- अहिवारा के शासकीय महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर करने की घोषणा
दुर्ग, 05 नवम्बर 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय पहुंचकर छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले मृदुभाषी, मिलनसार एवं अनुभवी व्यक्तित्व के धनी अहिवारा के विधायक स्वर्गीय डोमन लाल कोर्सेवाड़ा को पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश एवं क्षेत्र के विकास तथा अनुसूचित जाति के उत्थान के लिए उनके द्वारा किए गए उल्लेखनीय योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वर्गीय कोर्सेवाड़ा का निधन छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके द्वारा समाज और प्रदेश के विकास के लिए किए गए कार्य सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय कोर्सेवाड़ा को उनके वास्तविक नाम से अधिक लोग गुरुजी के नाम से ज्यादा जानते थे। उनका सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाता था। मुख्यमंत्री ने उनके साथ जुड़े आत्मीय प्रसंग को साझा करते हुए बताया कि जब स्वर्गीय कोर्सेवाड़ा हैदराबाद में उपचार के लिए भर्ती थे, तब उन्होंने स्वयं फोन कर उनका हाल-चाल जाना था तथा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल को भी उनका हाल जानने के लिए हैदराबाद जाने के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि अनुसूचित जाति के विकास, उत्थान और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए स्वर्गीयकोर्सेवाड़ा द्वारा किए गए कार्य ऐतिहासिक हैं। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने अहिवारा स्थित शासकीय महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के नाम पर किए जाने की घोषणा की।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास गुरु खुशवंत साहब, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल एवं जगदलपुर के विधायक किरण देव ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। उन्होंने स्वर्गीय कोर्सेवाडा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाले। साथ ही अपनी भावभीनी श्रद्धांजली अर्पित की।
श्रद्धांजली सभा में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण व अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चन्द्राकर, जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष कीर्ति नायक, कलेक्टर अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ प्रदेश के दूर-दराज से पहुंचे जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में जनसमुदाय उपस्थित थे।
00 भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश, लोकतंत्र की जननी है हमारा देश : साय
रायपुर। भाजपा रायपुर जिला द्वारा आज राजधानी रायपुर के सुभाष स्टेडियम में आयोजित लोकतंत्र बचाओ - अराजकता हटाओ पदयात्रा एवं विशाल रैली 10,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। रैली विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम के विरोध में निकाली गई, जिसमें रायपुर शहर की जनता आक्रोशित नजर आई और विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया भी व्यक्त की। विपक्ष द्वारा लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम पूरी तरह झूठा और जनता को गुमराह करने वाला है। जनता अब विपक्ष के इस भ्रमजाल में आने वाली नहीं है, क्योंकि देश की जनता जानती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश का लोकतंत्र पूरी तरह सुरक्षित है और संविधान की रक्षा के लिए भाजपा पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस और आईएनडीआई गठबंधन के लोग सरकार में बैठने और प्रधानमंत्री बनने की लालसा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का विरोध करते-करते अब पूरे देश का विरोध करने पर उतारू हो गए हैं और देश में अराजकता फैलाकर जनता द्वारा चुनी हुई सरकार को गिराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लोकतंत्र की जननी है, दुनिया के सभी देश हमारे लोकतंत्र की सराहना करते हैं। उन्होंने कहा कि जब ये चुनाव हार जाते हैं तो कभी ईवीएम में दोष लगाते हैं, कभी चुनाव आयोग में दोष लगाते हैं। जब जीत जाते हैं तो वही चुनाव आयोग उन्हें अच्छा लगने लगता है। कांग्रेस का यही दोहरा चरित्र उसकी हताशा को दर्शाता है।
साय ने कहा कि कांग्रेस और आईएनडीआई गठबंधन के लोग भाजपा-एनडीए के ऊपर वोट चोरी और लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाते हैं, जबकि खुद कांग्रेस का इतिहास ही लोकतंत्र की हत्या का इतिहास है। उन्होंने कहा कि मैं आपको बताना चाहता हूँ, जब देश आजाद हुआ और प्रधानमंत्री चुनने की बात आई, उस समय कांग्रेस के 12 नेता सरदार वल्लभभाई पटेल जी के पक्ष में थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के पक्ष में एक भी नेता नहीं था। इसके बावजूद पंडित जवाहरलाल नेहरू जी को प्रधानमंत्री बना दिया गया। तो असली वोट चोर कौन हुआ? वोट चोर कांग्रेस है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा जी के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में और हर जिला-जिला में लोकतंत्र बचाओ - अराजकता हटाओ पदयात्रा का आयोजन हो रहा है, ताकि जनता के सामने कांग्रेस की अराजक मानसिकता का सच लाया जा सके।
148 करोड़ जनता लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए सजग खड़ी है - देव
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने कहा कि आज रायपुर की इस पावन भूमि पर लोकतंत्र बचाओ - अराजकता हटाओ पदयात्रा का आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा का महाअभियान है। उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक दल अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है। आजादी के बाद जिस दल का पूरे देश में शासन हुआ करता था, आज वह गिने-चुने तीन-चार राज्यों में ही सिमट कर रह गया है। जनविरोधी नीतियां और देशविरोधी सोच आज उस दल का आवश्यक अंग बन चुकी हैं। लेकिन भारत में लोकतंत्र की जड़ें अत्यंत मजबूत हैं, यहां 148 करोड़ जनता लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए सजग खड़ी है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस चुनाव हार जाती है तो कभी ईवीएम में दोष लगाती है, कभी चुनाव आयोग में दोष लगाती है, लेकिन जब जीत जाती है तो वही चुनाव आयोग उसे अच्छा लगने लगता है, यही कांग्रेस का दोहरा चरित्र है और यही उसकी हताशा को दर्शाता है, जबकि देश की जनता ने जनविरोधी और देशविरोधी राजनीति को हमेशा नकारा है और आगे भी नकारेगी।
कुछ तत्व विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को अस्थिर करने का षड्यंत्र रच रहे हैं - बृजमोहन
भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कुछ तत्व प्रजातंत्र को संकट में डालकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को अस्थिर करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों से कुछ समूहों और नेताओं के द्वारा भारत को नेपाल बना देने, बांग्लादेश बना देने की धमकियां दी जा रही हैं। देश की जनता इस अराजक मानसिकता को कभी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें अत्यंत मजबूत हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को देश की जनता पलकों पर बिठाकर रखती है, उन्हें अपना प्यार और समर्थन देती है। देश को अराजकता की ओर धकेलने वालों के मंसूबे कभी पूरे नहीं होंगे।
भाजपा रायपुर जिले द्वारा आज राजधानी रायपुर के सुभाष स्टेडियम में आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ - अराजकता हटाओ रैली एवं पदयात्रा ऐतिहासिक रूप से सफल रही। यह रैली रायपुर शहर जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर एवं रायपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष श्याम नारंग के नेतृत्व में निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में कार्यकर्ता, पदाधिकारी एवं आमजन शामिल हुए और रैली को सफल बनाया। रैली में कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा, गुरु खुशवंत साहेब, प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, विधायक राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी, अनुज शर्मा, इंद्र कुमार साहू, महापौर मीनल चौबे, रायपुर शहर जिला प्रभारी राजेंद्र शर्मा, रायपुर ग्रामीण जिला प्रभारी सुरेंद्र पाटनी, मंडल अध्यक्ष, मोर्चा-प्रकोष्ठ के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता व 10 हजार से अधिक संख्या में आमजन मौजूद रहे।
रायपुर--मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 के अंतर्गत गठित कार्यकारी समिति की प्रथम बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों द्वारा क्रियान्वित किए जा रहें सुधार प्रस्तावों, जोखिम-आधारित वर्गीकरण तथा ईओडीबी नियमों के चरणबद्ध क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति की विस्तृत एवं गहन समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान प्रस्तुत कार्ययोजना के अनुसार उद्योगों एवं व्यवसायों को उनके संचालन के लिए भवनों के स्वरूप, ऊंचाई और निर्मित क्षेत्र के आधार पर कम जोखिम, स्व-प्रमाणीकरण और स्व-घोषणा के आधार पर तुरंत स्वीकृति व निरीक्षण से राहत, मध्यम जोखिम, थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन एवं अधिकृत विशेषज्ञों के प्रमाणीकरण के माध्यम से समयबद्ध मंजूरी के लिए नियमों के बारे में विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में उच्च जोखिम, निर्धारित सुरक्षा मानकों, अग्निशमन नियमों और जन-सुरक्षा के आधार पर विभागीय भौतिक निरीक्षण के पश्चात त्वरित स्वीकृति, विभागीय समीक्षा और सिंगल विंडो सिस्टम एकीकरण, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए गठित जिला सशक्त समिति, कार्यकारी परिषद और कार्यकारी समिति की प्रक्रियाओं को समयबद्ध सीमा के भीतर अधिसूचित कर दिया गया है।
बैठक में नगरीय प्रशासन, आबकारी, आवास एवं पर्यावरण, उद्योग, गृह-अग्निशमन, संस्कृति, जल संसाधन तथा लोक निर्माण विभाग के व्यावसायिक सेवाओं के जोखिम वर्गीकरण, लोक सेवा गारंटी समय-सीमा और सिंगल विंडो पोर्टल एकीकरण की स्थिति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि सभी संबंधित विभाग ईओडीबी नियमों के प्रारूप पर अपने अंतिम सुझाव त्वरित रूप से प्रेषित करें, जिससे निवेशकों को अनावश्यक प्रक्रियाओं से मुक्ति मिले और प्रदेश में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों को पारदर्शी, डिजिटल और सुगम वातावरण प्राप्त हो सके।
बैठक में गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव मनीष कुमार ठाकुर, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. सारांश मित्तर सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
00 खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के दिए निर्देश, बस्तर में विकास कार्यों पर विशेष जोर
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास और वहां के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के साथ पर्यावरणविदों का भी सहयोग लिया जाए।
राज्यपाल डेका आज लोक भवन में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की गतिविधियों, खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने डीएमएफ की राशि के प्रभावी और सुनियोजित उपयोग के लिए कम से कम दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीएमएफ से आवश्यक कार्य किए जाएं। साथ ही उद्योगों से चर्चा कर पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को अभियान के रूप में संचालित करने पर उन्होंने जोर दिया।
वैज्ञानिक तरीके से हो रेत का उत्खनन
राज्यपाल ने नदियों से रेत उत्खनन के संबंध में वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि रेत रहेगी तो पानी रहेगा और पानी रहेगा तो रेत रहेगी। रेत खदानों में वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन को लेकर विशेष अभियान चलाने की बात भी कही।
जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करें डीएमएफ की कार्ययोजना
राज्यपाल ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे आम जनता से संवाद करें और उनकी आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं को समझें। इसके अनुरूप डीएमएफ की कार्ययोजना तैयार की जाए। विकास कार्यों के क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों को भी विश्वास में लेना आवश्यक है। प्रशासन को जनता के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कौन से कार्य किए जा सकते हैं तथा किन कार्यों को करना संभव नहीं है। उन्होंने डीएमएफ की नियमित बैठकें आयोजित करने को कहा, ताकि कार्यों की प्रगति की समीक्षा और आवश्यक निर्णय समय पर लिए जा सकें।
खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं
राज्यपाल ने कहा कि डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक कल्याण और विकास से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विशेष उद्देश्यों के लिए डीएमएफ के अंतर्गत कार्य निर्धारित किए जाते हैं, उन कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाना चाहिए। राज्यपाल ने बस्तर क्षेत्र में डीएमएफ के माध्यम से विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यधारा में लौट आए हैं, उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। उनके पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जीवन स्तर में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि वे विकास की प्रक्रिया से जुड़ सकें।
विशेष पिछड़ी जनजातियों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर दें ध्यान
राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन जनजातीय समुदायों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने तथा स्वास्थ्य एवं जीवनशैली में सुधार के लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन समुदायों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जाएं और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। राज्यपाल ने कहा कि मनरेगा की तर्ज पर डीएमएफ के कार्यों में भी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही निर्मित परिसंपत्तियों के भौतिक सत्यापन पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि यह पता चल सके कि स्वीकृत कार्यों का वास्तविक क्रियान्वयन हुआ है और उनसे क्षेत्र के लोगों को लाभ मिल रहा है।
विस्थापित परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश
राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापित हुए लोगों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से विस्थापित परिवारों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि प्रभावित और विस्थापित परिवारों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए उनके लिए संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में खनिज विभाग के सचिव श्री पी दयानंद ने राज्यपाल को डीएमएफ की गतिविधियों और कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीएमएफ पोर्टल 2.0 के माध्यम से प्रत्येक परियोजना और कार्य की जानकारी उपलब्ध है। पोर्टल के जरिए कार्यों की स्थिति और प्रगति की निगरानी भी की जा रही है। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, खनिज विभाग के अधिकारी तथा खनन प्रभावित विभिन्न जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव किया गया है। राज्य वित्त सेवा संवर्ग के कई अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। जारी आदेश के तहत अलग-अलग पदों पर कार्यरत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
राज्यपाल डेका ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन
रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकभवन में असम राज्य सहित देश-विदेश में सांस्कृतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी, भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर प्रसन्ना, विधिक सलाहकार सत्यभामा अजय दुबे एवं लोकभवन के अधिकारियों. कर्मचारियों ने हजारिका के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
00 पुष्प अर्पित कर किया नमन, शोकाकुल परिजनों से मिलकर बंधाया ढांढस
रायपुर। दिवंगत विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बुधवार को बालोद जिले में उनके गृह ग्राम भेंड्रा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा शामिल हुए। इस अवसर पर उनके साथ शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद विजय बघेल, विधायक ललित चंद्राकर, सतनामी समाज की गुरू दीदी प्रियंका, पूर्व विधायक सांवलाराम डाहरे सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने दिवंगत स्व. डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा उनके प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन समाज और जनजीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान, जनसेवा के प्रति समर्पण और लोगों से उनके आत्मीय जुड़ाव को सदैव याद किया जाएगा। उनका स्नेह, सरल व्यवहार और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता लोगों के हृदय में हमेशा बनी रहेगी।
इस दौरान सभी ने शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में उन्हें संबल प्रदान किया तथा दिवंगत आत्मा की शांति एवं परिजनों को इस दु:ख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, नगर पालिका दल्लीराजहरा के अध्यक्ष तोरन लाल साहू, नगर पंचायत गुण्डरदेही के अध्यक्ष श्री प्रमोद जैन, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
Raipur Jungle Safari Closed: दीपावली के त्योहार के दौरान रायपुर के जंगल सफारी और जू घूमने का प्लान बना रहे पर्यटकों के लिए जरूरी खबर है। त्योहार को देखते हुए जंगल सफारी एवं जू को दो दिनों के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है। जारी आदेश के मुताबिक, 10 और 11 नवंबर को पर्यटकों को यहां प्रवेश नहीं मिलेगा। यानी इन दोनों दिनों में जंगल सफारी घूमने और वन्य प्राणियों को करीब से देखने की योजना बना रहे लोगों को अपना कार्यक्रम बदलना होगा।
10 और 11 नवंबर को नहीं मिलेगी एंट्री
कार्यालय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, रायपुर की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, 10 नवंबर और 11 नवंबर को जंगल सफारी एवं जू पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद रहेंगे। इन दोनों दिनों में पर्यटकों को सफारी परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे में दीपावली की छुट्टियों के दौरान परिवार और दोस्तों के साथ जंगल सफारी घूमने का प्लान बना रहे लोगों को तारीखों का विशेष ध्यान रखना होगा। पर्यटकों को सलाह है कि सफारी पहुंचने से पहले संचालन की तारीख और प्रवेश संबंधी जानकारी जरूर जांच लें, ताकि वहां पहुंचने के बाद निराश होकर वापस न लौटना पड़े।
वन्य प्राणियों को शोर और आतिशबाजी से बचाने की तैयारी
दीपावली के दौरान शहरों में पटाखे और आतिशबाजी का दौर चलता है। इसका असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि वन्य प्राणियों पर भी पड़ सकता है। तेज आवाज और अचानक होने वाले शोर से जानवरों में तनाव और घबराहट की स्थिति पैदा हो सकती है। जंगल सफारी में अलग-अलग प्रजातियों के वन्य प्राणी रहते हैं, जिनकी सुरक्षा और सामान्य दिनचर्या बनाए रखना वन विभाग की प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए त्योहार के दौरान पर्यटकों की आवाजाही रोकने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा सफारी परिसर में सरकारी संपत्ति को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए भी यह कदम उठाया गया है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के कमजोर पड़ने के बाद भी मौसम का असर बना हुआ है। तूफान के बाद बने डिप्रेशन के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल गया है। मौसम विभाग ने 5 नवंबर को राज्य के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। वहीं, गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है।
मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, पूर्वी तेलंगाना और उससे लगे तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर बना यह अवदाब असल में चक्रवाती तूफान मुरासु का ही कमजोर हुआ रूप है। इसी मौसमी सिस्टम के प्रभाव से दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिलों में बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि आज के लिए किसी भी जिले में भारी बारिश का कोई रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी नहीं किया गया है, लेकिन एहतियात के तौर पर दक्षिणी हिस्सों में थोड़ा संभलकर रहने की जरूरत है, क्योंकि इन इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या छिटपुट बारिश हो सकती है।
जैसे-जैसे बारिश की गतिविधियां कम होंगी, वैसे-वैसे प्रदेश के तापमान में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 48 घंटों के दौरान छत्तीसगढ़ में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है। तापमान के नीचे जाने से अब रात और सुबह के वक्त हल्की ठंड का अहसास और ज्यादा बढ़ जाएगा, जो ठंड की आहट साफ तौर पर बयां कर रहा है।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों का तापमान
छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में आज का न्यूनतम और अधिकतम तापमान इस प्रकार प्रकार रहने की संभावना है:
• रायपुर: न्यूनतम तापमान 19°C और अधिकतम तापमान 30°C
• बिलासपुर: न्यूनतम तापमान 18°C और अधिकतम तापमान 30°C
पेंड्रा रोड: न्यूनतम तापमान 15°C और अधिकतम तापमान 28°C
• दुर्ग: न्यूनतम तापमान 18°C और अधिकतम तापमान 30°C
• राजनांदगांव: न्यूनतम तापमान 19°C और अधिकतम तापमान 30°C
• अम्बिकापुर: न्यूनतम तापमान 16°C और अधिकतम तापमान 27°C
• सूरजपुर: न्यूनतम तापमान 15°C और अधिकतम तापमान 28°C
6 नवंबर से साफ होने लगेगा मौसम
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, कल यानी 6 नवंबर को प्रदेश में इक्का-दुक्का जगहों पर ही बहुत हल्की बारिश हो सकती है और इस दिन के लिए कोई चेतावनी भी नहीं है। इसके बाद 7, 8, 9 और 10 नवंबर को पूरे छत्तीसगढ़ में मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की संभावना है। यानी आने वाले कुछ ही दिनों में बारिश का यह दौर थम जाएगा और आसमान साफ होने के साथ ही ठंडक धीरे-धीरे और जोर पकड़ेगी।
धनतेरस का त्योहार दिवाली से पहले मनाया जाता है. इस साल धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है. इस दिन सोना, चांदी और बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है.
आमतौर पर लोग धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना पसंद करते हैं. हालांकि, वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ ऐसी छोटी-छोटी चीजें भी हैं, जिन्हें इस दिन घर लाना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इन चीजों की खरीदारी से घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है. खास बात यह है कि धनतेरस पर शुभ खरीदारी के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना जरूरी नहीं है. आप अपने बजट के अनुसार भी इन चीजों को खरीद सकते हैं.
धनतेरस पर खरीदें ये 9 शुभ चीजें
1. सोने के सिक्के या आभूषण
धनतेरस पर सोना खरीदना सबसे लोकप्रिय परंपराओं में से एक है. मान्यता है कि सोना धन, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक है. इस दिन लोग सोने के सिक्के, अंगूठी, चेन या अन्य आभूषण खरीदते हैं. अगर आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार ही खरीदारी करें. सोना खरीदते समय हॉलमार्क और शुद्धता की जांच जरूर करें.
2. चांदी के सिक्के और बर्तन
धनतेरस पर चांदी खरीदना भी शुभ माना जाता है. इस दिन कई लोग मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आकृति वाले चांदी के सिक्के खरीदते हैं. इसके अलावा चांदी के गिलास, कटोरी और अन्य छोटे बर्तन भी खरीदे जा सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी को शुद्धता और शुभता का प्रतीक माना जाता है.
3. पीतल, तांबे या स्टील के बर्तन
धनतेरस पर नए बर्तन खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इसी वजह से इस दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. आप पीतल, तांबे या स्टील की थाली, कटोरी, गिलास और रसोई के दूसरे उपयोगी बर्तन खरीद सकते हैं. कुछ घरों में नए बर्तन में चावल, अनाज या मिठाई रखकर घर लाने की भी परंपरा है.
4. मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति
धनतेरस पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति या तस्वीर खरीदना भी शुभ माना जाता है. दिवाली की पूजा के लिए लोग इस दिन नई प्रतिमाएं घर लाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी धन और वैभव की देवी हैं, जबकि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का देवता माना जाता है. मूर्ति खरीदते समय उसके आकार और पूजा घर में रखने की जगह का ध्यान रखें.
5. मिट्टी के दीपक और सजावटी लैंप
धनतेरस और दिवाली पर दीपक जलाने का विशेष महत्व है. इस दिन आप मिट्टी के दीये, पीतल के दीपक और सजावटी लैंप खरीद सकते हैं. वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर के मुख्य द्वार और आसपास रोशनी रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. दीपक खरीदते समय ध्यान रखें कि उन्हें सुरक्षित जगह पर रखा जा सके.
6. नया झाड़ू
धनतेरस पर झाड़ू खरीदना भी कई जगहों पर शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, झाड़ू को मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है. इसे घर की गंदगी और नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक माना जाता है. इस दिन नया झाड़ू खरीदने के साथ घर के कोनों और स्टोर रूम की अच्छी तरह सफाई करें.
7. साबुत धनिया
धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदने की भी परंपरा है. कुछ परिवार इसे पूजा में शामिल करते हैं और बाद में इसे मिट्टी में बो देते हैं. मान्यता है कि धनिया के बीज विकास, खुशहाली और समृद्धि के प्रतीक होते हैं. आप थोड़ी मात्रा में साबुत धनिया खरीदकर पूजा में रख सकते हैं.
8. घर के लिए जरूरी सामान
धनतेरस पर केवल सोना-चांदी या पूजा से जुड़ी चीजें खरीदना जरूरी नहीं है. आप घर की जरूरत के हिसाब से नई चादर, किचन के डिब्बे, पानी का फिल्टर, फर्नीचर या घर की सजावट से जुड़ी चीजें भी खरीद सकते हैं. वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना सकारात्मक माहौल बनाने में मदद करता है.
9. व्यापार और कामकाज से जुड़ी चीजें
अगर आप अपना कारोबार करते हैं या घर से काम करते हैं, तो धनतेरस पर काम से जुड़ी नई चीजें खरीद सकते हैं. इस दिन नया लैपटॉप, ऑफिस का सामान, मशीनरी, औजार या हिसाब-किताब से जुड़ी जरूरी चीजें खरीदना शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इससे कामकाज में तरक्की और नए अवसरों का स्वागत होता है.
धनतेरस से पहले घर में करें ये 5 वास्तु उपाय
1. उत्तर-पूर्व दिशा की सफाई करें
वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है. इसे पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. धनतेरस से पहले इस दिशा की अच्छी तरह सफाई करें. यहां बेकार सामान, कबाड़ और टूटी-फूटी चीजें जमा न होने दें.
2. मुख्य द्वार को सजाएं
घर का मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का स्थान माना जाता है. धनतेरस से पहले दरवाजे की सफाई करें. यहां फूलों का तोरण लगाएं और सुंदर रंगोली बनाएं. जूते-चप्पलों को भी व्यवस्थित रखें.
3. पूजा घर को व्यवस्थित करें
धनतेरस पर पूजा घर की सफाई जरूर करें. देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को साफ करें और पूजा की जरूरी सामग्री व्यवस्थित रखें. अगर आप नई मूर्ति या चांदी का सिक्का खरीदकर ला रहे हैं, तो उसे साफ जगह पर रखें.
4. शाम के समय जलाएं दीपक
धनतेरस की शाम घर में दीपक जलाने की परंपरा है. कई परिवार इस दिन यम दीपदान भी करते हैं. दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें, पर्दों या ज्वलनशील चीजों के पास न जलाएं.
5. घर में जमा कबाड़ हटाएं
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर में अनावश्यक सामान जमा नहीं करना चाहिए. धनतेरस से पहले अलमारी, बालकनी, रसोई और स्टोर रूम की सफाई करें. पुराने और बेकार सामान को हटाकर घर को व्यवस्थित बनाएं.
धनतेरस पर किनचीजों को खरीदने से बचते हैं?
कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर कुछ चीजों की खरीदारी से परहेज किया जाता है. हालांकि, ये मान्यताएं अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग हो सकती हैं.
– नुकीली चीजें: कुछ लोग चाकू, कैंची और अन्य धारदार सामान खरीदने से बचते हैं.
– लोहे का सामान: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन लोहे की वस्तुएं खरीदना कुछ लोग अशुभ मानते हैं.
– काले रंग की चीजें: कुछ परिवार धनतेरस पर काले रंग की वस्तुएं खरीदने से परहेज करते हैं.
– बिना जरूरत की महंगी चीजें: त्योहार के नाम पर अपनी आर्थिक क्षमता से ज्यादा खर्च करने से बचना चाहिए.
धनतेरस पर खरीदारी का महत्व केवल महंगी चीजें घर लाने में नहीं है. आप अपनी जरूरत और बजट के अनुसार छोटी-सी शुभ वस्तु खरीदकर भी इस परंपरा को निभा सकते हैं. घर की साफ-सफाई, पूजा और परिवार के साथ खुशियां बांटना भी इस त्योहार का अहम हिस्सा है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट से अब एक क्लिक पर मिलेगी भौगोलिक जानकारी
190 से अधिक जीआईएस डेटा लेयर्स का एकीकरण, 35 से अधिक जीआईएस आधारित टूल्स एवं समाधान विकसित
जीआईएस तकनीक से औद्योगिक भूमि चयन, बैंकिंग सेवाओं के विस्तार और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में मिलेगी मदद
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन को तकनीक आधारित, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य में विकास योजनाओं के बेहतर निर्माण, संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन तथा सटीक निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा नवा रायपुर स्थित एक निजी होटल में ‘शासन में भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राज्यभर के विभिन्न विभागों के 200 से अधिक अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया।कार्यशाला में राज्य स्तरीय जियो-पोर्टल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के माध्यम से विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
*जीआईएस आधारित डेटा से योजनाओं के निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को मिलेगी मजबूती*
कार्यशाला का शुभारंभ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद ने किया। उन्होंने बताया कि चिप्स द्वारा राज्य के लिए 190 से अधिक जीआईएस डेटा लेयर्स का एकीकरण किया जा चुका है। इन आंकड़ों के आधार पर विभिन्न विभागों की आवश्यकताओं के अनुरूप 35 से अधिक जीआईएस आधारित टूल्स एवं उपयोग आधारित समाधान विकसित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इन तकनीकी समाधानों के माध्यम से विभागों को उपलब्ध भौगोलिक आंकड़ों का विश्लेषण करने, संसाधनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाओं का निर्माण एवं प्रभावी क्रियान्वयन करने में सहायता मिल रही है।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य चिप्स द्वारा विकसित राज्य स्तरीय जियो-पोर्टल एवं डिसीजन सपोर्ट सिस्टम से जिलों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को परिचित कराना था। इसके माध्यम से जिला स्तर पर उपलब्ध भौगोलिक आंकड़ों का उपयोग कर विकास संबंधी आवश्यकताओं की पहचान और योजनाओं की प्राथमिकता निर्धारित करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जियो-पोर्टल के उपयोग के लिए चिप्स द्वारा सभी जिलों को यूजर नेम और पासवर्ड भी जारी किए जा चुके हैं।
कार्यशाला में नई दिल्ली से आए ईसरी इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत जोशी, हेड ई.आई.सी. पीयूष मिश्रा, ऑक्टेव इंडिया के विवेक चौहान, चंचल मुखर्जी, चिप्स सीईओ मयंक अग्रवाल, चिप्स के संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अनुपम आशीष टोप्पो, परियोजना प्रमुख संदीप टिकरिहा तथा हरीश सिन्हा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
*एआई चैट बॉट से आसान होगी भौगोलिक जानकारी तक पहुंच*
कार्यशाला का विशेष आकर्षण जियो-पोर्टल पर विकसित नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट फीचर रहा। इस नई सुविधा से उपयोगकर्ताओं के लिए भौगोलिक जानकारी प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक होगा। अब उपयोगकर्ता जियो-पोर्टल पर किसी भी क्षेत्र, स्थान, परिसंपत्ति अथवा स्थल का नाम चैट बॉट में लिखकर सीधे संबंधित स्थान तक पहुंच सकेंगे। इसके लिए उन्हें ड्रॉप-डाउन मेन्यू या लंबी सूची में स्थान खोजने की आवश्यकता नहीं होगी।
चैट बॉट में स्थान का नाम दर्ज करते ही जियो- पोर्टल का मानचित्र संबंधित स्थान पर नेविगेट करेगा। साथ ही उस स्थान से जुड़ी विस्तृत भौगोलिक जानकारी और आवश्यक दिशा-निर्देश स्क्रीन पर प्रदर्शित होंगे। यह सुविधा जियो-पोर्टल को अधिक सरल, सहज और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने के साथ ही विभागीय अधिकारियों को आवश्यक सूचनाएं तेजी से उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगी।
*औद्योगिक विकास से लेकर बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार तक उपयोगी होगी तकनीक*
कार्यशाला में जियो-पोर्टल और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी देते हुए चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मयंक अग्रवाल ने विभिन्न विभागों द्वारा अपनाए जा रहे जीआईएस आधारित समाधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा औद्योगिक भूमि के चयन और नियोजन के लिए ‘लैंड पैच एनालिसिस’ का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से संभावित औद्योगिक भूखंडों की पहचान, उपलब्ध भूमि का डिजिटल विश्लेषण तथा उपयुक्त स्थानों के चयन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाई जा सकेगी।
इसी प्रकार संस्थागत वित्त संचालनालय (डीआईएफ) द्वारा ‘बैंक कवरेज एनालिसिस’ के माध्यम से बैंकिंग सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। इसके आधार पर नई बैंक शाखाएं स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थानों का निर्धारण किया जा सकेगा। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि भू-स्थानिक तकनीक केवल मानचित्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन, संसाधन प्रबंधन और जनसुविधाओं के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
*विशेषज्ञों ने बताए भू-स्थानिक तकनीक के नवीनतम उपयोग*
कार्यशाला के दौरान ईसरी इंडिया (Esri India) एवं ऑक्टेव इंडिया के विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रस्तुतिकरण दी गई। विशेषज्ञों ने जीआईएस तकनीक के नवीनतम अनुप्रयोगों, आधुनिक भू-स्थानिक समाधानों तथा शासन की कार्यप्रणाली में इनके प्रभावी उपयोग की संभावनाओं पर जानकारी साझा की।
इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने जीआईएस आधारित योजनाओं, डेटा विश्लेषण और विभागीय आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित करने के विषय में विचार-विमर्श किया।
*डेटा आधारित शासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल*
छत्तीसगढ़ में जियो-पोर्टल और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम का विस्तार विकास योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण पहल है। भौगोलिक सूचनाओं के एकीकृत उपयोग से विभागों को स्थानीय जरूरतों की पहचान करने, उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने और विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने में सहायता मिलेगी।
इस पहल का उद्देश्य राज्य और जिला स्तर पर डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ करते हुए विकास योजनाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाना है। आधुनिक जीआईएस तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का समन्वित उपयोग छत्तीसगढ़ में डिजिटल एवं तकनीक आधारित शासन व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा।
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के मुख्य आरोपी रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। सौरभ चंद्राकर के बाद अब एजेंसियों ने शिकंजा कसते हुए प्रत्यर्पण की तैयारी शुरू कर दी है।
रायपुर: चर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप (Mahadev Online Betting App) सिंडिकेट मामले में प्रवर्तन निदेशालय और सुरक्षा एजेंसियों को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। इस बहुचर्चित अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के मास्टरमाइंड और को-प्रमोटर रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है।
इससे पहले इस अवैध साम्राज्य के मुख्य संचालक सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी हुई थी, और अब रवि उप्पल के शिकंजे में आने के बाद जांच एजेंसियों ने उसे भारत वापस लाने (प्रत्यर्पण) की कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ से जुड़े इस करोड़ों रुपए के अवैध सट्टा नेटवर्क ने देश भर में हड़कंप मचा रखा था। कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों, हवाला कारोबारियों और सेलिब्रिटीज के नाम इस सिंडिकेट से जुड़े होने के कारण यह मामला लगातार राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर था। रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर पर लंबे समय से रेड कॉर्नर नोटिस और गैर-जमानती वारंट जारी थे। अब दुबई में रवि उप्पल की गिरफ्तारी के बाद माना जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क के अन्य छिपे हुए चेहरों और वित्तीय लेन-देन की परते तेजी से बाहर आएंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल का दूरदर्शी निर्णय, अग्निवीरों के अनुभव और कौशल का राष्ट्रहित में होगा बेहतर उपयोग
युवाओं को राष्ट्रसेवा के साथ सैन्य क्षेत्र में आगे बढ़ने के मिलेंगे नए अवसर : मुख्यमंत्री साय
रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अग्निवीरों के लिए दो वर्ष के अतिरिक्त ‘सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी’ को स्वीकृति दिए जाने के निर्णय का हार्दिक स्वागत करते हुए इसे अभिनंदनीय एवं दूरदर्शी पहल बताया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस निर्णय से अग्निवीरों को चार वर्ष की प्रारंभिक सेवा पूरी करने के बाद दो वर्ष तक और राष्ट्र की सेवा करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, निर्धारित चयन मानदंडों को पूरा करने वाले इच्छुक अग्निवीर नियमित सैन्य सेवा में भी शामिल हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय अग्निवीरों के अनुभव, कौशल और सामर्थ्य का राष्ट्रहित में बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के साथ ही युवाओं को सैन्य सेवा में आगे बढ़ने के नए अवसर प्रदान करेगा। इससे देश की रक्षा व्यवस्था को भी अनुभवी एवं प्रशिक्षित युवाओं की क्षमताओं का लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित युवाओं के मनोबल को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्यों में करेंगे स्थापित : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री साय ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ की उच्चस्तरीय बैठक
छत्तीसगढ़ को वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, तकनीकी नवाचार और चिकित्सा प्रौद्योगिकी का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श
प्रदेश में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर तथा विज्ञान एवं गणित शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी और आधुनिक अनुसंधान के क्षेत्र में प्रदेश के युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर
आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ और किफायती स्वास्थ्य तकनीकों के विकास में भी आईआईएससी की विशेषज्ञता का लाभ लेने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रस्तावित परियोजनाओं की व्यवहार्यता का परीक्षण कर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देश
रायपुर -- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार की शक्ति से समृद्ध बनाना राज्य सरकार का संकल्प है। हमारा लक्ष्य छत्तीसगढ़ को केवल औद्योगिक और आर्थिक विकास में ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधनों, औद्योगिक संभावनाओं और प्रतिभाशाली मानव संसाधन को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़कर विकास का एक नया अध्याय लिखा जा सकता है। मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन एवं संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों तथा राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में छत्तीसगढ़ को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और चिकित्सा अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर संभावित सहयोग, आवश्यक वैज्ञानिक अधोसंरचना, संस्थागत व्यवस्थाओं और क्रियान्वयन की प्रारंभिक रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री साय ने भारतीय विज्ञान संस्थान के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों का छत्तीसगढ़ आगमन पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान देश ही नहीं, विश्व के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों में शामिल है। इसकी विशेषज्ञता, अनुसंधान क्षमताओं और शैक्षणिक अनुभवों का लाभ छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, स्वास्थ्य सेवाओं और विशेष रूप से युवाओं को मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी उत्कृष्टता और उच्च कौशलयुक्त मानव संसाधन की निर्णायक भूमिका होगी। छत्तीसगढ़ भी इसी राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी विश्वस्तरीय वैज्ञानिक और शैक्षणिक अधोसंरचनाएं विकसित करना चाहती है, जिनका लाभ केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित न रहे, बल्कि आने वाली अनेक पीढ़ियों को प्राप्त हो। विज्ञान और अनुसंधान में निवेश प्रदेश के दीर्घकालिक विकास, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है।
मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ केवल बड़े शहरों और प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ अंचलों में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इन प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की है।
मुख्यमंत्री साय ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ सहयोग की सभी संभावनाओं का गंभीरता से परीक्षण किया जाए। प्रस्तावित परियोजनाओं की तकनीकी, वित्तीय एवं संस्थागत व्यवहार्यता का अध्ययन कर ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि इन पहलों को व्यावहारिक स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार से संबंधित इन महत्वपूर्ण प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।
तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से तैयार होगा वैज्ञानिक और तकनीकी विकास का नया आधार
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन प्रमुख परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इनमें प्रदेश में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना, विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड संस्थान का विकास तथा आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ तक पहुंचाना शामिल है।
इन प्रस्तावित परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में अत्याधुनिक वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, अनुसंधान आधारित औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया गया।
विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर से उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों को मिलेगी नई शक्ति
बैठक में छत्तीसगढ़ में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना के प्रस्ताव पर विशेष रूप से चर्चा हुई। यह प्रस्तावित केंद्र प्रदेश के खनिज, इस्पात, धातु, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित उद्योगों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज और औद्योगिक राज्यों में शामिल है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपयोग बढ़ाने, नई औद्योगिक तकनीकों के विकास और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान सुविधाओं की आवश्यकता है। प्रस्तावित केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस केंद्र में अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे आधारित विश्लेषण, उच्च तापमान पर पदार्थों का परीक्षण, नैनो टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक एवं चुंबकीय पदार्थों का अध्ययन तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
इन सुविधाओं के माध्यम से धातु एवं मिश्रधातुओं के गुणों का अध्ययन, उन्नत पदार्थों का परीक्षण, नई विनिर्माण तकनीकों का विकास और औद्योगिक उत्पादों की गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सकेगा। इससे रक्षा, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और अन्य अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में भी अनुसंधान एवं नवाचार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
प्रस्तावित केंद्र में लगभग 600 शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के आवासीय प्रशिक्षण की क्षमता विकसित करने की परिकल्पना है। इसके माध्यम से तीन वर्षों में लगभग 1,800 विद्यार्थियों को उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।
इस केंद्र के विकसित होने से छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग संस्थानों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, स्टार्टअप और औद्योगिक इकाइयों को उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे वैज्ञानिक परीक्षण के लिए विदेशी संस्थानों पर निर्भरता कम करने, अनुसंधान की लागत और समय में कमी लाने तथा उद्योगों की तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और औद्योगिक क्षमताओं को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीक से जोड़ना प्रदेश के आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाला कदम होगा। इससे राज्य में अनुसंधान आधारित उद्योगों, तकनीकी नवाचार और उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकेंगे।
विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए विशेष संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव
बैठक में प्रदेश में विज्ञान और गणित शिक्षा की गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार के उद्देश्य से भारतीय विज्ञान संस्थान के अकादमिक मार्गदर्शन में चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विशेष संस्थान की स्थापना के प्रस्ताव पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रस्तावित इस संस्थान का उद्देश्य विज्ञान एवं गणित विषयों में उच्च प्रशिक्षित, दक्ष और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित शिक्षकों की नई पीढ़ी तैयार करना है।
प्रस्तावित पाठ्यक्रम में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित जैसे प्रमुख विषयों के साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, वैज्ञानिक अनुसंधान, संचार कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
संस्थान में 14 आधुनिक शिक्षण प्रयोगशालाएं, 600 विद्यार्थियों की आवासीय क्षमता, समृद्ध पुस्तकालय, डिजिटल शिक्षण सुविधाएं, आधुनिक व्याख्यान कक्ष, खेल सुविधाएं तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए आवासीय अधोसंरचना विकसित करने की परिकल्पना है। यहां 25 पूर्णकालिक शिक्षकों की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा पाठ्यक्रम निर्माण, प्रयोगशाला विकास, शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अनुसंधान संस्कृति को प्रोत्साहित करने में अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा ही वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता की मजबूत आधारशिला है। विज्ञान और गणित के विषयों में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने तथा उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने के लिए उत्कृष्ट शिक्षकों का होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रदेश में विज्ञान एवं गणित के उच्च प्रशिक्षित शिक्षकों की नई पीढ़ी तैयार करने में सहायता मिलेगी। इसका सकारात्मक प्रभाव शासकीय विद्यालयों सहित प्रदेश की संपूर्ण स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण एवं जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण प्रयास होगा।
चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों में भी सहयोग की संभावनाएं
बैठक में तीसरी महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की शैक्षणिक, वैज्ञानिक और अनुसंधान क्षमताओं का लाभ छत्तीसगढ़ में उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
इस प्रस्ताव में किफायती चिकित्सा जांच तकनीकों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, क्लिनिकल रिसर्च और चिकित्सा क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन के विकास को प्राथमिकता दी गई है।
प्रारंभिक चरण में पूर्ण मेडिकल स्कूल की स्थापना के स्थान पर हब एंड नेटवर्क मॉडल अपनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस मॉडल के माध्यम से भारतीय विज्ञान संस्थान को छत्तीसगढ़ के अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, शासकीय संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों से जोड़कर संयुक्त अनुसंधान एवं तकनीकी विकास की दिशा में कार्य किया जा सकेगा।
इसके अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान प्रयोगशालाओं की स्थापना, चिकित्सा तकनीकों के परीक्षण एवं सत्यापन केंद्रों का विकास, फेलोशिप, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।
बैठक में बताया गया कि बेंगलुरु स्थित टाटा आईआईएससी मेडिकल स्कूल विज्ञान, इंजीनियरिंग और चिकित्सा के समन्वय पर आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है। इसमें कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण और रोबोटिक सर्जरी जैसे विशेषज्ञ चिकित्सा क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
इस संस्थान के वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुभवों का लाभ छत्तीसगढ़ में चिकित्सा अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आधुनिक उपचार तकनीकों के विकास में लिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों में चिकित्सा जांच, रोगों की शीघ्र पहचान और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए तकनीकी नवाचार उपयोगी सिद्ध होंगे।
बस्तर और सरगुजा के युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़ने, आधुनिक प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षण प्राप्त करने और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की है।
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान की विशेषज्ञता से प्रदेश के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन, ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अनुसंधान इंटर्नशिप, आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों का प्रशिक्षण और विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के व्याख्यान उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी, बुनियादी विज्ञान और अन्य उभरती तकनीकों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने पर भी विचार किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अवसरों से शासकीय शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों तथा ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के युवाओं को प्राथमिकता के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा के प्रतिभाशाली युवा भी देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में अनुसंधान करें, नई तकनीकों का विकास करें और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएं, यह राज्य सरकार की आकांक्षा है।
बस्तर और सुकमा में जल संरक्षण तथा स्थानीय तकनीकी नवाचार की संभावनाओं पर चर्चा
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग पर भी विचार-विमर्श किया गया।
भारतीय विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने बस्तर और सुकमा सहित विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के बिना जल प्रवाह की ऊर्जा से संचालित पंपिंग तकनीकों के उपयोग संबंधी कार्यों की जानकारी दी।
हाइड्रोलिक रैम एवं टरबाइन पंपों पर आधारित ये तकनीकें विशेष रूप से दूरस्थ वनांचलों में उपयोगी हो सकती हैं, जहां पारंपरिक विद्युत आधारित जलापूर्ति व्यवस्थाओं के संचालन में कठिनाइयां आती हैं। स्थानीय जलस्रोतों और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप इन तकनीकों का उपयोग जल उपलब्धता बढ़ाने तथा ग्रामीण समुदायों की आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक हो सकता है।
इसके अतिरिक्त शोधित जल के पुनर्चक्रण, जलाशयों के पुनर्भरण और भूजल संवर्धन के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के अनुभवों पर भी चर्चा हुई।
इस दौरान कर्नाटक के कोलार जिले में प्रतिदिन 440 मिलियन लीटर शोधित जल को 137 जलाशयों तक पहुंचाने वाली परियोजना का उदाहरण प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचारों की उपयोगिता का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, जल प्रबंधन और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विज्ञान और तकनीक का उपयोग ग्रामीण जीवन को सुगम बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए भी किया जाना चाहिए।
विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में विज्ञान, शिक्षा, उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय आवश्यक
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, उद्योग, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़कर आगे बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग से प्रदेश में आधुनिक वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने, उच्चस्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा देने, उद्योगों की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार चाहती है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की पहचान केवल खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और उत्कृष्ट मानव संसाधन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी स्थापित हो।
उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के संकल्प को साकार करने में विज्ञान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ प्रस्तावित सहयोग प्रदेश की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल साबित हो सकता है।
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन, प्रशासन एवं वित्त संकाय के डीन प्रोफेसर पी.एस. अनिल कुमार, मैकेनिकल साइंसेज डिवीजन के डीन प्रोफेसर सत्यम सुवास तथा बायोलॉजिकल साइंसेज डिवीजन के डीन प्रोफेसर सतीश राघवन शामिल हुए।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन की नई दिल्ली में पदस्थ निवेश आयुक्त सुश्री ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, कौशल विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजू सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर :- सेंट विंसेंट पैलोटी महाविद्यालय, रायपुर द्वारा प्राइवेट कॉलेजेस प्रिंसिपल वेलफेयर एसोसिएशन (निजी महाविद्यालय प्राचार्य कल्याण संघ) के तत्वावधान में लीडरशिप फॉर एक्सीलेंस: एंपावरिंग प्रिंसिपल्स फॉर विकसित भारत 2047” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रभावी नेतृत्व, संस्थागत विकास एवं शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ावा देना तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्राचार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार-विमर्श करना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. संजीव प्रशार, निदेशक, भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), रायपुर उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कुलदीप दुबे ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व ही शैक्षणिक संस्थानों को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर कर सकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में उच्च शिक्षण संस्थानों एवं उनके प्राचार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सकारात्मक दृष्टिकोण एवं सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
निजी महाविद्यालय प्राचार्य कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ. मेघेष तिवारी एवं सचिव डॉ. देवाशीष मुखर्जी ने बताया कि वर्तमान बदलते शैक्षणिक परिवेश में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों के नेतृत्वकर्ताओं का सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में सहभागिता के लिए शहर के लगभग 30 महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने अपनी सहमति प्रदान की है।
मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता प्रो. संजीव प्रशार ने अपने उद्बोधन में शैक्षणिक संस्थानों के विकास में दूरदर्शी नेतृत्व, नवाचार एवं प्रभावी प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं मूल्यपरक शिक्षा की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सांस्कृतिक चेतना का विकास भी होना चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपराओं एवं अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में पारंपरिक ज्ञान एवं समकालीन शैक्षणिक दृष्टिकोण के बीच समन्वय स्थापित करना आवश्यक है, ताकि शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके।
कार्यशाला के अंतर्गत दो विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में प्रो. एस. के. पांडेय, पूर्व कुलपति, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा में नेतृत्व की बदलती भूमिका एवं संस्थागत विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। द्वितीय सत्र में प्रो. बी. जी. सिंह, पूर्व कुलपति, पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा में नेतृत्व, प्रशासनिक दक्षता एवं संस्थागत उत्कृष्टता के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। दोनों सत्रों में प्रतिभागियों को विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त करने तथा अपने विचार साझा करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजित समापन समारोह में प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलपति, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने उच्च शिक्षा में नेतृत्व की बदलती भूमिका, शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संस्थानों की प्रगति के लिए प्राचार्यों में दूरदर्शिता, नवाचार को अपनाने की क्षमता तथा बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करने का दृष्टिकोण होना आवश्यक है। उन्होंने प्राचार्यों को संस्थागत विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करने तथा एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने के लिए प्रेरित किया।
इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने सहभागिता की। विभिन्न महाविद्यालयों से आए प्राचार्यों एवं शैक्षणिक नेतृत्वकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, संस्थागत विकास एवं प्रभावी नेतृत्व से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। कार्यशाला ने सभी प्रतिभागियों को नवीन विचारों एवं अनुभवों से सीखने तथा शैक्षणिक संस्थानों के विकास के लिए प्रभावी रणनीतियों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यशाला के माध्यम से उच्च शिक्षा में नेतृत्व की भूमिका, संस्थागत विकास तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में प्राचार्यों की जिम्मेदारियों पर सार्थक विचार-विमर्श किया गया।
00 मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक, पर्यटन और रोजगार के खुलेंगे नए द्वार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण (फिल्म शूटिंग) को प्रोत्साहित करने और पर्यटन के बहुमुखी विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख और लोकप्रिय फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना है।
प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा वैश्विक मंच
मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिनेमैटिक और प्राकृतिक दृश्यों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। राज्य के अनछुए प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध पर्यटन स्थलों को देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर में फिल्म शूटिंग के लिहाज से उपयुक्त और संभावनाशील नए स्थलों की पहचान कर उन्हें तेजी से विकसित और प्रोत्साहित किया जाए।
फिल्म नीति का नवीनीकरण और चित्रोत्पला फिल्म सिटी पर विशेष जोर
चर्चा के दौरान राज्य की मौजूदा फिल्म नीति को और अधिक व्यावहारिक व प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही, बहुप्रतीक्षित चित्रोत्पला फिल्म सिटी के प्रस्ताव और उसकी संभावनाओं को मूर्त रूप देने को लेकर भी गहन मंथन हुआ। सरकार का उद्देश्य फिल्म मेकर्स के लिए शूटिंग की प्रक्रियाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी और आकर्षक बनाना है, जिससे अधिक से अधिक प्रोडक्शन हाउस छत्तीसगढ़ का रुख करें।
स्थानीय युवाओं और कलाकारों के लिए सृजित होंगे रोजगार के अवसर
मुख्य सचिव ने इस बात पर विशेष बल दिया कि फिल्म निर्माण गतिविधियों के बढऩे से न केवल पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, होटल उद्योग और युवाओं के लिए रोजगार के नए और सुनहरे अवसर सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त, बैठक में निफ्टेम के प्रस्तावित भ्रमण तथा खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) के क्षेत्र में तकनीकी सुविधाओं एवं प्रशिक्षण के विस्तार को लेकर भी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।
इस उच्चस्तरीय बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ की प्रबंध संचालक श्रीमती संजीता गुप्ता तथा वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की उप सचिव श्रीमती आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए प्रदेश चुनाव टोली की घोषणा की है। गठित चुनाव टोली मे संतोष पाण्डेय - प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं सांसद, अखिलेश सोनी - भाजपा प्रदेश महामंत्री, भूपेन्द्र सवन्नी - अध्यक्ष राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा), सौरभ सिंह - अध्यक्ष खनिज विकास निगम, किशोर राय - प्रदेश संयोजक नगरीय निकाय प्रकोष्ठ, प्रफुल विश्वकर्मा - अध्यक्ष लौह शिल्पकार विकास बोर्ड और पंकज कुमार झा - मीडिया सलाहकार को शामिल किया गया है। टोली के पदेन सदस्य के रूप में सुनील पिल्लई - भाजपा आईटी सेल प्रदेश संयोजक, मितुल कोठारी - भाजपा सोशल मीडिया प्रदेश संयोजक और हेमंत पाणिग्रही - भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक शामिल किया गया है।
इसी प्रकार आगामी नगरीय निकाय चुनावों और उपचुनाव के मद्देनजर प्रभारियों एवं सह-प्रभारियों की सूची घोषित की गई है : रायगढ़ जिला की नगर पंचायत तमनार के लिए लखनलाल साहू को प्रभारी और श्रीमती संयोगिता सिंह जूदेव व जोगेश लाम्बा को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। धमतरी जिला की नगर पंचायत बड़ी करेली में शशि पवार को प्रभारी और अरूण सार्वा व श्रीमती ज्योति चंद्राकर सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला की नगर पंचायत बिलाईगढ़ में केवल अध्यक्ष पद के उपचुनाव हेतु केदार गुप्ता को प्रभारी और चन्द्रकुमार पटेल व श्रीमती अल्का चंद्राकर को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है।
00 बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़ थीम पर आधारित प्रदर्शनी में वन संरक्षण, पर्यटन और आजीविका की पहल को मिला सम्मान
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव 2026 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को विभागीय प्रदर्शनियों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। राज्योत्सव के समापन एवं राज्य अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने यह सम्मान प्रदान किया। विभाग की ओर से अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पांडेय ने पुरस्कार प्राप्त किया। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों- कर्मचारियों और वन धन केंद्रों से जुड़े सदस्यों को बधाई दी।
गौरतलब है कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़ थीम पर तैयार प्रदर्शनी में बस्तर में शांति के साथ बढ़ते पर्यटन और आजीविका के अवसरों से लेकर प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की पहलों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रदर्शनी को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया था। प्रवेश द्वार पर जगदलपुर के जनजातीय गौरव वाटिका, बीजापुर स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व के चेंदरू गेट और दंतेवाड़ा के वन मंदिर के प्रतिरूप बनाए गए थे। इनके माध्यम से बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रकृति के प्रति आस्था और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व की परंपरा को प्रदर्शित किया गया।
बदलता बस्तर खंड में सुकमा के तुंगल डैम स्थित तुंगल कैफे की पहल विशेष आकर्षण रही। यहां मुख्यधारा में लौट चुकी पूर्व महिला नक्सली कैफे का संचालन कर रही हैं, जबकि स्थानीय युवा पर्यटकों को नौकायन और कयाकिंग की सुविधा उपलब्ध कराकर आजीविका अर्जित कर रहे हैं। प्रदर्शनी में इस पहल के माध्यम से बस्तर में बदलते सामाजिक परिवेश और रोजगार के नए अवसरों को सामने रखा गया। इसके साथ ही कांगेर घाटी के समीप धुड़मारास गांव के होमस्टे, कोंडागांव की पुष्पाल घाटी के इको-कॉटेज, तीरथगढ़ जलप्रपात और इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका क्षेत्र के मॉडल प्रदर्शित किए गए। धुड़मारास गांव का चयन संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन के बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम में हुआ है। प्रदर्शनी में बस्तर की 572 देवगुडिय़ों के जीर्णोद्धार, मनरेगा के अंतर्गत 21.67 लाख मानव दिवस रोजगार सृजन तथा कांगेर वैली में 35 सफारी जिप्सियों के संचालन से 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की जानकारी भी दी गई।
वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन की पहल प्रदर्शित
संवरता छत्तीसगढ़ भाग में प्रदेश की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को त्रिआयामी मॉडल एवं जीवंत प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें बिलासपुर के कोपरा जलाशय को दिसंबर 2025 में प्रदेश के पहले रामसर स्थल के रूप में मिली मान्यता, बारनवापारा अभयारण्य में दशकों बाद काले हिरणों की रिलोकेशन और औरापानी में गिद्ध संरक्षण के प्रयास प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए। बारनवापारा में काले हिरणों के पुनर्व्यवस्थापन की सराहना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में भी की थी। मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन के लिए गजरथ यात्रा जागरूकता अभियान और गज संकेत ऐप का प्रदर्शन किया गया। यह ऐप हाथियों की आवाजाही की जानकारी ग्रामीणों तक वॉयस कॉल, एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से पहुंचाता है। वृक्षारोपण की उपलब्धियों में एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत वर्ष 2024 में 3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में 3.55 करोड़ पौधों के रोपण की जानकारी दी गई। इसी तरह किसान वृक्ष मित्र योजना के अंतर्गत 36 हजार 896 किसानों द्वारा 62 हजार 441 एकड़ क्षेत्र में 3.67 करोड़ पौधे लगाने की जानकारी प्रस्तुत की गई।
डिजिटल तकनीक और वन उत्पादों ने भी किया आकर्षित
प्रदर्शनी में क्यूआर कोड आधारित वन्यजीव प्रश्नोत्तरी, इंटरैक्टिव गेम, 360 डिग्री वर्चुअल रियलिटी, लाइट एंड साउंड प्रभाव तथा सेल्फी प्वाइंट दर्शकों, विशेषकर युवाओं के आकर्षण का केंद्र रहे। क्यूआर कोड स्कैन कर दर्शकों ने विभाग की विशेष वेबसाइट के माध्यम से वानिकी योजनाओं और प्रदेश के इको-टूरिज्म स्थलों की जानकारी प्राप्त की।
संयुक्त वन प्रबंधन के स्टॉल पर ग्रामीण कारीगरों द्वारा निर्मित बांस के घर, नाव, लालटेन और सजावटी वस्तुओं की बिक्री हुई। छत्तीसगढ़ हर्बल्स के स्टॉल पर वन मधु, सफेद मूसली, त्रिफला चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू और महाभृंगराज तेल जैसे वन धन केंद्रों में तैयार उत्पादों ने भी लोगों को आकर्षित किया। राज्य औषधीय पादप बोर्ड ने घरेलू बाडिय़ों में सिंगी और शतावरी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती से ग्रामीण महिलाओं के लिए सालाना 20 से 30 हजार रुपए की अतिरिक्त आय की संभावनाओं को प्रदर्शित किया।
धमतरी। देशभर में जहां कार्तिक अमावस्या को दीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सेमरा गांव में दिवाली मनाने की परंपरा सबसे अलग है। यहां ग्रामीण अमावस्या के दिन नहीं, बल्कि एक सप्ताह पहले अष्टमी तिथि को दीपावली का त्योहार मनाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस परंपरा के पीछे करीब 100 साल पुरानी मान्यता और एक रहस्यमयी लोककथा जुड़ी हुई है।
सपने में ग्राम देवता ने दिया था आदेश
ग्रामीणों के अनुसार, करीब 100 साल पहले गांव के बैगा को ग्राम देवता ने सपने में दर्शन देकर सभी त्योहार निर्धारित तिथि से सात दिन पहले मनाने का आदेश दिया था। मान्यता है कि इस परंपरा का पालन नहीं करने पर गांव में कोई अनहोनी या विपदा आ सकती है। तभी से ग्रामीण पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं।
गांव के बुजुर्गों द्वारा सुनाई जाने वाली कहानी के मुताबिक, पुराने समय में सेमरा गांव घने जंगलों के बीच बसा हुआ था। एक दिन गांव के दो दोस्त जंगल घूमने गए, जहां शेर ने उन पर हमला कर दिया। इस घटना में दोनों की मौत हो गई। ग्रामीण उनके शव गांव लेकर आए और अंतिम संस्कार किया। बताया जाता है कि इस घटना के कुछ दिनों बाद ही बैगा को ग्राम देवता ने सपने में दर्शन दिए और त्योहार सात दिन पहले मनाने का निर्देश दिया।
दिवाली ही नहीं, सभी त्योहार सात दिन पहले
सेमरा गांव में केवल दीपावली ही नहीं, बल्कि धनतेरस से लेकर गोवर्धन पूजा तक पांचों दिन के सभी रीति-रिवाज एक सप्ताह पहले ही पूरे कर लिए जाते हैं। ग्रामीण पारंपरिक तरीके से पूजा-पाठ, दीप प्रज्वलन और उत्सव मनाते हैं। इस दौरान गांव में मेले जैसा माहौल रहता है। ससुराल गई बेटियां भी मायके लौटकर परिवार के साथ दीपावली का पर्व मनाती हैं।
अमावस्या के दिन सामान्य रहता है गांव का माहौल
इस परंपरा की सबसे अनोखी बात यह है कि जब देशभर में दीपावली की रोशनी और आतिशबाजी से उत्सव मनाया जाता है, तब सेमरा गांव में सामान्य दिनों जैसा माहौल रहता है। यहां न तो विशेष दीपावली पूजन होता है और न ही कोई बड़ा जश्न मनाया जाता है। आसपास के गांवों से लोग इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए सेमरा पहुंचते हैं।
भले ही आधुनिक दौर में इस मान्यता को कुछ लोग अंधविश्वास मानें, लेकिन सेमरा के ग्रामीणों के लिए यह उनकी आस्था, परंपरा और पूर्वजों की विरासत का हिस्सा है। गांव के युवा भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि करीब एक सदी पुरानी यह अनूठी परंपरा आज भी कायम है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ के लिए प्रदेशवासियों, विशेषकर आदिवासी समुदाय को बधाई दी और इस सफलता का श्रेय केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) तथा छत्तीसगढ़ पुलिस को दिया। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में 5 लाख पीपल के पेड़ लगाए जाएंगे और इसे ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित कर दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण-अनुकूल शहर बनाया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
अटल बिहारी वाजपेयी को दिया छत्तीसगढ़ राज्य गठन का श्रेय
अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को धन्यवाद और श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे संवारा है। उनके अनुसार, पहले इस क्षेत्र के साथ अन्याय हुआ और विकास की गति बाधित रही।
गौरव, सिद्धि और संकल्प का दिन बताया
गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए आज गौरव, सिद्धि और संकल्प का दिन है। गौरव अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत का है, सिद्धि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ और नक्सलमुक्त भारत के संकल्प की है और संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का है।
लोक संस्कृति और आदिवासी परंपराओं को बढ़ावा
अमित शाह ने कहा कि गुरु घासीदास का संदेश और गुरु नानक देव की सेवा, समानता तथा सच्चाई की सीख छत्तीसगढ़ के संस्कारों का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ पंडुम और बस्तर ओलंपिक के माध्यम से लोक संस्कृति को जीवंत रखने का काम कर रही है। पंथी, पांडवानी, राउत नाचा, कर्मा और सैला नृत्य के साथ ढोकरा कला, बेल मेटल, काष्ठ शिल्प और कोसा जैसी पारंपरिक कलाओं को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने बस्तर दशहरे की 75 दिन चलने वाली परंपरा का भी उल्लेख किया।
नक्सलवाद ने विकास और शिक्षा को किया प्रभावित
गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने उनकी पार्टी को सत्ता में पहुंचाया और सरकार बनने के दो महीने के भीतर नक्सल उन्मूलन का संकल्प लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलवाद के कारण जिस क्षेत्र में सांस्कृतिक गलियारा बनना चाहिए था, वहां रेड कॉरिडोर बन गया। जंगलों में महुआ, तेंदूपत्ता और लोकगीतों की जगह बारूदी सुरंगें बिछाई गईं। बच्चों के हाथों में कलम की जगह बंदूकें थमा दी गईं और जहां स्कूलों की घंटियां बजनी चाहिए थीं, वहां स्कूलों की इमारतें उड़ा दी गईं।
मानवाधिकार के मुद्दे पर नक्सलवाद समर्थकों से सवाल
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने मानवाधिकार के नाम पर नक्सलवाद का समर्थन करने वालों से सवाल किया कि क्या मानवाधिकार केवल बंदूक उठाकर विकास रोकने वालों का है, गरीब आदिवासियों का नहीं? उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा में जिन लोगों के हाथ-पैर गंवाए, उन्हें मोदी सरकार कृत्रिम अंग उपलब्ध कराकर फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर लेख लिखकर सलाह देने वालों से वहां आकर विकास कार्य देखने और आदिवासियों के दर्द पर भी लिखने का आह्वान किया।
90% नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण: शाह
गृह मंत्री ने विपक्षी पार्टी पर नक्सलवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में विपक्षी पार्टी की तत्कालीन केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने नक्सलियों से हथियार डालने के बजाय केवल उत्पात बंद करने की अपील की थी। इसके विपरीत, उन्होंने नक्सलियों से हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने की अपील की और ऐसा नहीं करने पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई की चेतावनी दी। शाह के मुताबिक, इस नीति के तहत 90% नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 10% मारे गए। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति कानून का पालन करने वालों के साथ नागरिकों जैसा व्यवहार करने और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की है।
‘जनताना सरकार’ और मॉक पार्लियामेंट को लेकर विपक्ष पर निशाना
अमित शाह ने आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी गैर-संवैधानिक संस्थाओं के साथ खड़ी रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में ‘जनताना सरकार’ बनाकर समानांतर व्यवस्था चलाई और निर्दोष पत्रकारों, समाजसेवियों तथा विद्यार्थियों की हत्याएं कीं। शाह ने विपक्ष पर ऐसी व्यवस्था का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए मॉक पार्लियामेंट आयोजित करने को भी संसद का मखौल बताया।
संसद में चर्चा की चुनौती दी
केंद्रीय गृह मंत्री ने विपक्ष के नेता के आचरण को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि केवल हाथ में संविधान लेकर घूमने से उसका सम्मान नहीं होता, बल्कि आचरण भी संवैधानिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष को संसद चलने देने और चर्चा में हिस्सा लेने की चुनौती दी। शाह ने कहा कि संसद में चर्चा होने पर जनता को पता चल जाएगा कि सच कौन बोल रहा है और झूठ कौन।
सरकार ने 70% से अधिक गारंटियां पूरी कीं: अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने कम समय में 70% से अधिक गारंटियां पूरी की हैं। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त महिलाओं के खातों में भेजी गई है। धान की खरीद जारी है और कृषि, वनोपज, पशुपालन तथा एमएसएमई जैसे क्षेत्र अपने लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ को शीर्ष तीन पर्यटन राज्यों में लाने का लक्ष्य
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलमुक्त होने के बाद छत्तीसगढ़ आने वाले दिनों में देश के शीर्ष तीन पर्यटन राज्यों में शामिल होगा। उन्होंने चित्रकूट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, मां बम्लेश्वरी, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी और बस्तर दशहरे का उल्लेख करते हुए कहा कि ये स्थल दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।
10 साल में धरती और लोग दोनों होंगे समृद्ध
अमित शाह ने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ के बारे में कहा जाता था कि यहां की धरती अमीर है, लेकिन लोग गरीब हैं। उन्होंने दावा किया कि अगले 10 वर्षों में राज्य की धरती और यहां के लोग दोनों समृद्ध होंगे। उन्होंने बताया कि राज्य का वार्षिक बजट 30 गुना, प्रति व्यक्ति आय 17 गुना और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 25 गुना बढ़ा है। उनके अनुसार, इस अवधि में आईटीआई की संख्या दोगुनी, इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या तीन गुनी तथा पॉलिटेक्निक कॉलेजों और महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों की संख्या छह गुनी हुई है। उन्होंने साक्षरता दर 65% से बढ़कर 79% होने का भी दावा किया।
भय से भरोसे और संसाधन से समृद्धि की ओर बढ़ेगा राज्य
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार छत्तीसगढ़ को भय से भरोसे और संसाधन से समृद्धि की ओर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास की संभावनाओं को उपलब्धियों में बदलकर स्वाभिमानी लोगों और समृद्ध धरती वाला खुशहाल छत्तीसगढ़ बनाने का लक्ष्य है।
रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन ने राजधानी रायपुर और नवा रायपुर अटल नगर के लिए स्थानीय अवकाश की तारीख में बदलाव किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी नए आदेश के मुताबिक, अब 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को देवउठनी एकादशी के अवसर पर स्थानीय अवकाश रहेगा। इस दिन रायपुर और नवा रायपुर के राज्य शासन के सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे।
गोवर्धन पूजा की छुट्टी में बदलाव के बाद लिया गया फैसला
दरअसल, शासन की ओर से जारी पुराने आदेश में 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा के लिए स्थानीय अवकाश घोषित किया गया था। इसके बाद 26 अक्टूबर को जारी नई अधिसूचना में गोवर्धन पूजा को सामान्य अवकाश घोषित कर दिया गया। ऐसे में इस दिन पहले से तय स्थानीय अवकाश की आवश्यकता नहीं रह गई थी।
इसी को ध्यान में रखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने स्थानीय अवकाश में संशोधन करते हुए 9 नवंबर के स्थान पर 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी का अवकाश घोषित किया है।
बैंक और कोषालय में जारी रहेगा कामकाज
शासन के आदेश के अनुसार, 20 नवंबर का स्थानीय अवकाश सभी संस्थानों पर लागू नहीं होगा। बैंक, कोषालय और उप कोषालय इस दिन सामान्य रूप से खुले रहेंगे। वित्तीय संस्थानों में भी कामकाज जारी रहेगा। यानी सरकारी कार्यालयों में छुट्टी रहेगी, लेकिन बैंकिंग और कोषालय से जुड़ी सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी।
सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा लंबा वीकेंड
20 नवंबर को शुक्रवार होने के कारण पांच दिवसीय कार्य सप्ताह वाले सरकारी कर्मचारियों को लगातार तीन दिनों की छुट्टी का लाभ मिल सकता है। शुक्रवार के स्थानीय अवकाश के बाद शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। इस तरह कर्मचारियों को तीन दिन का लंबा वीकेंड मिलेगा।
साहित्य, कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल, कृषि, समाजसेवा, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय उत्थान सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान का सम्मान
रायपुर -- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों एवं संस्थाओं को प्रतिष्ठित राज्य अलंकरण पुरस्कारों से सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस समारोह में साहित्य, कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल, कृषि, समाजसेवा, जनजातीय उत्थान, महिला सशक्तिकरण, सहकारिता, श्रम, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मान प्रदान किया गया।
राज्य अलंकरण से सम्मानित विभूतियों एवं संस्थाओं का विवरण
शहीद वीरनारायण सिंह स्मृति सम्मान आदिवासी सामाजिक चेतना तथा उनके उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए धमतरी जिले के श्री डुमन लाल ध्रुव को प्रदान किया गया।
यति यतनलाल सम्मान अहिंसा एवं गोरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए दुर्ग जिले के विश्व गीता धेनू गोविन्द पक्षी सेवा धाम, कुम्हारी को प्रदान किया गया।
गुण्डाधूर सम्मान खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कोरबा जिले की सुश्री संजू देवी को प्रदान किया गया।
मिनीमाता सम्मान महिला उत्थान एवं जनजागृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लोक आस्था सेवा संस्थान, गरियाबंद (सुश्री लता नेताम) को प्रदान किया गया।
गुरु घासीदास सामाजिक चेतना एवं अनुसूचित जाति उत्थान सम्मान सामाजिक चेतना एवं दलित उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री सुखचंद भास्कर को प्रदान किया गया।
ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए बस्तर जिले की प्राथमिक कुडुक मछुवा सहकारी समिति मर्यादित, चित्रकोट (श्री धनसिंह बघेल) को प्रदान किया गया।
हबीब तनवीर सम्मान समकालीन रंगकर्म, छत्तीसगढ़ी, हिन्दी एवं अन्य भाषा नाटकों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर को प्रदान किया गया।
महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन, विशेष रूप से तीरंदाजी के लिए बालोद जिले के श्री टोमन कुमार को प्रदान किया गया।
पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिलासपुर जिले के तेजस्विनी सेवा प्रतिष्ठान, नेहरू नगर को प्रदान किया गया।
पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायगढ़ जिले के डॉ. बिहारीलाल साहू को प्रदान किया गया।
चक्रधर सम्मान शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. एम. श्रीराम मूर्ति को प्रदान किया गया।
दाऊ मंदराजी सम्मान लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले की श्रीमती रेखा जलक्षत्री को प्रदान किया गया।
डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री पुन्नीदास भट्ट को प्रदान किया गया।
महाराजा अग्रसेन सम्मान सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए रायगढ़ जिले के श्री बाबूलाल अग्रवाल को प्रदान किया गया।
चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार हिन्दी प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री प्रमोद कुमार साहू को प्रदान किया गया।
चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार हिन्दी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री बरुण सखाजी एवं सुश्री रसिका पांडेय को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार अंग्रेजी प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री शिशिर रॉय चौधरी को प्रदान किया गया।
धन्वन्तरि सम्मान आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा तथा शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए धमतरी जिले के डॉ. दिनेश कुमार नाग को प्रदान किया गया।
श्रीमती बिलासादेवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार मछली पालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए बालोद जिले के श्री प्रदीप कुमार सोनी को प्रदान किया गया।
राजेश्री महंत वैष्णवदास जी महाराज संस्कृत भाषा पुरस्कार संस्कृत भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. बहुरन सिंह पटेल को प्रदान किया गया।
डॉ. भंवरसिंह पोर्ते आदिवासी सेवा पुरस्कार आदिवासियों की सेवा और आर्थिक उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, नवा रायपुर (श्री सी. श्रीनिवास यंगम) को प्रदान किया गया।
स्व. रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार श्रम के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बलौदाबाजार जिले के अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड, यूनिट कुकुरडीह, सीमेंट वर्क्स, सरकीपार को प्रदान किया गया।
पंडित लखनलाल मिश्र सम्मान अपराध अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए रायपुर जिले के श्री सुरेश कुमार ध्रुव, उप पुलिस अधीक्षक को प्रदान किया गया।
छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान देश के बाहर अप्रवासी भारतीयों द्वारा सामाजिक कल्याण, साहित्य, मानव संसाधन, निकाय अथवा आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दंतेवाड़ा जिले की श्रीमती दीपाली सरावगी को प्रदान किया गया।
किशोर साहू सम्मान हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में रचनात्मक लेखन, निर्देशन, अभिनय, पटकथा एवं निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री सैयद ताहिर अली (करन खान) को प्रदान किया गया।
लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान छत्तीसगढ़ी लोकगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दुर्ग जिले की श्रीमती साधना यादव को प्रदान किया गया।
देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार पंथी नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आरंग, रायपुर जिले के श्री सी.एल. रात्रे को प्रदान किया गया।
खुमान साव सम्मान छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री चंद्रभूषण वर्मा को प्रदान किया गया।
लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार आंचलिक साहित्य एवं लोक कविता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दुर्ग जिले के श्री दुर्गा प्रसाद पारकार को प्रदान किया गया।
किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में निर्देशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री मोहन सुंदरानी को प्रदान किया गया।
बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान विधि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मयूर विहार, दिल्ली के श्री कौस्तुभ शुक्ला एवं रायपुर जिले के श्री हेमन्त कुमार मिश्र को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
माता बहादुर कलारिन सम्मान महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष एवं नारी उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कांकेर जिले की श्रीमती बुलबुल बैदया को प्रदान किया गया।
पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान रचनात्मक लेखन और हिन्दी भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री अनंत विजय को प्रदान किया गया।
डॉ. तीज़न बाई सम्मान पंडवानी कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पाहंदा, दुर्ग जिले के श्री चेतन लाल देवांगन को प्रदान किया गया।
चेंदरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री सत्येन्द्र कुमार उपाध्याय 'सन्नी' को प्रदान किया गया।
संत रविदास सम्मान सामाजिक समरसता तथा साहित्य एवं काव्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बालोद जिले के श्री जगदीश प्रसाद देशमुख को प्रदान किया गया।
राज्य अलंकरण समारोह छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्वों के सम्मान का महत्वपूर्ण अवसर बना। इन पुरस्कारों के माध्यम से राज्य की लोककला, संस्कृति, साहित्य, सामाजिक समरसता, जनजातीय परंपराओं और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को प्रतिष्ठित पहचान मिली।
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन अवसर पर आयोजित राज्य अलंकरण समारोह ने प्रदेश की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ ही नई पीढ़ी को समाज और राज्य के विकास में रचनात्मक योगदान देने की प्रेरणा दी।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों एवं संस्थाओं को प्रतिष्ठित राज्य अलंकरण पुरस्कारों से सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस समारोह में साहित्य, कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल, कृषि, समाजसेवा, जनजातीय उत्थान, महिला सशक्तिकरण, सहकारिता, श्रम, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मान प्रदान किया गया।
राज्य अलंकरण से सम्मानित विभूतियों एवं संस्थाओं का विवरण
शहीद वीरनारायण सिंह स्मृति सम्मान आदिवासी सामाजिक चेतना तथा उनके उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए धमतरी जिले के श्री डुमन लाल ध्रुव को प्रदान किया गया।
यति यतनलाल सम्मान अहिंसा एवं गोरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए दुर्ग जिले के विश्व गीता धेनू गोविन्द पक्षी सेवा धाम, कुम्हारी को प्रदान किया गया।
गुण्डाधूर सम्मान खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कोरबा जिले की सुश्री संजू देवी को प्रदान किया गया।
मिनीमाता सम्मान महिला उत्थान एवं जनजागृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लोक आस्था सेवा संस्थान, गरियाबंद (सुश्री लता नेताम) को प्रदान किया गया।
गुरु घासीदास सामाजिक चेतना एवं अनुसूचित जाति उत्थान सम्मान सामाजिक चेतना एवं दलित उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री सुखचंद भास्कर को प्रदान किया गया।
ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए बस्तर जिले की प्राथमिक कुडुक मछुवा सहकारी समिति मर्यादित, चित्रकोट (श्री धनसिंह बघेल) को प्रदान किया गया।
हबीब तनवीर सम्मान समकालीन रंगकर्म, छत्तीसगढ़ी, हिन्दी एवं अन्य भाषा नाटकों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर को प्रदान किया गया।
महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन, विशेष रूप से तीरंदाजी के लिए बालोद जिले के श्री टोमन कुमार को प्रदान किया गया।
पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिलासपुर जिले के तेजस्विनी सेवा प्रतिष्ठान, नेहरू नगर को प्रदान किया गया।
पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायगढ़ जिले के डॉ. बिहारीलाल साहू को प्रदान किया गया।
चक्रधर सम्मान शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. एम. श्रीराम मूर्ति को प्रदान किया गया।
दाऊ मंदराजी सम्मान लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले की श्रीमती रेखा जलक्षत्री को प्रदान किया गया।
डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री पुन्नीदास भट्ट को प्रदान किया गया।
महाराजा अग्रसेन सम्मान सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए रायगढ़ जिले के श्री बाबूलाल अग्रवाल को प्रदान किया गया।
चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार हिन्दी प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री प्रमोद कुमार साहू को प्रदान किया गया।
चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार हिन्दी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री बरुण सखाजी एवं सुश्री रसिका पांडेय को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार अंग्रेजी प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री शिशिर रॉय चौधरी को प्रदान किया गया।
धन्वन्तरि सम्मान आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा तथा शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए धमतरी जिले के डॉ. दिनेश कुमार नाग को प्रदान किया गया।
श्रीमती बिलासादेवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार मछली पालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए बालोद जिले के श्री प्रदीप कुमार सोनी को प्रदान किया गया।
राजेश्री महंत वैष्णवदास जी महाराज संस्कृत भाषा पुरस्कार संस्कृत भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. बहुरन सिंह पटेल को प्रदान किया गया।
डॉ. भंवरसिंह पोर्ते आदिवासी सेवा पुरस्कार आदिवासियों की सेवा और आर्थिक उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, नवा रायपुर (श्री सी. श्रीनिवास यंगम) को प्रदान किया गया।
स्व. रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार श्रम के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बलौदाबाजार जिले के अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड, यूनिट कुकुरडीह, सीमेंट वर्क्स, सरकीपार को प्रदान किया गया।
पंडित लखनलाल मिश्र सम्मान अपराध अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए रायपुर जिले के श्री सुरेश कुमार ध्रुव, उप पुलिस अधीक्षक को प्रदान किया गया।
छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान देश के बाहर अप्रवासी भारतीयों द्वारा सामाजिक कल्याण, साहित्य, मानव संसाधन, निकाय अथवा आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दंतेवाड़ा जिले की श्रीमती दीपाली सरावगी को प्रदान किया गया।
किशोर साहू सम्मान हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में रचनात्मक लेखन, निर्देशन, अभिनय, पटकथा एवं निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री सैयद ताहिर अली (करन खान) को प्रदान किया गया।
लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान छत्तीसगढ़ी लोकगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दुर्ग जिले की श्रीमती साधना यादव को प्रदान किया गया।
देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार पंथी नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आरंग, रायपुर जिले के श्री सी.एल. रात्रे को प्रदान किया गया।
खुमान साव सम्मान छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री चंद्रभूषण वर्मा को प्रदान किया गया।
लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार आंचलिक साहित्य एवं लोक कविता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दुर्ग जिले के श्री दुर्गा प्रसाद पारकार को प्रदान किया गया।
किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में निर्देशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री मोहन सुंदरानी को प्रदान किया गया।
बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान विधि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मयूर विहार, दिल्ली के श्री कौस्तुभ शुक्ला एवं रायपुर जिले के श्री हेमन्त कुमार मिश्र को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
माता बहादुर कलारिन सम्मान महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष एवं नारी उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कांकेर जिले की श्रीमती बुलबुल बैदया को प्रदान किया गया।
पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान रचनात्मक लेखन और हिन्दी भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री अनंत विजय को प्रदान किया गया।
डॉ. तीज़न बाई सम्मान पंडवानी कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पाहंदा, दुर्ग जिले के श्री चेतन लाल देवांगन को प्रदान किया गया।
चेंदरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री सत्येन्द्र कुमार उपाध्याय 'सन्नी' को प्रदान किया गया।
संत रविदास सम्मान सामाजिक समरसता तथा साहित्य एवं काव्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बालोद जिले के श्री जगदीश प्रसाद देशमुख को प्रदान किया गया।
राज्य अलंकरण समारोह छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्वों के सम्मान का महत्वपूर्ण अवसर बना। इन पुरस्कारों के माध्यम से राज्य की लोककला, संस्कृति, साहित्य, सामाजिक समरसता, जनजातीय परंपराओं और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को प्रतिष्ठित पहचान मिली।
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन अवसर पर आयोजित राज्य अलंकरण समारोह ने प्रदेश की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ ही नई पीढ़ी को समाज और राज्य के विकास में रचनात्मक योगदान देने की प्रेरणा दी।
00 हमर रेलवे, हमर छत्तीसगढ़ थीम पर आधारित स्टॉल में रेलवे की उपलब्धियों, आधुनिक तकनीक, विकास परियोजनाओं एवं यात्री सुविधाओं का अनूठा संगम
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के 26वें स्थापना दिवस के अवसर पर अटल नगर, नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मैदान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का प्रदर्शनी स्टॉल लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस वर्ष आयोजित राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न विभागों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित उपक्रमों एनटीपीसी, एसईसीएल, सेल, बीएसएनएल सहित अनेक संस्थानों द्वारा अपनी उपलब्धियों एवं गतिविधियों को प्रदर्शित करने के लिए आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं। इसी क्रम में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा हमर रेलवे, हमर छत्तीसगढ़ थीम पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी स्टॉल तैयार किया गया है, जहां रेलवे की विकास यात्रा, उपलब्धियों, आधुनिक तकनीक और भविष्य की योजनाओं को रोचक एवं तकनीक आधारित माध्यमों से प्रस्तुत किया जा रहा है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के इस स्टॉल में आकर्षक बैकलिट पैनल्स के माध्यम से रेलवे की प्रमुख उपलब्धियों, अधोसंरचना विकास, नई रेल लाइन परियोजनाओं, पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं एवं वर्तमान में प्रगतिरत परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की गई है। वहीं, स्टॉल में स्थापित आरएस वॉल्व सिमुलेटर आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण बना हुआ है। इसके माध्यम से बच्चे, युवा एवं अन्य आगंतुक ट्रेन के इंजन के संचालन का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। यह अनुभव उन्हें रेल परिचालन की तकनीकी कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर प्रदान कर रहा है।रायपुर रेलवे स्टेशन पर जारी मेजर रि-डेवलपमेंट कार्य तथा पुनर्विकास के बाद स्टेशन के प्रस्तावित आधुनिक एवं भव्य स्वरूप को दर्शाता आकर्षक मॉडल भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इसके साथ ही एक बड़ी स्क्रीन पर रायपुर स्टेशन के पुनर्विकास कार्य की वॉक-थ्रू फिल्म प्रदर्शित की जा रही है, जिसके माध्यम से आगंतुक स्टेशन के भावी स्वरूप एवं आधुनिक यात्री सुविधाओं की झलक देख पा रहे हैं।
00 पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह में 24 हजार 800 विद्यार्थियों को उपाधियां एवं डिप्लोमा किए गए प्रदान
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि युवा आत्मविश्वास, निरंतर प्रयास और अपनी विशिष्ट प्रतिभा के बल पर जीवन में आगे बढ़ें। असफलता से घबराने के बजाय उसके कारणों को समझें और गलतियों से सीखकर पुन: प्रयास करें। शिक्षा का उपयोग व्यक्तिगत सफलता के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी होना चाहिए। राज्यपाल आज पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़, बिलासपुर के सप्तम दीक्षांत समारोह को अध्यक्षीय आसंदी से संबोधित कर रहे थे। समारोह में पिछले पांच वर्षों के 24 हजार 800 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा की उपाधियां प्रदान की गईं।
समारोह में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विधायक धरमलाल कौशिक एवं श्री सुशांत शुक्ला, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष कैलाश चंद्र शर्मा, नेक अध्यक्ष श्री नागेश्वर राव, विश्वविद्यालय के कुलपति श्री वीरेंद्र कुमार सारस्वत तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की उन्नत आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण और स्मारिका अभ्युदय का विमोचन किया गया। विश्वविद्यालय की ओर से एकलव्य विद्यालय देवपहरी के 311 विद्यार्थियों को बैग, स्वेटर, टिफिन एवं पानी की बोतलें वितरित की गईं।राज्यपाल डेका ने उपाधि एवं पदक प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियों में अभिभावकों, गुरुजनों और शिक्षण संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान है। दीक्षांत समारोह जीवन में नई ऊर्जा और नई जिम्मेदारियों के साथ आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। मुक्त विश्वविद्यालय दूरस्थ क्षेत्रों तक ज्ञान पहुंचाने और शिक्षा के अवसरों का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इंटरनेट और डिजिटल तकनीक ने ज्ञान तक पहुंच आसान बनाई है। युवाओं को इन साधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए अपनी विचारशक्ति और रचनात्मक क्षमता को विकसित करना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि आज रोजगार और आजीविका के अनेक नए क्षेत्र उपलब्ध हैं। युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर पूरी मेहनत से आगे बढऩा चाहिए। जीवन में अपना स्थान स्वयं बनाना पड़ता है। दूसरों की नकल अथवा तुलना करने के बजाय अपनी विशिष्टता पर विश्वास रखें। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों पर अपनी अपेक्षाएं थोपने के बजाय उनकी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप आगे बढऩे में सहयोग दें। डेका ने जीवन में आंतरिक संतुष्टि, संतुलन और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की आवश्यकता बताई। उन्होंने डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से बचने और अपने समय का सार्थक कार्यों में उपयोग करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने, पौधे लगाने और उनकी देखभाल जैसे कार्यों से समाज में बदलाव ला सकता है। जीवन में ऐसा कार्य अवश्य करें, जिसका उद्देश्य केवल लेन-देन नहीं, बल्कि सकारात्मक परिवर्तन हो।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने उपाधि एवं पदक प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के उत्थान में करें। स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक पंडित सुंदरलाल शर्मा के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय उन लोगों के सपनों को साकार कर रहा है, जो कामकाज अथवा अन्य परिस्थितियों के कारण नियमित अध्ययन नहीं कर पाते। उन्होंने विश्वविद्यालय को नैक की 'ए प्लसÓ ग्रेडिंग मिलने पर बधाई दी और कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आगे बढ़ाने तथा शिक्षा की पहुंच बढ़ाने में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष श्री कैलाश चंद्र शर्मा ने दीक्षांत भाषण दिया। समारोह को नेक अध्यक्ष श्री नागेश्वर राव ने भी संबोधित किया।
कुलपति श्री वीरेंद्र कुमार सारस्वत ने स्वागत उद्बोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी। इस अवसर पर विश्व विद्यालय के कार्य परिषद के सदस्य, अन्य अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी , प्राध्यापकगण सहित बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक, और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे ।
रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को सीबीआई की टीम मंगलवार को लेकर रायपुर पहुंची। उसे फ्लाइट ई6 2307 से दिल्ली से रायपुर लाया गया है जहां कल उसे उसे स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा। फिलहाल उसे सीबीआई अपने माना रोड स्थित सीबीआई मुख्यालय में रखा है। उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने कल ही दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट से 4 नवंबर तक ट्रांजिट रिमांड पर लिया है जहां कल रिमांड खत्म हो रही है।