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भ्रामक विज्ञापन मामला : बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, कहा -आपके जवाब से हम संतुष्ट नहीं

भ्रामक विज्ञापन मामला : बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, कहा -आपके जवाब से हम संतुष्ट नहीं
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  दिल्ली :- आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा है कि वो पंतजलि के जवाब से संतुष्ट नहीं है। योगगुरु बाबा रामदेव सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए हैं। उनके साथ आचार्य बालकृष्ण भी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बाबा रामदेव को अदालत में पेश होने का समन जारी किया था। 

अदालत ने पतंजलि और आचार्य बालकृष्ण को अदालत के नोटिस का जवाब नहीं देने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट में बाबा रामदेव की ओर से सीनियर वकील बलवीर सिंह पेश हुए।पंतजलि विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने सुनवाई की। जस्टिस कोहली ने पूछा कि बाबा रामदेव और दूसरे अवमाननाकर्ता का हलफनामा कहां है? पतंजलि के वकील ने जवाब दिया कि वे कोर्ट के अंदर हैं, भीड़ के कारण हम उन्हें यहां नहीं लाए।जस्टिस कोहली ने पूछा कि बाबा रामदेव के जवाब के बारे में क्या कहना है? वकील ने जवाब दिया कि प्रतिवादी 5 कंपनी है और प्रतिवादी 6 प्रबंध निदेशक है। जस्टिस कोहली ने कहा हम 27 फरवरी के आदेश के पैरा 9 को देख रहे हैं और यह इस बारे में था कि कंपनी और प्रबंधन के खिलाफ अवमानना क्यों नहीं होनी चाहिए और फिर उस हलफनामे को दाखिल न करने का आदेश दिया जाए

पतंजलि की सफाई
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पतंजलि आयुर्वेद ने एक हलफनामे में बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि पतंजलि का इरादा केवल इस देश के नागरिकों को अपने उत्पादों का उपयोग करके स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था। आगे कहा गया है कि पतंजलि की खोज आयुर्वेद के माध्यम से जीवनशैली से संबंधित चिकित्सा जटिलताओं के समाधान प्रदान करके देश के स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे पर बोझ को कम करना था। नवंबर 2023 में, सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद से आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के खिलाफ भ्रामक दावों और विज्ञापनों को रोकने के लिए कहा था. पतंजलि ने अदालत को आश्वासन दिया था कि वह कोई बयान या निराधार दावा नहीं करेगी.


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