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पद्म विभूषण तीजन बाई पंचतत्व में विलीन : राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

पद्म विभूषण तीजन बाई पंचतत्व में विलीन : राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

 दुर्ग :- पद्म विभूषण और पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई रविवार दोपहर पंचतत्व में विलीन हो गई. उनके गृहग्राम गनियारी स्थित मुक्तिधाम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी.

अंतिम संस्कार के दौरान लोक कलाकारों, शिष्यों और उपस्थित जनसमूह ने “चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा…” गीत गाकर अपनी प्रिय लोकगायिका को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. पूरा वातावरण गमगीन हो गया और हर आंख नम नजर आई. डॉ. तीजन बाई को उनके मंझले बेटे दिलहरण पारधी ने मुखाग्नि दी. इस दौरान उनके पति तुलसी राम देशमुख भी मौजूद रहेअंतिम दर्शन के लिए राजनीति और कला जगत की कई हस्तियां पहुंचीं. इनमें पद्मश्री उषा बारले, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत अनेक जनप्रतिनिधि, कलाकार और उनके शिष्य शामिल रहे. सभी ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर छत्तीसगढ़ की इस महान लोक कलाकार को अंतिम प्रणाम किया.

डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्षों से भरा रहा. साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने बचपन से ही पंडवानी के प्रति अपने जुनून और समर्पण के दम पर देश-दुनिया में अलग पहचान बनाई. अपनी अद्वितीय प्रस्तुति शैली से उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया. उनके निधन से लोक संस्कृति जगत को ऐसी क्षति हुई है, जिसकी भरपाई करना कठिन माना जा रहा है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत किया पौधारोपण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत किया पौधारोपण

 रायपुर :- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने श्भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), नवा रायपुर में आयोजित चिंतन शिविर 3.0 के दूसरे दिन एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया। इस अवसर पर मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने भी पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं जनभागीदारी का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि एक पेड़ माँ के नाम अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक संवेदनाओं को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान से जुड़कर पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हरित एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए जनभागीदारी आधारित पर्यावरण संरक्षण अभियानों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।

पद्म विभूषण तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि: छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अमर आवाज़ हुई शांत

पद्म विभूषण तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि: छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अमर आवाज़ हुई शांत

 पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान लोकगायिका के निधन पर संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने जताया गहरा शोक, कहा— छत्तीसगढ़ ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर का अनमोल रत्न खो दिया 

रायपुर-छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर एम्स में निधन हो गया। वे लंबे  समय से अस्वस्थ थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और विश्व की लोक कला जगत में शोक की लहर है। उनके निधन पर प्रदेश के संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई केवल एक लोक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की जीवंत प्रतीक थीं। उन्होंने अपनी अद्भुत कला, दमदार प्रस्तुति और समर्पण से पंडवानी जैसी लोकविधा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित किया। उनका निधन प्रदेश और देश की सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों और असंख्य प्रशंसकों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

गरीब परिवार से निकलकर विश्व मंच तक का प्रेरणादायी सफर

24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता का नाम हुकुमचंद परधा तथा माता का नाम सुखवती बाई था। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाओं और पंडवानी गायन में गहरी रुचि थी। उनके नाना ब्रजलाल परधा से उन्हें इस लोककला की प्रारंभिक शिक्षा मिली।

महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया। उस समय महिलाओं द्वारा पंडवानी की वेदमती शैली में बैठकर प्रस्तुति देने की परंपरा थी, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को चुनौती देते हुए पुरुष कलाकारों की कापालिक शैली में खड़े होकर अभिनय, संवाद, गायन और भाव-भंगिमाओं के साथ प्रस्तुति देना शुरू किया। उनकी यही शैली आगे चलकर उनकी विशिष्ट पहचान बन गई। 

हबीब तनवीर ने पहचानी प्रतिभा, बदल गई जिंदगी

प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बड़े मंचों तक पहुंचाया। इसके बाद तीजन बाई ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के समक्ष अपनी प्रस्तुतियां दीं।

उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मॉरीशस, जापान सहित 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का विश्वभर में परचम लहराया। उनकी प्रभावशाली आवाज, अभिनय और कथावाचन शैली ने विदेशी दर्शकों को भी भारतीय लोक परंपरा से परिचित कराया।

देश-विदेश में मिले अनेक प्रतिष्ठित सम्मान

लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 में पद्म भूषण, 2018 में जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार तथा 2019 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त बिलासपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. (मानद उपाधि) प्रदान कर सम्मानित किया।

नई पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणा

तीजन बाई ने न केवल पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि इस लोकविधा से नई पीढ़ी के अनेक कलाकारों को भी जोड़ा। उनकी प्रेरणा से अनेक महिला कलाकारों ने पंडवानी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर लोककला को वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है।

देशभर से उमड़ा श्रद्धांजलियों का सैलाब

तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विभिन्न जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा सांस्कृतिक संस्थाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके योगदान को सदैव अविस्मरणीय बताया।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान रहेंगी अमर

तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण की अनुपम मिसाल है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से महाभारत की कथाओं को जन-जन तक पहुंचाया और पंडवानी को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनके निधन से भले ही लोककला जगत ने अपनी बुलंद आवाज खो दी हो, लेकिन उनकी कला, उनकी शैली और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनकी अमिट सांस्कृतिक विरासत भारतीय लोककला के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी।

राज्यपाल डेका ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया

राज्यपाल डेका ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया

 रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर स्वर-कोकिला, पद्म विभूषण से सम्मानित एवं विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
अपने शोक संदेश में राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का निधन केवल लोककला जगत ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पूरे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय गायन शैली, असाधारण प्रतिभा और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई। लोककला के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपना संपूर्ण जीवन लोककला की साधना, संरक्षण और संवर्धन को समर्पित किया। उन्होंने पंडवानी जैसी समृद्ध लोक परंपरा को विश्व मंच तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उनका व्यक्तित्व, कला-साधना और सांस्कृतिक योगदान आने वाली पीढिय़ों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। राज्यपाल ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों और समस्त लोककला जगत को इस गहन दु:ख को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।

पद्म विभूषण डॉ तीजन बाई के निधन पर वित्त मंत्री चौधरी ने जताया गहरा शोक

पद्म विभूषण डॉ तीजन बाई के निधन पर वित्त मंत्री चौधरी ने जताया गहरा शोक

 रायपुर। वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर गाथाकार, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्मविभूषण से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय पंडवानी डॉ. गायिका तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। चौधरी ने कहा कि तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। लोककला के संरक्षण और संवर्धन में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा तथा आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने कहा कि इस दु:खद घड़ी में उनकी गहरी संवेदनाएँ शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य प्रशंसकों के साथ हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों और प्रशंसकों को इस कठिन समय में दु:ख सहने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।

सफलता की नई उड़ान : पारंपरिक मजबूरी से लखपति दीदी बनने तक का सफर

सफलता की नई उड़ान : पारंपरिक मजबूरी से लखपति दीदी बनने तक का सफर

 00 नारायणपुर की अनिता वड्डे ने बिहान और उन्नत मुर्गीपालन से बदली अपने परिवार की तकदीर, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
रायपुर।
मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो और सही मार्गदर्शन यदि मिल जाए, तो परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती। इसे सच कर दिखाया है नारायणपुर जिले के विकासखंड नारायणपुर अंतर्गत ग्राम भाटपाल की रहने वाली अनिता वड्डे ने। कभी आर्थिक तंगहाली और अनिश्चित भविष्य से जूझने वाली अनिता आज समाज में लखपति दीदी के रूप में अपनी एक नई और सम्मानजनक पहचान बना चुकी हैं।
चुनौतियों भरा था शुरुआती सफर
कुछ समय पहले तक अनिता वड्डे के परिवार की आजीविका का मुख्य साधन बेहद सीमित खेती और अस्थायी मजदूरी थी। आमदनी इतनी कम थी कि घर की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी। भविष्य को लेकर हमेशा एक चिंता बनी रहती थी, लेकिन अनिता ने अपनी इस नियति को स्वीकार करने के बजाय आत्मनिर्भर बनने की ठानी।
बिहान ने जगाया आत्मनिर्भरता का विश्वास
अनिता के जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया, जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत जीवन स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह में होने वाली नियमित बैठकों, बचत की आदतों और वित्तीय प्रबंधन के तौर-तरीकों ने उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास फूंका। इसी दौरान उन्हें बिहान के तहत संचालित एकीकृत कृषि क्लस्टर (आईएफसी) परियोजना के बारे में पता चला। पारंपरिक ढर्रे से हटकर कुछ नया करने की चाह में उन्होंने आधुनिक और वैज्ञानिक आजीविका पद्धतियों को अपनाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि बिहान योजना और एकीकृत कृषि क्लस्टर ने मुझे केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर ही नहीं बनाया, बल्कि समाज में सम्मान के साथ जीने का गौरव भी दिया है।
वैज्ञानिक पद्धतियों से पाई सफलता
आईएफसी क्लस्टर के माध्यम से मिले तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग ने अनिता के प्रयासों को पंख लगा दिए। उन्होंने 1500 चूजों की ब्रूडिंग की कमान संभाली और स्थानीय किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले चूजों की आपूर्ति शुरू की। इससे न केवल उनकी बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हुई। संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण और बेहतर प्रबंधन जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उन्होंने मुर्गीपालन व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वैज्ञानिक प्रबंधन का ही नतीजा था कि शुरुआती चरण में ही उन्हें 16 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।
अब लक्ष्य: 30 हजार रुपये प्रतिमाह की नियमित आय
इस शुरुआती सफलता ने अनिता के हौसलों को एक नई उड़ान दी है। आज वे अपने इस व्यवसाय का लगातार विस्तार कर रही हैं। अब उनका अगला लक्ष्य इस आजीविका के माध्यम से हर महीने 30 हजार रुपये तक की नियमित और स्थिर आय अर्जित करना है। आज उनका परिवार एक सुरक्षित और समृद्ध जीवन जी रहा है। अनिता अब सिर्फ अपने परिवार का सहारा नहीं हैं, बल्कि वे अपने पूरे गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणापुंज बन चुकी हैं। वे चाहती हैं कि गांव की हर महिला आर्थिक रूप से सक्षम होकर अपने पैरों पर खड़ी हो। अनिता वड्डे की यह कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही अवसर और दृढ़ संकल्प के बल पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक सशक्तिकरण की नई इबारत लिख सकती हैं।

मरीजों का मनोवैज्ञानिक इलाज भी करें डॉक्टर- डेका

मरीजों का मनोवैज्ञानिक इलाज भी करें डॉक्टर- डेका

 लोक भवन से महाराष्ट्र मंडल को मिले एंबुलेंस की सेवा शुभारंभ समारोह में युवा डॉक्टर्स व चार्टर्ड एकाउंटेंट्स का भी किया सम्मान
रायपुर।
डॉक्टर को किसी मरीज का इलाज दो स्तर पर करना चाहिए। एक अपनी दवाओं से और दूसरा मनोवैज्ञानिक तरीके से। जब आप किसी बीमार व्यक्ति को उसकी बीमारी के बारे में पूछताछ करते हैं, तो आपको अपनी शिक्षा व अनुभव के आधार पर उसके मर्ज की विस्तृत जानकारी हो जाती है और आप दवाओं का उसे पर्चा थमा देते हैं। आपकी लिखी दवाओं से मरीज ठीक हो जाता है। फिर भी उसे अपने स्वस्थ होने पर संदेह तो रहता है, क्योंकि डॉक्टर ने न तो उसे हाथ लगाया और न ही स्टेथोस्कोप से उसके शरीर की जांच की।
महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में युवा डॉक्टर्स और चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने इस आशय के विचार व्यक्त किए। रमेन डेका लोक भवन से मिले एंबुलेंस की सेवा का शुभारंभ करने के लिए बेहद खराब मौसम के बावजूद महाराष्ट्र मंडल पहुंचे थे। राज्यपाल ने डॉक्टर्स से कहा कि कम से कम आप अपने मरीज की मनोवैज्ञानिक संतुष्टि के लिए मरीज को स्पर्श कर, उसका स्टेथोस्कोप से जांच कर उसके पूरी तरह सेहतमंद होने का भरोसा तो दे ही सकते हैं।
रमेन डेका ने युवा चार्टर्ड एकाउंटेंट्स से कहा कि आप लोग व्यापारियों के सबसे करीबी और विश्वस्त मार्गदर्शक हो, शुभचिंतक हो और फिलासफर हो। जिस  समय आम धरणा बनती है कि अब पुश्तैनी बिजनेस में कुछ नहीं बचा, तब आप ही हैं, जो उन्हें आपने मार्गदर्शन से पुराने बिजनेस में ही नवाचार करने का रास्ता दिखाकर कुछ नया सोचने और करने के लिए प्रोत्सहित करते हैं। उन्होंने युवा सीए से कहा कि उनके कंधों पर देश की अर्थव्यवस्था का भार है। इसे आप महसूस करें।
महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि छह जून को शिवाजी प्रतिमा अनावरण समारोह में इसी मंच से राज्यपाल डेका ने मंडल को एबुंलेंस देने का वादा किया था। एक माह के भीतर लोक भवन से मिले एबुंलेंस की सेवा का उनके हाथों से ही शुभारंभ करते हुए देखकर हम सब उनके प्रति कृतज्ञ व आभारी हैं। काले ने कहा कि हम राज्यपाल के भरोसे पर खरा उतरकर दिखेंगे। इससे पूर्व राज्यपाल ने एबुलेंस का हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम का संचालन सचिव चेतन दंडवते और आभार प्रदर्शन उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने किया। इस अवसर पर कार्यकारिणी सदस्यों, पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में सभासद भी उपस्थित थे। 

चिंतन शिविर 3.0: योग से हुई नई सुबह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिया स्वस्थ और संतुलित जीवन का संदेश

चिंतन शिविर 3.0: योग से हुई नई सुबह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिया स्वस्थ और संतुलित जीवन का संदेश

 रायपुर  :- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चिंतन शिविर 3.0 के दूसरे दिन की शुरुआत योगाभ्यास के साथ की। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) नवा रायपुर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित विशेष योग सत्र में उन्होंने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया। 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि नियमित योग न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि व्यक्ति को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन और प्रभावी निर्णय क्षमता के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से चिंतन शिविर के दौरान दिन की शुरुआत योग से की गई, ताकि सकारात्मक ऊर्जा और एकाग्रता के साथ राज्य के विकास से जुड़े विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श किया जा सके। उन्होंने कहा कि योगाभ्यास के इस सामूहिक आयोजन से चिंतन शिविर 3.0 में सकारात्मक ऊर्जा के साथ अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली के संदेश को नई दिशा मिलेगी ।

योग सत्र में उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव तथा आईआईएम रायपुर के अधिकारी भी उपस्थित थे। 

बिहान योजना से मिली नई पहचान: पशु सखी बन आत्मनिर्भर हुईं तैलासो राजवाड़े, हर माह 10 से 15 हजार रुपये की आय…

बिहान योजना से मिली नई पहचान: पशु सखी बन आत्मनिर्भर हुईं तैलासो राजवाड़े, हर माह 10 से 15 हजार रुपये की आय…

 रायपुर: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ से जुड़कर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। इसी का प्रेरक उदाहरण सरगुजा जिले के विकासखंड अंबिकापुर की तैलासो राजवाड़े हैं, जो महादेव स्वयं सहायता समूह, रोशनी ग्राम संगठन (वीओ) एवं समृद्ध सरगुजा संकुल से जुड़ी हुई हैं। वे पिछले दो वर्षों से पशु सखी के रूप में कार्य करते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं।

तैलासो राजवाड़े बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका का सशक्त माध्यम मिला। वर्तमान में वे पशुपालकों को बकरियों की देखभाल, टीकाकरण के प्रति जागरूकता, समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक दवाइयों की जानकारी उपलब्ध कराती हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 से 15 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण एवं बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल रही है।

उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें बड़ा बेटा कक्षा 12वीं, दूसरा कक्षा 10वीं तथा सबसे छोटा कक्षा 8वीं में अध्ययनरत है। पहले आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन आज स्वयं की आय से वे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा कर पा रही हैं।

तैलासो ने बताया कि उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जहां पशुपालन एवं बकरियों के स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। उन्होंने कहा कि यदि पशु सखियों को नियमित रूप से उन्नत प्रशिक्षण एवं टीकाकरण संबंधी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को और बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकेंगी।

उन्होंने यह भी बताया कि बिहान योजना के माध्यम से उन्हें आजीविका संवर्धन के लिए विभिन्न अवसर प्राप्त हुए हैं। योजना से मिली सहायता के आधार पर उन्होंने अपने खेत में बोर खुदवाया है तथा धान की खेती शुरू की है। भविष्य में वे सब्जी उत्पादन कर अपनी आय में और वृद्धि करने की योजना बना रही हैं।

तैलासो राजवाड़े ने कहा कि बिहान योजना से जुड़कर उन्हें आत्मविश्वास, सम्मान और आर्थिक स्वावलंबन मिला है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभा रही है और इससे अनेक महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

सीएम हेल्पलाइन 1076 से तीजन बाई को मिला नया राशन कार्ड

सीएम हेल्पलाइन 1076 से तीजन बाई को मिला नया राशन कार्ड

 शिकायत के त्वरित निराकरण से मिली राहत,,हितग्राही ने शासन के प्रति जताया आभार

रायपुर -- मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किए जाने से आमजन को राहत मिल रही है। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंढा निवासी तीजन बाई मंडावी को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नया राशन कार्ड प्राप्त हुआ है। 

ग्राम मेंढा निवासी  बलराम मंडावी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कर बताया था कि तीजन बाई मंडावी का नया राशन कार्ड नहीं बन पा रहा है, जिससे उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ प्राप्त करने में कठिनाई हो रही थी। शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा मामले का परीक्षण कर त्वरित कार्रवाई की गई। आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करते हुए तीजन बाई मंडावी का नया राशन कार्ड जारी कर दिया गया। इसके पश्चात विभाग द्वारा दूरभाष के माध्यम से हितग्राही से संपर्क कर जानकारी प्राप्त की गई, जिसमें तीजन बाई मंडावी ने नया राशन कार्ड प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए समाधान पर संतोष व्यक्त किया। तीजन बाई मंडावी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से उनकी समस्या का शीघ्र निराकरण हुआ और अब उन्हें राशन कार्ड प्राप्त हो गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की प्रभावी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया है।

सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से हितग्राहियों को घर बैठेऑनलाइन प्राप्त हुए जाति प्रमाण-पत्र

सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से हितग्राहियों को घर बैठेऑनलाइन प्राप्त हुए जाति प्रमाण-पत्र

 रायपुर- छत्तीसगढ़  सरकार की डिजिटल सुशासन पहल ‘सेवा सेतु’ प्रदेश के नागरिकों तक सीधे सरकारी सुविधाएं पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन चुकी है, जिससे आमजन को अब छोटे-छोटे कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसी तारतम्य में, डिजिटल सशक्तिकरण की एक प्रभावी झलक दुर्ग जिले के ग्राम बोरई में देखने को मिली, जहाँ विगत 3 जुलाई 2026 को आवेदित दो हितग्राहियों, जय ठाकुर और यमुना ठाकुर का सामाजिक प्रास्थिति (अनुसूचित जनजाति-गोंड) प्रमाण-पत्र अनुविभागीय अधिकारी  हरवंश सिंह मिरी द्वारा त्वरित रूप से स्वीकृत कर ऑनलाइन जारी किया गया। बिना किसी दफ्तर जाए, घर बैठे आईटी नियमों के तहत प्राप्त हुए ये डिजिटल दस्तावेज़ यह पुख्ता प्रमाण हैं कि ’सेवा सेतु’ व्यवस्था दूर-दराज के इलाकों में भी बेहद पारदर्शी, त्वरित और जन-अनुकूल तरीके से काम कर रही है।  

उल्लेखनीय है कि ‘सेवा सेतु’ छत्तीसगढ़ के नागरिकों तक डिजिटल सेवाएँ लाने की एक ऐसी खास पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से दूर-दराज विशेषकर ग्रामीण इलाकों में रहने वालों तक सरकार की योजनाएं और सुविधाएं पहुंचाना है। राज्य सरकार की इस डिजिटल पहल के तहत लगभग 36 विभागों की 528 सेवाएँ एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस नई डिजिटल व्यवस्था के शुरू होने से अब हितग्राहियों का  समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है, साथ ही उन्हें अपनी पढ़ाई और नौकरी से जुड़े जरूरी प्रमाण-पत्र पाने के लिए दलालों और बिचौलियों से भी पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।

46,500 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीएपी आवंटन से खरीफ सीजन के लिए खाद की उपलब्धता हुई सुनिश्चित

46,500 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीएपी आवंटन से खरीफ सीजन के लिए खाद की उपलब्धता हुई सुनिश्चित

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा का जताया आभार

रायपुर-- मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री  जगत प्रकाश नड्डा द्वारा छत्तीसगढ़ को 46,500 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीएपी आवंटित किए जाने पर उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया है।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्रीय मंत्री  नड्डा के विशेष सहयोग से लिया गया यह निर्णय प्रदेश के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे खरीफ सीजन के दौरान किसानों को  समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में बड़ी सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि कुछ समय पूर्व नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री  नड्डा से हुई भेंट के दौरान उन्होंने खरीफ सीजन की आवश्यकताओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ के लिए अतिरिक्त डीएपी उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। केंद्रीय मंत्री ने किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सकारात्मक सहयोग का आश्वासन दिया था, जिसके परिणामस्वरूप राज्य को अतिरिक्त डीएपी का आवंटन प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में यूरिया की उपलब्धता पहले से ही पर्याप्त थी और अब अतिरिक्त डीएपी मिलने से खरीफ सीजन के लिए खाद की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। इससे किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा तथा कृषि कार्य सुचारु रूप से संचालित होंगे। 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य  सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित कर रही है कि उन्हें समय पर डीएपी, यूरिया सहित सभी आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार अन्नदाता के कल्याण और कृषि क्षेत्र की मजबूती के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

०-पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी श्रद्धांजलि

रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर पहुंचकर पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।   

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई तथा छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।  

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक  पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज करेंगे थोक बाजार डूमरतराई फेस-2 का नामकरण एवं लोकार्पण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज करेंगे थोक बाजार डूमरतराई फेस-2 का नामकरण एवं लोकार्पण

 गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आयोजित समारोह में होंगे शामिल, वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी करेंगे अध्यक्षता

रायपुर- छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा विकसित रायपुर के डूमरतराई थोक बाजार फेस-2 के नामकरण एवं लोकार्पण समारोह का आयोजन 5 जुलाई 2026 (रविवार) को शाम 5:00 बजे किया जाएगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समारोह की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री  ओ.पी. चौधरी करेंगे।

कार्यक्रम में मंत्री केदार कश्यप, मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब तथा रायपुर लोकसभा सांसद  बृजमोहन अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
इसके अलावा विधायक  राजेश मूणत,  मोतीलाल साहू,  पुरंदर मिश्रा,  सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष  अनुराग सिंह देव, रायपुर महापौर मीनल चौबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक समारोह में शामिल होंगे।

16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

 पंचायतों के वित्तीय सशक्तिकरण एवं ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर हुई चर्चा

 

रायपुर-

नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा शामिल हुए। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के आवंटन, पंचायतों की वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ करने तथा 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

 कार्यशाला में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता, बेहतर सेवा प्रदायगी, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित अनुदान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में सहभागिता करते हुए पंचायतों एवं ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर आयोजित प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श का अवलोकन किया।

छत्तीसगढ़ को ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान

कार्यशाला के दौरान 16वें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के लिए प्रस्तावित अनुदान की जानकारी साझा की गई। आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि में छत्तीसगढ़ को कुल 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त होगा। इसमें 9,331 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट तथा 2,333 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट शामिल हैं। वहीं, ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अंतर-राज्यीय अनुदान वितरण में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 2.68 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

वर्षवार आवंटन के अनुसार 2026-27 में राज्य को 1,498 करोड़ रुपए की बेसिक ग्रांट मिलेगी। 2027-28 में 1,663 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 248 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2028-29 में 1,846 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 624 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2029-30 में 2,049 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 693 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट तथा 2030-31 में 2,275 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 768 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट का प्रावधान किया गया है।

यह अनुदान ग्राम पंचायतों एवं अन्य ग्रामीण स्थानीय निकायों के माध्यम से आधारभूत अधोसंरचना के विकास, नागरिक सुविधाओं के विस्तार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

चिरायु दल ने लौटाई मुस्कान, जन्मजात कटे होंठ और तालु से मिली मुक्ति…

चिरायु दल ने लौटाई मुस्कान, जन्मजात कटे होंठ और तालु से मिली मुक्ति…

 रायपुर: ’जन्म से थी गंभीर समस्या’

माड़कम हुंगा जन्म से ही कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या से पीड़ित था। इस कारण उसे भोजन करने, साफ बोलने और सामान्य जीवन जीने में काफी परेशानी होती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका इलाज कराना संभव नहीं था।

’स्कूल में जांच के दौरान हुई पहचान’
आरबीएसके के चिरायु दल ने स्कूल में नियमित  स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान माड़कम हुंगा की पहचान की। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत रायपुर रेफर किया गया।

’निःशुल्क सर्जरी से मिली नई जिंदगी’
25 जून 2026 को माड़कम हुंगा को रायपुर के एक विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी सफल प्लास्टिक सर्जरी की। उपचार के बाद उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और 30 जून 2026 को उसे  स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

’इलाज का पूरा खर्च शासन ने उठाया’
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सर्जरी, जांच, दवाइयां, रायपुर तक आने-जाने की व्यवस्था तथा उपचार के दौरान रहने और भोजन सहित पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया। इससे परिवार पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

’नई मुस्कान, नया आत्मविश्वास’
आज माड़कम हुंगा पहले की तुलना में बेहतर जीवन जी रहा है। अब उसे भोजन करने और बोलने में पहले जैसी कठिनाई नहीं होती। उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान और बढ़ा आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि शासन की स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) का चिरायु दल दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यह पहल बच्चों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद का आधार बन रही है।

चिंतन शिविर 3.0 से सुशासन के अगले चरण की रूपरेखा तैयार होगी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….

चिंतन शिविर 3.0 से सुशासन के अगले चरण की रूपरेखा तैयार होगी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….

 रायपुर: चिंतन शिविर 3.0 का उद्देश्य शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के लिए दूरदर्शी नीति-निर्माण की मजबूत आधारशिला तैयार करना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने शासन के विभिन्न आयामों पर व्यापक मंथन करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि चिंतन शिविर केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति में निरंतर सुधार और नवाचार का माध्यम बन चुका है। पिछले दो संस्करणों से प्राप्त सुझावों को  सरकार ने प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा है, जिसके सकारात्मक परिणाम आज प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन में तकनीक, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना ही इस शिविर का मूल उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि चिंतन शिविर 3.0 के प्रथम दिवस में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा कृषि समृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, सेवा-भाव और जनप्रतिनिधियों के नैतिक दायित्वों पर अपने विचार रखे। उन्होंने मूल्य-आधारित नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासन को प्रभावी सुशासन की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

शिविर में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने “इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़” विषय पर संबोधित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीक आधारित सेवा वितरण, नवाचार, रोजगार सृजन तथा डिजिटल समावेशन के लिए छत्तीसगढ़ के समक्ष उपलब्ध अवसरों की भी चर्चा की।

कृषि विषयक सत्र “कृषि से समृद्धि” में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क और तकनीक आधारित कृषि सुधारों पर अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न राज्यों के सफल मॉडलों की जानकारी देते हुए किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। इस दौरान मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने समूह आधारित विचार-मंथन में भी भाग लिया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पिछले चिंतन शिविरों से प्राप्त सुझावों के आधार पर मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई, जिससे फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और समयबद्ध बनी है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु जैसे महत्वपूर्ण नवाचार भी इसी चिंतन प्रक्रिया का परिणाम हैं। आज सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आमजन को सरल, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव सुशासन, तकनीक आधारित प्रशासन, कृषि सुधार, विभागीय समन्वय और जनसेवा के नए मानक स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार नवाचार, ज्ञान, तकनीक और प्रभावी नीति-निर्माण को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी तथा चिंतन शिविर से निकले विचारों को शीघ्र ही ठोस नीतिगत और प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

BREAKING NEWS : पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन, रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस

BREAKING NEWS : पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन, रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस

 रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्वभर में नई पहचान दिलाने वाली प्रख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। रविवार तड़के सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था।

डॉ. तीजन बाई ने अपनी बुलंद आवाज, दमदार अभिनय और अनूठी कथावाचन शैली से पंडवानी को गांव-देहात की लोक परंपरा से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने की उनकी कला ने उन्हें भारतीय लोक संस्कृति की सबसे सम्मानित हस्तियों में शामिल कर दिया। उन्होंने दुनिया के अनेक देशों में अपनी प्रस्तुतियों से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का परचम लहराया।

भारतीय लोक कला में उनके अद्वितीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। उनके निधन से कला, साहित्य और संस्कृति जगत में गहरा शोक व्याप्त है। छत्तीसगढ़ ने अपनी ऐसी सांस्कृतिक धरोहर खो दी है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया शोक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जाना छत्तीसगढ़ और पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपने असाधारण पंडवानी गायन से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया। उनकी कला, संघर्ष और समर्पण सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों, शुभचिंतकों और उनके करोड़ों प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मंत्रिमंडल का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का आयोजन आज से…..

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मंत्रिमंडल का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का आयोजन आज से…..

 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का आयोजन 4 एवं 5 जुलाई को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रायपुर में किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर के सहयोग से आयोजित इस शिविर का उद्देश्य शासन की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, नवाचार आधारित तथा परिणामोन्मुख बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के विज़न को नई गति देना है।

विष्णु देव साय ने कहा कि बदलते समय की चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप शासन को भी निरंतर सीखना, स्वयं का मूल्यांकन करना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए। इसी सोच के अनुरूप आयोजित यह चिंतन शिविर मंत्रिमंडल और विभिन्न क्षेत्रों के राष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच संवाद, अनुभव-साझाकरण तथा नीति-निर्माण का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

शिविर में प्रदेश के समग्र, संतुलित और समावेशी विकास से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग, निवेश, पर्यटन, खेल, नवाचार, उभरती प्रौद्योगिकी, सुशासन, संस्थागत सुधार, नेतृत्व विकास तथा प्रभावी जनसेवा जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित होंगे। इन चर्चाओं के आधार पर शासन की प्राथमिकताओं, विभागीय समन्वय और जनहितकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए भावी रणनीति तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा है कि सुशासन केवल योजनाएँ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय की मांग के अनुरूप स्वयं को निरंतर बेहतर बनाते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी है। चिंतन शिविर इसी सतत सुधार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि  सरकार का उद्देश्य ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जो पारदर्शी, उत्तरदायी, संवेदनशील और परिणाम आधारित हो तथा जिसका प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग से नहीं, बल्कि दूरदर्शी नीति, नवाचार, प्रभावी नेतृत्व और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से संभव होगा। चिंतन शिविर में होने वाला मंथन आने वाले वर्षों की विकास यात्रा को नई दिशा देगा।

राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ साझा करेंगे अनुभव

चिंतन शिविर के प्रथम दिवस की शुरुआत आध्यात्मिक गुरु एवं मोटिवेशनल स्पीकर  गौर गोपाल दास के नेतृत्व एवं जीवन मूल्यों पर व्याख्यान से होगी। इसके बाद अभय करंदीकर उभरती प्रौद्योगिकियों एवं भविष्य की शासन व्यवस्था में उनकी भूमिका पर अपने विचार रखेंगे। डॉ. रमेश चंद कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भविष्य की कृषि रणनीतियों पर विशेष व्याख्यान देंगे।

द्वितीय दिवस की शुरुआत योग सत्र से होगी। इसके पश्चात  सुमन बिल्ला पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र की संभावनाओं,  शशांक मणि त्रिपाठी सार्वजनिक नीति एवं विकास, ओलंपिक पदक विजेता गगन नारंग उत्कृष्टता, नेतृत्व और प्रदर्शन की संस्कृति तथा डॉ. विनय सहस्रबुद्धे सुशासन, नेतृत्व और जनकेंद्रित प्रशासन पर अपने विचार साझा करेंगे।

सुशासन की नई कार्यसंस्कृति को मिलेगा बल

चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य शासन व्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देना, विभागों के बीच अभिसरण एवं समन्वय को मजबूत करना, निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना तथा परिणामोन्मुखी प्रशासनिक संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। साथ ही शासन में प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग, नवाचार आधारित समाधान और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को लेकर भी विस्तृत चर्चा होगी।

मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर प्रदेश में पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध, राज्य में 30 जून की स्थिति में 13.16 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का भण्डारण

मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर प्रदेश में पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध, राज्य में 30 जून की स्थिति में 13.16 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का भण्डारण

 रायपुर: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य  सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर लगातार प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। खरीफ वर्ष 2026 के लिए 30 जून तक की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। इससे अब किसानों के लिए पर्याप्त डीएपी उपलब्ध हो सकेगा। बता दंे कि अब तक भंडारित कुल रासायनिक खाद पिछले साल इसी अवधि में भंडारित रासायनिक खाद की तुलना में 1.08 लाख मीट्रिक टन अधिक है।

वहीं प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के भण्डारण और वितरण की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार ने खेती के मौसम से पहले ही किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि किसान परिवारों की समृद्धि और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बता दें कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए खरीफ वर्ष 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध 30 जून की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। इनमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी तथा एसएसपी जैसे सभी प्रमुख उर्वरक शामिल हैं। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि किसानों को बुआई के दौरान खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने पहले से व्यापक तैयारी की है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के किसानों को अभी तक 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। यह वितरण किसानों की वास्तविक मांग के अनुरूप लगातार किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में 5 लाख 88 हजार 673 मीट्रिक टन उर्वरकों का शेष भण्डार उपलब्ध है, जिससे आगामी दिनों में भी किसानों को निर्बाध रूप से खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी।

यदि गत वर्ष की समान अवधि से तुलना करें तो इस वर्ष की उपलब्धियां और भी उत्साहजनक हैं। 30 जून 2025 तक प्रदेश में 12 लाख 25 हजार 929 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण हुआ था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन हो गया है। अर्थात लगभग 90 हजार 577 मीट्रिक टन अधिक खाद का भण्डारण सुनिश्चित किया गया है।

इसी प्रकार, गत वर्ष 30 जून तक 7 लाख 66 हजार 161 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में वर्तमान में उपलब्ध 5.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक का शेष भण्डार आगामी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और यह सरकार की दूरदर्शी योजना एवं मजबूत आपूर्ति प्रबंधन का परिचायक है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी किसान को खाद के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। यही कारण है कि राज्य सरकार खाद की उपलब्धता, भण्डारण, परिवहन एवं वितरण की सतत निगरानी कर रही है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों की समीक्षा की

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों की समीक्षा की

 यूटिलिटी शिफ्टिंग में तेजी लाने के दिए निर्देश, शासकीय भवनों के उपकरणों का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखने कहा

रायपुर- लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने आज अधिकारियों की बैठक लेकर विभाग द्वारा किए जा रहे विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने पीडब्लूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आयोजित बैठक में विद्युत एवं यांत्रिकी परिक्षेत्र के मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं, कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों को कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय कार्यप्रणाली को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सुव्यवस्थित, तेज और प्रभावी बनाने के साथ ही कार्यों में आधुनिक तकनीकों व उपकरणों का अधिकतम उपयोग करने को कहा।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में अधिकारियों को भवनों, सड़कों और पुलों के विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों में उच्च गुणवत्ता और टिकाऊ सामग्रियों के उपयोग के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा खरीदी गई सामग्री के जीएसटी बिल अनिवार्य रूप से जमा कराने को कहा। उन्होंने शासकीय भवनों में स्थापित सभी विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का समग्र ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे परिसंपत्तियों के रखरखाव और प्रबंधन में पारदर्शिता तथा दक्षता आएगी।

विभागीय सचिव ने मरम्मत, रखरखाव तथा विभिन्न आयोजनों से संबंधित बिलों के भुगतान नियमित रूप से एक माह के भीतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने ई-ऑफिस के माध्यम से भुगतान की कार्यवाही करने को कहा। उन्होंने चालू जुलाई माह में 30 जून 2026 तक के सभी लंबित बिलों के भुगतान करने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने प्रमुख अभियंता को कार्यपालन अभियंताओं के लिए आवश्यक बजट आबंटन जारी करने को कहा।

श्री बंसल ने बैठक में यूटिलिटी शिफ्टिंग के कार्यों में तेजी लाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इन कार्यों के कारण निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने शहरों के बीच की सड़कों पर स्थापित स्ट्रीट लाइटों के संचालन, संधारण एवं मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित नगरीय निकायों को सौंपने के लिए आवश्यक समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने शासकीय भवनों के हैंडओवर के समय ही वहां स्थापित लिफ्टों के संचालन, संधारण और मरम्मत की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने विभिन्न शासकीय आयोजनों एवं कार्यक्रमों में लगने वाली व्यवस्थाओं के लिए ठेकेदारों एवं वेंडर्स से रेट-कॉन्ट्रैक्ट व रेट-इम्पैनलमेंट करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अन्य राज्यों की उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं के अनुरूप उन्हें लागू करने को कहा।

 बंसल ने विद्युत एवं यांत्रिकी ठेकेदारों के साथ भी बैठक कर कार्यों में आने वाली समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों में सुदृढ़ता एवं तेजी लाने के लिए उनसे सुझाव भी मांगे। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी, विद्युत एवं यांत्रिकी परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता  टी.आर. कुंजाम और  जी.एस. मंडावी, अधीक्षण अभियंता  सुरेश भूपल और  एन.के. लाल सहित सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता तथा उप संभागों के अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किया योग को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किया योग को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान

 छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने संभाला पदभार

रायपुर - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और अनुशासित जीवन का आधार है। उन्होंने प्रदेशवासियों से योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं।

मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष  संजय अग्रवाल के पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने  अग्रवाल को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में योग आयोग प्रदेश में योग के प्रचार-प्रसार को नई गति देगा तथा योग को गांव-गांव, विद्यालयों और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर प्रयासों से भारत की प्राचीन योग परंपरा को वैश्विक पहचान मिली है। आज विश्व के 176 से अधिक देश 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाकर भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का सम्मान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने योग और आयुर्वेद को नई दिशा देने के लिए आयुष मंत्रालय का गठन किया तथा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को सशक्त बनाने के अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद एम्स की स्थापना का आग्रह किया गया है। राज्य का लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र औषधीय वनस्पतियों से समृद्ध है, जिससे भविष्य में छत्तीसगढ़ आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बन सकता है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसे प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है। उन्होंने कहा कि योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

विधायक किरण सिंह देव ने विश्वास व्यक्त किया कि  संजय अग्रवाल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ योग आयोग प्रदेश के प्रत्येक गांव, शहर और परिवार तक योग की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी कार्य करेगा।

समारोह में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद लक्ष्मी वर्मा, सांसद कमलेश जांगड़े, विधायक  किरण देव, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय अग्रवाल, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष  दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष  ध्रुव कुमार मिर्धा, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया सहित वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बड़ी संख्या में योग साधक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

रायपुर में आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे

रायपुर में आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे

 रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे. मुख्यमंत्री सुबह 11:30 बजे कृषि मंडपम ऑडिटोरियम में आयोजित ‘राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. इसके बाद शाम 5:30 बजे एक निजी होटल में आयोजित ‘संवाद संगोष्ठी’ और शाम 6:45 बजे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘नारी संगम’ कार्यक्रम में भाग लेंगे. इसके बाद वह रात 8 बजे मुख्यमंत्री निवास लौटेंगे.

मंत्री टंक राम वर्मा ने सुनीं कार्यकर्ताओं-आमजनों की समस्याएं

मंत्री टंक राम वर्मा ने सुनीं कार्यकर्ताओं-आमजनों की समस्याएं

 रायपुर । प्रदेश भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित सहयोग केंद्र में आज आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।

इस अवसर पर मंत्री वर्मा ने प्रत्येक प्रकरण को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि हमारे कार्यकर्ता साथियों एवं आमजनों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा डबल इंजन सरकार द्वारा जनहित से जुड़े प्रत्येक विषय पर संवेदनशीलता के साथ निरंतर कार्य किया जा रहा है।प्रदेश भाजपा कार्यालय में संचालित सहयोग केंद्र संगठन और सरकार के बीच प्रभावी समन्वय का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। जनदर्शन के माध्यम से जहां भाजपा कार्यकर्ताओं की समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है, वहीं आम नागरिकों को भी शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने और समाधान प्राप्त करने का सहज अवसर मिल रहा है।

चिकित्सा में आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय संवेदनाएं भी जरूरी है - राज्यपाल डेका

चिकित्सा में आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय संवेदनाएं भी जरूरी है - राज्यपाल डेका

 रायपुर :- राज्यपाल रमेन डेका ने डॉक्टर्स डे के अवसर पर आज विमतारा भवन में सिक्ख समाज छत्तीसगढ़ एवं जेसीआई रायपुर मेडिको सिटी द्वारा आयोजित अलग-अलग कार्यक्रमों में चिकित्सकों का सम्मान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में अत्याधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का महत्व बढ़ा है, लेकिन रोगी के प्रति मानवीय संवेदनाएं, आत्मीय व्यवहार और नैतिक मूल्यों के साथ की गई चिकित्सा ही समाज का विश्वास मजबूत करती है।

चिकित्सा में आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय संवेदनाएं भी जरूरी है

राज्यपाल ने कहा कि डॉक्टर का मधुर व्यवहार कई दवाइयों से भी अधिक प्रभावी होता है। मरीज के लिए चिकित्सक भगवान के समान होता है और उसे वास्तविक संतोष तभी मिलता है, जब डॉक्टर स्वयं उसका शारीरिक परीक्षण कर उसकी स्थिति को समझे। उन्होंने कहा कि आधुनिक जांच तकनीकों का अपना महत्व है, लेकिन मरीज का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से उपचार भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि देश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन फैमिली डॉक्टर अथवा पड़ोस के डॉक्टर की परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। इस परंपरा को बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि ऐसे चिकित्सक परिवारों के स्वास्थ्य और विश्वास का महत्वपूर्ण आधार होते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले हमारे देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिकित्सक इस दिशा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर अनेक रोगों की रोकथाम की जा सकती है।

उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए कहा कि चिकित्सकों को इस दिशा में विशेष ध्यान देना होगा। मोबाइल और इंटरनेट की बढ़ती लत पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इनका उपयोग केवल आवश्यकता के अनुसार होना चाहिए। एआई अनेक क्षेत्रों में उपयोगी है, लेकिन मानव मस्तिष्क की संवेदनशीलता, विवेक और निर्णय क्षमता का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

राज्यपाल ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को सोचनीय बताते हुए कहा कि नशे की लत से ग्रस्त लोगों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करते हुए उनका उपचार और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने सिक्ख समाज द्वारा किए जा रहे सामाजिक एवं सेवा कार्यों की सराहना भी की।
राज्यपाल ने सिक्ख समाज के कार्यक्रम में समाज के चिकित्सकों तथा जेसीआई रायपुर मेडिको सिटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सा के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सकों को सम्मानित किया।

इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा, जेसीआई रायपुर मेडिको सिटी के अध्यक्ष डॉ. निखिल मोती रामानी, सचिव डॉ. अविनाश तिवारी, सिक्ख समाज के अध्यक्ष महेंद्र सिंह छाबड़ा, एम्स रायपुर के निदेशक डॉ. अशोक जिंदल, रिम्स के निदेशक डॉ. कृष्ण कुमार वाधवा, वरिष्ठ चिकित्सक, सिक्ख समाज के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।