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टीका उत्सव (Teeka Utsav) के पहले दिन इतने लाख लोगों को टीका लगाया गया

टीका उत्सव (Teeka Utsav) के पहले दिन इतने लाख लोगों को टीका लगाया गया

टीके उत्सव के पहले दिन देश भर में 27 लाख 69 लोगों का टीकाकरण करवाया गया। 11 अप्रैल, 2021 को देश भर में टीका उत्सव शुरू हुआ था। यह उत्सव 4 दिन तक चलेगा। टीका उत्सव (Teeka Utsav) एक टीका पर्व है। यह 11 अप्रैल, 2021 और 14 अप्रैल, 2021 के बीच आयोजित किया जायेगा। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण करना है। यह COVID-19 वैक्सीन के शून्य अपव्यय पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।

भारत में COVID-19 टीकाकरण अभियान
वर्तमान में, तीन राज्य अधिकतम COVID -19 खुराक प्राप्त कर रहे हैं। वे महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात हैं।
COVAXIN और COVISHIELD दो प्रमुख COVID-19 टीके हैं जो वर्तमान में भारत में इस्तेमाल किये जा रहे हैं।
अब तक, भारत ने कैरेबियाई, अफ्रीका और एशिया के 84 देशों में टीकों की 64 मिलियन खुराकें भेज दी हैं। भारतीय COVID-19 टीकों के प्रमुख प्राप्तकर्ता देश मैक्सिको, कनाडा और ब्राजील हैं।
भारत सरकार ने अपने टीकाकरण कार्यक्रम के तहत जुलाई 2021 तक 250 मिलियन लोगों को “उच्च प्राथमिकता” श्रेणी में शामिल करने की योजना बनाई है।
COVAXIN
COVAXIN भारत बायोटेक द्वारा निर्मित एक सरकारी समर्थित टीका है। इसकी प्रभावकारिता दर 81% है। COVAXIN वैक्सीन के चरण तीन परीक्षणों में 27,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया है। COVAXIN दो खुराक में दिया जाता है। खुराक के बीच का समय अंतराल चार सप्ताह है। COVAXIN को मृत COVID-19 वायरस से तैयार किया गया था।

COVISHIELD
COVISHIELD वैक्सीन एस्ट्राज़ेनेका द्वारा निर्मित है। स्थानीय रूप से, COVISHIELD सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया द्वारा निर्मित किया जा रहा है। यह चिम्पांजी के एडेनोवायरस नामक एक सामान्य कोल्ड वायरस के कमजोर संस्करण से तैयार किया गया था। COVID-19 वायरस की तरह दिखने के लिए वायरस को संशोधित किया गया है। यह दो खुराक में लगाया जाता है। 

अगर आप होम आइसोलेट हैं तो आपके लिए जरूरी खबर

अगर आप होम आइसोलेट हैं तो आपके लिए जरूरी खबर

कोरोनावायरस से संक्रमित हुए 66 फीसदी लोग होम आइसोलेशन में है। ऐसे में जरुरी यह हो जानना जरुरी हो जाता है कि होम आइसोलेशन को लेकर चिकित्सीय गाइडलाइन क्या है और अगर आप कोरोना पॉजिटिव होने के बाद होम क्वारेंटाइन है तो आपको किन सावधानियों का पालन करना है।

संक्रमित व्यक्ति घर में कैसे रहे-

होम आइसोलेशन के संबंध में कोविड-19 प्रोटोकॉल के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार संक्रमित व्यक्ति एक अलग हवादार बाथरूम अटैच कमरे में रहना चाहिए। आइसोलेशन अवधि में संक्रमित व्यक्ति न तो अपने कमरे से बाहर निकले, व्यक्तियों से सीधे सम्पर्क में न आये और अपने कमरे में ही खाना खाये। वह अपने कपड़ों, दरवाजे का हेण्डल, बिजली के बटन, बाथरूम आदि की सफाई एक प्रतिशत सोडियम हाईपोक्लोराइड साल्यूशन से करे। अपने खाने के बर्तन भी स्वयं ही साफ करे।

होम आइसोलेशन के दौरान संक्रमित व्यक्ति घर के सभी सदस्यों,विशेषकर वृद्ध, गर्भवती महिलाएँ और बच्चों से दूरी बनाये रखें। किसी भी सामाजिक और धार्मिक कार्य में सम्मिलित न हों। संक्रमित व्यक्ति के किसी कार्यक्रम में शामिल होने से कोरोना मरीजों की एक नई श्रृंखला बन जाएगी। संक्रमित व्यक्ति पर्याप्त आराम करें, क्योंकि कोरोना में कमजोरी काफी आती है,आराम से जल्दी ठीक होंगेे।

दूसरों को करें सावधान-

होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमित व्यक्ति अपने सम्पर्क में आये सभी व्यक्तियों को संक्रमण की जानकारी दूरभाष पर तुरंत दें। सम्पर्क में आये हुए परिचितों को अपने सम्पर्क दिनांक से 5वें से 10वें दिन के बीच जाँच कराने की सलाह दें। कोरोना से संबंधित जानकारी के लिये हेल्पलाइन 104 और 1075 लगातार 24 घंटे कार्यरत हैं।

परिजन रखे यह सावधानी-

कोरोना संक्रमित व्यक्ति के घर वाले भी सावधानियाँ बरतें। वृद्ध संक्रमित व्यक्तियों की देखभाल घर के युवा सदस्य तीन परतों वाला मास्क पहनकर ही करें। भोजन, पानी, दवाइयाँ आदि देते समय दूरी बनाये रखें। न तो घर से बाहर निकलें और न किसी को घर में प्रवेश करने दें। देखभाल के दौरान सर्दी, खाँसी, बुखार, गले में खराश आदि होने पर समीप के फीवर क्लीनिक में तुरंत जांच कराए।
अस्पताल जाने की आवश्यकता है तो-
अगर कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति में उपर दिए गए लक्षण पाए जा रहे है और व्यक्ति को अस्पताल ले जाने की आवश्यकता है तो जिला कोविड कंट्रोल एवं कमाण्ड सेंटर से चर्चा कर उपलब्ध बिस्तर के आधार पर स्वयं के वाहन से चिन्हांकित केन्द्रों पर जा सकते हैं। स्वयं का परिवहन न होने पर 108 एम्बुलेंस परिवहन व्यवस्था का लाभ लिया जा सकता है। परिवहन के दौरान वाहन में मास्क का प्रयोग और हाथ का सेनेटाइज होना अनिवार्य है। वाहन की खिड़कियाँ खुली रखें और ड्रायवर से दूरी बनाकर रखी जाये। बंद एवं वातानुकूलित वाहनों का उपयोग नहीं किया जाये। इसी तरह ड्रायवर भी मास्क एवं दास्तानों का उपयोग करें। यथासंभव वाहन में ड्रायवर के अतिरिक्त 2 से अधिक व्यक्ति सफर न करें।
 

वैक्सीन लेने से पहले और बाद में सही डाइट क्या है, जानिए एक्सपर्ट की राय

वैक्सीन लेने से पहले और बाद में सही डाइट क्या है, जानिए एक्सपर्ट की राय

जिस तरह कोरोना की दूसरी लहर जोरों पर है, उसी तरह पूरे देश में वैक्सीनेशन ड्राइव भी जोरों पर है. लोग लाइन में लगकर कोरोना की वैक्सीन लगवा रहे हैं. हालांकि लोग वैक्सीन लेने में साइड इफेक्ट को लेकर चिंतित रहते हैं और चाहते हैं कि वैक्सीन लेने के बाद वह सुरक्षित रहे और किसी तरह की हेल्थ कंपलिकेशन में ना पड़ें. एक्सपर्ट की मानें तो वैक्सीन लेने के बाद ज्यादा साइड इफेक्ट ना हो, इसके लिए डाइट की महत्वपूर्ण भूमिका है. वैसे लोग कई तरह की सलाह देते हैं. कुछ लोग कहेंगे वैक्सीन लेने से पहले न्यूट्रिशियस डाइट लेनी चाहिए. कुछ कहते हैं कि पानी नहीं पीना चाहिए. हालांकि एक्सपर्ट की राय अलग है. क्या है एक्सपर्ट की राय, इसे जानिए


खूब पानी पिएं और फल खाएं
एक्सपर्ट की मानें तो शरीर में पानी की मात्रा गुड हेल्थ के लिए जरूरी है. जब वैक्सीन लेने जाएं तो खूब पानी पीएं और ज्यादा पानी वाले फल खाएं. इससे वैक्सीन लेने के बाद होने वाले साइड इफेक्ट का असर बहुत कम हो जाएगा.


अल्कोहल से दूर रहें
वैक्सीन लेने के बाद किसी-किसी में मामूली साइड इफेक्ट देखा गया है. ज्यादातर लोगों में कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता. चूंकि वैक्सीन लेने के दौरान शरीर में पानी की खूब मात्रा होनी चाहिए लेकिन जब अल्कोहल लिया जाए तो इससे डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. इस स्थिति में साइड इफेक्ट की आशंका बढ़ जाती है. इसलिए अल्कोहल बिल्कुल भी न लें.


प्रोसेस्ड फूड न खाएं
ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन के मुताबिक महामारी के इस दौर में शुद्ध अनाज का भोजन करना चाहिए. वैक्सीन लेने के दौरान प्रोसेस्ड फूड का सेवन न करें. इससे बेहतर है कि ऐसी डाइड लें जिसमें फाइबर ज्यादा हो. यह देसी अनाजों में ज्यादा होता है. इसके अलावा शुगरयुक्त चीजों का भी सेवन न करें तो बेहतर है.


वैक्सीन लेने से पहले संतुलित आहार लें
वैक्सीन लेने के बाद ज्यादातर बेहोश होने की शिकायतें आती हैं. इसके लिए जरूरी है कि वैक्सीन लेने से पहले संतुलित आहार लें. सेंटर फ़र डिजिज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के मुताबिक वैक्सीन लेने से पहले पर्याप्त पानी, संतुलित आहार और स्नेक्स लेने से वैक्सीन के साइड इफेक्ट की चिंता दूर हो सकती है.

 

Remdesivir: क्या है रेमडीसिविर, क्यों बनाई गई थी और क्या है ‘कोरोना’ में इसका इस्तेमाल?

Remdesivir: क्या है रेमडीसिविर, क्यों बनाई गई थी और क्या है ‘कोरोना’ में इसका इस्तेमाल?

जिस रेमडीसिविर इंजेक्‍शन के लिए हाल ही में इंदौर समेत देश के कई शहरों के मेड‍ि‍कलों और दवा बाजारों में खरीददारों की भीड लगी, दरअसल वह इंजेक्‍शन कोविड संक्रमण में या तो बहुत कम या फ‍िर ब‍िल्‍कुल भी असरकारक नहीं है।

देश के कई डॉक्‍टरों और विशेषज्ञों ने इस बात की पुष्‍ट‍ि की है और इसे अनफाउंडेड यानी निराधार बताया है।

आइए जानते है आखि‍र क्‍या है रेमडीसिविर और सबसे पहले इसे किस रोग के लिए डवलेप किया गया था। इसके इस्‍तेमाल को लेकर डॉक्‍टर क्‍या कहते हैं।

दरअसल, जिस रेमडीसिविर इंजेक्‍शन के लिए फ‍िलहाल इतनी मारामारी चल रही है, वो सबसे पहले हेपेटाइटीस सी के लिए बनाया गया था। इसके बाद उसे इबोला और मिड‍िल ईस्‍ट रेस्‍प‍िरेटरी सिंड्रोम एमईआरएस के लिए के लिए इस्‍तेमाल किया गया।

लेकिन जैसा कि अभी हो रहा है, कोविड-19 के संक्रमण में एक जीवन रक्षक ड्रग के तौर पर इसका इस्‍तेमाल गलत है। डॉक्‍टरों के मुताब‍िक रेमड‍ीसिविर इंजेक्‍शन सिर्फ मरीज के अस्‍पताल में रहने के समय को दो या तीन दिन घटा सकता है।

क्‍या थी आईसीएमआर की गाइडलाइन?
पिछले साल 2020 में इंड‍ियन काउंसिल ऑफ मेड‍िकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने अपनी एक गाइडलाइन जारी कर बताया था कि इस ड्रग का लाइफ सेविंग में कोई फायदा नहीं है और यह सिर्फ संक्रमण के दौरान पहले 10 दिनों के भीतर इस्‍तेमाल करने के लिए ही है।

टाइम्‍स ऑफ इंड‍िया के हवाले से कोविड टास्‍क फोर्स के डॉ शशांक जोशी ने बताया कि लोगों को इसके लिए भागम-भाग नहीं करना चाहिए, क्‍योंकि यह नि‍राधार है। यह ड्रग सिर्फ शरीर में वायरल इंफेक्‍शन के रेप्‍लिकेशन को रोकने में मदद करता है। मृत्यु से बचाने के लिए इस ड्रग में कोई क्षमता नहीं है। डॉ जोशी कहते हैं कि हो सकता है कि डॉक्‍टर इसे प्र‍िस्‍‍क्राइब्‍स करते हों त‍ाकि अस्‍पताल में मरीज के रहने का टाइम घटाया जा सके और बाकी मरीजों के लिए पलंग की उपलब्‍धता बढाई जा सके।

टाइम्‍स के मुताबि‍क मुंबई, थाने के एक चेस्‍ट विशेषज्ञ डॉक्‍टर अजय गोडसे का कहना है कि करीब 95 प्रतिशत मरीजों के लिए रेमडेसिविर है, लेकिन इसे किसी चमत्‍कार की तरह नहीं लिया जाना चाहिए।

क्‍या कहती है दूसरी स्‍टडीज?
कोविड-19 के खिलाफ रेमडेसिविर कितनी असरदार है इसका पता लगाने के लिए अब तक कई ट्रायल और स्टडीज हो चुकी हैं। ऐसा ही एक ट्रायल अमेरिका की नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ ने भी किया था जिसमें यह सुझाव दिया गया कि रेमडेसिवियर कोविड-19 के मरीजों के रिकवरी टाइम को 31 प्रतिशत तक बेहतर कर सकती है और इस तरह से मरीज 11वें दिन में अस्पताल से बाहर आ सकता है। जबकी स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट में मरीज को 15 दिन के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलती है।

क्‍यों बनाई गई थी रेमड‍ीसिविर?
रेमड‍ीसिविर को इबोला के लिए किया गया था विकसित
रेमड‍ीसिविर एक न्यूक्लियोसाइड राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) पोलीमरेज़ इनहिबिटर इंजेक्शन है।
इसका निर्माण सबसे पहले वायरल रक्तस्रावी बुखार इबोला के इलाज के लिए किया गया था।
इसे अमेरिकी फार्मास्युटिकल गिलियड साइंसेज द्वारा बनाया गया है।
फरवरी में US नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिजीज (NIAID) ने SARS-CoV-2 के खिलाफ जांच के लिए रेमड‍ीसिविर का ट्रायल करने की घोषणा की थी। 

भारत के सक्रिय मामलों में इन 10 जिलों का योगदान इतने प्रतिशत

भारत के सक्रिय मामलों में इन 10 जिलों का योगदान इतने प्रतिशत

नईदिल्ली। आज देशभर में कोविड-19 के टीके की खुराक दिए जाने की कुल संख्या 9.80 करोड़ से अधिक हो गई है। आज सुबह 7 बजे तक की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार, 14,75,410 सत्रों के माध्यम से कुल 9,80,75,160 टीके की खुराकें दी गई हैं। इनमें 89,88,373 स्वास्थ्य कर्मियों ने टीके की पहली खुराक और 54,79,821 स्वास्थ्य कर्मियों ने टीके की दूसरी खुराक, 98,67,330 अग्रिम मोर्चे के कार्यकर्ताओं ने टीके की पहली खुराक, 46,59,035 अग्रिम मोर्च के कार्यकर्ताओं ने टीके की दूसरी खुराक, 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले 3,86,53,105 लाभार्थियों ने टीके की पहली खुराक और 15,90,388 लाभार्थियों ने टीके की दूसरी खुराक और 45 से 60 वर्ष की उम्र के 2,82,55,044 लाभार्थियों ने टीके की पहली खुराक और 5,82,064 लाभार्थियों ने टीके की दूसरी खुराक ली। देश में अब तक कुल टीके की 60.62 प्रतिशत खुराकें 8 राज्यों में दी गई हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान 34 लाख से अधिक टीके की खुराकें दी गई। टीकाकरण मुहिम के 84वें दिन (09 अप्रैल 2021) को 34,15,055 टीके की खुराकें दी गई। 46,207 सत्रों के माध्यम से 30,06,037 लाभार्थियों ने पहली खुराक और 4,09,018 लाभार्थियों ने दूसरी खुराक ली। वैश्विक स्तर पर दैनिक खुराकों की संख्या के संदर्भ में, भारत प्रतिदिन औसत 38,93,288 टीके की खुराक दिए जाने के साथ शीर्ष पर बना हुआ। भारत में दैनिक नये मामलों का बढ़ना जारी है। पिछले 24 घंटे में 1,45,384 नये मामले दर्ज किए गए। दस राज्यों- महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान- में कोविड-19 के दैनिक नये मामलों में वृद्धि दिखाई दे रही है। नये मामलों का 82.82 प्रतिशत इन्हीं दस राज्यों में ही है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक 58,993 दैनिक नये मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद छत्तीसगढ़ में 11,447 जबकि उत्तर प्रदेश में 9,587 नये मामले दर्ज किए गए हैं। भारत में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 10,46,631 तक पहुंच गई है। यह देश में कुल पॉजिटिव मामलों का अब 7.93 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों में कुल सक्रिय मामलों की संख्या में से 67,023 मामले कम हुए। भारत में कुल सक्रिय मामलों का कुल 72.23 प्रतिशत पांच राज्यों महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और केरल में है। देश में कुल सक्रिय मामलों का 51.23 प्रतिशत अकेले महाराष्ट्र से है। देश के दस जिलों में कुल सक्रिय मामलों के 45.65 प्रतिशत हैं। भारत में आज तक कुल स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या 1,19,90,859 है। राष्ट्रीय स्तर पर रिकवरी दर 90.80 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में 77,567 मरीज स्वस्थ हुए। दैनिक मौतें की संख्या में लगातार उछाल देखा जा रहा है। पिछले 24 घंटों में 794 मौतें दर्ज की गई।

इस राज्य  में वैक्सीन का स्टॉक ख़त्म होने के कगार पर अगले तीन दिनों का ही स्टॉक,शेष

इस राज्य में वैक्सीन का स्टॉक ख़त्म होने के कगार पर अगले तीन दिनों का ही स्टॉक,शेष

नईदिल्ली। देश में लगातार कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में इज़ाफ़ा हो रहा है. पूरे देश के केस लोड का आधे से अधिक महाराष्ट्र में है. इस बीच वहाँ के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा है कि महाराष्ट्र में वैक्सीन का स्टॉक ख़त्म होने के कगार पर है. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक उन्होंने कहा है कि राज्य के पास कोविड-19 वैक्सीन की लगभग 14 लाख खुराकें ही बची हुई हैं जो वर्तमान वैक्सीन देने की रफ़्तार के हिसाब से अगले तीन दिनों का स्टॉक ही है. उन्होंने कहा कि इसकी वजह से कई वैक्सीन सेंटर बंद करने पड़े हैं और वहाँ लोगों को वापस जाना पड़ा है. उन्होंने केंद्र से वैक्सीन की आपूर्ति करने में महाराष्ट्र को प्राथमिकता देने का आग्रह किया और कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि यहाँ मरने वालों की संख्या 50 हज़ार को पार कर चुकी है. इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि अब संक्रमित हो रहे लोगों में अधिकतर की उम्र 25 से 40 साल के बीच है.

हर्षवर्धन ने क्या कहा?
हालाँकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस तरह के वक्तव्यों को ध्यान भटकाने का प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि "हाल के दिनों में मैंने कुछ राज्य सरकारों की ओर से कोरोना महामारी को लेकर गैर ज़िम्मेदाराना बातें सुनी हैं. कुछ राज्य सरकारें अपने यहाँ महामारी को काबू करने के उपायों को लागूं करने में विफल रही हैं. ऐसे वक्तव्य लोगों का ध्यान भटकाने और उनमें दहशत फ़ैलाने का काम कर सकते हैं." साथ ही उन्होंने कहा कि देश में जब कोराना वैक्सीन की आपूर्ति सीमित तब प्राथमिकता के आधार पर ही वैक्सीन देना विकल्प है. भारत सरकार पारदर्शिता के साथ सभी राज्यों को वैक्सीन की मांग और आपूर्ति के बारे में बताती रही है. वैक्सीनेशन अभियान की पूरी रूपरेखा राज्यों के साथ बातचीत के बाद ही तैयार किया गया है. इसके साथ ही उन्होंने वैक्सीन दिए जाने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष करने के कुछ राज्यों की उस मांग को ख़ारिज करते हुए कहा कि जब राज्य यह कहते हैं तो यह माना जाना चाहिए कि उन्होंने इससे अधिक उम्र के वर्गों को वैक्सीन लगा दिया होगा. जबकि आंकड़े कुछ और ही कह रहे हैं. इसके बाद उन्होंने सभी राज्यों के वैक्सीनेशन की ताज़ा स्थिति के आंकड़े साझा किए जिसके मुताबिक महाराष्ट्र के 86 फ़ीसद स्वास्थ्यकर्मियों को ही अभी वैक्सीन का पहला डोज़ दिया जा सका है. 

प्रतिदिन औसतन इतने लाख से अधिक लोगों को टीका लगाकर भारत विश्व में शीर्ष स्थान पर

प्रतिदिन औसतन इतने लाख से अधिक लोगों को टीका लगाकर भारत विश्व में शीर्ष स्थान पर

नईदिल्ली।  वैश्विक महामारी के विरुद्ध सामूहिक और सहयोगपूर्ण लड़ाई लड़ते हुए भारत ने इस वर्ष 16 जनवरी को शुरू किए गए विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान में महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। देश में अब कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत 9 करोड़ से ज्‍यादा लोगों को टीका लगाया जा चुका है। आज सुबह 7 बजे तक मिली प्रारंभिक सूचना के अनुसार 13,77,304 सत्रों में 9,01,98,673 लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। इनमें 89,68,151 स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों (एचसीडब्‍ल्‍यू) को टीके की पहली खुराक दी गई है और 54,18,084 स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों को दूसरी खुराक दी गई है। इसके अलावा 97,67,538 अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं (एफएलडब्‍ल्‍यू) को पहली खुराक और 44,11,609 अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को दूसरी खुराक दी गई है। इसके साथ ही 60 वर्ष से अधिक उम्र के 3,63,32,851 लाभार्थियों को पहली खुराक और 11,39,291 लाभार्थियों को दूसरी खुराक दी गई है। 45 से 60 साल उम्र के 2,36,94,487 लाभार्थियों को पहली खुराक और 4,66,622 लाभार्थियों को दूसरी खुराक दी गई है। देश में अब तक लगाई गई टीके की कुल खुराक में 60 प्रतिशत 8 राज्यो में लगाई गई हैं पिछले 24 घंटों में टीके की 30 लाख से ज्‍यादा खुराकें दी गईं। टीकाकरण अभियान के 82वें दिन (7 अप्रैल, 2021) को 29,79,292 टीके लगाए गए। इनमें से 26,90,031 लाभार्थियों को 38,760 सत्रों में पहला टीका और 2,89,261 लाभार्थियों को दूसरा टीका लगाया गया। भारत में नए मामलों की संख्‍या बढ़ रही है। पिछले 24 घंटों के दौरान 1,26,789 नए मामले सामने आए। महाराष्‍ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्‍य प्रदेश, तमिलनाडु. गुजरात, केरल और पंजाब इन दस राज्‍यों में कोविड के प्रतिदिन सामने आने वाले मामलों में वृद्धि हुई है। कुल नए मामलों का 84.21 प्रतिशत मामले इन्‍हीं 10 राज्‍यों में दर्ज हुए हैं। महाराष्‍ट्र में सबसे ज्‍यादा 59,907 नए मामले प्रतिदिन दर्ज किए गए। इसके बाद, छत्तीसगढ़ में 10,310 और कर्नाटक में 6,976 नए मामले दर्ज किए गए।

 

 

दुर्लभ बीमारियों के लिए राष्ट्रीय नीति 2021 के संबंध में मंत्रालय ने कहा कि...

दुर्लभ बीमारियों के लिए राष्ट्रीय नीति 2021 के संबंध में मंत्रालय ने कहा कि...

नईदिल्ली। यह हाल ही में समाचार पत्र में प्रकाशित लेख के संबंध में है जिसमें कहा गया है कि दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित रोगों के रोगियों को सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज मिलेगा। इस संबंध में यह स्पष्ट करना है कि हाल ही में अधिसूचित "दुर्लभ बीमारियों के लिए राष्ट्रीय नीति 2021" में राष्ट्रीय आरोग्य निधि योजना के तहत 20 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान है, उन दुर्लभ बीमारियों के लिए जिन्हें एक बार उपचार (दुर्लभ बीमारी नीति में समूह 1 के तहत सूचीबद्ध रोग) की आवश्यकता होती है। इस वित्तीय सहायता के लिए लाभार्थी को बीपीएल परिवार से होना जरूरी नहीं है। यानी बीपीएल के बाहर का व्यक्ति भी इसका लाभ उठा सकता है लेकिन यह लाभ लगभग 40% आबादी को दिया जाएगा, जो आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) के तहत पात्र हैं। दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए यह वित्तीय सहायता राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) योजना के तहत प्रस्तावित है, न कि आयुष्मान भारत पीएमजेएवाई के तहत। इसके अलावा, रेयर डिजीज पॉलिसी में एक क्राउडफंडिंग तंत्र की भी परिकल्पना की गई है जिसमें कॉरपोरेट्स और आम लोगों को दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए एक मजबूत आईटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से वित्तीय सहायता देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। एकत्रित की गई धनराशि का उपयोग सेंटर ऑफ एक्सेलेंस द्वार सभी तीन श्रेणियों की दुर्लभ बीमारियों के उपचार के लिए किया जाएगा और शेष वित्तीय संसाधनों का उपयोग अनुसंधान के लिए भी किया जा सकता है।  

सिर्फ ताली बजाने से ठीक हो जाती हैं 6 बीमारियां!

सिर्फ ताली बजाने से ठीक हो जाती हैं 6 बीमारियां!

खुशी के हर मौके पर ताली बजाना ओम बात है। फिर चाहे किसी का उत्साह बढ़ाने की बात हो, धार्मिक स्तुति में, किसी के अभिवादन के लिए या फिर किसी को प्रोत्साहन देने जैसे कामों के लिए सबसे आसान और प्रभावी तरीका अगर कोई है, तो वो है ताली बजाना। दोस्तों आपको जानकर हैरानी होगी कि ताली बजाने से सिर्फ खुशी जाहिर नहीं होती, बल्कि ताली बजाने के कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं....
1. कॉलेस्ट्रोल का स्तर कम होता है
दोस्तों आज के समय में कोलेस्ट्रॉल की समस्या से ज्यादातर लोग परेशान होते हैं। इसलिए ये जानकारी सबके लिए आवश्यक है, कि ताली बजाने से रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है। साथ हीं रक्त संचार भी काफी बेहतर होता है।
2. ब्लड प्रेशर नियंत्रित
दोस्तों ताली बजाने से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में काफी सहायता मिलती है। इसलिए जितना हो ताली बजाते रहें।
3. मधुमेह, अस्थमा इत्यादि में लाभदायक
कम से कम 15 सौ बार ताली बजाने से मधुमेह, अस्थमा, ह्रदय रोग और गठिया इत्यादि बीमारियों में काफी राहत मिलता है।
4. एक्यूप्रेशर का लाभ
हमारे शरीर में कुल 340 प्रेशर बिंदु हैं. जिनमें 29 बिंदु हमारे हथेली में होते हैं। एक्यूप्रेशर थेरेपी के मुताबिक सिर्फ ताली बजाने मात्र से शरीर के सभी अंगो को स्वस्थ रख सकते हैं।
5. ऑक्सीजन का फ्लो सही रहता है
ताली बजाने से ऑक्सीजन का फ्लो शरीर में सही तरीके से काम करता है. जिससे फेफड़ों में ऑक्सीजन ठीक तरीके से पहुंच पाता है, और शरीर स्वस्थ रहता है।
6. तीन मर्ज का इलाज
हर रोज आधा घंटा ताली बजाने से सर्दी-जुकाम, बालों का झडऩा और शारीरिक दर्द जैसी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।

 

15 मिनट में कोरोना वायरस का पता बतानेवाली नई किट का विकास, जानिए मशीन की और क्या है खासियत

15 मिनट में कोरोना वायरस का पता बतानेवाली नई किट का विकास, जानिए मशीन की और क्या है खासियत

वैज्ञानिकों ने कोविड-19 की 15 मिनट में पहचान करनेवाली लैपटॉप के आकार की नई मशीन बनाई है. दावा है कि पोर्टेबल टेस्ट से अत्यंत संक्रामक वैरिएन्ट का भी पता चल सकता है. कोरोना वायरस की जांच करनेवाली मशीन को साल्क इंस्टीट्यूट फोर बायोलोजिकल स्टडीज, कैलिफोर्निया ने विकसित किया है.

लैपटॉप के आकार की मशीन बताएगी कोरोना के नतीजे

निर्वाणा (NIRVANA) टेस्ट एक ही समय में इन्फ्लुएंजा जैसे मिलते-जुलते लक्षणों वाले अन्य वायरस का भी खुलासा कर सकता है. मशीन वायरस के म्यूटेशन को स्पष्ट करने के लिए मात्र तीन घंटे में जेनेटिक सिक्वेंसिंग का भी काम कर सकती है. इससे जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों को निर्धारित करने में मदद मिल सकती है कि वायरस कितनी तेजी से फैल रहा है.

प्रेस रिलीज में कहा गया, "ये वायरस का सुराग लगानेवाला और सर्विलांस का तरीका है जिसे महंगे ढांचे की आवश्यकता नहीं होगी. हम एक ही पोर्टेबल टेस्ट से उसी काम को पूरा कर सकते हैं जिसको करने के लिए दो या तीन विभिन्न टेस्ट और मशीनों का इस्तेमाल होता है." वर्तमान में कोविड-19 मरीजों की टेस्टिंग के लिए पोलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) टेस्ट की प्रक्रिया शामिल होती है. पीसीआर टेस्ट को उच्च मानक का टेस्ट समझा जाता है जो वायरस के जेनेटिक मैटेरियल की तलाश करता है.


पोर्टेबल टेस्ट का स्कूल, एयरपोर्ट पर हो सकेगा इस्तेमाल

वैज्ञानिकों का कहना है कि टेस्ट से मात्र 15 मिनट में निगेटिव या पॉजिटिव की रिपोर्ट का खुलासा हो जाएगा. मशीन की टेस्टिंग के नतीजे को मेड पत्रिका में प्रकाशित किया गया है. सऊदी अरब में किंग अब्दुल्लाह साइंस एंड टेक्नोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर मो ली ने कहा "हमें जल्द ही एहसास हो गया है कि हम इस तकनीक का इस्तेमाल न सिर्फ सार्स-कोव-2 का पता लगाने में कर सकते हैं बल्कि एक ही वक्त में अन्य वायरस की भी पहचान कर सकते हैं."

कोविड-19 की तरह एन्फ्लूएंजा की की जांच करने के लिए ली और इजपिसुआ बेलमोन्टे ने निर्वाणा का डिजाइन तैयार किया है. ली और इजपिसुआ बेलमोन्टे ने कहा है कि मशीन एक वक्त में 96 सैंपल की जांच कर सकती है. उसके छोटे आकार के कारण उसका इस्तेमाल वायरस का पता लगाने में स्कूल या एयरपोर्ट पर किया जा सकता है. इजपिसुआ बेलमोन्टे ने कहा, "महामारी ने दो महत्वपूर्ण सबक सिखाया है: पहला, जल्दी और बड़े पैमाने पर जांच और दूसरा, अपने वैरिएन्ट्स को जानें. हमारी निर्वाणा पद्धति वर्तमान महामारी की इन दो चुनौतियों के लिए आशाजनक समाधान पेश करती है." 

Covid-19 : घर में मौजूद इन 10 औषधीय चीजों से सुधरेगा इम्यून सिस्टम

Covid-19 : घर में मौजूद इन 10 औषधीय चीजों से सुधरेगा इम्यून सिस्टम

कोरोनावायरस से बचने के लिए तमाम तरह के उपाय आजमाए जा रहे हैं। लेकिन यदि आप अंदर से ही मजबूत होंगे तो आप पर इस संक्रमण का कोई असर नहीं होगा। 'अंदर से मजबूत' से तात्पर्य है कि यदि आपका इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है तो आप किसी भी तरह के संक्रमण को मात देने के लिए सक्षम हैं। इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ भी सलाह दे रहे हैं।
अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर किन चीजों से इम्यून सिस्टम को मजबूत किया जा सकता है? तो हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी औषधीय चीजों के बारे में, जो आपके घर में ही मौजूद हैं और इनके प्रयोग से आप खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। आइए जानते हैं-

दालचीनी

मसालों में मौजूद दालचीनी का इस्तेमाल आपने खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए तो कई बार किया होगा। दालचीनी खाने के स्वाद को बढ़ाने के साथ ही कई स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने का काम भी करती है। दालचीनी का इस्तेमाल इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए भी किया जा सकता है। दालचीनी में कई एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो आपकी सेहत के लिए बहुत लाभकारी हो सकते हैं। दालचीनी का इस्तेमाल काढ़ा, चाय या पानी बनाने में किया जा सकता है।
अदरक

अदरक का इस्तेमाल आप अपने रसोई में खूब करते होंगे। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीइंफ्लेमेट्री गुण पाए जाते हैं, जो कई बीमारियों से छुटकारा दिलाने में कारगर माने जाते हैं, क्योंकि यह आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का काम करता है। यदि आपको सर्दी है या खांसी हो रही है तो अदरक का एक छोटा-सा टुकड़ा आपको इन समस्याओं से आराम दिलाने के लिए काफी है। इसका सेवन आप नियमित रूप से कर सकते हैं। आप चाहे तो अदरक वाली चाय व अदरक को पानी में उबालकर काढ़े के रूप में या सादा अदरक का टुकड़ा भी खा सकते हैं।
लौंग

लौंग इम्युनिटी बढ़ाने का एक अच्छा स्रोत है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। यह सेहत से जुड़ीं कई समस्याओं को दूर करने में कारगर साबित होती है। आपने अधिकतर सुना होगा कि यदि खांसी हो रही है तो लौंग का सेवन करें, इससे खांसी-सर्दी ठीक हो जाएगी। जी हां, लौग सर्दी-खांसी से छुटकारा दिलाने के लिए कारगर है।

आंवला

आंवला विटामिन-सी का एक बेहतरीन स्रोत है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का काम करता है। जहां ये सौंदर्य लाभ के लिए जाना जाता है, वहीं इसके स्वास्थ्य लाभ भी बेमिसाल हैं।
अश्वगंधा

आयुर्वेदिक औषधि अश्वगंधा कई रोगों से छुटकारा दिलाने के लिए जानी जाती है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती ही है।

लहसुन

घर की रसोई में मौजूद लहसुन खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए प्रयोग में लाई जाती है लेकिन इसके स्वास्थ्य लाभ भी कई हैं। यदि नियमित सुबह इसका सेवन खाली पेट किया जाए तो यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को तो बढ़ाती ही है, साथ ही अन्य बीमारियों से भी दूर रखती है।
तुलसी

तुलसी के फायदे अनगिनत हैं। यह आपको कई स्वास्थ्य लाभ देती है। सुबह खाली पेट तुलसी के सेवन से कई लाभ होते हैं। तुलसी सर्दी-जुकाम, बुखार, सूखा रोग, निमोनिया व कब्ज जैसी समस्याओं के लिए भी फायदेमंद हो सकती है।

हल्दी वाला दूध

हल्दी वाले दूध के नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं से राहत दिलाने के लिए हल्दी वाला दूध बहुत कारगर सिद्ध होता है। यदि नियमित सोने से पहले इसका सेवन करके सोया जाए तो यह आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए बहुत फायदेमंद है।
ग्रीन टी

ग्रीन टी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। यदि इसका नियमित सेवन किया जाए तो रोगों से लड़ने की क्षमता मजबूत होती है।

गिलोय

गिलोय इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर माना जाता है। इसके सेवन से शरीर में संक्रमण से लड़ने की क्षमता मजबूत होती है।

 

Corona Vaccination: क्या आप भी वैक्सीन लगवाना चाहते है तो पंजीयन के लिए फॉलो करे ये स्टेप

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टीकाकरण के लिए http://cowin.gov.in के जरिये एडवांस अप्वॉइंटमेंट लिया जा सकता है और वैक्सीनेशन के लिए ऑन-साइट रजिस्ट्रेशन भी कराया जा सकता है. देश में अबतक वैक्सीन की छह करोड़ 51 लाख 17 हजार 896 डोज दी गई हैं.


टीकाकरण के लिए पंजीकरण या रजिस्ट्रेशन कैसे कराएं

1-लाभार्थी COWIN पोर्टल या आरोग्य सेतु ऐप पर रजिस्ट्रेशन या एप्वाइंटमेंट बुक करा सकते हैं

2- केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की वेबसाइट पर भी नागरिकों को रजिस्ट्रेशन और एप्वाइंटमेंट के लिए यूजर गाइड दी गई है.
3- Co-WIN पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और Send OTP आइकन पर क्लिक करें. फिर, फोन पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वैरिफाई बटन पर क्लिक करें.
4- Aarogya Setu रजिस्ट्रेशन कराने के लिए, CoWIN टैब पर जाएं, टीकाकरण टैब पर टैप करें और Proceed पर क्लिक करें. रजिस्ट्रेशन फॉर्म में डिटेल भरें. रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद आपको एक कंफर्म मैसेज मिलेगा.
5- एक व्यक्ति जिसने रजिस्ट्रेशन कराया है वह एक मोबाइल नंबर पर चार लोगों को लिंक कर सकता है.
6- लाभार्थी दूसरी खुराक के लिए पोर्टल या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से एप्वाइंटमेंट को रिशेड्यूल या रद्द कर सकते हैं. हर टीकाकरण का एक डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा रहा है.
7- यदि आप रिशेड्यूल करना चाहते हैं, तो आप फिर से अपने मोबाइल नंबर से लॉग इन कर सकते हैं, ओटीपी दर्ज कर सकते हैं और 'एक्शन' कॉलम के नीचे एडिट आइकन पर क्लिक करके बदलाव कर सकते हैं.
8- वैक्सीनेशन प्रोसेस पूरा हो जाने के बाद, एक डिजिटल प्रमाण पत्र पोर्टल या ऐप पर भेजा जाएगा. इसे डाउनलोड किया जा सकता है.

 

भारत के स्वास्थ्य सेवा उद्योग के 2022 में इतने बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद

भारत के स्वास्थ्य सेवा उद्योग के 2022 में इतने बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद

नई दिल्ली,  भारत के स्वास्थ्य सेवा उद्योग के 2022 में 372 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। देश का स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ा है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर लगभग 22% है। नीति आयोग ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के अवसरों की सीमा को रेखांकित करते हुए एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें अस्पताल, चिकित्सा उपकरण, स्वास्थ्य बीमा, टेलीमेडिसिन, गृह स्वास्थ्य इत्यादि शामिल हैं। हेल्थकेयर राजस्व और रोजगार दोनों के मामले में भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक बन गया है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के अनुमान के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र 2017-22 के बीच भारत में 27 लाख अतिरिक्त नौकरियां पैदा कर सकता है। इस रिपोर्ट को नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल, सीईओ अमिताभ कांत और अतिरिक्त सचिव डॉ. राकेश सरवाल ने जारी किया।

नीति आयोग
यह भारत में एक पॉलिसी थिंक टैंक है जिसे 2015 में योजना आयोग के स्थान पर स्थापित किया गया था। सस निकाय की स्थापना सहकारी संघवाद के साथ सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से की गई थी। प्रधानमंत्री नीति आयोग के अध्यक्ष होते हैं।

नीति आयोग के सदस्य
प्रधानमंत्री नीति आयोग के अध्यक्ष होते हैं।
इसमें एक गवर्निंग काउंसिल भी शामिल है जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नर शामिल हैं।हालांकि, इसमें दिल्ली और पुदुचेरी शामिल नहीं है।
इसमें क्षेत्रीय परिषदें भी हैं जो राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों से बनी हैं। 

नींद न आने की समस्या झेल रहे व्यक्तियों में कोरोना का खतरा ज्यादा

नींद न आने की समस्या झेल रहे व्यक्तियों में कोरोना का खतरा ज्यादा

नींद न आने की समस्या झेल रहे व्यक्तियों में कोरोना का खतरा ज्यादा हालिया अध्ययन में सामने आया है कि अनिद्रा के शिकार लोगों में कोविड-19 से संक्रमित होने का खतरा अधिक होता है। लेकिन अगर इन लोगों में हर अतिरिक्त घंटे की नींद के साथ संक्रमण का जोखिम करीब 12 फीसदी तक कम हो सकता है। शोधकर्ताओं की टीम कहना है, कि अनिद्रा की बीमारी हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है, जिससे कि कोविड-19 जैसी बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
हालिया अध्ययन में सामने आया है कि अनिद्रा के शिकार लोगों में कोविड-19 से संक्रमित होने का खतरा अधिक होता है। लेकिन अगर इन लोगों में हर अतिरिक्त घंटे की नींद के साथ संक्रमण का जोखिम करीब 12 फीसदी तक कम हो सकता है। शोधकर्ताओं की टीम कहना है, कि अनिद्रा की बीमारी हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है, जिससे कि कोविड-19 जैसी बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
शोधकर्ताओं ने 2,884 स्वास्थ्य कर्मचारियों के एक सर्वेक्षण के परिणामों का विश्लेषण करने के बाद ये निष्कर्ष जारी किए हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि जिन लोगों को अनिद्रा की समस्या होती है, उन्हें कोरोना संक्रमण की अधिक संभावना रहती है। इसमें शोधकर्ताओं ने लोगों को कोरोना काल में गुणत्तापूर्ण नींद लेने के लिए सलाह दी है। इसके साथ ही शारीरिक गतिविधियों को जरूरी बताया।
 

गर्मियों में बेहद गुणकारी हैं खीरे का पानी, ऐसे करें इस्तेमाल...

गर्मियों में बेहद गुणकारी हैं खीरे का पानी, ऐसे करें इस्तेमाल...

खीरा सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है उसी तरह खीरे का पानी हमारे लिए अच्छा होता है। अगर आप इसका सेवन करेंगे तो कई रोगों से बच सकते हैं। लेकिन खीरे का पानी इससे भी ज्यादा लाभकारी होता हैं। अक्सर गर्मियों में हर वक्त गला सूखता है और बार-बार पानी पीने का मन होता है लेकिन कई बार सादा पानी पीने का मन नहीं होता। ऐसे में आप खीरे का पानी पीजिए जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत लाभकारी होता है।
डिहाइड्रेशन:
खीरे की तासीर ठंडी होती है जिससे ये ड्रिंक गर्मियों में शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाएगी। इसके अलावा खीरे का पानी पीने से शरीर को और भी कई तरह के लाभ मिलते हैं। चलिए जानते हैं इसके लाभ के बारे में..
-खीरे का पानी में विटामिन सी और बीटा कैरोटिन एंटी-ऑक्सीडैंट गुण पाए जाते हैं जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालते हैं। हर रोज खीरे के पानी का सेवन करने से पेट साफ रहता है।
मांसपेशियां मजबूत:
आपको बता दें कि खीरे के पानी का सेवन करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। खीरे के पानी में मौजूद सिलिका शरीर के संयोजी ऊतकों को स्वस्थ रखता है। एक्सरसाइज करने के बाद इसका सेवन करने से शरीर को काफी लाभ होता है।
मुंह से दुर्गंध दूर:
कई बार आपने महसूस किया होगा कि ब्रश करने के बावजूद भी कई बार मुंह से दुर्गंध आती है । ऐसा सिर्फ पेट में गर्मी होने की वजह से होता है। ऐसे में खीरे का पानी पीने से पेट की गर्मी कम होती है और इससे मुंह के तलवे पर जमा होने वाले जीवाणु भी नष्ट होते हैं जिससे सांसों से बदबू नहीं आती।
वजन कम:
अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपको मीठा सोडा, स्पोर्ट्स ड्रिंक और जूस के साथ खीरे के पानी का सेवन भी करना चाहिए। इससे आपको और भी अधिक कैलोरी कम करने में मदद मिल सकती है।
चेहरे के दाग-धब्बे:
खीरे के पानी का सेवन करने से चेहरे के दाग-धब्बे और मुंहासों की परेशानी दूर होती है। इसमें मौजूद सिलिका चेहरे की रंगत निखारने में भी सहायता करता है।
ऐसे बनाएं खीरे का पानी:
सर्व प्रथम खीरे को अच्छी तरह धो लीजिए और इसे आधा छील लीजिए। अब खीरे की स्लाइस कीजिए और इन्हें आधा जग पानी में डाल दीजिए। कुछ देर इस जग को फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दीजिए और फिर इसे पीना चाहिए। इस पानी को दो दिन से अधिक यूज नहीं करना।
 

भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) की स्थापना की, क्या है इसकी उपयोगिता

भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) की स्थापना की, क्या है इसकी उपयोगिता

सरकार ने भारत भर में SARS-CoV-2 की जीनोमिक निगरानी के लिए “भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG)” की स्थापना की है। इसकी घोषणा केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में की। मंत्री ने यह भी कहा कि, इस कंसोर्टियम में दस क्षेत्रीय जीनोम अनुक्रमण प्रयोगशालाएं (RGSL) अर्थात् ILS भुवनेश्वर, NIBMG कल्याणी, NCCS पुणे, ICMR-NIV पुणे, CDFD हैदराबाद, CSIR-CCMB हैदराबाद, NIMHANS बेंगलुरु, InStem / NCBS बेंगलुरु, CSIR-IGIB दिल्ली, और NCDC दिल्ली शामिल हैं।

Regional Genome Sequencing Laboratories (RGSL)
देश भर में RGSL वर्तमान में अपने आंतरिक कोष और संसाधनों का उपयोग कंसोर्टियम की गतिविधियों को करने के लिए कर रहे हैं। फंड को मंजूरी देने का प्रस्ताव जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ वित्तीय मूल्यांकन प्रक्रिया के अधीन है।

INSACOG क्या है?
INSACOG को यूके वेरिएंट के उद्भव की पृष्ठभूमि में लॉन्च किया गया था। INSACOG का उद्देश्य वायरस निगरानी, ​​लक्षण वर्णन और जीनोम अनुक्रमण में तेजी लाना है।
यह BT-NIBMG, DBT-ILS, ICMR-NIV, DBT-NCCS, CSIR-CCMB, DBT-CDFD, DBT-InSTEM, NIMHANS, CSIR-IGIB और NCDC नामक दस प्रयोगशालाओं का एक संघ है।इन प्रयोगशालाओं को अब INSACOG लैब्स कहा जाता है।
INSACOG में अंतर-मंत्रालयीय संचालन समिति होगी। यहसमिति कंसोर्टियम को मार्गदर्शन और निगरानी प्रदान करेगी।
भविष्य में, INSACOG वैक्सीन, डायग्नोस्टिक्स और संभावित चिकित्सा विकसित करने में मदद करेगा।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग, सीएसआईआर और आईसीएमआर द्वारा INSACOG के लिए एक रोड मैप तैयार किया गया है।
 

अगर आप भी पास रखकर सोते हैं स्मार्टफोन तो हो जाएं सावधान

अगर आप भी पास रखकर सोते हैं स्मार्टफोन तो हो जाएं सावधान

स्मार्टफोन से एक पल की भी दूरी बर्दाश्त नहीं होती? सोते समय स्मार्टफोन को सिरहाने रखने की आदत है? अगर हां तो संभल जाइए। ब्रिटेन की एक्जिटर सहित कई यूनिवर्सिटी के अध्ययन में मोबाइल से निकलने वाली विकिरणों को कैंसर से लेकर नपुंसकता तक के खतरे से जोड़ा गया है।
कैंसर का डर
अंतरराष्ट्रीय कैंसर रिसर्च एजेंसी ने मोबाइल फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरणों को संभावित कार्सिनोजन (कैंसरकारी तत्वों) की श्रेणी में रखा है। उसने चेताया है कि स्मार्टफोन का अत्यधिक इस्तेमाल मस्तिष्क और कान में ट्यूमर पनपने की वजह बन सकता है, जिसके आगे चलकर कैंसर का भी रूप अख्तियार करने की आशंका रहती है।
संतान सुख पर संकट
2014 में प्रकाशित ब्रिटेन के एक्जिटर विश्वविद्यालय के अध्ययन में मोबाइल फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरणों का नपुंसकता से सीधे संबंध पाया गया था। शोधकर्ताओं ने आगार किया था कि पैंट की जेब में स्मार्टफोन रखने से पुरुषों में न सिर्फ शुक्राणुओं का उत्पादन घटता है, बल्कि अंडाणुओं को निषेचित करने की उसकी गति भी धीमी पड़ जाती है।
नींद में खलल डालती है नीली रोशनी
2017 में इजरायल की हाइफा यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए एक अध्ययन में सोने से आधे घंटे पहले से ही स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर देने की सलाह दी गई थी। शोधकर्ताओं का कहना था कि स्मार्टफोन, कंप्यूटर और टीवी की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी 'स्लीप हार्मोनÓ मेलाटोनिन का उत्पादन बाधित करती है। इससे व्यक्ति को न सिर्फ सोने में दिक्कत पेश आती है, बल्कि सुबह उठने पर थकान, कमजोरी और भारीपन की शिकायत भी सताती है।
 

सेल्फी खींचने का शौक आपको डाल सकता है बड़े खतरे में!

सेल्फी खींचने का शौक आपको डाल सकता है बड़े खतरे में!

अगर आपके घर में भी किसी को ज़रूरत से ज्यादा सेल्फी लेने का शौक है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि हो सकता है। अब आपको सावधान होने की जरूरत है, क्योंकि आपका सेल्फी खींचने का शौक आपको बड़े खतरे में डाल सकता है.....
डॉक्टर्स के मुताबिक, सेल्फी का असर स्किन पर इतना ज्यादा पड़ता है कि जिस साइड से आप अक्सर सेल्फी खींचती है, उस साइड की स्किन दूसरी साइड की स्किन से ज्यादा ड्राई हो जाती है। हाल ही में आए एक सर्वे के मुताबिक, मोबाइल फोन से पडऩे वाली लाइट और रेडिएशन स्किन को धूप की किरणों से 3 गुना ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।
सेल्फी लेने की यह आदत अगर लत में बदल जाए, तो आप सेल्फाइटिस बीमारी की चपेट में आ सकती हैं। इस बीमारी से पीडि़त महिला के दिमाग में हमेशा यह भूत सवार रहता है कि किस जगह सेल्फी लें और कितनी जल्दी उसे सोशल मीडिया पर डालें। धीरे-धीरे यह बीमारी इतनी बढ़ जाती है कि यह लत बन जाती है।
डॉक्टर्स के मुताबिक, लगातार अपनी फोटो लेते रहने की लत 'सेल्फी एल्बो’ की वजह बन सकती है। यह एक नई तरह की बीमारी है, जिसमें कुहनी का दर्द सताने लगता है।
स्किन स्पेशलिस्ट के मुताबिक, चेहरे पर लगातार स्मार्टफोन की लाइट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से स्किन बूढ़ी होने लगती है जिससे जल्दी रिंकल्स पडऩे लगते हैं। मोबाइल फोन की तरंगें सीधे डीएनए को नुकसान पहुंचाती है, जिससे स्किन की नैचरल रिपेयर क्षमता दिन प्रतिदिन कम होती जाती है। जिससे आपकी स्किन पर कोई पिंपल्स या दाग धब्बे हो जाएं, तो उन्हें ठीक होने में महीनों लग जाते हैं।
दरअसल, फोन से निकलने वाली ये तरंगे अलग तरह की होती हैं, जिसमें सनस्क्रीन भी कोई काम नहीं करता। सनस्क्रीन आपकी त्वचा की बाहरी लेयर को धूप से बचाता है, जबकि मोबाइल की तरंगे स्किन के अंदर की लेयर तक को प्रभावित करती है, जिससे सनस्क्रीन भी इस नुकसान से आपको नहीं उभार पाता।
 

स्तन कैंसर के निदान के लिए वैज्ञानिकों ने डीप लर्निंग (डीएल) नेटवर्क पर आधारित एक वर्गीकरण पद्धति विकसित की  जानिए क्या तकनीक

स्तन कैंसर के निदान के लिए वैज्ञानिकों ने डीप लर्निंग (डीएल) नेटवर्क पर आधारित एक वर्गीकरण पद्धति विकसित की जानिए क्या तकनीक

स्तन कैंसर के निदान के लिए हार्मोन की स्थिति का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिकों ने डीप लर्निंग (डीएल) नेटवर्क पर आधारित एक वर्गीकरण पद्धति विकसित की है। यह पद्धति शरीर में स्तन कैंसर के बढ़ने का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाने के लिए एस्ट्रोजन रिसेप्टर की स्थिति का निर्धारण करने के लिए अब तक उपयोग में लाए जा रहे तरीकों का एक बेहतरीन विकल्प है जो पूरी तरह से स्वचालित प्रणाली पर आधारित है। स्तन कैंसर सबसे खतरनाक कैंसर है। भारत की ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कैंसर से पीड़ित महिलाओं में से 14 प्रतिशत महिलाएं स्तन कैंसर से ग्रसित होती हैं। देश में स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं के बचने की दर हालांकि 60 प्रतिशत बताई गई है लेकिन इनमें से 80 फीसदी से ज्यादा महिलाएं 60 से कम उम्र वाली हैं। यदि स्तन कैंसर का पता प्रारंभिक अवस्था में लग जाए तो इससे बचाव के उपाय समय रहते किए जा सकते हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान “विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी उच्च अध्ययन संस्थान” (आईएएसएसटी) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने स्तन कैंसर का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाने के लिए इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री (आईएचसी) नमूने की मदद से एस्ट्रोजन या प्रोजेस्टेरोन की स्थिति के अध्ययन के वास्ते एक नई किस्म की डीप लर्निंग (डीएल) पद्धति विकसित की है। इस नई पद्धति की खोज डाक्टर लिपी बी महंत और उनकी टीम ने कैंसर के बारे में गहन अध्ययन करने वाले एक प्रमुख संस्थान बी बोरुआ कैंसर संस्थान के चिकित्सकों के सहयोग से की है। एक व्यावहारिक व्यावसायिक सॉफ्टवेयर के रूप में इसके इस्तेमाल की बड़ी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस अध्ययन को एक जानी मानी पत्रिका "एप्लाइड सॉफ्ट कम्प्यूटिंग" में प्रकाशित किया जा रहा है। स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए सबसे प्रचलित विधि बायोप्सी है। रोगी के शरीर से लिए गए बायोप्सी नमूने का माइक्रोस्कोप के जरिए सूक्ष्म परीक्षण कर कैंसर का पता लगाया जाता है। कैंसर का पता लगाने के लिए किए जाने वाले परीक्षण में आईएचसी मार्कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका उपयोग एक रोगसूचक मार्कर के रूप में किया जाता है। इसमें कैंसर के मुख्य केन्द्र या न्यूकलिक की पहचान के लिए विशेष प्रकार के रंग का इस्तेमाल किया जाता है। इस रंग की तीव्रता अलग अलग होती है और इसी के आधार पर रोग की गंभीरता को 0 से 3 तक की श्रेणी में परिभाषित किया जाता है। रंगो की तीव्रता के आधार पर गणना करने की यह प्रणाली आलरेड और एच स्कोर कहलाती है। नैदानिक परीक्षणों के दौरान इनके आधार पर ही एस्ट्रोजेन रिसेप्टर और प्रोजेस्टेरोन रिसेप्टर की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया जाता है। इस प्रतिक्रिया के आधार पर ही शरीर में कैंसर के फैलाव की संभावनाओं तथा भविष्य में इसके दोबारा होने के खतरे को भांपा जाता है। इसने वैज्ञानिकों की टीम को उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकियों की मदद से इसके प्रबंधन के लिए और प्रभावी समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। टीम ने एक एल्गोरिथम विकसित किया जो यह बताने में मदद करता है कि शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं की सतह पर हार्मोन रिसेप्टर्स हैं या नहीं। इस अध्ययन ने स्तन ऊतकों की तस्वीरों में से कैंसर के नाभिक क्षेत्र को पहचान कर उसे आसानी से अलग करने की एक नई विधि खोज निकाली। यह प्रक्रिया कैंसर का पता लगाने में मशीन लर्निंग (एमएल)मॉडल के तीनों निष्कर्षों को एकीकृत करती है।

 

परीक्षाओं के दौरान याद्दाश्त के लिए बच्चों को पिलाने चाहिए ये 5 हेल्दी ड्रिंक्स!

परीक्षाओं के दौरान याद्दाश्त के लिए बच्चों को पिलाने चाहिए ये 5 हेल्दी ड्रिंक्स!

बच्चों को समुचित पोषण न मिले तो यह उनमें ऊर्जा की कमी, कमजोर याद्दाश्त और आलस जैसी समस्याओं के हमले करवा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों के खान-पान और उनमें पोषण की मात्रा पर विशेष ध्यान दिया जाए। आज हम आपको पांच ऐसे हेल्दी ड्रिंक्स के बारे में बताने वाले हैं जो आपके बच्चों के दिमाग और सेहत को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। ये उनकी परीक्षाओं के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में मददगार हो सकते हैं....
1. बादाम का दूध :- बादाम दूध याद्दाश्त बढ़ाने का सबसे कारगर नुस्खा माना जाता है। बादाम में पाया जाने वाला प्रोटीन संज्ञानात्मक क्षमता को बढ़ाने में मददगार होता है। उबले दूध में कुछ बादाम पीसकर डाल लें और हर रोज इसे बच्चे को पीने के लिए दें।
2. ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी :- ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी में पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स दिमाग की कोशिकाओं को क्षततिग्रस्त होने से बचाते हैं। इसलिए कुछ ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी को पीसकर एक कप दही और दूध के साथ मिलाकर मिक्सर में पीस लें। अब इसे अपने बच्चे को पीने के लिए दें।
3. डार्क चॉकलेट शेक :- अगर आप अपने बच्चे की एकाग्रता और उसके समस्याओं के सुलझाने का कौशल बढ़ाना चाहते हैं तो उसे हर रोज डार्क चॉकलेट शेक पीने के लिए दें। शेक में इस्तेमाल होने वाला दूध दिमाग के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ऐसे में परीक्षाओं के दौरान यह बच्चों के लिए लाभदेह पेय हो सकता है।
4. चुकंदर का जूस :- चुकंदर का जूस पोषक तत्वों का भंडार होता है। इसे आप बच्चों की परीक्षाओं के दौरान सेवन करने के लिए दे सकते हैं। इसमें विटामिन ए, के, सी, बीटा कैरोटिन, एंटी-ऑक्सीडेंट्स, फोलेट और पॉलीफेनॉल्स काफी मात्रा में पाए जाते हैं जो आपके बच्चों के दिमाग पर बेहतरीन असर डालते हैं।
5. गुड़ की चाय :- गुड़ एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य है। परीक्षाओं के दौरान बच्चों को गुड़ की चाय बनाकर पिलाया जा सकता है। यह उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार होता है।
 

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