रायपुर । रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जनजातीय क्षेत्रों के विकास को लेकर कई बड़े और अहम फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बस्तर, जो क्षेत्रफल में केरल से भी बड़ा है, लंबे समय तक विकास से दूर रहा, लेकिन अब वहां तेजी से बदलाव दिख रहा है और योजनाओं का असर जमीन पर नजर आने लगा है। उन्होंने जनजातीय आस्था से जुड़े देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अवैध अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
रायपुर। तेंदूपत्ता सीजन 2026 की शुरुआत से पहले वन विभाग और संबंधित समितियों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। बीजापुर वनमंडल में तेंदूपत्ता तोड़ाई कार्य 1 मई 2026 से शुरू होना है। इसी बीच कर्मचारियों और प्रबंधकों द्वारा 8 सूत्रीय मांगों को लेकर 27 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी गई थी। इस संभावित हड़ताल से तेंदूपत्ता संग्रहण प्रभावित होने और शासन को बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने 29 अप्रैल 2026 को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
तेंदूपत्ता सीजन 2026 में कार्यरत सभी कर्मचारी और प्रबंधक अब अत्यावश्यक सेवाओं के अंतर्गत माने जाएंगे। साथ ही कोई भी कर्मचारी या प्रबंधक अपने सौंपे गए कार्य से इंकार नहीं कर सकेगा। यह आदेश राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से आगामी 3 माह तक लागू रहेगा। राज्य शासन के इस निर्णय से स्पष्ट है कि तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य को किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। यह फैसला लाखों संग्राहकों की आजीविका को सुरक्षित रखने और लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।तेंदूपत्ता संग्रहण छत्तीसगढ़ में आदिवासी और वनवासी परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में शासन की यह पहल न केवल संग्रहण कार्य को सुचारू बनाएगी, बल्कि हितग्राहियों के हितों की भी रक्षा करेगी।
00 जनगणना आंकड़ों का संग्रहण डिजिटल उपकरणों/माध्यमों से
रायपुर। जनगणना 2027 हमारे देश का एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान है, जो केवल आंकड़ों का संकलन नहीं बल्कि भविष्य के भारत और हमारे राज्य छत्तीसगढ़ के विकास की ठोस नींव तैयार करने का कार्य करेगा। यह प्रक्रिया हमें यह समझने में सक्षम बनाती है कि समाज के विभिन्न वर्गों तक विकास के लाभ किस प्रकार और कितनी प्रभावशीलता से पहुँच रहे हैं। जनगणना आंकड़ों का संग्रहण डिजिटल उपकरणों/माध्यमों से किया जाएगा। जनगणना कार्य में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी फील्ड कर्मचारियों को फोटो युक्त पहचान-पत्र जारी किए हैं। राज्य के सभी नागरिकों से अपील है कि वे केवल अधिकृत पहचान-पत्र वाले कर्मचारियों को ही जानकारी उपलब्ध कराएं।जनगणना
निदेशालय छत्तीसगढ़ के निदेशक श्री कार्तिकेय गोयल द्वारा छत्तीसगढ़ के नागरिकों से यह अपील की गई है कि वे अपने उत्तम ज्ञान के आधार पर प्रगणक को सही-सही जानकारी दें। नागरिकों द्वारा दी गई सही और पूर्ण जानकारी ही आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार एवं आधारभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी।
भारत में जनगणना 1872 से की जा रही है। भारतीय जनगणना का 150 वर्षों का इतिहास है। आगामी जनगणना देश की 16 वीं और स्वतन्त्रता के बाद की 8 वीं जनगणना होगी। छत्तीसगढ़ राज्य में जनगणना 2027 के प्रथम चरण यथा मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का फील्ड कार्य 1 मई, 2026 से प्रारम्भ हो रहा है जो 30 मई, 2026 तक संपादित किया जाएगा। वर्तमान समय में तकनीकी प्रगति को ध्यान में रखते हुए यह जनगणना विशिष्ट और उल्लेखनीय है, क्योंकि यह भारत की पहली ऐसी जनगणना होगी, जिसमें जनगणना आंकड़ों का संग्रहण डिजिटल उपकरणों/माध्यमों से किया जाएगा। यह परिवर्तन न केवल कार्य को अधिक पारदर्शी और तीव्र बनाएगा, बल्कि आंकड़ों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को भी सुदृढ़ करेगा। विशेष रूप से स्व-गणना की सुविधा नागरिकों को सशक्त बनाती है, जिससे वे स्वयं अपनी जानकारी घर बैठे सुरक्षित एवं सहज तरीके से दर्ज कर सकते हैं। यह सुविधा छत्तीसगढ़ राज्य में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 की अवधि में स्व-गणना पोर्टल se.census.gov.in के माध्यम से उपलब्ध थी। आज 30 अप्रैल 2026 तक शाम की स्थिति में राज्य में एक लाख 32 हजार 195 परिवारों ने स्व-गणना का कार्य संपादित कर लिया है। 01 मई से 30 मई 2026 के दौरान
प्रगणक घर-घर जाकर परिवारों से 33 प्रश्न पूछेंगे। यह प्रश्न मुख्य रूप से मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं तथा परिसंपत्तियों से संबन्धित होंगे। जनगणना के दौरान प्रगणक मोबाइल एप के माध्यम से जानकारी एकत्र करेंगे, जिससे प्रक्रिया सरल और त्रुटिरहित बनेगी। जनगणना में दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारियाँ जनगणना अधिनियम 1948 तथा जनगणना नियमावली 1990 के प्रावधानों के अंतर्गत पूर्णत: गोपनीय रखी जाएगी । इसे किसी से भी साझा नहीं किया जाता है। टैक्स, पुलिस या जांच में इस जानकारी का उपयोग नहीं किया जा सकता है। इसका उपयोग किसी भी प्रकार के साक्ष्य के रूप में नहीं किया जा सकता। व्यक्तिगत जानकारी त्ज्प् के माध्यम से भी प्राप्त नहीं की जा सकती। इन आंकड़ों का उपयोग केवल नीति निर्माण एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए ही किया जाएगा।
प्रगणक द्वारा घर-घर जाने की प्रक्रिया के दौरान उत्तरदाता से किसी भी प्रकार की ओटीपी की मांग नहीं की जाएगी, और न ही कोई लिंक सांझा किया जाएगा। जिन परिवारों ने स्व- गणना किया है, प्रगणक के फील्ड विजिट के दौरान परिवार द्वारा 11 अंकों का स्व-गणना पहचान (एसईआईडी) ) उन्हें दिया जाना है जो कि स्व-गणना कार्य पूर्ण करने पर संबन्धित के मोबाइल एवं ई-मेल(यदि दी गई हो) पर प्राप्त हुआ है, ताकि उसे अपने मोबाइल एप में वेलीडेट कर सके। यदि एसईआईडी वेलीडेट नहीं हो पाया है अथवा किसी परिवार ने स्व-गणना नहीं किया है, तो भी प्रगणक के द्वारा उस परिवार का गणना कार्य पूर्ण किया जाएगा।
शहरी क्षेत्रों, बंद गेट वाली कालोनियों और अपार्टमेंट परिसरों में गणना कार्य को लेकर विशेष रणनीति बनाई गई है। सभी जिला कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्तों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे जिले के अंतर्गत आने वाले आवासीय समितियों और प्रबंधन समूहों को निर्देश जारी करें कि प्रगणकों को प्रवेश में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए, जिन आवासीय समितियों और प्रबंधन समूहों के द्वारा जनगणना कार्य में बाधा डाली जाएगी, उन पर जनगणना अधिनियम के तहत कार्यवाही किए जाने के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं।
राज्य में इस कार्य हेतु लगभग 62 हजार 500 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जिसमें 47 प्रमुख जनगणना अधिकारी, 250 जिला स्तर के अधिकारी, 472 चार्ज अधिकारी, 1 हजार 160 मास्टर ट्रेनर्स एवं फील्ड ट्रेनर्स, 51 हजार 300 प्रगनक एवं 9 पर्यवेक्षक शामिल हैं।
राज्य में जनगणना 2027 का कार्य 33 जिले, 195 नगरीय निकाय एवं 252 तहसीलों के अंतर्गत 19 हजार 978 ग्रामों में संपादित कराये जाएंगे। जनगणना कार्य संपादित करने के लिए राज्य में 251 ग्रामीण चार्ज एवं 221 नगरीय चार्ज हैं । इन चार्जों के अंतर्गत लगभग 49 हजार मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं । इन मकान सूचीकरण ब्लॉकों में प्रगणकों के द्वारा घर-घर जाकर मकान सूचीकरण का कार्य संपादित किया जाएगा। जनगणना 2027 कार्य के लिए जन सामान्य हेतु जनगणना से संबन्धित जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1855 स्थापित किया गया है ।
रायपुर। खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी है। जशपुर कलेक्टर के निर्देश पर उप संचालक कृषि एवं अधिसूचित प्राधिकारी (उर्वरक) द्वारा विभिन्न विकासखंडों में कृषि आदान विक्रय प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान कई दुकानों में अनियमितताएं सामने आईं, जिस पर संबंधित संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं करने और उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश, 1985 के प्रावधानों के उल्लंघन के चलते प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कार्रवाई के तहत मेसर्स अन्नु कृषि केन्द्र (कांसाबेल), मेसर्स अन्नु सीड्स (कुनकुरी), मेसर्स मौसम बीज भंडार (कवई, विकासखंड बगीचा) तथा मेसर्स कृषि कल्प एग्रीकल्चर प्वाइंट (मुडाबहला, विकासखंड पत्थलगांव) के उर्वरक विक्रय लाइसेंस को उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश, 1985 के खंड 26 (्र) के तहत 21 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान रासायनिक उर्वरकों का विक्रय नहीं कर सकेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आगे भी इस तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
00 मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उपभोक्ताओं को मिली राहत, हजारों रुपये की छूट
00 लंबित अमानत राशि का भुगतान, देरी पर अधिकारियों को सख्त हिदायत
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी नीतियों एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेशभर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम की सक्रियता के चलते राज्य के विभिन्न जिलों में वर्षों से लंबित विद्युत प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल रही है।
योजना के तहत हजारों उपभोक्ताओं को राहत
मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत प्रदान की जा रही है। योजना के अंतर्गत लंबित विद्युत देयकों की समीक्षा कर उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत से अधिक तक की छूट दी जा रही है। इसी क्रम में सूरजपुर जिले के एक उपभोक्ता को 90 हजार रुपये से अधिक के बकाया बिल पर 55 हजार रुपये से अधिक की छूट प्रदान की गई, जिससे उन्होंने शेष राशि का भुगतान कर अपना खाता पूर्णत: शून्य कर लिया।
लंबित अमानत राशि का त्वरित भुगतान
फोरम की सक्रिय पहल के तहत लंबे समय से लंबित अमानत राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) के मामलों का भी निराकरण किया जा रहा है। एक प्रकरण में एक वर्ष से लंबित राशि को उपभोक्ता के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित किया गया। साथ ही, इस प्रकार की देरी पर फोरम द्वारा संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
समयबद्ध समाधान पर जोर
विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ताओं से जुड़े सभी प्रकरणों का समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से निराकरण किया जाए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
योजना का लाभ लेने की अपील
विभागीय अधिकारियों ने प्रदेश के सभी बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का अधिकतम लाभ उठाएं। शासन का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक परिवारों को पुराने बकाया से मुक्ति दिलाकर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया जा सके।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए भूमि और राजस्व संबंधी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सुशासन के संकल्प को साकार करते हुए, अब नागरिकों को खसरा-बी-1, नामांतरण और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है।
नागरिकों की सुविधा हमारी प्राथमिकता-मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजस्व विभाग की इस डिजिटल पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार तकनीक के माध्यम से शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राजस्व सेवाओं का डिजिटलीकरण आम आदमी के समय और श्रम की बचत सुनिश्चित करेगा। यह पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भ्रष्टाचार मुक्त और सुगम राजस्व प्रशासन का लक्ष्य - राजस्व मंत्री वर्मा
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने जानकारी दी कि विभाग अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन कर रहा है। हमारा उद्देश्य तकनीक के उपयोग से मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए। डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के माध्यम से हम राज्य को अत्याधुनिक राजस्व तंत्र प्रदान कर रहे हैं, जिससे नागरिक घर बैठे अपनी भूमि का विवरण प्राप्त कर सकें। राजस्व विभाग द्वारा दी जा रही प्रमुख ऑनलाइन सुविधाओं में नागरिक अब नि:शुल्क खसरा और बी-1 की डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रति राज्य के किसी भी कोने से कभी भी बिल्कुल मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं। खसरा या बी-1 में किसी भी संशोधन या बदलाव की सूचना सीधे पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रियल-टाइम एसएमएस अलर्ट के माध्यम से प्राप्त होती है, जो किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को रोकने में सहायक है।
कृषि ऋण के लिए बैंक में गिरवी रखी गई भूमि की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे खरीद-बिक्री के समय पारदर्शिता बनी रहती है। अब नामांतरण के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ता। उप पंजीयक कार्यालय में पंजीयन होते ही स्वत: नामांतरण प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसी तरह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध विशेष मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक कहीं से भी अपने स्मार्टफोन से जमीन का रिकॉर्ड देख और डाउनलोड कर सकते हैं। राजस्व विभाग के इन नवाचारों से छत्तीसगढ़ राज्य राजस्व प्रशासन में एक नई डिजिटल क्रांति का गवाह बन रहा है।
अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित राजस्व प्रशासन डिलम्प के तहत राज्य की सभी तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित कर राजस्व प्रशासन को पूरी तरह अत्याधुनिक और पेपरलेस बनाना है। इन सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और समय की बचत करना है। डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम वर्ष 2008-09 में शुरू हुई। यह केंद्र-प्रवर्तित योजना 1 अप्रैल 2016 से पूर्णत: केंद्रीय योजना के रूप में संचालित है। वर्तमान में राज्य के 20 हजार 286 गांवों के खसरा और 19 हज़ार 694 गांवों के नक्शों का कंप्यूटरीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग कर उन्हें अत्याधुनिक बनाया गया है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों के साथ ऑनलाइन जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे काम में गति और सटीकता आई है।
असर्वेक्षित ग्रामों का सर्वेक्षण
राज्य के 1 हज़ार 89 ग्रामों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1,018 का नक्शा उपलब्ध कराया गया है। प्रथम चरण में 717 गांवों का और 454 गांवों का द्वितीय चरण में सत्यापन पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही 233 गांवों का डेटा भुईयां एवं भू-नक्शा सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा चुका है। इसी तरह राज्य की 50 तहसीलों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर राजस्व सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 252 में से 172 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत हैं, जिनमें से 155 का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही राज्य के राजस्व कार्यालयों का डिजिटलीकरण एवं इंटरकनेक्टिविटी का कार्य तेजी से किया जा रहा है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को ऑनलाइन कर उन्हें तहसील कार्यालयों के साथ इंटरनेट के माध्यम से जोड़ दिया गया है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत राज्य के सभी राजस्व ग्रामों के खसरा नक्शों का जियोरेफरेंसिंग कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 19,694 गांवों में से 18,959 गांवों में यह कार्य पूर्ण हो चुका है।
इस डिजिटल पहल से आम नागरिकों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में स्पष्टता और सुगमता आई है, जो निश्चित रूप से राज्य के चहुंमुखी विकास में सहायक सिद्ध होगी।
00 राज्यसभा सांसद वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट कर जताया आभार
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित कार्यालय में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र तथा इस संबंध में पारित शासकीय संकल्प के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।
महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं के उत्थान हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि राज्य में महिला सशक्तिकरण को और अधिक गति मिलेगी तथा महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में सुदृढ़ होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन जैसी ऐतिहासिक पहल समाज में समानता और न्याय के नए आयाम स्थापित करेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की महिलाएं विकास यात्रा की सशक्त सहभागी हैं और उनके सशक्तिकरण के बिना समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी है।मुख्यमंत्री ने महिला प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज विधानसभा में मिस इंडिया छत्तीसगढ़ 2026 अनुष्का सोन ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर अनुष्का ने मुख्यमंत्री को नारी सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को लेकर विशेष सत्र आयोजित करना एक प्रेरणादायक पहल है। उन्होंने कहा कि इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिलती है।
अनुष्का ने बताया कि वे आज विधानसभा की ऐतिहासिक कार्यवाही को सुनने विशेष रूप से पहुंची थीं और इस अनुभव को उन्होंने अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण की प्रक्रिया को करीब से देखना उनके लिए एक नई सीख रही, जिससे वे समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए और अधिक प्रोत्साहित कर सकेंगी।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सुखद है कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों से महिलाएं आगे आकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही हैं, जो एक सशक्त और जागरूक समाज की पहचान है।
मुख्यमंत्री साय ने विश्वास जताया कि इस तरह की पहल महिलाओं के आत्मविश्वास को और मजबूत करेंगी तथा उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे आने के लिए प्रेरित करेंगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी की बेटियां शिक्षा, कला, खेल और सामाजिक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने अनुष्का सोन को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरक बनें। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा उपस्थित थे।
BREAKING: रायपुर की प्लास्टिक फैक्ट्री में भीषण आग, पूरा गोदाम जलकर खाक, दमकल की कई गाड़ियां मौके पर
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सड्डू इलाके में गुरुवार सुबह एक प्लास्टिक फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। कवल मल्टीलेयर प्लास्टिक फैक्ट्री में लगी इस आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया और पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। अब तक 5 से अधिक फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग बुझाने में जुटी हैं, जबकि अतिरिक्त संसाधन भी लगातार भेजे जा रहे हैं। पुलिस और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीम राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई है।
तेजी से फैली लपटें, नियंत्रण में लाना चुनौती
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग बेहद तेजी से फैली और देखते ही देखते पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। प्लास्टिक सामग्री के कारण आग और अधिक भड़क गई, जिससे उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है।
विधानसभा थाना क्षेत्र का मामला, जांच जारी
यह घटना विधानसभा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई है। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और हालात पर नजर रखे हुए हैं। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। नुकसान का आकलन आग पर काबू पाने के बाद ही किया जाएगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया. आंसदी ने चर्चा के लिए 4 घण्टे का समय निर्धारित किया।
मुख्यमंत्री साय के प्रस्ताव के बाद नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत अशासकीय संकल्प प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे आसंदी ने अग्राह्य कर दिया. इस पर डॉ. महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री तो निंदा प्रस्ताव लाने वाले थे, लेकिन यह शासकीय संकल्प प्रस्ताव तो निंदा पर नहीं है।
इसके साथ ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सदन के बाहर और अंदर सत्ता पक्ष की ओर महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है।
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक लता उसेंडी ने कहा कि महिला आरक्षण पर रुकावट बनने का काम विपक्ष ने किया. महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में गिराने का काम विपक्ष ने किया. महिलाओं की भावनाओं और सम्मान का ख्याल नहीं रखा गया।
मुख्यमंत्री साय ने रखा शासकीय संकल्प
रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र शुरू हो गया है। इसकी कार्यवाही देखने और शामिल होने प्रदेश भर से महिला जनप्रतिनिधि पहुंची हुई हैं। आज के इस सत्र में महिला सशक्तिकरण को लेकर शासकीय संकल्प पेश किया गया। इसमें परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने की मांग की गई है। भाजपा के महिला विधायक विषय पर सदन में अपना पक्ष रखकर बता रही हैं कि किस प्रकार यह विधेयक जरूरी है और कांग्रेस गठबंधन दल का विरोध करने से क्या नुकसान हो रहा है। प्रथम वक्ता के रुप में पूर्व मंत्री लता उसेंडी ने चर्चा की शुरआत की । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन में शासकीय संकल्प रखा इसमें कहा गया कि नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए संसद और विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर लागू किया जाए। इस पर चर्चा से पहले नेता प्रतिपक्ष डा.चरणदास महंत ने अशासकीय संकल्प की सूचना दी,स्पीकर डा.रमनसिंह ने कहा कि विशेष सत्र के विषय निश्चित रहते हैं इसके लिए शासकीय संकल्प प्रस्तुत किया जा चुका है। इसके बाद परम्परानुसार कोई अशासकीय संकल्प पर चर्चा नहीं हो सकती।
छगन लोन्हारे, उप संचालक जंनसंपर्क
रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लगातार आर्थिक मदद दी जा रही है। श्रम विभाग के तीनों मंडल-छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। इसी का परिणाम है कि बीते 02 साल 04 माह में श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगभग 800 करोड़ रूपए डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में अंतरित किए जा चुके हैं। इस वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में श्रमिकों के 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा।
मजदूर दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है। 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस या श्रमिक दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए संकल्प लेना है। यह दिन श्रमिकों के योगदान को याद करने और उनके संघर्षों को सम्मानित करने के लिए भी मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1886 में शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की याद में मनाया जाता है, जहां अनेक श्रमिकों ने 8 घंटे के कार्य दिवस की मांग की थी। सन् 1889 में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में घोषित किया था। इस दिन को मनाने का उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों को सुनिश्चित करना, सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए आवाज बुलंद करना है। भारत में मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1923 में चेन्नई (मद्रास) से हुई थी। भारतीय संविधान निर्माण सभा के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने श्रमिकों के काम का समय 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे किया। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं को प्रसूति अवकाश की सुविधा उपलब्ध कराई।
मुख्यमंत्री श्री साय का मानना है कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो बड़े पैमाने पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण भी तकनीक के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।
प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि प्रदेश में विष्णु देव सरकार के सुशासन में अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के हितों में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार किट योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कॉपी हेतु सहायता राशि योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित की जा रही है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सोच है कि हर हाथ को काम इस दिशा में प्रदेश के वाणिज्य उद्योग एवं श्रम विभाग द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। श्रम विभाग के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 256 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।
श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि विष्णु देव के सरकार की सोच है कि हर हाथ को काम मिले उसका उन्हें उचित दाम मिले और हर पेट को अन्न मिले यह हमारी सरकार की आदर्श नीति है। इस नीति को क्रियान्वित करने हेतु राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 38 भोजन केन्द्र संचालित है। इस योजना के अंतर्गत श्रमिकों को 5 रूपये में गरम भोजन, दाल चावल, सब्जी, आचार प्रदाय किया जा रहा है, जिसका विस्तार चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में समस्त जिलों में किया जा रहा है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। एक प्रतिशत उपकर (सेस) से वर्ष 2025-26 में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि मंडल गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित हुआ है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं।
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। श्रम विभाग के अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं का मुख्य दायित्व श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सा हित लाभ उपलब्ध कराया जाता है। कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए 76 करोड़ 38 लाख रूपए का प्रावधान राज्य सरकार द्वारा किया गया है।
छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक
डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर
उप संचालक (जनसंपर्क)
रायपुर-- हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ में यह दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका योगदान पहले से अधिक प्रभावी होता जा रहा है।
राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लंबे समय से कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ने और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में सक्रिय रही हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति निर्माण कार्य, घरेलू सेवाओं और लघु व्यवसायों में तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक पहचान और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती दे रहा है। इसके बावजूद यह भी सच है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों को लंबे समय तक उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। वेतन असमानता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभों की कमी और पारंपरिक सोच जैसी बाधाएं उनके सामने बनी रहीं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नई श्रमिक नीतियों के जरिए असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। महिला शक्ति केंद्रों को केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि परामर्श, कानूनी सहयोग और रोजगार मार्गदर्शन के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है।
राज्य में संचालित विभिन्न योजनाएं महिला श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति के बाद 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों को, जिनका कम से कम तीन वर्षों का पंजीयन है, एक लाख रुपये तक की सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।
इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय के साधन मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम महिला श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। घरेलू कामगारों, ठेका श्रमिकों और हमाल परिवारों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।
आज छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक केवल श्रमशक्ति नहीं रहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। उनकी भूमिका अब सहायक तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने तक पहुंच रही है। योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जागरूकता के कारण उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे समाज में उनका सम्मान भी लगातार बढ़ रहा है।
छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के लिए किए जा रहे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि संवेदनशील नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए सकारात्मक बदलाव संभव है। सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसरों के साथ महिला श्रमिक आज राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है।
CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी का दौर जारी है, हालांकि मौसम विभाग ने आगामी दिनों में तापमान में मामूली गिरावट और हल्की वर्षा की संभावना जताई है । मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों में प्रदेश के अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन दर्ज नहीं किया गया है ।
तापमान का हाल: राजनांदगांव रहा सबसे गर्म
बुधवार को प्रदेश में गर्मी का तीखा असर देखने को मिला। राजनांदगांव 44 डिग्री सेल्सियस के साथ राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा । वहीं, राजधानी रायपुर में अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.1 डिग्री सेल्सियस अधिक है । न्यूनतम तापमान की बात करें तो जगदलपुर में सबसे कम 25.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया ।
प्रमुख शहरों का तापमान एक नज़र में:
- माना एयरपोर्ट: 43.5 डिग्री सेल्सियस
- बिलासपुर: 42.6 डिग्री सेल्सियस
- दुर्ग: 42.6 डिग्री सेल्सियस
- अंबिकापुर: 41.1 डिग्री सेल्सियस
मौसम का पूर्वानुमान और चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले 2 दिनों में अधिकतम तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है, जिससे झुलसाने वाली गर्मी से हल्की राहत मिल सकती है । इसके पश्चात आगामी 3 दिनों तक तापमान स्थिर रहने का अनुमान है ।
आगामी 5 दिनों के लिए अलर्ट: प्रदेश के सभी संभागों में अगले 5 दिनों तक एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ वज्रपात (बिजली गिरना) और तेज हवाएं (40-50 किमी/घंटा) चलने की चेतावनी दी गई है । इस दौरान कुछ क्षेत्रों में हल्की वर्षा भी हो सकती है ।
3 प्रमुख मौसमी प्रणालियां सक्रिय
वर्तमान में तीन प्रमुख मौसमी प्रणालियां सक्रिय हैं जो प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर रही हैं। एक चक्रवाती परिसंचरण दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश और उसके आसपास के क्षेत्रों में समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर बना हुआ है। वहीं, एक पूर्व-पश्चिम द्रोणिका (Trough) दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश से बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल होते हुए नागालैंड तक फैली है। इसके अलावा एक अन्य द्रोणिका उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश से झारखंड होते हुए बांग्लादेश तक 1.5 किमी की ऊंचाई पर स्थित है ।
रायपुर शहर का स्थानीय पूर्वानुमान
राजधानी रायपुर में आज 30 अप्रैल को आकाश आंशिक रूप से मेघमय रहने की संभावना है । शहर में शाम या रात को मेघगर्जन के साथ वर्षा होने के आसार हैं। इस दौरान अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
रायपुर। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लोकसभा से पारित नहीं हो पाने पर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने के लिए आज आहुत छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र से पहले रणनीति तय करने भाजपा विधायक दल की बैठक विधानसभा के मुख्य समिति कक्ष में हो रही है.
बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के आज होने वाले विशेष सत्र में राज्य सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने के विरोध में निंदा प्रस्ताव लाने जा रही है. इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सदन में तीखी बहस के आसार हैं.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बीते दिनों इस विषय पर कहा था कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का लक्ष्य विपक्ष के रुख के कारण पूरा नहीं हो सका. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह निर्णय देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को प्रभावित करने वाला है, और यह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है.
वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार पर तीखा पलटवार किया है. कांग्रेस का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण को लेकर केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन को लेकर स्पष्टता नहीं है. पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर जिम्मेदारी तय किए बिना इसे चुनावी मुद्दे के रूप में पेश किया जा रहा है. कांग्रेस ने यह भी कहा कि वे सदन में तथ्यों के साथ सरकार के दावों का जवाब देंगे.
रायपुर: छत्तीसगढ़ कैडर के 2011 बैच के आईपीएस (IPS - Indian Police Service) अधिकारी डॉ. संतोष सिंह (Santosh Singh) को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल सीआईएसएफ (CISF - Central Industrial Security Force) में डीआईजी (DIG - Deputy Inspector General) के पद पर नियुक्त किया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA - Ministry of Home Affairs) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी देते हुए आदेश जारी कर दिया है। आदेश के अनुसार राज्य सरकार को पत्र भेजकर कहा गया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारी संभालने के लिए रिलीव किया जाए।
डॉ. संतोष सिंह वर्तमान में छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय में डीआईजी सीसीटीएनएस और एससीआरबी के पद पर कार्यरत हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति मिलने के बाद अब वे सीआईएसएफ में डीआईजी के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के बाद राज्य सरकार की ओर से औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिसके बाद उन्हें नई पोस्टिंग पर जॉइन करना होगा।
सीआईएसएफ देश की प्रमुख केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों में से एक है। यह बल देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक संस्थानों, एयरपोर्ट, परमाणु संयंत्रों, सरकारी इमारतों और संसद परिसर जैसी संवेदनशील जगहों की सुरक्षा का जिम्मा संभालता है। इसके अलावा हाल के वर्षों में बंदरगाहों और अन्य रणनीतिक संस्थानों की सुरक्षा भी इस बल को सौंपी गई है।
डॉ. संतोष सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं। वे 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और जनवरी 2025 में उन्हें पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर पदोन्नति मिली थी। उन्होंने वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय में एमफिल किया और दुर्ग विश्वविद्यालय से संयुक्त राष्ट्र के शांति निर्माण कार्यों पर पीएचडी की डिग्री हासिल की।
छत्तीसगढ़ कैडर में रहते हुए संतोष सिंह ने पुलिस विभाग में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं और तकनीकी पुलिसिंग से जुड़े कामों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अब केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीआईएसएफ में डीआईजी बनने के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा से जुड़े अहम कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास को लेकर व्यापक चर्चा की गई और अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा क्षेत्र है, दशकों तक विकास से वंचित रहा, लेकिन अब वहां योजनाओं का तीव्र विस्तार हो रहा है और विकास की नई धारा स्थापित हो रही है।
मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के माध्यम से प्रदेश के 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं, जबकि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 32 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं।
बैठक में “नियद नेल्ला नार योजना” की उल्लेखनीय सफलता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने इसके अगले चरण के रूप में “नियद नेल्ला नार 2.0” को शीघ्र लागू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस उन्नत पहल के माध्यम से सुदूर अंचलों में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का और अधिक विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के तहत 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच का कार्य निरंतर प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज पर दोहन के मामलों की जांच के निर्देश दिए। साथ ही कोरवा और संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को शीघ्र केंद्र सरकार को प्रेषित करने के निर्देश भी दिए।
शिक्षा और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री साय ने छात्रावासों की सीट वृद्धि, उनके बेहतर रखरखाव तथा शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए त्वरित शिक्षण व्यवस्था विकसित करने और खुले में कक्षाएं संचालित न करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही बरसात के दौरान कटने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।
आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री एवं परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम ने कहा कि बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ जनजातीय अंचलों में लंबे समय तक नक्सलवाद विकास की सबसे बड़ी बाधा बना रहा। बीते चार दशकों की इस चुनौती से मुक्ति मिलने के बाद अब इन क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी एवं तेज क्रियान्वयन संभव हो सका है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है और उन्हें आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

श्री नेताम ने यह भी बताया कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद योजनाओं का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ है। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वीकृत योजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संवेदनशील मुद्दों का त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बसाहटों तक अब बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। साथ ही नए छात्रावासों के निर्माण से दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल रहा है, जिससे उनके समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वनमंत्री श्री केदार कश्यप, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सुश्री लता उसेंडी, सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय, मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री प्रणव मरपच्ची, विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, विधायक श्री चैतराम अटामी, विधायक श्री विक्रम उसेंडी, विधायक श्रीमती उद्देश्वरी पैकरा, विधायक श्री नीलकंठ टेकाम, विधायक श्री आशाराम नेताम, मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं परिषद के सदस्य उपस्थित थे।
रायपुर: आज छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी ने अपने रायपुर स्थित निवास स्पीकर हाउस में ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक अत्यंत उपयोगी और व्यावहारिक मार्गदर्शिका पुस्तक “Developing Skills through Activities for Children with Autism – A Practical Guide for Parents, Teachers, Caregivers and Therapists” का विमोचन किया।
ई दिशा
यह पुस्तक विशेष रूप से इस उद्देश्य के साथ तैयार की गई है कि अभिभावक और देखभालकर्ता घर पर उपलब्ध साधारण संसाधनों का उपयोग करके बच्चों के विकास में सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभा सकें। इसमें सरल, स्वदेशी एवं व्यावहारिक विधियों के माध्यम से बच्चों को कौशल सिखाने के तरीके बताए गए हैं। पुस्तक में 10 प्रमुख विकासात्मक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें कुल 100 से अधिक गतिविधियां शामिल हैं।प्रत्येक गतिविधि को “3A मॉडल” Aim (उद्देश्य), Activity (गतिविधि) और Action (क्रियान्वयन) के आधार पर प्रस्तुत किया गया है, ताकि इसे समझना और लागू करना अत्यंत सरल हो। इस मार्गदर्शिका की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें दिए गए सभी अभ्यास घर में आसानी से उपलब्ध सामग्री से किए जा सकते हैं। डॉ. सिमी श्रीवास्तव द्वारा रचित यह पुस्तक हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर पुस्तक की लेखिका, पुनर्वास मनोवैज्ञानिक एवं विशेष शिक्षक डॉ. सिमी श्रीवास्तव के साथ डॉ. मनीष, मुकुल श्रीवास्तव, जीनल, भागीरथी, अभिलाष, शिवली एवं रागवी उपस्थित रहे।
भानुप्रतापपुर। भानुप्रतापपुर के लोहत्तर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुरानी रंजिश के चलते एक युवक पर जानलेवा हमला किया गया। जानकारी के अनुसार, तुमरीसुर निवासी लालजी पुड्डो देर रात एक शादी समारोह से लौट रहे थे, तभी घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
सक्ती। जिले में बुधवार सुबह एक हृदयविदारक हादसे में दो जुड़वा बच्चियों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। मृत बच्चियों की पहचान दीप्ति गोंड (6 वर्ष) और दिव्या गोंड (6 वर्ष) के रूप में हुई है। घटना बाराद्वार थाना क्षेत्र अंतर्गत लवसरा गांव की है।
कुछ देर बाद गांव के लोगों ने तालाब में दोनों बच्चियों के शव तैरते हुए देखे, जिसके बाद तत्काल उन्हें बाहर निकाला गया। परिजनों और ग्रामीणों ने बिना देर किए दोनों बच्चियों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सक्ती पहुंचाया, जहां मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय स्थित पंचम तल के सभागार से छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित कक्षा 10वीं और 12वीं के रिजल्ट जारी कर दिया है। जिन छात्रों ने इस साल हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी की परीक्षा दी थी, उनका इंतजार आज खत्म हो गया है। 10वीं में कुल 3,20,535 और 12वीं में कुल 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी थी। लाखों छात्र अपना परिणाम ऑनलाइन चेक कर सकते है।
10th के TOPPERS की लिस्ट देखने के लिए क्लिक करें – Top 10 High School Merit List
12th के TOPPERS की लिस्ट देखने के लिए क्लिक करें- Top 10 Higher School Merit List
रायपुर। विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हो गई है, बैठक में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई है, वहीं कई बड़े फैसलों पर मुहर लगी हुई।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –
1. मंत्रिपरिषद ने आज ‘‘छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति, 2026‘‘ को मंजूरी प्रदान की है। इस नीति के माध्यम से प्रदेश में स्वच्छ एवं सस्ती प्राकृतिक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी और आम उपभोक्ताओं को एलपीजी की तुलना में किफायती विकल्प मिलेगा।
साथ ही इस नीति से पाइपलाइन के माध्यम से गैस की त्वरित और सुगम आपूर्ति का विस्तार होगा, जिससे शहरी क्षेत्रों में सुविधाजनक ईंधन व्यवस्था विकसित होगी। इस पहल से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, ईंधन उपयोग में विविधता आएगी और राज्य में पाइपलाइन अधोसंरचना के विकास के साथ बड़े पैमाने पर निवेश एवं रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। राज्य सरकार का यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधा, दोनों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
2. मंत्रिपरिषद द्वारा आधुनिक खेल मैदान और क्रिकेट अकादमी के निर्माण हेतु जिला क्रिकेट एसोसिएशन, राजनांदगांव को सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा के नाम पर दर्ज भूमि में से 5 एकड़ भूमि को रियायती दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया गया।
3. मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री जी के स्वेच्छानुदान मद से 6 हजार 809 व्यक्ति एवं संस्थाओं को लगभग 11 करोड़ 98 लाख 84 हजार रुपये की जारी आर्थिक सहायता राशि की स्वीकृति प्रदान की है। यह सहायता राशि जरूरतमंदों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने, सामाजिक सहयोग को मजबूत करने तथा विभिन्न आवश्यक परिस्थितियों में संबल प्रदान करने के उद्देश्य से दी गई है।
4. मंत्रिपरिषद ने वर्ष 1988 बैच के तीन भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों श्री संजय पिल्ले, श्री आर.के. विज एवं श्री मुकेश गुप्ता के संबंध में पूर्व में जारी पदावनति आदेश दिनांक 26 सितंबर 2019 का पुनर्विलोकन करते हुए उसे निरस्त करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, मंत्रिपरिषद ने दिनांक 24 सितंबर 2019 को लिए गए संबंधित निर्णय को अपास्त करते हुए, उस निर्णय के पालन में जारी समस्त आदेशों को बैठक से पूर्व की स्थिति में पुनर्जीवित मान्य किया है। यह निर्णय प्रशासनिक तथ्यों एवं परिस्थितियों के समग्र परीक्षण के उपरांत लिया गया है।
रायपुर। वैवाहिक सीजन एवं आगामी फसल की तैयारियों के बीच गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना, राम्हेपुर (कवर्धा) द्वारा किसानों को 13.80 करोड़ की राशि जारी की गई है। इसके साथ ही चालू पेराई सत्र में अब तक कुल 71.29 करोड़ का भुगतान किसानों को किया जा चुका है।
कलेक्टर एवं कारखाने के प्राधिकृत अधिकारी श्री गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में भुगतान प्रक्रिया लगातार जारी है। समयबद्ध भुगतान से सहकारी व्यवस्था में किसानों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। चालू पेराई सत्र में कारखाने ने उपलब्धि हासिल की है, जिसमें 2,55,818 मीट्रिक टन गन्ना पेराई एवं 3,09,120 क्विंटल शक्कर उत्पादन किया गया है। यह सफलता किसानों के सहयोग, प्रशासनिक मार्गदर्शन और कारखाने की कुशल कार्यप्रणाली का परिणाम है।
भोरमदेव शक्कर कारखाना किसानों और श्रमिकों के हित में निरंतर कार्य कर रहा है। इसमें एफआरपी के अतिरिक्त रिकवरी आधारित भुगतान, शासन द्वारा प्रदत्त बोनस वितरण, रियायती दर पर शक्कर उपलब्धता, उन्नत बीज एवं कृषि मार्गदर्शन, नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत किसानों के लिए सर्वसुविधायुक्त “बलराम सदन” तथा मात्र 5 रूपए में गरम भोजन की कैंटीन सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना जिले की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनकर उभरा है। यह किसानों को न्यूनतम मूल्य की गारंटी, फसल विविधता को बढ़ावा, हजारों लोगों को रोजगार तथा पीडीएस के लिए सस्ती दर पर शक्कर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। समय पर भुगतान, बेहतर प्रबंधन और किसान-केंद्रित योजनाओं के चलते यह कारखाना सहकारी मॉडल की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ जिले के समग्र विकास को भी गति मिल रही है।
रायपुर। प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं और अभिभावकों का इंतज़ार आज खत्म होने वाला है। आज 2: 30 बजे सीएम विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड के परीक्षा परिणामों की घोषणा करेंगे। वहीं इस खास मौके पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सभी छात्र-छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं साथ ही टॉपर्स को डेढ़-डेढ़ लाख की राशि देने की घोषणा की है।
नतीजों की घोषणा के साथ ही मेधावी छात्रों के लिए बड़े इनाम का ऐलान किया गया है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने प्रदेश के सभी छात्र छात्राओं को बधाई दी है। उन्होंने 10वीं और 12वीं की Merit List में स्थान बनाने वाले टॉपर्स को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने कहा की जिन बच्चों का रिज़ल्ट उनके अनुरूप न आए तो निराश न हों उनके सामने अभी कई मौक़े मिलेंगे।
रायपुर। विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। बैठक में प्रदेश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार विभिन्न विभागों की योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ नई घोषणाओं पर भी निर्णय ले सकती है।





























