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इस गांव में सांपों के साथ रहते हैं लोग, दाना-पानी के साथ करते हैं रहने का इंतजाम...जानिए क्या है वजह

इस गांव में सांपों के साथ रहते हैं लोग, दाना-पानी के साथ करते हैं रहने का इंतजाम...जानिए क्या है वजह
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 Snake Village: भारत में सापों और हिंदू देवी देवताओं का पुराना संबंध है. भगवान शिव अपने गले में हमेशा सांप को धारण करते हैं. हर साल नाग पंचमी के दिन आशीर्वाद पाने के लिए लोग सांपों की पूजा करते हैं और दूध चढ़ाते हैं. एक तरफ लोग सांपों से डरते हैं, तो दूसरी उसकी पूजा भी करते हैं. सांप से डरना भी लाजिमी है, क्योंकि अगर किसी जहरीले सांप ने किसी को काट लिया, तो उसकी जान बचना मुश्किल हो जाती है, लेकिन भारत में ही एक ऐसा गांव है, जहां के घरों में सांप परिवार के सदस्यों की तरह रहते हैं.

पूणे से लगभग 200 किमी है गांव
यह गांव महाराष्ट्र में पूणे से लगभग 200 किमी दूर शोलापुर जिले में स्थित है जिसका नाम शेतपाल है. इस अनोखें गांव में लोग सांपों के साथ रहते हैं. इसके साथ ही लोग सांप की पूजा भी करते हैं और अपने घर में भी रहने के लिए जगह भी बनाते हैं. सबसे हैरानी की बात यह है कि लोग किसी दूसरे सांप नहीं बल्कि जहरीले सांप कोबरा को रहने देते हैं. इस गांव सांपों की आवाजाही पर रोक तक नहीं है. इस गांव में कोबरा घूमते हैं, लेकिन कोई कुछ बोलता नहीं है.

किस्मत के भरोसे गांव में आते हैं लोग
इस गांव में जब लोग घर का निर्माण कराते हैं, तो सांपों के लिए भी एक छोटी जगह बनवाते हैं. इस जगह को देवस्थानम का नाम देते हैं. इस कोने यानी जगह पर आकर सांप बैठते हैं. यह किसी को जानकारी नहीं है कि सांपों के साथ रहने की परंपरा की शुरुआत कब और कैसे हुई, लेकिन सांप लोगों के जीवन का हिस्सा बन गए हैं. हालांकि इस गांव में आने वाले डरते हैं तो उनको सलाह दी जाती है कि अपने साथ अंडा, दूध और अच्छी किस्मत लेकर आएं.

भगवान शिव मानकर करते हैं पूजा
दिलचस्प बात ये है कि आजतक इन सांपों के काटने से किसी भी तरह की मौत की कोई खबर नहीं आई है. बच्चे और बड़े सभी इन सांपों के साथ परिवार के सदस्य की तरह ही बर्ताव करते है. यहां रहने वाले लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं और उनके लिए श्रद्धा रखते हैं. कोबरा को लोग भगवान शिव का अवतार मानते हुए उसकी पूजा करते है और सांपों को दूध पिलाते हैं.

क्या है सांपों की आबादी का राज
पुणे से करीब दो सौ किलोमीटर दूर शेतपुर गांव का इलाका मैदानी हैं. यहां का वातावरण सूखा है, जो कि सांपों के रहने के लिए अनुकूल है. जिसके कारण यहां कई तरह के सांप पाए जाते हैं. वहीं इनके द्वारा ग्रामीणों को नुकसान न पहुंचाने के पीछे माना जा रहा है कि यहां के लोग सांपों को लेकर जागरुक रहते है. इसके साथ ही वो पहले से उनके रहने के लिए उचित स्थान बना देते हैं, जिस कारण सांपों का लोगों से कम ही सामना हो पाता है.


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