CORONA IN INDIA : एक बार फिर भारत में कोरोना की एंट्री, ये दो नए वेरिएंट पसारने लगे पैर    |    छत्तीसगढ़ पर फिर पड़ा Corona का साया,एक ही दिन में इस जिले में मिले इतने कोरोना मरीज,जानिए किस जिले में कितने एक्टिव केस ?    |    CG CORONA UPDATE : छत्तीसगढ़ में कोरोना के मामलों में बढ़त जारी...जानें 24 घंटे में सामने आए कितने नए केस    |    छत्तीसगढ़ में आज कोरोना के 10 नए मरीज मिले, कहां कितने केस मिले, देखें सूची…    |    प्रदेश में थमी कोरोना की रफ्तार, आज इतने नए मामलों की पुष्टिं, प्रदेश में अब 91 एक्टिव केस    |    CG CORONA UPDATE : छत्तीसगढ़ में कोरोना के मामलों में बढ़त जारी...जानें 24 घंटे में सामने आए कितने नए केस    |    BREAKING : प्रदेश में आज 15 नए कोरोना मरीजों पुष्टि, देखें जिलेवार आकड़े    |    प्रदेश में कोरोना का कहर जारी...कल फिर मिले इतने से ज्यादा मरीज, एक्टिव मरीजों का आंकड़ा पहुंचा 100 के पार    |    छत्तीसगढ़ में मिले कोरोना के 14 नए मरीज...इस जिले में सबसे ज्यादा संक्रमित,कुल 111 एक्टिव केस    |    सावधान : छत्तीसगढ़ में फिर बढ़ रहा कोरोना...जानें 24 घंटे में सामने आए कितने नए केस    |
Previous123456789...4849Next
1 अरब से ज्यादा लोग मोटापे के शिकार, संभल जाइए, वरना...

1 अरब से ज्यादा लोग मोटापे के शिकार, संभल जाइए, वरना...

ज्यादा वजन और मोटापा आजकल सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है. इसकी वजह से कई तरह की क्रोनिक बीमारियां भी हो रही हैं. यही कारण है कि ये समस्या चिंताजनक बनती जा रही है. सामान्य से ज्यादा वजन होने पर डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. हाल ही में आए अध्ययन में इसे लेकर गंभीर चिंता जताई गई है. इसमें कहा गया है कि जिस तरह से दुनिया में मोटापा बढ़ रहा है, उससे आने वाले समय में कई गंभीर समस्याएं (Obesity Risk Factors) बढ़ सकती हैं. आइए जानते हैं आखिर क्यों अलर्ट कर रहा यह रिपोर्ट...

क्या कहती है रिपोर्ट

द लैंसेट जर्नल में छपी एक रिपोर्ट में मोटापे को लेकर चिंता जाहिर की गई है. इसके अनुसार, दुनियाभर में मोटापे के शिकार बच्चों, किशोरों और वयस्कों की संख्या 1 अरब से भी ज्यादा हो गई है. शोधकर्ताओं ने बताया है कि साल 1990 के बाद से मोटापे की समस्या बढ़ी है. हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं. ज्यादा वजन वालों में कई समस्याएं हो सकती हैं.

डराने वाले हैं आंकड़े

WHO ने सहयोगियों के साथ मिलकर एक ग्लोबल डेटा तैयार किया है. जिसमें अनुमान जताया गया है कि 1990 की तुलना में 2022 में मतलब तीन दशक में बच्चों और किशोरों में मोटापा चार गुना तक बढ़ा है. महिलाएं में दोगुना और पुरुषों में यह समस्या तीन गुना से ज्यादा हो गई है. आंकड़ों के अनुसार, 2022 में 15.9 करोड़ बच्चे और किशोर, जबकि 87.9 करोड़ वयस्क मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं.

मोटापा क्यों खतरनाक
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया में इन दिनों जिन बीमारियों की वजह से मौत का खतरा या गंभीर समस्याएं हो रही हैं, उनका कारण ज्यादा वजन यानी मोटापा ही माना जाता है. बच्चों में मोटापा होना बेहद ही गंभीर समस्या बन सकती है. इसका सीधा असर उनकी लाइफ पर पड़ता है, जो पूरी तरह प्रभावित हो सकती है. इसकी वजह से हार्ट अटैक और हार्ट से जुड़ी बीमारियां भी हो सकती हैं. अगर इसे समय पर रहते कंट्रोल न किया जाए तो ये कई बड़ी बीमारियों को जन्म दे सकता है. इसलिए इन आंकड़ों को हेल्थ अलर्ट मानना चाहिए.

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें. 

खाली पेट इन फलों को खाना होता है फायदेमंद, शरीर को मिलते हैं भरपूर पोषण

खाली पेट इन फलों को खाना होता है फायदेमंद, शरीर को मिलते हैं भरपूर पोषण

 फल हमारे शरीर को कई तरह के विटामिन्स देते हैं, कुछ फल ऐसे हैं जिसे अगर सुबह खाली पेट खाने से शरीर को अधिक फायदा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि खाली पेट अधिक पोषक तत्वों को अवशोषित करता है और उस समय आपका पाचन तंत्र अन्य खाद्य पदार्थों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहा होता है।

यहां हम आपको ऐसे सात फलों के बारे में बता रहे हैं जिनका खाली पेट सेवन आपको ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचा सकता है।

पपीता

पपीता पपेन और काइमोपैपेन जैसे एंजाइमों से भरपूर होता है। ये एंजाइम पाचन में सुधार और कब्ज को रोकने के लिए जिम्मेदार हैं। जब इसे खाली पेट खाया जाता है, तो शरीर पपीते से विटामिन ए, सी और ई को बेहतर ढंग से अवशोषित कर पाता है, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट हैं जो प्रतिरक्षा को मजबूत करते हैं और स्वस्थ त्वचा बनाए रखते हैं।

तरबूज

अगर आप सुबह सबसे पहले तरबूज खाते हैं तो यह लंबी रात के बाद आपके शरीर को हाइड्रेट करने के लिए बेहतरीन हो सकता है क्योंकि इसमें 92% पानी होता है। इसके अलावा तरबूज लाइकोपीन से भरपूर होता है जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है।

ब्लूबेरीज

सुबह-सुबह अगर कुछ मीठा खाने का मन करे तो ब्लूबेरी खाएं। इसमें एंटीऑक्सिडेंट होता है। इसे खाली पेट खाने पर दिमागी ताकत मिलती है और शुगर भी कंट्रोल में रहती है।

केले

सुबह सबसे पहले केला खाने से शरीर में ऊर्जा भर जाती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और प्राकृतिक शर्करा अधिक होती है। इसमें पोटैशियम भी प्रचुर मात्रा में होता है जो हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखता है।

अनानास

अनानास खाली पेट खाने के लिए एक बेहतरीन फल है। फल विटामिन सी और मैंगनीज से भरपूर होता है और जैसे ही ये पोषक तत्व शरीर में अच्छी तरह से अवशोषित हो जाता है, वो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने लगता है और हड्डियों को भी मजबूत बनाता है। यह फल सूजन को भी कम करता है।

सेब

प्रतिदिन एक सेब डॉक्टर को दूर रखता है, यह कहावत सच है, खासकर जब इसे खाली पेट खाया जाए तो और भी अच्छा है। सेब में पेक्टिन उच्च मात्रा में होता है। यह एक प्रकार का फाइबर है जो पाचन में सहायता करता है और भूख को नियंत्रित करने में मदद करता है। इनमें क्वेरसेटिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं जो मस्तिष्क की कार्यक्षमता और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ाते हैं।

कीवी

कीवी भले ही छोटा सा फल है लेकिन इसे खाली पेट खाने से बड़े फायदे होते हैं। यह फल आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है। इसमें एक्टिनिडिन नामक एंजाइम भी होता है जो पाचन को सुचारू बनाने में सहायता करता है।

भारत में CORONA का नया वेरिएंट JN.1 दे रहा दस्तक, जानिए क्या है इसके लक्षण

भारत में CORONA का नया वेरिएंट JN.1 दे रहा दस्तक, जानिए क्या है इसके लक्षण

  नई दिल्ली : पूरी दुनिया में कोहराम मचाने वाली कोरोना महामारी अभी भी हमारा पीछा नहीं छोड़ रही है। बीते कुछ समय से दुनियाभर में भले ही इसके केसों में कुछ कमी देखने के लिए तो मिल रही है, लेकिन इसका खतरा अभी तक टला नहीं है।

बीच-बीच मे कई बार इस वायरस के विभिन्न वेरिएंट्स ने लोगों की चिंता और भी ज्यादा बढ़ा दी है। इसी दौरान अब एक बार फिर इसे लेकर लोगों की चिंता और भी ज्यादा बढ़ा दी है। दरअसल, चीन जहां से इस महामारी की शुरुआत हुई थी, वहां अब कोरोना के एक नए सबवेरिएंट जेएन.1 (JN.1) के केस सामने आए है।

कोविड के इस नए सबवेरिएंट की पहचान सबसे पहले लक्जमबर्ग में हुई थी, इसके उपरांत यूके, आइसलैंड, फ्रांस और अमेरिका में भी इसके केस सामने आने लग गए। इतना ही नहीं खुद इंडिया में भी कोरोना के इस सबवेरिएंट का एक केस देखने के लिए मिला है। बीते दिनों केरल में इस नए सबवेरिएंट जेएन.1 की पुष्टि भी कर दी गई थी। इस केस के सामने आते ही अब सभी की चिंताएं एक बार फिर से तेजी से बढ़ने लगी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में जानते हैं कोरोना के इस नए सबवेरिएंट से जुड़ी वह सभी बातें, जो आपके लिए जानना बहुत ही ज्यादा आवश्यक है।

जेएन.1 क्या है ?: डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन सेंटर (CDC) के अनुसार कोविड का यह सबवेरिएंट, ओमिक्रॉन सबवेरिएंट BA.2.86 का वंशज है, जिसे ‘पिरोला’ भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों की मानें, तो JN.1 और BA.2.86 के मध्य केवल एक ही बदलाव है और वह है स्पाइक प्रोटीन में परिवर्तन। स्पाइक प्रोटीन जिसे स्पाइक भी बोला जाता है। यह वायरस की सतह पर छोटे स्पाइक्स जैसा दिखाई देता है। इसी वजह से लोगों में वायरस का संक्रमण अधिक तेजी से होता है।

जेएन.1 के लक्षण क्या है?: खबरों का कहना है कि कोरोना के इस नए सबवेरिएंट के अभी तक कोई खास लक्षण दिखाई नहीं दे रहे है। ऐसे में यह पता लगा पाना मुश्किल है कि इसके लक्षण कोरोना के अन्य वेरिएंट से अलग है या नहीं। वहीं, बात करें कोरोना के आम लक्षणों की, तो इनमें निम्न शामिल हैं-

बुखार
लगातार खांसना
जल्दी थकान होना
नाक बंद या जाम हो जाना
नाक का बहना
दस्त
सिर में दर्द

कितना खतरनाक है नया वेरिएंट: फिलहाल, जेएन.1 को लेकर कोई विस्तृत जानकारी अब तक सामने नहीं आई है। CDC की मानें तो इस वेरिएंट के बढ़ते केसों को देख यह कहा जा सकता है कि या तो यह अधिक संक्रामक है या फिर यह हमारे इम्यून सिस्टम से आसानी से बच सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि मौजूदा समय में इस बात का कोई सबूत नहीं है कि JN.1 वर्तमान में मौजूद कोविड के अन्य वेरिएंट की तुलना में अधिक खतरनाक है या नहीं।

इन 4 चीज़ो के साथ कभी नहीं खाना चाहिए आम, हो सकते है नुकसान

इन 4 चीज़ो के साथ कभी नहीं खाना चाहिए आम, हो सकते है नुकसान

 सेहत। गर्मियों के मौसाम में आम खाना किसे नहीं पसंद। आम को यूं ही नहीं फलो का राजा कहते हैं। आम बाजार में आते ही खरीदने के लिए लंबी कतार लग जाती है। वैसे तो आम को किसी भी समय स्वाद लेकर लोग खा लेते हैं लेकिन इसके सेवन से जुड़ी कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाना जरूरी है। लोग अक्सर आम के साथ कुछ ऐसी चीजें खा लेते हैं जो हमारे लिए नुकसानदायक हो सकते हैं इन्हें खाने पर पेट खराब होने तक की नौबत आ जाती है। आज इस लेख में जानते है कि आम के साथ क्या क्या नहीं खाना चाहिए।

आम के साथ ना खाए जाने वाली चीजें

दही

आम के साथ दही को खाने की सलाह नहीं दी जाती है. दही (Curd) और आम एक साथ खाने पर वे शरीर को अंदर से जरूरत से ज्यादा गर्म करने लगते हैं। ऐसी स्थिति में स्किन संबंधी दिक्कतें होने लगती हैं और साथ ही शरीर में टॉक्सिंस बढ़ सकते हैं। यह देखते हुए दही और आम को साथ खाने से परहेज किया जाता हैं।

मिर्च

मिर्च और तीखी चीजों को आम के साथ ना खाना ही बेहतर होता है। आम और तीखी चीजों का कोंबिनेशन पेट को बिगाड़ सकता है. इससे स्किन संबंधी दिक्कतें तो बढ़ती ही हैं, साथ ही पेट में दर्द और गड़बड़ी भी हो सकती है।

कोल्ड ड्रिंक्स

कार्बोनेटेड और एक्सेस शुगर से भरपूर कोल्ड ड्रिंक्स (Cold Drinks) को आम के साथ ना खाने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि आम खाने के बाद इन कोल्ड ड्रिंक्स को पीने पर पेट खराब हो सकता है। इसके अलावा शुगर लेवल अत्यधिक बढ़ जाने से शुगर स्पाइक हो सकता है जोकि सेहत के लिए अत्यधिक हानिकारक होता है।

पानी पीना

आम के साथ या आम खाने के तुरंत बाद पानी पीने से परहेज करना चाहिए। आम के साथ पानी पीने पर पाचनतंत्र खराब हो सकता है। इससे डाइजेस्टिव एंजाइम्स प्रभावित होते हैं। इसके अलावा पेट में दर्द और कब्ज (Constipation) की समस्या हो सकती है।

गर्मियों खाएंगे ये फल-सब्जियां तो कभी नहीं बढ़ेगा कोलेस्ट्रॉल लेवल, जानिए कोलेस्ट्रॉल वाली डाइट

गर्मियों खाएंगे ये फल-सब्जियां तो कभी नहीं बढ़ेगा कोलेस्ट्रॉल लेवल, जानिए कोलेस्ट्रॉल वाली डाइट

कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली सब्जियां और फल

देखा जाए तो गर्मी का मौसम ताजे और रसीले फलों और सब्जियों का मौसम है। स्वादिष्ट आम से लेकर ताजगी देने वाले तरबूज तक में सूरज की गर्मी से राहत देने की क्षमता होती है। हालांकि इस मौसम में अपनी हेल्थ का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है, फिर चाहे हम कितने भी स्वादिष्ट पदार्थों का सेवन ना कर लें। फैट जैसा पदार्थ कोलेस्ट्रॉल शरीर में पाया जाता है। जो दो तरह के होते हैं। एलडीएल और एचडीएल। जबकि हमारे सिस्टम के लिए कोलेस्ट्रॉल की जरूरत होती है। काफी ज्यादा खराब कोलेस्ट्रॉल या एलडीएल किडनी की समस्याओं का कारण बन सकता है। डीप फ्राई खाना, डेयरी प्रोडक्ट, रेड मीट, बेकरी उत्पाद, प्रोसेस्ड मीट, सलामी, सॉसेज, कोरिजो, मांस के फैटी कट्स होती है और शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल या बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यहां कुछ गर्मियों के खाद्य पदार्थ हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकते हैं।

भिंडी

गर्मियों के मौसम के लिए भिंडी खाना काफी ज्यादा फायदेमंद होती है। यह ना केवल पकाने में आसान होती है, बल्कि इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। विटामिन के, सी और ए के साथ-साथ मैग्नीशियम, फोलेट और फाइबर जैसे जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर भिंडी को पचाना भी काफी आसान है और कोलेस्ट्रॉल से निपटने में मदद करती है।

करेला

गर्मी कई तरह की सब्जियों का मौसम है। जिसमें से एक परवल भी है। जिसे सभी खाना पसंद करते हैं। यह सब्जी ना केवल गर्मियों को मुख्य भोजन है, बल्कि यह हाई कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने में भी मदद करती है। विटामिन सी, बी1, बी2 और ए जैसे पोषक तत्वों से भरपूर परवल गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है।

ककड़ी और खीरा

ककड़ी गर्म महीनों के लिए सबसे लोकप्रिय सब्जियों में से एक है। इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जो आपको गर्मी में ठंडा रखने के लिए काफी अच्छा है। इसमें फाइटोस्टेराल होते हैं, जो हाई कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा इसमें पेक्टिन भी होता है। जो एक घुलनशील फाइबर होता है। जो कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने में मदद करते हैं।

तरबूज

गर्मी, धूप वाले दिन के बाद एक ग्लास तरबूज का जूस पीना किसे पसंद नहीं होगा। तरबूज में एक काफी ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। इसमें मौजूद लाइकोपीन की मौजूदगी में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है। 

सावधान! गर्मियों में ठंडा पानी पीना हो सकता है खतरनाक, तुरंत हो जाएंगे इन बीमारियों के शिकार

सावधान! गर्मियों में ठंडा पानी पीना हो सकता है खतरनाक, तुरंत हो जाएंगे इन बीमारियों के शिकार

 गर्मी का मौसम आते ही हम सबकी हालत खराब हो जाती है। सूरज की तपती धूप की मार सहना हम सबके लिए किसी सजा से कम नहीं होती। ऐसे में इस मौसम में ठंडा पानी ही लोगों का सहारा बनता है। चिलचिलाती धूप में पसीने से भीगे हुए ऑफिस, स्कूल या फिर कॉलेज से जब हम घर पहुंचते हैं तो बिना सोचे समझे ठंडा पानी पी लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं ठंडा पानी आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इस मौसम में ज़्यादा ठंडा पानी पीने से हमे कई सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। चलिए आपको उन परेशानियों के बारे में बताते हैं।

  • दिल की धड़कन करता है प्रभावित: ठंडा पानी आपकी धड़कन की गति को बहुत ही गंभीर तरीके से प्रभावित करता है। ठंडा पानी हमारे शरीर के नर्वस सिस्टम का बैलेंस बिगाड़ देता है। जिस वजह से हमारी धड़कन की गति स्लो हो जाती है।
  • मोटापा बढाए: मोटापे के पीछे एक सबसे बड़ी वजह हमारी अनियमित जीवनशैली है। अगर आप खाने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीते है तो इससे आपको मोटापे की संभावना कई गुना बढ़ हो जाती है। यही कारण है कि डाइटिशियन खाने के तुरंत बाद पानी पीने से मना करते हैं।
  • सर्दी और खांसी हो सकती है: इस मौसम में ठंडा पानी पीने से लोग सर्दी और खांसी की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए खाने के बाद ठन्डे पानी की बजाय आपको नॉर्मल पानी पीना चाहिए।दरअसल, ठंडा पानी हमारे शरीर में बहुत ज़्यादा मात्रा में म्यूकस पैदा करता है जिस वजह से बॉडी में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
  • पाचन क्रिया होती है कमजोर: बहुत ठंडा पानी या कोई भी ड्रिंक आपकी ब्लड सेल्स को प्रभावित करता है, जिसका सीधा असर हमारी पाचन क्रिया पर पड़ता है। ठंडे पानी का सेवन पाचन क्रिया कमजोर कर देता है। इसलिए ठन्डे पानी से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है।

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य ले)

 
किशमिश का पानी इन लोगों के लिए है अमृत समान रोज़ाना खाली पेट पीने से मिलेंगे चौंकाने वाले फायदे

किशमिश का पानी इन लोगों के लिए है अमृत समान रोज़ाना खाली पेट पीने से मिलेंगे चौंकाने वाले फायदे

  किशमिश को गुणों की खान कहते हैं। अंगूर को सुखाकर इस बेहतरीन ड्राई फ्रूट को तैयार किया जाता है। इसमें अंगूर के सभी गुण मौजूद होते है। इसमें आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फाइबर काफी ज़्यादा मात्रा में पाया जाता है। जो आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है। इसके सेवन से कई गंभीर बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है। बेहतरीन और हेल्दी लाइफ के लिए इसको भिगोकर सुबह के समय खाना और इसका पीनी पीना बेहद लाभकारी माना गया है। चलिए आपको बताते हैं इसका पानी पीने से आपको क्या फायदे मिलेंगे।

इन समस्याओं में कारगर है किशमिश का पानी

पेट की तकलीफों से दिलाए छुटकारा: अगर आपको कब्ज, एसिडिटी और थकान की समस्या है तो किशमिश का पानी काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इसका नियमित रूप से सेवन करने से आपको पेट की इन तकलीफों से छुटकारा मिलेगा।

कोलेस्ट्रॉल करे कंट्रोल: किशमिश के पानी को रोज पीने से बढ़ते कोलेस्ट्रॉल के लेवल को मेंटेन किया जा सकता है। साथ ही ये शरीर के ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने में मदद भी करता है। जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
स्किन बनाएं जवान: किशमिश के पानी को रोज सुबह पीने से आपकी स्किन से झुर्रियां काम होने लगेंगी और साथ ही आपको अपनी त्वचा में एक बेहतरीन ग्लो देखने मिलेगा। इसके रोजाना सेवन करने से, मेटाल्जिम भी मजबूत होता है।

खून बढ़ाये: अगर आपका हीमोग्लोबिन कम हो गया है तो आपको किशमिश और उसके पानी का सेवन करना चाहिए। इसके निरंतर सेवन से आपके शरीर में खून बढ़ने लगता है।

बुखार में असरदार: अगर आपको बुखार आ रहा है तो इसके पानी का रोज़ाना सुबह के समय सेवन करने से आपको बेहतरीन लाभ देखने मिलेगा।

ऐसे बनाएं किशमिश का पानी

किशमिश के पानी को बनाने के लिए एक पैन में थोड़ा पानी लेकर इसमें थोड़ी किशमिश डालकर कम से कम 20 मिनट तक उबालें। इसके बाद इसे पानी को एक गिलास में रात भर भिगो कर रख दें सुबह इस पानी को पी लें।

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)

खांसी में जहर के समान हैं इन फलों का सेवन बढ़ा सकता है कफ और कंजेशन की समस्या

खांसी में जहर के समान हैं इन फलों का सेवन बढ़ा सकता है कफ और कंजेशन की समस्या

 मौसम बदल रहा है और इस समय वायरल और कोराना का भी प्रकोप देखा जा रहा है। ऐसी स्थिति में डाइट का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। खास कर उन चीजों का जिनका सेवन खांसी में बलगम बढ़ा सकता है और सीने में कंजेशन पैदा कर सकता है। ऐसे ही कुछ फल हैं जिनका सेवन खांसी में जहर के समान काम कर सकता है। तो, जानते हैं इन फलों के बारे में विस्तार से।

खांसी में कौन सा फल नहीं खाना चाहिए-fruits avoid in cough in hindi

1. एवोकाडो-Avocado
एवोकाडो, खांसी जुकाम की समस्या में खाने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए कि ये हिस्टामाइन (histamines) से भरपूर होते हैं और ये खांसी को ट्रिगर कर सकते हैं। साथ ही ये फल शरीर के लिए ठंडा होता है जिसे खाने से कफ बढ़ सकता है और आपको सीने में कंजेशन की समस्या हो सकती है।

2. स्ट्रॉबेरी-Strawberry
स्ट्रॉबेरी का सेवन, यूं तो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। लेकिन, खांसी में इसके सेवन से बचना चाहिए। दरअसल, इसके कुछ तत्व जैसे कि कई बार विटामिन सी ही खांसी को ट्रिगर करता है और बलगम बढ़ाने वाला हो सकता है। इससे सीने में कंजेशन की समस्या महसूस हो सकती है।

3. नारियल पानी-Coconut water
नारियल पानी पीना खांसी की समस्या में जहर का काम कर सकता है। ये आपके शरीर में कफ तत्व को बढ़ा सकता है, ठंडक पैदा कर सकता है और खांसी का कारण बन सकता है। इससे न चाहते हुए भी आपको लंबे समय तक के लिए खांसी परेशान कर सकती है।

4. अंगूर-Grapes
अंगूर खाना, कफ की समस्या और खांसी को बढ़ा सकता है। अंगूर खाने की वजह से आपको रह-रह कर खांसी परेशान कर सकती है। इसलिए, अगर आपको खांसी हो रही है तो थोड़े दिन अंगूर का सेवन करने से बचें। साथ ही इन फलों की जगह गर्म चीजों का सेवन करें जो कि खांसी-जुकाम को कम करने में आपकी मदद करे।

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)

इस लाजवाब जूस के सेवन से करें बॉडी डिटॉक्स, कब्ज और एसिडिटी की समस्या भी होगी कंट्रोल

इस लाजवाब जूस के सेवन से करें बॉडी डिटॉक्स, कब्ज और एसिडिटी की समस्या भी होगी कंट्रोल

 इन दिनों दिल्ली समेत एनसीआर में धीरे धीर गर्मी बढ़ रही है वहीं दूसरी तरफ बारिश भी हो रही है, जिस वजह से लोग कई बीमारीयों का शिकार हो कस्ते हैं. ऐसे में आपकी सेहत खराब न हो इसलिए आप अपनी बॉडी को इन कुछ घरेलू नुस्खों से डिटॉक्स कर सकते हैं. स्वामी रामदेव के अनुसार लौकी और कद्दू के जूस का सेवन करने से आपको इस मौसम में खूब एनर्जी मिलेगी।

दरअसल इस मौसम में आप अपने शरीर को डिटॉक्स कर अपना पाचन दुरुस्त कर सकते हैं साथ ही आपके लीवर की ताकत भी बढ़ेगी। इतना ही नहीं कद्दू और लौकी का जूस पीने से र एसिडिटी, कब्ज जैसी पेट संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलने के साथ वजन कम करने में मदद मिलेगी। जानिए कैसे करें इसका सेवन।

विटामिन से भरपूर है लौकी और कद्दू

कद्दू के जूस में प्रचुर मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है। इसके अलावा इसमें कॉपर, आयरन और फास्फोरस, फाइबर, विटामिन बी1, बी2, बी6,सी, ई और बीटा केरोटिन की प्रचुर मात्रा मौजूद होती है। वहीं लौकी के जूस में भरपूर मात्रा में डायट्री फाइबर, विटामिन- ए, विटामिन -सी, थायमिन, राइबोफ्लेविन, विटामिन- बी3, बी6, मिनरल्स, कैल्श‍ियम, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस आदि पाए जाते हैं।

इन बीमारियों में लौकी और कद्दू का जूस है फायदेमंद

  • दिल को रखें मजबूत
  • वजन कम करने के लिए फायदेमंद
  • हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करे
  • कब्ज में राहत दे
  • विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालने में मददगार
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाए
  • मॉर्निंग सिकनेस दूर करे
  • बॉडी की सूजन को दूर करे

ऐसे बनाएं जूस

लौकी और कद्दू दोनों को बराबर मात्रा में लेकर ग्राइंडर के माध्यम से जूस निकाल लें। अगर आपको थोड़ा स्वाद सही करना हैं तो इसमें धनिया, पुदीना की कुछ पत्तियां डालकर ग्राइंड कर लें और पीते समय थोड़ा सा नींबू का रस मिला लें। इससे जूस का स्वाद बेहतर हो जाएगा। रोजाना सुबह-सुबह अपनी डाइट में इसे जरूर शामिल करें।

ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)

पेट की गर्मी को बाहर निकालकर बॉडी को ठंडक पहुंचाती हैं ये हरी पत्तियां, लू लगने से बचा रहेगा शरीर

पेट की गर्मी को बाहर निकालकर बॉडी को ठंडक पहुंचाती हैं ये हरी पत्तियां, लू लगने से बचा रहेगा शरीर

 पुदीना, विटामिन सी, विटामिन ए और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स जैसे गुणों से भरपूर होता है। पुदीने में ऐसे गुण मौजूद होते हैं जिसके सेवन से आपको तुरंत ताजगी भरा महसूस होता है। पुदीने का इस्तेमाल अमूमन गर्मियों में इसलिए किया जाता है क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। छाछ हो या आम पन्ना इसका इस्तेमाल इन दोनों में किया जाता है।

इसके अलावा ये कैंडीज टूथपेस्ट से लेकर माउथ फ्रेशनर्स में इस्तेमाल किया जाता है। पुदीना बेहतर पाचन को बढ़ावा देता है, मितली को रोकता है, सांस की समस्याओं, अवसाद-थकान को दूर करने में मदद करता है। वहीं पुदीने में मेन्थॉल, मेन्थोन और लिमोनेन जैसे कई एसेंशियल ऑयल पाए जाते हैं जो आपके खराब पेट को सही करने में मददगार साबित होते हैं। क्या कभी आपने पुदीने की चाय ट्राई की है? अगर नहीं तो आज हम आपके लिए पेपरमिंट टी बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। पेपरमिंट टी चाय टेस्टी और हेल्दी होती है। इसके सेवन से आपके शरीर से गर्मी को बाहर निकालने में मदद मिलती है, तो चलिए जानते हैं पेपरमिंट टी कैसे बनाएं।

पेपरमिंट टी बनाने के लिए इंग्रीडिएंट्स

पानी 2 कप
पुदीने के पत्ते 15 ताजे
शहद 1 बड़ा चम्मच
आइस क्यूब्स 4-5

 

इसके चाय से ये बीमारियां होंगी कंट्रोल

संक्रमण का जोखिम होता है कम
माइग्रेन में पा सकते हैं आराम
नींद में होता है सुधार
पेट कम करने के लिए बेहद फायदेमंद

पेपरमिंट टी कैसे बनाएं?

पेपरमिंट टी बनाने के लिए आप सबसे पहले एक पैन लें। फिर आप इसमें पानी डालें और 1 उबाल आने तक पकाएं। इसके बाद आप इसमें पुदीने के पत्ते डालें। फिर आप इसको धीमी आंच पर करीब 4-5 मिनट तक पकाएं। इसके बाद आप गैस को बंद करके इसको थोड़ा ठंडा होने के लिए रख दें। फिर आप एक गिलास में आइस क्यूब्स और पेपरमिंट टी डालें। इसके बाद आप इसमें शहद और नींबू का रस डालकर मिला लें। अब आपकी हेल्दी पेपरमिंट टी बनकर तैयार हो चुका है।

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)

रोजाना इन पत्तों को खाने से स्किन और सेहत दोनों रहती है अच्छी

रोजाना इन पत्तों को खाने से स्किन और सेहत दोनों रहती है अच्छी

 हम अपने घरों में कई तरह के पौधे लगाते हैं. इनमें से कुछ पौधे ऐसे होते हैं जो घर के वातावरण को स्वच्छ रखते हैं और कुछ केवल घर की शोभा बढ़ाने में ही काम आते हैं. वहीं, कुछ ऐसे पौधे भी हैं जिनके पत्ते स्किन और सेहत के लिए अच्छे साबित होते हैं।

 ऐसे ही कुछ पत्ते हैं तुलसी के पत्ते. ये पत्ते अनेक घरों में पाए जाते हैं. इन्हें एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के चलते इनका चाय और काढ़ा बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन, तुलसी के पत्तों के फायदे यहीं पर खत्म नहीं होते हैं।

तुलसी के पत्ते  फायदा

सर्दी-जुकाम

तुलसी के पत्तों को सुबह खाली पेट चबाना बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा तुलसी के पत्तों का काढ़ा  या चाय बनाकर पीने पर भी सर्दी-जुकाम जैसी श्वसन तंत्र की दिक्कतों से छुटकारा मिलता है. सिर में ज्यादा दर्द हो तो तुलसी के पत्तों को पानी में डालकर उबालकर पीने पर दर्द से राहत मिल जाती है।

एक्ने कम करने में मददगार 

चेहरे पर लाल फुंसियां निकलने को एक्ने  कहते हैं. एक्ने होने पर त्वचा की बाहरी परत लाल और दानों से भरी हुई दिखने लगती है और त्वचा अत्यधिक सेंसिटिव भी हो जाती है. ऐसे में तुलसी के पत्ते इंफेक्शन और एक्ने बढ़ाने वाले बैक्टीरिया को मारते हैं और प्राकृतिक रूप से एक्ने कम करने में मदद करते हैं. इसके लिए तुलसी के पत्तों को खाने के अलावा इन्हें पीसकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर फेस पैक की तरह लगाया जा सकता है. दूसरा तरीका है कि तुलसी के तेल को नारियल तेल के साथ मिक्स करके रूई की मदद से एक्ने पर लगाएं जिससे त्वचा इसे बेहतर तरीके से सोख सके। 

डायबिटीज 

डायबिटीज होने पर व्यक्ति को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. इसके अलावा ऐसी चीजों के सेवन पर जोर दिया जाता है जो ब्लड शुगर को कम करने या फिर सामान्य रखने में मदद करें. ऐसे में तुलसी के पत्तों का सेवन फायदेमंद होता है. तुलसी के पत्ते ब्लड ग्लुकोज लेवल को सामान्य रखने में मददगार साबित हो सकते हैं. डायबिटीज के मरीज इन पत्तों को साफ करके इन्हें चबाकर खा सकते हैं।

पाचन होता है बेहतर 

तुलसी एसिड रिफलक्स को बैलेंस करती है और पाचन को दुरुस्त करने में भी मददगार है. पेट में गड़बड़ी महसूस होने पर तुलसी के पत्तों को गर्म पानी में पकाकर इसकी चाय पी जा सकती है. ये पत्ते हर्बल चाय में भी तरह-तरह से इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

तुलसी के पत्तों को चबाने पर मुंह से आ रही बदबू से छुटकारा मिलता है। आप इन पत्तों को चबाना अपनी आदत भी बना सकते हैं. रोज सुबह उठकर कुछ तुलसी के पत्तों को चबा लें। इसके अलावा, जब भी मुंह से बदबू आती महसूस हो तो तुलसी के पत्ते खा लें। बदबू कम होने लगेगी। 

इम्यूनिटी होती है मजबूत 

तुलसी के पत्तों में कई एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. यह पत्ते शरीर को कई इंफेक्शंस से दूर रखने में भी सहायक साबित होते हैं. ऐसे में नुकसानदायक बैक्टीरिया से लड़ने वाले इन पत्तों को शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खाया जा सकता है.

शादियों में बजने वाला तेज म्यूजिक कैसे बन रहा आपके दिल का दुश्मन, नई स्टडी में हुआ खुलासा?

शादियों में बजने वाला तेज म्यूजिक कैसे बन रहा आपके दिल का दुश्मन, नई स्टडी में हुआ खुलासा?

बिहार के सीतामढ़ी के 22 साल के सुरेंद्र कुमार की मौत मंच पर उस समय हो गयी जब वो अपनी दुल्हन को वरमाला पहना रहे थे. सुरेंद्र कुमार की मौत हार्ट अटैक से हुई. परिवार का कहना था कि सुरेंद्र कुमार की मौत डीजे की तेज आवाज के कारण हुई. तेज आवाज की वजह से उनकी दिल की धड़कने बढ़ गई और वो मंच से गिर पड़े.

इसी तरह की एक और घटना तेलंगाना में हुई. एक 19 साल के शख्स की मौत शादी में डांस करते समय हो गयी. वहीं दूसरी तरफ पिछले साल 25 नवंबर को वाराणसी के पिपलानी कटरा में एक शादी समारोह में डांस करते समय एक व्यक्ति का दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई थी. समारोह के वायरल हुए वीडियो में शख्स डांस करता दिखाई दे रहा था और अचानक जमीन पर गिर पड़ा.

पिछले कुछ महीनों में, देश भर से चौंकाने वाली ऐसी कुछ घटनाएं सामने आई हैं. जिसमें लोगों को अचानक गिरते हुए देखा गया और कुछ मामलों में मौके पर लोग मर भी गए. देख कर ऐसा लगा कि वो तेज संगीत बर्दाश्त नहीं कर पाए.

सेहतमंद बुजुर्ग कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों की चपेट में


नवंबर 2019 में यूरोपीय हार्ट जर्नल में छपी एक रिसर्च में बताया गया कि किसी भी तरह का संगीत, चाहे वह धीमा हो या तेज व्यक्ति के दिल को कमजोर बना सकता है. शोधकर्ताओं ने 500 स्वस्थ वयस्कों पर अध्ययन किया. इस शोध में ऐसे लोगों को शामिल किया गया जो बहुत बिजी और शोरगुल वाले बाजार में रहते थे या काम कर रहे थे.

पांच साल तक किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई कि जिन लोगों में दिल की बीमारियों के कोई लक्षण नहीं होते, उन्हें शोरगुल वाले बाजारों में रहने के बाद हृदय रोग के लक्षण दिखने लगे. इस रिसर्च में ये पता चला कि कार्डियोवैस्कुलर संबंधित बीमारियों के होने की सबसे बड़ी वजह शोरगुल में होना है.

रिसर्च में ये पाया गया कि औसत 24 घंटे में 5-डेसिबल के शोर से दिल के दौरे, स्ट्रोक और अन्य गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं में 34 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. यह एमिग्डाला (मस्तिष्क के अंदर ग्रे मैटर) को भी प्रभावित करता है जो निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. और दिल का दौरा इस हिस्से को सिकुड़ने की वजह से होता है. इससे मूड स्विंग, गुस्सा जैसी समस्याएं पैदा होती हैं जो हार्ट अटैक का लक्षण हैं.

तेज संगीत दिल की धड़कन की पर क्या असर डालता है

इसी तरह का एक अध्ययन जर्मनी के मेन्ज़ यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में भी किया गया. इसमें 35 से 74 साल की आयु के लगभग 15,000 लोगों को शामिल किया गया. अध्ययन में इस बात का पता किया गया कि हार्ट अटैक की वजह संगीत है या शोर. शोध में ये बात सामने निकल कर आई कि जब कोई व्यक्ति तेज संगीत के संपर्क में आता है, तो उनके दिल की धड़कन तेजी से बढ़ती है, यह ठीक वैसा ही है जैसे जॉगिंग या शारीरिक व्यायाम करते समय दिल की धड़कनों का तेज हो जाना.

अनियमित दिल की धड़कन को एट्रियल फाइब्रिलेशन (एएफआईबी) कहा जाता है और इसकी वजह से हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और ब्लड क्लॉट जैसे खतरे होते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि रक्तचाप बढ़ाने वाली कोई भी गतिविधि फाइब्रिलेशन को ट्रिगर कर सकती है और तेज आवाज के साथ भी ऐसा ही होता है. इसमें हृदय के ऊपरी दो कक्षों तक रक्त ठीक से नहीं पहुंच पाता है. इस वजह से निचले कक्षों का रक्त प्रवाह भी गड़बड़ा जाता है और इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है.

शोध में ये भी बताया गया कि बहुत तेज ध्वनि के संपर्क में आने से कान की संवेदी कोशिकाएं और संरचनाओं को थकान हो सकती है. अगर आप लंबे समय से तेज ध्वनि के संपर्क में हैं तो वे हमेशा के लिए खराब भी हो सकती है. जिससे सुनने की शक्ति हमेशा के लिए चली जाती है.

अध्ययनों के निष्कर्षों से पता चलता है कि मानव कान के लिए 60 डेसिबल तक की ध्वनि सामान्य है. लेकिन क्लब या पार्टियों में ध्वनि का लेवल बढ़ जाता है. जो हमारे लिए नुकसानदायक होता है.

15 मिनट से ज्यादा समय तक 100 डेसिबल या उससे ज्यादा समय तक संगीत सुनने से बचना चाहिए क्योंकि यह सुनने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करता है. 50-70 डेसिबल से ऊपर की आवाज हानिकारक मानी जाती है जो इंसान के दिल और दिमाग को प्रभावित करती है.

पिछले साल, वैश्विक स्वास्थ्य संगठन ने सुनने के लिए एक मानक तैयार किया था ये मानक क्लब या संगीत कार्यक्रमों में जाने वाले 12 से 35 साल की आयु के लोगों को सुनने की समस्याओं को मद्देनजर रखकर तैयार किया गया था.

क्या कहते हैं भारतीय विशेषज्ञ?

कार्डियोलॉजिस्ट और फोर्टिस अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. अजय कौल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, "एक तरफ, संगीत एक चिकित्सा के रूप में काम करता है लेकिन दूसरी तरफ, ज्यादा तेज संगीत या ध्वनि नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है. अच्छा म्यूजिक नींद और दूसरे तरह की मानसिक समस्याओं के इलाज में एक दवा के रूप में काम करता है तो वहीं अगर 60 डेसिबल से ऊपर तेज आवाज में म्यूजिक हो तो यह काफी नुकसानदायक हो सकता है. इसके कारण दिल की धड़कनों में तेजी आ जाती है. जो कभी कभी दिल का दौरा भी ला देती है.

आंकड़े के मुताबिक कम उम्र में हार्ट-अटैक वाले मामले दिनों-दिन भारत में बढ़ते जा रहे हैं. अमेरिका के एक रिसर्च जर्नल में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक 2015 तक भारत में 6.2 करोड़ लोगों को दिल से जुड़ी बीमारी हुई. दिल की बीमारी का शिकार हुए तकरीबन 2.3 करोड़ लोगों की उम्र 40 साल से कम बताई गई.यानी 40 फीसदी हार्ट के मरीजों की उम्र 40 साल से कम थी. भारत के लिए ये आंकड़े में परेशान करने वाले हैं. जानकार बताते हैं कि पूरी दुनिया में भारत में ये आंकड़े सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं. 2016 में दिल की बीमारी, अकाल मृत्यु का पहला कारण बन गया है इससे पहले तक प्रीमैच्योर डेथ यानी अकाल मृत्यु में हार्ट अटैक तीसरे नंबर पर था.

दिल के दौरे से जुड़े कुछ और सवाल भी हैं जिसे आपको जान लेना जरूरी है

पुरुष या महिलाएं किसका दिल है ज्यादा कमजोर

2018 में हुए एक रिसर्च के मुताबिक महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा चार मामलों में ज्यादा होता है जिसमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, क्रोनिक किडनी रोग, स्ट्रोक, शामिल है. इस रिसर्च में औरतों में धूम्रपान की वजह से कम हार्ट अटैक के चांसेस देखे गए. रिसर्च में ये बताया गया था कि 50 साल से कम उम्र की महिलाओं में कैनबिस और कोकीन के इस्तेमाल से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है.

क्या आपकी उम्र से आपके दिल का है कोई ताल्लुक

2010 के नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च के मुताबिक 35-44 आयु वर्ग के लोगों के मुकाबले 65-74 आयु वर्ग के लोगों में दिल के दौरा पड़ने का खतरा सात गुना ज्यादा होता है. वहीं 65-69 आयु वर्ग के लोगों के मुकाबले 80 वर्ष से ज्यादा आयु के लोगों में ये खतरा दो से तीन गुना ज्यादा होता है.

बुजुर्गों की तुलना में 45 साल से कम उम्र के लोगों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा इन स्थितियों में बढ़ता है पहला ज्यादा धूम्रपान, मोटापा, दिल का दौरे का पारिवारिक इतिहास यानी जेनेटिक .

दूसरे फैक्टर जो हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार हैं

उम्र: बढ़ती उम्र के साथ हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है.

सेक्स: बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में पुरुषों की तुलना में दिल का दौरा पड़ने का खतरा ज्यादा होता है. जैसे मेनोपॉज होने पर महिलाओं में दिल का दौरा बढ़ता है. वहीं पुरुषों में इस उम्र में ये खतरा महिलाओं के मुकाबले थोड़ा कम है.
आनुवंशिकी: जिन लोगों के परिवार के सदस्यों में पहले दिल का दौरा पड़ चुका है , उनमें दिल का दौरा पड़ने की संभावना अधिक हो सकती है. 

 

source: ABP news

Health Tips : रात में सोने से पहले दूध में घी डालकर पिएं, होते है अनगिनत फायदे, जरूर करें इस्तेमाल…

Health Tips : रात में सोने से पहले दूध में घी डालकर पिएं, होते है अनगिनत फायदे, जरूर करें इस्तेमाल…

 Health Tips :अच्छी सेहत भला कौन नहीं चाहता, अच्छी सेहत के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपनाते है, घी और दूध दोनों की चीजें सेहत के लिए लाभदायक होती हैं. ऐसे में दोनों का एक साथ सेवन करना सोने पर सुहागा होने जैसा है. एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर घी को दूध में मिलाकर पीने से इसका लाभ दोगुना हो जाता है. इसके सेवन से आपको कई गुणकारी लाभ हो सकते हैं. इस आर्टिकल में हम आपको घी और दूध मिलाकर पीने से होने वाले फायदे बताने जा रहे हैं-

पाचन शक्ति को बढ़ाने में है मददगार
दूध में घी डालकर पीने से डाइजेस्टिव सिस्टम मजबूत होता है. पाचन के कार्य में सुधार करता है. अगर आपको कब्ज है या पाचन तंत्र कमजोर है तो आप रोजाना दूध में घी डालकर पी सकते हैं.

स्टेमिना बढ़ाने में मददगार
अगर आपको अक्सर थकान महसूस होती है तो दूध में डालकर पिएं. इससे आपको स्टेमिना बढ़ाने में मदद मिलेगी. दरअसल, दूध के साथ घी का सेवन करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है. इसके सेवन से आप अधिक एनर्जेटिक हो जाते हैं.

मेटाबॉलिज्म बढ़ाए
यह कॉम्बो शरीर से विषैले खाद्य पदार्थ को बाहर निकालता है. इसके अलावा मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में मदद करता है.

नींद ना आने की समस्या को करता है ठीक
अगर आप भी अनिद्रा की समस्या से जूझ रहे हैं तो दूध और घी का मिश्रण पिएं. यह कॉम्बिनेशन स्ट्रेस और अनिद्रा दूर करता है.

जोड़ों के दर्द से मिलेगी निजात
अगर आप भी जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो घी और दूध के सेवन से आपको फायदा हो सकता है. ये ना सिर्फ जोड़ों में सूजन को कम करता है बल्कि हड्डियों को भी मजबूत बनाता है.

कैसे करना है सेवन
इसके लिए सबसे पहले दूध को अच्छी तरह से गर्म कर लें. इसके बाद उसमें एक से दो चम्मच घी अच्छी तरह से मिला लें और गरमा-गरम दूध पी लें. बेहतर रिजल्ट के लिए इसका सेवन रात को सोने से पहले करें. ध्यान रहे अगर आपको हार्ट, किडनी या लीवर जैसी कोई गंभीर समस्या है तो दूध के साथ घी का सेवन करने से पहले अपने डायट विशेषज्ञ से संपर्क करें.

Shake Recipe : सर्दियों में जरूर पिएं ये हेल्दी-टेस्टी शेक, एक्सपर्ट से जानें फायदे और रेसिपी

Shake Recipe : सर्दियों में जरूर पिएं ये हेल्दी-टेस्टी शेक, एक्सपर्ट से जानें फायदे और रेसिपी

 सर्दियों में लोग आमतौर पर ये मानकर चलते हैं कि आसानी से वजन बढ़ाया जा सकता है। लेकिन कई लोगों की काफी कोशिशों के बाद भी सर्दी के दौरान वजन नहीं बढ़ाया जाता। ऐसे में वो कुछ ऐसे तरीकों की तलाश करते हैं जिससे वो तेजी से अपना वजन बढ़ा सकें।

केला भी वजन ( weight)बढ़ाने के लिए अच्छा होता है और इसे तेजी से वजन बढ़ाया जा सकता है।  आप रोजाना इस शेक को पीने के बाद खुद को एक्टिव और भरपूर मात्रा में ऊर्जावान महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा आपको जानकर हैरानी होगी कि ये शेक आपके हृदय स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है।

क्या है बनाने का तरीका( how to prepare) 

दूध में एवोकैडो और केले को अच्छी तरह से ब्लेंड कर मिला लें।

इसमें आप दही को भी शामिल कर सकते हैं।

फिर स्ट्रॉबेरी और सही मात्रा में चीनी को इस मिश्रण में मिलाएं।

सेब, केले और दूध से बना शेक

सेब, केले और दूध आपके पूर्ण स्वास्थ्य के लिए कितने फायदेमंद होते हैं ये तो आप जानते ही हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं ये आपके वजन बढ़ान के लिए भी बहुत फायदेमंद हो सकते हैं।

बनाने का तरीका( how to prepare) 

सेब, केले और दूध को आप अच्छी तरह से ब्लेंड कर लें।

इस मिश्रण में आप चीनी या शहद को शामिल कर सकते हैं।

अच्छी तरह से मिलाने के बाद आप इसका सेवन रोजाना कर सकते हैं।

अगर आपके पेट में पल रहा नन्ही सी जान, तो कुछ भी खाते समय जरूर रखें इन बातों का ध्यान, सर्दियों में करें इनका सेवन…

अगर आपके पेट में पल रहा नन्ही सी जान, तो कुछ भी खाते समय जरूर रखें इन बातों का ध्यान, सर्दियों में करें इनका सेवन…

 Health Tips For Pregnant Women : किसी भी औरत के लिए मां बनना एक खूबसूरत एहसास होता है महिला अपने प्रेगनेंसी को हेल्दी और पर्फेक्ट बनाने की तमाम कोशिश करती है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि प्रेगनेंसी के दौरान करी गई छोटी सी गलती आगे चलकर बहुत भारी पड़ती है प्रेगनेंसी का सबसे मुश्किल समय ठंडी के समय का होता है ठंडी का मौसम प्रेग्नेंट औरतों के लिए काफी मुश्किल भरा होता है और ठंड के मौसम में हर छोटी सी बड़ी चीजें करना बहुत मायने रखता है सबसे महत्वपूर्ण होता है ठंडे में सही खाने का सेवन करना ठंडियों के दिनों में गर्भवती महिलाओं को अपने डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सर्दियों के मौसम में सबसे अच्छे ताजे फल और हरी सब्जियां आती हैं, जिसमें पोषण भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए आपको इन सर्दियों में अपनी डाइट (Pregnancy Diet in Winter) में कुछ ख़ास वेज फूड्स को शामिल करना चाहिए।

सर्दियों में प्रेगनेंसी में क्या खाएं –

फलियां –
मसूर, मटर, बींस, छोले, सोयाबीन और मूंगफली फलियों का सबसे अहम हिस्सा है। हालांकि प्रेगनेंसी के दौरान शरीर को इन सभी पोषक तत्वों की ज्यादा जरूरत होती है। फलियों में फाइबर, प्रोटीन, आयरन, फोलेट और कैल्शियम के गुण होते हैं। इसलिए प्रेगनेंसी में फलियां डाइट में जरूर शामिल करनी चाहिए।

हरी मटर –
सर्दियों के मौसम में हरी मटर हर डिश में जान डाल देती है। इसे कच्चा या पका दोनों तरह से खाया जा सकता है। हालांकि प्रेगनेंसी के दौरान हरी मटर खाने से होने वाले बच्चे का दिमागी विकास अच्छा होता है और उसकी रीढ़ की हड्डी भी मजबूत होती है।

कसूरी मेथी – 
सर्दियों में मेथी के पत्ते खाना काफी लोगों को पसंद होता है। इसके अनगिनत फायदे होते हैं। इसमें आयरन भी अच्छी मात्रा में होता होता है। इसे प्रेगनेंसी के दौरान खाने से एनीमिया को रोकने में मदद मिल सकती है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, विटामिन सी जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो प्रेगनेंसी के दौरान जरूरी होते हैं.

शकरकंद –
सर्दियों और शकरकंद का रिश्ता काफी अनोखा है। प्रेगनेंसी के दौरान शकरकंद खाना फायदेमंद हो सकता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है, जो लगातार एनर्जी देता है। बच्चे के विकास के लिए इसमें जरूरी विटामिन ए होता है।

अखरोट –
मेवों में आमतौर पर फाइबर के गुण होते हैं। अखरोट में विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है। इससे इम्युनिटी भी मजबूत होती है। सर्दियों के मौसम में होने वाले फ्लू और सर्दी-जुखाम से अखरोट बचाव करता है। प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को मुट्ठी भर अखरोट खाने की सलाह डॉक्टर भी देते हैं।

अब सर्दियों में नहीं फटेंगे आपके होंठ, बस अपनाने होगा ये घरेलु उपाय

अब सर्दियों में नहीं फटेंगे आपके होंठ, बस अपनाने होगा ये घरेलु उपाय

 नई दिल्ली। Winter Lips Care : सर्दियों के मौसम में उमस के कारण अक्सर लोगो में होंठ फटने (Chapped Lip) की शिकायत होती हैं। इसकी मुख्य वजह डिहाइड्रेशन (dehydration), पानी कम पीना, ज्यादा मात्रा में खट्टी चीजों का सेवन, बार-बार होंठों (Lips) पर जीभ फेरने की आदत हो सकते हैं। इन आदतों के चलते होंठों में नमी कम हो जाती है और होंठ फटने की समस्या हो सकती है।

Winter Lips Care : कई लोग होंठों को मुलायम बनाने के लिए लिप Scrub का भी उपयोग करते हैं लेकिन हम आपको ऐसे घरेलु उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे अपनाकर आप मुलायम होंठ पा सकते हैं।

इन उपायों का करे पालन

Winter Lips Care : रोजाना रात में सोते समय मलाई में चुटकीभर हल्दी मिक्स करके लगाने से भी काफी आराम मिलता है। इससे फटे होंठ की समस्या तो दूर होती ही है, साथ ही होंठों का इंफेक्शन भी ठीक हो जाता है।

Winter Lips Care : लगातार पानी पीते रहे। जिससे होंठों में नमी बरकरार रहती है।

Winter Lips Care : रोजाना रात को सोने से पहले अपनी नाभि पर सरसों का तेल लगाएं। इससे फटे होंठ की समस्या दूर होने के साथ होंठ गुलाबी भी होंगे।

Winter Lips Care : वैसलीन पेट्रोलियम जेली भी होंठों के लिए एक दवा का काम करती है। आप जैतून के तेल में वैसलीन लेकर मिक्स करें और इसे रात को सोने से पहले होंठोंं पर लगाएं। इससे आपके होंठ भी ठीक होते हैं और होंठों का कालापन भी दूर होता है।

Winter Lips Care : फटे होंठ की समस्या को गुलाब की पत्तियां भी दूर कर सकती हैं। आप गुलाब की पत्तियों को पीसकर इसमें नींबू और शहद मिक्स करें। इसके बाद सोते समय होंठों पर इसे लगाएं। इससे भी काफी आराम मिलता है।

Winter Lips Care : ग्लिसरीन, गुलाबजल और नींबू का मेल बहुत पुराना नुस्खा है। इसे आमतौर पर लोग ​सर्दियों में स्किन पर इस्तेमाल करते हैं।

Winter Lips Care : लेकिन आप इसका इस्तेमाल होंठों पर भी कर सकते हैं। ये आपके होंठों को मुलायम बनाता है और हाइड्रेट रखता है।

 

अगर एक दिन में चार से पांच बार पी जाते है चाय, तो हो जाये सावधान, जान पर आ सकती है बात…

अगर एक दिन में चार से पांच बार पी जाते है चाय, तो हो जाये सावधान, जान पर आ सकती है बात…

 नई दिल्ली, Disadvantage of Tea : कई लोगों की आदत होती है कि सो के उठते ही चाय पीने होना होता है. लेकिन दिन में एक दो बार चाय पीना और उससे ज्यादा चाय पीना काफी अलग होता है. किसी सरकारी और गैर सरकारी संस्थान में डेस्क में बैठकर काम करने वाले कर्मियों को चाय की बुरी आदत होती है। बहुत से लोगों की आदत होती है कि वो दिन में लगभग 5 से 6 कप चाय पीते हैं। गर्मी हो या सर्दी इन लोगों को चाय की ऐसी आदत होती हैं कि ये बिना चाय के रह नहीं पाते हैं। चाय का अधिक सेवन करना स्वास्थय के लिए बेहद खतरनाक होता है।

अच्छी नींद न आना : बहुत से लोग देर तक काम करने के दौरान चाय का अधिक सेवन करते हैं। चाय में कैफीन अधिक मात्रा में होता है। इस कारण जब नींद लेने का समय होता है तो अच्छी नींद नहीं आ पाती है। चाय का अधिक सेवन नींद की क्वालिटी को खराब करता है। इस कारण आंखों के नीचे काले घेरे, मानसिक तनाव और एंग्जाइटी आदि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि आप चाय के अधिक सेवन से खुद को बचाएं।

सीने में जलन : ज्यादा चाय पीने से कई लोगों को सीने में जलन, पेट में गैस, बदहजमी और खट्टी डकार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

आंतों पर होगा असर : चाय पीने से कई समस्याएं होती है। चाय पीने से आंतें खराब भी हो जाती है। जिससे खाने के पाचन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

ज्यादा चाय पीने के नुकसान

घबराहट होना ज्यादा चाय पीने से घबराहट होने लगती है।
आंतों के लिए नुकसानदायक।
मेटाबॉलिज्म दर को कम करती है।

Vastu Tips : आटा गूंथते समय न करें ये गलतियां, पूरे परिवार पर पड़ती हैं भारी

Vastu Tips : आटा गूंथते समय न करें ये गलतियां, पूरे परिवार पर पड़ती हैं भारी

 आपके घर में रोजाना आटा गूंथा जाता है, लेकिन ये बात बहुत ही कम लोग जानते हैं कि आटा गूंथते समय छोटी सी गलतियां बाद में परिवार पर बहुत भारी पड़ती हैं. ऐसे में आटा गूंथते समय जाने अनजाने लोगों से गलतियां हो जाती है. जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति, तरक्‍की, सेहत और वैवाहिक( married life) जीवन पर नकारात्‍मक असर देखने को मिलता है।

आप जरूरत के मुताबिक ही आटा गूंथें क्‍योंकि बचे हुए आटे को आप किचन में रख देते हैं या फ्रिज में रख देते हैं, जो वास्तु नियमों के मुताबिक सही नहीं होता है. इसके अलावा बासी आटे से बनी रोटी खाने से आपकी सेहत पर भी असर पड़ता है

तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी इस्‍तेमाल( use) 

तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी इस्‍तेमाल करना चाहिए क्‍योंकि तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल शुद्ध और पवित्र रहता है. इसलिए भगवान को भी तांबे के बर्तन से ही जल अर्पित किया जाता है. आप भी तांबे के बर्तन का पानी यूज करें.।

पानी को पौधों( plants) में डाल दें

आटा गूंथने के बाद जो पानी बचा हुआ रहता है, उसे व्यर्थ ना फेंकें. इस पानी को पौधों में डाल दें. ऐसा करने से आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी. आटा गूंथने के बाद उस पर उंगलियों का निशान छोड़ दें, जिससे आटा पिंड के समान न लगें. आटा गूंथने के बाद उसे ढक दें, ताकि वहां नकारात्मक ऊर्जा का वास ना हो. ज्यादा देर तक आटा खुला रख देते हैं तो उस पर कीटाणु आ जाते हैं.

Health Tips : सर्दियों में अदरक का सेवन करने से दूर होगी ये पांच समस्याएं, जानें

Health Tips : सर्दियों में अदरक का सेवन करने से दूर होगी ये पांच समस्याएं, जानें

 Health Tips : सर्दियों के मौसम में अदरक की चाय की डिमांड सबसे अधिक होती है, इस मौसम में केवल अदरक की चाय ही नहीं बल्कि दूसरे और भी कई लाभ  मिलते हैं। अदरक में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को मजबूत बनाने का काम करती है। जानिए  सर्दियों के मौसम में अदरक किस तरह से फायदेमंद होते है।

सेहत के लिए फायदेमंद होता है अदरक (Ginger is beneficial for health)

अदरक में ऐसे कई गुण पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। अदरक में पोटैशियम, मैग्निशियम, फोलेट, जिंक, एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन बी, सी, और सोडियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो सर्दियों के मौसम में शरीर को अंदर से गर्म रखता है। ऐसे में सर्दियों में अदरक का सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी मजबूत रहती है।

लिवर को मजबूत रखता है (keeps the liver strong)

अगर आपको लिवर संबंधी समस्या है तो आप अदरक का सेवन कर सकते हैं, आप अदरक की चाय पी सकते हैं, आप अदरक का पाउडर बनाकर भी उसका इस्तेमाल कर सकते हैं, ऐसा करने से आपको लिवर को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

इम्यूनिटी मजबूत करता है अदरक (Ginger strengthens immunity)

सर्दियों में इम्यूनिटी कमजोर होने के खतरा रहता है, क्योंकि जरा सी लापरवाही से कमजोरी आ जाती है, लेकिन अगर आप अपनी इम्यूनिटी को मजबूत रखना चाहते हैं तो इसके लिए आप अदरक का इस्तेमाल कर सकते हैं, इससे आपकी इम्यूनिटी भी मजबूत रहेगी।

सर्दी-जुखाम से निजात (relief from cold and flu)

ठंड इस के मौसम में सबसे ज्यादा सर्दी-जुखाम होने का खतरा रहता है, क्योंकि बदलते मौसम में सर्दी-जुखाम सबसे ज्यादा होता है, लेकिन अगर आप नियमित अदरक का सेवन करते हैं तो इससे आपको सर्दी-जुखाम की समस्या नहीं होगी। इसलिए चाय में अदरक का सेवन किया जाता है।

भूख बढ़ाने में (to increase appetite)

अदरक पेट को साफ रखता है, ऐसे में आपको भूख अच्छी लगती है, आप अदरक को शहद के साथ भी ले सकते हैं, इसके अलावा अदरक का इस्तेमाल सब्जी में भी किया जा सकता है। क्योंकि अदरक के सेवन से भूख अच्छी लगती है और पाचन संबंधी समस्या भी नहीं होती है।

वजन बढ़ान में सहायक (to increase appetite)

कई लोग अपने पतले पन से परेशान होते हैं, लेकिन अगर आप नियमित अदरक का सेवन करते हैं तो इससे आपकी भूख बढ़ेगी, जिससे आपका वजन भी बढ़ने के चांस रहते हैं, इसलिए लोगों को वजन बढ़ाने के लिए अक्सर अदरक को शहद में मिलाकर सेवन करने की सलाह दी जाती है।

Zika Virus Case: इस शहर में मिला जीका वायरस का केस,जाने क्या है जीका वायरस और उसके लक्षण

Zika Virus Case: इस शहर में मिला जीका वायरस का केस,जाने क्या है जीका वायरस और उसके लक्षण

Zika Virus Infection: पुणे में जीका वायरस का एक मामला दर्ज किया गया है. 16 नवंबर को बुखार, खांसी, जोड़ों के दर्द और थकान की शिकायत के चलते मरीज पुणे के जहांगीर अस्पताल में इलाज के लिए आया था. 18 नवंबर को एक प्राइवेट लैब में जीका वायरस का पता चला.
वहीं 30 नवंबर को एनआईवी पुणे में जांच के दौरान मरीज के जीका से संक्रमित होने की पुष्टि हुई. 22 नवंबर को पुणे नगर निगम की ओर से इस क्षेत्र में डिसीज कंट्रोल एक्शन प्लान शुरू किया गया. मरीज के आस-पास के घरों का सर्वे किया गया, लेकिन इलाके में अन्य किसी संदिग्ध मरीज की पुष्टि नहीं हुई.
इस क्षेत्र में मच्छरों के प्रजनन के लिए घर-घर सर्वे, कंटेनर सर्वे किया गया, लेकिन यहां एडीज मच्छरों का प्रजनन नहीं पाया गया. क्षेत्र को फ्यूमिगेट किया गया था. जीका वायरस से संक्रमित मरीज मूल रूप से नासिक का रहने वाला है और वह 6 नवंबर को पुणे आया था. इससे पहले वह 22 अक्टूबर को सूरत गया था. फिलहाल मरीज पूरी तरह से ठीक है और उसमें कोई लक्षण नहीं हैं.
क्या होता है जीका वायरस?
जीका वायरस मच्छरों से फैलने वाली एक बीमारी है. ये बीमारी एडीज मच्छर के काटने से ही फैलती है. ये मच्छर दिन के समय ही ज्यादा एक्टिव होते हैं. इस वायरस से होने वाला संक्रमण खतरनाक होता है और मरीज के अस्पताल में भर्ती होने की भी नौबत भी आ सकती है.
ये हैं जीका वायरस से संक्रमण के लक्षण
एडीज एल्बोपिक्ट्स और एडीज इजिप्टी से जीका वायरस फैलने का खतरा होता है. जीका वायरस से संक्रमित होने पर बुखार और मलेरिया के मिले-जुले लक्षण नज़र आते हैं. यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है. ऐसे में संक्रमित व्यक्ति से करीब 3 हफ्ते तक दूरी बनाकर रखना जरूरी होता है.

 

Previous123456789...4849Next