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लॉकडाउन ने तोड़ी मध्यम वर्ग की कमर, छोटे व्यापारियों की हालत खराब

लॉकडाउन ने तोड़ी मध्यम वर्ग की कमर, छोटे व्यापारियों की हालत खराब
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रायपुुर। रायपुर जिले में जारी लॉकडाउन ने जहां आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है तो वहीं व्यापारी वर्ग खासकर छोटे व्यापारियों की स्थिति दयनीय हो गई है। व्यापारी वर्ग ने जल्द से जल्द लॉकडाउन खोले जाने की मांग की है। इधर लॉकडाउन के चलते शासकीय कार्यालयों में भी कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हो चुका है। 

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कोरोना संक्रमण के मद्देनजर रायपुर जिले में जारी लॉकडाउन ने जहां आदमियों का जीना मुहाल कर दिया है तो वहीं इससे समाज का सभी वर्ग भी बेहाल हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी मंझोले वर्ग को उठानी पड़ रही है, चाहे बात आम नागरिकों की हो, व्यापारियों की हो या प्राईवेट नौकरी करने वालों की है। लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर इस वर्ग पर पड़ रहा है। सामान्य प्राईवेट नौकरी करने वाला अथवा किसी संस्थान या दुकान में करने वाले मंझले वर्ग को इस लॉकडाउन में सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। निजी कार्यालयों के बंद रहने से वे अपने काम पर नहीं जा पा रहे हैं, ऐसे में मालिक भी नो वर्क-नो पेमेंट की पॉलीसी अपनाए हुए हैं। इसके पीछे उनकी अपनी स्वयं की मजबुरी है।
 
 
इसी तरह संस्थान या दुकानों में काम करने वाले कर्मचारी भी बिना काम के और बिना वेतन के अपने-अपने घरों में कैद है। उच्च वर्ग तो अपने बचत से या अन्य संसाधनों से आसानी से गुजर-बसर कर ले रहा है। वहीं निम्न अथवा गरीब वर्ग के लोगों को राशन दुकानों से सस्ते दर पर अनाज आदि उपलब्ध हो रहा है अथवा सामाजिक संगठनों द्वारा मदद मिल जा रही है। मध्यम वर्ग इस लॉकडाउन में बुरी तरह से घिरा हुआ है। इसी तरह छोटे-छोटे दुकान या रेहड़ी लगाने वाले व्यापारी भी इस लॉकडाउन से बुरी तरह से आहत हो चुके हैं। कामधंधा न चलने की वजह से उनकी आवक पूरी तरह से बंद हो गई है, जबकि परिवार की जिम्मेदारी उनके सिर पर लगातार बनी हुई है। लॉकडाउन लगाना शासन-प्रशासन के लिए जरूरी है, लेकिन लगातार चल रहे लॉकडाउन ने अब लोगों की स्थिति बिगाडऩी भी शुरू कर दी है। शासकीय कार्यालयों में कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हो चुकाहै, अधिकांश शासकीय कार्य लॉकडाउन के चलते अटक गए हैं। शहर के व्यापारी वर्ग ने जल्द से जल्द लॉकडाउन खत्म करने की मांग की है। 


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