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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सोच को साकार कर रहा टेक्सटाइल पार्क, स्थानीय रोजगार को मिलेगी नई उड़ान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सोच को साकार कर रहा टेक्सटाइल पार्क, स्थानीय रोजगार को मिलेगी नई उड़ान

 मुख्यमंत्री की पहल पर नवा रायपुर के टेक्सटाइल पार्क में लग रही पहली यूनिट, 235 करोड़ का निवेश, 4600 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार

81 एकड़ में विकसित हो रहा टेक्सटाइल पार्क, निवेशकों के लिए तैयार की जा रही सभी जरूरी अधोसंरचनाएं

रायपुर. 26 जून 2026. मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार नवा रायपुर को देश के प्रमुख टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा है कि नवा रायपुर का टेक्सटाइल पार्क प्रदेश के युवाओं और महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का मजबूत आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार टेक्सटाइल पार्क में निवेशकों को विश्वस्तरीय अधोसंरचना और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय की गंभीर कोशिशों से नवा रायपुर के टेक्सटाइल पार्क में पहली यूनिट लगने जा रही है। 235 करोड़ रुपए के निवेश से लगने वाली इस यूनिट से 4600 से अधिक लोगों को रोजगार का मौका मिलेगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने 25 जून को टेक्सटाइल पार्क की पहली गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का भूमिपूजन किया। तमिलनाडु की स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड यहां अपनी मेन्युफेक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रही है। कंपनी मुख्य रूप से बच्चों के कपड़े (किड्सवियर) और यूरोपीय व अमेरिकी बाजारों में निर्यात पर ध्यान केंद्रित करते हुए निट गारमेंट्स और कपड़े बनाएगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के टेक्सटाइल व गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश-विदेश में नई पहचान दिलाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के बड़े अवसर तैयार करने के विजन को साकार करने नवा रायपुर में 81 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। यहां टेक्सटाइल, गारमेंट, तकनीकी वस्त्र तथा सहायक उद्योगों के लिए सभी आवश्यक अधोसंरचनाएं विकसित की जा रही हैं। इस टेक्सटाइल पार्क में स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ ही पुनीत क्रिएशन्स और दृष्टि डिजाइन्स एलएलपी को भी भूमि आबंटित की जा चुकी है। इन तीनों इकाईयों द्वारा लगभग 445 करोड़ रुपए के निवेश से 11 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा नवा रायपुर में सर्वसुविधायुक्त टेक्सटाइल पार्क के लिए डामरीकृत पक्की सड़कों, नाली एवं जल निकासी व्यवस्था, पॉवर सब-स्टेशन, जल प्रदाय व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, प्रशासनिक भवन, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP), ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र एवं कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अच्छी कनेक्टीविटी, आधुनिक अधोसंरचना और सुदृढ़ लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ नवा रायपुर का यह टेक्सटाइल पार्क वस्त्र उद्योगों को एक आदर्श निवेश स्थल के रूप में आकर्षित कर रहा है।

राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में टेक्सटाइल एवं रेडीमेड गारमेंट्स को थ्रस्ट सेक्टर के रूप में विशेष प्राथमिकता दी है। रोजगार सृजन को बढ़ावा देने महिला कर्मचारियों हेतु 6 हजार रुपए तथा पुरुष कर्मचारियों हेतु 5 हजार रुपए प्रतिमाह की रोजगार सहायता पांच वर्षों तक देने का प्रावधान किया गया है। नई औद्योगिक नीति के प्रभाव से प्रदेश में पिछले 18 महीनों में 8 लाख करोड़ रुपु से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे 1.6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

टेक्सटाइल और कपड़ों के अलावा राज्य ने डेटा सेंटर, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़े निवेश आकर्षित किए हैं। यह छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।

"नवा रायपुर का टेक्सटाइल पार्क छत्तीसगढ़ के युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का मजबूत माध्यम बनेगा। हमारी सरकार यहां निवेशकों को विश्वस्तरीय अधोसंरचना और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। उद्योगों के विस्तार के साथ रोजगार, आर्थिक गतिविधियों और प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। हम छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्माण केंद्र बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे है। - मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय"

जनता के द्वार, डिजिटल सरकार: छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया चेहरा बना सेवा सेतु

जनता के द्वार, डिजिटल सरकार: छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया चेहरा बना सेवा सेतु

 रायपुर- आधुनिक युग में जब तकनीक आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने का माध्यम बन जाए, तो वह सुशासन की सबसे बड़ी सफलता कहलाती है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल 'सेवा सेतु पोर्टल आज कुछ ऐसा ही कमाल कर रही है। यह पोर्टल प्रदेश के आम नागरिकों के लिए एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है, जिसने सरकारी दफ्तरों की जटिल प्रक्रियाओं को घर बैठे एक क्लिक पर समेट दिया है।

इस डिजिटल क्रांति की एक जीवंत मिसाल बनी हैं धमतरी जिले के कुरूद तहसील के ग्राम करेली की रहने वाली कु. लोमेश्वरी साहू। लोमेश्वरी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कैसे 'सेवा सेतु ने आमजन के समय, श्रम और धन की बचत कर उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया है।

चक्कर काटने के दौर से 'क्लिक के सफर तक

अपने बीते अनुभवों को साझा करते हुए लोमेश्वरी साहू बताती हैं कि पहले किसी भी शासकीय प्रमाण पत्र को बनवाना एक थका देने वाली प्रक्रिया थी। उन्हें और उनके जैसे कई ग्रामीणों को तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे।पहले आवेदन करने के लिए बस का किराया लगाकर शहर जाओ, फिर दफ्तरों के चक्कर काटो। कई बार जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी न होने के कारण काम अटक जाता था। इससे समय तो बर्बाद होता ही था, साथ ही जेब पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था।

: घर बैठे मिला जाति प्रमाण पत्र, एसडीएम ने सौंपा

लोमेश्वरी के लिए 'सेवा सेतु पोर्टल एक वरदान साबित हुआ। जब उन्हें अपने जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई, तो उन्होंने किसी कार्यालय के चक्कर काटने के बजाय घर बैठे ही सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया। बेहद सरल प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और अपने मोबाइल से ही आवेदन की स्थिति (स्ह्लड्डह्लह्वह्य) को ट्रैक करती रहीं। ?नतीजा यह हुआ कि बिना किसी भाग-दौड़ के, निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया। कुरूद के एसडीएम ने उन्हें यह प्रमाण पत्र सौंपा। लोमेश्वरी कहती हैं कि इस पारदर्शी व्यवस्था ने उन्हें दफ्तरों की कतारों और आवागमन के खर्च, दोनों से हमेशा के लिए मुक्ति दिला दी।

: डिजिटल तकनीक से सुदृढ़ हुआ 'जन-विश्वास

सेवा सेतु पोर्टल ने पारंपरिक शासकीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। इसके जरिए अब नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनके समय और श्रम की भारी बचत हो रही है। घर बैठे आवेदन की सुविधा मिलने से न केवल आवागमन का खर्च बंद हुआ है, बल्कि बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होने से आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत भी मिली है। इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी शत-प्रतिशत पारदर्शिता है, जिसके तहत आवेदक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, यह पोर्टल समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करता है, जिससे सभी आवश्यक प्रमाण पत्र और शासकीय लाभ तय समय-सीमा के भीतर सीधे नागरिकों तक पहुँच रहे हैं।

लोमेश्वरी साहू का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था ने शासकीय सेवाओं को न केवल सुलभ बनाया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में गजब की पारदर्शिता ला दी है। अब नागरिकों को अपने काम के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे शासन और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

: सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर

धमतरी जिले की यह सफलता की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि डिजिटल तकनीक के सही इस्तेमाल से शासकीय सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को कितना बेहतर किया जा सकता है। आज 'सेवा सेतु पोर्टल त्वरित, पारदर्शी और विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर  'जनता के द्वार, डिजिटल सरकार की परिकल्पना को धरातल पर सच कर रहा है। छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह पहल वाकई एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

नशा मुक्त भारत अभियान को मिला जनसहभागिता का संबल

नशा मुक्त भारत अभियान को मिला जनसहभागिता का संबल

 जिला जेल में बंदियों ने ली नशामुक्त जीवन की शपथ, गीत-संगीत से दिया जागरूकता का संदेश

रायपुर, 26 जून 2026/ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशन तथा छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में नशामुक्त भारत सप्ताह और नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी विरोधी सप्ताह पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

जिला जेल में हुआ विशेष आयोजन,नशामुक्ति की दिलाई गई शपथ

अभियान के समापन पर जिला जेल रायगढ़ में नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम हुआ। यहां बंदियों को नशे से दूर रहकर स्वस्थ और सकारात्मक जीवन अपनाने का संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम में सभी बंदियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। नशीले पदार्थों के दुष्परिणाम, उनके सामाजिक- परिवारिक प्रभाव और स्वस्थ जीवनशैली के फायदे बताए गए। गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भी नशामुक्ति का प्रभावी संदेश दिया गया, जिसे सभी ने सराहा।

सामूहिक प्रयास से ही आएगी जागरूकता

उपसंचालक समाज कल्याण रायगढ ने कहा कि नशा व्यक्ति की क्षमता, परिवार की खुशहाली और समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है। युवाओं को नशे से बचाने और समाज में जागरूकता लाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।उन्होंने बताया कि नशा मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, उपचार- पुनर्वास सेवाओं से जोड़ना और जनसहभागिता से नशामुक्त भारत बनाना है। विभाग ने आमजन से अपील की कि वे खुद नशे से दूर रहें और परिवार-मित्रों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करें।

कार्यक्रम में जिला जेल अधीक्षक  जी.एस.सोनी, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, नशा मुक्ति केंद्र के प्रबंधक  सुमंत आचार्य, रंजना यादव, डे-केयर सेंटर सियान गुड़ी के संगीत प्रशिक्षक  कुबेर चरण चौहान सहित जेल प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में बंदियों ने हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन बनी त्वरित जनसमस्या समाधान का सशक्त माध्यम: मात्र दो घंटे में पुनः सक्रिय हुआ संजुक्ता पटेल का आधार कार्ड

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन बनी त्वरित जनसमस्या समाधान का सशक्त माध्यम: मात्र दो घंटे में पुनः सक्रिय हुआ संजुक्ता पटेल का आधार कार्ड

 रायपुर, 26 जून 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुसार आमजन की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी निराकरण के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शासन की जनसेवा, सुशासन और जवाबदेही के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। कलेक्टर  अमृत विकास तोपनो के निर्देशन में जिले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का गंभीरता, संवेदनशीलता एवं समयबद्ध तरीके से निराकरण किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को त्वरित राहत मिल रही है।

इसी क्रम में विकासखंड डभरा के ग्राम खोंधर निवासी संजुक्ता पटेल का आधार कार्ड तकनीकी कारणों से निष्क्रिय हो गया था। आधार कार्ड निष्क्रिय होने के कारण उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं आवश्यक सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। समस्या से परेशान होकर उनके पति श्री नरेंद्र पटेल ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन क्रमांक 1076 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही ई-जिला प्रबंधक श्री दुष्यंत सोनी एवं आधार टीम ने तत्परता और संवेदनशीलता के साथ मामले का परीक्षण कर आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण की तथा मात्र दो घंटे के भीतर उनका निष्क्रिय आधार कार्ड पुनः सक्रिय करा दिया। इससे उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ और शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने का मार्ग भी सुगम हो गया।

संजुक्ता पटेल ने त्वरित कार्रवाई पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें समस्या के समाधान की उम्मीद थी, लेकिन इतनी शीघ्र कार्रवाई होने से वे अत्यंत संतुष्ट हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की प्रभावी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि अब आमजन की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की संवेदनशील एवं जनहितैषी कार्यप्रणाली से जरूरतमंद लोगों को समय पर राहत मिल रही है, जिससे आम नागरिकों का शासन के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

​मनरेगा और जल निधि का महासंगम: छत्तीसगढ़ के धमतरी में 'आजीविका डबरी' से बदल रही ग्रामीण इकॉनमी की तस्वीर

​मनरेगा और जल निधि का महासंगम: छत्तीसगढ़ के धमतरी में 'आजीविका डबरी' से बदल रही ग्रामीण इकॉनमी की तस्वीर

 कलेक्टर ने बोथापारा और चनागांव का किया जमीनी निरीक्षण

​वैज्ञानिक मत्स्य पालन और बागवानी के इंटीग्रेटेड मॉडल से किसानों की आय होगी दोगुनी

​कॉर्पोरेट पार्टनरशिप (एबिस कंपनी) से इनपुट कॉस्ट में 25% की छूट, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष फोकस

​रायपुर,26 जून 2026/ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आर्थिक स्वावलंबन और जल संरक्षण को लेकर एक बेहद अनूठा और सफल प्रयोग सामने आ रहा है। धमतरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और 'जल निधि परियोजना' के बेहतरीन तालमेल ने पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय के नए द्वार खोल दिए हैं। मनरेगा के तहत खोदे गए तालाबों (डबरी) को महज जल संचय तक सीमित न रखकर, उन्हें वैज्ञानिक मत्स्य पालन से जोड़ा गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है।
​इसी जमीनी हकीकत और इसकी भविष्य की संभावनाओं को परखने के लिए कलेक्टर ने नगरी विकासखंड के सुदूर ग्राम बोथापारा और चनागांव का सघन दौरा किया। उन्होंने सीधे खेतों की मेढ़ पर पहुंचकर महिला मत्स्य पालकों और प्रगतिशील किसानों से संवाद किया और इस आजीविका मॉडल को ग्रामीण समृद्धि की एक नई और स्थायी दिशा बताया।

​क्या है 'आजीविका डबरी' का पूरा बिजनेस मॉडल?

​अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को बताया कि प्रत्येक आजीविका डबरी का एक मानक आकार तय किया गया है। ग्रामीण इस मॉडल को अपनाकर बेहद कम लागत में अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं। लगभग 33 हजार रुपये की लागत से वैज्ञानिक देखरेख में लगभग 6 महीने में 20*20*3 मीटर की आजीविका डबरी का निर्माण किया जा सकेगा।

लागत की तुलना में लगभग दोगुनी आय की शत-प्रतिशत संभावना

​कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) का सहारा

इस मॉडल को व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रशासन ने 'एबिस कंपनी' के साथ हाथ मिलाया है। सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत कंपनी इन ग्रामीण मत्स्य पालकों को मछली दाना (फीड) की खरीदी पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट दे रही है। इससे किसानों की उत्पादन लागत काफी घट गई है और उनका शुद्ध लाभांश बढ़ गया है।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं सावित्री दर्रो

​नगरी विकासखंड के ग्राम बोथापारा की महिला मत्स्य पालक श्रीमती सावित्री दर्रो के खेत पहुंचकर कलेक्टर ने खुद डबरी का मुआयना किया। सावित्री ने बताया कि उनके पास करीब 7 एकड़ कृषि भूमि है, जहां वे बरसों से पारंपरिक रूप से सिर्फ धान की खेती करती आ रही थीं। लेकिन अब उन्होंने अपने खेत में दो आजीविका डबरियां तैयार की हैं, जिनमें कतला, रोहू और मृगल प्रजाति की मछलियों का पालन हो रहा है।
​इस कहानी में नया मोड़ तब आया जब अधिकारियों ने बताया कि सावित्री के बेटे ओमप्रकाश को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों की एडवांस ट्रेनिंग के लिए अगले महीने पुरी (ओडिशा) भेजा जा रहा है। वहां से ट्रेनिंग लेकर लौटने के बाद वह न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे इलाके के युवाओं को उन्नत और आधुनिक मत्स्य पालन की बारीकियां सिखाएगा।

नारायण सिंह का इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल

​इसके बाद कलेक्टर चनागांव के प्रगतिशील किसान  नारायण सिंह नेताम के खेत पहुंचे। नेताम ने अपनी 5 एकड़ कृषि भूमि में से दो आजीविका डबरियां विकसित की हैं। खास बात यह है कि वे डबरी के पानी से सिर्फ मछली पालन नहीं कर रहे, बल्कि उसके चारों तरफ आम की बागवानी (हॉर्टिकल्चर) भी अपना चुके हैं। डबरी के पोषक तत्वों से भरपूर पानी की वजह से बागवानी की फसल भी बंपर हो रही है, जिससे उन्हें सालभर एक फिक्स और मोटी आमदनी मिल रही है।कलेक्टर ने खुद मौके पर जाकर डबरी के पानी की गुणवत्ता (Water Quality) की जांच भी कराई।

16 से बढ़कर 50 गांवों तक पहुंचेगा यह सफर

​कलेक्टर ने जिले के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मनरेगा के तहत बनने वाली हर एक सरकारी और निजी परिसंपत्ति का शत-प्रतिशत उत्पादक उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य सिर्फ गड्ढे खुदवाना या अस्थाई रोजगार देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के हाथ में एक ऐसा साधन सौंपना है जिससे वे जीवनभर कमाई कर सकें। मनरेगा, जल संरक्षण और वैज्ञानिक मत्स्य पालन का यह त्रिवेणी संगम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा, गांवों में कुपोषण दूर कर पोषण सुरक्षा लाएगा और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देगा।
​वर्तमान में धमतरी जिले के 16 गांवों में यह आजीविका मॉडल सफलतापूर्वक जमीन पर उतर चुका है। इसकी अपार सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब अगले चरण में 50 गांवों की 50 आजीविका डबरियों में इस मत्स्य पालन विस्तार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और सतत कृषि विकास (Sustainable Agriculture) को गति देने की दिशा में यह प्रयोग एक नजीर बन चुका है।

आवास निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी प्रदेश के विकास को देगा नई गति : मुख्यमंत्री साय

आवास निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी प्रदेश के विकास को देगा नई गति : मुख्यमंत्री साय

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नए लोगो का किया विमोचन

पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को सक्षम बनाकर प्रदेश के विकास को गति देना हमारी इकोनॉमिक फिलॉसफी : मंत्री  ओ पी चौधरी

आवास बुक करने वाले लकी ड्रा के विजेताओं को कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन सहित अन्य पुरस्कार का किया वितरण

दो वर्षों में 07 हजार से अधिक परिसंपत्तियों का विक्रय कर 1500 करोड़ रुपये का किया राजस्व अर्जित

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले अंशुल कश्यप को दी 2.50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि

रायपुर, 26 जून 2026// मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज नया रायपुर स्थित सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नवीन लोगो का विमोचन किया। इस अवसर पर वर्ष 2025 के आवास मेले में आवास बुक करने वाले हितग्राहियों को लकी ड्रा के माध्यम से कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित विभिन्न पुरस्कार वितरित किए गए। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले  अंशुल कश्यप को शुभकामनाएं दी और प्रतियोगिता की पुरस्कार राशि ढाई लाख रुपए का चेक सौंपा।

मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार का अपना पक्का घर होने का सपना होता है और राज्य सरकार इस सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पूर्व में केवल गृह निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आर्थिक चुनौतियों से उबरते हुए मंडल ने लगभग 7,388 संपत्तियों का विक्रय कर 1,532 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग, मंडल के अध्यक्ष तथा पूरी टीम को बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने सभी संकल्पों और वायदों को तेजी से पूरा किया है। सरकार के गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। आज प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद साढ़े दस लाख से अधिक परिवार के आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 नए आवास तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से 15 हजार अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कराए गए हैं तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए भी विशेष आवास योजना संचालित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन हमारे सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 'सेवा सेतु' के माध्यम से 450 से अधिक शासकीय सेवाएं अब मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 भी प्रारंभ की गई है, जहां नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कर समयबद्ध समाधान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग 65 हजार घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के माध्यम से सरकार घर में सोलर संयंत्र लगाने के लिए आकर्षक सब्सिडी भी दे रही है और इन परिवारों लिए आने वाले समय में बिजली पूरी तरह मुफ्त हो जाएगी और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच पाएंगें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के माध्यम से लंबित बिजली बिल के भुगतान का भी बड़ा अवसर दिया है और बिल पर लगने वाले सरचार्ज समेत आकर्षक छूट का प्रावधान किया है।  साय ने कहा कि सरकार न केवल जनहितैषी योजनाएं लागू कर रही है बल्कि सुशासन तिहार के माध्यम से उसका फीडबैक लेने लोगों के बीच भी गई। दो महीने लगातार जनता से फीडबैक लेकर व्यवस्थाओं में सुधार का काम किया गया है। उन्होंने इस दौरान शासन की विभिन्न नवाचारी पहल की जानकारी देते हुए सुशासन और पारदर्शी सरकार के संकल्प को दोहराया।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में विभाग में व्यापक प्रशासनिक सुधार लागू किए गए हैं। गृह निर्माण मंडल को अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में नई पहचान देकर प्रदेश के पूंजीगत व्यय और विकास कार्यों में इसकी भूमिका का विस्तार किया गया है। मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को वित्तीय और मानव संसाधन के माध्यम से सक्षम बनाने का काम किया है ताकि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि अब किसी भी नई आवासीय परियोजना का निर्माण तभी प्रारंभ होगा जब पर्याप्त बुकिंग सुनिश्चित हो जाएगी, जिससे अनावश्यक निर्माण और वित्तीय जोखिम से बचा जा सके। मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू कर वर्षों से लंबित संपत्तियों के विक्रय को गति दी तथा वित्तीय अनुशासन स्थापित किया। इसके परिणामस्वरूप मंडल की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अब यह अधोसंरचना विकास के नए आयाम स्थापित करने के लिए तैयार है।
मंडल के अध्यक्ष  अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मंडल ने नई कार्य संस्कृति अपनाई है। गृह निर्माण मंडल का विस्तार कर अधोसंरचना विकास मंडल बनाया जाना प्रदेश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने रिकॉर्ड संपत्तियों का विक्रय कर नई उपलब्धियां हासिल की हैं और भविष्य में मांग आधारित, गुणवत्तापूर्ण तथा वित्तीय रूप से व्यवहारिक परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम में लकी ड्रा के नौ विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। सारंगढ़ की पूजा बरेठ को प्रथम पुरस्कार के रूप में कार प्रदान की गई। इसके अलावा स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित अन्य आकर्षक पुरस्कार भी वितरित किए गए।
इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ,आयुक्त  अवनीश शरण, तथा विभाग एवं मंडल के वरिष्ठ अधिकारी और हितग्राही उपस्थित थे।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने सुकमा प्रवास में विभागीय संस्थाओं का किया निरीक्षण

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने सुकमा प्रवास में विभागीय संस्थाओं का किया निरीक्षण

 सुकमा। छत्तीसगढ़ शासन की महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े आज शुक्रवार को अपने एक दिवसीय प्रवास पर सुकमा पहुंची। इस दौरान उन्होंने जिले में संचालित विभिन्न विभागीय संस्थाओं का निरीक्षण कर आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

मंत्री राजवाड़े आंगनबाड़ी केंद्र राकेल और एनआरसी सुकमा पहुंचकर उन्होंने बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी दिनचर्या स्वास्थ्य, भोजन और शिक्षा जैसी गतिविधियों की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने परिसर में पौधा रोपण किया। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के साथ फर्श पर बैठकर एबीसीडी और पहाड़ा के बारे में जानकारी ली। बच्चों ने राजवाड़े को एबीसीडी सुनाया। मंत्री ने बच्चों से आत्मीयता से मुलाकात की पढ़ाई-लिखाई के बारे में बातचीत की और उन्हें फल व चॉकलेट देकर प्रोत्साहित किया। इस दौरान उन्होंने निर्देशित किया कि सभी बच्चों को पढ़ाई के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मंत्री राजवाड़े ने गुणवत्तापूर्ण भोजन कराने और बच्चों को उनकी बोली भाषा में पढ़ाने के निर्देश दिए।

इसके पश्चात मंत्री राजवाड़े ने कुम्हाररास में स्थित ईमली प्रशंसकरण केंद्र का निरीक्षण किया। भ्रमण के दौरान कलेक्टर अमित कुमार ने केंद्र के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि केंद्र में स्व सहायता समूह के लगभग 60 महिलाओं के रोजगार का प्रबंध किया गया। केंद्र में इमली से जुड़े विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। समूह की महिलाओं ने मंत्री का आत्मीय स्वागत किए। उन्होंने संस्था के विभिन्न कक्ष में उपलब्ध व्यवस्थाओं को देखा।

इसके पश्चात महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े नक्सल पुनर्वास केंद्र पहुंची। उन्होंने केंद्र में उनके रहने, खाने और व्यवस्थापन के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इस दौरान कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि पुनर्वास के लिए सभी आत्मसमर्पितों को विभिन्न प्रशिक्षण प्रकार के प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान 36 प्रशिक्षणार्थियों को मंत्री राजवाड़े ने वेलकम किट वितरित की। उन्होंने केंद्र में निवासरत लोगों से चर्चा की और उन्हें समाज की मुख्य धारा में जुड़कर परिवार के साथ प्रेमपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा दी। मंत्री राजवाड़े ने आत्मसमर्पित युवाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने केंद्र में रहने, खाने और प्रशिक्षण की व्यवस्था की बारे में बात की।

इस दाैरान एसपी किरण चव्हाण, जिला सीईओ मुकुंद ठाकुर, डिप्टी कलेक्टर शबाब खान, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि धनीराम बारसे, अरुण सिंह सिसोदिया, संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग सिसोदिया, जिला महिला बाल विकास अधिकारी शिवदास नेताम, रितीश टंडन सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने वाले ही भविष्य का नेतृत्व करेंगे : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने वाले ही भविष्य का नेतृत्व करेंगे : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

 एआई से डरने की नहीं, उसे अवसर में बदलने की है जरूरत

वित्त मंत्री ने मैक कॉलेज के राष्ट्रीय सम्मेलन में युवाओं से कहा- बदलती तकनीक के अनुरूप स्वयं को करें तैयार

रायपुर, 26 जून 2026/ वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज (एमएआईसी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "Artificial Intelligence & Digital Transformation: Opportunities, Challenges and Future Impact" में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर युवाओं का आह्वान किया कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नई तकनीकों से भयभीत होने के बजाय उन्हें अपने भविष्य के निर्माण का सबसे बड़ा अवसर मानें।

अपने संबोधन में मंत्री  चौधरी ने कहा कि आज पूरी दुनिया तेजी से ज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। भारत का स्वर्णिम इतिहास भी ज्ञान, शिक्षा और नवाचार की नींव पर खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत लगभग 1600 वर्षों तक विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इसलिए रहा क्योंकि यहां शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च स्थान दिया गया।

मंत्री  चौधरी ने युवाओं से कहा कि आज दुनिया के सबसे सफल उद्योगपति और उद्यमी वे हैं जिन्होंने नए विचारों और नवाचार के बल पर अपनी पहचान बनाई है। एलन मस्क, एनवीडिया और एप्पल जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज तकनीक की शक्ति इतनी बड़ी हो चुकी है कि कई टेक्नोलॉजी कंपनियों का मूल्यांकन अनेक देशों की अर्थव्यवस्था से भी अधिक है। इसलिए युवाओं को समय रहते तकनीकी परिवर्तन को समझकर स्वयं को उसके अनुरूप तैयार करना होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि "जो एआई को अपनाएगा वही भविष्य का नेतृत्व करेगा। जो इससे दूर भागेगा, वह प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएगा।" उन्होंने कहा कि हर तकनीकी परिवर्तन चुनौतियां लेकर आता है, लेकिन वही परिवर्तन नए अवसर भी पैदा करता है। आवश्यकता इस बात की है कि युवा इन अवसरों का लाभ उठाएं।

उन्होंने कहा कि एआई कई कार्यों को सरल बना सकता है, लेकिन मानवीय संवेदनशीलता, करुणा और मानवीय स्पर्श का विकल्प कभी नहीं बन सकता। इसलिए युवाओं को ऐसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहिए जहां मानवीय मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, नर्सिंग और अन्य सेवा क्षेत्र।

मंत्री चौधरी ने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल नौकरी तलाशने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार और उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ें तथा विश्वस्तरीय स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियां स्थापित करने का लक्ष्य रखें। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और पूरी दुनिया में भारतीय तकनीकी नेतृत्व का लोहा माना जाता है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के विजन से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ सरकार भी मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में "छत्तीसगढ़ अंजोर विजन @2047" पर कार्य कर रही है। इस दिशा में नवा रायपुर को उभरते तकनीकी और नवाचार केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां सेमीकंडक्टर यूनिट, एआई डाटा सेंटर तथा ट्रिपल आईटी में अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं सहित अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य हो रहा है।

कार्यक्रम के अंत में वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज प्रबंधन, आयोजकों एवं सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के युवा नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सुशासन में साकार हो रहे गरीबों के सपने, प्रधानमंत्री आवास योजना से अमृतलाल के परिवार को मिला सम्मानपूर्ण जीवन

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सुशासन में साकार हो रहे गरीबों के सपने, प्रधानमंत्री आवास योजना से अमृतलाल के परिवार को मिला सम्मानपूर्ण जीवन

 कच्चे घर की परेशानियों से मिली मुक्ति, पक्के आवास ने बदली पूरे परिवार की तस्वीर और तकदीर

रायपुर, 26 जून 2026। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के माध्यम से हजारों परिवारों के पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पंडरीपानी निवासी अमृतलाल का परिवार इसका प्रेरणादायी उदाहरण है। वर्षों तक कच्चे मिट्टी के मकान में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाला यह परिवार आज प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बने मजबूत एवं सुरक्षित पक्के घर में सम्मान और खुशहाली के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है।
बीते 24 जून को पंडरीपानी में आयोजित विशेष ग्राम सभा के दौरान कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे ने अमृतलाल के नए आवास का अवलोकन किया। उन्होंने परिवार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अमृतलाल ने बताया कि पहले उनका परिवार कच्चे मिट्टी के मकान में रहता था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था, दीवारों में सीलन आ जाती थी और पूरे परिवार को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और सुरक्षित जीवन जीना भी चुनौती बना रहता था। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि स्वयं पक्का मकान बनवा सकें।
प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास स्वीकृत होने के बाद उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ। योजना की सहायता से उन्हें मजबूत, सुरक्षित और सुविधायुक्त पक्का घर मिला। अब बारिश और अन्य मौसम संबंधी परेशानियों से पूरी तरह राहत मिल गई है। स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण मिलने से परिवार की जीवनशैली में उल्लेखनीय सुधार आया है। बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिला है और पूरे परिवार में नई ऊर्जा एवं आत्मविश्वास का संचार हुआ है।
अमृतलाल ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में गरीबों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को केवल पक्का घर ही नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का भरोसा भी दिया है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की सराहना की।
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री आवास योजना इसी संकल्प को साकार करते हुए प्रदेश के हजारों परिवारों के जीवन में खुशहाली और नई उम्मीद का आधार बन रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर की महिलाएं बनेंगी 'ड्रोन दीदी'

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर की महिलाएं बनेंगी 'ड्रोन दीदी'

 रायपुर में ले रहीं आधुनिक ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण, किसानों तक पहुंचाएंगी तकनीक आधारित कृषि सेवाएं

ड्रोन से उर्वरक एवं कीटनाशक का वैज्ञानिक छिड़काव, कम लागत में होगी बेहतर खेती

रायपुर, - मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में जशपुर जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाएं नई पहचान बना रही हैं। नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत जिले की चयनित महिलाएं इन दिनों रायपुर स्थित आईटीएम विश्वविद्यालय में ड्रोन संचालन एवं रिमोट पायलटिंग का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

यह प्रशिक्षण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के साथ उन्हें कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं देने के लिए दक्ष बन रही हैं।

प्रशिक्षण के दौरान ड्रोन दीदियों को ड्रोन की तकनीकी संरचना, सुरक्षित उड़ान संचालन, रिमोट पायलटिंग, फसलों में उर्वरक एवं कीटनाशकों का वैज्ञानिक छिड़काव, ड्रोन के रखरखाव तथा कृषि क्षेत्र में उसके व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद ये ड्रोन दीदियां जशपुर जिले के किसानों को ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरक, कीटनाशक एवं अन्य कृषि कार्यों की सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे कृषि कार्य कम समय में, कम लागत पर और अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। साथ ही वैज्ञानिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में जशपुर प्रवास के दौरान प्रशिक्षण के लिए रवाना हो रही ड्रोन दीदियों की बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इससे पूर्व 17 अप्रैल 2026 को रणजीता स्टेडियम में आयोजित 'लखपति दीदी' कार्यक्रम के दौरान ड्रोन दीदी एवं उन्नत सॉयल टेस्टिंग मशीन भी प्रदान की गई थी।

उप संचालक कृषि, जशपुर के अनुसार प्रशिक्षण के बाद ड्रोन दीदियां जिले के विभिन्न विकासखंडों में किसानों को तकनीक आधारित कृषि सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे खेती में समय की बचत, लागत में कमी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग का विश्वास है कि यह पहल जशपुर में तकनीक आधारित कृषि को नई गति देने के साथ महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक सशक्तता और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

CG - तालाब में डूबने से एक ही परिवार की दो मासूम बच्चियों की मौत, गांव में पसरा मातम

CG - तालाब में डूबने से एक ही परिवार की दो मासूम बच्चियों की मौत, गांव में पसरा मातम

 धमतरी। धमतरी जिले के मगरलोड थाना क्षेत्र के कपालफोड़ी गांव में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार की दो मासूम बच्चियों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार, मोहर्रम की छुट्टी होने के कारण 8 वर्षीय गीतिका और 6 वर्षीय खुशबू गांव के तालाब में नहाने के लिए गई थीं। काफी देर तक जब दोनों बच्चियां घर वापस नहीं लौटीं तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की।

तालाब किनारे मिले कपड़े और बाल्टी

खोजबीन के दौरान तालाब के किनारे दोनों बच्चियों के कपड़े और बाल्टी मिली। इसके बाद ग्रामीणों को अनहोनी की आशंका हुई और तत्काल तालाब में तलाश शुरू की गई। काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चियों के शव तालाब से बरामद किए गए। घटना की सूचना मिलते ही मगरलोड थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों बच्चियों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मगरलोड ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।

मृतक गीतिका और खुशबू एक ही परिवार की थीं। एक साथ दो मासूम बच्चियों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में मातम पसरा हुआ है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। मगरलोड पुलिस ने घटना का पंचनामा तैयार कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।प्रारंभिक जांच में मामला तालाब में डूबने का प्रतीत हो रहा है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस हृदयविदारक घटना के बाद कपालफोड़ी गांव में हर आंख नम है। ग्रामीणों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर तालाबों और जलाशयों के आसपास सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

CG : नक्सलियों के ठिकानों पर बड़ा खुलासा, 24 लाख कैश और नक्सलियो का डंप हथियार जब्त

CG : नक्सलियों के ठिकानों पर बड़ा खुलासा, 24 लाख कैश और नक्सलियो का डंप हथियार जब्त

 नारायणपुर।  नक्सलवाद के समाप्त होने के बाद अब उनके पीछे छोड़ गए सामग्रियों को ढूंढने में सुरक्षाबल जुटी हुई है। इस कड़ी में टेकला जंगल से हथियारों का बड़ा डंप और तोयामेटा से 24 लाख रुपये नगद बरामद किया गया है। खुफिया सूचना पर चलाए गए सर्च ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को दो अलग-अलग स्थानों पर बड़ी सफलता मिली है। टेकला जंगल से सुरक्षा बलों ने इंसास, एसएलआर, 303 रायफल समेत भारी मात्रा में गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद किया है, वहीं छोटेडोंगर के तोयामेटा जंगल-पहाड़ी से नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए 24 लाख रुपये नगद बरामद किया गया है।

ACB की बड़ी कार्रवाई, पटवारी और बिजली विभाग का बाबू रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

ACB की बड़ी कार्रवाई, पटवारी और बिजली विभाग का बाबू रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

 बिलासपुर। जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग मामलों में सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पहली कार्रवाई रतनपुर तहसील में हुई, जहां लालपुर पटवारी को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया। वहीं दूसरी कार्रवाई मस्तूरी क्षेत्र में की गई, जहां सीएसपीडीसीएल (विद्युत विभाग) के बाबू को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। पहले मामले में रतनपुर निवासी अशोक अग्रवाल ने ACB बिलासपुर इकाई में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उन्होंने अपनी लालपुर स्थित जमीन के नक्शा बंटांकन के लिए लगभग एक वर्ष पहले तहसीलदार रतनपुर के यहां आवेदन दिया था। इस कार्य के लिए तहसीलदार द्वारा लालपुर पटवारी भानु चंद्राकर को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

आरोप है कि पटवारी भानु चंद्राकर ने कार्य करने के एवज में 40 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, बल्कि आरोपी को रंगे हाथ पकड़वाना चाहता था। एसीबी द्वारा सत्यापन के दौरान यह बात सही पाई गई। बाद में मोलभाव के बाद 25 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। इसके बाद ACB ने ट्रैप की योजना बनाई और 25 जून को प्रार्थी को रिश्वत की राशि लेकर तहसील कार्यालय रतनपुर भेजा गया। जैसे ही पटवारी ने 25 हजार रुपये की राशि ली, एसीबी की टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। आरोपी के कब्जे से पूरी रिश्वत राशि बरामद कर ली गई। इसके बाद उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

एसीबी अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगने पर तत्काल सूचना देने की अपील की गई है। डीएसपी एसीबी ने कहा कि जनता बिना किसी डर के शिकायत दर्ज कर सकती है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह दूसरी कार्रवाई बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र में की गई, जहां बिजली विभाग के एक बाबू को रिश्वत लेते पकड़ा गया। ग्राम पारघाट निवासी त्रिलोकी साहू ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपने कृषि भूमि में शासन की योजना के तहत निःशुल्क विद्युत पोल लगाने के लिए सीएसपीडीसीएल कार्यालय मस्तूरी में आवेदन किया था। आरोप है कि कार्यालय में पदस्थ बाबू सहदेव कुमार चंद्रा ने काम आगे बढ़ाने के एवज में 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

शिकायतकर्ता ने भी इस पूरे मामले में एसीबी से संपर्क कर कार्रवाई की मांग की। शिकायत के सत्यापन के बाद मामला सही पाया गया। इसके बाद ACB ने ट्रैप की योजना बनाई और प्रार्थी को रिश्वत की राशि लेकर कार्यालय भेजा गया। जैसे ही बाबू ने 10 हजार रुपये लिए, टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। हालांकि बाद में रिश्वत राशि की बरामदगी और आरोपी की पहचान को लेकर विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इन दोनों मामलों के सामने आने के बाद जिले में सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी रिश्वत की मांग आम बात बनती जा रही है, जिससे आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ACB की इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। विभागीय अधिकारियों ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक स्तर पर समीक्षा शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री साय के सुशासन में साकार हो रहा पक्के आवास का सपना

मुख्यमंत्री साय के सुशासन में साकार हो रहा पक्के आवास का सपना

 रायपुर। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के सुशासन में प्रदेश के लाखों जरूरतमंद परिवारों का पक्के आवास का सपना साकार हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) केवल एक आवासीय योजना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास का नया अध्याय लिखने का माध्यम बन रही है। इस योजना के जरिए ऐसे परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराया जा रहा है, जो वर्षों से कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर थे।

रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत आमगांव निवासी ललित कुमार राठिया भी उन हितग्राहियों में शामिल हैं, जिनके जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना ने सकारात्मक बदलाव लाया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले ललित कुमार राठिया मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आय के कारण परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति ही बड़ी चुनौती थी। ऐसे में स्वयं का पक्का मकान बनाना उनके लिए लगभग असंभव था। ललित कुमार राठिया का परिवार वर्षों तक मिट्टी और खपरैल से बने कच्चे मकान में निवास करता रहा। बरसात के मौसम में घर की छत से पानी टपकता था और दीवारों में नमी भर जाती थी। कई बार लगातार बारिश होने पर घर के भीतर पानी तक भर जाता था, जिससे परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और परिवार हमेशा किसी अनहोनी की आशंका से घिरा रहता था। 

परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे स्वयं अपने संसाधनों से पक्का मकान बना सकें। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उनका चयन हुआ और उन्हें शासन से आवास निर्माण के लिए सहायता राशि स्वीकृत हुई। योजना का लाभ मिलने के बाद उन्होंने अपने सपनों के घर का निर्माण कार्य शुरू किया और कुछ ही समय में उनका पक्का आवास तैयार हो गया। आज ललित कुमार राठिया का परिवार अपने नए पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहा है। मजबूत दीवारें और पक्की छत उन्हें हर मौसम में सुरक्षा प्रदान कर रही हैं। घर का वातावरण स्वच्छ और व्यवस्थित होने से परिवार के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिला है और परिवार का सामाजिक सम्मान भी बढ़ा है।

वे कहते हैं कि अपना घर होना केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और सुरक्षा का प्रतीक है। आज हमारे पास मजबूत और सुरक्षित घर है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने हमारे परिवार का जीवन बदल दिया है। अब हम सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवन जी रहे हैं। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और शासन-प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में व्यापक परिवर्तन ला रही है। यह योजना केवल पक्के मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सुरक्षित भविष्य, बेहतर जीवन स्तर और सामाजिक सम्मान प्रदान करने का कार्य भी कर रही है।

वनांचल की बिंदा बाई के सपनों को मिला अपना आशियाना

वनांचल की बिंदा बाई के सपनों को मिला अपना आशियाना

 रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सुशासन में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में विकास की एक नई और सुखद तस्वीर उभर रही है। बालोद जिले के डौण्डी विकासखंड के वनांचल ग्राम नर्राटोला की निवासी बिंदा बाई इसका एक जीवंत और सशक्त उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का घर मिलने से न सिर्फ उनके सपनों को उड़ान मिली है, बल्कि शासन की अन्य योजनाओं के समन्वय ने उनके जीवन में खुशहाली और आत्मविश्वास का नया संचार किया है।

कच्चे घर की परेशानियां अब बीती बात

एक समय था जब बिंदा बाई अपने परिवार के साथ एक जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर थीं। खासकर मानसून के दिनों में छत से पानी टपकना, दीवारों में सीलन और वनांचल क्षेत्र होने के कारण जहरीले जीव-जंतुओं का डर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। बेहद सीमित आर्थिक संसाधनों के चलते पक्का मकान बनाना उनके लिए एक दूर का सपना था। लेकिन ग्राम पंचायत के माध्यम से जब प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उनका आवेदन स्वीकृत हुआ, तो समय पर मिली किस्तों की मदद से उन्होंने बिना किसी बाधा के अपना पक्का घर तैयार कर लिया।

मनरेगा और अन्य योजनाओं के समन्वय से मिली मजबूती

बिंदा बाई के घर को संवारने में कई सरकारी योजनाओं ने एक साथ मिलकर काम किया कि आवास निर्माण के दौरान बिंदा बाई को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत मजदूरी का समय पर भुगतान मिला, जिससे निर्माण के दौरान उन्हें कोई आर्थिक तंगी नहीं झेलनी पड़ी। घर की दहलीज तक नल कनेक्शन पहुंचने से अब उन्हें और उनके परिवार को शुद्ध पेयजल के लिए दूर नहीं भटकना पड़ता। रसोई में गैस कनेक्शन और चूल्हा मिलने से बिंदा बाई का घर अब धुएं से पूरी तरह मुक्त हो चुका है, जिससे उनकी सेहत भी सुरक्षित है। इस योजना के तहत हर महीने मिलने वाली वित्तीय सहायता राशि से वे अपने परिवार की छोटी-मोटी और आवश्यक जरूरतों को बिना किसी पर निर्भर रहे पूरा कर पा रही हैं।

योजनाओं ने दिया सम्मान और सुरक्षित जीवन का भरोसा

अपनी खुशी जाहिर करते हुए बिंदा बाई कहती हैं कि शासन की इन योजनाओं ने हमें केवल एक पक्का मकान ही नहीं दिया, बल्कि समाज में सम्मान और एक सुरक्षित जीवन का भरोसा भी दिया है। अब मेरा परिवार एक बेहतर माहौल में रह रहा है। उन्होंने इस सकारात्मक बदलाव के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है।

अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास का लाभ

वनांचल के दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास योजनाओं की यह प्रभावी पहुंच साफ दर्शाती है कि राज्य सरकार की जनहितकारी पहलें समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के अंत्योदय के लक्ष्य को सफलतापूर्वक साकार कर रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य योजनाओं का यह कन्वर्जेंस (समन्वय) ग्रामीण परिवारों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव का मजबूत आधार बन रहा है।

डोंगरगांव बना नगर पालिका,बहुप्रतीक्षित मांग हुई पूरी,अधिसूचना जारी

डोंगरगांव बना नगर पालिका,बहुप्रतीक्षित मांग हुई पूरी,अधिसूचना जारी

 रायपुर। राज्य शासन ने डोंगरगांववासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए डोंगरगांव नगर पंचायत का नगर पालिका के रूप में उन्नयन कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। डोंगरगांव नगर पंचायत की सीमाएं ही डोंगरगांव नगर पालिका की सीमाएं होंगी। राज्य शासन के इस निर्णय से पूरे शहर में खुशी एवं उत्साह का वातावरण है।

डोंगरगांव नगर पंचायत के नगर पालिका में उन्नयन के बाद वहां के जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने आज उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव से मुलाकात कर आभार व्यक्त किया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि इससे डोंगरगांव के सुनियोजित विकास को नई दिशा मिलेगी तथा शहरी सुविधाओं के विस्तार के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।  

उप मुख्यमंत्रीसाव ने डोंगरगांव के जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि नगर पालिका बनने के बाद डोंगरगांव में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, उद्यान, सामुदायिक भवन सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं के विकास को गति मिलेगी। साथ ही राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से नगरवासियों तक पहुंच सकेगा। इस दौरान डोंगरगांव नगर पंचायत की अध्यक्ष अंजू त्रिपाठी, पार्षद  मनबोधी पटेल, पदमनी ठाकुर, गायत्री यादव, लीला मंडलोई, डीकेश साहू, दीना पटेल और  रामकुमार गुप्ता भी मौजूद थे।

छत्तीसगढ़ में अब बिना लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम वाली यात्री बसों पर होगी कार्रवाई….

छत्तीसगढ़ में अब बिना लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम वाली यात्री बसों पर होगी कार्रवाई….

 रायपुर: छत्तीसगढ़ में यात्री सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए परिवहन विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब सभी यात्री बसों में वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) लगाना और उसे सक्रिय रखना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय सीमा के भीतर नियम का पालन नहीं करने वाले बस संचालकों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम, 1988 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

परिवहन सचिव एवं परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश ने आज इंद्रावती भवन नवा रायपुर स्थित परिवहन कार्यालय में सभी बस संचालकों एवं विभाग द्वारा वीएलटीडी लगाने हेतु अधिकृत वेंडरों की संयुक्त बैठक लेकर यात्री बसो में स्थापित वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा है कि जिन बसों में अभी तक वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) नहीं लगी है, उनमें 15 दिनों के भीतर इसे अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाए। वहीं जिन बसों में यह उपकरण लगा हुआ है लेकिन संचालित नहीं है, उन्हें तत्काल चालू किया जाए।

परिवहन विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में हुए भीषण सड़क हादसों के बाद सर्वाेच्च न्यायालय के निर्देशों और भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप यह निर्णय लिया गया है। सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करने वाली महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की जा रही है।

विभाग ने बताया कि राज्य मुख्यालय के कमांड एवं नियंत्रण केंद्र से सभी बसों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। उपग्रह आधारित ट्रैकिंग प्रणाली के माध्यम से यह पता लगाया जा सकेगा कि बस निर्धारित मार्ग पर चल रही है या नहीं तथा समय पर संचालन हो रहा है या नहीं। यात्रियों को भी संगवारी ऐप के जरिए बसों की वास्तविक समय की लोकेशन की जानकारी मिल सकेगी।

अतिरिक्त परिवहन आयुक्त  डी. रविशंकर ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरे और बुद्धिमान यातायात प्रबंधन प्रणाली स्थापित की जा रही है। इससे नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की तत्काल पहचान कर कार्रवाई की जा सकेगी।
उल्लेखनीय है कि वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस एक ऐसी उपग्रह आधारित प्रणाली है, जो वाहन की हर पल की स्थिति और लोकेशन की जानकारी नियंत्रण केंद्र तक पहुंचाती है। किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 15 दिन की मोहलत समाप्त होने के बाद नियमों की अनदेखी करने वाले बस संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक : खेती का नया और स्मार्ट विकल्प….

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक : खेती का नया और स्मार्ट विकल्प….

 रायपुर: भारत जैसे कृषि प्रधान देश में बढ़ती जनसंख्या, घटती कृषि भूमि और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच खेती की नई और टिकाऊ तकनीकों की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। ऐसे समय में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में एक अभिनव और प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। यह ऐसी आधुनिक खेती पद्धति है, जिसमें मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती और पौधों को पानी में घुले पोषक तत्वों के माध्यम से उगाया जाता है।

क्या है हाइड्रोपोनिक्स तकनीक?

हाइड्रोपोनिक्स एक वैज्ञानिक कृषि पद्धति है, जिसमें पौधों की जड़ों को पोषक तत्वों से युक्त पानी में रखा जाता है। इस तकनीक में मिट्टी के स्थान पर विशेष माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषण सीधे प्राप्त होता है। परिणामस्वरूप पौधों की वृद्धि तेजी से होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है।

कम संसाधनों में अधिक उत्पादन

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक खेती की तुलना में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। सीमित भूमि वाले किसान, शहरी क्षेत्रों के निवासी तथा छोटे उद्यमी भी इस तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक खेती कर सकते हैं। नियंत्रित वातावरण में फसल उत्पादन होने के कारण मौसम का प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम पड़ता है।

पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में सहायक

विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोपोनिक्स तकनीक गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कम पानी की खपत, रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग और भूमि पर कम दबाव के कारण यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की टिकाऊ कृषि पद्धतियों में शामिल किया जा रहा है।

युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वरोजगार और कृषि उद्यमिता के नए अवसर भी प्रदान करती है। कम स्थान में व्यावसायिक स्तर पर सब्जियां, हरी पत्तेदार फसलें और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलें उगाकर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। इससे युवाओं को कृषि आधारित स्टार्टअप शुरू करने का अवसर मिल रहा है।

सरकार दे रही आधुनिक कृषि को बढ़ावा

केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विभाग तथा विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे किसान आधुनिक खेती अपनाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकते हैं।

भविष्य की खेती की ओर एक मजबूत कदम

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग खोल रही है। यह तकनीक कम संसाधनों में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण का संतुलित समाधान प्रस्तुत करती है। आने वाले समय में यह पद्धति किसानों, युवाओं और कृषि उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ हाइड्रोपोनिक्स खेती न केवल कृषि को अधिक लाभकारी बना रही है, बल्कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

नवा रायपुर को मिली आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई सौगात

नवा रायपुर को मिली आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई सौगात

 वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का शुभारंभ

50 बिस्तरों वाले अस्पताल से नवा रायपुर एवं आसपास के क्षेत्र के लोगों को मिलेगा बेहतर उपचार का लाभ

रायपुर-- नवा रायपुर के सेक्टर-9 में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से सुसज्जित एक सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का आज विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी थे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री गुरु खुशवंत साहेब सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किसी भी राज्य के विकास का महत्वपूर्ण आधार होता है। नवा रायपुर में इस अत्याधुनिक अस्पताल की शुरुआत से क्षेत्र के नागरिकों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और अधोसंरचना के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है, जिससे प्रदेश के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है।

मंत्री  चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज देश के तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि एक समय जिन चुनौतियों की चर्चा होती थी, आज उन्हें पीछे छोड़ते हुए राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रदेश में निवेश बढ़ रहा है, उद्योगों का विस्तार हो रहा है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश और आधुनिक अस्पतालों की स्थापना से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार के प्रयासों और निजी क्षेत्र की सहभागिता से प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना लगातार मजबूत हो रही है, जिसका लाभ आम नागरिकों को मिल रहा है।

उल्लेखनीय है कि 50 बिस्तरों वाले सरोज सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। अस्पताल के संचालन से नवा रायपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं का लाभ मिलेगा तथा उपचार के लिए दूर-दराज के शहरों पर निर्भरता कम होगी। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, चिकित्सकों, अस्पताल प्रबंधन तथा बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही।

 

पिंक ऑटो योजना का विस्तार: 52 और महिलाओं को मिली आत्मनिर्भरता की नई राह

पिंक ऑटो योजना का विस्तार: 52 और महिलाओं को मिली आत्मनिर्भरता की नई राह

 रायपुर : राज्य शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पिंक ऑटो प्रोजेक्ट के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया गया। वित्त मंत्री  ओपी चौधरी एवं मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में पिंक ई-ऑटो को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान दोनों मंत्रियों ने स्वयं ई-ऑटो में बैठकर महिलाओं का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम में द्वितीय चरण के अंतर्गत 52 महिलाओं को पिंक ई-ऑटो प्रदान किए गए। इससे पहले प्रथम चरण में 40 महिलाओं को ई-ऑटो उपलब्ध कराए गए थे। योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लाभान्वित महिलाएं वर्तमान में प्रति माह 25 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।

इस अवसर पर प्रथम चरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। सम्मानित महिलाओं में ग्राम राखी की चंद्रिका साहू, कोटराभाठा की शीतू कोशले, ग्राम बेंद्री की श्रीमती रेशम साहू तथा ग्राम तूता की ज्ञानी बैस शामिल रहीं।

योजना के तहत प्रथम चरण में 14 ग्रामों और 16 ग्राम संगठनों की 40 महिलाओं को लाभ मिला था, जबकि द्वितीय चरण में 23 ग्रामों एवं 25 ग्राम संगठनों की कुल 52 महिलाओं को ई-ऑटो प्रदान किए गए हैं।

वित्त मंत्रीओपी चौधरी ने कहा कि पिंक ऑटो योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है। इस पहल से महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और वे सम्मानजनक तरीके से आत्मनिर्भर जीवन की ओर अग्रसर हो रही हैं। उन्होंने सभी हितग्राही महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह योजना उन्हें आत्मविश्वास और नई पहचान प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, एनआरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  चंदन कुमार, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी तेज, सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय समिति, इस रिटायर्ड जज को मिली अध्यक्ष की कमान

छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी तेज, सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय समिति, इस रिटायर्ड जज को मिली अध्यक्ष की कमान

 रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति राज्य में यूसीसी लागू करने की संभावनाओं, कानूनी पहलुओं और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। सरकार द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। समिति में पूर्व आईएएस अधिकारी एम.के. राउत और शत्रुघ्न सिंह को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार तथा प्राचार्य ज्योति रानी सिंह को भी समिति में शामिल किया गया है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार समिति राज्य में विभिन्न समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति संबंधी प्रावधानों का अध्ययन करेगी। साथ ही अन्य राज्यों में यूसीसी से जुड़े अनुभवों और कानूनी व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया जाएगा। समिति विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त कर व्यापक अध्ययन करेगी। इसके बाद अपनी अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए धर्म और समुदाय से परे एक समान नागरिक कानून लागू करना है। छत्तीसगढ़ में समिति के गठन को यूसीसी लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि व्यापक अध्ययन और सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही इस विषय पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

14 नगर निगम, 56 नगर पालिका और 124 नगर पंचायतों के मरम्मत और संधारण कार्यों के लिए 22 करोड़ आपात निधि जारी

14 नगर निगम, 56 नगर पालिका और 124 नगर पंचायतों के मरम्मत और संधारण कार्यों के लिए 22 करोड़ आपात निधि जारी

 रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को मरम्मत और संधारण कार्यों के लिए 22 करोड़ 6 लाख रुपए की आपात निधि जारी की है। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के निर्देश पर संचालनालय ने सभी निकायों को राशि हस्तांतरित कर दी है। विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही अप्रैल से जून के लिए यह राशि जारी की गई है।

नगरीय प्रशासन विभाग ने मरम्मत-संधारण आपात निधि के रूप में राज्य के 14 नगर निगमों को कुल 13 करोड़ 76 लाख रुपए जारी किए हैं। वहीं 56 नगर पालिकाओं के लिए कुल 5 करोड़ 18 लाख रुपए जारी किए गए हैं। विभाग ने 124 नगर पंचायतों के लिए भी कुल 3 करोड़ 66 लाख रुपए जारी किए हैं।

निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश से पहले जांच लें 5 जरूरी बातें, विनियामक आयोग ने जारी की गाइडलाइन

निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश से पहले जांच लें 5 जरूरी बातें, विनियामक आयोग ने जारी की गाइडलाइन

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश लेने की सोच रहे छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। प्रवेश के नाम पर होने वाले किसी भी तरह के फर्जीवाड़े से बचने के लिए छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने छात्रहित में एक आवश्यक गाइडलाइन जारी की है।

छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सचिव श्री अशोक अग्रवाल द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार छात्र किसी भी कोर्स या डिग्री में दाखिला लेने से पहले 5 मुख्य बिंदुओं की जांच अवश्य कर लें, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे और बाद में कोई परेशानी न हो। ​निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेते समय छात्र इन बातों का विशेष ध्यान रखें।

अधिनियम के तहत अधिसूचना की जांच

​सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि संबंधित विश्वविद्यालय राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम-2005 के अंतर्गत विधिवत अधिसूचित है या नहीं।

राजपत्र में प्रकाशन अनिवार्य

​विश्वविद्यालय के परिनियम एवं अध्यादेश का छत्तीसगढ़ शासन के राजपत्र में प्रकाशित होना अनिवार्य है। नियमानुसार राजपत्र में प्रकाशन के बाद ही कोई भी निजी विश्वविद्यालय छात्रों को प्रवेश देने के लिए पात्र होता है। बिना इसके प्रवेश देना अवैध माना जाएगा।

संबद्धता पर रोक

छत्तीसगढ़ के सभी निजी विश्वविद्यालय एकात्मक स्वरूप के हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि इन्हें अपने कैंपस से बाहर किसी अन्य कॉलेज या संस्थान को संबद्धता देने की अनुमति नहीं है। ये संस्थान केवल अपनी मुख्य इकाई या अपनी अध्ययन शाला के भीतर ही पाठ्यक्रम संचालित कर सकते हैं।

यूजीसी से कोर्स की मंजूरी

​ जिस भी पाठ्यक्रम या डिग्री में प्रवेश ले रहे हैं, वह यूजीसी द्वारा अनुमोदित होनी चाहिए। साथ ही, राजपत्र में प्रकाशित विश्वविद्यालय के अध्यादेश में भी उस पाठ्यक्रम का उल्लेख होना अनिवार्य है।

पी-एच.डी. के लिए कड़े नियम

​पी-एच.डी. की उपाधि के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम, 2022 के नियम प्रभावी हैं। छात्र यह अच्छी तरह जांच लें कि संबंधित विषय में नियमों के अनुरूप योग्यता रखने वाले नियमित शोध निर्देशक विश्वविद्यालय में पदस्थ हों। बाहर के शोध निर्देशकों की सेवाएं लेकर शोध कार्य कराना यूजीसी के नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।

​विनियामक आयोग के सचिव की अपील

आयोग के सचिव द्वारा जनहित में जारी इस गाइडलाइन का एकमात्र उद्देश्य छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखना है। किसी भी संस्थान के बहकावे या भ्रामक विज्ञापनों में आने के बजाय, छात्र और अभिभावक स्वयं आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.purc.cgstate.gov.in पर जाएं या आयोग के कार्यालय से नियमों की पुष्टि करने के बाद ही पूरी तरह संतुष्ट होकर प्रवेश लें।

छत्तीसगढ़ की धरती को बंजर होने से बचाना है तो प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाना ही होगा: सांसद बृजमोहन अग्रवाल

छत्तीसगढ़ की धरती को बंजर होने से बचाना है तो प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाना ही होगा: सांसद बृजमोहन अग्रवाल

 रायपुर /भाटापारा ।  धरती की उर्वरकता और स्वस्थ पीढ़ी के लिए जैविक खेती को अपनाना हमारी जिम्मेदारी है यह कहना है रायपुर लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता  बृजमोहन अग्रवाल का जिन्होंने गुरुवार को भाटापारा में आयोजित ‘राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तिलहन (NMEO-OS)’ अंतर्गत जिला स्तरीय तिलहन मेला सह जैविक कृषि कार्यशाला में शामिल होकर हुए किसानों को पारंपरिक और वैज्ञानिक खेती के समावेश का मूल मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि केवल धान की फसल पर निर्भरता न केवल हमारी भूमि की उर्वरक शक्ति को कम कर रही है, बल्कि भविष्य के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर रही है।

धरती की उर्वरकता और स्वस्थ पीढ़ी के लिए जैविक खेती अनिवार्य

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, आज जब से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी और ₹3100 प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य दिया जा रहा है, तब से एक स्थिति यह भी बन गई है कि अधिकांश किसान केवल धान की खेती तक सीमित होकर रह गए हैं। हर तरफ केवल धान, धान, धान और धान की ही खेती हो रही है। बाकी फसलों का उत्पादन लगभग बंद होता जा रहा है।

हमें विचार करना होगा कि क्या केवल धान की खेती से भविष्य में काम चल पाएगा? एक समय ऐसा भी आ सकता है जब हमारी जमीन का पानी सूख जाएगा। धान ऐसी फसल है जिसमें सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। छत्तीसगढ़ में आज पानी की कमी नहीं है, लेकिन पहले हमारे गांवों में पांच-पांच, दस-दस तालाब हुआ करते थे। आज वे तालाब सूख रहे हैं, समाप्त होते जा रहे हैं।

बार-बार एक ही फसल लेने से धरती की उर्वरक शक्ति भी कम होती है। अधिक उत्पादन लेने के लिए हम लगातार यूरिया और फास्फेट का उपयोग कर रहे हैं। इससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। आने वाली पीढ़ियों, हमारे बच्चों और नाती-पोतों के लिए जो जमीन हम छोड़कर जाएंगे, वह कहीं बंजर न हो जाए, इस बारे में हमें गंभीरता से सोचना होगा।

इसीलिए कहा जाता है कि फसल चक्र अपनाना चाहिए। अलग-अलग फसलें लेने से मिट्टी की उर्वरक शक्ति बनी रहती है। पहले लोग अपने घर के खाने के लिए अलग से धान रखते थे, लेकिन आज यह परंपरा भी लगभग समाप्त हो गई है। हम केवल अधिक उत्पादन और अधिक कमाई के पीछे भाग रहे हैं।

लेकिन सोचने की बात यह भी है कि जितना अधिक पैसा हम कमाते हैं, उसका बड़ा हिस्सा बाद में डॉक्टरों को देना पड़ता है। कम से कम हमें यह तो तय करना चाहिए कि हमारे परिवार के खाने के लिए जितना चावल और धान चाहिए, उतना उत्पादन हम जैविक तरीके से करें। गोबर खाद और गौमूत्र का उपयोग कर प्राकृतिक खेती करें।

हमें यह विचार करना होगा कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ रखना है, अपने परिवार को स्वस्थ रखना है, अपने बच्चों और नाती-पोतों को स्वस्थ रखना है, तो हमें प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर लौटना ही होगा।

उन्होंने कहा कि, आज हमें यह भी सोचना होगा कि हमने पशुपालन को लगभग छोड़ ही दिया है। पहले के समय में जिसके घर में जितने अधिक पशु होते थे, उसे उतना ही समृद्ध और बड़ा आदमी माना जाता था। आज अधिकांश घरों में पशु नहीं हैं। बच्चों के लिए शुद्ध दूध तक उपलब्ध नहीं है। बाजार से जो दूध आता है, वह किस प्रकार तैयार होता है, इसकी भी चिंता लोगों को रहती है।

इतिहास स्वयं को दोहराता है। इसलिए समय की मांग है कि हम फिर से प्राकृतिक खेती और जैविक खेती की ओर लौटें। यदि हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करना है तो हमें गोबर खाद और गौमूत्र आधारित खेती को अपनाना होगा। प्राकृतिक खेती और जैविक खेती ही स्वस्थ समाज, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ भविष्य का आधार बन सकती है।

खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने का आह्वान

सांसद ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन को साझा करते हुए कहा कि यदि खेती को लाभ का व्यवसाय बनाना है, तो किसानों को विविधीकरण अपनाना होगा। उन्होंने सलाह दी कि किसान अपनी जमीन के एक चौथाई हिस्से में फल-फूल, एक चौथाई में पशुपालन, मछली पालन या मुर्गी पालन करें, ताकि आय का जरिया साल भर बना रहे। उन्होंने बताया कि सरकार दलहन-तिलहन की खेती करने पर 15,000 रुपये प्रति वर्ष और खेत में वृक्षारोपण करने पर 10,000 रुपये प्रति वर्ष प्रोत्साहन राशि दे रही है।

युवाओं के लिए नई तकनीक और बाजार की संभावनाएं

युवाओं को गांव में ही रोजगार और खेती से जोड़ने के लिए उन्होंने ‘नेट हाउस’, ‘पॉली हाउस’ और ‘ड्रिप इरिगेशन’ जैसी आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि रायपुर जैसे शहरों में जैविक उत्पादों की भारी मांग है और जैविक उत्पाद सामान्य फसलों की तुलना में कई गुना अधिक कीमत पर बिक रहे हैं। अतः जैविक खेती ‘नुकसान नहीं, बल्कि फायदे का सौदा’ है।

हितग्राहियों को मिली योजनाओं की सौगात
इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और प्रदेश के कृषि मंत्री  रामविचार नेताम की उपस्थिति में विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया। कार्यक्रम में पीएम आशा योजना, स्वनिधि योजना, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, नैनो यूरिया प्रोत्साहन और मत्स्य पालन विभाग से जुड़ी योजनाओं के हितग्राहियों को सहायता राशि एवं प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

इस अवसर पर राज्य शासन के कृषि मंत्री राम विचार नेताम, मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह ठाकुर,  अश्विनी शर्मा , सनम जांगड़े, सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे।

ACB का बड़ा एक्शन, जमीन के बटांकन के बदले 25 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पटवारी गिरफ्तार

ACB का बड़ा एक्शन, जमीन के बटांकन के बदले 25 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पटवारी गिरफ्तार

 बिलासपुर। जिले के लालपुर में पदस्थ एक पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने एक बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटवारी भानु चंद्राकर को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। पटवारी द्वारा यह रिश्वतखोरी जमीन से संबंधित कार्यों के लिए की गई थी, जिसमें उसे जमीन का नक्शा और बटांकन करने के एवज में यह रकम हासिल करनी थी। इस मामले की शिकायत मिलने के बाद एसीबी बिलासपुर की टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही आरोपी पटवारी ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया। इस घटना के बाद, एसीबी ने आरोपी भानु चंद्राकर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।