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युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप मिलेगा प्रशिक्षण, रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप मिलेगा प्रशिक्षण, रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

 युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप मिलेगा प्रशिक्षण, रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग की बड़ी पहल, चार संस्थाओं के साथ एमओयू

टीसीएस, अडानी समूह और नांदी फाउंडेशन के सहयोग से युवाओं को मिलेगा आधुनिक तकनीक एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण

आईटीआई और पॉलिटेक्निक में शुरू होंगे नए पाठ्यक्रम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर विशेष जोर

पॉलिटेक्निक संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया से कराया गया थर्ड पार्टी मूल्यांकन

रायपुर,  छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल शैक्षणिक योग्यता तक सीमित न रखते हुए उन्हें आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी कौशल से सशक्त बनाना है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में एवं कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा प्रतिष्ठित औद्योगिक एवं प्रशिक्षण संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू), तकनीकी शिक्षा में नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत तथा प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।

चार संस्थाओं के साथ एमओयू से युवाओं को मिलेगा बेहतर प्रशिक्षण

            दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला 2026 के समापन अवसर पर कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से चार संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) की पहल की गई। इन समझौतों के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार प्राप्त करने में सुविधा होगी।

          टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के सहयोग से इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह प्रशिक्षण कंपनी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों के अंतर्गत निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और उद्योगों में उपयोग होने वाले व्यावहारिक कौशल की जानकारी प्राप्त होगी।

         इसी प्रकार अडानी समूह के सहयोग से आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस पहल से विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता विकसित करने के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

          विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और रोजगार क्षमता में वृद्धि के लिए नांदी फाउंडेशन के सहयोग से सॉफ्ट स्किल, अंग्रेजी संवाद कौशल, साक्षात्कार की तैयारी एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पिछले वर्ष इस संस्था के माध्यम से छह हजार से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया गया था। इस वर्ष भी आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं कौशल विकास से जुड़े विद्यार्थियों को लगभग 48 से 50 घंटे का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

           इसके अतिरिक्त जंगल सफारी में विभिन्न ट्रेडों से संबंधित कौशल प्रशिक्षण के लिए भी संस्थाओं के साथ एमओयू की पहल की जा रही है। इससे युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे।

पॉलिटेक्निक संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने विशेष पहल

           प्रदेश के पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में शिक्षा एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के माध्यम से थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराया गया है। इस मूल्यांकन में संस्थानों के शैक्षणिक स्तर, प्रशिक्षण व्यवस्था, उपलब्ध अधोसंरचना और अन्य आवश्यक सुविधाओं का आकलन किया गया है। मूल्यांकन की रिपोर्ट का रोजगार मेला के समापन समारोह में मुख्यमंत्री साय, मंत्री तकनीकी शिक्षा साहेब, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा  सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने विमोचन किया। इसमें संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने तथा प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों के आधार पर पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों के विकास और आधुनिकीकरण के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध हो सकेगा।

आईटीआई और पॉलिटेक्निक में शुरू होंगे आधुनिक तकनीक आधारित रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम

          राज्य सरकार ने तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है। इसी क्रम में आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों में पुराने एवं अप्रासंगिक पाठ्यक्रमों की समीक्षा कर नए रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और आधुनिक तकनीक से संबंधित पाठ्यक्रमों को शामिल किया जा रहा है। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को नई तकनीकों की जानकारी और व्यावहारिक दक्षता प्राप्त होगी। इससे वे बदलते औद्योगिक परिवेश में रोजगार की नई संभावनाओं का लाभ उठा सकेंगे।

डिजिटल रोजगार पोर्टल को स्किल मार्केट के रूप में विकसित करने की तैयारी

           कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा डिजिटल रोजगार पोर्टल को भविष्य में स्किल मार्केट के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इस पोर्टल पर उद्योगों की आवश्यकताओं, विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रिक्त पदों और रोजगार के इच्छुक युवाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है।

छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

          इस व्यवस्था के माध्यम से युवा अपनी योग्यता और कौशल के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। वहीं उद्योग एवं नियोजक संस्थाएं अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का चयन कर सकेंगी। इससे रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी होगी। राज्य सरकार की इस पहल से प्रदेश में तकनीकी शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय, आधुनिक पाठ्यक्रम, डिजिटल रोजगार सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के माध्यम से छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

बस्तर में बोधघाट परियोजना का मुद्दा गरमाया, प्रभावितों से मुलाकात करेंगे राहुल गांधी

बस्तर में बोधघाट परियोजना का मुद्दा गरमाया, प्रभावितों से मुलाकात करेंगे राहुल गांधी

 रायपुर. कांग्रेस नेता राहुल गांधी जल्द ही छत्तीसगढ़ के दौरे पर आ सकते हैं। बोधघाट परियोजना को लेकर राहुल गांधी का बस्तर दौरा संभावित है। इसकी जानकारी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने दी है।

दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस ग्रामीणों की आवाज उठाएगी। प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत ने बस्तर दौरे के दौरान ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनी हैं। अब बहुत जल्द राहुल गांधी बोधघाट परियोजना को लेकर बस्तर दौरे पर आएंगे और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे।

उत्तर प्रदेश से बिजली की खरीदी पर बोले पीसीसी चीफ
छत्तीसगढ़ में खुद बिजली का उत्पादन होता है। इसके बावजूद दूसरे राज्य से बिजली खरीदने की तैयारी की जा रही है। सरकार इस फैसले के जरिए राज्य की जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाएगी। उन्होंने आगे कहा कि पहले से ही बिजली की दरें काफी बढ़ चुकी हैं और सरकार की नीतियों के चलते महंगाई बढ़ रही है। निजी कंपनियों को बिजली विभाग सौंपा जा रहा है।

रेल मंत्री के छत्तीसगढ़ दौरे पर साधा निशाना
प्रदेश में पहले से ही ट्रेनों का संचालन प्रभावित है और ऐसे में रेल मंत्री छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। यह दौरा छत्तीसगढ़ की जनता की समस्याओं के समाधान के लिए नहीं बल्कि उद्योपतियों, कॉरपोरेट घरानों के हितों को साधने के लिए किया जा रहा है।

डिजिटल क्रॉप सर्वे में शत-प्रतिशत गिरदावरी सुनिश्चित करें -मुख्य सचिव विकासशील

डिजिटल क्रॉप सर्वे में शत-प्रतिशत गिरदावरी सुनिश्चित करें -मुख्य सचिव विकासशील

 डिजिटल क्रॉप सर्वे में शत-प्रतिशत गिरदावरी सुनिश्चित करें -मुख्य सचिव विकासशील

फसल की वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और सर्वे का क्रॉस वेरिफिकेशन करने के निर्देश

नक्शों की त्रुटियों के निराकरण और भूमि अभिलेखों को अद्यतन करने के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने पर जोर

रायपुर - मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में डिजिटल क्रॉप सर्वे के संबंध में बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वे की प्रगति, भूमि अभिलेखों की पूर्णता और शत-प्रतिशत गिरदावरी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव विकासशील ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में फसलें बोई गई है, वहां उसकी वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए। संबंधित खसरों का सत्यापन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि भूमि पर फसल लगी है या नहीं। फसल वाले क्षेत्रों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पॉलीगॉन बनाकर जानकारी दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से खेतों में बोई गई फसल का सटीक और विश्वसनीय विवरण तैयार किया जाना चाहिए।

डिजिटल क्रॉप सर्वे का क्रॉस वेरिफिकेशन करने के निर्देश

       मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि सर्वे की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर टीम गठित कर विभिन्न जिलों में फील्ड वेरिफिकेशन करें। उन्होंने निर्देश दिए कि सर्वे में दर्ज जानकारी का मौके पर सत्यापन किया जाए तथा कितने खसरों का सत्यापन हुआ है, कितने रिकॉर्ड सही पाए गए है, कहां त्रुटियां मिलीं है इसकी रिपोर्ट तैयार की जाए। त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड को सुधारने के साथ ही सर्वे की आंतरिक जांच भी सुनिश्चित की जाए।उन्होंने डिजिटल क्रॉप सर्वे के आंकड़ों का धान की खेती, किसान पंजीयन और धान उपार्जन से संबंधित आंकड़ों के साथ तुलनात्मक परीक्षण करने के निर्देश दिए है। उन्होंने अधिकारियों से विभिन्न अभिलेखों में उपलब्ध जानकारी का मिलान कर आवश्यक सुधार करने कहा है।

नक्शों की त्रुटियों के निराकरण के लिए तकनीकी समाधान तलाशें

        बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे के दौरान सामने आई प्रमुख बाधाओं की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि नक्शों की अनुपलब्धता और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण कार्य अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए। राजस्व विभाग इन समस्याओं के निराकरण के लिए उपयुक्त तकनीकी समाधान तलाशे। मुख्य सचिव ने कहा कि आवश्यकतानुसार नक्शों को अद्यतन करने की कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन मामलों में भौतिक सत्यापन और पॉलीगॉन सत्यापन आवश्यक है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा कर लिया जाए।

कलेक्टरों के साथ बैठक कर कार्यों की समीक्षा करें

        मुख्य सचिव ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति और सत्यापन कार्यों की समीक्षा के लिए कलेक्टरों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी जिलों के संबंधित अधिकारी गांवों और खेतों के रिकॉर्ड का सत्यापन करें तथा कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करें। सर्वे की नियमित निगरानी के साथ विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य को प्रभावी ढंग से पूरा किया जाए।

     बैठक में मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव सुरीना बाबा साहब कंगाले, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी,  संचालक उद्योग प्रभात मलिक, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार, संचालक खाद्य फरिया आलम सिद्दीकी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 राष्ट्रीय सेवा योजना के स्थापना दिवस पर नवोदित छात्र छात्राओं ने पेश की सांस्कृतिक झलक

राष्ट्रीय सेवा योजना के स्थापना दिवस पर नवोदित छात्र छात्राओं ने पेश की सांस्कृतिक झलक

रायपुर :- महंत लक्ष्मी नारायण दास महाविद्यालय गांधी चौक रायपुर में आज राष्ट्रीय सेवा योजना का स्थापना दिवस एवं अभीउन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया इस अवसर पर कार्यक्रम में डॉ टी एल चंद्रा, निदेशक फोरेंसिक विभाग मुख्य अतिथि के रूप में मौजूदगी रही वही कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर देवाशीष मुखर्जी ने की आयोजन में महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र-छात्राओं के द्वारा विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसे उपस्थित अतिथियों से प्रशंसा मिली वहीं सांस्कृतिक आयोजन से पहले कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ चंद्र ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना का मूल उद्देश्य सामाजिक सद्भावना को आगे बढ़ाना है उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राएं राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़कर शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्र में स्वास्थ्य शिक्षा स्वच्छता सहित कई विषयों पर कार्य करके आम लोगों को जागृत और प्रेरित करने का कार्य करते हैं इससे समाज में एक स्वस्थ माहौल तैयार हो पता है जो समाज के विस्तार और सौंदर्य के लिए उत्तम है आयोजन में महाविद्यालय के प्राचार्य ने भी विचार रखे और बताया कि महंत कॉलेज के राष्ट्रीय सेवा योजना की विद्यार्थी ग्रामों में जाकर किस तरह से स्वास्थ शिक्षा स्वस्थ मनोरंजन और साक्षरता के साथ स्वच्छता पर आम लोगों को प्रेरणा देने का काम करते हैं प्राचार्य ने कहा कि योजना से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में भी विकास हो पता है जबकि राष्ट्रीय सेवा योजना के इकाई के अध्यक्ष डॉ लक्ष्मीकांत साहू ने कहा कि महाविद्यालय से निरंतर मिलते सपोर्ट के कारण छत्तीसगढ़ प्रदेश के अलग-अलग जिलों और गांव में जाकर राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र-छात्राएं हरियाली स्वच्छता स्वास्थ्य और शिक्षा के महत्वपूर्ण कार्यों में भाग लेते हैं और बच्चों सहित बुजुर्गों माता-पिता अन्य को भी प्रेरित करने का कार्य करते रहे हैं और एक मिसाल बना कर रखे हैं कि महंत कॉलेज के विद्यार्थियों ने किस तरह से कार्य राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्र में किया है इसके बाद राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र-छात्राओं ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया और सभी की प्रशंसा प्राप्त की, कार्यक्रम का सञ्चालन सिमरन व साथी ने किया

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, 31 नए स्थान राम वनगमन पथ के रूप में होंगे विकसित

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, 31 नए स्थान राम वनगमन पथ के रूप में होंगे विकसित

 रायपुर। पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में पर्यटन, संस्कृति, धर्मस्व एवं पुरातत्व विभाग की योजनाओं और विकास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटन विकास से जुड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़कर प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए।

चित्रकोट को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी तेज

मंत्री अग्रवाल ने बस्तर के विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं दो सप्ताह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित समय-सीमा में डीपीआर एवं प्रेजेंटेशन तैयार कर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने को कहा। साथ ही सिरपुर पर्यटन विकास की तैयार डीपीआर का प्रस्तुतीकरण करने के निर्देश दिए।

144 पर्यटन स्थलों का सर्वेक्षण पूरा, 20 स्थलों पर प्राथमिकता से विकसित होंगी सुविधाएं

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रदेश के 144 पर्यटन स्थलों का गैप फिलिंग असेसमेंट पूरा कर लिया गया है। मंत्री श्री अग्रवाल ने सर्वेक्षण के आधार पर प्राथमिकता वाले 20 पर्यटन स्थलों में सार्वजनिक शौचालय, स्वच्छ पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं फास्ट ट्रैक आधार पर विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन सुविधाओं के संचालन एवं रखरखाव के लिए स्थानीय समितियों को जिम्मेदारी देने अथवा सुलभ इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं का सहयोग लेने को कहा।

राम वनगमन पर्यटन परिपथ के 31 नए स्थलों पर दो माह में शुरू होंगे कार्य

मंत्री अग्रवाल ने राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत पूर्व में विकसित स्थलों के अधूरे कार्य शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्मित पर्यटन इकाइयों, सार्वजनिक शौचालयों और कैफेटेरिया का संचालन स्थानीय समितियों को सौंपने के निर्देश दिए। उन्होंने नवीन चिह्नित 31 स्थलों पर विकास कार्यों के लिए डीपीआर, निविदा और एजेंसी चयन सहित सभी प्रक्रियाएं दो माह के भीतर पूरी कर कार्यादेश जारी करने तथा निर्माण कार्य प्रारंभ कराने को कहा। प्रथम चरण में चयनित 10 स्थलों के अतिरिक्त बस्तर के एक-दो महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल करने तथा आवश्यक बजट प्रस्ताव प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने माता कौशल्या धाम चंदखुरी में प्रभु श्रीराम की नवीन प्रतिमा को स्थानांतरित कर मंदिर समिति से चर्चा कर जल्द से जल्द मूर्ति स्थापना के निर्देश दिए।

रामलला दर्शन योजना की समीक्षा के दौरान मंत्री अग्रवाल ने कहा कि श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की यात्रा में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। आईआरसीटीसी द्वारा पेंट्री बोगी में तकनीकी समस्या के कारण ट्रेन उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में उन्होंने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) के माध्यम से पृथक एजेंसी चयनित कर वैकल्पिक ट्रेन संचालन की आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

भोरमदेव कॉरिडोर की ऑनलाइन निगरानी, होमस्टे हितग्राहियों को शीघ्र मिलेगी सब्सिडी

मंत्री अग्रवाल ने भोरमदेव कॉरिडोर के निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा और तकनीकी निगरानी के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने तथा संबंधित एजेंसियों को नियमानुसार समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने होमस्टे नीति के अंतर्गत चयनित हितग्राहियों को कैपिटल सब्सिडी शीघ्र उपलब्ध कराने तथा तीन चरणों में सहायता राशि वितरण की आवश्यक तैयारी करने को कहा।

पर्यटन मंडल की जिन इकाइयों को तकनीकी कारणों से निजी संस्थाओं को लीज पर देना संभव नहीं है, उनका संचालन स्थानीय समितियों के माध्यम से कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रत्येक पर्यटन इकाई में आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों और उनकी दूरी दर्शाने वाले बड़े सूचना बोर्ड लगाने को कहा गया।

पर्यटन मार्गों पर विकसित होंगे सुविधा केंद्र, परियोजनाओं की निगरानी के लिए इंजीनियरों की सेवाएं

मंत्री अग्रवाल ने पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रमुख पर्यटन मार्गों पर वेसाइड एमेनिटीज विकसित करने हेतु सभी जिला कलेक्टरों से समन्वय कर भूमि चिह्नित करने और पर्यटन मंडल का लैंड बैंक तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्र एवं राज्य शासन की निर्माणाधीन पर्यटन परियोजनाओं की तकनीकी मॉनिटरिंग के लिए सर्विस प्रोवाइडर एजेंसी के माध्यम से इंजीनियरों की सेवाएं लेने पर सहमति प्रदान की।

बैठक में मुख्यमंत्री पर्यटन मिशन की तैयारियों, कुदरगढ़ रोप-वे निर्माण, मंदिर परिसरों के तालाबों एवं झीलों के जीर्णाेद्धार, मुख्यमंत्री की घोषणाओं से संबंधित लंबित कार्यों तथा स्वीकृत बजट के समयबद्ध उपयोग की भी समीक्षा की गई। मंत्री अग्रवाल ने प्रदेश के पर्यटन स्थलों को जोड़कर मिनी सर्किट विकसित करने, स्थानीय टूर ऑपरेटरों एवं ट्रैवल एजेंटों के साथ कार्यशाला आयोजित करने तथा केंद्र सरकार की परियोजनाओं के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए।

कलाकारों के लिए डिजिटल पोर्टल होंगे सुदृढ़, पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण पर विशेष जोर

संस्कृति विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री अग्रवाल ने कलाकारों के पंजीयन हेतु संचालित चिन्हारी पोर्टल को अपडेट करने, कलाकार दलों के श्रेणी उन्नयन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पारदर्शी आवंटन के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक पीठों के संबंधित विभागों को हस्तांतरण और पुनः संचालन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा।

पुरातत्व विभाग की समीक्षा में सिरपुर के सुरंग टीला और नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो का नियमित संचालन सुनिश्चित करने, अंबिकापुर जिला पुरातत्व संग्रहालय के उन्नयन तथा रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में ऐतिहासिक रियासतों से जुड़ी सामग्री के व्यवस्थित प्रदर्शन के निर्देश दिए गए। बैठक में युवा दर्शन योजना में खिलाड़ियों को शामिल करने तथा फिल्म सिटी एवं ट्राइबल कन्वेंशन सेंटर के कार्यों में तेजी लाने पर भी चर्चा हुई।

मंत्री अग्रवाल ने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने, लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने तथा अगली समीक्षा बैठक में प्रत्येक निर्देश पर की गई कार्रवाई का अद्यतन प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना भी आवश्यक है।

बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के उपसचिव अभिषेक गुप्ता, पर्यटन मंडल की उपमहाप्रबंधक पूनम शर्मा, राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ब्रेकिंग : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा पर लगाई रोक, राज्य सरकार को दिए ये निर्देश …

ब्रेकिंग : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा पर लगाई रोक, राज्य सरकार को दिए ये निर्देश …

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस कृष्णराम महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने भर्ती परीक्षा पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। यह याचिका भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांग उम्मीदवारों के आरक्षण रोस्टर और विज्ञापन में निर्धारित शर्तों को लेकर दायर की गई थी।

यह पूरा मामला भर्ती विज्ञापन में निर्धारित शर्तों और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए तय किए गए आरक्षण रोस्टर से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रूंगटा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विज्ञापन की वैधता को चुनौती दी गई थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि शासन द्वारा जारी भर्ती विज्ञापनों में दिव्यांग उम्मीदवारों के आरक्षण का निर्धारण करते वक्त गंभीर खामियां बरती गई हैं। सामान्य प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के सर्कुलर का हवाला देते हुए यह आरोप लगाया गया कि नियमों के तहत पूर्णतः दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा गया है, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

अक्टूबर माह में प्रस्तावित थीं परीक्षाएं

कर्मचारी चयन आयोग द्वारा इन परीक्षाओं के आयोजन को लेकर अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। घोषित कार्यक्रम के मुताबिक:

11 अक्टूबर 2026 को सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा होनी थी।

25 अक्टूबर 2026 को शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की जानी थी।

कैलेंडर देखें

हालांकि, हाईकोर्ट के इस स्थगन आदेश के बाद इन दोनों महत्वपूर्ण परीक्षाओं के तय समय पर होने पर संशय के बादल मंडरा गए हैं।

2,292 पदों पर होनी है भर्ती

राज्य में कुल 2,292 पदों पर शिक्षकों की यह भर्ती प्रक्रिया प्रस्तावित है, जिन्हें ई-संवर्ग और टी-संवर्ग के बीच बांटा गया है:

ई-संवर्ग: 795 पद

टी-संवर्ग: 1,497 पद

कुल पद: 2,292

फिलहाल, अदालत के इस आदेश के बाद अभ्यर्थियों की नजरें राज्य  सरकार के जवाब और अगली सुनवाई पर टिकी हैं। परीक्षा से जुड़े किसी भी नए अपडेट या संशोधित तारीख के लिए परीक्षार्थियों को संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचनाओं का इंतजार करना होगा।

CG IPS Transfer : छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर आईपीएस अफसरों का हुआ तबादला, राज्य सरकार ने जारी किया आदेश

CG IPS Transfer : छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर आईपीएस अफसरों का हुआ तबादला, राज्य सरकार ने जारी किया आदेश

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में बड़ी प्रशासनिक फेरबदल की गई है। 18 IPS का तबादला किया गया है, जिसका आदेश भी जारी कर दिया गया है। जारी आदेश के मुताबिक, सहायक पुलिस आयुक्त ईशु अग्रवाल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स) नारायणपुर बनाए गए हैं।

देखें पूरी लिस्ट-

  1. झा अमनकुमार रमनकुमार (भापुसे–2021)- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, (ऑप्स) जिला–बीजापुर से पुलिस अधीक्षक (एसआईए), पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर
  2. अजय कुमार (भापुसे–2021)- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, (ऑप्स) जिला–नारायणपुर से पुलिस अधीक्षक (एसआईबी), पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर
  3. आकाश श्री श्रीमाल (भापुसे–2021)- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, (ऑप्स) जिला भानूप्रतापपुर, जिला–कांकेर से सहायक पुलिस महानिरीक्षक (अ.अ.वि.), पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर
  4. अक्षय प्रमोद सबद्रा (भापुसे–2021)- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, (ऑप्स) जिला–नारायणपुर से सहायक पुलिस महानिरीक्षक (योजना/प्रबंध), पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर
  5. आकाश कुमार शुक्ला (भापुसे–2021)- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, (ऑप्स) एसटीएफ, बघेरा, जिला–दुर्ग से सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एस.एन.टी.एफ.), पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर
  6. रोहित कुमार शाह (भापुसे–2021)- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, (ऑप्स) जिला–सुकमा से सेनानी, 15वीं वाहिनी छ.स.बल, बीजापुर
  7. रविन्द्र कुमार मीणा (भापुसे–2021)- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, (ऑप्स) जिला–बीजापुर से पुलिस अधीक्षक (चिटफंड एवं महिला विरुद्ध अपराध), पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर
  8. धोत्रे सुमीतकुमार दत्ताहारी (भापुसे–2021)- नगर पुलिस अधीक्षक, जगदलपुर, जिला–बस्तर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स), जिला–कांकेर
  9. ईशु अग्रवाल (भापुसे-2022)- सहायक पुलिस आयुक्त, आजाद चौक, रायपुर नगरीय से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स), जिला नारायणपुर
  10. मयंक मिश्रा (भापुसे-2022)- नगर पुलिस अधीक्षक, रायगढ़, जिला रायगढ़ से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स), जिला सुकमा
  11. वैशाली जैन (भापुसे-2022)- नगर पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव, जिला राजनांदगांव से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स), जिला जगदलपुर
  12. विमल कुमार पाठक (भापुसे-2022)- नगर पुलिस अधीक्षक, दर्री, जिला कोरबा से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स), जिला नारायणपुर
  13. हर्षित मेहर (भापुसे-2022)- नगर पुलिस अधीक्षक, दुर्ग, जिला दुर्ग से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स), जिला कोंडागांव
  14. राहुल बंसल (भापुसे-2022)- नगर पुलिस अधीक्षक, अंबिकापुर, जिला सरगुजा से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स), जिला बीजापुर
  15. अंशिका जैन (भापुसे-2022)- प्रशिक्षु, जिला बिलासपुर से नगर पुलिस अधीक्षक, जगदलपुर, जिला जगदलपुर
  16. साकोर मानसी नानाभाउ (भापुसे-2023)- प्रशिक्षु, जिला रायपुर से सहायक पुलिस आयुक्त, आजाद चौक, रायपुर नगरीय
  17. आदित्य कुमार (भापुसे-2024)- प्रशिक्षु, जिला राजनांदगांव से नगर पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव, जिला राजनांदगांव
  18. प्रतीक बंसोड़े (भापुसे-2024)- प्रशिक्षु, जिला कांकेर से नगर पुलिस अधीक्षक, अंबिकापुर, जिला सरगुजा

छत्तीसगढ़ के IPS संतोष सिंह को मिली नई जिम्मेदारी, संभालेंगे दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा की कमान

छत्तीसगढ़ के IPS संतोष सिंह को मिली नई जिम्मेदारी, संभालेंगे दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा की कमान

 रायपुर। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत छत्तीसगढ़ कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी संतोष सिंह को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) में CISF के डीआईजी के पद पर पदस्थ किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर होगी।

संतोष सिंह को सुरक्षा प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों के अनुभव को देखते हुए यह अहम दायित्व सौंपा गया है। दिल्ली और आसपास के शहरों को जोड़ने वाली मेट्रो सेवा में रोजाना बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। ऐसे में मेट्रो नेटवर्क, स्टेशनों और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था उनके कार्यक्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

271 स्टेशनों वाला दिल्ली मेट्रो नेटवर्क

दिल्ली मेट्रो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की प्रमुख सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था है। इसका नेटवर्क दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और हरियाणा के आसपास के शहरों को भी जोड़ता है। वर्तमान में दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क में 271 स्टेशन हैं। मेट्रो में प्रतिदिन लाखों यात्री सफर करते हैं। हाल ही में 17 सितंबर को करीब 82.45 लाख यात्रियों की एक दिन में आवाजाही दर्ज की गई थी। ऐसे बड़े यात्री नेटवर्क की सुरक्षा व्यवस्था संभालना CISF के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

छत्तीसगढ़ के कई जिलों में SP-SSP रह चुके हैं संतोष सिंह

IPS संतोष सिंह को छत्तीसगढ़ में विभिन्न जिलों में पुलिसिंग का लंबा अनुभव रहा है। वे प्रदेश के रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव, कोरिया, रायगढ़, महासमुंद, नारायणपुर और कोंडागांव में SP/SSP के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा वे सुकमा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) और दुर्ग में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इस तरह छत्तीसगढ़ के कुल 11 जिलों में अलग-अलग पदों पर काम करने का अनुभव उनके पास है।

सामुदायिक पुलिसिंग पर भी रहा फोकस

संतोष सिंह को पुलिसिंग के साथ सामुदायिक स्तर पर पुलिस और आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय से जुड़े प्रयोगों के लिए भी जाना जाता है। विभिन्न जिलों में एसपी के तौर पर कार्य करते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था के साथ सामुदायिक पुलिसिंग को भी अपने कार्यक्षेत्र में शामिल किया।

हैदराबाद में भी संभाल चुके हैं महत्वपूर्ण सुरक्षा जिम्मेदारी

 

 
 

दिल्ली मेट्रो में नई जिम्मेदारी से पहले संतोष सिंह हैदराबाद में DIG साउथ ज़ोन-2 के रूप में तैनात थे। इस जिम्मेदारी के तहत वे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक क्षेत्र में औद्योगिक एवं रणनीतिक प्रतिष्ठानों तथा पूर्वी तट के बंदरगाहों की सुरक्षा से जुड़े दायित्व संभाल रहे थे। अब उनकी नई पोस्टिंग दिल्ली में हुई है, जहां उन्हें देश के सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क में शामिल दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। नई जिम्मेदारी के तहत स्टेशनों, मेट्रो परिसरों और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े CISF के कामकाज में उनकी भूमिका अहम होगी।

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज साइबर जागृति अभियान और करमा तिहार कार्यक्रम में होंगे शामिल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज साइबर जागृति अभियान और करमा तिहार कार्यक्रम में होंगे शामिल

 रायपुर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार,मुख्यमंत्री साय शाम 5 बजे दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम पहुंचेंगे,जहां वे साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री शाम 7 बजे इनडोर स्टेडियम में आयोजित करमा तिहार कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इस दौरान वे कार्यक्रम में शामिल होकर करमा तिहार के आयोजन का हिस्सा बनेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार,मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रात 9 बजे मुख्यमंत्री निवास लौटेंगे।

CG Weather Update:छत्तीसगढ़ में मानसून की विदाई जारी,कुछ इलाकों में हल्की बारिश के आसार

CG Weather Update:छत्तीसगढ़ में मानसून की विदाई जारी,कुछ इलाकों में हल्की बारिश के आसार

 रायपुर – छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई का सिलसिला जारी है। प्रदेश के कुछ और हिस्सों से मानसून लौट चुका है। हालांकि,बीते 24 घंटों के दौरान उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ के एक-दो स्थानों पर मौसम में बदलाव देखने को मिला। इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ बादल गरजने और मध्यम बारिश दर्ज की गई। राजधानी रायपुर में तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं, मौसम विभाग के अनुसार आज प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने के संकेत दिए हैं। ऐसे में बारिश की गतिविधियों में कमी आने के साथ मौसम में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल सकता है।

Breaking: IED निष्क्रिय करने के दौरान जोरदार ब्लास्ट, CRPF के 4 जवान घायल; दो की हालत गंभीर

Breaking: IED निष्क्रिय करने के दौरान जोरदार ब्लास्ट, CRPF के 4 जवान घायल; दो की हालत गंभीर

 सुकमा।  छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा अभियान के दौरान चार CRPF जवान घायल हो गए। एलाड़मड़गु इलाके में तलाशी अभियान के बीच मिले विस्फोटक को सुरक्षित करने की कोशिश के दौरान अचानक ब्लास्ट हो गया। घटना के बाद घायल जवानों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

बताया जा रहा है कि सुरक्षा बलों की टीम एलाड़मड़गु कैंप के आसपास अभियान चला रही थी। इसी दौरान संदिग्ध विस्फोटक मिलने पर उसे सुरक्षित तरीके से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कार्रवाई आगे बढ़ने के दौरान अचानक जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे मौके पर मौजूद चार जवान इसकी चपेट में आ गए।

धमाके के बाद साथी जवानों ने तुरंत घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और कोंटा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। यहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए तेलंगाना के भद्राचलम स्थित हायर सेंटर भेजा जा रहा है।

घटना में ATT टीम के ASI एम.के. तिवारी और CRPF की 50वीं वाहिनी के ASI अनीश खान को गंभीर चोटें आई हैं। वहीं ATT टीम के निरीक्षक अमरनाथ मिश्रा और 50वीं वाहिनी के प्रधान आरक्षक कुलदीप राज को सामान्य चोटें बताई गई हैं।

हादसे के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। जवान आसपास के क्षेत्र में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं, ताकि किसी अन्य विस्फोटक या संदिग्ध गतिविधि की संभावना को जांचा जा सके।

सुकमा का यह इलाका सुरक्षा बलों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में घटना के बाद कैंप और आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

डबल मर्डर : पति-पत्नी की हत्या से दहला इलाका, खून से लथपथ मिले शव, गांव में दहशत का माहौल…

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 आरंग। थाना आरंग क्षेत्र के ग्राम बिरबिरा में आज एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। गांव में अपने घर पर रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती की अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही आरंग पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

मृतकों की पहचान सदासी राम साहू (65 वर्ष) और उनकी पत्नी आसबती साहू (62 वर्ष) निवासी बीरबीरा के रूप में हुई है।पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला किसी नुकीले व धारदार हथियार से हमला कर हत्या किए जाने का प्रतीत हो रहा है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर डॉग स्क्वाड और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को बुलाया गया, जिन्होंने साक्ष्य जुटाने की निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर ली है। घटना के बाद से ही गांव में दहशत का माहौल है। पुलिस हर संभावित पहलू से मामले की तफ्तीश में जुटी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।

CG – 26 साल का युवक झूला फांसी के फंदे पर, धड़कनें चल रही थी, लेकिन फिर जो हुआ…..

CG – 26 साल का युवक झूला फांसी के फंदे पर, धड़कनें चल रही थी, लेकिन फिर जो हुआ…..

 कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में 26 वर्षीय युवक ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना लक्ष्मणबंद तालाब बस्ती की है। युवक को फंदे पर लटका देख परिजनों ने तुरंत उसे नीचे उतारा और इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और आत्महत्या के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल युवक के इस कदम के पीछे की वजह सामने नहीं आई है।

मृतक की पहचान उदय कुमार यादव (26) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उदय ने अपने घर में फांसी के फंदे पर लटककर जान देने की कोशिश की। परिजनों की नजर पड़ने पर उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

उदय रोजी-मजदूरी का काम करता था। परिजनों के मुताबिक वह रोज की तरह काम पर जाता था और सीधे घर लौटता था। उसने कभी किसी तरह की परेशानी या तनाव की बात परिवार से साझा नहीं की थी।

घटना की सूचना मिलने पर जिला अस्पताल चौकी पुलिस ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर परिजनों के बयान दर्ज किए। परिजन भी मौत की वजह स्पष्ट नहीं बता सके। उनका कहना है कि उदय ने कब, कैसे और किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।

पुलिस का कहना है कि पहली नजर मामला आत्महत्या का लग रहा है। हालांकि, आत्महत्या के पीछे की वजह अभी सामने नहीं आई है। पुलिस पारिवारिक, आर्थिक और अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रही है।

पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मामले में आगे की जांच और कार्रवाई जारी है।

युवा शक्ति ही करेगी विकसित और सशक्त भारत का निर्माण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

युवा शक्ति ही करेगी विकसित और सशक्त भारत का निर्माण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर - मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा शक्ति विकसित एवं सशक्त भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, अपनी रुचि के अनुरूप लक्ष्य तय करने और पूरी मेहनत एवं समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए समय का सदुपयोग, निरंतर परिश्रम और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प सबसे महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री  साय आज शाम राजधानी रायपुर के सड्डू में न्यूज 24 और लल्लूराम डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘जेन नेक्स्ट संवाद 'यंग माइंड्स, मीनिंगफुल कन्वर्सेशंस’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री जेन-जी और जेन-अल्फा के विद्यार्थियों से रूबरू हुए। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन के संघर्ष, राजनीति, शिक्षा, राज्य के आर्थिक विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं और जल संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर सवाल किए। मुख्यमंत्री  साय ने सहज और आत्मीय अंदाज में युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए।

प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में दुनिया में बढ़ा भारत का मान-सम्मान

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में जनता की सेवा करते हुए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने 25 वर्ष पूरे किए हैं। इस अवसर पर पूरे देश में सेवा संकल्प अभियान मनाया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री  साय ने स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने जब लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता का आह्वान किया था, तब इसे लेकर सवाल भी उठाए गए थे। आज स्वच्छता जन-जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। घर-घर शौचालय के निर्माण से माताओं-बहनों के सम्मान और स्वास्थ्य की रक्षा हुई तथा गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिली। स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के प्रति सोच और व्यवहार दोनों में बड़ा बदलाव लाया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत के सामर्थ्य और दृढ़ इच्छाशक्ति से परिचित कराया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टि से भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है।  प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है और आज पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है।

मुख्यमंत्री  साय ने अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि चार दिनों के प्रवास के दौरान उनकी अनेक प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा हुई। वहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का उल्लेख किया।

अपना बचपन याद कर मुख्यमंत्री ने बताया – कितना बदल गया है शिक्षा का परिदृश्य

युवाओं से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि आप सभी से चर्चा करते हुए मुझे अपना बचपन याद आ रहा है। जब मैं बगिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता था, तब हमारे स्कूल में पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने की व्यवस्था तक नहीं थी। परीक्षा देने के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ा और वहां पांच दिनों तक रुककर परीक्षा दी। उस समय स्कूल भवन भी कच्चे होते थे और बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है और उच्च शिक्षा की विभिन्न संस्थाएं प्रदेश में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज उन्हें शिक्षा के जो अवसर और सुविधाएं मिल रही हैं, उनका भरपूर सदुपयोग करें और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें।

“कभी नहीं सोचा था सरपंच भी बनूंगा, ईश्वर ने मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया”

बीबीए के छात्र अश्मित शिंदे ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की प्रेरणा कैसे मिली। सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री  साय ने अपने जीवन के संघर्षपूर्ण दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि मैं जशपुर के बगिया जैसे छोटे से गांव में पला-बढ़ा हूं। जब मैं लगभग 10 वर्ष का था, तब मेरे पिता का आकस्मिक निधन हो गया। भाइयों में सबसे बड़ा होने के कारण छोटी उम्र में ही छोटे भाइयों, मां और दादी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पढ़ाई के साथ खेती-बाड़ी संभाली और छोटे भाइयों को सक्षम बनाने का प्रयास किया। उस समय कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि गांव का सरपंच बनूंगा। सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ते हुए सरपंच से विधायक, सांसद, केंद्रीय राज्यमंत्री और आज मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला।

मुख्यमंत्री  साय ने युवाओं से कहा कि उन्होंने हमेशा ‘कर्म ही पूजा है’ के सिद्धांत को जीवन में अपनाया। जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि हम अच्छे उद्देश्य से पूरी निष्ठा के साथ काम करते हैं तो ईश्वर भी हमारा साथ देता है। शायद ईश्वर को मेरे हाथों से लोगों की सेवा करानी थी, इसलिए एक छोटे से गांव के सरपंच को मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का अवसर मिला।

समय की कीमत समझें, अपनी रुचि को बनाएं लक्ष्य

छात्र करण भोसले ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन का मूल मंत्र पूछा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समय की कीमत समझनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अभी उनका समय अध्ययन और अपने भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का है। इस समय का जितना अधिक सदुपयोग करेंगे, भविष्य उतना ही बेहतर होगा। सपने हमें मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं। हर युवा को अपनी रुचि पहचाननी चाहिए, उसी के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उसे हासिल करने के लिए पूरी ऊर्जा से प्रयास करना चाहिए।

“जल है तो कल है”—जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान

कक्षा नवमीं के छात्र आदित्य राज तिवारी ने मुख्यमंत्री  साय से पूछा कि स्कूली विद्यार्थी जल संरक्षण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल है तो कल है।” जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और यह आज पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ‘जल संचय-जनभागीदारी’ अभियान चलाया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री  साय ने कोरिया जिले में लागू 5 प्रतिशत मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में अच्छे परिणाम सामने आए हैं। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसका उल्लेख किया है। राजनांदगांव में सोक पिट निर्माण की दिशा में अच्छा काम हो रहा है।उन्होंने युवाओं से वर्षा जल संचयन को अपने घर, स्कूल और समाज में प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल के कक्षा ग्यारहवीं के छात्र मितांश सिंह ने प्रदेश के आर्थिक विकास को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए अपना विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न राज्य है और इन संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर प्रदेश की आय बढ़ाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 

शिक्षा को संस्कार और रोजगार से जोड़ रही नई शिक्षा नीति

छात्रा सानिया परवीन ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में सवाल किया। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि प्रदेश में 17 प्रयास विद्यालय संचालित हैं। इन संस्थानों में प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और अधोसंरचना को भी लगातार बेहतर किया जा रहा है। केंद्र सरकार की पीएम योजना में छत्तीसगढ़ के 341 स्कूल शामिल हैं। योजना के तहत इन विद्यालयों में अधोसंरचना, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं सहित आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखते हुए उसे संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ना है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के बच्चों और युवाओं को ऐसी शिक्षा मिले, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करे।

युवाओं के साथ सुने भक्ति गीत, प्रतिभाओं का किया सम्मान

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने युवाओं के साथ ‘भजन क्लबिंग’ के अंतर्गत आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत भक्ति गीतों का आनंद लिया। मुख्यमंत्री ने खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले युवाओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।

इस अवसर पर गणमान्य नागरिक, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा हमारी जनजातीय संस्कृति, आस्था और सामूहिक सहभागिता की अनुपम विरासत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा हमारी जनजातीय संस्कृति, आस्था और सामूहिक सहभागिता की अनुपम विरासत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में बस्तर सांसद महेश कश्यप के नेतृत्व में बस्तर दशहरा समिति, जगदलपुर के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री साय को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व 2026 में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया। इस अवसर पर बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपरा के अनुरूप प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक पागा पहनाकर उनका सम्मान किया।

मुख्यमंत्री साय ने आत्मीय आमंत्रण के लिए प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए बस्तर दशहरा के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी आस्था, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता की अनुपम विरासत है। इस पर्व में बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा और सामाजिक समरसता की सुंदर अभिव्यक्ति दिखाई देती है। हमारी सरकार बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इससे जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों, परंपराओं तथा इस वर्ष के आयोजन की तैयारियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

*75 दिनों तक चलती है आस्था और परंपरा की अनूठी यात्रा*

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा लगभग 75 दिनों तक चलने वाला विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है। हरेली अमावस्या से इसकी पारंपरिक शुरुआत होती है और विभिन्न पूजा-विधानों एवं अनुष्ठानों के साथ यह पर्व आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तक चलता है।

इस वर्ष 12 अगस्त को पाटजात्रा पूजा विधान के साथ बस्तर दशहरा पर्व का शुभारंभ हुआ। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा, 18 अक्टूबर को बेल पूजा तथा 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार का आयोजन किया जाएगा। बस्तर दशहरा के विभिन्न अनुष्ठानों में अंचल के अलग-अलग समुदायों की परंपरागत और महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है।

*मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा है बस्तर दशहरा*

बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बस्तर में दशहरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था और आराधना के महापर्व के रूप में मनाया जाता है।

बस्तर दशहरा की परंपरा को ऐतिहासिक मान्यताओं में चालुक्य नरेश पुरुषोत्तम देव से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पुरुषोत्तम देव ने पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की यात्रा की थी, जहां उन्हें ‘रथपति’ की उपाधि प्राप्त हुई। इसी ऐतिहासिक परंपरा के साथ बस्तर दशहरा में रथ का विशेष महत्व जुड़ा हुआ है।

बस्तर दशहरा में मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन सहित विभिन्न समुदायों और समाज के अलग-अलग वर्गों की जिम्मेदारियां परंपरागत रूप से निर्धारित हैं। धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर रथ निर्माण और आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं तक स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी इसकी विशेषता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही सामूहिक सहभागिता की यह परंपरा बस्तर दशहरा को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय का अनूठा उदाहरण बनाती है।

*देश-दुनिया को आकर्षित करती है बस्तर की जीवंत संस्कृति*

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा अपनी भव्य रथयात्रा, विशिष्ट पूजा-अनुष्ठानों, जनजातीय परंपराओं और लोक संस्कृति के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक आयोजन और बस्तर की जीवंत संस्कृति को करीब से देखने के लिए पहुंचते हैं।

बस्तर दशहरा जहां सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है, वहीं यह बस्तर की लोक कला, परंपराओं और पर्यटन को भी व्यापक पहचान देता है। विभिन्न समुदायों की सामूहिक भागीदारी और मां दंतेश्वरी के प्रति अगाध आस्था इस पर्व को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करती है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर की संस्कृति छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर है। बस्तर दशहरा जैसी परंपराएं हमें अपनी जड़ों से जोड़ती हैं और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती हैं। इन परंपराओं का संरक्षण और उन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री को आमंत्रण देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में बस्तर सांसद महेश कश्यप, परगनाकरेकोट के  मंगलु मांझी,  बलराम मांझी, श्री पदम् चालकी, समारू चालकी, डमरू चालकी, लक्ष्मण मांझी सहित अनेक मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन एवं बस्तर दशहरा समिति के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने की विभागीय योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा, अधिकारियों को दिए महत्वपूर्ण निर्देश

पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने की विभागीय योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा, अधिकारियों को दिए महत्वपूर्ण निर्देश

 रायपुर - पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री  राजेश अग्रवाल ने आज नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में पर्यटन, संस्कृति, धर्मस्व एवं पुरातत्व विभाग की योजनाओं और विकास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटन विकास से जुड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़कर प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए।

चित्रकोट को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी तेज

मंत्री  अग्रवाल ने बस्तर के विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं दो सप्ताह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित समय-सीमा में डीपीआर एवं प्रेजेंटेशन तैयार कर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने को कहा। साथ ही सिरपुर पर्यटन विकास की तैयार डीपीआर का प्रस्तुतीकरण करने के निर्देश दिए।

144 पर्यटन स्थलों का सर्वेक्षण पूरा, 20 स्थलों पर प्राथमिकता से विकसित होंगी सुविधाएं

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रदेश के 144 पर्यटन स्थलों का गैप फिलिंग असेसमेंट पूरा कर लिया गया है। मंत्री  अग्रवाल ने सर्वेक्षण के आधार पर प्राथमिकता वाले 20 पर्यटन स्थलों में सार्वजनिक शौचालय, स्वच्छ पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं फास्ट ट्रैक आधार पर विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन सुविधाओं के संचालन एवं रखरखाव के लिए स्थानीय समितियों को जिम्मेदारी देने अथवा सुलभ इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं का सहयोग लेने को कहा।

राम वनगमन पर्यटन परिपथ के 31 नए स्थलों पर दो माह में शुरू होंगे कार्य

मंत्री  अग्रवाल ने राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत पूर्व में विकसित स्थलों के अधूरे कार्य शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्मित पर्यटन इकाइयों, सार्वजनिक शौचालयों और कैफेटेरिया का संचालन स्थानीय समितियों को सौंपने के निर्देश दिए। उन्होंने नवीन चिह्नित 31 स्थलों पर विकास कार्यों के लिए डीपीआर, निविदा और एजेंसी चयन सहित सभी प्रक्रियाएं दो माह के भीतर पूरी कर कार्यादेश जारी करने तथा निर्माण कार्य प्रारंभ कराने को कहा। प्रथम चरण में चयनित 10 स्थलों के अतिरिक्त बस्तर के एक-दो महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल करने तथा आवश्यक बजट प्रस्ताव प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने माता कौशल्या धाम चंदखुरी में प्रभु राम की नवीन प्रतिमा को स्थानांतरित कर मंदिर समिति से चर्चा कर जल्द से जल्द मूर्ति स्थापना के निर्देश दिए।

रामलला दर्शन योजना के लिए वैकल्पिक ट्रेन संचालन की व्यवस्था

 रामलला दर्शन योजना की समीक्षा के दौरान मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की यात्रा में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। आईआरसीटीसी द्वारा पेंट्री बोगी में तकनीकी समस्या के कारण ट्रेन उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में उन्होंने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) के माध्यम से पृथक एजेंसी चयनित कर वैकल्पिक ट्रेन संचालन की आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

भोरमदेव कॉरिडोर की ऑनलाइन निगरानी, होमस्टे हितग्राहियों को शीघ्र मिलेगी सब्सिडी

मंत्री  अग्रवाल ने भोरमदेव कॉरिडोर के निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा और तकनीकी निगरानी के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने तथा संबंधित एजेंसियों को नियमानुसार समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने होमस्टे नीति के अंतर्गत चयनित हितग्राहियों को कैपिटल सब्सिडी शीघ्र उपलब्ध कराने तथा तीन चरणों में सहायता राशि वितरण की आवश्यक तैयारी करने को कहा।

पर्यटन मंडल की जिन इकाइयों को तकनीकी कारणों से निजी संस्थाओं को लीज पर देना संभव नहीं है, उनका संचालन स्थानीय समितियों के माध्यम से कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रत्येक पर्यटन इकाई में आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों और उनकी दूरी दर्शाने वाले बड़े सूचना बोर्ड लगाने को कहा गया।

पर्यटन मार्गों पर विकसित होंगे सुविधा केंद्र, परियोजनाओं की निगरानी के लिए इंजीनियरों की सेवाएं

मंत्री  अग्रवाल ने पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रमुख पर्यटन मार्गों पर वेसाइड एमेनिटीज विकसित करने हेतु सभी जिला कलेक्टरों से समन्वय कर भूमि चिह्नित करने और पर्यटन मंडल का लैंड बैंक तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्र एवं राज्य शासन की निर्माणाधीन पर्यटन परियोजनाओं की तकनीकी मॉनिटरिंग के लिए सर्विस प्रोवाइडर एजेंसी के माध्यम से इंजीनियरों की सेवाएं लेने पर सहमति प्रदान की।

बैठक में मुख्यमंत्री पर्यटन मिशन की तैयारियों, कुदरगढ़ रोप-वे निर्माण, मंदिर परिसरों के तालाबों एवं झीलों के जीर्णाेद्धार, मुख्यमंत्री की घोषणाओं से संबंधित लंबित कार्यों तथा स्वीकृत बजट के समयबद्ध उपयोग की भी समीक्षा की गई। मंत्री  अग्रवाल ने प्रदेश के पर्यटन स्थलों को जोड़कर मिनी सर्किट विकसित करने, स्थानीय टूर ऑपरेटरों एवं ट्रैवल एजेंटों के साथ कार्यशाला आयोजित करने तथा केंद्र सरकार की परियोजनाओं के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए।

कलाकारों के लिए डिजिटल पोर्टल होंगे सुदृढ़, पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण पर विशेष जोर

संस्कृति विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री  अग्रवाल ने कलाकारों के पंजीयन हेतु संचालित चिन्हारी पोर्टल को अपडेट करने, कलाकार दलों के श्रेणी उन्नयन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पारदर्शी आवंटन के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक पीठों के संबंधित विभागों को हस्तांतरण और पुनः संचालन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा।

पुरातत्व विभाग की समीक्षा में सिरपुर के सुरंग टीला और नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो का नियमित संचालन सुनिश्चित करने, अंबिकापुर जिला पुरातत्व संग्रहालय के उन्नयन तथा रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में ऐतिहासिक रियासतों से जुड़ी सामग्री के व्यवस्थित प्रदर्शन के निर्देश दिए गए। बैठक में युवा दर्शन योजना में खिलाड़ियों को शामिल करने तथा फिल्म सिटी एवं ट्राइबल कन्वेंशन सेंटर के कार्यों में तेजी लाने पर भी चर्चा हुई।

मंत्री  अग्रवाल ने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने, लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने तथा अगली समीक्षा बैठक में प्रत्येक निर्देश पर की गई कार्रवाई का अद्यतन प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना भी आवश्यक है।

बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक  सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के उपसचिव  अभिषेक गुप्ता, पर्यटन मंडल की उपमहाप्रबंधक मती पूनम शर्मा, राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

डेयरी व्यवसाय से संध्या बनीं आत्मनिर्भर, दूध की बिक्री से हर महीने हो रही 15 हजार रुपये की बचत

डेयरी व्यवसाय से संध्या बनीं आत्मनिर्भर, दूध की बिक्री से हर महीने हो रही 15 हजार रुपये की बचत

 रायपुर- ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और नियमित आमदनी का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। सरगुजा जिले के ग्राम लमगांव निवासी श्रीमती संध्या ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना से मिले सहयोग को अपनी मेहनत से सफल स्वरोजगार में बदल दिया है। वर्ष 2024 में योजना के तहत मिले अनुदान से उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया। आज उन्हें प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की बिक्री से प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी होती है, जिसमें चारा-पानी एवं अन्य खर्च निकालने के बाद करीब 15 हजार रुपये की बचत हो रही है।

संध्या की यह सफलता बताती है कि शासकीय योजनाओं से मिलने वाला सहयोग और पशुपालन के प्रति लगन ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित आय का मजबूत आधार बन सकती है। डेयरी व्यवसाय से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और भविष्य में व्यवसाय को और विस्तार देने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

वर्ष 2024 में मिला अनुदान, डेयरी व्यवसाय को मिली नई दिशा

संध्या बताती हैं कि वर्ष 2024 में उन्हें छत्तीसगढ़ शासन की राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत अनुदान प्राप्त हुआ। इस सहायता से गायों के पालन-पोषण और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

उन्होंने पशुओं की देखभाल और दूध उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया। नियमित मेहनत और बेहतर प्रबंधन से डेयरी व्यवसाय उनके परिवार के लिए आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

प्रतिदिन 30 लीटर दूध उत्पादन, हर महीने हो रही अच्छी आमदनी

संध्या के डेयरी व्यवसाय से वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की बिक्री से उन्हें रोजाना करीब 1,200 रुपये की आय होती है। उनके अनुसार, महीने में लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।

पशुओं के चारे, पानी और अन्य आवश्यक खर्चों को निकालने के बाद उन्हें प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये की बचत होती है। इस तरह डेयरी व्यवसाय से उनकी सालाना बचत करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच रही है।

नियमित रूप से होने वाली इस आमदनी ने संध्या को आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाया है। पशुपालन अब उनके लिए केवल घरेलू गतिविधि नहीं, बल्कि आय अर्जित करने का महत्वपूर्ण व्यवसाय बन गया है।

तीन बछियां बनीं भविष्य की नई उम्मीद

संध्या ने वर्तमान डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ भविष्य की भी तैयारी शुरू कर दी है। उनकी गायों से तीन बछियां प्राप्त हुई हैं, जिन्हें वे आगे प्रजनन के लिए तैयार कर रही हैं।

इन बछियों के बड़े होने से आने वाले समय में उनके पशुधन में वृद्धि होने की संभावना है। इससे दूध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी व्यवसाय का विस्तार करने के नए अवसर भी तैयार होंगे।

संध्या का प्रयास बताता है कि पशुपालन से होने वाली वर्तमान आय के साथ पशुधन का विकास भी भविष्य की आर्थिक मजबूती का आधार बन सकता है।

शासकीय सहयोग से आत्मनिर्भरता की राह हुई आसान

राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के माध्यम से मिले अनुदान ने संध्या को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। उन्होंने इस अवसर का उपयोग करते हुए पशुपालन को नियमित आय के साधन के रूप में विकसित किया।

संध्या ने योजना के तहत मिले सहयोग के लिए पशुधन विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि विभागीय सहायता से डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

लमगांव की संध्या की कहानी ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों के लिए प्रेरक उदाहरण है। शासकीय योजना से मिले सहयोग, पशुओं की बेहतर देखभाल और निरंतर मेहनत के माध्यम से उन्होंने डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। आज दूध की बिक्री से होने वाली नियमित आमदनी उनके वर्तमान को आर्थिक संबल दे रही है, वहीं बढ़ता पशुधन भविष्य में और आगे बढ़ने की उम्मीद जगा रहा है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में छत्तीसगढ़ का बड़ा सुधार, भूमि उपयोग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में छत्तीसगढ़ का बड़ा सुधार, भूमि उपयोग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव

 रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और शहरी विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किया है। भारत सरकार द्वारा डीरिगुलेशन (Deregulation) और अनुपालन बोझ कम करने (Compliance Burden Reduction) के लिए सुझाए गए सुधारों के अनुरूप राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस बदलाव से भूमि उपयोग संबंधी प्रावधान अधिक सरल, स्पष्ट और लचीले होंगे तथा आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे।

वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में किए गए इन सुधारों का उद्देश्य शहरी नियोजन व्यवस्था को बदलती आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक व्यावहारिक बनाना है। नई व्यवस्था में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए नेगेटिव लिस्ट (Negative List) आधारित मॉडल अपनाया गया है। इससे भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं में अनावश्यक जटिलताएं कम होंगी और नागरिकों, उद्यमियों तथा निवेशकों को अधिक सुविधा मिलेगी।

शहरी नियोजन सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ को मिली 885 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता

भारत सरकार की विशेष सहायता योजना (Special Assistance to States for Capital Investment-SASCI) के अंतर्गत शहरी नियोजन सुधारों को अपनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय पहल की है। इन सुधारों के लिए राज्य को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 800 करोड़ रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 85 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई है। इस प्रकार दो वर्षों में कुल 885 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिली है।

इसी सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने अब भूमि उपयोग नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। यह पहल केंद्र सरकार की उस व्यापक नीति के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत राज्यों में नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनावश्यक प्रतिबंधों को कम करने और निवेश एवं आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

नेगेटिव लिस्ट मॉडल से भूमि उपयोग में आएगा अधिक लचीलापन

संशोधित भूमि विकास नियमों में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए नेगेटिव लिस्ट आधारित व्यवस्था लागू की गई है। इस मॉडल के अंतर्गत प्रत्येक भूमि उपयोग श्रेणी में उन गतिविधियों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है, जो संबंधित क्षेत्र के लिए अनुपयुक्त हैं। वहीं, अन्य अनुमत्य गतिविधियों के संचालन के लिए अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

इस व्यवस्था का प्रमुख लाभ यह होगा कि भूमि उपयोग से संबंधित नियम अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनेंगे। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, नई व्यावसायिक गतिविधियों और नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप भूमि का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।

भारत सरकार द्वारा सुझाए गए सुधारों के अनुरूप त्रिपुरा, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों ने भी अपने विकास नियंत्रण विनियमों (Development Control Regulations-DCR) में नेगेटिव लिस्ट मॉडल अपनाया है। छत्तीसगढ़ ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए भूमि उपयोग नियमन को अधिक आधुनिक, लचीला और विकासोन्मुख बनाया है।

आवासीय क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल और कार्यालयों को मिलेगी अनुमति

संशोधित नियमों की एक महत्वपूर्ण विशेषता विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के बीच अनुमत्य गतिविधियों का विस्तार है। आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मिश्रित भूमि उपयोग (Mixed Use) को प्रोत्साहित किया गया है।

नई व्यवस्था के अंतर्गत अस्पताल और स्कूल जैसी जन-आवश्यक सुविधाओं को आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमत्य किया गया है। इसी प्रकार कार्यालयों को भी आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमति दी गई है।

इस बदलाव से नागरिकों को अपने निवास स्थान के आसपास ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही, आवासीय और कार्यस्थलों के बीच की दूरी कम होने से आवागमन में लगने वाले समय और यातायात के दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकेगी।

औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी और श्रमिक आवास की सुविधा

राज्य सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों और श्रमिकों की आवश्यकताओं को भी भूमि उपयोग सुधारों में विशेष महत्व दिया है। संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी तथा संबंधित श्रमिकों के लिए आवास जैसी सुविधाओं को अनुमत्य गतिविधियों में शामिल किया गया है।

इससे औद्योगिक इकाइयों के आसपास कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी। श्रमिकों को कार्यस्थल के निकट रहने की सुविधा उपलब्ध होने से उनके दैनिक आवागमन में आसानी होगी और औद्योगिक क्षेत्रों में आवश्यक सामाजिक अधोसंरचना के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

इसके अतिरिक्त मनोरंजन भूमि उपयोग श्रेणी में श्मशान एवं कब्रिस्तान से संबंधित आवश्यक गतिविधियों को भी अनुमत्य किया गया है। इस प्रकार संशोधित व्यवस्था में नागरिक सुविधाओं, सामाजिक आवश्यकताओं और आर्थिक गतिविधियों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है।

निवेश, रोजगार और शहरी विकास को मिलेगी नई गति

तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ भूमि उपयोग की आवश्यकताएं भी लगातार बदल रही हैं। आवासीय क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता, व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुविधाओं का विकास आधुनिक शहरी नियोजन के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

राज्य सरकार द्वारा किए गए इन सुधारों से भूमि उपयोग संबंधी नियम अधिक व्यावहारिक होंगे और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सुविधा मिलेगी। नियमों में स्पष्टता और अनुपालन संबंधी बोझ कम होने से उद्यमियों तथा निवेशकों को भी लाभ मिलने की अपेक्षा है।

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य में निवेश के नए अवसर विकसित करने, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और नागरिकों के लिए बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को मिलेगी मजबूती

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और निवेश अनुकूल वातावरण के निर्माण को प्राथमिकता दे रही है। भूमि उपयोग नियमों में किया गया यह संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

भारत सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने संबंधी सुधारों के अनुरूप लागू की गई नई व्यवस्था से छत्तीसगढ़ में शहरी नियोजन को अधिक आधुनिक और विकासोन्मुख बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में यह सुधार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

बिहान से बदली पुष्पा राजवाड़े की जिंदगी, टेंट व्यवसाय से शुरू हुआ सफर, ट्रैक्टर खरीदकर बनीं लखपति दीदी

बिहान से बदली पुष्पा राजवाड़े की जिंदगी, टेंट व्यवसाय से शुरू हुआ सफर, ट्रैक्टर खरीदकर बनीं लखपति दीदी

 रायपुर- कभी घरेलू कामकाज और पारंपरिक खेती-किसानी तक सीमित रहने वाली सरगुजा जिले की मती पुष्पा राजवाड़े आज लखपति दीदी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत की शुरुआत की, फिर टेंट व्यवसाय के माध्यम से स्वरोजगार की राह पकड़ी। व्यवसाय से आत्मविश्वास बढ़ा तो समूह से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदा। आज ट्रैक्टर से जहां परिवार की खेती आसान हुई है, वहीं उसे किराए पर देकर अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है। इस तरह एक छोटे से प्रयास से शुरू हुआ उनका सफर आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है।

सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत मेंड्रा खुर्द निवासी पुष्पा राजवाड़े की यह कहानी बताती है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाला आर्थिक सहयोग, नियमित बचत और स्वरोजगार के अवसर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। बिहान से जुड़कर उन्होंने न केवल परिवार की आय बढ़ाने के नए साधन विकसित किए, बल्कि बच्चों की बेहतर परवरिश और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

समूह से जुड़कर शुरू की बचत, टेंट व्यवसाय ने दिखाई स्वरोजगार की राह

पुष्पा राजवाड़े जय  शक्ति महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं और समूह में लेखापाल का दायित्व भी निभा रही हैं। वे बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले उनका अधिकांश समय घरेलू कार्यों और खेती-किसानी में बीतता था। परिवार की आय बढ़ाने की इच्छा थी, लेकिन स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक संसाधन और अवसर सीमित थे।

बिहान से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की। समूह की गतिविधियों में भागीदारी से उन्हें स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली और स्वयं का काम शुरू करने का आत्मविश्वास भी बढ़ा। इसके बाद उन्होंने समूह के माध्यम से टेंट व्यवसाय की शुरुआत की।

टेंट व्यवसाय से आमदनी होने लगी तो पुष्पा ने आजीविका के अन्य साधन विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने महसूस किया कि खेती-किसानी में आधुनिक साधनों का उपयोग कर समय और मेहनत की बचत करने के साथ अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा सकती है।

समूह से ऋण लेकर खरीदा ट्रैक्टर, पारंपरिक खेती की मुश्किलें हुईं कम

पुष्पा बताती हैं कि पहले उनके परिवार में पारंपरिक तरीके से हल चलाकर खेती की जाती थी। खेतों की जुताई और अन्य कृषि कार्यों में अधिक समय तथा मेहनत लगती थी। कई बार समय पर कृषि कार्य पूरा करने में भी कठिनाई होती थी।

इन परेशानियों को दूर करने के लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदने का निर्णय लिया। समूह से मिले आर्थिक सहयोग के माध्यम से ट्रैक्टर खरीदने के बाद परिवार की खेती-किसानी का तरीका बदल गया।

अब खेतों की जुताई सहित अन्य कृषि कार्य समय पर पूरे हो रहे हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। उनके पति खेती-किसानी के साथ ट्रैक्टर चलाने का कार्य करते हैं।

पुष्पा के लिए ट्रैक्टर केवल खेती का साधन नहीं, बल्कि अतिरिक्त आमदनी का जरिया भी बन गया है। परिवार अपनी खेती के कार्य पूरे करने के साथ ट्रैक्टर को किराए पर देकर भी आय अर्जित कर रहा है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है।

टेंट व्यवसाय से ट्रैक्टर तक, आय के कई साधन किए विकसित

पुष्पा ने अपनी आजीविका को किसी एक व्यवसाय तक सीमित नहीं रखा। टेंट व्यवसाय से शुरुआत करने के बाद उन्होंने ट्रैक्टर के माध्यम से खेती और किराए से आमदनी के अवसर विकसित किए।

इसके साथ ही उनका स्वयं सहायता समूह मानसरोवर तालाब में मछली पालन और बागवानी का कार्य भी कर रहा है। समूह की महिलाएं सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से आजीविका के नए अवसर तलाश रही हैं।

पुष्पा का अनुभव बताता है कि ग्रामीण महिलाएं उपलब्ध संसाधनों और समूह से मिलने वाले सहयोग का उपयोग कर अलग-अलग आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकती हैं। इससे परिवार की आय के स्रोत बढ़ाने के साथ भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार भी तैयार होता है।

लखपति दीदी बनकर मिली नई पहचान, बच्चों की बेहतर परवरिश में मिल रहा सहयोग

पुष्पा राजवाड़े के परिवार में उनके पति और दो बच्चे हैं। वे बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और स्वरोजगार शुरू करने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। अब खेती-किसानी के साथ टेंट व्यवसाय और ट्रैक्टर से होने वाली अतिरिक्त आमदनी परिवार की जरूरतों को पूरा करने में मददगार बन रही है।

आर्थिक स्थिति बेहतर होने से बच्चों के पालन-पोषण और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सुविधा हुई है। पुष्पा के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वे अब परिवार की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।

पुष्पा गर्व के साथ कहती हैं, “मुझे खुशी है कि मैं बिहान समूह से जुड़कर लखपति दीदी बनी हूं। समूह से मुझे बहुत सहयोग मिला है। आज हम खेती-किसानी के साथ अन्य व्यवसाय भी कर रहे हैं और अपने बच्चों की अच्छी तरह देखभाल कर पा रहे हैं।”

बिहान ने दिया आत्मविश्वास, बचत से व्यवसाय तक पहुंची पुष्पा

पुष्पा राजवाड़े की सफलता में स्वयं सहायता समूह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित बचत करने, आवश्यकता के अनुसार ऋण प्राप्त करने और व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला।

उन्होंने इन अवसरों का उपयोग करते हुए पहले टेंट व्यवसाय शुरू किया और बाद में ट्रैक्टर खरीदकर अपनी आजीविका का विस्तार किया। आज वे लखपति दीदी के रूप में अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

पुष्पा ने बिहान योजना के माध्यम से मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक रूप से आगे बढ़ने और परिवार की स्थिति बेहतर बनाने का अवसर मिला।

छोटी बचत से बड़े बदलाव तक, ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं पुष्पा

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पुष्पा राजवाड़े की कहानी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार से आए बदलाव का उदाहरण है। कभी घरेलू कार्यों और पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाली पुष्पा ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बचत की आदत विकसित की और धीरे-धीरे अपनी आजीविका के साधन बढ़ाए।

टेंट व्यवसाय से शुरू हुआ उनका सफर आज ट्रैक्टर, खेती-किसानी और समूह की अन्य आजीविका गतिविधियों तक पहुंच चुका है। लखपति दीदी के रूप में उनकी पहचान यह संदेश देती है कि आर्थिक सहयोग के साथ मेहनत, आत्मविश्वास और सही अवसर मिलें तो ग्रामीण महिलाएं स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने परिवार की आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार भी बन सकती हैं।

कच्चे मकान की परेशानियों से मिली मुक्ति, पीएम जनमन आवास से नोहर साय का पक्के घर का सपना हुआ साकार

कच्चे मकान की परेशानियों से मिली मुक्ति, पीएम जनमन आवास से नोहर साय का पक्के घर का सपना हुआ साकार

 रायपुर- बारिश के दिनों में छत से टपकता पानी, कच्चे मकान के क्षतिग्रस्त होने का डर और परिवार की सुरक्षा की चिंता कभी सरगुजा जिले के पहाड़ी कोरवा जनजाति के श्री नोहर साय के जीवन का हिस्सा थी। सीमित आमदनी और आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपने परिवार के लिए पक्का मकान बनाना उनके लिए एक बड़ा सपना था। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के अंतर्गत आवास योजना ने उनके इसी सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज नोहर साय का परिवार अपने पक्के घर में सुरक्षित और सुकून के साथ जीवन बिता रहा है।

सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड की ग्राम पंचायत ससौली के ग्राम चांगोरी निवासी नोहर साय विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह पहाड़ी कोरवा से आते हैं। जिला मुख्यालय अम्बिकापुर से लगभग 55 किलोमीटर दूर रहने वाले इस परिवार को वर्ष 2023-24 में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था। योजना से मिली सहायता और अपनी मेहनत की कमाई से की गई बचत को जोड़कर उन्होंने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया।

बारिश में टपकती थी छत, परिवार की सुरक्षा को लेकर बनी रहती थी चिंता

नोहर साय बताते हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बारिश शुरू होते ही छत से पानी टपकने लगता था। कच्चे मकान के क्षतिग्रस्त होने की आशंका के साथ परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती थी। जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी परेशानी का कारण था।

परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे अपनी कमाई से पक्का मकान बनवा सकें। सीमित संसाधनों के बीच घर की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही प्राथमिकता थी। ऐसे में पक्के मकान का सपना लंबे समय तक अधूरा रहा।

शासकीय सहायता और अपनी बचत से पूरा किया घर बनाने का सपना

वर्ष 2023-24 में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत होने पर नोहर साय को अपना पक्का घर बनाने का अवसर मिला। उन्होंने योजना से प्राप्त सहायता राशि के साथ अपनी मेहनत की कमाई से बचाई गई राशि का उपयोग कर मकान निर्माण पूरा किया।

पक्का मकान बन जाने के बाद परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब बारिश के मौसम में छत से पानी टपकने और घर के क्षतिग्रस्त होने की चिंता नहीं रहती। परिवार को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध हुआ है।

पक्की छत के साथ जीवन में आया सुकून और आत्मविश्वास

नोहर साय के लिए पक्का मकान केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि वर्षों की परेशानी से मिली राहत और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद है। पहले कच्चे मकान में रहने के दौरान मौसम बदलने के साथ घर की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती थी। अब अपने पक्के घर में परिवार के साथ रहना उन्हें सुकून देता है।

पक्का आवास मिलने से परिवार को बारिश और अन्य मौसमी परेशानियों से बेहतर सुरक्षा मिली है। इसके साथ ही घर की मजबूती को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहने से परिवार में आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

विशेष पिछड़ी जनजातीय परिवारों के लिए सुरक्षित आवास का संबल

प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों के पात्र परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आवास योजना के माध्यम से पक्का मकान उपलब्ध कराना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

नोहर साय की कहानी बताती है कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों के लिए आवास सहायता कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। सीमित आमदनी के कारण जो परिवार अपने संसाधनों से पक्का घर नहीं बना पाते, उनके लिए योजना से मिलने वाला सहयोग सुरक्षित आवास का सपना पूरा करने का माध्यम बन रहा है।

कच्चे घर से पक्के आशियाने तक, बदली परिवार की जिंदगी

कभी कच्चे मकान में मौसम की मुश्किलों और असुरक्षा के बीच जीवन बिताने वाला नोहर साय का परिवार आज अपने पक्के घर में रह रहा है। वर्षों से संजोया सपना पूरा होने के साथ परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार मिला है।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत नोहर साय की यह कहानी जनकल्याणकारी योजनाओं से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में आने वाले बदलाव को सामने लाती है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से मिली सहायता और स्वयं की मेहनत ने उनके पक्के घर का सपना साकार किया है। आज यह घर उनके परिवार के लिए केवल एक आशियाना नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान, सुकून और बेहतर भविष्य के प्रति विश्वास का प्रतीक बन गया है।

विष्णु भैया के विजन के अनुरूप पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों से नागरिकों के समय और धन की हो रही बचत

विष्णु भैया के विजन के अनुरूप पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों से नागरिकों के समय और धन की हो रही बचत

 सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी

विष्णु भैया के विजन के अनुरूप पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों से नागरिकों के समय और धन की हो रही बचत

महज 30 मिनट में हुई रजिस्ट्री, नम्रता और प्रिया को मिली 30 हजार रुपये की आर्थिक राहत

महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट और 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से कम हुआ रजिस्ट्री का खर्च

समय और धन की हुई बचत —राजनांदगांव की दो महिलाओं ने साझा किए पंजीयन व्यवस्था में बदलाव के अनुभव

रायपुर- कभी संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए घंटों इंतजार और अधिक खर्च की चिंता रहती थी, लेकिन अब पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों से नागरिकों के समय और धन दोनों की बचत हो रही है। राजनांदगांव की श्रीमती नम्रता खंडेलवाल और श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पहुंचीं दोनों महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत और 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से कुल करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक राहत मिली। वहीं, उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीयन की पूरी प्रक्रिया महज 30 मिनट में पूरी हो गई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में दोनों महिलाओं ने इस सुखद अनुभव को साझा किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न सुधार किए गए हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में रियायत, उपकर की समाप्ति और तकनीक आधारित सुविधाओं के विस्तार से नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिलने के साथ रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी आसान हुई है।

रजिस्ट्री में 30 हजार रुपये की बचत, दोनों महिलाओं के चेहरे पर आई खुशी

श्रीमती नम्रता खंडेलवाल और श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने बताया कि महिला क्रेता होने के कारण उन्हें पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत मिली। महिलाओं के पक्ष में संपत्ति अंतरण संबंधी दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त किए जाने का लाभ भी उन्हें मिला।

इन दोनों रियायतों के कारण संपत्ति पंजीयन पर होने वाला कुल खर्च कम हुआ और उन्हें करीब 30 हजार रुपये की बचत हुई। दोनों महिलाओं ने इस आर्थिक राहत को उपयोगी बताते हुए कहा कि शुल्क में कमी से अपने नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराना अधिक किफायती हुआ है।

प्रिया ने बताया—सिर्फ 30 मिनट में पूरा हो गया रजिस्ट्री का कार्य

श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने पंजीयन प्रक्रिया में आए बदलाव के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उप-पंजीयक कार्यालय में उनकी रजिस्ट्री और उससे संबंधित प्रक्रिया लगभग 30 मिनट में पूरी हो गई। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल भुगतान और तकनीक आधारित अन्य सुविधाओं के कारण उन्हें पंजीयन कराने में आसानी हुई।

उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक हुई है। कम समय में काम पूरा होने से अनावश्यक इंतजार और कार्यालयीन दौड़भाग से भी राहत मिली।

डिजिटल सुविधाओं से रजिस्ट्री हुई आसान, नामांतरण की प्रक्रिया भी हुई सरल

पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित सुधारों के माध्यम से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट से नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार पंजीयन के लिए समय निर्धारित कर सकते हैं। वहीं, ऑनलाइन भुगतान की सुविधा से पंजीयन शुल्क का भुगतान डिजिटल माध्यम से किया जा सकता है। इसके साथ ही आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल दस्तावेज जैसी व्यवस्थाओं से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति की रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो रही है।

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को मिल रहा प्रोत्साहन

राज्य शासन द्वारा महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत से संपत्ति पंजीयन का आर्थिक भार कम हुआ है। यह पहल महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने और उसका विधिवत पंजीयन कराने को प्रोत्साहित कर रही है। संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना उनकी आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

श्रीमती नम्रता खंडेलवाल और श्रीमती प्रिया खंडेलवाल को मिली करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक राहत इसी व्यवस्था का प्रत्यक्ष उदाहरण है। शुल्क में छूट के साथ कम समय में रजिस्ट्री पूरी होने से दोनों महिलाओं को दोहरा लाभ मिला।

नम्रता और प्रिया की कहानी—सुशासन से मिली दोहरी राहत

श्रीमती नम्रता खंडेलवाल और श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने पंजीयन शुल्क में रियायत तथा डिजिटल सुविधाओं से मिले लाभ के लिए छत्तीसगढ़ शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शुल्क में राहत और कम समय में पंजीयन की सुविधा से उनका अनुभव पहले की तुलना में बेहतर रहा।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है।

राजनांदगांव की नम्रता और प्रिया की यह कहानी बताती है कि नागरिक सेवाओं में किए गए सुधारों का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचता है। महज 30 मिनट में रजिस्ट्री और करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक बचत उनके लिए केवल प्रशासनिक सुधार का परिणाम नहीं, बल्कि समय, धन और अनावश्यक परेशानी से मिली राहत का अनुभव है।

कमल विहार के रहवासियों का फूटा गुस्सा: बिजली, पानी और सीवेज की समस्याओं को लेकर आरडीए सीईओ को सौंपा ज्ञापन

कमल विहार के रहवासियों का फूटा गुस्सा: बिजली, पानी और सीवेज की समस्याओं को लेकर आरडीए सीईओ को सौंपा ज्ञापन

 सात सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन 

रायपुर, 8 अक्टूबर। कमल विहार (कौशल्या विहार) के रहवासियों ने क्षेत्र की बिजली, पेयजल, सीवेज, स्ट्रीट लाइट और पार्कों से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर आरडीए के सीईओ अवनीश शरण से मुलाकात की। कमल विहार रहवासी संघ के अध्यक्ष डॉ. सुजीत परिहार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। रहवासियों ने समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की। आरडीए अध्यक्ष नंदे साहू से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने फोन पर कमल विहार पहुंचकर रहवासियों से मिलने का आश्वासन दिया।

रहवासियों ने क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती और कम वोल्टेज की समस्या दूर करने, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें चालू करने तथा ओल्ड धमतरी रोड चौक पर प्रकाश व्यवस्था करने की मांग की। इसके अलावा बदबूदार और दूषित पानी की शिकायत पर पेयजल आपूर्ति लाइन और फिल्टर की जांच, जाम सीवेज चैंबरों की सफाई, सड़कों पर बह रहे गंदे पानी की समस्या दूर करने तथा पार्कों में नियमित सफाई और रखरखाव की मांग रखी गई। रिहायशी क्षेत्र में भारी और व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने के साथ स्ट्रीट वेंडरों से जुड़ी अव्यवस्था और नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतों पर भी कार्रवाई की मांग की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने अवनी पब्लिक स्कूल परिसर में करीब 250 मजदूरों के लिए कथित तौर पर लेबर हाउस बनाए जाने की तैयारी का मुद्दा भी उठाया। रहवासियों ने इसकी अनुमति और भूमि उपयोग की जांच कराने तथा स्थल निरीक्षण कर अग्नि सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, सीवेज और कचरा प्रबंधन की स्थिति देखने की मांग की। उनका कहना है कि इतने लोगों के रहने से यातायात, पार्किंग और सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव की भी समीक्षा होनी चाहिए। रहवासियों ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति किसी जाति या समुदाय से नहीं, बल्कि नियमों, सुरक्षा और रिहायशी क्षेत्र की व्यवस्था से जुड़ी है।

RDA सीईओ अवनीश शरण ने स्ट्रीट लाइट, सीवेज, पेयजल और वेंडरों से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई का भरोसा दिया। प्रतिनिधिमंडल में डॉ. सुजीत परिहार, पन्नालाल सिन्हा, विनोद मोटवानी, प्रताप परख, आनंद श्रीवास, प्रतिभा कुकरेजा, अंकित अग्रवाल, अजय शर्मा, किशन साहू, विनय गुप्ता, मनोज डहरिया और संजय गुहे सहित अन्य रहवासी शामिल थे।

मुख्यमंत्री साय ने जिले को दी 218 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

मुख्यमंत्री साय ने जिले को दी 218 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

 - 1.22 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण एवं 217 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का हुआ भूमिपूजन

-जिले को अधोसंरचना, शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्र में मिलेगी विशेष गति

दुर्ग, 08 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने दुर्ग जिले को अधोसंरचना, शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्र में सुदृढ़ बनाने के लिए कुल 218 करोड़ 48 लाख 29 हजार रुपये के विभिन्न विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी है। जिनमें 122.56 लाख (1.22 करोड़ रुपये) का लोकार्पण तथा कुल 217 करोड़ 25 लाख 73 हजार रुपये की लागत से 23 प्रमुख निर्माण कार्यों का भूमिपूजन कार्य शामिल है। इसके तहत लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पाेरेशन लिमिटेड तथा छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के माध्यम से जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति दी गई है।
लोकार्पण कार्यों के अंतर्गत दुर्ग शहर विधानसभा क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग द्वारा सिडबी क्लस्टर डेव्हलपमेंट फंड से पोषित आई.टी.आई. दुर्ग के उन्नयन कार्य का लोकार्पण किया गया, जिसकी कुल स्वीकृत लागत 122.56 लाख रुपये (1.22 करोड़ रुपये) है। वहीं जिले में अधोसंरचना और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री श्री साय ने 23 प्रमुख निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया। जिनमें मुख्यतः सड़क एवं शासकीय भवन निर्माण के क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग द्वारा दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में पुलगांव पुल मुख्य मार्ग से अंजोरा रसमड़ा पहुंच राज्य मार्ग क्रमांक 22 के लगभग 5 किमी 04 लेन निर्माण कार्य हेतु 30.20 करोड़ रुपये के कार्य का भूमिपूजन किया गया। अहिवारा विधानसभा में कुम्हारी-अहिवारा-पथरिया राज्य मार्ग-21 के किलोमीटर 1 से 27/6 तक चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 24.06 करोड़ रुपये तथा जेवरा सिरसा से भटगांव मार्ग के 3.60 किलोमीटर निर्माण कार्य हेतु 4.28 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। पाटन विधानसभा में भिलाई-सिरसा औंधी-औरी-मोतीपुर मार्ग के 15.50 किलोमीटर चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य के लिए 15.03 करोड़ रुपये, भिलाई से तर्रा मुख्य जिला मार्ग के 15 किलोमीटर मजबूतीकरण हेतु 8.33 करोड़ रुपये तथा पौहा से खपरी मार्ग के 2.20 किलोमीटर निर्माण हेतु 3.97 करोड़ रुपये के कार्यों का भूमिपूजन हुआ। दुर्ग शहर विधानसभा अंतर्गत नाबार्ड (आरआईडीएफ) पोषित शासकीय पॉलिटेक्निक दुर्ग में ऑफिस ब्लॉक रिनोवेशन, सी.सी. रोड, दिव्यांग पुरुष टॉयलेट तथा सिविल विंग विस्तार कार्यों के लिए 8.86 करोड़ रुपये की लागत कार्य का भूमिपूजन हुआ। अहिवारा एवं वैशाली नगर क्षेत्र में चंदूलाल चंद्राकर शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से जुनवानी-कोहका-कुरूद मुख्य मार्ग के 2.50 किलोमीटर चौड़ीकरण हेतु 7.06 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, जबकि दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में लाईवलीहुड कॉलेज भवन निर्माण हेतु 4.11 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसी प्रकार जिले में जल संसाधन एवं सिंचाई परियोजनाओं के अंतर्गत जल संसाधन विभाग, दुर्ग द्वारा क्षेत्र में जल संरक्षण और सिंचाई प्रणाली में सुधार हेतु कई महत्वपूर्ण कार्यों की आधारशिला रखी गई। पाटन विधानसभा में सुरपा व्यपवर्तन योजना के जीर्णाेद्धार एवं नहर प्रणाली की रीमॉडलिंग व लाईनिंग हेतु 2.23 करोड़ रुपये के कार्य का भूमिपूजन हुआ। अहिवारा क्षेत्र में मोहंदी जलाशय जीर्णाेद्धार एवं नहर लाईनिंग हेतु 4.96 करोड़ रुपये, कपसदा जलाशय जीर्णाेद्धार एवं नहर लाईनिंग हेतु 4.57 करोड़ रुपये तथा नंदौरी जलाशय जीर्णाेद्धार एवं नहर लाईनिंग हेतु 4.77 करोड़ रुपये के कार्य शामिल हैं। दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में तिरगा जलाशय जीर्णाेद्धार हेतु 4.71 करोड़ रुपये, गनियारी जलाशय जीर्णाेद्धार हेतु 4.71 करोड़ रुपये एवं रिसाली उमरपोटी जलाशय के जीर्णाेद्धार तथा नहर लाईनिंग कार्य हेतु 4.97 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त दुर्ग शहर विधानसभा अंतर्गत निगम क्षेत्र के तालाबों में निस्तारी जल भरने हेतु कोटनी माईनर चौनल निर्माण के लिए 4.93 करोड़ रुपये तथा शिवनाथ मण्डल कार्यालय दुर्ग के जीर्णाेद्धार एवं नव निर्माण कार्य हेतु 4.96 करोड़ रुपये के कार्यों का भूमिपूजन किया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं एवं चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के तहत छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पाेरेशन लिमिटेड द्वारा दुर्ग शहर में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास निर्माण हेतु 16.16 करोड़ रुपये तथा जिला चिकित्सालय दुर्ग स्थित शासकीय जी.एन.एम. प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण कार्य हेतु 11.96 करोड़ रुपये की लागत से भूमिपूजन संपन्न हुआ। ऊर्जा एवं विद्युत ट्रांसमिशन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड द्वारा पाटन विधानसभा क्षेत्र में विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 132/33 के.व्ही. उपकेंद्र जामगांव (आर) निर्माण हेतु 25.83 करोड़ रुपये, 132 के.व्ही.डी.सी.डी.एस. पाटन-जामगांव (आर) अति उच्च दाब ट्रांसमिशन लाइन हेतु 14.00 करोड़ रुपये तथा 220/132 के.व्ही. उपकेंद्र पाटन में 2 नग 132 के.व्ही. अतिरिक्त बे निर्माण कार्य हेतु 2.50 करोड़ रुपये के कार्यों की सौगात दी गई।

सेवा संकल्प अभियान- 'सेवा के रंग' कार्यक्रम के तहत निर्मित भव्य रंगोली का मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किया अवलोकन

सेवा संकल्प अभियान- 'सेवा के रंग' कार्यक्रम के तहत निर्मित भव्य रंगोली का मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किया अवलोकन

 -‘ऑपरेशन सिंदूर’, ‘विकसित भारत@2047’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं व राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर बनाई गई रंगोली

-मुख्यमंत्री ने रंगोली कलाकारों के रचनात्मक प्रयासों की सराहना कर उनका उत्साह बढ़ाया

दुर्ग, 08 अक्टूबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘सेवा के रंग’ कार्यक्रम के तहत आज दुर्ग शहर में सेवा, राष्ट्रभाव और विकास के संदेशों को रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया। इस अवसर पर रवि शंकर स्टेडियम के समीप स्थित बैडमिंटन कोर्ट में कुशल कलाकारों द्वारा आकर्षक एवं भव्य रंगोली का निर्माण किया गया।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज इस भव्य रंगोली का अवलोकन किया। उन्होंने कलाकारों से मुलाकात कर उनके द्वारा किए गए रचनात्मक प्रयासों की सराहना की तथा उनका उत्साहवर्धन किया। निर्मित रंगोली में ‘ऑपरेशन सिंदूर’, ‘विकसित भारत@2047’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं राष्ट्रीय महत्व के विषयों को कलात्मक रूप से उकेरा गया है। रंगोली के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, सेवा भावना, विकास और जनकल्याण का संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि ‘सेवा के रंग’ जैसे रचनात्मक आयोजनों के माध्यम से सेवा, राष्ट्रभावना और विकास के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है। कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से सामाजिक सरोकार और राष्ट्र के विकास की परिकल्पना को सुंदर स्वरूप प्रदान किया है।
इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, जिले के प्रशासनिक अधिकारियों, कलाकारों एवं नागरिकों ने भी रंगोली का अवलोकन किया और कलाकारों के रचनात्मक प्रयासों की सराहना की।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आदिम जाति विकास संबंधी राज्य स्तरीय कार्य समिति की बैठक सम्पन्न

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आदिम जाति विकास संबंधी राज्य स्तरीय कार्य समिति की बैठक सम्पन्न

 रायपुर, 8 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ शासन, आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत भारत के संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत गठित राज्य स्तरीय कार्यसमिति की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास, बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों का सूक्ष्म परीक्षण कर उन्हें अनुमोदित किया गया।

प्राथमिकता वाले प्रस्तावों को अंतिम रूप देते हुए, राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति के अनुमोदन हेतु परीक्षण पश्चात कुल 3,189 प्राथमिक कार्यों के लिए 246 करोड़ 54 लाख रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

बैठक की मुख्य विशेषताएँ और प्रमुख निर्णय

बैठक में जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (च्टज्ळ) वाले कुपोषण प्रभावित क्षेत्रों में 185 कम्युनिटी-मैनेज्ड क्रेच (पालना-घर) की स्थापना और संचालन को हरी झंडी दी गई।

सांस्कृतिक धरोहर व शिक्षा

जनजातीय क्षेत्रों के पवित्र सामाजिक-सांस्कृतिक स्थलों के जीर्णाेद्धार एवं संरक्षण के पायलट प्रोजेक्ट के साथ-साथ प्राथमिक शालाओं (कक्षा 1 से 5) में 2 वर्षों के लिए बहुभाषी शिक्षण-अधिगम सामग्री के विकास हेतु भी मंजूरी प्रदान की गई। अन्य विकास कार्य बुनियादी ढांचा, शिक्षा, संस्कृति एवं धरोहर, नवीकरणीय ऊर्जा, पेयजल, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, ग्राम व समुदाय विकास सहायता, खेलकूद, पशुपालन, अनुसूचित क्षेत्रों के लोगों के लिए आय सृजन की योजनाएं, तथा सुदृढ़ीकरण एवं प्रशासनिक व्यय से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के उपरांत उन्हें अनुमोदित किया गया।

मुख्य सचिव ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि अनुमोदित प्रस्तावों का क्रियान्वयन पूरी गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित किया जाए, ताकि कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ अंतिम छोर तक बसे जनजातीय अंचलों तक पहुंच सके।

इस उच्च स्तरीय बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के सचिव  भूवनेश यादव, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव सारांश मित्तर, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद अब्दुल कैसर हक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  भीम सिंह सहित कृषि, वन, महिला एवं बाल विकास और संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।