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आइब्रो में हो गए हैं दाने तो अपनाए ये घरेलू नुस्खे

आइब्रो में हो गए हैं दाने तो अपनाए ये घरेलू नुस्खे

भौहों में बालों के बीच होने वाले दानों से कई लोग परेशान रहते हैं। जी हाँ, दुनिया में कई लोग हैं जो भौहों में बालों के बीच होने वाले दानों को लेकर परेशान रहते हैं और कुछ कर नहीं पाते। कई बार ये दाने दर्द करते हैं और इनसे निजात पाना आसान नहीं होता। हालाँकि अगर आप भी अक्सर इस समस्या को झेलते हैं, तो इससे छुटकारा पाने के लिए आप इन घरेलू नुस्खों को आजमा सकते हैं जिनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।
हल्दी का लेप: अगर आप चाहे तो, आइब्रो में होने वाले दानों से राहत के लिए हल्दी का लेप लगा सकते हैं। जी दरअसलहल्दी के एंटीसेप्टिक गुण दानों को कुछ ही समय में कम कर देंगे और इनसे होने वाले दर्द से भी आपको राहत मिल सकती है।

बर्फ की सिकाई: अगर आपको आंखों के आसपास और आइब्रो में पिंपल या दाने के होने पर इसका तुरंत इलाज करना है तो ऐसी स्थिति में आपको आइब्रो पर बर्फ की सिकाई करनी है। इसके लिए एक कॉटन के कपड़े में बर्फ लें और इसे दाने पर कुछ मिनटों के लिए लगाए रखें।

खीरे का रस: आप खीरे के रस से आइब्रो में हुए दानों का इलाज कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें गुलाब जल मिलाकर आइब्रो पर लगाएं। इससे दाने तो कम होंगे ही, साथ ही ठंडक भी मिलेगा।

दालचीनी पाउडर: मसाले के रूप में किचन में इस्तेमाल होने वाली दालचीनी को दानों के इलाज में भी बेस्ट माना जाता है। आप दालचीनी पाउडर में शहद मिलाकर इसे भौह में दाने पर लगाएं और रात भर के लिए छोड़ दें और कुछ समय में आप फर्क पाएंगे।

 

सिर के मुंहासों से राहत दिलाने में मदद करेंगे ये पांच घरेलू नुस्खे

सिर के मुंहासों से राहत दिलाने में मदद करेंगे ये पांच घरेलू नुस्खे

बालों को अच्छी तरह से न धोना, हेयर स्टाइल प्रोडक्ट्स का अधिक इस्तेमाल करना, सिर में पसीना आने के बाद उसे न साफ करना आदि की वजह स्कैल्प के रोमछिद्र बंद हो सकते हैं, जिस वजह से सिर में मुंहासे हो सकते हैं। यह एक कष्टदायक समस्या है क्योंकि इसके कारण दर्द और जलन जैसी समस्याएं होती हैं। आइए आज हम आपको पांच ऐसे घरेलू नुस्खे बताते हैं, जिन्हें अपनाकर आप सिर के मुंहासों से जल्द राहत पा सकते हैं।

टमाटर के रस का करें इस्तेमाल
टमाटर का रस सिर के मुंहासों के उपचार के लिए एक बेहतरीन घरेलू नुस्खा है। सैलिसिलिक एसिड से भरपूर टमाटर आपके सिर के श्च॥ स्तर को संतुलित करके मुंहासों को धीरे-धीरे कम करने में मदद कर सकता है। लाभ के लिए एक कटोरी में टमाटर का रस निकालें, फिर उससे रूई के टुकड़े को भिगोकर सिर के मुंहासों पर हल्के हाथ लगाएं। एक घंटे के बाद अपने सिर को माइल्ड शैंपू और पानी से धोकर साफ करें।

लहसुन लगाएं
लहसुन सैलिसिलिक एसिड, एंटी-ऑक्सिडेंट, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल गुणों से समृद्ध होता है, जो सिर के मुंहासों से राहत दिलाने में काफी मदद कर सकते हैं। शायद इससे आपके सिर से लहसुन की महक आए, लेकिन यह इसे स्वस्थ और मुंहासों से मुक्त बना सकता है। राहत के लिए लहसुन की कुछ कलियों को पानी में उबाल लें, फिर इस पानी को ठंडा करके अपने स्कैल्प पर लगाएं। 30 मिनट के बाद अपने सिर को माइल्ड शैंपू से साफ करें।

सेब का सिरका आएगा काम
सेब का सिरका एंटी-माइक्रोबियल गुणों से भरपूर होता है, जो सिर में मुंहासें पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं। इसके अतिरिक्त, यह सिर के पीएच स्तर को संतुलित करके इसे बहुत अधिक तैलीय या बहुत शुष्क होने से भी बचाता है। लाभ के लिए एक कटोरी में तीन चम्मच सेब का सिरका और पानी मिलाएं, फिर शैंपू करने के बाद इस मिश्रण को अपने सिर पर लगाएं। एक मिनट बाद फिर से अपना सिर धोएं।

एलोवेरा करेगा मदद
एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर एलोवेरा भी सिर के मुंहासों से राहत दिलाने में काफी मदद कर सकता है। यह मुहांसो के कारण होने वाली सिर में जलन और खुजली से भी जल्द राहत दिलाकर स्कैल्प को हाइड्रेट रखने समेत स्वस्थ बालों के विकास को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। लाभ के लिए ताजा एलोवेरा जेल सीधे अपने स्कैल्प पर लगाएं और 15-30 मिनट के बाद अपने सिर को सिर्फ पानी से धो लें।

टी ट्री ऑयल से भी दूर होंगे सिर के मुंहासें
एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से समृद्ध टी ट्री ऑयल सिर के मुंहासों का इलाज काफी प्रभावी तरीके से कर सकता है। यह सिर के रोमछिद्रों को खोलकर मुंहासों को कम कर सकता है। लाभ के लिए टी ट्री ऑयल की दो-तीन बूंदों को जोजोबा ऑयल में मिलाएं, फिर इसे अपने स्कैल्प पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें। एक घंटे बाद सिर को माइल्ड शैंपू से साफ करें।
 

LPG Cylinder Price: आज से सस्ता हुआ एलपीजी सिलेंडर...जानिए नए रेट्स

LPG Cylinder Price: आज से सस्ता हुआ एलपीजी सिलेंडर...जानिए नए रेट्स

 महंगाई की मार झेल रही जनता को सितंबर महीने के पहले दिन ही बड़ी राहत मिली है। गुरुवार (1 सितंबर) को गैस सिलेंडर (LPG cylinders) के दामों में कमी देखने को मिली है। एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 100 रुपए की भारी कटौती हुई है।

हालांकि दामों में यह कमी सिर्फ कमर्शियल सिलेंडर पर हुई है, जबकि 14.2 किलो वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर पुराने दामों पर ही मिल रहा है।एलपीजी कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो) के दाम दिल्ली में 91.50 रुपए और कोलकाता में 100 रुपए तक कम हुए हैं। मुंबई में कमर्शियल सिलेंडर 92.50 रुपएऔर चेन्नई में 96 रुपए तक सस्ता हो गया है

घरेलू सिलेंडर की कीमत में बदलाव नहीं

14.2 किलो वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर अभी 6 जुलाई के रेट पर ही मिलता रहेगा। आखिरी बार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव 6 जुलाई को किया गया था। जुलाई में देश भर में इसमें 50 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। देश के अधिकांश शहरों में अब सरकार की तरफ से गैस सिलेंडर पर सब्सिडी नहीं दी जा रही है। लिहाजा अब लोगों को बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर ही खरीदना पड़ रहा है। सरकार सिर्फ उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन पाने वाले लाभार्थियों को ही एलपीजी सब्सिडी दे रही है। एलपीजी घरेलू गैस के दाम इस साल चार बार बढ़ाए जा चुके हैं। जुलाई से पहले 7 मई को प्रति सिलेंडर 50 रुपए की वृद्धि की गई थी।

कमर्शियल सिलेंडर के रेट में लगातार कमी

यह लगातार पांचवीं बार है जब कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में कमी की गई है। कमर्शियल सिलेंडर आमतौर पर रेस्तरां, होटलों में इस्तेमाल किया जाता है।

राहत की खबर : CNG और PNG गैस के दामों में हुई कटौती, इतने रुपये हुए सस्ते

राहत की खबर : CNG और PNG गैस के दामों में हुई कटौती, इतने रुपये हुए सस्ते

 मुंबई: महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए एक राहत की खबर है। दरअसल सरकारी गैस वितरण कंपनी महानगर गैस लिमिटेड ने पाइप के जरिए आपूर्ति की जाने वाली रसोई गैस और वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी के दामों में कटौती की है।

कंपनी ने सरकार द्वारा घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाए जाने के बाद उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए यह फैसला लिया है।

इस फैसले के बाद पीएनजी के दाम चार रुपये प्रति घनमीटर घटाकर 48.50 रुपये हो गए है। वहीं सीएनजी के दाम छह रुपये किलोग्राम घटाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है।

महानगर गैस लिमिटेड ने अपने बयान में कहा कि कीमतों में संशोधन के बाद आर्थिक राजधानी के वाहन मालिक अन्य ईंधन की तुलना में सीएनजी की लागत में 48 प्रतिशत की बचत कर पाएंगे। वहीं पीएनजी के मामले में सबसे ज्यादा इस्तेमाल वाली तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की तुलना में उपभोक्ताओं को 18 प्रतिशत की बचत होगी।

क्या हैं लोगों में एलर्जी के कारण...जानें सबकुछ

क्या हैं लोगों में एलर्जी के कारण...जानें सबकुछ

 कुछ लोगों को किसी खास गंध से एलर्जी होती है। एलर्जी शरीर की संवेदनशील प्रक्रिया है, जो किसी विशिष्ट पदार्थ के अवशोषण (absorption) से बाहरी लक्षणों के रूप में प्रदर्शित होती है। कई बार इसमें उल्टी होना, नजला, चक्कर आना, शरीर का नीला पड़ जाना आदि जैसी असामान्य क्रियाएं होने लगती हैं। कोई भी खाने की चीजें किसी भी व्यक्ति पर प्रतिक्रिया कर सकता है। यह उस व्यक्ति विशेष की शारीरिक संरचना पर निर्भर करता है कि उसके उत्तक किस पदार्थ से संवेदनशील हो उठते हैं। आमतौर पर यह माना जाता है कि अंडा, दूध, फल, अनाज, मछली आदि से अधिक एलर्जी होती है, लेकिन यह बात शत-प्रतिशत सही नहीं मानी जा सकती है। इसके अलावा एलर्जी के और भी कई स्रोत माने जाते हैं। फूलों के परागकण हवाओं में तैरते रहते हैं। इनके सम्पर्क में आकर कई बार लोगों को एलर्जी हो जाती है। अलग-अलग तरह की समस्याओं जैसे दमा, खांसी, लगातार छींकें आना और आंखों में लालपन से आप जूझ सकते हैं। इसके साथ-साथ एलर्जी होने पर कई लक्षण प्रकट होते हैं जैसे खुजली होना, शरीर पर दाने निकल आना आदि।

क्या है एलर्जी

 

स्किनोलॉजी स्किन एंड हेयर क्लिनिक, दिल्ली की डर्मटोलॉजिस्ट डॉ. निवेदिता दादू का कहना है कि वास्तव में, एलर्जी कोई रोग है ही नहीं। यह मात्र शारीरिक लक्षणों में परिवर्तन है, जिसे सही उपचार से दूर किया जा सकता है। सुगंधित पदार्थ, फूलों के पराग, धूलकण, पेट्रोल या केरोसिन तेल की गंध, फफूंदी, दर्द निवारक गोलियां इत्यादि इसी श्रेणी में आते हैं। इन सारे कारकों को एलर्जन (प्रतिजन) की संज्ञा दी गयी है, जो शरीर में प्रविष्ट होने पर एलर्जिक पदार्थों के उत्पादन को अभिप्रेरित (Motivate) करते हैं। उत्पादित एंटीबॉडी (Antibody)और पहले से शरीर में स्थित एंटीबॉडी में परस्पर एक प्रतिक्रिया होती है। इस प्रतिक्रिया के फलस्वरूप शरीर में कुछ हानिकारक रसायन उत्पादित होते हैं जो एलर्जी के लक्षण उत्पन्न करते हैं। एंटीबॉडी जो मुख्य रूप से एलर्जी कारक होते हैं, उसी प्रतिजन (Antigen) के अनुसार होते हैं, जो उन्हें उत्पन्न करता है। ये रक्त के गामा ग्लोबुलिन वाले अंश में मौजूद होते हैं। ये एंटीजेन और एंटीबॉडी जब परस्पर प्रतिक्रिया करते हैं, तो हिस्टामिन और सेरोटोनिन नामक रसायनिक पदार्थ मुक्त करते हैं, जो शरीर ताप अनियंत्रण, श्वास अनियंत्रण, त्वचा शोध जैसी परेशानियां उत्पन्न करते हैं।

हृदय रोग विशेषज्ञ ने बताया: जिम जाने वालों में हार्ट अटैक के ये हैं दो प्रमुख कारण, आप भी हो जाइए सावधान

हृदय रोग विशेषज्ञ ने बताया: जिम जाने वालों में हार्ट अटैक के ये हैं दो प्रमुख कारण, आप भी हो जाइए सावधान

 युवाओं में बढ़ते हृदय रोग के मामलों को स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी गंभीर मानते हैं। हृदय की बीमारियों को कुछ दशक पहले तक बढ़ती उम्र के साथ होने वाली समस्या के तौर पर देखा जाता रहा है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कम उम्र के लोगों में भी इसके गंभीर मामले और हार्ट अटैक की समस्या देखी जा रही है। इतना ही नहीं वो लोग भी हार्ट अटैक के शिकार हो रहे हैं जो फिटनेस फ्रीक हैं और नियमित रूप से व्यायाम भी करते हैं।

अध्ययनों में दावा किया जाता रहा है कि हृदय रोग की समस्याओं को कम करने के लिए सभी लोगों को नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है कि जिम जाने वालों में फिर हार्ट अटैक के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

हाल ही में जिम में व्यायाम के दौरान मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव और इससे पहले बिग-बॉस के विजेता रह चुके अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला को भी दिल का दौरा पड़ चुका है। आखिर इस तरह के बढ़ते मामलों के पीछे क्या कारण है? जिम के दौरान किन  बातों का ध्यान रखना चाहिए, आइए इस बारे में विशेषज्ञ से विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।

जिम में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों का कारण

जिम के दौरान हार्ट अटैक के कारणों के बारे में समझने के लिए हमने मुंबई के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ अनवर.एस खान से संपर्क किया। डॉ अनवर बताते हैं, हार्ट अटैक के कई कारण हो सकते हैं। जिम के दौरान होने वाले दिल के दौरे के ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि पीड़ित को या पहले से ही हृदय रोग की समस्या रही है और वह तीव्रता वाले व्यायाम करता है अथवा दूसरे कारण में धूम्रपान-स्टेरॉयड के इस्तेमाल के कारण इस तरह की समस्या अधिक देखी जाती रही है। सामान्यतौर पर हम इन बातों पर ध्यान नहीं देते हैं पर ये गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती हैं।