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छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े दानवीर दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल की जमीनें होंगी राजसात, शासन ने जारी किया आदेश

छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े दानवीर दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल की जमीनें होंगी राजसात, शासन ने जारी किया आदेश
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बिलासपुर | छत्तीसगढ़ के दानवीरों में पहले नंबर पर दर्ज भाटापारा ग्राम तरेंगा के दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल की संपत्ति को राजस्व मंडल बिलासपुर ने राजसात कर शासकीय राजस्व अभिलेख में दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि यदि किसी भूमि स्वामी की बिना संतान मौत हो जाती है तो ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के अनुसार वाद भूमि को शासकीय मद में दर्ज करने का प्रावधान है।

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उल्लेखनीय है कि दाऊ कल्याण सिंह ने पहली पत्नी जनकनंदनी से कोई संतान नहीं होने पर सरजा देवी से दूसरा विवाह किया था। सरजा से भी कोई संतान नहीं हुई। राजस्व मंडल के आदेश में राममूर्ति अग्रवाल के नाम का जिक्र है, जिन्होंने सरजा की मृत्यु के बाद फर्जी तरीके से अपने नाम पर मुख्तियारनामा बनवा लिया। वसीयत भी फर्जी पाई गई। इसके बाद राजस्व मंडल ने 19 नवंबर 2020 को यह फैसला दिया।

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संपत्ति विवाद 1967 से चल रहा था। अपने फैसले में राजस्व मंडल ने कहा है कि यदि किसी भूमि स्वामी की बिना संतान मौत हो जाती है तो ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 57, 176 व हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1958 की धारा 29 के अनुसार वाद भूमि को शासकीय मद में दर्ज करने का प्रावधान है। मंडल ने 30 दिनों के भीतर कार्रवाई कर बलौदाबाजार-भाटापारा कलेक्टर को अभिलेख सौंपने का आदेश दिया है।

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फर्जी वसीयता बनाने का खुलासा वर्ष 1985 में हुआ। राजस्व दस्तावेज की पड़ताल के दौरान राजस्व निरीक्षक ने पाया कि दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल के स्वामित्व वाली जमीन व अचल संपत्ति को सरजा के स्थान पर राममूर्ति अग्रवाल के नाम पर राजस्व दस्तावेज में हेरफेर कर नामातंरण करा लिया था। नामांतरण पंजी में राममूर्ति के आम मुख्तियार के रूप में अनूप कुमार अग्रवाल का नाम दर्ज करा लिया गया था। इस नामांतरण के खिलाफ शांतिबाई ने अनुविभागीय अधिकारी के कोर्ट में चुनौती दी थी। अनुविभागीय अधिकारी ने पूर्व की स्थिति बहाल करने के निर्देश दिए थे।

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दाऊ कल्याण सिंह ने राजधानी रायपुर में अस्पताल के लिए जमीन दान दी थी। इसी जमीन पर डीके अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। राज्य निर्माण के बाद डीके अस्पताल भवन को मंत्रालय में तब्दील किया गया। एक दशक से भी अधिक समय तक यहां मंत्रालय चल रहा था। दान के अलावा भी उनके नाम की भाटापारा, तरेंगा, हथनी, अवरेटी व रायपुर में करीब 115 एकड़ जमीन थी।



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