रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार महतारी वंदन योजना का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। अब 40 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं को भी योजना के तहत आर्थिक सहायता देने की तैयारी है। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से प्रदेश के जिलों में सर्वे कराया जा रहा है। योजना के विस्तार के बाद 40 वर्ष से अधिक उम्र की ऐसी अविवाहित महिलाओं के नाम भी लाभार्थियों की सूची में जोड़े जाएंगे, जो निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं।
जिलों में कराया जा रहा सर्वे
महिला एवं बाल विकास विभाग 40 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं की जानकारी जुटाने के लिए जिलों में सर्वे शुरू कराया जा रहा है। सर्वे के माध्यम से ऐसी महिलाओं की संख्या और उनकी पात्रता से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है। विभागीय स्तर पर प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 40 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं की संख्या एक लाख से अधिक बताई जा रही है।
योजना का बढ़ेगा दायरा
बता दें कि महतारी वंदन योजना के तहत वर्तमान में पात्र विवाहित महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। अब अविवाहित महिलाओं को शामिल करने की तैयारी के बाद योजना का दायरा और बढ़ जाएगा। हालांकि, अविवाहित महिलाओं को लाभ देने के लिए अंतिम पात्रता शर्तें और प्रक्रिया सरकार की ओर से स्पष्ट किया जाना बाकी है।
रायपुर: आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि पीएम जनमन (PM-JANMAN) योजना के तहत देश के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बहुउद्देशीय केंद्रों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिनका उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सामुदायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। । धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का उद्देश्य आदिवासी बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक-आर्थिक विकास को बेहतर बनाना है।
आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने आज बिलासपुर प्रवास के दौरान विभागीय योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की। उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मंथन सभाकक्ष में बिलासपुर संभाग के सहायक आयुक्त आदिवासी विकास एवं परियोजना प्रशासकों की उच्चस्तरीय बैठक ली। इस बैठक में कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल सहित संभाग के संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
*समय-सीमा में छात्रवृत्ति और जनसुनवाई के प्रभावी आयोजन पर जोर*
बैठक के दौरान प्रमुख सचिव बोरा ने विद्यार्थियों के हित में छात्रवृत्ति की स्वीकृति निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने जल्द से जल्द संस्था प्रमुखों की बैठक आयोजित करने को कहा। इसके साथ ही, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 13 से 15 अगस्त तक गाँवों के आदि सेवा केंद्रों में आयोजित होने वाली जनसुनवाई की तैयारियों की समीक्षा की गई। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और मैदानी अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर जनसुनवाई को पूरी तरह प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
*विभागीय योजनाओं की समीक्षा*
आवासीय विद्यालय व कोचिंग संस्थान प्रयास व एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्रवेश व संचालन की स्थिति तथा विद्यार्थियों की कोचिंग हेतु संस्था चयन प्रक्रिया की समीक्षा की गई। पीएम जनमन योजना के तहत निर्मित बहुउद्देशीय केंद्रों के संचालन, धरती आबा अभियान के स्वीकृत कार्यों तथा प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत जारी निर्माण कार्यों की प्रगति देखी गई। पठन सामग्री, गणवेश (यूनिफॉर्म) के समय पर वितरण, विद्यार्थी पोषण उपवन तथा पीएचडीटीजी (PHDTG) सर्वे कार्यों की प्रगति की जानकारी ली गई। सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त आवेदनों के त्वरित निराकरण और विलेज वेरिफिकेशन सर्वे पर विशेष बल दिया गया।
*योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना ज़रूरी*
बैठक में प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि विभागीय योजनाओं का उद्देश्य केवल प्रशासनिक स्वीकृति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक और प्रत्यक्ष लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने और मैदानी स्तर पर आने वाली समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान करने के निर्देश दिए।
रायपुर। राज्य शासन ने नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के पारिवारिक सदस्यों के प्रतिनिधियों के रूप में नाम-निर्देशन पर रोक लगा दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ नगरपालिक (लोकसभा सदस्य या राज्य विधानसभा के सदस्य या राज्य सभा के सदस्य द्वारा प्रतिनिधि के रूप में नाम निर्देशन हेतु अर्हताएँ) नियम, 2022 में संशोधन कर अधिसूचना प्रकाशित की है।
छत्तीसगढ़ राजपत्र में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रकाशित छत्तीसगढ़ नगरपालिक नियम, 2022 में नवीन संशोधन के अनुसार किसी भी नगरीय निकाय में, निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा किसी अन्य निकट पारिवारिक, सदस्य या नातेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि अथवा समन्वयक व्यक्ति के रूप में नाम-निर्दिष्ट अथवा नियुक्त नहीं किया जाएगा। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह प्रतिबंध सभी नगरीय निकायों में लागू हो गया है।
रायपुर-- राज्य शासन ने नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के पारिवारिक सदस्यों के प्रतिनिधियों के रूप में नाम-निर्देशन पर रोक लगा दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ नगरपालिक (लोकसभा सदस्य या राज्य विधानसभा के सदस्य या राज्य सभा के सदस्य द्वारा प्रतिनिधि के रूप में नाम निर्देशन हेतु अर्हताएँ) नियम, 2022 में संशोधन कर अधिसूचना प्रकाशित की है।
छत्तीसगढ़ राजपत्र में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रकाशित छत्तीसगढ़ नगरपालिक नियम, 2022 में नवीन संशोधन के अनुसार किसी भी नगरीय निकाय में, निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा किसी अन्य निकट पारिवारिक, सदस्य या नातेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि अथवा समन्वयक व्यक्ति के रूप में नाम-निर्दिष्ट अथवा नियुक्त नहीं किया जाएगा। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह प्रतिबंध सभी नगरीय निकायों में लागू हो गया है।
रायपुर । राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने सारंगढ़ प्रवास के दौरान जिले को स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और पशु चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने 1.24 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित विभिन्न विभागीय भवनों का लोकार्पण किया। इन कार्यों से जिला मुख्यालय में बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
विभागीय भवनों का लोकार्पण
मंत्री टंकराम वर्मा ने 74 लाख 59 हजार रुपये की लागत से निर्मित पशु चिकित्सा विभाग के जिला कार्यालय भवन का लोकार्पण किया। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के 50 लाख रुपये की लागत से तैयार BPHU के अतिरिक्त कक्ष, क्चक्क॥ भवन और जिला अस्पताल के मेडिसीन वार्ड का भी उद्घाटन किया।
उन्होंने शासकीय लोचन प्रसाद पाण्डेय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जनभागीदारी मद से निर्मित अतिरिक्त कक्ष का भी लोकार्पण किया। इस दौरान मंत्री ने ऑफिसर्स क्लब का उद्घाटन कर खेल गतिविधियों से भी जुड़ाव किया।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर सीड बॉल अभियान
मंत्री वर्मा ने पौधरोपण अभियान में भी हिस्सा लिया। परिसर में पौधे रोपने के साथ ही ग्राम छुहीपाली में आयोजित वृहद पर्यावरण कार्यक्रम में शामिल हुए और सीड बॉल के माध्यम से पौधरोपण किया। इसके बाद उन्होंने जिला कार्यालय के संयुक्त भवन यानी कंपोजिट बिल्डिंग का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
स्वामित्व योजना के हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख
मंत्री ने मंडी प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में स्वामित्व योजना के तहत किसान हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख वितरित किए। उन्होंने कहा कि अधिकार अभिलेख मिलने से हितग्राहियों को उनकी संपत्ति पर स्वामित्व का दस्तावेजी आधार मिलेगा और वे उपलब्ध वित्तीय एवं अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
कार्यक्रम में विधायक उत्तरी जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय, उपाध्यक्ष अजय नायक, जिला पंचायत सदस्य, पूर्व विधायक केराबाई मनहर सहित वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
रायपुर । हरेली तिहार के अवसर पर छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हित में किए गए कार्यों को रेखांकित करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खेती-किसानी को नया संबल मिला है। सरकार के अनुसार गांव, गरीब और किसान उसकी प्राथमिकता में हैं और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कई नीतिगत फैसले लिए गए हैं।
सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, बीते खरीफ विपणन वर्ष में किसानों से समर्थन मूल्य पर 141.05 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। वहीं पंजीकृत किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की गई।
सरकार का दावा है कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए रमन सरकार के पिछले दो वर्षों के बकाया धान बोनस की राशि 3716.38 करोड़ रुपये भी किसानों के खातों में अंतरित की गई है। सरकार का कहना है कि किसान खुशहाल होंगे तो प्रदेश के व्यापार और उद्योग को भी गति मिलेगी।
हरेली: खेती, परंपरा और आस्था का पर्व
छत्तीसगढ़ में हरेली को पहला प्रमुख तिहार माना जाता है। सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व हरियाली, खेती-किसानी, पशुधन और प्रकृति से जुड़ा हुआ है। बारिश के मौसम में जब खेत-खलिहान और आसपास का वातावरण हरियाली से भर जाता है, तब किसान अच्छी फसल और समृद्धि की कामना के साथ हरेली मनाते हैं।
हरेली के दिन किसान अपने कृषि उपकरणों की साफ-सफाई कर पूजा करते हैं। हल, नांगर, कुदाली, फावड़ा, गैती, टंगिया सहित खेती में उपयोग होने वाले अन्य औजारों को धोकर धूप-दीप से पूजा की जाती है। घरों में गुड़ का चीला और अन्य छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाए जाते हैं तथा कृषि औजारों को भोग लगाया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में गांव के गुड़ी अथवा ठाकुरदेव की पूजा भी की जाती है। इस दौरान नारियल अर्पित कर परिवार, खेती और पशुधन की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
पशुधन की सेहत के लिए पारंपरिक उपाय
हरेली पर्व में पशुधन की पूजा और उनके स्वास्थ्य की रक्षा की भी परंपरा है। किसान गाय, बैल और बछड़ों को नहलाकर उनकी पूजा करते हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में आटे की औषधियुक्त लोंदी बनाकर पशुओं को खिलाने की परंपरा है।
पारंपरिक रूप से यादव समाज के लोग वन क्षेत्रों से कंद-मूल और जड़ी-बूटियां लाकर पशुओं के लिए औषधि उपलब्ध कराते रहे हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास इन वनौषधियों को तैयार कर किसानों को देने की परंपरा भी बताई जाती है।
गेड़ी के बिना अधूरा हरेली का उत्सव
हरेली तिहार और गेड़ी का संबंध बेहद खास है। ग्रामीण इलाकों में बच्चे और युवा इस दिन गेड़ी चढ़कर उत्सव का आनंद लेते हैं। पारंपरिक रूप से गेड़ी बांस से तैयार की जाती है। बांस में निश्चित दूरी पर कील लगाकर पैर रखने के लिए पउआ तैयार किए जाते हैं।
गेड़ी पर चलते समय निकलने वाली आवाज और गांव की गलियों में बच्चों-युवाओं का उत्साह हरेली के माहौल को खास बना देता है। हालांकि गांवों में सड़कों के कांक्रीटीकरण के बाद बारिश में कीचड़ की समस्या कम हुई है, लेकिन गेड़ी की परंपरा आज भी हरेली का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है।
पारंपरिक खेल और छत्तीसगढ़ी व्यंजन
हरेली के दिन घरों में गुलगुल भजिया, गुड़हा चीला सहित कई पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। कृषि उपकरणों और गेड़ी की पूजा के बाद बच्चे और युवा गांव के खेल मैदानों में कबड्डी समेत विभिन्न खेलों में हिस्सा लेते हैं। महिलाएं और बहू-बेटियां नए वस्त्र पहनकर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो और फुगड़ी जैसे पारंपरिक खेलों का आनंद लेती हैं। कई गांवों में नारियल फेंकने जैसी पारंपरिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं।
सामाजिक समरसता का संदेश
हरेली केवल कृषि और धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस दिन समाज के विभिन्न वर्ग मिल-जुलकर पूजा और पारंपरिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं।
हरेली के माध्यम से किसान प्रकृति, कृषि उपकरणों और पशुधन के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। खेती-किसानी से जुड़ी परंपराओं और लोक संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने में भी इस पर्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
महासमुंद। जिले में लगातार हो रही बारिश के चलते नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। कई नदियां उफान पर हैं। इसी बीच पिथौरा थाना क्षेत्र में बाघ नदी के तेज बहाव में एक 17 वर्षीय किशोर डूबकर लापता हो गया। घटना के बाद से एनडीआरएफ की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है, लेकिन 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद किशोर का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम कौडिय़ा निवासी 17 वर्षीय हरिशंकर ठाकुर बाघ नदी के पास गया था। इसी दौरान वह तेज बहाव की चपेट में आ गया और देखते ही देखते पानी में बह गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन नदी के तेज बहाव के कारण किशोर का पता नहीं चल सका
घटना की सूचना मिलते ही पिथौरा पुलिस मौके पर पहुंची और प्रशासन को जानकारी दी गई। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। टीम ने नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू किया और लगातार अलग-अलग हिस्सों में किशोर की तलाश की जा रही है।
तेज बहाव के कारण रेस्क्यू में मुश्किल
नदी का जलस्तर बढ़ा होने और तेज बहाव के कारण रेस्क्यू टीम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एनडीआरएफ के जवान नदी के किनारों, गहरे हिस्सों और बहाव वाले क्षेत्रों में लगातार खोजबीन कर रहे हैं। 24 घंटे से अधिक समय से अभियान जारी रहने के बावजूद हरिशंकर का कोई पता नहीं चल पाया है। इससे परिजनों की चिंता बढ़ गई है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव में भी चिंता और शोक का माहौल बना हुआ है।
पुलिस और प्रशासन की टीम एनडीआरएफ के साथ समन्वय बनाकर तलाश अभियान की निगरानी कर रही है। जलस्तर अधिक होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को सावधानी के साथ चलाया जा रहा है।
प्रशासन ने लोगों से की सावधानी बरतने की अपील
लगातार बारिश के बीच प्रशासन ने लोगों से उफनती नदियों और नालों के पास नहीं जाने की अपील की है। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को तेज बहाव वाले पानी से दूर रहने की सलाह दी गई है। बारिश के दौरान नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
कांकेर। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव मंगलवार, 11 अगस्त को कांकेर जिले के प्रवास पर रहेंगे। वे सुबह तिरंगा यात्रा में शामिल होंगे और शासकीय नरहरदेव उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय परिसर स्थित मिनी स्टेडियम का लोकार्पण करेंगे।
इसके बाद उपमुख्यमंत्री विश्वनाथ गढ़ का दौरा करेंगे। दोपहर 12 बजे कांकेर से नया रायपुर के लिए रवाना होंगे।
जनसुनवाई में कई मामलों का हुआ निराकरण, भरण-पोषण और महिला सुरक्षा को लेकर दिए महत्वपूर्ण निर्देश
रायपुर :- छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने आज रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में महिलाओं से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई की। जनसुनवाई के दौरान महिला उत्पीड़न, पारिवारिक विवाद, भरण-पोषण, घरेलू हिंसा तथा कार्यस्थल पर शोषण से संबंधित कुल 32 प्रकरणों पर विचार किया गया, जिनमें कई मामलों में दोनों पक्षों की उपस्थिति दर्ज हुई। इस अवसर पर आयोग की सदस्यगण सरला कोसरिया , ओजस्वी मंडावी एवं सुश्री दीपिका सोरी भी उपस्थित रहीं।
डॉ. ममता साहू ने सुनवाई के दौरान महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए त्वरित निराकरण पर जोर दिया। आयोग की समझाइश से एक प्रकरण में 1500 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण राशि देने पर सहमति बनी, जिससे संबंधित महिला को राहत मिली।
कार्यस्थल पर महिलाओं के आर्थिक शोषण से जुड़े मामलों को भी आयोग ने गंभीरता से लिया। इस संबंध में डॉ. साहू ने संबंधित महिलाओं को एफआईआर दर्ज कराने तथा कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रमिक और सेवा क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
जनसुनवाई के दौरान पारिवारिक विवाद, भरण-पोषण, घरेलू हिंसा और महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में आयोग ने आवश्यक कानूनी परामर्श प्रदान करते हुए संबंधित पक्षों को विधिक प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने कहा कि आयोग केवल शिकायतों की सुनवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित महिलाओं को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा, न्याय और आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
राजनांदगांव। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और डिप्टी सीएम अरुण साव ने राजनांदगांव के दिग्विजय स्टेडियम में जिला बैडमिंटन एसोसिएशन द्वारा आयोजित 25वीं छत्तीसगढ़ स्टेट जूनियर रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट का शुभारंभ किया। प्रतियोगिता में अंडर-19 बालक एवं बालिका वर्ग के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता 9 अगस्त से 13 अगस्त 2026 तक आयोजित की जा रही है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रतियोगिता में शामिल सभी खिलाडिय़ों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, राजनांदगांव में प्रदेश स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता का आयोजन होना गर्व की बात है। उन्होंने खिलाडिय़ों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि, वे उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाएं। उन्होंने कहा कि, राजनांदगांव में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, जूडो, कराटे और कुश्ती सहित विभिन्न खेलों में यहां के खिलाड़ी लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने कहा कि, राजनांदगांव को खेल नगरी के रूप में और अधिक विकसित करने के लिए खेल अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। खिलाडिय़ों की आवश्यकता के अनुरूप मैदान, कोर्ट, प्रशिक्षण सुविधाएं और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, सरकार द्वारा खेलों को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर राशि का प्रावधान किया गया है। खिलाडिय़ों के प्रशिक्षण, कोचिंग और प्रशिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण के साथ-साथ खेल अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, खेल प्रतिभाओं को आगे बढऩे के लिए बेहतर अवसर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि, राजनांदगांव के बच्चे भी खेलों के प्रति उत्साह के साथ मैदानों में पहुंच रहे हैं। सुबह बड़ी संख्या में बच्चे हॉकी, फुटबॉल और क्रिकेट सहित विभिन्न खेलों का अभ्यास करते दिखाई देते हैं। यह राजनांदगांव की खेल संस्कृति और यहां की प्रतिभाओं की मजबूत नींव को दर्शाता है। उन्होंने खिलाडिय़ों से कहा कि, वे अनुशासन, निरंतर अभ्यास और मेहनत के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि, राजनांदगांव के खिलाड़ी प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।
डिप्टी सीएम साव ने सभी खिलाडिय़ों और आयोजकों का अभिनंदन करते हुए कहा कि, राजनांदगांव संस्कारधानी के साथ-साथ अब खेलों की राजधानी के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। ज्ञानेश्वरी यादव जैसे प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों ने विश्व स्तर पर राजनांदगांव का नाम रोशन किया है और जिले में ऐसी अनेक खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं। उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल सभी खिलाडिय़ों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, पीएम मोदी के संदेश जो खेलेगा, वही खिलेगा को आत्मसात करते हुए खिलाड़ी पूरी लगन और मेहनत के साथ खेलें, आगे बढ़ें और देश का नाम रोशन करें।
डिप्टी सीएम साव ने कहा कि, प्रदेश में सरकार बनने के बाद खेल और खिलाडिय़ों की तरक्की एवं बेहतरी के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। उत्कृष्ट खिलाडिय़ों की लंबित घोषणा को पूरा करते हुए इस वर्ष 156 खिलाडिय़ों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किया गया है, जो सरकार की खेलों और खिलाडिय़ों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि, प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास के साथ विभिन्न खेलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार बड़े आयोजन किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है, जिसका उपयोग खेल अधोसंरचना, प्रशिक्षण और खिलाडिय़ों की सुविधाओं के विकास के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, बैडमिंटन एसोसिएशन द्वारा अधोसंरचना के संबंध में प्रस्ताव दिए जाने पर आवश्यकतानुसार बजट का प्रावधान करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि, यह प्रतियोगिता सफल होगी और यहां से प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकलकर प्रदेश एवं देश का नाम रोशन करेंगे।
सांसद संतोष पाण्डेय ने प्रतियोगिता में शामिल खिलाडिय़ों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, राजनांदगांव में वॉलीबॉल, फुटबॉल, हॉकी और बैडमिंटन सहित विभिन्न खेलों में प्रतिभाएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि, राजनांदगांव के खिलाडिय़ों ने अपनी प्रतिभा के बल पर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है, जो जिले के लिए गर्व की बात है। उन्होंने उपस्थित खिलाडिय़ों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि, वे मेहनत और लगन के साथ खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ें। सांसद पाण्डेय ने दिग्विजय स्टेडियम परिसर में उपलब्ध भवन एवं अन्य संसाधनों का खिलाडिय़ों के हित में बेहतर उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि, बैडमिंटन सहित अन्य खेलों के प्रशिक्षण एवं अभ्यास के लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जानी चाहिए, ताकि राजनांदगांव के खिलाडिय़ों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष विक्रम सिंह सिसोदिया, राजगामी संपदा न्यास के अध्यक्ष पूर्णिमा साहू, कोमल सिंह राजपूत, रमेश पटेल,राजेश श्यामकर,योगेश बागड़ी और सीईओ जिला पंचायत दुर्गा प्रसाद अधिकारी सहित में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, जिला बैडमिंटन एसोसिएशन के पदाधिकारी, कोच, प्रशिक्षक एवं खिलाड़ी उपस्थित थे।
राजनांदगांव। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और डिप्टी सीएम अरुण साव ने राजनांदगांव शहर में 43 करोड़ 61 लाख 26 हजार रुपए लागत के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें 15 करोड़ 92 लाख रूपए की लागत से प्रदेश के सबसे बड़े 2000 सीटर ऑडिटोरियम का निर्माण प्रमुख रूप से शामिल है। इसके साथ ही शहर के विभिन्न वार्डों में सड़क, नाली, विद्युतीकरण, पेयजल, मुक्तिधाम उन्नयन एवं सामुदायिक भवन सहित विभिन्न अधोसंरचना विकास कार्य किए जाएंगे। कार्यक्रम में 15वें वित्त आयोग 12 करोड़ 9 लाख 44 हजार रुपए की लागत से विभिन्न वार्डों में सड़क, नाली एवं विद्युतीकरण के कार्य किए जाएंगे। अधोसंरचना मद से 11 करोड़ 57 लाख रूपए की लागत से सड़क, नाली, मुक्तिधाम उन्नयन एवं सामुदायिक भवन निर्माण कार्य होंगे। मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत 1 करोड़ रुपए की लागत से 4 वार्डों में सड़क, नाली एवं सामुदायिक भवन निर्माण कार्य तथा 15वें वित्त आयोग से 3 करोड़ 2 लाख 82 हजार रुपए की लागत से विभिन्न वार्डों में पाइपलाइन विस्तार के कार्य किए जाएंगे। कार्यक्रम में 1000 पौधों का वितरण भी किया गया।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, राजनांदगांव में बनने वाला 2000 सीटर ऑडिटोरियम शहर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। ऑडिटोरियम में बड़े आयोजनों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही पार्किंग, कॉरिडोर तथा लगभग एक हजार लोगों के एक साथ बैठकर भोजन करने की व्यवस्था भी होगी। यह ऑडिटोरियम राजनांदगांव सहित आसपास के नगरीय क्षेत्रों के लिए भी बड़े आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव शहर के विभिन्न वार्डों में सड़क, नाली, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग, प्रकाश व्यवस्था और पाइपलाइन विस्तार सहित 43 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्य किए जा रहे हैं। सीएम साय के नेतृत्व में राजनांदगांव के सभी क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिली है। जनप्रतिनिधियों द्वारा रखी जा रही मांगों और प्रस्तावों को प्राथमिकता के साथ स्वीकृति प्रदान की जा रही है।
डिप्टी सीएम साव साव ने अपने संबोधन में कहा कि, आज राजनांदगांव शहर के लिए ऐतिहासिक दिन है। शहर को 43 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिली है। सीएम साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पिछले दो वर्षों में राजनांदगांव नगर निगम को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगभग 267 करोड़ रूपए की राशि विकास कार्यों के लिए प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि, प्रदेश के शहरों को स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने राजनांदगांववासियों से शहर को स्वच्छता के क्षेत्र में देश में अग्रणी बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि, यदि नागरिक और नगर निगम मिलकर प्रयास करें तो राजनांदगांव स्वच्छता के क्षेत्र में देश में पहला स्थान प्राप्त कर सकता है।
डिप्टी सीएम साव ने राजनांदगांव शहर के लिए कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की बात कही। उन्होंने बताया कि, गांधी चौक, पोस्ट ऑफिस चौक, नंदई चौक सहित अन्य प्रमुख चौकों के सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 3 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। उन्होंने रानी सागर एवं बूढ़ा सागर तालाब के पुनर्विकास के लिए 14 करोड़ रूपए की योजना तैयार किए जाने की जानकारी दी। जीई रोड से लखोली कबाड़ी दुकान तक सड़क चौड़ीकरण के लिए 6 करोड़ 85 लाख रूपए, आरके नगर चौक से डोंगरगांव रोड तक सड़क निर्माण के लिए 6 करोड़ 90 लाख रूपए तथा बायपास कन्हारपुरी से तिरंगा चौक तक सड़क चौड़ीकरण के लिए 5 करोड़ 50 लाख रूपए की स्वीकृति शीघ्र प्रदान करने की बात कही। इसी प्रकार मोहारा जल संयंत्र के री-मरम्मत कार्य के लिए 4 करोड़ रूपए तथा ढाबा, गौरीनगर और गोकुलनगर में ओवरहेड टैंक निर्माण के लिए 12 करोड़ 61 लाख रूपए की स्वीकृति शीघ्र प्रदान किए जाने की जानकारी दी।
डिप्टी सीएम साव ने कहा कि, विकास के साथ स्वच्छता भी शहर की पहचान का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि, घर और आसपास स्वच्छता बनाए रखें, कचरा नालियों और सड़कों पर न डालें तथा नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि, सामूहिक प्रयासों से राजनांदगांव को स्वच्छता के क्षेत्र में देश में पहला स्थान दिलाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटियों को पूरा करने के साथ ही छत्तीसगढ़ के शहरों के समग्र विकास के लिए योजना बनाकर निरंतर कार्य किया जा रहा है।
सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि, शासन द्वारा राजनांदगांव शहर के विकास कार्यों के लिए 43 करोड़ 61 लाख 26 हजार रूपए की सौगात दी गई है। नगर निगम राजनांदगांव अंतर्गत नालंदा परिसर सहित अन्य विकास कार्य किए जा रहे है। केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा जिले के विकास के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि, केन्द्र सरकार द्वारा परमालकसा से खरसिया तक नई रेल लाईन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही चौथी रेल लाईन भी चालू हो गया है। राजनांदगांव एवं डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन को मॉडल एवं अमृत रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
गौरीनगर एवं स्टेशन पारा के अंडर ब्रिज का निर्माण कार्य दिसम्बर तक पूर्ण हो जाएगा। इसके साथ ही मोतीपुर अंडर ब्रिज का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि डोंगरगढ़ से कटघोरा तक नई रेल लाईन की स्वीकृति दी गई है, जिसका जंक्शन डोंगरगढ़ होगा। सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि, राजनांदगांव प्रतिभा की भूमि है, श्रम और परिश्रम की भूमि है। जिले की प्रतिभावान खिलाड़ी ज्ञानेश्वरी यादव ने राष्ट्रमंडल खेल में देश के लिए पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया है।
महापौर मधुसूदन यादव ने कहा कि, राजनांदगांव शहर के विकास के लिए 43 करोड़ 61 लाख 26 हजार रूपए की लागत से विभिन्न कार्यों का भूमिपूजन किया गया है। उन्होंने बताया कि, राजनांदगांव शहर में 800 सीटर का ऑडिटोरियम उपलब्ध है। इसके साथ ही 15 करोड़ 92 लाख रूपए की लागत से 2000 सीटर का ऑडिटोरियम के लिए भूमिपूजन किया गया है। इस ऑडिटोरियम के बनने से भविष्य में बड़े आयोजन के लिए व्यवस्थित स्थल मिलेगा। राजनांदगांव शहर के सभी 51 वार्डों के संतुलित विकास को दृष्टिगत रखते हुए 15वें वित्त आयोग से 12 करोड़ रूपए एवं 3 करोड़ रूपए, मुख्यमंत्री की घोषणा अंतर्गत वाटर सप्लाई के लिए 1 करोड़ रूपए, अधोसंरचना के लिए 11 करोड़ 57 लाख रूपए के विकास कार्यों के लिए भूमिपूजन किया गया है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, अध्यक्ष जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक सचिन बघेल, राजगामी संपदा न्यास के अध्यक्ष पूर्णिमा साहू, खूबचंद पारख, कोमल सिंह राजपूत, संतोष अग्रवाल, रमेश पटेल, राजेश श्यामकर, राजेन्द्र गोलछा, सौरभ कोठारी, नगर निगम सभापति पारस वर्मा, पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा, सीईओ जिला पंचायत दुर्गा प्रसाद अधिकारी सहित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पार्षदगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं नागरिकगण उपस्थित थे।
रायपुर :- महंत लक्ष्मी नारायण दास महाविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के सहयोग से आज प्रदेश के अखबार साथी सन्देश के 14 वें स्थापना दिवस पर परिचर्चा का आयोजन किया गया. अभिव्यक्ति की आजादी एवं जेन-जी का भविष्य” विषय पर आयोजित इस परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज, साहित्यकार डॉ महेंद्र कुमार ठाकुर, स्वराज दास, डॉ माणिक विश्वकर्मा नवरंग, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला, छग राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष केदार गुप्ता, छग हाऊसिंग बोर्ड के चेयरमैन अनुराग सिंहदेव, बीरगांव नगर पालिका के महापौर नंदलाल देवांगन, छग राज्य आन्दोलन के प्रणेता डॉ उदयभान सिंह चौहान, राज्य दिव्यांगजन कल्याण परिषद् के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया, कांग्रेस पदाधिकारी डॉ राकेश गुप्ता, महंत कॉलेज के प्राचार्य डॉ देवाशीष मुखर्जी, एवं सेंट्रल जीएसटी के अधीक्षक एम राजीव सहित विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए. सभी वक्ताओं ने इस बात को रखांकित किया की अभिव्यक्ति की आजादी भारत के संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को मिली हुई है. लेकिन इसके साथ कुछ कर्तव्य भी शामिल हैं, जिनके अनुपालन के बिना यह आजादी अधूरी मानी जाएगी. जेन जी के हाल ही में हुए आन्दोलन पर वक्ताओं का विचार था कि आन्दोलन का विषय निश्चित रूप से आवश्यक और प्रासंगिक था, लेकिन जिस भाषा में विरोध व्यक्त किया गया, उसे मर्यादित रखने की आवश्यकता है. विरोध का अर्थ अशालीन होना कतई नहीं हो सकता.
इस कार्यक्रम में महंत लक्ष्मी नारायण दास महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों का सम्मान किया गया. साथ ही मीडिया के क्षेत्र में लम्बे जुड़े वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया शिक्षक डॉ रामप्रसाद दुबे, डॉ विभाष कुमार झा को पीएच डी उपाधि प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया. साथ ही पत्रकार शगुफ्ता शिरीन, एंकर राहुल सिन्हा, प्रिंटिंग विशेषग्य अश्विनी मिश्र, पत्रकार इमरान खान को भी सम्मानित किया गया. इस अवसर पर साथी सदेश अखबार के यूट्यूब चैनल और ब्रोशर का विमोचन भी किया गया. कार्यक्रम के अंत में साथी सन्देश के प्रधान संपादक मलय बनर्जी ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि महंत कॉलेज में वे एक विद्यार्थी के रूप में आए थे और आज इसी संस्थान में उनके अखबार का कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, यह निश्चित ही गर्व का विषय है. महंत कॉलेज के प्राध्यापक प्रो प्रीतम दास ने महाविद्यालय की और से सभी आमंत्रित वक्ताओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया.
00 सेवानिवृत्ति के दिन ही मिले सभी स्वत्व देयक और सम्मानजनक विदाई - राजवाड़े
रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभागीय प्रशासन में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए सेवानिवृत्ति प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण के सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि शासन की लंबी सेवा देने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी सेवानिवृत्ति के समय किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कठिनाई का सामना न करें, यह विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मंत्री राजवाड़े ने प्रमुख सचिव, संचालक समाज कल्याण तथा संचालक महिला एवं बाल विकास को निर्देशित किया है कि विभाग से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रकरणों की अग्रिम तैयारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति आदेश, पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और अन्य सभी देय स्वत्व देयकों का निराकरण सेवानिवृत्ति तिथि से पूर्व पूर्ण कर लिया जाए, ताकि संबंधित कर्मचारी को उसके सेवानिवृत्ति दिवस पर ही सभी आदेश और भुगतान उपलब्ध हो सकें। राजवाड़े ने कहा कि प्राय: यह देखा गया है कि कई बार न मांग न जांच प्रमाण पत्र, सेवा सत्यापन तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया में विलंब होने से कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है। कुछ मामलों में प्रशासनिक अनुमोदन हेतु प्रकरण देर से प्रस्तुत होने के कारण भुगतान और अन्य लाभ प्रभावित होते हैं। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी स्तरों पर समयबद्ध कार्यसंस्कृति अपनाने के निर्देश दिए।
मंत्री ने शासन स्तर पर, विभागाध्यक्ष स्तर और अधीनस्थ कार्यालयों में सेवानिवृत्ति संबंधी कार्यों के लिए चेकलिस्ट आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली लागू करने को कहा है। प्रत्येक कार्यालय में आगामी सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवकों की सूची तैयार कर उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि कोई भी प्रकरण लंबित न रहे। श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सेवानिवृत्ति केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कर्मचारी के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसलिए विभागीय अधिकारियों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी कर्मचारियों को सम्मानजनक विदाई के साथ उनके सभी वैधानिक स्वत्व अधिकार समय पर प्राप्त हों।
00 हजारों कदमों के साथ गूंजा राष्ट्र सर्वोपरि का संकल्प
00 तिरंगे के रंग में रंगा रायपुर, राष्ट्रध्वज के तले एकजुट हुआ जनसैलाब
00 छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों की शौर्यगाथा का किया स्मरण, शहीद वीर नारायण सिंह और गुण्डाधुर को किया नमन
रायपुर। हाथों में लहराता तिरंगा, भारत माता के जयघोष, देशभक्ति के गीत और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत हजारों नागरिकों का उत्साह - राजधानी रायपुर आज पूरी तरह तिरंगे के रंग में रंगी नजर आई। बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक निकली भव्य तिरंगा यात्रा में हजारों नागरिक राष्ट्रध्वज के तले एकजुट हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं हाथ में तिरंगा थामकर जनसैलाब के साथ कदम से कदम मिलाया। यात्रा में युवाओं, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। स्कूली विद्यार्थियों द्वारा हाथों में थामा गया लगभग एक किलोमीटर लंबा तिरंगा पूरे आयोजन का विशेष आकर्षण रहा।तिरंगा यात्रा के शुभारंभ से लेकर समापन तक राजधानी में राष्ट्रभक्ति का अद्भुत वातावरण दिखाई दिया। हजारों हाथों में एक साथ लहराते राष्ट्रीय ध्वज और भारत माता के जयघोष ने पूरे यात्रा मार्ग को राष्ट्रप्रेम की भावना से भर दिया। मुख्यमंत्री साय भी नागरिकों के बीच तिरंगा लेकर आगे बढ़े। इस दौरान नागरिकों में मुख्यमंत्री के साथ चलने और राष्ट्रध्वज के सम्मान में आयोजित इस यात्रा का हिस्सा बनने को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि तिरंगा हमारी आन, बान और शान है। यह केवल हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि भारत की एकता, अखंडता, स्वाभिमान और असंख्य बलिदानों का प्रतीक है। तिरंगे में देश के 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में बांधने की अद्भुत शक्ति है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और क्षेत्रों की विविधता के बावजूद तिरंगा हम सभी को भारतीय होने के एक साझा गौरव से जोड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तिरंगा लहराता है तो प्रत्येक भारतीय के मन में स्वाभाविक रूप से राष्ट्र के प्रति गौरव और सम्मान का भाव जागृत होता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष, स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और एक सशक्त राष्ट्र के रूप में भारत की यात्रा का साक्षी है। तिरंगा हमें अपने अधिकारों के साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का भी स्मरण कराता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर हर घर तिरंगा अभियान आज एक व्यापक जनअभियान का स्वरूप ले चुका है। इस अभियान ने तिरंगे को घर-घर तक पहुंचाने के साथ राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत किया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में पूरे सम्मान और गौरव के साथ तिरंगा फहराने तथा तिरंगा यात्राओं से जुड़कर राष्ट्रीय एकता के इस उत्सव को और भव्य बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत में गर्व और सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं, वह स्वतंत्रता हमें सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई है। इसके पीछे लाखों देशवासियों का संघर्ष, त्याग, तपस्या और बलिदान जुड़ा हुआ है। देश के असंख्य वीर सपूतों ने मातृभूमि को पराधीनता की बेडिय़ों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में देश के हर क्षेत्र और समाज के लोगों ने अपना योगदान दिया। किसी ने अपना जीवन समर्पित किया, किसी ने अपना घर-परिवार छोड़ा और अनेक वीरों ने मातृभूमि के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी। इन बलिदानों के कारण ही आज हम स्वतंत्रता और लोकतंत्र के गौरव का अनुभव कर पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की नई पीढ़ी स्वतंत्र भारत में जन्मी और आगे बढ़ रही है। इसलिए उसे यह जानना आवश्यक है कि आजादी कितनी अनमोल है और इसके लिए हमारे पूर्वजों ने कितना बड़ा संघर्ष किया। स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवगाथाओं से परिचित होकर ही नई पीढ़ी स्वतंत्रता के वास्तविक मूल्य को समझ सकेगी। उन्होंने कहा कि तिरंगा हमें उन सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों के बलिदान का स्मरण कराता है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। स्वतंत्रता की इस गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इससे युवाओं के भीतर राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, समर्पण, सेवा और राष्ट्र प्रथम का भाव और अधिक मजबूत होगा।
छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों ने स्वतंत्रता संग्राम में लिखी शौर्यगाथा
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों का स्मरण करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती भी वीरों, जननायकों और बलिदानियों की धरती रही है। देश की स्वतंत्रता के लिए हुए संघर्ष में छत्तीसगढ़ के अनेक वीर सपूतों ने अदम्य साहस और स्वाभिमान का परिचय दिया। मुख्यमंत्री ने शहीद वीर नारायण सिंह का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में गरीबों और जरूरतमंदों के हित में आवाज उठाई और अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया। उनका जीवन हमें बताता है कि राष्ट्रप्रेम के साथ जनसेवा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस भी सच्ची देशभक्ति का स्वरूप है।
मुख्यमंत्री साय ने बस्तर के महान जननायक गुण्डाधुर की शौर्यगाथा को याद करते हुए कहा कि उन्होंने विदेशी शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज को संगठित कर संघर्ष का बिगुल फूंका। बस्तर की धरती ने सदैव अपने स्वाभिमान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। गुण्डाधुर का साहस और नेतृत्व आज भी छत्तीसगढ़वासियों के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, गुण्डाधुर सहित छत्तीसगढ़ के अनेक ज्ञात-अज्ञात सेनानियों का संघर्ष हमारे गौरवशाली इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। इन महानायकों की शौर्यगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उनके आदर्शों से युवाओं को परिचित कराना हमारा दायित्व है।
बदलते बस्तर में शांति और विकास के साथ लहराएगा तिरंगा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर आज हिंसा और भय के लंबे दौर को पीछे छोड़कर शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। डबल इंजन सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और क्षेत्रवासियों के सहयोग से नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई निर्णायक दौर में पहुंची है। उन्होंने कहा कि बस्तर के जिन क्षेत्रों में कभी नक्सली हिंसा के कारण भय का वातावरण था, वहां अब विकास की नई रोशनी पहुंच रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ लोगों का शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। बस्तर के लोगों की आकांक्षाओं और सपनों को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते बस्तर की पहचान अब हिंसा से नहीं, बल्कि शांति, विकास, विश्वास और नई संभावनाओं से बन रही है। इस वर्ष बस्तर में भी स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा तथा तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी। बस्तर के गांवों और दूरस्थ अंचलों में भी तिरंगा पूरे गौरव के साथ लहराएगा।
एक किलोमीटर लंबे तिरंगे के साथ आगे बढ़ी नई पीढ़ी
तिरंगा यात्रा में स्कूली छात्र-छात्राओं का उत्साह विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विद्यार्थियों ने लगभग एक किलोमीटर लंबे तिरंगे को अपने हाथों में थामकर अनुशासित पंक्तियों में यात्रा की। सड़क पर दूर तक फैला विशाल तिरंगा राजधानी में राष्ट्रीय एकता और गौरव की अनुपम छटा बिखेरता दिखाई दिया। यात्रा में युवाओं, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
पुष्पवर्षा से स्वागत, भारत माता के जयघोष से गूंजा रायपुर
तिरंगा यात्रा को लेकर राजधानी के नागरिकों में भी विशेष उत्साह दिखाई दिया। यात्रा के मार्ग में जगह-जगह लोगों ने इसका आत्मीय स्वागत किया। कई स्थानों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा में शामिल लोगों का अभिनंदन किया। लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों से तिरंगा लहराकर राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त करते नजर आए। यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इसके साथ नागरिकों का उत्साह भी बढ़ता गया। देशभक्ति के गीतों और भारत माता की जय, वंदे मातरम् तथा झंडा ऊंचा रहे हमारा के उद्घोष से पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो गया। युवाओं के हाथों में लहराते तिरंगे और स्कूली बच्चों के उत्साह ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।
बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक चारों ओर तिरंगा ही तिरंगा दिखाई दे रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरी राजधानी ने तीन रंगों की चादर ओढ़ ली हो। हजारों हाथों में एक साथ लहराते तिरंगे और राष्ट्रभक्ति से भरे जयघोष के बीच पूरा रायपुर एक स्वर में यही संदेश देता नजर आया - भारत एक है, भारत श्रेष्ठ है और राष्ट्र सर्वोपरि है।
तिरंगा स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक : उप मुख्यमंत्री साव
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि देश स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व मनाने जा रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र हर घर तिरंगा तथा तिरंगा यात्रा के माध्यम से राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया है। यह उन स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनायकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिनके त्याग और बलिदान के कारण देश को स्वतंत्रता मिली। उन्होंने कहा कि रायपुर के कोने-कोने से बड़ी संख्या में युवा तिरंगा यात्रा में शामिल होने पहुंचे हैं। यह उत्साह बताता है कि देश की नई पीढ़ी के हृदय में राष्ट्रप्रेम की भावना कितनी मजबूत है। जिस तिरंगे ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों को एकजुट किया था, आज उसी तिरंगे के सम्मान में पूरा रायपुर एक साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।
तिरंगा यात्रा राष्ट्रभक्ति की सामूहिक अभिव्यक्ति : उप मुख्यमंत्री शर्मा
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि तिरंगा हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, गौरव और एकता का प्रतीक है। तिरंगा यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि देश के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की सामूहिक अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर घर तिरंगा अभियान ने देशभर में राष्ट्रीय गौरव और राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा प्रदान की है। जब प्रत्येक घर पर तिरंगा लहराता है तो वह केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति प्रत्येक नागरिक के सम्मान, गौरव और संकल्प की अभिव्यक्ति बन जाता है। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराने और हर घर तिरंगा अभियान से उत्साहपूर्वक जुडऩे का आह्वान किया।
तिरंगा यात्रा में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, सांसद रूप कुमारी चौधरी, विधायक राजेश मूणत, सुनील सोनी, अनुज शर्मा, इंद्र कुमार साहू, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, महापौर मीनल चौबे, निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षगण सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पूर्व सैनिक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर। प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। गांव, गरीब और किसान सरकार की प्राथमिकताओं में हैं। देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है और छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है। धान के कटोरे के रूप में पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान किसानों के हित में कई नीतिगत फैसले लिए हैं, जिससे खेती-किसानी को नया संबल मिला है।
बीते खरीफ विपणन वर्ष में किसानों से समर्थन मूल्य पर 141.05 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। सरकार का दावा है कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में भी लगातार काम किया जा रहा है।
किसानों के हित में लिए गए फैसले
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की। सरकार के अनुसार, इससे किसानों की आय को मजबूती मिली और खेती-किसानी के प्रति उनका भरोसा बढ़ा।इसके अलावा किसानों के खाते में पूर्ववर्ती सरकार के पिछले दो वर्षों के बकाया धान बोनस की राशि 3716.38 करोड़ रुपये अंतरित की गई। सरकार का मानना है कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से प्रदेश के व्यापार और उद्योग को भी गति मिलेगी।मुख्यमंत्री का कहना है कि भारत गांवों में बसता है और जब किसान खुशहाल होंगे, तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
हरेली: छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और आस्था का पर्व
छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार का विशेष महत्व है। हरेली को प्रदेश का पहला प्रमुख त्यौहार माना जाता है। सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व हरियाली, कृषि, पशुधन और प्रकृति के प्रति आस्था से जुड़ा है।हरेली का अर्थ ही हरियाली से जुड़ा है। वर्षा ऋतु में जब धरती हरे रंग की चादर ओढ़ लेती है और चारों ओर हरियाली दिखाई देती है, तब यह पर्व किसानों के लिए विशेष उत्साह लेकर आता है। हरेली आते-आते खरीफ फसलों की बुआई और खेती-किसानी के शुरुआती कार्य लगभग पूरे हो चुके होते हैं।इस दिन किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं। हल, नांगर, कुदाली, फावड़ा, गैंती, टंगिया, बसुला, दतारी, सब्बल और अन्य कृषि औजारों को साफ कर पूजा के लिए सजाया जाता है।
पशुधन की पूजा और औषधि खिलाने की परंपरा
हरेली के दिन किसान अपने पशुधन को भी विशेष महत्व देते हैं। सुबह से ही किसान परिवार गाय, बैल और बछड़ों को नहलाते हैं। इसके बाद उनकी पूजा की जाती है।पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए इस दिन औषधि युक्त आटे की लोंदी खिलाने की परंपरा भी रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यादव समाज के लोग वनांचल से कंद-मूल और वनौषधियां लाकर किसानों को उपलब्ध कराते हैं।गांव के सहाड़ादेव या ठाकुरदेव के पास वन से लाई गई जड़ी-बूटियों को उबालकर किसानों को देने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है। इसके बदले किसान चावल, दाल आदि देकर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
घर-घर बनता है गुड़ का चीला
हरेली के दिन घरों में विशेष छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाए जाते हैं। माताएं गुड़ का चीला, गुलगुल भजिया सहित कई पारंपरिक पकवान तैयार करती हैं। कृषि उपकरणों की पूजा के बाद नारियल और गुड़ के चीले का भोग लगाया जाता है।गांवों में ठाकुरदेव की पूजा कर नारियल अर्पित किया जाता है। परिवार अपने आराध्य देवी-देवताओं की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
हरेली और गेड़ी का अटूट रिश्ता
हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते हैं।गेड़ी मुख्य रूप से बांस से बनाई जाती है। दो लंबे बांसों में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है। बांस के टुकड़ों से पैर रखने के लिए पउआ तैयार किया जाता है, जिसे मुख्य बांसों पर बांधा जाता है।गेड़ी पर चलते समय निकलने वाली खास आवाज वातावरण में उत्साह और उमंग भर देती है। पहले बारिश के मौसम में गांव की गलियों में कीचड़ हुआ करता था, ऐसे में गेड़ी पर चलकर गलियों का भ्रमण करने का अलग ही आनंद होता था। अब गांवों में सड़कों के पक्कीकरण और कांक्रीटीकरण के कारण कीचड़ की समस्या काफी कम हुई है, लेकिन गेड़ी की परंपरा आज भी कायम है।
लोक परंपराओं से जुड़ा है हरेली का उत्सव
हरेली के दिन गांवों में पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े राऊत, लोहार और बैगा जैसे पारंपरिक समुदायों की भी भूमिका रहती है। कई स्थानों पर घरों के दरवाजे पर नीम की डाली लगाई जाती है। वहीं अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए लोहार द्वारा चौखट में कील लगाने की परंपरा भी रही है।ग्रामीण क्षेत्रों में इन परंपराओं का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व आज भी बना हुआ है। ये परंपराएं छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की गहरी जड़ों को दर्शाती हैं।
खेल-कूद और उत्सव का माहौल
हरेली केवल पूजा और कृषि से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में उत्सव और मनोरंजन का अवसर भी लेकर आता है। शाम के समय बच्चे और युवा गांव के खेल मैदानों में कबड्डी सहित विभिन्न खेलों में हिस्सा लेते हैं।नारियल फेंकने जैसे पारंपरिक खेल भी खेले जाते हैं। बहू-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो और फुगड़ी जैसे पारंपरिक खेलों का आनंद लेती हैं।
सामाजिक समरसता का प्रतीक है हरेली
हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। यह केवल धार्मिक या कृषि पर्व नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ जोड़ने का माध्यम भी है।इस दिन गांव के लोग मिल-जुलकर पूजा और विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के साथ प्रकृति, कृषि और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
एक ओर सरकार की किसान हितैषी योजनाएं खेती-किसानी को आर्थिक मजबूती देने का प्रयास कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर हरेली जैसे लोकपर्व छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए हुए हैं। यही मेल प्रदेश के गांवों, किसानों और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की पहचान को और मजबूत करता है।
o जब दिल्ली के मंच पर जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा
o इंडिया हैबिटेट सेंटर में छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का रंग, पंडवानी ने बांधा समां
नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ की पंडवानी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच इंडिया हैबिटेट सेंटर में अपनी पूरी जीवंतता के साथ प्रस्तुत हुई। महान पंडवानी कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को समर्पित विशेष प्रस्तुति के साथ आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ। पंडवानी की इस प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा।
छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत पंडवानी
इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टाइन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में पंडवानी कलाकार प्रभा यादव ने पारंपरिक संगीतकारों के साथ प्रस्तुति दी। महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी में कथा, गायन, संवाद, लय और अभिनय का ऐसा संयोजन देखने को मिला, जिसने छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत और व्यापकता को सामने रखा।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधियों के साथ प्रदेश की कला और संस्कृति से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व भी उपस्थित रहे। वरिष्ठ पत्रकार एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्ण दास, धरसींवा विधायक एवं प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार अनुज शर्मा, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव तथा सांस्कृतिक कार्यकर्ता ने कार्यक्रम में भाग लिया। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश और अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा भी इस अवसर पर मौजूद रहीं।
तीजन बाई के योगदान को याद किया
इस प्रस्तुति का केंद्र तीजन बाई की कला यात्रा और पंडवानी को मिली राष्ट्रीय पहचान रही। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा से निकली पंडवानी को देश और दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाने में तीजन बाई का योगदान असाधारण रहा। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली से पंडवानी को नई पहचान दी और इसे भारतीय लोक प्रदर्शन कलाओं की प्रमुख विधाओं में स्थापित किया।
सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम पंडवानी
तीजन बाई को समर्पित प्रस्तुति के जरिए उनके कला जीवन और छत्तीसगढ़ की उस परंपरा को याद किया गया, जिसमें कथावाचन केवल मनोरंजन नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम रहा है। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश ने कहा कि, भारत की लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें पीढ़ियों से चली आ रही कहानियां, परंपराएं और मूल्य सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि, लोक कलाकारों और परंपराओं को राष्ट्रीय राजधानी में मंच देना इन विरासतों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास पंडवानी
धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि, पंडवानी छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण लोक कला है। तीजन बाई ने इसे गांवों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि, दिल्ली में इस परंपरा का सम्मान होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा ने कहा कि, भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास, सामूहिक स्मृति और जीवन-दर्शन सुरक्षित है। ऐसे आयोजन इन परंपराओं को नए दर्शकों और नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करते हैं।
देश की लोक परंपराओं का साझा मंच
आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन भारत के अलग-अलग हिस्सों की लोक संगीत, कथावाचन और प्रदर्शन परंपराओं को एक मंच पर लाने वाला वार्षिक आयोजन है। इसका उद्देश्य देश की विविध लोक कलाओं को सामने लाना और पारंपरिक कलाकारों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का अवसर देना है।
इस वर्ष सम्मेलन की शुरुआत ही छत्तीसगढ़ की पंडवानी और तीजन बाई की स्मृति को समर्पित प्रस्तुति से होना विशेष महत्व रखता है। राजधानी के प्रमुख सांस्कृतिक मंच पर हुई इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि भारत की लोक कलाएं केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आज भी देश की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक ऊर्जा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अन्वेषा कला केंद्र पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से भारत की शास्त्रीय और लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन, दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियों के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
रायपुर। संचालक संचालनालय तकनीकी शिक्षा द्वारा सत्र 2026-27 हेतु संचालित सभी 4 डिप्लोमा पाठ्यक्रमों (1. डिप्लोमा इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर, 2. सी.डी.डी.एम./आईडी, 3. एमओएम / एचएमसीटी, 4. डिप्लोमा इंजीनियरिंग (लेटरल एंट्री) में अभ्यर्थियों के पंजीकरण हेतु निर्धारित अंतिम तिथि को 11 अगस्त 2026 को शाम 06 बजे तक बढ़ाया गया है।आई आई टी के परिणाम घोषित हो चुके हैं, इसलिए आईटीआई उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया में सम्मिलित होने का अवसर प्रदान करने हेतु पंजीकरण की अवधि बढ़ाई गई है।
अतिरिक्त संचालक संचालनालय तकनीकी शिक्षा नवा रायपुर अटल नगर से प्राप्त जानकारी के अनुसार डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया में अभ्यर्थी की पंजीकरण की अंतिम तिथि में ही परिवर्तन किया गया है। शेष कोर्स के लिए प्रवेश प्रक्रिया की सभी तिथियाँ एवं कार्यक्रम पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार यथावत रहेंगे।
00 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एक उच्चस्तरीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन
00 एनडीएमए ने दी राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में गाइडलाइन्स
रायपुर। राज्य में संभावित बाढ़ आपदा से निपटने और पूर्व तैयारियों को पुख्ता करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एक उच्चस्तरीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान निर्णय लिया गया कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन की वास्तविक क्षमताओं और अंतर-विभागीय समन्वय को परखने के लिए 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज और 20 अगस्त को व्यापक मॉक एक्सरसाइज (मॉक ड्रिल) का आयोजन किया जाएगा।
त्वरित राहत व बचाव के लिए तैयारियों का परीक्षण आवश्यक
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे टेबल-टॉप एक्सरसाइज की सभी प्रक्रियाओं और एसओपी को गहराई से समझें। उन्होंने कहा कि वास्तविक आपदा के समय शून्य देरी से राहत और बचाव कार्य संचालित करने के लिए यह पूर्वाभ्यास बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर
कॉन्फ्रेंस के दौरान बाढ़ के समय विभिन्न विभागों की सक्रिय भूमिका और समन्वय पर विस्तृत समीक्षा की गई। आपदा के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी तथा पशुपालन विभाग द्वारा की जाने वाली त्वरित कार्यवाहियों का खाका तैयार किया गया।
समीक्षा बैठक में पहुंचे प्रमुख विभागों के उच्चाधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा, पुलिस मुख्यालय, रायपुर रेल मंडल, स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के निदेशक, दूरसंचार, विज्ञान केंद्र और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग सहित पंचायत, ऊर्जा, परिवहन और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। प्रदेश के सभी जिलों के नोडल अधिकारी इस कॉन्फ्रेंस में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे।
00 इस तरह दो महीने में फेफड़े की कुल 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी
00 सर्जरी में 15 साल के बच्चे के फेफड़े की लोबेक्टोमी सर्जरी भी हुई जिसमें मरीज को बायें फेफड़े के ऊपरी लोब में था एस्परजि़लोमा नमक फंगस का संक्रमण
00 अब तक के सबसे कम उम्र का मरीज जिसके फेफड़े की लोबेक्टमी सर्जरी की गई
00 इस ऑपरेशन में शामिल मरीजों की उम्र 15 साल से लेकर 70 साल तक
रायपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने फेफड़ों की जटिल सर्जरी के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए मात्र 20 दिनों में 9 तथा इस संख्या को मिलाकर पिछले दो महीनों में कुल 13 लोबेक्टॉमी (फेफड़े के संक्रमित हिस्से को निकालने की सर्जरी) सफलतापूर्वक कर मरीजों को नया जीवन दिया है। इनमें दो आपातकालीन सर्जरी ऐसे मरीजों की की गई, जिन्हें खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव (हेमोप्टाइसिस) हो रहा था। आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर की सहायता से की गई इन जटिल सर्जरियों ने न केवल संस्थान की विशेषज्ञता को सिद्ध किया है, बल्कि छत्तीसगढ़ में फेफड़ों की सर्जरी के क्षेत्र में अम्बेडकर अस्पताल को अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित किया है।
हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, फेफड़े की लोबेक्टॉमी सर्जरी का मतलब यह होता है कि इसमें मरीज के क्षतिग्रस्त फेफड़े के एक हिस्से को निकाल दिया जाता है। यह सर्जरी अत्यंत ही जटिल सर्जरी होती है। यह सर्जरी इस संस्थान में अत्याधुनिक तकनीक से किया जाता है जिसमें एडवांस्ड लंग स्टैपलर का उपयोग किया जाता है, जिससे भविष्य में इस सर्जरी से होने वाले कॉम्प्लिकेशन जैसे कि ब्रोन्कोप्लूरल फिस्टुला बनने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है। छत्तीसगढ़ के किसी भी प्राइवेट या सरकारी संस्थान की तुलना में इस संस्थान द्वारा इतने कम समय में इतना ज्यादा लोबेक्टॉमी सर्जरी (फेफड़े की लोबेक्टॉमी सर्जरी) किया जाना इस संस्थान के लिए एक कीर्तिमान है और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है।
छत्तीसगढ़ में लोबेक्टॉमी (फेफड़े की) सर्जरी का प्रमुख कारण फेफड़े में एस्परजिलोमा एवं ब्रोन्किएक्टैसिस है। यह एस्परजिलोमा एक फंगस एस्परजिलस नाइजर से होता है। यह इन्फेक्शन फेफड़े के टी.बी. वाले मरीजों या ऐसे मरीजों को होता है, जिनकी इम्युनिटी बहुत ही कम हो जाती है।
एस्परजिलोमा सामान्यत: दायें फेफड़े के ऊपरी लोब (भाग) में सबसे अधिक होता है, क्योंकि यहाँ पर टीबी के बैक्टीरिया एवं एस्परजिलोमा के फंगस को बहुत ही अच्छा वातावरण मिलता है। ब्रोन्किएक्टैसिस भी फेफड़े के टी.बी. संक्रमण के बाद होने वाली सबसे सामान्य बीमारी है, जिसमें फेफड़े के अंदर छोटे-छोटे कैविटी (गुहा) बन जाती हैं एवं इसमें संक्रमण होने के बाद मरीजों को खांसी के समय खून निकलता है। वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं लंग एब्सिस में फेफड़े में बड़ा कैविटी बन जाने से खांसी में खून आने का सबसे बड़ा कारण है। वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं फेफड़े का कैंसर भी थूक या बलगम में खून आने का सबसे बड़ा कारण है। एवं ऐसी स्थिति जिसमें फेफड़े का कैंसर अपनी प्रारंभिक अवस्था में हो तो लोबेक्टॉमी ऑपरेशन से इस बीमारी (कैंसर) से पूर्णत: निजात पाया जा सकता है।
पूरे छ.ग. में फेफड़े की सर्वाधिक सर्जरी इसी हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में होती है, जिसमें प्रमुख रूप से फेफड़े का डिकॉर्टिकेशन सर्जरी, लोबेक्टॉमी, सेगमेंटेक्टॉमी एवं न्यूमोनेक्टॉमी जिसमें एक तरफ के दायें या बायें फेफड़े को पूर्णत: निकाल दिया जाता है, इत्यादिसामान्यत: इस संस्थान में साल में 15 से 20 लोबेक्टॉमी सर्जरी होती है। यही नहीं यहाँ पर फेफड़े की सर्जरी कराने के लिए सिर्फ छ.ग. से ही नहीं बल्कि अन्य पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, उड़ीस , म.प्र. एवं उ.प्र. के भी मरीज आते हैं। जो इस संस्थान के लिए गौरव का विषय है। ये सभी ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया जाता है। अभी भी हमारे विभाग में लोबेक्टॉमी सर्जरी के लिए कुछ मरीज प्रतीक्षारत हैं।
क्या होती है लोबेक्टॉमी सर्जरी:
हमारे शरीर में फेफड़े के दो हिस्से होते हैं, जिसे दायां एवं बायां फेफड़ा कहा जाता है। बायां फेफड़ा दो लोब (भाग) से मिलकर बनता है, जिसको अपर लोब और लोअर लोब कहा जाता है। उसी प्रकार दायें फेफड़े में तीन लोब होते हैं: अपर लोब, मिडिल लोब एवं लोअर लोब। यदि फेफड़े को कोई बीमारी जैसे कि एस्परजिलोमा, ब्रोन्किएक्टैसिस या लंग ट्यूमर किसी एक भाग या लोब तक सीमित होती है तो उस स्थिति में उस भाग को ऑपरेशन द्वारा निकाल दिया जाता है, जिसको मेडिकल भाषा में लोबेक्टॉमी कहा जाता है। इसमें दायें या बायें छाती में चीरा लगाकर संक्रमित फेफड़े को अन्य भागों से अलग किया जाता है एवं विशेष तकनीक एवं लंग स्टेपलर की सहायता से संक्रमित लोब को निकाला जाता है। आधुनिक स्टेपलर प्रयोग करने से फेफड़े के ऑपरेशन के बाद होने वाले कॉम्प्लिकेशन जैसे कि ब्रोन्कोप्लूरलफिस्टुला में बहुत ही कमी आ जाती है। सामान्यत: 6-8 दिनों बाद मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य में बच्चों के लिए चलाये जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य विभागीय अधिकारी की बैठक ली।
बैठक में राज्य में बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, साफ-सफाई और स्वच्छता सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाये जाने के लिए विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बच्चों में कुपोषण, एनिमिया, विकास में देरी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। बच्चों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, फोलेट, विटामिन, बी-12 और जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूनिसेफ और विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, एनिमिया नियंत्रण, कुपोषण और बाल विवाह जैसी समस्याओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों और यूनिसेफ की संयुक्त बैठक में बच्चों के कम्यूनिटी मेनेजमेंट का सभी जिलों तक विस्तार करने, विकलांगता वाले बच्चों के माता-पिता को खानपान संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बैठक में टेक होम राशन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के साथ-साथ घर पर पोष्टिक भोजन और बच्चों को भोजन खिलाने की बेहतर पद्धतियों को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी गई। अनाज, दाल, फल्लियों की उपलब्धता ग्राम पंचायत स्तर पर अनाज बैंक की अवधारणा पर भी चर्चा हुई।
इसके साथ ही राज्य के किसानों तक विविध एवं पोषक तत्वों से भरपूर फसलों और दालों की पहुंच बढ़ाने के लिए अच्छे बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि राज्य में एंटी-मलेरिया अभियान के चलते मलेरिया के रोगियों में उल्लेखनीय कमी आयी है। बच्चों में एनिमिया की स्थिति के बारे में चर्चा हुई। इसके तहत बस्तर में बच्चों मे एनिमिया से निपटने विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे है। मुख्य सचिव ने सभी जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जमीन स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और लोगों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने के निर्देश दिए है।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिवअब्दुल कैसर हक, गृह विभाग की सचिवनेहा चंपावत, आयुक्त समग्र शिक्षा सुश्री किरण कौशल सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा 10 और 11 अगस्त को सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे क्षेत्र को स्वास्थ्य, शिक्षा, पशु चिकित्सा और आधारभूत संरचना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। साथ ही राष्ट्रीय चेतना से जुड़े कार्यक्रमों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
मंत्री वर्मा पहले दिन 10 अगस्त को पूर्वाह्न 11बजे सारंगढ़ सर्किट हाउस पहुँचेंगे, जहाँ वे कार्यकर्ताओं से भेंट-मुलाकात करेंगे। इसके बाद दोपहर वे पशु चिकित्सा विभाग भवन, ऑफिसर्स क्लब, जिला अस्पताल सारंगढ़-बिलाईगढ़ में अतिरिक्त कक्ष तथा बीपीएचयू भवन का उद्घाटन करेंगे। शिक्षा के क्षेत्र को मजबूती देते हुए वे शासकीय लोचन प्रसाद पाण्डेय महाविद्यालय में जनभागीदारी मद से निर्मित नए कक्ष का लोकार्पण करेंगे और एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत पौधारोपण भी करेंगे।
दोपहर में मंत्री वर्मा सावन महोत्सव, ग्राम छुहीपाली में वृहद वृक्षारोपण और मंडी प्रांगण में स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख वितरण कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। मंत्री वर्मा दूसरे दिन 11 अगस्त को मुख्य रूप से सामाजिक आयोजनों में व्यस्त रहेंगे। इस दौरान वे भारत माता चौक से रानी लक्ष्मीबाई कॉम्पलेक्स तक आयोजित भव्य तिरंगा यात्रा का नेतृत्व करेंगे।
रायपुर। वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन मंत्री श्री केदार कश्यप के सख्त निर्देशों के बाद वन विभाग ने वन्यजीव तस्करों और शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में मोहला वनमंडल के दक्षिण मानपुर क्षेत्र में सांभर का शिकार करने वाले तीन आरोपियों को रंगे हाथ पकड़कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
वनमण्डलाधिकारी दिनेश कुमार पटेल ने बताया कि विगत 6 अगस्त की शाम को वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि ग्राम पंचायत बागडोगरी के रेंगाटोला गांव (तहसील औंधी) में कुछ लोग सांभर का मांस पका रहे हैं। सूचना मिलते ही दक्षिण मानपुर के परिक्षेत्र अधिकारी और मानपुर के उपवनमंडलाधिकारी ने सर्च वारंट लेकर तुरंत मौके पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान पका हुआ मांस बरामद किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि खेत में फंसे सांभर के बच्चे की कुल्हाड़ी से मारकर हत्या की गई थी। वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियोंकृकाजूराम (पिता मसरूराम), रघुराम (पिता मनीराम) और राहुल (पिता सुकलु) को गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सी.जी.एम.) न्यायालय, अंबागढ़ चौकी में पेश किया। न्यायालय ने तीनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में राजनांदगांव जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया है।
इस संदर्भ में वन मंत्री केदार कश्यप ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और शिकारियों के खिलाफ ऐसे ही कड़े कदम उठाए जाते रहेंगे।
रायपुर। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को रायपुर में आयोजित होने वाले नुआखाई पर्व में शामिल होने के लिए निमंत्रण पत्र देने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में विधायक पुरंदर मिश्रा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं, सामाजिक समरसता और नुआखाई पर्व के सांस्कृतिक महत्व से भी अवगत कराया।
विधायक पुरंदर मिश्रा बताया कि नुआखाई केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नई फसल, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, पारिवारिक एकजुटता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। भगवान जगन्नाथ की पावन परंपरा से जुड़े इस आयोजन का छत्तीसगढ़ में विशेष सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। महामहिम राष्ट्रपति मुर्मू को नुआखाई पर्व में शामिल होने का आमंत्रण देना उनके लिए अत्यंत गौरव और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू का सान्निध्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और भगवान जगन्नाथ की भक्ति परंपरा के लिए गौरव का विषय होगा। इससे प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को देशभर में नई पहचान मिलेगी।
उन्होंने कहा कि नुआखाई पर्व हमारी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का उत्सव है, जो लोगों को अपनी जड़ों, अपनी मिट्टी और अपनी परंपराओं से जोड़ता है। रायपुर के श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित होने वाला यह आयोजन श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक समरसता का सुंदर संगम होगा।
0-तीन बहनों का एक साथ मेडिकल में चयन पूरे प्रदेश के लिए है प्रेरणादायी उदाहरण- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
रायपुर-- कबीरधाम जिले के नेउर गाँव की तीन प्रतिभाशाली बहनों किरण, ज्योति और सुमन महोबिया ने इस वर्ष नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज नेउर गाँव पहुंच, तीनों छात्राओं से उनके घर पर मुलाकात कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने छात्राओं की माता भगवती महोबिया और पिताराम महोबिया एवं परिजनों से भी मुलाकात की तथा तीनों बेटियों की इस उपलब्धि के लिए पूरे परिवार को बधाई दी और कहा कि एक ही परिवार की तीन बहनों का एक साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफल होना न केवल पूरे परिवार के लिए खुशी का अवसर है, बल्कि क्षेत्र और जिले के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है।
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि एक ही घर में रहकर तीन बहनों का एक साथ नीट जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना और सफलता हासिल करना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस सफलता से जिले के अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी कि नियमित मेहनत, सही दिशा और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि तीनों बहनों की सफलता उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने गाँव या घर पर रहकर सीमित संसाधनों के बीच बड़े लक्ष्य की तैयारी कर रहे हैं।
मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री शर्मा ने तीनों छात्राओं से उनकी स्कूली पढ़ाई, नीट परीक्षा की तैयारी और आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने छात्राओं से कहा कि अब मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर पूरी लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई करें तथा अपने उज्ज्वल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ें और माता-पिता व परिवार के सपनों को अपने कार्यों और उपलब्धियों से पूरा करें। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विदेशी राम धुर्वे सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
डॉक्टर बनकर क्षेत्र और समाज की सेवा का रखें भाव
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने छात्राओं को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डॉक्टर के रूप में शिक्षा पूरी करने के बाद अच्छे संस्थानों और अस्पतालों में कार्य कर अनुभव प्राप्त करें। साथ ही उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढऩे के साथ अपने क्षेत्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी बनाए रखें। अपनी शिक्षा और अनुभव का उपयोग जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए करने का प्रयास करें, ताकि आपकी सफलता का लाभ समाज और स्थानीय लोगों तक भी पहुंच सके।
घर पर की ऑनलाइन तैयारी, एक साथ पाई सफलता
तीनों बहनों ने घर पर रहकर ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से नीट परीक्षा की तैयारी की। पढ़ाई के दौरान तीनों एक-दूसरे का सहयोग करती रहीं और अपने लक्ष्य को लेकर लगातार प्रयासरत रहीं। उनकी यह उपलब्धि विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि दो बहनों ज्योति और सुमन ने अपने पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है, दोनों ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, बोड़ला से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है। जबकि बड़ी बहन किरण ने अपने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर, पांडातराई से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की है।
रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के महोबा बाजार स्थित एक निजी होटल में आयोजित आईटीवी नेटवर्क और इंडिया न्यूज के युवा मंच कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद अब छत्तीसगढ़ समन्वित रूप से प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर है। सरगुजा से लेकर बस्तर तक पूरे प्रदेश के लक्ष्यकेंद्रित विकास के लिए सरकार संकल्पित है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए विशिष्टजनों सम्मानित किया।
युवा मंच कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा थी। हमारी सरकार के गठन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद विषय पर हुई बैठक में यह तथ्य हमारे सामने आया कि देश में शेष नक्सल समस्या का अधिकांश हिस्सा छत्तीसगढ़ में ही था। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से एक डेडलाइन तय हुई और हमारे सुरक्षाबल के जवानों ने अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बना दिया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन के विकास की अपार संभावना है। बस्तर का चित्रकोट जलप्रपात नियाग्रा के नाम से प्रसिद्ध है। धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की सूची में शामिल किया है। वहाँ बम्बू राफ्टिंग जैसी पर्यटन गतिविधियां संचालित हैं और होम स्टे में पर्यटक आकर रुक रहे हैं। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई उद्योग नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में धर्मांतरण रोकने सबसे सख्त कानून लाने वाला प्रदेश है। प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करवाने वालों पर अब कड़ी कार्यवाही की जा रही है। अन्य प्रदेशों के कानूनों का विस्तार से अध्ययन करके छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पीएससी में भ्रष्टाचार करने वालों पर सख्त कार्रवाई की गई है। प्रदेश में अब पीएससी से लेकर सभी भर्ती परीक्षाएं पारदर्शिता के साथ सम्पन्न हो रही हैं और युवाओं के साथ उनके अभिभावक भी अब भर्ती प्रक्रिया को लेकर निश्चिंत हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार युवाओं से लगातार संवाद कर रही है। उनके सभी सुझावों का स्वागत है। युवा ही हमारे देश का भविष्य हैं। विकास की नीति निर्माण में युवाओं के सुझाव महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बहुल राज्य है। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेई ने जनजातीय विकास के लिए आदिम जाति कल्याण मंत्रालय का गठन किया। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में छत्तीसगढ़ के 6 हजार गांवों को शामिल किया गया है। हमारे प्रदेश में 5 विशेष पिछड़ी जनजातियां निवास करती हैं, जिनके उत्थान के लिए हम कटिबद्ध हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा विकास का मूलमंत्र है। शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है। आज छत्तीसगढ़ में हर स्तर पर स्कूल संचालित हैं। हर ब्लॉक में कॉलेज हैं। बस्तर के नक्सलमुक्त होने के बाद वहां एजुकेशन सिटी बनायी जा रही है। इसके लिए बजट में प्रावधान किया गया है।राज्य में शिक्षा मिशन पर भी काम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के निकटवर्ती राज्यों में भी आदिवासी बहुलता है, इसे देखते हुए हमारा प्रयास है कि राज्य में ट्राइबल यूनिवर्सिटी भी स्थापित हो। जिसका लाभ इस क्षेत्र के जनजातीय बच्चों को मिल सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का निरंतर विकास किया जा रहा है। आज हमारे प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। पांच नए मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति मिल गई है। जिनमें कुल 250 सीटें स्वीकृत हुई हैं और इसी वर्ष से पढ़ाई भी शुरू हो जाएगी। बस्तर में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बन गया है। अब वहां ब्रेन ट्यूमर का भी इलाज हो रहा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। 40 हजार लोगों का उपचार भी हुआ है। बस्तर मुन्ने और नियद नेल्लानार योजना के तहत लोगों को शासकीय योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की नई उद्योग नीति के तहत हमने 8 लाख करोड़ के एमओयू साइन किए हैं, इसका असर धरातल पर भी दिखने लगा है। सेमीकंडक्टर प्लांट, एआई डाटा सेंटर, टेक्सटाइल जैसे सैक्टर में कार्य चल रहा है। ऐसे उद्यमी जो अपने 1000 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराएंगे उनके लिए विशेष इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है। बरसात के बात रोजगार मेला भी लगाया जाएगा, जहां विभिन्न उद्योगों में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगें इस अवसर पर राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा, आईटीवी नेटवर्क और इंडिया न्यूज के पदाधिकारीगण तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।