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इस लाजवाब जूस के सेवन से करें बॉडी डिटॉक्स, कब्ज और एसिडिटी की समस्या भी होगी कंट्रोल

इस लाजवाब जूस के सेवन से करें बॉडी डिटॉक्स, कब्ज और एसिडिटी की समस्या भी होगी कंट्रोल

 इन दिनों दिल्ली समेत एनसीआर में धीरे धीर गर्मी बढ़ रही है वहीं दूसरी तरफ बारिश भी हो रही है, जिस वजह से लोग कई बीमारीयों का शिकार हो कस्ते हैं. ऐसे में आपकी सेहत खराब न हो इसलिए आप अपनी बॉडी को इन कुछ घरेलू नुस्खों से डिटॉक्स कर सकते हैं. स्वामी रामदेव के अनुसार लौकी और कद्दू के जूस का सेवन करने से आपको इस मौसम में खूब एनर्जी मिलेगी।

दरअसल इस मौसम में आप अपने शरीर को डिटॉक्स कर अपना पाचन दुरुस्त कर सकते हैं साथ ही आपके लीवर की ताकत भी बढ़ेगी। इतना ही नहीं कद्दू और लौकी का जूस पीने से र एसिडिटी, कब्ज जैसी पेट संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलने के साथ वजन कम करने में मदद मिलेगी। जानिए कैसे करें इसका सेवन।

विटामिन से भरपूर है लौकी और कद्दू

कद्दू के जूस में प्रचुर मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है। इसके अलावा इसमें कॉपर, आयरन और फास्फोरस, फाइबर, विटामिन बी1, बी2, बी6,सी, ई और बीटा केरोटिन की प्रचुर मात्रा मौजूद होती है। वहीं लौकी के जूस में भरपूर मात्रा में डायट्री फाइबर, विटामिन- ए, विटामिन -सी, थायमिन, राइबोफ्लेविन, विटामिन- बी3, बी6, मिनरल्स, कैल्श‍ियम, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस आदि पाए जाते हैं।

इन बीमारियों में लौकी और कद्दू का जूस है फायदेमंद

  • दिल को रखें मजबूत
  • वजन कम करने के लिए फायदेमंद
  • हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करे
  • कब्ज में राहत दे
  • विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालने में मददगार
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाए
  • मॉर्निंग सिकनेस दूर करे
  • बॉडी की सूजन को दूर करे

ऐसे बनाएं जूस

लौकी और कद्दू दोनों को बराबर मात्रा में लेकर ग्राइंडर के माध्यम से जूस निकाल लें। अगर आपको थोड़ा स्वाद सही करना हैं तो इसमें धनिया, पुदीना की कुछ पत्तियां डालकर ग्राइंड कर लें और पीते समय थोड़ा सा नींबू का रस मिला लें। इससे जूस का स्वाद बेहतर हो जाएगा। रोजाना सुबह-सुबह अपनी डाइट में इसे जरूर शामिल करें।

ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)

पेट की गर्मी को बाहर निकालकर बॉडी को ठंडक पहुंचाती हैं ये हरी पत्तियां, लू लगने से बचा रहेगा शरीर

पेट की गर्मी को बाहर निकालकर बॉडी को ठंडक पहुंचाती हैं ये हरी पत्तियां, लू लगने से बचा रहेगा शरीर

 पुदीना, विटामिन सी, विटामिन ए और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स जैसे गुणों से भरपूर होता है। पुदीने में ऐसे गुण मौजूद होते हैं जिसके सेवन से आपको तुरंत ताजगी भरा महसूस होता है। पुदीने का इस्तेमाल अमूमन गर्मियों में इसलिए किया जाता है क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। छाछ हो या आम पन्ना इसका इस्तेमाल इन दोनों में किया जाता है।

इसके अलावा ये कैंडीज टूथपेस्ट से लेकर माउथ फ्रेशनर्स में इस्तेमाल किया जाता है। पुदीना बेहतर पाचन को बढ़ावा देता है, मितली को रोकता है, सांस की समस्याओं, अवसाद-थकान को दूर करने में मदद करता है। वहीं पुदीने में मेन्थॉल, मेन्थोन और लिमोनेन जैसे कई एसेंशियल ऑयल पाए जाते हैं जो आपके खराब पेट को सही करने में मददगार साबित होते हैं। क्या कभी आपने पुदीने की चाय ट्राई की है? अगर नहीं तो आज हम आपके लिए पेपरमिंट टी बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। पेपरमिंट टी चाय टेस्टी और हेल्दी होती है। इसके सेवन से आपके शरीर से गर्मी को बाहर निकालने में मदद मिलती है, तो चलिए जानते हैं पेपरमिंट टी कैसे बनाएं।

पेपरमिंट टी बनाने के लिए इंग्रीडिएंट्स

पानी 2 कप
पुदीने के पत्ते 15 ताजे
शहद 1 बड़ा चम्मच
आइस क्यूब्स 4-5

 

इसके चाय से ये बीमारियां होंगी कंट्रोल

संक्रमण का जोखिम होता है कम
माइग्रेन में पा सकते हैं आराम
नींद में होता है सुधार
पेट कम करने के लिए बेहद फायदेमंद

पेपरमिंट टी कैसे बनाएं?

पेपरमिंट टी बनाने के लिए आप सबसे पहले एक पैन लें। फिर आप इसमें पानी डालें और 1 उबाल आने तक पकाएं। इसके बाद आप इसमें पुदीने के पत्ते डालें। फिर आप इसको धीमी आंच पर करीब 4-5 मिनट तक पकाएं। इसके बाद आप गैस को बंद करके इसको थोड़ा ठंडा होने के लिए रख दें। फिर आप एक गिलास में आइस क्यूब्स और पेपरमिंट टी डालें। इसके बाद आप इसमें शहद और नींबू का रस डालकर मिला लें। अब आपकी हेल्दी पेपरमिंट टी बनकर तैयार हो चुका है।

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)

रोजाना इन पत्तों को खाने से स्किन और सेहत दोनों रहती है अच्छी

रोजाना इन पत्तों को खाने से स्किन और सेहत दोनों रहती है अच्छी

 हम अपने घरों में कई तरह के पौधे लगाते हैं. इनमें से कुछ पौधे ऐसे होते हैं जो घर के वातावरण को स्वच्छ रखते हैं और कुछ केवल घर की शोभा बढ़ाने में ही काम आते हैं. वहीं, कुछ ऐसे पौधे भी हैं जिनके पत्ते स्किन और सेहत के लिए अच्छे साबित होते हैं।

 ऐसे ही कुछ पत्ते हैं तुलसी के पत्ते. ये पत्ते अनेक घरों में पाए जाते हैं. इन्हें एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के चलते इनका चाय और काढ़ा बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन, तुलसी के पत्तों के फायदे यहीं पर खत्म नहीं होते हैं।

तुलसी के पत्ते  फायदा

सर्दी-जुकाम

तुलसी के पत्तों को सुबह खाली पेट चबाना बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा तुलसी के पत्तों का काढ़ा  या चाय बनाकर पीने पर भी सर्दी-जुकाम जैसी श्वसन तंत्र की दिक्कतों से छुटकारा मिलता है. सिर में ज्यादा दर्द हो तो तुलसी के पत्तों को पानी में डालकर उबालकर पीने पर दर्द से राहत मिल जाती है।

एक्ने कम करने में मददगार 

चेहरे पर लाल फुंसियां निकलने को एक्ने  कहते हैं. एक्ने होने पर त्वचा की बाहरी परत लाल और दानों से भरी हुई दिखने लगती है और त्वचा अत्यधिक सेंसिटिव भी हो जाती है. ऐसे में तुलसी के पत्ते इंफेक्शन और एक्ने बढ़ाने वाले बैक्टीरिया को मारते हैं और प्राकृतिक रूप से एक्ने कम करने में मदद करते हैं. इसके लिए तुलसी के पत्तों को खाने के अलावा इन्हें पीसकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर फेस पैक की तरह लगाया जा सकता है. दूसरा तरीका है कि तुलसी के तेल को नारियल तेल के साथ मिक्स करके रूई की मदद से एक्ने पर लगाएं जिससे त्वचा इसे बेहतर तरीके से सोख सके। 

डायबिटीज 

डायबिटीज होने पर व्यक्ति को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. इसके अलावा ऐसी चीजों के सेवन पर जोर दिया जाता है जो ब्लड शुगर को कम करने या फिर सामान्य रखने में मदद करें. ऐसे में तुलसी के पत्तों का सेवन फायदेमंद होता है. तुलसी के पत्ते ब्लड ग्लुकोज लेवल को सामान्य रखने में मददगार साबित हो सकते हैं. डायबिटीज के मरीज इन पत्तों को साफ करके इन्हें चबाकर खा सकते हैं।

पाचन होता है बेहतर 

तुलसी एसिड रिफलक्स को बैलेंस करती है और पाचन को दुरुस्त करने में भी मददगार है. पेट में गड़बड़ी महसूस होने पर तुलसी के पत्तों को गर्म पानी में पकाकर इसकी चाय पी जा सकती है. ये पत्ते हर्बल चाय में भी तरह-तरह से इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

तुलसी के पत्तों को चबाने पर मुंह से आ रही बदबू से छुटकारा मिलता है। आप इन पत्तों को चबाना अपनी आदत भी बना सकते हैं. रोज सुबह उठकर कुछ तुलसी के पत्तों को चबा लें। इसके अलावा, जब भी मुंह से बदबू आती महसूस हो तो तुलसी के पत्ते खा लें। बदबू कम होने लगेगी। 

इम्यूनिटी होती है मजबूत 

तुलसी के पत्तों में कई एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. यह पत्ते शरीर को कई इंफेक्शंस से दूर रखने में भी सहायक साबित होते हैं. ऐसे में नुकसानदायक बैक्टीरिया से लड़ने वाले इन पत्तों को शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खाया जा सकता है.

शादियों में बजने वाला तेज म्यूजिक कैसे बन रहा आपके दिल का दुश्मन, नई स्टडी में हुआ खुलासा?

शादियों में बजने वाला तेज म्यूजिक कैसे बन रहा आपके दिल का दुश्मन, नई स्टडी में हुआ खुलासा?

बिहार के सीतामढ़ी के 22 साल के सुरेंद्र कुमार की मौत मंच पर उस समय हो गयी जब वो अपनी दुल्हन को वरमाला पहना रहे थे. सुरेंद्र कुमार की मौत हार्ट अटैक से हुई. परिवार का कहना था कि सुरेंद्र कुमार की मौत डीजे की तेज आवाज के कारण हुई. तेज आवाज की वजह से उनकी दिल की धड़कने बढ़ गई और वो मंच से गिर पड़े.

इसी तरह की एक और घटना तेलंगाना में हुई. एक 19 साल के शख्स की मौत शादी में डांस करते समय हो गयी. वहीं दूसरी तरफ पिछले साल 25 नवंबर को वाराणसी के पिपलानी कटरा में एक शादी समारोह में डांस करते समय एक व्यक्ति का दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई थी. समारोह के वायरल हुए वीडियो में शख्स डांस करता दिखाई दे रहा था और अचानक जमीन पर गिर पड़ा.

पिछले कुछ महीनों में, देश भर से चौंकाने वाली ऐसी कुछ घटनाएं सामने आई हैं. जिसमें लोगों को अचानक गिरते हुए देखा गया और कुछ मामलों में मौके पर लोग मर भी गए. देख कर ऐसा लगा कि वो तेज संगीत बर्दाश्त नहीं कर पाए.

सेहतमंद बुजुर्ग कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों की चपेट में


नवंबर 2019 में यूरोपीय हार्ट जर्नल में छपी एक रिसर्च में बताया गया कि किसी भी तरह का संगीत, चाहे वह धीमा हो या तेज व्यक्ति के दिल को कमजोर बना सकता है. शोधकर्ताओं ने 500 स्वस्थ वयस्कों पर अध्ययन किया. इस शोध में ऐसे लोगों को शामिल किया गया जो बहुत बिजी और शोरगुल वाले बाजार में रहते थे या काम कर रहे थे.

पांच साल तक किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई कि जिन लोगों में दिल की बीमारियों के कोई लक्षण नहीं होते, उन्हें शोरगुल वाले बाजारों में रहने के बाद हृदय रोग के लक्षण दिखने लगे. इस रिसर्च में ये पता चला कि कार्डियोवैस्कुलर संबंधित बीमारियों के होने की सबसे बड़ी वजह शोरगुल में होना है.

रिसर्च में ये पाया गया कि औसत 24 घंटे में 5-डेसिबल के शोर से दिल के दौरे, स्ट्रोक और अन्य गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं में 34 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. यह एमिग्डाला (मस्तिष्क के अंदर ग्रे मैटर) को भी प्रभावित करता है जो निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. और दिल का दौरा इस हिस्से को सिकुड़ने की वजह से होता है. इससे मूड स्विंग, गुस्सा जैसी समस्याएं पैदा होती हैं जो हार्ट अटैक का लक्षण हैं.

तेज संगीत दिल की धड़कन की पर क्या असर डालता है

इसी तरह का एक अध्ययन जर्मनी के मेन्ज़ यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में भी किया गया. इसमें 35 से 74 साल की आयु के लगभग 15,000 लोगों को शामिल किया गया. अध्ययन में इस बात का पता किया गया कि हार्ट अटैक की वजह संगीत है या शोर. शोध में ये बात सामने निकल कर आई कि जब कोई व्यक्ति तेज संगीत के संपर्क में आता है, तो उनके दिल की धड़कन तेजी से बढ़ती है, यह ठीक वैसा ही है जैसे जॉगिंग या शारीरिक व्यायाम करते समय दिल की धड़कनों का तेज हो जाना.

अनियमित दिल की धड़कन को एट्रियल फाइब्रिलेशन (एएफआईबी) कहा जाता है और इसकी वजह से हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और ब्लड क्लॉट जैसे खतरे होते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि रक्तचाप बढ़ाने वाली कोई भी गतिविधि फाइब्रिलेशन को ट्रिगर कर सकती है और तेज आवाज के साथ भी ऐसा ही होता है. इसमें हृदय के ऊपरी दो कक्षों तक रक्त ठीक से नहीं पहुंच पाता है. इस वजह से निचले कक्षों का रक्त प्रवाह भी गड़बड़ा जाता है और इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है.

शोध में ये भी बताया गया कि बहुत तेज ध्वनि के संपर्क में आने से कान की संवेदी कोशिकाएं और संरचनाओं को थकान हो सकती है. अगर आप लंबे समय से तेज ध्वनि के संपर्क में हैं तो वे हमेशा के लिए खराब भी हो सकती है. जिससे सुनने की शक्ति हमेशा के लिए चली जाती है.

अध्ययनों के निष्कर्षों से पता चलता है कि मानव कान के लिए 60 डेसिबल तक की ध्वनि सामान्य है. लेकिन क्लब या पार्टियों में ध्वनि का लेवल बढ़ जाता है. जो हमारे लिए नुकसानदायक होता है.

15 मिनट से ज्यादा समय तक 100 डेसिबल या उससे ज्यादा समय तक संगीत सुनने से बचना चाहिए क्योंकि यह सुनने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करता है. 50-70 डेसिबल से ऊपर की आवाज हानिकारक मानी जाती है जो इंसान के दिल और दिमाग को प्रभावित करती है.

पिछले साल, वैश्विक स्वास्थ्य संगठन ने सुनने के लिए एक मानक तैयार किया था ये मानक क्लब या संगीत कार्यक्रमों में जाने वाले 12 से 35 साल की आयु के लोगों को सुनने की समस्याओं को मद्देनजर रखकर तैयार किया गया था.

क्या कहते हैं भारतीय विशेषज्ञ?

कार्डियोलॉजिस्ट और फोर्टिस अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. अजय कौल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, "एक तरफ, संगीत एक चिकित्सा के रूप में काम करता है लेकिन दूसरी तरफ, ज्यादा तेज संगीत या ध्वनि नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है. अच्छा म्यूजिक नींद और दूसरे तरह की मानसिक समस्याओं के इलाज में एक दवा के रूप में काम करता है तो वहीं अगर 60 डेसिबल से ऊपर तेज आवाज में म्यूजिक हो तो यह काफी नुकसानदायक हो सकता है. इसके कारण दिल की धड़कनों में तेजी आ जाती है. जो कभी कभी दिल का दौरा भी ला देती है.

आंकड़े के मुताबिक कम उम्र में हार्ट-अटैक वाले मामले दिनों-दिन भारत में बढ़ते जा रहे हैं. अमेरिका के एक रिसर्च जर्नल में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक 2015 तक भारत में 6.2 करोड़ लोगों को दिल से जुड़ी बीमारी हुई. दिल की बीमारी का शिकार हुए तकरीबन 2.3 करोड़ लोगों की उम्र 40 साल से कम बताई गई.यानी 40 फीसदी हार्ट के मरीजों की उम्र 40 साल से कम थी. भारत के लिए ये आंकड़े में परेशान करने वाले हैं. जानकार बताते हैं कि पूरी दुनिया में भारत में ये आंकड़े सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं. 2016 में दिल की बीमारी, अकाल मृत्यु का पहला कारण बन गया है इससे पहले तक प्रीमैच्योर डेथ यानी अकाल मृत्यु में हार्ट अटैक तीसरे नंबर पर था.

दिल के दौरे से जुड़े कुछ और सवाल भी हैं जिसे आपको जान लेना जरूरी है

पुरुष या महिलाएं किसका दिल है ज्यादा कमजोर

2018 में हुए एक रिसर्च के मुताबिक महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा चार मामलों में ज्यादा होता है जिसमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, क्रोनिक किडनी रोग, स्ट्रोक, शामिल है. इस रिसर्च में औरतों में धूम्रपान की वजह से कम हार्ट अटैक के चांसेस देखे गए. रिसर्च में ये बताया गया था कि 50 साल से कम उम्र की महिलाओं में कैनबिस और कोकीन के इस्तेमाल से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है.

क्या आपकी उम्र से आपके दिल का है कोई ताल्लुक

2010 के नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च के मुताबिक 35-44 आयु वर्ग के लोगों के मुकाबले 65-74 आयु वर्ग के लोगों में दिल के दौरा पड़ने का खतरा सात गुना ज्यादा होता है. वहीं 65-69 आयु वर्ग के लोगों के मुकाबले 80 वर्ष से ज्यादा आयु के लोगों में ये खतरा दो से तीन गुना ज्यादा होता है.

बुजुर्गों की तुलना में 45 साल से कम उम्र के लोगों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा इन स्थितियों में बढ़ता है पहला ज्यादा धूम्रपान, मोटापा, दिल का दौरे का पारिवारिक इतिहास यानी जेनेटिक .

दूसरे फैक्टर जो हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार हैं

उम्र: बढ़ती उम्र के साथ हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है.

सेक्स: बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में पुरुषों की तुलना में दिल का दौरा पड़ने का खतरा ज्यादा होता है. जैसे मेनोपॉज होने पर महिलाओं में दिल का दौरा बढ़ता है. वहीं पुरुषों में इस उम्र में ये खतरा महिलाओं के मुकाबले थोड़ा कम है.
आनुवंशिकी: जिन लोगों के परिवार के सदस्यों में पहले दिल का दौरा पड़ चुका है , उनमें दिल का दौरा पड़ने की संभावना अधिक हो सकती है. 

 

source: ABP news

Health Tips : रात में सोने से पहले दूध में घी डालकर पिएं, होते है अनगिनत फायदे, जरूर करें इस्तेमाल…

Health Tips : रात में सोने से पहले दूध में घी डालकर पिएं, होते है अनगिनत फायदे, जरूर करें इस्तेमाल…

 Health Tips :अच्छी सेहत भला कौन नहीं चाहता, अच्छी सेहत के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपनाते है, घी और दूध दोनों की चीजें सेहत के लिए लाभदायक होती हैं. ऐसे में दोनों का एक साथ सेवन करना सोने पर सुहागा होने जैसा है. एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर घी को दूध में मिलाकर पीने से इसका लाभ दोगुना हो जाता है. इसके सेवन से आपको कई गुणकारी लाभ हो सकते हैं. इस आर्टिकल में हम आपको घी और दूध मिलाकर पीने से होने वाले फायदे बताने जा रहे हैं-

पाचन शक्ति को बढ़ाने में है मददगार
दूध में घी डालकर पीने से डाइजेस्टिव सिस्टम मजबूत होता है. पाचन के कार्य में सुधार करता है. अगर आपको कब्ज है या पाचन तंत्र कमजोर है तो आप रोजाना दूध में घी डालकर पी सकते हैं.

स्टेमिना बढ़ाने में मददगार
अगर आपको अक्सर थकान महसूस होती है तो दूध में डालकर पिएं. इससे आपको स्टेमिना बढ़ाने में मदद मिलेगी. दरअसल, दूध के साथ घी का सेवन करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है. इसके सेवन से आप अधिक एनर्जेटिक हो जाते हैं.

मेटाबॉलिज्म बढ़ाए
यह कॉम्बो शरीर से विषैले खाद्य पदार्थ को बाहर निकालता है. इसके अलावा मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में मदद करता है.

नींद ना आने की समस्या को करता है ठीक
अगर आप भी अनिद्रा की समस्या से जूझ रहे हैं तो दूध और घी का मिश्रण पिएं. यह कॉम्बिनेशन स्ट्रेस और अनिद्रा दूर करता है.

जोड़ों के दर्द से मिलेगी निजात
अगर आप भी जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो घी और दूध के सेवन से आपको फायदा हो सकता है. ये ना सिर्फ जोड़ों में सूजन को कम करता है बल्कि हड्डियों को भी मजबूत बनाता है.

कैसे करना है सेवन
इसके लिए सबसे पहले दूध को अच्छी तरह से गर्म कर लें. इसके बाद उसमें एक से दो चम्मच घी अच्छी तरह से मिला लें और गरमा-गरम दूध पी लें. बेहतर रिजल्ट के लिए इसका सेवन रात को सोने से पहले करें. ध्यान रहे अगर आपको हार्ट, किडनी या लीवर जैसी कोई गंभीर समस्या है तो दूध के साथ घी का सेवन करने से पहले अपने डायट विशेषज्ञ से संपर्क करें.

Shake Recipe : सर्दियों में जरूर पिएं ये हेल्दी-टेस्टी शेक, एक्सपर्ट से जानें फायदे और रेसिपी

Shake Recipe : सर्दियों में जरूर पिएं ये हेल्दी-टेस्टी शेक, एक्सपर्ट से जानें फायदे और रेसिपी

 सर्दियों में लोग आमतौर पर ये मानकर चलते हैं कि आसानी से वजन बढ़ाया जा सकता है। लेकिन कई लोगों की काफी कोशिशों के बाद भी सर्दी के दौरान वजन नहीं बढ़ाया जाता। ऐसे में वो कुछ ऐसे तरीकों की तलाश करते हैं जिससे वो तेजी से अपना वजन बढ़ा सकें।

केला भी वजन ( weight)बढ़ाने के लिए अच्छा होता है और इसे तेजी से वजन बढ़ाया जा सकता है।  आप रोजाना इस शेक को पीने के बाद खुद को एक्टिव और भरपूर मात्रा में ऊर्जावान महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा आपको जानकर हैरानी होगी कि ये शेक आपके हृदय स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है।

क्या है बनाने का तरीका( how to prepare) 

दूध में एवोकैडो और केले को अच्छी तरह से ब्लेंड कर मिला लें।

इसमें आप दही को भी शामिल कर सकते हैं।

फिर स्ट्रॉबेरी और सही मात्रा में चीनी को इस मिश्रण में मिलाएं।

सेब, केले और दूध से बना शेक

सेब, केले और दूध आपके पूर्ण स्वास्थ्य के लिए कितने फायदेमंद होते हैं ये तो आप जानते ही हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं ये आपके वजन बढ़ान के लिए भी बहुत फायदेमंद हो सकते हैं।

बनाने का तरीका( how to prepare) 

सेब, केले और दूध को आप अच्छी तरह से ब्लेंड कर लें।

इस मिश्रण में आप चीनी या शहद को शामिल कर सकते हैं।

अच्छी तरह से मिलाने के बाद आप इसका सेवन रोजाना कर सकते हैं।

अगर आपके पेट में पल रहा नन्ही सी जान, तो कुछ भी खाते समय जरूर रखें इन बातों का ध्यान, सर्दियों में करें इनका सेवन…

अगर आपके पेट में पल रहा नन्ही सी जान, तो कुछ भी खाते समय जरूर रखें इन बातों का ध्यान, सर्दियों में करें इनका सेवन…

 Health Tips For Pregnant Women : किसी भी औरत के लिए मां बनना एक खूबसूरत एहसास होता है महिला अपने प्रेगनेंसी को हेल्दी और पर्फेक्ट बनाने की तमाम कोशिश करती है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि प्रेगनेंसी के दौरान करी गई छोटी सी गलती आगे चलकर बहुत भारी पड़ती है प्रेगनेंसी का सबसे मुश्किल समय ठंडी के समय का होता है ठंडी का मौसम प्रेग्नेंट औरतों के लिए काफी मुश्किल भरा होता है और ठंड के मौसम में हर छोटी सी बड़ी चीजें करना बहुत मायने रखता है सबसे महत्वपूर्ण होता है ठंडे में सही खाने का सेवन करना ठंडियों के दिनों में गर्भवती महिलाओं को अपने डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सर्दियों के मौसम में सबसे अच्छे ताजे फल और हरी सब्जियां आती हैं, जिसमें पोषण भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए आपको इन सर्दियों में अपनी डाइट (Pregnancy Diet in Winter) में कुछ ख़ास वेज फूड्स को शामिल करना चाहिए।

सर्दियों में प्रेगनेंसी में क्या खाएं –

फलियां –
मसूर, मटर, बींस, छोले, सोयाबीन और मूंगफली फलियों का सबसे अहम हिस्सा है। हालांकि प्रेगनेंसी के दौरान शरीर को इन सभी पोषक तत्वों की ज्यादा जरूरत होती है। फलियों में फाइबर, प्रोटीन, आयरन, फोलेट और कैल्शियम के गुण होते हैं। इसलिए प्रेगनेंसी में फलियां डाइट में जरूर शामिल करनी चाहिए।

हरी मटर –
सर्दियों के मौसम में हरी मटर हर डिश में जान डाल देती है। इसे कच्चा या पका दोनों तरह से खाया जा सकता है। हालांकि प्रेगनेंसी के दौरान हरी मटर खाने से होने वाले बच्चे का दिमागी विकास अच्छा होता है और उसकी रीढ़ की हड्डी भी मजबूत होती है।

कसूरी मेथी – 
सर्दियों में मेथी के पत्ते खाना काफी लोगों को पसंद होता है। इसके अनगिनत फायदे होते हैं। इसमें आयरन भी अच्छी मात्रा में होता होता है। इसे प्रेगनेंसी के दौरान खाने से एनीमिया को रोकने में मदद मिल सकती है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, विटामिन सी जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो प्रेगनेंसी के दौरान जरूरी होते हैं.

शकरकंद –
सर्दियों और शकरकंद का रिश्ता काफी अनोखा है। प्रेगनेंसी के दौरान शकरकंद खाना फायदेमंद हो सकता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है, जो लगातार एनर्जी देता है। बच्चे के विकास के लिए इसमें जरूरी विटामिन ए होता है।

अखरोट –
मेवों में आमतौर पर फाइबर के गुण होते हैं। अखरोट में विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है। इससे इम्युनिटी भी मजबूत होती है। सर्दियों के मौसम में होने वाले फ्लू और सर्दी-जुखाम से अखरोट बचाव करता है। प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को मुट्ठी भर अखरोट खाने की सलाह डॉक्टर भी देते हैं।

अब सर्दियों में नहीं फटेंगे आपके होंठ, बस अपनाने होगा ये घरेलु उपाय

अब सर्दियों में नहीं फटेंगे आपके होंठ, बस अपनाने होगा ये घरेलु उपाय

 नई दिल्ली। Winter Lips Care : सर्दियों के मौसम में उमस के कारण अक्सर लोगो में होंठ फटने (Chapped Lip) की शिकायत होती हैं। इसकी मुख्य वजह डिहाइड्रेशन (dehydration), पानी कम पीना, ज्यादा मात्रा में खट्टी चीजों का सेवन, बार-बार होंठों (Lips) पर जीभ फेरने की आदत हो सकते हैं। इन आदतों के चलते होंठों में नमी कम हो जाती है और होंठ फटने की समस्या हो सकती है।

Winter Lips Care : कई लोग होंठों को मुलायम बनाने के लिए लिप Scrub का भी उपयोग करते हैं लेकिन हम आपको ऐसे घरेलु उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे अपनाकर आप मुलायम होंठ पा सकते हैं।

इन उपायों का करे पालन

Winter Lips Care : रोजाना रात में सोते समय मलाई में चुटकीभर हल्दी मिक्स करके लगाने से भी काफी आराम मिलता है। इससे फटे होंठ की समस्या तो दूर होती ही है, साथ ही होंठों का इंफेक्शन भी ठीक हो जाता है।

Winter Lips Care : लगातार पानी पीते रहे। जिससे होंठों में नमी बरकरार रहती है।

Winter Lips Care : रोजाना रात को सोने से पहले अपनी नाभि पर सरसों का तेल लगाएं। इससे फटे होंठ की समस्या दूर होने के साथ होंठ गुलाबी भी होंगे।

Winter Lips Care : वैसलीन पेट्रोलियम जेली भी होंठों के लिए एक दवा का काम करती है। आप जैतून के तेल में वैसलीन लेकर मिक्स करें और इसे रात को सोने से पहले होंठोंं पर लगाएं। इससे आपके होंठ भी ठीक होते हैं और होंठों का कालापन भी दूर होता है।

Winter Lips Care : फटे होंठ की समस्या को गुलाब की पत्तियां भी दूर कर सकती हैं। आप गुलाब की पत्तियों को पीसकर इसमें नींबू और शहद मिक्स करें। इसके बाद सोते समय होंठों पर इसे लगाएं। इससे भी काफी आराम मिलता है।

Winter Lips Care : ग्लिसरीन, गुलाबजल और नींबू का मेल बहुत पुराना नुस्खा है। इसे आमतौर पर लोग ​सर्दियों में स्किन पर इस्तेमाल करते हैं।

Winter Lips Care : लेकिन आप इसका इस्तेमाल होंठों पर भी कर सकते हैं। ये आपके होंठों को मुलायम बनाता है और हाइड्रेट रखता है।

 

अगर एक दिन में चार से पांच बार पी जाते है चाय, तो हो जाये सावधान, जान पर आ सकती है बात…

अगर एक दिन में चार से पांच बार पी जाते है चाय, तो हो जाये सावधान, जान पर आ सकती है बात…

 नई दिल्ली, Disadvantage of Tea : कई लोगों की आदत होती है कि सो के उठते ही चाय पीने होना होता है. लेकिन दिन में एक दो बार चाय पीना और उससे ज्यादा चाय पीना काफी अलग होता है. किसी सरकारी और गैर सरकारी संस्थान में डेस्क में बैठकर काम करने वाले कर्मियों को चाय की बुरी आदत होती है। बहुत से लोगों की आदत होती है कि वो दिन में लगभग 5 से 6 कप चाय पीते हैं। गर्मी हो या सर्दी इन लोगों को चाय की ऐसी आदत होती हैं कि ये बिना चाय के रह नहीं पाते हैं। चाय का अधिक सेवन करना स्वास्थय के लिए बेहद खतरनाक होता है।

अच्छी नींद न आना : बहुत से लोग देर तक काम करने के दौरान चाय का अधिक सेवन करते हैं। चाय में कैफीन अधिक मात्रा में होता है। इस कारण जब नींद लेने का समय होता है तो अच्छी नींद नहीं आ पाती है। चाय का अधिक सेवन नींद की क्वालिटी को खराब करता है। इस कारण आंखों के नीचे काले घेरे, मानसिक तनाव और एंग्जाइटी आदि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि आप चाय के अधिक सेवन से खुद को बचाएं।

सीने में जलन : ज्यादा चाय पीने से कई लोगों को सीने में जलन, पेट में गैस, बदहजमी और खट्टी डकार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

आंतों पर होगा असर : चाय पीने से कई समस्याएं होती है। चाय पीने से आंतें खराब भी हो जाती है। जिससे खाने के पाचन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

ज्यादा चाय पीने के नुकसान

घबराहट होना ज्यादा चाय पीने से घबराहट होने लगती है।
आंतों के लिए नुकसानदायक।
मेटाबॉलिज्म दर को कम करती है।

Vastu Tips : आटा गूंथते समय न करें ये गलतियां, पूरे परिवार पर पड़ती हैं भारी

Vastu Tips : आटा गूंथते समय न करें ये गलतियां, पूरे परिवार पर पड़ती हैं भारी

 आपके घर में रोजाना आटा गूंथा जाता है, लेकिन ये बात बहुत ही कम लोग जानते हैं कि आटा गूंथते समय छोटी सी गलतियां बाद में परिवार पर बहुत भारी पड़ती हैं. ऐसे में आटा गूंथते समय जाने अनजाने लोगों से गलतियां हो जाती है. जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति, तरक्‍की, सेहत और वैवाहिक( married life) जीवन पर नकारात्‍मक असर देखने को मिलता है।

आप जरूरत के मुताबिक ही आटा गूंथें क्‍योंकि बचे हुए आटे को आप किचन में रख देते हैं या फ्रिज में रख देते हैं, जो वास्तु नियमों के मुताबिक सही नहीं होता है. इसके अलावा बासी आटे से बनी रोटी खाने से आपकी सेहत पर भी असर पड़ता है

तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी इस्‍तेमाल( use) 

तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी इस्‍तेमाल करना चाहिए क्‍योंकि तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल शुद्ध और पवित्र रहता है. इसलिए भगवान को भी तांबे के बर्तन से ही जल अर्पित किया जाता है. आप भी तांबे के बर्तन का पानी यूज करें.।

पानी को पौधों( plants) में डाल दें

आटा गूंथने के बाद जो पानी बचा हुआ रहता है, उसे व्यर्थ ना फेंकें. इस पानी को पौधों में डाल दें. ऐसा करने से आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी. आटा गूंथने के बाद उस पर उंगलियों का निशान छोड़ दें, जिससे आटा पिंड के समान न लगें. आटा गूंथने के बाद उसे ढक दें, ताकि वहां नकारात्मक ऊर्जा का वास ना हो. ज्यादा देर तक आटा खुला रख देते हैं तो उस पर कीटाणु आ जाते हैं.

Health Tips : सर्दियों में अदरक का सेवन करने से दूर होगी ये पांच समस्याएं, जानें

Health Tips : सर्दियों में अदरक का सेवन करने से दूर होगी ये पांच समस्याएं, जानें

 Health Tips : सर्दियों के मौसम में अदरक की चाय की डिमांड सबसे अधिक होती है, इस मौसम में केवल अदरक की चाय ही नहीं बल्कि दूसरे और भी कई लाभ  मिलते हैं। अदरक में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को मजबूत बनाने का काम करती है। जानिए  सर्दियों के मौसम में अदरक किस तरह से फायदेमंद होते है।

सेहत के लिए फायदेमंद होता है अदरक (Ginger is beneficial for health)

अदरक में ऐसे कई गुण पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। अदरक में पोटैशियम, मैग्निशियम, फोलेट, जिंक, एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन बी, सी, और सोडियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो सर्दियों के मौसम में शरीर को अंदर से गर्म रखता है। ऐसे में सर्दियों में अदरक का सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी मजबूत रहती है।

लिवर को मजबूत रखता है (keeps the liver strong)

अगर आपको लिवर संबंधी समस्या है तो आप अदरक का सेवन कर सकते हैं, आप अदरक की चाय पी सकते हैं, आप अदरक का पाउडर बनाकर भी उसका इस्तेमाल कर सकते हैं, ऐसा करने से आपको लिवर को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

इम्यूनिटी मजबूत करता है अदरक (Ginger strengthens immunity)

सर्दियों में इम्यूनिटी कमजोर होने के खतरा रहता है, क्योंकि जरा सी लापरवाही से कमजोरी आ जाती है, लेकिन अगर आप अपनी इम्यूनिटी को मजबूत रखना चाहते हैं तो इसके लिए आप अदरक का इस्तेमाल कर सकते हैं, इससे आपकी इम्यूनिटी भी मजबूत रहेगी।

सर्दी-जुखाम से निजात (relief from cold and flu)

ठंड इस के मौसम में सबसे ज्यादा सर्दी-जुखाम होने का खतरा रहता है, क्योंकि बदलते मौसम में सर्दी-जुखाम सबसे ज्यादा होता है, लेकिन अगर आप नियमित अदरक का सेवन करते हैं तो इससे आपको सर्दी-जुखाम की समस्या नहीं होगी। इसलिए चाय में अदरक का सेवन किया जाता है।

भूख बढ़ाने में (to increase appetite)

अदरक पेट को साफ रखता है, ऐसे में आपको भूख अच्छी लगती है, आप अदरक को शहद के साथ भी ले सकते हैं, इसके अलावा अदरक का इस्तेमाल सब्जी में भी किया जा सकता है। क्योंकि अदरक के सेवन से भूख अच्छी लगती है और पाचन संबंधी समस्या भी नहीं होती है।

वजन बढ़ान में सहायक (to increase appetite)

कई लोग अपने पतले पन से परेशान होते हैं, लेकिन अगर आप नियमित अदरक का सेवन करते हैं तो इससे आपकी भूख बढ़ेगी, जिससे आपका वजन भी बढ़ने के चांस रहते हैं, इसलिए लोगों को वजन बढ़ाने के लिए अक्सर अदरक को शहद में मिलाकर सेवन करने की सलाह दी जाती है।

Zika Virus Case: इस शहर में मिला जीका वायरस का केस,जाने क्या है जीका वायरस और उसके लक्षण

Zika Virus Case: इस शहर में मिला जीका वायरस का केस,जाने क्या है जीका वायरस और उसके लक्षण

Zika Virus Infection: पुणे में जीका वायरस का एक मामला दर्ज किया गया है. 16 नवंबर को बुखार, खांसी, जोड़ों के दर्द और थकान की शिकायत के चलते मरीज पुणे के जहांगीर अस्पताल में इलाज के लिए आया था. 18 नवंबर को एक प्राइवेट लैब में जीका वायरस का पता चला.
वहीं 30 नवंबर को एनआईवी पुणे में जांच के दौरान मरीज के जीका से संक्रमित होने की पुष्टि हुई. 22 नवंबर को पुणे नगर निगम की ओर से इस क्षेत्र में डिसीज कंट्रोल एक्शन प्लान शुरू किया गया. मरीज के आस-पास के घरों का सर्वे किया गया, लेकिन इलाके में अन्य किसी संदिग्ध मरीज की पुष्टि नहीं हुई.
इस क्षेत्र में मच्छरों के प्रजनन के लिए घर-घर सर्वे, कंटेनर सर्वे किया गया, लेकिन यहां एडीज मच्छरों का प्रजनन नहीं पाया गया. क्षेत्र को फ्यूमिगेट किया गया था. जीका वायरस से संक्रमित मरीज मूल रूप से नासिक का रहने वाला है और वह 6 नवंबर को पुणे आया था. इससे पहले वह 22 अक्टूबर को सूरत गया था. फिलहाल मरीज पूरी तरह से ठीक है और उसमें कोई लक्षण नहीं हैं.
क्या होता है जीका वायरस?
जीका वायरस मच्छरों से फैलने वाली एक बीमारी है. ये बीमारी एडीज मच्छर के काटने से ही फैलती है. ये मच्छर दिन के समय ही ज्यादा एक्टिव होते हैं. इस वायरस से होने वाला संक्रमण खतरनाक होता है और मरीज के अस्पताल में भर्ती होने की भी नौबत भी आ सकती है.
ये हैं जीका वायरस से संक्रमण के लक्षण
एडीज एल्बोपिक्ट्स और एडीज इजिप्टी से जीका वायरस फैलने का खतरा होता है. जीका वायरस से संक्रमित होने पर बुखार और मलेरिया के मिले-जुले लक्षण नज़र आते हैं. यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है. ऐसे में संक्रमित व्यक्ति से करीब 3 हफ्ते तक दूरी बनाकर रखना जरूरी होता है.

 

चुकंदर में छिपा है सेहत का खज़ाना, डाइजेशन से लेकर गट हेल्थ तक बनाता है बेहतर

चुकंदर में छिपा है सेहत का खज़ाना, डाइजेशन से लेकर गट हेल्थ तक बनाता है बेहतर

सर्दियों का सीजन शुरू होते ही हमारे खानपान में बदलाव आने लग जाता है. हम हरी सब्जियां का सेवन ज्यादा शुरू कर देते हैं. यह सब्जियां हमें बीमारियों से बचा के रखती है. इन्हीं में से एक सब्जी है बीटरुट यानि चुकंदर. लाल रंग के कंद वाली ये सब्जी पोषक तत्वों का भंडार है. इसमें मैग्नीशियम, फोलेट, पोटैशियम, विटामिन बी6, कार्ब, आयरन जैसे पोषक तत्व मौजूद हैं जो हमारे शरीर के अंगो के संचालन के लिए जरूरी होते हैं. इस सब्जी की खास बात यह है कि आप इसे पका भी सकते हैं, इसका जूस भी बना सकते हैं और सलाद के रूप में इसे कच्चा भी खा सकते हैं. चलिए खबर के जरिए इसके फायदों के बारे में जानते हैं.

चुकंदर खाने से शरीर को होने वाले फायदे

1.बेहतर डाइजेशन में इफेक्टिव
बीटरुट में अच्छी खासी मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है. साथ ही ये हमारी पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. तो अगर आप चुकंदर को सर्दी के मौसम में अपनी डाइट में शामिल करेंगे तो आपका डाइजेशन हमेशा अच्छा बना रहेगा.

2. शरीर में सूजन को करता है कम
इस सब्जी में एंटीऑक्सीकडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो शरीर के अंगो में होने वाली सूजन को घटाते हैं. चुकंदर का यही गुण शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है और कैंसर के खतरे को भी कम करता है.

3. नेचुरल डिटॉक्स
चुकंदर खाने से बॉडी का डिटॉक्स अपने आप हो जाता है. इसमें पावरफुल एंजाइम्स मौजूद रहते हैं जो बॉडी को अपने आप डिटॉक्स कर देते हैं. नेचुरल डोटॉक्स होने के कारण ही चुकंदर खाने से आपका वजन कम होता है.

4. गट हेल्थ के लिए होता है अच्छा
इस सब्जी में प्री बायोटिक और फाइबर पाया जाता है जो गुड बैक्टीरिया को हेल्दी रखते हैं. इन्हें हेल्दी रखने से शरीर में पेट की समस्याओं से राहत मिलती है.

 

बाजारों में जमकर चल रहा नकली अंडे का कारोबार, ऐसे कर रहा आपकी सेहत पर बुरा असर, जाने कैसे करें असली और नकली अंडे की पहचान…

बाजारों में जमकर चल रहा नकली अंडे का कारोबार, ऐसे कर रहा आपकी सेहत पर बुरा असर, जाने कैसे करें असली और नकली अंडे की पहचान…

 Fake Egg Business :  आज के समय में भले कोई चिकन मछली या मटन नाका लेकिन हर वर्ग के लोग अंडे काफी शौक से खाते हैं लेकिन क्या आपको पता है अब नकली अंडे का भी कारोबार बाजारों में तूल पकड़ चुका है अंडे की बढ़ती डिमांड ने इसे बढ़ावा दिया है लेकिन इसकी पहचान कैसे किया जाए यह काफी मुश्किल भरा सवाल है

 

सर्दी आते ही देश में अंडे (Egg) की डिमांड बढ़ने लगती है क्‍योंकि इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और ओमेगा-3 की अच्‍छी खासी मात्रा होती है. डिमांड बढ़ते ही व्‍यापारी इस बात का फायदा उठाते हैं. कुछ कारोबारी नकली अंडे को मार्केट में बेचते हैं और आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ करते हैं. जिससे आपकी सेहत को कुछ फायदा नहीं होता है और आप इससे बीमार भी हो सकते हैं. भारत में सबसे ज्‍यादा अंडे का प्रोडक्‍शन आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में होता है वहीं खपत की बात करें तो सबसे आगे तेलंगाना है. एक रिपोर्ट के अनुसार हैदराबाद में ही रोज 75 लाख अंडों की डिमांड होती है. अंडे का कारोबार एक लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा का हो गया है.

ऐसे करें असली और नकली अंडे की पहचान?

 

नकली अंडे बनाने के लिए उसके छिलके पर प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है. इसलिए अगर आप नकली अंडे को आग के पास रखेंगे तो अंडे से जलने की महक आएगी और वह आग भी पकड़ सकता है.

इन बातों रखें ध्यान

अगर आपके पास असली अंडा है तो उसे हाथ में लेकर हिलाए, उसमें से किसी भी तरह की आवाज नहीं आएगी, लेकिन नकली अंडे को हाथ में लेकर हिलाने पर उसमें से कुछ आवाज आएगी. इसलिए अंडा खरीदने से पहले इस तरह पहचान करें, क्योंकि इस तरह नकली अंडे खाने से आपकी सेहत खराब हो सकती है.

Drinking Water: क्या आप भी खड़े-खड़े पीते हैं पानी? तो जान लें इससे होने वाले 4 नुकसान

Drinking Water: क्या आप भी खड़े-खड़े पीते हैं पानी? तो जान लें इससे होने वाले 4 नुकसान

 Drinking Water Tips: पानी हमारे जीवन के लिए कितना ज़रूरी है, यह हम सब जानते हैं। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ कई तरह की बीमारियों से भी बचाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसर, दिन भर में कम से कम 8 गिलास पानी पीना बेहद ज़रूरी है। हालांकि, सिर्फ इतना ही काफी नहीं है, आपको यह भी पता होना चाहिए कि पानी पीने का सही तरीके क्या है। जी हां, पानी पीने का एक सही तरीका भी है और यह उतनी ही अहमियत रखता है जितना की पानी पीना।

जब बात आती है पानी पीने की आदत की, तो आमतौर पर लोग जल्दी में खड़े होकर ही पानी पी लेते हैं। सही कहा ना? हालांकि, यह कोई नहीं सोचता कि इस तरह पानी पीना कितना हानिकारक हो सकता है। तो आइए जानें कि खड़े होकर पानी पीने से किस तरह के नुकसान हो सकते हैं?

खड़े-खड़े पानी पीने के साइड इफेक्ट्स:

1. फेफड़ों को होता है नुकसान

जब आप खड़े होकर पानी पीते हैं, तो ज़रूरी पोषक तत्व और विटामिन लिवर और पाचन तंत्र तक नहीं पहुंचते और साथ ही यह सिस्टम से बहुत तेज़ी से गुज़र जाता है, जिससे आपके फेफड़ों और हृदय के काम को नुकसान पहुंचता है क्योंकि इससे ऑक्सीजन का स्तर गड़बड़ हो जाता है.

2. बदहज़मी

खड़े होकर पानी पीने से पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंचता है। क्योंकि जब हम खड़े होकर पानी पीते हैं, तो यह बड़ी तेज़ गति के साथ भोजन नली से होकर सीधे पेट के निचले हिस्से पर जा गिरता है, जो हानिकारक है। खड़े होकर तेज़ी से पानी पीने से नसें तनावग्रस्त हो जाती हैं, जिससे तरल पदार्थ का संतुलन बिगड़ जाता है, और टॉक्सिन्स व बदहज़मी बढ़ती है।

3. किडनी से जुड़ी दिक्कतें

ऐसा पाया गया है कि हमारी किडनी उस वक्त बेहतर तरीके से फिल्टर करती हैं, जब हम बैठे होते हैं। ऐसे में जब खड़े होकर पानी पिया जाता है, तो तरल पदार्थ बिना फिल्टर हुए सीधे पेट के निचले हिस्से में चला जाता है। इससे पानी में मैजूद अशुद्धियां मूत्राशय में जम जाती हैं, और गुर्दे की कार्यप्रणाली को नुकसान पहुंचाती हैं। इससे युरीनरी ट्रेक्ट से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं.

4. गठिया का ख़तरा बढ़ता है

जब आप खड़े होकर गटागट पानी पी जाते हैं, तो इससे नसें तनाव की स्थिति में आ जाती हैं,तरल पदार्थ का संतुलन बिगड़ता है और शरीर में टॉक्सिन्स और बदहज़मी बढ़ती है, यहां तक कि यह जोड़ों में तरल पदार्थ भी जमा करता है, जिससे गठिया हो जाता है और हड्डियों को नुकसान पहुंचता है।

तो फिर पानी पीने का सही तरीका क्या है?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, पानी पीने का सही तरीका है बेठकर पीना। इसके लिए कुर्सी पर बैठें, पीठ को सीधा रखें और फिर पानी पिएं। इससे पोषक तत्व दिमाग़ तक पहुंचते हैं और मस्तिष्क गतिविधि में सुधार आता है। सिर्फ इतना ही नही, इससे पाचन में भी सुधार आता है और पेट में सूजन या पेट फूलने की दिक्कत नहीं होती।

Foods For Bloating: पेट फूलने की समस्या में खाएं ये 5 फूड्स, मिलेगा तुरंत आराम

Foods For Bloating: पेट फूलने की समस्या में खाएं ये 5 फूड्स, मिलेगा तुरंत आराम

 Foods That Help With Bloating: आज के समय की लाफस्टाइल औक खराब खान-पान के चलते ब्लोटिंग यानि पेट फूलने की समस्या बहुत आम हो गई है। ब्लोटिंग होने पर आपका पेट भारी-भारी और भरा महसूस होता है जिससे आपको कुछ भी खाने की इच्छा नहीं करती है। जिसका आपकी मेंटल हेल्थ पर भी काफी गहरा प्रभाव पड़ता है।

ब्लोटिंग की समस्या में आपकी छोटी आंत में गैस हो जाती है जिसके कारण आपका पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता है जोकि पेट फूलना, पेट में ऐंठन और पेट में दर्द जैसी समस्याएं पैदा करता है। ऐसे में आज हम आपको ब्लोटिंग की समस्या से छुटकारा पाने के लिए कुछ फूड्स बताने जा रहे हैं जिनके सेवन से आप तुरंत ही राहत प्राप्त कर सकते हैं, तो चलिए जानते हैं-

अदरक

अदरक एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। इसके अलावा अदरक में जिंजीबैन नामक एंजाइम मौजूद होता है जोकि ब्लोटिंग की समस्या को दूर करने में मददगार होता है। इसके सेवन से आपको खाना पचाने में मदद मिलती है।

सौंफ

सौंफ में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं जोकि आपके पेट को लंबे वक्त तक हेल्दी बनाए रखने में मददगार साबित होता है। सौंफ का सेवन करने से आपका खाना ठीक से पचता है जिससे आपको गैस की समस्या नहीं होती है। इसलिए सौंफ खाने से ब्लोटिंग नहीं होती है।

दही

दही एक प्रोबायोटिक्स है, जोकि आंत के बैक्टीरिया को हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है। ऐसे में आप दही में नमक या हल्का मीठा डालकर खा सकते है। इससे आपका पाचन तंत्र बेहतर बना रहता है और आपको ब्लोटिंग की समस्या नहीं होती है।

केला

केला पोटैशियम और फाइबर जैसे गुणों से भरपूर होता है। इसलिए केले के नियमित सेवन से अपच और गैस की समस्या दूर होती हैं। जिससे आपको ब्लोटिंग की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

नींबू

नींबू विटामिन सी, सोडियम और पोटैशियम जैसे हेल्दी गुणों से भरपूर होता है इसलिए ये आपके पाचन तंत्र को हेल्दी रखने में मदद करता है। अगर आप रोजाना नींबू को आहार में शामिल करते हैं तो इससे आपको अपच, गैस और ब्लोटिंग की समस्या से छुटकारा मिलता है।

How To Use Raw Milk For Hair: कच्‍चे दूध से दूर करें बालों का रूखापन, जाने लें इस्‍तेमाल करने का तरीका

How To Use Raw Milk For Hair: कच्‍चे दूध से दूर करें बालों का रूखापन, जाने लें इस्‍तेमाल करने का तरीका

 Raw Milk Hair Benefits: हर कोई सबसे सुंदर और आकर्षक दिखने की ख्वाहिश करता है। लेकिन सर्दियों का मौसम आते ही आपके बालों में रूखेपन की समस्या होने लग जाती है। इससे बचने के लिए आप तरह-तरह के महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स, ट्रीटमेंट्स या पार्लर का सहारा लेते हैं।

लेकिन ये सारे प्रोसेस महंगे होने के साथ-साथ केमिकलयुक्त भी होते हैं जिनसे आपकी त्वचा को लाभ कम हानि ज्यादा हो सकती है। ऐसे में आज हम आपके लिए बालों में कच्चे दूध लगाने के तरीके और फायदे लेकर आए हैं। कच्चा दूध व‍िटाम‍िन डी, व‍िटाम‍िन के, मैग्नीशियम, कैल्‍श‍ियम, फॉस्‍फोरस और प्रोटीन जैसे गुणों से भरपूर होता है।

इससे आपके बालों को जरूर पोषक तत्व प्राप्त हो जाते हैं जिससे आपके बाल कोमल, चमकदार और मजबूत बनते हैं। कच्चे दूध की मदद से आपके बालों से रूखेपन की समस्या को दूर करके बालों को हेल्दी बनाया जा सकता है, तो चलिए जानते हैं बालों को कच्चा दूध लगाने के तरीके-

कच्‍चा दूध और शहद

इसके विए आप कच्‍चे दूध में शहद डालकर एक गाढ़ा पेस्‍ट बना लें। फिर आप इस पेस्ट को अपने बालों में अच्‍छी तरह से लगा लें। फिर आप करीब आधे घंटे बाद साधारण साफ पानी से बाल धो लें। इससे आपके बालों की ग्रोथ को बढ़ाने और रूखेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

कच्‍चा दूध कंडीशनर के साथ म‍िलाएं

बालो को सोफ्ट बनाने के ल‍िए आप अपने कंडीशनर में कच्‍चा दूध म‍िलाकर बालों में अच्छी तरह से मिलाकर करीब 3 म‍िनट तक लगाकर छोड़ दें। फ‍िर आप बालों को साधारण पानी से धोकर साफ कर लें। कंडीशनर में कच्‍चा दूध म‍िलाकर लगाने से आपके बाल हेल्‍दी और मुलायम बनते हैं।

कच्‍चा दूध एलोवेरा

बालों का ड्रायनेस को दूर करने के ल‍िए आप अपने बालों में एलोवेरा और कच्‍चे दूध का म‍िक्चर लगाएं। इससे आपके बालों में नमी आ जाती है जिससे आपके बालों को रूखापन दूर हो जाता है। एलोवेरा विटामिन ए और ई की अच्छी मात्रा से भरपूर होता है। इसके लिए आप 3 बड़े चम्‍मच कच्‍चा दूध में एलोवेरा म‍िलाकर बालों में लगाएं। इससे बालों में डैंड्रफ और ड्राईनेस की समस्या दूर होती है।

Winter Health Care Tips: सर्दियों में इन 5 तरह से डाइट में शामिल करें अदरक, इम्यूनिटी होगी मजबूत

Winter Health Care Tips: सर्दियों में इन 5 तरह से डाइट में शामिल करें अदरक, इम्यूनिटी होगी मजबूत

 How to Use Ginger in Winter Season: अदरक एक मसाला है जिसको खाने में स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है। अदरक की तासीर गर्म होती है इसलिए सर्दियों में इसके सेवन से आपका शरीर आंतरिक तौर पर गर्म रहता है जिससे आप खांसी, जुखाम या बुखार जैसी कई मौसमी बीमारियों से बचे रहते हैं।

इसके अलावा अदरक में कई एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स, मिनरल्स, विटामिन बी3, विटामिन बी6 और पोटेशियम की भी अच्छी मात्रा मौजूद होती है जिससे आपकी सेहत को बेहतरीन फायदे प्राप्त होते हैं।

ऐसे में आज हम आपके लिए सर्दियों में अदरक को अपनी डाइट में शामिल करने के तरीके लेकर आए हैं। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है, तो चलिए जानते हैं सर्दियों में अदरक खाने के तरीके-

सर्दियों में अदरक को अपनी डाइट में शामिल करने के तरीके- How to Use Ginger in Winter Season in Hindi

अदरक का काढ़ा

अदरक का काढ़ा बनाने के लिए आप एक गिलास पानी में अदरक, काली मिर्च, लौंग और बड़ी इलायची डालें। फिर आप इस पानी को आधा होने तक अच्छी तरह से उबाल लें। इसके बाद आप फिर इस पानी को छानकर पी लें। इससे आपकी इम्यूनिटी मजबूत होती है और आप सर्दी में होने वाला जुकाम, खांसी जैसी समस्याओं से बचे रहते हैं।

अदरक का अचार

अगर आप अचार खाने के शौकीन हैं तो आप रोटी या चावल के साथ अदरक का अचार खा सकते हैं। अदरक के अचार को आप घर पर बना सकते हैं या फिर बाजार से भी खरीद भी ला सकते हैं।

अदरक की चाय

ज्यादातर लोग दूध वाली अदरक की चाय खूब पसंद करते हैं। लेकिन ये आपकी सेहत के लिए अच्छी नहीं मानी जाती है। ऐसे में आप एक गिलास पानी में अदरक डालकर अच्छी तरह से उबाल लें। फिर आप इस पानी को एक गिलास में छान लें। इसके बाद आप इसमें नींबू का रस और शहद मिला लें। इस चाय को दिन में दो से तीन बार पीने से आपकी इम्यूनिटी बूस्ट होती है।

अदरक का सूप

अदरक का सूप बनाने के लिए आप इसमें ब्रोकली, मशरूम या मिक्स वेज आदि के सूप में अदरक डालकर बना सकते हैं। इससे आपका सूप कई गुना पोषक तत्वों से भर जाता है। ऐसे में सर्दियों में शरीर को गर्माहट और एनर्जी प्रदान करने के लिए अदरक का सूप जरूर पीएं।

अदरक की चटनी

कई लोग खाने के साथ चटनी खाने के शौकीन होते हैं। ऐसे में अदरक की चटनी बेहद स्वादिष्ट और पोषक तत्वों भंडार होती है। इसको आप रोटी या परांठे के साथ चटकारा लेकर खा सकते हैं। अदरक की चटनी के सेवन से आपकी इम्यूनिटी बूस्ट होती है।

आइब्रो में हो गए हैं दाने तो अपनाए ये घरेलू नुस्खे

आइब्रो में हो गए हैं दाने तो अपनाए ये घरेलू नुस्खे

भौहों में बालों के बीच होने वाले दानों से कई लोग परेशान रहते हैं। जी हाँ, दुनिया में कई लोग हैं जो भौहों में बालों के बीच होने वाले दानों को लेकर परेशान रहते हैं और कुछ कर नहीं पाते। कई बार ये दाने दर्द करते हैं और इनसे निजात पाना आसान नहीं होता। हालाँकि अगर आप भी अक्सर इस समस्या को झेलते हैं, तो इससे छुटकारा पाने के लिए आप इन घरेलू नुस्खों को आजमा सकते हैं जिनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।
हल्दी का लेप: अगर आप चाहे तो, आइब्रो में होने वाले दानों से राहत के लिए हल्दी का लेप लगा सकते हैं। जी दरअसलहल्दी के एंटीसेप्टिक गुण दानों को कुछ ही समय में कम कर देंगे और इनसे होने वाले दर्द से भी आपको राहत मिल सकती है।

बर्फ की सिकाई: अगर आपको आंखों के आसपास और आइब्रो में पिंपल या दाने के होने पर इसका तुरंत इलाज करना है तो ऐसी स्थिति में आपको आइब्रो पर बर्फ की सिकाई करनी है। इसके लिए एक कॉटन के कपड़े में बर्फ लें और इसे दाने पर कुछ मिनटों के लिए लगाए रखें।

खीरे का रस: आप खीरे के रस से आइब्रो में हुए दानों का इलाज कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें गुलाब जल मिलाकर आइब्रो पर लगाएं। इससे दाने तो कम होंगे ही, साथ ही ठंडक भी मिलेगा।

दालचीनी पाउडर: मसाले के रूप में किचन में इस्तेमाल होने वाली दालचीनी को दानों के इलाज में भी बेस्ट माना जाता है। आप दालचीनी पाउडर में शहद मिलाकर इसे भौह में दाने पर लगाएं और रात भर के लिए छोड़ दें और कुछ समय में आप फर्क पाएंगे।

 

सिर के मुंहासों से राहत दिलाने में मदद करेंगे ये पांच घरेलू नुस्खे

सिर के मुंहासों से राहत दिलाने में मदद करेंगे ये पांच घरेलू नुस्खे

बालों को अच्छी तरह से न धोना, हेयर स्टाइल प्रोडक्ट्स का अधिक इस्तेमाल करना, सिर में पसीना आने के बाद उसे न साफ करना आदि की वजह स्कैल्प के रोमछिद्र बंद हो सकते हैं, जिस वजह से सिर में मुंहासे हो सकते हैं। यह एक कष्टदायक समस्या है क्योंकि इसके कारण दर्द और जलन जैसी समस्याएं होती हैं। आइए आज हम आपको पांच ऐसे घरेलू नुस्खे बताते हैं, जिन्हें अपनाकर आप सिर के मुंहासों से जल्द राहत पा सकते हैं।

टमाटर के रस का करें इस्तेमाल
टमाटर का रस सिर के मुंहासों के उपचार के लिए एक बेहतरीन घरेलू नुस्खा है। सैलिसिलिक एसिड से भरपूर टमाटर आपके सिर के श्च॥ स्तर को संतुलित करके मुंहासों को धीरे-धीरे कम करने में मदद कर सकता है। लाभ के लिए एक कटोरी में टमाटर का रस निकालें, फिर उससे रूई के टुकड़े को भिगोकर सिर के मुंहासों पर हल्के हाथ लगाएं। एक घंटे के बाद अपने सिर को माइल्ड शैंपू और पानी से धोकर साफ करें।

लहसुन लगाएं
लहसुन सैलिसिलिक एसिड, एंटी-ऑक्सिडेंट, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल गुणों से समृद्ध होता है, जो सिर के मुंहासों से राहत दिलाने में काफी मदद कर सकते हैं। शायद इससे आपके सिर से लहसुन की महक आए, लेकिन यह इसे स्वस्थ और मुंहासों से मुक्त बना सकता है। राहत के लिए लहसुन की कुछ कलियों को पानी में उबाल लें, फिर इस पानी को ठंडा करके अपने स्कैल्प पर लगाएं। 30 मिनट के बाद अपने सिर को माइल्ड शैंपू से साफ करें।

सेब का सिरका आएगा काम
सेब का सिरका एंटी-माइक्रोबियल गुणों से भरपूर होता है, जो सिर में मुंहासें पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं। इसके अतिरिक्त, यह सिर के पीएच स्तर को संतुलित करके इसे बहुत अधिक तैलीय या बहुत शुष्क होने से भी बचाता है। लाभ के लिए एक कटोरी में तीन चम्मच सेब का सिरका और पानी मिलाएं, फिर शैंपू करने के बाद इस मिश्रण को अपने सिर पर लगाएं। एक मिनट बाद फिर से अपना सिर धोएं।

एलोवेरा करेगा मदद
एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर एलोवेरा भी सिर के मुंहासों से राहत दिलाने में काफी मदद कर सकता है। यह मुहांसो के कारण होने वाली सिर में जलन और खुजली से भी जल्द राहत दिलाकर स्कैल्प को हाइड्रेट रखने समेत स्वस्थ बालों के विकास को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। लाभ के लिए ताजा एलोवेरा जेल सीधे अपने स्कैल्प पर लगाएं और 15-30 मिनट के बाद अपने सिर को सिर्फ पानी से धो लें।

टी ट्री ऑयल से भी दूर होंगे सिर के मुंहासें
एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से समृद्ध टी ट्री ऑयल सिर के मुंहासों का इलाज काफी प्रभावी तरीके से कर सकता है। यह सिर के रोमछिद्रों को खोलकर मुंहासों को कम कर सकता है। लाभ के लिए टी ट्री ऑयल की दो-तीन बूंदों को जोजोबा ऑयल में मिलाएं, फिर इसे अपने स्कैल्प पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें। एक घंटे बाद सिर को माइल्ड शैंपू से साफ करें।
 

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