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पुलिस आधुनिकीकरण में कम बजट देना राजनीति से प्रेरित: विकास उपाध्याय

पुलिस आधुनिकीकरण में कम बजट देना राजनीति से प्रेरित: विकास उपाध्याय
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रायपुर। केन्द्र द्वारा छत्तीसगढ़ को आधुनिकीकरण मद में कम राशि दिए जाने पर संसदीय सचिव गृह विकास उपाध्याय ने केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उत्तरप्रदेश में पिछले चार सालों से कोई माओवादी घटना नहीं हुई, इसके बाद भी उसे ज्यादा बजट दिया गया। वहीं छत्तीसगढ़ में माओवाद का ज्यादा प्रभाव होने के बाद भी यहां के लिए कम बजट जारी करना सीधे-सीधे राजनीति से प्रेरित है। 

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संसदीय सचिव गृह उपाध्याय ने कहा कि उत्तर प्रदेश की तुलना में छत्तीसगढ़ को 6 गुना कम बजट आबंटित करना स्पष्ट करता है कि यह सब राजनीति से प्रेरित है। उपाध्याय ने केन्द्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह माओवादी हिंसा से प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ में पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार मिलने वाले फण्ड में कटौती कर सौतेला व्यवहार कर रही है। विकास ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा पिछले चार सालों में सबसे अधिक बजट का आबंटन उत्तर प्रदेश को किया है। जबकि वहाँ एक भी नक्सली वारदात नही हुए हैं। छत्तीसगढ़ शासन में गृह विभाग के संसदीय सचिव विकास उपाध्याय मंत्री ताम्रध्वज साहू द्वारा आधुनिकीकरण मद में कटौती को लेकर अमित शाह को पत्र लिखे जाने के बाद एक बयान जारी कर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है और आरोप लगाया है कि वह छत्तीसगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। इतना ही नही बल्कि इस मद का राजनैतिक फायदा उठाने के नियत से खुला दुरुपयोग भी कर रही है।
 
 
विकास उपाध्याय ने कहा देश के सर्वाधिक माओवाद प्रभावित जि़लों में उत्तर प्रदेश का एक भी जिला जब सम्मिलित नहीं है। यहां तक कि पिछले कई सालों में उत्तर प्रदेश में माओवादी हिंसा की एक भी वारदात नहीं हुई है, तो की आधार पर मोदी सरकार उत्तर प्रदेश को आधुनिकीकरण मद के नाम पर करोड़ों रुपए आबंटित कर रही है। विकास उपाध्याय ने आगे कहा देश के जिन 35 जि़लों को सर्वाधिक माओवाद प्रभावित माना गया है, उन्हें सबसे कम बजट आबंटित किया गया है। ये वो जिले हैं, जिनमें माओवादी हिंसा की 80 फीसदी से अधिक घटनाएँ होती हैं। उन्होंने इस मद का सिलसिलेवार विवरण देते हुए बताया कि इसमें सबसे ज्यादा सौतेला व्यवहार छत्तीसगढ़ के साथ किया गया है। 2017-18 में माओवाद प्रभावित राज्यों में पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के नाम पर सबसे कम बजट दिया गया है। उत्तर प्रदेश को जहां इस 2017-18 में 77.16 करोड़ आबंटित किए गए, वहीं झारखंड को महज 11.24 करोड़ और छत्तीसगढ़ को 11.87 करोड़ रुपए दिया गया। विकास उपाध्याय ने कहा 2014 से 2018 तक के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान उत्तर प्रदेश को जहां कुल 349.21 करोड़ रुपए दिए गए, वहीं छत्तीसगढ़ को पुलिस आधुनिकीकरण के नाम पर महज 53.71 करोड़ दिए गए। जबकी इस दौरान उत्तर प्रदेश में माओवादी हिंसा की एक भी घटना नहीं हुई, वहीं छत्तीसगढ़ में 2015 में 466, 2016 में 395, 2017 में 373 और 2018 में फ रवरी तक 76 घटनाएँ हो चुकी हैं। विकास उपाध्याय ने कहा ये भी गौर करने वाली बात है कि देश के कुल नक्सली वारदात में से 44.27 फीसदी घटनाएं अकेले छत्तीसगढ़ के आठ जि़लों में हुई हैं। इनमें छत्तीसगढ़ में आंशिक रूप से प्रभावित अन्य आठ जि़लों की माओवादी हिंसा की घटनाएँ जबकि शामिल नहीं हैं। ऐसे में माओवाद प्रभावित राज्यों में पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए छत्तीसगढ़ को उत्तर प्रदेश के मुकाबले छह गुणा कम बजट का आबंटन राजनैतिक से प्रेरित है।


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