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बाल कल्याण समितियों में नई नियुक्तियां, सरगुजा और गरियाबंद में अध्यक्ष समेत 5 जिलों में सदस्य नियुक्त

बाल कल्याण समितियों में नई नियुक्तियां, सरगुजा और गरियाबंद में अध्यक्ष समेत 5 जिलों में सदस्य नियुक्त

 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग ने बाल कल्याण समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति का आदेश जारी किया है। यह आदेश 3 सितंबर 2026 को जारी किया गया है। नियुक्तियां किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत की गई हैं।

आदेश के अनुसार सरगुजा जिले में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष पद पर  ज्योति श्रीवास्तव और गरियाबंद में अध्यक्ष पद पर अभिमन्यु ध्रुव की नियुक्ति की गई है।

वहीं दुर्ग, रायगढ़, सुकमा, बीजापुर और जशपुर जिलों की बाल कल्याण समितियों में सदस्यों की नियुक्ति की गई है। दुर्ग में  खुशबू ठाकुर, रायगढ़ में  मृदुला सिसोदिया और दिव्या पाण्डेय, सुकमा में  प्रमिला राव,  राधिका साहू और  गीता, बीजापुर में  पुष्पा सिन्हा और  महावीर माहेश्वरी तथा जशपुर में  सावित्री सोनी को सदस्य नियुक्त किया गया है।

आदेश में कहा गया है कि नियुक्त अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल आदेश जारी होने की तारीख से तीन वर्ष रहेगा। हालांकि, सदस्य या अध्यक्ष के 65 वर्ष की आयु पूरी करने पर नियुक्ति स्वतः समाप्त हो जाएगी।

नियुक्तियां पुलिस सत्यापन होने तक प्रावधिक रहेंगी। संबंधित उम्मीदवारों को आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपने जिले में उपस्थित होकर आवश्यक दस्तावेज और शपथ पत्र जमा करना होगा।

 
 
साइबर अपराधों से बचाव के लिए डिजिटल युग में जागरूकता और सतर्कता अत्यंत आवश्यक- मंत्री नेताम

साइबर अपराधों से बचाव के लिए डिजिटल युग में जागरूकता और सतर्कता अत्यंत आवश्यक- मंत्री नेताम

 00 इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में छत्तीसगढ़ पुलिस के ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

00 देश में रोजाना 61 करोड़ रुपये की हो रही साइबर ठगी, सचेत रहना बेहद जरूरी- डॉ. संजीव शुक्ला

रायपुर। डिजिटल युग में इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। इससे सुरक्षित रहने के लिए जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है। यह बात छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास, किसान कल्याण तथा आदिम जाति मंत्री  रामविचार नेताम ने कही। वे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित “साइबर जागृति अभियान” के तहत एक दिवसीय कार्यशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल विशिष्ट अतिथि तथा रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे।
15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चल रहा विशेष अभियान
छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए 15 अगस्त से 02 अक्टूबर 2026 तक छः सप्ताह का “साइबर जागृति अभियान” चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बैंक खाताधारकों को ऑनलाइन ठगी से बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना है।

चार वर्षों में 12 गुना बढ़े साइबर अपराध
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने चिंताजनक आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि बीते चार सालों में देश के भीतर साइबर अपराधों में 12 गुना और ठगी की राशि में 40 गुना की वृद्धि हुई है। वर्तमान में देश में प्रतिदिन लगभग 61 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो रही है। साइबर ठग लगातार नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं, जिससे लोगों को अत्यधिक सावधान रहने की आवश्यकता है।
पुलिस ने बताए बचाव के ये प्रमुख उपाय
व्यक्तिगत जानकारी न बांटें, किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP), बैंक खाता विवरण, पासवर्ड या एटीएम पिन साझा न करें। किसी भी संदिग्ध या अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। फर्जी नौकरी, निवेश योजनाओं, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग कॉल या सोशल मीडिया पर मिलने वाले प्रलोभनों और धमकियों पर विश्वास न करें।
ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें संपर्क
रायपुर पुलिस के अधिकारियों ने अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध या वित्तीय ठगी का शिकार होता है, तो वह बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करे या पोर्टल
www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराए। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक, कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता, विभिन्न विभागों के संचालक, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने विभागों में रिक्त पदों और भर्तियों की स्थिति की ली उच्च स्तरीय बैठक

मुख्य सचिव ने विभागों में रिक्त पदों और भर्तियों की स्थिति की ली उच्च स्तरीय बैठक

 00 प्रमुख विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दिए आवश्यक निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के सभी विभागों के भारसाधक सचिवों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न प्रशासकीय विभागों में स्वीकृत, भरे और रिक्त पदों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत विभागवार समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित की जा रही भर्ती परीक्षाओं और भेजे गए इंडेंट (मांग पत्र) की प्रगति की जानकारी ली। इसके साथ ही, विभागों में रिक्त पदों की पूर्ति हेतु वित्त विभाग से मिली सहमति, पूर्व में विज्ञापित पदों की स्थिति तथा अब तक की गई नियुक्तियों का ब्योरा तलब किया गया। बैठक में वर्ष 2027 के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले संभावित पदों और सभी विभागों में अद्यतन (अपडेटेड) भर्ती नियमों की स्थिति पर भी गहनता से चर्चा हुई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य शासकीय विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं को गति देना, नियमों को अद्यतन करना और आने वाले वर्षों के लिए नियोजन की स्पष्ट रूपरेखा तैयार करना था। इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में विभिन्न प्रमुख विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और छत्तीसगढ़ चयन मंडल के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  अविनाश चम्पावत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री एवं खनिज विभाग के सचिव  पी.दयानंद, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव  सिद्धार्थ कोमल परदेशी, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, परिवहन विभाग के सचिव  एस.प्रकाश सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं छत्तीसगढ़ चयन मंडल के अधिकारी मौजूद थे।

नहित के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए मंत्री राजवाड़े ने ओड़गी में विकास कार्यों की समीक्षा की

नहित के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए मंत्री राजवाड़े ने ओड़गी में विकास कार्यों की समीक्षा की

 00 अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता के दिए निर्देश

रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज सूरजपुर जिला के ओड़गी के जनपद पंचायत सभाकक्ष में आयोजित विकासखंड स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में शामिल होकर क्षेत्र में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विभागवार योजनाओं और कार्यों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने तथा शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए।

महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े

मंत्री  राजवाड़े ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर योजनाओं एवं विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा आमजन से जुड़ी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और विकास कार्यों का वास्तविक लाभ आमजन को मिले, इसके लिए अधिकारी पूरी जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।

समीक्षा बैठक में क्षेत्र में संचालित विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति, हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन तथा विभागीय योजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को लंबित कार्यों में गति लाने और जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष इन्द्रमणि पैकरा सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

देवभोग ब्रांड गुणवत्ता और विश्वास का प्रतीक - नेताम

देवभोग ब्रांड गुणवत्ता और विश्वास का प्रतीक - नेताम

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के पशुधन विकास मंत्री  रामविचार नेताम दुर्ग जिले के उरला (कुम्हारी) स्थित छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ मर्यादित (देवभोग) द्वारा आयोजित दुग्ध किसान सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देवभोग ब्रांड गुणवत्ता और अटूट विश्वास का प्रतीक बन चुका है, जिसने अपनी शुद्धता के बल पर देश में एक विशिष्ट पहचान कायम की है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री  नेताम ने उरला दुग्ध संयंत्र में नवीन कैंटीन का उद्घाटन किया तथा दुग्ध संयंत्र की विभिन्न प्रणालियों का निरीक्षण कर कार्यप्रणाली का जायजा लिया।

पशुपालकों के लिए तैयार विशेष मार्गदर्शिका का विमोचन

पशुधन विकास मंत्री  नेताम ने पशुपालकों के लिए तैयार विशेष मार्गदर्शिका पुस्तिकाओं, देवभोग के रेडियो जिंगल, रिंगटोन एवं प्रेरक गीत का औपचारिक विमोचन किया। डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाना है, ताकि किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो सके।

दुग्ध उत्पादकों और किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता

पशुधन विकास मंत्री नेताम ने कहा कि पशुपालन को आजीविका का मजबूत साधन बनाने के लिए दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण, विपणन नेटवर्क और तकनीकी सेवाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि दुग्ध उत्पादकों और किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए डेयरी विकास की कार्ययोजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करें। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप ’’देवभोग’’ को पूरे देश में गुणवत्ता और विश्वास के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक उत्पादन व्यवस्था, विपणन नेटवर्क और किसानों की भागीदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा रहा है। इससे दुग्ध उत्पादक किसानों की आय, आत्मनिर्भरता और समृद्धि में निरंतर वृद्धि होगी।

सम्मेलन में पशु चिकित्सा सेवाएं के संचालक  चंद्रकांत वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में दुग्ध उत्पादक किसान एवं महिला पशुपालक उपस्थित थे।

आवासीय संस्थाओं को अपना घर और बच्चों को अपना समझकर करें कार्य- शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव

आवासीय संस्थाओं को अपना घर और बच्चों को अपना समझकर करें कार्य- शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव

 रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री  गजेन्द्र यादव की अध्यक्षता में जिला मुख्यालय स्थित नवीन विश्राम गृह में जिले के समस्त पोटा केबिन आवासीय विद्यालयों, पोटा केबिन हाई स्कूल छात्रावासों एवं कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों के अधीक्षकों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में आवासीय संस्थाओं की शैक्षणिक व्यवस्था के साथ बच्चों के आवास, भोजन,  स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा, पेयजल, विद्युत एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की गई।

शिक्षा मंत्री  यादव ने कहा कि आवासीय विद्यालय एवं छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की शिक्षा के साथ उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा, पोषण एवं समुचित देखभाल की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधीक्षकों को संस्था को अपना घर और बच्चों को अपने बच्चों की तरह समझकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधीक्षक संस्था में निवास करें और बच्चों के बीच नियमित रूप से उपस्थित रहकर उनकी समस्याओं को समझें तथा संवेदनशीलता के साथ उनका निराकरण करें।

उन्होंने प्रत्येक संस्था में शासन द्वारा निर्धारित समय-सारणी एवं शैक्षणिक कैलेण्डर का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रार्थना, अध्ययन, भोजन, खेलकूद, संध्याकालीन अध्ययन एवं रात्रि विश्राम तक बच्चों की दिनचर्या सुव्यवस्थित रखने तथा प्रार्थना के साथ मंत्रोच्चार एवं अमृतवाणी विचार का वाचन कराने कहा। बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए मंत्री ने बीमार होने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्था में रेफर करने के निर्देश दिए। उन्होंने नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने को कहा। भोजन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्धारित मीनू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण, पौष्टिक, स्वच्छ एवं गर्म भोजन उपलब्ध कराने तथा रसोईघर एवं खाद्य सामग्री के भंडारण की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।

मंत्री ने जिला प्रशासन को आवासीय संस्थाओं के नियमित एवं औचक निरीक्षण के लिए अधिकारियों का दल गठित करने तथा भवन, छात्रावास, रसोईघर, शौचालय, स्नानागार, पेयजल, विद्युत एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच कर आवश्यक कमियों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित,  स्वस्थ, अनुशासित एवं सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बैठक में विधायक श्री चैतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री अरविंद कुंजाम, कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव, जिला पंचायत सीईओ श्री एम. भार्गव, संयुक्त संचालक शिक्षा बस्तर संभाग श्री एच. आर. सोम, समग्र शिक्षा के उप संचालक श्री दिनेश कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रमोद सिंह, जिला मिशन समन्वयक श्री हरीश गौतम, सहायक परियोजना समन्वयक श्री राजेन्द्र पाण्डेय सहित संबंधित अधिकारी एवं आवासीय संस्थाओं के अधीक्षक उपस्थित रहे।

CG – तीन दिन से लापता युवक की इस हाल में मिली लाश, इलाके में फैली सनसनी, पुलिस जांच में जुटी…

CG – तीन दिन से लापता युवक की इस हाल में मिली लाश, इलाके में फैली सनसनी, पुलिस जांच में जुटी…

 कोरबा। छत्तीसगढ़ कोरबा जिले के कटघोरा थाना क्षेत्र के आंची दादर में एक सुनसान कमरे में युवक का शव मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान अभिनय रजक पिता शंकर रजक के रूप में हुई है। शव मिलने की खबर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए।

ग्रामीणों ने कमरे में शव पड़ा देखा तो इसकी सूचना तुरंत कटघोरा पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई शुरू की।

कटघोरा थाना प्रभारी प्रेमचंद साहू ने बताया कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह अभी स्पष्ट नहीं है। सुनसान कमरे में शव मिलने के कारण मामला संदिग्ध माना जा रहा है। पुलिस ने घटनास्थल से जरूरी सबूत जुटाई है, फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता चल सकेगा।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अभिनय शराब पीने का आदी था और अक्सर नशे में रहता था। आशंका जताई जा रही है कि नशे की हालत में वह कमरे में गया होगा, जहां उसकी मौत हो गई। हालांकि, पुलिस ने अभी किसी संभावना की पुष्टि नहीं की है।

फिलहाल पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। युवक आखिरी बार कब और किसके साथ देखा गया था, वह कमरे तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

महिलाओं के संपत्ति अधिकार को मजबूत कर रही विष्णु भैया की सरकार, रजिस्ट्री में मिल रही 50 प्रतिशत की छूट……

महिलाओं के संपत्ति अधिकार को मजबूत कर रही विष्णु भैया की सरकार, रजिस्ट्री में मिल रही 50 प्रतिशत की छूट……

 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल से महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिलाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य  सरकार द्वारा महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने का सीधा लाभ अब प्रदेश की महिलाओं को मिल रहा है। रायगढ़ की शर्मिला मिश्रा ने इस सुविधा का लाभ उठाते हुए जमीन की रजिस्ट्री कराई, जिससे उन्हें करीब 25 हजार रुपये की बचत हुई। उन्होंने इस जनहितकारी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और  वित्त मंत्री  ओपी चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार महिलाओं के नाम पर जमीन एवं अन्य अचल संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क की दर को आधा कर दिया गया है। पहले संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर 4 प्रतिशत की दर से पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे अब महिलाओं के पक्ष में होने वाली रजिस्ट्री के लिए घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इस निर्णय से महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने और संपत्ति में उनकी भागीदारी बढ़ाने को प्रोत्साहन मिल रहा है।

रजिस्ट्री के खर्च में मिली सीधी आर्थिक राहत

रायगढ़ निवासी शर्मिला मिश्रा ने सरकार की इस सुविधा का लाभ लेते हुए जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम कराई। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उन्हें करीब 25 हजार रुपये की बचत हुई। उन्होंने बताया कि सरकार का यह निर्णय महिलाओं के लिए आर्थिक रूप से राहत देने वाला है। इससे न केवल रजिस्ट्री का खर्च कम हुआ है, बल्कि महिलाओं के नाम पर संपत्ति होने से उनके आर्थिक अधिकार और सामाजिक सुरक्षा भी मजबूत होती है।

शर्मिला मिश्रा ने कहा कि महिलाओं के नाम पर संपत्ति को प्रोत्साहित करने का यह निर्णय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से उनके आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

विद्यार्थियों का कल्याण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हो विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता - राज्यपाल डेका

विद्यार्थियों का कल्याण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हो विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता - राज्यपाल डेका

 00 निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में नैक ग्रेडिंग, पीएचडी की गुणवत्ता, पाठ्यक्रमों और सामाजिक दायित्वों की समीक्षा

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि विद्यार्थियों का कल्याण विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विश्वविद्यालय शिक्षा के पवित्र मंदिर हैं, इसलिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। राज्यपाल रमेन डेका ने आज निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक लेकर विश्वविद्यालयों में शिक्षा एवं शोध की गुणवत्ता सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को नैक में बेहतर ग्रेडिंग प्राप्त करने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और शिक्षकों का अनुपात संतुलित होना चाहिए तथा विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। प्रत्येक विश्वविद्यालय में कम से कम 1000 विद्यार्थियों की संख्या सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करने को कहा।

विश्वविद्यालय द्वारा शोधार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहिए
डेका ने कहा कि पीएच.डी. उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी होनी चाहिए। पीएच.डी. के लिए होने वाले पंजीयनों की विशेषज्ञों के माध्यम से रैंडम चेकिंग कराई जाएगी, ताकि शोध कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल उपाधि प्रदान करने तक सीमित न रहकर ऐसे शोध को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसका समाज और देश के विकास में वास्तविक योगदान हो।

रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दें
राज्यपाल ने कहा कि कोई भी नया पाठ्यक्रम प्रारंभ करने से पहले विश्वविद्यालय संबंधित क्षेत्र में सर्वेक्षण कर आवश्यकता और विद्यार्थियों की रुचि का आकलन करें। जिन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संख्या नहीं है, उन्हें बंद करने पर विचार किया जाए। अनावश्यक रूप से पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ाने के बजाय रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दी जाए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल
डेका ने एनवायरनमेंटल साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।

विश्वविद्यालय गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका हो
डेका ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को अपने आसपास के गांवों को गोद लेकर वहां शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नियमित कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने सामाजिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाना चाहिए। गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ब्रेस्ट कैंसर सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी विश्वविद्यालय सक्रिय भूमिका निभाएं।
स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान महत्वपूर्ण
राज्यपाल ने विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को प्रत्येक विद्यार्थी तक योग पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थियों को योग के लिए इस प्रकार प्रेरित किया जाए कि यह उनकी दैनिक जीवनशैली और आदत का हिस्सा बन जाए।
छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा दें

डेका ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए विश्वविद्यालयों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें

राज्यपाल ने कहा कि फार्मेसी सीधे मानव स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए जिन विश्वविद्यालयों में फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालित हैं, वहां विद्यार्थियों के बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ टाई-अप किया जाए। उन्होंने फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें
डेका ने विश्वविद्यालयों से नशा मुक्ति अभियान में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें नशे से दूर रखने में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय करें

राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों को शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्य करने का आह्वान किया। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उच्च शिक्षा सचिव अविनाश चंपावत, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष श्री वी. के. गोयल सहित विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे।

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए और अधिक प्रयास जरूरी - राज्यपाल

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए और अधिक प्रयास जरूरी - राज्यपाल

 00 वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज

00 राज्यपाल ने टीम के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर किया सम्मानित

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए छत्तीसगढ़ में अभी और बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। उन्हें गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री सहज रूप से उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। तकनीक के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने का वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का प्रयास सराहनीय और अनुकरणीय है।

वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम को उल्लेखनीय योगदान के लिए किया सम्मानित
राज्यपाल डेका से आज लोक भवन में वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ के सदस्यों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल ने टीम के सभी सदस्यों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। टीम की उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने पर उन्होंने सभी सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
शारदा ने 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी
वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम द्वारा दृष्टिबाधित एवं सामान्य विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस अभिनव अभियान की शुरुआत 5 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका सुश्री के. शारदा के नेतृत्व में हुई। सुश्री शारदा स्वयं अब तक 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी हैं। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के 30 शिक्षक- शिक्षिकाएं अपने नियमित शैक्षणिक दायित्वों के साथ इस कार्य में योगदान दे रहे हैं।
दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने समान अवसर

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ऑडियो के माध्यम से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को और व्यापक बनाने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक दृष्टिबाधित विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।

वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल को 8 लाख से अधिक बार देखा गया
वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल पर 107 से अधिक प्लेलिस्ट उपलब्ध हैं और इसे अब तक 8 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। टीम द्वारा विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित एवं उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार की जा रही है। इस अवसर पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की छत्तीसगढ़ हेड डॉ. सोनल राजेश शर्मा सहित वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम के सभी सदस्य उपस्थित थे।

CG : सितंबर में इन 7 दिनों तक मांस-मटन की बिक्री पर लगी रोक, होटल-रेस्टोरेंट भी रडार पर, जानिए वजह…..

CG : सितंबर में इन 7 दिनों तक मांस-मटन की बिक्री पर लगी रोक, होटल-रेस्टोरेंट भी रडार पर, जानिए वजह…..

 रायपुर। धार्मिक पर्वों और त्योहारों को देखते हुए रायपुर नगर निगम क्षेत्र में सितंबर महीने के 7 दिनों तक मांस-मटन की बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने शासन के निर्देश के तहत इन निर्धारित तिथियों पर पशुवध गृह और मांस-मटन की सभी दुकानों को बंद रखने के आदेश जारी किए हैं।

प्रतिबंध की अवधि में मांस-मटन की बिक्री या पशुवध करते पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नगर निगम द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी। निगम की टीम होटल, रेस्टोरेंट और मांस-मटन की दुकानों में भी निगरानी रखेगी, ताकि प्रतिबंध का प्रभावी ढंग से पालन कराया जा सके। नगर निगम ने दुकानदारों और व्यवसायियों से निर्धारित तिथियों पर दुकानें बंद रखने और शासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

7 दिन बंद रहेगी मांस-मटन की बिक्री

नगर निगम के अनुसार, 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मांस-मटन की बिक्री पर रोक रहेगी। इसके बाद 7 सितंबर को पर्युषण पर्व के प्रथम दिवस, 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी, 15 सितंबर को पर्युषण पर्व के अंतिम दिवस, 22 सितंबर को डोल ग्यारस, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी तथा 26 सितंबर को संवत्सरी एवं उत्तम क्षमा के अवसर पर भी मांस-मटन की दुकानें और पशुवध गृह बंद रखे जाएंगे।

होटल-रेस्टोरेंट पर भी रहेगी नजर

नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध केवल मांस-मटन की दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा। होटल और रेस्टोरेंट में भी मांस-मटन की बिक्री या परोसे जाने की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर निगम का स्वास्थ्य विभाग इन प्रतिष्ठानों पर भी नजर रखेगा। प्रतिबंधित दिनों में मांस-मटन बेचते पाए जाने पर संबंधित सामग्री की तत्काल जब्ती की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

लगातार निगरानी करेंगे निगम के अधिकारी

प्रतिबंध का प्रभावी ढंग से पालन कराने के लिए नगर निगम ने अपने मैदानी अमले को भी सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। जोन स्वास्थ्य अधिकारी और स्वच्छता निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में मांस-मटन की दुकानों के साथ होटल-रेस्टोरेंट की निगरानी करेंगे। प्रतिबंधित दिनों में दुकानें खुली मिलने या मांस-मटन की बिक्री किए जाने की स्थिति में संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखकर फैसला

नगर निगम की ओर से यह प्रतिबंध धार्मिक पर्वों के मद्देनजर लगाया गया है। सितंबर में अलग-अलग तिथियों पर कई प्रमुख धार्मिक पर्व और जैन समाज के महत्वपूर्ण आयोजन होने हैं। इन्हीं अवसरों को ध्यान में रखते हुए शासन के निर्देश के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में पशुवध और मांस-मटन की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

ऐसे में सितंबर महीने में इन 7 निर्धारित दिनों पर मांस-मटन की दुकानें बंद रहेंगी। निगम ने संबंधित दुकानदारों और व्यवसायियों से आदेश का पालन करने की अपील की है, वहीं अधिकारियों को नियमों का उल्लंघन होने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

किरण सिंह देव से मिले BJP अध्यक्ष नितिन नबीन, दिल्ली में जाना हाल; डॉक्टरों से इलाज की जानकारी ली

किरण सिंह देव से मिले BJP अध्यक्ष नितिन नबीन, दिल्ली में जाना हाल; डॉक्टरों से इलाज की जानकारी ली

 रायपुर। सड़क हादसे में घायल छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव का दिल्ली के मेदांता अस्पताल में इलाज जारी है। इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उनसे मुलाकात कर कुशलक्षेम जाना और डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य व इलाज की जानकारी ली।मुलाकात के बाद किरण सिंह देव ने सोशल मीडिया के जरिए नितिन नबीन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दिल्ली में आत्मीय मुलाकात कर उनका हाल जाना और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने नितिन नबीन के स्नेह और शुभेक्षाओं के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

29 जुलाई को हुआ था सड़क हादसा

किरण सिंह देव 29 जुलाई को उत्तर प्रदेश में सड़क हादसे का शिकार हुए थे। वह परिवार के साथ बागेश्वर धाम से दर्शन कर लौट रहे थे। इसी दौरान झांसी-ललितपुर हाईवे पर सामने से आ रहे वाहन को बचाने की कोशिश में चालक ने अचानक ब्रेक लगाया, जिससे कार का संतुलन बिगड़ गया और वह ट्रक से जा टकराई।

हादसे के समय उनकी सुरक्षा में तैनात पीएसओ भी वाहन में मौजूद थे। परिवार के अन्य सदस्य दूसरी कार में यात्रा कर रहे थे। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से किरण सिंह देव को झांसी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया।

इसके बाद 30 जुलाई को उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के मेदांता अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने की चर्चाओं से भी जोड़ी जा रही मुलाकात

नितिन नबीन और किरण सिंह देव की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसे कुछ लोग छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने की संभावनाओं से भी जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, मुलाकात के दौरान इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

 
Weather Alert : छत्तीसगढ़ में फिर बिगड़ा मौसम,भारी बारिश के साथ आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी

Weather Alert : छत्तीसगढ़ में फिर बिगड़ा मौसम,भारी बारिश के साथ आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी

 रायपुर – छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय है और प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने आज कई जिलों में भारी बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक बलरामपुर, सरगुजा, मनेंद्रगढ़, सूरजपुर, रायपुर, बिलासपुर, धमतरी, जांजगीर-चांपा, दुर्ग, कोरबा और महासमुंद समेत कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है। इस दौरान कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात का खतरा भी बना हुआ है। रायपुर के लिए भी मौसम विभाग ने 3 सितंबर को गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी है।मौसम खराब होने की स्थिति में लोगों को सावधानी बरतने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। आंधी और बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने और सुरक्षित स्थान पर रहने की अपील की गई है।

छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामले पर स्वास्थ्य मंत्री बोले-पैनिक नहीं,सतर्क रहें

छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामले पर स्वास्थ्य मंत्री बोले-पैनिक नहीं,सतर्क रहें

 रायपुर -छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू और कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का बयानसमें आया हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक स्वाइन फ्लू के 152 मरीज सामने आए हैं, जिनमें से 114 मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं, जबकि 38 मरीज एक्टिव हैं। वहीं, प्रदेश में कोरोना के भी दो मरीज सामने आए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति को लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है। कोरोना से निपटने के लिए पहले लगाई गई वैक्सीन की डोज के चलते लोगों के शरीर में पर्याप्त इम्यूनिटी मौजूद है।

स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक,मरीजों की जांच और इलाज के लिए जिला अस्पताल और मेकाहारा में जांच की पूरी व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत के मुताबिक स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से अपील की है कि स्वाइन फ्लू या कोरोना से जुड़े किसी भी तरह के लक्षण नजर आने पर लापरवाही न बरतें। लक्षण दिखाई देते ही तत्काल अस्पताल पहुंचकर जांच कराएं और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार इलाज करवाएं।

छत्तीसगढ़ : 3 पदाधिकारियों को मिला राज्य मंत्री का दर्जा, जानिए कौन-कौन हैं शामिल…

छत्तीसगढ़ : 3 पदाधिकारियों को मिला राज्य मंत्री का दर्जा, जानिए कौन-कौन हैं शामिल…

 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य के विभिन्न निगम, मंडल और आयोग के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया है। इस संबंध में शासन ने 2 सितंबर को आदेश जारी किया है।

जारी आदेश के अनुसार, संजय अग्रवाल को छत्तीसगढ़ राज्य योग आयोग के अध्यक्ष के रूप में राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। अजय शुक्ला को छत्तीसगढ़ राज्य आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में राज्य मंत्री का दर्जा मिला है। वहीं शरद अवस्थी को इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के रूप में राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है।

नियमानुसार मिलेंगी सुविधाएं

शासन के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राज्य मंत्री का दर्जा केवल शिष्टाचार (प्रोटोकॉल) के लिए प्रदान किया गया है। संबंधित पदाधिकारियों को नियमानुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने का उत्तरदायित्व संबंधित प्रशासनिक विभाग/आयोग का होगा।

आदेश में यह भी कहा गया है कि यह सूची किसी प्रकार की वरिष्ठता या प्रोटोकॉल की स्थिति नहीं दर्शाती है। राज्य मंत्री का दर्जा आदेश जारी होने की तारीख से प्रभावशील होगा।

माइनिंग से हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग तक, छत्तीसगढ़ लगा रहा दांव

माइनिंग से हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग तक, छत्तीसगढ़ लगा रहा दांव

 रायपुर- छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान लंबे समय से खनिज और प्राथमिक प्रसंस्करण पर आधारित रही है। अब राज्य इस पहचान को बदलते हुए कच्चे संसाधनों की बजाय वैल्यू एडेड और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंगका केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार की औद्योगिक रणनीति में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, रक्षा उपकरण, एआई और ग्रीन स्टील जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी जा रही है।

राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में इस बदलाव का आधार तैयार किया गया है। इस नीति में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और उनके मूल्य संवर्धन के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एआई, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मा, रक्षा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन दिया गया है। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ को केवल खनिजों का आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि तैयार उत्पादों और उन्नत तकनीक आधारित उद्योगों का केंद्र बनाना है।

*करीब 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव*

औद्योगिक नीति लागू होने के बाद से राज्य में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है। राज्य के निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के अनुसार पिछले करीब 18 महीनों में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावप्राप्त हुए हैं। इनसे 1.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। खास बात यह है कि इन प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा पारंपरिक खनिज आधारित उद्योगों से आगे बढ़कर एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे विशेष क्षेत्रों से जुड़ा है।

नवा रायपुर में एआई और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव राज्य की बदलती औद्योगिक दिशा को दर्शाते हैं। इसी क्रम में राजनांदगांव मेंइलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0)को मंजूरी मिली है। इससे 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और करीब 9,000 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार आने की उम्मीद है।

*स्टील से आगे ग्रीन स्टील की ओर*

स्टील उत्पादन में मजबूत आधार रखने वाला छत्तीसगढ़ अब इस क्षेत्र में भी अगली पीढ़ी के उत्पादन पर जोर दे रहा है। देश में कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित विनिर्माण को बढ़ावा देने के बीचग्रीन स्टीलराज्य के लिए बड़ा अवसर बनकर उभरा है। पिछले महीने आयोजित छत्तीसगढ़ ग्रीन स्टील डायलॉग के दौरान करीब 13,840 करोड़ रुपये के निवेश प्रतिबद्धताओंने इस क्षेत्र की संभावनाओं को मजबूत किया है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष स्टील के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई जैसी योजनाएं चल रही हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ अपने खनिज संसाधन, मौजूदा स्टील उद्योग और ऊर्जा आधार का इस्तेमाल उच्च मूल्य वाले स्टील उत्पादों के निर्माण में कर सकता है।

*फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स में नई संभावनाएं*

फार्मास्यूटिकल्स भी राज्य की नई औद्योगिक तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र में करीब992.53 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावआए हैं, जबकि 216 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट कार्यान्वयन के चरण में हैं।इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विस्तार हो रहा है। केंद्र की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत देशभर में 69 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। छत्तीसगढ़ में EMC 2.0 जैसी पहल इस राष्ट्रीय सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का अवसर देती है।

*संसाधन से उत्पाद तक*

बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में भी औद्योगिक विकास की रणनीति केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है। वन उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के जरिए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ सकते हैं।

निवेश को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था, SIPB और ऑनलाइन स्वीकृति तंत्र को मजबूत किया है। 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता आधारित सुविधाएं और त्वरित अनुमोदन की व्यवस्था भी की गई है।

छत्तीसगढ़ के पास खनिज, ऊर्जा और औद्योगिक आधार की ताकत पहले से मौजूद है। अब लक्ष्य इन संसाधनों से आगे बढ़करउच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्माणकरना है। इलेक्ट्रॉनिक्स से ग्रीन स्टील और फार्मा से एआई तक नए क्षेत्रों में बढ़ता निवेश संकेत दे रहा है कि राज्य अपनी औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी में है।

एम्स रायपुर का तीसरा दीक्षांत समारोह , छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खतरे को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन के बल पर समाप्त किया गया – उपराष्ट्रपति  राधाकृष्णन

एम्स रायपुर का तीसरा दीक्षांत समारोह , छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खतरे को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन के बल पर समाप्त किया गया – उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

 छत्तीसगढ़ अतीत के अंधकार से निकलकर विकास और प्रगति के नए युग की ओर अग्रसर – उपराष्ट्रपति

ज्ञान के साथ करूणा और नैतिक मूल्य को अपनाएं युवा चिकित्स- राज्यपाल रमेन डेका

एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में भी 376 महिलाओं और 313 पुरुषों को डिग्री मिली

रायपुर। उपराष्ट्रपति  सी.पी. राधाकृष्णन ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होकर कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का क्षण नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि “आज युवाओं को जो डिग्रियां मिल रही हैं और कल इससे कहीं अधिक मूल्यवान जिम्मेदारी सौंपी जाएगी- भारत की जनता का स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन।” एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में 376 महिलाओं और 313 पुरुषों को डिग्री प्रदाय की गई। उपराष्ट्रपति ने मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।

*एम्स रायपुर का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे उल्लेखनीय परिवर्तन को दर्शाता है*

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2012 में स्थापना के बाद से एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि बेहद कम समय में यह संस्थान छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के लिए एक प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है और ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों तक भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे उल्लेखनीय परिवर्तन को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में दशकों से चली आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि कठिन भौगोलिक स्थिति, आवागमन की खराब सुविधा और वामपंथी उग्रवाद ने विकास में गंभीर बाधाएं खड़ी की। कई दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में भय और हिंसा ने सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के विकास को बाधित कर दिया, जिससे समुदायों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में दूरी और अभाव का सामना करना पड़ता था।

*छत्तीसगढ़ समृद्धि, विकास और प्रगति के एक नए युग की ओर अग्रसर*

उपराष्ट्रपति ने अपने उदबोधन में आगे कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपने अतीत के अंधकार से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के एक नए युग की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रतिबद्ध नेतृत्व को दिया। दशकों से चले आ रहे नक्सली खतरे का अंत हो गया है और जिन क्षेत्रों को कभी हिंसा के लिए जाना जाता था, उन्हें अब सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, रोड़ कनेक्टिविटी, निवेश और अवसरों के लिए जाना जाने लगा है। उन्होंने कहा, यह परिवर्तन इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन में कितना बड़ा बदलाव लाया जा सकता हैं।

*उन्नत चिकित्सा तेजी से सुलभ हो रही है*

उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नए छत्तीसगढ़ के बेहतरीन प्रतीकों में से एक बताया, जो भय और अभाव के युग से शांति, प्रगति और संभावनाओं के युग की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने उन्नत स्वास्थ्य सेवा और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में किए गए पहले किडनी प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर, कॉर्नियल प्रत्यारोपण और कान प्रत्यारोपण को महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उल्लेख किया, जो यह दर्शाती हैं कि इस क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा कितनी तेजी से सुलभ हो रही है। उन्होंने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

*उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में हुई उल्लेखनीय वृद्धि*

विकसित भारत के राष्ट्रीय विजन को प्राप्त करने के लिए संतुलित विकास के महत्व पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह दृष्टिकोण तभी साकार हो सकता है, जब प्रत्येक राज्य, जिला और गांव का विकास हो। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा तक पहुंच विकसित भारत की परिकल्पना का मूल आधार है। उन्होंने पिछले बारह वर्षों के दौरान उच्च शिक्षा के विस्तार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014-15 में महिला नामांकन जहां 1.57 करोड़ था, 2023-24 में यह बढ़कर अब 2.24 करोड़ हो गया, जो 42.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

*छत्तीसगढ़ का रूपांतरण 2047 तक विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनेगा*

स्नातकों को संबोधित करते हुए, उप राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने युवा स्नातकों से हमेशा दृढ़ता से नशीली दवाओं को न कहने और एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया, जहां प्रौद्योगिकी सभी नागरिकों तक पहुंचे और प्रत्येक युवा भारतीय एक बेहतर भविष्य की आकांक्षा कर सके। उन्होंने कहा आपका ज्ञान स्वास्थ्य प्रदान करे, आपका शोध नवाचार लाए और आपकी सेवा प्रेरणा दे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि एम्स रायपुर को नैदानिक उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नवाचार, जन स्वास्थ्य और करुणापूर्ण सेवा में निरंतर सफलता की कामना की। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ का रूपांतरण 2047 तक विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनेगा।

राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल ज्ञान और कौशल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धैर्य, करुणा और गहरी जिम्मेदारी की भावना भी आवश्यक है। चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य मानवता की सेवा है और एक चिकित्सक की श्रेष्ठता केवल उसकी पेशेवर दक्षता से नहीं, बल्कि मरीजों के साथ किए जाने वाले व्यवहार, विश्वास और सम्मान से भी निर्धारित होती है। उन्होंने सभी उत्तीर्ण विद्यार्थियों को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल, सफल एवं संतोषप्रद भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

*एम्स रायपुर की बढ़ती प्रतिष्ठा छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय*

राज्यपाल ने कहा कि नव-स्नातक चिकित्सकों से स्वास्थ्य सेवाओं के विकास, नवाचार को प्रोत्साहित करने और चिकित्सा अनुसंधान में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों, विशिष्ट चिकित्सकीय सेवाओं और अनुसंधान पहलों के माध्यम से संस्थान क्षेत्र के स्वास्थ्य तंत्र को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एम्स रायपुर की बढ़ती प्रतिष्ठा छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और यह संस्थान के प्राध्यापकों, चिकित्सा विशेषज्ञों तथा पूरी टीम की उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से चिकित्सा विशेषज्ञता के साथ वैज्ञानिक जिज्ञासा और अनुसंधान आधारित सोच को अपनाने तथा समाज की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन समाधान विकसित करने का आग्रह किया।

केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने भी विद्यार्थियों को बधाई दी और आयुष्मान भारत, PM-JAY ABHA और e-Sanjeevani  जैसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों का उल्लेख करते हुए युवा डॉक्टरों से चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ करुणा, नैतिकता, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, शोध और समाज सेवा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने संस्थान की प्रगति और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए चिकित्सा शिक्षा, शोध, नवाचार और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में उच्च मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने स्मृातक विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और पेशेवर कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र की सेवा में करने का आह्वान किया।

*विद्यार्थियों को 689 डिग्री प्रमाण-पत्रों का वितरण, उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 16 विद्यार्थियों को किया पुरस्कृत*

दीक्षांत समारोह का प्रमुख आकर्षण विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को 689 डिग्री प्रमाण-पत्रों का वितरण रहा। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 16 पुरस्कार भी प्रदान किए गए। यह अवसर विद्यार्थियों, उनके परिवारों, शिक्षकों और पूरे एम्स रायपुर परिवार के लिए गर्व और खुशी का क्षण रहा।

समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल और रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद  बृजमोहन अग्रवाल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित और एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा और एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह में ‘नसे को ना कहें की शपथ भी दिलाई गई।

बिजली बिल में फिर बढ़ेगा बोझ, सितंबर में 13% एफपीपीएएस की वसूली, 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं को झटका

बिजली बिल में फिर बढ़ेगा बोझ, सितंबर में 13% एफपीपीएएस की वसूली, 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं को झटका

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के करीब 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में बिजली बिल में राहत मिलने की उम्मीद कम है। सितंबर में जारी होने वाले अगस्त के बिजली बिल में 13 फीसदी एफपीपीएएस (फ्यूल पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज) लगने की जानकारी सामने आई है। इसमें पिछले महीने का शेष 8 फीसदी शुल्क और अगस्त के लिए निर्धारित 5 फीसदी नया शुल्क शामिल है।

अगस्त के लिए एफपीपीएएस शुल्क 16 फीसदी तय किया गया था, लेकिन जुलाई में बिजली टैरिफ बढ़ने के कारण फिलहाल केवल 10 फीसदी की वसूली की गई। शेष 8 फीसदी राशि को आगे के बिल में लेने का निर्णय लिया गया था। अब यह राशि अगस्त के नए 5 फीसदी शुल्क के साथ सितंबर के बिजली बिल में जुड़ सकती है।

एफपीपीएएस शुल्क हर महीने बिजली खरीद की लागत के आधार पर तय होता है। इसी वजह से उपभोक्ताओं के बिल में इसका असर भी लगातार बदल रहा है। इस साल जनवरी में दिसंबर के बिल में 13.64 फीसदी एफपीपीएएस लगाया गया था। इसमें 5.43 फीसदी पिछला शुल्क और दिसंबर का 8.21 फीसदी नया शुल्क शामिल था।

फरवरी में जनवरी के बिल पर भी उपभोक्ताओं से पुराने 8.21 फीसदी शुल्क के साथ जनवरी का नया 4.14 फीसदी शुल्क लिया गया। इस तरह लगातार दोहरे शुल्क का असर बिजली बिल पर दिखाई दिया।

मार्च में फरवरी के बिजली बिल पर एफपीपीएएस शुल्क 5.91 फीसदी रहा। इसके बाद अप्रैल में मार्च के बिल पर यह घटकर 4.24 फीसदी हो गया। मई में अप्रैल के बिल में 3.98 फीसदी शुल्क लगाया गया।

हालांकि, इसके बाद एफपीपीएएस में फिर बढ़ोतरी हुई। जून में मई के बिल पर करीब 9.13 फीसदी, जबकि जुलाई में जून के बिल पर 11.33 फीसदी शुल्क वसूला गया।

अगस्त में जारी जुलाई के बिजली बिल में 10 फीसदी एफपीपीएएस लगाया गया। बताया गया कि उस समय शुल्क 18 फीसदी निर्धारित था, लेकिन जुलाई में बिजली टैरिफ बढ़ाए जाने के कारण पूरी राशि की जगह केवल 10 फीसदी की वसूली की गई। बाकी 8 फीसदी राशि को अगले बिलों में समायोजित किया जाना था।

अब अगस्त के लिए निर्धारित 5 फीसदी नए शुल्क के साथ यह 8 फीसदी बकाया राशि भी सितंबर के बिल में जोड़े जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं पर कुल 13 फीसदी एफपीपीएएस शुल्क का भार पड़ सकता है।

पावर कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में एफपीपीएएस बढ़ने की बड़ी वजह गर्मी के दौरान प्रदेश में बिजली की बढ़ी मांग और बाहर से अधिक बिजली खरीदना है। मांग बढ़ने पर अतिरिक्त बिजली की जरूरत पड़ी, जिसकी पूर्ति बाहरी स्रोतों से की गई।

इसके अलावा कोरबा स्थित 210-210 मेगावाट क्षमता वाले दो बिजली संयंत्र करीब दो महीने तक बंद रहे। इनमें से एक 210 मेगावाट क्षमता का संयंत्र अभी भी बंद बताया जा रहा है। ऐसे में प्रदेश की बिजली जरूरत पूरी करने के लिए बाहर से बिजली खरीदने का दबाव बढ़ा है। अतिरिक्त बिजली खरीद की लागत का असर अब एफपीपीएएस के जरिए सीधे उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर पड़ रहा है।

छत्तीसगढ़ SI मुख्य परीक्षा-2024 का शेड्यूल जारी, 2 से 4 नवंबर तक होगी परीक्षा; पांच संभागीय मुख्यालयों में केंद्र

छत्तीसगढ़ SI मुख्य परीक्षा-2024 का शेड्यूल जारी, 2 से 4 नवंबर तक होगी परीक्षा; पांच संभागीय मुख्यालयों में केंद्र

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में सूबेदार, उप निरीक्षक (SI) संवर्ग और प्लाटून कमांडर मुख्य परीक्षा-2024 को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म हो गया है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने मुख्य परीक्षा का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। परीक्षा 2, 3 और 4 नवंबर 2026 को प्रदेश के पांच संभागीय मुख्यालयों में आयोजित की जाएगी।

मुख्य परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 20 अगस्त को दोपहर 12 बजे से शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी 19 सितंबर 2026 की रात 11.59 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन में किसी तरह की गलती होने पर उम्मीदवारों को 20 और 21 सितंबर को संशोधन का अवसर दिया जाएगा।

सीजी पीएससी ने मुख्य परीक्षा के लिए प्रदेश में पांच परीक्षा केंद्र निर्धारित किए हैं। अभ्यर्थी रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर (बस्तर) और अंबिकापुर (सरगुजा) में परीक्षा देंगे। इस व्यवस्था से अलग-अलग क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को अपने संबंधित संभागीय मुख्यालय के स्तर पर परीक्षा देने की सुविधा मिलेगी।

सीजी पीएससी ने छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासियों के लिए परीक्षा शुल्क को लेकर भी राहत दी है। परीक्षा या साक्षात्कार में शामिल होने वाले स्थानीय अभ्यर्थियों को परीक्षा शुल्क वापस किया जाएगा। शुल्क की राशि सीधे अभ्यर्थियों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

आवेदन के दौरान छत्तीसगढ़ के आरक्षित वर्ग यानी एससी, एसटी और ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए 300 रुपये, जबकि अन्य सभी श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए 400 रुपये परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है।

मुख्य परीक्षा में कुल पांच पेपर होंगे। परीक्षा तीन दिनों तक दो पालियों में आयोजित की जाएगी। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार—

2 नवंबर:

  • सुबह की पाली — भाषा (हिंदी एवं अंग्रेजी)
  • दोपहर की पाली — सामान्य ज्ञान

3 नवंबर:

  • सुबह की पाली — एप्टीट्यूड टेस्ट

4 नवंबर:

  • सुबह की पाली — विज्ञान (भौतिकी, रसायन एवं गणित)
  • दोपहर की पाली — कंप्यूटर साइंस

इस प्रकार अभ्यर्थियों को तीन दिनों में पांच अलग-अलग विषयों की परीक्षा देनी होगी।

अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड परीक्षा से लगभग 10 दिन पहले सीजी पीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। आयोग की ओर से एडमिट कार्ड को लेकर अभ्यर्थियों को डाक या एसएमएस के माध्यम से अलग से सूचना नहीं भेजी जाएगी। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे आयोग की वेबसाइट पर नियमित रूप से नजर रखें और समय पर अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर लें।

ऑनलाइन आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों को लाइव फोटो अपलोड करना अनिवार्य होगा। फोटो का बैकग्राउंड हल्के रंग का होना चाहिए। आयोग ने आवेदन प्रक्रिया के दौरान फोटो से संबंधित दिए गए निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है, ताकि आवेदन में किसी तरह की परेशानी न हो।

  • परीक्षा: सूबेदार, SI संवर्ग और प्लाटून कमांडर मुख्य परीक्षा-2024
  • परीक्षा तिथि: 2, 3 और 4 नवंबर 2026
  • परीक्षा केंद्र: रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और अंबिकापुर
  • कुल पेपर: 5
  • आवेदन की अंतिम तिथि: 19 सितंबर 2026, रात 11.59 बजे तक
  • आवेदन सुधार: 20 और 21 सितंबर
  • परीक्षा शुल्क: आरक्षित वर्ग 300 रुपये, अन्य वर्ग 400 रुपये
  • फीस वापसी: परीक्षा/साक्षात्कार में शामिल होने वाले स्थानीय अभ्यर्थियों को
  • एडमिट कार्ड: परीक्षा से लगभग 10 दिन पहले
  • लाइव फोटो: ऑनलाइन आवेदन में अनिवार्य
जन्माष्टमी पर छत्तीसगढ़ में शुष्क दिवस, शराब की दुकानें और बार रहेंगे बंद, आदेश जारी

जन्माष्टमी पर छत्तीसगढ़ में शुष्क दिवस, शराब की दुकानें और बार रहेंगे बंद, आदेश जारी

 रायपुर : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को पूरे प्रदेश में शुष्क दिवस घोषित किया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का सख्ती से पालन कराने को कहा है।

शासन के आदेश के मुताबिक शुष्क दिवस के दौरान प्रदेश की सभी देशी और विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। इसके अलावा रेस्टोरेंट बार, होटल बार, क्लब, अहाता और शराब बेचने या परोसने वाले सभी लाइसेंसी प्रतिष्ठानों को भी बंद रखा जाएगा। इस दौरान भांग और भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी संचालित नहीं होंगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि शुष्क दिवस के दौरान किसी भी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब, स्टार होटल या अन्य प्रतिष्ठान अथवा व्यक्ति को शराब बेचने या परोसने की अनुमति नहीं होगी। गैरमालिकाना क्लबों और अन्य संबंधित संस्थानों पर भी यह प्रतिबंध लागू रहेगा।

शुष्क दिवस की अवधि में शराब के व्यक्तिगत भंडारण और गैर-लाइसेंसी परिसरों में मदिरा रखने पर भी रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर शराब जब्त करने के साथ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अवैध शराब के परिवहन, संग्रहण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए जिला कार्यालयों के अलावा संभागीय और राज्य स्तरीय उड़नदस्तों को भी सक्रिय किया गया है। जांच दल संभावित अवैध शराब भंडारण स्थलों और संदिग्ध वाहनों की जांच करेंगे। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री राजवाड़े ने सूरजपुर और भैयाथान में विकासखंड स्तरीय समीक्षा बैठकों में योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की

मंत्री राजवाड़े ने सूरजपुर और भैयाथान में विकासखंड स्तरीय समीक्षा बैठकों में योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की

 00 हितग्राहियों तक समयबद्ध लाभ पहुंचाने और मैदानी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के दिए निर्देश

रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज सूरजपुर एवं भैयाथान में आयोजित विकासखंड स्तरीय समीक्षा बैठकों में विभागीय योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए।

मंत्री राजवाड़े ने सूरजपुर और भैयाथान में विकासखंड स्तरीय समीक्षा बैठकों में योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की

मंत्री राजवाड़े ने बैठक में योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी लेते हुए मैदानी स्तर पर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विकास एवं जनकल्याण से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। आमजन से जुड़ी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए।

मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर खरकट्टा-कोडेकेला मार्ग के निर्माण हेतु 6.30 करोड़ से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर खरकट्टा-कोडेकेला मार्ग के निर्माण हेतु 6.30 करोड़ से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति

 00 6.20 किलोमीटर सड़क का पुल-पुलिया सहित होगा निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल खरकट्टा से कोडेकेला पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 6 करोड़ 30 लाख 81 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

स्वीकृत परियोजना के तहत 6.20 किलोमीटर लंबी सड़क का पुल-पुलिया सहित निर्माण किया जाएगा। इस मार्ग के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों की मुख्य मार्गों से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और क्षेत्रवासियों को वर्षभर सुगम एवं सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। विशेषकर बरसात के दौरान आवागमन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने में पुल-पुलिया सहित सड़क निर्माण महत्वपूर्ण साबित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों तक मजबूत सड़क नेटवर्क पहुंचाने को प्राथमिकता दी जा रही है। बेहतर सड़कें गांवों को केवल मुख्य मार्गों से जोडऩे का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि और व्यापार जैसी आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच भी आसान होती है। सड़क संपर्क मजबूत होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है और विकास की संभावनाएं भी व्यापक होती हैं।

कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच होगी आसान
खरकट्टा-कोडेकेला मार्ग के निर्माण से क्षेत्र के किसानों को अपनी कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी। विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों तक आवागमन में सहूलियत मिलेगी, वहीं मरीजों एवं उनके परिजनों को स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होगी। सड़क निर्माण से स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। पुल-पुलिया सहित सड़क का निर्माण होने से वर्षा ऋतु में जलभराव एवं मार्ग बाधित होने जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी। इससे ग्रामीणों को पूरे वर्ष बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी तथा गांवों और आसपास के प्रमुख क्षेत्रों के बीच संपर्क और अधिक मजबूत होगा।
क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री साय का जताया आभार
खरकट्टा से कोडेकेला मार्ग के निर्माण के लिए मिली स्वीकृति पर क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। ग्रामीणों ने कहा कि इस सड़क के निर्माण से लंबे समय से आवागमन से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा और लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिल सकेगी। क्षेत्रवासियों ने कहा कि सड़क निर्माण से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि क्षेत्र में कृषि, व्यापार, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना के पूर्ण होने से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को नई दिशा मिलेगी और लोगों का जीवन अधिक सुगम एवं सुविधाजनक बनेगा।

ब्रेकिंग : भाजपा ने की प्रकोष्ठों के प्रभारियों की घोषणा, इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी, देखें पूरी लिस्ट…!!

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 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ ने प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की सहमति से विभिन्न प्रकोष्ठों के लिए संयोजक-सहसंयोजक और प्रभारियों की घोषणा की है। पार्टी के प्रदेश मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन मार्कण्डेय की ओर से जारी आदेश के अनुसार चुन्नीलाल साहू को प्रकोष्ठ संकुल संयोजक और लाभचंद बाफना को प्रकोष्ठ संकुल सहसंयोजक बनाया गया है। 

700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न करें - वर्मा

700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न करें - वर्मा

00 उच्च शिक्षा मंत्री ने ली समीक्षा बैठक
रायपुर। राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति लाने के उद्देश्य से आज उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने विभागीय अधिकारियों की मंत्रालय में समीक्षा बैठक ली। बैठक में 1 जुलाई 2026 को लिए गए निर्णयों पर अब तक हुई कार्यवाही का बिंदुवार क्रियान्वयन की समीक्षा की गया। मंत्री वर्मा ने समयबद्ध कार्यों में देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक ढिलाई को तुरंत दूर करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के सख्त निर्देश दिए। इस बैठक में सचिव अविनाश चंपावत, आयुक्त श्रीमती रीता यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
प्राध्यापक भर्ती और पदोन्नति की समयसीमा तय
बैठक के दौरान राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सत्र 2026-27 के तहत जारी प्रवेश प्रक्रिया का जायजा लिया गया। मंत्री वर्मा ने सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया की रुकावटों को तत्काल दूर करने तथा प्राध्यापकों के 595 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। स्नातक प्राचार्य के पदों पर पदोन्नति की पेंडेंसी पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने 15 सितंबर 2026 तक समस्त कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अपात्र होने के बावजूद पदोन्नति पाने वाले प्राध्यापकों की जांच कर उन पर की गई कार्यवाही की भी समीक्षा की गई।
न्यायालयीन प्रकरणों पर चिंता और वेतनमान का त्वरित निराकरण

वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान के प्रकरणों में हो रही देरी के कारण सहायक प्राध्यापकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जिस पर मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभाग में लंबित न्यायालयीन प्रकरणों और याचिकाओं का ब्योरा मांगते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 1 अक्टूबर 2026 तक सभी विचाराधीन प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर आदेश जारी किए जाएं। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों की पीएच.डी. अनुमोदन की प्रगति और मंत्री कार्यालय द्वारा भेजी गई शिकायतों पर की गई कार्यवाही का विस्तृत विवरण तलब किया गया।
वित्तीय पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता पर जोर
मंत्री  वर्मा ने समीक्षा के दौरान पिछली बैठक में मांगी गई बजट संबंधी अधूरी जानकारी पर असंतोष जताया गया। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्येक शासकीय महाविद्यालय को आवंटित बजट की महाविद्यालयवार पूर्ण सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से महाविद्यालयों में पदस्थ अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षकीय कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया।
सत्र प्रबंधन और नई नीतिगत पहल
छात्र-छात्राओं के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने महाविद्यालयों में सीट वृद्धि की प्रक्रिया को सुचारू बनाने हेतु नया कैलेंडर लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत शासकीय व निजी महाविद्यालयों से सीट वृद्धि के प्रस्ताव दिसंबर तक मंगाकर जनवरी तक स्वीकृतियां जारी की जाएंगी, ताकि आदेशों में होने वाली त्रुटियों से महाविद्यालयों को मुक्ति मिल सके। लॉ और बी. एड. जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 31 दिसंबर तक प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदनों का निराकरण समय सीमा के भीतर करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, 4-वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रम हेतु एन.सी.टी.ई. दिल्ली की नैक ग्रेडिंग शर्तों पर चर्चा के लिए एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजने और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार प्रति सेक्शन 60 विद्यार्थियों के अनुपात को समायोजित करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने के निर्देश जारी किए गए।

 

 

 

Breaking: महिला एवं बाल विकास विभाग में बड़ा फेरबदल, 14 अधिकारियों को मिली नई पदस्थापना, देखें आदेश..!!

Breaking: महिला एवं बाल विकास विभाग में बड़ा फेरबदल, 14 अधिकारियों को मिली नई पदस्थापना, देखें आदेश..!!

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग में प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। विभाग ने उप संचालक, जिला कार्यक्रम अधिकारी समेत कई अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित करते हुए नई पदस्थापना दी है। आदेश के मुताबिक यह व्यवस्था आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी।

देखें आदेश