रायपुर। केंद्रीय जेल रायपुर में महिला बंदियों के सर्वांगीण सुधार और समाज की मुख्यधारा में उनके सम्मानजनक पुनर्वास के लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। जेल प्रशासन द्वारा संचालित निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे जेल के भीतर ही उनके रोजगार की राह आसान हुई है।
केन्द्रीय जेल रायपुर में विभिन्न अपराधों के तहत बंद 60 महिला बंदियों को बेसिक ऑफ पिकल (अचार) एवं मसाला निर्माण के व्यावसायिक उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य महिला बंदियों को स्वयं की व्यावसायिक इकाई स्थापित करने के योग्य बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान इन बंदियों को खाद्य उत्पादों के निर्माण और उनकी उत्तम गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छता, पैकेजिंग एवं सुरक्षित भंडारण से संबंधित व्यावहारिक जानकारियां दी गईं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिला बंदियों ने जेल के महिला प्रकोष्ठ में ही नियमित रूप से अचार का निर्माण शुरू कर दिया है।
महिला बंदियों द्वारा जेल के भीतर पूरी स्वच्छता के साथ आम, नींबू, गाजर और लहसुन जैसी विभिन्न वैरायटियों के स्वादिष्ट और हाइजीनिक अचार तैयार किए जा रहे हैं। इन गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की बिक्री के लिए व्यवस्था की गई है। तैयार उत्पादों को केंद्रीय जेल परिसर स्थित आस्था मुंगोडी सेंटर (आस्था गृह उद्योग स्टॉल) और जेल कैंटीन के माध्यम से आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इस बिक्री से होने वाली आय का एक हिस्सा सीधे इन महिला बंदियों के खातों में जमा किया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
जेल सकारात्मक परिवर्तन का केंद्र- जेल अधीक्षक
इस सराहनीय पहल को लेकर केंद्रीय जेल रायपुर के अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भी एक केंद्र है। जेल महानिदेशक श्री हिमांशु गुप्ता के मार्गदर्शन में जेलों में चलाए जा रहे निश्चय कार्यक्रम के माध्यम से महिला बंदियों को रोजगारपरक कौशल प्रदान किए जा रहे हैं। यह कौशल उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ रिहाई के बाद समाज में सम्मानपूर्वक जीने और आजीविका अर्जित करने में सहायक सिद्ध होगा। जेल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बंदियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इस प्रकार के रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी निरंतर संचालित किए जाते रहेंगे।
बगिया क्लस्टर की समृद्धि एम-कैड योजना से 13 गांवों के 4,933 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगी सिंचाई सुविधा
00 मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में बगिया दाबित उद्वहन सिंचाई परियोजना का कार्य तेज़ी से जारी
00 समृद्धि की पाठशाला में किसानों को आधुनिक सिंचाई, जल प्रबंधन और कृषि नवाचारों की दी जानकारी
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में संचालित समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। इसी क्रम में कांसाबेल विकासखंड के ग्राम डोकड़ा में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय, छत्तीसगढ़ शासन एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में ष्किसानों के लिए समृद्धि की पाठशालाष् का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय, कलेक्टर रोहित व्यास, भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के उप संचालक शुभम पटोरी, घनश्याम पटेल, जनप्रतिनिधि, 13 ग्राम पंचायतों के सरपंच, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय ने कहा कि यह परियोजना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। इसके माध्यम से सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलने से किसान खरीफ के साथ रबी एवं अन्य फसलें भी आसानी से ले सकेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि बगिया क्षेत्र में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत हुई है।
मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय ने किसानों एवं महिलाओं को इस योजना का अधिकतम लाभ लेने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यह परियोजना जशपुर के किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कलेक्टर रोहित व्यास ने कहा कि समृद्धि की पाठशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली एवं जल प्रबंधन की जानकारी देना है। उन्होंने बताया कि परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जशपुर के किसानों को मध्यप्रदेश के मोहनपुरा-कुंडलिया सिंचाई मॉडल का अध्ययन भ्रमण भी कराया गया। उन्होंने बताया कि इस योजना में जमीन के भीतर पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिससे भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी और किसानों की जमीन भी सुरक्षित रहेगी।
जल शक्ति मंत्रालय के उप संचालक शुभम पटोरी ने बताया कि परियोजना तीन प्रमुख आधारों पर आधारित हैकृभूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाना, जल प्रबंधन समितियों के जरिए संचालन एवं रखरखाव तथा किसानों की आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से जल वितरण। इससे किसान वर्षा पर निर्भर नहीं रहेंगे और दो से तीन फसलें लेकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे।
13 गांवों के 4,933 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गत 01 मई को अपने गृह ग्राम बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में समृद्धि एम-कैड योजना के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया था। लगभग 119 करोड़ रुपये की इस परियोजना में भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना के अंतर्गत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 गांवों के लगभग 4,933 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
आधुनिक तकनीक से होगा जल प्रबंधन
समृद्धि योजना के स्टेट नोडल ऑफिसर आलोक अग्रवाल ने बताया कि एम-कैड कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में अप्रैल 2025 में किया गया था। देशभर में स्वीकृत 34 परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ का बगिया क्लस्टर शामिल है। उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति, प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क, सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजि़शन) तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। डेटा आधारित जल प्रबंधन प्रणाली यह तय करेगी कि किस खेत में कब और कितनी मात्रा में पानी पहुंचाना है। परियोजना का संचालन एवं रखरखाव प्रारंभिक पांच वर्षों तक निर्माण एजेंसी द्वारा किया जाएगा, इसके बाद इसकी जिम्मेदारी जल उपभोक्ता समिति को सौंपी जाएगी, जिसमें महिलाओं की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी। समृद्धि एम-कैड योजना का उद्देश्य पानी की प्रत्येक बूंद का वैज्ञानिक एवं प्रभावी उपयोग करते हुए कृषि उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करना तथा जशपुर को आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली के राष्ट्रीय मॉडल जिले के रूप में स्थापित करना है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने गृह ग्राम बगिया में गुरुवार देर रात तक जनदर्शन आयोजित कर आम नागरिकों की समस्याएं सुनीं। जनदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, किसान तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री साय ने प्रत्येक आवेदक की बात गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुनी तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को सभी आवेदनों का गंभीरता से परीक्षण कर उनका शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाएं आम नागरिकों की सुविधा, विकास और जीवन स्तर में सुधार के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं इसलिए प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी ढंग से पहुंचना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनसमस्याओं के निराकरण में संवेदनशीलता, जवाबदेही और तत्परता के साथ कार्य करें, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान ही सुशासन की पहचान है। जनदर्शन के दौरान प्राप्त कई आवेदनों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके पर ही समाधान किया गया। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए तथा जनहित से जुड़े मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीणों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि राज्य सरकार जनता के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और प्रत्येक नागरिक की समस्या का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनदर्शन कार्यक्रम में कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, अन्य विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन ने स्वतंत्रता दिवस 2026 को पूरे प्रदेश में गरिमामय, भव्य और प्रेरणादायी ढंग से मनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस विशेष होने जा रहा है, क्योंकि इस मौके पर राष्ट्रगीत श्वंदे मातरम्श् के 150 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक उत्सव भी मनाया जाएगा। शासन द्वारा सभी जिलों के कलेक्टरों और विभागीय प्रमुखों को आयोजनों की समुचित निगरानी के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री रायपुर में करेंगे ध्वजारोहण, वंदे मातरम् का सामूहिक गायन अनिवार्य
राजधानी रायपुर के स्थानीय पुलिस परेड ग्राउंड में मुख्य राज्य स्तरीय समारोह 15 अगस्त की प्रातः 9:00 बजे आयोजित किया जाएगा। इस भव्य समारोह में माननीय मुख्यमंत्री जी ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे।
ऐतिहासिक अवसर वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए सभी शासकीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन अनिवार्य किया गया है। परेड में बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (पुरुष व महिला), नगर सेना, एनसीसी तथा बैंड प्लाटून की टुकड़ियाँ भाग लेंगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जी प्रदेश की जनता के नाम संदेश देंगे।
जिला और ब्लॉक स्तर पर मंत्रियों व स्थानीय जन-प्रतिनिधियों को कमान
जिला मुख्यालयों में शासन द्वारा नामित मंत्रीगण ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे। यहाँ स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। जनपद पंचायत मुख्यालयों में जनपद पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिकाओं व पंचायतों में उनके अध्यक्ष व सरपंच तथा बड़े गांवों में ग्राम प्रमुख ध्वजारोहण करेंगे। इन स्थलों पर राष्ट्रीय गान, भाषण तथा देश की एकता एवं अखण्डता का संदेश प्रसारित किया जाएगा।
शहीदों के परिजनों का सम्मान
जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि जिला स्तरीय समारोह में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और नक्सली हिंसा में शहीद हुए जवानों के परिजनों को विशेष व सम्मानपूर्वक रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया जाए।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जारी होने वाले सरकारी विज्ञापन स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और छत्तीसगढ़ के शहीदों को समर्पित होंगे। इन विज्ञापनों का प्रकाशन 15 अगस्त के दिन समाचार पत्रों में सुनिश्चित किया जाएगा।
रात्रि में शासकीय भवनों पर होगी विशेष रोशनी
स्वतंत्रता दिवस की रात्रि को प्रदेश के सभी शासकीय भवनों, कार्यालयों और राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों को आकर्षक रोशनी (लाइटिंग) से सजाया जाएगा, जिसका खर्च संबंधित विभाग स्वयं वहन करेंगे। आम नागरिकों और निजी संस्थाओं से भी अपने भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और रात्रि में रोशनी करने की अपील की जाएगी।
संस्थानों के लिए अन्य महत्वपूर्ण निर्देश
शासकीय एवं शिक्षण संस्थाओं में प्रातः 9:00 बजे से पहले ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, प्रभात फेरी, सांस्कृतिक, साहित्यिक, खेलकूद और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम संपन्न कराने होंगे। लाउडस्पीकर के प्रयोग हेतु जिला कलेक्टर से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। लाउडस्पीकर पर केवल मर्यादित और देशभक्ति से ओतप्रोत गीत ही बजाए जा सकेंगे।
बिलासपुर। सकरी थाना क्षेत्र में मोबाइल गुम होने के विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। मामूली विवाद के बाद छह युवकों ने कथित तौर पर ढाबा संचालक और कर्मचारियों के साथ मारपीट की और बाद में पेट्रोल छिड़ककर ढाबे में आग लगाने का प्रयास किया। आरोपियों पर ढाबा संचालक को जिंदा जलाने की धमकी देने का भी आरोप है। मामले में सकरी थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार, भूण्डा निवासी इस्माइल खान उर्फ सोनू (31 वर्ष) ने सकरी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि 13 जुलाई की रात संकेत कुमार जायसवाल अपने दो साथियों के साथ उनके ढाबे पर खाना खाने आया था। खाना खाने के बाद सभी वहां से चले गए। अगले दिन 14 जुलाई को संकेत कुमार जायसवाल अपने साथी आर्यन दुबे और संदीप यादव के साथ दोबारा ढाबे पर पहुंचा। उसने बताया कि उसका मोबाइल फोन ढाबे में कहीं गिर गया है। इसके बाद उसने ढाबा संचालक से सीसीटीवी फुटेज दिखाने की मांग की।
ढाबा संचालक और कर्मचारियों ने उसकी मांग पर सीसीटीवी फुटेज दिखाया। करीब 45 मिनट तक फुटेज देखने के बाद भी मोबाइल दिखाई नहीं दिया। इसके बाद आरोपियों ने ढाबे के मिस्त्री विनोद कुमार टोंडे के साथ विवाद शुरू कर दिया। पुलिस के मुताबिक, मोबाइल नहीं मिलने से नाराज आरोपियों ने विनोद कुमार के साथ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान ढाबे में मौजूद अन्य कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। हालांकि, आरोपी इस घटना से नाराज थे और उन्होंने रंजिश रख ली।
पुलिस ने बताया कि 15 जुलाई की सुबह करीब 10 बजकर 20 मिनट पर संकेत कुमार जायसवाल अपने चार अन्य साथियों के साथ दोबारा ढाबे पर पहुंचा। इस दौरान सभी आरोपियों ने ढाबा संचालक और कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोप है कि आरोपियों ने एकजुट होकर ढाबा संचालक और कर्मचारियों से मारपीट की। इसके बाद उन्होंने ढाबे में पेट्रोल छिड़क दिया और लाइटर से आग लगाने का प्रयास किया। आरोपियों ने बटनदार चाकू और अन्य हथियार दिखाकर ढाबा संचालक को जान से मारने की धमकी भी दी।
घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया। पीड़ित पक्ष ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही सकरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस टीम ने घटना में शामिल आरोपियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने विवाद और मारपीट की घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त बटनदार चाकू समेत अन्य सामान जब्त किया है। इसके अलावा पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों में संकेत कुमार जायसवाल उर्फ छोटू, राजवीर बाबरा, लारेन फ्रांसिस, राहुल गहरवरिया, आर्यन दुबे उर्फ तुषार और राहुल श्रीवास्तव शामिल हैं। सभी आरोपी बिलासपुर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए असामाजिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। किसी भी व्यक्ति द्वारा हिंसा, धमकी या कानून हाथ में लेने की कोशिश करने पर उसके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी विवाद की स्थिति में कानून को हाथ में लेने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना दें। छोटी-छोटी बातों को लेकर हिंसक घटनाओं को अंजाम देने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़ विकासखंड स्थित ग्राम चनवारीडांड की रहने वाली रीता मिंज इसकी प्रेरक मिसाल हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपना स्वयं का परिवहन व्यवसाय स्थापित किया, बल्कि आज वे क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
रीता मिंज वर्ष 2017 में गठित वसुंधरा महिला स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। बिहान मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें समूह के माध्यम से प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और स्वरोजगार के लिए आवश्यक मार्गदर्शन मिला। इससे उन्होंने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।बिहान योजना के अंतर्गत समूह को रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि और बैंक ऋण के रूप में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई। इस सहयोग और स्वयं के निवेश के आधार पर रीता मिंज ने मिंज बस ट्रांसपोर्ट की शुरुआत की। आज उनका बस परिवहन व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और इससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 80 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
रीता मिंज बताती हैं कि व्यवसाय शुरू होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब बच्चों की शिक्षा, घरेलू आवश्यकताओं और अन्य खर्चों की पूर्ति आसानी से हो रही है। साथ ही व्यवसाय के लिए निजी ऋण या साहूकारों पर निर्भर रहने की जरूरत भी समाप्त हो गई है।उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के गांवों की अनेक महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। रीता मिंज स्वयं भी समूह की बैठकों में महिलाओं को बचत, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करती हैं।
रीता मिंज का कहना है कि बिहान योजना ने उन्हें केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं दिया, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया। उनका मानना है कि यदि शासन की योजनाओं का सही उपयोग किया जाए और मेहनत के साथ आगे बढ़ा जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं।बिहान मिशन के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को उपलब्ध कराए जा रहे प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और संस्थागत मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। रीता मिंज की सफलता इस बात का उदाहरण है कि संगठित प्रयास और सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ उठाकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को नई पहचान दी जा सकती है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित किए गए सुशासन तिहार-2026 आमजन की मस्याओं के त्वरित समाधान और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। शासन की मंशा के अनुरूप जिले में प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण किया जा रहा है, जिससे पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ शीघ्र पहुंच रहा है। इसी कड़ी में मरवाही विकासखंड के ग्राम उषाड़ निवासी कृषक विनय अभिषेक सिंह की मांग पर कृषि विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें शासन की योजना के अंतर्गत अनुदान पर धान की रोपाई के लिए आधुनिक रोपा लगाने की मशीन उपलब्ध कराई है।
विनय अभिषेक सिंह ने सुशासन तिहार के जिला स्तरीय समाधान शिविर में आवेदन प्रस्तुत कर धान की रोपाई को अधिक सरल, तेज, कम श्रमसाध्य और कम लागत वाला बनाने के लिए आधुनिक रोपा लगाने की मशीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की कार्यशैली के अनुरूप आवेदन प्राप्त होते ही कृषि विभाग ने आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ की। विभाग ने सीएचएएमपीएस प्रणाली के माध्यम से किसान का पंजीयन कर पात्रता के अनुसार अनुदान स्वीकृत कराया और शीघ्र ही उन्हें आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध करा दिया।
कृषक विनय अभिषेक सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक रोपा लगाने की मशीन मिलने से धान की रोपाई कम समय में अधिक दक्षता और बेहतर गुणवत्ता के साथ हो सकेगी। इससे मजदूरी पर होने वाला खर्च कम होगा, समय की बचत होगी तथा खेती अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समय पर रोपाई होने से फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा, जिससे उनकी आय में सकारात्मक वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
उप संचालक कृषि सत्यजीत कंवर ने बताया कि राज्य शासन किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और यंत्रीकरण से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पात्र किसानों को अनुदान पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि खेती को अधिक उत्पादक, सुविधाजनक और लाभकारी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण कर किसानों सहित सभी पात्र हितग्राहियों तक शासन की योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक उनका लाभ समयबद्ध ढंग से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों की छोटी-बड़ी आवश्यकताओं का त्वरित समाधान कर उन्हें आधुनिक संसाधनों से जोड़ने की पहल खेती को आत्मनिर्भर, प्रतिस्पर्धी और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यही कारण है कि सुशासन तिहार प्रदेश में जनविश्वास, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायिक सेवा में बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए 38 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर पदोन्नत किया है। इस संबंध में हाईकोर्ट की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, चयनित न्यायिक अधिकारियों को विभिन्न मामलों में उनकी पात्रता के आधार पर मार्च और अप्रैल 2026 से प्रभावी तिथियों के अनुसार पदोन्नति प्रदान की गई है।
पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों में अंजली पांडेय, अंकिता अग्रवाल, दिव्या गोयल, ऐश्वर्या दीवान, शैलेश कुमार वशिष्ठ, आफरीन बानो, हरषि अग्रवाल, मीनू नंद, प्रज्ञा अग्रवाल, स्वर्णा देहरे, काम्या अय्यर, सारिका नंदे, अजय सिंह मीणा, रश्मि मिश्रा, शाश्वत दुबे, कोनिका यादव, आशीष कुमार चांदहे, गुरु प्रसाद देवांगन, कुमुदिनी गर्ग, अंकिता यदु, उन्नति महिस्वर, सिद्धार्थ आनंद सोनी, तनया ब्राह्मी, नीति, मनीष कुमार, साक्षी ध्रुव, पार्थ दुबे, जेनिफर लकड़ा, धारिणी राणा, प्रांजलि नेताम, राजेश खलको, अजय लकड़ा, ध्रुवराज ग्वाल, शिवेंद्र कुमार टेकाम, श्वेता ठाकुर, पुनीत तिग्गा, डिपल और प्रवीण कुजूर शामिल हैं।
हाईकोर्ट के इस फैसले को न्यायिक सेवा में वरिष्ठ स्तर पर रिक्त पदों की पूर्ति और न्यायिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पदोन्नत अधिकारियों को अब सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के रूप में नई जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।




रायपुर। स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के बीच फैल रही भ्रांतियों को दूर करते हुए बिजली विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर बिजली बिल नहीं बढ़ाता बल्कि केवल वास्तविक बिजली खपत के आधार पर सटीक बिल तैयार करता है। विभाग के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता का बिल बढ़ा है, तो इसका कारण बिजली की अधिक खपत और उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचना है, न कि स्मार्ट मीटर।
विभाग ने बताया कि स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उपभोक्ता ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से हर आधे घंटे की बिजली खपत देख सकते हैं। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-से विद्युत उपकरण अधिक बिजली खर्च कर रहे हैं और खपत कम करने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
बिजली विभाग के अनुसार प्रदेश में बिजली दरें निर्धारित स्लैब के आधार पर लागू होती हैं। 0 से 100 यूनिट तक 4.40 रुपये,101 से 200 यूनिट, तक 4.50 रुपये, 201 से 400 यूनिट तक 6 रुपये, 401 से 600 यूनिट तक 7 रुपये और 600 यूनिट से अधिक खपत होने पर 8.80 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू होती है। ऐसे में जैसे ही बिजली की खपत अगले स्लैब में पहुंचती है, बिल स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
विभाग ने बताया कि अप्रैल, मई और जून की भीषण गर्मी के दौरान एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग के कारण अधिकांश घरों में बिजली खपत बढ़ी, जिससे कई उपभोक्ताओं के बिल भी अधिक आए। यह पूरी तरह मौसम और बिजली उपयोग से जुड़ी स्थिति है।
स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ता अपनी मासिक खपत पर लगातार नजर रख सकते हैं और उसे 400 यूनिट से कम रखने की योजना बना सकते हैं, जिससे राज्य सरकार की हाफ बिजली योजना का लाभ मिलता रहे। यदि खपत 400 यूनिट से अधिक हो जाती है, तो योजना का लाभ प्रभावित होने से बिल बढ़ सकता है।
बिजली विभाग ने बताया कि स्मार्ट मीटर से जुड़ी अधिकांश शिकायतों की जांच में मीटर सही पाए गए हैं। किसी भी शिकायत की स्थिति में उपभोक्ता 1912 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। विभाग ने लोगों से स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप का अधिक से अधिक उपयोग करने, ऊर्जा संरक्षण अपनाने तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर बिजली बिल कम करने की अपील की है।
रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने दुर्ग जिले की अमलेश्वर नगर पालिका में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए 13 लाख 26 हजार रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभागीय संचालनालय ने स्वीकृति आदेश जारी कर दिए हैं।
स्वीकृत राशि के तहत वार्ड क्रमांक-12 में सीसी रोड निर्माण के लिए 9 लाख 73 हजार रुपए, आरसीसी नाली निर्माण के लिए 1 लाख 25 हजार रुपए तथा शिव मंदिर के बाजू में चबूतरा निर्माण के लिए 2 लाख 28 हजार रुपए मंजूर किए गए हैं। इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से स्थानीय नागरिकों को बेहतर सड़क, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने उद्योग और कारोबार को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026’ पारित कर दिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जोखिम आधारित (रिस्क बेस्ड) एवं विश्वास आधारित (ट्रस्ट बेस्ड) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा।
इस विधेयक का उद्देश्य उद्योगों एवं कारोबार की स्थापना और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक अनुपालनों को कम करना तथा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अधिक पारदर्शी, तेज और उद्यम-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण तैयार करना है।
विधेयक के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर विभिन्न जोखिम श्रेणियों में किया जाएगा। कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों को सरल एवं त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध स्वीकृति की व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी। इससे छोटे कारोबारियों को बड़े उद्योगों जैसी जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।
नई व्यवस्था के अंतर्गत कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षणों के स्थान पर सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा लाइसेंसधारी अभियंता, आर्किटेक्ट या अन्य अधिकृत पेशेवरों द्वारा प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे अनुमतियों की प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक जवाबदेह बनेगी।
विधेयक के तहत हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू की जाएगी। इससे उद्यमियों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी और वे अपने कारोबार के विस्तार एवं संचालन पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
एमएसएमई इकाइयों के लिए जल प्रदाय संबंधी अनुमति स्व-घोषणा के आधार पर, सोसायटी अथवा फर्म का पंजीयन समयबद्ध प्रक्रिया से तथा भवन अनुज्ञा सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा अधिकृत विशेषज्ञ के प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रदान की जा सकेगी। निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग द्वारा निर्णय नहीं लेने की स्थिति में पात्र मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत (ऑटो अप्रूवल) मानी जाएगी। हालांकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी परीक्षण एवं भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी।
विधेयक के अंतर्गत राज्य शासन के 8 विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली के दायरे में शामिल किया गया है। आवश्यकता अनुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अतिरिक्त सेवाएं भी इसमें जोड़ी जा सकेंगी।
विधेयक के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति तथा जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति इसके क्रियान्वयन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी निभाएगी। दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी।
इस सुधार से राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित यह व्यवस्था कारोबार शुरू करने और संचालित करने में लगने वाले समय एवं लागत को कम करेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और परीक्षण की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026’ राज्य में पारदर्शी, सरल, पूर्वानुमेय और निवेश-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड स्थित ग्राम दोकड़ा में आयोजित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव-2026 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ परंपरागत गजपति महाराजा की भूमिका का निर्वहन करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
मुख्यमंत्री साय ने छेरा पहरा की पावन परंपरा का निर्वहन करते हुए सोने की झाड़ू से भगवान के रथ के आगे मार्ग का प्रतीकात्मक रूप से मार्जन किया तथा चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव किया। इसके बाद उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं के साथ भगवान श्री जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ किया। पूरे दोकड़ा क्षेत्र में “जय जगन्नाथ” के जयघोष, शंखध्वनि, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
छेरा पहरा की पावन परंपरा का निर्वहन कर दिया सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश
मुख्यमंत्री साय ने सभी श्रद्धालुओं को रथयात्रा की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा आस्था, संस्कृति और सनातन परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1942 से चली आ रही यह गौरवशाली परंपरा आज भी जनआस्था को नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। जनसहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और वर्ष 2025 में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरी भव्य रथयात्रा आयोजित हो रही है। उन्होंने गजपति महाराजा की परंपरा निभाने का अवसर देने के लिए दोकड़ावासियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भगवान श्री जगन्नाथ से प्राचीन और आत्मीय संबंध रहा है। देवभोग का चावल आज भी पुरी के महाप्रसाद में उपयोग किया जाता है, जो इस सांस्कृतिक संबंध का जीवंत प्रमाण है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की गारंटी के अनुरूप प्रदेश में 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। महतारी वंदन योजना की 29 किस्तें जारी की जा चुकी हैं तथा रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं। राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरचार्ज माफी योजना की अवधि तीन माह बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से चौबीसों घंटे नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। वहीं अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाओं सहित 520 से अधिक शासकीय सेवाएँ उनके गाँव में ही उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि जशपुर जिले को शीघ्र ही रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं।धरमजयगढ़-लोहरदगा रेल परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है। साथ ही जशपुर जिले में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति से स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ विकसित होंगी।
रथयात्रा के दौरान ओडिशा की प्रसिद्ध कीर्तन मंडलियों ने भजन एवं संकीर्तन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ढोल, मृदंग, झांझ और शंखध्वनि के बीच श्रद्धालु भगवान के जयघोष लगाते हुए रथयात्रा में शामिल हुए। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस आयोजन को आस्था और लोक संस्कृति के विराट उत्सव में बदल दिया।
इस अवसर पर पद्मश्री जागेश्वर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा सहित जगन्नाथ मंदिर आयोजन समिति के सदस्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए निजी विद्यालयों में कक्षा पहली की रिक्त सीटों पर प्रवेश हेतु तृतीय एवं अंतिम चरण की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जाएगी। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
विद्यालयवार आरटीई की रिक्त सीटों का प्रकटीकरण
शासन ने स्पष्ट किया है कि आरटीई प्रवेश की संपूर्ण प्रक्रिया 27 अगस्त 2026 तक हर स्थिति में पूर्ण की जानी अनिवार्य है तथा इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। महत्वपूर्ण तिथियां और समय-सारणी लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी निर्धारित समय-सारणी इस प्रकार है। 17 जुलाई से 21 जुलाई 2026 तक जिला स्तर पर विद्यालयवार आरटीई की रिक्त सीटों का प्रकटीकरण और प्रचार-प्रसार कर सकेंगे। 22 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक पात्र पालक आरटीई पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन और आवश्यक संशोधन कर सकेंगे।
27 अगस्त 2026 तक नोडल प्राचार्यों द्वारा प्रवेशित बच्चों की अंतिम प्रविष्टि आरटीई पोर्टल पर दर्ज करना
25 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक नोडल प्राचार्यों द्वारा आवेदनों का सूक्ष्म परीक्षण, सत्यापन और पात्र/अपात्र की प्रविष्टि दर्ज करना। 10 अगस्त से 14 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन लॉटरी काउंसलिंग के माध्यम से चयनित बच्चों की सूची जारी होना। 17 अगस्त से 25 अगस्त 2026 तक लॉटरी में चयनित बच्चों का संबंधित निजी विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित कराना। 20 अगस्त से 27 अगस्त 2026 तक नोडल प्राचार्यों द्वारा प्रवेशित बच्चों की अंतिम प्रविष्टि आरटीई पोर्टल पर दर्ज करना।
केवल नए व अप्रवेशित बच्चों को मिलेगा मौका
लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि इस अंतिम चरण में केवल वे ही पात्र बच्चे आवेदन कर सकेंगे, जिन्हें पूर्व के किसी भी चरण में प्रवेश प्राप्त नहीं हुआ है। प्रथम चरण में लागू सभी नियम एवं पात्रता की शर्तें इस चरण में भी यथावत प्रभावी रहेंगी।
मुनादी और स्थानीय माध्यमों से होगा प्रचार
जिला शिक्षा अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि निजी विद्यालयों के आसपास निवासरत पालकों तक इस अंतिम चरण की जानकारी पहुंचाने के लिए मुनादी, समाचार पत्रों एवं अन्य स्थानीय माध्यमों का उपयोग करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र बच्चा इस कल्याणकारी योजना के लाभ से वंचित न रहे। स्कूल शिक्षा संचालनालय ने सभी अधिकारियों और निजी स्कूलों को इस समय-सारणी का कड़ाई से पालन करने तथा प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं।
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। रथयात्रा पर्व के दौरान लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच उरमाल बाजार में एक बड़ा हादसा हो गया। बारिश से बचने के लिए लोग बाजार स्थित ईंट-खपरे से बने एक पुराने होटल में शरण लिए हुए थे। इसी दौरान लगातार बारिश के कारण कमजोर हो चुका भवन अचानक भरभराकर ढह गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
भर-भरकर पुराना होटल ढहा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय होटल के अंदर और आसपास 9 से अधिक लोग मौजूद थे। अचानक मलबा गिरते ही चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर घायलों को बाहर निकाला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उरमाल पहुंचाया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उरमाल के डॉक्टर पांडे ने बताया कि एक व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में चोट आई है, जिसे एक्स-रे के लिए भेजा गया है। शेष सभी घायलों को सामान्य चोटें आई थीं, जिनका प्राथमिक उपचार कर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
घायलों के नाम
घायलों में रोहित सिन्हा (28 वर्ष, ग्राम धोरकोट), प्रीतिवास (उरमाल), तिलेश्वर सोनवानी (बेहरामुड़ा), होरेंद्र सिंह मरकाम, उड़ीसा के बेहरामुड़ा निवासी एक व्यक्ति, दो वर्षीय एक बच्ची, चार वर्षीय एक बच्ची सहित अन्य लोग शामिल हैं।
घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और भवन गिरने के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरोना रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है। सरोना रेलवे स्टेशन का लगभग 14 करोड़ रूपए की लागत से स्टेशन का पुनर्विकास कर इसे आधुनिक, सुव्यवस्थित एवं यात्री-केंद्रित स्वरूप प्रदान किया गया है, जिससे यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम एवं आरामदायक यात्रा अनुभव सुनिश्चित हो सके। इस पुनर्विकास के अंतर्गत स्टेशन परिसर का समग्र उन्नयन करते हुए यात्री सुविधाओं को आधुनिक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ किया गया है। इसमें बेहतर सुगम्यता उन्नत एवं स्वच्छ प्रतीक्षालय, डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली, बेहतर प्रकाश व्यवस्था तथा सुव्यवस्थित स्टेशन परिसर जैसी सुविधाओं का विकास शामिल है। इन सुधारों से न केवल यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि स्टेशन की कार्यक्षमता एवं सौंदर्य में भी सुधार हुआ है, जिससे क्षेत्रीय रेल संपर्क और अधिक प्रभावी एवं विश्वसनीय बन रहा है।
सरोना रेलवे स्टेशन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। यह स्टेशन रायपुर शहर, औद्योगिक क्षेत्रों तथा आसपास के तेजी से विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों के यात्रियों के लिए सुविधाजनक रेल संपर्क उपलब्ध कराता है। साथ ही, रायपुर आने वाले पर्यटकों एवं व्यापारिक यात्रियों के लिए भी यह स्टेशन एक महत्वपूर्ण प्रवेश बिंदु है। स्टेशन के आधुनिकीकरण से क्षेत्रीय आवागमन, व्यापारिक गतिविधियों तथा रोजगार के अवसरों को नई गति मिलेगी।
सरोना रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों के अंतर्गत 95 वर्गमीटर का नया कॉनकोर्स भवन, लगभग 2000 वर्गमीटर का विकसित सर्कुलेटिंग एरिया, नया फुट ओवर ब्रिज (FOB), सात प्लेटफॉर्म शेल्टर, 2,800 वर्गमीटर प्लेटफॉर्म सरफेसिंग का उन्नयन, 2 लिफ्ट, आधुनिक प्रतीक्षालय, उन्नत शौचालय, द्वितीय प्रवेश द्वार, समुचित और पर्याप्त पार्किंग स्थान, एकीकृत यात्री सूचना प्रणाली, सीसीटीवी कैमरे तथा आकर्षक कला एवं सांस्कृतिक सज्जा विकसित की गई है। इसके साथ ही यात्रियों की सुविधा के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत सरोना रेलवे स्टेशन का यह कायाकल्प न केवल यात्रियों को आधुनिक एवं विश्वस्तरीय सुविधाएँ उपलब्ध कराएगा, बल्कि रायपुर महानगर एवं आसपास के क्षेत्रों के आर्थिक, सामाजिक एवं औद्योगिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगा। यह पुनर्विकास कार्य भारतीय रेल की यात्री-केंद्रित, सुरक्षित एवं सतत् विकास की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।
बलौदाबाजार-भाटापारा। भारतीय पुलिस सेवा (भापुसे) 2019 बैच के वरिष्ठ अधिकारी राय गौरव रामप्रवेश ने आज जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के नए पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। इससे पूर्व राय गौरव रामप्रवेश जिला दंतेवाड़ा में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे।
पुलिस कार्यालय बलौदाबाजार पहुंचने पर निवर्तमान पुलिस अधीक्षक ओ.पी. शर्मा ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने विधिवत रूप से नए पुलिस अधीक्षक को बलौदाबाजार-भाटापारा जिले का चार्ज सौंपा।
इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक का स्वागत किया। इस दौरान अभिषेक सिंह (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बलौदाबाजार), हेमसागर सिदार (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, भाटापारा), तारेश साहू (अनुविभागीय अधिकारी पुलिस – SDOP, भाटापारा), कौशल किशोर वासनिक (उप पुलिस अधीक्षक – DSP, कैंप कसडोल), संजय साहू (उप पुलिस अधीक्षक – DSP, यातायात), उषा सोन्धिया (उप पुलिस अधीक्षक – DSP), उषा ठाकुर रक्षित निरीक्षक उपस्थित थे।
पदभार ग्रहण करने के बाद नए पुलिस अधीक्षक राय गौरव रामप्रवेश ने मौजूद सभी अधिकारियों का परिचय लिया। साथ ही जिले की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और जन-केंद्रित पुलिसिंग को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया।
रायपुर। पुलिस विभाग में इन दिनों खूब तबादले हो रहे हैं। पुलिस स्थापना बोर्ड के निर्णय के मुताबिक ट्रांसफर की एक और सूची जारी हुई है। इस लिस्ट में सात इंस्पेक्टर और 3 सब इस्पेक्टर हैं। अंतरजिला तबादले की ये तीसरी लिस्ट हैं। इससे पहले भी दो लिस्ट जारी हो चुकी है।
यहां देखिये पूरी लिस्ट

14.49 लाख से अधिक माताओं को 558.93 रूपये करोड़ की डीबीटी सहायता
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने साइबर ठगी से सतर्क रहने की अपील
रायपुर- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाने में सफल रहा है। पारदर्शी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली, राज्य सरकार की सतत निगरानी तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पित प्रयासों से प्रदेश की लाखों गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तक समय पर आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने योजना की इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मातृ सुरक्षा, पोषण और महिला कल्याण के क्षेत्र में लगातार नए मानक स्थापित कर रहा है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि प्रदेश में अब तक 14 लाख 49 हजार 309 पात्र हितग्राहियों का सफल पंजीयन किया जा चुका है। इन सभी पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 558.93 करोड़ रूपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के कारण लाभार्थियों को बिना किसी बिचौलिये के समय पर आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना विश्व की सबसे बड़ी डीबीटी आधारित मातृत्व सहायता योजनाओं में से एक है। एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की केस स्टडी के अनुसार यह योजना गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार लाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है। योजना के सकारात्मक प्रभाव से मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने में भी सहायता मिली है।
मंत्री राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व, बेहतर पोषण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जोडऩा है। इसी उद्देश्य से विभाग द्वारा योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है तथा पात्र हितग्राहियों का समयबद्ध पंजीयन सुनिश्चित किया जा रहा है।
-योजना के नाम पर साइबर ठगी से रहें सतर्क
योजना की सफलता के बीच मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने साइबर अपराधियों की सक्रियता को लेकर प्रदेशवासियों को विशेष रूप से सचेत किया। उन्होंने बताया कि कुछ जिलों में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के नाम पर फर्जी फोन कॉल कर महिलाओं से ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी अथवा राशि की मांग किए जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा, ष्यदि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के नाम पर किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा फोन कर ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी या किसी प्रकार की राशि की मांग की जाती है, तो उसकी बातों में बिल्कुल न आएं। ऐसे कॉल साइबर ठगों के हो सकते हैं। किसी भी संदिग्ध स्थिति में तत्काल अपनी निकटतम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा संबंधित विभाग से संपर्क करें। साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता और सतर्कता ही है।
मंत्री राजवाड़े ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी किए हैं कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से हितग्राही महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही योजना से जुड़ी सही जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए, ताकि कोई भी महिला ठगी का शिकार न बने।
रायपुर, 16 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए एक 6 वर्षीय मासूम की जान बचा ली है। बैगा जनजाति के इस बालक ने खेलते समय गलती से सिक्का निगल लिया था, जो उसकी आहार नली (अन्ननली) में फंस गया था। डॉक्टरों की टीम ने बेहद जटिल और आपातकालीन स्थिति में सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर सिक्के को बाहर निकाला।
पेंड्रा से सिम्स बिलासपुर किया गया था रेफर
जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के कोटा तहसील अंतर्गत ग्राम सरगोंड का निवासी 6 वर्षीय बालक नरेंद्र खेलते समय सुबह करीब 7 बजे अचानक सिक्का निगल गया। इसके तुरंत बाद उसे कुछ भी निगलने में अत्यधिक परेशानी होने लगी। परिजन आनन-फानन में उसे पेंड्रा के एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बालक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया।
डॉक्टरों के समन्वित प्रयास से मिली सफलता
बालक को शाम करीब 6.30 बजे सिम्स लाया गया, जिसके बाद अस्पताल का पूरा अमला सक्रिय हो गया। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने तत्काल एक्स-रे कर अन्ननली के ऊपरी भाग (श्वासनली के मुहाने के ठीक पीछे) में फंसे सिक्के की सटीक लोकेशन की पहचान की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने बच्चे को सामान्य एनेस्थीसिया दिया। इसके बाद ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी तकनीक के जरिए अत्यंत सावधानी से सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और ऑपरेशन के बाद बालक की स्थिति पूरी तरह सामान्य और संतोषजनक है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का परिणाम
इस सफल उपचार पर सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता, आधुनिक तकनीकों और आपसी तालमेल के कारण ही इस जटिल आपातकालीन मामले को समय पर सुलझाया जा सका। सिम्स का लक्ष्य हर मरीज को सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं देना है।
चिकित्सा अधीक्षक और डॉक्टरों ने अभिभावकों के लिए जारी की सलाह
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने आगाह किया कि छोटे बच्चों द्वारा सिक्का, बटन, बैटरी या चुंबक जैसी चीजें निगलना एक गंभीर आपात स्थिति है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय सीधे विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचना चाहिए। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से सिक्के, छोटी बैटरी और छोटे खिलौने दूर रखें। यदि बच्चा कोई वस्तु निगल लेता है और उसे लार टपकने, गले में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें, तो बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें।
00 मुख्यमंत्री ने ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
00 वन विभाग की अभिनव पहल से निःशुल्क पौधों का होगा वितरण, पर्यावरण संरक्षण का दिया जाएगा संदेश
रायपुर। आमतौर पर एटीएम का नाम सुनते ही लोगों के मन में पैसे निकालने वाली मशीन की तस्वीर उभरती है, लेकिन जशपुर वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए 'ट्री एटीएम' की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बगिया हेलीपैड परिसर में इस अनूठे मोबाइल ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल आम नागरिकों तक पौधों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता को नई गति प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर स्वयं ट्री एटीएम से आंवला का पौधा प्राप्त किया तथा उपस्थित लोगों को भी पौधों का वितरण किया। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल ट्री एटीएम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर आम नागरिकों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा। इससे अधिक से अधिक लोग पौधरोपण से जुड़ेंगे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को नया विस्तार मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वन विभाग की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि 'ट्री एटीएम' लोगों को सहज और सरल तरीके से पौधे उपलब्ध कराने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वर्षा ऋतु पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। ऐसे समय में यह पहल लोगों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे आसानी से उपलब्ध कराएगी, जिससे व्यापक स्तर पर पौधरोपण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान ने पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया है। इसी अभियान से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधरोपण कर 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के संदेश के साथ शुरू हुई अनूठी पहल
उल्लेखनीय है कि 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान के अंतर्गत प्रारंभ किए गए ट्री एटीएम को 'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के प्रेरक संदेश के साथ रवाना किया गया। इस अभिनव पहल के तहत केवल निःशुल्क पौधों का वितरण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि पौधा प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण की वैज्ञानिक एवं सही विधि, नियमित देखभाल, संरक्षण तथा पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने के उपायों की भी जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रहने की दर को बढ़ाना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का यह अभियान दीर्घकालिक और प्रभावी बन सके।

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री की सुरक्षा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। आईपीएस अधिकारी जयंत वैष्णव को मुख्यमंत्री सुरक्षा का नया पुलिस अधीक्षक (SP) नियुक्त किया गया है।
हाल ही में हुए पुलिस फेरबदल में हरीश राठौर को कोरिया जिले का नया एसपी बनाया गया था। उनके ट्रांसफर के बाद से ही सीएम सुरक्षा का यह महत्वपूर्ण पद रिक्त चल रहा था, जिसकी जिम्मेदारी अब जयंत वैष्णव को सौंप दी गई है। डीजीपी अरुण देव गौतम द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।

00 आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
रायपुर। छत्तीसगढ़ (धान का कटोरा) में धान की कटाई के बाद बचने वाले श्पैराश् (पराली/पुआल) से बनाई जाने वाली खूबसूरत हस्तकला को पैरा आर्ट कहते हैं। इसके जरिए वेस्ट पैरा का उपयोग कर महापुरुषों और देवी-देवताओं के 3ष्ठ पोर्ट्रेट और चित्र बनाए जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह ग्रामीण आय का भी एक बड़ा साधन बन रहा है। पैरा आर्ट बेहद दिलचस्प कला है, जिसमें धैर्य, कल्पनाशक्ति और बारीकी की समझ जरूरी है. धीरे-धीरे इस कला का क्रेज लोगों के बीच बढ़ता जा रहा है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उन्हें आजीविका के नए साधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा लगातार विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड बलौदाबाजार के अंतर्गत ग्राम लाहौद में स्व-सहायता समूह की 40 महिलाओं को धान एवं पैरा (पुआल) आर्ट का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
जिला पंचायत सीईओ ने बांटे प्रमाण पत्र
प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने महिलाओं द्वारा धान और पैरा से तैयार की गईं विभिन्न सुंदर और आकर्षक कलाकृतियों का अवलोकन किया तथा उनके हुनर की सराहना करते हुए उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया। जिला पंचायत सीईओ बलौदाबाजार-भाटापारा ने बताया कि जिला पंचायत की बिहान टीम के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में गैर-कृषि आजीविका को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य के साथ छत्तीसगढ़ महतारी संकुल संगठन लाहौद में स्व-सहायता समूह की 40 दीदियों को इस कला का प्रशिक्षण दिलाया गया है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं अब स्थानीय स्तर पर अनुपयोगी समझे जाने वाले पैरा (पुआल) और धान से कलाकृतियां बनाकर अपनी अतिरिक्त आय सुनिश्चित कर सकेंगी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी।
जोखिम आधारित बिजनेस परमिशन व्यवस्था लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा छत्तीसगढ़
छोटे कारोबारों को मिलेगी आसान मंजूरी, सेल्फ सर्टिफिकेशन और ऑटो अप्रूवल जैसी सुविधाएं, हर साल लाइसेंस नवीनीकरण से मिलेगी राहत
रायपुर, 16 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने उद्योग और कारोबार को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' पारित कर दिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जोखिम आधारित (रिस्क बेस्ड) एवं विश्वास आधारित (ट्रस्ट बेस्ड) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा।
इस अधिनियम का उद्देश्य उद्योगों एवं कारोबार की स्थापना और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक अनुपालनों को कम करना तथा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अधिक पारदर्शी, तेज और उद्यम-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण तैयार करना है।
अधिनियम के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर विभिन्न जोखिम श्रेणियों में किया जाएगा। कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों को सरल एवं त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध स्वीकृति की व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी। इससे छोटे कारोबारियों को बड़े उद्योगों जैसी जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।
नई व्यवस्था के अंतर्गत कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षणों के स्थान पर सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा लाइसेंसधारी अभियंता, आर्किटेक्ट या अन्य अधिकृत पेशेवरों द्वारा प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे अनुमतियों की प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक जवाबदेह बनेगी।
अधिनियम के तहत हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू की जाएगी। इससे उद्यमियों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी और वे अपने कारोबार के विस्तार एवं संचालन पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
एमएसएमई इकाइयों के लिए जल प्रदाय संबंधी अनुमति स्व-घोषणा के आधार पर, सोसायटी अथवा फर्म का पंजीयन समयबद्ध प्रक्रिया से तथा भवन अनुज्ञा सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा अधिकृत विशेषज्ञ के प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रदान की जा सकेगी। निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग द्वारा निर्णय नहीं लेने की स्थिति में पात्र मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत (ऑटो अप्रूवल) मानी जाएगी। हालांकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी परीक्षण एवं भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी।
अधिनियम के अंतर्गत राज्य शासन के 8 विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली के दायरे में शामिल किया गया है। आवश्यकता अनुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अतिरिक्त सेवाएं भी इसमें जोड़ी जा सकेंगी।
अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति तथा जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति इसके क्रियान्वयन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी निभाएगी। दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी।
इस सुधार से राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित यह व्यवस्था कारोबार शुरू करने और संचालित करने में लगने वाले समय एवं लागत को कम करेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और परीक्षण की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' राज्य में पारदर्शी, सरल, पूर्वानुमेय और निवेश-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा में हुए शामिल
पूजा-अर्चना एवं छेरा-पहरा की परंपरा निभाकर प्रदेश की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा और किसानों की खुशहाली की कामना की
रायपुर - राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में आयोजित भव्य रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए। दोनों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा पारंपरिक श्छेरा-पहराश् की रस्म निभाते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को विशेष विधि-विधान के साथ मंदिर से रथ तक लाया गया।

इसके पूर्व राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पारंपरिक रीति से सोने की झाड़ू द्वारा छेरा-पहरा की रस्म निभाकर रथमार्ग का प्रतीकात्मक शुद्धिकरण किया। इसके पश्चात महाप्रभु की प्रतिमाओं को श्रद्धापूर्वक रथ पर विराजित किया गया और रथयात्रा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता, लोकपरंपरा और जन-जन की आस्था का महापर्व है। यह उत्सव समाज को सेवा, समर्पण, समानता और लोककल्याण का संदेश देता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भगवान जगन्नाथ किसानों के आराध्य और अन्नदाता के रक्षक माने जाते हैं। उनकी कृपा से समय पर वर्षा होती है, खेतों में हरियाली आती है, धान की बालियों में दूध भरता है और किसानों के घरों में समृद्धि का आगमन होता है। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की कि इस वर्ष प्रदेश में भरपूर वर्षा हो, कृषि समृद्ध हो, किसानों की मेहनत सफल हो और छत्तीसगढ़ निरंतर विकास एवं खुशहाली के पथ पर आगे बढ़ता रहे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का दिव्य आशीर्वाद समस्त प्रदेशवासियों पर बना रहे तथा सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल का संचार हो। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हमारी परंपराओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज में सद्भाव, एकता और सामूहिक चेतना को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में प्रतिवर्ष पुरी की विश्वविख्यात रथयात्रा की तर्ज पर यह आयोजन अत्यंत श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होता है। छेरा-पहरा की परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और सेवा ही सर्वाेच्च धर्म है। उल्लेखनीय है कि ओडिशा का पड़ोसी राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में भगवान जगन्नाथ के प्रति विशेष श्रद्धा और आस्था रही है। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में रथयात्रा का आयोजन उत्साहपूर्वक किया जाता है। उत्कल संस्कृति और दक्षिण कोसल की सांस्कृतिक परंपराओं के बीच यह पर्व एक सशक्त सेतु का कार्य करता है। इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न निगम-मंडलों एवं आयोगों के अध्यक्षगण, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।





























