रायपुर। राज्य सरकार ने राजस्व विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला किया है। 57 तहसीलदार और नायब तहसीलदाराें को इधर से उधर किया गया है। इसका आदेश आज राजस्व विभाग ने जारी किया है।



रायपुर। राज्य सरकार ने राजस्व विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला किया है। 57 तहसीलदार और नायब तहसीलदाराें को इधर से उधर किया गया है। इसका आदेश आज राजस्व विभाग ने जारी किया है।



रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिसिंग व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने सात निरीक्षकों की पदस्थापना में बदलाव करते हुए नवीन जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

रायपुर: शहरों का विकास केवल वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों के अनुरूप किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के 21 नवचयनित सहायक संचालकों (योजना) को नियुक्ति पत्र प्रदान करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने सभी नवचयनित अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य निर्माण के बाद पहली बार नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में सहायक संचालकों की नियुक्ति हुई है। यह नियुक्ति विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ प्रदेश में तेजी से हो रहे शहरीकरण को सुनियोजित दिशा देने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री साय ने नवचयनित अधिकारियों के माता-पिता और परिजनों को भी विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर योग्य बनाना और उन्हें जिम्मेदार पद पर प्रदेश तथा जनता की सेवा करते देखना प्रत्येक माता-पिता के लिए गर्व और प्रसन्नता का अवसर होता है। आज इन युवाओं के जीवन में नई जिम्मेदारी की शुरुआत हो रही है और इसके साथ उनके परिवारों की अपेक्षाएं तथा प्रदेश की आशाएं भी जुड़ी हुई हैं।
राज्य गठन के बाद 25 वर्षों में 17 नियुक्तियां, अब एक साथ 21 युवा अधिकारी
’मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में कुल 17 सहायक संचालकों की नियुक्ति हुई थी, जबकि आज एक साथ 21 युवा अधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभागों को पर्याप्त मानव संसाधन और प्रोफेशनल क्षमता से सशक्त कर रही है
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। गांवों से शहरों की ओर आबादी का विस्तार होने के साथ नगरों की सीमाएं बढ़ रही हैं और प्रमुख सड़कों तथा शहरों के आसपास नई बसाहटें विकसित हो रही हैं। आने वाले वर्षों में यह गति और तेज होगी। ऐसे में आवासीय क्षेत्रों, व्यावसायिक गतिविधियों, सड़कों, सार्वजनिक स्थलों, परिवहन, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए दीर्घकालीन एवं वैज्ञानिक योजना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने नवचयनित अधिकारियों से कहा कि टाउन प्लानिंग केवल नक्शे बनाने या भू-उपयोग तय करने का कार्य नहीं है। इसका सीधा संबंध नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता और शहरों के भविष्य से है। एक अच्छी योजना शहर को व्यवस्थित बनाती है, नागरिक सुविधाओं को सुलभ करती है और भविष्य में अनियोजित विस्तार से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को रोकती है। इसलिए आज नियुक्त हुए युवा अधिकारियों के कंधों पर भविष्य के छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों को आकार देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
जनहित और पारदर्शिता को हमेशा सर्वाेच्च प्राथमिकता दे
मुख्यमंत्री साय ने नवचयनित अधिकारियों को दायित्वबोध का संदेश देते हुए कहा कि शासकीय सेवा जनता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। शासन में अधिकारी द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय किसी न किसी रूप में आम नागरिक के जीवन को प्रभावित करता है। इसलिए अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, निष्ठा, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ करें।
उन्होंने कहा कि शासन की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें आम नागरिक को अपने छोटे से छोटे कार्य के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। नियमों और प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करते हुए नागरिकों की सुविधा और जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देना अधिकारियों का दायित्व है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों से अपनी तकनीकी शिक्षा, आधुनिक ज्ञान और नवाचार का उपयोग प्रदेश के बेहतर नियोजन में करने का आह्वान किया।
विकसित भारत के संकल्प में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भागीदारी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ देश इस लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका है
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आने वाले वर्षों के विकास की स्पष्ट दिशा तय करते हुए ‘छत्तीसगढ़ अंजोर रू विजन 2047’ तैयार किया है। हमारा लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां आधुनिक अधोसंरचना के साथ बेहतर नागरिक सुविधाएं हों, युवाओं के लिए पर्याप्त अवसर हों और विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसमें शासन-प्रशासन, युवाओं और प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
ढाई वर्षों में 15 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में विभिन्न विभागों में 15 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नियुक्तियां प्रदान की गई हैं। पुलिस विभाग में 7 हजार से अधिक और शिक्षा विभाग में 3 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। बिजली विभाग में भी 1200 से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया निरंतर जारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए अवसरों का दायरा केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है। राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति में रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन के प्रावधान किए गए हैं। रोजगार मेलों, निजी क्षेत्र, स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से भी रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक युवा को उसकी योग्यता और रुचि के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिले।
पारदर्शी व्यवस्था से मिली नियुक्ति, उसी पारदर्शिता का लाभ जनता तक पहुंचाएं : श्री ओ.पी. चौधरी
वित्त तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नवचयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सुनियोजित शहरीकरण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अर्थव्यवस्था के विकास के साथ शहरी आबादी और शहरों का विस्तार बढ़ना स्वाभाविक है। इसलिए भविष्य की आवश्यकताओं का पहले से आकलन कर आधुनिक और वैज्ञानिक टाउन प्लानिंग करना समय की आवश्यकता है।
वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में पहले एक बार में तीन या चार सहायक संचालकों की नियुक्तियां होती थीं, लेकिन इस बार एक साथ 21 अधिकारियों की नियुक्ति हुई है। इससे विभाग की प्रोफेशनल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश में सुनियोजित शहरी विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने नवचयनित अधिकारियों से कहा कि उनकी भर्ती पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ हुई है। अब उनकी नैतिक जिम्मेदारी है कि वे इसी पारदर्शिता और ईमानदारी को अपनी कार्यशैली का आधार बनाएं। जब कोई नागरिक नक्शा स्वीकृति या अपने किसी अन्य कार्य के लिए विभाग के कार्यालय आए, तो उसे व्यवस्था में सरलता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता का अनुभव होना चाहिए।
नई पीढ़ी के अधिकारियों की ऊर्जा से विकास को मिलेगी नई गति: केदार कश्यप
वन मंत्री केदार कश्यप ने नवचयनित अधिकारियों और उनके परिजनों को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों की नियुक्ति प्रदेश के सुनियोजित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नई पीढ़ी के अधिकारियों का ज्ञान, ऊर्जा और आधुनिक दृष्टिकोण विभाग की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नवचयनित अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनेंगे।
कार्यक्रम में विभागीय सचिव अंकित आनंद, आयुक्त श्री अवनीश शरण सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, नवचयनित सहायक संचालक एवं उनके परिजन उपस्थित थे।
रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –
1. मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार के नए अवसर सृजित करने हेतु महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन’ को मंजूरी दी है। मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों हेतु 500 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र, 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे तथा NIPUN JOB Engine के माध्यम से उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल विकास और औपचारिक रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा
इस मिशन का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर देने के साथ ही उन्हें जॉब-सीकर से जॉब-क्रिएटर बनाना और छत्तीसगढ़ को स्टार्टअप, नवाचार एवं नई तकनीक आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
2. मंत्रिपरिषद ने राज्य को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30’ को मंजूरी दी है। नई नीति के माध्यम से प्रदेश में मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने, निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच एवं व्यापार सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों में मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस नीति के तहत ई-कॉमर्स, व्यापार मेलों एवं प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों और निर्यातकों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच बढ़ाई जाएगी। इस नीति का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के निर्यात में गुणात्मक एवं मात्रात्मक वृद्धि के साथ प्रदेश को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों से और मजबूती से जोड़ना है।
3. मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को ग्राम तेंदुवा में 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
लगभग 200 करोड़ रूपए की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं छात्रावास सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों में प्रतिवर्ष 1,000 तथा अल्पकालीन कार्यक्रमों में 3,000 प्रशिक्षुओं को आज के उद्योगों की जरूरत के अनुरूप आधुनिक तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना से प्रदेश के युवाओं के लिए उन्नत कौशल प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा नवा रायपुर को देश में कौशल एवं तकनीकी शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
4. मंत्रिपरिषद ने राज्य शासन के अधीन कार्यरत स्थायी/अस्थायी शासकीय सेवकों, निगम-मंडल एवं स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदाकर्मियों तथा नगर सैनिकों को अन्य शासकीय सेवाओं एवं उच्च पदों के लिए आवेदन करने में बड़ी राहत देते हुए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
इस निर्णय से शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को उच्च पदों एवं अन्य सेवाओं में आगे बढ़ने के अधिक और समान अवसर प्राप्त होंगे। इस संबंध में राज्य शासन द्वारा एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
5. मंत्रिपरिषद ने दुर्ग जिला न्यायालय के नवीन भवन निर्माण के लिए ग्राम तितुरडीह में बीआईटी कॉलेज के समीप 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए भिलाई इस्पात संयंत्र के नाम दर्ज उक्त भूमि के बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों भूखंडों का वर्तमान मूल्य लगभग समान है। इस निर्णय से दुर्ग में जिला न्यायालय के लिए आधुनिक एवं सुव्यवस्थित नवीन न्यायालय परिसर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा और न्यायिक अधोसंरचना को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।
रायपुर: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (‘बिहान’) के तहत संचालित इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर योजना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक प्रभावी जरिया बन रही है। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा और दंतेवाड़ा विकासखंडों में बीते डेढ़ वर्षों से लागू इस योजना के जरिए लगभग 2,200 परिवारों को आजीविका के नए साधनों से जोड़ा जा चुका है।
’हिम्मत और मेहनत की मिसाल बनीं रामबती’
दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड के ग्राम मुड़ापारा की निवासी रामबती नाग ने इस योजना का लाभ उठाकर मुर्गी पालन की शुरुआत की। जिला प्रशासन के सहयोग से उन्हें जून माह में ₹80 प्रति चूजा की दर से 100 चूजे और दाना उपलब्ध कराया गया था। शुरुआती दौर में बीमारी के कारण करीब 25 से 30 चूजों की मृत्यु हो जाने से रामबती को झटका ज़रूर लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बचे हुए चूजों का बेहतर रखरखाव और देखभाल करके उन्होंने अब तक करीब 25,000 रूपए की शुद्ध आय अर्जित कर ली है। रामबती अपने तैयार मुर्गों को 500 रूपए प्रति किलो की दर से बेचती हैं, जिनका औसतन वजन 1 से 3 किलोग्राम तक होता है।
’ब्रुडिंग केंद्रों से महिला उद्यमियों को दोहरा लाभ’
योजना के अंतर्गत एक विशेष पहल भी शुरू की गई है, जिसमें क्लस्टर स्तर पर महिलाओं को उद्यमी के रूप में तैयार किया जा रहा है। ये महिला उद्यमी बाहर से क्रॉस असील प्रजाति के ज़ीरो-डे चूजे लाती हैं और ब्रुडिंग केंद्र में 15 दिनों तक उनका पालन-पोषण करती हैं। इसके बाद इन स्वस्थ चूजों को समूह की अन्य महिलाओं को सौंपा जाता है, जिससे तैयार करने वाली उद्यमी और पालन करने वाली महिला, दोनों को आय का अवसर मिल रहा है।
’450 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार’
जिले के विभिन्न क्लस्टरों में अब तक लगभग 450 महिलाओं को मुर्गी पालन गतिविधि से जोड़ा गया है। महिलाओं को उनकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार 50 से 100 चूजे मुहैया कराए जाते हैं। बिहान योजना की इस पहल ने न केवल स्थानीय स्तर पर नियमित रोजगार उपलब्ध कराया है, बल्कि रामबती जैसी सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास भरकर उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर खड़ा किया है।
75 दिवसीय पर्व को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प, बलराम मांझी बने दशहरा समिति के नए उपाध्यक्ष
रायपुर। ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व 2026 इस वर्ष भी पूरी भव्यता, आस्था और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। पर्व की तैयारियों, पूजा विधान, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न आयोजनों को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने की।
बैठक में बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित समस्त मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं टेम्पल स्टेट समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
बलराम मांझी निर्विरोध नहीं, बहुमत से चुने गए नए उपाध्यक्ष
बैठक की शुरुआत औपचारिक प्रक्रियाओं के साथ हुई। इसके बाद बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन कराया गया। बचेली परगना के बीरो मांझी ने अर्जुन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि सोनाबाल परगना के समुन्द मांझी ने बलराम मांझी के नाम का प्रस्ताव किया। सदस्यों द्वारा हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें स्पष्ट बहुमत के आधार पर बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया।
नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने देवसराय सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के संबंध में सुझाव दिए।
केवल पर्व नहीं, विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत
बैठक को संबोधित करते हुए सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने पर्व की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग करने की बात कही।
उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से सकारात्मक चर्चा हुई है। सांसद ने कहा कि 75 दिनों तक चलने वाले इस विशिष्ट पर्व की मौलिकता और परंपरागत स्वरूप को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने पर्व अवधि के दौरान समानांतर आयोजनों की अनुमति नहीं देने, देवस्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा प्रमुख पूजा विधान स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग और पक्की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का साझा संकल्प
बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1423 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा मैसूर और कुल्लू दशहरा से भी प्राचीन है। उन्होंने बस्तर दशहरा को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए सामूहिक प्रयास और साझा संकल्प को दोहराया।
उन्होंने मावली परघाव के लिए संबंधित स्थलों एवं मार्गों की विशेष साफ-सफाई, देवी-देवताओं और आंगा देव के सम्मानपूर्वक आगमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही मांझी-चालकी से पर्व के दौरान पारंपरिक वेशभूषा एवं पगड़ी धारण करने का आग्रह किया।
भंजदेव ने मेंबर-मेंबरीन के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए मेंबरीन के मासिक मानदेय में वृद्धि करने का प्रस्ताव भी दशहरा समिति के समक्ष रखा।
1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित
बैठक में दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने बस्तर दशहरा पर्व के लिए एक करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया। उन्होंने पर्व के दौरान संपन्न होने वाले विभिन्न पूजा विधानों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी समिति के सदस्यों को दी।
बैठक में पूजा स्थलों, मार्गों, देवस्थलों, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। पर्व की विशिष्ट परंपराओं को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के साथ आयोजन को सफल बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए प्रशासन तैयार
कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा ने बस्तर दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने पर्व से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने तथा सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया।
बैठक में मौजूद मांझी-चालकी, पुजारी, मेंबर-मेंबरीन और समिति के सदस्यों ने भी विभिन्न पूजा विधान एवं आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं के संबंध में सुझाव दिए। इस प्रकार बैठक में बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा, जनभागीदारी, धार्मिक आस्था और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के समन्वय के साथ वर्ष 2026 के पर्व को भव्य एवं गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित करने की रूपरेखा पर व्यापक चर्चा हुई।
अमृत मिशन के कार्य मिशन मोड में पूरे कर शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश
नालंदा परिसरों के निर्माण में तेजी लाने और शहरों में स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में चलेंगी 240 ई-बसें
800 करोड़ रुपये की लागत से 8 नगरीय निकायों में स्थापित किए जा रहे सीबीजी प्लांट
रायपुर - शहरों का विकास केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, बेहतर सड़क, प्रकाश व्यवस्था और सुगम सार्वजनिक परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप से मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को नगरीय निकायों में संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित निगरानी करते हुए उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि शासन द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों का वास्तविक लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचे, यह अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।
38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर, 31 का निर्माण प्रगतिरत
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के नगरीय निकायों में युवाओं को अध्ययन के लिए आधुनिक और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जा रहे सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन ‘नालंदा परिसर’ की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माणाधीन परिसरों के कार्यों में तेजी लाते हुए इन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि योजना के अंतर्गत तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश के 38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिनमें 31 कार्य वर्तमान में प्रगतिरत हैं। मुख्यमंत्री ने इन परिसरों में प्रस्तावित सीटों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने रायपुर में निर्माणाधीन नालंदा परिसर की प्रगति की भी समीक्षा की।
सुनियोजित और नागरिक-केंद्रित हों प्रदेश के शहर
मुख्यमंत्री साय ने नगरोत्थान योजना की समीक्षा करते हुए शहरों में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अधोसंरचना विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 14 नगर निगमों के लिए प्रारंभ की गई इस योजना के तहत मुख्य सड़कों का चौड़ीकरण, बाईपास, फ्लाईओवर, सर्विस लेन और अंडरपास सहित यातायात से संबंधित आवश्यक अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपनी पूर्व घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत नगरीय विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए उन्हें समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि नगरीय निकायों के सतत, संगठित एवं नागरिक-केंद्रित विकास के लिए ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ प्रारंभ की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसके अंतर्गत 32 नगरीय निकायों का चयन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों में पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सेवाओं के संचालन में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। नागरिकों से सीधे जुड़ी इन सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रायपुर के प्रदर्शन की मुख्यमंत्री ने की सराहना
बैठक में 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत भारत सरकार से प्राप्त अनटाइड एवं टाइड ग्रांट से किए जा रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इसके माध्यम से सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था, जल प्रदाय, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित कार्य कराए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि रायपुर नगर निगम ने वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय सुधार किया है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रायपुर ने 189 अंक प्राप्त कर देश में छठा स्थान हासिल किया है। राज्य स्तरीय वार्ड रैंकिंग-2026 में रायपुर के वार्ड क्रमांक 46 ने 30 हजार से अधिक आबादी वाली श्रेणी तथा वार्ड क्रमांक 30 ने 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है।
मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि के लिए विभाग और नगर निगम की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छ शहर के साथ स्वस्थ और बेहतर शहरी जीवन के लिए हरित क्षेत्र भी जरूरी हैं। उन्होंने वार्डों में उद्यान विकसित करने तथा जिन क्षेत्रों में वृक्षों की संख्या कम है, उनका चिन्हांकन कर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने शहरी ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर देते हुए प्रत्येक नगरीय निकाय में अपशिष्ट प्रसंस्करण के लिए प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को शीघ्र मिले आवास
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 1.0 और 2.0 की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्वीकृत आवासों, निर्माण की स्थिति, आबंटन और व्यवस्थापन की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि आवासों के आवंटन एवं व्यवस्थापन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि पात्र परिवारों को शीघ्र अपने पक्के आवास का लाभ मिल सके।
चार प्रमुख शहरों में 240 ई-बसों से मजबूत होगा सार्वजनिक परिवहन
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा की तैयारियों की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में कुल 240 ई-बसों के संचालन की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आवश्यक अधोसंरचना संबंधी कार्य मार्च 2027 से पहले पूर्ण कर ई-बसों का संचालन प्रारंभ करने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री साय ने संबंधित सभी निर्माण एवं अधोसंरचना कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-बस सेवा से नागरिकों को आधुनिक, सुविधाजनक और बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होने के साथ पर्यावरण-अनुकूल शहरी परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
नागरिकों की शिकायतों का हो त्वरित और प्रभावी समाधान
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में नगरीय प्रशासन से संबंधित प्राप्त शिकायतों और उनके निराकरण की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को शिकायतों का संवेदनशीलता के साथ त्वरित और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने प्रॉपर्टी टैक्स के पुनरीक्षण से संबंधित विषयों और नगरीय निकायों के विद्युत देयकों की भी जानकारी ली। उन्होंने नगरीय निकायों को विद्युत देयकों का नियमित रूप से प्रतिमाह भुगतान सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजस्व एवं कर संकलन बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कर संकलन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने की व्यवस्था विकसित की जाए।
अमृत मिशन के कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी, मिशन मोड में काम करने के निर्देश
मुख्यमंत्री साय ने अमृत मिशन 2.0 की समीक्षा के दौरान अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता का विषय है। अमृत मिशन के लंबित कार्यों को मिशन मोड में लेते हुए तेजी से पूरा किया जाए।
मुख्यमंत्री ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण में उच्च गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्लम रिडेवलपमेंट और लैंड मोनेटाइजेशन की दिशा में भी योजनाबद्ध तरीके से आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
800 करोड़ रुपये की लागत से 8 नगरीय निकायों में सीबीजी प्लांट
बैठक में प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने भारत सरकार द्वारा परिवहन एवं औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्वच्छ एवं सतत ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित सतत योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत प्रदेश के 8 नगरीय निकायों में लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहरी विकास से जुड़ी सभी योजनाओं में परिणाम स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखाई देने चाहिए। उन्होंने योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा, निर्माण की गुणवत्ता की सतत निगरानी तथा सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
शिक्षकों के मार्गदर्शन और जनसेवा से ही संभव है, समाज व राष्ट्र का सर्वांगीण विकास- मंत्री टंक राम वर्मा
रायपुर- राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा आज नेवरा स्थित पी. एम कन्या शाला में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति एवं महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व व कृतित्व को नमन करते हुए कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने के संस्कार भी गढ़ते हैं। मस्तिष्क और बुद्धि के सर्वांगीण विकास के लिए गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य है। प्राचीनकाल से लेकर आधुनिक युग तक, जब भी समाज या राष्ट्र के समक्ष चुनौतियां आई हैं, गुरुजनों ने ही सही दिशा दिखाने का कार्य किया है। बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में शेड, बाउंड्रीवॉल, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं दी गई हैं।
गुरुजनों का सम्मान हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का मूल आधार
शिक्षक सम्मान समारोह और अपने गुरुजनों से मुलाकात का स्मरण करते हुए मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि गुरुजनों का सम्मान हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का मूल आधार है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी विवादों के निपटारे और सामाजिक व सांस्कृतिक आयोजनों में शिक्षकों की केंद्रीय भूमिका होती थी। वर्तमान तकनीकी युग में व्यस्तता भले ही बढ़ी है, लेकिन समाज को समय देकर ग्रामीण व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सकता है।
रजिस्ट्री के तुरंत बाद ऑटोमैटिक नामांतरण की प्रक्रिया शुरू
इस दौरानमंत्री वर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग की छवि सुधारने के लिए किए गए क्रांतिकारी फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मैन्युअल से ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज करते समय हुई त्रुटियों के जल्द निपटारे हेतु अधिकारों का विस्तार कर तहसीलदारों को भी शक्तियां दी गई हैं। इसके अलावा द्वितीय अपील की सुनवाई का अधिकार अब कमिश्नर के स्थान पर सीधे जिला कलेक्टर को सौंपा गया है। अवैध कॉलोनियों को रोकने के लिए 5 डिसमिल से कम जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई है, जबकि फर्जी रजिस्ट्री रोकने हेतु तहसील कार्यालयों को पंजीयन कार्यालय से ऑनलाइन जोड़कर रजिस्ट्री के समय ओटीपी अनिवार्य किया गया है। अब रजिस्ट्री के तुरंत बाद ऑटोमैटिक नामांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी और किसानों को किसान पुस्तिका के लिए कार्यालयों के चक्कर न काटकर इसे ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है। भू-स्वामी अपने जीवनकाल में ही भूमि का बंटवारा कर सकते हैं। वहीं, भारतमाला जैसी बड़ी परियोजनाओं में भू-माफियाओं के अनुचित लाभ को रोकने के लिए अधिसूचना जारी होते ही संबंधित क्षेत्र की खरीद-बिक्री पर रोक का प्रावधान किया गया है, ताकि वास्तविक किसानों को पारदर्शी मुआवजा मिल सके।
उच्च शिक्षा विभाग के संदर्भ में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू कर शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रकाश व्यवस्था हेतु 40 गांवों के लिए 2 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। साथ ही 100 गांवों के तालाबों में पक्के चबूतरों का निर्माण, 40 गांवों में महतारी सदन का निर्माण और सरस्वती शिशु मंदिर जैसी संस्थाओं के लिए भवन निर्माण स्वीकृत कराए गए हैं। उन्होंने दोहराया कि जनसेवा के इन कार्यों में वरिष्ठों और गुरुजनों का मार्गदर्शन सदैव सर्वाेपरि रहेगा।
सहकारिता मंत्री ने की विभागीय काम-काज की समीक्षा
पहली बार लोकरंग पर्व में दिखी सरगुजा-जशपुर अंचल की आदिवासी लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक, पंथी और नाचा-गम्मत ने भी मोहा दर्शकों का मन
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करने वाले तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का तीसरा एवं अंतिम दिन सरगुजा-जशपुर अंचल की आदिवासी लोकसंस्कृति के नाम रहा। पहली बार लोकरंग पर्व के मंच पर जशपुर अंचल के सरहुल एवं करमा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों की मधुरता और कलाकारों के ऊर्जावान नृत्य ने पूरे वातावरण को उत्साह और उमंग से भर दिया।
कार्यक्रम में विजय कुमार भगत, जशपुर के दल द्वारा सरहुल एवं करमा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। आदिवासी लोकजीवन, प्रकृति और सामुदायिक परंपराओं से जुड़े इन लोकनृत्यों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति, पारंपरिक लय और आकर्षक वेशभूषा ने कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया।
इसके साथ ही रायपुर के डॉ. रामनारायण नेताम ने आदिवासी लोकगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति दी। श्री नवलदास मानिकपुरी, दुर्ग ने लोकगीत-संगीत से समां बांधा। वहीं सुश्री आरती बारले, भिलाई ने पंथी नृत्य की ऊर्जापूर्ण प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। सुश्री रमादत्त जोशी, रायपुर की नाचा-गम्मत की प्रस्तुति ने हास्य, मनोरंजन और लोकनाट्य के रंगों से कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया।
लोककलाओं को मंच देना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी : डॉ. कन्नौजे
लोकरंग पर्व के समापन अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सुदूर जनजातीय अंचलों सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्थानीय कलाकारों ने अपनी-अपनी लोककलाओं की शानदार प्रस्तुतियां दीं। ऐसे आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ प्रोत्साहन और सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि लोकरंग पर्व जैसे सांस्कृतिक आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध और सुघर लोकसंस्कृति को सहेजने तथा उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। लोकगीत, लोकनृत्य, लोकनाट्य और पारंपरिक कलाओं के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने के साथ ही विलुप्त होती लोकविधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को भी प्रोत्साहन मिलता है।
लोकविरासत के विविध रंगों का संगम बना लोकरंग
तीन दिनों तक चले लोकरंग पर्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों की लोकसंस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्य की विविध परंपराओं को मंच मिला। अंतिम दिन सरहुल, करमा, आदिवासी लोकगीत, पंथी और नाचा-गम्मत जैसी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान उसकी विविध लोकपरंपराओं में निहित है।
कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, छत्तीसगढ़ के कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा, फिल्म बोर्ड की सदस्य प्रसन्ना अवस्थी तथा समाजसेवी उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।
लोकरंग पर्व का अंतिम दिन दर्शकों के लिए छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की विविधता और जीवंतता को करीब से अनुभव करने का अवसर बना। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। आयोजन ने एक ओर जहां लोककलाकारों को सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराया, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को सहेजने, संवारने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सार्थक संदेश दिया।
रायपुर-भारत रत्न एवं प्रख्यात संगीतकार, गायक, गीतकार और फिल्मकार डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर आज लोक भवन स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. हजारिका के कला, संगीत एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में अतुलनीय योगदान का स्मरण किया गया तथा उनकी कालजयी रचनाओं और जीवन-यात्रा को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि डॉ. भूपेन हजारिका का संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि उसमें समाज, संस्कृति, प्रकृति, मानवीय संवेदना और राष्ट्रीय एकता की गहरी अभिव्यक्ति थी। उन्होंने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़ने का कार्य किया। उनकी रचनाएं आज भी लोगों को सामाजिक समरसता, भाईचारे और मानवीय मूल्यों का संदेश देती हैं।
सांस्कृतिक संध्या में इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के कलाकारों ने डॉ. भूपेन हजारिका के जीवन एवं रचनाओं पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। नृत्य के माध्यम से उनकी रचनाओं और जीवन-यात्रा को प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया गया। महाकालीबाड़ी एवं विश्वनाथ मंदिर समिति, पंडरी, रायपुर के कलाकारों ने डॉ. हजारिका द्वारा गाए प्रसिद्ध गीतों की भावपूर्ण संगीतमय प्रस्तुति दी।
राज्यपाल रमेन डेका ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर प्रथम महिला रानी डेका काकोटी, विधायक पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन सहित गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
रायपुर: अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर जिला साक्षरता विभाग, कोरबा द्वारा उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय साक्षरता समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का आयोजन “साक्षर बनें, सशक्त बनें” एवं “उल्लास से उज्ज्वल भविष्य की ओर” की थीम पर किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जिले में निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाने के साथ उनमें जागरूकता एवं आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उद्योग, वाणिज्य एवं श्रम, आबकारी तथा सार्वजनिक उपक्रम मंत्री छत्तीसगढ़ शासन लखन लाल देवांगन शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति का साक्षर होना अत्यंत आवश्यक है। साक्षरता व्यक्ति को अपने अधिकारों और दायित्वों को समझने के साथ दैनिक जीवन में बैंकिंग लेन-देन, शासकीय योजनाओं और विभिन्न प्रकार की सूचनाओं को सही ढंग से समझने में सक्षम बनाती है। साक्षर व्यक्ति ठगी और धोखाधड़ी का शिकार होने से भी काफी हद तक बच सकता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल पढ़ना-लिखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल रूप से भी जागरूक और साक्षर होना जरूरी है।
मंत्री देवांगन ने कहा कि कोरबा जिला विभिन्न क्षेत्रों में लगातार उपलब्धियां हासिल कर रहा है। साक्षरता के क्षेत्र में भी जिले को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 27 सितंबर को आयोजित होने वाली परीक्षा के बाद कोरबा पूर्ण साक्षर जिला बनने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि कोरबा को पूर्ण साक्षर जिला बनाने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे साक्षरता अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाएं और अपने आसपास तथा परिवार के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने में सहयोग करें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को लेकर देश को आगे बढ़ा रहे हैं। इसी प्रकार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विकसित छत्तीसगढ़-2047 के लक्ष्य के साथ विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को मूर्त रूप दे रहे हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने में साक्षरता की महत्वपूर्ण भूमिका है। साक्षर व्यक्ति अपने अधिकारों को समझने के साथ शासन की योजनाओं का बेहतर लाभ उठा सकता है और समाज के विकास में प्रभावी योगदान दे सकता है।
कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने कहा कि साक्षरता से व्यक्ति में जागरूकता आती है और रूढ़िवादिता दूर होती है। आज के डिजिटल दौर में डिजिटल साक्षरता भी बेहद जरूरी है। किसान, व्यापारी, पशुपालक और अन्य वर्ग के लोग जितने अधिक साक्षर होंगे, वे अपने-अपने क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं एवं सुविधाओं का उतना ही बेहतर लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रौढ़ शिक्षा एवं प्रेरकों के माध्यम से गांव-गांव में निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने का अभियान संचालित किया जा रहा है। निरक्षर को साक्षर बनाने वाले लोगों को प्रोत्साहन के रूप में 10 अंक प्रदान किए जाने की व्यवस्था से अभियान को और गति मिलेगी।
पटेल ने कहा कि साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को संविधान, अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों, लोकतांत्रिक व्यवस्था और मूलभूत आवश्यकताओं को समझने में भी सक्षम बनाती है। उन्होंने महिलाओं की साक्षरता दर बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षा और साक्षरता की दिशा में आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी लोगों का साक्षर एवं जागरूक होना जरूरी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति का साक्षर और जागरूक होना जरूरी है। डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करने के लिए डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। साक्षरता के माध्यम से लोग अपने अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर ढंग से समझकर उनका लाभ उठा सकते हैं।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से जिले में निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाने की पहल संचालित की जा रही है। कोरबा जिला विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है और इस दिशा में साक्षरता अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि आज मोबाइल फोन लगभग हर व्यक्ति के हाथ में है। मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से जहां सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में व्यक्ति जितना अधिक साक्षर और जागरूक होगा, वह साइबर ठगी सहित विभिन्न प्रकार की धोखाधड़ी से उतना ही सुरक्षित रह सकेगा।
कलेक्टर ने कहा कि साक्षरता के साथ लोगों में जागरूकता और डिजिटल समझ विकसित करना भी जरूरी है। जिले का लक्ष्य है कि अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक निरक्षर लोगों को साक्षर बनाया जाए और कोरबा को पूर्ण साक्षर जिला बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, युवाओं और सामाजिक संगठनों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि लखन लाल देवांगन ने साक्षरता अभियान में उल्लेखनीय कार्य करने वाले युवाओं, ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने सभी को साक्षरता अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने और जिले को पूर्ण साक्षर बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम का संचालन जिला साक्षरता अधिकारी श्रीमती ज्योति शर्मा ने किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन, जिला शिक्षा अधिकारी श्री तामेश्वर उपाध्याय, डीएमसी श्री वल्लभ वैष्णव सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, युवा एवं साक्षरता अभियान से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
रायपुर: छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू, लोकजीवन की सहज संवेदनाएं और पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपराओं के रंगों से ‘लोकरंग पर्व’ का दूसरा दिन सराबोर रहा। मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित कार्यक्रम में ‘लोरिक चंदा’, ददरिया और चंदैनी जैसी पारंपरिक लोकविधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रदेश की लोकप्रिय लोकगाथा ‘लोरिक चंदा’ के भावपूर्ण प्रसंग से हुई। श्री व्यासनाथ योगी एवं साथियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से लोकगाथा की कथात्मकता, भाव और गायन परंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया। प्रस्तुति के दौरान लोकसंगीत और पारंपरिक गायन शैली ने वातावरण को पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया।
इसके बाद विजय साहू एवं साथियों ने ददरिया की प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ के लोकजीवन से गहरे जुड़ी ददरिया की मधुर धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वहीं श्री बरसन देशलहरे ने चंदैनी के माध्यम से प्रेम, लोकजीवन और मानवीय संवेदनाओं को सुरों में पिरोया। प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जीवनशैली, लोकभावनाओं और सामाजिक सरोकारों की सहज झलक दिखाई दी।
लोककलाओं के संरक्षण और कलाकारों को प्रोत्साहन पर जोर
कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि स्थानीय मंच छत्तीसगढ़ की लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने और प्रोत्साहन पाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी हैं।
उन्होंने कहा कि लोरिक चंदा, चंदैनी गीत और ददरिया जैसी लोकविधाएं छत्तीसगढ़ के लोकजीवन की पहचान हैं। इनकी प्रस्तुति और संरक्षण से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है। ‘लोकरंग पर्व’ इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल है।
सांस्कृतिक जगत की प्रमुख हस्तियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पूर्व संचालक अनिल कुमार साहू, उपसंचालक उमेश मिश्रा, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा तथा समाजसेवी उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।
लोकविधाओं को एक मंच पर ला रहा लोकरंग पर्व
‘लोकरंग पर्व’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं, लोकगीतों, लोकसंगीत और पारंपरिक लोकनृत्यों को एक साझा मंच प्रदान किया जा रहा है। आयोजन के दूसरे दिन की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिकता के दौर में अपनी लोकपरंपराओं को सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना उतना ही जरूरी है।
मुक्ताकाशी मंच पर गूंजे लोकसुरों और कलाकारों की सजीव प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। लोरिक चंदा की कथा, ददरिया की मिठास और चंदैनी के भावपूर्ण सुरों ने लोकरंग पर्व के दूसरे दिन को यादगार बना दिया।
00 व्यावहारिक गतिविधियां विद्यार्थियों में उद्यमिता, नेतृत्व क्षमता,आत्मनिर्भरता और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करने में मददगार - वर्मा
00 विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शुरू हुए कई अभिनव कार्यक्रम
रायपुर। राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने आज शिक्षक सम्मान समारोह के अवसर पर पीएम शासकीय विद्यालय, तिल्दा में विद्यार्थियों द्वारा संचालित स्टूडेंट स्टोर की व्यावसायिक गतिविधियों का अवलोकन किया। मंत्री वर्मा ने स्टूडेंट स्टोर के संचालन की प्रक्रिया को समझा और बच्चों के इस अभिनव प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उनके अनुभवों को जाना और उनके आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच तथा कार्यकुशलता की सराहना की। बच्चों ने स्टूडेंट स्टोर के जरिए व्यवसाय संचालन, वस्तुओं की बिक्री, वित्तीय लेखा-जोखा (अकाउंटिंग) एवं ग्राहक व्यवहार सहित विभिन्न व्यावहारिक एवं व्यावसायिक कौशलों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि यह पहल 21वीं सदी की शिक्षा व्यवस्था की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री जी के स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) कार्यक्रम का एक प्रभावी हिस्सा बताया। उन्होंने इस नवाचार के लिए मार्गदर्शन दे रहे व्याख्याता एवं प्राचार्य के प्रयासों को सराहा।
बच्चों को व्यावसायिक एवं जीवनोपयोगी कौशलों से जोडऩे का प्रयास
मंत्री वर्मा ने कहा कि इस प्रकार की व्यावहारिक गतिविधियां विद्यार्थियों में उद्यमिता, नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करने में बेहद मददगार साबित होंगी। विद्यालय में पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को व्यावसायिक एवं जीवनोपयोगी कौशलों से जोडऩे का यह प्रयास अनुकरणीय है।
विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को उभारना, उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना के अनुरूप, पीएम शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक, तकनीकी और जीवनोपयोगी कौशलों में दक्ष बनाने के लिए विभिन्न नवाचार कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को उभारना, उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों एवं स्वरोजगार के अवसरों के लिए तैयार करना है। इस अवसर पर शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सुधीर गौतम, शाला के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने अतिथियों के समक्ष अपने स्टूडेंट स्टोर की गतिविधियों को बेहद उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किया।
00 नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में गौरवपूर्ण 25 वर्ष पूरे होने पर छत्तीसगढ़ में जलेंगे 36 लाख आशीर्वाद के दीये
रायपुर। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री/गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीर्घायु, स्वस्थ एवं ऊर्जावान जीवन के लिए 17 सितंबर को पूरे प्रदेश में 36 लाख आशीर्वाद के दीये प्रज्जवलित किए जाएंगे। इसके तहत प्रत्येक मतदान केंद्र (बूथ) पर कम-से-कम 100 दीये जलाने का लक्ष्य रखा गया है। शर्मा मंगलवार को यहाँ भाजपा प्रदेश कार्यालय (कुशाभाऊ ठाकरे परिसर) में पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि यह अभियान मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण का व्यापक जनांदोलन बनेगा।
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संवैधानिक पद (मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री) पर रहते हुए 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले सेवा संकल्प अभियान और सेवा पखवाड़ा के विस्तृत कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि अभियान में हर गाँव, शहर, बूथ और परिवार की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक बूथ पर हर परिवार दीप प्रज्जवलन कर प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सेवा समर्पण के प्रति आभार प्रकट करेगा और विकसित भारत 2047 का संकल्प लेगा। 7 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों के प्रमुख चौराहों पर एक विशेष मशाल स्थापित की जाएगी। 7 अक्टूबर को, जिस दिन श्री मोदी के सरकार प्रमुख के तौर पर 25 वर्ष पूरे हो रहे है, प्रमुख चौकों पर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी, जिसके माध्यम से प्रधानमंत्री देश के सभी जिला केंद्रों को एक साथ सम्बोधित करेंगे। इसी दरम्यान युवाओं की एक विशेष यात्रा प्रधानमंत्री के जन्मस्थान वडनगर (गुजरात) से उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक निकाली जाएगी। यह यात्रा विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए छत्तीसगढ़ के कवर्धा और कोरिया समेत कई क्षेत्रों में पहुँचेगी। अभियान के तहत वडनगर से वाराणसी (जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा) कार्यक्रम होगा। गुजरात की पवित्र नदियों के जल के साथ 250 बाइकों पर 500 यात्री वडनगर में हाटकेश्वर महादेव का अभिषेक करेंगे और शर्मिष्ठा तालाब का जल लेकर 10 टोलियों में काशी के लिए प्रस्थान करेंगे। 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक एक माह तक चलने वाले सेवा मेरा योगदान अभियान में भाजपा कार्यकर्ता और आम नागरिक प्रशासनिक एवं सामाजिक स्तर पर सेवा गतिविधियों में भाग लेंगे।
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने सेवा के रंग रंगोली प्रतियोगिता की जानकारी देते हुए बताया कि सार्वजनिक स्थानों, प्रमुख संस्थानों और घरों में 25 वर्षों के विकास कार्यों और सेवा भाव पर आधारित रंगोली प्रतियोगिताएँ एवं प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाएंगी। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि इस दौरान राष्ट्रव्यापी ड्राइंग एवं भाषण प्रतियोगिता के तहत देशभर के सभी सरकारी व निजी स्कूलों में छात्रों के लिए मोदी सरकार के सेवा कार्यों और विकसित भारत की संकल्पना पर भाषण व ड्राइंग प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी। इसी प्रकार नमो सेवा गाथा कार्यक्रम में 25 वर्षों के सेवा कार्यों और जनहितैषी योजनाओं को संगीतपूर्ण व सरल नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए स्कूल, कॉलेज, पंचायत और सामुदायिक केंद्रों तक पहुँचाया जाएगा। आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों, माताओं की भागीदारी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सार्वजनिक सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
शर्मा ने बताया कि जनसेवक महाकुंभ कार्यक्रम के तहत पंच से लेकर संसद तक के सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का एक राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के सभी जनप्रतिनिधि भाग लेंगे। 25 साल की 25 कहानियाँ कार्यक्रम के तहत विगत 25 वर्षों में देश के बड़े बदलावों, निर्णयों (जैसे धारा 370 हटाना) और बड़े निर्माण कार्यों (चिनाब ब्रिज, अटल टनल, सरदार सरोवर) को कहानियों के माध्यम से समाज और युवाओं के बीच प्रस्तुत किया जाएगा। केंद्र सरकार की योजनाओं से लाभान्वित 25 लाख नागरिकों की वास्तविक बदलाव की कहानियों और वीडियो को संकलित कर डिजिटल डेटा बैंक बनाया जाएगा। इनमें से 25 हजार चयनित और 250 सबसे प्रभावशाली कहानियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। विकसित भारत संकल्प यात्रा कार्यक्रम के तहत डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को बस्तर, गिफ्ट सिटी और आई-क्रिएट जैसे परिवर्तनकारी प्रोजेक्ट्स पर ले जाया जाएगा, ताकि वे जमीनी विकास की वास्तविक तस्वीर देश के सामने रख सकें। इसी प्रकार गाँव, जिला और राज्य स्तर पर पैदल व बाइक रैली के माध्यम से सेवा ज्योति यात्राएँ निकाली जाएँगी, जो विभिन्न दिशाओं से शुरू होकर एक केंद्रीय स्थल पर मिलेंगी।
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम में 25 प्रमुख सेवा गतिविधियों की सूची जारी की जाएगी, जिनमें से नागरिक स्वेच्छा से कोई एक कार्य चुनकर अपने क्षेत्र में प्रत्यक्ष फेसलिफ्टिंग और सुधार करेंगे। प्रत्येक विधानसभा में न्यूनतम दो प्रमुख स्थानों पर दृश्यमान बदलाव सुनिश्चित किया जाएगा। सेवा सेतु अभियान के तहत ब्लॉक एवं विधानसभा स्तर पर सेवा सेतु केंद्र और कैंप लगाए जाएंगे, जहाँ नागरिकों को एक ही स्थान पर सभी केंद्रीय व राज्य योजनाओं का ऑन-द-स्पॉट लाभ प्रदान किया जाएगा। इसी प्रकार युवाओं, स्टार्टअप्स व इनोवेटर्स के लिए पाँच बड़े क्षेत्रीय इनोवेशन चैलेंज आयोजित होंगे। प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री एवं अभियान के प्रदेश संयोजक यशवंत जैन, प्रदेश उपाध्यक्ष जी. वेंकट, प्रदेश मंत्री अमित साहू, अंबिकेश केशरी, भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकारिहा मौजूद रहे।
00 अमृत मिशन के कार्य मिशन मोड में पूरे कर शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश
00 नालंदा परिसरों के निर्माण में तेजी लाने और शहरों में स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर00 रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में चलेंगी 240 ई-बसें
00 800 करोड़ रुपये की लागत से 8 नगरीय निकायों में स्थापित किए जा रहे सीबीजी प्लांट
रायपुर। शहरों का विकास केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, बेहतर सड़क, प्रकाश व्यवस्था और सुगम सार्वजनिक परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप से मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को नगरीय निकायों में संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित निगरानी करते हुए उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि शासन द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों का वास्तविक लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचे, यह अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।
38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर, 31 का निर्माण प्रगतिरत
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के नगरीय निकायों में युवाओं को अध्ययन के लिए आधुनिक और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जा रहे सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन नालंदा परिसर की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माणाधीन परिसरों के कार्यों में तेजी लाते हुए इन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि योजना के अंतर्गत तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश के 38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिनमें 31 कार्य वर्तमान में प्रगतिरत हैं। मुख्यमंत्री ने इन परिसरों में प्रस्तावित सीटों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने रायपुर में निर्माणाधीन नालंदा परिसर की प्रगति की भी समीक्षा की।
सुनियोजित और नागरिक-केंद्रित हों प्रदेश के शहर
मुख्यमंत्री श्री साय ने नगरोत्थान योजना की समीक्षा करते हुए शहरों में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अधोसंरचना विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 14 नगर निगमों के लिए प्रारंभ की गई इस योजना के तहत मुख्य सड़कों का चौड़ीकरण, बाईपास, फ्लाईओवर, सर्विस लेन और अंडरपास सहित यातायात से संबंधित आवश्यक अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपनी पूर्व घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत नगरीय विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए उन्हें समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि नगरीय निकायों के सतत, संगठित एवं नागरिक-केंद्रित विकास के लिए आदर्श शहर समृद्धि योजना प्रारंभ की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसके अंतर्गत 32 नगरीय निकायों का चयन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों में पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सेवाओं के संचालन में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। नागरिकों से सीधे जुड़ी इन सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रायपुर के प्रदर्शन की मुख्यमंत्री ने की सराहना
बैठक में 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत भारत सरकार से प्राप्त अनटाइड एवं टाइड ग्रांट से किए जा रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इसके माध्यम से सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था, जल प्रदाय, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित कार्य कराए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि रायपुर नगर निगम ने वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय सुधार किया है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रायपुर ने 189 अंक प्राप्त कर देश में छठा स्थान हासिल किया है। राज्य स्तरीय वार्ड रैंकिंग-2026 में रायपुर के वार्ड क्रमांक 46 ने 30 हजार से अधिक आबादी वाली श्रेणी तथा वार्ड क्रमांक 30 ने 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि के लिए विभाग और नगर निगम की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छ शहर के साथ स्वस्थ और बेहतर शहरी जीवन के लिए हरित क्षेत्र भी जरूरी हैं। उन्होंने वार्डों में उद्यान विकसित करने तथा जिन क्षेत्रों में वृक्षों की संख्या कम है, उनका चिन्हांकन कर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने शहरी ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर देते हुए प्रत्येक नगरीय निकाय में अपशिष्ट प्रसंस्करण के लिए प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को शीघ्र मिले आवास
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 1.0 और 2.0 की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्वीकृत आवासों, निर्माण की स्थिति, आबंटन और व्यवस्थापन की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि आवासों के आवंटन एवं व्यवस्थापन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि पात्र परिवारों को शीघ्र अपने पक्के आवास का लाभ मिल सके।
चार प्रमुख शहरों में 240 ई-बसों से मजबूत होगा सार्वजनिक परिवहन
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा की तैयारियों की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में कुल 240 ई-बसों के संचालन की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आवश्यक अधोसंरचना संबंधी कार्य मार्च 2027 से पहले पूर्ण कर ई-बसों का संचालन प्रारंभ करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री श्री साय ने संबंधित सभी निर्माण एवं अधोसंरचना कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-बस सेवा से नागरिकों को आधुनिक, सुविधाजनक और बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होने के साथ पर्यावरण-अनुकूल शहरी परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
नागरिकों की शिकायतों का हो त्वरित और प्रभावी समाधान
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में नगरीय प्रशासन से संबंधित प्राप्त शिकायतों और उनके निराकरण की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को शिकायतों का संवेदनशीलता के साथ त्वरित और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने प्रॉपर्टी टैक्स के पुनरीक्षण से संबंधित विषयों और नगरीय निकायों के विद्युत देयकों की भी जानकारी ली। उन्होंने नगरीय निकायों को विद्युत देयकों का नियमित रूप से प्रतिमाह भुगतान सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजस्व एवं कर संकलन बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कर संकलन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने की व्यवस्था विकसित की जाए।
अमृत मिशन के कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी, मिशन मोड में काम करने के निर्देश
मुख्यमंत्री श्री साय ने अमृत मिशन 2.0 की समीक्षा के दौरान अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता का विषय है। अमृत मिशन के लंबित कार्यों को मिशन मोड में लेते हुए तेजी से पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण में उच्च गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्लम रिडेवलपमेंट और लैंड मोनेटाइजेशन की दिशा में भी योजनाबद्ध तरीके से आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
800 करोड़ की लागत से 8 नगरीय निकायों में सीबीजी प्लांट
बैठक में प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने भारत सरकार द्वारा परिवहन एवं औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्वच्छ एवं सतत ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित सतत योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत प्रदेश के 8 नगरीय निकायों में लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शहरी विकास से जुड़ी सभी योजनाओं में परिणाम स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखाई देने चाहिए। उन्होंने योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा, निर्माण की गुणवत्ता की सतत निगरानी तथा सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
00 किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं से लेकर उद्योगों, शिक्षा, बस्तर और सुशासन तक हो रहा बड़े फैसलों का असर
विशेष लेख : धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए गए बड़े नीतिगत सुधारों और जनकल्याणकारी फैसलों ने राज्य के समग्र विकास को एक नई दिशा दी है। प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदमों से हर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के ढाई वर्ष से ज्यादा केवल योजनाओं और घोषणाओं को जमीनी स्तर पर उतारने के ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में व्यवस्था बदलने वाले फैसलों के रहे हैं। सरकार ने एक ओर गरीब, किसान और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा, वहीं दूसरी ओर उद्योग, शिक्षा, खनिज, डिजिटल गवर्नेंस और बस्तर के विकास में लंबे समय तक असर डालने वाले नीतिगत सुधार शुरू किए।
सरकार बनने के तुरंत बाद सबसे बड़ा फैसला प्रधानमंत्री आवास को लेकर हुआ। पहली कैबिनेट में ही 18 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों के आवास की स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) में अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत हो चुके हैं। प्रदेश में औसतन करीब 1,600 आवास प्रतिदिन पूरे किए जा रहे हैं। ढाई वर्षों में पुराने और नए स्वीकृत आवास मिलाकर 11 लाख से अधिक घर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। इसी तरह सरकार ने धान खरीदी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत बनाया। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान बेचने की सुविधा दी गई। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना को मिलाकर किसानों को लगभग 43,723 करोड़ रुपए की राशि दी गई। खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे सुधार किसानों के लिए काफी सुविधाजनक रहे।

महिला सशक्तिकरण साय सरकार की प्रमुख पहचान के रूप में उभरा है। महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों में लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं को 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे खातों में दी जा चुकी है। प्रदेश में 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान मिशन में प्रदेश के 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत और स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत दी गई है।
बस्तर में बदलाव सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। नक्सलवाद दशकों से बस्तर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरूद्ध निर्णायक जीत हासिल हुई है। बस्तर में सुरक्षा कार्रवाई के साथ विकास और योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने की नीति अपनाई गई, जिससे बस्तर के लोगों का भरोसा सरकार पर मजबूत हुआ। नियद नेल्ला नार 2.0 और बस्तर मुन्ने अभियान के जरिए विकास योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। ओरछा और जगरगुंडा जैसे सुदूर क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। बस्तर में लगभग 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के लिए 4,824 करोड़ रुपए की'आजीविका उन्नयन योजना तैयार की गई है।

बस्तर के जंगलों में मौजूद सुरक्षा कैंप अब दूरदराज के गांव वालों के लिए सेवा और विकास के केंद्र बन रहे हैं। दूरस्थ गांवों में सार्वजनिक परिवहन के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा शुरू की गई है। बस्तर में सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, उचित मूल्य दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। सरकार का जोर अब बस्तर को संघर्ष की पहचान से निकालकर शिक्षा, पर्यटन, आजीविका और उद्योगों की नई पहचान देने पर है।
उद्योग के क्षेत्र में राज्य में निवेश लाने के साथ उद्योगों की स्थापना की प्रक्रियाओं को आसान पर जोर दिया गया। छत्तीसगढ़ ने 450 से अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार लागू किए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 लाने वाला राज्य देश का पहला राज्य बना। जन विश्वास सुधारों के जरिए 279 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। वन-क्लिक सिंगल विंडो व्यवस्था, सरल भूमि डायवर्जन और रजिस्ट्री के बाद स्वत: नामांतरण जैसे सुधार किए गए हैं। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के बाद 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.72लाख से अधिक संभावित रोजगार के अवसर निर्मित होंगे।
00 मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की आत्मीय भेंट
00 इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 सहित प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से उनके रायपुर स्थित निवास पर आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड के प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 तथा प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड का प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट क्षेत्र के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना साबित होगा। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ सहायक उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे राजनांदगांव सहित आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में नई संभावनाओं वाले उद्योगों के विस्तार के साथ आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य आधारित विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 इसी दिशा में छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आधुनिक विनिर्माण के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश के लिए नई संभावनाएं बनी हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश में आने वाला निवेश स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, क्षेत्रीय विकास और आर्थिक समृद्धि का माध्यम बने। राजनांदगांव की प्रस्तावित फर्टिलाइजर परियोजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।
रायपुर। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में देश में छठवां स्थान हासिल किया है और शहर ने 189 अंक हासिल किए हैं। खास बात यह है कि पिछले तीन साल में क्करू-10 प्रदूषण के स्तर में भी करीब 18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। 2022-23 में पीएम-10 का स्तर 78 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो 2025-26 में घटकर 64 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया।
नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार करीब 100 किलोमीटर सड़कों पर पैच रिपेयर कराया गया है, जबकि मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों से रोजाना लगभग 150 किलोमीटर सड़कों की सफाई की जा रही है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। शहर में 26 हजार से ज्यादा ई-वाहन और करीब 30 चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं। हरियाली बढ़ाने के लिए 2025-26 में करीब 42 हजार पौधे भी लगाए गए हैं। रायपुर की बेहतर रैंकिंग में वार्ड स्तर पर किए गए प्रयासों का भी योगदान रहा है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में वार्ड-46 ने 30 हजार से अधिक आबादी वाली श्रेणी में और वार्ड-30 ने 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में जगह बनाई है। वहीं 3 एकड़ में विकसित मियावाकी प्लांटेशन में करीब 23 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से लगभग 91 प्रतिशत पौधों के सुरक्षित होने का दावा नगर निगम ने किया है।
00 राज्यपाल रमेन डेका से छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने की भेंट
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने भेंट कर छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा इसके संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के संबंध में चर्चा की।
छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा
भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश एवं मानकीकरण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा है और लगभग डेढ़ करोड़ लोग इसका प्रयोग करते हैं।
छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल
राज्यपाल डेका ने स्वयं पहल करते हुए इस विषय पर सार्थक चर्चा की। छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए कहा कि इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश एवं अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन किया जाएगा। इसके लिए विषय के विद्वानों एवं विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी और सुझाव भी लिए जाएंगे। राज्यपाल ने इस संदर्भ में असमिया और बोडो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया।
छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा
भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना एवं पत्रकारिता सहित विभिन्न विधाओं में प्रचुर सामग्री उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ी का व्याकरण वर्ष 1890 में तथा पहला शब्दकोश वर्ष 1939 में तैयार हुआ। वर्ष 1924 में पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास हीरू के कहिनी प्रकाशित हुआ। पंडित सुंदरलाल शर्मा द्वारा जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका दुलरवा का प्रकाशन भी किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी का अध्ययन कराया जा रहा है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है। इस अवसर पर भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार श्री शीलकांत पाठक एवं श्रीमती अर्चना पाठक उपस्थित थीं।
रायपुर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर मंत्रालय पहुंचेंगे। जहाँ दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा बैठक में शामिल होकर विभागीय कार्यों की समीक्षा करेंगे वही दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मुख्यमंत्री कार्यालयीन कार्य करेंगे। वहीं शाम 5 बजकर 50 मिनट पर मुख्यमंत्री निवास से लोकभवन के लिए रवाना होंगे और 5 बजकर 55 मिनट पर लोकभवन पहुंचेंगे। इसके बाद शाम 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक छत्तीसगढ़ मंडपम्, लोकभवन में आयोजित “सांस्कृतिक संध्या” कार्यक्रम में शामिल होंगे।
रायपुर – समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर दुर्ग संभाग में आज से दो दिवसीय “जन-संवाद” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके जरिए UCC कमिटी सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय स्थापित करने की दिशा में काम करेगी। जन-संवाद के दौरान सामान्य लोगों के साथ बैठक कर UCC को लेकर उनके विचार और सुझाव लिए जाएंगे। समिति का उद्देश्य है कि समाज के हर वर्ग की बात सुनी जाए और उनके सुझावों को प्रस्तावित ड्राफ्ट में उचित स्थान मिल सके। इस जन-संवाद के जरिए समिति अलग-अलग वर्गों के लोगों से सीधे संवाद करेगी और UCC को लेकर उनकी राय,अपेक्षाओं और सुझावों को समझने का प्रयास करेगी। कमिटी का मानना है कि व्यापक जन-सहभागिता के जरिए तैयार होने वाला ड्राफ्ट अधिक समावेशी और सभी वर्गों की भावनाओं को ध्यान में रखने वाला हो सकेगा।
रायपुर: रायपुर प्रेस क्लब में रविवार को आयोजित महिला पत्रकारों का तीज महोत्सव पारंपरिक उल्लास, उमंग और आत्मीयता के रंगों से सराबोर रहा। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने शामिल होकर महिला पत्रकारों का उत्साह बढ़ाया और तीज की खुशियों में सहभागी बनीं। उन्होंने महिला पत्रकारों के साथ विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेने के साथ पारंपरिक छत्तीसगढ़ी अंदाज में रैंप वॉक भी किया। उनका सहज, आत्मीय और सादगीपूर्ण अंदाज आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में रहा।
तीज महोत्सव में राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा और विधायक भावना बोहरा भी विशेष रूप से शामिल हुईं। श्रीमती भावना बोहरा ने महिला पत्रकारों के साथ रैंप वॉक कर कार्यक्रम की रौनक बढ़ाई, वहीं लक्ष्मी वर्मा ने भी रैंप पर अपनी प्रस्तुति देकर महिला पत्रकारों के साथ तीज की खुशियां साझा कीं। जनप्रतिनिधियों की इस आत्मीय सहभागिता से महिला पत्रकारों का उत्साह और बढ़ा।
पारंपरिक परिधानों में दिखा सादगी और आत्मविश्वास
महोत्सव का सबसे खास आकर्षण रैंप वॉक रहा। महिला पत्रकारों ने पारंपरिक परिधानों में सादगी, सौंदर्य और आत्मविश्वास के साथ रैंप पर अपनी प्रस्तुति दी। वहीं श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का सिर पर पल्लू लेकर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी अंदाज में रैंप पर उतरना विशेष रूप से सराहा गया। इस दौरान पूरे परिसर में उत्साह और तालियों की गूंज सुनाई दी।
खेल-प्रतियोगिताओं और मनोरंजन ने बढ़ाई महोत्सव की रौनक
तीज महोत्सव के दौरान महिला पत्रकारों के लिए विभिन्न मनोरंजक खेल और प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। महिला पत्रकारों ने उत्साहपूर्वक इनमें हिस्सा लिया और हंसी-मजाक तथा मस्ती के बीच आयोजन का आनंद लिया। प्रतियोगिताओं के दौरान प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया गया और उनकी प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया गया।
महिला पत्रकारों के योगदान की श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने की सराहना
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि तीज छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और महिलाओं के उल्लास से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। रायपुर प्रेस क्लब द्वारा महिला पत्रकारों के लिए तीज महोत्सव का आयोजन सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि महिलाएं पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हुए समाज की आवाज को मजबूती से सामने रखने का कार्य कर रही हैं। ऐसे आयोजन उन्हें व्यस्त कार्यदायित्वों के बीच आपसी संवाद, आत्मीयता और उत्सव का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी महिला पत्रकारों को तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं।
राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने तीज को महिलाओं की खुशियों, आत्मीयता और सांस्कृतिक परंपराओं का पर्व बताते हुए महिला पत्रकारों को शुभकामनाएं दीं। विधायक भावना बोहरा ने कहा कि महिला पत्रकार समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे आयोजन महिलाओं को साथ मिलकर खुशियां साझा करने और आपसी सहभागिता को मजबूत करने का अवसर देते हैं।
महिला पत्रकारों को दिए गए रिटर्न गिफ्ट
कार्यक्रम के समापन पर सभी महिला पत्रकारों को रिटर्न गिफ्ट प्रदान किए गए। उपहार पाकर महिला पत्रकारों में खासा उत्साह देखने को मिला। तीज के पारंपरिक रंग, रैंप वॉक की आकर्षक प्रस्तुतियां, खेल-प्रतियोगिताएं और आत्मीय मेलजोल ने पूरे प्रेस क्लब परिसर को उत्सव के माहौल में बदल दिया।
कार्यक्रम में रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े सहित आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाली अमृता शर्मा, प्रियंका कौशल, मीनल शर्मा, आकांक्षा दुबे, विनीता मंडल, सोनल भारद्वाज, सुजाता साहा, अंबिका मिश्रा सहित बड़ी संख्या में महिला पत्रकार एवं प्रेस क्लब सदस्य उपस्थित रहे।
रायपुर: राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा तैयार किए गए नए वेब पोर्टल
cgpurc.cgstate.gov.in का क्लिक कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष श्री वी. के. गोयल सहित आयोग के अन्य सदस्य उपस्थित थे।
नए पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित महत्वपूर्ण एवं अद्यतन जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। इसमें अध्यादेश के आधार पर संचालित पाठ्यक्रमों का विवरण, अकादमिक कैलेंडर, प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी, विद्यार्थियों की अंकसूची ,डिग्री तथा गत वर्षों के परीक्षा परिणाम अपलोड किए जाएंगे।
पोर्टल पर विश्वविद्यालयों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क, कार्यरत अधिकारियों, विभिन्न समितियों एवं उनके सदस्यों तथा पीएचडी शोध-निर्देशकों की विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा एनईपी-2020, नैक प्रत्यायन, अन्य विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू, स्किल डेवलपमेंट, इनोवेशन, स्टार्टअप, जॉब ओरिएंटेशन प्रोग्राम, कैंपस प्लेसमेंट और ई-लाइब्रेरी से संबंधित जानकारी भी पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी। पोर्टल में शैक्षणिक स्वीकृतियों, भरे एवं रिक्त पदों से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे निजी विश्वविद्यालयों की गतिविधियों में पारदर्शिता, सूचना की सुगमता और प्रभावी निगरानी को बढ़ावा मिलेगा।
तिल्दा नेवरा। राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की अनुशंसा पर बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में हाई मास्ट लाइट (High Mast Light) स्थापना हेतु 2 करोड़ 6 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
ग्रामीण अंचल में बुनियादी सुविधाओं और रात्रि में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों की सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों को रात्रि के समय बेहतर प्रकाश व्यवस्था से आच्छादित करने की दिशा में यह एक बड़ी पहल है।
मंत्री टंकराम वर्मा ने इस संबंध में कहा कि बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक गांव में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। हाई मास्ट लाइट लगने से ग्रामीण अंचलों में सुरक्षा और सुविधा का नया वातावरण निर्मित होगा। मुख्य चौराहों और प्रमुख स्थलों पर हाई मास्ट लाइट लगने से रात्रि के समय आवागमन सुगम होगा, असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और गांव की सुंदरता में भी वृद्धि होगी।
’बलौदाबाजार जनपद के 13 गांवों में जगमगाएंगी हाई मास्ट लाइटें’
’बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के तिल्दा और सिमगा विकासखंड की 15 -15 ग्राम पंचायतों को 1.50 करोड़ रुपये स्वीकृत’ रायपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के लिए कुल 1 करोड़ 50 लाख रुपये की विकास राशि स्वीकृत की गई है। इस बजट से रायपुर जिले के तिल्दा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा विकासखंड के अंतर्गत आने वाली 15 -15 ग्राम पंचायतों के लिए स्वीकृति दी गई है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में 5-5 नग हाई मास्ट लाइट की स्थापना के लिए 5 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
तिल्दा विकासखंड के लाभान्वित ग्राम पंचायतों में
सरारीडीह, खपरीकला, मोहगांव, निनवा, खैरखुट, चांपा, जोता, भुरसदा, सड्डू, सिनोधा, कोटा, भिलौनी, छपोरा, टोहडा, सतभाँवा शामिल है। इसी तरह सिमगा विकासखंड के लाभान्वित ग्राम पंचायतो में झीपन, भोथाडीह, हिरमी, शिकारी केशली, भालेसुर, रावन, सुहेला, जरौद, नवापारा, जांगड़ा, सकलोर, मोहभट्टा, खिलोरा , बरडीह, कुकराचुंदा शामिल है।