BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |

रात में 5 घंटे से कम सोते हैं तो हो जाएं सावधान, इस गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है दोगुना

रात में 5 घंटे से कम सोते हैं तो हो जाएं सावधान, इस गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है दोगुना
Share

एक नई रिसर्च चेतावनी देती है कि रात में पांच घंटे से कम सोना डिमेंशिया का खतरा दोगुना कर देता है. बोस्टन के ब्रिघम और महिला अस्पताल के शोधकर्ताओं ने 2 हजार 812 अमेरिकी व्यस्कों के अलावा 65 और 65 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों का डेटा परीक्षण किया. 'बहुत छोटी' नींद का समय पांच घंटे या पांच घंटे से कम के तौर पर परिभाषित किया गया था और 7-8 घंटे के 'अनुशंसित समय' की तुलना में डिमेंशिया का दोगुना खतरा पाया गया.


क्या आप रात में 5 घंटे से कम सोते हैं?


नई रिसर्च पूर्व की रिसर्च का समर्थन करती है कि नींद का अभाव अनिवार्य रूप से डिमेंशिया की शक्ल जैसे अल्जाइमर की बीमारी का 'मंच तैयार करती है'. ये रिसर्च संबंध के पीछे वजह की जांच नहीं करती है, लेकिन उचित आराम की कमी दिमाग को टॉक्सिन्स हटाने से रोक सकती है जिससे दिमाग के कार्य में गिरावट होती रहती है.


डिमेंशिया का दोगुना खतरा होने का डर


शोधकर्ता 'तत्काल जरूरत' को दर्शाते हैं, जिससे बुजुर्गों में नींद सुधार की खास सिफारिश की पहचान की जा सके. शोधकर्ता डॉक्टर रेबेका रोबिन्स का कहना है कि नतीजे से नींद की कमी और डिमेंशिया के खतरे के बीच संबंध स्पष्ट होता है और हर रात पर्याप्त नींद हासिल करने में बुजुर्गों की मदद करने के महत्व को दर्शाता है.


विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 50 मिलियन लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं और करीब 10 मिलियन नए मामले हर साल उजागर होते हैं. अल्जाइमर की बीमारी डिमेंशिया की सबसे आम शक्ल है और डिमेंशिया के मामलों में इसका 60-70 फीसदी योगदान हो सकता है.


यूके अल्जाइमर सोसायटी के मुताबिक, ब्रिटेन में 9 लाख से ज्यादा लोग डिमेंशिया के साथ रह रहे हैं और 2024 तक एक मिलियन आंकड़ा होने का अनुमान है. स्लीप फाउंडेशन का कहना है कि किसी अन्य उम्र के लोगों के मुकाबले बुजुर्गों में नींद की ज्यादा गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं. डिमेंशिया के कई प्रकार होते हैं जिसमें से अल्जाइमर की बीमारी सबसे आम है.


डिमेंशिया वैश्विक चिंता है, लेकिन सबसे ज्यादा अमीर देशों में देखी जाती है. वर्तमान में डिमेंशिया का इलाज नहीं है, लेकिन दवाइयां रफ्तार को धीमा कर सकती हैं. अगर शुरुआती स्तर पर पहचान हो जाए, तो ये ज्यादा प्रभावी इलाज हो सकता है. चीन की एक नई रिसर्च के मुताबिक, पर्याप्त नींद नहीं लेनेवाले बुजुर्गों को दिमागी खराबी और डिमेंशिया का खतरा 25 फीसद ज्यादा होता है. 


Share

Leave a Reply