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स्मार्ट मीटर से नहीं बढ़ता बिजली बिल, ज्यादा खपत और टैरिफ स्लैब हैं मुख्य वजह: बिजली विभाग

स्मार्ट मीटर से नहीं बढ़ता बिजली बिल, ज्यादा खपत और टैरिफ स्लैब हैं मुख्य वजह: बिजली विभाग

 रायपुर। स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के बीच फैल रही भ्रांतियों को दूर करते हुए बिजली विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर बिजली बिल नहीं बढ़ाता बल्कि केवल वास्तविक बिजली खपत के आधार पर सटीक बिल तैयार करता है। विभाग के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता का बिल बढ़ा है, तो इसका कारण बिजली की अधिक खपत और उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचना है, न कि स्मार्ट मीटर।

विभाग ने बताया कि स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उपभोक्ता ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से हर आधे घंटे की बिजली खपत देख सकते हैं। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-से विद्युत उपकरण अधिक बिजली खर्च कर रहे हैं और खपत कम करने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

बिजली विभाग के अनुसार प्रदेश में बिजली दरें निर्धारित स्लैब के आधार पर लागू होती हैं। 0 से 100 यूनिट तक 4.40 रुपये,101 से 200 यूनिट, तक 4.50 रुपये, 201 से 400 यूनिट तक 6 रुपये, 401 से 600 यूनिट तक 7 रुपये और 600 यूनिट से अधिक खपत होने पर 8.80 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू होती है। ऐसे में जैसे ही बिजली की खपत अगले स्लैब में पहुंचती है, बिल स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।

विभाग ने बताया कि अप्रैल, मई और जून की भीषण गर्मी के दौरान एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग के कारण अधिकांश घरों में बिजली खपत बढ़ी, जिससे कई उपभोक्ताओं के बिल भी अधिक आए। यह पूरी तरह मौसम और बिजली उपयोग से जुड़ी स्थिति है।

स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ता अपनी मासिक खपत पर लगातार नजर रख सकते हैं और उसे 400 यूनिट से कम रखने की योजना बना सकते हैं, जिससे राज्य सरकार की हाफ बिजली योजना का लाभ मिलता रहे। यदि खपत 400 यूनिट से अधिक हो जाती है, तो योजना का लाभ प्रभावित होने से बिल बढ़ सकता है।

बिजली विभाग ने बताया कि स्मार्ट मीटर से जुड़ी अधिकांश शिकायतों की जांच में मीटर सही पाए गए हैं। किसी भी शिकायत की स्थिति में उपभोक्ता 1912 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। विभाग ने लोगों से स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप का अधिक से अधिक उपयोग करने, ऊर्जा संरक्षण अपनाने तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर बिजली बिल कम करने की अपील की है।

अमलेश्वर में विकास कार्यों को मिली रफ्तार, सीसी रोड, नाली और चबूतरा निर्माण के लिए 13.26 लाख रुपए मंजूर

अमलेश्वर में विकास कार्यों को मिली रफ्तार, सीसी रोड, नाली और चबूतरा निर्माण के लिए 13.26 लाख रुपए मंजूर

 रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने दुर्ग जिले की अमलेश्वर नगर पालिका में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए 13 लाख 26 हजार रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभागीय संचालनालय ने स्वीकृति आदेश जारी कर दिए हैं।

स्वीकृत राशि के तहत वार्ड क्रमांक-12 में सीसी रोड निर्माण के लिए 9 लाख 73 हजार रुपए, आरसीसी नाली निर्माण के लिए 1 लाख 25 हजार रुपए तथा शिव मंदिर के बाजू में चबूतरा निर्माण के लिए 2 लाख 28 हजार रुपए मंजूर किए गए हैं। इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से स्थानीय नागरिकों को बेहतर सड़क, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

छोटे कारोबारों को मिलेगी आसान मंजूरी, सेल्फ सर्टिफिकेशन और ऑटो अप्रूवल जैसी सुविधाएं, हर साल लाइसेंस नवीनीकरण से मिलेगी राहत

छोटे कारोबारों को मिलेगी आसान मंजूरी, सेल्फ सर्टिफिकेशन और ऑटो अप्रूवल जैसी सुविधाएं, हर साल लाइसेंस नवीनीकरण से मिलेगी राहत

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने उद्योग और कारोबार को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026’ पारित कर दिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जोखिम आधारित (रिस्क बेस्ड) एवं विश्वास आधारित (ट्रस्ट बेस्ड) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा।

इस विधेयक का उद्देश्य उद्योगों एवं कारोबार की स्थापना और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक अनुपालनों को कम करना तथा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अधिक पारदर्शी, तेज और उद्यम-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण तैयार करना है।

विधेयक के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर विभिन्न जोखिम श्रेणियों में किया जाएगा। कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों को सरल एवं त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध स्वीकृति की व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी। इससे छोटे कारोबारियों को बड़े उद्योगों जैसी जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।

नई व्यवस्था के अंतर्गत कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षणों के स्थान पर सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा लाइसेंसधारी अभियंता, आर्किटेक्ट या अन्य अधिकृत पेशेवरों द्वारा प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे अनुमतियों की प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक जवाबदेह बनेगी।

विधेयक के तहत हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू की जाएगी। इससे उद्यमियों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी और वे अपने कारोबार के विस्तार एवं संचालन पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

एमएसएमई इकाइयों के लिए जल प्रदाय संबंधी अनुमति स्व-घोषणा के आधार पर, सोसायटी अथवा फर्म का पंजीयन समयबद्ध प्रक्रिया से तथा भवन अनुज्ञा सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा अधिकृत विशेषज्ञ के प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रदान की जा सकेगी। निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग द्वारा निर्णय नहीं लेने की स्थिति में पात्र मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत (ऑटो अप्रूवल) मानी जाएगी। हालांकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी परीक्षण एवं भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी।

विधेयक के अंतर्गत राज्य शासन के 8 विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली के दायरे में शामिल किया गया है। आवश्यकता अनुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अतिरिक्त सेवाएं भी इसमें जोड़ी जा सकेंगी।

विधेयक के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति तथा जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति इसके क्रियान्वयन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी निभाएगी। दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी।

इस सुधार से राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित यह व्यवस्था कारोबार शुरू करने और संचालित करने में लगने वाले समय एवं लागत को कम करेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और परीक्षण की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026’ राज्य में पारदर्शी, सरल, पूर्वानुमेय और निवेश-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा में निभाई गजपति महाराजा की परंपरा : भगवान श्री जगन्नाथ का रथ खींचकर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा में निभाई गजपति महाराजा की परंपरा : भगवान श्री जगन्नाथ का रथ खींचकर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड स्थित ग्राम दोकड़ा में आयोजित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव-2026 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ परंपरागत गजपति महाराजा की भूमिका का निर्वहन करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

मुख्यमंत्री साय ने छेरा पहरा की पावन परंपरा का निर्वहन करते हुए सोने की झाड़ू से भगवान के रथ के आगे मार्ग का प्रतीकात्मक रूप से मार्जन किया तथा चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव किया। इसके बाद उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं के साथ भगवान श्री जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ किया। पूरे दोकड़ा क्षेत्र में “जय जगन्नाथ” के जयघोष, शंखध्वनि, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

छेरा पहरा की पावन परंपरा का निर्वहन कर दिया सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश

मुख्यमंत्री साय ने सभी श्रद्धालुओं को रथयात्रा की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा आस्था, संस्कृति और सनातन परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1942 से चली आ रही यह गौरवशाली परंपरा आज भी जनआस्था को नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। जनसहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और वर्ष 2025 में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरी भव्य रथयात्रा आयोजित हो रही है। उन्होंने गजपति महाराजा की परंपरा निभाने का अवसर देने के लिए दोकड़ावासियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भगवान श्री जगन्नाथ से प्राचीन और आत्मीय संबंध रहा है। देवभोग का चावल आज भी पुरी के महाप्रसाद में उपयोग किया जाता है, जो इस सांस्कृतिक संबंध का जीवंत प्रमाण है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की गारंटी के अनुरूप प्रदेश में 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। महतारी वंदन योजना की 29 किस्तें जारी की जा चुकी हैं तथा रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं। राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरचार्ज माफी योजना की अवधि तीन माह बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से चौबीसों घंटे नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। वहीं अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाओं सहित 520 से अधिक शासकीय सेवाएँ उनके गाँव में ही उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि जशपुर जिले को शीघ्र ही रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं।धरमजयगढ़-लोहरदगा रेल परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है। साथ ही जशपुर जिले में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति से स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ विकसित होंगी।

रथयात्रा के दौरान ओडिशा की प्रसिद्ध कीर्तन मंडलियों ने भजन एवं संकीर्तन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ढोल, मृदंग, झांझ और शंखध्वनि के बीच श्रद्धालु भगवान के जयघोष लगाते हुए रथयात्रा में शामिल हुए। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस आयोजन को आस्था और लोक संस्कृति के विराट उत्सव में बदल दिया।

इस अवसर पर पद्मश्री जागेश्वर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा सहित जगन्नाथ मंदिर आयोजन समिति के सदस्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए तीसरा व अंतिम चरण 22 जुलाई से, 27 अगस्त तक पूरी होगी प्रक्रिया

निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए तीसरा व अंतिम चरण 22 जुलाई से, 27 अगस्त तक पूरी होगी प्रक्रिया

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए निजी विद्यालयों में कक्षा पहली की रिक्त सीटों पर प्रवेश हेतु तृतीय एवं अंतिम चरण की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जाएगी। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

विद्यालयवार आरटीई की रिक्त सीटों का प्रकटीकरण
शासन ने स्पष्ट किया है कि आरटीई प्रवेश की संपूर्ण प्रक्रिया 27 अगस्त 2026 तक हर स्थिति में पूर्ण की जानी अनिवार्य है तथा इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। महत्वपूर्ण तिथियां और समय-सारणी लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी निर्धारित समय-सारणी इस प्रकार है। 17 जुलाई से 21 जुलाई 2026 तक जिला स्तर पर विद्यालयवार आरटीई की रिक्त सीटों का प्रकटीकरण और प्रचार-प्रसार कर सकेंगे। 22 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक पात्र पालक आरटीई पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन और आवश्यक संशोधन कर सकेंगे।

27 अगस्त 2026 तक नोडल प्राचार्यों द्वारा प्रवेशित बच्चों की अंतिम प्रविष्टि आरटीई पोर्टल पर दर्ज करना
25 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक नोडल प्राचार्यों द्वारा आवेदनों का सूक्ष्म परीक्षण, सत्यापन और पात्र/अपात्र की प्रविष्टि दर्ज करना। 10 अगस्त से 14 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन लॉटरी काउंसलिंग के माध्यम से चयनित बच्चों की सूची जारी होना। 17 अगस्त से 25 अगस्त 2026 तक लॉटरी में चयनित बच्चों का संबंधित निजी विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित कराना। 20 अगस्त से 27 अगस्त 2026 तक नोडल प्राचार्यों द्वारा प्रवेशित बच्चों की अंतिम प्रविष्टि आरटीई पोर्टल पर दर्ज करना।

केवल नए व अप्रवेशित बच्चों को मिलेगा मौका
लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि इस अंतिम चरण में केवल वे ही पात्र बच्चे आवेदन कर सकेंगे, जिन्हें पूर्व के किसी भी चरण में प्रवेश प्राप्त नहीं हुआ है। प्रथम चरण में लागू सभी नियम एवं पात्रता की शर्तें इस चरण में भी यथावत प्रभावी रहेंगी।

मुनादी और स्थानीय माध्यमों से होगा प्रचार
जिला शिक्षा अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि निजी विद्यालयों के आसपास निवासरत पालकों तक इस अंतिम चरण की जानकारी पहुंचाने के लिए मुनादी, समाचार पत्रों एवं अन्य स्थानीय माध्यमों का उपयोग करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र बच्चा इस कल्याणकारी योजना के लाभ से वंचित न रहे। स्कूल शिक्षा संचालनालय ने सभी अधिकारियों और निजी स्कूलों को इस समय-सारणी का कड़ाई से पालन करने तथा प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं।

रथयात्रा के दौरान बड़ा हादसा: मूसलाधार बारिश के बीच पुराना होटल ढहा, 9 से अधिक लोग मलबे में दबे

रथयात्रा के दौरान बड़ा हादसा: मूसलाधार बारिश के बीच पुराना होटल ढहा, 9 से अधिक लोग मलबे में दबे

 गरियाबंदछत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। रथयात्रा पर्व के दौरान लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच उरमाल बाजार में एक बड़ा हादसा हो गया। बारिश से बचने के लिए लोग बाजार स्थित ईंट-खपरे से बने एक पुराने होटल में शरण लिए हुए थे। इसी दौरान लगातार बारिश के कारण कमजोर हो चुका भवन अचानक भरभराकर ढह गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

भर-भरकर पुराना होटल ढहा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय होटल के अंदर और आसपास 9 से अधिक लोग मौजूद थे। अचानक मलबा गिरते ही चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर घायलों को बाहर निकाला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उरमाल पहुंचाया।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उरमाल के डॉक्टर पांडे ने बताया कि एक व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में चोट आई है, जिसे एक्स-रे के लिए भेजा गया है। शेष सभी घायलों को सामान्य चोटें आई थीं, जिनका प्राथमिक उपचार कर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

 

घायलों के नाम
घायलों में रोहित सिन्हा (28 वर्ष, ग्राम धोरकोट), प्रीतिवास (उरमाल), तिलेश्वर सोनवानी (बेहरामुड़ा), होरेंद्र सिंह मरकाम, उड़ीसा के बेहरामुड़ा निवासी एक व्यक्ति, दो वर्षीय एक बच्ची, चार वर्षीय एक बच्ची सहित अन्य लोग शामिल हैं।


घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और भवन गिरने के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

सरोना रेलवे स्टेशनः आधुनिक रेल अवसंरचना के साथ क्षेत्रीय विकास की नई पहचान

सरोना रेलवे स्टेशनः आधुनिक रेल अवसंरचना के साथ क्षेत्रीय विकास की नई पहचान

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरोना रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है। सरोना रेलवे स्टेशन का लगभग 14 करोड़ रूपए की लागत से स्टेशन का पुनर्विकास कर इसे आधुनिक, सुव्यवस्थित एवं यात्री-केंद्रित स्वरूप प्रदान किया गया है, जिससे यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम एवं आरामदायक यात्रा अनुभव सुनिश्चित हो सके। इस पुनर्विकास के अंतर्गत स्टेशन परिसर का समग्र उन्नयन करते हुए यात्री सुविधाओं को आधुनिक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ किया गया है। इसमें बेहतर सुगम्यता उन्नत एवं स्वच्छ प्रतीक्षालय, डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली, बेहतर प्रकाश व्यवस्था तथा सुव्यवस्थित स्टेशन परिसर जैसी सुविधाओं का विकास शामिल है। इन सुधारों से न केवल यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि स्टेशन की कार्यक्षमता एवं सौंदर्य में भी सुधार हुआ है, जिससे क्षेत्रीय रेल संपर्क और अधिक प्रभावी एवं विश्वसनीय बन रहा है।

सरोना रेलवे स्टेशन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। यह स्टेशन रायपुर शहर, औद्योगिक क्षेत्रों तथा आसपास के तेजी से विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों के यात्रियों के लिए सुविधाजनक रेल संपर्क उपलब्ध कराता है। साथ ही, रायपुर आने वाले पर्यटकों एवं व्यापारिक यात्रियों के लिए भी यह स्टेशन एक महत्वपूर्ण प्रवेश बिंदु है। स्टेशन के आधुनिकीकरण से क्षेत्रीय आवागमन, व्यापारिक गतिविधियों तथा रोजगार के अवसरों को नई गति मिलेगी।

सरोना रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों के अंतर्गत 95 वर्गमीटर का नया कॉनकोर्स भवन, लगभग 2000 वर्गमीटर का विकसित सर्कुलेटिंग एरिया, नया फुट ओवर ब्रिज (FOB), सात प्लेटफॉर्म शेल्टर, 2,800 वर्गमीटर प्लेटफॉर्म सरफेसिंग का उन्नयन, 2 लिफ्ट, आधुनिक प्रतीक्षालय, उन्नत शौचालय, द्वितीय प्रवेश द्वार, समुचित और पर्याप्त पार्किंग स्थान, एकीकृत यात्री सूचना प्रणाली, सीसीटीवी कैमरे तथा आकर्षक कला एवं सांस्कृतिक सज्जा विकसित की गई है। इसके साथ ही यात्रियों की सुविधा के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत सरोना रेलवे स्टेशन का यह कायाकल्प न केवल यात्रियों को आधुनिक एवं विश्वस्तरीय सुविधाएँ उपलब्ध कराएगा, बल्कि रायपुर महानगर एवं आसपास के क्षेत्रों के आर्थिक, सामाजिक एवं औद्योगिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगा। यह पुनर्विकास कार्य भारतीय रेल की यात्री-केंद्रित, सुरक्षित एवं सतत् विकास की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।

CG : नवपदस्थ SP राय गौरव ने संभाला कार्यभार, सुरक्षा और कानून व्यवस्था मजबूत करने पर दिया जोर…..

CG : नवपदस्थ SP राय गौरव ने संभाला कार्यभार, सुरक्षा और कानून व्यवस्था मजबूत करने पर दिया जोर…..

बलौदाबाजार-भाटापारा। भारतीय पुलिस सेवा (भापुसे) 2019 बैच के वरिष्ठ अधिकारी राय गौरव रामप्रवेश ने आज जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के नए पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। इससे पूर्व राय गौरव रामप्रवेश जिला दंतेवाड़ा में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। ​

पुलिस कार्यालय बलौदाबाजार पहुंचने पर निवर्तमान पुलिस अधीक्षक ओ.पी. शर्मा ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने विधिवत रूप से नए पुलिस अधीक्षक को बलौदाबाजार-भाटापारा जिले का चार्ज सौंपा।

इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक का स्वागत किया। इस दौरान अभिषेक सिंह (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बलौदाबाजार), हेमसागर सिदार (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, भाटापारा), तारेश साहू (अनुविभागीय अधिकारी पुलिस – SDOP, भाटापारा), कौशल किशोर वासनिक (उप पुलिस अधीक्षक – DSP, कैंप कसडोल), संजय साहू (उप पुलिस अधीक्षक – DSP, यातायात), ​उषा सोन्धिया (उप पुलिस अधीक्षक – DSP), उषा ठाकुर रक्षित निरीक्षक उपस्थित थे।

​पदभार ग्रहण करने के बाद नए पुलिस अधीक्षक राय गौरव रामप्रवेश ने मौजूद सभी अधिकारियों का परिचय लिया। साथ ही जिले की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और जन-केंद्रित पुलिसिंग को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया।

POLICE TRANSFER : 10 निरीक्षकों-उप निरीक्षकों के तबादले, देखें लिस्ट

POLICE TRANSFER : 10 निरीक्षकों-उप निरीक्षकों के तबादले, देखें लिस्ट

 रायपुर।  पुलिस विभाग में इन दिनों खूब तबादले हो रहे हैं। पुलिस स्थापना बोर्ड के निर्णय के मुताबिक ट्रांसफर की एक और सूची जारी हुई है। इस लिस्ट में सात इंस्पेक्टर और 3 सब इस्पेक्टर हैं। अंतरजिला तबादले की ये तीसरी लिस्ट हैं। इससे पहले भी दो लिस्ट जारी हो चुकी है।

यहां देखिये पूरी लिस्ट 

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में छत्तीसगढ़ ने बनाया राष्ट्रीय कीर्तिमान

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में छत्तीसगढ़ ने बनाया राष्ट्रीय कीर्तिमान

 14.49 लाख से अधिक माताओं को 558.93 रूपये करोड़ की डीबीटी सहायता

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने साइबर ठगी से सतर्क रहने की अपील

रायपुर- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाने में सफल रहा है। पारदर्शी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली, राज्य सरकार की सतत निगरानी तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पित प्रयासों से प्रदेश की लाखों गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तक समय पर आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने योजना की इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मातृ सुरक्षा, पोषण और महिला कल्याण के क्षेत्र में लगातार नए मानक स्थापित कर रहा है।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि प्रदेश में अब तक 14 लाख 49 हजार 309 पात्र हितग्राहियों का सफल पंजीयन किया जा चुका है। इन सभी पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 558.93 करोड़ रूपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के कारण लाभार्थियों को बिना किसी बिचौलिये के समय पर आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना विश्व की सबसे बड़ी डीबीटी आधारित मातृत्व सहायता योजनाओं में से एक है। एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की केस स्टडी के अनुसार यह योजना गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार लाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है। योजना के सकारात्मक प्रभाव से मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने में भी सहायता मिली है।

मंत्री राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व, बेहतर पोषण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जोडऩा है। इसी उद्देश्य से विभाग द्वारा योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है तथा पात्र हितग्राहियों का समयबद्ध पंजीयन सुनिश्चित किया जा रहा है।

 -योजना के नाम पर साइबर ठगी से रहें सतर्क

योजना की सफलता के बीच मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने साइबर अपराधियों की सक्रियता को लेकर प्रदेशवासियों को विशेष रूप से सचेत किया। उन्होंने बताया कि कुछ जिलों में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के नाम पर फर्जी फोन कॉल कर महिलाओं से ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी अथवा राशि की मांग किए जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा, ष्यदि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के नाम पर किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा फोन कर ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी या किसी प्रकार की राशि की मांग की जाती है, तो उसकी बातों में बिल्कुल न आएं। ऐसे कॉल साइबर ठगों के हो सकते हैं। किसी भी संदिग्ध स्थिति में तत्काल अपनी निकटतम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा संबंधित विभाग से संपर्क करें। साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता और सतर्कता ही है।

मंत्री राजवाड़े ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी किए हैं कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से हितग्राही महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही योजना से जुड़ी सही जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए, ताकि कोई भी महिला ठगी का शिकार न बने।

सिम्स बिलासपुर में डॉक्टरों का कमाल : 6 वर्षीय मासूम की आहार नली से सफलतापूर्वक निकाला गया सिक्का, बची जान

सिम्स बिलासपुर में डॉक्टरों का कमाल : 6 वर्षीय मासूम की आहार नली से सफलतापूर्वक निकाला गया सिक्का, बची जान

 रायपुर, 16 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए एक 6 वर्षीय मासूम की जान बचा ली है। बैगा जनजाति के इस बालक ने खेलते समय गलती से सिक्का निगल लिया था, जो उसकी आहार नली (अन्ननली) में फंस गया था। डॉक्टरों की टीम ने बेहद जटिल और आपातकालीन स्थिति में सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर सिक्के को बाहर निकाला।

पेंड्रा से सिम्स बिलासपुर किया गया था रेफर

जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के कोटा तहसील अंतर्गत ग्राम सरगोंड का निवासी 6 वर्षीय बालक नरेंद्र खेलते समय सुबह करीब 7 बजे अचानक सिक्का निगल गया। इसके तुरंत बाद उसे कुछ भी निगलने में अत्यधिक परेशानी होने लगी। परिजन आनन-फानन में उसे पेंड्रा के एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बालक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया।

डॉक्टरों के समन्वित प्रयास से मिली सफलता

बालक को शाम करीब 6.30 बजे सिम्स लाया गया, जिसके बाद अस्पताल का पूरा अमला सक्रिय हो गया। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने तत्काल एक्स-रे कर अन्ननली के ऊपरी भाग (श्वासनली के मुहाने के ठीक पीछे) में फंसे सिक्के की सटीक लोकेशन की पहचान की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने बच्चे को सामान्य एनेस्थीसिया दिया। इसके बाद ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी तकनीक के जरिए अत्यंत सावधानी से सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और ऑपरेशन के बाद बालक की स्थिति पूरी तरह सामान्य और संतोषजनक है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का परिणाम

इस सफल उपचार पर सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता, आधुनिक तकनीकों और आपसी तालमेल के कारण ही इस जटिल आपातकालीन मामले को समय पर सुलझाया जा सका। सिम्स का लक्ष्य हर मरीज को सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं देना है।

चिकित्सा अधीक्षक और डॉक्टरों ने अभिभावकों के लिए जारी की सलाह

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने आगाह किया कि छोटे बच्चों द्वारा सिक्का, बटन, बैटरी या चुंबक जैसी चीजें निगलना एक गंभीर आपात स्थिति है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय सीधे विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचना चाहिए। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से सिक्के, छोटी बैटरी और छोटे खिलौने दूर रखें। यदि बच्चा कोई वस्तु निगल लेता है और उसे लार टपकने, गले में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें, तो बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें।

आज लगाया गया हर पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा : मुख्यमंत्री साय

आज लगाया गया हर पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा : मुख्यमंत्री साय

 00 मुख्यमंत्री ने ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
00 वन विभाग की अभिनव पहल से निःशुल्क पौधों का होगा वितरण, पर्यावरण संरक्षण का दिया जाएगा संदेश
रायपुर।
आमतौर पर एटीएम का नाम सुनते ही लोगों के मन में पैसे निकालने वाली मशीन की तस्वीर उभरती है, लेकिन जशपुर वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए 'ट्री एटीएम' की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बगिया हेलीपैड परिसर में इस अनूठे मोबाइल ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल आम नागरिकों तक पौधों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता को नई गति प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर स्वयं ट्री एटीएम से आंवला का पौधा प्राप्त किया तथा उपस्थित लोगों को भी पौधों का वितरण किया। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल ट्री एटीएम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर आम नागरिकों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा। इससे अधिक से अधिक लोग पौधरोपण से जुड़ेंगे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को नया विस्तार मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वन विभाग की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि 'ट्री एटीएम' लोगों को सहज और सरल तरीके से पौधे उपलब्ध कराने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वर्षा ऋतु पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। ऐसे समय में यह पहल लोगों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे आसानी से उपलब्ध कराएगी, जिससे व्यापक स्तर पर पौधरोपण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान ने पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया है। इसी अभियान से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधरोपण कर 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के संदेश के साथ शुरू हुई अनूठी पहल
उल्लेखनीय है कि 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान के अंतर्गत प्रारंभ किए गए ट्री एटीएम को 'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के प्रेरक संदेश के साथ रवाना किया गया। इस अभिनव पहल के तहत केवल निःशुल्क पौधों का वितरण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि पौधा प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण की वैज्ञानिक एवं सही विधि, नियमित देखभाल, संरक्षण तथा पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने के उपायों की भी जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रहने की दर को बढ़ाना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का यह अभियान दीर्घकालिक और प्रभावी बन सके।

 हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया रथ यात्रा का पावन पर्व

हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया रथ यात्रा का पावन पर्व

रायपुर महानगर का सबसे प्राचीनतम रथ यात्रा है पुरानी बस्ती की रथ यात्रा

रायपुर - राजधानी रायपुर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर टुरी हटरी पुरानी बस्ती में रथ यात्रा का पावन पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। प्रातः कालीन बेला से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ था। सुबह 9:00 बजे होम हवन का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ तत्पश्चात जगन्नाथ जी की आरती की गई दोपहर में भोग भंडारे का कार्यक्रम संपन्न हुआ, अपराह्न 3:30 बजे रथ यात्रा निकाली गई जिसमें हजारों की संख्या में लोग अपने परिवार सहित उपस्थित हुए। वे सभी भगवान के दर्शन का एक झलक प्राप्त करने के लिए लालायित थे। जानकारों का मानना है कि यह रायपुर नगर का सबसे प्राचीनतम रथ यात्रा है जो लगभग ढाई सौ वर्षों से अधिक का कार्यकाल पूर्ण कर चुका है। महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने रथ यात्रा के संदर्भ में अपने संदेश में कहा है कि -आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया को प्रत्येक वर्ष रथ यात्रा का त्यौहार मनाया जाता है इस वर्ष भी यह पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जा रहा है। पुरानी बस्ती का यह आयोजन रायपुर नगर का सबसे प्राचीनतम आयोजन है जिसमें लोग बड़ी श्रद्धा भक्ति पूर्वक हजारों की संख्या में सम्मिलित होते हैं। उन्होंने कहा कि हमें जब किसी भी देवी- देवता का दर्शन प्राप्त करना होता है तो मंदिरों में जाना ही पड़ता है लेकिन भगवान श्री जगन्नाथ जी विश्व के एकमात्र ऐसे देवता हैं जो अपने भक्तों को उनके दरवाजे तक पहुंचकर दर्शन प्रदान करते हैं वे जगत के स्वामी हैं,इसीलिए उन्हें जगन्नाथ कहा जाता है। रथ यात्रा के इस पावन अवसर पर दाऊ महेंद्र अग्रवाल, सुरेश शुक्ला, अजय तिवारी, विजय पाली, रामकृष्ण पाली, तोय निधि वैष्णव, बृजभूषण द्विवेदी, अनिल बरोड़िया ,प्रशांत ठेंगड़ी, राहुल उपाध्याय, तिलक दास जी, राम छबिदास जी, राम प्रिय दास जी, राम लोचन दास जी, मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव, हर्ष दुबे सहित अनेक प्रतिष्ठित नागरिक गण सम्मिलित हुए।
 
BREAKING : IPS जयंत वैष्णव बने मुख्यमंत्री सुरक्षा के नए SP, DGP अरुण देव गौतम ने जारी किया आदेश

BREAKING : IPS जयंत वैष्णव बने मुख्यमंत्री सुरक्षा के नए SP, DGP अरुण देव गौतम ने जारी किया आदेश

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री की सुरक्षा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। आईपीएस अधिकारी जयंत वैष्णव को मुख्यमंत्री सुरक्षा का नया पुलिस अधीक्षक (SP) नियुक्त किया गया है।

हाल ही में हुए पुलिस फेरबदल में हरीश राठौर को कोरिया जिले का नया एसपी बनाया गया था। उनके ट्रांसफर के बाद से ही सीएम सुरक्षा का यह महत्वपूर्ण पद रिक्त चल रहा था, जिसकी जिम्मेदारी अब जयंत वैष्णव को सौंप दी गई है। डीजीपी अरुण देव गौतम द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।

बलौदाबाजार में समूह की 40 महिलाओं को मिला धान और पैरा आर्ट का प्रशिक्षण

बलौदाबाजार में समूह की 40 महिलाओं को मिला धान और पैरा आर्ट का प्रशिक्षण

 00 आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
रायपुर।
छत्तीसगढ़ (धान का कटोरा) में धान की कटाई के बाद बचने वाले श्पैराश् (पराली/पुआल) से बनाई जाने वाली खूबसूरत हस्तकला को पैरा आर्ट कहते हैं। इसके जरिए वेस्ट पैरा का उपयोग कर महापुरुषों और देवी-देवताओं के 3ष्ठ पोर्ट्रेट और चित्र बनाए जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह ग्रामीण आय का भी एक बड़ा साधन बन रहा है। पैरा आर्ट बेहद दिलचस्प कला है, जिसमें धैर्य, कल्पनाशक्ति और बारीकी की समझ जरूरी है. धीरे-धीरे इस कला का क्रेज लोगों के बीच बढ़ता जा रहा है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उन्हें आजीविका के नए साधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा लगातार विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड बलौदाबाजार के अंतर्गत ग्राम लाहौद में स्व-सहायता समूह की 40 महिलाओं को धान एवं पैरा (पुआल) आर्ट का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
जिला पंचायत सीईओ ने बांटे प्रमाण पत्र
प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने महिलाओं द्वारा धान और पैरा से तैयार की गईं विभिन्न सुंदर और आकर्षक कलाकृतियों का अवलोकन किया तथा उनके हुनर की सराहना करते हुए उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया। जिला पंचायत सीईओ बलौदाबाजार-भाटापारा ने बताया कि जिला पंचायत की बिहान टीम के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में गैर-कृषि आजीविका को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य के साथ छत्तीसगढ़ महतारी संकुल संगठन लाहौद में स्व-सहायता समूह की 40 दीदियों को इस कला का प्रशिक्षण दिलाया गया है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं अब स्थानीय स्तर पर अनुपयोगी समझे जाने वाले पैरा (पुआल) और धान से कलाकृतियां बनाकर अपनी अतिरिक्त आय सुनिश्चित कर सकेंगी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी।

छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित हुआ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026

छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित हुआ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026

 जोखिम आधारित बिजनेस परमिशन व्यवस्था लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा छत्तीसगढ़

छोटे कारोबारों को मिलेगी आसान मंजूरी, सेल्फ सर्टिफिकेशन और ऑटो अप्रूवल जैसी सुविधाएं, हर साल लाइसेंस नवीनीकरण से मिलेगी राहत

रायपुर, 16 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने उद्योग और कारोबार को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' पारित कर दिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जोखिम आधारित (रिस्क बेस्ड) एवं विश्वास आधारित (ट्रस्ट बेस्ड) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा।

इस अधिनियम का उद्देश्य उद्योगों एवं कारोबार की स्थापना और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक अनुपालनों को कम करना तथा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अधिक पारदर्शी, तेज और उद्यम-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण तैयार करना है।

अधिनियम के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर विभिन्न जोखिम श्रेणियों में किया जाएगा। कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों को सरल एवं त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध स्वीकृति की व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी। इससे छोटे कारोबारियों को बड़े उद्योगों जैसी जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।

नई व्यवस्था के अंतर्गत कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षणों के स्थान पर सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा लाइसेंसधारी अभियंता, आर्किटेक्ट या अन्य अधिकृत पेशेवरों द्वारा प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे अनुमतियों की प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक जवाबदेह बनेगी।

अधिनियम के तहत हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू की जाएगी। इससे उद्यमियों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी और वे अपने कारोबार के विस्तार एवं संचालन पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

एमएसएमई इकाइयों के लिए जल प्रदाय संबंधी अनुमति स्व-घोषणा के आधार पर, सोसायटी अथवा फर्म का पंजीयन समयबद्ध प्रक्रिया से तथा भवन अनुज्ञा सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा अधिकृत विशेषज्ञ के प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रदान की जा सकेगी। निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग द्वारा निर्णय नहीं लेने की स्थिति में पात्र मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत (ऑटो अप्रूवल) मानी जाएगी। हालांकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी परीक्षण एवं भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी।

अधिनियम के अंतर्गत राज्य शासन के 8 विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली के दायरे में शामिल किया गया है। आवश्यकता अनुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अतिरिक्त सेवाएं भी इसमें जोड़ी जा सकेंगी।

अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति तथा जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति इसके क्रियान्वयन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी निभाएगी। दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी।

इस सुधार से राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित यह व्यवस्था कारोबार शुरू करने और संचालित करने में लगने वाले समय एवं लागत को कम करेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और परीक्षण की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' राज्य में पारदर्शी, सरल, पूर्वानुमेय और निवेश-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

रथयात्रा हमारी आस्था, लोकसंस्कृति, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का जीवंत महापर्व : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रथयात्रा हमारी आस्था, लोकसंस्कृति, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का जीवंत महापर्व : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 राज्यपाल  रमेन डेका और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय भगवान  जगन्नाथ की पावन रथयात्रा में हुए शामिल

पूजा-अर्चना एवं छेरा-पहरा की परंपरा निभाकर प्रदेश की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा और किसानों की खुशहाली की कामना की

रायपुर - राज्यपाल  रमेन डेका और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान  जगन्नाथ मंदिर में आयोजित भव्य रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए। दोनों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान  जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा पारंपरिक श्छेरा-पहराश् की रस्म निभाते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच भगवान  जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को विशेष विधि-विधान के साथ मंदिर से रथ तक लाया गया। 

राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा में हुए शामिल

इसके पूर्व राज्यपाल  रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने पारंपरिक रीति से सोने की झाड़ू द्वारा छेरा-पहरा की रस्म निभाकर रथमार्ग का प्रतीकात्मक शुद्धिकरण किया। इसके पश्चात महाप्रभु की प्रतिमाओं को श्रद्धापूर्वक रथ पर विराजित किया गया और रथयात्रा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल  रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान  जगन्नाथ की रथयात्रा सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता, लोकपरंपरा और जन-जन की आस्था का महापर्व है। यह उत्सव समाज को सेवा, समर्पण, समानता और लोककल्याण का संदेश देता है।

राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा में हुए शामिल

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि भगवान  जगन्नाथ किसानों के आराध्य और अन्नदाता के रक्षक माने जाते हैं। उनकी कृपा से समय पर वर्षा होती है, खेतों में हरियाली आती है, धान की बालियों में दूध भरता है और किसानों के घरों में समृद्धि का आगमन होता है। उन्होंने भगवान  जगन्नाथ से प्रार्थना की कि इस वर्ष प्रदेश में भरपूर वर्षा हो, कृषि समृद्ध हो, किसानों की मेहनत सफल हो और छत्तीसगढ़ निरंतर विकास एवं खुशहाली के पथ पर आगे बढ़ता रहे।

राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा में हुए शामिल

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भगवान  जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का दिव्य आशीर्वाद समस्त प्रदेशवासियों पर बना रहे तथा सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल का संचार हो। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हमारी परंपराओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज में सद्भाव, एकता और सामूहिक चेतना को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में प्रतिवर्ष पुरी की विश्वविख्यात रथयात्रा की तर्ज पर यह आयोजन अत्यंत श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होता है। छेरा-पहरा की परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और सेवा ही सर्वाेच्च धर्म है। उल्लेखनीय है कि ओडिशा का पड़ोसी राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में भगवान जगन्नाथ के प्रति विशेष श्रद्धा और आस्था रही है। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में रथयात्रा का आयोजन उत्साहपूर्वक किया जाता है। उत्कल संस्कृति और दक्षिण कोसल की सांस्कृतिक परंपराओं के बीच यह पर्व एक सशक्त सेतु का कार्य करता है। इस अवसर पर सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, विधायक  पुरंदर मिश्रा, विभिन्न निगम-मंडलों एवं आयोगों के अध्यक्षगण, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए राज्यपाल डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए राज्यपाल डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 रायपुर- राज्यपाल  रमेन डेका रथ यात्रा पर्व के अवसर पर आज गायत्री नगर रायपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर में आयोजित महाप्रभु जगन्नाथ के रथ यात्रा महोत्सव में शामिल हुए। राज्यपाल  डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना कर ‘छेरा-पहरा‘ की रस्म निभाई। राज्य की प्रथम महिला  रानी डेका काकोटी ने जगन्नाथ जी की विधि-विधान से पूजा अर्चना की। इस दौरान सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, विधायक  पुरंदर मिश्रा, अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

महाप्रभु श्री जगन्नाथ
रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए राज्यपाल श्री डेका
रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए राज्यपाल श्री डेका
रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए राज्यपाल श्री डेका
रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए राज्यपाल श्री डेका

 

अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशन का होगा शुभारंभ

अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशन का होगा शुभारंभ

 0-रेलवे के आधुनिकीकरण से यात्री सुविधाओं, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 

0-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से रायपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) दयानन्द ने की सौजन्य भेंट

 
 
 

रायपुर / मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में रायपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम)  दयानन्द ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उद्घाटन समारोह के लिए केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव की ओर से मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय को आमंत्रण पत्र भेंट किया। भेंट के दौरान अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों पर विकसित आधुनिक यात्री सुविधाओं, अधोसंरचना उन्नयन तथा स्टेशनों के नए स्वरूप को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।  

 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना भारतीय रेलवे को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और यात्री-केंद्रित बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है, जिसका लाभ सीधे आम नागरिकों और प्रदेश के समग्र विकास को मिलेगा।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय रेलवे आज अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। देशभर के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर यात्री सेवाओं और विश्वस्तरीय अधोसंरचना से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे विकसित भारत के संकल्प को नई गति मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, व्यापार, पर्यटन और जनसुविधाओं की जीवनरेखा है। रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उन्नयन से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में आधुनिक रेल अधोसंरचना का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। रेल संपर्क के सुदृढ़ होने से प्रदेश में निवेश, उद्योग, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा आम नागरिकों का आवागमन अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को वर्चुअल माध्यम से देशभर में अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित एवं नवीनीकृत रेलवे स्टेशनों का लोकार्पण करेंगे। इस योजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को आधुनिक, सुगम, सुरक्षित एवं यात्री-अनुकूल बनाकर देश की परिवहन व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

नक्सलियों की साजिश नाकाम, हथियार, IED और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद

नक्सलियों की साजिश नाकाम, हथियार, IED और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद

 कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के पल्लाहुर जंगल में संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखा गया एक डंप बरामद किया गया, जिसमें हथियार, विस्फोटक और बड़ी मात्रा में नक्सली सामग्री मिली है।

पुलिस के अनुसार, जिला पुलिस और बीएसएफ (BSF) की संयुक्त टीम क्षेत्र में सर्चिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान जंगल में छिपाए गए नक्सली डंप का पता चला। तलाशी के दौरान 3 किलोग्राम का टिफिन IED, 2 पाइप बम, एक .303 रायफल, एक बीजीएल (BGL) लॉन्चर, .303 रायफल के 4 कारतूस, AK-47 के 30 राउंड, SLR के 4 राउंड, 10 बीजीएल सेल सहित बड़ी मात्रा में नक्सली सामग्री बरामद की गई।

बरामद IED और अन्य विस्फोटकों को देखते हुए मौके पर ही बम निरोधक दस्ता (BDS) बुलाया गया। सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बीडीएस टीम ने टिफिन IED को नियंत्रित विस्फोट के जरिए सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया, जिससे किसी भी संभावित खतरे को टाल दिया गया।सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह डंप नक्सलियों द्वारा भविष्य में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के उद्देश्य से छिपाकर रखा गया था। समय रहते इसकी बरामदगी से नक्सलियों की साजिश नाकाम हो गई। पुलिस ने बताया कि पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है और नक्सलियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सुरक्षा बल क्षेत्र में अभियान तेज कर संभावित ठिकानों की तलाश में जुटे हुए हैं।

विधानसभा में उर्वरक वितरण पर गरमाई बहस, कांग्रेस ने उठाए सवाल, मंत्री ने जांच से किया इनकार

विधानसभा में उर्वरक वितरण पर गरमाई बहस, कांग्रेस ने उठाए सवाल, मंत्री ने जांच से किया इनकार

 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रदेश में उर्वरकों के वितरण का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। कांग्रेस विधायक दलेश्वर साहू ने सहकारी और निजी क्षेत्रों में उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कई जिलों में निर्धारित लक्ष्य से अधिक उर्वरकों की सप्लाई की गई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

विधानसभा में प्रश्न उठाते हुए दलेश्वर साहू ने कहा कि उर्वरकों के वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किन जिलों में कितनी मात्रा में उर्वरक भेजा गया और लक्ष्य से अधिक आपूर्ति किन परिस्थितियों में की गई। उन्होंने कहा कि यदि अनियमितता हुई है तो इसकी जांच आवश्यक है।

इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए आदिम जाति विकास एवं कृषि से जुड़े मामलों के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से प्राप्त उर्वरकों की कंपनीवार, मौसमवार और जिलावार आवंटन संबंधी पूरी जानकारी विधानसभा पुस्तकालय में उपलब्ध कराई गई है।

मंत्री ने सदन को बताया कि भारत सरकार के आवंटन के आधार पर उर्वरक कंपनियां सहकारी समितियों और निजी थोक विक्रेताओं को खाद उपलब्ध कराती हैं, जहां से किसानों तक इसका वितरण किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग केवल वितरण के बाद उपलब्ध शेष उर्वरकों का रिकॉर्ड रखता है, जबकि कंपनीवार बची हुई मात्रा का अलग से कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।

 दलेश्वर साहू द्वारा मामले की जांच की मांग दोहराए जाने पर मंत्री रामविचार नेताम ने साफ कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच कराने का कोई औचित्य नहीं बनता। मंत्री के इस जवाब के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच उर्वरक वितरण को लेकर कुछ समय तक तीखी बहस भी देखने को मिली।

Road Accident: मातम में बदली रथ यात्रा की खुशियां, पूजा में जा रहे एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, एक घायल

Road Accident: मातम में बदली रथ यात्रा की खुशियां, पूजा में जा रहे एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, एक घायल

 भिलाई।  दुर्ग-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर गुरुवार सुबह हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक 8 वर्षीय बालक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। घायल बच्चे का इलाज रायपुर स्थित एम्स में जारी है, जहां उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

छावनी सीएसपी प्रशांत सिंह पैकरी के अनुसार, स्कूटी क्रमांक CG 07 DE 5847 पर सवार पांच लोग भिलाई-3 से रायपुर के बसंत विहार में आयोजित एक पारिवारिक पूजा कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। स्कूटी अमृत निर्मलकर (28) चला रही थीं। सुबह करीब 10 से 10:30 बजे कुम्हारी स्थित दशमेश ढाबा के पास उनकी स्कूटी सड़क किनारे खड़े ऑक्सीजन सिलेंडरों से लदे ट्रैक्टर CG 07 NA 0930 के पिछले हिस्से से जा भिड़ी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी तेज थी कि स्कूटी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में अमृत निर्मलकर (28), लक्ष्मी निर्मलकर (26), 7 वर्षीय यासना और 4 वर्षीय डाली की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं 8 वर्षीय भावेश गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रायपुर एम्स रेफर किया गया।

  घटना की सूचना मिलते ही कुम्हारी पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। पुलिस ने ट्रैक्टर को जब्त कर उसके चालक भोला यादव को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ट्रैक्टर हाईवे किनारे खड़ा था, जिसकी वजह से यह भीषण दुर्घटना हुई। पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सुपेला स्थित मर्चुरी भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह हादसा एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और लापरवाही से खड़े वाहनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

विशेष लेख -अकादमिक सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और कर्मचारी हितों के साथ आगे बढ़ता छत्तीसगढ़

विशेष लेख -अकादमिक सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और कर्मचारी हितों के साथ आगे बढ़ता छत्तीसगढ़

 00 ​362 सहायक प्राध्यापक बने प्रोफेसर, 152 प्रोफ़ेसर हुए प्राचार्य पदोन्नति, शैक्षणिक नेतृत्व को मिली नई मजबूती
00 ​595 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, 700 नए पदों की मंजूरी, युवाओं के लिए सरकारी सेवा के बड़े अवसर
00 ​72 सहायक प्राध्यापकों को 37.23 करोड़ रुपये एरियर्स, 935 की परिवीक्षा अवधि समाप्त
00 ​सेवा सुरक्षा को मिला मजबूत आधार, 34 अनुकंपा नियुक्तियां, 118 कर्मचारियों को उच्चतर समयमान वेतनमान, कर्मचारी कल्याण को मिली संवेदनशील दिशा

किसी भी राज्य की प्रगति का वास्तविक पैमाना उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है और इसकी गुणवत्ता केंद्र में खड़े शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारियों की सक्षमता, सुरक्षा और सम्मान पर निर्भर करती है। जब उच्च शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत मानव संसाधन को पदोन्नति, सेवा सुरक्षा, वित्तीय सम्मान और शोध के अवसर एक साथ मिलते हैं, तब शिक्षा राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की सबसे मजबूत धुरी बन जाती है। छत्तीसगढ़ का उच्च शिक्षा विभाग इन दिनों इसी व्यापक और समग्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।
राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग को केवल भवनों, पाठ्यक्रमों और परीक्षाओं तक सीमित न रखकर उसे अकादमिक गुणवत्ता, प्रशासनिक दक्षता, रोजगार सृजन, शोध संवर्धन और कर्मचारी कल्याण से जोड़ा है। हाल के महीनों में लिए गए निर्णय इस बात के प्रमाण हैं कि सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों को भविष्य के ज्ञान-केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पदोन्नतियों की लंबित फाइलों को गति देना, नई भर्तियां, वेतनमान व एरियर्स का निराकरण, तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति, शोध को प्रोत्साहन और अनुकंपा नियुक्ति जैसे कदमों से विभाग ने हर मोर्चे पर ठोस और संवेदनशील पहल की है।
​पदोन्नति से संस्थागत नेतृत्व को नई शक्ति
​उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता का एक बड़ा आधार उनका नेतृत्व होता है। जब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में योग्य और अनुभवी शिक्षकों को समय पर पदोन्नति मिलती है, तो उसका सीधा असर संस्थान की कार्यसंस्कृति और प्रशासनिक क्षमता पर दिखाई देता है। लंबित पदोन्नति प्रक्रियाओं को गति देकर राज्य सरकार ने एक निर्णायक पहल की है।
वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 362 सहायक प्राध्यापकों को पदोन्नत कर प्राध्यापक (प्रोफेसर) बनाया गया है। इसके साथ ही 152 पदोन्नत प्राध्यापकों को स्नातक प्राचार्य तथा 07 स्नातक प्राचार्यों को स्नातकोत्तर (PG) प्राचार्य के पद पर पदोंन्नत किया गया है। इन निर्णयों से महाविद्यालयों की कमान अनुभवी हाथों में पहुँची है, जिससे संस्थागत निर्णय क्षमता, शैक्षणिक अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी।
​सीधी भर्ती से युवाओं के लिए खुले अवसरों के नए द्वार
गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था के लिए संस्थानों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक और विशेषज्ञ अनिवार्य हैं। राज्य सरकार ने रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर युवाओं के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश के बड़े अवसर निर्मित किए हैं। शासकीय महाविद्यालयों में प्राध्यापकों के 595 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो चुकी है।
इसके अतिरिक्त, विभागीय संरचना को सशक्त बनाने के लिए कुल 700 पदों पर सीधी भर्ती को मंजूरी दी गई है। इनमें 625 पद सहायक प्राध्यापक, 50 पद ग्रंथपाल और 25 पद क्रीड़ाधिकारी के शामिल हैं। सहायक प्राध्यापकों की भर्ती से विषयवार अध्यापन की गुणवत्ता बेहतर होगी, ग्रंथपालों से पुस्तकालय अकादमिक संसाधनों के प्रभावी केंद्र बनेंगे और क्रीड़ाधिकारियों से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होगा। यह अभियान प्रदेश के योग्य युवाओं को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने का सशक्त माध्यम बनने जा रहा है।
​CG-SET: युवा अकादमिक प्रतिभाओं के लिए बड़ी उम्मीद
राज्य में सहायक प्राध्यापक बनने की आकांक्षा रखने वाले हजारों युवाओं के लिए राज्य पात्रता परीक्षा (CG-SET) एक महत्वपूर्ण अवसर है। विभाग द्वारा CG-SET का आयोजन 04 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है l सरकार नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को अकादमिक करियर में आगे बढ़ाने के लिए गंभीर है। यह परीक्षा छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक परिदृश्य और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में अपनी जगह बनाने का अवसर देती है।
​प्रयोगशालाओं और तकनीकी तंत्र को मिला नया आधार
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक विषयों के लिए प्रयोगशालाएं, उपकरण और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ उतने ही आवश्यक हैं जितने कक्षा और कक्ष। वर्ष 2025-26 के दौरान प्रयोगशाला तकनीशियन के 260 रिक्त पदों के विरुद्ध 247 अभ्यर्थियों तथा प्रयोगशाला परिचारक के 429 रिक्त पदों के विरुद्ध 399 अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके हैं। तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता से प्रयोगशालाओं का नियमित संचालन और विद्यार्थियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
​वेतनमान, एरियर्स और सेवा सुरक्षा: कर्मचारियों का बढ़ा भरोसा
विभागीय मजबूती का सबसे बड़ा आधार कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, न्यायपूर्ण वेतन संरचना और लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान है। आपातकालीन रूप से अचयनित रहे 72 सहायक प्राध्यापकों को उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठ, प्रवर श्रेणी और पे-बैंड-4 की स्वीकृति देकर 37.23 करोड़ रुपये की एरियर्स राशि उनके खातों में अंतरित की गई है, जो संस्थागत न्याय का प्रतीक है।
इसी तरह, वर्ष 2021 और 2022 में नियुक्त लगभग 1168 सहायक प्राध्यापकों में से रिकॉर्ड 935 नवनियुक्त प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि समाप्त करने के आदेश जारी किए गए हैं। परिवीक्षा समाप्त होना कर्मचारियों के लिए स्थायित्व और पेशेवर सुरक्षा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिससे विभाग के भीतर प्रतिबद्ध शैक्षणिक कार्यबल तैयार हुआ है।
​शोध, अनुसंधान और गैर-अकादमिक स्टाफ का कल्याण
उच्च शिक्षा व्यवस्था में शोध और नवाचार की भूमिका को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा 577 सहायक प्राध्यापकों को पीएचडी करने की अनुमति देना एक दूरदर्शी निर्णय है। अधिक शिक्षक जब शोध से जुड़ेंगे, तो कक्षा में अद्यतन ज्ञान पहुंचेगा और महाविद्यालयों में बौद्धिक विमर्श का स्तर ऊपर उठेगा।
​शिक्षकों के साथ-साथ तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी व्यवस्था की रीढ़ हैं। दिसंबर 2023 से अब तक दिवंगत कर्मचारियों के 34 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है, जो संकटग्रस्त परिवारों को जीवन संभालने का संबल देती है। इसके अतिरिक्त, 324 कर्मचारियों को उच्चतर समयमान वेतनमान प्रदान किया गया है और वर्ष 2024-25 की पदोन्नति संबंधी समस्त कार्यवाहियां समय सीमा में पूर्ण कर ली गई हैं।
​उच्च शिक्षा में समग्र सुधार का उभरता मॉडल
उच्च शिक्षा विभाग के ये फैसले मिलकर एक व्यापक परिवर्तनकारी मॉडल की रचना करते हैं, जहां नेतृत्व सुदृढ़ीकरण, नई भर्ती, सेवा सुरक्षा, कर्मचारी कल्याण, तकनीकी संसाधन और शोध संवर्धन एक साथ आगे बढ़ते हैं। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जो परिवर्तन आज दिखाई दे रहे हैं, वे केवल विभागीय उपलब्धियों की सूची नहीं, बल्कि एक ऐसी नीति-दृष्टि हैं जिसमें शिक्षा को राज्य के भविष्य निर्माण का केंद्रीय माध्यम माना गया है। आने वाले समय में ये प्रयास छत्तीसगढ़ के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को ज्ञान, शोध, नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन के सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करेंगे।

डबल इंजन सरकार के संकल्प को नई गति: केंद्र के ऐतिहासिक निर्णयों से छत्तीसगढ़ को मिलेगा औद्योगिक और कृषि विकास का नया आधार

डबल इंजन सरकार के संकल्प को नई गति: केंद्र के ऐतिहासिक निर्णयों से छत्तीसगढ़ को मिलेगा औद्योगिक और कृषि विकास का नया आधार

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल का जताया आभार

सेमिकॉन 2.0, राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 और मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना से निवेश, रोजगार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

रायपुर-मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा सेमिकॉन 2.0, राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) तथा मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) को स्वीकृति दिए जाने का स्वागत करते हुए इसे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज आत्मनिर्भरता, नवाचार और अत्याधुनिक विनिर्माण के नए युग की ओर तेजी से अग्रसर है। केंद्र सरकार के ये तीनों महत्वपूर्ण निर्णय देश की औद्योगिक क्षमता, कृषि सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले सिद्ध होंगे। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ₹1,27,500 करोड़ की सेमिकॉन 2.0 योजना देश में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए विश्वस्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भी नई औद्योगिक नीति, बेहतर अधोसंरचना, निवेश अनुकूल वातावरण और कौशल विकास के माध्यम से उच्च तकनीक आधारित उद्योगों के लिए तेजी से उभरता हुआ गंतव्य बन रहा है। इस प्रकार की राष्ट्रीय पहल से राज्य में भी निवेश और रोजगार की नई संभावनाएं विकसित होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 देश में उर्वरकों की उपलब्धता को सुदृढ़ करेगी तथा किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराने में सहायक होगी। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों को मिलेगा और कृषि उत्पादन को नई मजबूती प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र की आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र और राज्य सरकार निरंतर समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे भारतीय ब्रांडों, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार तथा स्थानीय विनिर्माण को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी औद्योगिक निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी तथा उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए जा रहे ऐसे दूरदर्शी निर्णय विकसित भारत के साथ-साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी नई गति प्रदान करेंगे। नवाचार, निवेश, तकनीकी आत्मनिर्भरता, आधुनिक विनिर्माण और कृषि सशक्तिकरण पर आधारित यह विकास मॉडल आने वाले वर्षों में देश और प्रदेश दोनों की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पर्वतारोही अमिता श्रीवास को दी बधाई

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पर्वतारोही अमिता श्रीवास को दी बधाई

 अमिता की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए गर्व का विषय, युवाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा - मुख्यमंत्री  साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही सुश्री अमिता श्रीवास ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर इतिहास रचने वाली अमिता श्रीवास को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।इस अवसर पर विधायक गोमती साय उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि अमिता श्रीवास ने अपने साहस, अदम्य इच्छाशक्ति, अनुशासन और अटूट संकल्प के बल पर विश्व की सबसे ऊँची चोटी पर भारत का तिरंगा लहराकर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य के प्रति समर्पण और निरंतर प्रयास से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। अमिता श्रीवास की सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का सशक्त उदाहरण है।

उल्लेखनीय है कि जांजगीर-चांपा जिले की रहने वाली पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने 22 मई को समुद्र तल से 8,848.86 मीटर ऊंची दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाया है।