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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर को पहुंचेंगी बस्तर, मुरिया दरबार में होंगी शामिल: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर को पहुंचेंगी बस्तर, मुरिया दरबार में होंगी शामिल: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ प्रवास प्रस्तावित है। इस दौरान 23 अक्टूबर को वे जगदलपुर पहुंचकर मुरिया दरबार में शामिल होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति को बस्तर आने का आमंत्रण दिया गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। उनके बस्तर आगमन को प्रदेश के लिए गौरव और प्रसन्नता का अवसर बताते हुए साय ने कहा कि इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को भी महत्व मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों और दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित करने के लिए दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिविर को संबोधित किया। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित लोगों को जरूरी सहायता मिले और वे सम्मान व आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। वहीं, छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मुकाबले को लेकर मुख्यमंत्री ने खुशी जताई। भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमों के बीच होने वाले मैच में महिला दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रहेगा, जिससे माताओं, बहनों और बेटियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।

छत्तीसगढ़ में 150 करोड़ से अधिक का औद्योगिक निवेश, 3,500 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

छत्तीसगढ़ में 150 करोड़ से अधिक का औद्योगिक निवेश, 3,500 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की नई औद्योगिक इकाई का भूमिपूजन किया। इस परियोजना में 150 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है, जिससे साढ़े तीन हजार से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवचयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि इसके माध्यम से स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। नई इकाई में विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के लिए उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 के तहत टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा सहित श्रम आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और उद्योगों की स्थापना में आने वाली बाधाओं को दूर करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। सरकार को अब तक साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि रोजगार देने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए सब्सिडी का बजटीय प्रावधान लगभग 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक किया गया है। वहीं, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के अनुसार, प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों में तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनसे 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। आगामी औद्योगिक परियोजनाओं से डेढ़ लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।

वनांचल में उम्मीदों का जल

वनांचल में उम्मीदों का जल

 रायपुर - छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक मूलभूत सुविधाएं पहुँचाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा लगातार सशक्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में नारायणपुर जिले के दूरस्थ ग्राम बागझर में नलकूप खनन का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। इस दूरदर्शी पहल से गाँव में पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा और ग्रामीणों को उनके अपने गाँव में ही स्वच्छ व पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

​कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में उम्मीद की नई किरण

​नारायणपुर के वनांचलों की भौगोलिक परिस्थितियाँ अक्सर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में बड़ी चुनौती बनती रही हैं। भोजन पकाने, पीने तथा अन्य घरेलू कार्यों के लिए नियमित जल आपूर्ति ग्रामीणों की प्राथमिक आवश्यकता है। इन व्यावहारिक कठिनाइयों को प्राथमिकता पर लेते हुए बागझर में नलकूप खनन कराया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर ही एक मजबूत जलस्रोत तैयार हो गया है।

​महिलाओं व बुजुर्गों के जीवन में आएगा सुलभ बदलाव

 ​गाँव में ही जलस्रोत विकसित होने का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को मिलेगा। अब पानी लेने के लिए दूर-दराज़ के क्षेत्रों में भटकना नहीं पड़ेगा, जिससे ग्रामीणों के श्रम और समय दोनों की भारी बचत होगी। समय की बचत होने से ग्रामीण अन्य आजीविका और पारिवारिक कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

​स्वास्थ्य और विकास को मिलेगी नई गति

 ​स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल सीधा ग्रामीणों के बेहतर स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ा हुआ है। बागझर में नलकूप खनन का कार्य पूरा होना केवल एक जलस्रोत का निर्माण नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। नलकूप के सुचारू संचालन और जल की गुणवत्ता सुनिश्चित होने से गाँव में जल जनित बीमारियों का खतरा कम होगा और ग्रामीणों का जीवन पहले से अधिक सुविधाजनक एवं खुशहाल बनेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात, समडमा में 2.91 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा विद्युत सब स्टेशन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात, समडमा में 2.91 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा विद्युत सब स्टेशन

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल से नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात

रायपुर :- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा आम नागरिकों को बेहतर विद्युत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री  साय के गृह जिले जशपुर के नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात मिली है। जिले के फरसाबहार तहसील अंतर्गत ग्राम समडमा में 2 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत से 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। इस सब स्टेशन के शुरू होने से क्षेत्र के 16 गांवों के बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति का लाभ मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही लो वोल्टेज की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

नागलोक क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से लो वोल्टेज और बिजली आपूर्ति संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे। पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलने के कारण घरेलू विद्युत उपकरणों के संचालन, कृषि कार्यों और अन्य दैनिक गतिविधियों में कठिनाइयां होती थीं। क्षेत्र की इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर समडमा में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण कराया जा रहा है। इसके पूर्ण होने से स्थानीय विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी तथा बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार होगा।

समडमा सहित 16 गांवों के हजारों ग्रामीणों को मिलेगा बेहतर बिजली व्यवस्था का लाभ

समडमा में निर्माणाधीन 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन से समडमा, सांको, साहिलता, बांसाझाल, छरला, मांझापारा, कोरचिकानी, लावाकेरा, जूनाडीह, जगदमपुर, रेंगारमुण्डा, जाडामल, बेलडीपा, चालडीह, जामडांड और रंगीयाडीपा सहित आसपास के क्षेत्रों के विद्युत उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।

विद्युत सब स्टेशन के शुरू होने से इन गांवों में बिजली वितरण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी। इससे उपभोक्ताओं को पर्याप्त वोल्टेज के साथ बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की गुणवत्ता में सुधार होने से लोगों के दैनिक जीवन में सहूलियत बढ़ेगी।

कृषि, शिक्षा और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बढ़ावा

समडमा में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण केवल बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे क्षेत्र की कृषि, शिक्षा, छोटे व्यवसाय और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर विद्युत आपूर्ति से किसानों को सिंचाई पंप और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन में सुविधा होगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के संचालन में भी सहूलियत मिलेगी।

इसके साथ ही घरों में विद्युत उपकरणों का उपयोग अधिक सुगम होगा और विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। विद्युत अधोसंरचना के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और स्थानीय विकास को गति देने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय की पहल से दूरस्थ अंचलों में मजबूत हो रही विद्युत अधोसंरचना

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। समडमा में 2.91 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन विद्युत सब स्टेशन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके शुरू होने से नागलोक क्षेत्र में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

लंबे समय से बिजली संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे क्षेत्रवासियों ने विद्युत सब स्टेशन के निर्माण पर प्रसन्नता व्यक्त की है। ग्रामीणों ने इस महत्वपूर्ण सुविधा के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए उम्मीद व्यक्त की है कि सब स्टेशन के शुरू होने से क्षेत्र में लो वोल्टेज की समस्या दूर होगी और बिजली आपूर्ति व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण : अवैध धर्मांतरण पर लगेगी रोक – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण : अवैध धर्मांतरण पर लगेगी रोक – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ में पत्रकारों के सवालों के जवाब में धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण बताया है। रायगढ़ में मीडिया से चर्चा के दौरान इस संबंध में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलने को लेकर यह निर्णय दूरगामी महत्व रखता है  और इससे निश्चित रूप से अवैध धर्मांतरण पर भी रोक लगेगी।

मुख्यमंत्री  साय आज रायगढ़ में कोलता समाज द्वारा आयोजित नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने आमंत्रण के लिए समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी समाजजनों को नुआखाई और शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलता समाज शिक्षित, संगठित और प्रगतिशील समाज है। समाज के लोग शिक्षा, कृषि और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी कोलता समाज की महत्वपूर्ण भागीदारी है।

मुख्यमंत्री  साय ने समाज की गतिविधियों को और सुदृढ़ करने के लिए नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के भवन हेतु 50 लाख रुपए तथा ग्राम कोतरलिया चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपए देने की घोषणा की।

मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के आयोजन पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों से प्रदेश में महिला क्रिकेट को प्रोत्साहन मिलेगा और हमारी बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इन मुकाबलों में पहुंचकर महिला खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया।

आदिवासी समाज का इतिहास गौरवशाली, हमारी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की परंपरा पूरे देश के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

आदिवासी समाज का इतिहास गौरवशाली, हमारी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की परंपरा पूरे देश के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायगढ़- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का गौरवशाली इतिहास है। हमारी जनजातीय संस्कृति में प्रकृति केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि आराध्य है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की जो सीख आदिवासी समाज ने सदियों से अपने जीवन और परंपराओं के माध्यम से दी है, वह आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है। कर्मा पर्व इसी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक है।

मुख्यमंत्री  साय आज रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारसमाल स्थित माध्यमिक शाला के खेल मैदान में उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने भगवान करम देव तथा आराध्य देव भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना की।

कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति की जीवंत छटा उस समय और मनोहारी हो उठी, जब कर्मा दलों के आग्रह पर मुख्यमंत्री  साय स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे। मांदर की थाप और पारंपरिक लोकधुनों के बीच मुख्यमंत्री ने महिला-पुरुषों के साथ कर्मा नृत्य किया। मुख्यमंत्री की आत्मीय और सहज सहभागिता से समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला। समाज के पदाधिकारियों ने गजमाला पहनाकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया।

जनजातीय महापुरुषों का संघर्ष हमारी अमूल्य विरासत

मुख्यमंत्री  साय ने कर्मा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने देश की संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर सहित अनेक जनजातीय महानायकों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनके त्याग, तपस्या और बलिदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय  अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के कल्याण और विकास को विशेष प्राथमिकता देते हुए अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। इससे जनजातीय समाज के विकास के प्रयासों को संस्थागत आधार और नई गति मिली। आज प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सम्मान के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल, आजीविका और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए व्यापक स्तर पर कार्य हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु विराजमान हैं। छत्तीसगढ़ में भी जनजातीय समाज के एक बेटे को मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। यह जनजातीय समाज के बढ़ते सम्मान और भागीदारी का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि नया रायपुर में स्थापित जनजातीय संग्रहालय हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यहां जनजातीय समाज के इतिहास, जीवनशैली, परंपराओं, संस्कृति और वीर महापुरुषों के योगदान को जानने-समझने का अवसर मिलता है। हमारी सरकार जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए समाज को विकास के आधुनिक अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

कर्मा पर्व हमारी जड़ों और प्रकृति से जुड़ाव का उत्सव

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आदिवासी समाज मूल रूप से प्रकृति का उपासक है। प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण हमारी परंपराओं में रचा-बसा है। कर्मा पर्व नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन की भावना को अभिव्यक्त करता है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ते हैं।

उन्होंने समाजजनों से अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए शिक्षा और आधुनिक अवसरों को अपनाकर समाज तेजी से आगे बढ़ सकता है। संस्कृति हमारी पहचान है और शिक्षा हमारे उज्ज्वल भविष्य का आधार है।

शिक्षा से खुलेगा प्रगति का मार्ग, युवा ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करें

मुख्यमंत्री  साय ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। आज हमारे युवाओं के सामने अवसरों की कमी नहीं है। आवश्यकता है कि वे अपना लक्ष्य निर्धारित करें, परिश्रम करें और उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं।

उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। नालंदा परिसर जैसी आधुनिक अध्ययन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक संसाधन मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए भी प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है, जिससे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को सुविधा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि समाज तभी तेजी से आगे बढ़ेगा, जब हमारी नई पीढ़ी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीक, उद्योग, उद्यमिता और अन्य क्षेत्रों में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार खुल रहे नए अवसर

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। शासकीय विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं के साथ रोजगार मेलों और उद्योगों के माध्यम से युवाओं के लिए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का उद्देश्य भी स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करना है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों, रोजगार मेलों और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी रखें तथा इनका अधिकतम लाभ उठाएं। शिक्षा और रोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने वाला प्रत्येक युवा अपने परिवार के साथ पूरे समाज की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।

जनजातीय अंचलों में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही विकास की योजनाएं

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विकास की बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) जैसी योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक आवास, सड़क, पेयजल सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ जनजातीय अंचलों में रहने वाला कोई भी परिवार विकास की मुख्यधारा और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित न रहे। विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

राज्यसभा सांसद  देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनाए रखा है। समाज के वीर महापुरुषों और उनके योगदान को व्यापक पहचान दिलाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज की प्रगति का आधार है और सांस्कृतिक एकता उसकी पहचान को सुदृढ़ करती है।

उरांव समाज विकास समिति के अध्यक्ष  पनत राम भगत ने स्वागत उद्बोधन में कर्मा पर्व की प्राचीन परंपरा, उरांव समाज की भाषा, संस्कृति, लोककला तथा प्रकृति से जुड़े गोत्रों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मांदर की थाप पर जीवंत हुई जनजातीय लोक संस्कृति

कर्मा पूजा महोत्सव में आदिवासी समाज की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की मनोहारी झलक देखने को मिली। मांदर, मृदंग और ढोल की थाप पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों ने सामूहिक कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। लयबद्ध नृत्य के माध्यम से प्रकृति के प्रति प्रेम, सामूहिकता, उल्लास और आराध्य देवों के प्रति आस्था की सुंदर अभिव्यक्ति हुई।

कर्मा पर्व आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सामाजिक एकजुटता और लोक परंपराओं से गहरे जुड़ाव की भावना को अभिव्यक्त करता है।

शाह का बड़ा दावा: अब तक 8,526 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, खुशहाल बस्तर बनाने का संकल्प

शाह का बड़ा दावा: अब तक 8,526 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, खुशहाल बस्तर बनाने का संकल्प

 रायपुर- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि माओवादी हिंसा से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण जीवन देना सरकार का संकल्प है। माओवादियों की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हंसता-खेलता और खुशहाल बनाया जाएगा।

हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।

शाह ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा में आयोजित निश्शुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया।

768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए। शाह ने बताया कि दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय शिविर के पहले चरण में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए गए। इससे पहले जगदलपुर शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे।

छत्तीसगढ़ में पहली बार होगा अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच, मुख्यमंत्री साय ने जताई प्रसन्नता

छत्तीसगढ़ में पहली बार होगा अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच, मुख्यमंत्री साय ने जताई प्रसन्नता

 भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को मिला आमंत्रण

मुख्यमंत्री  साय ने महिला दर्शकों के लिए निःशुल्क प्रवेश का दिया सुझाव, छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ ने जताई सहमति

प्रदेश में महिला क्रिकेट को मिलेगी नई पहचान, बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने की मिलेगी प्रेरणा रू मुख्यमंत्री  साय

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बढ़ रहे आगे: मुख्यमंत्री

रायपुर-छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रदेश में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच का आयोजन होने जा रहा है। भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच आयोजित होने वाले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले को लेकर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज महानदी मंत्रालय भवन में छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की और उन्हें भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने आमंत्रण स्वीकार करते हुए प्रदेश में पहली बार आयोजित होने जा रहे इस अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मुकाबले के लिए क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों को बधाई दी और सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच का आयोजन होना प्रदेश की खेल यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देश और दुनिया की श्रेष्ठ महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को छत्तीसगढ़ की धरती पर खेलते देखना विशेष रूप से हमारी बेटियों और युवा महिला खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी अनुभव होगा। ऐसे आयोजनों से उनमें यह विश्वास और मजबूत होगा कि उचित अवसर, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिलने पर वे भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 मुकाबले को लेकर प्रदेश की महिलाओं, युवाओं और खेलप्रेमियों में विशेष उत्साह रहेगा। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन में महिलाओं की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महिला दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री के इस सुझाव पर छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों ने सहमति व्यक्त की।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और हमारी बेटियां राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ा रही हैं। ऐसे में महिला खिलाड़ियों के मुकाबलों को देखने के लिए अधिक से अधिक महिलाओं और बालिकाओं को स्टेडियम तक लाना स्वयं में प्रेरणा का माध्यम बनेगा। जब हमारी बेटियां अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को मैदान पर आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा के साथ खेलते देखेंगी, तो उनमें भी खेलों को अपने भविष्य और करियर के रूप में अपनाने का उत्साह बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमारा लक्ष्य केवल अच्छे खिलाड़ी तैयार करना ही नहीं, बल्कि प्रदेश में ऐसी मजबूत खेल संस्कृति विकसित करना है, जिसमें बच्चों और युवाओं को खेलों से जुड़ने के लिए परिवार और समाज से भी प्रोत्साहन मिले। बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। राज्य के गांवों, कस्बों, आदिवासी एवं दूरस्थ अंचलों से अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आ रहे हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि इन प्रतिभाओं को बेहतर खेल अधोसंरचना, प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। प्रदेश में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन से खिलाड़ियों को बड़े मुकाबलों और श्रेष्ठ खिलाड़ियों को करीब से देखने तथा उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलता है। इससे प्रदेश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण और मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत और जिम्बाब्वे के बीच होने वाला यह अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मुकाबला छत्तीसगढ़ में महिला क्रिकेट की लोकप्रियता को नई ऊंचाई देगा। इससे प्रदेश की उभरती महिला क्रिकेट प्रतिभाओं को नई प्रेरणा मिलेगी और भविष्य में छत्तीसगढ़ से भी अधिक संख्या में खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए तेजी से अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। बेहतर खेल अधोसंरचना, खिलाड़ियों के लिए बढ़ती सुविधाएं और खेलों के प्रति युवाओं का उत्साह प्रदेश को खेलों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का आधार बन रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय में विभिन्न खेलों की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन छत्तीसगढ़ में हो और प्रदेश देश के प्रमुख खेल केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए।

मुख्यमंत्री  साय ने भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों को आगामी मुकाबले के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि खेल प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ अनुशासन, टीम भावना और आपसी सद्भाव का भी माध्यम हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों और खेलप्रेमियों से इस ऐतिहासिक मुकाबले को उत्सव की तरह मनाने और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के अध्यक्ष  मोहन दास, डायरेक्टरविजय शाह, पूर्व अध्यक्ष मुकुल तिवारी, सचिव  विंटेश अग्रवाल,  जी. एस. मूर्ति,  विनय बजाज सहित संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की

भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार की दीर्घकालिक कार्ययोजना : मुख्यमंत्री

जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक चिकित्सक, दवाइयां और जांच सुविधाएं रहें उपलब्ध

सुरक्षित संस्थागत प्रसव, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पर विशेष जोर

दुर्गम क्षेत्रों में एम्बुलेंस नहीं पहुंच सके तो स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करें वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था

प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार, 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत; नर्सिंग और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी

त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की सघन जांच के निर्देश, मुख्यमंत्री ने कहा - नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं

रायपुर-- स्वास्थ्य सेवाएं सीधे आम नागरिकों के जीवन और परिवार की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय हैं। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को आवश्यकता पड़ने पर समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार, आवश्यक दवाइयां, जांच और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध हों, यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं की गुणवत्ता और अंतिम व्यक्ति तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने पर समान रूप से ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस दौरान संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, संचालनालय चिकित्सा शिक्षा, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन, संचालनालय आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अंतर्गत संचालित योजनाओं, उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना का लगातार विस्तार हुआ है। अनेक अच्छे अस्पताल और चिकित्सा संस्थान विकसित हुए हैं। अब जहां चिकित्सकों, विशेषज्ञों, स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सा उपकरणों अथवा जांच सुविधाओं की कमी है, उन्हें चिन्हित कर प्राथमिकता के साथ दूर किया जाए। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो और उनका अधिकतम लाभ मरीजों तक पहुंचे।

भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बने स्वास्थ्य अधोसंरचना की दीर्घकालिक कार्ययोजना

मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश की बढ़ती आबादी और भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में वर्तमान स्वास्थ्य सुविधाओं, जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जाए। इसी आधार पर स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार और आवश्यक सुविधाओं के विकास की स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में आवश्यकता के अनुरूप बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार करने और नवगठित जिलों में जरूरी चिकित्सा सुविधाओं को प्राथमिकता से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास में केवल भवन निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों, उपकरणों, दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता को भी समग्र रूप से सुनिश्चित किया जाए।

जिला अस्पताल से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक मरीजों को मिलें आवश्यक दवाइयां और जांच सुविधाएं

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। मरीजों को सामान्य जांच और उपचार के लिए अनावश्यक परेशानी या भटकाव का सामना न करना पड़े।

उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के नियमित रखरखाव और प्रभावी उपयोग पर भी विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल में उपलब्ध कोई भी महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण रखरखाव अथवा मरम्मत के अभाव में लंबे समय तक बंद नहीं रहना चाहिए। इसके लिए प्रभावी निगरानी और समयबद्ध मरम्मत व्यवस्था विकसित की जाए।

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वित्तीय प्रगति, मानव संसाधन की उपलब्धता तथा रिक्त पदों पर भर्ती की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि रिक्त पदों पर भर्ती के प्रयास किए जा रहे हैं और सेवा भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया भी प्रचलन में है। मुख्यमंत्री ने भर्ती संबंधी प्रक्रियाओं को गति देने के निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता सेवाओं की गुणवत्ता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र प्रारंभ किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के साथ स्वास्थ्य संस्थानों के गुणवत्ता मानकों, ई-हॉस्पिटल तथा आभा जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की और तकनीक का उपयोग मरीजों की सुविधा तथा सेवाओं की दक्षता बढ़ाने के लिए करने के निर्देश दिए।

हर प्रसव सुरक्षित हो, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री  साय ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में बताते हुए कहा कि गर्भवती माताओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक पोषण एवं चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाए। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें और प्रसूता महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा तथा सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।

उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक प्रसव सुरक्षित हो और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन इस दिशा में और बेहतर परिणाम हासिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत के करीब लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए।

बैठक में संस्थागत प्रसव, पूर्ण टीकाकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) में टीकाकरण की स्थिति, मलेरिया की रोकथाम, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जाए, जिससे बीमारियों की समय पर पहचान हो और मरीजों को प्रारंभिक स्तर पर ही उपचार मिल सके।

दुर्गम अंचलों के लिए विकसित हो वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था

मुख्यमंत्री श्री साय ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 102 महतारी एक्सप्रेस की सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि आपात स्थिति में मरीज तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूरस्थ, वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को केवल भौगोलिक कठिनाइयों के कारण उपचार से वंचित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सड़क अथवा भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एम्बुलेंस का पहुंचना संभव नहीं है, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए। मरीज को गांव से एम्बुलेंस प्वाइंट अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के अंतर्गत 375 एम्बुलेंस तथा 102 महतारी एक्सप्रेस के अंतर्गत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक महतारी एक्सप्रेस सेवा से 2 लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

दुख की घड़ी में शव वाहन के लिए परेशान न हों परिजन

मुख्यमंत्री  साय ने शव वाहन सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी परिजन को खोना परिवार के लिए जीवन के सबसे कठिन और पीड़ादायक क्षणों में से एक होता है। ऐसे समय में परिवार को शव वाहन जैसी बुनियादी व्यवस्था के लिए परेशान होना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में शव वाहन की सुविधा परिजनों को सहजता और समय पर उपलब्ध हो। स्वास्थ्य विभाग ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करे, जिनमें मरीज और उसके परिवार की गरिमा तथा संवेदनाओं का पूरा सम्मान हो।

सिकल सेल उन्मूलन के लिए जांच, परामर्श और जनजागरूकता का हो विस्तार

मुख्यमंत्री श्री साय ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, जांच और उपचार के लिए संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एक आनुवंशिक बीमारी है और इसके प्रति व्यापक जनजागरूकता अत्यंत आवश्यक है। जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाओं का विस्तार करने के साथ विवाह पूर्व स्वैच्छिक जांच एवं आनुवंशिक परामर्श के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जाए।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में योजनाबद्ध और प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। विशेषकर प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करने पर उन्होंने जोर दिया।

मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा

मुख्यमंत्री श्री साय ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, परामर्श सेवाओं और उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाई जाए, जिससे जरूरतमंद व्यक्ति समय रहते सहायता प्राप्त कर सके।

बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मोबाइल हेल्थ सेवाओं तथा मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत एक लाख लोगों को उपचार का लाभ मिला है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पात्र मरीजों को आयुष्मान भारत योजना का पूरा लाभ मिले। विशेष रूप से दूरस्थ अंचलों में योजनाओं की जानकारी और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और सुदृढ़ किया जाए।

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ गुणवत्ता पर भी समान जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा की सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, पर्याप्त फैकल्टी, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और 6 निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अतिरिक्त 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन शासकीय मेडिकल कॉलेजों की प्रगति, नए कॉलेजों की स्थापना तथा संचालित मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों तथा अन्य व्यवस्थाओं में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल चिकित्सा शिक्षा के संस्थान नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र भी हैं। इसलिए वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर उपचार सुविधाएं विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी, आईपीडी और विभिन्न जांच सुविधाओं की स्थिति की भी समीक्षा की।

नर्सिंग, फिजियोथेरेपी और एलाइड हेल्थ एजुकेशन का भी विस्तार

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 8 से बढ़कर 17 तथा फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर 7 हो गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार एलाइड हेल्थ से जुड़े 11 पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पहली बार रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें भी प्रारंभ की गई हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से प्रदेश में प्रशिक्षित चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों, फिजियोथेरेपिस्ट तथा अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा।

दवाइयों की उपलब्धता और उपकरणों के रखरखाव में लापरवाही नहीं

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए दवाइयों की खरीदी, आपूर्ति, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि दवाइयों की आपूर्ति ऐसी हो कि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में आवश्यक दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी न हो।

उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और समय पर मरम्मत के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संसाधनों के प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने संचालनालय आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित संस्थाओं, मानव संसाधन, उपचार सुविधाओं और योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के निर्देश दिए।

त्योहारी सीजन में मिलावट के विरुद्ध चलाएं सघन जांच अभियान

मुख्यमंत्री श्री साय ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की समीक्षा के दौरान आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में मिठाई, दुग्ध उत्पाद एवं अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती है। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और विक्रय स्थलों की नियमित जांच की जाए। अमानक अथवा मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारी पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी से कार्य करें।

अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचना ही योजनाओं की वास्तविक सफलता

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और सेवाओं की वास्तविक सफलता का पैमाना यह है कि जरूरत के समय उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितनी सहजता और समयबद्धता से पहुंचता है। जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित समीक्षा हो और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कमियों की पहचान कर उनका त्वरित निराकरण किया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक, चाहे वह बड़े शहर में रहता हो या सुदूर वनांचल में, आवश्यकता पड़ने पर उसे समय पर बेहतर उपचार मिले। चिकित्सा सुविधा के अभाव में किसी भी परिवार को कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसी लक्ष्य के साथ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत कर रही है।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, संचालक स्वास्थ्य श्री संजीव कुमार झा, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री रितेश अग्रवाल, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री प्रभात मलिक सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ब्रेकिंग : इस दिन होगी साय कैबिनेट की अहम बैठक, धान खरीदी समेत कई मुद्दों पर होगी चर्चा…

ब्रेकिंग : इस दिन होगी साय कैबिनेट की अहम बैठक, धान खरीदी समेत कई मुद्दों पर होगी चर्चा…

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर को साय कैबिनेट की अहम बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक मंत्रालय महानदी भवन में होगी, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के साथ फैसले लिए जा सकते हैं।

बैठक में धान खरीदी को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है। धान खरीदी का सीजन नजदीक आने के साथ ही किसानों और कृषि से जुड़े मुद्दे अहम हो गए हैं। ऐसे में कैबिनेट की इस बैठक पर किसानों सहित प्रदेशभर की नजरें टिकी रहेंगी। इसके अलावा बैठक में राज्य  सरकार की विभिन्न योजनाओं, प्रशासनिक विषयों और जनहित से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी विचार किया जा सकता है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सहसपुर लोहारा कॉलेज को दी 50 लाख के विकास कार्यों की सौगात

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सहसपुर लोहारा कॉलेज को दी 50 लाख के विकास कार्यों की सौगात

 रायपुर। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और उच्च शिक्षा के लिए अधोसंरचना मजबूत करने की दिशा में उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के शासकीय गजानंद माधव मुक्तिबोध महाविद्यालय, सहसपुर लोहारा में 30 लाख रुपए की लागत से बनने वाले अतिरिक्त कक्ष का भूमिपूजन किया।

इस दौरान उन्होंने महाविद्यालय में 15 लाख रुपए की लागत से बाउंड्रीवॉल तथा 5 लाख रुपए की लागत से बालिका शौचालय निर्माण कराने की घोषणा की। महाविद्यालय में आयोजित युवा शक्ति संवाद कार्यक्रम में उन्होंने विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उन्हें अनुशासन, मेहनत और आधुनिक तकनीक के उपयोग से भविष्य संवारने के लिए प्रेरित किया।

अनुशासन और मेहनत से बनाएं भविष्य – उप मुख्यमंत्री शर्मा

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने युवा शक्ति संवाद में विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि युवा अपने लक्ष्य तय करें, अनुशासन में रहें और परिणाम की चिंता छोड़ मेहनत पर ध्यान दें। आधुनिक तकनीक सीखें, लेकिन उसके अधीन न हों। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉलेज करियर बनाने का महत्वपूर्ण केंद्र है। विद्यार्थियों को अनुशासन, मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

शर्मा ने बताया कि कवर्धा क्षेत्र के स्कूलों में डिजिटल बोर्ड लगाए जा रहे हैं। अब महाविद्यालयों में भी डिजिटल बोर्ड के माध्यम से पीएससी, एसएससी और यूपीएससी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

आधुनिक शिक्षा के साथ अपना ज्ञान और कौशल बढ़ाना जरूरी

तकनीक और नवाचार पर बात करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के युवाओं को आधुनिक एआई टूल्स जैसे चौटजीपीटी, क्लॉड, परप्लेक्सिटी और सोशल मीडिया की तकनीकी समझ होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इन तकनीकों का सही उपयोग कर इनका मास्टर बनें, न कि तकनीक को खुद का मास्टर बनने दें। आधुनिक तकनीक की समझ के साथ अपना ज्ञान और कौशल बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मेहनत और तैयारी हमारे हाथ में हैं, इसलिए परिणाम की चिंता करने के बजाय प्रयासों पर ध्यान देना चाहिए।

निरंतर अभ्यास, अनुशासन और धैर्य से ही सफलता का रास्ता बनता है। उन्होंने महाविद्यालय को विद्यार्थियों का अपना संस्थान बताते हुए कहा कि जिस तरह दीपावली पर हम अपने घर को संवारते हैं, उसी तरह विद्यार्थियों और शिक्षकों को मिलकर कॉलेज को बेहतर बनाने में योगदान देना चाहिए।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म में आने और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि अनुशासन जीवन में आगे बढ़ने की मजबूत नींव है। उन्होंने प्राचार्य और प्राध्यापकों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों से नियमित पढ़ाई करने, अपनी रूचि पहचानने और लक्ष्य हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगरपालिका कवर्धा के अध्यक्ष  चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, साकम्बरी बोर्ड के सदस्य  संतोष पटेल जी,  लाला राम साहू, जनपद पंचायत लोहारा की अध्यक्ष दुर्गा ठाकुर, नगरपालिका लोहारा की अध्यक्ष  सरिता मिश्रा, जिला पंचायत सभापति  मनीराम साहू, नगरपालिका लोहारा के उपाध्यक्ष हेमंत साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापक, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित थे।

 
 
डिजिटल माध्यमों से छत्तीसगढ़ की लोककलाओं को दुनिया तक पहुंचाएं- राज्यपाल रमेन डेका

डिजिटल माध्यमों से छत्तीसगढ़ की लोककलाओं को दुनिया तक पहुंचाएं- राज्यपाल रमेन डेका

 रायपुर । छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककलाओं जैसे पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराओं का जिक्र करते हुए उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश की इस सांस्कृतिक थाती को मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश के कोने-कोने तक पहुंचाया जाना चाहिए।

राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय का 70वां स्थापना दिवस समारोह राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में हर्षाेल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की 70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक योगदान का परिणाम बताया।

राज्यपाल डेका ने दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती द्वारा अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि संगीत मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करता है, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प समाज के इतिहास व संस्कृति को अभिव्यक्त करते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि कला के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए प्रतिभा के साथ-साथ धैर्य, निरंतर अभ्यास और समर्पण बहुत जरूरी है। साथ ही, उन्होंने कला को आजीविका और व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाओं पर भी बल दिया।

सांसद संतोष पांडे ने राजपरिवार के योगदान को बताया अनुकरणीय

सांसद संतोष पांडे ने कहा कि राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती द्वारा अपनी पुत्री की स्मृति में दिया गया दान अद्वितीय और अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जमीन दान करना भी कठिन है, लेकिन राजपरिवार की दूरदर्शी सोच ने खैरागढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। उन्होंने शिक्षा, कला-कौशल, परिश्रम और राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करने का संदेश भी दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने दिया। इस गरिमापूर्ण आयोजन में राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े, जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में प्राध्यापक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

ब्रेकिंग : CRPF के सब इंस्पेक्टर ने खुद को मारी गोली, इलाज के दौरान थमीं सांसें…मचा हड़कंप…

ब्रेकिंग : CRPF के सब इंस्पेक्टर ने खुद को मारी गोली, इलाज के दौरान थमीं सांसें…मचा हड़कंप…

 सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में CRPF कैंप से एक दुखद घटना सामने आई है। मेट्टागुड़म कैंप में तैनात सब इंस्पेक्टर ने अपने सर्विस हथियार से खुद को गोली मार ली। घटना के बाद कैंप में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए इल्मागुड़ा कैंप ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। फिलहाल, सब इंस्पेक्टर के इस कदम के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

जानकारी के अनुसार, मेट्टागुड़म कैंप में 131वीं वाहिनी CRPF में पदस्थ उपनिरीक्षक देवानंद यादव (पिता रामानंद यादव) ने अज्ञात कारणों से अपने सर्विस हथियार से खुद को गोली मार ली।

गोली चलने की जानकारी मिलते ही कैंप में मौजूद साथी जवानों और अधिकारियों ने तत्काल उन्हें फील्ड एंबुलेंस के माध्यम से प्राथमिक उपचार के लिए इल्मागुड़ा कैंप पहुंचाया। हालांकि, उपचार के दौरान उपनिरीक्षक देवानंद यादव की मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मर्ग कायम कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। उपनिरीक्षक ने किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। वहीं मृतक के पार्थिव शरीर का नियमानुसार पंचनामा और पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे उनके गृह ग्राम भेजने की व्यवस्था की जा रही है।

छत्तीसगढ़ में यात्री बसों का सफर हुआ महंगा, किराये में इतने प्रतिशत हुई बढ़ोतरी, जानें नई दरें…

छत्तीसगढ़ में यात्री बसों का सफर हुआ महंगा, किराये में इतने प्रतिशत हुई बढ़ोतरी, जानें नई दरें…

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में यात्री बसों से सफर करने वाले लोगों को अब पहले से ज्यादा किराया चुकाना होगा। राज्य के परिवहन विभाग ने यात्री बसों के किराये की नई दरें जारी की हैं। नई दरों के तहत साधारण बसों का किराया 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 1.75 रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया गया है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

साधारण बसों के किराये में बढ़ोतरी

परिवहन विभाग द्वारा जारी नई दरों के अनुसार, साधारण बसों के किराये में प्रति किलोमीटर 50 पैसे की वृद्धि की गई है। इससे साधारण बसों का किराया लगभग 40 प्रतिशत बढ़ गया है। किराये में इस बढ़ोतरी का सीधा असर रोजाना बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों के बजट पर पड़ सकता है।

डीलक्स, स्लीपर और एसी बसों के लिए भी नई दरें

नई अधिसूचना में केवल साधारण बसों को ही नहीं, बल्कि डीलक्स, स्लीपर और वातानुकूलित (एसी) बसों के किराये की दरें भी निर्धारित की गई हैं। इसके अलावा वोल्वो, स्कैनिया और मर्सिडीज जैसी प्रीमियम बस सेवाओं को भी नई दरों में शामिल किया गया है।

सिटी बस सेवाएं दायरे से बाहर

परिवहन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, शहरों में संचालित सिटी बस सेवाओं को नई किराया दरों के दायरे से बाहर रखा गया है। यानी यह अधिसूचना शहरी सिटी बस सेवाओं पर लागू नहीं होगी।

पुरानी अधिसूचना को किया गया अधिक्रमित

विभाग ने 11 मार्च 2025 को जारी पुरानी अधिसूचना को अधिक्रमित करते हुए किराये की नई दरें निर्धारित की हैं। नई दरों के लागू होने से राज्य में बस यात्रा की लागत बढ़ेगी, जिसका असर खासतौर पर नौकरी, पढ़ाई और अन्य जरूरी कामों के लिए नियमित रूप से लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है।

बस किराये में इस बढ़ोतरी के बाद यात्रियों को अपनी यात्रा का बजट नए सिरे से तय करना पड़ सकता है। हालांकि, अलग-अलग श्रेणियों की बसों के लिए निर्धारित किराये की विस्तृत जानकारी के आधार पर ही यात्रियों के वास्तविक अतिरिक्त खर्च का आकलन किया जा सकेगा।

WhatsApp का बड़ा अपडेट! अब पहले से शेड्यूल कर सकेंगे मैसेज, जानें कैसे करेगा काम

WhatsApp का बड़ा अपडेट! अब पहले से शेड्यूल कर सकेंगे मैसेज, जानें कैसे करेगा काम

 मुंबई - WhatsApp पर किसी को जन्मदिन की बधाई देना भूल जाते हैं या फिर जरूरी मैसेज भेजने के लिए सही समय का इंतजार करना पड़ता है, तो जल्द ही आपकी यह परेशानी दूर हो सकती है. WhatsApp एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है कि, जिसकी मदद से यूजर्स पहले से मैसेज लिखकर उसका समय तय कर सकेंगे. इसके बाद मैसेज अपने आप तय टाइम पर भेज दिया जागा. खास खास बात यह है कि इस फीचर से सिर्फ टेक्स्ट ही नहीं, बल्कि फोटो और वीडियो भी शेड्यूल किए जा सकेंगे. यानी मैसेज भेजने के लिए उस वक्त फोन हाथ में रखने या ऑनलाइन रहने की जरूरत नहीं होगी। 

कुछ Android यूजर्स के लिए शुरू हुई टेस्टिंग
रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp फिलहाल इस फीचर की टेस्टिंग कुछ Android बीटा यूजर्स के साथ कर रहा है. WABetaInfo की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सुविधा WhatsApp के Android बीटा वर्जन 2.26.40.7 इस्तेमाल करने वाले कुछ यूजर्स को मिल रही है. आने वाले हफ्तों में इसे और यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है. हालांकि, कंपनी ने अभी तक सभी यूजर्स के लिए इसके रोलआउट की कोई तय तारीख नहीं बताई है। 

कैसे काम करेगा मैसेज शेड्यूल करने वाला फीचर?
इस फीचर का इस्तेमला करना काफी आसान हो सकता है. यूजर को सबसे पहले WhatsApp की किसी चैट में जाकर मैसेज लिखना होगा. इसके बाद सेंड बटन को दबाकर रखने पर, अगर उसके अकाउंट में यह सुविधा उपलब्ध है, तो मैसेज भेजने की तारीख और समय चुनने का ऑप्शन दिखाई दे सकता है. टाइम फिक्स करने के बाद मैसेज शेड्यूल हो जाएगा और चुने गए समय पर अपने आप भेज दिया जाएगा। 

टेक्स्ट के साथ फोटो और वीडियो भी कर सकेंगे शेड्यूल
इस फीचर में यूजर्स को सिर्फ टेक्स्ट मैसेज शेड्यूल करने की सुविधा नहीं मिलेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, लिंक, फोटो और वीडियो को भी तय समय पर भेजने के लिए शेड्यूल किया जा सकेगा. हालांकि, एक बार में केवल एक फोटो या वीडियो शेड्यूल करने का विकल्प मिल सकता है. फोटो भेजने से पहले यूजर्स उसमें बदलाव कर सकेंगे और जरूरत के हिसाब से कैप्शन भी जोड़ सकेंगे। 

10 मिनट से लेकर दो हफ्ते तक का समय चुनने का विकल्प
रिपोर्ट के मुताबिक, यूजर्स मैसेज को कम से कम 10 मिनट बाद और ज्यादा से ज्यादा दो हफ्ते तक के लिए शेड्यूल कर सकेंगे. इसका फायदा यह होगा कि जन्मदिन, सालगिरह या किसी जरूरी काम से जुड़ा मैसेज पहले ही तैयार करके रखा जा सकेगा. तय समय आने पर मैसेज अपने आप चला जाएगा. इसके लिए ऐप को खुला रखना या फोन को ऑनलाइन रखना भी जरूरी नहीं होगा। 

प्राइवेट और ग्रुप चैट, दोनों में करेगा काम
यह फीचर सिर्फ किसी एक व्यक्ति को मैसेज भेजने तक सीमित नहीं रह सकता. रिपोर्ट के मुताबिक, इसे प्राइवेट चैट से साथ ग्रुप चैट में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. हालांकि ग्रुप मैसेज को लेकर एक खास बात सामने आई है. शेड्यूल करते समय ग्रुप में जो सदस्य मौजूद होंगे उन्हें ही वह मैसेज मिल सकता है. बाद में ग्रुप में जुड़ने वाले सदस्यों को पहले से शेड्यूल किया गया मैसेज मिलने की उम्मीद नहीं है। 

भेजने से पहले शेड्यूल मैसेज डिलीट कर सकेंगे
अगर आपने कोई मैसेज शेडयूल कर दिया है, लेकिन बाद में उसे भेजने का इरादा बदल जाता है तो उसे डिलीट करने का ऑप्शन भी मिल सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, यूजर्स चैट की जानकारी वाले सेक्शन में जाकर शेड्यूल किए गए मैसेज देख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटा सकेंगे. अगर मैसेज भेजे जाने से पहले ही डिलीट कर दिया जाता है, तो सामने वाले व्यक्ति को इसकी सूचना मिलने की उम्मीद नहीं है। 

आम यूजर्स को कब मिलेगा यह फीचर?
फिलहाल WhatsApp के शेड्यूल्ड मैसेज फीचर की टेस्टिंग कुछ Android बीटा यूजर्स के साथ चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में इसे ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाया जा सकता है. हालांकि, WhatsApp ने अभी तक इसके ग्लोबल रोलआउट की आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया है. ऐसे में आम यूजर्स को इस फीचर के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। 

मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता से सपने को मिला पंख

मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता से सपने को मिला पंख

 मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना से मिली आर्थिक मदद

बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर बनना चाहती हैं नर्स

रायपुर-- आर्थिक सहयोग मिले तो प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। सक्ती जिले के डभरा विकासखंड के ग्राम किरारी की शिवानी साहू की कहानी इसकी मिसाल है। श्रम विभाग की मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना से शिवानी को उच्च शिक्षा के लिए 45 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिली है। इससे उनकी पढ़ाई जारी रखने में परिवार को मदद मिली और नर्स बनने के उनके सपने को नई दिशा मिली।

शिवानी,  टंकेश्वर साहू और गोमती साहू की बेटी हैं। उन्होंने भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में करियर बनाने के उद्देश्य से बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई चुनी है। वर्तमान में वे नर्सिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। वर्ष 2025-26 में योजना के तहत उन्हें 45 हजार रुपये की सहायता सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से दी गई। इस राशि से पढ़ाई से जुड़े खर्चों में परिवार को आर्थिक संबल मिला।

शिवानी का कहना है कि शासन से मिली सहायता ने उन्हें बिना आर्थिक चिंता के पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया है। वे नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर कुशल नर्स बनना चाहती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की सेवा करना चाहती हैं।

शिवानी ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया। छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाएं श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा और बेहतर भविष्य की राह पर आगे बढ़ने में मददगार बन रही हैं।

मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन से छत्तीसगढ़ के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन से छत्तीसगढ़ के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और क्षेत्रीय विकास का मजबूत आधार बनाएगी राज्य सरकार

पर्यटन विकास के लिए 500 करोड़ रुपए की मिशन निधि प्रस्तावित, विभिन्न स्रोतों से 1,000 करोड़ रुपए से अधिक जुटाने की कार्ययोजना

चित्रकोट, मैनपाट, सिरपुर, राजिम और हसदेव बांगो सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों में विकसित होंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

1,000 नए पर्यटन उद्यमी तैयार करने और 250 महिला स्व-सहायता समूहों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य

पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने, 12 हजार अतिरिक्त कमरों की क्षमता विकसित करने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने की योजना

चार प्रमुख और 15 मिनी पर्यटन सर्किट होंगे विकसित, डिजिटल तकनीक से आसान और सुविधाजनक होगा पर्यटकों का सफर

रायपुर-- छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य का प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहर और धार्मिक आस्था के केंद्र हमारी विशिष्ट पहचान हैं। इन खूबियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रभावी रूप से स्थापित करते हुए पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास का मजबूत आधार बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने  महानदी भवन मंत्रालय में पर्यटन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पर्यटन का विकास केवल किसी स्थान के सौंदर्यीकरण या अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए। पर्यटन स्थलों के आसपास रहने वाले युवाओं, महिलाओं, हस्तशिल्पियों, कलाकारों और छोटे व्यवसायियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा हों। स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प, लोककला और संस्कृति को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़कर आय के स्थायी साधन विकसित किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पर्यटन से समृद्धि’ इस मिशन की मूल भावना होगी। हमारा प्रयास ऐसा पर्यटन मॉडल विकसित करने का है, जिसमें पर्यटक छत्तीसगढ़ की प्रकृति और संस्कृति से जुड़ें तथा पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का अधिकतम लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे।

*500 करोड़ रुपए की मिशन निधि प्रस्तावित*

बैठक में पर्यटन विभाग के सचिव ने मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा तैयार मिशन के अंतर्गत पर्यटन विकास के लिए 500 करोड़ रुपए की मूल मिशन निधि प्रस्तावित की गई है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और विभागीय अभिसरण के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाने की कार्ययोजना तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री ने पर्यटन परियोजनाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न वित्तीय स्रोतों का प्रभावी उपयोग करने तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन परियोजनाओं की योजना बनाते समय उनकी दीर्घकालिक उपयोगिता, आर्थिक संभावनाओं और स्थानीय रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को प्राथमिकता दी जाए।

*चित्रकोट, मैनपाट, सिरपुर सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों का होगा कायाकल्प*

मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। प्रथम चरण में चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, सिरपुर, हसदेव बांगो जलाशय और राजिम को उच्च प्रभाव वाले पर्यटन गंतव्यों के रूप में विकसित करने की योजना है।

इसके साथ ही मायाली-बगीचा, चंपारण, सतरेंगा, तीरथगढ़, देवरानी-जेठानी, कबीर चबूतरा, केंदई, महामाया और चिल्फी घाटी सहित अन्य महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में भी सुविधाओं के विस्तार की कार्ययोजना प्रस्तावित है।

इन स्थलों में बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, सुव्यवस्थित पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता के साथ विकसित किया जाएगा। पर्यटन स्थलों की विशिष्टता को ध्यान में रखते हुए उनके विकास में स्थानीय वास्तुकला, संस्कृति और प्राकृतिक परिवेश के संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।

*स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने पर्यटन विकास में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मिशन के अंतर्गत 1,000 नए पर्यटन उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 250 महिला स्व-सहायता समूहों को पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। इसके अतिरिक्त 600 आतिथ्य एवं पर्यटक सहायता कर्मियों तथा 500 टूर गाइड और फ्रंटलाइन कर्मियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककला, पर्यटन मार्गदर्शन, परिवहन और अन्य सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे पर्यटन से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था में पहुंचेगा और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर प्राप्त होंगे।

*पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य*

मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यटकों के औसत प्रवास की अवधि बढ़ाकर दो दिन करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

पर्यटकों के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण आवास सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश में 12 हजार अतिरिक्त कमरों की क्षमता विकसित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। इसके लिए होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे और अन्य आवासीय सुविधाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा।

पर्यटन क्षेत्र में 10 से 20 सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाएं विकसित करने का प्रस्ताव है, जिनके माध्यम से कम से कम 1,000 करोड़ रुपए की निजी पूंजी आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे होटल, रिसॉर्ट, परिवहन, खानपान और अन्य पर्यटन आधारित सेवाओं के विस्तार के साथ स्थानीय बाजारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

*चार प्रमुख और 15 मिनी पर्यटन सर्किट होंगे विकसित*

प्रदेश के अलग-अलग पर्यटन स्थलों को एक-दूसरे से जोड़कर पर्यटकों को बेहतर और विविध अनुभव उपलब्ध कराने के लिए मिशन के अंतर्गत चार प्रमुख पर्यटन सर्किट और 15 मिनी पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना है।

प्रमुख पर्यटन मार्गों पर लगभग 15 से 20 वे-साइड सुविधाएं तथा करीब 500 पर्यटन संकेतक स्थापित किए जाएंगे। इससे पर्यटकों को पर्यटन स्थलों तक पहुंचने और अपनी यात्रा को सुविधाजनक तरीके से नियोजित करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन सर्किट तैयार करते समय प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक और जनजातीय पर्यटन स्थलों को इस तरह जोड़ा जाए कि पर्यटक एक ही यात्रा में छत्तीसगढ़ की विविधता का व्यापक अनुभव प्राप्त कर सकें।

*डिजिटल तकनीक से आसान होगा पर्यटकों का सफर*

पर्यटन सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए भी मिशन में व्यापक प्रावधान किए गए हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए बहुभाषी पर्यटन वेबसाइट, मोबाइल एप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पर्यटन सूचना, डिजिटल बुकिंग, ऑनलाइन भुगतान और रियल टाइम नेविगेशन जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

इन डिजिटल माध्यमों से पर्यटकों को पर्यटन स्थलों, आवास, परिवहन, स्थानीय आकर्षण, खानपान और अन्य आवश्यक सेवाओं की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

*जनजातीय संस्कृति और विरासत बनेगी छत्तीसगढ़ पर्यटन की विशिष्ट पहचान*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोककला, लोकनृत्य, पारंपरिक खानपान, हस्तशिल्प और जीवनशैली हमारी अमूल्य विरासत है। पर्यटन विकास के दौरान इनकी मौलिकता और गरिमा को संरक्षित रखते हुए इन्हें व्यापक पहचान दिलाई जानी चाहिए।

विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा अंचल की प्राकृतिक सुंदरता और विशिष्ट जनजातीय संस्कृति को पर्यटन के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार कर श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पर्यटन स्थलों के विकास में पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन के सिद्धांतों का विशेष ध्यान रखा जाए। प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर विकास कार्य वहां के पर्यावरण और जैव विविधता के अनुरूप हों।

*‘पर्यटन से समृद्धि’ बनेगा मिशन का आधार*

मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन की मूल अवधारणा ‘पर्यटन से समृद्धि’ निर्धारित की गई है। मिशन के माध्यम से पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों के विकास तक सीमित न रखते हुए इसे स्थानीय अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक संरक्षण, रोजगार सृजन, निवेश और क्षेत्रीय विकास से जोड़ा जाएगा।

मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय मार्गदर्शक समिति तथा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय संचालन समिति का प्रावधान किया गया है। पर्यटन, लोक निर्माण, वन, नगरीय प्रशासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, उद्योग, कौशल विकास सहित संबंधित विभागों के समन्वय से परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मिशन की कार्ययोजना को परिणामोन्मुख बनाते हुए प्राथमिकता के आधार पर पर्यटन स्थलों का चयन किया जाए और प्रत्येक परियोजना के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य छत्तीसगढ़ को ऐसा पर्यटन गंतव्य बनाना है, जहां आने वाला पर्यटक प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और आत्मीयता का यादगार अनुभव लेकर लौटे तथा पर्यटन की बढ़ती गतिविधियां स्थानीय लोगों की समृद्धि का माध्यम बनें।

बैठक में पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत एवं श्री प्रभात मलिक, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, पर्यटन सचिव श्री पी. दयानंद, पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, वित्त विभाग के सचिव श्री रोहित यादव, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के सचिव श्री एस. भारतीदासन, पीसीसीएफ श्री अरुण पांडेय, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव श्री सोनमणि बोरा, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश टोप्पो, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

खेल प्रतिभाओं को गांव के मैदान से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

खेल प्रतिभाओं को गांव के मैदान से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 रायपुर- छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। गांवों, जनजातीय क्षेत्रों और दूरस्थ अंचलों में ऐसी अनेक प्रतिभाएं हैं, जिन्हें सही समय पर पहचान, बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और प्रतिस्पर्धा के पर्याप्त अवसर मिलें तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ा सकती हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसी प्रतिभाओं के लिए गांव के खेल मैदान से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक आगे बढ़ने का सुनियोजित मार्ग तैयार करना है। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन इसी सोच को धरातल पर उतारने की महत्वपूर्ण पहल है।मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव और संजू देवी जैसी प्रदेश की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों से यह साबित किया है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की भरपूर क्षमता है। आवश्यकता इस बात की है कि प्रतिभाओं की पहचान कम उम्र में हो और उन्हें लगातार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन तथा उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं का अनुभव मिले। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिशन की कार्ययोजना ऐसी हो, जिसमें खिलाड़ी की प्रतिभा की पहचान से लेकर उसके उच्च प्रदर्शन वाले खिलाड़ी बनने तक की पूरी यात्रा के लिए स्पष्ट व्यवस्था हो।

गांवों और दूरस्थ अंचलों तक पहुंचे खेल प्रतिभाओं की खोज

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल प्रतिभाओं की तलाश केवल बड़े शहरों और स्थापित खेल अकादमियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छत्तीसगढ़ के गांवों, जनजातीय अंचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। तीरंदाजी, कबड्डी सहित विभिन्न खेलों से इन क्षेत्रों के युवाओं का स्वाभाविक जुड़ाव रहा है। ऐसी प्रतिभाओं को चिन्हित कर वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रशिक्षण से जोड़ने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि खेल उत्कर्ष मिशन की सफलता इस बात से तय होगी कि हम जमीनी स्तर पर कितनी प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दे पाते हैं। कोई भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल संसाधनों अथवा अवसर की कमी के कारण पीछे नहीं रहना चाहिए।

स्कूल से ही मजबूत होगी खेल संस्कृति

मुख्यमंत्री ने बच्चों को स्कूल स्तर से खेल गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले गांवों में बच्चों का खेल के मैदानों से स्वाभाविक जुड़ाव होता था, लेकिन बदलती जीवनशैली के कारण यह जुड़ाव कम हुआ है। इसे फिर मजबूत करने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री  साय ने स्कूलों में व्यायाम शिक्षकों के माध्यम से नियमित खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेल बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाने के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना भी विकसित करते हैं। स्कूल स्तर पर प्रतिभा की पहचान होने से योग्य बच्चों को समय रहते विशेषज्ञ प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सकेगा और वे भविष्य में खेलों को एक बेहतर करियर के रूप में भी अपना सकेंगे।

फीडर सेंटर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक बनेगा प्रशिक्षण का मजबूत तंत्र

बैठक में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के अंतर्गत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती, भारोत्तोलन, तैराकी, बैडमिंटन, जूडो और कबड्डी सहित प्राथमिकता वाले खेलों के विकास की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।

जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए फीडर सेंटर, उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र और उत्कृष्टता केंद्र विकसित करने की प्रस्तावित व्यवस्था की समीक्षा की गई। फीडर सेंटरों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को क्रमशः खेल अकादमियों और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं की पहचान के बाद उनके प्रदर्शन और प्रगति की नियमित निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे प्रत्येक चयनित खिलाड़ी के प्रशिक्षण, प्रदर्शन और आवश्यकता का नियमित आकलन हो तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अगले स्तर तक पहुंचने के अवसर मिलते रहें।

प्रशिक्षित कोच और स्पोर्ट्स साइंस पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री  साय ने खेलवार प्रशिक्षित और योग्य कोचों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस खेल की जहां संभावनाएं अधिक हैं, वहां उसी के अनुरूप विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की पदस्थापना और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बैठक में आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस सुविधाओं के विकास पर भी विस्तृत चर्चा हुई। खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण, मनोवैज्ञानिक सहयोग, फिटनेस, चोटों से बचाव और पुनर्वास जैसी सेवाओं को प्रशिक्षण व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने की योजना पर विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धा में तकनीक और खेल विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को भी आधुनिक प्रशिक्षण की इन सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।

बैठक में बिलासपुर स्थित स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर के विस्तार की योजना की भी समीक्षा की गई। सेंटर में आवासीय खिलाड़ियों की वर्तमान क्षमता 165 से बढ़ाकर 300 करने तथा यहां संचालित खेल विधाओं का विस्तार करने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पहले से उपलब्ध खेल अधोसंरचनाओं का अधिकतम और बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्टेडियमों, खेल मैदानों और प्रशिक्षण केंद्रों के नियमित रखरखाव के साथ आवश्यकतानुसार उनका उन्नयन किया जाए, ताकि खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी से प्रतिभाओं को मिलेगा मंच

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रशिक्षण के साथ खिलाड़ियों को नियमित प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलना भी आवश्यक है। प्रतियोगिताओं से खिलाड़ी अपने प्रदर्शन का आकलन कर पाते हैं और उनमें बड़े मुकाबलों के लिए आवश्यक आत्मविश्वास विकसित होता है।

बैठक में टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी के माध्यम से विकासखंड, जिला और राज्य स्तर पर नियमित प्रतियोगिताएं आयोजित करने की प्रस्तावित व्यवस्था पर चर्चा की गई। इसके माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को चिन्हित कर उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और आगे की प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री  साय ने महिला खिलाड़ियों और दिव्यांग खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियों ने विभिन्न खेलों में अपनी प्रतिभा और क्षमता सिद्ध की है। उन्हें सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, आवश्यक खेल सुविधाएं और प्रतियोगिताओं के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

बैठक में महिला खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर, पैरा स्पोर्ट्स के विकास तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप तैयार करने की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

अगले पांच वर्षों के लिए तैयार होगी स्पष्ट कार्ययोजना

मुख्यमंत्री  साय ने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों की स्पष्ट, परिणामोन्मुख और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में मिशन के विभिन्न घटकों के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन पर भी विस्तृत मंथन किया गया।

मुख्यमंत्री ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के साथ स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेलों का विकास किसी एक विभाग तक सीमित विषय नहीं है। सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयास करते हुए प्रदेश में मजबूत खेल संस्कृति और खिलाड़ियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश केवल खेल सुविधाओं का विस्तार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम विकसित करना है, जिसमें प्रतिभा की पहचान, प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, पोषण, प्रतियोगिता और उच्चस्तरीय प्रदर्शन तक खिलाड़ी को हर जरूरी सहयोग एक सुनियोजित व्यवस्था के तहत मिले।

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिले। गांव के खेल मैदान से शुरू हुआ उसका सफर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से हम ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहते हैं, जो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नई पहचान दे।

बैठक में उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव  विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव  अंकित आनंद, लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, खेल विभाग के सचिव  यशवंत कुमार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कौशल विकास से खुलेंगे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की होगी महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

कौशल विकास से खुलेंगे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की होगी महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल से सशक्त बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। तेजी से बदलती तकनीक और औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय की उपस्थिति में आज मंत्रालय महानदी भवन में पीएम-सेतु योजना के प्रदेश में क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए दुर्ग और बस्तर क्लस्टर के लिए क्रमशः भिलाई स्टील प्लांट और एनएमडीसी लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपन्न हुआ। इन दोनों प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों की भागीदारी से आईटीआई में प्रशिक्षण को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने और युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में कौशल विकास को रोजगार और औद्योगिक प्रगति से जोड़ने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। पीएम-सेतु योजना इसी दूरदर्शी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से आईटीआई को केवल प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि आधुनिक कौशल, नवाचार, रोजगार और उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में नए उद्योगों और निवेश के विस्तार के साथ विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग भी बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हो और प्रदेश के युवाओं को अपने कौशल के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर मिलें।

प्रदेश के 30 आईटीआई का होगा कायाकल्प

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की पहल पर भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) योजना के अंतर्गत देशभर के एक हजार शासकीय आईटीआई को आधुनिक बनाने के लिए लगभग 60 हजार करोड़ रुपए के निवेश का प्रावधान किया गया है।

योजना का उद्देश्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक तकनीक एवं उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना, प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना और युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाना है।

छत्तीसगढ़ में पीएम-सेतु योजना के क्रियान्वयन के लिए दुर्ग, कोरबा, सरगुजा, बस्तर, रायगढ़ और रायपुर सहित छह क्लस्टर चयनित किए गए हैं। इनमें छह हब आईटीआई और 24 स्पोक आईटीआई सहित कुल 30 शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का उन्नयन प्रस्तावित है।

प्रदेश के छह क्लस्टरों में पांच वर्षों की अवधि में लगभग 1,446 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। प्रत्येक क्लस्टर में लगभग 241 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। इसके अंतर्गत हब आईटीआई के लिए 81 करोड़ रुपए तथा प्रत्येक स्पोक आईटीआई के लिए 40 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

योजना में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित उद्योग भागीदार की वित्तीय सहभागिता क्रमशः 50 प्रतिशत, 33 प्रतिशत और 17 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इसके माध्यम से आईटीआई में आधुनिक मशीनों, उपकरणों, प्रयोगशालाओं और तकनीकी संसाधनों के साथ उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

उद्योग और आईटीआई के बीच मजबूत होगी साझेदारी

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। उद्योगों की सीधी भागीदारी से युवाओं को ऐसी तकनीकों और कार्यप्रणालियों का प्रशिक्षण मिलेगा, जिनका वास्तविक औद्योगिक इकाइयों में उपयोग हो रहा है।

उन्होंने कहा कि उद्योगों की आवश्यकता और युवाओं के कौशल के बीच अंतर को कम करना जरूरी है। पीएम-सेतु के माध्यम से पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और व्यावहारिक अनुभव को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने से प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

दुर्ग क्लस्टर में भिलाई स्टील प्लांट की महत्वपूर्ण भागीदारी

पीएम-सेतु योजना के अंतर्गत दुर्ग क्लस्टर के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की इकाई भिलाई स्टील प्लांट (BSP) एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागी होगा।

इस क्लस्टर में शासकीय आईटीआई दुर्ग को हब आईटीआई तथा शासकीय आईटीआई भिलाई, महिला आईटीआई भिलाई, राजनांदगांव और डौंडीलोहारा को स्पोक आईटीआई के रूप में शामिल किया गया है।

भिलाई स्टील प्लांट की विशेषज्ञता और औद्योगिक अनुभव का लाभ प्रशिक्षण व्यवस्था को मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को औद्योगिक क्षेत्र में उपयोग होने वाली आधुनिक तकनीकों, मशीनों और कार्यप्रणाली के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय की उपस्थिति में आज भिलाई स्टील प्लांट के साथ एमओयू संपन्न कर इस सहभागिता को औपचारिक स्वरूप दिया गया।

बस्तर के युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ने की बड़ी पहल

बस्तर क्लस्टर के लिए एनएमडीसी लिमिटेड एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागी होगा। बस्तर क्लस्टर में शासकीय आईटीआई बस्तर को हब आईटीआई तथा जगदलपुर, गीदम, कोंडागांव और नारायणपुर के शासकीय आईटीआई को स्पोक आईटीआई के रूप में सम्मिलित किया गया है।

मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एनएमडीसी लिमिटेड के साथ एमओयू संपन्न

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर जैसे जनजातीय और दूरस्थ अंचलों के युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण तकनीकी प्रशिक्षण पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। एनएमडीसी जैसे प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थान की सहभागिता से बस्तर के युवाओं को आधुनिक औद्योगिक कौशल से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें स्थानीय एवं प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में विकसित हो रहे रोजगार के अवसरों का लाभ लेने में सहायता मिलेगी।

सरगुजा और कोरबा क्लस्टर में भी उद्योगों की सहभागिता

सरगुजा क्लस्टर के लिए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागिता की सहमति प्रदान की है। इस क्लस्टर के लिए टाटा IIS का चयन ऑपरेटिंग पार्टनर के रूप में किया गया है। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की स्वीकृति के लिए प्रकरण विभाग को प्रस्तुत किया गया है तथा एमओयू के प्रारूप में आवश्यक संशोधन के लिए इसे एसईसीएल को भेजा गया है।

इसी प्रकार कोरबा क्लस्टर के लिए एनटीपीसी कोरबा द्वारा एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागिता की सहमति दी गई है। एनटीपीसी कोरबा द्वारा ऑपरेटिंग पार्टनर के चयन की प्रक्रिया प्रचलन में है।

रायपुर और रायगढ़ क्लस्टर के लिए प्रक्रिया जारी

रायपुर एवं रायगढ़ क्लस्टर के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के चयन की प्रक्रिया भी जारी है। इसके लिए राज्य के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से निविदाएं जारी की गई हैं।

रायपुर क्लस्टर के संबंध में हीरा ग्रुप से प्राप्त प्रश्नों का निराकरण किया जा चुका है। रायगढ़ क्लस्टर के लिए एनटीपीसी लारा से संपर्क किया गया है और योजना में सहभागिता तथा क्रियान्वयन को लेकर प्रारंभिक चर्चा की जा रही है।

हब-स्पोक मॉडल से मजबूत होगा कौशल प्रशिक्षण नेटवर्क

पीएम-सेतु योजना में हब एवं स्पोक मॉडल के माध्यम से आईटीआई के बीच तकनीकी संसाधनों, आधुनिक उपकरणों, विशेषज्ञता और प्रशिक्षण सुविधाओं का बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।

हब आईटीआई को उन्नत प्रशिक्षण एवं संसाधनों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि उससे जुड़े स्पोक आईटीआई भी इन संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ उठा सकेंगे। इससे अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण की पहुंच बढ़ेगी।

उद्योग भागीदारों की सक्रिय सहभागिता से प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को समय-समय पर उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने, प्रशिक्षकों के कौशल उन्नयन और विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने में भी सहायता मिलेगी।

कौशल से रोजगार और रोजगार से समृद्धि की दिशा में बढ़ रहा छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, कौशल, उद्योग और रोजगार को एक-दूसरे से जोड़कर युवाओं के लिए अवसरों का मजबूत तंत्र विकसित कर रही है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ने के साथ युवाओं को भविष्य की तकनीकों और आधुनिक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ का युवा केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि अपने कौशल और नवाचार के बल पर रोजगार सृजित करने वाला भी बने। कौशल से रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता का मार्ग प्रशस्त होगा और हमारे युवाओं की शक्ति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का मजबूत आधार बनेगी।

रोजगार, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि पीएम-सेतु योजना प्रदेश के युवाओं के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल है। आईटीआई के आधुनिकीकरण और उद्योगों की प्रत्यक्ष सहभागिता से युवाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण मिलेगा। इससे उनके कौशल उन्नयन के साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री  राजेश अग्रवाल, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के सचिव  बसव राजू, संचालक  हेमंत नंदनवार, एनएमडीसी के कार्यपालक निदेशक  संजीव साही, सेल के  पवन कुमार सहित संबंधित विभागों एवं औद्योगिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में 22 प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले, गृह-परिवहन समेत कई विभागों में नई जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ में 22 प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले, गृह-परिवहन समेत कई विभागों में नई जिम्मेदारी

 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रशासनिक कार्यकुशलता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सचिवालय सेवा के अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला किया है।

सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव मनराखन भूआर्य द्वारा जारी आदेश के तहत सचिवालय सेवा के कुल 22 सहायक सचिवालय सहायक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से नए विभागों में पदस्थ किया गया है।

गृह और वित्त विभागों में पदस्थापना
 
जारी आदेश के अनुसार, राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग, पर्यटन विभाग, गह विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, वित्त विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग आदि में नए अधिकारियों की तैनाती की है।
 
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ममता साहू की जेल विभाग में पदस्थापना
 
सौरव मंडल को गृह विभाग से सामान्य प्रशासन विभाग, ममता साहू को सामान्य प्रशासन विभाग से जेल विभाग और अभिषेक देवांगन को सामान्य प्रशासन से जेल विभाग में पदस्थापना मिली है।
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चन्द्रनारायण की गृह विभाग में पदस्थापना
 
इसके अलावा संगीता देवी को सामान्य शासन विभाग से वित्त विभाग, चन्द्रनारायण को नगरीय प्रशासन विभाग से गृह विभाग और धनेश्वर पटेल को मुख्यमंत्री सचिवालय से चिकित्सा शिक्षा विभाग में तैनाती मिली है।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक प्रगति दुनिया के लिए उदाहरण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक प्रगति दुनिया के लिए उदाहरण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर जारी अनुमान पर सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में नया भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद आर्थिक प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आईएमएफ द्वारा वर्ष 2026 और 2027 में भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वर्ष 2026 में वैश्विक विकास दर मात्र 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह अंतर भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती, निरंतरता और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को रेखांकित करता है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में किए गए व्यापक आर्थिक सुधारों, अधोसंरचना में ऐतिहासिक निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार, विनिर्माण को प्रोत्साहन और उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण ने देश की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। भारत आज न केवल दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारत की यह तेज आर्थिक प्रगति ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में देश के मजबूत कदमों का परिचायक है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत के निर्माण की यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में छत्तीसगढ़ भी अपनी पूरी सामर्थ्य के साथ सहभागी है। राज्य सरकार ‘विकसित भारत–विकसित छत्तीसगढ़’ के ध्येय के अनुरूप निवेश, उद्योग, अधोसंरचना, रोजगार और नवाचार को गति देते हुए प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

ब्रेकिंग: राज्य सरकार ने जारी किया आदेश,इस विभाग में 10 अधिकारियों के तबादले,देखे आदेश…

ब्रेकिंग: राज्य सरकार ने जारी किया आदेश,इस विभाग में 10 अधिकारियों के तबादले,देखे आदेश…

  रायपुर :- छत्तीसगढ़ जीएसटी विभाग बड़ा प्रशासनिक फेरबदल (CG GST Transfer) किया गया है।  राज्य सरकार ने ज्वाइंट कमिश्नर स्तर के 10 अधिकारियों के ट्रांसफर का आदेश जारी किए हैं। इस फेरबदल में बिजनेस इंटेलिजेंस यूनिट (BIU) की जिम्मेदारी भी बदली गई है।

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राज्यपाल रमेन डेका से राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल रमेन डेका से राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने की सौजन्य भेंट

 रायपुर--छत्तीसगढ़ के राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष  गणेश शंकर मिश्रा ने सौजन्य भेंट की।

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष  गणेश शंकर मिश्रा ने सौजन्य भेंट की।

इस अवसर पर  मिश्रा ने राज्यपाल  डेका का अभिवादन किया। भेंट के दौरान राज्य के समग्र एवं सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

नवनियुक्त राज्यपालों को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई एवं शुभकामनाएं

नवनियुक्त राज्यपालों को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई एवं शुभकामनाएं

 मुख्यमंत्री ने कहा- समृद्ध अनुभव और कुशल मार्गदर्शन से संबंधित राज्यों में सुशासन एवं जनकल्याण को मिलेगी नई मजबूती

रायपुर-- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा विभिन्न राज्यों के लिए नियुक्त राज्यपालों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने केरल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त ओम प्रकाश माथुर, तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में नियुक्त राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, ओडिशा के राज्यपाल के रूप में नियुक्त  ब्रज मोहन राम, कर्नाटक की राज्यपाल के रूप में नियुक्त डॉ. सुधा यादव, उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में नियुक्त डॉ. ढाल सिंह बिसेन तथा सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्त  दुष्यंत गौतम को नवीन दायित्व के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सभी नवनियुक्त राज्यपालों का दीर्घ सार्वजनिक जीवन, समृद्ध अनुभव और कुशल मार्गदर्शन संबंधित राज्यों की विकास यात्रा को नई गति प्रदान करेगा तथा सुशासन, जनकल्याण और संवैधानिक मूल्यों को और सुदृढ़ करेगा।

मुख्यमंत्री  साय ने सभी नवनियुक्त राज्यपालों के सफल, यशस्वी एवं गरिमामय कार्यकाल की मंगलकामना की है।

सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों का गंभीरता से निराकरण करें - मुख्य सचिव

सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों का गंभीरता से निराकरण करें - मुख्य सचिव

00 समस्याओं का भौतिक सत्यापन कर जवाबदेही के साथ करें कार्रवाई
00 धान खरीदी नीति, जल जीवन मिशन, डिजिटल क्रॉप सर्वे और विभागीय योजनाओं की प्रगति की हुई समीक्षा

रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील ने सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के निराकरण को प्राथमिकता देते हुए सभी विभागों को जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य स्तरीय उच्चाधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को गंभीरता से लें, समस्याओं का कराएं भौतिक सत्यापन
मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन में अब तक राज्य में लगभग दो लाख शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। उन्होंने सभी विभागों को शिकायतों की गंभीरता से समीक्षा करने तथा समस्याओं का वास्तविक स्वरूप जानने के लिए आवश्यकतानुसार भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिकायतों का निराकरण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संबंधित नागरिकों की समस्याओं का वास्तविक समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग करने और निराकरण की गुणवत्ता में सुधार लाने पर विशेष ध्यान देने को कहा।

धान खरीदी नीति और जल जीवन मिशन की तैयारियों की समीक्षा

बैठक में आगामी धान खरीदी के लिए नीति तैयार करने तथा जल जीवन मिशन से संबंधित नीति के शेष बिंदुओं को समय पर पूरा करने के संबंध में चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को सभी आवश्यक बिंदुओं की समीक्षा कर कमियों को दूर करने तथा कार्ययोजना को व्यवस्थित रूप से अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने जल उपयोगिता से जुड़े विषयों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।
डिजिटल क्रॉप सर्वे और अन्य विभागीय विषयों पर चर्चा
बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे की समीक्षा करने तथा संबंधित विषयों पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। प्लानिंग एरिया में अनुमति, टीएसपी एक्ट तथा प्रावधानों पर भी चर्चा की गई।
पारस पोर्टल के एजेंडा बिंदुओं और आधारभूत परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में पारस पोर्टल के अंतर्गत शामिल एजेंडा बिंदुओं पर चर्चा की गई। आधारभूत संरचना से जुड़ी परियोजनाओं को बिना अनावश्यक विलंब के आगे बढ़ाने तथा जल जीवन मिशन और अमृत 2.0 सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए। पेंशन और प्रशिक्षण से संबंधित विषयों की भी समीक्षा की गई।
कर्मचारी चयन मंडल को समय पर भेंजे प्रस्ताव
मुख्य सचिव ने कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया के लिए संबंधित विभागों को अपनी आवश्यकताएं एवं प्रस्ताव समय पर भेजने के निर्देश दिए। सभी विभाग अपने-अपने विषयों और प्रस्तावों का सावधानीपूर्वक परीक्षण करें। बैठक में सेवा सेतु, नियामकीय प्रावधानों तथा लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे से बाहर रह गई प्रेडिसेसर सर्विसेज को इसके अंतर्गत लाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
नवा रायपुर में प्रस्तावित बॉटनिकल गार्डन के विकास पर जोर

बैठक में नवा रायपुर में प्रस्तावित बॉटनिकल गार्डन के विकास एवं बेहतर प्रबंधन के संबंध में चर्चा की गई। बॉटनिकल गार्डन में आधुनिक तकनीकों, लैंडस्केपिंग, हरित क्षेत्र के प्रबंधन और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं का अध्ययन कर उपयोगी पहलुओं को अपनाने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को बॉटनिकल गार्डन के सुनियोजित विकास, आकर्षक स्वरूप और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जंगल सफारी के प्रबंधन, संचालन और सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनीष कुमार ठाकुर, नगरीय प्रशासन विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, खनिज साधन विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहुल भगत, मुख्यमंत्री के सचिव एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ.रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, कौशल विकास विभाग के सचिव बसवराजु एस., कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अविनाश चम्पावत, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. सारांश मित्तर सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।