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अक्षय तृतीया के लिए गुड्डे गुडियों की बिक्री शुरू लॉकडाउन की वजह से बिक्री पर सीधा असर

अक्षय तृतीया के लिए गुड्डे गुडियों की बिक्री शुरू लॉकडाउन की वजह से बिक्री पर सीधा असर
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धमतरी। वैशाख मास की तृतीया तिथि का हिंदू धर्म में बहुत विशेष महत्व है। इस दिन को अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस बार अक्षय तृतीया 14 मई शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह तिथि बहुत ही पवित्र मानी जाती है। यह तिथि सभी पापों का नाश करने वाली और सुखों को प्रदान करने वाली मानी गई है। इस दिन लोग सोने, चांदी और अन्य चीजों की खरीदारी करते हैं। इसके साथ ही इस दिन भगवान विष्णु, परशुराम और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है।
अक्षय तृतीया के दिन अबूझ मुहूर्त रहता है। इस दिन कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है। इस दिन दान-पुण्य करने से अक्षय फल कभी न समाप्त होने वाला की प्राप्ति होती है। इस दिन लोग सोने चांदी से बनी चीजों की विशेष तौर पर खरीददारी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई चीज में हमेशा बढ़ोत्तरी होती है और सोना खरीदने से सुख-समृद्धि आती है। इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन-धान्य आता है। भगवान परशुराम ने भी इसी दिन जन्म लिया था। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से भी विशेष फल की प्राप्ति होती है।
इस वर्ष यह तिथि लॉकडाउन के बीच में आई है। इस वजह से व्यापार नहीं होगा। इस दिन शादियां भी अधिक होती है। लेकिन सीमित लोग ही शादी में शामिल होंगे। इस तिथि में गुड्डा गुडिया का विवाह भी कराया जाता है। जिसकी बिक्री के लिए कुम्हार मकई चैक में बैठे हुए ग्राहक का इंतजार कर रहे हैं। 14 मई तक यहां पर बैठेंगे। इस बार व्यापारियों को व्यवसाय की काफी उम्मीद थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से सब धरा का धरा रह गया।


शुभ कार्य के लिए मुहुर्त शुद्धि की जरुरत नहीं:-
विप्र विद्वत परिषद धमतरी ने बताया कि देव पंचाग के अनुसार इस वर्ष 14 मई को अक्षय तृतीया अक्ति और भगवान विष्णु के छठवें अवतार परशुराम का प्राकटय उत्सव का पर्व मनाया जाएगा। परिषद के मीडिया प्रभारी पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि हिन्दु मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया को वर्ष का सबसे शुभ दिन माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहुर्त शुद्धि की जरुरत नही होती है। अक्षय तृतीया को पुण्य का तीन गुना फल देने वाली तिथि कही जाती है। इस दिन दान पुण्य करने से कभी क्षय नहीं होता।
इसी दिन किसान ग्रमीण देवता ठाकुर देवता का पूजा पाठ साथ मे परसा पत्ते का दोना बनाकर उसमे धान भरकर देवों पर चढ़ाते हैं। उसी धान को अच्छी फसल होने की कामना करते हुऐ फसल बोनी का कार्य प्रारंभ करते हैं। विवाह और पाणीग्रहण गोधोली बेला मे करने को शुभ मुर्हुत माना जाता है। इस कारण यह अक्षय तृतीया अक्ति का विशेष महत्व है। परिषद ने अपील की है की कोविड 19 की शासन प्रशासन के गाईड लाईन के अनुसार उपरोक्त पर्व को हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाए। अपने घर पर रहें और सुरक्षित रहें।
 



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