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बिहान से ग्रामीण परिवारों को मिल रहा आत्मनिर्भरता का नया आधार, मछली पालन से बढ़ेंगे आजीविका के अवसर

बिहान से ग्रामीण परिवारों को मिल रहा आत्मनिर्भरता का नया आधार, मछली पालन से बढ़ेंगे आजीविका के अवसर

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने लखनपुर में मछली बीज वितरण कार्यक्रम में की सहभागिता, महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर दिया जोर

रायपुर । राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ एवं आकांक्षी विकासखण्ड कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद पंचायत लखनपुर के तत्वावधान में ग्राम पंचायत स्तरीय मछली बीज वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने सहभागिता करते हुए ग्रामीण परिवारों को आजीविका के नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और गांव के लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। मछली पालन जैसे स्थानीय संसाधन आधारित व्यवसाय ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय कौशल का बेहतर उपयोग करते हुए अधिक से अधिक परिवारों को स्थायी आजीविका से जोड़ा जाए। मछली बीज वितरण जैसी पहल से ग्रामीणों को मछली पालन के लिए आवश्यक आधार मिलेगा और वे इसे आर्थिक गतिविधि के रूप में विकसित कर अपनी आय में वृद्धि कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से न केवल परिवार मजबूत होता है, बल्कि पूरे गांव की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है।

अग्रवाल ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह ‘बिहान’ अभियान की सबसे बड़ी ताकत हैं। समूहों के माध्यम से महिलाएं बचत, ऋण, स्वरोजगार और विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। शासन की योजनाओं का लाभ इन समूहों तक पहुंचाकर उन्हें कृषि, पशुपालन, मछली पालन, लघु उद्यम तथा अन्य स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आकांक्षी विकासखण्ड कार्यक्रम के माध्यम से विकास की दृष्टि से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, कौशल विकास और आजीविका के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की मंशा है कि विकास की मुख्यधारा से गांव का प्रत्येक परिवार जुड़े और स्थानीय स्तर पर ही आय के पर्याप्त साधन विकसित हों।

मंत्री  अग्रवाल ने ग्रामीणों से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे और वह अपने पैरों पर खड़ा हो सके। उन्होंने मछली पालन से जुड़े हितग्राहियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पहल आने वाले समय में ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी।

कार्यक्रम के दौरान मछली पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रामीण हितग्राहियों को मछली बीज का वितरण किया गया। ग्रामीणों ने इस पहल के लिए राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाओं से उन्हें अपने गांव में ही आय का नया साधन प्राप्त हो रहा है।

कार्यक्रम में लुंड्रा विधायक  प्रबोध मिंज सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

 
 नगरीय निकायों को एल्डरमैन निधि के 9.44 करोड़ जारी, अरुण साव ने दिए सदुपयोग के निर्देश

नगरीय निकायों को एल्डरमैन निधि के 9.44 करोड़ जारी, अरुण साव ने दिए सदुपयोग के निर्देश

 रायपुर। राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगरीय निकायों हेतु कुल 9 करोड़ 44 लाख 25 हजार रुपए की एल्डरमैन निधि जारी की है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत एल्डरमैन निधि की प्रथम किस्त की 50 प्रतिशत राशि विभाग द्वारा जारी की गई है। इस मद से मनोनीत पार्षदों (एल्डरमैन) की अनुशंसा पर विकास कार्य किए जाते हैं ।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने नगरीय निकायों को ये राशि जारी कर दी है। साव ने नगरीय निकायों को इस निधि का सदुपयोग करते हुए राज्य की शहरी आबादी तक योजनाओं का समुचित लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा राज्य के 10 नगर निगमों में एल्डरमैन निधि के कुल 2 करोड़ 7 लाख रुपए जारी किए गए हैं। 53 नगर पालिकाओं में कुल 3 करोड़ 93 लाख रुपए और 102 नगर पंचायतों में कुल 3 करोड़ 44 लाख 25 हजार रुपए की एल्डरमैन निधि विभाग द्वारा जारी की गई है।

वॉश एंड वॉश ब्लैक करेंसी स्कैम का पर्दाफाश : 4 करोड़ से ज्यादा कैश के साथ अंतरराज्यीय गिरोह के 7 आरोपी गिरफ्तार

वॉश एंड वॉश ब्लैक करेंसी स्कैम का पर्दाफाश : 4 करोड़ से ज्यादा कैश के साथ अंतरराज्यीय गिरोह के 7 आरोपी गिरफ्तार

 रायपुर।  राजधानी पुलिस ने ‘वॉश एंड वॉश’ ब्लैक करेंसी स्कैम के एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के 7 आरोपियों को पुणे से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 4 करोड़ रुपये से अधिक की नगदी, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार के काले पेपर, कांच की प्लेट्स समेत अन्य सामग्री और दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने रायपुर में एक व्यक्ति को 1.13 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया था। मामले में पहले ही दो महिला आरोपियों को नागपुर से गिरफ्तार किया जा चुका है। इस तरह प्रकरण में अब तक कुल 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुणे के रिसॉर्ट में रंगे हाथों पकड़े गए आरोपी

पुलिस जांच में गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट, संपर्क नंबर और सोशल मीडिया अकाउंट की तकनीकी जांच से गिरोह के अन्य सदस्यों की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने पुणे पहुंचकर करीब एक सप्ताह तक आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी।

पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर बुला रहे हैं। टीम ने मौके पर रेड की, जहां 7 आरोपी पीड़ित से करोड़ों रुपये की रकम लेकर ठगी करते हुए पकड़े गए।

2005 से ठगी करने का दावा

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य वर्ष 2005 से सक्रिय हैं और देश के अलग-अलग राज्यों में 100 से अधिक लोगों से ठगी करने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने छत्तीसगढ़ के अलावा नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर, दिल्ली समेत कई शहरों में वारदातों को अंजाम दिया।

गिरोह के मुख्य सरगना के रूप में ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन/शेट्टी/रेड्डी और मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर** के नाम सामने आए हैं।

रकम दोगुनी करने का झांसा

पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद को प्रभावशाली लोगों और विदेशी निवेशकों से जुड़ा बताकर लोगों का विश्वास जीतते थे। इसके बाद बड़े निवेश, फंड रिलीज, विदेशी तकनीक और केमिकल के नाम पर पीड़ितों से बड़ी रकम ली जाती थी।

गिरोह द्वारा ‘वॉश-वॉश’ ब्लैक करेंसी स्कैम के जरिए काले कागज या नकली नोटों को विशेष केमिकल से असली भारतीय मुद्रा में बदलने का झूठा प्रदर्शन किया जाता था। इसके लिए पहले से तैयार असली नोटों का इस्तेमाल कर पीड़ितों का भरोसा जीता जाता था। बाद में अलग-अलग बहानों से पीड़ितों से लगातार रकम वसूली जाती थी।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी पीड़ितों को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, राजस्थान, गुजरात और अन्य शहरों के महंगे होटलों में बुलाकर खुद को प्रभावशाली व्यक्ति के तौर पर पेश करते थे। कई मामलों में गिरोह के सदस्य निजी गनमैन के साथ भी रहते थे, ताकि पीड़ितों पर प्रभाव बनाया जा सके।

दो आरोपी पहले भी जा चुके हैं जेल

पुलिस के अनुसार, आरोपी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन पहले भी ठगी के मामले में मुंबई में जेल जा चुका है। वहीं मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर भी मुंबई और वाराणसी में ठगी के मामलों में जेल निरुद्ध रह चुका है।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 330/26, धारा 318(4), 61(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

गिरफ्तार आरोपी

01. ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी पिता रामआश्रय श्रीवास्तव उम्र 46 साल निवासी सेक्टर 51 समस्तपुर गुड़गांव हरियाणा। हाल पता – फ्लैट नंबर बी/205 सीडी हाईट्स नालासोपारा थाना नालासोपारा मुम्बई।

02. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी पिता सत्यप्रकाश श्रीवास्तव उम्र 52 वर्ष निवासी पाण्डेयपुर लालपुर थाना वाराणसी उत्तरप्रदेश।

03. मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर पिता स्व. एस एस लाल श्रीवास्तव उम्र 55 वर्ष निवासी एस एच 8/54 बी 9 शिवपुर थाना शिवपुर जिला वाराणसी उत्तरप्रदेश।

04. विवेक सिंह पिता स्व. शिवरतन सिंह उम्र 48 साल निवासी लहौरा वीर जगत गंज थाना चेतगंज जिला वाराणसी उत्तरप्रदेश।

05. शुभम पांडेय पिता महेंद्र पांडेय उम्र 37 साल निवासी चंदवत थाना चंदवत जिला जौनपुर उत्तरप्रदेश। हाल पता – ए विंग फ्लैट नंबर 411 रॉयल पॉम अपार्टमेंट थाना गोरेगांव गोरेगांव ईस्ट मुम्बई।

06. योगेन्द्र चौहान पिता स्व. रामानंद चौहान उम्र 48 साल निवासी ग्राम सेनापुर पोस्ट बडनपुर थाना केराकत जिला जौनपुर उत्तरप्रदेश।

07. बालमुकुंद दीक्षित पिता वेदप्रकाश दीक्षित उम्र 40 साल निवासी ग्राम खटारा पोस्ट भौंरा थाना केराकत जिला जौनपुर उत्तरप्रदेश।

पुलिस का कहना है कि गिरोह के नेटवर्क और देशभर में की गई ठगी से जुड़े अन्य मामलों की भी जांच की जा रही है।

छत्तीसगढ़ के इस जिले में H1N1 की एंट्री से मचा हड़कंप, 2 साल की मासूम हुई संक्रमित; स्वास्थ्य विभाग सतर्क…..

छत्तीसगढ़ के इस जिले में H1N1 की एंट्री से मचा हड़कंप, 2 साल की मासूम हुई संक्रमित; स्वास्थ्य विभाग सतर्क…..

दुर्ग। जिले में स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है। एक निजी अस्पताल में भर्ती 2 साल 11 माह की बच्ची H1N1 पॉजिटिव पाई गई है। जिले में यह स्वाइन फ्लू का पहला पुष्ट मामला बताया जा रहा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाते हुए अलर्ट जारी कर दिया है।

बताया जा रहा है कि बच्ची को तेज बुखार और फ्लू जैसे लक्षण होने पर दो दिन पहले निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों को स्वाइन फ्लू की आशंका हुई, जिसके बाद बच्ची का RT-PCR टेस्ट कराया गया। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई।

फिलहाल बच्ची का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

सिविल सर्जन डॉ. आशीषन कुमार मिंज ने बताया कि बच्ची को तेज बुखार और फ्लू जैसे अन्य लक्षणों के कारण दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रारंभिक जांच में स्वाइन फ्लू की आशंका होने पर बच्ची का आरटी-पीसीआर टेस्ट कराया गया। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर H1N1 वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई।

रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल एहतियाती कदम उठाए हैं। विभाग की टीम संक्रमित बच्ची के घर और आसपास के क्षेत्र में सर्वे कर रही है। संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने के लिए बच्ची के परिवार के अन्य सदस्यों के भी सैंपल लेकर जांच की गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संक्रमण के प्रसार की आशंका को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रशिक्षित स्वच्छता निरीक्षक संघ ने उपमुख्यमंत्री साव से की मुलाकात, रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की मांग

प्रशिक्षित स्वच्छता निरीक्षक संघ ने उपमुख्यमंत्री साव से की मुलाकात, रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की मांग

 रायपुर। छत्तीसगढ़ स्वच्छता निरीक्षक संघ, मुख्यालय रायपुर के पदाधिकारियों एवं प्रशिक्षित डिप्लोमाधारी स्वच्छता निरीक्षक अभ्यर्थियों ने आज जनदर्शन कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव से सौजन्य भेंट कर राज्य के नगर निगमों एवं नगर पालिकाओं में रिक्त स्वच्छता निरीक्षक पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने हेतु ज्ञापन सौंपा।
संघ ने अवगत कराया कि वर्ष 2018 में 54 पदों पर भर्ती के पश्चात पिछले 6-7 वर्षों से स्वच्छता निरीक्षकों के अनेक पद रिक्त हैं। वर्तमान में अधिकांश सफाई कार्य एजेंसियों एवं ठेकेदारों के माध्यम से संचालित हो रहे हैं, जबकि उनके प्रभावी निरीक्षण, मॉनिटरिंग एवं पर्यवेक्षण के लिए प्रशिक्षित स्वच्छता निरीक्षकों की आवश्यकता है। उपमुख्यमंत्री साव ने आवेदन पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को आवश्यक एवं उचित कार्रवाई हेतु तत्काल निर्देशित किया। संघ ने इस पहल का स्वागत करते हुए शीघ्र भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ होने की उम्मीद जताई।
इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष सुखीराम पटेल, उपाध्यक्ष नेमचंद बंजारे, सचिव बिशेसर जोगी, सहसचिव सुमीत तंबोली, दुर्ग संभाग अध्यक्ष संदीप कुरें, रायपुर संभाग अध्यक्ष ईश्वरी महोबिया, बिलासपुर संभाग अध्यक्ष मनीष पटेल, सरगुजा संभाग अध्यक्ष मनोज सिदार, बस्तर संभाग अध्यक्ष दीया देवनाथ, मीडिया प्रभारी हेमंत दास मानिकपुरी तथा सलाहकार देवनारायण जायसवाल सहित संघ के अन्य प्रशिक्षित डिप्लोमाधारी सदस्य उपस्थित रहे और भर्ती की मांग का समर्थन किया।

उप मुख्यमंत्री साव ने 32 करोड़ के कार्यों का किया भूमिपूजन

उप मुख्यमंत्री साव ने 32 करोड़ के कार्यों का किया भूमिपूजन

 0 नए बस स्टैंड के लिए 6.50 करोड़ और नगर पालिका कार्यालय के लिए 3.50 करोड़ की घोषणा

रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने आज महासमुंद में 31 करोड़ 60 लाख रुपए के कार्यों का भूमिपूजन किया। वे शहर के लोहिया चौक में आयोजित विभिन्न विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में महासमुंद के नए बस स्टैंड को सुविधायुक्त और आधुनिक बस स्टैंड के रूप में विकसित करने 6 करोड़ 50 लाख रुपए देने की घोषणा की। उन्होंने नगर पालिका के नए कार्यालय भवन के निर्माण के लिए 3 करोड़ 50 लाख रुपए की भी घोषणा की।

उप मुख्यमंत्री  साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरों के समग्र और संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश की दशा और दिशा बदलने का कार्य किया है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी शहर स्वच्छ, सुंदर और विकसित बनें। उन्होंने कहा कि राज्य के छह जिलों को स्वच्छता के क्षेत्र में पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। सरकार बिना किसी भेदभाव के विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 38 नालंदा परिसर स्वीकृत किए गए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की एक-एक गारंटी को पूरा करने की दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि घर बैठे मिल रही है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में विकास कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 12 हजार 666 करोड़ रुपए के पुल-पुलिया निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। महासमुंद जिले में भी विभिन्न विकास कार्यों के लिए 468 कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चारों ओर सड़कों और अधोसंरचना के विकास को गति दी जा रही है। महासमुंद के विकास के लिए राज्य सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। श्री साव ने कहा कि आने वाले समय में महासमुंद को देश का नंबर-1 स्वच्छ शहर बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि सभी मिलकर संकल्प लें कि ये शहर हमारा है, यहां का मान-सम्मान मेरा सम्मान है और यहां का गौरव मेरा गौरव है

विधायक  योगेश्वर राजू सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार और उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री  अरुण साव के मार्गदर्शन में महासमुंद के विकास को लगातार प्राथमिकता मिल रही है। महासमुंद लगातार विकास की ओर अग्रसर है और सभी के सहयोग से जिले को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि महासमुंद का गौरव पथ और तुमगांव रोड निर्माणाधीन है। नहर लिंकिंग रोड स्वीकृत हो चुका है तथा सड़कों के कार्यों के टेंडर भी जारी हो चुके हैं। सीकासेर का पानी कोडार तक पहुंच रहा है। सिरपुर बैराज भी स्वीकृत हो चुका है। विधायक  सिन्हा ने महासमुंद शहर के विकास के लिए रिंग रोड की आवश्यकता पर जोर देते हुए नए बस स्टैंड तथा नए कार्यालय भवन की मांग उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखी।
नगर पालिका अध्यक्ष  निखिल कांत साहू ने महासमुंद को विकास कार्यों की सौगात देने के लिए उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बढ़ती जनसंख्या और शहर के विस्तार को देखते हुए महासमुंद नगर पालिका को नगर निगम बनाने की मांग रखी। 
पूर्व राज्य मंत्री  पूनम चंद्राकर, पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री चन्द्रहास चन्द्राकर, जिला स्काउट एवं गाइड संघ के जिलाध्यक्ष  येतराम साहू, छ.ग. राज्य स्काउट गाइड के मुख्य आयुक्त  इंद्रजीत सिंह खालसा, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष पवन पटेल, नगर पालिका उपाध्यक्ष  देवीचंद राठी और कलेक्टर  विनय कुमार लंगेह सहित पार्षदगण, ऐल्डरमेन स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक कार्यक्रम में मौजूद थे।

जिले में 30 अगस्त को नीट-पीजी परीक्षा 2026 आयोजित

जिले में 30 अगस्त को नीट-पीजी परीक्षा 2026 आयोजित

 रायपुर। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित नीट-पीजी परीक्षा 2026 का आयोजन 30 अगस्त को किया जाएगा। परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक संचालित होगी। परीक्षा के सुचारू संचालन हेतु डिप्टी कलेक्टर रायपुर उपेन्द्र किण्डो एवं पुलिस विभाग से सहायक पुलिस आयुक्त सुश्री नंदनी ठाकुर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।


रक्षाबंधन से पहले बहनों को विष्णु भैया का महतारी वंदन उपहार

रक्षाबंधन से पहले बहनों को विष्णु भैया का महतारी वंदन उपहार

 o रक्षाबंधन से पहले बहनों को विष्णु भैया का महतारी वंदन उपहार

o 30 किस्तों में 19,444.33 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में अंतरित
o महतारी वंदन की राशि से बहनें मनाएंगी रक्षाबंधन का पर्व, घर-परिवार की खुशियों में बढ़ेगा आर्थिक संबल

रायपुर। रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले छत्तीसगढ़ की बहनों को सीएम विष्णु देव साय ने महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त के रूप में विशेष उपहार दिया है। 7 अगस्त 2026 को जारी 30वीं किस्त के साथ प्रदेश की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 19,444 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। रक्षाबंधन से पहले खाते में पहुंची यह राशि महिलाओं के लिए आर्थिक संबल के साथ पर्व की खुशियों को और बढ़ाने वाली सौगात बन गई है। सीएम साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित महतारी वंदन योजना अब महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है। योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता सीधे डीबीटी के माध्यम से महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है।
रायगढ़- राशी कँवर
मनेन्द्रगढ़- गायत्री श्रीवास्तव
सुरजपुर – मेनका रजवाड़े
सुरजपुर- गणेश्वरी प्रजापति (रामनगर)
7159 (4)- सुरजपुर- शहनाज बेगम (सोहागपुर)
7159 (5) – सक्ती- हेमंत बंजारे

रक्षाबंधन से पहले खाते में पहुंची राशि, बहनों के चेहरे पर खुशी
रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व है। इस बार पर्व से पहले महतारी वंदन की राशि मिलने से महिलाओं में विशेष उत्साह है। महिलाएं इस राशि से भाई के लिए राखी, मिठाई और उपहार खरीदने के साथ-साथ घर-परिवार की जरूरतों को पूरा करते हुए रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाने की तैयारी कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि, सीएम साय ने रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन की राशि देकर बहनों की खुशियों को दोगुना कर दिया है। उनके लिए यह केवल एक हजार रुपये की मासिक सहायता नहीं, बल्कि अपने छोटे-बड़े फैसले स्वयं लेने का भरोसा और सम्मान का अहसास है।
जांजगीर-चांपा- शबीना बेगम
कोरबा- शकुंतला कुर्रे
मुंगेली- अनीता गंधर्व

हर महीने की सहायता बनी परिवारों का सहारा
सूरजपुर जिले की तेज कुमारी,मंजू रजवाड़े, पुनिया प्रजापति,शहनाज बेगम, गणेश्वरी प्रजापति, मेनका रजवाड़े और लता केंवट जैसी महिलाओं ने बताया कि महतारी वंदन की राशि से वे बच्चों की पढ़ाई, कॉपी-किताब, पौष्टिक भोजन और दैनिक जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर भी यह राशि उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है।

बचत से स्वरोजगार तक की नई राह
महतारी वंदन योजना का सकारात्मक प्रभाव केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है। अनेक महिलाओं ने नियमित मिलने वाली राशि को बचाकर स्वरोजगार की नींव रखी है। मुंगेली विकासखंड के ग्राम घुठेरा की अनीता गंधर्व ने महतारी वंदन से मिली राशि को बचाकर मुंगेली के पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में मनिहारी एवं सिलाई दुकान शुरू की। आज वे प्रतिदिन 500 से 1,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं और बच्चों की पढ़ाई तथा घरेलू खर्च में सहयोग कर रही हैं।

जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम सरखों की शबीना बेगम ने योजना की राशि से अपनी चूड़ी दुकान में नया सामान और चूडि़यों की विविधता बढ़ाई। इससे ग्राहकों की संख्या और आमदनी दोनों में वृद्धि हुई है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की गायत्री श्रीवास्तव ने राशि बचाकर सेकेंड हैंड सिलाई-पिको मशीन खरीदी। अब वे सिलाई के साथ पिको का काम भी कर आय बढ़ा रही हैं। रायगढ़ की राशी कँवर ने भी महतारी वंदन की किस्तों से सिलाई मशीन खरीदी, जो उनके लिए आजीविका और आत्मनिर्भरता का साधन बन गई है।

भविष्य की सुरक्षा का भी भरोसा
कोरबा की शकुंतला कुर्रे महतारी वंदन की राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य के साथ अपनी बेटी ध्रीयांशी के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में बचत करने में कर रही हैं। सक्ती जिले की हेमंत बंजारे, मोहला जिले की देवकी निषाद और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की अनीता गुप्ता भी योजना की राशि से घरेलू जरूरतों और छोटे व्यवसाय को मजबूती दे रही हैं।

30 किस्तों ने बनाया भरोसे का मजबूत आधार
1 मार्च 2024 से शुरू हुई महतारी वंदन योजना की 30 किस्तों की निरंतरता ने महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल दिया है। इस भरोसे के कारण महिलाएं अपनी जरूरतों के अनुसार खर्च, बचत और निवेश की योजना बना पा रही हैं। कई महिलाएं सिलाई, मनिहारी, चूड़ी व्यवसाय और अन्य छोटे स्वरोजगार से जुड़कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं।

महतारी वंदन से खुशहाल परिवार, सशक्त मातृशक्ति
महतारी वंदन योजना ने महिलाओं की घरेलू निर्णयों में भागीदारी को मजबूत करने के साथ बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर खर्च को बढ़ावा दिया है। महिलाओं के हाथ में नियमित आर्थिक सहायता पहुंचने से परिवारों में आर्थिक स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ा है।
रक्षाबंधन से पहले मिली महतारी वंदन की 30वीं किस्त इस बदलाव की एक सुखद तस्वीर पेश कर रही है। प्रदेश की बहनें इस राशि से राखी और मिठाई खरीदने के साथ अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते हुए भाई-बहन के स्नेह का पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाएंगी।
महतारी वंदन योजना की यह कहानी केवल आर्थिक सहायता की कहानी नहीं है। यह उस विश्वास की कहानी है, जिसमें सीएम साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति को सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की नई ताकत मिल रही है। रक्षाबंधन से पहले बहनों के खातों में पहुंची राशि उनके लिए ’‘विष्णु भैया का उपहार’’ बनकर पर्व की खुशियों को और खास बना रही है।

28 अगस्त तक छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना, इन इलाकों में बरसेंगे बादल

28 अगस्त तक छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना, इन इलाकों में बरसेंगे बादल

 अगले सात दिन बारिश का अलर्ट जारी

रायपुर । छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग ने 22 से 28 अगस्त तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार, 22 से 25 अगस्त के बीच बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। वहीं 26 से 28 अगस्त तक भी कई इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। इस दौरान मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ में बारिश का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। लोगों को मौसम के अनुसार सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ में ज्यादा असर
अगले सप्ताह बारिश का प्रभाव खासतौर पर मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ में देखने को मिल सकता है। कुछ स्थानों पर भारी से अतिभारी बारिश की स्थिति बन सकती है। ऐसे में निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों के जलस्तर बढऩे की स्थिति पर नजर रखने की जरूरत होगी। मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान मौसम प्रणाली भी बारिश के लिए अनुकूल बनी हुई है। 21 अगस्त के मौसम विभाग के बुलेटिन में उत्तर-पूर्वी मध्यप्रदेश और आसपास के क्षेत्र में निम्न दबाव क्षेत्र बने रहने की जानकारी दी गई है।

रायपुर में भी बारिश के आसार
राजधानी रायपुर में भी अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। 22 अगस्त को शहर में एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पडऩे की संभावना है। इसके बाद भी अगले सप्ताह बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं। पिछले 24 घंटे में रायपुर में बारिश अपेक्षाकृत कम रही और करीब 5.2 मिमी पानी दर्ज किया गया। वहीं नवा रायपुर समेत कुछ इलाकों में तेज बारिश हुई।

प्रदेश में अब तक 774.7 मिमी बारिश
मानसून सीजन में छत्तीसगढ़ में अब तक 774.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य बारिश से करीब 7 फीसदी कम है। इस अवधि तक प्रदेश में 829.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। वहीं रायपुर जिले में स्थिति प्रदेश के औसत से अलग है। जिले में अब तक 808.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 10 फीसदी अधिक है।

27 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश में बारिश का वितरण समान नहीं रहा है। आंकड़ों के मुताबिक 6 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि 27 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में होने वाली बारिश से यह अंतर और बदल सकता है। मानसून सीजन आधिकारिक रूप से 30 सितंबर तक रहता है। इसके बाद भी कई बार मानसून की वापसी अक्टूबर तक होती है, इसलिए सितंबर में भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना बनी रहती है।

इन इलाकों में हुई बारिश
पिछले 24 घंटों में राजपुर और बिहारपुर में 4-4 सेमी, डोंगरगढ़ में 3 सेमी, जबकि जनकपुर-भरतपुर और दुर्ग में 2-2 सेमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा रेंगाखारकला, सारागांव, राजनांदगांव, साल्हेवारा, प्रेमनगर, पिपरिया, कोटाडोल, भैरमगढ़, गीदम, खरोरा, पसान, चांपा, केल्हारी, मोहला और घुमका में भी बारिश हुई। लगातार बारिश का असर नवा रायपुर के सेंध तालाब पर भी दिखाई दे रहा है। तालाब पानी से लगभग लबालब हो चुका है। जलभराव के बाद यहां का नजारा और आकर्षक हो गया है।

तालाब किनारे सड़क और कृत्रिम टापू का काम
सेंध तालाब के किनारे सड़क निर्माण का काम चल रहा है। इसके अलावा तालाब के बीच में कृत्रिम टापू भी बनाया गया है। फिलहाल बारिश के कारण निर्माण कार्य प्रभावित है और काम रुका हुआ है।

अगले सात दिन बारिश पर नजर
ताजा चेतावनी के मुताबिक 22 से 28 अगस्त तक छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का दौर बना रह सकता है। ऐसे में अगले सप्ताह राजधानी समेत प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढऩे की संभावना है।

जनजातीय कारीगरों के हुनर को मिलेगा व्यापक बाजार, 20 कलाकारों एवं कारीगरों ने लगाए स्टॉल

जनजातीय कारीगरों के हुनर को मिलेगा व्यापक बाजार, 20 कलाकारों एवं कारीगरों ने लगाए स्टॉल

00 ट्राइफेड से जुड़कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का अवसर
रायपुर।
धमतरी जिले के लाइवलीहुड कॉलेज में जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता (एम्पैनलमेंट) मेला आयोजित किया गया। इसे जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन ट्राइफेड और जिला प्रशासन ने मिलकर आयोजित किया था, जिसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजार दिलाना है।
जिले के जनजातीय कारीगरों, कलाकारों और उद्यमियों के पारंपरिक हुनर को स्थानीय बाजार से निकालकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के बाजारों से जोडऩे की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। जनजातीय कारीगरों को बेहतर बाजार, पहचान, विपणन और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गुरुवार को लाइवलीहुड कॉलेज में एक दिवसीय जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता मेला आयोजित किया गया। मेले में जिले के 20 कलाकारों एवं कारीगरों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों तथा जनजातीय उद्यमियों को ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने का अवसर प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि जिला प्रशासन की यह पहल जनजातीय कलाकारों को अपनी कला और हुनर प्रदर्शित करने के लिए प्रभावी मंच उपलब्ध कराएगी। ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने के बाद कारीगरों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों, जनजातीय भारत बिक्री केंद्रों, मेलों तथा विभिन्न विपणन गतिविधियों में भाग लेने के अवसर मिलेंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार और कारीगरों को आय के नए अवसर प्राप्त होंगे।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि आजीविका से जुड़ी गतिविधियां केवल आय का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि जनजातीय समाज की पारंपरिक कला, कौशल और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए। उन्होंने कारीगरों से कहा कि आज इंटरनेट और सोशल मीडिया का दौर है। अपने उत्पादों और हुनर को सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग कर कारीगर सीधे ग्राहकों तक पहुंच बना सकते हैं और अपने उत्पादों की बाजार क्षमता बढ़ा सकते हैं।

BREAKING: IGKV पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा: प्रोफेसर समेत 6 आरोपी गिरफ्तार

BREAKING: IGKV पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा: प्रोफेसर समेत 6 आरोपी गिरफ्तार

  रायपुर- छत्तीसगढ़ में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की कीटशास्त्र परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड कोई छात्र नहीं, बल्कि एक कृषि कॉलेज का प्रोफेसर निकला. आरोप है कि प्रोफेसर ने परीक्षा के सीलबंद लिफाफे में छेड़छाड़ कर प्रश्नपत्र की जानकारी हासिल की और उसे 11 हजार रुपये में छात्रों को बेच दिया. रायपुर पुलिस की साइबर और क्राइम टीम ने 36 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करते हुए प्रोफेसर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. 

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित 28 कृषि महाविद्यालयों में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष द्वितीय सेमेस्टर के एजीसीएच-221 (कीटशास्त्र) विषय की परीक्षा आयोजित होनी थी. परीक्षा शुरू होने से पहले 20 अगस्त की सुबह विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली. इसके साथ ही छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने भी व्हाट्सएप पर प्रश्नपत्र के कुछ सवाल वायरल होने की जानकारी दी.

साइबर जांच से खुली पूरे नेटवर्क की परतें

मामला सामने आने के बाद एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की टीम ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट, फोटो, मैसेज और अन्य डिजिटल सामग्री का तकनीकी विश्लेषण किया. जांच अधिकारियों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस मोबाइल नंबर, अकाउंट या डिजिटल माध्यम से साझा किया था.

डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल डेटा, लोकेशन और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच के आधार पर पुलिस ने वायरल सामग्री की पूरी श्रृंखला तैयार की. इसी दौरान जांच की कड़ी दुर्ग निवासी अनुज मिंज तक पहुंची, जिसके बाद पुलिस टीम वहां रवाना हुई और उससे पूछताछ की गई.

100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने 36 घंटे में किया खुलासा

पेपर लीक मामले की जांच के लिए रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम, बिलासपुर और आसपास के जिलों में अलग-अलग पुलिस टीमों को भेजा गया. 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने लगातार 36 घंटे तक तकनीकी और मैदानी जांच की. जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया और मामले में कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने पेपर लीक के आरोपियों को किया गिरफ्तार.

प्रोफेसर ने ऐसे किया प्रश्नपत्र लीक

पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी योगेश सोनकेसरिया है, जो वर्ष 2019 से दुर्ग स्थित भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है. जानकारी के अनुसार, 17 अगस्त को वह कृषि महाविद्यालय रायपुर में अपने कॉलेज की उत्तरपुस्तिकाएं जमा करने गया था. वहीं से उसे आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों के सीलबंद पैकेट सौंपे गए. वह सभी पैकेट कॉलेज ले गया, लेकिन 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र परीक्षा का प्रश्नपत्र अपने घर ले आया.

आरोप है कि उसने सुई और नुकीले उपकरण की मदद से सीलबंद लिफाफे में बेहद छोटा छेद किया. इसके बाद मोबाइल कैमरा लिफाफे के अंदर डालकर प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग की. रिकॉर्डिंग से मिली जानकारी के आधार पर उसने प्रश्नपत्र की सामग्री तैयार की और उसे छात्रों को बेच दिया.

11 हजार रुपये में हुआ प्रश्नपत्र का सौदा

पुलिस के मुताबिक, प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया ने प्रश्नपत्र की जानकारी अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक और अन्य छात्रों को कुल 11 हजार रुपये में बेची थी. बाद में यह प्रश्नपत्र अन्य छात्रों तक भी पहुंचाया. जांच में सामने आया कि अजय नायक ने प्रश्नपत्र त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू को उपलब्ध कराया था. इसके बाद प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.Latest and Breaking News on NDTV

पेपर लीक करने के लिए शामिल डिवाइस को पुलिस ने जब्त किया.  

आरोपियों से बरामद हुए अहम सबूत

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 11 हजार रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सुजा, कॉपी और फेविकोल सहित कई महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है. इन बरामद वस्तुओं को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इन्हीं के जरिए प्रश्नपत्र के साथ छेड़छाड़ और उसे रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया था.

दो आरोपी अब भी फरार

पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क से जुड़े दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं. उनकी तलाश लगातार जारी है और जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है. मामले में थाना तेलीबांधा में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2008 की धारा 4, 5 और 10 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 के तहत अपराध दर्ज किया है.

कौन-कौन हुए गिरफ्तार

पुलिस ने जिन छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें मुख्य आरोपी प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया के अलावा अजय नायक, त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू शामिल हैं. सभी छात्र दुर्ग स्थित भारती एग्रीकल्चर कॉलेज से जुड़े बताए गए हैं.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से की सौजन्य भेंट

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से की सौजन्य भेंट

 छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण को लेकर हुई चर्चा

दूरस्थ और जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर

रायपुर - मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  जे.पी. नड्डा से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री  नड्डा से उनके स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम की जानकारी ली और उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं के विस्तार तथा केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति को लेकर सार्थक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री  साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का विशेष फोकस इस बात पर है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को उसके निकट ही गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं तक स्वास्थ्य तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ, वनांचल एवं जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। राज्य सरकार इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, चिकित्सकीय सेवाओं की उपलब्धता और आधुनिक उपचार सुविधाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाने की दिशा में प्राथमिकता से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री  साय ने केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा को प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, गंभीर बीमारियों के उपचार, स्वास्थ्य बीमा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में व्यापक बदलाव आया है। आयुष्मान भारत सहित केंद्र सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं से जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिली है। छत्तीसगढ़ सरकार भी केंद्र की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  जे.पी. नड्डा ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री  साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी तथा विशेष रूप से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के नागरिकों को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य तेजी से पूरा होगा।

 

परीक्षाओं की शुचिता से कोई समझौता नहीं, गड़बड़ी पर होगी कठोर कार्रवाई : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

परीक्षाओं की शुचिता से कोई समझौता नहीं, गड़बड़ी पर होगी कठोर कार्रवाई : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 आईजीकेवी की परीक्षा में प्रश्नपत्र प्रसारित होने के मामले को मुख्यमंत्री ने लिया गंभीरता से

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति गठित, पुलिस में एफआईआर दर्ज

प्रश्नपत्र कहां से और कैसे हुआ प्रसारित, इसकी तह तक जाएगी जांच

दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा : मुख्यमंत्री

विद्यार्थियों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता सर्वोपरि, परीक्षाओं में गड़बड़ी पर जीरो टॉलरेंस की नीति

रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) विषय की परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पूर्व सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित होने के मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने या विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। साथ ही प्रकरण में तेलीबांधा थाने में अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले की तकनीकी जांच में साइबर सेल की भी सहायता ली जा रही है, ताकि प्रश्नपत्र के प्रसारण की पूरी कड़ी का पता लगाया जा सके।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पूरी संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ कार्य कर रही है। भर्ती हो या शैक्षणिक परीक्षा, उसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के प्रति हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। विद्यार्थियों की मेहनत, उनका विश्वास और उनका भविष्य हमारे लिए सर्वोपरि है। इस मामले की पूरी तह तक जाकर जांच की जाएगी। प्रश्नपत्र कहां से बाहर आया, किसने इसे प्रसारित किया और इसमें किन लोगों की भूमिका रही, प्रत्येक तथ्य सामने लाया जाएगा। दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

प्राप्त जानकारी के अनुसार इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा 20 अगस्त को आयोजित की गई थी। प्रदेश के 27 कृषि महाविद्यालयों के लगभग 1,200 विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रसारित होने की शिकायत सामने आई थी। मामले की गंभीरता और परीक्षा की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा निरस्त कर दी है। निरस्त परीक्षा सितंबर के प्रथम सप्ताह में पुनः आयोजित की जाएगी।

गठित जांच समिति द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रश्नपत्र और परीक्षा में उपयोग किए गए मूल प्रश्नपत्र का मिलान करने के साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्रोत से बाहर आया, किन माध्यमों से आगे प्रसारित हुआ और इसकी पहुंच कहां तक रही। पुलिस एवं साइबर सेल द्वारा उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर भी जांच आगे बढ़ाई जाएगी।

मुख्यमंत्री  साय ने संबंधित अधिकारियों को जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने और प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास बनाए रखना सरकार और शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसी किसी भी गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा, जिससे मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के हित प्रभावित हों।

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन को भविष्य की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था की भी व्यापक समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर उसके सुरक्षित रख-रखाव, परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने और परीक्षा प्रारंभ होने तक की पूरी प्रक्रिया में आवश्यक सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने को कहा गया है, ताकि इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता के बाद बस्तर में विकास की नई गति : मुख्यमंत्री साय

नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता के बाद बस्तर में विकास की नई गति : मुख्यमंत्री साय

 नई औद्योगिक नीति से निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को मिला नया विस्तार

नवा रायपुर बन रहा शिक्षा और नई तकनीक का उभरता केंद्र

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से चेन्नई के पत्रकारों के दल ने की सौजन्य भेंट

रायपुर-- लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण विकास की दौड़ में पीछे रहे बस्तर में अब शांति, विश्वास और विकास का नया दौर शुरू हुआ है। सुरक्षा के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, रोजगार और आजीविका के क्षेत्र में तेजी से काम किया जा रहा है। बस्तर की प्राकृतिक संपदा, संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं को विकास से जोड़कर क्षेत्र के लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाना हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय ने विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पत्र सूचना कार्यालय, चेन्नई के निदेशक  पी. अरुण कुमार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए चेन्नई के पत्रकारों के दल  से चर्चा के दौरान यह बात कही। 

मुख्यमंत्री  साय ने पत्रकारों से छत्तीसगढ़ में विकास की बदलती तस्वीर, बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलता के बाद तेज हुई विकास गतिविधियों, राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति, निवेश एवं रोजगार की संभावनाओं तथा शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे विस्तार पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद ने बस्तर के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित किया। दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय लोगों के बढ़ते विश्वास से बस्तर तेजी से शांति और विकास की ओर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी नक्सलवाद के कारण शासन की पहुंच कठिन थी, वहां आज विकास की योजनाएं तेजी से पहुंच रही हैं। सुरक्षा कैंपों के आसपास के गांवों में ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, राशन, बैंकिंग और आजीविका की सुविधाओं में वृद्धि हुई है। सरकार का लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत करना नहीं, बल्कि बस्तर में विकास और समृद्धि की ऐसी मजबूत नींव तैयार करना है, जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बेहतर हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों, वन संपदा, जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं की विशिष्ट पहचान है। शांति स्थापित होने के साथ पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के लिए नए अवसर बन रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि बस्तर की विशिष्टताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले तथा पर्यटन से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर सृजित हों।

मुख्यमंत्री  साय ने पत्रकारों को राज्य में औद्योगिक विकास की संभावनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन और कृषि संपदा से समृद्ध होने के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर है। राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में रोजगार सृजन, स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन और नए एवं उभरते क्षेत्रों के उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सरल प्रक्रियाओं और उद्योग अनुकूल वातावरण के कारण देश-विदेश के निवेशकों का छत्तीसगढ़ के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि राज्य अब परंपरागत उद्योगों तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, फार्मास्युटिकल, टेक्सटाइल और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं तेजी से विकसित हो रही हैं। पर्याप्त विद्युत उपलब्धता, मजबूत अधोसंरचना, देश के मध्य में भौगोलिक स्थिति और बेहतर कनेक्टिविटी छत्तीसगढ़ को निवेश के लिए अनुकूल बनाती है। सरकार का विशेष जोर ऐसे निवेश पर है, जिससे प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर तैयार हों।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि रायपुर और नवा रायपुर देश के महत्वपूर्ण एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो रहे हैं।  उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के इन संस्थानों की उपलब्धता से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर अपने ही राज्य में मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार पर भी लगातार काम कर रही है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, मेडिकल शिक्षा का विस्तार करने और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक कदम उठाए गए हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे व्यक्ति तक पहुंचे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने चेन्नई से आए पत्रकारों को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कोसा फैब के शॉल भेंट कर सम्मानित किया। पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को तमिलनाडु के प्रसिद्ध महाबलीपुरम मंदिर की प्रतिकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार  आर. कृष्णा दास, जनसंपर्क आयुक्त  रजत बंसल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  आलोक सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

कांवड़ यात्रा आस्था, भक्ति और समर्पण का प्रतीक : मंत्री राजेश अग्रवाल

कांवड़ यात्रा आस्था, भक्ति और समर्पण का प्रतीक : मंत्री राजेश अग्रवाल

 रायपुर: पावन श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की भक्ति में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। इसी क्रम में रामगढ़ से कैलाश गुफा की ओर कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं का छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आत्मीय स्वागत एवं सत्कार किया। उन्होंने कांवड़ यात्रियों से मुलाकात कर उनकी यात्रा के संबंध में जानकारी ली और सभी श्रद्धालुओं को सुखद, सुरक्षित एवं सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि श्रावण मास में निकलने वाली कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति, तपस्या और समर्पण की यात्रा है। भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास इस यात्रा में दिखाई देता है। कांवड़ यात्री कठिन परिस्थितियों और लंबी दूरी की चुनौतियों के बावजूद पूरे उत्साह एवं श्रद्धाभाव के साथ अपनी यात्रा पूरी करते हैं। यह यात्रा श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक ऊर्जा और भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी गहरी आस्था का प्रतीक है।

उन्होंने कांवड़ यात्रियों का स्वागत करते हुए भगवान भोलेनाथ से सभी श्रद्धालुओं की यात्रा सुखaद, सुरक्षित एवं सफल होने की कामना की। उन्होंने कहा कि बाबा भोलेनाथ सभी कांवड़ यात्रियों पर अपनी कृपा बनाए रखें और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करें।

कांवड़ यात्रियों में दिखा उत्साह और भक्तिभाव

रामगढ़ से कैलाश गुफा की ओर बढ़ रहे कांवड़ यात्रियों में भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव के साथ कांवड़ लेकर अपनी यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं का स्वागत, सेवा और सत्कार भी किया जा रहा है। इससे यात्रा मार्ग पर भक्ति और सेवा का वातावरण बना हुआ है।

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि धार्मिक यात्राएं समाज में भाईचारे, सेवा, सद्भाव और एकजुटता की भावना को मजबूत करती हैं। कांवड़ यात्रियों की सेवा करना, उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनका उत्साह बढ़ाना भी भगवान शिव की भक्ति का ही एक रूप है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में श्रद्धा, सेवा और सामुदायिक सहभागिता का विशेष महत्व रहा है।

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान सावधानी बरतने, अनुशासन बनाए रखने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखने और यात्रा मार्ग पर दूसरों की सुविधा का भी ध्यान रखने का आग्रह किया।

इस अवसर पर पूरा वातावरण भक्तिमय रहा और ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से गूंजता रहा। कांवड़ यात्रियों ने आत्मीय स्वागत एवं शुभकामनाओं के लिए मंत्री  राजेश अग्रवाल के प्रति आभार व्यक्त किया।

अतिथि शिक्षक बनने का मौका, जिले में स्थानीय स्तर पर 12 रिक्त पदों पर होगी भर्ती

अतिथि शिक्षक बनने का मौका, जिले में स्थानीय स्तर पर 12 रिक्त पदों पर होगी भर्ती

 सुकमा। सुकमा जिले में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए स्थानीय अतिथि शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। जिले के शासकीय हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में विभिन्न विषयों के 12 रिक्त पदों पर शिक्षित बेरोजगार स्थानीय युवाओं से आवेदन मंगाए गए हैं। भर्ती का उद्देश्य स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करना और विद्यार्थियों की पढ़ाई को बेहतर बनाना है।

इन पदों पर गणित, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान, इतिहास, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र और भूगोल विषयों के व्याख्याताओं की नियुक्ति की जाएगी। इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकते हैं।

अभ्यर्थियों को पूर्ण रूप से भरा हुआ आवेदन पत्र स्वयं उपस्थित होकर संबंधित शासकीय हाई/हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य के पास जमा करना होगा। आवेदन प्रक्रिया 20 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है, जबकि आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 25 अगस्त 2026 शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है। इसके बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

इस भर्ती से स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार का अवसर मिलने के साथ ही स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की कमी भी दूर होने की उम्मीद है। भर्ती से जुड़ी विस्तृत जानकारी और आवेदन का निर्धारित प्रारूप सुकमा जिले की आधिकारिक वेबसाइट तथा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है।

इधर, जिला रोजगार कार्यालय सक्ती की ओर से शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए 25 अगस्त 2026, मंगलवार को शासकीय आईटीआई सक्ती में एक दिवसीय रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले में निजी क्षेत्र की तीन कंपनियां विभिन्न पदों पर युवाओं की भर्ती करेंगी।

पुष्कल एग्रो टेक प्राइवेट लिमिटेड, रायपुर द्वारा सेल्स ऑफिसर के 30 और सेल्स रिप्रेजेंटेटिव के 30 पदों पर भर्ती की जाएगी। इन पदों का कार्यक्षेत्र डभरा, सक्ती और धरमजयगढ़ रहेगा। चयनित उम्मीदवारों को 12 हजार से 20 हजार रुपये वेतन के साथ अन्य भत्ते दिए जाएंगे। इसके लिए बीएससी या 12वीं उत्तीर्ण अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं।

वहीं, श्रीराम फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, जांजगीर द्वारा ट्रैक्टर फाइनेंसर, पर्सनल लोन ऑफिसर, कलेक्शन ऑफिसर और इंश्योरेंस ऑफिसर के 10-10 पदों पर भर्ती की जाएगी। इन पदों का कार्यक्षेत्र बरमकेला, जैजैपुर, सारंगढ़, चंद्रपुर, डभरा और सक्ती रहेगा। वेतन 10 हजार से 12 हजार रुपये तथा अन्य भत्तों के साथ निर्धारित है। इन पदों के लिए 12वीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।

इसके अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), नैला द्वारा ग्रामीण बीमा सलाहकार और बीमा सखी के 10-10 पदों पर भर्ती की जाएगी। इन पदों का कार्यक्षेत्र सक्ती और जांजगीर रहेगा। चयनित अभ्यर्थियों को 7 हजार रुपये स्टाइपेंड दिया जाएगा। इन पदों के लिए भी न्यूनतम योग्यता 12वीं पास रखी गई है।

रोजगार मेला सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित होगा। इसमें शामिल होने के इच्छुक युवाओं को अपने शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों और जिला रोजगार कार्यालय के रोजगार पंजीयन कार्ड के साथ निर्धारित समय पर उपस्थित होना होगा। रोजगार मेले से संबंधित अधिक जानकारी के लिए जिला रोजगार कार्यालय जांजगीर-चांपा, सक्ती से संपर्क किया जा सकता है।

रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर, दुर्ग-हटिया और शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस में लगाए जाएंगे अतिरिक्त कोच

रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर, दुर्ग-हटिया और शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस में लगाए जाएंगे अतिरिक्त कोच

 बिलासपुर। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की बेहतर यात्रा सुविधा व अधिकाधिक यात्रियों को कंफ़र्म बर्थ उपलब्ध कराने हेतु दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे SECR से चलने, गुजरने वाली 02 जोड़ी गाड़ियों में अतिरिक्त कोच की सुविधा अस्थायी रूप से उपलब्ध कराई है।

गाड़ी संख्या 18641 हटिया-दुर्ग एक्सप्रेस में 01 अतिरिक्त स्लीपर कोच की सुविधा दिनांक 27 अगस्त 2026 को तथा गाड़ी संख्या 18642 दुर्ग-हटिया एक्सप्रेस में दिनांक 28 अगस्त 2026 को उपलब्ध रहेगी।

गाड़ी संख्या 18030 शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस में 01 अतिरिक्त एसी-03 कोच की सुविधा दिनांक 22 अगस्त से 28 अगस्त 2026 तक तथा गाड़ी संख्या 18029 एलटीटी-शालीमार एक्सप्रेस में दिनांक 24 अगस्त से 30 अगस्त 2026 तक उपलब्ध रहेगी।

रेलवे प्रशासन द्वारा 79वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय निरंकारी संत समागम में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की विशेष सुविधा हेतु उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल के भोडवाल माजरी स्टेशन पर 30 सितम्बर से 31 अक्टूबर 2026 तक दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से गुजरने/चलने वाली गाड़ी 02 जोड़ी गाड़ियों का दो मिनट का अस्थायी ठहराव की सुविधा प्रदान की जा रही है।

इस सुविधा से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से होकर आने-जाने वाले यात्रियों एवं श्रद्धालुओं को संत समागम स्थल तक पहुंचने की विशेष सुविधा मिलेगी।

30 सितंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक गाड़ी संख्या 20807 विशाखापटनम-अमृतसर हीराकुंड एक्सप्रेस भोडवाल माजरी रेलवे स्टेशन में दो मिनट ठहराव के साथ चलेगी। यह गाड़ी भोडवाल माजरी रेलवे स्टेशन 15.48 बजे पहुंचेगी तथा 15.50 बजे रवाना होगी।

30 सितंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक गाड़ी संख्या 20808 अमृतसर-विशाखापटनम हीराकुंड एक्सप्रेस भोडवाल माजरी रेलवे स्टेशन में दो मिनट ठहराव के साथ चलेगी। यह गाड़ी भोडवाल माजरी रेलवे स्टेशन 05.56 बजे पहुंचेगी तथा 05.58 बजे रवाना होगी।

30 सितंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक गाड़ी संख्या 20847 दुर्ग-शहीद कप्तान तुषार महाजन ऊधमपुर एक्सप्रेस भोडवाल माजरी रेलवे स्टेशन में दो मिनट ठहराव के साथ चलेगी। यह गाड़ी भोडवाल माजरी रेलवे 08.41 बजे पहुंचेगी तथा 08.43 बजे रवाना होगी।

30 सितंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक गाड़ी संख्या 20848 शहीद कप्तान तुषार महाजन ऊधमपुर-दुर्ग एक्सप्रेस भोडवाल माजरी रेलवे स्टेशन में दो मिनट ठहराव के साथ चलेगी। यह गाड़ी भोडवाल माजरी रेलवे 09.35 बजे पहुंचेगी तथा 09.37 बजे रवाना होगी।

गांजे की तस्करी का भंडाफोड़, ट्रॉली बैग में छिपाकर ले जा रहे थे लाखों का गांजा, रेलवे स्टेशन पर पति-पत्नी गिरफ्तार

गांजे की तस्करी का भंडाफोड़, ट्रॉली बैग में छिपाकर ले जा रहे थे लाखों का गांजा, रेलवे स्टेशन पर पति-पत्नी गिरफ्तार

 बिलासपुर। बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान RPF और जिला पुलिस ने एक दंपती को गिरफ्तार किया है। दोनों के ट्रॉली बैग से 21 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ|

स्टेशन परिसर में नियमित गश्त और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के दौरान टीम की नजर प्लेटफार्म पर मौजूद महिला और पुरुष पर पड़ी। दोनों के पास भारी ट्रॉली बैग था। पुलिस को देखकर दोनों घबराने लगे और वहां से निकलने का प्रयास करने लगे। संदेह होने पर पुलिस ने दोनों को रोककर पूछताछ की और ट्रॉली बैग की तलाशी ली। इसमें प्लास्टिक टेप से पैक किए गए गांजे के पैकेट मिले, कुल वजन 21 किलोग्राम बताया गया है।

जब्त गांजे की कीमत लाखों रुपए बताई गई है। पूछताछ में दोनों गांजे के परिवहन से जुड़े कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके। पुलिस ने गांजा जब्त कर दोनों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर ज्यूडिशियल रिमांड पर जेल भेज दिया है।

छत्तीसगढ़ में संपत्ति की मालकिन बन रही महिलाएं, आर्थिक सशक्तिकरण को मिली नई मजबूती

छत्तीसगढ़ में संपत्ति की मालकिन बन रही महिलाएं, आर्थिक सशक्तिकरण को मिली नई मजबूती

 मुख्यमंत्री साय की पहल का असर: महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में लगभग 51 प्रतिशत की बढ़ोतरी
पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट से नागरिकों को मिला 76.95 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ
महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़कर हुई 41 प्रतिशत
प्रदेश के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और संपत्ति स्वामित्व में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए लिए गए निर्णय के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने से प्रदेश में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन का रुझान बढ़ा है। इससे महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा मिलने के साथ ही नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ भी प्राप्त हुआ है। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा किए गए तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार, 06 मई से 27 जुलाई 2026 की अवधि में महिलाओं के नाम 30 हजार 720 दस्तावेज पंजीकृत किए गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 20 हजार 319 थी। इस प्रकार महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या में लगभग 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
32 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत हुई महिलाओं की हिस्सेदारी
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 06 मई से 27 जुलाई 2025 की अवधि में कुल 63 हजार 174 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए थे, जिनमें 20 हजार 319 दस्तावेजों में महिलाएं खरीदार थीं। महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी। इसी अवधि में वर्ष 2026 में कुल 74 हजार 424 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए, जिनमें 30 हजार 720 दस्तावेजों में महिलाएं खरीदार थीं। इससे महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई है। यानी एक वर्ष में महिलाओं की हिस्सेदारी में 9 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए किए गए सुधार के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है। संपत्ति में महिलाओं का बढ़ता स्वामित्व उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ परिवार में उनकी निर्णयात्मक भूमिका को भी मजबूत करता है।
प्रदेशभर में दिख रहा असर, लगभग 75 प्रतिशत जिलों में उल्लेखनीय वृद्धि
पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का प्रभाव प्रदेश के विभिन्न जिलों में दिखाई दे रहा है। विभागीय विश्लेषण के अनुसार प्रदेश के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। जांजगीर-चांपा, बालोद, कोरिया, रायपुर और कांकेर सहित अनेक जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जिला-वार आंकड़ों में रायपुर में महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 4,220 से बढ़कर 6,038, बिलासपुर में 1,894 से बढ़कर 2,958 तथा जांजगीर-चांपा में 1,239 से बढ़कर 2,302 हुई है। इससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व के प्रति बढ़ते रुझान का पता चलता है।
76.95 करोड़ रुपये का मिला प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ
महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा पंजीयन शुल्क में दी जा रही 50 प्रतिशत की छूट से नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिली है। 06 मई से 27 जुलाई 2026 की अवधि में इस छूट के माध्यम से नागरिकों को 76 करोड़ 95 लाख 33 हजार 689 रुपये, यानी लगभग 76.95 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है।
महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और स्वावलंबन हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें परिवार तथा समाज में समान अवसर उपलब्ध कराना है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस निर्णय के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि यह पहल परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति स्वामित्व के लिए प्रोत्साहित कर रही है। संपत्ति का स्वामित्व महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करता है तथा परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी भूमिका को और सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शासन की नीतियों के केंद्र में माताओं-बहनों की आर्थिक सुरक्षा और विकास में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना है।
सामाजिक और आर्थिक सोच में सकारात्मक बदलाव : चौधरी
वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि राज्य में सामाजिक एवं आर्थिक सोच में आ रहे सकारात्मक परिवर्तन को दर्शाती है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट ने परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित किया है।
नारी सशक्तिकरण को आर्थिक आधार दे रही सरकार की पहल
छत्तीसगढ़ सरकार महिला सशक्तिकरण को आर्थिक स्वावलंबन और संपत्ति स्वामित्व से जोड़कर आगे बढ़ा रही है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में दर्ज हुई वृद्धि और नागरिकों को मिले 76.95 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ से इस पहल के सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।
महिलाओं के नाम संपत्ति का स्वामित्व उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ परिवार और समाज में उनकी भागीदारी को सशक्त बना रहा है। यह पहल सशक्त परिवार और सशक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जैव ऊर्जा बनेगी छत्तीसगढ़ की ऊर्जा सुरक्षा और हरित अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

जैव ऊर्जा बनेगी छत्तीसगढ़ की ऊर्जा सुरक्षा और हरित अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

 जैव ऊर्जा बनेगी छत्तीसगढ़ की ऊर्जा सुरक्षा और हरित अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

कम्प्रेस्ड बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ईंधन से खुलेंगे निवेश और हरित रोजगार के नए अवसर

छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 से स्वच्छ ऊर्जा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति

बायोमास को कृषि अवशेष नहीं, ऊर्जा और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में विकसित करने पर जोर

क्लस्टर आधारित मॉडल से किसानों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों की बढ़ेगी आय

फीडस्टॉक प्रबंधन, बायोमास वैल्यू चेन और निजी निवेश के लिए मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

रायपुर 21 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कृषि अवशेष, वन संसाधन, पशुधन अपशिष्ट और नगरीय जैव अपशिष्ट को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित कर प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। कम्प्रेस्ड बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोएथेनॉल और अन्य जैव ईंधनों के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं का योजनाबद्ध उपयोग छत्तीसगढ़ को देश की उभरती जैव ऊर्जा अर्थव्यवस्था में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर सकता है।

इन्हीं संभावनाओं और भावी कार्ययोजना पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र, इसके टेक्निकल पार्टनर सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) तथा छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में अरण्य भवन, नवा रायपुर अटल नगर के सभागार में ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक विकास में जैव ऊर्जा की भूमिका पर केंद्रित कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला में शासन के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्योगों, वित्तीय एवं तकनीकी संस्थानों, शिक्षाविदों और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जैव ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया। विशेषज्ञों ने कहा कि राज्य में उपलब्ध बायोमास संसाधनों की मजबूत वैल्यू चेन विकसित कर उन्हें स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने पर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने के साथ उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को गति मिलेगी।

कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 से जैव ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा

कार्यशाला में बताया गया कि राज्य शासन ने जैव ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दूरदर्शी पहल के रूप में छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 लागू की है। यह नीति प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, हरित औद्योगिकीकरण, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में बायोएनर्जी परियोजनाओं के लिए विभिन्न प्रोत्साहनों और सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इन नीतिगत पहलों के माध्यम से प्रदेश में जैव ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनुकूल निवेश वातावरण तैयार करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जैव ऊर्जा का विस्तार केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे कृषि अवशेषों और अपशिष्ट का आर्थिक उपयोग संभव होगा, किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार होंगे और सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी।

बायोमास को अपशिष्ट नहीं, आर्थिक संसाधन के रूप में देखने की जरूरत : श्री सुमित सरकार

छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित सरकार ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा तथा सामाजिक और पर्यावरणीय विकास के लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है। इसके लिए बायोमास को केवल कृषि अवशेष अथवा अपशिष्ट के रूप में देखने के बजाय ऊर्जा आधारित आर्थिक विकास और हरित रोजगार के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में विकसित करना होगा।

उन्होंने कहा कि कम्प्रेस्ड बायोगैस, बायोएथेनॉल और अन्य बायोफ्यूल जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इनके उपयोग से उद्योगों के कार्बन उत्सर्जन को कम करने के साथ संसाधनों के पुनः उपयोग पर आधारित सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि और वन आधारित अर्थव्यवस्था जैव ऊर्जा के विकास के लिए अनुकूल आधार उपलब्ध कराती है। उपलब्ध संसाधनों को तकनीक, निवेश और प्रभावी बाजार व्यवस्था से जोड़कर प्रदेश में जैव ऊर्जा आधारित नए आर्थिक अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

क्लस्टर आधारित मॉडल से कम होगी लागत, स्थानीय समुदायों की बढ़ेगी आय

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सीसीएफ, एचआरडी-आईटी श्री आलोक तिवारी (आईएफएस) ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रमुख कृषि फसलों, वन एवं पशुधन संसाधनों तथा नगरीय निकायों से निकलने वाले अपशिष्ट की उपलब्धता को देखते हुए जैव ऊर्जा के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल प्रभावी सिद्ध हो सकता है।

उन्होंने कहा कि क्लस्टर आधारित व्यवस्था से बायोमास के परिवहन की लागत कम की जा सकती है और जैव ऊर्जा संयंत्रों के लिए फीडस्टॉक की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। इस व्यवस्था से किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों को भी सीधे आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है।

विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर कन्वर्जेन्स आवश्यक :  रमापति कुमार

सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रमापति कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बायोएनर्जी क्षमता को वास्तविक धरातल पर उतारने के लिए कृषि, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, उद्योग, पर्यावरण और वित्त विभाग के साथ छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर कन्वर्जेन्स आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि उद्योगों, वित्तीय संस्थानों, किसानों और नागरिक संगठनों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ना होगा। प्राकृतिक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता और दीर्घकालिक नीतिगत पहलों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को बायोएनर्जी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सीड राज्य के प्रयासों में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और फीडस्टॉक प्रबंधन, बायोमास वैल्यू चेन तथा अभिनव समाधानों की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम में  अमिताभ वाजपेयी (आईएफएस), सदस्य-सचिव, छत्तीसगढ़ स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड ने भी भाग लिया।

तकनीकी सत्र में बायोएनर्जी की वैल्यू चेन और व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में जैव ऊर्जा उत्पादन के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, फीडस्टॉक प्रबंधन, परिवहन, संग्रहण, तकनीक, बाजार, वित्तपोषण और उद्योगों में जैव ईंधन के उपयोग सहित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

तकनीकी सत्र में  संतोष वार्ष्णेय, जनरल मैनेजर-बायोफ्यूल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड; डॉ. प्रवीण डी. चेंडगे, सीनियर मैनेजर-कृषि, बरगढ़, ओडिशा, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड;  योगेश कुमार काडू, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एवं नोडल ऑफिसर, स्वच्छ भारत मिशन, रायपुर नगर निगम; डॉ. अनिल श्रीवास्तव, प्रोजेक्ट साइंटिस्ट, छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र;  विशाल प्रसाद गुप्ता, डायरेक्टर, एनर्जी कोर इंडिया एंड पावर लिमिटेड;  चंद्रमौली सिंह, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड;  विशाल जाधव, जिंदल पावर लिमिटेड, तमनार;  पुलकित श्रोत्रय, सेक्टर एक्सपर्ट;  अश्वनी अशोक, डायरेक्टर-जस्ट ट्रांजिशन, सीड; डॉ. देवयानी शर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर-क्लाइमेट, सीड तथातुषार शर्मा, सीड सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत के प्रतिनिधियों ने किया मंथन

कार्यशाला में कृषि, वन एवं जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, स्टेट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी तथा रायपुर नगर निगम के अधिकारियों ने भाग लिया। इसके साथ ही महिन्द्रा पावर, जायसवाल नेको, नाकोडा इस्पात, गोदावरी तथा बायो-एनर्जी और सीएनजी आधारित विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधि भी चर्चा में शामिल हुए।

आईआईएम रायपुर और कलिंगा यूनिवर्सिटी के शिक्षाविदों तथा विभिन्न सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी जैव ऊर्जा के विकास से जुड़े तकनीकी, आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक पहलुओं पर सुझाव दिए।

बायोमास कॉरिडोर और मजबूत फीडस्टॉक नेटवर्क पर जोर

कार्यशाला और तकनीकी सत्रों से जैव ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। विशेषज्ञों ने राज्य में उपलब्ध बायोमास संसाधनों का मानकीकृत आकलन और विश्वसनीय डेटा बेस तैयार करने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही एकीकृत बायोमास कॉरिडोर विकसित करने, संग्रहण एवं एकत्रीकरण की मजबूत व्यवस्था बनाने और उत्पादों की बाजार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

निजी निवेश आकर्षित करने के लिए अनुकूल वित्तीय और नियामकीय व्यवस्था विकसित करने तथा फीडस्टॉक के संग्रहण और प्रबंधन में किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों और सहकारी समितियों की भूमिका बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।

कार्यशाला में इस बात पर सहमति रही कि नीति, तकनीक, निवेश और स्थानीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाकर छत्तीसगढ़ में बायो-रिसोर्स आधारित अर्थव्यवस्था का मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है। इससे कृषि और वन आधारित संसाधनों का बेहतर मूल्य संवर्धन होने के साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अतिरिक्त आय, स्थानीय स्तर पर हरित रोजगार और उद्योगों के लिए स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प उपलब्ध होंगे।

राज्य में उपलब्ध प्राकृतिक और जैव संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी बायोएनर्जी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में यह कार्यशाला एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से की नई दिल्ली में सौजन्य भेंट

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से की नई दिल्ली में सौजन्य भेंट

 रायपुर 21 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली प्रवास के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच विभिन्न समसामयिक विषयों पर आत्मीय चर्चा हुई।

शिव महापुराण कथा सुनने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह

शिव महापुराण कथा सुनने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह

 दुर्ग, 21 अगस्त 2026/ जिले के भिलाई नगर स्थित जयंती स्टेडियम के समीप आयोजित शिव महापुराण कथा सुनने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह पहुंचे। उन्होंने आम जनता के बीच बैठकर कथा श्रवण किया और महाआरती में शामिल होकर प्रदेश वासियों के खुशहाली के लिए भगवान भोले शंकर से कामना की। डॉ. सिंह ने प्रदेश की जनता की ओर से कथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा का भिलाई आगमन पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मिनी इंडिया के नाम से प्रसिद्ध भिलाई के लोगों में सामप्रदायिक सामन्जस्य यहॉं की पहचान है। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए पवित्र श्रावण मास में कथा श्रवण हेतु उपस्थित शिव भक्तों के विशाल जनसमुदाय को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर सांसद  विजय बघेल, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल (श्रम विभाग) के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष  मोना सेन, पूर्व मंत्री  ताम्रध्वज साहू, रमशीला साहू तथा  कौशिल्या देवी साय, आयोजन समिति के  दयासिंह सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

स्कूल शिक्षा विभाग की उपलब्धियों पर मंत्री गजेंद्र यादव ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, दो वर्षों के कार्यों का रखा लेखा-जोखा

स्कूल शिक्षा विभाग की उपलब्धियों पर मंत्री गजेंद्र यादव ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, दो वर्षों के कार्यों का रखा लेखा-जोखा

 शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर सरकार का विशेष जोर

रायपुर, 21 अगस्त 2026/ स्कूल शिक्षा विभाग की विगत दो वर्षों की विभागीय गतिविधियों एवं उपलब्धियों को लेकर आज छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम, अटल नगर, नवा रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव एवं स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। इस दौरान विभाग द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षकों की उपलब्धता एवं पदोन्नति, भर्ती प्रक्रिया, विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं, विद्यालय अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा तथा तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी गई।

स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव ने बताया कि विगत दो वर्षों में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

विद्यालयों का युक्तियुक्तकरण और शिक्षकों की उपलब्धता

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के प्रावधानों के अनुरूप 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से 15,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का समायोजन किया गया। 453 शिक्षकविहीन विद्यालयों में शिक्षकों की पूर्ति तथा 4,729 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। शिक्षकों की पदोन्नति के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। टी संवर्ग में 1,335 तथा ई संवर्ग में 1,478, कुल 2,813 पदों पर प्राचार्यों की पदोन्नति की गई। टी संवर्ग में 1,798 व्याख्याताओं की पदोन्नति तथा विगत दो वर्षों में विभिन्न पदों पर 7,000 से अधिक पदोन्नतियां की गई हैं।

शिक्षक भर्ती को मिली गति

स्कूल शिक्षा मंत्री  यादव ने बताया कि दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर के 848 पद स्वीकृत किए गए। वर्ष 2025 में 62 पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्ति की गई। विगत दो वर्षों में 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की गई है। इसके अतिरिक्त 5,000 शिक्षकीय पदों पर सीधी भर्ती परीक्षा प्रक्रिया में है। स्वामी आत्मानंद एवं विवेकानंद विद्यालयों में 3,000 से अधिक पदों पर संविदा भर्ती प्रक्रिया भी जारी है।

पारदर्शी एवं तकनीक आधारित भर्ती प्रक्रिया

मंत्री श्री यादव ने बताया कि स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय एवं अन्य शासकीय संस्थाओं में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक संविदा पदों की भर्ती के लिए राज्य स्तरीय ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) की शुरुआत की गई है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,895 तथा स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,171, कुल 3,066 पदों पर संविदा भर्ती प्रक्रिया प्रचलित है। सीबीटी के माध्यम से भर्ती में पारदर्शिता और कम समय में परीक्षा परिणाम उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

नई शिक्षा नीति एवं पाठ्यपुस्तकों में नवाचार

15 जुलाई 2024 से विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की गई। कक्षा 1 एवं 2 की हिंदी पुस्तकों में बारहखड़ी को शामिल किया गया। कक्षा 1 एवं 2 के लिए 16 स्थानीय तथा 4 अंतरराज्यीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया गया। कक्षा 1, 2, 3 एवं 6 के विषयों की एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों का अनुकूलन किया गया है। कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए सहायक वाचन सामग्री भी विकसित की गई है।

बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा

यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ भाषा-चित्रण (Language Mapping) करने वाला देश का पहला राज्य है। बस्तर संभाग में बच्चों की भाषा के कक्षा में उपयोग के लिए 2,700 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। सरगुजा संभाग में 2,368 शिक्षकों का प्रशिक्षण किया गया है। कक्षा 1 से 3 तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी को शिक्षा के माध्यम के अनुरूप पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया जारी है।

ऑनलाइन उपस्थिति और प्रशासनिक डिजिटलीकरण

शिक्षामंत्री ने कहा कि शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और शैक्षणिक अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक एवं टीके एप्प के माध्यम से उपस्थिति व्यवस्था लागू की गई है। प्रतिदिन टीके एप्प के माध्यम से लगभग 85 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हो रही है। अवकाश प्रबंधन पोर्टल, पेपरलेस कार्यप्रणाली एवं ऑनलाइन संपत्ति विवरण जैसी व्यवस्थाओं से प्रशासनिक कार्यों को अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाया गया है।

विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, साइकिल एवं गणवेश

यादव ने बताया कि कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों को सत्र प्रारंभ होने से पूर्व पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की पहल से 45 लाख 33 हजार 261 विद्यार्थी लाभान्वित हुए। पाठ्यपुस्तकों के वितरण एवं सत्यापन के लिए स्कैनिंग व्यवस्था लागू की गई तथा हिंदी-अंग्रेजी के अतिरिक्त 16 बोलियों में पाठ्यपुस्तक प्रकाशन की पहल की गई। उन्होंने कहा कि निःशुल्क सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत 1 लाख 62 हजार 827 बालिकाएं लाभान्वित हुईं। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क गणवेश उपलब्ध कराया गया, जिससे 28 लाख 63 हजार 786 बच्चे लाभान्वित हुए।

परीक्षा परिणाम में सुधार

शिक्षामंत्री  यादव ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणामों में लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। परीक्षा पूर्व समीक्षा, ब्लूप्रिंट निर्माण एवं अध्यापन, पालक-शिक्षक बैठकों तथा केंद्रीकृत परीक्षाओं के माध्यम से परीक्षा परिणाम सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है।

शनिवार बैग-रहित दिवस से विद्यार्थियों का समग्र विकास

यादव ने कहा कि प्रत्येक शनिवार विद्यार्थियों के लिए तनाव एवं भयमुक्त वातावरण में पठन-पाठन के साथ खेल, योग एवं व्यायाम, स्थानीय कला-संस्कृति, महापुरुषों की जयंती, तीज-त्योहार एवं ऐतिहासिक तिथियों से परिचित कराने वाली गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। भाषण, निबंध, गीत, कहानी एवं लोककथाओं के माध्यम से विद्यार्थियों के सतत विकास पर बल दिया जा रहा है।

विद्यालय अधोसंरचना के विस्तार पर विशेष जोर

शिक्षामंत्री ने बताया कि विगत तीन वर्षों में 504 नवीन विद्यालयों की स्वीकृति दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 700 भवनविहीन विद्यालयों के लिए नवीन विद्यालयों का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2023 से 2026 के मध्य 2,583 नवीन अतिरिक्त कक्षों की स्वीकृति दी गई। विद्यालयों के शौचालय निर्माण एवं मरम्मत के लिए 52 करोड़ 39 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गई तथा 302 शौचालयों का निर्माण पूर्ण किया गया है।

150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान

 यादव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण एवं संचालन के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक विकासखंड में कम से कम एक स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इन विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

बस्तर एवं आदिवासी अंचलों में शिक्षा का विस्तार

शिक्षामंत्री  यादव ने बताया कि नियत नेल्ला नार के अंतर्गत बस्तर संभाग के छह जिलों के 97 प्रतिशत ग्रामों में प्राथमिक शालाओं की स्थापना की गई है। द्विभाषीय पुस्तकों के माध्यम से बस्तर संभाग में 13,817 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। शिक्षकविहीन एवं एकल शिक्षकीय विद्यालयों में 573 शिक्षा दूतों के माध्यम से शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। 48 बंद विद्यालय पुनः खोले गए तथा 36 नवीन विद्यालय प्रारंभ किए गए हैं।

एआई आधारित विद्या समीक्षा केंद्र से ऑनलाइन मॉनिटरिंग

 यादव ने बताया कि शिक्षा व्यवस्था की प्रभावी ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए एआई आधारित विद्या समीक्षा केंद्र की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से अधोसंरचना, भौतिक सुविधाओं, पीएम पोषण, भ्त्डप्ै एवं थ्स्छ सहित विभिन्न योजनाओं की निगरानी की जा रही है। कॉल सेंटर के माध्यम से शिक्षकों, पालकों, संकुल समन्वयकों एवं अधिकारियों से एक लाख से अधिक कॉल के जरिए फीडबैक लिया गया है। पाठ्यपुस्तक वितरण की बारकोड आधारित ट्रैकिंग से शासन को लगभग 40 करोड़ रूपए की बचत हुई है।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधा

शिक्षामंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों के लिए विद्यालयों के समीप आवासीय छात्रावास की सुविधा विकसित की जा रही है। प्रदेश में संचालित 156 आवासीय विद्यालय एवं छात्रावासों में 33,000 से अधिक बच्चे आवासीय सुविधा का लाभ ले रहे हैं। 13 जिलों में 40 पीवीटीजी छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 21 का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है।

जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान

 यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों के समग्र एवं संतुलित विकास पर जोर दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इन क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यालयीन अधोसंरचना एवं छात्रावास सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। 13 जिलों में 42 छात्रावासों की स्वीकृति दी गई है।

शिक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया गया कि स्कूल शिक्षा विभाग का निरंतर प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण एवं समान अवसर वाली शिक्षा उपलब्ध हो। इसके लिए शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता, पारदर्शी भर्ती एवं पदोन्नति, आधुनिक अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा, डिजिटल तकनीक, विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक सामग्री तथा जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को प्राथमिकता दी जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग की इन पहलों का व्यापक उद्देश्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है।

श्रमिकों के सशक्तिकरण का नया दौर : छत्तीसगढ़ में श्रम कल्याण को मिल रही नई गति

श्रमिकों के सशक्तिकरण का नया दौर : छत्तीसगढ़ में श्रम कल्याण को मिल रही नई गति

 00 सुरक्षित श्रम, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, सम्मानजनक रोजगार और डिजिटल सेवाओं का व्यापक विस्तार
विशेष लेख - छगन लाल लोन्हारे संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर।
राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र विकास के बिना विकसित राज्य की कल्पना संभव नहीं है। इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। श्रमिकों के हितों की रक्षा, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से सेवाओं को सरल बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। राज्य सरकार के ढाई साल में श्रम विभाग की उपलब्धियाँ राज्य सरकार की श्रमिक हितैषी सोच और संवेदनशील प्रशासन का परिचायक हैं।
प्रशासनिक ढांचे का विस्तार, सेवाओं की बेहतर पहुंच
श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा श्रमिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पाँच नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए हैं। साथ ही पाँच श्रम पदाधिकारी कार्यालयों को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के रूप में उन्नत किया गया है। अब प्रदेश में 10 सहायक श्रमायुक्त कार्यालय एवं 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय सहित कुल 33 श्रम कार्यालय संचालित हैं। इससे श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और योजनाओं के प्रभावी संचालन को नई गति मिली है।
समय के अनुरूप श्रम कानूनों में सुधार
औद्योगिक विकास और श्रमिक हितों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने श्रम कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962 में संशोधन कर निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों के साथ महिलाओं के रोजगार के अवसरों का विस्तार किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021 में संशोधन के माध्यम से श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र अब 24 घंटे के भीतर जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है। इससे उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सरल एवं पारदर्शी सेवाएँ उपलब्ध होंगी तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को भी बढ़ावा मिलेगा।
56 लाख से अधिक श्रमिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में
श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल तथा असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के माध्यम से अब तक लगभग 56.83 लाख संगठित, निर्माण एवं असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है।
3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल उन्नयन जैसी सुविधाओं का लाभ
वर्ष 2026 में 30 जून तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लगभग 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल उन्नयन जैसी सुविधाओं का लाभ प्रदान किया गया है। इन योजनाओं पर लगभग 173.32 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं, जो श्रमिक कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
निर्माण श्रमिकों को बढ़ी आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के अंतर्गत आवास निर्माण अथवा घर खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। यह निर्णय निर्माण श्रमिकों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
महिला श्रमिकों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर
इसी प्रकार दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों एवं उनके समूहों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए सहायता राशि भी एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। इससे महिला श्रमिकों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिल रहे हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई पहल
राज्य सरकार ने श्रमिक परिवारों के भविष्य को संवारने के उद्देश्य से अटल कैरियर निर्माण योजना प्रारंभ की है। इसके माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग एवं मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण नि:शुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।
पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण
वहीं मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। इस पहल से बीमारियों की प्रारंभिक पहचान, समय पर उपचार तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
उत्कृष्ट शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य की ओर
श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है।मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप वर्ष 2026-27 से इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। यह पहल श्रमिक परिवारों के बच्चों के भविष्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का माध्यम बनेगी।
पाँच रुपये में पौष्टिक भोजन
शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण, संगठित एवं असंगठित श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में गरम एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 18 जिलों में 39 भोजन केन्द्र संचालित हैं, जो हजारों श्रमिकों के लिए राहत का माध्यम बने हुए हैं।
डिजिटल सेवाओं से बढ़ी पारदर्शिता
श्रम विभाग द्वारा विकसित श्ई-श्रम साथी मोबाइल एप श्रमिकों और नियोजकों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। इस एप के माध्यम से स्वयं पंजीयन, श्रमिक एवं नियोजक के बीच सीधा संपर्क तथा रोजगार संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है। इससे पारदर्शिता के साथ रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है।
मॉडल लेबर चौक से मिलेगा सम्मानजनक वातावरण
राज्य सरकार द्वारा मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन केन्द्रों पर श्रमिकों के पंजीयन, विभिन्न योजनाओं के आवेदन, भोजन, पेयजल, विश्राम एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे श्रमिकों को सम्मानजनक एवं सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध होगा।
सामाजिक सुरक्षा को मिला नया विस्तार
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत सामान्य मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये, कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों की कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर भी उनके आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता
इसी प्रकार असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये तथा दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
सुरक्षित कार्यस्थल की दिशा में प्रयास
राज्य के विभिन्न कारखानों में श्रमिकों को उनके कार्य के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारियों एवं सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इससे कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं में कमी और उत्पादकता में वृद्धि हो रही है।
श्रमिक कल्याण की नई पहचान
छत्तीसगढ़ में श्रम विभाग द्वारा किए जा रहे व्यापक सुधार यह सिद्ध करता है कि राज्य सरकार श्रमिकों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास यात्रा का महत्वपूर्ण सहभागी मानती है। प्रशासनिक ढाँचे का विस्तार, श्रम कानूनों का आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं का विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक रोजगार जैसी पहलें श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। श्रमिकों के कल्याण और सशक्तिकरण के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ समावेशी और संवेदनशील विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

साप्रवि ने कर्मचारी चयन मंडल द्वारा भरे जाने वाले तृतीय श्रेणी पदों की शैक्षणिक योग्यता में किया संशोधन

साप्रवि ने कर्मचारी चयन मंडल द्वारा भरे जाने वाले तृतीय श्रेणी पदों की शैक्षणिक योग्यता में किया संशोधन

 रायपुर। सामान्य प्रशासन विभाग ने कर्मचारी चयन मंडल द्वारा भरे जाने वाले तृतीय श्रेणी पदों की शैक्षणिक योग्यता में संशोधन किया है। प्रशासकीय विभाग के भर्ती नियम में जो पद चतुर्थ श्रेणी के रूप में अधिसूचित हैं वो चतुर्थ श्रेणी के ही माने जाएंगे। सभी पदों के अभ्यर्थियों का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना अनिवार्य होगा।
उक्त अधिसूचना में समूह-2, तृतीय श्रेणी (स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर) शीर्षक अंतर्गत उप समूह-01 के सरल क्रमांक 15 एवं उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित नया सरल क्रमांक जोड़ा जाये, अर्थात - निरीक्षक (खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड) - किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण। राजस्व निरीक्षक - मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण अथवा मान्यता प्राप्त मण्डल से हायर सेकेण्डरी (10+2) परीक्षा उत्तीर्णतथा सिविल इंजीनियरिंग (सर्वे) में डिप्लोमा। कनिष्ठ रोजगार अधिकारी - किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण। 
समूह-2, तृतीय श्रेणी (स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर) शीर्षक अंतर्गत उप समूह-02 के सरल क्रमांक 4 एवं उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित नया सरल क्रमांक जोड़ा जाये, अर्थात: अनुदेशक (संस्कृति विभाग) -किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण। अथवा अनिवार्य (कॉमन) परीक्षा आयोजित होगी। किसी मान्यता प्राप्त मण्डल से हायर सेकेण्डरी (10+2) उत्तीर्ण एवं छत्तीसगढ़ राज्य की मान्यता प्राप्त पॉलिटेक्निक संस्था से मॉर्डन। सभी का अनिवार्य (कॉमन) परीक्षा आयोजित होगी।