<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>Just 36 News Feed</title><link>https://just36news.com</link><description>Just 36 News Feed Description</description><item><title>Teachers Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए इस दिन का खास महत्व</title><link>https://just36news.com/teachers-day-2026:-why-is-teachers-day-celebrated-on-september</link><description>नई दिल्ली। Teachers Day 2026:हर साल 5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस दिन स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई का माहौल कुछ अलग दिखाई देता है। विद्यार्थी अपने शिक्षकों के सम्मान में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण, खेल और विशेष प्रस्तुतियां आयोजित करते हैं। कई शिक्षण संस्थानों में वरिष्ठ छात्र एक दिन के लिए शिक्षकों की भूमिका भी निभाते हैं और जूनियर कक्षाओं को पढ़ाते हैं।
कहीं विद्यार्थी अपने शिक्षकों की नकल करके मनोरंजक कार्यक्रम पेश करते हैं तो कहीं उन्हें उपहार देकर आभार जताया जाता है। हालांकि, इस पूरे आयोजन के पीछे सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि शिक्षकों के प्रति सम्मान और उनके योगदान को याद करने की भावना जुड़ी है। लेकिन सवाल यह है कि भारत में शिक्षक दिवस मनाने के लिए 5 सितंबर की तारीख ही क्यों तय की गई? इसके पीछे देश के महान शिक्षाविद और दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की महत्वपूर्ण भूमिका है।
5 सितंबर से कैसे जुड़ा शिक्षक दिवस?
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वे देश के जाने-माने दार्शनिक, विद्वान और शिक्षाविद थे। उन्होंने अपने जीवन का लंबा समय शिक्षा और अध्यापन के क्षेत्र को समर्पित किया। जब वर्ष 1962 में डॉ. राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने, तब उनके कुछ विद्यार्थियों और प्रशंसकों ने उनका जन्मदिन विशेष रूप से मनाने की इच्छा जताई।
बताया जाता है कि राधाकृष्णन ने अपने जन्मदिन को व्यक्तिगत तौर पर मनाने के बजाय इस दिन को देश के शिक्षकों के सम्मान के लिए समर्पित करने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि जन्मदिन को केवल एक व्यक्ति तक सीमित रखने के बजाय इसे उन सभी शिक्षकों के सम्मान का अवसर बनाया जाना चाहिए, जो समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी विचार के बाद भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई।
कौन थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन?
डॉ. राधाकृष्णन को भारत के प्रमुख दार्शनिकों और शिक्षाविदों में गिना जाता है। उन्होंने अध्यापन और शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया। वे आंध्र विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उन्होंने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर भी जिम्मेदारी संभाली।
वर्ष 1952 में वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और इसके बाद 1962 में देश के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला। राधाकृष्णन शिक्षा को केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं मानते थे। उनके विचार में शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों में तर्क करने की क्षमता, स्वतंत्र विचार, नैतिक समझ और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित करना था।
1962 से जारी है शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा
भारत में शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत 1962 से मानी जाती है। तब से हर साल 5 सितंबर को शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के सम्मान में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों के लिए विशेष प्रस्तुतियां तैयार करते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में भाषण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। कई जगह विद्यार्थी एक दिन के लिए शिक्षक की भूमिका निभाकर कक्षाएं भी संचालित करते हैं। इस तरह शिक्षक दिवस विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है।
48 शिक्षकों को राष्ट्रीय सम्मान
इस वर्ष 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में 48 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन शिक्षकों को सम्मान प्रदान करेंगी। इन शिक्षकों का चयन जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन चरणों में हुई प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है। सम्मान पाने वाले शिक्षक 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और 6 केंद्रीय सरकारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
1958 में हुई थी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत
Teachers Day 2026: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत 1958 में की गई थी। इसका मकसद ऐसे शिक्षकों को पहचान और सम्मान देना है, जिन्होंने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया हो और अपने विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ उनके जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव डाला हो। शिक्षक दिवस हर साल यह याद दिलाता है कि एक शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के ज्ञान, व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाता है।
</description><guid>teachers-day-2026:-why-is-teachers-day-celebrated-on-september</guid><pubDate>05-Sep-2026 1:12:33 pm</pubDate></item><item><title>देश के 48 उत्कृष्ट शिक्षकों को मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित</title><link>https://just36news.com/48-outstanding-teachers-of-the-country-will-receive-the-national-awar</link><description>नई दिल्ली: देशभर में आज 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में देश के 48 उत्कृष्ट स्कूल शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। सम्मान पाने वाले शिक्षकों में केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, आदर्श जनजातीय स्कूल और पीएम श्री स्कूल सहित विभिन्न संस्थानों के शिक्षक शामिल हैं।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुने गए 48 शिक्षकों में 26 पुरुष और 22 महिला शिक्षक हैं। राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश से तीन, जबकि बिहार और मध्य प्रदेश से दो-दो शिक्षकों का चयन किया गया है
लातूर के गणित शिक्षक वैभव कुलकर्णी भी सूची में
राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों में महाराष्ट्र के लातूर स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के गणित शिक्षक वैभव वसंतराव कुलकर्णी भी शामिल हैं। उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है। कुलकर्णी के पास तीन दशक से अधिक का शिक्षण अनुभव है। गणित जैसे विषय को विद्यार्थियों के लिए आसान और रोचक बनाने के उद्देश्य से उन्होंने पढ़ाने के कई नए तरीके अपनाए। इसके अलावा उन्होंने कम लागत में तैयार किए जा सकने वाले विभिन्न लर्निंग एड्स विकसित किए, ताकि विद्यार्थी गणितीय अवधारणाओं को बेहतर तरीके से समझ सकें।
तीन स्तरों की प्रक्रिया से हुआ शिक्षकों का चयन
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए 48 शिक्षकों का चयन जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर हुई तीन चरणों वाली प्रक्रिया के बाद किया गया है। इस पुरस्कार का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों के काम को सामने लाना है, जिन्होंने अपने समर्पण, मेहनत और नवाचार के जरिए स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने में योगदान दिया है। साथ ही विद्यार्थियों के सीखने, व्यक्तित्व विकास और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।
किन शिक्षकों को मिलता है राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार?
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार उन शिक्षकों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हों। इसके लिए मुख्य रूप से ऐसे योगदानों को महत्व दिया जाता है

    स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रभावी पहल करना।
    विद्यार्थियों की पढ़ाई और समग्र विकास में उल्लेखनीय योगदान देना।
    शिक्षण में नए, रचनात्मक और प्रभावी तरीकों का प्रयोग करना।
    अपने कार्यों के जरिए अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करना।

1958 में हुई थी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत 1958 में हुई थी। इसका उद्देश्य देश के समर्पित और उत्कृष्ट शिक्षकों के योगदान को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करना और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्यों को पहचान दिलाना है। समय के साथ यह पुरस्कार उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मान बन गया है, जो अपने नवाचार और समर्पण के जरिए विद्यार्थियों की शिक्षा को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं।
पीएम मोदी भी कर चुके हैं पुरस्कार विजेता शिक्षकों से मुलाकात
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुलाकात कर चुके हैं। वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से बातचीत की थी। उस समय कुल 82 शिक्षकों को यह सम्मान दिया गया था। इस मुलाकात के दौरान तमिलनाडु से आई एक शिक्षिका ने स्थानीय भाषा में पढ़ाई की जरूरत का मुद्दा उठाया था। इस पर प्रधानमंत्री ने मातृभाषा में शिक्षा के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा था कि नई शिक्षा नीति में स्थानीय और मातृभाषाओं पर विशेष जोर दिया गया है।
वहीं पिछले साल शिक्षक दिवस से एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले 45 शिक्षकों से मुलाकात की थी। करीब 35 मिनट के संबोधन में उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ GST सुधार, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े कानून और आत्मनिर्भर भारत जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की थी। आज एक बार फिर शिक्षक दिवस के अवसर पर देश के 48 शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उनके समर्पण, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में योगदान को पहचान देने का अवसर होगा।
यहां देखें पूरी सूची

    
        
            क्र.सं.
            नाम
            राज्य / केंद्र शासित प्रदेश / संगठन
        
    
    
        
            1
            जे प्रकाश राव
            अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
        
        
            2
            राजेश कौलुरी
            आंध्र प्रदेश
        
        
            3
            याकू तामे
            अरुणाचल प्रदेश
        
        
            4
            राजेश बोरदोलोई
            असम
        
        
            5
            खुशबू कुमारी
            बिहार
        
        
            6
            पुष्पा प्रसाद
            बिहार
        
        
            7
            राधा राजेश
            सी.आई.एस.सी.ई.
        
        
            8
            संगीता यादव
            सी.बी.एस.ई.
        
        
            9
            रवि जायसवाल
            चंडीगढ़
        
        
            10
            सुनिता यादव
            छत्तीसगढ़
        
        
            11
            पटेल पूर्णिमा मोहनलाल
            दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
        
        
            12
            सुमन गोयल
            दिल्ली
        
        
            13
            मो. ज़फर आलम
            एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (जनजातीय कार्य मंत्रालय)
        
        
            14
            महादेव हनमंत शिंदे
            गोवा
        
        
            15
            नितिनकुमार महेंद्रकुमार पाठक
            गुजरात
        
        
            16
            अनिल कौशिक
            हरियाणा
        
        
            17
            मंजरी वी महाजन
            हिमाचल प्रदेश
        
        
            18
            मोहम्मद अयाज रैना
            जम्मू और कश्मीर
        
        
            19
            मुनमुन भट्टाचार्जी
            झारखंड
        
        
            20
            रत्नाकुमारी एस
            कर्नाटक
        
        
            21
            अमुथा जे
            केंद्रीय विद्यालय संगठन
        
        
            22
            डॉ. मनीषा क्षेत्रपाल
            केंद्रीय विद्यालय संगठन
        
        
            23
            सुनील कुमार केपी
            केरल
        
        
            24
            मोहम्मद मुस्तफा कुमल
            लद्दाख
        
        
            25
            डॉ. अर्चना शुक्ला
            मध्य प्रदेश
        
        
            26
            शैलेंद्र प्रताप सिंह
            मध्य प्रदेश
        
        
            27
            डॉ. कविता नरसिंगराव गित्ते
            महाराष्ट्र
        
        
            28
            कुंदा जयवंत बच्छाव
            महाराष्ट्र
        
        
            29
            वांगलेम्बम गोबिन सिंह
            मणिपुर
        
        
            30
            लालनुनमावी
            मिजोरम
        
        
            31
            आर रोनाल्ड मेरु
            नगालैंड
        
        
            32
            वैभव वसंतराव कुलकर्णी
            नवोदय विद्यालय समिति
        
        
            33
            पदराज उमाकांत नायक
            ओडिशा
        
        
            34
            गणेसन एस
            पुडुचेरी
        
        
            35
            दिनेश कुमार
            पंजाब
        
        
            36
            डॉ. दिव्येंदु सेन
            राजस्थान
        
        
            37
            डॉ. वर्तिका गुलाटी
            राजस्थान
        
        
            38
            शिवप्रसाद अरविंद टिंगरे
            रक्षा मंत्रालय के तहत सैनिक स्कूल
        
        
            39
            सुषमा तमंग
            सिक्किम
        
        
            40
            थंगा राज एम
            तमिलनाडु
        
        
            41
            भवानी बोमपेल्ली
            तेलंगाना
        
        
            42
            रंजन देबनाथ
            त्रिपुरा
        
        
            43
            डॉ. रेनू त्रिपाठी
            उत्तर प्रदेश
        
        
            44
            डॉ. इफ्तिखार खान
            उत्तर प्रदेश
        
        
            45
            शालिनी कुशवाहा
            उत्तर प्रदेश
        
        
            46
            गबर सिंह
            उत्तराखंड
        
        
            47
            पलाश चौधरी
            पश्चिम बंगाल
        
        
            48
            शांतनु पात्रा
            पश्चिम बंगाल
        
    
</description><guid>48-outstanding-teachers-of-the-country-will-receive-the-national-awar</guid><pubDate>05-Sep-2026 12:55:18 pm</pubDate></item><item><title>बाढ़ की चपेट में यूपी के 23 जिले, 16 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू, जन-जीवन प्रभावित</title><link>https://just36news.com/floods-hit-23-districts-in-uttar-pradesh,-with-over-16,000-people-rescued-and-life-affected</link><description>लखनऊ। UP Flood 2026: उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। प्रदेश के 35 प्रभावित जिलों में से 23 जिले फिलहाल बाढ़ से जूझ रहे हैं। प्रशासन की ओर से लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है, जिसमें अकेले बुधवार को 3,042 लोगों का रेस्क्यू किया गया। बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें प्रतापगढ़ का 18 महीने का प्रियांश, जबकि अमरोहा के गजरौला में 32 वर्षीय शेरा और 55 वर्षीय सुरेश शामिल हैं।
बड़े स्तर पर राहत-बचाव अभियान
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए प्रशासन ने 1,499 नाव और मोटरबोट मैदान में उतारी हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,067 मेडिकल टीमें भी तैनात की गई हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के लिए 1,311 राहत केंद्र बनाए हैं, हालांकि इनमें से फिलहाल 201 केंद्र ही सक्रिय हैं। इसके अलावा बारिश और बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए 442 मकानों के मामलों में भी सहायता उपलब्ध कराई गई है। बाढ़ का असर करीब 36,287 पशुओं पर भी पड़ा है।
चित्रकूट में 150 लोगों का रेस्क्यू
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के आसपास के इलाकों में पानी बढ़ने के बाद चौरा गांव में राहत अभियान चलाया गया। 42वीं बटालियन PAC की मोटरबोट की मदद से करीब 150 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। रेस्क्यू किए गए लोगों को भोजन, जरूरी राहत सामग्री और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
बलिया में 20 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित
बलिया में गंगा और सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर ने कई इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। यहां करीब 20,500 लोग प्रभावित बताए गए हैं। राहत कार्य के लिए 83 नावें तैनात हैं। जिले में अब तक 6,500 राशन किट, 33,843 दवा किट और 83,092 पके भोजन के पैकेट वितरित किए गए हैं। पशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए 16,629 पशुओं का टीकाकरण किया गया है, जबकि 965 क्विंटल चारे की व्यवस्था की गई है। बाढ़ चौकियों के साथ NDRF और PAC की टीमें भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं। गोपालनगर टाडी और भोजपुरवा में राहत शिविरों के साथ कम्युनिटी किचन भी संचालित किए जा रहे हैं।
पीलीभीत में कई नदियों का जलस्तर बढ़ा
पीलीभीत में शारदा, देओहा और खाकरा नदियों का जलस्तर बढ़ने से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बनबसा से शारदा नदी में दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया, जबकि नानक सागर से देओहा नदी में 30 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने की जानकारी है। स्थिति को देखते हुए कक्षा 1 से 8 तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। खाकरा पुल के पानी में डूबने के कारण करीब 18 गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
वहीं 200 बेड वाले मेडिकल कॉलेज की बिजली व्यवस्था भी बारिश से प्रभावित हुई। अंडरग्राउंड केबल बॉक्स में पानी भर जाने के कारण मुख्य बिजली आपूर्ति 34 घंटे से अधिक समय तक बाधित रही। इस दौरान अस्पताल में जनरेटर के जरिए बिजली की व्यवस्था जारी रखी गई।
लखीमपुर खीरी में कटाव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण
लखीमपुर खीरी में जिला मजिस्ट्रेट अंजनी कुमार सिंह ने गिरजा बैराज एफ्लक्स बांध और मोहना नदी के किनारे कटाव प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। प्रशासन की टीमें लगातार मौके पर काम कर रही हैं। पानी की चपेट में आए करीब एक दर्जन घरों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक पालिया में शारदा नदी का जलस्तर 154.59 मीटर के खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया और फिलहाल जलस्तर स्थिर बताया गया है। कई खेत और गांवों को जोड़ने वाली सड़कें पानी में डूबी हुई हैं। हालांकि अभी किसी गांव के पूरी तरह बाढ़ में डूबने की सूचना नहीं है।
लाखों क्लोरीन टैबलेट और ORS पैकेट वितरित
बाढ़ के साथ बीमारियों का खतरा बढ़ने को देखते हुए प्रशासन राहत सामग्री के साथ स्वास्थ्य संबंधी सामान भी वितरित कर रहा है। अब तक 68,953 खाद्यान्न पैकेट और 3.36 लाख से अधिक भोजन पैकेट बांटे जा चुके हैं। पानी से होने वाली बीमारियों पर नियंत्रण के लिए 5.02 लाख से ज्यादा क्लोरीन की गोलियां और 1.77 लाख से अधिक ORS पैकेट वितरित किए गए हैं। इससे पहले भी बड़ी मात्रा में खाद्यान्न, भोजन, क्लोरीन और ORS सामग्री प्रभावित इलाकों में पहुंचाई गई थी।</description><guid>floods-hit-23-districts-in-uttar-pradesh,-with-over-16,000-people-rescued-and-life-affected</guid><pubDate>05-Sep-2026 10:06:23 am</pubDate></item><item><title>BREAKING : श्रीनगर एयरपोर्ट पर पार्किंग के दौरान खंभे से टकराया विमान, बाल-बाल बचे यात्री</title><link>https://just36news.com/breaking:-plane-hits-pole-while-parking-at-srinagar-airport,-passengers-have-narrow-escape</link><description>श्रीनगर। मुंबई से श्रीनगर पहुंची इंडिगो की फ्लाइट 6E 225 लैंडिंग के बाद हादसे का शिकार हो गई। जानकारी के मुताबिक, विमान लैंड करने के बाद पार्किंग बे की ओर जा रहा था। इसी दौरान विमान के ब्रेक सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण विमान समय पर रुक नहीं सका और पार्किंग बे में लगे पोल/VDGS सिस्टम से जा टकराया। टक्कर के कारण विमान के अगले हिस्से यानी नोज सेक्शन को नुकसान पहुंचा है।


सभी यात्री और क्रू सुरक्षित
हादसे के वक्त विमान में मौजूद सभी यात्री और क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। यात्रियों और क्रू को मैनुअल सीढ़ियों की मदद से सुरक्षित विमान से बाहर निकाल लिया गया।
विमान को हुए नुकसान को देखते हुए फिलहाल इसे उड़ान भरने से रोक दिया गया है। घटना की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, हादसे की परिस्थितियों और इसकी वजह की जांच तय प्रक्रियाओं के तहत संबंधित एजेंसियों द्वारा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के सही कारणों का पता चल सकेगा।




श्रीनगर एयरपोर्ट का संचालन सामान्य रूप से जारी है
वहीं, श्रीनगर एयरपोर्ट का संचालन सामान्य रूप से जारी है और विमानों की आवाजाही तय कार्यक्रम के मुताबिक हो रही है। एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के लिए सुरक्षित एवं सुचारू संचालन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
दोहा-बेंगलुरु फ्लाइट की भी हुई थी इमरजेंसी लैंडिंग
गौरतलब है कि गुरुवार को दोहा से बेंगलुरु जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 1302 को भी मस्कट डायवर्ट किया गया था। उड़ान के दौरान पायलट की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद विमान की एहतियातन मस्कट में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी।







</description><guid>breaking:-plane-hits-pole-while-parking-at-srinagar-airport,-passengers-have-narrow-escape</guid><pubDate>04-Sep-2026 4:53:07 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल बाढ़ के 9 दिन बाद चमत्कार, त्रिशूली हाइड्रोपावर सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर</title><link>https://just36news.com/miracle:-9-days-after-nepal-floods,-2-workers-emerge-alive-from-trishuli-hydropower-tunnel</link><description>काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के नौ दिन बाद शुक्रवार को राहत अभियान में ऐसी सफलता मिली, जिसने सभी को हैरान कर दिया। त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो मजदूरों को जिंदा और सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। आपदा के बाद से ही इस सुरंग में फंसे मजदूरों के जीवित बचने को लेकर आशंकाएं जताई जा रही थीं।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दो मजदूरों को जमीन में किए गए छोटे छेद के जरिए एक-एक करके बाहर निकाला गया। सामने आए वीडियो में एक मजदूर को कीचड़ से सना हुआ देखा जा सकता है, जिसे बचावकर्मी अपने कंधे पर लेकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचा रहे हैं। दोनों मजदूरों के बाहर आने पर मौके पर मौजूद रेस्क्यू टीम ने तालियां बजाकर खुशी जाहिर की।
42 मजदूरों को निकालने के लिए चल रहा था ऑपरेशन
त्रिशूली-3A पावर प्लांट की करीब चार किलोमीटर लंबी सुरंग में कई मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। उन्हें बाहर निकालने के लिए बचाव दल जमीन के भीतर ड्रिलिंग कर रास्ता बनाने में जुटा था। इसी दौरान टीम को दो मजदूरों तक पहुंचने में सफलता मिली।
नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत और स्थानीय सांसद श्री राम न्यौपाने ने दोनों मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकलने की पुष्टि की है।
सुरंग से सुनाई दीं दूसरे मजदूरों की आवाजें
रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच एक और राहत की खबर सामने आई है। नुवाकोट जिले के पुलिस प्रमुख बिपिन रेग्मी के मुताबिक, बचाव दल को सुरंग के अंदर से कुछ अन्य मजदूरों की आवाजें सुनाई दी हैं। इससे सुरंग में फंसे दूसरे लोगों के भी जीवित होने की उम्मीद मजबूत हुई है।
मजदूरों तक जल्द पहुंचने के लिए रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया गया है। घटनास्थल पर मेडिकल टीमों को भी भेजा गया है, ताकि बाहर निकाले जाने वाले लोगों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता मिल सके।
12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से करीब 900 मजदूर लापता
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक नेपाल के करीब 12 अलग-अलग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से लगभग 900 मजदूरों के लापता होने की जानकारी है। इनमें करीब 500 मजदूरों के विभिन्न सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुई थीं। इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। ऐसे में दो मजदूरों का नौ दिन बाद जिंदा मिलना बचाव अभियान के लिए बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है।a</description><guid>miracle:-9-days-after-nepal-floods,-2-workers-emerge-alive-from-trishuli-hydropower-tunnel</guid><pubDate>04-Sep-2026 4:41:24 pm</pubDate></item><item><title>ISRO ने रचा इतिहास, EOS-05 सेटेलाइट सफलता पूर्वक हुआ लॉन्च, समझें क्यों ये है भारत के लिए बहुत बड़ी सफलता</title><link>https://just36news.com/isro-creates-history,-successfully-launches-eos-05-satellite</link><description>SRO EOS-05 launch: जब पूरा भारत गहरी नींद में था, तब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिक एक नए इतिहास की स्क्रिप्ट लिख रहे थे. शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 की तड़के 2:55 बजे, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से GSLV-F17 रॉकेट ने अंधेरे और बारिश को चीरते हुए उड़ान भरी. इस लॉन्चिंग के साथ ही इसरो ने अपने 8 महीने के सूखे को खत्म कर दिया और भारत के पहले जियो-इमेजिंग सैटेलाइट EOS-05 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया.
क्या है आई इन द स्काई (EOS-05) की खासियत?
इस सैटेलाइट को आसमान में मौजूद भारत की आंख (Eye in the sky) कहा जा रहा है. अब तक भारत के जो 22 ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट काम कर रहे हैं, वे लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में हैं. लेकिन, EOS-05 पहला ऐसा सैटेलाइट है जो पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में काम करेगा.
इस ऊंचाई से यह सैटेलाइट पृथ्वी की घूमने की गति के साथ-साथ चलेगा, जिसका मतलब है कि यह भारतीय उपमहाद्वीप और उसकी सीमाओं पर 247 रियल-टाइम नजर रख सकेगा.
सेना को मिलेंगी 5 मीटर तक की साफ तस्वीरें
इस 2367 किलोग्राम वजनी (अब तक का सबसे भारी GSLV पेलोड) सैटेलाइट में एक खास किस्म की दूरबीन और हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगे हैं. यह कैमरे सीमाओं पर होने वाली किसी भी हलचल की 5 मीटर तक की साफ तस्वीरें भारतीय सेना (Armed Forces) को रियल-टाइम में भेजेंगे. इसके अलावा, यह स्पेसक्राफ्ट बाढ़, जंगल की आग, आपदा प्रबंधन और कृषि के क्षेत्र में भी देश को बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रैटेजिक डेटा (Strategic Data) उपलब्ध कराएगा.
नॉटी बॉय का शानदार कमबैक
GSLV रॉकेट को अतीत में कुछ विफलताओं के कारण अक्सर नॉटी बॉय (ISRO Naughty Boy) कहा जाता रहा है. 2021 में इसके एक मिशन में खराबी आ गई थी. लेकिन इस बार GSLV ने महज 18 मिनट के भीतर ही पेलोड को सटीक कक्षा में स्थापित कर अपना लोहा मनवा लिया. इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन (V. Narayanan ISRO Chief) ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, सैटेलाइट की स्थिति बिल्कुल ठीक है और सोलर पैनल खुल चुके हैं. यह हमारे स्पेस प्रोग्राम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इस बड़ी कामयाबी पर पूरी इसरो टीम को बधाई दी.
ग्लोबल स्पेस पावर बना भारत (isro satellite launch)
जनवरी 2026 में PSLV मिशन की आंशिक विफलता के बाद यह लॉन्चिंग इसरो के लिए साख का सवाल थी. तिरुपति बालाजी के दर्शन से लेकर 27 घंटे के लंबे काउंटडाउन तक, वैज्ञानिकों की मेहनत आखिरकार रंग लाई. EOS-05 का सफल लॉन्च यह साबित करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत तेजी से एक ग्लोबल स्पेस पावर (Global Space Power) के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.
ISRO को लेकर पूछे जाने वाले सवाल

    EOS-05 सैटेलाइट क्या है और इसका काम क्या होगा?
    इसरो EOS-05 लॉन्च की पूरी जानकारी
    GSLV-F17 रॉकेट से कौन सा सैटेलाइट लॉन्च हुआ?
    इसरो का नॉटी बॉय रॉकेट फिर चर्चा में क्यों?
    श्रीहरिकोटा से इसरो का सैटेलाइट लॉन्च
    EOS-05 मिशन भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
    इसरो के पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का क्या काम है?
    इसरो के GSLV रॉकेट की खासियत क्या है?
</description><guid>isro-creates-history,-successfully-launches-eos-05-satellite</guid><pubDate>04-Sep-2026 4:31:06 pm</pubDate></item><item><title>दिशा सालियान मर्डर केस: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, सीबीआई करेगी जांच</title><link>https://just36news.com/disha-salian-murder-case:-bombay-high-court-issues-major-order,-cbi-to-investigate</link><description>मुंबई। करीब छह साल पुराने दिशा सालियान मौत मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम आदेश देते हुए जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने एजेंसी को एफआईआर दर्ज कर नए सिरे से जांच शुरू करने और दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज करने को कहा है। इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। दिशा के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया था कि उनकी बेटी की मौत की पहले हुई जांच में कई सवाल अनसुलझे रह गए। उन्होंने स्वतंत्र जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद CBI को मामले की जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि CBI अब पहले की जांच से जुड़े सभी रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर मामले की शुरुआत से पड़ताल करेगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही की जाएगी। दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। शुरुआती जांच में इसे दुर्घटना और बाद में आत्महत्या बताया गया था। हालांकि, उनके पिता लगातार निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे। अब CBI जांच के आदेश के बाद मामले की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।</description><guid>disha-salian-murder-case:-bombay-high-court-issues-major-order,-cbi-to-investigate</guid><pubDate>02-Sep-2026 10:07:55 pm</pubDate></item><item><title>राम मंदिर को मिला पहला सीईओ, जितेंद्र मिश्रा संभालेंगे जिम्मेदारी</title><link>https://just36news.com/ram-temple-gets-its-first-ceo,-jitendra-mishra-to-take-charge</link><description>अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ ) को लेकर निर्णय हो गया है। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ट्रस्ट के सीईओ चुने गए हैं। बुधवार को अयोध्या की मणिरामदास छावनी में महंत नृत्यगोपालदास की अध्यक्षता में हुई ट्रस्ट की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। बैठक में ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ ही आमंत्रित सदस्य भी मौजूद रहे।
वहीं, ट्रस्ट की बैठक में तीन नए सदस्यों की भी घोषणा की गई है। नए शामिल होने वाले सदस्यों में मदन मोहन पांडेय अयोध्या के, महेश भागचंदका दिल्ली के और निर्मला यादव अयोध्या से हैं। ट्रस्ट ने एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ ) नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके मिश्रा अब राम मंदिर की प्रशासनिक और संचालन व्यवस्था को नई दिशा देंगे।
एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा मूल रूप से देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया था। अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान भरी और 3,000 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव हासिल किया। कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर भी रहे हैं। इसके अलावा एकीकृत रक्षा स्टाफ में उप प्रमुख (सिद्धांत, संगठन एवं प्रशिक्षण) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। देश के साथ अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले मिश्रा के पास बड़े संगठन के संचालन और नेतृत्व का व्यापक अनुभव है।
सैन्य अनुशासन से मंदिर प्रबंधन तक
राम मंदिर के सीईओ के रूप में उनकी नियुक्ति को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मंदिर अब निर्माण के चरण से आगे बढ़कर व्यवस्थित संचालन और वैश्विक धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, कर्मचारी प्रबंधन, सुविधाओं का विस्तार और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसी जिम्मेदारियां सीईओ के सामने होंगी।
ऐसे में सैन्य सेवा से आए मिश्रा के अनुशासन, नेतृत्व, बड़े संस्थान के प्रबंधन और समन्वय के अनुभव को ट्रस्ट के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देवरिया के छोटे से गांव भोपतपुरा से भारतीय वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे मिश्रा का अब अयोध्या के राम मंदिर के पहले सीईओ के रूप में नया अध्याय शुरू हुआ है।
राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य और स्थाई सदस्य
के. परासरन : सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य।
महंत नृत्य गोपाल दास : अध्यक्ष, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट।
स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज : कोषाध्यक्ष।
कृष्ण मोहन : अंतरिम महासचिव।
जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज : सदस्य (प्रयागराज)।
जगतगुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ जी महाराज : सदस्य (पेजावर मठ, उडुपी)।
युगपुरुष परमानन्द जी महाराज : सदस्य (हरिद्वार)।
महंत दिनेंद्र दास : सदस्य (निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि)।
निर्मला यादव : नई महिला ट्रस्टी (शिकोहाबाद)।
मदन मोहन पांडे : नए ट्रस्टी (अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता)।
महेश भागचंदका : नए ट्रस्टी (दिल्ली)।
पदेन और सरकारी सदस्य
नृपेंद्र मिश्रा : अध्यक्ष, मंदिर निर्माण समिति।
प्रशांत लोखंडे : केंद्र सरकार के प्रतिनिधि।
संजय प्रसाद : उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि।
शशांक त्रिपाठी : जिलाधिकारी अयोध्या।</description><guid>ram-temple-gets-its-first-ceo,-jitendra-mishra-to-take-charge</guid><pubDate>02-Sep-2026 10:05:22 pm</pubDate></item><item><title>ग्रामीणों के लिए सरकार के संकट से पहले सुरक्षा वाला विकास मॉडल चाहिए : खरगे</title><link>https://just36news.com/rural-people-need-a-development-model-that-puts-security-before-crisis-in-the-government:-kharge</link><description>नयी दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि किसी भी दल की सरकार को ग्रामीणों को केवल सूखा, बाढ़, फसल खराब होने या चुनाव के समय याद नहीं करना चाहिए बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चत करने वाला विकास मॉडल अपनाना चाहिए। खरगे ने बुधवार को यहां डॉ.वाईएस राजशेखर रेड्डी अवार्ड-2026 समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे ग्रामीण समुदायों को संकट आने से पहले सुरक्षा मिल सके और वे भारत के विकास में भागीदार बन सकें।
उन्होंने कहा कि यह पूछा जाना चाहिए कि किसानों को उचित बाजार, ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक आजीविका, महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और आदिवासी समुदायों को प्रौद्योगिकी एवं अवसरों तक पहुंच मिल रही है या नहीं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी और कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन की सोच में समानता थी कि विकास का वास्तविक अर्थ आम लोगों की गरिमा और जीवन में सुधार से है तथा देश की प्रगति का महत्व तभी है जब उसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि डॉ रेड्डी ने गरीबों और वंचितों के लिए स्वास्थ्य, आवास, भूमि, किसानों को मुफ्त बिजली और कृषि ऋण राहत जैसे कदम उठाए थे। खरगे ने कहा कि ग्रामीण भारत के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता उसकी शासन-दृष्टि का महत्वपूर्ण आधार रही है। उन्होंने इंदिरा गांधी के भूमि सुधारों, राजीव गांधी के प्रौद्योगिकी मिशनों, पंचायती राज को सशक्त बनाने तथा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दौरान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और काम के बदले भोजन जैसी योजनाओं का उल्लेख किया और कहा कि 1960 के दशक के खाद्य संकट से देश को उबारने में हरित क्रांति की महत्वपूर्ण भूमिका रही और स्वामीनाथन ने ऐसी सदाबहार क्रांति की अवधारणा दी, जिसमें उत्पादन बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समुदायों की गरिमा सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा कि एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन वर्ष 1988 से ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के बीच कृषि, आजीविका, महिला सशक्तीकरण और जलवायु अनुकूलन के क्षेत्र में काम कर रहा है। इस अवसर पर फाउंडेशन को डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी एवं डॉ. केवीपी फाउंडेशन की ओर से डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी अवार्ड-2026 प्रदान किया गया। फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने पुरस्कार ग्रहण किया। पुरस्कार के तहत 25 लाख रुपये की नकद राशि दी गई।</description><guid>rural-people-need-a-development-model-that-puts-security-before-crisis-in-the-government:-kharge</guid><pubDate>02-Sep-2026 10:03:41 pm</pubDate></item><item><title>अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति, कुछ ही देर में CEO का भी ऐलान</title><link>https://just36news.com/ayodhya:-three-new-members-appointed-to-ram-temple-trust,-ceo-to-be-announced-shortly</link><description>अयोध्या :- अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आज सीईओ का ऐलान करेगा. इससे पहले ट्रस्ट में 3 नए सदस्यों को शामिल किया गया है. इनमें अयोध्या से मदन मोहन पांडेय, दिल्ली से महेश भागचन्दका और शिकोहाबाद से निर्मला यादव का नाम शामिल है.
बुधवार को राम मंदिर के सीईओ का भी ऐलान होना है. इसके लिए ट्रस्ट की मीटिंग चल रही है. इस बैठक में CEO चुनने के साथ-साथ ट्रस्ट की डीड में संशोधन करने जैसे बड़े फैसले भी होने हैं. 5 फरवरी 2020 को ट्रस्ट के गठन के बाद ये पहला मौका है, जब इसकी डीड में संशोधन किया जा रहा है.
बता दें कि राम मंदिर चंदा चोरी मामले में आरोपों के बाद पूर्व महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था. इस विवाद के बाद ट्रस्ट की छवि और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सीईओ की नियुक्ति प्रक्रिया 6 जुलाई से शुरू की गई थी.सीईओ पद के लिए कुल 5,585 आवेदन आए थे. जस्टिस (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली स्क्रीनिंग कमेटी ने 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया और 3 नामों का लिफाफा ट्रस्ट के अध्यक्ष को सौंप दिया है.

सीईओ के पास होंगी ये जिम्मेदारियां
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि पेशेवर प्रशासन और पारदर्शिता के लिए एक सीईओ बेहद जरूरी है. नए नियमों के तहत सीईओ के अधिकार और शक्तियां तय की जाएंगी. सीईओ ट्रस्ट के महामंत्री को रिपोर्ट करेंगे और उनके पास सभी प्रशासनिक, वित्तीय और वैधानिक अधिकार होंगे.</description><guid>ayodhya:-three-new-members-appointed-to-ram-temple-trust,-ceo-to-be-announced-shortly</guid><pubDate>02-Sep-2026 3:49:46 pm</pubDate></item><item><title>अश्लील कंटेंट के चक्कर में न करें ये गलती, एक APK फाइल खाली कर सकती है बैंक अकाउंट! सरकार ने जारी की चेतावनी</title><link>https://just36news.com/dont-make-this-mistake-while-obsessing-over-pornographic-content,-a-single-apk-file-can-empty-</link><description>नई दिल्ली। Instagram-Facebook Alert: सोशल मीडिया पर कुछ भी देखने के चक्कर में अगर आप अनजान लिंक पर क्लिक करते हैं या किसी वेबसाइट से APK फाइल डाउनलोड कर लेते हैं, तो यह आपकी बड़ी गलती साबित हो सकती है। भारत सरकार ने Android फोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ संदिग्ध विज्ञापनों और APK फाइलों को लेकर अलर्ट किया है।
सरकार के मुताबिक, साइबर अपराधी Facebook और Instagram पर अश्लील कंटेंट से जुड़े विज्ञापनों का इस्तेमाल करके यूजर्स को खतरनाक APK फाइल डाउनलोड करने के लिए फंसा सकते हैं। देखने में ये ऐप सामान्य एडल्ट कंटेंट या वीडियो ऐप जैसे लग सकते हैं, लेकिन फोन में इंस्टॉल होने के बाद ये संवेदनशील जानकारी और वित्तीय डेटा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
यह चेतावनी गृह मंत्रालय और Indian Cybercrime Coordination Centre (I4C) की National Cybercrime Threat Analytics Unit (NCTAU) की ओर से जारी की गई एडवाइजरी से जुड़ी है। एडवाइजरी में Night Play, Reloop, Kyss, Vimo, Rivo, Nexo और Vixa जैसे ऐप के नाम बताए गए हैं।
Facebook-Instagram के विज्ञापन से शुरू हो सकता है पूरा खेल
साइबर अपराधियों का तरीका काफी चालाक हो सकता है। सबसे पहले यूजर को Facebook या Instagram पर अश्लील वीडियो या अन्य कंटेंट से जुड़ा कोई विज्ञापन दिखाई देता है।
जैसे ही यूजर उस विज्ञापन पर क्लिक करता है, उसे किसी दूसरी वेबसाइट पर ले जाया जा सकता है। यहां वीडियो या कंटेंट देखने के लिए यूजर से किसी ऐप को डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।
कई मामलों में यूजर को Google Play Store की जगह सीधे APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जा सकता है। यही वह जगह है जहां सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
APK फाइल डाउनलोड करना क्यों हो सकता है खतरनाक?
APK Android ऐप की इंस्टॉलेशन फाइल होती है। Google Play Store के बाहर से डाउनलोड की गई किसी अनजान APK में क्या मौजूद है, इसका भरोसा करना मुश्किल हो सकता है।
ऐसी फाइल के जरिए फोन में संदिग्ध या नुकसान पहुंचाने वाला सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इसलिए किसी वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापन या अनजान लिंक से मिलने वाली APK फाइल को सिर्फ इसलिए इंस्टॉल न करें क्योंकि उसमें कोई आकर्षक वीडियो या कंटेंट दिखाने का दावा किया जा रहा है।
ऐप इंस्टॉल करने के बाद मांगी जाती हैं खतरनाक परमिशन
संदिग्ध ऐप फोन में इंस्टॉल होने के बाद कई तरह की परमिशन मांग सकते हैं। इनमें Accessibility Access जैसी परमिशन भी शामिल हो सकती है।
Accessibility सुविधा असल में जरूरतमंद यूजर्स की सहायता के लिए बनाई गई है, लेकिन अगर कोई संदिग्ध ऐप इसका गलत इस्तेमाल करे तो फोन के कुछ हिस्सों पर असामान्य नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की जा सकती है।
ऐसी स्थिति में यूजर की स्क्रीन पर होने वाली गतिविधियों, ऐप इस्तेमाल और अन्य संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है।
बैंकिंग और UPI भी हो सकते हैं निशाने पर
सबसे बड़ी चिंता तब पैदा होती है जब फोन में मौजूद संदिग्ध ऐप को संवेदनशील परमिशन मिल जाती है। साइबर अपराधी इसका इस्तेमाल OTP, स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी या बैंकिंग गतिविधियों तक पहुंच बनाने की कोशिश में कर सकते हैं।
इसलिए अगर आपने गलती से कोई संदिग्ध ऐप इंस्टॉल कर लिया है तो अपने बैंक अकाउंट, UPI और कार्ड से जुड़े लेनदेन पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
कोई ऐसा ट्रांजैक्शन दिखाई दे जिसे आपने नहीं किया है तो बिना देरी किए अपने बैंक से संपर्क करें।
VPN के नाम पर भी हो सकता है खेल
कुछ संदिग्ध ऐप फोन में VPN इंस्टॉल करने या उसकी अनुमति देने के लिए भी कह सकते हैं। VPN का इस्तेमाल सामान्य तौर पर इंटरनेट कनेक्शन और प्राइवेसी के लिए किया जाता है, लेकिन किसी अनजान या संदिग्ध VPN के मामले में सावधानी जरूरी है।
ऐसे सॉफ्टवेयर से इंटरनेट ट्रैफिक की सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर जोखिम पैदा हो सकता है।
संदिग्ध ऐप को हटाना भी हो सकता है मुश्किल
कुछ खतरनाक ऐप इस तरह डिजाइन किए जा सकते हैं कि उन्हें सामान्य तरीके से हटाना आसान न हो। अगर किसी नए ऐप को इंस्टॉल करने के बाद फोन में अचानक अजीब पॉप-अप, अनजान ऐप, बैटरी तेजी से खत्म होना, फोन का असामान्य व्यवहार या बैंकिंग गतिविधियों में गड़बड़ी दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज न करें।
सबसे पहले संदिग्ध ऐप की पहचान करें और उसकी परमिशन की जांच करें।
अगर APK इंस्टॉल कर ली है तो क्या करें?
अगर आपने गलती से किसी अनजान वेबसाइट से APK डाउनलोड या इंस्टॉल कर ली है तो घबराने के बजाय तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाएं।
सबसे पहले संदिग्ध ऐप की परमिशन चेक करें। खासकर Accessibility, Notification Access, Device Admin और अन्य संवेदनशील एक्सेस की जांच करें।
इसके बाद संदिग्ध ऐप को हटाने की कोशिश करें। अगर ऐप सामान्य तरीके से डिलीट नहीं हो रहा है तो Safe Mode में फोन शुरू करके उसे हटाने का प्रयास किया जा सकता है।
समस्या बनी रहने पर जरूरी डेटा का सुरक्षित बैकअप लेने के बाद Factory Reset भी एक विकल्प हो सकता है। हालांकि, ऐसा करने से पहले जरूरी डेटा और अकाउंट की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।
Google Play Protect रखें ON
Android यूजर्स को अपने फोन में Google Play Protect चालू रखना चाहिए। यह ऐप्स को स्कैन करने और संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले ऐप्स की पहचान करने में मदद करता है।
इसके अलावा फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और सिक्योरिटी अपडेट को समय पर इंस्टॉल करते रहें।
इन गलतियों से हमेशा बचें

    अनजान वेबसाइट से APK डाउनलोड न करें।
    सोशल मीडिया पर आए संदिग्ध विज्ञापनों पर क्लिक न करें।
    किसी अनजान ऐप को Accessibility Access न दें।
    संदिग्ध ऐप को SMS, कॉल, नोटिफिकेशन या अन्य संवेदनशील परमिशन देने से बचें।
    अनजान लिंक से बैंकिंग ऐप या दूसरे जरूरी ऐप डाउनलोड न करें।
    फोन में Google Play Protect चालू रखें।
    Android का सिक्योरिटी अपडेट समय पर करें।
    बैंक और UPI ट्रांजैक्शन नियमित रूप से चेक करते रहें।

साइबर फ्रॉड हो जाए तो तुरंत करें शिकायत
अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे इंतजार नहीं करना चाहिए। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है।
इसके अलावा National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।
एक छोटी सी सावधानी बचा सकती है बड़ा नुकसान
सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर विज्ञापन सुरक्षित नहीं होता। खासकर जब कोई विज्ञापन आपको अश्लील कंटेंट, फ्री वीडियो या किसी खास सुविधा का लालच देकर Play Store के बाहर से APK डाउनलोड करने के लिए कहे, तो सावधान हो जाएं।
किसी अनजान ऐप को फोन में इंस्टॉल करने से पहले यह जरूर सोचें कि उसे आपके फोन और आपकी निजी जानकारी तक कितनी पहुंच मिल रही है। थोड़ी सी सावधानी आपके डेटा और पैसे दोनों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है।</description><guid>dont-make-this-mistake-while-obsessing-over-pornographic-content,-a-single-apk-file-can-empty-</guid><pubDate>01-Sep-2026 3:05:54 pm</pubDate></item><item><title>बिना इंटरनेट भेजें पैसे! अब फीचर फोन से भी होगा UPI पेमेंट, जानिए कैसे करेगा काम</title><link>https://just36news.com/send-money-without-internet-now-upi-payments-can-be-made-even-from-feature-phones,-learn-how-it-works</link><description>नई दिल्ली। अगर आपके पास स्मार्टफोन नहीं है और आप अभी भी फीचर फोन का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए डिजिटल पेमेंट से जुड़ी बड़ी खबर है। PhonePe ने फीचर फोन यूजर्स के लिए UPI 123Pay सेवा शुरू की है, जिसके जरिए चुनिंदा फीचर फोन से बिना सामान्य इंटरनेट कनेक्शन के UPI पेमेंट किया जा सकेगा।


इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिल सकता है, जो स्मार्टफोन इस्तेमाल नहीं करते या ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर रहती है। PhonePe के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य फीचर फोन इस्तेमाल करने वाले लोगों को भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा से जोड़ना है।


बिना इंटरनेट कैसे होगा पेमेंट?
UPI 123Pay को खास तौर पर ऐसे यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिन्हें UPI इस्तेमाल करने के लिए स्मार्टफोन और लगातार इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं है। सेवा के जरिए फीचर फोन से जरूरी UPI सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
यानी अगर आपके फोन में सामान्य इंटरनेट नहीं चलता, तब भी उपलब्ध सुविधा और नेटवर्क के आधार पर आप पैसे भेजने और पेमेंट करने जैसे काम कर सकेंगे।
फीचर फोन से कर सकेंगे ये काम
PhonePe की इस सुविधा के जरिए यूजर्स को कई जरूरी UPI सुविधाएं मिलने की बात कही गई है। इनमें

    दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजना
    दुकानदार को UPI पेमेंट करना
    बैंक अकाउंट का बैलेंस चेक करना
    पुराने ट्रांजैक्शन की जानकारी देखना
    आने वाले समय में बिल पेमेंट और मोबाइल रिचार्ज जैसी सुविधाएं

शामिल हो सकती हैं।
इससे फीचर फोन यूजर्स को छोटे-बड़े रोजमर्रा के भुगतान के लिए हर बार कैश पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।
किन फीचर फोन में मिलेगा सपोर्ट?
शुरुआत में यह सुविधा HMD, Nokia, Lava International और Itel Mobile के चुनिंदा फीचर फोन मॉडल्स में उपलब्ध कराई जा रही है।
बताए गए सपोर्टेड मॉडल्स में HMD 105 2G, HMD 110 2G, Nokia 105 Classic, Nokia 105 Single SIM, Nokia 105 Dual SIM, Nokia 106 और Nokia 123 Shield जैसे फोन शामिल हैं।
आने वाले समय में कुछ अन्य फीचर फोन मॉडल्स में भी इसका सपोर्ट बढ़ाया जा सकता है।
आवाज के जरिए भी मिलेगी मदद
PhonePe ने यूजर्स की सुविधा के लिए AI आधारित वॉयस हेल्पलाइन उपलब्ध कराने की बात कही है। यह सेवा अंग्रेजी के साथ कई भारतीय भाषाओं में मदद देगी।
इसके जरिए यूजर्स को UPI 123Pay शुरू करने और इस्तेमाल करने के तरीके की जानकारी स्टेप-बाय-स्टेप दी जा सकती है। UPI से जुड़े सामान्य सवालों का जवाब भी वॉयस हेल्पलाइन के माध्यम से लिया जा सकेगा।
UPI 123Pay कैसे शुरू करें?
सेवा शुरू करने के लिए सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि आपका फीचर फोन इस सुविधा को सपोर्ट करता है। इसके बाद फोन में उपलब्ध PhonePe सेवा को खोलकर जरूरी नियम और शर्तों को स्वीकार करना होगा।
इसके बाद यूजर को अपना बैंक अकाउंट चुनना होगा। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में डेबिट कार्ड से जुड़ी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण मांगे जा सकते हैं। इसके बाद UPI PIN सेट करना होगा।
रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद उपलब्ध विकल्पों के अनुसार मोबाइल नंबर, कॉन्टैक्ट या UPI ID के जरिए पेमेंट किया जा सकेगा।
अगर फीचर फोन में कैमरा उपलब्ध है और संबंधित सुविधा सपोर्ट करती है, तो QR कोड के जरिए भी पेमेंट किया जा सकता है।
पेमेंट करते समय रखें सावधानी
UPI का इस्तेमाल करते समय सबसे जरूरी है कि पेमेंट करने से पहले सामने वाले व्यक्ति की जानकारी और रकम को अच्छी तरह जांच लें। UPI PIN कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शेयर न करें।
अगर कोई व्यक्ति फोन करके UPI PIN, OTP या बैंक की गोपनीय जानकारी मांगता है तो उसे बिल्कुल न बताएं। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करके बैंकिंग जानकारी दर्ज करने से भी बचें।
कमजोर इंटरनेट वाले इलाकों में मिल सकता है फायदा
भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोग फीचर फोन का इस्तेमाल करते हैं। कई ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी भी हमेशा बेहतर नहीं रहती।
ऐसे में फीचर फोन पर UPI की सुविधा डिजिटल पेमेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है। खासकर छोटे दुकानदारों, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और उन यूजर्स के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है, जो स्मार्टफोन नहीं रखते।
स्मार्टफोन के बिना डिजिटल पेमेंट की ओर बड़ा कदम
PhonePe की UPI 123Pay सेवा से फीचर फोन यूजर्स के लिए डिजिटल पेमेंट की पहुंच बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, सभी फीचर फोन में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, इसलिए इस्तेमाल करने से पहले अपने फोन मॉडल और संबंधित सेवा की उपलब्धता जरूर जांच लें।



</description><guid>send-money-without-internet-now-upi-payments-can-be-made-even-from-feature-phones,-learn-how-it-works</guid><pubDate>01-Sep-2026 2:41:54 pm</pubDate></item><item><title>FD में पैसा रखने से पहले जान लें ये विकल्प! LIC की इन स्कीम्स से मिल सकता है बेहतर रिटर्न</title><link>https://just36news.com/before-investing-in-an-fd,-learn-about-these-options-these-lic-schemes-can-offer-better-returns</link><description>नई दिल्ली। जब निवेश की बात आती है तो ज्यादातर लोग सबसे पहले सुरक्षित विकल्प तलाशते हैं। बैंक एफडी इसी वजह से लंबे समय से भारतीय निवेशकों की पसंद रही है। हालांकि, कम जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न की तलाश करने वाले निवेशक LIC Mutual Fund की डेट और हाइब्रिड कैटेगरी की कुछ योजनाओं पर भी नजर डाल सकते हैं।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड में रिटर्न की गारंटी नहीं होती। डेट फंड और आर्बिट्रेज फंड को भी पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकता। इसलिए किसी भी योजना में निवेश करने से पहले उसके जोखिम, अवधि, रिटर्न और टैक्स नियमों को समझना जरूरी है।


LIC MF Banking  PSU Debt Fund
यह एक डेट फंड है, जो मुख्य रूप से बैंकिंग और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से जुड़े डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है। इसका उद्देश्य अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न हासिल करना होता है।
यह विकल्प उन निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकता है जो इक्विटी मार्केट के सीधे उतार-चढ़ाव से बचते हुए मध्यम अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं। हालांकि, इसमें भी ब्याज दर और क्रेडिट से जुड़े जोखिम मौजूद रहते हैं।
LIC MF Savings Fund
कम अवधि के लिए निवेश करने वाले लोग सेविंग्स फंड जैसी डेट स्कीम पर विचार कर सकते हैं। ऐसी योजनाएं आमतौर पर कम अवधि वाले डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करती हैं।
बैंक सेविंग अकाउंट की तुलना में इनमें संभावित रिटर्न अधिक हो सकता है, लेकिन रिटर्न निश्चित नहीं होता और जरूरत के समय निकासी पर संबंधित नियम लागू हो सकते हैं।
LIC MF Arbitrage Fund
आर्बिट्रेज फंड कैश और फ्यूचर्स मार्केट में मौजूद कीमतों के अंतर से कमाई करने की रणनीति अपनाता है। इसे आमतौर पर कम जोखिम वाली इक्विटी श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन इसे बिना जोखिम वाला निवेश समझना सही नहीं है।
इसका एक फायदा यह है कि टैक्स नियमों के तहत यह इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड की श्रेणी में आता है, हालांकि वास्तविक टैक्स देनदारी निवेश की अवधि और लागू आयकर नियमों पर निर्भर करेगी।
LIC MF Conservative Hybrid Fund
जो निवेशक डेट के साथ थोड़ी इक्विटी एक्सपोजर चाहते हैं, उनके लिए कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड एक विकल्प हो सकता है। इस तरह की योजनाओं में आमतौर पर डेट इंस्ट्रूमेंट्स का हिस्सा अधिक और इक्विटी का हिस्सा कम रखा जाता है।
इक्विटी एक्सपोजर की वजह से लंबी अवधि में महंगाई को मात देने की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन इसके साथ बाजार जोखिम भी आता है। इसलिए इसे एफडी की तरह पूंजी-सुरक्षित निवेश नहीं माना जाना चाहिए।
FD या म्यूचुअल फंड, क्या बेहतर?
एफडी में बैंक द्वारा तय ब्याज दर के अनुसार रिटर्न मिलता है और पात्र जमा पर DICGC के नियमों के तहत प्रति बैंक प्रति जमाकर्ता ₹5 लाख तक जमा बीमा उपलब्ध होता है। दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड में रिटर्न बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
इसलिए सिर्फ ज्यादा रिटर्न के आधार पर निवेश का फैसला करने के बजाय जोखिम, निवेश अवधि, टैक्स और पैसे की जरूरत को ध्यान में रखना बेहतर है।







</description><guid>before-investing-in-an-fd,-learn-about-these-options-these-lic-schemes-can-offer-better-returns</guid><pubDate>01-Sep-2026 10:37:02 am</pubDate></item><item><title>अमेरिका-ईरान में फिर भड़का तनाव, मिसाइल हमलों से बढ़ी टकराव की आशंका</title><link>https://just36news.com/us-iran-tensions-flare-again,-missile-attacks-increase-fear-of-conflict</link><description>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। रविवार रात से सोमवार सुबह के बीच दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे पर मिसाइल हमले किए गए, जिससे क्षेत्र में हालात फिर से गंभीर हो गए हैं। पिछले एक महीने से अधिक समय में यह दोनों देशों के बीच पहला प्रत्यक्ष सैन्य टकराव माना जा रहा है। इन हमलों के बाद पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास नहीं करते, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
हाल के हफ्तों में अपेक्षाकृत शांति बनी हुई थी, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने संघर्ष के फिर से गहराने की आशंका बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी विवाद पहले भी कई बार सैन्य टकराव का रूप ले चुके हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव लगातार बना रहा है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाते हैं या हालात और बिगड़ते हैं।</description><guid>us-iran-tensions-flare-again,-missile-attacks-increase-fear-of-conflict</guid><pubDate>31-Aug-2026 11:14:25 pm</pubDate></item><item><title>Road Accident: भीषण सड़क हादसा, डंपर की टक्कर से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, 1 घायल</title><link>https://just36news.com/road-accident:-horrific-road-accident,-4-people-of-the-same-family-died</link><description>बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में मंगलवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। हादसा मसौली थाना क्षेत्र के बाराबंकी-बहराइच हाईवे पर बिंदौरा चौराहे के पास हुआ, जहां तेज रफ्तार डंपर ने मोड़ लेते समय एक ऑल्टो कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोग वाहन के अंदर फंस गए। हादसे में चार लोगों की जान चली गई, जबकि 7 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई।
मोड़ पर कार को डंपर ने मारी टक्कर
जानकारी के मुताबिक, कार में सवार लोग श्रावस्ती के भिनगा कस्बे के रहने वाले थे और बहराइच की ओर से आ रहे थे। बिंदौरा चौराहे के पास कार मोड़ रही थी, तभी सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने कार को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद कार में फंसे लोगों को बाहर निकालकर बड़ागांव सीएचसी पहुंचाया गया।
चार लोगों ने तोड़ा दम
अस्पताल में डॉक्टरों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान मोहम्मद शरीफ (51), तबस्सुम बानो (45), साजिया खातून (31) और उजैम (33) के रूप में हुई है। वहीं हादसे में घायल 7 वर्षीय हुदा को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों की निगरानी में बच्ची का इलाज जारी है और फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
हादसे के बाद डंपर चालक फरार
घटना के तुरंत बाद डंपर चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और दोनों वाहनों को कब्जे में ले लिया। सड़क से क्षतिग्रस्त कार हटवाकर यातायात भी बहाल कराया गया। पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं फरार डंपर चालक की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
बच्ची का इलाज जारी
बाराबंकी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि हादसे में चार लोगों की मौत हुई है। मृतकों के शवों की पोस्टमार्टम प्रक्रिया कराई जा रही है। घायल बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है। फिलहाल पुलिस हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है और फरार चालक की तलाश जारी है।</description><guid>road-accident:-horrific-road-accident,-4-people-of-the-same-family-died</guid><pubDate>26-Aug-2026 10:12:22 am</pubDate></item><item><title>चीनी की बढ़ती कीमतों पर केंद्र का बड़ा फैसला, कच्ची चीनी के आयात नियम बदले</title><link>https://just36news.com/the-centre-has-taken-a-major-decision-on-rising-sugar-prices-and-changed-the-rules-for-importing-raw-sugar</link><description>नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत आयात होने वाली कच्ची चीनी को अब किसी एक निश्चित अंतिम तारीख तक बाजार में उतारने की बाध्यता नहीं होगी। इसके बजाय प्रत्येक खेप के लिए अलग समयसीमा निर्धारित की गई है। आयातक को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर कच्ची चीनी को रिफाइन कर सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराना होगा।
सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब देशभर में चीनी की खुदरा कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। महज एक महीने के दौरान चीनी के दाम करीब 15.6 फीसदी तक बढ़ गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत TRQ के माध्यम से आयात की गई कच्ची चीनी की प्रत्येक खेप के लिए बिल ऑफ एंट्री की तारीख से दो महीने की समयसीमा लागू होगी। इससे पहले आयातित कच्ची चीनी को रिफाइन कर घरेलू बाजार में बेचने के लिए 31 अक्टूबर 2026 की एक समान अंतिम तारीख निर्धारित थी।
सरकार ने कुल 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के TRQ आयात से जुड़े नियमों में यह बदलाव किया है। अब आयातक को संबंधित खेप को तय दो महीने के भीतर रिफाइन कर सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में उतारना होगा।
चीनी की कीमतों में तेजी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी। 20 अगस्त तक यह बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई।
इस तरह एक महीने में चीनी के दाम में 7.52 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। प्रतिशत के लिहाज से यह करीब 15.6 फीसदी की वृद्धि है। कीमतों में इस उछाल से घरेलू बजट पर भी दबाव बढ़ा है।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी चीनी की कीमतों और उत्पादन को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक अल नीनो परिस्थितियों का असर गन्ने की फसल पर पड़ा है। इसका प्रभाव भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों में कृषि उत्पादन और विशेष रूप से चीनी उत्पादन पर भी पड़ा है।
मंत्री के अनुसार, भारत में सालाना चीनी की जरूरत करीब 280 लाख टन है। वहीं, देश में फिलहाल 20 से 25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध है।
सरकार की नई व्यवस्था का मकसद TRQ के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को लंबे समय तक स्टॉक में रखने के बजाय तय अवधि के भीतर रिफाइन कर घरेलू बाजार में उपलब्ध कराना है। प्रत्येक खेप के लिए दो महीने की समयसीमा तय होने से आयातित कच्ची चीनी की बाजार में आपूर्ति को समयबद्ध करने की कोशिश की गई है।
हालांकि, इस बदलाव से खुदरा कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में चीनी की आपूर्ति, घरेलू उत्पादन और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार के सामने कीमतों को नियंत्रित रखने के साथ पर्याप्त घरेलू स्टॉक बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।</description><guid>the-centre-has-taken-a-major-decision-on-rising-sugar-prices-and-changed-the-rules-for-importing-raw-sugar</guid><pubDate>26-Aug-2026 9:49:50 am</pubDate></item><item><title>Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर कब लगेगा ग्रहण ? क्या होगा सूतक काल और भद्रा का समय, जानें 10 बड़ी बातें</title><link>https://just36news.com/raksha-bandhan-2026:-when-will-the-eclipse-occur-on-raksha-bandhan-what-will-be-the-</link><description>Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व इस साल 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक यह त्योहार सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। हालांकि, इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण का संयोग बनने से लोगों के मन में राखी बांधने के शुभ समय, ग्रहण की अवधि और सूतक काल को लेकर कई तरह के सवाल हैं। वहीं, भद्रा का साया भी रक्षाबंधन से एक दिन पहले रहेगा। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ समय क्या रहेगा, चंद्र ग्रहण कब लगेगा और क्या इसका प्रभाव भारत में भी माना जाएगा। आइए जानते हैं रक्षाबंधन 2026 से जुड़ी 10 बड़ी बातें।
1. कब मनाया जाएगा रक्षा बंधन 2026 ?
सावन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त 2026, गुरुवार को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से होगी और इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को ही रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।
2. किस समय लगेगा चंद्र ग्रहण 2026 ?
ज्योतिषियों के अनुसार, 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को चंद्र ग्रहण सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होगा। ग्रहण का समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर माना जा रहा है।
3. क्या भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण ?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल का यह आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यही वजह है कि, भारत में इस ग्रहण से जुड़े कोई भी नियम मान्य नहीं होंगे और धूमधाम से राखी का पर्व मनाया जा सकेगा।
4. क्या रहेगा सूतक काल का समय ?
चंद्र ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है। लेकिन जब ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई नहीं देता है तो वहां सूतक संबंधी नियम लागू नहीं माने जाते। इसलिए ग्रहण के न दिखने के कारण भारत में रक्षाबंधन के दिन सूतक काल मान्य नहीं होगा।
5. क्या है रक्षाबंधन 2026 का शुभ मुहूर्त ?
28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस दौरान अलग-अलग शुभ मुहूर्त भी रहेंगे।
लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 7 बजकर 33 मिनट से सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक।
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 9 बजकर 10 मिनट से सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक।
6. कब रहेगा भद्रा का साया ?
इस साल 27 अगस्त 2026 को भद्रा का प्रभाव सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। ऐसे में भद्रा की अवधि 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए 28 अगस्त को बिना भद्रा के रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।
7. कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण ?
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण अफ्रीका, यूरोप, उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका तथा पश्चिमी एशिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
8. किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ग्रहण ?
28 अगस्त 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में माना जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर एक जैसा नहीं माना जाता। ज्योतिषीय गणना के अनुसार मेष, कर्क, कन्या और तुला राशि के जातकों को इस अवधि में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
9. आखिर कब लगता है चंद्र ग्रहण ?
खगोल विज्ञान के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है। चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा तिथि को ही लगता है।
10. ग्रहण के कारण क्या सावन पूर्णिमा मनाने में कोई बाधा होगी ?
चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण यहां इसका धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा। इसलिए सावन पूर्णिमा का पर्व सामान्य रूप से मनाया जा सकेगा। इस दिन स्नान-दान और धार्मिक कार्यों के लिए कई शुभ समय भी रहेंगे।
सावन पूर्णिमा स्नान-दान मुहूर्त 2026
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:37 बजे तक।
प्रातः संध्या: सुबह 5:14 बजे से 6:23 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:14 बजे से 1:05 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:45 बजे से 3:36 बजे तक।</description><guid>raksha-bandhan-2026:-when-will-the-eclipse-occur-on-raksha-bandhan-what-will-be-the-</guid><pubDate>25-Aug-2026 10:21:29 am</pubDate></item><item><title>नैनीताल की इस झील में पूर्णिमा की रात आती हैं परियां? जानिए रहस्यमयी परीताल का राज</title><link>https://just36news.com/do-fairies-visit-this-lake-in-nainital-on-full-moon-nights</link><description>नई दिल्ली। उत्तराखंड का नैनीताल अपनी खूबसूरत झीलों और पहाड़ों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन इसी इलाके में एक ऐसी झील भी है, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ रहस्यमयी लोककथाओं के लिए जानी जाती है। इसका नाम है परीताल।
नैनीताल से करीब 25 किलोमीटर दूर चाफी गांव के आसपास स्थित यह झील मुख्य सड़क से कुछ दूरी पर है। गांव से लगभग 3-4 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद यहां पहुंचा जा सकता है। पथरीला और दुर्गम रास्ता इस सफर को रोमांचक बना देता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, पूर्णिमा की रात इस झील पर देव परियां आती हैं और पानी में स्नान करती हैं। इसी लोककथा के कारण इसका नाम परीताल पड़ा। कहा जाता है कि इस विश्वास की वजह से कई स्थानीय लोग पूर्णिमा के दौरान झील के पास जाने से बचते हैं।
झील की गहराई को लेकर भी कई तरह की बातें कही जाती हैं। आसपास की काली चट्टानों और प्राकृतिक संरचनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। हालांकि, परियों के आने या झील की असाधारण गहराई से जुड़े दावों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। नैनीताल से भीमताल-पदमपुरी मार्ग होते हुए चाफी गांव पहुंचा जा सकता है। इसके बाद करीब 3 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है। रास्ता कठिन होने के कारण स्थानीय लोगों की मदद और मौसम की जानकारी लेकर यात्रा करना बेहतर रहेगा।</description><guid>do-fairies-visit-this-lake-in-nainital-on-full-moon-nights</guid><pubDate>24-Aug-2026 10:52:51 pm</pubDate></item><item><title>महिलाओं को बड़ा तोहफा: साल में 3 एलपीजी सिलेंडर फ्री, डीलक्स बसों में भी मुफ्त सफर</title><link>https://just36news.com/big-gift-for-women:-3-free-lpg-cylinders-a-year-and-free-travel-in-deluxe-buses</link><description>चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने महिलाओं के लिए कई बड़ी कल्याणकारी योजनाओं का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में बताया कि, कम आय वाले परिवारों को हर साल तीन मुफ्त LPG सिलेंडर दिए जाएंगे। साथ ही महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा का दायरा भी बढ़ाया गया है।
सरकार के मुताबिक, अन्नापूरणई सुपर सिक्स योजना के तहत 2.5 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों को तीन LPG सिलेंडर का लाभ मिलेगा। यह योजना अगले साल पोंगल के मौके पर शुरू होने की बात कही गई है। सिलेंडर की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। सरकार का अनुमान है कि, करीब 1.30 करोड़ परिवार इससे लाभान्वित होंगे और योजना पर सालाना लगभग 4,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि, LPG की बढ़ती कीमतों और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के बीच यह कदम परिवारों का खर्च कम करने में मदद करेगा। इसके अलावा वेट्री पयानम मुफ्त बस यात्रा योजना का विस्तार किया गया है। अब महिलाएं साधारण बसों के साथ एक्सप्रेस, LSS, डीलक्स और अंतर-जिला सरकारी बसों में भी मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। ट्रांसजेंडर लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। विस्तारित बस योजना 2 अक्टूबर से लागू होने की घोषणा की गई है।</description><guid>big-gift-for-women:-3-free-lpg-cylinders-a-year-and-free-travel-in-deluxe-buses</guid><pubDate>24-Aug-2026 10:44:07 pm</pubDate></item><item><title>अयोध्या में ऐतिहासिक पल! राम मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर पर फहरा नया धर्म ध्वज, देखें अलौकिक तस्वीरें</title><link>https://just36news.com/a-historic-moment-in-ayodhya-a-new-religious-flag-unfurled-atop-the</link><description>अयोध्या. रामनगरी से बड़ी और गौरवशाली खबर सामने आ रही है. श्रावण मास के पावन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के शुभ अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य शिखर पर नवीन धर्मध्वज का विधिवत पूजन के साथ ध्वजारोहण किया गया.
जैसे ही मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर केसरिया धर्मध्वज लहराया, पूरा राम मंदिर परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा. दूर से ही शिखर पर लहराता यह नया ध्वज श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है.
ट्रस्ट ने जारी की तस्वीरें
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आज नवीन धर्मध्वज की भव्य तस्वीरें और ड्रोन वीडियो जारी किए हैं. ट्रस्ट के अनुसार, यह ध्वज सनातन धर्म, विजय और मर्यादा का प्रतीक है.
मंदिर के शिखर पर स्थापित यह ध्वज विशेष तकनीक और सैन्य-ग्रेड पैराशूट कपड़े से बनाया गया है, ताकि तेज हवा और मौसम में भी इसकी चमक और मजबूती बनी रहे. ध्वज पर सूर्यवंश का प्रतीक  सूर्य, ओम और कोविदार का चिन्ह अंकित है.
श्रद्धालुओं में उत्साह
धर्मध्वज फहराए जाने की तस्वीरें सामने आते ही देशभर के रामभक्तों में जबरदस्त उत्साह है. सोशल मीडिया पर #DharmDhwaj और #RamMandir ट्रेंड करने लगा है.
बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं. ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि मुख्य शिखर के साथ-साथ परकोटे के अन्य मंदिरों पर भी इसी तरह के धर्मध्वज स्थापित किए गए हैं.
उन्होंने बताया कि यह मंदिर निर्माण के पूर्णता की ओर बढ़ते एक और ऐतिहासिक पड़ाव को दर्शाता है.</description><guid>a-historic-moment-in-ayodhya-a-new-religious-flag-unfurled-atop-the</guid><pubDate>23-Aug-2026 8:02:45 pm</pubDate></item><item><title>वाराणसी का चर्चित 27 किलो चांदी लूटकांड मामला, गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच दो अंतरराज्यीय बदमाश गिरफ्तार</title><link>https://just36news.com/varanasi-high-profile-27-kg-silver-robbery-case:-two-interstate-criminals-arrested-amidst-a-hail-of-gunfire</link><description>वाराणसी। जिले के चर्चित 27 किलो चांदी लूटकांड में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के दो शातिर बदमाशों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। कमिश्नरेट वाराणसी की एसओजी, थाना चौक और थाना लंका की संयुक्त टीम ने लौटूबीर पुलिया के पास घेराबंदी की। खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाश घायल हो गए और मौके से गिरफ्तार कर लिए गए।
मुठभेड़ में घायल बदमाशों की पहचान
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद अली उर्फ शाबिर हसन (55) पुत्र हाजी मुस्कीन उर्फ महमूद अली, निवासी रायसेन, वर्तमान पता ईरानी बस्ती, अमन कॉलोनी करोध, थाना निशादपुरा, जिला भोपाल (मध्य प्रदेश) तथा हाल पता इदबारा, पोस्ट कोतवाली पिपारिया, जिला होशंगाबाद (नर्मदापुरम), और माशाअल्लाह (40) पुत्र अनवर अली, निवासी पिपारिया, थाना पंचमढ़ी रोड, जिला नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश) के रूप में हुई है।
नकदी, अवैध हथियार और चांदी बरामद
पुलिस ने दोनों के कब्जे से 4 किलो वजन की चांदी की चार बटिया, 15,020 रुपये नकद, दो अवैध .315 बोर तमंचे, चार जिंदा कारतूस और तीन खोखा कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद चांदी 17 जुलाई को चौक थाना क्षेत्र में हुई लूट की घटना से संबंधित है।
गोविंदपुरा मोड़ के पास हुई थी वारदात
गौरतलब है कि हेमा ज्वेलर्स से 27 किलो 327 ग्राम चांदी महालक्ष्मी ज्वेलर्स ले जातेसमय गोविंदपुरा मोड़ के पास बदमाशों ने कर्मचारियों से चांदी लूट ली थी। घटना के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई।
मुख्य आरोपी पर दर्ज हैं गंभीर मुकदमे
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी मोहम्मद अली उर्फ शाबिर हसन एक शातिर अंतरराज्यीय अपराधी है। उसके खिलाफ वाराणसी, दिल्ली, जयपुर सहित विभिन्न राज्यों में हत्या के प्रयास, लूट, चोरी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराधों के कई मुकदमे दर्ज हैं।
दोनों आरोपियों को घायल अवस्था में बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और लूटी गई बाकी चांदी की बरामदगी के लिए अभियान चला रही है।</description><guid>varanasi-high-profile-27-kg-silver-robbery-case:-two-interstate-criminals-arrested-amidst-a-hail-of-gunfire</guid><pubDate>23-Aug-2026 7:58:23 pm</pubDate></item><item><title>दिल्लीवासियों को बड़ी सौगात! 9.62 करोड़ से बनेगा नया स्काईवॉक, नवंबर में होगा शुरू</title><link>https://just36news.com/a-major-gift-for-delhiites-new-skywalk-to-be-built-at-a-cost-</link><description>दिल्ली - दिल्ली के मधुबन चौक पर राहगीरों की सुविधा और सड़क पार करने में सुरक्षा बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से Skywalk-FOB का निर्माण कराया जा रहा है। करीब 9.62 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह स्काईवॉक-फुटओवर ब्रिज नवंबर 2026 से आम लोगों के लिए खोलने की योजना है। यह Skywalk-FOB आउटर रिंग रोड स्थित मधुबन चौक पर बनाया जा रहा है। इसके तैयार होने के बाद पैदल यात्रियों को व्यस्त सड़क और चौराहे पर वाहनों के बीच से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। Skywalk-FOB को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यह पितमपुरा मेट्रो स्टेशन, मधुबन चौक मेट्रो स्टेशन और रोहिणी जिला अदालत को आपस में जोड़ेगा। इससे मेट्रो यात्रियों, अदालत आने वाले लोगों और आसपास के निवासियों को आवाजाही में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य
सूत्रों के मुताबिक, मधुबन चौक पर बन रहे Skywalk-FOB को 30 नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके शुरू होने के बाद पैदल यात्रियों को आउटर रिंग रोड जैसी व्यस्त सड़क को सीधे सड़क स्तर पर पार करने की जरूरत नहीं होगी। Skywalk-FOB के जरिए यात्रियों को सड़क के ऊपर से सुरक्षित तरीके से आवाजाही की सुविधा मिलेगी। इससे व्यस्त मार्ग पर पैदल यात्रियों और वाहनों के बीच टकराव का जोखिम भी कम होने की उम्मीद है।
दुर्घटनाओं का जोखिम होगा कम
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मधुबन चौक पर Skywalk-FOB बनने से पैदल यात्रियों और वाहनों के बीच टकराव और दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी। व्यस्त आउटर रिंग रोड को सड़क स्तर पर पार करने की जरूरत नहीं होने से पैदल यात्रियों की आवाजाही अधिक सुरक्षित हो सकेगी। अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना से मेट्रो स्टेशनों और रोहिणी जिला अदालत के बीच लास्ट-माइल कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। इससे रोजाना मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों, अदालत आने वाले लोगों और आसपास के आम नागरिकों को आवाजाही में सुविधा मिलेगी।
मेट्रो से कनेक्टिविटी होगी बेहतर
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, PWD की इस परियोजना से मधुबन चौक क्षेत्र में पैदल यातायात को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, आउटर रिंग रोड पर वाहनों और पैदल यात्रियों के बीच बेहतर पृथक्करण सुनिश्चित किया जा सकेगा। Skywalk-FOB के जरिए मेट्रो स्टेशनों और रोहिणी जिला अदालत के बीच पैदल आवाजाही आसान होगी। इससे क्षेत्र की लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ मेट्रो यात्रियों को भी बेहतर सुविधा मिलेगी।


</description><guid>a-major-gift-for-delhiites-new-skywalk-to-be-built-at-a-cost-</guid><pubDate>23-Aug-2026 7:53:33 pm</pubDate></item><item><title>भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान, अगले दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान</title><link>https://just36news.com/india-space-economy-set-to-soar;-projected-to-reach</link><description>भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 9 अरब डॉलर तक पहुंच गई है और मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम एवं नीतिगत सुधारों के चलते अगले दशक में इसके 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी सरकार की ओर से जारी ताजा डेटा में सामने आई। भारत रविवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस ऐसे अवसर पर मनाया जा रहा है, जब देश का अंतरिक्ष इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। पंजीकृत अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या इस साल अगस्त तक बढ़कर करीब 440 हो गई है, जो 2014 में सिर्फ 1 थी।
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश लगभग छह गुना बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 2021-22 में 100.5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर हो गया। अकेले 2026 में अब तक 187 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को 113 ऑथराइजेशन दिए जा चुके हैं। इनमें 18 स्टार्टअप हैं, जिन्हें उपग्रह संचालन, पेलोड स्थापित करने और लॉन्च सेवाओं के लिए अनुमति मिली है।
भारत ने 2020 में अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया था। इससे उपग्रहों, लॉन्च सिस्टम और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में उद्योगों और स्टार्टअप्स की भागीदारी संभव हुई। इसे भारत के व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना गया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में निजी भागीदारी को और बढ़ाया। इस नीति में न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया।
इसरो की वाणिज्यिक शाखा एनएसआईएल लॉन्च, उपग्रह और अंतरिक्ष आधारित सेवाएं उपलब्ध कराती है और इसरो की तकनीकों को भारतीय उद्योगों तक पहुंचाती है। एनएसआईएल का राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 में 321.77 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 3,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बढ़ते व्यावसायीकरण को दर्शाता है। इन-स्पेस सिंगल-विंडो व्यवस्था के जरिए निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को सक्षम बनाता है। 31 जनवरी 2026 तक इसने उद्योगों और स्टार्टअप्स को इसरो की 71 तकनीकों के हस्तांतरण में मदद की।</description><guid>india-space-economy-set-to-soar;-projected-to-reach</guid><pubDate>23-Aug-2026 7:45:15 pm</pubDate></item><item><title>भारत को रक्षा क्षेत्र में बनना होगा आत्मनिर्भर, किसी देश पर निर्भर नहीं रह सकते: राजनाथ सिंह</title><link>https://just36news.com/india-must-become-self-reliant-in-the-defence-sector-we-cannot-remain-</link><description>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि अब हमारी सोच यह नहीं होनी चाहिए कि भारत को दुनिया से क्या खरीदना है। हमारी सोच यह होनी चाहिए कि दुनिया भारत से क्या खरीदना चाहती है। स्वदेशी हथियार हमारे लिए कितने जरूरी हैं, इसका उदाहरण हमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत की स्वदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमता देखी।
राजनाथ सिंह ने यह बात रविवार को पांच रक्षा प्रोजेक्टों का शिलान्यास करने के दौरान कहीं। जिनका शिलान्यास किया गया वे पश्चिम बंगाल स्थित जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड की 5 नई फैसिलिटी हैं। जीआरएसई देश के प्रमुख युद्धपोत निर्माण प्रतिष्ठानों में शामिल है। जीआरएसई के पास 800 से अधिक जहाजों के निर्माण का अनुभव है। यहां राजनाथ सिंह ने कहा, हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि क्वालिटी ऐसी कि दुनिया भरोसा करे, कीमत ऐसी कि दुनिया चुने और डिलीवरी ऐसी कि दुनिया बार-बार ऑडर करे।
उन्होंने बताया जीआरएसई के पास तकनीकी जानकारी है, कुशल कार्यबल है और अब विस्तारित क्षमता भी होगी। आपको इसका पूरा उपयोग करना होगा। आप अभी नौसेना के ऑर्डर के साथ-साथ, एक जर्मन कंपनी के लिए 12 मालवाहक जहाज बना रहे हैं। यह बिल्कुल हमारी मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड, विजन के अनुरूप है। जैसे-जैसे आपकी क्षमता बढ़ेगी, आपको घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों में अधिक आक्रामक बोली लगानी होगी।
राजनाथ सिंह ने कहा, आगे भी, रक्षा मंत्रालय के साथ, हमारी प्रयोगशालाएं, हमारे सार्वजनिक उपक्रम, और निजी हितधारक मिलकर, अपनी सेनाओं को स्वदेशी प्लेटफॉर्म से लैस करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हमने यह साबित किया है कि आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं है। आत्मनिर्भरता, युद्धक्षेत्र क्षमता का गुणक है। और इस पहल में जीआरएसई, तथा यंत्र इंडिया लिमिटेड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि यदि हम हिंद महासागर क्षेत्र में जहाज मरम्मत और ओवरहॉल का केंद्र बन जाएं, तो विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ, हजारों रोजगार पैदा होंगे। आज भी हमारे बनाए युद्धपोत, दुनिया के संघर्ष क्षेत्रों से होकर हमारी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम रक्षा क्षेत्र में किसी भी देश पर निर्भर नहीं रह सकते। हमारी अपनी स्वदेशी कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों को ही इस क्षेत्र में पूरी तरह प्रभुत्व हासिल करना होगा। और आज के ये पांचों परियोजनाएं उसी रणनीतिक स्वायत्तता को प्रतिबिंबित कर रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने बताया, आज हम, लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपयों की लागत वाली पांच अत्यंत महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास कर रहे हैं। इनमें जीआरएसई की तीन नई जहाज निर्माण सुविधाएं  रायचक शिपयार्ड, टिम्बर पोंड हावड़ा जहाज निर्माण सुविधा और दामोदर कॉम्प्लेक्स जहाज निर्माण सुविधा शामिल हैं। इसके साथ ही यंत्र इंडिया लिमिटेड की दो अत्याधुनिक धातुकर्म सुविधाओं, 3,000 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक ओपन डाई फोर्जिंग प्रेस और रेडियल फोर्जिंग प्लांट, का भी शिलान्यास हो रहा है। ये पांचों परियोजनाएं आत्मनिर्भरता, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की भावना को बल देने वाली हैं।
उन्होंने कहा कि जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड जैसे संस्थान, इस बात के प्रमाण हैं, कि बंगाल का औद्योगिक आधार फिर से मजबूत हो रहा है। यहां से शुरू होने वाले ये परियोजनाएं, रक्षा उत्पादन को तो बढ़ाएंगे ही, साथ ही साथ एमएसएमई, संबद्ध उद्योगों और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगे। एक तरह से देखें, तो ये परियोजनाएं, बंगाल की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के, नए अध्याय के रूप में सामने आने वाले हैं।</description><guid>india-must-become-self-reliant-in-the-defence-sector-we-cannot-remain-</guid><pubDate>23-Aug-2026 7:41:52 pm</pubDate></item><item><title>मध्य प्रदेश को जैव विविधता संरक्षण के लिए मोदी सरकार की अतिरिक्त मदद, दिए 32.73 लाख रुपये</title><link>https://just36news.com/modi-government-provides-additional-assistance-of-</link><description>भोपाल। मध्य प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय जैव संसाधनों के दस्तावेजीकरण और उनसे जुड़े समुदायों की आजीविका को मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने पहुंच एवं लाभ-साझाकरण तंत्र के तहत मध्य प्रदेश को 32.73 लाख रुपये आवंटित किए हैं।
उल्लेखनीय है कि देशभर में जारी 2.80 करोड़ रुपये की राशि में मध्य प्रदेश को मिलने वाला यह हिस्सा उसे प्रमुख प्राप्तकर्ता राज्यों में शामिल करता है। यह राशि राज्य में जैव विविधता संरक्षण और उससे जुड़े स्थानीय समुदायों के हित में विभिन्न गतिविधियों पर खर्च की जाएगी।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने भारत के जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों को साझा करने के उद्देश्य से पहुंच एवं लाभ-साझाकरण यानी एबीएस तंत्र के तहत कुल 2.82 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। इसमें से 2.80 करोड़ रुपये 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों तथा तीन केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 2.01 लाख रुपये भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, कर्नाटक को दिए जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश को आवंटित 32.73 लाख रुपये इस पूरी राशि में तीसरा सबसे बड़ा राज्यवार हिस्सा है। गुजरात को 44.59 लाख रुपये और पश्चिम बंगाल को 41.24 लाख रुपये मिले हैं। मध्य प्रदेश के बाद ओडिशा को 32.57 लाख रुपये, बिहार को 30.86 लाख रुपये और छत्तीसगढ़ को 16.54 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि जैविक संसाधनों और बागवानी फसलों की विविधता के लिहाज से मध्य प्रदेश का महत्व राष्ट्रीय स्तर पर भी रेखांकित हुआ है।
इस संबंध में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) की ओर से अधिकारिक तौर पर कहा गया है कि यह राज्य की जैव विविधता को संरक्षित करने और स्थानीय स्तर पर उसके सतत उपयोग की दिशा में संसाधन उपलब्ध कराने की पहल है।
फूलगोभी, मिर्च, भिंडी और टमाटर से जुड़े संसाधनों से आया लाभ
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को मेसर्स एडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड, पूर्व में मेसर्स यूपीएल लिमिटेड, से एबीएस के तहत 2.94 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह राशि फूलगोभी की आठ संकर किस्मों, मिर्च की पांच संकर किस्मों, भिंडी की पांच संकर किस्मों और टमाटर की छह संकर किस्मों से जुड़े आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से संबंधित है।
इस मामले में जैविक संसाधनों तक पहुंच किसी अन्य कंपनी के अधिग्रहण के माध्यम से हुई थी। ऐसे में किसानों, समुदायों अथवा किसी एक पहचान योग्य भौगोलिक स्रोत को प्रत्यक्ष लाभार्थी के रूप में चिन्हित करना संभव नहीं था। इसी कारण राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने ऐसे मामलों में लाभ-साझाकरण राशि के वितरण और उपयोग के लिए विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर एक कार्यप्रणाली विकसित की। प्राधिकरण द्वारा इसे अनुमोदित किए जाने के बाद संबंधित राज्यों में बागवानी फसलों की खेती को ध्यान में रखते हुए राशि का वितरण किया गया।
मध्य प्रदेश में किन कामों पर खर्च होगी राशि
राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी राशि का उपयोग जन जैव विविधता रजिस्टरों के दस्तावेजीकरण एवं अद्यतन, जैव विविधता के इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण, खराब हो चुके पारिस्थितिक तंत्रों के पुनर्स्थापन तथा जैव विविधता विरासत स्थलों को मजबूत करने जैसे कार्यों में किया जाना है।
इसके साथ ही जैव विविधता प्रबंधन समितियों की क्षमता बढ़ाने और स्थानीय समुदायों की आजीविका के संवर्धन पर भी राशि खर्च की जाएगी। मध्य प्रदेश जैसे बड़े और जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध राज्य के लिए यह राशि स्थानीय स्तर पर जैव संसाधनों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्राप्त राशि का उपयोग करने के बाद संबंधित संस्थाओं को एक वर्ष के भीतर उपयोग प्रमाण पत्र और व्यय विवरण प्रस्तुत करना होगा। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से प्राप्त आर्थिक लाभ संरक्षण कार्यों तक पहुंचे और उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही हो।
अनुसंधान संस्थानों को भी लाभ
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को सुमितोमो केमिकल इंडिया लिमिटेड, मुंबई, पूर्व में एक्सेल क्रॉप केयर, से दो सूक्ष्मजीव उपभेदों के अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग के लिए 7.15 लाख रुपये एबीएस राशि के रूप में प्राप्त हुए। इनमें स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस और ट्राइकोडर्मा हारजियानम के संबंधित उपभेद शामिल हैं, जिन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, कर्नाटक से प्राप्त किया गया था।
चूंकि ये जैविक संसाधन एक सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान से प्राप्त हुए थे, इसलिए नियमों के अनुसार एबीएस राशि का 30 प्रतिशत यानी 2.01 लाख रुपये भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान को दिया जा रहा है। इस राशि का उपयोग जैविक संसाधनों के भंडारों के रखरखाव, अनुसंधान, जैव विविधता सर्वेक्षण, वर्गीकरण एवं संरक्षण संबंधी क्षमता विकास तथा जैव संसाधनों और उनसे जुड़े वन्य जीवों के इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण के लिए किया जाएगा।
संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच बनेगा संतुलन
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अनुसार अब तक कुल 185 करोड़ रुपये की एबीएस राशि जारी की जा चुकी है। इसका उद्देश्य भारत के जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से उत्पन्न आर्थिक लाभ को जैव विविधता संरक्षण, उसके सतत उपयोग तथा किसानों, स्थानीय समुदायों और संरक्षण से जुड़े अन्य लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास से जोड़ना है।मध्य प्रदेश को मिला 32.73 लाख रुपये का आवंटन इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा है।</description><guid>modi-government-provides-additional-assistance-of-</guid><pubDate>23-Aug-2026 7:37:52 pm</pubDate></item><item><title>बंगाल की खाड़ी में समंदर में समाया मालवाहक जहाज, 24 नाविक सवार; रेस्क्यू जारी</title><link>https://just36news.com/cargo-ship-sinks-in-the-bay-of-bengal-with-24-crew-members</link><description>नई दिल्ली। ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 नॉटिकल मील दूर बंगाल की खाड़ी में शनिवार को पनामा के झंडे वाला एक मालवाहक जहाज डूब गया। अधिकारियों के मुताबिक, जहाज पर 24 क्रू सदस्य सवार थे। हादसे के बाद भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है।
कहां और कैसे हुआ हादसा?
अधिकारियों के अनुसार, मालवाहक जहाज ओडिशा से लौह अयस्क लेकर सिंगापुर की ओर जा रहा था। उसने शुक्रवार को ओडिशा के तट से अपनी यात्रा शुरू की थी। शनिवार को यह जहाज बंगाल की खाड़ी में डूब गया। जहाज के डूबने की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद दूसरे जहाजों को भी अलर्ट किया गया, ताकि बचाव अभियान में मदद मिल सके।
जहाज पर कितने लोग थे?
मालवाहक जहाज पर कुल 24 क्रू सदस्य मौजूद थे। एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने बताया कि इनमें से ज्यादातर सदस्य चीनी नागरिक थे। अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कितने क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचाया जा सका है। बचाव अभियान जारी है और अधिकारियों की नजर रेस्क्यू ऑपरेशन पर बनी हुई है।
भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने संभाला मोर्चा
जहाज के डूबने की जानकारी मिलने के बाद भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना ने बचाव अभियान शुरू किया। आसपास के जहाजों को भी सहायता के लिए सतर्क किया गया है। फिलहाल अधिकारियों की प्राथमिकता जहाज पर सवार सभी क्रू सदस्यों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित निकालना है।</description><guid>cargo-ship-sinks-in-the-bay-of-bengal-with-24-crew-members</guid><pubDate>23-Aug-2026 7:33:49 pm</pubDate></item><item><title>शनिवार को पीपल के पेड़ पर छाछ चढ़ाने की मान्यता, जानिए क्या है धार्मिक महत्व</title><link>https://just36news.com/the-belief-of-offering-buttermilk-to-the-peepal-tree-on-saturday</link><description>नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल का संबंध भगवान विष्णु, ब्रह्मा, महेश और शनिदेव से जोड़ा जाता है। इसी वजह से शनिवार के दिन पीपल की पूजा और उससे जुड़े उपायों का विशेष महत्व बताया गया है।धार्मिक परंपराओं में एक उपाय पीपल की जड़ में छाछ या मट्ठा अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि शनिवार को लगातार सात सप्ताह तक श्रद्धा के साथ यह उपाय करने से शनि से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है। इसे आर्थिक संकट, कर्ज और जीवन में आने वाली बाधाओं से जोड़कर भी देखा जाता है।
क्या है तरीका?
शनिवार सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद पीपल के पेड़ के पास जाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करने की परंपरा है। इसके बाद पेड़ की जड़ में छाछ अर्पित की जाती है। धार्मिक विश्वास रखने वाले लोग इसे सात शनिवार तक करने की मान्यता बताते हैं।
कहा जाता है कि, इस उपाय से नकारात्मकता दूर होती है, रुके काम बनने लगते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। हालांकि, इन दावों के वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में ही देखना उचित है। साथ ही पीपल के पेड़ और आसपास की मिट्टी को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखना चाहिए।</description><guid>the-belief-of-offering-buttermilk-to-the-peepal-tree-on-saturday</guid><pubDate>23-Aug-2026 7:20:52 pm</pubDate></item><item><title>उत्तर प्रदेश में पान मसाला और तंबाकू के अवैध उत्पादन नेटवर्क का भंडाफोड़, 185 करोड़ की कर चोरी उजागर</title><link>https://just36news.com/illegal-pan-masala-and-tobacco-production-network-busted-in-uttar-</link><description>डीजीजीआई की कार्रवाई में 27 अघोषित पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त, चित्रकूट-बांदा के छह परिसरों से 15.50 लाख से अधिक तैयार पाउच बरामद
नई दिल्ली । जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की लखनऊ क्षेत्रीय इकाई ने उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और बांदा जिलों में पान मसाला, सुगंधित जर्दा और गुटखा के अवैध उत्पादन से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। छह उत्पादन परिसरों में की गई कार्रवाई के दौरान 27 अघोषित पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त की गईं और करीब 185 करोड़ रुपये की जीएसटी, स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा (एचएसएनएस) उपकर तथा केंद्रीय उत्पाद शुल्क की चोरी का पता चला है।
डीजीजीआई अधिकारियों ने खुफिया जानकारी के आधार पर 18 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि के आसपास चित्रकूट और बांदा स्थित छह परिसरों में एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। ये परिसर दो फर्मों से जुड़े पाए गए। इनमें से एक पान मसाला एवं संबंधित उत्पादों के उत्पादन, जबकि दूसरी व्यापारिक गतिविधियों में शामिल थी।
27 अघोषित मशीनें मिलीं
तलाशी के दौरान अधिकारियों को 27 ऐसी पाउच-पैकिंग मशीनें मिलीं, जिनका घोषित उत्पादन व्यवस्था में उल्लेख नहीं था। इनमें सुगंधित जर्दा के लिए छह, पान मसाला के लिए नौ और दोहरा/देसी गुटखा के लिए 12 मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा मिश्रण, सुपारी की कुटाई और सुखाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी बरामद की गईं।
कार्रवाई के दौरान पान मसाला, चबाने वाला तंबाकू, सुगंधित जर्दा और सुगंधित सुपारी के 15,50,922 तैयार पाउच जब्त किए गए।
जांच के दौरान बड़ी मात्रा में कच्चा माल और पैकिंग सामग्री भी बरामद हुई। इसमें 32.9 मीट्रिक टन सुपारी एवं कटी सुपारी, 2.8 मीट्रिक टन तंबाकू, 8.4 मीट्रिक टन पैकिंग सामग्री, पाउच और लैमिनेट्स, 470 किलोग्राम कत्था पाउडर, 850 किलोग्राम ग्लिसरीन, 545 किलोग्राम एसेंस और 256 किलोग्राम बिना पैक किया हुआ पान मसाला शामिल है।
अपंजीकृत परिसरों से चल रहा था कारोबार
जांच में सामने आया कि अवैध कारोबार अपंजीकृत परिसरों के एक नेटवर्क के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। इन परिसरों में अघोषित मशीनरी के जरिए पान मसाला और तंबाकू उत्पादों का उत्पादन किया जाता था। तैयार माल को लागू जीएसटी, एचएसएनएस उपकर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क का भुगतान किए बिना कथित तौर पर गुप्त रूप से बाजार में भेजा जा रहा था।
जांच एजेंसी के अनुसार, निर्माण फर्म के मालिक की इस अवैध उत्पादन और माल की निकासी की गतिविधियों को संगठित करने में प्रमुख भूमिका सामने आई है।
मालिक गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया
फर्म के मालिक को 19 अगस्त 2026 को स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम, 2025 की धारा 26 और केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 की धारा 13 के तहत गिरफ्तार किया गया। उसे विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीमा शुल्क), लखनऊ के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
मामले की जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, जांच आगे बढऩे पर और बरामदगी तथा कर चोरी से जुड़े तथ्यों का खुलासा होने की संभावना है।
1 फरवरी से लागू है क्षमता आधारित कर व्यवस्था
पान मसाला और तंबाकू क्षेत्र में 1 फरवरी 2026 से क्षमता आधारित उपकर और कर व्यवस्था लागू की गई है। स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम, 2025 के तहत पान मसाला पर क्षमता आधारित मासिक उपकर लगाया जाता है। इसकी गणना स्थापित पाउच-पैकिंग मशीनों की संख्या, प्रकार और क्षमता के आधार पर की जाती है।
इसी तरह केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 के तहत चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा पर भी क्षमता आधारित केंद्रीय उत्पाद शुल्क लागू है। डीजीजीआई के अनुसार, कुछ निर्माता अघोषित मशीनों का इस्तेमाल कर उत्पादन छिपाने और कर एवं उपकर से बचने का प्रयास करते हैं।
देशभर में 27 मामले दर्ज, 668 करोड़ की चोरी का पता
अघोषित उत्पादन और कर चोरी पर अंकुश लगाने के लिए डीजीजीआई ने देशभर में खुफिया सूचना आधारित प्रवर्तन कार्रवाई तेज की है। डेटा विश्लेषण से जुड़ी विभिन्न इकाइयों के समन्वय से अवैध उत्पादन और कर चोरी के मामलों की पहचान की जा रही है।
1 फरवरी 2026 से अब तक डीजीजीआई की विभिन्न इकाइयों ने देशभर में ऐसे 27 मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में कुल 668 करोड़ रुपये के शुल्क, कर और उपकर की चोरी का पता चला है। जांच के दौरान 11.7 करोड़ रुपये की राशि स्वेच्छा से जमा की गई है।
इसके अलावा, कार्रवाई के दौरान अब तक 131 पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त की जा चुकी हैं और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। डीजीजीआई की कार्रवाई से पान मसाला और तंबाकू क्षेत्र में अघोषित उत्पादन तथा कर चोरी के खिलाफ प्रवर्तन अभियान तेज होने के संकेत मिले हैं।</description><guid>illegal-pan-masala-and-tobacco-production-network-busted-in-uttar-</guid><pubDate>22-Aug-2026 7:25:57 pm</pubDate></item><item><title>छोटे बच्चों की दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसला, 4 साल से कम उम्र में एफडीसी पर रोक</title><link>https://just36news.com/government-major-decision-on-medicines-for-young-children</link><description>नई दिल्ली। छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सर्दी-जुकाम में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फेनिलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड वाले फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की नई अधिसूचना के मुताबिक, इन दोनों दवाओं वाले किसी भी फॉर्मूलेशन को अब चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। कंपनियों को दवाओं के लेबल, पैकेज इंसर्ट और प्रचार सामग्री पर स्पष्ट चेतावनी देना भी अनिवार्य किया गया है।
सरकार ने यह फैसला विशेषज्ञ समिति और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों में इस संयोजन से दुष्प्रभाव का खतरा हो सकता है, जबकि सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं। इससे पहले अप्रैल 2025 में सरकार ने कुछ चुनिंदा एफडीसी पर प्रतिबंध लगाया था। अब नए आदेश के जरिए इसका दायरा बढ़ाकर इन दोनों सामग्रियों वाले सभी फॉर्मूलेशन तक कर दिया गया है। अधिसूचना ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत जारी हुई है और गजट में प्रकाशन के साथ लागू होगी। नए फैसले से बाजार में मौजूद कई बच्चों की सर्दी-जुकाम वाली दवाओं पर असर पड़ सकता है।</description><guid>government-major-decision-on-medicines-for-young-children</guid><pubDate>22-Aug-2026 7:22:04 pm</pubDate></item><item><title>राजस्थान में दर्दनाक सड़क हादसा, एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, हाईवे जाम</title><link>https://just36news.com/tragic-road-accident-in-rajasthan:-4-members-of-the-same-family-killed;-highway-blocked</link><description>जयपुर। राजस्थान के फागी इलाके में शुक्रवार शाम हुए भीषण सड़क हादसे ने एक परिवार को उजाड़ दिया। तेज रफ्तार एसयूवी की चपेट में आने से एक दंपति और उनकी दो बहुओं की मौत हो गई। हादसा सरमथुरा-फलोदी मेगा हाईवे पर माधोराजपुरा रोड के पास हुआ। पुलिस के मुताबिक, सत्यनारायण कुम्हार अपने खेत से काटी गई मूंग की फसल सड़क किनारे सुखा रहे थे। उनकी पत्नी मनमौजी और दोनों बहुएं अमृता व शिमला भी उनके साथ थीं। इसी दौरान तेज रफ्तार कार ने चारों को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि सभी कई फीट दूर जा गिरे और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना की खबर फैलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। शवों को फागी उप-जिला अस्पताल की मोर्चरी में भेजा गया, जहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर जयपुर-भीलवाड़ा मेगा हाईवे पर जाम लगा दिया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की। कई घंटे की मशक्कत के बाद प्रदर्शन समाप्त कराया गया। मृतकों में शिमला प्रशिक्षित नर्स थीं और उनकी आठ महीने की बेटी है। उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने हादसे पर दुख जताते हुए अधिकारियों को पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद के निर्देश दिए हैं।</description><guid>tragic-road-accident-in-rajasthan:-4-members-of-the-same-family-killed;-highway-blocked</guid><pubDate>22-Aug-2026 7:18:43 pm</pubDate></item><item><title>चारधाम यात्रा में 48 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, यमुनोत्री में बना नया रिकॉर्ड</title><link>https://just36news.com/over-48-million-pilgrims-visited-during-the-char-dham-yatra-a-new-record-was-set-at-yamunotri</link><description>देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद चारधाम यात्रा जारी है। यात्रा के 125 दिनों में 48 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधामों के दर्शन कर चुके हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 5 लाख 22 हजार 634 अधिक है। वहीं, यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। पहली बार यहां 6.68 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम यात्रियों की सुरक्षा प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। चारों धामों और यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। जिलाधिकारियों को भी यात्रा व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार के अनुसार, मानसून को देखते हुए चारधाम यात्रा को विशेष सतर्कता और निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है। यात्रा से जुड़े रुद्रप्रयाग,चमोली और उत्तरकाशी जिलों में आपदा प्रबंधन तंत्र को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रा को नियंत्रित किया जा रहा है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
यमुनोत्री धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। पहली बार यहां 6 लाख 68 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। शुक्रवार तक 6 लाख 68 हजार 163 श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन कर चुके हैं। वर्ष 2025 में यह संख्या 6 लाख 44 हजार 637 थी।
इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। 21 अगस्त तक बदरीनाथ में 16 लाख 54 हजार 263, केदारनाथ में 14 लाख 65 हजार 370, गंगोत्री में 7 लाख 47 हजार 671 और यमुनोत्री में 6 लाख 68 हजार 163 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं, हेमकुंड साहिब में 2 लाख 69 हजार 430 श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं। बदरीनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में यहां इस वर्ष 3 लाख 62 हजार 304 अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं।
यमुनोत्री धाम में प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं की संख्या
2025------6,44,637
2024------5,15,067
2023------5,60,918
2022------6,21,538
2021--------33,311
2020---------7728
2019---------4,65,534
2018---------3,94,445
2017---------3,92,208
2016---------1,55,129
2015---------1,22,926
2014---------038,294
2013---------253110
2012---------413615
2011---------448945
2010---------309634
2009--------322242
2008--------327611
2007--------287870
2006--------216883
2005--------169046
2004--------102331
2003--------78,050
2002--------54023
2001--------54074
2000-------88672</description><guid>over-48-million-pilgrims-visited-during-the-char-dham-yatra-a-new-record-was-set-at-yamunotri</guid><pubDate>22-Aug-2026 7:11:37 pm</pubDate></item><item><title>नितिन नबीन ने भाजपा की नयी राष्ट्रीय टीम के साथ की पहली बैठक, चुनावी रणनीति पर हुई चर्चा</title><link>https://just36news.com/nitin-nabin-holds-first-meeting-with-bjp-new-national-team;-election-strategy-discussed</link><description>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ शनिवार को पहली बैठक की जिसमें चुनावी रणनीति और जमीनी स्तर पर जनसंपर्क को लेकर चर्चा की गई। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी।
बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों, बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने और सरकार की योजनाओं एवं पहलों को जनता तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने बताया कि दिन में और बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और राज्य प्रभारी शामिल होंगे।
ज्ञात हो, भाजपा ने इस सप्ताह की शुरुआत में नितिन नवीन के नेतृत्व में नयी राष्ट्रीय टीम की घोषणा की थी। इसमें कुल 65 पदाधिकारी शामिल हैं, जिनमें 51 नए चेहरे हैं। नयी टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व पदाधिकारी राम माधव सहित 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को आठ राष्ट्रीय महासचिवों में से एक नियुक्त किया गया है। बी.एल. संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि विनोद तावड़े और सुनील बंसल महासचिव पद पर हैं। भाजपा की नयी टीम में 12 महिलाएं और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े छह नेता शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले भी वह मई 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार के गठन से पहले इस पद पर रह चुके हैं। भाजपा ने अपने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय को पद से हटाकर उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को नियुक्त किया है।
वहीं, गुजरात के हेमांग जोशी को पार्टी युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने लोकसभा सांसद तेजस्वी सूर्या का स्थान लिया है।
दरअसल, यह संगठनात्मक बदलाव वर्ष 2015 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कार्यकाल में हुए बड़े फेरबदल के बाद एक दशक से अधिक समय में सबसे बड़ा बदलाव है। इस फेरबदल के बाद संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं।</description><guid>nitin-nabin-holds-first-meeting-with-bjp-new-national-team;-election-strategy-discussed</guid><pubDate>22-Aug-2026 7:04:57 pm</pubDate></item><item><title>राष्ट्रपति मुर्मु शिक्षक दिवस पर 48 स्कूली शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करेंगी</title><link>https://just36news.com/president-murmu-will-confer-the-national-teachers-award-upon-48-school-teachers-on-teachers</link><description>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 5 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में स्थित विज्ञान भवन में 48 स्कूली शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करेंगी। इस कार्यक्रम में प्रत्येक पुरस्कार विजेता के द्वारा किए गए अनुकरणीय कार्यों को दर्शाने वाले लघु वृत्तचित्रों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम का प्रसारण दूरदर्शन और शिक्षा मंत्रालय के स्वयं प्रभा चैनलों पर लाइव किया जाएगा और इसे https://webcast.gov.in/moe पर लाइव स्ट्रीम भी किया जाएगा। इस कार्यक्रम को शिक्षा मंत्रालय के विभिन्न सोशल मीडिया चैनलों पर भी लाइव देखा जा सकता है।
शिक्षा मंत्रालय का स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग एक कड़ी, पारदर्शी और ऑनलाइन चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करने के लिए हर साल शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर एक राष्ट्रीय स्तर के समारोह का आयोजन करता है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का उद्देश्य देश के कुछ बेहतरीन शिक्षकों के अद्वितीय योगदान का उत्सव मनाना और उन शिक्षकों को सम्मानित करना है, जिन्होंने अपनी अपनी लगन और मेहनत से न केवल स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया है, बल्कि अपने छात्रों के जीवन को भी समृद्ध किया है।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए योग्य शिक्षकों से ऑनलाइन नामांकन 15.06.2026 से 20.07.2026 तक शिक्षा मंत्रालय के पोर्टल http://nationalawardstoteachers.education.gov.in के माध्यम से आमंत्रित किए गए थे।
इस साल स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन चरणों वाली चयन प्रक्रिया के जरिए कुल 48 स्कूल शिक्षकों को चुना है। चुने गए 48 स्कूल शिक्षक 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के 6 संगठनों से हैं। चुने गए 48 स्कूल शिक्षकों में से 26 पुरुष और 22 महिलाएं हैं।</description><guid>president-murmu-will-confer-the-national-teachers-award-upon-48-school-teachers-on-teachers</guid><pubDate>22-Aug-2026 7:00:56 pm</pubDate></item><item><title>ऊर्जा सुरक्षा के लिए नियामक ने 7,000 करोड़ रुपये के एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी दी</title><link>https://just36news.com/regulator-approves-₹7,000-crore-lpg-pipeline-network-for-energy-security</link><description>तेल क्षेत्र के नियामक ने 7,000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से लगभग 1,800 किलोमीटर लंबी नई एलपीजी पाइपलाइनों के विकास को मंजूरी दे दी है। इससे देश के कॉमन-कैरियर एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क में लगभग एक-चौथाई का विस्तार होगा। इस पहल का मकसद ईंधन आपूर्ति को अधिक लचीला बनाना और सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करना है।
6 राज्यों के लिए मंजूरी
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने एक बयान में कहा कि उसने तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तीन एलपीजी पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
सरकारी कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा विकसित की जाने वाली इन परियोजनाओं से पीएनजीआरबी द्वारा अधिकृत कॉमन-कैरियर एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क लगभग 7,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर हो जाएगा, जो लगभग 23.5 प्रतिशत की वृद्धि है।
आयातित एलपीजी पर अत्यधिक निर्भरता
यह विस्तार ऐसे समय में किया जा रहा है जब भारत आयातित एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर है, जिसकी थोक आपूर्ति तटीय आयात टर्मिनलों पर पहुंचती है और फिर देश भर के उपभोग केंद्रों तक पहुंचाई जाती है। एक बड़े पाइपलाइन नेटवर्क से देश के भीतरी इलाकों में एलपीजी पहुंचाने की दक्षता और विश्वसनीयता में सुधार होने की उम्मीद है।
3 नई परियोजनाएं
मंजूरी दी गई तीन नई परियोजनाएं हैं- चेर्लापल्ली (तेलंगाना) से नागपुर (महाराष्ट्र) तक 556 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, झांसी (उत्तर प्रदेश) से सितारगंज (उत्तराखंड) तक 611 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, और शिकारपुर (महाराष्ट्र) से गोवा और हुबली (कर्नाटक) तक 633 किलोमीटर लंबी लाइन।</description><guid>regulator-approves-₹7,000-crore-lpg-pipeline-network-for-energy-security</guid><pubDate>22-Aug-2026 6:56:43 pm</pubDate></item><item><title>राजनाथ सिंह ने नोएडा में अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन किया</title><link>https://just36news.com/rajnath-singh-inaugurated-a-state-of-the-art-diagnostic-center-in-noida</link><description>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को नोएडा में इंदिरा गांधी कला केंद्र सभागार में महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के नए इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन किया। इस मौके पर नोएडा सांसद डॉ. महेश शर्मा के साथ लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज भी उपस्थित रहीं। यह केंद्र उत्तर प्रदेश में कंपनी का पहला सेंटर है, जो दिल्ली और हरियाणा के बाद यूपी में अपने विस्तार की शुरुआत नोएडा से कर रही है।
राजनाथ सिंह ने कहा
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल तकनीक ने अभूतपूर्व प्रगति की है। पहले जिन बीमारियों का पता लगाना काफी मुश्किल होता था, अब आधुनिक जांच तकनीकों के माध्यम से उनकी पहचान जल्द और अधिक सटीक तरीके से संभव हो पा रही है। अच्छी जांच व्यवस्था का उद्देश्य केवल बीमारी का पता लगाना नहीं, बल्कि मरीज को अनावश्यक जांच और गलत निदान से बचाना भी होना चाहिए।
आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में एकीकृत दृष्टिकोण को समय की जरूरत
रक्षा मंत्री ने आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में एकीकृत दृष्टिकोण को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और अन्य जांच सुविधाएं एक ही केंद्र पर उपलब्ध होने से मरीजों को बार-बार अलग-अलग स्थानों पर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ती। साथ ही, डॉक्टरों को भी सभी जांच रिपोर्ट एक साथ मिल जाने से उपचार संबंधी निर्णय लेने में काफी आसानी होती है।
उन्होंने मेडिकल साइंस और रक्षा क्षेत्र के बीच पुराने और महत्वपूर्ण संबंधों का जिक्र किया
उन्होंने मेडिकल साइंस और रक्षा क्षेत्र के बीच पुराने और महत्वपूर्ण संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि रेडियोलॉजी जैसी तकनीकों का विकास और उनका इस्तेमाल सैन्य क्षेत्र में भी अहम रहा है। अल्ट्रासोनोग्राफी जैसी तकनीकों का उपयोग सैनिकों की चिकित्सा जांच और युद्धक्षेत्र में घायल जवानों की स्थिति का आकलन करने में किया जाता रहा है। सैन्य क्षेत्र में मजबूत चिकित्सा व्यवस्था अत्यंत जरूरी है और भविष्य में मेडिकल विज्ञान को नई तकनीकों के साथ निरंतर जोड़ना होगा।
45 करोड़ लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच
रक्षा मंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से करीब 45 करोड़ लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बनी है। उत्तर प्रदेश में पिछले 10 वर्षों में करीब 5 करोड़ लोग स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आए हैं और लगभग 80 लाख लोगों को इसका सीधा लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत ढांचे का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में जहां करीब 12 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर करीब 45 हो गई है। साथ ही, प्रदेश के करीब 75 जिलों में निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जो गुर्दा रोगियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
वर्ष 2050 तक बुजुर्गों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना
भविष्य की चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आज युवा आबादी वाला देश है, लेकिन आने वाले दशकों में जनसंख्या की उम्र बढ़ेगी। वर्ष 2050 तक बुजुर्गों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है, जिससे अस्पतालों पर दबाव बढ़ेगा। इससे निपटने के लिए बीमारी होने के बाद इलाज करने की बजाय प्रिवेंटिव हेल्थ केयर (रोग निवारण) को प्राथमिकता देना अत्यंत जरूरी है।
बता दें कि महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के इस नए केंद्र में एआई आधारित अल्ट्रा-फास्ट 3.0 टेस्ला एमआरआई और 160-स्लाइस सीटी स्कैनर जैसी अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक ही छत के नीचे रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, जीनोमिक्स और व्यक्तिगत स्वास्थ्य जांच की सुविधाएं होने से नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।</description><guid>rajnath-singh-inaugurated-a-state-of-the-art-diagnostic-center-in-noida</guid><pubDate>22-Aug-2026 6:53:49 pm</pubDate></item><item><title>देश की असली तरक्की उन फैसलों से होती है जिनका असर जमीन पर दिखता: PM मोदी</title><link>https://just36news.com/the-countrys-true-progress-stems-from-decisions-whose-impact-</link><description>पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा कि देश की असली तरक्की उन फैसलों से होती है जिनका असर जमीन पर दिखता है और जो चुनावी फायदे के लिए किए गए अल्पकालिक (short-term) ऐलान के बजाय वर्तमान और भविष्य दोनों की ज़रूरतों में संतुलन बनाते हैं।
एक निजी कार्यक्रम वर्ल्ड लीडर्स फोरम में बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति में अक्सर ऐसे फैसलों की चर्चा होती है जिनका असर सिर्फ़ एक-दो दिन ही रहता है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें अक्सर जनता के सामने ऐसे ऐलान करती थीं जिनसे देश के बंटने का खतरा रहता था। इसके उलट, स्थायी बदलाव उन नीतियों से आता है जो देश के दीर्घकालिक (long-term) हितों को सुरक्षित रखते हुए साफ नतीजे देती हैं।
अपनी सरकार की दो प्रमुख योजनाओं का उदाहरण देते हुए, PM मोदी ने PM-कुसुम योजना और PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि PM-कुसुम योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए बिजली की लगातार चिंता से राहत मिली है। उन्होंने कहा कि PM सूर्य घर योजना ने घरों की छतों को मुफ्त बिजली के स्रोत में बदलकर मध्यम वर्ग को बहुत फायदा पहुंचाया है।
पीएम ने कहा, हमने हर घर की छत पर सूरज (सोलर सिस्टम) लगाने की योजना बनाई थी, और बताया कि अब 50 लाख से ज़्यादा परिवार इस योजना से जुड़ चुके हैं। सरकार ने इन परिवारों को सोलर सिस्टम लगाने के लिए 22,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की मदद दी है। लाभार्थी न केवल वॉशिंग मशीन और टेलीविज़न जैसी रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए अपनी बिजली खुद बना रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। नतीजतन, उनके बिजली के बिल ज़ीरो हो गए हैं और अतिरिक्त आमदनी भी होने लगी है।
PM मोदी ने कहा कि इस योजना ने आम नागरिकों के सपने पूरे किए हैं। इसने बिजली कटौती को खत्म किया है, जिसकी वजह से पहले दूध खराब हो जाता था और स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई में रुकावट आती थी। कई परिवारों के लिए मुफ़्त या किफायती उपकरण हकीकत बन गए हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि चुनावी चक्र से परे, रूफटॉप सोलर के फायदे व्यवसायों का विस्तार करते रहेंगे और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाते रहेंगे।
अपनी सरकार के संकल्प को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को तेज़ी से आगे ले जाने के लिए पूरे समर्पण के साथ काम जारी रहेगा। इस भरोसे के साथ कि भारत दुनिया के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगा, उन्होंने उम्मीद जताई कि एक मज़बूत, सुरक्षित और ज़्यादा सक्षम भारत उभरकर सामने आएगा जो वैश्विक मंच पर सार्थक योगदान देगा।</description><guid>the-countrys-true-progress-stems-from-decisions-whose-impact-</guid><pubDate>22-Aug-2026 6:45:32 pm</pubDate></item><item><title>भारत प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट से हटकर PLI के जरिए उत्पादन को बढ़ावा देने की ओर बढ़ा है: PM मोदी</title><link>https://just36news.com/india-has-moved-away-from-production-linked-punishment</link><description>पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत लाइसेंस राज के दौर की प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट वाली सोच से हटकर ऐसे मॉडल की ओर बढ़ा है जो ज्यादा उत्पादन को बढ़ावा देता है। उन्होंने देश की बदलती आर्थिक सोच के उदाहरण के तौर पर प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के प्रदर्शन का जिक्र किया।
राजधानी में एक मीडिया इवेंट को संबोधित करते हुए PM मोदी ने कहा कि PLI स्कीम से 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है और इससे 22 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और बिक्री हुई है। उन्होंने कहा कि इस स्कीम से 15 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है और 14 लाख से ज़्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं।
पीएम ने कहा कि यह बदलाव कारोबार और उत्पादन के प्रति सरकार की सोच में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। पाबंदियां लगाने के बजाय, केंद्र सरकार ऐसा माहौल बनाने पर ध्यान दे रही है जो कंपनियों को मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करे।
पीएम मोदी ने अनिश्चित वैश्विक माहौल का भी ज़िक्र किया और कहा कि दुनिया बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रही है क्योंकि संसाधनों का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अविश्वास आम बात होती जा रही है।
इस माहौल में, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने की उम्मीद की किरण और विकास व आशा का एक उज्ज्वल केंद्र बनकर उभर रहा है। पीएम मोदी ने कहा, IMF का अनुमान है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के तौर पर आगे बना रहेगा, और भारत इसे हकीकत बनाने की सभी कोशिशों में सबसे आगे है।
पीएम ने कहा कि भारत का भविष्य अकेले रहकर नहीं बनाया जा सकता और उन्होंने दुनिया में जारी उथल-पुथल के बीच देश के लिए दुनिया के साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने सबको साथ लेकर चलने (leading with all) का तरीका अपनाया है और तेज़ी से बदलते अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल में साझेदारी और सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।</description><guid>india-has-moved-away-from-production-linked-punishment</guid><pubDate>22-Aug-2026 6:39:50 pm</pubDate></item><item><title>Transfers: मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 32 IAS समेत कई अफसरों के तबादले</title><link>https://just36news.com/transfers:-major-administrative-reshuffle-in-madhya-pradesh</link><description>मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के मुताबिक 32 IAS और 4 राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस फेरबदल में ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसके साथ ही ग्वालियर और सतना नगर निगम के आयुक्त भी बदले गए हैं। इसके अलावा करीब 10 जिलों के CEO जिला पंचायत को भी नई जगह पदस्थ किया गया है।
2016 से 2024 बैच तक के अफसरों को नई जिम्मेदारी
जारी आदेश में 2016 से 2024 बैच तक के अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है। इनमें CEO जिला पंचायत, अपर कलेक्टर, SDM और सहायक कलेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल हैं। कुछ अधिकारियों को राज्य शासन के अलग-अलग विभागों में उप सचिव बनाया गया है, जबकि कुछ को नगर निगम में आयुक्त और अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है।
ग्वालियर नगर निगम के कमिश्नर बदले
अभिषेक चौधरी (2018 बैच) को CEO जिला पंचायत धार से हटाकर आयुक्त, नगर पालिक निगम ग्वालियर बनाया गया है। वहीं ग्वालियर नगर निगम के मौजूदा आयुक्त संघ प्रिय को अब CEO जिला पंचायत सिंगरौली की जिम्मेदारी दी गई है। अक्षय कुमार तेजपाल को CEO जिला पंचायत दतिया से अपर आयुक्त, नगर पालिक निगम भोपाल बनाया गया है।
सतना नगर निगम को भी मिला नया आयुक्त
डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा (2019 बैच) को CEO जिला पंचायत खंडवा से आयुक्त, नगर पालिक निगम सतना बनाया गया है। उन्हें CEO स्मार्ट सिटी सतना का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
जिला पंचायतों में भी बड़ा बदलाव
तबादला सूची में कई जिलों के CEO जिला पंचायत बदले गए हैं। जगदीश कुमार गोमे को CEO जिला पंचायत सिंगरौली से CEO जिला पंचायत सागर बनाया गया है। नवीन कुमार धुर्वे को CEO जिला पंचायत टीकमगढ़ से CEO जिला पंचायत देवास भेजा गया है। काजल जावला को CEO जिला पंचायत बड़वानी से अपर मिशन संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल की जिम्मेदारी दी गई है। अभिषेक सराफ को CEO जिला पंचायत बालाघाट से अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास बनाया गया है। विवेक के. डी. को CEO जिला पंचायत सागर से CEO, जबलपुर विकास प्राधिकरण बनाया गया है।
2022 बैच के अधिकारियों को भी नई पोस्टिंग
2022 बैच के अधिकारियों में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। ईश्वर्य वर्मा को CEO जिला पंचायत खंडवा बनाया गया है। कार्तिकेय जायसवाल को CEO जिला पंचायत श्योपुर और विशाल धाकड़ को CEO जिला पंचायत टीकमगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। अर्पित गुप्ता को CEO जिला पंचायत बड़वानी और तनुश्री मीणा को CEO जिला पंचायत बालाघाट बनाया गया है। वहीं आशीष को अपर आयुक्त, नगर पालिक निगम इंदौर की जिम्मेदारी मिली है।
कई अधिकारियों को उप सचिव बनाया गया
संजना जैन को अपर कलेक्टर मेहर से उप सचिव, जल संसाधन विभाग भेजा गया है। ज्योति शर्मा को CEO जिला पंचायत देवास से उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन बनाया गया है। अंजली जोसेफ जोनाथन को CEO जिला पंचायत हरदा से उप सचिव, लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। अनिल कुमार डामोर को अपर कलेक्टर विदिशा से उप सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पदस्थ किया गया है।
2024 बैच के अधिकारियों को SDM की जिम्मेदारी
2024 बैच के कई सहायक कलेक्टरों को अब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की जिम्मेदारी दी गई है।
इनमें आशीष कुमार को बीना, अनिकेत शांडिल्य को बैहर, आकाश अग्रवाल को मझौली, पाटिल आशीष अशोक को कुक्षी, सुशील श्रीकृष्ण श्रीराम को देवसर, कुलदीप पटेल को बिछिया, जमादार फरहान इरफान को शाहपुरा, ठाकुर ऋत्विक विजय को बिजावर और नवकीरण कौर को उदयपुरा का SDM बनाया गया है।
श्रद्धा शुक्ला को अपर कलेक्टर खंडवा की जिम्मेदारी
आदेश के अनुसार श्रद्धा शुक्ला (2022 बैच) को अपर कलेक्टर, जिला खंडवा के पद पर पदस्थ किया गया है। आदेश में उनके लिए कनिष्ठ वेतनमान का भी उल्लेख किया गया है। मध्यप्रदेश सरकार के इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन और जिला स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।



</description><guid>transfers:-major-administrative-reshuffle-in-madhya-pradesh</guid><pubDate>21-Aug-2026 6:10:33 pm</pubDate></item><item><title>भारत के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाएगी स्टारलिंक सेवा: एलन मस्क</title><link>https://just36news.com/starlink-service-will-boost-internet-access-in-indias-rural-and-remote-areas:-elon-musk</link><description>दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने शुक्रवार को कहा कि स्टारलिंक की उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा भारत में सबसे कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि कंपनी भारत में अपनी व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की मंजूरी का इंतजार कर रही है।
मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, स्टारलिंक भारत के सबसे कम सेवाएं प्राप्त क्षेत्रों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की मदद करेगा। मस्क की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच इंटरनेट पहुंच का अंतर अभी भी बना हुआ है। एक्स पर साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक देश के 11,256 सूचीबद्ध गांवों में अभी भी चौथी पीढ़ी की मोबाइल सेवा (4जी) उपलब्ध नहीं थी। यह दर्शाता है कि देश के कई दूरस्थ क्षेत्रों तक पारंपरिक दूरसंचार ढांचा अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक भारत में कुल 109.3 करोड़ इंटरनेट सब्सक्रिप्शन्स थीं, जिनमें से 44.08 करोड़ सब्सक्रिप्शन्स ग्रामीण क्षेत्रों से थीं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन घनत्व केवल प्रति 100 लोगों पर 48.31 था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 126.80 प्रति 100 लोगों तक पहुंच चुका था। इससे स्पष्ट होता है कि डिजिटल पहुंच के मामले में ग्रामीण और शहरी भारत के बीच अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है।
इसी संदर्भ में पोस्ट में कहा गया कि भारत सरकार की भारतनेट परियोजना के तहत 8.5 लाख किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाया जा चुका है और लगभग 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को सेवाओं के लिए तैयार किया गया है। इसके बावजूद जून 2026 तक केवल 80,472 ग्राम पंचायत उपस्थिति केंद्र ही पूरी तरह परिचालन में थे।
पोस्ट में आगे कहा गया है कि उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाएं उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं जहां पारंपरिक मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना कठिन और महंगा है। इनमें दूरस्थ गांव, पर्वतीय क्षेत्र, द्वीपीय इलाके और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्र शामिल हैं। पोस्ट में यह भी कहा गया कि भारत में स्टारलिंक की सेवाएं शुरू होने से पहले नियामकीय मंजूरियां, स्पेक्ट्रम आवंटन और अन्य आवश्यक स्वीकृतियां पूरी की जानी चाहिए। कंपनी लंबे समय से भारतीय बाजार में प्रवेश की तैयारी कर रही है। स्टारलिंक, स्पेसएक्स की उपग्रह इंटरनेट सेवा है, जो निम्न-पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में स्थापित हजारों उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट उपलब्ध कराती है, जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों तक उच्च-गति इंटरनेट पहुंचाना है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाएं सीमित या अनुपलब्ध हैं।
इससे पहले अगस्त में एक सरकारी अधिकारी ने कहा था कि एलन मस्क की कंपनी एक्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नए नियम का पालन करना होगा, जिसके तहत किसी भी सार्वजनिक सरकार द्वारा सामग्री हटाने के अनुरोध को अस्वीकार किया जा सकता है। इसके अलावा, एलन मस्क ने दावा किया है कि एक्स में शामिल एक नए एल्गोरिदम का खुलासा करने के बाद सरकारों द्वारा आवश्यक कोई भी सेंसरशिप अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।</description><guid>starlink-service-will-boost-internet-access-in-indias-rural-and-remote-areas:-elon-musk</guid><pubDate>21-Aug-2026 5:56:10 pm</pubDate></item><item><title>सीमाएं सुरक्षित हुए बिना भारत सुरक्षित नहीं रह सकता: गृह मंत्री अमित शाह</title><link>https://just36news.com/india-cannot-remain-secure-unless-its-borders-are-secure:-home-minister-amit-shah</link><description>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि जब तक सीमाएं सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक न तो पश्चिम बंगाल और न ही भारत सुरक्षित रह सकता है।
उन्होंने कहा कि उनके कई बार अनुरोध करने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध नहीं कराई।
अमित शाह ने कहा कि राज्य के किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) या सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कार्यक्रमों में कभी हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने इस परंपरा को तोड़ने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को बधाई दी।
केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने सिलीगुड़ी स्थित एसएसबी फ्रंटियर मुख्यालय में विभिन्न परियोजनाओं के भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में कहा, मैंने बीएसएफ द्वारा सीमा पर बाड़ लगाए जाने के लिए जमीन देने की कई बार गुहार लगाई लेकिन (पूर्व मुख्यमंत्री) ममता बनर्जी ने इसे अनसुना कर दिया। मैं सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए 1,129 एकड़ जमीन की मांग 2014 से कर रहा था। राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद ही हमें यह जमीन मिली।
उन्होंने कहा कि एसएसबी कोई राजनीतिक संगठन नहीं है और सीमावर्ती बलों के समारोहों से पूर्व मुख्यमंत्रियों की दूरी ने गलत संदेश दिया। गृह मंत्री ने कहा कि वह आजादी के बाद देश में बनीं पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को उचित सम्मान नहीं दिए जाने से दुखी थे।
उन्होंने कहा, इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाया गया लेकिन इससे पहले भारत में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण कभी नहीं गाया गया था। मुझे इस बात की तसल्ली है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा इसकी रचना के 150वें वर्ष में देश ने इस गीत को आखिरकार उचित मान्यता दी है।</description><guid>india-cannot-remain-secure-unless-its-borders-are-secure:-home-minister-amit-shah</guid><pubDate>21-Aug-2026 5:53:17 pm</pubDate></item></channel></rss>