CG : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, किसानों को मिलेगी बड़ी सौगात    |    नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में भाजपा नेता की बेटी समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता    |    बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री साय    |    लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |

बासिंग मेला और कैम्प की जुगलबंदी से बदलने लगा है अबूझमाड़, जाने पूरी खबर

बासिंग मेला और कैम्प की जुगलबंदी से बदलने लगा है अबूझमाड़, जाने पूरी खबर
Share

नारायणपुर । नारायणपुर जिला मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर धुर नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ के बासिंग में पांच वर्ष पूर्व 2015 में बासिंग में पुलिस कैम्प खुलने के बाद तत्कालीन कलेक्टर टामन सिंह सोनवानी ने अबूझमाड़ के लोगों में नक्सली खौफ और दहशत को दूर करने व समाज की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए बासिंग मेला की शुरुवात की गई थी। 05 वर्ष बाद बासिंग मेला और कैंप की जुगलबंदी से अबूझमाड़ के बदलते स्वरूप को महसूस किया जा सकता है। जिला कलेक्टर पदुमसिंह एल्मा ने ग्रामीणों से कहा कि पारम्परिक बासिंग मेला की शुरुवात हो गई है, मेले के आयोजन का उद्देश्य अबुझमाड़ के लोगों को विकास, शांति बहाली और समाज को मुख्यधारा से जोडऩा है। बासिंग मेला अबूझमाड़ के बदलते स्वरूप और विकास के लिए सबसे मुख्य अंग बनता जा रहा है। अबूझमाड़ नक्सलियों के गढ़ के नाम से जाना जाता था, लेकिन जब से अबूझमाड़ में पुलिस के कैम्प-थाने के खुलने की शुरुवात हुई तो केम्प व थाने के आस-पास के इलाके नक्सलियों के खौफ और दहशत से आजाद होते गए लोग चैन से रहने लगे हैं। इस बदलाव को देखते हुए बासिंग में वर्ष 2014-15 बासिंग केम्प खोला गया। कैम्प के खुलने के बाद लोग नक्सलियों के दहशत के चलते पुलिस और प्रशासन पर विश्वास नहीं करते थे इसको देखते हुए कलेक्टर एसपी ने लोगो को जोडऩे और उनके अंदर बसे नक्सली खौफ को दूर करने बासिंग मेले की शुरुवात की, बासिंग मेले के आयोजन होने से प्रतिवर्ष एक बदलाव देखने को मिलने लगा। आज 5 साल बाद ये बदलाव ग्रामीणों में पुलिस और प्रशासन पर बढ़ते विश्वास को दिखाता है। लोग अब खुलकर मिलते है, और अपनी समस्यों को अवगत करवाकर  अपने गांव में विकास की मांग करते है। पांच वर्ष  पूर्व की गई बासिंग मेले की शुरुवात के बाद से अबूझमाड़ के लोगो को प्रतिवर्ष मेले का आनन्द उठाने के साथ आसपास के गांवों के लोगों से मेल-मिलाप करने का एक अच्छा मौका मिल जाता है। ग्रामीणों को बासिंग मेले का बेसब्री से इंतजार रहता है। 

 

Share

Leave a Reply