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कोरोना वायरस के नए लक्षण आया सामने, बेंगलुरु के डॉक्टरों ने जताई आशंका, जाने क्या है वो लक्षण

कोरोना वायरस के नए लक्षण आया सामने, बेंगलुरु के डॉक्टरों ने जताई आशंका, जाने क्या है वो लक्षण

बेंगलुरु, बेंगलुरु में डॉक्टरों ने कोरोना वायरस के मरीजों में एक खास तरह का लक्षण देखा है, जिसे वे कोविड जुबान कह रहे हैं. ऐसे मामलों में मरीजों में कोरोना के कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं सिवाय मुंह में सूखापन के. कोविड टास्क फोर्स के एक सदस्य डॉ. जी.बी. सत्तूर ने कहा कि हाइपरटेंशन से गुजर रहे 55 साल के एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया था और वह बुरी तरह से मुंह के सूखेपन से पीड़ित था. बाद में उसकी कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी.
बैंगलोर मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. सत्तूर ने कहा, 'जब मैंने उनका ब्लड शुगर चेक किया, तो वह सामान्य था, लेकिन ईएसआर सामान्य से अधिक निकला. मैंने सुना था कि कंजंक्टिवाइटिस कोरोना का एक लक्षण हो सकता है. हालांकि, मरीज को बुखार नहीं था. उन्होंने कहा था कि वे बहुत थके हुए हैं. इसलिए मुझे संदिग्ध तौर पर लगा कि यह कोविड-19 का एक लक्षण हो सकता है. फिर मैंने उनसे अपना आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने को कहा, जो कि पॉजिटिव निकला. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और अब वे स्वस्थ हैं.'
इस बीच डॉक्टर कोरोना वायरस के नए लक्षण के पीछे की वजहों को जानने की कोशिश में जुटे हैं. डॉ. सत्तूर ने संभावना जताई कि कोरोना के यूके, ब्राजील या भारत में मिले पहले डबल म्यूटेंट की तरह ही किसी नए वैरिएंट के कारण ऐसा हो सकता है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जुबान में कोरोना की शुरुआत मुख्यतः चिड़चिड़ाहट, खुजली और मुंह के सूखेपन के साथ होती है. इसके बाद मरीज को बिना बुखार के ही कमजोरी महसूस होने लगती है.
डॉ. सत्तूर ने कहा, 'डॉक्टरों को चाहिए कि वे जुबान या जीभ में मिल रही शिकायतों पर नजर रखें और उन्हें नजरअंदाज बिल्कुल ना करें. कोरोना के वैरिएंट को बेहतर तरीके से समझने के लिए सरकार को भी चाहिए कि वे जीनोम सीक्वेंसिंग पर और ध्यान केंद्रित करें.'
 

भारत सरकार द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अब तक इतने  करोड़ से अधिक टीके नि:शुल्क दिए

भारत सरकार द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अब तक इतने करोड़ से अधिक टीके नि:शुल्क दिए

टीकाकरण, कोविड महामारी के नियंत्रण और प्रबंधन में भारत सरकार की व्यापक रणनीति (जिसमें जांच करना, पता लगाना, उपचार व कोविड उपयुक्त व्यवहार शामिल हैं) का एक अभिन्न अंग है। भारत सरकार कोविड टीकों के उत्पादन और आपूर्ति को बढ़ाने के कई प्रयासों के अलावा, राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को मुफ्त में कोविड टीके प्रदान करके राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान को अधिक तेज़ी प्रदान कर रही है।

कोविड-19 टीकाकरण के उदारीकृत और त्वरित तीसरे चरण की रणनीति का कार्यान्वयन पहली मई 2021 को शुरू हो गया था। इस रणनीति के तहत, केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) द्वारा स्वीकृत किसी भी टीका निर्माता द्वारा उत्पादित कुल टीके की 50 प्रतिशत खुराक की खरीद हर महीने भारत सरकार द्वारा की जाएगी। केंद्र सरकार इन टीकों को राज्य सरकारों को पूरी तरह से मुफ्त में उपलब्ध कराना जारी रखेगी, जिस तरह से पूर्व में इसको वितरित किया जा रहा था।

भारत सरकार ने अब तक राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को 20 करोड़ से अधिक वैक्सीन खुराक (20,28,09,250) निःशुल्क प्रदान की हैं। इसमें से, 14 मई 2021 तक औसत गणना के आधार पर अब तक (कल शाम 7 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार) हुई कुल खपत 18,43,67,772 खुराक है, इसमें अपव्यय को भी शामिल किया गया है।

1.84 करोड़ से ज़्यादा कोविड वैक्सीन खुराक (1,84,41,478) अभी भी टीकाकरण के लिए राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के पास मौजूद हैं। टीकों का नेगेटिव बैलेंस दिखाने वाले राज्य आपूर्ति किए गए टीके की तुलना में अधिक खपत (अपव्यय सहित) दिखा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने वैक्सीन खुराक की उस संख्या को शामिल नहीं किया है, जिसकी उन्होंने सशस्त्र बलों को आपूर्ति की है।

इसके अलावा लगभग 51 लाख (50,95,640) अतिरिक्त टीके पाइपलाइन में हैं और ये अगले 3 दिनों में राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को उपलब्ध कराये जाएंगे। 

पिछले 45 दिनों में कोरोना वायरस के कारण देश के घरेलू व्यापार को 12 लाख करोड़ का घाटा ,कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री से वित्तीय पैकेज की मांग की

पिछले 45 दिनों में कोरोना वायरस के कारण देश के घरेलू व्यापार को 12 लाख करोड़ का घाटा ,कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री से वित्तीय पैकेज की मांग की

रायपुर, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोशी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं मीडिया प्रभारी संजय चौबे ने बताया कि ष्कोरोना वायरस के प्रकोप से पिछले 45 दिनों में भारत के घरेलू व्यापार को 12 लाख करोड़ रुपये का व्यापार घाटा हुआ है, जो एक बड़ा नुकसान है और निश्चित रूप से ऐसे समय में जब लॉक डाउन वापिस लिए जाएगा तब व्यापारियों को अपने व्यापार को दोबारा खड़ा करना बेहद मुश्किल होगा। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज यह आंकड़े जारी करते हुए कहा की देश का व्यापार बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कोरोना की दूसरी लहर ने व्यापारियों की कमर ही तोड़ दी है।

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमर पारवानी ने कहा की हमने पिछले 45 दिनों की अवधि में सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए देश के आंतरिक व्यापार के नुकसान का अनुमान लगाया जो लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का है जो कि काफी बड़ा नुकसान है। प्रति वर्ष देश भर में में लगभग 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होता है । देश में लगभग 8 करोड़ छोटे बड़े व्यापारी हैं जो देश के घरेलू व्यापार को चलाते हैं। उन्होनें कहा कि कारोबार के लगभग रु. 12 लाख करोड़ के व्यापारिक नुकसान में खुदरा व्यापार में लगभग 7.50 लाख करोड़ रुपये और थोक व्यापार में लगभग 4.50 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
कैट सी.जी.चैप्टर के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष श्री विक्रम सिंहदेव ने कहा कि बाजार शुरुआती दिनों में खुले थे और बाद में कुछ घंटों के लिए आंशिक रूप से खुले थे, वहां ग्राहकों की बहुत कम भीड़ थी क्योंकि लोग डर की चपेट में हैं और आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी को छोड़कर बाजारों में जाने से बच रहे है। उन्होंने कहा कि इससे ई-कॉमर्स में कारोबार में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, यह देखा गया है कि कोविड दिशा-निर्देशों में प्रतिबंधों के बावजूद विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियां गैर-जरूरी वस्तुओं की बिक्री और वितरण में लगी हुई हैं और किसी ने भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है, जिसका कड़ा विरोध कैट एवं देश के व्यापारियों ने किया है। ऐसा लगता है कि इन कंपनियों ने कानून और निति का उंल्घन करने का ठान लिया है। और उन्हें कानून का कोई डर नही है।

श्री पारवानी ने केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से आग्रह किया कि लॉकडाउन हटने पर व्यापारियों को उनकी व्यावसायिक गतिविधियों को बहाल करने के लिए एक वित्तीय पैकेज दिया जाए।
श्री पारवानी और श्री सिंहदेव ने याद किया कि पिछले साल लॉक डाउन के दौरान व्यापारियों को केन्द्र सरकार द्वारा घोषित विभिन्न पैकेजों में कोई जगह नहीं मिली थी, हालांकि अर्थव्यवस्था के अन्य सभी क्षेत्रों के हितों का विधिवत ध्यान रखा गया था। उन्होंने कहा कि पहले उपाय के रूप में केन्द्र सरकार को जीएसटी, आयकर और टीडीएस के तहत सभी पालनाओं की वैधानिक तिथियों को कम से कम 31 अगस्त, 2021 तक के लिए स्थगित कर देना चाहिए। इसके अलावा बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को व्यापारियों को आसान तरीके से और रियायती ब्याज दर पर ऋण देने का निर्देश दिया जाए । डिजिटल भुगतान करने पर बैंक शुल्क माफ किया जाना चाहिए और सरकार बैंक शुल्क सीधे बैंकों को सब्सिडी दे सकती है।
 

754 करोड़ रुपये में बिकी पाब्लो पिकासो की पेंटिंग “Woman Sitting Near a Window”

754 करोड़ रुपये में बिकी पाब्लो पिकासो की पेंटिंग “Woman Sitting Near a Window”

हाल ही में पाब्लो पिकासो (Pablo Picasso) की पेंटिंग “Woman Sitting Near a Window (Marie-Therese)” में 103.4 मिलियन डालर (लगभग 754 करोड़ रुपये) में बिकी। इस पेंटिंग को न्यूयॉर्क में बेचा गया। यह पेंटिंग 1932 में बनकर पूरी हुई थी। नीलामी के 19वें मिनट में ही इस पेंटिंग के लिए 90 मिलियन डालर की बोली लगाई गई, जो फीस और कमीशन जोड़े जाने पर बढ़कर 103.4 मिलियन अमरीकी डालर हो गई। इससे पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि यह पेंटिंग 55 मिलियन अमरीकी डालर में बिकेगी।

पाब्लो पिकासो (Pablo Picasso)
पाब्लो पिकासो (Pablo Picasso) एक महान स्पेनिश चित्रकार, शिल्पकार व थिएटर डिज़ाइनर थे। उनका जन्म स्पेन के मलागा में 25 अक्टूबर, 1881 को हुआ था। उनके प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं : La Vie (1903), Family of Saltimbanques (1905), Les Demoiselles d’Avignon (1907), Portrait of Daniel-Henry Kahnweiler (1910), Girl before a Mirror (1932), Le Rêve (1932), Guernica (1937), The Weeping Woman (1937), Massacre in Korea (1951)। उनका निधन 8 अप्रैल, 1973 को हुआ था। 

OMG: इस बुजुर्ग की है 16 पत्नियां-151 बच्चे, 17वीं शादी की तैयारी, बोला- बीवियों को खुश करना ही मेरा काम

OMG: इस बुजुर्ग की है 16 पत्नियां-151 बच्चे, 17वीं शादी की तैयारी, बोला- बीवियों को खुश करना ही मेरा काम

16 Wives 151 Children: लोग अक्सर मजाक में कहते हैं कि एक बीवी को संभालना मुश्किल है. सोचिए अगर किसी की 16 बीवियां और 151 बच्चे हों तो उस शख्स के बारे में आप क्या कहेंगे…सोच लिया हो तो अब ऐसे शख्स के बारे में जान भी लीजिए. आजकल ये जनाब ट्रेंड कर रहे हैं.
खबर जिम्बॉब्वे से है. यहां एक शख्स ने 16 शादियां कीं, और पूरी जिंदगी वो बच्चे पैदा करता रहा है. अब तक वो 151 बच्चे पैदा कर चुका है.
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ इतने भर से ये संतुष्ट नहीं है. अब ये 17वीं शादी की तैयारी कर रहा है. इतना सब करने के बाद ये जनाब कहते हैं कि इनकी लाइफ का एक ही लक्ष्य है, और वो है बीवियों को खुश रखना.
आपको बता दे इसकी उम्र है 66 साल. तमन्ना है कि मरने से पहले ये 100 शादियां और 1000 बच्चे पैदा करने की है
 

दूल्हे के खड़े होने की स्टाइल देखकर दुल्हन ने स्टेज पर ही पूछ लिया दो का पहाड़ा और फिर...

दूल्हे के खड़े होने की स्टाइल देखकर दुल्हन ने स्टेज पर ही पूछ लिया दो का पहाड़ा और फिर...

अक्सर जयमाल के दौरान शादियों में हंगामा और फिर बात बढ़ जाने को लेकर शादी टूटने की खबरें कई बार सुनी होंगी, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि दुल्हन ने शादी करने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया हो कि दूल्हा उसके सवालों का जवाब नहीं दे सका। दरअसल शिक्षित दुल्हन ने दूल्हे से दो का पहाड़ा पूछ लिया, लेकिन दूल्हा दो का पहाड़ा नहीं सुना सका। इसके बाद इससे आहत दुल्हन ने शादी से इंकार कर दिया। घंटों आरजू मिन्नतों का दौर चलता रहा मगर बात नहीं बनी। मामला थाने तक पहुंच गया। अंततः बारात बिना दुल्हन के बैरंग वापस हो गई।
मामला महोबा जिले के खरेला थाने के बल्लायं गांव का है। यहां के रहने वाले रतीराम अहिरवार ने अपनी बेटी माया का विवाह महोबकंठ थाने के धवार गांव निवासी रंजीत अहिरवार के बेटे रामकिशुन के साथ तय किया था। 30 अप्रैल को शादी की तिथि तय हुई और दुल्हा बारात लेकर पहुंच गया। जयमाला की तैयारियां चल रही थीं। दुल्हन स्टेज पर पहुंची, उसे दूल्हे के खड़े होने की स्टाइल ठीक नहीं लगी। दुल्हन को दूल्हे के अशिक्षित होने का अंदेशा हुआ तो स्टेज पर ही दूल्हे से दो का पहाड़ा सुनाने को कहा। दूल्हन के सवाल के बाद दूल्हा बगलें झांकने लगा और उसकी पोल खुल गई। फिर क्या था दुल्हन ने अशिक्षित दूल्हे के साथ सात फेरे लेने से इनकार कर दिया।
दुल्हन के फैसला से वहां हड़कंप मच गया और दोनों पक्ष के लोगों ने बात बनाने का प्रयास किया मगर दुल्हन अपनी जिद पर अड़ी रही। बाद में मामला पुलिस के पास पहुंचा। पुलिस ने दोनों पक्षों में सुलह कराई और दुल्हन पक्ष को शादी में खर्च किए गए चार लाख रुपया वापस दिलाए। दुल्हन के निर्णय की लोगों ने सराहना की, लेकिन कहा यह पहले पता करना चाहिए था। थाना प्रभारी विनोद कुमार यादव का कहना है कि वर और वधु पक्ष के बीच विवाद होने पर शादी नहीं हो सकी है। बाद में दोनों पक्षों में सुलह हो गई।