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छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी: समान नागरिक संहिता पर जनता से मांगे गए सुझाव,15 अक्टूबर तक दे सकेंगे राय

छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी: समान नागरिक संहिता पर जनता से मांगे गए सुझाव,15 अक्टूबर तक दे सकेंगे राय

 रायपुर,04 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़  सरकार प्रदेश में ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों के बजाय सभी नागरिकों को संविधान के एक ही दायरे में लाने के उद्देश्य से गठित विशेष समिति ने अब आम जनता और विभिन्न संगठनों से उनके सुझाव और अभिमत आमंत्रित किए हैं। राज्य के नागरिक यह बता सकते हैं कि राज्य में आने वाला नया कानून कैसा होना चाहिए।

​राज्य सरकार द्वारा गठित यह 5-सदस्यीय समिति छत्तीसगढ़ में UCC की आवश्यकता और उसकी रूपरेखा का अध्ययन कर रही है। इसके साथ ही समिति व्यक्तिगत सिविल मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों व व्यवस्थाओं की भी व्यापक समीक्षा करेगी।

​समिति ने शासकीय, गैर-शासकीय संगठनों, सामाजिक समूहों, धार्मिक संस्थाओं, समुदायों और राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे 15 अक्टूबर 2026 तक अपने विचार, राय और अभ्यावेदन अनिवार्य रूप से जमा करा दें।

*​UCC लागू करने वाला देश का 5वां राज्य बनेगा छत्तीसगढ़*

​ यूसीसी लागू करने में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था। उत्तराखंड के अलावा गोवा, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी यूसीसी लागू किया जा चुका है।
​ राज्य में यूसीसी के क्रियान्वयन व सुझावों के लिए उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 5-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
राज्य के नागरिक ​ और संगठन 15 अक्टूबर तक निम्नलिखित माध्यमों से अपने सुझाव भेज सकते हैं:

*​ई-मेल (E-mail):* *ucc-chhattisgarh@cg.gov.in*

*​वेब पोर्टल (Web Portal):*
*[https://ucc.cgstate.gov.in/](https://ucc.cgstate.gov.in/)*

शहर और स्थानीय मार्गदर्शिका

*​डाक द्वारा (Postal Address):*

*​कार्यालय समान नागरिक संहिता समिति,न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, कमरा नंबर-201,रायपुर, छत्तीसगढ़ – 492001

ब्रेकिंग: बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा में बड़ी चूक, 8 नाबालिग चकमा देकर फरार

ब्रेकिंग: बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा में बड़ी चूक, 8 नाबालिग चकमा देकर फरार

 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित बरोंडा बाजार बाल संप्रेक्षण गृह से सोमवार तड़के 8 नाबालिगों के फरार होने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि देर रात करीब 2 से 3 बजे के बीच सभी ने खिड़की की ग्रील तोड़कर परिसर से भागने की योजना को अंजाम दिया। घटना सामने आते ही संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।  जानकारी के मुताबिक, फरार हुए सभी नाबालिग पिछले चार से पांच महीनों के दौरान अलग-अलग मामलों में यहां निरुद्ध किए गए थे। इनमें एक दुष्कर्म, दो चोरी और अन्य एनडीपीएस एक्ट समेत विभिन्न आपराधिक मामलों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनका संबंध महासमुंद, सरायपाली, धमतरी और पड़ोसी राज्य ओडिशा के विभिन्न थाना क्षेत्रों से है।  घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। पूरे परिसर की जांच की जा रही है, जबकि फरार नाबालिगों की तलाश के लिए जिलेभर में सर्च अभियान तेज कर दिया गया है। गौरतलब है कि, करीब दो वर्ष पहले भी इसी बाल संप्रेक्षण गृह से बच्चों के फरार होने की घटना सामने आई थी। लगातार दूसरी बार हुई इस चूक ने सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। पुलिस मामले की जांच के साथ जिम्मेदारों की भूमिका भी खंगाल रही है।

नशा दीमक की तरह जीवन को खोखला कर देता है : राजस्व मंत्री वर्मा

नशा दीमक की तरह जीवन को खोखला कर देता है : राजस्व मंत्री वर्मा

 o ​नशामुक्त युवा ही बनाएंगे ‘विकसित भारत’

o बलौदाबाजार में ‘नशामुक्त युवा संकल्प अभियान’ का आगाज
o राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने दिलाई शपथ

बलौदाबाजार- भाटापारा। पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा देशव्यापी ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के वर्चुअल शुभारंभ के साथ ही बलौदाबाजार- भाटापारा जिले में भी इस महाअभियान का शंखनाद हुआ। मुख्य अतिथि की आसंदी से राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि “नशा एक दीमक की तरह है जो न केवल व्यक्ति को खोखला करता है, बल्कि उसके परिवार, माता-पिता के सपनों और भविष्य को भी तबाह कर देता है।

बलौदाबाजार- भाटापारा जिला के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने उपस्थित युवाओं को स्वयं नशे से दूर रहने तथा परिवार व समाज को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि,पीएम मोदी के 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इतिहास गवाह है कि देश में जितने भी बड़े परिवर्तन हुए हैं, वे युवाओं के दम पर ही संभव हुए हैं। युवाओं को नशे के चंगुल से मुक्त रहकर राष्ट्र निर्माण में अपनी ऊर्जा लगानी होगी।

​100 सप्ताह तक चलेगा जनजागरूकता का महाअभियान
इस संकल्प अभियान के तहत आगामी 100 हफ्तों तक जिले भर में खेल, कला, संस्कृति और जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने नशामुक्ति पर केंद्रित एक बेहद संवेदनशील व आकर्षक नाटिका का मंचन किया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

​जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने युवाओं को संदेश में कहा कि नशा केवल व्यक्ति का नहीं, पूरे परिवार का विनाश करता है। हमारी युवा पीढ़ी को सही संस्कार और विचार अपनाकर अपने भविष्य को सुरक्षित करना होगा। एक समृद्ध और स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए युवाओं का व्यसनमुक्त होना अनिवार्य है। इस 100-साप्ताहिक अभियान में जिले के युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। ​इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, जनपद अध्यक्ष सुलोचना यादव, जिला पंचायत सदस्य ईशान वैष्णव, कलेक्टर कुलदीप शर्मा, खेल अधिकारी सहित अनेक स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में युवा उपस्थित थे।

BREAKING : गंगरेल से छोड़ा जाएगा 20 हजार क्यूसेक पानी, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट..!

BREAKING : गंगरेल से छोड़ा जाएगा 20 हजार क्यूसेक पानी, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट..!

 Chhattisgarh dhamtari गंगरेल जलाशय में लगातार बढ़ रही जल आवक के बीच गुरुवार रात 8 बजे की स्थिति के अनुसार जल स्तर 345.39 मीटर और जलभराव 63.26% दर्ज किया गया। वर्तमान में जलाशय में 94,500 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जबकि पिछले एक घंटे में जल स्तर 11 सेंटीमीटर बढ़ा है।

मुख्य अभियंता के निर्देश पर बांध की सुरक्षा और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गंगरेल जलाशय से नरराज बैराज की ओर 20,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पानी छोड़े जाने से पहले निचले इलाकों के संबंधित अधिकारियों और प्रभावित क्षेत्रों को सूचना देकर आवश्यक सुरक्षा एवं एहतियाती व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

गुरु पूर्णिमा पर कोसमनारा पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, सत्यनारायण बाबा धाम में की पूजा-अर्चना

गुरु पूर्णिमा पर कोसमनारा पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, सत्यनारायण बाबा धाम में की पूजा-अर्चना

 रायपुर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायगढ़ के ग्राम कोसमनारा स्थित प्रसिद्ध श्री श्री 108  सत्यनारायण बाबा धाम पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान भोलेनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। इस अवसर पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है।

गुरुजनों का आशीर्वाद जीवन को सही दिशा देने के साथ आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि कोसमनारा स्थित सत्यनारायण बाबा धाम लोगों की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा श्रद्धालुओं को आत्मबल और शांति प्रदान करती है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर इस पवित्र धाम में आकर पूजा-अर्चना करना उनके लिए सौभाग्य का अवसर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार गुरुजनों के आशीर्वाद और जनता के विश्वास के साथ जनकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ रही है। सरकार का प्रयास है कि विकास और जनकल्याण की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े। इस अवसर पर नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

गुरु पूर्णिमा पर पूर्व विद्यार्थियों की प्रेरणादायी पहल, 26 जरूरतमंद छात्रों की फीस जमा कर की सहायता

गुरु पूर्णिमा पर पूर्व विद्यार्थियों की प्रेरणादायी पहल, 26 जरूरतमंद छात्रों की फीस जमा कर की सहायता

 रायपुर। गुरु पूर्णिमा के मौके पर कालीबाड़ी विद्यालय में हुए कार्यक्रम में वर्ष 2000 बैच के पूर्व विद्यार्थियों ने डी.के. तिवारी और गौतम राहा सर के मार्गदर्शन में अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान जताते हुए समाज के लिए एक बहुत ही अच्छी पहल की। इस दौरान पूर्व छात्रों ने स्कूल के 26 आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों की फीस भरकर उनकी पढ़ाई बिना रुकावट जारी रखने में मदद की।


कार्यक्रम में पूर्व विद्यार्थियों ने अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए शिक्षकों के प्रति दिल से आभार जताया। उन्होंने कहा कि आज जो भी सफलता उन्हें मिली है, उसमें उनके गुरुजनों का बड़ा योगदान है और गुरु पूर्णिमा के दिन जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करना ही उनके लिए सच्ची गुरु-दक्षिणा है।

डी.के. तिवारी और गौतम राहा सर ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ सेवा और अच्छे संस्कार ही समाज को आगे बढ़ाते हैं। स्कूल प्रबंधन ने भी इस कदम की तारीफ की और इसे बाकी पूर्व छात्रों के लिए प्रेरणा बताया। कार्यक्रम का समापन सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ हुआ।
Monsoon Update: मानसून हुआ मेहरबान, रायपुर समेत कई जिलों में झमाझम बारिश, जलभराव से बढ़ी परेशानी

Monsoon Update: मानसून हुआ मेहरबान, रायपुर समेत कई जिलों में झमाझम बारिश, जलभराव से बढ़ी परेशानी

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश से मौसम सुहावना हो गया है और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। हालांकि, भारी बारिश के चलते कई इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बन गई है, जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बता दें कि, रविवार सुबह से ही रायपुर समेत कई जिलों में रुक-रुक कर तेज बारिश का दौर जारी है। लगातार हो रही वर्षा के कारण शहर की कई प्रमुख सड़कें, कॉलोनियां और निचले इलाके पानी में डूब गए हैं। कई स्थानों पर सड़कों पर पानी भरने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई, जबकि लोगों को आने-जाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

बारिश के चलते कुछ इलाकों में ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ गई और व्यस्त मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें भी देखने को मिलीं। नगर निगम और प्रशासन की टीमें जलनिकासी की व्यवस्था को सुचारु करने में जुटी हुई हैं। इधर, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। वहीं, लगातार हो रही बारिश का लोग भरपूर आनंद भी लेते नजर आए। कई जगहों पर युवाओं और बच्चों ने बारिश का लुत्फ उठाया, जबकि मौसम सुहावना होने से शहर के पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर भी लोगों की आवाजाही बढ़ी। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से बने मौसम तंत्र के सक्रिय होने के कारण प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

BREAKING : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कवर्धा दौरे पर,भोरमदेव मंदिर में करेंगे पूजा-अर्चना

BREAKING : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कवर्धा दौरे पर,भोरमदेव मंदिर में करेंगे पूजा-अर्चना

 रायपुर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कवर्धा जिले के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे सुबह 9:30 बजे रायपुर से रवाना होंगे और 10:50 बजे भोरमदेव मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद मुख्यमंत्री सुबह 11:30 बजे भोरमदेव से रवाना होंगे और दोपहर 12:50 बजे मुख्यमंत्री निवास, रायपुर लौटेंगे। वही शाम के कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री शाम 4:30 बजे रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में शामिल होंगे। इसके बाद वे शाम 5:30 बजे एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। सभी निर्धारित कार्यक्रमों के बाद मुख्यमंत्री शाम 6:45 बजे मुख्यमंत्री निवास वापस लौटेंगे।

 
प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में गूंजा कोरबा का जल संरक्षण मॉडल

प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में गूंजा कोरबा का जल संरक्षण मॉडल

 रायपुर। जल संरक्षण के क्षेत्र में कोरबा जिले के नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों को आज राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 136वें एपिसोड में कोरबा नगर पालिक निगम द्वारा कैच द रेन अभियान के अंतर्गत किए जा रहे वर्षा जल संरक्षण कार्यों का उल्लेख करते हुए इसे जल संवर्धन की प्रभावी पहल बताया। यह उपलब्धि कोरबा नगर पालिक निगम, जिला प्रशासन एवं जिलेवासियों के लिए गौरव का विषय है।

कैच द रेन’ अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन
कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन तथा नगर पालिक निगम, कोरबा के आयुक्त आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से अनेक नवाचारी एवं स्थायी पहल की गई हैं। ‘कैच द रेन’ अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत वर्षा जल का अधिकतम संचयन एवं भूजल स्तर में वृद्धि के लिए शहर में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। एसएएम-2.0 योजना के अंतर्गत शहर के 10 विभिन्न स्थानों पर रिचार्ज वेल का निर्माण कराया गया है। इनका निर्माण नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (इसरो) के तकनीकी विशेषज्ञों के परामर्श से इंजेक्ट वेल पद्धति के अनुसार किया गया है। इन रिचार्ज वेल के माध्यम से भारी वर्षा के दौरान सड़कों एवं नालियों में बहने वाले वर्षा जल को सीधे भूगर्भ में पहुंचाया जा रहा है, जिससे जल का अपव्यय रुक रहा है तथा भूजल स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है।

1,728 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट स्थापित
नगर निगम ने वर्षा जल संचयन को जनभागीदारी से जोड़ते हुए शासकीय भवनों में 757 तथा निजी भवनों में 971, कुल 1,728 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट स्थापित कराए हैं। साथ ही भवन अनुज्ञा विभाग द्वारा जारी प्रत्येक भवन निर्माण अनुमति में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य प्रावधान के रूप में शामिल किया गया है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट का प्रावधान
अनिवार्य इसके अतिरिक्त सामुदायिक भवनों, विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों, आंगनबाड़ी भवनों, मंगल भवनों तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवनों के निर्माण में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट का प्रावधान अनिवार्य किया गया है। वर्तमान में 109 निर्माण कार्यों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, जिनमें वर्षा जल संचयन की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

95 अनुपयोगी, क्षतिग्रस्त एवं ध्वस्त बोरवेलों का चिन्हांकन कर रिचार्ज
भूजल संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर स्थित 95 अनुपयोगी, क्षतिग्रस्त एवं ध्वस्त बोरवेलों का चिन्हांकन कर उन्हें रिचार्ज संरचनाओं के रूप में विकसित करने के लिए री-ड्रिलिंग की कार्ययोजना तैयार की गई है। इससे अनुपयोगी संसाधनों का उपयोग जल संरक्षण के लिए किया जा सकेगा। वाटर हार्वेस्टिंग पिट के माध्यम से जल संरक्षण को भी बढ़ावा

जल संरक्षण के साथ-साथ जिले में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित आवरण बढ़ाने के लिए भी व्यापक अभियान संचालित किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा कोरबा एवं कटघोरा वनमंडल में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है तथा वाटर हार्वेस्टिंग पिट के माध्यम से जल संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। कोरबा वनमंडल में इस वर्ष ढाई लाख पौधे रोपने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सभी शासकीय कार्यालयों के परिसरों में वृक्षारोपण को प्रोत्साहन
कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशानुसार जिले में 15 सितंबर तक एक पेड़ माँ के नाम सहित सघन वृक्षारोपण अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में नगर निगम द्वारा 18 जुलाई को “रन फॉर ग्रीन कोरबा” का आयोजन कर जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों की सहभागिता से पौधरोपण किया गया तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इसके साथ ही बीबी-राम-जी अभियान के माध्यम से पौधों का वितरण कर सभी शासकीय कार्यालयों के परिसरों में वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में कोरबा के जल संरक्षण मॉडल का उल्लेख किया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में कोरबा के जल संरक्षण मॉडल का उल्लेख किया जाना इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर दूरदृष्टि, नवाचार और जनभागीदारी के साथ किए गए प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेरणा बन सकते हैं। कोरबा नगर पालिक निगम का यह मॉडल अब जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के अन्य नगरीय निकायों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण के रूप में उभर रहा है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं स्थापित कर वर्षा जल संचयन को जनआंदोलन बनाएं
कलेक्टर कुणाल दुदावत एवं निगमायुक्त आशुतोष पांडेय ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों, संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं स्थापित कर वर्षा जल संचयन को जनआंदोलन बनाएं तथा जल संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाएं। उन्होंने अधिक से अधिक पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों के संघर्ष की जीत : पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों के संघर्ष की जीत : पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश

 रायपुर। नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे देशभर के छात्रों की जीत करार देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।

वहीं, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने विजय रैली निकालकर अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। इससे पहले नीट पेपर लीक मामले को लेकर उनके इस्तीफे की मांग करते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पिछले 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने एक्स पर लिखा, “एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। यह भारत के युवाओं की जीत है।” इसके बाद मीडिया से बातचीत में बघेल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों के संघर्ष की जीत है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हार भी है। भूपेश बघेल ने सरकार की तुलना पौराणिक पात्र हिरण्यकश्यप से करते हुए कहा कि देश का जेन जेड वर्ग नरसिंह अवतार बनकर सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन के सामने सरकार और उसकी एजेंसियां टिक नहीं सकीं।

भाजपा पर हमला बोलते हुए बघेल ने सोनम वांगचुक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम कभी सोनम वांगचुक को चीन का एजेंट बताती थी, जबकि बाद में सरकार के मंत्री उनके साथ नजर आए। बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर भाजपा किसी के भी साथ खड़ी हो जाती है।धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बिलासपुर में छात्रों और विभिन्न युवा संगठनों ने विजय रैली निकाली। रैली के दौरान “छात्र एकता जिंदाबाद” और “एनटीए रद्द करो” जैसे नारे लगाए गए। रैली में शामिल छात्रों का कहना था कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका कहना है कि केवल मंत्री के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा।

परीक्षा प्रणाली में सुधार और एनटीए को लेकर उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद यह पहला मौका माना जा रहा है जब किसी केंद्रीय मंत्री ने व्यापक विरोध के बीच इस्तीफा दिया है। हालांकि 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने भी पद छोड़ा था, लेकिन उनका इस्तीफा ‘मी टू’ अभियान के दौरान लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद आया था। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा व्यवस्था, नीट परीक्षा और एनटीए की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीयस्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में जल संरक्षण को नई गति, मोर गाँव मोर पानी महाभियान बना ग्रामीण समृद्धि का आधार

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में जल संरक्षण को नई गति, मोर गाँव मोर पानी महाभियान बना ग्रामीण समृद्धि का आधार

 00 सेमरदर्री में प्रतिदिन 67 लाख 23 हजार लीटर वर्षा जल का भू-जल में हो रहा रिचार्ज, हजारों मानव दिवस का रोजगार भी सृजित

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से संचालित वीबी जी राम जी योजना के अंतर्गत ष्मोर गाँव मोर पानी महाभियानष् उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। यह अभियान जल संकट के स्थायी समाधान के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की ग्राम पंचायत सेमरदर्री इसका प्रेरणादायी उदाहरण बन गई है, जहाँ वैज्ञानिक पद्धति से किए गए कार्यों से प्रतिदिन लाखों लीटर वर्षा जल भूमि में समाहित होकर भू-जल स्तर को समृद्ध कर रहा है।

जिले के मरवाही विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरदर्री के भाटा-टिकरा, शीतल गडहा तथा पथरा कोड़ी क्षेत्र में 8300 स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच का निर्माण कराया गया है। वर्षा ऋतु में इन संरचनाओं के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 67 लाख 23 हजार लीटर पानी का भू-जल में रिचार्ज हो रहा है। इससे वर्षा जल का अपव्यय रुक रहा है, भू-जल स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है तथा मिट्टी की नमी लंबे समय तक सुरक्षित रहने से कृषि और वन क्षेत्र को भी व्यापक लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप यह अभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है। ट्रेंच निर्माण कार्य में प्रतिदिन लगभग 100 से 120 श्रमिकों को रोजगार मिला है तथा अब तक 8078 मानव दिवस का रोजगार सृजित किया जा चुका है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं

जिला प्रशासन द्वारा जनभागीदारी को केंद्र में रखकर जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। विभिन्न ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण से जुड़े स्थायी कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में जल उपलब्धता बढ़ेगी, खेती अधिक टिकाऊ बनेगी और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिलेगी। मोर गाँव मोर पानी महाभियान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरदर्शी सोच और प्रकृति संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। यह अभियान जल सुरक्षा, भू-जल संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के साथ-साथ आत्मनिर्भर गाँवों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है। आने वाले समय में इस प्रकार के कार्य प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे और जल संरक्षण की संस्कृति को और अधिक सशक्त करेंगे।

सफलता की कहानी : आधुनिक सूकरपालन से स्वरोजगार: 400 से अधिक सूकरों के साथ ग्रेसी ने लिखी सफलता की नई इबारत

सफलता की कहानी : आधुनिक सूकरपालन से स्वरोजगार: 400 से अधिक सूकरों के साथ ग्रेसी ने लिखी सफलता की नई इबारत

 बीएससी एग्रीकल्चर ग्रेजुएट युवती ने सरकारी सहायता से स्वरोजगार को बनाया सफलता की मिसाल

नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी, आधुनिक फार्म में 400 से अधिक सूकर

रायपुर, 22 जुलाई 2026/ सूकर पालन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक तेजी से उभरता हुआ और अत्यधिक लाभदायक स्वरोजगार है। कम लागत, उच्च प्रजनन क्षमता और मांस की लगातार बढ़ती मांग के कारण, यह लाखों युवाओं और किसानों के लिए स्थायी आय का एक प्रमुख साधन बन गया है। सूअर अन्य पशुओं की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ते हैं। मादा सूअर एक बार में 8 से 12 बच्चों (पिगलेट्स) को जन्म देती है, जो 45 से 60 दिनों में बेचने लायक हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ में कई युवा अपनी पारंपरिक या सामान्य नौकरियां छोड़कर आधुनिक तरीके से सूकर पालन कर सालाना लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे हैं।

बस्तर के युवाओं में अब पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि एवं पशुपालन आधारित उद्यमों की नई सोच विकसित हो रही है। इसी सोच को साकार करते हुए बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से एक करोड़ रुपये से अधिक लागत की आधुनिक सूकरपालन परियोजना स्थापित कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। आज उनका फार्म न केवल सफल व्यावसायिक मॉडल बन चुका है, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन गया है।

नौकरी के बजाय स्वरोजगार का चुना रास्ता

ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने के बजाय उन्होंने व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग करते हुए कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने पारंपरिक व्यवसायों के बजाय सूकरपालन को चुना, क्योंकि बस्तर क्षेत्र में इसकी मांग लगातार बढ़ रही थी, जबकि व्यावसायिक स्तर पर इस क्षेत्र में बहुत कम लोग कार्य कर रहे थे। भारत सरकार सूकर पालन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल लाइवस्टॉक मिशन जैसी योजनाएं चला रही है। इसके तहत, फार्म खोलने के लिए 15 लाख से 30 लाख तक की परियोजना पर 50% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

एक करोड़ बारह लाख रुपए की परियोजना को मिला सरकारी सहयोग

बड़े स्तर पर आधुनिक सूकरपालन इकाई स्थापित करने के लिए ग्रेसी को तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी। पशु चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त संचालक कार्यालय ने उन्हें परियोजना तैयार करने से लेकर विभिन्न तकनीकी पहलुओं तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया। विभाग के मार्गदर्शन में 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रूपए की आधुनिक परियोजना तैयार की गई, जिसे केंद्र सरकार की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन योजना के अंतर्गत स्वीकृति मिली।

अनुसूचित जनजाति वर्ग से पहली बार आवेदन करने पर ग्रेसी को योजना के तहत 30 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। ग्रेसी का कहना है कि यदि यह सरकारी अनुदान नहीं मिलता तो वे केवल 20 से 25 सूकरों के साथ छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू कर पातीं, लेकिन शासन की सहायता ने उन्हें आधुनिक अधोसंरचना के साथ बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने का अवसर दिया।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन से मिली सफलता

पशुपालन विभाग के चिकित्सकों और कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में फार्म में तमिलनाडु से उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए। सभी पशुओं के टीकाकरण, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। मई 2025 में फार्म की शुरुआत 110 प्रजनन योग्य सूकरों से हुई थी, जिनमें 100 मादा और 10 नर शामिल थे। शुरुआती चरण में छोटे बच्चों को तैयार करने और प्रजनन योग्य बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर देखभाल के परिणामस्वरूप जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क प्रजनन योग्य सूकर तथा लगभग 206 पिगलेट तैयार हो चुके हैं। वर्तमान में फार्म में कुल 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं, जो इस परियोजना की उल्लेखनीय सफलता को दर्शाते हैं।

पहली बिक्री में ही लगभग चार लाख रुपये की आय

ग्रेसी दुग्गा के आधुनिक फार्म से अब उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की व्यावसायिक बिक्री भी शुरू हो चुकी है। उनके फार्म से रायपुर सहित स्थानीय बाजारों में सूकरों की नियमित आपूर्ति की जा रही है। हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स को 6 हजार रूपए प्रति पिगलेट की दर से बेचकर 3 लाख 90 हजार रुपए की आय अर्जित की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर सूकरपालन लाभकारी व्यवसाय के रूप में तेजी से उभर रहा है।

बस्तर के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

ग्रेसी दुग्गा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर सफल उद्यम स्थापित कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग, शासन की वित्तीय सहायता और अपनी मेहनत के बल पर ग्रेसी ने न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि बस्तर के शिक्षित युवाओं को कृषि एवं पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू करने के लिए भी नई प्रेरणा दी है।

कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जमीनी स्तर पर तंत्र को करें मजबूत, हर दिन आंगनबाड़ी केंद्रों का करें निरीक्षण : मंत्री राजवाड़े

कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जमीनी स्तर पर तंत्र को करें मजबूत, हर दिन आंगनबाड़ी केंद्रों का करें निरीक्षण : मंत्री राजवाड़े

 00 हर आंगनबाड़ी केंद्रों में लगाएं मुनगा और करें पोषण वाटिका का विकास अपने बच्चों के समान करें, आंगनबाड़ी में बच्चों का पालन-पोषण

00 बाल विवाह एक अभिशाप, बाल विवाह रोककर बचाएं बच्चों का भविष्य

00 मंत्री राजवाड़े ने ली विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक
रायपुर।
महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज जिला सूरजपुर में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा समाज कल्याण विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति का आकलन किया। बैठक में सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील, जिला पंचायत सीईओ  विजेंद्र सिंह पाटले सहित दोनों विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

बैठक में मंत्री राजवाड़े ने विभाग की स्थापना संबंधी जानकारी लेते हुए रिक्त पदों की समीक्षा की तथा सभी परियोजनाओं में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के रिक्त पदों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की अधोसंरचना की समीक्षा करते हुए भवनविहीन, किराए के भवनों में संचालित, मरम्मत योग्य, निष्प्रयोज्य योग्य जर्जर भवनों की जानकारी ली तथा निर्माणाधीन भवनों की प्रगति एवं भवन मरम्मत के लिए जारी राशि के व्यय की समीक्षा करते हुए सभी मरम्मत कार्य शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए।मंत्री ने मीठा शक्ति आहार, नमकीन दलिया निर्माण, रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री के वितरण तथा उसकी गुणवत्ता की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नियमित रूप से फील्ड निरीक्षण कर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन, पोषण ट्रैकर में नियमित प्रविष्टि तथा बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कार्य कर जिले को कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य प्राप्त करें।

उन्होंने कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत कुपोषित बच्चों एवं एनीमिक महिलाओं को लाभान्वित करने की प्रगति, लक्षित हितग्राहियों के पर्यवेक्षण तथा चयनित स्व-सहायता समूहों की भूमिका की समीक्षा की। कुपोषण की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने तथा एनीमिक महिलाओं की समय पर पहचान एवं उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, सखी वन स्टॉप सेंटर तथा नवा बिहान योजना की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने सभी परियोजनाओं में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए।
जिले में बाल विवाह की स्थिति की समीक्षा करते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बाल विवाह रोकने के लिए प्रभावी रणनीति अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरपंचों एवं सचिवों को विशेष प्रशिक्षण देकर विवाह तय होने की प्रारंभिक अवस्था में ही बाल विवाह रोकने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही किशोर-किशोरियों को कम उम्र में विवाह के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाए।

उन्होंने प्रत्येक घर में मुनगा का पौधा लगाने तथा प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में मुनगा, हरी सब्जियों एवं पोषण वाटिका विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि मुनगा की पौष्टिकता का उपयोग कर कुपोषण को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकता है। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छता बनाए रखने, शौचालयों की नियमित सफाई, बच्चों को स्वच्छ वस्त्र पहनाने तथा अभिभावकों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि व्यवस्थाओं में सुधार के लिए जमीनी स्तर तक तंत्र को पूर्ण रूप से सक्रिय करना बेहद आवश्यक है। अधिकारी एवं कर्मचारी नियमित रूप से फील्ड में उतरकर कार्य करेंगे, तभी कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक अधिकारी प्रतिदिन कम से कम पांच आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करें तथा यह सुनिश्चित करें कि सभी केंद्र नियमित रूप से संचालित हों, वहां पोषण वाटिका विकसित हो और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा हो।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों का उद्देश्य बच्चों का समग्र विकास और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है। बच्चों का पालन-पोषण अपने बच्चों की तरह करते हुए सभी अधिकारी एवं कर्मचारी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त सूरजपुर के निर्माण का आधार बनेगा, जिससे मजबूत और स्वस्थ परिवारों का निर्माण होगा।
इसके अलावा समाज कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री राजवाड़े ने सामाजिक सहायता कार्यक्रम, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, सुखद सहारा योजना, दिव्यांग पेंशन योजना, पेंशन हितग्राहियों के भौतिक सत्यापन, दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरण, दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना एवं दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली तथा योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाने के निर्देश दिए।

मंगलदास ठाकुर छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष मनोनीत

मंगलदास ठाकुर छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष मनोनीत

 रायपुर / राज्य शासन द्वारा  मंगलदास ठाकुर ग्राम छुरिया डोंगरी, जिला-राजनांदगांव को छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष के पद पर मनोनीत किए गए है। इस आशय का आदेश आदिम जाति विकास विभाग मंत्रालय महानदी भवन से जारी किया गया है।

रायपुर-बिलासपुर रूट की कई ट्रेनें प्रभावित, यात्रा से पहले स्टेटस जरूर जांचें

रायपुर-बिलासपुर रूट की कई ट्रेनें प्रभावित, यात्रा से पहले स्टेटस जरूर जांचें

 रायपुर| दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने रायपुर मंडल के भाटापारा-हथबंध सेक्शन में तीसरी रेल लाइन पर ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम की कमीशनिंग के लिए नॉन-इंटरलॉकिंग (एनआई) कार्य शुरू किया है। इसके चलते 18 और 19 जुलाई को रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, गेवरा रोड और झारसुगुड़ा रूट पर चलने वाली कई ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया है।

रेलवे ने यात्रियों से सफर पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जांचने की अपील की है। इसके अलावा बिलासपुर में हुई भारी बारिश के कारण रेलवे स्टेशन और यार्ड में ट्रैक पर पानी भर गया, जिससे कई ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ। कुछ ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं, जबकि कुछ का संचालन बीच मार्ग से किया गया।

18 और 19 जुलाई को इन ट्रेनों का बदला संचालन

68861 गोंदिया–झारसुगुड़ा मेमू 18 और 19 जुलाई को बिलासपुर से ही रवाना होगी। गोंदिया से बिलासपुर के बीच यह ट्रेन रद्द रहेगी।

68862 झारसुगुड़ा–गोंदिया मेमू 18 और 19 जुलाई को बिलासपुर में ही समाप्त होगी। बिलासपुर से गोंदिया के बीच इसका संचालन नहीं होगा।

रद्द की गई ट्रेनें

68734 बिलासपुर–कोरबा मेमू

68733 कोरबा–बिलासपुर मेमू

68719 बिलासपुर–रायपुर मेमू

68746 रायपुर–बिलासपुर मेमू

68745 बिलासपुर–रायपुर मेमू

इन ट्रेनों का संचालन बीच मार्ग से किया गया

68735 रायगढ़–बिलासपुर मेमू को चांपा स्टेशन पर ही समाप्त किया गया।

68738 बिलासपुर–रायगढ़ मेमू का संचालन चांपा स्टेशन से शुरू किया गया।

68728 रायपुर–बिलासपुर मेमू को दाधापारा स्टेशन से रायपुर के लिए रवाना किया गया।

रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन का लाइव स्टेटस और समय जरूर जांच लें। नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण परिचालन में बदलाव संभव है।

जनता के प्रचंड विश्वास के सामने विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव निष्प्रभावी : मुख्यमंत्री साय

जनता के प्रचंड विश्वास के सामने विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव निष्प्रभावी : मुख्यमंत्री साय

 00 70 लाख माताओं का आशीर्वाद और किसानों का विश्वास हमारी सरकार की शक्ति

00 विपक्ष का आरोप पत्र तथ्यहीन, हमारी ढाई साल की उपलब्धियां ही उसका जवाब

00 मोदी की गारंटी का अर्थ है गारंटी पूरी होने की गारंटी
00 नक्सलवाद की समाप्ति हमारी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि, अब बस्तर को बनाएंगे देश का सर्वश्रेष्ठ आदिवासी संभाग 
रायपुर।
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर करारा पलटवार करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव सरकार के विरुद्ध नहीं, बल्कि प्रदेश की तीन करोड़ जनता द्वारा दिए गए जनादेश, किसानों के विश्वास, माताओं-बहनों के आशीर्वाद और गरीबों के अधिकारों के विरुद्ध है। जनता के प्रचंड विश्वास और सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धियों के सामने विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव पूरी तरह तथ्यहीन, दिशाहीन और निष्प्रभावी सिद्ध हुआ है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वे पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों की बातें प्रारंभ से सुन रहे हैं और सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तथ्यों तथा आंकड़ों के आधार पर विपक्ष के प्रत्येक आरोप का प्रभावी उत्तर दिया है। विपक्ष द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव महज एक औपचारिकता है, जिसमें न कोई ठोस तथ्य है, न विश्वसनीय आधार और न ही कोई दम है।

मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि आखिर यह अविश्वास प्रस्ताव किसके विरुद्ध लाया गया है। क्या यह वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 54 सीटें देकर सरकार बनाने वाली छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता के विरुद्ध है? क्या यह लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 11 में से 10 सीटों पर भाजपा को विजय दिलाने वाले मतदाताओं के विरुद्ध है? अथवा सभी नगर निगमों और 70 प्रतिशत से अधिक नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों में भाजपा को जनादेश देने वाली जनता के प्रति अविश्वास है?

उन्होंने कहा कि विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव उन किसानों के विरुद्ध भी प्रतीत होता है, जिन्हें हमारी सरकार 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य दे रही है। इस वर्ष राज्य सरकार ने 144 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की और अंतर की राशि किसानों के खातों में एकमुश्त अंतरित की। पिछली सरकार किसानों को राशि के लिए पूरे वर्ष इंतजार कराती थी और चार किश्तों में भुगतान करने के बाद भी अंतिम किश्त तक नहीं दे पाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने सत्ता संभालने के केवल 12 दिनों के भीतर 13 लाख किसानों को दो वर्षों का बकाया 3716 करोड़ रुपये का धान बोनस प्रदान किया। यह बोनस पूर्ववर्ती सरकार के जनघोषणा पत्र में शामिल होने के बावजूद पांच वर्षों तक किसानों को नहीं दिया गया था। भाजपा सरकार ने किसानों का वर्षों पुराना अधिकार उन्हें तत्काल लौटाया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश की लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रत्येक महीने के प्रथम सप्ताह में आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी है। पूर्ववर्ती सरकार ने महिलाओं को 500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था, लेकिन पांच वर्षों में एक रुपया भी नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जिस सरकार के साथ 70 लाख माताओं-बहनों का आशीर्वाद हो, उसका विपक्ष के तथ्यहीन आरोप कुछ नहीं बिगाड़ सकते।

मुख्यमंत्री ने शास्त्रों की उक्ति—“सत्यमेव जयते नानृतं, सत्येन पन्था विततो देवयानः” का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य की हमेशा विजय होती है। सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। विपक्ष कितना भी भ्रम और असत्य फैलाने का प्रयास कर ले, प्रदेश की जनता सच्चाई और सरकार के कार्यों को भलीभांति जानती है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि असत्य बोलने और भ्रष्टाचार करने में पीएचडी होती, तो विपक्ष में बैठे कई लोग उसके विशेषज्ञ होते। साय ने कहा कि शायद विपक्ष को यह स्वीकार नहीं हो पा रहा है कि एक छोटे से गांव के आदिवासी किसान का बेटा आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद पर बैठकर प्रदेश की सेवा कर रहा है। कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति और आदिवासी समाज का दशकों तक केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने आदिवासी समाज को वास्तविक सम्मान, अधिकार और विकास के अवसर दिए।
उन्होंने कहा कि श्रद्धेय भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी ने आदिवासियों के समग्र विकास के लिए केंद्र में अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय बनाया। आज आदिवासी समाज की बेटी द्रौपदी मुर्मु देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति के रूप में विराजमान हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोरवा, बिरहोर, कमार, बैगा और अबूझमाड़िया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन में बदलाव लाने के लिए हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता से कार्य कर रही है। कांग्रेस ने लंबे शासनकाल के बावजूद इन समुदायों की बुनियादी आवश्यकताओं और विकास की चिंता नहीं की।
 साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का ऐतिहासिक कार्य भी श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने किया। वर्ष 2003 में भाजपा सरकार बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मजबूत सार्वजनिक वितरण प्रणाली लागू की, जिसकी पूरे देश में सराहना हुई। इसी संवेदनशील व्यवस्था के कारण वे जन-जन में “चाउर वाले बाबा” के नाम से लोकप्रिय हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को बड़ा जनादेश दिया था, लेकिन पांच वर्ष का पूरा कार्यकाल ढाई-ढाई वर्ष की कुर्सी की खींचतान में निकल गया। कांग्रेस ने अपने जनघोषणा पत्र के 36 वादों में से एक भी वादा शत-प्रतिशत पूरा नहीं किया। उसके शासन में प्रदेश में यह धारणा बन गई थी कि कोई ऐसा वर्ग नहीं बचा, जिसे कांग्रेस सरकार ने ठगा न हो।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के चुनाव में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ की जनता को जो वचन दिए, उन्हें “मोदी की गारंटी” का नाम दिया गया। मोदी की गारंटी का अर्थ है—गारंटी पूरी होने की गारंटी। हमारी सरकार ने मात्र ढाई वर्षों में अपने अधिकांश प्रमुख वादों को धरातल पर उतार दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने राजनीतिक दुर्भावना के कारण 18 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास से वंचित रखा। केंद्र सरकार के बार-बार आग्रह और पत्राचार के बावजूद गरीबों के मकान स्वीकृत नहीं किए गए। हमारी सरकार ने 13 दिसंबर 2023 को शपथ लेने के अगले ही दिन, 14 दिसंबर को आयोजित पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति प्रदान की।
उन्होंने बताया कि बीते ढाई वर्षों में 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण हो चुके हैं और वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1600 मकान बनाए जा रहे हैं। सरकार पूर्ववर्ती शासन द्वारा छोड़े गए अधूरे कार्यों को भी बिना किसी भेदभाव के पूरा कर रही है। गरीबों के सिर पर पक्की छत देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की ढाई वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि नक्सलवाद की समाप्ति है। कभी ऐसा प्रतीत होता था कि इस समस्या का समाधान संभव नहीं होगा, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन तथा सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने केंद्र के साथ आवश्यक समन्वय नहीं किया, जिसके कारण देश में बचा अधिकांश नक्सलवाद छत्तीसगढ़ में केंद्रित रहा। हमारी सरकार ने सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति अपनाई। अब बस्तर में शांति लौट रही है और विकास की नई शुरुआत हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर संभाग को देश का सर्वश्रेष्ठ आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है और राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के माध्यम से 5 लाख 60 हजार से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष एकमुश्त 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। सरकार लगातार दो वर्षों से इस योजना का लाभ प्रदान कर रही है।
किसानों के लिए खाद की उपलब्धता पर मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में 15.55 लाख मीट्रिक टन खाद के लक्ष्य के विरुद्ध 13.16 लाख मीट्रिक टन का भंडारण किया गया है। अब तक 7.27 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों को वितरित किया जा चुका है। राज्य की मांग पर केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने अतिरिक्त 50 हजार मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराया है।
सिंचाई क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने पांच वर्षों में केवल 9667 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बढ़ाई थी, जबकि हमारी सरकार ने ढाई वर्ष में 19 हजार 500 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का विस्तार किया है। कांग्रेस शासन में पांच वर्षों में सिंचाई योजनाओं के लिए 5794 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई, जबकि वर्तमान सरकार ने ढाई वर्ष में ही 11 हजार 107 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत की हैं। सिंचाई के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को लगातार दो वर्षों में उत्कृष्ट राज्य का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत—जी राम जी योजना प्रदेश में 1 जुलाई से लागू हो चुकी है। ग्रामीण रोजगार का बजट 4 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 6 हजार करोड़ रुपये किया गया है। योजना में 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों के रोजगार की गारंटी और 15 दिनों के भीतर मजदूरी भुगतान का प्रावधान है। निर्धारित समय पर मजदूरी नहीं मिलने पर श्रमिकों को क्षतिपूर्ति भी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की 6 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र शुरू किए जा चुके हैं। इन केंद्रों में ग्रामीणों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र सहित अनेक शासकीय सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। एक लाख रुपये तक का बैंकिंग लेन-देन भी गांव में ही संभव हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए देश के पांच प्रमुख हवाई अड्डों पर शोरूम खोले जाएंगे। इसके लिए राज्य बजट में प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश के शिल्पकारों, स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों की आय बढ़ेगी।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के अतिरिक्त रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण का कार्य फिर से महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा जा रहा है। कुछ जिलों में इसकी शुरुआत हो चुकी है। पूर्ववर्ती सरकार ने महिलाओं से यह रोजगार छीनकर निजी हाथों में दे दिया था।
उन्होंने बताया कि प्रदेश की 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क में बड़ी रियायत दी जा रही है। ये निर्णय महिलाओं को केवल सहायता प्राप्त करने वाली हितग्राही नहीं, बल्कि संपत्ति की स्वामी और आर्थिक निर्णयों की भागीदार बना रहे हैं।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि पिछली सरकार में शराब दुकानों में दो-दो कैश काउंटर चलने की चर्चा पूरे प्रदेश में थी। एक काउंटर का पैसा सरकारी खजाने में जाता था और दूसरे काउंटर की राशि कहां जाती थी, यह प्रदेश की जनता जानती है। पिछली सरकार छत्तीसगढ़ के विकास के बजाय दिल्ली दरबार के लिए एटीएम बनकर रह गई थी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल की क्षमता 50 सीटों से बढ़ाकर 200 सीट कर दी गई है। यह प्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि इस वर्ष इसी छात्रावास के 13 युवाओं ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। आदिवासी युवाओं को देश की सर्वोच्च सेवाओं तक पहुंचाने के लिए सरकार हर संभव संसाधन उपलब्ध करा रही है।
कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि डायल-112 नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार 16 जिलों से बढ़ाकर सभी 33 जिलों में किया गया है। साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए ढाई वर्षों में 9 साइबर थाने खोले गए हैं और 5 नए साइबर थाने प्रारंभ किए जाएंगे। इसके विपरीत पिछली सरकार पांच वर्षों में केवल पांच साइबर थाने खोल पाई थी।
युवाओं के रोजगार और पारदर्शी भर्ती के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल का गठन किया गया है। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के समान पदों के लिए सात श्रेणियों में संयुक्त भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। भर्ती परीक्षाएं अब नियमित रूप से हर वर्ष होंगी, जिससे युवाओं में व्यवस्था के प्रति विश्वास और उत्साह बढ़ेगा।
उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्षों में पुलिस विभाग में 4174 पदों पर भर्ती की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार ढाई वर्षों में ही 7 हजार युवाओं की भर्ती कर चुकी है। आने वाले समय में पुलिस विभाग के 7 हजार अतिरिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। पीएससी घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है और प्रकरण के दोषी जेल में हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम सेतु योजना के अंतर्गत प्रदेश के 30 आईटीआई का उन्नयन किया जा रहा है। इसके लिए छह क्लस्टर बनाए गए हैं और प्रत्येक क्लस्टर में लगभग 241 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इससे युवाओं को आधुनिक उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
श्री साय ने बताया कि प्रदेश में निफ्ट, नाइलिट और फोरेंसिक यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। पिछली सरकार के पांच वर्षों में केवल 8673 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया था, जबकि वर्तमान सरकार के ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 22 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
औद्योगिक विकास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वस्त्र उद्योग के माध्यम से 42 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर चिप संयंत्र का कार्य प्रारंभ हो चुका है। ऊर्जा क्षेत्र में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। आने वाले वर्षों में प्रदेश में 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे छत्तीसगढ़ ऊर्जा क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेशवासियों को रियायती बिजली से मुफ्त बिजली की ओर ले जा रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 70 हजार से अधिक घरों में सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं और प्रतिदिन 500 से अधिक घर इस योजना से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने पांच वर्षों में 78 हजार 898 सिंचाई पंपों का ऊर्जीकरण किया था, जबकि वर्तमान सरकार ने ढाई वर्षों में ही 1 लाख 2 हजार 845 पंपों का ऊर्जीकरण कर किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया है। किसानों को दी जाने वाली बिजली सब्सिडी 9145 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 14 हजार 198 करोड़ रुपये की गई है। यह अन्नदाताओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
मुख्यमंत्री ने जिला खनिज संस्थान न्यास निधि में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के विकास के लिए डीएमएफ की व्यवस्था बनाई थी, लेकिन पिछली सरकार के समय इस जनकल्याणकारी निधि को भी कमीशनखोरी का माध्यम बना दिया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार सेवा, सुशासन, सुरक्षा और विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। किसान, गरीब, युवा, महिला, आदिवासी और श्रमिक सहित समाज के प्रत्येक वर्ग का विश्वास सरकार के साथ है। विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव प्रदेश की जनता द्वारा बार-बार दिए गए प्रचंड जनादेश और सरकार की उपलब्धियों को नकारने का असफल प्रयास है।
उन्होंने कहा कि जनता ने वर्ष 2023 में कांग्रेस सरकार के विश्वासघात और कुशासन का हिसाब कर उसे सत्ता से उखाड़ फेंका। अब वही विपक्ष तथ्यहीन आरोपों के सहारे अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहा है। छत्तीसगढ़ की जनता भ्रम और असत्य की राजनीति को पहचान चुकी है। सत्य, विकास और जनविश्वास के मार्ग पर चलते हुए हमारी सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प अवश्य पूरा करेगी।

छत्तीसगढ़ में सुशासन, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रही है सरकार : मुख्यमंत्री साय

छत्तीसगढ़ में सुशासन, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रही है सरकार : मुख्यमंत्री साय

 रायपुर / मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह प्रस्ताव सरकार के विरुद्ध नहीं, बल्कि प्रदेश की तीन करोड़ जनता के विश्वास और जनादेश के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव तथा नगरीय निकाय चुनावों में जनता ने विकास, सुशासन और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी पर अपना अटूट विश्वास व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार ने जनता से किए गए अधिकांश वादों और मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की उपलब्धियां स्वयं उसकी कार्यशैली और जनविश्वास का प्रमाण हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों, महिलाओं, गरीबों, युवाओं, आदिवासियों तथा समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, दो वर्षों के बकाया बोनस का भुगतान, महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 70 लाख महिलाओं को 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की सम्मान राशि तथा गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को नई दिशा दी है। महतारी वंदन योजना के साथ-साथ 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाओं को 'लखपति दीदीÓ बनाया गया है। महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने के लिए रजिस्ट्री शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों को पुन: रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं और महिलाओं का आशीर्वाद ही सरकार की सबसे बड़ी शक्ति है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि के लिए रिकॉर्ड धान खरीदी, कृषक उन्नति योजना, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, फसल विविधीकरण, उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता तथा सिंचाई क्षमता के विस्तार जैसे अनेक निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जल संसाधन परियोजनाओं के लिए रिकॉर्ड प्रशासनिक स्वीकृतियां दी गई हैं तथा सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।  

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आदिवासी समाज के विकास के लिए सरकार ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों का पारिश्रमिक बढ़ाया गया, चरणपादुका योजना पुन: प्रारंभ की गई तथा वनाधिकार पत्रधारकों को राहत देने वाले निर्णय लिए गए। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से हजारों जनजातीय गांवों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों तक सड़क, बिजली, पेयजल, आवास और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। जनजातीय युवाओं के लिए दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल का विस्तार, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी तथा जनजातीय संग्रहालय और शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक जैसी पहलें भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने और नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सुरक्षा, विकास और जनविश्वास की रणनीति के माध्यम से प्रदेश में शांति का नया वातावरण बना है। रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है तथा साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए नए साइबर थानों की स्थापना की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास के अधिक अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।  

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के कारण राज्य में निवेश का वातावरण मजबूत हुआ है। देश और विदेश में आयोजित निवेश सम्मेलनों के माध्यम से 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लाखों रोजगार सृजित होंगे। वस्त्र उद्योग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एआई-सेज, डेटा सेंटर पार्क तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में सरकार ने उत्पादन, पारेषण, वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 76 हजार से अधिक घरों में सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं तथा मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के माध्यम से 12 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को राहत दी गई है। किसानों के सिंचाई पंपों का बड़े पैमाने पर ऊर्जीकरण किया गया है तथा राज्य ने प्लांट लोड फैक्टर के मामले में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। नई ताप विद्युत परियोजनाओं, पम्प स्टोरेज तथा सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खनिज संसाधनों के पारदर्शी उपयोग और जिला खनिज संस्थान निधि के प्रभावी संचालन से प्रदेश के विकास को नई गति मिली है। रिकॉर्ड खनिज राजस्व अर्जित करने के साथ खनिज ऑनलाइन 2.0 और डीएमएफ पोर्टल 2.0 लागू किए गए हैं। 82 हजार से अधिक विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं तथा खनिज ब्लॉकों की नीलामी, लीथियम जैसे रणनीतिक खनिजों के विकास और नई रेत नीति के माध्यम से पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था स्थापित की गई है। अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई और पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल अधोसंरचना, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। दूरस्थ क्षेत्रों में 829 मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं तथा भारतनेट फेज-3.0 के माध्यम से हजारों ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ा जा रहा है। शिक्षा में युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षकविहीन विद्यालयों की समस्या समाप्त की गई है, जबकि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत राज्य के अधिकांश परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रशासनिक सुधार और ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं। ई-डिस्ट्रिक्ट, ऑटो म्यूटेशन, मॉडल स्मार्ट रजिस्ट्री कार्यालय, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से आम नागरिकों तक शासकीय सेवाओं की समयबद्ध और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि 435 प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ को सुशासन का मॉडल बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, इको-टूरिज्म, वन संवर्धन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को समान महत्व दे रही है।  'एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत सात करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि  रामलला दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम की यात्रा कर चुके हैं तथा राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान मिल रही है।

अपने संबोधन के समापन में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता का अटूट विश्वास सरकार के साथ है और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी। 

बिलासपुर में भारी बारिश का कहर, 5 ट्रेनें रद्द और 3 का बदला रूट

बिलासपुर में भारी बारिश का कहर, 5 ट्रेनें रद्द और 3 का बदला रूट

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। गुरुवार रात से शुक्रवार दोपहर तक हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। करीब 20 साल बाद बिलासपुर में इस तरह का जलभराव देखने को मिला है। भारी बारिश के कारण सड़कें, कॉलोनियां और निचले इलाके पानी में डूब गए हैं। कई स्थानों पर लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल कदम उठाते हुए स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। वहीं रेलवे ट्रैक पर पानी भरने के कारण रेल यातायात भी प्रभावित हुआ है। बिलासपुर रेल मंडल से गुजरने वाली 5 मेमू (MEMU) ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, जबकि 3 ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया है। रेलवे और प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान औसतन 74.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। वहीं सीपत क्षेत्र में सबसे अधिक 110.2 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए हैं और निचले इलाकों में पानी तेजी से भर रहा है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है

सरकंडा और चांटीडीह में राहत-बचाव अभियान बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में सरकंडा और चांटीडीह क्षेत्र शामिल हैं। यहां निचले इलाकों में पानी तेजी से भरने के कारण कई परिवार फंस गए। स्थिति को देखते हुए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम को मौके पर भेजा गया। SDRF की टीम ने दो नावों की मदद से राहत एवं बचाव अभियान चलाया और 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। सरकंडा के बंधवापारा क्षेत्र में पानी का स्तर बढ़ने के बाद टीम ने घरों में फंसे लोगों को बाहर निकाला। वहीं दोमुहानी इलाके में 10 से अधिक घर चारों तरफ से पानी से घिर गए थे। कई परिवार पूरी रात अपने घरों में फंसे रहे, जिसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई और राहत दल ने पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकाला।

बिजली और पेयजल व्यवस्था पर पड़ा असर
भारी बारिश का असर शहर की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है। कई इलाकों में ट्रांसफॉर्मर पानी में डूबने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कई क्षेत्रों में घंटों तक ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी रही। बिजली नहीं होने से लोगों को पेयजल की समस्या का भी सामना करना पड़ा। बिजली विभाग की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचकर व्यवस्था सुधारने में जुटी हुई हैं। विभाग द्वारा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति बंद रखी गई है, ताकि पानी के कारण किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।

कलेक्टर बंगले में भी भरा पानी
भारी बारिश का असर सरकारी कार्यालयों और प्रशासनिक अधिकारियों के आवासों तक पहुंच गया। बिलासपुर कलेक्टर के सरकारी बंगले में भी बारिश का पानी भर गया। इसके बाद नगर निगम की टीम को जल निकासी के लिए लगाया गया। नगर निगम की मशीनों के माध्यम से लगातार पानी निकालने का काम किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की स्थिति का जायजा लिया और संबंधित विभागों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए।

नेशनल हाईवे पर यातायात प्रभावित
बारिश के कारण बिलासपुर-जांजगीर नेशनल हाईवे पर भी यातायात प्रभावित हुआ। दर्रीघाट के पास सड़क पर पानी भर जाने से वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई घंटों तक वाहन चालक परेशान रहे। राहगीरों ने जलभराव के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए। इसके अलावा अपोलो हॉस्पिटल के पास भी जलभराव के कारण कई लोग फंस गए। सड़क पर पानी भरने से लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी हुई। प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से धीरे-धीरे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

प्रशासन अलर्ट मोड पर
बारिश रुकने के बाद कई इलाकों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है, लेकिन प्रशासन अभी भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। नगर निगम, जिला प्रशासन, SDRF और अन्य विभागों की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। प्रशासन द्वारा लोगों से अपील की गई है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। साथ ही नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। बिलासपुर में आई इस बारिश ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लंबे समय बाद बने ऐसे हालात ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने पर है।

सिम्स बिलासपुर में डॉक्टरों का कमाल : 6 वर्षीय मासूम की आहार नली से सफलतापूर्वक निकाला गया सिक्का, बची जान

सिम्स बिलासपुर में डॉक्टरों का कमाल : 6 वर्षीय मासूम की आहार नली से सफलतापूर्वक निकाला गया सिक्का, बची जान

 रायपुर, 16 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए एक 6 वर्षीय मासूम की जान बचा ली है। बैगा जनजाति के इस बालक ने खेलते समय गलती से सिक्का निगल लिया था, जो उसकी आहार नली (अन्ननली) में फंस गया था। डॉक्टरों की टीम ने बेहद जटिल और आपातकालीन स्थिति में सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर सिक्के को बाहर निकाला।

पेंड्रा से सिम्स बिलासपुर किया गया था रेफर

जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के कोटा तहसील अंतर्गत ग्राम सरगोंड का निवासी 6 वर्षीय बालक नरेंद्र खेलते समय सुबह करीब 7 बजे अचानक सिक्का निगल गया। इसके तुरंत बाद उसे कुछ भी निगलने में अत्यधिक परेशानी होने लगी। परिजन आनन-फानन में उसे पेंड्रा के एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बालक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया।

डॉक्टरों के समन्वित प्रयास से मिली सफलता

बालक को शाम करीब 6.30 बजे सिम्स लाया गया, जिसके बाद अस्पताल का पूरा अमला सक्रिय हो गया। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने तत्काल एक्स-रे कर अन्ननली के ऊपरी भाग (श्वासनली के मुहाने के ठीक पीछे) में फंसे सिक्के की सटीक लोकेशन की पहचान की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने बच्चे को सामान्य एनेस्थीसिया दिया। इसके बाद ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी तकनीक के जरिए अत्यंत सावधानी से सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और ऑपरेशन के बाद बालक की स्थिति पूरी तरह सामान्य और संतोषजनक है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का परिणाम

इस सफल उपचार पर सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता, आधुनिक तकनीकों और आपसी तालमेल के कारण ही इस जटिल आपातकालीन मामले को समय पर सुलझाया जा सका। सिम्स का लक्ष्य हर मरीज को सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं देना है।

चिकित्सा अधीक्षक और डॉक्टरों ने अभिभावकों के लिए जारी की सलाह

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने आगाह किया कि छोटे बच्चों द्वारा सिक्का, बटन, बैटरी या चुंबक जैसी चीजें निगलना एक गंभीर आपात स्थिति है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय सीधे विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचना चाहिए। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से सिक्के, छोटी बैटरी और छोटे खिलौने दूर रखें। यदि बच्चा कोई वस्तु निगल लेता है और उसे लार टपकने, गले में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें, तो बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें।

अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशन का होगा शुभारंभ

अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशन का होगा शुभारंभ

 0-रेलवे के आधुनिकीकरण से यात्री सुविधाओं, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 

0-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से रायपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) दयानन्द ने की सौजन्य भेंट

 
 
 

रायपुर / मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में रायपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम)  दयानन्द ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उद्घाटन समारोह के लिए केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव की ओर से मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय को आमंत्रण पत्र भेंट किया। भेंट के दौरान अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों पर विकसित आधुनिक यात्री सुविधाओं, अधोसंरचना उन्नयन तथा स्टेशनों के नए स्वरूप को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।  

 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना भारतीय रेलवे को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और यात्री-केंद्रित बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है, जिसका लाभ सीधे आम नागरिकों और प्रदेश के समग्र विकास को मिलेगा।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय रेलवे आज अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। देशभर के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर यात्री सेवाओं और विश्वस्तरीय अधोसंरचना से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे विकसित भारत के संकल्प को नई गति मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, व्यापार, पर्यटन और जनसुविधाओं की जीवनरेखा है। रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उन्नयन से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में आधुनिक रेल अधोसंरचना का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। रेल संपर्क के सुदृढ़ होने से प्रदेश में निवेश, उद्योग, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा आम नागरिकों का आवागमन अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को वर्चुअल माध्यम से देशभर में अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित एवं नवीनीकृत रेलवे स्टेशनों का लोकार्पण करेंगे। इस योजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को आधुनिक, सुगम, सुरक्षित एवं यात्री-अनुकूल बनाकर देश की परिवहन व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

CG BREAKING : छत्तीसगढ़ को मिले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की सौगात, 250 सीटों को मिली स्वीकृति

CG BREAKING : छत्तीसगढ़ को मिले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की सौगात, 250 सीटों को मिली स्वीकृति

 रायपुर। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा एवं कबीरधाम में 50-50 एमबीबीएस सीटों वाले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही प्रदेश में एक साथ कुल 250 नई एमबीबीएस सीटों का विस्तार होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा सुदृढ़, समावेशी और आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जहाँ प्रदेश का कोई भी युवा डॉक्टर बनने के अपने सपने से वंचित न रहे और किसी भी नागरिक को बेहतर उपचार के लिए दूर-दराज़ के शहरों का रुख न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे गीदम (दंतेवाड़ा) से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ के आदिवासी वनांचल कुनकुरी (जशपुर) तक नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि डबल इंजन सरकार विकास के अवसरों को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुँचा रही है। यह केवल नए संस्थानों की स्थापना नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने और दूरस्थ अंचलों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव रखने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रही है। प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और आकांक्षी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और क्षेत्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार आएगा।

मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा के प्रति समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं होंगे, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय मानव संसाधन विकास के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार होगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर उपचार की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी, प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई दिशा देगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगी।

CG Assembly : विधानसभा के प्रश्नकाल में उठा B.Ed./D.Ed. कोर्स नहीं होने का मुद्दा, विधायक लता उसेंडी ने उठाए सवाल

CG Assembly : विधानसभा के प्रश्नकाल में उठा B.Ed./D.Ed. कोर्स नहीं होने का मुद्दा, विधायक लता उसेंडी ने उठाए सवाल

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल में कोंडागांव से भाजपा विधायक लता उसेंडी ने महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बी.एड. और डी.एड. पाठ्यक्रम संचालित नहीं होने का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 लागू है और शिक्षक शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही पूछा कि शहिद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर में शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक के कुल कितने पद स्वीकृत है। कितने कार्यरत है?

उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लागू है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में उच्च शिक्षा विभाग के अधीन प्रदेश के किसी भी जिले में बी.एड. या डी.एड. कॉलेज संचालित नहीं हैं। मंत्री ने सदन को बताया कि प्रदेश में 13 ऐसे महाविद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जहां भविष्य में बी.एड. कॉलेज खोले जा सकते हैं।

उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि, उच्च शिक्षा विभाग की ओर से किसी भी जिले में बी.एड और डी.एड महाविद्यालय संचालित नहीं है। इसका संचालन स्कूल शिक्षा विभाग और SCERT द्वारा किया जाता है। शहिद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर में शैक्षणिक के कुल 265 पद स्वीकृत है। कुल 236 पद रिक्त है। गैर शैक्षणिक के कुल 320 पद स्वीकृत। गैर शैक्षणिक के कुल 291 पद रिक्त है। वहीं कुल छात्र क्षमता 3300 है। वर्तमान में 1898 छात्र अध्ययनरत है। UGC के मानकों के हिसाब से 223 शिक्षक होने चाहिए। वर्तमान में 29 नियमित शिक्षक कार्यरत है।

हालांकि, इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और संबंधित नियामक संस्थाओं के अलग-अलग नियम एवं मानक हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस दिशा में आगे की कार्यवाही के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो आवश्यक प्रक्रियाओं और संभावनाओं का अध्ययन कर अपनी अनुशंसाएं देगी।

लता उसेंडी ने पूछा कि क्या पूर्व में शिक्षकों के भर्ती संबंधित शिकायत मिली थी क्या? जवाब में मंत्री ने कहा, हां, जांच समिति द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर राज्यपाल व कुलाधिपति द्वारा पत्र दिनांक 13 फरवरी 26 द्वारा शिकायतें निराधार होने के कारण प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया है।

जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखीं विधायक लता उसेंडी ने कहा कि महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में लंबे समय से कई पद रिक्त हैं, जिससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने सरकार से विश्वविद्यालय में रिक्त पदों पर जल्द भर्ती करने और क्षेत्र के विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बी.एड./डी.एड. पाठ्यक्रम शीघ्र शुरू करने की मांग की। प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे पर शिक्षक शिक्षा, उच्च शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी चर्चा हुई।

उद्योगों के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई साझेदारी: आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी

उद्योगों के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई साझेदारी: आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी

 रायपुर- राज्य में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी की मुख्य आतिथ्य में बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। सही समय पर, उपयुक्त प्रजाति के स्वस्थ पौधों का रोपण तथा उनकी नियमित देखभाल और सिंचाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योगों से पीपल, शिरीष, नीम, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक वृक्षारोपण तकनीकों का उल्लेख किया है और ऐसे नवाचारों को अपनाने से हरित आवरण तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

मंत्री  चौधरी ने सभी उद्योगों से अपने परिसर तथा आसपास हरित वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी तथा पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि अनिवार्य होगी।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उद्योगों को उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का भी पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के माध्यम से भी व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

मंत्री  चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर को “पीपल सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर में पूर्व में लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अतिरिक्त आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने बताया कि नवा रायपुर की पहचान बन चुकी सेंध (Sendh) लेक का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी तथा झील का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा। झील के मध्य स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक “बर्ड आइलैंड” (ईको-हब) विकसित किया जा रहा है।

आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष  अंकित आनंद ने कहा कि पिछले एक वर्ष में मंडल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधों का रोपण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। इस वर्ष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को ही अंतिम माना जाएगा तथा सभी उद्योगों को समय पर ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जो उद्योगों की सक्रिय सहभागिता से 30 लाख से अधिक तक पहुंच सकता है।

सचिव  आनंद ने बताया कि 320 से अधिक उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के माध्यम से निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रारंभिक चरण में नियमों के उल्लंघन पर नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन मंडल का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि प्रदूषण कम करते हुए पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने उद्योगों से पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) जल के अधिकतम उपयोग तथा देशी एवं पर्यावरण-अनुकूल वृक्ष प्रजातियों के रोपण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव  राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निर्देश दिए कि प्रत्येक हेक्टेयर में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाए जाएं तथा त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधरोपण के माध्यम से सघन ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित करने, केवल स्वीकृत पौध प्रजातियों का रोपण करने तथा पौधों की सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित जल का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने सभी उद्योगों को ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) 24 घंटे संचालित रखने तथा प्रत्येक तीन माह में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनका संरक्षण और जीवित रहना है।

बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट एवं डायरेक्टर स्तर के प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने की घोषणा, पंडवानी गायिका तीजन बाई के नाम पर दिया जाएगा राज्यस्तरीय पुरस्कार….

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने की घोषणा, पंडवानी गायिका तीजन बाई के नाम पर दिया जाएगा राज्यस्तरीय पुरस्कार….

 रायपुर। पंडवानी की महान गायिका स्वर्गीय तीजन बाई को श्रद्धांजलि देने के लिए रायपुर में आयोजित सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रदेश के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने स्वर्गीय तीजन बाई को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके कला जगत में दिए गए अतुलनीय योगदान को याद किया।

कार्यक्रम के दौरान संस्कृति मंत्री ने तीजन बाई के परिजनों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक भी प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने तीजन बाई की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। मंत्री राजेश अग्रवाल ने घोषणा की कि अब पंडवानी कला के क्षेत्र में स्वर्गीय तीजन बाई के नाम पर राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही तीजन बाई के पैतृक गांव गनियारी का समग्र विकास किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी विरासत से जुड़ सकें।

संस्कृति मंत्री अग्रवाल ने कहा कि तीजन बाई द्वारा उपयोग किया गया ऐतिहासिक तंबूरा अब घासीदास संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा। संस्कृति विभाग उनकी स्मृतियों, कला और योगदान को सहेजने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास करेगा। कार्यक्रम में मौजूद कलाकारों, साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों ने भी पंडवानी गायिका स्व. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

Sai Cabinet Ke Faisle: साय कैबिनेट की बैठक हुई संपन्न, चर्चा के बाद इन अहम मुद्दों पर लगी मुहर

Sai Cabinet Ke Faisle: साय कैबिनेट की बैठक हुई संपन्न, चर्चा के बाद इन अहम मुद्दों पर लगी मुहर

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में राज्य के विकास, निवेश, शिक्षा, उद्योग, बिजली, पुलिस व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। बैठक में कुल 11 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनका उद्देश्य सुशासन को मजबूत करना, निवेश को बढ़ावा देना, कारोबार को आसान बनाना, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –

1. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के विद्युत उपक्रमों (CPSUs) से खरीदी जा रही बिजली के भुगतान की सुरक्षा के लिए वर्तमान त्रिपक्षीय अनुबंध (Tripartite Agreement) के स्थान पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (Direct Debit Mandate-DDM) व्यवस्था लागू किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 

इस निर्णय से एनटीपीसी सहित अन्य सीपीएसयू से विद्युत आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित होगी तथा भुगतान सुरक्षा की व्यवस्था आरबीआई के वर्तमान प्रावधानों के अनुरूप हो सकेगी। राज्य शासन पर इससे कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा, क्योंकि वितरण कंपनी द्वारा भुगतान की व्यवस्था पूर्ववत रहेगी तथा आवश्यक होने पर पहले लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) की व्यवस्था प्रभावी रहेगी।

2. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ पुलिस विशेष कार्यपालिक बल (बस्तर फाइटर्स), फाइटर आरक्षक सेवा (भर्ती तथा सेवा की शर्तें) नियम, 2026 में महत्वपूर्ण संशोधन को स्वीकृति दी गई है। 

3. मंत्रिपरिषद् द्वारा छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया है। इस संशोधन में भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय के विनियमन प्रकोष्ठ की अनुशंसाओं के अनुरूप निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी प्रावधानों को अधिक व्यावहारिक, गुणवत्तापूर्ण और समकालीन बनाया गया है।

इसके तहत निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए विन्यास निधि के स्थान पर रक्षित निधि का प्रावधान लागू करने से अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के भविष्य को संवारने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जा सकेंगे। इसमें आधारभूत अधोसंरचना, पुस्तकालय एवं अन्य सुविधाओं को यूजीसी एवं सक्षम नियामक संस्थाओं के मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। इस संशोधन से राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा।

4. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इस संशोधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर अधिकरण को समाप्त करने के साथ ही उससे संबंधित प्रावधानों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

जीएसटी लागू होने के बाद वैट संबंधी द्वितीय अपीलों के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है और राज्य में जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की स्थापना भी हो चुकी है। ऐसे में पृथक वाणिज्यिक कर अधिकरण की आवश्यकता नहीं रह गई है। इस संशोधन के बाद अधिकरण में लंबित प्रकरणों का स्थानांतरण राजस्व मंडल को किया जाएगा, जिससे अपीलों के निराकरण की प्रक्रिया सुव्यवस्थित एवं अधिक प्रभावी हो सकेगी।

5. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई। इस संशोधन का उद्देश्य जीएसटी कानून को सरल बनाना, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा करदाताओं, विशेषकर निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले उद्योगों के लिए रिफंड प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है। इससे कर प्रशासन अधिक प्रभावी होगा, करदाताओं को सुविधा मिलेगी साथ ही राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी।

6. मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इस संशोधन का उद्देश्य राज्य में निवेश को बढ़ावा देना, उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना तथा निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस संशोधन विधेयक के प्रारूप को तैयार करने में अन्य अग्रणी राज्यों की औद्योगिक नीतियों का भी अध्ययन किया गया है। इससे निवेश प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। 

7. मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनिमय-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में व्यापार और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, डिजिटल एवं समयबद्ध बनाना है। इस तरह का विधेयक लाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा।

इसके अंतर्गत डीम्ड परमिशन (Deemed Permission), स्व-प्रमाणीकरण (Self-certification), तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third-party Verification), जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-based Inspection) तथा दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों को समाप्त करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इससे निवेशकों के लिए अनावश्यक प्रक्रियात्मक बाधाएं कम होंगी, कारोबार करने में सुगमता बढ़ेगी तथा राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी।

8. मंत्रिपरिषद् ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) द्वारा आबंटित भूखंडों एवं निर्मित परिसरों पर देय ब्याज एवं अधिभार में राहत प्रदान करने हेतु वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना-2026 को मंजूरी दी है।

इस योजना से पात्र आबंटितियों को निर्धारित शर्तों के तहत बकाया देयों के नियमितीकरण, परियोजनाओं को निर्धारित समयावधि में पूरा करने में मदद मिलेगी, जो विकास करने के इच्छुक है उनको अवसर मिलेगा और जो इच्छुक नहीं है, वे समय पर आबंटित भूमि को सरेंडर कर सकेंगे। इस निर्णय से मुकदमेबाजी में कमी आएगी, भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा तथा नवा रायपुर में निवेश एवं विकास गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।

9. मंत्रिपरिषद् ने जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को छत्तीसगढ़ राज्य में अंगीकार करने के लिए विधानसभा में संकल्प प्रस्तुत किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

भारत सरकार द्वारा लाए गए इस संशोधन का उद्देश्य पर्यावरणीय कानूनों के अनुपालन को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इसके तहत छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाकर उन पर आर्थिक दंड का प्रावधान तथा दंड निर्धारण एवं अपील की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया है। इस निर्णय से राज्य में पर्यावरणीय नियमन को सरल बनाने, अनुपालन को प्रोत्साहित करने तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ प्रभावी पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

10. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम, 2011 (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य खाली मकानों को किराये पर देने को बढ़ावा देना और किरायेदारी से जुड़े विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। इस संशोधन में भवन स्वामी और किरायेदार के अधिकार व दायित्व स्पष्ट किए गए है, साथ ही संपत्ति प्रबंधक, किराया प्राप्ति, अधिकरण के अध्यक्ष की पदावधि और न्यायालय शुल्क से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए है। यह संशोधन भारत सरकार के आदर्श किरायेदारी अधिनियम, 2021 के अनुरूप है। 

11. मंत्रिपरिषद् द्वारा राजनांदगांव में 2000 सीट क्षमता वाले आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए आवश्यक शासकीय भूमि के आबंटन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

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