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हम सभी को मिलकर कोरबा को पूर्ण साक्षर जिला बनाना है – कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन

हम सभी को मिलकर कोरबा को पूर्ण साक्षर जिला बनाना है – कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन

 रायपुर: अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर जिला साक्षरता विभाग, कोरबा द्वारा उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय साक्षरता समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का आयोजन “साक्षर बनें, सशक्त बनें” एवं “उल्लास से उज्ज्वल भविष्य की ओर” की थीम पर किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जिले में निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाने के साथ उनमें जागरूकता एवं आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उद्योग, वाणिज्य एवं श्रम, आबकारी तथा सार्वजनिक उपक्रम मंत्री छत्तीसगढ़ शासन  लखन लाल देवांगन शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति का साक्षर होना अत्यंत आवश्यक है। साक्षरता व्यक्ति को अपने अधिकारों और दायित्वों को समझने के साथ दैनिक जीवन में बैंकिंग लेन-देन, शासकीय योजनाओं और विभिन्न प्रकार की सूचनाओं को सही ढंग से समझने में सक्षम बनाती है। साक्षर व्यक्ति ठगी और धोखाधड़ी का शिकार होने से भी काफी हद तक बच सकता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल पढ़ना-लिखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल रूप से भी जागरूक और साक्षर होना जरूरी है।

मंत्री देवांगन ने कहा कि कोरबा जिला विभिन्न क्षेत्रों में लगातार उपलब्धियां हासिल कर रहा है। साक्षरता के क्षेत्र में भी जिले को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 27 सितंबर को आयोजित होने वाली परीक्षा के बाद कोरबा पूर्ण साक्षर जिला बनने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि कोरबा को पूर्ण साक्षर जिला बनाने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे साक्षरता अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाएं और अपने आसपास तथा परिवार के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने में सहयोग करें।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को लेकर देश को आगे बढ़ा रहे हैं। इसी प्रकार मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय विकसित छत्तीसगढ़-2047 के लक्ष्य के साथ विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को मूर्त रूप दे रहे हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने में साक्षरता की महत्वपूर्ण भूमिका है। साक्षर व्यक्ति अपने अधिकारों को समझने के साथ शासन की योजनाओं का बेहतर लाभ उठा सकता है और समाज के विकास में प्रभावी योगदान दे सकता है।
कटघोरा विधायक  प्रेमचंद पटेल ने कहा कि साक्षरता से व्यक्ति में जागरूकता आती है और रूढ़िवादिता दूर होती है। आज के डिजिटल दौर में डिजिटल साक्षरता भी बेहद जरूरी है। किसान, व्यापारी, पशुपालक और अन्य वर्ग के लोग जितने अधिक साक्षर होंगे, वे अपने-अपने क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं एवं सुविधाओं का उतना ही बेहतर लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रौढ़ शिक्षा एवं प्रेरकों के माध्यम से गांव-गांव में निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने का अभियान संचालित किया जा रहा है। निरक्षर को साक्षर बनाने वाले लोगों को प्रोत्साहन के रूप में 10 अंक प्रदान किए जाने की व्यवस्था से अभियान को और गति मिलेगी।

पटेल ने कहा कि साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को संविधान, अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों, लोकतांत्रिक व्यवस्था और मूलभूत आवश्यकताओं को समझने में भी सक्षम बनाती है। उन्होंने महिलाओं की साक्षरता दर बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षा और साक्षरता की दिशा में आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी लोगों का साक्षर एवं जागरूक होना जरूरी है।

जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति का साक्षर और जागरूक होना जरूरी है। डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करने के लिए डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। साक्षरता के माध्यम से लोग अपने अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर ढंग से समझकर उनका लाभ उठा सकते हैं।

कलेक्टर  कुणाल दुदावत ने कहा कि उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से जिले में निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाने की पहल संचालित की जा रही है। कोरबा जिला विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है और इस दिशा में साक्षरता अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि आज मोबाइल फोन लगभग हर व्यक्ति के हाथ में है। मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से जहां सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में व्यक्ति जितना अधिक साक्षर और जागरूक होगा, वह साइबर ठगी सहित विभिन्न प्रकार की धोखाधड़ी से उतना ही सुरक्षित रह सकेगा।

कलेक्टर ने कहा कि साक्षरता के साथ लोगों में जागरूकता और डिजिटल समझ विकसित करना भी जरूरी है। जिले का लक्ष्य है कि अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक निरक्षर लोगों को साक्षर बनाया जाए और कोरबा को पूर्ण साक्षर जिला बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, युवाओं और सामाजिक संगठनों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि  लखन लाल देवांगन ने साक्षरता अभियान में उल्लेखनीय कार्य करने वाले युवाओं, ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने सभी को साक्षरता अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने और जिले को पूर्ण साक्षर बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम का संचालन जिला साक्षरता अधिकारी श्रीमती ज्योति शर्मा ने किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन, जिला शिक्षा अधिकारी श्री तामेश्वर उपाध्याय, डीएमसी श्री वल्लभ वैष्णव सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, युवा एवं साक्षरता अभियान से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

लोकसुरों में गूंजा छत्तीसगढ़ का लोकमन, ‘लोरिक चंदा’ से ददरिया-चंदैनी तक बिखरी संस्कृति की रंगत…..

लोकसुरों में गूंजा छत्तीसगढ़ का लोकमन, ‘लोरिक चंदा’ से ददरिया-चंदैनी तक बिखरी संस्कृति की रंगत…..

 रायपुर: छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू, लोकजीवन की सहज संवेदनाएं और पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपराओं के रंगों से ‘लोकरंग पर्व’ का दूसरा दिन सराबोर रहा। मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित कार्यक्रम में ‘लोरिक चंदा’, ददरिया और चंदैनी जैसी पारंपरिक लोकविधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रदेश की लोकप्रिय लोकगाथा ‘लोरिक चंदा’ के भावपूर्ण प्रसंग से हुई। श्री व्यासनाथ योगी एवं साथियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से लोकगाथा की कथात्मकता, भाव और गायन परंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया। प्रस्तुति के दौरान लोकसंगीत और पारंपरिक गायन शैली ने वातावरण को पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया।

इसके बाद  विजय साहू एवं साथियों ने ददरिया की प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ के लोकजीवन से गहरे जुड़ी ददरिया की मधुर धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वहीं श्री बरसन देशलहरे ने चंदैनी के माध्यम से प्रेम, लोकजीवन और मानवीय संवेदनाओं को सुरों में पिरोया। प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जीवनशैली, लोकभावनाओं और सामाजिक सरोकारों की सहज झलक दिखाई दी।

लोककलाओं के संरक्षण और कलाकारों को प्रोत्साहन पर जोर

कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि स्थानीय मंच छत्तीसगढ़ की लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने और प्रोत्साहन पाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी हैं।

उन्होंने कहा कि लोरिक चंदा, चंदैनी गीत और ददरिया जैसी लोकविधाएं छत्तीसगढ़ के लोकजीवन की पहचान हैं। इनकी प्रस्तुति और संरक्षण से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है। ‘लोकरंग पर्व’ इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल है।

सांस्कृतिक जगत की प्रमुख हस्तियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पूर्व संचालक  अनिल कुमार साहू, उपसंचालक  उमेश मिश्रा, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार  दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार  विजय मिश्रा तथा समाजसेवी  उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।

लोकविधाओं को एक मंच पर ला रहा लोकरंग पर्व

‘लोकरंग पर्व’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं, लोकगीतों, लोकसंगीत और पारंपरिक लोकनृत्यों को एक साझा मंच प्रदान किया जा रहा है। आयोजन के दूसरे दिन की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिकता के दौर में अपनी लोकपरंपराओं को सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना उतना ही जरूरी है।

मुक्ताकाशी मंच पर गूंजे लोकसुरों और कलाकारों की सजीव प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। लोरिक चंदा की कथा, ददरिया की मिठास और चंदैनी के भावपूर्ण सुरों ने लोकरंग पर्व के दूसरे दिन को यादगार बना दिया।

पीएम श्री स्कूल तिल्दा का स्टूडेंट स्टोर बना मिसाल, मंत्री वर्मा ने बच्चों की उद्यमिता व हुनर को सराहा

पीएम श्री स्कूल तिल्दा का स्टूडेंट स्टोर बना मिसाल, मंत्री वर्मा ने बच्चों की उद्यमिता व हुनर को सराहा

 00 व्यावहारिक गतिविधियां विद्यार्थियों में उद्यमिता, नेतृत्व क्षमता,आत्मनिर्भरता और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करने में मददगार - वर्मा

00 विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शुरू हुए कई अभिनव कार्यक्रम

रायपुर। राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने आज शिक्षक सम्मान समारोह के अवसर पर पीएम  शासकीय विद्यालय, तिल्दा में विद्यार्थियों द्वारा संचालित स्टूडेंट स्टोर की व्यावसायिक गतिविधियों का अवलोकन किया। मंत्री  वर्मा ने स्टूडेंट स्टोर के संचालन की प्रक्रिया को समझा और बच्चों के इस अभिनव प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उनके अनुभवों को जाना और उनके आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच तथा कार्यकुशलता की सराहना की। बच्चों ने स्टूडेंट स्टोर के जरिए व्यवसाय संचालन, वस्तुओं की बिक्री, वित्तीय लेखा-जोखा (अकाउंटिंग) एवं ग्राहक व्यवहार सहित विभिन्न व्यावहारिक एवं व्यावसायिक कौशलों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस अवसर पर राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि यह पहल 21वीं सदी की शिक्षा व्यवस्था की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री जी के स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) कार्यक्रम का एक प्रभावी हिस्सा बताया। उन्होंने इस नवाचार के लिए मार्गदर्शन दे रहे व्याख्याता एवं प्राचार्य के प्रयासों को सराहा।

बच्चों को व्यावसायिक एवं जीवनोपयोगी कौशलों से जोडऩे का प्रयास
मंत्री  वर्मा ने कहा कि इस प्रकार की व्यावहारिक गतिविधियां विद्यार्थियों में उद्यमिता, नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करने में बेहद मददगार साबित होंगी। विद्यालय में पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को व्यावसायिक एवं जीवनोपयोगी कौशलों से जोडऩे का यह प्रयास अनुकरणीय है।
विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को उभारना, उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना के अनुरूप, पीएम  शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक, तकनीकी और जीवनोपयोगी कौशलों में दक्ष बनाने के लिए विभिन्न नवाचार कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को उभारना, उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों एवं स्वरोजगार के अवसरों के लिए तैयार करना है। इस अवसर पर शिक्षा आयोग के अध्यक्ष  सुधीर गौतम, शाला के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने अतिथियों के समक्ष अपने स्टूडेंट स्टोर की गतिविधियों को बेहद उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किया।

प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक माह भर चलेगा सेवा संकल्प अभियान - शर्मा

प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक माह भर चलेगा सेवा संकल्प अभियान - शर्मा

 00 नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में गौरवपूर्ण 25 वर्ष पूरे होने पर छत्तीसगढ़ में जलेंगे 36 लाख आशीर्वाद के दीये

रायपुर। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री/गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीर्घायु, स्वस्थ एवं ऊर्जावान जीवन के लिए 17 सितंबर को पूरे प्रदेश में 36 लाख आशीर्वाद के दीये प्रज्जवलित किए जाएंगे। इसके तहत प्रत्येक मतदान केंद्र (बूथ) पर कम-से-कम 100 दीये जलाने का लक्ष्य रखा गया है।  शर्मा मंगलवार को यहाँ भाजपा प्रदेश कार्यालय (कुशाभाऊ ठाकरे परिसर) में पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि यह अभियान मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण का व्यापक जनांदोलन बनेगा।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संवैधानिक पद (मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री) पर रहते हुए 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले सेवा संकल्प अभियान और सेवा पखवाड़ा के विस्तृत कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि अभियान में हर गाँव, शहर, बूथ और परिवार की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक बूथ पर हर परिवार दीप प्रज्जवलन कर प्रधानमंत्री  मोदी के 25 वर्षों के सेवा समर्पण के प्रति आभार प्रकट करेगा और विकसित भारत 2047 का संकल्प लेगा। 7 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों के प्रमुख चौराहों पर एक विशेष मशाल स्थापित की जाएगी। 7 अक्टूबर को, जिस दिन श्री मोदी के सरकार प्रमुख के तौर पर 25 वर्ष पूरे हो रहे है, प्रमुख चौकों पर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी, जिसके माध्यम से प्रधानमंत्री देश के सभी जिला केंद्रों को एक साथ सम्बोधित करेंगे। इसी दरम्यान युवाओं की एक विशेष यात्रा प्रधानमंत्री के जन्मस्थान वडनगर (गुजरात) से उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक निकाली जाएगी। यह यात्रा विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए छत्तीसगढ़ के कवर्धा और कोरिया समेत कई क्षेत्रों में पहुँचेगी। अभियान के तहत वडनगर से वाराणसी (जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा) कार्यक्रम होगा। गुजरात की पवित्र नदियों के जल के साथ 250 बाइकों पर 500 यात्री वडनगर में हाटकेश्वर महादेव का अभिषेक करेंगे और शर्मिष्ठा तालाब का जल लेकर 10 टोलियों में काशी के लिए प्रस्थान करेंगे। 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक एक माह तक चलने वाले सेवा मेरा योगदान अभियान में भाजपा कार्यकर्ता और आम नागरिक प्रशासनिक एवं सामाजिक स्तर पर सेवा गतिविधियों में भाग लेंगे।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने सेवा के रंग रंगोली प्रतियोगिता की जानकारी देते हुए बताया कि सार्वजनिक स्थानों, प्रमुख संस्थानों और घरों में 25 वर्षों के विकास कार्यों और सेवा भाव पर आधारित रंगोली प्रतियोगिताएँ एवं प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाएंगी। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि इस दौरान राष्ट्रव्यापी ड्राइंग एवं भाषण प्रतियोगिता के तहत देशभर के सभी सरकारी व निजी स्कूलों में छात्रों के लिए मोदी सरकार के सेवा कार्यों और विकसित भारत की संकल्पना पर भाषण व ड्राइंग प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी। इसी प्रकार नमो सेवा गाथा कार्यक्रम में 25 वर्षों के सेवा कार्यों और जनहितैषी योजनाओं को संगीतपूर्ण व सरल नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए स्कूल, कॉलेज, पंचायत और सामुदायिक केंद्रों तक पहुँचाया जाएगा। आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों, माताओं की भागीदारी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सार्वजनिक सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।

शर्मा ने बताया कि जनसेवक महाकुंभ कार्यक्रम के तहत पंच से लेकर संसद तक के सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का एक राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के सभी जनप्रतिनिधि भाग लेंगे। 25 साल की 25 कहानियाँ कार्यक्रम के तहत विगत 25 वर्षों में देश के बड़े बदलावों, निर्णयों (जैसे धारा 370 हटाना) और बड़े निर्माण कार्यों (चिनाब ब्रिज, अटल टनल, सरदार सरोवर) को कहानियों के माध्यम से समाज और युवाओं के बीच प्रस्तुत किया जाएगा। केंद्र सरकार की योजनाओं से लाभान्वित 25 लाख नागरिकों की वास्तविक बदलाव की कहानियों और वीडियो को संकलित कर डिजिटल डेटा बैंक बनाया जाएगा। इनमें से 25 हजार चयनित और 250 सबसे प्रभावशाली कहानियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। विकसित भारत संकल्प यात्रा कार्यक्रम के तहत डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को बस्तर, गिफ्ट सिटी और आई-क्रिएट जैसे परिवर्तनकारी प्रोजेक्ट्स पर ले जाया जाएगा, ताकि वे जमीनी विकास की वास्तविक तस्वीर देश के सामने रख सकें। इसी प्रकार गाँव, जिला और राज्य स्तर पर पैदल व बाइक रैली के माध्यम से सेवा ज्योति यात्राएँ निकाली जाएँगी, जो विभिन्न दिशाओं से शुरू होकर एक केंद्रीय स्थल पर मिलेंगी।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम में 25 प्रमुख सेवा गतिविधियों की सूची जारी की जाएगी, जिनमें से नागरिक स्वेच्छा से कोई एक कार्य चुनकर अपने क्षेत्र में प्रत्यक्ष फेसलिफ्टिंग और सुधार करेंगे। प्रत्येक विधानसभा में न्यूनतम दो प्रमुख स्थानों पर दृश्यमान बदलाव सुनिश्चित किया जाएगा। सेवा सेतु अभियान के तहत ब्लॉक एवं विधानसभा स्तर पर सेवा सेतु केंद्र और कैंप लगाए जाएंगे, जहाँ नागरिकों को एक ही स्थान पर सभी केंद्रीय व राज्य योजनाओं का ऑन-द-स्पॉट लाभ प्रदान किया जाएगा। इसी प्रकार युवाओं, स्टार्टअप्स व इनोवेटर्स के लिए पाँच बड़े क्षेत्रीय इनोवेशन चैलेंज आयोजित होंगे। प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री एवं अभियान के प्रदेश संयोजक यशवंत जैन, प्रदेश उपाध्यक्ष जी. वेंकट, प्रदेश मंत्री अमित साहू, अंबिकेश केशरी, भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकारिहा मौजूद रहे।

शहरों में नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों में लाएं तेजी : मुख्यमंत्री साय

शहरों में नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों में लाएं तेजी : मुख्यमंत्री साय

 00 अमृत मिशन के कार्य मिशन मोड में पूरे कर शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश

00 नालंदा परिसरों के निर्माण में तेजी लाने और शहरों में स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर00 रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में चलेंगी 240 ई-बसें
00 800 करोड़ रुपये की लागत से 8 नगरीय निकायों में स्थापित किए जा रहे सीबीजी प्लांट
रायपुर।
शहरों का विकास केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, बेहतर सड़क, प्रकाश व्यवस्था और सुगम सार्वजनिक परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप से मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को नगरीय निकायों में संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित निगरानी करते हुए उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि शासन द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों का वास्तविक लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचे, यह अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर, 31 का निर्माण प्रगतिरत
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के नगरीय निकायों में युवाओं को अध्ययन के लिए आधुनिक और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जा रहे सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन नालंदा परिसर की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माणाधीन परिसरों के कार्यों में तेजी लाते हुए इन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि योजना के अंतर्गत तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश के 38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिनमें 31 कार्य वर्तमान में प्रगतिरत हैं। मुख्यमंत्री ने इन परिसरों में प्रस्तावित सीटों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने रायपुर में निर्माणाधीन नालंदा परिसर की प्रगति की भी समीक्षा की।

सुनियोजित और नागरिक-केंद्रित हों प्रदेश के शहर
मुख्यमंत्री श्री साय ने नगरोत्थान योजना की समीक्षा करते हुए शहरों में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अधोसंरचना विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 14 नगर निगमों के लिए प्रारंभ की गई इस योजना के तहत मुख्य सड़कों का चौड़ीकरण, बाईपास, फ्लाईओवर, सर्विस लेन और अंडरपास सहित यातायात से संबंधित आवश्यक अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपनी पूर्व घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत नगरीय विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए उन्हें समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि नगरीय निकायों के सतत, संगठित एवं नागरिक-केंद्रित विकास के लिए आदर्श शहर समृद्धि योजना प्रारंभ की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसके अंतर्गत 32 नगरीय निकायों का चयन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों में पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सेवाओं के संचालन में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। नागरिकों से सीधे जुड़ी इन सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रायपुर के प्रदर्शन की मुख्यमंत्री ने की सराहना
बैठक में 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत भारत सरकार से प्राप्त अनटाइड एवं टाइड ग्रांट से किए जा रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इसके माध्यम से सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था, जल प्रदाय, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित कार्य कराए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि रायपुर नगर निगम ने वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय सुधार किया है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रायपुर ने 189 अंक प्राप्त कर देश में छठा स्थान हासिल किया है। राज्य स्तरीय वार्ड रैंकिंग-2026 में रायपुर के वार्ड क्रमांक 46 ने 30 हजार से अधिक आबादी वाली श्रेणी तथा वार्ड क्रमांक 30 ने 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि के लिए विभाग और नगर निगम की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छ शहर के साथ स्वस्थ और बेहतर शहरी जीवन के लिए हरित क्षेत्र भी जरूरी हैं। उन्होंने वार्डों में उद्यान विकसित करने तथा जिन क्षेत्रों में वृक्षों की संख्या कम है, उनका चिन्हांकन कर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने शहरी ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर देते हुए प्रत्येक नगरीय निकाय में अपशिष्ट प्रसंस्करण के लिए प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को शीघ्र मिले आवास
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 1.0 और 2.0 की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्वीकृत आवासों, निर्माण की स्थिति, आबंटन और व्यवस्थापन की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि आवासों के आवंटन एवं व्यवस्थापन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि पात्र परिवारों को शीघ्र अपने पक्के आवास का लाभ मिल सके।
चार प्रमुख शहरों में 240 ई-बसों से मजबूत होगा सार्वजनिक परिवहन
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा की तैयारियों की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में कुल 240 ई-बसों के संचालन की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आवश्यक अधोसंरचना संबंधी कार्य मार्च 2027 से पहले पूर्ण कर ई-बसों का संचालन प्रारंभ करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री श्री साय ने संबंधित सभी निर्माण एवं अधोसंरचना कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-बस सेवा से नागरिकों को आधुनिक, सुविधाजनक और बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होने के साथ पर्यावरण-अनुकूल शहरी परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

नागरिकों की शिकायतों का हो त्वरित और प्रभावी समाधान
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में नगरीय प्रशासन से संबंधित प्राप्त शिकायतों और उनके निराकरण की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को शिकायतों का संवेदनशीलता के साथ त्वरित और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने प्रॉपर्टी टैक्स के पुनरीक्षण से संबंधित विषयों और नगरीय निकायों के विद्युत देयकों की भी जानकारी ली। उन्होंने नगरीय निकायों को विद्युत देयकों का नियमित रूप से प्रतिमाह भुगतान सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजस्व एवं कर संकलन बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कर संकलन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने की व्यवस्था विकसित की जाए।
अमृत मिशन के कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी, मिशन मोड में काम करने के निर्देश
मुख्यमंत्री श्री साय ने अमृत मिशन 2.0 की समीक्षा के दौरान अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता का विषय है। अमृत मिशन के लंबित कार्यों को मिशन मोड में लेते हुए तेजी से पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण में उच्च गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्लम रिडेवलपमेंट और लैंड मोनेटाइजेशन की दिशा में भी योजनाबद्ध तरीके से आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
800 करोड़ की लागत से 8 नगरीय निकायों में सीबीजी प्लांट
बैठक में प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने भारत सरकार द्वारा परिवहन एवं औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्वच्छ एवं सतत ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित सतत योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत प्रदेश के 8 नगरीय निकायों में लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शहरी विकास से जुड़ी सभी योजनाओं में परिणाम स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखाई देने चाहिए। उन्होंने योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा, निर्माण की गुणवत्ता की सतत निगरानी तथा सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में नीतिगत बदलावों से विकास को मिली नई रफ्तार

छत्तीसगढ़ में नीतिगत बदलावों से विकास को मिली नई रफ्तार

 00 किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं से लेकर उद्योगों, शिक्षा, बस्तर और सुशासन तक हो रहा बड़े फैसलों का असर

विशेष लेख : धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए गए बड़े नीतिगत सुधारों और जनकल्याणकारी फैसलों ने राज्य के समग्र विकास को एक नई दिशा दी है। प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदमों से हर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के ढाई वर्ष से ज्यादा केवल योजनाओं और घोषणाओं को जमीनी स्तर पर उतारने के ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में व्यवस्था बदलने वाले फैसलों के रहे हैं। सरकार ने एक ओर गरीब, किसान और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा, वहीं दूसरी ओर उद्योग, शिक्षा, खनिज, डिजिटल गवर्नेंस और बस्तर के विकास में लंबे समय तक असर डालने वाले नीतिगत सुधार शुरू किए।
सरकार बनने के तुरंत बाद सबसे बड़ा फैसला प्रधानमंत्री आवास को लेकर हुआ। पहली कैबिनेट में ही 18 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों के आवास की स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) में अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत हो चुके हैं। प्रदेश में औसतन करीब 1,600 आवास प्रतिदिन पूरे किए जा रहे हैं। ढाई वर्षों में पुराने और नए स्वीकृत आवास मिलाकर 11 लाख से अधिक घर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। इसी तरह सरकार ने धान खरीदी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत बनाया। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान बेचने की सुविधा दी गई। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना को मिलाकर किसानों को लगभग 43,723 करोड़ रुपए की राशि दी गई। खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे सुधार किसानों के लिए काफी सुविधाजनक रहे।

छत्तीसगढ़ में नीतिगत बदलावों से विकास को मिली नई रफ्तार

महिला सशक्तिकरण साय सरकार की प्रमुख पहचान के रूप में उभरा है। महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों में लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं को 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे खातों में दी जा चुकी है। प्रदेश में 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान मिशन में प्रदेश के 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत और स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत दी गई है। 
बस्तर में बदलाव सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। नक्सलवाद दशकों से बस्तर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरूद्ध निर्णायक जीत हासिल हुई है। बस्तर में सुरक्षा कार्रवाई के साथ विकास और योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने की नीति अपनाई गई, जिससे बस्तर के लोगों का भरोसा सरकार पर मजबूत हुआ। नियद नेल्ला नार 2.0 और बस्तर मुन्ने अभियान के जरिए विकास योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। ओरछा और जगरगुंडा जैसे सुदूर क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। बस्तर में लगभग 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के लिए 4,824 करोड़ रुपए की'आजीविका उन्नयन योजना तैयार की गई है।

छत्तीसगढ़ में नीतिगत बदलावों से विकास को मिली नई रफ्तार


बस्तर के जंगलों में मौजूद सुरक्षा कैंप अब दूरदराज के गांव वालों के लिए सेवा और विकास के केंद्र बन रहे हैं। दूरस्थ गांवों में सार्वजनिक परिवहन के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा शुरू की गई है। बस्तर में सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, उचित मूल्य दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। सरकार का जोर अब बस्तर को संघर्ष की पहचान से निकालकर शिक्षा, पर्यटन, आजीविका और उद्योगों की नई पहचान देने पर है। 
उद्योग के क्षेत्र में राज्य में निवेश लाने के साथ उद्योगों की स्थापना की प्रक्रियाओं को आसान पर जोर दिया गया। छत्तीसगढ़ ने 450 से अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार लागू किए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 लाने वाला राज्य देश का पहला राज्य बना। जन विश्वास सुधारों के जरिए 279 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। वन-क्लिक सिंगल विंडो व्यवस्था, सरल भूमि डायवर्जन और रजिस्ट्री के बाद स्वत: नामांतरण जैसे सुधार किए गए हैं। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के बाद 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.72लाख से अधिक संभावित रोजगार के अवसर निर्मित होंगे।

राजनांदगांव में प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से औद्योगिक विकास और रोजगार को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री साय

राजनांदगांव में प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से औद्योगिक विकास और रोजगार को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री साय

 00 मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की आत्मीय भेंट

00 इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 सहित प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा

रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से उनके रायपुर स्थित निवास पर आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड के प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 तथा प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड का प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट क्षेत्र के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना साबित होगा। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ सहायक उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे राजनांदगांव सहित आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में नई संभावनाओं वाले उद्योगों के विस्तार के साथ आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य आधारित विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 इसी दिशा में छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आधुनिक विनिर्माण के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश के लिए नई संभावनाएं बनी हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश में आने वाला निवेश स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, क्षेत्रीय विकास और आर्थिक समृद्धि का माध्यम बने। राजनांदगांव की प्रस्तावित फर्टिलाइजर परियोजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रायपुर को मिला देश में छठवां स्थान

10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रायपुर को मिला देश में छठवां स्थान

रायपुर। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में देश में छठवां स्थान हासिल किया है और शहर ने 189 अंक हासिल किए हैं। खास बात यह है कि पिछले तीन साल में क्करू-10 प्रदूषण के स्तर में भी करीब 18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। 2022-23 में पीएम-10 का स्तर 78 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो 2025-26 में घटकर 64 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया।
नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार करीब 100 किलोमीटर सड़कों पर पैच रिपेयर कराया गया है, जबकि मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों से रोजाना लगभग 150 किलोमीटर सड़कों की सफाई की जा रही है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। शहर में 26 हजार से ज्यादा ई-वाहन और करीब 30 चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं। हरियाली बढ़ाने के लिए 2025-26 में करीब 42 हजार पौधे भी लगाए गए हैं। रायपुर की बेहतर रैंकिंग में वार्ड स्तर पर किए गए प्रयासों का भी योगदान रहा है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में वार्ड-46 ने 30 हजार से अधिक आबादी वाली श्रेणी में और वार्ड-30 ने 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में जगह बनाई है। वहीं 3 एकड़ में विकसित मियावाकी प्लांटेशन में करीब 23 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से लगभग 91 प्रतिशत पौधों के सुरक्षित होने का दावा नगर निगम ने किया है।

 

छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए सकारात्मक पहल

छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए सकारात्मक पहल

 00 राज्यपाल रमेन डेका से छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने की भेंट

रायपुर। राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने भेंट कर छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा इसके संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के संबंध में चर्चा की।

छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा
भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश एवं मानकीकरण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा है और लगभग डेढ़ करोड़ लोग इसका प्रयोग करते हैं।

छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल
राज्यपाल डेका ने स्वयं पहल करते हुए इस विषय पर सार्थक चर्चा की। छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए कहा कि इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश एवं अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन किया जाएगा। इसके लिए विषय के विद्वानों एवं विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी और सुझाव भी लिए जाएंगे। राज्यपाल ने इस संदर्भ में असमिया और बोडो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया।
छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा
भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना एवं पत्रकारिता सहित विभिन्न विधाओं में प्रचुर सामग्री उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ी का व्याकरण वर्ष 1890 में तथा पहला शब्दकोश वर्ष 1939 में तैयार हुआ। वर्ष 1924 में पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास हीरू के कहिनी प्रकाशित हुआ। पंडित सुंदरलाल शर्मा द्वारा जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका दुलरवा का प्रकाशन भी किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी का अध्ययन कराया जा रहा है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है। इस अवसर पर भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार श्री शीलकांत पाठक एवं श्रीमती अर्चना पाठक उपस्थित थीं।

CM साय आज लेंगे अहम समीक्षा बैठक, नगरीय प्रशासन विभाग के कामकाज की करेंगे समीक्षा

CM साय आज लेंगे अहम समीक्षा बैठक, नगरीय प्रशासन विभाग के कामकाज की करेंगे समीक्षा

 रायपुर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर मंत्रालय पहुंचेंगे। जहाँ दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा बैठक में शामिल होकर विभागीय कार्यों की समीक्षा करेंगे वही दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मुख्यमंत्री कार्यालयीन कार्य करेंगे। वहीं शाम 5 बजकर 50 मिनट पर मुख्यमंत्री निवास से लोकभवन के लिए रवाना होंगे और 5 बजकर 55 मिनट पर लोकभवन पहुंचेंगे। इसके बाद शाम 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक छत्तीसगढ़ मंडपम्, लोकभवन में आयोजित “सांस्कृतिक संध्या” कार्यक्रम में शामिल होंगे।

CG : UCC को लेकर दुर्ग संभाग में दो दिवसीय जन-संवाद, हर वर्ग से लिए जाएंगे सुझाव

CG : UCC को लेकर दुर्ग संभाग में दो दिवसीय जन-संवाद, हर वर्ग से लिए जाएंगे सुझाव

 रायपुर – समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर दुर्ग संभाग में आज से दो दिवसीय “जन-संवाद” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके जरिए UCC कमिटी सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय स्थापित करने की दिशा में काम करेगी। जन-संवाद के दौरान सामान्य लोगों के साथ बैठक कर UCC को लेकर उनके विचार और सुझाव लिए जाएंगे। समिति का उद्देश्य है कि समाज के हर वर्ग की बात सुनी जाए और उनके सुझावों को प्रस्तावित ड्राफ्ट में उचित स्थान मिल सके। इस जन-संवाद के जरिए समिति अलग-अलग वर्गों के लोगों से सीधे संवाद करेगी और UCC को लेकर उनकी राय,अपेक्षाओं और सुझावों को समझने का प्रयास करेगी। कमिटी का मानना है कि व्यापक जन-सहभागिता के जरिए तैयार होने वाला ड्राफ्ट अधिक समावेशी और सभी वर्गों की भावनाओं को ध्यान में रखने वाला हो सकेगा।

तीज के रंग में रंगा रायपुर प्रेस क्लब, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने रैंप वॉक कर बढ़ाया महिला पत्रकारों का उत्साह…

तीज के रंग में रंगा रायपुर प्रेस क्लब, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने रैंप वॉक कर बढ़ाया महिला पत्रकारों का उत्साह…

 रायपुर: रायपुर प्रेस क्लब में रविवार को आयोजित महिला पत्रकारों का तीज महोत्सव पारंपरिक उल्लास, उमंग और आत्मीयता के रंगों से सराबोर रहा। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने शामिल होकर महिला पत्रकारों का उत्साह बढ़ाया और तीज की खुशियों में सहभागी बनीं। उन्होंने महिला पत्रकारों के साथ विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेने के साथ पारंपरिक छत्तीसगढ़ी अंदाज में रैंप वॉक भी किया। उनका सहज, आत्मीय और सादगीपूर्ण अंदाज आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में रहा।

तीज महोत्सव में राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा और विधायक भावना बोहरा भी विशेष रूप से शामिल हुईं। श्रीमती भावना बोहरा ने महिला पत्रकारों के साथ रैंप वॉक कर कार्यक्रम की रौनक बढ़ाई, वहीं लक्ष्मी वर्मा ने भी रैंप पर अपनी प्रस्तुति देकर महिला पत्रकारों के साथ तीज की खुशियां साझा कीं। जनप्रतिनिधियों की इस आत्मीय सहभागिता से महिला पत्रकारों का उत्साह और बढ़ा।

पारंपरिक परिधानों में दिखा सादगी और आत्मविश्वास

महोत्सव का सबसे खास आकर्षण रैंप वॉक रहा। महिला पत्रकारों ने पारंपरिक परिधानों में सादगी, सौंदर्य और आत्मविश्वास के साथ रैंप पर अपनी प्रस्तुति दी। वहीं श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का सिर पर पल्लू लेकर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी अंदाज में रैंप पर उतरना विशेष रूप से सराहा गया। इस दौरान पूरे परिसर में उत्साह और तालियों की गूंज सुनाई दी।

खेल-प्रतियोगिताओं और मनोरंजन ने बढ़ाई महोत्सव की रौनक

तीज महोत्सव के दौरान महिला पत्रकारों के लिए विभिन्न मनोरंजक खेल और प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। महिला पत्रकारों ने उत्साहपूर्वक इनमें हिस्सा लिया और हंसी-मजाक तथा मस्ती के बीच आयोजन का आनंद लिया। प्रतियोगिताओं के दौरान प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया गया और उनकी प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया गया।

महिला पत्रकारों के योगदान की श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने की सराहना

महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि तीज छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और महिलाओं के उल्लास से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। रायपुर प्रेस क्लब द्वारा महिला पत्रकारों के लिए तीज महोत्सव का आयोजन सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि महिलाएं पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हुए समाज की आवाज को मजबूती से सामने रखने का कार्य कर रही हैं। ऐसे आयोजन उन्हें व्यस्त कार्यदायित्वों के बीच आपसी संवाद, आत्मीयता और उत्सव का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी महिला पत्रकारों को तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं।

राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने तीज को महिलाओं की खुशियों, आत्मीयता और सांस्कृतिक परंपराओं का पर्व बताते हुए महिला पत्रकारों को शुभकामनाएं दीं। विधायक  भावना बोहरा ने कहा कि महिला पत्रकार समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे आयोजन महिलाओं को साथ मिलकर खुशियां साझा करने और आपसी सहभागिता को मजबूत करने का अवसर देते हैं।

महिला पत्रकारों को दिए गए रिटर्न गिफ्ट

कार्यक्रम के समापन पर सभी महिला पत्रकारों को रिटर्न गिफ्ट प्रदान किए गए। उपहार पाकर महिला पत्रकारों में खासा उत्साह देखने को मिला। तीज के पारंपरिक रंग, रैंप वॉक की आकर्षक प्रस्तुतियां, खेल-प्रतियोगिताएं और आत्मीय मेलजोल ने पूरे प्रेस क्लब परिसर को उत्सव के माहौल में बदल दिया।

कार्यक्रम में रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष  मोहन तिवारी, महासचिव  गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष  दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष  दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं  भूपेश जांगड़े सहित आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाली अमृता शर्मा, प्रियंका कौशल, मीनल शर्मा, आकांक्षा दुबे, विनीता मंडल,  सोनल भारद्वाज, सुजाता साहा, अंबिका मिश्रा सहित बड़ी संख्या में महिला पत्रकार एवं प्रेस क्लब सदस्य उपस्थित रहे।

निजी विश्वविद्यालयों की अद्यतन जानकारी के लिए नया वेब पोर्टल शुरू, राज्यपाल रमेन डेका ने किया शुभारंभ….

निजी विश्वविद्यालयों की अद्यतन जानकारी के लिए नया वेब पोर्टल शुरू, राज्यपाल रमेन डेका ने किया शुभारंभ….

 रायपुर: राज्यपाल  रमेन डेका ने आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा तैयार किए गए नए वेब पोर्टल

cgpurc.cgstate.gov.in का क्लिक कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष श्री  वी. के. गोयल सहित आयोग के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

नए पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित महत्वपूर्ण एवं अद्यतन जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। इसमें अध्यादेश के आधार पर संचालित पाठ्यक्रमों का विवरण, अकादमिक कैलेंडर, प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी, विद्यार्थियों की अंकसूची ,डिग्री तथा गत वर्षों के परीक्षा परिणाम अपलोड किए जाएंगे।

पोर्टल पर विश्वविद्यालयों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क, कार्यरत अधिकारियों, विभिन्न समितियों एवं उनके सदस्यों तथा पीएचडी शोध-निर्देशकों की विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा एनईपी-2020, नैक प्रत्यायन, अन्य विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू, स्किल डेवलपमेंट, इनोवेशन, स्टार्टअप, जॉब ओरिएंटेशन प्रोग्राम, कैंपस प्लेसमेंट और ई-लाइब्रेरी से संबंधित जानकारी भी पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी। पोर्टल में शैक्षणिक स्वीकृतियों, भरे एवं रिक्त पदों से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे निजी विश्वविद्यालयों की गतिविधियों में पारदर्शिता, सूचना की सुगमता और प्रभावी निगरानी को बढ़ावा मिलेगा।

बलौदाबाजार विधानसभा के 43 गांव होंगे रोशन, मंत्री टंक राम वर्मा की पहल पर 2.06 करोड़ रुपये की हाई मास्ट लाइट योजना मंजूर

बलौदाबाजार विधानसभा के 43 गांव होंगे रोशन, मंत्री टंक राम वर्मा की पहल पर 2.06 करोड़ रुपये की हाई मास्ट लाइट योजना मंजूर

 तिल्दा नेवरा। राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की अनुशंसा पर बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में हाई मास्ट लाइट (High Mast Light) स्थापना हेतु 2 करोड़ 6 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

ग्रामीण अंचल में बुनियादी सुविधाओं और रात्रि में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों की सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों को रात्रि के समय बेहतर प्रकाश व्यवस्था से आच्छादित करने की दिशा में यह एक बड़ी पहल है।

मंत्री टंकराम वर्मा ने इस संबंध में कहा कि बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक गांव में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। हाई मास्ट लाइट लगने से ग्रामीण अंचलों में सुरक्षा और सुविधा का नया वातावरण निर्मित होगा। मुख्य चौराहों और प्रमुख स्थलों पर हाई मास्ट लाइट लगने से रात्रि के समय आवागमन सुगम होगा, असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और गांव की सुंदरता में भी वृद्धि होगी।

’बलौदाबाजार जनपद के 13 गांवों में जगमगाएंगी हाई मास्ट लाइटें’

’बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के तिल्दा और सिमगा विकासखंड की 15 -15 ग्राम पंचायतों को 1.50 करोड़ रुपये स्वीकृत’ रायपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के लिए कुल 1 करोड़ 50 लाख रुपये की विकास राशि स्वीकृत की गई है। इस बजट से रायपुर जिले के तिल्दा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा विकासखंड के अंतर्गत आने वाली 15 -15 ग्राम पंचायतों के लिए स्वीकृति दी गई है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में 5-5 नग हाई मास्ट लाइट की स्थापना के लिए 5 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

तिल्दा विकासखंड के लाभान्वित ग्राम पंचायतों में

सरारीडीह, खपरीकला, मोहगांव, निनवा, खैरखुट, चांपा, जोता, भुरसदा, सड्डू, सिनोधा, कोटा, भिलौनी, छपोरा, टोहडा, सतभाँवा शामिल है। इसी तरह सिमगा विकासखंड के लाभान्वित ग्राम पंचायतो में झीपन, भोथाडीह, हिरमी, शिकारी केशली, भालेसुर, रावन, सुहेला, जरौद, नवापारा, जांगड़ा, सकलोर, मोहभट्टा, खिलोरा , बरडीह, कुकराचुंदा शामिल है।

CG NEWS : अब जमीन के सीमांकन के लिए तहसील जाने की जरूरत नहीं,नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश

CG NEWS : अब जमीन के सीमांकन के लिए तहसील जाने की जरूरत नहीं,नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश

 रायपुर- राज्य सरकार के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए ज़मीन के सीमांकन (Demarcation) की प्रक्रिया को बेहद आसान, पारदर्शी और डिजिटल बना दिया है। अब ज़मीन मालिकों को नाप-जोख या सीमांकन के लिए तहसील कार्यालयों और सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

नए डिजिटल सिस्टम में सीमांकन आवेदन के लिए तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी बल्कि सिर्फ लोक सेवा केंद्र (CSC/चॉइस सेंटर) और राजस्व विभाग के ऑनलाइन सिटिज़न पोर्टल या सेवासेतु के माध्यम से ही आवेदन जमा किए जा सकेंगेद्य जिससे सीमांकन के ऑफलाइन या मैन्युअल आवेदन को म-बवनतज अंतर्गत तहसील स्तर से दर्ज करने की व्यवस्था खत्म की जा रही है। आवेदन सीधे संबंधित तहसीलदार की आईडी में ट्रांसफर हो जाएंगे। एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा भी अपने रिपोर्ट ऑनलाइन जमा करने का प्रावधान भी इसमें शामिल किया जा रहा है, जिससे आवेदक को आवेदन के संबंध मे सभी स्तर के जानकारी उपलब्ध होती रहेगी।

राजस्व विभाग के भू-अभिलेख शाखा से जारी पत्र अनुसार राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक को ई-कोर्ट (E-Court) सॉफ्टवेयर में ज़रूरी तकनीकी सुधार कर नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए गये हैं।

*सिर्फ आपत्ति होने पर ही जाना होगा तहसील*

नई व्यवस्था के तहत पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और डिजिटल मैपिंग से पूरी होगी। आवेदक को तहसील कार्यालय केवल तभी जाना पड़ेगा, जब सीमांकन के दौरान किसी पड़ोसी या अन्य पक्ष द्वारा कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई जाए। अगर मामला निर्विवाद है, तो आवेदक को एक बार भी दफ्तर जाने की ज़रूरत नहीं होगी।

मैन्युअल व्यवस्था खत्म होने से दफ्तरों की अनचाही भाग-दौड़ और बिचौलियों का दखल पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। तय समय-सीमा के कारण मामलों के पेंडिंग रहने की समस्या दूर होगी और आवेदकों को निश्चित समय में सीमांकन रिपोर्ट मिल जाएगी।

*ई-गवर्नेंस की ओर एक और बड़ा कदम*

राजस्व विभाग नागरिकों की सुविधा के लिए पहले ही कई सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन कर चुका है। जिसमें डिजिटल हस्ताक्षरित B-1 एवं P-II नागरिक घर बैठे खसरा और खतौनी की QR कोड वाली प्रमाणित कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं। ज़मीन की खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन और स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध है। ऑनलाइन नजरी नक्शा, परिवर्तित भूमि (Diversion) और नजूल ज़मीन के टैक्स रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल किया जा चुका है। राजस्व अदालतों में चल रहे मामलों की पेशी, आदेश और सुनवाई का स्टेटस ऑनलाइन देखा जा सकता है।

राजस्व विभाग की यह नई पहल राज्य में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने और आम लोगों की समस्याओं को पारदर्शी तरीके से हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में तेजी लाएं, प्रत्येक मापदंड पर दिखे ठोस सुधार- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में तेजी लाएं, प्रत्येक मापदंड पर दिखे ठोस सुधार- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर: उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने नवीन आपराधिक कानूनों के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों तथा अधिकारियों को समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को अधिक त्वरित, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है तथा इसके लिए कानून में उल्लिखित प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण की जानी चाहिए।

नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में गृह मंत्री  शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (एनसीएलआई) डैशबोर्ड की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की बेहतर स्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त की। डैशबोर्ड के प्रत्येक मापदंड की बिंदुवार समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की रैंकिंग में और सुधार के लिए हर स्तर पर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप जुलाई माह से राज्य की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उप मुख्यमंत्री ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए सभी मापदंडों में सुधार की गति बनाए रखने के निर्देश दिए।

एफआईआर से न्यायालय तक की प्रक्रिया हो त्वरित

कार्यात्मक दक्षता के मापदंड पर सुधार के संबंध में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि एफआईआर और चार्जशीट सीधे न्यायालय तक पहुंचाने की व्यवस्था शीघ्र पूर्ण की जाए, ताकि विवेचना से लेकर विचारण तक की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो। इसी मापदंड के अंतर्गत उन्होंने नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (नाफिस) तथा ई-साक्ष्य के उपयोग को बढ़ाने के लिए सभी थानों को तकनीकी एवं कार्यात्मक दृष्टि से शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।  शर्मा ने यह भी कहा कि ई-समन जारी होने के बाद उसकी तामील शीघ्र सुनिश्चित की जाए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर चार्जशीट ऑनलाइन माध्यम से न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जाए।

प्रशासकीय सुधार के अंतर्गत लंबित अधिसूचनाएं शीघ्र जारी हों

गृह मंत्री  शर्मा ने प्रशासकीय सुधार के अंतर्गत आवश्यक अधिसूचनाएं और प्रक्रियात्मक व्यवस्थाएं शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी व्यवस्थाओं के साथ-साथ मैदानी स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है, तभी नए कानूनों का वास्तविक लाभ नागरिकों तक पहुंच सकेगा।

राज्य स्तरीय कठिनाइयों के समाधान पर विचार-विमर्श

बैठक में नवीन आपराधिक कानूनों, सीसीटीएनएस तथा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के क्रियान्वयन में राज्य स्तर पर आ रही कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरडी), नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के अधिकारियों के साथ इनके तकनीकी और प्रक्रियात्मक समाधान पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन बिंदुओं पर केंद्रीय स्तर से सहयोग अथवा तकनीकी समाधान अपेक्षित है, उन पर समन्वय स्थापित कर शीघ्र निराकरण कराया जाए, जिससे छत्तीसगढ़ नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में और बेहतर प्रदर्शन कर सके।

बैठक में महानिदेशक एनसीआरबी श्री अमित गर्ग, महानिदेशक बीपीआरडी श्री आलोक मित्तल, गृह विभाग की प्रमुख सचिव गृह सुश्री निहारिका बारिक, गृह सचिव सुश्री नेहा चंपावत एवं श्री हिमशिखर गुप्ता, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, महानिदेशक जेल श्री हिमांशु गुप्ता, संचालक अभियोजन श्री प्रदीप गुप्ता, अपर पुलिस महानिदेशक श्री विवेकानंद सिन्हा, सीएपीटी भोपाल श्री अनिल किशोर यादव उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागीय पुलिस महानिरीक्षक, जिले के पुलिस अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग के मेडिको-लीगल नोडल अधिकारी और अभियोजन अधिकारी, तथा दिल्ली से एनसीआरबी एवं एनआईसी के अन्य अधिकारी बैठक में सम्मिलित हुए।

क्या है एनसीएलआई डैशबोर्ड

नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (एनसीएलआई) डैशबोर्ड भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से तीनों नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के देशव्यापी क्रियान्वयन की प्रगति की निगरानी की जाती है।

आत्मनिर्भरता की नई मिसाल- खेतों से मशरूम उत्पादन तक मिथिला दीदी ने लिखी सफलता की नई कहानी

आत्मनिर्भरता की नई मिसाल- खेतों से मशरूम उत्पादन तक मिथिला दीदी ने लिखी सफलता की नई कहानी

 रायपुर :पारंपरिक कृषि पर निर्भरता से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ने वाली ग्रामीण महिलाओं की सूची में अब सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी का नाम भी जुड़ गया है। अपनी कड़ी मेहनत, सूझबूझ और शासकीय योजनाओं के सही क्रियान्वयन के बदौलत मिथिला दीदी ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है।

सीमित आय से आर्थिक मजबूती की ओर’
        महिलाओं में आत्मनिर्भरता की जो लहर उठ रही हैए उसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी हैए जिनके लिए मशरूम उत्पादन की खेती वरदान साबित हुई है। शुरुआत में परिवार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे घर का खर्च चलाना कठिन हो रहा था। इस चुनौती से निपटने के लिए मिथिला दीदी ने अन्नपूर्णा स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली के माध्यम से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ।

’1 लाख 50 हजार रूपए की शुरुआती पूंजी से सफर का आगाज’
        मशरूम उत्पादन का व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्होंने सखी क्लस्टर संगठन से ऋण 1 लाख 20 हजार रूपए, अपनी व्यक्तिगत बचत से 30 हजार रूपए इस प्रकार कुल शुरुआती लागतरू 1 लाख 20 हजार रूपए से मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू की। शुरुआती दौर में यह कार्य नया था, लेकिन सीखने की ललक और निरंतर प्रयासों से जल्द ही मशरूम उत्पादन एक सफल आजीविका गतिविधि में बदल गया। शुरुआती दौर में तापमान नियंत्रण, मार्केटिंग और तकनीकी जानकारी की कमी जैसी कई समस्याएं सामने आईं। लेकिन मिथिला दीदी ने प्रशिक्षण लेकर और आपसी सहयोग से इन सभी चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।

’हर माह 50 हजार रूपए की आय और प्रेरणादायक पहल’
        बेहतर गुणवत्ता और उत्पादन के चलते स्थानीय बाजारों में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ी। वर्तमान में मिथिला दीदी अपने घर से ही मशरूम उत्पादन कर स्थानीय बाजार में बेचती हैं और प्रतिमाह लगभग 50 हजार रूपए की आमदनी अर्जित कर रही हैं। उनकी यह सफलता आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है।

’सुशासन नीति और बेहतर मॉनिटरिंग का परिणाम’
         मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन की सतत् मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर मार्गदर्शन से सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँच रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के नए अवसर गढ़ रही हैं। आज आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतारते हुए यह संदेश दे रही है कि छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

Police Transfer: पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 8 अधिकारियों के पदस्थापना आदेश जारी

Police Transfer: पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 8 अधिकारियों के पदस्थापना आदेश जारी

 सूरजपुर।  जिले में पुलिस विभाग में प्रशासनिक दृष्टिकोण से बड़ा फेरबदल किया गया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार 8 पुलिस अधिकारियों की अस्थायी रूप से नई पदस्थापना की गई है। अधिकारियों को वर्तमान पदस्थापना से हटाकर अलग-अलग थानों और चौकी में जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जारी आदेश के मुताबिक, प्रतापपुर, प्रेमनगर, विश्रामपुर, ओड़गी और सूरजपुर थाना सहित बरबदई चौकी में अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई है। कुछ थाना प्रभारियों को दूसरे थानों की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि चौकी प्रभारियों में भी बदलाव किया गया है।

आदेश में अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों को कार्यमुक्त करने और आमद की सूचना पुलिस अधीक्षक कार्यालय को देने के निर्देश जारी किए गए हैं।

CG : वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 18 अधिकारियों को मिली पदोन्नति, देखें पूरी सूची

CG : वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 18 अधिकारियों को मिली पदोन्नति, देखें पूरी सूची

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। राज्य शासन ने वन विभाग में कार्यरत 18 अधिकारियों को पदोन्नति देते हुए उन्हें सहायक वन संरक्षक के पद पर पदोन्नत किया है। इस संबंध में विभाग की ओर से 7 सितंबर 2026 को आदेश जारी किया गया है।

जारी आदेश के अनुसार पदोन्नत अधिकारियों को वेतन मैट्रिक्स लेवल-12 में पदोन्नति दी गई है। इन अधिकारियों की वर्तमान पदस्थापना अलग-अलग वन मंडलों और वन क्षेत्रों में है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों को उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से सहायक वन संरक्षक के पद पर पदोन्नत किया जाता है। पदोन्नति के बाद अधिकारियों की नई पदस्थापना का आदेश अलग से जारी किया जाएगा।

इस फैसले के बाद वन विभाग के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव देखने को मिल सकता है। नई पदस्थापना के आदेश जारी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पदोन्नत अधिकारियों को किन स्थानों पर नई जिम्मेदारी दी जाती है।

यह आदेश नवा रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन से जारी किया गया है। आदेश छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार जारी किया गया है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष सचिव की ओर से इसे डिजिटल रूप से प्रमाणित किया गया है

पदोन्नति के बाद अब संबंधित अधिकारियों की नई पदस्थापना को लेकर अलग आदेश जारी किया जाएगा। इसके बाद अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। विभाग के इस फैसले को वन प्रशासन में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

पदोन्नत अधिकारियों की पूरी सूची नीचे देखें

मोदी सरकार ने ओबीसी समाज को दिया सम्मान और अधिकार, भाजपा के नेतृत्व में सशक्त हो रहा पिछड़ा वर्ग : केन्द्रीय राज्यमंत्री साहू

मोदी सरकार ने ओबीसी समाज को दिया सम्मान और अधिकार, भाजपा के नेतृत्व में सशक्त हो रहा पिछड़ा वर्ग : केन्द्रीय राज्यमंत्री साहू

 रायपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रबुद्धजन सम्मेलन एवं भाजपा ओबीसी मोर्चा की संभागीय बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री  तोखन साहू शामिल हुए। उन्होंने ओबीसी समाज की एकजुटता, सामाजिक सशक्तीकरण और संगठन की मजबूती पर विस्तार से अपने विचार रखे। तोखन साहू ने ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक साहू एवं उनकी पूरी टीम को प्रदेश के कोने-कोने में जाकर ओबीसी समाज को जोडऩे, जागरूक करने और संगठन को मजबूत बनाने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग की लगभग 67 जातियाँ आती हैं। हमारी जातियाँ भले अलग-अलग हों, लेकिन हमारी परंपराएं, रहन-सहन और सांस्कृतिक मूल्य एक हैं। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें किसी छोटे दायरे में नहीं बंधना है, बल्कि अपनी एकजुटता को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बनाना है। साहू ने कहा कि यह पूरे देश के लिए गर्व का विषय है कि भारत की आधी से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य ओबीसी समुदाय और तेली समाज से निकले बेटे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को मिला है। यह पूरे ओबीसी समाज के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में ओबीसी समाज से दो प्रधानमंत्री बने हैं—एच. डी. देवगौड़ा जी (1996-1997), वोक्कालिगा समुदाय से औरनरेंद्र मोदी जी (2014 से निरंतर), घांची/तेली समुदाय से। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपनी मेहनत और संघर्ष से देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचकर यह साबित किया है कि नए भारत में अवसर किसी परिवार की जागीर नहीं, बल्कि मेहनत और प्रतिभा के आधार पर हासिल किए जा सकते हैं।
ओबीसी अधिकारों के संघर्ष का इतिहास
 साहू ने कहा कि 1953 में काका कालेलकर आयोग का गठन हुआ और 1955 में उसकी रिपोर्ट आई, लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
1979 में मोरारजी देसाई जी की सरकार में मंडल आयोग का गठन हुआ। आयोग ने 1980 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की।

1990 में वी.पी. सिंह जी की सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर ओबीसी आरक्षण लागू किया, जिसके बाद 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने इंद्रा साहनी मामले में इसे संवैधानिक मान्यता दी।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद लंबे समय तक पिछड़ा वर्ग आयोग को वह अधिकार नहीं मिले, जो उसे मिलने चाहिए थे। आजादी के बाद लगभग 75 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में करीब छह दशक तक कांग्रेस सत्ता में रही, लेकिन पिछड़े वर्गों के सामाजिक और राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
मोदी सरकार में ओबीसी सशक्तीकरण को नई मजबूती
श्री तोखन साहू ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद सामाजिक न्याय को केवल बातों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर उसे धरातल पर उतारा गया। उन्होंने कहा कि 2018 में 102वें संविधान संशोधन के माध्यम से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया और उसे सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां प्रदान की गईं। 2019 में अलग से मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय बनाया गया, जिससे मछुआरा समाज और पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को लाभ मिला। उन्होंने बताया कि 2017 में क्रीमी लेयर की आय सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये सालाना की गई, ताकि अधिक से अधिक पात्र परिवारों को आरक्षण का लाभ मिल सके। ओबीसी समुदाय की छोटी-बड़ी सभी जातियों तक आरक्षण का लाभ समान रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से न्यायमूर्ति रोहिणी आयोग का गठन किया गया।
उन्होंने कहा कि 2021 में नीट के ऑल इंडिया कोटा की एमबीबीएस और पीजी सीटों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। इससे हर वर्ष लगभग 4,000 ओबीसी युवाओं को डॉक्टर बनने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 105वें संविधान संशोधन के माध्यम से राज्य सरकारों को अपनी ओबीसी सूची तैयार करने का अधिकार वापस दिया गया। श्री साहू ने कहा कि यही वास्तविक सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास है। भाजपा के नेतृत्व में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने ओबीसी समाज को सम्मान, अधिकार और अवसर देने का कार्य किया है। उन्होंने ओबीसी समाज के सभी लोगों से एकजुट होकर संगठन को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री अजय जामलाल, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, प्रदेश ओबीसी मोर्चा प्रभारी लखन साहू, प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी मोर्चा अशोक साहू सहित संगठन के पदाधिकारी, ओबीसी मोर्चा के कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सीजीआईटी रायपुर में छह दिवसीय एआईसीटीई–अटल फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारंभ

सीजीआईटी रायपुर में छह दिवसीय एआईसीटीई–अटल फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारंभ

 एआई और सौर ऊर्जा से बनेगा स्मार्ट ऊर्जा भविष्य

रायपुर। ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों और नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं सौर ऊर्जा के एकीकरण पर केंद्रित छह दिवसीय एआईसीटीई–अटल फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारंभ 7 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सीजीआईटी), रायपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा किया गया। कार्यक्रम का विषय “Artificial Intelligence Integrated Solar Energy Systems for Smart and Sustainable Power Generation” रखा गया है।
 
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं को सौर ऊर्जा प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन तथा आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग से परिचित कराना है। छह दिनों तक चलने वाले इस फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित तकनीकी एवं शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञ प्रतिभागियों के साथ अपने तकनीकी अनुभव, शोध कार्य तथा औद्योगिक क्षेत्र में अपनाई जा रही नवीन तकनीकों को साझा करेंगे।
 
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. अभिताब दुबे, अतिरिक्त संचालक, तकनीकी शिक्षा संचालनालय, छत्तीसगढ़ तथा संरक्षक डॉ. प्रो. एम. आर. खान, प्राचार्य, सीजीआईटी रायपुर की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय की जिम्मेदारी डॉ. अजय त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा निभाई जा रही है।
 
कार्यक्रम के प्रथम दिन सौर ऊर्जा विशेषज्ञ इंजी. शैलेन्द्र कुमार शुक्ल, जो विद्युत मंडल के पूर्व चेयरमैन, क्रेडा के पूर्व अध्यक्ष तथा वर्तमान में ईआईकॉन सोलर कंपनी के मालिक हैं, ने सौर पीवी प्रणालियों की वर्तमान औद्योगिक स्थिति, तकनीकी विकास एवं भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों, फोटोवोल्टिक तकनीक की बढ़ती उपयोगिता तथा भविष्य में स्मार्ट सौर ऊर्जा प्रणालियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऊर्जा की बढ़ती मांग, पर्यावरण संरक्षण तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए सौर ऊर्जा आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
 
इसके पश्चात प्रतिभागियों के लिए सौर ऊर्जा से संबंधित शोध-पत्र चर्चा सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न शोध विषयों पर प्रतिभागियों ने विचार-विमर्श किया। इस सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को नवीनतम शोध प्रवृत्तियों, शोध पद्धतियों तथा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में संभावित अनुसंधान विषयों की जानकारी प्राप्त हुई।
 
द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. आर. एन. पटेल, प्रोफेसर, एनआईटी रायपुर ने घरेलू सौर पीवी संयंत्रों के बीच स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन एवं विद्युत साझाकरण विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन प्रणालियों के माध्यम से घरेलू स्तर पर उत्पादित सौर ऊर्जा का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने ऊर्जा उत्पादन, खपत, भंडारण एवं विद्युत साझाकरण को स्मार्ट तकनीकों से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
 
कार्यक्रम के प्रथम दिन के अंत में प्रतिभागियों के लिए प्रायोगिक एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को सौर ऊर्जा प्रणालियों के व्यावहारिक पहलुओं तथा स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन से संबंधित तकनीकों को समझने का अवसर मिला।
 
आयोजकों के अनुसार, वर्तमान समय में सौर ऊर्जा प्रणालियों में केवल विद्युत उत्पादन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऊर्जा उत्पादन एवं मांग का पूर्वानुमान, सिस्टम की निगरानी, फॉल्ट डिटेक्शन, अधिकतम विद्युत उत्पादन, ऊर्जा भंडारण तथा ग्रिड के साथ प्रभावी समन्वय भी आवश्यक हो गया है। इन सभी क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एआई आधारित प्रणालियां मौसम, सौर विकिरण और ऊर्जा मांग जैसे विभिन्न आंकड़ों का विश्लेषण कर सौर विद्युत उत्पादन का पूर्वानुमान लगाने तथा ऊर्जा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकती हैं।
 
छह दिवसीय इस कार्यक्रम में सौर फोटोवोल्टिक प्रणालियां, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन, ऊर्जा भंडारण, सौर ऊर्जा पूर्वानुमान, स्मार्ट ग्रिड तथा सौर ऊर्जा प्रणालियों के व्यावहारिक एवं औद्योगिक अनुप्रयोगों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रतिभागियों को प्रायोगिक प्रशिक्षण, शोध-पत्र चर्चा एवं विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर भी मिलेगा।
 
कार्यक्रम के आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार के फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम शिक्षकों को नवीनतम तकनीकी ज्ञान से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अपने संस्थानों में एआई आधारित स्मार्ट एवं टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों पर शिक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सक्षम बनाएंगे। इससे देश में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी।
बिहान से बदली राह : 35 महिला किसानों ने 600 क्विंटल सब्जी उगाकर लिखी सफलता की नई कहानी

बिहान से बदली राह : 35 महिला किसानों ने 600 क्विंटल सब्जी उगाकर लिखी सफलता की नई कहानी

रायपुर। पारंपरिक खेती से हटकर हरी सब्जियों की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने वाले कई किसानों ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से सफलता की नई कहानियां लिखी हैं, जिनमें  ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती जैसी प्रेरणादायक मिसालें शामिल हैं, जो कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करती थी और आज लाखों की कमाई कर रही हैं।

बिहान से बदली राह : 35 महिला किसानों ने 600 क्विंटल सब्जी उगाकर लिखी सफलता की नई कहानी

छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। छोटे से भूखंड पर भी टमाटर, बैंगन, लौकी या करेला, खीरा जैसी सब्जियां उगाकर किसान प्रति बीघा या एकड़ कई गुना अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। उजाला उत्पादक समूह से जुड़ी 35 महिला किसानों ने एकजुट होकर न केवल लागत घटाई, बल्कि 600 क्विंटल सब्जियों का रिकॉर्ड उत्पादन कर करीब 6 लाख रूपए की आय अर्जित की है।

बिहान से बदली राह : 35 महिला किसानों ने 600 क्विंटल सब्जी उगाकर लिखी सफलता की नई कहानी

2 लाख रूपए की शुरुआती पूंजी से मिली नई उड़ान

वर्ष 2025 में गठित इस समूह का उद्देश्य सामूहिक प्रयास के ज़रिए उत्पादन बढ़ाना और बेहतर बाज़ार तलाशना था। आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए समूह को क्लस्टर से स्टार्टअप राशि 50 हजार रूपए, सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली से ऋण 1 लाख 50 हजार रूपए, कुल शुरुआती पूंजी 2 लाख रूपए। इस पूंजी की मदद से महिलाओं ने अपने खेतों में वैज्ञानिक तकनीक अपनाते हुए लौकी, करेला और खीरा की खेती शुरू की।

600 क्विंटल सब्जियों की बंपर पैदावार

महिलाओं की कड़ी मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से खेतों में शानदार उत्पादन हुआ। सब्जी की फसल से बचत बढने लगी तो महिलाओं का हौसला बढ़़ा। इसके साथ ही फसल का दायरा बढ़ाने लगी, जिससे पैदावार में बढ़ोत्तरी होने लगी। महिलाओं ने सामूहिक खेती कर लौकी 250 क्विंटल, करेला 250 क्विंटल, खीरा 100 क्विंटल का उत्पादन की। कुल सब्जी उत्पादन 600 क्विंटल होने लगा।  

बिहान से बदली राह : 35 महिला किसानों ने 600 क्विंटल सब्जी उगाकर लिखी सफलता की नई कहानी

बिचौलियों से मुक्ति, सीधे थोक बाजार से जुड़ाव

सफलता की सबसे बड़ी कड़ी महिलाओं की विपणन (मार्केटिंग) रणनीति रही। बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय समूह की दीदियों ने अपनी उपज को सीधे थोक बाजार तक पहुंचाया। इससे फसल का उचित दाम मिला और कुल आय 6 लाख रूपए तक पहुंच गई।

सुशासन और जमीनी मॉनिटरिंग का असर

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बिहान योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर निरंतर कार्य कर रही है। जिला प्रशासन द्वारा बेहतर क्रियान्वयन, मैदानी मार्गदर्शन और सतत् मॉनिटरिंग से योजनाओं का सीधा लाभ हितग्राहियों तक पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं।

पत्रकारिता में सत्य, तथ्य और जनहित सर्वाेच्च प्राथमिकता हो - राज्यपाल डेका

पत्रकारिता में सत्य, तथ्य और जनहित सर्वाेच्च प्राथमिकता हो - राज्यपाल डेका

 राज्यपाल ने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में कन्या छात्रावास, मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का किया शुभारंभ

रायपुर, 07 सितम्बर 2026/ राज्यपाल  रमेन डेका ने आज कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का उद्घाटन भी किया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज का दिन विश्वविद्यालय के लिए विशेष महत्व रखता है। सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा के प्रसार और नारी सशक्तिकरण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनके नाम पर कन्या छात्रावास का नामकरण छात्राओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह छात्रावास दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी उच्च शिक्षा और प्रतिभा विकास में सहायक होगा।

राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन से मीडिया और पत्रकारिता के स्वरूप में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। ऐसे समय में विश्वविद्यालय में स्थापित मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र विद्यार्थियों को नई तकनीकों को समझने तथा उनके जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यपाल  डेका ने विश्वविद्यालय के प्रेरणा स्त्रोत स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे जी की प्रतिमा में श्रद्धा-सुमन अर्पित किये। उन्होंने स्व. ठाकरे जी के सानिध्य में बिताए गए अवसरों और प्रेरणादायी उद्धरणों को साझा किया।

 डेका ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है और इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना प्रत्येक पत्रकार का दायित्व है। समाचारों में तथ्य, सत्य और जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के संबंध में समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पूर्ण पुष्टि आवश्यक है, क्योंकि एक समाचार का प्रभाव व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ सकता है।

डेका ने कहा कि सोशल मीडिया के वर्तमान दौर में सूचनाओं का तेजी से प्रसार हो रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर उपलब्ध प्रत्येक सामग्री सत्य हो, यह आवश्यक नहीं है। ऐसे में पत्रकारों को तथ्यों की जांच-पड़ताल के बाद ही समाचारों को प्रसारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। एक श्रेष्ठ पत्रकार वह नहीं जो सबसे पहले खबर दे, बल्कि वह है जो सही, तथ्यपरक और जिम्मेदारी के साथ खबर दे।

राज्यपाल ने प्रिंट मीडिया के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, एआई और सोशल मीडिया के आधुनिक दौर में भी प्रिंट मीडिया आज भी विश्वसनीय माध्यम समाज में बना हुआ है। पत्रकारिता को समाज के अंतिम व्यक्ति की आवश्यकताओं और समस्याओं को सामने लाने तथा व्यवस्था में आवश्यक सुधार के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में अनेक ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं, लेकिन वे व्यापक रूप से पहचाने नहीं जा सके। ऐसे अनसुने नायक-नायिकाओं के कार्यों को समाचारों और लेखों के माध्यम से समाज के सामने लाने से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने तथा कम से कम एक हजार विद्यार्थियों का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों की आवश्यक मान्यता सुनिश्चित करने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मनोज दयाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष मंडावी विभागाध्यक्ष प्रबंधन और आभार प्रदर्शन सुनील कुमार शर्मा कुलसचिव ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षक, प्राध्यापकगण, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

ब्रेकिंग : दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे ने छीन लिया CG का होनहार छात्र, DU में कर रहा था पढ़ाई… परिवार में पसरा मातम…

ब्रेकिंग : दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे ने छीन लिया CG का होनहार छात्र, DU में कर रहा था पढ़ाई… परिवार में पसरा मातम…

 दुर्ग 7 सितम्बर 2026। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुए दर्दनाक इमारत हादसे में दुर्ग जिले के एक परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। हादसे में 20 वर्षीय छात्र युवराज सोनी की मौत हो गई। युवराज दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में B.Com द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था और सत्य निकेतन स्थित बॉयज पीजी में रहता था।

नए स्थान तलाशें

सत्य निकेतन में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे निर्माण और मरम्मत के दौरान इमारत का हिस्सा ढह गया। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। घटनास्थल दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के प्रमुख इलाके के पास है, जहां बड़ी संख्या में छात्रों के पीजी, हॉस्टल और खाने-पीने की दुकानें संचालित होती हैं।

मरम्मत के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय इमारत में निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा था। प्रारंभिक जानकारी में बेसमेंट में खुदाई और मरम्मत के दौरान एक पिलर खिसकने की वजह से इमारत के ढहने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग, कैट एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव अभियान चलाया गया।

दुर्ग में परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

युवराज की मौत की खबर मिलते ही दुर्ग स्थित उसके परिवार में मातम पसर गया। पढ़ाई के लिए दिल्ली में रह रहे युवराज की हादसे में मौत से परिजनों और परिचितों में शोक का माहौल है।

न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र ने ली छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ, देखें LIVE प्रसारण

न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र ने ली छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ, देखें LIVE प्रसारण

 रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के नवनियुक्त माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र का शपथ ग्रहण समारोह आज रायपुर स्थित लोकभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम में आयोजित किया गया। समारोह में वे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। इस अवसर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशगण, मंत्रीगण व विधायकगण , रजिस्ट्रार जनरल, पी.पी.एस., प्रोटोकॉल ऑफिसर, प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज, रायपुर सहित अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।

शपथ ग्रहण समारोह के बाद 7 सितंबर 2026 को शाम 4:15 बजे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर स्थित मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट रूम में उनके सम्मान में ओवेशन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस समारोह में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, न्यायिक अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहेंगे।

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