नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में भाजपा नेता की बेटी समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता    |    बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री साय    |    लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |
Previous123456789...481482Next
1 नवंबर से अनजान कॉल पर दिखेगा कॉलर का नाम, DoT के नए निर्देश से फ्रॉड रोकने में मिलेगी मदद

1 नवंबर से अनजान कॉल पर दिखेगा कॉलर का नाम, DoT के नए निर्देश से फ्रॉड रोकने में मिलेगी मदद

 नई दिल्ली

 
भारत में अनजान नंबर से आने वाली कॉल की पहचान करना जल्द आसान हो सकता है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम कंपनियों को 1 नवंबर, 2026 से Calling Name Presentation (CNAP) सेवा शुरू करने का निर्देश दिया है। इस सुविधा के तहत यूजर्स को इनकमिंग कॉल के दौरान मोबाइल नंबर के साथ कॉल करने वाले का नाम भी दिखाई दे सकेगा। यह सेवा 4G और इससे नई टेक्नोलॉजी वाले मोबाइल नेटवर्क पर शुरू की जानी है।
 
CNAP का मकसद फोन पर आने वाली अनजान कॉल की पहचान आसान बनाना है। फिलहाल, अगर किसी व्यक्ति के फोन में कोई नंबर सेव नहीं है, तो कॉल आने पर आमतौर पर केवल नंबर दिखाई देता है। कॉल करने वाले का नाम जानने के लिए कई यूजर्स Truecaller जैसे ऐप का इस्तेमाल करते हैं। CNAP के आने के बाद इसके लिए थर्ड-पार्टी ऐप पर डिपेंडेसी या निर्भरता कम हो सकती है।
 
क्या है CNAP और कैसे करेगा काम?
CNAP यानी Calling Name Presentation टेलीकॉम नेटवर्क पर काम करने वाली कॉलर पहचान से जुड़ी सुविधा है। इसके तहत कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम उसके टेलीकॉम ऑपरेटर के सब्सक्राइबर रिकॉर्ड के आधार पर दिखाया जाएगा। यानी यह जानकारी केवल दूसरे यूजर्स की ओर से दी गई रिपोर्ट या किसी थर्ड-पार्टी ऐप के डेटाबेस पर आधारित नहीं होगी।
 
अगर आपके फोन में किसी व्यक्ति का नंबर सेव नहीं है और वह आपको कॉल करता है, तो CNAP के जरिए स्क्रीन पर उसके नाम की जानकारी दिखाई जा सकती है। वहीं, अगर नंबर पहले से आपके कॉन्टैक्ट में सेव है, तो फोन में सेव नाम दिखाई दे सकता है। हालांकि, स्क्रीन पर दिखने वाला नाम सिम के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड पर आधारित होने के चलते जरूरी नहीं कि वह कॉल करने वाले व्यक्ति की असली पहचान से हमेशा मेल खाए।
 
स्क्रीन पर दिखेगी दो तरह की जानकारी
दूरसंचार विभाग के निर्देश के मुताबिक, कॉल आने पर फोन की स्क्रीन पर दो जानकारियां दिखाई देंगी। पहली में कॉल करने वाले का मोबाइल नंबर और दूसरी में उसका नाम होगा। अगर कॉल करने वाले का नंबर आपके कॉन्टैक्ट में सेव है, तो आपके फोन में सेव नाम दिखेगा। नंबर सेव नहीं होने पर घरेलू कॉल के लिए टेलीकॉम ऑपरेटर के सब्सक्राइबर रिकॉर्ड में दर्ज नाम दिखाया जाएगा। वहीं, अंतरराष्ट्रीय कॉल के मामले में स्क्रीन पर ‘International Call’ लिखा दिखाई देगा।
 
इस सिस्टम को लागू करने के लिए सभी टेलीकॉम कंपनियों को अपने सब्सक्राइबर्स के मोबाइल नंबर और नाम का डेटाबेस तैयार रखना होगा। कॉल रिसीव करने वाले ऑपरेटर को इस डेटाबेस से नाम की जानकारी लेकर यूजर के फोन तक पहुंचानी होगी। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि कॉल खत्म होने के बाद इस प्रोसेस के जरिए प्राप्त कॉलर के नाम को बनाए नहीं रखा जाना चाहिए।
 
2G और 3G यूजर्स को करना होगा इंतजार
CNAP की शुरुआत फिलहाल 4G और इससे नई तकनीक वाले वायरलेस नेटवर्क पर की जाएगी। 2G और 3G नेटवर्क के साथ लैंडलाइन फोन पर इस सुविधा को लागू करने पर अलग से विचार किया जाएगा। यानी शुरुआती चरण में सभी मोबाइल नेटवर्क यूजर्स को इसका फायदा मिलना तय नहीं है और केवल 4G या 5G यूजर्स को यह सुविधा मिलेगी।
 
बता दें, कॉलर का नाम दिखाई देने से संदिग्ध कॉल पहचानने में मदद मिल सकती है, लेकिन CNAP फ्रॉड कॉल को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देता। किसी कॉल पर सही नाम दिखने के बावजूद धोखाधड़ी की कोशिश हो सकती है। इसलिए यूजर्स को फोन पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, UPI PIN या बैंकिंग से जुड़ी पर्सनल जानकारी शेयर नहीं करनी चाहिए।
नीले ड्रम हत्याकांड में बड़ा फैसला, मुस्कान और साहिल को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा, परिवार को मिला इंसाफ

नीले ड्रम हत्याकांड में बड़ा फैसला, मुस्कान और साहिल को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा, परिवार को मिला इंसाफ

 मेरठ। उत्तर प्रदेश के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने दोषी साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने बुधवार को सजा पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। इससे पहले 30 सितंबर को अदालत ने दोनों को हत्या के मामले में दोषी ठहराया था।

सजा सुनाए जाने के दौरान दोनों आरोपियों को जिला कारागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने उनकी स्थिति और जेल में दिनचर्या से संबंधित जानकारी ली। इसके बाद सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर मृत्युदंड का फैसला सुनाया गया।

मृतक के परिवार ने की थी कड़ी सजा की मांग

सौरभ राजपूत की मां रेणू और भाई बबलू ने अदालत से दोनों दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की थी। जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) केके चौबे ने भी मामले में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर दोनों के लिए कड़ी सजा की मांग रखी थी। परिवार की ओर से कहा गया था कि यदि अदालत से उनकी अपेक्षा के अनुरूप फैसला नहीं आता, तो वे उच्च न्यायालय का रुख करेंगे। अदालत के फैसले के बाद मामले ने एक बार फिर व्यापक ध्यान खींचा है।

प्रेम विवाह के बाद रिश्तों में आई दूरी

मामले के अनुसार, मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र स्थित इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत ने वर्ष 2016 में गौरीपुरा निवासी मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह किया था। वर्ष 2019 में पारिवारिक विवाद के बाद दोनों अलग रहने लगे। उसी वर्ष मुस्कान ने बेटी पीहू को जन्म दिया, जो वर्तमान में अपने नाना-नानी के साथ रहती है। इसी दौरान मुस्कान की मुलाकात अपने स्कूल के पुराने सहपाठी और इंद्रानगर निवासी साहिल शुक्ला से हुई। बताया गया कि सौरभ के विदेश जाने के बाद साहिल और मुस्कान के बीच नजदीकियां बढ़ गई थीं।

मार्च 2025 में सामने आया था हत्याकांड

पुलिस के अनुसार, सौरभ के विदेश से लौटने के बाद उसकी हत्या की साजिश रची गई। आरोप था कि 3 मार्च 2025 की रात सौरभ की हत्या कर दी गई और शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया। घटना के बाद साहिल और मुस्कान के हिमाचल प्रदेश घूमने जाने की बात सामने आई। 17 मार्च को लौटने के बाद अगले दिन, 18 मार्च को, मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने 19 मार्च को दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की निशानदेही पर ड्रम से सौरभ का शव बरामद किया गया।

जांच और सुनवाई के बाद दोषी करार

 पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद 30 सितंबर को अदालत ने साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को हत्या का दोषी ठहराया था। इसके बाद बुधवार को अदालत ने सजा के प्रश्न पर सुनवाई करते हुए दोनों को मृत्युदंड सुनाया। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और फैसले के विरुद्ध संभावित अपील की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।

गन्ना किसानों के विवाद सुलझाने बनेगी संयुक्त कमेटी: शिवराज सिंह चौहान

गन्ना किसानों के विवाद सुलझाने बनेगी संयुक्त कमेटी: शिवराज सिंह चौहान

 गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम: 1 हफ्ते में उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का ऐलान

मोदी सरकार की प्राथमिकता में अन्नदाता: गन्ना रिकवरी में हेराफेरी और समस्याओं पर कड़ा रुख, शिवराज सिंह चौहान ने दिए ठोस व्यवस्था के निर्देश

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार किसानों के सर्वांगीण कल्याण, उनकी उपज के पारदर्शी मूल्यांकन और आय सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में कर्नाटक और महाराष्ट्र से आए गन्ना किसानों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील उच्चस्तरीय बैठक की।

इस बैठक में कर्नाटक सरकार के संबंधित मंत्रीगण तथा केंद्र व राज्य सरकारों के सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में गन्ना किसानों की जमीनी समस्याओं, शुगर मिलों द्वारा रिकवरी के आंकड़ों में अंतर, वजन, वेस्टेज, प्रयोगशाला जांच और फसल बीमा से जुड़े विभिन्न विषयों पर बिंदुवार व विस्तार से सार्थक चर्चा हुई।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ किसानों की बात को बेहद गंभीरता और आत्मीयता से सुनते हुए स्पष्ट किया कि मोदी सरकार के लिए किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा के समान है। अन्नदाता का शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों द्वारा रखे गए रिकवरी डिफरेंस, वजन में कटौती और मिलों द्वारा वास्तविक रिकवरी छिपाने जैसी विसंगतियों को उन्होंने बेहद संवेदनशील विषय बताया। चौहान ने कहा कि इन विसंगतियों का कोई भी तात्कालिक या आधा-अधूरा समाधान निकालने के बजाय एक पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी मिल किसानों के हक पर डाका न डाल सके।

किसानों को तत्काल और प्रभावी राहत देने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्री चौहान ने प्रह्लाद जोशी के साथ बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि एक सप्ताह के भीतर एक विशेष उच्चस्तरीय संयुक्त कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों (कर्नाटक व महाराष्ट्र), किसान संगठनों के अधिकृत प्रतिनिधि, शुगर मिलों के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। यह कमेटी गन्ने की कटाई के समय, रिकवरी के साइंटिफिक मापदंड, आधुनिक लैब टेस्टिंग व्यवस्था और वजन की शुद्धता से जुड़े हर तकनीकी पहलू की बारीकी से जांच करेगी और एक निश्चित समय-सीमा में अपनी व्यावहारिक सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। इस संबंध में राज्य सरकार से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है, ताकि किसानों की भलाई के लिए और तेजी से कार्यवाही की जा सकें।

शिवराज सिंह द्वारा प्रह्लाद जोशी के साथ आयोजित इस बैठक में यह भी तय किया गया कि समस्याओं के समाधान को दो चरणों- अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म) और दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) में विभाजित कर नीतिगत फैसले लिए जाएंगे। तात्कालिक प्रशासनिक सुधारों को लागू करने के साथ ही नीतिगत व तकनीकी व्यवस्थाओं को वैज्ञानिक आधार पर स्थायी रूप से सुदृढ़ किया जाएगा।

किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने पूरी बैठक में स्वयं उपस्थित रहकर संवाद को निष्कर्ष तक पहुंचाया। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार बिना किसी भेदभाव के पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके सुझावों पर अमल करेगी और मोदी सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हरसंभव सहयोग, सहायता और ठोस व्यवस्था निरंतर जारी रखेगी।

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी बैठक में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) निर्धारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया और लागत आकलन के तौर-तरीकों की जानकारी देते हुए आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार राज्यों और किसानों के समन्वय से हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है।

योगी सरकार की औद्योगिक नीति को मिली नई ताकत, 20 हजार हेक्टेयर में आकार लेगा ‘न्यू नोएडा’

योगी सरकार की औद्योगिक नीति को मिली नई ताकत, 20 हजार हेक्टेयर में आकार लेगा ‘न्यू नोएडा’

 निवेश और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित होगा न्यू नोएडा, औद्योगिक विस्तार को मिलेगी नई रफ्तार

योगी सरकार के निवेश-अनुकूल माहौल का असर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ेगी गतिविधियां

मजबूत कनेक्टिविटी और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से नोएडा को मिलेगी ग्लोबल इंडस्ट्रियल हब की नई पहचान

सेमीकंडक्टर, एआई और बैटरी तकनीक जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर जोर, न्यू नोएडा बनेगा नई औद्योगिक अर्थव्यवस्था का आधार

नोएडा/लखनऊ- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश-दुनिया के प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में नोएडा औद्योगिक विकास का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। योगी सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, बेहतर कानून-व्यवस्था, मजबूत कनेक्टिविटी और विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर का असर अब नोएडा के विस्तार की महत्वाकांक्षी योजना के रूप में दिखाई दे रहा है। औद्योगिक मांग में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्राधिकरण लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ‘न्यू नोएडा’ विकसित करने की तैयारी कर रहा है।

नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश के अनुसार, इस विस्तार से औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलने के साथ वर्ष 2030 तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 5 से 6 लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है। वहीं, आगामी पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) में नोएडा अथॉरिटी के करीब ₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट शामिल होंगे। इसमें डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाणिज्यिक रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

औद्योगिक विस्तार को मिलेगी नई दिशा
प्राधिकरण के सीईओ करुणेश ने बताया कि वर्ष 1976 में दिल्ली के निकट औद्योगिक नगरी के रूप में स्थापित नोएडा आज उत्तर भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में शामिल है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से निकटता, बेहतर बुनियादी ढांचे और मजबूत कनेक्टिविटी के कारण यहां विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और वाणिज्यिक गतिविधियों में लगातार निवेश बढ़ा है। मौजूदा शहरी क्षेत्र में भूमि की उपलब्धता सीमित होने के कारण अब ‘न्यू नोएडा’ के विकास की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जल्द ही चरणबद्ध तरीके से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही राज्य सरकार मौजूदा नोएडा क्षेत्र में अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नीतिगत विकल्पों पर भी काम कर रही है।

न्यू नोएडा के विकास से औद्योगिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध होगी और नए निवेशकों को आधुनिक औद्योगिक आधारभूत सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे विनिर्माण, तकनीक, लॉजिस्टिक्स और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश को और गति मिलने की उम्मीद है।

₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट्स धरातल पर
मुख्य कार्यपालक अधिकारी के अनुसार, आगामी पांचवें ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) में नोएडा से जुड़े करीब ₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट्स धरातल पर उतरेंगे। इनमें डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाणिज्यिक रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। योगी सरकार द्वारा लगातार आयोजित किए जा रहे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नोएडा में प्रस्तावित ये परियोजनाएं इसी निवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगी।

तीन प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
न्यू नोएडा के साथ कनेक्टिविटी को भी विस्तार देने की योजना है। शहर को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा से जोड़ने के लिए तीन प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर पर योजना बनाई जा रही है। इनके जरिए नोएडा को बोड़ाकी के मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब, बॉटनिकल गार्डन और चार मूर्ति के रास्ते गौर सिटी से जोड़ने का प्रस्ताव है। नोएडा पहले से ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, डीएनडी फ्लाईवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के जरिए प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। प्रस्तावित मेट्रो कनेक्टिविटी से आवागमन और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

168 सेक्टरों में फैला मजबूत औद्योगिक आधार
करीब 20 हजार हेक्टेयर में फैला नोएडा 168 सेक्टरों में विभाजित है और इसका लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र विकसित हो चुका है। पिछले तीन दशकों में यहां करीब 9,500 औद्योगिक, 5,000 वाणिज्यिक और 250 से अधिक संस्थागत आवंटन किए गए हैं। इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप पिछले 30-35 वर्षों में 12 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। अब न्यू नोएडा के विस्तार के साथ रोजगार और निवेश के इस आधार को और व्यापक बनाने की तैयारी है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी निर्यात में बड़ी हिस्सेदारी
नोएडा का उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में करीब 10 प्रतिशत योगदान है। राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी निर्यात में इसकी हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत, जबकि परिधान निर्यात में करीब 80 प्रतिशत बताई जाती है। नोएडा में सैमसंग, डिक्सन, टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल, माइक्रोसॉफ्ट, विप्रो और एडोबी जैसी प्रमुख कंपनियों की मौजूदगी ने इसे देश के प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी केंद्रों में स्थापित किया है। डेटा सेंटर क्षेत्र में सिफी और अडानीकनेक्स के निवेश से भी नोएडा के तकनीकी इकोसिस्टम को मजबूती मिली है।

दमोह सहित सभी जिलों को मिल रही हैं सड़कों की सौगात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

दमोह सहित सभी जिलों को मिल रही हैं सड़कों की सौगात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 भोपाल- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दमोह जिले को नई सड़कों की सौगत मिल रही है। इनमें दमोह-कटनी और दमोह-सागर फोर लेन रोड शामिल हैं। इनकी संयुक्त लागत साढ़े छह हजार करोड़ रूपये से अधिक है। इसके अतिरिक्त बांदकपुर में देव जागेश्वर नाथ लोक के प्रथम चरण में 10 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण कार्य हो रहे हैं। रानी दमयंती पुरातत्व संग्रहालय को नया स्वरूप प्रदान करने के लिए 20 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को (संवाद भवन) मुख्यमंत्री निवास में आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दमोह लोकसभा क्षेत्र के नागरिकों, विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न विकास योजनाओं को लागू करने के लिए स्मृति चिन्ह भेंट करने के साथ पुष्पहार पहनाकर और साफा बांधकर अभिनंदन किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखंड की धरती पर वीरों के शौर्य और आल्हा-ऊदल की वीरता के किस्से आज भी गली-गली में गूंजते हैं। सागर और दमोह केवल दो जुड़वाँ जिला मुख्यालय नहीं हैं, बल्कि ये बुंदेलखंड की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। बुंदेलखंड में पर्यटन, कृषि, व्यापार और उद्योग विकास की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

कनेक्टिविटी से विकास, सागर-दमोह के बीच बनेगा 4 लेन रोड
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के प्रमुख नगरों और जिला मुख्यालयों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध करवाई जा रही है। अच्छी सड़कें विकास की संभावनाओं को साकार कर देती हैं। क्षेत्र विकास के लिये दमोह-सागर, दमोह-कटनी मार्ग को फोरलेन करने के लिए मंजूरी दी गई। इससे दोनों जिला मुख्यालयों के बीच आवागमन की सुविधा बढ़ेगी। मड़ियादो- रजपुरा और मड़ियादो-बनार- किशनगढ़ मार्गों का निर्माण भी किया जाएगा। दमोह- बांदकपुर मार्ग सहित तीन आरओबी का कार्य भी शीघ्र पूरा हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि हर क्षेत्र में बेहतर सड़क, अच्छी शिक्षा, उत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार के अधिक से अधिक अवसर मिलें। सागर और दमोह के बीच लगभग 2 हजार करोड़ की लागत से वर्तमान 76.83 किलोमीटर मार्ग को चार लेन किया जाएगा। इस परियोजना में 4 बायपास भी बनाए जाएंगे।

अच्छी सड़कें खोलेती है समृद्धि का मार्ग
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अच्छी सड़कों से राज्य के किसानों को मंडी तक फसल ले जाने, विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने और मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने जैसे कार्यों में मदद मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सड़कें केवल वाहनों के चलने का रास्ता नहीं होतीं, बल्कि रोजगार, निवेश, शिक्षा और समृद्धि का मार्ग भी खोलती हैं। हमारी सरकार एक ऐसे मध्यप्रदेश का निर्माण करना चाहती है, जहां विकास योजनाओं से अंतिम पंक्ति का व्यक्ति भी लाभान्वित हो। सच्चा वादा और पक्का काम हमारा मंत्र है।

दमोह में 337.30 करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि दमोह जिले में सिंग्रामपुर में कैबिनेट बैठक भी की जा चुकी है। सड़क और ओवर ब्रिज निर्माण के साथ ही जिले में कई शहरी विकास योजनाओं को क्रियान्वित किया जा रहा है। दमोह के 6 विकास खंडों में सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जो पूर्ण होने के करीब है। दमोह में 337.30 करोड़ रुपए की लागत से मेडिकल कॉलेज की शुरुआत होने जा रही है। यही नहीं, कृषि क्षेत्र में समृद्धि के लिए दमोह को विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं और जल जीवन मिशन से जोड़ने का क्रम जारी है।

पर्यटन बढ़ने से होगा क्षेत्र का विकास
पर्यटन क्षेत्र को गति देने के लिए बांदकपुर में 10 करोड़ की लागत से देव जोगेश्वर नाथ लोक के प्रथम चरण का निर्माण किया जा रहा है। नौरादेही स्थित वीरांगना अवंतीबाई लोधी नेशनल पार्क में चीतों का आवास होने से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी। यह प्रदेश में चीतों का तीसरा रहवास क्षेत्र है। तीन सिंचाई परियोजनाओं का क्रियान्वयन करीब 280 करोड़ की लागत से हो रहा है। यह परियोजनाएं शीघ्र पूरी हो रही हैं। दमोह को विकास की सौगातें मिलती रहेंगी।

उन्नत पशुओं की स्पर्धा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर लाने के उद्देश्य से उन्नत मवेशी पालन को प्रोत्साहित किया है। जिलों में उन्नत पशुओं की स्पर्धा अयोजित कर पशुपालकों को पुरस्कृत करने की पहल की गई है। सांसद राहुल सिंह लोधी ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में संस्कृति राज्य मंत्री धर्मेंन्द्र सिंह लोधी, पूर्व मंत्री द्वय जयंत मलैया, रामकृष्ण कुसमरिया सहित दमोह क्षेत्र के जनप्रतिनिधि,नागरिक उपस्थित थे।

विराट कोहली-अनुष्का शर्मा ने मुंबई में खरीदे 3 फ्लैट, ₹44.1 करोड़ की डील से रियल एस्टेट में बढ़ाया निवेश

विराट कोहली-अनुष्का शर्मा ने मुंबई में खरीदे 3 फ्लैट, ₹44.1 करोड़ की डील से रियल एस्टेट में बढ़ाया निवेश

 नई दिल्ली- टीम इंडिया के पूर्व कप्तान विराट कोहली अपना रियल एस्टेट निवेश बढ़ाते जा रहे हैं, इसमें उनके साथ उनकी पत्नी बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा भी शामिल हैं. हाल ही में Virat Kohli, Anushka Sharma और एक्ट्रेस की फैमिली ने मुंबई के पॉश वर्सोवा इलाके में तीन बड़े सौदे किए हैं. यहां के एक रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट में एक ही मंजिल पर तीन फ्लैट खरीदे गए हैं और ये सौदा करीब 44.1 करोड़ रुपये में हुआ है.

गोदरेज स्काईशोर में खरीदे फ्लैट
रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म सीआरई मैट्रिक्स से मिली प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन डॉक्युमेंट्स को देखें, तो विराट अनुष्का और उनके परिवार द्वारा खरीदे गए ये तीनों फ्लैट मुंबई के वर्सोवा में यारी रोड पर स्थित गोदरेज स्काईशोर बिल्डिंग में हैं.

अनुष्का शर्मा का फ्लैट कितना बड़ा?
रिपोर्ट में प्रॉपर्टी डॉक्युमेंट्स में दर्शाई गई डिटेल के आधार पर बताया गया है कि अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने इस बिल्डिंग में लगभग 2,153 वर्ग फुट का एक फ्लैट खरीदा है, जिसकी कीमत 14.89 करोड़ रुपये है. इसके लिए उन्होंने स्टांप शुल्क के तौर पर 74.47 लाख रुपये का पेमेंट किया है. इसमें तीन कवर्ड बेसमेंट पार्किंग स्पेस मिला है.

अनुष्का शर्मा के माता-पिता आशिमा और अजय कुमार शर्मा ने भी यहां एक फ्लैट 10.91 करोड़ रुपये में खरीदा है. इमें दो कवर्ड बेसमेंट पार्किंग स्पेस मिला है. अभिनेत्री के माता-पिता ने 65.44 लाख रुपये का स्टांप शुल्क का भुगतान किया है. सीआरई मैट्रिक्स के मुताबिक, दोनों खरीद बीते 8 जुलाई 2026 को रजिस्टर्ड हुई हैं और इन्हें वन-स्टॉप बिजनेस सर्विसेज एलएलपी से खरीदा गया था, जिसके डेवलपर गोदरेज प्रॉपर्टीज थे.

विराट कोहली संग तीसरा फ्लैट
बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अनुष्का शर्मा ने अपने पति क्रिकेट स्टार विराट कोहली के साथ मिलकर तीसरा फ्लैट खरीदा है. जिसकी कीमत 18.29 करोड़ रुपये बताई गई है. जैपकी द्वारा प्राप्त संपत्ति दस्तावेजों के अनुसार, 2,644 वर्ग फुट के इस घर का रजिस्ट्रेशन 21 जुलाई 2026 को हुआ. इसमें भी तीन कार पार्किंग का स्पेस शामिल है.

24वीं मंजिल पर तीनों फ्लैट
विराट कोहली, अनुष्का शर्मा और उनकी फैमिली द्वारा खरीदे गए ये तीनों फ्लैट गोदरेज स्काईशोर के टावर-A की 24वीं मंजिल पर हैं. प्रोजेक्ट अभी भी अंडर कंस्ट्रक्शन है और रजिस्ट्रेशन डिटेल के अनुसार अनुष्का और उनके माता-पिता के अपार्टमेंट का पजेशन 30 जून 2031 को या उससे पहले मिलने की उम्मीद है.

विराट-अनुष्का ने यहां भी किया निवेश
विराट और अनुष्का की ये मुंबई में पहली खरीदारी नहीं है. उन्होंने अलीबाग में भी संपत्ति में निवेश किया है. खबरों की मानें, तो इस सेलिब्रिटी कपल ने इसी साल जनवरी 2026 में वहां दो एक दूसरे से जुड़े हुए प्लॉट खरीदे थे और इनकी कीमत 37.86 करोड़ रुपये थी. 13 जनवरी को रजिस्टर हुए इस सौदे के लिए करीब 2.27 करोड़ का स्टांप शुल्क चुकाया गया था.

इससे पहले भी अलीबाग में कथित तौर पर उनकी एक प्रॉपर्टी खरीद थी. 2022 में विराट-अनुष्का ने दो लेन-देन के माध्यम से इस क्षेत्र में लगभग आठ एकड़ जमीन 19.24 करोड़ रुपये में खरीदी और बाद में वहां एक आलीशान हॉलिडे होम बनाया.

किसानों को रबी सीजन के लिये बिजली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें : ऊर्जा मंत्री तोमर

किसानों को रबी सीजन के लिये बिजली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें : ऊर्जा मंत्री तोमर

 वरिष्ठ अधिकारी जन-प्रतिनिधियों से सतत संवाद करें

भोपाल- किसानों को रबी सीजन के लिये बिजली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें। साथ ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जन-प्रतिनिधियों से सतत संवाद कर बिजली की उपलब्धता एवं अन्य कठिनाइयों की जानकारी देते रहें। ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह निर्देश सोमवार को मंत्रालय में विभागीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान दिये।

ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि एमडी पॉवर जनरेशन कम्पनी यह सुनिश्चित करें कि सभी प्लांट पूरी क्षमता के साथ बिजली का उत्पादन करें। कोयले की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करें। एमडी श्री मंजीत सिंह ने बताया कि प्रदेश के सभी प्लांटों में कोयले का पर्याप्त भण्डारण है। तोमर ने एमडी ट्रांसमिशन कम्पनी श्री सुनील तिवारी को निर्धारित लक्ष्य के अनुसार समय-सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिये।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बिजली की माँग का आंकलन अग्रिम रूप से करें और उसकी आपूर्ति की सुनियोजित कार्य-योजना बनायें। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध नवकरणीय ऊर्जा के संबंध में भी जानकारी ली। किसानों को सिंचाई के लिये दिन में बिजली की आपूर्ति करने पर भी चर्चा हुई। तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों के एमडी ने रबी सीजन के लिये विद्युत उपलब्धता के संबंध में की गई तैयारियों के संबंध में जानकारी दी।

बैठक में प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री मनीष सिंह, एमडी पॉवर मैनेजमेंट कम्पनी श्री विशेष गढ़पाले सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। विभिन्न कम्पनियों के एमडी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

6 राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त, राष्ट्रपति ने जारी किए आदेश

6 राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त, राष्ट्रपति ने जारी किए आदेश

 नई दिल्ली- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और तबादले की घोषणा की है। ओम प्रकाश माथुर को केरलम से जोड़ा गया है, जबकि राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर तमिलनाडु के पूर्णकालिक राज्यपाल होंगे। सुधा यादव को कर्नाटक, ब्रज मोहन राम को ओडिशा, ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड और दुष्यंत गौतम को सिक्किम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राष्ट्रपति दौपदी मुर्मु ने सोमवार को 6 राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति की घोषणा की। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ओम प्रकाश माथुर को केरलम, सुधा यादव को कर्नाटक, ब्रज मोहन राम को ओडिशा, दुष्यंत गौतम को सिक्किम, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु और डॉ. ढाल सिंह को उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों से जुड़े आदेश संबंधित राज्यपालों के अपने-अपने पदों का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यपालों की निम्नलिखित नियुक्तियां कीं
    सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
    केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
    ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
    डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
    डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
    दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

आर्लेकर को तमिलनाडु का पूर्णकालिक राज्यपाल बनाया गया
केरलम से स्थानांतरित किए गए राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मार्च से ही तमिलनाडु के राज्यपाल के कार्यों का निर्वहन कर रहे थे। उस समय आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। ताजा आदेश के बाद आर्लेकर तमिलनाडु के नियमित राज्यपाल होंगे। गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष आर्लेकर हिमाचल प्रदेश और बिहार के राज्यपाल के रूप में भी काम कर चुके हैं।

ओम प्रकाश माथुर उनकी जगह केरलम के राज्यपाल का पद संभालेंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान से पूर्व राज्यसभा सांसद माथुर ने जुलाई 2024 में सिक्किम के राज्यपाल का कार्यभार संभाला था।

चार राज्यों को मिले नए राज्यपाल
    ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। पलामू से लोकसभा के पूर्व सांसद राम हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे। कंभमपति ने जनवरी 2025 में ओडिशा के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी।
    सुधा यादव कर्नाटक की नई राज्यपाल होंगी। महेंद्रगढ़ से भाजपा की पूर्व सांसद और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की पूर्व सदस्य यादव, थावरचंद गहलोत की जगह लेंगी।
     
    मध्य प्रदेश के बालाघाट से लोकसभा के पूर्व सांसद ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की जगह लेंगे।
    भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम सिक्किम के नए राज्यपाल होंगे। वह ओम प्रकाश माथुर का स्थान लेंगे।
    राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति में हरि बाबू कंभमपति, थावरचंद गहलोत और गुरमीत सिंह के लिए किसी नई जिम्मेदारी की घोषणा नहीं की गई है।

राज्य सरकार किसानों के विकास के लिये प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य सरकार किसानों के विकास के लिये प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के सर्वांगीण विकास के लिये प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि उपज मंडी समिति प्रांगण, देवास में आयोजित 'बलराम कृषि महोत्सव' एवं जिला स्तरीय किसान मेले का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों एवं अन्नदाताओं को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी की पावन धरा पर कृषि विभाग द्वारा किसानों के हित में आयोजित यह महाअभियान अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि माताजी की कृपा और शासन के कड़े निर्णयों से प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्ति मिली है। देवास के किसानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिले के अन्नदाता उन्नत तकनीकों और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में कई उत्कृष्ट नवाचार कर रहे हैं, जिससे देवास पूरे प्रदेश में कृषि क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल बनकर उभर रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपेक्स बैंक प्रशासक महेंद्र सिंह यादव ने बताया कि 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए देवास प्रदेश का 45वां जिला है, जहां बलराम कृषि महोत्सव का भव्य आयोजन हो रहा है। विधायक गायत्री राजे पवार ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों और देवास मंडी व्यवस्था को अभूतपूर्व संबल प्रदान किया है।

किसान मेले का मुख्य उद्देश्य कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, प्राकृतिक व जैविक खेती तथा श्रीअन्न (मिलेट मिशन) को बढ़ावा देना रहा। मेले में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा रबी सीजन के दृष्टिगत कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों जैसे गेहूं, चना, मसूर एवं सरसों की प्रमाणित किस्मों पर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया।

मंडी प्रांगण में आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रिप-स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों एवं कृषि नवाचारों की भव्य प्रदर्शनी भी लगाई गई। समारोह के दौरान देवास जिले के प्रगतिशील किसानों ने अपने नवाचारों के अनुभव भी साझा किए। इसमें देवास विकासखण्ड के ग्राम छोटी चुरलाय निवासी कृषक धर्मेन्द्र सिंह राजपूत ने प्राकृतिक और आधुनिक खेती के समन्वय से मॉडल फार्मिंग और आय वृद्धि के बारे में बताया, ग्राम कनोरिया की पवित्रा नागर ने प्राकृतिक खेती के तरीकों और उसके परिणामों पर चर्चा की, सोनकच्छ के ग्राम अरनिया कला निवासी नारायण सिंह सेंधव ने शेडनेट व पॉलीहाउस के जरिए उद्यानिकी फसलों के प्रबंधन की जानकारी दी, ग्राम पोलाय जागीर के लक्ष्मीनारायण ने किसान उत्पादक संगठन के जरिए उत्पादों की मार्केटिंग व्यवस्था पर प्रकाश डाला तथा टोंकखुर्द के ग्राम चौबारधीरा की संगीता कुशवाह ने प्राकृतिक खेती के सफल क्रियान्वयन के व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन एवं नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले कृषकों में आधुनिक खेती के लिए देवास के धर्मेन्द्र सिंह राजपूत, उन्नत पशुपालन के लिए दौलत यादव, प्राकृतिक खेती के लिए पवित्रा नागर तथा फसल विविधीकरण के लिए ग्राम मेंडकी धाकड़ के जगदीश नागर शामिल हैं। इसी क्रम में उद्यानिकी फसल (शेडनेट एवं पॉलीहाउस) हेतु सोनकच्छ के नारायण सिंह सेंधव, एफपीओ मार्केटिंग के लिए लक्ष्मीनारायण, प्राकृतिक खेती के लिए टोंकखुर्द की संगीता कुशवाह, खातेगांव की चिंताबाई कुमरे एवं बागली के बांकेसिंह कर्मा को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त कन्नौद विकासखण्ड के ग्राम खेरखेड़ा से प्राकृतिक खेती के सफल क्रियान्वयन एवं प्रसार के लिए ज्योति राव तथा रामभरोसे बैरागी को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष लीला भेरूलाल अटारिया, महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल, डॉ. रायसिंह सेंधव, पूर्व देवास विकास प्राधिकरण अध्यक्ष राजेश यादव सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं किसान उपस्थित रहे।

बच्चे और युवा हमारे सुनहरे भविष्य के सितारे, इनकी तरक्की में नहीं आने देंगे कोई बाधा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बच्चे और युवा हमारे सुनहरे भविष्य के सितारे, इनकी तरक्की में नहीं आने देंगे कोई बाधा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बच्चे ही हमारे देश-प्रदेश के भावी कर्णधार हैं। बच्चे और युवा हम सबके सुनहरे भविष्य के चमकते सितारे हैं। हम इनकी शिक्षा-दीक्षा, प्रतिभा प्रोत्साहन और तरक्की में कोई बाधा नहीं आने देंगे। राज्य सरकार आधुनिक शिक्षा सुविधाओं के विस्तार के साथ युवाओं को रोजगार और विकास के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश में विकास का कारवां निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को नरसिंहपुर में 42.52 करोड़ रुपए की लागत से नवनिर्मित शासकीय सांदीपनि विद्यालय भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अंतर्गत प्रदेश के 35.56 लाख से अधिक हितग्राहियों के बैंक खातों में सिंगल क्लिक से 213.41 करोड़ रुपए की पेंशन राशि अंतरित की। मुख्यमंत्री ने रविवार को नवरात्र शुभारंभ के अवसर पर नरसिंहपुर जिलेवासियों को नये विकास कार्यों की भी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने यहां लगभग 175.14 करोड़ रुपए लागत के 31 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इसमें सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण भी शामिल है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन योजना- 2026 के अंतर्गत करीब 10 हितग्राहियों को उनके मालिकाना पट्टे की नि:शुल्क रजिस्ट्री की कॉपी (चेक सहित) तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालय की 15 नई बसों को हरी झंडी दिखाकर सांदीपनि बस सेवा का शुभारंभ किया।

गुरुकुल परम्परा का ही आधुनिक स्वरूप हैं हमारे सांदीपनि विद्यालय
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरु हो, तो सांदीपनि जैसा। शिष्य हो, तो कृष्ण जैसा और मित्रता हो, तो कृष्ण-सुदामा जैसी। प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे सांदीपनि विद्यालय हमारी प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पद्धति और गुरु-शिष्य परंपरा का ही आधुनिक स्वरूप हैं। राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और शैक्षणिक परिवेश को बेहतर बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त विद्यालय भवन, स्कूल बस, पुस्तकें, यूनिफॉर्म और साइकिल उपलब्ध कराई जा रही हैं। पचहत्तर प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप तथा स्कूल टॉपर्स को स्कूटी प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक विद्यार्थी को आगे बढ़ने के समान अवसर देना है।

सफलता के दिए अनमोल टिप्स, सपनों को पूरा करने के लिए किया प्रेरित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र बताते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए मेहनत, अनुशासन, आत्मविश्वास और निरंतर सीखने की भावना आवश्यक है। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार लक्ष्य तय कर पूरी लगन से पढ़ाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी में आगे बढ़ने की क्षमता है और सही दिशा में किए गए प्रयास सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

बहनों, किसानों और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। लाड़ली बहनों को प्रतिमाह 1500 रुपए की सहायता दी जा रही है। मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप की राशि और ग्रामीण परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है। सरकार ने 50 लाख संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, बिजली, पेयजल, सिंचाई, अधोसंरचना और औद्योगिक विकास के कार्य तेजी से हो रहे हैं। भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

नरसिंहपुर को मिलेंगी नये विकास कार्यों की सौगातें
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां नरसिंहपुर से पिपरिया मार्ग के उन्नयन के लिए सरकार द्वारा 540 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने नरसिंहपुर में नगर वन कॉरिडोर विकसित करने, नगरपालिका क्षेत्र में खैरीनाका से रेलवे स्टेशन तक पक्की सुसज्जित सड़क बनाने तथा नगर क्षेत्र में ही एक गीता भवन भी बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी के बरमान घाट पर रिवर फ्रंट विकसित किया जाएगा। जिले के सभी विकासखंडों में पशुपालकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को क्रमश: एक लाख, 50 हजार और 25 हजार रुपए के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नरसिंहपुर को जबलपुर मेट्रोपोलिटन एरिया का लाभ मिलेगा। जिले के 50 गांवों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 23.17 करोड़ रुपए की लागत से नल से जल की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जिले में चार सड़कों और शासकीय हाईस्कूल कल्याणपुर का लोकार्पण भी किया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 95 करोड़ रुपए लागत के 21 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया।

युवाओं के लिए रोजगार और चिकित्सा शिक्षा का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 को युवा वर्ष घोषित किया गया है। अगले वर्ष पीएससी की परीक्षाएं दो बार आयोजित की जाएंगी। प्रदेश में 85 हजार नई नियुक्तियां की गई हैं और बहुत जल्द एक लाख से अधिक नवीन पदों पर भर्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष प्रदेश में 12 नये मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे, जिससे चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का विस्तार होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने सेवा संकल्प के महाअभियान में भारत को दुनिया में अग्रणी राष्ट्र बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। विकसित भारत की यात्रा में मध्यप्रदेश हर कदम पर प्रधानमंत्री के साथ खड़ा है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय शुरू किए गए हैं, ये विद्यालय हमें भगवान श्रीकृष्ण के शिक्षाकाल का स्मरण कराते हैं। श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता से हमें शिक्षा लेकर मित्र की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। सांदीपनि विद्यालय और बस सेवा की सौगात बच्चों के चेहरों पर साफ नजर आ रही है। शासकीय स्कूलों में ड्रापआउट दर 14 प्रतिशत से कम होते हुए आज शून्य पर आ गई है। प्रदेश में सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नरसिंहपुर की पवित्र धरती को मां नर्मदा का विशेष स्नेह मिला है। यह आदिगुरु शंकराचार्य की तपस्थली, महर्षि महेशयोगी की ध्यानस्थली, वीरांगना रानी दुर्गावती की कर्मस्थली और आचार्य रजनीश ओशो का नरसिंहपुर के विशेष जुड़ाव रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को नवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जब भक्त संकट में होते हैं तो भगवान नरसिंह अवतार में प्रकट होकर दुष्टों को विनाश करते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में खेलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व बढ़ा है। एशियन गेम्स-2026 में हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन इसका गवाह है। मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों को 11 पदक मिले, जिनमें से 5 स्वर्ण पदक शामिल हैं। भारत आज मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग में अग्रणी राष्ट्र बन चुका है। अमृतकाल में वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने संकल्प लिया है। भारत दुनिया का नंबर-एक देश बनेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट, मंडला, डिंडौरी जिले लंबे समय तक नक्सलवाद की चपेट में रहे। विकास के मामले में यहां हालात बहुत खराब हो गए थे। हमारी सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के बल पर प्रदेश की धरती से लाल सलाम को आखिरी सलाम किया है। चंबल में दस्यु समस्या का समाधान भी किया है। उन्होंने कहा कि पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल के नेतृत्व में जल संरक्षण, नल जल योजना के अंतर्गत 10 हजार करोड़ लागत के विकास कार्य किए गए। पात्र हितग्राहियों को एक बगिया मां के नाम योजना का भी लाभ मिल रहा है। प्रदेश के किसानों को नदी जोड़ो अभियान की सौगात मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में आज 5 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है। भोपाल और इंदौर में मेट्रो ट्रेन दौड़ रही है। राज्य में लगातार नए हवाई अड्डे विकसित कर एयर कनेक्टिविटी बढ़ाई जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में रीवा, सतना और दतिया को एयरपोर्ट की सौगात मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार गरीब, किसान, महिला और युवाओं के कल्याण के लिए सभी जरूरी काम कर रही है। इस वर्ष किसानों को गेहूं खरीद के लिए 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान किया गया।

स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि नरसिंहपुर के बेटा-बेटियों को आज भव्य सांदीपनि विद्यालय के भवन की सौगात मिली है। प्रदेश में 375 सांदीपनि विद्यालय बनकर तैयार हो चुके हैं। स्कूली बच्चों को लैपटॉप, स्कूटी और साइकिलें बांटी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जिले को विकास की अनेक सौगातें मिली हैं। किसी भी राज्य का विकास वित्तीय प्रबंधन के बिना संभव नहीं है। मध्यप्रदेश सरकार ने लगातार नीतियों में सुधार और प्रबंधन को बेहतर करते हुए इस वर्ष साढ़े 4 लाख करोड़ का बजट प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को सुगम परिवहन बसों की सौगात दी है। स्कूल के बच्चों को भी आवागमन के लिए इन बसों का लाभ मिलेगा।

नर्मदापुरम के सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर आज नरसिंहपुर में सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण हुआ है। यह विद्यालय हमारे बच्चों के स्वर्णिम भविष्य की गारंटी हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में देश कृषि, उद्योग, तकनीक सहित सभी क्षेत्रों में तेज गति से बढ़ रहा है। सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इच्छाशक्ति अटल है। मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ते हुए नए रिकॉर्ड बना रहा है।

पूर्व मंत्री जालम सिंह पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव लगातार युवाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें स्वर्णिम अवसर दिलवाने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने नशे के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत की है। युवाओं को हर तरह के नशे से बचाने के लिए प्रदेश में कठोर कार्रवाई हो रही है। नरसिंहपुर गन्ना किसानों का जिला है। किसानों को गन्ने का उचित मूल्य मिल रहा है।

विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को वितरित किए हितलाभ
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न विभागों की योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए। राजस्व विभाग की स्वामित्व पंजीयन योजना के अंतर्गत बृजेश कुमार, कमल सिंह पटेल, आशीष कुमार जाट, जितेन्द्र सिंह जाट, सरोज साहू, गिरधारी साहू, पूरन लाल, टीकाराम दुबे, भूपेन्द्र सिंह जाट, रामचरन जाट, सालिगराम, दीपप्रसाद श्रीवास्तव, विष्णु प्रसाद श्रीवास्तव, गेंदालाल, अनुप कुमार, तोड़ल काछी, विकास, राकेश जाट, अशोक कुमार और रघुवीर श्रीवास्तव को ई-रजिस्ट्री प्रदान की। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अंतर्गत प्रशांत कुर्मी को दुग्ध प्रसंस्करण प्लांट के लिए 51 लाख रुपये का हितलाभ प्रदान किया गया। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत देवेश जाट को 42 लाख रुपये तथा संदीप मिश्रा को 36 लाख रुपये का हितलाभ दिया गया। उद्यानिकी विभाग की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना के अंतर्गत राजजीत धनोरिया को 22 लाख रुपये तथा सत्यम सोनी को 9.35 लाख रुपये का हितलाभ प्रदान किया गया। आजीविका मिशन के अंतर्गत सीसीएल हितलाभ वितरण में लीलावती जाटव, साधना शर्मा, रोशनी मेहरा एवं लक्ष्मी कुशवाहा से संबंधित क्रमशः रेवा एसएचजी, अदिति एसएचजी, परी एसएचजी एवं राधा एसएचजी को हितलाभ वितरित किए गए।

विद्यालय की व्यवस्थाओं का किया अवलोकन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांदीपनि विद्यालय के नवीन भवन का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न कक्षाओं, पुस्तकालय, संगीत कक्ष, प्रयोगशाला सहित अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। विद्यालय में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करने के लिए विकसित की गई व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत रक्तदान शिविर एवं पोषण प्रदर्शनी का आयोजन
विद्यालय परिसर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित रक्तदान शिविर एवं पोषण प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने वृद्धजनों का सम्मान किया तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों को सामग्री भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर विधायक महेंद्र नागेश, महिला आयोग की सदस्या सुसाधना स्थापक, देवीसिंह पटेल, नरसिंहपुर की जिला पंचायत अध्यक्षा ज्योति नीलेश काकोडिया, रामस्नेही पाठक सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं बडी संख्या में स्थानीयजन उपस्थित थे।

नेपाल में फिर आई जल प्रलय! गोरखा में बूढ़ी गंडकी नदी का कहर, 35 से ज्यादा मकान बहे, 4 लोग लापता

नेपाल में फिर आई जल प्रलय! गोरखा में बूढ़ी गंडकी नदी का कहर, 35 से ज्यादा मकान बहे, 4 लोग लापता

 गोरखा- नेपाल में आई भीषण बाढ़ को अभी दो महीने भी नहीं बीते हैं कि एक और जल प्रलय आ गई है। गोरखा जिले में रविवार को बूढ़ी गंडक नदी में आचनाक बाढ़ आ गई। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह से अचानक नदी में सैलाब चला आ रहा है। नदी का पानी आसपास के गांवों में घुस गया और कई घर और पुल भी बह गए। इसके अलावा चार लोग लापता हैं। प्रशासन उनकी तलाश में जुटा है।

जानकारी के मुताबिक गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ आने की वजह से कुछ उपकरण बह गए हैं। सुबह 4 बजे के करीब ही पानी गांवों में घुसने लगा और इसके बाद लोग ऊंचे स्थानों की ओर भागे। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऊंचाई वाले इलाकों में चुन्चुब्री स्यारी नदी का पानी बंद हो गया था। इसके बाद यहां एक झील बनने लगी थी। यही पानी तेजी से बहाव के साथ नीचे आया है।

'काठमांडू पोस्ट' की खबर के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड संख्या तीन के अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग ने बताया कि बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ से सल्लेरी, पायूका और जगत में नदी किनारे स्थित मकान बह गए। बाढ़ में वार्ड को जोड़ने वाला एक पुल भी बह गया। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि शुरुआती खबरों के अनुसार, सिउरीबास के ऊपरी इलाके में भूस्खलन हुआ था। उन्होंने कहा कि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों को संदेह है कि चुमनुब्री-6 में लोकपा और चुमलिंग के बीच बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी स्यार का प्रवाह बाधित हो गया होगा, जिससे बाढ़ आई। अधिकारियों ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से उत्तरी गोरखा के कई इलाकों में 35 से अधिक मकान बह गए।

समाचार पोर्टल 'ऑनलाइन खबर' के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग ने कहा कि रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ ने उन्हें रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ की याद दिला दी। उन्होंने कहा, ''बूढ़ी गंडकी में आई बाढ़ ने भोटेकोशी की बाढ़ की याद दिला दी। इसमें दर्जनों मकान बह गए हैं। फिलहाल नुकसान का सही आकलन करना संभव नहीं है।''

भोटेकोशी नदी में बाढ़ में मारे गए थे 1455 लोग
26 अगस्त को त्रिशूली और भोटेकोशी नदी में ऐसी भीषण बाढ़ आई थी कि गांव के गांव साफ हो गए। इस आपदा में कम से कम 1455 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई थी। अब बी 5 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं जिनकी तलाश की जा रही है।

नदी किनारे रह रहे लोगों को अलर्ट जारी
चुमनुब्री गांवपालिका के अध्यक्ष निमा लामा के मुताबिक, गांवपालिका स्थित चुम्के खोला में भूस्खलन के कारण नदी का बहाव रुक गया था. इसके बाद अचानक बाढ़ आ गई. बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा ने लोगों को सतर्क करने के लिए SMS अलर्ट जारी किया है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है.

चुमनुब्री गांवपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुड़ के मुताबिक, बाढ़ से दोभान, घट्टेखोला, जगत और सल्लेरी गांवों में भारी तबाही मची है.

कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह
बुढ़ीगंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद स्वास्थ्य आपातकालीन केंद्र को सक्रिय कर दिया गया है. स्वास्थ्य और खाद्य स्वच्छता मंत्रालय के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं, इमरजेंसी ट्रीटमेंट और दूसरी मेडिकल हेल्प मुहैया कराने के लिए तैयारी की जा रही है. मंत्रालय ने स्वास्थ्य संबंधी सहायता की जरूरत होने पर हेल्पलाइन नंबर 1115 पर संपर्क करने को कहा है.

नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने बुढ़ीगंडकी नदी के किनारे और निचले तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से तुरंत सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है. फेसबुक पर जारी अपने मैसेज में उन्होंने खासतौर पर सिर्दिबास, जगत, सल्लेरी, खोलाबेसी, माछाखोला, सोती, आर्खेत और आरुघाट के निवासियों को अलर्ट रहने की सलाह दी है.

गृहमंत्री ने कहा कि नेपाल को एक बार फिर भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र गोरखा के चुमनुब्री गांवपालिका स्थित न्याकचेत और फिलिम बाजार को जोड़ने वाला पुल बहने और घट्टेखोला के कुछ मकानों में मलबे के साथ पानी घुसने की खबरों पर चिंता जताई. उन्होंने ये भी बताया कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है.

गृहमंत्री के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन को राहत और बचाव में जुटी है. प्रभावित क्षेत्र में हेलीकॉप्टरों की तैनाती की प्रक्रिया भी शुरू की गई है.

जगत में लैंडस्लाइड का खतरा, 6 लोग एयरलिफ्ट
वहीं, नेपाल के PM बालेन शाह ने भी बताया कि बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ के बाद, नेपाली सेना की एक टुकड़ी को सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए हवाई और जमीनी रास्तों से तैनात किया गया है. उन्होंने कहा, 'जगत इलाके से 6 लोगों को एयरलिफ्ट किया गया है, जहां लैंडस्लाइड का खतरा है. काठमांडू में तैनात कम्पोजिट क्विक रिएक्शन टीम को भी हवाई ट्रांसपोर्ट के जरिए बताए गए इलाके में तैनात किया गया है.

शारदीय नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने से पहले जान लें सही दिशा और जरूरी नियम

शारदीय नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने से पहले जान लें सही दिशा और जरूरी नियम

 Shardiya Navratri Akhand Jyoti Niyam: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है. यह पर्व मां दुर्गा को समर्पित है, जो पूरे नौ दिनों तक चलता है.  इस दौरान मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ अखंड ज्योति जलाने की भी परंपरा है. कई भक्त नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति जलाते हैं. मान्यता है कि नौ दिनों तक लगातार जलने वाली ज्योति मां दुर्गा के प्रति आस्था और भक्ति का प्रतीक है. हालांकि, अखंड ज्योति जलाने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

अखंड ज्योति जलाने के लिए सही दीपक, बत्ती और घी या तेल का इस्तेमाल करना जरूरी है. साथ ही, इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि दीपक में घी या तेल कम न हो और उसकी लौ लगातार जलती रहे. तो आइए जानते हैं नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का सही तरीका क्या है. साथ ही जानिए इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

अखंड ज्योति जलाने की शुभ दिशा
वास्तु के अनुसार, नवरात्रि में अखंड ज्योति रखने के लिए घर की दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण को शुभ माना जाता है. इस दिशा का संबंध अग्नि तत्व से है. पूजा घर में जगह हो, तो यहां दीपक रख सकते हैं. ध्यान रखें कि ज्योति ऐसी जगह हो, जहां उसकी देखभाल आसानी से हो सके और आग लगने का खतरा भी न रहे.

नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने की सही विधि
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करने के बाद पूजा घर की सफाई कर लें. इसके बाद मां दुर्गा की पूजा की तैयारी करें.  फिर अखंड ज्योति रखने के लिए साफ-सुथरा जगह चुनें. अब एक लकड़ी की चौकी पर साफ लाल कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर दीपक रखें. दीपक ऐसी जगह रखें, जहां वह स्थिर रहे और आसानी से गिर न सके.

अखंड ज्योति के लिए ऐसी बत्ती चुनें, जो लंबे समय तक जल सके.  आप गाय के घी का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर घी उपलब्ध न हो तो तिल या सरसों के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.  इस बात का ध्यान रखें कि बत्ती को दीपक में ठीक तरह से लगाएं, ताकि लौ स्थिर बनी रहे.

दीपक जलाने से पहले मां दुर्गा का ध्यान करें. नवरात्रि के नौ दिनों तक पूजा करने का संकल्प लें. मन में अपनी श्रद्धा और मनोकामना व्यक्त करते हुए देवी से पूजा पूरी करने की प्रार्थना करें. इसके बाद अखंड ज्योति प्रज्वलित करें. फिर दीपक के पास फूल और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद मां दुर्गा की पूजा करें. साथ ही, आरती के साथ उनका स्मरण करें.

अखंड ज्योति जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर आपने नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का संकल्प लिया है, तो इसकी देखभाल के लिए पहले से इंतजाम कर लें. घर में कोई न कोई व्यक्ति इसकी निगरानी  जरूर करें. जलते हुए दीपक को अकेला छोड़ने से आग लगने का खतरा हो सकता है.

अखंड ज्योति को चौकी पर रखना शुभ माना जाता है. दीपक को हमेशा समतल और सुरक्षित जगह पर रखें. इसके आसपास पर्दे, कागज या कपड़े जैसी चीजें न रखें. साथ ही, दीपक को बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें.

दीपक में घी या तेल कम होने पर ज्योति बुझ सकती है. इसलिए समय-समय पर घी या तेल की मात्रा चेक करते रहें. इसे डालते समय सावधानी बरतें और दीपक को पूरा न भरें. साथ ही, बत्ती का आकार दीपक के हिसाब से रखें. इसके अलावा अखंड ज्योति से दूसरा दीपक जलाने और बार-बार उसकी बत्ती बदलने से बचना चाहिए.

अखंड ज्योति का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में दीपक को रोशनी, आस्था और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाकर भक्त मां दुर्गा की पूजा करते हैं और नौ दिनों तक उनकी आराधना करते हैं. मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है.

शाजापुर जिला कृषि, नवाचार और विकास के क्षेत्र में निरंतर बढ़ रहा है आगे : मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव

शाजापुर जिला कृषि, नवाचार और विकास के क्षेत्र में निरंतर बढ़ रहा है आगे : मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव

 भोपाल- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बिहार के बोधगया से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा शाजापुर जिले में आयोजित ‘बलराम कृषि महोत्सव’ में सहभागिता की। उन्होंने किसानों से संवाद कर कृषि क्षेत्र के विकास एवं किसानों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवाद करते हुए कहा कि शाजापुर कृषि, नवाचार और विकास के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। जिले की पहचान प्याज, आलू, सोयाबीन जैसी फसलों के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों और सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी प्रभावी रूप से बन रही है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सड़क और एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं से शाजापुर जिले के विकास को गति मिलेगी तथा किसानों और स्थानीय व्यापारियों के लिए बाजारों तक पहुंच आसान होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहा कि कृषक कल्याण वर्ष अंतर्गत राज्य सरकार कृषि को लाभकारी बनाने के लिए सिंचाई, बिजली, सोलर पंप, भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दे रही है। किसानों को नई सड़कों के लिए 4 गुना मुआवजा, दिन में बिजली उपलब्ध कराने, सोलर पंपों को प्रोत्साहित करने तथा कृषि उपज के उचित मूल्य और भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर जोर देते हुए बताया कि जिले में प्राकृतिक खेती के लिए किसानों का चयन और कृषि सखियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान भाइयों से कहा कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, फूलों की खेती, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों को अपनाकर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सांची दुग्ध संघ को सशक्त बनाया जा रहा है। गौशालाओं के संचालन के लिए प्रति गौमाता प्रतिदिन सहायता दी जा रही है तथा पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतियोगिताएं और पुरस्कार योजनाएं भी संचालित की जाएंगी। आलू और प्याज की प्रोसेसिंग, भंडारण तथा फूड पार्क की स्थापना से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस योजना के माध्यम से गांव-गांव तक बस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस योजना के माध्यम से गांव-गांव तक बस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण परिवारों के आवासों की नि:शुल्‍क रजिस्ट्री की सुविधा तथा किसानों को सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार निर्णय ले रही

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बोनस सहित खरीदी और भावांतर योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार निर्णय ले रही है। किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई का रकबा विस्तारित करने और कृषि क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

‘बलराम कृषि महोत्सव’ किसानों को कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों, आधुनिक तकनीकों एवं नवाचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍कि ‘बलराम कृषि महोत्सव’ किसानों को कृषि क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों, आधुनिक तकनीकों एवं नवाचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजनों से किसानों को नई जानकारियां प्राप्त करने, उन्नत कृषि पद्धतियों को समझने तथा खेती में नवीन तकनीकों के उपयोग के प्रति जागरूक होने का अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से संवाद के माध्यम से कृषि क्षेत्र को सशक्त करने तथा अन्नदाताओं की खुशहाली सुनिश्चित करने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने शाजापुर जिले के किसानों और कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

म.प्र. राज्य सहकारी बैंक मर्यादित भोपाल (अपेक्स बैंक) प्रशासक  महेन्द्र सिंह यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और किसान देश की समृद्धि का आधार हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में कृषि, पशुपालन और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को सीधे आर्थिक सहायता मिल रही है।

विधायक  अरुण भीमावद ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के हर जिले में ‘भगवान बलराम कृषि महोत्सव’ आयोजित हो रहा है। कृषि प्रधान शाजापुर जिले में यह महोत्सव खेती को उन्नत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, विभागीय जांच को योगी सरकार ने बनाया पारदर्शी और जवाबदेह

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, विभागीय जांच को योगी सरकार ने बनाया पारदर्शी और जवाबदेह

 भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, विभागीय जांच को योगी सरकार ने बनाया पारदर्शी और जवाबदेह

जांच प्रक्रिया में एकरूपता के लिए लागू हुआ मानकीकृत प्रारूप और 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची

हर आरोप का अलग परीक्षण, साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर दर्ज होगा स्पष्ट एवं कारणयुक्त निष्कर्ष

जांच की हर प्रक्रिया का होगा अभिलेखीकरण, कमियों वाली रिपोर्ट को पूर्णता के लिए लौटाया जाएगा

जांच और दंड निर्धारण की भूमिका अलग, सक्षम प्राधिकारी ही करेगा नियमों के तहत अंतिम निर्णय

समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव प्रवीण मिश्र ने जारी किया शासनादेश

लखनऊ- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीति और पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विभागीय जांच व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया है। समाज कल्याण विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत होने वाली विभागीय जांचों के लिए मानकीकृत प्रारूप और 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची लागू की है। विशेष सचिव प्रवीण मिश्र ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है। 

जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता

योगी सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभागीय जांच प्रक्रिया को स्पष्ट एवं व्यवस्थित किया है। नए मानकीकृत प्रारूप के तहत जांच अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का विधिवत अभिलेखीकरण करना होगा। इससे जांच आख्या की गुणवत्ता बेहतर होगी और शासन स्तर पर मामलों के परीक्षण में भी स्पष्टता आएगी।

प्रत्येक आरोप का होगा स्वतंत्र और साक्ष्य आधारित परीक्षण

नई व्यवस्था की खास बात यह है कि आरोप-पत्र में दर्ज प्रत्येक आरोप का अलग-अलग परीक्षण किया जाएगा। जांच अधिकारी को आरोप, संबंधित अधिकारी के उत्तर, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के साथ मौखिक सुनवाई का विवरण भी दर्ज करना होगा। इसके आधार पर प्रत्येक आरोप के संबंध में स्पष्ट और कारणयुक्त निष्कर्ष दिया जाएगा। इससे विभागीय जांच प्रक्रिया अधिक तथ्यपरक और निष्पक्ष बनेगी।

10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची से मजबूत होगी व्यवस्था

जांच आख्या के साथ 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची और अनुपालन प्रमाण-पत्र संलग्न करना जरूरी होगा। इसमें आरोप-पत्र की तामीली, लिखित उत्तर, अभिलेखों के निरीक्षण का अवसर, गवाहों की जिरह और मौखिक सुनवाई सहित आवश्यक प्रक्रियाओं का विवरण शामिल होगा। निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरा पालन नहीं होने पर जांच आख्या को पूर्णता के लिए वापस भेजा जा सकेगा। इससे जांच प्रक्रिया में गुणवत्ता और जिम्मेदारी दोनों सुनिश्चित होंगी।

जांच और दंड निर्धारण की भूमिका स्पष्ट, निष्पक्षता को मिलेगा बल

योगी सरकार ने जांच अधिकारी की भूमिका भी स्पष्ट कर दी है। जांच अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर आरोपों के सिद्ध, आंशिक रूप से सिद्ध या असिद्ध होने का निष्कर्ष देंगे। दंड के संबंध में निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमों के अनुसार लिया जाएगा। इससे विभागीय जांच में निष्पक्षता और संस्थागत प्रक्रिया मजबूत होगी।

बिहार में बाढ़ से 10,671 करोड़ का नुकसान, 82 हजार हेक्टेयर में फसल बर्बाद; 26 लोगों की मौत

बिहार में बाढ़ से 10,671 करोड़ का नुकसान, 82 हजार हेक्टेयर में फसल बर्बाद; 26 लोगों की मौत

 पटना - गंगा, गंडक, सोन एवं कोसी समेत बिहार की प्रमुख नदियों में कई वर्ष उपरांत रिकॉर्ड पानी आने से राज्य को दस हजार करोड़ रुपये से अधिक नुकसान हुआ है। इसमें आधे से अधिक क्षति जल संसाधन विभाग के तटबंधों के टूटने एवं क्षतिग्रस्त होने से हुई है।

हालांकि, यह नुकसान का प्रारंभिक आकलन है। कई विभागों की अंतिम रिपोर्ट मिलना अभी शेष है। ऐसे में अंतिम आकलन के बाद नुकसान का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है।

बाढ़ का कहर दो चरणों में देखने को मिला। पहले चरण में 26 अगस्त से 10 सितंबर के बीच बिहार की नदियों के राज्य से बाहर स्थित जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। इस दौरान 30 रेनगेज स्थलों पर औसतन 225 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई।

इसके कारण गंगा नदी ने दानापुर, गांधीघाट, बंकाघाट, पंडारक, सुल्तानगंज और एकचारी में अपने पुराने उच्चतम जलस्तर का रिकॉर्ड तोड़ दिया। दरधा नदी के कोल्हाचक में भी नया रिकॉर्ड बना।

दूसरे चरण में 24 से 30 सितंबर के बीच नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश से गंडक नदी में पानी का दबाव काफी बढ़ गया। इस दौरान 13 घंटे तक पांच लाख क्यूसेक और 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया।

गंडक नदी ने बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में उच्चतम जलस्तर का नया रिकॉर्ड बनाया। पानी के भारी दबाव के कारण नदी के छह स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए।

पहले चरण में 9617 करोड़ की क्षति
पहले चरण की बाढ़ से 9617 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। इसमें जल संसाधन विभाग ने तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने से 5472 करोड़ रुपये की क्षति बताई है।

आपदा प्रबंधन विभाग ने 2710 करोड़, ग्रामीण कार्य विभाग ने 1062 करोड़, कृषि विभाग ने 270 करोड़, पथ निर्माण विभाग ने 76 करोड़ और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने 27 करोड़ रुपये के नुकसान की सूचना दी है।

वहीं, दूसरे चरण की बाढ़ से 1054 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन हुआ है। इसमें जल संसाधन विभाग की ओर से 1027.34 करोड़ और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की ओर से 26.81 करोड़ रुपये की क्षति बताई गई है। दोनों चरणों के विभागीय आकलन को जोड़ने पर नुकसान की राशि 10,671 करोड़ रुपये होती है।

तटबंधों की मरम्मत के लिए मांगे करीब 1027 करोड़
गंडक नदी में तटबंध क्षतिग्रस्त होने से पश्चिम चंपारण के बगहा-एक, बैरिया और योगापट्टी, गोपालगंज के बैकुंठपुर तथा सारण के मकेर और पानापुर प्रखंड प्रभावित हुए।

जल संसाधन विभाग ने क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत के लिए 28 करोड़ 65 लाख रुपये, चंपारण, तिरहुत एवं अन्य तटबंधों के सुदृढ़ीकरण के लिए 973 करोड़ 69 लाख रुपये और बाढ़ पूर्व मरम्मत के लिए 25 करोड़ रुपये की मांग की है।

82 हजार हेक्टेयर में फसल बर्बाद, 26 की मौत
बाढ़ से कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग ने 11 जिलों में 82 हजार 186 हेक्टेयर में फसल बर्बाद होने का अनुमान लगाया है।

खेतों में पानी भरने और फसल डूबने से किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। फसल क्षति का अंतिम आकलन होने के बाद प्रभावित किसानों को मिलने वाली सहायता का दायरा स्पष्ट होगा।

दोनों चरणों की बाढ़ में राज्य में कुल 26 लोगों की मौत हुई है। पहले चरण में आठ और दूसरे चरण में 18 लोगों की जान गई। सारण में सर्वाधिक 15 लोगों की मौत हुई है।

इसके अलावा पश्चिम चंपारण में तीन, मुंगेर में चार, भोजपुर में दो और भागलपुर में दो लोगों की मौत हुई है। राज्य सरकार मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान दे रही है।

Orkut की वापसी की तैयारी? 12 साल बाद फिर चर्चा में आया पुराना सोशल मीडिया, जानें क्या है फाउंडर का प्लान

Orkut की वापसी की तैयारी? 12 साल बाद फिर चर्चा में आया पुराना सोशल मीडिया, जानें क्या है फाउंडर का प्लान

 क्या आपको Orkut याद है? अगर आप मिलेनियल हैं तो पता ही होगा, लेकिन GenZ के लिए ये नाम नया लग सकता है. बता दें कि इसे सोशल मीडिया का OG प्लेटफॉर्म कहा जाता था. वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जहां दोस्तों के प्रोफाइल देखना, एक-दूसरे की प्रोफाइल पर मैसेज छोड़ना और अपनी पसंद की कम्युनिटी से जुड़ना इंटरनेट का खास एक्सपीरिएंस हुआ करता था.

फीड की जगह स्क्रैप होते थे. लोग अपने दोस्तों को स्क्रैप लिखते थे, जिनके ज्यादा स्क्रैप होते थे वो पॉपुलर माने जाते थे. अब करीब 12 साल बाद Orkut एक बार फिर चर्चा में है. इसके फाउंडर Orkut Buyukkokten ने लोगों से एक नए सोशल नेटवर्क को बनाने के लिए सपोर्ट मांगा है. उनका मकसद ऐसा इंटरनेट तैयार करना है, जहां लाइक, व्यूज और एल्गोरिदम से ज्यादा अहमियत असली लोगों, दोस्ती और आपसी जुड़ाव को मिले.

गूगल और Orkut कनेक्शन
गूगल में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऑर्कुट बायूकॉकटेन ने 2004 में Orkut नाम का प्लेटफॉर्म बनाया था. इसे गूगल के इंटर्नल प्रोजेक्ट के तौर पर तैयार किया गया था. हालांकि Orkut को गूगल ने 2014 में शटडाउन कर दिया, लेकिन Orkut.com के मालिक ऑर्कुट बायूकॉकटेन ही रहे, क्योंकि उन्हीं के पास इसके ट्रेडमार्क और राइट्स हैं.

यह खबर ऐसे समय आई है, जब Instagram, Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI से तैयार कंटेंट, फर्जी प्रोफाइल और एल्गोरिदम के बढ़ते असर को लेकर चर्चा हो रही है. Orkut के फाउंडर का मानना है कि सोशल मीडिया लोगों को जोड़ने के बजाय उनका ध्यान खींचने और उन्हें ज्यादा समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने पर केंद्रित हो गया है. ऐसे में वह इंटरनेट को फिर से इंसानों के करीब लाना चाहते हैं.

बेहद पॉपुलर था Orkut
Orkut की शुरुआत 2004 में हुई थी और दिलचस्प ये है कि इसके फाउंडर ने अपने ही नाम पर प्लेटफॉर्म का नाम रखा. इसके फाउंडर का नाम भी Orkut है. वो गूगल के इंजीनियर थे. ये भारत और ब्राजील में सबसे ज्यादा पॉपुलर हुआ. 2014 में इसे गूगल ने बंद कर दिया.

क्या सच में वापस आ रहा है Orkut?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Orkut की पुरानी वेबसाइट और उसके पुराने अकाउंट अभी दोबारा शुरू नहीं हुए हैं. फिलहाल इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर एक अभियान चल रहा है, जिसके जरिए लोगों से पूछा जा रहा है कि क्या वे असली लोगों, दोस्ती और कम्युनिटी पर आधारित नया सोशल नेटवर्क चाहते हैं.

इस अभियान के लिए लोग अपना नाम दर्ज करा सकते हैं और एक सपोर्टर कार्ड भी पा सकते हैं. लेकिन नाम दर्ज कराने का मतलब यह नहीं है कि आपका पुराना अकाउंट वापस मिल जाएगा या नए प्लेटफॉर्म पर आपका यूजरनेम सुरक्षित हो गया है. कंपनी ने अभी यह भी नहीं बताया है कि नया सोशल नेटवर्क कब लॉन्च होगा.

क्यों खास था Orkut?
Orkut को जनवरी 2004 में लॉन्च किया गया था. इसे Google के इंजीनियर Orkut Buyukkokten ने बनाया था. उस दौर में भारत और ब्राजील जैसे देशों में यह काफी पॉपुलर हुआ. लोग अपनी प्रोफाइल बनाते थे, दोस्तों को जोड़ते थे और अपनी पसंद के सबजेक्ट पर बनी कम्युनिटी में बातचीत करते थे.

इसकी खासियत सिर्फ दोस्तों की लिस्ट बनाना नहीं थी. यूजर्स एक-दूसरे की प्रोफाइल पर स्क्रैप यानी पब्लिक मैसेज छोड़ सकते थे और अपने दोस्तों के लिए टेस्टिमोनियल लिख सकते थे. कम्युनिटी में लोग फिल्मों, संगीत, कॉलेज, शहरों और अपनी रोजमर्रा की पसंद से जुड़े विषयों पर बातचीत करते थे.

आज के सोशल मीडिया की तरह हर पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की होड़ उस समय इतनी बड़ी नहीं थी. Orkut पर लोगों को अपनी पसंद के समूहों में जुड़ने और एक-दूसरे से बातचीत करने का अलग अनुभव मिलता था. हालांकि, समय के साथ Facebook और दूसरे प्लेटफॉर्म ज्यादा लोकप्रिय हो गए. आखिरकार Google ने सितंबर 2014 में Orkut को बंद कर दिया.

AI से क्यों परेशान हैं Orkut के संस्थापक?
Orkut ने अपनी वेबसाइट पर लिखे खुले पत्र में आज के सोशल मीडिया के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि सोशल नेटवर्किंग का असली मकसद लोगों को जोड़ना था, लेकिन अब कई प्लेटफॉर्म का जोर यूजर्स का ध्यान बनाए रखने पर है.

उनके मुताबिक, AI से तैयार पोस्ट, बॉट्स और नकली तस्वीरों या वीडियो के बढ़ते इस्तेमाल से यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि स्क्रीन के दूसरी तरफ असली इंसान है या नहीं. सोशल मीडिया की खास बात यही थी कि लोग किसी दूसरे इंसान से जुड़ते थे. अगर यह भरोसा कमजोर होता है, तो ऑनलाइन बातचीत का अनुभव भी बदल सकता है.

हालांकि, ऑर्कुट AI को पूरी तरह खारिज नहीं करते. उनकी सोच है कि AI का इस्तेमाल लोगों की जगह लेने के बजाय उन्हें नए दोस्त बनाने, पुराने दोस्तों को खोजने और अपनी पसंद की कम्युनिटी से जुड़ने में मदद करने के लिए होना चाहिए. यानी तकनीक का इस्तेमाल इंसानी रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए हो, न कि उनकी जगह लेने के लिए.

क्या लोग सच में पुराने सोशल मीडिया को मिस कर रहे हैं?
Orkut की वापसी की चर्चा के पीछे पुरानी यादें जरूर हैं, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है. क्या लोग आज के सोशल मीडिया से थक चुके हैं और ऐसा प्लेटफॉर्म चाहते हैं, जहां उन्हें हर समय ट्रेंडिंग पोस्ट, वायरल वीडियो और एल्गोरिदम से तय होने वाले कंटेंट के बीच न रहना पड़े?

Orkut की आधिकारिक वेबसाइट पर चल रहे अभियान को दुनिया के कई देशों से समर्थन मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 115 देशों के लोगों से 2.6 लाख से ज्यादा सपोर्ट दर्ज किए जा चुके थे. यह आंकड़ा लोगों की दिलचस्पी दिखाता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि नया सोशल नेटवर्क सफल होगा या सभी पुराने यूजर्स उस पर लौट आएंगे.

किसी भी नए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सिर्फ पुरानी यादें काफी नहीं होंगी. उसे यूजर्स की प्राइवेसी, फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन जैसी चुनौतियों का भी हल निकालना होगा. साथ ही यह भी देखना होगा कि लोग रोजमर्रा की जिंदगी में इसे इस्तेमाल करने के लिए क्यों चुनेंगे.

अब आगे क्या होगा?
फिलहाल Orkut की वापसी को एक शुरुआती पहल के तौर पर देखना सही होगा. संस्थापक लोगों का समर्थन जुटा रहे हैं और एक ऐसे सोशल नेटवर्क की कल्पना पेश कर रहे हैं, जिसमें असली लोग, दोस्ती और कम्युनिटी सबसे अहम हों. फिलहाल ये साफ नहीं है कि इसे लॉन्च किया जाएगा भी या नहीं.

न SIM, न टावर! अब सीधे आसमान से मिलेगा इंटरनेट, Jio की बड़ी तैयारी, Starlink को देगा टक्कर

न SIM, न टावर! अब सीधे आसमान से मिलेगा इंटरनेट, Jio की बड़ी तैयारी, Starlink को देगा टक्कर

 नई दिल्ली : भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर Reliance Jio और Elon Musk की Starlink के बीच मुकाबला तेज होता नजर आ रहा है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में Jio ने अपनी सैटेलाइट कनेक्टिविटी योजना का रोडमैप सामने रखा है। कंपनी की योजना जमीन पर मौजूद मोबाइल टावर और फाइबर नेटवर्क से आगे बढ़कर सीधे अंतरिक्ष के जरिए देश के दूर-दराज इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने की है।

Jio ने सरकार के सामने करीब 1,600 लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट और देशभर में 23 ग्राउंड स्टेशन विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। कंपनी इसे ‘संप्रभु सैटेलाइट कनेक्टिविटी’ के तौर पर विकसित करना चाहती है। इसका मकसद उन क्षेत्रों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है, जहां मोबाइल टावर लगाना या फाइबर केबल बिछाना भौगोलिक और आर्थिक रूप से मुश्किल है।

6 लाख से ज्यादा गांवों को जोड़ने की तैयारी

Jio का सैटेलाइट नेटवर्क पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किए जाने वाले करीब 1,600 छोटे LEO सैटेलाइट की मदद से काम करेगा। इन सैटेलाइट को जमीन पर मौजूद नेटवर्क से जोड़ने के लिए देशभर में 23 हाईटेक ग्राउंड स्टेशन तैयार करने की योजना है।

कंपनी की योजना 6 लाख से ज्यादा गांवों, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे दूरदराज द्वीपों, ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों, बर्फीले सीमावर्ती क्षेत्रों और समुद्री क्षेत्रों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने की है। इससे ऐसे इलाकों को भी तेज इंटरनेट मिल सकेगा, जहां मौजूदा नेटवर्क पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है।

मोबाइल और फाइबर नेटवर्क के साथ काम करेगा सैटेलाइट नेटवर्क

Jio अपने सैटेलाइट नेटवर्क को मौजूदा मोबाइल और फाइबर नेटवर्क के विकल्प के बजाय उनके पूरक नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है। कंपनी का विजन ग्रामीण और नेटवर्क से वंचित इलाकों में सैटेलाइट के जरिए कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल कॉलिंग और मैसेजिंग, विमानन, समुद्री क्षेत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और रक्षा सेवाओं में भी किया जा सकता है।

Jio इस पूरे प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग, इंटीग्रेशन, टेस्टिंग, सैटेलाइट लॉन्च और ऑपरेशन से जुड़ी वैल्यू चेन को भारत में विकसित करने पर जोर दे रहा है। कंपनी का उद्देश्य विदेशी तकनीक और कंपनियों पर निर्भरता कम करना है।

Starlink के साथ बढ़ेगा मुकाबला

Jio की यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब Elon Musk की Starlink भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है। Starlink के पास भारत में GMPCS लाइसेंस है, लेकिन व्यावसायिक सेवा शुरू करने के लिए जरूरी अंतिम सुरक्षा मंजूरियों और अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं का इंतजार है।

Starlink ने भारत में अपनी तैयारियां भी तेज कर दी हैं। कंपनी की ओर से बताया गया है कि भारत में 20 गेटवे साइट्स तैयार की जा चुकी हैं। कंपनी ने भारतीय यूजर्स के डेटा को देश के भीतर रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को भी स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार किया है।

भारत सरकार का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में सभी कंपनियों के लिए समान और गैर-भेदभावपूर्ण नियामकीय प्रक्रिया लागू है। Starlink के साथ Jio की सैटेलाइट सेवा और Bharti Airtel समर्थित OneWeb भी सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी प्रक्रियाओं में हैं।

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट का बढ़ रहा बाजार

आने वाले समय में सैटेलाइट इंटरनेट भारत के डिजिटल कनेक्टिविटी सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकता है। खासतौर पर पहाड़ी, सीमावर्ती, द्वीपीय और ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में इसका फायदा मिल सकता है जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है।

Jio और Starlink के अलावा Airtel और Amazon भी भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को लेकर तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, व्यावसायिक स्तर पर सेवा शुरू करने से पहले कंपनियों को सरकार की ओर से जरूरी मंजूरियां और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऐसे में आने वाले समय में भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में Jio और Starlink के बीच मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।

धर्मांतरण के दबाव में लिनेश साहू की मौत का मामला, पत्नी समेत ससुराल वालों को जेल और जुर्माने की सजा

धर्मांतरण के दबाव में लिनेश साहू की मौत का मामला, पत्नी समेत ससुराल वालों को जेल और जुर्माने की सजा

 धमतरी.धमतरी में नया इतिहास रचा गया है. धर्मांतरण के दबाव में एक युवक ने जान दे दी थी. मामले में कोर्ट ने युवक की पत्नी के साथ सास-ससुर और दोनों सालियों को दोषी पाते हुए पांच-पांच साल का कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ पांच-पांच सौ रुपए का अर्थदंड लगाया है.

पूरा मामला अर्जुनी थाना क्षेत्र के पोटियाडीह गांव का है. 6 सितंबर 2024 को लिनेश साहू नाम के युवक ने आत्महत्या कर ली थी. आरोप है कि लिनेश की पत्नी, उसके सास-ससुर और दो सालियां लगातार ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बना रहे थे. लिनेश बार-बार मना करता रहा, लेकिन दबाव खत्म नहीं हुआ. तंग आकर उसने पहले वाट्सअप-इंस्टाग्राम में स्टेट्स रखकर सारी समस्या बताई, फिर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी, और अब घटना के लगभग एक साल बाद अप सत्र न्यायाधीश अर्चना भास्कर ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.

कोर्ट ने पत्नी करुणा बाई साहू के साथ ससुर राजकुमार साहू, सास गौरी साहू, सालियां किरण और कनिष्का साहू को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल का कठोर कारावास और पांच-पांच सौ रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है. मामले में लोक अभियोजक गीतेश प्रजापति थे.

हर नागरिक तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

हर नागरिक तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 भोपाल - मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ खड़ी है और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तत्परता से कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से जनविश्वास अभियान के माध्यम से सरकार घर-घर पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश निरंतर प्रगति कर रहा है। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रत्येक वर्ग को राहत देने तथा बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर योजनाएं संचालित कर रही है।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरदा जिला चिकित्सालय पहुंचकर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया तथा मरीजों से चर्चा कर उनके उपचार एवं अस्पताल में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अंधत्व निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूली बच्चों को निःशुल्क चश्में वितरित किए। साथ ही क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मरीजों को पोषण सहायता के उद्देश्य से फूड बास्केट प्रदान की।

बुजुर्ग महिला से ली स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, बच्चों को किया दुलार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्पताल में मौजूद मरीजों के परिजनों से चर्चा करते हुए उपचार की व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान उनका संवेदनशील अंदाज भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने एक बुजुर्ग महिला से बातचीत कर उनकी कुशलक्षेम पूछी। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने बुजुर्ग महिला से चर्चा करते हुऐ कुशलक्षेम पूछा, बुजुर्ग महिला ने बताया कि इलाज बहुत अच्छा मिल रहा है और अब पहले से आराम है। मुख्यमंत्री ने बच्चों से दुलार करते भी नजर आए। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित बच्चों के सर पर दुलार से हाथ फेरते हुए उनका भी हाल-चाल पूछा।

अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री द्वारा स्कूली बच्चों को वितरित किए गए निःशुल्क चश्में

सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव बच्चों के बीच पहुंचे जहां उन्होंने बच्चों को निशुल्क चश्में वितरित किए। मुख्यमंत्री द्वारा शासकीय कन्या शाला की कक्षा 12वी की छात्रा कु. शिवानी, कु. छाया एवं शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय की छात्रा कु. मुस्कान को चश्मा वितरित किया।

हरदा में जिला अन्धत्व निवारण कार्यक्रम के अन्तर्गत 135 स्कूलों में 20320 बच्चों की जांच की गई जिसमें 1156 बच्चों में दृष्टिदोष पाए जाने पर उन्हें निशुल्क चश्में वितरित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में टीबी मरीजों को पोषण आहार की टोकरी भी वितरित की। प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से युक्त लगभग 8 किलोग्राम की प्रत्येक फूड बास्केट में आटा, मूंगफली दाना, दाल और चना आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने हरदा जिले के ग्राम झिरी की रामबाई धुर्वे, उषा गिनारे तथा टिमरनी के परसराम लोवंशी को पोषण आहार की टोकरी प्रदान की।

उल्लेखनीय है कि नि-क्षय पोषण योजना के अंतर्गत क्षय रोगियों को पोषण सहायता के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जाती है। जिले में टीबी उन्मूलन की दिशा में व्यापक स्तर पर जांच एवं स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। अब तक हरदा जिले के हाईरिस्क ग्रामों एवं मोहल्लों को कवर करते हुए घर-घर जाकर 1 लाख 86 हजार 332 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत हाईरिस्क ग्रामों एवं वार्डों में एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन और बलगम (स्यूटम) जांच के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की पहचान की जा रही है। इसके साथ ही समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से टीबी मरीजों को पोषण आहार की फूड बास्केट भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जिला अस्पताल को मिला आईएसओ सर्टिफिकेट

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरदा जिला अस्पताल को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्राप्त आईएसओ सर्टिफिकेट भी कलेक्टर  सिद्धार्थ जैन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच.पी. सिंह को प्रदान किया। यह उपलब्धि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धजनों का किया सम्मान, वृद्धजनों ने दिया स्नेह और आशीर्वाद

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम अंतर्गत हरदा में सार्थक सेवा वृद्धजन आश्रम पहुंचकर वृद्धजनों से आत्मीय भेंट की। उन्होंने वृद्धजनों को शाल, फल एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया। वृद्धजनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति स्नेह व्यक्त करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धजनों से उनकी कुशलक्षेम जानी तथा आश्रम में उपलब्ध व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धाश्रम का भ्रमण किया तथा सेवा संकल्प अभियान के तहत आश्रम में आयोजित विभिन्न गतिविधियों से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में आश्रम में आयोजित भ्रमण, भेंट एवं सम्मान सहित अन्य गतिविधियों की जानकारी प्रदर्शित की गई थी।

सार्थक सेवा आश्रय समिति को सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संस्था के रूप में शासन स्तर से मान्यता प्रदान की गई है। समिति द्वारा जिला प्रशासन के निर्देशन में वृद्धाश्रम का आधिकारिक संचालन किया जा रहा है। संस्था द्वारा वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्गों को ऐसा पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया गया है, जिसमें उन्हें अपनापन, सम्मान, स्वास्थ्य सुविधाएं, पौष्टिक भोजन एवं मानसिक शांति का अनुभव मिल रहा है। वर्तमान में 50 सीटर वृद्धाश्रम में 37 वृद्धजन निवासरत हैं, जिनमें 19 महिलाएं एवं 18 पुरुष शामिल हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री  दुर्गादास उइके, पूर्व कृषि मंत्री  कमल पटेल, पूर्व विधायक  संजय शाह, जिला पंचायत अध्यक्ष  गजेंद्र शाह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  दर्शन सिंह गहलोत,  राजेश वर्मा, नगर पालिका उपाध्यक्ष  अंशुल गोयल, नगर पालिका अध्यक्ष टिमरनी  देवेन्द्र भारद्वाज,  विशाल सिंह बघेल, मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल, सचिव मुख्यमंत्री सुदाम खाड़े, कमिश्नर नर्मदापुरम  कांत बनोठ, आईजी  चंद्रशेखर सोलंकी, कलेक्टर  सिद्धार्थ जैन, पुलिस अधीक्षक  शशांक सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 11 अक्टूबर को करेंगे 502 करोड़ रुपये की आरटीई फीस प्रतिपूर्ति राशि अंतरित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 11 अक्टूबर को करेंगे 502 करोड़ रुपये की आरटीई फीस प्रतिपूर्ति राशि अंतरित

 भोपाल- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 अक्टूबर को नरसिंहपुर जिले में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति राशि का सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरण करेंगे। इसके अंतर्गत प्रदेश के 20 हजार 456 अशासकीय स्कूलों के खातों में 502 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। इससे 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा नरसिंहपुर जिले में 45 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण भी करेंगे।

इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह, स्थानीय जन प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ ही बडी संख्या विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहेंगे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के सांदीपनी विद्यालय बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेश सरकार द्वारा गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में अशासकीय स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पात्र विद्यार्थियों की नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।

अब तक 3,600 करोड़ रुपये की राशि हो चुकी है जारी

शिक्षा के अधिकार से प्रदेश का कोई भी बच्चा वंचित न रहे, इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) अंतर्गत निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक गरीब एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाया जा रहा है। इन विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा सीधे संबंधित निजी स्कूलों को दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2011 से अब तक 16 लाख 85 हजार से अधिक विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में 3,600 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है, जिससे जरूरतमंद बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग आसान हुआ है।

विद्यार्थियों को मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं

विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा सांदीपनि विद्यालय योजना अंतर्गत प्रथम चरण में नरसिंहपुर जिले में शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का सर्वसुविधायुक्त नवीन भवन का निर्माण कराया गया है। केजी-1 से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक, शारीरिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए एक आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए सुसज्जित डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल एवं ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही, विद्यार्थियों की बाह्य शारीरिक गतिविधियों एवं खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए खेल मैदान, सुगम एवं सुरक्षित आवागमन के लिए परिवहन सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक शैक्षणिक वातावरण के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इसी विद्यालय की मेधावी छात्रा कु. माही साहू ने कक्षा-12वीं की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

Previous123456789...481482Next