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मुख्यमंत्री ने कुदरगढ़ी माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर की प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

मुख्यमंत्री ने कुदरगढ़ी माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर की प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर कुदरगढ़ी माता के दर्शन करने सूरजपुर जिले स्थित कुदरगढ़ी माता मंदिर पहुंचे। कुदरगढ़ महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने मंदिर के नीचे प्रांगण स्थल पर ही हिंगुलाज माता एवं झगरा खाड़ देवता की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार चंदन लगाकर एवं चुनरी चढ़ाकर श्रद्धापूर्वक माता का नमन किया। इस दौरान स्थानीय बैगा राम कुमार बंछोर ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई। उनके परिवार की लगभग 10 पीढ़ियां कुदरगढ़ी माता की सेवा में निरंतर लगी हुई हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और सभी को कुदरगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृषि मंत्री  रामविचार नेताम,
वन विकास निगम एवं कुदरगढ़ी मंदिर मां बागेश्वरी लोक न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष  रामसेवक पैंकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।उल्लेखनीय है कि जनश्रुतियों के अनुसार कुदरगढ़ी माता मंदिर की मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसी कारणवश जिले सहित प्रदेश एवं अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।

 

मुख्यमंत्री ने नवरात्रि की पावन बेला पर मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया शुभारंभ….

मुख्यमंत्री ने नवरात्रि की पावन बेला पर मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया शुभारंभ….

रायपुर: नवरात्रि के पावन बेला में मां महामाया की धरा से यह शुभ शुरुआत हुई है। मां महामाया के आशीर्वाद पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का आयोजन हो रहा है और आज सरगुजा अंचल के साथियों को ओलंपिक के जरिए अपनी हुनर दिखाने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित पी जी कॉलेज ग्राउंड में सरगुजा ओलंपिक का शुभारंभ किया और कार्यक्रम का शुभारंभ कर अंचल वासियों को शुभकामनाएं दी।  साय को इस दौरान संभाग के सभी जिलों से पहुँचे खिलाड़ियों ने मार्च पास्ट का सलामी दी। मुख्यमंत्री ने मुख्य मंच से सभी खिलाड़ियों का अभिवादन स्वीकारा और खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की।

 मुख्यमंत्री ने नवरात्रि की पावन बेला पर मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया शुभारंभ


मुख्यमंत्री  साय ने मां महामाया का स्मरण करते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक की सफलता के बाद अब सरगुजा में भी इस आयोजन की शुरुआत की गई है, जिससे यहां के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि बस्तर ओलंपिक में पहले वर्ष 1.65 लाख और इस वर्ष 3.91 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि सरगुजा ओलंपिक में इस बार लगभग 3.49 लाख खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 2000 से अधिक खिलाड़ी संभाग स्तरीय तीन दिवसीय प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 लाख 49 हजार खिलाड़ियों की स्वस्फूर्त सहभागिता खेल के प्रति उनके प्रेम और समर्पण को दिखाता है।

 मुख्यमंत्री ने नवरात्रि की पावन बेला पर मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए बजट में बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक के वार्षिक आयोजन हेतु 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेताओं को क्रमशः 3 करोड़, 2 करोड़ और 1 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद उन्मूलन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र अब तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। नक्सल मुक्ति का संकल्प हमारे जवानों के अदम्य साहस से पूरा होने की कगार पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर ओलंपिक में आत्म समर्पित नक्सलियों की टीम ने जोआ बाट के नाम से हिस्सा लिया, जिसमें लगभग 700 आत्म समर्पित नक्सली शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि खेलों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है और बस्तर व सरगुजा अंचल खेल अधोसंरचनाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरगुजा के पंडरापाठ में 20 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी स्थापित की जा रही है, जिससे क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवा एथलीट अनिमेष कुजूर का उल्लेख करते हुए उनकी उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि पहली बार खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में होगा, जिसका शुभारंभ 25 मार्च को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित हुए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक तथा कर्मचारी चयन मंडल के स्थापना के संबंध में भी जानकारी दी। शुभारंभ सत्र के अंत में मुख्यमंत्री सह अतिथियों ने सरगुजा ओलंपिक का मशाल प्रज्ज्वलित किया और सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

 मुख्यमंत्री ने नवरात्रि की पावन बेला पर मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया शुभारंभ
कार्यक्रम में राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता गीता फोगाट ने भी खिलाड़ियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक में बड़ी संख्या में बेटियों की भागीदारी देखना सुखद है। उन्होंने युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने का संदेश दिया, साथ ही नशे और गलत आदतों से दूर रहने की अपील की।

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि सरगुजा ओलंपिक में 6 जिलों से कुल 3.49 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है, जिनमें 1.59 लाख पुरुष और 1.89 लाख महिलाएं शामिल हैं। तीन दिवसीय इस आयोजन में 11 से अधिक खेल विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।
कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने इसे सरगुजा वासियों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि इस मंच से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

 मुख्यमंत्री ने नवरात्रि की पावन बेला पर मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया शुभारंभ

इस अवसर पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद  चिंतामणि महाराज, विधायक  प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष  राम किशुन सिंह, सभापति हरविंदर सिंह, राम लखन पैंकरा खेल विभाग के सचिव  यशवंत कुमार, संभाग आयुक्त  नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

माओवादी हमला NIA ने दाखिल की सप्लिमेंट्री चार्जशीट, 6 आरोपियों के नाम शामिल

माओवादी हमला NIA ने दाखिल की सप्लिमेंट्री चार्जशीट, 6 आरोपियों के नाम शामिल

बीजापुर :- राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने वर्ष 2024 में बीजापुर जिले के धर्मावरम क्षेत्र में सीआरपीएफ कैंप पर हुए माओवादी हमले के मामले में सप्लिमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी है। 16 जनवरी 2024 को लगभग 300 माओवादी धर्मावरम, चिंतावागु और पामेड स्थित सीआरपीएफ कैंपों पर समन्वित हमला किया था, जिसमें सीआरपीएफ के करीब एक दर्जन जवान घायल हुए थे। चार्जशीट में तीन गिरफ्तार माओवादी — अवलम भीमा, मदकम नंदा और मदकम देवा उर्फ रतन — के साथ तीन फरार आरोपियों के नाम भी शामिल किए गए हैं। सभी के खिलाफ UAPA, भारतीय दंड संहिता, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले भी NIA ने इस मामले में 17 माओवादी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ताजा चार्जशीट के साथ जांच एजेंसी ने हमले से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण सबूत और आरोप अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए हैं, जिसे सुरक्षा बलों के खिलाफ माओवादी गतिविधियों पर शिकंजा कसने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में जमीन और घर की रजिस्ट्री हुई सस्ती 0.60% सेस खत्म, आम जनता को बड़ी राहत

छत्तीसगढ़ में जमीन और घर की रजिस्ट्री हुई सस्ती 0.60% सेस खत्म, आम जनता को बड़ी राहत

रायपुर :- छत्तीसगढ़ में अपना घर बनाने या जमीन खरीदने का सपना देख रहे मध्यमवर्गीय परिवारों और किसानों के लिए बड़ी राहत दी गई है। विधानसभा ने ‘छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026’ को पारित कर अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60% सेस हटा दिया है। इस कदम से जनता पर सालाना 460 करोड़ रुपए का बोझ कम होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्गमीटर आधारित मूल्यांकन खत्म कर हेक्टेयर दर लागू की गई है, जिससे छोटे जमीन मालिकों को 300-400 करोड़ रुपए का लाभ मिलेगा। कृषि भूमि पर जटिल नियम जैसे ढाई गुना मूल्यांकन और पेड़ों का अलग मूल्यांकन भी हटा दिए गए हैं, जिससे जमीन और मकान की रजिस्ट्री अधिक किफायती होगी। वाणिज्यिक कर मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि पंजीयन प्रक्रिया को ‘वीजा ऑफिस’ की तर्ज पर स्मार्ट बनाया जा रहा है, जिससे रजिस्ट्री होते ही नामांतरण अपने आप होगा और फर्जीवाड़े रोकने के लिए आधार आधारित सत्यापन अनिवार्य किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह निर्णय केवल कर में राहत नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के सपनों को सम्मान देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे संपत्ति पंजीकरण बढ़ेगा, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई ऊर्जा मिलेगी।

CG : बड़े भाई ने लगाई डांट, तो 10 वर्षीय बच्ची ने फांसी लगाकर दे दी जान

CG : बड़े भाई ने लगाई डांट, तो 10 वर्षीय बच्ची ने फांसी लगाकर दे दी जान

दुर्ग। जिले के जामुल थाना क्षेत्र से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां गणेश नगर वार्ड-5 में रहने वाली 10 वर्षीय बच्ची गुरप्रीत कौर ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। जानकारी के अनुसार, गुरुवार 19 मार्च की शाम को खुशी का अपने बड़े भाई से किसी बात पर विवाद हुआ था। भाई की डांट से क्षुब्ध होकर चौथी कक्षा की इस छात्रा ने कमरे में जाकर आत्मघाती कदम उठा लिया।

घटना के समय घर में कोई बड़ा सदस्य मौजूद नहीं था; पिता पेशे से ड्राइवर हैं और मां ब्यूटी पार्लर गई हुई थीं। शोर सुनकर जब पड़ोसी और परिजन पहुंचे, तो बच्ची को तुरंत भिलाई के बीएम शाह अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। खुशी स्वामी आत्मानंद स्कूल जामुल की छात्रा थी। शुक्रवार को गमगीन माहौल में बच्ची का अंतिम संस्कार किया गया। फिलहाल जामुल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

“क्या हो रहा है बच्चों को?”: बढ़ते आत्महत्या के मामलों ने खड़े किए गंभीर सवाल

देशभर में बच्चों और किशोरों के बीच आत्महत्या के बढ़ते मामलों ने समाज और परिवारों के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आए दिन सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पढ़ाई का बढ़ता दबाव, सोशल मीडिया का प्रभाव, पारिवारिक अपेक्षाएं और अकेलापन बच्चों पर मानसिक रूप से भारी पड़ रहा है। कई मामलों में बच्चे अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते, जिससे वे अंदर ही अंदर तनाव से जूझते रहते हैं।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चों में अवसाद (डिप्रेशन), चिंता और असफलता का डर तेजी से बढ़ रहा है। खासकर परीक्षा के समय या रिजल्ट के दौरान यह दबाव और अधिक बढ़ जाता है, जिससे कुछ बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि माता-पिता को बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। यदि बच्चा चुप रहने लगे, अकेले समय बिताने लगे या अचानक गुस्सा या उदासी दिखाने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह किसी मानसिक परेशानी से गुजर रहा है।

सरकार और स्कूलों को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है, जैसे काउंसलिंग व्यवस्था को मजबूत करना और बच्चों के लिए एक सुरक्षित व संवादात्मक माहौल तैयार करना।

CG – राजधानी में मिला नर कंकाल, इलाके में फैली सनसनी, शव की शिनाख्ती में जुटी पुलिस……

CG – राजधानी में मिला नर कंकाल, इलाके में फैली सनसनी, शव की शिनाख्ती में जुटी पुलिस……

 रायपुर। राजधानी रायपुर के उरला स्थित मेटल पार्क इलाके में कंकाल मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान दिलीप (उम्र 45-50 वर्ष) के रूप में की गई है, जिसकी एक माह पहले गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

मामले की सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच, थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी घटना स्थल का निरीक्षण कर रहे हैं। उरला थाना पुलिस के मुताबिक, फिलहाल कंकाल बरामद हुआ है और टीम मौके पर जांच कर रही है।

जगदलपुर में पहली बार होगा ‘बस्तर राइडर्स मीट 2026’, बाइक प्रेमियों का लगेगा महाकुंभ

जगदलपुर में पहली बार होगा ‘बस्तर राइडर्स मीट 2026’, बाइक प्रेमियों का लगेगा महाकुंभ

 जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर में 4 अप्रैल 2026 को पहली बार एक भव्य और अनूठे आयोजन ‘बस्तर राइडर्स मीट 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘गरुड़ा – द राइडर्स क्लब’ द्वारा किया जा रहा है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से बाइक राइडर्स और राइडिंग के शौकीन लोग हिस्सा लेंगे।

बता दें कि, इस आयोजन का उद्देश्य बस्तर की समृद्ध संस्कृति, खानपान, वेशभूषा और प्राकृतिक सौंदर्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। साथ ही, बाइक राइडर्स को बस्तर के अद्भुत पर्यटन स्थलों का अनुभव भी कराया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान बाइक शो और प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न ब्रांड की आकर्षक मोटरसाइकिलों का प्रदर्शन होगा। इसके अलावा राइडिंग शो में कुशल राइडर्स द्वारा रोमांचक स्टंट और परफॉर्मेंस भी देखने को मिलेंगे।

इस मौके पर सर्वश्रेष्ठ मॉडिफाइड बाइक, सर्वश्रेष्ठ विंटेज बाइक और सर्वश्रेष्ठ सुपरबाइक के लिए पुरस्कार भी दिए जाएंगे। वहीं, ‘बस्तर टैलेंट शोकेस’ के जरिए स्थानीय कलाकारों, संगीतकारों और प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में सांस्कृतिक फूड फेस्टिवल भी आयोजित होगा, जहां बस्तर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने का अवसर मिलेगा। साथ ही राइडर्स द्वारा यातायात सुरक्षा नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास किया जाएगा।

 यह आयोजन न केवल बाइक प्रेमियों के लिए एक बड़ा मंच होगा, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को देशभर में प्रदर्शित करने का एक शानदार अवसर भी बनेगा। आयोजकों ने सभी राइडर्स, मीडिया प्रतिनिधियों, बाइक प्रेमियों और आम जनता से इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होने की अपील की है। इच्छुक लोग पंजीकरण के लिए व्हाट्सएप या कॉल के माध्यम से 6263437809 और 7240839494 पर संपर्क कर सकते हैं। “राइड विद प्राइड, राइड फॉर बस्तर” के संदेश के साथ यह आयोजन बस्तर की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करेगा।

 

सभी के सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ विधानसभा बजट सत्र,मुख्यमंत्री ने सभी सदस्यों और अधिकारियों को दिया धन्यवाद

सभी के सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ विधानसभा बजट सत्र,मुख्यमंत्री ने सभी सदस्यों और अधिकारियों को दिया धन्यवाद

 0-लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती के साथ अनेक महत्वपूर्ण विधेयक हुए पारित - मुख्यमंत्री  

रायपुर-विधानसभा के बजट सत्र के सफल समापन पर मंत्रीगण एवं विधायकगण ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में भेंट कर उन्हें बधाई दी।मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया और सफल सत्र के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के समन्वय और सहयोग से ही यह सत्र सार्थक और सफल बन पाया है।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का पावन मंदिर है और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाना ही इसका मूल दायित्व है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि इस बजट सत्र के दौरान लगभग 585 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने विधानसभा की कार्यवाही का अवलोकन किया जो एक अत्यंत प्रेरणादायक पहल है। इससे यह संदेश गया है कि राज्य सरकार भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा से जोडऩे के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है, जिसका सीधा संबंध राज्य की आंतरिक सुरक्षा, शांति और समृद्धि से है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट सत्र में कुल 15 बैठकें आयोजित हुईं और यह सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण एवं परिणामकारी रहा। सत्र के दौरान माननीय राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन द्वारा कृतज्ञता व्यक्त की गई तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पारित किया गया। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी सम्पन्न हुए। उन्होंने कहा कि इस सत्र में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026, छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक-2026 तथा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक-2026 जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। साथ ही भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने संबंधी विधेयक तथा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक भी सर्वसम्मति से पारित हुए, जो युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रणाली के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सत्र के दौरान सदन के सदस्यों ने अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, प्रश्न पूछे और अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाया, जो लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वे भले ही अस्वस्थता के कारण सदन में उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने लगातार डिजिटल माध्यम से सदन की कार्यवाही पर नजर रखी।मुख्यमंत्री ने उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। मुख्यमंत्री  साय ने सत्र के सफल संचालन के लिए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, संसदीय कार्य मंत्री  केदार कश्यप, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, सभी विधायकगण, विधानसभा सचिव  दिनेश शर्मा, सुरक्षा कर्मियों एवं समस्त अधिकारियों-कर्मचारियों को विशेष धन्यवाद दिया।उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आप सभी ने सदन की महत्वपूर्ण कार्यवाही और जनहित के मुद्दों को जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अंत में मुख्यमंत्री  साय ने चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

 

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए सख्त कानून पारित, नकल और पेपर लीक पर रोक के लिए व्यापक प्रावधान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए सख्त कानून पारित, नकल और पेपर लीक पर रोक के लिए व्यापक प्रावधान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2026 को पारित किया दिया। इस विधेयक के माध्यम से राज्य में आयोजित होने वाली भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि विकसित राज्य के निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए यह आवश्यक है कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में अनुचित साधनों के उपयोग को पूरी तरह समाप्त करना और योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्र लीक, फर्जी अभ्यर्थियों की भागीदारी तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से नकल जैसी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में तीन से दस वर्ष तक की सजा और दस लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जबकि संगठित अपराध के मामलों में एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने के साथ संपत्ति जब्ती का भी प्रावधान रखा गया है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी नकल या अन्य अनुचित साधनों का उपयोग करते हुए पाया जाता है, तो उसका परीक्षा परिणाम निरस्त किया जाएगा और उसे एक से तीन वर्ष तक परीक्षा से प्रतिबंधित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि परीक्षा से जुड़ी एजेंसियों, आईटी सेवा प्रदाताओं और परीक्षा केंद्रों के प्रबंधकों को भी जवाबदेह बनाया गया है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता की संभावना को रोका जा सके।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि इस कानून के तहत यह भी सुनिश्चित किया गया है कि परीक्षा से संबंधित मामलों की जांच उप निरीक्षक से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी, जिससे जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहे। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार विशेष जांच एजेंसियों को भी जांच सौंप सकेगी।

उन्होंने बताया कि यह कानून राज्य लोक सेवा आयोग, व्यापमं तथा विभिन्न शासकीय विभागों, निगमों और मंडलों द्वारा आयोजित सभी भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं पर लागू होगा। इसके माध्यम से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने, अनुचित हस्तक्षेप को रोकने और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने का प्रयास किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के सख्त प्रावधानों से परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा और योग्य अभ्यर्थियों को उनकी मेहनत के अनुरूप अवसर प्राप्त हो सकेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून राज्य में एक निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

फिर मिला कैश ही कैश : पुलिस ने चैकिंग के दौरान इन जिलों में लाखों कैश पकड़ाया, 4 आरोपी गिरफ्तार…..

फिर मिला कैश ही कैश : पुलिस ने चैकिंग के दौरान इन जिलों में लाखों कैश पकड़ाया, 4 आरोपी गिरफ्तार…..

 महासमुंद। बसना थाना क्षेत्र के पालसपाली के पास मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने टोयोटा कार से 32 लाख 50 हजार रुपए की अवैध राशि जब्त की है। इस मामले में आशु बंसल और महेंद्र चौहान को गिरफ्तार किया गया है।

वहीं बलौदा थाना क्षेत्र के सिरपुर इलाके में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 लाख रुपए की अवैध रकम जब्त की है। यहां से केशव अग्रवाल और नरेश अग्रवाल को पकड़ा गया है। चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 106 के तहत कार्रवाई करते हुए मामला इनकम टैक्स विभाग को सौंपा जा रहा है। कुल 47 लाख 50 हजार रुपए जब्त किया गया है।

गौरतलब है कि महासमुंद जिला पुलिस ने पिछले एक सप्ताह में 1 करोड़ 47 लाख रुपए की अवैध राशि जब्त कर बड़ी सफलता हासिल की है।

 

पहली बार महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने किया लोकभवन का भ्रमण….

पहली बार महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने किया लोकभवन का भ्रमण….

 रायपुर: राज्यपाल  रमेन डेका की पहल पर प्रदेश के सर्वाेच्च संवैधानिक कार्यालय ‘‘लोकभवन‘‘ की कार्यप्रणाली से अवगत कराने और यहां की कार्यालयीन गतिविधियों से जनसामान्य को जोड़ने के उद्देश्य से लोकभवन का भ्रमण कराया जा रहा है। इसी कड़ी में आज शासकीय दिग्विजय स्नातकोत्तर स्वाशासी महाविद्यालय राजनांदगांव के विद्यार्थियों ने आज लोकभवन का भ्रमण किया। बी.ए. और एम.ए के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था और लोक भवन की ऐतिहासिक व कार्यालयीन महत्ता को जाना और समझा।

पहली बार महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने किया लोकभवन का भ्रमण

यह पहला अवसर था जब महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएं लोकभवन आए, इससे पहले स्कूली विद्यार्थी और गोद ग्राम से आए ग्रामीणों ने लोेकभवन का भ्रमण किया था। उन्हें लोकभवन परिसर स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम, उदंती परिसर, कन्हार परिसर, डिस्पेंसरी, सचिवालय की विभिन्न शाखाओं और हरे-भरे उद्यान का भ्रमण कराया गया और इन स्थानों के संबंध में विस्तृत जानकारी भी प्रदान की गई। ग्रामीणों ने परिसर में स्थापित तोप का भी अवलोकन किया यह वर्ष 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान उपयोग में लाया गया था। भ्रमण एवं अवलोकन के बाद ग्रामीणों ने बताया कि लोकभवन में आकर उन्हें बहुत आनंद का अनुभव हो रहा है।

 

आज माँ कुदरगढ़ी के पावन धाम पर होगा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आगमन…..

आज माँ कुदरगढ़ी के पावन धाम पर होगा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आगमन…..

 रायपुर: चैत्र नवरात्र की पावन बेला में प्रदेश के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय कल 21 मार्च को जिले के विकासखण्ड ओड़गी अंतर्गत ग्राम पंचायत कुदरगढ़ मे शिरकत करेंगे। इस दौरान उनके द्वारा 185 करोड़ और 10 लाख के विकास कार्यों की सौगात देंगे।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय अपने इस प्रवास के दौरान अंचल के सुप्रसिद्ध एवं प्राचीन माँ कुदरगढ़ी देवी मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन-अर्चन करेंगे तथा माँ कुदरगढ़ी के श्रीचरणों में प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की मंगल कामना करेंगे। उल्लेखनीय है कि लगभग 2000 फीट की ऊंची पहाड़ी पर विराजमान माँ कुदरगढ़ी का यह पावन धाम सदियों से अंचल की आस्था का केंद्र रहा है और प्रतिवर्ष चौत्र नवरात्र के अवसर पर यहां सुदूर अंचलों से लाखों श्रद्धालु माँ के दर्शन हेतु आते हैं।

इस शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जिलेवासियों को 52 कार्यों का लोकार्पण और 24 कार्यों का भूमिपूजन कर 185 करोड़ 10 लाख के लागत के विकास कार्यों की बड़ी सौगात भी देंगे। इस दौरान लोक निर्माण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय निकाय , लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, जल संसाधन संभाग सूरजपुर एवं महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी वि. वि. दुर्ग अंतर्गत सड़क, भवन, पेयजल, शिक्षा, जलाशय एवं नगरीय अधोसंरचना निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया जायेगा। कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही है। मंच एवं साज-सज्जा का कार्य अपने अंतिम चरणों पर है।

 

मछली पालन से बदली लक्ष्मी की जिंदगी, सढ़ौली की लक्ष्मी ठाकुर बनी आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल….

मछली पालन से बदली लक्ष्मी की जिंदगी, सढ़ौली की लक्ष्मी ठाकुर बनी आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल….

 रायपुर: जिला मुख्यालय गरियाबंद के निकटस्थ ग्राम सढ़ौली की महिला कृषक लक्ष्मी ठाकुर ने अपने नवाचार और परिश्रम के बल से एक अद्भुत मिशाल पेश की है। लक्ष्मी को पहले परंपरागत खेती पर निर्भर रहने के कारण अधिक मेहनत करने पर भी उन्हें अपने मेहनत के अनुरूप आय नहीं मिल पाती थी। लेकिन मत्स्य विभाग के अधिकारियों के संपर्क एवं मार्गदर्शन करने से उनका ध्यान मछली पालन की ओर बढ़ा। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2021-22 में उन्होंने अपनी 0.94 हेक्टेयर निजी भूमि में तालाब का निर्माण कराया और उसमें मिश्रित मेजर कार्प के साथ पंगेशियस एवं रूपचंद मछली पालना शुरू किया। आज उनकों प्रति वर्ष लगभग तीन से साढ़े तीन लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है।

ठाकुर ने केवल मछली पालन तक ही सीमित न रहते हुए बाद में एकीकृत मछली पालन मॉडल भी अपनाया है। उन्होंने अपने तालाब के मेढ़ों पर पपीता, आम, नींबू, करौंदा, चीकू, मुनगा और नारियल जैसी उद्यानिकी फसलें लगाई हैं। साथ ही गाय और सुकर पालन से भी वे अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रही हैं। विभाग के निरंतर मार्गदर्शन में कार्य करते हुए आज  ठाकुर आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं और गांव के अन्य किसानों, महिला कृषकों के लिए रोल मॉडल बनकर उभरी हैं।

 

मां बम्लेश्वरी के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी, 23 से 28 मार्च तक चलेगी नवरात्रि स्पेशल ट्रेन, 63 स्टेशनों पर होगा ठहराव…..

मां बम्लेश्वरी के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी, 23 से 28 मार्च तक चलेगी नवरात्रि स्पेशल ट्रेन, 63 स्टेशनों पर होगा ठहराव…..

बिलासपुर। मां बम्लेश्वरी के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी है। चैत्र नवरात्रि के दौरान डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर में लगने वाले नवरात्रि मेले में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे प्रशासन ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) कोरबा के बीच मेमू स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन 23 से 28 मार्च तक चलेगी और इस दौरान 63 स्टेशनों पर रुकेगी। पूरी दूरी तय करने में ट्रेन को करीब 14 घंटे 30 मिनट लगेंगे।

रेलवे के अनुसार ट्रेन नंबर 06883 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)–कोरबा मेमू स्पेशल सुबह 5 बजे इतवारी से रवाना होगी और मध्यवर्ती स्टेशनों से होते हुए शाम 7.30 बजे कोरबा पहुंचेगी। इसी तरह ट्रेन नंबर 06884 कोरबा–नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) मेमू स्पेशल कोरबा से सुबह 5.10 बजे रवाना होकर निर्धारित स्टेशनों पर रुकते हुए शाम 7.30 बजे इतवारी पहुंचेगी।

इतवारी से चलकर ट्रेन सुबह 9.06 बजे डोंगरगढ़ पहुंचेगी और 9.11 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में कोरबा से आने वाली ट्रेन दोपहर 1.41 बजे डोंगरगढ़ पहुंचेगी और 5 मिनट ठहराव के बाद इतवारी के लिए रवाना होगी।

कलमना, कामठी, कन्हान, भंडारा रोड, तुमसर रोड, तिरोड़ा, गोंदिया, आमगांव, सालेकसा, दरेकसा, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई नगर, भिलाई पावर हाउस, रायपुर, उरकुरा, तिल्दा नेवरा, भाटापारा, बिल्हा, चकरभाठा, बिलासपुर, अकलतरा, जांजगीर-नैला, चांपा, उरगा सहित कुल 63 स्टेशनों में ट्रेन का ठहराव रहेगा।

चैत्र नवरात्रि पर्व पर कवर्धा के गन्ना किसानों को मिली बड़ी सौगात: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

चैत्र नवरात्रि पर्व पर कवर्धा के गन्ना किसानों को मिली बड़ी सौगात: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर: चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर कवर्धा के गन्ना किसानों को बड़ी सौगात मिली है। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना मर्यादित, राम्हेपुर (कवर्धा) द्वारा गन्ना किसानों को 5.97 करोड़ की राशि जारी की गई है। इसके साथ ही कारखाना द्वारा अब तक गन्ना किसानों को 57.48 करोड़ का भुगतान पूर्ण किया जा चुका है। नियमित और समयबद्ध भुगतान से क्षेत्र के किसानों में उत्साह, संतोष और प्रसन्नता का वातावरण बना हुआ है।

कलेक्टर एवं कारखाने के प्राधिकृत अधिकारी  गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में भुगतान प्रक्रिया निरंतर जारी है, जिससे सहकारी व्यवस्था में किसानों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। कारखाना प्रबंधन ने बताया कि यह निरंतरता किसानों की आर्थिक मजबूती के साथ-साथ कारखाने के सुचारु संचालन को भी स्थायित्व प्रदान कर रही है। कारखाना प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार चालू पेराई सत्र में 255818 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई तथा 3,09,120 क्विंटल शक्कर का उत्पादन किया जा चुका है। यह उपलब्धि किसानों के सहयोग, जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और कारखाने की बेहतर कार्यक्षमता का संयुक्त परिणाम मानी जा रही है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से भोरमदेव शक्कर कारखाने ने जारी किए 5.97 करोड़

किसानों एवं श्रमिकों के हित में निरंतर कार्य

भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना क्षेत्र के किसानों की आर्थिक और सामाजिक उन्नति का मजबूत आधार बना हुआ है। कारखाने द्वारा एफआरपी के अतिरिक्त रिकवरी राशि का भुगतान, शासन द्वारा प्रदत्त बोनस, रियायती दर पर शक्कर वितरण, उन्नत बीज उपलब्ध कराना, किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही कारखाना परिसर में किसानों के लिए सर्वसुविधायुक्त बलराम सदन, तथा मात्र 5 में गरम भोजन की कैंटीन सुविधा सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण है।

अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त, आम नागरिकों को बड़ी राहत – मुख्यमंत्री साय

अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त, आम नागरिकों को बड़ी राहत – मुख्यमंत्री साय

 रायपुर, 20 मार्च 2026 : छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को आज ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के पारित होने से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर बाजार मूल्य के आधार पर लगाया जाने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त हो गया है। वाणिज्यिक कर मंत्री ओ पी चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से प्रदेश के आम नागरिकों, किसानों, मध्यमवर्गीय परिवारों तथा संपत्ति के क्रय-विक्रय से जुड़े लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

छत्तीसगढ़ उपकर समाप्त होने से अब संपत्ति पंजीयन की लागत में कमी आएगी। उदाहरण के तौर पर एक करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की संपत्ति पर नागरिकों को लगभग 60 हजार रुपये की सीधी बचत होगी, इससे जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक सुलभ, सरल और कम खर्चीली बनेगी। इस अवसर पर विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करते हुए मंत्री चौधरी ने कहा कि यह विधेयक केवल एक विधिक संशोधन नहीं, बल्कि राज्य सरकार की जनहित, लोककल्याण और कर-व्यवस्था में न्यायपूर्ण सुधार के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट मत है कि शासन का उद्देश्य केवल राजस्व अर्जित करना नहीं, बल्कि जनता के जीवन को सरल, सुलभ और सम्मानजनक बनाना है।

वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 के माध्यम से आम जनता के उपयोग की वस्तुओं एवं सेवाओं पर व्यापक कर रियायतें प्रदान कीं, जिससे आम नागरिकों की निर्वाह लागत में कमी आई। इसी क्रम में पंजीयन विभाग में भी अनेक ऐतिहासिक, व्यावहारिक और जनहितकारी सुधार किए गए हैं, जिनका उद्देश्य आम जनता पर आर्थिक बोझ कम करना और सेवाओं को सरल बनाना है। उन्होंने बताया कि स्वतः नामांतरण व्यवस्था आम जनता के लिए अत्यंत राहतकारी सिद्ध हुई है। पंजीयन के बाद तत्काल नामांतरण होने से पक्षकारों को आर्थिक बचत के साथ-साथ महीनों चलने वाली नामांतरण प्रक्रिया से मुक्ति मिली है। मई 2025 से अब तक लगभग डेढ़ लाख दस्तावेजों का स्वतः नामांतरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।

पंजीयन प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए सुगम मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जो संपत्ति की सही भौगोलिक स्थिति सुनिश्चित करने में सहायक है। साथ ही, फर्जी व्यक्ति द्वारा पहचान छुपाकर पंजीयन न कराया जा सके, इसके लिए पंजीयन कार्यालयों में आधार आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए विभाग द्वारा पंजीयन कार्यालयों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वीजा ऑफिस की तर्ज पर सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत नागरिकों को वातानुकूलित प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, निःशुल्क वाई-फाई तथा क्यू-आधारित त्वरित पंजीयन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में 10 पंजीयन कार्यालयों को पीपीपी मोड पर स्मार्ट पंजीयन कार्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके बाद अन्य कार्यालयों को भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट कार्यालय बनाया जाएगा।

अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा, धर्मांतरण विरोधी कानून पर लगी मुहर

अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा, धर्मांतरण विरोधी कानून पर लगी मुहर

 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का शुक्रवार को समापन हो गया। सभापति धरम लाल कौशिक ने आज सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। इस दौरान धर्मान्तरण रोकने और प्रदेश की भर्ती परिक्षाओं में गड़बड़ी पर रोक लगाने दो महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में बहुमत के आधार पर पारित कर दिया। सत्र के दौरान कई जनहित के मुद्दों पर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने का प्रयास जरूर किया परन्तु इसमें वह सफल नहीं हो पाए।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कर्मचारी चयन मंडल विधेयक सदन में पेश किया। इस पर पक्ष विपक्ष के सदस्यों की चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया गया। इस विधेयक के बनने से राज्य की भर्ती परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ी पर रोक लग सकेगी। वही एक दिन पूर्व धर्मांतरण विरोधी कानून लाया गया जिसका विपक्ष ने बहिष्कार कर दिया, इसके बाद सदन में बगैर विपक्ष के चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि धर्म की आड़ में सरकार राजनीति कर रही है इस विधेयक को कब से लागू किया जाएगा यह बताएं।

वही उपमुख्यमंत्री अरुण साव और भाजपा सदस्य सुनील सोनी ने कहा प्रदेश में धर्मांतरण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं जिससे यहां की डेमोग्राफी बदल रही है। इस पर रोक लगाने यह विधेयक जरूरी था। इसके पारित होने पर प्रदेश की जनता को बधाई देते हैं।

प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण, विधेयकों की मंजूरी के बाद सभापति धरम लाल कौशिक ने सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।23 फरवरी से चले इस सत्र में विधायकों ने 2924 सवाल लगाए थे जिसमें से मात्र 86 प्रश्नों पर ही सदन में चर्चा हो सकी। पूरे सत्र के दौरान कुल 108 घंटे विधानसभा की कार्यवाही चली। इस दौरान राज्य सरकार का एक लाख 72 हजार करोड़ का भारी भरकम बजट भी पारित किया गया।

CG : छत्तीसगढ़ में जल क्रांति का नया अध्याय: जल जीवन मिशन 2.0 पर ऐतिहासिक एमओयू

CG : छत्तीसगढ़ में जल क्रांति का नया अध्याय: जल जीवन मिशन 2.0 पर ऐतिहासिक एमओयू

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केन्द्र और राज्य के बीच एमओयू कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल की वर्चुअल मौजूदगी में अधिकारियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर कर एक्सचेंज किया।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि “हर घर जल” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हुये एमओयू से इन कार्यों में गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के विस्तारित चरण, जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी है। इस चरण में जल सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ जनभागीदारी को भी सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 41 लाख 30 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों, यानी लगभग 82.66 प्रतिशत घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है।  साय ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत दूरस्थ, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि मिशन 2.0 के तहत ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही जल संवर्धन, पुनर्भरण तथा योजनाओं के संचालन और रखरखाव को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि इस एमओयू के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक आधारित जल सेवा प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल वितरण और अधिक व्यवस्थित एवं सुदृढ़ होगा।

मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री से 1300 करोड़ रुपये की विशेष स्वीकृति का आग्रह भी किया। इस स्वीकृति से 70 समूह जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 3 हजार से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने में मदद मिलेगी। अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि सभी के सहयोग से छत्तीसगढ़ न केवल “हर घर जल” का लक्ष्य हासिल करेगा, बल्कि सतत जल प्रबंधन और ग्रामीण जल शासन में भी नए मानक स्थापित करेगा।

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने कहा कि आज का दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण है और इस एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ में पाइप लाइन एवं संरचनाओं के माध्यम से प्रत्येक घर में पानी की पहुँच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को इसके तहत सशक्त अधिकार प्राप्त होंगे और इन संरचनाओं के रख रखाव के लिए वे जिम्मेदार होंगे। पाटिल ने कहा कि जिला प्रशासन के जरिये पंचायत के कार्यों पर निगरानी रखी जाएगी एवं आवश्यकता होने पर सहायता भी करेंगे। उन्होंने बताया कि आज का यह एमओयू जल शक्ति मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन का साझा प्रयास का परिणाम है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर घर स्वच्छ एवं निर्बाध पानी की पहुँच का सपना साकार होगा।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश टोप्पो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 

छत्तीसगढ़ में 6 दिवसीय फेम ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न, छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिली नई दिशा

छत्तीसगढ़ में 6 दिवसीय फेम ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न, छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिली नई दिशा

 रायपुर, 20 मार्च 2026- छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से राज्य के पर्यटन स्थलों के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से 13 से 18 मार्च तक आयोजित 6 दिवसीय विशेष फेम (FAM) ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। यह आयोजन राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच और पर्यटन को आर्थिक विकास के प्रमुख साधन के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ में 6 दिवसीय फेम ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न, छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिली नई दिशा

इस ट्रिप में देश के विभिन्न राज्यों—दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, ओडिशा, चेन्नई, बेंगलुरु एवं अंडमान-निकोबार से आए लगभग 30 टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट्स ने भाग लिया। इन प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित कर उत्तर एवं दक्षिण छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया गया, जिससे उन्हें राज्य की विविध पर्यटन संभावनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।

उत्तर छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर, मैनपाट, रामगढ़ और जशपुर जैसे स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता एवं इको-टूरिज्म संभावनाओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। वहीं दक्षिण छत्तीसगढ़ में कांगेर घाटी, कोंडागांव, जगदलपुर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा, बारसूर एवं धुडमारास जैसे स्थलों के माध्यम से बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक वैभव का अनुभव कराया गया।

छत्तीसगढ़ में 6 दिवसीय फेम ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न, छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिली नई दिशा

फेम ट्रिप के दौरान बस्तर स्थित विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात ने प्रतिभागियों को विशेष रूप से आकर्षित किया, जहां उन्होंने बोटिंग के साथ प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया। चित्रकोट के प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन कर उन्होंने आध्यात्मिक अनुभव भी प्राप्त किया। इसके अलावा स्थानीय हाट-बाजारों का भ्रमण कर प्रतिभागियों ने जनजातीय जीवनशैली, पारंपरिक आयोजनों और सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझा, जो छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान है।

ऐतिहासिक नगरी बारसूर के बत्तीसा मंदिर एवं प्राचीन गणेश प्रतिमाओं का अवलोकन कर राज्य की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर संभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर पर्यटन विकास, सुरक्षा व्यवस्था एवं बुनियादी सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की, जिससे राज्य में पर्यटन के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण का विश्वास मजबूत हुआ।
मैनपाट एवं जशपुर क्षेत्र में इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे मॉडल की संभावनाओं को प्रस्तुत करते हुए राज्य सरकार की योजनाओं और पहल की सराहना की गई। कुनकुरी का गिरजाघर, राजपुरी जलप्रपात तथा केरे विलेज के महुआ होमस्टे जैसे स्थलों ने यह सिद्ध किया कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन के विविध आयाम विकसित किए जा सकते हैं।

फेम ट्रिप का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव यह है कि इसमें शामिल टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट्स अपने-अपने राज्यों में छत्तीसगढ़ को एक उभरते हुए और आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में प्रचारित करेंगे। इससे राज्य में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की प्रबल संभावना है।
पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, खासकर होटल, ट्रांसपोर्ट, गाइड सेवा, हस्तशिल्प एवं स्थानीय बाजारों को सीधा लाभ मिलेगा। जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन के बढ़ने से स्थानीय संस्कृति को संरक्षण एवं पहचान मिलेगी, साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

इसके अतिरिक्त, इस प्रकार के आयोजनों से राज्य की सकारात्मक छवि राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होती है, जिससे निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलता है और पर्यटन अधोसंरचना के विकास को गति मिलती है।

समापन समारोह में पर्यटन मंडल के अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने ट्रैवल पार्टनर्स से छत्तीसगढ़ को देशभर में बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जा रही बेहतर सुविधाओं, सुरक्षित वातावरण और आतिथ्य की परंपरा पर विश्वास जताया। प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने भी प्रतिभागियों से अपने अनुभवों को व्यापक स्तर पर साझा करने और अधिक पर्यटकों को छत्तीसगढ़ लाने में सहयोग करने की अपील की।
प्रतिभागियों ने छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए इसे “हिडन जेम” बताया और भविष्य में यहां अधिक पर्यटकों को लाने का भरोसा जताया।
यह 6 दिवसीय फेम ट्रिप छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड एवं राज्य सरकार की प्रभावी रणनीति का प्रमाण है, जो राज्य को देश के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।


 

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर

 शांति, विश्वास और विकास-बस्तर हेरिटेज मैराथन एक मज़बूत संदेश

बस्तर की वादियों में गूँजेगी बदलाव की नई आहट, बस्तर हेरिटेज मैराथन को लेकर पुनर्वासित जनों में अभूतपूर्व उत्साह

खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने 25 लाख रुपये की पुरस्कार की घोषणा

रायपुर, 20 मार्च 2026- बस्तर में आपका स्वागत है, जहाँ विरासत जीवंत है और प्रकृति साँस लेती है। बस्तर हेरिटेज मैराथन में प्राचीन वन, जीवंत आदिवासी संस्कृति और मनमोहक परिदृश्य समाहित हैं। धावक साल के पेड़ों से घिरे सुरम्य मार्गों और प्राचीन गाँवों से गुजरेंगे, और हर कदम पर बस्तर की सुंदरता का अनुभव करेंगे। छत्तीसगढ़ के बस्तर में रोमांच और प्रकृति के बीच एक खास आयोजन होने जा रहा है। 22 मार्च 2026 को बस्तर हेरिटेज मैराथन  2026 का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के धावक हिस्सा ले सकेंगे। इस मैराथन की शुरुआत हगदलपुर के लाल बाग मैदान से होगी और फिनिश लाइन एशिया के नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात पर होगी। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि की घोषणा की गई है।

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर

बस्तर की शांत वादियों में इस बार केवल प्रकृति का संगीत नहीं, बल्कि बदलाव और विकास के संकल्प की एक अभूतपूर्व गूँज सुनाई देने वाली है।  इस मैराथन की सबसे गौरवशाली और मानवीय तस्वीर उन आत्म-समर्पित माओवादियों के रूप में उभर कर सामने आ रही है, जो कभी दुर्गम जंगलों के अंधेरों में भटकते थे, लेकिन अब समाज की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा बनकर इस खेल महाकुंभ में अपनी शारीरिक शक्ति और जीवटता का परिचय देने को बेताब हैं। हिंसा का मार्ग त्याग कर शांति की राह चुनने वाले इन युवाओं का यह उत्साह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि बस्तर अब पुराने संघर्षों के साये से बाहर निकलकर खेल, साहस और शौर्य के वैश्विक मंच पर अपनी एक नई और सकारात्मक पहचान गढ़ रहा है।

इस मैराथन में 42 कि.मी., 21 कि.मी., 10 कि.मी. और 5 कि.मी. जैसी अलग-अलग कैटेगरी रखी गई हैं, ताकि हर स्तर के रनर्स इसमें भाग ले सकें। प्रतियोगिता में 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी रखी गई है और बस्तर संभाग के धावकों के लिए अलग से पुरस्कार की व्यवस्था की गई है। यह आयोजन बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती, संस्कृति और खेल भावना को एक साथ जोड़ने का खास मौका बनने जा रहा है।

बस्तर की फिजाओं में अब हिंसा के बारूद की नहीं, बल्कि उम्मीदों और सपनों की उड़ान की खुशबू तैर रही है। कभी जिन हाथों में बंदूकें हुआ करती थीं और जो पैर घने जंगलों की खाक छानते थे, वे अब बस्तर मैराथन के ट्रैक पर अपनी किस्मत आजमाने और एक नई पहचान बनाने को पूरी तरह तैयार हैं। दंतेवाड़ा के लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान और पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) जैसे प्रभावी पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से दर्जनों पूर्व नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने का ऐतिहासिक फैसला किया है। शासन की कल्याणकारी पुनर्वास नीति के तहत ये युवा अब अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग कर रहे हैं और जंगल की संकरी पगडंडियों पर छिपने के बजाय मैराथन की फिनिशिंग लाइन को छूने का लक्ष्य लेकर कड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं।

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर

स्थानीय खेल मैदानों में आयोजित अभ्यास सत्रों के दौरान इन युवाओं का जोश देखते ही बनता है, जहाँ पसीने से तर-बतर चेहरे और दृढ़ संकल्प वाली आँखें बस्तर के बदलते स्वरूप की गवाही दे रही हैं। प्रशिक्षकों का मानना है कि इन युवाओं में अदम्य साहस और बेमिसाल स्टेमिना है, जिसे अब आधुनिक रनिंग तकनीकों के माध्यम से तराशा जा रहा है ताकि वे न केवल दौड़ें, बल्कि जीत का परचम भी लहरा सकें। इस बदलाव का मानवीय पक्ष तब और उभर कर आता है जब शिविर की महिला प्रतिभागी भावुक होकर बताती हैं कि डर के साये से निकलकर अब उन्हें समाज में सम्मान और सुरक्षा मिल रही है। यह अनूठी पहल केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जंगल की हिंसा और भटकाव को पीछे छोड़कर एथलेटिक्स में करियर बनाने का एक सुनहरा अवसर है। अनुभवी कोचों द्वारा दी जा रही प्रोफेशनल ट्रेनिंग इन युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बना रही है, जिससे वे स्थानीय समुदाय के साथ जुड़कर एक नई पहचान तलाश रहे हैं।

अंततः यह प्रयास बस्तर में शांति, विश्वास और प्रगति का एक सशक्त संदेश दे रहा है, जहाँ पूरा दंतेवाड़ा इन युवाओं के हौसले को सलाम करते हुए मैराथन के ट्रैक पर उनकी ऐतिहासिक जीत की राह देख रहा है। इस मैराथन के माध्यम से ये पूर्व माओवादी न केवल अपनी दमखम का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश भी देंगे कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो बस्तर का हर हाथ राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सहभागी बन सकता है। ऐतिहासिक लालबाग मैदान की मिट्टी से शुरू होकर विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के कल-कल करते तटों पर समाप्त होने वाली यह 42 किलोमीटर की श्फुल मैराथनश् इन समर्पित युवाओं की भागीदारी को विशेष रूप से रेखांकित करेगी।

आयोजन को पूरी तरह समावेशी बनाने के उद्देश्य से इसमें 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर की दौड़ और 5 किलोमीटर की श्फन रनश् जैसी श्रेणियां भी रखी गई हैं, जहाँ बस्तर के स्थानीय धावकों और मुख्यधारा में लौटे इन युवाओं का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन ने 25 लाख रुपये की विशाल इनामी राशि की घोषणा की है, जिसमें बस्तर कैटेगरी के विशेष प्रावधानों ने स्थानीय समुदायों के साथ-साथ इन युवाओं के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया है। विशेषकर 10 किलोमीटर की श्रेणी में जूनियर और ओपन वर्ग के अलग-अलग प्रावधानों ने पहली बार दौड़ने वाले युवाओं और फिटनेस प्रेमियों के बीच जबरदस्त आकर्षण पैदा किया है। स्थानीय सहभागिता को अधिकतम करने के लिए बस्तर जिले के सभी धावकों हेतु पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है, ताकि कोई भी प्रतिभा आर्थिक तंगी के कारण इस ऐतिहासिक अवसर से वंचित न रह जाए।

इच्छुक खिलाड़ी आधिकारिक वेबसाइटwww.bastarheritage.runया जारी विज्ञापनों में उपलब्ध क्यूआर कोड के माध्यम से अपना स्थान सुरक्षित कर सकते हैं, जबकि किसी भी प्रकार की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर +91-92440-79533 भी सक्रिय कर दिया गया है। निश्चित रूप से, 22 मार्च को जब ये धावक चित्रकोट की लहरों के साथ कदमताल करेंगे, तो वे केवल फिनिश लाइन की ओर नहीं भाग रहे होंगे, बल्कि बस्तर के एक नए, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील भविष्य की पटकथा लिख रहे होंगे।

22 मार्च 2026 (रविवार) को जगदलपुर से चित्रकोट तक आयोजित होने वाली बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 में बस्तर संभाग के सभी सात जिलोंकृसुकमा, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कांकेर एवं कोंडागांव से 200 से अधिक पुनर्वासित माओवादी कैडर उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। इस आयोजन में उनके साथ-साथ विभिन्न वर्गों के प्रतिभागी, पेशेवर एवं स्थानीय एथलीट, युवा, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में नागरिक भी सम्मिलित हो रहे हैं। यह मैराथन खेल भावना के साथ-साथ बस्तर में शांति, एकता एवं सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बनकर उभर रही है।

आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों की यह सक्रिय सहभागिता “पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) की अवधारणा को साकार रूप देती है, जो शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का मूल उद्देश्य है। “पूना मारगेम” के माध्यम से इन कैडरों को हिंसा के मार्ग से हटाकर समाज की मुख्यधारा में जोड़ने, उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने तथा नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। मैराथन जैसे आयोजनों में उनकी भागीदारी इस सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण है। बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 का उद्देश्य बस्तर क्षेत्र को एक नई पहचान देना, पर्यटन एवं सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना तथा बस्तर की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है।

आत्मसमर्पित कैडरों, स्थानीय नागरिकों एवं एथलीट्स की संयुक्त सहभागिता इस आयोजन को और अधिक प्रेरणादायक बना रही है। यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बस्तर अब विकास, विश्वास एवं नई संभावनाओं की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां “पूना मारगेम” के माध्यम से हिंसा का राह छोड़, उम्मीदों की दौड़ का अवसर मिल रहा है।


 

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : बस्तरवासियों को देखने मिलेंगे एथलेटिक्स के रोमांचक मुकाबले

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : बस्तरवासियों को देखने मिलेंगे एथलेटिक्स के रोमांचक मुकाबले

 30 मार्च से 2 अप्रैल तक होंगी प्रतियोगिताएं, तैयारियां अंतिम चरण में

रायपुर, 20 मार्च 2026 खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के तहत बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर में एथलेटिक्स की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। देश में पहली बार हो रहे राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं। प्रतियोगिता स्थल धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में ट्रैक, मैदान, दर्शक दीर्घा तथा खिलाड़ियों के लिए आवश्यक सुविधाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। साथ ही लाइटिंग, सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल एवं आवास जैसी व्यवस्थाओं को भी प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि खिलाड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : बस्तरवासियों को देखने मिलेंगे एथलेटिक्स के रोमांचक मुकाबले

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : बस्तरवासियों को देखने मिलेंगे एथलेटिक्स के रोमांचक मुकाबले

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : बस्तरवासियों को देखने मिलेंगे एथलेटिक्स के रोमांचक मुकाबले

खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए देशभर के जनजातीय खिलाड़ी बड़ी संख्या में बस्तर पहुंचेंगे। इस आयोजन में न केवल अंचल के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक विविधता को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। बस्तर जिला प्रशासन और खेल विभाग इस आयोजन को सफल बनाने के लिए समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। पूरी प्रतियोगिता के दौरान स्थानीय खेलप्रेमियों को रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे।


 

राज्यपाल रमेन डेका से रक्षा महाविद्यालय नई दिल्ली के अध्ययन दल ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल रमेन डेका से रक्षा महाविद्यालय नई दिल्ली के अध्ययन दल ने की सौजन्य भेंट

 राज्यपाल डेका ने रक्षा विशेषज्ञों को छत्तीसगढ़ की विशेषताओं से कराया अवगत, कहा- छत्तीसगढ़ सुंदर संस्कृति, कला और परंपराओं वाला मनोरम प्रदेश है

रायपुर, 20 मार्च 2026 राज्यपाल रमेन डेका से आज रक्षा महाविद्यालय (NDC) नई दिल्ली के अध्ययन दल ने सौजन्य भेंट की। रक्षा महाविद्यालय द्वारा "National Security and Strategic Studies" विषय पर Understanding India Study Tour (UIST)  के अंतर्गत 16 सदस्यों का दल 15 से 20 मार्च तक छत्तीसगढ़ भ्रमण पर था। अपनी यात्रा के अंतिम दिन आज इस दल ने राज्यपाल डेका से मुलाकात की। अध्ययन दल में भारतीय सशस्त्र सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारीगण, मित्र देशों के सेनाधिकारी तथा कुछ सिविल सेवाओं के अधिकारीगण शामिल थे। इस दल ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न पर्यटक स्थलों, जैसे-बारनवापारा अभ्यारण्य, ट्राइबल म्यूजियम, पुरखैती मुक्तांगन, बस्तर के विभिन्न जलप्रताप, कोन्डागांव के शिल्पग्राम इत्यादि का भ्रमण किया।
राज्यपाल  डेका ने अध्ययन दल के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ एक सुंदर प्रदेश है। आप सभी दोस्तों और परिवार के सदस्यों को अपने भ्रमण और छत्तीसगढ़ की खूबसूरती के बारे में बताएं, ताकि वे भी पर्यटक के रूप में यहां आ सकें। उन्होंने छत्तीसगढ़ की विशेषताओं के बारे में अध्ययन दल से चर्चा की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां पर धान की प्रजातियों को संरक्षित करके रखा गया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की शिल्प कला जैसे ढोकरा आर्ट, वुडन आर्ट, बैम्बु आर्ट के बारे मंे भी चर्चा की। इस प्रदेश में प्रतिभाशाली लोगों की भी कमी नही है, अमेरिका के ह्यूस्टन में छत्तीसगढ़ के हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सेवाएं दे रहे है। इसके अलावा अमेरिका में बसे छत्तीसगढ़ के प्रवासी लोगों की संस्था नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन (NACHA) अमेरिका में स्वदेशी मेले का आयोजन करते है, जहां पर छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन किया जाता है। उन्होंने इस दौरान ऊर्जा के नवीनीकृत स्रोतों को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की बात कही।  डेका ने छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के बारे में भी अध्ययन दल को अवगत कराया।
अध्ययन दल के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए छत्तीसगढ़ की सुंदर, संस्कृति, कला और परंपराओं की सराहना की। अध्ययन दल ने छत्तीसगढ़ के आतिथ्य की तारीफ करते हुए कहा कि यहां के लोग सीधे सरल और आत्मीय है। हम सभी को यहां आकर बहुत अच्छा लगा। अध्ययन  दल के सदस्यों ने प्रदेश में संचालित लोककल्याणकारी योजनाओं जैसे महतारी वंदन, कृषक उन्नति योजना, नक्सल पुनर्वास नीति आदि की सराहना की।


 

प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को डबल इंजन की सरकार ने किया दूर : मुख्यमंत्री साय

प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को डबल इंजन की सरकार ने किया दूर : मुख्यमंत्री साय

 नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात

विदेशी मेहमानों ने कहा - अद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा

राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की हुई सराहना

नेशनल डिफेंस कॉलेज का 15 सदस्यीय अध्ययन दल 05 दिवसीय यात्रा पर पहुंचा है छत्तीसगढ़

नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात

नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात

रायपुर ,20 मार्च 2026 / छत्तीसगढ़ की हमारी धरती   सघन वन, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा के विपुल भंडार, लोक संस्कृति की अमूल्य विरासत और नैसर्गिक सौन्दर्य का अद्भुत संगम है। इस सुंदर धरती के विकास की सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को हमारे डबल इंजन की सरकार ने अब दूर कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में नेशनल डिफेंस कॉलेज के सैन्य एवं सिविल सेवा अधिकारियों के अध्ययन दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश से आए अधिकारियों का स्वागत करते हुए शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। अध्ययन दल का नेतृत्व कर रहे एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव साझा करते हुए राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री को सैन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।

नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात

मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ सघन वनों, खनिज संपदा, समृद्ध लोक संस्कृति और नैसर्गिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम है। उन्होंने बताया कि राज्य का लगभग 46 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जिसमें “एक पेड़ मां के नाम” अभियान और कैम्पा योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। साय ने कहा कि राज्य खनिज संसाधनों से परिपूर्ण है—कोयले से लेकर हीरे तक यहां उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ वर्तमान में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सरप्लस राज्य है, जहां लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए है, जिससे आने वाले समय में इतनी ही अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से अब नक्सल समस्या समाप्ति की ओर है। इससे प्रदेश में शांति और विकास की गति और तेज होगी। कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है और यहां किसानों के लिए प्रभावी धान खरीदी नीति लागू है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘महतारी वंदन योजना’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके तहत 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा 05 लाख 30 हजार से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति, खान पान, रीति रिवाज परंपरा पर खुलकर बातें की और अपने राजनीतिक और सामाजिक अनुभव भी उनके साथ साझा किए।

विदेशी मेहमानों ने कहा - अद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा

अध्ययन दल में शामिल विदेश के सैन्य अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ प्रवास को “अद्भुत और यादगार” बताते हुए कहा कि राज्य भौगोलिक विविधताओं और उर्वर भूमि से समृद्ध है। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा की।
एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने कहा कि स्पष्ट नेतृत्व और सशक्त नीति के कारण प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ा है जिससे नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्य हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं—जैसे महिला सशक्तिकरण और आवास योजनाओं—का जमीनी स्तर पर सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को कुशल नेतृत्व का परिणाम बताया।

इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, आईजी  ओ पी पाल, अध्ययन दल में आईपीएस  अमनदीप सिंह कपूर, म्यांमार कर्नल लू जॉ आंग, ब्रिगेडियर मोहम्मद शाहिद अहमद, जापान के कर्नल उचीनो तोमोफुमी, ब्रिगेडियर कुंवर मान विजय सिंह राणा, सुश्री सुप्रिया घाघ, ब्रिगेडियर शिशिर थमैय्या, बांग्लादेश के ब्रिगेडियर जनरल फिरदौस आरिफ अहमद, ब्रिगेडियर केतन अरुण मोहिते, ब्रिगेडियर अनिरुद्ध चौहान, एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी, एयर कमोडोर  मूलनाथ गिरीश, डॉ. राजेश कुमार अस्थाना, भूटान के कर्नल समतेन चेनोर, ग्रीस के कर्नल कॉन्सटेंटिनॉस नीरस शामिल है।

उल्लेखनीय है कि नेशनल डिफेंस कॉलेज द्वारा प्रतिवर्ष एक साल का कोर्स आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 66वाँ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें 120 सैन्य तथा गैर सैन्य अधिकारियों का दल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 15 अधिकारियों का दल आर्थिक सुरक्षा और रणनीति विषय पर अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ पहुँचा, जिसमें 05 विदेशी सैन्य अधिकारी भी शामिल है। प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने नया रायपुर में शहर की व्यवस्था और प्लान, कृषि और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा, कांकेर के जंगल वारफेयर कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र का अवलोकन किया। इसके साथ ही बस्तर में सुरक्षा संबंधी विषयों से जुड़ी विशेष चर्चा, सुरक्षाबलों के साहसिक कार्य, पर्यटन स्थल, विभिन्न शासकीय आयोजनों में बस्तर की कला-संस्कृति, चित्रकोट जलप्रपात, कोंडागांव में शिल्पग्राम का भ्रमण किया। अगले दिन उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट और भिलाई के पुलिस थाना का भ्रमण कर कानून व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की।

CG - महानदी पुल के नीचे मिला युवक का शव, हत्या या आत्महत्या? जांच में जुटी पुलिस

CG - महानदी पुल के नीचे मिला युवक का शव, हत्या या आत्महत्या? जांच में जुटी पुलिस

 आरंग। आरंग थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पारागांव से सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां नेशनल हाईवे 53 पर महानदी पुल के नीचे 18 वर्षीय युवक की लाश मिली है। मृतक की पहचान ग्राम पारागांव निवासी प्रेमलाल पाल पिता राजाराम पाल (उम्र 18 वर्ष) के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर आरंग पुलिस पहुंच गई है। मृतक के शरीर में किसी प्रकार के चोट के निशान नहीं है।

आरंग थाना प्रभारी हरीश साहू ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मृतक अपनी शारीरिक समस्याओं से परेशान था, मौत से पहले उसने अपने भाई को व्हाट्सएप में अपनी परेशानी को बताया है।

बताया जा रहा है कि मृतक कल शाम को अपने दोस्त के साथ निकला था, निसदा मोड़ के पास मृतक प्रेमलाल पाल आइस्क्रीम खाने रुका था, और उसका दोस्त वहां से निकल गया था।

प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है। लेकिन पुलिस हत्या के साथ-साथ आत्महत्या के भी एंगल से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही मौत के असली कारणों का पता चल पाएगा।

 

Breaking : छत्तीसगढ़ में दुर्ग, बलरामपुर के बाद अब यहां अफीम की खेती का भंडाफोड़, तरबूज-ककड़ी की आड़ में चल रहा था नशे का खेल

Breaking : छत्तीसगढ़ में दुर्ग, बलरामपुर के बाद अब यहां अफीम की खेती का भंडाफोड़, तरबूज-ककड़ी की आड़ में चल रहा था नशे का खेल

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से नशे के अवैध कारोबार को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। तमनार क्षेत्र के आमाघाट में पुलिस ने दबिश देकर लगभग डेढ़ एकड़ में फैली अफीम की अवैध खेती को नष्ट किया है। इस मामले में पुलिस ने झारखंड के एक आरोपी को हिरासत में लिया है।

तरबूज की आड़ में अफीम का खेल

जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने पुलिस और स्थानीय लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए जमीन को तरबूज और ककड़ी की खेती के नाम पर किराए पर लिया था। खेत के बीचों-बीच अफीम की नशीली फसल उगाई जा रही थी, ताकि बाहर से देखने पर किसी को शक न हो।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारी

मुखबिर की सूचना पर रायगढ़ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आमाघाट में छापेमारी की। पुलिस ने झारखंड निवासी मार्शल सांगां को हिरासत में लिया है। लगभग 1.5 एकड़ में अफीम की फसल लहलहा रही थी।

15 दिनों में चौथा मामला

छत्तीसगढ़ में पिछले 15 दिनों के भीतर अफीम की खेती का यह चौथा मामला सामने आया है। जिसने पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।