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RPF के 42वें स्थापना दिवस पर उत्कृष्ट अधिकारी-जवान सम्मानित, सेगवे परेड ने मोहा मन

RPF के 42वें स्थापना दिवस पर उत्कृष्ट अधिकारी-जवान सम्मानित, सेगवे परेड ने मोहा मन

 रायपुर.रेलवे सुरक्षा बल ने उत्साह और उल्लास के साथ 42वां स्थापना दिवस मनाया. रेलवे वर्कशॉप ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवा के लिए अधिकारियों और जवानों को 3 राष्ट्रपति पुलिस पदक, 30 पुलिस पदक और एक जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया गया.

इस अवसर पर महिला दस्ता, कोरास कमांडो, डॉग स्क्वॉड और सेगवे दस्ते ने प्रदर्शन किया. इसके साथ तकनीकी प्रदर्शनी में ड्रोन निगरानी, ह्यूमनॉइड रोबोट ‘अर्जुन’ और आधुनिक डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों की झलक नजर आई. कार्यक्रम में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर मिनल चौबे, RPF की महानिदेशक सोनाली मिश्रा, डीजीपी अरुण देव गौतम, रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला के अलावा रेलवे और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.

कार्यक्रम के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे सुरक्षा बल के स्थापना दिवस पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं. रेलवे संपत्ति की रक्षा करें. विश्वास बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है. भारतीय रेल जीवन की अभुक्त शक्ति है. रेलवे को सुरक्षित करने में रेलवे सुरक्षा बल की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है. महिलाओं बच्चों के अत्यंत प्रति निष्ठा से अपने दायित्व का निर्वहन करते रहेंगे. हम इसी सेवा भाव की कर्तव्य मान कर चलेंगे. इसमें आपकी भूमिका महत्वपूर्ण है. रेलवे का अनुशासन ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है. सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को मै नमन करता हूं. पदक विजेताओं को बधाई देता हूं.

इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में RPF को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा है. यहां बम ब्लास्ट होता था, पटरिया उखाड़ ली जाती थी. ऐसे समय में यहां कार्यक्रम हुआ है. जब यहां से नक्सल समाप्त हो चुका है. आज हमने यहां बल का प्रदर्शन देखा है. जोन और आईटी का उपयोग करके यहां पर यात्रियों को सुविधा उपलब्ध कराने काम कर रहा है. रेल मंत्री ने पूरी फोर्स को पूरा सपोर्ट किया है. हमारे देश में सबसे ज्यादा ट्रैवल करते हैं. महिलाएं लोकल ट्रेन में यात्रा ज्यादा से ज्यादा करें. उसके लिए RPF काम कर रहा है.

रेलवे महानिदेशक RPF सोनाली मिश्रा ने कहा कि जहां भी हमारी आश्यकता है, वहां विशेष रूप से काम करेंगे. अभी नए अभियान नशे को लेकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने शुरू किया है. टारगेट रखा है, उसमें हम हर प्रकार से सहयोग कर रहे हैं. रेल मंत्री ने मेसेज में बताया है. कमजोर वर्ग, महिलाएं-बच्चे की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. मेरा कैडर एमपी हैं, लेकिन मैने शुरुवात बिलासपुर से की है. आज बहुत खुशी हुई है.

ट्रेनों में गांजा सप्लाई पर कहा सोनाली मिश्रा ने कहा कि ज्वाइंट ऑपरेशन चल रहा है. हम लोग गारमेंट के सहयोग से काम कर रहे हैं. RPF और GRPF के साथ स्टेट पुलिस भी काम कर रही है. हमारा इसमें अरेस्ट भी बड़ी संख्या में बढ़ा है. हमारा जो टारगेट रखा गया है, उसमें भी हम काम करेंगे. हमने SOP नए बनाए हैं. ट्रैफिकर्स भी अपना मॉडल बदल रहे हैं. आने वाले समय में बेहतर कार्रवाई होगी.

पीएम मातृ वंदना योजना से लीलावती को मिला आर्थिक संबल, पौष्टिक आहार और दवाइयों की जरूरतें हुईं पूरी

पीएम मातृ वंदना योजना से लीलावती को मिला आर्थिक संबल, पौष्टिक आहार और दवाइयों की जरूरतें हुईं पूरी

 सेवा संकल्प अभियान-2026

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मिल रहा बढ़ावा, दूसरी संतान बालिका होने पर 6 हजार रुपये की सहायता का भी प्रावधान

रायपुर- मातृत्व का समय हर महिला के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इस दौरान मां और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार, आवश्यक दवाइयों और नियमित देखभाल की विशेष जरूरत होती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इन आवश्यकताओं को पूरा करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कृष्णापुर निवासी श्रीमती लीलावती को भी इस योजना से बड़ी राहत मिली है। उन्हें दो किस्तों में कुल 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई, जिसका उपयोग उन्होंने पौष्टिक भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में किया। लीलावती बताती हैं कि योजना से मिली सहायता के कारण उन्हें मातृत्व के दौरान अपनी और बच्चे की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सुविधा हुई। वर्तमान में वे और उनका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत लीलावती की यह कहानी दर्शाती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता जरूरतमंद महिलाओं के लिए कितनी उपयोगी साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री माताओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य, पोषण और शिशु की बेहतर देखभाल को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

दो किस्तों में मिली 5 हजार रुपये की सहायता, मातृत्व के दौरान मिला सहारा
लीलावती बताती हैं कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत उन्हें पहली किस्त में 3 हजार रुपये और दूसरी किस्त में 2 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। कुल 5 हजार रुपये की इस राशि से उन्होंने अपने लिए पौष्टिक आहार, आवश्यक दवाइयों और अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था की। मातृत्व के दौरान स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है और ऐसे समय में मिलने वाली आर्थिक सहायता से परिवार पर पड़ने वाला खर्च का बोझ भी कुछ कम हो जाता है।

उन्होंने बताया कि योजना का लाभ मिलने से उन्हें अपनी सेहत के साथ बच्चे के स्वास्थ्य की देखभाल करने में भी मदद मिली। पौष्टिक भोजन और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था करने में सहायता राशि उपयोगी साबित हुई। लीलावती के अनुसार, मातृत्व के समय मिलने वाला यह आर्थिक सहयोग उनके लिए महत्वपूर्ण था। आज वे और उनका बच्चा स्वस्थ हैं, जिससे परिवार में खुशी है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्रोत्साहन, दूसरी संतान बालिका होने पर भी सहायता का प्रावधान
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण को बढ़ावा देना है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रथम संतान के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार कुल 5 हजार रुपये की सहायता राशि दो किस्तों में प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त दूसरी संतान बालिका होने पर पात्रता एवं योजना के प्रावधानों के अनुसार 6 हजार रुपये की सहायता राशि एकमुश्त प्रदान किए जाने का प्रावधान है।

योजना के माध्यम से महिलाओं को गर्भावस्था और प्रसव के बाद स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक सहयोग मिलता है। विशेष रूप से सीमित आय वाले परिवारों में यह सहायता पौष्टिक भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करने में उपयोगी साबित हो रही है। इससे माताओं को अपने स्वास्थ्य के साथ नवजात शिशु की देखभाल पर भी ध्यान देने में मदद मिलती है।

योजना से मिली राहत, लीलावती ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ मिलने पर लीलावती ने खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि मातृत्व के दौरान प्राप्त 5 हजार रुपये की सहायता राशि से उन्हें पौष्टिक भोजन और दवाइयों सहित अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में सहयोग मिला। इससे वे अपनी और बच्चे की सेहत का बेहतर ध्यान रख सकीं। लीलावती का कहना है कि मातृत्व के समय महिलाओं को स्वास्थ्य और पोषण संबंधी अनेक जरूरतें होती हैं। ऐसे में योजना से मिलने वाली सहायता राशि काफी उपयोगी होती है। उन्होंने इस आर्थिक सहयोग के लिए शासन के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए बताया कि वर्तमान में वे और उनका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु के संकल्प को मिल रहा संबल
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत ग्राम कृष्णापुर की लीलावती की कहानी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में संचालित योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव का उदाहरण है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से प्राप्त 5 हजार रुपये की सहायता राशि ने उन्हें मातृत्व के दौरान पौष्टिक आहार, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करने में सहयोग दिया। यह आर्थिक सहायता उनके लिए अपनी और बच्चे की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी।

लीलावती का अनुभव बताता है कि मातृत्व के समय मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं को स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने में मदद कर सकती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को मिल रहा यह सहयोग स्वस्थ मातृत्व, बेहतर शिशु देखभाल और परिवार के सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

महतारी वंदन की राशि से बेटी समीक्षा के सपनों को संवार रहीं अनीता सिंह

महतारी वंदन की राशि से बेटी समीक्षा के सपनों को संवार रहीं अनीता सिंह

 महतारी वंदन और सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ लेकर अनीता ने पेश की आर्थिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल

रायपुर- हर मां की ख्वाहिश होती है कि उसकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे, आत्मनिर्भर बने और अपने सपनों को साकार करे। बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बड़ी रकम से ज्यादा जरूरी है समय रहते बचत की शुरुआत करना। इसी सोच को अपने जीवन में उतार रही हैं सरगुजा जिले की श्रीमती अनीता सिंह। वे महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की पूरी राशि अपनी बेटी समीक्षा सिंह के नाम पर खोले गए सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं। इस तरह शासन से मिलने वाली आर्थिक सहायता को उन्होंने बेटी की शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए नियमित बचत का माध्यम बना लिया है।

अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत कृष्णापुर निवासी अनीता सिंह की यह पहल महिला आर्थिक सशक्तिकरण और बेटियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति जागरूकता का प्रेरक उदाहरण है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता राशि को वे दैनिक खर्चों में उपयोग करने के बजाय बेटी के भविष्य के लिए सुरक्षित रख रही हैं। प्रतिमाह एक हजार रुपये की इस बचत से एक वर्ष में 12 हजार रुपये जमा होंगे, जो आने वाले समय में समीक्षा की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं।

महतारी वंदन की राशि बनी बेटी के भविष्य की पूंजी
अनीता सिंह बताती हैं कि उन्होंने अपनी बेटी समीक्षा सिंह के नाम पर सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खुलवाया है। महतारी वंदन योजना से उनके बैंक खाते में प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त होती है। इस पूरी राशि को वे नियमित रूप से बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर देती हैं।

उनका कहना है कि बेटी की अच्छी शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए अभी से आर्थिक तैयारी करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि को बचत में बदलने का निर्णय लिया।

अनीता का मानना है कि छोटी-छोटी राशि को नियमित रूप से जमा करने से भविष्य में एक अच्छी पूंजी तैयार की जा सकती है। इससे बेटी की उच्च शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहारा मिलेगा।

हर महीने एक हजार रुपये की बचत, सालभर में 12 हजार रुपये का संचय
अनीता सिंह की बचत की यह पहल आर्थिक नियोजन का भी उदाहरण है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक राशि को वे सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं।

इस तरह नियमित बचत जारी रखने पर एक वर्ष में 12 हजार रुपये की मूल राशि जमा होगी। सुकन्या समृद्धि योजना के प्रावधानों के अनुसार जमा राशि पर निर्धारित ब्याज का लाभ भी मिलता है, जिससे समय के साथ बचत में वृद्धि हो सकती है।

अनीता बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता के कारण उन्हें बेटी के लिए बचत करने में सुविधा हो रही है। इस राशि को वे समीक्षा की आगे की पढ़ाई और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए सुरक्षित रखना चाहती हैं।

दो योजनाओं को जोड़कर बेटी की शिक्षा के लिए कर रहीं आर्थिक तैयारी
अनीता सिंह ने महतारी वंदन योजना और सुकन्या समृद्धि योजना का उपयोग एक-दूसरे के पूरक के रूप में किया है। महतारी वंदन योजना से उन्हें हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त होती है, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना में वे इस राशि को बेटी के भविष्य के लिए जमा कर रही हैं।

इस प्रकार एक योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता दूसरी योजना के माध्यम से दीर्घकालिक बचत का आधार बन रही है। अनीता का यह प्रयास दर्शाता है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाली सहायता का सुनियोजित उपयोग कर परिवार की भविष्य की जरूरतों के लिए आर्थिक तैयारी की जा सकती है।

बेटी की अच्छी शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही मां का सपना
अनीता सिंह चाहती हैं कि उनकी बेटी समीक्षा अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और जीवन में आगे बढ़े। वे अपनी बेटी के भविष्य को लेकर अभी से सजग हैं और नियमित बचत के माध्यम से उसकी शिक्षा के लिए आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं।

उनका कहना है कि बच्चों की उच्च शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए समय रहते बचत करना आवश्यक है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। अनीता के लिए हर महीने जमा किए जाने वाले एक हजार रुपये केवल बचत की राशि नहीं, बल्कि बेटी के सपनों को पूरा करने की दिशा में किया गया एक प्रयास है।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
महतारी वंदन और सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ मिलने पर अनीता सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है। इस राशि का उपयोग वे अपनी बेटी समीक्षा के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा करने के लिए कर रही हैं।

अनीता ने बताया कि योजना से मिलने वाली सहायता ने उन्हें बेटी के भविष्य के लिए नियमित बचत करने का अवसर दिया है। इससे वे उसकी शिक्षा और आगे की जरूरतों के लिए आर्थिक तैयारी कर पा रही हैं।

छोटी बचत से बड़े सपनों को संबल, अनीता की पहल बनी प्रेरणा
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत अनीता सिंह की कहानी यह संदेश देती है कि आर्थिक सहायता का सही नियोजन परिवार के भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अबूझमाड़ के दुर्गम अंचल में ‘सौर क्रांति’: सोलर ड्यूल पंप से 371 गांवों तक पहुँच रहा स्वच्छ पेयजल

अबूझमाड़ के दुर्गम अंचल में ‘सौर क्रांति’: सोलर ड्यूल पंप से 371 गांवों तक पहुँच रहा स्वच्छ पेयजल

 अबूझमाड़ के दुर्गम अंचल में 'सौर क्रांति': सोलर ड्यूल पंप से 371 गांवों तक पहुँच रहा स्वच्छ पेयजल

​जल जीवन मिशन एवं क्रेडा की संयुक्त पहल से नारायणपुर जिले के वनांचल में बदली पेयजल की तस्वीर

​1,064 सोलर ड्यूल पंपों के लक्ष्य में से 849 पंप स्थापित; दूरस्थ पारा-टोलों को 'झिरिया' के दूषित जल से मिली मुक्ति

सौर ऊर्जा आधारित तकनीक से विद्युतविहीन क्षेत्रों में 24/7 सुरक्षित पेयजल की सुनिश्चितता

रायपुर :- छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के दुर्गम वनांचल एवं पथरीले अंचलों में, जहाँ कभी एक-एक मटका पानी के लिए ग्रामीणों को मीलों का कठिन सफर तय करना पड़ता था या झिरिया के दूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ता था, वहाँ अब सौर ऊर्जा एक वरदान बनकर उभरी है। राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप जल जीवन मिशन और छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के साझा प्रयासों से संचालित सोलर ड्यूल पंप योजना ने अबूझमाड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। इस दूरदर्शी पहल का मुख्य उद्देश्य जिले के दूरदराज वाले पारा-टोलों तक स्वच्छ पेयजल की नियमित पहुँच सुनिश्चित करना है, जिससे ग्रामीणों को झिरिया के दूषित जल से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।
        ​नारायणपुर जिले की भौगोलिक परिस्थितियाँ, कठिन वनांचल और बिखरी हुई बसाहटें पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा को हर घर तक पहुँचाने में हमेशा से बड़ी चुनौती रही हैं। ऐसे क्षेत्रों में पीने का साफ पानी सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील विषय है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिले के 371 ग्रामों एवं पारा-टोलों को स्वच्छ पेयजल से जोड़ने के लिए कुल 1,064 सोलर ड्यूल पंप स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। क्रेडा और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के निरंतर प्रयासों से अब तक 849 पंपों की सफल स्थापना पूरी की जा चुकी है, जिससे एक बड़े क्षेत्र में पेयजल संकट दूर हुआ है।
        ​सोलर ड्यूल पंपों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होते हैं। बिजली की अनिश्चितता वाले या विद्युतविहीन दूरस्थ क्षेत्रों में भी यह प्रणाली बिना किसी रुकावट के चौबीसों घंटे पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करती है। जिले के नेलांगुर, पदमकोट, जाटलूर, उसेबेड़ा, हरबेल, कस्तुरमेंटा-2, धुरबेड़ा और गुमरका जैसे अत्यंत संवेदनशील व दुर्गम गाँवों में इन पंपों के शुरू होने से ग्रामीणों को अपने घर के पास ही शुद्ध पानी मिलने लगा है। इससे पानी जुटाने के लिए दूर जाने की मजबूरी खत्म हुई है, जिससे ग्रामीणों के दैनिक श्रम और समय दोनों की बड़ी बचत हो रही है।
       ​पेयजल की सुलभता का सबसे सुखद और सीधा प्रभाव ग्रामीण महिलाओं और परिवारों की जीवनशैली पर पड़ा है। पहले जहाँ महिलाओं को पानी के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ती थी, वहीं अब वे उस समय का उपयोग अन्य आजीविका गतिविधियों और अपने बच्चों की देखभाल में कर पा रही हैं। इसके साथ ही, शुद्ध पेयजल की उपलब्धता से दूषित पानी के सेवन से होने वाली जलजनित बीमारियों पर प्रभावी रोक लगी है और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। शेष बचे पंपों की स्थापना का कार्य भी तेजी से जारी है। नारायणपुर में सोलर ड्यूल पंपों का यह सफल प्रयोग न केवल दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुँचाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ में ग्रीन एनर्जी के माध्यम से समावेशी और सतत ग्रामीण विकास की एक नई इबारत भी लिख रहा है।

गन्ना बोनस में बढ़ोतरी से भोरमदेव कारखाने के 14,961 किसानों को मिलेगी बोनस राशि

गन्ना बोनस में बढ़ोतरी से भोरमदेव कारखाने के 14,961 किसानों को मिलेगी बोनस राशि

 प्रदेश के चारो शक्कर कारखानों के 31,022 किसानों को मिलेगा 51.09 करोड़ रुपए का लाभ

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गन्ना बोनस की गणना का आधार 355 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 425 रूपए प्रति क्विंटल किए जाने से गन्ना किसानों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से लिए गए इस निर्णय से गन्ना किसानों को बढ़ी हुई दर से बोनस का लाभ मिलेगा। इस निर्णय के फलस्वरूप पेराई सत्र 2025-26 में भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना मर्यादित, राम्हेपुर, कवर्धा को गन्ना बेचने वाले 14,961 किसानों को लगभग 24.55 करोड़ रुपए की बोनस राशि प्राप्त होगी।

पेराई सत्र 2025-26 के लिए बोनस गणना में एफआरपी 329.05 रुपए प्रति क्विंटल का आधार लिया गया है। बढ़ी हुई दर के अनुसार 425 रुपए में से एफआरपी घटाने पर किसानों को 95.95 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस मिलेगा। भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने में पेराई सत्र 2025-26 के दौरान कुल 25,58,188 क्विंटल गन्ने की पेराई हुई। इस मात्रा पर 95.95 रुपए प्रति क्विंटल की दर से लगभग 24.55 करोड़ रुपए की बोनस राशि बनेगी, जिसका लाभ कारखाने को गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों को मिलेगा।

नवरात्रि से पहले गन्ना उत्पादकों को प्रदेश सरकार ने दिया तोहफा
 प्रदेश के चारों सहकारी शक्कर कारखानों में पेराई सत्र 2025-26 के दौरान कुल 53,25,120 क्विंटल गन्ने की पेराई हुई है। इस आधार पर प्रदेश के कुल 31,022 गन्ना विक्रेता किसानों को लगभग 51.09 करोड़ रुपए की बोनस राशि प्राप्त होगी। नवरात्रि से पहले राज्य सरकार के इस निर्णय से गन्ना किसानों में हर्ष व्याप्त है। इससे किसानों को आर्थिक संबल मिलेगा। बढ़ी हुई बोनस राशि से किसानों को खेती की लागत वहन करने, समय पर कृषि कार्य कराने तथा आगामी फसल की बेहतर तैयारी करने में सहायता मिलेगी। इस निर्णय से कबीरधाम जिले के गन्ना किसानों में खुशी का माहौल है। किसानों ने गन्ना बोनस की गणना का आधार बढ़ाने के निर्णय पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया है। बढ़ी हुई बोनस राशि से किसानों को खेती की लागत वहन करने और आगामी फसल की तैयारी में आर्थिक सहायता मिलेगी।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 78.51 लाख रुपए के दो सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्यों का किया भूमिपूजन

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 78.51 लाख रुपए के दो सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्यों का किया भूमिपूजन

 रायपुर- उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों को गति देते हुए मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के अंतर्गत कबीरधाम जिले में कुल 78.51 लाख रुपए की लागत से सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया। इस अवसर पर क्षेत्र की महिलाओं की सहभागिता के साथ भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ। भूमिपूजन के साथ ही दोनों निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिए गए। इन निर्माण कार्यों के पूर्ण होने से ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलेगी तथा व्यवस्थित नाली निर्माण से जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी। इससे गांवों में सड़क एवं नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और ग्रामीणों को दैनिक आवागमन में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।

       मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के अंतर्गत ग्राम धरमपुरा में मानिकचौरी मेन रोड से धान खरीदी केंद्र एवं गौठान तक 49.74 लाख रुपए की लागत से 0.5 किलोमीटर लंबाई में सीसी सड़क सह नाली का निर्माण किया जाएगा। इस निर्माण कार्य से ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही सड़क के किनारे नाली निर्माण होने से जल निकासी व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही ग्राम बिरकोना में 28.77 लाख रुपए की लागत से 0.25 किमी लंबाई में सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्य कराया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने संबंधित अधिकारी और ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश दिए।

     उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में ग्राम बिरकोना में 1 करोड़ 2 लाख 96 हजार रुपए तथा ग्राम धरमपुरा में  1 करोड़ 24 लाख 7 हजार रुपए की लागत से विभिन्न विकास कार्य कराए गए हैं। इसके साथ ही दोनों गांवों में सैकड़ों प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण भी किया गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों को पक्के मकान की सुविधा मिली है। सरकार का उद्देश्य गांवों में सड़क, नाली, आवास सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार कर ग्रामीणों के जीवन को और अधिक सुविधाजनक बनाना है।

    उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने कहा कि कवर्धा विधानसभा क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। इसके तहत स्कूलों में लगाई गई स्क्रीन के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ करियर काउंसलिंग और कोचिंग की सुविधा भी मिलेगी।विधानसभा क्षेत्र के कुल 85 स्कूलों में से अब तक 50 स्कूलों में स्क्रीन लगाई जा चुकी हैं। शेष 35 स्कूलों में भी स्क्रीन लगाने की योजना है। इसके अलावा क्षेत्र के सभी 8 छात्रावासों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल के तहत देश के प्रमुख ऑनलाइन शिक्षा संस्थानों में शामिल फिजिक्स वाला के माध्यम से विद्यार्थियों को कोचिंग उपलब्ध कराने के लिए बातचीत की गई है। योजना के अनुसार, विद्यार्थियों को स्कूलों और छात्रावासों में ही स्क्रीन के माध्यम से ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य महंगी कोचिंग और दूसरे शहरों में जाकर पढ़ाई करने की मजबूरी को कम करना तथा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना है।

     तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में साहसिक कार्य किया गया है। वे बिरकोना और धरमपुरा जैसे गांवों की जरूरतों को समझते हुए लगातार विकास कार्यों को गति प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों द्वारा भूमिपूजन किया जाना भी सराहनीय है, क्योंकि महिलाओं की भागीदारी के बिना समाज और क्षेत्र का विकास संभव नहीं है। विकास एक सतत प्रक्रिया है, जो कभी रुकनी नहीं चाहिए। इस दौरान पुर्व विधायक मोतीराम चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य बीरेंद्र साहू ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

भूमिपूजन के साथ ही शुरू हुए निर्माण कार्य
      उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नाली सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देते हुए इन निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया। दोनों कार्यों को भूमिपूजन के साथ ही प्रारंभ कर दिया गया है। इन निर्माण कार्यों से धरमपुरा और बिरकोना के ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध होने के साथ ही गांवों में बुनियादी अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के फ्रेंचाइजीस और टीमों का ऐलान, सभी टीमों की जर्सी लॉन्च

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के फ्रेंचाइजीस और टीमों का ऐलान, सभी टीमों की जर्सी लॉन्च

 ओलंपियन सुरेंद्र कुमार, प्रदीप मोर, एस.वी. सुनील, ललित कुमार उपाध्याय, शमशेर सिंह और चिंगलेनसाना सिंह करेंगे टीमों की अगुवाई

रायपुर- भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सफल फील्ड हॉकी खिलाड़ियों में से एक सरदार सिंह को छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन का लीग एंबेसडर घोषित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा आयोजित भारत की पहली हॉकी लीग, छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का उद्घाटन सीजन 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक राजधानी रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में आयोजित होगा। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव के मुख्य आतिथ्य में आज रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित एक कार्यक्रम में लीग की छह फ्रेंचाइज़ीस और टीमों का ऐलान किया गया। ड्रा के जरिए फ्रेंचाइजीस को टीमों के आबंटन के साथ ही सभी टीमों की जर्सी भी लॉन्च की गई। टीम ड्रॉ के माध्यम से प्रत्येक फ्रेंचाइज़ी को 22 खिलाड़ियों का दल और एक मुख्य कोच आबंटित किया गया।
 
उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम में कहा, “छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन के लिए सरदार सिंह जैसी प्रतिष्ठित शख्सियत को लीग एंबेसडर बनाना हमारे युवा खिलाड़ियों को सही संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वह भारत के सबसे प्रतिष्ठित हॉकी खिलाड़ियों में से एक हैं और उनकी विशेषज्ञता से इस लीग को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।”

श्री साव ने जमीनी स्तर पर छत्तीसगढ़ में हॉकी को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देने के लिए लीग और फ्रेंचाइज़ी टीमों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “मैं उन छह टीम मालिकों और प्रायोजकों का हार्दिक स्वागत करता हूं, जिन्होंने हमारे खेल का समर्थन करने और इसमें निवेश करने का निर्णय लिया है। हॉकी को बढ़ावा देने के लिए उनका दृष्टिकोण और दृढ़ संकल्प सराहनीय है। राज्य में हॉकी के पुनरुत्थान की इस महत्वपूर्ण पहल में सरकार के साथ साझेदारी के लिए मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं।”

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लीग एंबेसडर सरदार सिंह ने कहा, “एक पूर्व खिलाड़ी और अब हॉकी इंडिया के साथ कोच के रूप में मैंने छत्तीसगढ़ में खेलों के विकास को करीब से देखा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षा राज्य को एक खेल राज्य के रूप में विकसित करने की है। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की शुरुआत एक ऐसी पहल है, जो दूसरे राज्यों के लिए मिसाल बनेगी। मुझे विश्वास है कि इससे छत्तीसगढ़ के हॉकी खिलाड़ियों को बहुत लाभ मिलेगा। सीएचएल का लीग एंबेसडर बनना मेरे लिए केवल एक मानद पद नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सितारों के रूप में विकसित करने में योगदान देने का अवसर भी है।”

सीएचएल में छह फ्रेंचाइज़ी टीमें शामिल हैं, जिनमें राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज खिलाड़ियों, ओलंपियनों, स्थानीय प्रतिभाओं और छत्तीसगढ़ क्षेत्र के अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार मिश्रण देखने को मिलेगा। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को उच्च स्तरीय मंच उपलब्ध कराना और राज्य में घरेलू हॉकी के ढांचे को मजबूत करना है।

प्रतियोगिता की छह फ्रेंचाइजी टीमों के साथ प्रतिष्ठित संस्थान जुड़े हैं। चक्रधर चैंपियंस की फ्रेंचाइजी जिंदल स्टील लिमिटेड, न्यायधानी नाइट्स की साउथ इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), राजधानी रॉयल्स की बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड, मैनपाट टाइगर्स की छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स की सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड और बैलाडीला बुल्स की फ्रेंचाइजी एनएमडीसी लिमिटेड के पास है।

विजेता को मिलेंगे 11 लाख रुपए, 18 पुरुष मुकाबलों के साथ महिला हॉकी का भी दिखेगा रोमांच

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में छह फ्रेंचाइजी टीमों के कुल 132 खिलाड़ी मैदान में उतरेंगे। इनमें छत्तीसगढ़ के 108 स्थानीय और 24 अतिथि खिलाड़ी शामिल हैं। प्रत्येक टीम में 22 खिलाड़ी होंगे। इनमें चार अतिथि खिलाड़ी शामिल रहेंगे। हर टीम में एक पूर्व ओलंपियन मार्की खिलाड़ी भी होगा। 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक आयोजित इस लीग में 18 पुरुष हॉकी मुकाबले और एक प्रदर्शनी महिला हॉकी मैच खेला जाएगा। खिलाड़ियों के लिए कुल 21 लाख रुपए की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। विजेता टीम को 11 लाख और उपविजेता को छह लाख रुपए मिलेंगे। दर्शक सभी मुकाबलों का नि:शुल्क आनंद ले सकेंगे। हॉकी के रोमांच के साथ छत्तीसगढ़ी संस्कृति और मनोरंजन का भी रंग जमेगा।

लीग की सबसे बड़ी खासियत प्रत्येक टीम में एक पूर्व ओलंपियन का मार्की खिलाड़ी के रूप में शामिल होना है। इन छह दिग्गज खिलाड़ियों में एस.वी. सुनील, सुरेंद्र कुमार, ललित कुमार उपाध्याय, चिंगलेनसाना सिंह, शमशेर सिंह और प्रदीप मोर के नाम शामिल हैं। इन अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी से स्थानीय खिलाड़ियों को भी मैदान पर उनके साथ खेलने का अवसर मिलेगा।

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए पुरस्कारों की भी आकर्षक व्यवस्था की गई है। कुल 21 लाख रुपए की पुरस्कार राशि में से 17 लाख रुपए विजेता और उपविजेता टीमों के लिए निर्धारित हैं। विजेता टीम को 11 लाख रुपए तथा उपविजेता को छह लाख रुपए दिए जाएंगे। व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिए अलग-अलग श्रेणियों में कुल चार लाख रुपए के पुरस्कार रखे गए हैं।

बरसात में टपकती छत से मिली मुक्ति, पीएम जनमन आवास से संगीता पहाड़ी कोरवा का पक्के घर का सपना हुआ साकार

बरसात में टपकती छत से मिली मुक्ति, पीएम जनमन आवास से संगीता पहाड़ी कोरवा का पक्के घर का सपना हुआ साकार

 सेवा संकल्प अभियान-2026

कभी खपरैल की छत से टपकता था पानी, अब अपने पक्के मकान में सुरक्षित और सुकून भरा जीवन जी रहा परिवार

प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से मिली सुरक्षित छत, घर में नल से पानी की सुविधा ने भी आसान बनाया जीवन

पक्का आशियाना मिलने पर संगीता ने जताई खुशी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति व्यक्त किया आभार

रायपुर- कभी आसमान में बादल छाते ही संगीता पहाड़ी कोरवा की चिंता बढ़ जाती थी। खपरैल और कच्ची छत वाले मकान में बारिश का पानी टपकने लगता था। बरसात के दिनों में घर के भीतर पानी आने से परिवार को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से संगीता के परिवार को अपना पक्का आशियाना मिल गया है। जिस परिवार के लिए कभी बारिश का मौसम परेशानियों का कारण बन जाता था, वह आज अपने पक्के मकान में सुरक्षित और सुकून भरा जीवन व्यतीत कर रहा है।

सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खाला के कोरवा पारा निवासी संगीता पहाड़ी कोरवा की यह कहानी शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण परिवारों के जीवन में आ रहे बदलाव का उदाहरण है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने उनके परिवार को न केवल पक्की छत उपलब्ध कराई है, बल्कि वर्षों से कच्चे मकान में रहने की परेशानियों से भी राहत दिलाई है।

बरसात में टपकती थी छत, कच्चे मकान में रहना था मुश्किल
संगीता बताती हैं कि पहले उनका परिवार खपरैल और कच्ची छत वाले मकान में रहता था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और घर के भीतर पानी आने से काफी परेशानी होती थी। बरसात के दौरान परिवार को घर में सुरक्षित रहने और घरेलू सामान को पानी से बचाने की चिंता बनी रहती थी। कच्चे मकान की असुविधाओं के बीच जीवन गुजारना उनकी मजबूरी थी।

संगीता के मन में भी अपने परिवार के लिए एक पक्का घर होने का सपना था, जहां बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने की परेशानी न हो और परिवार सुरक्षित रह सके।प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से मिला लाभ उनके इसी सपने को साकार करने का माध्यम बना।

पीएम जनमन आवास से मिला अपना पक्का घर, वर्षों पुरानी परेशानी हुई दूर
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत संगीता पहाड़ी कोरवा को पक्के आवास का लाभ मिला। उनके मकान का निर्माण पूरा हो चुका है और अब वे अपने परिवार के साथ उसी घर में निवास कर रही हैं। संगीता बताती हैं कि पहले बारिश होने पर घर में पानी टपकता था, लेकिन अब पक्का मकान बनने से यह परेशानी दूर हो गई है। परिवार को सुरक्षित छत मिलने के साथ रहने की बेहतर सुविधा भी उपलब्ध हुई है।

उनके पति का नाम शनि लाल है। परिवार में सास-ससुर भी हैं, जो अलग रहते हैं। संगीता अपने परिवार के साथ नवनिर्मित पक्के मकान में रह रही हैं। उनका कहना है कि पक्का आवास मिलने से परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें पहले की तरह कच्ची छत और बारिश के पानी की चिंता नहीं करनी पड़ती।

पक्के आवास के साथ घर में नल से पानी की सुविधा, दैनिक जीवन हुआ आसान
संगीता के नवनिर्मित आवास में नल से पानी की सुविधा भी उपलब्ध है। इससे परिवार को घरेलू कार्यों के लिए पानी की व्यवस्था करने में सहूलियत मिल रही है। संगीता बताती हैं कि पक्का घर बनने के बाद रहने की व्यवस्था पहले से काफी बेहतर हुई है। घर में पानी की सुविधा उपलब्ध होने से दैनिक जरूरतों को पूरा करना भी आसान हुआ है। उनके लिए अपना पक्का मकान केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और सम्मान के साथ जीवन जीने का आधार बन गया है।

“पहले बरसात में पानी टपकता था, अब अपने पक्के घर में कोई परेशानी नहीं होती”
अपने पक्के आवास में रह रहीं संगीता पहाड़ी कोरवा खुशी व्यक्त करते हुए बताती हैं, “पहले हमारा खपरैल और कच्ची छत वाला घर था। बरसात में पानी टपकता था, जिससे बहुत परेशानी होती थी। अब आवास मिल गया है और घर भी पूरा बन गया है। हम उसी में रहते हैं, अब कोई परेशानी नहीं होती। घर में नल से पानी की सुविधा भी है।” संगीता के शब्दों में पक्का आवास मिलने की खुशी साफ झलकती है। वर्षों तक कच्चे मकान में परेशानियां झेलने के बाद अब उनका परिवार सुरक्षित छत के नीचे रह रहा है।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का लाभ मिलने पर संगीता पहाड़ी कोरवा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पक्का आवास मिलने से उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। अब वे अपने घर में सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से रह पा रही हैं। संगीता ने आत्मीयता के साथ कहा, “इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विष्णु भइया को बहुत-बहुत धन्यवाद।”

पीएम जनमन आवास से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार के जीवन में आया बदलाव
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों के पात्र परिवारों को पक्के आवास की सुविधा उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास प्रदान कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। संगीता पहाड़ी कोरवा की कहानी इसी बदलाव की एक तस्वीर प्रस्तुत करती है। कभी खपरैल की छत से टपकते पानी के बीच जीवन गुजारने वाला उनका परिवार आज अपने पक्के मकान में रह रहा है।पक्के आवास के साथ घर में नल से पानी की सुविधा मिलने से परिवार की दैनिक परेशानियां भी कम हुई हैं।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, परिसर में अत्याधुनिक बायोसेफ्टी प्रयोगशाला स्थापित

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, परिसर में अत्याधुनिक बायोसेफ्टी प्रयोगशाला स्थापित

 संक्रामक रोगों की पहचान, रोकथाम और वैक्सीन अनुसंधान को मिलेगी गति

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर परिसर में स्थापित अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल-3) प्रयोगशाला छत्तीसगढ़ में उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा अनुसंधान को नई दिशा देने के साथ ही वैज्ञानिक नवाचार और संक्रामक रोगों की रोकथाम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस प्रयोगशाला के माध्यम से संक्रामक रोगजनकों की पहचान, उनके वैज्ञानिक अध्ययन, वैक्सीन एवं उपचार संबंधी अनुसंधान तथा उन्नत नैदानिक तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं का विस्तार राज्य के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कृषि एवं पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था वाले छत्तीसगढ़ में इस प्रकार की उच्चस्तरीय वैज्ञानिक सुविधा का विशेष महत्व है।

उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवनिर्मित सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत स्थापित बायोसेफ्टी लेवल-3 प्रयोगशाला का लोकार्पण विगत 28 सितंबर को किया गया था। मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश चंदेल के प्रयासों की सराहना करते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीएसएल-3 प्रयोगशाला के माध्यम से पौधों, पशुओं और मानव स्वास्थ्य से जुड़े संक्रामक रोगों, विशेषकर पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले जूनोटिक रोगों के अध्ययन एवं निगरानी को नई गति मिलेगी। यह सुविधा गंभीर संक्रामक रोगों की शीघ्र पहचान, रोग प्रकोप से निपटने की तैयारी और उन्नत नैदानिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने में उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

उन्होंने कहा कि इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला में उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप नियंत्रित वातावरण उपलब्ध होगा, जिससे वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को संक्रामक रोगजनकों के अध्ययन तथा वैक्सीन एवं उपचार संबंधी अनुसंधान के नए अवसर प्राप्त होंगे। इससे राज्य में कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, पशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोग अनुसंधान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के परस्पर संबंधों पर आधारित 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को मजबूत बनाने में भी यह प्रयोगशाला महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में रोगों की निगरानी और वैज्ञानिक समाधान विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

श्री साय ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पहले से ही कृषि अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। विश्वविद्यालय की फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला कृषि नमूनों, मृदा, जल, फसल अवशेषों तथा अन्य नमूनों के परीक्षण एवं अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बीएसएल-3 प्रयोगशाला की स्थापना से विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमताओं को और अधिक मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सुविधा से वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, प्रयोगशाला तकनीशियनों एवं संबंधित विशेषज्ञों को उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसर मिलेंगे। इससे राज्य में कुशल वैज्ञानिक मानव संसाधन विकसित करने के साथ ही आधुनिक अनुसंधान तकनीकों के विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि बीएसएल-3 प्रयोगशाला भविष्य में संक्रामक रोग अनुसंधान, रोग निगरानी, जैव-सुरक्षा, पशु एवं जूनोटिक रोगों के अध्ययन तथा रोग प्रकोप से निपटने की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अधोसंरचना के रूप में विकसित होगी। इससे छत्तीसगढ़ में उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा अनुसंधान को नई गति मिलने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता और पहचान को भी मजबूती मिलेगी।

राज्यपाल से गेड़ी नर्तक अनिल गढ़ेवाल ने की भेंट

राज्यपाल से गेड़ी नर्तक अनिल गढ़ेवाल ने की भेंट

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका से आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध गेड़ी लोक नर्तक एवं लोक श्रृंगार भारती, बिलासपुर के संचालक अनिल कुमार गढ़ेवाल ने अपने सहयोगी श्री लक्ष्मी नारायण मांडले के साथ सौजन्य भेंट की।
उल्लेखनीय है की गढ़ेवाल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के गेड़ी लोक नृत्य दल ने 26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह तथा 15 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एट होम कार्यक्रम में गेड़ी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी थी। इन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आयोजनों में छत्तीसगढ़ की लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रदर्शन कर दल ने प्रदेश को गौरवान्वित किया। राज्यपाल डेका ने गढ़ेवाल एवं उनकी टीम के प्रयासों और उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोकनृत्य हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण अंग हैं। ऐसे कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की लोककला और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्यपाल ने गढ़ेवाल एवं उनके सहयोगियों को लोककला के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करने तथा भविष्य में भी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल डेका से प्रदेश के उत्कृष्ट खिलाडिय़ों ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल डेका से प्रदेश के उत्कृष्ट खिलाडिय़ों ने की सौजन्य भेंट

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के विभिन्न खेलों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले खिलाडिय़ों ने आज लोकभवन में राज्यपाल रमेन डेका से सौजन्य भेंट की। खिलाड़ी छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के उपाध्यक्ष किशोर महानंद के साथ राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे।
राज्यपा ने खिलाडिय़ों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने खिलाडिय़ों को भविष्य में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश एवं देश का नाम रोशन करने के लिए प्रोत्साहित किया और आगामी प्रतियोगिताओं में सफलता की शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल से भेंट करने वालों में अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टर प्रदीप क्षत्री एवं लखपति सिंदूर, वेटलिफ्टर कैलाश सिक्का, बास्केटबॉल खिलाड़ी कु. सौपी सिक्का, थाई बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक विजेता कु. मानसी तांडी, सॉफ्टबॉल खिलाड़ी कु. गंगा सोना एवं कु. प्रतिमा सोना, फुटबॉल खिलाड़ी बोस्टो तांडी एवं राजेश महानंद, कराटे खिलाड़ी कु. लक्षिता तांडी, किक बॉक्सिंग खिलाड़ी कु. रीयाशा बाघ, पावरलिफ्टर कु. प्रिया हरपाल तथा इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन-5 के विजेता रितेश पाल शामिल थे। राज्यपाल ने सभी खिलाडिय़ों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें खेल के क्षेत्र में निरंतर आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया।

ब्रेकिंग : राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, मंत्रालय में पदस्थ इन अधिकारियों के विभाग बदले, देखें पूरी लिस्ट…

ब्रेकिंग : राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, मंत्रालय में पदस्थ इन अधिकारियों के विभाग बदले, देखें पूरी लिस्ट…

 रायपुर। छत्तीसगढ़ मंत्रालय में पदस्थ अधिकारियों के विभाग में बदलाव किया गया हैं। सूची में आधा दर्जन अधिकारियों के नाम शामिल हैं।

जारी सूची देखें….

CG- घर में मिली महिला की खून से लथपथ लाश, जताई जा रही ये आशंका, जांच में जुटी पुलिस…..

CG- घर में मिली महिला की खून से लथपथ लाश, जताई जा रही ये आशंका, जांच में जुटी पुलिस…..

 बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र के टोनाटार गांव में एक 50 वर्षीय महिला का शव उसके घर के अंदर मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। महिला के शरीर पर गहरे घाव पाए गए हैं, जिससे धारदार हथियार से हत्या किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

घटना के बाद से महिला का पति भी लापता बताया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस महिला की मौत के कारणों का पता लगाने के साथ ही लापता पति की तलाश कर रही है। फिलहाल वारदात से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

महिला अपने पति के साथ गांव में रहती थी। घर में काफी देर तक कोई गतिविधि नहीं दिखने पर पड़ोसियों ने आवाज लगाई। जवाब नहीं मिलने पर वे अंदर पहुंचे तो बिस्तर पर महिला का शव दिखाई दिया। आसपास खून फैला हुआ था। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। शुरुआती जांच में महिला के पैरों सहित शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें मिली हैं। कमरे की दीवारों और फर्श पर भी खून के निशान पाए गए।

पुलिस ने मौके से भौतिक साक्ष्य एकत्र किए और पंचनामा की कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मौत के कारण और चोटों की प्रकृति को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

हवाई यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, बिलासपुर से यहां के लिए फिर शुरू होगी फ्लाइट, इतना होगा किराया, जाने डिटेल…..

हवाई यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, बिलासपुर से यहां के लिए फिर शुरू होगी फ्लाइट, इतना होगा किराया, जाने डिटेल…..

 बिलासपुर। बिलासपुर और कोलकाता के बीच पिछले करीब चार महीने से बंद पड़ी सीधी विमान सेवा एक बार फिर शुरू होने जा रही है। अलायंस एयर ने अपना नया विंटर शेड्यूल जारी कर दिया है, जिसके तहत यह सेवा 1 नवंबर से बहाल की जाएगी। हालांकि इस बार फ्लाइट का किराया काफी ज्यादा होगा। इस बार करीब 6000 रुपये का एक तरफ का किराया होगा।

संचालन के दिन: यह सीधी उड़ान सप्ताह में दो दिन यानी शुक्रवार और रविवार को संचालित होगी।

किराया और शुल्क: यह सेवा लगभग तीन गुना किराए के साथ शुरू की जा रही है, जिसमें एक तरफ की उड़ान का किराया करीब 6 हजार रुपए है।

बुकिंग शुरू: यात्रियों की सुविधा के लिए एयरलाइन द्वारा टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू कर दी गई है।

लंबे समय से इस रूट पर विमान सेवा बंद होने के कारण यात्रियों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अब फ्लाइट के दोबारा शुरू होने से पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

Weather Today : छत्तीसगढ़ में गर्मी से मिलेगी राहत! बदलेगा मौसम का मिजाज, जानिए लेटेस्ट अपडेट

Weather Today : छत्तीसगढ़ में गर्मी से मिलेगी राहत! बदलेगा मौसम का मिजाज, जानिए लेटेस्ट अपडेट

 रायपुर. मानसून रायपुर से विदा हो चुका है, मगर मानसून द्रोणिका छत्तीसगढ़ से पूरी तरह रवाना नहीं हुई है. दिन में तेज धूप निकलने से राज्य में गर्मी का असर बना हुआ है. मौसम विभाग के मुताबिक, सोमवार को राजधानी रायपुर में तेज धूप वाला मौसम रहने वाला है. तापमान में एक डिग्री का इजाफा भी हो सकता है. प्रदेश के अधिकतर इलाकों में सोमवार को मौसम साफ रहने, जबकि कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई है.

रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम 

रायपुर में लोगों को दिन-रात गर्मी का अहसास हो रहा है. सोमवार को मौसम साफ रहने की संभावना है. रविवार के मुकाबले अधकितम तापामान आज एक डिग्री अधिक यानी 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने के आसार हैं.

प्रदेश में कैसा रहा पिछला 24 घंटा

बात करें प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान रहने वाले मौसम की तो अधिकतर स्थानों पर शुष्क रहा और एक-दो जगहों पर हल्की बारिश हुई. प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस राजनन्दगांव में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 17.8 डिग्री सेल्सियस अम्बिकापुर में दर्ज किया गया.

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 2 दिनों तक अधिकांश स्थानों पर मौसम के शुष्क रहने की संभावना है. इसके बाद एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की वर्षा हो सकती है.

किन शहरों में कितना रहा तापमान 

प्रदेश में रविवार को दुर्ग 33.4 डिग्री सेल्सियस, जगदलपुर 33.2 डिग्री सेल्सियस, माना 32.9 डिग्री सेल्सियस, बिलासपुर 32. 4 डिग्री सेल्सियस, पेंड्रारोड 31.4 डिग्री सेल्सियस और अंबिकापुर 31 डिग्री सेल्सियस रहा.

हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने के आसार

मौसम विभाग ने आज यानी सोमवार को प्रदेश में एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की वर्षा होने की संभावना जताई है. वहीं कुछ जगहों पर बादल गरजने-चमकने के साथ बिजली गिरने और 40 से 50 किमी की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के आसार हैं. दो दिन बाद इसी तरह की गतिविधियां जारी रह सकती हैं.

मौसमी सिस्टम

मौसम विभाग ने जानकारी दी कि सुपौल, रांची, सुंदरगढ़, बरगढ़, बीजापुर, हैदराबाद, बेलगावी, पणजी से होकर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी की रेखा गुजर रही है. अगले 2 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए स्थितियां अनुकूल बन सकती हैं. इसके अतिरिक्त उत्तर-पश्चिम राजस्थान से उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश तक द्रोणिका बना हुआ है.

नवा रायपुर में 200 एकड़ में विकसित की जा रही आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क

नवा रायपुर में 200 एकड़ में विकसित की जा रही आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क

  • छत्तीसगढ़ मध्य भारत के बड़े मेडिकल हब के रूप में हो रहा विकसित : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
  • रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल, कैंसर उपचार केंद्र का हुआ भूमिपूजन
  • मुख्यमंत्री साय ने कहा – प्रदेश में ही कैंसर मरीजों को मिलेंगी उच्चस्तरीय उपचार सुविधाएं, दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम
  • शहरों से लेकर सुदूर वनांचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का फोकस
  • आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना बनीं जरूरतमंद परिवारों का संबल
  • मेडिसिटी से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा, फार्मा उद्योग, अनुसंधान और रोजगार को मिलेगा नया विस्तार

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ तेजी से मध्य भारत के एक बड़े मेडिकल हब के रूप में विकसित हो रहा है। राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक, सुपर स्पेशलिटी सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक को बेहतर, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं अपने प्रदेश में ही उपलब्ध हों तथा आर्थिक अभाव किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने।

मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल एवं कैंसर उपचार केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अस्पताल प्रबंधन और ओमेगा ग्रुप की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज के साथ पूरा परिवार कठिन दौर से गुजरता है। यदि उपचार के लिए दूसरे राज्य जाना पड़े तो परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ अनेक व्यावहारिक कठिनाइयां भी आती हैं। हमारी कोशिश है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर से गंभीर बीमारी के उपचार के लिए प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता न्यूनतम हो और उन्हें अपने परिवार के बीच रहते हुए विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने कहा कि ओमेगा अस्पताल का प्रस्तावित ऑन्कोलॉजी सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की उपलब्धता से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों को भी बेहतर कैंसर उपचार की सुविधा मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय गांव, गरीब और सुदूर जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। जिला अस्पतालों में आईसीयू, डायलिसिस यूनिट, आधुनिक पैथोलॉजी और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि सामान्य जांच और उपचार के लिए मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण करना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच चिकित्सा सुविधाओं के अंतर को कम करते हुए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जा रही है।

गंभीर बीमारी में परिवारों का संबल बन रही सरकार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गंभीर बीमारी केवल स्वास्थ्य संबंधी चुनौती नहीं होती, बल्कि कई बार परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट भी खड़ा कर देती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई आयुष्मान भारत योजना ने ऐसे लाखों परिवारों को उपचार की चिंता से राहत दी है। शासकीय अस्पतालों के साथ बड़ी संख्या में निजी अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा गया है, जिससे पात्र परिवारों को निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान कर रही है। हमारा स्पष्ट संकल्प है कि पैसे के अभाव में किसी गरीब का इलाज न रुके और बीमारी के उपचार के लिए किसी परिवार को अपनी जमीन, घर या गहने बेचने जैसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहा बदलाव केवल रायपुर या बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार की प्राथमिकता अबूझमाड़ सहित प्रदेश के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना भी है।

उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सीमित थी, वहां आज स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वनांचलों में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों की जांच और उपचार किया जा रहा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ चिकित्सकों, दवाइयों और आवश्यक जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है जिसमें बस्तर के सुदूर गांव से लेकर राजधानी रायपुर तक हर नागरिक को आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।

नवा रायपुर में 200 एकड़ में मेडिसिटी और फार्मा पार्क से खुलेगा संभावनाओं का नया द्वार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख स्वास्थ्य और चिकित्सा निवेश केंद्रों में शामिल करने की दिशा में नवा रायपुर में लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि मेडिसिटी और फार्मा पार्क के माध्यम से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाओं, फार्मास्युटिकल उद्योग, चिकित्सा अनुसंधान और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों को एक मजबूत इकोसिस्टम उपलब्ध होगा। इससे चिकित्सकों, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ सहित प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर और नवा रायपुर में सुपर स्पेशलिटी एवं मल्टीस्पेशलिटी स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। आधुनिक स्वास्थ्य इकाइयों और चिकित्सा क्षेत्र में नए निवेश के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मेडिकल टूरिज्म की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं। हमारा प्रयास है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ न केवल प्रदेशवासियों, बल्कि आसपास के राज्यों के लोगों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का प्रमुख केंद्र बने।

स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश से बढ़ेंगी सुविधाएं और रोजगार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ओमेगा ग्रुप का रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ चिकित्सा क्षेत्र में निवेश के आकर्षक केंद्र के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के समन्वित प्रयासों से आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार संभव है। नए अस्पतालों और सुपर स्पेशलिटी केंद्रों की स्थापना से जहां मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा, वहीं चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और अन्य युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

पीडब्ल्यूडी सचिव मुकेश कुमार बंसल बोले – बरसात के बाद निर्माण कार्यों को मिली रफ्तार, गुणवत्ता और समय-सीमा पर जोर

पीडब्ल्यूडी सचिव मुकेश कुमार बंसल बोले – बरसात के बाद निर्माण कार्यों को मिली रफ्तार, गुणवत्ता और समय-सीमा पर जोर

 रायपुर. बरसात के बाद सड़कों, पुल-पुलियों और भवनों के निर्माण को रफ्तार देने की पूरी तैयारी है। लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। काम की प्रगति अब केवल दफ्तरों की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी खुद मैदान में उतरकर निर्माण की वास्तविक स्थिति परखेंगे। कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ औचक निरीक्षण से भी गुणवत्ता और प्रगति पर नजर रखी जाएगी। इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने गरियाबंद जिले का दौरा कर सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ समीक्षा बैठक कर निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी ली और कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।

सचिव बंसल ने गरियाबंद जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर निर्माणाधीन परियोजनाओं की जमीनी स्थिति देखी। उन्होंने फिंगेश्वर विकासखंड में कोपरा-पोखरा मार्ग के 26.20 किलोमीटर लंबे मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस परियोजना में पुल-पुलियों के निर्माण कार्य भी शामिल हैं। उन्होंने राजिम में नवीन मेला स्थल चौबेबांधा से लक्ष्मण झूला तक 3.50 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के निर्माण की प्रगति भी देखी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली और निर्माण में गुणवत्ता तथा समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

सड़क परियोजनाओं के साथ सचिव बंसल ने गरियाबंद में निर्माणाधीन शासकीय भवनों का भी जायजा लिया। उन्होंने व्यवहार न्यायालय में न्यायिक अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे दो डी-टाइप आवासगृहों, जिला परिवहन कार्यालय भवन तथा 40 जीएडी आवासगृहों के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने इन परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सचिव बंसल गरियाबंद जिले के बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र के दुर्गम इलाकों में भी पहुंचे। उन्होंने कसाबाय-पतोरा दादर मार्ग के आरडी 135 में चचंगी नाला पर निर्मित पुल एवं पहुंच मार्ग का निरीक्षण किया। यह कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने कसाबाय-सातधार मार्ग में हलफली नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण कार्य का भी जायजा लिया। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित इन परियोजनाओं के निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली।

मैदानी निरीक्षण के बाद सचिव बंसल ने गरियाबंद सर्किट हाउस में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक ली। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए काम में आ रही समस्याओं और बाधाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों को गति देने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। बरसात के बाद निर्माण कार्यों में तेजी लाने विभागीय अमले को सक्रियता से काम करना होगा। कार्यों की सतत निगरानी और वरिष्ठ अधिकारियों के मैदानी निरीक्षण से निर्माण की वास्तविक प्रगति पर नजर रखी जाएगी।

सचिव बंसल ने लोक निर्माण विभाग के संभागीय कार्यालय और कार्यालय परिसर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यालय में स्वच्छता और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता व्ही. के. भतपहरी, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी एवं उप अभियंतागण उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को 10% आरक्षण

छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को 10% आरक्षण

 रायपुर- राज्य सरकार ने गृह विभाग में आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। इन पदों पर भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रविधान पहले ही किया जा चुका है। उनके अनुभव और दक्षता का लाभ राज्य सेवाओं में लेने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने राज्य शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन को भी मंजूरी दी। इसके तहत 'आदिम जाति विकास विभाग' का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा।

पीएम मोदी की 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा पर कैबिनेट में अभिनंदन प्रस्ताव पारित
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में निरंतर 25 वर्ष पूरे होने पर बैठक में अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्यमंत्री साय ने इसे राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय के सिद्धांतों को समर्पित कर्मयात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव बताया।

अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे ऐतिहासिक फैसलों के लिए केंद्र का आभार
कैबिनेट ने जैम, जीएसटी, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और माओवादी हिंसा से मुक्ति सहित राष्ट्रहित में केंद्र सरकार के ऐतिहासिक निर्णयों का अभिनंदन किया। सहकारी संघवाद के जरिए छत्तीसगढ़ को अधिक संसाधन और भागीदारी देने तथा आवास, नल-जल, स्वच्छता, राशन, स्वास्थ्य और स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहयोग के लिए केंद्र का आभार भी जताया।

सेवा संकल्प अभियान: ‘निदान-03’ शिविर से दिव्यांगजनों की जिंदगी में आ रहा सकारात्मक बदलाव

सेवा संकल्प अभियान: ‘निदान-03’ शिविर से दिव्यांगजनों की जिंदगी में आ रहा सकारात्मक बदलाव

 रायपुर- सेवा संकल्प अभियान के तहत धमतरी जिले में आयोजित तीन दिवसीय ‘निदान-03’ विशेष शिविर दिव्यांगजनों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आ रहा है। जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी दैनिक गतिविधियों को सुगम करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। नगरी और धमतरी में आयोजित इन शिविरों के शुरुआती दो दिनों में कुल 632 दिव्यांगजनों ने हिस्सा लिया, जिन्हें एक ही छत के नीचे कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण और शासकीय योजनाओं का पूरा संबल प्रदान किया गया।

एक ही छत के नीचे मिलीं तमाम शासकीय सुविधाएं
शिविर के पहले दिन 8 अक्टूबर को नगरी विकासखंड के श्रृंगी ऋषि हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में 172 दिव्यांगजन शामिल हुए। यहाँ पात्र हितग्राहियों को ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, बैसाखी, वॉकिंग स्टिक और वॉकर वितरित किए गए। साथ ही, नौ दिव्यांगजनों के कृत्रिम हाथ-पैर तैयार करने के लिए आवश्यक माप और प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि 18 दिव्यांगता प्रमाण पत्र और 44 यूडीआईडी कार्ड भी प्रदान किए गए।

श्रृखला के दूसरे दिन 10 अक्टूबर को धमतरी के इंडोर स्टेडियम में भव्य शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ 460 दिव्यांगजन पहुँचे और इनमें से 359 हितग्राहियों को विभिन्न उपकरणों व सुविधाओं से लाभान्वित किया गया।

छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावडि़या और महापौर रामू रोहरा की उपस्थिति में संपन्न इस कार्यक्रम में कृत्रिम पैर, कृत्रिम हाथ, कैलिपर्स, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, स्मार्ट केन और वॉकर जैसी आधुनिक सामग्रियां बड़े पैमाने पर बांटी गईं। इसके अलावा, शिविर में दिव्यांगजनों के बस पास, दिव्यांगता प्रमाण पत्र और एम. आधार कार्ड जैसी आवश्यक सुविधाएँ भी तुरंत उपलब्ध कराई गईं, जिससे उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़े।

जनसंपर्क प्रदर्शनी और जनमन पत्रिका का आकर्षण
इस आयोजन की एक और खास बात यह रही कि यहाँ विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। जनसंपर्क विभाग की ओर से विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई और मासिक पत्रिका 'छत्तीसगढ़ जनमन' का निःशुल्क वितरण किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने बेहद सराहा। धमतरी कलेक्टर ने इस दौरान सभी स्टॉलों का अवलोकन किया और कहा कि दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण व शासकीय योजनाओं का लाभ देकर उन्हें सशक्त और स्वावलंबी बनाना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।
       इस तीन दिवसीय विशेष अभियान के अंतिम दिन आज भी पंजीयन, परीक्षण और कृत्रिम अंगों के मापन की सुविधा जारी रहेगी, ताकि कोई भी जरूरतमंद इस कल्याणकारी पहल से वंचित न रह जाए।

ट्रेन हादसे के दर्द पर ‘सेवा संकल्प’ का मरहम, धमतरी के तेजराम को दो घंटे में मिला कृत्रिम हाथ, लौटी जिंदगी की रंगत

ट्रेन हादसे के दर्द पर ‘सेवा संकल्प’ का मरहम, धमतरी के तेजराम को दो घंटे में मिला कृत्रिम हाथ, लौटी जिंदगी की रंगत

 रायपुर. यह सिर्फ कृत्रिम हाथ नहीं, मेरी संपूर्णता और स्वाभिमान का अहसास है!"—यह शब्द हैं धमतरी जिले के ग्राम गोजी निवासी तेजराम साहू के, जिनके जीवन में वर्षों के संघर्ष के बाद आखिरकार आत्मविश्वास और मुस्कान वापस लौट आई है। छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित ‘निदान-03’ शिविर दिव्यांगजनों के जीवन में किस तरह बदलाव की नई इबारत लिख रहा है, इसकी एक जीती-जागती मिसाल तेजराम की यह कहानी है।

​जीवन की राह में कभी-कभी एक पल का हादसा इंसान के सामने अनगिनत चुनौतियां खड़ी कर देता है। तेजराम साहू की जिंदगी में भी ऐसा ही मोड़ तब आया जब महज 18 वर्ष की उम्र में एक भीषण ट्रेन दुर्घटना में उनका दायां हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गंभीर चोटों के चलते डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें अपना हाथ गंवाना पड़ा। इतनी कम उम्र में आए इस संकट ने उनके सामने न केवल रोजमर्रा के छोटे-छोटे कार्यों को करने का गंभीर संकट खड़ा किया, बल्कि आजीविका के लिए संघर्ष को भी और कठिन बना दिया। हाथ का अभाव केवल एक शारीरिक कमी नहीं था, बल्कि हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की विवशता भी थी। हालांकि, इन विकट परिस्थितियों के बावजूद तेजराम ने कभी हिम्मत नहीं हारी और लगातार संघर्ष करते हुए अपनी जिंदगी की गाड़ी को आगे बढ़ाते रहे।

​उनके इसी संघर्ष को आसान बनाने और उनके जीवन में नई उम्मीद जगाने का काम किया जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘निदान-03’ शिविर ने। सेवा संकल्प अभियान के तहत लगाए गए इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि जनकल्याणकारी सेवाओं और उपकरणों का लाभ बिना किसी देरी के सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे। जब तेजराम इस शिविर में पहुंचे, तो वहां मौजूद भगवान महावीर सेवा संस्थान के इंजीनियरों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तुरंत उनके हाथ का माप लिया और आवश्यक प्रक्रिया शुरू की। हैरान करने वाली बात यह रही कि महज डेढ़ से दो घंटे की रिकॉर्ड समयसीमा के भीतर उन्हें कृत्रिम हाथ तैयार कर सौंप दिया गया।

​इतनी जल्दी और सहजता से मिली इस सहायता ने तेजराम के लिए वर्षों की कठिनाइयों के बीच संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए। कृत्रिम हाथ मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं और चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि व खुशी साफ झलकने लगी। उन्होंने भावुक होकर जिला प्रशासन और समिति के प्रति आभार जताते हुए कहा कि अब उनके जीवन की राह बहुत आसान हो जाएगी और वे अपने दैनिक काम खुद कर पाएंगे। ​तेजराम साहू की यह कहानी महज एक उपकरण मिलने की नहीं, बल्कि सेवा संकल्प अभियान के उस मानवीय पक्ष की है जो किसी जरूरतमंद को सिर्फ सुविधा नहीं देता, बल्कि उसे सहायता से आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाता है। शिविर में तेजराम के चेहरे पर खिली यह मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित सेवा का समन्वय होता है, तो वह किसी के भी जीवन में नई ऊर्जा और रंगत भरने की ताकत रखता है।

महतारी वंदन योजना से सरिता के हुनर को मिला सहारा, सिलाई से परिवार की आजीविका में दे रहीं योगदान

महतारी वंदन योजना से सरिता के हुनर को मिला सहारा, सिलाई से परिवार की आजीविका में दे रहीं योगदान

 00 हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये से खरीद रहीं धागा और सिलाई सामग्री, घर बैठे स्वरोजगार को मिली मजबूती

00 पति की मजदूरी और अपनी सिलाई से संभाल रहीं परिवार की जिम्मेदारियां, तीन बच्चों के पालन-पोषण में मिल रही मदद

रायपुर। सिलाई का हुनर तो पहले से था, लेकिन काम को लगातार जारी रखने के लिए धागा और अन्य जरूरी सामग्री खरीदने में आर्थिक परेशानियां आती थीं। अब महतारी वंदन योजना से हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि ने सरगुजा जिले की सरिता तिग्गा के इस हुनर को आजीविका का मजबूत सहारा बना दिया है। वे योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग सिलाई सामग्री खरीदने में कर रही हैं और घर बैठे सिलाई का काम कर परिवार की आमदनी में योगदान दे रही हैं। पति की मजदूरी से होने वाली आय के साथ उनकी मेहनत से अर्जित अतिरिक्त आमदनी तीन बच्चों के पालन-पोषण और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है।अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्रा कला निवासी सरिता तिग्गा की यह कहानी बताती है कि नियमित रूप से मिलने वाली छोटी आर्थिक सहायता भी महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को उन्होंने अपने हुनर और स्वरोजगार से जोड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

पति करते हैं मजदूरी, सरिता ने सिलाई को बनाया अतिरिक्त आय का जरिया

सरिता तिग्गा बताती हैं कि उनके पति  सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं। परिवार में तीन बच्चे हैं, जिनकी परवरिश, पढ़ाई और घरेलू जरूरतों की जिम्मेदारी दोनों मिलकर निभाते हैं। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में सरिता ने अपने सिलाई के हुनर को परिवार की आजीविका से जोडऩे का निर्णय लिया। वे घर पर ही सिलाई का काम करती हैं, जिससे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने का अवसर मिलता है। उनका कहना है कि पति की मजदूरी से घर का खर्च चलता है, जबकि सिलाई से मिलने वाली आय परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करती है। इस तरह वे अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में बराबर की सहभागी बन रही हैं।महतारी वंदन के एक हजार रुपये से खरीदती हैं धागा और सिलाई सामग्री
सरिता के लिए महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि विशेष महत्व रखती है। वे इस राशि का उपयोग सिलाई के लिए धागा और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में करती हैं। सरिता बताती हैं कि सिलाई का काम नियमित रूप से जारी रखने के लिए समय-समय पर सामग्री की आवश्यकता होती है। पहले सीमित पारिवारिक आय के बीच इन जरूरतों के लिए पैसे की व्यवस्था करना मुश्किल होता था। अब योजना से मिलने वाली राशि के कारण सिलाई सामग्री खरीदने में सुविधा हो रही है। इस सहायता से वे अपने काम को लगातार जारी रख पा रही हैं। सिलाई से प्राप्त आमदनी परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक बन रही है। सरिता का अनुभव दर्शाता है कि महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता का उपयोग छोटे स्वरोजगार को बनाए रखने और आगे बढ़ाने में भी किया जा सकता है।
घर की जिम्मेदारियों के साथ स्वरोजगार, तीन बच्चों की परवरिश में मिल रहा सहयोग
तीन बच्चों की देखभाल और घरेलू कामकाज के बीच सरिता घर पर ही सिलाई करती हैं। इससे उन्हें परिवार के साथ रहते हुए अपनी मेहनत से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। उनका कहना है कि घर से सिलाई का काम करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे बच्चों की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के साथ परिवार की आमदनी में भी योगदान दे पाती हैं। पति की मजदूरी और स्वयं के सिलाई कार्य से प्राप्त आय के सहारे परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है। महतारी वंदन योजना की सहायता राशि उनके इस प्रयास को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
छोटी आर्थिक सहायता से बढ़ा आत्मविश्वास, हुनर बना आजीविका का सहारा
सरिता तिग्गा के लिए सिलाई केवल घरेलू काम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढऩे का माध्यम है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें अपने हुनर का उपयोग कर आय अर्जित करने में सहयोग दिया है। वे बताती हैं कि हर महीने सहायता राशि मिलने से सिलाई सामग्री की व्यवस्था करना आसान हुआ है। इससे उन्हें अपना काम जारी रखने के लिए परिवार की सीमित आय पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता। सरिता का प्रयास यह भी दर्शाता है कि महिलाओं के पास उपलब्ध कौशल को आर्थिक सहयोग मिलने पर वह परिवार की आजीविका का उपयोगी साधन बन सकता है।
महतारी वंदन की राशि से सिलाई का सामान खरीदती हूं, परिवार को भी मिल रही मदद 
सरिता तिग्गा बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से उन्हें हर महीने एक हजार रुपये मिलते हैं। इस राशि से वे सिलाई के लिए धागा और अन्य जरूरी सामग्री खरीदती हैं। उनका कहना है कि इससे सिलाई का काम जारी रखने में सुविधा होती है और वे घर पर काम कर परिवार की आमदनी में योगदान दे पा रही हैं। सरिता के अनुसार, योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। इससे घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के साथ स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में भी सहयोग मिल रहा है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
महतारी वंदन योजना से मिल रहे लाभ पर खुशी व्यक्त करते हुए सरिता तिग्गा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल मिल रहा है। इस सहायता से वे अपने सिलाई कार्य के लिए आवश्यक सामग्री खरीद पा रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं।
महतारी वंदन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम, सरिता की कहानी बनी प्रेरणा
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सरिता तिग्गा की कहानी महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का उदाहरण है। सीमित आय वाले परिवार में तीन बच्चों की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने सिलाई के हुनर को अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बनाया है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक सहायता राशि का उपयोग वे सिलाई सामग्री खरीदने में कर रही हैं। इससे उनका काम जारी रखने में मदद मिल रही है और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में भी सहयोग मिल रहा है।

पति के निधन के बाद चार बेटियों का भविष्य संवारने का उठाया बीड़ा, सक्षम योजना से आत्मनिर्भर बनीं इंदु लता

पति के निधन के बाद चार बेटियों का भविष्य संवारने का उठाया बीड़ा, सक्षम योजना से आत्मनिर्भर बनीं इंदु लता

 00 एक लाख रुपये के ऋण से शुरू किया डेयरी व्यवसाय, दो भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन

रायपुर। पति के निधन के बाद चार बेटियों की परवरिश, घर की जिम्मेदारी और उनके बेहतर भविष्य की चिंता। आर्थिक कठिनाइयों के बीच एक मां के सामने कई चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ उन्होंने स्वरोजगार की राह चुनी। यह प्रेरक कहानी सरगुजा जिले की इंदु लता गुप्ता की है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण की सहायता से डेयरी व्यवसाय शुरू कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है, दूसरी इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही है और दो अन्य बेटियां भी अपनी स्कूली शिक्षा जारी रखे हुए हैं। इंदु लता की सफलता केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी नहीं, बल्कि एक मां के संघर्ष, साहस और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति समर्पण की मिसाल है। सक्षम योजना से मिला आर्थिक सहयोग उनके लिए आजीविका का साधन बनने के साथ बेटियों की उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण सहारा साबित हुआ है।

पति के निधन के बाद बढ़ीं जिम्मेदारियां, बेटियों की पढ़ाई जारी रखना था सबसे बड़ा संकल्प
इंदु लता गुप्ता बताती हैं कि पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार बेटियों की परवरिश और घर का खर्च चलाना आसान नहीं था। नियमित आय का कोई साधन नहीं होने के कारण परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इन परिस्थितियों में उन्हें सबसे अधिक चिंता बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य की होती थी। वे चाहती थीं कि आर्थिक परेशानियों के कारण किसी भी बेटी की पढ़ाई अधूरी न रह जाए। इसके लिए उन्होंने स्वयं कुछ काम शुरू करने का निर्णय लिया, ताकि परिवार की आजीविका चलाने के साथ बेटियों की शिक्षा का खर्च भी उठा सकें। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना के बारे में जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत स्वरोजगार शुरू करने के लिए कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होने की जानकारी ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की नई राह दिखाई।

एक लाख के ऋण से खरीदीं दो भैंसें, डेयरी व्यवसाय से बदली आर्थिक स्थिति
इंदु लता गुप्ता ने सक्षम योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि में अपनी बचत के पैसे मिलाकर उन्होंने दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। शुरुआत में परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना उनका मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने पशुपालन को आजीविका का माध्यम बनाया और मेहनत के साथ डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनकी दोनों भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध उत्पादन से मिलने वाली आय परिवार के भरण-पोषण और बेटियों की पढ़ाई में सहायक बन रही है। इंदु लता बताती हैं कि पहले घर की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब डेयरी व्यवसाय से आय का साधन उपलब्ध होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। इससे उन्हें बेटियों की शिक्षा और घरेलू आवश्यकताओं का खर्च उठाने में मदद मिल रही है।

मां की मेहनत लाई रंग, एक बेटी मेडिकल कॉलेज में तो दूसरी इंजीनियरिंग की कर रही पढ़ाई
इंदु लता गुप्ता के जीवन की सबसे बड़ी खुशी उनकी बेटियों की शिक्षा है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी। डेयरी व्यवसाय से आर्थिक संबल मिलने के बाद उन्होंने बेटियों की शिक्षा को आगे बढ़ाया। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत है और डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी बेटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। एक समय बेटियों की पढ़ाई का खर्च जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। आज उन्हीं बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करते देखकर इंदु लता को अपनी मेहनत सफल होती दिखाई देती है। वे बताती हैं कि बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाना उनका सबसे बड़ा सपना है। वे चाहती हैं कि उनकी चारों बेटियां पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें और अपने जीवन में आगे बढ़ें। इंदु लता का संघर्ष यह दर्शाता है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद दृढ़ संकल्प और स्वरोजगार के अवसर मिलने पर महिलाएं अपने परिवार के भविष्य को नई दिशा दे सकती हैं।

सक्षम योजना ने दिया आर्थिक संबल, आत्मविश्वास के साथ संभाल रहीं परिवार की जिम्मेदारी

इंदु लता गुप्ता के अनुसार, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव का माध्यम बनी है। योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उन्हें डेयरी व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होने से व्यवसाय शुरू करने में सुविधा हुई। दूध उत्पादन से प्राप्त आय के कारण अब वे परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ बेटियों की शिक्षा में भी आर्थिक योगदान दे पा रही हैं। उनका कहना है कि पहले परिवार के भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब स्वयं का व्यवसाय होने से आत्मविश्वास बढ़ा है। वे अपनी मेहनत से परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं और बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।

बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना ही इंदु लता के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य

इंदु लता गुप्ता बताती हैं कि पति के निधन के बाद जीवन में कठिन परिस्थितियां आईं, लेकिन उन्होंने बेटियों की शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया। उनका मानना है कि बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना उनके बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। इसी सोच के साथ उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया और उससे मिलने वाली आय का उपयोग परिवार की जरूरतों तथा बेटियों की पढ़ाई में किया। आज एक बेटी का मेडिकल कॉलेज और दूसरी का इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है। शेष दो बेटियों की शिक्षा को भी वे इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ा रही हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
इंदु लता गुप्ता ने छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले आर्थिक सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर दिया। डेयरी व्यवसाय से प्राप्त आय के कारण वे परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने के साथ बेटियों की पढ़ाई का खर्च भी उठा पा रही हैं। इंदु लता का कहना है कि ऐसी योजनाएं जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और अपने परिवार का भविष्य बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
एक मां का संघर्ष, चार बेटियों के सपनों को मिला संबल

सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत इंदु लता गुप्ता की कहानी महिला आत्मनिर्भरता और बेटियों की शिक्षा का प्रेरक उदाहरण है। पति के निधन के बाद चार बेटियों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उनके लिए डेयरी व्यवसाय शुरू करने की राह खोली। दो भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध उत्पादन के माध्यम से उन्होंने परिवार की आजीविका को मजबूत बनाया। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में और दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां भी शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। इंदु लता की सफलता बताती है कि स्वरोजगार के लिए मिला आर्थिक सहयोग केवल एक महिला को आत्मनिर्भर नहीं बनाता, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को संवारने का माध्यम भी बन सकता है। एक मां की मेहनत, संघर्ष और बेटियों को शिक्षित बनाने के संकल्प ने इस कहानी को विशेष बना दिया है।

 

 
 

 

 

महिला सशक्तिकरण से विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

महिला सशक्तिकरण से विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 महिलाओं को योजनाओं की लाभार्थी ही नहीं, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में नेतृत्वकर्ता बनाना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री  साय

शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं का किया सम्मान

महतारी वंदन योजना से 68 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक संबल, 32 किस्तों में 20700 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता

लक्ष्य से आगे बढ़कर 14 लाख ग्रामीण महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही मातृशक्ति

बस्तर में नक्सल हिंसा से बंद 421 स्कूल फिर शुरू, बेटियों की शिक्षा और सुरक्षित भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता

रायपुर-मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है और महिला सशक्तिकरण विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का मजबूत आधार है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। हमारा लक्ष्य महिलाओं को केवल शासकीय योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रदेश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार और नेतृत्वकर्ता बनाना है।

मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर में हिंदी खबर द्वारा आयोजित शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली महिलाओं का सम्मान किया और उनसे संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूपा माना गया है। नवरात्रि मातृशक्ति की आराधना का महापर्व है। हमारी परंपरा में कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

*मां के संघर्ष और संस्कारों ने सिखाया सेवा और संवेदनशीलता का महत्व*

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने जीवन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। बचपन में ही पिता का साया उठ जाने के बाद उन्होंने अपनी माता को अनेक कठिनाइयों के बीच परिवार को संभालते और खेती-बाड़ी करते हुए देखा। उनकी माता ने कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों की शिक्षा और संस्कारों में कोई कमी नहीं आने दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मां के संघर्ष, सेवाभाव, सनातन मूल्यों के प्रति आस्था और परिवार के प्रति समर्पण ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। जनसेवा और जरूरतमंद के प्रति संवेदनशीलता की प्रेरणा उन्हें अपने परिवार और विशेष रूप से अपनी माता से मिली। आज मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व निभाते हुए भी वे उन्हीं संस्कारों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

*महतारी वंदन ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 32 किस्तों में 20 हजार 700 करोड़ रुपए से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में सीधे अंतरित की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता की योजना नहीं है। इस राशि ने महिलाओं को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए आर्थिक स्वतंत्रता देने के साथ परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी और आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है। महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों, पोषण, घरेलू आवश्यकताओं और बचत जैसे कार्यों में कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि योजना की पात्र कोई भी महिला इसके लाभ से वंचित न रहे। तकनीकी कारणों, दस्तावेजों, आधार अथवा बैंक खाते से जुड़ी त्रुटियों के कारण जिन पात्र महिलाओं को लाभ नहीं मिल पाया है, उनके प्रकरणों का परीक्षण कर आवश्यक समाधान किया जा रहा है।

*लक्ष्य से लगभग दोगुनी उपलब्धि, 14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी*

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल देने के साथ उन्हें स्थायी आजीविका और उद्यमिता से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ‘लखपति दीदी’ पहल के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 7.82 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 14 लाख ग्रामीण महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। प्रदेश की 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इन समूहों की महिलाओं को कृषि आधारित व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, लघु वनोपज, डेयरी, मशरूम उत्पादन, मिलेट प्रसंस्करण, सिलाई और रेडीमेड वस्त्र निर्माण सहित विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के उत्पादों की गुणवत्ता, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल स्वरोजगार से न जुड़ें, बल्कि सफल उद्यमी बनकर दूसरे लोगों को भी रोजगार देने की स्थिति में आएं।

*481 महतारी सदन बनेंगे महिला समूहों की गतिविधियों के केंद्र*

मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला स्व-सहायता समूहों और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में 481 महतारी सदनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। ये महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र बनेंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से प्रदेश की 39.73 लाख महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। रानी दुर्गावती योजना के लिए 15 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत पात्र बालिकाओं के 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर डेढ़ लाख रुपए की सहायता का प्रावधान है।

*बस्तर में लौटी शिक्षा की रोशनी, नक्सल हिंसा से बंद 421 स्कूल फिर खुले*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी बेटी के सपनों की राह में दूरी, गरीबी या असुरक्षा बाधा न बने, इसके लिए सरकार शिक्षा के अवसरों का लगातार विस्तार कर रही है। विशेष रूप से दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में छात्रावासों, आश्रमों, आवासीय विद्यालयों और प्रयास संस्थानों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।उन्होंने कहा कि बस्तर में लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण अनेक गांवों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई और स्कूल बंद हो गए थे। शांति और विश्वास की स्थापना के साथ राज्य सरकार ने ऐसे 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया है। वर्षों बाद इन स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल और पढ़ाई की आवाज लौटना बदलते बस्तर की सबसे सुखद तस्वीरों में से एक है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ओरछा और जगरगुंडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं, ताकि आदिवासी अंचलों के बच्चों, विशेषकर बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अपने परिवार और गांव से बहुत दूर न जाना पड़े।

*स्वस्थ महिला से स्वस्थ परिवार और स्वस्थ छत्तीसगढ़ का निर्माण*

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महिला और बाल स्वास्थ्य को राज्य सरकार ने अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। गर्भवती महिलाओं, माताओं, किशोरियों और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण की बेहतर व्यवस्था के लिए आंगनबाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, बच्चों के पोषण और किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 2.49 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 6.21 लाख वय-वंदना कार्ड जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर सरकार का विशेष ध्यान है। आर्थिक स्थिति अथवा गांव की दूरी किसी महिला के उपचार में बाधा न बने, इसी सोच के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

*आईटी, एआई और आधुनिक उद्योगों में महिलाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर*

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्वरूप को देखते हुए महिलाओं को पारंपरिक आजीविका के साथ भविष्य की तकनीकों और आधुनिक उद्योगों से जोड़ना भी आवश्यक है।राज्य की नई औद्योगिक नीति में महिलाओं के रोजगार और स्वरोजगार को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, चिकित्सा, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित करने पर सरकार का विशेष जोर है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं है। निर्णय लेने और नेतृत्व करने में महिलाओं की बराबर भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। पंचायतों और स्थानीय निकायों से लेकर प्रशासन और उद्यमिता तक महिलाओं को नेतृत्व के अधिक अवसर मिलने चाहिए। प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिला कलेक्टर प्रशासन का नेतृत्व कर रही हैं, जो बदलते और सशक्त छत्तीसगढ़ की प्रेरणादायक तस्वीर है।

*छत्तीसगढ़ की बेटियां खेलों में बढ़ा रही प्रदेश का गौरव*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। राज्य सरकार का संकल्प है कि संसाधनों, प्रशिक्षण अथवा आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपने सपनों से समझौता न करना पड़े।उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में देश का गौरव बढ़ाने वाली ज्ञानेश्वरी यादव को डीएसपी पद पर पदोन्नति के साथ 30 लाख रुपए की सम्मान राशि प्रदान की गई है। कोरबा जिले की संजू देवी रावत ने भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्वर्णिम उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार ने उन्हें 50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की है।
छत्तीसगढ़ की किरण पिस्दा का भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम में चयन हुआ है। उन्होंने रायपुर की आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजनों से ग्रामीण और जनजातीय अंचलों की बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के नए अवसर मिल रहे हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

*बेटियां बड़े सपने देखें, सरकार अवसर उपलब्ध कराने के लिए उनके साथ है*

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के युवाओं और बेटियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरा प्रदेश है। युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर शिक्षा के साथ कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी, उभरते उद्योगों, कृषि आधारित व्यवसायों, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, वनोपज, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं बन रही हैं। सरकार युवाओं और महिलाओं को इन नए अवसरों से जोड़ने के लिए कौशल विकास और प्रशिक्षण की व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही है।

*मातृशक्ति की भागीदारी से बनेगा विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़*

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की वास्तविक शक्ति यहां की माताएं, बहनें और बेटियां हैं। नवरात्रि का पर्व हमें शक्ति की आराधना के साथ समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों का सहारा बनने की प्रेरणा भी देता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गरीब, महिला, किसान और युवा को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के साथ निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व में उनकी भागीदारी बढ़ाकर ही विकसित एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी माताएं-बहनें आत्मनिर्भर होंगी, हमारी बेटियां शिक्षित और सक्षम होंगी तथा प्रदेश के विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगी, तभी ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का संकल्प अपनी पूर्णता को प्राप्त करेगा।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, हिंदी खबर की ब्यूरो हेड सुश्री निशा द्विवेदी सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।

प्रदेश के 31 हजार गन्ना किसानों को मिलेगा 51.09 करोड़ रुपए का बोनस

प्रदेश के 31 हजार गन्ना किसानों को मिलेगा 51.09 करोड़ रुपए का बोनस

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं सहकारिता मंत्री  केदार कश्यप ने गन्ना किसानों को दी बधाई

गन्ना बोनस में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी मेहनत का मिलेगा बेहतर प्रतिफल- सहकारिता मंत्री  केदार कश्यप

गन्ना बोनस की गणना का आधार रूपए 355 से बढ़ाकर रूपए 425 प्रति क्विंटल किया गया

रायपुर-- छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के गन्ना किसानों को नवरात्रि से पहले बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने गन्ना बोनस की गणना का आधार रूपए 355 से बढ़ाकर रूपए 425 प्रति क्विंटल कर दिया है। इस निर्णय से पेराई सत्र 2025-26 में प्रदेश के चारों सहकारी शक्कर कारखानों को गन्ना आपूर्ति करने वाले 31,022 किसानों को लगभग 51.09 करोड़ रूपए की बोनस राशि प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने इस अवसर पर प्रदेश के गन्ना किसानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। सहकारिता मंत्री  कश्यप ने कहा कि गन्ना बोनस में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उनकी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बोनस की बढ़ी हुई राशि से किसानों को खेती की लागत वहन करने और आगामी फसल की बेहतर तैयारी में मदद मिलेगी। यह निर्णय प्रदेश में गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ सहकारी शक्कर कारखानों से जुड़े किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करेगा।

पेराई सत्र 2025-26 के लिए बोनस गणना में एफआरपी रूपए 329.05 प्रति क्विंटल का आधार लिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार रूपए 425 में से एफआरपी घटाने पर किसानों को रूपए 95.95 प्रति क्विंटल की दर से बोनस मिलेगा। 

इस निर्णय के तहत भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना, कवर्धा के 14,961 किसानों को लगभग 24.55 करोड़ रूपए तथा सरदार पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया के 8,049 किसानों को लगभग 11.68 करोड़ रूपए की बोनस राशि मिलेगी। इसी प्रकार महामाया सहकारी शक्कर कारखाना, केरता के 7,250 किसानों को लगभग 11.35 करोड़ रूपए और दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना, बालोद के 762 किसानों को लगभग 3.52 करोड़ रूपए का बोनस प्राप्त होगा।

छत्तीसगढ़ मध्य भारत के बड़े मेडिकल हब के रूप में हो रहा विकसित: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ मध्य भारत के बड़े मेडिकल हब के रूप में हो रहा विकसित: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल, कैंसर उपचार केंद्र का हुआ भूमिपूजन

मुख्यमंत्री  साय ने कहा - प्रदेश में ही कैंसर मरीजों को मिलेंगी उच्चस्तरीय उपचार सुविधाएं, दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम

नवा रायपुर में 200 एकड़ में विकसित की जा रही आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क

शहरों से लेकर सुदूर वनांचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का फोकस

आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना बनीं जरूरतमंद परिवारों का संबल

मेडिसिटी से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा, फार्मा उद्योग, अनुसंधान और रोजगार को मिलेगा नया विस्तार

रायपुर,--मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ तेजी से मध्य भारत के एक बड़े मेडिकल हब के रूप में विकसित हो रहा है। राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक, सुपर स्पेशलिटी सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक को बेहतर, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं अपने प्रदेश में ही उपलब्ध हों तथा आर्थिक अभाव किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने।

मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल एवं कैंसर उपचार केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अस्पताल प्रबंधन और ओमेगा ग्रुप की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएगा।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज के साथ पूरा परिवार कठिन दौर से गुजरता है। यदि उपचार के लिए दूसरे राज्य जाना पड़े तो परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ अनेक व्यावहारिक कठिनाइयां भी आती हैं। हमारी कोशिश है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर से गंभीर बीमारी के उपचार के लिए प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता न्यूनतम हो और उन्हें अपने परिवार के बीच रहते हुए विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने कहा कि ओमेगा अस्पताल का प्रस्तावित ऑन्कोलॉजी सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की उपलब्धता से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों को भी बेहतर कैंसर उपचार की सुविधा मिल सकेगी।

स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए मजबूत हो रही स्वास्थ्य अधोसंरचना

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय गांव, गरीब और सुदूर जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। जिला अस्पतालों में आईसीयू, डायलिसिस यूनिट, आधुनिक पैथोलॉजी और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि सामान्य जांच और उपचार के लिए मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण करना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच चिकित्सा सुविधाओं के अंतर को कम करते हुए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जा रही है।

गंभीर बीमारी में परिवारों का संबल बन रही सरकार

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गंभीर बीमारी केवल स्वास्थ्य संबंधी चुनौती नहीं होती, बल्कि कई बार परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट भी खड़ा कर देती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई आयुष्मान भारत योजना ने ऐसे लाखों परिवारों को उपचार की चिंता से राहत दी है। शासकीय अस्पतालों के साथ बड़ी संख्या में निजी अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा गया है, जिससे पात्र परिवारों को निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान कर रही है। हमारा स्पष्ट संकल्प है कि पैसे के अभाव में किसी गरीब का इलाज न रुके और बीमारी के उपचार के लिए किसी परिवार को अपनी जमीन, घर या गहने बेचने जैसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े।

अबूझमाड़ और सुदूर वनांचलों तक पहुंच रहा स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहा बदलाव केवल रायपुर या बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार की प्राथमिकता अबूझमाड़ सहित प्रदेश के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना भी है।

उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सीमित थी, वहां आज स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वनांचलों में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों की जांच और उपचार किया जा रहा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ चिकित्सकों, दवाइयों और आवश्यक जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है जिसमें बस्तर के सुदूर गांव से लेकर राजधानी रायपुर तक हर नागरिक को आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।

नवा रायपुर में 200 एकड़ में मेडिसिटी और फार्मा पार्क से खुलेगा संभावनाओं का नया द्वार

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख स्वास्थ्य और चिकित्सा निवेश केंद्रों में शामिल करने की दिशा में नवा रायपुर में लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि मेडिसिटी और फार्मा पार्क के माध्यम से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाओं, फार्मास्युटिकल उद्योग, चिकित्सा अनुसंधान और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों को एक मजबूत इकोसिस्टम उपलब्ध होगा। इससे चिकित्सकों, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ सहित प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर और नवा रायपुर में सुपर स्पेशलिटी एवं मल्टीस्पेशलिटी स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। आधुनिक स्वास्थ्य इकाइयों और चिकित्सा क्षेत्र में नए निवेश के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मेडिकल टूरिज्म की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं। हमारा प्रयास है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ न केवल प्रदेशवासियों, बल्कि आसपास के राज्यों के लोगों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का प्रमुख केंद्र बने।

स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश से बढ़ेंगी सुविधाएं और रोजगार

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ओमेगा ग्रुप का रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ चिकित्सा क्षेत्र में निवेश के आकर्षक केंद्र के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के समन्वित प्रयासों से आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार संभव है। नए अस्पतालों और सुपर स्पेशलिटी केंद्रों की स्थापना से जहां मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा, वहीं चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और अन्य युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध प्रदेश की सबसे मजबूत नींव हैं। इसलिए सरकार उपचार की सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, आधुनिक और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में काम कर रही है। हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी नागरिक गंभीर बीमारी के उपचार के लिए स्वयं को असहाय महसूस न करे। सरकार हर जरूरतमंद के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है।

उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिसका सीधा लाभ प्रदेश की जनता को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र द्वारा आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को और मजबूती मिलेगी।

स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार गांव से लेकर शहर तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण के साथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कैंसर उपचार केंद्र की पहल के लिए अस्पताल प्रबंधन और पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर विधायक मोतीलाल साहू, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, मेडिसिन हॉस्पिटल के डायरेक्टर  सुशील शर्मा, ओमेगा ग्रुप के सीईओ सहित अन्य जनप्रतिनिधि, चिकित्सक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।