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कोमाखान रेलवे स्टेशन पर 37 किलो गांजा जब्त, तीन अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार

कोमाखान रेलवे स्टेशन पर 37 किलो गांजा जब्त, तीन अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार

 महासमुंद । महासमुंद जिले की कोमाखान पुलिस ने अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 37.400 किलोग्राम गांजा, तीन मोबाइल फोन समेत 18.95 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि खेप को ओडिशा के भवानीपटना से राजस्थान के कोटा ले जाकर खपाने की तैयारी थी।

एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान कोमाखान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि तीन संदिग्ध रेलवे स्टेशन परिसर में ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उनके बैगों से गांजा बरामद हुआ। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि मादक पदार्थ को ओडिशा से लाकर राजस्थान पहुंचाने की योजना बनाई गई थी।

पुलिस ने बरामद मादक पदार्थ के साथ तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। मामले में थाना कोमाखान में अपराध क्रमांक 130/2026 दर्ज कर आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(B)(II)(C) एवं 29 के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई। त्वरित सूचना, प्रभावी समन्वय और सतर्क पुलिसिंग के चलते यह कार्रवाई सफल रही।

महतारी वंदन योजना से उमा सिंह अपनी बिटिया के भविष्य के लिए कर रहीं बचत

महतारी वंदन योजना से उमा सिंह अपनी बिटिया के भविष्य के लिए कर रहीं बचत

 रायपुर:प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए आर्थिक निर्णय लेने का अवसर देने वाली महतारी वंदन योजना ग्रामीण अंचल की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता अब महिलाओं के लिए केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने का माध्यम नहीं, बल्कि बचत और भविष्य की बेहतर योजना का आधार भी बन रही है।

सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खुटिया की निवासी उमा सिंह ने महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता को अपनी बिटिया के उज्ज्वल भविष्य से जोड़कर एक प्रेरणादायी पहल की है। उन्हें योजना के तहत हर माह मिलने वाली 1,000 रूपए की राशि वे अपनी बेटी के नाम पर पोस्ट ऑफिस में जमा कर रही हैं। उनका उद्देश्य भविष्य में इस बचत का उपयोग बेटी की पढ़ाई-लिखाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए करना है।

आज की छोटी बचत, कल बेटी के सपनों की बड़ी उड़ान
उमा सिंह बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत हर माह मिलने वाली राशि उनके लिए आर्थिक सहारा है। उन्होंने इस राशि को तत्काल खर्च करने के बजाय अपनी बेटी के भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि नियमित रूप से की जा रही यह छोटी-सी बचत आने वाले समय में बेटी की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग बनेगी।
उमा सिंह की यह पहल बताती है कि शासन की योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता का उपयोग महिलाएं अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप किस तरह परिवार के भविष्य को मजबूत बनाने में कर रही हैं। नियमित राशि ने उनमें बचत की आदत विकसित करने के साथ आर्थिक निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ाया है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बनी योजना
महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। योजना की राशि से महिलाएं घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बचत और भविष्य की जरूरतों के लिए भी आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं।
उमा सिंह ने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि  विष्णु भैया ने महतारी वंदन योजना के माध्यम से उन्हें अपनी बेटी के भविष्य के लिए बचत करने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि योजना से मिलने वाली राशि उनके लिए अपनी बिटिया के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण शुरुआत है।
जब महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल मिलता है, तो वे केवल अपनी वर्तमान जरूरतें ही पूरी नहीं करतीं, बल्कि आने वाले कल की मजबूत नींव भी तैयार करती हैं। महतारी वंदन योजना की राशि से शुरू हुई उनकी यह बचत आज उनकी बेटी के सपनों को सुरक्षित करने की दिशा में एक उम्मीद बन गई है। 

PWD में लागू होगा 'वमिस', सम्पूर्ण कार्यप्रणाली होगी पारदर्शी

PWD में लागू होगा 'वमिस', सम्पूर्ण कार्यप्रणाली होगी पारदर्शी

 निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए कैबिनेट ने दी है मंजूरी

रायपुर। लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए वर्क एण्ड अकाउंट्स मैनेजमेंट इंटीग्रेशन सिस्टम (WAMIS) लागू किया जाएगा। 'वमिस' (WAMIS) से कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB), बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन तथा गुणवत्ता की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगी। इस प्रणाली से निर्माण कार्यों की पारदर्शिता बढ़ेगी, भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आएगी तथा कार्यों की रियल-टाइम निगरानी की जा सकेगी। इससे निर्माण परियोजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और जवाबदेह होगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विगत 5 अगस्त को हुई कैबिनेट की बैठक में लोक निर्माण विभाग में 'वमिस' को लागू करने की मंजूरी दी गई है। सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित इस प्रणाली को पहले लोक निर्माण विभाग में लागू किया जाएगा, जिसके बाद अन्य निर्माण एवं अधोसंरचना विभागों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। राज्य कैबिनेट का यह निर्णय उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव द्वारा विभाग में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समयबद्धता पर लगातार दिए जा रहे जोर की परिणति है। लोक निर्माण विभाग में डिजिटल कार्य-संस्कृति की दिशा में राज्य शासन की यह महत्वपूर्ण पहल है।उप मुख्यमंत्री साव लोक निर्माण विभाग में प्रत्येक स्तर पर उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने निर्माण कार्यों की स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया को कागजी औपचारिकताओं से मुक्त कर पूर्णतः ऑनलाइन एवं अभिलेख-आधारित करने लगातार जोर दे रहे थे। राज्य कैबिनेट की मोहर के बाद अब इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में प्रचलित कार्य एवं लेखा प्रबंधन प्रणालियों के तुलनात्मक अध्ययन तथा सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित एवं अनेक राज्यों में सफलतापूर्वक संचालित 'वमिस' (WAMIS) को छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं के अनुरूप सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया। इसी आधार पर प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।

क्या है 'वमिस'?
'वमिस' (Work & Accounts Management Integration System) भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौ‌द्योगिकी मंत्रालय के अधीन संस्थान सी-डैक, पुणे द्वारा विकसित एक एकीकृत प्रणाली है, जो किसी भी निर्माण कार्य के सम्पूर्ण जीवन-चक्र... प्रारंभिक प्रस्ताव से लेकर कार्य पूर्णता एवं अंतिम भुगतान तक को डिजिटल रूप में संचालित करती है। इस प्रणाली में कार्यों की प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति, ई-प्राक्कलन (e-Estimate) एवं अनुमानित लागत का ऑनलाइन निर्धारण, ई-प्रोक्योरमेंट (निविदा प्रक्रिया) से एकीकरण, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB) मापन पुस्तिका का डिजिटलीकरण, ठेकेदारों के देयकों (बिल) की ऑनलाइन तैयारी एवं भुगतान, मासिक लेखा, कैशबुक एवं बजट आबंटन के विरुद्ध व्यय का प्रबंधन, जियो-टैग्ड छायाचित्रों सहित कार्यों की गुणवत्ता एवं भौतिक प्रगति की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएँ एक ही प्लेटफॉर्म पर समाहित हैं।

लोक निर्माण विभाग के कार्यों में आएंगे ये बदलाव
राज्य में 'वमिस' के लागू होने के बाद कार्य के सभी स्तरों में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसमें प्रत्येक कार्य की स्वीकृति, निविदा, मापन एवं भुगतान का डिजिटल अभिलेख उपलब्ध रहेगा। इससे निर्माण कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। वरिष्ठ अधिकारी एवं शासन स्तर पर कार्यों की भौतिक तथा वित्तीय प्रगति की समवर्ती निगरानी संभव होगी।

'वमिस' से ठेकेदारों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा। देयकों की ऑनलाइन प्रक्रिया से ठेकेदारों को भुगतान में विलंब कम होगा और परियोजनाओं की गति बढ़ेगी। अधिकांश प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम से कम होने तथा मापन एवं बिलिंग प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से त्रुटि तथा अनियमितता की संभावना घटेगी।

इस प्रणाली से लेखा संधारण में भी सुधार आएगा। महालेखाकार कार्यालय को प्रस्तुत की जाने वाली मासिक लेखा प्रविष्टियाँ इससे स्वतः तैयार हो जाएंगी। विभागीय परिसंपत्तियों एवं व्यय का एकीकृत डेटाबेस हमेशा उपलब्ध रहने से विभागीय फैसलों और नीतियों के निर्धारण में भी सहायता मिलेगी।
"शासन का संकल्प है कि जनता के धन से बनने वाला प्रत्येक निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण हो और निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हो। 'वमिस' (WAMIS) के माध्यम से लोक निर्माण विभाग की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली पारदर्शी, अभिलेख-आधारित और जवाबदेह बनेगी।" - अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री

 
 
 

 

 

तीन साल बाद फिर धमाल मचाएंगे अमलेश और मन, ‘तोर मयारु मोर मयारु’ का ट्रेलर लॉच

तीन साल बाद फिर धमाल मचाएंगे अमलेश और मन, ‘तोर मयारु मोर मयारु’ का ट्रेलर लॉच

 रायपुर। छत्तीसगढ़ी सिनेमा के स्टार कॉमेडी किंग अमलेश नागेश और  मन कुरैशी की जोड़ी तीन साल बाद एक बार फिर बड़े पर्दे पर धमाल मचाने को तैयार हैं। नीलजय फिल्म्स के बैनर तले बनी फ़िल्म ‘तोर मयारु मोर मयारु’ में अमलेश नागेश आधुनिक यूट्यूबर माही के किरदार में नजर आएंगे। वहीं मन कुरैशी भावुक और दिल जीत लेने वाले बैंड मास्टर महिंदर की भूमिका में दिखेंगे।

‘तोर मयारु मोर मयारु’ के निर्माता प्रणय गर्ग और को-प्रोड्यूसर निशेष त्रिपाठी हैं। निर्देशन की कमान राहुल प्रताप सिंह ने संभाली हैl   तोर मयारु मोर मयारु’ को प्रसिद्ध फिल्म मेकर मनीष मानिकपुरी प्रस्तुत कर रहे हैं। फिल्म का ट्रेलर 22 अगस्त को राजधानी रायपुर के एक सितारा हॉटल में छत्तीसगढ़ फ़िल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन समेत सतीश जैन, मनोज वर्मा, संतोष जैन, योगेश अग्रवाल, मोहन सुंदरानी, लखी सुंदरानी, अनुमोद राजवैद्य, अनुपम वर्मा, अनिरुद्ध दुबे एवं पवन सिंह के जैसी हस्तियों की मौजूदगी में लॉन्च हुआ।फिल्म में संजय महानंद, सतीश जैन, उपासना वैष्णव, उर्वशी साहू, रजनीश झांझी, प्रदीप शर्मा, हेमलाल कौशल, अंजलि चौहान और क्रांति दीक्षित जैसे दिग्गज कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।

रोमांस और कॉमेडी से भरपूर फिल्म  में लोक गीतों की मिठास और पुरानी परंपराओं को भी रुपहले पर्दे पर उतारा गया है। सोशल मीडिया के जुनून वाली नई पीढ़ी का  स्टाइल फिल्म में देखने को मिलेगा।

फिल्म की नायिका इशिका यादव चुलबुली गांव की लड़की तथा काजल सोनबेर शहर की स्मार्ट लड़की ‘गायत्री’ के किरदार में नजर आएंगी। अमलेश,  मन, इशिका व काजल इन चार मुख्य किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती कहानी में हंसी, रोमांस और भावनाओं का खूबसूरत मेल है। फिल्म में सात मनमोहक गीत हैं, जिनके लिए अनुराग शर्मा, अल्का चंद्राकर और अनुपमा निश्रा जैसे सुरीले गायकों ने अपनी आवाज दी है। संगीत नवलदास मानिकपुरी, अनुराग शर्मा और परवेज खान का है।पारिवारिक मनोरंजन के तौर पर बनाई गई ‘तोर मयारु मोर मयारु’ में कॉमेडी, रोमांस और भावनाओं का ऐसा संगम है, जो दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखने का दम रखता है। ट्रेलर लॉच कार्यक्रम का संचालन आरजे नमित ने किया।

 

 
 

 

 

छत्तीसगढ़ NSUI में बड़ा फेरबदल, 48 घंटे में 9 नियुक्तियां रद्द; संगठन में मची हलचल

छत्तीसगढ़ NSUI में बड़ा फेरबदल, 48 घंटे में 9 नियुक्तियां रद्द; संगठन में मची हलचल

 रायपुर : छत्तीसगढ़ NSUI में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 20 अगस्त को जारी आदेश के जरिए चार विधानसभा अध्यक्षों और पांच जिलाध्यक्षों समेत कुल 9 पदों पर नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। हालांकि, नियुक्ति के महज 48 घंटे बाद ही संगठन ने सभी फैसलों को रद्द कर दिया। अचानक नियुक्तियां वापस लिए जाने से NSUI के भीतर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

क्रिप्टो ट्रेडिंग में रकम दोगुनी करने का झांसा, 17 लोगों से 1.80 करोड़ की ठगी; दो भाइयों पर FIR

क्रिप्टो ट्रेडिंग में रकम दोगुनी करने का झांसा, 17 लोगों से 1.80 करोड़ की ठगी; दो भाइयों पर FIR

 सरगुजा। क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग में रकम दोगुनी करने और हर महीने कमीशन देने का झांसा देकर 17 लोगों से 1 करोड़ 80 लाख रुपये से अधिक की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि निवेश के नाम पर रकम लेने के बाद आरोपियों ने न तो मुनाफा दिया और न ही मूलधन लौटाया। रकम वापस मांगने पर दोनों भाइयों ने मोबाइल बंद कर दिया और परिवार सहित फरार हो गए। मामले में अंबिकापुर के गांधीनगर थाना पुलिस ने बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ क्षेत्र निवासी दो सगे भाइयों अक्षय लाल टोप्पो और संतोष टोप्पो के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

मामले की शिकायत ग्राम आरा, थाना राजपुर निवासी प्रभु नारायण ने एसएसपी राजेश अग्रवाल से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर बड़ी रकम ली गई, लेकिन बाद में उसे वापस नहीं किया गया। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने शिकायत की जांच की। जांच के दौरान आरोपियों को रकम दिए जाने की पुष्टि होने के बाद गांधीनगर थाना पुलिस ने दोनों भाइयों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अलग-अलग गांवों के कुल 17 लोगों से रकम ली थी। इनमें टेनू राम से 1.27 लाख, गवर साय से 40 हजार, पंकज चौधरी से 8 लाख, जुगेश्वर बेक से 6.60 लाख, संजीवन से 3.20 लाख, शिवशंकर बेक से 2 लाख और कृपाशंकर बेक से 3.50 लाख रुपये लेने का आरोप है।

इसके अलावा गोविंद से 13.50 लाख, जंगला मिंज से 2.50 लाख, शिवपाल तिर्की से 13 लाख, दयाशंकर बेक से 2 लाख, ओडिशा के बसंत कुमार ओगर से 50 लाख, किशोर कलू से 5 लाख, संदीप दास से 40 लाख, गांधी टोप्पो से 4.20 लाख, शिकायतकर्ता प्रभु नारायण से 20.85 लाख और भूपेंद्र सिंह से 5.20 लाख रुपये लेने की बात जांच में सामने आई है।

बताया गया है कि आरोपियों ने 29 दिसंबर 2024 से 5 अगस्त 2025 के बीच नकद, चेक और फोन-पे के जरिए लोगों से रकम ली। शुरुआत में निवेशकों को मुनाफे का भरोसा दिलाया गया, लेकिन जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो आरोपी लगातार टालमटोल करने लगे। बाद में दोनों ने मोबाइल फोन बंद कर दिए और परिवार के साथ फरार हो गए।

गांधीनगर थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस अब मामले में रकम के लेन-देन, अन्य संभावित पीड़ितों और आरोपियों से जुड़े आर्थिक नेटवर्क की जांच कर रही है।

CG – मवेशियों के खून से सनी सड़क, मवेशियों के झुंड को ट्रक ने रौंदा, 14 की दर्दनाक मौत, मौके पर मची अफरा-तफरी…

CG – मवेशियों के खून से सनी सड़क, मवेशियों के झुंड को ट्रक ने रौंदा, 14 की दर्दनाक मौत, मौके पर मची अफरा-तफरी…

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से सड़क हादसे को लेकर बड़ी खबर सामने आई। बसंतपुर थाना क्षेत्र के रेवाडीह स्थित राज इंपीरियल होटल के पास सड़क पर बैठे मवेशियों के झुंड में तेज रफ्तार ट्रक घुस गया। हादसे में करीब 14 मवेशियों की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ  समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में मवेशी सड़क पर बैठे हुए थे। इसी दौरान तेज गति से गुजर रहे ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई।

हादसे के बाद सड़क पर मवेशियों के शव बिखर गए, जिससे मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने के बाद संबंधित अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति को संभाला गया।

हादसे के बाद नेशनल हाईवे की काऊ कैचर टीम और नगर निगम की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर इन दिनों बड़ी संख्या में गौवंश सड़कों पर नजर आ रहा है।

लोगों के मुताबिक, सड़क पर बैठे मवेशी वाहन चालकों को दूर से दिखाई नहीं देते। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक मवेशी आने से गंभीर दुर्घटना का खतरा बना रहता है। शहर की कई सड़कों पर मवेशियों के सड़क किनारे या बीच मार्ग में बैठे रहने की समस्या लगातार सामने आती रही है। भारी वाहनों और तेज रफ्तार यातायात वाले मार्गों पर यह स्थिति वाहन चालकों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी सड़क पर बैठे मवेशियों के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। हादसे के बाद बेसहारा और आवारा मवेशियों की पहचान, उनकी देखरेख और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि संबंधित विभागों को हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही प्रभावी व्यवस्था करनी चाहिए।

मवेशियों के लिए सुरक्षित शेल्टर, नियमित निगरानी और सड़कों से मवेशियों को हटाने की व्यवस्था लगातार प्रभावी तरीके से चलाने की जरूरत बताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम, नेशनल हाईवे से जुड़े अमले और संबंधित विभागों से सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि कुछ दिनों के लिए अभियान चलाकर मवेशियों को हटाना पर्याप्त नहीं है।

राजनांदगांव की यह घटना सड़क सुरक्षा और पशु संरक्षण दोनों से जुड़ा गंभीर सवाल खड़ा करती है। करीब 14 मवेशियों की मौत के बाद अब जरूरत है कि प्रशासन सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी रोकने और उनके लिए सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की

 गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के दिए निर्देश

लापरवाही और धीमा प्रगति पर होगी कार्रवाई

रायपुर, 24 अगस्त 2026- उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मुंगेली जिले के विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी विकास कार्यों को निर्धारित समयावधि के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंबे समय से लंबित कार्यों को प्राथमिकता के साथ जल्दी पूरा करने को कहा। 

उप मुख्यमंत्री  साव ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्ध प्रगति को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों से कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कार्यों में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों एवं संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

 साव ने बैठक में शासन की प्राथमिकता के अनुरूप विकास कार्यों को गति देते हुए उनका लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को विकास कार्यों की निरंतर समीक्षा एवं स्थल निरीक्षण करते हुए प्रगति पर कड़ी नजर रखने को कहा। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और कार्यों की धीमी प्रगति पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की बात कही।

श्रावण के अंतिम सोमवार को अमरकंटक पहुंचे उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

श्रावण के अंतिम सोमवार को अमरकंटक पहुंचे उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

 मां नर्मदा के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की

कांवडि़यों के बीच बैठकर ग्रहण किया प्रसाद

मां नर्मदा के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की
मां नर्मदा के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की

रायपुर-- श्रावण मास के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने मध्यप्रदेश के पवित्र तीर्थस्थल अमरकंटक पहुंचकर मां नर्मदा के दर्शन किए। उन्होंने नर्मदा उद्गम स्थल स्थित नर्मदा कुंड में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात उन्होंने जलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का पूजन किया और प्रदेश एवं प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने नर्मदा कुंड एवं नर्मदा उद्गम स्थल के पवित्र परिसर में पूजा-अर्चना कर मां नर्मदा का आशीर्वाद लिया। श्रावण मास के अंतिम सोमवार को अमरकंटक में श्रद्धा और आस्था का विशेष वातावरण रहा। इस दौरान  शर्मा ने धार्मिक अनुष्ठानों के साथ जनकल्याण की भावना को सर्वाेपरि रखते हुए प्रदेश की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

कांवडि़यों के बीच आत्मीयता से बिताया समय

अमरकंटक प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा कांवडि़यों के बीच भी पहुंचे। उन्होंने मृत्युंजय आश्रम में कांवडि़यों को भोजन प्रसादी वितरित की और उनके साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण की। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्मीय बातचीत कर उनकी कांवड़ यात्रा, यात्रा मार्ग और उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। कांवडि़यों के साथ सहजता से संवाद करते हुए उन्होंने उनकी यात्रा के अनुभव भी सुने।

भोरमदेव-अमरकंटक कांवड़ यात्रा के लिए विशेष व्यवस्थाएं

 

 
 

उल्लेखनीय है कि अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक लगभग 150 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के निर्देश पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। यात्रा मार्ग पर कांवडि़यों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य, सुरक्षा, भोजन और रात्रि विश्राम सहित आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। कांवडि़यों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ पुलिस पेट्रोलिंग दल भी तैनात किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

मृत्युंजय आश्रम में निःशुल्क भोजन और रात्रि विश्राम की व्यवस्था

अमरकंटक स्थित मृत्युंजय आश्रम में कांवडि़यों के लिए निःशुल्क भोजन एवं रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई है। यहां श्रद्धालुओं को दाल-भात, सब्जी के साथ खीर, पूरी और हलवा सहित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे लंबी कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को विश्राम के साथ पौष्टिक भोजन की सुविधा मिल रही है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि कांवडि़यों की सुविधा और सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सावन माह के इस पवित्र अवसर पर भोरमदेव से अमरकंटक तक श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी कांवड़ यात्रा को सुगम बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि सभी भक्तजन श्रद्धा, उत्साह और सुरक्षित वातावरण में अपनी कांवड़ यात्रा पूरी कर सकें।

मुख्यमंत्री साय 25 अगस्त को महतारी वंदन योजना के 31वीं किस्त की राशि करेंगे जारी

मुख्यमंत्री साय 25 अगस्त को महतारी वंदन योजना के 31वीं किस्त की राशि करेंगे जारी

 डौण्डीलोहारा में आयोजित समारोह में 67 लाख 28 हजार 918 बहनों के खाते में 631 करोड़ से अधिक की राशि का करेंगे अंतरण

रायपुर-- मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय 25 अगस्त को बालोद जिले के विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डीलोहारा के लाल रघुवीर सिंह स्टेडियम में आयोजित बिहान दीदी एवं स्व-सहायता समूह के सम्मान समारोह के अवसर पर महतारी वंदन योजना के 31वीं किस्त 67 लाख 28 हजार 918 हितग्राहियों के खाते में 631 करोड़ 38 लाख 37 हजार 700 रूपये की राशि का अंतरण करेंगे। 

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  विष्णु भैय्या के द्वारा रक्षाबंधन के ठीक पूर्व महतारी वंदन योजना की राशि बहनों के खातें में सीधे अंतरण कर लाभान्वित करेंगे। राज्य सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से प्रतिमाह मिलने वाली राशि महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक सशक्तिकरण एवं चिकित्सा, स्वास्थ्य तथा सुपोषण के लिए अत्यंत मददगार साबित हो रहा है। इसके अलावा इस राशि का उपयोग राज्य की महिलाओं के द्वारा बेटियों की सुरक्षित एवं सुखद भविष्य हेतु सुकन्या समृद्धि योजना में जमा करने के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के निष्पादन में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। महतारी वंदन योजना से अब तक 30 किस्तों में 19 हजार 444 करोड़ की सहायता राशि बहनों को प्रदान की जा चुकी है। ज्ञातव्य है कि सितंबर 2026 की 31वीं किस्त की सहायता राशि का भुगतान सितंबर माह में किया जाना है, लेकिन मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा बहनों को सौगात के तौर पर सितंबर माह की राशि को राखी त्योहार के पूर्व बहनोें के खातें में अंतरित किया जाएगा। 

श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिल रही उत्कृष्ट शिक्षा, उनके सपनों को पंख देना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिल रही उत्कृष्ट शिक्षा, उनके सपनों को पंख देना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 श्रमिक परिवारों के बच्चे आगे बढ़ेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का सपना होगा पूरा

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

मुख्यमंत्री ने श्रमिक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों का किया सम्मान, उनके साथ बैठकर किया भोजन और साझा किए अपने जीवन के अनुभव

मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा - बड़े सपने देखें, खूब मेहनत करें और देश-प्रदेश की सेवा का संकल्प लेकर आगे बढ़ें

1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों के खातों में डीबीटी से अंतरित हुई 39.67 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि

श्रमिक कल्याण की 67 योजनाओं से मिल रही सामाजिक सुरक्षा, ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि सीधे श्रमिकों के खातों में

रायपुर 24 अगस्त 2026/ श्रमिक हमारे विकास की मजबूत नींव हैं। अपने परिश्रम से वे सड़कें, भवन, पुल और विकास की अनेक संरचनाएं खड़ी करते हैं। ऐसे श्रमिक परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। श्रमिक परिवारों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे, अपने सपनों को पूरा करेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का संकल्प भी साकार होगा।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

समारोह में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने योजना के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों से आत्मीय संवाद किया और शिक्षा, खेल, कला तथा सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों को 39 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को आज व्यवस्थित यूनिफॉर्म में, आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी में संवाद करते और शिक्षा के साथ खेल तथा अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इन बच्चों का आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि उचित अवसर और अच्छी शिक्षा मिले तो कोई भी परिस्थिति प्रतिभा को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

उन्होंने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 बच्चों के साथ की गई थी। इस वर्ष इसका विस्तार करते हुए 200 बच्चों को योजना के अंतर्गत प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में शिक्षा का अवसर दिया गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित प्रतिभावान बच्चे राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना कभी श्रमिक परिवारों के लिए कठिन सपना हुआ करता था, आज राज्य सरकार उस सपने को साकार कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल बच्चों को अच्छे विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की योजना नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर वातावरण, आत्मविश्वास और अपने सपनों को पूरा करने के लिए समान अवसर देने की पहल है।

श्रमिकों के परिश्रम से खड़ी होती है विकास की मजबूत बुनियाद

मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश और देश के निर्माण में श्रमिकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि शहरों की ऊंची इमारतों से लेकर गांवों की सड़कों तक और बड़े पुलों से लेकर विकास की अनेक अधोसंरचनाओं के पीछे श्रमिकों का परिश्रम है। सरकार का दायित्व है कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण के लिए 67 प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व सहायता, दिव्यांग सहायता, पेंशन, कौशल उन्नयन, रोजगार और आवास सहित जीवन के विभिन्न चरणों में सहायता देने वाली योजनाएं शामिल हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इन योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पात्र श्रमिकों तक पहुंचे और सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा हो।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

शिक्षा विकास का मूलमंत्र, परिस्थितियां नहीं रोक सकतीं आगे बढ़ने का रास्ता

मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए अपने जीवन के संघर्ष और अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बच्चों से कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, शिक्षा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अभी से बड़े सपने देखें और तय करें कि भविष्य में किस क्षेत्र में जाकर देश और प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी, तो कोई व्यवसाय, समाजसेवा अथवा अन्य क्षेत्र में जाना चाहता है। लक्ष्य कोई भी हो, उसकी मजबूत नींव शिक्षा ही है। इसलिए बच्चों को मिले इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हेतु ऋण तथा विदेश में अध्ययन के लिए सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। सरकार चाहती है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान बच्चे की शिक्षा और उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी खुल रहे शिक्षा और विकास के नए द्वार

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन के बाद प्रदेश के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी शिक्षा और विकास की पहुंच कठिन थी, वहां अब नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के वही अवसर मिलें, जो बड़े शहरों के बच्चों को उपलब्ध हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र को ध्येय मानकर छत्तीसगढ़ सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सिद्धि के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और विकास के अवसर पहुंचाना आवश्यक है। श्रमिक परिवारों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ढाई वर्षों में श्रमिकों के खातों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार नई पहल की जा रही है। श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से वर्तमान में 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ श्रमिकों को दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में अंतरित की गई है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक का बच्चा परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को सीमित न करे, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, वैज्ञानिक, उद्यमी अथवा अपनी पसंद के किसी भी क्षेत्र में ऊंचाइयां हासिल करे।

श्रम मंत्री ने बताया कि बदलते रोजगार परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए श्रमिक कल्याण योजनाओं का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। पार्सल डिलीवरी से जुड़े श्रमिकों को वाहन खरीदने के लिए सहायता तथा चरवाहों को आर्थिक सहायता देने जैसी नई योजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।

राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण आवश्यक है और इसके लिए प्रत्येक परिवार को विकास की यात्रा में साथ लेकर चलना होगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का बड़ा अवसर दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना ने ऐसे परिवारों के प्रतिभावान बच्चों के लिए प्रतिष्ठित विद्यालयों के द्वार खोले हैं, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखारकर जीवन में नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ने और अपने माता-पिता तथा छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

किसी का सपना आईएएस बनना, किसी को मिला अंग्रेजी बोलने का आत्मविश्वास

समारोह में अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत अध्ययनरत विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। बच्चों की बातों में नए अवसर मिलने की खुशी के साथ भविष्य के बड़े सपनों का आत्मविश्वास भी दिखाई दिया।

राजनांदगांव के दिल्ली पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत बीजापुर के अतीश ने बताया कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उन्हें इतने प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ने का अवसर मिलेगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के कारण उन्हें पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला है। अतीश ने मुख्यमंत्री के सामने आईएएस अधिकारी बनकर देश और प्रदेश की सेवा करने का अपना सपना भी साझा किया।

रुंगटा पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत कबीरधाम की छात्रा इशिका डाहरे ने बताया कि पहले उन्हें विश्वास नहीं था कि वे अंग्रेजी में सहजता से बात कर पाएंगी। नए विद्यालय में मिले वातावरण और अवसरों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है। विद्यार्थियों के अभिभावकों ने भी मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना उनके लिए कठिन था, लेकिन इस योजना ने उनके बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने को साकार किया है।

बच्चों के बीच सहज हुए मुख्यमंत्री, साथ बैठकर किया भोजन

समारोह का सबसे आत्मीय दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय श्रमिक परिवारों के बच्चों के साथ दोपहर का भोजन करने बैठे। मुख्यमंत्री बच्चों के बीच सहजता से बैठे और परिवार के सदस्य की तरह उनसे बातचीत करते रहे। औपचारिक कार्यक्रम से अलग इस संवाद में बच्चों ने भी मुख्यमंत्री से खुलकर सवाल किए।

किसी ने मुख्यमंत्री के बचपन के बारे में पूछा, तो किसी ने उनकी पढ़ाई, पसंदीदा भोजन और जीवन के संघर्षों के बारे में जानना चाहा। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए बच्चों के प्रत्येक सवाल का जवाब दिया और अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्हें मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी।

मुख्यमंत्री की सहजता और आत्मीयता ने बच्चों को खासा प्रभावित किया। एक बच्चे ने उत्साह के साथ कहा - “मुख्यमंत्री जी हमारे अच्छे टीचर जैसे हैं। उनसे जितने भी सवाल पूछो, वे परेशान नहीं होते और हर सवाल का जवाब देते हैं।” बच्चों ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ बैठकर भोजन करना, उनसे खुलकर बातें करना और अपने सपने साझा करना उनके लिए ऐसा अनुभव है, जिसे वे हमेशा याद रखेंगे।

मुख्यमंत्री  साय ने बच्चों से कहा कि उनकी सफलता ही सरकार और उनके माता-पिता की सबसे बड़ी खुशी होगी। वे खूब पढ़ें, अपने सपनों को बड़ा रखें और जब जीवन में सफल हों तो समाज तथा अपने प्रदेश के प्रति अपने दायित्व को भी हमेशा याद रखें।

उल्लेखनीय है कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना का उद्देश्य आर्थिक परिस्थितियों के कारण प्रतिभावान बच्चों के अवसर सीमित न होने देना और उन्हें उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

कार्यक्रम में सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक  पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष  योगेश दत्त मिश्रा, उपाध्यक्ष किशोर महानंद, श्रम विभाग के सचिव  हिमशिखर गुप्ता सहित विभागीय अधिकारी, श्रमिक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

विष्णु के सुशासन में गांव की बेटियां बन रहीं आत्मनिर्भर, बबली यादव ने फोटो कॉपी, मशरूम और महुआ व्यवसाय से बढ़ाई आय

विष्णु के सुशासन में गांव की बेटियां बन रहीं आत्मनिर्भर, बबली यादव ने फोटो कॉपी, मशरूम और महुआ व्यवसाय से बढ़ाई आय

 00 बिहान से मिला संबल, विष्णु भैया की योजनाओं ने बढ़ाया आत्मविश्वास
रायपुर।
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लागू हो रहे विष्णु के सुशासन का लाभ गांव-गांव तक पहुंच रहा है। शासन की योजनाओं और ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत चुकतीपानी की बबली यादव ऐसी ही मेहनतकश महिला हैं, जिन्होंने विष्णु भैया की सरकार की योजनाओं से मिले अवसरों को अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से सफलता में बदला है।
बबली यादव जागृति महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उन्होंने समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर कंप्यूटर खरीदा और अपने घर पर ही फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर संबंधी कार्य शुरू किया। गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। वहीं बबली को नियमित आय का साधन भी मिल गया। एक छोटे से प्रयास ने उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी और उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया।
बबली यादव ने अपनी आय बढ़ाने के लिए खेती-किसानी से जुड़े कार्यों को भी अपनाया। उन्होंने मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इसके साथ ही वे पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी का कार्य भी कर रही हैं। इस पहल से उन्हें आय का एक और साधन मिला है और स्थानीय स्तर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़े हैं।
बबली यादव बताती हैं कि फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसे विभिन्न कार्यों से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक हो जाती है। इससे वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम हुई हैं। उनका कहना है कि पहले जहां आर्थिक जरूरतों के लिए सीमित साधन थे, वहीं अब मेहनत और समूह से मिले सहयोग के कारण उनके पास आय के कई साधन हैं।
बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। शासन की विभिन्न योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ उनके भीतर आगे बढ़ने का विश्वास पैदा किया है। वे कहती हैं कि विष्णु भैया की सरकार में गांव की महिलाओं को केवल सहायता ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने के अवसर भी मिल रहे हैं।
बबली अपनी सफलता का श्रेय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान, स्व-सहायता समूह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं को देती हैं। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं का सही उपयोग कर महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं और आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
बबली यादव की कहानी इस बात का उदाहरण है कि विष्णु के सुशासन में योजनाओं का लाभ जब मेहनत और संकल्प से जुड़ता है, तो गांव की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगता है। आज बबली स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में हो रहे प्रयासों की एक सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है।

BREAKING : 31 IPS अधिकारियों के तबादले, पवन देव बने नगर सेना महानिदेशक, देखें पूरी लिस्ट

BREAKING : 31 IPS अधिकारियों के तबादले, पवन देव बने नगर सेना महानिदेशक, देखें पूरी लिस्ट

 रायपुर।  राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में आईपीएस अधिकारियों में फेरबदल किया है। इस संबंध में गृह विभाग ने आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार 31 आईपीएस अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है।

पवन देव (1992 बैच) को महानिदेशक, नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं गुरजिंदर पाल सिंह (1994 बैच) को महानिदेशक, प्रशिक्षण के साथ महानिदेशक, राज्य पुलिस अकादमी बनाया गया है।

एसआरपी कल्लूरी (1994 बैच) को प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। प्रदीप गुप्ता (1995 बैच) को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, प्रशासन एवं चयन के साथ संचालक, अभियोजन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

इसी तरह विवेकानंद (1996 बैच) को वर्तमान कार्यों के साथ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, वित्त, योजना एवं प्रबंध का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। दीपांशु विजय काबरा (1997 बैच) को वर्तमान दायित्वों के साथ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, रेल एवं यातायात की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अमित कुमार (1998 बैच) को वर्तमान कार्य के अतिरिक्त अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का प्रभार दिया गया है। वहीं डॉ. आनंद छाबड़ा (2001 बैच) को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, तकनीकी सेवाएं, डायल-112 एवं दूरसंचार बनाया गया है।

ओमप्रकाश पॉल (2003 बैच) को पुलिस महानिरीक्षक, कानून व्यवस्था एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

देखें पूरी लिस्ट

 

 

सेना के सम्मान में राखी का धागा, नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर विद्यार्थियों ने लिखे भावपूर्ण संदेश

सेना के सम्मान में राखी का धागा, नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर विद्यार्थियों ने लिखे भावपूर्ण संदेश

 रायपुर :- रक्षाबंधन के पावन अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए भावनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। ब्व्ै। ।तउल के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों एवं अन्य रैंक सहित कुल 72 सैन्यकर्मियों ने सहभागिता की।

बहनों ने बांधी राखी, जवानों को दिया सम्मान और विश्वास का संदेश
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने सैन्यकर्मियों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। छात्राओं ने देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात समर्पित जवानों के प्रति सम्मान, स्नेह और आभार व्यक्त किया। राखी के इस पवित्र धागे ने सैनिकों और विद्यार्थियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत किया।
नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर देश के रक्षकों के नाम लिखी भावनाएं
कार्यक्रम की विशेष पहल के रूप में विद्यार्थियों ने नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर भारतीय सेना के जवानों के लिए अपने हाथों से व्यक्तिगत पत्र एवं संदेश लिखे। इन संदेशों में विद्यार्थियों ने सैनिकों के साहस, त्याग और देशसेवा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उनके सुरक्षित रहने और देश की रक्षा में सदैव सफल होने की कामना की। बच्चों के इन भावपूर्ण संदेशों ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
जवानों ने साझा किए अनुभव, विद्यार्थियों को दिया देशसेवा का संदेश
इस अवसर पर सैन्यकर्मियों ने विद्यार्थियों से संवाद किया और भारतीय सेना के जीवन, अनुशासन एवं कार्यप्रणाली से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने, जिम्मेदार नागरिक बनने और राष्ट्रहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को सेना के जीवन को करीब से समझने और सैनिकों के समर्पण एवं चुनौतियों को जानने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्टेशन मुख्यालय, रायपुर के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल अभिषेक उनियाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के समन्वय एवं संचालन में सूबेदार राज किशोर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर कर्नल अरिंदम मजूमदार, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों ने अपने संदेशों और भावनाओं के माध्यम से देश के वीर जवानों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और राष्ट्रभक्ति का भाव प्रकट किया। नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर लिखे बच्चों के संदेशों में देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों के प्रति पूरे समाज की श्रद्धा और विश्वास की झलक दिखाई दी।

सेना के सम्मान में राखी का धागा, नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर विद्यार्थियों ने लिखे भावपूर्ण संदेश

CG : 108 फीट उंचे शिवलिंग का क्रेन से हुआ अद्भुत महा अभिषेक, दर्शन को उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

CG : 108 फीट उंचे शिवलिंग का क्रेन से हुआ अद्भुत महा अभिषेक, दर्शन को उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

राजनांदगांव। शहर की शिवलिंगाकार मां पाताल भैरवी मंदिर में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की दश्मी तिथि को मंदिर के 108 फीट उंचे शिवलिंग का महा अभिषेक किया गया। इस अदभुद अलौकिक और भव्य अभिषेक का दर्शन लाभ लेने हजारों लोग मंदिर परिसर में एकत्रित हुए ।

शनिवार की रात्रि शहर में सिद्धपीठ मां पाताल भैरवी मंदिर के वृहद शिवलिंग पर क्रेन द्वारा बीस फीट ऊंचे कलश से 120 फिट ऊंचे क्रेन की सहायता से शिवलिंग का हल्दी दुग्ध से महा अभिषेक किया गया। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने हजारों श्रद्वालु मां पाताल भैरवी मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। सावन माह में विगत तीन वर्षों से तथागत पांडे और उनकी युवा टीम द्वारा यह आयोजन किया जा रहा है। उन्होने बताया कि इस कार्य में स्वतः जन सहयोग मिल रहा है। इस महा अभिषेक के लिए 120 फीट ऊंची क्रेन भिलाई से मंगाई गई थी।

 
 
मुख्यमंत्री साय ने किया जशपुर: एक परिचय पुस्तक का विमोचन

मुख्यमंत्री साय ने किया जशपुर: एक परिचय पुस्तक का विमोचन

 00 जशपुर की विशिष्ट पहचान और विकास की संभावनाओं को देश-दुनिया के सामने लाने में उपयोगी सिद्ध होगा प्रकाशन : साय

00 भारतीय लोक प्रशासन संस्थान ने जशपुर के प्रशासन, सुशासन, विकास, संस्कृति और प्राकृतिक वैभव पर किया व्यापक अध्ययन

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान दिल्ली के द्वारा प्रकाशित पुस्तक जशपुर : एक परिचय का विमोचन किया। यह पुस्तक जशपुर जिले के इतिहास, प्रशासनिक विकास, सुशासन की व्यवस्थाओं, सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन, जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और विकास की संभावनाओं पर केंद्रित एक व्यापक अध्ययन है। पुस्तक में आजादी के बाद से जशपुर की प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलावों के साथ वर्तमान प्रशासनिक संस्थाओं और कार्यप्रणाली का अध्ययन किया गया है। इस अवसर पर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर के चेयरमैन भूतपूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्रा, वाइस चेयरमैन भूतपूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. इंदिरा मिश्रा तथा वाइस चेयरमैन भूतपूर्व मुख्य सचिव तथा वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त  अजय सिंह उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण प्रकाशन के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा को बधाई देते हुए कहा कि जशपुर छत्तीसगढ़ के उन विशिष्ट अंचलों में है, जहां प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं की समृद्ध विरासत के साथ विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जशपुर की पहचान उसके सुंदर पहाड़ों, घाटियों, नदियों, जलप्रपातों और घने वनों से तो है ही, यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराएं इसे विशिष्ट बनाती हैं। उन्होंने कहा कि जशपुर की इन विशेषताओं के साथ जिले की विकास यात्रा और प्रशासनिक अनुभवों को एक पुस्तक के रूप में समेटना सराहनीय प्रयास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र की विकास यात्रा को समझने के लिए वहां के इतिहास, समाज, संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का समग्र अध्ययन आवश्यक है। 'जशपुर : एक परिचयÓ इसी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह पुस्तक केवल जशपुर की वर्तमान तस्वीर प्रस्तुत नहीं करती, बल्कि समय के साथ जिले की प्रशासनिक संरचना और विकास प्रक्रिया में आए परिवर्तनों को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।

साय ने कहा कि जशपुर का सांस्कृतिक और पारिस्थितिक स्वरूप छत्तीसगढ़ के मैदानी और औद्योगिक क्षेत्रों से अलग है। छोटानागपुर पठार के विस्तारित भू-भाग का हिस्सा होने के कारण यहां की भौगोलिक संरचना, जलवायु, वन संपदा और आजीविका के स्वरूप की अपनी विशिष्टताएं हैं। पीढिय़ों से यहां निवासरत जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, जीवन-पद्धति और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की संस्कृति को संरक्षित रखा है। यही विविधता जशपुर को अध्ययन और विकास, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनाती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते वर्षों में जशपुर ने अधोसंरचना, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका संवर्धन और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में निरंतर प्रगति की है। विकास की इस यात्रा में यह आवश्यक है कि स्थानीय विशेषताओं और जरूरतों को केंद्र में रखकर भविष्य की योजनाएं तैयार की जाएं। इस प्रकार के अध्ययन प्रशासन को क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को गहराई से समझने और विकास की भावी प्राथमिकताएं तय करने में उपयोगी आधार प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार, रोजगार और आजीविका के अवसरों का विस्तार करते हुए स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संपदा का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जशपुर में विकास और प्रकृति के बीच संतुलन की बड़ी संभावनाएं हैं। कृषि, वनोपज, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों और महिला तथा युवा उद्यमिता को बढ़ावा देकर जिले की अर्थव्यवस्था को और सशक्त बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर प्राकृतिक पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के सबसे समृद्ध अंचलों में से एक है। यहां के पहाड़, वन, नदियां, जलप्रपात और सुरम्य घाटियां पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखती हैं। इसके साथ ही जनजातीय जीवन, लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और स्थानीय खान-पान जशपुर को विशिष्ट पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। जिले की इन खूबियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण जशपुर को व्यापक पहचान दिलाने में भी सहायक होगा।

साय ने कहा कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान ने देश में लोक प्रशासन के अध्ययन और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शोध, प्रशिक्षण, प्रकाशन और नीतिगत विमर्श के माध्यम से संस्थान ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने में निरंतर योगदान दिया है। जिला स्तर पर प्रशासन और विकास के अध्ययन की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की विकास यात्रा को सही मायने में समझने के लिए जिलों और स्थानीय प्रशासन के अनुभवों को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन शासन और नागरिकों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर सेवा प्रदाय और स्थानीय समस्याओं के समाधान तक जिला स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था की केंद्रीय भूमिका होती है। ऐसे में किसी जिले की प्रशासनिक यात्रा, सफल प्रयोगों और चुनौतियों का दस्तावेजीकरण अन्य क्षेत्रों के लिए भी सीख और नवाचार का आधार बन सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जशपुर : एक परिचय प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और जशपुर के सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप को समझने की रुचि रखने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री सिद्ध होगी। यह पुस्तक जशपुर की विशिष्टताओं को व्यापक मंच पर सामने लाने के साथ जिले पर आगे होने वाले शोध और विकासपरक अध्ययनों को भी प्रेरित करेगी।

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत हुआ जशपुर का अध्ययन
उल्लेखनीय है कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान नई दिल्ली द्वारा अपनी क्षेत्रीय शाखाओं को संबंधित राज्यों के कम से कम एक जिले का व्यापक अध्ययन करने का प्रोजेक्ट दिया गया है। इसका उद्देश्य आजादी के बाद जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था, शासन प्रणाली और कार्यप्रणाली में आए बदलावों के साथ उनकी विकास यात्रा का अध्ययन और दस्तावेजीकरण करना है। इस अध्ययन में वर्तमान प्रशासनिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का आकलन करने के साथ भविष्य में बेहतर प्रशासन और विकास के लिए संभावित दिशा की पहचान पर भी जोर दिया गया है। इसी क्रम में भारतीय लोक प्रबंधन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर ने प्रदेश के 33 जिलों में से जशपुर का चयन किया।
जशपुर को अध्ययन के लिए चुने जाने के पीछे जिले की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण रही हैं। छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित जशपुर एक प्रमुख जनजातीय बहुल जिला है। इसकी सांस्कृतिक और पारिस्थितिक संरचना प्रदेश के मैदानी कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों से काफी अलग है। छोटानागपुर पठार के विस्तारित क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण जशपुर में ऊंचे भू-भाग, वन आधारित आजीविका और समृद्ध जनजातीय परंपराओं का अनूठा संगम दिखाई देता है।
जशपुर पर अपनी तरह का महत्वपूर्ण समग्र अध्ययन
पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि यह परंपरागत जिला गजेटियर नहीं, बल्कि जशपुर के विविध पक्षों को समेटने वाला संक्षिप्त समग्र दस्तावेज है। वर्ष 1998 में पृथक जिला बनने से पहले जशपुर, रायगढ़ जिले की एक तहसील था। जशपुर का पृथक जिला गजेटियर उपलब्ध नहीं होने के कारण अध्ययन में रायगढ़ जिला गजेटियर सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न प्रकाशनों, जनगणना 2011, शासकीय विभागों की रिपोर्ट और जिले से संबंधित प्रकाशित सामग्री का उपयोग किया गया है। इस अध्ययन की एक विशेषता यह भी है कि इसे किसी एक व्यक्ति द्वारा तैयार नहीं किया गया है, बल्कि जशपुर जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों से प्राप्त जानकारियों और सामूहिक सहयोग के आधार पर इसे स्वरूप दिया गया है। जिले के विभिन्न शासकीय कार्यालयों से उपलब्ध आंकड़ों और सूचनाओं को संकलित कर जशपुर की समग्र तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक जशपुर के प्रशासन और विकास की यात्रा के साथ उसकी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशिष्टताओं को भी सामने लाती है।भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा ने विश्वास व्यक्त किया है कि जशपुर के विविध पहलुओं पर केंद्रित यह प्रारंभिक समग्र अध्ययन भविष्य में जिले के इतिहास, प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और विकास की संभावनाओं पर और अधिक विस्तृत शोध के लिए आधार बनेगा। मुख्यमंत्री साय ने जशपुर : एक परिचय के प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि यह अध्ययन जशपुर के अतीत और वर्तमान को समझने के साथ उसके उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं को नई दिशा देने में उपयोगी सिद्ध होगा।

प्यार के नाम पर धोखा : शादी का वादा कर होटल में दुष्कर्म, लाखों वसूले और कर ली दूसरी शादी, फिर जो हुआ…

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 रायगढ़। दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सक्ती निवासी आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। आरोपी के खिलाफ थाना घरघोड़ा क्षेत्र की 27 वर्षीय युवती ने 20 अगस्त को महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत मिलते ही महिला थाना पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया और मामले की जांच शुरू कर आरोपी की तलाश में जुट गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। मामले में पुलिस आगे की जांच कर रही है।

जानिए पूरी घटना

पीड़िता ने महिला पुलिस अधिकारी को बताया कि वर्ष 2023 में उसकी पहचान मोबाइल फोन के माध्यम से तरूण कर्ष पिता रोहित लाल कर्ष निवासी ग्राम ओडेकेरा, थाना जैजैपुर, जिला सक्ती से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच लगातार मोबाइल फोन पर बातचीत होने लगी। इसी दौरान तरूण ने युवती से प्रेम का इजहार करते हुए उससे शादी करने की इच्छा जताई। पीड़िता के अनुसार सितंबर 2024 में आरोपी उसे एक होटल में ले गया और शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद आरोपी उसके किराये के मकान में भी आता-जाता रहा और लगातार शारीरिक संबंध बनाता रहा। पीड़िता ने बताया कि दोनों ने मंदिर में शादी भी की थी और वह आरोपी से सामाजिक रूप से शादी करने के लिए लगातार कहती रही। अप्रैल 2026 में आरोपी ने शादी करने का आश्वासन भी दिया था। जनवरी 2026 में आरोपी करीब एक सप्ताह तक उसके साथ रहा।

2.50 लाख ऐंठा

पीड़िता के अनुसार 18 मार्च 2026 को तरूण अपने पिता, दोस्त व जीजा के साथ उसके घर रिश्ता लेकर आया था और नवंबर माह में शादी करने की बात कही थी। इसके कुछ दिनों बाद आरोपी ने फोन कर बताया कि वह नौकरी करने रायपुर चला गया है। बाद में उसने बिलासपुर में रहने तथा काम के लिए बाहर जाने की बात कही। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी द्वारा पैसों की जरूरत बताने पर उसने अलग-अलग  समय में करीब 2.50 लाख रुपये भी दिए थे। इसके बाद आरोपी ने चंडीगढ़ से आगे काम करने जाने की बात कहते हुए बातचीत कम कर दी।

दूसरी युवती से की शादी

पीड़िता के मुताबिक 17 अगस्त 2026 को उसे जानकारी मिली कि तरूण ने किसी अन्य युवती से शादी कर ली है। इस पर उसने आरोपी को फोन कर शादी के संबंध में पूछा तो आरोपी ने शादी करने की बात स्वीकार करते हुए उससे शादी करने से इनकार कर दिया तथा उसके पैसे वापस नहीं करने की बात कही और जो करना है कर लेने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता ने अपने माता-पिता से सलाह-मशविरा कर 20 अगस्त 2026 को महिला थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई महिला थाना में धारा 69,351(3) भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध पंजीबद किया गया।

आरोपी को भेजा गया जेल

रिपोर्ट दर्ज होते ही महिला थाना पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया। साथ ही एसएसपी शशि मोहन सिंह के बिरदेश पर आरोपी की पतासाजी शुरू की गई। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तरूण कुमार कर्ष पिता रोहित लाल कर्ष (27 वर्ष) निवासी ग्राम ओडेकेरा, वार्ड नंबर 10, थाना जैजैपुर, जिला सक्ती को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने के बाद 21 अगस्त को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।

GRP की बड़ी कार्रवाई: ट्रेन में पर्स-ATM कार्ड चुराकर खातों से उड़ाता था रकम, अंतरराज्यीय आरोपी गिरफ्तार

GRP की बड़ी कार्रवाई: ट्रेन में पर्स-ATM कार्ड चुराकर खातों से उड़ाता था रकम, अंतरराज्यीय आरोपी गिरफ्तार

 भिलाई। भिलाई में GRP ने ट्रेन में यात्रियों के पर्स और ATM कार्ड चोरी कर उनके खातों से रकम निकालने वाले अंतरराज्यीय आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खास तौर पर सेना और सुरक्षा बलों के जवानों को निशाना बनाता था। पुलिस के मुताबिक, दूरदराज क्षेत्रों में तैनाती के चलते जवान कई बार तुरंत बैंक से संपर्क कर ATM कार्ड बंद नहीं करा पाते थे। आरोपी इसी स्थिति का फायदा उठाकर उनके खातों से पैसे निकाल लेता था।

पुलिस ने आरोपी सुनील कुमार दुबे उर्फ लल्लू (34) निवासी मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश को पावर हाउस रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन, चार सिम कार्ड, 12 ATM कार्ड और 3 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पूछताछ में आरोपी द्वारा कई राज्यों में यात्रियों के पर्स और ATM कार्ड चोरी करने की बात सामने आई है।

मामला 18 अप्रैल 2026 का है। सेक्टर-6 निवासी BSF जवान कन्हैया भगत बिहार जाने के लिए दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। टिकट लेने और ट्रेन में सवार होने के दौरान आरोपी ने उनसे बातचीत शुरू की और दोस्ती कर ली।

इसी दौरान आरोपी ने कन्हैया का ATM PIN देख लिया। ट्रेन में चढ़ने के दौरान भीड़ का फायदा उठाकर उसने जवान का पर्स चोरी कर लिया। पर्स में ATM कार्ड था और PIN पहले से पता होने के कारण आरोपी ने कार्ड का इस्तेमाल कर खाते से रकम निकाल ली।

पुलिस जांच में पता चला कि चोरी किए गए ATM कार्ड से आरोपी ने करीब 75 हजार रुपये के सोने के झुमके खरीदे। इसके अलावा अलग-अलग ATM से करीब 22,500 रुपये नकद निकाले गए। इस तरह एक ही वारदात में लगभग 97,500 रुपये की रकम निकाली या खर्च की गई।

बाद में आरोपी ने सोने के झुमकों को ग्वालियर में करीब 50 हजार रुपये में बेच दिया। पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने अन्य वारदातों में भी चोरी किए गए ATM कार्ड का इसी तरह इस्तेमाल किया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ के अलावा कई राज्यों और बड़े शहरों में चोरी, जेबकटी और धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। करनाल, बेंगलुरु, इटारसी, भोपाल, ग्वालियर, दिल्ली निजामुद्दीन, जालंधर और हावड़ा समेत कई स्थानों पर उसके खिलाफ प्रकरण सामने आए हैं।

पुलिस का कहना है कि अलग-अलग राज्यों में घूमकर ट्रेनों में यात्रियों को निशाना बनाना आरोपी की पुरानी कार्यशैली रही है।

कन्हैया भगत के बैंक खाते से रकम निकाले जाने की शिकायत के बाद रेलवे पुलिस ने जांच शुरू की। रेलवे पुलिस की साइबर टीम और भिलाई-3 GRP चौकी की संयुक्त टीम ने ATM लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू की।

मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की और सुनील कुमार दुबे को पावर हाउस रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर उसकी अन्य वारदातों और नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है।

CG-चाकू बाजी से फिर थर्रा उठी राजधानी, दो युवकों की चाकू मारकर हत्या, एक की हालत नाजुक

CG-चाकू बाजी से फिर थर्रा उठी राजधानी, दो युवकों की चाकू मारकर हत्या, एक की हालत नाजुक

 रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बार फिर चाकूबाजी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। डीडी नगर थाना क्षेत्र में दो युवकों पर चाकू से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें दोनों की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

महादेव घाट रोड में हुई पहली घटना

पहली घटना महादेव घाट रोड की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, कैलाश अपनी महिला मित्र के साथ पैदल घर की ओर जा रहा था। इसी दौरान स्कूटी सवार टिकेंद्र ने सुमीत बाजार के सामने कैलाश को रोक लिया और कथित तौर पर बिना किसी बातचीत के चाकू से उस पर हमला कर दिया। हमले के दौरान कैलाश ने चाकू छीन लिया और टिकेंद्र पर वार कर दिया। इस घटना में टिकेंद्र की मौत हो गई। घायल कैलाश को गंभीर हालत में उपचार के लिए एम्स रायपुर भेजा गया है, जहां उसका इलाज जारी है। पुलिस ने मामले में हत्या का अपराध दर्ज कर घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।

चंगोराभांठा में हुई दूसरी घटना

वहीं दूसरी घटना श्रीराम नगर, चंगोराभांठा में हुई। जानकारी के मुताबिक, 20 वर्षीय भोला विश्वकर्मा का कुछ स्थानीय युवकों से किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर मिलकर भोला पर चाकू से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल भोला को उपचार के लिए मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

5 आरोपी गिरफ्तार

घटना के बाद डीडी नगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चंगोराभाटा की वारदात में शामिल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें कुछ नाबालिग भी बताए जा रहे हैं। वहीं अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम रवाना की गई है। दोनों मामलों में बीएनएस की हत्या और बलवा सहित संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है। पुलिस घटनाओं के कारण, आरोपियों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

आज सावन के आखिरी सोमवार जरूर करें ये काम, भोलेनाथ की कृपा से दूर होंगी परेशानियां!

आज सावन के आखिरी सोमवार जरूर करें ये काम, भोलेनाथ की कृपा से दूर होंगी परेशानियां!

 रायपुर। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। आज सावन का आखिरी सोमवार है। इस दिन शिव भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, मंत्र जाप और व्रत के साथ भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कई विशेष उपाय करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार को श्रद्धा के साथ किए गए उपायों से जीवन की परेशानियां कम हो सकती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

आज सावन के आखिरी सोमवार करें ये विशेष उपाय

1. शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं

सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान शिव का ध्यान करें। शिवलिंग पर गंगाजल या साफ जल अर्पित करें और इसके बाद बेलपत्र चढ़ाएं। बेलपत्र अर्पित करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

2. मनोकामना पूर्ति के लिए करें ये उपाय

यदि कोई मनोकामना लंबे समय से पूरी नहीं हो रही है तो आज शिव मंदिर जाकर श्रद्धा के साथ जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र और सफेद फूल अर्पित करें। इसके बाद कुछ समय शांत बैठकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें और भगवान शिव से अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करें।

3. चंद्रमा से जुड़ी परेशानी के लिए उपाय

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा से संबंधित परेशानी होने पर आज शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। भगवान शिव के सामने बैठकर ‘ॐ सोम सोमाय नमः’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। सफेद फूल अर्पित करने और जरूरतमंद व्यक्ति को दूध, चावल या चीनी का दान करने की भी मान्यता है।

4. आर्थिक परेशानी के लिए करें ये काम

धन संबंधी परेशानियों से राहत की कामना के लिए आज भगवान शिव का जलाभिषेक करें और शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें। शाम के समय भगवान शिव के सामने घी का दीपक जलाकर शिव मंत्र का जाप करें। अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद को भोजन या आवश्यक वस्तु का दान करें।

5. वैवाहिक जीवन में सुख के लिए

विवाहित लोग वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और आपसी प्रेम बनाए रखने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकते हैं। शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद माता पार्वती का ध्यान करें और परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना करें। कुंवारी कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से भगवान शिव की पूजा करती हैं।

6. घर की नकारात्मकता दूर करने के लिए

आज शाम घर के पूजा स्थान में घी का दीपक जलाएं। भगवान शिव का ध्यान करते हुए शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करें। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

7. जरूरतमंदों को करें दान

आज दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, कपड़े, दूध, चावल, चीनी या अन्य आवश्यक सामग्री का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार सेवा और दान से मन को शांति मिलती है।

आज की पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर जल या गंगाजल चढ़ाएं। दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक भी किया जा सकता है। इसके बाद बेलपत्र, सफेद फूल, चंदन और अक्षत अर्पित करें।

पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद शिव चालीसा, रुद्राष्टक या भगवान शिव की आरती करें। शाम को भी भगवान शिव के सामने दीपक जलाकर पूजा और मंत्र जाप किया जा सकता है।

आज के पूजा के शुभ मुहूर्त

आज के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं—

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक
  • प्रीति योग: सूर्योदय से सुबह 07:04 बजे तक
  • आयुष्मान योग: सुबह 07:04 बजे से पूरे दिन

पूजा के समय को लेकर स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें, क्योंकि स्थान के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।

व्रत रखने वाले रखें इन बातों का ध्यान

व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद संकल्प लें। अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या जलाहार व्रत रखा जा सकता है। कई धार्मिक परंपराओं में सोमवार के व्रत के दौरान अनाज और नमक का सेवन नहीं किया जाता। व्रत के दौरान सात्विक विचार रखें और क्रोध, अहंकार तथा नकारात्मक भावनाओं से दूर रहने का प्रयास करें।

नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। उपायों को लेकर अलग-अलग परंपराओं और पंचांगों में अंतर हो सकता है। किसी विशेष पूजा या अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान या आचार्य की सलाह लेना उचित है।

 
 
छत्तीसगढ़ के बच्चों के हक की एक भी सीट नहीं होगी प्रभावित: स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल

छत्तीसगढ़ के बच्चों के हक की एक भी सीट नहीं होगी प्रभावित: स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल

 00 स्थानीय छात्र हितों के साथ किसी भी तरह की अनदेखी नहीं होगी बर्दाश्त: श्री श्याम बिहारी जायसवाल

00 नीट यूजी काउंसलिंग 2026: फर्जी जानकारी देने पर निरस्त होगा प्रवेश, राज्य काउंसलिंग समिति की चेतावनी

00 मूल दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही मानी जाएगी प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के बच्चों के हितों के साथ किसी भी तरह की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज और MBBS की सीटें बढ़ाने का उद्देश्य ही यही है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक बच्चों को मेडिकल शिक्षा का अवसर मिले।

 जायसवाल ने कहा है कि डोमिसाइल को लेकर अगर कहीं कोई शंका या शिकायत सामने आती है तो उसकी पूरी गंभीरता से जांच कराई जाएगी।व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और पुख्ता बनाया गया है। जिनके दस्तावेज सही हैं, उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन अगर कहीं नियमों का उल्लंघन या फर्जीवाड़ा पाया गया तो उसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों ने मेहनत की है, उनके भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ाना हमारी उपलब्धि है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि इसका लाभ पात्र विद्यार्थियों को ही मिले। इस मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं होगी।

नीट यूजी प्रवेश वर्ष 2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग
पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी काउंसलिंग, मेरिट और आवंटन की संपूर्ण प्रक्रिया प्रचलित प्रवेश नियमों के अनुसार ऑनलाइन माध्यम से पारदर्शी ढंग से संपादित की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य काउंसलिंग समिति ने नीट यूजी प्रवेश वर्ष 2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 
नियम 7 के तहत होगा सत्यापन
छत्तीसगढ़ चिकित्सा, दंत चिकित्सा एवं भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) स्नातक प्रवेश नियम, 2025 के नियम 7 के अनुसार ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया में पंजीयन, प्राथमिकता क्रम का निर्धारण, आवंटन, मूल दस्तावेजों की संवीक्षा एवं प्रवेश की प्रक्रिया शामिल है। पात्रता परीक्षण के दौरान मूल निवासी प्रमाण-पत्र, श्रेणी/संवर्ग संबंधी प्रमाण-पत्र तथा नियमानुसार अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आवंटन के बाद अभ्यर्थी द्वारा आवश्यक मूल दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने और उनके सत्यापन में पात्र पाए जाने के उपरांत ही प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।
गलत जानकारी दी तो निरस्त होगा प्रवेश
प्रवेश नियम के नियम 12 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी अभ्यर्थी द्वारा झूठी या गलत जानकारी देकर अथवा प्रासंगिक तथ्यों को छिपाकर प्रवेश प्राप्त किया गया हो, या प्रवेश के बाद किसी भी समय यह पाया जाए कि अभ्यर्थी को किसी त्रुटि अथवा चूक के कारण प्रवेश प्राप्त हो गया है, तो नियमानुसार उसका प्रवेश निरस्त किया जा सकता है। मूल निवासी अथवा अन्य दस्तावेजों को लेकर कोई शिकायत या तथ्य सामने आने पर नियमानुसार जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
अफवाहों से बचें, पोर्टल पर करें शिकायत दर्ज
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सौर ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 सौर ऊर्जा के विस्तार से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा छत्तीसगढ़

मार्च 2027 तक प्रदेश के 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से अब तक लगभग 95 हजार घर हुए सौर ऊर्जा से रोशन

4 हजार मेगावाट ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य, कार्बन न्यूट्रल भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण योगदान देगा छत्तीसगढ़

महिला स्व-सहायता समूहों के लिए सौर ऊर्जा बन रही रोजगार और स्वरोजगार का नया माध्यम

ऊर्जा क्षेत्र में ₹3.50 लाख करोड़ के एमओयू, लगभग 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन क्षमता होगी विकसित

मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के दो दिवसीय ‘संवाद’ कार्यक्रम के समापन समारोह में हुए शामिल

मुख्यमंत्री ने सोलर उद्योगों के स्टॉलों का किया अवलोकन, उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं, बैंकों एवं व्यक्तियों को किया सम्मानित

रायपुर--- सौर ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा है और छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ भी सौर ऊर्जा की अपनी अपार संभावनाओं का उपयोग करते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को मजबूती दे रहा है। प्रदेश में मार्च 2027 तक 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘संवाद’ कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाने वाला यह अपनी तरह का पहला बड़ा आयोजन है। अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव और सुझावों का यह सार्थक संवाद छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विस्तार को नई गति देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ऊर्जा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पहले से ही मजबूत स्थिति में है और वर्तमान में प्रदेश में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में लगभग ₹3 लाख 50 हजार करोड़ के एमओयू हुए हैं, जिनसे आने वाले समय में लगभग 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता विकसित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है।

स्वच्छ ऊर्जा से सुरक्षित होगा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी सौर ऊर्जा के साथ ग्रीन एनर्जी के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दे रहे हैं। सूर्य हमें प्रकृति से प्राप्त स्वच्छ, अक्षय और प्रचुर ऊर्जा स्रोत प्रदान करता है। सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग पर्यावरण संरक्षण के साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2070 तक भारत को नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला देश बनाने का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रदेश में आने वाले समय में 4 हजार मेगावाट ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

मार्च 2027 तक 5 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने सामान्य परिवारों को ऊर्जा उपभोक्ता के साथ ऊर्जा उत्पादक बनने का भी अवसर दिया है। छत्तीसगढ़ में योजना को उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। प्रदेश में अब तक लगभग 95 हजार घरों की छतों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं और यह संख्या निरंतर बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि मार्च 2027 तक प्रदेश के 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सोलर उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं और नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग के लिए सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 किलोवाट क्षमता का सोलर संयंत्र स्थापित करने पर केंद्र सरकार द्वारा ₹30 हजार और राज्य सरकार द्वारा ₹15 हजार का अनुदान दिया जा रहा है। इसी प्रकार 3 किलोवाट क्षमता के संयंत्र पर लगभग ₹1 लाख 8 हजार की सब्सिडी उपलब्ध है। डीएमएफ वाले क्षेत्रों में अनुदान की अंतर राशि डीएमएफ से उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है। इससे अधिक से अधिक परिवारों के लिए सौर ऊर्जा अपनाना आसान होगा।

*सौर ऊर्जा से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही नारी शक्ति*

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सौर ऊर्जा का विस्तार केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों की बहनें अब सोलर वेंडर के रूप में आगे आ रही हैं और हितग्राहियों के घरों में सोलर संयंत्र स्थापित करने का कार्य कर रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला वेंडरों से संवाद किया। महिलाओं ने बताया कि वे स्वयं हितग्राहियों के घर जाकर सोलर संयंत्र स्थापित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने उनके कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की प्रेरक तस्वीर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 82 हजार स्व-सहायता समूहों से 30 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं और 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। हमारी माताएं-बहनें प्रतिभा और उद्यमशीलता से परिपूर्ण हैं। सौर ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों से उन्हें जोड़कर रोजगार, स्वरोजगार और आयवृद्धि के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘संवाद’ कार्यक्रम अपने नाम के अनुरूप सार्थक सिद्ध हुआ है। सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के एक मंच पर आने, अनुभव साझा करने और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करने से निश्चित रूप से प्रदेश में इस क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति ने हमें सूर्य के रूप में ऊर्जा का असीम स्रोत दिया है। घरों, कृषि और अन्य क्षेत्रों में सूर्य की ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करके परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सकती है। कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ना समय की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिंचाई के क्षेत्र में भी सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग हो रहा है और लगभग ढाई लाख सिंचाई पंप सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत किए जा चुके हैं। आने वाले समय में कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग का और विस्तार किया जाना चाहिए। इससे ऊर्जा पर होने वाले व्यय में कमी के साथ किसानों को भी दीर्घकालीन लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उससे छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा।

विधायक  पुरंदर मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विकास की मजबूत नींव रखी गई है और अब मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में इसे नई गति मिल रही है। उन्होंने नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने और अपने परिवार तथा परिचितों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष  संतोष मिश्रा ने कहा कि ‘संवाद’ कार्यक्रम सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नए विचारों, संभावनाओं और संकल्पों को साझा करने का प्रभावी मंच बना है। प्रदेश में हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उद्योगों, वेंडर्स, वित्तीय संस्थाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को एक मंच मिलने से इस क्षेत्र में निवेश, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि ‘हर घर सोलर, हर घर ऊर्जा आत्मनिर्भर’ के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

*मुख्यमंत्री ने सोलर उद्योगों के स्टॉलों का किया अवलोकन*

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम परिसर में सोलर उद्योगों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने सोलर पैनल, उपकरणों, नवीन तकनीकों और हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली तथा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाली संस्थाओं, बैंकों एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन की डायरेक्टरी का विमोचन भी किया। डायरेक्टरी में प्रदेशभर के एसोसिएशन पदाधिकारियों और वेंडर्स के संपर्क विवरण के साथ शासन की ऊर्जा संबंधी योजनाओं की उपयोगी जानकारी संकलित की गई है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक  भीम सिंह कंवर, छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी, सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगपति एवं वेंडर्स, बैंक अधिकारी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

तस्वीरों ने ताजा कीं मुख्यमंत्री  विष्णुदेवसाय की पुरानी यादें : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ‘दृश्य संवाद 2026’ के समापन समारोह में हुए शामिल

तस्वीरों ने ताजा कीं मुख्यमंत्री  विष्णुदेवसाय की पुरानी यादें : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ‘दृश्य संवाद 2026’ के समापन समारोह में हुए शामिल

 पांच दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट में प्रकृति, संस्कृति, परंपरा और जनसरोकार के विविध रंगों ने खींचा ध्यान

रायपुर :-  तस्वीरें बीते हुए समय को वर्तमान से जोड़ती हैं। कभी वे इतिहास का दस्तावेज बनती हैं तो कभी जीवन के भूले-बिसरे पलों को फिर से जीवंत कर देती हैं। राजधानी रायपुर में आज कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अपनी वर्षों पुरानी तस्वीरों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन के लंबे सफर को एक बार फिर जिया। कहीं पहली बार विधायक बनने की स्मृतियां थीं, तो कहीं गांव, खेत और मिट्टी से जुड़े जीवन की झलक। इस दौरान मुख्यमंत्री का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने स्वयं कैमरा संभाला और एक फोटो पत्रकार की तस्वीर खींचकर इस अवसर को यादगार बना दिया।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज रायपुर प्रेस क्लब द्वारा विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’ के समापन समारोह में शामिल हुए। 19 अगस्त से आयोजित इस फेस्ट में मुख्यमंत्री ने फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया और फोटो पत्रकारों तथा ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों द्वारा खींची गई तस्वीरों की सराहना की।

प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने जब अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी पुरानी तस्वीरें देखीं तो उनके साथ जुड़ी अनेक स्मृतियां भी ताजा हो गईं। वर्षों पुराने चित्रों को देखते हुए उन्होंने अपने साथ मौजूद लोगों से कई रोचक संस्मरण साझा किए। अपनी पहली बार विधायक बनने के समय की एक तस्वीर देखकर मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय उन्होंने विशेष रूप से सफारी सूट सिलवाया था। इस छोटे से संस्मरण ने वहां मौजूद लोगों के बीच सहज और आत्मीय माहौल बना दिया।

प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री  साय के ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें भी प्रदर्शित की गई थीं। हल चलाते हुए अपनी तस्वीर देखकर उन्होंने खेती के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि गांव और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें उन्हें अपनी मिट्टी, खेत-खलिहान और पुराने दिनों की याद दिलाती हैं। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण जीवन से जुड़े अपने अनुभव भी फोटो पत्रकारों के साथ साझा किए।

प्रदर्शनी के दौरान एक दिलचस्प क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने खुद कैमरा थाम लिया। उन्होंने फोटो पत्रकार की भूमिका निभाते हुए एक फोटो जर्नलिस्ट को कैमरे में कैद किया। आमतौर पर मुख्यमंत्री की गतिविधियों और भाव-भंगिमाओं को अपने कैमरे में दर्ज करने वाले फोटो पत्रकार के सामने इस बार स्वयं मुख्यमंत्री कैमरे के पीछे थे। यह सहज और आत्मीय पल ‘दृश्य संवाद 2026’ के खास आकर्षणों में शामिल रहा।

मुख्यमंत्री  साय ने फोटो पत्रकारों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि तस्वीरें केवल किसी घटना या क्षण को दर्ज करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समय, समाज और स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजती हैं। कई बार एक तस्वीर बिना शब्दों के पूरी कहानी कह देती है। फोटो पत्रकार कठिन परिस्थितियों में भी घटनास्थल पर पहुंचकर समाज और इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को कैमरे में दर्ज करते हैं। उनका काम पत्रकारिता का महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पक्ष है।

मुख्यमंत्री ने रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘दृश्य संवाद 2026’ की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता की रचनात्मकता को मंच प्रदान करते हैं। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को अनुभवी फोटो पत्रकारों के काम को देखने, समझने और सीखने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी फोटो पत्रकारों, प्रतिभागियों और रायपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

तस्वीरों में दिखे प्रकृति, संस्कृति और जनसरोकार के विविध रंग

रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ‘दृश्य संवाद 2026’ में प्रेस फोटो पत्रकारों के साथ ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों की तस्वीरों को भी स्थान दिया गया। प्रकृति एवं पर्यावरण, संस्कृति एवं परंपरा तथा समाचार एवं जनसरोकार सहित विभिन्न विषयों पर प्रदर्शित तस्वीरों ने छत्तीसगढ़ के जीवन, समाज और परिवेश के विविध रंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। पांच दिनों के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकारों, विद्यार्थियों, फोटोग्राफी प्रेमियों और नागरिकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

समापन अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष  मोहन तिवारी, महासचिव  गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष  दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष  दिनेश यदु, संयुक्त सचिव सुश्री निवेदिता साहू एवं  भूपेश जांगड़े उपस्थित थे। इस अवसर पर फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट के संयोजक  दीपक पांडे, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट  गोकुल सोनी,  प्रदीप डडसेना, राजकुमार चतुर्वेदी,  रुपेश यादव,  नरेंद्र बंगाले,  सुधीर सागर,  रमन हलवाई, किशन लोखंडे, मनोज देवांगन,  विजय देवांगन,  विनय घाड़गे,  पंकज चौहान,  हीरा मानिकपुरी,  त्रिलोचन मानिकपुरी,  हेमंत गोस्वामी,  जय गोस्वामी,  पंकज सिंह सहित बड़ी संख्या में फोटो जर्नलिस्ट एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।

‘कोहरा’ जैसी रचनाएं समाज को सजग करने और सच सामने लाने का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

‘कोहरा’ जैसी रचनाएं समाज को सजग करने और सच सामने लाने का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री ने युवा साहित्यकार करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का किया विमोचन

हर घर में हो छोटी-सी लाइब्रेरी, पढ़ने की संस्कृति को दें बढ़ावा : मुख्यमंत्री साय

रायपुर  :-  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय सभागृह में युवा साहित्यकार करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसे सजग करने और सही दिशा दिखाने का भी सशक्त माध्यम है। ‘कोहरा’ जैसे उपन्यास सामाजिक विषयों को विमर्श के केंद्र में लाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने युवा साहित्यकार करुणा सागर पण्डा को उनके उपन्यास के प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषय पर लेखन के लिए साहस की आवश्यकता होती है। रचनाकार जब समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को अपनी लेखनी का विषय बनाते हैं, तो साहित्य सामाजिक चेतना का माध्यम बनता है।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की धरती ने देश को अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिए हैं। विनोद कुमार शुक्ल जैसे मूर्धन्य रचनाकार को साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ मुक्तिबोध की सृजनभूमि रही है और पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जैसे साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के रचनाकार इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और समकालीन विषयों को साहित्य के माध्यम से समाज के सामने ला रहे हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सिनेमा और साहित्य ने समय-समय पर समाज के संवेदनशील विषयों को सामने लाने का काम किया है। उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन और मार्मिक विषयों को उठाने पर मतभेद और विरोध के स्वर भी सामने आते हैं, लेकिन रचनाकार का दायित्व है कि वह अपनी दृष्टि और संवेदना के साथ समाज के सामने विषय रखे। उन्होंने ‘कोहरा’ के लेखक के साहसिक प्रयास की सराहना की।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि अच्छी पुस्तकें अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपने घरों में छोटी-सी लाइब्रेरी बनाने और बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि घर की समृद्धि केवल उसकी भव्यता में नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें पीढ़ियों के बीच ज्ञान, संस्कार और अनुभव का सेतु बनती हैं। इसलिए हर परिवार को अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकों का संग्रह अवश्य रखना चाहिए।

नक्सलवाद की अनकही पीड़ा को भी सामने लाएं रचनाकार

मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर नक्सलवाद का उल्लेख करते हुए साहित्यकारों और रचनाकारों से इससे प्रभावित लोगों की पीड़ा और संघर्ष को भी अपनी रचनाओं का विषय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से प्रदेश में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है और बस्तर शांति एवं विकास के नए दौर की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की हिंसा में अनेक निर्दोष लोगों ने अपने परिजनों को खोया, बच्चों की शिक्षा और भविष्य प्रभावित हुआ तथा दशकों तक अनेक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। नक्सलवाद की इस मानवीय त्रासदी और इसके कारण समाज पर पड़े प्रभावों को भी व्यापक रूप से सामने लाने की आवश्यकता है। साहित्यकार अपनी संवेदनशील लेखनी के माध्यम से उन परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और बदलते बस्तर की कहानी को देश-दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुनील गंगाराम गर्ग ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधता और विशिष्टता के साथ सहअस्तित्व को स्वीकार करती है। उन्होंने करुणा सागर पण्डा की लेखनी की सराहना करते हुए ‘कोहरा’ को समकालीन विषय पर लिखी गई प्रासंगिक कृति बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय विचारों के संवाद का समय है और साहित्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक प्रश्नों पर सार्थक विमर्श पैदा करने वाली रचनाएं समाज को आत्ममंथन का अवसर देती हैं। ‘कोहरा’ भी अपने विषय के माध्यम से पाठकों को विचार करने के लिए प्रेरित करता है।

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा ने कहा कि ‘कोहरा’ केवल समस्या को सामने नहीं रखता, बल्कि समाधान की दिशा में भी सोचने के लिए प्रेरित करता है। बीबीजे के स्वतंत्र निदेशक जगन्नाथ पाणिग्रही ने कहा कि नई पीढ़ी को देश की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक वास्तविकताओं से परिचित कराने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका है।

वरिष्ठ साहित्यकार  गिरीश पंकज ने ‘कोहरा’ को साहसिक लेखन का उदाहरण बताते हुए कहा कि रचनाकार को समाज के ज्वलंत प्रश्नों पर अपनी बात रखने का साहस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपन्यास में सामाजिक विषयों के साथ नक्सलवाद की समस्या को भी अभिव्यक्ति दी गई है। साहित्य समाज में वैचारिक चेतना और सकारात्मक प्रतिरोध का स्वर मजबूत करता है।

इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष  राजीव लोचन महाराज,  जलज कुमार अनुपम सहित जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने सोलर उद्योगों के स्टॉलों का किया अवलोकन, उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं, बैंकों एवं व्यक्तियों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री ने सोलर उद्योगों के स्टॉलों का किया अवलोकन, उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं, बैंकों एवं व्यक्तियों को किया सम्मानित

 रायपुर। सौर ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा है और छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ भी सौर ऊर्जा की अपनी अपार संभावनाओं का उपयोग करते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को मजबूती दे रहा है। प्रदेश में मार्च 2027 तक 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘संवाद’ कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाने वाला यह अपनी तरह का पहला बड़ा आयोजन है। अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव और सुझावों का यह सार्थक संवाद छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विस्तार को नई गति देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ऊर्जा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पहले से ही मजबूत स्थिति में है और वर्तमान में प्रदेश में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में लगभग ₹3 लाख 50 हजार करोड़ के एमओयू हुए हैं, जिनसे आने वाले समय में लगभग 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता विकसित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है।

स्वच्छ ऊर्जा से सुरक्षित होगा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सौर ऊर्जा के साथ ग्रीन एनर्जी के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दे रहे हैं। सूर्य हमें प्रकृति से प्राप्त स्वच्छ, अक्षय और प्रचुर ऊर्जा स्रोत प्रदान करता है। सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग पर्यावरण संरक्षण के साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वर्ष 2070 तक भारत को नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला देश बनाने का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रदेश में आने वाले समय में 4 हजार मेगावाट ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

मार्च 2027 तक 5 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने सामान्य परिवारों को ऊर्जा उपभोक्ता के साथ ऊर्जा उत्पादक बनने का भी अवसर दिया है। छत्तीसगढ़ में योजना को उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। प्रदेश में अब तक लगभग 95 हजार घरों की छतों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं और यह संख्या निरंतर बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि मार्च 2027 तक प्रदेश के 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सोलर उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं और नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग के लिए सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 किलोवाट क्षमता का सोलर संयंत्र स्थापित करने पर केंद्र सरकार द्वारा ₹30 हजार और राज्य सरकार द्वारा ₹15 हजार का अनुदान दिया जा रहा है। इसी प्रकार 3 किलोवाट क्षमता के संयंत्र पर लगभग ₹1 लाख 8 हजार की सब्सिडी उपलब्ध है। डीएमएफ वाले क्षेत्रों में अनुदान की अंतर राशि डीएमएफ से उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है। इससे अधिक से अधिक परिवारों के लिए सौर ऊर्जा अपनाना आसान होगा।

सौर ऊर्जा से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही नारी शक्ति
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सौर ऊर्जा का विस्तार केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों की बहनें अब सोलर वेंडर के रूप में आगे आ रही हैं और हितग्राहियों के घरों में सोलर संयंत्र स्थापित करने का कार्य कर रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला वेंडरों से संवाद किया। महिलाओं ने बताया कि वे स्वयं हितग्राहियों के घर जाकर सोलर संयंत्र स्थापित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने उनके कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की प्रेरक तस्वीर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 82 हजार स्व-सहायता समूहों से 30 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं और 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। हमारी माताएं-बहनें प्रतिभा और उद्यमशीलता से परिपूर्ण हैं। सौर ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों से उन्हें जोड़कर रोजगार, स्वरोजगार और आयवृद्धि के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘संवाद’ कार्यक्रम अपने नाम के अनुरूप सार्थक सिद्ध हुआ है। सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के एक मंच पर आने, अनुभव साझा करने और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करने से निश्चित रूप से प्रदेश में इस क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति ने हमें सूर्य के रूप में ऊर्जा का असीम स्रोत दिया है। घरों, कृषि और अन्य क्षेत्रों में सूर्य की ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करके परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सकती है। कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिंचाई के क्षेत्र में भी सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग हो रहा है और लगभग ढाई लाख सिंचाई पंप सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत किए जा चुके हैं। आने वाले समय में कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग का और विस्तार किया जाना चाहिए। इससे ऊर्जा पर होने वाले व्यय में कमी के साथ किसानों को भी दीर्घकालीन लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उससे छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा।

विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विकास की मजबूत नींव रखी गई है और अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इसे नई गति मिल रही है। उन्होंने नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने और अपने परिवार तथा परिचितों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष मिश्रा ने कहा कि ‘संवाद’ कार्यक्रम सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नए विचारों, संभावनाओं और संकल्पों को साझा करने का प्रभावी मंच बना है। प्रदेश में हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उद्योगों, वेंडर्स, वित्तीय संस्थाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को एक मंच मिलने से इस क्षेत्र में निवेश, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि ‘हर घर सोलर, हर घर ऊर्जा आत्मनिर्भर’ के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री ने सोलर उद्योगों के स्टॉलों का किया अवलोकन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम परिसर में सोलर उद्योगों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने सोलर पैनल, उपकरणों, नवीन तकनीकों और हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली तथा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाली संस्थाओं, बैंकों एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन की डायरेक्टरी का विमोचन भी किया। डायरेक्टरी में प्रदेशभर के एसोसिएशन पदाधिकारियों और वेंडर्स के संपर्क विवरण के साथ शासन की ऊर्जा संबंधी योजनाओं की उपयोगी जानकारी संकलित की गई है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर, छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी, सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगपति एवं वेंडर्स, बैंक अधिकारी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।