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 क्वारंटाइन सेंटर से फरार हुआ युवक निकला कोरोना पॉजिटिव, मचा हड़कंप

क्वारंटाइन सेंटर से फरार हुआ युवक निकला कोरोना पॉजिटिव, मचा हड़कंप

नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नारायणपुर जिले के क्वारंटाइन सेंटर से एक युवक भाग गया ,जिसके बाद भागे हुए युवक की कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई, इसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है|

मिली जानकारी के अनुसार भागा हुआ युवक अपने घर पर जाकर रह रहा था, जिसे प्रशासन ने पकड़ लिया है, अब उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी चल रही है, साथ ही उसके पूरे परिवार के कोरोना टेस्ट के लिए सेम्पल लिए गए हैं और उन्हें आइसोलेट कर दिया गया है|

बताया जाता हैं कि इसी क्वारंटाइन सेंटर में तीन नए कोरोना मरीजों की पुष्टि हुई है, जिसमें फरार युवक का नाम भी शामिल है, क्वारंटाइन सेंटर में नए मरीज मिलने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है, अब जिला प्रशासन इलाके को सील करने की तैयारी कर रही है और इस इलाके को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है।
वन नेशन वन राशन कार्ड : बिना आधार नंबर वाले राशनकार्ड/सदस्यों का होगा आधार सीडिंग

वन नेशन वन राशन कार्ड : बिना आधार नंबर वाले राशनकार्ड/सदस्यों का होगा आधार सीडिंग

 नारायणपुरसार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत- वन नेशन वन राशन कार्ड प्रारंभ करने के लिए राशनकार्ड के सभी सदस्यों का आधार सीडिंग किया जाएगा। आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से राशन सामग्री वितरण एवं पोर्टेबिलिटी का उपयोग किया जा सकेगा। कार्डधारियों को अपनी पसंद की उचित मूल्य दुकान से राशन प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। खाद्य अधिकारी ने बिना आधार नंबर वाले राशन कार्डधारियों/सदस्यों के आधार नंबर प्राप्त करने के लिए सभी खाद्य निरीक्षकों को पत्र जारी कर निर्देश दिये है।

      जारी पत्र के अनुसार नारायणपुर जिले में प्रचलित 33713 राशन कार्डाे में से 2712 राशन कार्ड में एक भी सदस्य का आधार नंबर दर्ज नहीं है। 2712 राशन कार्डधारी परिवारों के 11899 सदस्यों के आधार नंबर प्राप्त नहीं हुए हैं। खाद्य अधिकारी ने बताया कि राशन कार्ड धारी अपने क्षेत्र के शासकीय उचित मूल्य दुकानों में आधार सीडिंग का कार्य समयसीमा में पूर्ण करा सकते हैं।

 

कैम्प में जवानों के बीच झड़प, एक जवान ने 3 साथियों पर चलाई गोली 2 की मौत 1 गंभीर, पढ़ें पूरी खबर

कैम्प में जवानों के बीच झड़प, एक जवान ने 3 साथियों पर चलाई गोली 2 की मौत 1 गंभीर, पढ़ें पूरी खबर

नारायणपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के अतिसंवेदनशील नक्सलीगढ़ नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर थाना अंर्तगत आमदई घाटी कैम्प में पदस्थ जवानों के मध्य शुक्रवार की रात्रि 11:15 बजे आपसी विवाद में एक जवान घनश्याम कुमेटी के द्वारा अपने साथियों पर गोली चलाने से दो जवानों की मौके पर मौत हो गई है, वहीं एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया है। 

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आमदई घाटी कैम्प में आपसी विवाद में एक जवान घनश्याम कुमेटी ने अपने 03 साथियों पर गोली चला दी,  गोलीबारी की इस घटना में 02 जवान रामेश्वर साहू एवं जिगनेश्वर साहनी की मौत हो गई है। वहीं तीसरे जवान लच्छराम को गंभीर अवस्था मे रायपुर ईलाज के लिए भेजा गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। आरोपी जवान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 

इस गोलीबारी के पूरी घटना की पुष्टि नारायणपुर एसपी मोहित गर्ग ने करते हुए बताया कि दो जवान की मौत हो गई है, वहीं एक जवान को रायपुर ईलाज के लिए भेजा गया है, जहां उसकी हालत स्थिर है।

 
कोरोना से अछूता जिला लोगों के जागरूकता का परिचायक - अभिजीत सिंह

कोरोना से अछूता जिला लोगों के जागरूकता का परिचायक - अभिजीत सिंह

 नारायणपुर | नवपदस्थ कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जिले के इलेक्ट्रानिक एवं प्रिंट मीडिया के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर प्रेस वार्ता के माध्यम से चर्चा में उन्होने कहा कि नारायणपुर जिला कोरोना संक्रमण से अछूता है। यह लोगों के जागरूकता का परिचायक है, कलेक्टर ने मीडिया प्रतिनिधियों से जिले के विकास के लिए सुझाव मांगे। उन्होंने जिले में कोविड-19 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतुं अब तक की गई तैयारियों की जानकारी देते हुए चरंटाइन सेंटरों में की जा रही व्यवस्था और चरंटीन श्रमिकों के बारे में भी बताया। 

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जिले में आर्थिक गतिविधियों के बारे में भी संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से कोरोना से लोगों को जागरूक करने पूरा सहयोग की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करने में मीडिया की अहम् भूमिका होती है। जिसे आप लोग अच्छी तरह निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी मीडिया प्रतिनिधी कभी भी अपनी बात या सुझाव मुझे आकर या दूरभाष पर भी दे सकता है। अच्छे सुझावों का स्वागत रहेगा। इस अवसर पर एसडीएम दिनेश कुमार नाग, जिला जनसंपर्क से शशिरत्न पाराशर, सहित प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रतिनिधी उपस्थित थे।
 
छत्तीसगढ़ के दक्षिण वनांचल की आदि परंपरा में शामिल है सोशल डिस्टेंसिंग , जिसे आज पूरी दुनिया अपना रही है

छत्तीसगढ़ के दक्षिण वनांचल की आदि परंपरा में शामिल है सोशल डिस्टेंसिंग , जिसे आज पूरी दुनिया अपना रही है

नारायणपुरपूरी दुनिया कोविड-19 की महामारी से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन कर रही है। लेकिन तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, उड़िसा एवं महाराष्ट्र की सरहदों से घिरा तथा लोक संस्कृतियों और सामाजिक परंपराओं का जीवन्त उदाहरण रहा छत्तीसगढ़ का दक्षिण वनांचल बस्तऱ क्षेत्र इस मामले में पुरातन काल से आगे रहा है। प्रकृति के उपहारों से घिरा समूचे बस्तर क्षेत्र में उन्मुक्त प्राकृतिक परिवेश के बीच दूर-दूर घरों में निवास का चलन वनांचल क्षेत्र में पुरातन काल से चली आ रही परंपरा का अहम् हिस्सा है, जो वर्तमान समय में कोरोना संक्रमण सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) के वैश्विक संदेश का पुरातन संकेत दर्शा रहा है। इस परम्परा के तहत अबूझमाड़िया जनजाति बाहुल्य क्षेत्र नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में निवास करने वाले जनजाति वर्ग के परिवार पुरातन काल से ही दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित वन भूमि पर निवास बनाकर अपना जीवनयापन करने की महत्वाकांक्षी परम्परा वर्तमान समय में उपयोगी साबित हो रही है।

प्रकृति के बीच सादगी से सेहत का वरदान

जनजाति बाहुल्य जिलों के ग्रामीण क्षेत्र में जनजाति वर्ग के आदिवासी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होकर भी वन भूमि पर निवास बनाकर निवास करते आ रहे हैं एवं इसी अरण्य स्थल में निवास के साथ जीवन का आनन्द उठाते रहे हैं। वर्तमान समय में दूर-दूर निवास की परम्परा सोशल डिस्टेसिंग के मूलभूत सिद्धान्त को पूरा करती नजर आ रही है। जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में आज भी सोशल डिस्टेसिंग पालन के जीवन्त उदाहरणों को आसानी से देखा जा सकता है।  

आदिवासी परिवार में यह चलन है कि परिवार में जितने भी बच्चे हैं उनका अपना अलग घर होता है। परिवार में बड़े बेटे की शादी होने के तुरन्त बाद ही अपने घर से थोड़ी दूरी पर उसका घर बना दिया जाता है और इसी प्रकार अन्य लड़कों का भी शादी के बाद उनका अपना घर अलग बना दिया जाता है। यह अपने आप में आत्मनिर्भर एवं स्वतंत्र जीवनयापन के साथ ही परम्परा सोशल डिस्टेंिसंग को ही अभिव्यक्त करता रहा है। जनजाति क्षेत्र के ग्रामीण इलाको में आज भी अलग-अलग घर बनाकर रहते हैं।

सेहत के लिहाज से भी बेहतर व्यवस्था है यह

सेहत की दृष्टि से भी इनके घर अत्यन्त अनुकूल और सादगीपूर्ण हैं। घर के आगे खुला आँगन, चारों तरफ हरियाली ही हरियाली और सूरज की भरपूर रोशनी इनके स्वास्थ्य और शारीरिक दृष्टि से प्रभावकारी होते हैं। आज कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेसिंग का होना ही आवश्यक है। कोविड 19 के बचाव व सुरक्षा के लिए जहां सोशल डिस्टेसिंग को अपनाना सर्वाेपरि प्राथमिकता हो गई है और विश्व स्तर पर माना गया है कि मौजूदा परिप्रेक्ष्य में सामाजिक दूरी ही इस महामारी के प्रसार को रोकने का बेहतर और सहज-सरल एवं स्वीकार्य उपाय है। 

इस दृष्टि से जनजाति अंचलों को इस मायने में आदर्श परंपराओं का आदि संवाहक कहा जा सकता है कि उनमें संक्रमण को रोकने के लिए बचाव के उपाय सदियों से चले आ रहे हैं और यह सामाजिक परंपराओं का हिस्सा रहे हैं। मौजूदा समय में सोशल डिस्टेंसिंग के मामले में जनजाति क्षेत्रों को अग्रणी माना जा सकता है, आज पूरी दुनिया इसे अपना रही है। कोरोना वायरस के संक्रमण से जनजाति क्षेत्र के लोग भी अपनी जागरूकता दिखा रहे हैं तथा मास्क का उपयोग, साबुन से हाथ धोने सहित बहुत जरूरी होने पर ही अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं। 

प्रवासी श्रमिक प्रशासन के लिए बन रहे हैं चुनौती 

राज्य शासन की मंशानुरूप देश के विभिन्न राज्यों में काम करने गये प्रवासी मजदूर अब अपने गृहग्राम की ओर रूख कर रहे हैं। ऐसे में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बनाये रखना प्रशासन के लिए चुनौती भरा काम है। इस चुनौती को कलेक्टर श्री पी.एस.एल्मा के नेतृत्व में जिला एवं पुलिस प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी प्राथमिकता देते हुए जिले को सुरक्षित रखने में लगे हुए हैं। अन्य राज्यों से वापस जिले में आने वाले प्रवासी मजदूरों को सीधे उनके घर न भेजकर सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें जिला प्रशासन द्वारा जिले में बनाये गये 14 क्वारंटाइन सेंटरों में 14 दिनों के लिए संस्थागत कोरांटाईन एवं 14 दिन होम कोरंटाईन में रखा जा रहा हैं। जहां उन्हें सभी जरूरी सुविधायें उपलब्ध करायी जा रही है। जिससे इस वनांचल क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को सुरक्षित रखा जा सके। 

नक्सली मुठभेड़ में एक महिला नक्सली की मौत 2 जवान घायल, जाने पूरी खबर

नक्सली मुठभेड़ में एक महिला नक्सली की मौत 2 जवान घायल, जाने पूरी खबर

नारायणपुर। जिला के छाटेड़ोंगर थाना अंर्तगत कड़ेमेटा केम्प से एक किलोमीटर की दूरी पर नक्सलियों ने रोड़ ओपनिग पार्टी पर घात लगाकर हमला किया। पुलिस नक्सली मुठभेड़ में एक महिला नक्सली को पुलिस ने मार गिराया है। वहीं मुठभेड़ में 02 जवान घायल हो गए हैं। 

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कड़ेमेटा कैंप से रोड ओपनिंग पार्टी निकली थी, कैंप से एक किलोमीटर की दूरी पर नक्सलियों ने एंबुश लगाकर जवानों पर हमला कर दिया। नक्सलियों ने पहले आईईडी ब्लास्ट करने के बाद नक्सलियों ने जमकर फायरिंग की है। जवाबी कार्यवाही ने एक महिला नक्सली को पुलिस ने मार गिराया है। वही दो जवान घायल हो गए हैं जिसमें से 01 जवान को गोली लगी है, और एक अन्य जवान नक्सलियों द्वारा किए गए बारूदी विस्फोट से घायल हुआ है। पुलिस  को भारी पड़ता देख नक्सली भाग खड़े हुए। सर्चिंग के दौरान एक महिला नक्सली का शव बरामद कर लिया गया है, साथ ही एक एसएलआर रायफल और एक 12 बोर की बंदूक बरामद हुई है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नक्सली एंबुश लगाकर बड़ी वारदात को अंजाम देना चाहते थे। जिसमें बड़ी संख्या में नक्सलियों की मौजूदगी थी, जिसे पुलिस ने नाकाम कर दिया है। 

नारायणपुर के एसपी मोहित गर्ग ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि नक्सलियों ने घात लगाकर रोड ओपनिंग पार्टी पर हमला किया था जिसमें एक महिला नक्सली मारी गई है, साथ ही एक एसएलआर रायफल और एक 12 बोर की बंदूक बरामद हुई है। मुठभेड़ में 02 जवान भी घायल हुए है।
पुलिस के जवानों ने ड्यूटी पर जा रहे पटवारी को पीटा, जाने क्या है पूरा मामला

पुलिस के जवानों ने ड्यूटी पर जा रहे पटवारी को पीटा, जाने क्या है पूरा मामला

नारायणपुर। जिले के ओरछा ब्लॉक में पदस्थ पटवारी को पुलिस के जवानों ने ड्यूटी पर जाने के दौरान बेदम पिटाई कर दी, जिससे पटवारी राजलाल सलाम घायल हो गया है। 


प्राप्त जानकारी के अनुसार पटवारी को घूमता देख जवानों ने पूछताछ की तो उन्होंने आने का कारण बताते हुए आईकार्ड जवानों को दिखाया। पर जवानों ने पटवारी की एक न सुनी और बेवजह घूमने का आरोप लगाकर बेदम पिटाई कर दी। पिटाई से घायल हुए राजलाल को प्राथमिक उपचार के लिए ओरछा में ही भर्ती करवाया गया जिसे आज तहसीलदार के द्वारा जिला अस्पताल में लाकर उपचार करवाया जा रहा है।

इस मामले पर नारायणपुर कलेक्टर पीएस एल्मा ने का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी जवानो द्वारा स्वास्थ्य कर्मियों व ग्राम सचिवों को परेशान करने की जानकारी मिली है, और अब पटवारी से मारपीट का मामला सामने आया है। कलेक्टर ने एसपी मोहित गर्ग को इसकी जानकारी दी है, जिसपर एसपी ने जांच कर कार्यवाही करने की बात कही है।
 नक्सली मुठभेड़ में सीएएफ के प्रधान आरक्षक सहित 04 घायल, प्रधान आरक्षक के कंधे और सीने पर लगी गोली

नक्सली मुठभेड़ में सीएएफ के प्रधान आरक्षक सहित 04 घायल, प्रधान आरक्षक के कंधे और सीने पर लगी गोली

नारायणपुर। जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर अमदई घाटी में बुधवार की सुबह पुलिस और नक्सलियों के बीच हुए मुठभेड में सीएएफ का प्रधान आरक्षक अनंत भगत, आरक्षक कडती काम्या, हाइवा ड्राइवर संजीत शील और पोकलेन ड्राइवर अरुण कुमार साहू घायल हो गए है। प्रधान आरक्षक के दाएं कंधे और सीने में गोली लगी है। वहीं आरक्षक कडती के कलाई में गोली लगी है। दोनों वाहन चालक गोलीबारी के दौरान भगदड़ में पत्थरों से टकराकर घायल हुए हैं। प्रधान आरक्षक अनंत भगत जशपुर के रहने वाले हैं। वे छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के 9वीं बटालियन में पदस्थ हैं।

घायलों ने बताया कि नक्सलियों के द्वारा पहाडिय़ों की टेकरी में पोजीशन लेकर सुबह ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। करीब 15 मिनट तक मुठभेड़ होने के बाद पुलिस को भारी पड़ता देखकर नक्सली भाग खड़े हुए। उन्होंने बताया कि नारायणपुर के आमदई घाट में निक्को जायसवाल कंपनी द्वारा लौह अयस्क निकालने के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा था। ज्ञात हो कि माइंस एरिया को कवर करने के लिए घाटी में कैम्प भी खोला गया है। कैम्प के करीब चार किमी दूर माइंस एरिया में नक्सली मुठभेड़ हुआ है। नक्सलियों द्वारा हमेशा से माइंस खोदने का विरोध किया जाता रहा है। पूर्व में नक्सलियों के द्वारा इसी क्षेत्र में कई वाहनों को आग के हवाले किया जा चुका है तथा दो लोगों की हत्या भी की जा चुकी है।

एसपी नारायणपुर मोहित गर्ग ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि घायल जवान अनंत भगत के दाहिने कंधे में गोली लगी है, सभी जवान खतरे से बहार है। 
दूरस्थ वनांचल नारायणपुर में जीवन बनकर दौड़ रही बाइक एम्बुलेंस : हजारों गर्भवती माताओं के लिए बाइक एम्बुलेंस हो रही वरदान साबित

दूरस्थ वनांचल नारायणपुर में जीवन बनकर दौड़ रही बाइक एम्बुलेंस : हजारों गर्भवती माताओं के लिए बाइक एम्बुलेंस हो रही वरदान साबित

नारायणपुरनक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले का एक बड़ा हिस्सा विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आज भी मुख्य मार्ग से नहीं जुड़ पाया है। अबूझमाड़ वह क्षेत्र है, जहां वनांचल और  नदी-नाले बहुत हैं। यही कारण है कि लोगों को शासन की मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। स्वास्थ्य सेवाओं की सरलता से उपलब्धता को ध्यान में रखकर बाइक एम्बुलेंस का प्रयोग किया गया। जिले में शुरूआती दौर में पहले दो बाइक एम्बुलेंस अंदरूनी ईलाकों के छोटे नदी-नालों, पगडंडियों, उबड़-खाबड़ रास्तों में दौड़ायी गयी, जो सफल हुई। इसकी सफलता को देखकर कलेक्टर श्री पी.एस.एल्मा के विषेष प्रयास से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने के लिए मोटर बाईक एम्बुलेंस की सेवाओं का विस्तार किया है। कलेक्टर श्री एल्मा ने इस वर्ष खनिज न्यास निधि से 4 नई मोटर बाईक एम्बुलेंस स्वास्थ्य विभाग को दी है। जिससे अंदरूनी क्षेत्र के मरीजों को स्वास्थ्य केन्द्रों तक लाने-ले-जाने में सुविधा होगी।

विशेष पिछड़ी जनजाति माड़िया बाहुल्य ओरछा विकासखण्ड के सुदूर और दुर्गम वनांचल में रहने वाले बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए बाईक एम्बुलेंस वरदान साबित हो रही है। प्रसव पीड़ा गर्भवती महिलाओं के लिए कठिन समय होता है और यह उनके जीवन-मरण का काल बन सकता है। अंदरूनी ईलाके के ऐसे गांव जहां बड़ी एम्बुलेंस न पहुंच पाये या सड़क मार्ग न हो उन जगहों की महिलाओं को प्रसव काल में मुसीबत से

उबारा जा सके, इसके लिए जिले में बाइक एम्बुलेंस का सहारा लिया जा रहा है। यह प्रसवकाल में महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है।  
बाईक एम्बुलेंस की सेवाओं का जिक्र करते हुए वनांचल क्षेत्र की मितानिनों से चर्चा करने पर बताया कि बाइक एंबुलेंस की सेवा मिलने से वनांचल गांवों में सदियों से चली आ रही झाड़-फूक की सामाजिक कुरीतियों को तोड़ने और अंध विश्वास को दूर करने में मदद मिल रही है। मितानिनों का कहना है कि वनांचल गांवों में पहले जब मोटर बाईक एम्बुलेंस संचालित नहीं थी तब प्रसव घर पर ही गांव की स्थानीय महिलाओं के सहयोग से किया जाता था, जिससे माता एवं बच्चे की जान को खतरा रहता था। बाईक एम्बुलेंस के आने से यह समस्या अब दूर हुई है और संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही मौसमी बीमारियां जैसे चिकनपॉक्स (माता), मलेरिया, डायरिया, उल्टी-दस्त और अन्य बीमारियां के साथ ही सांप-बिच्छू के काटने पर, तब यहां के लोग पहले स्थानीय बैगा-गुनिया, सिरहा के पास जाकर अपना ईलाज कराते थे। उनका कहना है, कि अब बाईक एम्बुलेंस की सेवाएं इन क्षेत्रों में मिलने से वनांचल ग्रामों में जागृति आयी है। बाईक एम्बुलेंस की सेवा मिलने से झाड़-फूक जैसे अंधविश्वास को दूर करने और गांव-घर में ही प्रसव करने जैसे सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में मदद मिल रही है।

बता दें कि बाईक एम्बुलेंस की सेवाएं मिलने से अब तक 234 मरीजों को इस सुविधा का सीधा लाभ मिला है। बाईक एम्बुलेंस के माध्यम से वनांचल क्षेत्र के गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए स्वास्थ्य केन्द्र तक लाया जाता है तथा शिशुवती माताओं को प्रसव के बाद सुरक्षित घर पहुंचाया भी जाता है। इसके साथ ही गर्भवती माताओं को नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, बच्चों का टीकाकरण एवं मौसमी बीमारियों के उपचार के लिए भी बाईक एम्बुलेंस का उपयोग किया जाता हैं। बाईक एम्बुलेंस के आने से शिशु एवं मातृ मृत्युदर में भी कमी आई है।

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