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रायपुर में होगा गुरु तेग बहादुर की शहादत यात्रा का विराट स्वागत, 30 से अधिक स्थानों पर पुष्पवर्षा की तैयारी

रायपुर में होगा गुरु तेग बहादुर की शहादत यात्रा का विराट स्वागत, 30 से अधिक स्थानों पर पुष्पवर्षा की तैयारी
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 रायपुर।  सिख समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। जब-जब देश पर किसी भी तरह की बात आई है, सिख समाज हमेशा ही आगे खड़ा नजर आया है। मुगल कालीन इतिहास की बात हो, अंग्रेजी हुकूमत की बात हो, या 1965, 1971 के युद्ध की बात हो, पड़ोसी मुल्क के छद्म युद्ध आक्रमण की बात हो, या कोरोना काल के समय की गई सेवा कार्य की बात देश की आबादी में भले सिख समाज 2% आता हो, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में सिख समाज की भागीदारी सदैव ही 100% रही है।

इस गौरवशाली इतिहास की एक कड़ी सिख धर्म के नवमे गुरु गुरु तेग बहादुर जी हैं, जिन्होंने कश्मीरी पंडितों की गुहार, धर्म की रक्षा की खातिर, तिलक-जनऊ की रक्षा की खातिर आतताई मुगल बादशाह औरंगजेब के धर्म-विरोधी नीतियों का विरोध किया। फलस्वरूप, गुरु तेग बहादुर जी को उनके तीन साथियों भाई सती दास, भाई मति दास, भाई दयाला जी सहित सैकड़ों अनुयायियों के साथ गिरफ्तार कर दिल्ली लाया गया।

दिल्ली के चांदनी चौक पर बंदी बनाकर गुरु तेग बहादुर के सम्मुख सैकड़ों अनुयायियों को शहीद किया गया। भाई सती दास, भाई मति दास और भाई दयाला जी को क्रूरता पूर्वक शहीद किया गया और फिर अंत में आतताई औरंगजेब के आदेश पर श्री गुरु तेग बहादुर जी का शीश धड़ से अलग कर दिया गया। आज दिल्ली में चांदनी चौक में शीश गंज और रकाब गंज गुरुद्वारा इसी याद में शहीद स्थल पर बनाया गया है।

 


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