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उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से आनलाइन और आफलाइन गेमों की निगरानी और इसके लिए नीति बनाने की मांग पर विचार करने का आदेश दिया

उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से आनलाइन और आफलाइन गेमों की निगरानी और इसके लिए नीति बनाने की मांग पर विचार करने का आदेश दिया
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नई दिल्ली।  उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार से पब्जी और फ्री फायर जैसे आनलाइन और आफलाइन गेमों की निगरानी और इसके लिए नीति बनाने की मांग पर विचार करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने इस मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को यह निर्देश दिया है। याचिका में इस तरह के आनलाइन और आफलाइन खेलों की नियमन के लिए एक प्राधिकार भी बनाने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने सरकार को इस याचिका को बतौर प्रतिवेदन स्वीकार करने और इसमें किए गए मांगों कर विचार करने को कहा है। पीठ ने सरकार को मौजूदा कानून, नीतियों के आधार पर याचिका में उठाए गए पहलुओं पर विचार करने और समुचित निर्णय लेने को कहा है। इसके साथ ही न्यायालय ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। याचिका में सरकार से पब्जी और फ्री फायर जैसे आनलाइन और आफलाइन गेमों की निगरानी और इसके लिए नीति बनाने का आदेश देने की मांग की गई थी। साथ ही सरकार को एक समिति बनाकर यह पता लगाने का आदेश देने की मांग की है कि ये गेम कितना हानिकारक है और बच्चों व युवाओं पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। उच्च न्यायालय में गैर सरकारी संगठन ‘डिस्ट्रिक्ट मैनेजमेंट क्लेकटिव’ ने दाखिल की थी। याचिका में सरकार को आनलाइन और आफलाइन गेमों के निगरानी के लिए नीति बनाने और अन्य देशों की तरह गेम का ग्रेडिंग करने का भी आदेश देने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि ये हिंसात्मक गेम बच्चों में आक्रामकता की ओर ले जा रहा है। याचिका में दावा किया गया कि इस तरह के गेम बच्चा व युवाओं को गलत रास्ते की ओर ले जाने का प्रयास करता है।
संगठन की ओर से अधिवक्ता रोबिन राजू ने याचिका में महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय और विधि एवं न्याय मंत्रालय को पक्षकार बनाया है। याचिका में कहा है कि कोरोना महामारी के दौरान न सिर्फ ऑफिस बल्कि स्कूलों का संचालन भी ऑनलाइन हो रहा है, ऐसे में बच्चे भी ऑनलाइन पढ़ाई करने लगे। साथ ही कहा है कि ऑनलाइन कक्षा की वजह से बच्चों के हाथ में भी मोबाइल आ गया है। याचिका में कहा गया है कि बच्चे मोबाइल से ऑनलाइन पढ़ाई के साथ-साथ अलावा ऑनलाइन गेम खेलने लगे हैं। याचिका में कहा गया है कि बच्चे व युवा इन खेलों के आदि हो चुके हैं।


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