रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के नारायणा एमएमआई अस्पताल पहुंचकर जशपुर विधायक रायमुनि भगत से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री साय ने चिकित्सकों से भगत के स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
प्रदेश में 51 हजार 80 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम जारी
नए रेल कॉरिडोर से माल ढुलाई, औद्योगिक कनेक्टिविटी और आदिवासी अंचलों के विकास को मिलेगी गति
धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायुपर
रायपुर,--

छत्तीसगढ़ में आधारभूत रेल अधोसंरचना का तेजी से विकास हो रहा है, जिसका लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक तक पहुंच रहा है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित रेलवे स्टेशनों के विकसित होने से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। बेहतर प्रतीक्षालय, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, स्वच्छ परिसर, आधुनिक यात्री सुविधाएं तथा उन्नत अधोसंरचना से आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण रेल सेवाएं उपलब्ध होंगी।

देश के प्रमुख औद्योगिक और खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल छत्तीसगढ़ में रेलवे नेटवर्क का विस्तार अब राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की जरूरतों से जुड़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। छत्तीसगढ़ मध्य भारत का महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स केंद्र है। ऐसे में मजबूत रेल नेटवर्क प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। रेलवे के विकास से उद्योगों की परिवहन लागत कम होगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे तथा युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री श्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। प्रदेश में नई रेल परियोजनाओं, दोहरीकरण, विद्युतीकरण तथा आधुनिक रेलवे सुविधाओं के विस्तार से विकास को नई दिशा मिल रही है। यह परिवर्तन विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास से छत्तीसगढ़ में रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के रेलवे बजट का आवंटन बढ़ाकर 7,470 करोड़ रुपये कर दिया है जो वर्ष 2009-14 के दौरान औसतन 311 करोड़ रुपये सालाना था। इस तरह वार्षिक औसत आवंटन में करीब 24 गुना वृद्धि हुई है। इस निवेश का प्रमुख उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर दबाव कम करना, खनिज और औद्योगिक माल की आवाजाही बढ़ाना तथा उन क्षेत्रों तक रेल संपर्क पहुंचाना है, जहां अब तक कनेक्टिविटी सीमित रही है।
राष्ट्रीय माल ढुलाई को मिलेगा वैकल्पिक रेल मार्ग
छत्तीसगढ़ की रेल रणनीति में खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल कॉरिडोर महत्वपूर्ण है। करीब 278 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2025 में मंजूर दी थी। तब इस परियोजना की लागत 8,741 करोड़ रुपये अनुमानित थी। बाद में इसमें संशोधन किया गया और इसकी अनुमानित लागत 7,854 करोड़ रुपये कर दी गई। इस परियोजना का उद्देश्य बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग के व्यस्त रेल खंडों को बाईपास कर माल और यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेल लाईन बिछाना है। इस कॉरिडोर से कोलकाता-मुंबई रेल मार्ग पर परिचालन का दबाव कम करने और बलौदाबाजार सहित नए औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क देने की योजना है। इससे कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योगों के लिए माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी और सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।साथ ही, मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होने से औद्योगिक इकाइयों को बाजारों तथा बंदरगाहों तक आसानी से पहुंचने में मदद मिलेगी।
बस्तर की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
रेल नेटवर्क के विस्तार का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू बस्तर की कनेक्टिविटी है। रावघाट-जगदलपुर (140 किमी)की महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है। जबकि किरंदुल-कोत्तागुडेम (180 किमी) तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) की 490 किलोमीटर नई रेल लाइन परियोजना का सर्वे कार्य प्रगति पर। दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के तहत दल्लीराजहरा से अंतागढ़ (77 किमी) तक रेल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। इस रेलखंड पर यात्री रेल सेवा प्रारंभ होने से हजारों ग्रामीण पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़े हैं। इस परियोजना के अगले चरण में रावघाट तक संपर्क विकसित करने का काम चल रहा है। परियोजना पूरी होने पर रावघाट की लौह अयस्क खदानें सीधे भिलाई इस्पात संयंत्र से जुड़ जाएंगी, जिससे उद्योगों और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को नई मजबूती मिलेगी। वहीं कोत्तावलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण से बस्तर क्षेत्र में माल एवं यात्री परिवहन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
कटघोरा से डोंगरगढ़ तक नए संपर्क की योजना
प्रस्तावित कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन की लंबाई करीब 295 किलोमीटर है। यह मार्ग कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित है। परियोजना को रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित करने की योजना है। इसके लिए स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) गठित करने का प्रस्ताव है। इस रेल लाइन का महत्व उन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने में है, जहां अभी रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है या सीमित है। इससे यात्रियों की आवाजाही, कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए भी नई परियोजनाएं
सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा (301 किलोमीटर) और अंबिकापुर-बरवाडीह (200 किलोमीटर) रेल कॉरिडोर को भी रेल मंत्रालय द्वारा जल्दी ही मंजूर किए जाने की संभावना है। अगस्त 2026 में इन प्रस्तावों पर जल्दी निर्णय और सर्वेक्षण की प्रक्रिया तेज करने का मुद्दा उठाया गया था। इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल संपर्क व्यवस्था मजबूती होगी तथा व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
स्टेशनों का आधुनिकीकरण
छत्तीसगढ़ में नई रेल लाइनों के साथ मौजूदा नेटवर्क और स्टेशनों को आधुनिक बनाने पर भी काम किया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को करीब 1,680 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रियों के लिए सुविधाएं बेहतर करना और स्टेशन परिसरों को अधिक व्यवस्थित बनाना है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रेल अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण हो रहा है और इसका प्रत्यक्ष लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चांपा, बालोद एवं सरोना रेलवे स्टेशनों का प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल लोकार्पण प्रदेश के रेल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस जनहितकारी पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का सशक्त आधार है। चांपा, बालोद और सरोना जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों के उन्नयन से व्यापार, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। इससे लोगों के लिए आवागमन अधिक सुगम होगा और रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न गरबा महोत्सवों और दुर्गा पूजा आयोजनों में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए मां आदिशक्ति से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि नवरात्रि शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना का महापर्व होने के साथ हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक एकता और मातृशक्ति के सम्मान का उत्सव भी है। गरबा और दुर्गा पूजा जैसे आयोजन हमारी आस्था और परंपराओं को जीवंत रखते हुए समाज को प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के सूत्र में जोड़ते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने माना बाजार सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति तथा सार्वजनिक श्री श्री दुर्गा पूजा समिति द्वारा स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना की। उन्होंने मां के चरणों में शीश नवाकर प्रदेशवासियों के कल्याण और छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति का आशीर्वाद मांगा।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री साय हुकुम ललित महल में पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत युवा विंग द्वारा आयोजित ‘रास गरबा विथ भजन डांडिया’, रामबाग में आयोजित रास गरबा, पचपेड़ी नाका स्थित राम मंगलम लॉन में दशा सोरठिया वाणिक समाज द्वारा आयोजित ‘सोरठी रंग रंगीलो’ नवरात्रि उत्सव तथा शंकर नगर स्थित बीटीआई मैदान में नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव समिति द्वारा आयोजित ‘संकल्प गरबा’ में शामिल हुए। विभिन्न आयोजनों में समाजजनों और श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री साय का आत्मीय स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर आज पूरे देश और छत्तीसगढ़ में भक्ति, आस्था और उल्लास का वातावरण है। गरबा मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति को अभिव्यक्त करने का सुंदर माध्यम है। गुजरात की सांस्कृतिक परंपरा से निकला गरबा आज पूरे देश में लोकप्रिय होकर हमारी सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत की विशेषता उसकी विविधता में निहित एकता है। हमारे पर्व और उत्सव अलग-अलग समाजों, समुदायों और पीढि़यों को एक साथ जोड़ते हैं तथा अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं।
नवरात्रि मातृशक्ति के सम्मान और सामर्थ्य का पर्व
मुख्यमंत्री साय ने गरबा आयोजनों में बड़ी संख्या में उपस्थित माताओं, बहनों और बेटियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव शक्ति का स्वरूप माना गया है। नवरात्रि हमें मातृशक्ति के सम्मान, उनकी गरिमा और समाज निर्माण में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण कराती है।
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, निर्णयों में भागीदारी निभाती हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं, तब परिवार के साथ पूरा समाज सशक्त होता है। इसलिए माताओं-बहनों की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक स्वावलंबन राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
महतारी वंदन से महिलाओं को आर्थिक संबल
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की सहायता राशि सीधे अंतरित की जा रही है। इस आर्थिक संबल से महिलाएं अपनी छोटी-बड़ी आवश्यकताओं के संबंध में स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हो रही हैं। यह सहायता बच्चों की शिक्षा, परिवार की आवश्यकताओं और घरेलू जरूरतों की पूर्ति में भी उपयोगी सिद्ध हो रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाते हुए उन्हें स्वावलंबन और समृद्धि की दिशा में आगे ले जाना है। आज छत्तीसगढ़ की 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह उपलब्धि प्रदेश की मातृशक्ति की मेहनत, उद्यमशीलता और सामर्थ्य का प्रमाण है। राज्य सरकार स्व-सहायता समूहों, आजीविका गतिविधियों और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के लिए आर्थिक प्रगति के नए अवसर तैयार कर रही है।
देवी आराधना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है। यह मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी की पुण्यभूमि है। प्रदेश में आदिशक्ति की उपासना और देवी आराधना की गौरवशाली परंपरा सदियों से चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान दंतेवाड़ा से डोंगरगढ़ और रतनपुर से चंद्रपुर तक प्रदेश के देवी मंदिरों और शक्तिपीठों में श्रद्धा का अद्भुत वातावरण दिखाई देता है। लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं। छत्तीसगढ़ की यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी इस विरासत को सहेजें और नई पीढ़ी को इससे जोड़ें। गरबा, दुर्गा पूजा और अन्य पारंपरिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराने और संस्कारों को आगे बढ़ाने के सशक्त माध्यम हैं।
विकास और विरासत साथ-साथ आगे बढ़ें: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों में अपनी संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली विरासत के प्रति स्वाभिमान का नया भाव जागृत किया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के साथ प्रदेश के सर्वांगीण विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के प्रमुख देवी शक्तिपीठों और धार्मिक स्थलों के विकास की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और इन स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त हो।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक विकास की यात्रा में हमारी संस्कृति और परंपराएं पीछे न छूटें, बल्कि वे विकसित छत्तीसगढ़ की पहचान और शक्ति बनें। विकास और विरासत का यही समन्वय आने वाली पीढि़यों को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाएगा।
बस्तर में अब सुनाई दे रही खुशहाली के मांदर की थाप: मंत्री श्री केदार कश्यप
कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में डबल इंजन की सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ी है। इसका परिणाम है कि बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर में जहां कभी बारूद और बम के धमाकों की आवाज सुनाई देती थी, वहां आज खुशहाली के मांदर की थाप गूंज रही है। बस्तर की बदलती तस्वीर पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि शांति स्थापित होने के साथ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन को भी नई पहचान मिल रही है।
विभिन्न गरबा आयोजनों में पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने गरबा और डांडिया की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। भक्ति गीतों और पारंपरिक संगीत के बीच बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों ने उत्साहपूर्वक पर्व की खुशियां साझा कीं। मुख्यमंत्री साय ने आयोजन समितियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता को मजबूत करने के साथ हमारी सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
मुख्यमंत्री साय ने अंत में मां दुर्गा से प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करते हुए कहा कि मां आदिशक्ति की कृपा छत्तीसगढ़ पर सदैव बनी रहे और हमारा प्रदेश शांति, समृद्धि तथा विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खुशवंत साहेब, विधायक मोतीलाल साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, सिंधी समाज के अमित चिमनानी, महेश दरयानी, दशा सोरठिया वाणिक समाज के नितिन ढोलकिया सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण, आयोजन समितियों के सदस्य, श्रद्धालु एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। ठगों ने एक कंपनी के अधिकृत अधिकारी के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी WhatsApp प्रोफाइल बनाई और उसके जरिए दो करोड़ रुपये दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए। हालांकि, कंपनी को धोखाधड़ी का पता चलते ही बैंक और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करा दी गई। समय रहते कार्रवाई होने से ठगी की रकम में से करीब एक करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में होल्ड करा दिए गए हैं। वहीं, शेष रकम के एक हिस्से को निकाले जाने की आशंका जताई जा रही है।मामले में तेलीबांधा पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत वंकाल केबल्स एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड के मुख्य वित्त अधिकारी ओमकार वरु ने दर्ज कराई है। कंपनी का कार्यालय रायपुर के तेलीबांधा इलाके में स्थित मैग्नेटो मॉल में है।
फर्जी WhatsApp प्रोफाइल से भेजे गए रुपये ट्रांसफर करने के निर्देश
प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपियों ने कंपनी के एक अधिकृत अधिकारी के मोबाइल नंबर और पहचान का इस्तेमाल करके WhatsApp पर फर्जी प्रोफाइल तैयार की। इसके बाद इसी प्रोफाइल के माध्यम से रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। निर्देशों पर भरोसा करते हुए कंपनी की ओर से बताए गए बैंक खाते में दो करोड़ रुपये भेज दिए गए।पुलिस की जांच में पता चला है कि जिस बैंक खाते में सबसे पहले रकम जमा कराई गई, वह कोलकाता का है। आरोपियों ने खाते में पैसे पहुंचने के बाद उन्हें दूसरे बैंक खातों में भी ट्रांसफर किया। जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि शिकायत दर्ज होने से पहले ही करीब एक करोड़ रुपये विभिन्न खातों से निकाले जा चुके थे।
समय पर बैंक और साइबर हेल्पलाइन को दी सूचना, एक करोड़ रुपये रुके
कंपनी को जैसे ही ठगी का पता चला, उसने संबंधित बैंक को ईमेल के जरिए इसकी सूचना दी। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई।शिकायत पर तेजी से कार्रवाई होने के कारण करीब एक करोड़ रुपये को अलग-अलग बैंक खातों में होल्ड कराने में सफलता मिली। इस कार्रवाई से ठगी की पूरी रकम के हाथ से निकल जाने की आशंका के बीच कुछ धनराशि सुरक्षित रखने में मदद मिली।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी WhatsApp प्रोफाइल किसने बनाई, रकम ट्रांसफर कराने में किन लोगों की भूमिका रही और पैसे किन-किन बैंक खातों के जरिए आगे भेजे गए।
17 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR, तकनीकी साक्ष्यों की जांच जारी
एसीपी सिविल लाइंस रमाकांत साहू के मुताबिक, इस मामले में 17 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कंपनी के अधिकृत व्यक्ति की पहचान और मोबाइल नंबर का दुरुपयोग करके धोखाधड़ी की गई। मामले से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है।पुलिस बैंक खातों के लेनदेन, डिजिटल गतिविधियों और आरोपियों के संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही है, ताकि ठगी के पूरे घटनाक्रम का पता लगाया जा सके।
कई बैंक खाते सीज, आरोपियों की पहचान में जुटी पुलिस
रायपुर पुलिस के अनुसार, मामले में कई बैंक खातों को सीज कराने की कार्रवाई की गई है। अब जांच का प्रमुख उद्देश्य ठगी में शामिल लोगों की पहचान करना, रकम के लेनदेन की कड़ियां जोड़ना और शेष धनराशि का पता लगाना है।कंपनी की ओर से शुरुआती समय में शिकायत किए जाने के कारण करीब एक करोड़ रुपये होल्ड कराए जा सके। हालांकि, पूरी रकम की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर जांच के अंतिम नतीजों का इंतजार है।
धमतरी। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के पायलीखंड खदान क्षेत्र से बहुमूल्य पत्थरों की चोरी के मामले में धमतरी पुलिस ने 64 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, भाटापारा निवासी विनोद अग्रवाल इन पत्थरों को बेचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहा था। इसी दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उसके कब्जे से 146 नग पत्थर बरामद किए गए हैं, जिनका कुल शुद्ध वजन 13.49 ग्राम है। जब्त पत्थरों की अनुमानित कीमत 10 लाख 15 हजार 200 रुपये बताई गई है।
धमतरी पुलिस के मुताबिक, 18 अक्टूबर को पुलिस की टीम इलाके में गश्त और अपराधों की पतासाजी कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि नेशनल हाईवे-30 पर कोड़ापार नहर पुलिया के पास एक व्यक्ति बहुमूल्य पत्थर लेकर खड़ा है और उन्हें बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहा है। सूचना मिलने के बाद बिरेझर पुलिस और साइबर थाने की टीम मौके पर पहुंची। घेराबंदी कर संदिग्ध को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने अपना नाम विनोद अग्रवाल, उम्र 64 वर्ष, निवासी केके वार्ड, भाटापारा, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा बताया।
पुलिस की तलाशी में आरोपी के पास पॉलीथीन में रखे 146 सफेद, चमकदार और पारदर्शी पत्थर मिले। ये नीले और फिरोजी रंग की झिल्ली में लिपटे हुए थे। पुलिस ने इन पत्थरों को हीरा बताया है।
जब्त पत्थरों का कुल वजन 16.17 ग्राम और शुद्ध वजन 13.49 ग्राम दर्ज किया गया है। इनकी अनुमानित कीमत 10 लाख 5 हजार रुपये बताई गई है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी के मेमोरेंडम कथन में उसने बताया कि इन पत्थरों को वर्ष 2018 में गरियाबंद जिले के पायलीखंड खदान क्षेत्र से चोरी किया था। अब वह इन्हें बेचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहा था। इस कथन और बरामदगी के आधार पर पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की।
हीरे जैसे पत्थरों के अलावा पुलिस ने आरोपी के पास से सैमसंग Galaxy S21 FE 5G मोबाइल फोन और दो सक्रिय सिम कार्ड भी जब्त किए हैं। मोबाइल की अनुमानित कीमत 8 हजार रुपये बताई गई है। इसके साथ ही 2,200 रुपये नकद भी मिले हैं।
पुलिस ने विनोद अग्रवाल के खिलाफ खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 21(4) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) के तहत मामला दर्ज किया है। उसे 19 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, आरोपी को कुरूद स्थित न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। मामले में बरामद पत्थरों की प्रकृति, उनकी उत्पत्ति और चोरी से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के महत्वपूर्ण पहलू होंगे।
धमतरी पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि अवैध खनिज उत्खनन, चोरी, तस्करी या संदिग्ध खरीद-बिक्री की जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचित करें।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में त्योहारी सीजन के बीच प्रशासनिक विभाग में तबादलों का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 12 अधीक्षण अभियंताओं के ट्रांसफर कर दिए हैं। विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, जिन जिलों और क्षेत्रों के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से रायपुर, दुर्ग, रायगढ़, गरियाबंद, बेमेतरा, जगदलपुर, कोरबा और खरसिया शामिल हैं।
देखें लिस्ट…..


बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में जमीन की खरीद-बिक्री के नाम पर 10 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। दयालबंद में रहने वाले विशालचंद्र केसरी ने भारतीय नगर निवासी प्रफुल्ल झा पर दूसरे की जमीन को खुद से अनुबंधित बताकर सौदा करने और एडवांस के रूप में 10 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336, 338 और 340 के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी है।
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, विशालचंद्र केसरी ने आरोप लगाया है कि प्रफुल्ल झा ने बिलासपुर के अमेरी क्षेत्र में स्थित कई जमीनों को अपने से अनुबंधित बताते हुए 70 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से बेचने का सौदा किया था। इस संबंध में 10 दिसंबर 2025 को अनुबंध किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से 10 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए थे। आरोप है कि अनुबंध में शामिल जमीनों में कुछ भूखंड राजस्व रिकॉर्ड में अन्य व्यक्तियों के नाम पर दर्ज थे।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, इनमें खसरा नंबर 232 की 0.2430 हेक्टेयर जमीन चंद्रकली बाई के नाम पर दर्ज थी, जो गोंड आदिवासी समुदाय से थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस जमीन को सामान्य वर्ग की भूमि बताते हुए सौदे में शामिल किया गया, जबकि संबंधित जमीन के स्वामित्व और अनुबंध को लेकर वास्तविक तथ्यों की जानकारी छिपाई गई।
विशालचंद्र केसरी ने शिकायत में बताया कि रकम लेने के बाद जब उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए प्रफुल्ल झा से संपर्क किया तो वह लगातार टालमटोल करता रहा। कई बार प्रयास करने के बावजूद रजिस्ट्री नहीं होने और संपर्क का जवाब नहीं मिलने पर उन्हें धोखाधड़ी की आशंका हुई।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रफुल्ल झा ने कृष्णा दुआ के नाम से जारी मुख्तियारनामा के आधार पर जमीनों को बेचने का अधिकार होने की बात कही थी। बाद में उन्हें कथित तौर पर जानकारी मिली कि संबंधित मुख्तियारनामा जमीन बिक्री के लिए अधिकृत नहीं था और उसकी प्रामाणिकता पर भी सवाल उठे थे।
शिकायत के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 को मसानगंज और तोरवा क्षेत्र की अन्य जमीनों के संबंध में भी प्रफुल्ल झा के साथ अनुबंध किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन जमीनों के विक्रय के लिए भी मुख्तियारनामा के जरिए अधिकार होने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक किसी भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। आवेदन में विशालचंद्र केसरी ने प्रफुल्ल झा के खिलाफ पहले की शिकायत और सिविल लाइन थाने में दर्ज एफआईआर क्रमांक 631, दिनांक 10 मई 2026 का भी उल्लेख किया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीनों के फर्जी अनुबंध के जरिए अन्य लोगों को भी प्रभावित करने की आशंका है। शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336, 338 और 340 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी प्रफुल्ल झा को गिरफ्तार कर कार्रवाई में जुटी है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आने वाले 15 दिन वीआईपी दौरों के लिहाज से खास रहने वाले हैं। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी राज्य के दौरे पर आएंगे। इन चारों के आगमन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। दौरों की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के छत्तीसगढ़ प्रवास से होगी। वहीं, राज्योत्सव में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इन कार्यक्रमों के चलते प्रदेश में राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगी। 22 अक्टूबर को वह रायपुर स्थित लोक भवन में पूज्य माता हासी देवी के सम्मान में दो सौ रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी करेंगी। शाम को इंडोर स्टेडियम में आयोजित नवाखाई पर्व, सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी।
23 अक्टूबर को राष्ट्रपति जगदलपुर पहुंचेंगी और मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी। पदस्थ राष्ट्रपति का मां दंतेश्वरी के दरबार में पहुंचना पहला अवसर होगा। इसके बाद वह बस्तर दशहरा के पारंपरिक मुरिया दरबार में शामिल होकर जनजातीय समाज से संवाद करेंगी।
22 और 23 अक्टूबर को ही डॉक्टर मोहन भागवत बिलासपुर के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। वह कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में विजयादशमी महोत्सव में शामिल होंगे और विभाग टोली तथा प्रांत कार्यकारिणी की बैठक लेंगे। सूत्रों के अनुसार, दौरे में छत्तीसगढ़ प्रांत को दो हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव पर निर्णय हो सकता है। इसके तहत एक हिस्से में बिलासपुर-सरगुजा और दूसरे में रायपुर-दुर्ग-बस्तर संभाग शामिल होंगे। संघ बस्तर जैसे क्षेत्रों में शाखाओं का विस्तार करने और 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की रणनीति पर भी ध्यान दे रहा है।
एक नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रायपुर पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आमंत्रण पर वह एक से तीन नवंबर तक आयोजित राज्योत्सव में मुख्य अतिथि होंगे। इस बार उत्सव की थीम ‘सुंदर, सुघ्घर और माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़’ रखी गई है। यह थीम न सिर्फ प्रदेश के विकास को बयां करेगी, बल्कि बस्तर से लेकर पूरे राज्य में बदलते और सुरक्षित अमन-चैन के नए दौर की गवाही भी देगी।
छत्तीसगढ़ भाजपा की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी 25 और 26 अक्टूबर को रायपुर में रहेंगी। वह अगले विधानसभा चुनाव यानी ‘मिशन 2028’ की तैयारियों के तहत वह पूर्व सांसदों और विधायकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगी और संगठन के कामकाज की समीक्षा करेंगी। चर्चा है कि उनके दौरे के बाद प्रदेश के 60 से ज्यादा पूर्व सांसदों और विधायकों को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में पदस्थ तीन अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिवस के भीतर जवाब मांगा गया है। तीनों पर सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में लापरवाही बरतने के आरोप है। कलेक्टर ने नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि अगर जवाब असंतोषजनक पाए गए तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशानात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मछलीपालन विभाग की योजनाओं में न्यून प्रगति पर सहायक संचालक को नोटिस
जिले में मछलीपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों के विरुद्ध न्यून प्रगति तथा हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित उपलब्धि नहीं होने पर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने सहायक संचालक, मछलीपालन एम.एस. कमल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्हें नोटिस प्राप्ति के तीन दिवस के भीतर सभी बिंदुओं पर तथ्यात्मक एवं अभिलेखीय साक्ष्यों सहित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
28 अक्टूबर को कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली समीक्षा बैठक के लिए प्रस्तुत विभागीय प्रगति रिपोर्ट के अवलोकन में कई महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति असंतोषजनक पाई गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले के लिए निर्धारित 37,993.54 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन लक्ष्य के विरुद्ध 21,277.37 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया है। इसी प्रकार मत्स्य कृषक प्रशिक्षण के निर्धारित 573 हितग्राहियों के लक्ष्य के विरुद्ध 395 हितग्राहियों को ही प्रशिक्षण दिया गया है।
नोटिस में मत्स्य अंगुलिकाओं के संचयन में 700 इकाई के लक्ष्य के विरुद्ध 450 इकाई की उपलब्धि तथा झींगा पालन सहायता योजना में 50 इकाई के लक्ष्य के विरुद्ध शून्य उपलब्धि पर भी असंतोष व्यक्त किया गया है। वहीं, मत्स्य कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड से लाभान्वित करने के लिए निर्धारित 8,500 के लक्ष्य के विरुद्ध 1,053 प्रकरण प्रस्तुत और 516 प्रकरण स्वीकृत होना दर्शाया गया है। फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) के अंतर्गत एक्वा इंश्योरेंस एवं अधोसंरचना निर्माण से संबंधित प्रकरणों में भी शून्य उपलब्धि पाई गई है।
कलेक्टर ने योजनाओं की नियमित समीक्षा, लक्ष्यपूर्ति तथा पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की है। नोटिस में इसे पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही एवं उदासीनता का प्रथम दृष्टया मामला मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के प्रावधानों के उल्लंघन के संबंध में विचारणीय बताया गया है।
निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने अथवा जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए उच्च कार्यालय को लेख किए जाने की चेतावनी दी गई है।
उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं को नोटिस
जिले में कृत्रिम गर्भाधान एवं वत्सोत्पादन कार्यक्रमों में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध कम उपलब्धि और राज्य स्तर पर जिले की कमजोर रैंकिंग को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. अवधेश मरकाम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्हें नोटिस प्राप्ति के तीन दिवस के भीतर बिंदुवार तथ्यात्मक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में 28 अक्टूबर को प्रस्तावित समीक्षा बैठक के लिए प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कृत्रिम गर्भाधान के निर्धारित लक्ष्य 39,400 के विरुद्ध मात्र 7,773 की उपलब्धि (19.72 प्रतिशत) तथा वत्सोत्पादन के लक्ष्य 8,142 के विरुद्ध 2,264 की उपलब्धि (27.80 प्रतिशत) दर्ज की गई है।
कलेक्टर ने कम प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए विभागीय कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन, मैदानी अमले की सक्रियता, नियमित मॉनिटरिंग तथा लक्ष्यपूर्ति के लिए किए गए प्रयासों का विवरण मांगा है। साथ ही, आगामी अवधि में प्रगति सुधारने के लिए स्पष्ट लक्ष्य, समय-सीमा, उत्तरदायी अधिकारी-कर्मचारी और साप्ताहिक समीक्षा व्यवस्था सहित ठोस सुधारात्मक कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
कृत्रिम गर्भाधान एवं वत्सोत्पादन कार्यक्रम पशुधन की नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और पशुपालकों की आय संवर्धन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि प्रथम दृष्टया यह स्थिति छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के उल्लंघन की श्रेणी में विचारणीय है। निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने अथवा स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए उच्च कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
कार्यपालन अभियंता को नोटिस
ग्राम सेमरा (बी) स्थित स्टॉप डैम की स्थिति, निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं उपयोगिता को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित वीडियो के संबंध में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने संज्ञान लेते हुए जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता बी.एल. खण्डेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
प्रसारित वीडियो में सेमरा (बी) स्थित स्टॉप डैम की बदहाल स्थिति को प्रदर्शित करते हुए किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निर्मित इस संरचना की उपयोगिता एवं निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। इस संबंध में निर्माण कार्य के क्रियान्वयन, गुणवत्ता, विभागीय पर्यवेक्षण तथा संधारण की स्थिति स्पष्ट करने की आवश्यकता बताई गई है।
कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस में संबंधित अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे उक्त वीडियो में उठाए गए बिंदुओं के संबंध में तथ्यात्मक एवं अभिलेख-समर्थित स्पष्टीकरण तीन दिवस के भीतर प्रस्तुत करें।
नोटिस में उल्लेख किया गया है कि स्टॉप डैम जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों का उद्देश्य किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। ऐसे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, उपयोगिता एवं उचित संधारण सुनिश्चित करना संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है |निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई के लिए प्रकरण प्रस्तुत किए जाने की चेतावनी भी दी गई है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां तीन साल की मासूम बच्ची को जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिश का विरोध करना दादी को महंगा पड़ गया। आरोपी ने बुजुर्ग महिला पर चाकू से हमला कर दिया, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
जानिए पूरा मामला
यह पूरा मामला सकरी थाना क्षेत्र के ग्राम मेंड्रा का है। बताया जा रहा है कि राजकुमारी यादव शनिवार देर रात अपने घर पर थीं। इसी दौरान पड़ोसी प्रशांत शुक्ला वहां पहुंचा। रात करीब 10 बजे तीन साल की बच्ची को कथित तौर पर जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिश की।
बच्ची को ले जाने से रोकने पर मारा चाकू
बच्ची की दादी राजकुमारी यादव ने इसका विरोध करते हुए उसे रोकने की कोशिश की। आरोप है कि इस बात से नाराज युवक ने पहले गाली-गलौज की और फिर अपने पास रखे धारदार चाकू से महिला पर हमला कर दिया। हमले में राजकुमारी यादव गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ीं।
अस्पताल में इलाज के दौरान मौत
महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। लोगों को आता देख आरोपी वहां से फरार हो गया। इसके बाद परिजन घायल राजकुमारी यादव को उपचार के लिए सिम्स अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही सकरी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फरार आरोपी प्रशांत शुक्ला की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
इस घटना के बाद गांव में सनसनी फैल गई है। तीन साल की मासूम को जबरन ले जाने की कोशिश और उसका विरोध करने पर बुजुर्ग महिला की मौत से इलाके में चिंता का माहौल है। अब पुलिस की कार्रवाई और आरोपी की गिरफ्तारी पर सभी की नजरें टिकी हैं।
मुख्यमंत्री साय ने ‘शौर्यांजलि : बस्तर के नायकों को समर्पित’ कार्यक्रम में अमर शहीदों को अर्पित की श्रद्धांजलि
शहीद जवानों ने अपने अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से बस्तर की आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की रखी नींव
शहीद परिवारों का सम्मान और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, हर सुख-दुख में उनके साथ मजबूती से खड़ी है छत्तीसगढ़ सरकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को मिली निर्णायक सफलता : मुख्यमंत्री
भय और हिंसा के लंबे दौर से आगे बढ़कर शांति, विश्वास और विकास की नई पहचान गढ़ रहा बस्तर
शहीदों के साय
रायपुर-- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर की धरती पर शांति की स्थापना और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले हमारे वीर जवानों का शौर्य, त्याग और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। हमारे जवानों ने केवल नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष नहीं किया, बल्कि अपने रक्त और बलिदान से बस्तर में शांति, सुरक्षा और खुशहाली के नए युग की नींव रखी है। आज बस्तर में शांति और विश्वास की जो नई सुबह दिखाई दे रही है, उसके पीछे हमारे सुरक्षा बलों का अदम्य साहस और अमर शहीदों का सर्वोच्च बलिदान है।
मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर में द हिन्दू फाउंडेशन, नागपुर द्वारा आयोजित ‘शौर्यांजलि : बस्तर के नायकों को समर्पित’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बस्तर में शांति और सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले 50 अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके परिजनों का सम्मान किया।
मुख्यमंत्री साय ने शहीद परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी अपने को खोने की पीड़ा को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। जब एक जवान देश और समाज की रक्षा करते हुए शहीद होता है तो एक मां अपना बेटा, पत्नी अपना जीवनसाथी और बच्चे अपने पिता का साया खो देते हैं। इस अपूरणीय क्षति की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन पूरा छत्तीसगढ़ अपने वीर सपूतों और उनके परिवारों के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा।
उन्होंने शहीद परिवारों से कहा कि आपके अपने केवल आपके परिवार के सदस्य नहीं थे, वे पूरे छत्तीसगढ़ और राष्ट्र के गौरव हैं। उन्होंने अपने जीवन से साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां गर्व और सम्मान के साथ याद करेंगी।
शहीद परिवारों के हर सुख-दुख में साथ खड़ी है सरकार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीद परिवारों का सम्मान, सुरक्षा और कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। मातृभूमि और समाज की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले जवानों के परिवारों की चिंता करना सरकार का दायित्व है। राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ शहीद परिवारों के सुख-दुख में सहभागी है और भविष्य में भी हर परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
उन्होंने कहा कि शहीदों के परिवार हमारे लिए केवल सहायता के पात्र परिवार नहीं, बल्कि हमारे अपने परिवार हैं। उनका सम्मान करना और उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बेहतर समन्वय के साथ अभियान चलाया है। केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 के लक्ष्य को लेकर सुरक्षा बलों ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया।
उन्होंने कहा कि चार दशकों से बस्तर में गहरी जड़ें जमा चुके नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष आसान नहीं था। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हमारे जवानों ने अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास, सुरक्षा बलों की रणनीति और जवानों के अदम्य पराक्रम से नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक सफलता मिली।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में बस्तर में स्थायी शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस परिवर्तन के वास्तविक नायक हमारे सुरक्षा बलों के जवान हैं, जिन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य और राष्ट्रसेवा के संकल्प से कभी समझौता नहीं किया।
चार दशकों तक बस्तर ने झेला हिंसा का दंश
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं, अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य और सरल-सहज जनजीवन के लिए पूरी दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। दुर्भाग्य से चार दशकों तक इस सुंदर अंचल को नक्सली हिंसा का दंश झेलना पड़ा। हजारों परिवार हिंसा से प्रभावित हुए। अनेक बच्चों का बचपन भय और असुरक्षा के बीच गुजरा और दूरस्थ अंचलों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इस कठिन दौर में हमारे सुरक्षा बलों के जवान बस्तरवासियों की सुरक्षा के लिए चट्टान की तरह खड़े रहे। अपने परिवारों से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर उन्होंने जंगलों और दुर्गम इलाकों में हर चुनौती का सामना किया। अनेक वीर जवान कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहीद हुए, लेकिन उनका बलिदान उनके साथियों के संकल्प को और मजबूत करता गया।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सहित नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में शामिल सभी सुरक्षा बलों के जवानों के शौर्य और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनके साहस और पराक्रम पर पूरे छत्तीसगढ़ को गर्व है।
अब शांति, विश्वास और विकास की नई पहचान गढ़ रहा बस्तर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस और बलिदान से स्थापित हो रही शांति के साथ अब बस्तर में विकास और खुशहाली के नए द्वार खुल रहे हैं। जिन क्षेत्रों में कभी भय और हिंसा का वातावरण था, वहां आज सड़कें बन रही हैं, बिजली पहुंच रही है, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित हो रही हैं तथा शासन की योजनाएं अंतिम छोर के गांवों तक पहुंच रही हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ और लंबे समय तक विकास से वंचित रहे गांवों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं को पहुंचाया जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि बस्तर का कोई भी गांव और कोई भी परिवार विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर के बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं और युवाओं को खेल, कौशल विकास तथा रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों के माध्यम से गांव-गांव की खेल प्रतिभाएं सामने आ रही हैं, वहीं बस्तर पंडुम इस अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को नई पहचान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान अब भय और हिंसा से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, प्रतिभाशाली युवाओं, पर्यटन और विकास की अपार संभावनाओं से और अधिक मजबूत होगी। हमारा संकल्प है कि बस्तर के प्रत्येक युवा के हाथ में अवसर हो और प्रत्येक परिवार के जीवन में विकास और खुशहाली आए।
शहीदों के सपनों का बस्तर बनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज बस्तर में दिखाई दे रहे सकारात्मक परिवर्तन की नींव हमारे शहीद जवानों के त्याग और बलिदान पर टिकी है। उन्होंने केवल वर्तमान की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि शहीदों के सपनों के अनुरूप शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समृद्ध और विकसित बस्तर का निर्माण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जिस शांति के लिए हमारे जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, वह शांति स्थायी बने और विकास तथा खुशहाली का लाभ बस्तर के प्रत्येक परिवार तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को हमारे वीर जवानों के जीवन, संघर्ष और बलिदान से परिचित कराना भी आवश्यक है। राष्ट्र और समाज की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले इन वीर सपूतों का जीवन युवाओं में देशप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा की भावना जागृत करता रहेगा।
*द हिन्दू फाउंडेशन की पहल सराहनीय*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए द हिन्दू फाउंडेशन, नागपुर की सराहना करते हुए कहा कि शहीद परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदना व्यक्त करने की यह पहल समाज को प्रेरणा देने वाली है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन द्वारा देशभर में यात्रा कर 800 से अधिक शहीद परिवारों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है। यह उन परिवारों के प्रति समाज की कृतज्ञता की सशक्त अभिव्यक्ति है, जिन्होंने राष्ट्र और समाज की सुरक्षा के लिए अपने प्रियजनों का बलिदान दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘शौर्यांजलि’ केवल अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके अधूरे सपनों को पूरा करने और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का भी अवसर है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि हमारे वीर जवानों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। उनके शौर्य और त्याग से बस्तर में शांति की जो नई सुबह आई है, उसे विकास और खुशहाली के उजाले में बदलना हमारा संकल्प है। हम सब मिलकर ऐसा शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समृद्ध और विकसित बस्तर बनाएंगे, जिसका सपना हमारे वीर जवानों ने देखा था। यही अमर शहीदों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर द हिन्दू फाउंडेशन, नागपुर के संयोजक श्री संदीप गुप्ता, शहीद वीर नारायण सिंह के वंशज श्री राजेंद्र सिंह दीवान सहित बड़ी संख्या में शहीद परिवारों के सदस्य, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
दिवंगतों के परिजनों के प्रति व्यक्त की संवेदना, घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना
रायपुर--मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ का समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। इस त्रासदी में अपनों को खोने वाले सभी परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
मुख्यमंत्री साय ने माँ दुर्गा से दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की है।
00 राजधानी रायपुर के विभिन्न गरबा एवं नवरात्रि महोत्सवों में हुए शामिल, प्रदेशवासियों को दी नवरात्रि की शुभकामनाएं
00 गरबा महोत्सव हमारी आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का सुंदर संगम: मुख्यमंत्री
00 महतारी वंदन योजना से लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को मिल रही आर्थिक मजबूती, प्रदेश की 14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
00 महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता से मजबूत होता है परिवार और समाज, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका
00 माता कौशल्या की पावन धरती छत्तीसगढ़ में शक्ति आराधना की समृद्ध परंपरा, देवी शक्तिपीठ हमारी आस्था और संस्कृति की अमूल्य धरोहर
00 विकास भी, विरासत भी की भावना के साथ प्रदेश की संस्कृति, आस्था और परंपराओं को सहेजते हुए आगे बढ़ रही राज्य सरकार
रायपुर। नवरात्रि का पावन पर्व शक्ति की आराधना के साथ नारी शक्ति के सम्मान, सामाजिक एकता और हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। हमारी सरकार इसी भावना के अनुरूप माताओं-बहनों के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। महिलाओं की प्रगति केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रदेश की प्रगति का आधार है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न गरबा एवं नवरात्रि महोत्सवों में शामिल होकर प्रदेशवासियों को नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय कालीबाड़ी स्थित मां काली मंदिर पहुंचे और माता के दर्शन-पूजन कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके साथ ही वे मंडी परिसर में श्री कच्छ कड़वा पाटीदार समाज द्वारा आयोजित श्री पाटीदार नवरात्रि महोत्सव, भानपुरी में श्री कच्छ कड़वा पाटीदार समाज के गरबा समारोह, गोवर्धन नगर में श्री कच्छ गुर्जर क्षत्रिय समाज द्वारा आयोजित नवरात्रि महोत्सव तथा अमलीडीह क्षेत्र में आयोजित ढोलिडा रास गरबा-2026 सहित विभिन्न आयोजनों में सम्मिलित हुए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर पूरे देश और प्रदेश में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत वातावरण निर्मित होता है। नौ दिनों तक शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना हमें जीवन में साहस, संयम, सकारात्मकता और सदाचार के मार्ग पर आगे बढऩे की प्रेरणा देती है। यह पर्व हमारी सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने के साथ समाज में प्रेम, सद्भाव और समरसता की भावना को भी मजबूत करता है।
गरबा हमारी आस्था और सामाजिक एकता का उत्सव
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गरबा केवल नृत्य का आयोजन नहीं, बल्कि मां दुर्गा के प्रति हमारी श्रद्धा और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति है। गुजरात से प्रारंभ हुई गरबा की समृद्ध परंपरा आज पूरे देश में उत्साह और उमंग के साथ मनाई जाती है। यह भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का सुंदर उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हमारे पर्व और त्योहार समाज को जोडऩे का कार्य करते हैं। अलग-अलग समाज और समुदाय जब एक साथ उत्सव मनाते हैं, तो आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना और मजबूत होती है। यही हमारी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है। छत्तीसगढ़ में भी सभी समाजों ने अपनी परंपराओं और संस्कृति को सहेजते हुए प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने गरबा महोत्सवों में माताओं, बहनों और बेटियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मातृशक्ति की भागीदारी से ऐसे आयोजन और अधिक सुंदर तथा गरिमामय बनते हैं। नवरात्रि का पर्व हमें नारी शक्ति के सम्मान के साथ उनके प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी स्मरण कराता है।
महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया माताओं-बहनों का आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है। योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की सहायता राशि सीधे अंतरित की जा रही है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता की योजना नहीं है, बल्कि माताओं-बहनों के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की उनकी स्वतंत्रता को मजबूत करने का माध्यम भी बनी है। हमारी माताएं-बहनें इस राशि का उपयोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, बचत और परिवार की जरूरतों के लिए कर रही हैं। जब महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि माताओं-बहनों के चेहरे पर आत्मविश्वास और संतोष देखकर सरकार को भी अपने प्रयासों की सार्थकता का अनुभव होता है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ की प्रत्येक महिला को आगे बढऩे के अवसर मिलें और वह प्रदेश के विकास में अपनी पूरी क्षमता के साथ भागीदारी कर सके।
14 लाख लखपति दीदी छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति के सामर्थ्य का प्रमाण
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज प्रदेश की 14 लाख बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की महिलाओं की मेहनत, लगन, उद्यमशीलता और सामर्थ्य का प्रमाण है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि गांव और समाज की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य आने से परिवारों में खुशहाली आती है, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य बेहतर होता है तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन की गति तेज होती है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में हमारी मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं को स्वावलंबी बनाने, कौशल विकास, आजीविका और उद्यमिता के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
शक्ति आराधना की पावन भूमि है छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है। यह मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी जैसी आराध्य देवियों की भूमि है। प्रदेश में सदियों से शक्ति की उपासना और देवी आराधना की गौरवशाली परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी से लेकर डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी, रतनपुर में मां महामाया और चंद्रपुर में मां चंद्रहासिनी के दरबार तक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। गांव-गांव और शहर-शहर में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित होते हैं और पूरा छत्तीसगढ़ माता की भक्ति में सराबोर हो जाता है। यह हमारी गहरी धार्मिक आस्था के साथ प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की विशिष्ट पहचान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में प्रकृति, आस्था, लोकजीवन और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। हमारे तीज-त्योहार और धार्मिक परंपराएं पीढिय़ों को आपस में जोड़ती हैं। इन्हें सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
विकास भी, विरासत भी के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़
साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिक विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी ने देश को विकास भी, विरासत भी का मंत्र दिया है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश के समग्र विकास के साथ अपनी संस्कृति, आस्था और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। देवी शक्तिपीठों और आस्था केंद्रों में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं के विकास के साथ उन्हें प्रदेश की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन से जोडऩे की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की स्मृति नहीं है, बल्कि वर्तमान की शक्ति और भविष्य की प्रेरणा भी है। विकास की यात्रा में अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहना आवश्यक है। हमारी सरकार का प्रयास है कि आधुनिक और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान भी और अधिक सशक्त हो। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवरात्रि और गरबा जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोडऩे का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करते हैं तथा समाज में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने मां दुर्गा से प्रार्थना करते हुए कहा कि माता रानी की कृपा सभी प्रदेशवासियों पर बनी रहे। हर घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आए तथा छत्तीसगढ़ शांति, समृद्धि और विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, देवजी भाई पटेल, जयंती पटेल, श्री जगदीश पटेल सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
00 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रतिभागी ले सकेंगे हिस्सा
रायपुर। नवा रायपुर स्थित आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा जनजातीय गौरव दिवस 2026 के अवसर पर राज्य स्तरीय चित्रकला और फोटोग्राफी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। दोनों प्रतियोगिताओं में अनुसूचित जनजाति वर्ग के 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रतिभागी भाग ले सकेंगे। चित्रकला प्रतियोगिता 12 और 13 नवंबर को होगी, जबकि फोटोग्राफी प्रतियोगिता नवंबर माह में आयोजित की जाएगी।
चित्रकला प्रतियोगिता का विषय ‘मेरी जनजाति, मेरी विरासत’ चित्रकला प्रतियोगिता में शामिल होने के इच्छुक प्रतिभागी 5 नवंबर 2026 तक
https://tinyurl.com/jjgdpainting पर पंजीयन कर सकते हैं। प्रतियोगिता के लिए पेंटिंग ब्रश, कैनवास, कार्टि्रज पेपर, ईजल, ड्राइंग शीट, रंग और पैलेट संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे।
नियम एवं शर्तें http://www.cgtrti.gov.in/ पर देखी जा सकती हैं। अधिक जानकारी के लिए सहायक संचालक सुश्री पार्वती जगत से +91-7805982502 पर संपर्क करें। प्रविष्टियां
jjgdpainting@gmail.com पर भेजी जा सकती हैं।
फोटोग्राफी प्रतियोगिता का विषय 'जनजातीय जीवन, संस्कृति एवं परंपराएं
फोटोग्राफी प्रतियोगिता के लिए 4 नवंबर 2026 को शाम 5:30 बजे तक
https://tinyurl.com/jjgdpainting पर पंजीयन किया जा सकता है। पंजीयन फॉर्म, फोटोग्राफ की सॉफ्ट कॉपी और आवश्यक दस्तावेज
jjgdphotography@gmail.com पर भेजने होंगे। प्रतियोगिता के नियम, शर्तों और पुरस्कार राशि की जानकारी संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिए सहायक अनुसंधान अधिकारी श्रीमती अंजनी भगत से 9926588481 पर संपर्क किया जा सकता है।
कोरबा। जिले के बाल संप्रेक्षण गृह से एक बार फिर अपचारी बालक के फरार होने का मामला सामने आया है। अपचारी बालक आज सुबह जवानों का ध्यान भटकते ही चैनल गेट खोलकर भाग निकला, जिससे हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस की टीम उसकी तलाश में जुट गई है।
दरअसल, पोंडीबहार के बालक को चोरी के मामले में 27 सितंबर को कोडिया स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में दाखिल कराया गया था। शनिवार सुबह मुख्य द्वार खुलते ही जवान काम में व्यस्त हो गए। इसी का फायदो उठाते हुए बालक चैनल गेट खोलकर फरार हो गया।
गिनती के दौरान बालक के भागने का पता चला, जिसके बाद सीएसईबी चौकी पुलिस ने पतासाजी शुरू की। सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि घर और रिश्तेदारों से पूछताछ की जा रही है।
बता दें कि कोडिया स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से अपचारी बालक के भागने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार बालक भाग चुके हैं, फिर भी सुरक्षा व्यवस्था लचर बनी हुई है।
रायपुर। नागरिकों द्वारा सीएम हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज कराई गई शिकायतों के समाधान को लेकर राज्य शासन बेहद गंभीर है। पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का संबंधित विभागों द्वारा सक्रियता और गंभीरता से निराकरण किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान और लापरवाही पर 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं।
सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने के कारण लोक निर्माण विभाग द्वारा अधिकारियों के विरुद्ध ये कार्रवाई की गई है। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर विगत दो महीनों अगस्त और सितम्बर माह में लोक निर्माण विभाग से संबंधित शिकायतों की समीक्षा में पाया गया कि एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर शिकायतों को ऐसी टीप के साथ बंद किया गया है, जो शिकायत का समाधान नहीं दर्शाती है।
विभाग ने एल-1 स्तर पर शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान पर राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग बिलासपुर के अनुविभागीय अधिकारी अतुल राज पेगवार, बेमेतरा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी राजेश कुमार बाजपेयी, पेंड्रा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी जगदीश प्रसाद, सेतु उप संभाग दुर्ग के अनुविभागीय अधिकारी अशोक कुमार हरियाले और पाटन उप संभाग की अनुविभागीय अधिकारी सोनल ढालेन्द्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
एल-2 स्तर पर शिकायतों के उचित निराकरण नहीं होने पर विभाग द्वारा बेमेतरा संभाग के कार्यपालन अभियंता केशव प्रसाद लहरे, कोरबा संभाग के कार्यपालन अभियंता घासीराम जांगड़े, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर के कार्यपालन अभियंता रोशन कुमार साहू, सारंगढ़ संभाग के कार्यपालन अभियंता प्यारे लाल पैकरा और कांकेर संभाग की कार्यपालन अभियंता प्रज्ञा नंद को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
इसी प्रकार से सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को एल-3 स्तर पर बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने पर मंडल क्रमांक-2, रायपुर के अधीक्षण अभियंता डी.के. नेताम, दुर्ग मंडल की अधीक्षण अभियंता अर्पणा चौरपगार तथा राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता महादेव लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
राज्य शासन ने इन अधिकारियों को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा है कि शिकायत बंद करते समय यह अपेक्षित है कि टीप में स्थल निरीक्षण के निष्कर्ष, की गई या प्रस्तावित कार्यवाही, उसकी तिथि या समय-सीमा एवं शिकायतकर्ता को दी गई सूचना का स्पष्ट उल्लेख हो। यदि शिकायत अन्य विभाग से संबंधित हो तो उसका कारण सहित उल्लेख हो। ऐसा नहीं पाए जाने पर टीप से नागरिकों की समस्या का निराकरण नहीं हुआ तथा पोर्टल पर निराकरण के आँकड़े भ्रामक हुए।
लोक निर्माण विभाग ने इसे कर्त्तव्य पालन में लापरवाही और पदीय कर्त्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया जाना मानते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को अपना लिखित प्रतिवाद नोटिस मिलने के 15 दिनों की समयावधि में लोक निर्माण विभाग के सचिव को प्रस्तुत करने कहा गया है। लिखित प्रतिवाद निर्धारित समयावधि में प्राप्त नहीं होने पर अधिकारियों के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में 19 शासकीय कर्मचारियों के स्थानांतरण से जुड़ा एक फर्जी आदेश सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने 6 अगस्त 2026 को जारी बताए जा रहे इस आदेश को फर्जी करार दिया है। मामले में अब प्रदेश के 15 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।
लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से 14 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में इस मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारियों को जरूरी जानकारी और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी आदेश से जुड़े मामले में संबंधित शासकीय सेवकों की भूमिका की जानकारी जुटाई जाएगी और नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी लेटरहेड और अवर सचिव के हस्ताक्षर का इस्तेमाल
विभाग के मुताबिक, फर्जी स्थानांतरण आदेश तैयार करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के आधिकारिक लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही अवर सचिव आर.पी. वर्मा के नाम, पदमुद्रा और हस्ताक्षर का भी कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
यह आदेश क्रमांक ESTB-102/755/2026/20-3 के साथ 6 अगस्त 2026 की तारीख का बताया गया था। इसके जरिए 19 शिक्षक और व्याख्याताओं का स्थानांतरण दर्शाया गया था। लोक शिक्षण संचालनालय ने जांच के लिए इस आदेश को फर्जी बताया है।
देखें फर्जी आदेश की कॉपी


15 जिलों के DEO से मांगी गई जानकारी
मामले की पड़ताल के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने बलौदाबाजार-भाटापारा, दुर्ग, बेमेतरा, बस्तर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, रायपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, राजनांदगांव, उत्तर बस्तर कांकेर, बालोद, कबीरधाम, धमतरी, सरगुजा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया है।
लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से जारी पत्र

सभी संबंधित अधिकारियों को तीन दिन के भीतर बिंदुवार जानकारी और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। विभाग यह पता लगाना चाहता है कि फर्जी आदेश किन माध्यमों से जिला कार्यालयों तक पहुंचा और अलग-अलग स्तर पर उस पर किस तरह कार्रवाई हुई।
आदेश के आधार पर कितने कर्मचारियों ने लिया कार्यभार?
जिला शिक्षा अधिकारियों से सबसे अहम जानकारी उन कर्मचारियों को लेकर मांगी गई है, जिन्होंने कथित फर्जी आदेश के आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेने की कोशिश की। अधिकारियों को बताना होगा कि कितने कर्मचारियों ने कार्यमुक्ति या नई जगह पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए आवेदन दिया था।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि कितने कर्मचारियों को वास्तव में कार्यमुक्त किया गया और कितनों को नई जगह पर कार्यभार ग्रहण कराया गया। संचालनालय ने इस संबंध में संबंधित कर्मचारियों की सूची और दस्तावेज भी मांगे हैं, ताकि पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सके।
फर्जी आदेश सामने आने के बाद क्या कार्रवाई हुई?
विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों से यह भी पूछा है कि आदेश के फर्जी होने की जानकारी मिलने के बाद उनके स्तर पर क्या कदम उठाए गए। तीन दिन में मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और मामले में हुई कार्रवाई का विवरण शासन को भेजा जाएगा।
इस मामले में अब जिला स्तर से मिलने वाली रिपोर्ट अहम होगी। इससे पता चलेगा कि फर्जी आदेश किन कार्यालयों तक पहुंचा, उसके आधार पर कितने कर्मचारियों की कार्यमुक्ति या कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया हुई और संबंधित अधिकारियों ने समय रहते क्या कदम उठाए।
बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से सामने आया है। जहां पत्नी ने अपनी ही पत्नी की हत्या कर दी है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है।
डंडे से पीट-पीटकर हत्या
मिली जानकारी के अनुसार, मामला राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटागहना में पत्नी की हत्या का मामला सामने आया है। यहां चरित्र शंका को लेकर एक पति ने अपनी 36 वर्षीय पत्नी की डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी। घटना के बाद गांव में सनसनी फैल गई है।
पिटाई के दौरान पत्नी की मौत
बताया जा रहा है कि आरोपी ने पहले घर के बाहर पेड़ के नीचे अपनी पत्नी की डंडे से बेरहमी से पिटाई की। महिला की हालत गंभीर होने पर वह उसे घर के अंदर ले गया, जहां कथित तौर पर फिर से उसकी पिटाई की गई। इस दौरान महिला की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर राजपुर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को महिला का शव घर के अंदर मिला, जबकि आरोपी पति भी घटनास्थल पर मौजूद था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की जांच और वैधानिक कार्रवाई में जुटी हुई है।
बिलासपुर। अनुकंपा नियुक्ति और आपत्ति को लेकर छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा, पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करने वाले बेटे का दावा केवल दूसरे भाई की आपत्ति के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। सक्षम प्राधिकारी को लागू नियमों और नीति के अनुसार दोनों के दावों की पात्रता जांचकर निर्णय लेना होगा।
हाई कोर्ट ने भिलाई-चरोदा नगर निगम के 15 अप्रैल 2025 के आदेश को निरस्त करते हुए आठ सप्ताह के भीतर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है, आदेश निरस्त होने मात्र से याचिकाकर्ता को नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता।
पढ़िए क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित साउथ वसुंधरा नगर निवासी खिलेेश्वर प्रसाद के पिता परस राम नगर निगम में सहायक राजस्व निरीक्षक थे। 29 सितंबर 2023 को सेवाकाल के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। पिता की मृत्यु के बाद खिलेश्वर ने 4 दिसंबर 2023 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया। भाई दुमेश कुमार टंडन ने 15 जुलाई 2024 को इस पर आपत्ति जताते हुए स्वयं का भी दावा कर दिया। इसी विवाद के बीच नगर निगम ने 15 अप्रैल 2025 को खिलेश्वर के आवेदन को खारिज कर दिया।
अनुकंपा नीति के अनुसार तय होगी पात्रता
याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के कोर्ट में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कहा, भाई की आपत्ति मात्र से नियुक्ति के दावे पर विचार करने की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। नगर निगम और आपत्तिकर्ता भाई की ओर से दलील दी गई कि परिवार में विवाद है और लागू नियमों के तहत सहमति तथा अन्य शर्तों का पालन जरूरी है। भाई ने खुद को बेरोजगार और दिवंगत कर्मचारी पर आश्रित बताते हुए अनुकंपा नियुक्ति के लिए अपना दावा पेश किया।
अनुकंपा नियुक्ति कोई विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं
हाई कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं है। इसका उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु से परिवार पर आई आर्थिक कठिनाई को कम करना है। प्राधिकारी को यह जांचना होगा कि भाई ने अलग से आवेदन दिया है या नहीं और लागू नीति में दावेदारों के लिए कोई प्राथमिकता तय है या नहीं। कोर्ट ने विधवा की 8 अक्टूबर 2026 की सहमति संबंधी शपथपत्र पर भी विचार करने को कहा, लेकिन स्पष्ट किया कि इससे दूसरे पात्र दावेदार का दावा अपने आप समाप्त नहीं होगा।
हाई कोर्ट ने नगर निगम का आदेश निरस्त कर दोनों भाइयों को अपना पक्ष और दस्तावेज रखने का अवसर देने तथा आठ सप्ताह में कारण सहित निर्णय पारित करने का निर्देश दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में न केवल आर्थिक संबल ला रही है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और परिवार की उन्नति में बराबर का भागीदार भी बना रही है। जगदलपुर के मेटगुड़ा क्षेत्र की निवासी सुशीला बघेल इसका एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी हैं।
सुशीला बघेल के परिवार के भरण-पोषण का मुख्य जरिया उनके पति की किराना दुकान है। सुशीला घर के कामकाज के साथ-साथ दुकान के संचालन में भी अपने पति का पूरा हाथ बंटाती हैं। योजना के तहत हर माह उनके बैंक खाते में सीधे अंतरित होने वाली एक हजार रुपए की सम्मान राशि उनके लिए व्यवसाय को गति देने का मजबूत जरिया बन गई है।
सुशीला बताती हैं कि वे शासन से मिलने वाली इस राशि को केवल घरेलू खर्चों तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि इसे दुकान की पूंजी में जोड़ती हैं। इस राशि से वे दुकान में जरूरी छोटी-बड़ी सामग्रियों का स्टॉक नियमित रूप से बनाए रखती हैं, ताकि ग्राहकों को जरूरत की हर चीज एक ही जगह उपलब्ध हो सके। इससे उनकी दुकान की बिक्री में सुधार हुआ है और आमदनी भी बढ़ी है।
योजना के जमीनी प्रभाव पर बात करते हुए सुशीला कहती हैं कि महतारी वंदन योजना से क्षेत्र के आम नागरिकों और खासकर महिलाओं की क्रय शक्ति में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। महिलाओं के हाथ में पैसा आने से स्थानीय बाजारों और किराना दुकानों में ग्राहकी बढ़ी है, जिसका सीधा सकारात्मक असर छोटे व्यापारियों की आजीविका पर दिखाई दे रहा है।
योजना से जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से बेहद खुश सुशीला बघेल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया है। उनका कहना है कि सरकार की इस पहल ने महिलाओं को स्वाभिमान के साथ परिवार की आर्थिक रीढ़ बनने का अवसर दिया है।
00 हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता से शुरू किया सिलाई का काम, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में बनीं सहभागी
00 महतारी वंदन योजना की 32 किस्तों से मिले 32 हजार रुपये ने बढ़ाया आत्मविश्वास, आर्थिक स्वावलंबन की ओर बढ़ाए कदम
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना से मिलने वाली प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता महिलाओं को न केवल घरेलू जरूरतें पूरी करने में सहयोग दे रही है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार शुरू करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बचत करने का अवसर भी प्रदान कर रही है। बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड अंतर्गत ग्राम उफरा निवासी श्रीमती प्रेमिन वर्मा इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने योजना से प्राप्त राशि का सदुपयोग कर सिलाई मशीन खरीदी और स्वरोजगार की शुरुआत की। साथ ही अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए नियमित बचत भी कर रही हैं।
प्रेमिन वर्मा बताती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सीमित आमदनी में घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना ही बड़ी चुनौती थी। एक मां होने के नाते उन्हें सबसे अधिक चिंता अपनी बेटी की पढ़ाई और उसके भविष्य की रहती थी। वह चाहती थीं कि उनकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और आर्थिक परेशानियां उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। लेकिन परिवार की सीमित आय के कारण भविष्य के लिए बचत कर पाना मुश्किल था।
ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के अंतर्गत उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। प्रेमिन को अब तक 32 किस्तों के माध्यम से कुल 32 हजार रुपये प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने इस राशि को केवल घरेलू खर्चों तक सीमित रखने के बजाय परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बेटी के भविष्य को सुरक्षित बनाने में उपयोग करने का निर्णय लिया।
’सिलाई मशीन ने खोले स्वरोजगार के नए रास्ते’
प्रेमिन वर्मा ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि की बचत कर एक सिलाई मशीन खरीदी। उनके लिए यह सिलाई मशीन केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के सपने को साकार करने का माध्यम है। अब वह घर पर सिलाई का कार्य कर आमदनी अर्जित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दे रही हैं। प्रेमिन बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी आर्थिक जरूरतों के लिए भी उन्हें परेशान होना पड़ता था, लेकिन अब स्वयं की मेहनत से आय अर्जित करने पर आत्मविश्वास बढ़ा है। सिलाई के काम ने उन्हें अपनी क्षमता पहचानने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी निभाने का अवसर दिया है।
’बेटी के भविष्य के लिए हर महीने 500 रुपये की बचत’
स्वरोजगार के साथ प्रेमिन ने अपनी बेटी के भविष्य को भी प्राथमिकता दी है। वह महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि में से प्रतिमाह 500 रुपये बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं। उनकी इच्छा है कि भविष्य में बेटी की उच्च शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त बचत हो सके। प्रेमिन का मानना है कि छोटी-छोटी नियमित बचत भविष्य में बड़ा सहारा बन सकती है। आज वह अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं। उनकी यह पहल दर्शाती है कि आर्थिक सहायता का योजनाबद्ध उपयोग महिलाओं को वर्तमान की जरूरतों के साथ भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए भी सक्षम बना सकता है।
’आर्थिक सहायता ने दिया आत्मविश्वास और सम्मान से जीने का संबल’
प्रेमिन वर्मा कहती हैं कि पहले आर्थिक परेशानियों और बेटी के भविष्य को लेकर मन में चिंता बनी रहती थी, लेकिन महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अब वह न केवल नियमित बचत कर पा रही हैं, बल्कि स्वयं के रोजगार से परिवार की आमदनी बढ़ाने में भी योगदान दे रही हैं।
उनका कहना है कि मेरे लिए सिलाई मशीन सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद है। महतारी वंदन योजना से मिली सहायता ने मुझे बचत करने और अपना काम शुरू करने का हौसला दिया है। अब मैं अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए भी पैसे जमा कर पा रही हूं। प्रेमिन वर्मा की सफलता की कहानी बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता, सही योजना और दृढ़ संकल्प से महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकती हैं। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को स्वरोजगार और बेटी की शिक्षा के लिए बचत में उपयोग कर उन्होंने आर्थिक स्वावलंबन की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है।
मुख्यमंत्री ने अनिमेष कुजूर को ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दी बधाई, कहा - आपकी सफलता पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय
जशपुर के ग्राम घुईटांगर के अनिमेष ने एशियन गेम्स की 4×100 मीटर मिक्स्ड रिले में जीता कांस्य पदक
भारतीय टीम ने 41.06 सेकंड का समय दर्ज कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड में भी किया सुधार
प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं अनिमेष, उनकी सफलता से छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को मिलेगी नई ऊर्जा : मुख्यमंत्री साय
खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार
रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एशियन गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाने वाले एथलीट अनिमेष कुजूर ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्रीसाय ने कुजूर को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल खेल भविष्य की कामना की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर की माटी के बेटे अनिमेष कुजूर ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। भारतीय टीम द्वारा राष्ट्रीय रिकॉर्ड में सुधार करना इस उपलब्धि को और विशेष बनाता है।
मुख्यमंत्री ने कुजूर से एशियन गेम्स में उनके प्रदर्शन, प्रशिक्षण और खेल यात्रा के संबंध में आत्मीय चर्चा की। उन्होंने कहा कि अनिमेष की उपलब्धि प्रदेश के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना यह साबित करता है कि प्रतिभा को उचित अवसर, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिले तो हमारे युवा दुनिया के किसी भी मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। बस्तर से सरगुजा और जशपुर तक हमारे जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि ऐसी प्रतिभाओं की पहचान शुरुआती स्तर पर हो और उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर खेल अधोसंरचना तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेलों के विकास को युवाओं के सर्वांगीण विकास से जोड़कर आगे बढ़ रही है। प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक से अधिक पदक जीतें तथा प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष जैसे खिलाड़ियों की सफलता प्रदेश में विकसित हो रही नई खेल संस्कृति को और मजबूत करती है। उनकी उपलब्धियां नई पीढ़ी में यह विश्वास जगाती हैं कि अनुशासन, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
अनिमेष कुजूर ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री श्री साय ने उन्हें भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इसी समर्पण और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते रहें और आने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में देश के लिए और पदक जीतें।
जशपुर के छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
उल्लेखनीय है कि श्री अनिमेष कुजूर मूलतः जशपुर जिले के कुनकुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम घुईटांगर के निवासी हैं। उन्होंने जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 की 4×100 मीटर मिक्स्ड रिले स्पर्धा में भारतीय टीम की ओर से शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अर्जित किया। भारतीय टीम ने इस स्पर्धा में 41.06 सेकंड का समय दर्ज करते हुए राष्ट्रीय रिकॉर्ड में भी सुधार किया।
अनिमेष की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिए विशेष गौरव का अवसर है। जशपुर के ग्रामीण अंचल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने तक की उनकी यात्रा प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है।
इस अवसर पर अनिमेष कुजूर के पिता अमृत कुजूर, माता रीना कुजूर सहित एथलेटिक्स एसोसिएशन के पदाधिकारी तथा खेल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
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00 मुख्यमंत्री साय ने नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की नई औद्योगिक इकाई का किया भूमिपूजन
00 150 करोड़ से अधिक के निवेश से स्थापित होगी इकाई, साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार
00 मुख्यमंत्री ने नवचयनित युवाओं को प्रदान किए नियुक्ति पत्र, उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं
00 नई औद्योगिक नीति से निवेश को मिली गति, प्रदेश को मिले साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव
00 प्रदेश में तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित, 50 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार - उद्योग मंत्री देवांगन
रायपुर। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास का लाभ प्रदेश के युवाओं तक रोजगार और आर्थिक अवसरों के रूप में पहुंचे, यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से नई औद्योगिक विकास नीति में ऐसे श्रम आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिनमें अपेक्षाकृत कम पूंजी निवेश के साथ बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करने की क्षमता है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि निवेश को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और प्रदेश की समृद्धि का माध्यम बनाना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की प्रस्तावित नई औद्योगिक इकाई के भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की नई इकाई छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस परियोजना में 150 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश प्रस्तावित है और इससे साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इस इकाई में विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के लिए उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन है। हमारी सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ में ऐसे उद्योग अधिक से अधिक स्थापित हों, जो प्रदेश के युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएं। जब युवाओं को अपने ही प्रदेश में कौशल और क्षमता के अनुरूप रोजगार मिलेगा तो उनके परिवार आर्थिक रूप से सशक्त होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
साय ने कार्यक्रम के दौरान नवचयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि युवाओं के हाथ में नियुक्ति पत्र देना किसी भी औद्योगिक निवेश की सबसे सार्थक उपलब्धि है। एक रोजगार केवल एक व्यक्ति को आत्मनिर्भर नहीं बनाता, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में आर्थिक सुरक्षा और नई उम्मीद लेकर आता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करने की पहल के लिए यश ग्रुप की सराहना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, कौशल विकास और आधुनिक अधोसंरचना के विस्तार पर एक साथ काम किया जा रहा है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा, कुशल मानव संसाधन और बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में सरकार निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नई औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 में रोजगार सृजन करने वाले उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया है। नीति तैयार करते समय इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि प्रदेश में आने वाला निवेश स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर पैदा करे। टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और अन्य श्रम आधारित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ ही उद्योग लगाने और संचालित करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं और जटिलताओं से मुक्ति दिलाने के लिए लगातार सुधार किए गए हैं। जन विश्वास से जुड़े सुधारों के अंतर्गत 279 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की विशेष पहल की गई है। विभिन्न अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाया जा रहा है, ताकि निवेश प्रस्ताव तेजी से धरातल पर उतरें और उत्पादन तथा रोजगार सृजन शीघ्र प्रारंभ हो सके।
साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक विकास नीति को देश-विदेश के निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। प्रदेश को साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। अब सरकार का विशेष जोर इन निवेश प्रस्तावों को तेजी से धरातल पर उतारने पर है। निवेशकों को परियोजनाओं की स्थापना से लेकर संचालन तक हर स्तर पर आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि औद्योगिकीकरण का विस्तार केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग अंचलों तक पहुंचे। स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के विकास से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यश ग्रुप की यह नई इकाई नवा रायपुर और आसपास के क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। उन्होंने कंपनी प्रबंधन को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि परियोजना समयबद्ध रूप से पूर्ण हो और शीघ्र उत्पादन प्रारंभ करे, इसके लिए संबंधित विभाग आवश्यक समन्वय और सहयोग सुनिश्चित करेंगे।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति की सोच में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब निवेश का मूल्यांकन केवल निवेश की राशि से नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसरों के आधार पर भी किया जा रहा है। प्रदेश में लंबे समय तक अधिक पूंजी निवेश और अपेक्षाकृत कम रोजगार देने वाले उद्योगों की प्रधानता रही है। इस स्थिति को बदलते हुए नई औद्योगिक नीति में श्रम आधारित और अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि यश फैन्स एंड एप्लायंसेस की प्रस्तावित इकाई इसी सोच का उदाहरण है। लगभग 150 करोड़ रुपए के निवेश से साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होना प्रदेश के औद्योगिक विकास की नई दिशा को दर्शाता है। हमारा प्रयास है कि औद्योगिक निवेश का सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के युवाओं तक पहुंचे।
चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर वित्त एवं उद्योग विभाग ने समन्वित रूप से औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 तैयार की है। इसमें रोजगार देने वाले उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने के साथ केंद्र सरकार की रोजगार प्रोत्साहन योजनाओं से भी समन्वय किया गया है। उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए सब्सिडी के बजटीय प्रावधान को लगभग 200 करोड़ रुपए से बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपए से अधिक किया गया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का पहला बजट ज्ञान अर्थात गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के कल्याण को समर्पित था, जबकि दूसरे बजट में गति के माध्यम से सुशासन, अधोसंरचना, तकनीक और औद्योगिक विकास को नई गति देने का लक्ष्य रखा गया। आर्थिक विकास से प्राप्त संसाधनों का उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं को और सशक्त बनाने में किया जाएगा। औद्योगिक और आर्थिक प्रगति के माध्यम से जनकल्याण को स्थायी आधार देना सरकार का लक्ष्य है।
प्रदेश में तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित, 50 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार - देवांगन
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में छोटे-बड़े मिलाकर तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके माध्यम से 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। आगामी औद्योगिक परियोजनाओं से डेढ़ लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। देवांगन ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण और सरकार की निवेश हितैषी नीतियों के कारण निवेशकों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए उद्योग, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में निरंतर काम किया जा रहा है। उन्होंने यश ग्रुप की नई औद्योगिक इकाई को प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कंपनी प्रबंधन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि इकाई जल्द उत्पादन प्रारंभ करे और प्रदेश के युवाओं को रोजगार का लाभ मिल सके।
सीएम हेल्पलाइन पर अब तक 2.31 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज, 2.05 लाख से अधिक का हुआ निराकरण
लगभग 89 प्रतिशत शिकायतों का समाधान, मुख्यमंत्री ने शुरुआती परिणामों को बताया उत्साहजनक
मुख्यमंत्री साय ने शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद कर लिया फीडबैक, समस्याओं के समाधान पर नागरिकों ने जताई संतुष्टि
किसी को मिली आवास की लंबित किस्त, किसी की नौ माह से रुकी पेंशन हुई शुरू, ट्रांसफॉर्मर बदलने से 80 से अधिक परिवारों को मिली राहत
मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता और तत्परता से शिकायतों का निराकरण करने वाले अधिकारियों की सराहना की
शिकायतों के आंकड़ों का विश्लेषण कर नागरिक सेवाओं में सुधार के दिए निर्देश
सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से शासन और जनता के बीच मजबूत हो रहा विश्वास : मुख्यमंत्री साय
ग्राम पंचायतों, उचित मूल्य दुकानों और कॉमन सर्विस सेंटरों तक सीएम हेल्पलाइन 1076 के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश
रायपुर-- आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध, संवेदनशील और प्रभावी समाधान सुशासन की पहली कसौटी है। इसी उद्देश्य से शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 कम समय में ही प्रदेशवासियों के लिए भरोसे का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। राशन, पेंशन, बिजली, आवास, पेयजल और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अब लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। नागरिक घर बैठे 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं और उनके निराकरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।
मुख्यमंत्री साय ने आज नवा रायपुर स्थित सीबीडी बिल्डिंग में संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 के कार्यालय पहुंचकर इसके कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात कही।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों, उनके निराकरण, शिकायतकर्ताओं से लिए जा रहे फीडबैक तथा विभागवार और जिलेवार प्रदर्शन की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों से जिलों में शिकायतों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान विभिन्न जिलों के शिकायतकर्ताओं से स्वयं बातचीत कर जाना कि सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बाद उनकी समस्या का समाधान हुआ या नहीं। नागरिकों ने मुख्यमंत्री से सीधे संवाद में अपने अनुभव साझा किए और शिकायतों के निराकरण पर संतुष्टि व्यक्त की।
2.31 लाख शिकायतें दर्ज, 88.85 प्रतिशत का हो चुका निराकरण
समीक्षा बैठक में बताया गया कि 9 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक सीएम हेल्पलाइन 1076 पर कुल 2 लाख 31 हजार 850 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 2 लाख 5 हजार 996 शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। शेष 25 हजार 854 शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। इस प्रकार अब तक प्राप्त कुल शिकायतों में से 88.85 प्रतिशत का निराकरण किया जा चुका है। हेल्पलाइन पर प्रतिदिन औसतन 1500 से 2000 शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने हेल्पलाइन के शुरुआती परिणामों को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों का निराकरण अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। पिछली समीक्षा में दिए गए निर्देशों पर भी अच्छा कार्य हुआ है। इस व्यवस्था को निरंतर बेहतर बनाते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि शिकायतों का निराकरण केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिक को वास्तविक रूप से राहत मिले और वह समाधान से संतुष्ट हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सबसे महत्वपूर्ण है। शिकायत बंद करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित नागरिक की समस्या वास्तव में दूर हुई है। नागरिकों से मिलने वाला फीडबैक ही इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता का आधार होना चाहिए।
एक शिकायत से 80 से अधिक परिवारों को मिली राहत, बदला गया खराब ट्रांसफॉर्मर
मुख्यमंत्री साय ने समीक्षा के दौरान गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के शिकायतकर्ता श्री दमन साहू से सीधे बातचीत की। साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके गांव का ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। इससे गांव के लगभग 80 से 85 परिवार प्रभावित थे। स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत दर्ज होने के लगभग एक सप्ताह के भीतर नया ट्रांसफॉर्मर लगाकर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई। श्री साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि अब गांव में बिजली व्यवस्था सामान्य है और ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने संबंधित अधिकारियों की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सीधे आम नागरिक के दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं। ऐसी शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक शिकायत का संवेदनशीलता से समाधान कई परिवारों के जीवन में राहत ला सकता है।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के दस दिनों के भीतर मिली पीएम आवास की लंबित किस्त
जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड निवासी श्री वीरेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उनके आवास निर्माण की दूसरी किस्त मिलने में विलंब हो रहा था। राशि नहीं मिलने से आवास निर्माण का काम भी प्रभावित हो रहा था।
उन्होंने अपनी समस्या सीएम हेल्पलाइन 1076 पर दर्ज कराई। शिकायत के लगभग दस दिनों के भीतर उनके बैंक खाते में आवास की दूसरी किस्त के रूप में 55 हजार रुपए की राशि प्राप्त हो गई। श्री यादव ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि राशि मिलने से अब वे अपने आवास का निर्माण आगे बढ़ा पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के पक्के घर के सपने को साकार करने वाली महत्वपूर्ण योजना है। पात्र हितग्राहियों को योजना की किस्त समय पर मिलनी चाहिए, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे प्रकरणों में विशेष संवेदनशीलता बरतने को कहा।
नौ महीने से रुकी थी पेंशन, 1076 पर शिकायत के बाद मिला लाभ
मुंगेली जिले के ग्राम करही निवासी श्री तोरण साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी माताजी को लगभग नौ महीने से पेंशन की राशि नहीं मिल रही थी। पेंशन नहीं मिलने के कारण परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभाग द्वारा प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की गई। इसके बाद उनकी माताजी की पेंशन पुनः प्रारंभ हुई और लंबित राशि का भी भुगतान किया गया। श्री साहू ने समस्या का समाधान होने पर संतुष्टि जताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन वृद्धजनों, विधवा महिलाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संबल है। पात्र हितग्राहियों को इसके लिए परेशान न होना पड़े, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
आम नागरिक के लिए छोटी समस्या भी हो सकती है बड़ी परेशानी : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि शासन-प्रशासन की दृष्टि में कोई प्रकरण सामान्य हो सकता है, लेकिन संबंधित नागरिक के लिए वही समस्या बहुत महत्वपूर्ण होती है। राशन कार्ड में सुधार, पेंशन का भुगतान, बिजली आपूर्ति, पेयजल, आवास की किस्त या राजस्व संबंधी छोटे से कार्य में देरी भी किसी परिवार को लंबे समय तक परेशान कर सकती है।
उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य यही है कि नागरिक की आवाज सीधे शासन तक पहुंचे और संबंधित विभाग उसकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय-सीमा में समाधान करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से मुलाकात के दौरान भी सीएम हेल्पलाइन को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। अनेक नागरिक बताते हैं कि 1076 पर शिकायत करने के बाद उनकी लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था नहीं, बल्कि शासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने का भी माध्यम है।
अच्छा काम करने वाले अधिकारियों की सराहना, लापरवाही पर जवाबदेही हो सुनिश्चित
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन-प्रशासन में बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ काम कर रहे हैं। उनके प्रयासों के कारण योजनाएं धरातल तक पहुंच रही हैं और लोगों की समस्याओं का समाधान हो रहा है। ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में लापरवाही या नागरिकों की समस्याओं के प्रति गंभीरता की कमी पूरे प्रशासन की छवि को प्रभावित करती है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को यह समझना होगा कि जनता की समस्या का समाधान करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहन मिले और शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक देरी अथवा लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।
शिकायतों के आंकड़े बनें नागरिक सेवाओं में सुधार का आधार
मुख्यमंत्री श्री साय ने समीक्षा के दौरान हेल्पलाइन पर कॉल रिसीव होने की स्थिति, शिकायतों के पंजीयन, विभिन्न स्तरों पर उनके निराकरण, शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लेने की व्यवस्था तथा विभागवार शिकायतों के विश्लेषण की जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों को केवल व्यक्तिगत प्रकरणों के रूप में न देखा जाए। शिकायतों के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण कर यह पता लगाया जाए कि किस विभाग, योजना, सेवा या क्षेत्र से संबंधित शिकायतें बार-बार आ रही हैं। यदि एक ही प्रकृति की शिकायतें बड़ी संख्या में प्राप्त हो रही हैं, तो उनके मूल कारण की पहचान कर व्यवस्था में आवश्यक सुधार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह सीएम हेल्पलाइन नागरिकों की व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के साथ शासन की नीतियों और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण फीडबैक सिस्टम के रूप में भी काम करेगी।
बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों तक पहुंचे 1076 की सुविधा
मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से बस्तर संभाग के जिलों से प्राप्त शिकायतों की प्रकृति और उनके निराकरण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के नागरिकों के लिए सीएम हेल्पलाइन विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी समस्या लेकर जिला अथवा राजधानी स्तर के कार्यालयों तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन 1076 की जानकारी अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जाए। ग्राम पंचायतों, उचित मूल्य दुकानों और कॉमन सर्विस सेंटरों में वॉल पेंटिंग सहित विभिन्न माध्यमों से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। स्थानीय स्तर पर भी नागरिकों को बताया जाए कि वे किस प्रकार हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
तकनीकी और प्रक्रियागत कमियों को दूर कर और मजबूत होगी व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन अभी अपने प्रारंभिक दौर में है। इसलिए शुरुआती अनुभवों से सीखते हुए तकनीकी और प्रक्रियागत कमियों को लगातार दूर किया जाए। कॉल रिस्पॉन्स, शिकायत पंजीयन, संबंधित विभाग को शिकायत भेजने, निर्धारित समय-सीमा में निराकरण और शिकायतकर्ता से फीडबैक तक पूरी प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन ऐसी होनी चाहिए, जिसमें नागरिक को शिकायत दर्ज कराने से लेकर उसके समाधान तक सहज अनुभव मिले। तकनीक का उद्देश्य प्रक्रियाओं को जटिल बनाना नहीं, बल्कि शासन को नागरिकों के और करीब लाना है।
जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि : मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना सरकार का दायित्व है और सीएम हेल्पलाइन 1076 इस दायित्व को प्रभावी ढंग से निभाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के मन में यह विश्वास हो कि उसकी बात शासन तक पहुंचेगी, उसे सुना जाएगा और उसकी जायज समस्या का समय पर समाधान होगा।
उन्होंने कहा कि शासन और जनता के बीच विश्वास जितना मजबूत होगा, सुशासन की व्यवस्था उतनी ही प्रभावी होगी। सीएम हेल्पलाइन इसी विश्वास की कड़ी को मजबूत कर रही है। जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है और इसे बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, विभिन्न विभागों के सचिव, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
नवरात्रि शक्ति की आराधना और नारी सम्मान का महापर्व : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा की आराधना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की
हमारी संस्कृति में नारी शक्ति का सर्वोच्च स्थान, माताओं-बहनों का सम्मान और सशक्तीकरण सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय
महतारी वंदन योजना से लगभग 68 लाख महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल, प्रदेश की 14 लाख बहनें बनीं लखपति दीदी
छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और देवी शक्तिपीठों के संरक्षण एवं विकास के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार
विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में गुजराती समाज की महत्वपूर्ण भागीदारी : मुख्यमंत्री साय
रायपुर- मुख्यमंत्री निवास आज नवरात्रि की भक्ति, गरबा की लय और उल्लास के रंगों से सराबोर नजर आया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आयोजित गरबा महोत्सव में बड़ी संख्या में माताओं-बहनों, बेटियों और गुजराती समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने मां दुर्गा की आराधना के साथ गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। भक्ति संगीत और गरबा की ताल के बीच पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंग गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मां दुर्गा की आराधना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। उन्होंने उपस्थित माताओं-बहनों, बेटियों एवं सभी श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवरात्रि शक्ति की आराधना, श्रद्धा और भक्ति के साथ नारी सम्मान का महापर्व है। हमारी सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। यह पर्व हमें मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है।
उन्होंने कहा कि गरबा मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति होने के साथ हमारी जीवंत सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। गुजरात की धरती से निकली गरबा की परंपरा आज पूरे देश में उत्साह के साथ मनाई जाती है। ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक विविधता में एकता के भाव को और मजबूत करते हैं।
हमारे पर्व समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक शक्ति
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत के पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं। ये परिवार और समाज को जोड़ने, आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि आज गरबा देश-दुनिया में भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान बन चुका है। छत्तीसगढ़ में भी गरबा के प्रति उत्साह लगातार बढ़ा है। बड़ी संख्या में माताओं-बहनों और बेटियों की सहभागिता इस उत्सव को और विशेष बनाती है।
महिला सशक्तीकरण हमारी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नारी शक्ति का सम्मान हमारी संस्कृति का मूल भाव है और महिलाओं को आत्मनिर्भर तथा सशक्त बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक संबल मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 14 लाख बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह हमारी मातृशक्ति के परिश्रम, सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रमाण है। हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी ही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं।
माता कौशल्या से मां दंतेश्वरी तक, छत्तीसगढ़ की धरती शक्ति आराधना की पावन भूमि
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है और यहां आदिशक्ति की आराधना की समृद्ध परंपरा सदियों से चली आ रही है। बस्तर की आराध्य मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया और चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी सहित अनेक देवी धाम प्रदेश की आस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख केंद्र हैं।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर दंतेवाड़ा से डोंगरगढ़ और रतनपुर से चंद्रपुर तक माता के दरबार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। पूरा छत्तीसगढ़ शक्ति की आराधना में लीन दिखाई देता है। ये शक्तिपीठ केवल हमारी आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पहचान के भी महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश "विकास भी, विरासत भी" की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। अपनी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं पर गर्व करते हुए आधुनिक भारत का निर्माण हो रहा है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रमुख देवी धामों के विकास और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।
विकसित छत्तीसगढ़ में गुजराती समाज की महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री साय ने गुजराती समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि गुजराती समाज ने अपनी उद्यमशीलता, परिश्रम, सेवा भावना और सामाजिक एकता से देश के विकास में विशिष्ट पहचान बनाई है। छत्तीसगढ़ में भी गुजराती समाज व्यापार, उद्योग, शिक्षा, सेवा और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान सदैव सभी समाजों और संस्कृतियों को आत्मीयता से अपनाने की रही है। गुजराती समाज ने भी छत्तीसगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाकर यहां की सामाजिक-सांस्कृतिक यात्रा में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। विकसित भारत के निर्माण के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में समाज की यह सहभागिता महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवरात्रि हमें शक्ति, सकारात्मकता और सामूहिकता का संदेश देती है। माता रानी के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए, यही कामना है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विभिन्न आयोग-मंडलों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, सर्व गुजराती समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतेश गांधी, पूर्व विधायक एवं एन.आर. गुजराती एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष देवजी पटेल, गुजराती स्कूल के अध्यक्ष जयंती पटेल, मितुल कोठारी, नितिन डोलकिया, महेंद्र कोडियार, बाबू भाई पटेल, अशोक पटेल, मुकेश शाह, गौरंग काचा, कीर्ति व्यास, राजेंद्र फौजदार सहित गुजराती समाज के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।





























