रायपुर। राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा ने संपूर्ण प्रदेश में अपना परचम लहराया है। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी वर्ष 2025-26 की राज्य स्तरीय एनएसएस पुरस्कार चयन सूची में विश्वविद्यालय और उससे जुड़ी संस्थाओं तथा स्वयंसेवकों ने कुल पांच पुरस्कार अपने नाम किए हैं। इस शानदार उपलब्धि में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय स्तर की श्रेणी में पूरे राज्य में पहला स्थान प्राप्त कर सरगुजा संभाग का गौरव बढ़ाया है।
संस्थागत श्रेणी में सरगुजा जिले के सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय, अम्बिकापुर को राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। वहीं महाविद्यालयीन स्वयंसेवक श्रेणी में राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अम्बिकापुर के शिवम शर्मा और शासकीय राम भजन राय एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय जशपुर नगर की कु. नेहा यादव ने बाजी मारी है। इसके अलावा विद्यालय स्तर की स्वयंसेवक श्रेणी में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अधिना (सूरजपुर) की कु. मीना राजवाड़े का चयन हुआ है।
राष्ट्रीय सेवा योजना के स्थापना दिवस के अवसर पर 24 सितम्बर को रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार में राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया जाएगा, जहाँ इन सभी उत्कृष्ट संस्थाओं और स्वयंसेवकों को सम्मानित किया जाएगा। वर्तमान में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के अंतर्गत सरगुजा संभाग के छह जिलों में 158 इकाइयां संचालित हैं, जो जमीनी स्तर पर समाजसेवा और सामुदायिक विकास के कार्यों में जुटी हुई हैं।
विश्वविद्यालय की इस ऐतिहासिक सफलता पर कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले ने सभी विजेताओं, प्राचार्यों और कार्यक्रम अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का समर्पण ही राष्ट्र निर्माण की असली नींव है और यह उपलब्धि उनके कठिन परिश्रम, अनुशासन व निष्ठा का ही परिणाम है।
00 375 अनुमेय कार्यों में से स्थानीय आवश्यकता के अनुसार कार्यों का करें चयन
रायपुर। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जिला पंचायत प्रतिनिधियों से वीसी द्वारा की वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन पर की चर्चाविकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के जिला पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यों से संवाद किया। बैठक में योजनांतर्गत जिलों में स्वीकृत कार्यों, प्रगति तथा योजना के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने जिला पंचायत प्रतिनिधियों से बारी-बारी संवाद करते हुए योजना के क्रियान्वयन की जानकारी ली तथा उनके सुझाव और जमीनी स्तर पर आ रही कठिनाइयों को जाना। उन्होंने सभी को वीबी-जीरामजी के अंतर्गत अब 375 प्रकार के अनुमय कार्यों में से स्थानीय आवश्यकता के अनुसार कार्यों का चयन एवं स्वीकृति के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों में पर्याप्त संख्या में कार्य स्वीकृत किए गए है, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ग्राम सभा के माध्यम से नए कार्य भी लिए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि योजना में मजदूरी एवं सामग्री का 60रू40 अनुपात बनाए रखते हुए तथा जल संरक्षण से संबंधित कम से कम 30 प्रतिशत कार्यों को प्राथमिकता देते हुए ग्राम सभाएं आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कार्य स्वीकृत कर सकती हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से योजना का लाभ ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कार्यों का चयन करने पर जोर दिया।
बैठक में अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ऋचा शर्मा ने पंचायतों में स्वीकृत कार्यों के गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किए जाएंगे, जिससे निर्माण कार्यों की प्रभावी निगरानी की जा सकेगी।
आयुक्त, विकसित भारतदृजीरामजी तारन प्रकाश सिन्हा ने जिला पंचायत सदस्यों के योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा तकनीकी समस्याओं से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों तथा किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खेत सड़क और धरसा को भी अनुमय कार्यों में शामिल किया गया है। प्रदेश में बालिका शौचालय, मुक्तिधाम शेड तथा डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज जैसे कार्यों को प्राथमिकता से लिया जा रहा है। ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकता के अनुसार इन कार्यों का चयन कर सकती हैं। सिन्हा ने बताया कि विभिन्न योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेंस) से संबंधित भारत सरकार का नोटिफिकेशन जल्द जारी होने की प्रक्रिया में है। वहीं मनरेगा के शेष लंबित भुगतान के संबंध में भारत सरकार को पत्र प्रेषित किया गया है।
वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 175 पदों पर भर्ती की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें कार्यक्रम अधिकारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर एवं लेखापाल के पद शामिल हैं तथा भर्ती प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। इसके अतिरिक्त बस्तर, बीजापुर एवं नारायणपुर जिलों में 63 रोजगार सहायक पदों पर भर्ती की अनुमति भी प्रदान की गई है।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने सुझाव साझा किए तथा मैदानी स्तर पर आ रही विभिन्न कठिनाइयों से अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों से प्राप्त सुझावों एवं समस्याओं को आवश्यक कार्रवाई हेतु संकलित किया गया है।
00 69.58 लाख रुपए से पक्के फड़ एवं समतलीकरण कार्य को मिली स्वीकृति, किसानों को मिलेगी बेहतर उपार्जन सुविधा
रायपुर। किसानों को धान उपार्जन के दौरान बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भटगांव विधानसभा क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की गई है। भटगांव विधायक एवं कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से विधानसभा क्षेत्र के 7 धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण कार्य के लिए 69.58 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। इससे इन केंद्रों में आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी और किसानों को धान बेचने के दौरान अधिक व्यवस्थित एवं सुविधाजनक वातावरण मिलेगा।
स्वीकृत कार्यों में सूरजपुर विकासखंड के टमकी, सिरसी, करोटी बी, खोपो, बतरा, सांवारांवां एवं कुर्रीडीह स्थित धान उपार्जन केंद्र शामिल हैं। प्रत्येक केंद्र में 9.94 लाख रुपए की लागत से पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण का कार्य किया जाएगा।
धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ और समतलीकरण होने से उपार्जन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी। इससे धान की आवक, खरीदी और रख-रखाव के दौरान होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को उपार्जन केंद्रों पर बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में यह कार्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में अधोसंरचना विकास को गति देने के क्रम में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा भटगांव विधानसभा क्षेत्र में किसानों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने के प्रयासों का यह एक और परिणाम है। इससे धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था मजबूत होने के साथ किसानों को सुविधाजनक उपार्जन व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
00 राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा चंपारण्य, करीब 15 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का होगा विस्तार
00 चंपारण्य को राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम - अग्रवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में लगभग 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ष्टस्रूष्ट ने स्वीकृति प्रदान की है। सीएसएमसी स्वदेश दर्शन 2.0 की केंद्रीय समिति है, जो मिशन निदेशालय की अनुशंसाओं के आधार पर परियोजनाओं की स्वीकृति पर विचार करती है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा तथा इसके लिए 18 माह की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को नई गति मिल रही है। चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। हमारा प्रयास होगा कि श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली की गरिमा और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्ता की सुविधाएं विकसित हों। यह परियोजना चंपारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के बीच और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करने में सहायक होगी।

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।
महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर में वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के माध्यम से पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य से संबंधित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना में यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है। यह श्रद्धालुओं के साथ-साथ परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी आकर्षक अनुभव होगा।
परियोजना की परिकल्पना इस प्रकार की गई है कि चंपारण्य आने वाले श्रद्धालुओं को महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के जीवन, दर्शन और विरासत से परिचित होने का अवसर मिले। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास तथा धार्मिक आयोजनों एवं वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक अवधि तक ठहरने की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है। परियोजना की डीपीआर एवं कार्य-सीमा तैयार है और स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारी है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को भी विस्तार मिलेगा। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले के राजस्व विभाग में बड़े पैमाने पर पटवारियों का ट्रासंफर किया गया है। यह सभी लंबे वक्त से एक ही हल्के में जमे हुए थे। प्रशासनिक कसावट के लिए पेंड्रारोड, मरवाही, सकोला और पेण्ड्रा तहसीलों में पटवारियों का ताबदला किया गया है। कलेक्टर कार्यालय से जारी सूची में 60 पटवारियों का नाम शामिल है।
देखें आदेश….




Pitra Paksha 2026। हिंदू पंचांग में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह अवधि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित होती है। इस दौरान परिवार अपने दिवंगत पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक कर्म करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए इन कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक ग्रंथ निर्णय सिंधु के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से मानी जाती है और इसका समापन अमावस्या तिथि पर होता है। तिथियों की स्थिति के आधार पर इसकी अवधि 15 या 16 दिन हो सकती है।
27 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर की रात 10:18 बजे शुरू होगी और 27 सितंबर की रात 8:58 बजे तक रहेगी। 26 सितंबर को दिनभर भाद्रपद पूर्णिमा रहेगी। उदयातिथि के नियम के अनुसार आश्विन कृष्ण प्रतिपदा का श्राद्ध 27 सितंबर 2026 को किया जाएगा। इसी के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत मानी जाएगी और अलग-अलग तिथियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाएगा।
प्रतिपदा तिथि पर किन पितरों का श्राद्ध?
पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि उन दिवंगत पितरों के लिए मानी जाती है, जिनका निधन किसी भी महीने की प्रतिपदा तिथि को हुआ हो। इस दिन उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और पंचबलि जैसे कर्म किए जाते हैं। श्राद्ध कर्म के लिए तिथि का सही निर्धारण करना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए परिवार अपने स्थानीय पंचांग और विद्वान आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि कर सकते हैं।
श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त
पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के लिए दिन के विशेष समय को महत्वपूर्ण माना गया है। दिए गए पंचांग के अनुसार श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:36 बजे से 1:24 बजे तक
दोनों मुहूर्तों की कुल अवधि 1 घंटा 36 मिनट है।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
पितृ पक्ष का अंतिम दिन आश्विन कृष्ण अमावस्या को होता है, जिसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात न हो या जिनका किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका हो। इस वर्ष अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे शुरू होगी और 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन होगा।
पितृ पक्ष में क्या किया जाता है?
पितृ पक्ष के दौरान परिवार अपने पूर्वजों को याद करते हुए विभिन्न धार्मिक कर्म करता है। इनमें तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, पंचबलि और दान आदि प्रमुख माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों की तृप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार को प्राप्त होता है। पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी माना जाता है। इसी कारण हिंदू धर्म में इस पक्ष का विशेष महत्व बताया गया है।
रायपुर। धार्मिक पर्वों को देखते हुए रायपुर नगर निगम क्षेत्र में तीन निर्धारित तिथियों पर मांस-मटन की बिक्री और पशुवध पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। नगर निगम ने डोल ग्यारस, अनंत चतुर्दशी और दिगंबर जैन समाज के पर्युषण पर्व के संवत्सरी एवं उत्तम क्षमा दिवस पर मांस-मटन की दुकानें और पशुवध गृह बंद रखने का आदेश जारी किया है।
नगर निगम के अनुसार 22 सितंबर को डोल ग्यारस, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी और 26 सितंबर को संवत्सरी एवं उत्तम क्षमा पर्व मनाया जाएगा। इन अवसरों को देखते हुए निगम क्षेत्र में मांस-मटन के विक्रय और पशुवध पर रोक रहेगी।
होटलों में भी मांस-मटन बेचने पर कार्रवाई
निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध सिर्फ खुले बाजार की मांस-मटन दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा। होटलों और अन्य प्रतिष्ठानों में भी इन तिथियों पर मांस-मटन की बिक्री नहीं की जा सकेगी।
महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर निगम प्रशासन ने कहा है कि प्रतिबंधित दिनों में यदि किसी होटल या अन्य प्रतिष्ठान में मांस-मटन की बिक्री होती पाई गई तो संबंधित सामग्री की तत्काल जब्ती की जाएगी और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
पशुवध गृह भी रहेंगे बंद
इन तीनों निर्धारित तिथियों पर नगर निगम क्षेत्र में स्थित पशुवध गृहों को भी बंद रखने का आदेश दिया गया है। निगम प्रशासन ने सभी संबंधित दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को पहले से आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन का कहना है कि धार्मिक पर्वों के दौरान जारी प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जोन कमिश्नर और स्वास्थ्य विभाग करेंगे निगरानी
आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम के सभी जोन कमिश्नरों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में मांस-मटन की दुकानों, होटलों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
निगम प्रशासन इन तिथियों पर पशुवध गृहों और मांस-मटन विक्रय केंद्रों के संचालन पर नजर रखेगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी।
किन तारीखों पर रहेगा प्रतिबंध?
22 सितंबर: डोल ग्यारस
25 सितंबर: अनंत चतुर्दशी
26 सितंबर: दिगंबर जैन समाज का पर्युषण पर्व — संवत्सरी एवं उत्तम क्षमा
दुर्ग : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां पुलिस ने चैन स्नैचिंग के जिस गैंग का पर्दाफाश किया है, उसके तार किसी पेशेवर अपराधियों से नहीं, बल्कि तकनीकी शिक्षा ले रहे दो युवा छात्रों से जुड़े हैं. पैसे की तंगी और शौक पूरा करने की चाहत ने इन होनहारों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है.
एक ही बुजुर्ग महिला को दो बार बनाया शिकार
मामले की शुरुआत 31 जुलाई से होती है. दुर्ग के सुपेला थाना क्षेत्र के प्रियदर्शनी परिसर में 62 वर्षीय गीता देवी सुबह करीब 6:32 बजे अपने घर के सामने टहल रही थीं. तभी स्कूटी सवार एक युवक-युवती वहां पहुंचे और पीछे बैठे शख्स ने उनके गले से सोने की चैन झपट ली.
इसके बाद, दुस्साहस देखिए कि 20 सितंबर को नेहरू नगर ईस्ट की विद्या विहार कॉलोनी में एक बार फिर उसी बुजुर्ग महिला (गीता देवी) को दोबारा निशाना बनाया गया. लगातार हो रही इन वारदातों से इलाके में सनसनी फैल गई थी.
सीसीटीवी फुटेज ने खोली पोल
लगातार शिकायतों के बाद हरकत में आई पुलिस ने सुपेला थाना क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपियों तक पहुंच गई. एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने खुलासा किया कि आरोपी पहचान छिपाने के लिए हेलमेट और कपड़ों का इस्तेमाल करते थे. स्कूटी पर सवार होकर ये सुबह के वक्त उन इलाकों में निकलते थे जहां बुजुर्ग महिलाएं टहलने आती थीं.
पुलिसिया पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
पुलिस ने जब दबिश देकर विक्की नायक (23) और तरूणा सिन्हा (20) को हिरासत में लिया, तो उनके कारनामों की फेहरिस्त देख पुलिस भी हैरान रह गई. विक्की नायक: मूल रूप से बालाघाट (मध्य प्रदेश) का रहने वाला है और वर्तमान में दुर्ग के तितुरडीह में रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है. तरूणा सिन्हा: राजनांदगांव की रहने वाली है और वह भी तितुरडीह, दुर्ग में रहकर इंजीनियरिंग की शिक्षा ले रही है.
दोनों आपस में दोस्त हैं और भिलाई में रहकर पढ़ाई कर रहे थे. शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि पैसों की तंगी और अय्याशी या शौक पूरे करने के चक्कर में इन्होंने आसान रास्ता चुना और चैन स्नैचिंग की वारदातों को अंजाम देने लगे. पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर लूटी गई सोने की चैन का हिस्सा और वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी को जब्त कर लिया है. दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है.
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में विरोध जताया। परिजनों का यह भी आरोप है कि महिला की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव उन्हें सौंप दिया। मामले को लेकर अब कलेक्टर से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
प्रसव पीड़ा के बाद जिला अस्पताल लाए थे परिजन
परिजनों के मुताबिक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर राजनांदगांव के जिला अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में उपचार के दौरान महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। दोनों की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने डॉक्टरों तथा स्वास्थ्यकर्मियों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।
मौत के बाद अस्पताल में हुआ हंगामा
जच्चा और बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध जताया। उनका आरोप है कि समय पर उचित इलाज नहीं मिलने के कारण दोनों की जान गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पूरे मामले की जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
बिना पोस्टमार्टम शव सौंपने का भी आरोप
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि महिला की मौत के बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई और बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव उन्हें सौंप दिया गया। परिजनों का दावा है कि इस तरह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पोस्टमार्टम कराया जाना जरूरी था।
कलेक्टर से शिकायत, जांच की मांग
घटना से नाराज महिला के रिश्तेदारों ने जिला प्रशासन के सामने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और इलाज के दौरान हुई घटनाओं की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। अब प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महिला और नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई और पोस्टमार्टम नहीं कराने के पीछे क्या कारण था।
रायपुर। जमीन, मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए राहत की खबर है। अब रजिस्ट्री से जुड़े काम के लिए लोगों को मुख्य कार्यालय तक लंबी दूरी तय करने और घंटों इंतजार करने की परेशानी से जल्द राहत मिल सकती है। प्रशासन ने रायपुर में रजिस्ट्री कार्यालयों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत शहर के अलग-अलग बाहरी क्षेत्रों में 7 नए रजिस्ट्री कार्यालय शुरू करने की तैयारी की जा रही है। नए केंद्र शुरू होने के बाद शहर में कुल 14 स्थानों पर रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध होगी।
जानकारी के अनुसार, रायपुर में प्रतिदिन करीब 400 जमीनों की रजिस्ट्री होती है। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण मुख्य रजिस्ट्री कार्यालय में लगातार भीड़ बनी रहती है। रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों को कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता है। दूर-दराज के इलाकों से आने वाले लोगों के साथ-साथ बुजुर्गों और महिलाओं को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। भीड़ के कारण कई बार कार्यालय में बैठने के लिए पर्याप्त जगह तक उपलब्ध नहीं हो पाती। गर्मी और बारिश के दौरान लोगों की दिक्कतें और बढ़ जाती हैं।
प्रशासन ने आउटर क्षेत्रों में नए रजिस्ट्री कार्यालय खोलने के लिए भवनों की तलाश शुरू कर दी है। टाटीबंध-हीरापुर, अमलीडीह-अवंति विहार और बीरगांव-सिलतरा सहित अन्य बाहरी क्षेत्रों में नए केंद्र खोलने की तैयारी है। इन कार्यालयों के शुरू होने के बाद संबंधित क्षेत्रों के लोगों को रजिस्ट्री के लिए मुख्य कार्यालय तक जाने की जरूरत कम होगी। वे अपने नजदीकी केंद्र पर ही जमीन, मकान और प्लॉट का पंजीयन करा सकेंगे।
नए रजिस्ट्री कार्यालयों में आधुनिक डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी तैयारी है। ऑनलाइन व्यवस्था को बढ़ावा मिलने से दस्तावेजों और पंजीयन से जुड़े काम अधिक सुविधाजनक तरीके से किए जा सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा लोगों को लंबी कतारों में खड़े होकर इंतजार करने से भी राहत मिल सकती है।
सात नए केंद्र शुरू होने के बाद रायपुर में कुल 14 स्थानों पर जमीन रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रशासन के अनुसार, शहर में बढ़ते पंजीयन कार्य और लोगों की संख्या को देखते हुए रजिस्ट्री कार्यालयों का विस्तार जरूरी हो गया है। नए केंद्र शुरू होने से मुख्य कार्यालय का दबाव कम होने के साथ ही लोगों को अपने क्षेत्र के नजदीक रजिस्ट्री की सुविधा मिल सकेगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम एक बार फिर करवट लेता नजर आ रहा है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 21 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है
इन जिलों में जारी हुआ अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, जिन जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, उनमें बिलासपुर, रायगढ़, मुंगेली, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा, बेमेतरा, बलौदाबाजार, महासमुंद, राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, बालोद, धमतरी, गरियाबंद, कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा शामिल हैं
हल्की बारिश और बिजली गिरने की संभावन
अलर्ट वाले जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही गरज-चमक के दौरान आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी जताया गया है। ऐसे में मौसम खराब होने के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम में बदलाव के बीच प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों से अपील की गई है कि बारिश और गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करें।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के दिनभर के कार्यक्रम को लेकर समय-सारिणी जारी की गई है। इसके तहत वह मंत्री टंक राम वर्मा के निवास पर पहुंचने के साथ ही तीज मिलन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद मंत्रालय और मुख्यमंत्री निवास में भी उनके कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दोपहर 2 बजे मंत्री टंक राम वर्मा के निवास पहुंचेंगे। यहां से उनका अगला कार्यक्रम तीज मिलन समारोह का है। मुख्यमंत्री दोपहर 2:30 बजे से 3:30 बजे तक आयोजित ‘तीज मिलन’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे कार्यक्रम में मौजूद लोगों से मुलाकात करेंगे।इसके बाद मुख्यमंत्री का काफिला शाम 3:40 बजे मंत्रालय स्थित महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर पहुंचेगा। यहां 3:40 बजे से शाम 5 बजे तक मुख्यमंत्री का समय आरक्षित रखा गया है। मंत्रालय से निकलने के बाद मुख्यमंत्री साय शाम 5:30 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर पहुंचेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री निवास में शाम 6 बजे से 7 बजे तक एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
00 विद्याभारती मध्यक्षेत्र क्षेत्रीय कबड्डी प्रतियोगिता के समापन समारोह में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री
रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव आज चांपा के सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित विद्याभारती मध्यक्षेत्र क्षेत्रीय कबड्डी खेलकूद प्रतियोगिता-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल खिलाडिय़ों का उत्साहवर्धन करते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समापन कार्यक्रम में विजेता टीम को मोमेन्टो, प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया। सांसद कमलेश जांगड़े भी समापन कार्यक्रम में शामिल हुईं।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम में कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए खेलना बेहद जरूरी है, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। विद्यार्थियों और युवाओं को प्रतिदिन खेल के लिए समय देना चाहिए। मैदान में बहाया गया पसीना शरीर में ऊर्जा और जीवन में उत्साह बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती विद्यार्थियों और युवाओं के जीवन को अनुशासन तथा संस्कारों से जोड़ते हुए उन्हें अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढऩे के लिए प्रेरित करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि खेल में कोई जीतता है तो कोई हारता है, लेकिन सीखते सभी हैं। खेल हमें अच्छा स्वास्थ्य, अनुशासन, आत्मविश्वास और ऊर्जा प्रदान करता है तथा लक्ष्य की दिशा में आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। एक अच्छा खिलाड़ी अनुशासित जीवन जीता है और ऊर्जा से भरपूर रहता है।
साव ने कहा कि जब कोई बच्चा छोटा होता है और चलने का प्रयास करता है, तो वह कई बार गिरता है, लेकिन हर बार उठकर दोबारा चलने का प्रयास करता है। अंतत: वही बच्चा चलना और दौडऩा सीख जाता है। इसी प्रकार जीवन में बार-बार असफलता मिलने पर निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर पुन: प्रयास करना चाहिए। मन, समर्पण और संकल्प के साथ किए गए प्रयास से सफलता प्राप्त की जा सकती है। आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरा व्यक्ति ही जीवन में आगे बढ़ता है। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर और अधिक मजबूती के साथ आगे बढऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल और खिलाडिय़ों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
सांसद कमलेश जांगड़े ने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यालयों में विद्यार्थियों को अनुशासन और शिष्टाचार की शिक्षा दी जाती है, जो उनके जीवन में एक अच्छा इंसान बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों एवं खिलाडिय़ों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
पूर्व संसदीय सचिव अंबेश जांगड़े, पूर्व सांसद कमला देवी पाटले, जिला पंचायत की अध्यक्ष इंजी. सत्यलता आनंद मिरी, नगर पालिका चांपा के अध्यक्ष प्रदीप नामदेव, नगर पालिका जांजगीर-नैला की अध्यक्ष रेखा देवा गढ़ेवाल, जिला पंचायत के सदस्य राजकुमार साहू, हनुमान प्रसाद, शान्ति कुमार सोनी, प्रशांत सिंह ठाकुर, रजनी सत्तु साहू, अमर सुल्तानिया, इंजी रवि पांडेय, कार्तिकेश्वर स्वर्णकार, सलीम मेमन, कमल देवांगन, जुड़ावन सिंह ठाकुर और सुधीर देव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी एवं खिलाड़ी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।
बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में निरीक्षक, उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल के तबादले हुए हैं। एसपी गौरव राय ने यह सूची जारी की हैं।
देखें आदेश….


रायपुर :- महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय, रायपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के संयुक्त तत्वावधान में 18 सितंबर 2026 को विशाल स्वास्थ्य परीक्षण एवं स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। महाविद्यालय के सभागार में आयोजित इस शिविर का संचालन प्राचार्य डॉ. देवाशीष मुखर्जी और राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी डॉ. लक्ष्मीकांत साहू के मार्गदर्शन में हुआ।
00 कबीरधाम के दंपती ने विशेष ट्रेन से पहुंचकर किए रामलला और बाबा विश्वनाथ के दर्शन
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था के केंद्रों तक पहुंचने का सहज और सुविधाजनक माध्यम बन रही है। कबीरधाम जिले के ग्राम बबई निवासी डोमन साहू और उनकी पत्नी पार्वती साहू के लिए यह यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि वर्षों से मन में संजोए एक सपने के साकार होने का अवसर बनी।
डोमन साहू बताते हैं कि प्रभु श्री राम के दर्शन की इच्छा उनके मन में लंबे समय से थी। परिवार की आर्थिक एवं अन्य परिस्थितियों के कारण वे अयोध्या धाम जाकर रामलला के दर्शन नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में छत्तीसगढ़ शासन की श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना उनके लिए आशा और अवसर लेकर आई। योजना के माध्यम से उन्हें अपनी पत्नी श्रीमती पार्वती साहू के साथ अयोध्या धाम जाने और प्रभु श्री रामलला के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। साथ ही उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन भी किए।
डोमन साहू ने कहा कि वर्षों से मन में रामलला के दर्शन की इच्छा थी। जब पत्नी के साथ अयोध्या धाम पहुंचकर प्रभु श्री रामलला के दर्शन किए तो मन भावुक हो गया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना ने उनके जैसे सामान्य परिवारों के लिए तीर्थयात्रा को आसान बनाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर में रामलला के दर्शन का अवसर मिलना उनके लिए अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय अनुभव है।
22 जनवरी 2024 को अयोध्या में नवनिर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक आयोजन हुआ था। इस ऐतिहासिक अवसर के बाद अयोध्या धाम में रामलला के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन हो रहा है। इसी आस्था को छत्तीसगढ़ शासन की श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना श्रद्धालुओं के लिए यात्रा की सुविधाओं से जोड़ रही है।
श्रद्धालुओं को कवर्धा से दुर्ग रेलवे स्टेशन तक निःशुल्क बस सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके बाद विशेष ट्रेन से उन्हें काशी एवं अयोध्या धाम ले जाया गया। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भोजन, नाश्ता और चाय की व्यवस्था के साथ स्वास्थ्य सुविधा के लिए चिकित्सकीय दल की व्यवस्था भी की गई।
श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के साथ अयोध्या धाम पहुंचकर श्री रामलला के दर्शन किए। लंबे समय से तीर्थयात्रा की इच्छा रखने वाले अनेक श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा आस्था, श्रद्धा और आत्मिक संतोष का अनुभव लेकर आई।
श्री डोमन साहू और श्रीमती पार्वती साहू की कहानी इस बात की एक झलक है कि जब धार्मिक आस्था से जुड़ी यात्रा में परिवहन, भोजन और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों, तो सामान्य परिवार भी अपने वर्षों पुराने तीर्थदर्शन के सपने को पूरा कर सकते हैं। श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना इसी उद्देश्य से श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से अयोध्या धाम और काशी की यात्रा का अवसर प्रदान कर रही है।
डोमन साहू दंपती के लिए अयोध्या की यह यात्रा अब उनके जीवन की ऐसी स्मृति बन गई है, जिसे वे लंबे समय तक संजोकर रखेंगे। वर्षों से मन में बसे रामलला के दर्शन का सपना जब अपनी पत्नी के साथ पूरा हुआ, तो उनके लिए यह यात्रा आस्था के साथ-साथ जीवन के एक अधूरे संकल्प के पूर्ण होने का भावुक अवसर भी बन गई।
सूरजपुर। गुरु को हमारी संस्कृति में भगवान से ऊपर का दर्जा दिया जाता है। लेकिन इस युग में इस पावन पवित्र रिश्ते को कई गुरुओं ने बदनाम कर दिया है। ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से सामने आया है। यहां एक शिक्षक ने 11वीं की छात्रा से अपनी हवस का शिकार बना लिया। इतना ही नहीं आरोपी शिक्षक छात्रा को ब्लैकमेल करता था। मामले की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है।
मिली जानकारी के अनुसार पूरा मामला भटगांव थाना क्षेत्र का है। यहां के एक स्कूल में छात्रा 11वीं कक्षा में पढ़ती थी। शिक्षक पर उस पर बुरी नजर रखता था। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी तो उसने हवस का शिकार बना लिया। इतना ही नहीं आरोपी शिक्षक छात्रा को ब्लैकमेल करता था। छात्रा ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी। परिजनों ने इसकी शिकायत भटगांव थाने में की। फिलहाल पुलिस आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई कर रही है।
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक युवक ने अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या कर शव को सेप्टिक टैंक में छिपा दिया। महिला रक्षाबंधन के मौके पर जब मायके नहीं पहुंची, तो परिजनों को शक हुआ। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और सेप्टिक टैंक से महिला का शव बरामद किया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।
जाने पूरा मामला
यह पूरा मामला श्यांग थाना अंतर्गत बरपाली गांव का है। बताया जा रहा है कि 33 वर्षीय संतोषी आरोपी मनोज उरांव के साथ लिव-इन में रह रही थी। वही उरांव नशे का आदी था। 27 अगस्त को उसने संतोषी के साथ मारपीट की थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद आरोपी ने उसके शव को बाड़ी के सेप्टिक टैंक में डालकर छिपा दिया और उसके भाईयों को गुमराह करते रहा।
रक्षाबंधन पर जब संतोषी घर नहीं पहुंची, तो उसके भाईयों ने खोजबीन शुरु की। इस दौरान उन्होंने घर के बाड़ी में सेप्टिक टैंक का ढक्कन खुला देखा और बदबू आने पर उसकी तलाशी ली, तो संतोषी का शव उसके अंदर मिला।
इसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी गई और फिर पुलिस ने कार्यपालिक दंडाधिकारी की मौजूदगी में शव को सेप्टिक टैंक से बाहर निकाला। फिलहाल संतोषी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और 5 सितंबर से फरार आरोपी मनोज उरांव की तलाश शुरु कर दी गई है।
00 प्रधानमंत्री मोदी के हर घर जल के संकल्प को साय सरकार ने गांव-गांव पहुंचाया, ग्राम पंडरी में जल जीवन मिशन से बदली जिंदगी की तस्वीर
रायपुर। कभी पानी के लिए सुबह की पहली किरण के साथ ही घर से निकलना पड़ता था। सिर पर बर्तन रखकर दूर स्थित जलस्रोत तक जाना, घंटों इंतजार करना और फिर पानी लेकर वापस लौटना ग्राम पंडरी की महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। बच्चों के लिए भी पानी लाने में परिवार का हाथ बंटाना सामान्य बात थी। पानी की यह जद्दोजहद केवल समय ही नहीं लेती थी, बल्कि परिवार की दिनचर्या, बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं के दूसरे जरूरी कामों को भी प्रभावित करती थी।
आज उसी ग्राम पंडरी की तस्वीर बदल गई है। घर के आंगन में लगा नल अब सिर्फ पानी आने का साधन नहीं, बल्कि बदलती ग्रामीण जिंदगी का प्रतीक बन गया है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से ग्रामीण परिवारों को उनके घर पर ही स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो रहा है। पानी के लिए दूर जाने की मजबूरी कम हुई है और वर्षों से चली आ रही कठिनाई ने सुविधा का रूप ले लिया है।
आदिवासी बाहुल्य जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के मरवाही विकासखंड का ग्राम पंडरी आज इस बदलाव की जीवंत कहानी प्रस्तुत कर रहा है। गांव की शीला केवट सहित अनेक महिलाओं के लिए नल से आने वाला पानी रोजमर्रा की जिंदगी में आई ऐसी सुविधा है, जिसका महत्व वही समझ सकता है जिसने कभी पानी के लिए लंबी दूरी तय की हो।
शीला केवट बताती हैं कि पहले पानी भरने के लिए घर के जरूरी काम छोड़कर दूर जाना पड़ता था। कई बार पानी लाने में सुबह का काफी समय निकल जाता था। अब घर में ही नल से पानी मिलने के कारण बहुत सुविधा हो गई है। समय बचता है और उस समय का उपयोग बच्चों, परिवार और दूसरे कामों में किया जा सकता है। उनके लिए नल से आने वाली पानी की हर धार घर की सुविधा के साथ परिवार के बेहतर भविष्य की उम्मीद भी लेकर आती है।
ग्राम पंडरी की यह कहानी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन से भी जुड़ती है, जिसमें ग्रामीण भारत के हर परिवार तक नल से जल पहुंचाने को प्राथमिकता दी गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा करते हुए ग्रामीण परिवारों तक घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाने का संकल्प देश के सामने रखा था। उस समय देश के 18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में लगभग 3.23 करोड़, यानी करीब 17 प्रतिशत परिवारों के पास ही नल से जल की सुविधा थी।
जल जीवन मिशन की सोच केवल पाइप बिछाने और नल लगाने तक सीमित नहीं है। मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को नियमित और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्भरण और ग्रे-वॉटर प्रबंधन जैसे उपायों को भी बढ़ावा देना है। साथ ही, मिशन को जनभागीदारी आधारित ‘जन आंदोलन’ के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है।
ग्राम पंडरी में इस सोच का असर ग्रामीण जीवन में दिखाई देता है। जहां पहले पानी की चिंता दिन की शुरुआत के साथ ही सामने खड़ी रहती थी, वहीं अब घर में नल की सुविधा ने इस चिंता को काफी हद तक कम किया है। महिलाओं को पानी ढोने की कठिन मेहनत से राहत मिली है। बच्चों के लिए पढ़ाई और खेल का समय बढ़ा है तथा परिवारों को अपने दूसरे जरूरी कार्यों के लिए अधिक समय मिल रहा है।
जल जीवन मिशन के प्रभाव का एक महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं के जीवन में आया बदलाव है। पानी की व्यवस्था का बड़ा दायित्व परंपरागत रूप से महिलाओं पर रहा है। घर तक नल का पानी पहुंचने से उनके श्रम और समय की बचत होती है। यही बचा हुआ समय परिवार, बच्चों की शिक्षा, आजीविका और स्वयं के विकास में लगाया जा सकता है। जल जीवन मिशन की आधिकारिक सामग्री में भी महिलाओं और बालिकाओं को दूर से पानी लाने की कठिनाई से राहत को मिशन के महत्वपूर्ण प्रभावों में शामिल किया गया है।
गांव के लिए यह बदलाव केवल सुविधा का बदलाव नहीं है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता में परिवर्तन है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा मिलता है। बच्चों और बुजुर्गों सहित पूरे परिवार को इसका लाभ मिलता है। पानी अब केवल गांव के किसी दूरस्थ स्रोत पर उपलब्ध संसाधन नहीं रहा, बल्कि घर की चौखट तक पहुंची बुनियादी सुविधा बन गया है।
केंद्र सरकार की पहल और राज्य सरकार के स्थानीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से ऐसी योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीण परिवारों तक पहुंचता है। ग्राम पंडरी इसका उदाहरण है कि किसी योजना की सफलता केवल सरकारी आंकड़ों में नहीं, बल्कि उस महिला के चेहरे की मुस्कान में दिखाई देती है जिसे अब पानी के लिए सुबह-सुबह दूर नहीं जाना पड़ता।
जल जीवन मिशन के सात वर्षों की यात्रा में देश के अनेक गांवों की तरह ग्राम पंडरी में भी ‘नल से जल’ ने विकास की नई तस्वीर बनाई है। मिशन को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने 2026 में जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक जारी रखने का निर्णय लिया है और जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण जलापूर्ति सेवाओं की विश्वसनीयता, गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
ग्राम पंडरी में अब किसी घर के आंगन में नल से गिरती पानी की बूंदें केवल प्यास बुझाने वाली बूंदें नहीं हैं। वे उस बदलाव की कहानी कहती हैं, जिसमें महिलाओं का श्रम कम हुआ, बच्चों के लिए समय बढ़ा, परिवारों को सुविधा मिली और ग्रामीण जीवन में सम्मान और आत्मविश्वास का नया भाव आया।
एक समय पानी की तलाश में दूर तक जाने वाला पंडरी आज अपने घरों में नल का पानी पाकर विकास की उस धारा से जुड़ चुका है, जिसका संकल्प देश ने सात वर्ष पहले लिया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ के विजन और जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव-गांव पहुंचती यह सुविधा अब ग्रामीण भारत में ‘सहज जीवन’ की एक नई पहचान बन रही है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने ओडिशा प्रवास के दौरान आज भुवनेश्वर में छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल एवं वरिष्ठ राजनेता विश्वभूषण हरिचंदन से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उनका कुशलक्षेम जाना तथा छत्तीसगढ़ में किए जा रहे विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यों पर चर्चा कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज भुवनेश्वर स्थित लोक भवन में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान विभिन्न समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई।
00 माँ का सम्मान हमारी संस्कृति और संस्कारों का आधार
00 माँ की महिमा पर साझा किया भावपूर्ण वीडियो
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कृति में माँ के सर्वोच्च स्थान को रेखांकित करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावपूर्ण वीडियो साझा किया है। मुख्यमंत्री ने इसके साथ अपनी भावनाओं को कविता की पंक्तियों में अभिव्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में उल्लेख किया है। माँ है ममता, माँ है करुणा, माँ जीवन का आधार है, माँ के चरणों में समर्पित पूरा ये संसार है। माँ का करे अपमान वो कुपुत्र ही कहलायेगा, माँ का करे तिरस्कार वो कहीं ठौर न पायेगा।
मुख्यमंत्री साय ने किसी राजनीतिक व्यक्ति का नाम लिए बिना अपने संदेश के माध्यम से माँ के प्रति सम्मान और मर्यादा बनाए रखने की सीख दी है। उन्होंने यह संदेश ऐसे समय साझा किया है, जब इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में एक कॉमेडी प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। उल्लेखनीय है कि इंदौर में आयोजित उक्त कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की बोलने की शैली और हाव-भाव की मिमिक्री की थी। प्रस्तुति के एक हिस्से में प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भीड़ में मौजूद बुजुर्ग माताजी के लिए कुर्सी उपलब्ध कराने को कहने से जुड़े प्रसंग को भी शामिल किया गया। इसे लेकर भाजपा के अनेक नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि हास्य के नाम पर माँ और मातृशक्ति के सम्मान को ठेस पहुंचाई गई। कार्यक्रम के दौरान श्री राहुल गांधी मंच पर मौजूद थे और प्रस्तुति पर उनकी प्रतिक्रिया को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हुई है।
इसी घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का माँ की महिमा और सम्मान को समर्पित संदेश सामने आया है। मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय माँ के प्रति भारतीय समाज की श्रद्धा, संवेदना और संस्कार को केंद्र में रखा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वर्गीय कवि ओम व्यास की माँ पर केंद्रित प्रसिद्ध काव्य रचना का वीडियो भी साझा किया। माँ के त्याग, ममता, वात्सल्य और संतान के जीवन में उनके अतुलनीय स्थान को अभिव्यक्त करती यह रचना सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय के संदेश का भाव स्पष्ट है कि माँ केवल एक संबंध नहीं, बल्कि ममता, करुणा, त्याग और संस्कार का स्वरूप है। भारतीय संस्कृति में माँ को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और उनका सम्मान सामाजिक एवं सांस्कृतिक मर्यादा का अभिन्न हिस्सा है। वैचारिक अथवा राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन माँ के प्रति सम्मान की मर्यादा सदैव अक्षुण्ण रहनी चाहिए। मुख्यमंत्री द्वारा साझा की गई पंक्तियां इसी सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्त करती हैं कि जिस माँ के स्नेह, त्याग और संस्कारों से व्यक्ति का जीवन आकार लेता है, उसका सम्मान प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।
00 सेवा संकल्प अभियान
विशेष लेख : विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक
रायपुर। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अब केवल किताबों और कक्षाओं के पारंपरिक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के लाखों युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना को धरातल पर उतारते हुए राज्य सरकार युवाओं को केवल डिग्री देने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर, हुनरमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का अभूतपूर्व कार्य कर रही है।
सेवा का संकल्प: गुणवत्ता और समावेशी विकास का मिशन मोड
राज्य सरकार ने सेवा का संकल्प निभाते हुए शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत महाविद्यालयों के ढांचागत और शैक्षणिक उन्नयन के लिए विशेष बजटीय संबल दिया जा रहा है। पारदर्शी और सख्त मॉनिटरिंग तंत्र यह सुनिश्चित कर रहा है कि सरकारी सहायता का सीधा लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचे। शैक्षणिक गुणवत्ता को शीर्ष पर ले जाने के लिए 3,000 से अधिक छात्र संख्या वाले उत्कृष्ट कॉलेजों को चिन्हित कर 36 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही, अध्यापन व्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्राध्यापकों की सीधी भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी गई है और उद्योग जगत के व्यावहारिक विशेषज्ञों को प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में परिसरों से जोड़ा जा रहा है।
सेवा आपके द्वार: वनांचल से शहरों तक उच्च शिक्षा की आसान पहुँच
सेवा आपके द्वार की भावना को चरितार्थ करते हुए राज्य के अंतिम छोर पर स्थित आदिवासी और दूरस्थ वनांचल अंचलों में नए महाविद्यालय खोले जा रहे हैं। अब बस्तर और सरगुजा जैसे दूरदराज क्षेत्रों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा है, बल्कि आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा उनके अपने अंचल में ही उपलब्ध हो रही है। चार वर्षीय बी.एड. और बी.पी.एड. जैसे एकीकृत व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
कहानी बदलाव की: आधुनिक तकनीक और स्वावलंबन से युवाओं का सशक्तीकरण
यह बदलाव केवल व्यवस्थागत नहीं, बल्कि हर उस युवा की कहानी बदलाव की है जो कल तक केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित था। स्वावित्तीय पाठ्यक्रम नीति के तहत अब स्थानीय और वैश्विक मांग के अनुसार युवाओं को तैयार किया जा रहा है। भविष्य में उपयोगी विभिन्न तकनीकों और कौशल को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, वेब डिजाइनिंग जैसे विषयों को प्रमुखता से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह स्थानीय व कृषि-आधारित उद्योग के तहत रेशम कीट पालन, टसर टेक्नोलॉजी, फिशरीज, फूड प्रोसेसिंग, मशरूम कल्टीवेशन, फ्लोरीकल्चर और हर्बल कल्टीवेशन की शिक्षा युवाओ को आर्थिक रूप से मजबूत करेंगे।
इन व्यावहारिक विषयों के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योग जगत के साथ रूश किए गए हैं, जिससे युवाओं को सीधी इंटर्नशिप, व्यावहारिक अनुभव और कैंपस प्लेसमेंट की सुविधा मिल रही है। रिसर्च, कौशल विकास, उद्योग समन्वय और वनांचल तक शिक्षा के विस्तार के इस संगम से छत्तीसगढ़ तेजी से देश के अग्रणी एजुकेशन हब के रूप में स्थापित हो रहा है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, आत्मीयता और पारंपरिक तिहारों की मिठास को सहेजने के उद्देश्य से नवा रायपुर में भव्य तीज मिलन उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की मेजबानी में यह गरिमामय उत्सव 22 सितंबर 2026, मंगलवार को दोपहर 12 बजे से संध्या 4 बजे तक एम.-12, सेक्टर-24, अटल नगर, नवा रायपुर में संपन्न होगा।
छत्तीसगढिय़ा अस्मिता और पारंपरिक पर्वों के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में आयोजित इस विशेष समागम में प्रदेश की शीर्ष हस्तियों का जमावड़ा देखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह अपनी धर्मपत्नी वीणा सिंह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय के साथ विशेष रूप से उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। इसके साथ ही राज्य के कई मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक भी इस सांस्कृतिक संध्या के साक्षी बनेंगे।
इस आयोजन के संदर्भ में मंत्री टंक राम वर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्व केवल धार्मिक या सांस्कृतिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि ये आपसी भाईचारे, प्रेम और सामाजिक समरसता की मजबूत बुनियाद हैं। इस तीज मिलन उत्सव का मूल उद्देश्य अपनी समृद्ध परंपराओं और छत्तीसगढिय़ा संस्कृति की मिठास को आपस में बांटना तथा आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़कर रखना है। इस अवसर पर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों, लोक-संस्कृति के रंगों और तीजा पर्व के आत्मीय अनुष्ठानों का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी शिक्षा सत्र के लिए दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश की घोषणा कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग के मुताबिक दशहरा अवकाश 17-21 अक्टूबर, दीपावली की 6-10 नवंबर और शीतकालीन अवकाश 24-28 दिसंबर तक होंगी। यह अवकाश सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त और गैर अनुदान प्राप्त स्कूलों, डीएड, बीएड, और एमएड कालेजों में लागू होंगी।





























