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सर्दी में गाजर खाने से होते हैं चौकाने वाले फायदे

सर्दी में गाजर खाने से होते हैं चौकाने वाले फायदे

गाजर खाना बहुत कम लोगों को पसंद होता है लेकिन ठंड के दिनों में गाजर बहुत बेहतरीन होती है। ऐसे में इसे खाने से कई चौकाने वाले फायदे होते हैं और आज हम आपको उन्ही फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं गाजर के फायदे।
गाजर के फायदे-
माइग्रेन के दर्द से राहत-
माइग्रेन से राहत दिलाने में गाजर लाभकारी है। इसके लिए इसके पत्तों को घी से चुपड़कर गर्म करके उनका रस निकालकर 2-3 बूंद नाक और कान में डालने से दर्द से राहत मिलती है।
आँखों के लिए-
गाजर आँखों को स्वस्थ रखने में मदद करती है। जी हाँ, इसके लिए आप 250 ग्राम सौंफ को साफ करके कांच के पात्र में रखें, उसके बाद इसमें बादामी रंग की गाजरों के रस दें। वहीं सूख जाने के बाद 5 ग्राम रोज रात में दूध के साथ सेवन करने से आँखों की रोशनी बढ़ती है।
मुंह के रोगों में फायदेमंद –
गाजर का औषधीय गुण मुँह के रोगों में फायदेमंद होता है। ऐसे में गाजर के ताजे पत्तों को चबाने से मुँह का अल्सर, मुख में दुर्गंध, दांत के जड़ से ब्लीडिंग होने तथा पूयस्राव (पस डिस्चार्ज) में लाभ मिलता है।
खांसी –
खांसी से परेशान है तो गाजर से इसका इलाज किया जा सकता है। इसके लिए गाजर के 40-60 मिली रस में चीनी तथा काली मिर्च के चूर्ण को डालकर सेवन करने से कफ निकलने लगता है जिससे कफ संबंधी समस्या से राहत मिलती है।
एनीमिया –
खून में लौह की कमी होने के कारण लाल रक्तकण नहीं बन पाते हैं, जो एनीमिया होने का कारण होता है। ऐसे में गाजर को कद्दूकस कर दूध में उबालकर खीर की तरह खाने से हृदय को ताकत मिलती है, खून की कमी मिटती है।
 

टीकाकरण अभियान ने पूरे किए एक साल, जानें कैसा रहा 1 से 157 करोड़ खुराक तक का सफर…

टीकाकरण अभियान ने पूरे किए एक साल, जानें कैसा रहा 1 से 157 करोड़ खुराक तक का सफर…

नई दिल्ली, आज देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। दरअसल, कोरोना महामारी को हराने के लिए चलाए गए टीकाकरण अभियान के आज एक साल पूरे हो गए। आज के ही दिन 16 जनवरी 2021 को देश में स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाए जाने की शुरुआत हुई थी। इसके बाद से कोरोना टीके दिए जाने का सिलसिला लगातार जारी है। अबतक देश में वैक्सीन की 157 करोड़ खुराक लगाई जा चुकी हैं। हालांकि अभी भी पूरी आबादी को टीका लगाने में बहुत समय लगेगा।
थोड़ी चिंता करने वाली बात यह है कि देश में 8 फीसदी आबादी ऐसी है, जिसे अब तक एक भी टीका नहीं लगा। वहीं, 31 फीसदी आबादी ऐसी है, जिन्हों अब तक दोनों टीके नहीं लगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मौके पर खुशी जताते हुए एक ट्वीट किया उन्होंने लिखा कि भारत में अब तक 156 करोड़ से अधिक वैक्सीन की खुराकें लगा दी गई हैं। जिनमें से 99 करोड़ खुराक ग्रामीण भारत में दी गई हैं। हमारी 70 फीसदी वयस्क आबादी पूरी तरह से टीकाकृत है। कार्यक्रम शुरू होने के बाद से तीन करोड़ से अधिक किशोर-किशोरियों को उनकी पहली खुराक मिल चुकी है। भारत ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया है।
बीते एक साल में टीकाकरण का पड़ाव
16 जनवरी 2021 को टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई थी। देश में अब तक 18+ की 87 करोड़ आबादी को पहली डोज लग चुकी है। यानी करीब 92 फीसदी आबादी को पहली डोज लग चुकी है। वहीं करीब 65 करोड़ की आबादी को दोनों डोज लग चुकी हैं, यानी करीब 70 फीसदी लोगों को दोनों डोज लग गई है। देश में अब तक 15 से 18 साल की उम्र के करीब सवा तीन करोड़ बच्चों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। यानी करीब 41 फीसदी। इन बच्चों को अभी दूसरी डोज लगाई जानी बाकी है।
10 जनवरी से बूस्टर डोज (एहतियाती खुराक) की शुरुआत
बीते सोमवार से ही बूस्टर डोज(एहतियाती खुराक) लगनी शुरू हुई है। करीब तीन लाख लोगों को बूस्टर डोज लगाई जानी है, जिसमें से 38 लाख बूस्टर डोज लगाई जा चुकी है। यानी करीब 13 फीसदी लोगों को बूस्टर डोज लगाई जा चुकी हैं।
भारत के लिए अब भी चुनौती
जनसंख्या अधिक होने की वजह से देश में अभी भी 33 फीसदी आबादी को टीका नहीं लग सका है। देश की कुल आबादी 138 करोड़ है जिसमें 90 करोड़ को ही पहली डोज लगी है यानी अभी भी 48 करोड़ लोगों को टीका लगाया जाना बाकी है।
टीकाकरण की रफ्तार
0 से 50 करोड़ डोज- 203 दिन
50 से 100 करोड़ डोज- 75 दिन
100 से 150 करोड़ डोज– 82 दिन

 

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल और डीजल के दाम 74वें दिन भी स्थिर

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल और डीजल के दाम 74वें दिन भी स्थिर

नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों के 75 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बावजूद घरेलू स्तर पर सोमवार को लगातार 74 वें दिन भी पेट्रोल और डीजल की दरों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।

केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में क्रमश: पांच और 10 रुपये घटाने की घोषणा के बाद 04 नवंबर 2021 को ईंधन की कीमतों में तेजी से कमी आई थी। इसके बाद राज्य सरकार के मूल्य वर्धित कर (वैट) कम करने के फैसले के बाद दिल्ली में भी वैट को कम करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद राजधानी में 02 दिसंबर 2021 को पेट्रोल लगभग आठ रुपये सस्ता हुआ था। डीजल की भी कीमतें हालांकि जस की तस बनी रहीं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिंगापुर में आज सुबह लंदन ब्रेंट क्रूड 0.08 प्रतिशत की तेजी के साथ 86.13 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड 0.31 प्रतिशत 84.08 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।पेट्रोल-डीजल के मूल्यों की रोजाना समीक्षा होती है और उसके आधार पर हर दिन सुबह छह बजे से नयी कीमतें लागू की जाती हैं।

देश के चार बड़े महानगरों में आज पेट्रोल और डीजल के दाम इस प्रकार रहे:
महानगर............पेट्रोल.............डीजल ........................(रुपए प्रति लीटर)
दिल्ली................95.41........ 86.67
कोलकाता ........104.67..........89.79
मुंबई ...............109.98.........94.14
चेन्नई...............101.40.........91.43 

फिर लौटी सोने चाँदी की चमक, देखें आज सोने और चाँदी के भाव में कितने रुपयों की हुई बढ़ोतरी

फिर लौटी सोने चाँदी की चमक, देखें आज सोने और चाँदी के भाव में कितने रुपयों की हुई बढ़ोतरी

नई दिल्ली | मकर संक्रांति के बाद शादियों का सीजन शुरू हो जाता है। ऐसे में सोने-चांदी की मांग में तेजी देखने को मिलती है। अगर आपके घर भी आने वाले समय में शादी-ब्याह है और आप सोना खरीदने की योजना कर रहे हैं तो आपके लिए यह खबर काम की हो सकती है। भारतीय सर्राफा बाजार में सोने-चांदी के भाव में बीते एक सप्ताह में तेजी आई है। बीते एक सप्ताह में राष्ट्रीय स्तर पर 999 शुद्धता वाला 24 कैरेट सोना 552 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ है।  जबकि 999 शुद्धता वाली चांदी के भाव में 1,868 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में सोना 48135 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है तो वहीं चांदी 61,859 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले कारोबारी सत्र के अंतिम दिन यानी 7 जनवरी 2022 को सोना 47,583 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो बीते कारोबारी दिन यानी 14 जनवरी को 48,017 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इसी तरह शुद्धता के आधार पर सोना-चांदी दोनों ही महंगे हुए हैं।  

 

 
क्यों होते हैं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स? ये कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

क्यों होते हैं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स? ये कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

ऐसा क्यों होता है कि भरोसे की नींव पर टिका रिश्ता हिलने लगता है और दो लोगों के बीच किसी तीसरे की एंट्री हो जाती है. रूटीन जहां हमें एक तरफ व्यवस्थित रखता है वहीं कई बार बोर भी कर देता है. सालों तक साथ रहने के बाद भी लोग अपने लाइफ पार्टनर के प्रति लापरवाह हो जाते हैं. आइए जानते हैं कि एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स शुरू होने की पीछे आखिर क्या वजह होती हैं.
अटेंशन के लिए-
ज्यादातर महिलाएं अपने अकेलेपन को कम करना चाहती हैं. वो चाहती हैं कि कोई उन्हें ध्यान से सुने. विवाहित जीवन में अकसर पति या बच्चे महिला को समझ नहीं पाते और यही उनके लिए परेशानी बन जाती है. वो चाहती हैं कि कोई उन्हें या उनके काम को ऐप्रिशिएट करे. शादी के कुछ सालों बाद कपल्स एक दूसरे की तारीफ करना कम कर देते हैं जिसकी तलाश वो किसी बाहरी से करने लगती हैं. सेल्फ एस्टीम बढ़ाने के लिए भी उन्हें दूसरे पुरुषों के ध्यान की जरूरत महसूस होती है. वो कॉन्फिडेंस बढ़ा हुआ महसूस करने लगती हैं.
भावनात्मक सहारे की चाह में-
शादी के कुछ सालों बाद पति-पत्नी एक दूसरे की भावनात्मक जरूरतें पूरी करने से बचते हैं. उन्हें डर हो सकता है कि दूसरा कहीं उन्हें अपना गुलाम न बना ले. वो सच सुनना पसंद नहीं करते. कई बार अपनी भावनाएं भी एक-दूसरे से छिपा लेते हैं. ऐसे में लोग किसी दूसरी महिला या पुरुष में भावनात्मक सहारे ढूंढने लगते हैं.
शादीशुदा जिंदगी अच्छी न हो-
शादी में जब पार्टनर के साथ अंडरस्टैंडिंग नहीं होती है तो रिश्ता बिगड़ने लगता है. यहीं से दिक्कतें बढ़ जाती हैं और मन किसी दूसरे की तरफ आकर्षित होने लगता है. इंसान हमेशा किसी ऐसे साथ की तलाश में रहता है जो उसे उसकी कमियों और खूबियों के साथ स्वीकार सके. जब अपने पार्टनर के साथ वो चीजें नहीं मिलती हैं तो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स की शुरुआत हो जाती है.
ज्यादा दिनों तक नहीं चलते एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर-
रिसर्च बताते हैं कि शुरुआत में भले ही ऐसे अफेयर अच्छे लगते हों लेकिन इनमें से ज्यादातर लंबे समय तक नहीं चल पाते हैं. आमतौर पर लोगों को जल्द ही अपनी गलती का एहसास हो जाता है और वो वापस से अपने पार्टनर के पास लौट आते हैं. एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का पता लगने के बाद भी ज्यादातर मामलों में लोग अपने पार्टनर को माफ कर देते हैं और पार्टनर भी उनसे कमिटमेंट का वादा करता है. हालांकि शादीशुदा जिंदगी ठीक न हो तो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का पता लगने पर शादी टूट भी जाती है.
 

मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा की जानें सही विधि

मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा की जानें सही विधि

पंचांग के अनुसार 14 जनवरी 2022, शुक्रवार को मकर संक्रांति है. इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेगे. मकर संक्रांति के दिन से ही मौसम में बदलाव आरंभ हो जाता है. माना जाता है कि मकर संक्रांति से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती है. सर्दी कम होने लगती है.
शास्त्रों में सूर्य देव को संसार का मित्र बताया गया है. पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान महादेव के तीन नेत्रों में से एक नेत्र को सूर्य की उपमा दी गई है. इस संसार में सूर्य देव ही है जो प्रत्यक्ष हमें दिखाई देते हैं.
सनातन धर्म में पंचदेव उपासना है, सर्वोपरि भगवान गणेश उपासना, शिव उपासना, विष्णु उपासना, देवी दुर्गा उपासना और सूर्य उपासना. किसी भी देव की उपासना से पूर्व सूर्य उपासना को अति आवश्यक है. मान्यता है कि बिना सूर्य की आराधना करें बिना किसी भी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है. सूर्य भगवान की पूजा और अर्घ्य नित्य देना चाहिए. भगवान सूर्य अर्घ्य प्रिय हैं. सूर्य की पूजा प्रतिदिन करने पर बल दिया गया है. सूतक काल के समय में भी सूर्य को मानसिक रूप से भी जल देना की बात शास्त्रों में कही गई है. सूर्य पूजा के लिए मकर संक्रांति का दिन सबसे अच्छा माना गया है. इस दिन सूर्य उपासना भी आरंभ कर सकते हैं.
सूर्य पूजन कहां और कैसे करना चाहिए
सूर्यनारायण को अर्घ्य जलाशय, नदी इत्यादि के आस-पास देना चाहिए. यदि जलाशय या नदी तक रोज नहीं पहुंच सकते तो साफ-सुथरी भूमि में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए. घर की छत या बालकनी जहां से सूर्य दिखाई दें, वहां खड़े होकर सूर्य पूजन कर सकते हैं.
सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि
शास्त्रों के अनुसार सूर्य भगवान को अर्घ्य देते समय दोनों हाथों की अंजलि के माध्यम से देना चाहिए लेकिन अर्घ्य देते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि हाथ की तर्जनी उंगली और अंगूठा एक-दूसरे से न छुए. ऐसा होने की स्थिति में पूजा का कोई फल नहीं मिलता है क्योंकि इस मुद्रा को राक्षसी मुद्रा कहा गया है.
सूर्य को कितनी बार अर्घ्य देना चाहिए
तांबे या कांसे का लोटा प्रयोग अर्घ्य देने का प्रावधान है. गंगाजल, लाल चंदन, पुष्प इत्यादि जल में डालना चाहिए. इससे जल की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है. सूर्य को तीन बार अर्घ्य देना चाहिए और प्रत्येक बार अर्घ्य देते समय प्रत्येक बार परिक्रमा करनी चाहिए. ऐसा करने से ईश्वर की हमेशा आप पर कृपा बनी रहती है और उनके आशीर्वाद से सभी कार्य पूरे होते हैं.
सूर्य को अर्घ्य देने का मंत्र-
ऊँ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।
ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ नमो भास्कराय नम:। अर्घ्य समर्पयामि।।
इन बातों का ध्यान रखें
1. प्रातःकाल सूर्य भगवान को अर्घ्य देते समय दांयी एड़ी को उठाकर और उगते सूर्य को जल की धारा के बीच से देखते हुए अर्घ्य देना अति शुभकारी होता है.
2. पूर्व की ओर मुख करके ही अर्घ्य देना चाहिए, चाहे किसी कारणवश आपको वह प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देते फिर भी मानसिक रूप से प्रत्यक्ष मानकर अर्घ्य देना चाहिए.
3. अर्घ्य देने के बाद जल को अपनी आंखों में जरूर लगाना चाहिए. कुछ लोग तुलसी के गमले के ऊपर जल छोड़ते हैं. लेकिन ऐसा करना अत्यधिक नुकसान देने वाला होता है.
4. अर्घ्य देते समय जल के छींटे शरीर और पैर में न पड़े, इसका ध्यान रखना चाहिए.
5. उगते हुए सूर्य को जल देना ही फलदायी होता है अर्थात सूर्य उदय होने के 2 घंटे तक ही जल देना चाहिए.
6. अर्घ्य देने बाद नमस्कार सीधे खड़े होकर सिर झुकाकर नमस्कार करना चाहिए.
7. अर्घ्य देते समय गायत्री मंत्र का जाप करना अत्यधिक फलदायी होता है. कम से कम सूर्य पूजन में 3 परिक्रमा या फिर 7 परिक्रमा करनी चाहिए.
8. किसी भी कपड़े से अंग को पोछकर और उसी कपड़े को पहनकर देव पूजन नहीं करना चाहिए.