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पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल - बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी

पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल - बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी

 रायपुर। प्राय: सभी प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि प्रकृति कभी भी अपना ऋण नहीं भूलती। यदि मनुष्य पूरी ईमानदारी से उसके संरक्षण की ओर एक कदम बढ़ाता है, तो प्रकृति उसे अपनी भव्यता से कई गुना वापस लौटाती है। छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जो सदियों से अपनी नैसर्गिक संपदा और सघन वन क्षेत्रों के लिए विख्यात रही है, आज वन्यजीव संरक्षण के एक नए स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रही है। 

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (लगभग 245 वर्ग किमी) में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार हुआ है, जहाँ इनकी संख्या अब 200 के करीब पहुँच गई है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों को 2018 की पुनरुद्धार योजना और 2026 तक के वैज्ञानिक प्रयासों से वापस लाया गया। हाल ही में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात में जब बारनवापारा अभ्यारण्य के काले हिरणों की सफल वापसी का उल्लेख किया, तो यह केवल एक राज्य की उपलब्धि नहीं रही, बल्कि भारत के पर्यावरण मानचित्र पर वन्यजीव संरक्षण का एक नया अध्याय बन गई।

विशेष लेख : पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल - 'बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी'


विजन भरा नेतृत्व और प्रतिबद्धता- इस गौरवमयी उपलब्धि के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय हैं। उन्होंने इस सफलता को राज्य की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री श्री साय का मानना है कि प्रधानमंत्री की सराहना केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग और वहां के स्थानीय समुदायों के कठिन परिश्रम पर लगी राष्ट्रीय मुहर है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास और पारिस्थितिकी तंत्र के बीच उस दुर्लभ संतुलन को साध रहा है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।
वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति से पुनर्वास तक- बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों का दिखाई देना एक समय दुर्लभ हो गया था। लेकिन वन मंत्री श्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के रणनीतिक निर्देशन ने इस असंभव लक्ष्य को वास्तविकता में बदल दिया। फरवरी 2026 का महीना छत्तीसगढ़ के वन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में 30 काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में सॉफ्ट रिलीज पद्धति से मुक्त किया गया। यह प्रक्रिया केवल उन्हें जंगल में छोडऩे तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि वे नए वातावरण में बिना किसी तनाव के रच-बस सकें। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर में बेहतर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से इनकी संख्या में वृद्धि हुई। 
प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी संघर्ष - इस महाअभियान के पीछे उन जांबाज अधिकारियों और मैदानी अमले की मेहनत है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया। मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) श्रीमती सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) श्री धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम ने एक ढाल की तरह काम किया। वर्तमान में इन हिरणों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग का उपयोग किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ वन विभाग की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।

विशेष लेख : पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल - 'बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी'


रामपुर ग्रासलैंड : एक सुरक्षित भविष्य का पालना बारनवापारा अभ्यारण्य का यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए एक केस स्टडी बन सकता है। यहाँ केवल काले हिरण की प्रजाति का पुनर्वास नहीं हुआ, बल्कि उनके लिए एक संपूर्ण आवास तंत्र विकसित किया गया। रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और घास की स्थानीय प्रजातियों का संवर्धन वे मुख्य कारक हैं, जिन्होंने काले हिरणों को वहां फलने-फूलने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की एक अनूठी मिसाल पेश की है। काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यत: उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।
भविष्य की राह और राष्ट्रीय संदेश - बारनवापारा अभ्यारण्य में गूंजती काले हिरणों की चहल-कदमी और उनकी कुलाचें इस बात का जीवंत साक्ष्य हैं कि यदि इंसान प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी समझ ले, तो खोई हुई धरोहर को फिर से लौटाया जा सकता है। यह पहल आने वाली पीढिय़ों के लिए एक लिविंग लैबोरेटरी (जीवंत प्रयोगशाला) के रूप में कार्य करेगी, जहाँ वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सीख सकेंगी। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात ने हमारे नवाचारों को एक वैश्विक मंच प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़कर एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रही है, जहाँ मनुष्य और वन्यजीव दोनों सुरक्षित हों।आज जब हम बारनवापारा अभ्यारण्य की खुली वादियों में कुलाचें भरते काले हिरणों को देखते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं मुस्कुराते हुए छत्तीसगढ़ के इस सराहनीय प्रयास को अपना आशीर्वाद दे रही है। यह छत्तीसगढ़ के गौरव का वह उत्कर्ष है, जिसकी चमक अब पूरे देश को प्रेरित कर रही है।

आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी - मुख्यमंत्री

आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी - मुख्यमंत्री

 0-लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं - मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश 

0-शालीनता और संवेदनशीलता - यही हो प्रशासनिक अधिकारी की पहचान-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 

 रायपुर/ मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से  शासकीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आमजन के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करें। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यालय और फील्ड स्तर पर शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका आचरण शासन की छवि को प्रभावित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को सुनना प्रशासनिक अधिकारियों  का पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान पर केंद्रित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तभी सार्थक है, जब उसमें संवेदना और समस्याओं का समाधान करने की नीयत हो।उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण को प्रभावी, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। जब कोई आम नागरिक किसी शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक अनुभव ही जनता के मन में विश्वास पैदा करता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें, लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और तत्परता ही प्रशासन की असली ताकत है। उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में शालीनता और विनम्रता भी जरूरी है।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी जनता के साथ सरल, सहज,  सहयोगात्मक और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का तरीका हर समय अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वयमेव अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों की संख्या स्वत: कम होने लगती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाकर आगे बढ़ें और हर व्यक्ति को यह अहसास दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार पक्ष का भी अवलोकन करेंगे।उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के दौरान अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए सुशासन तिहार 2026 का आयोजन 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे।इस दौरान पंचायत एवं वार्ड स्तर पर शिविरों में आवेदन स्वीकार कर जनसमस्याओं का निराकरण किया जाएगा। सुशासन तिहार में  जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी तथा स्वयं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा औचक निरीक्षण और जनसमस्याओं के निराकरण और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी। 

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद - मुख्यमंत्री साय

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद - मुख्यमंत्री साय

 मुख्यमंत्री साय ने विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विस अध्यक्ष डॉ. सिंह के प्रति किया आभार प्रकट

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि मातृशक्ति उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सृजन, संस्कार और सामर्थ्य की आधारशिला है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संसद एवं देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसी क्रम में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त करना हमारा अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह संकल्प देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से जोडऩे का एक सार्थक प्रयास है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव याद रखी जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र में समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आई महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के समर्थन में अपने विचार रखे और महिलाओं के अधिकारों तथा उनके सशक्तिकरण के लिए सशक्त स्वर प्रदान किया। सदन में वरिष्ठ विधायकों और महिला नेतृत्व ने भी पूरे मनोयोग से चर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए और इस महत्वपूर्ण संकल्प का समर्थन किया। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट रूप से कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं है। यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस दिशा में हर सकारात्मक पहल का समर्थन आवश्यक है।

जिला प्रशासन एवं अदाणी फाउंडेशन की साझेदारी से रायपुर में बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार

जिला प्रशासन एवं अदाणी फाउंडेशन की साझेदारी से रायपुर में बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार

 तिल्दा नेवरा/ रायपुर। रायपुर जिले में कक्षा 10वीं एवं 12वीं के शासकीय विद्यालयों के बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार के उद्देश्य से जिला प्रशासन के नेतृत्व में तथा अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से “मिशन उत्कर्ष” का संचालन किया गया। कार्यक्रम का मार्गदर्शन जिला कलेक्टर द्वारा किया गया, जबकि समन्वय और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिला शिक्षा विभाग ने निभाई।

पूर्व में रायपुर जिले की बोर्ड परीक्षा रैंकिंग लगभग 33वें स्थान के आसपास थी। इसे ध्यान में रखते हुए एक डेटा-केंद्रित शैक्षणिक मॉडल तैयार कर जिले के 215 शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में लागू किया गया। इस पहल के तहत कक्षा 10वीं के लगभग 16,100 तथा कक्षा 12वीं के लगभग 13,000 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। इसमें हिंदी एवं अंग्रेज़ी माध्यम के साथ विज्ञान, वाणिज्य और कला संकाय के विद्यार्थी शामिल रहे।

कार्यक्रम के दौरान मासिक परीक्षाएँ, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों के प्रदर्शन का नियमित आकलन किया गया। विषयवार विश्लेषण के आधार पर विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान किया गया। कार्यक्रम की निगरानी जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई, जिससे प्रशासनिक समन्वय बना रहा।

मिशन उत्कर्ष में अदाणी फाउंडेशन की भूमिका

मिशन उत्कर्ष के संचालन में अदाणी फाउंडेशन ने रणनीतिक सह-भागीदार के रूप में सहयोग दिया। फाउंडेशन द्वारा कार्यक्रम के लिए पूर्ण वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया गया। मासिक परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्रों की छपाई और उनके वितरण की व्यवस्था की गई। विद्यार्थियों के लिए आवश्यक शैक्षणिक सामग्री प्रदान की गई तथा शैक्षणिक सहयोग के लिए विशेषज्ञ संस्था एलीमेंट्स (ELEMENTS) की नियुक्ति और प्रबंधन किया गया। इसके साथ ही परीक्षा परिणामों की ट्रैकिंग, विश्लेषण और मॉनिटरिंग प्रक्रिया में सहयोग दिया गया। शिक्षकों के क्षमता विकास के लिए भी शैक्षणिक समर्थन उपलब्ध कराया गया, जिससे कार्यक्रम का संचालन तय ढांचे के अनुसार किया जा सका।

उल्लेखनीय परिणाम (शैक्षणिक सत्र 2025–26)

कक्षा 10वीं

जिला रैंक: 32 से बढ़कर 27
उत्तीर्ण प्रतिशत: 66.24% से बढ़कर 71.05%
कक्षा 12वीं

जिला रैंक: 25 से बढ़कर 15
उत्तीर्ण प्रतिशत: 79.94% से बढ़कर 84.79%
मेधा एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन

कक्षा 10वीं की टॉप-10 मेरिट सूची में 2 विद्यार्थियों ने स्थान प्राप्त किया, जिनमें अधिकतम अंक 592 (98.67%) रहे। कक्षा 12वीं में टॉप-10 मेरिट सूची में 5 विद्यार्थियों ने स्थान बनाते हुए 96 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित किए।

कुल मिलाकर लगभग 29,000 विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ यह पहल जिले के शासकीय विद्यालयों में शैक्षणिक स्तर में सुधार की दिशा में एक संगठित प्रयास के रूप में सामने आई है।

मिशन उत्कर्ष जिला प्रशासन और अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से संचालित एक ऐसी पहल है, जिसने रायपुर जिले में बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार की दिशा में ठोस आधार तैयार किया है और यह शैक्षणिक सहयोग के एक व्यावहारिक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री साव ने दी श्रमिक दिवस की बधाई: कांग्रेस के बोरे बासी दिवस और बैठक पर साधा निशाना

उप मुख्यमंत्री साव ने दी श्रमिक दिवस की बधाई: कांग्रेस के बोरे बासी दिवस और बैठक पर साधा निशाना

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव का श्रमिक दिवस और सुशासन तिहार को लेकर बयान सामने आया है। अरुण साव ने श्रमिक दिवस की बधाई देते हुए कहा कि श्रमिकों को सुरक्षित वातावरण मिले इसके लिए सरकार काम कर रही है। इसी के साथ ही उन्होंने कांग्रेस के बोरे बासी दिवस, कांग्रेस की बैठक और प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट के दौरे को लेकर निशाना भी साधा है।

श्रमिक दिवस की दी शुभकामनाएं
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने श्रमिक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्रमिकों के पसीने से विकसीत भारत का निर्माण हो रहा है। श्रम कानूनों में परिवर्तन कर सरकार उनके हित में काम कर रही हैं। श्रमिकों को सुरक्षित वातावरण मिले इसके लिए सरकार काम कर रही है।

सुशासन तिहार को लेकर दिया बयान
सुशासन तिहार को लेकर अरुण साव ने कहा कि आज से 10 जून तक सुशासन तिहार का आयोजन होने जा रहा है। निचले स्तर के अधिकारी से लेकर प्रदेश के मुखिया लोगों से मिलेंगे। साथ ही सरकार की योजनाओं की जमीनी हकीकत भी जानेंगे। लोगों को किस तरह से लाभ मिल रहा है इसकी जानकारी लेंगे। वहीं उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जनता के हित में काम कर रहे हैं। सरकार आपके गांव तक पहुंच रही है। अपनी समस्या जरुर बताएं ताकि छत्तीसगढ़ विकसीत हो।

बोरे बासी अभियान पर साधा निशाना
अरुण साव ने कांग्रेस के बोरे बासी अभियान को लेकर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दिखावे की राजनीति की आदी रही है। बोरे बासी के घोटाले को जनता भूली नहीं। ये लोग काटा चम्मच से बोरे बासी खा रहे थे। प्रदेश के लोग नियमित रूप से बोरे बासी खाते हैं। यह कोई एक दिन का त्यौहार नहीं है। छत्तीसगढ़िया लोगों को बोरे बासी खिलाने का नाटक कांग्रेस बंद करे।

कांग्रेस की बैठक पर भी साधा निशाना
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस की बैठक पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के नेताओं के अभियान का हश्र जनता ने देखा है। सभी राजनीतिक दलों को गतिविधि का अधिकार है। कांग्रेस जनहित और जनता से दूर जा चुकी है। कांग्रेस को इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा।

सचिन पायलट के दौरे को लेकर बोला हमला
इसी के साथ ही उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सचिन पायलट के दौरे को लेकर भी जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का जनहित और सरोकार नहीं। जनता और देशहित से कोई लेना-देना नहीं है। जनता कांग्रेस से दूर जा चुकी है। कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता भी दूर जा चुके हैं। इसका कोई परिणाम नहीं आने वाला है।

 

Rain Alert : छत्तीसगढ़ के मौसम ने अचानक ली करवट, कई जिलों में आंधी-बारिश के साथ गिरे ओले, अगले 5 दिन अंधड़-बारिश का अलर्ट…!!

Rain Alert : छत्तीसगढ़ के मौसम ने अचानक ली करवट, कई जिलों में आंधी-बारिश के साथ गिरे ओले, अगले 5 दिन अंधड़-बारिश का अलर्ट…!!

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम ने अचानक करवट ले ली। भीषण गर्मी के बीच गरियाबंद और रायगढ़ जिले में ओले गिरे हैं। गुरुवार को गरियाबंद जिले के इंदागांव, उदंती, जुगाड़ क्षेत्र में तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। इस दौरान नेशनल हाइवे 130C इंदागांव से जुगाड़ तक बड़े-बड़े बर्फ के गोले बिछ गए। इस बदलाव ने लोगों को चौंका भी दिया और राहत भी दी।

मौसम का असर गरियाबंद के साथ लोरमी में भी दिनभर की गर्मी के बाद शाम को तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, जिससे लोगों को राहत मिली। वहीं जशपुर में तेज बारिश और हवाओं से कुछ इलाकों में पेड़ गिर गए और बिजली आपूर्ति बाधित हुई। इस बदलाव ने एक तरफ गर्मी से राहत दी, तो दूसरी तरफ जनजीवन प्रभावित भी किया।

ओले इतने तेज थे कि नेशनल हाईवे 130C पर इंदागांव से जुगाड़ तक बड़े-बड़े ओले जमा हो गए। सड़क और आसपास के खेतों में सफेद परत बिछ गई, जो किसी बर्फबारी से कम नहीं लग रही थी। राहगीरों को कुछ समय के लिए रुकना पड़ा और कई जगहों पर यातायात धीमा हो गया। खेतों में बिछी यह बर्फ जैसी परत किसानों के लिए चिंता का कारण भी बन गई है।

तापमान में गिरावट से राहत

इस मौसम परिवर्तन का असर तापमान पर भी दिखने लगा है। अगले 2 दिनों में तापमान 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। इसके बाद अगले 3 दिनों तक तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। फिलहाल प्रदेश में सबसे अधिक तापमान राजनांदगांव में 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जबकि न्यूनतम तापमान जगदलपुर में 25.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है।

5 दिन तक अंधड़ और बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने प्रदेश में अगले 5 दिनों तक मौसम के ऐसे ही बने रहने का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार सभी संभागों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा, इसलिए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

ब्रेकिंग : इस विभाग में अधिकारी-कर्मचारियों के हुए तबादले, राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, देखें लिस्ट..!!

ब्रेकिंग : इस विभाग में अधिकारी-कर्मचारियों के हुए तबादले, राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, देखें लिस्ट..!!

 रायपुर। राज्य सरकार ने परिवहन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार, कई जिलों के परिवहन अधिकारी को इधर से उधर किया गया है।

देखिये आदेश….

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज जशपुर प्रवास, बगिया में समृद्धि एम-कैड निर्माण कार्य का करेंगे शुभारंभ

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज जशपुर प्रवास, बगिया में समृद्धि एम-कैड निर्माण कार्य का करेंगे शुभारंभ

 रायपुर: मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय 01 मई को जशपुर प्रवास पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे प्रातः 11:10 बजे पुलिस ग्राउंड हेलीपैड, रायपुर से प्रस्थान कर दोपहर 12:25 बजे विकासखंड कांसाबेल ग्राम बगिया पहुंचेंगे।मुख्यमंत्री दोपहर 01:00 बजे बगिया में ‘समृद्धि एम-कैड’ निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इसके पश्चात वे दोपहर 3.15 बजे विकासखंड कुनकुरी के ग्राम बंदरचुआं पहुंचकर अपने निज सहायक  दीपक अंधारे के चचेरे भाई स्वर्गीय  विवेक अंधारे के आकस्मिक निधन पर आयोजित ब्रह्मभोज कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री शाम 4:25 बजे बगिया हेलीपैड से रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।

हादसे में मृतक परिवार को मिली बड़ी राहत: 2 लाख रुपए की सहायता स्वीकृत, सीएम कैंप कार्यालय बगिया में आवेदन के बाद त्वरित कार्रवाई….

हादसे में मृतक परिवार को मिली बड़ी राहत: 2 लाख रुपए की सहायता स्वीकृत, सीएम कैंप कार्यालय बगिया में आवेदन के बाद त्वरित कार्रवाई….

 रायपुर: प्रदेश सरकार की जनहितकारी पहल का असर अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत जशपुर जिले के एक पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है, जिससे कठिन समय में उन्हें महत्वपूर्ण सहारा मिला है।

हादसे में मृतक परिवार को मिली बड़ी राहत: 2 लाख रुपए की सहायता स्वीकृत

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जशपुर जिले के फरसाबहार तहसील अंतर्गत ग्राम फरदबहार निवासी स्वर्गीय विनोद साय की नदी में नहाने के दौरान पैर फिसल जाने से गंभीर चोट लग गई थी। परिजनों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना के बाद परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था।

मृतक की पत्नी चिरंजीवी पैंकरा ने अपनी समस्या को लेकर बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया और तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत सहायता की मांग की। प्रारंभिक स्तर पर उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था।

मामले की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय ने त्वरित संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश दिए। प्रशासनिक पहल से प्रक्रिया में तेजी लाई गई और अंततः परिजनों को 2 लाख रुपए की बीमा सहायता राशि स्वीकृत कर दी गई।

हादसे में मृतक परिवार को मिली बड़ी राहत: 2 लाख रुपए की सहायता स्वीकृत

सहायता राशि प्राप्त होने पर परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने उनके दुख की घड़ी में संवेदनशीलता के साथ मदद पहुंचाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की सक्रिय कार्यप्रणाली की भी सराहना की।

सीएम कैंप कार्यालय बगिया बन रहा जनविश्वास का केंद्र

बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय क्षेत्र के लोगों के लिए उम्मीद का केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं और त्वरित निराकरण पा रहे हैं।

स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल, सड़क, राजस्व एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई से लोगों का भरोसा शासन-प्रशासन पर लगातार मजबूत हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब उन्हें छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भटकना नहीं पड़ता, बल्कि कैंप कार्यालय के माध्यम से शीघ्र और प्रभावी समाधान मिल रहा है।

सुदूर बीजापुर में चिकित्सा चमत्कार : अत्यंत दुर्लभ बीमारी से जूझते शिशु को बचाया

सुदूर बीजापुर में चिकित्सा चमत्कार : अत्यंत दुर्लभ बीमारी से जूझते शिशु को बचाया

 रायपुर: जिला अस्पताल बीजापुर के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु का सफलतापूर्वक उपचार कर उसे नया जीवन प्रदान किया गया है।

ग्राम कोरसागुड़ा कोरसागुड़ा, बासागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल 2026 को गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था। जांच में शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है। यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की। उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं। शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया। इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे। साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके।

केले के पत्तों से किया गया विशेष देखभाल

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. आर. पुजारी एवं सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के मार्गदर्शन में उपचार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस उपलब्धि में कलेक्टर श्री संबित मिश्रा एवं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन एवं सतत प्रशासनिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में मदद मिली।

शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया। उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

यह सफलता दर्शाती है कि अब दूरस्थ क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं और जिला अस्पताल बीजापुर का SNCU क्षेत्रवासियों के लिए आशा का केंद्र बनकर उभर रहा है।

श्रमिक समाज की आधारशिला हैं और उनके बिना विकास की कल्पना अधूरी: श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन

श्रमिक समाज की आधारशिला हैं और उनके बिना विकास की कल्पना अधूरी: श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन

 रायपुर: अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (मई दिवस) के अवसर पर प्रदेश के श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने राज्य के श्रमिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सभी मेहनतकश श्रमिकों के सुखमय और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि 1 मई का दिन श्रमिकों के परिश्रम, समर्पण और योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने का विशेष अवसर है।

मंत्री  देवांगन ने कहा कि श्रमिक समाज की आधारशिला हैं और उनके बिना विकास की कल्पना अधूरी है। उन्होंने श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक खुशहाली के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार श्रमिकों सहित सभी जरूरतमंद वर्गों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों और उनके परिवारों को विभिन्न योजनाओं का लाभ तेजी से उपलब्ध कराया जा रहा है। श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित तीनों मंडलों- भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, संगठित कर्मकार मंडल और राज्य सामाजिक सुरक्षा एवं श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

मंत्री  देवांगन ने कहा कि बीते सवा दो वर्षों में विभिन्न योजनाओं के तहत करीब 800 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे न केवल श्रमिकों बल्कि उनके परिवारों के सामाजिक और आर्थिक स्तर में भी सुधार आया है।

भीषण गर्मी में वन्यजीवों के लिए संजीवनी बना बारनवापारा, जल प्रबंधन का ऐसा मॉडल जो पूरे देश के लिए बना मिसाल

भीषण गर्मी में वन्यजीवों के लिए संजीवनी बना बारनवापारा, जल प्रबंधन का ऐसा मॉडल जो पूरे देश के लिए बना मिसाल

 00 240 से अधिक जल स्रोतों की हो रही है रियल-टाइम मॉनिटरिंग

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन और जैव-विविधता के केंद्र बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य ने इस भीषण गर्मी में वन्यजीव संरक्षण की एक नई इबारत लिखी है। जब पारा आसमान छू रहा है और प्राकृतिक जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं, तब बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा अपनाई गई वैज्ञानिक और व्यावहारिक जल प्रबंधन प्रणाली वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है।
हर 5 वर्ग किलोमीटर पर पानी की उपलब्धता
अभयारण्य प्रबंधन ने पूरे क्षेत्र का विस्तृत मानचित्रण (Mapping) कर 240 से अधिक जल स्रोतों को चिन्हित किया है। इसमें तालाब, स्टॉप डैम, वॉटरहोल और कृत्रिम सॉसर शामिल हैं। रणनीति ऐसी बनाई गई है कि वन्यप्राणियों को पानी के लिए भटकना न पड़े। प्रत्येक 5 वर्ग किलोमीटर के दायरे में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

भीषण गर्मी में वन्यजीवों के लिए 'संजीवनी' बना बारनवापारा


मैनेजमेंट का 'स्मार्ट' फॉर्मूला: मैपिंग से जियो-टैगिंग तक
बारनवापारा का यह मॉडल केवल पानी भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डेटा और तकनीक पर आधारित है। स्थलों का नियमित निगरानी का प्रबंध किया गया है। प्रत्येक 15 दिनों में जल स्तर का आकलन किया जाता है। 'स्टाफ गेज' के माध्यम से जल स्तर मापकर स्रोतों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, ताकि जहां पानी कम हो, वहां तुरंत कार्रवाई की जा सके।सभी जल स्रोतों की जियो-टैगिंग की गई है, जिससे मुख्यालय से भी इनकी स्थिति पर सटीक नजर रखी जा सके।
पानी की pH और TDS की नियमित जांच
वन्यजीवों को केवल पानी ही नहीं, बल्कि 'सुरक्षित पानी' मिले, इसके लिए नियमित अंतराल पर pH मान और TDS (Total Dissolved Solids) का परीक्षण किया जा रहा है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि पानी वन्यजीवों के स्वास्थ्य के अनुकूल हो। जिन दुर्गम क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत सूख गए हैं, वहां विभाग द्वारा टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है।
मिनरल्स का भी रखा ख्याल: स्थापित किए 'साल्ट लिक'
वन्यजीवों के समग्र स्वास्थ्य और उनकी खनिज आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जल स्रोतों के पास रणनीतिक रूप से 'साल्ट लिक' (Salt Licks) बनाए गए हैं। इससे जानवरों को पानी के साथ-साथ आवश्यक मिनरल्स भी एक ही स्थान पर मिल रहे हैं, जो गर्मी के तनाव (Heat Stress) को कम करने में सहायक है।
वनमंडलाधिकारी ने कहा कि एक ऐसी जवाबदेह प्रणाली विकसित की है जो केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान प्रदान करती है। लगातार निगरानी और वैज्ञानिक डेटा के कारण हम जल स्तर गिरने से पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था करने में सक्षम हैं। यह मॉडल भविष्य के वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक मानक स्थापित कर रहा है।"

मुख्यमंत्री साय ने अविस्मरणीय यात्रा पुस्तक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री साय ने अविस्मरणीय यात्रा पुस्तक का किया विमोचन

 00 महिला पत्रकारों ने नारी शक्ति वंदन के संकल्प को महिला सशक्तिकरण की ओर बताया ऐतिहासिक कदम

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा स्थित कार्यालय कक्ष में पत्रकार नीरा साहू द्वारा गुजरात यात्रा पर लिखी गई पुस्तक ‘अविस्मरणीय यात्रा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने साहू को उनकी उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र एवं शासकीय संकल्प के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी।

 

 

मुख्यमंत्री  साय ने महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण पत्रकारों की दृष्टि को व्यापक बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा-वृत्तांत पर्यटन प्रेमियों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका सिद्ध होगा।
इस अवसर पर सुश्री निशा द्विवेदी, सुश्री चित्रा पटेल, सुश्री लवलीना शर्मा, जनसंपर्क विभाग की उप संचालक डॉ. दानेश्वरी संभाकर, सहायक संचालक सुश्री संगीता लकड़ा एवं सुश्री आमना खातून सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

 

 

जनजातीय विकास पर बड़ा फोकस, CM साय की बैठक में कई अहम फैसले, ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ जल्द लागू

जनजातीय विकास पर बड़ा फोकस, CM साय की बैठक में कई अहम फैसले, ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ जल्द लागू

 रायपुर ।  रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जनजातीय क्षेत्रों के विकास को लेकर कई बड़े और अहम फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बस्तर, जो क्षेत्रफल में केरल से भी बड़ा है, लंबे समय तक विकास से दूर रहा, लेकिन अब वहां तेजी से बदलाव दिख रहा है और योजनाओं का असर जमीन पर नजर आने लगा है। उन्होंने जनजातीय आस्था से जुड़े देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अवैध अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

 

बैठक में “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के तहत 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की जानकारी दी गई, वहीं पीएम जनमन योजना के तहत 32 हजार आवास स्वीकृत होने की बात सामने आई। सबसे बड़ा ऐलान “नियद नेल्ला नार 2.0” को लेकर हुआ, जिसे जल्द लागू किया जाएगा। इस योजना के जरिए दूर-दराज के इलाकों में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं का और विस्तार किया जाएगा। साथ ही “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के तहत 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच का काम तेजी से जारी है।

मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को जनजातीय भूमि के लंबे समय तक लीज पर दिए जाने के मामलों की जांच करने के निर्देश दिए और कोरवा व संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने का प्रस्ताव जल्द केंद्र सरकार को भेजने को कहा। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए छात्रावासों की सीट बढ़ाने, उनके बेहतर रखरखाव और शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित शिक्षण व्यवस्था बनाने तथा खुले में कक्षाएं न लगाने के स्पष्ट निर्देश भी दिए गए।

 

इसके अलावा अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताते हुए काम को तय समय में और गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। बरसात के दौरान कटने वाले रास्तों को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया।

 

बैठक में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि नक्सलवाद की समस्या कम होने के बाद अब योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से हो रहा है और जनजातीय समुदाय विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अब दूरस्थ इलाकों तक बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं और नए छात्रावासों के निर्माण से बच्चों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं। बैठक में उपमुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

तेंदूपत्ता सीजन-2026 : हड़ताल की आशंका के बीच शासन का बड़ा निर्णय, अत्यावश्यक सेवाएं हुईं घोषित

तेंदूपत्ता सीजन-2026 : हड़ताल की आशंका के बीच शासन का बड़ा निर्णय, अत्यावश्यक सेवाएं हुईं घोषित

 रायपुर। तेंदूपत्ता सीजन 2026 की शुरुआत से पहले वन विभाग और संबंधित समितियों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। बीजापुर वनमंडल में तेंदूपत्ता तोड़ाई कार्य 1 मई 2026 से शुरू होना है। इसी बीच कर्मचारियों और प्रबंधकों द्वारा 8 सूत्रीय मांगों को लेकर 27 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी गई थी। इस संभावित हड़ताल से तेंदूपत्ता संग्रहण प्रभावित होने और शासन को बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने 29 अप्रैल 2026 को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
तेंदूपत्ता सीजन 2026 में कार्यरत सभी कर्मचारी और प्रबंधक अब अत्यावश्यक सेवाओं के अंतर्गत माने जाएंगे। साथ ही कोई भी कर्मचारी या प्रबंधक अपने सौंपे गए कार्य से इंकार नहीं कर सकेगा। यह आदेश राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से आगामी 3 माह तक लागू रहेगा। राज्य शासन के इस निर्णय से स्पष्ट है कि तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य को किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। यह फैसला लाखों संग्राहकों की आजीविका को सुरक्षित रखने और लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।तेंदूपत्ता संग्रहण छत्तीसगढ़ में आदिवासी और वनवासी परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में शासन की यह पहल न केवल संग्रहण कार्य को सुचारू बनाएगी, बल्कि हितग्राहियों के हितों की भी रक्षा करेगी।

जनगणना देश का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान, मकान सूचीकरण व मकानों की गणना कल से प्रारम्भ

जनगणना देश का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान, मकान सूचीकरण व मकानों की गणना कल से प्रारम्भ

 00 जनगणना आंकड़ों का संग्रहण डिजिटल उपकरणों/माध्यमों से

रायपुर। जनगणना 2027 हमारे देश का एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान है, जो केवल आंकड़ों का संकलन नहीं बल्कि भविष्य के भारत और हमारे राज्य छत्तीसगढ़ के विकास की ठोस नींव तैयार करने का कार्य करेगा। यह प्रक्रिया हमें यह समझने में सक्षम बनाती है कि समाज के विभिन्न वर्गों तक विकास के लाभ किस प्रकार और कितनी प्रभावशीलता से पहुँच रहे हैं। जनगणना आंकड़ों का संग्रहण डिजिटल उपकरणों/माध्यमों से किया जाएगा। जनगणना कार्य में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी फील्ड कर्मचारियों को फोटो युक्त पहचान-पत्र जारी किए हैं। राज्य के सभी नागरिकों से अपील है कि वे केवल अधिकृत पहचान-पत्र वाले कर्मचारियों को ही जानकारी उपलब्ध कराएं।जनगणना

निदेशालय छत्तीसगढ़ के निदेशक श्री कार्तिकेय गोयल द्वारा छत्तीसगढ़ के नागरिकों से यह अपील की गई है कि वे अपने उत्तम ज्ञान के आधार पर प्रगणक को सही-सही जानकारी दें। नागरिकों द्वारा दी गई सही और पूर्ण जानकारी ही आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार एवं आधारभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी।

भारत में जनगणना 1872 से की जा रही है। भारतीय जनगणना का 150 वर्षों का इतिहास है। आगामी जनगणना देश की 16 वीं और स्वतन्त्रता के बाद की 8 वीं जनगणना होगी। छत्तीसगढ़ राज्य में जनगणना 2027 के प्रथम चरण यथा मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का फील्ड कार्य 1 मई, 2026 से प्रारम्भ हो रहा है जो 30 मई, 2026 तक संपादित किया जाएगा। वर्तमान समय में तकनीकी प्रगति को ध्यान में रखते हुए यह जनगणना विशिष्ट और उल्लेखनीय है, क्योंकि यह भारत की पहली ऐसी जनगणना होगी, जिसमें जनगणना आंकड़ों का संग्रहण डिजिटल उपकरणों/माध्यमों से किया जाएगा। यह परिवर्तन न केवल कार्य को अधिक पारदर्शी और तीव्र बनाएगा, बल्कि आंकड़ों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को भी सुदृढ़ करेगा। विशेष रूप से स्व-गणना की सुविधा नागरिकों को सशक्त बनाती है, जिससे वे स्वयं अपनी जानकारी घर बैठे सुरक्षित एवं सहज तरीके से दर्ज कर सकते हैं। यह सुविधा छत्तीसगढ़ राज्य में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 की अवधि में स्व-गणना पोर्टल se.census.gov.in के माध्यम से उपलब्ध थी। आज 30 अप्रैल 2026 तक शाम की स्थिति में राज्य में एक लाख 32 हजार 195 परिवारों ने स्व-गणना का कार्य संपादित कर लिया है। 01 मई से 30 मई 2026 के दौरान

प्रगणक घर-घर जाकर परिवारों से 33 प्रश्न पूछेंगे। यह प्रश्न मुख्य रूप से मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं तथा परिसंपत्तियों से संबन्धित होंगे। जनगणना के दौरान प्रगणक मोबाइल एप के माध्यम से जानकारी एकत्र करेंगे, जिससे प्रक्रिया सरल और त्रुटिरहित बनेगी। जनगणना में दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारियाँ जनगणना अधिनियम 1948 तथा जनगणना नियमावली 1990 के प्रावधानों के अंतर्गत पूर्णत: गोपनीय रखी जाएगी । इसे किसी से भी साझा नहीं किया जाता है। टैक्स, पुलिस या जांच में इस जानकारी का उपयोग नहीं किया जा सकता है। इसका उपयोग किसी भी प्रकार के साक्ष्य के रूप में नहीं किया जा सकता। व्यक्तिगत जानकारी त्ज्प् के माध्यम से भी प्राप्त नहीं की जा सकती। इन आंकड़ों का उपयोग केवल नीति निर्माण एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए ही किया जाएगा। 

प्रगणक द्वारा घर-घर जाने की प्रक्रिया के दौरान उत्तरदाता से किसी भी प्रकार की ओटीपी की मांग नहीं की जाएगी, और न ही कोई लिंक सांझा किया जाएगा। जिन परिवारों ने स्व- गणना किया है, प्रगणक के फील्ड विजिट के दौरान परिवार द्वारा 11 अंकों का स्व-गणना पहचान (एसईआईडी) ) उन्हें दिया जाना है जो कि स्व-गणना कार्य पूर्ण करने पर संबन्धित के मोबाइल एवं ई-मेल(यदि दी गई हो) पर प्राप्त हुआ है, ताकि उसे अपने मोबाइल एप में वेलीडेट कर सके। यदि एसईआईडी वेलीडेट नहीं हो पाया है अथवा किसी परिवार ने स्व-गणना नहीं किया है, तो भी प्रगणक के द्वारा उस परिवार का गणना कार्य पूर्ण किया जाएगा। 

शहरी क्षेत्रों, बंद गेट वाली कालोनियों और अपार्टमेंट परिसरों में गणना कार्य को लेकर विशेष रणनीति बनाई गई है। सभी जिला कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्तों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे जिले के अंतर्गत आने वाले आवासीय समितियों और प्रबंधन समूहों को निर्देश जारी करें कि प्रगणकों को प्रवेश में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए, जिन आवासीय समितियों और प्रबंधन समूहों के द्वारा जनगणना कार्य में बाधा डाली जाएगी, उन पर जनगणना अधिनियम के तहत कार्यवाही किए जाने के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। 

राज्य में इस कार्य हेतु लगभग 62 हजार 500 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जिसमें 47 प्रमुख जनगणना अधिकारी, 250 जिला स्तर के अधिकारी, 472 चार्ज अधिकारी, 1 हजार 160 मास्टर ट्रेनर्स एवं फील्ड ट्रेनर्स, 51 हजार 300 प्रगनक एवं 9 पर्यवेक्षक शामिल हैं। 
राज्य में जनगणना 2027 का कार्य 33 जिले, 195 नगरीय निकाय एवं 252 तहसीलों के अंतर्गत 19 हजार 978 ग्रामों में संपादित कराये जाएंगे। जनगणना कार्य संपादित करने के लिए राज्य में 251 ग्रामीण चार्ज एवं 221 नगरीय चार्ज हैं । इन चार्जों के अंतर्गत लगभग 49 हजार मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं । इन मकान सूचीकरण ब्लॉकों में प्रगणकों के द्वारा घर-घर जाकर मकान सूचीकरण का कार्य संपादित किया जाएगा। जनगणना 2027 कार्य के लिए जन सामान्य हेतु जनगणना से संबन्धित जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1855 स्थापित किया गया है ।

 

अनियमितताओं पर सख्ती: चार कृषि आदान दुकानों के लाइसेंस 21 दिन के लिए निलंबित

अनियमितताओं पर सख्ती: चार कृषि आदान दुकानों के लाइसेंस 21 दिन के लिए निलंबित

 रायपुर। खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी है। जशपुर कलेक्टर के निर्देश पर उप संचालक कृषि एवं अधिसूचित प्राधिकारी (उर्वरक) द्वारा विभिन्न विकासखंडों में कृषि आदान विक्रय प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान कई दुकानों में अनियमितताएं सामने आईं, जिस पर संबंधित संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं करने और उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश, 1985 के प्रावधानों के उल्लंघन के चलते प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कार्रवाई के तहत मेसर्स अन्नु कृषि केन्द्र (कांसाबेल), मेसर्स अन्नु सीड्स (कुनकुरी), मेसर्स मौसम बीज भंडार (कवई, विकासखंड बगीचा) तथा मेसर्स कृषि कल्प एग्रीकल्चर प्वाइंट (मुडाबहला, विकासखंड पत्थलगांव) के उर्वरक विक्रय लाइसेंस को उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश, 1985 के खंड 26 (्र) के तहत 21 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है।

निलंबन अवधि के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान रासायनिक उर्वरकों का विक्रय नहीं कर सकेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आगे भी इस तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने सुलझाए लंबित प्रकरण

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने सुलझाए लंबित प्रकरण

 00 मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उपभोक्ताओं को मिली राहत, हजारों रुपये की छूट

00 लंबित अमानत राशि का भुगतान, देरी पर अधिकारियों को सख्त हिदायत

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी नीतियों एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेशभर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम की सक्रियता के चलते राज्य के विभिन्न जिलों में वर्षों से लंबित विद्युत प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल रही है।

योजना के तहत हजारों उपभोक्ताओं को राहत
मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत प्रदान की जा रही है। योजना के अंतर्गत लंबित विद्युत देयकों की समीक्षा कर उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत से अधिक तक की छूट दी जा रही है। इसी क्रम में सूरजपुर जिले के एक उपभोक्ता को 90 हजार रुपये से अधिक के बकाया बिल पर 55 हजार रुपये से अधिक की छूट प्रदान की गई, जिससे उन्होंने शेष राशि का भुगतान कर अपना खाता पूर्णत: शून्य कर लिया।
लंबित अमानत राशि का त्वरित भुगतान
फोरम की सक्रिय पहल के तहत लंबे समय से लंबित अमानत राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) के मामलों का भी निराकरण किया जा रहा है। एक प्रकरण में एक वर्ष से लंबित राशि को उपभोक्ता के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित किया गया। साथ ही, इस प्रकार की देरी पर फोरम द्वारा संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
समयबद्ध समाधान पर जोर
विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ताओं से जुड़े सभी प्रकरणों का समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से निराकरण किया जाए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
योजना का लाभ लेने की अपील
विभागीय अधिकारियों ने प्रदेश के सभी बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का अधिकतम लाभ उठाएं। शासन का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक परिवारों को पुराने बकाया से मुक्ति दिलाकर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया जा सके।

राजस्व विभाग की नई पहल : छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सुविधाएँ

राजस्व विभाग की नई पहल : छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सुविधाएँ

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए भूमि और राजस्व संबंधी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सुशासन के संकल्प को साकार करते हुए, अब नागरिकों को खसरा-बी-1, नामांतरण और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है।

नागरिकों की सुविधा हमारी प्राथमिकता-मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राजस्व विभाग की इस डिजिटल पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार तकनीक के माध्यम से शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राजस्व सेवाओं का डिजिटलीकरण आम आदमी के समय और श्रम की बचत सुनिश्चित करेगा। यह पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भ्रष्टाचार मुक्त और सुगम राजस्व प्रशासन का लक्ष्य - राजस्व मंत्री वर्मा

राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने जानकारी दी कि विभाग अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन कर रहा है। हमारा उद्देश्य तकनीक के उपयोग से मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए। डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के माध्यम से हम राज्य को अत्याधुनिक राजस्व तंत्र प्रदान कर रहे हैं, जिससे नागरिक घर बैठे अपनी भूमि का विवरण प्राप्त कर सकें। राजस्व विभाग द्वारा दी जा रही प्रमुख ऑनलाइन सुविधाओं में नागरिक अब नि:शुल्क खसरा और बी-1 की डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रति राज्य के किसी भी कोने से कभी भी बिल्कुल मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं। खसरा या बी-1 में किसी भी संशोधन या बदलाव की सूचना सीधे पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रियल-टाइम एसएमएस अलर्ट के माध्यम से प्राप्त होती है, जो किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को रोकने में सहायक है।

कृषि ऋण के लिए बैंक में गिरवी रखी गई भूमि की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे खरीद-बिक्री के समय पारदर्शिता बनी रहती है। अब नामांतरण के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ता। उप पंजीयक कार्यालय में पंजीयन होते ही स्वत: नामांतरण प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसी तरह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध विशेष मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक कहीं से भी अपने स्मार्टफोन से जमीन का रिकॉर्ड देख और डाउनलोड कर सकते हैं। राजस्व विभाग के इन नवाचारों से छत्तीसगढ़ राज्य राजस्व प्रशासन में एक नई डिजिटल क्रांति का गवाह बन रहा है।

अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित राजस्व प्रशासन डिलम्प के तहत राज्य की सभी तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित कर राजस्व प्रशासन को पूरी तरह अत्याधुनिक और पेपरलेस बनाना है। इन सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और समय की बचत करना है। डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम वर्ष 2008-09 में शुरू हुई। यह केंद्र-प्रवर्तित योजना 1 अप्रैल 2016 से पूर्णत: केंद्रीय योजना के रूप में संचालित है। वर्तमान में राज्य के 20 हजार 286 गांवों के खसरा और 19 हज़ार 694 गांवों के नक्शों का कंप्यूटरीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग कर उन्हें अत्याधुनिक बनाया गया है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों के साथ ऑनलाइन जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे काम में गति और सटीकता आई है।
असर्वेक्षित ग्रामों का सर्वेक्षण
राज्य के 1 हज़ार 89 ग्रामों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1,018 का नक्शा उपलब्ध कराया गया है। प्रथम चरण में 717 गांवों का और 454 गांवों का द्वितीय चरण में सत्यापन पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही 233 गांवों का डेटा भुईयां एवं भू-नक्शा सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा चुका है। इसी तरह राज्य की 50 तहसीलों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर राजस्व सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 252 में से 172 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत हैं, जिनमें से 155 का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही राज्य के राजस्व कार्यालयों का डिजिटलीकरण एवं इंटरकनेक्टिविटी का कार्य तेजी से किया जा रहा है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को ऑनलाइन कर उन्हें तहसील कार्यालयों के साथ इंटरनेट के माध्यम से जोड़ दिया गया है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत राज्य के सभी राजस्व ग्रामों के खसरा नक्शों का जियोरेफरेंसिंग कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 19,694 गांवों में से 18,959 गांवों में यह कार्य पूर्ण हो चुका है।
इस डिजिटल पहल से आम नागरिकों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में स्पष्टता और सुगमता आई है, जो निश्चित रूप से राज्य के चहुंमुखी विकास में सहायक सिद्ध होगी।

नारी शक्ति वंदन के संकल्प को मिला महिलाओं का व्यापक समर्थन

नारी शक्ति वंदन के संकल्प को मिला महिलाओं का व्यापक समर्थन

 00 राज्यसभा सांसद वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट कर जताया आभार

रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित कार्यालय में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र तथा इस संबंध में पारित शासकीय संकल्प के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।

महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं के उत्थान हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि राज्य में महिला सशक्तिकरण को और अधिक गति मिलेगी तथा महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में सुदृढ़ होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन जैसी ऐतिहासिक पहल समाज में समानता और न्याय के नए आयाम स्थापित करेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की महिलाएं विकास यात्रा की सशक्त सहभागी हैं और उनके सशक्तिकरण के बिना समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी है।मुख्यमंत्री ने महिला प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

CG : मुख्यमंत्री साय से मिस इंडिया छत्तीसगढ़ अनुष्का सोन ने की सौजन्य मुलाकात

CG : मुख्यमंत्री साय से मिस इंडिया छत्तीसगढ़ अनुष्का सोन ने की सौजन्य मुलाकात

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज विधानसभा में मिस इंडिया छत्तीसगढ़ 2026 अनुष्का सोन ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर अनुष्का ने मुख्यमंत्री को नारी सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को लेकर विशेष सत्र आयोजित करना एक प्रेरणादायक पहल है। उन्होंने कहा कि इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिलती है।

अनुष्का ने बताया कि वे आज विधानसभा की ऐतिहासिक कार्यवाही को सुनने विशेष रूप से पहुंची थीं और इस अनुभव को उन्होंने अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण की प्रक्रिया को करीब से देखना उनके लिए एक नई सीख रही, जिससे वे समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए और अधिक प्रोत्साहित कर सकेंगी।

मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सुखद है कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों से महिलाएं आगे आकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही हैं, जो एक सशक्त और जागरूक समाज की पहचान है।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास जताया कि इस तरह की पहल महिलाओं के आत्मविश्वास को और मजबूत करेंगी तथा उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे आने के लिए प्रेरित करेंगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी की बेटियां शिक्षा, कला, खेल और सामाजिक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने अनुष्का सोन को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरक बनें। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा उपस्थित थे।

 
BREAKING: रायपुर की प्लास्टिक फैक्ट्री में भीषण आग, पूरा गोदाम जलकर खाक, दमकल की कई गाड़ियां मौके पर

BREAKING: रायपुर की प्लास्टिक फैक्ट्री में भीषण आग, पूरा गोदाम जलकर खाक, दमकल की कई गाड़ियां मौके पर

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सड्डू इलाके में गुरुवार सुबह एक प्लास्टिक फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। कवल मल्टीलेयर प्लास्टिक फैक्ट्री में लगी इस आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया और पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। अब तक 5 से अधिक फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग बुझाने में जुटी हैं, जबकि अतिरिक्त संसाधन भी लगातार भेजे जा रहे हैं। पुलिस और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीम राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई है।

तेजी से फैली लपटें, नियंत्रण में लाना चुनौती
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग बेहद तेजी से फैली और देखते ही देखते पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। प्लास्टिक सामग्री के कारण आग और अधिक भड़क गई, जिससे उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है।

विधानसभा थाना क्षेत्र का मामला, जांच जारी
यह घटना विधानसभा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई है। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और हालात पर नजर रखे हुए हैं। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। नुकसान का आकलन आग पर काबू पाने के बाद ही किया जाएगा।

VIDHANSABHA : सीएम ने पेश किया महिला आरक्षण बिल पर चर्चा का प्रस्ताव, विपक्ष ने किया जमकर हंगामा

VIDHANSABHA : सीएम ने पेश किया महिला आरक्षण बिल पर चर्चा का प्रस्ताव, विपक्ष ने किया जमकर हंगामा

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया. आंसदी ने चर्चा के लिए 4 घण्टे का समय निर्धारित किया।

मुख्यमंत्री साय के प्रस्ताव के बाद नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत अशासकीय संकल्प प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे आसंदी ने अग्राह्य कर दिया. इस पर डॉ. महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री तो निंदा प्रस्ताव लाने वाले थे, लेकिन यह शासकीय संकल्प प्रस्ताव तो निंदा पर नहीं है।

इसके साथ ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सदन के बाहर और अंदर सत्ता पक्ष की ओर महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है।

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक लता उसेंडी ने कहा कि महिला आरक्षण पर रुकावट बनने का काम विपक्ष ने किया. महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में गिराने का काम विपक्ष ने किया. महिलाओं की भावनाओं और सम्मान का ख्याल नहीं रखा गया।

महिला आरक्षण पर छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र

महिला आरक्षण पर छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र

 मुख्यमंत्री साय ने रखा शासकीय संकल्प

 रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र शुरू हो गया है। इसकी कार्यवाही देखने और शामिल होने प्रदेश भर से महिला जनप्रतिनिधि पहुंची हुई हैं। आज के इस सत्र में महिला सशक्तिकरण को लेकर शासकीय संकल्प पेश किया गया। इसमें परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने की मांग की गई है। भाजपा के महिला विधायक विषय पर सदन में अपना पक्ष रखकर बता रही हैं कि किस प्रकार यह विधेयक जरूरी है और कांग्रेस गठबंधन दल का विरोध करने से क्या नुकसान हो रहा है। प्रथम वक्ता के रुप में पूर्व मंत्री लता उसेंडी ने चर्चा की शुरआत की ।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन में शासकीय संकल्प रखा इसमें कहा गया कि नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए संसद और विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर लागू किया जाए। इस पर चर्चा से पहले नेता प्रतिपक्ष डा.चरणदास महंत ने अशासकीय संकल्प की सूचना दी,स्पीकर डा.रमनसिंह ने कहा कि विशेष सत्र के विषय निश्चित रहते हैं इसके लिए शासकीय संकल्प प्रस्तुत किया जा चुका है। इसके बाद परम्परानुसार कोई अशासकीय संकल्प पर चर्चा नहीं हो सकती।  

1 मई अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विशेष : हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान: विष्णु देव सरकार की प्रतिबद्धता

1 मई अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विशेष : हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान: विष्णु देव सरकार की प्रतिबद्धता

 छगन लोन्हारे, उप संचालक जंनसंपर्क

रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लगातार आर्थिक मदद दी जा रही है। श्रम विभाग के तीनों मंडल-छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। इसी का परिणाम है कि बीते 02 साल 04 माह में श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगभग 800 करोड़ रूपए डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में अंतरित किए जा चुके हैं। इस वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में श्रमिकों के 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा। 

मजदूर दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है। 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस या श्रमिक दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए संकल्प लेना है। यह दिन श्रमिकों के योगदान को याद करने और उनके संघर्षों को सम्मानित करने के लिए भी मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1886 में शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की याद में मनाया जाता है, जहां अनेक श्रमिकों ने 8 घंटे के कार्य दिवस की मांग की थी। सन् 1889 में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में घोषित किया था। इस दिन को मनाने का उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों को सुनिश्चित करना, सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए आवाज बुलंद करना है। भारत में मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1923 में चेन्नई (मद्रास) से हुई थी। भारतीय संविधान निर्माण सभा के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने श्रमिकों के काम का समय 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे किया। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं को प्रसूति अवकाश की सुविधा उपलब्ध कराई।

मुख्यमंत्री श्री साय का मानना है कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो बड़े पैमाने पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण भी तकनीक के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।

प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि प्रदेश में विष्णु देव सरकार के सुशासन में अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के हितों में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार किट योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कॉपी हेतु सहायता राशि योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित की जा रही है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सोच है कि हर हाथ को काम इस दिशा में प्रदेश के वाणिज्य उद्योग एवं श्रम विभाग द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। श्रम विभाग के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 256 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 

श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि विष्णु देव के सरकार की सोच है कि हर हाथ को काम मिले उसका उन्हें उचित दाम मिले और हर पेट को अन्न मिले यह हमारी सरकार की आदर्श नीति है। इस नीति को क्रियान्वित करने हेतु राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 38 भोजन केन्द्र संचालित है। इस योजना के अंतर्गत श्रमिकों को 5 रूपये में गरम भोजन, दाल चावल, सब्जी, आचार प्रदाय किया जा रहा है, जिसका विस्तार चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में समस्त जिलों में किया जा रहा है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी। 

उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। एक प्रतिशत उपकर (सेस) से वर्ष 2025-26 में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि मंडल गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित हुआ है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं।

औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। श्रम विभाग के अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं का मुख्य दायित्व श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सा हित लाभ उपलब्ध कराया जाता है। कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए 76 करोड़ 38 लाख रूपए का प्रावधान राज्य सरकार द्वारा किया गया है।