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किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता: मंत्री रामविचार नेताम….

किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता: मंत्री रामविचार नेताम….
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 रायपुर: धान के कटोरे के रूप में विख्यात छत्तीसगढ़ अब परंपरागत धान की खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण, डिजिटल तकनीक और पर्यावरण अनुकूल स्थायी कृषि के एक नए युग में अग्रसर हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए ‘‘नवा अंजोर विज़न 2047’’ के तहत किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए चौतरफा रणनीति पर काम शुरू हो गया है। केन्द्रीय कृषि विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त  सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज इस आशय की जानकारी दी।

कृषि मंत्री  नेताम ने सम्मेलन में राज्य की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का कृषि ढांचा अब एक बड़े बदलाव की ओर है। हमारी सरकार ‘‘नवा अंजोर विज़न 2047’’ के जरिए राज्य के लगभग 40 लाख किसान परिवारों, जिनमें 82 प्रतिशत लघु एवं सीमांत जिसमें 31 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के किसान शामिल हैं, के आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन में वर्ष 2025-26 के दौरान दर्ज की गई 76 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि और तिलहन के रकबे में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक की बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि हमारा किसान अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। वहीं खरीफ 2026 में हम अरहर, उड़द और मूंग के लिए क्लस्टर आधारित रणनीति लागू कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य हर हाथ को काम और हर खेत को सही समय पर गुणवत्तायुक्त बीज और संतुलित खाद उपलब्ध कराना है।

राज्य में योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और रणनीतिक तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि कृषि तकनीक, बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक प्रबंधन से खेती की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने सम्मेलन में कहा कि खरीफ 2026 के लिए हमारी तैयारियां पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीक-आधारित हैं। राज्य के किसानों को कृषि विश्वविद्यालयों की वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर ही उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। सीमांत किसानों को जहां एकमुश्त उर्वरक दिया जा रहा है, वहीं यूरिया की कालाबाजारी और अत्यधिक खपत को रोकने के लिए लघु व बड़े किसानों को 20 से 25 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 बार में यूरिया देने की व्यवस्था की गई है। हम डीएपी के विकल्प के रूप में नैनो डीएपी, एसएसपी और एनपीके कॉम्प्लेक्स को तेजी से बढ़ावा दे रहे हैं। इसके अलावा, एग्रीस्टैक, डिजिटल क्रॉप सर्वे और एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से पूरी खरीद और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बना दिया गया है।

कृषि उत्पादन आयुक्त  परदेशी ने कांफ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ वर्ष 2025-26 में दलहन उत्पादन में रिकॉर्ड 76 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसके साथ ही तिलहन मिशन और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत सरसों, मूंगफली और सोयाबीन के बीज वितरण से तिलहनी फसलों के क्षेत्र में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक का विस्तार हुआ है। वहीं क्लस्टर विकास, बागवानी के क्षेत्र में फल, सब्जी और मसाला फसलों के लिए क्लस्टर आधारित विकास मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया गया है।



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