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आयकर विभाग में बड़ा फेरबदल! कई अफसरों के तबादले…देखें लिस्ट..!!

आयकर विभाग में बड़ा फेरबदल! कई अफसरों के तबादले…देखें लिस्ट..!!

 रायपुर। प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त सीजी एमपी ने अपनी टीम में बड़ा बदलाव किया है। बस्तर से लेकर ग्वालियर तक के अधिकारी स्थानांतरित किए गए हैं। इनमें 20 अतिरिक्त, संयुक्त आयुक्त, अतिरिक्त संयुक्त अन्वेषण निदेशक, 48 उपायुक्त और 114 आयकर अधिकारी (आईटीओ) शामिल हैं।

इनमें से 14 आईटीओ में अधिकांश पिछले महीनों में पदोन्नत किए गए थे। उसके बाद से तबादले संभावित थे। 18 एडिशनल कमिश्नर,11 उपायुक्तों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। सभी को 12 से 15 जून तक पदभार ग्रहण करने कहा गया है।आयकर विभाग में ट्रांसफर, देखें लिस्ट

BREAKING: राजधानी के सेंट्रल बैंक जोनल ऑफिस में भीषण आग, दस्तावेज़ व रिकॉर्ड जलकर खाक

BREAKING: राजधानी के सेंट्रल बैंक जोनल ऑफिस में भीषण आग, दस्तावेज़ व रिकॉर्ड जलकर खाक

 रायपुर। रायपुर के बॉम्बे मार्केट स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के जोनल कार्यालय में शनिवार सुबह अचानक आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और कार्यालय के रिकॉर्ड जलकर नष्ट हो गए हैं।

सुबह उठीं धुएं और आग की लपटें
जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह करीब 9 बजे बैंक के जोनल कार्यालय से धुआं निकलता दिखाई दिया। कुछ ही देर में आग की लपटें भी उठने लगीं। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और आसपास के लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और दमकल विभाग को दी। घटना के समय कार्यालय परिसर में सफाई का काम चल रहा था। देखते ही देखते आग ने कार्यालय के एक हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग फैलने से कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत बाहर निकलकर खुद को सुरक्षित किया।

दमकल टीम ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। दमकल कर्मियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आग को अन्य हिस्सों में फैलने से रोक लिया। कुछ समय की कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति पूरी तरह नियंत्रित कर ली गई। फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार समय रहते आग पर काबू पा लेने से बड़ा हादसा टल गया। आसपास के हिस्सों को भी सुरक्षित कर लिया गया ताकि आग दोबारा न भड़क सके।

शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका
आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को हादसे की वजह माना जा रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। पुलिस ने भी मौके का निरीक्षण किया और घटना से जुड़े तथ्यों को जुटाना शुरू कर दिया है। फायर विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच रिपोर्ट के बाद पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

छत्तीसगढ़ में मौसम ने ली करवट: राजधानी रायपुर सहित 21 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी

छत्तीसगढ़ में मौसम ने ली करवट: राजधानी रायपुर सहित 21 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी

 रायपुर : छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए चिलचिलाती धूप और उमस के बीच एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हवा में नमी की मात्रा बढ़ने के कारण राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में मौसमी गतिविधियों में तेजी आएगी। इस बदलाव से तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

मौसम विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर से लेकर दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुल 21 जिलों में मौसम करवट ले सकता है। इनमें सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, सरगुजा और बलरामपुर जैसे प्रमुख जिले शामिल हैं। इन इलाकों में न सिर्फ हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं, बल्कि कुछ जगहों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है।

पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के अलग-अलग शहरों के तापमान में काफी अंतर देखने को मिला है। जहां एक तरफ राजनांदगांव जिला 42 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ सबसे गर्म इलाका दर्ज किया गया, वहीं दूसरी तरफ पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जिससे वहां रातें काफी ठंडी रही। बात अगर राजधानी रायपुर की करें, तो यहां फिलहाल दिन का पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, लेकिन आने वाले वक्त में इसमें कमी आने के संकेत हैं।

रायपुर और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को जल्द ही उमस भरे माहौल से निजात मिल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, राजधानी में दिनभर बादलों की आवाजाही लगी रहेगी। शहर के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। मौसम के इस यू-टर्न से न केवल तापमान नीचे आएगा, बल्कि पिछले कुछ दिनों से परेशान कर रही चिपचिपी गर्मी से भी लोगों को काफी हद तक सुकून मिलेगा।

मौसम में यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है, बल्कि पिछले 24 घंटों से राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। बीते कल दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 3 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा कोरबा और पेंड्रा रोड में भी 2-2 सेंटीमीटर पानी गिरा। छत्तीसगढ़ के अन्य प्रमुख पर्यटन और पहाड़ी क्षेत्रों जैसे मैनपाट, कटघोरा, सूरजपुर और कांसाबेल में भी हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे मौसम खुशनुमा बना हुआ है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 का शुभारंभ

विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 का शुभारंभ

 राजीव स्मृति वन में बरगद का पौधा लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रायपुर-- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर  राजधानी रायपुर स्थित राजीव स्मृति वन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री साय ने कृष्ण वट (बरगद) का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने भी बेल का पौधा लगाकर अभियान में सहभागिता निभाई।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव  साय ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का संबंध अभिन्न है। अनियंत्रित वृक्ष कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रेरक और भावनात्मक पहल है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गत वर्ष प्रदेश में ढाई करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जनसहभागिता और विभागीय प्रयासों से साढ़े तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष भी प्रदेशवासी निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक पौधारोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है। राज्य सरकार और वन विभाग के सतत प्रयासों से वन क्षेत्र का संरक्षण और विस्तार निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर, खेत, आंगन और मेड़ों में अपनी माता के नाम एक पौधा लगाने का आग्रह करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज की प्रकृति संरक्षण परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से जंगलों को अपनी संस्कृति और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानकर उनकी रक्षा करता आया है। सरना स्थलों में वृक्षों को देवतुल्य मानकर पूजा जाना प्रकृति के प्रति हमारी सांस्कृतिक आस्था और संरक्षण की भावना का जीवंत उदाहरण है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्मश्री सम्मानित व्यक्तित्व  पंडी राम मंडावी, जागेश्वर यादव तथा डॉ. रामचंद्र गोडबोले का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि इन विभूतियों का जीवन समाजसेवा, समर्पण और जनहित का प्रेरणादायी उदाहरण है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित पुस्तकों—‘द बैगा’, ‘वेटलैंड्स ऑफ छत्तीसगढ़’, ‘फ्लोरल डायवर्सिटी ऑफ बीजापुर डिवीजन’, ‘मैमल्स ऑफ छत्तीसगढ़’ तथा ‘उत्तरी छत्तीसगढ़ के अनूठे पर्यटन स्थल और उनकी विविधता’—का विमोचन भी किया।

वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान प्रकृति और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक अनूठा माध्यम है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान को जन-जन का आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम में भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम सिलीबहार की सुश्री चन्दनबती कोला ने स्व-सहायता समूहों द्वारा जंगल संरक्षण और जैविक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि गांव में 138 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है, जिससे युवाओं का पलायन पूरी तरह रुक गया है तथा पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिली है।

कार्यक्रम को अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक  अरुण कुमार पाण्डेय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला, विधायक  मोतीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

समाज, संगठन और योग के प्रति समर्पित था रूपनारायण सिन्हा जी का जीवन : मुख्यमंत्री साय

समाज, संगठन और योग के प्रति समर्पित था रूपनारायण सिन्हा जी का जीवन : मुख्यमंत्री साय

 छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर--- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सिन्हा का संपूर्ण जीवन समाजसेवा, संगठन निर्माण और योग के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। उनका निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री  साय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा एक कुशल संगठनकर्ता, सरल, सौम्य और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने व्यवहार, कार्यशैली और समर्पण से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विशेष पहचान बनाई थी। योग के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद श्री सिन्हा ने पूरे समर्पण और ऊर्जा के साथ योग आंदोलन को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने योग को केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए अनेक नवाचार किए। उनके प्रयासों से प्रदेश में योग गतिविधियों को नई पहचान और व्यापक जनस्वीकृति मिली।

मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्गीय सिन्हा के साथ बिताए गए क्षणों को स्मरण करते हुए कहा कि उनसे नियमित मुलाकात होती थी और हर मुलाकात में वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए योग आधारित नए विचार साझा करते थे। उनकी सोच सदैव रचनात्मक और जनहितकारी होती थी। वे योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय रहते थे और इसी उद्देश्य को अपने जीवन का मिशन बना चुके थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जशपुर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की सफलता में  सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। सीमित समय में उन्होंने जिस कुशलता और प्रतिबद्धता के साथ उस आयोजन को भव्य स्वरूप दिया, वह उनकी संगठन क्षमता और कार्यकुशलता कावो उत्कृष्ट उदाहरण है। उस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने योग के प्रति जनजागरूकता को नई ऊंचाई प्रदान की थी। उनका जीवन समाज के प्रति समर्पण, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक था, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।

मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

श्रद्धांजलि सभा में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री  केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, विधायक  अमर अग्रवाल, विधायक  धरमलाल कौशिक, विधायक अजय चंद्राकर, महापौर मीनल चौबे,  रमेश बैस,  राम प्रताप,  पवन साय, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना,  राम दत्त,  राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, योग साधक एवं योग जगत से जुड़े लोगों ने उपस्थित होकर स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धासुमन अर्पित किया।

सुशासन तिहार: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सुनीं 17 गांवों की समस्याएं…..

सुशासन तिहार: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सुनीं 17 गांवों की समस्याएं…..

 रायपुर: राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पहल सुशासन तिहार 2026 के तहत सूरजपुर जिला के भैयाथान विकासखंड के चंद्रमेढ़ा में आयोजित समाधान शिविर में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को सभी आवेदनों का समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

चंद्रमेढ़ा हाईस्कूल मैदान में आयोजित शिविर में 17 ग्रामों के ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं और मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। शिविर में सुशासन तिहार के तहत पहले प्राप्त 629 आवेदनों के निराकरण की समीक्षा की गई, जिनमें 612 मांगों और 17 शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। वहीं शिविर के दौरान 328 नए आवेदन प्राप्त हुए, जिन्हें संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए सौंपा गया।

मंत्री राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक आवेदन का गुणवत्तापूर्ण निराकरण कर इसकी जानकारी आवेदकों तक भी पहुंचाई जाए

शिविर में जनकल्याणकारी गतिविधियों के तहत 100 पौधों का वितरण किया गया। पात्र हितग्राहियों को 4 नए राशन कार्ड प्रदान किए गए, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 8 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और 8 शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराया गया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कृषि, खाद्य तथा महिला एवं बाल विकास विभागों के स्टॉलों के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ, जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

कुनकुरी को मिलेगी पहली आधुनिक आवासीय कॉलोनी, अटल विहार योजना के तहत 97 आवासों का होगा निर्माण

कुनकुरी को मिलेगी पहली आधुनिक आवासीय कॉलोनी, अटल विहार योजना के तहत 97 आवासों का होगा निर्माण

 रायपुर: छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम गिनाबहार में शासन की महत्वाकांक्षी अटल विहार योजना के तहत क्षेत्र की पहली आधुनिक एवं सुव्यवस्थित आवासीय कॉलोनी विकसित की जाएगी। यह परियोजना न केवल गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती आवास उपलब्ध कराएगी, बल्कि कुनकुरी क्षेत्र में योजनाबद्ध शहरी विकास की नई शुरुआत भी करेगी।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल प्रदेश के सभी 33 जिलों में आवासीय योजनाओं का विस्तार करते हुए नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सतत प्रयासरत है। इसी क्रम में कुनकुरी की यह परियोजना क्षेत्र के समग्र विकास और स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि जशपुर जिले में शीघ्र ही अटल विहार योजना के अंतर्गत बालाछापर एवं पत्थलगांव तथा अटल आवास योजना के तहत महुआ टोली एवं कंदोरा में भी नई आवासीय परियोजनाएं प्रारंभ की जाएंगी।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री तथा जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के विशेष निर्देश पर ग्राम गिनाबहार, तहसील कुनकुरी में लगभग 7 एकड़ क्षेत्र में यह परियोजना विकसित की जाएगी। इसके लिए 17 करोड़ 15 लाख 71 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना के अंतर्गत विभिन्न आय वर्गों के लिए कुल 97 आवास निर्मित किए जाएंगे, जिनमें 91 आवास आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) एवं निम्न आय वर्ग (LIG) के हितग्राहियों के लिए होंगे।

अटल विहार योजना के अंतर्गत शासन द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को मात्र 1 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से भूमि आबंटित की गई है। साथ ही पात्र ईडब्ल्यूएस हितग्राहियों को 80 हजार रुपये तथा एलआईजी वर्ग के पात्र हितग्राहियों को 40 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया जाता है, जिससे आवास प्राप्त करना और अधिक सुलभ एवं किफायती बन सके।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि प्रस्तावित कॉलोनी आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगी। कॉलोनी में चौड़ी एवं सुव्यवस्थित सड़कें, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, समुचित जल निकासी प्रणाली, स्वच्छ एवं हरित वातावरण सहित सभी आवश्यक आधारभूत अधोसंरचनात्मक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि एक नियोजित एवं आधुनिक आवासीय परिसर के रूप में यह परियोजना क्षेत्रवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।

परियोजना स्थल कुनकुरी-बगीचा मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग-43 से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एशिया के द्वितीय सबसे बड़े चर्च, हॉलीक्रॉस मिशन अस्पताल, लोयला स्कूल एवं लोयला महाविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थान भी परियोजना स्थल से लगभग 3 से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, जिससे यह क्षेत्र आवासीय दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त माना जा रहा है।

भविष्य में इस क्षेत्र के आसपास शासकीय अस्पतालों, कार्यालयों एवं अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थानों के निर्माण की भी योजना है। वर्तमान में परियोजना स्थल के निकट शासकीय अस्पताल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इससे क्षेत्र के सुनियोजित विकास को नई गति मिलने के साथ-साथ भूमि मूल्य में वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जिससे यह परियोजना आवासीय एवं निवेश, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

उल्लेखनीय है कि यह परियोजना मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विधानसभा क्षेत्र कुनकुरी में विकसित की जा रही है। क्षेत्रवासियों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी पहल साबित होगी।

हरियर छत्तीसगढ़ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी- वन मंत्री केदार कश्यप

हरियर छत्तीसगढ़ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी- वन मंत्री केदार कश्यप

 रायपुर: विश्व पर्यावरण दिवस के गरिमामय अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप ने समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा, अनुपम जैव विविधता और अद्वितीय प्राकृतिक संसाधनों के कारण देश का एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। वर्तमान में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है।

’जनआंदोलन बना एक पेड़ मां के नाम अभियान’

वन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेaश में वन एवं वन्जीव संरक्षण सहित हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए कई प्रभावी योजनाएं चलाई जा रही हैं। ष्एक पेड़ मां के नामष् अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में राज्य में करोड़ों पौधों का रोपण किया गया है। आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से अब यह अभियान एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

’44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पूंजी’

मंत्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से ढका है, जो हमारी सबसे बड़ी प्राकृतिक संपदा है। वन विभाग द्वारा वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक पुनर्जनन और व्यापक वृक्षारोपण के माध्यम से इस हरित आवरण को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।

’सुरक्षित हुए प्राकृतिक आवास, बढ़ा जल स्तर’

 कश्यप ने वन्यजीवों के संरक्षण पर बात करते हुए बताया कि राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में वन्यप्राणियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ही में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज द्वारा घोंसला बनाने का दुर्लभ दृश्य देखा गया है, जो हमारी सुरक्षित एवं अनुकूल पर्यावरण प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसके अलावा, वन क्षेत्रों में हज़ारों जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से वन्यजीवों को सालभर पानी मिल रहा है और भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

’पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका को बढ़ावा’

वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वनाश्रित  परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लघु वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य के लिए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी लें।

नीट यूजी 2026 परीक्षा के सुचारु संचालन के लिए मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को दिये दिशा-निर्देश

नीट यूजी 2026 परीक्षा के सुचारु संचालन के लिए मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को दिये दिशा-निर्देश

 नीट पुन: परीक्षा 21 जून को, 19 शहरों में 127 परीक्षा केन्द्र बनाये गए

रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आगामी 21 जून को नीट (यू जी) 2026 की पुन: परीक्षा के सुचारु संचालन हेतु बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये हैं। उन्होंने परीक्षा के दौरान केन्द्र सरकार एवं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा जारी दिशा- निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने कहा है। 

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को परीक्षा के पहले ही परीक्षा केन्द्रों का निरीक्षण करने और परीक्षा के लिए की गई तमाम तैयारियों के बारे जानकारी लेने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस है इसे ध्यान में रखते हुये परीक्षा संचालन में कहीं पर कोई दिक्कत नहीं हो यह सुनिश्चित कर लिया जाये। परीक्षा केन्द्रों पर आने जाने के लिए समुचित व्यवस्था हो। उन्होंने योगा दिवस से संबंधित गतिविधियों के कारण किसी भी परीक्षा केन्द्र पर परीक्षा संचालन प्रभावित नहीं हो यह सुनिश्चित करने कहा है।

मुख्य सचिव ने कहा कि परीक्षा देने जा रहे बच्चें घबराये नही- परीक्षा अच्छे से दें। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की संयुक्त टीम बच्चों की काउंसलिंग करें कि उन्हें किसी भी तरह परीक्षा से घबराने की जरूरत नहीं है। मुख्य सचिव ने परीक्षा के एक दिन पहले 20 जून को परीक्षा संचालन के लिए तमाम व्यवस्थाओं के लिए माकड्रिल एक्सरसाइज करने के निर्देश दिए है। उन्होंने माकड्रिल की तैयारी पहले से करने कहा है। परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कहा गया है। परीक्षा के प्रश्न-पत्र एवं ओएमआर शीट एयर फोर्स के माध्यम से मूव होंगे। इन्हें सुरक्षा के साथ रखने कलेक्टर, एसपी को पहले से ही पर्याप्त तैयारी करने कहा गया है। प्रत्येक जिले में नियंत्रण कक्ष की स्थापना करने एवं परीक्षा दिवस पर सक्रिय रखने कहा गया है, जिससे परीक्षा संचालन का प्रभावी निगरानी की जा सकें।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बैठक में शामिल हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक  अभिषेक सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में नीट पुन: परीक्षा 2026 के लिए 19 शहरों में होगी। परीक्षा के लिए कुल 127 परीक्षा केन्द्र बनाये गए है।  सिंह ने सभी जिला प्रशासन के अधिकारियों से परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां करने एवं सहयोग और समन्वय करने का अनुरोध किया।
बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव  बसवराजु एस. सहित राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा नामित छत्तीसगढ़ राज्य नोडल अधिकारी  पीयुष शुक्ला सहित छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा संचालनालय, पुलिस विभाग तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारी सहित सरगुजा, बालोद, बीजापुर, बिलासपुर, दुर्ग, दंतेवाड़ा, धमतरी, बस्तर, जांजगीर-चापा, कांकेर, कोण्डागांव, कोरबा, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, नारायणपुर, रायगढ़, रायपुर, राजनांदगांव एवं सुकमा के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।

शिक्षा के साथ कौशल विकास से बढ़ता है आत्मविश्वास : साव

शिक्षा के साथ कौशल विकास से बढ़ता है आत्मविश्वास : साव

 00 लोरमी में 250 युवाओं को कंप्यूटर, सिलाई और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण, उप मुख्यमंत्री ने किया संवाद

रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लोरमी में कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने युवाओं को जीवन में निरंतर आगे बढऩे और अपने कौशल को लगातार विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रशिक्षण केंद्र में संचालित गतिविधियों का अवलोकन कर प्रशिक्षणार्थियों के अनुभव भी सुने।साव ने कहा कि स्थानीय युवाओं को उनकी रुचि और आवश्यकता के अनुरूप नि:शुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एसईसीएल के सहयोग से 1 अप्रैल से 250 युवा कंप्यूटर, सिलाई एवं ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। युवाओं में नए कौशल सीखने को लेकर उत्साह और उमंग दिखाई दे रहा है, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करता है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि, आज के समय में शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं है। पढ़ाई के साथ किसी एक व्यावहारिक कौशल का होना भी अत्यंत आवश्यक है। ब्यूटीशियन, सिलाई, डाटा एंट्री जैसे प्रशिक्षण युवाओं को अतिरिक्त दक्षता प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि, कौशल विकास युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही उनके व्यक्तित्व को भी सशक्त बनाता है।

 शिक्षा के साथ कौशल विकास से बढ़ता है आत्मविश्वास  : श्री अरुण साव

साव ने युवाओं से कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद भी सीखने की प्रक्रिया कभी नहीं रुकनी चाहिए। निरंतर अभ्यास और सीखने की प्रवृत्ति ही सफलता का आधार है। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के पास अतिरिक्त कौशल होता है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह हर परिस्थिति में सम्मानपूर्वक जीवन जीने में सक्षम बनता है। यही आत्मविश्वास जीवन में आगे बढऩे की सबसे बड़ी शक्ति है जो सफलता की नई राहें खोलता है।

 शिक्षा के साथ कौशल विकास से बढ़ता है आत्मविश्वास  : श्री अरुण साव

छत्तीसगढ़ में अब महज 24 घंटे में मिलेगा श्रम पहचान पंजीयन प्रमाणपत्र, श्रम विभाग ने नियमों में किया बड़ा संशोधन

छत्तीसगढ़ में अब महज 24 घंटे में मिलेगा श्रम पहचान पंजीयन प्रमाणपत्र, श्रम विभाग ने नियमों में किया बड़ा संशोधन

 00 ऑनलाइन प्रक्रिया हुई और भी आसान; दुकानदारों और उद्यमियों को मिलेगा त्वरित लाभ

00 3 जून 2026 से नई अधिसूचना प्रभावी, व्यवस्था में पारदर्शिता और समयबद्धता पर ज़ोर

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग ने राज्य में व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दुकानों एवं प्रतिष्ठानों के पंजीयन की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बना दिया है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना (नियोजन एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) नियम, 2021 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है, जो 3 जून 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी हो गई है।
24 घंटे के भीतर जारी होगा ऑनलाइन प्रमाणपत्र
संशोधित नियमों के तहत अब किसी भी दुकान या स्थापना के लिए श्रम पहचान संख्या का पंजीयन प्रमाणपत्र ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के मात्र 24 घंटे के भीतर जारी कर दिया जाएगा। इसके लिए नियोक्ताओं को निर्धारित प्रारूप में ऑनलाइन आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे और ई-चालान के माध्यम से शुल्क जमा करना होगा। यह पूरी व्यवस्था स्व-घोषणा पर आधारित और सिस्टम-जनरेटेड होगी, जिसमें किसी भौतिक हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं होगी।
दस्तावेजों का डिजिटलीकरण और पारदर्शिता
नई व्यवस्था के तहत जारी सभी श्रम पहचान संख्या प्रमाणपत्र अधिनियम के अंतर्गत पूर्णत: वैध माने जाएंगे। इसके साथ ही, श्रम विभाग के पोर्टल पर दुकानों और प्रतिष्ठानों का ऑनलाइन रजिस्टर संधारित किया जाएगा, जिससे अभिलेखों का डिजिटलीकरण और उनकी निगरानी बेहद आसान हो जाएगी।
नियोक्ताओं की होगी जिम्मेदारी, डिस्प्ले करना अनिवार्य

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यदि आवेदन में कोई भी जानकारी, तथ्य या दस्तावेज गलत अथवा भ्रामक पाए जाते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित नियोक्ता की होगी। इसके अलावा, सभी दुकानदारों को अपने प्रतिष्ठान परिसर में नाम-पट्ट के साथ इस पंजीयन प्रमाणपत्र को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
संशोधन प्रक्रिया भी हुई बेहद सरल
यदि कोई नियोक्ता अपने पंजीयन प्रमाणपत्र में नाम, पता, कर्मचारियों की संख्या या व्यवसाय की प्रकृति जैसे विवरणों में कोई बदलाव करना चाहता है, तो वह मात्र 100 रुपये का संशोधन शुल्क देकर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। ऐसे मामलों में भी संशोधित प्रमाणपत्र 24 घंटे के भीतर ही जारी कर दिया जाएगा। सरकार के इस इज़ ऑ$फ डूइंग बिज़नेस कदम से कागजी कार्यवाही कम होगी और व्यापारियों को एक सुविधाजनक माहौल मिलेगा।

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है - डेका

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है - डेका

 00 पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री

00 9 हजार 194 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधि
रायपुर।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन आज की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बनती जा रही है। यह केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस‘ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और केवल कृत्रिम संतुष्टि प्राप्त होती है।
राज्यपाल  रमेन डेका ने आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह के अध्यक्षीय उद्बोधन में उक्त बातें कही। समारोह में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथिक, मेडिकल बायोटेक, बीपीपी, एमपीटी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित अन्य संकायों में 7545 स्नातक और 1645 स्नातकोत्तर एवं 5 सुपर स्पेशयलिटी उपाधि प्रदान की गई तथा विभिन्न संकायों में सर्वाेच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को विभिन्न स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

राज्यपाल ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों से कहा कि जिस प्रकार वे राज्यपाल होने के नाते प्रदेश की जनता के हित के बारे में सोचते हैं, उसी प्रकार आपका दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप सभी ने मानवता की सेवा के उद्देश्य से इस क्षेत्र का चयन किया है। कठिन परिश्रम के बाद प्राप्त यह डिग्री आपके जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत है। जहां भी कार्य करें, मरीज के हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और ऐसा कार्य करें जो देश, प्रदेश और समाज में मिसाल बने

डेका ने कहा कि वर्तमान समय में नेबरहुड डॉक्टरों की सबसे अधिक आवश्यकता है। पहले फैमिली फिजिशियन की परंपरा थी, जो मरीज और उसके परिवार की परिस्थितियों को भलीभांति समझते थे। चिकित्सा क्षेत्र में उस आत्मीयता को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। किसी भी मरीज के लिए गोल्डन ऑवर अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में चिकित्सकों की त्वरित निर्णय क्षमता मरीज का जीवन बचा सकती है। राज्यपाल ने कहा कि आज के छात्र इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं। विज्ञान निरंतर आगे बढ़ रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम‘ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पशु, मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि आज का दिन केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है बल्कि समाज और मानवता के प्रति नई दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है। विद्यार्थियों की सफलता उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के प्रगति और विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। श्री साय ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ अधोसंरचना विस्तार, साथ ही बस्तर में नक्सल उन्मूलन के पश्चात विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्याे का भी उल्लेख किया।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करना लोगों की सेवा का बड़ा अवसर और महती जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विस्तृत जानकारी दी।

अध्यक्ष, राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, नई दिल्ली एवं दीक्षांत समारोह अभिभाषक डॉ वेदप्रकाश मिश्रा ने भी अपना संबोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा ने स्वागत उद्बोधन एवं अकादमिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित थे।

श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री साय

श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री साय

 0-कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों ने प्रदेश का नाम किया रोशन  

0-मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 22 मेधावी विद्यार्थियों को दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि

0--28 हजार 754 श्रमिक परिवारों को 7.79 करोड़ रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित

0-विश्व पर्यावरण दिवस पर  'एक पेड़ मां के नामÓ अभियान के तहत किया पौधारोपण, प्रदेशवासियों से भी किया आह्वान

रायपुर, /श्रमिक अपने श्रम, समर्पण और परिश्रम से समाज तथा देश के विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं। वे स्वयं कठिन परिस्थितियों में रहकर दूसरों को सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, इसलिए श्रमिक वास्तव में देश के निर्माता हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में श्रम विभाग द्वारा आयोजित मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करने वाले पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 22 मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया। इनमें कक्षा 10वीं के 9 तथा कक्षा 12वीं के 13 विद्यार्थी शामिल हैं। ये विद्यार्थी रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, गरियाबंद, सक्ती, बलौदाबाजार, रायगढ़ और कांकेर सहित विभिन्न जिलों से हैं।

मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों के संघर्ष, परिश्रम और संकल्प की प्रेरक कहानी है। उन्होंने कहा कि आज जिन श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों को सम्मानित किया जा रहा है, उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कभी भी स्वयं को किसी से कम न समझें। इतिहास इस बात का साक्षी है कि अनेक महान व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर उच्चतम शिखरों तक पहुंचे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि श्रमिकों के बच्चे केवल श्रमिक बनकर न रह जाएं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासक, वैज्ञानिक और विभिन्न उच्च पदों पर पहुंचकर छत्तीसगढ़ महतारी तथा देश की सेवा करें। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कल्याण के लिए लगभग 70 प्रकार की योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने श्रमिक परिवारों से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आग्रह किया तथा उपस्थित हितग्राहियों से कहा कि वे उन श्रमिकों तक भी योजनाओं की जानकारी पहुंचाएं जो अभी इन सुविधाओं से वंचित हैं।

अपने केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री के रूप में कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के हितों के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। वर्ष 2014 से 2019 के दौरान केंद्र सरकार में दायित्व निभाते समय उन्हें श्रम मंत्रालय के कार्यों को निकट से देखने तथा श्रमिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि पहले अलग-अलग स्थानों पर कार्य करने के कारण श्रमिकों को भविष्य निधि (पीएफ) राशि प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए यूनिवर्सल पीएफ नंबर की व्यवस्था लागू की गई, जिससे अब एक ही पीएफ नंबर श्रमिक के पूरे कार्यकाल से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम पेंशन व्यवस्था तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कदम भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में उठाए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 28 हजार 754 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों को कुल 7 करोड़ 79 लाख 52 हजार 370 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। यह राशि नि:शुल्क गणवेश एवं पुस्तक सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनीलाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना, मुख्यमंत्री साइकिल सहायता योजना, पेंशन सहायता योजना सहित विभिन्न श्रमिक हितैषी योजनाओं के तहत प्रदान की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत मेधावी विद्यार्थियों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा एक लाख रुपये दोपहिया वाहन क्रय करने के लिए प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा बच्चों के लिए नि:शुल्क कोचिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मंडल द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिवारों के हित में अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा और स्वरोजगार के लिए भी विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ मिला है और वे इस राशि का उपयोग उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करेंगे।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने  'एक पेड़ मां के नामÓ अभियान के तहत पौधारोपण किया तथा प्रदेशवासियों से अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोग अपने आंगन, खेत-खलिहान, मेढ़ अथवा उपलब्ध स्थानों पर पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण के इस अभियान को जनांदोलन का स्वरूप दें।

इस अवसर पर श्रम विभाग के सचिव एवं श्रम आयुक्त श्री हिमशिखर गुप्ता, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, जनप्रतिनिधिगण, विभागीय अधिकारी, श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में श्रमिक तथा उनके परिवारजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कैंसर पीडि़त महिला के उपचार हेतु स्वीकृत की 21.69 लाख की सहायता, रायपुर में होगा उपचार

मुख्यमंत्री साय ने कैंसर पीडि़त महिला के उपचार हेतु स्वीकृत की 21.69 लाख की सहायता, रायपुर में होगा उपचार

 मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया बना जरूरतमंदों के लिए राहत और भरोसे का केंद्र

रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कोरबा जिले की 66 वर्षीय कैंसर पीडि़त महिला उमातिन बाई के उपचार के लिए मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत 21 लाख 69 हजार 344 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है। इस सहायता से उनका उपचार रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेकाहारा) में कराया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, फेफड़े के कैंसर से पीडि़त उमातिन बाई के परिजनों ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज के लिए सहायता की मांग करते हुए बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन प्राप्त होते ही मामले पर त्वरित संज्ञान लिया गया और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत उपचार हेतु 21.69 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। मुख्यमंत्री की इस संवेदनशील पहल से मरीज और उसके परिजनों को बड़ी राहत मिली है। परिजनों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी आर्थिक सहायता मिलने से अब बेहतर और समय पर उपचार संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह सहयोग उनके परिवार के लिए संबल और नई उम्मीद लेकर आया है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के गृह ग्राम बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। यहां प्राप्त आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई कर जरूरतमंदों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य जनकल्याणकारी मामलों में लोगों को त्वरित राहत मिल रही है, जिससे शासन के प्रति आमजन का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा की भावना के साथ संचालित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया आज जरूरतमंदों के लिए आशा, विश्वास और सहारे का सशक्त केंद्र बन गया है।

विकसित छत्तीसगढ़ का नया विजन: पारंपरिक डिग्रियों से ग्लोबल करियर की ओर बढ़ते युवाओं के कदम

विकसित छत्तीसगढ़ का नया विजन: पारंपरिक डिग्रियों से ग्लोबल करियर की ओर बढ़ते युवाओं के कदम

 सिर्फ साक्षरता नहीं, सक्षमता का नया दौर

रायपुर। छत्तीसगढ़, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, घने वनों और खनिज संपदा के लिए जाना जाता है, आज एक नई पहचान के साथ उभर रहा है,एक ज्ञान-आधारित, प्रगतिशील राज्य। 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था में वह समाज सफल होगा जिसके पास अत्याधुनिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और नवाचार की शक्ति हो। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उत्कृष्टता केंद्र योजना शुरू की है। यह पहल पारंपरिक उच्च शिक्षा मॉडल को बदलकर कॉलेजों को युवाओं के लिए आधुनिक लॉन्चपैड बनाने की महत्वाकांक्षा रखती है।
कौशल और रोजगार के बीच की खाई
छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अक्सर सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रही है। परिणामस्वरूप, युवाओं को डिग्रियाँ मिलती रहीं पर उद्योग की बदलती तकनीकी मांगों—जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किलिंग और डेटा एनालिटिक्स—और वास्तविक कौशल के बीच एक गहरी खाई बन गई। खासकर वनांचल और ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्र आधुनिक संसाधनों, प्रयोगशालाओं और वैश्विक मार्गदर्शन के अभाव में पिछड़ जाते थे। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 की दिशानिर्देशों को अपनाते हुए, सरकार ने इसी खाई को पाटने और बहुसांस्कृतिक, अनुसंधान-उन्मुख संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है।
यह योजना दावे भर नहीं है—इसके पीछे ठोस बजटीय प्रावधान और चरणबद्ध रोडमैप मौजूद है। राज्य के 36 प्रमुख महाविद्यालयों जिनमें 3,000 से अधिक नामांकन हैं,उसे उत्कृष्टता केंद्र के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। प्रारम्भिक चरण में 25 कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज 3 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं और अगले चरण में प्रमुख कॉलेजों के लिए 15 करोड़ रुपए तक का विशेष वित्तीय प्रावधान रखा गया है। साथ ही राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना जैसी पहलें प्राध्यापकों और छात्रों को वैश्विक मानक के अनुसंधान के लिए वित्तीय व प्रशासनिक सहायता देंगी।
फाइव-पिलर आर्किटेक्चर: शिक्षा के पाँच स्तंभ
ये उत्कृष्टता केंद्र सिर्फ भौतिक सुविधाएँ नहीं होंगे; इनके कार्य-तत्व पांच मुख्य स्तंभों पर आधारित होंगे, जो छात्रों को विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करेंगे।
अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ
विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, तकनीकी और कृषि विषयों में अंतरराष्ट्रीय मानक की लैब सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे थ्योरी के साथ करके सीखना सुनिश्चित होगा।डिजिटल लर्निंग सेंटर: हाई-स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट क्लासरूम और ई-लाइब्रेरी के जरिए दूरस्थ और वनांचल के छात्र भी वैश्विक ज्ञान स्रोतों से जुड़ सकेंगे। रिसर्च एवं इनोवेशन लैब: स्थानीय कृषि, जनजातीय कला, हर्बल चिकित्सा और माइनिंग जैसे क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए शोध को प्रेरित किया जाएगा, ताकि लोकल शोध को ग्लोबल पहचान मिल सके। 
रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण
कोडिंग, आईटी कौशल, उद्यमिता और स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेल्स के माध्यम से छात्रों को मार्केट-रेडी बनाया जाएगा। 
करियर एवं प्लेसमेंट गाइडेंस
इन-हाउस काउंसलिंग, कैंपस प्लेसमेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे पीएससी, सीजीपीएससी बैंकिंग) की तैयारी के लिए संरचित मार्गदर्शन उपलब्ध होगा। 
जमीनी असर: लाभ किस तरह पहुंचेगा?
यह योजना व्यक्तिगत छात्रवृत्ति या लोन नहीं, बल्कि संस्थागत सशक्तिकरण पर आधारित है। चयनित उत्कृष्टता केंद्रों के नियमित छात्र बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। कौशल विकास, रिसर्च और इनक्यूबेशन प्रोग्राम्स के लिए विस्तृत परवर्ती पंजीकरण की व्यवस्था रहेगी, जो सरल और पारदर्शी रखी गई है ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र कागजी बाधाओं में न $फँसें।
बौद्धिक पलायन पर अंकुश और आर्थिक सशक्तिकरण
जब राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ और वैश्विक मानक का शिक्षण वातावरण छात्रों के अपने जिलों में उपलब्ध होगा तो दूर के महानगरों की ओर पलायन कम होगा। यह युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही नई उद्यमी गतिविधियाँ आरम्भ करने और नये रोजगार सृजित करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था लोकल से ग्लोबल की दिशा में जीतेगी।
मुख्यमंत्री का विजन: रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिभाशाली हैं; उन्हें सही अवसर और आधुनिक संसाधन मिले तो वे न केवल नौकरी पाएँगे बल्कि नये उद्यम भी खोलकर रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। यही इस योजना की आत्मा है।युवाओं को रोजगार संचयित करने की बजाय रोजगार सृजन के लिये सक्षम बनाना है। उत्कृष्टता केंद्र योजना छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक इतिहास में एक निर्णायक मील का पत्थर है। यह राज्य को परंपरागत उपभोक्ता पहचान से उठाकर एक नॉलेज स्टेट में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले वर्षों में इन केंद्रों से निकले प्रशिक्षित युवा केवल कागजी प्रमाणपत्र नहीं लेकर बाहर जाएंगे; उनके पास आधुनिक कौशल, नवाचार की चाह और आत्मनिर्भरता की भावना होगी। यह पहल नि:संदेह छत्तीसगढ़ को समृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों में मजबूती देगी।

पर्यावरणीय मानकों से समझौता नहीं, 94 उद्योगों को नोटिस, 3.03 करोड़ की क्षतिपूर्ति अधिरोपित

पर्यावरणीय मानकों से समझौता नहीं, 94 उद्योगों को नोटिस, 3.03 करोड़ की क्षतिपूर्ति अधिरोपित

 रायपुर क्षेत्र में प्रदूषणकारी उद्योगों पर मंडल की सख्त कार्रवाई

00 रायपुर की वायु गुणवत्ता में लगभग 4 प्रतिशत सुधार, एक्यूआई संतोषजनक श्रेणी में

रायपुर। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा रायपुर क्षेत्रांतर्गत संचालित औद्योगिक इकाइयों के पर्यावरणीय अनुपालन की नियमित निगरानी की जा रही है। मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर द्वारा जल एवं वायु प्रदूषणकारी उद्योगों का औचक निरीक्षण कर पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के विरुद्ध वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 एवं जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत कठोर कार्रवाई की जा रही है।

क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के अंतर्गत रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, महासमुंद एवं गरियाबंद जिलों में स्थापित उद्योगों के विरुद्ध जनवरी 2025 से मई 2026 की अवधि में व्यापक कार्रवाई की गई। इस दौरान कुल 94 प्रदूषणकारी उद्योगों को नोटिस जारी किए गए तथा 82 उद्योगों के विरुद्ध उत्पादन बंद करने अथवा विद्युत विच्छेदन के निर्देश जारी किए गए। इसी अवधि में 96 उद्योगों पर कुल 2 करोड़ 40 लाख 65 हजार 125 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि अधिरोपित की गई। वहीं कच्चे माल, उत्पाद एवं ठोस अपशिष्टों का बिना तारपोलिन से ढंके परिवहन करने वाले 136 उद्योगों एवं संस्थानों पर 51 लाख 2 हजार 323 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई। इसके अतिरिक्त पूर्व अनुमति के बिना फ्लाई ऐश के अपवहन एवं डम्पिंग के मामलों में 2 उद्योगों पर 12 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई।
सिंगल-यूज प्लास्टिक पर भी सख्त कार्रवाई
भारत सरकार द्वारा अधिसूचित प्लास्टिक कचरा प्रबंधन संशोधन नियम, 2021 तथा राज्य शासन के छत्तीसगढ़ प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्री नियम, 2023 के तहत सिंगल-यूज प्लास्टिक एवं अन्य प्रतिबंधित प्लास्टिक उत्पादों के विनिर्माण, भंडारण, विक्रय, परिवहन एवं उपयोग पर प्रतिबंध लागू है। इस संबंध में जनवरी 2025 से मई 2026 तक क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर द्वारा एक उद्योग का उत्पादन बंद कराते हुए 87 हजार 500 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई तथा संबंधित उद्योग के विरुद्ध न्यायालय में परिवाद भी दायर किया गया। एक अन्य उद्योग के विरुद्ध उत्पादन बंद करने के साथ 6 लाख 25 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई। इसके अलावा दो अन्य उद्योगों के विरुद्ध भी उत्पादन बंद करने की कार्रवाई की गई।
रायपुर की वायु गुणवत्ता में सुधार
रायपुर शहर में परिवेशीय वायु गुणवत्ता की सतत निगरानी के लिए 4 स्थानों पर डिस्प्ले बोर्ड सहित परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र तथा 6 स्थानों पर राष्ट्रीय परिवेशी वायु निगरानी कार्यक्रम स्टेशन संचालित किए जा रहे हैं। वर्ष 2024 में रायपुर शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 65.38 दर्ज किया गया था, जो वर्ष 2025 में घटकर 62.86 हो गया है। इस प्रकार वायु गुणवत्ता में लगभग 4 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया है। यह स्तर संतोषजनक श्रेणी में आता है और प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम को दर्शाता है।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के विरुद्ध आगे भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी तथा प्रदेश में स्वच्छ व स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने के लिए निगरानी एवं प्रवर्तन गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस पर हुआ पौधरोपण

भाजपा प्रदेश कार्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस पर हुआ पौधरोपण

 रायपुर। विश्व पर्यावरण दिवस पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय (कुशाभाऊ ठाकरे परिसर) में पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान भाजपा क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय द्वारा परिसर में पौधे रोपे गए और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का संदेश दिया गया। 
इस अवसर पर भाजपा क्षेत्रीय संगठन महामंत्री  जम्वाल ने कहा कि प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखना ही सतत विकास का आधार है। आज के आधुनिक युग में जहाँ विकास आवश्यक है, वहीं आने वाली पीढिय़ों के लिए पर्यावरण को सुरक्षित और हरा-भरा बनाए रखना भी हमारी परम जिम्मेदारी है। धरती और प्रकृति का संरक्षण करके ही हम एक स्वस्थ और समृद्ध भविष्य की नींव रख सकते हैं। भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री  साय ने प्रदेशवासियों से भी अपील की कि वे इस पर्यावरण दिवस पर न केवल एक पौधा लगाएँ, बल्कि उसके बड़े होने तक उसकी पूरी देखभाल करने का संकल्प भी लें। इस अवसर पर प्रदेश कार्यालय के पदाधिकारी, वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

CG – इश्क, लव और मर्डर : पत्थर से सिर कुचलकर बाउंसर को उतारा मौत के घाट, इस वजह से दिया वारदात को अंजाम

CG – इश्क, लव और मर्डर : पत्थर से सिर कुचलकर बाउंसर को उतारा मौत के घाट, इस वजह से दिया वारदात को अंजाम

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां कोटा क्षेत्र पथर्रा गांव में 27 वर्षीय बाउंसर निखिल गोस्वामी की आंखों में मिर्च झोंककर फिर पत्थर से सिर कुचलकर हत्या कर दी गई। पत्नी से कथित संबंधों के शक में भोला मानिकपुरी ने अपने साथियों के साथ वारदात को अंजाम दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल निखिल ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. कोटा पुलिस प्रेम प्रसंग, चरित्र शंका और पुरानी रंजिश के एंगल से जांच कर रही है, जबकि आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, पथर्रा निवासी निखिल गोस्वामी बिलासपुर के एक बार में बाउंसर के रूप में काम करता था। बीती रात वह अपने दो साथियों के साथ अमने मोड़ के पास बैठकर शराब पी रहा था। इसी दौरान तीन-चार युवक बाइक से वहां पहुंचे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक सवार युवकों में शामिल एक व्यक्ति को देखकर निखिल ने उसे नाम लेकर आवाज लगाई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। आरोपी भोला मानिकपुरी ने अपने साथियों के साथ मिलकर पहले निखिल की आंखों और चेहरे पर मिर्च पाउडर फेंका। अचानक हुए हमले से निखिल संभल नहीं पाया। इस बीच उसके साथ मौजूद दोनों साथी मौके से भाग निकले। इसके बाद आरोपियों ने निखिल पर हमला बोल दिया।

मिर्च पाउडर फेंकने के बाद भोला मानिकपुरी ने पास में पड़े भारी पत्थर से निखिल के सिर और शरीर पर ताबड़तोड़ वार किए। गंभीर चोट लगने से वह लहूलुहान होकर मौके पर गिर पड़ा। घटना के बाद राहगीरों ने घायल निखिल को अस्पताल पहुंचाया। उसकी हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए रेफर किया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही एडिशनल एसपी मधुलिका सिंह सहित कोटा पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण और लोगों से पूछताछ साक्ष्य जुटाए। पूछताछ में मृतक के भाई ने पुलिस को बताया कि आरोपी भोला मानिकपुरी की पत्नी और निखिल गोस्वामी के बीच कथित रूप से प्रेम संबंध थे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। कोटा पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और मुख्य आरोपी भोला मानिकपुरी सहित अन्य संदिग्धों की तलाश शुरू कर दी है।

CG WEATHER : छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम का मिजाज! बारिश-आंधी के आसार, गर्मी से मिलेगी राहत

CG WEATHER : छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम का मिजाज! बारिश-आंधी के आसार, गर्मी से मिलेगी राहत

 रायपुर। भीषण गर्मी और उमस से परेशान छत्तीसगढ़वासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मौसम विभाग ने देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक एंट्री का ऐलान कर दिया है और अब इसका असर धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ में भी दिखाई देने लगा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में उत्तर भारत की ओर बढ़ते हुए प्रदेश के मौसम को भी पूरी तरह बदल सकता है। इसी बीच शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में मौसम का मिजाज बदलने के संकेत मिले हैं। कहीं हल्की बारिश तो कहीं गरज-चमक और अंधड़ की संभावना जताई गई है।

पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के न्यूनतम तापमान में करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं रायपुर और राजनांदगांव सबसे गर्म रहे, जहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि अगले 5 दिनों में लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिल सकती है। इस दौरान तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है और मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।

मौसम विज्ञानी एच. पी. चंद्रा के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के लक्षद्वीप, केरल, तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। इसके अलावा पश्चिमी विक्षोभ पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय है, जबकि उत्तर-पूर्व उत्तर प्रदेश के आसपास ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। इन मौसम प्रणालियों का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी पड़ रहा है।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रदेश में आज एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। कुछ इलाकों में तेज अंधड़ चलने और बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। वहीं राजधानी रायपुर में शुक्रवार को एक बार फिर 42 डिग्री तक तापमान पहुंचने की संभावना है, लेकिन बादल छाने, आंधी चलने और बारिश होने के भी संकेत हैं। ऐसे में लोगों को तेज गर्मी के बीच मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है।

पीएम आवास योजना (शहरी): राज्य स्तरीय स्वीकृति व निगरानी समिति की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न

पीएम आवास योजना (शहरी): राज्य स्तरीय स्वीकृति व निगरानी समिति की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न

 रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील ने एसएलबीसी के बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को उनके हिस्से की राशि के लिए ऋण देने की प्रक्रिया का सरलीकरण करें, जिससे हितग्राही आवास शीघ्रता से बना सकें। मुख्य सचिव ने नगरीय-प्रशासन विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत जिन हितग्राहियों को आवास स्वीकृत हुए हैं, उनके लिए एक विशेष शिविर लगाकर बैंकर्स से ऋण दिलवाये। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केन्द्रांश एवं राज्यांश की राशि हितग्राहियों को दी जाती है

मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 तथा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक के अंतर्गत परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसी तरह से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के घटक भागीदारी में किफायती आवास निर्माण के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं में भारत सरकार के एमआईएस पोर्टल पर दर्ज हितग्राहियों की प्रविष्टी में आवश्यक संशोधन की स्वीकृति के संबंध में भी विस्तार से चर्चा हुई। 
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु भौतिक प्रगति अनुसार केन्द्रांश राशि एक लाख 50 हजार रूपए तथा अनिवार्य राज्यांश की राशि एक लाख रूपए दी जाती है। हितग्राही द्वारा निर्धारित समयावधि में आवास पूर्ण करते हुए गृह प्रवेश करने पर राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति आवास 32 हजार 850 रूपए पृथक से हितग्राही के खाते में हस्तांतरित की जायेगी। प्रति आवास डीपीआर और पीएमसी शुल्क की राशि 6 हजार 150 रूपए राज्य शासन द्वारा दिया जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण घटक अंतर्गत 10 हजार 549 हितग्राही हेतु नवीन आवास निर्माण के लिए केन्द्रांश राशि 158 करोड़ 23 लाख 50 हजार रूपए तथा राज्यांश 146 करोड़ 63 लाख 11 हजार रूपए एवं हितग्राही अंशदान राशि 105 करोड़ 49 लाख शामिल करते हुए 144 नगरीय निकायों में 410 करोड़ 35 लाख 61 हजार रूपए की लागत की 114 परियोजनाओं को स्वीकृत करने हेतु प्रस्तावित किया गया है। जिस पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव श्रीमती आर.शंगीता, आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश श्री अवनीश कुमार शरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुश्री ईफ्फत आरा सहित वित्त, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, गृह निर्माण मंडल, हुडको एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक शामिल हुए।

पद्मश्री जागेश्वर का जीवन सेवा, समर्पण और मानवता का उच्चतम आदर्श - मंत्री वर्मा

पद्मश्री जागेश्वर का जीवन सेवा, समर्पण और मानवता का उच्चतम आदर्श - मंत्री वर्मा

 00 बिरहोर जननायक पुस्तक का विमोचन: मंत्री वर्मा को लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने भेंट की प्रति
रायपुर।
राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा से लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डॉ. पटेल ने मंत्री वर्मा को पद्मश्री जागेश्वर यादव के प्रेरणादायी जीवन और संघर्षों पर आधारित अपनी नवनिर्मित पुस्तक बिरहोर जननायक की प्रति सप्रेम भेंट की। इस गौरवमयी अवसर पर स्वयं पद्मश्री जागेश्वर यादव जी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मंत्री वर्मा के साथ अपने सामाजिक जीवन के गहरे अनुभवों को साझा किया।
पुस्तक में बिरहोर समुदाय के उत्थान की अद्भुत गाथा
मुलाकात के दौरान मंत्री  टंकराम वर्मा ने पुस्तक का अवलोकन किया और इसके प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने जशपुर जिले में बिरहोर के भाई के नाम से विख्यात पद्मश्री जागेश्वर यादव द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बिरहोर समुदाय के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। मंत्री वर्मा ने कहा कि उनका पूरा जीवन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। पद्मश्री जागेश्वर यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका व्यक्तित्व सेवा, करुणा, समर्पण और मानवता के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है। उनका जीवन समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है।
1980 से निरंतर जारी है जागेश्वर यादव का संघर्ष
गौरतलब है कि पद्मश्री जागेश्वर यादव वर्ष 1980 से ही विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक जागरूकता एवं मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए निरंतर धरातल पर कार्यरत हैं। उनके इन्हीं अथक प्रयासों का परिणाम है कि आज बिरहोर समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित हुई है और अनेक परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
युवाओं और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी कृति
लेखक डॉ. लोकेश पटेल की यह कृति केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरक दस्तावेज है। यह पुस्तक पाठकों को संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, नि:स्वार्थ सेवा और समाज के प्रति समर्पण के माध्यम से बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह कृति विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील बनने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है। मंत्री वर्मा ने इस महत्वपूर्ण, शोधपरक एवं प्रेरणादायी कृति के सृजन के लिए लेखक डॉ. लोकेश पटेल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक समाज के विभिन्न वर्गों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का एक महत्वपूर्ण स्रोत सिद्ध होगी।

बस्तर का सनराइज टू सनसेट पर्यटन सर्किट : टाटामारी में सुनहरी सुबह, पुसपाल में मनमोहक शाम

बस्तर का सनराइज टू सनसेट पर्यटन सर्किट : टाटामारी में सुनहरी सुबह, पुसपाल में मनमोहक शाम

 रायपुर। बस्तर की पहचान अब केवल प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह क्षेत्र तेजी से पर्यटन विकास के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। कभी नक्सली गतिविधियों के कारण चर्चा में रहने वाला क्षेत्र अब पर्यटन और विकास की नई कहानी लिखने की तैयारी में है। इसी दिशा में कोण्डागांव वनमंडल द्वारा ग्राम पुसपाल को केंद्र में रखकर एक नए पर्यटन सर्किट का विकास किया जा रहा है, जो बस्तर के पर्यटन मानचित्र में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने वाला है।

इस नई पहल का सबसे बड़ा आकर्षण यह होगा कि पर्यटक एक ही दिन में टाटामारी की पहाड़ियों से उगते सूरज का अद्भुत दृश्य और पुसपाल में ढलते सूरज की मनोहारी छटा का आनंद ले सकेंगे। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और साहसिक गतिविधियों का अनूठा संगम इस सर्किट को विशेष पहचान दिलाएगा।
केशकाल से चित्रकोट की यात्रा होगी आसान और रोमांचक
प्रस्तावित पर्यटन सर्किट के विकसित होने से केशकाल से चित्रकोट जलप्रपात तक की यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और कम समय में पूरी की जा सकेगी। पर्यटक अपनी यात्रा की शुरुआत केशकाल स्थित टाटामारी से कर सकेंगे, जहां सूर्याेदय का विहंगम दृश्य उन्हें प्रकृति के अद्भुत अनुभव से रूबरू कराएगा। इसके बाद पर्यटक चौत्यगृह, भोंगापाल और गोबरहीन जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर सकेंगे। गोबरहीन स्थित प्राचीन शिवलिंग क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। दिनभर की यात्रा के बाद पर्यटक पुसपाल पहुंचकर सूर्यास्त के मनोरम दृश्य का आनंद ले सकेंगे, जो इस पूरे पर्यटन अनुभव को यादगार बना देगा।
कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास और विश्वास की नई किरण

यह क्षेत्र कभी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था, जिसके कारण यहां की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर पर्यटकों की पहुंच से दूर रही। राज्य सरकार की प्रभावी रणनीति, सुरक्षा बलों के प्रयासों और विकासोन्मुखी योजनाओं के चलते अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास का वातावरण बनने से पर्यटन की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। नया पर्यटन सर्किट इसी बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है, जो क्षेत्र की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक होगा।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य पर्यटन विकास के साथ स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं को गाइड, होमस्टे संचालन, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था के विकसित होने से क्षेत्र में आय के नए स्रोत पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
राफ्टिंग, कॉटेज और एडवेंचर स्पोर्ट्स बनेंगे आकर्षण का केंद्र

इस पर्यटन सर्किट में पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। यहां कॉटेज निर्माण, राफ्टिंग जैसी साहसिक गतिविधियों तथा विभिन्न एडवेंचर स्पोर्ट्स की तैयारियां की जा रही हैं। इससे प्रकृति प्रेमियों के साथ-साथ रोमांच पसंद करने वाले पर्यटकों को भी नया गंतव्य मिलेगा।
दो जिलों की सीमा पर विकसित होगा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट

इस पर्यटन परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा कोण्डागांव जिले के नारायणपुर सीमा से लगे क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा, जबकि शेष 30 प्रतिशत कार्य बस्तर जिले के अंतर्गत आने वाले कोण्डागांव वनमंडल क्षेत्र में किया जाएगा। परियोजना के लिए प्रारंभिक खाका और बजट तैयार किए जा चुके हैं तथा जमीनी स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाएं भी शुरू हो गई हैं

परियोजना के पूर्ण होने के बाद टाटामारी से पुसपाल तक का यह पर्यटन सर्किट बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और विकास की नई तस्वीर प्रस्तुत करेगा। यह न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन में आर्थिक समृद्धि और नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

​स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की जीत जनता के विश्वास की जीत : देव

​स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की जीत जनता के विश्वास की जीत : देव

 बम्हनीडीह,शिवनंदनपुर और सहसपुर लोहारा में भाजपा की ऐतिहासिक विजय पर जताया आभार

​रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने प्रदेश के स्थानीय निकाय उपचुनावों और अध्यक्ष पदों पर मिली शानदार जीत पर हर्ष व्यक्त करते हुए जनता और कर्मठ कार्यकर्ताओं का आभार जताया है।  देव ने कहा कि यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और हमारी सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के प्रति जनता के अटूट विश्वास का परिणाम है। जनता ने एक बार फिर विकास और सुशासन को चुना है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देव ने कहा कि कवर्धा जिले के सहसपुर लोहारा मेंअध्यक्ष पद पर भाजपा की प्रत्याशी सरिता संतोष मिश्रा ने 762 वोटों के बड़े अंतर से एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की है। इसी प्रकार ​सूरजपुर जिले के शिवनंदनपुर नगर पंचायत में भी जनता ने भाजपा पर भरोसा जताते हुए अध्यक्ष पद पर रितेश जायसवाल को 362 वोटों के अंतर से विजयी बनाया है।  देव ने कहा कि बम्हनीडीह, सहसपुर लोहारा और शिवनंदनपुर नगर पंचायत में मिली यह जीत दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर जनता कांग्रेस के खोखले वादों को पूरी तरह समझ चुकी है और विकास के लिए केवल भाजपा पर भरोसा कर रही है। इस चुनाव में दिन-रात मेहनत करने वाले प्रत्येक देवतुल्य कार्यकर्ता बधाई के पात्र हैं। भाजपा जनता के इस विश्वास का मान रखेगी और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के माध्यम से इन क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति दी जाएगी।

9 जून को होगी साय कैबिनेट की बैठक, कई महत्वपूर्ण फैसलों पर लग सकती है मुहर

9 जून को होगी साय कैबिनेट की बैठक, कई महत्वपूर्ण फैसलों पर लग सकती है मुहर

 रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद् (केबिनेट) की बैठक मंगलवार, 09 जून को सवेरे 11.00 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में होगी।

खेल प्रशिक्षण प्रारम्भ : कृषि गौ राक्षणी सभा ट्रस्ट द्वारा खेल व स्वास्थ्य के लिए दिए गए 18 एकड़ भूमि

खेल प्रशिक्षण प्रारम्भ : कृषि गौ राक्षणी सभा ट्रस्ट द्वारा खेल व स्वास्थ्य के लिए दिए गए 18 एकड़ भूमि

रायपुर - स्थानीय सकरी, रायपुर स्थित  कृषि गौ राक्षणी सभा ट्रस्ट द्वारा खेल व स्वास्थ्य के लिए दिए गए 18 एकड़ भूमि में सकरी के युवा खिलाड़ी कमलेश डहरिया द्वारा खेल प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया खेल प्रशिक्षण उद्घाटन में उपस्थित मुख्य अतिथि अजय तिवारी जी ,अध्यक्ष गौ रक्षिणी सभा ट्रस्ट अध्यक्षता राम अवतार तिवारी जी एवं विशेष अतिथि ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष पप्पू बंजारी ने किया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अजय तिवारी जी ने कहा कि हमारे ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य अच्छा नागरिक बनाना है और अच्छे नागरिक का प्रथम सोपान बचपन के खेलकूद से प्रारंभ होता है उन्होंने कहा कि वर्तमान में क्रिकेट विश्व का सर्वाधिक प्रसिद्ध खेल है एवं भारत में आईपीएल प्रतियोगिता ने गांव-गांव के खिलाड़ियों को उनके क्षमता अनुसार समृद्धि दिलवाई है अतः छत्तीसगढ़ के बच्चे भी उसी कतार में सम्मिलित हो साथ ही उन्होंने बच्चों की उज्जवल भविष्य की कामना की कार्यक्रम के अध्यक्ष रामावतार तिवारी जी ने कहा कि यदि बच्चे अपनी पूर्ण क्षमता के साथ खेल तो छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना अब आसान हो चुका है पप्पू बंजारे ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास खेल के माध्यम से संभव होता है कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ देवाशीष मुखर्जी ,प्राचार्य महंत कॉलेज के पी  पांडे जी विकास शेखर चंद्राकर जी टी आर सिन्हा एवं बड़ी संख्या में सकरी के गणमान्य नागरिक उपस्थित हुए कार्यक्रम का संचालन डॉ देवाशीष मुखर्जी ने किया ।