रायपुर। विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी - जीरामजी) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 20 अगस्त, 2026 को आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं में योजना से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को योजना के प्रावधानों, अधिकारों, लाभों एवं अनुमेय कार्यों की जानकारी देने के साथ-साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के अंतर्गत लिए जाने वाले कार्यों का ग्राम सभा से अनुमोदन कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त को पत्रकार वार्ता में कहा था कि वीबी - जीरामजी के अंतर्गत सभी विकास कार्यों का चयन ग्राम सभा की स्वीकृति से किया जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा एवं वीबी - जीरामजी के माध्यम से राज्य को लगभग 6 हजार 855 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे, जो ग्रामीण रोजगार एवं विकास कार्यों के लिए राज्य में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय निवेश है। योजना के लिए वर्ष 2026-27 में 5,591.42 करोड़ रुपए का प्रस्तावित बजट रखा गया है तथा प्रथम किस्त के रूप में भारत सरकार से 1,538 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
मेरी बेटी, मेरा अभिमान 26 जनवरी, 2027 तक चलेगा
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास को नई गति देने के उद्देश्य से मेरी बेटी, मेरा अभिमान अभियान का भी शुभारंभ किया है। 15 अगस्त, 2026 से 26 जनवरी, 2027 तक चलने वाले इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक गांव में मुक्तिधाम एवं प्रतीक्षालय तथा ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालय निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे। इन कार्यों सहित योजना के अंतर्गत अन्य विकास कार्यों का चयन एवं अनुमोदन ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की सहभागिता एवं स्वीकृति के आधार पर किया जाएगा।
ग्राम सभा की मांग के आधार पर होंगे कार्य
20 अगस्त की ग्राम सभाओं में ग्राम की स्थानीय आवश्यकता, उपलब्ध संसाधनों तथा ग्रामीणों की मांग के आधार पर वित्तीय वर्ष 2026-27 में वीबी - जीरामजी के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्यों पर चर्चा की जाएगी। प्रस्तावित कार्यों को ग्राम सभा के समक्ष रखा जाएगा और अनुमोदन के पश्चात उन्हें नियमानुसार स्वीकृति एवं क्रियान्वयन के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।
वीबी - जीरामजी में 318 प्रकार के अनुमेय कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में शामिल
योजना के अंतर्गत 318 प्रकार के अनुमेय कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में शामिल किया गया है। इनमें 107 जल संरक्षण एवं जल संवर्धन, 90 ग्रामीण अधोसंरचना, 86 आजीविका संवर्धन तथा 35 जलवायु अनुकूलन एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्य शामिल हैं। ग्राम सभा में स्थानीय आवश्यकता के अनुसार इन कार्यों में से प्राथमिकता वाले कार्यों का चयन किया जा सकेगा।
ग्रामीण अधोसंरचना के अंतर्गत कार्य किए जाएंगे
जल संरक्षण के अंतर्गत तालाब, चेकडैम, रिचार्ज संरचनाएं, सिंचाई विस्तार, भू-जल एवं मृदा संरक्षण तथा वृक्षारोपण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। ग्रामीण अधोसंरचना के अंतर्गत सड़क, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, स्कूल कक्ष, ग्रामीण पुस्तकालय, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, मुक्तिधाम आदि कार्य किए जा सकेंगे। इसी प्रकार आजीविका संवर्धन तथा जलवायु अनुकूलन से जुड़े कार्य भी स्थानीय आवश्यकता के अनुसार लिए जाएंगे।
2 अक्टूबर से तैयार होगी विकसित ग्राम पंचायत योजना
20 अगस्त की ग्राम सभा में विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाएगी। 2 अक्टूबर, 2026 से ग्राम सभा एवं स्थानीय समुदाय की अनुशंसाओं और सहभागिता के आधार पर वीजीपीपी तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। यह योजना ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के अनुरूप तैयार की जाएगी। 20 अगस्त की ग्राम सभा में ग्रामीणों से गांव की आवश्यकताओं, प्राथमिकताओं एवं संभावित विकास कार्यों के संबंध में सुझाव प्राप्त किए जाएंगे, ताकि 2 अक्टूबर से प्रारंभ होने वाली वीजीपीपी निर्माण प्रक्रिया में इन सुझावों एवं ग्राम सभा की अनुशंसाओं का प्रभावी उपयोग किया जा सके।
कार्यों की शीघ्र स्वीकृति एवं क्रियान्वयन पर जोर
वीबी - जीरामजी के अंतर्गत राज्य को उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का प्रभावी एवं समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभाओं में अनुमोदित कार्यों को शीघ्रता से स्वीकृति प्रदान कर क्रियान्वयन की प्रक्रिया में लाने पर जोर दिया जाएगा। रोजगार की मांग के अनुसार श्रमिकों को समय पर कार्य उपलब्ध कराने, मजदूरी का समय पर भुगतान तथा कार्यों की गुणवत्ता एवं निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
स्थानीय आवश्यकता के आधार पर कार्यों का प्रस्ताव को ग्राम सभा से अनुमोदन
मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा है कि योजना के अंतर्गत कृषि कार्यों के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में 60 दिनों तक योजना के कार्य बंद रखने का प्रावधान है। अत: उपलब्ध कार्य अवधि का प्रभावी उपयोग करते हुए ग्राम सभा से अनुमोदित कार्यों को समय पर प्रारंभ करना आवश्यक है। ग्राम पंचायतों से अपेक्षा की गई है कि 20 अगस्त की ग्राम सभाओं में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मांग एवं स्थानीय आवश्यकता के आधार पर अधिक से अधिक पात्र कार्यों का प्रस्ताव तैयार कर ग्राम सभा से अनुमोदन कराया जाए। अनुमोदित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र स्वीकृति एवं क्रियान्वयन के लिए आगे बढ़ाया जाए, ताकि योजना के अंतर्गत उपलब्ध बजट का अधिकतम एवं समयबद्ध उपयोग हो सके तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा सके।
विकसित एवं आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण करना
वीबी - जीरामजी का उद्देश्य केवल ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, स्वच्छता, शिक्षा, आजीविका तथा सामाजिक सुविधाओं को मजबूत करते हुए विकसित एवं आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण करना है। ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी से योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, स्थानीय आवश्यकताओं की प्राथमिकता और बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकेंगे।
00 पार्थिव शिवलिंग निर्माण में बने सहभागी, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना
रायपुर। पवित्र सावन माह के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बगिया स्थित फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान अपनी पत्नी के साथ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण भी किया और लोगों से एक लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन के धार्मिक अनुष्ठान में सहभागी बने की अपील भी किया।

बताया जाता है कि मैनी नदी के तट पर स्थित फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में 17 से 19 अगस्त तक एक लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन का तीन न दिवसीय दिवसीय विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में मुख्यमंत्री साय एवं कौशल्या साय श्रद्धापूर्वक पार्थिव शिवलिंग निर्माण में सहभागी बने और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को सावन मास एवं नागपंचमी की बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा सदैव प्रदेशवासियों पर बनी रहे और छत्तीसगढ़ निरंतर विकास, शांति एवं समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता रहे। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के विकास और जनकल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है।
00 राजधानी से रोजगारधानी की ओर बढ़ता नवा रायपुर
रायपुर। नवा रायपुर अटल नगर अब केवल आधुनिक प्रशासनिक राजधानी के रूप में नहीं, बल्कि निवेश, उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। सुनियोजित शहरी विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक अधोसंरचना के साथ शहर में ऐसे उद्योगों को आकर्षित किया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसरों का आधार बन सकें। नवा रायपुर में टेक्सटाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और आईटी जैसे भविष्य के उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। औद्योगिक निवेश के इन प्रयासों का उद्देश्य केवल नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करना नहीं, बल्कि विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था को गति देना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना भी है।
टेक्सटाइल पार्क : हजारों रोजगार का नया केंद्र
नवा रायपुर के लेयर-2 स्थित ग्राम कुर्रू में टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इस परियोजना के लिए सीएसआईडीसी को 100 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश की शुरुआत अब जमीन पर भी दिखाई देने लगी है। स्विफ्ट टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड ने जून 2026 में 235 करोड़ रुपए के निवेश से गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का भूमिपूजन किया है। इस इकाई से करीब 4,650 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। वहीं पुनीत क्रिएशन के साथ 175 करोड़ रुपए के निवेश का समझौता किया गया है। इन परियोजनाओं को मिलाकर टेक्सटाइल पार्क में लगभग 10,000 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इस तरह टेक्सटाइल पार्क नवा रायपुर में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार के साथ रोजगार के नए अवसरों का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
132 एकड़ में फार्मा पार्क, स्वास्थ्य उद्योग को मिलेगी नई गति
स्वास्थ्य और औषधि निर्माण के क्षेत्र में भी नवा रायपुर एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सेक्टर-22 में 132 एकड़ भूमि सीएसआईडीसी को आवंटित की गई है, जहां फार्मा पार्क विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना में लगभग 2,000 करोड़ रुपए के निवेश और करीब 1,400 रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। फार्मा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों टोरेंट फार्मा, एविला फार्मास्युटिकल्स और विटालिस हेल्थ के साथ कुल 735 करोड़ रुपए के एमओयू किए जा चुके हैं। फार्मा पार्क के विकसित होने से दवा निर्माण के साथ इससे जुड़ी विभिन्न औद्योगिक और सहायक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भी बढ़ते कदम
भविष्य की अर्थव्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की भूमिका लगातार बढ़ रही है। नवा रायपुर ने इस क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। यश फैंस ने 110 करोड़ रुपए के निवेश से होम अप्लायंसेज निर्माण इकाई शुरू की है। यह निवेश नवा रायपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण निर्माण के क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए इलेक्ट्रॉनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर को भारत सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। यहां पीसीबी प्रोटोटाइपिंग, 3डी प्रिंटिंग और ईएमसी टेस्टिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
एमएसएमई बनेंगे औद्योगिक विकास की रीढ़
नवा रायपुर के औद्योगिक विकास की कहानी केवल बड़े निवेशों तक सीमित नहीं है। बड़े उद्योगों के साथ-साथ एमएसएमई क्षेत्र को भी मजबूत आधार दिया जा रहा है। सेक्टर-05 में विनिर्माण उद्योगों के लिए भूमि आवंटित की गई है। यहां वर्तमान में 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है, जबकि भविष्य में 12,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। एमएसएमई क्षेत्र के विस्तार से स्थानीय उद्यमिता और विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ बड़े उद्योगों के लिए सहायक औद्योगिक नेटवर्क विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
निवेश से रोजगार और रोजगार से आर्थिक गतिविधियों का विस्तार
नवा रायपुर में विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों की तस्वीर बताती है कि शहर के विकास का अगला चरण प्रशासनिक राजधानी से आगे बढ़कर निवेश और रोजगार के केंद्र के रूप में आकार ले रहा है। टेक्सटाइल पार्क में लगभग 10,000 रोजगार, फार्मा पार्क में करीब 1,400 रोजगार और रूस्रूश्व क्षेत्र में भविष्य में 12,000 से अधिक रोजगार की संभावनाएं - ये सभी मिलकर नवा रायपुर की अर्थव्यवस्था को अधिक विविध और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और आईटी क्षेत्र में विकसित हो रहा इकोसिस्टम नवा रायपुर की औद्योगिक संभावनाओं को और व्यापक बना रहा है। शहर में 2,000 सीटों वाला प्लग एंड प्ले आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है, जहां स्क्वायर बिज़नेस सर्विसेज़, वराइज़ इंडिया और विज़न प्लस जैसी आईटी कंपनियां कार्य कर रही हैं।

निवेश की नई तस्वीर, रोजगार का नया भविष्य
नवा रायपुर में औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण पहलू सेक्टर आधारित औद्योगिक क्लस्टरों का विकास है। टेक्सटाइल के लिए अलग क्षेत्र, फार्मा के लिए समर्पित पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की शुरुआत और एमएसएमई के लिए औद्योगिक भूमि—ये प्रयास शहर की अर्थव्यवस्था को विविधता प्रदान कर रहे हैं। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक सेवाओं के विकास की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। नवा रायपुर में सीबीडी रेलवे स्टेशन संचालित है और सेक्टर-1 तथा सेक्टर-40 में आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब प्रस्तावित हैं।
आईटी, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर से बनेगा भविष्य का डिजिटल इकोसिस्टम
नवा रायपुर में औद्योगिक विकास का दायरा पारंपरिक विनिर्माण तक सीमित नहीं है। सेक्टर-22 में सीबीडी रेलवे स्टेशन के पास करीब 1,000 करोड़ रुपए की लागत से एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जा रहा है। इसे रैकबैंक करीब 13.5 एकड़ क्षेत्र में विकसित कर रही है, जिसमें एक हिस्सा सेज के रूप में विकसित होगा। इसके अलावा सीटीआरएलएस भी नवा रायपुर में अपना डेटा सेंटर स्थापित करने जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंजीनियरिंग आधारित दूसरे सेज को भी मंजूरी मिल चुकी है। इसमें पॉलीमेटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 5जी और 6जी तकनीक के लिए जीएएन आधारित सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन करेगी।
युवाओं के लिए बदल रहा अवसरों का परिदृश्य
नवा रायपुर का औद्योगिक विस्तार युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसरों का आधार तैयार कर रहा है। टेक्सटाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और सेमीकंडक्टर जैसे विविध क्षेत्रों के विकास से उत्पादन, तकनीकी सेवाओं, प्रबंधन और अन्य कौशल आधारित क्षेत्रों में अवसर बढऩे की संभावनाएं हैं। इस लिहाज से नवा रायपुर की नई औद्योगिक तस्वीर केवल निवेश और कारखानों की कहानी नहीं है, बल्कि रोजगार आधारित आर्थिक विकास की दिशा में बढ़ते कदमों की भी कहानी है।
नवा रायपुर की बदलती पहचान
एक ओर नवा रायपुर में आधुनिक राजधानी की अधोसंरचना विकसित हो रही है, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक निवेश की नई परियोजनाएं शहर की आर्थिक तस्वीर को नया आकार दे रही हैं। भूमि, निवेश, उद्योग और रोजगार को एक-दूसरे से जोड़कर नवा रायपुर को ऐसी अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें औद्योगिक विकास के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ें। यही औद्योगिक विस्तार नवा रायपुर अटल नगर को आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के निवेश और रोजगार के प्रमुख केंद्रों में शामिल करने की मजबूत संभावनाएं तैयार कर रहा है।
एक शहर, कई औद्योगिक संभावनाएं
नवा रायपुर अटल नगर की विकास यात्रा अब केवल प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रह गई है। औद्योगिक निवेश को शहर की विकास रणनीति से जोड़कर रोजगार आधारित अर्थव्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। टेक्सटाइल पार्क में हजारों रोजगार की संभावना से लेकर फार्मा पार्क में बड़े निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की शुरुआत, एमएसएमई क्षेत्र के विस्तार और एआई डेटा सेंटर व सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के क्षेत्रों में निवेश तक—नवा रायपुर में उद्योगों की ऐसी श्रृंखला तैयार हो रही है, जो आने वाले वर्षों में शहर की आर्थिक पहचान को नई दिशा दे सकती है। आधुनिक राजधानी के रूप में पहचान बना चुका नवा रायपुर अब निवेश, उद्योग और रोजगार के नए गंतव्य के रूप में अपनी अगली पहचान गढ़ रहा है।
00 हल की मूठ थामते ही जीवंत हुईं खेती-किसानी से जुड़ी पुरानी स्मृतियां
00 मुख्यमंत्री ने कहा - किसान परिवार से होने के नाते खेती मेरे लिए केवल आजीविका नहीं, जीवन का संस्कार
00 छत्तीसगढ़ की माटी, कृषि परंपरा और मेहनतकश अन्नदाता किसान सदैव हृदय के सबसे करीब: साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपनी माटी और खेती-किसानी से गहरा जुड़ाव आज एक बार फिर देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सुबह जशपुर जिले के अपने गृहग्राम बगिया में खेत पहुंचे और पारंपरिक रूप से बैलों की जोड़ी के साथ हल चलाकर बियासी की। खेत में उतरकर हल की मूठ थामे मुख्यमंत्री साय सहज ही एक किसान की भूमिका में नजर आए। इस दौरान उन्होंने खेती-किसानी से जुड़ी अपनी पुरानी स्मृतियों को भी साझा किया। मुख्यमंत्री साय ने हरे-भरे खेत में मिट्टी की सौंधी सुगंध और बैलों के साथ खेती करते हुए कहा कि अपने गांव, अपनी माटी और अपने खेत से जुड़ाव का सुख ही अलग है। हल की मूठ थामते ही खेती-किसानी से जुड़ी पुरानी स्मृतियां एक बार फिर जीवंत हो उठती हैं। खेतों के बीच बिताया समय मन को असीम सुकून देने के साथ नई ऊर्जा से भर देता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और बचपन से खेती-किसानी को बहुत करीब से देखा और अनुभव किया है। खेती उनके लिए केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है। गांव और खेतों ने ही उन्हें श्रम का सम्मान करना, प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना सिखाया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की माटी, मेहनतकश किसानों और समृद्ध कृषि परंपराओं से जुड़ी हुई है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में खेती का महत्वपूर्ण स्थान है। पीढिय़ों से हमारे किसान अपने परिश्रम से धरती को सींचते हुए प्रदेश की समृद्धि की नींव मजबूत करते आए हैं। छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहार, परंपराएं और ग्रामीण जीवन भी कृषि से गहराई से जुड़े हुए हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना महत्वपूर्ण है। खेती हमें परिश्रम, धैर्य और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है। किसान खेत में केवल फसल नहीं उगाता, बल्कि अपने श्रम से पूरे समाज के जीवन और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी संबल देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी, हमारी समृद्ध कृषि परंपरा और हमारे मेहनतकश अन्नदाता किसान सदैव उनके हृदय के सबसे करीब हैं। किसानों की खुशहाली और कृषि की समृद्धि ही प्रदेश की समृद्धि का मजबूत आधार है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अन्नदाता किसानों के परिश्रम को नमन करते हुए उनके जीवन में खुशहाली तथा खेतों में भरपूर फसल की कामना की।
खेती से मुख्यमंत्री का रहा है पुराना नाता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जीवन ग्रामीण परिवेश और खेती-किसानी से गहराई से जुड़ा रहा है। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वे अपने गांव, खेत और ग्रामीण परिवेश से जुड़कर आत्मीयता का अनुभव करते हैं। आज सुबह गृहग्राम बगिया के खेत में बैलों के साथ हल चलाते मुख्यमंत्री की सहजता में अपनी माटी और कृषि परंपरा के प्रति उनका यही गहरा लगाव दिखाई दिया।
रायपुर। राजधानी रायपुर से प्रेमी जोड़े की आत्महत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि दोनों के शव फांसी के फंदे से लटके हुए मिले। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया।
सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, दोनों ने यह कदम क्यों उठाया, इसकी वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। घटना की खबर फैलते ही गांव में मातम और दहशत का माहौल है।
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला राजधानी रायपुर के छेरीखेड़ी इलाके का है। यहां प्रेमी जोड़े ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतकों की पहचान मेघराज साहू और नंदिनी धुर्व के रूप में हुई है। दोनों छेरीखेड़ी गांव के रहने वाले थे और उनके बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों के शव पेड़ से लटके मिले, जिसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही मंदिर हसौद थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस ने शुरू की जांच
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया है। FSL की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोनों की मौत के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए परिजनों और आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है। घटना मंदिर हसौद थाना क्षेत्र की है।
रायपुर। राजधानी रायपुर में आज सुबह से बारिश का दौर जारी है। कई इलाकों में लगातार पानी गिरने से सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ गई हैं। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के दौरान छत्तीसगढ़ के अधिकांश इलाकों में बारिश होने का अनुमान जताया है। उत्तर छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति बन सकती है।
पिछले 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हुई। इस दौरान पेण्ड्रा रोड में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम के मौसमी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक बारिश सामान्य के आसपास रही है, हालांकि कुल वर्षा में करीब 9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
रायपुर में सुबह से बारिश, कई जगह पानी भरा
रायपुर में सुबह से रुक-रुककर और कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। घने बादलों के कारण दिन में भी अंधेरा छाया हुआ है। बारिश के चलते शहर की कुछ सड़कों और निचले इलाकों में पानी जमा होने की स्थिति बनी है।
आज राजधानी में अधिकतम तापमान करीब 28 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने दिनभर बादल छाए रहने के साथ बारिश की संभावना जताई है।
बंगाल की खाड़ी का सिस्टम हुआ सक्रिय
उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे उत्तरी ओडिशा तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र अब ज्यादा स्पष्ट हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक यह सिस्टम अगले 24 घंटे में और ताकतवर होकर डिप्रेशन में बदल सकता है।
इसका असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी पड़ रहा है। इसी वजह से अगले तीन दिनों तक प्रदेश में बारिश का दौर बने रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ भारी बारिश भी हो सकती है।
इन जिलों में भारी बारिश और तेज हवा का अलर्ट
मौसम विभाग ने रायपुर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है।
इन क्षेत्रों में बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद और बलरामपुर में मध्यम बारिश होने का अनुमान है।
रविवार को इन इलाकों में सबसे ज्यादा बरसा पानी
रविवार को प्रदेश के कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई। भैसमा और लवन में 9-9 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके बाद ओडगी में 8 सेंटीमीटर और कोटाडोल में 7 सेंटीमीटर पानी बरसा।
बेरला, सिमगा और थानखमरिया में 6-6 सेंटीमीटर, जबकि छाल और मनेंद्रगढ़ में 5-5 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा तिल्दा, दरी, सुहेला, नांदघाट, कटघोरा, लैलूंगा, पेण्ड्रा रोड, भाटापारा, सहसपुर लोहारा, कसडोल, हरदीबाजार और कोंटा में करीब 3 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।
अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अगले तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ में बारिश का प्रभाव बना रह सकता है। उत्तर और मध्य हिस्सों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है, जबकि अन्य इलाकों में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है।
लगातार बारिश को देखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। तेज बारिश के दौरान जलभराव वाले रास्तों से गुजरने और नदी-नालों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है।
पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा से पहले चेन स्नैचिंग, कलश यात्रा में आरोपियों ने महिलाओं को बनाया निशाना,
दुर्ग/भिलाई। अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा शुरू होने से पहले ही भिलाई में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को चोरों ने चुनौती दे दी। रविवार को निकाली गई भव्य कलश यात्रा के दौरान महिलाओं के गले से चेन झपटने के करीब चार से पांच मामले सामने आने की जानकारी मिली है। घटनाओं के बाद कलश यात्रा में शामिल महिलाओं में नाराजगी देखने को मिली और भीड़ में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे।
दरअसल, भिलाई के सेक्टर-6 स्थित जयंती स्टेडियम में 17 से 23 अगस्त तक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा से पहले रविवार को सेक्टर-5 मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। रिमझिम बारिश के बीच निकली इस यात्रा में 11 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हुईं। यात्रा सेक्टर-5 मंदिर से शुरू होकर जयंती स्टेडियम स्थित कथा पंडाल में पहुंचकर समाप्त हुई।
बताया जा रहा है कि इसी दौरान भारी भीड़ का फायदा उठाकर चोरों ने महिलाओं को निशाना बनाया। कलश यात्रा के दौरान करीब चार से पांच महिलाओं के साथ चेन स्नैचिंग के प्रयास या घटनाओं की शिकायत पुलिस तक पहुंची है। घटना के बाद महिलाओं में काफी आक्रोश देखने को मिला।
700 से ज्यादा जवानों की तैनाती
शिव महापुराण कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी के मुताबिक, कथा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए 20 राजपत्रित अधिकारियों समेत 700 से अधिक पुलिस जवानों की ड्यूटी लगाई गई है।
पुलिस के अनुसार, कलश यात्रा के दौरान चेन स्नैचिंग के प्रयास की शिकायतें मिली हैं। मामले की जांच सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। पुलिस ने दो से तीन संदिग्ध महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। पुलिस का कहना है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कथा से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में कथा से पहले ही कलश यात्रा में चेन स्नैचिंग की घटनाओं ने पुलिस के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी कथा के दौरान भारी भीड़ के बीच श्रद्धालुओं, खासकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होगी।
रायपुर। 23 वर्ष पश्चात इस वर्ष नाग पंचमी सोमवार को मनाई जाएगी। सोमवार का दिन होने के कारण इसे सोमवती नागपंचमी कहा जाएगा। इस अद्भुत संयोग के लिए अब 14 वर्षों का इंतजार करना होगा। सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। नाग पंचमी के दिन सावन के तीसरे सोमवार का व्रत भी किया जाएगा।
ऐसा संयोग इससे पहले साल 2003 में बना था। भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का प्रत्येक सोमवार विशेष माना जाता है, वहीं नाग पंचमी का पर्व नाग देवता की पूजा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। एक ही दिन इन दोनों शुभ अवसरों का संयोग बनने से यह विशेष फलदायी होगा। पंचमी तिथि की शुरुआत 16 अगस्त को दोपहर 4 बजकर 52 मिनट से हो चुकी है।
शिव-नाग पूजा से दूर होंगे कालसर्प व पितृ दोष
पंचमी तिथि का समापन सोमवार शाम 5 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी आज मनाई जाएगी। इस दिन शुभ योग, शुक्ल योग, रवि नामक योग भी बन रहा है। इन शुभ योग में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा अर्चना करने से कालसर्प दोष, पितृ समेत कई दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति भी आती है। इन शुभ योग के साथ गुरु के उच्च राशि में होने से हंसराज योग भी बन रहा है।
इसलिए पंचमी तिथि पर पूजन
ज्योतिष शास्त्र में हर तिथि की अधिष्ठात्री शक्ति और देवता होते हैं, इसी क्रम में पंचमी तिथि का संबंध नाग देवता से माना गया है। इसलिए सावन मास की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। सावन भगवान शिव का प्रिय मास है और शिवजी का नागों से संबंध भी है। महादेव ने अपने गले में नागराज वासुकी को धारण किया है, वहीं भगवान विष्णु के पास शेषनाग है। पंचमी तिथि नाग देवता को समर्पित है, इसलिए सालभर की सभी पंचमी तिथि में सावन मास की पंचमी तिथि नाग पूजन के लिए सबसे उपयुक्त मानी गई है।
2 घंटे 37 मिनट का समय सर्वोत्तम
नाग पंचमी पर पूजन के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 5 बजकर 50 मिनट से 8 बजकर 28 मिनट तक है। नाग देवता की पूजा के लिए 2 घंटे 37 मिनट का समय मिलेगा। इस अवधि में भक्त विधि विधान के साथ नाग देवता के साथ महादेव की आराधना भी कर सकते हैं और कालसर्प दोष, पितृ दोष समेत नाग संबंधी सभी दोषों के लिए पूजा व उपाय कर सकते हैं। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा करना शुभ रहेगा।
- ब्रह्म मुहूर्तः तड़के 4:25 बजे से 5:09 बजे तक
- अभिजित मुहूर्तः दोपहर 12 बजे से 12:52 बजे तक
- विजय मुहूर्तः दोपहर 2:37 बजे से 3:29 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्तः संध्या 6:59 बजे से 7:21 बजे
दुर्ग/भिलाई। भिलाई में बीएसपी के सेवानिवृत्त कर्मी से करीब 45 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने फेसबुक के जरिए ऑनलाइन ट्रेडिंग में कम समय में भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया। इसके बाद पंजीयन, मार्जिन और टैक्स समेत अलग-अलग शुल्क के नाम पर विभिन्न बैंक खातों में रकम जमा कराई गई।
मामले में दुर्ग पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश के बैतूल से 24 वर्षीय आरोपी विशाल नागले को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके कब्जे से मोबाइल फोन, चेकबुक और पहचान संबंधी दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस अब ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
फेसबुक के जरिए बनाया संपर्क
जानकारी के मुताबिक, आरोपियों ने फेसबुक के माध्यम से बीएसपी के सेवानिवृत्त कर्मी से संपर्क किया। ऑनलाइन ट्रेडिंग में कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने का झांसा देकर उसे निवेश के लिए तैयार किया गया। शुरुआत में ट्रेडिंग के नाम पर भरोसा कायम किया गया और बाद में अलग-अलग शुल्क बताकर लगातार रकम जमा कराई जाने लगी।
आरोपियों ने पंजीयन, मार्जिन और टैक्स के नाम पर पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए। धीरे-धीरे ठगी की रकम करीब 45 लाख रुपये तक पहुंच गई।
शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने भिलाई नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर दुर्ग पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने बैंक खातों में हुए लेनदेन, मोबाइल नंबर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपी विशाल नागले के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने बैतूल पहुंचकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस के मुताबिक, मामले में आरोपी के साथ अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। बरामद मोबाइल, चेकबुक, दस्तावेज और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच के जरिए पुलिस साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
दुर्ग पुलिस ने लोगों से ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर मिलने वाले अनजान ऑफर और सोशल मीडिया के झांसे से सावधान रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि कम समय में भारी मुनाफे का लालच देने वाले लोगों के कहने पर किसी भी बैंक खाते में रकम ट्रांसफर न करें और निवेश से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की जांच जरूर करें।
रायपुर: बिलासपुर जिला स्थित बिल्हा विकासखंड के ग्राम कड़ार में आयोजित भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने डॉ. खूबचंद बघेल और स्वामी आत्मानंद महाराज जैसी महान विभूतियों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में लाखों लोग जन्म लेते हैं, लेकिन अमर वही होते हैं जो अपने सत्कर्मों से समाज का निर्माण करते हैं और इतिहास रचते हैं।
इस अवसर पर मंत्री ने 20 लाख रूपए से बनने वाले सामुदायिक भवन का भूमि पूजन किया। छत्तीसगढ़ निर्माण की पृष्ठभूमि का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का सपना देखा गया था, और मार्ग में निरंतर आगे बढ़ने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने उस सपने को साकार किया। यदि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ का निर्माण न हुआ होता, तो प्रदेश की स्थिति आज भी वैसी ही बनी रहती। आज सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरी और अधोसंरचना के हर क्षेत्र में तेज़ी से काम हो रहा है। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और राजस्व का पूरा पैसा अब यहीं के सर्वांगीण विकास में उपयोग हो रहा है।
सामाजिक बदलाव पर प्रकाश डालते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि कभी पूर्णतः कृषि पर आधारित हमारा समाज अब व्यवसाय, व्यापार और नौकरियों के क्षेत्र में भी तेज़ी से आगे बढ़ा है। लोगों के रहन-सहन का स्तर बदला है; जिनके पास कभी साइकिल नहीं थी, वे आज दोपहिया, चारपहिया और हवाई यात्रा तक का आनंद ले रहे हैं। गांव-गांव में महज 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में स्कूल, हायर सेकेंडरी विद्यालय और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है। इस भौतिक प्रगति के साथ हम सभी को सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है।आधुनिकता के इस दौर में गांव-घर का पारस्परिक प्रेम और पारिवारिक मर्यादाएं प्रभावित हो रही हैं। प्रगति के साथ-साथ अपनी प्राचीन संस्कृति, परंपरा और संस्कारों को बनाए रखना बेहद अनिवार्य है, क्योंकि संस्कारों के बिना जीवन अधूरा है। हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना होगा जहां आपसी प्रेम, भाईचारा, संवेदनशीलता और एक-दूसरे के दुख-सुख में खड़े रहने की भावना सदैव जीवंत रहे।
वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और मार्गदर्शन से मिल रही काम करने की प्रेरणा: धरमलाल कौशिक
कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक धरमलाल कौशिक ने अपने उद्बोधन में वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन और जीवन अनुभवों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं का जीवन अनुभवों से भरा होता है, जिससे सीखकर, समझकर और पढ़कर संगठन व समाज सेवा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। पृथक छत्तीसगढ़ के निर्माण के बाद से लेकर आज तक प्रदेश ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। दूर-दराज़ के क्षेत्रों तक भौतिक साधनों और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच ने आम नागरिक के जीवन को सुगम बनाया है। बिल्हा विकासखंड के ग्राम कड़ार में आयोजित इस भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के क्रेडा के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी,सरपंच ब्रजेश दुबे,जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ नागरिक और ग्रामीण जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
धमतरी। जिले में जल पर्यटन और साहसिक खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रुद्री बांध परिसर में कयाकिंग अकादमी का शुभारंभ किया गया। इस पहल से जहां युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलेंगे, वहीं रुद्री और गंगरेल क्षेत्र में इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रुद्री बांध परिसर में कयाकिंग अकादमी का शुभारंभ नगर निगम धमतरी के महापौर रामू रोहरा ने किया। गंगरेल ब्लू एडवेंचर स्पोर्ट्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ और कर्मा महिला स्व-सहायता समूह रुद्री के सहयोग से शुरू हुई यह अकादमी जिले में जल आधारित साहसिक गतिविधियों को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जल क्रीड़ा गतिविधियों का किया जाएगा विस्तार- कलेक्टर
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि आने वाले समय में यहां कयाकिंग के अलावा अन्य जल क्रीड़ा गतिविधियों का भी विस्तार किया जाएगा। जलाशय की जल गुणवत्ता में सुधार, प्रदूषण और दुर्गंध को जैविक तरीके से कम करने तथा जल क्रीड़ा स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से बायो-क्यूब भी लगाए जाएंगे। इससे पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। कयाकिंग अकादमी का उद्देश्य सिर्फ साहसिक खेलों को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाना भी है। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन आधारित आजीविका को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कयाकिंग पर्यटकों के लिए बनेगा नया आकर्षण- महापौर
महापौर रामू रोहरा ने कहा कि रुद्री बांध की प्राकृतिक सुंदरता और मनोरम परिवेश को देखते हुए कयाकिंग पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगा। इससे धमतरी के पर्यटन मानचित्र पर रुद्री और गंगरेल क्षेत्र को नई पहचान मिल सकती है।
महापौर रामू रोहरा और कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने स्वयं कयाक में बैठकर चप्पू चलाया और कयाकिंग का रोमांचक अनुभव लिया। अकादमी का संदेश है—“Paddle Your Way to Adventure – Live Life One Stroke at a Time”, जो युवाओं में साहस, आत्मविश्वास और प्रकृति से जुड़ाव की भावना को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
रुद्री बांध में शुरू हुई यह कयाकिंग अकादमी धमतरी में साहसिक पर्यटन, जल क्रीड़ा और स्थानीय रोजगार के नए अवसरों का रास्ता खोल सकती है। आने वाले समय में यहां अन्य जल गतिविधियों के विस्तार से रुद्री और गंगरेल क्षेत्र पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बनने की उम्मीद है।
बलौदाबाजार। जिले के लवन थाना क्षेत्र के ग्राम चितावर में 24 वर्षीय शतरूपा ध्रुव की हत्या ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या के पीछे जादू-टोने को लेकर पैदा हुआ शक वजह बना। इस मामले में शतरूपा के रिश्तेदार और पड़ोसी रामदयाल ध्रुव पर हत्या का आरोप है।
पत्नी की मौत का ठीकरा शतरूपा के परिवार पर
पुलिस के अनुसार, आरोपी की पत्नी की मौत के बाद उसके मन में यह शक घर कर गया था कि शतरूपा की मां ने जादू-टोना किया है। यही शक धीरे-धीरे बदले की भावना में बदल गया। आरोप है कि इसी अंधविश्वास के चलते शतरूपा को निशाना बनाया गया और उसकी जान चली गई। सबसे भयावह बात यह है कि शतरूपा का आरोपी से कोई प्रत्यक्ष व्यक्तिगत विवाद नहीं बताया जा रहा था। बावजूद इसके, किसी दूसरे व्यक्ति के प्रति पैदा हुए शक और अंधविश्वास की कीमत एक 24 वर्षीय युवती को अपनी जिंदगी देकर चुकानी पड़ी।
जब अंधविश्वास बना हत्या की वजह
यह मामला सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच का खतरनाक चेहरा है, जिसमें बीमारी, मौत या परिवार में आने वाली किसी परेशानी का कारण वैज्ञानिक तरीके से तलाशने के बजाय जादू-टोना और टोना-टोटका मान लिया जाता है। अंधविश्वास की यही सोच कई बार किसी महिला को डायन बताने, किसी परिवार को सामाजिक रूप से बहिष्कृत करने और यहां तक कि हिंसा और हत्या तक पहुंच जाती है। डर, अफवाह और बिना प्रमाण के लगाए गए आरोप जब दिमाग पर हावी हो जाते हैं, तो रिश्ते भी दुश्मनी में बदल जाते हैं।
आंकड़े भी डराने वाले
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 में जादू-टोने के आरोप से जुड़े मामलों में 85 लोगों की हत्या हुई थी। वर्ष 2021 में यह संख्या 68 थी। वर्ष 2013 से 2022 के बीच ऐसे मामलों में 1,064 लोगों की जान गई। इन घटनाओं में महिलाओं को भी बड़ी संख्या में निशाना बनाया गया।
शतरूपा की मौत छोड़ गई बड़ा सवाल
शतरूपा की हत्या यह सवाल छोड़ गई है कि आखिर कब तक बीमारी, मौत और परेशानियों का जिम्मेदार किसी इंसान को ठहराकर उसके खिलाफ हिंसा की जाएगी? आधुनिक समाज में भी अगर बिना किसी प्रमाण के जादू-टोने का शक किसी की जान ले ले, तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना पर भी गंभीर सवाल है।
अंधविश्वास के खिलाफ लोगों को जागरूक करने की जरुरत
अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, स्कूल, समाज, सामाजिक संगठन और प्रशासन सभी को मिलकर वैज्ञानिक सोच और जागरूकता को बढ़ावा देना होगा। शतरूपा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी मौत समाज को एक जरूरी संदेश दे रही है- शक को सच मान लेना खतरनाक है और अंधविश्वास को हिंसा का आधार बनने देना उससे भी ज्यादा खतरनाक।
00 लंबे समय से रिक्त पदों पर भर्ती से विभाग को मिलेगी नई ऊर्जा, जमीनी स्तर पर पोषण अभियानों का होगा बेहतर क्रियान्वयन
रायपुर। महिला सशक्तिकरण और नौनिहालों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध छत्तीसगढ़ सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सुशासन सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों से, विभाग के अंतर्गत पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर) के 50 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती को आधिकारिक सहमति प्रदान कर दी गई है।
मैदानी स्तर पर विभाग की योजनाओं—विशेषकर आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारू संचालन, पोषण अभियानों की निगरानी, महत्वपूर्ण सामाजिक पहलों के क्रियान्वयन—में पर्यवेक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। लंबे समय से इन पदों के रिक्त होने के कारण मैदानी स्तर पर कार्य का दबाव था। इन 50 नए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से विभागीय ढांचे को ऐतिहासिक मजबूती मिलेगी और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे हितग्राहियों तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगा।
सुशासन के संकल्प को मिल रही सिद्धि
इस महत्वपूर्ण स्वीकृति पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और दूरदर्शी नेतृत्व के चलते आज विभाग को यह अहम स्वीकृति मिली है। पर्यवेक्षकों की कमी से जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग में जो चुनौतियां आ रही थीं, वे अब दूर होंगी। हमारी सरकार माताओं और बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। इन नई नियुक्तियों से विभाग की कार्यक्षमता में व्यापक सुधार आएगा और हमारी आंगनबाड़ी व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी।
प्रस्ताव को मिली वित्तीय एवं प्रशासकीय स्वीकृति
ज्ञात हो कि संचालनालय, महिला एवं बाल विकास द्वारा इन पदों की पूर्ति के लिए शासन से अनुमति मांगी गई थी। विभागीय मंत्री के निर्देश पर इस प्रक्रिया में तेजी लाई गई और 13 अगस्त 2026 को वित्त विभाग द्वारा 50 पर्यवेक्षकों की भर्ती के लिए विधिवत सहमति जारी कर दी गई है। इसके पश्चात महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा भी आदेश जारी कर भर्ती प्रक्रिया का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया गया है। इस बहुप्रतीक्षित फैसले से न केवल विभाग के कार्यों में गति आएगी, बल्कि प्रदेश की योग्य युवतियों और महिलाओं को शासकीय सेवा में आकर समाज के लिए कार्य करने का एक बड़ा अवसर भी प्राप्त होगा।
रायपुर: रक्षाबंधन के पावन अवसर पर देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात सैनिक भाइयों के प्रति सम्मान, स्नेह और कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से संचालित ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4’ अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सरगुजा की महिलाओं एवं स्काउट-गाइड द्वारा एकत्रित रक्षा सूत्र सैनिकों के लिए रवाना किए। अंबिकापुर के सर्किट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने स्वयं रक्षा सूत्र भेजकर सैनिकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया।
मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि यह लगातार चौथा वर्ष है, जब छत्तीसगढ़ की बहनों की ओर से देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिaए रक्षा सूत्र भेजे जा रहे हैं। यह अभियान प्रदेश की महिलाओं के सैनिक भाइयों के प्रति स्नेह, सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के अवसर पर जब पूरा देश अपने परिवार के साथ खुशियां मनाता है, तब हमारे सैनिक भाई अपने परिवार से दूर रहकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में डटे रहते हैं। उनके त्याग और समर्पण को नमन करते हुए बहनों की ओर से भेजा गया यह रक्षा सूत्र प्रेम, सम्मान और आशीर्वाद का संदेश लेकर जवानों तक पहुंचेगा।

रक्षा सूत्र सैनिकों के लिए बहनों के स्नेह का संदेश
श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि रक्षा सूत्र केवल एक धागा नहीं, बल्कि सैनिकों और देशवासियों के बीच भावनात्मक संबंध का प्रतीक है। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की माताएं और बहनें देश के वीर जवानों को यह संदेश दे रही हैं कि पूरा प्रदेश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपने परिवार और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से दूर रहने वाले सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि इस प्रकार के अभियान समाज में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करते हैं। छत्तीसगढ़ की महिलाओं द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए रक्षा सूत्र जब सैनिक भाइयों की कलाइयों पर बंधेंगे, तो उनमें प्रदेश की बहनों के स्नेह और आशीर्वाद की अनुभूति होगी।

चौथे वर्ष में पहुंचा ‘सिपाही रक्षा सूत्र’ अभियान
अभियान के संयोजक एवं पूर्व सैनिक महासभा के अध्यक्ष श्री महेंद्र प्रताप सिंह राणा ने बताया कि ‘सिपाही रक्षा सूत्र’ अभियान की शुरुआत बिलासपुर से हुई थी। वर्ष 2023 में लगभग 6 लाख 71 हजार, वर्ष 2024 में लगभग 9 लाख और वर्ष 2025 में 12 लाख 21 हजार रक्षा सूत्र सैनिकों तक भेजे गए। इस तरह पिछले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ से लगभग 27 लाख 92 हजार रक्षा सूत्र सैनिकों के सम्मान में भेजे जा चुके हैं।
वर्ष 2026 में अभियान का चौथा चरण ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4’ के रूप में संचालित किया जा रहा है। इस वर्ष लगभग 21 लाख रक्षा सूत्र एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के माध्यम से थल सेना, जल सेना और वायु सेना के जवानों तक भी छत्तीसगढ़ की बहनों का रक्षा सूत्र पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

अंबिकापुर से जशपुर होते हुए रांची रवाना होंगे रक्षा सूत्र
अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम के बाद रक्षा सूत्रों से भरी वाहन रैली जशपुर होते हुए रांची की ओर रवाना होगी। इसके बाद विभिन्न माध्यमों से देश के अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात सैनिकों तक रक्षा सूत्र पहुंचाए जाएंगे।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह, पूर्व सांसद श्री कमल भान सिंह, श्री किसन सिंह, श्री भारत सिंह सिसौदिया, श्री विनोद हर्ष, श्रीमती अरुणा सिंह सहित जनप्रतिनिधि, पूर्व सैनिक महासभा के पदाधिकारी, स्काउट-गाइड की सदस्याएं एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
रायपुर: भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अटल जी भारतीय राजनीति के ऐसे विराट व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने विचारों, सिद्धांतों, संवेदनशील नेतृत्व और राष्ट्रहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने की भावना से सार्वजनिक जीवन में एक नई मिसाल कायम की। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी का छत्तीसगढ़ से विशेष और आत्मीय संबंध रहा है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। छत्तीसगढ़ के गठन का निर्णय केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था, बल्कि यह प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं, पहचान और विकास की संभावनाओं को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक निर्णय था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी छत्तीसगढ़ की रजत जयंती के अवसर पर अटल जी को राज्य के निर्माण की दूरदर्शी सोच वाला नेता बताते हुए उनके योगदान को स्मरण कर चुके हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री अग्रवाल ने कहा कि अटल जी ने राजनीति में विचारों की गरिमा, संवाद की संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वाेच्च स्थान दिया। वे अपनी प्रभावशाली वाणी के साथ-साथ सहज, सरल और संवेदनशील व्यक्तित्व के लिए भी सदैव याद किए जाते रहेंगे। उन्होंने राष्ट्रहित को राजनीति से ऊपर रखा और विभिन्न विचारधाराओं के लोगों के साथ संवाद एवं समन्वय की लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि अटल जी का व्यक्तित्व केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं था। वे एक संवेदनशील कवि, प्रखर वक्ता और भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्र चेतना के सजग प्रतिनिधि थे। उनके विचारों में देश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरा सम्मान और आधुनिक भारत के निर्माण की स्पष्ट दृष्टि दिखाई देती थी। उनकी सरकार के कार्यकाल में देश ने अधोसंरचना, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, परमाणु क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि अटल जी ने देश को विकास के साथ अपनी जड़ों और विरासत से जुड़े रहने का संदेश दिया। आज छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोककला, लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य को देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में अटल जी की दूरदर्शिता और विकास के साथ विरासत को सम्मान देने की सोच विशेष रूप से प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन और संस्कृति के विकास के प्रयासों में भी अटल जी की उस सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक संपदा को विकास का आधार बनाया जा सकता है। राज्य की ऐतिहासिक धरोहरें, पुरातात्विक स्थल, जनजातीय संस्कृति, लोककलाएं, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक पर्यटन केंद्र छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन के साथ पर्यटन को रोजगार और आर्थिक अवसरों से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी को वर्ष 2014 में देश के सर्वाेच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके राष्ट्र के प्रति आजीवन समर्पण और अतुलनीय योगदान का सम्मान है। अटल जी का जीवन हमें सिखाता है कि सार्वजनिक जीवन में सिद्धांत, संवेदनशीलता, राष्ट्रभक्ति और जनसेवा का महत्व सर्वाेपरि है। उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए हम सभी को छत्तीसगढ़ के विकास, समृद्धि और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लेना चाहिए।
अग्रवाल ने पुण्यतिथि पर श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी को नमन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती और प्रदेश की जनता उनके ऐतिहासिक योगदान को सदैव कृतज्ञता के साथ स्मरण करती रहेगी। अटल जी ने जिस छत्तीसगढ़ की कल्पना की थी, उसे विकसित, समृद्ध, आत्मविश्वासी और अपनी संस्कृति एवं विरासत पर गर्व करने वाला प्रदेश बनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
रायपुर: छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता, नए भारत के स्वप्नदृष्टा एवं पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी का जीवन राष्ट्रसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों, दृढ़ संकल्प और सुशासन का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने देश के विकास और राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारत को नई दिशा प्रदान की।
मंत्री चौधरी ने कहा कि अटल जी के नेतृत्व में पोखरण परमाणु परीक्षण के निर्णायक कदम से भारत की रणनीतिक शक्ति को नई मजबूती मिली। साथ ही, उन्होंने आधुनिक बुनियादी ढाँचे के विकास की मजबूत नींव रखी, जिसके दूरगामी परिणाम आज देश की प्रगति में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अटल जी के नेतृत्व और दूरदर्शिता से ही छत्तीसगढ़ को एक पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व मिला। छत्तीसगढ़ की जनता सदैव उनके योगदान को कृतज्ञता के साथ स्मरण करती रहेगी।
वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि अटल जी का अटूट राष्ट्रसमर्पण, सरल व्यक्तित्व, ओजस्वी विचार और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता सदैव देशवासियों को प्रेरणा देती रहेगी। उनके आदर्शों पर चलते हुए विकसित, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर अपनी पहली बाइक रेंटल सेवा शुरू कर दी है। अब यात्रियों को स्टेशन से बाहर निकलने के बाद ऑटो या टैक्सी का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। वे अपनी जरूरत के मुताबिक बाइक किराये पर लेकर शहर में आसानी से सफर कर सकेंगे।
स्टेशन परिसर में कोच रेस्टोरेंट के पास शुरू की गई यह सेवा 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन उपलब्ध रहेगी। यात्री महज 100 रुपये में चार घंटे के लिए बाइक किराये पर ले सकते हैं। इसके लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की पहली बाइक रेंटल सेवा
रेलवे के अनुसार बिलासपुर स्टेशन पर शुरू की गई यह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की पहली बाइक रेंटल सेवा है। इसका उद्देश्य यात्रियों को स्टेशन से शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने के लिए तेज, सुविधाजनक और किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
सेवा का शुभारंभ प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक विजय कुमार ने फीता काटकर किया। इस दौरान वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनुराग कुमार सिंह समेत वाणिज्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
ऑटो-टैक्सी के इंतजार से मिलेगी राहत
बाइक रेंटल सुविधा शुरू होने से खासतौर पर उन यात्रियों को राहत मिलेगी, जिन्हें शहर में कम दूरी का सफर करना है। ट्रेन से उतरने के बाद यात्री ऑटो या टैक्सी का इंतजार किए बिना सीधे बाइक किराये पर लेकर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
यह सुविधा पर्यटकों, छात्रों, व्यावसायिक यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार शहर के विभिन्न इलाकों में घूमने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
24 घंटे मिलेगी सुविधा
बाइक रेंटल सेवा 24 घंटे और सातों दिन संचालित होगी। सेवा का लाभ लेने के लिए यात्री को वैध ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड उपलब्ध कराना होगा।
जानें कितने घंटे का कितना किराया
रेलवे ने बाइक किराये की अलग-अलग दरें निर्धारित की हैं।
- 4 घंटे तक — 100 रुपये
- 4 से 8 घंटे — 200 रुपये
- 8 से 16 घंटे — 300 रुपये
- 16 से 24 घंटे — 400 रुपये
बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर बाइक रेंटल सुविधा शुरू होने से यात्रियों को स्टेशन से शहर तक आने-जाने के लिए एक नया, स्वतंत्र और किफायती विकल्प मिल गया है। रेलवे की यह पहल यात्री सुविधाओं के विस्तार और स्टेशनों पर आधुनिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
रायपुर:- छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स के लिए राहत की खबर आई है। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2026-27 में प्रवेश की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी है।
सीटें खाली होने के कारण बढ़ाई डेट
पहले कॉलेजों में प्रवेश की अंतिम तिथि 14 अगस्त निर्धारित की गई थी। कई सीटें रिक्त रहने की स्थिति को देखते हुए विभाग ने विद्यार्थियों को अतिरिक्त अवसर देने का फैसला लिया है।

बलरामपुर। जिले के रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में आज हाथियों का आतंक देखने को मिला। जहां शिवपुर के जंगल में भैंस चराने के दौरान एक ग्रामीण पर नर हाथी ने हमला कर दिया। हाथी के हमले में ग्रामीण की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि यह नर हाथी झारखंड की ओर से क्षेत्र में पहुंचा है।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के इलाके में दहशत का माहौल है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में अलग-अलग चार हाथियों का दल विचरण कर रहा है, जिसके चलते वन विभाग भी अलर्ट हो गया है।
वन विभाग की टीम क्षेत्र में निगरानी कर रही है और ग्रामीणों को जंगल एवं आसपास के इलाकों में जाने के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। विभाग की ओर से लोगों से हाथियों से दूरी बनाए रखने और किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाने की सलाह दी गई है।
इधर, घटना के बाद ग्रामीण के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है।
रायपुर: पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज लखनपुर विकासखंड के ग्राम कटकोना पहुंचकर क्षेत्रवासियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं, आवश्यकताओं और स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे विभिन्न विषयों की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित एवं यथोचित निराकरण के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
मंत्री अग्रवाल ने ग्रामीणों से संवाद के दौरान उनकी बातों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में क्षेत्र की जनता से सीधे संवाद करना और उनकी समस्याओं को समझकर उनका समाधान सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। ग्रामीणों द्वारा बताई गई समस्याओं के संबंध में उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों से आवश्यक जानकारी ली और समस्याओं के निराकरण के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इस दौरान ग्रामवासियों ने खदान से संबंधित विभिन्न विषय भी मंत्री राजेश अग्रवाल के संज्ञान में लाए। ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से सुनते हुए मंत्री ने कहा कि इस विषय में ग्रामवासियों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि पूरे मामले का यथोचित परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अग्रवाल ने कहा कि विकास कार्यों का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। विकास के साथ स्थानीय लोगों के हितों, सुविधाओं और अधिकारों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ग्रामवासियों के हितों की रक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना तथा क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करना सरकार की प्राथमिकता है।
ग्राम कटकोना में मंत्री अग्रवाल के साथ हुए संवाद के दौरान ग्रामीणों ने विभिन्न स्थानीय विषयों और आवश्यकताओं से उन्हें अवगत कराया। मंत्री ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनके द्वारा उठाए गए विषयों पर संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और जनहित से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के साथ देखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों की सहभागिता से ही विकास की दिशा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ग्रामीणों की अपेक्षाओं और सुझावों को विकास कार्यों में शामिल करते हुए क्षेत्र को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। ग्रामवासियों ने मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाने पर आभार व्यक्त किया।
रायपुर: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा तथा राज्य की सुशासन और विकास यात्रा को प्रदर्शनी में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
इसी क्रम में बी.पी. पुजारी गवर्नमेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल, राजातालाब रायपुर के विद्यार्थियों ने शिक्षिकाओं के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विद्यार्थी मानवी साहू, पलक साहू, योगिता विश्वकर्मा, आनंदित बोस और युगती सोनकर शिक्षिका अनवरी जावेद शेख एवं सुनील महर के साथ प्रदर्शनी देखने पहुंचे। विद्यार्थियों ने विभिन्न छायाचित्रों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रदर्शित सामग्री को उत्सुकता के साथ देखा तथा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की जानकारी प्राप्त की।
वंदे मातरम की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा
प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रजागरण के प्रेरणादायी स्वर के रूप में इसकी भूमिका को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि स्वतंत्रता केवल संघर्ष और बलिदान का परिणाम नहीं, बल्कि देशवासियों की एकजुटता, राष्ट्रप्रेम और दृढ़ संकल्प की भी गौरवगाथा है।

’छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की गाथा’
प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग प्रदर्शित किए गए हैं। महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा प्रदेश में हुए सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं।
विभागीय अधिकारियों ने विद्यार्थियों को छायाचित्रों और ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी देते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण से अवगत कराया।
’योजनाओं से बदली जिंदगी की तस्वीर’
प्रदर्शनी में राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए संचालित योजनाओं के माध्यम से विकास और सशक्तिकरण की तस्वीर प्रस्तुत की गई है।
महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नति योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पहलों की जानकारी भी प्रदर्शनी में दी गई है। विद्यार्थियों ने इन योजनाओं के बारे में भी विशेष रुचि दिखाई।
’सुशासन और आधुनिक अधोसंरचना से विकसित छत्तीसगढ़ की झलक’
प्रदर्शनी में डिजिटल पंजीयन, सुशासन तिहार, हरित छत्तीसगढ़, शिक्षा एवं अधोसंरचना विस्तार सहित राज्य की विकास यात्रा को भी छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों की झलक भी यहां देखने को मिल रही है।

’एआई तकनीक से विरासत और पर्यटन का अभिनव अनुभव’
प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अनूठा संगम भी देखने को मिल रहा है। एआई आधारित विशेष पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। बच्चों और युवाओं में इस पहल को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इसके अलावा राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।
’21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी’
कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित यह सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10ः30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास एवं वर्तमान विकास से परिचित कराने वाला अनुभव बताया।
० अत्याधुनिक सुविधाओं और मशीनरी का किया अवलोकन, मरीजों को एक ही परिसर में बेहतर उपचार मिलने की उम्मीद
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल परिसर में नवनिर्मित रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में उपलब्ध आधुनिक उपचार सुविधाओं और मशीनरी का अवलोकन किया तथा अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों को इस पहल के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने डॉ. संदीप दवे के भाई स्वर्गीय प्रदीप दवे को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल पिछले 36 वर्षों से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है। नए कैंसर इंस्टीट्यूट से मरीजों को जांच और उपचार की सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों में न जाना पड़े और उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं छत्तीसगढ़ में ही मिलें। निजी क्षेत्र की ऐसी पहल से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
कैंसर की शुरुआती पहचान बेहद जरूरी : डॉ. रमन सिंह
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ को स्वास्थ्य क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि कैंसर का असर केवल मरीज पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। नियमित स्क्रीनिंग और समय पर बीमारी की पहचान से उपचार की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि नए संस्थान के शुरू होने से मरीजों को आधुनिक कैंसर उपचार के साथ अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लाभ एक ही स्थान पर मिल सकेगा।
प्रदेश में बढ़ रहा मेडिकल और सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं का दायरा
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि नए कैंसर इंस्टीट्यूट के शुरू होने से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण सुविधा जुड़ी है। उन्होंने बताया कि राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 15 हो चुकी है और सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर और बिलासपुर में सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं के विस्तार से गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना है। कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू, चिकित्सक, स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
सुकमा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने झीरम घाटी पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीदों की स्मृति में पौधारोपण किया और उनके बलिदान को नमन करते हुए श्रद्धा एवं संकल्प के नारों के साथ उन्हें याद किया।
झीरम की घटना छत्तीसगढ़ के लिए भयंकर विभीषिका थी
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि, झीरम की घटना छत्तीसगढ़ के लिए एक भयंकर विभीषिका थी। इस घटना में हमने प्रदेश के वरिष्ठ और कुशल नेतृत्वकर्ताओं को खोया। राज्य के नेता प्रतिपक्ष रहे स्वर्गीय महेंद्र कर्मा और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष स्वर्गीय नंदकुमार पटेल ,वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, सुरक्षा जवानों और नागरिकों का बलिदान छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूल सकता।
लोकतंत्र और विकास की राह हुई मजबूत
उन्होंने कहा कि, आज वे झीरम के शहीदों को यह बताने आए हैं कि, जिस ताकत ने बस्तर को वर्षों तक अपने भय और हिंसा के साये में रखा, जिसने संविधान और लोकतंत्र की पहुंच को बस्तर के सुदूर अंचलों तक नहीं पहुंचने दिया, जिसने तिरंगे को फहराने से रोकने का प्रयास किया और विकास की गति को अवरुद्ध किया, उस ताकत को जड़ से उखाड़ फेंका गया है।
बस्तर अब खुली और आजाद हवा में सांस ले रहा है
श्री शर्मा ने कहा कि, आज बस्तर फिर से खुली और आजाद हवा में सांस ले रहा है। उन्होंने कहा कि, झीरम के शहीदों का सपना ऐसा बस्तर था, जहां लोकतंत्र, शांति, विकास और विश्वास की जीत हो। आज बस्तर उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
शहीदों के परिजनों से की मुलाकात, वीरों की मिट्टी की संग्रहित
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री शर्मा ने शहीदों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने शहीदों के परिजनों से कहा कि शासन द्वारा सभी शहीदों के सम्मान में स्मारक निर्माण का कार्य किया जा रहा है। शहीदों के परिजनों ने झीरम की पवित्र मिट्टी पुलिस अधीक्षक को संग्रहित करने के लिए प्रदान किया।
हौसले और विश्वास से बदली तस्वीर
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि, अब बस्तर को रोकने वाला कोई नहीं है। बस्तर के युवाओं को जबरन हिंसा के रास्ते पर ले जाने वाली ताकतें कमजोर हो चुकी हैं। हमने बस्तर को केवल गोलियों से नहीं, बल्कि हौसले, विश्वास और विकास के संकल्प से जीता है। उन्होंने कहा कि, भटके हुए युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
झीरम के दोषियों को रोल मॉडल मानने पर जताई चिंता
श्री शर्मा ने कहा कि, इसका परिणाम है कि 3 हजार से अधिक लोगों ने पुनर्वास का रास्ता चुनकर हिंसा का त्याग किया है। यह परिवर्तन बस्तर में शांति और विश्वास की नई सुबह का संकेत है। उन्होंने कहा कि, झीरम की घटना में हमने अपने प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व खोया है परंतु यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि, इस घटना में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल नक्सलियों को कुछ लोग अपना रोल मॉडल मानते हैं।
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक कलयुगी बेटे ने अपनी मां की शराब पीने की आदत से तंग आकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई। मामला डौंडी थाना क्षेत्र का है।
मिली जानकारी के अनुसार, मृतका का नाम 55 वर्षीय सुशीला गांवड़े है। वह ग्राम घोठिया का रहने वाली थी। बताया जा रहा है कि, मृतका सुशीला गांवडे शराब पीने की आदी थी। इसी बात को लेकर अक्सर अपने बेटे लीकेश गांवडे के साथ विवाद होता था। रविवार को भी इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया।
पुलिस पूछताछ में बेटे लीकेश ने कबूला अपना जुर्म
विवाद इतना बढ़ा कि, बेटे लीकेश ने लकड़ी के पाटा से मां के सिर पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई। पुलिस ने इस मामले की कार्रवाई करते हुए आरोपी बेटे 28 वर्षीय लीकेश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ करने पर आरोपी ने अपना जूर्म कबूल लिया।
रायपुर। राजधानी रायपुर में प्रेम प्रसंग से जुड़े विवाद के बाद एक युवक की मौत का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आमानाका थाना क्षेत्र में एम्स अस्पताल के सामने एक युवक को कार से टक्कर मारने के बाद कुचलने का मामला सामने आया है। घटना के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मिली जानकारी के अनुसार, मृतक युवक की एक युवती से करीब 3-4 साल से दोस्ती और प्रेम संबंध था। दोनों परिवारों के बीच शादी की बातचीत भी चल रही थी। इसी दौरान युवक ने युवती को उसके एक दोस्त के साथ कार में देखा, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। विवाद के दौरान युवक ने कार को रोकने की कोशिश की।
कार की बोनट पर चढ़ा युवक
बताया जा रहा है कि कार चला रहे युवक ने पहले उसे टक्कर मारी। इसके बाद कार आगे बढ़ने लगी। युवक कार के बोनट पर चढ़ गया, लेकिन कार चालक ने वाहन नहीं रोका। करीब 200 मीटर तक कार चलने के बाद युवक सड़क पर गिर गया और पुलिस के मुताबिक कार उसके ऊपर चढ़ गई। गंभीर चोट लगने से उसकी मौत हो गई।
दोनों आरोपियों से पूछताछ में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही आमानाका पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली है। CCTV और शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया हत्या का संदेह जताते हुए मामला दर्ज किया है। इस मामले में कार चला रहा युवक भरत मंगनानी फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने युवती को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।





























