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जाने इन्हें शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाया जाता, कल महाशिवरात्रि का पर्व

जाने इन्हें शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाया जाता,  कल महाशिवरात्रि का पर्व
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हिंदू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है. इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व गुरुवार 11 मार्च को मनाया जाएगा. शिव भक्तों के लिए महाशिवरात्रि सबसे बड़ा दिन होता है. महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर कई प्रकार की चीजें अर्पित की जाती है. लेकिन कुछ चीजों को शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता. जानते हैं ये चीजें कौन सी हैं और इन्हें शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाया जाता है.

तुलसी: वैसे तो हिंदू धर्म में तुलसी का विशेष महत्व है लेकिन इसे भगवान शिव पर चढ़ाना मना है.
तिल: शिवलिंग पर तिल भी नहीं चढ़ाया जाता है. मान्याता है कि तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ है इसलिए इसे भगवान शिव को अर्पित नहीं किया जाता.
टूटे हुए चावल: टूटे हुए चावल भी भगवान शिव को अर्पित नहीं किए जाते हैं. शास्त्रों के मुताबिक टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है.
कुमकुम: भगवान शिव को कुमकुम और हल्दी चढ़ाना भी शुभ नहीं माना गया है.
नारियल: शिवलिंग पर नारियल का पानी भी नहीं चढ़ाया जाता. नारियल को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. देवी लक्ष्मी का संबंध भगवान विष्णु से है इसलिए नारियल शिव को नहीं चढ़ता.
शंख: भगवान शिव की पूजा में कभी शंख का प्रयोग नहीं किया जाता. शंखचूड़ नाम का एक असुर भगवान विष्णु का भक्त था जिसका वध भगवान शिव ने किया है. शंख को शंखचूड़ का प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि शिव उपासना में शंख का इस्तेमाल नहीं होता.
केतकी का फूल: भगवान शिव की पूजा में केतकी के फूल को अर्पित करना वर्जित माना जाता है. 


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