Breast Cancer Alert: महिलाएं सावधान! देर रात जागने की आदत बन रही बड़ा खतरा, ज़रा सी अनदेखी...
Breast Cancer Alert : भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद डरावनी रिपोर्ट सामने आई है। ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) के मामले अब न केवल बढ़ रहे हैं बल्कि यह युवा महिलाओं को भी अपना शिकार बना रहे हैं। हालिया शोध और आईसीएमआर (ICMR) की स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हमारी बदलती जीवनशैली खासकर नींद की कमी और तनाव इस कैंसर के पीछे के सबसे बड़े कारण बनकर उभरे हैं।
चिंताजनक आंकड़े: अब युवाओं पर भी खतरा
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च के अनुसार भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में सालाना 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। पहले यह बीमारी 50 साल के बाद देखी जाती थी लेकिन अब 35 से 50 साल की महिलाएं इसकी चपेट में सबसे ज्यादा आ रही हैं। देर से शादी, बच्चों को स्तनपान (Breastfeeding) न कराना और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके मुख्य कारण हैं।
नींद की कमी और कैंसर का संबंध
क्या आप जानते हैं कि कम सोना कैंसर को दावत दे सकता है? स्टडी में सामने आया है कि नींद पूरी न होने से 'मेलाटोनिन' हार्मोन कम बनता है जिससे एस्ट्रोजन का स्तर बिगड़ जाता है। गहरी नींद के दौरान शरीर अपने सेल्स और DNA की मरम्मत करता है। नींद की कमी इस प्रक्रिया को रोक देती है जिससे कैंसर की कोशिकाएं पनपने लगती हैं। लगातार थकान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है।
मोटापा और एस्ट्रोजन का खतरनाक खेल
विशेषज्ञों के अनुसार पेट के आसपास जमा चर्बी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। शरीर का बढ़ा हुआ वजन सूजन पैदा करता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है। मेनोपॉज के बाद शरीर में जमा फैट ही एस्ट्रोजन का मुख्य जरिया बन जाता है। एस्ट्रोजन का अधिक स्तर ब्रेस्ट सेल्स में कैंसर की गांठ बना सकता है।
रोज दर्द की दवा ले रहे हैं? सावधान! धीरे-धीरे खराब हो सकती है किडनी और लिवर
नेशनल डेस्क: दर्द से तुरंत राहत देने वाली पेन किलर दवाएं जैसे NSAIDs (इबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक, नेप्रोक्सन) और पैरासिटामोल आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन अगर इन्हें लंबे समय तक या बिना डॉक्टर की सलाह के लिया जाए, तो ये शरीर के सबसे अहम अंग—किडनी और लिवर—को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन दवाओं का अत्यधिक या गलत इस्तेमाल धीरे-धीरे अंगों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे क्रॉनिक डैमेज, ऑर्गन फेलियर तक का खतरा बढ़ सकता है।
किडनी पर पेन किलर का असर क्यों खतरनाक है?
NSAIDs शरीर में बनने वाले प्रोस्टाग्लैंडिन्स नामक केमिकल्स को रोक देती हैं। ये केमिकल्स किडनी की रक्त नलिकाओं को खुला रखने में मदद करते हैं। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है तो किडनी में ब्लड फ्लो कम हो जाता है, फिल्ट्रेशन क्षमता घटती है,समय के साथ एक्यूट किडनी इंजरी, एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी या क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) हो सकती है। पैरासिटामोल सामान्य मात्रा में अपेक्षाकृत सुरक्षित है, लेकिन ओवरडोज या लंबे समय तक सेवन किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
ज्यादा खतरा किन लोगों में?
बुजुर्ग,हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज के मरीज ,हार्ट डिजीज वाले,और पहले से किडनी की समस्या से जूझ रहे लोग।
लिवर पर कैसे असर डालती हैं दर्द की दवाएं?
लिवर का काम दवाओं को मेटाबॉलाइज करना होता है। पैरासिटामोल की अधिक मात्रा लेने पर लिवर में मौजूद ग्लूटाथियोन खत्म हो जाता है, जिससे लिवर सेल्स को सीधा नुकसान पहुंचता है।
Share Market Updates 16 Feb.: आज कैसी रहेगी शेयर मार्केट की चाल
7: 53 AM Share Market Live Updates 16 Feb.: वैश्विक बाजारों में मिले जुले संकेतों के बाद भारतीय शेयर मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 के सोमवार को गिरावट के साथ खुलने के आसार हैं। एशियाई बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, ज्यादातर बाजार छुट्टियों के लिए बंद हैं, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार पिछले सप्ताह मिले-जुले रहे। बता दें शुक्रवार को, भारतीय शेयर बाजार तेजी से नीचे बंद हुआ, जो एआई व्यवधान और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव पर चिंताओं पर आईटी शेयरों में भारी बिकवाली से प्रभावित हुआ। सेंसेक्स 1048 अंक या 1.25 प्रतिशत क्रैश होकर 82,626 पर बंद हुआ। जबकि, निफ्टी 336 अंक या 1.30 प्रतिशत का गोता लगाकर 25,471 पर बंद हुआ।
इस हफ्ते कैसी रहेगी दलाल स्ट्रीट की चाल
इस सप्ताह निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स, रिजर्व बैंक की एमपीसी बैठक के मिनट्स, विदेशी पूंजी के प्रवाह, आईटी शेयरों में उतार-चढ़ाव, सोने और चांदी के रेट्स और अन्य प्रमुख घरेलू और वैश्विक मैक्रोइकोनॉमिक डेटा रिलीज सहित प्रमुख शेयर बाजार ट्रिगर पर रहेगी।
सेंसेक्स के लिए आज के प्रमुख संकेत
एशियाई बाजार
आज एशियाई बाजार स्थिर रहे, जिससे हाल ही में भारी तेजी मजबूत हुई। पिछले सप्ताह 5 प्रतिशत की वृद्धि के बाद जापान का निक्केई महज 0.2 प्रतिशत बढ़ा। जापान के बाहर एशिया-प्रशांत शेयरों के एमएससीआई के व्यापक सूचकांक में 0.1 प्रतिशत चढ़ा। चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजार नव वर्ष की छुट्टियों के लिए बंद हैं।
गिफ्ट निफ्टी टुडे
गिफ्ट निफ्टी 25,465 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से करीब 54 अंकों की छूट है। यह भारतीय शेयर बाजार के के लिए कमजोर शुरुआत का संकेत देता है।
वॉल स्ट्रीट का हाल
अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को मिश्रित बंद हुए। डॉऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 48.95 अंक या 0.10 प्रतिशत बढ़कर 49,500.93 पर पहुंच गया, जबकि एसएंडपी 500 3.41 अंक या 0.05 प्रतिशत बढ़कर 6,836.17 पर पहुंच गया। नैस्डैक कंपोजिट 50.48 अंक या 0.22 प्रतिशत कम होकर 22,546.67 पर बंद हुआ।
सोने के भाव
अमेरिकी मुद्रास्फीति के हल्के आंकड़ों के बाद सोने के भाव 5,000 डॉलर प्रति औंस से ऊपर लौटने के बाद कारोबारियों ने मुनाफा दर्ज किया। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.3 प्रतिशत गिरकर 5,026.96 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि चांदी की कीमत 1.1 प्रतिशत गिरकर 76.54 डॉलर प्रति औंस हो गई।
डॉलर
मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद अमेरिकी डॉलर अन्य मुद्राओं के मुकाबले लगभग सपाट था। डॉलर इंडेक्स 0.03 प्रतिशत गिरकर 96.90 पर आ गया, यूरो 0.01 प्रतिशत गिरकर $1.1869 पर आ गया। जापानी येन के मुकाबले, डॉलर 0.01 प्रतिशत मजबूत होकर 152.75 पर पहुंच गया। बेंचमार्क यूएस 10-वर्षीय बांड पर यील्ड गुरुवार देर से 4.104 प्रतिशत से 5.6 बेसिस प्वाइंट गिरकर 4.048 प्रतिशत हो गया।
कच्चे तेल की कीमतें
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू होने से पहले कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.03 प्रतिशत गिरकर 67.73 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 0.05 प्रतिशत गिरकर 62.86 डॉलर पर आ गया।
₹1 लाख से नीचे आ सकता है सोने का भाव, खरीदने से पहले पढ़ लें यह खबर
साल 2025 में शानदार रिटर्न देने वाला सोना जनवरी 2026 में भी अपनी तेजी पर कायम रहा और एमसीएक्स पर 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के अपने शिखर पर पहुंच गया। हालांकि, बीते शुक्रवार को एमसीएक्स पर सोना 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो अपने पिछले रिकॉर्ड स्तर से लगभग 24,500 रुपये यानी 13.50% नीचे है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही हाल रहा, जहां कॉमेक्स गोल्ड 5,626.80 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 10.50% नीचे 5,046.30 डॉलर प्रति औंस पर आ गिरा।
ब्लूमबर्ग समाचार एजेंसी ने एक रूसी डॉक्यूमेंट्स के हवाले से बताया है कि क्रेमलिन अमेरिका के साथ आर्थिक साझेदारी की संभावना तलाश रहा है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू मॉस्को का डॉलर आधारित व्यापार निपटान पर लौटना है। यह कदम ब्रिक्स देशों के डी-डॉलरीकरण यानी अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिक्स सदस्य व्यापार में डॉलर की जगह लेने के लिए जमकर सोना जमा कर रहे थे, लेकिन रूस का डॉलर में लौटना सीधे तौर पर इस मुहिम और सोने की बढ़ती कीमतों को प्रभावित करेगा।
क्या रूस सच में डॉलर में वापस लौट रहा है?
भू-राजनीतिक संरेखण में बदलाव की ओर इशारा करते हुए, पेस 360 के मुख्य वैश्विक रणनीतिकार अमित गोयल ने बताया कि सप्ताहांत में ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट दी है कि रूस डॉलर में वापस लौट रहा है। खबर में दावा किया गया है कि क्रेमलिन अमेरिका के साथ व्यापार साझेदारी की संभावना तलाश रहा है, जिसमें लेन-देन डॉलर में होगा, क्योंकि ट्रम्प किसी अन्य रूप में भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन प्रशासन रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त होने के मद्देनजर इस तरह की ट्रेड डील पर विचार कर रहा है, जो एक संभावित शांति समझौते का संकेत है।
गोयल ने कहा कि रूस ने अभी तक ऐसी खबरों पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन इतने संवेदनशील मामले पर मॉस्को की ओर से कोई खंडन न आना डिमांड-सप्लाई के खेल में एक बड़े बदलाव का संकेत है। ऐसे घटनाक्रम से ब्रिक्स देशों के डी-डॉलराइजेशन अभियान पर सीधा असर पड़ने की उम्मीद है, जो अब तक बड़े पैमाने पर सोना खरीदकर उसकी सप्लाई को सीमित कर रहे थे।
सोने की कीमतों को आसमान पर पहुंचाने वाला बड़ा कारण
एसईबीआई-रजिस्टटर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने सोने की कीमतों में तेजी में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब से डोनाल्ड ट्रम्प व्हाइट हाउस में आए, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने ट्रम्प के टैरिफ का मुकाबला करने के लिए सोना खरीदना शुरू कर दिया। इससे मांग और आपूर्ति में भारी असंतुलन पैदा हुआ, जिससे कीमतें बढ़ीं।
विशेष रूप से ब्रिक्स सदस्यों के केंद्रीय बैंकों ने लगातार सोना खरीदा, जिसने सोने की कीमतों में तेजी के लिए ईंधन का काम किया। अनुज गुप्ता का मानना है कि वैश्विक केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी में रुकावट का सोने की कीमतों पर गहरा नकारात्मक असर होगा और हम कीमतों में तेज सुधार देख सकते हैं। यहां तक कि संभावना है कि ये केंद्रीय बैंक खुले बाजार में सोना बेचना शुरू कर सकते हैं, जिससे धातु की अधिक आपूर्ति के कारण मांग और कमजोर होगी।
ब्रिक्स देशों का डॉलर रिजर्व और उनकी दोहरी रणनीति
ब्रिक्स उभरते देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) का एक महत्वपूर्ण आर्थिक समूह है, जो सोना जमा करके तेजी से डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स देशों के पास वैश्विक सोने के भंडार का लगभग 20% है, लेकिन अपने रणनीतिक सहयोगियों के साथ मिलकर ये अब वैश्विक सोने के उत्पादन का लगभग 50% हिस्सा रखते हैं। इस रणनीति में रूस और चीन सबसे आगे रहे। 2024 में, चीन ने 380 टन सोने का उत्पादन किया, जबकि रूस ने 340 टन का योगदान दिया। सितंबर 2025 में ब्राजील ने 2021 के बाद पहली बार 16 टन सोना खरीदा।
अनुज गुप्ता के अनुसार, ब्रिक्स देशों की दोहरी रणनीति रही है: वे अधिक सोना उत्पादित कर रहे हैं और कम बेच रहे हैं, साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी सोना खरीद रहे हैं। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच, ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों ने दुनिया के 50% से अधिक सोने की खरीदारी की। ब्रिक्स की अर्थव्यवस्थाएं आज वैश्विक व्यापार का लगभग 30% हिस्सा हैं, जिससे उनके मौद्रिक विकल्पों को वैश्विक प्रासंगिकता मिलती है। रूस के डॉलर में लौटने से ब्लॉक के डी-डॉलराइजेशन के लंबे समय से चले आ रहे उद्देश्य को खतरा पैदा हो जाएगा।
सरकारी बांड सोने की जगह लेंगे सुरक्षित निवेश के रूप में?
पेस 360 के विशेषज्ञ अमित गोयल का कहना है कि जनवरी 2026 के सीपीआई आंकड़ों में अमेरिकी मुद्रास्फीति में वृद्धि ने आर्थिक मंदी की आशंका को फिर से बढ़ा दिया है, क्योंकि वहां मांग और कंपनियों की कमाई पहले से ही दबाव में है। इससे मार्च 2026 की बैठक में अमेरिकी फेड दर में कटौती की संभावना रुक गई है। ऐसे में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, जो 110 के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर 100 से नीचे आ चुका है, पर और बिकवाली का दबाव बनने की उम्मीद है।
हालांकि, आर्थिक अनिश्चितता के इस माहौल में सोना सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) का विकल्प नहीं बन पाएगा, क्योंकि यह पहले ही अपने चरम पर पहुंच चुका है। उन्होंने 2008 के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति में लंबी अवधि के सरकारी बांड सोने और चांदी की जगह सुरक्षित निवेश की मांग को पूरा कर सकते हैं। उनका सुझाव है कि लंबी अवधि के निवेशकों को 30 या 40 साल के सरकारी बांड पर ध्यान देना चाहिए।
सोने की कीमतें और कितनी गिरेंगी ?
सोने की कीमतों की डिमांड-सप्लाई में संरचनात्मक बदलाव की उम्मीद करते हुए, अमित गोयल का मानना है कि सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,626.80 डॉलर प्रति औंस और भारत में 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम पर अपने शिखर पर पहुंच चुकी हैं। डी-डॉलराइजेशन प्रक्रिया में इस तरह के संरचनात्मक बदलाव से वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा घबराहट में बिकवाली शुरू हो सकती है, जिससे डिमांड-सप्लाई का असंतुलन पीली धातु के पक्ष में कमजोर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पहला झटका कागजी सोने की बिकवाली के रूप में आएगा, लेकिन अंततः इसका असर भौतिक सोने की कीमतों पर भी पड़ेगा। भारत में सोने की दरें पहले ही लगभग 15% गिर चुकी हैं और इस विकास के बाद यह गिरावट और गहराने की उम्मीद है।
उनका अनुमान है कि 2027 के अंत तक भारत में सोने की दरें 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ सकती हैं और कॉमेक्स गोल्ड की कीमत 3,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि भारत में सोने की दर 2027 के अंत तक 90,000 से 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ सकती है।
हालांकि, यह गिरावट एक बार में नहीं आएगी बल्कि इसमें कई बार 'डेड-कैट बाउंस' (तेजी के दौरान अस्थायी उछाल) देखने को मिलेंगे। इस रिपोर्ट के अनुसार, रूस का एक आंतरिक मेमो दर्शाता है कि व्लादिमीर पुतिन का प्रशासन अमेरिका के साथ आर्थिक साझेदारी के सात क्षेत्रों पर विचार कर रहा है, जिसमें जीवाश्म ईंधन, प्राकृतिक गैस, अपतटीय तेल और महत्वपूर्ण कच्चे माल पर केंद्रित है।
बालों में सरसों का तेल और मेथी को एक साथ मिलाकर लगाने से क्या होता है? फायदे करेंगे आपको हैरान
आजकल बालों से जुड़ी समस्याएं बढ़ गई हैं। स्थिति ऐसी है कि हर कोई झड़ते बाल, डैंड्रफ और स्कैल्प इंफेक्शन से परेशान है और इसकी बड़ी वजह बालों में गंदगी और सफाई की कमी है। इसके अलावा ड्राई स्कैल्प की वजह से भी लोगों को ये दिक्कत हो सकती है। ऐसे में बालों की कई समस्याओं के लिए आप सरसों का तेल और मेथी का इस्तेमाल कर सकते हैं। उसके पीछे सिर्फ इन समस्याओं से छुटकारा पाना ही कारण नहीं है बल्कि, ये दोनों मिलकर बालों के लिए कई प्रकार से काम भी कर सकते हैं। तो, जानते हैं बालों के लिए सरसों का तेल और मेथी लगाने के फायदे।
बालों के लिए सरसों का तेल और मेथी लगाने के फायदे
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डैंड्रफ कम करने में मददगार: बालों के लिए सरसों का तेल और मेथी दोनों ही मिलकर कारगर तरीके से काम करते हैं। सरसों का तेल जहां एंटीबैक्टीरियल है वहीं मेथी, क्लींनजर की तरह काम करते हुए भी बालों को पोषण देने में मददगार है। जब आप इन दोनों को मिलाकर बालों में लगाते हैं तो एक डैंड्रफ का सफाया करता है और दूसरा, बालों को बढ़ाने में मदद करता है। इस प्रकार से बालों के लिए ये दोनों कारगर तरीके से काम करते हैं।
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स्कैल्प इंफेक्शन में कारगर: स्कैल्प इंफेक्शन में सरसों का तेल और मेथी लगाने के फायदे कई हैं। जैसे कि सरसों का तेल और मेथी दोनों एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर हैं और स्कैल्प इंफेक्शन को कम करने में मदद कर सकते हैं। ये स्कैल्प में जमा गंदगी को साफ करता है, फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन को कम करता है और फिर ड्राई स्किन की समस्या को कम करके डैंड्रफ से बचाव में मदद करता है।
बालों के लिए कैसे करें मेथी और सरसों तेल का इस्तेमाल
बालों के लिए आप मेथी और सरसों के तेल का व्यापक तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। पर सबसे आसान तरीका है मेथी के बीजों को पीस लें और इसमें सरसों का तेल मिला लें। अब इसे अपने बालों पर लगाएं और इसे ऐसे ही छोड़ दें। फिर अपने बालों को शैंपू करके वॉश कर लें। इससे स्कैल्प की सफाई तो होगी ही बल्कि बालों की चमक भी बढ़ जाएगी।
अंगूर पर लगे केमिकल को कैसे हटाएं, धोते वक्त कर लें ये उपाय, मर जाएंगे सारे कीटाणु
ताजा अंगूर एकदम चमकदार और रसीला होते हैं। लेकिन बाजार में बिकने वाले इन अंगूरों पर केमिकल का भी इस्तेमाल किया जाता है। जिससे अंगूर के छिलकों को ऊपर से चमकदार बनाया जा सके। अंगूर के गुच्छे में अक्सर कीटनाशक, मोम की परत और गंदगी छिपी हुई होती है। अंगूर के गुच्छे काफी घने उगते हैं और उनके छिलके पतले और काफी नाजुक होते हैं, इसलिए वे आसानी से केमिकल और धूल को सोख लेते हैं। नल के नीचे सिर्फ पानी से धोना काफी नहीं है। इसके लिए रसोई में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजों का उपयोग करें। जिससे कीटनाशक मर जाएं और केमिकल भी पूरी तरह से हट जाए। अंगूर को धोने के लिए ये उपाय कारगर साबित हो सकते हैं। जान लें अंगूर से केमिकल कैसे साफ करें।
अंगूर से केमिकल कैसे साफ करें?
पहला स्टेप- सबसे पहले अंगूर को बहते पानी के नीचे धो लें। कोई भी उपाय आजमाने से पहले हमेशा अंगूरों को अच्छी तरह से धो लें। एक बड़े कटोरे या छलनी में अंगूर रखें और उन्हें ठंडे बहते पानी के नीचे 20-30 सेकंड तक धीरे-धीरे हाथों से रगड़ते हुए धोएं। इससे धूल-मिट्टी और ऊपर लगी चीजें साफ हो जाएंगी। हालांकि इससे सारे कीटनाशक नहीं हटेंगे, लेकिन इससे कीटनाशकों की मात्रा काफी कम हो जाती है और अंगूर को साफ करना आसान हो जाता है।
दूसरा स्टेप- कीटनाशकों को नष्ट करने के लिए अंगूरों को बेकिंग सोडा के घोल में भिगो दें। अंगूरों को साफ करने के लिए यह सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से असरदार तरीकों में से एक है। कई रिसर्च में पता चलता है कि बेकिंग सोडा यानि सोडियम बाइकार्बोनेट कई आम कीटनाशक अणुओं को तोड़ने में मदद करता है। सोडा वाले पानी में भिगोने के बाद अंगूरों को हाथ से हल्का रगड़कर साफ करें और साफ पानी से अच्छी तरह धो लें।
तीसरा स्टेप- कीटाणुओं और जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए अंगूरों को सिरके से धोएं। सिरका अंगूरों के लिए एक और बेहतरीन प्राकृतिक क्लीनर है। जिससे कीटनाशक साफ होते हैं और बैक्टीरिया, फफूंद और दूसरे रोगाणुओं को भी नष्ट किया जा सकता है। इसके लिए 1 भाग सफेद सिरका और 3 भाग पानी मिलाएं। इसमें अंगूर को अच्छी तरह से धो लें। मार्केट से लाए अंगूर कई बार छूए जाते हैं।
चौथा स्टेप- अंगूरों को धोने के बाद अच्छी तरह से रगड़कर सुखा लें। सफाई सिर्फ भिगोने से खत्म नहीं होती। धोने के बाद अंगूर के प्रत्येक गुच्छे को अपनी उंगलियों या साफ कपड़े से धीरे-धीरे रगड़ें। रगड़ने से बचे हुए अवशेष भी निकल जाते हैं। फिर हवा में सूखने दें या रसोई के तौलिए से थपथपाकर सुखा लें। सूखे अंगूर फ्रिज में ज्यादा समय तक ताज़ा रहते हैं और उनमें फफूंदी लगने की संभावना भी कम होती है।
पांचवां स्टेप- नए संक्रमण से बचने के लिए साफ अंगूरों को सही तरीके से स्टोर करें। किसी हवादार कंटेनर में अंगूरों को रखें। अंगूरों को धोने के बाद उन्हें घंटों तक गीला न छोड़ें, क्योंकि नमी से बैक्टीरिया पनपते हैं। अगर आप चाहें तो केवल उतना ही धो सकते हैं जितना आप खाने वाले हैं। साफ अंगूर और सही तरीके से स्टोर करने से आप कई दिनों तक इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।












