रायपुर। मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ राज्य के प्रमुख विषयों और उत्कृष्ट पहलों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए आज मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पिछले राष्ट्रीय सम्मेलन से जुड़े विषयों पर चर्चा के साथ-साथ एक्शन ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से कार्यों की प्रगति और गुणात्मक सुधार की समीक्षा की गई।
शिक्षा, स्वास्थ्य और नवाचारों पर विशेष जोर
बैठक में मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों के सचिवों को निर्देश दिए कि आगामी राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्य के नवाचारों और गुणात्मक सुधारों को प्रमुखता से रखा जाए। उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य और पोषण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किए गए उत्कृष्ट कार्यों की जानकारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर तैयार करने के निर्देश दिए ताकि राज्य के प्रयासों और सकारात्मक परिणामों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
आंगनबाड़ी केंद्रों में खिलौना बैंक की अनूठी पहल
बैठक के दौरान राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित खिलौना बैंक की पहल की विशेष रूप से सराहना की गई। इस अभिनव योजना के तहत लोग अपने बच्चों के पुराने खिलौने जमा करते हैं, जिनका उपयोग आंगनबाड़ी के बच्चों के मानसिक विकास और उनके सुपोषण के प्रति जनजागुरूकेंट बढ़ाने के लिए किया जाता है। अब तक इस पहल के अंतर्गत एक लाख से अधिक खिलौने जमा किए जा चुके हैं।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों पर केंद्रित सत्र
बैठक में यह जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय सम्मेलन में विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए मुख्य रूप से चार सत्र आयोजित किए जाएंगे। विकसित भारत के लिए विशिष्ट प्राथमिकताएं और उद्देश्य, आर्थिक विकास एवं राज्य के वित्त को मजबूत बनाने में खनन क्षेत्र की भूमिका, सुशासन में तकनीक का प्रभावी उपयोग, सड़क व अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए नए विचार और बेहतर कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य एवं पोषण, गैर- कृषि कार्यों में उर्वरकों के दुरुपयोग पर नियंत्रण, प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देने और अंतरराज्यीय प्रतिस्पर्धा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, खाद्य विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, कौशल विकास विभाग के सचिव बसवराजू एस., राजस्व विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, आदिम जाति विभाग के सचिव भूवनेश यादव, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा, तथा मुख्यमंत्री के विशेष सचिव एवं आयुक्त जनसंपर्क रजत बंसल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
0 जनजातीय समाज को केवल वोट बैंक मानती रही कांग्रेस, हमारी सरकार ने सम्मान, अधिकार और विकास को प्राथमिकता दी
रायपुर। कांग्रेस ने हमेशा जनजातीय समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखा। यही कारण है कि जनजातीय समाज ने कांग्रेस को छोड़ दिया। 55-60 वर्षों तक देश में शासन करने वाली कांग्रेस अब बताए कि उसने जनजातीय समाज के जीवन में वास्तविक बदलाव के लिए क्या किया? कांग्रेस द्वारा बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में शामिल होने आई महामहिम राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान प्रशासनिक तैयारियों को प्रशासनिक दखलंदाजी बताए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उक्त बातें कही। वे मीडिया के प्रश्नों का जवाब दे रहे थे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार जनजातीय समाज के सम्मान, अधिकार और सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जनजातीय समाज के कल्याण और विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता में रखा है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के विकास, शिक्षा, आजीविका और सशक्तीकरण के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य हो रहा है। छत्तीसगढ़ में भी विभिन्न विकास प्राधिकरणों और योजनाओं के जरिए जनजातीय अंचलों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को तेज गति दी जा रही है।
साय ने कहा कि बस्तर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों तथा हमारे सुरक्षा बलों के साहस और पराक्रम से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी भय और हिंसा का माहौल था, आज वहाँ सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के नए अवसर पहुँच रहे हैं। दूरस्थ गाँव विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और बस्तर शांति एवं विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को आरोप लगाने से पहले अपने लंबे शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। आज जनजातीय समाज जागरूक है। वह साफ देख रहा है कि किसने केवल उसके नाम पर राजनीति की और किसने उसके सम्मान, सुरक्षा तथा विकास के लिए जमीन पर काम किया है।
00 बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता, सामूहिक आस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक - राष्ट्रपति मुर्मु
00 माओवाद से मुक्त बस्तर में अब नवनिर्माण और विकास की बारी - मुख्यमंत्री साय 00 अब मांझियों को 5000 रूपए और चालकियों को 3500 मिलेगा मासिक मानदेय
रायपुर। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने बस्तर दशहरा की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और जनजातीय विरासत का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह अनूठा उत्सव विभिन्न समुदायों को एक सूत्र में बांधने और पीढिय़ों से चली आ रही परंपराओं को संरक्षित रखने का उत्कृष्ट उदाहरण है।
राष्ट्रपति ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि बस्तर दशहरा जैसे विश्वप्रसिद्ध उत्सव में शामिल होना उनके लिए विशेष प्रसन्नता का विषय है। इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता रहती है। रथ निर्माण से लेकर रथ खींचने, पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों तक प्रत्येक समुदाय अपनी परंपरागत जिम्मेदारी का निर्वहन करता है। यह सामूहिक सहभागिता सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक निरंतरता का असाधारण उदाहरण है।
मुरिया दरबार लोकतांत्रिक परंपराओं का उत्कृष्ट उदाहरण-राष्ट्रपति
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बस्तर दशहरा के अंतर्गत आयोजित होने वाले मुरिया दरबार की परंपरा को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं, आवश्यकताओं और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। सामूहिक संवाद के माध्यम से निकाले गए समाधान समाज की खुशहाली और आपसी सहयोग का मार्ग प्रशस्त करते हैं। ऐसी परंपराएं भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को नई प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि लगभग दो माह पूर्व राष्ट्रपति भवन में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से उनकी मुलाकात हुई थी। इसमें बस्तर पंडुम के विजेताओं के साथ बस्तर के परगना मांझी और चालकी भी शामिल थे। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को अवसर देना आवश्यक
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज में अपार प्रतिभा और संभावनाएं हैं। उचित अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन उपलब्ध होने पर जनजातीय समाज के बेटे-बेटियां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक में जनजातीय युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि खेल प्रतिभाओं को उचित मंच मिलने से बस्तर के युवा भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं और ओलंपिक जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ा सकते हैं। राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या से मुक्ति और सुरक्षा एवं विकास के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की पीड़ा से मुक्त होकर यह क्षेत्र प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के युवा और जनजातीय समुदाय के लोग अपनी प्रतिभा, परिश्रम और सहभागिता से देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
दंडकारण्य की सांस्कृतिक स्मृतियों में रची-बसी है बस्तर की विरासत
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बस्तर क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण में इस अंचल का संबंध दंडकारण्य से जोड़ा जाता है। भगवान श्रीराम के वनवास से संबंधित अनेक प्रसंग इस क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों में विद्यमान हैं। माता शबरी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की पवित्रता और माता शबरी की भक्ति से प्रेरणा लेकर समाज को नैतिकता, मर्यादा और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
प्रकृति संरक्षण जनजातीय जीवन दर्शन का अभिन्न हिस्सा
राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रकृति पूजा की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि पेड़-पौधों, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान इस समाज की विशिष्ट पहचान है। जनजातीय परंपराओं में पेड़-पौधों को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवनदाता के रूप में देखा जाता है। प्रकृति हमें ऑक्सीजन, जल, फल, फूल, भोजन और औषधियां प्रदान करती है। इसलिए प्रकृति की पूजा के साथ-साथ उसका संरक्षण और संवर्धन भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक संसाधन अमूल्य धरोहर हैं। इनका उपयोग आवश्यकता के अनुरूप करते हुए इनके संरक्षण और क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। एक वृक्ष को विकसित होने में कई दशक लगते हैं, इसलिए वनों की रक्षा और अधिकाधिक पौधरोपण भविष्य की पीढिय़ों के लिए जरूरी है। उन्होंने सभी नागरिकों, विशेषकर जनजातीय समाज के लोगों से अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने और जंगलों को हरा-भरा बनाए रखने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं। जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जोडऩे के प्रयास समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर उपलब्ध कराकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनजातीय समाज की भागीदारी और अधिक मजबूत होगी। बस्तर दशहरा के पारंपरिक अनुष्ठानों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कुटुम्ब जात्रा के माध्यम से ग्राम देवी-देवताओं की विदाई तथा 27 अक्टूबर को माँ दंतेश्वरी और देवी मावली की डोली विदाई जैसे आयोजनों को इस उत्सव की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का परिचायक बताया। उन्होंने माँ दंतेश्वरी से बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य, छत्तीसगढ़ की प्रगति और समग्र विकास की कामना की।
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बस्तर दशहरा और विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतांत्रिक मूल्य हमारी सभ्यता एवं संस्कारों में गहराई से रचे-बसे हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिकता जनजातीय समाज की जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। गांवों में सामाजिक निर्णय मिल-बैठकर लिए जाते हैं। बड़ों की बात सुनना और प्रत्येक व्यक्ति की आवाज को सम्मान देना जनजातीय समाज की सहज परंपरा रही है। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी भव्यता के साथ समाज को साथ लेकर चलने की सीख भी देता है। रथ के लिए लकड़ी लाने से लेकर उसके निर्माण और संचालन तक विभिन्न गांवों एवं समुदायों के लोग अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। राजशाही की समाप्ति के बाद भी यह परंपरा निरंतर जारी रही और जनतांत्रिक संवाद के सशक्त मंच के रूप में विकसित हुई।
उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार यह संदेश देते हैं कि संवाद ही समाधान का मार्ग है। जब शासन और समाज आमने-सामने बैठकर चर्चा करते हैं, तब कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने मांझी, मुखिया, पुजारी, कारीगरों, रथ निर्माताओं, कलाकारों और स्थानीय प्रशासन सहित उन सभी लोगों के योगदान की सराहना की, जिनके सामूहिक परिश्रम और श्रद्धा से यह विश्वप्रसिद्ध परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित बस्तर दशहरा उत्सव में स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का बस्तर की धरती से गहरा जुड़ाव रहा है। इसी वर्ष फरवरी में उन्होंने बस्तर पंडुम का शुभारंभ किया था। इसके बाद बस्तर पंडुम के विजेताओं को सम्मानित करने के साथ राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। आज बस्तर दशहरा में उनकी उपस्थिति से समस्त बस्तरवासियों का उत्साह बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुरिया दरबार जनजातीय संस्कृति और लोकतांत्रिक परंपराओं की सुंदर अभिव्यक्ति है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा बस्तर की लोक संस्कृति का आईना है। इसकी रस्में जनजातीय समाज में निहित समतामूलक विचारों, सामूहिक सहभागिता और आपसी विश्वास को प्रदर्शित करती हैं।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष बस्तर दशहरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक ओर राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति से उत्सव की प्रतिष्ठा बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बस्तर पंडुम के माध्यम से यहां की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को देश-विदेश तक पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बस्तर की समृद्धि और विकास के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन योजना के तहत अंदरूनी बसाहटों को सड़क मार्ग से जोडऩे का कार्य किया जा रहा है। जहां सड़कें बन चुकी हैं, वहां मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के माध्यम से परिवहन सुविधाओं के विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि रायपुर से रावघाट तक नई रेल सेवा प्रारंभ की गई है तथा रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर कार्य जारी है। रायपुर से विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा बस्तर क्षेत्र से गुजरता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे की व्यवस्था हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं। वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रारंभ किया गया है तथा गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू हो गया है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से बस्तर को देश का अग्रणी संभाग बनाने तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने माँ दंतेश्वरी, माँ मावली और बस्तर अंचल के समस्त ग्राम देवी-देवताओं को नमन करते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी अवधि, विशिष्ट परंपराओं, आस्था और व्यापक जनभागीदारी के कारण देश के अन्य उत्सवों से अलग पहचान रखता है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की जीवंत सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने परंपरागत प्रतिनिधियों के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मांझियों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये तथा चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया गया है। यह निर्णय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले परंपरागत प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, विधायक कोण्डागांव सुश्री लता उसेंडी, महापौर संजय पाण्डे सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी श्री शलभ सिन्हा सहित पारंपरिक मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन, नाइक-पाइक और बस्तर दशहरा समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।
00 रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर से बदलेगी जशपुर की तस्वीर, राजधानी रायपुर तक का सफर होगा आसान
00 रायपुर तक यात्रा का समय घटकर 5 से 6 घंटे होने की उम्मीद, बिलासपुर, कोरबा और झारखंड से भी बेहतर होगा सड़क संपर्क रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों से जशपुर जिले में सड़क अधोसंरचना के विकास को नई गति मिल रही है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण जशपुर जिले में आकार लेने लगा है। जिले में लगभग 3147 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रही इस सड़क परियोजना के पूर्ण होने से जशपुर का राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों और पड़ोसी राज्यों से सड़क संपर्क अधिक सुगम होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से जिले में व्यापार, पर्यटन, कृषि आधारित गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
निर्माणाधीन इकोनॉमिक कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 707 किलोमीटर बताई गई है, जिसमें लगभग 104 किलोमीटर सड़क जशपुर जिले से होकर गुजरेगी। यह फोरलेन सड़क रायपुर और धनबाद के बीच आवागमन को अधिक सुविधाजनक बनाने के साथ जशपुर, पत्थलगांव और आसपास के क्षेत्रों को व्यापक सड़क नेटवर्क से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश की राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर, ऊर्जाधानी कोरबा और पड़ोसी राज्य झारखंड की ओर आवागमन की सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है।
राजधानी रायपुर तक का सफर होगा आसान, यात्रा समय में आएगी उल्लेखनीय कमी
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत विकसित हो रहे इकोनॉमिक कॉरिडोर से जशपुर जिले के लोगों को सबसे बड़ा लाभ यात्रा समय में कमी के रूप में मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में जशपुर से राजधानी रायपुर तक सड़क मार्ग से यात्रा करने में लंबा समय लगता है। परियोजना के पूर्ण होने पर बेहतर फोरलेन सड़क और सुगम यातायात व्यवस्था से यात्रा अवधि में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। उपलब्ध परियोजना संबंधी जानकारी के अनुसार, संबंधित मार्गों पर यात्रा अवधि लगभग 14 घंटे से घटकर 8 से 9 घंटे होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। वहीं जशपुर से रायपुर तक का सफर भविष्य में लगभग 5 से 6 घंटे में पूरा होने की उम्मीद भी जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक यात्रा अवधि मार्ग की उपलब्धता, यातायात की स्थिति और परियोजना के पूर्ण संचालन पर निर्भर करेगी। सड़क संपर्क बेहतर होने से जिले के नागरिकों को राजधानी रायपुर और अन्य बड़े शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च शिक्षा, व्यापार और प्रशासनिक कार्यों के लिए आने-जाने में सहूलियत होगी।
व्यापार, कृषि और रोजगार के नए अवसरों को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर जशपुर जिले की आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क विकसित होने से किसानों को अपनी कृषि उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। विशेष रूप से उद्यानिकी फसलों, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों के परिवहन में लगने वाला समय कम होने से किसानों और व्यापारियों को लाभ मिलने की संभावना है। जशपुर जिला कृषि, वनोपज, हस्तशिल्प और ग्रामीण आजीविका गतिविधियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण संभावनाएं रखता है। आधुनिक सड़क संपर्क से स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने, व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार और नए उद्यमों के विकास के अवसर बढ़ सकते हैं। सड़क निर्माण और परिवहन सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाओं को भी बल मिलेगा।
जशपुर के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान, पर्यटकों की पहुंच होगी आसान
प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों, पर्वतीय क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए प्रसिद्ध जशपुर जिले में पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। बेहतर सड़क संपर्क के अभाव में कई पर्यटकों को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने में अधिक समय लगता है। भारतमाला परियोजना के पूर्ण होने से देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के लिए जशपुर पहुंचना अधिक सुविधाजनक होगा।
जिले के प्रसिद्ध मयाली नेचर कैंप, मधेश्वर पर्वत, रानीदाह जलप्रपात, कैलाश गुफा और अन्य प्राकृतिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच को बेहतर सड़क नेटवर्क से अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। पर्यटकों की आवाजाही बढऩे से होटल, होमस्टे, स्थानीय परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों को प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित हो सकेंगे।
आधुनिक सड़क संरचनाओं से सुरक्षित और व्यवस्थित होगा आवागमन
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत विकसित किए जा रहे इकोनॉमिक कॉरिडोर में यातायात को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए आधुनिक सड़क संरचनाओं का प्रावधान किया जा रहा है। विभिन्न स्थानों पर अंडरपास, वाहन अंडरपास और वन्यजीवों की आवाजाही के अनुकूल संरचनाओं जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य मुख्य मार्ग पर यातायात को व्यवस्थित रखने के साथ स्थानीय नागरिकों और वाहनों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाना है। वन्यजीवों के आवागमन से संबंधित संरचनाएं पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होंगी। आधुनिक सड़क अधोसंरचना विकसित होने से लंबी दूरी के यात्री वाहनों और मालवाहक वाहनों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सड़क के साथ रेल कनेक्टिविटी की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में सड़क और रेल संपर्क के विस्तार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। भारतमाला परियोजना के साथ कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य को गति मिली है। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राज्य राजमार्गों के अंतर्गत विभिन्न सड़कों का निर्माण एवं उन्नयन कराया जा रहा है। जिले के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित रेल संपर्क की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। लोहरदगा से धरमजयगढ़ तक प्रस्तावित रेल लाइन से संबंधित स्वीकृति की जानकारी केंद्रीय राजपत्र में प्रकाशित की गई है। यह रेल परियोजना आगे बढऩे पर जशपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के लिए रेल संपर्क के नए अवसर उपलब्ध करा सकती है। रेल और सड़क नेटवर्क का विस्तार भविष्य में जिले के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को गति देने में सहायक होगा।
दूरस्थ जनजातीय अंचल को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पिछले लगभग तीन वर्षों में सड़क, पुल-पुलिया और अन्य परिवहन अधोसंरचना के विकास के लिए अनेक परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे जशपुर जिले की प्रदेश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों और पड़ोसी राज्यों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजना के पूर्ण होने पर आवागमन की सुविधा बढऩे के साथ व्यापार, पर्यटन, कृषि और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार को भी प्रोत्साहन मिलेगा। आधुनिक सड़क नेटवर्क के विकास से जशपुर जिले में आर्थिक अवसरों का विस्तार होगा और दूरस्थ अंचलों को बेहतर परिवहन सुविधाओं से जोडऩे की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल होगी।
जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुरिया दरबार की परंपरा की प्रशंसा की। उन्होंने आदिवासी समाज से अपने पारंपरिक रीति-रिवाज, आपसी एकता और सांस्कृतिक विरासत को कायम रखने की अपील की। राष्ट्रपति ने कहा कि वह खुद इसी संस्कृति से जुड़ी रही है। उनके दादा और पिता मांझी की भूमिका निभाते थे, इसलिए वह इस व्यवस्था और इसकी परंपराओं को समझती है।
मुरिया दरबार को मजबूत बनाए रखने की अपील
मुरिया दरबार में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शासन की व्यवस्थाएं समय के साथ बदलती रही है। पहले राजाओं का शासन था, फिर अंग्रेज आए और बाद में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई। इन बदलावों के बीच आदिवासी समाज ने अपने पारंपरिक नियमों और सामुदायिक जीवन को बनाए रखा है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की खूबसूरती आपसी मेलजोल, शांति और मिलकर त्योहार मनाने की परंपरा में है। गांवों में मांझी और परगना जैसे पारंपरिक नेतृत्वकर्ता बैठकों के जरिए लोगों की समस्याओं का समाधान करते है। इस व्यवस्था को सामाजिक एकता का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए राष्ट्रपति ने इसे सम्मान देने की बात कही।
गांव में ही सुलझाएं विवाद, पारंपरिक व्यवस्था का करें सम्मान
राष्ट्रपति ने कहा कि आज छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए लोग थाने और अदालतों तक पहुंचते है, जहां मामलों के निपटारे में समय और धन खर्च हो सकता है। उन्होंने गांवों में सामुदायिक स्तर पर समस्याओं के समाधान की परंपरा को बनाए रखने पर जोर दिया।
उन्होंने मुरिया दरबार को प्रभावशाली पारंपरिक व्यवस्था बताते हुए कहा कि गांव की भलाई के लिए लोग एक साथ पूजा-पाठ और दूसरे सामुदायिक कार्य करते है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि इस तरह की परंपराएं भाईचारे और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि मुरिया दरबार की व्यवस्था लगातार जारी रहनी चाहिए, ताकि समाज अपनी पहचान और विरासत को सुरक्षित रख सके।
बस्तर दशहरा में सभी समाजों की भागीदारी विशेष
लालबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने सभी को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा में विभिन्न समाजों की भागीदारी इस उत्सव को खास बनाती है। यह आयोजन लोगों को आपस में जोड़ने और सामाजिक आत्मीयता बढ़ाने का काम करता है।
राष्ट्रपति ने बताया कि मांझियों ने उन्हें मुरिया दरबार की परंपरा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस व्यवस्था को जमीन से जुड़ा हुआ बताया और कहा कि ऐसी पारंपरिक संस्थाएं लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करने में योगदान दे सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान उन्हें बस्तर पंडुम में शामिल होने का निमंत्रण मिला था।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलाव और बस्तर ओलंपिक का जिक्र
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से प्रभावित लोगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों से नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को राहत मिली है और वे आगे बढ़ रहे है। उनके मुताबिक, देश के दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों को भी इन बदलावों से नई ऊर्जा मिली है।
उन्होंने बस्तर में आयोजित बस्तर ओलंपिक का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें आदिवासी युवाओं ने भाग लिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र के खिलाड़ी आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकते है और ओलंपिक में पदक जीतने की दिशा में आगे बढ़ सकते है।
दंडकारण्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख
राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर भी बात की। उन्होंने दंडकारण्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका जिक्र वाल्मीकि रामायण में मिलता है। राम, सीता और लक्ष्मण के वनवास से जुड़ी मान्यताएं इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। उन्होंने माता शबरी से भगवान राम की भेंट और रावण वध से जुड़ी कथाओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इस विरासत की पवित्रता को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि जनजातीय समाज में आज भी राम, लक्ष्मण और सीता से जुड़ी परंपराओं और कथाओं का विशेष स्थान है।
प्रकृति और जंगलों का संरक्षण समाज की जिम्मेदारी
राष्ट्रपति मुर्मू ने छत्तीसगढ़ में विकास की संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जुड़ने के अवसर बढ़ने से क्षेत्र के विकास को गति मिल सकती है। उन्होंने आदिवासी समाज की प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली की प्रशंसा की, जिसमें पेड़-पौधों, पत्थरों और मिट्टी को विशेष महत्व दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे भोजन, जलवायु और जीवन के लिए जरूरी प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े है। जंगल और पहाड़ पर्यावरण के संतुलन में अहम भूमिका निभाते है। इसलिए इनका संरक्षण करना सभी का साझा दायित्व है।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में आदिवासी समाज की परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान, आपसी भाईचारे और प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने राज्य सरकार से दीपावली से पहले 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता एरियर सहित जारी करने की मांग की है। इस संबंध में फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी को पत्र लिखकर जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया है।
केंद्र के समान DA देने की मांग
फेडरेशन के अनुसार, प्रदेश के कर्मचारियों को फिलहाल 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार की दर के मुकाबले यह 2 प्रतिशत कम है। संगठन ने मांग की है कि लंबित महंगाई भत्ते को देय तिथि से एरियर सहित स्वीकृत किया जाए। फेडरेशन का कहना है कि महंगाई बढ़ने के कारण कर्मचारियों और पेंशनरों को घरेलू खर्चों और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में उन्हें राहत देने के लिए जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।
घोषणा पत्र के वादे का दिया हवाला
फेडरेशन ने अपने पत्र में भाजपा के घोषणा पत्र का उल्लेख करते हुए कहा है कि प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता एरियर सहित देने का वादा किया गया था। संगठन ने सरकार से इस वादे के अनुरूप लंबित 2 प्रतिशत महंगाई भत्ते का भुगतान सुनिश्चित करने की अपील की है।
6 सितंबर की बैठक में लिया गया था निर्णय
कमल वर्मा के मुताबिक, फेडरेशन की 6 सितंबर को आयोजित प्रांतीय बैठक में दीपावली से पहले महंगाई भत्ते का एरियर जारी कराने की मांग को लेकर शासन को पत्र लिखने का निर्णय लिया गया था। इसी क्रम में मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र भेजकर कर्मचारियों की मांग पर जल्द कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
मांग पूरी नहीं हुई तो मंत्रालय घेराव की चेतावनी
कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने राज्य सरकार से दीपावली से पहले महंगाई भत्ते का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार की ओर से जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो मंत्रालय का घेराव किया जाएगा। फिलहाल, महंगाई भत्ते को लेकर राज्य सरकार की ओर से किसी नए निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर है।
मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली में प्रेम संबंध के चलते हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि 17 वर्षीय नाबालिग और एक युवक के बीच पिछले पांच साल से प्रेम संबंध थे। इस बीच नाबालिग की मोबाइल पर एक अन्य युवक से बातचीत होने लगी। प्रेमी को उनके बीच नजदीकी बढ़ने का शक हुआ, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। इसी दौरान गुस्से में आकर युवक ने कथित तौर पर नाबालिग का गला दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।
छत्तीसगढ़ मुंगेली जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम नेवासपुर की है। यहां रहने वाली 17 वर्षीय नाबालिग की संदिग्ध मौत के मामले में मुंगेली पुलिस ने हत्या का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, नाबालिग मृतका का आरोपी युवक के साथ प्रेम संबंध और उनके बीच किसी अन्य युवक के आ जाने से विवाद गहरा गया। तीसरे युवक से प्रेमिका द्वारा बातचीत करने और प्रेम संबंध बढ़ाने की आशंका चलते आरोपी ने वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस के मुताबिक, 20 अक्टूबर की रात परिजनों को नाबालिग अपने बिस्तर पर बेहोशी की हालत में मिली। उसके गले पर चोट और खरोंच के निशान थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई कर शव का पोस्टमार्टम कराया। जांच के दौरान गला दबाकर हत्या करने की आशंका के चलते पुलिस ने धारा 103 बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
प्रेमी ने ऐसे दिया घटना को अंजाम
16 अक्टूबर को हैदराबाद से गांव लौटने के बाद अजीत ने अपने साथी साहिल खांडे को मृतका के दूसरे युवक के संपर्क में होने की बात बताई। दो दिन बाद 19 अक्टूबर की रात दोनों मोटरसाइकिल से नेवासपुर पहुंचे। साहिल को बाहर निगरानी के लिए छोड़कर अजीत घर की दीवार फांदकर अंदर गया। वहां मृतका को मोबाइल पर बात करते देखने के बाद दोनों के बीच विवाद हुआ। हाथापाई के दौरान आरोपी ने नाबालिग प्रेमिका का गला दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
ऐसे खुला हत्या का राज
जांच पड़ताल के दौरान पुलिस को अजीत घृतलहरे से नाबालिग की प्रेम संबंध होने की जानकारी सामने आई। संदेह के आधार पर पुलिस ने अजीत को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने वर्ष 2021 से मृतका के साथ प्रेम संबंध होने की बात स्वीकार की। करीब एक साल पहले मृतका के किसी अन्य युवक से बातचीत करने की जानकारी मिलने पर दोनों के बीच विवाद हुआ था। इस दौरान आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी थी।
मौत को सामान्य दिखाने की कोशिश
पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपी ने शव को दूसरे कमरे के बिस्तर पर लिटा दिया, ताकि मौत सामान्य या हार्ट अटैक से हुई प्रतीत हो। इसके बाद उसने अपने साथी साहिल को घटना की जानकारी दी। विवेचना के दौरान साक्ष्य छिपाने की भूमिका सामने आने पर साहिल को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल क्रमांक सीजी 28 जे 7143 जब्त कर दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 103, 238 एवं 3(5) बीएनएस के तहत कार्रवाई करते हुए कोर्ट में पेश किया। कोर्ट के आदेश पर दोनों को ज्यूडिशियल रिमांड पर जेल भेज दिया है।
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से सड़क हादसे को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जहां नेशनल हाइवे 53 पर शुक्रवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। ओडिशा के संबलपुर से आ रही कार दुर्घटना का शिकार हो गई। 16 चक्का ट्रक में कार पीछे से जा घुसी। हादसा इतना भयानक था कि दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना पटेवा थाना क्षेत्र में बावनकेरा की है।
घटना में कार के परखच्चे उड़ गए। मृतकों की फिलहाल पहचान नहीं हो पाई है। प्रारंभिक तौर पर सभी राजनांदगांव जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। कार में घटना के वक्त 5 लोग सवार थे। वह ओडिशा के संबलपुर में शादी में शामिल होने के लिए गए थे। पुलिस घटना के संबंध में जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर बावनकेरा चौक पर तेज रफ्तार कार 16 चक्का ट्रक से जा टकराई। ट्रक के पीछे के हिस्से टकराने के बाद कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के वक्त कार में 5 लोग सवार थे। राहगीरों की सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस ने वाहन में मौजूद लोगों को बाहर निकाला। सभी को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव लाया गया। डॉक्टरों ने दो महिलाओं की मृत घोषित कर दिया। वहीं घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया गया है।
पुलिस ने वाहनों को मार्ग से हटाया, ताकि यातायात प्रभावित न हो। मृतकों के शवों को पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वहीं हादसे के कारणों की जांच और मृतकों की पहचान करने के लिए पुलिस जुटी हुई है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अमलीडीह इलाके में धर्म परिवर्तन को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने दो महिलाओं पर परिवार को ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव डालने और इनकार करने पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर न्यू राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने दोनों महिलाओं के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि धर्म परिवर्तन के लिए सहमति नहीं देने पर परिवार के सदस्यों को परेशान भी किया गया। फिलहाल मामले में पुलिस की जांच से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
पीड़ित परिवार ने पुलिस को बताया कि परिवार पर धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। शिकायत में दावा है कि उसकी छोटी बेटी का पहले ही धर्म परिवर्तन कराया जा चुका है। वहीं परिवार के अन्य सदस्यों पर भी ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर उनके साथ लात-घूंसों से मारपीट की गई।
पीड़ितों का आरोप है कि विवाद के दौरान मोबाइल फोन तोड़ दिया गया। इसके अलावा घर में ताला लगाने और इलाज के लिए बाहर नहीं जाने देने की भी शिकायत की गई है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उसके 16 वर्षीय बेटे को धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन दिया जा रहा था।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर विशाखा मसीह और दुलारी साहू के खिलाफ FIR दर्ज किया। पुलिस ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 की धारा 16(1) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
रायपुर। बंगाल की खाड़ी में एक नई मौसमी प्रणाली विकसित होने की संभावना बन रही है। दक्षिण-पूर्व और उससे लगे पूर्व-मध्य हिस्से में 23 अक्टूबर के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है। समुद्र में इस हलचल के बीच छत्तीसगढ़ के लिए जारी पूर्वानुमान में फिलहाल बारिश के संकेत नहीं हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक, खाड़ी और अंडमान द्वीप समूह के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती घेरा सक्रिय है। इसके प्रभाव से बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ सकता है और आगे इसकी तीव्रता बढ़ने की भी संभावना है।
प्रदेश में बारिश की चेतावनी नहीं, रात के तापमान में बदलाव संभव
छत्तीसगढ़ में अगले पांच दिनों तक मौसम सूखा रहने का अनुमान है। किसी भी इलाके के लिए बारिश की चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि, तापमान में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल सकता है।
अगले 24 घंटों तक पारे में खास अंतर आने की संभावना नहीं है। इसके बाद रात का तापमान 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक नीचे जा सकता है। ऐसे में सुबह और रात के समय ठंडक बढ़ने के आसार हैं।
रायपुर में साफ आसमान, अंबिकापुर में सबसे कम न्यूनतम तापमान
राजधानी में 23 अक्टूबर को मौसम खुला रहने की संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।
विभाग के पिछले 24 घंटों के आंकड़ों में रायपुर का अधिकतम तापमान प्रदेश में सबसे अधिक 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं, अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 13.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो राज्य में सबसे कम था। इस अवधि में प्रदेश में कहीं भी उल्लेखनीय बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई।
रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज अपने बस्तर प्रवास के दौरान जगदलपुर स्थित बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति ने माँ दंतेश्वरी से देशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। राष्ट्रपति मुर्मु ने मंदिर में माँ दंतेश्वरी के दर्शन किए और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति का परंपरागत ढंग से स्वागत किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के प्रति अंचल के लोगों की अटूट श्रद्धा है। माँ दंतेश्वरी बस्तर की आस्था और लोकजीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी का माँ दंतेश्वरी के दर्शन-पूजन के लिए आगमन बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अपनी अनुपम जनजातीय संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और विशिष्ट जीवन मूल्यों के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। यहाँ की परंपराओं में प्रकृति, आस्था और समाज के बीच गहरा संबंध दिखाई देता है। राष्ट्रपति जी के प्रवास से बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और सम्मान मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि माँ दंतेश्वरी बस्तर अंचल की आराध्य देवी हैं। माँ दंतेश्वरी के प्रति बस्तरवासियों की गहरी आस्था है और उनकी उपासना क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है। माँ दंतेश्वरी से जुड़ी आस्था बस्तर की सदियों पुरानी परंपराओं और यहां के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में गहराई से रची-बसी है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में ओला इलेक्ट्रिक के करीब 3,000 वाहनों का पंजीयन लंबित होने का मामला सामने आया है। इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सब्सिडी से जुड़े आवेदन नहीं किए जाने के कारण परिवहन विभाग ने कंपनी को नोटिस जारी किया है। विभाग ने मोटरयान अधिनियम के तहत कंपनी से जवाब मांगा है।
सब्सिडी के लाभ में आ रही परेशानी
जानकारी के अनुसार, ओला इलेक्ट्रिक के करीब 3,000 वाहनों का पंजीयन लंबित है। ईवी सब्सिडी से संबंधित आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण वाहन मालिकों को सब्सिडी का लाभ मिलने में परेशानी हो रही है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है। ऐसे में सब्सिडी से संबंधित आवेदन और पंजीयन की प्रक्रिया में देरी होने से वाहन मालिकों को आर्थिक लाभ मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
मोटरयान अधिनियम के तहत मांगा जवाब
परिवहन विभाग ने ओला इलेक्ट्रिक को नोटिस जारी कर लंबित पंजीयन और ईवी सब्सिडी के आवेदन नहीं किए जाने के संबंध में जवाब मांगा है। कंपनी को निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय में कंपनी की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
वाहन मालिकों की बढ़ी परेशानी
करीब 3,000 वाहनों का पंजीयन लंबित होने और सब्सिडी का लाभ मिलने में आ रही दिक्कतों के बीच वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ गई है। अब इस मामले में कंपनी की ओर से दिए जाने वाले जवाब और परिवहन विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।फिलहाल, कंपनी की ओर से नोटिस पर क्या जवाब दिया जाता है और लंबित मामलों का निराकरण कब तक होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी ने भेंट की छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कोसा साड़ी
रायपुर- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लोक भवन में राज्यपाल रमेन डेका ने सम्मान स्वरूप छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की प्रतिकृति भेंट की। इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी ने राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कोसा साड़ी भेंट की।
राष्ट्रपति मुर्मु ने भी स्मृति स्वरूप राज्यपाल डेका को विशिष्ट शैली की चित्रकला भेंट की। स्मृति चिह्नों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक कलाओं को सम्मानित किया गया। पहाड़ी मैना राज्य की प्राकृतिक पहचान का प्रतीक है, वहीं कोसा साड़ी छत्तीसगढ़ की समृद्ध बुनकर परंपरा और हस्तकला का प्रतिनिधित्व करती है।
अन्न का सम्मान, किसानों के योगदान को स्वीकार करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हम सभी का सामूहिक दायित्व: राष्ट्रपति
विकसित भारत के निर्माण में युवाओं और महिलाओं की समान भागीदारी आवश्यक
जहां कभी आतंक का अंधेरा था, वहां आज विकास का उजियारा फैल रहा है: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में नुआखाई जुहार पर सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का जीवन देश की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
सेवा संकल्प अभियान के रक्तदान महाकुंभ में 2,548 लोगों ने किया रक्तदान, 1,188 महिलाएं भी बनीं मानवता की इस मुहिम में सहभागी


युवा बड़े सपने देखें, अपने विचारों को व्यापक बनाएं और अपनी सफलता को समाज एवं राष्ट्र की सेवा से जोड़ें। परिस्थितियां और चुनौतियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन प्रत्येक युवा के भीतर कुछ नया करने, बेहतर बनाने और अपनी पहचान स्थापित करने की ललक होनी चाहिए। जब युवाओं के व्यक्तिगत प्रयास सामूहिक और राष्ट्रीय लक्ष्यों से जुड़ेंगे, तभी देश की प्रगति का मार्ग और अधिक प्रशस्त होगा। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में नुआखाई के अवसर पर आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सहित बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित थे।

रायपुर --राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने नुआखाई की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नुआखाई मिलन केवल एक सांस्कृतिक समारोह नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध परंपराओं, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का उत्सव है। ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने, अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और भारतीय जीवन मूल्यों को आने वाली पीढि़यों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि नुआखाई हमारी कृषि परंपरा को सहेजने, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और सामुदायिक भावना को मजबूत करने का पर्व है। अन्न केवल हमारी भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि किसान भाई-बहनों के परिश्रम, धरती की उदारता और प्रकृति के अनमोल उपहार का प्रतीक है। अन्न का सम्मान करना, किसानों के योगदान को स्वीकार करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
ज्ञान के साथ विनम्रता, महत्वाकांक्षा के साथ नैतिकता और सफलता के साथ सेवा-भाव जोड़ें युवा
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने युवाओं से कहा कि वे जीवन में सीखना कभी बंद न करें। पुस्तकें पढ़ें, प्रश्न पूछें, नई चीजों को समझें और अपने ज्ञान एवं कौशल को निरंतर विकसित करें। जीवन में लक्ष्य तय करें और चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करें। सफलता और असफलता जीवन का हिस्सा हैं। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीखकर स्वयं में सुधार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को ज्ञान के साथ विनम्रता, महत्वाकांक्षा के साथ नैतिकता और सफलता के साथ सेवा-भाव को जोड़ना चाहिए। आपका ज्ञान किसी जरूरतमंद के काम आए, आपकी प्रतिभा किसी समस्या का समाधान करे और आपकी सफलता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बने, तभी उपलब्धि की वास्तविक सार्थकता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र का निर्माण केवल बड़े निर्णयों से नहीं होता, बल्कि करोड़ों नागरिकों के छोटे-छोटे ईमानदार प्रयासों से होता है। प्रत्येक युवा जो भी कार्य करे, उसे ईमानदारी, निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करे। ये गुण विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं के योगदान को और सशक्त बनाएंगे।
विकसित भारत के लिए महिलाओं की समान भागीदारी जरूरी
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महिलाओं की समान भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। देश की आधी आबादी को आगे बढ़ाए बिना राष्ट्र पूरी क्षमता के साथ प्रगति नहीं कर सकता।
उन्होंने महिलाओं से देश और समाज के कार्यों में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने पुरुषों, विशेषकर युवाओं से कहा कि वे अपनी बहनों और बेटियों को ऐसा वातावरण और अवसर प्रदान करें, जिसमें वे बिना किसी बाधा के अपने सपनों को साकार कर सकें। महिलाओं के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारी सोच, व्यवहार और दैनिक आचरण में भी दिखाई देना चाहिए।
जहां कभी आतंक का अंधेरा था, वहां आज विकास का उजियारा
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने छत्तीसगढ़ में हो रहे सकारात्मक बदलाव का उल्लेख करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों तथा युवाओं की दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर प्रदेश के युवा नक्सलवाद के भटकाव से मुक्त होकर मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जहां कभी आतंक का अंधेरा था, वहां आज विकास का उजियारा फैल रहा है। इस परिवर्तन से न केवल युवाओं और उनके परिवारों का कल्याण हो रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ और पूरे भारत के विकास को भी गति मिल रही है।
नुआखाई सामाजिक एकता और सेवा भावना का पर्व: राज्यपाल श्री रमेन डेका
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने प्रदेशवासियों को नुआखाई जुहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल नई फसल के आगमन की खुशी मनाने का अवसर नहीं, बल्कि धरती माता के प्रति कृतज्ञता, किसानों के परिश्रम के सम्मान और मिल-जुलकर खुशियां बांटने का उत्सव है। यह हमारी समृद्ध कृषि संस्कृति, सामाजिक एकता और आपसी सहयोग की परंपरा को मजबूत करता है।
राज्यपाल ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति को प्रदेश के लिए सौभाग्य और प्रेरणा का अवसर बताते हुए कहा कि उनका संघर्ष, सादगी, समर्पण और सेवाभाव हम सभी के लिए प्रेरक है। उन्होंने युवाओं से सेवा को अपने जीवन का स्वभाव बनाने और नशे एवं भटकाव से दूर रहकर ज्ञान, कौशल और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि स्वस्थ, शिक्षित, संस्कारित और सेवाभावी युवा ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने रक्तदाताओं, विशेष रूप से महिला रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान मानवता की महान सेवाओं में से एक है।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु जी का जीवन बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा: मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु जी का छत्तीसगढ़ से गहरा आत्मीय संबंध है। प्रदेशवासियों के मन में उनके प्रति अपार आदर और आत्मीयता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु जी का संपूर्ण जीवन संघर्ष, सादगी, सेवा, शिक्षा और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक मिसाल है। ओडिशा के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उनकी जीवन यात्रा विशेष रूप से देश की बेटियों, युवाओं तथा जनजातीय और ग्रामीण अंचलों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका मार्गदर्शन प्रदेश के युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नुआखाई हमारी समृद्ध कृषि संस्कृति, नई फसल के स्वागत और धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सदियों पुराने सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंध हैं। ओडि़या समाज ने अपनी मेहनत, सादगी और सेवाभाव से छत्तीसगढ़ के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नुआखाई के पावन अवसर पर सेवा सम्मान और युवा प्रबोधन का आयोजन हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को समाज सेवा और युवा सशक्तीकरण से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है।
युवा शक्ति को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रहा विकसित छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की निर्णायक भूमिका होगी। राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवा शक्ति को केंद्र में रखकर शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के अवसरों का विस्तार कर रही है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए गीदम, कुनकुरी, जांजगीर-चांपा, मनेन्द्रगढ़ और कवर्धा में पांच नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए हैं। नवा रायपुर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की जा रही है, जहां प्रतिवर्ष लगभग चार हजार युवाओं को आधुनिक तकनीक एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलेगा। छत्तीसगढ़ राज्य एआई मिशन के माध्यम से छह लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से रोजगार और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति के अंतर्गत युवाओं के नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड बनाया गया है। प्रदेश में फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी कैंपस, निफ्ट और नाइलिट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना की दिशा में भी पहल की गई है। चार वर्ष की सैन्य सेवा पूर्ण करने वाले छत्तीसगढ़ के अग्निवीरों को पुलिस आरक्षक, वनरक्षक और जेल प्रहरी की सीधी भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर देना है, ताकि उनकी प्रतिभा, ऊर्जा और क्षमता विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की शक्ति बने।
रक्तदान महाकुंभ में 2,548 लोगों ने किया रक्तदान
मुख्यमंत्री श्री साय ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित रक्तदान महाकुंभ के रक्तदाताओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि रक्तदान मानवता की महान सेवा है। अभियान में 2,548 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया, जिनमें 1,188 महिलाएं शामिल थीं। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ की सेवा भावना, सामाजिक सहभागिता और नारी शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री द्वय श्री अरूण साव एवं विजय शर्मा, केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरू खुशवंत साहेब, राज्य सभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
भंडारपुरी धाम/आरंग। परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी की पावन कर्मभूमि भंडारपुरी धाम में आयोजित गुरुदर्शन एवं संत समागम मेले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी ने कैबिनेट मंत्री एवं आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब जी की मांग पर क्षेत्र में शिक्षा एवं नगरीय सुविधाओं के विस्तार के लिए 2 करोड़ 90 लाख रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की।
साथ ही अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के माध्यम से 40 स्थानों पर सेतखाम स्थापना की घोषणा की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी एवं मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी की उपस्थिति में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत रायपुर जिले के तीन महत्वपूर्ण सड़क निर्माण एवं उन्नयन कार्यों का भूमिपूजन भी संपन्न हुआ, जिनकी कुल प्रशासनिक स्वीकृति राशि 28 करोड़ 96 लाख 82 हजार रुपये है।
राजागुरु धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब जी के सान्निध्य में आयोजित इस समागम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी, कैबिनेट मंत्री एवं आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब जी, संत-महात्माओं, धर्मगुरुओं, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा और क्षेत्र के विकास से जुड़ी घोषणाओं के कारण यह आयोजन धार्मिक, सांस्कृतिक एवं विकासात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।
गुरुदर्शन एवं संत समागम मेले की पारंपरिक शुरुआत गुरुद्वारा में पूजा-अर्चना के साथ हुई। इस अवसर पर गुरुद्वारा में विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया। इसके पश्चात गुरूजन घोड़ा-बग्गी में सवार होकर भव्य पारंपरिक यात्रा के साथ धर्ममंच तक पहुंचे। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरा वातावरण गुरु परंपरा, श्रद्धा एवं भक्ति से सराबोर रहा।
मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी की मांग पर मुख्यमंत्री जी ने की घोषणा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी ने क्षेत्र में शैक्षणिक एवं नगरीय सुविधाओं के विस्तार के लिए चार निर्माण कार्यों की घोषणा की। इनमें पीएमश्री स्कूल, मंदिर हसौद में प्रथम तल पर अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये, शासकीय हाईस्कूल खम्हतराई में भवन निर्माण के लिए 75 लाख रुपये, ग्राम ओड़का में नवीन शासकीय प्राथमिक शाला भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपये तथा नगर पंचायत चंदखुरी कार्यालय के प्रथम तल के निर्माण के लिए 85 लाख रुपये शामिल हैं। इन चारों कार्यों की कुल राशि 2 करोड़ 90 लाख रुपये है। इनसे क्षेत्र में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और नगरीय प्रशासनिक अधोसंरचना को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
28 करोड़ 96 लाख 82 हजार रुपये के सड़क कार्यों का भूमिपूजन
गुरुदर्शन एवं संत समागम मेले के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी एवं कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी की उपस्थिति में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत रायपुर जिले के तीन सड़क निर्माण एवं उन्नयन कार्यों का भूमिपूजन किया गया। इनकी कुल प्रशासनिक स्वीकृति राशि 28 करोड़ 96 लाख 82 हजार रुपये है।
भूमिपूजन किए गए कार्यों का विवरण इस प्रकार है—
छतोना-दखवा कटेसर-बड़गांव-कुण्डा-नारा-लखौली मार्ग: 29 किलोमीटर लंबाई के उन्नयन एवं नवीनीकरण कार्य के लिए 17 करोड़ 34 लाख 99 हजार रुपये।
नरदहा आंतरिक मार्ग: 2 किलोमीटर लंबाई के निर्माण कार्य के लिए 3 करोड़ 30 लाख 78 हजार रुपये।
चंदखुरी-मोहदी-अटसैना मार्ग: 4 किलोमीटर लंबाई के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य के लिए 8 करोड़ 31 लाख 5 हजार रुपये।
इन सड़क निर्माण एवं उन्नयन कार्यों से आवागमन की सुविधा बेहतर होने और क्षेत्र की सड़क अधोसंरचना मजबूत होने की उम्मीद है।
40 स्थानों पर सेतखाम स्थापना की घोषणा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी ने अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के माध्यम से 40 स्थानों पर सेतखाम स्थापना की घोषणा की। सेतखाम सतनामी समाज की धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक चेतना और गुरु परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इस घोषणा से समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़े विषय को प्रमुखता मिली।
भंडारपुरी धाम सतनामी समाज की आस्था और गुरु परंपरा का प्रमुख केंद्र है। परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी के सत्य, समानता, मानवता और सदाचार के संदेश आज भी समाज को सामाजिक समरसता एवं सद्भाव की प्रेरणा देते हैं।
गुरु बालदास साहेब जी के सान्निध्य में गुरु परंपरा का भव्य समागम
गुरुदर्शन एवं संत समागम मेले में राजागुरु धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब जी का सान्निध्य आयोजन की प्रमुख विशेषता रहा। गुरु सोमेश बाबा जी एवं गुरु सौरभ साहेब जी सहित संत-महात्माओं की उपस्थिति ने आयोजन की धार्मिक गरिमा बढ़ाई।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुजनों के दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए भंडारपुरी धाम पहुंचे। गुरु घासीदास बाबा जी की पावन कर्मभूमि भंडारपुरी धाम में आयोजित यह समागम पीढ़ियों से चली आ रही गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण की परंपरा का प्रतीक बना।
मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी की उपस्थिति में आस्था और विकास का संगम
छत्तीसगढ़ शासन में कैबिनेट मंत्री एवं आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब जी की उपस्थिति में आयोजित इस समागम में धार्मिक आस्था, सामाजिक परंपरा और क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषय प्रमुखता से सामने आए। मंत्री जी की मांग पर घोषित विकास कार्यों और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में संपन्न सड़क निर्माण कार्यों के भूमिपूजन ने आयोजन को विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाया।
संत-महात्माओं, मंत्रियों एवं जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी, राजागुरु धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब जी, कैबिनेट मंत्री एवं आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब जी, कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा जी, विधायक रोहित साहू जी, विधायक इंद्रकुमार साहू जी, निगम/आयोग उपाध्यक्ष राजीव लोचनदास महाराज जी, अंजय शुक्ला जी, प्रहलाद रजक जी, भाजपा रायपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष श्याम नारंग जी, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल जी तथा जांजगीर जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता आनंद मीरी जी सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इसके साथ ही सतनामी समाज एवं अखिल भारतीय सतनाम सेना के पदाधिकारियों, सदस्यों, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। संत-महात्माओं के सान्निध्य, गुरुजनों के दर्शन और श्रद्धालुओं की सहभागिता से भंडारपुरी धाम में श्रद्धा एवं भक्ति का वातावरण बना रहा।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मनेंद्रगढ़-केल्हारी मार्ग पर हुई भीषण बस दुर्घटना में 6 लोगों के असामयिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस हृदयविदारक घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को राज्य शासन की ओर से ₹5-5 लाख तथा घायलों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री साय ने दुर्घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य तत्परता से संचालित करने तथा घायलों के उपचार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और उनके उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न हो।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि दुर्घटना में घायल यात्रियों का सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ एवं जिला अस्पताल चिरमिरी में उपचार जारी है। गंभीर रूप से घायल 2 यात्रियों को बेहतर उपचार के लिए अंबिकापुर रेफर किया गया है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यकता के अनुरूप हरसंभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें, शोकाकुल परिवारों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें तथा सभी घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ दें।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों का सिलसिला जारी है। इस बार लोक निर्माण विभाग (PWD) में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। विभाग ने एक साथ 84 कर्मचारियों को दूसरी जगह भेजने का आदेश जारी किया है। इनमें मानचित्रकार से लेकर सहायक ग्रेड-1 और ग्रेड-2 तक के कर्मचारी शामिल हैं।
लोक निर्माण विभाग की ओर से जारी आदेश में सबसे ज्यादा तबादले सहायक ग्रेड-2 के कर्मचारियों के हुए हैं। इस श्रेणी के 41 कर्मचारियों को दूसरी जगह भेजा गया है। इसके अलावा 29 मानचित्रकारों का भी तबादला किया गया है, जो सिविल और यांत्रिकी से जुड़े कार्यों में तैनात हैं। वहीं, सहायक ग्रेड-1 के 14 कर्मचारी भी इस फेरबदल की सूची में शामिल हैं। विभाग ने सभी 84 कर्मचारियों के तबादले का आदेश जारी कर दिया है।





रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की शुरुआत 15 नवंबर 2026 से होने जा रही है। खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और दूसरे राज्यों से अवैध रूप से धान लाकर प्रदेश में बेचने की कोशिशों पर रोक लगाने के लिए खाद्य विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। खाद्य सचिव रीना कंगाले ने सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों और मार्कफेड के प्रबंध संचालक को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों के अनुसार, इस बार धान खरीदी के दौरान बाहरी राज्यों से आने वाले धान की निगरानी के साथ-साथ कोचियों, बिचौलियों और धान के अवैध कारोबार पर भी विशेष नजर रखी जाएगी।
आशंका जताई गई है कि दूसरे राज्यों से धान लाकर छत्तीसगढ़ के पंजीकृत किसानों के रकबे में बेचने का प्रयास किया जा सकता है। इससे सरकारी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा गांवों और शहरी क्षेत्रों में सक्रिय कोचिये-बिचौलिये भी छोटे स्तर पर धान खरीदकर किसानों के पंजीयन के माध्यम से उसे खपाने की कोशिश कर सकते हैं।
कुछ मिलरों और धान परिवहनकर्ताओं द्वारा धान के पुनर्चक्रण यानी एक ही धान को अलग-अलग माध्यमों से दोबारा खरीदी व्यवस्था में खपाने की आशंका को देखते हुए भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
हर जिले में बनेगा विशेष चेकिंग दल
धान खरीदी में अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रत्येक जिले में कलेक्टर की ओर से विशेष चेकिंग दल का गठन किया जाएगा। इस दल में राजस्व, खाद्य, मंडी, सहकारिता, वन, परिवहन सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।
विशेष चेकिंग दल नियमित निरीक्षण करेगा और दूसरे राज्यों से आने वाले धान की आवक पर नजर रखेगा। जांच के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
273 चेक पोस्ट पर कड़ी निगरानी
प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर स्थापित 273 चेक पोस्ट पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर चेक पोस्ट की संख्या बढ़ाई जा सकती है। विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों में अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दूसरे राज्यों से अवैध रूप से धान लाकर बेचने की कोशिशों को रोका जा सके।
बिना अनुमति नहीं ला सकेंगे दूसरे राज्यों से धान
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर 2026 से 30 अप्रैल 2027 तक दूसरे राज्यों से धान का आयात करने के लिए संचालक, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
हालांकि, 3300 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक लागत वाले सुपर फाइन धान के आयात के मामले में संचालक की अनुमति से छूट दी गई है। लेकिन ऐसे धान के आयात की सूचना संबंधित जिला खाद्य अधिकारी या खाद्य नियंत्रक को देना अनिवार्य होगा।
कोचियों और बिचौलियों की पहले ही होगी पहचान
मंडी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि धान खरीदी शुरू होने से पहले ही गांवों और शहरी क्षेत्रों में छोटे स्तर पर धान खरीदने वाले कोचियों और बिचौलियों की पहचान कर ली जाए। इनकी जानकारी नजदीकी धान खरीदी समिति और खाद्य विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।
यदि कोई कोचिया या बिचौलिया समिति में धान लाकर दूसरे किसानों के पंजीयन में उसे बेचने या खपाने की कोशिश करता पाया जाता है, तो उसका वाहन और धान जब्त किया जा सकता है। साथ ही संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम में पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उपस्थित थे।
पूज्य शदाणी दरबार रायपुर की 5 वीं पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की 200 वीं जयंती पर भारत सरकार वित्त मंत्रालय द्वारा 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी किया गया है। सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का जारी होना समाज के लिए ऐतिहासिक मौका था। यह देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सिंधी लोगों के लिए गर्व का विषय है। स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा जारी इस विशेष सिक्के पर पूज्य माता हासी देवी जी की छवि अंकित है। सिक्के के एक ओर अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष और 200 रुपये का मूल्यवर्ग दर्शाया गया है। इस स्मारक सिक्के के माध्यम से उनके जीवन, विचारों और आध्यात्मिक योगदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन पूज्य शदाणी दरबार रायपुर के पीठाधीश संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी ने दिया।
इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी, मोतीलाल साहू, मुख्य सचिव विकासशील, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना सहित वरिष्ठ अधिकारी, पूज्य शदाणी दरबार के सदस्य सहित देशभर से आए हुए जनप्रतिनिधि और सिंधी समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने देवनानी का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर इंदौर लोकसभा क्षेत्र के सांसद शंकर लालवानी और अमित चिमनानी उपस्थित थे।
00 यूनेस्को की संभावित सूची में सिरपुर का शामिल होना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिरपुर को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। साय ने कहा कि सिरपुर हमारी समृद्ध सभ्यता, कला, आध्यात्मिकता और ज्ञान परंपरा की अनमोल धरोहर है। प्राचीन काल से ही सिरपुर शिक्षा, संस्कृति, धर्म और स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में विरासत भी, विकास भी के संकल्प के साथ देश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यटन की नई संभावनाओं से जोडऩे के लिए प्रतिबद्ध है। साय ने कहा कि यूनेस्को की संभावित सूची में सिरपुर का शामिल होना हमारी गौरवशाली विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सिरपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सिरपुर सहित छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि आने वाली पीढिय़ां अपनी गौरवशाली विरासत से परिचित हों और छत्तीसगढ़ की संस्कृति की कीर्ति विश्वभर में और अधिक विस्तारित हो।
00 रायपुर जिले के आरंग स्थित सालासार विहार परियोजना में नियमों के उल्लंघन पर प्राधिकरण की सख्ती
00 संपत्ति खरीदने से पहले रेरा पंजीयन की जांच अवश्य करें नागरिक : सीजी-रेरा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भूखंड एवं आवास खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (सीजी-रेरा) द्वारा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रमोटरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में प्राधिकरण ने रायपुर जिले के आरंग स्थित सालासार विहार परियोजना में बिना रेरा पंजीयन के भूखंडों की बिक्री करने के मामले में प्रमोटर राजीव सोनी, पिता के.एल. सोनी, पर 25 लाख रुपये की शास्ति अधिरोपित की है।
प्राधिकरण द्वारा प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं उपलब्ध तथ्यों के परीक्षण में पाया गया कि सालासार विहार परियोजना के अंतर्गत भूमि का भूखंडों में विभाजन कर रेरा पंजीयन प्राप्त किए बिना भूखंडों का विक्रय किया गया। यह कृत्य भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 3 के प्रावधानों का उल्लंघन है। प्राधिकरण ने इस उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत परियोजना की अनुमानित लागत के आधार पर प्रमोटर पर 25 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया है।
रेरा पंजीयन के बिना भूखंडों की बिक्री अधिनियम का उल्लंघन
भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के अंतर्गत निर्धारित श्रेणी की रियल एस्टेट परियोजनाओं का रेरा में पंजीयन कराना अनिवार्य है। ऐसी परियोजनाओं में पंजीयन प्राप्त किए बिना भूखंडों अथवा अन्य संपत्तियों का विज्ञापन, विपणन या विक्रय करना अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध है। इन प्रावधानों का उद्देश्य संपत्ति खरीदारों को परियोजना की वैधानिक स्थिति, विकास संबंधी जानकारी और अन्य आवश्यक विवरण उपलब्ध कराना तथा उनके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्राधिकरण की यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि रियल एस्टेट परियोजनाओं के विकास और विक्रय में निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है। बिना पंजीयन परियोजनाओं का संचालन करने वाले प्रमोटरों के विरुद्ध अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
भूखंड खरीदने से पहले रेरा पंजीयन की जांच करने की अपील
छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने आम नागरिकों एवं संपत्ति खरीदारों से अपील की है कि किसी भी आवासीय अथवा भूखंड परियोजना में निवेश करने से पहले संबंधित परियोजना की रेरा पंजीयन स्थिति की जांच अवश्य करें। खरीदार परियोजना का पंजीयन क्रमांक, प्रमोटर का विवरण तथा अन्य आवश्यक जानकारियों का सत्यापन करें, ताकि भविष्य में संभावित विवादों एवं आर्थिक नुकसान से बचा जा सके। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। साथ ही भूखंड एवं आवास खरीदारों के अधिकारों की रक्षा तथा सुरक्षित एवं विश्वसनीय संपत्ति लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए प्राधिकरण प्रतिबद्ध है। आमजन छत्तीसगढ़ रेरा की आधिकारिक वेबसाइट https://rera.cgstate.gov.in पर जाकर परियोजनाओं के पंजीयन संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ऐसा हाईटेक मेगा एग्जाम सेंटर बनाने की सरकार की याेजना है, जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा एंट्रेस एग्जाम लिए जाएंगे। मेगा एग्जाम सेंटर में स्टेट और सेंट्रल लेवल के एग्जाम लिए जाएंगे।
भवन की ड्राइंग डिजाइन कैसे रहेगी, हाईटेक सेंटर में नकल रोकने क्या व्यवस्था रहेगी, कैम्पस से लेकर एग्जाम हॉल तक सीसीटीवी कैमरे में निगरानी में रखने फूलप्रूफ डिजाइन तैयार करने विभाग ने आर्किटेक्ट की खोजबीन शुरू कर दी है। अपनी तरह की पहली और मेगा प्लान के लिए 25 करोड़ का बजट बनाया गया है।
अपनी तरह के इस पहली परियोजना का निर्माण लोक निर्माण विभाग PWD के जरिए कराया जाएगा। लिहाजा, पीडब्ल्यूडी ने मेगा परीक्षा केंद्र भवन के लिए आर्किटेक्ट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है।
हाईटेग मेगा एग्जाम सेंटर में एक साथ 5 हजार परीक्षार्थी बैठकर परीक्षा दिला सकेंगे। पूरे सेंटर को ऑफलाइन के अलावा ऑनलाइन कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) मोड की परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाएगा। परीक्षा केंद्र भवन निर्माण के लिए जमीन चिंहित की प्रक्रिया चल रही है। इसके चयन में अभ्यर्थियों की पहुंच को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई है, ताकि परीक्षा देने आने वाले छात्रों को केंद्र तक पहुंचने में परेशानी न हो।
2027 में कर्मचारी चयन मंडल से 22 परीक्षाएं होंगी
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2027 में कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से 22 परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा।कर्मचारी चयन मंडल के जरिए शासकीय विभागों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर, बीएड और डीएलएड जैसी प्रवेश परीक्षाएं भी चयन मंडल के दायरे में रहेगी।
NTA, UPSC एग्जाम भी मेगा सेंटर में
प्रस्तावित मेगा परीक्षा केंद्र में कर्मचारी चयन मंडल और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग CGPSC की परीक्षाओं के अलावा राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करने की भी सुविधा होगी। इसके लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी संस्थाओं की परीक्षाएं भी कराई जा सकेंगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के सेवारत शासकीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के विशेष आयोजन के प्रस्ताव को सहमति प्रदान की है। यह परीक्षा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) के माध्यम से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) पद्धति से आयोजित की जाएगी। शासन ने वर्ष में न्यूनतम दो बार परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सेवारत शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें।
टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील क्रमांक 1385/2025 में 1 सितंबर 2025 तथा पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को पारित निर्णय के अनुपालन में यह निर्णय लिया गया है। न्यायालय के निर्देशानुसार कक्षा पहली से आठवीं तक के ऐसे समस्त सेवारत शिक्षक, जिनकी सेवा अवधि पांच वर्ष या उससे अधिक शेष है, उन्हें सेवा में बने रहने अथवा पदोन्नति के लिए निर्धारित स्तर की टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राज्यों को निर्देशित किया गया है कि गैर-टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों के लिए प्रतिवर्ष न्यूनतम दो बार शिक्षक पात्रता परीक्षा का विशेष आयोजन किया जाए। इसी परिप्रेक्ष्य में लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 24 सितंबर 2026 को शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, जिस पर राज्य सरकार ने सहमति प्रदान की है।
गरियाबंद। जिले में प्रशासनिक कार्यों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रणबीर शर्मा ने राज्य प्रशासनिक सेवा के पांच अधिकारियों के कार्यस्थल में आंशिक संशोधन किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकारियों को जिले के विभिन्न अनुविभागों एवं कलेक्टर कार्यालय में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इनमें संयुक्त कलेक्टर टी.आर. महेश्वरी को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), देवभोग पदस्थ किया गया है। वहीं, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) विशाल महाराणा को संयुक्त कलेक्टर, कार्यालय कलेक्टर गरियाबंद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी प्रकार संयुक्त कलेक्टर अवंति गुप्ता को छुरा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नियुक्त किया गया है। डिप्टी कलेक्टर नेहा भेड़िया को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), राजिम तथा डिप्टी कलेक्टर लोकांश एल्मा को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मैनपुर के पद पर पदस्थ किया गया है।
देखें आदेश….






























