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कोरोना काल में स्कूल खोलना खतरे से खाली नहीं, निजी स्कूल संचालक सरकार पर बना रहे दबाव

 कोरोना काल में स्कूल खोलना खतरे से खाली नहीं, निजी स्कूल संचालक सरकार पर बना रहे दबाव
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रायपुर। विश्व व्यापी कोरोना वायरस महामारी कोविड 19 की जकड़ से देश प्रदेश सहित दुनिया के अधिकांश देश जहां एक ओर संक्रमण से मुक्ति के लिए वैक्सीन की खोज में लगे हुए हैं वहीं देश एवं प्रदेश में निजी स्कूल संचालक केंद्र एवं राज्य सरकारों पर स्कूल खोलने के लिए दबाव बना रहे हैं।
 
 
आशुतोष मिश्रा एवं राकेश चौबे से मिली जानकारी के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यू एचओ के रिपोर्ट के अनुसार 2019 की रिपोर्ट में प्रदेश एवं देश में अधिकांश स्कूलों में स्वच्छता संबंधी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है वहीं प्रदेश सरकार द्वारा निजी स्कूल संचालकों के दबाव में आकर सितंबर माह से दसवीं एवं बारहवीं के बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल खोलने की योजना बनाई जा रही है। पालकों एवं चिकित्सकों के अनुसार उक्त निर्णय कोरोना संक्रमण में वृद्धि का बड़ा कारण बन सकता है।
 
 
वहीं दुनिया के साठ देशों ने जिनमें 244 मिलियन बच्चे शामिल हैं उनकी पढ़ाई एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को पूर्णत: विराम दिया है। देश एवं प्रदेश में विशेष कर ग्रामीण क्षेत्रों में आधे से अधिक स्कूल ऐसे हैं जहां पर साल भर पेयजल की सुविधा भी उपलब्ध नहीं होती ऐसी स्थिति में कोरोना गाइड लाइन के अनुसार बार-बार साबून से हाथ धोने के लिए पानी उपलब्ध कराना भी संबंधित शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक बड़ी समस्या होगी।
 
 
रायपुर पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता एवं छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन क अध्यक्ष क्रिष्टोफर पाल ने मुख्यमंत्री से एवं प्रधानमंत्री से कोरोना संक्रमण के दौरान बच्चों को अध्ययन के नाम पर स्कूल खोलवाकर बली का बकरा नहीं बनाने की मांग की है। अनेक प्रबुद्ध नागरिकों ने भी पांच बार के लाकडाउन के बाद अभी भी कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण नहीं होने की बात कहते हुए सरकार से इस वर्ष बच्चों के लिए विशेषकर बोर्ड परीक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए घर से ही वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। 


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