Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत से पहले, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
Crude Oil Price Today: आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली. कारोबार के दौरान WTI Crude और Brent Crude दोनों के दाम गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे हैं. इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल तेल बाजार पर दबाव बना हुआ है. ये गिरावट ऐसे समय में आई है जब US और ईरान के बीच शुक्रवार को ओमान में बातचीत के लिए सहमत बनी है.
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, WTI Crude की कीमत घटकर 64.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है. इसमें 1.13 डॉलर यानी करीब 1.73% की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं Brent Crude भी कमजोर होकर 68.25 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जिसमें 1.21 डॉलर या 1.74% की गिरावट आई है.
किन कारणों से तेल कीमतों मे आई गिरावट?
बाजार जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट ग्लोबल मांग को लेकर चिंता और सप्लाई से जुड़े संकेतों की वजह से आई है. कुछ देशों में आर्थिक सुस्ती के संकेत मिलने से तेल की मांग कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है. इसके अलावा, डॉलर की चाल और वैश्विक बाजारों में निवेशकों की सतर्कता भी तेल के दामों पर असर डाल रही है.
भारत पर क्या होगा असर
भारत जैसे देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट राहत की खबर मानी जाती है, क्योंकि इससे आगे चलकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. हालांकि, घरेलू ईंधन कीमतें कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं.
कुल मिलाकर, आज कच्चे तेल के बाजार में नरमी का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर आगे आने वाले वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और सप्लाई से जुड़ी खबरों पर टिकी हुई है.
बाजार जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट ग्लोबल मांग को लेकर चिंता और सप्लाई से जुड़े संकेतों की वजह से आई है. कुछ देशों में आर्थिक सुस्ती के संकेत मिलने से तेल की मांग कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है. इसके अलावा, डॉलर की चाल और वैश्विक बाजारों में निवेशकों की सतर्कता भी तेल के दामों पर असर डाल रही है.
भारत पर क्या होगा असर
भारत जैसे देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट राहत की खबर मानी जाती है, क्योंकि इससे आगे चलकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. हालांकि, घरेलू ईंधन कीमतें कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं.
कुल मिलाकर, आज कच्चे तेल के बाजार में नरमी का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर आगे आने वाले वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और सप्लाई से जुड़ी खबरों पर टिकी हुई है.







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