00 छत्तीसगढ़ भारत के सबसे समृद्ध, मौलिक और पर्यटन संभावनाओं से भरपूर गंतव्यों में से एक, हर पर्यटक की यात्रा सूची में होना चाहिए यह राज्य - मीनाक्षी शर्मा
00 14 दिवसीय पर्यटन यात्रा में विरासत, प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, आध्यात्मिक धरोहर और रोमांचक पर्यटन स्थलों का किया विस्तृत भ्रमण
रायपुर। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की पूर्व महानिदेशक मीनाक्षी शर्मा ने पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ का विस्तृत भ्रमण कर प्रदेश के पर्यटन वैभव, प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और आत्मीय आतिथ्य की मुक्त कंठ से सराहना की। अपनी 14 दिवसीय यात्रा के दौरान उन्होंने प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों का अवलोकन किया और कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा पर्यटन गंतव्य है, जहां प्रकृति, संस्कृति, इतिहास, आध्यात्मिकता और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह प्रदेश देश के प्रत्येक पर्यटक की यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत के पर्यटन क्षेत्र में कार्य करने के बावजूद उन्हें पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ आने का अवसर मिला और यह यात्रा उनके लिए अत्यंत सुखद एवं अविस्मरणीय रही। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने उन्हें सकारात्मक रूप से आश्चर्यचकित किया। यहां की प्राकृतिक संपदा, घने वन, विशाल जलप्रपात, प्राचीन मंदिर, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और स्थानीय लोगों का आत्मीय व्यवहार इसे देश के सबसे विशिष्ट पर्यटन राज्यों में स्थान दिलाता है।
शर्मा ने अपनी यात्रा की शुरुआत रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन एवं जनजातीय संग्रहालय से की, जहां उन्होंने प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को निकट से देखा। इसके बाद उन्होंने कबीरधाम जिले के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल, छेरकी महल तथा आसपास के वन क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक परिवेश में स्थित भोरमदेव परिसर भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण है।
यात्रा के अगले चरण में उन्होंने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे अमरकंटक पहुंचकर मां नर्मदा उद्गम स्थल, सायंकालीन आरती, कलचुरीकालीन मंदिर समूह, दूधधारा एवं कपिलधारा जलप्रपात, राजमेरगढ़, कबीर चबूतरा तथा जैन मंदिर का भ्रमण किया। उन्होंने इस क्षेत्र को आध्यात्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का अद्वितीय संगम बताया। वापसी के दौरान उन्होंने रतनपुर स्थित मां महामाया शक्तिपीठ में दर्शन कर प्रदेश की समृद्ध धार्मिक परंपराओं का अनुभव प्राप्त किया।
बस्तर प्रवास के दौरान श्रीमती शर्मा ने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, टाटामारी घाटी, कोंडागांव शिल्प ग्राम, नारायणपाल मंदिर, मेंदरी घुमर एवं तामड़ा घुमर जलप्रपात का भ्रमण किया तथा चित्रकोट में नौकायन का आनंद भी लिया। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय कला विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की क्षमता रखती है।
उन्होंने दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी शक्तिपीठ, प्राचीन मंदिरों के नगर बारसूर, जगदलपुर पुरातत्व संग्रहालय, बस्तर राजमहल तथा स्थानीय हस्तशिल्प केंद्रों का भी अवलोकन किया। उन्होंने बस्तर की ढोकरा कला, बेलमेटल शिल्प, बांस एवं लकड़ी की कलाकृतियों को स्थानीय संस्कृति की जीवंत पहचान बताते हुए कहा कि यहां का हस्तशिल्प विश्व स्तर पर विशेष पहचान बनाने की क्षमता रखता है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में उन्होंने तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, धुड़मारास, बांस राफ्टिंग तथा केचला क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और साहसिक पर्यटन के प्रेमियों के लिए यह क्षेत्र किसी स्वर्ग से कम नहीं है। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे ओडिशा के जैपुर, कोलाब बांध, जगन्नाथ मंदिर, कोरापुट कॉफी प्लांटेशन, देओमाली पर्वत, दुदमा जलप्रपात, बोंडा जनजातीय बाजार तथा कोटपाड़ बुनकर ग्राम का भी भ्रमण किया, जिससे बस्तर और कोरापुट क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक विरासत को निकट से समझने का अवसर मिला।
अपने अनुभव साझा करते हुए श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि पर्यटन केवल किसी स्थान को देखने का माध्यम नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपराओं और लोगों से जुडऩे का अवसर भी होता है। इस दृष्टि से छत्तीसगढ़ अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहां आने वाला पर्यटक भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून, आध्यात्मिक शांति और जनजातीय जीवन की मौलिकता का वास्तविक अनुभव प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। यदि यहां के विशिष्ट और अपेक्षाकृत कम चर्चित पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह राज्य देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने प्रदेश में विकसित हो रही पर्यटन अधोसंरचना, स्थानीय समुदाय की सहभागिता तथा पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की भी सराहना की।
मीनाक्षी शर्मा ने देश-विदेश के पर्यटकों से छत्तीसगढ़ आने का आग्रह करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति एक बार छत्तीसगढ़ आएगा, वह यहां की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन धरोहरों, जनजातीय जीवन, आत्मीय आतिथ्य और अविस्मरणीय अनुभवों की यादें हमेशा अपने साथ लेकर जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ अपनी मौलिक पहचान, अद्वितीय पर्यटन संसाधनों और सतत पर्यटन विकास की दिशा में हो रहे प्रयासों के बल पर आने वाले वर्षों में भारत के सर्वाधिक आकर्षक पर्यटन गंतव्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर ने वैश्विक शैक्षणिक पटल पर राज्य का गौरव बढ़ाते हुए एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि हासिल की है। थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान, एचएनएलयू ने वैश्विक विश्वविद्यालय नवाचार एवं सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस ऐतिहासिक समझौते पर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के 20 अग्रणी और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम उच्च शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और सतत विकास के क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
बैंकॉक के आईकॉनसियाम में हुआ वैश्विक समागम
यह समझौता 9-10 जुलाई 2026 को बैंकॉक स्थित प्रसिद्ध आईकॉनसियाम कन्वेंशन सेंटर में आयोजित "AUAP - WURI इम्पैक्ट समिट 2026" के दौरान हुआ। इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय सरकार के साथ साझेदारी में विश्वविद्यालय नवाचार-नीति, तंत्र और प्रभाव था, जिसमें दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के प्रमुखों, नीति-निर्माताओं, नवाचार विशेषज्ञों और जाने-माने शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।
कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल
कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल शिखर सम्मेलन में एचएनएलयू का प्रतिनिधित्व करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानन्दन ने विश्वविद्यालय के अभिनव रिसर्च हब एंड स्पोक (R-HaS) मॉडल पर आधारित एक केस स्टडी प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने एचएनएलयू के अंतर्विषयी अनुसंधान तंत्र, बाह्य वित्तपोषित (एक्सटर्नली फंडेड) शोध परियोजनाओं तथा समाज के प्रति जवाबदेह एवं प्रभावकारी अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया, जिसकी उपस्थित विशेषज्ञों ने काफी सराहना की।
इस रणनीतिक कामयाबी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने कहा कि एचएनएलयू क्षेत्रीय और वैश्विक विश्वविद्यालय संगठनों के साथ सार्थक सहभागिता के माध्यम से अपनी अनुसंधान पहलों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित और प्रसारित करने की दिशा में प्रभावशाली प्रगति कर रहा है। यह बहुपक्षीय समझौता हमारे अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को विस्तार देने की दिशा में एक मील का पत्थर है। सम्मेलन के दौरान AUAP के महासचिव प्रो. डॉ. अनूप स्वरूप तथा कार्यकारी सचिव डॉ. सुपापोर्न चुआंगचिद के साथ संयुक्त सम्मेलन, अनुसंधान परियोजनाओं, संकाय (फैकल्टी) व छात्र विनिमय (एक्सचेंज) कार्यक्रमों पर भी बेहद सार्थक चर्चा हुई है।
समझौते के तहत इन क्षेत्रों में होगा साझा काम
बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद-3 के तहत सभी 20 सहभागी संस्थान भविष्य में मिलकर काम करेंगे। इसके तहत आपसी सहयोग से वैश्विक महत्व की नवाचार व शोध परियोजनाओं का संचालन, संकाय (फैकल्टी), शोधार्थियों और छात्रों के लिए विनिमय कार्यक्रम,नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलनों, कार्यशालाओं और केस स्टडीज का विकास करना शामिल है।
इन संगठनों के सहयोग से हुआ शिखर सम्मेलन
AUAP (एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक): यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एक बेहद प्रतिष्ठित और पुराना विश्वविद्यालय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को एक मंच पर लाकर शैक्षणिक सहयोग, नेतृत्व विकास और उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देना है।
WURI (वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स फॉर इनोवेशन) यह एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली है जो विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन सिर्फ पारंपरिक किताबी या शोध मानकों पर नहीं, बल्कि वास्तविक सामाजिक प्रभाव, उद्योग सहयोग, उद्यमिता और नैतिक नेतृत्व जैसे नवाचारों के आधार पर करती है। एचएनएलयू अपने दूरदर्शी नेतृत्व के कारण इस रैंकिंग में लगातार अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है।
हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर देश के अग्रणी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। अपने विशिष्ट 'R-HaS' मॉडल, अनुभवात्मक अधिगम (एक्सपेरिमेंटल लर्निंग) और लोकनीति-उन्मुख अनुसंधान के दम पर यह संस्थान विधि शिक्षा के भविष्य को वैश्विक स्तर पर आकार देने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
रायपुर। उप महालेखाकार पेंशन एवं निधि रायपुर ने सामान्य भविष्य निधि के वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक लेखा जारी कर दी है। उन्होंने बताया कि सभी अभिदातागण अपनी भविष्य निधि की वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक लेखा पर्ची राज्य शासन से प्राप्त आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।
उप महालेखाकार पेंशन एवं निधि रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों व अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के सामान्य भविष्य निधि वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक लेखा पर्ची कार्यालय प्रधान महालेखाकार छत्तीसगढ़ रायपुर की विभागीय वेबसाइट http://cag.gov.in/ae/chhattisgarh/en एवं राज्य शासन की वेबसाइट e-Kosh www.treasury.cg.nic.in पर अपलोड कर दिया गया है, इसे डाउनलोड कर अवलोकन किया जा सकता है। इसके अलावा वार्षिक लेखा विवरण 2025-26 डीजीलाकर्स (Digilocker) प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध कराया गया है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज विधानसभा परिसर से ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ के अंतर्गत संचालित निःशुल्क मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों तक पहुँचकर विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एयरोमॉडलिंग तथा ऑगमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी (AR/VR) जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ केवल एक मोबाइल लैब नहीं, बल्कि ग्रामीण विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली अभिनव पहल है। यह बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, आत्मविश्वास और तकनीकी दक्षता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी।
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मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज पूरी दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ड्रोन, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीकों की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को भी इन उभरती हुई तकनीकों का ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि अवसरों में किसी प्रकार की असमानता न रहे और गाँव का बच्चा भी भविष्य की तकनीकों में उतना ही सक्षम बने जितना किसी महानगर का विद्यार्थी होता है।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य भी विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार, प्रयोगधर्मिता और रचनात्मक सोच का विकास करना है। यह मोबाइल लैब उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जो बच्चों को केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं सिखाएगी, बल्कि उन्हें नई तकनीकों के निर्माण और नवाचार की दिशा में भी प्रेरित करेगी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है तथा बच्चों को समय के साथ नई तकनीकों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ जैसी अभिनव पहल ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी वही अवसर उपलब्ध कराएगी, जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को मिलते हैं। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी, नवाचार की सोच विकसित होगी और वे आधुनिक तकनीकों को समझने के साथ उनका व्यावहारिक उपयोग भी सीख सकेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मोबाइल लैब के माध्यम से विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्वयं ड्रोन उड़ाने, रोबोट संचालित करने, 3डी मॉडल तैयार करने और आधुनिक उपकरणों पर कार्य करने का अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मजबूत नींव तैयार करेगी।
उन्होंने पंडरिया विधायक भावना बोहरा की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा, नवाचार और युवा प्रतिभाओं के विकास के लिए निरंतर नए प्रयास कर रही हैं। यह मोबाइल साइंस लैब भी उनकी दूरदर्शी सोच और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है, जो आने वाले समय में हजारों विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।
मोबाइल लैब की तकनीकी सुविधाओं का किया अवलोकन
कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब का अवलोकन किया। प्रशिक्षकों ने उन्हें लैब में उपलब्ध विभिन्न उपकरणों, प्रशिक्षण मॉड्यूल और शिक्षण प्रणाली की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि लेते हुए एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों का स्वयं निरीक्षण किया तथा यह जाना कि विद्यार्थी किस प्रकार इन तकनीकों को व्यवहारिक रूप से सीखेंगे। उन्होंने इसे ग्रामीण प्रतिभाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने वाला अभिनव और प्रेरणादायी प्रयास बताया। उन्होंने लैब में प्रदर्शित विभिन्न तकनीकी मॉड्यूल का अवलोकन करते हुए प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण प्रक्रिया की जानकारी ली और बच्चों को मिलने वाले व्यावहारिक अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रयोग आधारित शिक्षा विद्यार्थियों में सीखने की रुचि और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाती है।

एक वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचेगी तकनीकी शिक्षा
उल्लेखनीय है कि यह मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों तथा सरस्वती शिशु मंदिरों में जाकर प्रशिक्षण प्रदान करेगी। पाँच अनुभवी प्रशिक्षकों की टीम प्रत्येक विद्यालय में तीन से पाँच दिनों की कार्यशाला आयोजित करेगी, जिसमें विद्यार्थियों को AI, रोबोटिक्स, ड्रोन एवं एयरोमॉडलिंग, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा AR/VR जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत पहले वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक तकनीकी शिक्षा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि आगामी चरणों में अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा।
इस मोबाइल लैब की सबसे बड़ी विशेषता इसकी हैंड्स-ऑन लर्निंग पद्धति है। विद्यार्थी स्वयं ड्रोन उड़ाना, रोबोट संचालित करना, कोडिंग करना, 3डी मॉडल तैयार करना तथा AI और AR/VR जैसी तकनीकों का वास्तविक अनुभव प्राप्त करेंगे। इससे उनमें तकनीकी समझ, रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार की भावना का विकास होगा।
कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल लैब में स्थापित फीडबैक बोर्ड पर अपने विचार भी लिखे और इस अभिनव पहल की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक भावना बोहरा, विधायक सुशांत शुक्ला, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
प्रदेशवासियों को 441 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिल रहीं, सुश्री संतोषी सिंह को सहजता से मिला निवास प्रमाण पत्र
रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल प्रशासन को नई गति देने वाला सेवा सेतु पोर्टल आज आम नागरिकों के लिए शासकीय सेवाओं तक आसान, पारदर्शी और समयबद्ध पहुंच का सशक्त माध्यम बन गया है। इस अभिनव पहल के माध्यम से प्रदेश के नागरिकों को अब 441 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो गई है।
सेवा सेतु पोर्टल का लाभ प्रदेशभर के नागरिकों को मिल रहा है। इसी क्रम में बलरामपुर जिले की सुश्री संतोषी सिंह को भी इस व्यवस्था से राहत मिली। उन्होंने निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। प्रारंभिक परीक्षण के दौरान आवश्यक भूमि संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण आवेदन लंबित हो गया था। संबंधित अधिकारियों ने उन्हें वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करने के संबंध में मार्गदर्शन दिया। इसके बाद उन्होंने 15 वर्ष के निवास संबंधी प्रमाण एवं जन्म संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनका निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। प्रमाण पत्र प्राप्त होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा सेतु के माध्यम से उनकी वर्षों पुरानी समस्या का सहज समाधान हो गया।
पूर्व में ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से सीमित सेवाएं उपलब्ध थीं, लेकिन अब इसे विस्तारित और उन्नत स्वरूप देकर सेवा सेतु के रूप में विकसित किया गया है। वर्तमान में विभिन्न विभागों की सैकड़ों सेवाओं को एकीकृत कर नागरिकों के लिए एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है। आवेदन से लेकर सेवा प्राप्ति तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जा रही है।
सेवा सेतु के प्रभावी संचालन के लिए पंचायत सचिवों, सेवा सेतु केंद्र संचालकों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि ग्राम पंचायत स्तर तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हो सके और अधिक से अधिक नागरिक इसका लाभ उठा सकें।
पोर्टल के माध्यम से आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, भू-अभिलेख संबंधी सेवाएं, नाम संशोधन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े आवेदन, श्रम एवं राजस्व विभाग की सेवाएं सहित अनेक सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर विवाह प्रमाण पत्र, भवन अनुज्ञा, स्ट्रीट लाइट संबंधी आवेदन, स्वच्छता से जुड़ी शिकायतें तथा राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से नाम परिवर्तन जैसी सेवाएं भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सेवा सेतु पोर्टल को व्हाट्सएप सुविधा से भी जोड़ा गया है, जिससे नागरिक घर बैठे आवेदन की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इसका व्यापक लाभ मिल रहा है। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा सरकारी सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो रही है।
00 कौशल विकास से आत्मनिर्भर भारत और विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार : चौधरी
रायपुर। विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रदेश एवं देश के समस्त युवाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। ओपी चौधरी ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में कौशल विकास को निरंतर नई गति मिल रही है। स्किल इंडिया मिशन सहित विभिन्न पहल के माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, नवाचार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज के समय में कौशल ही युवाओं की सबसे बड़ी शक्ति है। आधुनिक तकनीक, नवाचार और व्यावसायिक दक्षता के माध्यम से युवा न केवल अपने भविष्य को सशक्त बना सकते हैं, बल्कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने युवाओं से निरंतर सीखने, अपने कौशल का विकास करने तथा समाज और राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए विश्व युवा कौशल दिवस की पुन: शुभकामनाएं दीं।
रायपुर। नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बुधवार को विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर काम रोको (स्थगन) प्रस्ताव लाकर तत्काल चर्चा की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सरकार का पक्ष सुनने के बाद प्रस्ताव अग्राह्य कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए, जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित कांग्रेस के सभी 34 विधायकों को सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया।
प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि नकटी गांव में 29 और 30 जून को बुलडोजर चलाकर 85 गरीब परिवारों के मकान तोड़ दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें कई मकान प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत बने थे, जहां बिजली, पेयजल और सड़क जैसी सरकारी सुविधाएं उपलब्ध थीं।
काम रोको प्रस्ताव में कहा गया कि सरकार की कार्रवाई अन्यायपूर्ण, असंवैधानिक और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। इससे प्रभावित परिवारों के मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है। कांग्रेस सदस्यों ने आरोप लगाया कि मकानों के साथ घरेलू सामान, बच्चों की किताबें, राशन और अन्य आवश्यक वस्तुएं भी नष्ट हो गईं। साथ ही, क्षेत्रीय सांसद द्वारा वर्षा ऋतु में मकान नहीं तोडऩे और पहले पुनर्वास करने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद उसका पालन नहीं किया गया। प्रभावित परिवारों को सेक्टर-30, नवा रायपुर में दिए जा रहे वैकल्पिक आवास छोटे हैं और वहां बिजली, पानी सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने आरोप लगाया कि विधायक कॉलोनी के लिए गरीबों के मकान तोड़े गए। इस पर भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर ने कहा कि यदि विधायक कॉलोनी निर्माण से संबंधित कोई दस्तावेज है तो उसे सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए। जवाब में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि पूरी कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक और नियमानुसार की गई है। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण की शिकायत मिलने पर अतिरिक्त तहसीलदार ने जांच की थी। जांच में अवैध कब्जा पाए जाने के बाद वर्ष 2025 में बेदखली का आदेश पारित किया गया और उसके बाद 28 जून को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।
राजस्व मंत्री ने कहा कि कब्जाधारियों को कार्रवाई से पहले अपना सामान हटाने का पर्याप्त समय दिया गया था। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए सेक्टर-30, नवा रायपुर में फ्लैट उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार के घरेलू सामान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया और यह कहना भी सही नहीं है कि कार्रवाई बारिश के दौरान की गई।
राजस्व मंत्री का जवाब सुनने के बाद स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने काम रोको प्रस्ताव को अग्राह्य घोषित कर दिया। इससे नाराज कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए। विधानसभा नियमों के तहत गर्भगृह में प्रवेश करने पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित कांग्रेस के सभी 34 विधायक स्वत: निलंबित हो गए।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को नक्सल हिंसा से मुक्ति पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लाया गया आभार प्रस्ताव लंबी चर्चा के बाद सर्वसम्मति से पारित हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों तक नक्सल हिंसा के कारण बस्तर का विकास और शिक्षा प्रभावित रहे, लेकिन अब केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों, सुरक्षा बलों के साहस तथा स्थानीय जनता के सहयोग से प्रदेश शांति, सुरक्षा और विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
मुख्यमंत्री ने नक्सल विरोधी अभियान में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में अपनाई गई सुरक्षा एवं विकास आधारित रणनीति की सराहना की।
उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं
सीएम ने कहा कि बस्तर में 6.79 लाख राशन कार्ड, 17 लाख जनधन खाते, 22 लाख आयुष्मान कार्ड और 1.76 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही नक्सल प्रभावित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15 हजार अतिरिक्त आवास भी मंजूर किए गए हैं।
चर्चा के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप भावुक हो गए। डॉ. रमन सिंह ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी नक्सल विरोधी लड़ाई की जीत बताया, जबकि केदार कश्यप ने नक्सल हिंसा की भयावह घटनाओं को याद करते हुए कहा कि अब बस्तर भय नहीं, विकास की पहचान बनेगा।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज छत्तीसगढ़ नक्सली संगठन से मुक्त होकर नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सरकारी अस्पतालों के लिए दवा खरीद का मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया। यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड से खरीदी गई एस्पिरिन को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा और दवा खरीद प्रक्रिया के साथ गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल उठाए। इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ में गुजरात में प्रतिबंधित बैच की कोई दवा नहीं खरीदी गई है और राज्य में वितरित दवाएं पूरी तरह अलग बैच की हैं।
राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ी है। विपक्ष के इस हंगामे ने प्रदेश की दवा खरीद व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की सुरक्षा को लेकर जनता के बीच चर्चा तेज कर दी है, जिससे पारदर्शिता की मांग बढ़ी है।
विपक्ष का आरोप, मरीजों की जान जोखिम में डालकर दवाएं खरीदी
प्रश्नकाल के दौरान विधायक अटल श्रीवास्तव ने अमानक दवाओं के मुद्दे पर सरकार से तीखे सवाल पूछे। विपक्ष ने जानना चाहा कि जिस कंपनी की दवाओं को गुजरात में प्रतिबंधित किया गया था, उसे छत्तीसगढ़ में किन परिस्थितियों में और कितनी मात्रा में खरीदा गया। विपक्ष का आरोप था कि मरीजों की जान जोखिम में डालकर ऐसी दवाएं खरीदी गईं।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि 25 मार्च 2026 को CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन) को गुजरात से सूचना प्राप्त हुई थी। उन्होंने बताया कि राज्य में खरीदी गई एस्पिरिन 75 mg (अनकोटेड) दवा, गुजरात में ब्लैकलिस्ट की गई दवाओं के बैच से पूरी तरह अलग थी।
विस्तृत जांच की मांग
विपक्ष ने इस मामले में विस्तृत जांच की मांग की है, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने भविष्य में दवा खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का आश्वासन दिया है। अब यह देखना होगा कि क्या सरकार इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश देती है या नहीं।
रायपुर। राज्य शासन ने राजिमवासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए राजिम नगर पंचायत का नगर पालिका के रूप में उन्नयन कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। राजिम नगर पंचायत की सीमाएं ही राजिम नगर पालिका की सीमाएं होंगी। राज्य शासन के इस निर्णय से पूरे शहर में खुशी एवं उत्साह का वातावरण है।
उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्रीअरुण साव ने राजिम नगर पंचायत के नगर पालिका के रूप में उन्नयन पर कहा कि राज्य शासन के इस निर्णय से राजिम के सुनियोजित विकास को नई दिशा मिलेगी तथा शहरी सुविधाओं के विस्तार के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे राजिम में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, उद्यान, सामुदायिक भवन सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं के विकास को और ज्यादा गति मिलेगी। साथ ही राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से नगरवासियों तक पहुंचेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने जा रहा है। मंगलवार को गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बुधवार से राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने 15 जुलाई से प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां तेज होने का अनुमान जताया है। राजधानी रायपुर में सुबह से आसमान में बादल छाए हुए हैं और हल्की बूंदाबांदी से मौसम सुहावना बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए सिस्टम के प्रभाव से अगले 24 घंटे के भीतर प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। खासकर उत्तर छत्तीसगढ़ में बारिश का असर अधिक देखने को मिल सकता है। रायपुर में भी दिनभर बादल छाए रहने के साथ गरज-चमक और बारिश की संभावना है, जहां अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में मानसून द्रोणिका जम्मू, देहरादून, बाराबंकी, पटना, बंकुरा होते हुए पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। वहीं उत्तर बंगाल की खाड़ी और दक्षिण बांग्लादेश के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण अगले 24 घंटे में निम्न दबाव के क्षेत्र में बदल सकता है। इसी सिस्टम के असर से प्रदेश में मानसून फिर सक्रिय होगा। हालांकि पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश का मौसम शुष्क रहा और कहीं भी उल्लेखनीय बारिश दर्ज नहीं हुई। बिलासपुर में अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि राजनांदगांव और पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहा। इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से 29 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
मौसम विभाग ने सुकमा, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद, जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों के लिए तेज हवा, गरज-चमक, आकाशीय बिजली और बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं बीजापुर, बालोद, राजनांदगांव, महासमुंद, रायपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, कोरिया समेत कई जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा और बारिश की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया गया है।
सरगुजा, अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक बार फिर चौंकाने वाली खबर सामने आई है। गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से देर रात 13 अपचारी बालक फरार हो गए। लगातार दूसरी बार हुई इस घटना ने संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और फरार बालकों की तलाश के लिए जिलेभर में सर्च अभियान तेज कर दिया है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अपचारी बालकों ने संप्रेक्षण गृह के पुराने और कमजोर दरवाजे को तोड़कर भागने की योजना बनाई। देर रात सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठाते हुए सभी 13 बालक परिसर से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही संप्रेक्षण गृह प्रबंधन ने गांधीनगर थाना पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान शुरू किया गया।
गौरतलब है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 23 जून को भी इसी बाल संप्रेक्षण गृह से 13 अपचारी बालक फरार हो गए थे। उस दौरान पुलिस ने अधिकांश बालकों को पकड़ लिया था, लेकिन दो अपचारी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। ऐसे में एक बार फिर हुई इस घटना ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है।
फिलहाल पुलिस फरार सभी अपचारी बालकों की तलाश में जुटी हुई है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आखिर बार-बार सुरक्षा में चूक कैसे हो रही है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
रायपुर- सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण की दिशा में लगातार की जा रही कार्रवाई का एक और प्रभावी उदाहरण सामने आया है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में ना नवपदस्थ कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के निर्देशानुसार जिला खनिज विभाग ने अवैध खनिज परिवहन के विरुद्ध विशेष अभियान चलाते हुए रेत एवं गिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त छह ट्रैक्टरों को जब्त किया। यह कार्रवाई सीएम हेल्पलाइन (टोल फ्री नंबर-1076) में प्राप्त शिकायत के आधार पर तत्काल जांच के बाद की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायत मिलते ही कलेक्टर ने जिला खनिज विभाग को त्वरित जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देशों के पालन में जिला खनिज उडऩदस्ता दल ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया। इस दौरान कोलबिर्रा एवं रुमगा क्षेत्र से रेत से भरे तीन ट्रैक्टर, खंता एवं पिपरिया क्षेत्र से रेत से भरे दो ट्रैक्टर तथा सधवानी क्षेत्र से गिट्टी से भरा एक ट्रैक्टर अवैध परिवहन करते हुए पकड़ा गया। सभी छह वाहनों को मौके पर जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
खनिज विभाग ने संबंधित वाहन स्वामियों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अर्थदंड एवं समझौता राशि खनिज मद में जमा किए जाने के बाद ही नियमानुसार जब्त वाहनों को मुक्त किया जाएगा। कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश भी दिए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ शासन के राजस्व हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सतत निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि अवैध खनिज गतिविधियों की जानकारी मिलने पर सीएम हेल्पलाइन अथवा संबंधित विभाग को सूचित करें, ताकि तत्काल कार्रवाई कर नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जा सके।
इस कार्रवाई में सहायक खनि अधिकारी श्री आदित्य मानकर, खनि निरीक्षक श्री सुजीत कंवर, खनिज सिपाही श्री शिवकुमार लहरे तथा नगर सैनिक श्री सतीश साहू की सक्रिय भूमिका रही।
00 मुख्यमंत्री साय और विधानसभा अध्यक्ष सिंह से की भेंट: लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय व्यवस्था की मिली जानकारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर लोकतंत्र की पाठशाला बन गया, जब भिलाई स्थित शकुंतला विद्यालय के ग्यारहवीं एवं बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं का दल शैक्षणिक भ्रमण पर विधानसभा पहुंचा। विद्यार्थियों ने विधानसभा की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अवलोकन कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसदीय परंपराओं को निकट से समझने का अवसर प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की आकांक्षाओं को सदन में अभिव्यक्त करने की सतत प्रक्रिया है। विधानसभा में जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा होती है और जनता के कल्याण के लिए नीतियां एवं कानून बनाए जाते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ-साथ संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण उन्हें लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझने, संविधान के प्रति सम्मान विकसित करने तथा जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव तथा विधायक रिकेश सेन भी उपस्थित थे।
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने सदन की कार्यवाही को दर्शक दीर्घा से देखा और प्रश्नकाल, विभिन्न विषयों पर चर्चा तथा संसदीय प्रक्रियाओं को निकट से समझा। उन्होंने विधानसभा भवन की संरचना, कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त कीं।
विद्यार्थियों ने इस अनुभव को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि पुस्तकों में पढ़ी गई संसदीय व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर उनके लिए विशेष रहा। उन्होंने कहा कि इससे लोकतंत्र, संविधान और जनप्रतिनिधियों की भूमिका के प्रति उनकी समझ और अधिक विकसित हुई है।
00 वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत बालोद जिले में 2.85 लाख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण, 19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित
00 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब, डबरी, रिचार्ज शाफ्ट, चेकडैम एवं भू-जल पुनर्भरण कार्यों से जल सुरक्षा की दिशा में उल्लेखनीय पहल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान प्रदेशभर में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे रहा है। अभियान के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ-साथ जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं हरित विकास के कार्यों को व्यापक गति मिली है।
इसी क्रम में बालोद जिले में जिला प्रशासन द्वारा सभी ग्राम पंचायतों, शासकीय कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, स्व-सहायता समूहों तथा सामाजिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता से जल संरक्षण के विविध कार्य किए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य “जहाँ वर्षा हो, जब वर्षा हो - वहीं वर्षा जल का संचयन हो” की अवधारणा को व्यवहार में उतारना है।
अभियान के अंतर्गत प्रत्येक शासकीय भवन में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग तथा सतही वर्षा जल संचयन के लिए रिचार्ज शाफ्ट, डबरी, तालाब एवं ट्रेंच का निर्माण किया गया है। साथ ही हैंडपंपों एवं प्रधानमंत्री आवासों में सोख्ता गड्ढों तथा वर्षा जल संचयन प्रणालियों की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
भू-जल संवर्धन के लिए रिचार्ज पिट, इंजेक्शन वेल, निष्क्रिय बोरवेलों का रिचार्ज, तालाबों का जीर्णाेद्धार एवं गहरीकरण, चेकडैम, वाटर एब्जॉर्बिंग ट्रेंच सहित विभिन्न जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण एवं पुनर्जीवन किया गया है
जिले में वीबीजी-रामजी (मनरेगा), वन विभाग, जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं तथा जनभागीदारी के माध्यम से अब तक 2.85 लाख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जिनसे लगभग 19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित हुई है। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि, भूमि की नमी का संरक्षण, खरीफ एवं रबी दोनों फसलों के लिए सिंचाई सुविधा में सुधार तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी
अभियान की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार जनभागीदारी है। जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों, ग्राम विकास समितियों, महिला कमांडो, ग्रीन आर्मी तथा स्कूल एवं कॉलेज के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से तालाबों एवं जलाशयों की स्वच्छता, घर-घर जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के प्रति जनजागरूकता तथा व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण एवं सीड बॉल अभियान संचालित किया जा रहा है। जुलाई माह में अब तक 3 लाख से अधिक सीड बॉल का रोपण किया जा चुका है तथा 2 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राज्य शासन द्वारा वीबी- जी राम जी योजना के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, हरित विकास एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। ‘जल संरक्षण - जन सहभागिता से जल समृद्धि की ओर’ की भावना के साथ जिला प्रशासन बालोद जल-सुरक्षित, हरित एवं समृद्ध ग्रामीण विकास के लक्ष्य की दिशा में सतत कार्य कर रहा है।
00 लखपति दीदी बनने की ओर अग्रसर हैं केजू बाई सलामे
रायपुर। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मोहला के ग्राम रामगढ़ निवासी केजू बाई सलामे इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। अपनी मेहनत और लगन के साथ शासन की योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया है, बल्कि आज वे आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बन रही हैं।
’केवल आर्थिक सहयोग नहीं, व्यवसाय को आगे बढ़ाने बनी पूंजी’
केजू बाई बिहान के रोशनी स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। समूह से जुड़ने के बाद उनमें बचत एवं आर्थिक प्रबंधन की समझ बढ़ी और स्वरोजगार को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास मिला। इसी आत्मविश्वास के साथ उन्होंने अपने गांव में एक किराना दुकान का संचालन शुरू किया, जो आज उनके परिवार की आय का प्रमुख स्रोत बन चुकी है। वे बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपए की सहायता राशि नियमित रूप से प्राप्त होती है। यह राशि उनके लिए केवल आर्थिक सह...योग नहीं, बल्कि व्यवसाय को आगे बढ़ाने की पूंजी बन गई है। प्राप्त राशि से वे अपनी दुकान के लिए आवश्यक किराना सामग्री खरीदती हैं, जिससे दुकान में हमेशा पर्याप्त सामान उपलब्ध रहता है। परिणामस्वरूप ग्राहकों की संख्या और बिक्री में निरंतर वृद्धि हुई है तथा उनकी आय पहले की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ हुई है।
दुकान की आय से परिवार की आवश्यकताओं की होगी पूर्ति
सलामे कहती हैं कि पहले सीमित संसाधनों के कारण व्यवसाय का विस्तार करना कठिन था, लेकिन अब नियमित आर्थिक सहायता मिलने से वे आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं। दुकान से होने वाली आय से परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है और भविष्य के लिए बचत भी संभव हो रही है। अपने बढ़ते व्यवसाय और निरंतर आय के बल पर वे आज लखपति दीदी बनने की ओर अग्रसर हैं। उनका लक्ष्य अपने व्यवसाय का और विस्तार करना तथा अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना है।
योजना महिलाओं के सम्मान, आत्मविश्वास, आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम
सलामे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए सम्मान, आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है। शासन की योजनाओं के सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर वे आज आत्मनिर्भरता की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रही हैं।.......
00 जल संरक्षण, पौधारोपण, प्राकृतिक पुर्नजनन और मानव-वन्यजीव संरक्षण के लिए बलौदाबाजार वनमण्डल की समन्वित पहल
रायपुर। वन क्षेत्रों को समृद्ध, सुरक्षित और हरा-भरा बनाने के लिए वृक्षारोपण और कटाई के बीच संतुलन, वनों को आग से सुरक्षा, झूम कृषि पर रोक, और जन जागरूकता जैसे ठोस उपाय अत्यंत आवश्यक हैं। इन प्रयासों में स्थानीय समुदायों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी से वनों का संरक्षण अधिक प्रभावी हो जाता है। छत्तीसगढ मेें मानसून की शुरुआत के साथ बलौदाबाजार वनमण्डल में वन संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन से जुड़े कार्यों में तेजी आ गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर के मार्गदर्शन में विभिन्न वन परिक्षेत्रों में जल संरक्षण, पौधारोपण, प्राकृतिक पुर्नजनन, वन महोत्सव, मानव-वन्यजीव संरक्षण तथा वन मार्गों के रखरखाव के कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा ऋतु का बेहतर उपयोग कर वन क्षेत्रों को अधिक समृद्ध, सुरक्षित और हराभरा बनाना है।
जल संरक्षण संरचनाओं में हुआ भरपूर जलभराव
जल संचय से जन भागीदारी 2.0 अभियान के तहत पूर्व वर्षों में बनाई गई सॉइल कंजर्वेशन ट्रेंच (एससीटी) तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाएँ हाल की वर्षा से पूरी तरह भर गई हैं। इन संरचनाओं से वर्षा जल का संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और वन क्षेत्रों में नमी बनाए रखने में मदद मिल रही है, जिससे पौधों और वन्यजीवों को भी लाभ मिल रहा है।
सीड बॉल अभियान से दिखने लगे सकारात्मक परिणाम
वनमण्डल के देवपुर वन परिक्षेत्र में साजा प्रजाति के सीड बॉल से सफल अंकुरण देखा गया है। वहीं अर्जुनी वन परिक्षेत्र के उत्तर महराजी परिसर में कंटूर पाल एवं जल संरक्षण संरचनाओं के किनारे सीड बॉल और स्थानीय घास प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी का कटाव कम होगा और प्राकृतिक रूप से नए पौधों का विकास होगा।
वन मार्गों को सुरक्षित रखने का कार्य जारी
बारिश के दौरान वन मार्गों को सुरक्षित और सुगम बनाए रखने के लिए विभिन्न स्थानों पर क्रॉस ड्रेनेज (आड़ीपार) निर्माण किया जा रहा है। बार-दोंद मार्ग, पुटपुरा तथा पूर्व सुरबाय-बारनवापारा वन मार्ग सहित कई स्थानों पर सुरक्षा श्रमिक वर्षा से होने वाले कटाव को रोकने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।
एक पेड़ माँ के नाम अभियान में बढ़ रही जनभागीदारी
वन महोत्सव के तहत चल रहे ष्एक पेड़ माँ के नामष् अभियान में लोगों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। बल्दाकछार वन परिक्षेत्र के नंदनिया एवं बल्दाकछार परिसरों में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, वन प्रबंधन समितियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, ग्रामीणों तथा वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए हाथी मित्र दल को मिला सहयोग
बारनवापारा अभयारण्य में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए हाथी मित्र दल को टॉर्च, मेगाफोन और जूते उपलब्ध कराए गए हैं। इससे दल वन्य हाथियों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेगा तथा ग्रामीणों को समय पर सूचना देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
लाइव हेज के रूप में कैक्टस रोपण की नई पहल
बल्दाकछार वन परिक्षेत्र के दलदली परिसर में सुरक्षा संरचनाओं के किनारे लाइव हेज के रूप में कैक्टस का रोपण शुरू किया गया है। यह पहल मिट्टी संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्रों की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगी।
वन संरक्षण के लिए मानसून सबसे उपयुक्त समय
वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि मानसून प्राकृतिक पुनर्जनन और वन संरक्षण के लिए सबसे अनुकूल समय होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण, पौधारोपण, वन मार्गों का रखरखाव, मानव-वन्यजीव संरक्षण तथा जनभागीदारी से जुड़े सभी कार्य समन्वित रूप से किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से वन क्षेत्रों की पारिस्थितिकी और जैव विविधता को मजबूती मिलेगी तथा जल और वन संसाधनों के सतत संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
00 मुख्यमंत्री साय और विस अध्यक्ष सिंह ने लगाया रुद्राक्ष का पौधा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर हरियाली, जनभागीदारी और मातृ सम्मान के भाव से सराबोर नजर आया। एक पेड़ मां के नाम 3.0 अभियान के अंतर्गत आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप सहित विधानसभा के सभी सदस्यों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया। यह संकल्प केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के संरक्षण, मातृत्व के सम्मान और आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित एवं हरित भविष्य के निर्माण का सामूहिक संकल्प बनकर उभरा। कार्यक्रम के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों ने अभियान के लिए तैयार विशेष सेल्फी प्वाइंट पर तस्वीरें भी खिंचवाईं तथा प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ एक पेड़ मां के नाम अभियान आज पूरे देश में जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मां के प्रति कृतज्ञता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और आने वाली पीढिय़ों के प्रति उत्तरदायित्व का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी मां के नाम पर पौधा लगाता है तो उस पौधे के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता भी जुड़ जाता है और वह उसके संरक्षण के लिए स्वयं प्रेरित होता है। यही भाव इस अभियान को स्थायी, प्रभावी और जनभागीदारी आधारित बनाता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधारोपण किया जाना अत्यंत प्रेरणादायी पहल है। विधानसभा परिसर से दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न करेगा। उन्होंने इस अभिनव आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल समाज में वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भावी पीढिय़ों के भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के संतुलन के आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता का संरक्षण और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी उसी आत्मीयता से करनी चाहिए, जिस भाव से वह अपने परिवार के किसी सदस्य की देखभाल करता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में वन संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा जनभागीदारी आधारित पर्यावरणीय अभियानों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक पेड़ मां के नाम 3.0 अभियान प्रदेश के गांव-गांव, शहर-शहर और प्रत्येक परिवार तक पहुंचेगा तथा प्रकृति संरक्षण को सामाजिक दायित्व और जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपनी मां के नाम पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में उत्कृष्ट मॉडल बन सकता है।
कार्यक्रम में विधानसभा के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी माताओं के नाम पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्री मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण स्व. डॉ. तीजन बाई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि : गनियारी में आयोजित दशगात्र एवं श्रद्धांजलि सभा में हुए शामिल
रायपुर-- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी पहुंचे, जहां उन्होंने विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई के दशगात्र एवं श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके पैतृक गृह ग्राम गनियारी में आयोजित इस शोकसभा में मुख्यमंत्री ने स्व. डॉ. तीजन बाई के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें सादर नमन किया तथा शोकसंतप्त परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर स्व. डॉ. तीजन बाई के पुत्र दिलहरण पारधी तथा परिवार के अन्य सदस्यों से भेंट कर उनका हालचाल जाना और उन्हें ढांढस बंधाया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि स्व. डॉ. तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान थीं। उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा, अद्भुत साधना और पंडवानी की कापालिक शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्व. डॉ. तीजन बाई का योगदान आने वाली पीढ़ियों को भी निरंतर प्रेरित करता रहेगा। स्व. डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोककला, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित रहा। उन्होंने पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाकर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। उनकी कला, साधना और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि राज्योत्सव के अवसर पर प्रतिवर्ष 'डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण' प्रदान किया जाएगा, जिसके माध्यम से लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राम गनियारी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण स्व. डॉ. तीजन बाई के नाम पर किया जाएगा, ताकि इस क्षेत्र के विद्यार्थी उनके जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने यह कहा कि लोककला की महान साधिका डॉ. तीजन बाई की स्मृतियों को राज्य सरकार द्वारा चिरस्थायी रखते हुए उनकी जीवनभर की कला-साधना के प्रतीक रहे तंबूरे को रायपुर के संग्रहालय में पूरे सम्मान के साथ संरक्षित रखा जाएगा, जिससे भविष्य की पीढ़ियां उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।
श्रद्धांजलि सभा को सांसद विजय बघेल, प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल तथा विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा ने भी संबोधित किया। उन्होंने स्व. डॉ. तीजन बाई के व्यक्तित्व, कृतित्व और लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा उन्हें सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर पद्मश्री आर.एस. बारले, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित अन्य गणमान्यजन, छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे कलाकार, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की चाल बदल गई है। इस पर ब्रेक लगने के बाद पिछले 24 घंटों में प्रदेश में मौसम शुष्क रहा. दोबारा बारिश की गतिविधि बढ़ने का इन्तजार बढ़ते जा रहा है। रायपुर पूरी तरह सूखा रहने के साथ ही सबसे गर्म इलाका भी रहा। प्रदेश में सामान्य से अबतक 26 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि 15 और 16 जुलाई को प्रदेश में वर्षा की गतिविधि में वृद्धि हो सकती है, जिनमे कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। प्रदेश में सोमवार को रायपुर और बिलासपुर में सबसे ज्यादा तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम तापमान अंबिकापुर में 23.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है।
रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ?
राजधानी रायपुर में आज मौसम विभाग ने आकाश में बादल छाए रहने की संभावना जताई है. अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने के आसार हैं।
मौसम सारांश
मौसम विभाग के अनुसार औसत समुद्र तल पर मानसून द्रोणिका श्रीगंगानगर, हिसार, मुरादाबाद, गोरखपुर, मुज.फ्फरपुर, बालुरघाट और वहां से पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर मणिपुर तक बनी हुई है। उत्तरी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे दक्षिणी बांग्लादेश के ऊपर, औसत समुद्र तल से 4.5 से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके कारण प्रदेश में मंगलवार को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।
अब AI करेगा जंगल की चौकीदारी, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू
रायपुर। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम सामान्य सीसीटीवी कैमरों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत और सक्रिय सुरक्षा समाधान हैं। यह कंप्यूटर विज़न (Computer Vision) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) तकनीकों का उपयोग करते हैं, जो वीडियो फुटेज का वास्तविक समय (रियल-टाइम) में विश्लेषण करके संभावित खतरों की पहचान करते हैं और तुरंत अलर्ट भेजते हैं ।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और वन सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू किया गया है। यह पहल वन्यजीवों की सुरक्षा, मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम तथा अवैध शिकार, लकड़ी तस्करी और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वन बल प्रमुख अरुण पांडेय, पीसीसीएफ (वन्यजीव) ओम प्रकाश यादव तथा क्षेत्र संचालक गुरुनाथन एन.जी. के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस परियोजना के तहत 70 से 80 फीट ऊंचे टावरों पर पी2पी (पीयर-टू-पीयर) मॉड्यूल और एआई कैमरे लगाए जा रहे हैं। इनकी मदद से दूरस्थ और दुर्गम वन क्षेत्रों में वन्यजीवों और संदिग्ध गतिविधियों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। परियोजना का प्रारंभिक ट्रायल ओडिशा सीमा से लगे कुल्हाडीघाट, इंदागांव, रिसगांव, दक्षिण उदंती और पायलीखण्ड उत्तर उदंती रेंज में किया जा रहा है। ये क्षेत्र हाथियों और अन्य वन्यजीवों के प्रमुख आवागमन गलियारे हैं तथा अवैध वन्यजीव व्यापार, सागौन तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी और अतिक्रमण की दृष्टि से भी संवेदनशील माने जाते हैं।
एआई आधारित कैमरे एशियाई हाथी, बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे प्रमुख वन्यजीवों की स्वतः पहचान कर सकेंगे। साथ ही शिकारी, लकड़ी तस्कर, अवैध घुसपैठिए और अतिक्रमणकारियों जैसी संदिग्ध मानव गतिविधियों का भी स्वतः पता लगाएंगे। यह पूरी प्रणाली पोर्टेबल होगी, जिससे आवश्यकता के अनुसार इसे अन्य स्थानों पर भी स्थापित किया जा सकेगा। जैसे ही किसी वन्यजीव या संदिग्ध व्यक्ति की पहचान होगी, सिस्टम तुरंत व्हाट्सएप के माध्यम से फ्रंटलाइन वन कर्मियों और अधिकारियों को सूचना भेजेगा। इससे मौके पर तेजी से कार्रवाई करना संभव होगा।
रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने व्यास पीठ पर विराजमान श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज द्वारा वाचन की जा रही श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया तथा श्रीमद्भागवत जी का विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ आरती-वंदन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने व्यास पीठ पर विराजमान कथा व्यास श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए आशीर्वाद ग्रहण किया। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के अंतर्गत भगवद्नाम के महत्व पर आधारित प्रसंग का एकाग्र भाव से श्रवण किया तथा कहा कि आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में ऐसी धार्मिक कथाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध प्रदेश है। यह प्रभु श्री राम का ननिहाल तथा माता कौशल्या का मायका है। भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर व्यतीत किया, जिसके कारण राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान और अधिक गौरवशाली बनती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवरीनारायण माता शबरी की तपोभूमि है, जहां प्रभु श्रीराम और माता शबरी के दिव्य मिलन की स्मृतियां आज भी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर करती हैं। उन्होंने कहा कि राजिम स्थित पवित्र त्रिवेणी संगम पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला राजिम कुंभ देश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इस भव्य आयोजन में देशभर से साधु-संतों, श्रद्धालुओं और धर्माचार्यों का आगमन होता है, जिससे छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक वैभव को नई पहचान मिलती है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए विभिन्न धार्मिक योजनाओं का प्रभावी संचालन कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रभु श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम के दर्शन कराए जा रहे हैं। अब तक लगभग 50 हजार से अधिक श्रद्धालु भगवान श्रीरामलला के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त कर चुके हैं। इसी प्रकार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के बुजुर्ग देश के विभिन्न प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों के संरक्षण, संवर्धन और समग्र विकास के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक समरसता, धार्मिक स्वतंत्रता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू किया गया है। इस कानून में देश के विभिन्न राज्यों की तुलना में अधिक कठोर प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन सख्त प्रावधानों से अवैध धर्मांतरण की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गौ माता के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार द्वारा गौधाम योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत गौधामों में गौवंश के लिए चारा, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण है तथा राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, सद्भाव, सेवा, करुणा और लोककल्याण की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और मंगल की कामना करते हुए सभी से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीवलोचन महाराज, पवन साय, नंदन जैन, योगेश अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित थे।
रायपुर: कभी आधार कार्ड बनवाने के लिए वर्षों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर रहे मुंगेली जिले के विकासखंड लोरमी के ग्राम सिंघनपुरी निवासी श्री राम साहू के जीवन में आखिरकार खुशियों की नई सुबह आई। लगभग 13 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद सीएम हेल्पलाइन और जिला प्रशासन मुंगेली की संवेदनशील पहल से उनका आधार कार्ड बन गया। इसके साथ ही उनके लिए शासकीय योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं का लाभ लेने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया।
श्री राम साहू ने आधार कार्ड बनवाने के लिए वर्षों तक कई बार प्रयास किए, लेकिन तकनीकी एवं अन्य कारणों से हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी। आधार कार्ड नहीं होने के कारण वे अनेक शासकीय योजनाओं और सेवाओं से वंचित रह रहे थे। अंततः उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत प्राप्त होते ही कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से राम साहू को जिला पंचायत मुंगेली स्थित आधार पंजीयन केंद्र बुलाया गया, जहां उनकी आधार नामांकन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कराई गई।
आधार पंजीयन पूर्ण होने के बाद राम साहू की वर्षों पुरानी चिंता दूर हो गई। खुशी से भावुक हुए साहू ने कहा कि पिछले 13 वर्षों से वे आधार कार्ड बनवाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन और जिला प्रशासन मुंगेली की तत्परता से आज उनकी सबसे बड़ी समस्या का समाधान हो गया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब वे भी बिना किसी बाधा के सरकारी योजनाओं और अन्य सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
ई-जिला प्रबंधक सोनम शर्मा ने बताया कि यह केवल एक आधार कार्ड बनने का मामला नहीं, बल्कि सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन प्रत्येक नागरिक की समस्या के समाधान के लिए पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। यह सफलता आमजन के विश्वास को और मजबूत करती है कि शासन-प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सदैव तत्पर है।
भिलाई नगर:भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी सुरूचि सिंह ने सोमवार को नगर पालिक निगम भिलाई के आयुक्त के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। राज्य शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के तहत उन्हें नगर पालिक निगम भिलाई का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। इससे पूर्व वे जिला पंचायत राजनांदगांव की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं*।
नगर निगम मुख्यालय पहुंचने पर निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सुश्री सिंह का आत्मीय स्वागत किया। आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह का शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र नागरिक तक पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के साथ पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। पदभार ग्रहण के दौरान निगम के सभी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने नवपदस्थ आयुक्त का स्वागत करते हुए उन्हें निगम की वर्तमान परियोजनाओं एवं विभिन्न विभागों की प्रगति से अवगत कराया। राज्य शासन द्वारा हाल ही में किए गए प्रशासनिक फेरबदल के अंतर्गत आईएएस अधिकारी सुश्री सुरूचि सिंह को नगर पालिक निगम भिलाई का आयुक्त नियुक्त किया गया है। उनके प्रशासनिक अनुभव एवं कार्यकुशलता से भिलाई नगर निगम में विकास कार्यों को नई दिशा एवं गति मिलेगी।
00 नक्सल मामलों में निरुद्ध लोगों के प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए शासन प्रतिबद्ध - शर्मा
00 जनहानि रहित मामलों की होगी साप्ताहिक समीक्षा, लंबित न्यायालयीन मामलों में भी तेज होगी प्रक्रिया
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल मामलों में जेल में बंद ऐसे लोगों के प्रकरणों के त्वरित निराकरण और रिहाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिनके खिलाफ कोई गंभीर जनहानि का मामला दर्ज नहीं है। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज बस्तर क्षेत्र से आए जनप्रतिनिधियों, नक्सल प्रकरणों में निरुद्ध लोगों के परिजनों, नक्सल पीड़ितों तथा युवाओं से आज विधानसभा में मुलाकात कर नक्सल प्रकरणों के निराकरण और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नक्सल मामलों में जेल में निरुद्ध लोगों के प्रकरणों की शीघ्र और न्यायसंगत समीक्षा और सभी की जल्द रिहाई के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा प्रत्येक पात्र मामले में विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
नक्सल प्रकरणों के निराकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि 10 जुलाई को मंत्रालय में गृह विभाग के प्रमुख सचिव, संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर संभाग के सभी 12 जिलों के संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर नक्सल प्रकरणों के निराकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है। बैठक में सभी लंबित प्रकरणों को दो श्रेणियों में विभाजित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। एक जिनमें जनहानि हुई हैं तथा दूसरे वे प्रकरण जिनमें जनहानि नहीं हुई है।
मामलों का शीघ्र निराकरण कर पात्र लोगों को राहत मिले
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि जिन मामलों में जनहानि नहीं हुई है, उनकी समीक्षा संबंधित जिलों पुलिस अधीक्षक प्रत्येक सप्ताह अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम के साथ करेंगे, ताकि ऐसे मामलों का शीघ्र निराकरण कर पात्र लोगों को राहत मिल सके। इसके लिए अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम बनाई गई है। वहीं जिन मामलों में जनहानि हुई है और न्यायालय में प्रकरण लंबित हैं, उनमें चालान प्रस्तुत करने, गवाही की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा न्यायालयीन प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जिन प्रकरणों में गंभीर धाराएं लगी हैं उनमें न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया जाएगा।
अधिवक्ताओं की टीम द्वारा विधिसम्मत होगा परीक्षण
शर्मा ने कहा कि यदि किसी अभियुक्त के परिजन अपने प्रकरण की समीक्षा कराना चाहते हैं तो वे संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक को आवेदन दे सकते हैं। ऐसे आवेदनों का अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम द्वारा विधिसम्मत परीक्षण किया जाएगा।
किसकोड़ो में पहली बार वास्तविक आजादी का अनुभव कर रहे हैं
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी हिंसा ने बस्तर सहित अनेक क्षेत्रों को वर्षों तक प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब इन क्षेत्रों में सामान्य आवाजाही भी कठिन थी, लेकिन आज स्थिति तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में अत्यंत नक्सल प्रभावित रहे किसकोड़ो गांव के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि वे अब पहली बार वास्तविक आजादी का अनुभव कर रहे हैं। शर्मा ने कहा कि कबीरधाम क्षेत्र में भी माओवादी गतिविधियों का प्रभाव रहा है और उन्होंने स्वयं उस दौर को निकट से देखा है। इस दौरान युवाओं ने अपनी व्यथाओं को भी उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखा, जिसपर उप मुख्यमंत्री ने सभी के समाधान का आश्वासन दिया।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ कर जैविक खेती अपनाने का आग्रह
शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर बस्तर में शांति, विकास और विश्वास का वातावरण मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बस्तर के युवाओं से विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से बचते हुए प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का आग्रह किया तथा कहा कि बस्तर के जैविक उत्पादों को एनपीओपी के तहत प्रमाणित कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में सरकार द्वारा कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर विधायक धरमलाल कौशिक, नीलकंठ टेकाम, विक्रम उसेंडी, कवासी लखमा, विक्रम मंडावी सहित बस्तर क्षेत्र के अनेक युवा उपस्थित थे।





























