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तिरुपति-रक्सौल-तिरुपति साप्ताहिक एक्सप्रेस का नियमित संचालन प्रारंभ

तिरुपति-रक्सौल-तिरुपति साप्ताहिक एक्सप्रेस का नियमित संचालन प्रारंभ

 रायपुर- बिलासपुर। दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं बेहतर रेल संपर्क को ध्यान में रखते हुए ट्रेन संख्या 17433/17434 तिरुपति-रक्सौल-तिरुपति साप्ताहिक एक्सप्रेस के नियमित संचालन का निर्णय लिया गया है। यह ट्रेन वर्तमान में संचालित विशेष ट्रेन संख्या 07051/07152 तिरुपति-रक्सौल-तिरुपति साप्ताहिक विशेष ट्रेन का नियमित रूप होगी।

ट्रेन संख्या 17433 तिरुपति-रक्सौल एक्सप्रेस 1 जून से तिरुपति से प्रस्थान करेगी। वहीं ट्रेन संख्या 17434 रक्सौल-तिरुपति एक्सप्रेस 4 जून से रक्सौल से संचालित होगी।* गाड़ी संख्या 17433 तिरुपति-रक्सौल साप्ताहिक एक्सप्रेस प्रत्येक सोमवार को 1 जून से तिरुपति से प्रात: 08.15 बजे प्रस्थान कर रेणिगुंटा जंक्शन 08.36/08.38 बजे, कुडप्पा 10.18/10.20 बजे, यर्रगुन्तला 10.53/10.55 बजे, ताडिपत्रि 11.53/11.55 बजे, गुंतकल जंक्शन 13.20/13.30 बजे, आदोनि 14.18/14.20 बजे, रायचूर 15.40/15.42 बजे, कृष्णा 16.08/16.18 बजे, विकाराबाद जंक्शन 19.38/19.40 बजे, लिंगमपल्ली 20.38/20.40 बजे, सिकंदराबाद जंक्शन 21.25/21.35 बजे, चर्लापल्ली 21.58/22.00 बजे, काजीपेट 23.28/23.30 बजे, पेद्दपल्ली 00.23/00.25 बजे, मंचिर्याल 00.59/01.00 बजे, सिरपुर कागजनगर 01.54/01.56 बजे, बल्हारशाह 03.50/04.00 बजे, चांदाफोर्ट 04.15/04.17 बजे, वडसा 05.53/05.55 बजे, गोंदिया जंक्शन 07.30/07.40 बजे, दुर्ग 10.00/10.05 बजे, रायपुर जंक्शन 10.45/10.50 बजे, बिलासपुर जंक्शन 13.20/13.30 बजे, झारसुगुड़ा जंक्शन 18.05/18.07 बजे, राउरकेला 19.40/19.48 बजे, हटिया 22.50/22.55 बजे, रांची 23.05/23.15 बजे, मुरी जंक्शन 00.35/00.40 बजे, बोकारो स्टील सिटी 01.40/01.50 बजे, चंद्रपुरा 02.21/02.23 बजे, धनबाद जंक्शन 03.43/03.50 बजे, बराकर 04.31/04.32 बजे, चित्तरंजन 05.02/05.04 बजे, मधुपुर जंक्शन 06.01/06.03 बजे, जसीडीह जंक्शन 06.39/06.41 बजे, झाझा 08.00/08.05 बजे, किऊल जंक्शन 08.51/08.53 बजे, बरौनी जंक्शन 10.40/10.50 बजे, समस्तीपुर जंक्शन 12.15/12.20 बजे, दरभंगा जंक्शन 13.28/13.33 बजे तथा सीतामढ़ी जंक्शन 14.55/15.00 बजे होते हुए 17.00 बजे रक्सौल पहुंचेगी।

इसी प्रकार गाड़ी संख्या 17434 रक्सौल-तिरुपति साप्ताहिक एक्सप्रेस 4 जून 2026 से प्रत्येक गुरुवार को रक्सौल से प्रात: 03.15 बजे प्रस्थान कर सीतामढ़ी जंक्शन 04.42/04.47 बजे, दरभंगा जंक्शन 07.00/07.05 बजे, समस्तीपुर जंक्शन 08.13/08.18 बजे, बरौनी जंक्शन 09.20/09.30 बजे, किऊल जंक्शन 10.38/10.40 बजे, झाझा 12.20/12.25 बजे, जसीडीह जंक्शन 12.58/13.00 बजे, मधुपुर जंक्शन 13.25/13.27 बजे, चित्तरंजन 14.20/14.22 बजे, बराकर 15.09/15.10 बजे, धनबाद जंक्शन 16.15/16.20 बजे, चंद्रपुरा 17.21/17.23 बजे, बोकारो स्टील सिटी 18.20/18.25 बजे, मुरी 19.33/19.35 बजे, रांची 21.05/21.10 बजे, हटिया 21.25/21.30 बजे, राउरकेला 00.12/0.:17 बजे, झारसुगुड़ा जंक्शन 01.43/01.45 बजे, बिलासपुर जंक्शन 04.40/04.50 बजे, रायपुर जंक्शन 06.20/06.25 बजे, दुर्ग 07.15/07.20 बजे, गोंदिया जंक्शन 09.20/09.30 बजे, वडसा 10.48/10.50 बजे, चांदाफोर्ट 12.33/12.35 बजे, बल्हारशाह 12.50/12.55 बजे, सिरपुर कागजनगर 13.44/13.45 बजे, मंचिर्याल 14.35/14.36 बजे, पेद्दपल्ली 14.58/15.00 बजे, काजीपेट 16.28/16.30 बजे, चर्लापल्ली 18.28/18.30 बजे, सिकंदराबाद जंक्शन 18.55/19.05 बजे, लिंगमपल्ली 19.38/19.40 बजे, विकाराबाद 20.08/20.10 बजे, कृष्णा 00.05/00.15 बजे, रायचूर 00.38/00.40 बजे, आदोनि 01.38/01.40 बजे, गुंतकल जंक्शन 02.45/02.50 बजे, ताडिपत्रि 03.48/03.50 बजे, यर्रगुन्तला 04.48/04.50 बजे, कुडप्पा 05.23/05.25 बजे तथा रेणिगुंटा जंक्शन 07.50/07.52 बजे होते हुए शनिवार को प्रात: 09.30 बजे तिरुपति पहुंचेगी।

प्रमुख वाणिज्यिक ठहराव - यह ट्रेन मार्ग में रेणिगुंटा, गुंतकल जंक्शन, रायचूर, कृष्णा, सिकंदराबाद, काजीपेट, मंचिर्याल, सिरपुर कागजनगर, चांदाफोर्ट, वडसा, गोंदिया, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, झारसुगुड़ा, राउरकेला, रांची, धनबाद, बरौनी, समस्तीपुर, दरभंगा एवं सीतामढ़ी सहित अनेक महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहराव प्रदान करेगी।
कोच संरचना - यह ट्रेन 24 आईसीएफ कोचों के साथ संचालित की जाएगी, जिसमें 3 एसी कोच, 5 एसी थ्री टियर, 10 स्लीपर कोच तथा 4 सामान्य श्रेणी के डिब्बे शामिल रहेंगे। नागपुर मंडल के गोंदिया स्टेशन सहित मध्य भारत एवं दक्षिण भारत के यात्रियों को इस नई नियमित सेवा से विशेष लाभ प्राप्त होगा तथा दक्षिण भारत एवं बिहार क्षेत्र के बीच रेल संपर्क और अधिक सुदृढ़ होगा।

मदिरा के अवैध परिवहन एवं बिक्री पर रोक लगाए : आबकारी मंत्री देवांगन

मदिरा के अवैध परिवहन एवं बिक्री पर रोक लगाए : आबकारी मंत्री देवांगन

 00 पड़ोसी राज्यों से आने वाली शराब रोक लगाने के दिए निर्देश

रायपुर। प्रदेश के वाणिज्यिक कर (आबकारी) मंत्री  लखन लाल देवांगन ने आज नवा रायपुर स्थित जीएसटी भवन स्थित आबकारी आयुक्त कार्यालय में विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की और आगामी महीनों के लिए जिलेवार विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर आबकारी मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति हेतु ठोस रणनीति अपनाने, दुकानवार समीक्षा करने और अनुशासन के साथ कार्य संपादन के निर्देश दिए। बैठक में वाणिज्यिक कर आबकारी विभाग सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, आबकारी आयुक्त  पदुम सिंह एल्मा, विशेष सचिव आबकारी  देवेन्द्र भारद्वाज, आबकारी मुख्यालय, बेवरेजेस कारपोरेशन, मार्केटिंग कारपोरेशन के अधिकारियों सहित जिले से आए मैदानी अधिकारी उपस्थित थे। 

आबकारी मंत्री  देवांगन ने राज्य की अंतरराज्यीय सीमाओं पर स्थित आबकारी जांच चौकियों को अन्य राज्यों की मदिरा के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने और सीसीटीवी कैमरों के सुचारू संचालन की निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने जिला अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि मदिरा के अवैध परिवहन एवं बिक्री पर कोचियों के विरूद्ध प्रभावी कार्य करें। सभी जिला अधिकारी यह सुनिश्चित करें आबकारी उपनिरीक्षक एवं नीचे का अमला अवैध शराब बिक्री करने वाले के विरूद्ध समझौता न करें। इसके अलावा विभाग में प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मदिरा दुकानों में उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार मदिरा स्कंध (स्टाक) का संधारण सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया किया मदिरा दुकानों में उपभोक्ताओं के मांग के अनुरूप मदिरा की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर बिक्री न हो। उन्होंने अधिकारियों को मदिरा दुकानों में नियम और अनुशासन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के भी निर्देश दिए। दुकानों में उपलब्ध मदिरा को नियमानुसार दरों सहित रैकों में प्रदर्शित करने कहा गया, ताकि उपभोक्ताओं को पारदर्शिता और सुविधा मिल सके।

मंत्री ने बैठक में राजस्व लक्ष्य की जिलेवार समीक्षा करते हुए जिन जिलों ने अब तक लक्ष्य की प्राप्ति की है, उन्हें सतत् कार्य जारी रखने के निर्देश दिए गए। वहीं लक्ष्य से पीछे चल रहे जिलों को इसके कारणों की दुकानवार समीक्षा कर कमी की पूर्ति हेतु विस्तृत कार्य-योजना बनाकर तत्परता से अमल में लाने के निर्देश दिए गए। बैठक में अधिकारियों को इस बात की स्पष्ट हिदायत दी कि मदिरा में किसी प्रकार की मिलावट न होने पाए। इसके लिए सभी जिला अधिकारियों को समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण करने और वहां पाई गई अनियमितताओं पर तत्काल कार्रवाई और दोषी कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त कर ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, दुकानों में पेटीएम या अन्य कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पृथक काउंटर की व्यवस्था के भी निर्देश दिए गए।

आबकारी सचिव कंगाले ने प्रदेश में संचालित बारों, क्लबों, होटलों और ढाबों की आकस्मिक जांच करने तथा समय पश्चात संचालन अथवा अवैध मदिरा विक्रय करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अवैध मदिरा एवं अन्य मादक पदार्थों के निर्माण, परिवहन, तस्करी और विक्रय पर सख्त नियंत्रण रखने हेतु आवश्यकता पडऩे पर पुलिस विभाग से सहयोग लेने के निर्देश दिए गए।

अबूझमाड़ का धोबे गांव- जहां कभी बंदूकें गूंजती थीं, वहां अब नलों से बह रही विकास की धारा

अबूझमाड़ का धोबे गांव- जहां कभी बंदूकें गूंजती थीं, वहां अब नलों से बह रही विकास की धारा

 नारायणपुर। अबूझमाड़ का धोबे गांव- जहां कभी बंदूकें गूंजती थीं, वहां अब नलों से बह रही विकास की धाराÓविकास की असली परीक्षा तब होती है जब वह समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचे। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 94 किलोमीटर दूर, घने जंगलों और दुर्गम पहाडिय़ों के बीच बसा अबूझमाड़ का धोबे गांव आज इसी बदलते भारत और बदलते छत्तीसगढ़ की एक जीती-जाती मिसाल बन चुका है। जो इलाका कभी सिर्फ नक्सली हलचलों और विकास से दूरी के लिए जाना जाता था, आज वहां जल जीवन मिशन ने उम्मीदों का एक नया सवेरा ला दिया है। अबूझमाड़ के इस सुदूर अंचल में पहली बार घर-घर शुद्ध पेयजल की सुविधा पहुंची है, जिसने ग्रामीणों की जिंदगी की पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी है।

’अबूझमाड़ का धोबे गांव- जहां कभी बंदूकें गूंजती थीं, वहां अब नलों से बह रही विकास की धारा’

पूर्व में संघर्षों का दौर नदी-नालों के दूषित पानी से जंग
वर्षों तक धोबे गांव के ग्रामीणों के लिए सुबह की शुरुआत पानी के बड़े संघर्ष के साथ होती थी। अत्यंत दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा तो दूर, पीने का साफ पानी मिलना भी एक बड़ी चुनौती थी। गांव के लोग पीने के पानी के लिए पूरी तरह से स्थानीय नदी, नालों और झरनों पर निर्भर थे। पहाड़ों से बहकर आने वाला यह पानी न सिर्फ दूषित होता था, बल्कि इसके उपयोग से ग्रामीण लगातार जलजनित बीमारियों की चपेट में रहते थे। विशेषकर महिलाओं और बच्चों का एक बड़ा समय सिर्फ पीने का पानी ढोने में ही बीत जाता था।
जल जीवन मिशन- ऐसे बदली धोबे गांव की तस्वीर
ग्रामीणों की इस दशकों पुरानी और बेहद संवेदनशील समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन और जल जीवन मिशन की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में कदम रखा। विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा की चुनौतियों को पार करते हुए गांव में योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू किया गया। बिजली की अनिश्चितता से निपटने के लिए गांव में 10-10 हजार लीटर क्षमता वाले दो सोलर आधारित जल टैंक स्थापित किए गए। ऊबड़-खाबड़ रास्तों और घने जंगलों के बीच लगभग 1375 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई। गांव के सभी 40 परिवारों को श्हर घर जलश् योजना के तहत नल कनेक्शन से जोड़ा गया।
अंतिम छोर तक विकास की दस्तक
नारायणपुर की कलेक्टर ने इस सफलता पर कहा कि शासन की प्राथमिकता दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक हर हाल में मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है। जल जीवन मिशन के माध्यम से अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम है। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता से पहुँचे।
खुशहाली की नई दस्तक- आसान हुई जिंदगी
आज धोबे गांव के हर घर के आंगन में लगे नल से जब स्वच्छ और शीतल जल बहता है, तो ग्रामीणों के चेहरे की खुशी देखते ही बनती है। अब न तो पानी के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता है और न ही दूषित पानी के कारण बीमार होने का डर सताता है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे इस दूरदराज के गांव में भी कभी नल से साफ पानी आएगा। सरकार के इस प्रयास ने हमारी दैनिक जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है। यह हमारे लिए सिर्फ पानी नहीं, बल्कि एक नया जीवन है। जल जीवन मिशन ने यहाँ सिर्फ पानी नहीं पहुँचाया है, बल्कि ग्रामीणों के मन में शासन और व्यवस्था के प्रति एक अटूट विश्वास भी पैदा किया है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग की बड़ी पहल- जून के पहले सप्ताह में शुरू होगा विशेष प्रशिक्षण

वन्यजीव संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग की बड़ी पहल- जून के पहले सप्ताह में शुरू होगा विशेष प्रशिक्षण

 00 राष्ट्रीय विशेषज्ञ देंगे वन्यजीवों के पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच की बारीकियों का प्रशिक्षण

00 हाथी शावकों की सुरक्षा और वैज्ञानिक स्वास्थ्य प्रबंधन को मिलेगी नई मजबूती

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों और उनके शावकों की सुरक्षा तथा संरक्षण को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए वन विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में जून 2026 के प्रथम सप्ताह में एक उच्च स्तरीय राज्य स्तर पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस विशेष प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों की असमय मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच करना, उनका बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन सुनिश्चित करना तथा भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस रणनीति तैयार करना है। इस कार्यक्रम का विषय लर्निंग फ्रॉम डेड एसेंशियलस ऑफ मोर्टेलिटी इनवेस्टिगेशन ऑफ एशियन एलिफेंट फॉर ऑफिसियल ऑफ छत्तीसगढ़ फॉरेस्ट डिपार्टमेंट रखा गया है।

देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ देंगे व्यावहारिक प्रशिक्षणa
इस उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के ख्यातिलब्ध और प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ मुख्य रूप से शामिल होकर मैदानी अमले का मार्गदर्शन करेंगे। इनमें शामिल होंगे डॉ. पराग निगम, डॉ. कारिकलन, डॉ. तपेन्द्र सैनी, डॉ. जैन करण भरत जैसे राष्ट्रीय विशेषज्ञ उपस्थित वन अधिकारियों और वन्यप्राणी पशु चिकित्सकों को हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों में होने वाली जटिल बीमारियों की समय पर पहचान, उनके सटीक उपचार, वैज्ञानिक पोस्टमार्टम प्रक्रिया तथा आधुनिक फॉरेंसिक जांच की बारीकियों का व्यावहारिक व तकनीकी प्रशिक्षण देंगे।
पिछली घटनाओं केस स्टडी से बनेगी नई रणनीति
वन विभाग ने इस प्रशिक्षण को पूरी तरह व्यावहारिक बनाने के लिए पिछली घटनाओं से सीखने पर जोर दिया है। प्रशिक्षण के दौरान पिछले दो वर्षों में रायगढ़ और धरमजयगढ़ वनक्षेत्रों में हुई हाथी शावकों की मृत्यु से जुड़े मामलों की गहन समीक्षा की जाएगी। संबंधित वनमंडलाधिकारी इन मामलों से जुड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा जांच रिपोर्ट और विशेषज्ञ संस्थानों के निष्कर्षों को पटल पर रखेंगे। राष्ट्रीय विशेषज्ञ इन सभी रिपोर्टों का तकनीकी विश्लेषण कर भविष्य के लिए अचूक सुरक्षात्मक सुझाव देंगे।
बड़ी संख्या में शामिल होंगे मैदानी अधिकारी और पशु चिकित्सक

इस विशेष प्रशिक्षण सत्र में राज्य के सभी चिडिय़ाघरों और संरक्षित क्षेत्रों में पदस्थ वन्यप्राणी पशु चिकित्सक, हाथी प्रभावित क्षेत्रों के सभी वनमंडलाधिकारी, उप-वनमंडलाधिकारी, वनक्षेत्रपाल तथा पशुपालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक अनिवार्य रूप से भाग लेंगे। उल्लेखनीय है कि वन विभाग द्वारा इससे पूर्व विगत 7 अप्रैल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 150 से अधिक अधिकारियों और चिकित्सकों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब जून में आयोजित होने वाले इस उन्नत प्रशिक्षण के जरिए मैदानी अमले को तकनीकी रूप से पूर्णत: दक्ष बनाया जाएगा। वन विभाग का अंतिम लक्ष्य वन्यजीवों के बीमार होने या उनकी मृत्यु की स्थिति में त्वरित, पारदर्शी और वैज्ञानिक कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों और अन्य वन्यप्राणियों का संरक्षण पूरी मजबूती के साथ किया जा सके।

सूरजपुर सूपाझरिया जलाशय के जीर्णोद्धार के लिए 3.15 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति

सूरजपुर सूपाझरिया जलाशय के जीर्णोद्धार के लिए 3.15 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति

 00 मरम्मत के बाद 82 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बहाल होगी

रायपुर। राज्य शासन ने सूरजपुर जिले के विकासखंड ओडग़ी स्थित सूपाझरिया जलाशय योजना के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य के लिए 3 करोड़ 15 लाख 95 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। मरम्मत कार्य पूर्ण होने पर जलाशय की रूपांकित सिंचाई क्षमता 82 हेक्टेयर पूरी तरह बहाल हो जाएगी। इस नहर जीर्णोद्धार कार्य से ओडग़ी क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलेगी और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सूपाझरिया जलाशय के जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण होने पर जलाशय की रूपांकित सिंचाई क्षमता 82 हेक्टेयर पूरी तरह बहाल हो जाएगी। इससे क्षेत्र के किसानों को खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलेगी। शासन ने कार्य को स्वीकृत राशि और निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। कार्य शुरू करने से पहले सक्षम अधिकारी से ड्रॉइंग-डिजाइन का अनुमोदन और तकनीकी स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही कम से कम 75 प्रतिशत बाधा रहित भूमि उपलब्ध होने पर ही निविदा जारी की जाएगी। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि भू-अर्जन स्वीकृत राशि की सीमा में ही किया जाए और किसी अन्य मद की बचत राशि का उपयोग बिना पूर्व स्वीकृति के न हो। यदि भू-अर्जन प्रस्तावित नहीं है, तो निर्माण शासकीय भूमि पर ही कराया जाए। निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बस्तर का मांझीपाल बना छत्तीसगढ़ का नया इको-टूरिज्म हब, देश-विदेश के पर्यटकों को कर रहा आकर्षित

बस्तर का मांझीपाल बना छत्तीसगढ़ का नया इको-टूरिज्म हब, देश-विदेश के पर्यटकों को कर रहा आकर्षित

 00 बैम्बू राफ्टिंग, आमचो लाड़ी होमस्टे और जनजातीय संस्कृति का अनूठा संगम दे रहा प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत अनुभव

रायपुर। प्रकृति की अनुपम छटा, जनजातीय संस्कृति की आत्मीयता और रोमांच से सराबोर बस्तर अंचल का खूबसूरत ग्राम मांझीपाल आज छत्तीसगढ़ के सबसे तेजी से उभरते इको-टूरिज्म केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित यह मनोरम स्थल अपने घने जंगलों, स्वच्छ कांगेर नदी और ग्रामीण परिवेश की सादगी के कारण देश-विदेश के सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन गया है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा बस्तर में इको-टूरिज्म, ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए की गई विशेष पहल का ही परिणाम है कि आज मांझीपाल वैश्विक मानचित्र पर चमक रहा है। इस मॉडल से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों को रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।

बस्तर का मांझीपाल बना छत्तीसगढ़ का नया इको-टूरिज्म हब, देश-विदेश के पर्यटकों को कर रहा आकर्षित
मांझीपाल की सबसे बड़ी यूएसपी यहाँ बहने वाली निर्मल कांगेर नदी है। नदी की शांत जलधारा में स्थानीय आदिवासियों द्वारा तैयार पारंपरिक बांस की नावों पर होने वाली बैम्बू राफ्टिंग पर्यटकों को बेहद रोमांचित कर रही है। राफ्टिंग के दौरान सैलानी घने जंगलों की हरियाली, नदी के किनारों की प्राकृतिक सुंदरता और दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट के बीच प्रकृति को बेहद करीब से महसूस करते हैं। यह गतिविधि केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बस्तर के जनजातीय समुदायों की पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को भी जीवंत करती है।मांझीपाल में स्थित आमचो लाड़ी होमस्टे आज बस्तर की पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से समझने का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन गया है। अपनी अनूठी और आत्मीय मेजबानी, बस्तरिया व्यंजनों के स्वाद और पारंपरिक परिवेश के कारण यह होमस्टे विदेशी पर्यटकों के बीच भी तेजी से अपनी पैठ बना रहा है। आधुनिक शहरों की भागदौड़ से दूर यहाँ आने वाले पर्यटक स्थानीय रीति-रिवाजों को जीते हैं, जंगल का आनंद लेते हैं, बर्ड वॉचिंग (पक्षी अवलोकन) करते हैं और बस्तर के पारंपरिक जीवन के साथ आत्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं।

राज्य सरकार की कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म (सामुदायिक सहभागिता आधारित पर्यटन) नीति का सीधा और सकारात्मक असर अब बस्तर के ग्रामीण अंचलों में देखने को मिल रहा है। मांझीपाल के पर्यटन हब बनने से स्थानीय आदिवासी युवाओं को प्रोफेशनल टूरिस्ट गाइड, राफ्टिंग संचालक, होमस्टे प्रबंधन और बस्तरिया हस्तशिल्प (हैंडीक्राफ्ट) की बिक्री के जरिए सीधे तौर पर स्थायी रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल पलायन पर रोक लगी है, बल्कि जनजातीय परंपराओं और स्थानीय विरासत के संरक्षण को भी एक नई दिशा मिली है।

बस्तर का मांझीपाल बना छत्तीसगढ़ का नया इको-टूरिज्म हब, देश-विदेश के पर्यटकों को कर रहा आकर्षित

कैसे पहुँचें मांझीपाल
पर्यटकों के लिए मांझीपाल पहुँचना बेहद सुगम और आसान है। यह खूबसूरत पर्यटन स्थल जिला मुख्यालय जगदलपुर से मात्र 35 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जगदलपुर से दरभा मार्ग होते हुए बेहतरीन पक्की सड़क द्वारा निजी वाहन या स्थानीय टैक्सी से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा भी जगदलपुर में ही स्थित है, जिससे देश के किसी भी कोने से यहाँ का आगमन सुलभ हो जाता है। प्रकृति संरक्षण, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर पर्यटन मॉडल का बेहतरीन उदाहरण पेश करता मांझीपाल आज सिर्फ एक घूमने की जगह नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की एक नई और गौरवशाली पहचान बन चुका है।

मुख्य सचिव ने ई-प्रगति पोर्टल पर जियोटैग फोटो के साथ रिपोर्ट अपलोड करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने ई-प्रगति पोर्टल पर जियोटैग फोटो के साथ रिपोर्ट अपलोड करने के निर्देश

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में ई-प्रगति पोर्टल में दर्ज राज्य की अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाई जाए और आ रही बाधाओं को तत्काल दूर कर नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में बेवजह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही बरतने वाली निर्माण एजेंसियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ई-प्रगति पोर्टल की 5 प्रमुख परियोजनाएं
समीक्षा बैठक में विशेष रूप से पोर्टल पर दर्ज राज्य की 5 अति-महत्वपूर्ण परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। वर्किंग वुमेन हॉस्टल, उसलापुर (बिलासपुर), वर्किंग वुमेन हॉस्टल, कोनी (बिलासपुर), 4ळ स्टेशन क्टछ मोबाइल टॉवर स्थापना (बिलासपुर), मोबाइल टॉवर हेतु विद्युत अधोसंरचना परियोजना (बिलासपुर) और सिकारसर कोडार रिसीवर लिंक कैनाल (गरियाबंद जिला)
साप्ताहिक मॉनिटरिंग और कड़े प्रशासनिक निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे प्रत्येक परियोजना की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट ई-पोर्टल पर फोटो जियोटैग (च्ीवजव ळमव.जंह) के साथ अनिवार्य रूप से अपलोड करें, ताकि कार्यों की वास्तविक स्थिति की पारदर्शी मॉनिटरिंग हो सके। उन्होंने जिलों में मोबाइल टॉवर स्थापना के मार्ग में आ रही भूमि आवंटन या अन्य तकनीकी दिक्कतों को संबंधित कलेक्टरों से समन्वय कर शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर ई-प्रगति पोर्टल की परियोजनाओं की दैनिक समीक्षा करने और उनमें तेजी लाने को कहा है।
इस समीक्षा बैठक में मंत्रालय से सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, जल संसाधन विभाग तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (टब्) के माध्यम से राज्य के 21 जिलों के कलेक्टर शामिल हुए, जिनमें बीजापुर, कांकेर, कोरबा, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, नारायणपुर, रायगढ़, सुकमा, बलौदाबाजार-भाटापारा, बलरामपुर, धमतरी, गरियाबंद, जशपुर, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, दंतेवाड़ा एवं कोण्डागांव शामिल हैं।

CG – घर में पिता कर रहा था दोस्तों के साथ शराब पार्टी, गुस्साएं बेटे ने उठाया ये खौफनाक कदम

CG – घर में पिता कर रहा था दोस्तों के साथ शराब पार्टी, गुस्साएं बेटे ने उठाया ये खौफनाक कदम

 रायपुर। तिल्दा से 70 साल के बुजुर्ग पिता की हत्या का सनसनीखेज वारदात सामने आया है। शराब की लत से परेशान बेटे ने बुजुर्ग पिता की लड़की से मार-मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान संतु कोठरी के रूप में हुई है, जो रेलवे का रिटायर्ड कर्मचारी था। पूरा मामला तिल्दा थाना क्षेत्र का है।

जानिए पूरा मामला

घटना तिल्दा थाना क्षेत्र की है। तिल्दा नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड 4 में संतु कोठारी 70 वर्ष अपने परिजनों के साथ रहता था। संतु शराब का आदि था और शराब को लेकर बेटे से विवाद होता रहता था। संतु अपने घर में दोस्तों के साथ शराब पार्टी कर रहा था। इसी दौरान बेटा वीरेंद्र कोठारी 40 वर्ष वहां आ पहुंचा। बेटे ने पिता की हरकतें देख उसे डांट-फटकर लगाई। इसी बीच पिता शराब के नशे में बेटे से विवाद करने लगा। देखते ही देखते विवाद बढ़ा और बेटे बीरेंद्र कोठारी ने घर में रखी लकड़ी से पिता पर वार कर दिया।

घटना में बुजुर्ग के सीने, शरीर समेत अन्य हिस्सों में गंभीर चोट आई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पिता की मौत के बाद रात भर शव को घर में ही रखा था। सुबह वार्ड पार्षद को सूचना मिली तो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी बीरेंद्र कोठारी उर्फ राजू 40 वर्ष को गिरफ्तार किया गया।

फिलहाल मामले में पुलिस अपराध दर्ज कर आगे की जांच कार्रवाई कर रही है। वहीं, इस घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। लोग घटना की ही चर्चा कर रहे है।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में नक्सल मुक्त जिलों के भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों को मिलेंगे पक्के भवन

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में नक्सल मुक्त जिलों के भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों को मिलेंगे पक्के भवन

 00 महिला एवं बाल विकास विभाग तथा महात्मा गांधी नरेगा के अभिसरण से 506 आंगनबाड़ी भवनों को मिलेगी स्वीकृति

00 बच्चों और माताओं के बेहतर भविष्य के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा हमारी प्राथमिकता - साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित एवं अब तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे जिलों में बच्चों और माताओं के लिए आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। राज्य सरकार ने भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बस्तर संभाग के जिलों में संचालित शेष 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए भवन स्वीकृति की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा है कि सरकार का लक्ष्य है कि नक्सल मुक्त घोषित जिलों में कोई भी आंगनबाड़ी भवनविहीन न रहे और प्रत्येक बच्चे तथा माता को बेहतर, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध हो।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र केवल पोषण वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, मातृ स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि विशेषकर दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आंगनबाड़ी व्यवस्था बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं की देखभाल को नई मजबूती प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और स्थानीय आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा जिलों में भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर भवन निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्य सचिव स्तर पर 16 मई 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुरूप बस्तर संभाग की प्रत्येक ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी भवन निर्माण को शासन की प्राथमिकता बताया गया है। इस संबंध में संबंधित जिलों के कलेक्टरों को संयुक्त निर्देश जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल भवन निर्माण कराना नहीं, बल्कि ऐसे आंगनबाड़ी केन्द्र विकसित करना है जो बच्चों के सीखने, खेलने और मानसिक विकास के लिए प्रेरक वातावरण तैयार करें। इसी उद्देश्य से भवन निर्माण में कॉन्सेप्ट को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भवन स्वयं बच्चों के लिए सीखने और समझने का माध्यम बन सके तथा आंगनबाड़ी केन्द्र आकर्षक और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के अनुकूल वातावरण विकसित कर सकें। आंगनबाड़ी भवन निर्माण हेतु प्रति भवन 11 लाख 69 हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 2 लाख रुपये, महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत 8 लाख रुपये तथा शेष 1.69 लाख रुपये की राशि जिले में उपलब्ध अन्य स्थानीय संसाधनों जैसे डीएमएफ, सीएसआर अथवा अन्य मदों से उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विभिन्न योजनाओं और स्थानीय संसाधनों के प्रभावी अभिसरण के माध्यम से विकास कार्यों को गति देना राज्य सरकार की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मांग आधारित प्रक्रिया के अंतर्गत भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्राथमिकता के साथ स्वीकृति प्रदान की जाए और मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूर्ण कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से कार्यों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश सरकार सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और जनसुविधाओं के विस्तार के साथ अब बच्चों और महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित करने वाले सामाजिक ढांचे को भी मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि मजबूत आंगनबाड़ी अवसंरचना गांवों में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का आधार बनेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छोटे बच्चों का प्रारंभिक विकास ही भविष्य के सशक्त समाज की नींव तैयार करता है। आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा का जो आधार मिलता है, वही आगे चलकर उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बेहतर भवन, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं बच्चों में आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता को नई दिशा देंगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि विभागों के समन्वित प्रयास, जिला प्रशासन की सक्रियता तथा स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग से बस्तर संभाग के सभी भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों को शीघ्र पक्के भवन उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल मातृ एवं शिशु कल्याण को नई मजबूती देने के साथ-साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, विश्वास और सुशासन के नए अध्याय को भी मजबूत करेगी।

राज्यपाल रमेन डेका ने की 'पीएम-जनमन योजना समीक्षा

राज्यपाल रमेन डेका ने की 'पीएम-जनमन योजना समीक्षा

 रायपुर-छत्तीसगढ़ के राज्यपाल  रमेन डेका आज लोक भवन में पीएम-जनमन (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) योजना की प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव तथा सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हैं।

ब्रेकिंग: साय कैबिनेट ने लिये कई अहम फैसले,पढ़िए मंत्रिपरिषद की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय

ब्रेकिंग: साय कैबिनेट ने लिये कई अहम फैसले,पढ़िए मंत्रिपरिषद की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल की अहम बैठक संपन्न हो गई है। यह बैठक शाम 6 बजे मंत्रालय में आयोजित की गई थी। बैठक में कई बड़े मुद्दों पर फैसले लिए गए है।

1. मंत्रिपरिषद ने राज्य के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, मंडलों और स्थानीय निकायों में जमा स्क्रैप और अनुपयोगी सामग्रियों के पारदर्शी एवं व्यवस्थित निस्तारण के लिए भारत सरकार के उपक्रम मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (MSTC) के साथ सेलिंग एजेंसी अनुबंध की अवधि को आगामी तीन वर्षों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है।

यह अनुबंध नवंबर 2019 से प्रभावी है तथा 31 मई 2026 को समाप्त हो रहा था। MSTC के अत्याधुनिक ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर के खरीदार प्रतिस्पर्धी बोली लगाकर स्क्रैप सामग्री खरीद सकते हैं, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है और राज्य को बेहतर मूल्य प्राप्त होता है।

इस व्यवस्था से राज्य में स्क्रैप निस्तारण की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित, तकनीक आधारित और राजस्वोन्मुख हुई है। इस निर्णय से विभागों को अलग-अलग निविदा और विज्ञापन प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी, प्रशासनिक समय और संसाधनों की बचत होगी, साथ ही कार्यालय परिसरों में स्वच्छता और स्थान प्रबंधन भी बेहतर होगा।

2. मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल को सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके लिए “छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम” में संशोधन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि “छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल अधिनियम, 2026” लागू होने के बाद पूर्व के छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल का विलय नए कर्मचारी चयन मण्डल में हो चुका है। साथ ही उसकी सभी परिसंपत्तियां एवं देनदारियां भी नए मण्डल में शामिल हो गई हैं।

3. राज्य मंत्रिपरिषद ने सड़क निर्माण कार्यों में 01 अप्रैल 2026 के पश्चात बिटुमिन (डामर) की कीमतों में हुई असाधारण और अप्रत्याशित वृद्धि को देखते हुए, राज्य के हित और निर्माण कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 की अवधि के लिए अनुबंधित ठेकेदारों को सीमित एवं आंशिक मूल्य राहत (क्षतिपूर्ति) प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

यह राहत केवल बिटुमिन मूल्य में हुई असाधारण वृद्धि के प्रभाव को कम करने हेतु निर्धारित फार्मूले के आधार पर दी जाएगी तथा अन्य निर्माण घटकों पर अनुबंध में पूर्व से प्रावधानित एस्केलेशन नियम यथावत लागू रहेंगे। वैश्विक परिस्थितियों और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण डामरीकरण कार्य प्रभावित होने लगे थे, जिससे सड़क निर्माण और संधारण कार्यों की गति बाधित होने की आशंका थी। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं हेतु इसी प्रकार की राहत के निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क निर्माण कार्य प्रभावित न हों और विकास कार्यों की गति बनी रहे, जिससे जनता को निर्धारित समय पर सड़क निर्माण कार्यों का लाभ मिल सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण होने पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण होने पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी शुभकामनाएं

 रायपुर-- छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर ऐतिहासिक 12 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने कहा कि 26 मई 2014 से शुरू हुआ यह 12 वर्षों का कार्यकाल देश के इतिहास में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के संकल्प का जीवंत प्रतीक रहा है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने अंत्योदय के लक्ष्य को साकार किया है।

Óयोजनाओं से आया क्रांतिकारी व्यापक बदलावÓ

 चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं ने समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाया है। जनधन योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना ने गरीबों, किसानों और माताओं-बहनों के जीवन को गरिमापूर्ण बनाया है। डिजिटल इंडिया अभियान ने युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं और देश में अभूतपूर्व पारदर्शिता सुनिश्चित की है।

Óनव-निर्माण और सबका साथ, सबका विकासÓ

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि यह कालखंड देश के नव-निर्माण और  'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयासÓ की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने वाला रहा है। इन 12 वर्षों में भारत ने वैश्विक पटल पर विकास, सुशासन, डिजिटल परिवर्तन और जनकल्याण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। श्री चौधरी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के अद्वितीय राष्ट्र-समर्पण, निरंतर जनता-सेवा और सुशासन के लिए उनका हार्दिक अभिनंदन करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।

ब्रेकिंग : बकरीद अवकाश की तारीख में हुआ बदलाव, अब इस तारीख को रहेगी सार्वजनिक छुट्‌टी, देखें आदेश…!!

ब्रेकिंग : बकरीद अवकाश की तारीख में हुआ बदलाव, अब इस तारीख को रहेगी सार्वजनिक छुट्‌टी, देखें आदेश…!!

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार नेईद-उल-जुहा (बकरीद) की छुट्टी की तारीख में बदलाव किया है। पहले 27 मई को घोषित अवकाश अब 28 मई को रहेगा। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।

सामान्य प्रशासन विभाग की जारी अधिसूचना में कहा गया है कि विभाग की पूर्व अधिसूचना क्रमांक GENS-1001/86/2025-GAD-5 06 नवंबर 2025 में वर्ष 2026 के लिए घोषित सार्वजनिक एवं सामान्य अवकाशों की सूची में बकरीद के लिए 27 मई का अवकाश निर्धारित था। अब राज्य शासन ने आंशिक संशोधन करते हुए 28 मई 2026 को सार्वजनिक एवं सामान्य अवकाश घोषित किया है। इस निर्णय के बाद राज्य के सभी शासकीय कार्यालय, स्कूल-कॉलेज और अन्य सरकारी संस्थान 28 मई को बंद रहेंगे।

CG : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई

CG : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई

 रायपुर।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘प्रधान सेवक’ के रूप में राष्ट्रसेवा, सुशासन और जनकल्याण को समर्पित सफल 12 वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी, निर्णायक और जनकेंद्रित नेतृत्व में भारत ने सेवा, सुरक्षा, आत्मविश्वास और विकास के नए युग में प्रवेश किया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शासन की सोच और कार्यशैली को बदलते हुए सेवा, सुशासन और अंत्योदय की भावना को केंद्र में रखा तथा यह सुनिश्चित किया कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि गरीब, किसान, महिला, युवा, वंचित और जनजातीय समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो संकल्प प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने लिया, वह आज देश के कोने-कोने में दिखाई देता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में आज भारत आत्मविश्वास, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए आयाम स्थापित कर रहा है। मजबूत अर्थव्यवस्था, आधुनिक अधोसंरचना, डिजिटल क्रांति, आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समावेशन की दिशा में देश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विकसित भारत @2047 का संकल्प आज जनभागीदारी और विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व विशेष रूप से प्रेरणादायी रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे बस्तर और वनांचल क्षेत्रों में आज विकास, विश्वास और जनकल्याण की नई धारा दिखाई दे रही है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल कनेक्टिविटी, बैंकिंग सुविधाओं और शासकीय योजनाओं की पहुँच दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक सुनिश्चित हुई है, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, हर घर जल, जन-धन योजना और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं ने गरीबों, किसानों, मातृशक्ति, युवाओं तथा जनजातीय समाज के जीवन में आशा, सम्मान और आत्मविश्वास का नया संचार किया है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच ने शासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाया है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को केवल नारा नहीं रहने दिया, बल्कि उसे व्यवहार और नीति का आधार बनाया। इसी का परिणाम है कि आज देश विकास और सामाजिक समावेशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी का नेतृत्व देश को केवल आर्थिक रूप से सशक्त नहीं बना रहा, बल्कि सांस्कृतिक आत्मगौरव, राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी की भावना को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए देशवासियों में नए आत्मविश्वास का संचार किया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जनकल्याण, सुशासन और अंत्योदय के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और विकास का लाभ समाज के हर वर्ग को मिले।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को पुनः बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, यशस्वी और दीर्घायु जीवन की कामना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

अवैध मुरुम उत्खनन पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई, तीन हाईवा वाहन जब्त

अवैध मुरुम उत्खनन पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई, तीन हाईवा वाहन जब्त

 जांजगीर-चांपा।  जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ क्षेत्र में अवैध मुरुम उत्खनन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खनन माफियाओं में हड़कंप मचा दिया है। बारगांव में चल रहे अवैध उत्खनन पर एसडीएम के निर्देश पर छापेमार कार्रवाई की गई, जहां मौके से एक चैन माउंटेन मशीन और तीन हाईवा वाहनों को जब्त किया गया। कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।

दरअसल, प्रशासन को लगातार बारगांव क्षेत्र में अवैध रूप से मुरुम उत्खनन किए जाने की शिकायत मिल रही थी। शिकायतों के आधार पर एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व और प्रशासनिक टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मौके पर दबिश दी। टीम को देखकर उत्खनन में लगे लोगों में भगदड़ मच गई। कार्रवाई के दौरान मौके से एक चैन माउंटेन मशीन और तीन हाईवा वाहन जब्त किए गए।
सभी वाहनों को थाना पामगढ़ की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया है, जहां आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।  वहीं मशीन में डीजल नहीं होने के कारण उसे फिलहाल चालक के सुपुर्द किया गया। प्रशासन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि जिले में अवैध खनन और उत्खनन करने वालों के खिलाफ आगे भी लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से अवैध कारोबार में जुड़े लोगों में हड़कंप का माहौल बना हुआ है।
सुशासन तिहार बना संबल : ट्राइसाइकिल मिलने से सुश्री खोमीन कल्लो के जीवन में लौटी आत्मनिर्भरता की मुस्कान

सुशासन तिहार बना संबल : ट्राइसाइकिल मिलने से सुश्री खोमीन कल्लो के जीवन में लौटी आत्मनिर्भरता की मुस्कान

समाज कल्याण विभाग की पहल से अब खुद के दम पर तय कर रही जिंदगी की राह

रायपुर :- कई बार छोटी-सी सहायता किसी व्यक्ति के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आती है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम पंचायत हांडीटोला की रहने वाली 30 वर्षीय दिव्यांग हितग्राही सुश्री खोमीन कल्लो की जिंदगी में भी ऐसा ही सकारात्मक परिवर्तन आया है। बौनापन (शॉर्ट स्टेचर) से प्रभावित सुश्री खोमीन को रोजमर्रा के कार्यों और आने-जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। घर से बाहर निकलना, सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होना या छोटे-छोटे जरूरी काम करना भी उनके लिए चुनौती बन जाता था।
40 प्रतिशत दिव्यांगता से जूझ रही सुश्री खोमीन अक्सर दूसरों पर निर्भर रहने को मजबूर थीं। लेकिन सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगा दी। ग्राम पंचायत हांडीटोला में आयोजित शिविर में समाज कल्याण विभाग द्वारा उन्हें ट्राइसाइकिल प्रदान की गई, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दे दी।
सुश्री खोमीन कल्लो भावुक होकर कहती हैं कि ट्राइसाइकिल मिलने के बाद अब उन्हें अपने दैनिक कार्यों के लिए किसी का इंतजार नहीं करना पड़ता। अब वे आसपास आसानी से आ-जा सकती हैं और आत्मविश्वास के साथ अपने काम खुद करने लगी हैं। उनके चेहरे पर लौट आई मुस्कान इस बात की गवाही देती है कि शासन की योजनाएं जब जरूरतमंदों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल सुविधा नहीं बल्कि सम्मान और आत्मनिर्भरता भी प्रदान करती हैं।
उन्होंने शासन, जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके लिए किसी नई जिंदगी से कम नहीं है। अब वे पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी महसूस कर रही हैं।

सुशासन तिहार 2026 : शिविरों में त्वरित निराकरण से जरूरतमंदों को मिली बड़ी राहत

सुशासन तिहार 2026 : शिविरों में त्वरित निराकरण से जरूरतमंदों को मिली बड़ी राहत

 पेंशन के 80 आवेदन मौके पर स्वीकृत, दिव्यांग हितग्राही को मिली बैटरी चलित ट्राई सायकिल

रायपुर :- सुशासन तिहार 2026 अंतर्गत प्रदेशभर में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर आमजन के लिए राहत और भरोसे का माध्यम बनते जा रहे हैं। शिविरों में प्राप्त आवेदनों का त्वरित निराकरण कर पात्र हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मौके पर ही प्रदान किया जा रहा है।
जशपुर जिले के जनपद पंचायत पत्थलगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत घरजियाबथान में आयोजित सुशासन शिविर में समाज कल्याण विभाग को पेंशन हेतु प्राप्त 80 आवेदनों का शिविर स्थल पर ही निराकरण किया गया। जांच उपरांत सभी आवेदक पात्र पाए गए, जिससे हितग्राहियों में खुशी का माहौल रहा।
शिविर में दिव्यांग हितग्राही श्री मोहित राम कोरवा को सहायक उपकरण के रूप में बैटरी चलित ट्राई सायकिल प्रदान की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक श्रीमती गोमती साय उपस्थित रहीं।
इसी प्रकार मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले में भी सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित जन समस्या निवारण शिविरों में छब्।म्त् सर्वे के वंचित पात्र हितग्राहियों को जनपद पंचायतों के सहयोग से पेंशन स्वीकृति आदेश पत्र वितरित किए जा रहे हैं। प्रशासन की इस पहल से पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ शीघ्रता से मिल रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में शासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
सुशासन तिहार के माध्यम से राज्य सरकार आमजन की समस्याओं के समाधान, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार तथा अंतिम व्यक्ति तक शासन की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

सुशासन तिहार 2026 : सरबकोम्बो और अमडीहा में 27 मई को लगेगा जनसमस्या निवारण शिविर’

सुशासन तिहार 2026 : सरबकोम्बो और अमडीहा में 27 मई को लगेगा जनसमस्या निवारण शिविर’

 28 गांवों के ग्रामीणों की समस्याओं का होगा त्वरित समाधान’

रायपुर :- मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार प्रदेशभर में “सुशासन तिहार 2026” के तहत जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में 27 मई 2026 को जशपुर जिले के बगीचा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम सरबकोम्बो तथा फरसाबहार जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम अमडीहा में शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में कुल 28 गांवों के ग्रामीण शामिल होकर अपनी समस्याओं एवं मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।
सरबकोम्बो शिविर में सरबकोम्बो, बुटंगा, गायलुंगा, कलिया, बच्छरांव, रमसमा, साहीडांड, करमा, कुदमुरा, रनपुर, तम्बाकछार एवं पंडरीपानी सहित 12 गांवों के ग्रामीण शामिल होंगे। वहीं अमडीहा शिविर में अमडीहा, बाम्हनमारा, जबला, जामबहार, घुमरा, बांसाझाल, पुराईनबंध, समडमा, केरसई, कोहपानी, लठबोरा, साजबहार, सिंगीबहार, सुण्डरु, तपकरा एवं उपरकछार सहित 16 गांवों के ग्रामीण भाग लेंगे।
सुशासन तिहार के अंतर्गत नागरिक लिखित रूप में अपने आवेदन शिविरों में प्रस्तुत करेंगे, जिनका मौके पर निराकरण किया जाएगा। शिविरों के माध्यम से शासन और प्रशासन आमजन तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं।
जिला प्रशासन ने संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के शिविर में उपस्थित होकर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाएं तथा अपनी समस्याओं एवं मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत करें। कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने शिविरों के सुचारू संचालन के लिए नोडल एवं विभागीय अधिकारियों को अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए हैं।

अपनापन के विमोचन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

अपनापन के विमोचन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 0-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अनुभवों और सार्वजनिक जीवन की आत्मीय यात्रा पर आधारित है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक

0-मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, कहा - जनसेवा के अनुभव समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं

रायपुर :- मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक 'अपनापन के विमोचन समारोह में शामिल हुए। यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ  चौहान के सार्वजनिक जीवन, आत्मीय संबंधों और कार्य अनुभवों पर आधारित है, जिसमें नेतृत्व, जनसेवा और व्यक्तिगत संवेदनाओं को प्रेरक एवं भावनात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है। 

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने  शिवराज सिंह चौहान को पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से समाज तक पहुँचाना एक प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास जनप्रतिनिधियों के अनुभवों, कार्यशैली और जनसेवा के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनसेवा, सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। इस पृष्ठभूमि में सार्वजनिक जीवन के अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रेरित करेगी तथा नेतृत्व और समाजसेवा के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर प्रदान करेगी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रीगण, देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

CG- सट्टा माफियाओं पर पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई, 26 आरोपी गिरफ्तार, 50 लाख का सामान जब्त

CG- सट्टा माफियाओं पर पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई, 26 आरोपी गिरफ्तार, 50 लाख का सामान जब्त

 रायपुर। राजधानी रायपुर में ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ पुलिस कमिश्नरेट ने बड़ी और समन्वित कार्रवाई करते हुए सट्टा नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है। रायपुर क्राइम ब्रांच और कमिश्नरेट पुलिस की टीम ने अंतरराज्यीय कार्रवाई करते हुए कोलकाता, हरियाणा और बिहार तक दबिश दी और ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले 5 बड़े पैनलों को ध्वस्त कर दिया।

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान ऑनलाइन सट्टा खिलाते हुए कुल 26 सटोरियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के तार देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं, जहां से तकनीकी माध्यमों और मोबाइल ऐप के जरिए अवैध सट्टा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी लोटस 365, लायन4.कॉम  समेत कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ऐप के जरिए करोड़ों रुपये के सट्टे का कारोबार चला रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, कुल 14 ऑनलाइन सट्टा ग्रुप संचालित किए जा रहे थे, जिनमें शामिल 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। कार्रवाई के दौरान करीब 18 लाख रुपये नगद, 74 एटीएम कार्ड, मोबाइल, लैपटॉप, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण समेत लगभग 50 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया है।

 यह कार्रवाई रायपुर कमिश्नरेट क्षेत्र के 4 थाना इलाकों में दर्ज 4 अलग-अलग मामलों के आधार पर की गई। कमिश्नरेट पुलिस का दावा है कि गठन के बाद से अब तक ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के खिलाफ अभियान में करीब 100 सटोरियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फिलहाल पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

साय कैबिनेट की आज अहम बैठक,जल संकट और किसानों के मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

साय कैबिनेट की आज अहम बैठक,जल संकट और किसानों के मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

 रायपुर – छत्तीसगढ़ में आज साय कैबिनेट की अहम बैठक आयोजित होने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में होने वाली मंत्रिपरिषद की यह बैठक शाम 6 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय में होगी। बैठक में प्रदेश में बढ़ते जल संकट, स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की स्थिति और किसानों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

भीषण गर्मी और कई जिलों में पेयजल समस्या को देखते हुए सरकार जरूरी फैसले ले सकती है।इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और किसानों को राहत देने से जुड़े प्रस्तावों पर भी मंत्रिमंडल में चर्चा हो सकती है। बैठक में कई विभागों के महत्वपूर्ण एजेंडों पर मुहर लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

दिल दहला देने वाला हादसा, ट्रेन की चपेट में आए युवक का हाथ कटकर शरीर से हुआ अलग, दर्दनाक मंजर देख मची अफरा-तफरी

दिल दहला देने वाला हादसा, ट्रेन की चपेट में आए युवक का हाथ कटकर शरीर से हुआ अलग, दर्दनाक मंजर देख मची अफरा-तफरी

 रायपुर।  राजधानी रायपुर से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। रायपुर के सरस्वती नगर रेलवे स्टेशन पर देर रात एक युवक भीषण ट्रेन हादसे का शिकार हो गया। हादसा इतना वीभत्स था कि युवक का दाहिना हाथ पूरी तरह कटकर शरीर से अलग हो गया। घटना के बाद स्टेशन परिसर और आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के तुरंत बाद युवक दर्द से चीखता-चिल्लाता रहा और गंभीर हालत में प्लेटफॉर्म के पास तड़पता दिखा। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तत्काल मदद करते हुए पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। आनन-फानन में घायल युवक को इलाज के लिए मेकाहारा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। फिलहाल युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है।

हादसा आखिर किन परिस्थितियों में हुआ, युवक ट्रेन की चपेट में कैसे आया, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। शुरुआती तौर पर इसे ट्रेन हादसा माना जा रहा है, लेकिन पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। सरस्वती नगर थाना पुलिस मौके की परिस्थितियों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और रेलवे स्टेशन के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच में जुटी हुई है।

CG : पूजा के दीये से भड़की भीषण आग, गरीब का आशियाना जलकर राख

CG : पूजा के दीये से भड़की भीषण आग, गरीब का आशियाना जलकर राख

 बिलासपुर।  बिलासपुर के 27 खोली विकास नगर में सोमवार रात उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब पूजा के जलते दीये से अचानक एक घर में भीषण आग लग गई। दोपहर से बिजली गुल होने के कारण शाम को घर में दीया जलाया गया था, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस आशियाने में किराए पर रहने वाला एक गरीब परिवार, जो ई-रिक्शा चलाकर अपना गुजर-बसर करता है, उसका बिस्तर, पलंग, कपड़े और राशन समेत रोजमर्रा का सारा सामान जलकर पूरी तरह खाक हो गया।

आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई; हालांकि स्थानीय लोगों ने भारी सूझबूझ दिखाते हुए घर के भीतर रखे दो गैस सिलेंडरों को समय रहते बाहर निकाल लिया, जिससे एक बहुत बड़ा ब्लास्ट होने से टल गया। घटना के दौरान दमकल विभाग की बड़ी लापरवाही भी सामने आई, जिससे लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि फायर स्टेशन पास में ही होने के बावजूद सूचना देने के करीब 45 मिनट बाद दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची। हालांकि बाद में टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दर्दनाक हादसे में राहत की बात यह रही कि समय रहते सभी लोग बाहर निकल गए जिससे कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन पीड़ित परिवार के 6 से 8 सदस्यों के सिर से छत छिन गई है और उनके सामने अब दाने-दाने का संकट खड़ा हो गया है।

सावधान! अब विधायक भी सुरक्षित नहीं, रायपुर में MLA पुरंदर मिश्रा से साइबर ठगी

सावधान! अब विधायक भी सुरक्षित नहीं, रायपुर में MLA पुरंदर मिश्रा से साइबर ठगी

 रायपुर। रायपुर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रायपुर उत्तर से भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा को ठगों ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी के नाम का इस्तेमाल कर अपने जाल में फंसा लिया। आरोपी ने खुद को नितिन नवीन का निजी सहायक बताते हुए विधायक से पैसों की मांग की और 10 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए। मामले में खम्हारडीह थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने विधायक पुरंदर मिश्रा को फोन किया और खुद को भाजपा नेता नितिन नवीन का पीए बताया। बातचीत के दौरान उसने कहा कि वाहन में तत्काल डीजल डलवाने की जरूरत है और इसके लिए पैसों की आवश्यकता है। राजनीतिक पहचान और भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी ने विधायक को विश्वास में ले लिया।

बताया जा रहा है कि आरोपी ने दो अलग-अलग बार में रकम ट्रांसफर करवाई। पहले 4500 रुपए और फिर 5500 रुपए खाते में डलवाए गए। विधायक पुरंदर मिश्रा ने अपने जगन्नाथ मंदिर के सेवक नारायण मिश्रा को पैसे भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सेवक ने बताए गए बैंक खाते में कुल 10 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए।

कुछ समय बाद आरोपी ने दोबारा पैसों की मांग की। लगातार रकम मांगने और बातचीत में संदिग्धता महसूस होने पर मामले की जांच की गई। जांच में पता चला कि फोन करने वाला व्यक्ति फर्जी तरीके से खुद को भाजपा नेता का निजी सहायक बताकर ठगी कर रहा था। इसके बाद नारायण मिश्रा ने खम्हारडीह थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर मोबाइल नंबर, बैंक खाते और ट्रांजेक्शन डिटेल की जांच शुरू कर दी है। वहीं क्राइम ब्रांच की साइबर टीम आरोपी की लोकेशन और बैंकिंग ट्रेल खंगालने में जुटी हुई है

नैनो डीएपी के उपयोग से किसानों को कम लागत में मिलेगा बेहतर उत्पादन : कृषि मंत्री नेताम

नैनो डीएपी के उपयोग से किसानों को कम लागत में मिलेगा बेहतर उत्पादन : कृषि मंत्री नेताम

 रायपुर: पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। वर्तमान में राज्य में 9.29 लाख मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक खाद का स्टॉक गोदामों और सोसायटियों में उपलब्ध है। जबकि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रयास से केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को इस खरीफ सीजन के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आबंटित हुआ है। राज्य सरकार किसानों के धान बुआई एवं उत्पादन प्रभावित न हो इस उद्देश्य से तरल नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का स्टॉक भी समानांतर रूप से भण्डारित करने की रणनीति पर भी कार्य कर रही है।

वहीं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को नैनो डीएपी उर्वरक के उपयोग हेतु जागरूक किया जा रहा है। कृषि क्रांति की ओर एक कदम” अभियान के अंतर्गत नैनो डीएपी को फॉस्फोरस एवं नाइट्रोजन युक्त उन्नत तरल उर्वरक के रूप में किसानों के बीच प्रचारित किया जा रहा है, जिससे कम लागत में अधिक एवं संतुलित उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

कृषि विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनो डीएपी के उपयोग से किसानों को संतुलित पोषण, बेहतर परिणाम एवं पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही ठोस डीएपी पर निर्भरता में कमी आएगी तथा उर्वरक उपयोग की दक्षता में वृद्धि होगी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार एक एकड़ क्षेत्र में परंपरागत डीएपी के उपयोग की तुलना में नैनो डीएपी के उपयोग से लागत में कमी संभव है। जहां 50 किलोग्राम डीएपी पर लगभग 1350 रुपये की लागत आती है, वहीं 25 किलोग्राम डीएपी एवं 500 मिली नैनो डीएपी के संयुक्त उपयोग से लगभग 1275 रुपये की लागत आती है।

कृषि विभाग ने नैनो डीएपी के उपयोग की वैज्ञानिक विधि भी किसानों को बताई है। प्रथम चरण में आधार खाद के रूप में 25 किलोग्राम डीएपी अथवा 75 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट अथवा 38 किलोग्राम 12-32-16 मिश्रित उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी गई है। दूसरे चरण में बीज उपचार हेतु 150 मिली नैनो डीएपी को 3 लीटर पानी में मिलाकर बीज उपचार करने तथा पौध उपचार हेतु 250 मिली नैनो डीएपी को 50 लीटर पानी में घोलकर पौधों की जड़ों को उपचारित करने की जानकारी दी गई है। तीसरे चरण में फसल रोपाई के लगभग 30 दिन बाद 250 मिली नैनो डीएपी को 125 लीटर पानी में मिलाकर खड़ी फसल में छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

मंत्री  नेताम ने बताया कि पश्चिमी एशियाई संकट के चलते रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए विभाग द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत एनपीके 12:32:16, 20:20:0:13, हरी खाद, जैविक खाद और नैनो उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।

कृषि मंत्री  नेताम ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को केन्द्र सरकार द्वारा 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आबंटित हुआ है। जिसमें यूरिया 7.25 लाख, डीएपी 3 लाख, एमओपी 80 हजार, एनपीके 2.5 लाख तथा एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश के गोदामों एवं समितियों में लगभग 9.29 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी किसानों को पारदर्शिता के साथ पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद का आबंटन सुनिश्चित हो।

कृषि उत्पादन आयुक्त  सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों के गठन के निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर उर्वरकों में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (प्राइस सपोर्ट स्कीम) के तहत दलहन और तिलहन फसलों के उपार्जन को भी प्राथमिकता में रखा गया है। हर जिले में सुगंधित धान की प्रजाति के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही दलहन-तिलहन फसलों तथा उद्यानिकी क्षेत्र में ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के विस्तार के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य शासन ने किसानों से वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर नैनो डीएपी का उपयोग करने तथा उर्वरक प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने की अपील की है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ खेती की लागत को भी कम किया जा सके।