21 सितंबर का पंचांग: अमृतकाल में करें कोई भी शुभ काम, जानें अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल का समय0
Aaj Ka Panchang: हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है. 21 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रात 8:01 बजे तक है. इसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी. सोमवार सुबह 6:19 बजे सूर्योदय और शाम 6:20 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, दोपहर 3:04 चंद्रोदय और रात 2:01 बजे चंद्रास्त होगा.
आज का पंचांग
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा. यह आकाश मंडल का 12वां नक्षत्र है. सोमवार दोपहर 16:04 बजे तक शोभन योग रहेगा. इसको एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक नित्य योग माना गया है. सौ योगों में से इसको पांचवां योग माना गया है. जब सूर्य और चंद्रमा की गतियों की योग दूरी 53 अंश 20 कला से 66 अंश 40 कला के बीच होती है, तब यह योग बनता है. इस योग के स्वामी देवता या कारक ग्रह देवगुरु बृहस्पति हैं, जिनको ज्ञान, वृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है. शोभन योग में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य, मांगलिक अनुष्ठान या नई यात्रा की शुरुआत करना बेहद उत्तम माना जाता है.
अभिजीत मुहूर्त
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 से दोपहर 12:44 बजे तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ और फलदाई समय माना जाता है. आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं. जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है.
अमृतकाल
सोमवार को अमृतकाल रात 12:01 से रात 1:47 बजे तक रहेगा. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) होता है. इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है. नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ, और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है.
राहुकाल
इस दिन राहुकाल सुबह 7:49 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा. हिन्दू ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है. स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है. इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं उन्हें जारी रखा जा सकता है.





















