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राजधानी में अब कोरोना के बिच मंडरा रहा डेंगू मलेरिया, चिकनगुनिया का खतरा

राजधानी में अब कोरोना के बिच मंडरा रहा डेंगू मलेरिया, चिकनगुनिया का खतरा
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भोपाल। अभी कोरोना महामारी का संकट खत्म भी नहीं हुआ है कि राजाानी में मौसमी बीमारियां पैर पसारने लगी हैं। बारिश का सीजन आते ही पानी में मच्छरों के लार्वा पनपने से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में डरने की जरूरत नहीं, लेकिन सतर्क होने की जरूरत है। वो इसलिए कि भोपाल में हर दसवें घर में डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर का लार्वा मिल रहा है। यानी दस फीसदी घरों में लार्वा पाया जा रहा है। इसके बाद भी न तो लोग चेत रहे हैं और ना ही स्वास्थ्य विभाग लार्वा सर्वे के लिए टीमें बढ़ा रहा है। जून-जुलाई मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अच्छे महीने माने जाते हैं। पिछले सालों तक इन महीनों में डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग 90 से 100 के बीच टीमें लगाता था, लेकिन इस साल कर्मचारियों की ड्यूटी कोरोना कार्यों में लगी है। इस वजह से भोपाल शहर की 28 लाख की आबादी के लिए सिर्फ 34 टीमें लगी हैं। ऐसे में लार्वा सर्वे किसी खानापूर्ति से कम नहीं है। पांच फीसद से ज्यादा घरों में लार्वा मिलना खतरनाक माना जाता है। दस फीसदी घरों में लार्वा मिलने का मतलब यह है कि बीमारी तेजी से फैल सकती है। डेंगू, चिकनगुनिया और जीका फैलाने वाला मच्छर 400 मीटर तक उड़ सकता है। ऐसे में अगर मच्छर डेंगू, चिनकगुनिया और जीका वायरस का वाहक है तो आसपास के 400 मीटर के दायरे में आने वाले लोगों को प्रभावित कर सकता है। जनवरी से अब तक शहर में डेंगू के 17 मरीज मिल चुके हैं। जिला मलेरिया अधिकारी अखिलेश दुबे ने बताया कि जुलाई में दो मरीज अभी तक मिले हैं। उन्होंने बताया कि जहां 2018 में जीका वायरस के मामले पाए गए थे, वहां पर विशेष रूप से सतर्कता जारी रखी जा रही है। इन क्षेत्रों में विशेष सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। 

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