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मुख्यमंत्री साय ने कैंसर पीडि़त महिला के उपचार हेतु स्वीकृत की 21.69 लाख की सहायता, रायपुर में होगा उपचार

मुख्यमंत्री साय ने कैंसर पीडि़त महिला के उपचार हेतु स्वीकृत की 21.69 लाख की सहायता, रायपुर में होगा उपचार

 मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया बना जरूरतमंदों के लिए राहत और भरोसे का केंद्र

रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कोरबा जिले की 66 वर्षीय कैंसर पीडि़त महिला उमातिन बाई के उपचार के लिए मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत 21 लाख 69 हजार 344 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है। इस सहायता से उनका उपचार रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेकाहारा) में कराया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, फेफड़े के कैंसर से पीडि़त उमातिन बाई के परिजनों ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज के लिए सहायता की मांग करते हुए बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन प्राप्त होते ही मामले पर त्वरित संज्ञान लिया गया और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत उपचार हेतु 21.69 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। मुख्यमंत्री की इस संवेदनशील पहल से मरीज और उसके परिजनों को बड़ी राहत मिली है। परिजनों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी आर्थिक सहायता मिलने से अब बेहतर और समय पर उपचार संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह सहयोग उनके परिवार के लिए संबल और नई उम्मीद लेकर आया है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के गृह ग्राम बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। यहां प्राप्त आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई कर जरूरतमंदों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य जनकल्याणकारी मामलों में लोगों को त्वरित राहत मिल रही है, जिससे शासन के प्रति आमजन का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा की भावना के साथ संचालित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया आज जरूरतमंदों के लिए आशा, विश्वास और सहारे का सशक्त केंद्र बन गया है।

विकसित छत्तीसगढ़ का नया विजन: पारंपरिक डिग्रियों से ग्लोबल करियर की ओर बढ़ते युवाओं के कदम

विकसित छत्तीसगढ़ का नया विजन: पारंपरिक डिग्रियों से ग्लोबल करियर की ओर बढ़ते युवाओं के कदम

 सिर्फ साक्षरता नहीं, सक्षमता का नया दौर

रायपुर। छत्तीसगढ़, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, घने वनों और खनिज संपदा के लिए जाना जाता है, आज एक नई पहचान के साथ उभर रहा है,एक ज्ञान-आधारित, प्रगतिशील राज्य। 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था में वह समाज सफल होगा जिसके पास अत्याधुनिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और नवाचार की शक्ति हो। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उत्कृष्टता केंद्र योजना शुरू की है। यह पहल पारंपरिक उच्च शिक्षा मॉडल को बदलकर कॉलेजों को युवाओं के लिए आधुनिक लॉन्चपैड बनाने की महत्वाकांक्षा रखती है।
कौशल और रोजगार के बीच की खाई
छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अक्सर सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रही है। परिणामस्वरूप, युवाओं को डिग्रियाँ मिलती रहीं पर उद्योग की बदलती तकनीकी मांगों—जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किलिंग और डेटा एनालिटिक्स—और वास्तविक कौशल के बीच एक गहरी खाई बन गई। खासकर वनांचल और ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्र आधुनिक संसाधनों, प्रयोगशालाओं और वैश्विक मार्गदर्शन के अभाव में पिछड़ जाते थे। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 की दिशानिर्देशों को अपनाते हुए, सरकार ने इसी खाई को पाटने और बहुसांस्कृतिक, अनुसंधान-उन्मुख संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है।
यह योजना दावे भर नहीं है—इसके पीछे ठोस बजटीय प्रावधान और चरणबद्ध रोडमैप मौजूद है। राज्य के 36 प्रमुख महाविद्यालयों जिनमें 3,000 से अधिक नामांकन हैं,उसे उत्कृष्टता केंद्र के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। प्रारम्भिक चरण में 25 कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज 3 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं और अगले चरण में प्रमुख कॉलेजों के लिए 15 करोड़ रुपए तक का विशेष वित्तीय प्रावधान रखा गया है। साथ ही राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना जैसी पहलें प्राध्यापकों और छात्रों को वैश्विक मानक के अनुसंधान के लिए वित्तीय व प्रशासनिक सहायता देंगी।
फाइव-पिलर आर्किटेक्चर: शिक्षा के पाँच स्तंभ
ये उत्कृष्टता केंद्र सिर्फ भौतिक सुविधाएँ नहीं होंगे; इनके कार्य-तत्व पांच मुख्य स्तंभों पर आधारित होंगे, जो छात्रों को विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करेंगे।
अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ
विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, तकनीकी और कृषि विषयों में अंतरराष्ट्रीय मानक की लैब सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे थ्योरी के साथ करके सीखना सुनिश्चित होगा।डिजिटल लर्निंग सेंटर: हाई-स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट क्लासरूम और ई-लाइब्रेरी के जरिए दूरस्थ और वनांचल के छात्र भी वैश्विक ज्ञान स्रोतों से जुड़ सकेंगे। रिसर्च एवं इनोवेशन लैब: स्थानीय कृषि, जनजातीय कला, हर्बल चिकित्सा और माइनिंग जैसे क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए शोध को प्रेरित किया जाएगा, ताकि लोकल शोध को ग्लोबल पहचान मिल सके। 
रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण
कोडिंग, आईटी कौशल, उद्यमिता और स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेल्स के माध्यम से छात्रों को मार्केट-रेडी बनाया जाएगा। 
करियर एवं प्लेसमेंट गाइडेंस
इन-हाउस काउंसलिंग, कैंपस प्लेसमेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे पीएससी, सीजीपीएससी बैंकिंग) की तैयारी के लिए संरचित मार्गदर्शन उपलब्ध होगा। 
जमीनी असर: लाभ किस तरह पहुंचेगा?
यह योजना व्यक्तिगत छात्रवृत्ति या लोन नहीं, बल्कि संस्थागत सशक्तिकरण पर आधारित है। चयनित उत्कृष्टता केंद्रों के नियमित छात्र बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। कौशल विकास, रिसर्च और इनक्यूबेशन प्रोग्राम्स के लिए विस्तृत परवर्ती पंजीकरण की व्यवस्था रहेगी, जो सरल और पारदर्शी रखी गई है ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र कागजी बाधाओं में न $फँसें।
बौद्धिक पलायन पर अंकुश और आर्थिक सशक्तिकरण
जब राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ और वैश्विक मानक का शिक्षण वातावरण छात्रों के अपने जिलों में उपलब्ध होगा तो दूर के महानगरों की ओर पलायन कम होगा। यह युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही नई उद्यमी गतिविधियाँ आरम्भ करने और नये रोजगार सृजित करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था लोकल से ग्लोबल की दिशा में जीतेगी।
मुख्यमंत्री का विजन: रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिभाशाली हैं; उन्हें सही अवसर और आधुनिक संसाधन मिले तो वे न केवल नौकरी पाएँगे बल्कि नये उद्यम भी खोलकर रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। यही इस योजना की आत्मा है।युवाओं को रोजगार संचयित करने की बजाय रोजगार सृजन के लिये सक्षम बनाना है। उत्कृष्टता केंद्र योजना छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक इतिहास में एक निर्णायक मील का पत्थर है। यह राज्य को परंपरागत उपभोक्ता पहचान से उठाकर एक नॉलेज स्टेट में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले वर्षों में इन केंद्रों से निकले प्रशिक्षित युवा केवल कागजी प्रमाणपत्र नहीं लेकर बाहर जाएंगे; उनके पास आधुनिक कौशल, नवाचार की चाह और आत्मनिर्भरता की भावना होगी। यह पहल नि:संदेह छत्तीसगढ़ को समृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों में मजबूती देगी।

पर्यावरणीय मानकों से समझौता नहीं, 94 उद्योगों को नोटिस, 3.03 करोड़ की क्षतिपूर्ति अधिरोपित

पर्यावरणीय मानकों से समझौता नहीं, 94 उद्योगों को नोटिस, 3.03 करोड़ की क्षतिपूर्ति अधिरोपित

 रायपुर क्षेत्र में प्रदूषणकारी उद्योगों पर मंडल की सख्त कार्रवाई

00 रायपुर की वायु गुणवत्ता में लगभग 4 प्रतिशत सुधार, एक्यूआई संतोषजनक श्रेणी में

रायपुर। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा रायपुर क्षेत्रांतर्गत संचालित औद्योगिक इकाइयों के पर्यावरणीय अनुपालन की नियमित निगरानी की जा रही है। मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर द्वारा जल एवं वायु प्रदूषणकारी उद्योगों का औचक निरीक्षण कर पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के विरुद्ध वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 एवं जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत कठोर कार्रवाई की जा रही है।

क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के अंतर्गत रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, महासमुंद एवं गरियाबंद जिलों में स्थापित उद्योगों के विरुद्ध जनवरी 2025 से मई 2026 की अवधि में व्यापक कार्रवाई की गई। इस दौरान कुल 94 प्रदूषणकारी उद्योगों को नोटिस जारी किए गए तथा 82 उद्योगों के विरुद्ध उत्पादन बंद करने अथवा विद्युत विच्छेदन के निर्देश जारी किए गए। इसी अवधि में 96 उद्योगों पर कुल 2 करोड़ 40 लाख 65 हजार 125 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि अधिरोपित की गई। वहीं कच्चे माल, उत्पाद एवं ठोस अपशिष्टों का बिना तारपोलिन से ढंके परिवहन करने वाले 136 उद्योगों एवं संस्थानों पर 51 लाख 2 हजार 323 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई। इसके अतिरिक्त पूर्व अनुमति के बिना फ्लाई ऐश के अपवहन एवं डम्पिंग के मामलों में 2 उद्योगों पर 12 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई।
सिंगल-यूज प्लास्टिक पर भी सख्त कार्रवाई
भारत सरकार द्वारा अधिसूचित प्लास्टिक कचरा प्रबंधन संशोधन नियम, 2021 तथा राज्य शासन के छत्तीसगढ़ प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्री नियम, 2023 के तहत सिंगल-यूज प्लास्टिक एवं अन्य प्रतिबंधित प्लास्टिक उत्पादों के विनिर्माण, भंडारण, विक्रय, परिवहन एवं उपयोग पर प्रतिबंध लागू है। इस संबंध में जनवरी 2025 से मई 2026 तक क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर द्वारा एक उद्योग का उत्पादन बंद कराते हुए 87 हजार 500 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई तथा संबंधित उद्योग के विरुद्ध न्यायालय में परिवाद भी दायर किया गया। एक अन्य उद्योग के विरुद्ध उत्पादन बंद करने के साथ 6 लाख 25 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई। इसके अलावा दो अन्य उद्योगों के विरुद्ध भी उत्पादन बंद करने की कार्रवाई की गई।
रायपुर की वायु गुणवत्ता में सुधार
रायपुर शहर में परिवेशीय वायु गुणवत्ता की सतत निगरानी के लिए 4 स्थानों पर डिस्प्ले बोर्ड सहित परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र तथा 6 स्थानों पर राष्ट्रीय परिवेशी वायु निगरानी कार्यक्रम स्टेशन संचालित किए जा रहे हैं। वर्ष 2024 में रायपुर शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 65.38 दर्ज किया गया था, जो वर्ष 2025 में घटकर 62.86 हो गया है। इस प्रकार वायु गुणवत्ता में लगभग 4 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया है। यह स्तर संतोषजनक श्रेणी में आता है और प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम को दर्शाता है।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के विरुद्ध आगे भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी तथा प्रदेश में स्वच्छ व स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने के लिए निगरानी एवं प्रवर्तन गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस पर हुआ पौधरोपण

भाजपा प्रदेश कार्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस पर हुआ पौधरोपण

 रायपुर। विश्व पर्यावरण दिवस पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय (कुशाभाऊ ठाकरे परिसर) में पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान भाजपा क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय द्वारा परिसर में पौधे रोपे गए और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का संदेश दिया गया। 
इस अवसर पर भाजपा क्षेत्रीय संगठन महामंत्री  जम्वाल ने कहा कि प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखना ही सतत विकास का आधार है। आज के आधुनिक युग में जहाँ विकास आवश्यक है, वहीं आने वाली पीढिय़ों के लिए पर्यावरण को सुरक्षित और हरा-भरा बनाए रखना भी हमारी परम जिम्मेदारी है। धरती और प्रकृति का संरक्षण करके ही हम एक स्वस्थ और समृद्ध भविष्य की नींव रख सकते हैं। भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री  साय ने प्रदेशवासियों से भी अपील की कि वे इस पर्यावरण दिवस पर न केवल एक पौधा लगाएँ, बल्कि उसके बड़े होने तक उसकी पूरी देखभाल करने का संकल्प भी लें। इस अवसर पर प्रदेश कार्यालय के पदाधिकारी, वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

CG – इश्क, लव और मर्डर : पत्थर से सिर कुचलकर बाउंसर को उतारा मौत के घाट, इस वजह से दिया वारदात को अंजाम

CG – इश्क, लव और मर्डर : पत्थर से सिर कुचलकर बाउंसर को उतारा मौत के घाट, इस वजह से दिया वारदात को अंजाम

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां कोटा क्षेत्र पथर्रा गांव में 27 वर्षीय बाउंसर निखिल गोस्वामी की आंखों में मिर्च झोंककर फिर पत्थर से सिर कुचलकर हत्या कर दी गई। पत्नी से कथित संबंधों के शक में भोला मानिकपुरी ने अपने साथियों के साथ वारदात को अंजाम दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल निखिल ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. कोटा पुलिस प्रेम प्रसंग, चरित्र शंका और पुरानी रंजिश के एंगल से जांच कर रही है, जबकि आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, पथर्रा निवासी निखिल गोस्वामी बिलासपुर के एक बार में बाउंसर के रूप में काम करता था। बीती रात वह अपने दो साथियों के साथ अमने मोड़ के पास बैठकर शराब पी रहा था। इसी दौरान तीन-चार युवक बाइक से वहां पहुंचे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक सवार युवकों में शामिल एक व्यक्ति को देखकर निखिल ने उसे नाम लेकर आवाज लगाई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। आरोपी भोला मानिकपुरी ने अपने साथियों के साथ मिलकर पहले निखिल की आंखों और चेहरे पर मिर्च पाउडर फेंका। अचानक हुए हमले से निखिल संभल नहीं पाया। इस बीच उसके साथ मौजूद दोनों साथी मौके से भाग निकले। इसके बाद आरोपियों ने निखिल पर हमला बोल दिया।

मिर्च पाउडर फेंकने के बाद भोला मानिकपुरी ने पास में पड़े भारी पत्थर से निखिल के सिर और शरीर पर ताबड़तोड़ वार किए। गंभीर चोट लगने से वह लहूलुहान होकर मौके पर गिर पड़ा। घटना के बाद राहगीरों ने घायल निखिल को अस्पताल पहुंचाया। उसकी हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए रेफर किया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही एडिशनल एसपी मधुलिका सिंह सहित कोटा पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण और लोगों से पूछताछ साक्ष्य जुटाए। पूछताछ में मृतक के भाई ने पुलिस को बताया कि आरोपी भोला मानिकपुरी की पत्नी और निखिल गोस्वामी के बीच कथित रूप से प्रेम संबंध थे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। कोटा पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और मुख्य आरोपी भोला मानिकपुरी सहित अन्य संदिग्धों की तलाश शुरू कर दी है।

CG WEATHER : छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम का मिजाज! बारिश-आंधी के आसार, गर्मी से मिलेगी राहत

CG WEATHER : छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम का मिजाज! बारिश-आंधी के आसार, गर्मी से मिलेगी राहत

 रायपुर। भीषण गर्मी और उमस से परेशान छत्तीसगढ़वासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मौसम विभाग ने देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक एंट्री का ऐलान कर दिया है और अब इसका असर धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ में भी दिखाई देने लगा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में उत्तर भारत की ओर बढ़ते हुए प्रदेश के मौसम को भी पूरी तरह बदल सकता है। इसी बीच शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में मौसम का मिजाज बदलने के संकेत मिले हैं। कहीं हल्की बारिश तो कहीं गरज-चमक और अंधड़ की संभावना जताई गई है।

पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के न्यूनतम तापमान में करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं रायपुर और राजनांदगांव सबसे गर्म रहे, जहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि अगले 5 दिनों में लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिल सकती है। इस दौरान तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है और मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।

मौसम विज्ञानी एच. पी. चंद्रा के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के लक्षद्वीप, केरल, तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। इसके अलावा पश्चिमी विक्षोभ पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय है, जबकि उत्तर-पूर्व उत्तर प्रदेश के आसपास ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। इन मौसम प्रणालियों का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी पड़ रहा है।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रदेश में आज एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। कुछ इलाकों में तेज अंधड़ चलने और बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। वहीं राजधानी रायपुर में शुक्रवार को एक बार फिर 42 डिग्री तक तापमान पहुंचने की संभावना है, लेकिन बादल छाने, आंधी चलने और बारिश होने के भी संकेत हैं। ऐसे में लोगों को तेज गर्मी के बीच मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है।

पीएम आवास योजना (शहरी): राज्य स्तरीय स्वीकृति व निगरानी समिति की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न

पीएम आवास योजना (शहरी): राज्य स्तरीय स्वीकृति व निगरानी समिति की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न

 रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील ने एसएलबीसी के बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को उनके हिस्से की राशि के लिए ऋण देने की प्रक्रिया का सरलीकरण करें, जिससे हितग्राही आवास शीघ्रता से बना सकें। मुख्य सचिव ने नगरीय-प्रशासन विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत जिन हितग्राहियों को आवास स्वीकृत हुए हैं, उनके लिए एक विशेष शिविर लगाकर बैंकर्स से ऋण दिलवाये। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केन्द्रांश एवं राज्यांश की राशि हितग्राहियों को दी जाती है

मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 तथा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक के अंतर्गत परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसी तरह से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के घटक भागीदारी में किफायती आवास निर्माण के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं में भारत सरकार के एमआईएस पोर्टल पर दर्ज हितग्राहियों की प्रविष्टी में आवश्यक संशोधन की स्वीकृति के संबंध में भी विस्तार से चर्चा हुई। 
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु भौतिक प्रगति अनुसार केन्द्रांश राशि एक लाख 50 हजार रूपए तथा अनिवार्य राज्यांश की राशि एक लाख रूपए दी जाती है। हितग्राही द्वारा निर्धारित समयावधि में आवास पूर्ण करते हुए गृह प्रवेश करने पर राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति आवास 32 हजार 850 रूपए पृथक से हितग्राही के खाते में हस्तांतरित की जायेगी। प्रति आवास डीपीआर और पीएमसी शुल्क की राशि 6 हजार 150 रूपए राज्य शासन द्वारा दिया जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण घटक अंतर्गत 10 हजार 549 हितग्राही हेतु नवीन आवास निर्माण के लिए केन्द्रांश राशि 158 करोड़ 23 लाख 50 हजार रूपए तथा राज्यांश 146 करोड़ 63 लाख 11 हजार रूपए एवं हितग्राही अंशदान राशि 105 करोड़ 49 लाख शामिल करते हुए 144 नगरीय निकायों में 410 करोड़ 35 लाख 61 हजार रूपए की लागत की 114 परियोजनाओं को स्वीकृत करने हेतु प्रस्तावित किया गया है। जिस पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव श्रीमती आर.शंगीता, आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश श्री अवनीश कुमार शरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुश्री ईफ्फत आरा सहित वित्त, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, गृह निर्माण मंडल, हुडको एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक शामिल हुए।

पद्मश्री जागेश्वर का जीवन सेवा, समर्पण और मानवता का उच्चतम आदर्श - मंत्री वर्मा

पद्मश्री जागेश्वर का जीवन सेवा, समर्पण और मानवता का उच्चतम आदर्श - मंत्री वर्मा

 00 बिरहोर जननायक पुस्तक का विमोचन: मंत्री वर्मा को लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने भेंट की प्रति
रायपुर।
राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा से लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डॉ. पटेल ने मंत्री वर्मा को पद्मश्री जागेश्वर यादव के प्रेरणादायी जीवन और संघर्षों पर आधारित अपनी नवनिर्मित पुस्तक बिरहोर जननायक की प्रति सप्रेम भेंट की। इस गौरवमयी अवसर पर स्वयं पद्मश्री जागेश्वर यादव जी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मंत्री वर्मा के साथ अपने सामाजिक जीवन के गहरे अनुभवों को साझा किया।
पुस्तक में बिरहोर समुदाय के उत्थान की अद्भुत गाथा
मुलाकात के दौरान मंत्री  टंकराम वर्मा ने पुस्तक का अवलोकन किया और इसके प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने जशपुर जिले में बिरहोर के भाई के नाम से विख्यात पद्मश्री जागेश्वर यादव द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बिरहोर समुदाय के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। मंत्री वर्मा ने कहा कि उनका पूरा जीवन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। पद्मश्री जागेश्वर यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका व्यक्तित्व सेवा, करुणा, समर्पण और मानवता के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है। उनका जीवन समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है।
1980 से निरंतर जारी है जागेश्वर यादव का संघर्ष
गौरतलब है कि पद्मश्री जागेश्वर यादव वर्ष 1980 से ही विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक जागरूकता एवं मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए निरंतर धरातल पर कार्यरत हैं। उनके इन्हीं अथक प्रयासों का परिणाम है कि आज बिरहोर समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित हुई है और अनेक परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
युवाओं और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी कृति
लेखक डॉ. लोकेश पटेल की यह कृति केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरक दस्तावेज है। यह पुस्तक पाठकों को संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, नि:स्वार्थ सेवा और समाज के प्रति समर्पण के माध्यम से बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह कृति विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील बनने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है। मंत्री वर्मा ने इस महत्वपूर्ण, शोधपरक एवं प्रेरणादायी कृति के सृजन के लिए लेखक डॉ. लोकेश पटेल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक समाज के विभिन्न वर्गों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का एक महत्वपूर्ण स्रोत सिद्ध होगी।

बस्तर का सनराइज टू सनसेट पर्यटन सर्किट : टाटामारी में सुनहरी सुबह, पुसपाल में मनमोहक शाम

बस्तर का सनराइज टू सनसेट पर्यटन सर्किट : टाटामारी में सुनहरी सुबह, पुसपाल में मनमोहक शाम

 रायपुर। बस्तर की पहचान अब केवल प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह क्षेत्र तेजी से पर्यटन विकास के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। कभी नक्सली गतिविधियों के कारण चर्चा में रहने वाला क्षेत्र अब पर्यटन और विकास की नई कहानी लिखने की तैयारी में है। इसी दिशा में कोण्डागांव वनमंडल द्वारा ग्राम पुसपाल को केंद्र में रखकर एक नए पर्यटन सर्किट का विकास किया जा रहा है, जो बस्तर के पर्यटन मानचित्र में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने वाला है।

इस नई पहल का सबसे बड़ा आकर्षण यह होगा कि पर्यटक एक ही दिन में टाटामारी की पहाड़ियों से उगते सूरज का अद्भुत दृश्य और पुसपाल में ढलते सूरज की मनोहारी छटा का आनंद ले सकेंगे। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और साहसिक गतिविधियों का अनूठा संगम इस सर्किट को विशेष पहचान दिलाएगा।
केशकाल से चित्रकोट की यात्रा होगी आसान और रोमांचक
प्रस्तावित पर्यटन सर्किट के विकसित होने से केशकाल से चित्रकोट जलप्रपात तक की यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और कम समय में पूरी की जा सकेगी। पर्यटक अपनी यात्रा की शुरुआत केशकाल स्थित टाटामारी से कर सकेंगे, जहां सूर्याेदय का विहंगम दृश्य उन्हें प्रकृति के अद्भुत अनुभव से रूबरू कराएगा। इसके बाद पर्यटक चौत्यगृह, भोंगापाल और गोबरहीन जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर सकेंगे। गोबरहीन स्थित प्राचीन शिवलिंग क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। दिनभर की यात्रा के बाद पर्यटक पुसपाल पहुंचकर सूर्यास्त के मनोरम दृश्य का आनंद ले सकेंगे, जो इस पूरे पर्यटन अनुभव को यादगार बना देगा।
कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास और विश्वास की नई किरण

यह क्षेत्र कभी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था, जिसके कारण यहां की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर पर्यटकों की पहुंच से दूर रही। राज्य सरकार की प्रभावी रणनीति, सुरक्षा बलों के प्रयासों और विकासोन्मुखी योजनाओं के चलते अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास का वातावरण बनने से पर्यटन की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। नया पर्यटन सर्किट इसी बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है, जो क्षेत्र की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक होगा।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य पर्यटन विकास के साथ स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं को गाइड, होमस्टे संचालन, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था के विकसित होने से क्षेत्र में आय के नए स्रोत पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
राफ्टिंग, कॉटेज और एडवेंचर स्पोर्ट्स बनेंगे आकर्षण का केंद्र

इस पर्यटन सर्किट में पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। यहां कॉटेज निर्माण, राफ्टिंग जैसी साहसिक गतिविधियों तथा विभिन्न एडवेंचर स्पोर्ट्स की तैयारियां की जा रही हैं। इससे प्रकृति प्रेमियों के साथ-साथ रोमांच पसंद करने वाले पर्यटकों को भी नया गंतव्य मिलेगा।
दो जिलों की सीमा पर विकसित होगा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट

इस पर्यटन परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा कोण्डागांव जिले के नारायणपुर सीमा से लगे क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा, जबकि शेष 30 प्रतिशत कार्य बस्तर जिले के अंतर्गत आने वाले कोण्डागांव वनमंडल क्षेत्र में किया जाएगा। परियोजना के लिए प्रारंभिक खाका और बजट तैयार किए जा चुके हैं तथा जमीनी स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाएं भी शुरू हो गई हैं

परियोजना के पूर्ण होने के बाद टाटामारी से पुसपाल तक का यह पर्यटन सर्किट बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और विकास की नई तस्वीर प्रस्तुत करेगा। यह न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन में आर्थिक समृद्धि और नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

​स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की जीत जनता के विश्वास की जीत : देव

​स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की जीत जनता के विश्वास की जीत : देव

 बम्हनीडीह,शिवनंदनपुर और सहसपुर लोहारा में भाजपा की ऐतिहासिक विजय पर जताया आभार

​रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने प्रदेश के स्थानीय निकाय उपचुनावों और अध्यक्ष पदों पर मिली शानदार जीत पर हर्ष व्यक्त करते हुए जनता और कर्मठ कार्यकर्ताओं का आभार जताया है।  देव ने कहा कि यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और हमारी सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के प्रति जनता के अटूट विश्वास का परिणाम है। जनता ने एक बार फिर विकास और सुशासन को चुना है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देव ने कहा कि कवर्धा जिले के सहसपुर लोहारा मेंअध्यक्ष पद पर भाजपा की प्रत्याशी सरिता संतोष मिश्रा ने 762 वोटों के बड़े अंतर से एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की है। इसी प्रकार ​सूरजपुर जिले के शिवनंदनपुर नगर पंचायत में भी जनता ने भाजपा पर भरोसा जताते हुए अध्यक्ष पद पर रितेश जायसवाल को 362 वोटों के अंतर से विजयी बनाया है।  देव ने कहा कि बम्हनीडीह, सहसपुर लोहारा और शिवनंदनपुर नगर पंचायत में मिली यह जीत दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर जनता कांग्रेस के खोखले वादों को पूरी तरह समझ चुकी है और विकास के लिए केवल भाजपा पर भरोसा कर रही है। इस चुनाव में दिन-रात मेहनत करने वाले प्रत्येक देवतुल्य कार्यकर्ता बधाई के पात्र हैं। भाजपा जनता के इस विश्वास का मान रखेगी और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के माध्यम से इन क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति दी जाएगी।

9 जून को होगी साय कैबिनेट की बैठक, कई महत्वपूर्ण फैसलों पर लग सकती है मुहर

9 जून को होगी साय कैबिनेट की बैठक, कई महत्वपूर्ण फैसलों पर लग सकती है मुहर

 रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद् (केबिनेट) की बैठक मंगलवार, 09 जून को सवेरे 11.00 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में होगी।

खेल प्रशिक्षण प्रारम्भ : कृषि गौ राक्षणी सभा ट्रस्ट द्वारा खेल व स्वास्थ्य के लिए दिए गए 18 एकड़ भूमि

खेल प्रशिक्षण प्रारम्भ : कृषि गौ राक्षणी सभा ट्रस्ट द्वारा खेल व स्वास्थ्य के लिए दिए गए 18 एकड़ भूमि

रायपुर - स्थानीय सकरी, रायपुर स्थित  कृषि गौ राक्षणी सभा ट्रस्ट द्वारा खेल व स्वास्थ्य के लिए दिए गए 18 एकड़ भूमि में सकरी के युवा खिलाड़ी कमलेश डहरिया द्वारा खेल प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया खेल प्रशिक्षण उद्घाटन में उपस्थित मुख्य अतिथि अजय तिवारी जी ,अध्यक्ष गौ रक्षिणी सभा ट्रस्ट अध्यक्षता राम अवतार तिवारी जी एवं विशेष अतिथि ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष पप्पू बंजारी ने किया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अजय तिवारी जी ने कहा कि हमारे ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य अच्छा नागरिक बनाना है और अच्छे नागरिक का प्रथम सोपान बचपन के खेलकूद से प्रारंभ होता है उन्होंने कहा कि वर्तमान में क्रिकेट विश्व का सर्वाधिक प्रसिद्ध खेल है एवं भारत में आईपीएल प्रतियोगिता ने गांव-गांव के खिलाड़ियों को उनके क्षमता अनुसार समृद्धि दिलवाई है अतः छत्तीसगढ़ के बच्चे भी उसी कतार में सम्मिलित हो साथ ही उन्होंने बच्चों की उज्जवल भविष्य की कामना की कार्यक्रम के अध्यक्ष रामावतार तिवारी जी ने कहा कि यदि बच्चे अपनी पूर्ण क्षमता के साथ खेल तो छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना अब आसान हो चुका है पप्पू बंजारे ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास खेल के माध्यम से संभव होता है कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ देवाशीष मुखर्जी ,प्राचार्य महंत कॉलेज के पी  पांडे जी विकास शेखर चंद्राकर जी टी आर सिन्हा एवं बड़ी संख्या में सकरी के गणमान्य नागरिक उपस्थित हुए कार्यक्रम का संचालन डॉ देवाशीष मुखर्जी ने किया ।
35 वर्षों का इंतजार हुआ खत्म : सपेरा बस्ती में साकार हो रहा पक्के घरों का सपना

35 वर्षों का इंतजार हुआ खत्म : सपेरा बस्ती में साकार हो रहा पक्के घरों का सपना

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने भीखमपुरा में निर्माणाधीन पीएम आवासों का किया निरीक्षण

जनजातीय परिवारों से संवाद कर सुनीं समस्याएं, दिव्यांग हितग्राहियों को दिए सहायक उपकरण

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया वृक्षारोपण

रायपुर-- सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड स्थित ग्राम भीखमपुरा पहुंचे, जहां उन्होंने सपेरा बस्ती में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण कर विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री  साय ने वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवनयापन कर रहे सवरा (सपेरा) जनजाति के परिवारों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री  साय ने निर्माणाधीन आवासों का अवलोकन करते हुए कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास और जनकल्याण का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को सभी स्वीकृत आवासों और अन्य निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे पिछले लगभग 35 वर्षों से कच्चे घरों में रहकर जीवनयापन कर रहे थे।प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से अब उनका पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। हितग्राहियों ने कहा कि पहली बार उन्हें अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक आवास में रहने की उम्मीद मिली है। मुख्यमंत्री  साय ने ग्रामीणों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए जाति प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश अधिकारियों को दिए।

इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग हितग्राही रमाबाई सिदार को बैसाखी प्रदान कर उनकी सहायता की तथा बच्चों को चॉकलेट वितरित कर उनसे आत्मीय बातचीत की। मुख्यमंत्री की सहजता और अपनत्व से ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

उल्लेखनीय है कि भीखमपुरा की सपेरा बस्ती में 68 परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास, सीसी रोड तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, जल जीवन मिशन सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 25 आवास, वर्ष 2025-26 में 14 आवास तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 14 आवास स्वीकृत किए गए हैं। वहीं 10 अन्य पात्र परिवारों को आवास प्लस 2.0 सर्वे में शामिल किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कदम का पौधा तथा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बरगद का पौधा रोपित किया। परिसर में कुल पांच पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त

 68.54 लाख महिलाओं के खातों में अंतरित हुए 642.27 करोड़ रुपये

--मातृशक्ति के सम्मान, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण को मिला नया संबल

रायपुर / मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 68 लाख 54 हजार महिलाओं के बैंक खातों में 642 करोड़ 27 लाख 77 हजार 950 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा महतारी वंदन योजना इस दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल के रूप में सामने आई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी समाज और राज्य की प्रगति तब तक पूर्ण नहीं हो सकती, जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से सम्मानित न किया जाए। महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश की माताओं और बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रही है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 1 मार्च 2024 से प्रारंभ हुई महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। योजना से प्राप्त राशि का उपयोग महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, पोषण तथा छोटे-छोटे स्वरोजगार कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी बढ़ी है।

जून 2026 में जारी 28वीं किस्त के साथ ही योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश की महिलाओं को कुल 18 हजार 165 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। यह राशि महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के अनुरूप सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और नारायणपुर में संचालित नियद नेल्लानार अभियान के माध्यम से 7 हजार 770 नई महिलाओं को महतारी वंदन योजना से जोड़ा गया है। इससे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों की महिलाओं को भी आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना आज केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, विश्वास और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परिवार तथा समाज में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महिलाओं की सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रदेश की हर महिला सशक्त, स्वावलंबी और सम्मानपूर्ण जीवन जी सके।

महतारी वंदन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई धारा प्रवाहित हुई है और लाखों परिवारों के जीवन में खुशहाली तथा आर्थिक स्थिरता का नया अध्याय जुड़ा है।

जनचौपाल में मुख्यमंत्री ने सुनी जनता की बात, विकास कार्यों की दी सौगात

जनचौपाल में मुख्यमंत्री ने सुनी जनता की बात, विकास कार्यों की दी सौगात

 सुशासन तिहार के तहत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भीखमपुरा पहुंचे मुख्यमंत्री, ग्रामीणों से किया सीधा संवाद

0-सपेरा समाज के लिए सामुदायिक भवन, मंगल भवन, सीसी रोड और तालाब सौंदर्यीकरण सहित कई विकास कार्यों की घोषणा

रायपुर-मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भीखमपुरा में आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। गौशाला परिसर में आयोजित जनचौपाल में मुख्यमंत्री पारंपरिक खाट पर बैठकर ग्रामीणों, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से रूबरू हुए और उनकी समस्याओं, सुझावों तथा अपेक्षाओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और जवाबदेही को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आमजन से प्राप्त आवेदनों और शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है जब सरकार स्वयं लोगों के बीच जाकर उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त करे। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में जनचौपालों और समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।  

मुख्यमंत्री  साय ने जनचौपाल में उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और जनकल्याण का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे।

जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत मांगों पर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने सपेरा समाज के लिए सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के निर्माण, बस्ती क्षेत्र में मंगल भवन निर्माण, गांव की आंतरिक गलियों में सीसी रोड निर्माण तथा चंडी मंदिर के समीप स्थित डबरी तालाब के सौंदर्यीकरण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम की प्राथमिक शाला का नामकरण पंडित हृदयानंद पाणिग्राही के नाम पर किए जाने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क तथा आजीविका के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से शासन की योजनाओं का लाभ लेने और विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।

इस अवसर पर वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री का सीधे गांव पहुंचकर लोगों से संवाद करना उनकी संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण का परिचायक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में विकास और सुशासन को नई दिशा मिली है तथा शासन की योजनाओं का लाभ तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

कार्यक्रम मे मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

जनता तक पहुंचे योजनाओं का वास्तविक लाभ, प्रशासन जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री साय

जनता तक पहुंचे योजनाओं का वास्तविक लाभ, प्रशासन जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री साय

 बिलासपुर संभाग के पांच जिलों की संयुक्त समीक्षा बैठक में विकास कार्यों, राजस्व प्रकरणों, पेयजल, स्वास्थ्य और खरीफ तैयारियों की विस्तृत समीक्षा

-राजस्व मामलों के त्वरित निराकरण, पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ करने और किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

रायपुर-शासन प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनसमस्याओं का संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत बिलासपुर प्रवास के दौरान बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक के दौरान यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने विकास कार्यों की प्रगति, राजस्व मामलों, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं तथा आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।

राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए चलाएं विशेष अभियान

मुख्यमंत्री ने राजस्व मामलों की समीक्षा करते हुए समय-सीमा से बाहर तथा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व प्रकरण सीधे नागरिकों के जीवन और आजीविका से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक विलंब आमजन की परेशानी बढ़ाता है, इसलिए इनके त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर रखें विशेष निगरानी

मुख्यमंत्री  साय ने ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को देखते हुए सभी जिलों में पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, इसके लिए निरंतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार के लिए अग्रिम तैयारी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं के संबंध में किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए खाद एवं बीज की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद एवं बीज उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण डीएपी उर्वरक की सीमित उपलब्धता का उल्लेख करते हुए किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया तथा नैनो डीएपी जैसे विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है।

कृषि क्षेत्र में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण और आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे तकनीक आधारित कृषि गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का विस्तार होगा और महिलाओं के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित होंगे।

जनभागीदारी से सफल हो रहा सुशासन तिहार

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वे स्वयं प्रदेश  में  आयोजित समाधान शिविरों में शामिल होकर आम नागरिकों से सीधे संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनता का शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार केवल शिकायतों के निराकरण का अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास एवं संवाद को मजबूत करने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की 28वीं किश्त जारी होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सुशासन का वास्तविक उद्देश्य है। यही विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार बनेगा।

बैठक में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, सांसद कमलेश जांगड़े, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक,  धर्मजीत सिंह,  सुशांत शुक्ला, दिलीप डहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, विशेष सचिव  रजत बंसल, संभागायुक्त  सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक  रामगोपाल गर्ग तथा पांचों जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

’मुख्यमंत्रीआज पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को करेंगे सम्मानित’…..

’मुख्यमंत्रीआज पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को करेंगे सम्मानित’…..

 रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आगामी शुक्रवार 5 जून को दोपहर 2.30 बजे न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन रायपुर में एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में टॉप-10 में स्थान बनाने वाले पंजीकृत श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों को सम्मानित करेंगे। इस गरिमामय अवसर पर श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन एवं छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

’योजना के तहत मिलने वाले मुख्य लाभ’

योजना के अंतर्गत चयनित प्रत्येक मेधावी छात्र को 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा और आवागमन को सुगम बनाने के लिए दोपहिया वाहन  क्रय करने हेतु 1  लाख रुपये का विशेष अनुदान देने का भी प्रावधान है। इस प्रकार प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को कुल रुपये 2,00,000/- का चेक वितरण कर लाभान्वित किया जाना है।

पात्रता एवं नियम छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं। हितग्राही श्रमिक का श्रम कल्याण मंडल में कम से कम 90 दिन पूर्व से पंजीकृत होना आवश्यक है। यह वार्षिक प्रोत्साहन राशि पंजीकृत निर्माण श्रमिक के केवल प्रथम दो बच्चों को ही देय होगी। इस योजना का लाभ एक शैक्षणिक वर्ष में केवल एक बार ही लिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह कल्याणकारी योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए एक बड़ा संबल प्रदान कर रही है।

CG WEATHER : छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में बारिश-आंधी और वज्रपात का अलर्ट

CG WEATHER : छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में बारिश-आंधी और वज्रपात का अलर्ट

 छत्तीसगढ़ । छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। रायपुर मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार आज से प्रदेशभर में मेघगर्जन और बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी।

कुछ इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। भारतीय मौसम विभाग की नाउकास्ट चेतावनी के मुताबिक सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बेमेतरा, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर जिलों के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना है। बीते 24 घंटों में दंतेवाड़ा के कुआकोंडा में सबसे ज्यादा 3 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि कोरबा और पेंड्रा रोड में 2-2 सेंटीमीटर वर्षा रिकॉर्ड हुई।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार राजनांदगांव प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पेंड्रा रोड सबसे ठंडा रहा। राजधानी रायपुर में भी आंशिक बादल, गरज-चमक, बारिश और अंधड़ के संकेत दिए गए हैं। मौसम विभाग ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा है कि खुले में रखी फसलें बारिश और तेज हवाओं से प्रभावित हो सकती हैं। लोगों से पेड़ों के नीचे खड़े न होने, जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने और बारिश के दौरान सावधानी से वाहन चलाने की अपील की गई है।

आजादी के 78 साल बाद रोशन होंगे दूरस्थ मजराटोले, सुशासन तिहार में जिले को मिली बड़ी सौगात

आजादी के 78 साल बाद रोशन होंगे दूरस्थ मजराटोले, सुशासन तिहार में जिले को मिली बड़ी सौगात

मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना के तहत 10 गांवों तक पहुंचेगी बिजली, दशकों का इंतजार होगा खत्म
रायपुर।
सुशासन तिहार-2026 के अवसर पर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले के 10 दूरस्थ एवं अब तक विद्युत सुविधा से वंचित मजराटोलों के विद्युतीकरण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो गई है। निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद इन क्षेत्रों में इसी सत्र के दौरान तेजी से विद्युतीकरण कार्य प्रारंभ कर पूर्ण किया जाएगा।

आजादी के 78 वर्षों बाद जिले के ऐसे दूरस्थ वनांचल एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार बिजली पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जहां अब तक अंधेरा ही ग्रामीणों की नियति बना हुआ था। मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना के तहत निजामडीह, तुम्दादाह, बलरामपुर, कोहकझोरी, संजारी-टाटीघाट, झिलमिली एवं गाताभर्री, घाघरा, लमरा, रिहाडबरा तथा टिनगीपुर जैसे गांवों के मजराटोलों में विद्युत नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।

ग्रामीण विकास की नई रोशनी, शिक्षा-स्वास्थ्य और आजीविका को मिलेगा बल
विद्युतीकरण से न केवल घरों में रोशनी पहुंचेगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि और आजीविका के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। बिजली उपलब्ध होने से बच्चों की पढ़ाई, किसानों की सुविधाएं, छोटे व्यवसाय और शासकीय सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा। लंबे समय से बिजली की मांग कर रहे ग्रामीणों के लिए यह निर्णय किसी सपने के साकार होने से कम नहीं है।
कलेक्टर और विद्युत विभाग के प्रयासों से मिली सफलता
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे कलेक्टर श्री इंद्रजीत चन्द्रवाल तथा विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीम सिंह का विशेष मार्गदर्शन और सतत प्रयास रहा है। उनके नेतृत्व में विभागीय प्रक्रियाओं को गति मिली और वर्षों से लंबित विद्युतीकरण प्रस्तावों को स्वीकृति दिलाने में सफलता प्राप्त हुई।
सुशासन तिहार के दौरान मिली यह सौगात जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में इन मजराटोलों में जगमगाती रोशनी के साथ विकास की नई किरण भी पहुंचेगी, जिससे ग्रामीणों के जीवन में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।

मत्स्य पालकों को मिली नई उड़ान, आजीविका सशक्त बनाने मुख्यमंत्री ने वितरित की आधुनिक सामग्री

मत्स्य पालकों को मिली नई उड़ान, आजीविका सशक्त बनाने मुख्यमंत्री ने वितरित की आधुनिक सामग्री

 00 मोटर साइकिल, आइस बॉक्स और मछली जाल से बढ़ेगा कारोबार, आय में होगी वृद्धि

रायपुर। सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय सोमवार को कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में आयोजित समाधान शिविर में शामिल हुए। इस अवसर पर मत्स्य पालन विभाग द्वारा जिले के मत्स्य पालकों एवं मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हितग्राहियों को आजीविका संवर्धन के लिए विभिन्न आधुनिक उपकरण एवं सामग्री प्रदान की गई। मुख्यमंत्री  साय ने ग्राम मालाकोट के  कमल सिंह नेताम एवं ग्राम जोबा के  नरेंद्र कश्यप को मोटर साइकिल और आइस बॉक्स प्रदान किए। इन संसाधनों के माध्यम से अब दोनों हितग्राही अपनी मछलियों को सुरक्षित तरीके से दूरस्थ बाजारों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उनके व्यवसाय को नई गति मिलेगी। हितग्राहियों ने बताया कि पहले मछलियों के परिवहन और संरक्षण में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आइस बॉक्स उपलब्ध होने से अब मछलियों की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी और उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। वहीं मोटर साइकिल मिलने से परिवहन आसान होने के साथ-साथ समय और लागत की भी बचत होगी।

आधुनिक जाल से बढ़ेगा उत्पादन
कार्यक्रम में ग्राम बड़ेकनेरा के  ललित बघेल एवं  रामलाल नेताम को मछली पकडऩे के लिए आधुनिक जाल वितरित किए गए। हितग्राहियों ने बताया कि नए जाल मिलने से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी तथा व्यवसाय को और अधिक व्यवस्थित एवं लाभकारी बनाया जा सकेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में पहल
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक व्यवसायों को आधुनिक संसाधनों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मत्स्य पालन आज ग्रामीण क्षेत्रों में आय का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहा है और सरकार इस क्षेत्र से जुड़े हितग्राहियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आय और जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं मत्स्य पालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन से प्राप्त यह सहयोग उनके व्यवसाय के विस्तार और आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक संसाधनों की मदद से वे अपने मत्स्य व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकेंगे।

CG - छत्तीसगढ़ के इस सेंट्रल जेल में महिला बंदी ने फांसी लगाकर की खुदकुशी, दो महीने पहले ही हुई थी गिरफ्तार

CG - छत्तीसगढ़ के इस सेंट्रल जेल में महिला बंदी ने फांसी लगाकर की खुदकुशी, दो महीने पहले ही हुई थी गिरफ्तार

 जगदलपुर। जगदलपुर केंद्रीय जेल में बंद एक महिला कैदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, जिससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि मृतका महिला दो महीने पहले हत्या के आरोप में दरभा थाने से केंद्रीय जेल लाई गई थी। महिला पर अपने सगे चाचा की हत्या का आरोप था। इस मामले में एडिशनल एसपी के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई है।

जानकारी के मुताबिक, मामले विवाद के चलते रेयमति ने अपने चाचा की हत्या कर दी थी, जिसके बाद आरोपी महिला को गिरफ्तार कर बीएनएस की धारा 103 एक के तहत मामला पंजीबद्ध कर रिमांड पर केंद्रीय जेल दाखिल किया गया था। इसलिए कुछ समय से लगातार महिला डिप्रेशन में थी और उसके  परिवार से कोई भी उससे मिलने भी नहीं आ रहा था। माना यह जा रहा है कि शायद इसी वजह से महिला ने सेल के वेंटीलेटर में फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली।

उसके तीन छोटे बच्चे हैं और बताया जा रहा है कि जेल में बंद रहने के दौरान उसका पति और अन्य परिजन उससे मिलने भी नहीं आ रहे थे। परिजनों से दूरी और बच्चों की चिंता के कारण वह गहरे मानसिक तनाव में थी। आशंका जताई जा रही है कि इसी तनाव और अकेलेपन के चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया होगा।

BREAKING : तहसीलदारों की हड़ताल खत्म, सरकार से सकारात्मक चर्चा के बाद काम पर लौटने का ऐलान

BREAKING : तहसीलदारों की हड़ताल खत्म, सरकार से सकारात्मक चर्चा के बाद काम पर लौटने का ऐलान

 रायपुर। सरगुजा जिले में नायब तहसीलदार तुषार मानिक से मारपीट के विरोध और सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की गिरफ्तारी की मांग को लेकर चल रहे तहसीलदरों का आंदोलन खत्म हो गया है। कल याने 4 जून से अब प्रदेश के 500 से ज्यादा तहसीलदार अपने-अपने काम पर लौट जाएंगे।

संघ द्वारा बताया गया कि 1 जून 2026 को मंत्री, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के साथ विस्तृत परिचर्चा आयोजित की गई थी। परिचर्चा के दौरान संघ द्वारा न केवल राजापुर प्रकरण में दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी का विषय प्रमुखता से उठाया गया, बल्कि तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों की सुरक्षा, संसाधनों की उपलब्धता, कार्यालयीन स्टाफ की कमी, वाहन सुविधा, न्यायालयीन कार्यों के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना तथा लंबे समय से लंबित अन्य प्रशासनिक मांगों को भी विस्तार से रखा गया।

संघ के प्रतिनिधियों को शासन स्तर से यह आश्वासन प्रदान किया गया कि राजापुर प्रकरण में शीघ्र वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी तथा संघ द्वारा उठाई गई मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए चरणबद्ध निराकरण की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

इसी क्रम में 3 जून को थाना प्रभारी सीतापुर ने बताया कि नायब तहसीलदार तुषार मानिक के लिखित आवेदन पर सीतापुर थाना में अपराध क्रमांक 190/2026 अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 121 (1), 132 एवं 191(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। विवेचना के दौरान प्रकरण के नामजद आरोपी नाजिम रजा एवं पंकज गुप्ता द्वारा पुलिस के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराई गई, जिनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। पुलिस द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रकरण वर्तमान में विवेचनाधीन है।

छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने उक्त कार्रवाई को प्रकरण में हुई प्रारंभिक एवं सकारात्मक प्रगति बताते हुए स्वागत किया है। संघ ने अपेक्षा व्यक्त की है कि शेष आरोपियों के विरुद्ध भी शीघ्र, निष्पक्ष एवं प्रभावी वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी, जिससे प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों में कानून के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।

संघ ने कहा है कि प्रशासनिक अधिकारियों का मूल दायित्व जनता को समयबद्ध एवं प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना है। प्रदेशभर के तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट सदैव जनहित, सुशासन एवं न्यायिक दायित्वों के निर्वहन के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं। इसी भावना को सर्वोपरि रखते हुए तथा शासन द्वारा दिए गए आश्वासन एवं प्रारंभ हुई वैधानिक कार्रवाई को ध्यान में रखते हुए संघ द्वारा प्रस्तावित सामूहिक अवकाश कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।

इसके फलस्वरूप प्रदेश के समस्त तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट 04 जून 2026 से पुनः अपने नियमित शासकीय दायित्वों का निर्वहन करेंगे तथा राजस्व, न्यायालयीन, निर्वाचन, जनगणना एवं अन्य प्रशासनिक कार्य सामान्य रूप से संचालित किए जाएंगे।

संघ ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा दिए गए आश्वासनों के अनुरूप आगामी 15 दिवस के भीतर प्रकरण के शेष आरोपियों के विरुद्ध अपेक्षित वैधानिक कार्रवाई तथा संघ की लंबित मांगों के निराकरण की दिशा में ठोस एवं संतोषजनक प्रगति अपेक्षित है। यदि निर्धारित अवधि में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संघ परिस्थितियों की समीक्षा कर पुनः अपने आगामी कार्यक्रमों पर निर्णय लेने के लिए बाध्य होगा।

संघ ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा संघ, राजस्व निरीक्षक संघ, राजस्व पटवारी संघ, राजस्व लिपिकीय संघ, लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ, छात्रावास अधीक्षक संघ तथा प्रदेश के विभिन्न अधिकारी-कर्मचारी संगठनों द्वारा प्रदान किए गए नैतिक समर्थन, एकजुटता एवं सहयोग के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया है।

संघ ने मीडिया प्रतिनिधियों, विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा उन सभी व्यक्तियों का भी आभार व्यक्त किया है जिन्होंने प्रशासनिक गरिमा, विधि के शासन तथा शासकीय अधिकारियों की सुरक्षा एवं सम्मान के इस महत्वपूर्ण विषय को गंभीरता से उठाया और समर्थन प्रदान किया।

छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने विश्वास व्यक्त किया है कि शासन एवं प्रशासन इस विषय की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए शेष आवश्यक कार्रवाईयों को भी समयबद्ध रूप से पूर्ण करेगा तथा अधिकारियों की सुरक्षा, सम्मान एवं संसाधनों से संबंधित विषयों के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाएगा।

खेती केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान का आधार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

खेती केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान का आधार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर: आधुनिक तकनीकों, नवाचारों और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज रायपुर में आयोजित ‘मुख्यमंत्री किसान संवाद’ में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसानों के साथ आत्मीय चर्चा करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने खेती-किसानी से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए तथा किसानों के प्रश्नों और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि वे स्वयं किसान  परिवार से आते हैं और कम उम्र में ही खेती-किसानी तथा परिवार की जिम्मेदारियां संभालने का अवसर मिला। इसी कारण वे किसानों की जरूरतों, चुनौतियों और उनके संघर्ष को निकटता से समझते हैं। उन्होंने कहा कि पहले खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं का अभाव था, लेकिन आज कृषि क्षेत्र में बड़े परिवर्तन आए हैं। मशीनों, वैज्ञानिक पद्धतियों और नई तकनीकों के उपयोग से उत्पादकता बढ़ी है तथा किसानों के लिए नई संभावनाएं खुली हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया है

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान गांवों में किसानों से सीधे संवाद के दौरान यह अनुभव हुआ है कि विभिन्न योजनाओं का लाभ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के चेहरे पर दिखाई देने वाला आत्मविश्वास ही सरकार की योजनाओं की वास्तविक सफलता है।

कार्यक्रम में शामिल ड्रोन दीदियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव कम समय, कम लागत और अधिक प्रभावशीलता के साथ किया जा सकता है। इससे खेती आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी बन रही है तथा महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जैविक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इनके उपयोग से लागत कम होती है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है तथा मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान किया।

किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा आगामी खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है तथा कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निगरानी की जा रही है।

कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों ने अमरूद, ड्रैगन फ्रूट, मौसंबी, पपीता और आम जैसी फसलों की उन्नत खेती के अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है तथा बदलते समय के अनुरूप किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी, प्राकृतिक कृषि, जैविक खेती और अन्य नवाचारों को अपनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का युवा खेती को केवल परंपरा नहीं बल्कि आधुनिक उद्यम के रूप में देख रहा है। यह परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत सकारात्मक है। राज्य सरकार कृषि आधारित कौशल विकास, ड्रोन संचालन, कृषि मशीनरी, जैविक खेती और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रही है।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने में संकोच न करें। समय के साथ बदलती तकनीकों को अपनाकर सीमित लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीक ही किसानों की समृद्धि का आधार बनेंगे।

CG- मुख्यमंत्री सचिवालय में फेरबदल:अधिकारियों के बीच नए सिरे से बांटा गया काम

CG- मुख्यमंत्री सचिवालय में फेरबदल:अधिकारियों के बीच नए सिरे से बांटा गया काम

 रायपुर- मुख्यमंत्री सचिवालय में अधिकारियों के कामों का पुनर्विभाजन किया गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से जारी आदेश में पहले के कार्य विभाजन में आंशिक बदलाव करते हुए अलग-अलग सचिवों और अधिकारियों को विभागवार नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। यह आदेश मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद लागू कर दिया गया है।”

“प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह के पास रहेंगे अहम विभाग”

“प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय, नीति आयोग, मंत्रिपरिषद, एआईएस अधिकारियों के मामलों, जनघोषणा पत्र, विशेष परियोजनाओं और सीएम डैशबोर्ड की जिम्मेदारी दी गई है।”

“इसके अलावा उनके पास सामान्य प्रशासन, वित्त, विधि एवं विधायी, खनिज साधन, वाणिज्य एवं उद्योग, गृह, जेल, परिवहन, पर्यटन, संस्कृति, खेल एवं युवा कल्याण, आदिम जाति विकास, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विभागों की समीक्षा का दायित्व रहेगा।”

“मुकेश बंसल करेंगे मुख्यमंत्री घोषणाओं की मॉनिटरिंग”

“सचिव मुकेश कुमार बंसल को मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा तथा मुख्यमंत्री सचिवालय के द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।”

“उनके पास जनसंपर्क, कृषि, पशुधन विकास, मछली पालन, सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, ऊर्जा, जल संसाधन, आबकारी तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभागों की समीक्षा का दायित्व रहेगा।”

“मुख्यमंत्री सहायता कोष की जिम्मेदारी पी. दयानंद को”

“सचिव पी. दयानंद मुख्यमंत्री सहायता कोष, विवेकाधीन निधि और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से जुड़े मामलों को देखेंगे।”

“उन्हें लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य एवं  परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, जीएसटी, पंजीयन और संसदीय कार्य विभागों की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।”

राहुल भगत को मुख्यमंत्री निवास और बस्तर की जिम्मेदारी

सचिव राहुल भगत मुख्यमंत्री निवास के समन्वय, बिल भुगतान तथा गैर-सरकारी सदस्यों के नामांकन संबंधी कार्य देखेंगे। साथ ही कुनकुरी और जशपुर जिले के विकास कार्यों की समीक्षा भी उनके जिम्मे रहेगी।

“रजत बंसल देखेंगे सुशासन तिहार और जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामले”

“विशेष सचिव रजत बंसल को सुशासन तिहार, सूचना का अधिकार (RTI) और सांसदों, विधायकों व अन्य जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी दी गई है।”

“वे पंचायत एवं ग्रामीण विकास, आवास एवं पर्यावरण, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, ग्रामोद्योग और विमानन विभागों की समीक्षा करेंगे।”

“प्रभात मलिक संभालेंगे जनदर्शन और जनशिकायत”

“संयुक्त सचिव प्रभात मलिक को जनदर्शन, जनशिकायत और मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के समय प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है।”

वे राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, नगरीय प्रशासन, आईटी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, रोजगार और जन शिकायत निवारण विभागों से जुड़े मामलों की निगरानी करेंगे।

संभागवार अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय

“राज्य के पांच संभागों की निगरानी के लिए भी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है—”

“| संभाग | प्रभारी अधिकारी |
| ——– | —————- |
| रायपुर | मुकेश कुमार बंसल |
| बिलासपुर | पी. दयानंद |
| बस्तर | राहुल भगत |
| सरगुजा | रजत बंसल |
| दुर्ग | प्रभात मलिक |”

“इन अधिकारियों को अपने-अपने संभागों में शासन की योजनाओं की समीक्षा, महत्वपूर्ण घटनाओं की निगरानी और लंबित मामलों के निराकरण का दायित्व दिया गया है।”

अभनपुर क्षेत्र के 16 गांवों की 518 एकड़ जमीन आ रही नई रेल परियोजना के दायरे में

अभनपुर क्षेत्र के 16 गांवों की 518 एकड़ जमीन आ रही नई रेल परियोजना के दायरे में

 00 जिला प्रशासन ने प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों से 30 दिनों के भीतर दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने कहा 

रायपुर। नवा रायपुर को नई रेल कनेक्टिविटी देने और प्रस्तावित रेलवे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को गति प्रदान करने के लिए अभनपुर क्षेत्र के 16 गांवों की करीब 518 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी। जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करते हुए प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों से 30 दिनों के भीतर दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने को कहा है। इससे पहले मंदिर हसौद क्षेत्र में अधिग्रहण की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई थी और अब परियोजना का दायरा अभनपुर तक पहुंच गया है।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, मल्टी ट्रैकिंग परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित 248 किलोमीटर लंबा रेल प्रोजेक्ट न केवल नवा रायपुर को नई रेल सुविधा से जोड़ेगा, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति देगा। यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ को ओडिशा से बेहतर रेल संपर्क प्रदान करेगा, जिससे माल परिवहन, औद्योगिक निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। अधिग्रहण की जद में अभनपुर क्षेत्र के पलौद, गिरोला, परसदा, खट्टी, अभनपुर, उरला, सारखी, कोलर, खोरपा, ढोंढरा, बेलभाठा, तर्रा, जामगांव, नवागांव, थनौद और खरखराडीह सहित 16 गांव आएंगे। परियोजना को क्षेत्र के आर्थिक विकास और औद्योगिक विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों और ग्रामीणों की नजरें अब प्रशासनिक प्रक्रिया पर टिकी है।