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60वाँ वर्ष डायमंड जुबिली दुर्गा पूजा महोत्सव 2026 सम्पन्न

60वाँ वर्ष डायमंड जुबिली दुर्गा पूजा महोत्सव 2026 सम्पन्न
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रसमती” — परंपरा, प्रकृति और बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम*

रायपुर :- रायपुर की डब्ल्यू.आर.एस. कॉलोनी में श्री श्री दुर्गा एवं लक्ष्मी पूजा समिति द्वारा आयोजित **60वाँ वर्ष डायमंड जुबिली दुर्गा पूजा महोत्सव* समिति के अध्यक्ष डॉ देवाशीष मुखर्जी व सचिव प्रश्क़न्त नाग ने कहा कि इस वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र है। छह दशकों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित यह महोत्सव केवल माँ दुर्गा की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि बंगाल की समृद्ध लोक-संस्कृति, पारंपरिक कला और सामूहिक समर्पण को जीवंत करने का एक अनूठा प्रयास है।

इस वर्ष महोत्सव की मुख्य थीम *“रसमती”* रखी गई है, जिसके माध्यम से समिति ने पारंपरिक बंगाली दुर्गा पूजा की मूल भावना, प्राकृतिक तत्वों और लोक-सौंदर्य को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है।

_तीन महीनों की मेहनत और समर्पण से साकार हुई ‘रसमती’_

इस वर्ष की पूजा की तैयारियाँ पिछले तीन महीनों से निरंतर चल रही हैं। माँ दुर्गा के आगमन को भव्य, कलात्मक और पारंपरिक स्वरूप देने के लिए समिति के सदस्यों ने योजनाबद्ध तरीके से डिजाइन, संरचना निर्माण, सजावट और दृश्य-सज्जा पर कार्य किया।

पंडाल की परिकल्पना से लेकर माँ दुर्गा की प्रतिमा के अनुरूप सजावटी संरचनाओं, पृष्ठभूमि (बैकड्रॉप), पारंपरिक आकृतियों और विभिन्न कलात्मक तत्वों के निर्माण तक, प्रत्येक चरण में बारीकी और रचनात्मकता का विशेष ध्यान रखा गया। इन सभी चीजों की डिजाइनिंग और योजना बनाने में ही एक महीने से अधिक का समय लगा।

इस वर्ष की थीम की सबसे खास बात है **बाँस से निर्मित विभिन्न उत्पादों और प्राकृतिक सामग्रियों का व्यापक उपयोग।* आधुनिक सजावट के बढ़ते चलन के बीच समिति ने बंगाल की पारंपरिक पूजा-पद्धति की सादगी, आत्मीयता और सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का प्रयास किया है।

_बाँस की सजावट में छिपी है परंपरा की जड़ें_

‘रसमती’ की अवधारणा केवल सजावट तक सीमित नहीं है। इसके पीछे नवरात्रि की मूल भावना, प्रकृति के प्रति सम्मान और पूजा में उपयोग होने वाली पारंपरिक सामग्रियों से प्रेरित एक सांस्कृतिक दृष्टिकोण है।

नवरात्रि के दौरान ज्वारा तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त प्राकृतिक तत्व, पारंपरिक रंग, पाटा-माटा जैसी स्थानीय सामग्रियों और मिट्टी से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं ने इस थीम की कल्पना को दिशा दी है। इन तत्वों से प्रेरणा लेते हुए पंडाल को ऐसा स्वरूप देने का प्रयास किया गया है, जो माँ दुर्गा की आराधना के मूल आधार को दर्शाए।

चाहे पूजा घर में हो, मंदिर में या विशाल पंडाल में—उसकी आत्मा श्रद्धा, प्रकृति, परंपरा और सामूहिक विश्वास में ही बसती है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की सजावट में भव्यता के साथ-साथ पारंपरिक बंगाली पूजा का स्पर्श और एहसास बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

इस विशाल आयोजन को कोलकाता से आये हुए कारीगरों और विभिन्न सहयोगी टीमों ने अपना योगदानपूर्ण किया। 

इसके साथ ही दृश्य-सज्जा, कलात्मक पृष्ठभूमि, सजावट और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग देने वाले सभी लोगों का योगदान भी सराहनीय रहा है। हर टीम ने अपने कौशल और अनुभव के माध्यम से ‘रसमती’ की कल्पना को वास्तविक रूप देने में सहायता की है।

विशेष रूप से पिछले 15 दिन इस आयोजन की तैयारी के सबसे व्यस्त और चुनौतीपूर्ण दिन रहे। इस दौरान समिति के सदस्यों ने अपने हाथों से बैकड्रॉप, सजावटी आकृतियाँ और कई अन्य कलात्मक संरचनाएँ तैयार कीं। यह मेहनत केवल एक भव्य पंडाल बनाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी परंपरा के प्रति प्रेम और समर्पण व्यक्त करने के लिए की गई है।

इस वर्ष की थीम की डिजाइनिंग, मार्गदर्शन, क्रियान्वयन और संपूर्ण रचनात्मक प्रक्रिया में समिति के *__अनिश नाग (Anish Nag)_* ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी  कल्पनाशीलता और निरंतर मार्गदर्शन ने इस परियोजना को दिशा देने में अहम योगदान दिया है।
डायमंड जुबिली महोत्सव के अंतर्गत 20 अक्टूबर 2026 को डब्ल्यू.आर.एस. कॉलोनी में एक भव्य संगीतमय संध्या का आयोजन किया गया।
इस आयोजन में मुख्यमंत्री, विधायकगण और सांसदगण सहित विशिष्ट जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बड़ी ।


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