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स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मिले इंटर्न डॉक्टर, आंदोलन स्थगित करने का लिया निर्णय….

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मिले इंटर्न डॉक्टर, आंदोलन स्थगित करने का लिया निर्णय….

 रायपुर:  स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक चर्चा की। इस दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा के बाद प्रदेश की विष्णुदेव साय सरकार पर विश्वास जताते हुए अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया, जिस पर सभी ने संतोष व्यक्त किया।

हेल्थ चेकअप और ऑनलाइन कंसल्टेशन बुक करना

स्टाइपेंड वृद्धि पर आगे बढ़ी प्रक्रिया

चर्चा में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि  IMA-MSN छत्तीसगढ़ द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव और संबंधित प्रकरण पर पहल करते हुए इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि से जुड़ी आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बताया गया कि इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर इसी माह आवश्यक एवं सकारात्मक निर्णय लेने के लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ाई जा रही है।

चिकित्सा शिक्षा के प्रति सरकार प्रतिबद्ध

स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा से जुड़े सभी विषयों के प्रति संवेदनशील है और इंटर्न डॉक्टरों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सोनमणि बोरा ने प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का कार्यभार ग्रहण किया….

सोनमणि बोरा ने प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का कार्यभार ग्रहण किया….

 रायपुर: भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी  सोनमणि बोरा (भा.प्र.से.-1999) ने आज प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन का कार्यभार ग्रहण किया। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी आदेश के तहत  बोरा को प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग पदस्थ किया गया है। वे प्रमुख सचिव, आदिम जाति विकास विभाग, अनुसूचित जाति विकास विभाग तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। वे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात  बोरा ने विभागीय अधिकारियों से विभाग की योजनाओं, कार्यक्रमों और विभिन्न कार्यों की जानकारी ली। इस अवसर पर विभाग के संचालक  रिमिजियुस एक्का, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुमीत अग्रवाल, उप सचिव  भागवत जायसवाल, अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य, मुख्य अभियंता  राजेश शर्मा, संयुक्त संचालक  मिथिलेश  अवस्थी,  उप संचालक  अरुण साहू, सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुनील अग्रहरि तथा  अधीक्षण अभियंता  रमेश सिंह के साथ ही अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और विभागीय गतिविधियों से अवगत कराया।

उल्लेखनीय है कि  बोरा की राज्य गठन के पश्चात रायपुर को राजधानी के रूप में संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वे रायपुर नगर पालिक निगम, आरडीए, बीडीए के आयुक्त एवं सीईओ रहे। उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव से रायपुर और बिलासपुर के नगर विकास के साथ-साथ कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, बिलासपुर जैसे जिलों के विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है बोरा के कार्यकाल में सफाई मित्र योजना, बूढ़ातालाब के साथ अन्य तालाबों के संवर्धन, विकास और पुनरोद्धार तथा रायपुर के महादेव घाट में मूर्ति विसर्जन के लिए स्थान निर्धारित कर कार्य प्रारंभ कराया गया। नगरीय क्षेत्रों में विद्यालयों का कायाकल्प कराया गया। रायपुर नगर निगम में जन्म व मृत्यु पंजीयन को ऑनलाइन कराया गया, लेखा संबंधित कार्यो को मैनुअल पध्यति से सॉफ्टवेयर आधारित कराया गया। साथ ही संचालन-संधारण (ओ एंड एम) कार्यो को प्रिवेंटिव कार्यो के रूप में शामिल कराने जैसे कार्य उनकी प्रमुख उपलब्धियां रहीं।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग नगरीय निकायों के माध्यम से नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहरी विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं के संचालन और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बोरा के कार्यभार ग्रहण करने के साथ विभागीय कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने तथा नगरीय विकास से जुड़े कार्यों के बेहतर समन्वय को और गति मिलने की उम्मीद है। बोरा ने अधिकारियों से चर्चा करते हुए कहा कि जनता से जुड़े विभागीय कार्यक्रम तथा उनके मूलभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाओं को प्रमुखता दी जानी चाहिए।

बलौदाबाजार और सिमगा विकासखंडों को राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की बड़ी सौगात

बलौदाबाजार और सिमगा विकासखंडों को राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की बड़ी सौगात

 बलौदाबाजार। बुनियादी सुविधाओं (रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली) का विकास और सुदृढ़ीकरण किसी भी समाज, गाँव या देश की प्रगति का आधार है। राज्य के ग्रामीण अंचलों में बुनियादी सुविधाओं के विकास और सुदृढ़ीकरण के लिए विष्णु सरकार के निरंतर प्रयास रंग ला रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार और अंतिम क्रियाकर्म के दौरान ग्रामीणों को होने वाली असुविधाओं को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मंत्री वर्मा द्वारा बलौदाबाजार एवं सिमगा विकासखंडों के 17 विभिन्न ग्रामों में 97.92 लाख रुपए (5.76 लाख रूपए प्रति ग्राम) के “मुक्तिधाम में शेड सह प्रतीक्षालय निर्माण” कार्यों को अपनी हरी झंडी (स्वीकृति) दे दी है। स्वीकृत यह सभी विकास कार्य ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूती प्रदान करेंगे।

ग्राम पंचायतों व गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
राजस्व मंत्री द्वारा 5.76 लाख रूपए प्रति ग्राम अनुसार स्वीकृत सूची में सिमगा तथा बलौदाबाजार विकासखंडों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में मुक्तिधाम शेड सह प्रतीक्षालय का निर्माण कराया जाएगा, जिसमें सिमगा विकासखंड के बिटकुली, बासीन (खैरवारी), धोबनीडीह (बुडगहन) एवं अमेरी (कसहीडीह) शामिल है। इसी तरह बलौदाबाजार विकासखंड के ढनढनी (खैरवारडीह), करमनडीह, मगरचबा (खैरघटा), लिमाही (गोड़खपरी), भरुवाडीह (पौसरी/चांपा एवं ढाबाडीह), भाठागांव-स, रसेड़ा (रसेड़ा), शुक्लाभाठा (सोनपुर), चौरटी (चौरटी एवं अचानकपुर), ढाबाडीह, अचनाकपुर, झोंका तथा सेमराडीह शामिल है।

इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के अवसर पर राजस्व मंत्री वर्मा ने कहा कि, ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास और हर नागरिक तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना हमारी सरकार का मुख्य ध्येय है। मुक्तिधाम में शेड और प्रतीक्षालय न होने के कारण ग्रामीणों को विशेषकर बारिश और भीषण गर्मी के मौसम में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इन स्वीकृतियों से अब अंतिम संस्कार के समय लोगों को एक सम्मानजनक और सुविधापूर्ण वातावरण मिलेगा। आगे भी विकास का यह सिलसिला अनवरत जारी रहेगा।

ग्रामीणों में हर्ष की लहर
17 प्रमुख गांवों में 97.92 लाख रूपए के मुक्तिधाम शेड सह प्रतीक्षालय निर्माण की स्वीकृति मिलने से क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों में अपार उत्साह है। ग्रामीणों ने मंत्री वर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, उनके इस संवेदनशील प्रयास से बरसात और गर्मी के मौसम में होने वाली विकट समस्याओं से स्थाई निजात मिलेगी।

CG : प्रदेश में इस दिन सार्वजनिक अवकाश, बैंक, कोषालय रहेंगे बंद, सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया अधिसूचना

CG : प्रदेश में इस दिन सार्वजनिक अवकाश, बैंक, कोषालय रहेंगे बंद, सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया अधिसूचना

 रायपुर।  प्रदेश सरकार ने रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर शुक्रवार 28 अगस्त 2026 को राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इस दिन सभी शासकीय कार्यालयों, संस्थाओं के साथ-साथ कोषालय एवं बैंकों में अवकाश रहेगा।

नेगोशिएबल इंस्टूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 25 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य शासन ने 28 अगस्त 2026 को प्रदेश के सभी कोषालय एवं बैंकों के लिए भी सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

”लोक निर्माण से छत्तीसगढ़ निर्माण” के मूलमंत्र के साथ अधोसंरचना विकास को दे रहे नई गति – अरुण साव

”लोक निर्माण से छत्तीसगढ़ निर्माण” के मूलमंत्र के साथ अधोसंरचना विकास को दे रहे नई गति – अरुण साव

 ’पिछले ढाई सालों में 12,666 करोड़ के 1572 कार्यों को मिली प्रशासकीय स्वीकृति, इनमें सड़कों के 1285, पुलों के 247 और भवन निर्माण के 42 कार्य शामिल’

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में लोक निर्माण विभाग के कार्यों की दी जानकारी

रायपुर. 19 अगस्त 2026. उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने आज प्रेस-कॉन्फ्रेंस में लोक निर्माण विभाग के कार्यों, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य का सबसे बड़ा निर्माण विभाग लोक निर्माण विभाग छत्तीसगढ़ के विकास का आधार है। सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण के साथ विभागीय कार्यों में तेजी और प्रशासनिक कसावट लाने के लिए विभाग लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दिसम्बर-2023 में सरकार बनने के बाद से अब तक लोक निर्माण विभाग को निर्माण कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर प्रशासकीय स्वीकृतियां मिली हैं। लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी और अपर सचिव  एस.एन. श्रीवास्तव भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव ने प्रेस-कान्फ्रेंस में बताया कि पिछले ढाई वर्षों में विभाग को 12 हजार 666 करोड़ रुपए से अधिक के लागत के कुल 1572 कार्यों के लिए प्रशासकीय स्वीकृतियां मिली हैं। इसमें सड़क निर्माण के 1285, पुलों के 247 और भवन निर्माण के 42 कार्य शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में दिसम्बर-2023 से मार्च-2024 तक 80 कार्यों के लिए 551 करोड़ 42 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। इनमें 374 किमी लंबाई की 72 सड़कें, 6 पुल और दो भवन शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2590 करोड़ 70 लाख रुपए लागत के कुल 438 कार्यों के लिए की स्वीकृति दी गई। इनमें 1465 किमी लंबाई की 400 सड़कें, 37 पुल और एक भवन शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 लोक निर्माण विभाग के लिए ऐतिहासिक रहा। विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए इस वर्ष 9129 करोड़ 18 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिली, जो राज्य निर्माण के बाद पिछले 25 वर्षों के इतिहास में विभाग को मिली सर्वाधिक स्वीकृति है। इस वित्तीय वर्ष में 5129.60 किमी लंबाई की 754 सड़कों, 200 पुलों और 39 भवनों सहित कुल 993 कार्यों को मंजूरी दी गई। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 10 अगस्त तक विभाग को 608 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। इसमें 608.20 किमी लंबाई की 59 सड़कें और दो पुलों के निर्माण शामिल हैं।

उप मुख्यमंत्री  साव ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में विभाग में कार्यों की गति बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत किया गया है। बेहतर संचालन और प्रशासनिक कसावट के लिए सात नए संभागीय कार्यालय और 12 नए उप संभागीय कार्यालय शुरू किए गए हैं। इससे निर्माण कार्यों की निगरानी और स्वीकृत कार्यों के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकताओं में लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का निराकरण भी शामिल है।

साव ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए जल्द ही ‘वमिस’ (WAMIS - Work and Accounts Monitoring Integration System) लागू किया जाएगा। इस प्रणाली से डीपीआर तैयार करने से लेकर कार्य की स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाएं ऑनलाइन और एकीकृत प्रणाली से संचालित होंगी। इससे वर्तमान में विभागीय प्रक्रियाओं में लगने वाले लंबे समय को कम किया जा सकेगा और निर्माण कार्यों को तेजी से धरातल पर उतारा जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से विभागीय कामकाज में सुगमता के साथ गुणवत्ता और निगरानी में भी सुधार होगा। हम राज्य में “लोक निर्माण से छत्तीसगढ़ निर्माण” के मूलमंत्र के साथ अधोसंरचना विकास को नई गति देने लगातार सक्रियता से काम कर रहे हैं।

श्रमिक परिवारों को मिले शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ : श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन

श्रमिक परिवारों को मिले शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ : श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन

 ई-केवायसी प्रक्रिया के तहत किसी भी श्रमिक का आवेदन लंबित न रहे, दिए निर्देश

रायपुर - श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन ने आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम विभाग के काम-काज की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ई-केवायसी प्रक्रिया के तहत किसी भी श्रमिक का आवेदन लंबित न रहे और सभी पात्र श्रमिकों को शासन की योजनाओं का समय पर लाभ मिले।

67 कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर
 मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। राज्य में संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों के हितों के संरक्षण के लिए विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से 67 कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों को मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए विभागीय अधिकारी आवश्यक कार्यवाही करें।

श्रम संहिताओं के अध्ययन और अधोसंरचना विस्तार के निर्देश
श्रम मंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा चार नए श्रम संहिताएं बनाई गई हैं। सभी श्रम अधिकारी इन कानूनों का अध्ययन कर लें। उन्होंने कहा कि नए जिलों के श्रम कार्यालयों में जल्द ही सेटअप अनुसार अधोसंरचना का विस्तार किया जाएगा। 

कारखानों की नियमित जांच कर आवश्यक कार्यवाही करें
      बैठक में उन्होंने श्रमिकों के पंजीयन के लिए प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। ठेकेदार को जितने श्रमिकों का लाइसेंस प्राप्त है, उतने ही श्रमिक कार्यरत हैं या नहीं, यह सुनिश्चित करने तथा कारखानों की नियमित जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए।

योजनाओं की जिलेवार समीक्षा 
बैठक में ऑनलाईन रेण्डम निरीक्षण, अभियोजन एवं निराकरण की कार्यवाही, छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम अंतर्गत पंजीयन की समीक्षा सहित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। इनमें मिनी माता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना, असंगठित कर्मकार छात्रवृत्ति योजना, ई-रिक्शा सहायता योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना, असंगठित कर्मकार महतारी जतन योजना और बस्तर मुन्ने पोर्टल (नियद नेल्ला नार 2.0) शामिल हैं।

अपात्रों को लाभ मिलने पर होगी कार्रवाई
 सचिव सह श्रमायुक्त  हिमशिखर गुप्ता ने जिलों के श्रम पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि इस योजना में अपात्र व्यक्ति को लाभ मिलता है अथवा किसी प्रकार की शिकायत मिलती है तो संबंधित जिलों के श्रम अधिकारी जवाबदेह होंगे और उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत सम्मान समारोह का आयोजन 24 अगस्त को
सचिव श्री गुप्ता ने बताया कि 24 अगस्त मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में राजधानी रायपुर में अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री की पहल पर चालू शैक्षणिक सत्र से इस योजना में सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 की गई है। इसके तहत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक श्रेष्ठ आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिसका पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।बैठक में अपर श्रमायुक्त द्व एस.एल. जांगड़े एवं सविता मिश्रा, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मण्डल के सचिव  गिरीश रामटेके सहित विभिन्न जिलों से आए श्रम विभाग के मैदानी अधिकारी उपस्थित थे।

नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ

नदियों के उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक एवं समयबद्ध कार्ययोजना पर जोर

मानचित्रण, संरक्षण, पुनर्भरण, जनभागीदारी और कार्ययोजना के पांच प्रमुख स्तंभों पर होगा नदी संरक्षण का काम

नेशनल वाटर एकेडमी पुणे के साथ एमओयू से जल संरक्षण के क्षेत्र में मजबूत होगा क्षमता निर्माण

एंट्रिक्स कॉरपोरेशन बेंगलुरु के सहयोग से आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक का होगा उपयोग

कुनकुरी तहसील के लगभग 1540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से जल संसाधनों की होगी निगरानी और विश्लेषण

मुख्यमंत्री ने किया जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन

रायपुर ,19 अगस्त 2026

मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ

नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, कृषि और समृद्धि की जीवनधारा हैं। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा बनाने में प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिन नदियों ने हमारी सभ्यता को पोषित किया और हमें समृद्धि दी, उनका संरक्षण हम सभी का साझा दायित्व है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री  साय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम स्थलों एवं जलग्रहण क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण, जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने तथा नदी संरक्षण को व्यापक जन अभियान का स्वरूप देना है। कार्यशाला में जल संरक्षण, नदी पुनरुद्धार और जल प्रबंधन से जुड़े विषय विशेषज्ञों के साथ राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य तथा विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा मंथन किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा। इसी भावना के साथ राज्य सरकार नदियों के उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के समन्वय से व्यापक कार्ययोजना पर आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान नदियों से गहराई से जुड़ी हुई है। महानदी सहित प्रदेश की अनेक नदियों ने कृषि, आजीविका और सामाजिक जीवन को समृद्ध किया है। नदियों का अस्तित्व उनके उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के स्वास्थ्य पर निर्भर है। इसलिए नदी संरक्षण का कार्य केवल उसके प्रवाह क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता। हमें नदी के स्रोत से लेकर उसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को समझकर संरक्षण की समग्र योजना बनानी होगी।

उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। स्रोत महोत्सव में विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर ऐसी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे धरातल पर समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।

’पांच प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ेगा नदी संरक्षण अभियान’

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में नदी संरक्षण के लिए मानचित्रण, संरक्षण, पुनर्भरण, जनभागीदारी और कार्ययोजना के पांच प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाएगा। प्रत्येक नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से मानचित्रण किया जाएगा। नदी का उद्गम कहां है, उसके प्रवाह क्षेत्र की प्रकृति कैसी है, भू-उपयोग में किस प्रकार के बदलाव हुए हैं और किन कारणों से नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव पड़ रहा है - इन सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक मानचित्रण और अध्ययन के आधार पर नदी के पूरे इकोसिस्टम के संरक्षण की योजना तैयार की जाएगी। इसमें वन एवं वनस्पति संरक्षण, मृदा क्षरण की रोकथाम, पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण एवं पुनर्जीवन, आवश्यकतानुसार नई जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और भू-जल पुनर्भरण जैसे कार्य शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षाजल हमारे नदी तंत्र और भू-जल का मूल आधार है। इसलिए बारिश के पानी को तेजी से बहकर निकल जाने देने के बजाय उसे अधिक से अधिक मात्रा में धरती के भीतर पहुंचाने के उपाय करने होंगे। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, जल स्रोतों को पुनर्जीवन मिलेगा और नदियों में लंबे समय तक जल प्रवाह बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

’नदी संरक्षण को बनाना होगा जन आंदोलन’

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संरक्षण का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। नदियों के किनारे बसे गांवों और वहां रहने वाले लोगों का नदी से सीधा संबंध है, इसलिए उन्हें नदी संरक्षण की प्रक्रिया का प्रमुख भागीदार बनाना होगा।

उन्होंने जिला स्तरीय समितियों के सदस्यों से कहा कि नदियों के किनारे बसे गांवों में स्थानीय समितियां गठित कर पंचायतों के सहयोग से नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्य आगे बढ़ाए जाएं। स्थानीय समुदाय को नदी की स्थिति, उसके महत्व और संरक्षण के उपायों की जानकारी दी जाए। जब समाज स्वयं अपनी नदी और जल स्रोतों के संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, तब ऐसे प्रयास अधिक प्रभावी और स्थायी होते हैं।

मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से भी आग्रह किया कि जल संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान को सरल एवं सहज भाषा में लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ धरातल पर दिखाई दे और आम नागरिक उसे समझकर अपने जीवन में अपना सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ है। नदियों ने पीढि़यों से मानव जीवन को जल, भोजन और आजीविका प्रदान की है। इसलिए एक सभ्य समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि हम अपनी आने वाली पीढि़यों के लिए नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्रोत महोत्सव 2026 से निकलने वाले निष्कर्ष छत्तीसगढ़ में नदी संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।

’जल संरक्षण और आधुनिक तकनीक के लिए दो महत्वपूर्ण एमओयू’

कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की संस्थागत और तकनीकी क्षमता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण एमओयू किए गए। नेशनल वाटर एकेडमी, पुणे के साथ हुए एमओयू के माध्यम से जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और मैदानी अमले के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इससे आधुनिक जल प्रबंधन, नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
इसी प्रकार एंट्रिक्स कॉरपोरेशन, बेंगलुरु के साथ हुए एमओयू के माध्यम से इसरो की विशेषज्ञता और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग जल संसाधनों के वैज्ञानिक विश्लेषण एवं निगरानी में किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में कुनकुरी तहसील के लगभग 1540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उन्नत भू-स्थानिक तकनीक के माध्यम से जल संसाधनों की स्थिति का अध्ययन, निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़ों को स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़कर जल संरक्षण की अधिक प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। इससे क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुरूप समाधान तैयार करने और उनके परिणामों की निगरानी करने में भी मदद मिलेगी।

’‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक नीर की रक्षा, नारी की भागीदारी और जल संपदा के संरक्षण की अवधारणा को रेखांकित करती है। पुस्तक में जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न अनुभवों, प्रयासों और नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया है।

’जलस्रोतों की पहचान और संरक्षण भविष्य की जल सुरक्षा के लिए जरूरी : डॉ. विनोद तारे’

सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नदियों के उद्गम और उन्हें पोषित करने वाले जल स्रोतों की पहचान एवं संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। बारिश का पानी ही नदियों और भू-जल का प्रमुख आधार है। वर्षाजल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे अधिक से अधिक मात्रा में जमीन के भीतर पहुंचाना होगा, जिससे भू-जल स्तर बढ़े और भविष्य के लिए जल सुरक्षित किया जा सके।

डॉ. तारे ने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्राचीन ज्ञान, स्थानीय एवं पारंपरिक अनुभव और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के बीच समन्वय जरूरी है। इन तीनों को एक साथ जोड़कर तैयार की गई कार्ययोजना ही जल स्रोतों के दीर्घकालिक संरक्षण और जल के सतत उपयोग का आधार बन सकती है।

’साइंस बेस्ड और साइट स्पेसिफिक समाधान तैयार होंगे: जल संसाधन विभाग सचिव’

जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने कहा कि स्रोत महोत्सव 2026 का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम और कैचमेंट एरिया के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक, व्यवहारिक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना है। नदी संरक्षण में केवल डाउनस्ट्रीम फ्लो का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सोर्स एरिया, भूमि उपयोग, मिट्टी की नमी, भू-जल रिचार्ज, वनस्पति और मृदा क्षरण सहित नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ समझना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला में नौ नदी समूहों पर अलग-अलग चर्चा की जा रही है। इन समूहों में क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों के अनुरूप साइट स्पेसिफिक और साइंस बेस्ड समाधान तैयार किए जाएंगे। इसमें समस्या की स्पष्ट पहचान के साथ समाधान, क्रियान्वयन की जिम्मेदारी और परिणामों के आकलन की समय-सीमा भी निर्धारित करने पर जोर रहेगा।

श्री टोप्पो ने कहा कि जल संरक्षण केवल अधोसंरचना निर्माण का विषय नहीं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी ही संरक्षण कार्यों की दीर्घकालिक सफलता और स्थायित्व की कुंजी है। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर छत्तीसगढ़ के लिए समयबद्ध रिवर सोर्स रेस्टोरेशन रोडमैप तैयार करने की दिशा में आगे कार्य किया जाएगा।

कार्यशाला में सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे, नमामि गंगे मिशन से जुड़े विषय विशेषज्ञ, एनआईटी रायपुर के प्राध्यापक, राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य, विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारी तथा जल एवं नदी संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञ उपस्थित थे।

रायपुर : परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर : परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक सम्पन्न

 नवा रायपुर में ई-बसों के संचालन, कार्यालय भवन निर्माण सहित सड़क परियोजनाओं के प्रस्तावों पर हुआ विचार-विमर्श

रायपुर :- मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नवा रायपुर अटल विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) एवं लोक निर्माण विभाग से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा एवं विचार-विमर्श किया गया।

’नवा रायपुर में चलेंगी ई-बसें’  

बैठक में एनआरडीए के अंतर्गत कंप्लायंट बैटरी ऑपरेटेड मोटर एसी-ई बसों के डिजाइन, प्रोक्योरमेंट, सप्लाई, परिचालन एवं संधारण के लिए ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर निविदा आमंत्रित किए जाने के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई। परियोजना के विभिन्न तकनीकी एवं क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं की समीक्षा की गई। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के कार्यालय सहित अन्य कार्यालय भवनों के निर्माण कार्य से संबंधित प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने परियोजना की आवश्यकताओं एवं निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की।

’रायगढ़ और जांजगीर-चांपा की सड़क परियोजनाओं पर चर्चा’  

लोक निर्माण विभाग द्वारा जिला रायगढ़ के अंतर्गत रायगढ़-पूंजीपथरा-घरघोड़ा फोरलेन मार्ग के निर्माण संबंधी प्रस्ताव पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। लगभग 37 किलोमीटर लंबाई वाले इस मार्ग के निर्माण से संबंधित तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों द्वारा परियोजना के लिए प्रभावित भूमि के अर्जन, भूमि व्यपवर्तन तथा निर्माण कार्य की तैयारियों की जानकारी दी गई। बैठक में जिला जांजगीर-चांपा के अंतर्गत लगभग 6.70 किलोमीटर लंबाई वाले अकलतरा बायपास मार्ग के निर्माण कार्य के प्रस्ताव पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। परियोजना से संबंधित तकनीकी एवं निर्माण संबंधी पहलुओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक प्रक्रिया के संबंध में चर्चा की गई।
 
बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव  भूवनेश यादव, ऊर्जा विभाग के सचिव सारांश मित्तर, एनआरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  चंदन कुमार सहित लोक निर्माण, वित्त एवं अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ली समाज कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ली समाज कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

 योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और हितग्राहियों तक समयबद्ध लाभ पहुंचाने के निर्देश

सियान गुड़ी एवं वृद्धाश्रमों में बेहतर सुविधाओं और नियमित मॉनिटरिंग पर जोर

रायपुर, 19 अगस्त 2026- समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज मंत्रालय में समाज कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना सुनिश्चित करें।

दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों के वितरण में तेजी लाएं 
बैठक में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों के वितरण, सियान गुड़ी एवं वृद्धाश्रमों में उपलब्ध सुविधाओं तथा हितग्राहीमूलक योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्री ने सहायक उपकरणों के वितरण में तेजी लाने तथा सियान गुड़ी एवं वृद्धाश्रमों में भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।

अधिकारियों को योजनाओं के नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने दिए निर्देश
 राजवाड़े ने कहा कि सुशासन सरकार समाज के प्रत्येक जरूरतमंद, दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिक को सम्मानपूर्ण जीवन और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ नियमित निरीक्षण एवं मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, संचालक रणवीर शर्मा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

ब्रेकिंग : पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, निरीक्षकों के हुए तबादले, SP ने जारी की लिस्ट…देखें सूची…..!!

ब्रेकिंग : पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, निरीक्षकों के हुए तबादले, SP ने जारी की लिस्ट…देखें सूची…..!!

 रायपुर। रायपुर ग्रामीण पुलिस में निरीक्षकों के तबादले हुए हैं। ग्रामीण एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने यह सूची जारी की है। जारी आदेश में 6 इंस्पेक्टर को नई जिम्मेदारी दी गई हैं।

देखें लिस्ट…..

एक जनवरी से राज्य के सभी अस्पतालों को डिजिटल करने का लक्ष्य लेकर करें काम: श्याम बिहारी जायसवाल

एक जनवरी से राज्य के सभी अस्पतालों को डिजिटल करने का लक्ष्य लेकर करें काम: श्याम बिहारी जायसवाल

 00 आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन कार्यशाला: छत्तीसगढ़ में 2.63 करोड़ नागरिकों के बने आभा, 12 हजार स्वास्थ्य संस्थान जुड़े

रायपुर। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन कार्यशाला का शुभारंभ किया। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में आयोजित आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम)की मॉडल डिस्ट्रिक्ट इनिशिएटिव कार्यशाला में राज्य की डिजिटल हेल्थ प्रगति की विस्तृत जानकारी साझा की गई। कार्यशाला में बताया गया कि एबीडीएम का सबसे नागरिक-केंद्रित हिस्सा आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) है, जिसके ज़रिए नागरिक अपनी जांच रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन और अन्य स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षितरख सकते हैं और अपनी सहमति से डॉक्टरों के साथ साझा कर सकते हैं। राज्य में अब तक 2.63 करोड़ नागरिकों के आभा बनाए जा चुके हैं।
डॉक्टरों और अस्पतालों की भी डिजिटल पहचान
स्वास्थ्य पेशेवरों के पंजीकरण के लिए बनी हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर) से राज्य में 34 हजार से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर जुड़ चुके हैं, जबकि हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर) के माध्यम से अस्पताल, क्लिनिक, लैब और ब्लड बैंक जैसे 12 हजार से अधिक स्वास्थ्य संस्थान नेटवर्क से जुड़ गए हैं।

क्लेम प्रोसेसिंग होगी आसान, कागज़ी निर्भरता घटेगी
कार्यशाला में कहा गया कि एबीडीएम - सक्षम एचएमआईएस के प्रभावी उपयोग से मरीज़ों का पूरा रिकॉर्ड-पंजीयन से लेकर उपचार और डिस्चार्ज तक-डिजिटल रूप में दर्ज होगा। इससे मेडिकल रिकॉर्ड की जांच आसान होगी, क्लेम प्रोसेसिंग में लगने वाला समय घटेगा और ऑडिट-वेरिफिकेशन अधिक व्यवस्थित होगा।
दूरदराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ज़ोर
छत्तीसगढ़ के बड़े भौगोलिक क्षेत्र और दुर्गम इलाकों को देखते हुए कार्यशाला में इस बात पर बल दिया गया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव, गरीब और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
डेटा सुरक्षा और विश्वास पर जोर
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एबीडीएम को केवल एक आईटी प्रोजेक्ट के रूप में नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र को बेहतर बनाने के माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए। नागरिकों की स्वास्थ्य जानकारी की सुरक्षा, गोपनीयता और सहमति-आधारित उपयोग को प्राथमिकता बताया गया।
आगे की प्राथमिकताएं
कार्यशाला में सात प्रमुख लक्ष्य तय किए गए — शेष स्वास्थ्य संस्थानों को एचएफआर से जोडऩा, अधिक डॉक्टरों-नर्सों को एचपीआर से जोडऩा, आभा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, एचएमआईएस का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना, रिकॉर्ड की गुणवत्ता बढ़ाना, सरकारी-निजी संस्थानों में समन्वय मजबूत करना, और ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचाना।
समापन में कहा गया कि लक्ष्य एक ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था बनाना है, जो हर नागरिक के लिए सरल, तेज़, पारदर्शी और उसके पुराने स्वास्थ्य रिकॉर्ड से जुड़ी हो।

इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयासरत है कि हम समय के अनुसार चलें और नई तकनीकों को अपनाएं। क्योंकि जब तक हम स्वयं जानकार नहीं होंगे, तब तक बेहतर मॉनिटरिंग संभव नहीं हो पाएगी। हमारा विभाग सतत रूप से इस दिशा में काम कर रहा है और अधिकारी-कर्मचारी लगातार मेहनत कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि सारे इलाज आभा के ज़रिए लिंक हो जाए, इसके लिए निजी अस्पतालों से भी डाटा शेयर होना बहुत ज़रूरी है । डिजिटल सिस्टम इस्तेमाल करने से हमारी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी । 
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के नए कार्ड में अब आभा आईडी को शामिल कर दिया गया है, जिससे मरीज़ों का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित और सुलभ बनेगा। अटल आरोग्य लैब की रिपोर्ट अब मरीज़ के मोबाइल पर सीधे भेजी जा रही है, ताकि उन्हें त्वरित जानकारी मिले। यह हमारी प्राथमिकता है और हमें यह करना ही है। उन्होंने कहा कि एक जनवरी से सभी कार्यों को ऑनलाइन करने के लक्ष्य को लेकर कार्य चल रहा है और इसके लिए हम मिशन मोड पर काम कर रहे हैं। हम का$फी हद तक इसमें सफल भी हो रहे हैं, और यह प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, एनएचए भारत सरकार के संचालक विक्रम पगारिया, राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सह संचालक संजीव झा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट मामले की सुनवाई के लिए बनेगा विशेष मेडिकल बोर्ड, त्वरित जांच कर दी जाएगी रिपोर्ट

फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट मामले की सुनवाई के लिए बनेगा विशेष मेडिकल बोर्ड, त्वरित जांच कर दी जाएगी रिपोर्ट

 00 समाज कल्याण मंत्री राजवाड़े व स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने ली संयुक्त बैठक
रायपुर।
दिव्यांगजनों, उभयलिंगी समुदाय तथा अन्य अंतर्विभागीय विषयों से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को महानदी भवन, मंत्रालय, अटल नगर में समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े एवं स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।
फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट प्रकरणों की होगी त्वरित जांच
बैठक में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत 186 व्यक्तियों से संबंधित प्रकरणों की जांच सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य मेडिकल बोर्ड अथवा संभागीय मेडिकल बोर्ड के माध्यम से कराए जाने पर चर्चा हुई। संबंधित व्यक्तियों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर परीक्षण कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने तथा निर्धारित समयान्तराल में दिव्यांगता की भौतिक जांच के लिए उपस्थित होने वाले व्यक्तियों के प्रकरणों की समीक्षा किए जाने पर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने बताया कि फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवाओं में कार्यरत व्यक्तियों की जांच के लिए राज्य मेडिकल एवं संभागीय मेडिकल बोर्ड में परीक्षण की प्रक्रिया को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।
दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड की प्रक्रिया होगी सुगम
बैठक में दिव्यांगजनों के दिव्यांगता प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने, मेडिकल बोर्ड में विषय- विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष मेडिकल बोर्ड एवं दिव्यांगता परीक्षण शिविर आयोजित करने पर चर्चा की गई। पात्र दिव्यांगजनों को समयबद्ध रूप से प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया। भारत सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप अस्थायी एवं स्थायी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। मेडिकल बोर्ड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी की स्थिति में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं लेने पर भी सहमति बनी।
उभयलिंगी समुदाय के कल्याण पर भी हुई चर्चा
बैठक में उभयलिंगी समुदाय के व्यक्तियों के लिए राज्य की सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी संबंधी सहायता तथा समय-सीमा में पात्र हितग्राहियों को लाभ प्रदान करने पर चर्चा हुई। स्क्रस् के लिए सहायता अनुदान संबंधी दिशा-निर्देशों में आवश्यक सर्जरी को शामिल किए जाने तथा निर्धारित दरों में वर्तमान बाजार दर के अनुरूप संशोधन की कार्यवाही पर विचार किया गया। राज्य के शासकीय अस्पतालों में उभयलिंगी व्यक्तियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पृथक ट्रांसजेंडर क्लीनिक/वार्ड की व्यवस्था किए जाने पर भी चर्चा हुई।
नशामुक्ति केंद्रों के सुदृढ़ीकरण पर जोर
बैठक में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित नशामुक्ति केंद्रों की समीक्षा की गई। मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के अनुरूप राज्य में संचालित नशामुक्ति केंद्रों के पंजीयन तथा मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण से संबंधित प्रक्रिया की समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नशामुक्ति केंद्रों में उपचाररत व्यक्तियों को दी जा रही दवाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने तथा केंद्रों के विस्तार एवं बेहतर संचालन पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, भिक्षुक, उभयलिंगी एवं नशा पीडि़त व्यक्तियों के पुनर्वास एवं संस्थागत संरक्षण के लिए संचालित शासकीय एवं अनुदान प्राप्त संस्थाओं में निवासरत हितग्राहियों के स्वास्थ्य परीक्षण की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सह संचालकसंजीव झा, समाज कल्याण विभाग के संचालक रणवीर शर्मा सहित दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति के 2 सितंबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों की मुख्य सचिव ने की समीक्षा

उपराष्ट्रपति के 2 सितंबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों की मुख्य सचिव ने की समीक्षा

 एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे उपराष्ट्रपति, व्यवस्थाओं को लेकर दिए निर्देश

रायपुर, 19 अगस्त 2026/ मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन के 2 सितंबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों के संबंध में राज्य स्तरीय अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपराष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा, प्रोटोकॉल, यातायात, चिकित्सा, स्वागत एवं कार्यक्रम स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति  सी. पी. राधाकृष्णन 2 सितंबर को रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे।

मुख्य सचिव ने दिए मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम के अनुसार व्यवस्था के निर्देश

मुख्य सचिव  विकासशील ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपराष्ट्रपति  सी. पी. राधाकृष्णन के प्रवास के दौरान सभी व्यवस्थाएं निर्धारित प्रोटोकॉल एवं मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक तथा वापसी के दौरान एंट्री एवं एग्जिट प्लान सहित सभी व्यवस्थाओं को बेहतर समन्वय के साथ अंतिम रूप देने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने एयरपोर्ट पर स्वागत व्यवस्था, रिसेप्शन लाइन, एम्स में रिसेप्शन एवं अन्य प्रोटोकॉल संबंधी व्यवस्थाओं के लिए रायपुर कलेक्टर को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने एयरपोर्ट एवं कार्यक्रम स्थल पर पुलिस की समुचित तैनाती तथा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा।

सुरक्षा, चिकित्सा और प्रकाश व्यवस्था पर विशेष जोर

मुख्य सचिव ने उपराष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए गृह विभाग को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही ठहरने की व्यवस्था, प्रकाश एवं विद्युत व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं तथा आकस्मिक चिकित्सा सहायता की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखते हुए सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा।

बैठक में कार्यक्रम की बैठक व्यवस्था भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल एवं प्राप्त डायस प्लान के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम के प्रारंभ में वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगान सहित निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया।

मुख्य सचिव ने एम्स प्रबंधन एवं अधिकारियों को भी दीक्षांत समारोह के आयोजन से संबंधित सभी व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश कुमार बंसल, रायपुर कमिश्नर  श्याम धावड़े, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल, सामान्य प्रशासन विभाग की उप सचिव अंशिका पांडेय, कलेक्टर रायपुर, आईजी रायपुर, एम्स रायपुर के चिकित्सा अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मिले 3 नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने नियुक्ति प्रस्ताव को दी मंजूरी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मिले 3 नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने नियुक्ति प्रस्ताव को दी मंजूरी

 रायपुर। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में तीन नए जजों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कॉलेजियम की 18 अगस्त 2026 को हुई बैठक में इन न्यायिक अधिकारियों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किए जाने की सिफारिश को मंजूरी दी गई।

इन न्यायिक अधिकारियों को छत्तीसगढ़ में मिली नियुक्ति

कॉलेजियम की मंजूरी के बाद जस्टिस संतोष शर्मा, जस्टिस सुषमा सावंत और जस्टिस सुधीर कुमार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज के तौर पर नियुक्त किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। कॉलेजियम ने बैठक में इन तीनों न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है।

 

नवा रायपुर में करेंसी डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर स्थापित करने की दिशा में पहल

नवा रायपुर में करेंसी डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर स्थापित करने की दिशा में पहल

 वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी से RBI महाप्रबंधक ने की मुलाकात

रायपुर- वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी से रायपुर स्थित उनके निवास पर भारतीय रिज़र्व बैंक, रायपुर कार्यालय के महाप्रबंधक  मनीष पराशर ने शिष्टाचार भेंट की। प्रभारी अधिकारी का कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात हुई इस मुलाकात में छत्तीसगढ़ में बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं के विस्तार, मुद्रा प्रबंधन तथा भारतीय रिज़र्व बैंक से संबंधित विभिन्न विषयों पर सकारात्मक एवं सार्थक चर्चा हुई।

बैठक के दौरान वर्तमान में नागपुर से होने वाले करेंसी डिस्ट्रीब्यूशन को नवा रायपुर में स्थापित करने की दिशा में की जा रही महत्वपूर्ण पहल पर भी चर्चा हुई। नवा रायपुर में करेंसी डिस्ट्रीब्यूशन की व्यवस्था विकसित होने से राज्य में मुद्रा प्रबंधन और बैंकिंग सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

पराशर ने वित्त मंत्री को राज्य में बैंकिंग सेवाओं तथा मुद्रा प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस दौरान भारतीय रिज़र्व बैंक, रायपुर कार्यालय में हाल ही में प्रारंभ की गई सॉइल्ड नोट्स के स्थानीय प्रसंस्करण की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी साझा की गई। इस सुविधा से प्रचलन से वापस प्राप्त अनुपयोगी एवं खराब हो चुके नोटों का प्रसंस्करण अब स्थानीय स्तर पर किया जा सकेगा।मुलाकात के दौरान भारतीय रिज़र्व बैंक की प्रस्तावित नवीन आवासीय परियोजना तथा इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। 

वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने इन पहलों की जानकारी प्राप्त करते हुए राज्य शासन की बैंकिंग प्रणाली से जुड़ी अपेक्षाओं को साझा किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक एवं राज्य शासन के बीच निरंतर सहयोग और बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर श्री प्रदीप गोंधुले,  अमरेन्द्र गुप्ता एव अमितेश सिंह उपस्थित रहे।

 

CG – चेन स्नेचिंग गैंग का आतंक! मॉर्निंग वॉक पर निकली महिला से सोने की चेन लूटी, कार सवार फरार…

CG – चेन स्नेचिंग गैंग का आतंक! मॉर्निंग वॉक पर निकली महिला से सोने की चेन लूटी, कार सवार फरार…

 धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में चेन स्नेचिंग की वारदात से हड़कंप मच गया है। मॉर्निंग वॉक पर निकली एक महिला को कार सवार बदमाशों ने अपना निशाना बनाया। बदमाश महिला के गले से सोने की चेन झपटकर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

ज्योग्राफिक मैप्स और जीपीएस गाइड एक्सप्लोर करना

बताया जा रहा है कि गुजरा गांव की रहने वाली बिंदा बाई साहू रोज की तरह आज सुबह टहलने के लिए निकली हुई थीं। इसी दौरान एक कार में सवार दो आरोपी उनके पास आए और पता पूछने के बहाने अपनी बातों में उलझाया। महिला कुछ समझ पाती इससे पहले ही धोखे से उसके गले से सोने की चेन को झपटकर रायपुर की तरह फरार हो गए।

CCTV फुटेज खंगालने में जुटी पुलिस

इस वारदात के बाद महिला पूरी तरह से दहशत में आ गई। बाद में हिम्मत जुटाकर उन्होंने इसकी शिकायत भखारा थाने में दर्ज कराई। बताया जा रहा है कि छीनी गई सोने की चेन की कीमत लगभग 30 हजार रुपये है। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और आसपास लगे CCTV फुटेज को खंगाला जा रहा है।

पुलिस ने किया जल्द गिरफ्तारी का दावा

पुलिस का कहना है कि जल्द ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए बड़ी खबर, क्रमोन्नति वेतनमान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये निर्देश….

छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए बड़ी खबर, क्रमोन्नति वेतनमान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये निर्देश….

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पंचायत संवर्ग के शिक्षकों को कमोन्नति वेतनमान (टाइम-बाउंड पे स्केल) दिलाने की लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में मंगलवार को महत्वपूर्ण मोड़ आया। वर्ष 1998 और 2005 में नियुक्त शिक्षकों तथा नगरीय निकायों में कार्यरत शिक्षकों से जुड़े मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में हुई। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन मसीह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद प्रकरण को पुनः छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय भेज दिया है। उच्च न्यायालय अब मामले की नए सिरे से सुनवाई करेगा।

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की छूट

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट भी दी है कि यदि हाईकोर्ट के नए फैसले से वे संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे आवश्यकतानुसार दोबारा सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं। इस फैसले को प्रदेश के हजारों पंचायत संवर्ग शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षक लंबे समय से कमोन्नति वेतनमान की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब मामले की नए सिरे से सुनवाई हाईकोर्ट में होगी।

सात याचिकाओं पर हुई सुनवाई

गौरतलब है कि कमोन्नति वेतनमान से जुड़े इस मामले में कुल सात याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई थीं। इनमें वर्ष 1998 और 2005 में नियुक्त पंचायत संवर्ग के शिक्षकों के साथ नगरीय निकायों में कार्यरत शिक्षकों से संबंधित मामले भी शामिल हैं। अब सभी की निगाहें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद मामले की आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

संस्कृति विभाग द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के लिए 31 अगस्त तक आवेदन आमंत्रित

संस्कृति विभाग द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के लिए 31 अगस्त तक आवेदन आमंत्रित

 रायपुर: छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के अंतर्गत प्रदेश के लोक कलाकारों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। योजना का उद्देश्य पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना, कलाकारों का सम्मान बढ़ाना तथा कला दलों के सतत विकास को नई गति प्रदान करना है।

योजना के अंतर्गत नृत्य-संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कलाकार, छत्तीसगढ़ी पाक कला (पारंपरिक व्यंजन) तथा छत्तीसगढ़ी सौंदर्यकला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजे जाएंगे। आवेदन प्रपत्र विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं तथा संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर स्थित कार्यालय से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

योजना के तहत पात्र कलाकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य होगा। चयनित कलाकारों को प्रतिवर्ष न्यूनतम 12 हजार रुपये से अधिकतम 24 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि ई-पेमेंट के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह राशि एक वित्तीय वर्ष में एक बार प्रदान की जाएगी।

योजना का लाभ केवल ऐसे कलाकारों को मिलेगा जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 96 हजार रुपये से अधिक नहीं है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ बैंक खाते का विवरण, आईएफएससी कोड तथा पैन कार्ड की छायाप्रति भी प्रस्तुत करनी होगी।

प्रविष्टियां भेजने का पता –

संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय,
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, व्यावसायिक परिसर,
द्वितीय तल, सेक्टर-27, नया रायपुर, अटल नगर (छत्तीसगढ़) – 492018

ज्योग्राफिक मैप्स और जीपीएस गाइड एक्सप्लोर करना

प्रविष्टियां प्राप्त होने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन भेजते समय लिफाफे पर मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 स्पष्ट रूप से अंकित करना आवश्यक होगा। प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण समिति द्वारा किया जाएगा तथा समिति का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।

मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना प्रदेश की समृद्ध लोक कला परंपराओं के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से लोक कलाकारों को न केवल आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी प्राप्त होगा।

तेंदूपत्ता सहित वनोपज के बेहतर विपणन पर सरकार का जोर- वन मंत्री केदार कश्यप

तेंदूपत्ता सहित वनोपज के बेहतर विपणन पर सरकार का जोर- वन मंत्री केदार कश्यप

 रायपुर: वन मंत्री  केदार कश्यप की अध्यक्षता में आज वनोपज राजकीय व्यापार अंतर्विभागीय समिति(आईडीसी) की 321वीं बैठक आयोजित हुई। यह बैठक नया रायपुर स्थित मंत्री  कश्यप के निवास/ कार्यालय में आयोजित थी। बैठक में वर्ष 2026 में संग्रहित एवं गोदामीकृत तेंदूपत्तों के विक्रय के लिए द्वितीय चरण की कार्यवाही तथा वर्ष 2025 सीजन के क्रेता करारनामा समाप्त तेंदूपत्ता लॉट के विक्रय के लिए प्राप्त निविदाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुवा, वन बल प्रमुख अरूण कुमार पाण्डेय, सचिव अमरनाथ, मुख्य वन संरक्षक  कोशलेन्द्र कुमार, मुख्य वनसंरक्षक संजीता गुप्ता, कार्यकारी निदेशक वन  एस.वेंकटचलम् सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में 4 अगस्त 2026 को आमंत्रित निविदाओं में प्राप्त दरों के अनुमोदन से संबंधित प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। वन मंत्री  केदार कश्यप ने वनोपज के बेहतर प्रबंधन, पारदर्शी प्रक्रिया और संग्रहणकर्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए तेंदूपत्ता सहित अन्य वनोपज के प्रभावी विपणन पर जोर दिया।

*संग्राहकों के हितों को प्राथमिकता*

राज्य सरकार द्वारा वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों की आजीविका को मजबूत करने के लिए लघु वनोपज के संग्रहण और विपणन को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े परिवारों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिले, इसके लिए शासन द्वारा संग्रहण मूल्य, विपणन व्यवस्था और भुगतान प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया गया है। बैठक में तेंदूपत्ते के भंडारण, लॉटवार विक्रय और प्राप्त निविदा दरों सहित विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि संग्रहित वनोपज का समयबद्ध और बेहतर तरीके से विक्रय किया जा सके।

*वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा*

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार वनवासियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लघु वनोपज आधारित गतिविधियों को प्राथमिकता दे रही है। वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वनोपज के संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक की व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। इससे वनांचल के लोगों को रोजगार और आय के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।

विष्णुभोग की खुशबू और बहनों के हुनर से सजी खास राखी, बिहान समूह की महिलाओं ने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को भेंट किया विष्णुभोग चावल और धान से बनी राखी…

विष्णुभोग की खुशबू और बहनों के हुनर से सजी खास राखी, बिहान समूह की महिलाओं ने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को भेंट किया विष्णुभोग चावल और धान से बनी राखी…

 रायपुर: गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की बिहान महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें जिले की पहचान विष्णुभोग चावल तथा विष्णुभोग धान से तैयार की गई विशेष राखी भेंट की

स्थानीय संसाधनों से तैयार इन उत्पादों को देखकर श्री साहू ने बिहान समूह की महिलाओं की रचनात्मकता, मेहनत और आत्मनिर्भरता की भावना की सराहना की। उन्होंने महिलाओं द्वारा स्थानीय उत्पादों को नए रूप में प्रस्तुत कर आजीविका के अवसर तैयार करने की पहल को प्रेरणादायी बताया।

*विष्णुभोग धान से बनी राखी बनी आकर्षण का केन्द्र*

बिहान समूह की महिलाओं द्वारा विष्णुभोग धान से तैयार की गई विशेष राखी स्थानीय संस्कृति, रचनात्मकता और महिला सशक्तिकरण का अनूठा संगम है। पारंपरिक पर्व रक्षाबंधन को जिले के स्थानीय कृषि उत्पाद से जोड़ते हुए तैयार की गई यह राखी न केवल एक हस्तनिर्मित उत्पाद है, बल्कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और ग्रामीण महिलाओं की उद्यमशीलता का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है।

विष्णुभोग धान जिले की विशिष्ट पहचान से जुड़ा उत्पाद है। महिलाओं ने इसी स्थानीय पहचान को अपनी रचनात्मकता से जोड़कर एक ऐसा उत्पाद तैयार किया है, जो स्थानीय संस्कृति और आजीविका दोनों को एक साथ बढ़ावा देता है।

*स्थानीय संसाधनों से रोजगार और अतिरिक्त आय की राह*

बिहान से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं तथा वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।

विष्णुभोग चावल और उससे जुड़े स्थानीय उत्पादों को आकर्षक स्वरूप देकर बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महिला समूहों की पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की क्षमता रखती है। ऐसी गतिविधियां महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

*महिला सशक्तिकरण और स्थानीय पहचान का सुंदर संगम*

विष्णुभोग धान से तैयार विशेष राखी यह संदेश देती है कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक पहचान को रचनात्मकता से जोड़कर आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। बिहान समूह की महिलाओं की यह पहल महिला सशक्तिकरण, स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

रिमझिम फुहारों के बीच खेल प्रतिभाओं ने भरी उड़ान, 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ….

रिमझिम फुहारों के बीच खेल प्रतिभाओं ने भरी उड़ान, 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ….

 रायपुर: रिमझिम फुहारों के बीच खुशनुमा और उत्साहपूर्ण माहौल में मंगलवार को पेण्ड्रा के फिजिकल कॉलेज मैदान में 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू ने ध्वजारोहण कर 18 से 21 अगस्त तक चलने वाली चार दिवसीय प्रतियोगिता के विधिवत शुभारंभ की घोषणा की। उद्घाटन समारोह में खेल प्रतिभाओं के उत्साह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आकर्षक मार्चपास्ट ने पूरे वातावरण को खेलमय बना दिया।

प्रतियोगिता में प्रदेश के पांचों संभागों रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा से 14 से 19 वर्ष आयु वर्ग के कुल 540 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। विभिन्न खेल विधाओं में प्रतिभागी अपनी खेल प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन करेंगे।

*खेल भावना और अनुशासन के साथ खेलने की दिलाई शपथ*

भौगोलिक संदर्भ

उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को खेल नियमों का पूर्ण पालन करते हुए सच्चे अनुशासन, निष्ठा और खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने की शपथ दिलाई। उन्होंने खिलाड़ियों से अपने खेल के गौरव, राज्य के सम्मान और खेल भावना की उच्च परंपराओं को अक्षुण्ण रखने का आह्वान किया।

उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल सभी खिलाड़ियों एवं अतिथियों का जीपीएम की धरती पर स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि अब खेल को देखने का नजरिया बदल गया है। खेल में हम या तो जीतते हैं या सीखते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल को ऐसे खेलें कि वह पढ़ाई बन जाए और पढ़ाई को ऐसे पढ़ें कि वह खेल बन जाए।

श्री साहू ने खिलाड़ियों को तनाव और अवसाद से मुक्त होकर पूरे आत्मविश्वास, अनुशासन और खेल भावना के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता में जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास, धैर्य और संघर्ष की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

*चार खेल विधाओं में प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे 540 खिलाड़ी*

चार दिवसीय राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जिम्नास्टिक, कबड्डी, क्रिकेट और ताइक्वांडो की स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं। जिम्नास्टिक में बालक एवं बालिका, कबड्डी में बालिका, क्रिकेट में बालक तथा ताइक्वांडो में बालक एवं बालिका खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।

प्रतियोगिता के अंतर्गत जिम्नास्टिक की स्पर्धाएं जिम्नास्टिक हॉल, गुरुकुल गौरेला, क्रिकेट की स्पर्धाएं फिजिकल कॉलेज मैदान, गुरुकुल पेण्ड्रा, ताइक्वांडो की स्पर्धाएं जनपद सभागार पेण्ड्रा तथा कबड्डी की स्पर्धाएं कबड्डी प्रशिक्षण केन्द्र पेण्ड्रा में आयोजित की जा रही हैं।

*रंग-बिरंगी पोशाकों में खिलाड़ियों का आकर्षक मार्चपास्ट*

उद्घाटन समारोह का सबसे आकर्षक दृश्य पांचों संभागों से आए खिलाड़ियों का मार्चपास्ट रहा। केसरिया, पीला, नीला, हरा, लाल और सफेद रंग की आकर्षक पोशाकों में सजे खिलाड़ियों की टुकड़ियों ने पूरे अनुशासन और उत्साह के साथ मार्चपास्ट किया। खिलाड़ियों के जोश और उमंग से पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

इस अवसर पर स्कूली छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति देकर समारोह में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और विद्यार्थियों की प्रतिभा का सुंदर प्रदर्शन किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया।

*फिजिकल कॉलेज मैदान में बनेगा भव्य मंच*

कार्यक्रम के दौरान कोटा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री अटल श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए प्रतियोगिता की सफलता की कामना की।

फिजिकल कॉलेज मैदान पेण्ड्रा में भविष्य में आयोजित होने वाले खेल एवं अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए सुंदर, सुसज्जित और बड़े मंच के निर्माण की घोषणा भी की गई। सांसद सह केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने 10 लाख रुपये तथा विधायक श्री अटल श्रीवास्तव ने 5 लाख रुपये, इस प्रकार कुल 15 लाख रुपये देने की घोषणा की। इस घोषणा का उपस्थित लोगों ने स्वागत किया।

*खिलाड़ियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर*

कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने प्रतियोगिता में शामिल सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रतियोगिता की सफलता की कामना की। उन्होंने आयोजन से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों की सुविधा, सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रतियोगिता से संबंधित खेल प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। आयोजक मंडल की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

*खेल प्रतिभाओं के लिए राज्य स्तरीय मंच*

26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए स्कूली खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रही है। चार दिनों तक चलने वाली विभिन्न खेल स्पर्धाओं में खिलाड़ी न केवल अपनी खेल क्षमता का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि अनुशासन, टीम भावना, प्रतिस्पर्धा और खेल भावना की सीख भी प्राप्त करेंगे।

उद्घाटन समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा श्री राकेश जालान, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद गौरेला श्री मुकेश दुबे, जनपद पंचायत गौरेला अध्यक्ष श्री शिवनाथ बघेल, जनपद पंचायत मरवाही अध्यक्ष श्रीमती जानकी कुशरो, पुलिस अधीक्षक श्री मनोज खिलारी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे, जिला शिक्षा अधिकारी श्री रजनीश तिवारी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, अधिकारी-कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि एवं प्रतिभागी खिलाड़ी उपस्थित रहे।

वर्षा ऋतु की मनोहारी छटा से सजेगा ‘पावस प्रसंग’, शास्त्रीय नृत्य-संगीत की प्रस्तुतियां 21 से 25 अगस्त तक…..

वर्षा ऋतु की मनोहारी छटा से सजेगा ‘पावस प्रसंग’, शास्त्रीय नृत्य-संगीत की प्रस्तुतियां 21 से 25 अगस्त तक…..

 रायपुर: संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कला, संस्कृति और शास्त्रीय परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘विभागीय आयोजन 2026’ की श्रृंखला के अंतर्गत विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम  ‘पावस प्रसंग’ का आयोजन किया जा रहा है। वर्षा ऋतु की सौंदर्यपूर्ण अनुभूतियों और भारतीय शास्त्रीय कला परंपरा को केंद्र में रखकर आयोजित यह कार्यक्रम  21, 22, 24 एवं 25 अगस्त को रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा। कार्यक्रम प्रतिदिन  शाम 7 बजे से प्रारंभ होगा।

‘पावस प्रसंग’ में वर्षा ऋतु की प्राकृतिक सुंदरता, उमंग, उल्लास और संवेदनाओं को शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाएगा। भारतीय कला परंपरा में वर्षा ऋतु का विशेष महत्व रहा है। बादलों की गड़गड़ाहट, वर्षा की रिमझिम, प्रकृति में नवजीवन का संचार और मन में जागृत होने वाले विविध भावों को कलाकार अपनी नृत्य मुद्राओं, भावाभिव्यक्ति और सुरों के माध्यम से जीवंत करते हैं। इसी समृद्ध सांस्कृतिक भावभूमि को ‘पावस प्रसंग’ के माध्यम से दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

संस्कृति विभाग की इस पहल का उद्देश्य शास्त्रीय कला विधाओं को प्रोत्साहित करने के साथ ही आमजन को उच्चस्तरीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जोड़ना है। मुक्ताकाशी मंच का वातावरण इन प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावशाली बनाएगा, जहां दर्शक  भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियों का आनंद ले सकेंगे।

‘पावस प्रसंग’ वर्षा ऋतु की सांस्कृतिक और कलात्मक अनुभूति को केंद्र में रखकर आयोजित होने वाला विशेष आयोजन है। इसमें प्रकृति और मानवीय भावनाओं के बीच के गहरे संबंध को कला के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। शास्त्रीय नृत्य की भावपूर्ण मुद्राओं और संगीत की मधुर स्वर-लहरियों के माध्यम से वर्षा के विभिन्न रंगों और संवेदनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा।

संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026 में आयोजित की जा रही विभागीय आयोजनों की श्रृंखला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ सहित देश की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं को मंच प्रदान करना तथा कलाकारों और दर्शकों के बीच जीवंत  सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना है। इसी कड़ी में ‘पावस प्रसंग’ शास्त्रीय कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

’संस्कृति और कला प्रेमियों से सहभागिता का आह्वान’

संस्कृति विभाग ने कला एवं संस्कृति प्रेमियों से ‘पावस प्रसंग’ में सहभागी बनने का आह्वान किया है। चार दिनों तक आयोजित होने वाला यह सांस्कृतिक आयोजन रायपुर में वर्षा ऋतु की प्राकृतिक अनुभूति को भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की सौंदर्यपूर्ण अभिव्यक्ति से जोड़ते हुए कला प्रेमियों के लिए यादगार अनुभव प्रस्तुत करेगा।

CG Weather Today: छत्तीसगढ़ में फिर बदला मौसम, रायपुर समेत कई जिलों में बारिश; आज भारी बारिश का अलर्ट

CG Weather Today: छत्तीसगढ़ में फिर बदला मौसम, रायपुर समेत कई जिलों में बारिश; आज भारी बारिश का अलर्ट

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता लगातार बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के असर से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। रायपुर समेत कई जिलों में मंगलवार को गरज-चमक के साथ बारिश हुई। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को भी प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की भी संभावना है।

रायपुर का मौसम:
राजधानी रायपुर में बुधवार को दिनभर बादल छाए रहने के आसार हैं। शहर के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने अधिकतम तापमान 27 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान जताया है।

बीते 24 घंटे में कहां कितनी बारिश:
पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ में कई जगहों पर अच्छी बारिश हुई। सरगुजा और रायपुर संभाग के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।

बागबाहरा में सबसे ज्यादा 14 सेमी पानी गिरा।

महासमुंद, छुरा, राजिम और कोमाखान में 11-11 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा आरंग, भटगांव, भाखरा और लटोरी में 9-9 सेमी तथा कुरूद, प्रतापपुर और गरियाबंद में 8-8 सेमी बारिश हुई।

क्यों हो रही है लगातार बारिश:
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और उससे लगे इलाकों में बने सिस्टम के साथ मानसून द्रोणिका की सक्रियता का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर पड़ रहा है। झारखंड और उसके आसपास बना अवदाब भी धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। इन मौसमी परिस्थितियों के चलते प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं।

आज कैसा रहेगा मौसम:
बुधवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। वहीं एक-दो स्थानों पर भारी से अतिभारी वर्षा हो सकती है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर बने रहने की संभावना जताई है।

 

राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक, मुख्य सचिव विकासशील ने दिए सड़क सुरक्षा उपायों के बेहतर क्रियान्वयन के निर्देश

राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक, मुख्य सचिव विकासशील ने दिए सड़क सुरक्षा उपायों के बेहतर क्रियान्वयन के निर्देश

 रायपुर। मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश में किए गए कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक के मुख्य बिंदु एवं निर्देश
दुर्घटना में घायलों का इलाज प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही 108 एम्बुलेंस की समय पर उपलब्धता की सख्त मॉनिटरिंग और ट्रामा सेंटरों को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। सड़क दुर्घटना के घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले नेक नागरिकों (गुड सेमेरिटन) को यथाशीघ्र प्रोत्साहन एवं सम्मान राशि प्रदान करने के निर्देश दिए गए।

दुर्घटनाओं के कारणों का गहन विश्लेषण कर विशेष कार्ययोजना तैयार करने निर्देश
अधिक दुर्घटना वाले 8 जिलों पर विशेष फोकस किया गया, जिनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार, सरगुजा और जगदलपुर (बस्तर) जिलों में दुर्घटनाओं के कारणों का गहन विश्लेषण कर विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
दुर्घटनाओं में कमी लाने सड़क निर्माण के पूर्व ही डिजाइन सही बनाएं
ब्लैक स्पॉट्स का सुधार एवं विश्लेषण के निर्देश दिए गए। लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई को ब्लैक स्पॉट्स में समय-सीमा के भीतर सुधार करने और सुधार के बाद दुर्घटनाओं में आई कमी का विश्लेषण करने का निर्देश दिया गया। मुख्य सचिव ने जोर दिया कि बाद में सुधार करने से बेहतर है कि सड़कों की शुरुआती डिजाइन ही सही हो। सड़कों पर आवारा पशुओं के विचरण को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों को यातायात जागरूकता से जोड़े
सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों में रोड क्लब गठित करने और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सुगम यातायात प्रबंधन से जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बनी रहे। सभी जिलों के कलेक्टरों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने और मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए।
बैठक की शुरुआत में परिवहन सचिव श्री एस. प्रकाश ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात) श्री प्रदीप गुप्ता सहित लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य, जनसंपर्क और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बस्तर में कनेक्टीविटी बढ़ाने विशेष जोर, सड़कों और पुल-पुलियों के काम दिसम्बर तक पूर्ण करने के निर्देश

बस्तर में कनेक्टीविटी बढ़ाने विशेष जोर, सड़कों और पुल-पुलियों के काम दिसम्बर तक पूर्ण करने के निर्देश

 00 लोक निर्माण विभाग के सचिव ने अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक लेकर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की
00 कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण कर कार्यों में तेजी लाने कहा, हर 15 दिनों में करें प्रगति की समीक्षा
00 सभी ठेकेदारों को 10 सितम्बर तक कार्य प्रगति दिखाने कहा, काम नहीं करने वालों को ब्लैकलिस्ट कर अनुबंध निरस्त करने के निर्देश
रायपुर।
राज्य शासन बस्तर में सड़क कनेक्टीविटी के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। बस्तर संभाग के सभी जिलों में निर्माणाधीन सड़कों और पुल-पुलियों की प्रगति की लगातार समीक्षा के साथ ही इन्हें तेजी से पूर्ण करने कार्यों की गहन मॉनिटरिंग की जा रही है। लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ बस्तर परिक्षेत्र के अभियंताओं और ठेकेदारों की बैठक लेकर निर्माणाधीन सड़कों, पुल-पुलियों और भवनों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में भारत सरकार के आर.आर.पी. और आर.सी.पी.एल.डब्लू.ई.ए. के अंतर्गत प्रगतिरत सड़कों और पुल-पुलियों को आगामी दिसम्बर माह तक पूर्ण करने के निर्देश दिए।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने नवा रायपुर में पीडब्लूडी मुख्यालय निर्माण भवन में आयोजित बैठक में अधिकारियों को सभी कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने हर 15 दिनों में प्रगति की समीक्षा करने को कहा। उन्होंने बैठक में ठेकेदारों से चर्चा कर कार्यस्थलों में आ रही समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने इनके त्वरित निराकरण के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया। श्री बंसल ने लोक निर्माण विभाग के बस्तर परिक्षेत्र के सभी 9 संभागों में काम कर रहे ठेकेदारों को 10 सितम्बर तक कार्य प्रगति दिखाने को कहा। उन्होंने निर्माण कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वालों को ब्लैकलिस्ट कर उनके अनुबंध निरस्त करने के निर्देश दिए।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में सभी मैदानी अधिकारियों को सप्ताह में दो-तीन दिन कार्यस्थलों का दौरा कर निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों से समन्वय कर टाइमलाइन के अनुसार कार्यों की प्रगति भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की जांच कर नियमित भुगतान भी करने को कहा। श्री बंसल ने अनुबंध के अनुसार कार्यक्षेत्रों में सभी ठेकेदारों से प्लांट व मशीनरी लगवाने को कहा। उन्होंने प्लांट व मशीनरी नहीं लगाने वाले ठेकेदारों पर नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
विभागीय सचिव ने बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के प्राथमिकता वाले कार्यों के प्राक्कलन सबमिशन की जानकारी ली। उन्होंने द्रुतगामी सड़कों तथा पहुंचविहीन गांवों को जोडऩे के लिए प्रस्तावित सड़कों व पुलों के प्राक्कलन की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने स्वीकृत नए कार्यों में भू-अर्जन और वन-व्यपवर्तन के लंबित मामलों की जानकारी शासन को भेजने के निर्देश दिए, ताकि इनके निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर से की जा सके। उन्होंने निर्माण कार्यों, आयोजनों एवं कार्यक्रमों के बिलों का भुगतान तत्परता से एक माह के भीतर सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सभी संभागों में अनुकंपा नियुक्ति, पेंशन, विभागीय जांच तथा न्यायालयीन मामलों के निपटारे की प्रगति की भी समीक्षा की।
बंसल ने बरसात के बाद पेच रिपेयर के कार्यों को युद्धस्तर पर शुरू करने 30 सितम्बर तक एजेंसियों के निर्धारिण के लिए निविदा की प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सुचारू आवागमन के लिए सड़कों के गड्ढों को तत्काल भरने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों के माध्यम से परफॉमेंस गांरटी वाली सड़कों की भी तत्परता से मरम्मत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्षा ऋतु की समाप्ति के बाद बाढ़ एवं अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुल-पुलियों की स्थायी मरम्मत के काम सर्वोच्च प्राथमिकता से करने को कहा।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, सेवा सेतु तथा लोक सेवा गांरटी के प्रकरणों को भी समय-सीमा में सक्रियता से निराकृत करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी, अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव, उप सचिव सुश्री अंशिका पाण्डेय, बस्तर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री एम.एल. उरांव, सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री एस.के. कोरी, विद्युत एवं यांत्रिकी के मुख्य अभियंता श्री टी.आर. कुंजाम, अधीक्षण अभियंता श्री संजय सूर्यवंशी, श्री डी.के. माहेश्वरी और सुरेश भूपल सहित बस्तर परिक्षेत्र के सभी 9 संभागों के कार्यपालन अभियंता एवं अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।