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अमर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान से बस्तर में शांति की नई सुबह, वीर जवानों का त्याग सदैव रहेगा स्मरणीय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

अमर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान से बस्तर में शांति की नई सुबह, वीर जवानों का त्याग सदैव रहेगा स्मरणीय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री  साय ने ‘शौर्यांजलि : बस्तर के नायकों को समर्पित’ कार्यक्रम में अमर शहीदों को अर्पित की श्रद्धांजलि

शहीद जवानों ने अपने अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से बस्तर की आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की रखी नींव

शहीद परिवारों का सम्मान और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, हर सुख-दुख में उनके साथ मजबूती से खड़ी है छत्तीसगढ़ सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को मिली निर्णायक सफलता : मुख्यमंत्री

भय और हिंसा के लंबे दौर से आगे बढ़कर शांति, विश्वास और विकास की नई पहचान गढ़ रहा बस्तर

शहीदों के साय

रायपुर-- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर की धरती पर शांति की स्थापना और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले हमारे वीर जवानों का शौर्य, त्याग और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। हमारे जवानों ने केवल नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष नहीं किया, बल्कि अपने रक्त और बलिदान से बस्तर में शांति, सुरक्षा और खुशहाली के नए युग की नींव रखी है। आज बस्तर में शांति और विश्वास की जो नई सुबह दिखाई दे रही है, उसके पीछे हमारे सुरक्षा बलों का अदम्य साहस और अमर शहीदों का सर्वोच्च बलिदान है।

मुख्यमंत्री साय  राजधानी रायपुर में द हिन्दू फाउंडेशन, नागपुर द्वारा आयोजित ‘शौर्यांजलि : बस्तर के नायकों को समर्पित’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बस्तर में शांति और सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले 50 अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके परिजनों का सम्मान किया।

मुख्यमंत्री  साय ने शहीद परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी अपने को खोने की पीड़ा को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। जब एक जवान देश और समाज की रक्षा करते हुए शहीद होता है तो एक मां अपना बेटा, पत्नी अपना जीवनसाथी और बच्चे अपने पिता का साया खो देते हैं। इस अपूरणीय क्षति की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन पूरा छत्तीसगढ़ अपने वीर सपूतों और उनके परिवारों के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा।

उन्होंने शहीद परिवारों से कहा कि आपके अपने केवल आपके परिवार के सदस्य नहीं थे, वे पूरे छत्तीसगढ़ और राष्ट्र के गौरव हैं। उन्होंने अपने जीवन से साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां गर्व और सम्मान के साथ याद करेंगी।

शहीद परिवारों के हर सुख-दुख में साथ खड़ी है सरकार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीद परिवारों का सम्मान, सुरक्षा और कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। मातृभूमि और समाज की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले जवानों के परिवारों की चिंता करना सरकार का दायित्व है। राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ शहीद परिवारों के सुख-दुख में सहभागी है और भविष्य में भी हर परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

उन्होंने कहा कि शहीदों के परिवार हमारे लिए केवल सहायता के पात्र परिवार नहीं, बल्कि हमारे अपने परिवार हैं। उनका सम्मान करना और उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बेहतर समन्वय के साथ अभियान चलाया है। केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 के लक्ष्य को लेकर सुरक्षा बलों ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया।

उन्होंने कहा कि चार दशकों से बस्तर में गहरी जड़ें जमा चुके नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष आसान नहीं था। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हमारे जवानों ने अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास, सुरक्षा बलों की रणनीति और जवानों के अदम्य पराक्रम से नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक सफलता मिली।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में बस्तर में स्थायी शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस परिवर्तन के वास्तविक नायक हमारे सुरक्षा बलों के जवान हैं, जिन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य और राष्ट्रसेवा के संकल्प से कभी समझौता नहीं किया।

चार दशकों तक बस्तर ने झेला हिंसा का दंश

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं, अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य और सरल-सहज जनजीवन के लिए पूरी दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। दुर्भाग्य से चार दशकों तक इस सुंदर अंचल को नक्सली हिंसा का दंश झेलना पड़ा। हजारों परिवार हिंसा से प्रभावित हुए। अनेक बच्चों का बचपन भय और असुरक्षा के बीच गुजरा और दूरस्थ अंचलों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि इस कठिन दौर में हमारे सुरक्षा बलों के जवान बस्तरवासियों की सुरक्षा के लिए चट्टान की तरह खड़े रहे। अपने परिवारों से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर उन्होंने जंगलों और दुर्गम इलाकों में हर चुनौती का सामना किया। अनेक वीर जवान कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहीद हुए, लेकिन उनका बलिदान उनके साथियों के संकल्प को और मजबूत करता गया।

मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सहित नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में शामिल सभी सुरक्षा बलों के जवानों के शौर्य और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनके साहस और पराक्रम पर पूरे छत्तीसगढ़ को गर्व है।

अब शांति, विश्वास और विकास की नई पहचान गढ़ रहा बस्तर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस और बलिदान से स्थापित हो रही शांति के साथ अब बस्तर में विकास और खुशहाली के नए द्वार खुल रहे हैं। जिन क्षेत्रों में कभी भय और हिंसा का वातावरण था, वहां आज सड़कें बन रही हैं, बिजली पहुंच रही है, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित हो रही हैं तथा शासन की योजनाएं अंतिम छोर के गांवों तक पहुंच रही हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ और लंबे समय तक विकास से वंचित रहे गांवों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं को पहुंचाया जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि बस्तर का कोई भी गांव और कोई भी परिवार विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर के बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं और युवाओं को खेल, कौशल विकास तथा रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों के माध्यम से गांव-गांव की खेल प्रतिभाएं सामने आ रही हैं, वहीं बस्तर पंडुम इस अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को नई पहचान दे रहा है।

उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान अब भय और हिंसा से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, प्रतिभाशाली युवाओं, पर्यटन और विकास की अपार संभावनाओं से और अधिक मजबूत होगी। हमारा संकल्प है कि बस्तर के प्रत्येक युवा के हाथ में अवसर हो और प्रत्येक परिवार के जीवन में विकास और खुशहाली आए।

शहीदों के सपनों का बस्तर बनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज बस्तर में दिखाई दे रहे सकारात्मक परिवर्तन की नींव हमारे शहीद जवानों के त्याग और बलिदान पर टिकी है। उन्होंने केवल वर्तमान की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।

उन्होंने कहा कि शहीदों के सपनों के अनुरूप शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समृद्ध और विकसित बस्तर का निर्माण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जिस शांति के लिए हमारे जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, वह शांति स्थायी बने और विकास तथा खुशहाली का लाभ बस्तर के प्रत्येक परिवार तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को हमारे वीर जवानों के जीवन, संघर्ष और बलिदान से परिचित कराना भी आवश्यक है। राष्ट्र और समाज की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले इन वीर सपूतों का जीवन युवाओं में देशप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा की भावना जागृत करता रहेगा।

*द हिन्दू फाउंडेशन की पहल सराहनीय*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए द हिन्दू फाउंडेशन, नागपुर की सराहना करते हुए कहा कि शहीद परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदना व्यक्त करने की यह पहल समाज को प्रेरणा देने वाली है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन द्वारा देशभर में  यात्रा कर 800 से अधिक शहीद परिवारों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है। यह उन परिवारों के प्रति समाज की कृतज्ञता की सशक्त अभिव्यक्ति है, जिन्होंने राष्ट्र और समाज की सुरक्षा के लिए अपने प्रियजनों का बलिदान दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘शौर्यांजलि’ केवल अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके अधूरे सपनों को पूरा करने और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का भी अवसर है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि हमारे वीर जवानों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। उनके शौर्य और त्याग से बस्तर में शांति की जो नई सुबह आई है, उसे विकास और खुशहाली के उजाले में बदलना हमारा संकल्प है। हम सब मिलकर ऐसा शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समृद्ध और विकसित बस्तर बनाएंगे, जिसका सपना हमारे वीर जवानों ने देखा था। यही अमर शहीदों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर द हिन्दू फाउंडेशन, नागपुर के संयोजक श्री संदीप गुप्ता, शहीद वीर नारायण सिंह के वंशज श्री राजेंद्र सिंह दीवान सहित बड़ी संख्या में शहीद परिवारों के सदस्य, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा दुःख

कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा दुःख

 दिवंगतों के परिजनों के प्रति व्यक्त की संवेदना, घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना

रायपुर--मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ का समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। इस त्रासदी में अपनों को खोने वाले सभी परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने माँ दुर्गा से दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की है।

नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार: साय

नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार: साय

 00 राजधानी रायपुर के विभिन्न गरबा एवं नवरात्रि महोत्सवों में हुए शामिल, प्रदेशवासियों को दी नवरात्रि की शुभकामनाएं

00 गरबा महोत्सव हमारी आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का सुंदर संगम: मुख्यमंत्री

00 महतारी वंदन योजना से लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को मिल रही आर्थिक मजबूती, प्रदेश की 14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
00 महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता से मजबूत होता है परिवार और समाज, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका

00 माता कौशल्या की पावन धरती छत्तीसगढ़ में शक्ति आराधना की समृद्ध परंपरा, देवी शक्तिपीठ हमारी आस्था और संस्कृति की अमूल्य धरोहर
00 विकास भी, विरासत भी की भावना के साथ प्रदेश की संस्कृति, आस्था और परंपराओं को सहेजते हुए आगे बढ़ रही राज्य सरकार

रायपुर। नवरात्रि का पावन पर्व शक्ति की आराधना के साथ नारी शक्ति के सम्मान, सामाजिक एकता और हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। हमारी सरकार इसी भावना के अनुरूप माताओं-बहनों के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। महिलाओं की प्रगति केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रदेश की प्रगति का आधार है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न गरबा एवं नवरात्रि महोत्सवों में शामिल होकर प्रदेशवासियों को नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय कालीबाड़ी स्थित मां काली मंदिर पहुंचे और माता के दर्शन-पूजन कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके साथ ही वे मंडी परिसर में श्री कच्छ कड़वा पाटीदार समाज द्वारा आयोजित श्री पाटीदार नवरात्रि महोत्सव, भानपुरी में श्री कच्छ कड़वा पाटीदार समाज के गरबा समारोह, गोवर्धन नगर में श्री कच्छ गुर्जर क्षत्रिय समाज द्वारा आयोजित नवरात्रि महोत्सव तथा अमलीडीह क्षेत्र में आयोजित ढोलिडा रास गरबा-2026 सहित विभिन्न आयोजनों में सम्मिलित हुए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर पूरे देश और प्रदेश में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत वातावरण निर्मित होता है। नौ दिनों तक शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना हमें जीवन में साहस, संयम, सकारात्मकता और सदाचार के मार्ग पर आगे बढऩे की प्रेरणा देती है। यह पर्व हमारी सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने के साथ समाज में प्रेम, सद्भाव और समरसता की भावना को भी मजबूत करता है।

गरबा हमारी आस्था और सामाजिक एकता का उत्सव
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गरबा केवल नृत्य का आयोजन नहीं, बल्कि मां दुर्गा के प्रति हमारी श्रद्धा और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति है। गुजरात से प्रारंभ हुई गरबा की समृद्ध परंपरा आज पूरे देश में उत्साह और उमंग के साथ मनाई जाती है। यह भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का सुंदर उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हमारे पर्व और त्योहार समाज को जोडऩे का कार्य करते हैं। अलग-अलग समाज और समुदाय जब एक साथ उत्सव मनाते हैं, तो आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना और मजबूत होती है। यही हमारी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है। छत्तीसगढ़ में भी सभी समाजों ने अपनी परंपराओं और संस्कृति को सहेजते हुए प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने गरबा महोत्सवों में माताओं, बहनों और बेटियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मातृशक्ति की भागीदारी से ऐसे आयोजन और अधिक सुंदर तथा गरिमामय बनते हैं। नवरात्रि का पर्व हमें नारी शक्ति के सम्मान के साथ उनके प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी स्मरण कराता है।

महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया माताओं-बहनों का आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है। योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की सहायता राशि सीधे अंतरित की जा रही है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता की योजना नहीं है, बल्कि माताओं-बहनों के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की उनकी स्वतंत्रता को मजबूत करने का माध्यम भी बनी है। हमारी माताएं-बहनें इस राशि का उपयोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, बचत और परिवार की जरूरतों के लिए कर रही हैं। जब महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि माताओं-बहनों के चेहरे पर आत्मविश्वास और संतोष देखकर सरकार को भी अपने प्रयासों की सार्थकता का अनुभव होता है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ की प्रत्येक महिला को आगे बढऩे के अवसर मिलें और वह प्रदेश के विकास में अपनी पूरी क्षमता के साथ भागीदारी कर सके।
14 लाख लखपति दीदी छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति के सामर्थ्य का प्रमाण
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज प्रदेश की 14 लाख बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की महिलाओं की मेहनत, लगन, उद्यमशीलता और सामर्थ्य का प्रमाण है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि गांव और समाज की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य आने से परिवारों में खुशहाली आती है, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य बेहतर होता है तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन की गति तेज होती है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में हमारी मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं को स्वावलंबी बनाने, कौशल विकास, आजीविका और उद्यमिता के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

शक्ति आराधना की पावन भूमि है छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है। यह मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी जैसी आराध्य देवियों की भूमि है। प्रदेश में सदियों से शक्ति की उपासना और देवी आराधना की गौरवशाली परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी से लेकर डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी, रतनपुर में मां महामाया और चंद्रपुर में मां चंद्रहासिनी के दरबार तक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। गांव-गांव और शहर-शहर में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित होते हैं और पूरा छत्तीसगढ़ माता की भक्ति में सराबोर हो जाता है। यह हमारी गहरी धार्मिक आस्था के साथ प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की विशिष्ट पहचान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में प्रकृति, आस्था, लोकजीवन और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। हमारे तीज-त्योहार और धार्मिक परंपराएं पीढिय़ों को आपस में जोड़ती हैं। इन्हें सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
विकास भी, विरासत भी के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़
साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिक विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी ने देश को विकास भी, विरासत भी का मंत्र दिया है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश के समग्र विकास के साथ अपनी संस्कृति, आस्था और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। देवी शक्तिपीठों और आस्था केंद्रों में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं के विकास के साथ उन्हें प्रदेश की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन से जोडऩे की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की स्मृति नहीं है, बल्कि वर्तमान की शक्ति और भविष्य की प्रेरणा भी है। विकास की यात्रा में अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहना आवश्यक है। हमारी सरकार का प्रयास है कि आधुनिक और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान भी और अधिक सशक्त हो। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवरात्रि और गरबा जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोडऩे का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करते हैं तथा समाज में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने मां दुर्गा से प्रार्थना करते हुए कहा कि माता रानी की कृपा सभी प्रदेशवासियों पर बनी रहे। हर घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आए तथा छत्तीसगढ़ शांति, समृद्धि और विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे। इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा, देवजी भाई पटेल,  जयंती पटेल, श्री जगदीश पटेल सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

जनजातीय गौरव दिवस पर राज्य स्तरीय चित्रकला और फोटोग्राफी प्रतियोगिता 12 व 13 नवंबर को

जनजातीय गौरव दिवस पर राज्य स्तरीय चित्रकला और फोटोग्राफी प्रतियोगिता 12 व 13 नवंबर को

 00 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रतिभागी ले सकेंगे हिस्सा

रायपुर। नवा रायपुर स्थित आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा जनजातीय गौरव दिवस 2026 के अवसर पर राज्य स्तरीय चित्रकला और फोटोग्राफी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। दोनों प्रतियोगिताओं में अनुसूचित जनजाति वर्ग के 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रतिभागी भाग ले सकेंगे। चित्रकला प्रतियोगिता 12 और 13 नवंबर को होगी, जबकि फोटोग्राफी प्रतियोगिता नवंबर माह में आयोजित की जाएगी।

चित्रकला प्रतियोगिता का विषय ‘मेरी जनजाति, मेरी विरासत’ चित्रकला प्रतियोगिता में शामिल होने के इच्छुक प्रतिभागी 5 नवंबर 2026 तक
https://tinyurl.com/jjgdpainting पर पंजीयन कर सकते हैं। प्रतियोगिता के लिए पेंटिंग ब्रश, कैनवास, कार्टि्रज पेपर, ईजल, ड्राइंग शीट, रंग और पैलेट संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे।

नियम एवं शर्तें http://www.cgtrti.gov.in/ पर देखी जा सकती हैं। अधिक जानकारी के लिए सहायक संचालक सुश्री पार्वती जगत से +91-7805982502 पर संपर्क करें। प्रविष्टियां
jjgdpainting@gmail.com पर भेजी जा सकती हैं।
फोटोग्राफी प्रतियोगिता का विषय 'जनजातीय जीवन, संस्कृति एवं परंपराएं
फोटोग्राफी प्रतियोगिता के लिए 4 नवंबर 2026 को शाम 5:30 बजे तक

https://tinyurl.com/jjgdpainting पर पंजीयन किया जा सकता है। पंजीयन फॉर्म, फोटोग्राफ की सॉफ्ट कॉपी और आवश्यक दस्तावेज
jjgdphotography@gmail.com पर भेजने होंगे। प्रतियोगिता के नियम, शर्तों और पुरस्कार राशि की जानकारी संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिए सहायक अनुसंधान अधिकारी श्रीमती अंजनी भगत से 9926588481 पर संपर्क किया जा सकता है।

CG- बाल संप्रेक्षण गृह से अपचारी बालक फरार, सुरक्षा कर्मियों को चकमा देकर हुआ रफूचक्कर…

CG- बाल संप्रेक्षण गृह से अपचारी बालक फरार, सुरक्षा कर्मियों को चकमा देकर हुआ रफूचक्कर…

 कोरबा। जिले के बाल संप्रेक्षण गृह से एक बार फिर अपचारी बालक के फरार होने का मामला सामने आया है। अपचारी बालक आज सुबह जवानों का ध्यान भटकते ही चैनल गेट खोलकर भाग निकला, जिससे हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस की टीम उसकी तलाश में जुट गई है।

दरअसल, पोंडीबहार के बालक को चोरी के मामले में 27 सितंबर को कोडिया स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में दाखिल कराया गया था। शनिवार सुबह मुख्य द्वार खुलते ही जवान काम में व्यस्त हो गए। इसी का फायदो उठाते हुए बालक चैनल गेट खोलकर फरार हो गया।

गिनती के दौरान बालक के भागने का पता चला, जिसके बाद सीएसईबी चौकी पुलिस ने पतासाजी शुरू की। सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि घर और रिश्तेदारों से पूछताछ की जा रही है।

बता दें कि कोडिया स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से अपचारी बालक के भागने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार बालक भाग चुके हैं, फिर भी सुरक्षा व्यवस्था लचर बनी हुई है।

13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी, विभाग ने 15 दिनों में मांगा जवाब, इस वजह से गिरी गाज, जाने पूरा मामला…!!

13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी, विभाग ने 15 दिनों में मांगा जवाब, इस वजह से गिरी गाज, जाने पूरा मामला…!!

 रायपुर। नागरिकों द्वारा सीएम हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज कराई गई शिकायतों के समाधान को लेकर राज्य शासन बेहद गंभीर है। पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का संबंधित विभागों द्वारा सक्रियता और गंभीरता से निराकरण किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान और लापरवाही पर 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं।

सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने के कारण लोक निर्माण विभाग द्वारा अधिकारियों के विरुद्ध ये कार्रवाई की गई है। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर विगत दो महीनों अगस्त और सितम्बर माह में लोक निर्माण विभाग से संबंधित शिकायतों की समीक्षा में पाया गया कि एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर शिकायतों को ऐसी टीप के साथ बंद किया गया है, जो शिकायत का समाधान नहीं दर्शाती है।

विभाग ने एल-1 स्तर पर शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान पर राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग बिलासपुर के अनुविभागीय अधिकारी अतुल राज पेगवार, बेमेतरा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी राजेश कुमार बाजपेयी, पेंड्रा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी जगदीश प्रसाद, सेतु उप संभाग दुर्ग के अनुविभागीय अधिकारी अशोक कुमार हरियाले और पाटन उप संभाग की अनुविभागीय अधिकारी सोनल ढालेन्द्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

एल-2 स्तर पर शिकायतों के उचित निराकरण नहीं होने पर विभाग द्वारा बेमेतरा संभाग के कार्यपालन अभियंता केशव प्रसाद लहरे, कोरबा संभाग के कार्यपालन अभियंता घासीराम जांगड़े, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर के कार्यपालन अभियंता रोशन कुमार साहू, सारंगढ़ संभाग के कार्यपालन अभियंता प्यारे लाल पैकरा और कांकेर संभाग की कार्यपालन अभियंता प्रज्ञा नंद को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

इसी प्रकार से सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को एल-3 स्तर पर बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने पर मंडल क्रमांक-2, रायपुर के अधीक्षण अभियंता डी.के. नेताम, दुर्ग मंडल की अधीक्षण अभियंता अर्पणा चौरपगार तथा राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता महादेव लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

राज्य शासन ने इन अधिकारियों को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा है कि शिकायत बंद करते समय यह अपेक्षित है कि टीप में स्थल निरीक्षण के निष्कर्ष, की गई या प्रस्तावित कार्यवाही, उसकी तिथि या समय-सीमा एवं शिकायतकर्ता को दी गई सूचना का स्पष्ट उल्लेख हो। यदि शिकायत अन्य विभाग से संबंधित हो तो उसका कारण सहित उल्लेख हो। ऐसा नहीं पाए जाने पर टीप से नागरिकों की समस्या का निराकरण नहीं हुआ तथा पोर्टल पर निराकरण के आँकड़े भ्रामक हुए।

लोक निर्माण विभाग ने इसे कर्त्तव्य पालन में लापरवाही और पदीय कर्त्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया जाना मानते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को अपना लिखित प्रतिवाद नोटिस मिलने के 15 दिनों की समयावधि में लोक निर्माण विभाग के सचिव को प्रस्तुत करने कहा गया है। लिखित प्रतिवाद निर्धारित समयावधि में प्राप्त नहीं होने पर अधिकारियों के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी।

शिक्षकों के ट्रांसफर का आदेश निकला फर्जी, शिक्षा विभाग के लेटरहेड और हस्ताक्षर का हुआ दुरुपयोग, अब डीपीआई ने इन जिलों के डीईओ से मांगी जानकारी…..

शिक्षकों के ट्रांसफर का आदेश निकला फर्जी, शिक्षा विभाग के लेटरहेड और हस्ताक्षर का हुआ दुरुपयोग, अब डीपीआई ने इन जिलों के डीईओ से मांगी जानकारी…..

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में 19 शासकीय कर्मचारियों के स्थानांतरण से जुड़ा एक फर्जी आदेश सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने 6 अगस्त 2026 को जारी बताए जा रहे इस आदेश को फर्जी करार दिया है। मामले में अब प्रदेश के 15 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।

लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से 14 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में इस मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारियों को जरूरी जानकारी और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी आदेश से जुड़े मामले में संबंधित शासकीय सेवकों की भूमिका की जानकारी जुटाई जाएगी और नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी लेटरहेड और अवर सचिव के हस्ताक्षर का इस्तेमाल

विभाग के मुताबिक, फर्जी स्थानांतरण आदेश तैयार करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के आधिकारिक लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही अवर सचिव आर.पी. वर्मा के नाम, पदमुद्रा और हस्ताक्षर का भी कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।

यह आदेश क्रमांक ESTB-102/755/2026/20-3 के साथ 6 अगस्त 2026 की तारीख का बताया गया था। इसके जरिए 19 शिक्षक और व्याख्याताओं का स्थानांतरण दर्शाया गया था। लोक शिक्षण संचालनालय ने जांच के लिए इस आदेश को फर्जी बताया है।

देखें फर्जी आदेश की कॉपी

15 जिलों के DEO से मांगी गई जानकारी

मामले की पड़ताल के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने बलौदाबाजार-भाटापारा, दुर्ग, बेमेतरा, बस्तर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, रायपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, राजनांदगांव, उत्तर बस्तर कांकेर, बालोद, कबीरधाम, धमतरी, सरगुजा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया है।

नक्शे देखें

लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से जारी पत्र

सभी संबंधित अधिकारियों को तीन दिन के भीतर बिंदुवार जानकारी और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। विभाग यह पता लगाना चाहता है कि फर्जी आदेश किन माध्यमों से जिला कार्यालयों तक पहुंचा और अलग-अलग स्तर पर उस पर किस तरह कार्रवाई हुई।

आदेश के आधार पर कितने कर्मचारियों ने लिया कार्यभार?
जिला शिक्षा अधिकारियों से सबसे अहम जानकारी उन कर्मचारियों को लेकर मांगी गई है, जिन्होंने कथित फर्जी आदेश के आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेने की कोशिश की। अधिकारियों को बताना होगा कि कितने कर्मचारियों ने कार्यमुक्ति या नई जगह पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए आवेदन दिया था।

इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि कितने कर्मचारियों को वास्तव में कार्यमुक्त किया गया और कितनों को नई जगह पर कार्यभार ग्रहण कराया गया। संचालनालय ने इस संबंध में संबंधित कर्मचारियों की सूची और दस्तावेज भी मांगे हैं, ताकि पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सके।

फर्जी आदेश सामने आने के बाद क्या कार्रवाई हुई?
विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों से यह भी पूछा है कि आदेश के फर्जी होने की जानकारी मिलने के बाद उनके स्तर पर क्या कदम उठाए गए। तीन दिन में मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और मामले में हुई कार्रवाई का विवरण शासन को भेजा जाएगा।

इस मामले में अब जिला स्तर से मिलने वाली रिपोर्ट अहम होगी। इससे पता चलेगा कि फर्जी आदेश किन कार्यालयों तक पहुंचा, उसके आधार पर कितने कर्मचारियों की कार्यमुक्ति या कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया हुई और संबंधित अधिकारियों ने समय रहते क्या कदम उठाए।

CG- पत्नी की हत्या: डंडे से पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट, वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान….

CG- पत्नी की हत्या: डंडे से पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट, वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान….

 बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से सामने आया है। जहां पत्नी ने अपनी ही पत्नी की हत्या कर दी है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है।

डंडे से पीट-पीटकर हत्या

मिली जानकारी के अनुसार, मामला राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटागहना में पत्नी की हत्या का मामला सामने आया है। यहां चरित्र शंका को लेकर एक पति ने अपनी 36 वर्षीय पत्नी की डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी। घटना के बाद गांव में सनसनी फैल गई है।

पिटाई के दौरान पत्नी की मौत

बताया जा रहा है कि आरोपी ने पहले घर के बाहर पेड़ के नीचे अपनी पत्नी की डंडे से बेरहमी से पिटाई की। महिला की हालत गंभीर होने पर वह उसे घर के अंदर ले गया, जहां कथित तौर पर फिर से उसकी पिटाई की गई। इस दौरान महिला की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर राजपुर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को महिला का शव घर के अंदर मिला, जबकि आरोपी पति भी घटनास्थल पर मौजूद था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की जांच और वैधानिक कार्रवाई में जुटी हुई है।

CG- एक नौकरी के लिए दो भाइयों में अदालती जंग! अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने सुनाया ये अहम फैसला…

CG- एक नौकरी के लिए दो भाइयों में अदालती जंग! अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने सुनाया ये अहम फैसला…

 बिलासपुर। अनुकंपा नियुक्ति और आपत्ति को लेकर छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा, पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करने वाले बेटे का दावा केवल दूसरे भाई की आपत्ति के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। सक्षम प्राधिकारी को लागू नियमों और नीति के अनुसार दोनों के दावों की पात्रता जांचकर निर्णय लेना होगा।

हाई कोर्ट ने भिलाई-चरोदा नगर निगम के 15 अप्रैल 2025 के आदेश को निरस्त करते हुए आठ सप्ताह के भीतर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है, आदेश निरस्त होने मात्र से याचिकाकर्ता को नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता।

पढ़िए क्या है मामला?

छत्तीसगढ़ दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित साउथ वसुंधरा नगर निवासी खिलेेश्वर प्रसाद के पिता परस राम नगर निगम में सहायक राजस्व निरीक्षक थे। 29 सितंबर 2023 को सेवाकाल के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। पिता की मृत्यु के बाद खिलेश्वर ने 4 दिसंबर 2023 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया। भाई दुमेश कुमार टंडन ने 15 जुलाई 2024 को इस पर आपत्ति जताते हुए स्वयं का भी दावा कर दिया। इसी विवाद के बीच नगर निगम ने 15 अप्रैल 2025 को खिलेश्वर के आवेदन को खारिज कर दिया।

अनुकंपा नीति के अनुसार तय होगी पात्रता

याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के कोर्ट में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कहा, भाई की आपत्ति मात्र से नियुक्ति के दावे पर विचार करने की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। नगर निगम और आपत्तिकर्ता भाई की ओर से दलील दी गई कि परिवार में विवाद है और लागू नियमों के तहत सहमति तथा अन्य शर्तों का पालन जरूरी है। भाई ने खुद को बेरोजगार और दिवंगत कर्मचारी पर आश्रित बताते हुए अनुकंपा नियुक्ति के लिए अपना दावा पेश किया।

अनुकंपा नियुक्ति कोई विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं

हाई कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं है। इसका उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु से परिवार पर आई आर्थिक कठिनाई को कम करना है। प्राधिकारी को यह जांचना होगा कि भाई ने अलग से आवेदन दिया है या नहीं और लागू नीति में दावेदारों के लिए कोई प्राथमिकता तय है या नहीं। कोर्ट ने विधवा की 8 अक्टूबर 2026 की सहमति संबंधी शपथपत्र पर भी विचार करने को कहा, लेकिन स्पष्ट किया कि इससे दूसरे पात्र दावेदार का दावा अपने आप समाप्त नहीं होगा।

हाई कोर्ट ने नगर निगम का आदेश निरस्त कर दोनों भाइयों को अपना पक्ष और दस्तावेज रखने का अवसर देने तथा आठ सप्ताह में कारण सहित निर्णय पारित करने का निर्देश दिया।

महतारी वंदन योजना बनी सुशीला के व्यापार की संबल, जगदलपुर की गृहिणी ने किराना दुकान को बनाया आत्मनिर्भर

महतारी वंदन योजना बनी सुशीला के व्यापार की संबल, जगदलपुर की गृहिणी ने किराना दुकान को बनाया आत्मनिर्भर

 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में न केवल आर्थिक संबल ला रही है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और परिवार की उन्नति में बराबर का भागीदार भी बना रही है। जगदलपुर के मेटगुड़ा क्षेत्र की निवासी सुशीला बघेल इसका एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी हैं।

सुशीला बघेल के परिवार के भरण-पोषण का मुख्य जरिया उनके पति की किराना दुकान है। सुशीला घर के कामकाज के साथ-साथ दुकान के संचालन में भी अपने पति का पूरा हाथ बंटाती हैं। योजना के तहत हर माह उनके बैंक खाते में सीधे अंतरित होने वाली एक हजार रुपए की सम्मान राशि उनके लिए व्यवसाय को गति देने का मजबूत जरिया बन गई है।
सुशीला बताती हैं कि वे शासन से मिलने वाली इस राशि को केवल घरेलू खर्चों तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि इसे दुकान की पूंजी में जोड़ती हैं। इस राशि से वे दुकान में जरूरी छोटी-बड़ी सामग्रियों का स्टॉक नियमित रूप से बनाए रखती हैं, ताकि ग्राहकों को जरूरत की हर चीज एक ही जगह उपलब्ध हो सके। इससे उनकी दुकान की बिक्री में सुधार हुआ है और आमदनी भी बढ़ी है।
योजना के जमीनी प्रभाव पर बात करते हुए सुशीला कहती हैं कि महतारी वंदन योजना से क्षेत्र के आम नागरिकों और खासकर महिलाओं की क्रय शक्ति में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। महिलाओं के हाथ में पैसा आने से स्थानीय बाजारों और किराना दुकानों में ग्राहकी बढ़ी है, जिसका सीधा सकारात्मक असर छोटे व्यापारियों की आजीविका पर दिखाई दे रहा है।

योजना से जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से बेहद खुश सुशीला बघेल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया है। उनका कहना है कि सरकार की इस पहल ने महिलाओं को स्वाभिमान के साथ परिवार की आर्थिक रीढ़ बनने का अवसर दिया है।

महतारी वंदन योजना से प्रेमिन के सपनों को मिले पंख, सिलाई मशीन बनी आत्मनिर्भरता का आधार

महतारी वंदन योजना से प्रेमिन के सपनों को मिले पंख, सिलाई मशीन बनी आत्मनिर्भरता का आधार

 00 हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता से शुरू किया सिलाई का काम, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में बनीं सहभागी

00 महतारी वंदन योजना की 32 किस्तों से मिले 32 हजार रुपये ने बढ़ाया आत्मविश्वास, आर्थिक स्वावलंबन की ओर बढ़ाए कदम

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना से मिलने वाली प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता महिलाओं को न केवल घरेलू जरूरतें पूरी करने में सहयोग दे रही है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार शुरू करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बचत करने का अवसर भी प्रदान कर रही है। बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड अंतर्गत ग्राम उफरा निवासी श्रीमती प्रेमिन वर्मा इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने योजना से प्राप्त राशि का सदुपयोग कर सिलाई मशीन खरीदी और स्वरोजगार की शुरुआत की। साथ ही अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए नियमित बचत भी कर रही हैं।

 प्रेमिन वर्मा बताती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सीमित आमदनी में घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना ही बड़ी चुनौती थी। एक मां होने के नाते उन्हें सबसे अधिक चिंता अपनी बेटी की पढ़ाई और उसके भविष्य की रहती थी। वह चाहती थीं कि उनकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और आर्थिक परेशानियां उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। लेकिन परिवार की सीमित आय के कारण भविष्य के लिए बचत कर पाना मुश्किल था।

ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के अंतर्गत उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। प्रेमिन को अब तक 32 किस्तों के माध्यम से कुल 32 हजार रुपये प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने इस राशि को केवल घरेलू खर्चों तक सीमित रखने के बजाय परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बेटी के भविष्य को सुरक्षित बनाने में उपयोग करने का निर्णय लिया।
’सिलाई मशीन ने खोले स्वरोजगार के नए रास्ते’
प्रेमिन वर्मा ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि की बचत कर एक सिलाई मशीन खरीदी। उनके लिए यह सिलाई मशीन केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के सपने को साकार करने का माध्यम है। अब वह घर पर सिलाई का कार्य कर आमदनी अर्जित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दे रही हैं। प्रेमिन बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी आर्थिक जरूरतों के लिए भी उन्हें परेशान होना पड़ता था, लेकिन अब स्वयं की मेहनत से आय अर्जित करने पर आत्मविश्वास बढ़ा है। सिलाई के काम ने उन्हें अपनी क्षमता पहचानने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी निभाने का अवसर दिया है।
’बेटी के भविष्य के लिए हर महीने 500 रुपये की बचत’
स्वरोजगार के साथ प्रेमिन ने अपनी बेटी के भविष्य को भी प्राथमिकता दी है। वह महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि में से प्रतिमाह 500 रुपये बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं। उनकी इच्छा है कि भविष्य में बेटी की उच्च शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त बचत हो सके। प्रेमिन का मानना है कि छोटी-छोटी नियमित बचत भविष्य में बड़ा सहारा बन सकती है। आज वह अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं। उनकी यह पहल दर्शाती है कि आर्थिक सहायता का योजनाबद्ध उपयोग महिलाओं को वर्तमान की जरूरतों के साथ भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए भी सक्षम बना सकता है।
’आर्थिक सहायता ने दिया आत्मविश्वास और सम्मान से जीने का संबल’

 

 
 
 
 

प्रेमिन वर्मा कहती हैं कि पहले आर्थिक परेशानियों और बेटी के भविष्य को लेकर मन में चिंता बनी रहती थी, लेकिन महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अब वह न केवल नियमित बचत कर पा रही हैं, बल्कि स्वयं के रोजगार से परिवार की आमदनी बढ़ाने में भी योगदान दे रही हैं।
उनका कहना है कि मेरे लिए सिलाई मशीन सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद है। महतारी वंदन योजना से मिली सहायता ने मुझे बचत करने और अपना काम शुरू करने का हौसला दिया है। अब मैं अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए भी पैसे जमा कर पा रही हूं। प्रेमिन वर्मा की सफलता की कहानी बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता, सही योजना और दृढ़ संकल्प से महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकती हैं। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को स्वरोजगार और बेटी की शिक्षा के लिए बचत में उपयोग कर उन्होंने आर्थिक स्वावलंबन की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है।

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से एशियन गेम्स के कांस्य पदक विजेता एथलीट अनिमेष कुजूर ने की सौजन्य मुलाकात

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से एशियन गेम्स के कांस्य पदक विजेता एथलीट अनिमेष कुजूर ने की सौजन्य मुलाकात

 मुख्यमंत्री ने अनिमेष कुजूर को ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दी बधाई, कहा - आपकी सफलता पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय

जशपुर के ग्राम घुईटांगर के अनिमेष ने एशियन गेम्स की 4×100 मीटर मिक्स्ड रिले में जीता कांस्य पदक

भारतीय टीम ने 41.06 सेकंड का समय दर्ज कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड में भी किया सुधार

प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं अनिमेष, उनकी सफलता से छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को मिलेगी नई ऊर्जा : मुख्यमंत्री  साय

खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एशियन गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाने वाले एथलीट अनिमेष कुजूर ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्रीसाय ने कुजूर को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल खेल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर की माटी के बेटे अनिमेष कुजूर ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। भारतीय टीम द्वारा राष्ट्रीय रिकॉर्ड में सुधार करना इस उपलब्धि को और विशेष बनाता है।

मुख्यमंत्री ने कुजूर से एशियन गेम्स में उनके प्रदर्शन, प्रशिक्षण और खेल यात्रा के संबंध में आत्मीय चर्चा की। उन्होंने कहा कि अनिमेष की उपलब्धि प्रदेश के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना यह साबित करता है कि प्रतिभा को उचित अवसर, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिले तो हमारे युवा दुनिया के किसी भी मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। बस्तर से सरगुजा और जशपुर तक हमारे जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि ऐसी प्रतिभाओं की पहचान शुरुआती स्तर पर हो और उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर खेल अधोसंरचना तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेलों के विकास को युवाओं के सर्वांगीण विकास से जोड़कर आगे बढ़ रही है। प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक से अधिक पदक जीतें तथा प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष जैसे खिलाड़ियों की सफलता प्रदेश में विकसित हो रही नई खेल संस्कृति को और मजबूत करती है। उनकी उपलब्धियां नई पीढ़ी में यह विश्वास जगाती हैं कि अनुशासन, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

अनिमेष कुजूर ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री श्री साय ने उन्हें भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इसी समर्पण और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते रहें और आने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में देश के लिए और पदक जीतें।

जशपुर के छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

उल्लेखनीय है कि श्री अनिमेष कुजूर मूलतः जशपुर जिले के कुनकुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम घुईटांगर के निवासी हैं। उन्होंने जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 की 4×100 मीटर मिक्स्ड रिले स्पर्धा में भारतीय टीम की ओर से शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अर्जित किया। भारतीय टीम ने इस स्पर्धा में 41.06 सेकंड का समय दर्ज करते हुए राष्ट्रीय रिकॉर्ड में भी सुधार किया।

अनिमेष की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिए विशेष गौरव का अवसर है। जशपुर के ग्रामीण अंचल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने तक की उनकी यात्रा प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है।

इस अवसर पर अनिमेष कुजूर के पिता  अमृत कुजूर, माता  रीना कुजूर सहित एथलेटिक्स एसोसिएशन के पदाधिकारी तथा खेल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़ में श्रम आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही सरकार : साय

छत्तीसगढ़ में श्रम आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही सरकार : साय

 00 मुख्यमंत्री साय ने नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की नई औद्योगिक इकाई का किया भूमिपूजन

00 150 करोड़ से अधिक के निवेश से स्थापित होगी इकाई, साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार

00 मुख्यमंत्री ने नवचयनित युवाओं को प्रदान किए नियुक्ति पत्र, उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं
00 नई औद्योगिक नीति से निवेश को मिली गति, प्रदेश को मिले साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव

00 प्रदेश में तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित, 50 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार - उद्योग मंत्री देवांगन
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास का लाभ प्रदेश के युवाओं तक रोजगार और आर्थिक अवसरों के रूप में पहुंचे, यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से नई औद्योगिक विकास नीति में ऐसे श्रम आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिनमें अपेक्षाकृत कम पूंजी निवेश के साथ बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करने की क्षमता है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि निवेश को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और प्रदेश की समृद्धि का माध्यम बनाना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की प्रस्तावित नई औद्योगिक इकाई के भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की नई इकाई छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस परियोजना में 150 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश प्रस्तावित है और इससे साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इस इकाई में विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के लिए उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन है। हमारी सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ में ऐसे उद्योग अधिक से अधिक स्थापित हों, जो प्रदेश के युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएं। जब युवाओं को अपने ही प्रदेश में कौशल और क्षमता के अनुरूप रोजगार मिलेगा तो उनके परिवार आर्थिक रूप से सशक्त होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
साय ने कार्यक्रम के दौरान नवचयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि युवाओं के हाथ में नियुक्ति पत्र देना किसी भी औद्योगिक निवेश की सबसे सार्थक उपलब्धि है। एक रोजगार केवल एक व्यक्ति को आत्मनिर्भर नहीं बनाता, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में आर्थिक सुरक्षा और नई उम्मीद लेकर आता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करने की पहल के लिए यश ग्रुप की सराहना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, कौशल विकास और आधुनिक अधोसंरचना के विस्तार पर एक साथ काम किया जा रहा है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा, कुशल मानव संसाधन और बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में सरकार निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नई औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 में रोजगार सृजन करने वाले उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया है। नीति तैयार करते समय इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि प्रदेश में आने वाला निवेश स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर पैदा करे। टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और अन्य श्रम आधारित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ ही उद्योग लगाने और संचालित करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं और जटिलताओं से मुक्ति दिलाने के लिए लगातार सुधार किए गए हैं। जन विश्वास से जुड़े सुधारों के अंतर्गत 279 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की विशेष पहल की गई है। विभिन्न अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाया जा रहा है, ताकि निवेश प्रस्ताव तेजी से धरातल पर उतरें और उत्पादन तथा रोजगार सृजन शीघ्र प्रारंभ हो सके।
साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक विकास नीति को देश-विदेश के निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। प्रदेश को साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। अब सरकार का विशेष जोर इन निवेश प्रस्तावों को तेजी से धरातल पर उतारने पर है। निवेशकों को परियोजनाओं की स्थापना से लेकर संचालन तक हर स्तर पर आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि औद्योगिकीकरण का विस्तार केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग अंचलों तक पहुंचे। स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के विकास से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यश ग्रुप की यह नई इकाई नवा रायपुर और आसपास के क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। उन्होंने कंपनी प्रबंधन को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि परियोजना समयबद्ध रूप से पूर्ण हो और शीघ्र उत्पादन प्रारंभ करे, इसके लिए संबंधित विभाग आवश्यक समन्वय और सहयोग सुनिश्चित करेंगे।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति की सोच में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब निवेश का मूल्यांकन केवल निवेश की राशि से नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसरों के आधार पर भी किया जा रहा है। प्रदेश में लंबे समय तक अधिक पूंजी निवेश और अपेक्षाकृत कम रोजगार देने वाले उद्योगों की प्रधानता रही है। इस स्थिति को बदलते हुए नई औद्योगिक नीति में श्रम आधारित और अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि यश फैन्स एंड एप्लायंसेस की प्रस्तावित इकाई इसी सोच का उदाहरण है। लगभग 150 करोड़ रुपए के निवेश से साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होना प्रदेश के औद्योगिक विकास की नई दिशा को दर्शाता है। हमारा प्रयास है कि औद्योगिक निवेश का सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के युवाओं तक पहुंचे।

चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर वित्त एवं उद्योग विभाग ने समन्वित रूप से औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 तैयार की है। इसमें रोजगार देने वाले उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने के साथ केंद्र सरकार की रोजगार प्रोत्साहन योजनाओं से भी समन्वय किया गया है। उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए सब्सिडी के बजटीय प्रावधान को लगभग 200 करोड़ रुपए से बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपए से अधिक किया गया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का पहला बजट ज्ञान अर्थात गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के कल्याण को समर्पित था, जबकि दूसरे बजट में गति के माध्यम से सुशासन, अधोसंरचना, तकनीक और औद्योगिक विकास को नई गति देने का लक्ष्य रखा गया। आर्थिक विकास से प्राप्त संसाधनों का उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं को और सशक्त बनाने में किया जाएगा। औद्योगिक और आर्थिक प्रगति के माध्यम से जनकल्याण को स्थायी आधार देना सरकार का लक्ष्य है।

प्रदेश में तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित, 50 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार - देवांगन
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में छोटे-बड़े मिलाकर तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके माध्यम से 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। आगामी औद्योगिक परियोजनाओं से डेढ़ लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। देवांगन ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण और सरकार की निवेश हितैषी नीतियों के कारण निवेशकों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए उद्योग, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में निरंतर काम किया जा रहा है। उन्होंने यश ग्रुप की नई औद्योगिक इकाई को प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कंपनी प्रबंधन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि इकाई जल्द उत्पादन प्रारंभ करे और प्रदेश के युवाओं को रोजगार का लाभ मिल सके।

आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही सीएम हेल्पलाइन 1076 : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही सीएम हेल्पलाइन 1076 : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 सीएम हेल्पलाइन पर अब तक 2.31 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज, 2.05 लाख से अधिक का हुआ निराकरण

लगभग 89 प्रतिशत शिकायतों का समाधान, मुख्यमंत्री ने शुरुआती परिणामों को बताया उत्साहजनक

मुख्यमंत्री  साय ने शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद कर लिया फीडबैक, समस्याओं के समाधान पर नागरिकों ने जताई संतुष्टि

किसी को मिली आवास की लंबित किस्त, किसी की नौ माह से रुकी पेंशन हुई शुरू, ट्रांसफॉर्मर बदलने से 80 से अधिक परिवारों को मिली राहत

मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता और तत्परता से शिकायतों का निराकरण करने वाले अधिकारियों की सराहना की

शिकायतों के आंकड़ों का विश्लेषण कर नागरिक सेवाओं में सुधार के दिए निर्देश

सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से शासन और जनता के बीच मजबूत हो रहा विश्वास : मुख्यमंत्री  साय

ग्राम पंचायतों, उचित मूल्य दुकानों और कॉमन सर्विस सेंटरों तक सीएम हेल्पलाइन 1076 के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश

रायपुर-- आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध, संवेदनशील और प्रभावी समाधान सुशासन की पहली कसौटी है। इसी उद्देश्य से शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 कम समय में ही प्रदेशवासियों के लिए भरोसे का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। राशन, पेंशन, बिजली, आवास, पेयजल और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अब लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। नागरिक घर बैठे 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं और उनके निराकरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।
मुख्यमंत्री  साय ने आज नवा रायपुर स्थित सीबीडी बिल्डिंग में संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 के कार्यालय पहुंचकर इसके कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात कही। 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों, उनके निराकरण, शिकायतकर्ताओं से लिए जा रहे फीडबैक तथा विभागवार और जिलेवार प्रदर्शन की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों से  जिलों में शिकायतों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान विभिन्न जिलों के शिकायतकर्ताओं से स्वयं बातचीत कर जाना कि सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बाद उनकी समस्या का समाधान हुआ या नहीं। नागरिकों ने मुख्यमंत्री से सीधे संवाद में अपने अनुभव साझा किए और शिकायतों के निराकरण पर संतुष्टि व्यक्त की।

2.31 लाख शिकायतें दर्ज, 88.85 प्रतिशत का हो चुका निराकरण

समीक्षा बैठक में बताया गया कि 9 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक सीएम हेल्पलाइन 1076 पर कुल 2 लाख 31 हजार 850 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 2 लाख 5 हजार 996 शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। शेष 25 हजार 854 शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। इस प्रकार अब तक प्राप्त कुल शिकायतों में से 88.85 प्रतिशत का निराकरण किया जा चुका है। हेल्पलाइन पर प्रतिदिन औसतन 1500 से 2000 शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने हेल्पलाइन के शुरुआती परिणामों को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों का निराकरण अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। पिछली समीक्षा में दिए गए निर्देशों पर भी अच्छा कार्य हुआ है। इस व्यवस्था को निरंतर बेहतर बनाते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि शिकायतों का निराकरण केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिक को वास्तविक रूप से राहत मिले और वह समाधान से संतुष्ट हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सबसे महत्वपूर्ण है। शिकायत बंद करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित नागरिक की समस्या वास्तव में दूर हुई है। नागरिकों से मिलने वाला फीडबैक ही इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता का आधार होना चाहिए।

एक शिकायत से 80 से अधिक परिवारों को मिली राहत, बदला गया खराब ट्रांसफॉर्मर

मुख्यमंत्री साय ने समीक्षा के दौरान गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के शिकायतकर्ता श्री दमन साहू से सीधे बातचीत की।  साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके गांव का ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। इससे गांव के लगभग 80 से 85 परिवार प्रभावित थे। स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत दर्ज होने के लगभग एक सप्ताह के भीतर नया ट्रांसफॉर्मर लगाकर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई। श्री साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि अब गांव में बिजली व्यवस्था सामान्य है और ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने संबंधित अधिकारियों की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सीधे आम नागरिक के दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं। ऐसी शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक शिकायत का संवेदनशीलता से समाधान कई परिवारों के जीवन में राहत ला सकता है।

सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के दस दिनों के भीतर मिली पीएम आवास की लंबित किस्त

जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड निवासी श्री वीरेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उनके आवास निर्माण की दूसरी किस्त मिलने में विलंब हो रहा था। राशि नहीं मिलने से आवास निर्माण का काम भी प्रभावित हो रहा था।

उन्होंने अपनी समस्या सीएम हेल्पलाइन 1076 पर दर्ज कराई। शिकायत के लगभग दस दिनों के भीतर उनके बैंक खाते में आवास की दूसरी किस्त के रूप में 55 हजार रुपए की राशि प्राप्त हो गई। श्री यादव ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि राशि मिलने से अब वे अपने आवास का निर्माण आगे बढ़ा पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के पक्के घर के सपने को साकार करने वाली महत्वपूर्ण योजना है। पात्र हितग्राहियों को योजना की किस्त समय पर मिलनी चाहिए, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे प्रकरणों में विशेष संवेदनशीलता बरतने को कहा।

नौ महीने से रुकी थी पेंशन, 1076 पर शिकायत के बाद मिला लाभ

मुंगेली जिले के ग्राम करही निवासी श्री तोरण साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी माताजी को लगभग नौ महीने से पेंशन की राशि नहीं मिल रही थी। पेंशन नहीं मिलने के कारण परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभाग द्वारा प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की गई। इसके बाद उनकी माताजी की पेंशन पुनः प्रारंभ हुई और लंबित राशि का भी भुगतान किया गया। श्री साहू ने समस्या का समाधान होने पर संतुष्टि जताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन वृद्धजनों, विधवा महिलाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संबल है। पात्र हितग्राहियों को इसके लिए परेशान न होना पड़े, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

आम नागरिक के लिए छोटी समस्या भी हो सकती है बड़ी परेशानी : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि शासन-प्रशासन की दृष्टि में कोई प्रकरण सामान्य हो सकता है, लेकिन संबंधित नागरिक के लिए वही समस्या बहुत महत्वपूर्ण होती है। राशन कार्ड में सुधार, पेंशन का भुगतान, बिजली आपूर्ति, पेयजल, आवास की किस्त या राजस्व संबंधी छोटे से कार्य में देरी भी किसी परिवार को लंबे समय तक परेशान कर सकती है।

उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य यही है कि नागरिक की आवाज सीधे शासन तक पहुंचे और संबंधित विभाग उसकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय-सीमा में समाधान करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से मुलाकात के दौरान भी सीएम हेल्पलाइन को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। अनेक नागरिक बताते हैं कि 1076 पर शिकायत करने के बाद उनकी लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था नहीं, बल्कि शासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने का भी माध्यम है।

अच्छा काम करने वाले अधिकारियों की सराहना, लापरवाही पर जवाबदेही हो सुनिश्चित

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन-प्रशासन में बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ काम कर रहे हैं। उनके प्रयासों के कारण योजनाएं धरातल तक पहुंच रही हैं और लोगों की समस्याओं का समाधान हो रहा है। ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में लापरवाही या नागरिकों की समस्याओं के प्रति गंभीरता की कमी पूरे प्रशासन की छवि को प्रभावित करती है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को यह समझना होगा कि जनता की समस्या का समाधान करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहन मिले और शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक देरी अथवा लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।

शिकायतों के आंकड़े बनें नागरिक सेवाओं में सुधार का आधार

मुख्यमंत्री श्री साय ने समीक्षा के दौरान हेल्पलाइन पर कॉल रिसीव होने की स्थिति, शिकायतों के पंजीयन, विभिन्न स्तरों पर उनके निराकरण, शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लेने की व्यवस्था तथा विभागवार शिकायतों के विश्लेषण की जानकारी ली।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों को केवल व्यक्तिगत प्रकरणों के रूप में न देखा जाए। शिकायतों के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण कर यह पता लगाया जाए कि किस विभाग, योजना, सेवा या क्षेत्र से संबंधित शिकायतें बार-बार आ रही हैं। यदि एक ही प्रकृति की शिकायतें बड़ी संख्या में प्राप्त हो रही हैं, तो उनके मूल कारण की पहचान कर व्यवस्था में आवश्यक सुधार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह सीएम हेल्पलाइन नागरिकों की व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के साथ शासन की नीतियों और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण फीडबैक सिस्टम के रूप में भी काम करेगी।

बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों तक पहुंचे 1076 की सुविधा

मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से बस्तर संभाग के जिलों से प्राप्त शिकायतों की प्रकृति और उनके निराकरण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के नागरिकों के लिए सीएम हेल्पलाइन विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी समस्या लेकर जिला अथवा राजधानी स्तर के कार्यालयों तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन 1076 की जानकारी अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जाए। ग्राम पंचायतों, उचित मूल्य दुकानों और कॉमन सर्विस सेंटरों में वॉल पेंटिंग सहित विभिन्न माध्यमों से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। स्थानीय स्तर पर भी नागरिकों को बताया जाए कि वे किस प्रकार हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

तकनीकी और प्रक्रियागत कमियों को दूर कर और मजबूत होगी व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन अभी अपने प्रारंभिक दौर में है। इसलिए शुरुआती अनुभवों से सीखते हुए तकनीकी और प्रक्रियागत कमियों को लगातार दूर किया जाए। कॉल रिस्पॉन्स, शिकायत पंजीयन, संबंधित विभाग को शिकायत भेजने, निर्धारित समय-सीमा में निराकरण और शिकायतकर्ता से फीडबैक तक पूरी प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन ऐसी होनी चाहिए, जिसमें नागरिक को शिकायत दर्ज कराने से लेकर उसके समाधान तक सहज अनुभव मिले। तकनीक का उद्देश्य प्रक्रियाओं को जटिल बनाना नहीं, बल्कि शासन को नागरिकों के और करीब लाना है।

जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना सरकार का दायित्व है और सीएम हेल्पलाइन 1076 इस दायित्व को प्रभावी ढंग से निभाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के मन में यह विश्वास हो कि उसकी बात शासन तक पहुंचेगी, उसे सुना जाएगा और उसकी जायज समस्या का समय पर समाधान होगा।

उन्होंने कहा कि शासन और जनता के बीच विश्वास जितना मजबूत होगा, सुशासन की व्यवस्था उतनी ही प्रभावी होगी। सीएम हेल्पलाइन इसी विश्वास की कड़ी को मजबूत कर रही है। जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है और इसे बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, विभिन्न विभागों के सचिव, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित  सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री निवास में गरबा महोत्सव की धूम, भक्ति और उल्लास के रंग में रंगा आयोजन

मुख्यमंत्री निवास में गरबा महोत्सव की धूम, भक्ति और उल्लास के रंग में रंगा आयोजन

 नवरात्रि शक्ति की आराधना और नारी सम्मान का महापर्व : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा की आराधना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

हमारी संस्कृति में नारी शक्ति का सर्वोच्च स्थान, माताओं-बहनों का सम्मान और सशक्तीकरण सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

महतारी वंदन योजना से लगभग 68 लाख महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल, प्रदेश की 14 लाख बहनें बनीं लखपति दीदी

छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और देवी शक्तिपीठों के संरक्षण एवं विकास के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में गुजराती समाज की महत्वपूर्ण भागीदारी : मुख्यमंत्री  साय

रायपुर- मुख्यमंत्री निवास आज नवरात्रि की भक्ति, गरबा की लय और उल्लास के रंगों से सराबोर नजर आया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आयोजित गरबा महोत्सव में बड़ी संख्या में माताओं-बहनों, बेटियों और गुजराती समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने मां दुर्गा की आराधना के साथ गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। भक्ति संगीत और गरबा की ताल के बीच पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंग गया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मां दुर्गा की आराधना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। उन्होंने उपस्थित माताओं-बहनों, बेटियों एवं सभी श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवरात्रि शक्ति की आराधना, श्रद्धा और भक्ति के साथ नारी सम्मान का महापर्व है। हमारी सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। यह पर्व हमें मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है।

उन्होंने कहा कि गरबा मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति होने के साथ हमारी जीवंत सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। गुजरात की धरती से निकली गरबा की परंपरा आज पूरे देश में उत्साह के साथ मनाई जाती है। ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक विविधता में एकता के भाव को और मजबूत करते हैं।

हमारे पर्व समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक शक्ति

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारत के पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं। ये परिवार और समाज को जोड़ने, आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि आज गरबा देश-दुनिया में भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान बन चुका है। छत्तीसगढ़ में भी गरबा के प्रति उत्साह लगातार बढ़ा है। बड़ी संख्या में माताओं-बहनों और बेटियों की सहभागिता इस उत्सव को और विशेष बनाती है।

महिला सशक्तीकरण हमारी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नारी शक्ति का सम्मान हमारी संस्कृति का मूल भाव है और महिलाओं को आत्मनिर्भर तथा सशक्त बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक संबल मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 14 लाख बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह हमारी मातृशक्ति के परिश्रम, सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रमाण है। हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी ही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं।

माता कौशल्या से मां दंतेश्वरी तक, छत्तीसगढ़ की धरती शक्ति आराधना की पावन भूमि

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है और यहां आदिशक्ति की आराधना की समृद्ध परंपरा सदियों से चली आ रही है। बस्तर की आराध्य मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया और चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी सहित अनेक देवी धाम प्रदेश की आस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख केंद्र हैं।

उन्होंने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर दंतेवाड़ा से डोंगरगढ़ और रतनपुर से चंद्रपुर तक माता के दरबार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। पूरा छत्तीसगढ़ शक्ति की आराधना में लीन दिखाई देता है। ये शक्तिपीठ केवल हमारी आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पहचान के भी महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश "विकास भी, विरासत भी" की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। अपनी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं पर गर्व करते हुए आधुनिक भारत का निर्माण हो रहा है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रमुख देवी धामों के विकास और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

विकसित छत्तीसगढ़ में गुजराती समाज की महत्वपूर्ण भूमिका

मुख्यमंत्री  साय ने गुजराती समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि गुजराती समाज ने अपनी उद्यमशीलता, परिश्रम, सेवा भावना और सामाजिक एकता से देश के विकास में विशिष्ट पहचान बनाई है। छत्तीसगढ़ में भी गुजराती समाज व्यापार, उद्योग, शिक्षा, सेवा और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान सदैव सभी समाजों और संस्कृतियों को आत्मीयता से अपनाने की रही है। गुजराती समाज ने भी छत्तीसगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाकर यहां की सामाजिक-सांस्कृतिक यात्रा में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। विकसित भारत के निर्माण के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में समाज की यह सहभागिता महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नवरात्रि हमें शक्ति, सकारात्मकता और सामूहिकता का संदेश देती है। माता रानी के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए, यही कामना है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री  रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा, खाद्य मंत्री  दयालदास बघेल, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विभिन्न आयोग-मंडलों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, सर्व गुजराती समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष  प्रीतेश गांधी, पूर्व विधायक एवं एन.आर. गुजराती एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष  देवजी पटेल, गुजराती स्कूल के अध्यक्ष जयंती पटेल,  मितुल कोठारी,  नितिन डोलकिया,  महेंद्र कोडियार,  बाबू भाई पटेल,  अशोक पटेल,  मुकेश शाह, गौरंग काचा,  कीर्ति व्यास,  राजेंद्र फौजदार सहित गुजराती समाज के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

नियद-नेल्ला-नार 2.0 के तहत 31 व्यक्तिगत और 14 सामुदायिक योजनाओं का मिलेगा लाभ

नियद-नेल्ला-नार 2.0 के तहत 31 व्यक्तिगत और 14 सामुदायिक योजनाओं का मिलेगा लाभ

 ०मुख्य सचिव विकासशील ने की समीक्षा, अधिकारियों को समय-सीमा में योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश

रायपुर । मुख्य सचिव विकासशील ने मंत्रालय महानदी भवन में नियद-नेल्ला-नार योजना 2.0 और बस्तर मुन्ने 2.0 के कार्यों की समीक्षा की। बैठक में पूर्व नक्सल प्रभावित और दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के ग्रामीणों तक 31 व्यक्तिगत हितग्राहीमूलक और 14 सामुदायिक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए चल रहे कार्यों की जानकारी ली गई।नियद-नेल्ला-नार 2.0 के तहत बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, बस्तर, कोंडागांव, गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई सहित संबंधित क्षेत्रों में योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है।

व्यक्तिगत योजनाओं में मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, जनधन योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, वनाधिकार पट्टा, श्रमिक कार्ड, पेंशन योजनाएं, उज्ज्वला योजना और विभिन्न प्रमाण पत्रों सहित कुल 31 योजनाएं शामिल हैं। इनके माध्यम से पात्र परिवारों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य है।वहीं, 14 सामुदायिक योजनाओं के अंतर्गत पक्की सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, मोबाइल टावर और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ निर्धारित समय-सीमा में पहुंचाया जाए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मिशन मोड में काम करने पर जोर दिया।बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, विभिन्न विभागों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। संबंधित जिलों के कलेक्टर एवं जिला स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर को पहुंचेंगी बस्तर, मुरिया दरबार में होंगी शामिल: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर को पहुंचेंगी बस्तर, मुरिया दरबार में होंगी शामिल: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ प्रवास प्रस्तावित है। इस दौरान 23 अक्टूबर को वे जगदलपुर पहुंचकर मुरिया दरबार में शामिल होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति को बस्तर आने का आमंत्रण दिया गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। उनके बस्तर आगमन को प्रदेश के लिए गौरव और प्रसन्नता का अवसर बताते हुए साय ने कहा कि इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को भी महत्व मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों और दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित करने के लिए दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिविर को संबोधित किया। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित लोगों को जरूरी सहायता मिले और वे सम्मान व आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। वहीं, छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मुकाबले को लेकर मुख्यमंत्री ने खुशी जताई। भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमों के बीच होने वाले मैच में महिला दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रहेगा, जिससे माताओं, बहनों और बेटियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।

छत्तीसगढ़ में 150 करोड़ से अधिक का औद्योगिक निवेश, 3,500 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

छत्तीसगढ़ में 150 करोड़ से अधिक का औद्योगिक निवेश, 3,500 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की नई औद्योगिक इकाई का भूमिपूजन किया। इस परियोजना में 150 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है, जिससे साढ़े तीन हजार से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवचयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि इसके माध्यम से स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। नई इकाई में विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के लिए उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 के तहत टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा सहित श्रम आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और उद्योगों की स्थापना में आने वाली बाधाओं को दूर करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। सरकार को अब तक साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि रोजगार देने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए सब्सिडी का बजटीय प्रावधान लगभग 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक किया गया है। वहीं, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के अनुसार, प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों में तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनसे 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। आगामी औद्योगिक परियोजनाओं से डेढ़ लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।

वनांचल में उम्मीदों का जल

वनांचल में उम्मीदों का जल

 रायपुर - छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक मूलभूत सुविधाएं पहुँचाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा लगातार सशक्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में नारायणपुर जिले के दूरस्थ ग्राम बागझर में नलकूप खनन का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। इस दूरदर्शी पहल से गाँव में पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा और ग्रामीणों को उनके अपने गाँव में ही स्वच्छ व पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

​कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में उम्मीद की नई किरण

​नारायणपुर के वनांचलों की भौगोलिक परिस्थितियाँ अक्सर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में बड़ी चुनौती बनती रही हैं। भोजन पकाने, पीने तथा अन्य घरेलू कार्यों के लिए नियमित जल आपूर्ति ग्रामीणों की प्राथमिक आवश्यकता है। इन व्यावहारिक कठिनाइयों को प्राथमिकता पर लेते हुए बागझर में नलकूप खनन कराया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर ही एक मजबूत जलस्रोत तैयार हो गया है।

​महिलाओं व बुजुर्गों के जीवन में आएगा सुलभ बदलाव

 ​गाँव में ही जलस्रोत विकसित होने का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को मिलेगा। अब पानी लेने के लिए दूर-दराज़ के क्षेत्रों में भटकना नहीं पड़ेगा, जिससे ग्रामीणों के श्रम और समय दोनों की भारी बचत होगी। समय की बचत होने से ग्रामीण अन्य आजीविका और पारिवारिक कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

​स्वास्थ्य और विकास को मिलेगी नई गति

 ​स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल सीधा ग्रामीणों के बेहतर स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ा हुआ है। बागझर में नलकूप खनन का कार्य पूरा होना केवल एक जलस्रोत का निर्माण नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। नलकूप के सुचारू संचालन और जल की गुणवत्ता सुनिश्चित होने से गाँव में जल जनित बीमारियों का खतरा कम होगा और ग्रामीणों का जीवन पहले से अधिक सुविधाजनक एवं खुशहाल बनेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात, समडमा में 2.91 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा विद्युत सब स्टेशन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात, समडमा में 2.91 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा विद्युत सब स्टेशन

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल से नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात

रायपुर :- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा आम नागरिकों को बेहतर विद्युत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री  साय के गृह जिले जशपुर के नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात मिली है। जिले के फरसाबहार तहसील अंतर्गत ग्राम समडमा में 2 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत से 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। इस सब स्टेशन के शुरू होने से क्षेत्र के 16 गांवों के बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति का लाभ मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही लो वोल्टेज की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

नागलोक क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से लो वोल्टेज और बिजली आपूर्ति संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे। पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलने के कारण घरेलू विद्युत उपकरणों के संचालन, कृषि कार्यों और अन्य दैनिक गतिविधियों में कठिनाइयां होती थीं। क्षेत्र की इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर समडमा में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण कराया जा रहा है। इसके पूर्ण होने से स्थानीय विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी तथा बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार होगा।

समडमा सहित 16 गांवों के हजारों ग्रामीणों को मिलेगा बेहतर बिजली व्यवस्था का लाभ

समडमा में निर्माणाधीन 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन से समडमा, सांको, साहिलता, बांसाझाल, छरला, मांझापारा, कोरचिकानी, लावाकेरा, जूनाडीह, जगदमपुर, रेंगारमुण्डा, जाडामल, बेलडीपा, चालडीह, जामडांड और रंगीयाडीपा सहित आसपास के क्षेत्रों के विद्युत उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।

विद्युत सब स्टेशन के शुरू होने से इन गांवों में बिजली वितरण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी। इससे उपभोक्ताओं को पर्याप्त वोल्टेज के साथ बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की गुणवत्ता में सुधार होने से लोगों के दैनिक जीवन में सहूलियत बढ़ेगी।

कृषि, शिक्षा और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बढ़ावा

समडमा में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण केवल बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे क्षेत्र की कृषि, शिक्षा, छोटे व्यवसाय और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर विद्युत आपूर्ति से किसानों को सिंचाई पंप और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन में सुविधा होगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के संचालन में भी सहूलियत मिलेगी।

इसके साथ ही घरों में विद्युत उपकरणों का उपयोग अधिक सुगम होगा और विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। विद्युत अधोसंरचना के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और स्थानीय विकास को गति देने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय की पहल से दूरस्थ अंचलों में मजबूत हो रही विद्युत अधोसंरचना

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। समडमा में 2.91 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन विद्युत सब स्टेशन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके शुरू होने से नागलोक क्षेत्र में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

लंबे समय से बिजली संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे क्षेत्रवासियों ने विद्युत सब स्टेशन के निर्माण पर प्रसन्नता व्यक्त की है। ग्रामीणों ने इस महत्वपूर्ण सुविधा के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए उम्मीद व्यक्त की है कि सब स्टेशन के शुरू होने से क्षेत्र में लो वोल्टेज की समस्या दूर होगी और बिजली आपूर्ति व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण : अवैध धर्मांतरण पर लगेगी रोक – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण : अवैध धर्मांतरण पर लगेगी रोक – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ में पत्रकारों के सवालों के जवाब में धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण बताया है। रायगढ़ में मीडिया से चर्चा के दौरान इस संबंध में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलने को लेकर यह निर्णय दूरगामी महत्व रखता है  और इससे निश्चित रूप से अवैध धर्मांतरण पर भी रोक लगेगी।

मुख्यमंत्री  साय आज रायगढ़ में कोलता समाज द्वारा आयोजित नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने आमंत्रण के लिए समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी समाजजनों को नुआखाई और शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलता समाज शिक्षित, संगठित और प्रगतिशील समाज है। समाज के लोग शिक्षा, कृषि और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी कोलता समाज की महत्वपूर्ण भागीदारी है।

मुख्यमंत्री  साय ने समाज की गतिविधियों को और सुदृढ़ करने के लिए नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के भवन हेतु 50 लाख रुपए तथा ग्राम कोतरलिया चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपए देने की घोषणा की।

मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के आयोजन पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों से प्रदेश में महिला क्रिकेट को प्रोत्साहन मिलेगा और हमारी बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इन मुकाबलों में पहुंचकर महिला खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया।

आदिवासी समाज का इतिहास गौरवशाली, हमारी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की परंपरा पूरे देश के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

आदिवासी समाज का इतिहास गौरवशाली, हमारी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की परंपरा पूरे देश के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायगढ़- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का गौरवशाली इतिहास है। हमारी जनजातीय संस्कृति में प्रकृति केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि आराध्य है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की जो सीख आदिवासी समाज ने सदियों से अपने जीवन और परंपराओं के माध्यम से दी है, वह आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है। कर्मा पर्व इसी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक है।

मुख्यमंत्री  साय आज रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारसमाल स्थित माध्यमिक शाला के खेल मैदान में उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने भगवान करम देव तथा आराध्य देव भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना की।

कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति की जीवंत छटा उस समय और मनोहारी हो उठी, जब कर्मा दलों के आग्रह पर मुख्यमंत्री  साय स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे। मांदर की थाप और पारंपरिक लोकधुनों के बीच मुख्यमंत्री ने महिला-पुरुषों के साथ कर्मा नृत्य किया। मुख्यमंत्री की आत्मीय और सहज सहभागिता से समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला। समाज के पदाधिकारियों ने गजमाला पहनाकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया।

जनजातीय महापुरुषों का संघर्ष हमारी अमूल्य विरासत

मुख्यमंत्री  साय ने कर्मा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने देश की संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर सहित अनेक जनजातीय महानायकों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनके त्याग, तपस्या और बलिदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय  अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के कल्याण और विकास को विशेष प्राथमिकता देते हुए अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। इससे जनजातीय समाज के विकास के प्रयासों को संस्थागत आधार और नई गति मिली। आज प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सम्मान के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल, आजीविका और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए व्यापक स्तर पर कार्य हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु विराजमान हैं। छत्तीसगढ़ में भी जनजातीय समाज के एक बेटे को मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। यह जनजातीय समाज के बढ़ते सम्मान और भागीदारी का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि नया रायपुर में स्थापित जनजातीय संग्रहालय हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यहां जनजातीय समाज के इतिहास, जीवनशैली, परंपराओं, संस्कृति और वीर महापुरुषों के योगदान को जानने-समझने का अवसर मिलता है। हमारी सरकार जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए समाज को विकास के आधुनिक अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

कर्मा पर्व हमारी जड़ों और प्रकृति से जुड़ाव का उत्सव

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आदिवासी समाज मूल रूप से प्रकृति का उपासक है। प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण हमारी परंपराओं में रचा-बसा है। कर्मा पर्व नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन की भावना को अभिव्यक्त करता है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ते हैं।

उन्होंने समाजजनों से अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए शिक्षा और आधुनिक अवसरों को अपनाकर समाज तेजी से आगे बढ़ सकता है। संस्कृति हमारी पहचान है और शिक्षा हमारे उज्ज्वल भविष्य का आधार है।

शिक्षा से खुलेगा प्रगति का मार्ग, युवा ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करें

मुख्यमंत्री  साय ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। आज हमारे युवाओं के सामने अवसरों की कमी नहीं है। आवश्यकता है कि वे अपना लक्ष्य निर्धारित करें, परिश्रम करें और उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं।

उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। नालंदा परिसर जैसी आधुनिक अध्ययन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक संसाधन मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए भी प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है, जिससे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को सुविधा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि समाज तभी तेजी से आगे बढ़ेगा, जब हमारी नई पीढ़ी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीक, उद्योग, उद्यमिता और अन्य क्षेत्रों में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार खुल रहे नए अवसर

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। शासकीय विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं के साथ रोजगार मेलों और उद्योगों के माध्यम से युवाओं के लिए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का उद्देश्य भी स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करना है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों, रोजगार मेलों और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी रखें तथा इनका अधिकतम लाभ उठाएं। शिक्षा और रोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने वाला प्रत्येक युवा अपने परिवार के साथ पूरे समाज की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।

जनजातीय अंचलों में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही विकास की योजनाएं

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विकास की बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) जैसी योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक आवास, सड़क, पेयजल सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ जनजातीय अंचलों में रहने वाला कोई भी परिवार विकास की मुख्यधारा और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित न रहे। विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

राज्यसभा सांसद  देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनाए रखा है। समाज के वीर महापुरुषों और उनके योगदान को व्यापक पहचान दिलाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज की प्रगति का आधार है और सांस्कृतिक एकता उसकी पहचान को सुदृढ़ करती है।

उरांव समाज विकास समिति के अध्यक्ष  पनत राम भगत ने स्वागत उद्बोधन में कर्मा पर्व की प्राचीन परंपरा, उरांव समाज की भाषा, संस्कृति, लोककला तथा प्रकृति से जुड़े गोत्रों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मांदर की थाप पर जीवंत हुई जनजातीय लोक संस्कृति

कर्मा पूजा महोत्सव में आदिवासी समाज की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की मनोहारी झलक देखने को मिली। मांदर, मृदंग और ढोल की थाप पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों ने सामूहिक कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। लयबद्ध नृत्य के माध्यम से प्रकृति के प्रति प्रेम, सामूहिकता, उल्लास और आराध्य देवों के प्रति आस्था की सुंदर अभिव्यक्ति हुई।

कर्मा पर्व आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सामाजिक एकजुटता और लोक परंपराओं से गहरे जुड़ाव की भावना को अभिव्यक्त करता है।

शाह का बड़ा दावा: अब तक 8,526 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, खुशहाल बस्तर बनाने का संकल्प

शाह का बड़ा दावा: अब तक 8,526 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, खुशहाल बस्तर बनाने का संकल्प

 रायपुर- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि माओवादी हिंसा से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण जीवन देना सरकार का संकल्प है। माओवादियों की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हंसता-खेलता और खुशहाल बनाया जाएगा।

हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।

शाह ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा में आयोजित निश्शुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया।

768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए। शाह ने बताया कि दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय शिविर के पहले चरण में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए गए। इससे पहले जगदलपुर शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे।

छत्तीसगढ़ में पहली बार होगा अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच, मुख्यमंत्री साय ने जताई प्रसन्नता

छत्तीसगढ़ में पहली बार होगा अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच, मुख्यमंत्री साय ने जताई प्रसन्नता

 भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को मिला आमंत्रण

मुख्यमंत्री  साय ने महिला दर्शकों के लिए निःशुल्क प्रवेश का दिया सुझाव, छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ ने जताई सहमति

प्रदेश में महिला क्रिकेट को मिलेगी नई पहचान, बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने की मिलेगी प्रेरणा रू मुख्यमंत्री  साय

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बढ़ रहे आगे: मुख्यमंत्री

रायपुर-छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रदेश में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच का आयोजन होने जा रहा है। भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच आयोजित होने वाले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले को लेकर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज महानदी मंत्रालय भवन में छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की और उन्हें भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने आमंत्रण स्वीकार करते हुए प्रदेश में पहली बार आयोजित होने जा रहे इस अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मुकाबले के लिए क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों को बधाई दी और सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच का आयोजन होना प्रदेश की खेल यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देश और दुनिया की श्रेष्ठ महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को छत्तीसगढ़ की धरती पर खेलते देखना विशेष रूप से हमारी बेटियों और युवा महिला खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी अनुभव होगा। ऐसे आयोजनों से उनमें यह विश्वास और मजबूत होगा कि उचित अवसर, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिलने पर वे भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 मुकाबले को लेकर प्रदेश की महिलाओं, युवाओं और खेलप्रेमियों में विशेष उत्साह रहेगा। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन में महिलाओं की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महिला दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री के इस सुझाव पर छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों ने सहमति व्यक्त की।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और हमारी बेटियां राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ा रही हैं। ऐसे में महिला खिलाड़ियों के मुकाबलों को देखने के लिए अधिक से अधिक महिलाओं और बालिकाओं को स्टेडियम तक लाना स्वयं में प्रेरणा का माध्यम बनेगा। जब हमारी बेटियां अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को मैदान पर आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा के साथ खेलते देखेंगी, तो उनमें भी खेलों को अपने भविष्य और करियर के रूप में अपनाने का उत्साह बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमारा लक्ष्य केवल अच्छे खिलाड़ी तैयार करना ही नहीं, बल्कि प्रदेश में ऐसी मजबूत खेल संस्कृति विकसित करना है, जिसमें बच्चों और युवाओं को खेलों से जुड़ने के लिए परिवार और समाज से भी प्रोत्साहन मिले। बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। राज्य के गांवों, कस्बों, आदिवासी एवं दूरस्थ अंचलों से अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आ रहे हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि इन प्रतिभाओं को बेहतर खेल अधोसंरचना, प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। प्रदेश में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन से खिलाड़ियों को बड़े मुकाबलों और श्रेष्ठ खिलाड़ियों को करीब से देखने तथा उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलता है। इससे प्रदेश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण और मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत और जिम्बाब्वे के बीच होने वाला यह अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मुकाबला छत्तीसगढ़ में महिला क्रिकेट की लोकप्रियता को नई ऊंचाई देगा। इससे प्रदेश की उभरती महिला क्रिकेट प्रतिभाओं को नई प्रेरणा मिलेगी और भविष्य में छत्तीसगढ़ से भी अधिक संख्या में खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए तेजी से अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। बेहतर खेल अधोसंरचना, खिलाड़ियों के लिए बढ़ती सुविधाएं और खेलों के प्रति युवाओं का उत्साह प्रदेश को खेलों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का आधार बन रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय में विभिन्न खेलों की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन छत्तीसगढ़ में हो और प्रदेश देश के प्रमुख खेल केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए।

मुख्यमंत्री  साय ने भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों को आगामी मुकाबले के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि खेल प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ अनुशासन, टीम भावना और आपसी सद्भाव का भी माध्यम हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों और खेलप्रेमियों से इस ऐतिहासिक मुकाबले को उत्सव की तरह मनाने और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के अध्यक्ष  मोहन दास, डायरेक्टरविजय शाह, पूर्व अध्यक्ष मुकुल तिवारी, सचिव  विंटेश अग्रवाल,  जी. एस. मूर्ति,  विनय बजाज सहित संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की

भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार की दीर्घकालिक कार्ययोजना : मुख्यमंत्री

जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक चिकित्सक, दवाइयां और जांच सुविधाएं रहें उपलब्ध

सुरक्षित संस्थागत प्रसव, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पर विशेष जोर

दुर्गम क्षेत्रों में एम्बुलेंस नहीं पहुंच सके तो स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करें वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था

प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार, 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत; नर्सिंग और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी

त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की सघन जांच के निर्देश, मुख्यमंत्री ने कहा - नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं

रायपुर-- स्वास्थ्य सेवाएं सीधे आम नागरिकों के जीवन और परिवार की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय हैं। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को आवश्यकता पड़ने पर समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार, आवश्यक दवाइयां, जांच और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध हों, यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं की गुणवत्ता और अंतिम व्यक्ति तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने पर समान रूप से ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस दौरान संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, संचालनालय चिकित्सा शिक्षा, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन, संचालनालय आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अंतर्गत संचालित योजनाओं, उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना का लगातार विस्तार हुआ है। अनेक अच्छे अस्पताल और चिकित्सा संस्थान विकसित हुए हैं। अब जहां चिकित्सकों, विशेषज्ञों, स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सा उपकरणों अथवा जांच सुविधाओं की कमी है, उन्हें चिन्हित कर प्राथमिकता के साथ दूर किया जाए। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो और उनका अधिकतम लाभ मरीजों तक पहुंचे।

भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बने स्वास्थ्य अधोसंरचना की दीर्घकालिक कार्ययोजना

मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश की बढ़ती आबादी और भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में वर्तमान स्वास्थ्य सुविधाओं, जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जाए। इसी आधार पर स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार और आवश्यक सुविधाओं के विकास की स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में आवश्यकता के अनुरूप बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार करने और नवगठित जिलों में जरूरी चिकित्सा सुविधाओं को प्राथमिकता से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास में केवल भवन निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों, उपकरणों, दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता को भी समग्र रूप से सुनिश्चित किया जाए।

जिला अस्पताल से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक मरीजों को मिलें आवश्यक दवाइयां और जांच सुविधाएं

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। मरीजों को सामान्य जांच और उपचार के लिए अनावश्यक परेशानी या भटकाव का सामना न करना पड़े।

उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के नियमित रखरखाव और प्रभावी उपयोग पर भी विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल में उपलब्ध कोई भी महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण रखरखाव अथवा मरम्मत के अभाव में लंबे समय तक बंद नहीं रहना चाहिए। इसके लिए प्रभावी निगरानी और समयबद्ध मरम्मत व्यवस्था विकसित की जाए।

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वित्तीय प्रगति, मानव संसाधन की उपलब्धता तथा रिक्त पदों पर भर्ती की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि रिक्त पदों पर भर्ती के प्रयास किए जा रहे हैं और सेवा भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया भी प्रचलन में है। मुख्यमंत्री ने भर्ती संबंधी प्रक्रियाओं को गति देने के निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता सेवाओं की गुणवत्ता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र प्रारंभ किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के साथ स्वास्थ्य संस्थानों के गुणवत्ता मानकों, ई-हॉस्पिटल तथा आभा जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की और तकनीक का उपयोग मरीजों की सुविधा तथा सेवाओं की दक्षता बढ़ाने के लिए करने के निर्देश दिए।

हर प्रसव सुरक्षित हो, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री  साय ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में बताते हुए कहा कि गर्भवती माताओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक पोषण एवं चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाए। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें और प्रसूता महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा तथा सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।

उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक प्रसव सुरक्षित हो और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन इस दिशा में और बेहतर परिणाम हासिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत के करीब लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए।

बैठक में संस्थागत प्रसव, पूर्ण टीकाकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) में टीकाकरण की स्थिति, मलेरिया की रोकथाम, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जाए, जिससे बीमारियों की समय पर पहचान हो और मरीजों को प्रारंभिक स्तर पर ही उपचार मिल सके।

दुर्गम अंचलों के लिए विकसित हो वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था

मुख्यमंत्री श्री साय ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 102 महतारी एक्सप्रेस की सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि आपात स्थिति में मरीज तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूरस्थ, वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को केवल भौगोलिक कठिनाइयों के कारण उपचार से वंचित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सड़क अथवा भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एम्बुलेंस का पहुंचना संभव नहीं है, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए। मरीज को गांव से एम्बुलेंस प्वाइंट अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के अंतर्गत 375 एम्बुलेंस तथा 102 महतारी एक्सप्रेस के अंतर्गत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक महतारी एक्सप्रेस सेवा से 2 लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

दुख की घड़ी में शव वाहन के लिए परेशान न हों परिजन

मुख्यमंत्री  साय ने शव वाहन सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी परिजन को खोना परिवार के लिए जीवन के सबसे कठिन और पीड़ादायक क्षणों में से एक होता है। ऐसे समय में परिवार को शव वाहन जैसी बुनियादी व्यवस्था के लिए परेशान होना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में शव वाहन की सुविधा परिजनों को सहजता और समय पर उपलब्ध हो। स्वास्थ्य विभाग ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करे, जिनमें मरीज और उसके परिवार की गरिमा तथा संवेदनाओं का पूरा सम्मान हो।

सिकल सेल उन्मूलन के लिए जांच, परामर्श और जनजागरूकता का हो विस्तार

मुख्यमंत्री श्री साय ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, जांच और उपचार के लिए संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एक आनुवंशिक बीमारी है और इसके प्रति व्यापक जनजागरूकता अत्यंत आवश्यक है। जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाओं का विस्तार करने के साथ विवाह पूर्व स्वैच्छिक जांच एवं आनुवंशिक परामर्श के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जाए।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में योजनाबद्ध और प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। विशेषकर प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करने पर उन्होंने जोर दिया।

मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा

मुख्यमंत्री श्री साय ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, परामर्श सेवाओं और उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाई जाए, जिससे जरूरतमंद व्यक्ति समय रहते सहायता प्राप्त कर सके।

बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मोबाइल हेल्थ सेवाओं तथा मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत एक लाख लोगों को उपचार का लाभ मिला है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पात्र मरीजों को आयुष्मान भारत योजना का पूरा लाभ मिले। विशेष रूप से दूरस्थ अंचलों में योजनाओं की जानकारी और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और सुदृढ़ किया जाए।

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ गुणवत्ता पर भी समान जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा की सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, पर्याप्त फैकल्टी, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और 6 निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अतिरिक्त 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन शासकीय मेडिकल कॉलेजों की प्रगति, नए कॉलेजों की स्थापना तथा संचालित मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों तथा अन्य व्यवस्थाओं में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल चिकित्सा शिक्षा के संस्थान नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र भी हैं। इसलिए वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर उपचार सुविधाएं विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी, आईपीडी और विभिन्न जांच सुविधाओं की स्थिति की भी समीक्षा की।

नर्सिंग, फिजियोथेरेपी और एलाइड हेल्थ एजुकेशन का भी विस्तार

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 8 से बढ़कर 17 तथा फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर 7 हो गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार एलाइड हेल्थ से जुड़े 11 पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पहली बार रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें भी प्रारंभ की गई हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से प्रदेश में प्रशिक्षित चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों, फिजियोथेरेपिस्ट तथा अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा।

दवाइयों की उपलब्धता और उपकरणों के रखरखाव में लापरवाही नहीं

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए दवाइयों की खरीदी, आपूर्ति, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि दवाइयों की आपूर्ति ऐसी हो कि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में आवश्यक दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी न हो।

उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और समय पर मरम्मत के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संसाधनों के प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने संचालनालय आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित संस्थाओं, मानव संसाधन, उपचार सुविधाओं और योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के निर्देश दिए।

त्योहारी सीजन में मिलावट के विरुद्ध चलाएं सघन जांच अभियान

मुख्यमंत्री श्री साय ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की समीक्षा के दौरान आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में मिठाई, दुग्ध उत्पाद एवं अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती है। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और विक्रय स्थलों की नियमित जांच की जाए। अमानक अथवा मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारी पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी से कार्य करें।

अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचना ही योजनाओं की वास्तविक सफलता

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और सेवाओं की वास्तविक सफलता का पैमाना यह है कि जरूरत के समय उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितनी सहजता और समयबद्धता से पहुंचता है। जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित समीक्षा हो और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कमियों की पहचान कर उनका त्वरित निराकरण किया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक, चाहे वह बड़े शहर में रहता हो या सुदूर वनांचल में, आवश्यकता पड़ने पर उसे समय पर बेहतर उपचार मिले। चिकित्सा सुविधा के अभाव में किसी भी परिवार को कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसी लक्ष्य के साथ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत कर रही है।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, संचालक स्वास्थ्य श्री संजीव कुमार झा, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री रितेश अग्रवाल, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री प्रभात मलिक सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।