रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका से आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध गेड़ी लोक नर्तक एवं लोक श्रृंगार भारती, बिलासपुर के संचालक अनिल कुमार गढ़ेवाल ने अपने सहयोगी श्री लक्ष्मी नारायण मांडले के साथ सौजन्य भेंट की।
उल्लेखनीय है की गढ़ेवाल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के गेड़ी लोक नृत्य दल ने 26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह तथा 15 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एट होम कार्यक्रम में गेड़ी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी थी। इन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आयोजनों में छत्तीसगढ़ की लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रदर्शन कर दल ने प्रदेश को गौरवान्वित किया। राज्यपाल डेका ने गढ़ेवाल एवं उनकी टीम के प्रयासों और उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोकनृत्य हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण अंग हैं। ऐसे कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की लोककला और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्यपाल ने गढ़ेवाल एवं उनके सहयोगियों को लोककला के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करने तथा भविष्य में भी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए शुभकामनाएं दीं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के विभिन्न खेलों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले खिलाडिय़ों ने आज लोकभवन में राज्यपाल रमेन डेका से सौजन्य भेंट की। खिलाड़ी छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के उपाध्यक्ष किशोर महानंद के साथ राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे।
राज्यपा ने खिलाडिय़ों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने खिलाडिय़ों को भविष्य में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश एवं देश का नाम रोशन करने के लिए प्रोत्साहित किया और आगामी प्रतियोगिताओं में सफलता की शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल से भेंट करने वालों में अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टर प्रदीप क्षत्री एवं लखपति सिंदूर, वेटलिफ्टर कैलाश सिक्का, बास्केटबॉल खिलाड़ी कु. सौपी सिक्का, थाई बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक विजेता कु. मानसी तांडी, सॉफ्टबॉल खिलाड़ी कु. गंगा सोना एवं कु. प्रतिमा सोना, फुटबॉल खिलाड़ी बोस्टो तांडी एवं राजेश महानंद, कराटे खिलाड़ी कु. लक्षिता तांडी, किक बॉक्सिंग खिलाड़ी कु. रीयाशा बाघ, पावरलिफ्टर कु. प्रिया हरपाल तथा इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन-5 के विजेता रितेश पाल शामिल थे। राज्यपाल ने सभी खिलाडिय़ों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें खेल के क्षेत्र में निरंतर आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ मंत्रालय में पदस्थ अधिकारियों के विभाग में बदलाव किया गया हैं। सूची में आधा दर्जन अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
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बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र के टोनाटार गांव में एक 50 वर्षीय महिला का शव उसके घर के अंदर मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। महिला के शरीर पर गहरे घाव पाए गए हैं, जिससे धारदार हथियार से हत्या किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
घटना के बाद से महिला का पति भी लापता बताया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस महिला की मौत के कारणों का पता लगाने के साथ ही लापता पति की तलाश कर रही है। फिलहाल वारदात से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
महिला अपने पति के साथ गांव में रहती थी। घर में काफी देर तक कोई गतिविधि नहीं दिखने पर पड़ोसियों ने आवाज लगाई। जवाब नहीं मिलने पर वे अंदर पहुंचे तो बिस्तर पर महिला का शव दिखाई दिया। आसपास खून फैला हुआ था। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। शुरुआती जांच में महिला के पैरों सहित शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें मिली हैं। कमरे की दीवारों और फर्श पर भी खून के निशान पाए गए।
पुलिस ने मौके से भौतिक साक्ष्य एकत्र किए और पंचनामा की कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मौत के कारण और चोटों की प्रकृति को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
बिलासपुर। बिलासपुर और कोलकाता के बीच पिछले करीब चार महीने से बंद पड़ी सीधी विमान सेवा एक बार फिर शुरू होने जा रही है। अलायंस एयर ने अपना नया विंटर शेड्यूल जारी कर दिया है, जिसके तहत यह सेवा 1 नवंबर से बहाल की जाएगी। हालांकि इस बार फ्लाइट का किराया काफी ज्यादा होगा। इस बार करीब 6000 रुपये का एक तरफ का किराया होगा।
संचालन के दिन: यह सीधी उड़ान सप्ताह में दो दिन यानी शुक्रवार और रविवार को संचालित होगी।
किराया और शुल्क: यह सेवा लगभग तीन गुना किराए के साथ शुरू की जा रही है, जिसमें एक तरफ की उड़ान का किराया करीब 6 हजार रुपए है।
बुकिंग शुरू: यात्रियों की सुविधा के लिए एयरलाइन द्वारा टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू कर दी गई है।
लंबे समय से इस रूट पर विमान सेवा बंद होने के कारण यात्रियों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अब फ्लाइट के दोबारा शुरू होने से पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
रायपुर. मानसून रायपुर से विदा हो चुका है, मगर मानसून द्रोणिका छत्तीसगढ़ से पूरी तरह रवाना नहीं हुई है. दिन में तेज धूप निकलने से राज्य में गर्मी का असर बना हुआ है. मौसम विभाग के मुताबिक, सोमवार को राजधानी रायपुर में तेज धूप वाला मौसम रहने वाला है. तापमान में एक डिग्री का इजाफा भी हो सकता है. प्रदेश के अधिकतर इलाकों में सोमवार को मौसम साफ रहने, जबकि कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई है.
रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम
रायपुर में लोगों को दिन-रात गर्मी का अहसास हो रहा है. सोमवार को मौसम साफ रहने की संभावना है. रविवार के मुकाबले अधकितम तापामान आज एक डिग्री अधिक यानी 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने के आसार हैं.
प्रदेश में कैसा रहा पिछला 24 घंटा
बात करें प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान रहने वाले मौसम की तो अधिकतर स्थानों पर शुष्क रहा और एक-दो जगहों पर हल्की बारिश हुई. प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस राजनन्दगांव में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 17.8 डिग्री सेल्सियस अम्बिकापुर में दर्ज किया गया.
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 2 दिनों तक अधिकांश स्थानों पर मौसम के शुष्क रहने की संभावना है. इसके बाद एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की वर्षा हो सकती है.
किन शहरों में कितना रहा तापमान
प्रदेश में रविवार को दुर्ग 33.4 डिग्री सेल्सियस, जगदलपुर 33.2 डिग्री सेल्सियस, माना 32.9 डिग्री सेल्सियस, बिलासपुर 32. 4 डिग्री सेल्सियस, पेंड्रारोड 31.4 डिग्री सेल्सियस और अंबिकापुर 31 डिग्री सेल्सियस रहा.
हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने के आसार
मौसम विभाग ने आज यानी सोमवार को प्रदेश में एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की वर्षा होने की संभावना जताई है. वहीं कुछ जगहों पर बादल गरजने-चमकने के साथ बिजली गिरने और 40 से 50 किमी की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के आसार हैं. दो दिन बाद इसी तरह की गतिविधियां जारी रह सकती हैं.
मौसमी सिस्टम
मौसम विभाग ने जानकारी दी कि सुपौल, रांची, सुंदरगढ़, बरगढ़, बीजापुर, हैदराबाद, बेलगावी, पणजी से होकर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी की रेखा गुजर रही है. अगले 2 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए स्थितियां अनुकूल बन सकती हैं. इसके अतिरिक्त उत्तर-पश्चिम राजस्थान से उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश तक द्रोणिका बना हुआ है.
- छत्तीसगढ़ मध्य भारत के बड़े मेडिकल हब के रूप में हो रहा विकसित : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
- रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल, कैंसर उपचार केंद्र का हुआ भूमिपूजन
- मुख्यमंत्री साय ने कहा – प्रदेश में ही कैंसर मरीजों को मिलेंगी उच्चस्तरीय उपचार सुविधाएं, दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम
- शहरों से लेकर सुदूर वनांचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का फोकस
- आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना बनीं जरूरतमंद परिवारों का संबल
- मेडिसिटी से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा, फार्मा उद्योग, अनुसंधान और रोजगार को मिलेगा नया विस्तार
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ तेजी से मध्य भारत के एक बड़े मेडिकल हब के रूप में विकसित हो रहा है। राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक, सुपर स्पेशलिटी सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक को बेहतर, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं अपने प्रदेश में ही उपलब्ध हों तथा आर्थिक अभाव किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने।
मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल एवं कैंसर उपचार केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अस्पताल प्रबंधन और ओमेगा ग्रुप की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज के साथ पूरा परिवार कठिन दौर से गुजरता है। यदि उपचार के लिए दूसरे राज्य जाना पड़े तो परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ अनेक व्यावहारिक कठिनाइयां भी आती हैं। हमारी कोशिश है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर से गंभीर बीमारी के उपचार के लिए प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता न्यूनतम हो और उन्हें अपने परिवार के बीच रहते हुए विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने कहा कि ओमेगा अस्पताल का प्रस्तावित ऑन्कोलॉजी सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की उपलब्धता से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों को भी बेहतर कैंसर उपचार की सुविधा मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय गांव, गरीब और सुदूर जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। जिला अस्पतालों में आईसीयू, डायलिसिस यूनिट, आधुनिक पैथोलॉजी और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि सामान्य जांच और उपचार के लिए मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण करना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच चिकित्सा सुविधाओं के अंतर को कम करते हुए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जा रही है।
गंभीर बीमारी में परिवारों का संबल बन रही सरकार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गंभीर बीमारी केवल स्वास्थ्य संबंधी चुनौती नहीं होती, बल्कि कई बार परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट भी खड़ा कर देती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई आयुष्मान भारत योजना ने ऐसे लाखों परिवारों को उपचार की चिंता से राहत दी है। शासकीय अस्पतालों के साथ बड़ी संख्या में निजी अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा गया है, जिससे पात्र परिवारों को निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान कर रही है। हमारा स्पष्ट संकल्प है कि पैसे के अभाव में किसी गरीब का इलाज न रुके और बीमारी के उपचार के लिए किसी परिवार को अपनी जमीन, घर या गहने बेचने जैसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहा बदलाव केवल रायपुर या बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार की प्राथमिकता अबूझमाड़ सहित प्रदेश के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना भी है।
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सीमित थी, वहां आज स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वनांचलों में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों की जांच और उपचार किया जा रहा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ चिकित्सकों, दवाइयों और आवश्यक जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है जिसमें बस्तर के सुदूर गांव से लेकर राजधानी रायपुर तक हर नागरिक को आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।
नवा रायपुर में 200 एकड़ में मेडिसिटी और फार्मा पार्क से खुलेगा संभावनाओं का नया द्वार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख स्वास्थ्य और चिकित्सा निवेश केंद्रों में शामिल करने की दिशा में नवा रायपुर में लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि मेडिसिटी और फार्मा पार्क के माध्यम से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाओं, फार्मास्युटिकल उद्योग, चिकित्सा अनुसंधान और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों को एक मजबूत इकोसिस्टम उपलब्ध होगा। इससे चिकित्सकों, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ सहित प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर और नवा रायपुर में सुपर स्पेशलिटी एवं मल्टीस्पेशलिटी स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। आधुनिक स्वास्थ्य इकाइयों और चिकित्सा क्षेत्र में नए निवेश के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मेडिकल टूरिज्म की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं। हमारा प्रयास है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ न केवल प्रदेशवासियों, बल्कि आसपास के राज्यों के लोगों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का प्रमुख केंद्र बने।
स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश से बढ़ेंगी सुविधाएं और रोजगार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ओमेगा ग्रुप का रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ चिकित्सा क्षेत्र में निवेश के आकर्षक केंद्र के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के समन्वित प्रयासों से आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार संभव है। नए अस्पतालों और सुपर स्पेशलिटी केंद्रों की स्थापना से जहां मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा, वहीं चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और अन्य युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
रायपुर. बरसात के बाद सड़कों, पुल-पुलियों और भवनों के निर्माण को रफ्तार देने की पूरी तैयारी है। लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। काम की प्रगति अब केवल दफ्तरों की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी खुद मैदान में उतरकर निर्माण की वास्तविक स्थिति परखेंगे। कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ औचक निरीक्षण से भी गुणवत्ता और प्रगति पर नजर रखी जाएगी। इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने गरियाबंद जिले का दौरा कर सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ समीक्षा बैठक कर निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी ली और कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।
सचिव बंसल ने गरियाबंद जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर निर्माणाधीन परियोजनाओं की जमीनी स्थिति देखी। उन्होंने फिंगेश्वर विकासखंड में कोपरा-पोखरा मार्ग के 26.20 किलोमीटर लंबे मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस परियोजना में पुल-पुलियों के निर्माण कार्य भी शामिल हैं। उन्होंने राजिम में नवीन मेला स्थल चौबेबांधा से लक्ष्मण झूला तक 3.50 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के निर्माण की प्रगति भी देखी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली और निर्माण में गुणवत्ता तथा समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
सड़क परियोजनाओं के साथ सचिव बंसल ने गरियाबंद में निर्माणाधीन शासकीय भवनों का भी जायजा लिया। उन्होंने व्यवहार न्यायालय में न्यायिक अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे दो डी-टाइप आवासगृहों, जिला परिवहन कार्यालय भवन तथा 40 जीएडी आवासगृहों के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने इन परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सचिव बंसल गरियाबंद जिले के बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र के दुर्गम इलाकों में भी पहुंचे। उन्होंने कसाबाय-पतोरा दादर मार्ग के आरडी 135 में चचंगी नाला पर निर्मित पुल एवं पहुंच मार्ग का निरीक्षण किया। यह कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने कसाबाय-सातधार मार्ग में हलफली नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण कार्य का भी जायजा लिया। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित इन परियोजनाओं के निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली।
मैदानी निरीक्षण के बाद सचिव बंसल ने गरियाबंद सर्किट हाउस में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक ली। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए काम में आ रही समस्याओं और बाधाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों को गति देने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। बरसात के बाद निर्माण कार्यों में तेजी लाने विभागीय अमले को सक्रियता से काम करना होगा। कार्यों की सतत निगरानी और वरिष्ठ अधिकारियों के मैदानी निरीक्षण से निर्माण की वास्तविक प्रगति पर नजर रखी जाएगी।
सचिव बंसल ने लोक निर्माण विभाग के संभागीय कार्यालय और कार्यालय परिसर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यालय में स्वच्छता और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता व्ही. के. भतपहरी, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी एवं उप अभियंतागण उपस्थित थे।
रायपुर- राज्य सरकार ने गृह विभाग में आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। इन पदों पर भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रविधान पहले ही किया जा चुका है। उनके अनुभव और दक्षता का लाभ राज्य सेवाओं में लेने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने राज्य शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन को भी मंजूरी दी। इसके तहत 'आदिम जाति विकास विभाग' का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा।
पीएम मोदी की 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा पर कैबिनेट में अभिनंदन प्रस्ताव पारित
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में निरंतर 25 वर्ष पूरे होने पर बैठक में अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्यमंत्री साय ने इसे राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय के सिद्धांतों को समर्पित कर्मयात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव बताया।
अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे ऐतिहासिक फैसलों के लिए केंद्र का आभार
कैबिनेट ने जैम, जीएसटी, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और माओवादी हिंसा से मुक्ति सहित राष्ट्रहित में केंद्र सरकार के ऐतिहासिक निर्णयों का अभिनंदन किया। सहकारी संघवाद के जरिए छत्तीसगढ़ को अधिक संसाधन और भागीदारी देने तथा आवास, नल-जल, स्वच्छता, राशन, स्वास्थ्य और स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहयोग के लिए केंद्र का आभार भी जताया।
रायपुर- सेवा संकल्प अभियान के तहत धमतरी जिले में आयोजित तीन दिवसीय ‘निदान-03’ विशेष शिविर दिव्यांगजनों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आ रहा है। जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी दैनिक गतिविधियों को सुगम करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। नगरी और धमतरी में आयोजित इन शिविरों के शुरुआती दो दिनों में कुल 632 दिव्यांगजनों ने हिस्सा लिया, जिन्हें एक ही छत के नीचे कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण और शासकीय योजनाओं का पूरा संबल प्रदान किया गया।
एक ही छत के नीचे मिलीं तमाम शासकीय सुविधाएं
शिविर के पहले दिन 8 अक्टूबर को नगरी विकासखंड के श्रृंगी ऋषि हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में 172 दिव्यांगजन शामिल हुए। यहाँ पात्र हितग्राहियों को ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, बैसाखी, वॉकिंग स्टिक और वॉकर वितरित किए गए। साथ ही, नौ दिव्यांगजनों के कृत्रिम हाथ-पैर तैयार करने के लिए आवश्यक माप और प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि 18 दिव्यांगता प्रमाण पत्र और 44 यूडीआईडी कार्ड भी प्रदान किए गए।
श्रृखला के दूसरे दिन 10 अक्टूबर को धमतरी के इंडोर स्टेडियम में भव्य शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ 460 दिव्यांगजन पहुँचे और इनमें से 359 हितग्राहियों को विभिन्न उपकरणों व सुविधाओं से लाभान्वित किया गया।
छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावडि़या और महापौर रामू रोहरा की उपस्थिति में संपन्न इस कार्यक्रम में कृत्रिम पैर, कृत्रिम हाथ, कैलिपर्स, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, स्मार्ट केन और वॉकर जैसी आधुनिक सामग्रियां बड़े पैमाने पर बांटी गईं। इसके अलावा, शिविर में दिव्यांगजनों के बस पास, दिव्यांगता प्रमाण पत्र और एम. आधार कार्ड जैसी आवश्यक सुविधाएँ भी तुरंत उपलब्ध कराई गईं, जिससे उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़े।
जनसंपर्क प्रदर्शनी और जनमन पत्रिका का आकर्षण
इस आयोजन की एक और खास बात यह रही कि यहाँ विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। जनसंपर्क विभाग की ओर से विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई और मासिक पत्रिका 'छत्तीसगढ़ जनमन' का निःशुल्क वितरण किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने बेहद सराहा। धमतरी कलेक्टर ने इस दौरान सभी स्टॉलों का अवलोकन किया और कहा कि दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण व शासकीय योजनाओं का लाभ देकर उन्हें सशक्त और स्वावलंबी बनाना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।
इस तीन दिवसीय विशेष अभियान के अंतिम दिन आज भी पंजीयन, परीक्षण और कृत्रिम अंगों के मापन की सुविधा जारी रहेगी, ताकि कोई भी जरूरतमंद इस कल्याणकारी पहल से वंचित न रह जाए।
रायपुर. यह सिर्फ कृत्रिम हाथ नहीं, मेरी संपूर्णता और स्वाभिमान का अहसास है!"—यह शब्द हैं धमतरी जिले के ग्राम गोजी निवासी तेजराम साहू के, जिनके जीवन में वर्षों के संघर्ष के बाद आखिरकार आत्मविश्वास और मुस्कान वापस लौट आई है। छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित ‘निदान-03’ शिविर दिव्यांगजनों के जीवन में किस तरह बदलाव की नई इबारत लिख रहा है, इसकी एक जीती-जागती मिसाल तेजराम की यह कहानी है।
जीवन की राह में कभी-कभी एक पल का हादसा इंसान के सामने अनगिनत चुनौतियां खड़ी कर देता है। तेजराम साहू की जिंदगी में भी ऐसा ही मोड़ तब आया जब महज 18 वर्ष की उम्र में एक भीषण ट्रेन दुर्घटना में उनका दायां हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गंभीर चोटों के चलते डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें अपना हाथ गंवाना पड़ा। इतनी कम उम्र में आए इस संकट ने उनके सामने न केवल रोजमर्रा के छोटे-छोटे कार्यों को करने का गंभीर संकट खड़ा किया, बल्कि आजीविका के लिए संघर्ष को भी और कठिन बना दिया। हाथ का अभाव केवल एक शारीरिक कमी नहीं था, बल्कि हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की विवशता भी थी। हालांकि, इन विकट परिस्थितियों के बावजूद तेजराम ने कभी हिम्मत नहीं हारी और लगातार संघर्ष करते हुए अपनी जिंदगी की गाड़ी को आगे बढ़ाते रहे।
उनके इसी संघर्ष को आसान बनाने और उनके जीवन में नई उम्मीद जगाने का काम किया जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘निदान-03’ शिविर ने। सेवा संकल्प अभियान के तहत लगाए गए इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि जनकल्याणकारी सेवाओं और उपकरणों का लाभ बिना किसी देरी के सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे। जब तेजराम इस शिविर में पहुंचे, तो वहां मौजूद भगवान महावीर सेवा संस्थान के इंजीनियरों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तुरंत उनके हाथ का माप लिया और आवश्यक प्रक्रिया शुरू की। हैरान करने वाली बात यह रही कि महज डेढ़ से दो घंटे की रिकॉर्ड समयसीमा के भीतर उन्हें कृत्रिम हाथ तैयार कर सौंप दिया गया।
इतनी जल्दी और सहजता से मिली इस सहायता ने तेजराम के लिए वर्षों की कठिनाइयों के बीच संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए। कृत्रिम हाथ मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं और चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि व खुशी साफ झलकने लगी। उन्होंने भावुक होकर जिला प्रशासन और समिति के प्रति आभार जताते हुए कहा कि अब उनके जीवन की राह बहुत आसान हो जाएगी और वे अपने दैनिक काम खुद कर पाएंगे। तेजराम साहू की यह कहानी महज एक उपकरण मिलने की नहीं, बल्कि सेवा संकल्प अभियान के उस मानवीय पक्ष की है जो किसी जरूरतमंद को सिर्फ सुविधा नहीं देता, बल्कि उसे सहायता से आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाता है। शिविर में तेजराम के चेहरे पर खिली यह मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित सेवा का समन्वय होता है, तो वह किसी के भी जीवन में नई ऊर्जा और रंगत भरने की ताकत रखता है।
00 हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये से खरीद रहीं धागा और सिलाई सामग्री, घर बैठे स्वरोजगार को मिली मजबूती
00 पति की मजदूरी और अपनी सिलाई से संभाल रहीं परिवार की जिम्मेदारियां, तीन बच्चों के पालन-पोषण में मिल रही मदद
रायपुर। सिलाई का हुनर तो पहले से था, लेकिन काम को लगातार जारी रखने के लिए धागा और अन्य जरूरी सामग्री खरीदने में आर्थिक परेशानियां आती थीं। अब महतारी वंदन योजना से हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि ने सरगुजा जिले की सरिता तिग्गा के इस हुनर को आजीविका का मजबूत सहारा बना दिया है। वे योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग सिलाई सामग्री खरीदने में कर रही हैं और घर बैठे सिलाई का काम कर परिवार की आमदनी में योगदान दे रही हैं। पति की मजदूरी से होने वाली आय के साथ उनकी मेहनत से अर्जित अतिरिक्त आमदनी तीन बच्चों के पालन-पोषण और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है।अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्रा कला निवासी सरिता तिग्गा की यह कहानी बताती है कि नियमित रूप से मिलने वाली छोटी आर्थिक सहायता भी महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को उन्होंने अपने हुनर और स्वरोजगार से जोड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
पति करते हैं मजदूरी, सरिता ने सिलाई को बनाया अतिरिक्त आय का जरिया
सरिता तिग्गा बताती हैं कि उनके पति सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं। परिवार में तीन बच्चे हैं, जिनकी परवरिश, पढ़ाई और घरेलू जरूरतों की जिम्मेदारी दोनों मिलकर निभाते हैं। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में सरिता ने अपने सिलाई के हुनर को परिवार की आजीविका से जोडऩे का निर्णय लिया। वे घर पर ही सिलाई का काम करती हैं, जिससे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने का अवसर मिलता है। उनका कहना है कि पति की मजदूरी से घर का खर्च चलता है, जबकि सिलाई से मिलने वाली आय परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करती है। इस तरह वे अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में बराबर की सहभागी बन रही हैं।महतारी वंदन के एक हजार रुपये से खरीदती हैं धागा और सिलाई सामग्री
सरिता के लिए महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि विशेष महत्व रखती है। वे इस राशि का उपयोग सिलाई के लिए धागा और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में करती हैं। सरिता बताती हैं कि सिलाई का काम नियमित रूप से जारी रखने के लिए समय-समय पर सामग्री की आवश्यकता होती है। पहले सीमित पारिवारिक आय के बीच इन जरूरतों के लिए पैसे की व्यवस्था करना मुश्किल होता था। अब योजना से मिलने वाली राशि के कारण सिलाई सामग्री खरीदने में सुविधा हो रही है। इस सहायता से वे अपने काम को लगातार जारी रख पा रही हैं। सिलाई से प्राप्त आमदनी परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक बन रही है। सरिता का अनुभव दर्शाता है कि महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता का उपयोग छोटे स्वरोजगार को बनाए रखने और आगे बढ़ाने में भी किया जा सकता है।
घर की जिम्मेदारियों के साथ स्वरोजगार, तीन बच्चों की परवरिश में मिल रहा सहयोग
तीन बच्चों की देखभाल और घरेलू कामकाज के बीच सरिता घर पर ही सिलाई करती हैं। इससे उन्हें परिवार के साथ रहते हुए अपनी मेहनत से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। उनका कहना है कि घर से सिलाई का काम करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे बच्चों की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के साथ परिवार की आमदनी में भी योगदान दे पाती हैं। पति की मजदूरी और स्वयं के सिलाई कार्य से प्राप्त आय के सहारे परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है। महतारी वंदन योजना की सहायता राशि उनके इस प्रयास को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
छोटी आर्थिक सहायता से बढ़ा आत्मविश्वास, हुनर बना आजीविका का सहारा
सरिता तिग्गा के लिए सिलाई केवल घरेलू काम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढऩे का माध्यम है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें अपने हुनर का उपयोग कर आय अर्जित करने में सहयोग दिया है। वे बताती हैं कि हर महीने सहायता राशि मिलने से सिलाई सामग्री की व्यवस्था करना आसान हुआ है। इससे उन्हें अपना काम जारी रखने के लिए परिवार की सीमित आय पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता। सरिता का प्रयास यह भी दर्शाता है कि महिलाओं के पास उपलब्ध कौशल को आर्थिक सहयोग मिलने पर वह परिवार की आजीविका का उपयोगी साधन बन सकता है।
महतारी वंदन की राशि से सिलाई का सामान खरीदती हूं, परिवार को भी मिल रही मदद
सरिता तिग्गा बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से उन्हें हर महीने एक हजार रुपये मिलते हैं। इस राशि से वे सिलाई के लिए धागा और अन्य जरूरी सामग्री खरीदती हैं। उनका कहना है कि इससे सिलाई का काम जारी रखने में सुविधा होती है और वे घर पर काम कर परिवार की आमदनी में योगदान दे पा रही हैं। सरिता के अनुसार, योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। इससे घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के साथ स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में भी सहयोग मिल रहा है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
महतारी वंदन योजना से मिल रहे लाभ पर खुशी व्यक्त करते हुए सरिता तिग्गा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल मिल रहा है। इस सहायता से वे अपने सिलाई कार्य के लिए आवश्यक सामग्री खरीद पा रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं।
महतारी वंदन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम, सरिता की कहानी बनी प्रेरणा
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सरिता तिग्गा की कहानी महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का उदाहरण है। सीमित आय वाले परिवार में तीन बच्चों की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने सिलाई के हुनर को अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बनाया है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक सहायता राशि का उपयोग वे सिलाई सामग्री खरीदने में कर रही हैं। इससे उनका काम जारी रखने में मदद मिल रही है और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में भी सहयोग मिल रहा है।
00 एक लाख रुपये के ऋण से शुरू किया डेयरी व्यवसाय, दो भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन
रायपुर। पति के निधन के बाद चार बेटियों की परवरिश, घर की जिम्मेदारी और उनके बेहतर भविष्य की चिंता। आर्थिक कठिनाइयों के बीच एक मां के सामने कई चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ उन्होंने स्वरोजगार की राह चुनी। यह प्रेरक कहानी सरगुजा जिले की इंदु लता गुप्ता की है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण की सहायता से डेयरी व्यवसाय शुरू कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है, दूसरी इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही है और दो अन्य बेटियां भी अपनी स्कूली शिक्षा जारी रखे हुए हैं। इंदु लता की सफलता केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी नहीं, बल्कि एक मां के संघर्ष, साहस और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति समर्पण की मिसाल है। सक्षम योजना से मिला आर्थिक सहयोग उनके लिए आजीविका का साधन बनने के साथ बेटियों की उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण सहारा साबित हुआ है।
पति के निधन के बाद बढ़ीं जिम्मेदारियां, बेटियों की पढ़ाई जारी रखना था सबसे बड़ा संकल्प
इंदु लता गुप्ता बताती हैं कि पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार बेटियों की परवरिश और घर का खर्च चलाना आसान नहीं था। नियमित आय का कोई साधन नहीं होने के कारण परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इन परिस्थितियों में उन्हें सबसे अधिक चिंता बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य की होती थी। वे चाहती थीं कि आर्थिक परेशानियों के कारण किसी भी बेटी की पढ़ाई अधूरी न रह जाए। इसके लिए उन्होंने स्वयं कुछ काम शुरू करने का निर्णय लिया, ताकि परिवार की आजीविका चलाने के साथ बेटियों की शिक्षा का खर्च भी उठा सकें। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना के बारे में जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत स्वरोजगार शुरू करने के लिए कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होने की जानकारी ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की नई राह दिखाई।
एक लाख के ऋण से खरीदीं दो भैंसें, डेयरी व्यवसाय से बदली आर्थिक स्थिति
इंदु लता गुप्ता ने सक्षम योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि में अपनी बचत के पैसे मिलाकर उन्होंने दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। शुरुआत में परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना उनका मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने पशुपालन को आजीविका का माध्यम बनाया और मेहनत के साथ डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनकी दोनों भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध उत्पादन से मिलने वाली आय परिवार के भरण-पोषण और बेटियों की पढ़ाई में सहायक बन रही है। इंदु लता बताती हैं कि पहले घर की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब डेयरी व्यवसाय से आय का साधन उपलब्ध होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। इससे उन्हें बेटियों की शिक्षा और घरेलू आवश्यकताओं का खर्च उठाने में मदद मिल रही है।
मां की मेहनत लाई रंग, एक बेटी मेडिकल कॉलेज में तो दूसरी इंजीनियरिंग की कर रही पढ़ाई
इंदु लता गुप्ता के जीवन की सबसे बड़ी खुशी उनकी बेटियों की शिक्षा है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी। डेयरी व्यवसाय से आर्थिक संबल मिलने के बाद उन्होंने बेटियों की शिक्षा को आगे बढ़ाया। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत है और डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी बेटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। एक समय बेटियों की पढ़ाई का खर्च जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। आज उन्हीं बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करते देखकर इंदु लता को अपनी मेहनत सफल होती दिखाई देती है। वे बताती हैं कि बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाना उनका सबसे बड़ा सपना है। वे चाहती हैं कि उनकी चारों बेटियां पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें और अपने जीवन में आगे बढ़ें। इंदु लता का संघर्ष यह दर्शाता है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद दृढ़ संकल्प और स्वरोजगार के अवसर मिलने पर महिलाएं अपने परिवार के भविष्य को नई दिशा दे सकती हैं।
सक्षम योजना ने दिया आर्थिक संबल, आत्मविश्वास के साथ संभाल रहीं परिवार की जिम्मेदारी
इंदु लता गुप्ता के अनुसार, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव का माध्यम बनी है। योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उन्हें डेयरी व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होने से व्यवसाय शुरू करने में सुविधा हुई। दूध उत्पादन से प्राप्त आय के कारण अब वे परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ बेटियों की शिक्षा में भी आर्थिक योगदान दे पा रही हैं। उनका कहना है कि पहले परिवार के भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब स्वयं का व्यवसाय होने से आत्मविश्वास बढ़ा है। वे अपनी मेहनत से परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं और बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।
बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना ही इंदु लता के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य
इंदु लता गुप्ता बताती हैं कि पति के निधन के बाद जीवन में कठिन परिस्थितियां आईं, लेकिन उन्होंने बेटियों की शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया। उनका मानना है कि बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना उनके बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। इसी सोच के साथ उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया और उससे मिलने वाली आय का उपयोग परिवार की जरूरतों तथा बेटियों की पढ़ाई में किया। आज एक बेटी का मेडिकल कॉलेज और दूसरी का इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है। शेष दो बेटियों की शिक्षा को भी वे इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ा रही हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
इंदु लता गुप्ता ने छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले आर्थिक सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर दिया। डेयरी व्यवसाय से प्राप्त आय के कारण वे परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने के साथ बेटियों की पढ़ाई का खर्च भी उठा पा रही हैं। इंदु लता का कहना है कि ऐसी योजनाएं जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और अपने परिवार का भविष्य बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
एक मां का संघर्ष, चार बेटियों के सपनों को मिला संबल
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत इंदु लता गुप्ता की कहानी महिला आत्मनिर्भरता और बेटियों की शिक्षा का प्रेरक उदाहरण है। पति के निधन के बाद चार बेटियों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उनके लिए डेयरी व्यवसाय शुरू करने की राह खोली। दो भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध उत्पादन के माध्यम से उन्होंने परिवार की आजीविका को मजबूत बनाया। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में और दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां भी शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। इंदु लता की सफलता बताती है कि स्वरोजगार के लिए मिला आर्थिक सहयोग केवल एक महिला को आत्मनिर्भर नहीं बनाता, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को संवारने का माध्यम भी बन सकता है। एक मां की मेहनत, संघर्ष और बेटियों को शिक्षित बनाने के संकल्प ने इस कहानी को विशेष बना दिया है।
महिलाओं को योजनाओं की लाभार्थी ही नहीं, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में नेतृत्वकर्ता बनाना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री साय
शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं का किया सम्मान
महतारी वंदन योजना से 68 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक संबल, 32 किस्तों में 20700 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता
लक्ष्य से आगे बढ़कर 14 लाख ग्रामीण महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही मातृशक्ति
बस्तर में नक्सल हिंसा से बंद 421 स्कूल फिर शुरू, बेटियों की शिक्षा और सुरक्षित भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता
रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है और महिला सशक्तिकरण विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का मजबूत आधार है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। हमारा लक्ष्य महिलाओं को केवल शासकीय योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रदेश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार और नेतृत्वकर्ता बनाना है।
मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर में हिंदी खबर द्वारा आयोजित शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली महिलाओं का सम्मान किया और उनसे संवाद भी किया।
मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूपा माना गया है। नवरात्रि मातृशक्ति की आराधना का महापर्व है। हमारी परंपरा में कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
*मां के संघर्ष और संस्कारों ने सिखाया सेवा और संवेदनशीलता का महत्व*
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने जीवन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। बचपन में ही पिता का साया उठ जाने के बाद उन्होंने अपनी माता को अनेक कठिनाइयों के बीच परिवार को संभालते और खेती-बाड़ी करते हुए देखा। उनकी माता ने कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों की शिक्षा और संस्कारों में कोई कमी नहीं आने दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मां के संघर्ष, सेवाभाव, सनातन मूल्यों के प्रति आस्था और परिवार के प्रति समर्पण ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। जनसेवा और जरूरतमंद के प्रति संवेदनशीलता की प्रेरणा उन्हें अपने परिवार और विशेष रूप से अपनी माता से मिली। आज मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व निभाते हुए भी वे उन्हीं संस्कारों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
*महतारी वंदन ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 32 किस्तों में 20 हजार 700 करोड़ रुपए से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में सीधे अंतरित की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता की योजना नहीं है। इस राशि ने महिलाओं को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए आर्थिक स्वतंत्रता देने के साथ परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी और आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है। महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों, पोषण, घरेलू आवश्यकताओं और बचत जैसे कार्यों में कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि योजना की पात्र कोई भी महिला इसके लाभ से वंचित न रहे। तकनीकी कारणों, दस्तावेजों, आधार अथवा बैंक खाते से जुड़ी त्रुटियों के कारण जिन पात्र महिलाओं को लाभ नहीं मिल पाया है, उनके प्रकरणों का परीक्षण कर आवश्यक समाधान किया जा रहा है।
*लक्ष्य से लगभग दोगुनी उपलब्धि, 14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी*
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल देने के साथ उन्हें स्थायी आजीविका और उद्यमिता से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ‘लखपति दीदी’ पहल के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 7.82 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 14 लाख ग्रामीण महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। प्रदेश की 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इन समूहों की महिलाओं को कृषि आधारित व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, लघु वनोपज, डेयरी, मशरूम उत्पादन, मिलेट प्रसंस्करण, सिलाई और रेडीमेड वस्त्र निर्माण सहित विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के उत्पादों की गुणवत्ता, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल स्वरोजगार से न जुड़ें, बल्कि सफल उद्यमी बनकर दूसरे लोगों को भी रोजगार देने की स्थिति में आएं।
*481 महतारी सदन बनेंगे महिला समूहों की गतिविधियों के केंद्र*
मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला स्व-सहायता समूहों और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में 481 महतारी सदनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। ये महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र बनेंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से प्रदेश की 39.73 लाख महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। रानी दुर्गावती योजना के लिए 15 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत पात्र बालिकाओं के 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर डेढ़ लाख रुपए की सहायता का प्रावधान है।
*बस्तर में लौटी शिक्षा की रोशनी, नक्सल हिंसा से बंद 421 स्कूल फिर खुले*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी बेटी के सपनों की राह में दूरी, गरीबी या असुरक्षा बाधा न बने, इसके लिए सरकार शिक्षा के अवसरों का लगातार विस्तार कर रही है। विशेष रूप से दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में छात्रावासों, आश्रमों, आवासीय विद्यालयों और प्रयास संस्थानों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।उन्होंने कहा कि बस्तर में लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण अनेक गांवों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई और स्कूल बंद हो गए थे। शांति और विश्वास की स्थापना के साथ राज्य सरकार ने ऐसे 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया है। वर्षों बाद इन स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल और पढ़ाई की आवाज लौटना बदलते बस्तर की सबसे सुखद तस्वीरों में से एक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ओरछा और जगरगुंडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं, ताकि आदिवासी अंचलों के बच्चों, विशेषकर बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अपने परिवार और गांव से बहुत दूर न जाना पड़े।
*स्वस्थ महिला से स्वस्थ परिवार और स्वस्थ छत्तीसगढ़ का निर्माण*
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिला और बाल स्वास्थ्य को राज्य सरकार ने अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। गर्भवती महिलाओं, माताओं, किशोरियों और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण की बेहतर व्यवस्था के लिए आंगनबाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, बच्चों के पोषण और किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 2.49 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 6.21 लाख वय-वंदना कार्ड जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर सरकार का विशेष ध्यान है। आर्थिक स्थिति अथवा गांव की दूरी किसी महिला के उपचार में बाधा न बने, इसी सोच के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
*आईटी, एआई और आधुनिक उद्योगों में महिलाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर*
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्वरूप को देखते हुए महिलाओं को पारंपरिक आजीविका के साथ भविष्य की तकनीकों और आधुनिक उद्योगों से जोड़ना भी आवश्यक है।राज्य की नई औद्योगिक नीति में महिलाओं के रोजगार और स्वरोजगार को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, चिकित्सा, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित करने पर सरकार का विशेष जोर है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं है। निर्णय लेने और नेतृत्व करने में महिलाओं की बराबर भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। पंचायतों और स्थानीय निकायों से लेकर प्रशासन और उद्यमिता तक महिलाओं को नेतृत्व के अधिक अवसर मिलने चाहिए। प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिला कलेक्टर प्रशासन का नेतृत्व कर रही हैं, जो बदलते और सशक्त छत्तीसगढ़ की प्रेरणादायक तस्वीर है।
*छत्तीसगढ़ की बेटियां खेलों में बढ़ा रही प्रदेश का गौरव*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। राज्य सरकार का संकल्प है कि संसाधनों, प्रशिक्षण अथवा आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपने सपनों से समझौता न करना पड़े।उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में देश का गौरव बढ़ाने वाली ज्ञानेश्वरी यादव को डीएसपी पद पर पदोन्नति के साथ 30 लाख रुपए की सम्मान राशि प्रदान की गई है। कोरबा जिले की संजू देवी रावत ने भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्वर्णिम उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार ने उन्हें 50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की है।
छत्तीसगढ़ की किरण पिस्दा का भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम में चयन हुआ है। उन्होंने रायपुर की आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजनों से ग्रामीण और जनजातीय अंचलों की बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के नए अवसर मिल रहे हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
*बेटियां बड़े सपने देखें, सरकार अवसर उपलब्ध कराने के लिए उनके साथ है*
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के युवाओं और बेटियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरा प्रदेश है। युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर शिक्षा के साथ कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी, उभरते उद्योगों, कृषि आधारित व्यवसायों, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, वनोपज, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं बन रही हैं। सरकार युवाओं और महिलाओं को इन नए अवसरों से जोड़ने के लिए कौशल विकास और प्रशिक्षण की व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही है।
*मातृशक्ति की भागीदारी से बनेगा विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़*
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की वास्तविक शक्ति यहां की माताएं, बहनें और बेटियां हैं। नवरात्रि का पर्व हमें शक्ति की आराधना के साथ समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों का सहारा बनने की प्रेरणा भी देता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गरीब, महिला, किसान और युवा को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के साथ निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व में उनकी भागीदारी बढ़ाकर ही विकसित एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी माताएं-बहनें आत्मनिर्भर होंगी, हमारी बेटियां शिक्षित और सक्षम होंगी तथा प्रदेश के विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगी, तभी ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का संकल्प अपनी पूर्णता को प्राप्त करेगा।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, हिंदी खबर की ब्यूरो हेड सुश्री निशा द्विवेदी सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने गन्ना किसानों को दी बधाई
गन्ना बोनस में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी मेहनत का मिलेगा बेहतर प्रतिफल- सहकारिता मंत्री केदार कश्यप
गन्ना बोनस की गणना का आधार रूपए 355 से बढ़ाकर रूपए 425 प्रति क्विंटल किया गया
रायपुर-- छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के गन्ना किसानों को नवरात्रि से पहले बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने गन्ना बोनस की गणना का आधार रूपए 355 से बढ़ाकर रूपए 425 प्रति क्विंटल कर दिया है। इस निर्णय से पेराई सत्र 2025-26 में प्रदेश के चारों सहकारी शक्कर कारखानों को गन्ना आपूर्ति करने वाले 31,022 किसानों को लगभग 51.09 करोड़ रूपए की बोनस राशि प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने इस अवसर पर प्रदेश के गन्ना किसानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। सहकारिता मंत्री कश्यप ने कहा कि गन्ना बोनस में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उनकी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बोनस की बढ़ी हुई राशि से किसानों को खेती की लागत वहन करने और आगामी फसल की बेहतर तैयारी में मदद मिलेगी। यह निर्णय प्रदेश में गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ सहकारी शक्कर कारखानों से जुड़े किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करेगा।
पेराई सत्र 2025-26 के लिए बोनस गणना में एफआरपी रूपए 329.05 प्रति क्विंटल का आधार लिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार रूपए 425 में से एफआरपी घटाने पर किसानों को रूपए 95.95 प्रति क्विंटल की दर से बोनस मिलेगा।
इस निर्णय के तहत भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना, कवर्धा के 14,961 किसानों को लगभग 24.55 करोड़ रूपए तथा सरदार पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया के 8,049 किसानों को लगभग 11.68 करोड़ रूपए की बोनस राशि मिलेगी। इसी प्रकार महामाया सहकारी शक्कर कारखाना, केरता के 7,250 किसानों को लगभग 11.35 करोड़ रूपए और दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना, बालोद के 762 किसानों को लगभग 3.52 करोड़ रूपए का बोनस प्राप्त होगा।
रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल, कैंसर उपचार केंद्र का हुआ भूमिपूजन
मुख्यमंत्री साय ने कहा - प्रदेश में ही कैंसर मरीजों को मिलेंगी उच्चस्तरीय उपचार सुविधाएं, दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम
नवा रायपुर में 200 एकड़ में विकसित की जा रही आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क
शहरों से लेकर सुदूर वनांचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का फोकस
आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना बनीं जरूरतमंद परिवारों का संबल
मेडिसिटी से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा, फार्मा उद्योग, अनुसंधान और रोजगार को मिलेगा नया विस्तार
रायपुर,--मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ तेजी से मध्य भारत के एक बड़े मेडिकल हब के रूप में विकसित हो रहा है। राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक, सुपर स्पेशलिटी सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक को बेहतर, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं अपने प्रदेश में ही उपलब्ध हों तथा आर्थिक अभाव किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने।
मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल एवं कैंसर उपचार केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अस्पताल प्रबंधन और ओमेगा ग्रुप की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज के साथ पूरा परिवार कठिन दौर से गुजरता है। यदि उपचार के लिए दूसरे राज्य जाना पड़े तो परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ अनेक व्यावहारिक कठिनाइयां भी आती हैं। हमारी कोशिश है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर से गंभीर बीमारी के उपचार के लिए प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता न्यूनतम हो और उन्हें अपने परिवार के बीच रहते हुए विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने कहा कि ओमेगा अस्पताल का प्रस्तावित ऑन्कोलॉजी सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की उपलब्धता से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों को भी बेहतर कैंसर उपचार की सुविधा मिल सकेगी।
स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए मजबूत हो रही स्वास्थ्य अधोसंरचना
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय गांव, गरीब और सुदूर जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। जिला अस्पतालों में आईसीयू, डायलिसिस यूनिट, आधुनिक पैथोलॉजी और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि सामान्य जांच और उपचार के लिए मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण करना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच चिकित्सा सुविधाओं के अंतर को कम करते हुए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जा रही है।
गंभीर बीमारी में परिवारों का संबल बन रही सरकार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गंभीर बीमारी केवल स्वास्थ्य संबंधी चुनौती नहीं होती, बल्कि कई बार परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट भी खड़ा कर देती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई आयुष्मान भारत योजना ने ऐसे लाखों परिवारों को उपचार की चिंता से राहत दी है। शासकीय अस्पतालों के साथ बड़ी संख्या में निजी अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा गया है, जिससे पात्र परिवारों को निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान कर रही है। हमारा स्पष्ट संकल्प है कि पैसे के अभाव में किसी गरीब का इलाज न रुके और बीमारी के उपचार के लिए किसी परिवार को अपनी जमीन, घर या गहने बेचने जैसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े।
अबूझमाड़ और सुदूर वनांचलों तक पहुंच रहा स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहा बदलाव केवल रायपुर या बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार की प्राथमिकता अबूझमाड़ सहित प्रदेश के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना भी है।
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सीमित थी, वहां आज स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वनांचलों में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों की जांच और उपचार किया जा रहा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ चिकित्सकों, दवाइयों और आवश्यक जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है जिसमें बस्तर के सुदूर गांव से लेकर राजधानी रायपुर तक हर नागरिक को आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।
नवा रायपुर में 200 एकड़ में मेडिसिटी और फार्मा पार्क से खुलेगा संभावनाओं का नया द्वार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख स्वास्थ्य और चिकित्सा निवेश केंद्रों में शामिल करने की दिशा में नवा रायपुर में लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि मेडिसिटी और फार्मा पार्क के माध्यम से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाओं, फार्मास्युटिकल उद्योग, चिकित्सा अनुसंधान और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों को एक मजबूत इकोसिस्टम उपलब्ध होगा। इससे चिकित्सकों, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ सहित प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर और नवा रायपुर में सुपर स्पेशलिटी एवं मल्टीस्पेशलिटी स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। आधुनिक स्वास्थ्य इकाइयों और चिकित्सा क्षेत्र में नए निवेश के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मेडिकल टूरिज्म की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं। हमारा प्रयास है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ न केवल प्रदेशवासियों, बल्कि आसपास के राज्यों के लोगों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का प्रमुख केंद्र बने।
स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश से बढ़ेंगी सुविधाएं और रोजगार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ओमेगा ग्रुप का रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ चिकित्सा क्षेत्र में निवेश के आकर्षक केंद्र के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के समन्वित प्रयासों से आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार संभव है। नए अस्पतालों और सुपर स्पेशलिटी केंद्रों की स्थापना से जहां मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा, वहीं चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और अन्य युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध प्रदेश की सबसे मजबूत नींव हैं। इसलिए सरकार उपचार की सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, आधुनिक और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में काम कर रही है। हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी नागरिक गंभीर बीमारी के उपचार के लिए स्वयं को असहाय महसूस न करे। सरकार हर जरूरतमंद के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिसका सीधा लाभ प्रदेश की जनता को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र द्वारा आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को और मजबूती मिलेगी।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार गांव से लेकर शहर तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण के साथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कैंसर उपचार केंद्र की पहल के लिए अस्पताल प्रबंधन और पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर विधायक मोतीलाल साहू, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, मेडिसिन हॉस्पिटल के डायरेक्टर सुशील शर्मा, ओमेगा ग्रुप के सीईओ सहित अन्य जनप्रतिनिधि, चिकित्सक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय ने देवपुरी में सुपर स्पेशलिटी प्रथमेश हॉस्पिटल का किया शुभारंभ
छत्तीसगढ़ मध्य भारत के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में तेजी से हो रहा विकसित: मुख्यमंत्री श्री साय
प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम
नवा रायपुर में 200 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही आधुनिक मेडिसिटी, मेडिकल टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर-- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी संकल्प के साथ स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने और दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ आज मध्य भारत के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के देवपुरी में लगभग एक एकड़ क्षेत्र में निर्मित 125 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक सुपर स्पेशलिटी प्रथमेश हॉस्पिटल के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर अस्पताल का शुभारंभ किया और अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन, चिकित्सकों और पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह अस्पताल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रदेश में ही उपलब्ध हों बेहतर और आधुनिक उपचार सुविधाएं
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज और उसके परिवार को उपचार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़े तो आर्थिक बोझ के साथ अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को अधिक से अधिक विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाएं छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हों।
उन्होंने कहा कि रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता लगातार कम होगी। इसका लाभ न केवल छत्तीसगढ़ के नागरिकों, बल्कि आसपास के राज्यों से आने वाले मरीजों को भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी और निजी संस्थानों के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में एक मजबूत हेल्थकेयर इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। आधुनिक अस्पतालों के खुलने से जहां लोगों को गुणवत्तापूर्ण उपचार की सुविधा मिलेगी, वहीं चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत कवच
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में व्यापक विस्तार हुआ है। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में पात्र परिवार इस योजना के माध्यम से निःशुल्क उपचार की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी डबल इंजन सरकार का प्रयास है कि आर्थिक अभाव किसी व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने। स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा गया है। जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। सुदूर वनांचलों और जनजातीय क्षेत्रों तक चिकित्सकीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सोच स्पष्ट है - बेहतर स्वास्थ्य सेवा पर प्रत्येक नागरिक का समान अधिकार है, चाहे वह राजधानी में रहता हो या प्रदेश के किसी सुदूर वनांचल में।
नवा रायपुर की मेडिसिटी से स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में नवा रायपुर में 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यह परियोजना आने वाले समय में प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई ऊंचाई प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि मेडिसिटी में आधुनिक और सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की व्यापक संभावनाएं होंगी। इससे प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और चिकित्सा क्षेत्र में नए निवेश तथा रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर और नवा रायपुर में आधुनिक चिकित्सा संस्थानों के लगातार विस्तार से छत्तीसगढ़ की पहचान एक बड़े हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में मजबूत हो रही है। हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर और जटिल बीमारियों के बेहतर उपचार के लिए बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े, बल्कि दूसरे राज्यों के लोग गुणवत्तापूर्ण उपचार के लिए छत्तीसगढ़ आएं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिक संस्थानों की स्थापना प्रदेश में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के निरंतर विस्तार का परिचायक है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सेवा, संवेदनशीलता और गुणवत्ता को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए मरीजों के हित में कार्य करने का आह्वान किया।
स्वास्थ्य अधोसंरचना के साथ मानव संसाधन और रोजगार का भी हो रहा विस्तार
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में होने वाला निवेश केवल अस्पतालों और चिकित्सा उपकरणों तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ चिकित्सकों, नर्सों, तकनीशियनों, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा संस्थानों का विस्तार छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए भी नई संभावनाएं लेकर आ रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन भी तैयार हो और युवाओं को अपने प्रदेश में ही बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त हों।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ से ही विकसित छत्तीसगढ़ का मार्ग प्रशस्त होगा। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और जनोन्मुखी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंचे और हर परिवार को आवश्यकता के समय बेहतर उपचार का भरोसा मिले।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य सुखी और समृद्ध जीवन का आधार है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रथमेश हॉस्पिटल जैसी आधुनिक चिकित्सा संस्थाओं के प्रारंभ होने से प्रदेशवासियों को बेहतर उपचार की सुविधा मिलेगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करने के साथ निजी क्षेत्र में भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। प्रथमेश हॉस्पिटल के शुभारंभ से प्रदेश की जनता को सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को सेवा और संवेदनशीलता के साथ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक श्री मोतीलाल साहू, प्रथमेश हॉस्पिटल ग्रुप के डॉ. राजीव साहू, डॉ. सारिका साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, चिकित्सक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर - छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) यशवंत कुमार ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से छूटे हुए और पात्र नए नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए एक महीने के विशेष अभियान की घोषणा की है. इस पहल के तहत, जो लोग इस वर्ष फरवरी में संपन्न हुए SIR अभ्यास के दौरान घर पर अनुपस्थित रहने या अन्य स्थानों पर स्थानांतरित होने के कारण नामांकित होने से वंचित रह गए थे, उन्हें वोटर लिस्ट में जोड़ने का अवसर दिया जाएगा।
निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें केवल वर्तमान में 18 वर्ष पूर्ण कर चुके युवा ही नहीं, बल्कि 17 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके वे किशोर भी अग्रिम पंजीकरण करा सकेंगे, जो अगले एक वर्ष के भीतर 18 वर्ष के होने वाले हैं।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) सप्ताह में दो दिन घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे. इसके अतिरिक्त, प्रत्येक बुधवार और गुरुवार को मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे।
युवा और संभावित मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर शुक्रवार और शनिवार को शैक्षणिक संस्थानों में विशेष पंजीकरण शिविर लगाए जाएंगे. CEO यशवंत कुमार ने स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है और कोई भी पात्र नागरिक किसी भी समय इसके लिए आवेदन कर सकता है।
दूसरी ओर, इस घोषणा का स्वागत करते हुए कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि वे इस विशेष अभियान की लगातार मांग और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि SIR के बाद मतदाता सूची से बाहर रहे सभी 24 लाख लोगों तक पहुँच बनाकर उन्हें अपने दावों के सत्यापन का पूरा अवसर प्रदान किया जाए. उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ में पहले 2.12 करोड़ मतदाता थे, लेकिन SIR के बाद केवल 1.87 करोड़ लोगों के नाम ही सूची में रह गए हैं।
डोंगरगढ़ :- नवरात्रि पर्व के दौरान दुर्ग पुलिस ने डोंगरगढ़ दर्शन के लिए जाने वाले पैदल श्रद्धालुओं तथा वाहन चालकों के सुगम व सुरक्षित आवागमन हेतु कुम्हारी से अंजोरा बाईपास तक विशेष रूट निर्धारित कर कॉरिडोर बनाया गया है।
इस दौरान 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक 03 पेट्रोलिंग वाहन लगातार 24 घंटे मार्ग पर तैनात रहेंगे। जो पेट्रोलिंग वाहन लाउडस्पीकर के माध्यम से पदयात्रियों को बाएं चलने और यातायात सुचारू रखने के निर्देश देंगे। पदयात्रियों की सुविधा व सुरक्षा हेतु मार्ग में अस्थायी पुलिस सहायता केंद्र भी बनाये जा रहे है। कुम्हारी टोल प्लाजा सिरसा गेट चौक डबरापारा तिराहा – खुर्सीपार तिराहा- पावर हाउस अंडरब्रिज मुर्गा चौक सेंट्रल एवेन्यू सेक्टर- 09 चौक -ठगड़ा बांध ओवरब्रिज जेल तिराहा गौरव पथ – गांधी पुतला – पटेल चौक गंजपारा पुलगांव चौक – शिवनाथ नदी ब्रिज -अंजोरा बाइपास – राजनांदगांव होते हुए डोंगरगढ़ जाएंगे। वहीं दुर्ग शहर एवं सेक्टर एरिया की यातायात व डायवर्शन व्यवस्था की है।
पावर हाउस अंडरब्रिज से मुर्गा चौक / सेंट्रल एवेन्यू की ओर जाने वाले सभी चार पहिया वाहनों को फॉरेस्ट एवेन्यू एवं गैरेज रोड की ओर डायवर्ट किया जाएगा और दुर्ग से सेंट्रल एवेन्यू की ओर आने वाले चार पहिया वाहनों को भी सेक्टर 09 चौक से फॉरेस्ट एवेन्यू एवं गैरेज रोड में डायवर्ट किया जाएगे। वहीं दुर्ग शहर (रात्रि नो एंट्री एवं बस, डायवर्शन भी किया है। भारी / मध्यम वाहन प्रतिबंधितः रात्रि के समय शहर के भीतर मध्यम एवं भारी वाहनों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
प्रतिबंधित क्षेत्र पुलगांव चौक, पोटिया चौक, महाराजा चौक, जेल तिराहा, गुरुद्वारा तिराहा, धमधा रोड, नयापारा से दुर्ग शहर की ओर ) गंजपारा दुर्गा पंडाल व्यवस्था में गंजपारा दुर्गा पंडाल के पास रात्रि में पुलिस लाइन एवं गंजपारा से आने वाले सभी दो पहिया व चार पहिया वाहनों को गंज मंडी के पीछे से डायवर्ट किया जाएगा। वहीं बस डायवर्जन में रात्रि के समय पुलगांव चौक से आने वाली सभी बसों को महाराजा चौक- जेल तिराहा होते हुए बस स्टैंड की ओर डायवर्ट किया जाएगा। इसी प्रकार दुर्ग बस स्टैंड से पुलगांव की ओर जाने वाले बस इसी मार्ग का उपयोग करेंगे।
रायपुर। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का 12 अक्टूबर को प्रस्तावित रायपुर दौरा रद्द हो गया है। रेल मंत्री को रायपुर में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के स्थापना दिवस समारोह में शामिल होना था। इसके साथ ही वे रेलवे की कई परियोजनाओं का शुभारंभ भी करने वाले थे। उनके दौरे को लेकर रेलवे प्रशासन पिछले एक महीने से तैयारियों में जुटा हुआ था।
रेल मंत्री का रायपुर दौरा पहले 9 अक्टूबर को प्रस्तावित था, लेकिन बाद में इसे स्थगित कर 12 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी। अब एक बार फिर उनका दौरा रद्द कर दिया गया है। रेलवे अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के दौरे के रद्द होने के बाद रायपुर रेलवे स्टेशन पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को भी निरस्त कर दिया गया है। हालांकि, उनके दौरे से जुड़े अन्य कार्यक्रमों को लेकर अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बाकी कार्यक्रम यथावत रहेंगे। बता दें कि रेल मंत्री के दौरे को लेकर रेलवे प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की थी। उनके हाथों कई रेलवे परियोजनाओं की शुरुआत किए जाने की योजना थी।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में चल रही कैबिनेट की बैठक खतम हो गई है। बैठक में महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगाई गई। नीचे पढ़ें आज लिए गए फैसले…
कैबिनेट की बैठक में निर्णय
1. छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने पूर्व अग्निवीर सैनिकों के अनुभव और दक्षता का लाभ राज्य की सेवाओं में लेने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत पूर्व अग्निवीरों के लिए गृह विभाग में आरक्षक के कुल 36 पदों पर उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध भर्ती की अनुमति प्रदान की गई है। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा पूर्व अग्निवीरों के लिए इन पदों पर 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है।
2. मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ”आप सभी को शारदीय नवरात्रि की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। इस शुभ अवसर पर एक शुभ प्रस्ताव आज हमारी मंत्रिपरिषद ने पारित किया है।
आज छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में निरंतर 25 वर्ष पूर्ण होने पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया है।
• हमारे लिए यह केवल एक उपलब्धि का अवसर नहीं है, बल्कि राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय के सिद्धांतों पर चली एक असाधारण कर्मयात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव है।
• छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता और मंत्रिपरिषद की ओर से मैं प्रधानमंत्री जी के कर्मयोग, जनसेवा और दूरदर्शी नेतृत्व का हृदय से अभिनंदन करता हूं, और उनके उत्तम स्वास्थ्य तथा सुदीर्घ राष्ट्र सेवा की कामना करता हूं।
• मंत्रिपरिषद ने जैम से लेकर जीएसटी तक, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से लेकर नक्सलवाद से मुक्ति तक, राष्ट्रहित में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों का भी अभिनंदन किया है।
• साथ ही, सहकारी संघवाद के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अधिक संसाधन और भागीदारी देने तथा आवास, नल-जल, स्वच्छता, राशन, स्वास्थ्य और स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मिले सहयोग के लिए हम केंद्र सरकार के प्रति आभार भी व्यक्त करते हैं।
अब मैं संक्षेप में आपके सामने रखना चाहूंगा कि इन 25 वर्षों के नेतृत्व का छत्तीसगढ़ पर क्या असर पड़ा है –
सबसे पहले बात गुजरात की, जहां से सुशासन के नए प्रयोगों की शुरुआत हुई
मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए शासन में टेक्नोलॉजी, जनसंवाद और परिणाम-आधारित कार्यप्रणाली के कई प्रयोग किए, जिन्हें आगे चलकर पूरे देश में अपनाया गया। वर्ष 2000 में बने हमारे छत्तीसगढ़ ने भी अपनी शुरुआती विकास यात्रा में ‘गुजरात मॉडल’ के सफल अनुभवों से सीखा और तेज़ी से आगे बढ़ा। संवाद और ‘चिंतन शिविर’ की परंपरा भी यहां लागू हुई।
इसी क्रम में पीएम गतिशक्ति ने परियोजनाओं की प्लानिंग और निगरानी को टेक्नोलॉजी से जोड़ा है। हमारे राज्य के लगभग 20 हजार गांवों में से करीब 14 हजार गांव जियो-रेफरेंस्ड किए जा चुके हैं।
निवेश का अनुकूल माहौल बनाने में भी हमें प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा मिली
‘वाइब्रेंट गुजरात’ ने राज्यों को अपनी संभावनाएं दुनिया के सामने रखने की प्रेरणा दी, और इसी से हमने निवेश आकर्षित करने के लिए संरचनात्मक नीतियां लागू कीं। ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ से औद्योगिक अनुमतियां सरल हुई हैं और तय समय-सीमा में निर्णय न होने पर डीम्ड अप्रूवल, यानी स्वतः स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम से भी प्रक्रिया आसान बनी है।
दो जनविश्वास अधिनियमों के माध्यम से 279 गैर-जरूरी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 24×7 संचालन की अनुमति दी गई। कुल मिलाकर 450 से अधिक प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। इन प्रयासों का नतीजा है कि राज्य को 8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.60 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।
टेक्नोलॉजी ने शासन को आम नागरिक के और करीब पहुंचाया है
जनधन-आधार-मोबाइल, यानी जैम की त्रयी से देश में 60 करोड़ लोग बैंकिंग से जुड़े, जो दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय समावेशन मॉडल है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, यानी डीबीटी से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई और शत-प्रतिशत सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में पहुंची। यूपीआई ने छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों तक डिजिटल भुगतान की सुविधा पहुंचाई। हमारे किसान भाइयों के लिए एग्रीस्टैक के तहत 42 लाख फार्मर आईडी बन चुकी हैं, और ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना से 7.51 लाख ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के अधिकार अभिलेख मिले हैं।
गरीब परिवारों को सम्मान के साथ जीवन जीने का भरोसा मिला
प्रधानमंत्री की नीतियों के केंद्र में सदैव गरीब कल्याण रहा है, और छत्तीसगढ़ में इसका असर साफ दिखाई देता है। प्रधानमंत्री आवास योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में 20.65 लाख और शहरी क्षेत्रों में 2.25 लाख पक्के आवास पूर्ण हुए हैं। पिछले पौने तीन वर्षों में ही 11.78 लाख आवास बने हैं, और निर्माण की गति में हमारा राज्य देश में प्रथम स्थान पर है।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत 2,437 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से 36 लाख घरेलू और 14,970 सामुदायिक शौचालय बने, और 18,653 गांव ओडीएफ प्लस घोषित हुए। उज्ज्वला योजना से 39.73 लाख बहनों को निःशुल्क गैस कनेक्शन मिले। आयुष्मान भारत में लगभग 2.49 करोड़, यानी करीब 92 प्रतिशत पात्र हितग्राहियों के कार्ड बने हैं, और 51.17 लाख हितग्राहियों को लगभग 11,877 करोड़ रुपये का निःशुल्क उपचार मिला है। 70 वर्ष से अधिक आयु के 6.21 लाख वरिष्ठ नागरिकों को ‘वय-वंदना’ कार्ड भी जारी किए जा चुके हैं।
संकट की घड़ी में भी देश को मजबूत और संवेदनशील नेतृत्व मिला
कोरोना महामारी से लेकर वैश्विक ऊर्जा संकट तक, भारत ने कठिन परिस्थितियों का आत्मविश्वास से सामना किया। हमने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में से एक चलाया, और ‘वैक्सीन मैत्री’ के जरिए 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराकर ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को व्यवहार में उतारा। कोरोना काल में शुरू हुई निःशुल्क खाद्यान्न व्यवस्था ने कमजोर परिवारों को बड़ी राहत दी। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना से आज छत्तीसगढ़ के 73 लाख परिवारों, यानी 1.99 करोड़ हितग्राहियों को निःशुल्क राशन मिल रहा है। केंद्र की इस योजना से राज्य को लगभग 5,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी भी प्राप्त हुई है।
हमारे अन्नदाता किसान भाइयों को भी बड़ा आर्थिक संबल मिला
पीएम किसान सम्मान निधि का सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के 26.57 लाख किसानों के खातों में पहुंचा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 5,064 करोड़ रुपये का केंद्रांश प्रीमियम प्राप्त हुआ है। वर्ष 2015 की तुलना में पंजीकृत किसान 13.17 लाख से बढ़कर 27.53 लाख और पंजीकृत रकबा 21.26 लाख से बढ़कर 33 लाख हेक्टेयर हो गया है। धान उपार्जन भी 59 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 141 लाख मीट्रिक टन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा है। किसानों को एमएसपी के माध्यम से 33,431 करोड़ रुपये और बोनस के रूप में 10,292 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
माताओं-बहनों और युवा साथियों को आगे बढ़ने के नए अवसर मिले
महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को 1,000 रुपये प्रतिमाह, यानी 12,000 रुपये वार्षिक की सीधी सहायता दी जा रही है। निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपलब्धि के साथ 14 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनी हैं। ‘बिहान’, यानी एनआरएलएम के माध्यम से 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। वन धन विकास केंद्रों से 70,000 से अधिक जनजातीय महिलाएं जुड़ी हैं।
हमारे युवा खिलाड़ियों के लिए खेलो इंडिया के तहत आठ जिलों के लिए 48 करोड़ रुपये की सहायता और 33 खेलो इंडिया मिनी सेंटर स्वीकृत हुए हैं। बिलासपुर में हॉकी, आर्चरी और एथलेटिक्स का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्वीकृत हुआ है।
हमारे जनजातीय समाज को सम्मान भी मिला और विकास भी
भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित कर जनजातीय समाज के योगदान को राष्ट्रीय पटल पर सम्मान मिला। ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ से प्रदेश के 6,000 से अधिक जनजातीय बहुल गांवों में अधोसंरचना का विकास हो रहा है। पीएम जनमन योजना के तहत 18 जिलों में रहने वाली 5 विशेष पिछड़ी जनजातियों के 56 हजार से अधिक परिवारों तक पक्के आवास, सड़क और पेयजल पहुंचा है।
26 जिलों में 75 ‘एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय’ संचालित हैं, और लघु वनोपज पर एमएसपी देकर 6 लाख संग्राहकों को 500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। नवा रायपुर में देश का पहला डिजिटल जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय भी स्थापित हुआ है।
केंद्र के सहयोग से राज्य के संसाधनों में भी ऐतिहासिक वृद्धि हुई
सहकारी संघवाद की भावना से केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत की गई। पिछले 12 वर्षों में छत्तीसगढ़ को केंद्रीय करों के अंश के रूप में 3,46,806 करोड़ रुपये मिले हैं, जो 2004 से 2014 के दशक के 47,100 करोड़ रुपये की तुलना में 7.4 गुना अधिक है।
खनिज संसाधनों का लाभ स्थानीय क्षेत्रों को देने के लिए बनी डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन, यानी डीएमएफ व्यवस्था से राज्य को 17,887 करोड़ रुपये मिले और 81 हजार से अधिक विकास कार्य हुए। ‘वन नेशन, वन टैक्स’, यानी जीएसटी से चेकपोस्ट की बाधाएं समाप्त हुईं और इस्पात, सीमेंट तथा कृषि उत्पादों के लिए पूरा देश एक बाजार बना। इसके साथ ही राज्य को 22,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जीएसटी क्षतिपूर्ति सहायता भी मिली।
सड़क, रेल, बिजली और मोबाइल नेटवर्क से छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल रही है
देश का सार्वजनिक पूंजीगत व्यय लगभग 2 लाख करोड़ से बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुआ है, और छत्तीसगढ़ को भी लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की सहायता मिली है। राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए 35,766 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं और 37 परियोजनाओं, यानी 18,215 करोड़ रुपये के कार्य जारी हैं। सभी जिला मुख्यालय अब राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। सिक्स-लेन रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे हमारे प्रदेश को बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जोड़ेगा। इसके साथ 4-लेन बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव मार्ग (4,007 करोड़ रुपये) और छह-लेन रायपुर-दुर्ग बायपास (2,289 करोड़ रुपये) का निर्माण भी प्रगति पर है।
रेल के क्षेत्र में लगभग 54 हजार करोड़ रुपये की नई लाइन, दोहरीकरण, फ्लाईओवर और पुल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। ‘डिजिटल भारत निधि’ से सुदूर और जनजातीय क्षेत्रों में 1,643 मोबाइल टावर स्वीकृत हुए।
ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। रायगढ़ के लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की क्षमता 4,000 से बढ़ाकर 4,800 मेगावाट की गई है। 2,808 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से 9.30 लाख घरों को नए कनेक्शन मिले हैं, और ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ में 1.16 लाख से अधिक घरों में सोलर संयंत्र लगे हैं, जिसके लिए 670 करोड़ रुपये की केंद्रीय सब्सिडी जारी हुई है।
बस्तर में अब शांति और विकास का नया अध्याय शुरू हुआ है
यह हमारे लिए सबसे गर्व और संतोष का विषय है कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों तथा सुरक्षाबलों के अदम्य साहस से 31 मार्च 2026 को हमें दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली। प्रधानमंत्री जी के इस विजन ‘कंधे पर गन नहीं, कंधे पर हल ही सभी समस्याओं का हल है’ ने बस्तर में स्थायी शांति और विकास का रास्ता खोला। नक्सल उन्मूलन के लिए केंद्र से 2,080 करोड़ रुपये की विशेष सहायता मिली, और आत्मसमर्पित कैडरों व नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना में 15,000 आवास स्वीकृत हुए, जिनमें से 5,671 का निर्माण चल रहा है।
संपर्क की बात करें तो आरसीपीएलडब्ल्यूई के तहत 267 सड़कें और 8 पुल पूरे हो चुके हैं। पीएमजीएसवाई-4 में 699 करोड़ रुपये से 228 सड़कें बन रही हैं। हिंसा के कारण बरसों से बंद 421 स्कूल फिर से खोले गए हैं, और ‘नियद नेल्ला नार योजना’ से दुर्गम गांवों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन की पहुंच सुनिश्चित हुई है। शांति की स्थापना के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और आजीविका के नए अवसर तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा और बड़े निर्णयों में भी देश ने दृढ़ता दिखाई
आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के दृढ़ राष्ट्रीय संकल्प को दुनिया के सामने रखा। वन रैंक वन पेंशन और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का सृजन भी इसी सोच के निर्णय हैं। अनुच्छेद 370 की समाप्ति से जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण संवैधानिक एकीकरण हुआ। औपनिवेशिक कानूनों की जगह त्वरित न्याय के लिए ‘भारतीय न्याय संहिता’, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ और ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम’ लागू किए गए, और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर सामाजिक न्याय को मजबूती दी गई।
विकास के साथ-साथ हमारी विरासत और आस्था का भी सम्मान हुआ
काशी विश्वनाथ धाम और 500 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर का निर्माण व प्राण प्रतिष्ठा हमारे सांस्कृतिक आत्मविश्वास के प्रतीक हैं। छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशवासियों के लिए ‘अयोध्या धाम श्रीरामलला दर्शन योजना’ भी संचालित कर रही है। प्रसाद योजना में 48 करोड़ रुपये की सहायता से माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर, डोंगरगढ़ का विकास कार्य पूर्ण हुआ है।
स्वदेश दर्शन में जशपुर, सरगुजा, बिलासपुर और जगदलपुर के जनजातीय पर्यटन सर्किट के लिए 94 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। स्वदेश दर्शन 2.0 में कबीरधाम के भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 146 करोड़ रुपये और जशपुर के मयाली-बगीचा इको-टूरिज्म के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। केंद्र सरकार ने चंपारण में संत श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की मूर्ति और कॉम्प्लेक्स की स्थापना के लिए स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत 73.42 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। रायपुर में 200 करोड़ रुपये की लागत से ‘पीएम एकता मॉल’ बनेगा, जो हथकरघा, हस्तशिल्प और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देगा, और नवा रायपुर में ‘निफ्ट’ की स्थापना भी स्वीकृत हुई है।
आज दुनिया में भारत की आवाज़ को सुना और सराहा जा रहा है
मोदी जी के नेतृत्व में वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका और प्रतिष्ठा का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। जी-20 की अध्यक्षता, ब्रिक्स में भारत की प्रभावी भूमिका, अफ्रीकी संघ को जी-20 की स्थायी सदस्यता दिलाने की पहल और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूती देना भारत की बढ़ती कूटनीतिक क्षमता के प्रतीक हैं। दुनिया के 36 देशों द्वारा उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाना भी इसे रेखांकित करता है।
इंटरनेशनल सोलर अलायंस, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष जैसी पहलों का लाभ छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को भी मिला है। श्रीअन्न को वैश्विक पहचान मिलने से बस्तर और सरगुजा के कोदो, कुटकी और रागी उत्पादक जनजातीय किसानों के लिए नए बाजार और आर्थिक अवसर बने हैं।
आगे की बात करें तो, हमारा संकल्प है ‘विकसित छत्तीसगढ़’ से ‘विकसित भारत 2047’
भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री जी के महासंकल्प में भागीदारी के लिए हमने ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ का रोडमैप तैयार किया है। नक्सलमुक्त बस्तर, खनिज और ऊर्जा की अपार संपदा, मेहनती किसान, सशक्त महिलाएं, युवा शक्ति, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और निवेश के अनुकूल वातावरण हमारी बड़ी ताकत हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की भावना के साथ मंत्रिपरिषद ने ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के माध्यम से ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण में पूर्ण योगदान देने का संकल्प दोहराया है।
मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत और छत्तीसगढ़ समृद्ध, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और विकसित भविष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।
00 सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री
00 नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू करेंगे पद्म भूषण पुलेला गोपीचंद, प्रदेश की प्रतिभाओं को मिलेगा विश्वस्तरीय प्रशिक्षण
00 खेल प्रतिभाओं को अवसर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता, खेल विकास के लिए बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान
00 बस्तर ओलंपिक से सामने आ रही दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाएं, दूसरे वर्ष लगभग 3.91 लाख खिलाडिय़ों ने लिया हिस्सा
00 खेल उत्कृष्टता, आधुनिक सुविधाओं और निवेश को प्रोत्साहित करने के राज्य सरकार के प्रयासों की गोपीचंद ने की सराहना
रायपुर। छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इन प्रतिभाओं को पहचानने, तराशने और उन्हें विश्वस्तरीय प्रशिक्षण एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। राज्य सरकार इसी दिशा में योजनाबद्ध रूप से आगे बढ़ रही है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के जोरा में आयोजित सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर में प्रस्तावित विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स क्लब की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदेश में खेल संस्कृति को नई मजबूती मिलेगी और युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण एवं खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर क्लब के संस्थापकों और पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक श्री पुलेला गोपीचंद का छत्तीसगढ़ में स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय बैडमिंटन को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनके मार्गदर्शन में अनेक खिलाडिय़ों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया है। नवा रायपुर में उनकी बैडमिंटन अकादमी की शुरुआत प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी। साय ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता का निर्माण भी करते हैं। खेलों में निवेश वास्तव में हमारी युवा पीढ़ी और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार खेल अधोसंरचना के विस्तार, प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास और प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन देने पर विशेष ध्यान दे रही है।
बस्तर ओलंपिक ने बदली तस्वीर, गांवों से निकलकर मैदान तक पहुंच रहे युवा
साय ने बस्तर ओलंपिक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढऩे का अवसर देने का सशक्त मंच बना है। बस्तर ओलंपिक के पहले वर्ष में लगभग एक लाख 65 हजार खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया था। दूसरे वर्ष यह संख्या बढ़कर लगभग तीन लाख 91 हजार हो गई। खिलाडिय़ों की बढ़ती भागीदारी बताती है कि बस्तर के युवाओं में खेलों को लेकर अभूतपूर्व उत्साह है और क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन की नई धारा प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में आज युवा बंदूक और हिंसा से दूर होकर खेल, शिक्षा, कौशल और रोजगार के माध्यम से अपने भविष्य को संवारने के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि सुदूर गांव की प्रतिभा को भी वही अवसर और मंच मिले, जो बड़े शहरों के खिलाडिय़ों को उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया के अंतर्गत राष्ट्रीय जनजातीय खेलों का सफल आयोजन किया गया है। प्रदेश के खिलाड़ी भी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में रजत पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी यादव तथा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य संजू देवी की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां अपने परिश्रम और प्रतिभा से प्रदेश का मान बढ़ा रही हैं।
खेल अधोसंरचना के विस्तार के लिए 100 करोड़ का प्रावधान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने खेलों के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए इस वर्ष के बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार की खेलो इंडिया सहित विभिन्न योजनाओं के समन्वय से प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित की जा रही है। खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण, आवश्यक सुविधाएं और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी, चाहे वह किसी शहर से हो या सुदूर वनांचल से, संसाधनों के अभाव में पीछे न रहे। प्रतिभा को अवसर से जोडऩा और खिलाडिय़ों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।
नक्सलवाद से मुक्ति के साथ बस्तर में खुल रहे विकास के नए द्वार
साय ने कहा कि प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता उनकी सरकार के लगभग पौने तीन वर्ष के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। चार दशकों से अधिक समय तक नक्सलवाद ने बस्तर सहित प्रदेश के अनेक क्षेत्रों के विकास को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक दिशा मिली है। उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों के साहस, समर्पण और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि इस परिवर्तन में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की जनता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्थानीय लोगों के विश्वास और सहयोग से आज उन क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, खेल और रोजगार की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मोदी की गारंटी के अंतर्गत प्रदेशवासियों से किए गए वादों को पूरा करने के साथ सुशासन और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित राज्य बनने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 75 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए राज्य की प्राकृतिक संपदा और पारंपरिक सामर्थ्य के साथ नई तकनीक, आधुनिक उद्योग, सेवा क्षेत्र और मानव संसाधन के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा, वनोपज, जल संसाधन और ऊर्जा के क्षेत्र में समृद्ध है। प्रदेश के मेहनतकश लोग हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इन सभी संभावनाओं का बेहतर उपयोग करते हुए रोजगार, उद्यमिता और निवेश के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति को देश और विदेश के निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। हाल ही में सिंगापुर प्रवास के दौरान डेटा सेंटर, कृषि प्रसंस्करण सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। लगभग 15 बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ आयोजित राउंड टेबल बैठक में निवेशकों ने छत्तीसगढ़ में उद्योग और व्यवसाय स्थापित करने में रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि निवेश बढऩे से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
सुशासन और तकनीक से बदल रही प्रशासनिक कार्यसंस्कृति
साय ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित प्रशासन के लिए लगातार सुधार कर रही है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने के साथ शासकीय सेवाओं के डिजिटलीकरण को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि तकनीक के माध्यम से सेवाएं अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी बनें तथा उनका लाभ समय पर आम नागरिकों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक, सशक्त युवा, आधुनिक अधोसंरचना और सुशासन विकसित छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से स्वस्थ, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओम प्रकाश चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान अब केवल खनिज और भारी उद्योगों तक सीमित नहीं है। राज्य में सेवा क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और आधुनिक शहरी अधोसंरचना का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। नवा रायपुर इस बदलते छत्तीसगढ़ की नई संभावनाओं का प्रमुख केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास के लिए लगातार प्रतिष्ठित संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी और नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान स्थापित हो रहे हैं, जबकि आईआईटी, आईआईएम, एम्स और सीपेट जैसे राष्ट्रीय संस्थान पहले से प्रदेश में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
चौधरी ने कहा कि अमरावती और हैदराबाद के बाद श्री पुलेला गोपीचंद द्वारा छत्तीसगढ़ में बैडमिंटन अकादमी प्रारंभ किया जाना प्रदेश के खेल जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को अपने ही प्रदेश में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नवा रायपुर में डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर इकाई की स्थापना की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार अंजोर विजन दस्तावेज को आधार बनाकर दीर्घकालिक योजना के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।
विकसित भारत के निर्माण के लिए स्वस्थ और सशक्त युवा पीढ़ी जरूरी : गोपीचंद
पद्म भूषण श्री पुलेला गोपीचंद ने छत्तीसगढ़ में मिले आत्मीय स्वागत के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर के सुव्यवस्थित और सुंदर विकास को देखकर छत्तीसगढ़ के प्रति उनकी धारणा को नई दिशा मिली है। उन्होंने इलेशियम क्लब्स की पहल को खेल, स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। गोपीचंद ने कहा कि पिछले दस-बारह वर्षों में देश में खेलों के प्रति दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने वर्ष 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी राष्ट्र की प्रगति में गौरव और आत्मविश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब कोई भारतीय खिलाड़ी विजय प्राप्त करता है और तिरंगा ऊंचा होता है, तो इससे पूरे देश का आत्मविश्वास बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और साक्षरता के साथ उनके शारीरिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। बच्चों को दौडऩे, कूदने, चढऩे और विभिन्न खेल गतिविधियों में भाग लेने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। खेलों में किया गया निवेश केवल खिलाडिय़ों के निर्माण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी समाज के निर्माण में योगदान देता है। गोपीचंद ने खेल उत्कृष्टता से जुड़ी योजनाओं, सुविधाओं और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करने के लिए ऐसी युवा पीढ़ी की आवश्यकता है, जो शिक्षित होने के साथ स्वस्थ, सक्रिय, अनुशासित और शारीरिक रूप से सक्षम भी हो। इसलिए खेल और स्वास्थ्य को विकास की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया जाना आवश्यक है। इस अवसर पर प्रह्लाद राय अग्रवाल, दीपचंद राजलीवाल, पवित्र कुमार, डॉ. हिमांशु द्विवेदी सहित अन्य अतिथिगण एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
त्योहारी सीजन में छत्तीसगढ़ को मिल सकती हैं दो स्पेशल ट्रेनें, सांसद संतोष पांडेय ने GM को लिखा पत्र
रायपुर- आगामी त्योहारी मौसम में ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़, लंबी प्रतीक्षा सूची और यात्रियों की दिक्कतों को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने रेलवे प्रशासन से विशेष प्रबंध करने का आग्रह शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद संतोष पांडेय ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के महाप्रबंधक को पत्र प्रेषित किया है। सांसद ने पत्र में नवरात्र, दीपावली, छठ पूजा और क्रिसमस पर्व के दौरान छत्तीसगढ़ के यात्रियों की सुविधा के लिए दो महत्वपूर्ण मार्गों पर नई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग की है।
सांसद संतोष पांडेय ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि त्योहारी सीजन में छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान और दर्शन के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार तथा ऋषिकेश की यात्रा करते हैं। वर्तमान में इस मार्ग पर नियमित ट्रेनों में भारी वेटिंग चल रही है। अत: दुर्ग से हरिद्वार के बीच एक सीधी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन का परिचालन तत्काल शुरू किया जाना चाहिए। इससे नियमित ट्रेनों पर यात्रियों का अत्यधिक दबाव कम होगा और श्रद्धालुओं को कंफर्म टिकट के साथ सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा।
गोंदिया-माता वैष्णो देवी कटरा मार्ग के लिए मांग
सांसद ने दूसरी महत्वपूर्ण मांग जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी धाम जाने वाले यात्रियों के लिए रखी है। उन्होंने गोंदिया से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन चलाने की जरूरत जताई है। इस ट्रेन का मार्ग गोंदिया से प्रारंभ होकर राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, उसलापुर और कटनी मुड़वारा होते हुए निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया गया है। इस मार्ग से उत्तर भारत जाने वाले हजारों यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।
रेल विकास संगठन का भी मिला समर्थन
सांसद ने अपने पत्र के साथ छत्तीसगढ़ रेल विकास संगठन द्वारा प्राप्त मांग पत्र को भी संलग्न किया है। उन्होंने महाप्रबंधक से कहा कि जनभावनाओं और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन दोनों ट्रेनों के संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इन ट्रेनों के चलने से न केवल आम यात्रियों को दलालों और भीड़भाड़ से मुक्ति मिलेगी, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होगी।
बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शिक्षक और सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस कृष्णराम महापात्र की डिवीजन बेंच ने भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया।इसके बाद छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल ने शुक्रवार को हाई कोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा स्थगित कर दी। बता दें कि भर्ती परीक्षा में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया था।
उल्लेखनीय है कि सहायक शिक्षक भर्ती के कुल 2,292 पदों के लिए लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर को प्रस्तावित थी। वहीं शिक्षक भर्ती के 1,654 पदों में के लिए लिखित परीक्षा 25 अक्टूबर को होनी थी।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भर्ती में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण नहीं मिला। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा है।
हालांकि, समाज कल्याण विभाग ने 11 सितंबर 2026 को संशोधित अधिसूचना जारी कर सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित (बी) श्रेणी को शामिल किया।हालांकि, अधिसूचना जारी होने से पहले आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। इसलिए इस श्रेणी को वर्तमान भर्ती में शामिल करना कानूनी रूप से संभव नहीं था।
संशोधित विज्ञापन जारी कर सकती है सरकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि संशोधन केवल सहायक शिक्षक भर्ती के लिए जारी किया गया है, शिक्षक भर्ती के लिए नहीं। परीक्षा की तारीखें नजदीक होने के कारण डिवीजन बेंच ने अंतरिम आदेश जारी किया है।
कोर्ट के आदेश के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2026 को होने वाली सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा और 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित शिक्षक भर्ती परीक्षा तब तक नहीं होगी, जब तक विज्ञापन में सभी आरक्षित श्रेणियों को शामिल कर संबंधित अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर नहीं दिया जाता।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य शासन नियमानुसार संशोधित विज्ञापन जारी कर सकता है या सभी आरक्षित श्रेणियों को शामिल करते हुए नया विज्ञापन निकाल सकता है।
दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण में गड़बड़ी के आरोप
कोरबा की रहने वाली मीनाक्षी मंगलेकर और बाकी ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद पूर्ण दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया गया है।
इससे वे भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के अवसर से वंचित हो रहे हैं। याचिका में इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए भर्ती विज्ञापन की शर्तों और आरक्षण व्यवस्था को चुनौती दी गई है।
संशोधित विज्ञापन में भी दृष्टिबाधितों को शामिल नहीं किया
सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने बताया कि 16 अप्रैल 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन में संशोधन की सूचना 9 अक्टूबर को रायपुर और बिलासपुर के अखबारों में प्रकाशित की गई है। इसे विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। संशोधन में आरक्षित पदों का श्रेणीवार बंटवारा किया गया है।
शासन ने कहा कि आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2026 निकल चुकी है। ऐसे में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर देना संभव नहीं है।
इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब संशोधन के जरिए आरक्षित पदों का श्रेणीवार बंटवारा किया गया है, तो दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों की श्रेणी को शामिल नहीं करने का प्रथम दृष्टया कोई उचित कारण नजर नहीं आता।
जानिए… क्या है दिव्यांगों के लिए आरक्षण का नियम
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 34 के तहत सरकारी संस्थानों में सीधी भर्ती के लिए दिव्यांग व्यक्तियों को कम से कम 4% आरक्षण देने का प्रावधान है। इसमें दृष्टिहीन और कम दृष्टि वाले व्यक्ति भी शामिल हैं।
आरक्षण का लाभ लेने के लिए सामान्यतः 40% या उससे अधिक दिव्यांगता का प्रमाणपत्र जरूरी है। याचिका में इसी 4% आरक्षण के तहत दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए पद आरक्षित नहीं करने को चुनौती दी गई है।
रायपुर- संकल्प नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव समिति, शंकर नगर, रायपुर द्वारा बीटीआई ग्राउंड, शंकर नगर में आयोजित होने वाले गरबा उत्सव के पोस्टर का विमोचन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री माननीय श्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री माननीय श्री विजय शर्मा के करकमलों से किया गया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आयोजन के 15वें वर्ष में प्रवेश करने पर समिति को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गरबा उत्सव के सफल आयोजन की कामना की।
समिति के संयोजक संजय श्रीवास्तव ने बताया कि बीटीआई ग्राउंड, शंकर नगर, रायपुर में आयोजित होने वाला यह गरबा उत्सव अपने 15वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस वर्ष उत्सव का आयोजन 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक किया जाएगा। आयोजन के दौरान प्रत्येक दिन उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले गरबा प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
श्रीवास्तव ने बताया कि नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित यह उत्सव मां दुर्गा की आराधना, भक्ति एवं पारंपरिक गरबा संस्कृति का अनूठा संगम है। समिति द्वारा प्रतिवर्ष इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है।
समिति द्वारा गरबा उत्सव को भव्य रूप देने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। समिति ने समस्त श्रद्धालुओं, नागरिकों एवं गरबा प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर उत्सव की शोभा बढ़ाने की अपील की है।
इस अवसर पर समिति से अनिता खंडेलवाल, संगीता मिश्रा, दीपक श्रीवास्तव, अमरजीत सिंह, सुमन मुथा, नेहा खंडेलवाल, ललित साहू, हर्ष वर्मा, अंकुर अग्रवाल, श्रुति जैन, ललित साहू उपस्थित रहे।





























