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छत्तीसगढ़ BJP में बड़ी नियुक्तियां, युवा मोर्चा समेत 7 मोर्चों के प्रभारी घोषित, देखें पूरी लिस्ट

छत्तीसगढ़ BJP में बड़ी नियुक्तियां, युवा मोर्चा समेत 7 मोर्चों के प्रभारी घोषित, देखें पूरी लिस्ट

 Chhattisgarh BJP Morcha Incharge: भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ ने प्रदेश के विभिन्न मोर्चों के लिए नए प्रभारियों की घोषणा कर दी है। पार्टी की ओर से जारी आदेश के अनुसार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की सहमति से इन नियुक्तियों को मंजूरी दी गई है। प्रदेश भाजपा ने कुल 7 मोर्चों के प्रभारियों की जिम्मेदारी तय की है। नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।

जारी सूची में युवा मोर्चा की जिम्मेदारी वैभव बैस को सौंपी गई है। वहीं महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा सहित अन्य मोर्चों के लिए भी नए प्रभारियों के नाम घोषित किए गए हैं।

  • युवा मोर्चा - वैभव बैस
  • महिला मोर्चा - सुभाष तिवारी
  • किसान मोर्चा - पूनम चंद्राकर
  • पिछड़ा वर्ग मोर्चा - लखनलाल साहू
  • अनुसूचित जनजाति मोर्चा - शिरिष अग्रवाल
  • अनुसूचित जाति मोर्चा - डॉ. गुलाब टिकरिहा
  • अल्पसंख्यक मोर्चा - मनोज जैन

तत्काल प्रभाव से लागू होगी नियुक्ति

प्रदेश भाजपा की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी नवनियुक्त मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। पार्टी संगठन की ओर से जारी इस सूची में प्रदेश के अलग-अलग सामाजिक और संगठनात्मक वर्गों से जुड़े सात मोर्चों की जिम्मेदारी तय की गई है।

भाजपा ने जारी की आधिकारिक सूची

भाजपा छत्तीसगढ़ की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की सहमति से मोर्चा प्रभारियों की घोषणा की गई है। सूची जारी होने के बाद अब संबंधित मोर्चों के संगठनात्मक कामकाज और गतिविधियों की जिम्मेदारी नवनियुक्त प्रभारियों के पास होगी। इस नियुक्ति में सबसे प्रमुख नाम युवा मोर्चा के लिए वैभव बैस का है। इसके साथ ही पार्टी ने महिला, किसान, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक मोर्चे के लिए भी प्रभारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है।

दशकों बाद ग्रामीणों तक पहुंचा नेटवर्क, सुकमा के सुदूर वनांचल टेटरई में लगा बीएसएनएल टावर

दशकों बाद ग्रामीणों तक पहुंचा नेटवर्क, सुकमा के सुदूर वनांचल टेटरई में लगा बीएसएनएल टावर

 0-2 हजार से अधिक ग्रामीणों की जिंदगी हुई आसान

सुकमा । दशकों तक भौगोलिक विषमताओं और संचार सुविधाओं के अभाव से जूझते सुकमा के सुदूर वनांचल अब विकास की नई सुबह देख रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व में बस्तर के अंतिम छोर तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने का संकल्प अब धरातल पर उतर आया है। जिला प्रशासन की सक्रियता और निरंतर निगरानी के चलते जिला मुख्यालय से करीब 190 किलोमीटर दूर कोंटा विकासखंड के टेटरई जैसे अति-संवेदनशील व अंदरूनी गांवों में नया मोबाइल टॉवर स्थापित कर नेटवर्क बहाल कर दिया गया है। वर्षों से एक अदद सिग्नल के लिए तरसते इन बीहड़ों में पहली बार बजी मोबाइल की घंटी ने ग्रामीणों के जीवन में विकास और भरोसे का नया संचार किया है।

इस नई कनेक्टिविटी ने स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों की जिंदगी को एक नई दिशा दी है। कभी अपनों की कुशलक्षेम पूछने या एक जरूरी कॉल करने के लिए मीलों पैदल चलने को मजबूर ग्रामीण अब अपने घर-आंगन से ही देश-दुनिया से सीधे जुड़ रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राएं अब गांव में रहकर ही ऑनलाइन कक्षाओं, ई-लाइब्रेरी और डिजिटल अध्ययन सामग्री का पूरा लाभ उठा पा रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय वनोपज, लोककला और हस्तशिल्प से जुड़े ग्रामीणों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच और स्वरोजगार के नए रास्ते खुल गए हैं।

नेटवर्क की उपलब्धता ने प्रशासनिक तंत्र और जनकल्याणकारी योजनाओं को सीधे ग्रामीणों की चौखट तक ला खड़ा किया है। अब डिजिटल बैंकिंग, ईकेवाईसी और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी सुविधाएं बिना किसी बाधा के मिल रही हैं, जिससे ग्रामीणों को अपने हक की राशि के लिए भटकना नहीं पड़ता। सबसे बड़ा बदलाव आपातकालीन सेवाओं में आया है—बीमारी या किसी संकट के समय अब ग्रामीण सीधे स्वास्थ्य सेवाओं, एंबुलेंस और प्रशासन से तत्काल संपर्क साध पा रहे हैं, जिससे दूरस्थ अंचलों में सुरक्षा का एक मजबूत कवच तैयार हुआ है।

कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, बीएसएनएल की ‘4त्र सैचुरेशन परियोजना के तहत जिले के दुर्गम क्षेत्रों को निर्बाध कॉलिंग और इंटरनेट कनेक्टिविटी से लैस किया जा रहा है। जनहित के संकल्प के साथ घने जंगलों और दुर्गम पहाडिय़ों के बीच भी विकास की रोशनी पहुंचाई जा रही है। सुकमा के इन वनांचलों में गूंजती मोबाइल की यह घंटी केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि बस्तर के सुरक्षित, सशक्त और विकसित भविष्य की बुलंद आवाज बन चुकी है।

छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा H1N1 संक्रमण, 130 मरीजों की पुष्टि; रायपुर में 60 मामले

छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा H1N1 संक्रमण, 130 मरीजों की पुष्टि; रायपुर में 60 मामले

 प्रदेश के 19 जिलों तक पहुंचा संक्रमण, 31 मरीज एक्टिव; अब तक किसी मरीज की मौत नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अब तक प्रदेश में 130 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें से 31 मरीज फिलहाल एक्टिव हैं, जबकि 99 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। राहत की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक स्वाइन फ्लू से किसी मरीज की मौत नहीं हुई है।

रायपुर में सबसे ज्यादा मामले
राजधानी रायपुर में तीन नए मरीज सामने आए हैं। इसके साथ ही जिले में स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 60 हो गई है। इनमें करीब 11 मरीज एक्टिव बताए जा रहे हैं।रायपुर के अलावा दुर्ग, रायगढ़, बिलासपुर, धमतरी, कोरबा, बेमेतरा और महासमुंद समेत कई अन्य जिलों में भी सक्रिय मरीज सामने आए हैं। संक्रमण का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब उन जिलों में भी मामले सामने आने लगे हैं, जहां पहले स्वाइन फ्लू के मरीज नहीं मिले थे।

19 जिलों में पहुंचा संक्रमण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रदेश के 19 जिलों में अब तक स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आ चुके हैं, जबकि 8 जिलों में फिलहाल एक्टिव केस हैं। नए मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाने के साथ ही उपचार और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों से संक्रमण के लक्षणों को लेकर सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की जा रही है।

तालाब बना आत्मनिर्भरता का आधार, वैज्ञानिक मत्स्य पालन से कामिनी की सालाना आय 2 लाख रुपये

तालाब बना आत्मनिर्भरता का आधार, वैज्ञानिक मत्स्य पालन से कामिनी की सालाना आय 2 लाख रुपये

 एमसीबी। मेहनत, सही तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के जरिए सीमित संसाधनों को भी बेहतर आमदनी के साधन में बदला जा सकता है। इसकी प्रेरक मिसाल मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के खोंगापानी की मत्स्य कृषक कामिनी रोहतिया हैं, जिन्होंने वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग के सहयोग से करीब 1 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले तालाब में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन शुरू किया। कभी मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर रहने वाली कामिनी के लिए यही तालाब अब आय का महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है। वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन और नियमित तालाब प्रबंधन के चलते उन्हें वर्तमान में करीब 2 लाख रुपये का वार्षिक लाभ मिल रहा है। वर्ष 2022 में नवीन तालाब निर्माण योजना के तहत उन्हें तालाब निर्माण का लाभ मिला था, जिसके बाद उन्होंने इसका उपयोग आजीविका के लिए करना शुरू किया। विभाग ने उन्हें मछली पालन की वैज्ञानिक तकनीक, तालाब प्रबंधन और मछलियों की देखभाल से जुड़ा तकनीकी मार्गदर्शन दिया।

कामिनी ने विभागीय सलाह के अनुसार तालाब में भारतीय प्रमुख कार्प यानी IMC प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया और करीब 5 हजार फिंगरलिंग्स का स्टॉकिंग किया। मछलियों के बेहतर विकास के लिए वे पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी, तालाब की साफ-सफाई और समय-समय पर जरूरी देखभाल पर विशेष ध्यान देती हैं। मछलियों में होने वाली संभावित बीमारियों की पहचान और रोकथाम के लिए भी उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वैज्ञानिक प्रबंधन और नियमित मेहनत का परिणाम उनकी आय में साफ दिखाई दे रहा है। कामिनी के अनुसार मत्स्य विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज संचयन, मछलियों की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने में काफी मदद की। अब उनका लक्ष्य मत्स्य उत्पादन और आय को और बढ़ाना है। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, बेहतर प्रबंधन और विशेषज्ञों की सलाह के जरिए वह अपने मत्स्य व्यवसाय को विस्तार देने की दिशा में प्रयास कर रही हैं।a

कामिनी का अनुभव दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। उनका कहना है कि उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर मत्स्य पालन को ग्रामीण परिवारों के लिए लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है। सरकारी योजनाओं का लाभ, विभागीय मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत मिलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर सकते हैं। कामिनी की सफलता यह दिखाती है कि सही योजना और तकनीक के साथ एक साधारण तालाब भी ग्रामीण परिवार की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भरता हासिल करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

महतारी के आशीष और राखी के विश्वास से मजबूत हो रही नारी शक्ति, महिलाओं के सम्मान और स्वावलंबन को सरकार की प्राथमिकता

महतारी के आशीष और राखी के विश्वास से मजबूत हो रही नारी शक्ति, महिलाओं के सम्मान और स्वावलंबन को सरकार की प्राथमिकता

 रायपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान मातृशक्ति के सम्मान और नारी शक्ति के प्रति आदर की परंपरा से जुड़ी रही है। मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी की आस्था से लेकर माता कौशल्या की धरती तक, मातृशक्ति प्रदेश के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और स्वावलंबन को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का संचालन कर रही है। वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया जाना इसी दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरकार के 30 माह के कार्यकाल में महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। योजना के तहत प्रदेश की करीब 68 लाख विवाहित महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खातों में दी जा रही है। इससे महिलाओं को अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ परिवार के आर्थिक निर्णयों में भी अधिक भागीदारी का अवसर मिल रहा है।

रक्षाबंधन से पहले राज्य सरकार ने महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि भी महिलाओं के खातों में अंतरित की। 25 अगस्त को बालोद जिले में आयोजित कार्यक्रम में करीब 68 लाख महिलाओं के बैंक खातों में लगभग 631 करोड़ रुपये की राशि पहुंचाई गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश की माताओं और बहनों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे अपने छोटे-बड़े फैसले स्वयं ले सकें और त्योहारों को पूरे उत्साह और सम्मान के साथ मना सकें। वहीं रायपुर में आयोजित ‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में स्कूली बेटियों, दिव्यांग बेटियों और महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने केंद्रीय सुरक्षा बलों, सेना और पुलिस के जवानों की कलाइयों पर रक्षा सूत्र बांधा। कार्यक्रम के दौरान शहीद उपनिरीक्षक युगल किशोर वर्मा की पत्नी माधुरी वर्मा ने मुख्यमंत्री की कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने इसे शहीद परिवार के विश्वास और अपनत्व का प्रतीक बताया तथा कहा कि नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ प्रदेश की बहनों के लिए सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी लगातार काम किया जा रहा है। प्रदेश में 2 लाख 42 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों से करीब 30 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। वहीं लखपति दीदी अभियान के तहत महिलाओं को स्वरोजगार और आय के स्थायी साधनों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है और प्रदेश में 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिला समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय स्तर पर विभिन्न उत्पादों का निर्माण और उनका विपणन कर आय अर्जित कर रही हैं। महतारी वंदन योजना, महिला स्व-सहायता समूह और लखपति दीदी जैसे प्रयासों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी भी बढ़ रही है। रक्षाबंधन से पहले सहायता राशि मिलने पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की महिलाओं ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए उन्हें बड़े भाई के रूप में सम्मान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान, स्वावलंबन और समृद्धि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और नारी शक्ति को विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

महतारी वंदन से महिलाओं को मिला आर्थिक संबल, पूनम धावरिया ने मुख्यमंत्री को कहा—धन्यवाद

महतारी वंदन से महिलाओं को मिला आर्थिक संबल, पूनम धावरिया ने मुख्यमंत्री को कहा—धन्यवाद

 रक्षाबंधन से पहले मिली सितंबर की किस्त, पूनम बोलीं—समय पर मिली राशि भाई के उपहार जैसी

रायपुर- महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ आर्थिक रूप से अधिक सक्षम महसूस कर रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सारबहरा निवासी पूनम धावरिया भी इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं। उन्हें महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि प्राप्त हो चुकी है।

राशि प्राप्त होने पर पूनम धावरिया ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें नियमित रूप से प्रत्येक माह आर्थिक सहायता मिल रही है। यह राशि उनके लिए बेहद उपयोगी है और घर-परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक सहारा प्रदान करती है।

समय पर मिली राशि से रक्षाबंधन की खुशी हुई दोगुनी

पूनम धावरिया ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए सितंबर माह की किस्त की राशि अगस्त माह में ही प्रदान की गई है। समय से पहले राशि मिलने से महिलाओं में खुशी का माहौल है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व से पहले राशि मिलना उनके लिए विशेष खुशी की बात है।

उन्होंने भावुक होकर कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर समय से मिली यह राशि उन्हें भाई की ओर से मिले उपहार जैसी महसूस हुई। इस आर्थिक सहायता से पर्व की तैयारियों और आवश्यक घरेलू खर्चों में उन्हें सहूलियत मिली है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

 पूनम ने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नियमित रूप से मिलने वाली राशि से महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग महिलाएं अपनी दैनिक जरूरतों, परिवार से जुड़े खर्चों तथा अन्य आवश्यक कार्यों में कर पा रही हैं। इससे उनमें आर्थिक आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।

पूनम धावरिया ने महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए भरोसे और संबल का माध्यम बन रही है। पूनम धावरिया की कहानी इसी बदलाव की एक झलक प्रस्तुत करती है, जहां समय पर मिली सहायता ने न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद की, बल्कि रक्षाबंधन के पर्व की खुशियों को भी बढ़ाया।

प्लेसमेंट एजेंसी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की बड़ी कार्रवाई, 10 लाख रूपये की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी राजसात

प्लेसमेंट एजेंसी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की बड़ी कार्रवाई, 10 लाख रूपये की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी राजसात

 अनुबंध शर्तों के उल्लंघन पर एजेंसी ब्लैकलिस्ट

कर्मचारियों के वेतन से अनुचित कटौती और कम भुगतान की शिकायत जांच में हुई प्रमाणित

रायपुर, 31 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने प्लेसमेंट के माध्यम से मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाली एजेंसी मेसर्स टॉपग्रेड मेनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, राजनांदगांव के विरुद्ध अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की है। मंडल द्वारा एजेंसी की 10 लाख रूपये की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी राजसात करते हुए उसे मंडल में कार्यरत एजेंसियों की काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में दर्ज किया गया है।

उल्लेखनीय है कि नया रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा संयुक्त निविदा के माध्यम से मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए उक्त एजेंसी के साथ 1 जुलाई 2023 को अनुबंध किया गया था। मंडल में उक्त निविदा की अवधि मार्च 2026 में समाप्त हो चुकी है।

निविदा अवधि समाप्त होने के बाद मंडल मुख्यालय में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारियों द्वारा शिकायत की गई कि एजेंसी ने पांच माह की अवधि में उनके वेतन से सुरक्षा निधि के नाम पर राशि की कटौती की। कर्मचारियों को कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह राशि वापस किए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन राशि वापस नहीं की गई।

शिकायत की जांच में मंडल द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक खातों एवं भुगतान संबंधी अभिलेखों का परीक्षण किया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि एजेंसी द्वारा कर्मचारियों के वेतन से किश्तों में राशि की कटौती की गई थी। साथ ही मंडल से एजेंसी को प्राप्त राशि की तुलना में संबंधित कर्मचारियों को कम वेतन का भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई।

मंडल द्वारा इस संबंध में एजेंसी को नोटिस जारी किया गया। एजेंसी ने अपने जवाब में कर्मचारियों के वेतन से राशि की कटौती किए जाने की बात स्वीकार की। शिकायत के बाद एजेंसी द्वारा कुछ राशि कर्मचारियों को वापस किए जाने की जानकारी भी सामने आई। जांच एवं एजेंसी के जवाब के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि निविदा एवं अनुबंध में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया।

निविदा की शर्त क्रमांक 1.5 के अनुसार सफल निविदाकार द्वारा भविष्य में संतोषप्रद कार्य संपादित नहीं किए जाने की स्थिति में Performance Security के रूप में जमा राशि जब्त किए जाने का प्रावधान है। वहीं निविदा की कंडिका 11 (vii) में कर्मचारियों के EPF एवं ESIC अंशदान सहित वेतन भुगतान की निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित वैधानिक प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य किया गया था।

निविदा की शर्तों के अनुसार एजेंसी के लिए EPF Act, ESIC Act, LWF Act एवं Minimum Wages Act सहित संबंधित श्रम कानूनों का पालन करना आवश्यक था। कर्मचारियों के अंशदान की राशि संबंधित EPF एवं ESIC खातों में जमा कर चालान प्रस्तुत करने के बाद ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रतिपूर्ति का प्रावधान था। नियमों का पालन नहीं किए जाने की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई के साथ एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किए जाने का प्रावधान भी निविदा में स्पष्ट था।

इन्हीं तथ्यों और 1 जुलाई 2023 को निष्पादित अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन को देखते हुए मंडल ने 10 लाख रूपये की Performance Security राजसात करने तथा मेसर्स टॉपग्रेड मेनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हेड ऑफिस न्यू चन्द्रा कॉलोनी, वार्ड क्रमांक-18, हनुमंतपुरम, राजनांदगांव को मंडल में कार्यरत एजेंसियों की काली सूची (Black List) में दर्ज करने की कार्रवाई की है।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण ने कहा कि प्लेसमेंट के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को उनके वैधानिक एवं अनुबंधानुसार देय पारिश्रमिक तथा सामाजिक सुरक्षा संबंधी लाभों से वंचित किए जाने की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। संबंधित प्रकरण में उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक खातों, भुगतान संबंधी अभिलेखों और एजेंसी के जवाब का परीक्षण किया गया है तथा जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि मंडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके अधीन प्लेसमेंट के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को नियमानुसार देय वेतन, EPF, ESIC एवं अन्य वैधानिक लाभ समय पर प्राप्त हों तथा किसी भी कर्मचारी के वेतन से अनुचित अथवा अनधिकृत कटौती न की जाए। कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता, अनुबंधीय शर्तों के उल्लंघन अथवा वैधानिक अंशदान में लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय और सीएमडीसी के मध्य हुआ महत्वपूर्ण समझौता

मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय और सीएमडीसी के मध्य हुआ महत्वपूर्ण समझौता

 कटिंग-पॉलिशिंग के आधुनिक प्रशिक्षण के लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय बनेगा नॉलेज पार्टनर, ‘बस्तर ब्रांड’ को मिलेगा बढ़ावा

कोरंडम से बस्तर को मिलेगी नई पहचान, खनन से मूल्य संवर्धन तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन

25 वर्षों बाद बीजापुर के कुचनूर में फिर शुरू हुआ कोरंडम खनन, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर

रायपुर, 31 अगस्त 2026

नेशनल क्रिटिकल मिनरल  मिशन और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के दोहन के साथ-साथ उनके स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) द्वारा बीजापुर जिले के कुचनूर क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद कोरंडम खदान का पुनः संचालन किया गया है। कोरंडम के खनन से लेकर उसकी कटिंग, पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के उद्देश्य से CMDC और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में नया रायपुर स्थित मेफेयर रिज़ॉर्ट में यह महत्वपूर्ण एमओयू सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर के रूप में चयनित किया गया है, जिसके माध्यम से स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का उत्खनन

                  प्रदेश में कोरंडम खनिज के दोहन एवं विपणन के लिए CMDC और संयुक्त उपक्रम साझेदार मेसर्स एन.सी. नाहर के मध्य गठित छत्तीसगढ़ कोरंडम माइन्स लिमिटेड के माध्यम से बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम क्षेत्र के ग्राम कुचनूर में कोरंडम खदान संचालित की जा रही है। लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद फरवरी 2025 से खदान का पुनः संचालन करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का वैज्ञानिक पद्धति से उत्खनन किया जा रहा है। वर्तमान में खदान से उत्खनित कोरंडम का लगभग 240 किलोग्राम भंडारण है, जिसमें से 157.643 किलोग्राम का परिवहन किया जा चुका है। परिवहन किए गए कोरंडम में 107.989 किलोग्राम बी-ग्रेड तथा 49.654 किलोग्राम औद्योगिक ग्रेड कोरंडम शामिल है।

खनन के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार

कुचनूर कोरंडम खदान के संचालन से बीजापुर जिले के 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार और CMDC का प्रयास है कि खनिज आधारित गतिविधियों का लाभ केवल खनन तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समुदायों, युवाओं, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों की भागीदारी से आय के नए अवसर सृजित हों।

कटिंग-पॉलिशिंग के प्रशिक्षण से बढ़ेगा मूल्य संवर्धन

कोरंडम से अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर जेम्स्टोन हैंडलिंग, कटिंग, पॉलिशिंग और अन्य वैल्यू एडिशन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रत्नों की पहचान और कौशल गतिविधियों में दक्ष बनाया जाएगा। इससे उन्हें रोजगार के साथ स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के अवसर भी मिलेंगे।

‘बस्तर ब्रांड’ के तहत आभूषण और रत्न उत्पादों को मिलेगा बाजार

                       कुचनूर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम को ‘बस्तर ब्रांड’ के तहत स्थानीय डिजाइन, गुणवत्ता और प्रमाणिकता से जोड़ने की योजना है। कोरंडम से आभूषण एवं रत्न उत्पाद तैयार कर उनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे बस्तर की स्थानीय कला, शिल्प और प्राकृतिक खनिज संपदा को एक साथ बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी। स्थानीय इकाइयों, स्टार्टअप्स, शिल्पकारों और निवेशकों की भागीदारी से कोरंडम आधारित नए उद्यम विकसित किए जा सकेंगे।

नए कोरंडम क्षेत्रों की पहचान और अन्वेषण जारी

बीजापुर जिले में कोरंडम से जुड़े नए संभावित क्षेत्रों की पहचान, अन्वेषण एवं पूर्वेक्षण का कार्य भी जारी है। भोपालपट्टनम क्षेत्र में ग्राम कुचनूर सहित अन्य संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर खनन गतिविधियों के विस्तार की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। धनगोल सहित विभिन्न इलाकों में क्षेत्र आरक्षित कर आवेदन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

पारदर्शी नीलामी से सरकार को राजस्व, बस्तर को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान

उत्खनित कोरंडम की पारदर्शी तरीके से नीलामी से राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि के साथ बस्तर क्षेत्र के कोरंडम को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग के साथ स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन होने से खनिज की वास्तविक आर्थिक क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। CMDC की यह पहल ‘खनन से मूल्य संवर्धन, मूल्य संवर्धन से रोजगार और रोजगार से आर्थिक सशक्तिकरण’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य केवल कोरंडम का उत्खनन करना नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं और समुदायों को पूरी वैल्यू चेन का भागीदार बनाकर बस्तर की खनिज संपदा को स्थानीय समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आधार बनाना है।

हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली को आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली को आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 हिंसा और नक्सलवाद का महिमामंडन करने वाली मानसिकता भी समाज के लिए घातक : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री ने कहा - बस्तर अब भय और हिंसा से निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर

रायपुर--मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने एक निजी चैनल के साक्षात्कार के दौरान कहा कि  नक्सलवाद के समर्थन में बात करने वाले और कुख्यात नक्सली हिड़मा , जिसने सैकड़ो निर्दोषों की हत्या की,  उसे आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली हैं । 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के लंबे और पीड़ादायक दौर से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, केंद्र और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बस्तर के लोगों के सहयोग से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। अब आवश्यकता इस बात की भी है कि हिंसा और नक्सलवाद को वैचारिक समर्थन देने तथा उसका महिमामंडन करने वाली मानसिकता को समाज स्पष्ट रूप से अस्वीकार करे।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग ऐसे कुख्यात नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं, जिनके हाथ निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों के खून से रंगे रहे हैं। हिड़मा जैसे नक्सलियों ने हिंसा और आतंक के माध्यम से बस्तर की अनेक पीढ़ियों को भय, अभाव और पिछड़ेपन में रखने का काम किया। ऐसे लोगों का महिमामंडन करना, उनके समर्थन में नारे लगाना या उन्हें नायक के रूप में प्रस्तुत करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदूक उठाकर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति किसी समाज का आदर्श नहीं हो सकता। नक्सली हिंसा में बस्तर ने अपने हजारों निर्दोष नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और बहादुर जवानों को खोया है। अनेक परिवारों ने अपनों को खोने का दर्द सहा, बच्चों से उनके माता-पिता छिने और विकास की संभावनाओं को दशकों तक बाधित किया गया। इस पीड़ा को नजरअंदाज कर हिंसा के जिम्मेदार लोगों का गुणगान करना बस्तर के पीड़ित परिवारों और शहीद जवानों के बलिदान का भी अपमान है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नक्सलवाद केवल बंदूक और जंगलों तक सीमित चुनौती नहीं है। हिंसा को उचित ठहराने, लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने और नक्सली हिंसा के जिम्मेदार लोगों को नायक के रूप में स्थापित करने वाली सोच भी उतनी ही चिंताजनक है। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा का समर्थन और निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों का महिमामंडन किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान बदल रही है। जिस क्षेत्र को कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और भय के कारण जाना जाता था, वहां अब स्कूलों की घंटियां सुनाई दे रही हैं, सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं, युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं तथा दूरस्थ गांव शासन की योजनाओं और विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के युवा अब बंदूक नहीं, किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहते हैं। वे अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं और देश-प्रदेश की प्रगति में भागीदार बनना चाहते हैं। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर के प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार तक विकास तथा सुशासन का लाभ पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल सुरक्षा की लड़ाई नहीं थी, बल्कि बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी। हमारे जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया है। अब समाज की जिम्मेदारी है कि हिंसा की विचारधारा को किसी भी स्वरूप में महिमामंडित न होने दे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ शांति, लोकतंत्र और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ चुका है। नक्सलवाद और हिंसा के लिए नए छत्तीसगढ़ में कोई स्थान नहीं है। बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, परिश्रम, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से समाज को आगे बढ़ा रहे हैं, न कि वे जिन्होंने बंदूक और हिंसा के सहारे निर्दोष लोगों का जीवन छीना।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना केवल सरकार या सुरक्षाबलों की उपलब्धि नहीं, बल्कि वहां के नागरिकों के साहस और विश्वास की जीत है। अब इस शांति को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर विकास की नई इबारत लिख रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर विकास की नई इबारत लिख रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा विकसित छत्तीसगढ़

सुरक्षा के साथ विकास की रणनीति ने बदली बस्तर की तस्वीर, अंतिम छोर तक पहुंच रही शासन की योजनाएं

नियद नेल्लानार से गांवों में पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान में 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण

बस्तर में पर्यटन, रोजगार और आजीविका के खुल रहे नए द्वार

मुख्यमंत्री  साय ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर--मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला छत्तीसगढ़ आज शांति, विश्वास और विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर प्रदेश अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना, पर्यटन और आजीविका सहित सर्वांगीण विकास के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।

मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट के अंतर्गत 10 प्रमुख मिशन निर्धारित किए गए हैं और उन्हें धरातल पर उतारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरपूर राज्य है। प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां लोहा, बॉक्साइट, लिथियम, सोना सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य भी है। प्राकृतिक संसाधनों की इस समृद्धि के साथ प्रदेश की मेहनतकश मानव शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इन क्षमताओं का समुचित उपयोग कर छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएगा।

सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति से बदली बस्तर की तस्वीर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद प्रदेश, विशेषकर बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा। वर्ष 2023 में राज्य में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने समन्वय के साथ नई रणनीति पर काम शुरू किया। पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक गति दी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। नई रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सुरक्षा बलों ने पूरी मजबूती से अभियान चलाते हुए पहले की तुलना में अपने जवानों की क्षति को कम रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जनता ने लगभग चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और संचार सुविधाओं जैसे विकास कार्यों का विरोध करते थे, जिसके कारण अनेक दूरस्थ क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटे रहे। इसलिए सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी।

‘नियद नेल्लानार’ ने दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरकार शुरू से स्पष्ट थी कि केवल नक्सल समस्या को समाप्त करना पर्याप्त नहीं होगा। स्थायी शांति के लिए बस्तर के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक विकास का लाभ पहुंचाना आवश्यक है। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई। गोंडी भाषा में इसका अर्थ है - ‘आपका अच्छा गांव’।

उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। क्षेत्र में 421 से अधिक स्कूल खोले गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। विकास को और गति देने के लिए सरकार ने ‘नियद नेल्लानार 2.0’ भी प्रारंभ किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है और राज्य सरकार इसी लक्ष्य के अनुरूप बस्तर के समग्र विकास पर काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों में पहुंचकर और वहां ठहरकर लोगों को योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।

शांति लौटने के साथ बस्तर में आजीविका और पर्यटन की नई संभावनाएं

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित होने के साथ अब रोजगार, आजीविका और पर्यटन के नए अवसर भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ समझौता किया गया है। बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। बस्तर के धुड़मारास गांव को दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक होम-स्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन और संस्कृति को निकट से अनुभव कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ऋण एवं अनुदान की सुविधा दे रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद खाली हो रहे लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए खोले पुनर्वास के द्वार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के लिए बेहतर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तैयार की गई। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा छोड़कर लौटने वालों के साथ न्याय होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने हिंसा की जगह संवाद और पुनर्वास को प्राथमिकता दी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी वैचारिक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश करने वाले कुछ तत्व मौजूद हैं, लेकिन बस्तर में तेजी से पहुंचता विकास और लोगों के जीवन में आ रहा सकारात्मक परिवर्तन ऐसे भ्रम का सबसे प्रभावी उत्तर है।

युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा और रोजगार पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। प्रत्येक विकासखंड तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ी है और आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी जैसे राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठित संस्थान प्रदेश में संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली में यूथ हॉस्टल के माध्यम से युवाओं को यूपीएससी की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है। प्रदेश में 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए भी सरकार अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभाशाली बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बनें।

नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही नई गति

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इनका असर धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि उसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इसी उद्देश्य से एक हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

“किसान परिवार से मिली मेहनत और जिम्मेदारी की सीख”

कार्यक्रम में अपनी जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। दस वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे के रूप में कम उम्र में ही उन्हें जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। बचपन से खेती करते हुए उन्होंने परिश्रम, धैर्य और जिम्मेदारी का महत्व सीखा।

उन्होंने कहा कि राजनीति में आने की उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। गांव के लोगों के आग्रह पर पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और जनप्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। पांच वर्ष तक पंच के रूप में किए गए कार्यों के आधार पर गांववासियों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना। इसके बाद वर्ष 1990 में तपकरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। अविभाजित मध्यप्रदेश में दो बार विधायक और रायगढ़ से चार बार सांसद के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला और आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा का महत्वपूर्ण दायित्व मिला है। सार्वजनिक जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के सामने संभावनाओं का नया आकाश है। नक्सलवाद की बाधा दूर होने के साथ बस्तर सहित पूरा प्रदेश विकास की नई गति पकड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और पर्यटन में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो तथा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ अपनी सशक्त भूमिका निभाए।

कार्यक्रम में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

शहीद वीर नारायण सिंह का जीवन सेवा, संघर्ष और राष्ट्रप्रेम की मिसाल : उप मुख्यमंत्री अरुण साव

शहीद वीर नारायण सिंह का जीवन सेवा, संघर्ष और राष्ट्रप्रेम की मिसाल : उप मुख्यमंत्री अरुण साव

 रायपुर: उप मुख्यमंत्री तथा बेमेतरा जिले के प्रभारी मंत्री  अरुण साव ने बेमेतरा में शहीद वीर नारायण सिंह की भव्य प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। वे प्रतिमा अनावरण के बाद कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित जिला स्तरीय आदिवासी महासम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में गोंडवाना भवन के जीर्णोद्धार के लिए 10 लाख रुपए तथा बेमेतरा में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 6 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। विधायक  दीपेश साहू भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री  साव ने आदिवासी महासम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ की माटी के ऐसे महान सपूत थे, जिन्होंने गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया। उनका पूरा जीवन संघर्ष, सेवा और राष्ट्रप्रेम की भावना से भरा रहा। उनके मन में समाज के प्रति सेवा का भाव और मातृभूमि के प्रति गहरा प्रेम था। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में गरीब और शोषित लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। अंग्रेजों के अत्याचार के सामने वे कभी नहीं झुके और देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

 साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती अनेक वीर योद्धाओं और जननायकों की गौरवशाली भूमि रही है। शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे महान योद्धाओं ने अपने साहस से समाज व मातृभूमि के प्रति समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया। इन वीर सपूतों का त्याग और बलिदान हमारी आने वाली पीढ़ियों को सदैव याद रहेगा। उन्होंने कहा कि बेमेतरा में स्थापित शहीद वीर नारायण सिंह की यह प्रतिमा उनके त्याग और बलिदान की स्मृति को चिरस्थायी बनाएगी। यह प्रतिमा युवाओं को राष्ट्रसेवा और समाजसेवा के लिए आगे बढ़ने का संदेश देगी। उन्होंने कहा कि देश और समाज के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले महापुरुषों का सम्मान हमारी जिम्मेदारी है।

केन्द्रीय गोंड़ महासभा धमधागढ़ के अध्यक्ष श्री कमलेश सोरी, सर्व आदिवासी समाज जिला अध्यक्ष श्री मुरीत मंडावी, गोंड समाज जिला अध्यक्ष श्री दरबार सिंह नेताम, बेमेतरा नगर पालिका के अध्यक्ष श्री विजय सिन्हा, उपाध्यक्ष श्री अशोक शर्मा, पूर्व विधायक श्री अवधेश चंदेल और श्री अजय साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गोड़ समाज के पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक भी आदिवासी महासम्मेलन में मौजूद थे।

राज्यपाल डेका से राज्य निर्वाचन आयुक्त ने सौजन्य भेंट की

राज्यपाल डेका से राज्य निर्वाचन आयुक्त ने सौजन्य भेंट की

 रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका से आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने आयोग की गतिविधियों से राज्यपाल को अवगत कराया।

अश्वनी नगर के गौसिया मस्जिद के पास युवक की हत्या कर ट्रेन से भागने वाले 4 नाबालिग आरोपी गिरफ्तार

अश्वनी नगर के गौसिया मस्जिद के पास युवक की हत्या कर ट्रेन से भागने वाले 4 नाबालिग आरोपी गिरफ्तार

 रायपुर। पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अश्वनी नगर स्थित गौसिया मस्जिद के पास 30 अगस्त की रात 11 बजे डंगनिया निवासी अहमद खान (22) के ऊपर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर हत्या करने वाले चार नाबालिग युवकों को पुलिस ने ट्रेन से दूसरी जगह भागने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया। तीन आरोपियो को बिलासपुर व एक आरोपी को स्थानीय स्तर पर पकड़ा गया। प्रारंभिक पूछताछ और जांच में पुलिस के सामने यह तथ्य आया है कि वारदात को आपसी रंजिश के चलते अंजाम दिया गया। पुलिस अब हिरासत में लिए गए सभी नाबालिगों से घटना के संबंध में विस्तृत पूछताछ कर रही है और हत्या के पीछे की पूरी वजह तथा घटनाक्रम की कडिय़ां जोडऩे में जुटी है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 30 अगस्त की रात करीब 11 बजे पुरानी बस्ती पुलिस को अश्वनी नगर में एक युवक डंगनिया निवासी अहमद खान (22) के गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घायल युवक को तत्काल एम्स रायपुर लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। इसके बाद पुलिस टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए और मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू की। हत्या की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के ट्रेन के जरिए रायपुर से बाहर भागने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही रायपुर पुलिस ने आरपीएफ पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया और आरोपियों की तलाश तेज कर दी। पुलिस की तत्परता के चलते तीन आरोपियों को बिलासपुर में, जबकि एक आरोपी को स्थानीय स्तर पर हिरासत में लिया गया। इस तरह मामले में कुल चार आरोपियों को पकड़ा गया। पकड़े गए सभी आरोपी नाबालिग है। पकड़े गए आरोपियों में से एक नाबालिग कुछ दिन पहले ही लूट के एक अन्य मामले में बाल संप्रेक्षण गृह से बाहर आया था। बाहर आने के कुछ ही समय बाद वह इस हत्या की वारदात में शामिल हो गया। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

रायपुर के नंदनवन का 50 करोड़ से होगा कायाकल्प, पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विकसित होगा बॉटनिकल गार्डन

रायपुर के नंदनवन का 50 करोड़ से होगा कायाकल्प, पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विकसित होगा बॉटनिकल गार्डन

 रायपुर। रायपुर जिले के अटारी गांव स्थित नंदनवन को अब एक नए और आकर्षक स्वरूप में पुनर्विकसित किया जाएगा। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों ने मुख्य सचिव श्री विकासशील के समक्ष नंदनवन पुनर्विकास की प्रस्तावित परियोजना का प्रस्तुतिकरण दिया।
परियोजना की मुख्य बातें
नंदनवन के कायाकल्प और विकास कार्य में लगभग 50 करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है। पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत यह पूरी परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर आधारित होगी। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बॉटनिकल गार्डन को नए सिरे से पुनर्जीवित और विकसित किया जाएगा। मुख्य सचिव ने परियोजना में पर्यटकों की सुविधा और आकर्षण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न जन-सुविधाएं विकसित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव द्वारा दिए गए समीक्षा बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, छत्क्। के सीईओ  चंदन कुमार समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

TIN पोर्टल खनिज संसाधनों को जनजातीय आजीविका से जोड़ने वाली मिनरल-टू-लाइवलीहुड पहल : साय

TIN पोर्टल खनिज संसाधनों को जनजातीय आजीविका से जोड़ने वाली मिनरल-टू-लाइवलीहुड पहल : साय

 00 मुख्यमंत्री ने किया TIN पोर्टल का शुभारंभ

00 TIN पोर्टल से टिन संग्राहक जनजातीय हितग्राहियों को मिलेगा पारदर्शी और उचित मूल्य
00 LME आधारित मूल्य निर्धारण से बाजार भाव के अनुरूप भुगतान, DBT से सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी राशि

00 डिजिटल रजिस्ट्रेशन, क्यूआर आधारित सत्यापन, एसएमएस अलर्ट और रियल टाइम मॉनिटरिंग से पूरी प्रक्रिया होगी पारदर्शी
रायपुर।
प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज संसाधनों के सतत एवं समावेशी विकास के साथ जनजातीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से विकसित TIN (ट्राइबल इंसेंटिव्स ऑन नेचुरल रिसोर्सेज़) पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान केंद्रीय कोयला और खान राज्यमंत्री  सतीश चंद्र दुबे, केंद्रीय शहरी आवासन राज्य मंत्री  तोखन साहू और सीएमडीसी के चेयरमैन  सौरभ सिंह सहित अधिकारीगण मौजूद रहे। 

यह पोर्टल बस्तर संभाग के जनजातीय समुदायों द्वारा संग्रहित टिन अयस्क के क्रय से लेकर परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और समयबद्ध बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। पोर्टल में लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) आधारित मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है, जिससे टिन संग्राहकों को बाजार की स्थिति के अनुरूप अधिक पारदर्शी मूल्य मिल सकेगा। वहीं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से विक्रय की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी, भुगतान में देरी की संभावना घटेगी और जनजातीय परिवारों को अपने प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ का अधिक प्रत्यक्ष एवं समयबद्ध लाभ मिलेगा।

टिन खरीदी की पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल, हर चरण की होगी निगरानी
TIN पोर्टल के माध्यम से टिन अयस्क के संग्रहण से लेकर भुगतान तक प्रत्येक चरण को डिजिटल वर्कफ्लो से जोड़ा गया है। इसमें डिजिटल हितग्राही पंजीयन एवं पहचान, बैंकिंग सेवाओं का एकीकरण, क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट सत्यापन, स्मार्ट कार्ड/पहचान सुविधा, ऑनलाइन स्टॉक प्रबंधन, भुगतान राशि की स्वचालित गणना, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और संपूर्ण ऑडिट ट्रेल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सीएमडीसी मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों और क्रय केंद्रों तक रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी विकसित की गई है। पोर्टल के माध्यम से हितग्राहियों को डिजिटल संचार, एसएमएस अलर्ट और भुगतान एवं लेन-देन की स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इससे न केवल संग्राहकों को अपने टिन की बिक्री और भुगतान की जानकारी समय पर मिलेगी, बल्कि सीएमडीसी के लिए स्टॉक, राजस्व, भुगतान और क्रय प्रक्रिया की निगरानी भी अधिक प्रभावी होगी।

06 टिन क्रय केंद्रों से खरीदी, 03 नए केंद्र प्रस्तावित
सीएमडीसी द्वारा वर्तमान में बस्तर संभाग में 06 टिन क्रय केंद्रों के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी की जा रही है। इनमें दंतेवाड़ा जिले के बचेली, कटेकल्याण और चिकपाल तथा सुकमा जिले के तोंगपाल, नामा और चिंतलनार में संचालित क्रय केंद्र शामिल हैं। अधिक से अधिक जनजातीय संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर टिन विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में 03 नए टिन संग्रहण एवं क्रय केंद्र स्थापित करने की योजना है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के संग्राहकों को अपने उत्पाद को बाजार तक ले जाने में होने वाली कठिनाइयों में कमी आएगी और अधिक हितग्राही औपचारिक एवं पारदर्शी क्रय व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।

टिन क्रय व्यवस्था में लागू हुई नई SOP, प्रक्रिया होगी सरल और किफायती

TIN पोर्टल के साथ CMDC द्वारा टिन अयस्क की खरीदी से बिक्री तक की प्रक्रिया के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी तैयार कर लागू की गई है। इसके तहत प्रत्येक क्रय केंद्र के लिए अलग सैंपलिंग की व्यवस्था, सैंपल की संख्या को 12 से घटाकर 6 करना, प्रत्येक सैंपल का मानकीकरण 50 ग्राम करना तथा परीक्षण परिणामों को लेकर असहमति की स्थिति में री-एनालिसिस का प्रावधान किया गया है। इससे प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होने के साथ परीक्षण एवं विश्लेषण से जुड़ी लागत में भी कमी आएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मासिक विश्लेषण शुल्क को 14,400 रुपए से घटाकर 7,200 रुपए किया गया है तथा इन सुधारों से CMDC को लगभग 10 लाख रुपए वार्षिक तक की संभावित बचत का अनुमान है। क्रय, बिक्री और परिवहन दरों के नियमित निर्धारण से पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता भी बढ़ेगी।

LME आधारित मूल्य से उचित मूल्य, DBT से सीधे खाते में भुगतान

TIN पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में LME आधारित मूल्य निर्धारण और DBT भुगतान व्यवस्था शामिल है। इससे टिन के अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखते हुए अधिक पारदर्शी मूल्य व्यवस्था विकसित होगी। विक्रय राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से हितग्राहियों को भुगतान के लिए किसी मध्यस्थ पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बैंकिंग प्रणाली से एकीकरण के कारण भुगतान अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय होगा। साथ ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था जनजातीय समुदायों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ते हुए वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा देगी।
टिन संग्रहण को आजीविका से जोड़ने की दिशा में पहल
बस्तर के दक्षिणी क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय लंबे समय से टिन अयस्क का संग्रहण करते रहे हैं। वर्ष 2013 में दंतेवाड़ा क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत पांच टिन अयस्क संग्रहण सहकारी समितियों का गठन किया गया था। अब TIN पोर्टल इसी सामुदायिक व्यवस्था को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए टिन संग्रहण को अधिक व्यवस्थित एवं स्थायी आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित करने का प्रयास है। इससे प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ को स्थानीय समुदायों तक सीधे पहुंचाने, उनकी आय बढ़ाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करने में मदद मिलेगी।
टिन खरीदी से जनजातीय हितग्राहियों को लगातार मिला आर्थिक लाभ
CMDC द्वारा जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी के माध्यम से लगातार आर्थिक लाभ पहुंचाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 8,707.2 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 90.82 लाख रुपए, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,895.335 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 3.81 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। 
सरकार और CMDC के लिए भी बनेगा मजबूत डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म
TIN पोर्टल केवल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह टिन की पूरी मिनरल वैल्यू चेन के डिजिटल प्रबंधन की व्यवस्था है। इससे सरकार को रियल टाइम राजस्व एवं क्रय संबंधी जानकारी प्राप्त होगी, जबकि CMDC को कागजी कार्यवाही कम करने, स्टॉक ट्रैकिंग, ऑडिट अनुपालन, भुगतान और क्रय केंद्रों की निगरानी में सुविधा मिलेगी। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य की नीतियों और योजनाओं के लिए भी बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे। इस प्रकार TIN पोर्टल छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधनों को जनजातीय आजीविका से जोड़ने वाली ‘मिनरल-टू-लाइवलीहुड’ पहल के रूप में सामने आया है। LME आधारित पारदर्शी मूल्य निर्धारण, DBT, डिजिटल पहचान, बैंकिंग एकीकरण, रियल टाइम मॉनिटरिंग और मानकीकृत SOP के माध्यम से इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बस्तर के टिन संग्राहक जनजातीय हितग्राहियों को उनके संसाधनों का अधिकतम, पारदर्शी और समयबद्ध आर्थिक लाभ मिल सके।
सीएमडीसी और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच हुआ महत्वपूर्ण एमओयू, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग को मिलेगी गति
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इस समझौते से खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, टिन संकलित करने वाले हितग्राहियों को पारदर्शी भुगतान और मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा।

सितंबर-अक्टूबर में रद्द रहेंगी कई ट्रेनें

सितंबर-अक्टूबर में रद्द रहेंगी कई ट्रेनें

 रायपुर। सितंबर और अक्टूबर में रेल यात्रियों की मुश्किलें बढऩे वाली हैं। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल के बंडामुंडा केबिन (ए) से राउरकेला सेक्शन के बीच पांचवीं लाइन के कमीशनिंग कार्य के चलते दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से संबंधित कई ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहेगा। रेलवे प्रशासन इस दौरान अलग-अलग चरणों में नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य और ट्रैफिक ब्लॉक लेगा। इसके चलते निर्धारित तिथियों पर कई ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कुछ ट्रेनों के मार्ग और समय में बदलाव किया गया है। ट्रेनों के प्रभावित होने का असर छत्तीसगढ़ समेत तीन राज्यों के यात्रियों पर पड़ेगा।

रेलवे के अनुसार, 25 से 30 सितंबर तथा 1, 2, 4, 5, 6, 7, 11, 12 और 13 अक्टूबर को नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी और टाटानगर से चलने वाली 18109/18110 इतवारी-टाटानगर-इतवारी एक्सप्रेस रद्द रहेगी। इसी अवधि में 18113 टाटानगर-बिलासपुर एक्सप्रेस का परिचालन भी प्रभावित रहेगा। वहीं, बिलासपुर-टाटानगर एक्सप्रेस भी 26 सितंबर से 14 अक्टूबर के बीच निर्धारित तिथियों पर रद्द रहेगी।

28 सितंबर और 12 अक्टूबर को 12767 नांदेड़-सांतरागाछी एक्सप्रेस तथा 30 सितंबर और 14 अक्टूबर को 12768 सांतरागाछी-नांदेड़ एक्सप्रेस रद्द रहेगी। 29 सितंबर को 01001 एलटीटी-सांतरागाछी स्पेशल और 1 अक्टूबर को 01002 सांतरागाछी-एलटीटी स्पेशल इसके अलावा, 1 और 13 अक्टूबर को 18641 हटिया-दुर्ग एक्सप्रेस तथा 2 और 14 अक्टूबर को 18642 दुर्ग-हटिया एक्सप्रेस का परिचालन रद्द रहेगा। 9 अक्टूबर को 22843 बिलासपुर-बक्सर एक्सप्रेस और 10 अक्टूबर को 22844 बक्सर-बिलासपुर एक्सप्रेस रद्द रहेगी। 10 अक्टूबर को 12812 हटिया-एलटीटी एक्सप्रेस और 12 अक्टूबर को 12811 एलटीटी-हटिया एक्सप्रेस भी नहीं चलेगी। 13 अक्टूबर को 12262 हावड़ा-सीएसएमटी दुरंतो एक्सप्रेस तथा 14 अक्टूबर को 12261 सीएसएमटी-हावड़ा दुरंतो एक्सप्रेस रद्द रहेगी। वहीं, 1 अक्टूबर को 13288/13287 आरा-दुर्ग-आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस का परिचालन भी रद्द रहेगा।

1 और 12 अक्टूबर को 18477 पुरी-योग नगरी ऋषिकेश उत्कल एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग से चलेगी। यह ट्रेन कटक, संबलपुर सिटी, झारसुगुड़ा रोड और ईब के रास्ते योग नगरी ऋषिकेश जाएगी। वहीं, 13 अक्टूबर को हावड़ा से रवाना होने वाली 12860 हावड़ा-सीएसएमटी गीतांजलि एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से दो घंटे देरी से रवाना होगी।

Police Transfer: रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में बड़ा फेरबदल, ASI-प्रधान आरक्षक समेत 25 पुलिसकर्मियों के तबादले

Police Transfer: रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में बड़ा फेरबदल, ASI-प्रधान आरक्षक समेत 25 पुलिसकर्मियों के तबादले

 रायपुर, 31 अगस्त 2026 | रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में सोमवार को एक बार फिर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने नए तबादला आदेश जारी करते हुए एक सहायक उपनिरीक्षक, एक प्रधान आरक्षक और 23 आरक्षकों की पदस्थापना में बदलाव किया है। इस तरह ताजा आदेश में कुल 25 पुलिसकर्मी प्रभावित हुए हैं। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में पिछले कुछ महीनों से लगातार अलग-अलग स्तर पर तबादले और नई जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। इससे पहले भी थाना, क्राइम ब्रांच और अन्य इकाइयों में अधिकारियों-कर्मचारियों की पदस्थापना बदली जा चुकी है।

23 आरक्षकों के थाने और इकाइयां बदलीं

ताजा आदेश में सबसे ज्यादा बदलाव आरक्षक स्तर पर किया गaया है। कुल 23 आरक्षकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा गया है। इसके अलावा एक सहायक उपनिरीक्षक और एक प्रधान आरक्षक की पदस्थापना भी बदली गई है। तबादला आदेश जारी होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करना होगा। विस्तृत सूची में किस पुलिसकर्मी को किस थाना या इकाई में भेजा गया है, यह आधिकारिक आदेश से स्पष्ट होगा।

कमिश्नरेट बनने के बाद लगातार हो रहे बदलाव

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद प्रशासनिक ढांचे में लगातार बदलाव देखने को मिले हैं। मई 2026 में भी बड़े स्तर पर 136 पुलिसकर्मियों की पदस्थापना बदली गई थी। उस सूची में SI, ASI, प्रधान आरक्षक और आरक्षक स्तर के कर्मचारी शामिल थे। इसके बाद 6 अगस्त को एक अन्य आदेश में 34 पुलिसकर्मियों का तबादला किया गया था, जिसमें SI, ASI, प्रधान आरक्षक और आरक्षक शामिल थे।

कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जरूरत के हिसाब से पोस्टिंग

पुलिस विभाग में इस तरह की पदस्थापनाएं आम तौर पर प्रशासनिक जरूरत, कानून-व्यवस्था और विभिन्न थाना क्षेत्रों में उपलब्ध बल के संतुलन को देखते हुए की जाती हैं। हालांकि ताजा आदेश में प्रत्येक पुलिसकर्मी की पदस्थापना बदलने का व्यक्तिगत कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है। इसलिए इन तबादलों को किसी कार्रवाई या अनुशासनात्मक कदम के रूप में लिखना सही नहीं होगा, जब तक आदेश में ऐसा स्पष्ट उल्लेख न हो।

पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने जारी किया आदेश

तबादला आदेश पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला की ओर से जारी किया गया है। रायपुर कमिश्नरेट में इससे पहले भी उनकी ओर से विभिन्न थाना प्रभारियों और पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किए जा चुके हैं। जुलाई में DCP और थाना स्तर पर भी प्रशासनिक फेरबदल हुआ था। ताजा तबादला सूची के बाद अब संबंधित पुलिसकर्मी नए थाना क्षेत्रों और इकाइयों में जिम्मेदारी संभालेंगे।

जशपुर में आधुनिक फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए 5.49 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति

जशपुर में आधुनिक फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए 5.49 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति

 00 मुख्यमंत्री साय के प्रयासों से जिले में खेल अधोसंरचना को मिलेगा नया आयाम

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से जशपुर जिले में खेल अधोसंरचना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला मुख्यालय जशपुर में आधुनिक फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 5 करोड़ 49 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरूण साव के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति दी गई है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण से जशपुर जिले के खिलाडिय़ों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही, स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी खेल प्रतिभा निखारने और जिला स्तर से आगे बढ़कर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए बेहतर मंच मिलेगा। जशपुर जिले में फुटबॉल के प्रति खिलाडिय़ों और युवाओं में विशेष उत्साह एवं रुचि को देखते हुए यह स्टेडियम खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे जिले में नियमित प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और खेल आयोजनों के लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध होगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा जशपुर जिले में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और खेल सुविधाओं के विस्तार पर लगातार जोर दिया जा रहा है। फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए मिली यह स्वीकृति जिले में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा छत्तीसगढ़, अन्वेषण से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन - मुख्यमंत्री साय

खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा छत्तीसगढ़, अन्वेषण से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन - मुख्यमंत्री साय

 00 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता से मजबूत होगी भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति

00 छत्तीसगढ़ के 5 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की हो रही नीलामी, मुख्यमंत्री ने निवेशकों से किया सक्रिय भागीदारी का आह्वान

00 मुख्यमंत्री साय ने ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल का किया शुभारंभ
00 सीएमडीसी का इंडियन ओवरसीज बैंक और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ एमओयू, वित्तीय सहयोग और कौशल विकास को मिलेगी गति

रायपुर। छत्तीसगढ़ में उपलब्ध समृद्ध खनिज संपदा और क्रिटिकल मिनरल्स की व्यापक संभावनाएं प्रदेश को विकास के नए क्षितिज पर ले जाने की क्षमता रखती हैं। हमारा लक्ष्य केवल धरती से खनिज निकालना नहीं, बल्कि अन्वेषण से उत्खनन, प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग से रिसाइक्लिंग तक पूरी मिनरल वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करना है। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की आठवीं किश्त के रोड शो को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स आने वाले समय में देश की आर्थिक प्रगति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक सुरक्षा के प्रमुख आधार होंगे। आज के तेजी से बदलते वैश्विक और तकनीकी परिदृश्य में इन खनिजों का महत्व बहुत आगे बढ़ चुका है। रक्षा उद्योग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक आधुनिक अर्थव्यवस्था के लगभग हर उभरते क्षेत्र के लिए इन खनिजों की विश्वसनीय उपलब्धता आवश्यक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल और टिन पोर्टल का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ महत्वपूर्ण एमओयू भी किए गए।

विकसित भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता आवश्यक
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से दुनिया की प्रमुख आर्थिक और तकनीकी शक्तियों में अपनी जगह बना रहा है। मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के माध्यम से देश में क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण, प्रसंस्करण और इनसे जुड़े उन्नत उद्योगों के विकास को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया के सभी प्रमुख देश अपने रणनीतिक संसाधनों और उनकी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में जुटे हैं। ऐसे समय में भारत के लिए क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की उपलब्धता में आत्मनिर्भर होना आर्थिक आवश्यकता के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता से मजबूत होगी भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति


रक्षा से एआई तक - नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं क्रिटिकल मिनरल्स
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रक्षा उद्योग तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी तकनीक की प्रभावशीलता को दुनिया ने देखा। आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में अनेक स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के लिए इनकी सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार एआई, सेमीकंडक्टर, बैटरी, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल प्रौद्योगिकी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, निकेल और क्रोमियम जैसे खनिज अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भविष्य की अर्थव्यवस्था में इनकी भूमिका लगातार बढऩे वाली है।

 

 
 

क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के पास बड़ी संभावनाएं
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज संपन्न राज्यों में है और अब क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी प्रदेश नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। कटघोरा और बस्तर में लिथियम एवं दुर्लभ मृदा तत्व, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम एवं गैलियम, बालोद में फास्फोराइट तथा महासमुंद में निकेल, क्रोमियम और ग्लाकोनाइट की संभावनाएं मौजूद हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की नीलामी की आठवीं किश्त में देश के 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स शामिल हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के 5 ब्लॉक्स हैं। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से इन ब्लॉक्स की नीलामी में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल खनिज ब्लॉक हासिल करने का अवसर नहीं है। यह अन्वेषण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, नवाचार और नए उद्योगों के माध्यम से छत्तीसगढ़ तथा देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का अवसर है। ये क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स विकसित भारत के निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी बन सकते हैं।

 

क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता से मजबूत होगी भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति

पूरी मिनरल वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सोच खनिज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास है कि खनिज आधारित उद्योगों की पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित हो। अन्वेषण और उत्खनन के बाद खनिज बाहर भेजने के बजाय उनका प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और उनसे संबंधित एडवांस मैन्युफैक्चरिंग प्रदेश में हो, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम आर्थिक लाभ छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों को मिले। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे आधुनिक उद्योगों में क्रिटिकल मिनरल्स की आवश्यकता होगी। खनिज संसाधनों की निकट उपलब्धता प्रदेश को इन उद्योगों के लिए स्वाभाविक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करेगी।

नई औद्योगिक नीति और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से निवेश को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार नए जमाने के उद्योगों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने के लिए निवेश अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। नई औद्योगिक नीति में उभरते और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों के लिए अनेक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के माध्यम से कम एवं मध्यम जोखिम वाले उद्योगों के लिए आवश्यक औपचारिकताओं को सरल किया गया है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 से विभिन्न अनुमतियों और एनओसी की प्रक्रिया भी सुगम हुई है। उन्होंने कहा कि पूंजी निवेश सहायता, स्टांप शुल्क एवं विद्युत शुल्क में छूट, ब्याज अनुदान और रोजगार आधारित प्रोत्साहन सहित विभिन्न सुविधाएं निवेशकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य में खनिज संपदा, ऊर्जा, भूमि, कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना की उपलब्धता क्रिटिकल मिनरल आधारित उद्योगों के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करती है।

क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता से मजबूत होगी भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति

खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ का खनिज राजस्व लगभग 400 करोड़ रुपए था। ढाई वर्ष पहले यह लगभग 12 हजार करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व का उपयोग प्रदेश के विकास और जनकल्याण में किया जा रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ स्थानीय लोगों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने उद्योग जगत और निवेशकों से छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आज पूरा देश छत्तीसगढ़ की ओर देख रहा है। प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और तेजी से औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह रोड शो छत्तीसगढ़ में निवेश, तकनीकी सहयोग और नई साझेदारियों के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा तथा प्रदेश को देश की क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता देश की रणनीतिक आवश्यकता : केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे

 

 
 

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। लंबे समय तक देश अनेक महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ इस दिशा में तेजी से काम हुआ है। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स का उपयोग वाहनों, इनवर्टर और ई-रिक्शा से लेकर जहाजों तथा आधुनिक रक्षा उपकरणों तक में होता है। उन्होंने निवेशकों, युवाओं और स्टार्टअप्स से इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल खनिजों का दोहन नहीं, बल्कि सतत और जिम्मेदार खनन को बढ़ावा देना है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाए।

 

क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता से मजबूत होगी भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति

खनन के साथ सुनियोजित और टिकाऊ विकास भी जरूरी : केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच छत्तीसगढ़ के पास अपनी समृद्ध खनिज संपदा और मजबूत औद्योगिक आधार के बल पर नई संभावनाओं को साकार करने का बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की सफलता केवल उनके आवंटन से नहीं मापी जानी चाहिए। इसका वास्तविक प्रभाव अन्वेषण, निवेश, प्रोसेसिंग सुविधाओं की स्थापना, तकनीकी विकास, वैल्यू एडिशन और रोजगार सृजन के रूप में दिखाई देना चाहिए। खनन और औद्योगिक निवेश के साथ आवास, परिवहन, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी नागरिक सुविधाओं का सुनियोजित विकास भी जरूरी है। इसके लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है।
निवेशकों को हर स्तर पर मिलेगा हैंडहोल्डिंग सपोर्ट - मुख्य सचिव विकास शील
मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कहा कि राज्य सरकार खनिज क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए 43 सेवाओं को रिस्क रेटेड अप्रोच के तहत अधिसूचित किया गया है। लो और मीडियम रिस्क गतिविधियों के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन तथा हाई रिस्क गतिविधियों के लिए आवश्यक अनुमति की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं की समयबद्ध स्थापना के लिए रणनीतिक परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खनन क्षेत्र में सर्वे, एनफोर्समेंट, परिवहन, रॉयल्टी भुगतान और नीलामी प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया जा रहा है तथा भविष्य में ट्रांसपोर्ट सिस्टम को और अधिक तेज तथा पेपरलेस बनाने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण, वन, भूमि अधिग्रहण एवं अन्य आवश्यक स्वीकृतियों में निवेशकों को सक्रिय हैंडहोल्डिंग सपोर्ट दे रही है। अब खनिज ब्लॉक्स की नीलामी लैंड शेड्यूलिंग के बाद की जा रही है, जिससे निवेशकों को भूमि, वन क्षेत्र एवं संबंधित प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी पहले ही उपलब्ध हो सके। मुख्य सचिव ने निवेशकों से केवल खदानों में निवेश तक सीमित न रहते हुए पूरी मिनरल वैल्यू चेन और डाउनस्ट्रीम उद्योगों में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने वाले नए बिजनेस मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया।

क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता से मजबूत होगी भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति


देश में अब तक 56 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की सफल नीलामी
भारत सरकार के खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने कहा कि भारत के वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की ओर तेजी से आगे बढऩे के साथ क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। ये खनिज इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रक्षा, एयरोस्पेस और उर्वरक सहित अनेक उन्नत उद्योगों के लिए जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी का अधिकार मिलने के बाद अब तक 88 ब्लॉक्स की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है, जिनमें 56 ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की खनिज संभावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि भारत के पहले लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक की नीलामी छत्तीसगढ़ के कटघोरा लिथियम एवं रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक से हुई। आठवीं किश्त में 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स में से 5 छत्तीसगढ़ में हैं।
उन्होंने बताया कि नीलामी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और निवेशक अनुकूल बनाने के लिए माइलस्टोन आधारित अनुपालन, समयबद्ध स्वीकृतियों, यूनिफाइड माइनिंग पोर्टल और बीमा सिक्योरिटी बॉन्ड जैसे अनेक सुधार किए गए हैं। उन्होंने निवेशकों से इन अवसरों का लाभ उठाते हुए भारत के सुरक्षित और आत्मनिर्भर क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम के निर्माण में भागीदार बनने का आग्रह किया।
वैज्ञानिक अन्वेषण और पारदर्शी व्यवस्था पर राज्य का विशेष जोर रू खनिज सचिव पी. दयानंद
खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद ने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा के सतत उपयोग, वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी नीलामी और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण सहित विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से वैज्ञानिक सर्वेक्षण, भू-आंकड़ों के संकलन और मैपिंग को मजबूत कर रही है। ऑनलाइन एवं पारदर्शी व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि संभावित खनिज क्षेत्रों को तेजी से उत्पादनशील खदानों में परिवर्तित किया जा सके। सरकार का लक्ष्य खनिज उत्खनन के साथ खनिज आधारित उद्योग, स्थानीय रोजगार, तकनीकी विकास और मूल्य संवर्धन को भी गति देना है।
ढाई वर्षों में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट, 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे
खनिज विभाग के संचालक एवं सीएमडीसी के प्रबंध संचालक श्री रजत बंसल ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में सतत खनन पद्धतियों के साथ खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को लगभग 16 हजार 700 करोड़ रुपए का खनिज राजस्व प्राप्त हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 98 प्रतिशत है। खनिज राजस्व में वर्ष-दर-वर्ष लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है। प्रदेश में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की गई है, जिनसे लगभग 4 लाख करोड़ रुपए के संभावित राजस्व की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लिथियम, ग्रेफाइट, वैनेडियम, गैलियम, गोल्ड, टंगस्टन, निकेल, क्रोमियम, कॉपर, लेड-जिंक और डायमंड सहित विभिन्न महत्वपूर्ण खनिजों की व्यापक संभावनाएं हैं। कटघोरा में लिथियम, बलरामपुर में ग्रेफाइट-वैनेडियम-गैलियम तथा बस्तर के टिन बेल्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों में अन्वेषण एवं नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। खनिज ऑनलाइन 2.0, डीएमएफ 2.0 और ई-नीलामी जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत की गई है। खदानों और माइनर मिनरल्स की निगरानी के लिए ड्रोन सर्वे का भी उपयोग किया जा रहा है।

क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता से मजबूत होगी भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति

ई-रेत संगवारी से पीएम आवास हितग्राहियों को सुविधा, टिन पोर्टल से आदिवासी परिवारों को मिलेगा उचित मूल्य
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाया जाएगा। इसी प्रकार दंतेवाड़ा क्षेत्र में टिन से जुड़े आदिवासी समुदायों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से टिन पोर्टल शुरू किया गया है। इन डिजिटल पहलों से खनिज प्रशासन में तकनीक के उपयोग के साथ आम नागरिकों को सीधे लाभ पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है।
सीएमडीसी के दो महत्वपूर्ण एमओयू, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग को मिलेगी गति
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इसके साथ ही कोरन्डम कटिंग एवं पॉलिशिंग के प्रशिक्षण के लिए सीएमडीसी और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच भी एमओयू हुआ। इन समझौतों से खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, कौशल विकास, मूल्य संवर्धन और निवेश की संभावनाओं को नई गति मिलेगी। इस अवसर पर माइनर मिनरल्स पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया गया तथा तीन लाइमस्टोन माइनिंग लीज ब्लॉक्स के लिए एनआईटी जारी करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई। कार्यक्रम में केंद्रीय खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री संदीप बसंत कदम सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, खनिज क्षेत्र से जुड़े निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स उपस्थित थे।

महतारी के आशीष से, राखी के विश्वास से मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर पहल

महतारी के आशीष से, राखी के विश्वास से मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर पहल

 00 2026 को महतारी गौरव वर्ष के रूप सदैव याद किया जाएगा

(एल.डी.मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)
रायपुर।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान मातृशक्ति के सम्मान और नारी शक्ति के प्रति आदर की परंपरा से जुड़ी हुई है। मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी की आस्था से लेकर माता कौशल्या की धरती तक, छत्तीसगढ़ में मातृशक्ति सदैव सामाजिक जीवन के केंद्र में रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और स्वावलंबन को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। वर्ष 2026 को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाया जाना इसी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार के 30 माह के कार्यकाल में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए महतारी वंदन योजना महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है। योजना के अंतर्गत प्रदेश की करीब 68 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। इससे महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ परिवार के आर्थिक निर्णयों में अधिक भागीदारी का अवसर मिल रहा है।
रक्षाबंधन से पहले बहनों को आर्थिक संबल
रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर राज्य सरकार ने महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि का अंतरण किया। 25 अगस्त को बालोद जिले में आयोजित कार्यक्रम में करीब 68 लाख महिलाओं के बैंक खातों में लगभग 631 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश की माताएं-बहनें आर्थिक रूप से सशक्त बनें, अपने छोटे-बड़े निर्णय स्वयं ले सकें और अपने त्योहारों को पूरे उत्साह एवं सम्मान के साथ मना सकें। रक्षाबंधन से पहले खातों में पहुंची यह राशि महिलाओं के लिए आर्थिक संबल के साथ पर्व की खुशियों में सरकार की सहभागिता का संदेश भी लेकर आई।

स्नेह की डोर कार्यक्रम में दिखा आत्मीयता और सम्मान का भाव
विगत दिनों रक्षाबंधन के अवसर पर रायपुर में आयोजित स्नेह की डोर कार्यक्रम में स्कूली बेटियों, दिव्यांग बेटियों और महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों, सेना और पुलिस के जवानों की कलाइयों पर रक्षा सूत्र बांधे। कार्यक्रम में सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया। कार्यक्रम का भावुक क्षण उस समय आया, जब वर्ष 2017 में रक्षाबंधन के ठीक एक दिन पूर्व नक्सली मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए शहीद उपनिरीक्षक श्री युगल किशोर वर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती माधुरी वर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की कलाई पर राखी बांधी। 

प्रदेश की बहनों के लिए सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राखी का यह धागा भाई-बहन के स्नेह के साथ-साथ शहीद परिवार के विश्वास और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के आतंक से मुक्त कराने के लिए सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। अनेक जवानों ने राष्ट्र और प्रदेश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ प्रदेश की बहनों के लिए सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार है। सरकार का प्रयास है कि नक्सल हिंसा के कारण किसी बहन का सुहाग न उजड़े, किसी मां को अपना बेटा न खोना पड़े और किसी बहन को अपने भाई की सुरक्षा की चिंता न सताए।

महिला स्व-सहायता समूहों से बढ़ा आत्मनिर्भरता का दायरा
राज्य में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोडऩे का कार्य निरंतर किया जा रहा है। प्रदेश में 2 लाख 42 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों से करीब 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। लखपति दीदी अभियान के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और आय के स्थायी साधनों से जोडऩे पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है। महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्थानीय स्तर पर विभिन्न उत्पादों का निर्माण एवं विपणन कर रही हैं। इससे उन्हें आय के अवसर प्राप्त हो रहे हैं और वे परिवार के साथ-साथ गांव के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
प्रदेशभर से मिला मुख्यमंत्री को बहनों का स्नेह
महतारी वंदन योजना की राशि रक्षाबंधन से पहले प्राप्त होने पर प्रदेश के विभिन्न जिलों की महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। सुकमा से कोरिया और राजनांदगांव से रायगढ़ तक प्रदेश के विभिन्न अंचलों की महिलाओं ने मुख्यमंत्री के प्रति स्नेह और विश्वास व्यक्त करते हुए उन्हें बड़े भाई के रूप में सम्मान दिया। महिलाओं ने कहा कि महतारी वंदन योजना से उन्हें अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता मिल रही है। आर्थिक सहायता ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया है और परिवार की आवश्यकताओं के लिए उन्हें अधिक सक्षम बनाया है।

राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश की नारी शक्ति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं का सम्मान, स्वावलंबन और समृद्धि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने तथा उन्हें विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। महतारी वंदन योजना, महिला स्व-सहायता समूहों और लखपति दीदी जैसे प्रयासों से छत्तीसगढ़ में नारी शक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों के खातों में पहुंची सहायता राशि ने इस विश्वास को और मजबूत किया है कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए प्रतिबद्ध है।

सुरक्षाबलों को सर्चिंग में मिला नक्सल डंप, 2 टिफिन बम सहित भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद

सुरक्षाबलों को सर्चिंग में मिला नक्सल डंप, 2 टिफिन बम सहित भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद

 सुकमा. आज रविवार को सुकमा में जवानों को बड़ी सफलता मिली. सुकमा के कोंटा थाना क्षेत्र के पहाड़ी जंगलों में चलाए गए सर्चिंग अभियान के दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक और नक्सली उपयोगी सामग्री बरामद की गई, जिसमें कुल 8 किलो वजन के दो टिफिन बम भी शामिल हैं.

जानकारी के मुताबिक, आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिले इनपुट के आधार पर ग्राम बेलपोच्चा से गोमपाड़ की ओर जाने वाले मार्ग के समीप घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में सर्चिंग अभियान चलाया गया. रविवार सुबह करीब 11 बजे जिला बल, डीआरजी और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम ने इलाके में एरिया डोमिनेशन और सर्चिंग की. इसी दौरान टीम को नक्सलियों द्वारा पहले से छिपाकर रखा गया डंप मिला.

सुरक्षा बलों ने डंप से 4 बंडल कोडेक्स वायर, 10 डेटोनेटर, 17 जिलेटिन, 1 बंडल फ्यूज वायर और 3 बंडल बिजली वायर बरामद किए. इसके अलावा वायर रहित अवस्था में दो टिफिन बम मिले, जिनमें एक का वजन 5 किलो और दूसरे का 3 किलो, यानी कुल 8 किलो है. दोनों बम को बीडीएस की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया. दो स्टील टिफिन, दो प्लास्टिक डस्टबिन, एक बैटरी और अन्य नक्सली उपयोगी सामग्री भी बरामद की गई है.

CG: गणेश उत्सव में इस बार नहीं बजेगा DJ! झांकी और मूर्ति की ऊंचाई को लेकर प्रशासन ने तय किए नए नियम

CG: गणेश उत्सव में इस बार नहीं बजेगा DJ! झांकी और मूर्ति की ऊंचाई को लेकर प्रशासन ने तय किए नए नियम

 Ganesh Utsav 2026: भिलाई में गणेश उत्सव को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से सम्पन्न कराने दुर्ग पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। डीआईजी विजय अग्रवाल के निर्देश पर जिले के 50 से अधिक बड़े और मध्यम गणेश पंडाल समितियों के पदाधिकारियों की बैठक लेकर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में एएसपी शोभराज अग्रवाल, सीएसपी दुर्ग हर्षित मेहर, सीएसपी भिलाई नगर निशांत पाठक और सीएसपी छावनी प्रशांत सिंह पैकरा मौजूद रहे।

प्रवेश-निकास पर कैमरे रात में दो सदस्य रहेंगे

पुलिस ने पंडालों में प्रवेश-निकास, मुख्य मूर्ति स्थल और पार्किंग क्षेत्र में पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे लगाने कहा है। रात में पंडाल की सुरक्षा के लिए समिति के कम से कम दो सदस्यों की मौजूदगी अनिवार्य रहेगी। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग कतार व प्रवेश-निकास व्यवस्था के साथ पर्याप्त वॉलेंटियर और सुरक्षा गार्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं।

रात 10 बजे बाद लाउडस्पीकर पर रोक

सीएसपी हर्षित मेहर ने बताया कि रात 10 बजे के बाद ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। उल्लंघन पर उपकरण जब्त करने के साथ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पंडाल और विसर्जन झांकी में नशे का सेवन तथा जबरन चंदा वसूली पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

केवल धार्मिक गीतों की अनुमति

विसर्जन झांकी निर्धारित मार्ग से ही निकालनी होगी। प्रत्येक झांकी में अधिकतम तीन वाहन—गणेश वाहन, झांकी वाहन और जनरेटर-डीजे वाहन—की अनुमति होगी। झांकी की अधिकतम ऊंचाई 15 फीट और प्रत्येक झांकी में कम से कम आठ वॉलेंटियर रखना अनिवार्य होगा। विसर्जन के दौरान तलवार, भाला, डंडा या अन्य हथियार रखने पर रोक रहेगी। झांकियों में केवल धार्मिक गीतों की अनुमति होगी।

सडक़ रोककर पार्किंग या वसूली नहीं

पंडाल और पार्किंग के लिए सडक़ अथवा आवागमन मार्ग बाधित नहीं करने तथा पहले से पार्किंग स्थल चिह्नित करने कहा गया है। अनधिकृत पार्किंग शुल्क वसूली मिलने पर कार्रवाई होगी। झूले, मनोरंजन उपकरण और तकनीकी मशीनरी लगाने से पहले संबंधित विभाग से तकनीकी प्रमाण-पत्र लेना होगा। पंडालों में फायर, सुरक्षा और इलेक्ट्रिसिटी ऑडिट कराने के साथ अग्निशमन उपकरण, रेत और पानी की व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए।

छत्तीसगढ़ सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत! दिल्ली-मुंबई समेत 66 बड़े अस्पतालों में करा सकेंगे इलाज, जानें नियम

छत्तीसगढ़ सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत! दिल्ली-मुंबई समेत 66 बड़े अस्पतालों में करा सकेंगे इलाज, जानें नियम

 CG Government Employees: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों और उनके परिजनों के इलाज के लिए अधिमान्य निजी अस्पतालों की नई सूची जारी की है। इसके तहत कर्मचारी अब दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद समेत दूसरे राज्यों के 66 बड़े निजी अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे। सूची में देश के कई प्रतिष्ठित अस्पतालों को शामिल किया गया है। हालांकि, प्रदेश में पदस्थ कर्मचारियों को इन अस्पतालों में इलाज के लिए रेफरल लेटर लेना अनिवार्य होगा। 

मेदांता से अपोलो तक कई बड़े अस्पताल शामिल

अधिमान्य अस्पतालों की सूची में मेदांता, सर गंगाराम अस्पताल, शेल्बी, जसलोक, सीएमसी, कोकिलाबेन, शंकर नेत्रालय और अपोलो जैसे प्रमुख अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों में गंभीर और जटिल बीमारियों के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। दूसरे राज्यों में इलाज कराने की सुविधा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई कर्मचारी बेहतर और एडवांस उपचार के लिए देश के बड़े चिकित्सा संस्थानों का रुख करते हैं।

प्रदेश के कर्मचारियों के लिए रेफरल जरूरी

छत्तीसगढ़ में पदस्थ सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों और उनके परिजनों को अधिमान्य अस्पतालों में इलाज कराने के लिए रेफरल लेटर लेना होगा। वहीं, दिल्ली में सेवा दे रहे कर्मचारियों को वहां के अधिमान्य अस्पतालों में इलाज के लिए सीधे जाने की सुविधा होगी।

2024 में सीमित अस्पतालों को लेकर उठे थे सवाल

इससे पहले वर्ष 2024 में इलाज के लिए महज कुछ अस्पतालों को अधिमान्यता दिए जाने पर अधिकारी-कर्मचारियों ने सवाल उठाए थे। सीमित विकल्प होने के कारण कर्मचारियों को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने में परेशानी होती थी। नई सूची में 66 बड़े निजी अस्पताल शामिल किए जाने से कर्मचारियों के पास इलाज के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

प्रदेश में 100 से ज्यादा अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा

सरकारी कर्मचारियों के लिए केवल दूसरे राज्यों के अधिमान्य अस्पताल ही विकल्प नहीं हैं। प्रदेश के 100 से ज्यादा अस्पतालों में भी वे नियमानुसार इलाज करा सकते हैं। हालांकि, गंभीर या जटिल बीमारी की स्थिति में कई कर्मचारी बेहतर विशेषज्ञता और आधुनिक सुविधाओं के लिए दूसरे राज्यों के बड़े अस्पतालों को प्राथमिकता देते हैं।

पहले करना होगा इलाज का भुगतान

अधिमान्य अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था कैशलेस नहीं है। कर्मचारी को पहले अस्पताल में इलाज का खर्च स्वयं वहन करना होगा। इलाज पूरा होने के बाद अस्पताल से मिले बिल के आधार पर राशि के रिअंबर्समेंट की प्रक्रिया होगी।

मेडिकल बिल पास होने के बाद खाते में आएगी राशि

बड़े मेडिकल बिलों को चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा स्वीकृत किया जाता है। इलाज से जुड़े दस्तावेज और बिलों की जांच के बाद भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है। बिल स्वीकृत होने के बाद इलाज में खर्च हुई निर्धारित राशि कर्मचारी के बैंक खाते में जमा कराई जाती है।

एडवांस इलाज के लिए बढ़ेंगे विकल्प

नई अधिमान्य अस्पताल सूची का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों और उनके परिजनों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए देश के प्रमुख निजी अस्पतालों तक पहुंच उपलब्ध कराना है। 66 अस्पतालों को सूची में शामिल किए जाने से कर्मचारियों को इलाज के लिए पहले की तुलना में अधिक विकल्प मिल सकेंगे।

आज BJP किसान मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति बैठक, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय होंगे शामिल

आज BJP किसान मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति बैठक, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय होंगे शामिल

 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा छत्तीसगढ़ की एक दिवसीय महत्वपूर्ण प्रदेश कार्यसमिति बैठक आगामी 31 अगस्त को रायपुर स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय ‘कुशाभाऊ ठाकरे परिसर’ में आयोजित की जा रही है। यह बैठक सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक विभिन्न सत्रों में संपन्न होगी।

​कार्यसमिति के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ छत्तीसगढ़ शासन के कृषि मंत्री रामविचार नेताम करेंगे। दिनभर चलने वाले विभिन्न संगठनात्मक सत्रों में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय तथा केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू सहित अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहकर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

बैठक के समापन सत्र में प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री जी कार्यकर्ताओं को अपना मार्गदर्शन प्रदान करेंगे और उनके उद्बोधन के साथ ही कार्यसमिति का विधिवत समापन होगा।

​इस बैठक में केंद्र व राज्य सरकार की किसान कल्याणकारी योजनाओं, संगठनात्मक विस्तार एवं आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में किसान मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारी, कार्यसमिति सदस्य एवं जिला स्तर के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।

उपरोक्त जानकारी प्रदेश अध्यक्ष आलोक ठाकुर भाजपा किसान मोर्चा छत्तीसगढ़ ने दी।

 
हाथी का खौफ! जंगल गए ग्रामीण का हाथी से हुआ सामना, हमले में मौके पर ही दर्दनाक मौत, गांव में पसरी दहशत….

हाथी का खौफ! जंगल गए ग्रामीण का हाथी से हुआ सामना, हमले में मौके पर ही दर्दनाक मौत, गांव में पसरी दहशत….

 सूरजपुर. छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिल में हाथी के हमले में ग्रामीण की मौत हो गई है. जजवाल गांव के पास जंगल गए ग्रामीण का हाथी से सामना हो गया. घटना के बाद गांव वाले दहशत में आ गए. वन विभाग की टीम सूचना मिलने पर सतर्क हो गई है.

जानकारी के मुताबिक, प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत जजवाल गांव के आसपास हाथी पहुंच गया. शनिवार रात जंगल गए ग्रामीण पर हाथी ने हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद जंगल से गुजर रहे अन्य ग्रामीणों की नजर शव पर पड़ी. उन्होंने तत्काल इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी.

जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है. फिलहाल मृतक के संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है. हाथी के लगातार हमलों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी के चलते ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. आसपास के गांवों में मुनादी कराई जा रही है.