रायपुर। मोबाइल पर खेले जाने वाले ऑनलाइन वीडियो गेम्स पब्जी (प्लेयर्स अननोन्स बैटल ग्राउंड्स) लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। मानसिक स्थित पर गंभीर असर डालने वाले पब्जी मोबाइल गेम पर कई देशों और भारत के कुछ राज्यों में प्रतिबंध लग चुका है। यही नहीं, छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने इस गेम के चलन को रोकने के लिए सर्कुलर जारी किया है। इसके बावजूद राजधानी के समता कॉलोनी स्थित महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज (मैक) में पब्जी कंप्टीशन करवाया जा रहा है।
जिले के निजी और शासकीय स्कूलों के साथ ही कॉलेज के छात्रों को इस प्रतियोगिता के लिए आमंत्रित किया गया है। अहम बात यह है कि पब्जी गेम के लिए अब तक 300 से ज्यादा छात्रों ने रजिस्ट्रेशन भी करा लिया है। प्रबंधन को उम्मीद है कि इस प्रतियोगिता में 1500 से अधिक छात्र पहुंचेंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि कॉलेज प्रबंधन इतना बड़ा स्पोट्र्स मीट आयोजित कर रहा है, लेकिन इसकी जानकारी न तो जिला प्रशासन को है न ही शिक्षा विभाग को। अभी बीते दिनों ही रेडियंट वे स्कूल में एडवेंचर गेम बिना प्रशासन की अनुमति के कराया गया। इस दौरान एक छात्रा गिर कर गंभीर रूप से घायल हो गई।
पीएचक्यू ने जारी किया था फरमान-
लगातार घटनाएं बढऩे और लोगों की मौत होने पर अब पीएचक्यू ने इस वीडियो गेम से बड़ों और बच्चों को दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का फरमान जारी किया है। स्कूल, कॉलेजों में कैंप, चलित थाना और सामुदायिक पुलिसिंग के जरिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश हैं।
हिंसक बना रहा है खेल-
पब्जी (प्लेयर्स अननोन्स बैटल ग्राउंड्स) खेल में 4 व्यक्ति इंटरनेट के जरिए ऑनलाइन जुड़ते हैं। एक दूसरे को गेम्स में चैलेंज दिया जाता है, जिसे हर खिलाड़ी को पूरा करना पड़ता है। चैलेंज में बंदूक और तलवार से लड़ाई करने और दुश्मनों को मारना होता है। नशे की लत की तरह इस गेम को बच्चे और बड़े लगातार खेलते रहे हैं।
लोगों को भावनाओं में बहा देता है यह गेम-
पीएचक्यू से जारी हुए आदेश में कहा गया था कि पब्जी गेम खेलने वाले खेलते समय भावुक हो रहे हैं। साथ ही मनोरोग का भी शिकार हो रहे हैं। खेल में बंदूक चलाते समय वे उन्हें यथार्थ महसूस होने लगता है। देश में इस वीडियो गेम को खेलने वाले कई लोगों की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है।
एक्सपर्ट व्यू-
साइबर नशा है-
यह पब्जी वीडियो गेम ही नहीं बल्की हर वह वीडियो गेम जिसमें साइबर एडिक्शन होता है, वह घातक होते हैं। साइबर एडिक्शन और नशे की प्रवृत्ति एक जैसी है। दोनों के कारण लोगों को मानसिक और शारीरिक क्षति होती है। इसे बंद करने का आदेश देना सही है। डॉ. मनोज साहू, मनोरोग विशेषज्ञ, आंबेडकर अस्पताल
वर्जन-
पब्जी गेम पर हमारे राज्य में अभी प्रतिबंध नहीं है। फिर भी इस खेल को लेकर मिल रही शिकायतों को देखते हुए मैं एक टीम कॉलेज भेज कर जांच करवाता हूं। आरिफ शेख, एसएसपी, रायपुर
वर्जन-
पब्जी खेल पर प्रतिबंध के लिए मैंने विधानसभा में मुद्दा उठाया था। एक तरफ हम इसके रोक के लिए प्रयास कर रहे हैं, दूसरी ओर इसका कंप्टीशन कराना गलत है। हम विरोध करेंगे। कुलदीप जुनेजा, विधायक
वर्जन-
कॉलेज प्रबंधन पब्जी प्रतियोगिता करा रहा है तो यह गलत है। इसमें निजी और शासकीय स्कूलों के छात्रों को बुलाया गया है। इसे रोकने के संबंध में सभी बीईओ को निर्देश जारी कर रहा हूं। जीआर चंद्राकर, डीईओ, रायपुर
वर्जन-
पब्जी के अलावा 11 प्रकार के खेल हैं। हम सिर्फ इसे एक प्रतियोगिता बतौर करा रहे हैं। यह सिर्फ 15 मिनट की प्रतियोगिता होगी।
डॉ. ज्योति जनस्वामी, प्रभारी प्राचार्य, मैक कॉलेज