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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी माँ के नाम पर लगाया पीपल का पौधा, वन महोत्सव-2026 का हुआ शुभारंभ

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी माँ के नाम पर लगाया पीपल का पौधा, वन महोत्सव-2026 का हुआ शुभारंभ

 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान के तहत 15 एकड़ में लगाए गए 2500 से अधिक पीपल के पौधे

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

प्रदेश में इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य, पिछले दो वर्षों में 7 करोड़ से अधिक पौधों का हुआ रोपण

रायपुर

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज वन महोत्सव-2026 का शुभारंभ करते हुए नया रायपुर में आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में अपनी माँ के नाम पर पीपल का पौधा लगाकर प्रदेशव्यापी 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के अंतर्गत लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में 2500 से अधिक पीपल के पौधे रोपे गए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को जीवनदाता माना गया है और पीपल का वृक्ष विशेष रूप से आस्था, आध्यात्मिक चेतना तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है। यह वृक्ष सर्वाधिक ऑक्सीजन देने वाले वृक्षों में माना जाता है और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2024 से प्रारंभ हुआ 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान आज जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को मातृ सम्मान की भावना से जोड़ा गया है, जिससे समाज में प्रकृति के प्रति आत्मीयता और जिम्मेदारी का भाव विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं तथा इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने घर, खेत-खलिहानों की मेड़, विद्यालय, कार्यस्थल अथवा आसपास उपलब्ध खाली भूमि पर अपनी माँ के नाम एक पौधा अवश्य लगाएँ और उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी निभाएँ। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पौधा आने वाले समय में स्वच्छ वायु, शुद्ध वातावरण और सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि बढ़ता तापमान, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव पूरी दुनिया के सामने गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे समय में वृक्षारोपण सबसे प्रभावी और सरल उपायों में से एक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने प्रतिदिन एक पौधा लगाने का आजीवन प्रण लिया है। यदि किसी दिन किसी कारणवश बाहर पौधा लगाना संभव नहीं होता, तो वे गमले में पौधा लगाकर भी अपने संकल्प का निर्वहन करते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे प्रकृति के प्रति समर्पण और अनुशासन का प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे संकल्प समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान केवल वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भविष्य के निर्माण का संकल्प है।

कश्यप ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पीपल का वृक्ष आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम है। धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत पवित्र माना गया है, वहीं वैज्ञानिक रूप से यह अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर वायु गुणवत्ता सुधारने और शहरी प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में लगभग 7 करोड़ 50 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने नागरिकों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में तिरंगा फहराने के साथ-साथ एक पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का भी आह्वान किया।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी, खाद्य मंत्री  दयाल दास बघेल, संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, विधायक  इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन  मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ)  अरुण कुमार पाण्डेय सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने पीपल के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने वृक्षारोपण के साथ पौधों के संरक्षण का भी संकल्प दोहराया।

शराब घोटाला मामला- SC से अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त

शराब घोटाला मामला- SC से अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त

 रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड में हुए घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारी अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने जमानत के साथ सख्त शर्त भी लगाई है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की दलील को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि ट्रायल के दौरान अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे। इसकी सूचना विधिवत जिला अदालत को देनी होगी।

इसके साथ ही उन्हें अपने रहने का पता और मोबाइल नंबर संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराना होगा। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल के दौरान जब भी अदालत बुलाएगी, अनवर ढेबर को पेश होना होगा। सुनवाई के दौरान अनवर ढेबर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा, जबकि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने पैरवी की।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से कहा कि यदि अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ में रहते हैं तो गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए जमानत की शर्त के रूप में उन्हें राज्य से बाहर रहने का निर्देश दिया। साथ ही अधिकारियों को अपना वर्तमान पता और संपर्क नंबर देने के लिए भी कहा गया है। बता दें इससेपहले 13 मई को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

जहाँ कभी पानी की थी चिंता, आज हर मौसम में जीवन का आधार बना जल स्रोत

जहाँ कभी पानी की थी चिंता, आज हर मौसम में जीवन का आधार बना जल स्रोत

 00 विकसित भारत जी-राम-जी योजना से बदली वनांचल गाँवों की तस्वीर

00 जल संरक्षण के साथ रोजगार और आजीविका का मजबूत संबल
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनभागीदारी और ग्रामीण विकास से जोड़कर लागू की जा रही विकसित भारत जी-राम-जी योजना दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रही है। सूरजपुर जिले के ओडग़ी विकासखंड के ग्राम पंचायत कालामांजल की सफलता इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि योजनाबद्ध जल संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता से किसी गाँव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती हैं। कालामांजल कभी ऐसा गाँव था जहाँ बारिश का अधिकांश पानी बह जाता था और गर्मी आते-आते जल स्रोत सूखने लगते थे। पेयजल, मवेशियों के लिए पानी और खेती-किसानी जैसी आवश्यकताओं के लिए ग्रामीणों को लंबे समय तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पानी की कमी यहाँ के लोगों की सबसे बड़ी चिंता बन गई थी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जल संरक्षण को ग्रामीण समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इसी सोच के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम का निर्माण कराया गया। इन संरचनाओं ने वर्षा जल को रोककर जमीन में समाहित करने का प्रभावी कार्य किया। साथ ही मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण हुआ और जंगल से आने वाला कचरा डैम तक पहुँचने से पहले ही रुकने लगा। इससे जल स्रोत न केवल संरक्षित हुए, बल्कि अधिक स्वच्छ और सुरक्षित भी बने। ग्राम के निवासी  मनोहर सिंह बताते हैं कि पहले गर्मी के दिनों में पानी की तलाश ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या होती थी। मवेशियों को पानी पिलाना और खेती करना दोनों ही कठिन हो जाता था। अब वही जल स्रोत पूरे वर्ष उपयोग में आ रहा है। ग्रामीण इस जल का उपयोग पेयजल, स्नान, कपड़े धोने, मवेशियों को पानी पिलाने और मत्स्य पालन जैसे कार्यों में कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत के सरपंच अर्जुन सिंह के अनुसार, इस योजना ने केवल जल संरक्षण ही नहीं किया, बल्कि 250 से अधिक श्रमिकों को रोजगार भी उपलब्ध कराया। निर्माण कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। आज कालामांजल के जल स्रोत पहले की तुलना में अधिक समृद्ध हैं और ग्रामीण भविष्य को लेकर आश्वस्त दिखाई देते हैं। खेती की संभावनाएँ बढ़ी हैं, मवेशियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है और मत्स्य पालन जैसी अतिरिक्त आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। ग्रामीणों ने इस सकारात्मक परिवर्तन के लिए राज्य शासन और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनका गाँव हर मौसम में पानी के भरोसे के साथ विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।

 हर बेटी को मिले सुरक्षित और स्वच्छ माहौल- राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा

 हर बेटी को मिले सुरक्षित और स्वच्छ माहौल- राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा

 डीएमएफ मद से तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में 3.50 करोड़ से बनेंगे आधुनिक बालिका शौचालय

​रायपुर, 05 अगस्त 2026/छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण अंचल की बेटियों को स्वच्छता, सम्मान और सुविधायुक्त शैक्षणिक माहौल प्रदान करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है। राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा के विशेष प्रयासों के फलस्वरूप तिल्दा विकासखंड के 50 ग्राम पंचायतों के शासकीय विद्यालयों में बालिका शौचालयों के निर्माण के लिए 3 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि की वित्तीय एवं प्रशासकीय मंजूरी प्रदान की गई है। जिला खनिज संस्थान न्यास मद से स्वीकृत यह सौगात क्षेत्र में बालिका शिक्षा को नए आयाम देने के साथ ही स्वच्छता अभियान को धरातल पर और अधिक सशक्त बनाएगी।

डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनेगी आधुनिक बालिका शौचालय

​इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार बेटियों के स्वाभिमान, बेहतर स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव अक्सर बेटियों की पढ़ाई में रुकावट बनता था। तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनने वाले ये आधुनिक बालिका शौचालय केवल एक निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि यह हमारी बेटियों के सम्मान और उनकी उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। विकास का यह प्रवाह अनवरत जारी रहेगा।

तिल्दा ब्लॉक की इन 50 गांवों को बनेगा शौचालय

​प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार सभी 50 ग्राम पंचायतों के विद्यालयों में 01-01 बालिका शौचालय का निर्माण किया जाएगा। ​इस योजना के तहत तिल्दा जनपद क्षेत्र के जिन 50 गांवों के विद्यालयों का चयन किया गया है, उनमें छपोरा, कोहका, मोहरेंगा, खौना, आलेसुर, कोटा, बोईरझीटी, अल्दा, मानपुर, इल्दा, सतभावा, सरोरा, भिंभौरी के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। इसी प्रकार मोतिमपुर कला, सगुनी, खपरीडीह खुर्द (चिंगरिया), ओटगन, सरफोंगा, छतौद, जंजगीरा, रजिया, भड़हा, बुडेरा, खमरिया (कोनारी), चांपा, सिनोधा,भरुवाडीह कला, खैरखूट(बलोदीखुर्द), जलसो के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। सरारीडीह, छच्छानपैरी, किरना, तुलसी(अ), मुड़पार, नहरडीह, कुम्हारी, लखना खपरीकला, मूरा, ताराशिव, असौंदा, केशला, बुड़गहन(सुंदरा), भिलौनी, कठिया, बिठिया, घिवरा, धनसुली, तुलसी मानपुर और कुंदरू के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

​क्षेत्र में उत्साह की लहर

​एक साथ 50 गांवों के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में 3.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की मंजूरी से पूरे तिल्दा क्षेत्र के ग्रामीणों, स्कूली छात्राओं और अभिभावकों में भारी उत्साह है। जनप्रतिनिधियों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा का आभार जताया है।मंत्री श्री वर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना इन्हें निर्धारित समयावधि के भीतर पूर्ण किया जाए।

विशेष लेख : नवजात का पहला सुरक्षा कवच- स्तनपान और इसका सामाजिक महत्व

विशेष लेख : नवजात का पहला सुरक्षा कवच- स्तनपान और इसका सामाजिक महत्व

 माँ का दूध नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक है

अमृत तुल्य है माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध

 रायपुर, 5 अगस्त 2026/ विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिशु के स्वास्थ्य के लिए माँ के दूध के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना है। जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और शुरुआती छह महीने तक केवल माँ का दूध ही देना बच्चे के लिए सबसे जरूरी है। स्तनपान के दौरान त्वचा से त्वचा का संपर्क मां और बच्चे के बीच भावनात्मक बंधन को मजबूत करता है, जिससे आराम, गर्माहट और सुरक्षा की भावना मिलती है जो स्वस्थ भावनात्मक विकास में सहायक होती है।

स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाती है

हर साल 1 अगस्त से 7 अगस्त तक दुनिया भर में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य माताओं और समाज को शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के अनुसार, शिशु के जन्म के बाद पहला घंटा और शुरुआती छह महीने उसका पूरा जीवन संवारने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। स्तनपान करने वाले शिशुओं में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुछ श्वसन संबंधी संक्रमण जैसी आम बचपन की बीमारियों का खतरा कम होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इष्टतम स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाकर विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष लाखों शिशु मृत्यु को रोकने की क्षमता रखता है।

अमृत तुल्य है पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम)

जन्म के पहले कुछ घंटों में, माँ का दूध सिर्फ़ भोजन नहीं होता, बल्कि यह नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक होती है, जो सीधे माँ के शरीर से बच्चे तक पहुँचती है। जन्म के बाद का पहला घंटा, जिसे अक्सर गोल्डन आवर कहा जाता है, स्तनपान शुरू करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान बच्चे स्वाभाविक रूप से सतर्क रहते हैं और सहज रूप से स्तन की तलाश करते हैं। त्वचा से त्वचा का शुरुआती संपर्क न केवल सफल स्तनपान की दर को बढ़ाता है, बल्कि बच्चे के तापमान, हृदय गति और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।

शिशु के जन्म के तुरंत बाद (एक घंटे के भीतर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलस्ट्रम कहा जाता है, बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका होता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीबॉडीज, प्रोटीन और विटामिन होते हैं, जो नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करते हैं और उसे विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से बचाते हैं।

शुरुआती 6 महीने केवल और केवल मां का दूध

चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि जन्म से लेकर 6 महीने की उम्र तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिए। इस अवधि के दौरान बच्चे को पानी, ऊपर का दूध या शहद जैसी चीजें देने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां के दूध में बच्चे की प्यास और भूख बुझाने के लिए सही अनुपात में पानी और सभी आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। 6 महीने पूरे होने के बाद, स्तनपान जारी रखते हुए बच्चे को धीरे-धीरे ऊपरी पौष्टिक आहार देना शुरू किया जा सकता है, जिसे 2 साल या उससे अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है।

स्तनपान के बहुआयामी लाभ

शिशु के लिए स्वास्थ्य वरदान है, स्तनपान कराने से बच्चों में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुपोषण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि स्तनपान करने वाले बच्चों का बौद्धिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य अन्य बच्चों की तुलना में बेहतर होता है। यह आगे चलकर बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और अस्थामा जैसी क्रोनिक बीमारियों की संभावना को घटाता है।

मां के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

स्तनपान कराने से माताओं में स्तन कैंसर और अंडाशय के कैंसर का जोखिम कम होता है। यह प्रसव के बाद वजन घटाने और गर्भाशय को पुनः सामान्य आकार में लाने में मदद करता है। मां और बच्चे के बीच एक भावनात्मक और अटूट संबंध स्थापित होता है।

समाज और परिवार की जिम्मेदारी

स्तनपान केवल एक मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज की साझी जिम्मेदारी है। अक्सर देखा जाता है कि जानकारी के अभाव, सामाजिक रूढ़ियों, या कामकाजी माहौल में सुविधाओं की कमी के कारण महिलाएं समय पर स्तनपान नहीं करा पातीं। प्रसव के बाद मां को सही पोषण, मानसिक शांति और आराम मिलना आवश्यक है ताकि वह बिना किसी तनाव के बच्चे को स्तनपान करा सके। कामकाजी माताओं के लिए कार्यस्थलों में क्रैच सुविधा, मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) और ब्रेस्टफीडिंग ब्रेक जैसी सुविधाएं होना बेहद जरूरी है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर माताओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ फीडिंग रूम की व्यवस्था होनी चाहिए।

स्तनपान एक स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी की नींव

विश्व स्तनपान सप्ताह हमें यह याद दिलाता है कि बच्चों को उनका मौलिक अधिकार मां का दूध दिलाने के लिए हम सभी को मिलकर एक अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। जब एक मां बिना किसी संकोच और बाधा के अपने बच्चे को स्तनपान करा सकेगी, तभी हम एक कुपोषण-मुक्त और स्वस्थ समाज की कल्पना साकार कर सकते हैं।

सशक्त बचपन, समृद्ध छत्तीसगढ़ : पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर

सशक्त बचपन, समृद्ध छत्तीसगढ़ : पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर

 00 बच्चों के पोषण, संरक्षण और सर्वांगीण विकास का नया अध्याय

रायपुर। किसी भी राज्य की वास्तविक प्रगति उसके बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा से मापी जाती है। छत्तीसगढ़ ने इसी सोच को आधार बनाकर बच्चों के सर्वांगीण विकास को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की दूरदर्शी नीतियों और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के सक्रिय नेतृत्व में प्रदेश में बच्चों के पोषण, संरक्षण और भविष्य निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं। आईसीडीएस, मिशन वात्सल्य, पोषण अभियान और बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन ने राज्य को बाल विकास के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।
आंगनबाड़ी केंद्र बन रहे बाल विकास के आधुनिक केंद्र
प्रदेश में 11 हजार 490 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम और आकर्षक बनाने का कार्य तेजी से जारी है। इन केंद्रों में बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड पेंटिंग, पोषण वाटिका, खेल एवं शिक्षण आधारित गतिविधियों जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे बच्चे सीखने के साथ आनंदमय वातावरण में विकसित हो सकें। मनरेगा अभिसरण के माध्यम से 2 हजार 337 नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को स्वीकृति मिली है। वहीं पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 191 नए आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा चुके हैं। नियद नेल्ला नार 2.0 के तहत 10 जिलों में 12 हजार 964 आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों तक सेवाएं पहुंचा रहे हैं। मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या 51 हजार 45 से बढ़कर 52 हजार 258 तथा सहायिकाओं की संख्या 44 हजार 826 से बढ़कर 51 हजार 548 हो गई है, जिससे सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार आया है।

पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर


कुपोषण पर प्रभावी प्रहार
छत्तीसगढ़ राज्य में बच्चों में कुपोषण कम करने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। पोषण ट्रैकर ऐप के आंकड़ों के अनुसार 0-5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में स्टंटिंग में 7.82 प्रतिशत की कमी, वेट में 4.36 प्रतिशत की कमी, अंडरवेट में 2.76 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। दिसंबर 2023 में जहां बौनापन की दर 30.27 प्रतिशत थी, वह जून 2026 तक घटकर 22.45 प्रतिशत रह गई। यह उपलब्धि पोषण प्रबंधन, नियमित मॉनिटरिंग, सामुदायिक सहभागिता और आंगनबाड़ी आधारित सेवाओं के प्रभावी संचालन का परिणाम है।
पोषण अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन
राष्ट्रीय पोषण माह और पोषण पखवाड़ा के दौरान छत्तीसगढ़ ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में छत्तीसगढ़ राज्य प्रति आंगनबाड़ी गतिविधियों में प्रथम स्थान पर रहा। अप्रैल 2025 के पोषण पखवाड़ा में भी छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया। प्रदेश में सितंबर-अक्टूबर 2025 के पोषण माह के दौरान 71 हजार 887 गतिविधियां और अप्रैल 2026 के पोषण पखवाड़ा में 34 लाख 93 हजार 474 गतिविधियां आयोजित की गईं। साथ ही स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए रेडी टू ईट इकाइयों की स्थापना की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल शुरू हो चुकी है।

पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर


मिशन वात्सल्य से बच्चों को सुरक्षा और संबल
अनाथ, परित्यक्त और विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए मिशन वात्सल्य प्रभावी सुरक्षा कवच बनकर उभरा है। राज्य में बाल देखरेख संस्थाओं की संख्या बढ़कर 109 हो गई है। मुख्यमंत्री बाल उदय योजना के माध्यम से सैकड़ों बच्चों को शिक्षा, देखभाल और पुनर्वास का लाभ मिला है। चाइल्ड हेल्पलाइन में प्राप्त 1 लाख 65 हजार 979 कॉलों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए हजारों मामलों का निराकरण किया गया। बाल संरक्षण सेवाओं के विस्तार का प्रभाव दत्तक ग्रहण और स्पॉन्सरशिप योजनाओं में भी स्पष्ट दिखाई देता है। दत्तक ग्रहण से लाभान्वित बच्चे 42 से बढ़कर 234 और स्पॉन्सरशिप से लाभान्वित बच्चे 767 से बढ़कर 2 हजार 37 हो गए हैं। यह वृद्धि बच्चों को पारिवारिक वातावरण और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार की संवेदनशील प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम
राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान ने सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक सक्रियता दोनों को नई दिशा दी है। बाल विवाह प्रतिरोध अधिकारियों की संख्या बढ़कर 1 हजार 382 हो गई है। इसके परिणामस्वरूप रोके गए बाल विवाहों की संख्या 109 से बढ़कर 888 तक पहुंच गई है। यह परिवर्तन केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बेटियों के शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव का संकेत है।

पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर


भविष्य की मजबूत नींव
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में संचालित ये प्रयास छत्तीसगढ़ के लाखों बच्चों को स्वस्थ, सुरक्षा, शिक्षित और सशक्त भविष्य की ओर अग्रसर कर रहे हैं। आधुनिक आंगनबाड़ी व्यवस्था, पोषण सुधार, बाल संरक्षण सेवाओं का विस्तार और बाल विवाह उन्मूलन जैसे बहुआयामी प्रयासों ने छत्तीसगढ़ को बाल विकास के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी और आदर्श राज्य के रूप में स्थापित किया है। सशक्त बचपन ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव है और राज्य सरकार उसी नींव को और अधिक मजबूत बनाने के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।

कर्तव्यनिष्ठ होकर जनसेवा एवं सुशासन के लिए जमीनी स्तर पर करें बेहतर कार्य : मुख्यमंत्री साय

कर्तव्यनिष्ठ होकर जनसेवा एवं सुशासन के लिए जमीनी स्तर पर करें बेहतर कार्य : मुख्यमंत्री साय

 00 प्रशासनिक सेवा जनविश्वास अर्जित करने का माध्यम, संवेदनशीलता और पारदर्शिता को बनाएं कार्यशैली का आधार

00 मुख्यमंत्री से 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकात
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने नवचयनित अधिकारियों को उनके भावी प्रशासनिक दायित्वों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा में चयन होना उपलब्धि अवश्य है, लेकिन वास्तविक सफलता तब है जब अधिकारी अपने पद का उपयोग जनसेवा, सुशासन और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए करें।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी शासन और जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उनके निर्णय, व्यवहार और कार्यशैली से आम नागरिक का शासन के प्रति विश्वास मजबूत होता है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी को संवेदनशीलता, पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करते समय जनता की अपेक्षाओं और स्थानीय परिस्थितियों को समझना अत्यंत आवश्यक है। अधिकारी यदि लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समयबद्ध समाधान की दिशा में कार्य करें, तो प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास स्वत: बढ़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा, वन संपदा, उर्वर भूमि और मजबूत ऊर्जा क्षमता उपलब्ध है। इन संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए राज्य को विकसित बनाने में प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में लंबे समय तक नक्सलवाद बड़ी बाधा रहा, लेकिन सुरक्षा बलों के साहस, केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति तथा जनविश्वास के कारण अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। जिन क्षेत्रों में कभी विकास पहुंचना कठिन था, वहां अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि उन्हें विशेष रूप से दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा। ऐसे क्षेत्रों में केवल प्रशासनिक दायित्व निभाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भाव भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिकारियों को चाहिए कि वे शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें

मुख्यमंत्री ने सुशासन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की गई है। साथ ही ई-ऑफिस प्रणाली लागू कर शासन की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, दक्ष और समयबद्ध बनाया गया है। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों का उपयोग प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजस्व से जुड़े विषय आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़े होते हैं। भूमि, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य राजस्व मामलों में लोगों को समय पर राहत मिलना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासनिक अधिकारी की छोटी-सी पहल भी किसी परिवार की बड़ी समस्या का समाधान कर सकती है। इसलिए अधिकारी संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएं और प्रत्येक प्रकरण को मानवीय दृष्टि से देखें।

उन्होंने अधिकारियों को व्यवहार में विनम्रता और संयम बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि लोगों की शिकायतों को सुनना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। कई बार केवल धैर्यपूर्वक शिकायत सुन लेने से ही आधी समस्या समाप्त हो जाती है। यदि अधिकारी जनता से संवाद नहीं करेंगे, तो छोटी समस्याएं भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। इसलिए प्रत्येक अधिकारी को जनता के प्रति सहज, सुलभ और उत्तरदायी रहना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके प्रशिक्षण अनुभवों की जानकारी भी ली तथा उन्हें भविष्य में अपने पदेन दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करते हुए प्रदेश के विकास और सुशासन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक टी.सी. महावर ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 2025 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों का इंडक्शन प्रशिक्षण अब पूर्ण हो चुका है। इसके पश्चात सभी प्रशिक्षु अधिकारी प्रदेश के विभिन्न जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में पदस्थ होकर शासन के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 बैच में कुल सात अधिकारी शामिल हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक  टी.सी. महावर, संयुक्त संचालक मेनका प्रधान तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति में आयोजित आरुग सम्मान समारोह का पोस्टर रायपुर प्रेस क्लब में विमोचित

स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति में आयोजित आरुग सम्मान समारोह का पोस्टर रायपुर प्रेस क्लब में विमोचित

 रायपुर। लोककला और पंडवानी परंपरा को समर्पित प्रसिद्ध पंडवानी गायिका स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति में आयोजित होने वाले आरुग सम्मान समारोह के पोस्टर का विमोचन बुधवार को रायपुर प्रेस क्लब में किया गया।
यह सम्मान समारोह 7 अगस्त को शहीद स्मारक, रायपुर में आयोजित होगा। कार्यक्रम का आयोजन अलीम बंसी, तीजन बाई के परिवारजनों के द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। समारोह में लोककला, संस्कृति और पंडवानी की विरासत को आगे बढ़ाने वाले कलाकारों का सम्मान किया जाएगा तथा स्वर्गीय तीजन बाई के कला-साधना से जुड़े अविस्मरणीय योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाएगा।पोस्टर विमोचन के अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी , कोषाध्यक्ष दिनेश यदु सहित आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने प्रदेशवासियों एवं कला प्रेमियों से बड़ी संख्या में समारोह में शामिल होकर स्वर्गीय तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करने और कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने की अपील की।

BIG ब्रेकिंग: साय कैबिनेट ने लिये कई अहम फैसले, पढ़िए मंत्रिपरिषद की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय…

BIG ब्रेकिंग: साय कैबिनेट ने लिये कई अहम फैसले, पढ़िए मंत्रिपरिषद की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय…

 दिनांक : 05 अगस्त 2026 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –

1. मंत्रिपरिषद ने ’छत्तीसगढ़ राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन’ को मंजूरी दी है। इस मिशन का उद्देश्य राज्य में सुशासन, नई तकनीक, कौशल विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। यह मिशन 5 वर्षों के लिए होगा, जिस पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इस मिशन के तहत – 100 AI डेटा लैब बनाई जाएंगी, 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, 300 से अधिक AI स्टार्टअप्स को सहायता दी जाएगी, 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को AI का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन के कार्यों को आसान और तेज़ बनाने के लिए 50 से अधिक AI आधारित सेवाएं विकसित की जाएंगी।

यह मिशन भारत सरकार के IndiaAI Mission के अनुरूप छत्तीसगढ़ को उत्तरदायी, नवाचार-आधारित और भविष्य उन्मुख डिजिटल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

2. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ में हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट (Heavy Earth Moving Equipment) मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र की स्थापना के लिए भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को रियायती दर पर भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बीईएमएल भारत सरकार का एक प्रतिष्ठित मिनीरत्न सार्वजनिक उपक्रम है। हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र हेतु यह राज्य का पहला उद्योग होगा, जिसकी स्थापना से छत्तीसगढ़ को देश के औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी और राज्य में आधुनिक भारी मशीन निर्माण उद्योग की शुरुआत होगी।

मंत्रिपरिषद के इस महत्वपूर्ण निर्णय से राज्य में बड़े निवेश को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। राज्य में संयंत्र की स्थापना से औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और छत्तीसगढ़ विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा।

3. मंत्रिपरिषद् ने लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए वर्क्स एण्ड अकाउंट मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (WAMIS) लागू करने के प्रथम चरण को मंजूरी दी है। इस प्रणाली के माध्यम से कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB), बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन तथा गुणवत्ता की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगी। सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित इस प्रणाली को पहले लोक निर्माण विभाग में लागू किया जाएगा, जिसके बाद अन्य निर्माण एवं अधोसंरचना विभागों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। इससे निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, भुगतान की प्रक्रिया तेज होगी, कार्यों की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और परियोजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनेगा।

4. मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना अंतर्गत बारहमासी सड़कों के निर्माण हेतु जारी दिशा-निर्देशों में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। संशोधनों के तहत ग्रामीण आंतरिक गलियों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण तथा सड़क निर्माण से पूर्व मनरेगा से मिट्टी कार्य की अनिवार्यता समाप्त की गई है। योजना की पात्रता का दायरा बढ़ाकर ऐसे सभी ग्रामीण मार्गों को शामिल किया गया है, जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अथवा अन्य योजनाओं में सम्मिलित नहीं हैं। आवश्यकता अनुसार नाबार्ड ऋण, पर्यावरण एवं अधोसंरचना विकास मद, खनिज न्यास मद सहित अन्य स्रोतों से भी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा सकेंगे। कार्यों का अनुमोदन प्रशासनिक विभाग करेगा तथा क्रियान्वयन की समीक्षा एवं अंतर्विभागीय समन्वय के लिए राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की जाएगी।

5. मंत्रिपरिषद् ने वित्त विभाग के उस प्रस्ताव का अनुमोदन किया है, जिसके तहत Asian Development Bank (ADB) से छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के क्रियान्वयन हेतु “Anjor LIGHT (Anjor Linked Implementation & Guidance for Holistic Tracking)’’ तकनीकी सहायता परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये का पूर्णतः अनुदान (Grant) प्राप्त किया जाएगा। यह तीन वर्ष (1 दिसंबर 2026 से 30 नवंबर 2029) की बहु-क्षेत्रीय परियोजना है, जिसमें राज्य शासन अथवा भारत सरकार का कोई वित्तीय अंशदान नहीं होगा।

परियोजना के अंतर्गत सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को सुदृढ़ करना, PPP इकोसिस्टम का विकास, ग्रीन एवं ब्लेंडेड फाइनेंस को बढ़ावा देना, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों (SOEs) की कार्यक्षमता में सुधार, क्लाइमेट-रेजिलिएंट परियोजनाओं का विकास तथा छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुरूप प्राथमिकता आधारित परियोजनाओं की पाइपलाइन तैयार की जाएगी। इसके लिए परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) की स्थापना की जाएगी।

यह परियोजना पूर्णतः अनुदान आधारित होने से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा तथा इससे संस्थागत क्षमता निर्माण, निवेश संवर्धन और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति को गति मिलेगी।

6. मंत्रिपरिषद् ने राज्य योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की राशि का अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। अब योजनाओं की राशि विभिन्न बैंक खातों में लंबे समय तक निष्क्रिय नहीं रहेगी, बल्कि एक केंद्रीकृत मदर अकाउंट के माध्यम से आवश्यकता होने पर ही सीधे हितग्राहियों या वेंडरों को भुगतान किया जाएगा। यह मॉडल भारत सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजनाओं में लागू SNA प्रणाली की तर्ज पर राज्य की योजनाओं में भी लागू किया जाएगा, जिससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को और मजबूती मिलेगी।

इस व्यवस्था से योजनाओं के क्रियान्वयन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी, वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा और निष्क्रिय राशि, गबन तथा बैंकिंग धोखाधड़ी जैसी संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। साथ ही, राज्य की नकदी प्रबंधन क्षमता बेहतर होगी, ब्याज का अनावश्यक बोझ कम होगा और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

7. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को आमजन एवं संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 200 करोड़ रूपए तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD)/बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध (लिस्टिंग) किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय से कंपनी के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के नए विकल्प उपलब्ध होंगे, ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा राज्य के विद्युत अवसंरचना विकास को और गति मिलेगी।

इसके लिए राज्य शासन द्वारा मूलधन एवं ब्याज के भुगतान पर प्रत्याभूति शुल्क में छूट सहित गारंटी प्रदान की जाएगी। साथ ही, लिस्टिंग प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक निर्णय लेने हेतु कंपनी के संचालक मंडल तथा आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए ऊर्जा विभाग को अधिकृत किया गया है।

मंत्री राजवाड़े के प्रयासों से 97 गांवों में होगा विद्युत विस्तार

मंत्री राजवाड़े के प्रयासों से 97 गांवों में होगा विद्युत विस्तार

 00 11.62 करोड़ की लागत से दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचेगी बिजली

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री एवं भटगांव विधानसभा की विधायक लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों से धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत भटगांव विधानसभा क्षेत्र के 97 गांवों में विद्युत विस्तार कार्य स्वीकृत किया गया है। लगभग 11.62 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत इस परियोजना के माध्यम से सूरजपुर जिला के दूरस्थ गांवों और मोहल्लों तक विद्युत सुविधा पहुंचाई जाएगी, जिससे हजारों ग्रामीण परिवार लाभान्वित होंगे।

राज्य शासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वीकृत कार्यों में विकासखंड भैयाथान के 36 गांवों के लगभग 109 मोहल्लों/पारों, विकासखंड ओडग़ी के 32 गांवों के लगभग 68 मोहल्लों/पारों तथा विकासखंड सूरजपुर के 29 गांवों के लगभग 53 मोहल्लों/पारों में विद्युत विस्तार किया जाएगा। यह परियोजना विशेष रूप से उन ग्रामीण और जनजातीय बस्तियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां अब तक पर्याप्त विद्युत सुविधा उपलब्ध नहीं थी। बिजली पहुंचने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कार्य, पेयजल व्यवस्था, कृषि आधारित गतिविधियों तथा ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य विकास की रोशनी को अंतिम छोर तक पहुंचाना है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्वीकृति भटगांव विधानसभा के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति देगी। उन्होंने कहा कि हर घर और हर आंगन तक बिजली पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे ग्रामीण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और जनजातीय क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं साकार होंगी।

प्रदेश में 1460 गौधामों की होगी स्थापना, 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण

प्रदेश में 1460 गौधामों की होगी स्थापना, 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण

 00 42 गौधामों में लगभग 5109 पशुधन संरक्षित

रायुपर। गौधाम योजना का उद्देश्य प्रदेश में बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना, उनके संरक्षण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। गोधन हमारी ग्रामीण संस्कृति, कृषि व्यवस्था और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य सरकार गोधन संरक्षण और बेसहारा मवेशियों की देखभाल के लिए गौधाम योजना को राज्यभर में चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है, जिससे गौसेवा की परंपरा को मजबूती मिलने के साथ ही पशुधन संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। 
प्रदेश में 1460 गौधामों की होगी स्थापना
संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं से प्राप्त जानकारी के अनुसार घुमन्तू एवं निराश्रित पशुधन के व्यवस्थापन हेतु शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग रायपुर को 1460 गौधाम योजना के तहत स्वीकृति प्रदान की गई। प्रथम चरण में ऐसे गौठानों का चयन किया गया है जो राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप है एवं जहां समस्त आवश्यक अधोसंरचना पूर्ण हैं। गौधाम योजना के प्राप्त 408 आवेदनों में से 151 को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जिसमें पंजीयन पूर्ण कर पशुओं के व्यवस्थापन की कार्यवाही की जा रही है। 
42 गौधामों में लगभग 5109 पशुधन संरक्षित
गौधाम योजना अंतर्गत ऐसी शासकीय भूमि जहां अधोसंचना पूर्ण हो एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप हो, जैसे गौठान को चिन्हांकित कर स्वयं सेवी संस्था, पंजीकृत गौशाला, एन.जी.ओ. एफ.पी.ओ. ट्रस्ट के माध्यम से संचालित किया जाना है। वर्तमान में 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण कर लिया गया है और 42 गौधामों में लगभग 5109 पशुधन संरक्षित है। कलेक्टर/जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा, पंचायत द्वारा प्रदायित अनापत्ति प्रमाण पत्र एवं जिला स्तर पर गठित समिति के भौतिक सत्यापन पश्चात, गौधाम के आवेदन छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को प्रेषित किये जाते हैं। प्राप्त आवेदन आयोग के क्रियान्वयन समिति की अनुशंसा हेतु प्रत्येक 03 माह में एक बार आयोजित बैठक में विस्तृत समीक्षा की जाती है, तत्पश्चात प्रशासकीय स्वीकृति हेतु शासन को प्रेषित की जाती है। 
प्रत्येक विकास खण्ड में उत्कृष्ठ 10 गौठानों का किया जाएगा चयन

प्रशासकीय स्वीकृति पश्चात आयोग के साथ अनुबंध एवं पंजीयन पश्चात जिला प्रशासन के माध्यम से गौधाम में घुमन्तू पशुओं का व्यवस्थापन किया जाता है। पशुधन विकास विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग नियम संशोधित कर गौधाम संचालन हेतु ग्राम पंचायत को प्राथमिकता दी गई। साथ-साथ शहरी गौठान को भी योजना में शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग द्वारा प्रेषित प्रस्ताव एवं शासन द्वारा स्वीकृत योजना में गौधाम निर्माण के लक्ष्य निर्धारित नहीं हैं, परन्तु अध्यक्ष गौ सेवा आयोग द्वारा परिकल्पना की गई है कि प्रत्येक विकास खण्ड में उत्कृष्ठ 10 गौठानों का चयन कर पूरे प्रदेश के 1460 गौधामों की स्थापना की जाएगीं।ग्राम पंचायत के माध्यम से गौधाम संचालन के नियम संशोधन एवं शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल करने के पश्चात निश्चित रूप से भविष्य में गौधाम के संख्या में बढोतरी होगी। आवश्यकता अनुसार जिलों से गौधाम स्थापना हेतु आवेदन प्राप्त हो रहे है, जिस पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

लोक कलाओं के संरक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में संस्कृति विभाग की महत्वपूर्ण पहल

लोक कलाओं के संरक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में संस्कृति विभाग की महत्वपूर्ण पहल

 मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के लिए आवेदन आमंत्रित

चयनित कलाकारों को मिलेंगे प्रतिवर्ष 12 से 24 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि

रायपुर, 5 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के अंतर्गत प्रदेश के लोक कलाकारों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। योजना का उद्देश्य पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना, कलाकारों का सम्मान बढ़ाना तथा कला दलों के सतत विकास को नई गति प्रदान करना है।

योजना के अंतर्गत नृत्य-संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कलाकार, छत्तीसगढ़ी पाक कला (पारंपरिक व्यंजन) तथा छत्तीसगढ़ी सौंदर्यकला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजे जाएंगे। आवेदन प्रपत्र विभाग की वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध हैं तथा संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर स्थित कार्यालय से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

योजना के तहत पात्र कलाकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य होगा। चयनित कलाकारों को प्रतिवर्ष न्यूनतम 12 हजार रुपये से अधिकतम 24 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि ई-पेमेंट के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह राशि एक वित्तीय वर्ष में एक बार प्रदान की जाएगी।

योजना का लाभ केवल ऐसे कलाकारों को मिलेगा जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 96 हजार रुपये से अधिक नहीं है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ बैंक खाते का विवरण, आईएफएससी कोड तथा पैन कार्ड की छायाप्रति भी प्रस्तुत करनी होगी।

प्रविष्टियां भेजने का पता –
संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय,
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, व्यावसायिक परिसर,
द्वितीय तल, सेक्टर-27, नया रायपुर, अटल नगर (छत्तीसगढ़) – 492018

प्रविष्टियां प्राप्त होने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन भेजते समय लिफाफे पर "मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026" स्पष्ट रूप से अंकित करना आवश्यक होगा। प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण समिति द्वारा किया जाएगा तथा समिति का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।

मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना प्रदेश की समृद्ध लोक कला परंपराओं के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से लोक कलाकारों को न केवल आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी प्राप्त होगा।

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री साय

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री साय

 रायपुर: खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन का आधार है। छत्तीसगढ़ सरकार कृषि और किसानों की समृद्धि को प्राथमिकता देते हुए खेती को अधिक लाभकारी, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।  किसानों की आय बढ़ाने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल विविधिकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग, कृषि यंत्रीकरण तथा कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर  में आयोजित ‘किसान और किसानी-प्रोत्साहन तथा परिणाम’ विषयक संवाद कार्यक्रम में यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों को उत्कृष्ट खेती, नवाचार और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया। कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों, उद्योग जगत तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

किसान परिवार से जुड़ाव ने खेती की चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर दिया – मुख्यमंत्री  साय

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनका जीवन स्वयं खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। किसान परिवार में जन्म लेने के कारण उन्होंने बचपन से खेतों में काम किया और खेती की कठिनाइयों तथा किसानों की आवश्यकताओं को निकट से देखा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में दिल्ली में रहने के दौरान भी वे नियमित रूप से अपने गांव और खेत की जानकारी लेते थे तथा गांव पहुंचने पर खेत अवश्य जाते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। पहले किसान पूंजी के अभाव में साहूकारों या कर्ज पर निर्भर रहते थे, जबकि आज किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्हें समय पर ऋण उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड योजना प्रारंभ किए जाने को किसानों के लिए ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि आज किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर केसीसी ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे खेती करना पहले की तुलना में अधिक सहज हुआ है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार बनने के बाद सबसे पहले किसानों से किए गए वादों को पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां किसानों को धान का सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान की खरीदी कर रही है। इसके साथ ही पूर्व में लंबित दो वर्ष के बोनस का भी भुगतान किसानों को किया गया।

उन्होंने बताया कि पिछले खरीफ विपणन सीजन में राज्य के लगभग 25 लाख किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी की गई, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना है और राज्य सरकार उसी दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना, उत्पादन लागत कम करना तथा खेती के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराना है ताकि खेती लाभ का व्यवसाय बन सके।

उन्होंने कहा कि केवल धान आधारित खेती पर निर्भर रहने के बजाय किसानों को विविध फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं।

फसल विविधिकरण को मिलेगा प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी जैसी फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ आदान सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए बागवानी, सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी तथा लघु वनोपज आधारित गतिविधियों को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय के अनेक स्रोत विकसित हो सकें।

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने में सिंचाई सुविधाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार अधिक से अधिक खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नई सिंचाई परियोजनाओं, बैराज, एनीकट तथा नहर विस्तार पर तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि किसानों को सोलर सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान पर आधुनिक कृषि यंत्र भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी पर मटनार और देऊरगांव में लगभग 2 हजार करोड़ रुपये की लागत से बैराज निर्माण किया जाएगा, जिससे हजारों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही सिकासार-कोडार नहर लिंकिंग परियोजना के लिए लगभग 3 हजार करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसका लाभ मैदानी छत्तीसगढ़ के किसानों को मिलेगा। विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के पुनर्निर्माण एवं सुधार कार्यों के लिए भी लगभग 2800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

बस्तर में विकास का नया दौर

मुख्यमंत्री नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की योजनाओं की पहुंच बढ़ी है। उन्होंने बताया कि जिन सुरक्षा शिविरों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है, उन्हें सेवाडेरा के रूप में विकसित किया जा रहा है और लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को सेवाडेरा में परिवर्तित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नेतानार स्थित सेवाडेरा में इमली की पैकेजिंग जैसी गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल रहे हैं।

आधुनिक तकनीक से बदल रही खेती की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं ड्रोन दीदी बनकर नैनो डीएपी का छिड़काव कर रही हैं और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से बेहतर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आज अनेक शिक्षित युवा अच्छी नौकरियां छोड़कर आधुनिक खेती और कृषि आधारित उद्यमों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो कृषि क्षेत्र में बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।

नई उद्योग नीति से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य की नई उद्योग नीति को देशभर में सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश संबंधी समझौते (एमओयू) किए जा चुके हैं, जिनमें से अनेक परियोजनाओं पर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, डाटा सेंटर सहित अनेक नए क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

शिक्षा,  स्वास्थ्य और अधोसंरचना में भी तेजी से हो रहा विकास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कृषि विकास के साथ-साथ राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के क्षेत्र में भी व्यापक परिवर्तन ला रही है। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान संचालित हैं। बस्तर में नक्सलवाद कम होने के बाद शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है और अब वहां ब्रेन ट्यूमर जैसी जटिल सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में रेल अधोसंरचना का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। राज्य के 32 रेलवे स्टेशनों का विश्वस्तरीय उन्नयन किया जा रहा है। हाल ही में खरसिया-परमलकसा रेल लाइन को स्वीकृति मिली है तथा लंबे समय से लंबित कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना भी अब साकार होने जा रही है।

कार्यक्रम में उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन जी महाराज, नई दुनिया  समाचार पत्र के संपादक सतीश चंद्र श्रीवास्तव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में फिर एक्टिव हुआ मानसून: अगले 3 दिन झमाझम बारिश के आसार, कई जिलों में भारी वर्षा और वज्रपात का अलर्ट…

छत्तीसगढ़ में फिर एक्टिव हुआ मानसून: अगले 3 दिन झमाझम बारिश के आसार, कई जिलों में भारी वर्षा और वज्रपात का अलर्ट…

 रायपुर. सावन माह में मजबूत मौसम तंत्र के प्रभाव से छत्तीसगढ़ फिर भीगने के लिए तैयार है. आगामी तीन दिनों तक मौसम बिगड़ा हुआ रहने वाला है. पिछले 24 घंटों में प्रदेश के अधिकतर इलाकों में बारिश हुई. उत्तरी इलाकों में सबसे ज्यादा पानी गिरा है. प्रदेश में मौसमी बारिश सामान्य से 7 प्रतिशत कम दर्ज की गई है.

4 अगस्त से अगले चार दिनों तक रायपुर समेत प्रदेश के अधिकतर जिलों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना जताई है. कुछ स्थानों पर भारी बारिश और गरज-चमक के साथ वज्रपात की संभावना बनी रहेगी. वहीं प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं.

रायपुर में उमस से राहत के आसार नहीं

राजधानी रायपुर के लिए मौसम विभाग ने स्थानीय पूर्वानुमान जारी किया है. इसके मुताबिक बुधवार को आकाश में बादल छाए रह सकते हैं. वहीं बादल गरजने-चमकने के साथ बारिश होने की संभावना है. इस दौरान अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने के आसार हैं.

तीन सिस्टम हैं एक्टिव

मौसम विभाग ने बताया कि समुद्र तल पर मॉनसून द्रोणिका अनूपगढ़, दिल्ली, शाहजहांपुर, बस्ती, छपरा और नागालैंड तक बनी हुई है. उत्तर-पश्चिम बिहार के क्षेत्र में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. वहीं बंगाल की खाड़ी आंध्र प्रदेश के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है.

इन इलाकों में जमकर हुई बारिश

मौसम विभाग के जारी आंकड़ों के अनुसार, शंकरगड़ में 11 सेमी, कुसमी, रतनपुर, सक्ती और भोपालपट्टनम में 7 सेमी, सुकमा और सकोला में 6 सेमी और सरागांव और बीजापुर में 5 सेमी बारिश हुई है. वीं पेंड्रा, भैरमगढ़, करपावंड, छाल, बरमकेला, सरिया और बम्हनीडीह में 4 सेमी पानी गिरा. इसके अलावा अनेक स्थानों पर इससे काम वर्षा हुई.

राज्यपाल रमेन डेका से स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सौजन्य भेंट की

राज्यपाल रमेन डेका से स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सौजन्य भेंट की

 रायपुर: राज्यपाल  रमेन डेका से लोकभवन में स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव ने सौजन्य भेंट की।

स्वास्थ्य अधोसंरचना को मिलेगी नई गति: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

स्वास्थ्य अधोसंरचना को मिलेगी नई गति: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

 रायपुर:  स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में स्वास्थ्य अधोसंरचना को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य सचिव एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव के साथ विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान रायपुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इनमें ट्रॉमा सेंटर, क्रिटिकल केयर यूनिट, नवीन सिकल सेल इंस्टीट्यूट, बॉयज एवं गर्ल्स हॉस्टल तथा स्टाफ रेजिडेंशियल बिल्डिंग जैसे महत्वपूर्ण निर्माण शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएं प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

बैठक में आगामी कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई, ताकि परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए, जिससे आमजन को स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर लाभ शीघ्र मिल सके।

संत रविदास ने समरसता, समानता और भक्ति का जो मार्ग दिखाया, वही विकसित और सशक्त भारत की आधारशिला : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

संत रविदास ने समरसता, समानता और भक्ति का जो मार्ग दिखाया, वही विकसित और सशक्त भारत की आधारशिला : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष पर आयोजित कलश वंदन महाअभियान में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय

संत रविदास जयंती पर अगले वर्ष माघी पूर्णिमा को रहेगा सार्वजनिक अवकाश, मांस एवं मदिरा बिक्री होगी प्रतिबंधित

संत रविदास के नाम पर राज्य अलंकरण पुरस्कार और नवा रायपुर में प्रमुख चौक का होगा नामकरण

जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर से आए पवित्र कलश का किया वंदन, जिलों के प्रतिनिधियों को सौंपे कलश, गांव-गांव तक अभियान के लिए वाहनों को दिखाई हरी झंडी

रायपुर 4 अगस्त 2026/ संत शिरोमणि  गुरु रविदास महाराज का जीवन समरसता, समानता, भक्ति, श्रम और सामाजिक न्याय का अमर संदेश है। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। संत रविदास ने समाज को ऊंच-नीच, भेदभाव और छुआछूत से ऊपर उठकर मानवता, समान अधिकार और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग दिखाया। यही मार्ग विकसित, समरस और सशक्त भारत की आधारशिला है।मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कलश वंदन महाअभियान के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से लाए गए पवित्र मिट्टी एवं जल से भरे कलश को श्रद्धापूर्वक अपने मस्तक पर धारण कर संत रविदास के छायाचित्र के समक्ष स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजन-अर्चन कर संत रविदास को नमन किया तथा इसे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।

संत रविदास के सम्मान में मुख्यमंत्री ने की महत्वपूर्ण घोषणाएं

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने संत रविदास के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के क्रम में अगले वर्ष 2027 में उनकी जयंती (माघी पूर्णिमा) को प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन प्रदेशभर में मांस एवं मदिरा का विक्रय पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर प्रदान किए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से एक राज्य अलंकरण पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। साथ ही नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण भी संत गुरु रविदास के नाम पर किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में संत रविदास के प्रसिद्ध संदेश -
"ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न।
छोट-बड़ो सब सम बसैं, रविदास रहैं प्रसन्न।।" - का अंकन कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा कर प्रयास किया जाएगा।

जब-जब समाज में अन्याय बढ़ा, तब-तब संतों और महापुरुषों ने नई दिशा दी

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि भारत संतों, ऋषियों और महापुरुषों की पावन भूमि है। जब-जब समाज में अन्याय, अत्याचार, ऊंच-नीच, छुआछूत और भेदभाव जैसी विकृतियां बढ़ीं, तब-तब संतों और महापुरुषों ने समाज को नई दिशा प्रदान की। संत रविदास ने अपने जीवन और उपदेशों के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता और भक्ति का ऐसा संदेश दिया, जिसने समाज को नई चेतना प्रदान की।

उन्होंने कहा कि संत रविदास ने तत्कालीन शासक सिकंदर लोदी के धर्मांतरण के दबाव का भी साहसपूर्वक विरोध किया और यह संदेश दिया कि सभी मनुष्य समान हैं तथा ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल सच्ची भक्ति और सदाचार है। उनका प्रसिद्ध संदेश "मन चंगा तो कठौती में गंगा" आज भी समाज को आंतरिक शुद्धता और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाता है।

मुख्यमंत्री ने संत रविदास से जुड़ा प्रसंग भी साझा किया और कहा कि उनकी अटूट भक्ति और तपस्या के प्रभाव से कठौती में गंगा प्रकट होने की घटना केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सच्ची श्रद्धा और निर्मल मन से ईश्वर की प्राप्ति संभव है।

'विकास भी, विरासत भी' हमारा मार्गदर्शक मंत्र

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री का "विकास भी, विरासत भी" का संदेश देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण का मार्गदर्शक मंत्र है।

उन्होंने कहा कि संत रविदास की जन्मभूमि से लाई गई पवित्र मिट्टी और जल का कलश देशभर के मठों, मंदिरों और आस्था केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है। यह समाज के प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार को जोड़ने वाला राष्ट्रीय समरसता अभियान है।

कलश वंदन अभियान सामाजिक समरसता का जनआंदोलन बनेगा

मुख्यमंत्री  साय ने डॉ. सनम जांगड़े के नेतृत्व में सीर गोवर्धनपुर से पवित्र कलश लेकर आए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह प्रयास संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने सभी जिलों से आए प्रतिनिधियों को पवित्र कलश सौंपे तथा गांव-गांव तक इन्हें पहुंचाने वाले वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अभियान संत रविदास के समरसता, समानता और सामाजिक एकता के संदेश को प्रत्येक गांव, प्रत्येक समाज और प्रत्येक घर तक पहुंचाएगा।

संत रविदास का जीवन सर्वसमाज को जोड़ने की प्रेरणा : गुरु खुशवंत साहेब

कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास ने छोटे-बड़े के भेद को समाप्त कर समानता और सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार संत रविदास के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। कलश वंदन अभियान गांव-गांव तक जाकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करेगा।

समरसता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति : अजय जामवाल

इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अजय जमवाल ने कहा कि संत रविदास का समरसता का संदेश आज पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि समाज को जाति, धर्म और भेदभाव के आधार पर विभाजित करने वाली शक्तियों से सावधान रहने की आवश्यकता है। संतों की शिक्षाओं को व्यवहार में उतारकर ही सामाजिक एकता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे पवित्र कलश को प्रत्येक जिले के सभी आस्था केंद्रों तक पहुंचाकर संत रविदास के विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें।

संत रविदास के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक : सरोज पाण्डेय

इस अवसर पर सुश्री सरोज पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने धर्मांतरण के दबाव का दृढ़ता से विरोध करते हुए सनातन परंपरा, समानता, श्रम और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने वाले हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास का संदेश जन-जन तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।

बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, संत समाज एवं श्रद्धालु रहे उपस्थित

कार्यक्रम में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक अनुज शर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक  इंद्र कुमार साहू, विधायक  संपत अग्रवाल, विधायक  रोहित साहू, छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष  ध्रुव कुमार मिर्धा, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष  राजीव लोचन महाराज, महंत खेलुराम पैगवार, संत  युधिष्ठिर लाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।a

मंत्री राजवाड़े की पहल से सूरजपुर जिले को मिली 5 नए आंगनबाड़ी केंद्रों की स्वीकृति

मंत्री राजवाड़े की पहल से सूरजपुर जिले को मिली 5 नए आंगनबाड़ी केंद्रों की स्वीकृति

 o मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पोषण और बाल विकास सेवाओं का हो रहा निरंतर विस्तार

सूरजपुर। सीएम विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिला एवं बाल विकास सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की विशेष पहल और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप सूरजपुर जिले में 5 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के युक्तियुक्तकरण एवं संचालन की स्वीकृति प्रदान की गई है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालनालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह निर्णय भारत सरकार के दिशा-निर्देशों एवं राज्य शासन की स्वीकृति के आधार पर लिया गया है। इससे दूरस्थ एवं जरूरतमंद क्षेत्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं तथा किशोरियों को पोषण, स्वास्थ्य एवं पूर्व-प्राथमिक शिक्षा सेवाएं और अधिक सुलभ हो सकेंगी। स्वीकृत केंद्र ओड़गी और भैयाथान परियोजना के अंतर्गत डगमलापारा (चेंद्रा सेक्टर),भूंडा (मोहरसोप सेक्टर), झाडूडीह (चेंद्रा सेक्टर),पण्डोपारा (चेंद्रा सेक्टर),बगईहापारा (दर्रीपारा सेक्टर) पर संचालित होंगे। इन क्षेत्रों की जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति एवं स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्रों की स्वीकृति दी गई है।

विभागीय आदेश के अनुसार कुछ पूर्व संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों का युक्तियुक्तकरण कर उन्हें अधिक आवश्यकता वाले क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अधिक से अधिक हितग्राहियों तक सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है संचालनालय ने जिला प्रशासन एवं संबंधित परियोजना अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी नवस्वीकृत आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन 60 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से प्रारंभ किया जाए। साथ ही पोषण ट्रैकर एवं आईसीडीएस पोर्टल पर आवश्यक अद्यतन, कार्यकर्ता एवं सहायिका पदों की व्यवस्था तथा भवन एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री राजवाड़े ने कहा कि, राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुपोषण, स्वास्थ्य सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि, सूरजपुर जिले में नए आंगनबाड़ी केंद्रों की स्वीकृति से दूरस्थ बस्तियों में रहने वाले बच्चों और माताओं को सीधा लाभ मिलेगा तथा कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक मजबूती मिलेगी। विभागीय जानकारी के अनुसार इन नए केंद्रों की स्वीकृति के बाद सूरजपुर जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की कुल संख्या 2086 हो जाएगी। यह निर्णय राज्य सरकार की समावेशी विकास, मातृ-शिशु कल्याण तथा ग्रामीण क्षेत्रों तक मूलभूत सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पेसा और एफआरए टास्क फोर्स की बैठक सम्पन्न, जल, जंगल, जमीन का होगा बेहतर प्रबंधन

पेसा और एफआरए टास्क फोर्स की बैठक सम्पन्न, जल, जंगल, जमीन का होगा बेहतर प्रबंधन

 रायपुर, 04 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातिय क्षेत्र में पंचायत अनुसूचित क्षेत्र विस्तार अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम के तहत समन्वय से वनवासियों के हित में साझा जल-जंगल के बेहतर प्रबंधन से कार्य किया जाएगा। इस संबंध में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में पेसा और एफआरए टास्क फोर्स समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में जल, जंगल, जमीन के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन छत्तीसगढ़ राज्य हो तथा वनवासियों के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन हो इस संबंध में मुख्य सचिव ने विभागाीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि सभी पात्र व्यक्तियों को वन अधिकार अधिनियमों के अनुसार वन संसाधन अधिकार पत्र दिए जायें। बैठक में वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के क्रियान्वयन के संबंध में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए।

टास्क फोर्स की बैठक में छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, प्रावधान एवं क्रियान्वन की स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की गई। इसी तरह से वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत राज्य में प्राप्त निराकृत एवं लंबित दावों, आवेदनों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन के अधिकारों की मान्यता में हुई प्रगति तथा वन ग्रामों के राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तन की प्रगति की जानकारी विभागीय अधिकारियों ने दी।

बैठक में अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियमों के क्रियान्वयन की जानकारी का प्रस्तुतीकरण किया गया। इसी तरह से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ पेसा नियम के क्रियान्वयन के संबंध में भी प्रस्तुतिकरण दिया गया।

बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव  ऋचा शर्मा, पीसीसीएफ  अरूण पाण्डेय, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अन्य अधिकारी शामिल हुए।

CG- ज्वेलर्स दुकान में ग्राहक बनकर आया शख्स, कुछ देर बाद 4.45 लाख के सोने पर किया हाथ साफ

CG- ज्वेलर्स दुकान में ग्राहक बनकर आया शख्स, कुछ देर बाद 4.45 लाख के सोने पर किया हाथ साफ

 धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां ग्राहक बनकर पहुंचे शातिर चोर ने दिनदहाड़े ज्वेलर्स दुकान में हाथ साफ कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच पड़ताल शुरु कर दी है।

पढ़िए पूरी खबर

पूरा मामला नगरी थाना क्षेत्र के नगरी बाजार स्थित नवकार ज्वेलर्स का है। बताया जा रहा है कि आरोपी बड़ी ही चालाकी से दुकान में दाखिल हुआ और सोने की ईयर रिंग दिखाने की बात कहने लगा। दुकानदार को क्या पता था कि ये ग्राहक नहीं बल्कि एक शातिर चोर है।

सोने के ईयर रिंग लेकर हुआ फरार

इसी बीच जैसे ही दुकानदार का ध्यान थोड़ा भटका आरोपी ने मौके का फायदा उठाकर काउंटर पर रखे 9 नग सोने के ईयर रिंग पर हाथ साफ कर दिया और पलक झपकते ही दुकान से फरार हो गया, जब दुकान के मालिक ने काउंटर पर रखे जेवरात को गिना तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन फानन में आसपास तलाश की गई, लेकिन तब तक आरोपी भीड़ का फायदा उठाकर फरार हो चुका था।

CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

बताया जा रहा है कि चोरी हुए जेवरात की कुल कीमत 4 लाख 45 हजार रुपये आंकी गई है। घटना के बाद पीड़ित दुकान मालिक ने तत्काल नगरी थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर नगरी पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है और दुकान में लगे CCTV फुटेज को खंगाल रही है।

व्यापारी वर्ग में दहशत का माहौल

पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा। फिलहाल इस घटना के बाद नगरी के व्यापारी वर्ग में दहशत का माहौल है। अब देखना होगा कि नगरी पुलिस इस शातिर चोर को कब तक सलाखों के पीछे पहुंचा पाती है।

खेल अधोसंरचना की मजबूती और खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ का प्रावधान

खेल अधोसंरचना की मजबूती और खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ का प्रावधान

  छत्तीसगढ़ में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी, छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए 57 करोड़ का बजट

 उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की दी जानकारी

रायपुर-- उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने आज प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों, गतिविधियों, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने, खेल अधोसंरचना की मजबूती, महिला खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करने तथा खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के तहत 57 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान रखा गया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव  यशवंत कुमार और उप संचालक रश्मि ठाकुर भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में मौजूद थीं।

उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी चल रही है। राज्य के खेल अकादमियों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मुहैया कराने 14 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए पटियाला भेजा गया है। उन्होंने बताया कि खेल गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए राज्य शासन ने 6 नए जिलों गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में खेल अधिकारी के पदों का सृजन किया गया है। विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 44 प्रशिक्षकों, 4 जिला खेल अधिकारियों, 23 सहायक ग्रेड-3 और 8 वार्डन्स की भर्ती प्रक्रियाधीन है।

साव ने बताया कि राज्य में ज्यादा से ज्यादा बच्चे एवं युवा खेल के मैदानों में पहुंचे, इसके लिए सरकार सक्रियता और गंभीरता से काम कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के समय केवल 4 करोड़ रुपए के बजट वाले खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 304 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। दूरस्थ आदिवासी वनांचलों को खेल की मुख्य धारा से जोडऩे की अभिनव पहल करते हुए पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक के आयोजन के साथ ही इस साल से सरगुजा ओलंपिक भी राज्य में शुरु किया गया है। देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शानदार मेजबानी ने छत्तीसगढ़ को देश के खेल मानचित्र में प्रतिष्ठित किया है।  

खेलों के विकास के लिये 6 जिलों में जिला खेल अधिकारियों की होगी नियुक्ति

खेलों के विकास के लिये 6 जिलों में जिला खेल अधिकारियों की होगी नियुक्ति

 रायपुर। राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ की बढ़ती धाक के मद्देनजर रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में खेलों और खिलाडिय़ों के विकास के लिये कमर कसते हुए आज उपमुख्यमंत्री व खेल मंत्री अरुण साव नेबड़ा फैसला लेते हुए  सूबे के छह नए जिलों में जिला खेल अधिकारी  के पदों पर नियुक्ति की स्वीकृति दे दी गई है। इन नियुक्तियों से स्थानीय स्तर पर खेल गतिविधियों के संचालन और खिलाडिय़ों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।जिन जिलों में जिला खेल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी उनमें मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सक्ती, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही शामिल हैं। मंगलवार को पत्रकार वार्ता में यह जानकारी उपमुख्यमंत्री व खेल मंत्री अरुण साव ने दी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और सरकार खेल अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि नवा रायपुर और जशपुर में करीब 67 करोड़ रुपये की लागत से तीरंदाजी अकादमी का निर्माण कार्य जारी है, जिससे प्रदेश के खिलाडिय़ों को आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी। खेल मंत्री साव ने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन की शुरुआत की है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें प्रशिक्षण देना और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना है।14 प्रशिक्षकों को आधुनिक खेल प्रशिक्षण के लिए पटियाला भेजा गया है, जहां वे नवीनतम तकनीकों और खेल विज्ञान का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

प्रदेश के खिलाडिय़ों को उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ में जल्द ही हॉकी लीग का आयोजन किया जाएगा, जिससे प्रदेश के हॉकी खिलाडिय़ों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच मिलेगा और खेल संस्कृति को और मजबूती मिलेगी।

माँ के दूध से स्वस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत, प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत

माँ के दूध से स्वस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत, प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत

 00 जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर विशेष जोर, स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता गतिविधियां जारी

रायपुर। हर नवजात को जीवन की स्वस्थ और सुरक्षित शुरुआत मिले, इसी उद्देश्य के साथ प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्ताहभर अस्पतालों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा समुदाय स्तर पर विविध जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से माताओं, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व तथा उसके वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना उसके स्वस्थ विकास की सबसे मजबूत नींव है। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह संक्रमण से बचाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा कुपोषण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छह माह तक केवल स्तनपान कराने के बाद शिशु को उम्र के अनुरूप ऊपरी आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।

स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद मां के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होता है, कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है तथा मां और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध भी अधिक मजबूत बनता है। विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती एवं धात्री माताओं की काउंसलिंग, समूह चर्चा, स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, प्रश्नोत्तर कार्यक्रम तथा स्तनपान संबंधी व्यवहारिक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्यकर्मी माताओं को सही स्तनपान तकनीक, नवजात की देखभाल तथा स्तनपान से जुड़े सामान्य भ्रमों के वैज्ञानिक समाधान भी बता रहे हैं।

स्तनपान को केवल मां की जिम्मेदारी न मानकर पूरे परिवार की साझा जिम्मेदारी समझें। परिवार का सहयोग, सकारात्मक वातावरण और सही जानकारी ही प्रत्येक नवजात को स्वस्थ जीवन की बेहतर शुरुआत दे सकती है। जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक सुधार लाया जा सकता है तथा कुपोषण मुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया जा सकता है।

तीन वर्ष से एक ही जगह पर कार्य करने वाले अधिकारी - कर्मचारियों के कार्य में परिवर्तन करने जीएडी ने जारी किया पत्र

तीन वर्ष से एक ही जगह पर कार्य करने वाले अधिकारी - कर्मचारियों के कार्य में परिवर्तन करने जीएडी ने जारी किया पत्र

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से एक ही जगह पर जमे अधिकारी-कर्मचारी बदले जाएंगे। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग, छग शासन के सचिव अविनाश चंपावत ने आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक, मंत्रालय से लेकर कलेक्टर ऑफिस तक तीन साल से एक ही जगह पर काम कर रहे अधिकारी-कर्मचारी बदले जाएंगे। अगर किसी को रोकना बहुत जरूरी है तो कारण बताना होगा।

आदेश में लिखा है कि राज्य के विभिन्न विभागों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों, संभागीय आयुक्त कार्यालयों, कलेक्टर कार्यालयों तथा अधीनस्थ कार्यालयों में पदस्थ कतिपय अधिकारी एवं कर्मचारी लंबे समय से एक ही स्थान अथवा एक ही कार्य-पटल पर कार्यरत हैं। कर्मचारियों की कार्य क्षमता में वृद्धि एवं उनके समग्र विकास के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें कार्यालय में संपादित होने वाले सभी प्रकार के कार्यों का कार्यरत रहते हुए व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। इससे वे विभिन्न कार्य प्रक्रियाओं, नियमों एवं कार्यालयीन व्यवस्थाओं से भली-भांति परिचित होते हैं, जिससे उनकी दक्षता, कार्यकुशलता में निरंतर वृद्धि होती है। अतः कर्मचारियों को समय-समय पर विभिन्न कार्यों में सहभागिता एवं प्रशिक्षण का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए, ताकि उक्त उद्देश्य की प्रभावी रूप से पूर्ति सुनिश्चित की जा सके। अतएव प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही, कार्यकुशलता एवं सुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा निम्नानुसार निर्णय लिया जाता है।

  1. राज्य के सभी विभागों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों, संभाग आयुक्त कार्यालयों, कलेक्टर कार्यालयों एवं अधीनस्थ कार्यालयों में पदस्थ अधिकारी एवं कर्मचारियों के कार्य-पटल का प्रत्येक तीन वर्ष में अनिवार्य रूप से परिवर्तन किया जाए।
  2. कार्य-पटल परिवर्तन करते समय संबंधित अधिकारी/कर्मचारियों की प्रशासनिक आवश्यकता, कार्य की प्रकृति एवं कार्यालयीन हित का समुचित ध्यान रखा जाए।
  3. विशेष परिस्थितियों में यदि किसी अधिकारी/कर्मचारी को उसी कार्य-पटल पर बनाए रखना आवश्यक हो तो सक्षम प्राधिकारी के लिखित एवं कारणयुक्त अनुमोदन के उपरांत ही ऐसा किया जाए।
  4. समस्त विभागाध्यक्ष एवं कार्यालय प्रमुख यह सुनिश्चित करेंगे कि इस परिपत्र के प्रावधानों का समयबद्ध एवं प्रभावी अनुपालन किया जाए।
  5. इस संबंध में आवश्यक अभिलेख एवं कार्य-पटल परिवर्तन का विवरण कार्यालय स्तर पर संधारित किया जाए।

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अवैध रेत उत्खनन, भण्डारण एवं परिवहन पर करें सख्त कार्यवाही : मंत्री बघेल

अवैध रेत उत्खनन, भण्डारण एवं परिवहन पर करें सख्त कार्यवाही : मंत्री बघेल

 00 खाद्य मंत्री ने गरियाबंद में जिला स्तरीय जिला स्तरीय काम-काज की समीक्षा की

रायपुर। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण तथा गरियाबंद जिले के प्रभारी मंत्री  दयालदास बघेल की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्टर सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। मंत्री बघेल ने बैठक में खनिज विभाग की समीक्षा के दौरान कहा कि जिले में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने रेत, मुरुम, पत्थर सहित अन्य गौण खनिजों के अवैध कारोबार पर सख्ती से नियंत्रण रखने तथा नियमित जांच एवं कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में प्रभारी मंत्री  बघेल ने राजस्व प्रकरणों के त्वरित एवं समय-सीमा में निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व विभाग का समीक्षा करते हुए कहा कि खाता विभाजन, नामांतरण, सीमांकन, बंदोबस्त त्रुटि सुधार, न्यायालयीन प्रकरण एवं डायवर्सन संबंधी मामलों का गुणवत्तापूर्ण और शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने लंबित एनओसी प्रकरणों का भी समयबद्ध निराकरण करने तथा अनावश्यक विलंब नहीं होने देने के सख्त निर्देश दिए। बैठक में राजिम विधायक  रोहित साहू, कलेक्टर बीएस उइके, पुलिस अधीक्षक  वेदव्रत सिरमौर, वनमण्डलाधिकारी  शशिगानंदन के, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  प्रखर चंद्राकर सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री बघेल ने ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवासों को शीघ्र पूर्ण कराने, भूमिहीन परिवारों को स्वीकृत आवासों की प्रगति पर नियमित निगरानी रखने तथा व्यक्तिगत शौचालयों का शत-प्रतिशत निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष बल देते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अधिक से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर बड़े कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। जहॉ विभागीय अधिकारी बैंक एवं उनके मंशा अनुरूप आजीविका कार्यों को फार्म भराकर उन्हें आजीविका उपलब्ध कराने के लिए ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकरियों को निर्देशित किया कि जिला, ब्लॉक एवं पंचायत स्तर पर किसी भी प्रकार के शासकिय कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, तो जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से बताएं। साथ ही विभागीय सामग्रियों का वितरण भी जनप्रतिनिधियों को कराएं। उन्होंने आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने, हस्तशिल्प, मसाला प्रसंस्करण, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मशरूम उत्पादन तथा अन्य स्वरोजगार गतिविधियों का विस्तार एवं उनके लिए बाजार उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के निर्माणाधीन सड़क, भवन तथा अन्य अधोसंरचना कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी कार्य गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।