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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने से किया इनकार, हाईकोर्ट की टिप्पणियां हटाईं

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने से किया इनकार, हाईकोर्ट की टिप्पणियां हटाईं

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित 2,161 करोड़ रुपए के शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उनकी जमानत रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने जांच एजेंसी के खिलाफ हाईकोर्ट की ओर से की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को अनावश्यक बताते हुए हटा दिया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि इस मामले से जुड़े कानूनी सवाल अभी भी खुले रहेंगे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल जमानत आदेश में पर्याप्त कारण नहीं होने के आधार पर किसी आरोपी की जमानत रद्द की जा सकती है।

चैतन्य बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने जमानत रद्द करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर सवाल उठाए। वहीं, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने भी माना कि कानूनी रूप से गलत जमानत आदेश हमेशा आरोपी की स्वतंत्रता खत्म करने का आधार नहीं बन सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने अंत में जमानत रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने हाईकोर्ट की ओर से जांच एजेंसी पर की गई सख्त टिप्पणियों को हटाते हुए कहा कि वे आवश्यक नहीं थीं।

बता दें कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामले में जनवरी में चैतन्य बघेल को जमानत दी थी। इस आदेश के खिलाफ ईडी और राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। ईडी का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच कथित शराब घोटाले में सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया। मामले की जांच ईडी और सीबीआई दोनों कर रही हैं।

पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल : सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बिहान दीदियों की बीज राखी बिखेरेगी हरियाली

पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल : सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बिहान दीदियों की बीज राखी बिखेरेगी हरियाली

 o सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बिहान दीदियों की बीज राखी बिखेरेगी हरियाली

सारंगढ़-बिलाईगढ़। भाई-बहन के अटूट प्रेम को जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित विभिन्न जिलों में ‘बीज राखी ‘ बनाने का अनूठा अभियान चलाया जा रहा है। त्योहार के बाद मिट्टी में मिलने पर इन राखियों में जड़े देसी बीज अंकुरित होकर पौधे बन जाते हैं। इन इको-फ्रेंडली राखियों में धान, सब्जियों और फूलों जैसे देसी बीज होते हैं। इन्हें फेंकने के बजाय अगर मिट्टी में डाल दिया जाए, तो ये हरियाली बिखेरते हैं। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व केवल रिश्तों की मिठास ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का एक नया अध्याय भी लिखेगा।

कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ के निर्देशन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) की स्व-सहायता समूह की महिलाएं बड़े पैमाने पर पर्यावरण-अनुकूल राखियों के निर्माण में जुटी हैं। इस वर्ष बीज राखी थीम पर कुल 12 हजार 300 राखियां तैयार की जा रही हैं, जो भाई-बहन के पवित्र प्रेम के साथ-साथ समाज को हरियाली और पर्यावरण संवर्धन का सुंदर संदेश देंगी।

’माटी में रोपने पर पौधे बन मुस्कुराएगी राखी’
इन राखियों का मुख्य आकर्षण इनके केंद्र (मध्य) में रखे गए बीज हैं। रक्षाबंधन पर्व के उपरांत इन राखियों को मिट्टी या गमलों में रोपित किया जा सकेगा, जिससे नए पौधे अंकुरित होंगे। महिलाओं का यह अभिनव प्रयास समाज में पर्यावरण-जागरूकता फैलाने के साथ-साथ प्रकृति को संवारने का कार्य भी करेगा।

’जिले के विभिन्न ग्रामों में बिहान की बहनें पूरे उत्साह के साथ राखी निर्माण में जुटी’
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के विभिन्न गांवों में बिहान दीदियों द्वारा राखियों का निर्माण पूरे उत्साह के साथ किया जा रहा है। इसमें सालर और गोड़म की दीदियाँ सबसे आगे रहते हुए 2-2 हजार राखियाँ बना रही हैं, वहीं छिंद, पेंड्रावन और सलोनीकला में 1,500-1,500 राखियों का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा ग्राम कोसीर, पवनी और बुंदेली में 1-1 हजार राखियाँ तैयार की जा रही हैं, जबकि बोन्दा में 500 और लेंद्रा में 300 राखियों के निर्माण के साथ इस हरित अभियान को आकार दिया जा रहा है।

’स्वावलंबन और प्रकृति प्रेम का अनूठा संगम’
बिहान समूह की यह रचनात्मक पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रही है। रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व को सीधे प्रकृति से जोड़ने और बहनों के इस हरित नवाचार की पूरे जिले और राज्य में भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है।

गैर-कृषि आजीविका का सफल मॉडलः सीमेंट ईंट उद्योग से बस्तर में आत्मनिर्भरता की गूँज

गैर-कृषि आजीविका का सफल मॉडलः सीमेंट ईंट उद्योग से बस्तर में आत्मनिर्भरता की गूँज

 o सीमेंट ईंट व्यवसाय से सशक्त होतीं बस्तर की महिलाएं : सुमनी कश्यप बनीं रोल मॉडल

o स्व-सहायता समूह की ताकत और सरकारी सहयोग से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर

बस्तर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सीमेंट ईंट निर्माण महिलाओं और स्थानीय युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) जैसी योजनाओं की मदद से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने छोटे ऋण और प्रशिक्षण से इस व्यवसाय को सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (जैसे- लक्ष्मी स्व सहायता समूह) के माध्यम से लखपति दीदी बन रही हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के सुखद परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोहकापाल के आश्रित ग्राम छिंदगांव की रहने वाली सुमनी कश्यप इसकी एक प्रेरणादायी मिसाल हैं। कभी केवल खेती-किसानी तक सीमित रहने वाली सुमनी आज सीमेंट ईंट निर्माण का सफल उद्यम संचालित कर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता का नया मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।

गैर-कृषि आजीविका का सफल मॉडल: सीमेंट ईंट उद्योग
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सुमनी कश्यप ने प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न निर्माण कार्यों के कारण क्षेत्र में सीमेंट ईंटों की बढ़ती मांग को अवसर के रूप में पहचाना। उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ गैर-कृषि आधारित आजीविका अपनाने का निर्णय लिया और सीमेंट ईंट निर्माण इकाई की स्थापना कर ग्रामीण उद्यमिता की नई मिसाल कायम की।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिला संबल
इस उद्यम की स्थापना के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के नॉन-फॉर्म (गैर-कृषि आधारित आजीविका) घटक के अंतर्गत संकुल संगठन से 5 लाख रुपये की सीड कैपिटल उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त सुमनी ने स्वयं एवं अपने स्व-सहायता समूह के माध्यम से लगभग 1.50 लाख रुपये का निवेश किया। कुल 6.50 लाख रुपये से अधिक की लागत से मशीनरी, शेड और फर्श सहित आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित कर अप्रैल 2026 से उत्पादन शुरू किया गया।

तीन माह में 20 ट्रॉली ईंटों की बिक्री
जगदलपुर एवं बालेंगा क्षेत्र से डस्ट और गिट्टी जैसे कच्चे माल की सहज उपलब्धता तथा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अन्य निर्माण कार्यों की अधिकता के कारण सुमनी द्वारा निर्मित सीमेंट ईंटों की मांग लगातार बढ़ रही है। तैयार माल निर्माण स्थल से ही खरीदा जा रहा है। व्यवसाय शुरू होने के मात्र तीन महीनों में ही 20 ट्रॉली सीमेंट ईंटों की बिक्री कर उन्होंने अपने उद्यम की सफलता साबित कर दी है।

आर्थिक सशक्तिकरण से बदल रहा परिवार का भविष्य
इस व्यवसाय से प्राप्त आय ने सुमनी कश्यप के परिवार को आर्थिक मजबूती प्रदान की है। उनकी बड़ी बेटी 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद जगदलपुर में कंप्यूटर कोर्स के साथ कृषि प्रवेश परीक्षा (पीएटी) की तैयारी कर रही है, जबकि उनके दो छोटे बेटे सातवीं और पांचवीं कक्षा में अध्ययनरत हैं। परिवार की शिक्षा और भविष्य को लेकर सुमनी अब पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।

दिल्ली तक मिली पहचान, महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
सुमनी कश्यप स्व-सहायता समूह में जेंडर मास्टर के रूप में कार्य करते हुए प्रतिमाह 5 हजार रुपये का मानदेय भी प्राप्त करती हैं। अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली और सक्रिय योगदान के कारण उन्हें दिल्ली तक अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला। खेती, किराना दुकान, मत्स्य पालन और अब सीमेंट ईंट निर्माण जैसे विविध आजीविका माध्यमों के जरिए उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और अवसर मिले तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती हैं।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: एक जिला-एक उत्पाद: विष्णुभोग चावल की महक जीपीएम जिले की बनी पहचान

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: एक जिला-एक उत्पाद: विष्णुभोग चावल की महक जीपीएम जिले की बनी पहचान

 गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ का 25वां नवगठित गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अब विशिष्ट कृषि उत्पाद सुगंधित विष्णुभोग चावल के कारण भी नई पहचान बना रहा है। भारत सरकार की एक जिला-एक उत्पाद योजना के अंतर्गत विष्णुभोग चावल को जिले का प्रमुख उत्पाद चुना गया है। मनमोहक सुगंध, उत्कृष्ट स्वाद और जैविक खेती की परंपरा के कारण यह चावल आज जिले की पहचान बन चुकी है। विष्णुभोग चावल की खुशबू अब केवल खेतों तक सीमित नहीं होकर जिला, प्रदेश और देश के अन्य राज्यों तक फेल रहा है। पारंपरिक तरीके से उगाई जाने वाली यह धान की किस्म गुणवत्ता और पौष्टिकता के लिए विशेष रूप से जानी जाती है।

जिले के पेंड्रा क्षेत्र में लगभग 1,500 किसान मिलकर करीब 600 एकड़ भूमि पर विष्णुभोग धान की खेती कर रहे हैं। किसानों के सामूहिक प्रयास और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदमों ने इस उत्पाद को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ जिले की कृषि अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। केवल खेती तक ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से स्व सहायता समूह की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। मलनिया महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी पेंड्रा द्वारा किसानों से विष्णुभोग धान खरीदी जाती है। इसके बाद धान को मिनी राइस मिल में प्रसंस्करण कर आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस कार्य से समूह की 15 महिला सदस्यों को स्थायी रोजगार मिला है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर लखपति दीदी की ओर अग्रसर है। समूह की महिलाओं ने अब तक लगभग 2 टन विष्णुभोग चावल की सफलता पूर्वक बिक्री कर चुकी हैं, इससे उन्हें करीब 1 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हुआ है। इसकी गुणवत्ता और सुगंध के कारण अब इसकी मांग जिले से बाहर अन्य जिलों और विभिन्न राज्यों से भी लगातार बढ़ रही है। यह स्थानीय उत्पाद अब व्यापक बाजार में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है।

एक जिला-एक उत्पाद योजना ने यह सिद्ध कर दिया है कि, यदि स्थानीय संसाधनों, किसानों की मेहनत और महिला शक्ति को सही दिशा मिले, तो कोई भी पारंपरिक उत्पाद राष्ट्रीय पहचान बना सकता है। विष्णुभोग चावल आज जीपीएम जिले के किसानों की समृद्धि, महिलाओं के स्वावलंबन और स्थानीय उद्यमिता का सशक्त प्रतीक बन चुका है। आने वाले समय में यदि विष्णुभोग चावल के उत्पादन, ब्रांडिंग और विपणन को और अधिक प्रोत्साहन मिलता है, तो यह न केवल जीपीएम जिले की आर्थिक प्रगति का आधार बनेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि विरासत को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।

पीएम जनमन आवास योजना ने बदली दिव्यांग परस कमार की जिंदगी, कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का भावुक सफर

पीएम जनमन आवास योजना ने बदली दिव्यांग परस कमार की जिंदगी, कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का भावुक सफर

 o प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने बदली दिव्यांग परस कमार की जिंदगी, कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का भावुक सफर

बलैदाबाजार। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत् परस कमार का पक्का घर बन जाने से उसके जीवन में कई बदलाव आया। अब बार -बार मरम्मत नहीं करना पड़ रहा है। बलैदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड अंतर्गत ग्राम बल्दाकछार के निवासी परस कमार विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय से संबंध रखते हैं। उनका जीवन संघर्ष, अभाव और कठिनाइयों से भरा रहा है। परस कमार पैर से दिव्यांग हैं, जिसके कारण रोजमर्रा के छोटे-छोटे कार्य भी उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं थे। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया और उनकी माताजी भी अति वृद्ध हैं, जो उम्र और कमजोरी के कारण स्वयं सहारे की मोहताज हैं।

आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वर्षों तक वे एक कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर थे। बरसात के दिनों में छत से टपकता पानी, ठंडी रातों में टूटती दीवारों से आती हवा, और गर्मी के मौसम में तपता हुआ घर यही उनकी जिंदगी की सच्चाई थी। हर मौसम उनके लिए एक नई परीक्षा लेकर आता था। रातों को कई बार यह डर सताता था कि कहीं कमजोर दीवारें ढह न जाएं। अपनी इस हालत को देखकर परस कमार का मन बार-बार टूट जाता था, लेकिन गरीबी के आगे वे बेबस थे।

एक पक्के और सुरक्षित घर का सपना उनके लिए किसी दूर के सपने जैसा था, जिसे पूरा करना लगभग असंभव लग रहा था। लेकिन प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने उनके जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई। जिला पंचायत के सतत मार्गदर्शन, जनपद पंचायत कसडोल के सहयोग एवं ग्राम पंचायत के प्रयासों से विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग से होने के कारण उन्हें योजना के अंतर्गत आवास स्वीकृत हुआ। आवास निर्माण कार्य समय पर प्रारंभ हुआ और धीरे-धीरे उनका सपना आकार लेने लगा।साथ ही, मनरेगा अंतर्गत 90 मानव दिवस की मजदूरी राशि भी अभिसरण के माध्यम से उन्हें प्राप्त हुई, जिससे आवास निर्माण में आर्थिक सहयोग मिला। इस राशि ने उनके लिए निर्माण कार्य को और आसान बनाया तथा आत्मनिर्भरता का संबल प्रदान किया।

परस कमार का पक्का मकान बनकर तैयार है। अब सुरक्षित छत के नीचे सुकून की सांस ले रहे हैं। बरसात की चिंता नहीं, ठंड की रातों का डर नहीं और गर्मी की तपिश का भय नहीं अब उनके जीवन में सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास है। यह घर केवल ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं, बल्कि उनके संघर्षों पर मिली सबसे बड़ी जीत है। अपनी आंखों में खुशी के आंसू लिए परस कमार कहते हैं-“मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे जैसे गरीब और दिव्यांग व्यक्ति को भी पक्का घर मिलेगा।इस सुरक्षित पक्का घर में देखकर लगता है जैसे भगवान ने मेरी सबसे बड़ी इच्छा पूरी कर दी। अब हमें डर नहीं लगता, अब हमें लगता है कि हमारा भी इस दुनिया में एक सम्मानजनक ठिकाना मिल गया है।

आधुनिक खेती से बदली किसान ग्रीक चंद पटेल की तस्वीर, धान के साथ सब्जी उत्पादन से बढ़ी आय

आधुनिक खेती से बदली किसान ग्रीक चंद पटेल की तस्वीर, धान के साथ सब्जी उत्पादन से बढ़ी आय

 कोण्डागांव। आदिवासी बहुल जिले के कुम्हारपारा निवासी प्रगतिशील किसान ग्रीक चंद पटेल ने आधुनिक कृषि तकनीकों और शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर खेती को अधिक लाभकारी बना दिया है। धान की पारंपरिक खेती के साथ सब्जी उत्पादन और नैनो उर्वरकों के उपयोग से उनकी पैदावार और आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

ग्रीक चंद पटेल खरीफ और रबी दोनों मौसम में खेती करते हैं। कृषि कार्यों के लिए वे किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं। वहीं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली राशि भी खेती के लिए जरूरी संसाधनों की व्यवस्था में मददगार साबित हो रही है।

उन्होंने खेती में नैनो उर्वरकों का उपयोग शुरू किया है, जिससे पोषक तत्व पौधों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचते हैं। उनका कहना है कि नैनो उर्वरकों के इस्तेमाल से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हुआ है।

धान की खेती के साथ-साथ वे मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी कर रहे हैं। फसल विविधीकरण के जरिए उन्हें पूरे वर्ष अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं। बाजार की मांग के अनुसार विभिन्न फसलों की खेती कर वे अपनी आमदनी लगातार बढ़ा रहे हैं। साथ ही, रासायनिक उर्वरकों की तुलना में जैविक खादों के उपयोग को प्राथमिकता देकर टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।

ग्रीक चंद पटेल की सफलता इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं और फसल विविधीकरण को अपनाकर किसान अपनी उत्पादकता और आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

फांसी के फंदे से लटकी मिली विवाहित बेटी,पिता खेत से आये तो यह दृस्य देख उड़े होस

फांसी के फंदे से लटकी मिली विवाहित बेटी,पिता खेत से आये तो यह दृस्य देख उड़े होस

 मुंगेली। जिले के लोरमी थाना क्षेत्र के बुधवारा गांव में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। घर के अंदर विवाहिता का शव फांसी के फंदे पर लटका मिलने से पूरे गांव में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही लोरमी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस फिलहाल मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है। पुलिस के अनुसार, यह घटना 22 जुलाई की सुबह करीब 9 बजे की है।

बुधवारा गांव निवासी नारद मरकाम ने अपने घर के भीतर अपनी 25 वर्षीय विवाहित पुत्री सुमन टेकाम का शव फंदे पर लटका हुआ देखा। बताया जा रहा है कि मृतका अपने मायके में रह रही थी। सुबह जब उसके पिता खेत से वापस घर लौटे तो उन्होंने यह दृश्य देखा, जिसके बाद उनके होश उड़ गए। घटना के बाद परिजनों ने तत्काल इसकी जानकारी आसपास के लोगों को दी और पुलिस को सूचना दी गई। कुछ ही समय में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। विवाहिता की मौत की खबर फैलते ही गांव में शोक और चिंता का माहौल बन गया। परिजन घटना को लेकर सदमे में हैं और पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। सूचना मिलने के बाद लोरमी थाना पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। इसके बाद शव को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई पूरी की गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया है, ताकि मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विवाहिता ने किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया या फिर घटना के पीछे कोई अन्य कारण तो नहीं है। जानकारी के अनुसार, मृतका सुमन टेकाम के दो छोटे बच्चे हैं। उसकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बच्चों के भविष्य को लेकर भी परिजन चिंतित हैं। पुलिस ने बताया कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।

ऐसे मामलों में पुलिस आमतौर पर मृतका के पारिवारिक संबंधों, सामाजिक परिस्थितियों और घटना से पहले की गतिविधियों की जानकारी जुटाती है। इसी क्रम में पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि घटना की वास्तविक वजह सामने आ सके। लोरमी पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान मिलने वाले प्रत्येक तथ्य को गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच प्रक्रियाओं के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। गांव में हुई इस घटना के बाद ग्रामीणों में भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी। फिलहाल लोरमी थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है। पुलिस की जांच अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और परिजनों के बयानों पर केंद्रित है।

पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से रोशन हो रहे लोगों के घर, त्रिलोक मिश्रा बने सौर ऊर्जा के प्रेरक मिसाल

पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से रोशन हो रहे लोगों के घर, त्रिलोक मिश्रा बने सौर ऊर्जा के प्रेरक मिसाल

 o गौरेला पेंड्रा मरवाही : पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से रोशन हो रहे लोगों के घर

गौरेला पेंड्रा मरवाही। पीएम नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी मंशा और सीएम विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ तेजी से असर दिखा रही है। इस योजना के तहत जिले में सैकड़ों घर रोशन हो रहे हैं और लोग मुफ्त, स्वच्छ एवं पर्यावरण-हितैषी बिजली का लाभ लेकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहे हैं। शासन द्वारा दी जा रही सब्सिडी और सरल प्रक्रिया ने इस योजना को और अधिक लोकप्रिय बना दिया है।

इसी सकारात्मक बदलाव की एक प्रेरक मिसाल हैंकृ गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के गुरुकुल परिसर पेंड्रारोड निवासी त्रिलोक मिश्रा, जिन्होंने 3 किलोवाट का सोलर प्लांट स्थापित कर साबित कर दिया कि सौर ऊर्जा न केवल खर्च घटाती है, बल्कि स्थायी ऊर्जा का मजबूत विकल्प भी है। केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये सब्सिडी सीधे उनके खाते में जमा हो गई। इस पूरी प्रक्रिया को मिश्रा ने पूरी तरह पारदर्शी, उपभोक्ता हितैषी और सहज बताया।

सोलर प्लांट लगने के बाद मिश्रा के घर में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की एक नई शुरुआत हुई। वे बताते हैं, ष्अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। हमारी जरूरत की बिजली हमारी अपनी छत से बन रही है।ष् सोलर प्लांट स्थापित करने से पहले मिश्रा को प्रतिमाह 3000 से 3500 रुपये तक का बिजली बिल भरना पड़ता था। लेकिन सोलर ऊर्जा शुरू होने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। अब माइनस बिल प्राप्त हुए, साथ ही अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी गई, उसकी राशि बिजली बिल में समायोजित होती रही। त्रिलोक मिश्रा की सफलता यह संदेश देती है कि, यदि योजनाओं का लाभ सही समय पर और सही तरीके से लिया जाए, तो सौर ऊर्जा न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि घरेलू बजट में भी बड़ी राहत देती है। उनकी कहानी शहरवासियों के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन चुकी है।

राज्यपाल से प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकात

राज्यपाल से प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकात

 00 सेवा भाव, संवेदनशीलता और तार्किक निर्णय से निभाएं दायित्व - डेका

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि आम जनता की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और ईमानदारी से निर्वहन करना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं नए अवसर भी मौजूद होते हैं। इसलिए प्रत्येक परिस्थिति का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना करते हुए जनता के हित में निर्णय लिए जाने चाहिए।
राज्यपाल आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के वर्ष 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से चर्चा कर रहे थे। ये अधिकारी वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी, निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय में मानवीय संवेदनाओं का भी समावेश होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक कार्य में ह्यूमन टच होना आवश्यक है, ताकि शासन की योजनाओं और निर्णयों का लाभ वास्तविक रूप से आम नागरिकों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता से नियमित संवाद करना चाहिए, क्षेत्र का सतत भ्रमण करना चाहिए और लोगों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कार्य संभव हो, उसे प्राथमिकता के साथ पूरा करें और यदि किसी कारणवश कोई कार्य संभव नहीं है तो उसकी स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी संबंधित व्यक्ति को अवश्य दें। इससे प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए तार्किक सोच और विवेकपूर्ण निष्कर्ष अत्यंत आवश्यक हैं। तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेना ही एक सक्षम अधिकारी की पहचान है। उन्होंने कहा कि जनता को न्याय दिलाना लोक सेवक का प्रथम कर्तव्य है और प्रत्येक अधिकारी को इस भावना के साथ कार्य करना चाहिए।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे युवा हैं और उनके कंधों पर भविष्य के प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको छत्तीसगढ़ जैसे शांत, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में सेवा करने का अवसर मिला है। यहां के लोगों में सेवा, सहयोग और आत्मीयता की भावना अत्यंत प्रबल है। इस विश्वास और अपनत्व को बनाए रखते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होगी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी की प्रशिक्षण निदेशक मेनका प्रधान एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

'कांकेयर' ब्रांड बना ग्रामीण महिलाओं की पहचान शुद्ध जैविक उत्पादों की लगातार बढ़ रही मांग

'कांकेयर' ब्रांड बना ग्रामीण महिलाओं की पहचान शुद्ध जैविक उत्पादों की लगातार बढ़ रही मांग

 रायपुर :-  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिला स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार ‘कांकेयर’ ब्रांड तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। यह ब्रांड कांकेर की हजारों महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक उत्पादों का प्रतीक बन चुका है।

‘कांकेयर’ ब्रांड के तहत सरसों तेल, अरहर दाल, छिंद गुड़, शहद, रागी, कोदो, मक्का, आम का अचार सहित विभिन्न जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। दण्डकारण्य क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों में उगाए गए ये उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। ये उत्पाद स्वसहायता समूहों द्वारा पारंपरिक एवं जैविक पद्धति से तैयार किए जाते हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं होता है। एफएसएसएआई (FSSAI) से पंजीकृत होने के कारण उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है।

वर्तमान में ‘कांकेयर’ उत्पादों का सी-मार्ट और कांकेश्वरी एफपीसी के माध्यम से स्थानीय बाजारों में वितरण और बिक्री सुनिश्चित की जा रही है। जिला पंचायत परिसर में स्थापित पैकेजिंग इकाई से इनकी थोक खरीदी की जा सकती है। वेबसाइट Kancare.Shop के माध्यम से इन्हें ऑनलाइन ऑर्डर कर घर बैठे शुद्ध एवं प्राकृतिक उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं।

कांकेर जिला पंचायत के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 'कांकेयर’ ब्रांड के 92 किलोग्राम अरहर दाल , 5.5 किलोग्राम शहद, 5 किलोग्राम छिंद गुड़, 9 किलोग्राम रागी आटा तथा 6 किलोग्राम मक्का आटा की बिक्री हो चुकी है। ‘कांकेयर’ ब्रांड आज केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि कांकेर जिले की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन की नई पहचान बनकर उभर रहा है।

महतारी वंदन योजना से माताओं और बहनों के जीवन में आया आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

महतारी वंदन योजना से माताओं और बहनों के जीवन में आया आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

  महिलाओं को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ

 महिला सशक्तिकरण, रोजगार, पर्यटन, उद्योग और सुशासन के विजन को मुख्यमंत्री ने किया साझा

 बस्तर में शांति, विकास और रोजगार का नया अध्याय शुरू

 इमर्जिंग छत्तीसगढ़-सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हुए शामिल

रायपुर / मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित 'इमर्जिंग छत्तीसगढ़-सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महिला सशक्तिकरण, बस्तर के विकास, रोजगार, उद्योग, पर्यटन, सुशासन और सामाजिक सुधारों पर राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि हम सभी के लिए छत्तीसगढ़ महतारी है। यह माता कौशल्या की पावन जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च सम्मान देने की परंपरा रही है। उन्होंने वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि  'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताÓ अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है।

 महतारी वंदन योजना से महिलाओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश की लगभग 68 लाख 50 हजार विवाहित महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में दिए जा रहे हैं। अब तक 29 किश्तों के माध्यम से लगभग 18 हजार 800 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जब वे गांवों का दौरा करते हैं तो माताओं और बहनों के चेहरों पर इस योजना से आया आत्मविश्वास और संतोष स्पष्ट दिखाई देता है। बातचीत के दौरान माताएं और बहनें बताती हैं कि किसी ने अपनी बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश किया है, किसी ने सिलाई मशीन खरीदकर रोजगार शुरू किया है तो किसी ने किराना या सब्जी की दुकान खोलकर आय बढ़ाई है। इससे माताएं और बहनें  आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है।

 दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन की राशि से शुरू किया राम मंदिर निर्माण

मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि यह इस योजना का सबसे प्रेरक उदाहरण है कि महिलाएं इस राशि का उपयोग समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी कर रही हैं।

30 लाख से अधिक महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 86 हजार महिला स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन्हें रेडी-टू-ईट कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है तथा ऋण एवं अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बस्तर में नक्सलवाद से विकास की ओर ऐतिहासिक परिवर्तन

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि चार-पांच दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर अब तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से बस्तर में शांति स्थापित हुई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कैंप स्थापित करने के साथ-साथ विकास की योजनाओं को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाया गया। पहले सुरक्षा शिविरों के पांच किलोमीटर दायरे तक योजनाओं का लाभ पहुंचता था, जिसे अब बढ़ाकर दस किलोमीटर तक किया गया है।

 नियद नेल्ला नार से 500 से अधिक गांवों तक पहुंची सरकार

मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत अब 500 से अधिक गांवों को जोड़ा जा चुका है। लगभग 17 विभागों की 40 से अधिक योजनाओं का लाभ इन गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। यहां लोगों को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत लगभग 36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया तथा गंभीर रोगियों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। वहीं बस्तर मुन्ने योजना के माध्यम से अधिकारी स्वयं दूरस्थ गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं।

सिंचाई, कृषि और पर्यटन से आत्मनिर्भर बनेगा बस्तर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में इंद्रावती नदी पर देउरगांव एवं मटनार सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनसे लगभग 80 हजार एकड़ भूमि सिंचित होगी।

उन्होंने कहा कि चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, अबूझमाड़ के विशाल वन तथा धुड़मारास जैसे गांव बस्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। नई औद्योगिक नीति में होम-स्टे को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत पांच कमरों तक के होम-स्टे निर्माण के लिए ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इमली, महुआ, हर्रा, बहेड़ा, सीताफल और औषधीय वनोपजों का मूल्य संवर्धन कर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाई जा रही है। नेतानार जैसे गांवों में सेवा डेरा के माध्यम से महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, पैकेजिंग तथा अन्य आजीविका आधारित प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। आईआईटी की टीम भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास का कार्य कर रही है।

धर्मांतरण के विरुद्ध कड़ा कानून लागू

मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मांतरण समाज के लिए गंभीर चुनौती है। विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 लागू किया गया है। इसके तहत धर्म परिवर्तन करने और करवाने वाले दोनों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। प्रलोभन, दबाव अथवा छलपूर्वक धर्मांतरण करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 समान नागरिक संहिता की दिशा में भी तेजी से कार्य

उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है तथा राज्य सरकार का प्रयास है कि आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र तक इस दिशा में ठोस प्रगति हो।

पीएससी घोटाले की जांच और रोजगार पर सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए पीएससी घोटाले की सीबीआई जांच जारी है तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने विभिन्न विभागों में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है तथा शीघ्र ही 5 हजार शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सभी युवाओं को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है, इसलिए नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निजी निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया जा रहा है। पिछले डेढ़ वर्षों में राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लाखों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।

महिलाओं ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम में बलौदाबाजार जिले की मीना देवांगन ने महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि योजना से प्राप्त राशि से उन्होंने चूड़ी का व्यवसाय शुरू किया है। वहीं सरोज ने कहा कि वे इस राशि से अपने बच्चे की स्कूल फीस का भुगतान कर रही हैं। दोनों महिलाओं ने कहा कि इस योजना ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री साय की पहल:स्वस्थ माताएं, स्वस्थ बच्चे और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए बनेगी समन्वित रणनीति

मुख्यमंत्री साय की पहल:स्वस्थ माताएं, स्वस्थ बच्चे और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए बनेगी समन्वित रणनीति

 00 यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी कार्ययोजना

00 स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव - साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन तथा बच्चों के समग्र विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इन क्षेत्रों में स्थायी सुधार के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा आदिम जाति विकास विभाग सहित सभी संबंधित विभाग यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से एक समन्वित और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करें, जिससे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण में कमी लाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का प्रभाव तभी बढ़ेगा, जब विभिन्न विभाग साझा लक्ष्य और समन्वित कार्यप्रणाली के साथ काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी मल्टी-सेक्टोरल रणनीति तैयार करने को कहा, जिससे स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और बच्चों के पोषण स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे का शॉल एवं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक नंदी भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। वहीं सुश्री मैककैफ्रे ने भारत में यूनिसेफ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष स्मारक डाक टिकट मुख्यमंत्री को भेंट किया। यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे ने मुख्यमंत्री का जय जोहार कहकर अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और सरल-सहज लोगों का प्रदेश है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ लंबे समय से राज्य सरकार के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के बच्चों का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध बनेगा। बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ की प्रमुख सुश्री सीमा कुमार, अनिल गुलाटी तथा डॉ. बाल पारितोष दास उपस्थित थे

कांग्रेस नकारात्मक राजनीति में कभी सफल नहीं होगी, जनता सच्चाई जानती है : उपमुख्यमंत्री अरुण साव

कांग्रेस नकारात्मक राजनीति में कभी सफल नहीं होगी, जनता सच्चाई जानती है : उपमुख्यमंत्री अरुण साव

 00 नीट परीक्षा की खामी को सरकार ने किया दूर, समय पर कार्रवाई कर दोबारा आयोजित की परीक्षा

00 स्मार्ट मीटर नई तकनीक का हिस्सा, बिजली व्यवस्था में आएगी पारदर्शिता

रायपुर। उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार पारदर्शिता, सुशासन और विकास के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तथ्यहीन आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। नीट परीक्षा, यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी), स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर जनता कांग्रेस के बहकावे में नहीं आएगी। प्रदेश की जनता सच्चाई को भली-भांति समझती है। विपक्ष की नकारात्मक राजनीति कभी सफल नहीं होगी।

उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि नीट परीक्षा मामले में सरकार ने समय पर कार्रवाई कर दोबारा परीक्षा आयोजित कराई। इसके बावजूद कांग्रेस इस विषय को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यूसीसी पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि यूसीसी को लेकर भी सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि आदिवासी समाज के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित समिति सभी वर्गों से सुझाव लेकर सरकार को अपना प्रारूप सौंपेगी।

साव ने स्मार्ट मीटर को लेकर कहा कि स्मार्ट मीटर नई तकनीक का हिस्सा हैं, जिससे बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिना तथ्यों के लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार पूरे छत्तीसगढ़ के संतुलित और समान विकास के लिए प्रतिबद्ध है। किसी भी क्षेत्र के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है।

प्रदेश में खेती-किसानी जोरों पर, राज्य में 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य का 69 प्रतिशत बोनी पूर्ण

प्रदेश में खेती-किसानी जोरों पर, राज्य में 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य का 69 प्रतिशत बोनी पूर्ण

 रायपुर, 22 जुलाई 2026/ प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती किसानी का कार्य जोरों पर हैं। राज्य में 22 जुलाई की स्थिति में राज्य के 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 69 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश: किसानों को सुगमता से मिले खाद-बीज
 
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा गया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। 
 
किसानों को 9.22 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित
 
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के किसानों को अब तक 9.22 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। राज्य में अब तक 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 69 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है। 
 
प्रदेश में अब तक 389.7 मि.मी. औसत वर्षा दर्जः राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मि.मी.
 
अधिकारियों ने बताया कि 22 जुलाई सुबह तक की स्थिति में प्रदेश में अब तक 389.7 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है। गौरतलब है कि औसत दर्ज वर्षा जिलों की आज तक की औसत वर्षा पिछले 10 वर्षाे के आधार पर 421.5 मिमी. है। वहीं प्रतिवेदित समय तक आज हुई वर्षा 33.5 मिमी. है। 
 
किसानों को 4.12 लाख क्विंटल बीज वितरित
 
अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरूद्ध 4.70 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 4.12 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 83 प्रतिशत है। गत वर्ष इसी अवधि में 4.11 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था। 
 
इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 14.57 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 9.22 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 59 प्रतिशत है।   
 
जरूरतमंद किसानों को 6633.71 करोड़ रूपये का निःशुल्क अल्पकालीन कृषि ऋण
 
अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियते हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। चालू खरीफ सीजन 2026 के लिए 21 जुलाई की स्थिति में 6633.71 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 5560.34 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।
सफलता की कहानी : आधुनिक सूकरपालन से स्वरोजगार: 400 से अधिक सूकरों के साथ ग्रेसी ने लिखी सफलता की नई इबारत

सफलता की कहानी : आधुनिक सूकरपालन से स्वरोजगार: 400 से अधिक सूकरों के साथ ग्रेसी ने लिखी सफलता की नई इबारत

 बीएससी एग्रीकल्चर ग्रेजुएट युवती ने सरकारी सहायता से स्वरोजगार को बनाया सफलता की मिसाल

नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी, आधुनिक फार्म में 400 से अधिक सूकर

रायपुर, 22 जुलाई 2026/ सूकर पालन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक तेजी से उभरता हुआ और अत्यधिक लाभदायक स्वरोजगार है। कम लागत, उच्च प्रजनन क्षमता और मांस की लगातार बढ़ती मांग के कारण, यह लाखों युवाओं और किसानों के लिए स्थायी आय का एक प्रमुख साधन बन गया है। सूअर अन्य पशुओं की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ते हैं। मादा सूअर एक बार में 8 से 12 बच्चों (पिगलेट्स) को जन्म देती है, जो 45 से 60 दिनों में बेचने लायक हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ में कई युवा अपनी पारंपरिक या सामान्य नौकरियां छोड़कर आधुनिक तरीके से सूकर पालन कर सालाना लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे हैं।

बस्तर के युवाओं में अब पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि एवं पशुपालन आधारित उद्यमों की नई सोच विकसित हो रही है। इसी सोच को साकार करते हुए बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से एक करोड़ रुपये से अधिक लागत की आधुनिक सूकरपालन परियोजना स्थापित कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। आज उनका फार्म न केवल सफल व्यावसायिक मॉडल बन चुका है, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन गया है।

नौकरी के बजाय स्वरोजगार का चुना रास्ता

ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने के बजाय उन्होंने व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग करते हुए कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने पारंपरिक व्यवसायों के बजाय सूकरपालन को चुना, क्योंकि बस्तर क्षेत्र में इसकी मांग लगातार बढ़ रही थी, जबकि व्यावसायिक स्तर पर इस क्षेत्र में बहुत कम लोग कार्य कर रहे थे। भारत सरकार सूकर पालन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल लाइवस्टॉक मिशन जैसी योजनाएं चला रही है। इसके तहत, फार्म खोलने के लिए 15 लाख से 30 लाख तक की परियोजना पर 50% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

एक करोड़ बारह लाख रुपए की परियोजना को मिला सरकारी सहयोग

बड़े स्तर पर आधुनिक सूकरपालन इकाई स्थापित करने के लिए ग्रेसी को तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी। पशु चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त संचालक कार्यालय ने उन्हें परियोजना तैयार करने से लेकर विभिन्न तकनीकी पहलुओं तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया। विभाग के मार्गदर्शन में 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रूपए की आधुनिक परियोजना तैयार की गई, जिसे केंद्र सरकार की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन योजना के अंतर्गत स्वीकृति मिली।

अनुसूचित जनजाति वर्ग से पहली बार आवेदन करने पर ग्रेसी को योजना के तहत 30 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। ग्रेसी का कहना है कि यदि यह सरकारी अनुदान नहीं मिलता तो वे केवल 20 से 25 सूकरों के साथ छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू कर पातीं, लेकिन शासन की सहायता ने उन्हें आधुनिक अधोसंरचना के साथ बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने का अवसर दिया।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन से मिली सफलता

पशुपालन विभाग के चिकित्सकों और कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में फार्म में तमिलनाडु से उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए। सभी पशुओं के टीकाकरण, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। मई 2025 में फार्म की शुरुआत 110 प्रजनन योग्य सूकरों से हुई थी, जिनमें 100 मादा और 10 नर शामिल थे। शुरुआती चरण में छोटे बच्चों को तैयार करने और प्रजनन योग्य बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर देखभाल के परिणामस्वरूप जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क प्रजनन योग्य सूकर तथा लगभग 206 पिगलेट तैयार हो चुके हैं। वर्तमान में फार्म में कुल 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं, जो इस परियोजना की उल्लेखनीय सफलता को दर्शाते हैं।

पहली बिक्री में ही लगभग चार लाख रुपये की आय

ग्रेसी दुग्गा के आधुनिक फार्म से अब उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की व्यावसायिक बिक्री भी शुरू हो चुकी है। उनके फार्म से रायपुर सहित स्थानीय बाजारों में सूकरों की नियमित आपूर्ति की जा रही है। हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स को 6 हजार रूपए प्रति पिगलेट की दर से बेचकर 3 लाख 90 हजार रुपए की आय अर्जित की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर सूकरपालन लाभकारी व्यवसाय के रूप में तेजी से उभर रहा है।

बस्तर के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

ग्रेसी दुग्गा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर सफल उद्यम स्थापित कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग, शासन की वित्तीय सहायता और अपनी मेहनत के बल पर ग्रेसी ने न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि बस्तर के शिक्षित युवाओं को कृषि एवं पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू करने के लिए भी नई प्रेरणा दी है।

विशेष लेख : सीड बॉल अभियान- हरियाली बढ़ाने का सरल और प्रभावी माध्यम  जनभागीदारी से साकार हो रहा हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प

विशेष लेख : सीड बॉल अभियान- हरियाली बढ़ाने का सरल और प्रभावी माध्यम जनभागीदारी से साकार हो रहा हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प

 रायपुर - सीड बॉल पर्यावरण को हरा-भरा बनाने और वनीकरण (रिफॉरेस्टेशन) का एक बेहद सरल, किफायती और अत्यधिक प्रभावी माध्यम है। इसमें बीजों को मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण से छोटी-छोटी गोलियों के रूप में सुरक्षित कर दिया जाता है, जिससे वे बिना मेहनत के दुर्गम स्थानों पर भी उग जाते हैं। सीड बॉल- बीज, मिट्टी (मुख्य रूप से चिकनी मिट्टी) और जैविक खाद (गोबर या वर्मीकम्पोस्ट) का एक छोटा और सूखा गोला होता है। बीजों को इस प्राकृतिक आवरण में लपेटकर सुखा लिया जाता है। मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद जब मिट्टी में पर्याप्त नमी हो, तब सीड बॉल्स का उपयोग करना सबसे अच्छा होता है। इन्हें यात्रा करते समय या खाली जगहों पर पैदल चलते हुए मिट्टी पर बिखेर दें। पानी के संपर्क में आते ही ये पौधे के रूप में विकसित होना शुरू हो जाती हैं।

बारिश का मौसम पौधारोपण और वनों के विस्तार के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इसी उद्देश्य से वन विभाग द्वारा सीड बॉल (बीज गोला) अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान जनभागीदारी के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने का प्रभावी प्रयास है, जहाँ पौधारोपण करना कठिन होता है।

क्या है सीड बॉल?

सीड बॉल मिट्टी, गोबर या जैविक खाद और विभिन्न वृक्षों के बीजों से तैयार किया गया छोटा गोलाकार गोला होता है। इसे जंगलों, पहाड़ियों, खाली भूमि और दुर्गम क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है। वर्षा का पानी मिलने पर बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं।

वन विभाग का हरित अभियान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा एक पेड़ मां के नाम, वन महोत्सव तथा युवा फॉर नेचर जैसे अभियानों के साथ सीड बॉल कार्यक्रम को भी व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। स्कूलों, महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से हजारों-लाखों सीड बॉल तैयार कर जंगलों और खाली भूमि में डाली जा रही हैं।

जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका

सीड बॉल में महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, बरगद, पीपल, आम, जामुन, शाल, बीजा, चार, खमार सहित स्थानीय प्रजातियों के बीजों का उपयोग किया जाता है। इससे प्राकृतिक वनों का विस्तार होता है, वन्यजीवों को भोजन और आश्रय मिलता है तथा जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है।

पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम

सीड बॉल अभियान से हरित आवरण बढ़ने के साथ-साथ जल संरक्षण, मिट्टी के क्षरण या कटाव में कमी, कार्बन अवशोषण तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी सहायता मिलती है। यह कम लागत में अधिक क्षेत्र को हरित बनाने का प्रभावी उपाय है।

जनभागीदारी से बनेगा हरित भविष्य

वन विभाग का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। जब बच्चे, युवा, महिलाएं और ग्रामीण इस अभियान से जुड़ते हैं, तो हर व्यक्ति प्रकृति संरक्षण का सहभागी बनता है।

हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी

यदि प्रत्येक नागरिक वर्षा ऋतु में कुछ सीड बॉल तैयार कर उपयुक्त स्थानों पर डाले या पौधारोपण में भागीदारी करे, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का हरित क्षेत्र और अधिक समृद्ध होगा। सीड बॉल अभियान प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी निभाने का एक सरल, सुलभ और प्रभावी माध्यम है।

जनजातीय बालिकाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम बनेगा शबरी वाचनालय -राज्यपाल डेका

जनजातीय बालिकाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम बनेगा शबरी वाचनालय -राज्यपाल डेका

 रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने मंगलवार को वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ द्वारा जनजातीय बालिकाओं में अध्ययन, ज्ञानार्जन एवं पठन-पाठन की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्थापित शबरी वाचनालय का उदघाटन किया। वाचनालय की स्थापना के लिए राज्यपाल द्वारा अपने स्वेच्छानुदान मद से आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि शबरी वाचनालय एक दूरदर्शी पहल है, जो जनजातीय बालिकाओं के लिए अध्ययन, चिंतन, आत्मविकास एवं व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त केंद्र बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां अध्ययन करने वाली बालिकाएं ज्ञान एवं शिक्षा के बल पर प्रतियोगी परीक्षाओं सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करेंगी। उनकी उपलब्धियां न केवल उनके परिवार, बल्कि समाज और राष्ट्र का गौरव भी बढ़ाएंगी। उन्होंने कहा कि शबरी कन्या आश्रम वर्षों से जनजातीय बालिकाओं को केवल आश्रय और शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता तथा राष्ट्रसेवा की भावना भी प्रदान कर रहा है। इसी का परिणाम है कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाली अनेक बालिकाएं आज शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन तथा समाज सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संपदा एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण राज्य है। यहां की संस्कृति का संबंध रामायण काल की परंपराओं से है। उन्होंने कहा कि असम और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं में अनेक समानताएं हैं तथा दोनों राज्यों की सांस्कृतिक धारा भगवान श्रीराम से जुड़ी हुई है। ऐसे गौरवशाली सांस्कृतिक परिवेश का हिस्सा होना हम सभी के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय इंटरनेट और तकनीक का युग है। तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच जीवन मूल्यों को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। परिवार और समाज के प्रति संवेदनशीलता, संतोष और सकारात्मक सोच ही जीवन को सार्थक बनाती है। संतुष्ट व्यक्ति ही वास्तविक रूप से प्रसन्न रह सकता है। जीवन ईश्वर का अमूल्य उपहार है, इसलिए इसके प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करते हुए समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात : 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर की तैयारियों पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात : 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर की तैयारियों पर हुई चर्चा

 एमएसएमई क्षेत्र को मिलेगा नया संबल, निवेश और रोजगार को मिलेगी गति - मुख्यमंत्री साय

रायपुर 22 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने आगामी 18, 19 एवं 20 सितंबर को रायपुर में आयोजित होने वाले 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर (आईआईएफ) की तैयारियों, उद्देश्यों एवं आयोजन की विस्तृत रूपरेखा से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

मुख्यमंत्री  साय ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे राष्ट्रीय स्तर के औद्योगिक आयोजन प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को नई दिशा देने के साथ-साथ निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन को भी गति प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योग-अनुकूल वातावरण तैयार करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा उद्यमियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। रायपुर में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर राष्ट्रीय औद्योगिक समागम का आयोजन छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि लघु उद्योग भारती लघु उद्यमियों का देश का सबसे बड़ा संगठन है, जो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को सशक्त बनाने तथा उद्योगों के बीच व्यवसायिक सहयोग (बी2बी) को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। रायपुर में आयोजित होने वाला 14वां इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर देशभर के उद्यमियों, निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों एवं तकनीकी संस्थानों को एक साझा मंच उपलब्ध कराएगा, जहां आधुनिक तकनीक, निवेश, विपणन, उद्योग-व्यापार सहयोग और व्यापार विस्तार के नए अवसर विकसित होंगे।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ के एमएसएमई क्षेत्र को नई ऊर्जा देने के साथ प्रदेश को राष्ट्रीय औद्योगिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस आयोजन से स्थानीय उद्यमियों को राष्ट्रीय बाजार से जुड़ने, नई तकनीकों को अपनाने और व्यापार विस्तार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

इस अवसर पर लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री  प्रकाश चंद्र गुप्त, संयुक्त महासचिव नरेश पारख, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समीर, प्रांत अध्यक्ष सी. पी. दुबे,  पुरुषोत्तम पटेल,  अनिल बाकलीवाल, तूलिका पांडे एवं  प्रांजल सिंह ठाकुर उपस्थित थे।

BIG ब्रेकिंग: साय कैबिनेट ने लिये अहम फैसले, पढ़िए मंत्रिपरिषद की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय…

BIG ब्रेकिंग: साय कैबिनेट ने लिये अहम फैसले, पढ़िए मंत्रिपरिषद की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय…

 रायपुर। सीएम विष्णुदेव की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में चल रही मंत्रिपरिषद की बैठक समाप्त हो गई है। इस मीटिंग में महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगाईं गई। नीचे पढ़ें आज लिए गए फैसले…

1. मंत्रिपरिषद् की बैठक में प्रदेश के किसानों को खरीफ एवं रबी मौसम में उर्वरकों की समयबद्ध एवं सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उर्वरक आपूर्ति, वितरण एवं प्रबंधन से संबंधित विषयों पर सुझाव, अनुशंसा एवं मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु मंत्री-मंडलीय उप समिति के गठन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया है।

इस उप समिति में उप मुख्यमंत्री, लोक निर्माण, लोक  स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग को अध्यक्ष तथा कैबिनेट मंत्री, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग, कैबिनेट मंत्री, सहकारिता विभाग एवं कैबिनेट मंत्री, वित्त विभाग को सदस्य के रूप में नामित किया गया है।

कृषि उत्पादन आयुक्त उप समिति के संयोजक होंगे। उप समिति आवश्यकतानुसार संबंधित विभागों के अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों एवं अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर सकेगी तथा उर्वरकों की उपलब्धता एवं आपूर्ति से संबंधित विषयों पर राज्य शासन को सुझाव देगी।

2. मंत्रिपरिषद् की बैठक में अग्निवीर सैनिकों के पुनर्वास एवं सम्मानजनक रोजगार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मंत्रिपरिषद् ने राज्य की तृतीय श्रेणी के पदों – पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक तथा जेल विभाग में प्रहरी की सीधी भर्ती में अग्निवीर सैनिकों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने हेतु छत्तीसगढ़ के अग्निवीर सैनिकों के लिए राज्य की सिविल सेवाओं में तृतीय श्रेणी के पदों में रिक्तियों का आरक्षण नियम-2026 बनाए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।

यह निर्णय मुख्यमंत्री जी द्वारा 26 जुलाई 2024 को विधानसभा में की गई घोषणा के अनुपालन में लिया गया है। इस आरक्षण का लाभ उन अग्निवीर सैनिकों को मिलेगा, जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों में चार वर्ष की सेवा पूर्ण करने के बाद वैध सेवा प्रमाण-पत्र के साथ सेवामुक्ति प्राप्त की हो।

इस निर्णय से अग्निवीर सैनिकों को राज्य की सेवाओं में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे तथा उनके अनुभव और अनुशासन का लाभ पुलिस, वन एवं जेल प्रशासन को मिलेगा।

जूनियर डॉक्टर्स की 17 सूत्रीय मांगों पर स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा, UG बॉन्ड खत्म और PG बॉन्ड घटाने का निर्णय

जूनियर डॉक्टर्स की 17 सूत्रीय मांगों पर स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा, UG बॉन्ड खत्म और PG बॉन्ड घटाने का निर्णय

 रायपुर।जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को JDA रायपुर के अध्यक्ष डॉ. पीयूष पी. श्रीवास्तव के नेतृत्व में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मुलाकात की। इस दौरान चिकित्सकों, पीजी रेजिडेंट्स, सीनियर रेजिडेंट्स और एमबीबीएस इंटर्न्स से जुड़ी 17 सूत्रीय मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि जिन विषयों पर तत्काल निर्णय संभव है, उन पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले शैक्षणिक सत्र से UG Bond समाप्त करने, PG Bond की अवधि 2 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष करने और शासकीय मेडिकल कॉलेजों में MBBS एवं PG प्रवेश के समय Property Mortgage (संपत्ति बंधक) की अनिवार्यता खत्म करने की दिशा में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री ने एमबीबीएस इंटर्न्स, पीजी रेजिडेंट्स और सीनियर रेजिडेंट्स के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर भी सकारात्मक रुख दिखाया और इस संबंध में जल्द आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

JDA छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने चिकित्सकों और मेडिकल विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और समाधान के प्रति सकारात्मक पहल की है। संगठन ने उम्मीद जताई कि इन मांगों पर जल्द निर्णय लेकर प्रदेश के डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।

JDA ने यह भी स्पष्ट किया कि वह चिकित्सकों और मेडिकल विद्यार्थियों के अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और 17 सूत्रीय सभी मांगों के पूर्ण समाधान तक अपने प्रयास जारी रखेगा।

राज्यपाल रमेन डेका से महिला आयोग की नव नियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने भेंट की….

राज्यपाल रमेन डेका से महिला आयोग की नव नियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने भेंट की….

 रायपुर: राज्यपाल रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में राज्य महिला आयोग की नव नियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने सौजन्य भेंट की।

लंबित परीक्षा शुल्क रिफंड वाले अभ्यर्थियों के लिए सीजी व्यापमं ने जारी किया नया ऑनलाइन लिंक

लंबित परीक्षा शुल्क रिफंड वाले अभ्यर्थियों के लिए सीजी व्यापमं ने जारी किया नया ऑनलाइन लिंक

 रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा शुल्क रिफंड का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। जिन उम्मीदवारों की फीस तकनीकी कारणों से वापस नहीं हो सकी थी, उनके लिए प्रोफाइल में नया ऑनलाइन लिंक उपलब्ध कराया गया है। इस लिंक के माध्यम से अभ्यर्थी अपने बैंक खाते की सही जानकारी अपडेट कर सकते हैं। बैंक विवरण का सत्यापन होने के बाद लंबित रिफंड राशि संबंधित खाते में भेजी जाएगी। मंडल ने अभ्यर्थियों से जल्द से जल्द अपनी जानकारी अपडेट करने की अपील की है।

मंडल की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, परीक्षा शुल्क ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के माध्यम से लिया जाता है और रिफंड भी उसी प्रक्रिया से किया जाता है। हालांकि, कई अभ्यर्थियों के मामलों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की समय-सीमा समाप्त होने या बैंक संबंधी तकनीकी कारणों के चलते राशि उनके खातों तक नहीं पहुंच पाई। इसी समस्या को दूर करने के लिए अभ्यर्थियों के प्रोफाइल में बैंक विवरण अपडेट करने का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। जिन अभ्यर्थियों को अभी तक आवेदन शुल्क वापस नहीं मिला है, वे सीजी व्यापम की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन कर अपने प्रोफाइल में उपलब्ध नए लिंक का उपयोग कर सकते हैं। यहां उन्हें अपना बैंक खाता नंबर, आईएफएससी कोड और अन्य आवश्यक जानकारियां सही-सही दर्ज करनी होंगी। मंडल का कहना है कि बैंक विवरण का सत्यापन होने के बाद संबंधित खाते में रिफंड राशि भेज दी जाएगी।

सीजी व्यापम ने अभ्यर्थियों को यह भी सलाह दी है कि यदि उन्होंने आवेदन किसी साइबर कैफे के माध्यम से किया है और भुगतान कैफे संचालक के बैंक खाते या यूपीआई से किया गया है, तो रिफंड की राशि भी उसी खाते में ट्रांसफर हो सकती है। ऐसे में अभ्यर्थियों को अपने बैंक विवरण अपडेट करते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जमीनी स्तर पर तंत्र को करें मजबूत, हर दिन आंगनबाड़ी केंद्रों का करें निरीक्षण : मंत्री राजवाड़े

कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जमीनी स्तर पर तंत्र को करें मजबूत, हर दिन आंगनबाड़ी केंद्रों का करें निरीक्षण : मंत्री राजवाड़े

 00 हर आंगनबाड़ी केंद्रों में लगाएं मुनगा और करें पोषण वाटिका का विकास अपने बच्चों के समान करें, आंगनबाड़ी में बच्चों का पालन-पोषण

00 बाल विवाह एक अभिशाप, बाल विवाह रोककर बचाएं बच्चों का भविष्य

00 मंत्री राजवाड़े ने ली विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक
रायपुर।
महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज जिला सूरजपुर में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा समाज कल्याण विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति का आकलन किया। बैठक में सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील, जिला पंचायत सीईओ  विजेंद्र सिंह पाटले सहित दोनों विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

बैठक में मंत्री राजवाड़े ने विभाग की स्थापना संबंधी जानकारी लेते हुए रिक्त पदों की समीक्षा की तथा सभी परियोजनाओं में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के रिक्त पदों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की अधोसंरचना की समीक्षा करते हुए भवनविहीन, किराए के भवनों में संचालित, मरम्मत योग्य, निष्प्रयोज्य योग्य जर्जर भवनों की जानकारी ली तथा निर्माणाधीन भवनों की प्रगति एवं भवन मरम्मत के लिए जारी राशि के व्यय की समीक्षा करते हुए सभी मरम्मत कार्य शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए।मंत्री ने मीठा शक्ति आहार, नमकीन दलिया निर्माण, रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री के वितरण तथा उसकी गुणवत्ता की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नियमित रूप से फील्ड निरीक्षण कर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन, पोषण ट्रैकर में नियमित प्रविष्टि तथा बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कार्य कर जिले को कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य प्राप्त करें।

उन्होंने कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत कुपोषित बच्चों एवं एनीमिक महिलाओं को लाभान्वित करने की प्रगति, लक्षित हितग्राहियों के पर्यवेक्षण तथा चयनित स्व-सहायता समूहों की भूमिका की समीक्षा की। कुपोषण की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने तथा एनीमिक महिलाओं की समय पर पहचान एवं उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, सखी वन स्टॉप सेंटर तथा नवा बिहान योजना की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने सभी परियोजनाओं में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए।
जिले में बाल विवाह की स्थिति की समीक्षा करते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बाल विवाह रोकने के लिए प्रभावी रणनीति अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरपंचों एवं सचिवों को विशेष प्रशिक्षण देकर विवाह तय होने की प्रारंभिक अवस्था में ही बाल विवाह रोकने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही किशोर-किशोरियों को कम उम्र में विवाह के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाए।

उन्होंने प्रत्येक घर में मुनगा का पौधा लगाने तथा प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में मुनगा, हरी सब्जियों एवं पोषण वाटिका विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि मुनगा की पौष्टिकता का उपयोग कर कुपोषण को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकता है। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छता बनाए रखने, शौचालयों की नियमित सफाई, बच्चों को स्वच्छ वस्त्र पहनाने तथा अभिभावकों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि व्यवस्थाओं में सुधार के लिए जमीनी स्तर तक तंत्र को पूर्ण रूप से सक्रिय करना बेहद आवश्यक है। अधिकारी एवं कर्मचारी नियमित रूप से फील्ड में उतरकर कार्य करेंगे, तभी कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक अधिकारी प्रतिदिन कम से कम पांच आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करें तथा यह सुनिश्चित करें कि सभी केंद्र नियमित रूप से संचालित हों, वहां पोषण वाटिका विकसित हो और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा हो।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों का उद्देश्य बच्चों का समग्र विकास और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है। बच्चों का पालन-पोषण अपने बच्चों की तरह करते हुए सभी अधिकारी एवं कर्मचारी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त सूरजपुर के निर्माण का आधार बनेगा, जिससे मजबूत और स्वस्थ परिवारों का निर्माण होगा।
इसके अलावा समाज कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री राजवाड़े ने सामाजिक सहायता कार्यक्रम, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, सुखद सहारा योजना, दिव्यांग पेंशन योजना, पेंशन हितग्राहियों के भौतिक सत्यापन, दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरण, दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना एवं दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली तथा योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार विक्रम यादव के उपचार के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार विक्रम यादव के उपचार के दिए निर्देश

 0-संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परिजनों से की चर्चा, बेहतर इलाज और हरसंभव सहायता का दिया भरोसा

0-मुख्यमंत्री बोले - प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर हैं  विक्रम यादव, उपचार में नहीं आने दी जाएगी कोई कमी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश के बाद पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक कलाकार एवं बांस वादक  विक्रम यादव के  परिजनों से दूरभाष पर चर्चा कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके समुचित उपचार तथा आवश्यक सहायता के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।  

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने राजनांदगांव के कलेक्टर तथा मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव के वरिष्ठ चिकित्सकों से भी चर्चा की। उन्होंने चिकित्सकों को  विक्रम यादव के उपचार पर विशेष ध्यान देने, आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि यदि उपचार के लिए अतिरिक्त चिकित्सा सुविधा अथवा अन्य व्यवस्थाओं की आवश्यकता होगी तो राज्य शासन द्वारा हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि  विक्रम यादव केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर हैं। उन्होंने अपनी बांसुरी और लोक कला के माध्यम से भारत की समृद्ध लोक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया है। ऐसे कलाकार प्रदेश का गौरव हैं और उनके सम्मान, स्वास्थ्य तथा सुरक्षा की जिम्मेदारी शासन और समाज दोनों की है। मुख्यमंत्री ने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए परिवार को आश्वस्त किया कि इस कठिन समय में राज्य सरकार हरसंभव सहयोग के साथ उनके साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि उनकी सरकार लोक कलाकारों के सम्मान, संरक्षण और कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। कलाकारों ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोक परंपराओं और विरासत को जीवंत बनाए रखने में समर्पित किया है। आवश्यकता की घड़ी में उनके साथ खड़ा होना सरकार का नैतिक दायित्व है।

उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट बांस वादन शैली से पहचान बनाने वाले  विक्रम यादव लंबे समय से अस्वस्थ हैं और वर्तमान में उनका उपचार राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर राज्य सरकार ने उनके स्वास्थ्य की स्थिति का तत्काल संज्ञान लेते हुए बेहतर उपचार और आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने की पहल की है।  

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के इस गौरवशाली लोक कलाकार के स्वास्थ्य और सम्मान से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा उनके उपचार के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

यूपीएससी 2025 के छत्तीसगढ़ टॉपरों ने वित्त मंत्री ओपी चौधरी से की सौजन्य मुलाकात

यूपीएससी 2025 के छत्तीसगढ़ टॉपरों ने वित्त मंत्री ओपी चौधरी से की सौजन्य मुलाकात

 रायपुर में हुई आत्मीय भेंट, वित्त मंत्री ने दी बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं

रायपुर-- संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा 2025 में उत्कृष्ट सफलता हासिल करने वाले छत्तीसगढ़ के टॉपर अभ्यर्थियों ने आज रायपुर में वित्त मंत्री  ओपी चौधरी से सौजन्य भेंट की। इस दौरान वित्त मंत्री ने सभी सफल अभ्यर्थियों को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता कठिन परिश्रम, अनुशासन, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिणाम होती है। छत्तीसगढ़ के इन प्रतिभाशाली युवाओं ने अपनी मेहनत और लगन से न केवल अपने परिवार, शिक्षकों और मार्गदर्शकों का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि इन युवाओं की सफलता प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है। यह उपलब्धि बताती है कि समर्पण और निरंतर प्रयास के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

वित्त मंत्री ने सभी सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे अपने ज्ञान, क्षमता और संवेदनशीलता से देश एवं समाज की सेवा करते हुए छत्तीसगढ़ का नाम और अधिक गौरवान्वित करेंगे।