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मंत्री राजवाड़े का बड़ा प्रशासनिक निर्णय, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग में सेवानिवृत्ति प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण के सख्त निर्देश

मंत्री राजवाड़े का बड़ा प्रशासनिक निर्णय, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग में सेवानिवृत्ति प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण के सख्त निर्देश

 00 सेवानिवृत्ति के दिन ही मिले सभी स्वत्व देयक और सम्मानजनक विदाई - राजवाड़े

रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभागीय प्रशासन में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए सेवानिवृत्ति प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण के सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि शासन की लंबी सेवा देने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी सेवानिवृत्ति के समय किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कठिनाई का सामना न करें, यह विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मंत्री राजवाड़े ने प्रमुख सचिव, संचालक समाज कल्याण तथा संचालक महिला एवं बाल विकास को निर्देशित किया है कि विभाग से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रकरणों की अग्रिम तैयारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति आदेश, पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और अन्य सभी देय स्वत्व देयकों का निराकरण सेवानिवृत्ति तिथि से पूर्व पूर्ण कर लिया जाए, ताकि संबंधित कर्मचारी को उसके सेवानिवृत्ति दिवस पर ही सभी आदेश और भुगतान उपलब्ध हो सकें। राजवाड़े ने कहा कि प्राय: यह देखा गया है कि कई बार न मांग न जांच प्रमाण पत्र, सेवा सत्यापन तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया में विलंब होने से कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है। कुछ मामलों में प्रशासनिक अनुमोदन हेतु प्रकरण देर से प्रस्तुत होने के कारण भुगतान और अन्य लाभ प्रभावित होते हैं। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी स्तरों पर समयबद्ध कार्यसंस्कृति अपनाने के निर्देश दिए।

मंत्री ने शासन स्तर पर, विभागाध्यक्ष स्तर और अधीनस्थ कार्यालयों में सेवानिवृत्ति संबंधी कार्यों के लिए चेकलिस्ट आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली लागू करने को कहा है। प्रत्येक कार्यालय में आगामी सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवकों की सूची तैयार कर उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि कोई भी प्रकरण लंबित न रहे। श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सेवानिवृत्ति केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कर्मचारी के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसलिए विभागीय अधिकारियों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी कर्मचारियों को सम्मानजनक विदाई के साथ उनके सभी वैधानिक स्वत्व अधिकार समय पर प्राप्त हों।

मुख्यमंत्री साय ने हाथ में तिरंगा थामकर किया भव्य तिरंगा यात्रा का नेतृत्व, कहा - 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में बांधता है तिरंगा

मुख्यमंत्री साय ने हाथ में तिरंगा थामकर किया भव्य तिरंगा यात्रा का नेतृत्व, कहा - 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में बांधता है तिरंगा

 00 हजारों कदमों के साथ गूंजा राष्ट्र सर्वोपरि का संकल्प

00 तिरंगे के रंग में रंगा रायपुर, राष्ट्रध्वज के तले एकजुट हुआ जनसैलाब

00 छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों की शौर्यगाथा का किया स्मरण, शहीद वीर नारायण सिंह और गुण्डाधुर को किया नमन
रायपुर।
हाथों में लहराता तिरंगा, भारत माता के जयघोष, देशभक्ति के गीत और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत हजारों नागरिकों का उत्साह - राजधानी रायपुर आज पूरी तरह तिरंगे के रंग में रंगी नजर आई। बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक निकली भव्य तिरंगा यात्रा में हजारों नागरिक राष्ट्रध्वज के तले एकजुट हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं हाथ में तिरंगा थामकर जनसैलाब के साथ कदम से कदम मिलाया। यात्रा में युवाओं, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। स्कूली विद्यार्थियों द्वारा हाथों में थामा गया लगभग एक किलोमीटर लंबा तिरंगा पूरे आयोजन का विशेष आकर्षण रहा।तिरंगा यात्रा के शुभारंभ से लेकर समापन तक राजधानी में राष्ट्रभक्ति का अद्भुत वातावरण दिखाई दिया। हजारों हाथों में एक साथ लहराते राष्ट्रीय ध्वज और भारत माता के जयघोष ने पूरे यात्रा मार्ग को राष्ट्रप्रेम की भावना से भर दिया। मुख्यमंत्री साय भी नागरिकों के बीच तिरंगा लेकर आगे बढ़े। इस दौरान नागरिकों में मुख्यमंत्री के साथ चलने और राष्ट्रध्वज के सम्मान में आयोजित इस यात्रा का हिस्सा बनने को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि तिरंगा हमारी आन, बान और शान है। यह केवल हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि भारत की एकता, अखंडता, स्वाभिमान और असंख्य बलिदानों का प्रतीक है। तिरंगे में देश के 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में बांधने की अद्भुत शक्ति है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और क्षेत्रों की विविधता के बावजूद तिरंगा हम सभी को भारतीय होने के एक साझा गौरव से जोड़ता है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तिरंगा लहराता है तो प्रत्येक भारतीय के मन में स्वाभाविक रूप से राष्ट्र के प्रति गौरव और सम्मान का भाव जागृत होता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष, स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और एक सशक्त राष्ट्र के रूप में भारत की यात्रा का साक्षी है। तिरंगा हमें अपने अधिकारों के साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का भी स्मरण कराता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर हर घर तिरंगा अभियान आज एक व्यापक जनअभियान का स्वरूप ले चुका है। इस अभियान ने तिरंगे को घर-घर तक पहुंचाने के साथ राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत किया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में पूरे सम्मान और गौरव के साथ तिरंगा फहराने तथा तिरंगा यात्राओं से जुड़कर राष्ट्रीय एकता के इस उत्सव को और भव्य बनाने का आह्वान किया।

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मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत में गर्व और सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं, वह स्वतंत्रता हमें सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई है। इसके पीछे लाखों देशवासियों का संघर्ष, त्याग, तपस्या और बलिदान जुड़ा हुआ है। देश के असंख्य वीर सपूतों ने मातृभूमि को पराधीनता की बेडिय़ों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में देश के हर क्षेत्र और समाज के लोगों ने अपना योगदान दिया। किसी ने अपना जीवन समर्पित किया, किसी ने अपना घर-परिवार छोड़ा और अनेक वीरों ने मातृभूमि के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी। इन बलिदानों के कारण ही आज हम स्वतंत्रता और लोकतंत्र के गौरव का अनुभव कर पा रहे हैं।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की नई पीढ़ी स्वतंत्र भारत में जन्मी और आगे बढ़ रही है। इसलिए उसे यह जानना आवश्यक है कि आजादी कितनी अनमोल है और इसके लिए हमारे पूर्वजों ने कितना बड़ा संघर्ष किया। स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवगाथाओं से परिचित होकर ही नई पीढ़ी स्वतंत्रता के वास्तविक मूल्य को समझ सकेगी। उन्होंने कहा कि तिरंगा हमें उन सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों के बलिदान का स्मरण कराता है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। स्वतंत्रता की इस गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इससे युवाओं के भीतर राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, समर्पण, सेवा और राष्ट्र प्रथम का भाव और अधिक मजबूत होगा।

छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों ने स्वतंत्रता संग्राम में लिखी शौर्यगाथा
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों का स्मरण करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती भी वीरों, जननायकों और बलिदानियों की धरती रही है। देश की स्वतंत्रता के लिए हुए संघर्ष में छत्तीसगढ़ के अनेक वीर सपूतों ने अदम्य साहस और स्वाभिमान का परिचय दिया। मुख्यमंत्री ने शहीद वीर नारायण सिंह का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में गरीबों और जरूरतमंदों के हित में आवाज उठाई और अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया। उनका जीवन हमें बताता है कि राष्ट्रप्रेम के साथ जनसेवा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस भी सच्ची देशभक्ति का स्वरूप है।

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मुख्यमंत्री साय ने बस्तर के महान जननायक गुण्डाधुर की शौर्यगाथा को याद करते हुए कहा कि उन्होंने विदेशी शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज को संगठित कर संघर्ष का बिगुल फूंका। बस्तर की धरती ने सदैव अपने स्वाभिमान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। गुण्डाधुर का साहस और नेतृत्व आज भी छत्तीसगढ़वासियों के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, गुण्डाधुर सहित छत्तीसगढ़ के अनेक ज्ञात-अज्ञात सेनानियों का संघर्ष हमारे गौरवशाली इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। इन महानायकों की शौर्यगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उनके आदर्शों से युवाओं को परिचित कराना हमारा दायित्व है।
बदलते बस्तर में शांति और विकास के साथ लहराएगा तिरंगा
मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर आज हिंसा और भय के लंबे दौर को पीछे छोड़कर शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। डबल इंजन सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और क्षेत्रवासियों के सहयोग से नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई निर्णायक दौर में पहुंची है। उन्होंने कहा कि बस्तर के जिन क्षेत्रों में कभी नक्सली हिंसा के कारण भय का वातावरण था, वहां अब विकास की नई रोशनी पहुंच रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ लोगों का शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। बस्तर के लोगों की आकांक्षाओं और सपनों को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते बस्तर की पहचान अब हिंसा से नहीं, बल्कि शांति, विकास, विश्वास और नई संभावनाओं से बन रही है। इस वर्ष बस्तर में भी स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा तथा तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी। बस्तर के गांवों और दूरस्थ अंचलों में भी तिरंगा पूरे गौरव के साथ लहराएगा।

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एक किलोमीटर लंबे तिरंगे के साथ आगे बढ़ी नई पीढ़ी
तिरंगा यात्रा में स्कूली छात्र-छात्राओं का उत्साह विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विद्यार्थियों ने लगभग एक किलोमीटर लंबे तिरंगे को अपने हाथों में थामकर अनुशासित पंक्तियों में यात्रा की। सड़क पर दूर तक फैला विशाल तिरंगा राजधानी में राष्ट्रीय एकता और गौरव की अनुपम छटा बिखेरता दिखाई दिया। यात्रा में युवाओं, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
पुष्पवर्षा से स्वागत, भारत माता के जयघोष से गूंजा रायपुर
तिरंगा यात्रा को लेकर राजधानी के नागरिकों में भी विशेष उत्साह दिखाई दिया। यात्रा के मार्ग में जगह-जगह लोगों ने इसका आत्मीय स्वागत किया। कई स्थानों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा में शामिल लोगों का अभिनंदन किया। लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों से तिरंगा लहराकर राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त करते नजर आए। यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इसके साथ नागरिकों का उत्साह भी बढ़ता गया। देशभक्ति के गीतों और भारत माता की जय, वंदे मातरम् तथा झंडा ऊंचा रहे हमारा के उद्घोष से पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो गया। युवाओं के हाथों में लहराते तिरंगे और स्कूली बच्चों के उत्साह ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।
बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक चारों ओर तिरंगा ही तिरंगा दिखाई दे रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरी राजधानी ने तीन रंगों की चादर ओढ़ ली हो। हजारों हाथों में एक साथ लहराते तिरंगे और राष्ट्रभक्ति से भरे जयघोष के बीच पूरा रायपुर एक स्वर में यही संदेश देता नजर आया - भारत एक है, भारत श्रेष्ठ है और राष्ट्र सर्वोपरि है।

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तिरंगा स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक : उप मुख्यमंत्री साव
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि देश स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व मनाने जा रहा है और प्रधानमंत्री  नरेंद्र हर घर तिरंगा तथा तिरंगा यात्रा के माध्यम से राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया है। यह उन स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनायकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिनके त्याग और बलिदान के कारण देश को स्वतंत्रता मिली। उन्होंने कहा कि रायपुर के कोने-कोने से बड़ी संख्या में युवा तिरंगा यात्रा में शामिल होने पहुंचे हैं। यह उत्साह बताता है कि देश की नई पीढ़ी के हृदय में राष्ट्रप्रेम की भावना कितनी मजबूत है। जिस तिरंगे ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों को एकजुट किया था, आज उसी तिरंगे के सम्मान में पूरा रायपुर एक साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।

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तिरंगा यात्रा राष्ट्रभक्ति की सामूहिक अभिव्यक्ति : उप मुख्यमंत्री शर्मा
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि तिरंगा हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, गौरव और एकता का प्रतीक है। तिरंगा यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि देश के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की सामूहिक अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के हर घर तिरंगा अभियान ने देशभर में राष्ट्रीय गौरव और राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा प्रदान की है। जब प्रत्येक घर पर तिरंगा लहराता है तो वह केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति प्रत्येक नागरिक के सम्मान, गौरव और संकल्प की अभिव्यक्ति बन जाता है। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराने और हर घर तिरंगा अभियान से उत्साहपूर्वक जुडऩे का आह्वान किया।
तिरंगा यात्रा में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, सांसद रूप कुमारी चौधरी, विधायक राजेश मूणत, सुनील सोनी, अनुज शर्मा, इंद्र कुमार साहू, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, महापौर मीनल चौबे, निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षगण सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पूर्व सैनिक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

विशेष लेख: विष्णु सरकार ने बढ़ाया किसानों का मान, खेती-किसानी को मिला नया संबल

विशेष लेख: विष्णु सरकार ने बढ़ाया किसानों का मान, खेती-किसानी को मिला नया संबल

 रायपुर। प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। गांव, गरीब और किसान सरकार की प्राथमिकताओं में हैं। देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है और छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है। धान के कटोरे के रूप में पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान किसानों के हित में कई नीतिगत फैसले लिए हैं, जिससे खेती-किसानी को नया संबल मिला है।

बीते खरीफ विपणन वर्ष में किसानों से समर्थन मूल्य पर 141.05 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। सरकार का दावा है कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में भी लगातार काम किया जा रहा है।

किसानों के हित में लिए गए फैसले
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की। सरकार के अनुसार, इससे किसानों की आय को मजबूती मिली और खेती-किसानी के प्रति उनका भरोसा बढ़ा।इसके अलावा किसानों के खाते में पूर्ववर्ती सरकार के पिछले दो वर्षों के बकाया धान बोनस की राशि 3716.38 करोड़ रुपये अंतरित की गई। सरकार का मानना है कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से प्रदेश के व्यापार और उद्योग को भी गति मिलेगी।मुख्यमंत्री का कहना है कि भारत गांवों में बसता है और जब किसान खुशहाल होंगे, तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

हरेली: छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और आस्था का पर्व
छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार का विशेष महत्व है। हरेली को प्रदेश का पहला प्रमुख त्यौहार माना जाता है। सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व हरियाली, कृषि, पशुधन और प्रकृति के प्रति आस्था से जुड़ा है।हरेली का अर्थ ही हरियाली से जुड़ा है। वर्षा ऋतु में जब धरती हरे रंग की चादर ओढ़ लेती है और चारों ओर हरियाली दिखाई देती है, तब यह पर्व किसानों के लिए विशेष उत्साह लेकर आता है। हरेली आते-आते खरीफ फसलों की बुआई और खेती-किसानी के शुरुआती कार्य लगभग पूरे हो चुके होते हैं।इस दिन किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं। हल, नांगर, कुदाली, फावड़ा, गैंती, टंगिया, बसुला, दतारी, सब्बल और अन्य कृषि औजारों को साफ कर पूजा के लिए सजाया जाता है।

पशुधन की पूजा और औषधि खिलाने की परंपरा
हरेली के दिन किसान अपने पशुधन को भी विशेष महत्व देते हैं। सुबह से ही किसान परिवार गाय, बैल और बछड़ों को नहलाते हैं। इसके बाद उनकी पूजा की जाती है।पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए इस दिन औषधि युक्त आटे की लोंदी खिलाने की परंपरा भी रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यादव समाज के लोग वनांचल से कंद-मूल और वनौषधियां लाकर किसानों को उपलब्ध कराते हैं।गांव के सहाड़ादेव या ठाकुरदेव के पास वन से लाई गई जड़ी-बूटियों को उबालकर किसानों को देने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है। इसके बदले किसान चावल, दाल आदि देकर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

घर-घर बनता है गुड़ का चीला
हरेली के दिन घरों में विशेष छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाए जाते हैं। माताएं गुड़ का चीला, गुलगुल भजिया सहित कई पारंपरिक पकवान तैयार करती हैं। कृषि उपकरणों की पूजा के बाद नारियल और गुड़ के चीले का भोग लगाया जाता है।गांवों में ठाकुरदेव की पूजा कर नारियल अर्पित किया जाता है। परिवार अपने आराध्य देवी-देवताओं की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

हरेली और गेड़ी का अटूट रिश्ता
हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते हैं।गेड़ी मुख्य रूप से बांस से बनाई जाती है। दो लंबे बांसों में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है। बांस के टुकड़ों से पैर रखने के लिए पउआ तैयार किया जाता है, जिसे मुख्य बांसों पर बांधा जाता है।गेड़ी पर चलते समय निकलने वाली खास आवाज वातावरण में उत्साह और उमंग भर देती है। पहले बारिश के मौसम में गांव की गलियों में कीचड़ हुआ करता था, ऐसे में गेड़ी पर चलकर गलियों का भ्रमण करने का अलग ही आनंद होता था। अब गांवों में सड़कों के पक्कीकरण और कांक्रीटीकरण के कारण कीचड़ की समस्या काफी कम हुई है, लेकिन गेड़ी की परंपरा आज भी कायम है।

लोक परंपराओं से जुड़ा है हरेली का उत्सव
हरेली के दिन गांवों में पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े राऊत, लोहार और बैगा जैसे पारंपरिक समुदायों की भी भूमिका रहती है। कई स्थानों पर घरों के दरवाजे पर नीम की डाली लगाई जाती है। वहीं अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए लोहार द्वारा चौखट में कील लगाने की परंपरा भी रही है।ग्रामीण क्षेत्रों में इन परंपराओं का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व आज भी बना हुआ है। ये परंपराएं छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की गहरी जड़ों को दर्शाती हैं।

खेल-कूद और उत्सव का माहौल
हरेली केवल पूजा और कृषि से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में उत्सव और मनोरंजन का अवसर भी लेकर आता है। शाम के समय बच्चे और युवा गांव के खेल मैदानों में कबड्डी सहित विभिन्न खेलों में हिस्सा लेते हैं।नारियल फेंकने जैसे पारंपरिक खेल भी खेले जाते हैं। बहू-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो और फुगड़ी जैसे पारंपरिक खेलों का आनंद लेती हैं।

सामाजिक समरसता का प्रतीक है हरेली
हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। यह केवल धार्मिक या कृषि पर्व नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ जोड़ने का माध्यम भी है।इस दिन गांव के लोग मिल-जुलकर पूजा और विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के साथ प्रकृति, कृषि और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

एक ओर सरकार की किसान हितैषी योजनाएं खेती-किसानी को आर्थिक मजबूती देने का प्रयास कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर हरेली जैसे लोकपर्व छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए हुए हैं। यही मेल प्रदेश के गांवों, किसानों और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की पहचान को और मजबूत करता है।

दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा, लोक संस्कृति ने बांधा समां

दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा, लोक संस्कृति ने बांधा समां

 o जब दिल्ली के मंच पर जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा

o इंडिया हैबिटेट सेंटर में छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का रंग, पंडवानी ने बांधा समां

नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ की पंडवानी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच इंडिया हैबिटेट सेंटर में अपनी पूरी जीवंतता के साथ प्रस्तुत हुई। महान पंडवानी कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को समर्पित विशेष प्रस्तुति के साथ आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ। पंडवानी की इस प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा।

छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत पंडवानी
इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टाइन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में पंडवानी कलाकार प्रभा यादव ने पारंपरिक संगीतकारों के साथ प्रस्तुति दी। महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी में कथा, गायन, संवाद, लय और अभिनय का ऐसा संयोजन देखने को मिला, जिसने छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत और व्यापकता को सामने रखा।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधियों के साथ प्रदेश की कला और संस्कृति से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व भी उपस्थित रहे। वरिष्ठ पत्रकार एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्ण दास, धरसींवा विधायक एवं प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार अनुज शर्मा, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव तथा सांस्कृतिक कार्यकर्ता ने कार्यक्रम में भाग लिया। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश और अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा भी इस अवसर पर मौजूद रहीं।

तीजन बाई के योगदान को याद किया
इस प्रस्तुति का केंद्र तीजन बाई की कला यात्रा और पंडवानी को मिली राष्ट्रीय पहचान रही। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा से निकली पंडवानी को देश और दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाने में तीजन बाई का योगदान असाधारण रहा। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली से पंडवानी को नई पहचान दी और इसे भारतीय लोक प्रदर्शन कलाओं की प्रमुख विधाओं में स्थापित किया।

सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम पंडवानी
तीजन बाई को समर्पित प्रस्तुति के जरिए उनके कला जीवन और छत्तीसगढ़ की उस परंपरा को याद किया गया, जिसमें कथावाचन केवल मनोरंजन नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम रहा है। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश ने कहा कि, भारत की लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें पीढ़ियों से चली आ रही कहानियां, परंपराएं और मूल्य सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि, लोक कलाकारों और परंपराओं को राष्ट्रीय राजधानी में मंच देना इन विरासतों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास पंडवानी
धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि, पंडवानी छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण लोक कला है। तीजन बाई ने इसे गांवों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि, दिल्ली में इस परंपरा का सम्मान होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा ने कहा कि, भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास, सामूहिक स्मृति और जीवन-दर्शन सुरक्षित है। ऐसे आयोजन इन परंपराओं को नए दर्शकों और नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करते हैं।

देश की लोक परंपराओं का साझा मंच
आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन भारत के अलग-अलग हिस्सों की लोक संगीत, कथावाचन और प्रदर्शन परंपराओं को एक मंच पर लाने वाला वार्षिक आयोजन है। इसका उद्देश्य देश की विविध लोक कलाओं को सामने लाना और पारंपरिक कलाकारों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का अवसर देना है।

इस वर्ष सम्मेलन की शुरुआत ही छत्तीसगढ़ की पंडवानी और तीजन बाई की स्मृति को समर्पित प्रस्तुति से होना विशेष महत्व रखता है। राजधानी के प्रमुख सांस्कृतिक मंच पर हुई इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि भारत की लोक कलाएं केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आज भी देश की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक ऊर्जा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अन्वेषा कला केंद्र पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से भारत की शास्त्रीय और लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन, दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियों के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।

CG NEWS : डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि बढ़ी, कल शाम 6 बजे तक का मौका

CG NEWS : डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि बढ़ी, कल शाम 6 बजे तक का मौका

 रायपुर। संचालक संचालनालय तकनीकी शिक्षा द्वारा सत्र 2026-27 हेतु संचालित सभी 4 डिप्लोमा पाठ्यक्रमों (1. डिप्लोमा इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर, 2. सी.डी.डी.एम./आईडी, 3. एमओएम / एचएमसीटी, 4. डिप्लोमा इंजीनियरिंग (लेटरल एंट्री) में अभ्यर्थियों के पंजीकरण हेतु निर्धारित अंतिम तिथि को 11 अगस्त 2026 को शाम 06 बजे तक बढ़ाया गया है।आई आई टी के परिणाम घोषित हो चुके हैं, इसलिए आईटीआई उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया में सम्मिलित होने का अवसर प्रदान करने हेतु पंजीकरण की अवधि बढ़ाई गई है।
अतिरिक्त संचालक संचालनालय तकनीकी शिक्षा नवा रायपुर अटल नगर से प्राप्त जानकारी के अनुसार डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया में अभ्यर्थी की पंजीकरण की अंतिम तिथि में ही परिवर्तन किया गया है। शेष कोर्स के लिए प्रवेश प्रक्रिया की सभी तिथियाँ एवं कार्यक्रम पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार यथावत रहेंगे।

छत्तीसगढ़ में बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज : 18 अगस्त को टेबल-टॉप और 20 को होगी मॉक ड्रिल

छत्तीसगढ़ में बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज : 18 अगस्त को टेबल-टॉप और 20 को होगी मॉक ड्रिल

 00 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एक उच्चस्तरीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन 

00 एनडीएमए ने दी राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में गाइडलाइन्स

रायपुर। राज्य में संभावित बाढ़ आपदा से निपटने और पूर्व तैयारियों को पुख्ता करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एक उच्चस्तरीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान निर्णय लिया गया कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन की वास्तविक क्षमताओं और अंतर-विभागीय समन्वय को परखने के लिए 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज और 20 अगस्त को व्यापक मॉक एक्सरसाइज (मॉक ड्रिल) का आयोजन किया जाएगा।

त्वरित राहत व बचाव के लिए तैयारियों का परीक्षण आवश्यक
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे टेबल-टॉप एक्सरसाइज की सभी प्रक्रियाओं और एसओपी को गहराई से समझें। उन्होंने कहा कि वास्तविक आपदा के समय शून्य देरी से राहत और बचाव कार्य संचालित करने के लिए यह पूर्वाभ्यास बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर
कॉन्फ्रेंस के दौरान बाढ़ के समय विभिन्न विभागों की सक्रिय भूमिका और समन्वय पर विस्तृत समीक्षा की गई। आपदा के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी तथा पशुपालन विभाग द्वारा की जाने वाली त्वरित कार्यवाहियों का खाका तैयार किया गया।
समीक्षा बैठक में पहुंचे प्रमुख विभागों के उच्चाधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा, पुलिस मुख्यालय, रायपुर रेल मंडल, स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के निदेशक, दूरसंचार, विज्ञान केंद्र और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग सहित पंचायत, ऊर्जा, परिवहन और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। प्रदेश के सभी जिलों के नोडल अधिकारी इस कॉन्फ्रेंस में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे।

मेडिकल कॉलेज के हार्ट-चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग का एक और कीर्तिमान, 20 दिन में किये फेफड़े की 9 लोबेक्टॉमी सर्जरी

मेडिकल कॉलेज के हार्ट-चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग का एक और कीर्तिमान, 20 दिन में किये फेफड़े की 9 लोबेक्टॉमी सर्जरी

 00 इस तरह दो महीने में फेफड़े की कुल 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी

00 सर्जरी में 15 साल के बच्चे के फेफड़े की लोबेक्टोमी सर्जरी भी हुई जिसमें मरीज को बायें फेफड़े के ऊपरी लोब में था एस्परजि़लोमा नमक फंगस का संक्रमण

00 अब तक के सबसे कम उम्र का मरीज जिसके फेफड़े की लोबेक्टमी सर्जरी की गई
00 इस ऑपरेशन में शामिल मरीजों की उम्र 15 साल से लेकर 70 साल तक
रायपुर।
पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने फेफड़ों की जटिल सर्जरी के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए मात्र 20 दिनों में 9 तथा इस संख्या को मिलाकर पिछले दो महीनों में कुल 13 लोबेक्टॉमी (फेफड़े के संक्रमित हिस्से को निकालने की सर्जरी) सफलतापूर्वक कर मरीजों को नया जीवन दिया है। इनमें दो आपातकालीन सर्जरी ऐसे मरीजों की की गई, जिन्हें खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव (हेमोप्टाइसिस) हो रहा था। आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर की सहायता से की गई इन जटिल सर्जरियों ने न केवल संस्थान की विशेषज्ञता को सिद्ध किया है, बल्कि छत्तीसगढ़ में फेफड़ों की सर्जरी के क्षेत्र में अम्बेडकर अस्पताल को अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित किया है।

हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, फेफड़े की लोबेक्टॉमी सर्जरी का मतलब यह होता है कि इसमें मरीज के क्षतिग्रस्त फेफड़े के एक हिस्से को निकाल दिया जाता है। यह सर्जरी अत्यंत ही जटिल सर्जरी होती है। यह सर्जरी इस संस्थान में अत्याधुनिक तकनीक से किया जाता है जिसमें एडवांस्ड लंग स्टैपलर का उपयोग किया जाता है, जिससे भविष्य में इस सर्जरी से होने वाले कॉम्प्लिकेशन जैसे कि ब्रोन्कोप्लूरल फिस्टुला बनने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है। छत्तीसगढ़ के किसी भी प्राइवेट या सरकारी संस्थान की तुलना में इस संस्थान द्वारा इतने कम समय में इतना ज्यादा लोबेक्टॉमी सर्जरी (फेफड़े की लोबेक्टॉमी सर्जरी) किया जाना इस संस्थान के लिए एक कीर्तिमान है और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है।

छत्तीसगढ़ में लोबेक्टॉमी (फेफड़े की) सर्जरी का प्रमुख कारण फेफड़े में एस्परजिलोमा एवं ब्रोन्किएक्टैसिस है। यह एस्परजिलोमा एक फंगस एस्परजिलस नाइजर से होता है। यह इन्फेक्शन फेफड़े के टी.बी. वाले मरीजों या ऐसे मरीजों को होता है, जिनकी इम्युनिटी बहुत ही कम हो जाती है।

एस्परजिलोमा सामान्यत: दायें फेफड़े के ऊपरी लोब (भाग) में सबसे अधिक होता है, क्योंकि यहाँ पर टीबी के बैक्टीरिया एवं एस्परजिलोमा के फंगस को बहुत ही अच्छा वातावरण मिलता है। ब्रोन्किएक्टैसिस भी फेफड़े के टी.बी. संक्रमण के बाद होने वाली सबसे सामान्य बीमारी है, जिसमें फेफड़े के अंदर छोटे-छोटे कैविटी (गुहा) बन जाती हैं एवं इसमें संक्रमण होने के बाद मरीजों को खांसी के समय खून निकलता है। वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं लंग एब्सिस में फेफड़े में बड़ा कैविटी बन जाने से खांसी में खून आने का सबसे बड़ा कारण है। वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं फेफड़े का कैंसर भी थूक या बलगम में खून आने का सबसे बड़ा कारण है। एवं ऐसी स्थिति जिसमें फेफड़े का कैंसर अपनी प्रारंभिक अवस्था में हो तो लोबेक्टॉमी ऑपरेशन से इस बीमारी (कैंसर) से पूर्णत: निजात पाया जा सकता है।

पूरे छ.ग. में फेफड़े की सर्वाधिक सर्जरी इसी हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में होती है, जिसमें प्रमुख रूप से फेफड़े का डिकॉर्टिकेशन सर्जरी, लोबेक्टॉमी, सेगमेंटेक्टॉमी एवं न्यूमोनेक्टॉमी जिसमें एक तरफ के दायें या बायें फेफड़े को पूर्णत: निकाल दिया जाता है, इत्यादिसामान्यत: इस संस्थान में साल में 15 से 20 लोबेक्टॉमी सर्जरी होती है। यही नहीं यहाँ पर फेफड़े की सर्जरी कराने के लिए सिर्फ छ.ग. से ही नहीं बल्कि अन्य पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, उड़ीस , म.प्र. एवं उ.प्र. के भी मरीज आते हैं। जो इस संस्थान के लिए गौरव का विषय है। ये सभी ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया जाता है। अभी भी हमारे विभाग में लोबेक्टॉमी सर्जरी के लिए कुछ मरीज प्रतीक्षारत हैं।
क्या होती है लोबेक्टॉमी सर्जरी:
हमारे शरीर में फेफड़े के दो हिस्से होते हैं, जिसे दायां एवं बायां फेफड़ा कहा जाता है। बायां फेफड़ा दो लोब (भाग) से मिलकर बनता है, जिसको अपर लोब और लोअर लोब कहा जाता है। उसी प्रकार दायें फेफड़े में तीन लोब होते हैं: अपर लोब, मिडिल लोब एवं लोअर लोब। यदि फेफड़े को कोई बीमारी जैसे कि एस्परजिलोमा, ब्रोन्किएक्टैसिस या लंग ट्यूमर किसी एक भाग या लोब तक सीमित होती है तो उस स्थिति में उस भाग को ऑपरेशन द्वारा निकाल दिया जाता है, जिसको मेडिकल भाषा में लोबेक्टॉमी कहा जाता है। इसमें दायें या बायें छाती में चीरा लगाकर संक्रमित फेफड़े को अन्य भागों से अलग किया जाता है एवं विशेष तकनीक एवं लंग स्टेपलर की सहायता से संक्रमित लोब को निकाला जाता है। आधुनिक स्टेपलर प्रयोग करने से फेफड़े के ऑपरेशन के बाद होने वाले कॉम्प्लिकेशन जैसे कि ब्रोन्कोप्लूरलफिस्टुला में बहुत ही कमी आ जाती है। सामान्यत: 6-8 दिनों बाद मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया जाता है।

मुख्य सचिव ने बच्चों के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली

मुख्य सचिव ने बच्चों के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली

रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य में बच्चों के लिए चलाये जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य विभागीय अधिकारी की बैठक ली।
बैठक में राज्य में बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, साफ-सफाई और स्वच्छता सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाये जाने के लिए विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बच्चों में कुपोषण, एनिमिया, विकास में देरी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। बच्चों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, फोलेट, विटामिन, बी-12 और जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूनिसेफ और विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, एनिमिया नियंत्रण, कुपोषण और बाल विवाह जैसी समस्याओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों और यूनिसेफ की संयुक्त बैठक में बच्चों के कम्यूनिटी मेनेजमेंट का सभी जिलों तक विस्तार करने, विकलांगता वाले बच्चों के माता-पिता को खानपान संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बैठक में टेक होम राशन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के साथ-साथ घर पर पोष्टिक भोजन और बच्चों को भोजन खिलाने की बेहतर पद्धतियों को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी गई। अनाज, दाल, फल्लियों की उपलब्धता ग्राम पंचायत स्तर पर अनाज बैंक की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। 

इसके साथ ही राज्य के किसानों तक विविध एवं पोषक तत्वों से भरपूर फसलों और दालों की पहुंच बढ़ाने के लिए अच्छे बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि राज्य में एंटी-मलेरिया अभियान के चलते मलेरिया के रोगियों में उल्लेखनीय कमी आयी है। बच्चों में एनिमिया की स्थिति के बारे में चर्चा हुई। इसके तहत बस्तर में बच्चों मे एनिमिया से निपटने विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे है। मुख्य सचिव ने सभी जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जमीन स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और लोगों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने के निर्देश दिए है।

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव  ऋर्चा शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव  अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिवअब्दुल कैसर हक, गृह विभाग की सचिवनेहा चंपावत, आयुक्त समग्र शिक्षा सुश्री किरण कौशल सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
मंत्री टंक राम वर्मा का सारंगढ़-बिलाईगढ़ का दो दिवसीय प्रवास, देंगे विकास कार्यों की सौगात और तिरंगा यात्रा का करेंगे नेतृत्व…..

मंत्री टंक राम वर्मा का सारंगढ़-बिलाईगढ़ का दो दिवसीय प्रवास, देंगे विकास कार्यों की सौगात और तिरंगा यात्रा का करेंगे नेतृत्व…..

 रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास तथा उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा 10 और 11 अगस्त को सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे क्षेत्र को  स्वास्थ्य, शिक्षा, पशु चिकित्सा और आधारभूत संरचना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। साथ ही राष्ट्रीय चेतना से जुड़े कार्यक्रमों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

मंत्री वर्मा ​पहले दिन 10 अगस्त को पूर्वाह्न 11बजे सारंगढ़ सर्किट हाउस पहुँचेंगे, जहाँ वे कार्यकर्ताओं से भेंट-मुलाकात करेंगे। इसके बाद दोपहर वे पशु चिकित्सा विभाग भवन, ऑफिसर्स क्लब, जिला अस्पताल सारंगढ़-बिलाईगढ़ में अतिरिक्त कक्ष तथा बीपीएचयू भवन का उद्घाटन करेंगे। शिक्षा के क्षेत्र को मजबूती देते हुए वे शासकीय लोचन प्रसाद पाण्डेय महाविद्यालय में जनभागीदारी मद से निर्मित नए कक्ष का लोकार्पण करेंगे और एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत पौधारोपण भी करेंगे।

​दोपहर में मंत्री  वर्मा सावन महोत्सव, ग्राम छुहीपाली में वृहद वृक्षारोपण और मंडी प्रांगण में स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख वितरण कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। ​ मंत्री  वर्मा दूसरे दिन 11 अगस्त को मुख्य रूप से सामाजिक आयोजनों में व्यस्त रहेंगे। इस दौरान वे भारत माता चौक से रानी लक्ष्मीबाई कॉम्पलेक्स तक आयोजित भव्य तिरंगा यात्रा का नेतृत्व करेंगे।

वन्यजीव तस्करों पर कड़ी कार्रवाई, सांभर शिकार मामले में 3 आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

वन्यजीव तस्करों पर कड़ी कार्रवाई, सांभर शिकार मामले में 3 आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

 रायपुर। वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन मंत्री श्री केदार कश्यप के सख्त निर्देशों के बाद वन विभाग ने वन्यजीव तस्करों और शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में मोहला वनमंडल के दक्षिण मानपुर क्षेत्र में सांभर का शिकार करने वाले तीन आरोपियों को रंगे हाथ पकड़कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

वनमण्डलाधिकारी  दिनेश कुमार पटेल ने बताया कि विगत 6 अगस्त की शाम को वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि ग्राम पंचायत बागडोगरी के रेंगाटोला गांव (तहसील औंधी) में कुछ लोग सांभर का मांस पका रहे हैं। सूचना मिलते ही दक्षिण मानपुर के परिक्षेत्र अधिकारी और मानपुर के उपवनमंडलाधिकारी ने सर्च वारंट लेकर तुरंत मौके पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान पका हुआ मांस बरामद किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि खेत में फंसे सांभर के बच्चे की कुल्हाड़ी से मारकर हत्या की गई थी। वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियोंकृकाजूराम (पिता मसरूराम), रघुराम (पिता मनीराम) और राहुल (पिता सुकलु) को गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सी.जी.एम.) न्यायालय, अंबागढ़ चौकी में पेश किया। न्यायालय ने तीनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में राजनांदगांव जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया है।

इस संदर्भ में वन मंत्री  केदार कश्यप ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और शिकारियों के खिलाफ ऐसे ही कड़े कदम उठाए जाते रहेंगे।

नुआखाई पर्व में शामिल होने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को विधायक मिश्रा ने दिया आमंत्रण

नुआखाई पर्व में शामिल होने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को विधायक मिश्रा ने दिया आमंत्रण

 रायपुर। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को रायपुर में आयोजित होने वाले नुआखाई पर्व में शामिल होने के लिए निमंत्रण पत्र देने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में विधायक पुरंदर मिश्रा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं, सामाजिक समरसता और नुआखाई पर्व के सांस्कृतिक महत्व से भी अवगत कराया।

विधायक पुरंदर मिश्रा बताया कि नुआखाई केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नई फसल, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, पारिवारिक एकजुटता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। भगवान  जगन्नाथ की पावन परंपरा से जुड़े इस आयोजन का छत्तीसगढ़ में विशेष सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। महामहिम राष्ट्रपति मुर्मू को नुआखाई पर्व में शामिल होने का आमंत्रण देना उनके लिए अत्यंत गौरव और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू का सान्निध्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और भगवान  जगन्नाथ की भक्ति परंपरा के लिए गौरव का विषय होगा। इससे प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को देशभर में नई पहचान मिलेगी।

उन्होंने कहा कि नुआखाई पर्व हमारी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का उत्सव है, जो लोगों को अपनी जड़ों, अपनी मिट्टी और अपनी परंपराओं से जोड़ता है। रायपुर के श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित होने वाला यह आयोजन श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक समरसता का सुंदर संगम होगा।

तीन बहनों ने एक साथ पास की नीट परीक्षा, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने घर पहुंचकर दी बधाई

तीन बहनों ने एक साथ पास की नीट परीक्षा, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने घर पहुंचकर दी बधाई

 0-तीन बहनों का एक साथ मेडिकल में चयन पूरे प्रदेश के लिए है प्रेरणादायी उदाहरण- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर-- कबीरधाम जिले के नेउर गाँव की तीन प्रतिभाशाली बहनों किरण, ज्योति और सुमन महोबिया ने इस वर्ष नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज नेउर गाँव पहुंच, तीनों छात्राओं से उनके घर पर मुलाकात कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने छात्राओं की माता भगवती महोबिया और पिताराम महोबिया एवं परिजनों से भी मुलाकात की तथा तीनों बेटियों की इस उपलब्धि के लिए पूरे परिवार को बधाई दी और कहा कि एक ही परिवार की तीन बहनों का एक साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफल होना न केवल पूरे परिवार के लिए खुशी का अवसर है, बल्कि क्षेत्र और जिले के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि एक ही घर में रहकर तीन बहनों का एक साथ नीट जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना और सफलता हासिल करना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस सफलता से जिले के अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी कि नियमित मेहनत, सही दिशा और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि तीनों बहनों की सफलता उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने गाँव या घर पर रहकर सीमित संसाधनों के बीच बड़े लक्ष्य की तैयारी कर रहे हैं।

मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने तीनों छात्राओं से उनकी स्कूली पढ़ाई, नीट परीक्षा की तैयारी और आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने छात्राओं से कहा कि अब मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर पूरी लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई करें तथा अपने उज्ज्वल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ें और माता-पिता व परिवार के सपनों को अपने कार्यों और उपलब्धियों से पूरा करें। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विदेशी राम धुर्वे सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

डॉक्टर बनकर क्षेत्र और समाज की सेवा का रखें भाव

उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने छात्राओं को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डॉक्टर के रूप में शिक्षा पूरी करने के बाद अच्छे संस्थानों और अस्पतालों में कार्य कर अनुभव प्राप्त करें। साथ ही उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढऩे के साथ अपने क्षेत्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी बनाए रखें। अपनी शिक्षा और अनुभव का उपयोग जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए करने का प्रयास करें, ताकि आपकी सफलता का लाभ समाज और स्थानीय लोगों तक भी पहुंच सके।

घर पर की ऑनलाइन तैयारी, एक साथ पाई सफलता

तीनों बहनों ने घर पर रहकर ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से नीट परीक्षा की तैयारी की। पढ़ाई के दौरान तीनों एक-दूसरे का सहयोग करती रहीं और अपने लक्ष्य को लेकर लगातार प्रयासरत रहीं। उनकी यह उपलब्धि विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि दो बहनों ज्योति और सुमन ने अपने पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है, दोनों ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, बोड़ला से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है। जबकि बड़ी बहन किरण ने अपने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर, पांडातराई से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की है।

नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर हो रहा -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर हो रहा -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के महोबा बाजार स्थित एक निजी होटल में आयोजित आईटीवी नेटवर्क और इंडिया न्यूज के युवा मंच कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद अब छत्तीसगढ़ समन्वित रूप से प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर है। सरगुजा से लेकर बस्तर तक पूरे प्रदेश के लक्ष्यकेंद्रित विकास के लिए  सरकार संकल्पित है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए विशिष्टजनों सम्मानित किया।

युवा मंच कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा थी। हमारी सरकार के गठन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद विषय पर हुई बैठक में यह तथ्य हमारे सामने आया कि देश में शेष नक्सल समस्या का अधिकांश हिस्सा छत्तीसगढ़ में ही था। ऐसे में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से एक डेडलाइन तय हुई और हमारे सुरक्षाबल के जवानों ने अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बना दिया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन के विकास की अपार संभावना है। बस्तर का चित्रकोट जलप्रपात नियाग्रा के नाम से प्रसिद्ध है। धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की सूची में शामिल किया है। वहाँ बम्बू राफ्टिंग जैसी पर्यटन गतिविधियां संचालित हैं और होम स्टे में पर्यटक आकर रुक रहे हैं। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई उद्योग नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में धर्मांतरण रोकने सबसे सख्त कानून लाने वाला प्रदेश है। प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करवाने वालों पर अब कड़ी कार्यवाही की जा रही है। अन्य प्रदेशों के कानूनों का विस्तार से अध्ययन करके छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पीएससी में भ्रष्टाचार करने वालों पर सख्त कार्रवाई की गई है। प्रदेश में अब पीएससी से लेकर सभी भर्ती परीक्षाएं पारदर्शिता के साथ सम्पन्न हो रही हैं और युवाओं के साथ उनके अभिभावक भी अब भर्ती प्रक्रिया को लेकर निश्चिंत हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरकार युवाओं से लगातार संवाद कर रही है। उनके सभी सुझावों का स्वागत है। युवा ही हमारे देश का भविष्य हैं। विकास की नीति निर्माण में युवाओं के सुझाव महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बहुल राज्य है। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेई ने जनजातीय विकास के लिए आदिम जाति कल्याण मंत्रालय का गठन किया। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में छत्तीसगढ़ के 6 हजार गांवों को शामिल किया गया है। हमारे प्रदेश में 5 विशेष पिछड़ी जनजातियां निवास करती हैं, जिनके उत्थान के लिए हम कटिबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा विकास का मूलमंत्र है। शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है। आज छत्तीसगढ़ में हर स्तर पर स्कूल संचालित हैं। हर ब्लॉक में कॉलेज हैं। बस्तर के नक्सलमुक्त होने के बाद वहां एजुकेशन सिटी बनायी जा रही है। इसके लिए बजट में प्रावधान किया गया है।राज्य में शिक्षा मिशन पर भी काम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के निकटवर्ती राज्यों में भी आदिवासी बहुलता है, इसे देखते हुए हमारा प्रयास है कि राज्य में ट्राइबल यूनिवर्सिटी भी स्थापित हो। जिसका लाभ इस क्षेत्र के जनजातीय बच्चों को मिल सके।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में  स्वास्थ्य सुविधाओं का निरंतर विकास किया जा रहा है। आज हमारे प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। पांच नए मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति मिल गई है। जिनमें कुल 250 सीटें स्वीकृत हुई हैं और इसी वर्ष से पढ़ाई भी शुरू हो जाएगी। बस्तर में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बन गया है। अब वहां ब्रेन ट्यूमर का भी इलाज हो रहा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। 40 हजार लोगों का उपचार भी हुआ है। बस्तर मुन्ने और नियद नेल्लानार योजना के तहत लोगों को शासकीय योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश की नई उद्योग नीति के तहत हमने 8 लाख करोड़ के एमओयू साइन किए हैं, इसका असर धरातल पर भी दिखने लगा है। सेमीकंडक्टर प्लांट, एआई डाटा सेंटर, टेक्सटाइल जैसे सैक्टर में कार्य चल रहा है। ऐसे उद्यमी जो अपने 1000 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराएंगे उनके लिए विशेष इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है। बरसात के बात रोजगार मेला भी लगाया जाएगा, जहां विभिन्न उद्योगों में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगें इस अवसर पर राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा, आईटीवी नेटवर्क और इंडिया न्यूज के पदाधिकारीगण तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास को मिल रही गति: वित्त मंत्री ओपी चौधरी

शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास को मिल रही गति: वित्त मंत्री ओपी चौधरी

 रायपुर: प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने शनिवार को रायगढ़ जिले के पुसौर क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों का दौरा कर 1 करोड़ 92 लाख 7 हजार रुपये की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इन कार्यों में आंगनबाड़ी भवन, मंगल भवन, सामुदायिक भवन, सांस्कृतिक मंच, शासकीय विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष, खेल मैदान में अहाता और शेड निर्माण जैसे जनोपयोगी कार्य शामिल हैं।

वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि गांवों का विकास  सरकार की प्राथमिकता है। विकास का वास्तविक लाभ तभी है, जब उसकी सुविधा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। पुसौर क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों में जिन विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया गया है, वे सीधे ग्रामीणों की आवश्यकताओं से जुड़े हैं। आंगनबाड़ी भवनों से बच्चों को बेहतर वातावरण मिलेगा, विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों से विद्यार्थियों के लिए अध्ययन-अध्यापन की सुविधाएं बढ़ेंगी, वहीं मंगल भवन, सामुदायिक भवन और सांस्कृतिक मंच ग्रामीणों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए उपयोगी साबित होंगे।

मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास की गति को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। गांवों में सड़क, शिक्षा,  स्वास्थ्य, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ ऐसी अधोसंरचना विकसित की जा रही है, जिससे ग्रामीणों का जीवन अधिक सुविधाजनक बने। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

लारा और लोहाखान में 94.97 लाख रुपये के कार्यों का भूमिपूजन

पुसौर क्षेत्र के ग्राम पंचायत लारा में 7.25 लाख रुपये की लागत से शेड निर्माण तथा डीपापारा में 31.55 लाख रुपये की लागत से मंगल भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। इन दोनों कार्यों की कुल लागत 38.80 लाख रुपये है। मंगल भवन के निर्माण से ग्रामीणों को सामाजिक एवं सामुदायिक आयोजनों के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा।

इसी क्रम में ग्राम लोहाखान में 14.35 लाख रुपये की लागत से आंगनबाड़ी भवन, 10.27 लाख रुपये की लागत से शासकीय प्राथमिक शाला में दो अतिरिक्त कक्ष तथा 31.55 लाख रुपये की लागत से मंगल भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। इन कार्यों की कुल लागत 56.17 लाख रुपये है। आंगनबाड़ी भवन से बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जबकि अतिरिक्त कक्षों के निर्माण से विद्यालय में अध्ययन-अध्यापन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होगा।

देवलसुर्रा और दर्रीपाली में शिक्षा, खेल एवं सांस्कृतिक सुविधाओं का विस्तार

ग्राम देवलसुर्रा में 14.35 लाख रुपये की लागत से आंगनबाड़ी भवन तथा 5.50 लाख रुपये की लागत से बीच बस्ती में सांस्कृतिक मंच निर्माण का भूमिपूजन किया गया। इससे बच्चों के लिए बेहतर आंगनबाड़ी सुविधा उपलब्ध होने के साथ ग्रामीणों को सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए उपयुक्त स्थान मिलेगा।

वहीं ग्राम दर्रीपाली में 14.35 लाख रुपये की लागत से आंगनबाड़ी भवन, 13.10 लाख रुपये की लागत से क्रिकेट ग्राउंड में अहाता निर्माण तथा 10.27 लाख रुपये की लागत से प्राथमिक शाला में अतिरिक्त कक्ष निर्माण का भूमिपूजन किया गया। इन कार्यों की कुल लागत 37.72 लाख रुपये है। क्रिकेट ग्राउंड में अहाता निर्माण से खेल मैदान को व्यवस्थित एवं सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी, जबकि अतिरिक्त कक्ष से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्राप्त होगा।

महलोई और आरमुड़ा में भी विकास कार्यों को मिली गति

ग्राम पंचायत महलोई में 15.18 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। यह भवन ग्रामीणों के सामाजिक, सार्वजनिक एवं सामुदायिक आयोजनों के लिए उपयोगी होगा। इसके साथ ही महलोई में उप स्वास्थ्य केंद्र के सामने 10 लाख रुपये की लागत से निर्मित शेड का लोकार्पण किया गया। इससे स्वास्थ्य केंद्र आने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों को सुविधा मिलेगी।

वहीं ग्राम आरमुड़ा में 14.35 लाख रुपये की लागत से आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। भवन के निर्माण से गांव के बच्चों को आंगनबाड़ी की बेहतर, सुरक्षित और व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध होगी।

गांवों की जरूरतों के अनुरूप हो रहे विकास कार्य

वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य केवल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि उनका सीधा और दीर्घकालिक लाभ ग्रामीणों को मिले। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर निगरानी रखने तथा निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा कराने में सहयोग करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि पुसौर क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और सामाजिक सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। आने वाले समय में भी ग्रामीणों की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

इस अवसर पर जनपद पंचायत पुसौर की अध्यक्ष हेमलता हरिशंकर चौहान, जिला पंचायत सदस्यब्रजेश गुप्ता, जनपद पंचायत सदस्य हेमालिनी प्रकाश गुप्ता, जनपद पंचायत सदस्यकृष्ण प्रधान सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के मुख्य कार्यक्रम में करेंगे ध्वजारोहण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के मुख्य कार्यक्रम में करेंगे ध्वजारोहण

 केन्द्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू बिलासपुर, उपमुख्यमंत्री  अरूण साव दुर्ग और विजय शर्मा बस्तर में फहराएंगे ध्वज

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव जिला मुख्यालय में करेंगे ध्वजारोहण

रायपुर -- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आगामी 15 अगस्त, को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह में राजधानी रायपुर के पुलिस मैदान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। वहीं मुख्यालय जिला बिलासपुर में केन्द्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, दुर्ग में उप मुख्यमंत्री  अरुण साव तथा बस्तर में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे।

सामान्य प्रशासन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, सरगुजा में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, महासमुंद में खाद्य मंत्री  दयालदास बघेल, दंतेवाड़ा में वन मंत्री  केदार कश्यप, कबीरधाम में उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहपण करेंगे। इसी प्रकार रायगढ़ में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, कांकेर में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, सूरजपुर में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, जांजगीर-चांपा में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, जशपुर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल, बालोद में  स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव, बलौदाबाजार में सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा में सांसद विजय बघेल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में सांसद  संतोष पांडेय ध्वजारोहण करेंगे।

इसी प्रकार कोंडागांव में सांसद  भोजराज नाग, बलरामपुर में सांसद चिंतामणि महाराज, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सांसद राधेश्याम राठिया, गरियाबंद में सांसद  रूपकुमारी चौधरी, सक्ती में सांसद कमलेश जांगड़े, बीजापुर में सांसद  महेश कश्यप, सुकमा में राज्यसभा सांसद  देवेंद्र प्रताप सिंह और मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ध्वजारोहण करेंगे।

जिला कोरबा में विधायक अमर अग्रवाल, धमतरी में विधायक  अजय चंद्राकर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में विधायक धरमजीत सिंह, मुंगेली जिला मुख्यालय में विधायक पुन्नूलाल मोहले, कोरिया में विधायक  भैय्या लाल राजवाड़े और नारायणपुर जिला मुख्यालय में विधायक सुश्री लता उसेंडी स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण करेंगे। इस अवसर पर समस्त मुख्य अतिथि जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे।

 

असम के बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए छत्तीसगढ़ सरकार देगी 5 करोड़, CM साय ने हिमंत बिस्वा सरमा से की फोन पर चर्चा

असम के बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए छत्तीसगढ़ सरकार देगी 5 करोड़, CM साय ने हिमंत बिस्वा सरमा से की फोन पर चर्चा

 रायपुर। असम में बाढ़ से उत्पन्न गंभीर परिस्थितियों के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मानवीय संवेदना और अंतरराज्यीय सहयोग की भावना के साथ बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 5 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान करने का निर्णय लिया है। यह राशि असम में चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों में सहयोग के लिए प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री  साय ने आज असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से दूरभाष पर चर्चा कर राज्य में बाढ़ से उत्पन्न परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में छत्तीसगढ़ की जनता असम के अपने भाई-बहनों के साथ पूरी एकजुटता से खड़ी है।

CG-काले कागज से असली नोट बनाने का झांसा,50 हजार की ठगी के आरोपी गिरफ्तार

CG-काले कागज से असली नोट बनाने का झांसा,50 हजार की ठगी के आरोपी गिरफ्तार

 जांजगीर-चांपा । जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र में काले कागज को केमिकल के जरिए असली नोट में बदलने का झांसा देकर ठगी करने की कोशिश का मामला सामने आया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने एक व्यक्ति से 50 हजार रुपये ठगने की कोशिश की थी, लेकिन सतर्कता के चलते रकम बच गई।

पुलिस के मुताबिक आरोपी सोशल मीडिया और फोन कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद काले कागज को विशेष केमिकल से असली नोट में बदलने का झांसा देकर उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश की जाती थी।

मामले में पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड शिवप्रसाद मनहर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार शिवप्रसाद मनहर पूर्व में भी नकली नोट से जुड़े मामलों में चालान हो चुका है।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से केमिकल पाउडर, 6 नग काले कागज और 3 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त सामान के आधार पर पुलिस ठगी के तरीके और आरोपियों के नेटवर्क की जांच कर रही है।

मामले में सायबर थाना और नवागढ़ पुलिस की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

CG-जमानत के लिए श्मशान में तंत्र-मंत्र…! चीफ जस्टिस की फोटो रखकर अनुष्ठान,मचा हड़कंप

CG-जमानत के लिए श्मशान में तंत्र-मंत्र…! चीफ जस्टिस की फोटो रखकर अनुष्ठान,मचा हड़कंप

 बिलासपुर - छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से जमानत से जुड़ा एक बेहद अजीब मामला सामने आया है। जेल में बंद रिश्तेदार को जमानत दिलाने के लिए एक व्यक्ति कथित तौर पर तांत्रिक के बताए रास्ते पर चल पड़ा। आरोप है कि श्मशान घाट में तांत्रिक अनुष्ठान के दौरान छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की तस्वीर भी रखी गई थी

मामला सिपत थाना क्षेत्र के देवरी गांव का है। शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात ग्रामीणों ने श्मशान घाट में चार लोगों को संदिग्ध गतिविधियां करते देखा। ग्रामीणों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन तीन लोग मौके से भाग निकले। वहीं ऋषिकेश कुमार को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।

तांत्रिक के वीडियो से मिला ‘जमानत’ का तरीका

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में ऋषिकेश ने बताया कि उसका रिश्तेदार प्रियांशु चाकू मारने के एक मामले में अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार हुआ था। इनमें से एक आरोपी को जमानत मिल चुकी थी, जबकि बाकी की जमानत अर्जियां अदालत में लंबित थीं।

बताया गया कि ऋषिकेश और उसके तीन साथी सोशल मीडिया पर एक तांत्रिक का वीडियो देखने के बाद श्मशान घाट पहुंचे थे। वीडियो में कथित तौर पर दावा किया गया था कि एक विशेष अनुष्ठान करने से आरोपी को जमानत मिल सकती है।

मछली, नींबू, सिंदूर और तस्वीरें बरामद

पुलिस ने मौके से कथित अनुष्ठान में इस्तेमाल सामान बरामद किया है। इनमें मछली, नींबू, सिंदूर और कई तस्वीरें शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, बरामद तस्वीरों में एक तस्वीर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की, जबकि दूसरी आरोपी प्रियांशु की और तीसरी चाकू मारने की घटना के पीड़ित की थी।

बिलासपुर एसपी रजनेश सिंह के मुताबिक मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस कथित अनुष्ठान के पीछे किसकी भूमिका थी और अन्य तीन लोग कौन थे।

पुलिस की सख्त चेतावनी

पुलिस ने लोगों को ऐसे अंधविश्वास और कथित तांत्रिक उपायों से दूर रहने की चेतावनी दी है। पुलिस का कहना है कि किसी भी तांत्रिक अनुष्ठान से अदालत से जमानत नहीं मिल सकती। कानून अपना काम करता है और आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होता है।

रेलवे ट्रैक के पास मिला 28 वर्षीय अज्ञात युवक का शव, पहचान में जुटी पुलिस

रेलवे ट्रैक के पास मिला 28 वर्षीय अज्ञात युवक का शव, पहचान में जुटी पुलिस

 रायपुर। राजधानी रायपुर के आमानाका थाना क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के किनारे एक अज्ञात युवक का शव मिलने से हड़कंप मच गया। घटना 8 अगस्त 2026 की बताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है।

पुलिस के अनुसार, युवक की उम्र करीब 28 वर्ष है। उसकी कद-काठी सामान्य है, बाल काले और छोटे हैं तथा चेहरे पर हल्की दाढ़ी-मूंछ है। घटना के समय उसने काले रंग की टी-शर्ट और नीली जींस पहन रखी थी। पुलिस ने मृतक के हुलिए और पहनावे की जानकारी सार्वजनिक करते हुए लोगों से पहचान में सहयोग की अपील की है।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि युवक रेलवे ट्रैक के पास किन परिस्थितियों में पहुंचा था और उसकी मौत कैसे हुई। घटनास्थल के आसपास भी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मृतक रायपुर का रहने वाला था या किसी अन्य स्थान से यहां आया था।मृतक की पहचान के लिए पुलिस आसपास के थाना क्षेत्रों से भी जानकारी जुटा रही है। हाल के दिनों में दर्ज गुमशुदगी की शिकायतों से भी मृतक की पहचान का मिलान किया जा सकता है।

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त हुलिए के युवक के बारे में जानकारी हो या उसके परिवार का कोई सदस्य हाल ही में लापता हुआ हो, तो थाना आमानाका, रायपुर में सूचना दें। पहचान होने के बाद पुलिस घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच आगे बढ़ाएगी। शव का पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रिया भी की जा रही है।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिला 14.20 लाख रुपए का अनुदान, एकीकृत कृषि प्रणाली बनी समृद्धि का आधार

राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिला 14.20 लाख रुपए का अनुदान, एकीकृत कृषि प्रणाली बनी समृद्धि का आधार

 o संरक्षित खेती और उद्यानिकी से जशपुर के किसान अनारथ साय ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

o ऑयल पाम से लेकर आम-लीची, स्ट्रॉबेरी, टमाटर और फूलगोभी की खेती से बढ़ी आय

जशपुर। सीएम विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में किसानों को पारंपरिक धान की खेती के साथ उद्यानिकी, संरक्षित खेती और फसल विविधीकरण को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। शासन की योजनाओं का लाभ लेकर किसान अब आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए अपनी आय के नए स्रोत तैयार कर रहे हैं। जशपुर जिले के ग्राम पतराटोली के किसान अनारथ साय ऐसे ही प्रगतिशील कृषक हैं, जिन्होंने उद्यानिकी आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाकर खेती को आर्थिक मजबूती का आधार बनाया है।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन से संरक्षित खेती को मिला बढ़ावा
किसान अनारथ साय ने उद्यानिकी विभाग की योजना का लाभ लेते हुए राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत एक एकड़ क्षेत्र में शेडनेट हाउस स्थापित कर संरक्षित खेती की शुरुआत की है। इसमें वे ग्राफ्टेड टमाटर की आधुनिक तकनीक से खेती कर रहे हैं। संरक्षित वातावरण में फसल उत्पादन से बेहतर गुणवत्ता, मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से सुरक्षा और उत्पादन प्रबंधन में सुविधा मिल रही है। शेडनेट हाउस की स्थापना में कुल 28 लाख 40 हजार रुपए की लागत आई, जिसमें उद्यानिकी विभाग की ओर से 14 लाख 20 हजार रुपए का अनुदान प्रदान किया गया। विभागीय सहयोग और आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसान ने खेती को नई दिशा दी है।

ऑयल पाम की खेती से बढ़ा आय का दायरा
अनारथ साय उद्यानिकी विभाग से लाभ लेकर ऑयल पाम की खेती भी कर रहे हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन सहित विभिन्न उद्यानिकी योजनाओं से मिले प्रोत्साहन ने उन्हें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर लाभकारी एवं दीर्घकालिक फसलों को अपनाने का अवसर दिया है। ऑयल पाम जैसी फसल को अपनाकर किसान अपनी कृषि भूमि का बेहतर उपयोग कर रहे हैं और भविष्य के लिए स्थायी आय का आधार तैयार कर रहे हैं।

आम और लीची के बगीचे से तैयार किया दीर्घकालिक आय का आधार
किसान अनारथ साय ने समेकित उद्यानिकी विकास योजना के तहत 2 हेक्टेयर क्षेत्र में आम एवं लीची का बगीचा भी विकसित किया है। फलदार पौधों की यह बागवानी उन्हें आने वाले वर्षों में निरंतर उत्पादन और आय का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने मुख्य उद्यानिकी फसलों के बीच उपलब्ध खाली भूमि का भी बेहतर उपयोग किया है। यही सोच उनकी खेती को एकीकृत एवं बहुआयामी बनाती है।

एक ही खेत में कई फसलें, सालभर आय का रास्ता
अनारथ साय ने बागवानी फसलों के बीच खाली स्थान का सदुपयोग करते हुए अंतरवर्ती खेती (इंटरक्रॉपिंग) को अपनाया है। वे स्ट्रॉबेरी, टमाटर और फूलगोभी जैसी फसलों का उत्पादन भी कर रहे हैं। इससे एक ओर भूमि का अधिकतम उपयोग हो रहा है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग फसलों से अलग-अलग समय पर आय प्राप्त हो रही है। किसान का यह प्रयोग जशपुर के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है।

फसल विविधीकरण से खेती बनी अधिक लाभकारी
किसान अनारथ साय का मानना है कि, एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न फसलों को एकीकृत रूप से अपनाने से खेती में जोखिम कम किया जा सकता है और आय के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। उनके अनुसार कम लागत में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए वर्षभर आय प्राप्त करने की दिशा में एकीकृत कृषि प्रणाली बेहद उपयोगी है।

जशपुर में बदल रही खेती की तस्वीर
अनारथ साय की सफलता यह दर्शाती है कि, शासन की योजनाओं का लाभ लेकर किसान आधुनिक तकनीक, संरक्षित खेती, उद्यानिकी और फसल विविधीकरण को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। जशपुर जैसे कृषि प्रधान जिले में ऐसे प्रगतिशील किसान न केवल स्वयं आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि आसपास के किसानों को भी पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नई तकनीकों और लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जशपुर में उद्यानिकी और संरक्षित खेती का बढ़ता दायरा किसानों की आय में वृद्धि के साथ जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई पहचान दे रहा है।

राजधानी में मर्डर, पाइप के अंदर छिपाया गया था युवक की लाश,3 दिन से था लापता

राजधानी में मर्डर, पाइप के अंदर छिपाया गया था युवक की लाश,3 दिन से था लापता

 रायपुर। राजधानी रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र के रावाभाठा स्थित बांधा मैदान में एक युवक का शव मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान करीब 22 से 23 वर्षीय पवन तांडन के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि पवन तांडन पिछले कुछ दिनों से लापता था और परिजन उसकी लगातार तलाश कर रहे थे। करीब चार दिन बाद उसका शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। शव जिस स्थिति में मिला है, उसे देखते हुए युवक की हत्या किए जाने की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, पवन तांडन 5 अगस्त 2026 से लापता था। वह घर से निकलने के बाद वापस नहीं लौटा था। काफी समय तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। परिवार के लोगों और परिचितों ने आसपास के इलाकों में युवक को खोजने का प्रयास किया, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया। इस दौरान परिवार लगातार उसके वापस लौटने की उम्मीद कर रहा था।

इसी बीच रावाभाठा क्षेत्र के बांधा मैदान में कंक्रीट कल्वर्ट और पानी के पाइप के पास एक शव मिलने की सूचना सामने आई। मौके पर मौजूद लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही खमतराई थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। शव की पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसके बाद मृतक की पहचान पवन तांडन के रूप में हुई। बताया जा रहा है कि शव पानी के पाइप के अंदर छिपा हुआ मिला। शव जिस स्थान पर मिला और जिस तरह से उसे छिपाया गया था, उससे पुलिस भी मामले को संदिग्ध मानकर जांच कर रही है। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि युवक की हत्या करने के बाद शव को पाइप के अंदर छिपाया गया होगा। हालांकि हत्या की पुष्टि अभी नहीं हुई है और मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम तथा पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी। FSL की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस आसपास के क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण कर रही है, ताकि घटना से जुड़े किसी भी सुराग को तलाशा जा सके। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पवन तांडन आखिरी बार किसके साथ देखा गया था और 5 अगस्त को घर से निकलने के बाद वह कहां गया। उसके मोबाइल फोन, परिचितों और आसपास के लोगों से जुड़ी जानकारी भी जांच का हिस्सा हो सकती है। पुलिस युवक के पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम को जोड़कर मामले की कड़ियां तलाशने का प्रयास कर रही है।

मृतक के शव मिलने के बाद परिजनों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। युवक के लापता होने के बाद परिवार उसकी तलाश कर रहा था, लेकिन कुछ दिनों बाद उसका शव मिलने से परिवार को गहरा सदमा लगा है। घटना की जानकारी फैलने के बाद बांधा मैदान और आसपास के क्षेत्र में लोगों की भीड़ भी जुट गई। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा रहा है और FSL की जांच के आधार पर भी पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि युवक की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई तथा शव को पाइप के अंदर किसने और क्यों छिपाया।

CM साय की पहल से खिलाड़ियों को मिले नए पंख, खेल बजट ₹304 करोड़; आधुनिक सुविधाओं से तैयार हो रहा नया स्पोर्ट्स हब

CM साय की पहल से खिलाड़ियों को मिले नए पंख, खेल बजट ₹304 करोड़; आधुनिक सुविधाओं से तैयार हो रहा नया स्पोर्ट्स हब

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार खेल अधोसंरचना को मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, संसाधन, सम्मान और रोजगार के अवसर देने के साथ ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को भी आगे लाने पर जोर दिया जा रहा है।

राज्य में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के तहत ₹100 करोड़ और छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए ₹57 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं, छत्तीसगढ़ बनने के समय खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट करीब 4 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर ₹304 करोड़ हो गया है।

खेल अधोसंरचना पर बड़ा फोकस
राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट और हॉकी स्टेडियम के साथ स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। रायगढ़ और कुनकुरी में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को मंजूरी दी गई है। बलौदाबाजार में करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से इंडोर स्टेडियम और नवा रायपुर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण जारी है। तिल्दा-नेवरा और मोपका में बहुउद्देशीय हॉल तथा बलौदाबाजार में 8-लेन सिंथेटिक ट्रैक भी तैयार किया जा रहा है।ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में खेलो इंडिया लघु केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में हॉकी, तीरंदाजी, मलखंभ, कुश्ती और फुटबॉल जैसे खेलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अकादमियों में खिलाड़ियों को मिल रही सुविधाएं
रायपुर की तीरंदाजी और बालिका हॉकी अकादमी में 80 खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण, आवास, भोजन और शिक्षा की सुविधा दी जा रही है। गैर-आवासीय अकादमियों में 130 से अधिक खिलाड़ी विभिन्न खेलों में प्रशिक्षण ले रहे हैं।बिलासपुर के बहतराई केंद्र को भारत सरकार ने स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा दिया है, जहां करीब 180 खिलाड़ी हॉकी, एथलेटिक्स, तीरंदाजी और कबड्डी में अभ्यास कर रहे हैं। शिवतराई उपकेंद्र में भी 45 खिलाड़ी तीरंदाजी का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बढ़ी छत्तीसगढ़ की चमक
छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन किया है। 2024 के खेलो इंडिया यूथ गेम्स में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 7 पदक जीते। पहले खेलो इंडिया पैरा गेम्स में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने 5 पदक हासिल किए। 2025 के खेलो इंडिया यूथ गेम्स में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 14 पदक जीते।गोवा में आयोजित 37वें नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ के 72 खिलाड़ियों ने 25 पदक जीते, जबकि उत्तराखंड में हुए 38वें नेशनल गेम्स में 58 खिलाड़ियों ने 16 पदक हासिल किए।

ज्ञानेश्वरी यादव को 30 लाख और DSP पद
हाल ही में ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में रजत पदक जीतने वाली छत्तीसगढ़ की वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव को राज्य सरकार ने 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें आउट ऑफ टर्न पदोन्नति देकर DSP बनाने का भी ऐलान किया है।ज्ञानेश्वरी ने महिलाओं की 53 किलोग्राम भार वर्ग स्पर्धा में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि को प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि उनकी सफलता राज्य की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा है।

ओलंपिक पदक विजेताओं के लिए बड़ी प्रोत्साहन राशि
मुख्यमंत्री साय ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता को 3 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेता को 2 करोड़ रुपये और कांस्य पदक विजेता को 1 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है।क्रिकेट में शशांक सिंह और अमनदीप तथा हॉकी में रेणुका यादव जैसे खिलाड़ी छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रहे हैं। वहीं बैडमिंटन खिलाड़ी आकर्षी कश्यप ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

बस्तर के बाद अब सरगुजा ओलंपिक
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को मंच देने के लिए पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष से सरगुजा ओलंपिक की भी शुरुआत की गई है। बस्तर ओलंपिक में सात जिलों के 1.65 लाख से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।इसके अलावा खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी से भी छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान मिली है।

खेल विभाग में भर्ती और नए पद
खेल गतिविधियों को मजबूत करने के लिए छह नए जिलों में खेल अधिकारी के पद सृजित किए गए हैं। विभाग में 44 प्रशिक्षकों, 4 जिला खेल अधिकारियों, 23 सहायक ग्रेड-3 और 8 वार्डनों की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है।सरकार ने सभी जिलों में खेल संघों के गठन और उनके पंजीयन को बढ़ावा देने के साथ ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविरों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया है।

गांव और स्कूलों से तैयार होंगे खिलाड़ी
सरकार की योजना स्कूलों में प्रतिदिन खेल का एक पीरियड सुनिश्चित करने और पंचायतों के माध्यम से गांव-गांव में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की है। जिला खेल अधिकारियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और उभरती प्रतिभाओं की प्रोफाइल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।प्रशिक्षकों और खेल अधिकारियों को आधुनिक तकनीक, नए खेल उपकरण, अंतरराष्ट्रीय नियमों और वैश्विक मानकों के अनुरूप खुद को अपडेट करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति विकसित करने, प्रतिभाओं की समय पर पहचान करने और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने का है। इन प्रयासों के जरिए छत्तीसगढ़ को आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

रायपुर में गांजा तस्करी का भंडाफोड़, 2.961 किलो गांजे के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

रायपुर में गांजा तस्करी का भंडाफोड़, 2.961 किलो गांजे के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

 रायपुर। राजधानी में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत तेलीबांधा पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने जोरा ओवरब्रिज के पास सर्विस रोड से दो आरोपियों को 2.961 किलोग्राम गांजा के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से गांजे से भरे तीन पैकेट और परिवहन में इस्तेमाल वाहन CG 04 P 7506 भी जब्त किया गया है।पुलिस के मुताबिक, 7 अगस्त को मुखबिर से सूचना मिली थी कि जोरा ओवरब्रिज के पास दो व्यक्ति गांजा लेकर बिक्री की फिराक में मौजूद हैं। सूचना के आधार पर तेलीबांधा पुलिस और ANTF की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और दोनों संदिग्धों को पकड़ लिया।

पूछताछ में आरोपियों की पहचान दिनेश ध्रुव (23) निवासी मंदिर हसौद और कोमल धीवर (29) निवासी तेलीबांधा के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उनके पास मौजूद पीले रंग के थैले से तीन पैकेट बरामद हुए, जिनमें गांजा पाया गया। वजन करने पर कुल 2.961 किलोग्राम गांजा मिला।पुलिस ने गांजा और वाहन को जब्त कर दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 341/2026 दर्ज किया है। आरोपियों पर धारा 20(बी) NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गांजा कहां से लाया गया था और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। पुलिस सप्लाई नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

आमापाली में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने लगाई जन चौपाल, सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

आमापाली में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने लगाई जन चौपाल, सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

 रायपुर: वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत आमापाली में आयोजित जन चौपाल में ग्रामीणों से संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से क्षेत्र के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय आवश्यकताओं के संबंध में चर्चा की।

जन चौपाल के दौरान ग्राम पंचायत आमापाली की माताओं-बहनों की एक प्रेरणादायी पहल भी सामने आई। महिलाओं ने महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्राप्त राशि में से अपनी इच्छा से धनराशि एकत्रित कर भगवान जगन्नाथ मंदिर के प्रारंभिक निर्माण कार्य के लिए समर्पित की। महिलाओं की इस पहल की वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सराहना की।

वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि आमापाली की बहनों ने स्वेच्छा और संकल्प के साथ राशि एकत्रित कर मंदिर निर्माण में सहयोग दिया है। यह महिलाओं के आर्थिक योगदान के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता और नेतृत्व की जीती-जागती मिसाल है। उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ समाज और सामुदायिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मंत्री  चौधरी ने कहा कि महिलाओं का यह स्वैच्छिक योगदान समाज में आपसी सहयोग, सहभागिता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता है। आमापाली की बहनों की यह पहल अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणादायी है।

वित्त मंत्री  चौधरी ने इस सराहनीय पहल के लिए ग्राम पंचायत आमापाली की सभी माताओं-बहनों और सहभागी नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। जन चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी बात सुनना और स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करना राज्य सरकार की जनकल्याण एवं सुशासन की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

10 अगस्त को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस व 17 अगस्त को मॉप-अप दिवस

10 अगस्त को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस व 17 अगस्त को मॉप-अप दिवस

 00 प्रदेश के 1.10 करोड़ बच्चों और किशोरों को एल्बेंडाजोल की खुराक खिलाकर कृमि संक्रमण से बचाने का अभियान

00 राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर राज्यभर में चलेगा विशेष अभियान, अभिभावकों से बच्चों को दवा अवश्य खिलाने की अपील

रायपुर। बच्चों की सेहत, पढ़ाई और बेहतर भविष्य के रास्ते में सबसे बड़ी लेकिन अक्सर अनदेखी समस्या है पेट में होने वाला कृमि संक्रमण। यही संक्रमण कई बार बच्चों में कुपोषण, एनीमिया, कमजोरी, भूख न लगना, बार-बार बीमार पडऩा तथा पढ़ाई में एकाग्रता की कमी जैसी समस्याओं का कारण बनता है। इन चुनौतियों से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए प्रदेश में 10 अगस्त को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर राज्यभर में 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को एल्बेंडाजोल की खुराक खिलाई जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित इस राज्यव्यापी अभियान का उद्देश्य केवल कृमि संक्रमण का उपचार करना नहीं, बल्कि बच्चों को बेहतर पोषण, बेहतर स्वास्थ्य और बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना भी है। अभियान के तहत प्रदेश के लगभग 1.10 करोड़ बच्चों एवं किशोर किशोरियों तक पहुंच उन्हें कृमि मुक्ति हेतु एल्बेंडाजोल खिलाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए शासकीय एवं निजी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा अन्य संस्थानों के माध्यम से व्यापक स्तर पर दवा सेवन करवाने की व्यवस्था की गई है।

कृमि संक्रमण मुख्य रूप से अस्वच्छ वातावरण के कारण फैलता है। ये संक्रमण आमतौर पर खुले में शौच और खराब स्वच्छता के कारण मिट्टी के संक्रमित होने, संक्रमित मिट्टी के संपर्क के बाद बिना हाथ धोए भोजन करने, दूषित पानी पीने या दूषित भोजन खाने, मानव मल से दूषित मिट्टी पर नंगे पैर चलने तथा शौच के बाद हाथ नहीं धोने जैसी परिस्थितियों में फैलते हैं। संक्रमण होने पर बच्चों के शरीर को भोजन से पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाएं नियमित दवा सेवन को बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण का प्रभावी उपाय मानती हैं।

अभियान के अंतर्गत 1 से 2 वर्ष आयु के बच्चों को एल्बेंडाजोल की आधी गोली तथा 2 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों एवं किशोरों को पूरी गोली निर्धारित मानकों के अनुसार खिलाई जाएगी। दवा प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की निगरानी में खिलाई जाएगी, जिससे इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके।  मैदानी स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों, शिक्षकों तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा चुका है।

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस को केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम न मानें, बल्कि अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखें। यदि कोई बच्चा 10 अगस्त को किसी कारणवश दवा नहीं खा पाता है, तो उसे मॉप-अप दिवस 17 अगस्त को कृमिनाशक दवा खिलाई जाएगी। इस दवा सेवन से बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की समस्या कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा उनकी शैक्षणिक क्षमता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है। इसलिए सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस एवं मॉप-अप दिवस पर कृमिनाशक दवा अवश्य खिलाने का आग्रह किया गया है।