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लॉकडाउन का भय नहीं: जंगलों में सज रही जुआरियों की महफिल

 लॉकडाउन का भय नहीं: जंगलों में सज रही जुआरियों की महफिल
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कोरबा। लगता है जिले के जुआरियों को वैश्विक महामारी कोरोना अथवा इसकी वजह से लगे लॉकडाउन का कोई भय नहीं है। तभी तो बड़ी संख्या में जुआरी जंगलों में जुट रहे है और उनकी महफीले भी सज रही है। 52 परियों के प्रेमी दोपहर बाद अपने-अपने घरों से निकलते है और अलग-अलग रास्ते से बिना रोक-टोक के जंगल में पहुंचकर लाखों रूपए का वारा-न्यारा करते है। 52 परियों का खेल अपरान्ह 3 बजे से प्रारंभ होकर रात 9 बजे तक चलता है। इस दौरान लाखों रूपए के दावं लगाये जाते है। इस खेल में कोरबा जिला ही नहीं पड़ोसी जिलों के भी 52 परियों के शौकिन शामिल होते है। जिले के जंगलों में चल रहे जुआ फड़ में संचालकों द्वारा पहुंचने वालों को तमाम तरह की सुविधाएं मुहैय्या कराई जा रही है। यथा खान-पान से लेकर नशा की वस्तुएं व उधार गिरवी में पैसे का इंतजाम भी फड़ स्थल पर उपलब्ध कराया जाता है। पुलिस के पहुंचने की सूचना देने के लिए भी जंगल में मोबाइल से लेस लोगोंं को फड़ संचालकों द्वारा तैनात किया जाता है ताकि उन्हें समय पर सूचना मिल सके और वे अपना ठिकाना बदल सके। सूत्रों के अनुसार जिले के बांकीमोंगरा थानांतर्गत शुक्लाखार जंगल, दीपका के झाबर व उरगा क्षेत्र के रामभांठा, तुमान का जंगल ऐसा है जहां फड़ का संचालन सर्वाधिक हो रहा है और कार्रवाई के अभाव में ये सुरक्षित ठिकाना बने हुए है। ऐसा नहीं है कि जंगल में चल रहे मंगल हाईटेक जुआ के इस अवैध कारोबार की जानकारी संबंधी थाना क्षेत्रों के प्रभारियों अथवा उनके स्टाफ को नहीं है। जानकारी होने के बावजूद जुआ फड़ के संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जिससे उनके हौसले बुलंद है। ऐसी चर्चा है कि जुआ फड़ के संचालकों को कुछ सफेद पोश लोगों तथा पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों का संरक्षण भी प्राप्त है। जिसकी वजह से कार्रवाई कर कोई पंगा नहीं लेना चाहता। फलस्वरूप शांत रहने में ही अपना भलाई समझ रहे है। उरगा क्षेत्र के रामभांठा-तुमान में चल रहे जुआ के संबंध में यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व में दूसरे ग्रुप द्वारा अड्डा का संचालन किया जा रहा था। इसके संचालन में आ रही बाधा तथा सौदेबाजी महंगा होने के कारण उस ग्रुप में होली पूर्व अपना काम बंद कर दिया था और शांत हो गए थे। जिसके बाद 03 लोगों का नया ग्रुप अब सामने आ गया है और इस ग्रुप ने संचालन शुरू किया है। जिनके द्वारा बड़ा जुआ खेलाया जा रहा है। लॉकडाउन में भी यह काफी फल-फूल रहा है।

जुआ किसी का नहीं हुआ:-कहा जाता है कि जुआ आज तक किसी का नहीं हुआ इसमें केवल जुआ खिलाने वालों को ही फायदा होता है। खेलने वाले हमेशा घाटे में रहते है। हार के बाद जुआरी अपना पैसा कव्हर करने के लिए लगातार बढ़ाकर दावं लगाता है और हर बार की तरह हार कर वह गर्त में चला जाता है। जुआ के कारण कई घर तबाह भी हो जाते है और अशांति का कारण भी बनते है। अत: इस बुराई से बचना चाहिए।


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