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IGKV पेपर लीक पर बड़ा एक्शन: परीक्षा रद्द, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

IGKV पेपर लीक पर बड़ा एक्शन: परीक्षा रद्द, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

 रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में B.Sc. द्वितीय वर्ष के Pest Management in Crops and Stored Grains-I (AENT 221) विषय के प्रश्नपत्र के कथित लीक मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय ने संबंधित परीक्षा रद्द कर दी है और पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई है, जिसमें परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र के बाहर आने की बात सामने आई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा की निष्पक्षता और विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए तत्काल परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया।

कवर्धा से मिली थी शिकायत
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग होने की शिकायत कवर्धा से प्राप्त हुई थी। शिकायत सामने आने के बाद अधिकारियों ने मामले की प्रारंभिक जानकारी जुटाई और संबंधित परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया।

अब इस विषय की परीक्षा नए सिरे से आयोजित की जाएगी। इसके लिए नई तारीख विश्वविद्यालय की ओर से बाद में जारी की जाएगी।

पांच सदस्यीय कमेटी खंगालेगी पूरा मामला
मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति यह पता लगाएगी कि प्रश्नपत्र की गोपनीयता किस स्तर पर भंग हुई और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाहर कैसे पहुंचा। समिति प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर उसके सुरक्षित रखे जाने और संबंधित परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच करेगी।

जांच में यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही अथवा संलिप्तता सामने आती है तो समिति की रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

28 कॉलेजों तक पहुंचता है प्रश्नपत्र
IGKV के कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक के अनुसार, संबंधित प्रश्नपत्र रायपुर में तैयार किया जाता है और इसके बाद विश्वविद्यालय से संबद्ध 28 कॉलेजों में भेजा जाता है। ऐसे में जांच समिति प्रश्नपत्र की पूरी सप्लाई और सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल करेगी।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
परीक्षा रद्द होने के बाद विद्यार्थियों के बीच नई परीक्षा तिथि को लेकर इंतजार है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाहर कैसे पहुंचा और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय ने संकेत दिया है कि जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी मत्स्य हब: केंद्रीय सचिव लेखी

छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी मत्स्य हब: केंद्रीय सचिव लेखी

 भारत सरकार के 900 और राज्य सरकार के 300 करोड़ से मत्स्य क्रांति को मिली रही गति

तिलापिया उत्पादन को बढ़ाने प्रदेश में रायपुर, धमतरी और कांकेर कलस्टर होगा विकसित 

पीएम मत्स्य संपदा योजना से 956.86 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत 

आधुनिक तकनीक, निर्यात और किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्र एवं राज्य का विशेष फोकस

रायपुर, 20 अगस्त 2026 -केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के सचिव  अविलक्ष्य लेखी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना देश के मत्स्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल है। योजना के विभिन्न घटकों के माध्यम से राज्यों के मत्स्य किसानों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता एवं अधोसंरचना उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे मत्स्य क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि छोटे एवं मध्यम श्रेणी के ऐसे मत्स्य किसान, जिनकी बैंकिंग सेवाओं तक सहज पहुंच नहीं हो पाती, उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों को बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी पात्र किसान योजनाओं से वंचित न रहे।

केंद्रीय सचिव  लेखी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मत्स्य उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और इन्हें साकार करने के लिए केंद्र सरकार देश के विभिन्न राज्यों में 34 मत्स्य क्लस्टरों का विकास करने जा रही है। इनमें छत्तीसगढ़ में तिलापिया कलस्टर शामिल है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार राज्य के मत्स्य क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं पर लगभग 900 करोड़ रुपये व्यय और स्वीकृत कर चुकी है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और तिलापिया उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इसे मत्स्य क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में उत्पादित मछलियों का निर्यात आयरलैंड, शिकागो सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हो रहा है। प्रदेश में 2 हजार से अधिक किसान तिलापिया पालन कर रहे हैं। इन किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए एक्सपोजर विजिट की कार्ययोजना तैयार करने, उन्नत गुणवत्ता के मत्स्य बीज उत्पादन हेतु नई हैचरियों की स्थापना तथा आधुनिक तकनीकों के विस्तार पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मत्स्य किसानों से संवाद कर उनके सुझाव भी प्राप्त किए।

इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव, मछलीपालन विभाग ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य पालन को किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य आज मत्स्य बीज उत्पादन में देश में चौथे तथा मछली उत्पादन में छठे स्थान पर पहुंच चुका है। प्रदेश में लगभग 2.08 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र में 9.59 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया जा रहा है। राज्य में 2021 पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियां, 1662 स्व-सहायता समूह, 123 मत्स्य हैचरियां, 102 मत्स्य बीज उत्पादन फार्म तथा 4 थोक मत्स्य बाजार संचालित हैं।

 परदेशी ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत पिछले छह वर्षों में राज्य के लिए 956.86 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 272.37 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। योजना के तहत बायोफ्लॉक, आरएएस, केज कल्चर, तालाब निर्माण, लाइव फिश वेंडिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज, फीड मिल और अन्य आधुनिक अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। कोरबा जिले के बांगो जलाशय में 37.10 करोड़ रुपये की लागत से एक्वा पार्क की स्थापना भी की जा रही है।

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें आधुनिक तकनीकों का विस्तार, मत्स्य अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, विपणन एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से हजारों परिवारों को रोजगार एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। ‘नवा अंजोर /2047‘ के अंतर्गत रायपुर, धमतरी एवं कांकेर जिलों में तिलापिया क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 37,857 लाख रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई है।

    कार्यक्रम में केंद्रीय सचिव ने अधिकारियों को मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि, वित्तीय समावेशन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तथा निर्यात क्षमता को और मजबूत करने के लिए समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में नाबार्ड, एमपीईडीए (डच्म्क्।), सीफा (ब्प्थ्।) सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे। अंत में मत्स्य पालन विभाग के संचालक  एन.एस. नाग ने आभार व्यक्त किया। बढ़ी संख्या में मत्स्य किसान एवं छत्तीसगढ़ राज्य मछुआरा बोर्ड के चेयरमेन उपस्थित थे।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता एवं समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के दिए निर्देश

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता एवं समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के दिए निर्देश

 विभागीय कार्यों की समीक्षा की, अधिकारियों को सप्ताह में दो दिन फील्ड में रहने के दिए निर्देश

ठेकेदारों के कार्यों की कड़ाई से मॉनिटरिंग कर निर्धारित मापदंडों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित कराने कहा

रायपुर, 20 अगस्त 2026- लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने बिलासपुर परिक्षेत्र के विभागीय एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को काम में तेजी लाने और सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने नवा रायपुर स्थित निर्माण भवन में आयोजित बैठक में विभागीय अभियंताओं से कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा में पूर्णता विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सड़कों और पुलों के नए प्रस्ताव तैयार करते समय भविष्य की जरूरतों और बढ़ते यातायात को ध्यान में रखने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी और अपर सचिव  एस.एन. श्रीवास्तव भी बैठक में मौजूद थे।

 बंसल ने अधिकारियों को प्रो-एक्टिव होकर काम करने तथा प्राक्कलन से लेकर निविदा की प्रक्रिया तक सभी कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कार्यपालन अभियंताओं को अपने जिले के कलेक्टरों से बेहतर समन्वय रखने को कहा, ताकि निर्माण कार्यों से जुड़े मामलों तथा कार्यस्थलों की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो और काम की गति बनी रहे। उन्होंने मैदानी अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन फील्ड में रहकर निर्माण कार्यों की कड़ी मॉनिटरिंग और निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों के कार्यों पर लगातार नजर रखने तथा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सड़कों और भवनों के निर्माण के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता की जांच करने को कहा, ताकि मजबूत और टिकाऊ निर्माण हो सके। 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने ऐसे नए कार्यों जिनकी निविदा हो चुकी है, उन्हें अक्टूबर तक शुरू करने को कहा। उन्होंने काम शुरू होने के बाद उसकी गति और गुणवत्ता दोनों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों और पुलों के रखरखाव पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़कें साफ-सुथरी, सुंदर और व्यवस्थित दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने बरसात में क्षतिग्रस्त हुई सड़कों और पुलों की तत्काल मरम्मत करने को कहा, ताकि लोगों की आवाजाही बाधित न हो। 

 बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों को एसडीएम से मिलकर विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए अधिग्रहित भूमि के नामांतरण की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने भू-अर्जन के नए और पुराने प्रकरणों के नामांतरण की कार्यवाही एक माह में पूर्ण करने को कहा। उन्होंने जमा पद के पूर्ण कार्यों को तत्काल संबंधित विभागों को हैंडओवर करने को कहा। 

विभागीय सचिव ने बैठक में विश्रामगृहों और सर्किट-हाउसों के संचालन एवं रखरखाव की भी जानकारी ली। उन्होंने विभाग के भवनों में बेहतर साफ-सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करने के साथ ही पूरे परिसर को व्यवस्थित रखने को कहा। लोक निर्माण विभाग की उप सचिव सुश्री अंशिका पाण्डेय, छत्तीसगढ़ सड़क एवं अधोसंरचना विकास निगम के अतिरिक्त प्रबंध संचालक  शशांक पाण्डेय, बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता  आर.के. रात्रे और  जी.एस. मंडावी तथा अधीक्षण अभियंता  के.पी. संत सहित बिलासपुर परिक्षेत्र के सभी 9 संभागों के कार्यपालन अभियंता एवं अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

शिशु संरक्षण माह: स्वस्थ बचपन और सुरक्षित भविष्य का आधार

शिशु संरक्षण माह: स्वस्थ बचपन और सुरक्षित भविष्य का आधार

 विशेष लेख : धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर। शिशु जीवन का वह नाजुक चरण है, जहाँ सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल उनके भविष्य की दिशा तय करती है। भारत जैसे विकासशील देश में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न संक्रामक बीमारियों की दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा शिशु संरक्षण माह का आयोजन किया जाता है। यह एक विशेष स्वास्थ्य अभियान है, जो नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है, जिसके तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की विशेष देखभाल की जा रही है। 
अभियान का मुख्य उद्देश्य
इस विशेष माह को मनाने का प्राथमिक लक्ष्य बाल मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके साथ ही, बच्चों में समय पर बीमारियों की पहचान करना, उन्हें आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करना, तथा माताओं को सही पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।

प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और गतिविधियाँ
शिशु संरक्षण माह के दौरान गांव-गांव और शहरों में स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जाती हैं:
विटामिन ए का अनुपूरण: 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी जैसी आंखों की बीमारियों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन ए की खुराक दी जाती है। एनीमिया से बचाव 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को खून की कमी (एनीमिया) से सुरक्षित रखने हेतु आयरन एवं फॉलिक एसिड सिरप का वितरण किया जाता है। पूर्ण टीकाकरण: जिन बच्चों के नियमित टीके छूट गए हैं, उन्हें खसरा, रुबेला, पोलिया, काली खांसी और टिटनेस जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकृत किया जाता है।

कुपोषण की पहचान व उपचार: आंगनवाड़ी स्तर पर सभी बच्चों का वजन और लंबाई नापकर गंभीर रूप से कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। आवश्यकता पडऩे पर गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है। दस्त नियंत्रण और ओआरएस वितरण: बच्चों में डिहाइड्रेशन रोकने के लिए माताओं को ओआरएस पैकेट और जिंक की गोलियां दी जाती हैं।
जागरूकता एवं परामर्श सत्र
केवल दवाएं देना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि माताओं और परिवारों का व्यवहार परिवर्तन भी इसका महत्वपूर्ण अंग है: स्तनपान का महत्व: जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के अंदर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) और शुरुआती 6 माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रेरित किया जाता है।

ऊपरी आहार की शुरुआत: 6 माह की आयु पूरी होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ सही मात्रा और गुणवत्ता वाला पूरक आहार (ऊपरी आहार) देने की सलाह दी जाती है। 6 से 12 महीने की उम्र के बीच, आपका शिशु पौष्टिक ठोस आहार खाना शुरू कर देगा, लेकिन माँ का दूध फिर भी पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा। जब आपका शिशु माँ का दूध या फार्मूला दूध पीना छोड़ दे, तो उसे धीरे-धीरे और धैर्य से खिलाएँ। उसे नए स्वाद चखने दें, लेकिन ज़बरदस्ती न करें। जब आपका बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करे, तो उसे भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खाने से रोकें ताकि वह गले में न अटके।
अपने शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करने के लिए उसे पढ़ें, उससे बातें करें और उसके लिए गाएं। अपने शिशु को सोने के पर्याप्त अवसर प्रदान करें - 4 से 12 महीने के शिशुओं के लिए अनुशंसित नींद की मात्रा प्रतिदिन 12 से 16 घंटे (24 घंटे की अवधि में, झपकी सहित) है। शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
स्वच्छता व सैनिटेशन: हाथ धोने की सही आदत और बच्चे की देखभाल में साफ-सफाई के महत्व पर चर्चा की जाती है, जिससे संक्रमण से बचाव संभव हो सके। शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है। शिशु को बांधकर रखने वाले उपकरण उसके विकास में बाधा डाल सकते हैं। शिशु को झूले, स्ट्रोलर, बाउंसिंग सीट, एक्सरसाइज़ सॉसर या अन्य किसी भी बांधकर रखने वाले उपकरण में लंबे समय तक न रखें। उन्हें बाहर निकालें और घूमने-फिरने दें।
शिशु संरक्षण माह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हर परिवार और समाज के लिए अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराने वाला समय है। जब समाज का हर वर्ग—स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अभिभावक—एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे, तभी हम एक स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और सशक्त पीढ़ी का निर्माण कर सकेंगे।

आजीविका से जोडऩा आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: कश्यप

आजीविका से जोडऩा आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: कश्यप

 00 वनौषधियों से महिलाओं को रोजगार की मिलेगी नई राह

00 मानव-हाथी द्वंद्व रोकने सामुदायिक भागीदारी पर जोर
रायपुर।
आजीविका से जोडऩा आर्थिक सशक्तिकरण की मुख्य धुरी है। इससे व्यक्तियों और परिवारों को नियमित आय मिलती है, गरीबी कम होती है और समाज में उनका आत्मसम्मान बढ़ता है। यह कदम देश के समग्र विकास और आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अपने कोरबा प्रवास के दौरान यह बात कहा है कि वन केवल पर्यावरण संरक्षण का आधार नहीं, बल्कि वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण साधन हैं।

मंत्री  कश्यप ने कहा कि वन संसाधनों का संरक्षण करते हुए उनका स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन किया जाए, तो महिलाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार तथा आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मानव-हाथी द्वंद्व की रोकथाम में वन विभाग के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी और समय पर सूचना व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। वन मंत्री कश्यप अपने कोरबा प्रवास के दौरान पाली विकासखंड के ग्राम डोंगानाला स्थित वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र पहुंचे। उन्होंने यहां हरि बोल स्व-सहायता समूह की महिलाओं से आत्मीय संवाद किया और वनौषधियों के संग्रहण, प्रसंस्करण तथा उनसे तैयार किए जा रहे उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने समूह द्वारा तैयार उत्पादों का अवलोकन कर महिलाओं के प्रयासों की सराहना की।

 कश्यप ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वनौषधियों और अन्य वन उत्पादों का उचित प्रसंस्करण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है। इससे वन आधारित उत्पादों को बेहतर मूल्य मिलेगा और स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को वन आधारित आजीविका से जोडऩा आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं की मेहनत, स्थानीय संसाधनों का ज्ञान और समूह के रूप में काम करने की क्षमता को उचित सहयोग मिले, तो ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की नई मिसालें तैयार की जा सकती हैं।
चोटिया में हाथी नियंत्रण केंद्र का निरीक्षण
वन मंत्री  कश्यप ने पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के चोटिया स्थित हाथी नियंत्रण केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने हाथी मित्र दल के सदस्यों से क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों, ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी आवाजाही और मानव-हाथी द्वंद्व की स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने हाथी मित्र दल को मोटरसाइकिल और सुरक्षा किट प्रदान की। इससे वन क्षेत्रों में निगरानी, गश्त और हाथियों की गतिविधियों की समय पर सूचना देने की व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

समय पर सूचना और सतर्कता से कम होगा मानव-हाथी द्वंद्व
वन मंत्री श्री कश्यप ने आमजनों का अवगत कराया कि मानव-हाथी द्वंद्व की रोकथाम केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए वन विभाग, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, वन प्रबंधन समितियों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। हाथियों की गतिविधियों की समय पर जानकारी मिलने से ग्रामीणों को सतर्क किया जा सकता है और संभावित घटनाओं को रोकने में मदद मिलती है। उन्होंने हाथी मित्र दल और वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों को ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ हाथियों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देने तथा लगातार निगरानी और समन्वय के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

वन संरक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी महत्वपूर्ण
वन मंत्री  केदार कश्यप ने स्थानीय वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों से भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण वन और वन्यजीवों के संरक्षण के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। उनके स्थानीय अनुभव और सहयोग से वन विभाग की संरक्षण गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण, वन आधारित आजीविका और वन्यजीव सुरक्षा सहित इन तीनों क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय को साथ लेकर आगे बढऩा ही स्थायी विकास का मजबूत आधार है। इस अवसर पर विधायक  प्रेमचंद पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन प्रबंधन समितियों के सदस्य, हाथी मित्र दल के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

उत्कृष्ट शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से संवर रहा छत्तीसगढ़ के बच्चों का भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

उत्कृष्ट शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से संवर रहा छत्तीसगढ़ के बच्चों का भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री साय आईबीसी 24 ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026’ कार्यक्रम में हुए शामिल

प्रदेश के सभी संभागों की टॉपर बेटियों को किया सम्मानित, प्रदान की स्कॉलरशिप

शिक्षा विकास का मूलमंत्र, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही राज्य सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय

बेमेतरा की प्रदेश टॉपर ओमनी वर्मा को एक लाख रुपए की स्कॉलरशिप, विद्यालय को भी मिला एक लाख रुपए का पुरस्कार

प्रदेश में बन रहे 34 नालंदा परिसर, नई दिल्ली के ट्राइबल यूथ हॉस्टल से 13 विद्यार्थियों ने उत्तीर्ण की यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा

एआई मिशन के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान, विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीक के लिए किया जाएगा तैयार

नई उद्योग नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही गति, बारिश के बाद आयोजित किए जाएंगे रोजगार मेले

रायपुर-- शिक्षा किसी भी समाज और राज्य के विकास का मूल आधार है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देती है और रोजगार उनके सपनों को साकार करने का मजबूत आधार बनता है। छत्तीसगढ़ सरकार उत्कृष्ट शिक्षा, आधुनिक तकनीक और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से प्रदेश के बच्चों और युवाओं का भविष्य संवारने के लिए प्रतिबद्ध है। गांवों से लेकर सुदूर वनांचलों तक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने  राजधानी रायपुर के जोरा स्थित एक निजी होटल में आयोजित आईबीसी24 ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय  ने टॉपर बेटियों को सम्मानित कर उन्हें स्कॉलरशिप प्रदान की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इन बेटियों की उपलब्धि उनके परिवार और विद्यालय के साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर हमारी बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।

कार्यक्रम में कक्षा बारहवीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बेमेतरा की ओमनी वर्मा को मुख्यमंत्री श्री साय ने एक लाख रुपए का चेक और सम्मान पत्र प्रदान किया। उनके विद्यालय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम कन्या विद्यालय, बेमेतरा को भी एक लाख रुपए की राशि का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों का सम्मान किया तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित पुस्तक ‘मेधा’ का विमोचन भी किया।

*गांव के मिट्टी के स्कूल से आधुनिक शिक्षण संस्थानों तक छत्तीसगढ़ ने तय की लंबी यात्रा*

मुख्यमंत्री  साय ने प्रतिभावान विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि होनहार बेटियों के बीच आकर उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृहग्राम बगिया की प्राथमिक शाला में हुई। पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने के लिए उन्हें अपने गांव से कुछ दूर दूसरे गांव जाना पड़ा था। उस समय गांव के स्कूल का भवन मिट्टी का था और उसकी मरम्मत में गांव के लोग मिलकर सहयोग करते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने राज्य निर्माण के 25 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज प्रदेश में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक संस्थानों का व्यापक नेटवर्क विकसित हुआ है। प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय उपलब्ध हैं। आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान आज छत्तीसगढ़ में संचालित हैं। इससे प्रदेश के बच्चों को अपने राज्य में ही उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना के साथ शिक्षा का नया अध्याय भी शुरू हो रहा है। जगरगुंडा और ओरछा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी की शुरुआत की जा रही है। जिन इलाकों में कभी परिस्थितियों के कारण शिक्षा तक पहुंच चुनौतीपूर्ण थी, वहां अब बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक अधोसंरचना और अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

*34 नालंदा परिसर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को मिलेगा बेहतर वातावरण*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास केवल शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सुविधाएं और वातावरण उपलब्ध कराना भी है। प्रदेश में 34 स्थानों पर नालंदा परिसर विकसित किए जा रहे हैं, जहां युवाओं को शांत और सुविधायुक्त वातावरण में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि देश की राजधानी नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के जनजातीय युवाओं के लिए 200 बिस्तरों वाला ट्राइबल यूथ हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष यहां रहकर तैयारी करने वाले 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। यह उपलब्धि बताती है कि सही अवसर और सुविधाएं मिलने पर छत्तीसगढ़ के युवा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा सिद्ध कर सकते हैं।

*एआई मिशन से भविष्य की तकनीक के लिए तैयार होगी नई पीढ़ी*

मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य के विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित नई तकनीकों से परिचित हों और भविष्य की संभावनाओं का लाभ उठा सकें, इसके लिए छत्तीसगढ़ एआई मिशन शुरू किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसके लिए 500 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें भविष्य के रोजगार और नवाचार के अवसरों के लिए तैयार करना है।

*बस्तर में शांति के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास का नया दौर*

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में शांति और विश्वास का वातावरण मजबूत हुआ है तथा विकास की गति तेज हुई है।

उन्होंने कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के 92 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया। यह बदलते बस्तर की नई तस्वीर है। नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, राशन और अन्य बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। बस्तर मुन्ने और नियद नेल्लानार जैसी पहलों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। एक लाख से अधिक लोगों के राशन कार्ड भी बनाए गए हैं।

*बस्तर में पर्यटन बनेगा रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का नया आधार*

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफा सहित अनेक प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। बस्तर के धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की सूची में शामिल किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

उन्होंने कहा कि धुड़मारास में विदेशी पर्यटक होमस्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन, संस्कृति, खान-पान और परंपराओं को करीब से जान रहे हैं। राज्य सरकार बस्तर सहित प्रदेश के पर्यटन क्षेत्रों में होमस्टे को प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए ऋण एवं सब्सिडी की सुविधा दी जा रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत माध्यम बनाने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में भी पर्यटन को शामिल किया गया है।

*निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा के साथ युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर तैयार करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति 2024-30 को देश-विदेश में सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। नई नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश के एमओयू हुए हैं और इन निवेश प्रस्तावों का प्रभाव धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी औद्योगिक इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है, जो स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराएंगी। एक हजार स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्यमियों के लिए बीस्पोक नीति के अंतर्गत विशेष इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है। बारिश के मौसम के बाद प्रदेश में रोजगार मेलों का आयोजन भी किया जाएगा, जिनके माध्यम से युवाओं को विभिन्न उद्योगों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप से सम्मानित सभी छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि वे बड़े सपने देखें, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और निरंतर मेहनत करें। राज्य सरकार उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, तकनीक और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, सांसद रूपकुमारी चौधरी, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष  राजीव लोचन जी महाराज, गोयल ग्रुप एंड कंपनीज के चेयरमैन  सुरेश गोयल,  राजीव गोयल,  दिनेश गोयल,  रविकांत मित्तल सहित जनप्रतिनिधिगण, शिक्षाविद्, विद्यार्थी, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बलौदाबाजार को बड़ी सौगात दिलाने राजस्व मंत्री की पहल, औद्योगिक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का जल्द होगा विस्तार

बलौदाबाजार को बड़ी सौगात दिलाने राजस्व मंत्री की पहल, औद्योगिक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का जल्द होगा विस्तार

 00 200 बिस्तर वाले ईएसआईसी अस्पताल के लिए नई दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से हुई सकारात्मक चर्चा
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक क्रांति के साथ-साथ श्रमिकों की सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं। इसी कड़ी में बलौदाबाजार के विशाल सीमेंट, पावर एंड स्टील प्लांटस, सहित अनेक लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र तथा अन्य संस्थानों में दिन-रात पसीना बहाने वाले हजारों मजदूरों की वर्षों पुरानी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा द्वारा एक बड़ी पहल हुई है।
सीमेंट, पावर एवं स्टील फैक्ट्रियों की बहुलता वाले बलौदाबाजार जिले में अब तक गंभीर बीमारियों और हादसों के वक्त श्रमिकों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे बड़े जिलों की ओर रुख करना पड़ता था और आपातकालीन स्थितियों में यह दूरी जानलेवा साबित होती थी। इस बड़ी व्यावहारिक समस्या को दूर करने के लिए राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा की पहल पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से नई दिल्ली में आज चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान बलौदाबाजार में 200 बिस्तर वाले सर्व सुविधायुक्त ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा गया। केंद्रीय मंत्री ने इस संवेदनशील जनहित मुद्दे पर बेहद गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है, जिससे जल्द ही क्षेत्र की जनता को एक आधुनिक अस्पताल की सौगात मिलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
आंकड़ों में दिख रहा सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा
बलौदाबाजार जिले में वर्तमान में 17,942 पंजीकृत कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि सामाजिक सुरक्षा के तहत 18,308 बीमित व्यक्तियों को सीधा लाभ मिल रहा है। बीमितों की यह अधिक संख्या स्पष्ट करती है कि इस सुरक्षा चक्र का लाभ न केवल श्रमिकों, बल्कि उनके पूरे परिवार तक पहुंच रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में 31 मार्च 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में 15,66,430 कर्मचारी ईएसआईसी में दर्ज हैं, जिनमें 6,27,260 बीमित पुरुष और 79,237 बीमित महिलाएं शामिल हैं। राज्य में ईएसआईसी के तहत कुल 37,283 नियोजक पंजीकृत हैं, जिनमें से 13,426 सक्रिय रूप से अपना योगदान दे रहे हैं। 
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की यह व्यवस्था श्रमिकों को सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि बीमारी, मातृत्व और कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं के दौरान आर्थिक संबल भी प्रदान करती है। राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा के सार्थक पहल पर बलौदाबाजार में 200 बिस्तर वाले अस्पताल के निर्माण से न केवल समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलेगा, बल्कि पूरे प्रदेश के संगठित श्रमिक वर्ग में सुरक्षा और विश्वास की भावना और अधिक मजबूत होगी।

अब ऑनलाइन देखी जा सकेगी आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी

अब ऑनलाइन देखी जा सकेगी आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा संचालित आश्रम-छात्रावासों में निवासरत छात्र-छात्राओं की जानकारी अब ऑनलाइन उपलब्ध होगी। पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यालय आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, नवा रायपुर द्वारा यह व्यवस्था की गई है।
आश्रम-छात्रावास प्रबंधन प्रणाली पोर्टल
https://hmstribal.cg.nic.in/ पर प्रवेशित सभी छात्र-छात्राओं की जानकारी पोर्टल के होम पेज पर प्रदर्शित की जाएगी। आम नागरिक पोर्टल के विद्यार्थी उपस्थिति रिपोर्ट मेनू पर क्लिक कर विद्यार्थियों से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इस व्यवस्था के तहत शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त, विशिष्ट संस्थाओं सहित सभी आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित छात्र-छात्राओं की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध होगी। साथ ही प्रत्येक माह की विद्यार्थियों की उपस्थिति भी अगले माह की 10 तारीख तक पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी। इसके अलावा शासन की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति तथा जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना (पूर्व में जवाहर उत्कर्ष योजना) के अंतर्गत लाभान्वित छात्र-छात्राओं की जानकारी भी पोर्टल के नया क्या है टैब पर क्लिक कर प्राप्त की जा सकती है। इस ऑनलाइन व्यवस्था से आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी और उनकी उपस्थिति को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने के साथ-साथ व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर निगरानी सुनिश्चित होगी।

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग में 22 अधिकारी-कर्मचारियों का तबादला

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग में 22 अधिकारी-कर्मचारियों का तबादला

 रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग में 22 अधिकारी-कर्मचारियों का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया गया है जिसमें सहायक संचालक से सहायक ग्रेड-3 तक के कर्मचारी प्रभावित हुए हैं. इनमें एक संयुक्त संचालक, 4 उप संचालक, 5 सहायक संचालक, 7 सहायक सूचना अधिकारी के अलावा एक सहायक ग्रेड-1, 2 सहायक ग्रेड-2 और 2 सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी शामिल हैं।.

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग में 22 अधिकारी-कर्मचारियों का तबादला

 

कांग्रेस संविधान से ऊपर नहीं, तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम् किया अपमान : साव

कांग्रेस संविधान से ऊपर नहीं, तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम् किया अपमान : साव

 00 कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से लेकर निचले स्तर के नेताओं में नैतिक पतन, धमकी की सजा इनके सहयोगी ही भुगत रहे
रायपुर।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में वंदे मातरम् के केवल दो पद गाने का फैसला बेहद निराशाजनक है। कांग्रेस की यह हठधर्मिता देश की भावनाओं के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् देश की स्वतंत्रता के संघर्ष का अभिन्न हिस्सा रहा है। अनेक वीर शहीदों ने इसे गाते हुए अपना जीवन बलिदान किया। कांग्रेस का यह फैसला उन महान शहीदों का अपमान है। यह संविधान और देश की 140 करोड़ जनता की भावनाओं का भी अपमान है। साव ने कहा कि कांग्रेस आज भी तुष्टिकरण की राजनीति से बाहर नहीं निकल पाई है। कांग्रेस की राजनीति एक बार फिर मुस्लिम लीग के रास्ते पर जाती दिखाई दे रही है। सीडब्ल्यूसी का यह प्रस्ताव कांग्रेस की इसी सोच को स्पष्ट करता है।
उप मुख्यमंत्री  साव ने अधिकारियों को धमकाने की घटनाओं पर कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े लोगों द्वारा पहले शिवनंदनपुर में अधिकारियों को धमकाने और फिर रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद ईडी अधिकारियों को धमकाने की घटनाएं सामने आई। अब ऐसी घटनाएं लगातार सामने आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। ये विष्णु देव साय सरकार का सुशासन सरकार है। अधिकारियों को धमकाना और यह कहना कि सत्ता में आने के बाद देख लेंगे, लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
साव ने कहा कि अधिकारी के साथ गाली-गलौज करना और डंडे से मारने की धमकी देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। ऐसी भाषा और व्यवहार लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं हो सकता। भूपेश बघेल सत्ता में रहते हुए अधिकारियों पर किस तरह का दबाव बनाया गया होगा, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से आज कांग्रेस के कई सहयोगी कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। लोकतंत्र में कानून से ऊपर कोई नहीं है।

CG – एक टक्कर और उजड़ गए 3 परिवार, बाइक-स्कूटी हादसे में शिक्षक समेत 3 की मौत, मौके पर मची अफरा-तफरी…

CG – एक टक्कर और उजड़ गए 3 परिवार, बाइक-स्कूटी हादसे में शिक्षक समेत 3 की मौत, मौके पर मची अफरा-तफरी…

 कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे में सरकारी शिक्षक समेत तीन लोगों की मौत हो गई। घटना लोहारा थाना क्षेत्र के बीचारपुर के पास हुई, जहां तेज रफ्तार बाइक और स्कूटी के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसा इतना भीषण था कि इसमें सरकारी शिक्षक समेत तीन लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

हादसे में तीन लोगों की मौत

जानकारी के अनुसार, हादसे में श्याम चरण, निवासी ग्राम कापसी, जिला राजनांदगांव की मौके पर ही मौत हो गई। श्याम चरण रणवीरपुर स्थित शासकीय स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। वहीं देवदास मार्कंडेय (18 वर्ष), निवासी ढोढमा नवापारा, ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। तीसरे घायल पुनीत रात्रे (19 वर्ष), निवासी ढोढमा नवापारा, की इलाज के दौरान मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही लोहारा पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर हादसे से जुड़े साक्ष्य जुटाए। तीनों मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

CG NEWS : राज्य खेल अलंकरण के लिए चयनित खिलाड़ियों की अंतरिम सूची हुआ जारी

CG NEWS : राज्य खेल अलंकरण के लिए चयनित खिलाड़ियों की अंतरिम सूची हुआ जारी

  रायपुर। राज्य खेल पुरस्कार अलंकरण 2026 के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने चयनित खिलाड़ियों की अंतरिम सूची जारी कर दी है। विभाग ने सूची पर खिलाड़ियों से दावा-आपत्ति आमंत्रित की है। इच्छुक खिलाड़ी 23 अगस्त 2026 को कार्यालयीन समय तक विभाग की वेबसाइट https://sportsyw.cg.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं। निर्धारित तिथि और समय के बाद प्राप्त होने वाले आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।

इन पुरस्कारों के लिए जारी हुई अंतरिम सूची

संचालनालय, खेल एवं युवा कल्याण छत्तीसगढ़ द्वारा जारी सूची में शहीद राजीव पाण्डेय पुरस्कार, शहीद कौशल यादव पुरस्कार, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार, शहीद पंकज विक्रम सम्मान, शहीद विनोद चौबे सम्मान और मुख्यमंत्री ट्रॉफी वर्ष 2025-26 के लिए चयनित खिलाड़ियों के नाम शामिल हैं।

देखिये अंतरिम सूची में पुरस्कार के लिए चयनित खिलाड़ियों के नाम-

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया दृश्य संवाद 2026 का शुभारंभ, तस्वीरों में उतरा छत्तीसगढ़, फोटो जर्नलिस्टों का हुआ सम्मान….

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया दृश्य संवाद 2026 का शुभारंभ, तस्वीरों में उतरा छत्तीसगढ़, फोटो जर्नलिस्टों का हुआ सम्मान….

 रायपुर:  स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने आज विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’ का शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में रायपुर के प्रेस फोटो जर्नलिस्टों के साथ-साथ प्रोफेशनल और शौकिया फोटोग्राफरों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। प्रदर्शनी में तस्वीरों के जरिए प्रकृति, छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा तथा जनसरोकार से जुड़े विषयों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।

चार कैटेगरी में आयोजित प्रदर्शनी की ‘प्रकृति एवं पर्यावरण’ कैटेगरी में प्रदर्शित तस्वीरों ने प्रदर्शनी स्थल पर प्राकृतिक सौंदर्य को साकार कर दिया। वहीं ‘संस्कृति एवं परंपरा’ कैटेगरी की तस्वीरों में छत्तीसगढ़ की लोककला, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की महक महसूस की जा सकती है। ‘समाचार एवं जनसरोकार’ कैटेगरी में फोटो जर्नलिस्टों की नजर से महत्वपूर्ण घटनाओं और सामाजिक सरोकारों को एक क्लिक में जीवंत रूप दिया गया है।

इस वर्ष रायपुर प्रेस क्लब ने प्रदर्शनी को और व्यापक स्वरूप देते हुए प्रेस क्लब के गैर सदस्य  प्रोफेशनल और शौकिया फोटोग्राफरों के लिए भी ओपन कैटेगरी में भागीदारी का अवसर दिया। इस श्रेणी में 35 से अधिक प्रतिभागियों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं।

*फोटोग्राफी चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारी वाला काम : श्याम बिहारी जायसवाल*
प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने फोटो जर्नलिस्टों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि फोटोग्राफी केवल कैमरे से तस्वीर खींचने का काम नहीं, बल्कि एक पल को इतिहास के लिए सुरक्षित कर देने की कला और जिम्मेदारी है। खासतौर पर फोटो जर्नलिज्म में परिस्थितियां हमेशा अनुकूल नहीं होतीं। फोटो जर्नलिस्ट को घटनास्थल पर मौजूद रहकर बेहद कम समय में यह तय करना होता है कि कौन-सा क्षण महत्वपूर्ण है और उसे किस एंगल से कैमरे में कैद किया जाए।

उन्होंने कहा कि एक अच्छी तस्वीर के पीछे तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ त्वरित निर्णय लेने की क्षमता, सही समय की पहचान, सही एंगल और परिस्थितियों को समझने की दृष्टि भी जरूरी है। कई बार पत्रकार घटना को शब्दों में विस्तार से बताते हैं, लेकिन एक तस्वीर वही बात एक क्षण में लोगों तक पहुंचा देती है। यही फोटो जर्नलिज्म की ताकत है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब द्वारा विश्व फोटोग्राफी दिवस पर इस तरह की प्रदर्शनी का आयोजन सराहनीय पहल है। इससे वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्टों के अनुभव नई पीढ़ी तक पहुंचेंगे और युवा तथा शौकिया फोटोग्राफरों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। उन्होंने सभी फोटो जर्नलिस्टों और फोटोग्राफरों को विश्व फोटोग्राफी दिवस की शुभकामनाएं दीं।

*तस्वीर पत्रकारिता की अधूरी खबर को पूरा करती है : मोहन तिवारी*

रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने सभी फोटो जर्नलिस्टों और फोटोग्राफरों को विश्व फोटोग्राफी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘दृश्य संवाद’ केवल एक फोटो प्रदर्शनी नहीं, बल्कि तस्वीरों के माध्यम से समाज और समय से संवाद करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता, फोटो जर्नलिस्ट साथियों के बिना अधूरी है। खबर को जीवंतता और प्रभाव देने में एक तस्वीर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने कहा कि एक सशक्त तस्वीर के लिए कई बार लंबे कैप्शन की जरूरत नहीं होती। बिना किसी कैप्शन के भी तस्वीर अपने आप में पूरी खबर कहने की ताकत रखती है। फोटो जर्नलिस्ट जिस क्षण को कैमरे में कैद करता है, वह आने वाले समय में उस घटना का दस्तावेज बन जाता है। उन्होंने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब आने वाले वर्षों में भी विश्व फोटोग्राफी दिवस पर इस तरह की प्रदर्शनी और फोटो जर्नलिस्ट गतिविधियों की परंपरा को आगे बढ़ाएगा।

कार्यक्रम में रायपुर प्रेस क्लब के महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू, भूपेश जांगड़े, वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट गोकुल सोनी, राजकुमार चतुर्वेदी, नरेंद्र बंगाले, प्रदीप डडसेना, पंकज चौहान, फोटो जर्नलिस्ट प्रकोष्ठ के संयोजक दीपक पांडे, दीपेंद्र सोनी, रमन हलवाई, जय गोस्वामी , सागर फारीकार, पंकज सिंह,विजय देवांगन मनोज देवांगन विनय घाटगे ,हेमंत गोस्वामी किशन लोखंडे त्रिलोचन मानिकपुरी, राजेश सोनकर  सहित बड़ी संख्या में फोटो जर्नलिस्ट एवं पत्रकार उपस्थित रहे।

तीन दिवसीय ‘दृश्य संवाद 2026’ फोटो प्रदर्शनी में दर्शक इन तस्वीरों का तीन दिन अवलोकन कर सकेंगे और फोटोग्राफी की दृष्टि से छत्तीसगढ़ की प्रकृति, संस्कृति, समाज और घटनाक्रम को एक अलग नजरिए से देख सकेंगे।

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने दिए जनहितकारी योजनाओं में प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश…..

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने दिए जनहितकारी योजनाओं में प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश…..

 रायपुर: केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू ने आज जिला कलेक्टोरेट स्थित मनियारी सभाकक्ष में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पात्र हितग्राहियों तक समय पर लाभ पहुंचाने तथा विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में मुंगेली विधायक पुन्नूलाल मोहले, बिल्हा विधायक  धरमलाल कौशिक, कलेक्टर  कुन्दन कुमार, अतिरिक्त कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय तिवारी, जिला पंचायत सीईओ  गोकुल रावटे, जनपद पंचायत मुंगेली के अध्यक्ष  रामकमल सिंह परिहार, जिला अध्यक्ष  दीनानाथ केशरवानी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने वीबी जी राम जी अंतर्गत श्रमिकों के पंजीयन की जानकारी ली। उन्होंने सक्रिय श्रमिकों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि अधिक से अधिक श्रमिकों का पंजीयन होने से उन्हें शासन की योजनाओं और रोजगार के अवसरों का लाभ मिलेगा। उन्होंने वीबी जी राम जी अंतर्गत जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की कार्ययोजना एवं स्वीकृति की भी जानकारी ली तथा आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता से स्वीकृत कराने के निर्देश दिए। केंद्रीय राज्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण एवं पीएम जनमन योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए पूर्ण हो चुके आवासों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने कहा। उन्होंने पीएम जनमन के अंतर्गत स्वीकृत आवासों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण कराने के निर्देश दिए। जर्जर स्कूल एवं आंगनबाड़ी भवनों की जानकारी लेते हुए आवश्यक निर्माण एवं मरम्मत कार्य सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। बिहान योजना के बैंक लिंकेज, सामुदायिक शौचालयों की स्वच्छता, सामाजिक सहायता योजनाओं के अंतर्गत पेंशन भुगतान तथा विशिष्ट दिव्यांगता आईडी की प्रगति की भी समीक्षा की गई। उन्होंने सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।

केन्द्रीय राज्यमंत्री साहू ने कृषि विभाग अंतर्गत मृदा  स्वास्थ्य कार्ड, जैविक खेती, खाद-बीज की उपलब्धता एवं पीएम किसान सम्मान निधि केवाईसी की जानकारी ली गई और जैविक खेती का रकबा बढ़ाने तथा किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद और बीज के लिए किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। पशुपालन एवं मत्स्य विभाग की समीक्षा में पशु रोग नियंत्रण, टीकाकरण, राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम तथा मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत कार्ययोजना एवं प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने खाद्य विभाग अंतर्गत पीएम उज्ज्वला योजना एवं राशन कार्ड से संबंधित लंबित प्रकरणों की जानकारी ली और शत-प्रतिशत पात्र हितग्राहियों का राशन कार्ड बनाने के निर्देश दिए। बैठक में जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित कर राशन कार्ड से नाम काटे जाने की शिकायत का मामला भी सामने आया, जिस पर उन्होंने जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने तथा भविष्य में नाम काटने से पहले विधिवत जांच एवं सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में महिला बाल विकास विभाग अंतर्गत रेडी-टू-ईट, वजन तिहार, आंगनबाड़ी भवनों की स्थिति एवं सुकन्या समृद्धि योजना की प्रगति की जानकारी ली गई और आंगनबाड़ी केंद्रों की बेहतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत गर्भवती महिलाओं का पंजीयन, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम, आयुष्मान कार्ड एवं जनऔषधि केंद्रों के संचालन की जानकारी ली और जिले को टीबी मुक्त बनाने तथा स्वास्थ्य योजनाओं में लक्षित प्रगति हासिल करने के लिए प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। नगरीय निकायों के अंतर्गत अटल कायाकल्प एवं अमृत 2.0, खुड़िया समूह जल प्रदाय योजना, पीएम आवास योजना-शहरी एवं एसबीएम 2.0 की समीक्षा की गई। लंबित आवासों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने पीएमजीएसवाई के अंतर्गत सड़कों की स्थिति की समीक्षा करते हुए 05 से 10 वर्ष पुरानी सड़कों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए। जिन सड़क कार्यों के टेंडर हो चुके हैं, उन्हें शीघ्र चलने योग्य बनाने पर जोर दिया गया। मनियारी जलाशय योजना के कमांड क्षेत्र के विकास, जल प्रबंधन एवं जलाशयों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। केंद्रीय राज्य मंत्री ने राजस्व विभाग अंतर्गत सीमांकन, नामांतरण एवं बंटवारा सहित विभिन्न प्रकरणों का संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए। छात्रावासों में ट्रांसफार्मर की व्यवस्था तथा विद्युत विभाग के कार्यों के लिए कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने को कहा। केंद्रीय राज्य मंत्री ने शिक्षा विभाग अंतर्गत स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना को बेहतर बनाने, शैक्षणिक व्यवस्था का उन्नयन करने तथा सभी अधिकारियों को नियमित रूप से स्कूलों का भ्रमण एवं निरीक्षण करने के निर्देश दिए। आदिवासी विकास विभाग अंतर्गत पीएम आदर्श ग्राम योजना, पीएम अजय योजना, पीएम कौशल विकास योजना तथा सीएसआर के अंतर्गत संचालित कार्यों की भी समीक्षा की गई। उन्होंने वन विभाग अंतर्गत जंगलों में अवैध कटाई पर प्रभावी रोक लगाने, सर्चिंग एवं कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिए।

बिल्हा विधायक  कौशिक ने कहा कि दिशा की बैठक केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को दिशा प्रदान करती है। उन्होंने जिले में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बेहतर कार्यों और बढ़ी हुई रैंकिंग की सराहना करते हुए स्वास्थ्य सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं में भी बेहतर प्रगति की बात कही। उन्होंने ई-श्रम पोर्टल पर शत-प्रतिशत श्रमिकों का पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी कोई कमी या समस्या सामने आती है, उसे दूर कर योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जाएगा। विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी।

CG Weather : छत्तीसगढ़ में अगले 3 दिन जारी रहेगी बारिश, कई जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट

CG Weather : छत्तीसगढ़ में अगले 3 दिन जारी रहेगी बारिश, कई जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय है और प्रदेश में अगले तीन दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 20 अगस्त को कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका है। वहीं 21 और 22 अगस्त को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश जारी रह सकती है, हालांकि भारी बारिश की गतिविधियों में कुछ कमी आने का अनुमान है।

मानसून ट्रफ और निम्न दबाव क्षेत्र का असर

मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में बारिश की प्रमुख वजह उत्तर झारखंड और उसके आसपास बने निम्न दबाव क्षेत्र को माना जा रहा है। इसके साथ ही मानसून ट्रफ भी सक्रिय है, जो इस मौसम प्रणाली के केंद्र से होकर बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है।

इस सिस्टम के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में लगातार नमी पहुंच रही है, जिसके चलते प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बनी हुई हैं।

इन जिलों में बारिश ज्यादा होने की संभावना

20 अगस्त को राजनांदगांव, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत ज्यादा रह सकती हैं। इन जिलों में कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है।

इन इलाकों में हल्की बारिश के आसार

इसके अलावा सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, रायगढ़ और कोरबा समेत कई जिलों में हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं

20 अगस्त के बाद कमजोर पड़ सकता है बारिश का जोर

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला बना रहेगा। हालांकि 20 अगस्त के बाद भारी बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। यानी बारिश पूरी तरह थमने के बजाय इसकी तीव्रता और क्षेत्र में कुछ कमी आ सकती है।

रायपुर में बादल छाए रहने के साथ बारिश

राजधानी रायपुर में भी मौसम बदला हुआ रहेगा। 20 अगस्त को शहर में आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। इस दौरान एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। रायपुर में अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

सुकमा में भारी से बहुत भारी बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान सुकमा जिले के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। वहीं बलरामपुर के कुछ इलाकों में भी भारी बारिश हुई। प्रदेश में इस दौरान अधिकतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस पेंड्रा रोड में रिकॉर्ड किया गया।

मौसम विभाग ने गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। खासकर बारिश के दौरान खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है।

 
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मिले इंटर्न डॉक्टर, आंदोलन स्थगित करने का लिया निर्णय….

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मिले इंटर्न डॉक्टर, आंदोलन स्थगित करने का लिया निर्णय….

 रायपुर:  स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक चर्चा की। इस दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा के बाद प्रदेश की विष्णुदेव साय सरकार पर विश्वास जताते हुए अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया, जिस पर सभी ने संतोष व्यक्त किया।

हेल्थ चेकअप और ऑनलाइन कंसल्टेशन बुक करना

स्टाइपेंड वृद्धि पर आगे बढ़ी प्रक्रिया

चर्चा में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि  IMA-MSN छत्तीसगढ़ द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव और संबंधित प्रकरण पर पहल करते हुए इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि से जुड़ी आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बताया गया कि इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर इसी माह आवश्यक एवं सकारात्मक निर्णय लेने के लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ाई जा रही है।

चिकित्सा शिक्षा के प्रति सरकार प्रतिबद्ध

स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा से जुड़े सभी विषयों के प्रति संवेदनशील है और इंटर्न डॉक्टरों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सोनमणि बोरा ने प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का कार्यभार ग्रहण किया….

सोनमणि बोरा ने प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का कार्यभार ग्रहण किया….

 रायपुर: भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी  सोनमणि बोरा (भा.प्र.से.-1999) ने आज प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन का कार्यभार ग्रहण किया। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी आदेश के तहत  बोरा को प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग पदस्थ किया गया है। वे प्रमुख सचिव, आदिम जाति विकास विभाग, अनुसूचित जाति विकास विभाग तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। वे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात  बोरा ने विभागीय अधिकारियों से विभाग की योजनाओं, कार्यक्रमों और विभिन्न कार्यों की जानकारी ली। इस अवसर पर विभाग के संचालक  रिमिजियुस एक्का, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुमीत अग्रवाल, उप सचिव  भागवत जायसवाल, अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य, मुख्य अभियंता  राजेश शर्मा, संयुक्त संचालक  मिथिलेश  अवस्थी,  उप संचालक  अरुण साहू, सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुनील अग्रहरि तथा  अधीक्षण अभियंता  रमेश सिंह के साथ ही अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और विभागीय गतिविधियों से अवगत कराया।

उल्लेखनीय है कि  बोरा की राज्य गठन के पश्चात रायपुर को राजधानी के रूप में संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वे रायपुर नगर पालिक निगम, आरडीए, बीडीए के आयुक्त एवं सीईओ रहे। उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव से रायपुर और बिलासपुर के नगर विकास के साथ-साथ कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, बिलासपुर जैसे जिलों के विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है बोरा के कार्यकाल में सफाई मित्र योजना, बूढ़ातालाब के साथ अन्य तालाबों के संवर्धन, विकास और पुनरोद्धार तथा रायपुर के महादेव घाट में मूर्ति विसर्जन के लिए स्थान निर्धारित कर कार्य प्रारंभ कराया गया। नगरीय क्षेत्रों में विद्यालयों का कायाकल्प कराया गया। रायपुर नगर निगम में जन्म व मृत्यु पंजीयन को ऑनलाइन कराया गया, लेखा संबंधित कार्यो को मैनुअल पध्यति से सॉफ्टवेयर आधारित कराया गया। साथ ही संचालन-संधारण (ओ एंड एम) कार्यो को प्रिवेंटिव कार्यो के रूप में शामिल कराने जैसे कार्य उनकी प्रमुख उपलब्धियां रहीं।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग नगरीय निकायों के माध्यम से नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहरी विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं के संचालन और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बोरा के कार्यभार ग्रहण करने के साथ विभागीय कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने तथा नगरीय विकास से जुड़े कार्यों के बेहतर समन्वय को और गति मिलने की उम्मीद है। बोरा ने अधिकारियों से चर्चा करते हुए कहा कि जनता से जुड़े विभागीय कार्यक्रम तथा उनके मूलभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाओं को प्रमुखता दी जानी चाहिए।

बलौदाबाजार और सिमगा विकासखंडों को राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की बड़ी सौगात

बलौदाबाजार और सिमगा विकासखंडों को राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की बड़ी सौगात

 बलौदाबाजार। बुनियादी सुविधाओं (रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली) का विकास और सुदृढ़ीकरण किसी भी समाज, गाँव या देश की प्रगति का आधार है। राज्य के ग्रामीण अंचलों में बुनियादी सुविधाओं के विकास और सुदृढ़ीकरण के लिए विष्णु सरकार के निरंतर प्रयास रंग ला रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार और अंतिम क्रियाकर्म के दौरान ग्रामीणों को होने वाली असुविधाओं को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मंत्री वर्मा द्वारा बलौदाबाजार एवं सिमगा विकासखंडों के 17 विभिन्न ग्रामों में 97.92 लाख रुपए (5.76 लाख रूपए प्रति ग्राम) के “मुक्तिधाम में शेड सह प्रतीक्षालय निर्माण” कार्यों को अपनी हरी झंडी (स्वीकृति) दे दी है। स्वीकृत यह सभी विकास कार्य ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूती प्रदान करेंगे।

ग्राम पंचायतों व गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
राजस्व मंत्री द्वारा 5.76 लाख रूपए प्रति ग्राम अनुसार स्वीकृत सूची में सिमगा तथा बलौदाबाजार विकासखंडों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में मुक्तिधाम शेड सह प्रतीक्षालय का निर्माण कराया जाएगा, जिसमें सिमगा विकासखंड के बिटकुली, बासीन (खैरवारी), धोबनीडीह (बुडगहन) एवं अमेरी (कसहीडीह) शामिल है। इसी तरह बलौदाबाजार विकासखंड के ढनढनी (खैरवारडीह), करमनडीह, मगरचबा (खैरघटा), लिमाही (गोड़खपरी), भरुवाडीह (पौसरी/चांपा एवं ढाबाडीह), भाठागांव-स, रसेड़ा (रसेड़ा), शुक्लाभाठा (सोनपुर), चौरटी (चौरटी एवं अचानकपुर), ढाबाडीह, अचनाकपुर, झोंका तथा सेमराडीह शामिल है।

इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के अवसर पर राजस्व मंत्री वर्मा ने कहा कि, ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास और हर नागरिक तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना हमारी सरकार का मुख्य ध्येय है। मुक्तिधाम में शेड और प्रतीक्षालय न होने के कारण ग्रामीणों को विशेषकर बारिश और भीषण गर्मी के मौसम में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इन स्वीकृतियों से अब अंतिम संस्कार के समय लोगों को एक सम्मानजनक और सुविधापूर्ण वातावरण मिलेगा। आगे भी विकास का यह सिलसिला अनवरत जारी रहेगा।

ग्रामीणों में हर्ष की लहर
17 प्रमुख गांवों में 97.92 लाख रूपए के मुक्तिधाम शेड सह प्रतीक्षालय निर्माण की स्वीकृति मिलने से क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों में अपार उत्साह है। ग्रामीणों ने मंत्री वर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, उनके इस संवेदनशील प्रयास से बरसात और गर्मी के मौसम में होने वाली विकट समस्याओं से स्थाई निजात मिलेगी।

CG : प्रदेश में इस दिन सार्वजनिक अवकाश, बैंक, कोषालय रहेंगे बंद, सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया अधिसूचना

CG : प्रदेश में इस दिन सार्वजनिक अवकाश, बैंक, कोषालय रहेंगे बंद, सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया अधिसूचना

 रायपुर।  प्रदेश सरकार ने रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर शुक्रवार 28 अगस्त 2026 को राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इस दिन सभी शासकीय कार्यालयों, संस्थाओं के साथ-साथ कोषालय एवं बैंकों में अवकाश रहेगा।

नेगोशिएबल इंस्टूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 25 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य शासन ने 28 अगस्त 2026 को प्रदेश के सभी कोषालय एवं बैंकों के लिए भी सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

”लोक निर्माण से छत्तीसगढ़ निर्माण” के मूलमंत्र के साथ अधोसंरचना विकास को दे रहे नई गति – अरुण साव

”लोक निर्माण से छत्तीसगढ़ निर्माण” के मूलमंत्र के साथ अधोसंरचना विकास को दे रहे नई गति – अरुण साव

 ’पिछले ढाई सालों में 12,666 करोड़ के 1572 कार्यों को मिली प्रशासकीय स्वीकृति, इनमें सड़कों के 1285, पुलों के 247 और भवन निर्माण के 42 कार्य शामिल’

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में लोक निर्माण विभाग के कार्यों की दी जानकारी

रायपुर. 19 अगस्त 2026. उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने आज प्रेस-कॉन्फ्रेंस में लोक निर्माण विभाग के कार्यों, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य का सबसे बड़ा निर्माण विभाग लोक निर्माण विभाग छत्तीसगढ़ के विकास का आधार है। सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण के साथ विभागीय कार्यों में तेजी और प्रशासनिक कसावट लाने के लिए विभाग लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दिसम्बर-2023 में सरकार बनने के बाद से अब तक लोक निर्माण विभाग को निर्माण कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर प्रशासकीय स्वीकृतियां मिली हैं। लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी और अपर सचिव  एस.एन. श्रीवास्तव भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव ने प्रेस-कान्फ्रेंस में बताया कि पिछले ढाई वर्षों में विभाग को 12 हजार 666 करोड़ रुपए से अधिक के लागत के कुल 1572 कार्यों के लिए प्रशासकीय स्वीकृतियां मिली हैं। इसमें सड़क निर्माण के 1285, पुलों के 247 और भवन निर्माण के 42 कार्य शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में दिसम्बर-2023 से मार्च-2024 तक 80 कार्यों के लिए 551 करोड़ 42 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। इनमें 374 किमी लंबाई की 72 सड़कें, 6 पुल और दो भवन शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2590 करोड़ 70 लाख रुपए लागत के कुल 438 कार्यों के लिए की स्वीकृति दी गई। इनमें 1465 किमी लंबाई की 400 सड़कें, 37 पुल और एक भवन शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 लोक निर्माण विभाग के लिए ऐतिहासिक रहा। विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए इस वर्ष 9129 करोड़ 18 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिली, जो राज्य निर्माण के बाद पिछले 25 वर्षों के इतिहास में विभाग को मिली सर्वाधिक स्वीकृति है। इस वित्तीय वर्ष में 5129.60 किमी लंबाई की 754 सड़कों, 200 पुलों और 39 भवनों सहित कुल 993 कार्यों को मंजूरी दी गई। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 10 अगस्त तक विभाग को 608 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। इसमें 608.20 किमी लंबाई की 59 सड़कें और दो पुलों के निर्माण शामिल हैं।

उप मुख्यमंत्री  साव ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में विभाग में कार्यों की गति बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत किया गया है। बेहतर संचालन और प्रशासनिक कसावट के लिए सात नए संभागीय कार्यालय और 12 नए उप संभागीय कार्यालय शुरू किए गए हैं। इससे निर्माण कार्यों की निगरानी और स्वीकृत कार्यों के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकताओं में लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का निराकरण भी शामिल है।

साव ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए जल्द ही ‘वमिस’ (WAMIS - Work and Accounts Monitoring Integration System) लागू किया जाएगा। इस प्रणाली से डीपीआर तैयार करने से लेकर कार्य की स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाएं ऑनलाइन और एकीकृत प्रणाली से संचालित होंगी। इससे वर्तमान में विभागीय प्रक्रियाओं में लगने वाले लंबे समय को कम किया जा सकेगा और निर्माण कार्यों को तेजी से धरातल पर उतारा जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से विभागीय कामकाज में सुगमता के साथ गुणवत्ता और निगरानी में भी सुधार होगा। हम राज्य में “लोक निर्माण से छत्तीसगढ़ निर्माण” के मूलमंत्र के साथ अधोसंरचना विकास को नई गति देने लगातार सक्रियता से काम कर रहे हैं।

श्रमिक परिवारों को मिले शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ : श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन

श्रमिक परिवारों को मिले शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ : श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन

 ई-केवायसी प्रक्रिया के तहत किसी भी श्रमिक का आवेदन लंबित न रहे, दिए निर्देश

रायपुर - श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन ने आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम विभाग के काम-काज की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ई-केवायसी प्रक्रिया के तहत किसी भी श्रमिक का आवेदन लंबित न रहे और सभी पात्र श्रमिकों को शासन की योजनाओं का समय पर लाभ मिले।

67 कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर
 मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। राज्य में संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों के हितों के संरक्षण के लिए विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से 67 कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों को मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए विभागीय अधिकारी आवश्यक कार्यवाही करें।

श्रम संहिताओं के अध्ययन और अधोसंरचना विस्तार के निर्देश
श्रम मंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा चार नए श्रम संहिताएं बनाई गई हैं। सभी श्रम अधिकारी इन कानूनों का अध्ययन कर लें। उन्होंने कहा कि नए जिलों के श्रम कार्यालयों में जल्द ही सेटअप अनुसार अधोसंरचना का विस्तार किया जाएगा। 

कारखानों की नियमित जांच कर आवश्यक कार्यवाही करें
      बैठक में उन्होंने श्रमिकों के पंजीयन के लिए प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। ठेकेदार को जितने श्रमिकों का लाइसेंस प्राप्त है, उतने ही श्रमिक कार्यरत हैं या नहीं, यह सुनिश्चित करने तथा कारखानों की नियमित जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए।

योजनाओं की जिलेवार समीक्षा 
बैठक में ऑनलाईन रेण्डम निरीक्षण, अभियोजन एवं निराकरण की कार्यवाही, छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम अंतर्गत पंजीयन की समीक्षा सहित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। इनमें मिनी माता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना, असंगठित कर्मकार छात्रवृत्ति योजना, ई-रिक्शा सहायता योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना, असंगठित कर्मकार महतारी जतन योजना और बस्तर मुन्ने पोर्टल (नियद नेल्ला नार 2.0) शामिल हैं।

अपात्रों को लाभ मिलने पर होगी कार्रवाई
 सचिव सह श्रमायुक्त  हिमशिखर गुप्ता ने जिलों के श्रम पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि इस योजना में अपात्र व्यक्ति को लाभ मिलता है अथवा किसी प्रकार की शिकायत मिलती है तो संबंधित जिलों के श्रम अधिकारी जवाबदेह होंगे और उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत सम्मान समारोह का आयोजन 24 अगस्त को
सचिव श्री गुप्ता ने बताया कि 24 अगस्त मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में राजधानी रायपुर में अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री की पहल पर चालू शैक्षणिक सत्र से इस योजना में सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 की गई है। इसके तहत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक श्रेष्ठ आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिसका पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।बैठक में अपर श्रमायुक्त द्व एस.एल. जांगड़े एवं सविता मिश्रा, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मण्डल के सचिव  गिरीश रामटेके सहित विभिन्न जिलों से आए श्रम विभाग के मैदानी अधिकारी उपस्थित थे।

नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ

नदियों के उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक एवं समयबद्ध कार्ययोजना पर जोर

मानचित्रण, संरक्षण, पुनर्भरण, जनभागीदारी और कार्ययोजना के पांच प्रमुख स्तंभों पर होगा नदी संरक्षण का काम

नेशनल वाटर एकेडमी पुणे के साथ एमओयू से जल संरक्षण के क्षेत्र में मजबूत होगा क्षमता निर्माण

एंट्रिक्स कॉरपोरेशन बेंगलुरु के सहयोग से आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक का होगा उपयोग

कुनकुरी तहसील के लगभग 1540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से जल संसाधनों की होगी निगरानी और विश्लेषण

मुख्यमंत्री ने किया जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन

रायपुर ,19 अगस्त 2026

मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ

नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, कृषि और समृद्धि की जीवनधारा हैं। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा बनाने में प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिन नदियों ने हमारी सभ्यता को पोषित किया और हमें समृद्धि दी, उनका संरक्षण हम सभी का साझा दायित्व है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री  साय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम स्थलों एवं जलग्रहण क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण, जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने तथा नदी संरक्षण को व्यापक जन अभियान का स्वरूप देना है। कार्यशाला में जल संरक्षण, नदी पुनरुद्धार और जल प्रबंधन से जुड़े विषय विशेषज्ञों के साथ राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य तथा विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा मंथन किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा। इसी भावना के साथ राज्य सरकार नदियों के उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के समन्वय से व्यापक कार्ययोजना पर आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान नदियों से गहराई से जुड़ी हुई है। महानदी सहित प्रदेश की अनेक नदियों ने कृषि, आजीविका और सामाजिक जीवन को समृद्ध किया है। नदियों का अस्तित्व उनके उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के स्वास्थ्य पर निर्भर है। इसलिए नदी संरक्षण का कार्य केवल उसके प्रवाह क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता। हमें नदी के स्रोत से लेकर उसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को समझकर संरक्षण की समग्र योजना बनानी होगी।

उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। स्रोत महोत्सव में विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर ऐसी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे धरातल पर समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।

’पांच प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ेगा नदी संरक्षण अभियान’

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में नदी संरक्षण के लिए मानचित्रण, संरक्षण, पुनर्भरण, जनभागीदारी और कार्ययोजना के पांच प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाएगा। प्रत्येक नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से मानचित्रण किया जाएगा। नदी का उद्गम कहां है, उसके प्रवाह क्षेत्र की प्रकृति कैसी है, भू-उपयोग में किस प्रकार के बदलाव हुए हैं और किन कारणों से नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव पड़ रहा है - इन सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक मानचित्रण और अध्ययन के आधार पर नदी के पूरे इकोसिस्टम के संरक्षण की योजना तैयार की जाएगी। इसमें वन एवं वनस्पति संरक्षण, मृदा क्षरण की रोकथाम, पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण एवं पुनर्जीवन, आवश्यकतानुसार नई जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और भू-जल पुनर्भरण जैसे कार्य शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षाजल हमारे नदी तंत्र और भू-जल का मूल आधार है। इसलिए बारिश के पानी को तेजी से बहकर निकल जाने देने के बजाय उसे अधिक से अधिक मात्रा में धरती के भीतर पहुंचाने के उपाय करने होंगे। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, जल स्रोतों को पुनर्जीवन मिलेगा और नदियों में लंबे समय तक जल प्रवाह बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

’नदी संरक्षण को बनाना होगा जन आंदोलन’

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संरक्षण का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। नदियों के किनारे बसे गांवों और वहां रहने वाले लोगों का नदी से सीधा संबंध है, इसलिए उन्हें नदी संरक्षण की प्रक्रिया का प्रमुख भागीदार बनाना होगा।

उन्होंने जिला स्तरीय समितियों के सदस्यों से कहा कि नदियों के किनारे बसे गांवों में स्थानीय समितियां गठित कर पंचायतों के सहयोग से नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्य आगे बढ़ाए जाएं। स्थानीय समुदाय को नदी की स्थिति, उसके महत्व और संरक्षण के उपायों की जानकारी दी जाए। जब समाज स्वयं अपनी नदी और जल स्रोतों के संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, तब ऐसे प्रयास अधिक प्रभावी और स्थायी होते हैं।

मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से भी आग्रह किया कि जल संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान को सरल एवं सहज भाषा में लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ धरातल पर दिखाई दे और आम नागरिक उसे समझकर अपने जीवन में अपना सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ है। नदियों ने पीढि़यों से मानव जीवन को जल, भोजन और आजीविका प्रदान की है। इसलिए एक सभ्य समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि हम अपनी आने वाली पीढि़यों के लिए नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्रोत महोत्सव 2026 से निकलने वाले निष्कर्ष छत्तीसगढ़ में नदी संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।

’जल संरक्षण और आधुनिक तकनीक के लिए दो महत्वपूर्ण एमओयू’

कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की संस्थागत और तकनीकी क्षमता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण एमओयू किए गए। नेशनल वाटर एकेडमी, पुणे के साथ हुए एमओयू के माध्यम से जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और मैदानी अमले के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इससे आधुनिक जल प्रबंधन, नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
इसी प्रकार एंट्रिक्स कॉरपोरेशन, बेंगलुरु के साथ हुए एमओयू के माध्यम से इसरो की विशेषज्ञता और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग जल संसाधनों के वैज्ञानिक विश्लेषण एवं निगरानी में किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में कुनकुरी तहसील के लगभग 1540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उन्नत भू-स्थानिक तकनीक के माध्यम से जल संसाधनों की स्थिति का अध्ययन, निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़ों को स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़कर जल संरक्षण की अधिक प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। इससे क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुरूप समाधान तैयार करने और उनके परिणामों की निगरानी करने में भी मदद मिलेगी।

’‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक नीर की रक्षा, नारी की भागीदारी और जल संपदा के संरक्षण की अवधारणा को रेखांकित करती है। पुस्तक में जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न अनुभवों, प्रयासों और नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया है।

’जलस्रोतों की पहचान और संरक्षण भविष्य की जल सुरक्षा के लिए जरूरी : डॉ. विनोद तारे’

सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नदियों के उद्गम और उन्हें पोषित करने वाले जल स्रोतों की पहचान एवं संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। बारिश का पानी ही नदियों और भू-जल का प्रमुख आधार है। वर्षाजल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे अधिक से अधिक मात्रा में जमीन के भीतर पहुंचाना होगा, जिससे भू-जल स्तर बढ़े और भविष्य के लिए जल सुरक्षित किया जा सके।

डॉ. तारे ने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्राचीन ज्ञान, स्थानीय एवं पारंपरिक अनुभव और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के बीच समन्वय जरूरी है। इन तीनों को एक साथ जोड़कर तैयार की गई कार्ययोजना ही जल स्रोतों के दीर्घकालिक संरक्षण और जल के सतत उपयोग का आधार बन सकती है।

’साइंस बेस्ड और साइट स्पेसिफिक समाधान तैयार होंगे: जल संसाधन विभाग सचिव’

जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने कहा कि स्रोत महोत्सव 2026 का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम और कैचमेंट एरिया के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक, व्यवहारिक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना है। नदी संरक्षण में केवल डाउनस्ट्रीम फ्लो का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सोर्स एरिया, भूमि उपयोग, मिट्टी की नमी, भू-जल रिचार्ज, वनस्पति और मृदा क्षरण सहित नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ समझना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला में नौ नदी समूहों पर अलग-अलग चर्चा की जा रही है। इन समूहों में क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों के अनुरूप साइट स्पेसिफिक और साइंस बेस्ड समाधान तैयार किए जाएंगे। इसमें समस्या की स्पष्ट पहचान के साथ समाधान, क्रियान्वयन की जिम्मेदारी और परिणामों के आकलन की समय-सीमा भी निर्धारित करने पर जोर रहेगा।

श्री टोप्पो ने कहा कि जल संरक्षण केवल अधोसंरचना निर्माण का विषय नहीं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी ही संरक्षण कार्यों की दीर्घकालिक सफलता और स्थायित्व की कुंजी है। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर छत्तीसगढ़ के लिए समयबद्ध रिवर सोर्स रेस्टोरेशन रोडमैप तैयार करने की दिशा में आगे कार्य किया जाएगा।

कार्यशाला में सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे, नमामि गंगे मिशन से जुड़े विषय विशेषज्ञ, एनआईटी रायपुर के प्राध्यापक, राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य, विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारी तथा जल एवं नदी संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञ उपस्थित थे।

रायपुर : परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर : परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक सम्पन्न

 नवा रायपुर में ई-बसों के संचालन, कार्यालय भवन निर्माण सहित सड़क परियोजनाओं के प्रस्तावों पर हुआ विचार-विमर्श

रायपुर :- मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नवा रायपुर अटल विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) एवं लोक निर्माण विभाग से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा एवं विचार-विमर्श किया गया।

’नवा रायपुर में चलेंगी ई-बसें’  

बैठक में एनआरडीए के अंतर्गत कंप्लायंट बैटरी ऑपरेटेड मोटर एसी-ई बसों के डिजाइन, प्रोक्योरमेंट, सप्लाई, परिचालन एवं संधारण के लिए ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर निविदा आमंत्रित किए जाने के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई। परियोजना के विभिन्न तकनीकी एवं क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं की समीक्षा की गई। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के कार्यालय सहित अन्य कार्यालय भवनों के निर्माण कार्य से संबंधित प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने परियोजना की आवश्यकताओं एवं निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की।

’रायगढ़ और जांजगीर-चांपा की सड़क परियोजनाओं पर चर्चा’  

लोक निर्माण विभाग द्वारा जिला रायगढ़ के अंतर्गत रायगढ़-पूंजीपथरा-घरघोड़ा फोरलेन मार्ग के निर्माण संबंधी प्रस्ताव पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। लगभग 37 किलोमीटर लंबाई वाले इस मार्ग के निर्माण से संबंधित तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों द्वारा परियोजना के लिए प्रभावित भूमि के अर्जन, भूमि व्यपवर्तन तथा निर्माण कार्य की तैयारियों की जानकारी दी गई। बैठक में जिला जांजगीर-चांपा के अंतर्गत लगभग 6.70 किलोमीटर लंबाई वाले अकलतरा बायपास मार्ग के निर्माण कार्य के प्रस्ताव पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। परियोजना से संबंधित तकनीकी एवं निर्माण संबंधी पहलुओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक प्रक्रिया के संबंध में चर्चा की गई।
 
बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव  भूवनेश यादव, ऊर्जा विभाग के सचिव सारांश मित्तर, एनआरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  चंदन कुमार सहित लोक निर्माण, वित्त एवं अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ली समाज कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ली समाज कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

 योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और हितग्राहियों तक समयबद्ध लाभ पहुंचाने के निर्देश

सियान गुड़ी एवं वृद्धाश्रमों में बेहतर सुविधाओं और नियमित मॉनिटरिंग पर जोर

रायपुर, 19 अगस्त 2026- समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज मंत्रालय में समाज कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना सुनिश्चित करें।

दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों के वितरण में तेजी लाएं 
बैठक में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों के वितरण, सियान गुड़ी एवं वृद्धाश्रमों में उपलब्ध सुविधाओं तथा हितग्राहीमूलक योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्री ने सहायक उपकरणों के वितरण में तेजी लाने तथा सियान गुड़ी एवं वृद्धाश्रमों में भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।

अधिकारियों को योजनाओं के नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने दिए निर्देश
 राजवाड़े ने कहा कि सुशासन सरकार समाज के प्रत्येक जरूरतमंद, दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिक को सम्मानपूर्ण जीवन और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ नियमित निरीक्षण एवं मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, संचालक रणवीर शर्मा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

ब्रेकिंग : पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, निरीक्षकों के हुए तबादले, SP ने जारी की लिस्ट…देखें सूची…..!!

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 रायपुर। रायपुर ग्रामीण पुलिस में निरीक्षकों के तबादले हुए हैं। ग्रामीण एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने यह सूची जारी की है। जारी आदेश में 6 इंस्पेक्टर को नई जिम्मेदारी दी गई हैं।

देखें लिस्ट…..