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अस्थमा के जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं ये एसेंशियल ऑयल्स...

अस्थमा के जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं ये एसेंशियल ऑयल्स...

अस्थमा की बीमारी शरीर के वायुमार्ग की अंदरूनी दीवारों में सूजन आने और सिकुडऩे के कारण होती है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है। इस बीमारी से बचने और इसके जोखिमों को कम करने में कुछ एसेंशियल ऑयल्स काफी मदद कर सकते हैं। आइए आपको कुछ ऐसे एसेंशियल ऑयल्स के बारे में बताते हैं, जिनका इस्तेमाल करना अस्थमा के रोगियों के लिए लाभदायक हो सकता है।


लैवेंडर एसेंशियल ऑयल

लैवेंडर ऑयल में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण अस्थमा से प्रभावित वायुमार्ग को आराम देकर बीमारी के जोखिमों को कम करने में सहायक हैं। लाभ के लिए लैवेंडर ऑयल की कुछ बूंदें डिफ्यूजर में डालें और इसे चालू करके अपने बिस्तर के पास रखें। इससे आपको बहुत जल्द ही राहत मिलेगी। हालांकि, अगर आपको पास डिफ्यूजर नहीं है तो आप रूई के टुकड़े पर दो-तीन बूंद लैवेंडर ऑयल डालें, फिर इसे सूंघें।

रोजमेरी एसेंशियल ऑयल

एक अध्ययन से पता चला है कि रोजमेरी एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल उन लोगों में अस्थमा के लक्षणों को कम कर सकता है, जिन्होंने पारंपरिक उपचार से सुधार नहीं देखा। इस अध्ययन में अस्थमा रोगियों में खांसी और घरघराहट जैसे अस्थमा के लक्षणों में कमी देखी गई है। लाभ के लिए एक रूई के टुकड़े पर थोड़ा सा रोजमेरी एसेंशियल लगाकर उसे कुछ मिनट के लिए सूंघे। हालांकि, इसके लिए पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

थाइम एसेंशियल ऑयल

थाइम एक हर्ब है, जिससे बने तेल का इस्तेमाल काफी समय से अस्थमा के उपचार के लिए किया जाता आ रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि थाइम एसेंशियल ऑयल में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो अस्थमा के जोखिम कम करने में सक्षम है। वहीं, इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल तत्व अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। लाभ के लिए रोजाना थाइम एसेंशियल ऑयल को कुछ मिनट के लिए सूंघे।

रोमन कैमोमाइल एसेंशियल ऑयल

रोमन कैमोमाइल एसेंशियल ऑयल भी कई ऐसे गुणों से समृद्ध होता है, जो अस्थमा के लक्षणों को प्रभावी ढंग से कम करने में मदद कर सकता है। इसके लिए रोमन कैमोमाइल ऑयल की कुछ बूंदें डिफ्यूजर में डालें और इसे चालू करके अपने पास रखें। हालांकि, अगर आपके पास डिफ्यूजर नहीं है तो आप एक रूई के टुकड़े पर थोड़ा सा रोमन कैमोमाइल ऑयल लगाकर उसे कुछ मिनट के लिए सूंघे।
 

गर्मियों के लिए बेस्ट ड्रिंक साबित होगी पुदीना-नींबू शरबत, शरीर को देगी ठंडक

गर्मियों के लिए बेस्ट ड्रिंक साबित होगी पुदीना-नींबू शरबत, शरीर को देगी ठंडक

गर्मियों का समय आ चुका हैं जिसमें बॉडी को हाइड्रेट रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थ का सेवन किया जाना चाहिए जिससे सेहत बनी रहे। गर्मियों के दिनों में सभी को ऐसे पेय पदार्थ की जरूरत होती हैं जो शरीर को ठंडक देने के साथ ही ताजगी प्रदान करें। ऐसे में आज इस कड़ी में हम आपके लिए पुदीना-नींबू शरबत बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं जो गर्मियों के लिए बेस्ट ड्रिंक साबित होगी। तो आइये जानते हैं इसकी रेसिपी के बारे में...


आवश्यक सामग्री
पुदीना पत्ती - 25-30
नींबू - 4
चीनी - 3/4 कप
जीरा पाउडर - 1 टेबलस्पून
आइस क्यूब्स - 5-6
पानी - 4 गिलास


बनाने की विधि

देसी कोल्ड ड्रिंक पुदीना और नींबू का शरबत बनाने के लिए सबसे पहले पुदीना को लें और उसे साफ पानी से अच्छी तरह से धो लें। इसके बाद एक बाउल में पुदीना अलग रख दें। इसके बाद नींबू को लें और उसे बीच से 2 टुकड़ों में काट लें और उसके बीज निकालकर अलग कर दें और एक कटोरी में नींबू का रस निकाल लें। इसके बाद मिक्सर में पुदीने की पत्तियां, नींबू का रस, चीनी और पानी डालकर ग्राइंड करें।
मिक्सर में इस मिश्रण को इतना ग्राइंड करें कि मिक्चर महीन हो जाए। इसके बाद शरबत को छान लें और चार गिलास में बराबर मात्रा में डाल दें। इस तरह आपका स्वादिष्ट नींबू का शरबत बनकर तैयार हो गया है। सर्व करने से पहले नींबू शरबत में एक-एक आइस क्यूब डाल दें। आप चाहें तो शरबत में ज्यादा आइस क्यूब्स भी डाल सकते हैं। इसके बाद हर गिलास में थोड़ा-थोड़ा जीरा पाउडर डालकर चम्मच से घोलें। जो भी इस शरबत को पिएगा उसके शरीर में ठंडक घुल जाएगी और वह दिनभर ताजगी महसूस करेगा।

एक उम्र के बाद जरूरी है रक्तचाप की नियमित जांच : डॉ. मेश्राम

एक उम्र के बाद जरूरी है रक्तचाप की नियमित जांच : डॉ. मेश्राम

दुर्ग : एक उम्र के बाद बीपी व शुगर की जांच नियमित रूप से कराते ही रहना चाहिए ताकि गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सके। अनियमित दिनचर्या और अनुचित खान-पान की वजह से स्वास्थ्य को काफी नुकसान होता है। अनुचित खान-पान व भाग-दौड़ भरी दिनचर्या की वजह से रक्त चाप पर भी इसका असर पड़ता है और तभी व्यक्ति उच्च रक्तचाप या फिर निम्न रक्त चाप का मरीज बन जाता है। विश्व रक्तचाप दिवस के अवसर पर जिले में ऐसी ही आवश्यक जानकारी से अवगत कराते हुए लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया जाएगा।

स्वास्थ्य केन्द्रों में रक्तचाप और मधुमेह की स्क्रीनिंग की जाएगी। इस बारे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेपी मेश्राम ने बताया कि ‘’प्रत्येक वर्ष 17 मई को विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मनाया जाता है। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष रूप से ओपीडी में आने वाले 30 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों के रक्तचाप की जांच की जाएगी। इसके अलावा मुख्य रूप से उच्च रक्तचाप से उत्पन्न होने वाली समस्याएं, बचाव, रोकथाम संबंधी जानकारी भी लोगों को दी जाएगी। इस वर्ष विश्व उच्च रक्तचाप दिवस “Measure your blood pressure accurately, control it, live longer” यानी “अपने रक्तचाप को सही तरीके से मापे इसे नियंत्रित करें, अधिक समय तक जीवित रहे।” की थीम पर मनाया जाएगा।”

आगे उन्होंने बताया कि ‘’अगर आपकी उम्र 30 वर्ष हो चुकी है तो जरूरी है कि आप नियमित रूप से रक्तचाप की जांच करवाएं। उच्च रक्तचाप कई कारणों से होता है जिनमें से कुछ कारण शारीरिक और कुछ मानसिक होते हैं। उच्च रक्तचाप से तेज सिरदर्द, थकान, भ्रम, देखने में समस्या, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, अनियमित रूप से बढ़ने वाली दिल की धड़कन, यूरिन में ब्लड आना ऐसे लक्षण हो सकते हैं। इससे बचने के लिए जंक फूड खाने से परहेज करने के साथ ही अनियमित जीवन शैली पर भी ध्यान देने की जरूरत है। जीवन में मानसिक तनाव को कम करने व शरीर को सक्रिय बनाए रखने के लिए डॉक्टर की सलाह से व्यायाम को नियमित दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।” उन्होंने अपील की है, अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जाकर अपना बीपी और शुगर की जांच करवाएं और ले, स्वस्थ रहें-निरोग रहें।

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के अवसर पर जिला चिकित्सालय एवं विकासखंड स्तर पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, सभी सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जागरूकता हेतु विशेष स्क्रीनिंग कैंप लगाए जाएंगे जिसमें उच्च रक्तचाप से संबंधित बीमारियों के रोकथाम हेतु एनपीसीडीसीएस (नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ कैंसर डायबिटीज कार्डियोवैस्कुलर डिजीज एंड स्ट्रोक) कार्यक्रम के अंतर्गत लोगों को जागरूक करने और “स्वस्थ जीवनशैली” अपनाने के बारे में भी बताया जाएगा।

उच्च रक्तचाप के कारण
नमक की अधिक मात्रा में सेवन, अनियमित दिनचर्या, अनियमित खानपान, तनाव,धूम्रपान या नशीली चीजों का सेवन करना, अत्यधिक वजन का बढ़ना।

रोकथाम व उपचार-
हरी साग-सब्जियों का सेवन ज्यादा करना, नमक का कम उपयोग करना, नशीली और धूम्रपान जैसी चीजों का सेवन ना करना, समय पर डॉक्टर से जांच कराकर और परामर्श लेना, डॉक्टर की सलाह से नियमित रूप से व्यायाम कारगर है।

 

 गर्मियों में बचना है लू से तो जरूर अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय

गर्मियों में बचना है लू से तो जरूर अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय

गर्मी अकेले नहीं आती, बल्कि अपने साथ-साथ हमें परेशान करने के लिए अन्य कई तरह की समस्याएं भी ले आती है। इन समस्याओं में चिलचिलाती धूप, उमस और गर्म हवाएं शामिल हैं। इन दिनों दोपहर के समय बाहर बहुत तेज गर्म हवाएं चलती हैं, इन गर्म हवाओं को ही लू कहते हैं। मजबूत इम्युनिटी वाले लोग इन गर्म हवाओं को सहन कर लेते हैं लेकिन बहुत से लोग इन हवाओं को सहन नहीं कर पाते हैं और संपर्क में आते ही बीमार पड़ जाते हैं। देश में हर साल काफी बड़ी तादात में लोग लू की चपेट में आ जाते हैं।


लू लगने के कारण
गर्मी में बढ़ता पारा हवाओं को लू में बदल देता है। ऐसे में अगर हम धूप में शरीर पूरा ढंके बिना बाहर निकलते हैं, तो लू लगने का पूरी-पूरी संभावना रहती है। इसके अलावा तेज़ धूप में नंगे पैर चलना, घर से बिना कुछ खाए निकलना, कम पानी पीना, एसी वाली जगह से निकलकर तुरंत धूप में चले जाना, धूप से बाहर आकर तुरंत ठंडा पानी पीना और कम पानी पीने वालों को लू जल्दी अपनी चपेट में लेती है।


लू से बचने के असरदार घरेलू उपाय
-प्याज को भून लें और इसे एक साधारण प्याज के साथ मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण में जीरा पाउडर और मिश्री मिलाकर खाने से भी लू से आराम मिलता है। इसके अलावा रोजाना खाने में कच्चे प्याज का इस्तेमाल करें।
-ज्यादा देर तक धूप में रहना हो तो छाते का इस्तेमाल करें।
-अधिक मात्रा में पानी पिएं। बाहर जाते समय पानी की बोतल साथ लेकर जाएं।
-घर पर ही आम का पना बनाकर पियें। लू से बचने का यह सबसे असरदार घरेलू उपाय है।
-धनिये और पुदीने दोनों की ही तासीर ठंडी होती है। लू से बचने के लिए गर्मियों में रोजाना धनिये और पुदीने का जूस बनाकर पिएं।
- प्याज के रस को निकाले और उसे पीये। साथ ही उसी रस को छाती पर भी मलें।
-गर्मियों के दिनों में हल्का भोजन करें
-पूरी बांह के कपड़े पहनें और नंगे पैर बाहर ना निकलें।
-हल्के रंगों वाले सूती कपड़े पहनें, सिंथेटिक कपड़ों से परहेज करें।
-गर्मी के दिनों में कभी भी खाली पेट घर से बाहर ना निकलें
-ऐसे में आप पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसमें दो लौंग मिलाएं और दोबारा से पीस लीजिये। अब पानी मिलाकर उसका सेवन करें।
-सब्जियों का सूप बनाकर रोजाना सेवन करें।
-लू लगने पर कभी बहुत ठंडा पानी न दें ,मटके का पानी दे या सामान्य पानी दें।
-शरीर को ठंडा रखने के लिए दिन में एक या दो बार नींबू पानी का सेवन ज़रुर करें।


लू से बचने के आयुर्वेदिक उपाय
आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों के दिनों में ठंडी तासीर वाली चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। ठंडी तासीर वाली चीजों को खाने से शरीर में ठंडक बनी रहती है और लू नहीं लगती है
सेब का सिरका : लू लगने पर शरीर में मिनरल और इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो जाती है खासतौर पर पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे ज़रुरी मिनरल की मात्रा काफी कम हो जाती है। ऐसे में सेब के सिरके का सेवन करने से ये खोए हुए मिनरल वापस मिल जाते हैं और शरीर में इनका संतुलन बना रहता है।
खुराक और सेवन का तरीका : दो चम्मच सेब के सिरके को एक गिलास पानी में मिलाकर दिन में दो बार इसका सेवन करें।
चंदनासव : यह चंदन और कई तरह की जड़ी बूटियों से निर्मित एक आयुर्वेदिक पेय औषधि (आसव) है। आयुर्वेद के अनुसार चंदनासव में शीतल गुण होता है। ठंडी तासीर होने के कारण जब शरीर में गर्मी या जलन काफी बढ़ जाती है तो इसका इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद रहता है। लू लगने पर इसका सेवन करने से जल्दी आराम मिलता है।
खुराक और सेवन का तरीका : तीन से चार चम्मच चंदनासव और समान मात्रा में पानी मिलाकर दिन में दो बार खाना खाने के बाद इसका सेवन करें।
बेल का शरबत : गर्मियों में बेल का शरबत अमृत के समान होता है। बेल में विटामिन सी और फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके सेवन से शरीर में ठंडक बनी रहती है और लू से बचाव होता है। बेल का शरबत पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।
खुराक और सेवन का तरीका : रोजाना दिन में दो-तीन बार इस जूस का सेवन खाना खाने से पहले करें।
गिलोय का जूस : गिलोय में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करती है। आयुर्वेद के अनुसार गिलोय वात, पित्त और कफ शामक माना जाता है। यह लू में होने वाले तेज बुखार को जल्दी ठीक करती है और शरीर के तापमान को और बढऩे से रोकती है।
खुराक और सेवन का तरीका : आजकल बाज़ार में गिलोय का रस आसानी से उपलब्ध है। आप इसे ऑनलाइन भी मंगा सकते हैं। दो से तीन चम्मच गिलोय रस में समान मात्रा में पानी मिलाकर रोजाना सुबह नाश्ते से पहले इसका सेवन करें।
उशीरासव : उशीरासव (खस) एक आयुर्वेदिक पेय औषधि है। यह पित्तशामक है और लू लगने पर यह शरीर में होने वाली गर्मी और जलन को शांत करने में मदद करती है. इसके अलावा पित्त संबंधी सभी रोगों में आप उशीरासव का इस्तेमाल कर सकते हैं।
खुराक और सेवन का तरीका : तीन से चार चम्मच उशीरासव और समान मात्रा में पानी मिलाकर दिन में दो बार खाना खाने के बाद इसका सेवन करें।

 गर्मियों के दौरान इस तरह से करें मेकअप, नहीं रहेगा इसके फैलने का डर...

गर्मियों के दौरान इस तरह से करें मेकअप, नहीं रहेगा इसके फैलने का डर...

गर्मियों में पसीने के कारण मेकअप फैल जाता है, जिसके चलते चेहरे का पूरा लुक बिगड़ जाता है। इसके अलावा, कई मेकअप प्रोडक्ट्स पसीने के साथ मिलकर आपकी त्वचा को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, अगर सही मेकअप प्रोडक्ट्स को चुनें और उन्हें सही तरीके से लगाते हैं तो इनके फैलने कि संभावना काफी कम हो सकती है। आइए जानते हैं गर्मियों में किस तरह से मेकअप करना चाहिए ताकि आपको इससे कोई परेशानी न हो।

सबसे पहले चेहरे पर सीरम और सनस्क्रीन लगाएं
अधिकतर लड़कियां और महिलाएं यह सोचकर गर्मियों के दौरान चेहरे को मॉइश्चराइज करने से बचती हैं कि इससे उन्हें और ज्यादा पसीना आएगा, लेकिन यह त्वचा के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए अपने चेहरे को माइल्ड क्लींजर से साफ करने के बाद हाइड्रेटिंग गुणों से समृद्ध फेस सीरम लगाएं, फिर अपनी त्वचा को हानिकारक यूवी किरणों से बचाने के लिए कम से कम एसपीएफ 50 वाला हल्की जेल बेस्ड सनस्क्रीन लगाएं।

चेहरे पर प्राइमर लगाना है जरूरी
गर्मियों के दौरान मेकअप की शुरूआत फेस प्राइमर से करना अच्छा है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि बाजार में कई तरह के फेस प्राइमर मौजूद हैं और ऐसे में गलत प्राइमर को चुनने की संभावना बढ़ जाती है। बेहतर होगा कि आप अच्छे ब्रांड के ही प्राइमर का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, जब भी आप प्राइमर खरीदें तो अपनी त्वचा के प्रकार और जरूरतों को जरूर ध्यान में रखें।

फाउंडेशन की जगह बीबी क्रीम से बनाएं मेकअप बेस
फाउंडेशन भले ही कितना भी महंगा या गुणवत्ता पूर्ण हो, चेहरे पर पसीना आते ही उसके फैलने की संभावना रहती ही है। इसलिए बेहतर होगा कि आप गर्मियों के दौरान फाउंडेशन की जगह बीबी क्रीम से मेकअप बेस बनाएं। यह क्रीम त्वचा को मॉइश्चराइज करने के साथ-साथ सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से भी बचाने में मदद कर सकती है। वहीं, अगर आपकी चेहरे पर मुंहासे हो रखे हैं तो इन्हें छुपाने में भी बीबी क्रीम बेस्ट है।

इन मेकअप टिप्स को भी जरूर अपनाएं
अगर आप मेकअप के दौरान कॉम्पैक्ट पाउडर लगाती हैं तो गर्मियों के दौरान इसे न लगाएं। इसके अतिरिक्त, पाउडर ब्लश की जगह क्रीम ब्लश चुनें और चेहरे के जिस भी हिस्से को आप हाइलाइट करना चाहते हैं तो उस पर ब्रोंजर का इस्तेमाल करें। इसके बाद अपने मेकअप को लंबे समय तक बरकरार रखने के लिए चेहरे पर मेकअप सेटिंग स्प्रे का छिड़काव करें। अंत में होंठो पर न्यूड शेड की लिपस्टिक लगाएं।
 

 जानिए गर्मी में दिन में कितनी बार धोना चाहिए चेहरा, जिससे बनी रहेगी आपके चेहरे की नमी....

जानिए गर्मी में दिन में कितनी बार धोना चाहिए चेहरा, जिससे बनी रहेगी आपके चेहरे की नमी....

गर्मी में ताजगी बने रहने के लिए लोग दिन में कई बार चेहरा धोते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि बार-बार फेस वॉश करने से चेहरे पर निखार आ जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं बार-बार चेहरा धोने की आदत आपको नुकसान पंहुचा सकता है। इससे आपके चेहरे की नमी गायब हो सकती है। सिर्फ फेसवॉश करने से चेहरा साफ नहीं होता है। इसके लिए आपके फेस वॉश करने का सही तरीका और समय पता होना जरूरी है। इसके अलावा फेस पर ग्लो लाने के लिए सही डाइट भी जरूरी है। आज हम आपको बता रहे हैं कि गर्मी हो या सर्दी आपको दिन में कितनी बार चेहरा धोना चाहिए।

सुबह - जब आप सोकर उठते हैं तो आलस छाया रहता है। इसलिए सुबह उठकर सबसे पहले सादा पानी से अपना चेहरा धो लें। चेहरा धोने से फुर्ती महसूस होगी और फेस के पोर्स भी साफ हो जाएगे। सुबह आप ठंडे पानी से चेहरा धोएं। आप चाहें को कोई माइल्ड फेसवाश का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

दोपहर - अगर आपकी ऑयली स्किन है तो आपको फेस वॉश करते वक्त अपनी त्वचा के हिसाब से साबुन या फेसवॉश का इस्तेमाल करना चाहिए। ऑयली स्किन पर दोपहर तक ऑयल आने लगता है। कई बार आप बाहर निकलते हैं तो चेहरे पर धूल जम जाती हैं ऐसे में दोपहर में भी ठन्डे पानी या फेसवाश से चेहरे को अच्छी तरह साफ करना चाहिए।

शाम - अगर आप कहीं बाहर जाते हैं तो शाम को घर लौटने के बाद चेहरा जरूर साफ करे लें। ऑफिस से घर आने के बाद दिनभर की गंदगी को साफ करना जरूरी है। जो महिलाएं मेकअप करके ऑफिस जाती हैं, उन्हें अपने फेस को जरूर साफ करके सोना चाहिए। फेस वॉश करने से दिनभर की थकान दूर हो जाती है। आप फ्रेश फील करते हैं।

चेहरा धोते समय इन बातों का रखे ध्यान
हाथ जरूर साफ करें
चेहरा साफ करने से पहले अपने हाथ जरूर साफ कर लें। गंदे हाथ से चेहरे धोने पर निखार कम हो जाता है। साथ ही चेहरा धोने के बाद इसे हल्के हाथों से पोछें। रगडऩे से स्किन खराब होती है।

सॉफ्ट स्क्रबिंग
चेहरे पर स्क्रबिंग कोमल हाथों से करें। वरना चेहरे पर रगड़ के निशान भी बन सकते हैं। स्क्रबिंग के लिए घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करें और हफ्ते में 2 बार स्किन एक्सफोलिएट करें।

चेहरे पर ना लगाएं ये चीजें
चेहरे पर वॉशक्लॉथ, मेश स्पॉन्ज या उंगलियों के अलावा किसी और चीज का इस्तेमाल ना करें। इससे आपकी त्वचा में जलन हो सकती है।

क्लीजिंग मिल्क जरूर करें
मेकअप उतारने के लिए पहले क्लीजिंग मिल्क करें और फिर कॉटन से चेहरे पोछें। इसके बाद पानी से धोएं। वरना मेकअप रोमछिद्रों में जाकर उन्हें बंद कर देगा।

दिन में 2 बार चेहरा धोएं
कई लोगों का मानना है कि मेकअप हटाने के लिए या जब यह गंदा दिखता है तो सिर्फ चेहरा धोने की जरूरत होती है। जबकि ऐसा नहीं है। हर किसी को कम से कम दिन में दो बार चेहरा धोना चाहिएं।

फेसवॉश से धोएं चेहरा
साबुन की बजाए फेसवॉश से चेहरा धोएं। वैसे आप इसके लिए बेसन, मक्की या चावल का आटा भी चूज करेंगे तो बेस्ट है।

पसीने के बाद चेहरा धोएं
भारी पसीने के बाद अपना चेहरा धो लें, खासकर टोपी या हेलमेट पहनने पर त्वचा में जलन होती है। ऐसे में पसीने के बाद जितनी जल्दी हो सके चेहरे धो लें। साथ ही कोशिश करें कि दिन में 2 बार चेहरा धोएं।

 

विभिन्न गुणों से भरपूर होता है चन्दन का लेप, जाने इसे लगाने के क्या होते हैं फायदे

विभिन्न गुणों से भरपूर होता है चन्दन का लेप, जाने इसे लगाने के क्या होते हैं फायदे

भारत में कुछ परम्पराएं सदियों से चली आ रही हैं. माथे पर चंदन का टीका लगाना भी इसी फेहरिस्त में शुमार है. पूजा-पाठ में भी चंदन का विशेष महत्व है. इसके अलावा कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में भी चंदन का इस्तेमाल किया जाता है. मार्केट में चंदन के फेस पैक से लेकर परफ्यूम, रूम फ्रैशनर जैसे अनगिनत प्रोडक्ट मौजूद हैं.बदलते ट्रेंड के बीच भी लाखों ऐसे लोग हैं, जो माथे पर चंदन का तिलक लगाते हैं. आज हम आपको बताते हैं चंदन के ऐसे गुणों के बारे में, जिसे जानकर आप भी चंदन का लेप इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे.

दरअसल हिंदू धार्मिक रिवाज का हिस्सा होने के साथ-साथ चंदन का खास वैज्ञानिक महत्व भी है. यही कारण है कि कई लोग माथे, गले और सर की चोटी पर चंदन का टीका लगाते हैं. यह परंपरा दक्षिण भारत के ज़्यादातर हिस्सों में में आज भी घर-घर निभाई जाती है. वहां महिला, पुरुष और बच्चे तक चंदन का तिलक लगाते हैं. जानिए चंदन के अनोखे फायदों के बारे में.

बुखार से राहत दिलाने में कारगर है चंदन
बुखार में शरीर का तापमान कम करने के लिए अक्सर ठंडे पानी की पट्टी सर पर रखी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बुखार से निपटने में भी चंदन का इस्तेमाल किया जाता है. दरअसल, चंदन की तासीर ठंडी होती है. बुखार में माथे पर चंदन का लेप लगाने से यह प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है. चंदन के लेप से शरीर का तापमान सामान्य होने लगता है.

ग्लोइंग स्किन का सीक्रेट है चंदन
मौजूदा समय में लोग फिर से नेचुरल चीज़ों का इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं. यही वजह है कि कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में चंदन का इस्तेमाल किया जाने लगा है. हालांकि इन प्रोडक्ट्स में केमिकल भी होते हैं. ऐसे में त्वचा पर निखार लाने के लिए चंदन पाउडर का फेस पैक भी लगा सकते हैं. इससे न सिर्फ स्किन में ग्लो आता है बल्कि कलर कॉम्प्लेक्शन भी अच्छा होता है.

सिर दर्द में असरदार है चंदन
सिर दर्द की समस्या से निजात पाने के लिए चंदन का उपयोग कर सकते हैं. कई बार गर्मी की वजह से सिर के नसों में खिंचाव होता है, जो सिर दर्द की वजह बनती है. ऐसे में सिर पर चंदन का लेप लगाने से मस्तिष्क ठंडा रहता है और दर्द से भी राहत मिलती है.

 

खीरा खाने के बाद भूलकर भी न करें ये काम, वरना काटने पड़ेंगे अस्पताल के चक्कर...

खीरा खाने के बाद भूलकर भी न करें ये काम, वरना काटने पड़ेंगे अस्पताल के चक्कर...

नई दिल्ली : गर्मी के मौसम में खीरे के सेवन से शरीर हाइड्रेट रहता है और ठंडक महसूस करता है। खीरा को विटामिन मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स का पावर हाउस कहा जाता है। खीरा में काफी अधिक पानी की मात्रा होने की वजह से खासकर गर्मियों में इसका सेवन काफी किया जाता है। खीरे में मैग्नीशियम, विटामिन सी, विटामिन के, मैंग्नीज और पोटैशियम जैसे गुण पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए लाभकारी होते है। यदि आप वजन को कम करने की सोच रहे है। तो खीरे को डाइट में शामिल कर सकते हैं।

खीरा का सेवन आप जूस (Juice) और सलाद (salad) के रूप में कर सकते है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि खीरा खाने के बाद विशेष बात का ध्यान रखना अधिक जरूरी है। गर आप खीरा खाने के तुरंत बाद पानी पीते है। तो शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।

खीरा खाने के बाद पानी पीने से हो सकते हैं ये नुकसान : 1.पाचन : हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, खाने के पाचन के लिए शरीर को पीएच लेवल की जरूरत होती है। लेकिन खीरा के साथ या उसके बाद पानी का सेवन करने से बॉडी का पीएच लेवल डिस्टर्ब हो सकता है, जिसकी वजह से आपको पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है।

2.लूज मोशन : यदि आपको खीरा खाने के बाद पानी पीने की आदत है। तो सावधान हो जाएं. क्योकि खीरा खाने के तुरंत बाद पानी का सेवन करने से लूज मोशन की परेशानी हो सकती है।

3.पेट फूलना : जो लोग खीरा खाने के बाद पानी पीते है। उनको पेट फूलने की परेशानी हो सकती है। पेट फूलना, पेट में भारी पन महसून होना और बेचैनी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
 

पीलिया से बचाव के लिए सावधानी है बहुत जरूरी, जानिये इसके बचाव के आवश्यक उपाय.....

पीलिया से बचाव के लिए सावधानी है बहुत जरूरी, जानिये इसके बचाव के आवश्यक उपाय.....

रायपुर : पीलिया यानि जाॅन्डिस लीवर से जुड़ा रोग है। लीवर शरीर का अत्यंत महत्त्वपूर्ण अंग है, इसलिए इसे सेहतमंद रखना बहुत जरूरी है। पीलिया एक सूक्ष्म वायरस से होता है। इसके संक्रमण के कारण व्यक्ति का लीवर सामान्य ढंग से कार्य नहीं कर पाता। फलस्वरूप खून में बिलिरुबिन बढ़ जाता है।

शासकीय आयुर्वेद कॉलेज रायपुर के सह-प्राध्यापक डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि आमतौर पर गर्मियों के मौसम में पीलिया संक्रमण के रोगी बहुतायत में मिलते हैं। इस रोग का प्रमुख कारण दूषित खाद्य तथा पेय पदार्थों का सेवन, दवाओं का दुष्प्रभाव, अनेक रोग एवं आवश्यक साफ-सफाई का अभाव है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के रक्तदान करने एवं पीलिया संक्रमित व्यक्ति के मल, मूत्र से भी यह रोग होता है। इस मौसम में लोग गर्मी से राहत पाने के लिए बाजार में बिकने वाले बर्फ मिले शीतल पेय पदार्थों का सेवन करते हैं। कभी-कभी दूषित पानी से बने बर्फ तथा सड़े-गले फलों के कारण पीलिया की संभावना बढ़ जाती है।

सामान्यतः पीलिया के रोगी में बुखार आना, सिर दर्द, भूख न लगना, भोजन देखकर मिचली और उल्टी, पेट फूलना, कमजोरी व थकावट, त्वचा, नाखून और आंखों के सफेद भाग का रंग पीला होना, त्वचा में खुजली होना, पेशाब का रंग गाढ़ा पीला होना, पैरों में सूजन, पेट दर्द और दस्त जैसे लक्षण मिलते हैं। पीलिया जहां एक गंभीर बीमारी है, वहीं यह अन्य रोगों का लक्षण भी है। इसलिए इन लक्षणों के दिखाई देने पर रोगी को तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए अन्यथा यह जानलेवा भी हो सकता है। डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि आयुर्वेद में पीलिया को कामला रोग कहा गया है। इसका मुख्य कारण अनुचित खान-पान व दिनचर्या के कारण पित्त दोष की वृद्धि को बताया गया है। आधुनिक एवं आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के अनुसार पीलिया रोग से बचाव के लिए खान-पान में आवश्यक सावधानी तथा वैयक्तिक स्वच्छता अपनाने की जरूरत है।

जहां तक संभव हो बाजार में खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों तथा बर्फ मिले गन्ना या अन्य फलों के रसों के सेवन, वसायुक्त भोजन, स्ट्रीट फूड, मांसाहार, शराब एवं धूम्रपान का परहेज करें। इस मौसम में ताजा व गर्म भोजन और उबले हुए पानी, दही, छाछ में काला नमक व जीरा मिलाकर पीएं। नीबू की शिकंजी, गन्ना रस, अनार, मौसंबी, अंगूर इत्यादि फल को खान-पान में शामिल करें तथा नियमित व्यायाम करें। शौच के बाद एवं भोजन के पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धोना चाहिए। इन सावधानियों को अपनाकर पीलिया बीमारी से बचा जा सकता है।
आमतौर पर यह देखा जाता है कि पीलिया के रोगी इस रोग के उपचार के लिए अंधविश्वास या झाड़-फूंक के फेर में पड़ जाते हैं जो जानलेवा हो सकता है। पीलिया रोग का उपचार आधुनिक एवं आयुर्वेद दोनों पद्धतियों में संभव है। इसलिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों, आयुर्वेद अस्पतालों अथवा विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह तुरंत लेनी चाहिए।
 

डायबिटीज पेशेंट इन सब्जियों को जरूर करें डाइट में शामिल, कंट्रोल होगा शुगर लेवल...

डायबिटीज पेशेंट इन सब्जियों को जरूर करें डाइट में शामिल, कंट्रोल होगा शुगर लेवल...

नई दिल्ली : डायबिटीज पेशेंट को अपने खानपान का खास ख्याल रखना चाहिए। ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी डाइट में क्या खा रहे हैं और क्या नहीं खा रहे इस बात की जानकारी आपको हो। आमतौर पर शुगर पेशेंट को उन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए जिसमें मिठास हो। यानी कि जिसके स्वाद में मीठापन हो। इन चीजों का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल और ज्यादा बढ़ सकता है। ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसी सब्जियों के बारे में बताएंगे जिनका सेवन करने से आप ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल कर सकते हैं।

रोज खाएं पत्ता गोभी : आजकल पत्ता गोभी आपको बाजार में हर मौसम में आराम से मिल जाएगी। ये एक लो स्टार्च वाली सब्जी है, जो कि शरीर में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में आपकी मदद करेगी। इसे आप सलाद के रूप में या फिर सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं।
करेला जरूर खाएं : कई लोगों को करेला बिल्कुल पंसद नहीं होता। वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें करेला बहुत ज्यादा अच्छा लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं करेला एक ऐसी सब्जी है जिसका सेवन डायबिटीज पेशेंट को जरूर करना चाहिए। ये ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करेगा।

भिंडी भी है लाभकारी : इस मौसम बाजार में भिंडी बहुत ज्यादा आती है। ये सेहत के लिए अच्छी होती है। इसमें घुलनशील फाइबर होता है जिसकी वजह से ये आसानी से पच जाती है। इसके साथ ही ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल भी करती है। खास बात है कि भिंडी में मौजूद तत्व इंसुलिन के प्रोडक्शन को बढ़ा भी सकता है।

ब्रोकली को करें डाइट में शामिल : ब्रोकली का सेवन ज्यादातर लोग सलाद के रूप में करते हैं। ये कम कार्ब्स वाली है। इसका सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल पर कोई असर नहीं पड़ता है। ऐसे में शुगर मरीज ब्रोकली को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
 

गर्मियों में रोज पिये एक गिलास नींबू पानी, दूर होंगी कई बीमारियां....

गर्मियों में रोज पिये एक गिलास नींबू पानी, दूर होंगी कई बीमारियां....

नींबू को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है और इसका इस्तेमाल कई तरह के हेल्दी ड्रिंक्स को बनाने के लिए किया जाता है। गर्मी के दिनों में नींबू पानी, शिंकजी और नींबू सोडा काफी पसंद किया जाता है। इनको पीने के कई फायदे हैं जो गर्मी में देखने के ली मिलते हैं। शरीर से लेकर चेहरे तक के लिए नींबू का इस्तेमाल किया जाता है। जी दरअसल ये त्वचा पर निखार लाने में भी मदद करता है और नींबू का पानी न केवल गर्मी से राहत पहुंचाने का काम करता है बल्कि ये सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। जी दरअसल इसमें विटामिन सी, बी, ई, आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं। तो आइए आपको बताते हैं

नींबू पानी पीने के फायदे

विटामिन सी का अच्छा स्त्रोत है- नींबू में विटामिन सी अधिक मात्रा में होता है। जी हाँ और यह कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाता है। आप सभी को बता दें कि विटामिन सी ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने में मदद करता है। ये स्ट्रोक और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में भी मदद करता है।

वजन घटाने के लिए- अगर आप हर सुबह नींबू के पानी का सेवन करते हैं तो ये मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। जी हाँ और इस प्रकार ये तेजी से वजन घटाने में मदद करता है। केवल यही नहीं बल्कि इसमें पेक्टिन एक फाइबर होता है। इससे आपको भूख कम लगती है और इससे पेट देर तक भरा हुआ महसूस होता है।

हाइड्रेशन- गर्मियों में हम अधिकतर डिहाइड्रेटेड महसूस करते हैं। जी हाँ और ऐसे में नींबू का पानी हमें हाइड्रेट रखने में मदद करता है।
पाचन- गुनगुना नींबू पानी सुबह के समय नियमित रूप से पीया जाए तो ये कब्ज की रोकथाम करने में मदद करता है। इसी के साथ ये पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है। इससे गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

त्वचा के लिए फायदेमंद- नींबू पानी में विटामिन सी अधिक मात्रा में होता है। ये त्वचा को हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है।
 

तेज धूप से आपके चेहरे पर आ गए है टैनिंग, तो अपनाइए शहद के ये 4 फेस मास्क, मिलेगा बहुंत फायदा, जाने कैसे बनाये मास्क

तेज धूप से आपके चेहरे पर आ गए है टैनिंग, तो अपनाइए शहद के ये 4 फेस मास्क, मिलेगा बहुंत फायदा, जाने कैसे बनाये मास्क

पारंपरिक भारतीय रसोई की सबसे शानदार सामग्रियाें में से एक है शहद। आपके छोटे बेबी से लेकर आपके एजिंग पेरेंट्स तक भी इसके स्वाद के मुरीद हैं। इसके खास पोषक तत्व इसे आपके स्वास्थ्य के लिए जरूरी सामग्री बना देते हैं। पर सिर्फ इतना ही नहीं, यह आपके सौंदर्य के लिए भी लाजवाब है। हमारी पुरखिनों की सौंदर्य पिटारी में शहद का खास महत्व रहा है। डल और डैमेज स्किन से लेकर बढ़ती उम्र में होने वाली पिग्मेंटेशन तक, शहद के पास सबका इलाज है। अगर आप भी इन दिनों पिग्मेंटेशन या त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं से पीड़ित हैं, तो आइए जानते हैं कैसे करना है शहद का इस्तेमाल |

शहद एक फायदे अनेक
दुनिया भर की संस्कृतियों ने हजारों सालों से अपनी त्वचा पर शहद का इस्तेमाल किया है। शहद के अन्दर मौजूद प्राकृतिक एंटी बैक्टीरियल गुण इसे त्वचा के लिए वरदान बनाते हैं। एनसीबीआई द्वारा 2016 में शहद के गुणों पर किए गए एक शोध में यह साबित हुआ कि त्वचा पर होने वाले सभी विकारों को दूर करने में शहद उपयोगी है। शहद के ऐसे ही औषधीय गुणों के बारे में बात कर रही हैं फिटनेस एंड वेलनेस एक्सपर्ट पूनम दुनेजा

पूनम बताती हैं कि शहद कई तरह के हार्मफुल बैक्टीरिया को मार सकता है। आपकी त्वचा में मौजूद हार्मफुल बैक्टीरिया की वजह से ही पिंपल्स हो सकते हैं, इसलिए चेहरे पर शहद का इस्तेमाल करने से मुंहासों को कम करने में मदद मिल सकती है।

एंटीऑक्सिडेंट और एंटी इन्फ्लेमेट्री
2014 में एथेंस, ग्रीस के जनरल मेडिसिन डिपार्टमेंट द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि शहद में फ्लेवोनोइड और पॉलीफेनोल यौगिक होते हैं, जो इसे एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करने में मदद करते हैं। इसे जब त्वचा पर लगाया जाता है, तो शहद को त्वचा में जलन पैदा करने वाले कैमिकल्स को कम करने में मदद मिलती है। यह त्वचा पर होने वाली रेडनेस और जलन को कम करने में भी मदद कर सकता है।

एक बेहतरीन एक्सफ़ोलिएटर है शहद
शहद में प्राकृतिक एंजाइम होते हैं, जो चेहरे पर से मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकते हैं। यह एक कारण है कि शहद आपकी त्वचा के लिए प्राकृतिक एक्सफोलिएटर के रूप में एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

पिगमेंटेशन हटाने में भी है लाभकारी
शहद आपके चेहरे पर होने वाले पिगमेंटेशन में भी काफी असरकारक है। खास करके तब जब इसका इस्तेमाल नींबू के साथ किया जाता है। शहद और नींबू का मिश्रण चेहरे पर होने वाली झाइयाें को हटाने में मददगार साबित हो सकता है।
चेहरे पर शहद लगाने से हो सकते हैं कुछ नुकसान भी | हालांकि शहद आमतौर पर आपके चेहरे पर उपयोग करने के लिए सुरक्षित होता है। पर कुछ लोगों को इससे एलर्जी हो सकती है।

यदि आप शहद के प्रति अपनी संवेदनशीलता को लेकर कॉन्फिडेंट नहीं हैं, तो आप इसे अपने चेहरे पर लगाने से पहले अपनी त्वचा पर पैच परीक्षण के जरिए जांच सकती हैं।

पैच टेस्ट करने के लिए, इन स्टेप्स को फॉलो करें:
त्वचा के एक छोटे से हिस्से पर शहद की एक बूंद लगाएं।
24 घंटे प्रतीक्षा करें।

लालिमा, जलन, सूजन या खुजली के लक्षण के लिए 24 घंटे के बाद अपनी त्वचा की सावधानीपूर्वक जांच करें। यदि आपकी त्वचा में इनमें से कोई भी लक्षण नहीं दिखाई देता है, तो संभवतः आपके चेहरे पर शहद का उपयोग करना सुरक्षित है।

हनी मास्क लगाने का सही तरीका
इसकी चिपचिपाहट के कारण, अन्य किसी भी प्राकृतिक तत्त्वों की तुलना में शहद को लगाने के बाद इसे स्किन से हटाना कठिन हो सकता है। अपनी त्वचा को रगड़े या खींचे बिना हनी को चेहरे से रिमूव करने के लिए गीले हाथ से इस पर मसाज करें और फिर गुलाबजल लगाएं, अपना चेहरा अच्छी तरह से धोएं। स्किन सॉफ्ट बनाए रखने के लिए चेहरा अच्छी तरह गुनगुने पानी से धो लें।

1 यूं बनाएं हनी फेस मास्क
यदि आपकी तैलीय त्वचा है, तो इस फेस मास्क में मौजूद तत्व अतिरिक्त तेल और छिद्रों को कसने में मदद कर सकते हैं।

इसके लिए आपको चाहिए:
1/2 बड़ा चम्मच कच्चा शहद
1 चम्मच नींबू का रस
एक अंडे का सफेद भाग
चेहरे के लिए तैयार करें हनी फेस मास्क
सामग्री को एक बाउल में डालकर 1 से 2 मिनट तक फेंटें।
अपने ताजे धुले चेहरे पर मिश्रण को लगाने के लिए अपनी उंगलियों या एक छोटे, साफ ब्रश का प्रयोग करें। इसे लगाते समय आंखों के क्षेत्र से बचें।
मिश्रण को टपकने से बचाते हुए जितना हो सके गाढ़ा लगाएं।
मास्क को 20 से 30 मिनट तक सूखने दें। अगर आपको लगता है कि मास्क सूख गया है और आपकी त्वचा पर खिंचने लगा है, तो इसे हटा दें।
अपनी त्वचा को गर्म पानी से या मुलायम गीले वॉशक्लॉथ से पोंछ लें। अपने चेहरे को सुखाएं। हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं।

अलग-अलग त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए यहां कुछ और हनी फेस मास्क दिए गए हैं –
आप विभिन्न त्वचा स्थितियों के लिए फेस मास्क बनाने के लिए नींबू के रस और शहद के अन्य संयोजनों का उपयोग कर सकते हैं। शहद के फेस पैक बनाते समय इन बातों का खयाल रखें

2 मुंहासे हटाने के लिए- मास्क
1 चम्मच नींबू का रस, 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं। 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें।

3 हाइपरपिग्मेंटेशन के लिए मास्क
1 चम्मच नींबू का रस, 1 बड़ा चम्मच शहद, 1 बड़ा चम्मच सादा दही और 1/4 चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं। 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें।

4 त्वचा की सूजन और लालिमा को कम करने के लिए मास्क

दो बड़े चम्मच शहद, एक नींबू के टुकड़े का रस और एक चम्मच दालचीनी मिलाएं। 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें।

और अंत में
शहद और नींबू दोनों ही प्राकृतिक तत्व हैं जिनमें कई उपचार गुण होते हैं। शहद आमतौर पर नींबू की तुलना में आपकी त्वचा पर उपयोग करने के लिए अधिक सुरक्षित होता है। यह अधिक कोमल, अधिक पौष्टिक तो होता है है साथ में इसके करने की संभावना कम होती है।

नींबू अत्यधिक अम्लीय होता है और त्वचा में जलन, ड्राईनेस और सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से क्षति का कारण बन सकता है। खासकर यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है इसलिए शहद के साथ इसके इस्तेमाल को लेकर भी सचेत रहें। शहद को नींबू के साथ सुरक्षित रूप से उपयोग करने की कुंजी त्वचा पर इसे थोड़ी मात्रा में उपयोग करना है।

इसके अलावा, अपने चेहरे पर शहद लगाने से पहले अपनी त्वचा के एक छोटे से हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर कर लें। यदि पैच टेस्ट से आपकी त्वचा लाल, सूजी हुई या खुजलीदार हो जाती है तो इसका उपयोग न करें।

 

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की  just36news पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

गर्मियों में पुदीने का सेवन करना है बेहद फायदेमंद, राहत के साथ देता है सेहत के 8 फायदे...

गर्मियों में पुदीने का सेवन करना है बेहद फायदेमंद, राहत के साथ देता है सेहत के 8 फायदे...

नई दिल्ली : गर्मी के मौसम में पुदीना (Mint) खाने से सेहत को कई लाभ होते है। पुदीना सबसे अधिक अपने अनोखे स्वाद के लिए ही जाना जाता है। पुदीने की तासीर ठंडी होने की वजह से शरबत, जलजीरा,पुदीने की चटनी या फिर किसी भी तरीके से सेवन करना अच्छा माना गया है। सामान्य तौर पर पुदीने का उपयोग माउथ फ्रेशनर, चुइंगगम्स, कैंडीज और दंत-मंजन,आदि में किया जाता है। पुदीने में ऐंटिबैक्टीरियल, ऐंटिइंफ्लामेट्री और ऐंटिफंगल तत्व पाए जाते है।

यूं तो पुदीना का प्रयोग स्वाद और औषधीय गुणों के लिए कभी भी किया जा सकता है, लेकिन अपनी ठंडक के कारण खास तौर से गर्मियों में यह बेहद फायदेमंद होता है। तो इन गर्मियों में जरूर जानें इसेके 8 बेशकीमती गुण और खूब करें इसका प्रयोग - 1 पेट की गर्मी को कम करने के लिए पुदीने का प्रयोग बेहद फायदेमंद है। इसके अलावा यह पेट से संबंधित अन्य समस्याओं से भी जल्द निजात दिलाने में लाभकारी है। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। 2 दिनभर बाहर रहने वाले लोगों को पैर के तलवों जलन की शिकायत रहती है, ऐसे में उन्हें फ्रिज में रखे हुए पुदीने को पीसकर तलवों पर लगाना चाहिए ताकि तुरंत राहत मिल सके।

इससे पैरों की गर्मी भी कम होगी। 3 सूखा या गीला पुदीना छाछ, दही, कच्चे आम के पने के साथ मिलाकर पीने पर पेट में होने वाली जलन दूर होगी और ठंडक मिलेगी। गर्मी हवाओं और लू से भी बचाव होगा। 4 अगर आपको अक्सर टॉंसिल्स की शिकायत रहती है और इसमें होने वाली सूजन से भी आप परेशान हैं तो पुदीने के रस में सादा पानी मिलाकर इस पानी से गरारे करना आपके लिए फायदेमंद होगा। 5 गर्मी में पुदीने की चटनी का रोजाना सेवन सेहत से जुड़े कई फायदे देता है। पुदीना, काली मिर्च, हींग, सेंधा नमक, मुनक्का, जीरा, छुहारा सबको मिलाकर चटनी पीस लें। यह चटनी पेट के कई रोगों से बचाव करती है व खाने में भी स्वादिष्ट होती है। भूख न लगने या खाने से अरुचि होने पर भी यह चटनी भूख को खोलती है। 6 पुदीने व अदरक का रस थोड़े से शहद में मिलाकर चाटने से खांसी ठीक हो जाती है।

वहीं अगर आप लगातार हिचकी आने से परेशान हैं तो पुदीने में चीनी मिलाकर धीरे-धीरे चबाएं। कुछ ही देर में आप हिचकी से निजात पा लेंगे। 7 पुदीने की पत्तियों का लेप करने से कई प्रकार के चर्म रोगों को खत्म किया जा सकता है। घाव भरने के लिए भी यह उत्तम है। इसके अलावा गर्मी में इसका लेप चेहरे पर लगाने से त्वचा की गर्मी समाप्त होगी और आप ताजगी का अनुभव करेंगे। 8 पुदीने का नियमित रूप से सेवन आपको पीलिया जैसे रोगों से बचाने में सक्षम है। वहीं मूत्र संबंधी रोगों के लिए भी पुदीने का प्रयोग बेहद लाभदायक है। पुदीने के पत्तियों को पीसकर पानी और नींबू के रस के साथ पीने से शरीर की आंतरिक सफाई होगी।  

क्या आप परेशान हैं बार बार हो रहे यूरिन इंफेक्शन से, जाने आपके इस बीमारी का कारन और इसे दूर करने क उपाय

क्या आप परेशान हैं बार बार हो रहे यूरिन इंफेक्शन से, जाने आपके इस बीमारी का कारन और इसे दूर करने क उपाय

यूरिन इंफेक्शन आपको बार-बार परेशान कर रहा है, जबकि आप हाइजीन का पूरा ध्यान रखती हैं तो इसकी जड़ साफ-सफाई की कमी के कारण नहीं बल्कि मानसिक समस्याओं में छिपी हो सकती है. ऐसा कई रिसर्च में सामने आया है कि जिन लोगों को एंग्जाइटी, डिप्रेशन जैसे मानसिक रोग घेरे हुए होते हैं, उन्हें ब्लेडर से रिलेटेड इश्यूज, बार-बार पेशाब आना और यूरिन इंफेक्शन का बार-बार होना जैसी समस्याएं घेरे रहती हैं.

एक या दो नहीं बल्कि 26 स्टडीज
हेल्थ एक्सपर्ट्स किन्हीं एक या दो रिपोर्ट्स के आधार पर नहीं बल्कि इस विषय में दुनियाभर में हुई अलग-अलग 26 स्टडीज में यह बात सामने आई है कि ओवर ऐक्टिव ब्लेडर और डिप्रेशन के बीच कनेक्शन है. जबकि एंग्जाइटी पर हुई 6 स्टडीज में यही बात सामने आई है कि एंग्जाइटी होने पर भी ब्लेडर ओवर एक्टिव हो जाता है, जिससे बार-बार यूरिन जाने की जरूरत पड़ती है.

रिसर्च में ये बातें भी सामने आईं
अलग-अलग रिसर्च में ये बात सामने आई है कि डर, अवसाद और बहुत अधिक मान सिक चिंता की स्थिति ब्लेडर के फंक्शन को प्रभावित करती है. यही वजह है कि यूरोलॉजिस्ट भी इस बात से सहमती रखते हैं कि मानसिक समस्याएं यूरिन इंफेक्शन, ब्लेडर और सेक्शुअल हेल्थ को प्रभावित करते हैं.

यूरिन इंफेक्शन से बचने के तरीके
यदि आपको यूरिन इंफेक्शन बार-बार हो रहा है और दवाएं लेने पर यह कुछ हद तक कम होता है लेकिन फिर से आ जाता है. तो आपको एक बार अपनी मानसिक सेहत पर जरूर ध्यान देना चाहिए. गौर करें कि क्या आप बहुत अधिक तनाव में रहते हैं या चिंता के कारण आपके सिर में भारीपन बना रहता है. अगर हां तो आपको ये बातें अपने डॉक्टर से जरूर बतानी चाहिए.


1. आप पानी का सेवन अधिक करें. चाय और कॉफी से जितना संभव हो दूर रहें.

2. तनाव को कम करने और मानसिक रूप से मजबूत बनने में ड्राई फ्रूट्स का सेवन बहुत सहायक होता है.

3. अधिक से अधिक मात्रा में पानी पिएं. ऐसा करने से इंफेक्शन अधिक पनप नहीं पाता है.

4. डॉक्टर की देखरेख में एंटिबायोटिक दवाओं का सेवन करें.

5. एकांत में समय बिताना और ध्यान लगाना यानी मेडिटेशन आपको मानसिक रूप से मजबूत बनने में बहुत मदद करता है.

 

 

कोरोना से हाहाकार, 27 शहरों में लगा लॉकडाउन- करोड़ों लोग घरों में कैद

कोरोना से हाहाकार, 27 शहरों में लगा लॉकडाउन- करोड़ों लोग घरों में कैद

बीजिंग : दुनिया के अन्य देशों के साथ अब कोरोना ने चीन में कोहराम मचाना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि 27 शहरों में यहां लॉकडाउन लगाना पड़ गया। लॉकडाउन के दौरान सख्ती इतनी है कि 16.5 करोड़ लोग घरों में कैद रहने के लिए मजबूर हैं। सरकार की कठोर नीति और जीरो कोविड पॉलिसी नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। हालत ये है कि जो लोग भोजन के सामग्री इक_ा नहीं कर पाए उन्हें काफी मुश्किल से भोजन मिल पा रहा है। कहीं-कहीं तो 24 घंटे लोग भूखे रह रहे हैं और फिर अगले दिन 1 घंटे के लिए खाने का सामान खरीदने की मोहलत दी जाती है।

महामारी के दौरान, चीन अपनी जीरो कोविड पॉलिसी पर अड़ा हुआ है। इसके तहत वायरस को रोकने के लिए लॉकडाउन, मास टेस्टिंग, क्वारंटीन और सीमाएं बंद करने, लोगों को घर से बाहर निकलने पर मनाही, बाहर निकलने पर भारी जुर्माना और जेल जैसे कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। चीन की सख्ती के बावजूद कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम नहीं हो रही है। इन कठोर प्रतिबंधों के कारण लोग भूखों मरने को मजबूर हैं।

इस साल मार्च में चीन में मामले अचानक बढऩे लगे, देखते-देखते देश में संक्रमण ने रफ्तार पकड़ ली जो कि 2020 की शुरुआत में वुहान में शुरुआती प्रकोप के बाद से भी तेज है। प्रकोप के शुरुआती चरणों के दौरान पूर्वोत्तर जिलिन प्रांत बुरी तरह प्रभावित हुआ था। गुरुवार को, चांगचुन और जिलिन सिटी के अधिकारियों, जिनकी संयुक्त आबादी एक करोड़ 35 लाख से अधिक निवासियों की है, ने कहा कि वे जल्द ही लॉकडाउन को कम करना शुरू कर देंगे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रक्रिया कैसी होगी, या किन परिस्थितियों में लोगों को घरों से निकलने की अनुमति दी जाएगी।

 

BIG BREAKING : भारत में 12 से 17 वर्ष के आयु वर्ग के लिए एक और वैक्सीन को मिली मंजूरी

BIG BREAKING : भारत में 12 से 17 वर्ष के आयु वर्ग के लिए एक और वैक्सीन को मिली मंजूरी

नई दिल्ली | राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के कोविड​​​​-19 कार्यकारी समूह ने सीरम इंस्टीट्यूट के कोवोवैक्स को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में 12 से 17 उम्र वालों के वास्ते शामिल करने की मंजूरी दे दी है. समाचार एजेंसी एएनआई ने अपने सूत्रों के हवाले से शुक्रवार को यह जानकारी दी. भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने कोवोवैक्स को 28 दिसंबर को वयस्कों में आपात स्थितियों में सीमित उपयोग के लिए और 9 मार्च को 12-17 आयु वर्ग के लिए कुछ शर्तों के अधीन इस्तेमाल की मंजूरी दी थी.

इससे पहले, सूत्रों ने तीन अप्रैल को बताया था कि कोविड​​​​-19 कार्यकारी समूह ने एनटीएजीआई की स्थायी तकनीकी उप-समिति से सिफारिश की थी कि कोवोवैक्स को 12 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाए., जिस पर अब मुहर लग गई है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के सरकार और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर कोवोवैक्स को टीकाकरण अभियान में शामिल करने का अनुरोध किया था.

एक अप्रैल को हुई थी एनटीएजीआई की अहम बैठक
एनटीएजीआई के कोविड​​​​-19 कार्यकारी समूह की एक बैठक एक अप्रैल को हुई थी, जिस दौरान कोवोवैक्स के आंकड़े की समीक्षा की गई थी, जिसके बाद यह सिफारिश की गई थी कि टीके को राष्ट्रीय कोविड​​​​-19 टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है ताकि 12 साल की उम्र और उससे अधिक आयु के लोगों को टीका लगाया जा सके. सिंह ने कहा था कि पुणे स्थित कंपनी एसएसआई 900 रुपये और जीएसटी के हिसाब से निजी अस्पतालों को कोवोवैक्स टीके की खुराक प्रदान करना चाहती है और केंद्र को भी टीकों की आपूर्ति करने के लिए निर्देशों का इंतजार कर रही है.

सीरम इंस्टीट्यूट ने 21 फरवरी को दिया था आवेदन
एसआईआई में सरकारी और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने डीसीजीआई को एक आवेदन 21 फरवरी को दिया था और 12 से 17 साल की उम्र के बच्चों के लिए कोवोवैक्स के लिहाज से ईयूए मांगी थी. समझा जाता है कि ईयूए के आवेदन में सिंह ने कहा है कि 12 से 17 साल के करीब 2,700 बच्चों पर किये गये दो अध्ययन के आंकड़े दिखाते हैं कि कोवोवैक्स बहुत प्रभावी, प्रतिरक्षा जनक और सुरक्षित है.

भारत ने 16 मार्च से 12-14 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया था. बायोलॉजिकल ई के कॉर्बेवैक्स का उपयोग उन्हें टीका लगाने के लिए किया जा रहा है. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण को लिखे एक पत्र में, सिंह ने कहा कि निजी कंपनियां, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन, केंद्र सरकार के संगठन और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अपने कर्मचारियों, परिवारों और बच्चों को टीका लगाने के लिए कोवोवैक्स के लिए अनुरोध कर रहे है.

क्या आप भी हैं जोड़ों के दर्द से परेशान, तो अपनाइए ये घरेलु उपाय, मिलेगा दर्द से आराम

क्या आप भी हैं जोड़ों के दर्द से परेशान, तो अपनाइए ये घरेलु उपाय, मिलेगा दर्द से आराम

बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान की वजह से लोगों का शरीर कमजोर होने लगा है. ऐसे में 30-35 साल की उम्र में ही लोगों को जोड़ो का दर्द सताने लगा है. वजन बढ़ने, यूरिक एसिड की समस्या होने या ज्यादा देर तक खड़े रहने से ये समस्या और बढ़ जाती है. ऐसे में उठने-बैठने में भी परेशानी होने लगती है. पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ये समस्या ज्यादा होती है. दवाओं से कुछ देर दर्द से राहत मिलती है, लेकिन जैसे ही दवा का असर कम होता है दर्द फिर से बढ़ जाता है. ऐसे में आप कुछ घरेलू उपायों से इस समस्या को कम कर सकते हैं.

1- लहसुन- लहसुन को आयुर्वेद में बहुत कारगर माना गया है. इससे कई बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है. कहते हैं कच्चा लहसुन खाने से जोड़ों के दर्द में बहुत आराम मिलता है. लहसुन के सेवन से कुछ ही दिनों में दर्द गायब हो जाती है. हां, इसके लिए सही मात्रा में सेवन करना भी ज़रूरी होता है भारतीय घरों में दर्द के अलावा भी लहसुन को कई बीमारियों के लिए आज भी इस्तेमाल किया जाता है.

2- पपीता- पपीता खाने से पेट और पाचन अच्छा रहता है ये तो सभी को पता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पपीता जोड़ों के दर्द को भी दूर करता है. अगर आप नियमित रूप से पपीता का सेवन करते हैं तो इससे जोड़ों के दर्द को आसानी से दूर किया जा सकता है. पपीता में विटामिन-सी भरपूर होता है जो दर्द और सूजन को कम करता है.

3- पिपरमिंट तेल- जोड़ों के दर्द में मालिश से काफी आराम मिलता है. हां इसके लिए आपको सही तेल का पता होना चाहिए. कहा जाता है कि पिपरमेंट ऑयल के साथ नारियल के तेल को हल्का गुनगुना करके सुबह और शाम मालिश करने से दर्द को दूर किया जा सकता है. इसके लिए ध्यान रहे कि दोनों तेल की मात्रा बिल्कुल बराबर हो और तेल हल्का गरम होना चाहिए. मालिश के साथ- साथ आपको नियमित एक्सरसाइज भी करनी चाहिए.

4- विटामिन-डी और कैल्शियम- ये सभी को पता है कि हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए विटामिन डी और कैल्शियम दोनों बहुत जरूरी हैं. अगर आपको जोड़ों और हड्डियों में दर्द की समस्या रहती है तो आप विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें. सुबह की थोड़ी धूर जरूर लें. इसके अलावा दूध को डाइट का हिस्सा बनाएं. इससे शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी दोनों की कमी पूरी होती है.

 

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की  just36news पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

रोजाना खाली पेट पानी पीने के ये 7 अमेजिंग फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

रोजाना खाली पेट पानी पीने के ये 7 अमेजिंग फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली : पानी हमारे स्वास्थ्य के लिए या यूं कहें कि जीवन के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है। कई विशेषज्ञ कहते हैं कि एक व्यक्ति को रोजाना आठ से 10 गिलास पानी पीना चाहिए। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह जरूरी नहीं है, आपको जितनी प्यास हो, उतना ही पानी पिएं। वैसे तो पानी पीने के कई तरीके हैं, जिन्हें लोग अपनाते हैं, लेकिन अंतत: निष्कर्ष यही निकलता है कि पानी जरूरी है। कई लोग ठंडा पानी पीना पसंद करते हैं तो कई लोगों को गर्म पानी अच्छा लगता है। खासकर सुबह-सुबह तो गर्म पानी पीना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। इससे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है और पाचन क्रिया के लिए भी यह फायदेमंद होता है। इसी तरह कई लोगों को खाली पेट पानी पीने की भी आदत होती है। इसे भी सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।


हमारे शरीर में 60% से 70% पानी होता है और उचित जलयोजन के बिना, यह अपरिहार्य है कि हमें स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, हमारी आधुनिक जीवनशैली और स्वाद भी हमारे द्वारा प्रतिदिन पीने वाले पानी की मात्रा को प्रभावित करते हैं।
आयुर्वेद और जापानी संस्कृति में सुबह सबसे पहले पानी पीने की प्रथा को बहुत अधिक माना जाता है। जैसे ही आप उठें, अपने दिन की शुरुआत 2 गिलास पानी से करें। हालांकि, अगर स्वाद आपको परेशान करता है, तो साइट्रस के निचोड़ के साथ अपनी बोतल को मसाला दें। इससे पहले कि आप महसूस करें, वह बोतल खाली हो जाएगी और आपका शरीर, खुश और स्वस्थ !


1. नियमित मल त्याग में मदद करता है
बार-बार कब्ज की समस्या हमारे स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है और शरीर के अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों को फेंकने से भी रोक सकती है। सुबह सबसे पहले पानी पीने से आपकी आंतों को साफ करने में मदद मिलती है। यह आंत्र को स्थानांतरित करने की इच्छा पैदा करता है और इस प्रकार पाचन तंत्र को विनियमित करने में मदद करता है।2. अब कोई सुबह का सिरदर्द नहीं
निर्जलीकरण सिरदर्द के सबसे बड़े कारणों में से एक है। सुबह खाली पेट पानी पीने से एसिडिटी कम होती है और इस समस्या से भी राहत मिलती है
3. आपके चयापचय को गति देता है
वजन कम करने के लिए आपको अपना मेटाबॉलिज्म बढ़ाना चाहिए। खाली पेट एक गिलास पानी पीने से मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है, इस प्रकार आपके भोजन के पाचन के समय में तेजी आती है और बदले में कुछ किलो वजन कम करने में भी मदद मिलती है !! यह आपके पाचन को भी दुरुस्त करता है !!


4. अपने वजन पैमाने पर संख्या कम करें
पानी पूरी तरह से कैलोरी मुक्त होता है और इस प्रकार इसे पर्याप्त मात्रा में पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है। यह विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर और एसिडिटी को भी कम करके आपके शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है !!


5. पाएं बेदाग त्वचा
क्या आपको आश्चर्य है कि जापानी लोगों की त्वचा इतनी चमकदार और निर्दोष क्यों होती है? जी हां, जापानी परंपरा है कि जागने के बाद सबसे पहले पानी पिएं। अगर आप कम पानी पीते हैं तो आपकी त्वचा पर समय से पहले झुर्रियां दिखने लगती हैं और त्वचा बेजान दिखने लगती है। खाली पेट पानी पीने से रक्त प्रवाह नियंत्रित होता है और बदले में त्वचा की गुणवत्ता में सुधार होता है। यह त्वचा को हाइड्रेटेड और चमकदार बनाता है।


6. स्वस्थ बाल
पानी बालों का 1/4 भाग बनाता है और इस प्रकार पर्याप्त पानी नहीं पीने से बाल कमजोर और भंगुर हो जाते हैं जिससे बाल टूटते हैं। पर्याप्त पानी पीने से बालों को चमकदार और स्वस्थ दिखने में मदद मिलती है


7. अपनी प्रतिरक्षा को मजबूत करें
जब आप जागने के बाद अपने शरीर को एक गिलास पानी से भरते हैं, तो यह आपके लसीका तंत्र को मजबूत करता है और शरीर से सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। यह संक्रमण के फैलने की संभावना को भी रोकता है। यह सब आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है, इस प्रकार सभी प्रकार के वायरल और बैक्टीरियल संक्रमणों को दूर रखता है !!

शाम की चाय के साथ खाएं ये हेल्दी स्नैक्स, मोटापा और डायबिटीज को करें कंट्रोल

शाम की चाय के साथ खाएं ये हेल्दी स्नैक्स, मोटापा और डायबिटीज को करें कंट्रोल

ज्यादातर लोग शाम की चाय के साथ कुछ न कुछ स्नैक्स जरूर लेते हैं. हालांकि जो लोग डाइट को लेकर थोड़ा ध्यान रखते हैं वो बड़ा ही सोच-समझकर कुछ खाते हैं. ऐसे में अगर आप वजन घटाना चाहते हैं या डायबिटीज के मरीज हैं तो आपको स्नैक्स के तौर पर कुछ ऐसी चीजें शामिल करनी होंगी जिससे आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहे. आज हम आपको ऐसे हेल्दी स्नैक्स बता रहे हैं, जिन्हें आप चाय या शाम को स्नैक्स के तौर पर खा सकते हैं.
1- ड्राइफ्रूट्स-
सबसे हेल्दी और टेस्टी स्नैक्स के तौर पर आप ड्राइफ्रूट्स खा सकते हैं. आप चाहें तो रोस्टेड या प्लेन काजू, बादाम, अखरोट और पिस्ता खा सकते हैं. इन्हें आप अपने साथ एक टिफिन में कैरी भी कर सकते हैं. ड्राइफ्रूट्स में स्वाद और पोषक तत्व भरपूर होते हैं. डेली ड्राइफ्रूट्स खाने से ब्लड शुगर और हार्ट दोनों कंट्रोल रहता है.
2- पॉपकोर्न-
जो लोग वजन घटाना चाहते हैं उन्हें स्नैक्स के रूप में पॉपकोर्न अपनी डाइट में शामिल करने चाहिए. शुगर के मरीजों के लिए भी ये काफी अच्छा स्नैक्स का ऑप्शन है. पॉपकोर्न में कम कैलरी होती है और इसे फटाफट घर में भी बना सकते हैं. पॉपकोर्न में काफी मात्रा में फाइबर होता है जिससे वजन भी कंट्रोल रहता है.
3- काले चने-
डायबिटीज के मरीज भुने हुए चने भी खा सकते हैं. रोज एक मुट्ठी चने खाने से आपकी भूख भी शांत होगी और वजन भी कंट्रोल रहेगा. काले चने खाने से ब्लड शुगर भी कंट्रोल रहता है. आप इन्हें अपने साथ आसानी से कैरी कर सकते हैं.
4- भेल और चिड़वा-
कुछ चटपटा खाने का मन है तो आप भेल खा सकते हैं. आप इसे हेल्दी बनाने के लिए इसमें फ्रूट्स और स्प्राउट्स भी मिला सकते हैं. इससे शरीर को अच्छी मात्रा में फाइबर मिलता है. आप चिड़वा यानि पोहा भी रोस्ट करके नमकीन बना सकते हैं. इसे एक बॉक्स में हमेशा अपने साथ आने-जाने में ले जा सकते हैं.
5- अंडा-
प्रोटीन से भरपूर अंडा भी अच्छा स्नैक्स ऑप्शन है. डॉक्टर्स रोज एक अंडा खाने की सलाह देते हैं. वजन घटाने के लिए आपको डाइट में अंडा जरूर शामिल करना चाहिए. डायबिटीज के मरीज रोज एक उबला हुआ अंडा खा सकते हैं. स्वाद बढ़ाने के लिए आप इसमें प्याज, टमाचर, हरी मिर्च, धनिया और चाट मसाला मिला लें.

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की just36news.com पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

 

6 से 12 साल के बच्चों को भी लगेगी कोरोना वैक्सीन, DCGI ने कोवैक्सीन को दी मंजूरी

6 से 12 साल के बच्चों को भी लगेगी कोरोना वैक्सीन, DCGI ने कोवैक्सीन को दी मंजूरी

भारत में बच्चों की वैक्सीन को लेकर बड़ा फैसला किया गया है. अब से 6 से 12 साल के बच्चों को भी वैक्सीन लगाई जा सकेगी. डीसीजीआई ने को-वैक्सीन को मंजूरी दे दी है. ये वैक्सीन भारत बायोटेक ने तैयार की है, इसके ट्रायल दिल्ली के AIIMS सहित कई राज्यों में हुए थे, अब DCGI ने इस वैक्सीन के ट्रायल के नतीजे आने के बाद को-वैक्सीन को 6-12 वर्ष के बच्चों के लिए सुरक्षित करार दिया है और इसे बच्चों को लगाए जाने को मंज़ूरी दे दी है.
अब DCGI की मंज़ूरी के बाद भारत बायोटेक बच्चों के वैक्सीन का उत्पादन व्यावसायिक आधार पर शुरू करेगी और इसके बाद बच्चों को वैक्सीन दिए जाने की शुरुआत की घोषणा सरकार की ओर से जल्द की जाएगी.
पेरेंट्स की चिंता हुई दूर
6-12 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ़्त वैक्सीन की व्यवस्था केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी, हाल ही में स्कूल पूरी तरह से खुल जाने के बाद बच्चों के मां-बाप को कोरोना को लेकर ख़ासी चिंता थी, अब छोटे बच्चों के लिए वैक्सीन को हरी झंडी दिए जाने के बाद ये पेरेंट्स के लिए बड़ी राहत की खबर है.
इन वैक्सीन को मिली है मंजूरी
6 से 12 साल के बच्चों के लिए को-वैक्सीन, 5 से 12 साल के बच्चों के लिए कोर्वेवैक्स और 12 साल से ऊपर के बच्चों के लिए ZyCoV-D को मंजूरी मिली है. इन तीनों वैक्सीन की मंजूरी आपातकालीन इस्तेमाल के लिए दी गई है. ये वैक्सीन लगवाने के लिए पहले कोविन ऐप या पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. रजिस्ट्रेशन के बाद ही इनको लगाया जा सकेगा. देश में 16 मार्च से 12 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए टीकाकरण शुरू किया गया था.

 

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