CG : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, किसानों को मिलेगी बड़ी सौगात    |    नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में भाजपा नेता की बेटी समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता    |    बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री साय    |    लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |

धर्मांतरण के खिलाफ बने कानून पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: केवल विवाह के आधार पर एफआईआर नहीं की जा सकती

धर्मांतरण के खिलाफ बने कानून पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: केवल विवाह के आधार पर एफआईआर नहीं की जा सकती
Share

अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट ने विवाह के लिए होने वाले धर्मांतरण के खिलाफ बने कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगा दी है। गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 में राज्य में दूसरे धर्म में विवाह के लिए धर्मांतरण पर प्रतिबंध है, लेकिन कोर्ट ने कुछ धाराओं पर रोक लगा दी है।


आज सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने विवाह के माध्यम से धर्मांतरण के खिलाफ बने कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगा दी है। कोर्ट कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। राज्य सरकार के कानून के मुताबिक धोखाधड़ी से या जबरन धर्म बदलवाने पर दंड का प्रावधान है।

गुजरात में 'लव जिहादÓ को लेकर बने कानून पर हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने साफ किया है कि केवल शादी के आधार पर ही मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने इस दौरन गुजरात धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम की कुछ धाराओं में हुए संशोधनों को लागू करने पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। हाल ही में उच्च न्यायालय ने गुजरात धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम से जुड़ी एक याचिका में सुनवाई के बाद राज्य सरकार को नोटिस भेजा था।
गुरुवार को गुजरात उच्च न्यायालय ने कहा है कि अंतर-धार्मिक विवाह के मामले में केवल शादी को ही एफआईआर का आधार नहीं बनाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि बगैर यह साबित हुए कि शादी जोर-जबरदस्ती से हुई है या लालच से हुई है, पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती है। कोर्ट की तरफ से अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 6 के संशोधनों को लागू करने पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं।

बता दें कि मंगलवार को मामले पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के सामने राज्य सरकार ने अपने धर्मांतरण विरोधी कानून का बचाव भी किया था। सरकार ने दावा किया था कि कानून सिर्फ शादी के लिए धर्मांतरण से संबंधित है। यह कानून दूसरे धर्मों में विवाह करने से नहीं रोकता है। सिर्फ गैर कानमूनी धर्मांतरण के खिलाफ है। हाई कोर्ट द्वारा उठाई गईं आशंकाओं को दूर करते हुए सरकार के वकील ने कहा कि कानून में कई सुरक्षा वाल्व हैं।

Share

Leave a Reply