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अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशन का होगा शुभारंभ

अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशन का होगा शुभारंभ

 0-रेलवे के आधुनिकीकरण से यात्री सुविधाओं, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 

0-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से रायपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) दयानन्द ने की सौजन्य भेंट

 
 
 

रायपुर / मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में रायपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम)  दयानन्द ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उद्घाटन समारोह के लिए केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव की ओर से मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय को आमंत्रण पत्र भेंट किया। भेंट के दौरान अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों पर विकसित आधुनिक यात्री सुविधाओं, अधोसंरचना उन्नयन तथा स्टेशनों के नए स्वरूप को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।  

 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना भारतीय रेलवे को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और यात्री-केंद्रित बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है, जिसका लाभ सीधे आम नागरिकों और प्रदेश के समग्र विकास को मिलेगा।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय रेलवे आज अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। देशभर के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर यात्री सेवाओं और विश्वस्तरीय अधोसंरचना से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे विकसित भारत के संकल्प को नई गति मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, व्यापार, पर्यटन और जनसुविधाओं की जीवनरेखा है। रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उन्नयन से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में आधुनिक रेल अधोसंरचना का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। रेल संपर्क के सुदृढ़ होने से प्रदेश में निवेश, उद्योग, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा आम नागरिकों का आवागमन अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को वर्चुअल माध्यम से देशभर में अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित एवं नवीनीकृत रेलवे स्टेशनों का लोकार्पण करेंगे। इस योजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को आधुनिक, सुगम, सुरक्षित एवं यात्री-अनुकूल बनाकर देश की परिवहन व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

नक्सलियों की साजिश नाकाम, हथियार, IED और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद

नक्सलियों की साजिश नाकाम, हथियार, IED और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद

 कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के पल्लाहुर जंगल में संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखा गया एक डंप बरामद किया गया, जिसमें हथियार, विस्फोटक और बड़ी मात्रा में नक्सली सामग्री मिली है।

पुलिस के अनुसार, जिला पुलिस और बीएसएफ (BSF) की संयुक्त टीम क्षेत्र में सर्चिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान जंगल में छिपाए गए नक्सली डंप का पता चला। तलाशी के दौरान 3 किलोग्राम का टिफिन IED, 2 पाइप बम, एक .303 रायफल, एक बीजीएल (BGL) लॉन्चर, .303 रायफल के 4 कारतूस, AK-47 के 30 राउंड, SLR के 4 राउंड, 10 बीजीएल सेल सहित बड़ी मात्रा में नक्सली सामग्री बरामद की गई।

बरामद IED और अन्य विस्फोटकों को देखते हुए मौके पर ही बम निरोधक दस्ता (BDS) बुलाया गया। सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बीडीएस टीम ने टिफिन IED को नियंत्रित विस्फोट के जरिए सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया, जिससे किसी भी संभावित खतरे को टाल दिया गया।सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह डंप नक्सलियों द्वारा भविष्य में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के उद्देश्य से छिपाकर रखा गया था। समय रहते इसकी बरामदगी से नक्सलियों की साजिश नाकाम हो गई। पुलिस ने बताया कि पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है और नक्सलियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सुरक्षा बल क्षेत्र में अभियान तेज कर संभावित ठिकानों की तलाश में जुटे हुए हैं।

विधानसभा में उर्वरक वितरण पर गरमाई बहस, कांग्रेस ने उठाए सवाल, मंत्री ने जांच से किया इनकार

विधानसभा में उर्वरक वितरण पर गरमाई बहस, कांग्रेस ने उठाए सवाल, मंत्री ने जांच से किया इनकार

 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रदेश में उर्वरकों के वितरण का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। कांग्रेस विधायक दलेश्वर साहू ने सहकारी और निजी क्षेत्रों में उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कई जिलों में निर्धारित लक्ष्य से अधिक उर्वरकों की सप्लाई की गई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

विधानसभा में प्रश्न उठाते हुए दलेश्वर साहू ने कहा कि उर्वरकों के वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किन जिलों में कितनी मात्रा में उर्वरक भेजा गया और लक्ष्य से अधिक आपूर्ति किन परिस्थितियों में की गई। उन्होंने कहा कि यदि अनियमितता हुई है तो इसकी जांच आवश्यक है।

इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए आदिम जाति विकास एवं कृषि से जुड़े मामलों के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से प्राप्त उर्वरकों की कंपनीवार, मौसमवार और जिलावार आवंटन संबंधी पूरी जानकारी विधानसभा पुस्तकालय में उपलब्ध कराई गई है।

मंत्री ने सदन को बताया कि भारत सरकार के आवंटन के आधार पर उर्वरक कंपनियां सहकारी समितियों और निजी थोक विक्रेताओं को खाद उपलब्ध कराती हैं, जहां से किसानों तक इसका वितरण किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग केवल वितरण के बाद उपलब्ध शेष उर्वरकों का रिकॉर्ड रखता है, जबकि कंपनीवार बची हुई मात्रा का अलग से कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।

 दलेश्वर साहू द्वारा मामले की जांच की मांग दोहराए जाने पर मंत्री रामविचार नेताम ने साफ कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच कराने का कोई औचित्य नहीं बनता। मंत्री के इस जवाब के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच उर्वरक वितरण को लेकर कुछ समय तक तीखी बहस भी देखने को मिली।

Road Accident: मातम में बदली रथ यात्रा की खुशियां, पूजा में जा रहे एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, एक घायल

Road Accident: मातम में बदली रथ यात्रा की खुशियां, पूजा में जा रहे एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, एक घायल

 भिलाई।  दुर्ग-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर गुरुवार सुबह हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक 8 वर्षीय बालक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। घायल बच्चे का इलाज रायपुर स्थित एम्स में जारी है, जहां उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

छावनी सीएसपी प्रशांत सिंह पैकरी के अनुसार, स्कूटी क्रमांक CG 07 DE 5847 पर सवार पांच लोग भिलाई-3 से रायपुर के बसंत विहार में आयोजित एक पारिवारिक पूजा कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। स्कूटी अमृत निर्मलकर (28) चला रही थीं। सुबह करीब 10 से 10:30 बजे कुम्हारी स्थित दशमेश ढाबा के पास उनकी स्कूटी सड़क किनारे खड़े ऑक्सीजन सिलेंडरों से लदे ट्रैक्टर CG 07 NA 0930 के पिछले हिस्से से जा भिड़ी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी तेज थी कि स्कूटी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में अमृत निर्मलकर (28), लक्ष्मी निर्मलकर (26), 7 वर्षीय यासना और 4 वर्षीय डाली की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं 8 वर्षीय भावेश गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रायपुर एम्स रेफर किया गया।

  घटना की सूचना मिलते ही कुम्हारी पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। पुलिस ने ट्रैक्टर को जब्त कर उसके चालक भोला यादव को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ट्रैक्टर हाईवे किनारे खड़ा था, जिसकी वजह से यह भीषण दुर्घटना हुई। पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सुपेला स्थित मर्चुरी भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह हादसा एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और लापरवाही से खड़े वाहनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

विशेष लेख -अकादमिक सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और कर्मचारी हितों के साथ आगे बढ़ता छत्तीसगढ़

विशेष लेख -अकादमिक सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और कर्मचारी हितों के साथ आगे बढ़ता छत्तीसगढ़

 00 ​362 सहायक प्राध्यापक बने प्रोफेसर, 152 प्रोफ़ेसर हुए प्राचार्य पदोन्नति, शैक्षणिक नेतृत्व को मिली नई मजबूती
00 ​595 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, 700 नए पदों की मंजूरी, युवाओं के लिए सरकारी सेवा के बड़े अवसर
00 ​72 सहायक प्राध्यापकों को 37.23 करोड़ रुपये एरियर्स, 935 की परिवीक्षा अवधि समाप्त
00 ​सेवा सुरक्षा को मिला मजबूत आधार, 34 अनुकंपा नियुक्तियां, 118 कर्मचारियों को उच्चतर समयमान वेतनमान, कर्मचारी कल्याण को मिली संवेदनशील दिशा

किसी भी राज्य की प्रगति का वास्तविक पैमाना उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है और इसकी गुणवत्ता केंद्र में खड़े शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारियों की सक्षमता, सुरक्षा और सम्मान पर निर्भर करती है। जब उच्च शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत मानव संसाधन को पदोन्नति, सेवा सुरक्षा, वित्तीय सम्मान और शोध के अवसर एक साथ मिलते हैं, तब शिक्षा राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की सबसे मजबूत धुरी बन जाती है। छत्तीसगढ़ का उच्च शिक्षा विभाग इन दिनों इसी व्यापक और समग्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।
राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग को केवल भवनों, पाठ्यक्रमों और परीक्षाओं तक सीमित न रखकर उसे अकादमिक गुणवत्ता, प्रशासनिक दक्षता, रोजगार सृजन, शोध संवर्धन और कर्मचारी कल्याण से जोड़ा है। हाल के महीनों में लिए गए निर्णय इस बात के प्रमाण हैं कि सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों को भविष्य के ज्ञान-केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पदोन्नतियों की लंबित फाइलों को गति देना, नई भर्तियां, वेतनमान व एरियर्स का निराकरण, तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति, शोध को प्रोत्साहन और अनुकंपा नियुक्ति जैसे कदमों से विभाग ने हर मोर्चे पर ठोस और संवेदनशील पहल की है।
​पदोन्नति से संस्थागत नेतृत्व को नई शक्ति
​उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता का एक बड़ा आधार उनका नेतृत्व होता है। जब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में योग्य और अनुभवी शिक्षकों को समय पर पदोन्नति मिलती है, तो उसका सीधा असर संस्थान की कार्यसंस्कृति और प्रशासनिक क्षमता पर दिखाई देता है। लंबित पदोन्नति प्रक्रियाओं को गति देकर राज्य सरकार ने एक निर्णायक पहल की है।
वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 362 सहायक प्राध्यापकों को पदोन्नत कर प्राध्यापक (प्रोफेसर) बनाया गया है। इसके साथ ही 152 पदोन्नत प्राध्यापकों को स्नातक प्राचार्य तथा 07 स्नातक प्राचार्यों को स्नातकोत्तर (PG) प्राचार्य के पद पर पदोंन्नत किया गया है। इन निर्णयों से महाविद्यालयों की कमान अनुभवी हाथों में पहुँची है, जिससे संस्थागत निर्णय क्षमता, शैक्षणिक अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी।
​सीधी भर्ती से युवाओं के लिए खुले अवसरों के नए द्वार
गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था के लिए संस्थानों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक और विशेषज्ञ अनिवार्य हैं। राज्य सरकार ने रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर युवाओं के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश के बड़े अवसर निर्मित किए हैं। शासकीय महाविद्यालयों में प्राध्यापकों के 595 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो चुकी है।
इसके अतिरिक्त, विभागीय संरचना को सशक्त बनाने के लिए कुल 700 पदों पर सीधी भर्ती को मंजूरी दी गई है। इनमें 625 पद सहायक प्राध्यापक, 50 पद ग्रंथपाल और 25 पद क्रीड़ाधिकारी के शामिल हैं। सहायक प्राध्यापकों की भर्ती से विषयवार अध्यापन की गुणवत्ता बेहतर होगी, ग्रंथपालों से पुस्तकालय अकादमिक संसाधनों के प्रभावी केंद्र बनेंगे और क्रीड़ाधिकारियों से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होगा। यह अभियान प्रदेश के योग्य युवाओं को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने का सशक्त माध्यम बनने जा रहा है।
​CG-SET: युवा अकादमिक प्रतिभाओं के लिए बड़ी उम्मीद
राज्य में सहायक प्राध्यापक बनने की आकांक्षा रखने वाले हजारों युवाओं के लिए राज्य पात्रता परीक्षा (CG-SET) एक महत्वपूर्ण अवसर है। विभाग द्वारा CG-SET का आयोजन 04 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है l सरकार नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को अकादमिक करियर में आगे बढ़ाने के लिए गंभीर है। यह परीक्षा छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक परिदृश्य और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में अपनी जगह बनाने का अवसर देती है।
​प्रयोगशालाओं और तकनीकी तंत्र को मिला नया आधार
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक विषयों के लिए प्रयोगशालाएं, उपकरण और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ उतने ही आवश्यक हैं जितने कक्षा और कक्ष। वर्ष 2025-26 के दौरान प्रयोगशाला तकनीशियन के 260 रिक्त पदों के विरुद्ध 247 अभ्यर्थियों तथा प्रयोगशाला परिचारक के 429 रिक्त पदों के विरुद्ध 399 अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके हैं। तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता से प्रयोगशालाओं का नियमित संचालन और विद्यार्थियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
​वेतनमान, एरियर्स और सेवा सुरक्षा: कर्मचारियों का बढ़ा भरोसा
विभागीय मजबूती का सबसे बड़ा आधार कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, न्यायपूर्ण वेतन संरचना और लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान है। आपातकालीन रूप से अचयनित रहे 72 सहायक प्राध्यापकों को उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठ, प्रवर श्रेणी और पे-बैंड-4 की स्वीकृति देकर 37.23 करोड़ रुपये की एरियर्स राशि उनके खातों में अंतरित की गई है, जो संस्थागत न्याय का प्रतीक है।
इसी तरह, वर्ष 2021 और 2022 में नियुक्त लगभग 1168 सहायक प्राध्यापकों में से रिकॉर्ड 935 नवनियुक्त प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि समाप्त करने के आदेश जारी किए गए हैं। परिवीक्षा समाप्त होना कर्मचारियों के लिए स्थायित्व और पेशेवर सुरक्षा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिससे विभाग के भीतर प्रतिबद्ध शैक्षणिक कार्यबल तैयार हुआ है।
​शोध, अनुसंधान और गैर-अकादमिक स्टाफ का कल्याण
उच्च शिक्षा व्यवस्था में शोध और नवाचार की भूमिका को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा 577 सहायक प्राध्यापकों को पीएचडी करने की अनुमति देना एक दूरदर्शी निर्णय है। अधिक शिक्षक जब शोध से जुड़ेंगे, तो कक्षा में अद्यतन ज्ञान पहुंचेगा और महाविद्यालयों में बौद्धिक विमर्श का स्तर ऊपर उठेगा।
​शिक्षकों के साथ-साथ तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी व्यवस्था की रीढ़ हैं। दिसंबर 2023 से अब तक दिवंगत कर्मचारियों के 34 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है, जो संकटग्रस्त परिवारों को जीवन संभालने का संबल देती है। इसके अतिरिक्त, 324 कर्मचारियों को उच्चतर समयमान वेतनमान प्रदान किया गया है और वर्ष 2024-25 की पदोन्नति संबंधी समस्त कार्यवाहियां समय सीमा में पूर्ण कर ली गई हैं।
​उच्च शिक्षा में समग्र सुधार का उभरता मॉडल
उच्च शिक्षा विभाग के ये फैसले मिलकर एक व्यापक परिवर्तनकारी मॉडल की रचना करते हैं, जहां नेतृत्व सुदृढ़ीकरण, नई भर्ती, सेवा सुरक्षा, कर्मचारी कल्याण, तकनीकी संसाधन और शोध संवर्धन एक साथ आगे बढ़ते हैं। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जो परिवर्तन आज दिखाई दे रहे हैं, वे केवल विभागीय उपलब्धियों की सूची नहीं, बल्कि एक ऐसी नीति-दृष्टि हैं जिसमें शिक्षा को राज्य के भविष्य निर्माण का केंद्रीय माध्यम माना गया है। आने वाले समय में ये प्रयास छत्तीसगढ़ के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को ज्ञान, शोध, नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन के सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करेंगे।

डबल इंजन सरकार के संकल्प को नई गति: केंद्र के ऐतिहासिक निर्णयों से छत्तीसगढ़ को मिलेगा औद्योगिक और कृषि विकास का नया आधार

डबल इंजन सरकार के संकल्प को नई गति: केंद्र के ऐतिहासिक निर्णयों से छत्तीसगढ़ को मिलेगा औद्योगिक और कृषि विकास का नया आधार

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल का जताया आभार

सेमिकॉन 2.0, राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 और मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना से निवेश, रोजगार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

रायपुर-मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा सेमिकॉन 2.0, राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) तथा मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) को स्वीकृति दिए जाने का स्वागत करते हुए इसे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज आत्मनिर्भरता, नवाचार और अत्याधुनिक विनिर्माण के नए युग की ओर तेजी से अग्रसर है। केंद्र सरकार के ये तीनों महत्वपूर्ण निर्णय देश की औद्योगिक क्षमता, कृषि सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले सिद्ध होंगे। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ₹1,27,500 करोड़ की सेमिकॉन 2.0 योजना देश में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए विश्वस्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भी नई औद्योगिक नीति, बेहतर अधोसंरचना, निवेश अनुकूल वातावरण और कौशल विकास के माध्यम से उच्च तकनीक आधारित उद्योगों के लिए तेजी से उभरता हुआ गंतव्य बन रहा है। इस प्रकार की राष्ट्रीय पहल से राज्य में भी निवेश और रोजगार की नई संभावनाएं विकसित होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 देश में उर्वरकों की उपलब्धता को सुदृढ़ करेगी तथा किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराने में सहायक होगी। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों को मिलेगा और कृषि उत्पादन को नई मजबूती प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र की आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र और राज्य सरकार निरंतर समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे भारतीय ब्रांडों, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार तथा स्थानीय विनिर्माण को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी औद्योगिक निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी तथा उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए जा रहे ऐसे दूरदर्शी निर्णय विकसित भारत के साथ-साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी नई गति प्रदान करेंगे। नवाचार, निवेश, तकनीकी आत्मनिर्भरता, आधुनिक विनिर्माण और कृषि सशक्तिकरण पर आधारित यह विकास मॉडल आने वाले वर्षों में देश और प्रदेश दोनों की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पर्वतारोही अमिता श्रीवास को दी बधाई

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पर्वतारोही अमिता श्रीवास को दी बधाई

 अमिता की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए गर्व का विषय, युवाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा - मुख्यमंत्री  साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही सुश्री अमिता श्रीवास ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर इतिहास रचने वाली अमिता श्रीवास को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।इस अवसर पर विधायक गोमती साय उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि अमिता श्रीवास ने अपने साहस, अदम्य इच्छाशक्ति, अनुशासन और अटूट संकल्प के बल पर विश्व की सबसे ऊँची चोटी पर भारत का तिरंगा लहराकर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य के प्रति समर्पण और निरंतर प्रयास से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। अमिता श्रीवास की सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का सशक्त उदाहरण है।

उल्लेखनीय है कि जांजगीर-चांपा जिले की रहने वाली पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने 22 मई को समुद्र तल से 8,848.86 मीटर ऊंची दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाया है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा उत्कृष्ट कार्य संस्कृति और स्वस्थ संसदीय परंपरा का जीवंत उदाहरण : राज्यपाल रमेन डेका

छत्तीसगढ़ विधानसभा उत्कृष्ट कार्य संस्कृति और स्वस्थ संसदीय परंपरा का जीवंत उदाहरण : राज्यपाल रमेन डेका

 प्रदेश के विकास और जनहित के संकल्पों को साकार करने का सशक्त मंच है विधानसभा - मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने स्थापित की उत्कृष्ट संसदीय परंपराएं, लोकतांत्रिक मूल्यों को किया सशक्त  - विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह

राज्यपाल  रमेन डेका ने विधानसभा परिसर में नवनिर्मित प्रेक्षागृह का किया लोकार्पण

रायपुर--छत्तीसगढ़ विधानसभा ने अपने गठन के बाद से लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय गरिमा और अनुशासन की ऐसी उत्कृष्ट परंपराएं विकसित की हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना होती है। यह प्रसन्नता का विषय है कि 1 नवंबर 2025 को यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण किया गया था और आज उसी परिसर में नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण राज्यपाल रमेन डेका के करकमलों से संपन्न हुआ है। यह विधानसभा की संस्थागत क्षमता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवनिर्मित प्रेक्षागृह में आज उत्कृष्टता अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।  

लोकतांत्रिक परंपराओं, संसदीय मूल्यों और उत्कृष्ट जनप्रतिनिधित्व को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित इस गरिमामयी समारोह में राज्यपाल रमेन डेका ने विधानसभा परिसर में नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण किया।  

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट संसदीय कार्य के लिए बिल्हा विधायक  धरमलाल कौशिक तथा अकलतरा विधायक  राघवेंद्र कुमार सिंह को उत्कृष्ट विधायक अलंकरण से सम्मानित किया गया। पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए दैनिक पत्रिका के संवाददाता  संतराम साहू को उत्कृष्ट संसदीय पत्रकार अलंकरण तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के लिए आईबीसी-24 के  सौरभ सिंह परिहार एवं डॉ. राजेश राज को उत्कृष्ट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रिपोर्टर अलंकरण प्रदान किया गया।

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा लोकसेवा का वह केन्द्र है जहां जनसेवक संसदीय सदन में लोक कल्याण का पावन अनुष्ठान संपादित करते हैं और इसलिए लोकतंत्र में संसदीय सदन को मंदिर की संज्ञा दी गयी है और इस मंदिर की प्रतिष्ठा सभी सदस्यों के आचरण व्यवहार और विचार पर निर्भर करती है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की गणना देश की श्रेष्ठ विधानसभाओं के उदाहरण के रूप में होती है। इस विधानसभा में पक्ष-प्रतिपक्ष के मध्य जो समन्वय है, सामन्जस्य है, और समादर का भाव है, वह निश्चित रूप से प्रशंसनीय और अनुकरणीय है।

राज्यपाल डेका ने अपने संबोधन में सभी सम्मानित जनप्रतिनिधियों एवं पत्रकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर में जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनता के प्रति उत्तरदायी रहते हुए समर्पण भाव से कार्य करें। राज्यपाल  डेका ने कहा कि सभी प्रतिनिधि मिलकर प्रदेश के विकास के लिए कार्य करें, तभी राज्य निरंतर प्रगति करेगा। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से संवाद, स्वच्छता अभियान में सहभागिता तथा समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले कार्यों को प्राथमिकता देने का भी आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा देश की पहली और एकमात्र ऐसी विधानसभा है, जहां गर्भगृह में किसी विधायक के प्रवेश करते ही वे स्वतः निलंबित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि आत्मानुशासन, संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। ऐसी विशिष्ट संसदीय परंपराओं ने छत्तीसगढ़ विधानसभा को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।

मुख्यमंत्री साय ने लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और पत्रकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को जनता से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही, जनहित के मुद्दों और लोकतांत्रिक विमर्श को निष्पक्ष एवं तथ्यपरक ढंग से जनता तक पहुँचाने में संसदीय पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सम्मानित पत्रकारों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाती है।

मुख्यमंत्री  साय ने सम्मानित विधायकों की सराहना करते हुए कहा कि  धरमलाल कौशिक का सार्वजनिक जीवन अत्यंत समृद्ध और अनुभवपूर्ण रहा है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए संसदीय परंपराओं को समृद्ध किया है। वहीं राघवेंद्र कुमार सिंह ने प्रथम बार विधायक निर्वाचित होने के बावजूद सदन में तथ्यपूर्ण, अध्ययनशील एवं प्रभावी ढंग से अपनी बात रखकर एक सकारात्मक पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि दोनों जनप्रतिनिधियों का सम्मान लोकतांत्रिक मूल्यों और उत्कृष्ट संसदीय आचरण के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि नवीन विधानसभा भवन के लोकार्पण के बाद आज नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण विधानसभा के विकास की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की षष्ठम विधानसभा अपने कार्यकाल में उत्कृष्ट संसदीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सदैव स्मरणीय रहेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पक्ष और प्रतिपक्ष राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रदेशहित के विषयों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा करते हैं। यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि उत्कृष्टता अलंकरण केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का सम्मान नहीं है, बल्कि यह संसदीय लोकतंत्र की सर्वोत्तम परंपराओं को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी है। ऐसे सम्मान जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक उत्तरदायी तथा उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रेरित करते हैं।

समारोह के सांस्कृतिक आयोजन में देश के प्रख्यात भजन गायक अनूप जलोटा ने अपने लोकप्रिय भजनों की मनोहारी प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। उनकी मधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे प्रेक्षागृह को आध्यात्मिक वातावरण से अनुप्राणित कर दिया और कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, विधायकगण, विधानसभा के सचिव दिनेश शर्मा,  वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ की मनोहारी पर्यटन छटा से अभिभूत हुए, पूर्व पर्यटन महानिदेशक, भारत सरकार

छत्तीसगढ़ की मनोहारी पर्यटन छटा से अभिभूत हुए, पूर्व पर्यटन महानिदेशक, भारत सरकार

 00 छत्तीसगढ़ भारत के सबसे समृद्ध, मौलिक और पर्यटन संभावनाओं से भरपूर गंतव्यों में से एक, हर पर्यटक की यात्रा सूची में होना चाहिए यह राज्य - मीनाक्षी शर्मा
00 14 दिवसीय पर्यटन यात्रा में विरासत, प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, आध्यात्मिक धरोहर और रोमांचक पर्यटन स्थलों का किया विस्तृत भ्रमण
रायपुर।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की पूर्व महानिदेशक मीनाक्षी शर्मा ने पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ का विस्तृत भ्रमण कर प्रदेश के पर्यटन वैभव, प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और आत्मीय आतिथ्य की मुक्त कंठ से सराहना की। अपनी 14 दिवसीय यात्रा के दौरान उन्होंने प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों का अवलोकन किया और कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा पर्यटन गंतव्य है, जहां प्रकृति, संस्कृति, इतिहास, आध्यात्मिकता और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह प्रदेश देश के प्रत्येक पर्यटक की यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत के पर्यटन क्षेत्र में कार्य करने के बावजूद उन्हें पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ आने का अवसर मिला और यह यात्रा उनके लिए अत्यंत सुखद एवं अविस्मरणीय रही। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने उन्हें सकारात्मक रूप से आश्चर्यचकित किया। यहां की प्राकृतिक संपदा, घने वन, विशाल जलप्रपात, प्राचीन मंदिर, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और स्थानीय लोगों का आत्मीय व्यवहार इसे देश के सबसे विशिष्ट पर्यटन राज्यों में स्थान दिलाता है।
शर्मा ने अपनी यात्रा की शुरुआत रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन एवं जनजातीय संग्रहालय से की, जहां उन्होंने प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को निकट से देखा। इसके बाद उन्होंने कबीरधाम जिले के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल, छेरकी महल तथा आसपास के वन क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक परिवेश में स्थित भोरमदेव परिसर भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण है।
यात्रा के अगले चरण में उन्होंने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे अमरकंटक पहुंचकर मां नर्मदा उद्गम स्थल, सायंकालीन आरती, कलचुरीकालीन मंदिर समूह, दूधधारा एवं कपिलधारा जलप्रपात, राजमेरगढ़, कबीर चबूतरा तथा जैन मंदिर का भ्रमण किया। उन्होंने इस क्षेत्र को आध्यात्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का अद्वितीय संगम बताया। वापसी के दौरान उन्होंने रतनपुर स्थित मां महामाया शक्तिपीठ में दर्शन कर प्रदेश की समृद्ध धार्मिक परंपराओं का अनुभव प्राप्त किया।
बस्तर प्रवास के दौरान श्रीमती शर्मा ने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, टाटामारी घाटी, कोंडागांव शिल्प ग्राम, नारायणपाल मंदिर, मेंदरी घुमर एवं तामड़ा घुमर जलप्रपात का भ्रमण किया तथा चित्रकोट में नौकायन का आनंद भी लिया। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय कला विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की क्षमता रखती है।
उन्होंने दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी शक्तिपीठ, प्राचीन मंदिरों के नगर बारसूर, जगदलपुर पुरातत्व संग्रहालय, बस्तर राजमहल तथा स्थानीय हस्तशिल्प केंद्रों का भी अवलोकन किया। उन्होंने बस्तर की ढोकरा कला, बेलमेटल शिल्प, बांस एवं लकड़ी की कलाकृतियों को स्थानीय संस्कृति की जीवंत पहचान बताते हुए कहा कि यहां का हस्तशिल्प विश्व स्तर पर विशेष पहचान बनाने की क्षमता रखता है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में उन्होंने तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, धुड़मारास, बांस राफ्टिंग तथा केचला क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और साहसिक पर्यटन के प्रेमियों के लिए यह क्षेत्र किसी स्वर्ग से कम नहीं है। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे ओडिशा के जैपुर, कोलाब बांध, जगन्नाथ मंदिर, कोरापुट कॉफी प्लांटेशन, देओमाली पर्वत, दुदमा जलप्रपात, बोंडा जनजातीय बाजार तथा कोटपाड़ बुनकर ग्राम का भी भ्रमण किया, जिससे बस्तर और कोरापुट क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक विरासत को निकट से समझने का अवसर मिला।
अपने अनुभव साझा करते हुए श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि पर्यटन केवल किसी स्थान को देखने का माध्यम नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपराओं और लोगों से जुडऩे का अवसर भी होता है। इस दृष्टि से छत्तीसगढ़ अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहां आने वाला पर्यटक भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून, आध्यात्मिक शांति और जनजातीय जीवन की मौलिकता का वास्तविक अनुभव प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। यदि यहां के विशिष्ट और अपेक्षाकृत कम चर्चित पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह राज्य देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने प्रदेश में विकसित हो रही पर्यटन अधोसंरचना, स्थानीय समुदाय की सहभागिता तथा पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की भी सराहना की।
मीनाक्षी शर्मा ने देश-विदेश के पर्यटकों से छत्तीसगढ़ आने का आग्रह करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति एक बार छत्तीसगढ़ आएगा, वह यहां की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन धरोहरों, जनजातीय जीवन, आत्मीय आतिथ्य और अविस्मरणीय अनुभवों की यादें हमेशा अपने साथ लेकर जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ अपनी मौलिक पहचान, अद्वितीय पर्यटन संसाधनों और सतत पर्यटन विकास की दिशा में हो रहे प्रयासों के बल पर आने वाले वर्षों में भारत के सर्वाधिक आकर्षक पर्यटन गंतव्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।

एचएनएलयू रायपुर ने बैंकॉक में रचा इतिहास, वैश्विक नवाचार और अनुसंधान के लिए 20 अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ किया महा-समझौता

एचएनएलयू रायपुर ने बैंकॉक में रचा इतिहास, वैश्विक नवाचार और अनुसंधान के लिए 20 अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ किया महा-समझौता

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर ने वैश्विक शैक्षणिक पटल पर राज्य का गौरव बढ़ाते हुए एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि हासिल की है। थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान, एचएनएलयू ने वैश्विक विश्वविद्यालय नवाचार एवं सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

​इस ऐतिहासिक समझौते पर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के 20 अग्रणी और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम उच्च शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और सतत विकास के क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

​बैंकॉक के आईकॉनसियाम में हुआ वैश्विक समागम
यह समझौता 9-10 जुलाई 2026 को बैंकॉक स्थित प्रसिद्ध आईकॉनसियाम कन्वेंशन सेंटर में आयोजित "AUAP - WURI इम्पैक्ट समिट 2026" के दौरान हुआ। इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय सरकार के साथ साझेदारी में विश्वविद्यालय नवाचार-नीति, तंत्र और प्रभाव था, जिसमें दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के प्रमुखों, नीति-निर्माताओं, नवाचार विशेषज्ञों और जाने-माने शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।
​कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल
​कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल ​शिखर सम्मेलन में एचएनएलयू का प्रतिनिधित्व करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानन्दन ने विश्वविद्यालय के अभिनव रिसर्च हब एंड ​​स्पोक (R-HaS) मॉडल पर आधारित एक केस स्टडी प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने एचएनएलयू के अंतर्विषयी अनुसंधान तंत्र, बाह्य वित्तपोषित (एक्सटर्नली फंडेड) शोध परियोजनाओं तथा समाज के प्रति जवाबदेह एवं प्रभावकारी अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया, जिसकी उपस्थित विशेषज्ञों ने काफी सराहना की।
इस रणनीतिक कामयाबी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने कहा कि एचएनएलयू क्षेत्रीय और वैश्विक विश्वविद्यालय संगठनों के साथ सार्थक सहभागिता के माध्यम से अपनी अनुसंधान पहलों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित और प्रसारित करने की दिशा में प्रभावशाली प्रगति कर रहा है। यह बहुपक्षीय समझौता हमारे अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को विस्तार देने की दिशा में एक मील का पत्थर है। सम्मेलन के दौरान AUAP के महासचिव प्रो. डॉ. अनूप स्वरूप तथा कार्यकारी सचिव डॉ. सुपापोर्न चुआंगचिद के साथ संयुक्त सम्मेलन, अनुसंधान परियोजनाओं, संकाय (फैकल्टी) व छात्र विनिमय (एक्सचेंज) कार्यक्रमों पर भी बेहद सार्थक चर्चा हुई है।
​समझौते के तहत इन क्षेत्रों में होगा साझा काम
​बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद-3 के तहत सभी 20 सहभागी संस्थान भविष्य में मिलकर काम करेंगे। इसके तहत आपसी सहयोग से वैश्विक महत्व की नवाचार व शोध परियोजनाओं का संचालन, संकाय (फैकल्टी), शोधार्थियों और छात्रों के लिए विनिमय कार्यक्रम,नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलनों, कार्यशालाओं और केस स्टडीज का विकास करना शामिल है।
​इन संगठनों के सहयोग से हुआ शिखर सम्मेलन
AUAP (एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक): यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एक बेहद प्रतिष्ठित और पुराना विश्वविद्यालय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को एक मंच पर लाकर शैक्षणिक सहयोग, नेतृत्व विकास और उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देना है।
WURI (वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स फॉर इनोवेशन) यह एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली है जो विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन सिर्फ पारंपरिक किताबी या शोध मानकों पर नहीं, बल्कि वास्तविक सामाजिक प्रभाव, उद्योग सहयोग, उद्यमिता और नैतिक नेतृत्व जैसे नवाचारों के आधार पर करती है। एचएनएलयू अपने दूरदर्शी नेतृत्व के कारण इस रैंकिंग में लगातार अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है।
हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर देश के अग्रणी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। अपने विशिष्ट 'R-HaS' मॉडल, अनुभवात्मक अधिगम (एक्सपेरिमेंटल लर्निंग) और लोकनीति-उन्मुख अनुसंधान के दम पर यह संस्थान विधि शिक्षा के भविष्य को वैश्विक स्तर पर आकार देने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

अधिकारियों-कर्मचारियों की GPF वार्षिक लेखा पर्ची जारी, वेबसाइट और DigiLocker पर उपलब्ध

अधिकारियों-कर्मचारियों की GPF वार्षिक लेखा पर्ची जारी, वेबसाइट और DigiLocker पर उपलब्ध

 रायपुर। उप महालेखाकार पेंशन एवं निधि रायपुर ने सामान्य भविष्य निधि के वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक लेखा जारी कर दी है। उन्होंने बताया कि सभी अभिदातागण अपनी भविष्य निधि की वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक लेखा पर्ची राज्य शासन से प्राप्त आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।

उप महालेखाकार पेंशन एवं निधि रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों व अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के सामान्य भविष्य निधि वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक लेखा पर्ची कार्यालय प्रधान महालेखाकार छत्तीसगढ़ रायपुर की विभागीय वेबसाइट http://cag.gov.in/ae/chhattisgarh/en एवं राज्य शासन की वेबसाइट e-Kosh www.treasury.cg.nic.in पर अपलोड कर दिया गया है, इसे डाउनलोड कर अवलोकन किया जा सकता है। इसके अलावा वार्षिक लेखा विवरण 2025-26 डीजीलाकर्स (Digilocker) प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध कराया गया है।

ग्रामीण विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

ग्रामीण विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज विधानसभा परिसर से ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ के अंतर्गत संचालित निःशुल्क मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों तक पहुँचकर विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एयरोमॉडलिंग तथा ऑगमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी (AR/VR) जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ केवल एक मोबाइल लैब नहीं, बल्कि ग्रामीण विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली अभिनव पहल है। यह बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, आत्मविश्वास और तकनीकी दक्षता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ को दिखाई हरी झंडीa

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज पूरी दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ड्रोन, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीकों की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को भी इन उभरती हुई तकनीकों का ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि अवसरों में किसी प्रकार की असमानता न रहे और गाँव का बच्चा भी भविष्य की तकनीकों में उतना ही सक्षम बने जितना किसी महानगर का विद्यार्थी होता है।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य भी विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार, प्रयोगधर्मिता और रचनात्मक सोच का विकास करना है। यह मोबाइल लैब उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जो बच्चों को केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं सिखाएगी, बल्कि उन्हें नई तकनीकों के निर्माण और नवाचार की दिशा में भी प्रेरित करेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ को दिखाई हरी झंडी

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है तथा बच्चों को समय के साथ नई तकनीकों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ जैसी अभिनव पहल ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी वही अवसर उपलब्ध कराएगी, जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को मिलते हैं। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी, नवाचार की सोच विकसित होगी और वे आधुनिक तकनीकों को समझने के साथ उनका व्यावहारिक उपयोग भी सीख सकेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मोबाइल लैब के माध्यम से विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्वयं ड्रोन उड़ाने, रोबोट संचालित करने, 3डी मॉडल तैयार करने और आधुनिक उपकरणों पर कार्य करने का अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मजबूत नींव तैयार करेगी।

उन्होंने पंडरिया विधायक भावना बोहरा की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा, नवाचार और युवा प्रतिभाओं के विकास के लिए निरंतर नए प्रयास कर रही हैं। यह मोबाइल साइंस लैब भी उनकी दूरदर्शी सोच और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है, जो आने वाले समय में हजारों विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।

मोबाइल लैब की तकनीकी सुविधाओं का किया अवलोकन

कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब का अवलोकन किया। प्रशिक्षकों ने उन्हें लैब में उपलब्ध विभिन्न उपकरणों, प्रशिक्षण मॉड्यूल और शिक्षण प्रणाली की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि लेते हुए एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों का स्वयं निरीक्षण किया तथा यह जाना कि विद्यार्थी किस प्रकार इन तकनीकों को व्यवहारिक रूप से सीखेंगे। उन्होंने इसे ग्रामीण प्रतिभाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने वाला अभिनव और प्रेरणादायी प्रयास बताया। उन्होंने लैब में प्रदर्शित विभिन्न तकनीकी मॉड्यूल का अवलोकन करते हुए प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण प्रक्रिया की जानकारी ली और बच्चों को मिलने वाले व्यावहारिक अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रयोग आधारित शिक्षा विद्यार्थियों में सीखने की रुचि और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाती है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ को दिखाई हरी झंडी

एक वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचेगी तकनीकी शिक्षा

उल्लेखनीय है कि यह मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों तथा सरस्वती शिशु मंदिरों में जाकर प्रशिक्षण प्रदान करेगी। पाँच अनुभवी प्रशिक्षकों की टीम प्रत्येक विद्यालय में तीन से पाँच दिनों की कार्यशाला आयोजित करेगी, जिसमें विद्यार्थियों को AI, रोबोटिक्स, ड्रोन एवं एयरोमॉडलिंग, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स  तथा AR/VR जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत पहले वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक तकनीकी शिक्षा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि आगामी चरणों में अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा।

इस मोबाइल लैब की सबसे बड़ी विशेषता इसकी हैंड्स-ऑन लर्निंग पद्धति है। विद्यार्थी स्वयं ड्रोन उड़ाना, रोबोट संचालित करना, कोडिंग करना, 3डी मॉडल तैयार करना तथा AI और AR/VR जैसी तकनीकों का वास्तविक अनुभव प्राप्त करेंगे। इससे उनमें तकनीकी समझ, रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार की भावना का विकास होगा।

कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल लैब में स्थापित फीडबैक बोर्ड पर अपने विचार भी लिखे और इस अभिनव पहल की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक भावना बोहरा, विधायक सुशांत शुक्ला, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से सेवा सेतु बना सुशासन का सशक्त डिजिटल माध्यम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से सेवा सेतु बना सुशासन का सशक्त डिजिटल माध्यम

 प्रदेशवासियों को 441 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिल रहीं, सुश्री संतोषी सिंह को सहजता से मिला निवास प्रमाण पत्र
रायपुर-
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल प्रशासन को नई गति देने वाला सेवा सेतु पोर्टल आज आम नागरिकों के लिए शासकीय सेवाओं तक आसान, पारदर्शी और समयबद्ध पहुंच का सशक्त माध्यम बन गया है। इस अभिनव पहल के माध्यम से प्रदेश के नागरिकों को अब 441 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो गई है।
सेवा सेतु पोर्टल का लाभ प्रदेशभर के नागरिकों को मिल रहा है। इसी क्रम में बलरामपुर जिले की सुश्री संतोषी सिंह को भी इस व्यवस्था से राहत मिली। उन्होंने निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। प्रारंभिक परीक्षण के दौरान आवश्यक भूमि संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण आवेदन लंबित हो गया था। संबंधित अधिकारियों ने उन्हें वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करने के संबंध में मार्गदर्शन दिया। इसके बाद उन्होंने 15 वर्ष के निवास संबंधी प्रमाण एवं जन्म संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनका निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। प्रमाण पत्र प्राप्त होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा सेतु के माध्यम से उनकी वर्षों पुरानी समस्या का सहज समाधान हो गया।
पूर्व में ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से सीमित सेवाएं उपलब्ध थीं, लेकिन अब इसे विस्तारित और उन्नत स्वरूप देकर सेवा सेतु के रूप में विकसित किया गया है। वर्तमान में विभिन्न विभागों की सैकड़ों सेवाओं को एकीकृत कर नागरिकों के लिए एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है। आवेदन से लेकर सेवा प्राप्ति तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जा रही है।
सेवा सेतु के प्रभावी संचालन के लिए पंचायत सचिवों, सेवा सेतु केंद्र संचालकों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि ग्राम पंचायत स्तर तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हो सके और अधिक से अधिक नागरिक इसका लाभ उठा सकें।
पोर्टल के माध्यम से आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, भू-अभिलेख संबंधी सेवाएं, नाम संशोधन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े आवेदन, श्रम एवं राजस्व विभाग की सेवाएं सहित अनेक सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर विवाह प्रमाण पत्र, भवन अनुज्ञा, स्ट्रीट लाइट संबंधी आवेदन, स्वच्छता से जुड़ी शिकायतें तथा राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से नाम परिवर्तन जैसी सेवाएं भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सेवा सेतु पोर्टल को व्हाट्सएप सुविधा से भी जोड़ा गया है, जिससे नागरिक घर बैठे आवेदन की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इसका व्यापक लाभ मिल रहा है। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा सरकारी सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो रही है।

विश्व युवा कौशल दिवस पर वित्त मंत्री चौधरी ने युवाओं को दी शुभकामनाएं

विश्व युवा कौशल दिवस पर वित्त मंत्री चौधरी ने युवाओं को दी शुभकामनाएं

 00 कौशल विकास से आत्मनिर्भर भारत और विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार : चौधरी
रायपुर।
विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रदेश एवं देश के समस्त युवाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। ओपी चौधरी ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में कौशल विकास को निरंतर नई गति मिल रही है। स्किल इंडिया मिशन सहित विभिन्न पहल के माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, नवाचार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज के समय में कौशल ही युवाओं की सबसे बड़ी शक्ति है। आधुनिक तकनीक, नवाचार और व्यावसायिक दक्षता के माध्यम से युवा न केवल अपने भविष्य को सशक्त बना सकते हैं, बल्कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने युवाओं से निरंतर सीखने, अपने कौशल का विकास करने तथा समाज और राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए विश्व युवा कौशल दिवस की पुन: शुभकामनाएं दीं।

नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई, गर्भगृह में पहुंचने वाले कांग्रेस के 34 विधायक निलंबित

नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई, गर्भगृह में पहुंचने वाले कांग्रेस के 34 विधायक निलंबित

 रायपुर। नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बुधवार को विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर काम रोको (स्थगन) प्रस्ताव लाकर तत्काल चर्चा की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सरकार का पक्ष सुनने के बाद प्रस्ताव अग्राह्य कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए, जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित कांग्रेस के सभी 34 विधायकों को सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया। 

प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि नकटी गांव में 29 और 30 जून को बुलडोजर चलाकर 85 गरीब परिवारों के मकान तोड़ दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें कई मकान प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत बने थे, जहां बिजली, पेयजल और सड़क जैसी सरकारी सुविधाएं उपलब्ध थीं।
काम रोको प्रस्ताव में कहा गया कि सरकार की कार्रवाई अन्यायपूर्ण, असंवैधानिक और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। इससे प्रभावित परिवारों के मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है। कांग्रेस सदस्यों ने आरोप लगाया कि मकानों के साथ घरेलू सामान, बच्चों की किताबें, राशन और अन्य आवश्यक वस्तुएं भी नष्ट हो गईं। साथ ही, क्षेत्रीय सांसद द्वारा वर्षा ऋतु में मकान नहीं तोडऩे और पहले पुनर्वास करने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद उसका पालन नहीं किया गया। प्रभावित परिवारों को सेक्टर-30, नवा रायपुर में दिए जा रहे वैकल्पिक आवास छोटे हैं और वहां बिजली, पानी सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने आरोप लगाया कि विधायक कॉलोनी के लिए गरीबों के मकान तोड़े गए। इस पर भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर ने कहा कि यदि विधायक कॉलोनी निर्माण से संबंधित कोई दस्तावेज है तो उसे सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए। जवाब में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि पूरी कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक और नियमानुसार की गई है। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण की शिकायत मिलने पर अतिरिक्त तहसीलदार ने जांच की थी। जांच में अवैध कब्जा पाए जाने के बाद वर्ष 2025 में बेदखली का आदेश पारित किया गया और उसके बाद 28 जून को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।
राजस्व मंत्री ने कहा कि कब्जाधारियों को कार्रवाई से पहले अपना सामान हटाने का पर्याप्त समय दिया गया था। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए सेक्टर-30, नवा रायपुर में फ्लैट उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार के घरेलू सामान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया और यह कहना भी सही नहीं है कि कार्रवाई बारिश के दौरान की गई।
राजस्व मंत्री का जवाब सुनने के बाद स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने काम रोको प्रस्ताव को अग्राह्य घोषित कर दिया। इससे नाराज कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए। विधानसभा नियमों के तहत गर्भगृह में प्रवेश करने पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित कांग्रेस के सभी 34 विधायक स्वत: निलंबित हो गए।

विधानसभा में नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ पर आभार प्रस्ताव पारित, सीएम बोले- बस्तर में शांति और विकास का नया दौर

विधानसभा में नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ पर आभार प्रस्ताव पारित, सीएम बोले- बस्तर में शांति और विकास का नया दौर

 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को नक्सल हिंसा से मुक्ति पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लाया गया आभार प्रस्ताव लंबी चर्चा के बाद सर्वसम्मति से पारित हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों तक नक्सल हिंसा के कारण बस्तर का विकास और शिक्षा प्रभावित रहे, लेकिन अब केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों, सुरक्षा बलों के साहस तथा स्थानीय जनता के सहयोग से प्रदेश शांति, सुरक्षा और विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।

मुख्यमंत्री ने नक्सल विरोधी अभियान में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में अपनाई गई सुरक्षा एवं विकास आधारित रणनीति की सराहना की।

उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं

सीएम ने कहा कि बस्तर में 6.79 लाख राशन कार्ड, 17 लाख जनधन खाते, 22 लाख आयुष्मान कार्ड और 1.76 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही नक्सल प्रभावित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15 हजार अतिरिक्त आवास भी मंजूर किए गए हैं।

चर्चा के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप भावुक हो गए। डॉ. रमन सिंह ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी नक्सल विरोधी लड़ाई की जीत बताया, जबकि केदार कश्यप ने नक्सल हिंसा की भयावह घटनाओं को याद करते हुए कहा कि अब बस्तर भय नहीं, विकास की पहचान बनेगा।

गृहमंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज छत्तीसगढ़ नक्सली संगठन से मुक्त होकर नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

जो गुजरात में बैन, वो दवा छत्तीसगढ़ में खरीदी गई ? स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने सदन में किया स्पष्ट

जो गुजरात में बैन, वो दवा छत्तीसगढ़ में खरीदी गई ? स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने सदन में किया स्पष्ट

 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सरकारी अस्पतालों के लिए दवा खरीद का मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया। यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड से खरीदी गई एस्पिरिन को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा और दवा खरीद प्रक्रिया के साथ गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल उठाए। इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ में गुजरात में प्रतिबंधित बैच की कोई दवा नहीं खरीदी गई है और राज्य में वितरित दवाएं पूरी तरह अलग बैच की हैं।

राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ी है। विपक्ष के इस हंगामे ने प्रदेश की दवा खरीद व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की सुरक्षा को लेकर जनता के बीच चर्चा तेज कर दी है, जिससे पारदर्शिता की मांग बढ़ी है।

विपक्ष का आरोप, मरीजों की जान जोखिम में डालकर दवाएं खरीदी

प्रश्नकाल के दौरान विधायक अटल श्रीवास्तव ने अमानक दवाओं के मुद्दे पर सरकार से तीखे सवाल पूछे। विपक्ष ने जानना चाहा कि जिस कंपनी की दवाओं को गुजरात में प्रतिबंधित किया गया था, उसे छत्तीसगढ़ में किन परिस्थितियों में और कितनी मात्रा में खरीदा गया। विपक्ष का आरोप था कि मरीजों की जान जोखिम में डालकर ऐसी दवाएं खरीदी गईं।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि 25 मार्च 2026 को CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन) को गुजरात से सूचना प्राप्त हुई थी। उन्होंने बताया कि राज्य में खरीदी गई एस्पिरिन 75 mg (अनकोटेड) दवा, गुजरात में ब्लैकलिस्ट की गई दवाओं के बैच से पूरी तरह अलग थी।

विस्तृत जांच की मांग

विपक्ष ने इस मामले में विस्तृत जांच की मांग की है, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने भविष्य में दवा खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का आश्वासन दिया है। अब यह देखना होगा कि क्या सरकार इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश देती है या नहीं।

CG : राजिमवासियों की मांग पूरी, बना नगर पालिका, अधिसूचना जारी

CG : राजिमवासियों की मांग पूरी, बना नगर पालिका, अधिसूचना जारी

 रायपुर। राज्य शासन ने राजिमवासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए राजिम नगर पंचायत का नगर पालिका के रूप में उन्नयन कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। राजिम नगर पंचायत की सीमाएं ही राजिम नगर पालिका की सीमाएं होंगी। राज्य शासन के इस निर्णय से पूरे शहर में खुशी एवं उत्साह का वातावरण है।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्रीअरुण साव ने राजिम नगर पंचायत के नगर पालिका के रूप में उन्नयन पर कहा कि राज्य शासन के इस निर्णय से राजिम के सुनियोजित विकास को नई दिशा मिलेगी तथा शहरी सुविधाओं के विस्तार के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे राजिम में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, उद्यान, सामुदायिक भवन सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं के विकास को और ज्यादा गति मिलेगी। साथ ही राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से नगरवासियों तक पहुंचेगा।

CG Weather : छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय होगा मानसून, कई जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट

CG Weather : छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय होगा मानसून, कई जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने जा रहा है। मंगलवार को गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बुधवार से राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने 15 जुलाई से प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां तेज होने का अनुमान जताया है। राजधानी रायपुर में सुबह से आसमान में बादल छाए हुए हैं और हल्की बूंदाबांदी से मौसम सुहावना बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए सिस्टम के प्रभाव से अगले 24 घंटे के भीतर प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। खासकर उत्तर छत्तीसगढ़ में बारिश का असर अधिक देखने को मिल सकता है। रायपुर में भी दिनभर बादल छाए रहने के साथ गरज-चमक और बारिश की संभावना है, जहां अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में मानसून द्रोणिका जम्मू, देहरादून, बाराबंकी, पटना, बंकुरा होते हुए पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। वहीं उत्तर बंगाल की खाड़ी और दक्षिण बांग्लादेश के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण अगले 24 घंटे में निम्न दबाव के क्षेत्र में बदल सकता है। इसी सिस्टम के असर से प्रदेश में मानसून फिर सक्रिय होगा। हालांकि पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश का मौसम शुष्क रहा और कहीं भी उल्लेखनीय बारिश दर्ज नहीं हुई। बिलासपुर में अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि राजनांदगांव और पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहा। इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से 29 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

मौसम विभाग ने सुकमा, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद, जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों के लिए तेज हवा, गरज-चमक, आकाशीय बिजली और बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं बीजापुर, बालोद, राजनांदगांव, महासमुंद, रायपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, कोरिया समेत कई जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा और बारिश की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया गया है।

 
 
 
CG : बाल संप्रेक्षण गृह से फिर फरार हुए 13 अपचारी, दूसरी बार सुरक्षा में बड़ी चूक

CG : बाल संप्रेक्षण गृह से फिर फरार हुए 13 अपचारी, दूसरी बार सुरक्षा में बड़ी चूक

 सरगुजा, अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक बार फिर चौंकाने वाली खबर सामने आई है। गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से देर रात 13 अपचारी बालक फरार हो गए। लगातार दूसरी बार हुई इस घटना ने संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और फरार बालकों की तलाश के लिए जिलेभर में सर्च अभियान तेज कर दिया है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अपचारी बालकों ने संप्रेक्षण गृह के पुराने और कमजोर दरवाजे को तोड़कर भागने की योजना बनाई। देर रात सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठाते हुए सभी 13 बालक परिसर से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही संप्रेक्षण गृह प्रबंधन ने गांधीनगर थाना पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान शुरू किया गया।

गौरतलब है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 23 जून को भी इसी बाल संप्रेक्षण गृह से 13 अपचारी बालक फरार हो गए थे। उस दौरान पुलिस ने अधिकांश बालकों को पकड़ लिया था, लेकिन दो अपचारी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। ऐसे में एक बार फिर हुई इस घटना ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है।

फिलहाल पुलिस फरार सभी अपचारी बालकों की तलाश में जुटी हुई है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आखिर बार-बार सुरक्षा में चूक कैसे हो रही है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर खनिज विभाग का सख्त एक्शन, अवैध रेत और गिट्टी परिवहन में 6 ट्रैक्टर जब्त

सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर खनिज विभाग का सख्त एक्शन, अवैध रेत और गिट्टी परिवहन में 6 ट्रैक्टर जब्त

 रायपुर- सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण की दिशा में लगातार की जा रही कार्रवाई का एक और प्रभावी उदाहरण सामने आया है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में ना नवपदस्थ कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के निर्देशानुसार जिला खनिज विभाग ने अवैध खनिज परिवहन के विरुद्ध विशेष अभियान चलाते हुए रेत एवं गिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त छह ट्रैक्टरों को जब्त किया। यह कार्रवाई सीएम हेल्पलाइन (टोल फ्री नंबर-1076) में प्राप्त शिकायत के आधार पर तत्काल जांच के बाद की गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायत मिलते ही कलेक्टर ने जिला खनिज विभाग को त्वरित जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देशों के पालन में जिला खनिज उडऩदस्ता दल ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया। इस दौरान कोलबिर्रा एवं रुमगा क्षेत्र से रेत से भरे तीन ट्रैक्टर, खंता एवं पिपरिया क्षेत्र से रेत से भरे दो ट्रैक्टर तथा सधवानी क्षेत्र से गिट्टी से भरा एक ट्रैक्टर अवैध परिवहन करते हुए पकड़ा गया। सभी छह वाहनों को मौके पर जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।

खनिज विभाग ने संबंधित वाहन स्वामियों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अर्थदंड एवं समझौता राशि खनिज मद में जमा किए जाने के बाद ही नियमानुसार जब्त वाहनों को मुक्त किया जाएगा। कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश भी दिए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ शासन के राजस्व हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सतत निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि अवैध खनिज गतिविधियों की जानकारी मिलने पर सीएम हेल्पलाइन अथवा संबंधित विभाग को सूचित करें, ताकि तत्काल कार्रवाई कर नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जा सके।

इस कार्रवाई में सहायक खनि अधिकारी श्री आदित्य मानकर, खनि निरीक्षक श्री सुजीत कंवर, खनिज सिपाही श्री शिवकुमार लहरे तथा नगर सैनिक श्री सतीश साहू की सक्रिय  भूमिका रही।

लोकतंत्र की पाठशाला बना विधानसभा परिसर: शकुंतला विद्यालय के विद्यार्थियों ने सदन की कार्यवाही का किया अवलोकन

लोकतंत्र की पाठशाला बना विधानसभा परिसर: शकुंतला विद्यालय के विद्यार्थियों ने सदन की कार्यवाही का किया अवलोकन

 00 मुख्यमंत्री साय और विधानसभा अध्यक्ष सिंह से की भेंट: लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय व्यवस्था की मिली जानकारी
रायपुर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर लोकतंत्र की पाठशाला बन गया, जब भिलाई स्थित शकुंतला विद्यालय के ग्यारहवीं एवं बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं का दल शैक्षणिक भ्रमण पर विधानसभा पहुंचा। विद्यार्थियों ने विधानसभा की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अवलोकन कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसदीय परंपराओं को निकट से समझने का अवसर प्राप्त किया। 
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की आकांक्षाओं को सदन में अभिव्यक्त करने की सतत प्रक्रिया है। विधानसभा में जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा होती है और जनता के कल्याण के लिए नीतियां एवं कानून बनाए जाते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ-साथ संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण उन्हें लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझने, संविधान के प्रति सम्मान विकसित करने तथा जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव तथा विधायक  रिकेश सेन भी उपस्थित थे।
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने सदन की कार्यवाही को दर्शक दीर्घा से देखा और प्रश्नकाल, विभिन्न विषयों पर चर्चा तथा संसदीय प्रक्रियाओं को निकट से समझा। उन्होंने विधानसभा भवन की संरचना, कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त कीं।
विद्यार्थियों ने इस अनुभव को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि पुस्तकों में पढ़ी गई संसदीय व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर उनके लिए विशेष रहा। उन्होंने कहा कि इससे लोकतंत्र, संविधान और जनप्रतिनिधियों की भूमिका के प्रति उनकी समझ और अधिक विकसित हुई है।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान को मिल रही व्यापक जनभागीदारी

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान को मिल रही व्यापक जनभागीदारी

 00 वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत बालोद जिले में 2.85 लाख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण, 19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित

00 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब, डबरी, रिचार्ज शाफ्ट, चेकडैम एवं भू-जल पुनर्भरण कार्यों से जल सुरक्षा की दिशा में उल्लेखनीय पहल
रायपुर।
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा के मार्गदर्शन में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान प्रदेशभर में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे रहा है। अभियान के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ-साथ जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं हरित विकास के कार्यों को व्यापक गति मिली है।

इसी क्रम में बालोद जिले में जिला प्रशासन द्वारा सभी ग्राम पंचायतों, शासकीय कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, स्व-सहायता समूहों तथा सामाजिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता से जल संरक्षण के विविध कार्य किए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य “जहाँ वर्षा हो, जब वर्षा हो - वहीं वर्षा जल का संचयन हो” की अवधारणा को व्यवहार में उतारना है।

अभियान के अंतर्गत प्रत्येक शासकीय भवन में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग तथा सतही वर्षा जल संचयन के लिए रिचार्ज शाफ्ट, डबरी, तालाब एवं ट्रेंच का निर्माण किया गया है। साथ ही हैंडपंपों एवं प्रधानमंत्री आवासों में सोख्ता गड्ढों तथा वर्षा जल संचयन प्रणालियों की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

भू-जल संवर्धन के लिए रिचार्ज पिट, इंजेक्शन वेल, निष्क्रिय बोरवेलों का रिचार्ज, तालाबों का जीर्णाेद्धार एवं गहरीकरण, चेकडैम, वाटर एब्जॉर्बिंग ट्रेंच सहित विभिन्न जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण एवं पुनर्जीवन किया गया है

जिले में वीबीजी-रामजी (मनरेगा), वन विभाग, जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं तथा जनभागीदारी के माध्यम से अब तक 2.85 लाख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जिनसे लगभग 19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित हुई है। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि, भूमि की नमी का संरक्षण, खरीफ एवं रबी दोनों फसलों के लिए सिंचाई सुविधा में सुधार तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी

अभियान की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार जनभागीदारी है। जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों, ग्राम विकास समितियों, महिला कमांडो, ग्रीन आर्मी तथा स्कूल एवं कॉलेज के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से तालाबों एवं जलाशयों की स्वच्छता, घर-घर जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के प्रति जनजागरूकता तथा व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण एवं सीड बॉल अभियान संचालित किया जा रहा है। जुलाई माह में अब तक 3 लाख से अधिक सीड बॉल का रोपण किया जा चुका है तथा 2 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राज्य शासन द्वारा वीबी- जी राम जी योजना के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, हरित विकास एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। ‘जल संरक्षण - जन सहभागिता से जल समृद्धि की ओर’ की भावना के साथ जिला प्रशासन बालोद जल-सुरक्षित, हरित एवं समृद्ध ग्रामीण विकास के लक्ष्य की दिशा में सतत कार्य कर रहा है।

महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक मजबूती, स्वरोजगार को मिली नई पहचान

महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक मजबूती, स्वरोजगार को मिली नई पहचान

 00 लखपति दीदी बनने की ओर अग्रसर हैं केजू बाई सलामे
रायपुर।
शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मोहला के ग्राम रामगढ़ निवासी केजू बाई सलामे इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। अपनी मेहनत और लगन के साथ शासन की योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया है, बल्कि आज वे आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बन रही हैं।
’केवल आर्थिक सहयोग नहीं, व्यवसाय को आगे बढ़ाने बनी पूंजी’
केजू बाई बिहान के रोशनी स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। समूह से जुड़ने के बाद उनमें बचत एवं आर्थिक प्रबंधन की समझ बढ़ी और स्वरोजगार को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास मिला। इसी आत्मविश्वास के साथ उन्होंने अपने गांव में एक किराना दुकान का संचालन शुरू किया, जो आज उनके परिवार की आय का प्रमुख स्रोत बन चुकी है। वे बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपए की सहायता राशि नियमित रूप से प्राप्त होती है। यह राशि उनके लिए केवल आर्थिक सह...योग नहीं, बल्कि व्यवसाय को आगे बढ़ाने की पूंजी बन गई है। प्राप्त राशि से वे अपनी दुकान के लिए आवश्यक किराना सामग्री खरीदती हैं, जिससे दुकान में हमेशा पर्याप्त सामान उपलब्ध रहता है। परिणामस्वरूप ग्राहकों की संख्या और बिक्री में निरंतर वृद्धि हुई है तथा उनकी आय पहले की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ हुई है।
दुकान की आय से परिवार की आवश्यकताओं की होगी पूर्ति
सलामे कहती हैं कि पहले सीमित संसाधनों के कारण व्यवसाय का विस्तार करना कठिन था, लेकिन अब नियमित आर्थिक सहायता मिलने से वे आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं। दुकान से होने वाली आय से परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है और भविष्य के लिए बचत भी संभव हो रही है। अपने बढ़ते व्यवसाय और निरंतर आय के बल पर वे आज लखपति दीदी बनने की ओर अग्रसर हैं। उनका लक्ष्य अपने व्यवसाय का और विस्तार करना तथा अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना है। 
योजना महिलाओं के सम्मान, आत्मविश्वास, आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम
सलामे ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए सम्मान, आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है। शासन की योजनाओं के सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर वे आज आत्मनिर्भरता की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रही हैं।.......

मानसून में तेज़ हुई वन संरक्षण गतिविधियाँ, जल संरक्षण से हरियाली और वन सुरक्षा को मिल रहा नया बल

मानसून में तेज़ हुई वन संरक्षण गतिविधियाँ, जल संरक्षण से हरियाली और वन सुरक्षा को मिल रहा नया बल

 00 जल संरक्षण, पौधारोपण, प्राकृतिक पुर्नजनन और मानव-वन्यजीव संरक्षण के लिए बलौदाबाजार वनमण्डल की समन्वित पहल
रायपुर।
वन क्षेत्रों को समृद्ध, सुरक्षित और हरा-भरा बनाने के लिए वृक्षारोपण और कटाई के बीच संतुलन, वनों को आग से सुरक्षा, झूम कृषि पर रोक, और जन जागरूकता जैसे ठोस उपाय अत्यंत आवश्यक हैं। इन प्रयासों में स्थानीय समुदायों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी से वनों का संरक्षण अधिक प्रभावी हो जाता है। छत्तीसगढ मेें मानसून की शुरुआत के साथ बलौदाबाजार वनमण्डल में वन संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन से जुड़े कार्यों में तेजी आ गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार वनमण्डलाधिकारी  धम्मशील गणवीर के मार्गदर्शन में विभिन्न वन परिक्षेत्रों में जल संरक्षण, पौधारोपण, प्राकृतिक पुर्नजनन, वन महोत्सव, मानव-वन्यजीव संरक्षण तथा वन मार्गों के रखरखाव के कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा ऋतु का बेहतर उपयोग कर वन क्षेत्रों को अधिक समृद्ध, सुरक्षित और हराभरा बनाना है।
जल संरक्षण संरचनाओं में हुआ भरपूर जलभराव
जल संचय से जन भागीदारी 2.0 अभियान के तहत पूर्व वर्षों में बनाई गई सॉइल कंजर्वेशन ट्रेंच (एससीटी) तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाएँ हाल की वर्षा से पूरी तरह भर गई हैं। इन संरचनाओं से वर्षा जल का संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और वन क्षेत्रों में नमी बनाए रखने में मदद मिल रही है, जिससे पौधों और वन्यजीवों को भी लाभ मिल रहा है।
सीड बॉल अभियान से दिखने लगे सकारात्मक परिणाम
वनमण्डल के देवपुर वन परिक्षेत्र में साजा प्रजाति के सीड बॉल से सफल अंकुरण देखा गया है। वहीं अर्जुनी वन परिक्षेत्र के उत्तर महराजी परिसर में कंटूर पाल एवं जल संरक्षण संरचनाओं के किनारे सीड बॉल और स्थानीय घास प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी का कटाव कम होगा और प्राकृतिक रूप से नए पौधों का विकास होगा।
वन मार्गों को सुरक्षित रखने का कार्य जारी
बारिश के दौरान वन मार्गों को सुरक्षित और सुगम बनाए रखने के लिए विभिन्न स्थानों पर क्रॉस ड्रेनेज (आड़ीपार) निर्माण किया जा रहा है। बार-दोंद मार्ग, पुटपुरा तथा पूर्व सुरबाय-बारनवापारा वन मार्ग सहित कई स्थानों पर सुरक्षा श्रमिक वर्षा से होने वाले कटाव को रोकने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।
एक पेड़ माँ के नाम अभियान में बढ़ रही जनभागीदारी
वन महोत्सव के तहत चल रहे ष्एक पेड़ माँ के नामष् अभियान में लोगों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। बल्दाकछार वन परिक्षेत्र के नंदनिया एवं बल्दाकछार परिसरों में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, वन प्रबंधन समितियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, ग्रामीणों तथा वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए हाथी मित्र दल को मिला सहयोग
बारनवापारा अभयारण्य में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए हाथी मित्र दल को टॉर्च, मेगाफोन और जूते उपलब्ध कराए गए हैं। इससे दल वन्य हाथियों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेगा तथा ग्रामीणों को समय पर सूचना देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
लाइव हेज के रूप में कैक्टस रोपण की नई पहल
बल्दाकछार वन परिक्षेत्र के दलदली परिसर में सुरक्षा संरचनाओं के किनारे लाइव हेज के रूप में कैक्टस का रोपण शुरू किया गया है। यह पहल मिट्टी संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्रों की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगी।
वन संरक्षण के लिए मानसून सबसे उपयुक्त समय
वनमण्डलाधिकारी  धम्मशील गणवीर ने कहा कि मानसून प्राकृतिक पुनर्जनन और वन संरक्षण के लिए सबसे अनुकूल समय होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण, पौधारोपण, वन मार्गों का रखरखाव, मानव-वन्यजीव संरक्षण तथा जनभागीदारी से जुड़े सभी कार्य समन्वित रूप से किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से वन क्षेत्रों की पारिस्थितिकी और जैव विविधता को मजबूती मिलेगी तथा जल और वन संसाधनों के सतत संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।