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महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय में ‘मिलेट्स का महत्व’ विषय पर पद्म डॉ. खादर वली का प्रेरणादायक व्याख्यान सम्पन्न"

 महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय में ‘मिलेट्स का महत्व’ विषय पर पद्म डॉ. खादर वली का प्रेरणादायक व्याख्यान सम्पन्न"
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रायपुर :- महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय, रायपुर के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ तथा नवाचार एवं इनक्यूबेशन सेल के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के सभागार में “मिलेट्स का महत्व” विषय पर एकल व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में देश के प्रसिद्ध मिलेट्स प्रचारक एवं पद्म  सम्मानित "मिलेट्स मैन" डॉ. खादर वली उपस्थित रहे। 
डॉ. खादर वली ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि वर्तमान समय में लोग पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक भारतीय खानपान को त्यागकर पाश्चात्य भोजन की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे युवावस्था में ही हार्मोनल असंतुलन, गट हेल्थ में गिरावट हो रही है जिसके कारण  शुगर, कैंसर, माइग्रेन जैसी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कोदो, कुटकी, सांवा, कांगनी एवं हरी कांगनी जैसे पाँच प्रमुख मिलेट्स के सेवन को स्वस्थ जीवन शैली का आधार बताया। उन्होंने यह भी कहा कि मिलेट्स में प्रचुर मात्रा में रेशा (फाइबर) होता है, जो पाचन तंत्र को सशक्त बनाता है तथा विभिन्न रोगों से प्राकृतिक रूप से बचाव करता है। डॉ. वली ने अपने 30 वर्षों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मिलेट्स के माध्यम से कई रोगियों को IVF संबंधित समस्याएं, कैंसर एवं माइग्रेन जैसी बीमारियों से उबरने में सहायता प्रदान की है। उन्होंने भगवद्गीता के श्लोक "युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु" का उल्लेख करते हुए संतुलित आहार एवं विहार के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में वाणिज्य संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. शांतनु पाल तथा डॉ. अनुपमा जैन ने संयुक्त रूप से स्मृति चिन्ह व शाल से  डॉ. खादर वली  को सम्मानित किया | इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री प्रीतम दास द्वारा किया गया ।  धन्यवाद ज्ञापन आईक्यूएसी प्रभारी एवं कंप्यूटर विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार चंद्राकर द्वारा किया गया। यह व्याख्यान न केवल मिलेट्स के वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्यवर्धक पहलुओं को समझने का माध्यम बना, बल्कि युवाओं को स्वदेशी खानपान की ओर लौटने हेतु प्रेरित भी किया।
 


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