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उप मुख्यमंत्री शर्मा ने नक्सल प्रकरणों की वापसी को लेकर बस्तर के युवाओं से की मुलाकात

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने नक्सल प्रकरणों की वापसी को लेकर बस्तर के युवाओं से की मुलाकात

 00 नक्सल मामलों में निरुद्ध लोगों के प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए शासन प्रतिबद्ध - शर्मा
00 जनहानि रहित मामलों की होगी साप्ताहिक समीक्षा, लंबित न्यायालयीन मामलों में भी तेज होगी प्रक्रिया
रायपुर।
छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल मामलों में जेल में बंद ऐसे लोगों के प्रकरणों के त्वरित निराकरण और रिहाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिनके खिलाफ कोई गंभीर जनहानि का मामला दर्ज नहीं है। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने आज बस्तर क्षेत्र से आए जनप्रतिनिधियों, नक्सल प्रकरणों में निरुद्ध लोगों के परिजनों, नक्सल पीड़ितों तथा युवाओं से आज विधानसभा में मुलाकात कर नक्सल प्रकरणों के निराकरण और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नक्सल मामलों में जेल में निरुद्ध लोगों के प्रकरणों की शीघ्र और न्यायसंगत समीक्षा और सभी की जल्द रिहाई के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा प्रत्येक पात्र मामले में विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। 
नक्सल प्रकरणों के निराकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार
उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बताया कि 10 जुलाई को मंत्रालय में गृह विभाग के प्रमुख सचिव, संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर संभाग के सभी 12 जिलों के संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर नक्सल प्रकरणों के निराकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है। बैठक में सभी लंबित प्रकरणों को दो श्रेणियों में विभाजित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। एक जिनमें जनहानि हुई हैं तथा दूसरे वे प्रकरण जिनमें जनहानि नहीं हुई है।
मामलों का शीघ्र निराकरण कर पात्र लोगों को राहत मिले
उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बताया कि जिन मामलों में जनहानि नहीं हुई है, उनकी समीक्षा संबंधित जिलों पुलिस अधीक्षक प्रत्येक सप्ताह अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम के साथ करेंगे, ताकि ऐसे मामलों का शीघ्र निराकरण कर पात्र लोगों को राहत मिल सके। इसके लिए अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम बनाई गई है। वहीं जिन मामलों में जनहानि हुई है और न्यायालय में प्रकरण लंबित हैं, उनमें चालान प्रस्तुत करने, गवाही की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा न्यायालयीन प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जिन प्रकरणों में गंभीर धाराएं लगी हैं उनमें न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया जाएगा।
अधिवक्ताओं की टीम द्वारा विधिसम्मत होगा परीक्षण
शर्मा ने कहा कि यदि किसी अभियुक्त के परिजन अपने प्रकरण की समीक्षा कराना चाहते हैं तो वे संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक को आवेदन दे सकते हैं। ऐसे आवेदनों का अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम द्वारा विधिसम्मत परीक्षण किया जाएगा। 
किसकोड़ो में पहली बार वास्तविक आजादी का अनुभव कर रहे हैं
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी हिंसा ने बस्तर सहित अनेक क्षेत्रों को वर्षों तक प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब इन क्षेत्रों में सामान्य आवाजाही भी कठिन थी, लेकिन आज स्थिति तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में अत्यंत नक्सल प्रभावित रहे किसकोड़ो गांव के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि वे अब पहली बार वास्तविक आजादी का अनुभव कर रहे हैं।  शर्मा ने कहा कि कबीरधाम क्षेत्र में भी माओवादी गतिविधियों का प्रभाव रहा है और उन्होंने स्वयं उस दौर को निकट से देखा है। इस दौरान युवाओं ने अपनी व्यथाओं को भी उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखा, जिसपर उप मुख्यमंत्री ने सभी के समाधान का आश्वासन दिया।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ कर जैविक खेती अपनाने का आग्रह
शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर बस्तर में शांति, विकास और विश्वास का वातावरण मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बस्तर के युवाओं से विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से बचते हुए प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का आग्रह किया तथा कहा कि बस्तर के जैविक उत्पादों को एनपीओपी के तहत प्रमाणित कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में सरकार द्वारा कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर विधायक धरमलाल कौशिक,  नीलकंठ टेकाम, विक्रम उसेंडी,  कवासी लखमा,  विक्रम मंडावी सहित बस्तर क्षेत्र के अनेक युवा उपस्थित थे।

कबीरधाम को मिली शासकीय मेडिकल कॉलेज की सौगात, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

कबीरधाम को मिली शासकीय मेडिकल कॉलेज की सौगात, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

 मेडिकल कॉलेज खुलना जिले के विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि - उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

एनएमसी ने 50 एमबीबीएस सीटों के साथ शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संचालन की दी अनुमति

लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, युवाओं को जिले में ही चिकित्सा शिक्षा का मिलेगा अवसर

रायपुर- कबीरधाम जिले के लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने शासकीय मेडिकल कॉलेज, कबीरधाम को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालित करने की औपचारिक अनुमति प्रदान कर दी है। यह मेडिकल कॉलेज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़) से संबद्ध होगा। इस स्वीकृति के साथ कबीरधाम जिले की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने जा रही है।

कबीरधाम में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर

उप मुख्यमंत्री एवं कबीरधाम विधायक विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर जिलेवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कबीरधाम में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना जिले के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रही है और इसके लिए लगातार केंद्र एवं राज्य स्तर पर समन्वय कर आवश्यक प्रयास किए गए।

चिकित्सा शिक्षा का सपना साकार करना और अधिक होगा आसान 

 शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। एनएमसी से मिली यह स्वीकृति केवल कबीरधाम ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के लाखों लोगों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का नया द्वार खोलेगी। साथ ही स्थानीय युवाओं को अपने जिले में ही एमबीबीएस की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा, जिससे चिकित्सा शिक्षा का सपना साकार करना और अधिक आसान होगा। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्रारंभ होने से जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा तथा स्वास्थ्य अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी। इससे गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए मरीजों की बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी और लोगों को अपने जिले में ही बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

कबीरधाम जिला अस्पताल का उन्नयन कराकर 220 बिस्तर का किया गया

मेडिकल कॉलेज की स्थापना को साकार करने में उप मुख्यमंत्री एवं कबीरधाम विधायक  विजय शर्मा की सक्रिय पहल और सतत प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज की स्थापना से जुड़ी सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को चरणबद्ध एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया।  शर्मा की पहल पर सबसे पहले कबीरधाम जिला अस्पताल का 100 बिस्तरों से बढ़ाकर 220 बिस्तरों में उन्नयन कराया गया, जिससे मेडिकल कॉलेज संचालन के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार हो सकी। कार्यों में तेजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उनके निर्देश पर एक मॉनिटरिंग समिति का गठन किया गया, जिसकी नियमित साप्ताहिक समीक्षा स्वयं उप मुख्यमंत्री  शर्मा प्रत्यक्ष रूप से करते रहे।

एमबीबीएस की 50 सीटों के साथ मेडिकल कॉलेज संचालन की अनुमति

मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी  शर्मा ने प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया। उनके सतत प्रयासों से लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत से मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण की स्वीकृति भी प्राप्त हुई। इतना ही नहीं, 23 जून को नई दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा से विशेष रूप से मुलाकात कर कबीरधाम मेडिकल कॉलेज के लिए इसी शैक्षणिक सत्र से कॉलेज आरंभ कराने का आग्रह किया, जिस पर उन्होंने तत्काल सहमति प्रदान करते हुए विभाग को निर्देश जारी किए जाने का आश्वासन दिया, परिणाम स्वरूप उनके निरंतर फॉलोअप, प्रभावी समन्वय और प्रतिबद्ध प्रयासों से ही नेशनल मेडिकल कमीशन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ मेडिकल कॉलेज संचालन की अनुमति प्रदान की है। 

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का आभार

उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, नेशनल मेडिकल कमीशन तथा सभी संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा होगी उपलब्ध 

कबीरधाम में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही जन-आकांक्षाओं को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मेडिकल कॉलेज के प्रारंभ होने से जिले के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध होगी, स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर उल्लेखनीय रूप से बेहतर होगा तथा पूरे क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। यह उपलब्धि कबीरधाम को स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के प्रमुख जिलों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

महतारी वंदन योजना बनी महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान

महतारी वंदन योजना बनी महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिल रही नई दिशा, नियमित सहायता राशि से बदल रहा परिवारों का जीवन

रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत नियमित रूप से मिल रही आर्थिक सहायता महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड गौरेला के ग्राम पंचायत डुमरिया की बसंती धुर्वे इसका प्रेरणादायक उदाहरण है।

बसंती धुर्वे ने बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना की 29वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो गई है। इस राशि से उन्हें दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति, घरेलू खर्चों के बेहतर प्रबंधन तथा परिवार की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से अब वे अधिक आत्मविश्वास के साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सहभागी बन रही हैं।

बसंती धुर्वे का कहना है कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को सम्मान, आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान के साथ जीवन जीने का अवसर भी प्रदान कर रही है। योजना से मिलने वाली राशि महिलाओं को छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहने से मुक्त कर रही है तथा उन्हें परिवार के निर्णयों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है।

उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी जनकल्याणकारी योजना लागू की है, जिसका लाभ सीधे महिलाओं तक पहुंच रहा है। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनके जीवन में आत्मविश्वास, सुरक्षा और सम्मान की भावना भी विकसित कर रही है।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रभावी क्रियान्वयन के कारण महतारी वंदन योजना का लाभ प्रदेशभर की लाखों महिलाओं तक नियमित रूप से पहुंच रहा है। योजना महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने, परिवारों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाने तथा समावेशी विकास के राज्य सरकार के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

महतारी वंदन योजना आज प्रदेश की महिलाओं के लिए केवल एक आर्थिक सहायता ही नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने और उनके जीवन स्तर में सतत सुधार लाने की दिशा में निरंतर प्रभावी कार्य कर रही है।

विश्व मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छाप: प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री को भेंट की बस्तर की ढोकरा ट्री ऑफ लाइफ शिल्पकृति

विश्व मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छाप: प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री को भेंट की बस्तर की ढोकरा ट्री ऑफ लाइफ शिल्पकृति

 00 प्रधानमंत्री की कूटनीतिक सौगात में शामिल हुई बस्तर की जनजातीय कला, मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मिली वैश्विक प्रतिष्ठा

रायपुर। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि उस समय दर्ज हुई, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को छत्तीसगढ़ के बस्तर की विश्वविख्यात ढोकरा ट्री ऑफ लाइफ (जीवन वृक्ष) धातु शिल्पकृति भेंट की। प्रधानमंत्री की इस विशिष्ट कूटनीतिक सौगात ने न केवल बस्तर की हजारों वर्ष पुरानी जनजातीय कला को वैश्विक पहचान दिलाई है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, पारंपरिक शिल्प कौशल और आदिवासी विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है।
यह अवसर पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। राज्य की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएं और पारंपरिक हस्तशिल्प आज वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को भेंट के लिए बस्तर की ढोकरा शिल्पकृति का चयन इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ की लोककला आज विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से कलाकारों तथा शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम है कि आज बस्तर की ढोकरा कला जैसी पारंपरिक विरासत वैश्विक कूटनीतिक उपहार का हिस्सा बनकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ा रही है।
संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ भी राज्य की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, प्रदर्शन और प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयासरत है। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में विभाग लोककला, जनजातीय परंपराओं और पारंपरिक शिल्प को नई पीढ़ी से जोडऩे तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में अनेक पहल कर रहा है। ढोकरा शिल्पकृति का वैश्विक स्तर पर सम्मानित होना इन प्रयासों की सार्थकता को भी रेखांकित करता है।

बस्तर की ढोकरा कला विश्व की सबसे प्राचीन धातु शिल्प परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसका निर्माण लॉस्ट वैक्स कास्टिंग अर्थात मोम सांचा ढलाई तकनीक से किया जाता है, जिसे विश्व की सबसे पुरानी धातु ढलाई विधियों में शामिल किया जाता है। कुशल जनजातीय शिल्पकार प्रत्येक कलाकृति को पूरी तरह हाथ से तैयार करते हैं, इसलिए हर शिल्पकृति अपनी बनावट, सौंदर्य और कलात्मक अभिव्यक्ति में अद्वितीय होती है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित यह शिल्प परंपरा बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा और जनजातीय जीवन-दर्शन का जीवंत स्वरूप है।
प्रधानमंत्री द्वारा भेंट की गई ट्री ऑफ लाइफ (जीवन वृक्ष) शिल्पकृति केवल एक कलात्मक वस्तु नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना का सशक्त प्रतीक है। यह परस्पर जुड़ाव, नवजीवन, समृद्धि और मानव तथा प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश देती है। भारतीय परंपरा में यह कल्पवृक्ष की अवधारणा का प्रतिनिधित्व करती है, वहीं न्यूजीलैंड के माओरी समुदाय की व्हाकापापा की अवधारणा से भी सामंजस्य स्थापित करती है, जो जीवन, प्रकृति और वंश परंपरा के गहरे संबंध को व्यक्त करती है। इस प्रकार यह शिल्पकृति सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक मानवीय मूल्यों का भी प्रतीक बन गई है।
बस्तर की ढोकरा कला केवल हस्तशिल्प नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोकविश्वास, प्रकृति के प्रति सम्मान और सतत जीवनशैली की अभिव्यक्ति है। यह कला स्थानीय शिल्पकारों की आजीविका को सशक्त बनाते हुए पर्यावरण-अनुकूल हस्तनिर्मित उत्पादों की परंपरा को भी आगे बढ़ाती है। प्रत्येक कलाकृति में जनजातीय समाज की सृजनात्मकता, प्रकृति से आत्मीय संबंध और सांस्कृतिक निरंतरता की झलक दिखाई देती है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस शिल्पकृति को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक उपहार के रूप में चयनित किया जाना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति की वैश्विक स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। इससे राज्य के जनजातीय कलाकारों और शिल्पकारों का उत्साह बढ़ेगा, स्थानीय हस्तशिल्प को नए बाजार मिलेंगे तथा छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और जनजातीय विरासत को विश्वभर में नई पहचान प्राप्त होगी।
बस्तर की ढोकरा ट्री ऑफ लाइफ शिल्पकृति आज केवल एक उपहार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता, जनजातीय गौरव, पारंपरिक शिल्प कौशल और भारत की अमूल्य विरासत का ऐसा वैश्विक दूत बन गई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ का नाम और अधिक गौरवपूर्ण ढंग से स्थापित कर दिया है।

शेख समी उर रहमान ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी का पदभार ग्रहण किया 

शेख समी उर रहमान ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी का पदभार ग्रहण किया 

 रायपुर – शेख समी उर रहमान ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी का पद भार आज दिनांक 13 जुलाई’ 2026 को डॉ.सुस्कर विपुल विलासराव से ग्रहण किया । पूर्व मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, डॉ.सुस्कर विपुल विलासराव का स्थानांतरण रायपुर रेल मंडल में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक के पद पर हुआ है ।  शेख समी उर रहमान 2015 बैच के भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) के अधिकारी है ।  रहमान इससे  पूर्व  पूर्वोत्तर रेलवे के बनारस मंडल में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबन्धक के पद पर कार्यरत थे । 

 
रहमान भारतीय रेलवे परिचालन सेवा (आईआरटीएस) के 2015 बैच के अधिकारी है ।  शेख समी उर रहमान मुख्य जनसंपर्क अधिकारी के पद पर पदस्थापना के पूर्व वे पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी मंडल में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे। इससे पूर्व वे सहायक परिचालन प्रबंधक (AOM), मंडल परिचालन प्रबंधक (DOM) तथा वरिष्ठ मंडल सुरक्षा अधिकारी (Sr. DSO) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं ।
 
अपने कार्यकाल के दौरान रहमान ने यात्री सुविधाओं के विस्तार एवं गैर-किराया राजस्व (Non-Fare Revenue) में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए अनेक नवाचार किए । उनके नेतृत्व में वाराणसी मंडल ने विभिन्न वाणिज्यिक पहलों के माध्यम से उल्लेखनीय अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया, जिसके लिए उन्हें वर्ष 2024 में भारतीय रेल का प्रतिष्ठित "अति विशिष्ट सेवा पुरस्कार (Ati Vishisht Seva Puraskar)" भी प्राप्त हुआ ।
 
मूलतः छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी श्री रहमान ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), रायपुर से सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) में बी.टेक. की उपाधि प्राप्त की है। वर्ष 2016 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से भारतीय रेल यातायात सेवा में चयनित होने के उपरांत उन्होंने 14 दिसंबर 2016 को भारतीय रेल में अपनी सेवाएं प्रारंभ कीं ।
CG BREAKING : छत्तीसगढ़ को मिले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की सौगात, 250 सीटों को मिली स्वीकृति

CG BREAKING : छत्तीसगढ़ को मिले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की सौगात, 250 सीटों को मिली स्वीकृति

 रायपुर। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा एवं कबीरधाम में 50-50 एमबीबीएस सीटों वाले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही प्रदेश में एक साथ कुल 250 नई एमबीबीएस सीटों का विस्तार होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा सुदृढ़, समावेशी और आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जहाँ प्रदेश का कोई भी युवा डॉक्टर बनने के अपने सपने से वंचित न रहे और किसी भी नागरिक को बेहतर उपचार के लिए दूर-दराज़ के शहरों का रुख न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे गीदम (दंतेवाड़ा) से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ के आदिवासी वनांचल कुनकुरी (जशपुर) तक नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि डबल इंजन सरकार विकास के अवसरों को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुँचा रही है। यह केवल नए संस्थानों की स्थापना नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने और दूरस्थ अंचलों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव रखने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रही है। प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और आकांक्षी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और क्षेत्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार आएगा।

मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा के प्रति समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं होंगे, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय मानव संसाधन विकास के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार होगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर उपचार की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी, प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई दिशा देगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगी।

CG Assembly : राम मंदिर चंदा चोरी मामले में छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष का हंगामा, सदन की कार्यवाही स्थगित

CG Assembly : राम मंदिर चंदा चोरी मामले में छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष का हंगामा, सदन की कार्यवाही स्थगित

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन शून्यकाल के दौरान अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के मामले को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाते हुए चर्चा कराने की मांग की, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई।

स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, मामला गंभीर है और इस पर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष ने इसे जनहित और सार्वजनिक आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि “करीब 3 करोड़ राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है, इसलिए इस गंभीर मामले पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।”

इस दौरान सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने स्थगन प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि, यह छत्तीसगढ़ विधानसभा के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें किसी भी विषय पर चर्चा करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चर्चा विधानसभा की प्रक्रिया और नियमों के तहत होनी चाहिए।” विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि, विधानसभा का नहीं विषय किसी भी विषय मे किसी को भी बोलने का अधिकार नहीं है।

अजय चंद्राकर के बयान पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि, जब सत्ता पक्ष कोई मुद्दा उठाता है तो उस पर चर्चा कराई जाती है, लेकिन विपक्ष के मुद्दों पर लगातार व्यवधान पैदा किया जाता है। इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच जमकर नोकझोंक और बहस हुई।

इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विपक्ष का पक्ष रखते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया है। इसलिए यह प्रदेश के लोगों की भावना और हितों से जुड़ा मामला है और इस पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए।

सदन में बढ़ते शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस विषय पर स्थगन प्रस्ताव लाया गया है, वह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है, इसलिए विधानसभा के नियमों के अनुसार उस पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा नहीं कराई जा सकती। अध्यक्ष के फैसले के बाद विपक्ष ने अपनी नाराजगी जताई, जबकि सत्ता पक्ष ने अध्यक्ष के निर्णय का समर्थन किया। अध्यक्ष के फैसले के बाद सदन में कुछ देर तक पक्ष-विपक्ष के बीच नोकझोंक होती रही, जिसके बाद कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।

 

CG Assembly : विधानसभा के प्रश्नकाल में उठा B.Ed./D.Ed. कोर्स नहीं होने का मुद्दा, विधायक लता उसेंडी ने उठाए सवाल

CG Assembly : विधानसभा के प्रश्नकाल में उठा B.Ed./D.Ed. कोर्स नहीं होने का मुद्दा, विधायक लता उसेंडी ने उठाए सवाल

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल में कोंडागांव से भाजपा विधायक लता उसेंडी ने महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बी.एड. और डी.एड. पाठ्यक्रम संचालित नहीं होने का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 लागू है और शिक्षक शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही पूछा कि शहिद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर में शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक के कुल कितने पद स्वीकृत है। कितने कार्यरत है?

उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लागू है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में उच्च शिक्षा विभाग के अधीन प्रदेश के किसी भी जिले में बी.एड. या डी.एड. कॉलेज संचालित नहीं हैं। मंत्री ने सदन को बताया कि प्रदेश में 13 ऐसे महाविद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जहां भविष्य में बी.एड. कॉलेज खोले जा सकते हैं।

उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि, उच्च शिक्षा विभाग की ओर से किसी भी जिले में बी.एड और डी.एड महाविद्यालय संचालित नहीं है। इसका संचालन स्कूल शिक्षा विभाग और SCERT द्वारा किया जाता है। शहिद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर में शैक्षणिक के कुल 265 पद स्वीकृत है। कुल 236 पद रिक्त है। गैर शैक्षणिक के कुल 320 पद स्वीकृत। गैर शैक्षणिक के कुल 291 पद रिक्त है। वहीं कुल छात्र क्षमता 3300 है। वर्तमान में 1898 छात्र अध्ययनरत है। UGC के मानकों के हिसाब से 223 शिक्षक होने चाहिए। वर्तमान में 29 नियमित शिक्षक कार्यरत है।

हालांकि, इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और संबंधित नियामक संस्थाओं के अलग-अलग नियम एवं मानक हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस दिशा में आगे की कार्यवाही के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो आवश्यक प्रक्रियाओं और संभावनाओं का अध्ययन कर अपनी अनुशंसाएं देगी।

लता उसेंडी ने पूछा कि क्या पूर्व में शिक्षकों के भर्ती संबंधित शिकायत मिली थी क्या? जवाब में मंत्री ने कहा, हां, जांच समिति द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर राज्यपाल व कुलाधिपति द्वारा पत्र दिनांक 13 फरवरी 26 द्वारा शिकायतें निराधार होने के कारण प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया है।

जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखीं विधायक लता उसेंडी ने कहा कि महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में लंबे समय से कई पद रिक्त हैं, जिससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने सरकार से विश्वविद्यालय में रिक्त पदों पर जल्द भर्ती करने और क्षेत्र के विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बी.एड./डी.एड. पाठ्यक्रम शीघ्र शुरू करने की मांग की। प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे पर शिक्षक शिक्षा, उच्च शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी चर्चा हुई।

रायपुर कमिश्नरेट पुलिस में बड़ा फेरबदल, तीन नए डीसीपी की नियुक्ति, देखें लिस्ट

रायपुर कमिश्नरेट पुलिस में बड़ा फेरबदल, तीन नए डीसीपी की नियुक्ति, देखें लिस्ट

 रायपुर। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के तहत राजधानी को तीन नए डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) मिले हैं। नए अधिकारियों की नियुक्ति से कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी की गई है।

जारी आदेश के अनुसार, एडीसीपी तारकेश्वर पटेल को रायपुर मध्य (DCP Central) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, दीपमाला कश्यप को रायपुर उत्तर (DCP North) का नया डीसीपी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा अर्चना झा को डीसीपी ट्रैफिक बनाया गया है। अब राजधानी की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और ट्रैफिक प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।पुलिस विभाग का मानना है कि नई नियुक्तियों से कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली में और मजबूती आएगी। नए डीसीपी अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, आम नागरिकों की सुरक्षा और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य करेंगे। आदेश के बाद तीनों अधिकारियों ने जल्द ही अपना कार्यभार संभालने की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली को और अधिक सुचारु एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए नई रणनीति पर भी काम किया जाएगा।

कार्यमंत्रणा समिति की बैठक आयोजित

कार्यमंत्रणा समिति की बैठक आयोजित

 रायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आज विधानसभा के समिति कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी सहित समिति के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह को पुष्प गुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया

मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह को पुष्प गुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया

 रायपुर। आज विधानसभा में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने षष्ठम विधानसभा के मानसून सत्र में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को विधानसभा में दी भावभीनी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को विधानसभा में दी भावभीनी श्रद्धांजलि

 छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का अनमोल रत्न खो दिया: आने वाली पीढि़यों के लिए सदैव रहेंगी प्रेरणा की स्त्रोत - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर-- छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

निधन उल्लेख के दौरान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके जाने से कला एवं सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी विलक्षण प्रतिभा से लोककला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी प्रस्तुतियों में गायन और अभिनय का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। पात्रों का सजीव चित्रण, ओजपूर्ण वाणी और प्रभावशाली प्रस्तुति श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थी।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। जिस दौर में महिलाओं की पंडवानी गायन में भागीदारी अत्यंत सीमित थी, उस समय उन्होंने सामाजिक रूढि़यों को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं। उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने एशिया, यूरोप सहित विश्व के अनेक देशों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वाेच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया। यह गौरव प्राप्त करने वाली वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र विभूति हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय मंत्रियों ने भी डॉ. तीजन बाई के कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्योत्सव के अवसर पर रायपुर प्रवास पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बातचीत कर उनका कुशलक्षेम जाना था।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा डॉ. तीजन बाई को डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। भारतीय लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उनकी कला, साधना और समर्पण आने वाली पीढि़यों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता रहेगा।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सदन की ओर से दिवंगत पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि परमात्मा इस कठिन समय में शोकाकुल परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों और कला जगत को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

24 घंटे में मिली ट्राइसाइकिल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल से दिव्यांग गणेश राम यादव के जीवन को मिली नई रफ्तार….

24 घंटे में मिली ट्राइसाइकिल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल से दिव्यांग गणेश राम यादव के जीवन को मिली नई रफ्तार….

 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की कार्यसंस्कृति एक बार फिर धरातल पर देखने को मिली। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम कमोसिनडांड निवासी जन्म से दिव्यांग गणेश राम यादव के संघर्षपूर्ण जीवन को लेकर प्रकाशित एक मार्मिक  समाचार पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को बिना किसी विलंब के शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाते हुए मात्र 24 घंटे के भीतर गणेश राम यादव के लिए ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी। यह पूरी प्रक्रिया रविवार के शासकीय अवकाश के दिन भी पूरी की गई, जो राज्य  सरकार की संवेदनशील और जवाबदेह कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। विभागीय अधिकारियों की टीम जनपद पंचायत धरमजयगढ़ पहुंची और वहां से ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रशासनिक दल गणेश राम यादव के घर भी पहुंचा, जहां उनके परिवार के सदस्यों, उनकी भाभी तथा वार्ड पंच से चर्चा की गई। उस समय गणेश राम यादव घर पर मौजूद नहीं थे, इसलिए उनके बड़े भाई विचित्र यादव को ट्राइसाइकिल सौंपते हुए यह जानकारी दी गई कि गणेश राम के घर लौटते ही उन्हें यह ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी जाए।

उल्लेखनीय है कि धरमजयगढ़ क्षेत्र से हाल ही में गणेश राम यादव की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें वे हाथों के सहारे चलकर अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते दिखाई दे रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे वर्षों से ट्राइसाइकिल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित थे। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में निवास करने के कारण उन्हें आवागमन,  स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए और प्रशासन ने भी संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्या का समाधान सुनिश्चित किया।

ट्राइसाइकिल प्राप्त होने के बाद गणेश राम यादव के बड़े भाई विचित्र यादव के चेहरे पर राहत और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया। भावुक माहौल में उन्होंने प्रशासन और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उसने कहा कि अब तक गणेश राम यादव को छोटी-सी दूरी तय करने के लिए भी हाथों के सहारे सड़क और पगडंडियों पर चलना पड़ता था, जिससे उन्हें शारीरिक कष्ट के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन जीने में भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब ट्राइसाइकिल मिलने से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा। वे अधिक सहजता से आवागमन कर सकेंगे, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर पाएंगे तथा स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, पंचायत और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे उनके आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

गणेश राम यादव की भाभी चंद्रवती ने बताया कि उनके पति विचित्र यादव और देवर गणेश राम यादव दोनों जन्म से दिव्यांग हैं तथा वे स्वयं भी दिव्यांग हैं। दोनों भाइयों को प्रतिमाह दिव्यांग पेंशन प्राप्त होती है। परिवार को महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है। इसके साथ ही राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न भी उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि ट्राइसाइकिल मिलने से गणेश राम के जीवन में बड़ी राहत आएगी और उनका दैनिक जीवन पहले की अपेक्षा काफी आसान हो जाएगा।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर महज 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में राज्य सरकार की संवेदनशील, जनकेंद्रित और जवाबदेह सुशासन व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में जिस तत्परता से शासन और प्रशासन ने कार्य किया जा रहा है, वह जरूरतमंदों के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच का प्रेरणादायी उदाहरण गया है।

जशक्राफ्ट से छत्तीसगढ़ के बांस हस्तशिल्प को मिलेगी नई पहचान

जशक्राफ्ट से छत्तीसगढ़ के बांस हस्तशिल्प को मिलेगी नई पहचान

 रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में जिला प्रशासन द्वारा “जशक्राफ्ट” ब्रांड के माध्यम से बांस हस्तशिल्प को नई पहचान देने, स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से विशेष पहल की जा रही है।

विकासखंड जशपुर की ग्राम पंचायत झोलांगा में 29 जून से 29 जुलाई तक एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। जिला पंचायत एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त प्रयास से संचालित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बांस हस्तशिल्प से जुड़े लगभग 150 परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाना है। वर्तमान में 46 महिलाओं का प्रथम बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नवीन डिजाइनों और वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले बांस उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत से विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। प्रशिक्षण में फैंसी ट्रे, गुलदस्ते, माचिया, सजावटी सामग्री, चटाई, आकर्षक टोकरियां, फर्नीचर, सोफा, पलंग सहित अनेक आधुनिक एवं उपयोगी उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है।

जशपुर और मनोरा विकासखंड में लगभग 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ), बैंक लिंकेज तथा मुद्रा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़कर उनके उद्यमों को मजबूत बनाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर कौशल उन्नयन एवं उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों तथा देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन एवं विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं, ताकि स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके और उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध हो।

राज्य सरकार की यह पहल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को “लखपति दीदी” की श्रेणी में शामिल करना है।

चिरायु की सतर्कता से थमी नहीं त्रिशांत के दिल की धड़कन, आरबीएसके ने मासूम को दिया नया जीवन

चिरायु की सतर्कता से थमी नहीं त्रिशांत के दिल की धड़कन, आरबीएसके ने मासूम को दिया नया जीवन

 00 धमतरी के 10 वर्षीय त्रिशांत का हुआ सफल और पूर्णत: नि:शुल्क हृदय ऑपरेशन

00 लाडले को स्वस्थ देख परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू
रायपुर।
कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित चिरायु योजना धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का दर्द झेलने से भी बचा लिया।
स्कूल में जांच के दौरान खुली बीमारी की परत
धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला छात्र त्रिशांत रोज की तरह स्कूल जाता था। माता-पिता को अंदाजा भी नहीं था कि उनके लाडले के भीतर जन्मजात हृदय रोग पनप रहा है। तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में असमानता महसूस की। टीम ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।

​'चिरायु' की सतर्कता से थमी नहीं त्रिशांत के दिल की धड़कन; आरबीएसके ने मासूम को दिया नया जीवन

जिला अस्पताल से रायपुर तक त्वरित एक्शन
चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को इतनी तेजी से पूरा किया कि बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
पहचान से लेकर घर वापसी तक
इस पूरी सफलता की कहानी को चिरायु टीम ने इन पांच चरणों में अमलीजामा पहनाया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिरायु टीम की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इसकी शुरुआत समय पर पहचान से होती है, जहाँ टीम के डॉक्टर स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के भीतर छिपे शुरुआती लक्षणों को पूरी सतर्कता से पकड़ते हैं। बीमारी की आशंका होते ही टीम त्वरित परामर्श का मोर्चा संभालती है और परिजनों को बिना डराए, बेहद आत्मीयता के साथ बीमारी की गंभीरता समझाकर उन्हें आगे के इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।
परिजनों की सहमति मिलते ही शुरू होता है नि:शुल्क रैफरल का सिलसिला, जिसके तहत धमतरी से लेकर रायपुर तक के इलाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जाती है और तमाम कागजी औपचारिकताओं का पूरा जिम्मा चिरायु टीम खुद उठाती है, ताकि गरीब परिवार पर कोई बोझ न पड़े। इसी तत्परता का सुखद परिणाम 8 जुलाई 2026 को सफल सर्जरी के रूप में सामने आया, जब रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मासूम का पूर्णत: नि:शुल्क और कामयाब हार्ट ऑपरेशन किया गया। चिरायु का यह मिशन अस्पताल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ऑपरेशन के बाद सतत फॉलो-अप के जरिए डिस्चार्ज के बाद भी बच्चे की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाती है और उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक सेहत की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।
लाखों का इलाज मुफ़्त हुआ, सरकार ने बचा ली हमारे घर की खुशियां
त्रिशांत के माता-पिता भावुक होकर बताते हैं कि हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता। हम मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।
सिर्फ जांच नहीं, स्वस्थ भविष्य की गारंटी है आरबीएसके
धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या जांच तक सीमित नहीं हैं। यह कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों की पहचान करने से लेकर उनके पूर्णत: ठीक होने तक एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है।

तीर से गंभीर रूप से घायल मरीज का अम्बेडकर अस्पताल में सफल ऑपरेशन

तीर से गंभीर रूप से घायल मरीज का अम्बेडकर अस्पताल में सफल ऑपरेशन

 00 सर्जरी विभाग की त्वरित तत्परता, विशेषज्ञ शल्य चिकित्सा एवं समन्वित प्रयासों से बची मरीज की जान

रायपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर के जनरल सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण ट्रॉमा केस का सफलतापूर्वक उपचार करते हुए तीर से गंभीर रूप से घायल मरीज के जीवन बचाने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। समय पर लिए गए चिकित्सकीय निर्णय, विशेषज्ञ शल्य चिकित्सा तथा सर्जरी विभाग की समर्पित टीम के समन्वित प्रयासों से मरीज को नया जीवन मिला।

विभागाध्यक्ष जनरल सर्जरी विभाग डॉ. मंजु सिंह केस के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताती हैं कि गरियाबंद जिले के निवासी एक मरीज को पीठ से होते हुए पेट में तीर लगने के कारण गंभीर अवस्था में उच्च स्तरीय उपचार के लिए अम्बेडकर अस्पताल रेफर किया गया था। प्रारंभिक चिकित्सकीय परीक्षण एवं आवश्यक जांचों में पाया गया कि तीर पेट में गहराई तक धंसा हुआ था, जिससे पेट के भीतर के महत्वपूर्ण अंग गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। इसके कारण एब्डोमेन में परफोरेशन, आंतरिक रक्तस्राव तथा संक्रमण का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। ऐसी स्थिति में उपचार में थोड़ी भी देरी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी।

मरीज के अस्पताल पहुंचते ही जनरल सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने उसकी स्थिति का त्वरित आकलन किया और बिना विलंब किए आपातकालीन शल्य चिकित्सा का निर्णय लिया। विशेषज्ञ निगरानी में 2 जुलाई 2026 को सर्जरी विभाग की टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक संपन्न किया। ऑपरेशन के दौरान अत्यंत सावधानी पूर्वक तीर को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया। इसके पश्चात क्षतिग्रस्त आंतरिक ऊतकों एवं अंगों की मरम्मत की गई, रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया तथा पेट के भीतर जमा रक्त एवं दूषित द्रव को साफ कर आवश्यक जीवनरक्षक प्रक्रियाएं संपन्न की गईं

ऑपरेशन के उपरांत मरीज को सर्जरी पोस्ट-ऑपरेटिव आईसीयू में स्थानांतरित किया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी में उसका उपचार जारी है। वर्तमान में मरीज की स्थिति स्थिर है तथा उसमें लगातार सुधार देखा जा रहा है। यदि सुधार की यही गति बनी रही तो उसे शीघ्र ही पूर्णत: स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। इस जटिल शल्य चिकित्सा की सफलता एक बार फिर यह सिद्ध करती है कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर में गंभीर ट्रॉमा एवं आपातकालीन शल्य चिकित्सा के उपचार हेतु अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम, अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं व ऑपरेशन थिएटर तथा चौबीसों घंटे उपलब्ध आपातकालीन सेवाएं प्रभावी रूप से कार्य कर रही हैं। ऐसे गंभीर मामलों में समय पर निर्णय, बहु-विषयक समन्वय तथा उच्च स्तरीय शल्य चिकित्सा मरीजों के जीवन की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सर्जरी विभाग द्वारा किए गए इस सफल उपचार ने न केवल एक गंभीर रूप से घायल मरीज का जीवन बचाया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि समर्पण, विशेषज्ञता, त्वरित निर्णय क्षमता और टीमवर्क के माध्यम से अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट चिकित्सा परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

मरीज अत्यंत गंभीर अवस्था में हमारे अस्पताल पहुंचा था। सर्जरी विभाग की टीम ने बिना समय गंवाए आपातकालीन ऑपरेशन कर उसकी जान बचाने में सफलता प्राप्त की। अस्पताल में गंभीर ट्रॉमा एवं आपातकालीन केस के उपचार के लिए अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक मरीज को समय पर बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

बदली बिलाईगढ़ के तिहारूराम की तकदीर: 4 लाख रूपए के अनुदान से मिला ट्रैक्टर

बदली बिलाईगढ़ के तिहारूराम की तकदीर: 4 लाख रूपए के अनुदान से मिला ट्रैक्टर

 रायपुर- आधुनिक दौर में खेती-किसानी को उन्नत और मुनाफे का सौदा बनाने में कृषि यंत्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो चुकी है। राज्य शासन की कृषि यंत्रीकरण योजना आज छोटे और मझोले किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसका एक जीवंत उदाहरण विकासखण्ड बिलाईगढ़ के ग्राम गधाभाटा में देखने को मिला है, जहाँ के प्रगतिशील कृषक तिहारूराम चंद्रा पिता जगनथिया का खुद का ट्रैक्टर खरीदने का सपना साकार हुआ है।

ग्राम झुमका में आयोजित भव्य सुशासन शिविर में प्रभारी मंत्री  टंकराम वर्मा के करकमलों से तिहारूराम को उनके नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई। ट्रैक्टर का 9.40 लाख रूपए की कुल लागत पर तिहारूराम को राज्य शासन की ओर से 4 लाख रूपए का भारी शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ है। इस पर तिहारूराम ने कहा कि कम जमीन और सीमित साधनों के कारण पहले समय पर खेती का काम पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी। भारी-भरकम किराए पर ट्रैक्टर लेना पड़ता था। लेकिन सरकार की इस योजना और 4 लाख रुपए की बड़ी छूट ने मेरी राह आसान कर दी। अब मैं न सिर्फ समय पर अपनी खेती कर सकूंगा, बल्कि खेती को अधिक आधुनिक और लाभकारी भी बना पाऊंगा।

​’वन स्टॉप सेंटर’ से मिला किसानों को तत्काल लाभ   ​

सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित इन शिविरों में कृषि विभाग द्वारा ‘वन स्टॉप सेंटर’ के रूप में स्टाल लगाए गए थे। यहाँ आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ-साथ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाया गया।
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शिविर के दौरान विभाग को कुल 575 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें 545 मांग संबंधी और 30 शिकायत संबंधी मामले थे। विभाग ने संवेदनशीलता और मुस्तैदी दिखाते हुए रिकॉर्ड समय में 572 आवेदनों (544 मांग व 28 शिकायत) का सफलतापूर्वक निराकरण कर सुशासन की मिसाल पेश की।

​उन्नत कृषि और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
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ट्रैक्टर वितरण के साथ ही विभाग द्वारा शिविर में उपस्थित किसानों को उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए नीम आधारित कीटनाशक, हरित खाद, प्रमाणित बीज और विभिन्न लघु कृषि यंत्रों का वितरण भी किया गया।
     
​उप संचालक कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों और ग्रामीण कृषि विकास अधिकारियों की टीम ने किसानों को चौपाल लगाकर केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इनमें मुख्य रूप से ​प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,​सॉइल हेल्थ कार्ड योजना और एग्री स्टैक पंजीयन,​प्राकृतिक व जैविक खेती मिशन तथा परंपरागत कृषि विकास योजना,​दलहन-तिलहन प्रोत्साहन कार्यक्रम और हरित खाद का उपयोग शामिल है।
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जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में कृषि विभाग का यह महाअभियान न केवल किसानों की समस्याओं के प्रभावी समाधान का जरिया बना, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। यह पूरी मुहिम सुशासन, जनभागीदारी और किसान कल्याण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।

महतारी वंदन योजना से महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का नया आधार

महतारी वंदन योजना से महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का नया आधार

 रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। योजना के तहत प्रत्येक माह पात्र महिलाओं के बैंक खातों में एक हजार रुपये की सहायता राशि सीधे अंतरित की जा रही है, जिससे वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
11 जुलाई को योजना की 29वीं किस्त जारी होने के बाद प्रदेशभर की महिलाओं में उत्साह का माहौल है। लाभार्थी महिलाओं का कहना है कि हर माह समय पर मिलने वाली सहायता राशि ने उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता का भरोसा दिया है। अब उन्हें छोटे-छोटे व्यक्तिगत एवं घरेलू खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। जशपुर जिले के कुनकुरी की लाभार्थी ज्योति पांडेय बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब योजना से मिलने वाली राशि से वे अपने दैनिक खर्च स्वयं वहन कर रही हैं।
रेहाना खातून ने बताया कि पहले वे मजदूरी कर परिवार का सहयोग करती थीं। महतारी वंदन योजना से प्राप्त सहायता ने उन्हें एक छोटा घरेलू व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास दिया। आज वे स्वयं आय अर्जित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में योगदान दे रही हैं। कविता शर्मा के अनुसार योजना से मिलने वाली नियमित सहायता उनके लिए बड़ा संबल है। इससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से कर लेती हैं और आर्थिक रूप से पहले की अपेक्षा अधिक आत्मविश्वास महसूस करती हैं। अंजू शर्मा का कहना है कि अब उन्हें अपने छोटे-छोटे खर्चों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया है।
लाभार्थी महिलाओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उनके अनुसार यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने, स्वावलंबन को प्रोत्साहित करने और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।

उद्योगों के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई साझेदारी, केवल पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी: चौधरी

उद्योगों के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई साझेदारी, केवल पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी: चौधरी

 00 स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढिय़ों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी

00 31 जुलाई तक वृक्षारोपण लक्ष्य पूरा करने और 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण पर जोर
00 हर उद्योग में 33 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट, प्रति हेक्टेयर 2,500 पौधे तथा देशी प्रजातियों के वृक्ष लगाने के निर्देश
रायपुर।
राज्य में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी की मुख्य आतिथ्य में बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। सही समय पर, उपयुक्त प्रजाति के स्वस्थ पौधों का रोपण तथा उनकी नियमित देखभाल और सिंचाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योगों से पीपल, शिरीष, नीम, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने भी मन की बात कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक वृक्षारोपण तकनीकों का उल्लेख किया है और ऐसे नवाचारों को अपनाने से हरित आवरण तेजी से बढ़ाया जा सकता है। मंत्री चौधरी ने सभी उद्योगों से अपने परिसर तथा आसपास हरित वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी तथा पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि अनिवार्य होगी।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढिय़ों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उद्योगों को उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का भी पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (ष्टस्क्र) के माध्यम से भी व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया। मंत्री चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर को पीपल सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर में पूर्व में लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अतिरिक्त आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि नवा रायपुर की पहचान बन चुकी सेंध लेक का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी तथा झील का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा। झील के मध्य स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक बर्ड आइलैंड (ईको-हब) विकसित किया जा रहा है।

आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष श्री अंकित आनंद ने कहा कि पिछले एक वर्ष में मंडल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधों का रोपण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। इस वर्ष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को ही अंतिम माना जाएगा तथा सभी उद्योगों को समय पर ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जो उद्योगों की सक्रिय सहभागिता से 30 लाख से अधिक तक पहुंच सकता है।
सचिव  आनंद ने बताया कि 320 से अधिक उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के माध्यम से निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रारंभिक चरण में नियमों के उल्लंघन पर नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन मंडल का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि प्रदूषण कम करते हुए पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने उद्योगों से पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) जल के अधिकतम उपयोग तथा देशी एवं पर्यावरण-अनुकूल वृक्ष प्रजातियों के रोपण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निर्देश दिए कि प्रत्येक हेक्टेयर में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाए जाएं तथा त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधरोपण के माध्यम से सघन ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित करने, केवल स्वीकृत पौध प्रजातियों का रोपण करने तथा पौधों की सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित जल का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने सभी उद्योगों को ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) 24 घंटे संचालित रखने तथा प्रत्येक तीन माह में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनका संरक्षण और जीवित रहना है। बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट एवं डायरेक्टर स्तर के प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

सूरत-जयपुर की तर्ज पर रायपुर सराफा व्यापारियों ने मुख्यमंत्री से पंडरी में जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क की मांग की

सूरत-जयपुर की तर्ज पर रायपुर सराफा व्यापारियों ने मुख्यमंत्री से पंडरी में जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क की मांग की

 रायपुर। छत्तीसगढ़ को सराफा व्यापार का राष्ट्रीय हब बनाने की मांग को लेकर सर्राफा व्यवसाईयों का प्रतिनिधि मंडल रायपुर सराफा एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरख मालू के नेतृत्व में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मिला। प्रतिनिधि मंडल ने रायपुर पंडरी स्थित पुराने बस स्टैंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर का जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क बनाने का प्रस्ताव सौंपा।
मुख्यमंत्री को दिए गए पत्र में 9 ठोस आधार बताते हुए कहा गया कि पंडरी पुराना बस स्टैंड की भूमि पहले से शासकीय है। नया अधिग्रहण न होने से समय और करोड़ों रुपये दोनों बचेंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग-30, जीई रोड और रिंग रोड-1 के जंक्शन पर होने से एयरपोर्ट 15 मिनट, रेलवे स्टेशन 10 मिनट और नवा रायपुर 25 मिनट में पहुंचा जा सकता है। पूरे छत्तीसगढ़ से ग्राहक 2 घंटे में यहां पहुंच सकेंगे।
पत्र में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कहा गया कि खुला परिसर, चारों तरफ सड़क और पास में पुलिस कंट्रोल रूम होने से सीसीटीएनएस से सीधा कनेक्शन संभव है। इससे बीमा कंपनियां भी प्रीमियम कम करेंगी। सदर-मालवीय रोड की ट्रैफिक समस्या का समाधान भी होगा। पंडरी में 5 एकड़ से ज्यादा जगह में मल्टीलेवल + बेसमेंट पार्किंग बनने से शादी-ब्याह के सीजन में 10 हजार ग्राहक भी आएं तो ट्रैफिक नहीं रुकेगा।
प्रस्ताव में कहा गया कि जयपुर का ज्वेलरी पार्क और सूरत का डायमंड बोर्स की तरह यह पार्क रायपुर की पहचान बनेगी। इससे निवेशक, टूरिस्ट और बड़े ब्रांड आकर्षित होंगे और न्यू रायपुर की इमेज को बल मिलेगा। संगठित मार्केट बनने से बिलिंग 100 प्रतिशत होगी। हॉलमार्किंग और रिफाइनरी एक जगह होने से टैक्स लीकेज बंद होगा। अनुमान है कि सालाना 200-300 करोड़ का अतिरिक्त जीएसटी संग्रह होगा।
एक छत के नीचे ट्रेनिंग सेंटर, सीएडी-कैम लैब और डिजाइन इंस्टीट्यूट खोलकर स्थानीय सुनारों के बच्चों को आधुनिक ज्वेलरी डिजाइन सिखाई जा सकेगी। इससे मेक इन छत्तीसगढ़ को धार मिलेगी। पार्क में म्यूजियम, एग्जीबिशन हॉल और फैशन शो की जगह से सराफा उत्सव आयोजित होगा तो होटल, ट्रांसपोर्ट, फूड इंडस्ट्री को भी फायदा होगा। पीपीपी मॉडल पर बनाकर सरकार को किराया/लीज से नियमित आय होगी। पत्र में प्रस्तावित कृषि उपज मंडी स्थल को निचली बस्तियों के पास और पूर्व में विवादित होने के कारण दीर्घकालिक सुरक्षा की दृष्टि से अनुपयोगी बताया गया है।
बीएनएस की धारा 317 पर बिहार एसओपी लागू करने की भी मांग 
इस अवसर पर ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन एआईजेजीएफ की ओर से भारतीय न्याय संहिता की धारा 317 पूर्व भारतीय दंड संहिता धारा 411 के संबंध में ज्वेलर्स एवं स्वर्णकार समुदाय की समस्याओं के समाधान हेतु दूसरा महत्वपूर्ण पत्र भी मुख्यमंत्री को सौंपा गया। 
पत्र में बताया गया कि एआईजेजीएफ की विधिक टीम द्वारा तैयार एसओपीख् का परीक्षण एवं अनुमोदन बिहार पुलिस के पुलिस महानिदेशक द्वारा किया गया है और बिहार में लागू होने से ज्वेलर्स एवं पुलिस प्रशासन दोनों को स्पष्टता मिली है। प्रतिनिधि मंडल ने अनुरोध किया कि बिहार में लागू इस एसओपीख् को छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जाए ताकि ईमानदार ज्वेलर्स को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत मिल सके। पत्र पर एआईजेजीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा, राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया और हरख मालू के संयुक्त हस्ताक्षर हैं। मुख्यमंत्री ने दोनों प्रस्तावों को ध्यानपूर्वक सुनकर संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर सकारात्मक निर्णय का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधि मंडल में हरख मालू, उत्तम पुखराज जी गोलछा, देवेंद्र सोनी, प्रमित नियोगी, अनिल बुरड़ रविकांत लूक्कड। रमेश पारख प्रहलाद सोनी अमित अंबानी विनय मालू सहित बड़ी संख्या में सराफा व्यापारी शामिल थे।

उद्योगों के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई साझेदारी: आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी

उद्योगों के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई साझेदारी: आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी

 रायपुर- राज्य में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी की मुख्य आतिथ्य में बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। सही समय पर, उपयुक्त प्रजाति के स्वस्थ पौधों का रोपण तथा उनकी नियमित देखभाल और सिंचाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योगों से पीपल, शिरीष, नीम, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक वृक्षारोपण तकनीकों का उल्लेख किया है और ऐसे नवाचारों को अपनाने से हरित आवरण तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

मंत्री  चौधरी ने सभी उद्योगों से अपने परिसर तथा आसपास हरित वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी तथा पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि अनिवार्य होगी।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उद्योगों को उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का भी पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के माध्यम से भी व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

मंत्री  चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर को “पीपल सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर में पूर्व में लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अतिरिक्त आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने बताया कि नवा रायपुर की पहचान बन चुकी सेंध (Sendh) लेक का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी तथा झील का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा। झील के मध्य स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक “बर्ड आइलैंड” (ईको-हब) विकसित किया जा रहा है।

आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष  अंकित आनंद ने कहा कि पिछले एक वर्ष में मंडल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधों का रोपण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। इस वर्ष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को ही अंतिम माना जाएगा तथा सभी उद्योगों को समय पर ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जो उद्योगों की सक्रिय सहभागिता से 30 लाख से अधिक तक पहुंच सकता है।

सचिव  आनंद ने बताया कि 320 से अधिक उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के माध्यम से निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रारंभिक चरण में नियमों के उल्लंघन पर नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन मंडल का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि प्रदूषण कम करते हुए पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने उद्योगों से पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) जल के अधिकतम उपयोग तथा देशी एवं पर्यावरण-अनुकूल वृक्ष प्रजातियों के रोपण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव  राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निर्देश दिए कि प्रत्येक हेक्टेयर में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाए जाएं तथा त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधरोपण के माध्यम से सघन ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित करने, केवल स्वीकृत पौध प्रजातियों का रोपण करने तथा पौधों की सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित जल का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने सभी उद्योगों को ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) 24 घंटे संचालित रखने तथा प्रत्येक तीन माह में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनका संरक्षण और जीवित रहना है।

बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट एवं डायरेक्टर स्तर के प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन ही विकसित छत्तीसगढ़ का आधार है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन ही विकसित छत्तीसगढ़ का आधार है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर - मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में एक नए परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में शासन की पारंपरिक कार्यप्रणाली को बदलते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें नागरिक सुविधाओं का केंद्र हो, प्रक्रियाएं सरल हों, निर्णय समयबद्ध हों और शासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीक-सक्षम बने। सरकार द्वारा अब तक लागू किए गए 435 प्रशासनिक सुधार केवल कार्यालयीन प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव लाते हुए आम नागरिक, किसान, उद्यमी, निवेशक और युवाओं तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक सहज, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ डिजिटल गवर्नेंस, सेवा वितरण और प्रशासनिक नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन को केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि शासन की मूल कार्यशैली बनाया है। भूमि प्रबंधन से लेकर राजस्व प्रशासन, शिकायत निवारण से लेकर ऑनलाइन नागरिक सेवाओं तक, औद्योगिक निवेश से लेकर पंजीयन व्यवस्था तक और डिजिटल कृषि से लेकर ई-गवर्नेंस तक अनेक क्षेत्रों में व्यापक सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों का समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बचत करना, सरकारी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना तथा तकनीक के माध्यम से शासन और जनता के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करना है। यही सोच आज विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य ऐसा प्रशासन विकसित करना है, जिसमें नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध हों और शासन की प्रत्येक प्रक्रिया पारदर्शी एवं जवाबदेह बने। डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। प्रशासनिक सुधारों की पूरी प्रक्रिया इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है कि शासन नागरिकों के और अधिक निकट पहुंचे तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक और बिना किसी अनावश्यक बाधा के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों का दायरा केवल ई-गवर्नेंस तक सीमित नहीं है। शिकायत निवारण, भूमि प्रबंधन, राजस्व प्रशासन, निवेश, पंजीयन, डिजिटल कृषि, ऑनलाइन सेवाएं, औद्योगिक अनुमतियां तथा सेवा वितरण के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव आम नागरिकों से लेकर किसानों, उद्यमियों, उद्योगों और निवेशकों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। इससे शासन की कार्यक्षमता बढ़ी है, निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है तथा सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सुशासन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जब प्रशासन सरल, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम होगा, तभी विकास की गति भी तेज होगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं, एकीकृत नागरिक सेवा व्यवस्था और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे और नागरिकों का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी ताकत बने।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासनिक सुधारों की यह सतत प्रक्रिया छत्तीसगढ़ को देश में सुशासन और डिजिटल प्रशासन के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगी। पारदर्शिता, तकनीक और संवेदनशील प्रशासन के प्रभावी समन्वय से प्रदेश में विकास को नई गति मिलेगी, निवेश का बेहतर वातावरण बनेगा, नागरिक सेवाएं और अधिक सुलभ होंगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।

डिजिटल गवर्नेंस ने बदली शासन की कार्यशैली

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को शासन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग के गठन के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और समन्वय की नई व्यवस्था विकसित की गई है। 25 दिसंबर 2023 को सुशासन दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार आया है।
इसी दिशा में ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इन प्रणालियों ने फाइलों के निस्तारण को अधिक तेज, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया है। अब प्रशासनिक निर्णयों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो रही है तथा विभागों के बीच समन्वय भी मजबूत हुआ है। तकनीक आधारित इन सुधारों ने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक परिवर्तन लाते हुए पारंपरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाया है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु

सुशासन की सबसे बड़ी पहचान नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत की, जिसने शासन और आम जनता के बीच संवाद का एक नया और भरोसेमंद माध्यम स्थापित किया है। अब प्रदेश का कोई भी नागरिक घर बैठे टोल-फ्री नंबर 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, सुझाव दे सकता है अथवा सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं के संबंध में फीडबैक साझा कर सकता है। यह व्यवस्था केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान को भी सुनिश्चित करती है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से वर्तमान में राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं तथा 1195 श्रेणियों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक शिकायत को एक विशिष्ट आईडी प्रदान की जाती है, जिससे आवेदक उसकी ऑनलाइन स्थिति स्वयं देख सकता है। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता, तो प्रकरण स्वतः उच्च स्तर पर पुनः परीक्षण के लिए पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर विभागीय सचिव स्तर तक इसकी नियमित समीक्षा की जाती है। सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संचालित यह व्यवस्था सरकार की संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित कार्यशैली का प्रभावी उदाहरण बन चुकी है।

सेवा सेतु ने सरकारी सेवाओं को बनाया घर-घर तक सुलभ

राज्य सरकार ने नागरिक सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘सेवा सेतु’ को विकसित किया है, जो आज प्रदेशवासियों के लिए सरकारी सेवाओं का प्रमुख डिजिटल प्रवेश द्वार बन चुका है। अलग-अलग विभागों के कार्यालयों में जाने की आवश्यकता को कम करते हुए यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है। वर्तमान में इस पोर्टल पर 36 विभागों की 520 सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड और 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16,726 सेवा2 केंद्रों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफल निराकरण किया जा चुका है। लगभग 94.3 प्रतिशत सफलता दर इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाती है। क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ई-चालान, ट्रेजरी और डीबीटी भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाओं ने सेवा वितरण को अधिक विश्वसनीय, 
सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है।

औद्योगिक निवेश के लिए बना सरल और पारदर्शी वातावरण

राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू किया है। इस नई व्यवस्था के माध्यम से उद्योग स्थापना के लिए आवश्यक विभिन्न विभागों की अनुमतियां एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब निवेशकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग, समयबद्ध अनुमोदन और डिजिटल पारदर्शिता ने निवेश प्रक्रिया को अधिक सरल, विश्वसनीय और उद्योग-अनुकूल बनाया है।
इसी दिशा में राज्य कर मुख्यालय, रायपुर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कक्ष की स्थापना की गई है, जहां नए उद्यमियों को जीएसटी पंजीयन सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार द्वारा दुकानों को 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित करने की अनुमति देने का निर्णय भी व्यापार, सेवा क्षेत्र और रोजगार को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को और अधिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से एमएसएमई मंत्रालय के गठन की घोषणा भी इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।

पंजीयन व्यवस्था में आया ऐतिहासिक बदलाव

संपत्ति पंजीयन प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक सुधार लागू किए हैं। ऑनलाइन भुगतान, ऑनलाइन दस्तावेज़ खोज, डिजिटल नकल सुविधा तथा ‘सुगम’ एप जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे संपत्ति संबंधी अनेक सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे समय की बचत के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक हुई है।
राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2026 से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त कर आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। लगभग 150 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का त्याग करते हुए सरकार ने जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला अत्याधुनिक स्मार्ट पंजीयन कार्यालय प्रारंभ किया गया है, जहां मकान, दुकान अथवा भूमि की रजिस्ट्री मात्र 12 से 15 मिनट में पूरी हो रही है। अगले एक वर्ष में प्रदेश के सभी 117 पंजीयन कार्यालयों को इसी प्रकार आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का लक्ष्य रखा गया है।

भूमि सुधारों ने बढ़ाया पारदर्शिता और नागरिकों का भरोसा

भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने तकनीक आधारित व्यापक सुधार लागू किए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण, राजस्व न्यायालयों का डिजिटलीकरण, आधुनिक रिकॉर्ड रूम की स्थापना तथा नक्शों का डिजिटल रूपांतरण किया गया है। भूमि विवादों के समाधान के लिए जियो-रेफ्रेंसिंग तकनीक को अपनाया गया है, जिससे सीमांकन और अभिलेखों की शुद्धता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

शहरी क्षेत्रों में नक्शा परियोजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के माध्यम से संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर डिजिटल संपत्ति कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को उनकी संपत्तियों का विधिक अधिकार प्राप्त हुआ है तथा भूमि विवादों में कमी आने लगी है। भूमि सुधारों और एग्रीस्टैक के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को ₹598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्रदान किया जाना इन प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना का प्रमाण है।

विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सुशासन, डिजिटल प्रशासन और नवाचार आधारित विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रशासनिक सुधारों की यह यात्रा केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करने का अभियान है। यही सुशासन की संस्कृति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति दे रही है और प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रही है।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में प्रदेशभर में जल संरक्षण बना जनआंदोलन

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में प्रदेशभर में जल संरक्षण बना जनआंदोलन

 00 वीबी जी राम जी योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिले में तेज़ी से हो रहे रोजगार, जल संरक्षण एवं हरित विकास के कार्य
00 एमसीबी जिले में मंत्री जायसवाल ने मोर गांव-मोर पानी अभियान एवं एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम का किया शुभारंभ
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं उपमुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा के मार्गदर्शन में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी) के अंतर्गत पूरे प्रदेश में रोजगार सृजन, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा हरित विकास के कार्यों को व्यापक गति मिली है। मोर गांव-मोर पानी अभियान के माध्यम से राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे रही है। अभियान के तहत प्रदेशभर में लाखों मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने के साथ-साथ जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर भू-जल संवर्धन की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) के जनपद पंचायत खडग़वां अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदर में जन सम्मेलन, एक पेड़ मां के नाम वृहद वृक्षारोपण एवं मोर गांव-मोर पानी जनभागीदारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री तथा मनेन्द्रगढ़ विधायक श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने वृक्षारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने स्वयं कंटूर ट्रेंच की खुदाई कर जल संरक्षण का संदेश दिया और कहा कि जल संरक्षण केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों से अधिकाधिक जनभागीदारी के साथ जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। ग्राम पंचायत बरदर में 52 एकड़ क्षेत्र में समेकित जल संरक्षण एवं हरित विकास मॉडल विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 30 एकड़ क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच एवं अन्य जल संरक्षण कार्यों के माध्यम से वर्षाजल के संग्रहण और भू-जल संवर्धन की व्यवस्था विकसित की गई है, जबकि 22 एकड़ क्षेत्र में लगभग 2,000 फलदार एवं अन्य पौधों का रोपण प्रारंभ किया गया है। जल संरक्षण और हरित विकास का यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा।
मोर गांव-मोर पानी अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों से इस क्षेत्र में लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता विकसित हुई है। इससे भविष्य में सिंचाई, पेयजल उपलब्धता, कृषि उत्पादकता तथा पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा वीबी जी राम जी के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण तथा आजीविका संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत को जल-सुरक्षित, हरित एवं आत्मनिर्भर बनाना है।

खाद वितरण में खैरागढ़ जिला प्रदेश में प्रथम, 83.82 प्रतिशत उर्वरक का हुआ वितरण

खाद वितरण में खैरागढ़ जिला प्रदेश में प्रथम, 83.82 प्रतिशत उर्वरक का हुआ वितरण

 खाद वितरण में खैरागढ़ जिला प्रदेश में प्रथम, 83.82 प्रतिशत उर्वरक का हुआ वितरण

रायपुर - खरीफ वर्ष 2026 में किसानों को समय पर रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए किए गए सुनियोजित प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला उर्वरक वितरण के मामले में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। 09 जुलाई 2026 की स्थिति में जिले में कुल 21,452 टन रासायनिक खाद का भंडारण किया गया, जिसमें से 17,980 टन खाद किसानों को वितरित की जा चुकी है। इस प्रकार जिले में 83.82 प्रतिशत उर्वरक वितरण दर्ज किया गया है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है।

कलेक्टर  इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल द्वारा खरीफ सीजन को देखते हुए उर्वरक भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जा रही है। उनके निर्देशन में कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक तथा सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से खाद की उपलब्धता, परिवहन और वितरण की नियमित मॉनिटरिंग की गई। यही कारण है कि जिले में किसानों को आवश्यकता के अनुरूप समय पर खाद उपलब्ध हो रही है तथा वितरण व्यवस्था बिना किसी बाधा के संचालित हो रही है।

कृषि विभाग के अनुसार जिले की सभी सेवा सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान में जिले के किसी भी क्षेत्र से खाद की कमी की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। किसानों को डीएपी, यूरिया एवं अन्य आवश्यक उर्वरक सुगमता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा मांग के अनुरूप निरंतर आपूर्ति भी की जा रही है।

नोडल अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक एवं सहकारिता विभाग ने बताया कि खरीफ सीजन की शुरुआत से ही समितियों में उर्वरकों का अग्रिम भंडारण कराया गया था। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में प्रतिदिन वितरण की समीक्षा की जा रही है। समितियों को आवश्यकतानुसार अतिरिक्त खाद भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग के अनुरूप खाद उपलब्ध कराने के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क एवं सक्रिय है।

जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत सेवा सहकारी समितियों एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक क्रय करें तथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल कृषि विभाग अथवा संबंधित समिति को अवगत कराएं। प्रशासन द्वारा खरीफ सीजन में किसानों को आवश्यक कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि खेती-किसानी के कार्य प्रभावित न हों।

जिले के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों ने समय पर खाद उपलब्ध होने पर संतोष व्यक्त किया है। विकासखंड खैरागढ़ के सेवा सहकारी समिति मदुराकोही के किसान  कोमल राम ने बताया कि इस वर्ष समिति में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है और उन्हें बिना किसी परेशानी के आवश्यक उर्वरक मिल गया। उन्होंने कहा कि समय पर खाद मिलने से बुआई एवं फसल प्रबंधन के कार्य सुचारू रूप से हो रहे हैं।

वहीं विकासखंड छुईखदान के किसान शिवकुमार ने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार व्यवस्था अधिक बेहतर है। उन्हें खाद के लिए भटकना नहीं पड़ा और आवश्यकता अनुसार उर्वरक आसानी से उपलब्ध हो गया। उन्होंने जिला प्रशासन एवं सहकारी समितियों की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि समय पर खाद मिलने से किसानों को काफी राहत मिली है।

रायपुर में जाम से मिलेगी राहत, QRT को ट्रैफिक पुलिस की 10 नई हाई-स्पीड बाइक्स

रायपुर में जाम से मिलेगी राहत, QRT को ट्रैफिक पुलिस की 10 नई हाई-स्पीड बाइक्स

 रायपुर. राजधानी रायपुर में ट्रैफिक समस्या पर प्रभावी रूप से एक्शन लेने के लिए पुलिस की क्विक रिस्पॉन्स टीम को 10 नई तेज रफ्तार बाइक प्रदान की गई है. अब ट्रैफिक पुलिस भीड़ भरी सड़क पर जल्द पहुंचकर लगे जाम को क्लियर कराएगी.

नई दोपहिया वाहन मिलने के बाद क्यूआरटी को सदरबाजार, रामसागरपारा, तात्यापारा जैसे हेवी ट्रैफिक वाले क्षेत्र में पहुंचने में दिक्कत नहीं आएगी. यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) के जवानों को इमरजेंसी लाइट और सायरन से लैस आधुनिक बाइक उपलब्ध कराई गई हैं. इससे जाम की स्थिति में भीड़भाड़ वाले इलाकों तक टीम तेजी से पहुंच सकेगी.

पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने पुलिस कार्यालय परिसर में क्यूआरटी टीमों को शहर के संवेदनशील और जाम प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी देते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. इससे पहले उन्होंने यातायात अधिकारियों की बैठक लेकर व्यवस्था की समीक्षा भी की. पुलिस के अनुसार, शहर में सुगम और निर्बाध यातायात सुनिश्चित करने के लिए सभी 10 क्यूआरटी टीमों को नए आधुनिक वाहनों से सुसज्जित किया गया है. साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि जाम की सूचना मिलते ही टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर यातायात सामान्य कराए, ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े.

ट्रैफिक जाम के लिए हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि शहर में कहीं भी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनने पर वे तुरंत यातायात हेल्पलाइन नंबर 94792 10632 पर सूचना दें. सूचना मिलते ही संबंधित ट्रैफिक थाने की क्यूआरटी टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर यातायात को सुचारु बनाने की कार्रवाई करेगी. इस दौरान एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले सहित यातायात पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.