00 जल संरक्षण, पौधारोपण, प्राकृतिक पुर्नजनन और मानव-वन्यजीव संरक्षण के लिए बलौदाबाजार वनमण्डल की समन्वित पहल
रायपुर। वन क्षेत्रों को समृद्ध, सुरक्षित और हरा-भरा बनाने के लिए वृक्षारोपण और कटाई के बीच संतुलन, वनों को आग से सुरक्षा, झूम कृषि पर रोक, और जन जागरूकता जैसे ठोस उपाय अत्यंत आवश्यक हैं। इन प्रयासों में स्थानीय समुदायों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी से वनों का संरक्षण अधिक प्रभावी हो जाता है। छत्तीसगढ मेें मानसून की शुरुआत के साथ बलौदाबाजार वनमण्डल में वन संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन से जुड़े कार्यों में तेजी आ गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर के मार्गदर्शन में विभिन्न वन परिक्षेत्रों में जल संरक्षण, पौधारोपण, प्राकृतिक पुर्नजनन, वन महोत्सव, मानव-वन्यजीव संरक्षण तथा वन मार्गों के रखरखाव के कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा ऋतु का बेहतर उपयोग कर वन क्षेत्रों को अधिक समृद्ध, सुरक्षित और हराभरा बनाना है।
जल संरक्षण संरचनाओं में हुआ भरपूर जलभराव
जल संचय से जन भागीदारी 2.0 अभियान के तहत पूर्व वर्षों में बनाई गई सॉइल कंजर्वेशन ट्रेंच (एससीटी) तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाएँ हाल की वर्षा से पूरी तरह भर गई हैं। इन संरचनाओं से वर्षा जल का संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और वन क्षेत्रों में नमी बनाए रखने में मदद मिल रही है, जिससे पौधों और वन्यजीवों को भी लाभ मिल रहा है।
सीड बॉल अभियान से दिखने लगे सकारात्मक परिणाम
वनमण्डल के देवपुर वन परिक्षेत्र में साजा प्रजाति के सीड बॉल से सफल अंकुरण देखा गया है। वहीं अर्जुनी वन परिक्षेत्र के उत्तर महराजी परिसर में कंटूर पाल एवं जल संरक्षण संरचनाओं के किनारे सीड बॉल और स्थानीय घास प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी का कटाव कम होगा और प्राकृतिक रूप से नए पौधों का विकास होगा।
वन मार्गों को सुरक्षित रखने का कार्य जारी
बारिश के दौरान वन मार्गों को सुरक्षित और सुगम बनाए रखने के लिए विभिन्न स्थानों पर क्रॉस ड्रेनेज (आड़ीपार) निर्माण किया जा रहा है। बार-दोंद मार्ग, पुटपुरा तथा पूर्व सुरबाय-बारनवापारा वन मार्ग सहित कई स्थानों पर सुरक्षा श्रमिक वर्षा से होने वाले कटाव को रोकने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।
एक पेड़ माँ के नाम अभियान में बढ़ रही जनभागीदारी
वन महोत्सव के तहत चल रहे ष्एक पेड़ माँ के नामष् अभियान में लोगों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। बल्दाकछार वन परिक्षेत्र के नंदनिया एवं बल्दाकछार परिसरों में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, वन प्रबंधन समितियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, ग्रामीणों तथा वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए हाथी मित्र दल को मिला सहयोग
बारनवापारा अभयारण्य में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए हाथी मित्र दल को टॉर्च, मेगाफोन और जूते उपलब्ध कराए गए हैं। इससे दल वन्य हाथियों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेगा तथा ग्रामीणों को समय पर सूचना देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
लाइव हेज के रूप में कैक्टस रोपण की नई पहल
बल्दाकछार वन परिक्षेत्र के दलदली परिसर में सुरक्षा संरचनाओं के किनारे लाइव हेज के रूप में कैक्टस का रोपण शुरू किया गया है। यह पहल मिट्टी संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्रों की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगी।
वन संरक्षण के लिए मानसून सबसे उपयुक्त समय
वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि मानसून प्राकृतिक पुनर्जनन और वन संरक्षण के लिए सबसे अनुकूल समय होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण, पौधारोपण, वन मार्गों का रखरखाव, मानव-वन्यजीव संरक्षण तथा जनभागीदारी से जुड़े सभी कार्य समन्वित रूप से किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से वन क्षेत्रों की पारिस्थितिकी और जैव विविधता को मजबूती मिलेगी तथा जल और वन संसाधनों के सतत संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
00 मुख्यमंत्री साय और विस अध्यक्ष सिंह ने लगाया रुद्राक्ष का पौधा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर हरियाली, जनभागीदारी और मातृ सम्मान के भाव से सराबोर नजर आया। एक पेड़ मां के नाम 3.0 अभियान के अंतर्गत आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप सहित विधानसभा के सभी सदस्यों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया। यह संकल्प केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के संरक्षण, मातृत्व के सम्मान और आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित एवं हरित भविष्य के निर्माण का सामूहिक संकल्प बनकर उभरा। कार्यक्रम के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों ने अभियान के लिए तैयार विशेष सेल्फी प्वाइंट पर तस्वीरें भी खिंचवाईं तथा प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ एक पेड़ मां के नाम अभियान आज पूरे देश में जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मां के प्रति कृतज्ञता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और आने वाली पीढिय़ों के प्रति उत्तरदायित्व का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी मां के नाम पर पौधा लगाता है तो उस पौधे के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता भी जुड़ जाता है और वह उसके संरक्षण के लिए स्वयं प्रेरित होता है। यही भाव इस अभियान को स्थायी, प्रभावी और जनभागीदारी आधारित बनाता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधारोपण किया जाना अत्यंत प्रेरणादायी पहल है। विधानसभा परिसर से दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न करेगा। उन्होंने इस अभिनव आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल समाज में वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भावी पीढिय़ों के भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के संतुलन के आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता का संरक्षण और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी उसी आत्मीयता से करनी चाहिए, जिस भाव से वह अपने परिवार के किसी सदस्य की देखभाल करता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में वन संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा जनभागीदारी आधारित पर्यावरणीय अभियानों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक पेड़ मां के नाम 3.0 अभियान प्रदेश के गांव-गांव, शहर-शहर और प्रत्येक परिवार तक पहुंचेगा तथा प्रकृति संरक्षण को सामाजिक दायित्व और जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपनी मां के नाम पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में उत्कृष्ट मॉडल बन सकता है।
कार्यक्रम में विधानसभा के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी माताओं के नाम पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्री मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण स्व. डॉ. तीजन बाई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि : गनियारी में आयोजित दशगात्र एवं श्रद्धांजलि सभा में हुए शामिल
रायपुर-- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी पहुंचे, जहां उन्होंने विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई के दशगात्र एवं श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके पैतृक गृह ग्राम गनियारी में आयोजित इस शोकसभा में मुख्यमंत्री ने स्व. डॉ. तीजन बाई के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें सादर नमन किया तथा शोकसंतप्त परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर स्व. डॉ. तीजन बाई के पुत्र दिलहरण पारधी तथा परिवार के अन्य सदस्यों से भेंट कर उनका हालचाल जाना और उन्हें ढांढस बंधाया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि स्व. डॉ. तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान थीं। उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा, अद्भुत साधना और पंडवानी की कापालिक शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्व. डॉ. तीजन बाई का योगदान आने वाली पीढ़ियों को भी निरंतर प्रेरित करता रहेगा। स्व. डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोककला, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित रहा। उन्होंने पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाकर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। उनकी कला, साधना और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि राज्योत्सव के अवसर पर प्रतिवर्ष 'डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण' प्रदान किया जाएगा, जिसके माध्यम से लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राम गनियारी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण स्व. डॉ. तीजन बाई के नाम पर किया जाएगा, ताकि इस क्षेत्र के विद्यार्थी उनके जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने यह कहा कि लोककला की महान साधिका डॉ. तीजन बाई की स्मृतियों को राज्य सरकार द्वारा चिरस्थायी रखते हुए उनकी जीवनभर की कला-साधना के प्रतीक रहे तंबूरे को रायपुर के संग्रहालय में पूरे सम्मान के साथ संरक्षित रखा जाएगा, जिससे भविष्य की पीढ़ियां उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।
श्रद्धांजलि सभा को सांसद विजय बघेल, प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल तथा विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा ने भी संबोधित किया। उन्होंने स्व. डॉ. तीजन बाई के व्यक्तित्व, कृतित्व और लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा उन्हें सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर पद्मश्री आर.एस. बारले, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित अन्य गणमान्यजन, छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे कलाकार, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की चाल बदल गई है। इस पर ब्रेक लगने के बाद पिछले 24 घंटों में प्रदेश में मौसम शुष्क रहा. दोबारा बारिश की गतिविधि बढ़ने का इन्तजार बढ़ते जा रहा है। रायपुर पूरी तरह सूखा रहने के साथ ही सबसे गर्म इलाका भी रहा। प्रदेश में सामान्य से अबतक 26 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि 15 और 16 जुलाई को प्रदेश में वर्षा की गतिविधि में वृद्धि हो सकती है, जिनमे कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। प्रदेश में सोमवार को रायपुर और बिलासपुर में सबसे ज्यादा तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम तापमान अंबिकापुर में 23.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है।
रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ?
राजधानी रायपुर में आज मौसम विभाग ने आकाश में बादल छाए रहने की संभावना जताई है. अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने के आसार हैं।
मौसम सारांश
मौसम विभाग के अनुसार औसत समुद्र तल पर मानसून द्रोणिका श्रीगंगानगर, हिसार, मुरादाबाद, गोरखपुर, मुज.फ्फरपुर, बालुरघाट और वहां से पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर मणिपुर तक बनी हुई है। उत्तरी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे दक्षिणी बांग्लादेश के ऊपर, औसत समुद्र तल से 4.5 से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके कारण प्रदेश में मंगलवार को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।
अब AI करेगा जंगल की चौकीदारी, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू
रायपुर। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम सामान्य सीसीटीवी कैमरों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत और सक्रिय सुरक्षा समाधान हैं। यह कंप्यूटर विज़न (Computer Vision) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) तकनीकों का उपयोग करते हैं, जो वीडियो फुटेज का वास्तविक समय (रियल-टाइम) में विश्लेषण करके संभावित खतरों की पहचान करते हैं और तुरंत अलर्ट भेजते हैं ।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और वन सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू किया गया है। यह पहल वन्यजीवों की सुरक्षा, मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम तथा अवैध शिकार, लकड़ी तस्करी और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वन बल प्रमुख अरुण पांडेय, पीसीसीएफ (वन्यजीव) ओम प्रकाश यादव तथा क्षेत्र संचालक गुरुनाथन एन.जी. के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस परियोजना के तहत 70 से 80 फीट ऊंचे टावरों पर पी2पी (पीयर-टू-पीयर) मॉड्यूल और एआई कैमरे लगाए जा रहे हैं। इनकी मदद से दूरस्थ और दुर्गम वन क्षेत्रों में वन्यजीवों और संदिग्ध गतिविधियों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। परियोजना का प्रारंभिक ट्रायल ओडिशा सीमा से लगे कुल्हाडीघाट, इंदागांव, रिसगांव, दक्षिण उदंती और पायलीखण्ड उत्तर उदंती रेंज में किया जा रहा है। ये क्षेत्र हाथियों और अन्य वन्यजीवों के प्रमुख आवागमन गलियारे हैं तथा अवैध वन्यजीव व्यापार, सागौन तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी और अतिक्रमण की दृष्टि से भी संवेदनशील माने जाते हैं।
एआई आधारित कैमरे एशियाई हाथी, बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे प्रमुख वन्यजीवों की स्वतः पहचान कर सकेंगे। साथ ही शिकारी, लकड़ी तस्कर, अवैध घुसपैठिए और अतिक्रमणकारियों जैसी संदिग्ध मानव गतिविधियों का भी स्वतः पता लगाएंगे। यह पूरी प्रणाली पोर्टेबल होगी, जिससे आवश्यकता के अनुसार इसे अन्य स्थानों पर भी स्थापित किया जा सकेगा। जैसे ही किसी वन्यजीव या संदिग्ध व्यक्ति की पहचान होगी, सिस्टम तुरंत व्हाट्सएप के माध्यम से फ्रंटलाइन वन कर्मियों और अधिकारियों को सूचना भेजेगा। इससे मौके पर तेजी से कार्रवाई करना संभव होगा।
रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने व्यास पीठ पर विराजमान श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज द्वारा वाचन की जा रही श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया तथा श्रीमद्भागवत जी का विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ आरती-वंदन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने व्यास पीठ पर विराजमान कथा व्यास श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए आशीर्वाद ग्रहण किया। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के अंतर्गत भगवद्नाम के महत्व पर आधारित प्रसंग का एकाग्र भाव से श्रवण किया तथा कहा कि आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में ऐसी धार्मिक कथाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध प्रदेश है। यह प्रभु श्री राम का ननिहाल तथा माता कौशल्या का मायका है। भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर व्यतीत किया, जिसके कारण राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान और अधिक गौरवशाली बनती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवरीनारायण माता शबरी की तपोभूमि है, जहां प्रभु श्रीराम और माता शबरी के दिव्य मिलन की स्मृतियां आज भी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर करती हैं। उन्होंने कहा कि राजिम स्थित पवित्र त्रिवेणी संगम पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला राजिम कुंभ देश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इस भव्य आयोजन में देशभर से साधु-संतों, श्रद्धालुओं और धर्माचार्यों का आगमन होता है, जिससे छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक वैभव को नई पहचान मिलती है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए विभिन्न धार्मिक योजनाओं का प्रभावी संचालन कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रभु श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम के दर्शन कराए जा रहे हैं। अब तक लगभग 50 हजार से अधिक श्रद्धालु भगवान श्रीरामलला के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त कर चुके हैं। इसी प्रकार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के बुजुर्ग देश के विभिन्न प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों के संरक्षण, संवर्धन और समग्र विकास के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक समरसता, धार्मिक स्वतंत्रता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू किया गया है। इस कानून में देश के विभिन्न राज्यों की तुलना में अधिक कठोर प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन सख्त प्रावधानों से अवैध धर्मांतरण की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गौ माता के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार द्वारा गौधाम योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत गौधामों में गौवंश के लिए चारा, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण है तथा राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, सद्भाव, सेवा, करुणा और लोककल्याण की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और मंगल की कामना करते हुए सभी से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीवलोचन महाराज, पवन साय, नंदन जैन, योगेश अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित थे।
रायपुर: कभी आधार कार्ड बनवाने के लिए वर्षों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर रहे मुंगेली जिले के विकासखंड लोरमी के ग्राम सिंघनपुरी निवासी श्री राम साहू के जीवन में आखिरकार खुशियों की नई सुबह आई। लगभग 13 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद सीएम हेल्पलाइन और जिला प्रशासन मुंगेली की संवेदनशील पहल से उनका आधार कार्ड बन गया। इसके साथ ही उनके लिए शासकीय योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं का लाभ लेने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया।
श्री राम साहू ने आधार कार्ड बनवाने के लिए वर्षों तक कई बार प्रयास किए, लेकिन तकनीकी एवं अन्य कारणों से हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी। आधार कार्ड नहीं होने के कारण वे अनेक शासकीय योजनाओं और सेवाओं से वंचित रह रहे थे। अंततः उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत प्राप्त होते ही कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से राम साहू को जिला पंचायत मुंगेली स्थित आधार पंजीयन केंद्र बुलाया गया, जहां उनकी आधार नामांकन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कराई गई।
आधार पंजीयन पूर्ण होने के बाद राम साहू की वर्षों पुरानी चिंता दूर हो गई। खुशी से भावुक हुए साहू ने कहा कि पिछले 13 वर्षों से वे आधार कार्ड बनवाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन और जिला प्रशासन मुंगेली की तत्परता से आज उनकी सबसे बड़ी समस्या का समाधान हो गया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब वे भी बिना किसी बाधा के सरकारी योजनाओं और अन्य सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
ई-जिला प्रबंधक सोनम शर्मा ने बताया कि यह केवल एक आधार कार्ड बनने का मामला नहीं, बल्कि सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन प्रत्येक नागरिक की समस्या के समाधान के लिए पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। यह सफलता आमजन के विश्वास को और मजबूत करती है कि शासन-प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सदैव तत्पर है।
भिलाई नगर:भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी सुरूचि सिंह ने सोमवार को नगर पालिक निगम भिलाई के आयुक्त के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। राज्य शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के तहत उन्हें नगर पालिक निगम भिलाई का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। इससे पूर्व वे जिला पंचायत राजनांदगांव की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं*।
नगर निगम मुख्यालय पहुंचने पर निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सुश्री सिंह का आत्मीय स्वागत किया। आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह का शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र नागरिक तक पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के साथ पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। पदभार ग्रहण के दौरान निगम के सभी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने नवपदस्थ आयुक्त का स्वागत करते हुए उन्हें निगम की वर्तमान परियोजनाओं एवं विभिन्न विभागों की प्रगति से अवगत कराया। राज्य शासन द्वारा हाल ही में किए गए प्रशासनिक फेरबदल के अंतर्गत आईएएस अधिकारी सुश्री सुरूचि सिंह को नगर पालिक निगम भिलाई का आयुक्त नियुक्त किया गया है। उनके प्रशासनिक अनुभव एवं कार्यकुशलता से भिलाई नगर निगम में विकास कार्यों को नई दिशा एवं गति मिलेगी।
00 नक्सल मामलों में निरुद्ध लोगों के प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए शासन प्रतिबद्ध - शर्मा
00 जनहानि रहित मामलों की होगी साप्ताहिक समीक्षा, लंबित न्यायालयीन मामलों में भी तेज होगी प्रक्रिया
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल मामलों में जेल में बंद ऐसे लोगों के प्रकरणों के त्वरित निराकरण और रिहाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिनके खिलाफ कोई गंभीर जनहानि का मामला दर्ज नहीं है। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज बस्तर क्षेत्र से आए जनप्रतिनिधियों, नक्सल प्रकरणों में निरुद्ध लोगों के परिजनों, नक्सल पीड़ितों तथा युवाओं से आज विधानसभा में मुलाकात कर नक्सल प्रकरणों के निराकरण और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नक्सल मामलों में जेल में निरुद्ध लोगों के प्रकरणों की शीघ्र और न्यायसंगत समीक्षा और सभी की जल्द रिहाई के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा प्रत्येक पात्र मामले में विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
नक्सल प्रकरणों के निराकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि 10 जुलाई को मंत्रालय में गृह विभाग के प्रमुख सचिव, संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर संभाग के सभी 12 जिलों के संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर नक्सल प्रकरणों के निराकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है। बैठक में सभी लंबित प्रकरणों को दो श्रेणियों में विभाजित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। एक जिनमें जनहानि हुई हैं तथा दूसरे वे प्रकरण जिनमें जनहानि नहीं हुई है।
मामलों का शीघ्र निराकरण कर पात्र लोगों को राहत मिले
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि जिन मामलों में जनहानि नहीं हुई है, उनकी समीक्षा संबंधित जिलों पुलिस अधीक्षक प्रत्येक सप्ताह अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम के साथ करेंगे, ताकि ऐसे मामलों का शीघ्र निराकरण कर पात्र लोगों को राहत मिल सके। इसके लिए अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम बनाई गई है। वहीं जिन मामलों में जनहानि हुई है और न्यायालय में प्रकरण लंबित हैं, उनमें चालान प्रस्तुत करने, गवाही की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा न्यायालयीन प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जिन प्रकरणों में गंभीर धाराएं लगी हैं उनमें न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया जाएगा।
अधिवक्ताओं की टीम द्वारा विधिसम्मत होगा परीक्षण
शर्मा ने कहा कि यदि किसी अभियुक्त के परिजन अपने प्रकरण की समीक्षा कराना चाहते हैं तो वे संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक को आवेदन दे सकते हैं। ऐसे आवेदनों का अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम द्वारा विधिसम्मत परीक्षण किया जाएगा।
किसकोड़ो में पहली बार वास्तविक आजादी का अनुभव कर रहे हैं
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी हिंसा ने बस्तर सहित अनेक क्षेत्रों को वर्षों तक प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब इन क्षेत्रों में सामान्य आवाजाही भी कठिन थी, लेकिन आज स्थिति तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में अत्यंत नक्सल प्रभावित रहे किसकोड़ो गांव के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि वे अब पहली बार वास्तविक आजादी का अनुभव कर रहे हैं। शर्मा ने कहा कि कबीरधाम क्षेत्र में भी माओवादी गतिविधियों का प्रभाव रहा है और उन्होंने स्वयं उस दौर को निकट से देखा है। इस दौरान युवाओं ने अपनी व्यथाओं को भी उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखा, जिसपर उप मुख्यमंत्री ने सभी के समाधान का आश्वासन दिया।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ कर जैविक खेती अपनाने का आग्रह
शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर बस्तर में शांति, विकास और विश्वास का वातावरण मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बस्तर के युवाओं से विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से बचते हुए प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का आग्रह किया तथा कहा कि बस्तर के जैविक उत्पादों को एनपीओपी के तहत प्रमाणित कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में सरकार द्वारा कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर विधायक धरमलाल कौशिक, नीलकंठ टेकाम, विक्रम उसेंडी, कवासी लखमा, विक्रम मंडावी सहित बस्तर क्षेत्र के अनेक युवा उपस्थित थे।
मेडिकल कॉलेज खुलना जिले के विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि - उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
एनएमसी ने 50 एमबीबीएस सीटों के साथ शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संचालन की दी अनुमति
लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, युवाओं को जिले में ही चिकित्सा शिक्षा का मिलेगा अवसर
रायपुर- कबीरधाम जिले के लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने शासकीय मेडिकल कॉलेज, कबीरधाम को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालित करने की औपचारिक अनुमति प्रदान कर दी है। यह मेडिकल कॉलेज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़) से संबद्ध होगा। इस स्वीकृति के साथ कबीरधाम जिले की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने जा रही है।
कबीरधाम में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर
उप मुख्यमंत्री एवं कबीरधाम विधायक विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर जिलेवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कबीरधाम में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना जिले के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रही है और इसके लिए लगातार केंद्र एवं राज्य स्तर पर समन्वय कर आवश्यक प्रयास किए गए।
चिकित्सा शिक्षा का सपना साकार करना और अधिक होगा आसान
शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। एनएमसी से मिली यह स्वीकृति केवल कबीरधाम ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के लाखों लोगों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का नया द्वार खोलेगी। साथ ही स्थानीय युवाओं को अपने जिले में ही एमबीबीएस की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा, जिससे चिकित्सा शिक्षा का सपना साकार करना और अधिक आसान होगा। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्रारंभ होने से जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा तथा स्वास्थ्य अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी। इससे गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए मरीजों की बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी और लोगों को अपने जिले में ही बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
कबीरधाम जिला अस्पताल का उन्नयन कराकर 220 बिस्तर का किया गया
मेडिकल कॉलेज की स्थापना को साकार करने में उप मुख्यमंत्री एवं कबीरधाम विधायक विजय शर्मा की सक्रिय पहल और सतत प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज की स्थापना से जुड़ी सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को चरणबद्ध एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया। शर्मा की पहल पर सबसे पहले कबीरधाम जिला अस्पताल का 100 बिस्तरों से बढ़ाकर 220 बिस्तरों में उन्नयन कराया गया, जिससे मेडिकल कॉलेज संचालन के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार हो सकी। कार्यों में तेजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उनके निर्देश पर एक मॉनिटरिंग समिति का गठन किया गया, जिसकी नियमित साप्ताहिक समीक्षा स्वयं उप मुख्यमंत्री शर्मा प्रत्यक्ष रूप से करते रहे।
एमबीबीएस की 50 सीटों के साथ मेडिकल कॉलेज संचालन की अनुमति
मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी शर्मा ने प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया। उनके सतत प्रयासों से लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत से मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण की स्वीकृति भी प्राप्त हुई। इतना ही नहीं, 23 जून को नई दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा से विशेष रूप से मुलाकात कर कबीरधाम मेडिकल कॉलेज के लिए इसी शैक्षणिक सत्र से कॉलेज आरंभ कराने का आग्रह किया, जिस पर उन्होंने तत्काल सहमति प्रदान करते हुए विभाग को निर्देश जारी किए जाने का आश्वासन दिया, परिणाम स्वरूप उनके निरंतर फॉलोअप, प्रभावी समन्वय और प्रतिबद्ध प्रयासों से ही नेशनल मेडिकल कमीशन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ मेडिकल कॉलेज संचालन की अनुमति प्रदान की है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नेशनल मेडिकल कमीशन तथा सभी संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा होगी उपलब्ध
कबीरधाम में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही जन-आकांक्षाओं को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मेडिकल कॉलेज के प्रारंभ होने से जिले के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध होगी, स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर उल्लेखनीय रूप से बेहतर होगा तथा पूरे क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। यह उपलब्धि कबीरधाम को स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के प्रमुख जिलों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिल रही नई दिशा, नियमित सहायता राशि से बदल रहा परिवारों का जीवन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत नियमित रूप से मिल रही आर्थिक सहायता महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड गौरेला के ग्राम पंचायत डुमरिया की बसंती धुर्वे इसका प्रेरणादायक उदाहरण है।
बसंती धुर्वे ने बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना की 29वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो गई है। इस राशि से उन्हें दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति, घरेलू खर्चों के बेहतर प्रबंधन तथा परिवार की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से अब वे अधिक आत्मविश्वास के साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सहभागी बन रही हैं।
बसंती धुर्वे का कहना है कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को सम्मान, आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान के साथ जीवन जीने का अवसर भी प्रदान कर रही है। योजना से मिलने वाली राशि महिलाओं को छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहने से मुक्त कर रही है तथा उन्हें परिवार के निर्णयों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी जनकल्याणकारी योजना लागू की है, जिसका लाभ सीधे महिलाओं तक पहुंच रहा है। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनके जीवन में आत्मविश्वास, सुरक्षा और सम्मान की भावना भी विकसित कर रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रभावी क्रियान्वयन के कारण महतारी वंदन योजना का लाभ प्रदेशभर की लाखों महिलाओं तक नियमित रूप से पहुंच रहा है। योजना महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने, परिवारों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाने तथा समावेशी विकास के राज्य सरकार के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
महतारी वंदन योजना आज प्रदेश की महिलाओं के लिए केवल एक आर्थिक सहायता ही नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने और उनके जीवन स्तर में सतत सुधार लाने की दिशा में निरंतर प्रभावी कार्य कर रही है।
00 प्रधानमंत्री की कूटनीतिक सौगात में शामिल हुई बस्तर की जनजातीय कला, मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मिली वैश्विक प्रतिष्ठा
रायपुर। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि उस समय दर्ज हुई, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को छत्तीसगढ़ के बस्तर की विश्वविख्यात ढोकरा ट्री ऑफ लाइफ (जीवन वृक्ष) धातु शिल्पकृति भेंट की। प्रधानमंत्री की इस विशिष्ट कूटनीतिक सौगात ने न केवल बस्तर की हजारों वर्ष पुरानी जनजातीय कला को वैश्विक पहचान दिलाई है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, पारंपरिक शिल्प कौशल और आदिवासी विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है।
यह अवसर पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। राज्य की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएं और पारंपरिक हस्तशिल्प आज वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को भेंट के लिए बस्तर की ढोकरा शिल्पकृति का चयन इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ की लोककला आज विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से कलाकारों तथा शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम है कि आज बस्तर की ढोकरा कला जैसी पारंपरिक विरासत वैश्विक कूटनीतिक उपहार का हिस्सा बनकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ा रही है।
संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ भी राज्य की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, प्रदर्शन और प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयासरत है। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में विभाग लोककला, जनजातीय परंपराओं और पारंपरिक शिल्प को नई पीढ़ी से जोडऩे तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में अनेक पहल कर रहा है। ढोकरा शिल्पकृति का वैश्विक स्तर पर सम्मानित होना इन प्रयासों की सार्थकता को भी रेखांकित करता है।
बस्तर की ढोकरा कला विश्व की सबसे प्राचीन धातु शिल्प परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसका निर्माण लॉस्ट वैक्स कास्टिंग अर्थात मोम सांचा ढलाई तकनीक से किया जाता है, जिसे विश्व की सबसे पुरानी धातु ढलाई विधियों में शामिल किया जाता है। कुशल जनजातीय शिल्पकार प्रत्येक कलाकृति को पूरी तरह हाथ से तैयार करते हैं, इसलिए हर शिल्पकृति अपनी बनावट, सौंदर्य और कलात्मक अभिव्यक्ति में अद्वितीय होती है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित यह शिल्प परंपरा बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा और जनजातीय जीवन-दर्शन का जीवंत स्वरूप है।
प्रधानमंत्री द्वारा भेंट की गई ट्री ऑफ लाइफ (जीवन वृक्ष) शिल्पकृति केवल एक कलात्मक वस्तु नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना का सशक्त प्रतीक है। यह परस्पर जुड़ाव, नवजीवन, समृद्धि और मानव तथा प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश देती है। भारतीय परंपरा में यह कल्पवृक्ष की अवधारणा का प्रतिनिधित्व करती है, वहीं न्यूजीलैंड के माओरी समुदाय की व्हाकापापा की अवधारणा से भी सामंजस्य स्थापित करती है, जो जीवन, प्रकृति और वंश परंपरा के गहरे संबंध को व्यक्त करती है। इस प्रकार यह शिल्पकृति सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक मानवीय मूल्यों का भी प्रतीक बन गई है।
बस्तर की ढोकरा कला केवल हस्तशिल्प नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोकविश्वास, प्रकृति के प्रति सम्मान और सतत जीवनशैली की अभिव्यक्ति है। यह कला स्थानीय शिल्पकारों की आजीविका को सशक्त बनाते हुए पर्यावरण-अनुकूल हस्तनिर्मित उत्पादों की परंपरा को भी आगे बढ़ाती है। प्रत्येक कलाकृति में जनजातीय समाज की सृजनात्मकता, प्रकृति से आत्मीय संबंध और सांस्कृतिक निरंतरता की झलक दिखाई देती है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस शिल्पकृति को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक उपहार के रूप में चयनित किया जाना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति की वैश्विक स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। इससे राज्य के जनजातीय कलाकारों और शिल्पकारों का उत्साह बढ़ेगा, स्थानीय हस्तशिल्प को नए बाजार मिलेंगे तथा छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और जनजातीय विरासत को विश्वभर में नई पहचान प्राप्त होगी।
बस्तर की ढोकरा ट्री ऑफ लाइफ शिल्पकृति आज केवल एक उपहार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता, जनजातीय गौरव, पारंपरिक शिल्प कौशल और भारत की अमूल्य विरासत का ऐसा वैश्विक दूत बन गई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ का नाम और अधिक गौरवपूर्ण ढंग से स्थापित कर दिया है।
रायपुर – शेख समी उर रहमान ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी का पद भार आज दिनांक 13 जुलाई’ 2026 को डॉ.सुस्कर विपुल विलासराव से ग्रहण किया । पूर्व मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, डॉ.सुस्कर विपुल विलासराव का स्थानांतरण रायपुर रेल मंडल में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक के पद पर हुआ है । शेख समी उर रहमान 2015 बैच के भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) के अधिकारी है । रहमान इससे पूर्व पूर्वोत्तर रेलवे के बनारस मंडल में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबन्धक के पद पर कार्यरत थे ।
रायपुर। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा एवं कबीरधाम में 50-50 एमबीबीएस सीटों वाले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही प्रदेश में एक साथ कुल 250 नई एमबीबीएस सीटों का विस्तार होगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा सुदृढ़, समावेशी और आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जहाँ प्रदेश का कोई भी युवा डॉक्टर बनने के अपने सपने से वंचित न रहे और किसी भी नागरिक को बेहतर उपचार के लिए दूर-दराज़ के शहरों का रुख न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे गीदम (दंतेवाड़ा) से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ के आदिवासी वनांचल कुनकुरी (जशपुर) तक नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि डबल इंजन सरकार विकास के अवसरों को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुँचा रही है। यह केवल नए संस्थानों की स्थापना नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने और दूरस्थ अंचलों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव रखने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रही है। प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और आकांक्षी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और क्षेत्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार आएगा।
मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा के प्रति समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं होंगे, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय मानव संसाधन विकास के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार होगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर उपचार की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी, प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई दिशा देगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन शून्यकाल के दौरान अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के मामले को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाते हुए चर्चा कराने की मांग की, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, मामला गंभीर है और इस पर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष ने इसे जनहित और सार्वजनिक आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि “करीब 3 करोड़ राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है, इसलिए इस गंभीर मामले पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।”
इस दौरान सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने स्थगन प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि, यह छत्तीसगढ़ विधानसभा के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें किसी भी विषय पर चर्चा करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चर्चा विधानसभा की प्रक्रिया और नियमों के तहत होनी चाहिए।” विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि, विधानसभा का नहीं विषय किसी भी विषय मे किसी को भी बोलने का अधिकार नहीं है।
अजय चंद्राकर के बयान पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि, जब सत्ता पक्ष कोई मुद्दा उठाता है तो उस पर चर्चा कराई जाती है, लेकिन विपक्ष के मुद्दों पर लगातार व्यवधान पैदा किया जाता है। इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच जमकर नोकझोंक और बहस हुई।
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विपक्ष का पक्ष रखते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया है। इसलिए यह प्रदेश के लोगों की भावना और हितों से जुड़ा मामला है और इस पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए।
सदन में बढ़ते शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस विषय पर स्थगन प्रस्ताव लाया गया है, वह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है, इसलिए विधानसभा के नियमों के अनुसार उस पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा नहीं कराई जा सकती। अध्यक्ष के फैसले के बाद विपक्ष ने अपनी नाराजगी जताई, जबकि सत्ता पक्ष ने अध्यक्ष के निर्णय का समर्थन किया। अध्यक्ष के फैसले के बाद सदन में कुछ देर तक पक्ष-विपक्ष के बीच नोकझोंक होती रही, जिसके बाद कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल में कोंडागांव से भाजपा विधायक लता उसेंडी ने महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बी.एड. और डी.एड. पाठ्यक्रम संचालित नहीं होने का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 लागू है और शिक्षक शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही पूछा कि शहिद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर में शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक के कुल कितने पद स्वीकृत है। कितने कार्यरत है?
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लागू है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में उच्च शिक्षा विभाग के अधीन प्रदेश के किसी भी जिले में बी.एड. या डी.एड. कॉलेज संचालित नहीं हैं। मंत्री ने सदन को बताया कि प्रदेश में 13 ऐसे महाविद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जहां भविष्य में बी.एड. कॉलेज खोले जा सकते हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि, उच्च शिक्षा विभाग की ओर से किसी भी जिले में बी.एड और डी.एड महाविद्यालय संचालित नहीं है। इसका संचालन स्कूल शिक्षा विभाग और SCERT द्वारा किया जाता है। शहिद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर में शैक्षणिक के कुल 265 पद स्वीकृत है। कुल 236 पद रिक्त है। गैर शैक्षणिक के कुल 320 पद स्वीकृत। गैर शैक्षणिक के कुल 291 पद रिक्त है। वहीं कुल छात्र क्षमता 3300 है। वर्तमान में 1898 छात्र अध्ययनरत है। UGC के मानकों के हिसाब से 223 शिक्षक होने चाहिए। वर्तमान में 29 नियमित शिक्षक कार्यरत है।
हालांकि, इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और संबंधित नियामक संस्थाओं के अलग-अलग नियम एवं मानक हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस दिशा में आगे की कार्यवाही के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो आवश्यक प्रक्रियाओं और संभावनाओं का अध्ययन कर अपनी अनुशंसाएं देगी।
लता उसेंडी ने पूछा कि क्या पूर्व में शिक्षकों के भर्ती संबंधित शिकायत मिली थी क्या? जवाब में मंत्री ने कहा, हां, जांच समिति द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर राज्यपाल व कुलाधिपति द्वारा पत्र दिनांक 13 फरवरी 26 द्वारा शिकायतें निराधार होने के कारण प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया है।
जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखीं विधायक लता उसेंडी ने कहा कि महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में लंबे समय से कई पद रिक्त हैं, जिससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने सरकार से विश्वविद्यालय में रिक्त पदों पर जल्द भर्ती करने और क्षेत्र के विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बी.एड./डी.एड. पाठ्यक्रम शीघ्र शुरू करने की मांग की। प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे पर शिक्षक शिक्षा, उच्च शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी चर्चा हुई।
रायपुर। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के तहत राजधानी को तीन नए डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) मिले हैं। नए अधिकारियों की नियुक्ति से कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी की गई है।
जारी आदेश के अनुसार, एडीसीपी तारकेश्वर पटेल को रायपुर मध्य (DCP Central) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, दीपमाला कश्यप को रायपुर उत्तर (DCP North) का नया डीसीपी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा अर्चना झा को डीसीपी ट्रैफिक बनाया गया है। अब राजधानी की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और ट्रैफिक प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।पुलिस विभाग का मानना है कि नई नियुक्तियों से कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली में और मजबूती आएगी। नए डीसीपी अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, आम नागरिकों की सुरक्षा और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य करेंगे। आदेश के बाद तीनों अधिकारियों ने जल्द ही अपना कार्यभार संभालने की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली को और अधिक सुचारु एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए नई रणनीति पर भी काम किया जाएगा।

रायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आज विधानसभा के समिति कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी सहित समिति के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।
रायपुर। आज विधानसभा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने षष्ठम विधानसभा के मानसून सत्र में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।।
छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का अनमोल रत्न खो दिया: आने वाली पीढि़यों के लिए सदैव रहेंगी प्रेरणा की स्त्रोत - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर-- छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
निधन उल्लेख के दौरान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके जाने से कला एवं सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी विलक्षण प्रतिभा से लोककला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी प्रस्तुतियों में गायन और अभिनय का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। पात्रों का सजीव चित्रण, ओजपूर्ण वाणी और प्रभावशाली प्रस्तुति श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। जिस दौर में महिलाओं की पंडवानी गायन में भागीदारी अत्यंत सीमित थी, उस समय उन्होंने सामाजिक रूढि़यों को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं। उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने एशिया, यूरोप सहित विश्व के अनेक देशों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वाेच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया। यह गौरव प्राप्त करने वाली वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र विभूति हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय मंत्रियों ने भी डॉ. तीजन बाई के कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्योत्सव के अवसर पर रायपुर प्रवास पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बातचीत कर उनका कुशलक्षेम जाना था।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा डॉ. तीजन बाई को डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। भारतीय लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उनकी कला, साधना और समर्पण आने वाली पीढि़यों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता रहेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन की ओर से दिवंगत पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि परमात्मा इस कठिन समय में शोकाकुल परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों और कला जगत को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की कार्यसंस्कृति एक बार फिर धरातल पर देखने को मिली। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम कमोसिनडांड निवासी जन्म से दिव्यांग गणेश राम यादव के संघर्षपूर्ण जीवन को लेकर प्रकाशित एक मार्मिक समाचार पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को बिना किसी विलंब के शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाते हुए मात्र 24 घंटे के भीतर गणेश राम यादव के लिए ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी। यह पूरी प्रक्रिया रविवार के शासकीय अवकाश के दिन भी पूरी की गई, जो राज्य सरकार की संवेदनशील और जवाबदेह कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।
मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। विभागीय अधिकारियों की टीम जनपद पंचायत धरमजयगढ़ पहुंची और वहां से ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रशासनिक दल गणेश राम यादव के घर भी पहुंचा, जहां उनके परिवार के सदस्यों, उनकी भाभी तथा वार्ड पंच से चर्चा की गई। उस समय गणेश राम यादव घर पर मौजूद नहीं थे, इसलिए उनके बड़े भाई विचित्र यादव को ट्राइसाइकिल सौंपते हुए यह जानकारी दी गई कि गणेश राम के घर लौटते ही उन्हें यह ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी जाए।
उल्लेखनीय है कि धरमजयगढ़ क्षेत्र से हाल ही में गणेश राम यादव की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें वे हाथों के सहारे चलकर अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते दिखाई दे रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे वर्षों से ट्राइसाइकिल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित थे। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में निवास करने के कारण उन्हें आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए और प्रशासन ने भी संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्या का समाधान सुनिश्चित किया।
ट्राइसाइकिल प्राप्त होने के बाद गणेश राम यादव के बड़े भाई विचित्र यादव के चेहरे पर राहत और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया। भावुक माहौल में उन्होंने प्रशासन और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उसने कहा कि अब तक गणेश राम यादव को छोटी-सी दूरी तय करने के लिए भी हाथों के सहारे सड़क और पगडंडियों पर चलना पड़ता था, जिससे उन्हें शारीरिक कष्ट के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन जीने में भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब ट्राइसाइकिल मिलने से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा। वे अधिक सहजता से आवागमन कर सकेंगे, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर पाएंगे तथा स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, पंचायत और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे उनके आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
गणेश राम यादव की भाभी चंद्रवती ने बताया कि उनके पति विचित्र यादव और देवर गणेश राम यादव दोनों जन्म से दिव्यांग हैं तथा वे स्वयं भी दिव्यांग हैं। दोनों भाइयों को प्रतिमाह दिव्यांग पेंशन प्राप्त होती है। परिवार को महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है। इसके साथ ही राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न भी उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि ट्राइसाइकिल मिलने से गणेश राम के जीवन में बड़ी राहत आएगी और उनका दैनिक जीवन पहले की अपेक्षा काफी आसान हो जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर महज 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में राज्य सरकार की संवेदनशील, जनकेंद्रित और जवाबदेह सुशासन व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में जिस तत्परता से शासन और प्रशासन ने कार्य किया जा रहा है, वह जरूरतमंदों के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच का प्रेरणादायी उदाहरण गया है।
रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में जिला प्रशासन द्वारा “जशक्राफ्ट” ब्रांड के माध्यम से बांस हस्तशिल्प को नई पहचान देने, स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से विशेष पहल की जा रही है।
विकासखंड जशपुर की ग्राम पंचायत झोलांगा में 29 जून से 29 जुलाई तक एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। जिला पंचायत एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त प्रयास से संचालित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बांस हस्तशिल्प से जुड़े लगभग 150 परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाना है। वर्तमान में 46 महिलाओं का प्रथम बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नवीन डिजाइनों और वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले बांस उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत से विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। प्रशिक्षण में फैंसी ट्रे, गुलदस्ते, माचिया, सजावटी सामग्री, चटाई, आकर्षक टोकरियां, फर्नीचर, सोफा, पलंग सहित अनेक आधुनिक एवं उपयोगी उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है।
जशपुर और मनोरा विकासखंड में लगभग 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ), बैंक लिंकेज तथा मुद्रा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़कर उनके उद्यमों को मजबूत बनाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर कौशल उन्नयन एवं उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों तथा देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन एवं विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं, ताकि स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके और उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध हो।
राज्य सरकार की यह पहल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को “लखपति दीदी” की श्रेणी में शामिल करना है।
00 धमतरी के 10 वर्षीय त्रिशांत का हुआ सफल और पूर्णत: नि:शुल्क हृदय ऑपरेशन
00 लाडले को स्वस्थ देख परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू
रायपुर। कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित चिरायु योजना धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का दर्द झेलने से भी बचा लिया।
स्कूल में जांच के दौरान खुली बीमारी की परत
धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला छात्र त्रिशांत रोज की तरह स्कूल जाता था। माता-पिता को अंदाजा भी नहीं था कि उनके लाडले के भीतर जन्मजात हृदय रोग पनप रहा है। तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में असमानता महसूस की। टीम ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।

जिला अस्पताल से रायपुर तक त्वरित एक्शन
चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को इतनी तेजी से पूरा किया कि बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
पहचान से लेकर घर वापसी तक
इस पूरी सफलता की कहानी को चिरायु टीम ने इन पांच चरणों में अमलीजामा पहनाया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिरायु टीम की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इसकी शुरुआत समय पर पहचान से होती है, जहाँ टीम के डॉक्टर स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के भीतर छिपे शुरुआती लक्षणों को पूरी सतर्कता से पकड़ते हैं। बीमारी की आशंका होते ही टीम त्वरित परामर्श का मोर्चा संभालती है और परिजनों को बिना डराए, बेहद आत्मीयता के साथ बीमारी की गंभीरता समझाकर उन्हें आगे के इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।
परिजनों की सहमति मिलते ही शुरू होता है नि:शुल्क रैफरल का सिलसिला, जिसके तहत धमतरी से लेकर रायपुर तक के इलाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जाती है और तमाम कागजी औपचारिकताओं का पूरा जिम्मा चिरायु टीम खुद उठाती है, ताकि गरीब परिवार पर कोई बोझ न पड़े। इसी तत्परता का सुखद परिणाम 8 जुलाई 2026 को सफल सर्जरी के रूप में सामने आया, जब रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मासूम का पूर्णत: नि:शुल्क और कामयाब हार्ट ऑपरेशन किया गया। चिरायु का यह मिशन अस्पताल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ऑपरेशन के बाद सतत फॉलो-अप के जरिए डिस्चार्ज के बाद भी बच्चे की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाती है और उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक सेहत की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।
लाखों का इलाज मुफ़्त हुआ, सरकार ने बचा ली हमारे घर की खुशियां
त्रिशांत के माता-पिता भावुक होकर बताते हैं कि हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता। हम मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।
सिर्फ जांच नहीं, स्वस्थ भविष्य की गारंटी है आरबीएसके
धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या जांच तक सीमित नहीं हैं। यह कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों की पहचान करने से लेकर उनके पूर्णत: ठीक होने तक एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है।
00 सर्जरी विभाग की त्वरित तत्परता, विशेषज्ञ शल्य चिकित्सा एवं समन्वित प्रयासों से बची मरीज की जान
रायपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर के जनरल सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण ट्रॉमा केस का सफलतापूर्वक उपचार करते हुए तीर से गंभीर रूप से घायल मरीज के जीवन बचाने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। समय पर लिए गए चिकित्सकीय निर्णय, विशेषज्ञ शल्य चिकित्सा तथा सर्जरी विभाग की समर्पित टीम के समन्वित प्रयासों से मरीज को नया जीवन मिला।
विभागाध्यक्ष जनरल सर्जरी विभाग डॉ. मंजु सिंह केस के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताती हैं कि गरियाबंद जिले के निवासी एक मरीज को पीठ से होते हुए पेट में तीर लगने के कारण गंभीर अवस्था में उच्च स्तरीय उपचार के लिए अम्बेडकर अस्पताल रेफर किया गया था। प्रारंभिक चिकित्सकीय परीक्षण एवं आवश्यक जांचों में पाया गया कि तीर पेट में गहराई तक धंसा हुआ था, जिससे पेट के भीतर के महत्वपूर्ण अंग गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। इसके कारण एब्डोमेन में परफोरेशन, आंतरिक रक्तस्राव तथा संक्रमण का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। ऐसी स्थिति में उपचार में थोड़ी भी देरी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी।
मरीज के अस्पताल पहुंचते ही जनरल सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने उसकी स्थिति का त्वरित आकलन किया और बिना विलंब किए आपातकालीन शल्य चिकित्सा का निर्णय लिया। विशेषज्ञ निगरानी में 2 जुलाई 2026 को सर्जरी विभाग की टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक संपन्न किया। ऑपरेशन के दौरान अत्यंत सावधानी पूर्वक तीर को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया। इसके पश्चात क्षतिग्रस्त आंतरिक ऊतकों एवं अंगों की मरम्मत की गई, रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया तथा पेट के भीतर जमा रक्त एवं दूषित द्रव को साफ कर आवश्यक जीवनरक्षक प्रक्रियाएं संपन्न की गईं
ऑपरेशन के उपरांत मरीज को सर्जरी पोस्ट-ऑपरेटिव आईसीयू में स्थानांतरित किया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी में उसका उपचार जारी है। वर्तमान में मरीज की स्थिति स्थिर है तथा उसमें लगातार सुधार देखा जा रहा है। यदि सुधार की यही गति बनी रही तो उसे शीघ्र ही पूर्णत: स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। इस जटिल शल्य चिकित्सा की सफलता एक बार फिर यह सिद्ध करती है कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर में गंभीर ट्रॉमा एवं आपातकालीन शल्य चिकित्सा के उपचार हेतु अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम, अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं व ऑपरेशन थिएटर तथा चौबीसों घंटे उपलब्ध आपातकालीन सेवाएं प्रभावी रूप से कार्य कर रही हैं। ऐसे गंभीर मामलों में समय पर निर्णय, बहु-विषयक समन्वय तथा उच्च स्तरीय शल्य चिकित्सा मरीजों के जीवन की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सर्जरी विभाग द्वारा किए गए इस सफल उपचार ने न केवल एक गंभीर रूप से घायल मरीज का जीवन बचाया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि समर्पण, विशेषज्ञता, त्वरित निर्णय क्षमता और टीमवर्क के माध्यम से अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट चिकित्सा परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
मरीज अत्यंत गंभीर अवस्था में हमारे अस्पताल पहुंचा था। सर्जरी विभाग की टीम ने बिना समय गंवाए आपातकालीन ऑपरेशन कर उसकी जान बचाने में सफलता प्राप्त की। अस्पताल में गंभीर ट्रॉमा एवं आपातकालीन केस के उपचार के लिए अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक मरीज को समय पर बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
रायपुर- आधुनिक दौर में खेती-किसानी को उन्नत और मुनाफे का सौदा बनाने में कृषि यंत्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो चुकी है। राज्य शासन की कृषि यंत्रीकरण योजना आज छोटे और मझोले किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसका एक जीवंत उदाहरण विकासखण्ड बिलाईगढ़ के ग्राम गधाभाटा में देखने को मिला है, जहाँ के प्रगतिशील कृषक तिहारूराम चंद्रा पिता जगनथिया का खुद का ट्रैक्टर खरीदने का सपना साकार हुआ है।
ग्राम झुमका में आयोजित भव्य सुशासन शिविर में प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा के करकमलों से तिहारूराम को उनके नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई। ट्रैक्टर का 9.40 लाख रूपए की कुल लागत पर तिहारूराम को राज्य शासन की ओर से 4 लाख रूपए का भारी शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ है। इस पर तिहारूराम ने कहा कि कम जमीन और सीमित साधनों के कारण पहले समय पर खेती का काम पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी। भारी-भरकम किराए पर ट्रैक्टर लेना पड़ता था। लेकिन सरकार की इस योजना और 4 लाख रुपए की बड़ी छूट ने मेरी राह आसान कर दी। अब मैं न सिर्फ समय पर अपनी खेती कर सकूंगा, बल्कि खेती को अधिक आधुनिक और लाभकारी भी बना पाऊंगा।
’वन स्टॉप सेंटर’ से मिला किसानों को तत्काल लाभ
सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित इन शिविरों में कृषि विभाग द्वारा ‘वन स्टॉप सेंटर’ के रूप में स्टाल लगाए गए थे। यहाँ आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ-साथ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाया गया।
शिविर के दौरान विभाग को कुल 575 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें 545 मांग संबंधी और 30 शिकायत संबंधी मामले थे। विभाग ने संवेदनशीलता और मुस्तैदी दिखाते हुए रिकॉर्ड समय में 572 आवेदनों (544 मांग व 28 शिकायत) का सफलतापूर्वक निराकरण कर सुशासन की मिसाल पेश की।
उन्नत कृषि और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
ट्रैक्टर वितरण के साथ ही विभाग द्वारा शिविर में उपस्थित किसानों को उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए नीम आधारित कीटनाशक, हरित खाद, प्रमाणित बीज और विभिन्न लघु कृषि यंत्रों का वितरण भी किया गया।
उप संचालक कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों और ग्रामीण कृषि विकास अधिकारियों की टीम ने किसानों को चौपाल लगाकर केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इनमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,सॉइल हेल्थ कार्ड योजना और एग्री स्टैक पंजीयन,प्राकृतिक व जैविक खेती मिशन तथा परंपरागत कृषि विकास योजना,दलहन-तिलहन प्रोत्साहन कार्यक्रम और हरित खाद का उपयोग शामिल है।
जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में कृषि विभाग का यह महाअभियान न केवल किसानों की समस्याओं के प्रभावी समाधान का जरिया बना, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। यह पूरी मुहिम सुशासन, जनभागीदारी और किसान कल्याण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।





























