CG : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, किसानों को मिलेगी बड़ी सौगात    |    नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में भाजपा नेता की बेटी समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता    |    बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री साय    |    लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |

विदेशों में बैठे ठगों ने भारतीयों को लगाई 250 करोड़ की चपत, ऐसे दिया लोगों को झांसा

 विदेशों में बैठे ठगों ने भारतीयों को लगाई 250 करोड़ की चपत, ऐसे दिया लोगों को झांसा
Share

देहरादून। विदेशों में बैठे व्यापारियों (ठग) ने एक मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से भारतीयों को 250 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगाई है। विदेशों के इन ठगों ने लोगों को 15 दिनों में पैसे दोगुना करने का लालच दिया था। उत्तराखंड राज्य के 3 पीड़ितों की शिकायत पर एसीएफ ने कार्रवाई करते हुए ठगों के एक भारतीय साथी को गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएफ के अनुसार यह मामला 250 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हो सकता है। इस मामले में अभी विवेचना के बाद कुछ लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है। 

साइबर ठगी के इतिहास में एसटीएफ उत्तराखंड की यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। इसका खुलासा करते हुए उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता एडीजी अभिनव कुमार ने बताया कि रोहित कुमार निवासी श्यामपुर और राहुल कुमार गोयल निवासी कनखल हरिद्वार ने साइबर थाने को एक शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार दोनों ने गूगल प्ले स्टोर से पावर बैंक नाम से एक एप्लीकेशन डाउनलोड की थी। निवेश संबंधी इस एप्लीकेशन में 15 दिनों में पैसा दोगुना करने का दावा किया गया था। इस लालच में आकर दोनों ने क्रमश: 91 हजार और 73 हजार रुपये गंवा दिए। 

इन मामलों में साइबर थाने में दो मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू की गई। जिन बैंकों खातों, ऑनलाइन वॉलेट में धनराशि ट्रांसफर हुई उनकी जानकारी ली गई। पता चला कि रोजर पे और पेयू वॉलेट के माध्यम से यह पैसा आईसीआईसीआई और पेटीएम बैंक के खातों में गया है। आगे जांच में आया कि पेटीएम बैंक का खाता प्रमुख संदिग्ध खाता है और इसका संचालन पवन कुमार पांडेय निवासी, सेक्टर 99, नोएडा कर रहा है। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह की अगुवाई में पवन कुमार पांडेय को मंगलवार को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया गया। पवन कुमार के खिलाफ अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया। 

50 लाख डाउनलोड, 21 मई तक चला एप 
एसटीएफ के अनुसार शुरूआती जांच में पता चला कि यह पॉवर बैंक नाम का एप्लीकेशन फरवरी 2021 में शुरू किया गया था। यह एप 12 मई 2021 तक संचालन में रहा। इसके बाद एकाएक क्रैश हो गया। इसके अब तक कुल 50 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था। साइबर थाने ने वित्तीय लेनदेन का अध्ययन किया तो पता चला कि इसके माध्यम से 250 करोड़ रुपये से ज्यादा ठगे गए हैं। एसटीएफ के अनुसार यह धनराशि 500 करोड़ या इससे भी ज्यादा होने की आशंका है। 

भारतीयों को मिलता है कमीशन 
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि इस पूरी फर्जी योजना के तार विदेशों के व्यापारियों से से जुड़े हैं। पता चला कि वहां के कुछ व्यापारी भारतीय निवेशकों से दोस्ती कर अपने साथ कमीशन के नाम पर जोड़ते हैं। पॉवर बैंक नाम की यह एप्लीकेशन पहले ऑनलाइन लोन प्रदान करती थी। अब अपराध के तरीके में बदलाव कर ये लोग विश्वास जीतकर पैसा दोगुना करने का प्रलोभन देकर धनराशि निवेश कराते हैं। भारत के नागरिको के ही बैंक खाते और उनके मोबाईल नम्बर का प्रयोग किया जाता है।

शुरूआत में कुछ लोगों के पैसे हुए वापस 
शुरूआत में इस एप्लीकेशन के माध्यम से लोगों को उनकी धनराशि बढ़ाकर वापस भी की गई। इसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार इसे और बढ़ाया गया। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध पूरे देश में फैल गया। हर दिन करोड़ों रुपये की धनराशि एक खाते से दूसरे खाते और आगे विभिन्न खातों में ट्रांसफर की जाने लगी। ऐसा करने से पुलिस भी भ्रमित हो गई। 

25 और इसी तरह की एप्लीकेशन आए सामने 
ठगी में प्रयोग किए गए खाते विभिन्न फर्जी कंपनियों के नाम से रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में रजिस्टर्ड हैं। एसटीएफ के मुताबिक इसी तरह की 25 मोबाइल एप्लीकेशन की सूची हाथ आई है। यह सब एप्लीकेशन संदिग्ध कार्यों में लगी हुई हैं। इन सबके बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
 

Share

Leave a Reply