00 मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इक्रीसेट के वैज्ञानिकों संग हुई बैठक
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से फसल विविधीकरण एवं व्यापवर्तन पर एक नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में कृषि विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) के वैज्ञानिकों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि वे छत्तीसगढ़ के किसानों के खेतों में भ्रमण कर किसानों को अच्छी किस्म और अधिक कीमत मिलने वाली फसलों को लेने के लिए प्रेरित करें। जिससे उनकी आमदनी में ईजाफा होगा।
बैठक में कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यह परियोजना ओडिशा राज्य में पहले से सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है, जिसे अब छत्तीसगढ़ में भी लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के अनुरूप फसल प्रणाली विकसित करना, पुनरुत्थान कृषि को बढ़ावा देना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है। परियोजना के बेहतर और अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव 5 वर्षों की अवधि के लिए रखा गया है। इस योजना को राज्य में क्लस्टर आधारित चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। आगामी फसल मौसम से ही प्रयोग शुरू करने के लिए एक विस्तृत बेसलाइन सर्वे तुरंत कराया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि विकास, किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग और अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) के मध्य एक जेनेरिक समझौता हस्ताक्षरित किया जाएगा। इस जेनेरिक एमओयू तैयार करने में समेति का भी सहयोग लिया जाएगा। इसके तहत मैदानी अमले के क्षमता विकास और तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग लिया जाएगा। कृषकों द्वारा उत्पादित फसल एवं उत्पादों के विक्रय व विपणन के लिए एक सुदृढ़ मार्केट लिंकेज प्रणाली विकसित की जाएगी। इस परियोजना में शासन की विभिन्न कृषि एवं विकास योजनाओं के घटकों एवं क्रियाकलापों का अभिसरण किया जाएगा।
बैठक के दौरान इक्रीसेट के वैज्ञानिक डॉ. गजानंद स्वर्गौनकर द्वारा परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस बैठक में अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) से डॉ. रोहन खोपड़े, डॉ. जी.के. चौधरी एवं डॉ. सी.एल. जैन तथा राज्य कृषि विभाग से संचालक (समेति) श्री बी. के. बिजरोनिया एवं उप संचालक कृषि श्री उमेश सिंह तोमर विशेष रूप से मौजूद रहे।
रायपुर- महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपने गृह ग्राम बीरपुर में आयोजित प्रकृति के पावन तिहार 'करमा पूजा में शामिल हुईं। उन्होंने ग्रामीणजनों के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं विधि-विधानपूर्वक करम देव की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, शांति, खुशहाली एवं समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने प्रकृति, संस्कृति और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
करमा पूजा छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और जनजीवन से गहराई से जुड़ा पारंपरिक पर्व है। यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सामुदायिक एकता और लोक आस्था का प्रतीक माना जाता है। करम देव की पूजा के साथ ग्रामीणजन सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और परिवार एवं समाज की खुशहाली की कामना करते हैं। पर्व के अवसर पर पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य और रीति-रिवाजों से गांव का वातावरण उल्लास और उत्साह से भर उठा।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, तीज-त्योहारों और प्रकृति से जुड़े पर्वों से है। करमा जैसे लोकपर्व हमें अपनी जड़ों और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं। इन परंपराओं में प्रकृति के प्रति सम्मान, आपसी भाईचारा और सामूहिकता की भावना निहित है।
उन्होंने कहा कि हमारी लोकसंस्कृति और परंपराएं केवल उत्सव का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान की अमूल्य धरोहर हैं। इन्हें जीवंत बनाए रखना और नई पीढ़ी को इनकी महत्ता से परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं और बच्चों से भी अपनी संस्कृति, लोककलाओं एवं पारंपरिक पर्वों से जुडऩे का आह्वान किया।
इस अवसर पर ग्रामीणजनों ने मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों से संवाद करते हुए करमा पूजा की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र एवं प्रदेश की निरंतर प्रगति तथा सभी परिवारों के सुख-समृद्धि की कामना की।
विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अब कोई बाधा नहीं, विकास की गति होगी और तेज : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
नगर निगम बीरगांव को बड़ी सौगात : 135 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन, लगभग 110 करोड़ रुपये के नए विकास कार्यों की घोषणा
एसटीपी के लिए 82 करोड़, ओवरहेड टैंक एवं पाइपलाइन विस्तार के लिए 10 करोड़ और सड़क-नाली एवं खेल मैदान विकास के लिए 10 करोड़ रुपये की घोषणा
स्टेट कैपिटल रीजन में शामिल बीरगांव के सुनियोजित विकास के लिए तैयार होगा दीर्घकालीन रोडमैप
बीरगांव में बनेगा नालंदा परिसर और मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय, सात क्षेत्रों में सर्वे के बाद पात्र लोगों को नियमानुसार दिए जाएंगे आवासीय पट्टे
मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों को सौंपे योजनाओं के लाभ, सफाई मित्रों और स्वच्छता दीदियों का किया सम्मान
बीरगांव नगर निगम को मिले दो नए अग्निशमन वाहन, मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लगाया रुद्राक्ष का पौधा
रायपुर, 23 सितंबर 2026/ विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। शहरों में आधुनिक अधोसंरचना के निर्माण के साथ नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। हमारे प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, मानव संसाधन और अपार संभावनाओं का उपयोग कर हम सब मिलकर एक समृद्ध, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे।
मुख्यमंत्री साय ने आज रायपुर जिले के नगर निगम बीरगांव में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर बीरगांव नगर निगम क्षेत्र को 135 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने इन कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करने के साथ ही क्षेत्र की आवश्यकताओं को देखते हुए लगभग 110 करोड़ रुपये के नवीन विकास कार्यों की घोषणा भी की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीरगांव तेजी से विकसित हो रहा शहरी क्षेत्र है। औद्योगिक गतिविधियों और बढ़ती आबादी के अनुरूप यहां सड़क, पेयजल, स्वच्छता, सीवरेज, खेल सुविधाओं और अन्य नागरिक अधोसंरचनाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार इन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध ढंग से कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में बीरगांव नगर निगम क्षेत्र को 160 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोकार्पित और भूमिपूजन किए गए विकास कार्यों में नगर निगम से संबंधित 94 करोड़ रुपये से अधिक तथा लोक निर्माण विभाग के 38 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही नगरोत्थान योजना के अंतर्गत लगभग 16 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया है। इन कार्यों के पूरा होने से बीरगांव और आसपास के क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, खेल अधोसंरचना सहित अनेक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।
स्टेट कैपिटल रीजन से बीरगांव के विकास को मिलेगी नई दिशा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार रायपुर, दुर्ग-भिलाई और आसपास के क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए स्टेट कैपिटल रीजन विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें बीरगांव भी शामिल है। स्टेट कैपिटल रीजन के माध्यम से पूरे क्षेत्र के सुनियोजित, समन्वित और दीर्घकालीन विकास का रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसका लाभ आने वाले वर्षों में बीरगांव को भी मिलेगा और यहां आधुनिक शहरी अधोसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं के विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि विकास का अर्थ केवल सड़क और भवन बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों के दैनिक जीवन को आसान बनाना भी है। इसी सोच के साथ सरकार सुशासन और ईज ऑफ लिविंग की दिशा में लगातार सुधार कर रही है। तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बीरगांव में मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय का निर्माण भी किया जाएगा। प्रदेश में 10 मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय विकसित किए जा रहे हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्री और स्वतः नामांतरण जैसी व्यवस्थाओं से भूमि संबंधी सेवाओं को सरल बनाया गया है। मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय के निर्माण से बीरगांव और आसपास के नागरिकों को जमीन की रजिस्ट्री से संबंधित सेवाएं अधिक सुविधाजनक ढंग से उपलब्ध होंगी।
बीरगांव में एसटीपी के लिए 82 करोड़ रुपये की बड़ी घोषणा
मुख्यमंत्री श्री साय ने बीरगांव के लिए अनेक महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने नगर निगम क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण के लिए 82 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इससे क्षेत्र में सीवेज प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करने और स्वच्छता के स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने ओवरहेड टैंक एवं पाइपलाइन विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपये, अधोसंरचना मद से सड़क एवं नाली निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये तथा सरोरा में खेल मैदान के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने बीरगांव में विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए आधुनिक अध्ययन सुविधाओं से युक्त नालंदा परिसर के निर्माण के लिए भी 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने व्यास तालाब तिराहा से बीरगांव नाला तक स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए एक करोड़ रुपये तथा बुधवारी बाजार बीरगांव से नगर निगम कार्यालय तक स्ट्रीट लाइट के लिए 50 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रावांभाठा में विद्युतीकरण एवं मरम्मत के लिए 50 लाख रुपये, सर्व मांगलिक भवन निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये और शासकीय महाविद्यालय में ई-लाइब्रेरी निर्माण के लिए 89 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री साय ने बीरगांव में छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल का जोन कार्यालय प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों का उद्देश्य बीरगांव के नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और क्षेत्र को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना है।
सात क्षेत्रों में सर्वे के बाद पात्र परिवारों को मिलेंगे आवासीय पट्टे
मुख्यमंत्री साय ने बीरगांव नगर निगम क्षेत्र के रावांभाठा, बंजारी नगर, शक्तिपारा, मठपारा, शीतलापारा, उरकुरा और मजदूर नगर सरोरा में सर्वेक्षण करवाकर पात्र लोगों को नियमानुसार आवासीय पट्टे वितरित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आवासीय सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
गरीब, महिला, श्रमिक और जरूरतमंद परिवारों का कल्याण हमारी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गरीब, महिला, श्रमिक, किसान, युवा और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 प्रधानमंत्री आवास बनाए जा रहे हैं। सरकार ने 18 लाख गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं और अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि माताओं-बहनों को प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 5.60 लाख से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को सालाना 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाने के साथ चरण पादुका योजना को फिर से प्रारंभ किया गया है। श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए सहायता दी जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना और प्रत्येक परिवार को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।
विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अब कोई बाधा नहीं : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद छत्तीसगढ़ के विकास में एक बड़ी बाधा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा स्थानीय नागरिकों के सहयोग से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। इससे विशेष रूप से उन क्षेत्रों में विकास के नए द्वार खुले हैं, जो लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं और अवसरों से वंचित रहे।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है। यहां प्रचुर खनिज और वन संपदा है, धरती उर्वर है और यहां के लोगों में अपार सामर्थ्य है। इन संसाधनों और क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि में छत्तीसगढ़ को अग्रणी भूमिका निभानी है और इसके लिए हम सबको मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है।
आयुर्वेद हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा
मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन और समृद्ध ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। केंद्र सरकार द्वारा आयुष मंत्रालय का गठन कर आयुर्वेद सहित भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, आयुर्वेद के प्रति जागरूक रहने और इसके वैज्ञानिक एवं पारंपरिक ज्ञान का लाभ लेने का आग्रह किया।
बीरगांव के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री अरुण साव
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन बीरगांव के लिए ऐतिहासिक और स्वर्णिम अवसर है। झमाझम बारिश के बीच बीरगांव में विकास की भी झमाझम बारिश हुई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने क्षेत्र को 135 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी है। इन कार्यों से बीरगांव को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित और सुविधायुक्त शहर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बीरगांव के सुनियोजित विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। विधायक श्री मोतीलाल साहू भी क्षेत्र की आवश्यकताओं और विकास कार्यों को लेकर निरंतर प्रयासरत हैं। पिछले ढाई वर्षों में नगर निगम बीरगांव क्षेत्र को 160 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिली है, जिनमें लगभग 90 करोड़ रुपये के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। आने वाले समय में भी अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं के विस्तार का यह क्रम जारी रहेगा।
हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ, सफाई मित्रों और स्वच्छता दीदियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों का गृह प्रवेश कराया। उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, मुख्यमंत्री गृह निर्माण सम्मान योजना और नोनी सुरक्षा योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि के डेमो चेक भी प्रदान किए।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय एवं जनप्रतिनिधियों ने सफाई मित्रों और स्वच्छता दीदियों के पांव धुलवाकर, तिलक लगाकर तथा आरती उतारकर उनकी सेवाओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सफाई मित्र और स्वच्छता दीदियां शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके श्रम और सेवा का सम्मान पूरे समाज का दायित्व है।
मुख्यमंत्री साय ने बीरगांव नगर निगम को दो नए अग्निशमन वाहन भी समर्पित किए। इससे नगर निगम क्षेत्र में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की क्षमता और मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने शासकीय महाविद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष ध्रुव कुमार मिर्धा, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्रीमती भावना बोहरा, महापौर नंदलाल देवांगन, सभापति श्री कृपाराम निषाद सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
मॉडिफाइड उड़ान योजना के नए चरण के लिए भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के बीच महत्वपूर्ण समझौता
बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार की संभावनाओं को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू के प्रति मुख्यमंत्री ने जताया आभार
रायपुर-- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मॉडिफाइड उड़ान योजना के नए चरण के अंतर्गत भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के बीच हुए समझौते को विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश की भौगोलिक दूरियां घटेंगी और विकास की रफ्तार बढ़ेगी। नई दिल्ली में हुए इस समझौते पर छत्तीसगढ़ शासन की ओर से विमानन सचिव मुकेश बंसल ने हस्ताक्षर किए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारा प्रयास है कि बेहतर हवाई संपर्क का लाभ बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों और दूरस्थ अंचलों तक भी पहुंचे। इस समझौते से प्रदेश में नए हवाई संपर्क, हवाई पट्टियों के विकास और दूरस्थ क्षेत्रों में हेली-कनेक्टिविटी के विस्तार की संभावनाओं को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि बेहतर हवाई संपर्क से नागरिकों का आवागमन सुगम होगा और पर्यटन, व्यापार, निवेश तथा रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। प्रदेश के प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। दूरस्थ क्षेत्रों में हेली-कनेक्टिविटी का विस्तार आपातकालीन चिकित्सा सहायता, आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में भी उपयोगी होगा।
मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नागर विमानन मंत्री श्री राम मोहन नायडू के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ देश के विस्तारित होते विमानन नेटवर्क से और मजबूती से जुड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि मॉडिफाइड उड़ान योजना के अंतर्गत देश में मौजूदा अनुपयोगी हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डे तथा दूरस्थ क्षेत्रों में 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
रायपुर-दिल्ली। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नए भाजपा प्रदेश प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी स्मृति ईरानी को सौंपा है। उनके साथ सिद्धार्थ शंभू सह प्रभारी होंगे। बिहार हरीश द्विवेदी, डा. अरविंद भदौरिया आंध्रप्रदेश, अंडमान निकोबार जय प्रकाश (दिल्ली), अरूणाचल प्रदेश डा.देवेन्द्र कुमार, असम के लिए मंगल पांडे, चंडीगड़ महेन्द्र पांडे, दादारा नगर हवेली दमन एंड दीप के लिए वर्षाबेन नरेन्द्र भाई दोशी को प्रभारी बनाया गया है।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ की प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया। उनकी नियुक्ति पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्मृति ईरानी को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि स्मृति ईरानी जी का दीर्घकालिक राष्ट्रीय अनुभव, राष्ट्रसेवा एवं संगठन के प्रति समर्पण निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ में हमारे संगठन और जनसेवा के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगा।
इसी के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सिद्धार्थ शम्भू को भी छत्तीसगढ़ के सह-प्रभारी का दायित्व मिलने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। साय ने कहा कि आपके सक्रिय सहभागिता से संगठनात्मक कार्यों को और गति मिलेगी। विभिन्न राज्यों में नवनियुक्त प्रदेश प्रभारियों एवं सह-प्रभारियों को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
रायपुर:- महंत लक्ष्मी नारायण दास महाविद्यालय में विद्यार्थियों और एलुमनाई के लिए रोजगार मेला का आयोजन किया गया। जिसमें स्नातक पंचम सेमेस्टर, स्नातक अंतिम वर्ष, स्नातकोत्तर कक्षा के वर्तमान और पूर्व विद्यार्थी के साथ एलुमनाई ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सैमसंग, आई. सी. आई. सी.आई बैंक, गणवीर लिमिटेड, श्रीराम फाइनेंस कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, टेक्नोटास्क और अन्य प्रतिष्ठित कंपनियो में विविध पदों पर कार्य करने के लिए विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करके साक्षात्कार देने का अनुभव लिया। प्राचार्य डॉ देवाशीष मुखर्जी ने विद्यार्थियों को अपनी करियर हेतु सजग रहने के लिए प्रोत्साहित किया और उज्जवल भविष्य की कामना करते कहां कि इस प्रकार की गतिविधियों से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और भविष्य में हमेशा अपनी करियर हेतु अपडेट रहने के लिए सही दिशा मिलती है। इस प्रकार का कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही साथ कार्यक्रम की सफलता के लिए प्राचार्य ने प्लेसमेंट सेल के सभी सदस्य और प्रतिभागियों को बधाई दिया।
रामनामी की अनूठी सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय पहचान मिलना हम सभी के लिए गौरव का विषय - राजेश अग्रवाल
रायपुर-- रामनामी समुदाय की अनूठी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री’ का प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति सहित निर्माता एवं पूरी फिल्म टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘राम-नामी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है। यह सम्मान केवल एक उत्कृष्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म को मिला पुरस्कार नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और पीढ़ियों से चली आ रही विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान भी है।
उन्होंने कहा कि रामनामी समुदाय की परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता का विशिष्ट उदाहरण है। अपनी अनूठी आस्था, परंपराओं और जीवन मूल्यों के माध्यम से रामनामी समाज ने प्रदेश की लोक संस्कृति को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री ने इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा को प्रभावी ढंग से देश के व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य किया है।
अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक श्री भरतबाला गणपति और पूरी टीम के रचनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि किसी लोक परंपरा को संवेदनशीलता और प्रभावशाली सिनेमाई प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फिल्म से जुड़े प्रत्येक कलाकार, तकनीकी विशेषज्ञ, निर्माता और सहयोगी इस सम्मान के सहभागी हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत व्यापक और विविधतापूर्ण है। यहां की लोककलाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, जनजातीय परंपराएं, धार्मिक आस्थाएं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ‘राम-नामी’ को मिला राष्ट्रीय सम्मान इन समृद्ध परंपराओं को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
संस्कृति मंत्री अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘राम-नामी’ को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदेश के अन्य लोक कलाकारों, रचनाकारों, फिल्मकारों और सांस्कृतिक कर्मियों को भी अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक विरासत को रचनात्मक माध्यमों से सामने लाने के लिए प्रेरित करेगा।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 की फिल्मों के लिए घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘राम-नामी’ को हिंदी भाषा की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के रूप में चुना गया है। फिल्म के निर्माता बीबीपी स्टूडियो वर्चुअल भारत प्राइवेट लिमिटेड और निर्देशक भरतबाला गणपति हैं।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने भरतबाला गणपति एवं ‘राम-नामी’ फिल्म की पूरी टीम को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देश के राष्ट्रीय पटल पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर है।
रायपुर-दिल्ली। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नए भाजपा प्रदेश प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी स्मृति ईरानी को सौंपा है। उनके साथ सिद्धार्थ शंभू सह प्रभारी होंगे। बिहार हरीश द्विेदी,डा.अरविंद भदौरिया आंध्रप्रदेश,अंडमान निकोबार जय प्रकाश(दिल्ली),अरूणाचल प्रदेश डा.देवेन्द्र कुमार,असम के लिए मंगल पांडे,चंडीगड़ महेन्द्र पांडे,दादारा नगर हवेली दमन एंड दीप के लिए श्रीमती वर्षाबेन नरेन्द्र भाई दोशी को प्रभारी बनाया गया है।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय
महतारी वंदन योजना से 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर माह मिल रहा आर्थिक संबल
प्रदेश की 13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम
650 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रही फिल्म सिटी, छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेंगे नए अवसर
लोक कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों का मुख्यमंत्री ने किया सम्मान


रायपुर-- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए। पारंपरिक उल्लास और आत्मीय वातावरण में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने माताओं-बहनों से भेंट कर उन्हें तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में मातृशक्ति का विशेष स्थान है। माताओं-बहनों का सम्मान, उनकी सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि तीज का पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और आत्मीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है। भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना का अवसर है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की सभी माताओं-बहनों और उनके परिवारों के सुखी, समृद्ध और स्वस्थ जीवन की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीज का पर्व भले ही संपन्न हो चुका है, लेकिन आज इतनी बड़ी संख्या में माताओं-बहनों के बीच तीज मिलन का अवसर अत्यंत सुखद और आत्मीय है। मुख्यमंत्री निवास में भी तीज के अवसर पर प्रदेशभर से आई बहनों के साथ पर्व का उल्लास साझा करने का अवसर मिला था। हमारी परंपराओं की यही खूबसूरती है कि वे हमें परिवार और समाज से जोड़ती हैं तथा आपसी प्रेम और आत्मीयता को मजबूत करती हैं।
सनातन संस्कृति में मातृशक्ति को मिला है सर्वोच्च सम्मान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में आदिकाल से मातृशक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। हमारे वेदों, पुराणों और सामाजिक परंपराओं में नारी के सम्मान और उसकी गरिमा का संदेश निहित है। हमारी संस्कृति कहती है - “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”, अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मां परिवार की पहली शिक्षक और संस्कारों की आधारशिला होती है। माताओं-बहनों के परिश्रम, त्याग और आशीर्वाद से ही परिवार मजबूत होता है और मजबूत परिवार से सशक्त समाज तथा समृद्ध प्रदेश का निर्माण होता है। इसलिए राज्य सरकार महिलाओं को केवल योजनाओं का हितग्राही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में बराबर का सहभागी मानकर कार्य कर रही है।
महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया बहनों का आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि सीधे अंतरित की जा रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि हितग्राही महिलाओं के खातों में पहुंचाई जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस योजना से माताओं-बहनों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव उन्हें विशेष संतोष देता है। बहनें इस राशि का उपयोग अपनी और परिवार की आवश्यकताओं के साथ बच्चों की पढ़ाई, बचत और छोटे-छोटे स्वरोजगार के लिए भी कर रही हैं। कोई बहन सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर बेटी का भविष्य संवार रही है तो कोई सिलाई मशीन खरीदकर अपने हुनर को आजीविका में बदल रही है। यह आर्थिक संबल महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक महिला को आगे बढ़ने के लिए अवसर, संसाधन और आवश्यक सहयोग मिले। जब हमारी माताएं-बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तो परिवार मजबूत होगा और पूरे प्रदेश की प्रगति को नई गति मिलेगी।
13.85 लाख लखपति दीदियां बनीं महिला सशक्तिकरण की नई पहचान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि माताओं-बहनों को स्थायी आजीविका, कौशल और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की सुखद तस्वीर है।
उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज विभिन्न आर्थिक गतिविधियों और छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं। अनेक महिलाएं महतारी वंदन योजना से मिले आर्थिक संबल और बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग करते हुए स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी न केवल परिवारों को समृद्ध बना रही है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को देश-दुनिया में मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी विशिष्ट लोककला, संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। यहां की सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान और हमारी ताकत है। इसे सहेजने के साथ नई पीढ़ी और देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगभग 650 करोड़ रुपए की लागत से फिल्म सिटी तैयार की जा रही है। इससे छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण और शूटिंग की संभावनाओं का विस्तार होगा। स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार तथा प्रतिभा प्रदर्शन के नए अवसर तैयार होंगे और प्रदेश के पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में कलाकारों का अमूल्य योगदान है। हमारे कलाकार अपनी प्रतिभा के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सुगंध और यहां की परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। राज्य सरकार कलाकारों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहेगी।
बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर
मुख्यमंत्री श्री साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके 15 वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश में सड़क, बिजली, पेयजल और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में व्यापक कार्य हुए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाकर जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था विकसित की गई, जिसके कारण डॉ. रमन सिंह को प्रदेश में ‘चाउंर वाले बाबा’ के नाम से भी पहचान मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही हैं। गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनकल्याण और विकास को मिली नई गति
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ विकसित भारत के संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ भी विकसित भारत के निर्माण में अपनी सशक्त भूमिका निभाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है और प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण किया जा रहा है। गांवों तक आवास, पेयजल, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के कठिन समय का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने स्वदेशी स्तर पर वैक्सीन विकसित कर अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ अनेक देशों की भी सहायता की। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा जयंती और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर छत्तीसगढ़वासियों ने अपने घरों में दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के प्रति अपना स्नेह और शुभकामनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री ने इसमें उत्साहपूर्वक सहभागी बनने के लिए प्रदेश की माताओं-बहनों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
शांति, विश्वास और विकास के साथ आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से छत्तीसगढ़ ने नक्सलवाद के विरुद्ध महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। जिन क्षेत्रों में कभी भय और हिंसा विकास की राह में बाधा थे, वहां आज शांति और विश्वास के साथ विकास के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति ने छत्तीसगढ़ को वन संपदा, वनोपज, खनिज संसाधनों और उपजाऊ कृषि भूमि से समृद्ध बनाया है। इन संसाधनों का जनहित में बेहतर उपयोग करते हुए प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना सरकार का संकल्प है। विकसित छत्तीसगढ़ की इस यात्रा में माताओं-बहनों की सहभागिता, उनका परिश्रम और आशीर्वाद अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने लोकगीत से किया माताओं-बहनों का अभिनंदन
राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि तीज के अवसर पर माताओं-बहनों का अपने निवास पर अभिनंदन करना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया है।
श्री वर्मा ने अपने जीवन के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि जब वे आठवीं कक्षा में पढ़ते थे, तब पहली बार उनके गांव में बिजली पहुंची थी और गांव तक सड़क भी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 के बाद प्रदेश के गांवों में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों का तेजी से विस्तार हुआ। आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास और खुशहाली की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किसान परिवार के बेटे के रूप में प्रदेश सरकार में मंत्री बनकर जनता की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ी लोकगीत प्रस्तुत कर माताओं-बहनों का अभिनंदन किया। उनकी प्रस्तुति से समारोह में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और तीज पर्व का उल्लास और भी जीवंत हो उठा।
लोक कला-संस्कृति को समृद्ध करने वाले कलाकारों का सम्मान
समारोह में छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं संस्कृति को देश-विदेश में पहचान दिलाने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कलाकारों को सम्मानित करते हुए उनके योगदान की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने, संवर्धित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारी लोककला, लोकगीत, लोकनृत्य और परंपराएं केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि हमारी जड़ों और सामाजिक जीवन की जीवंत अभिव्यक्ति हैं।
मुख्यमंत्री ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर मांगी प्रदेश की खुशहाली
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के निवास पर विराजित विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने गणपति बप्पा से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए प्रदेश की निरंतर प्रगति और खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ केश शिल्पी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री गौरी शंकर श्रीवास, चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार मिर्धा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, विधायक श्री रोहित साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, श्रीमती वीणा सिंह सहित बड़ी संख्या में माताएं-बहनें, कलाकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर। राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा ने संपूर्ण प्रदेश में अपना परचम लहराया है। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी वर्ष 2025-26 की राज्य स्तरीय एनएसएस पुरस्कार चयन सूची में विश्वविद्यालय और उससे जुड़ी संस्थाओं तथा स्वयंसेवकों ने कुल पांच पुरस्कार अपने नाम किए हैं। इस शानदार उपलब्धि में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय स्तर की श्रेणी में पूरे राज्य में पहला स्थान प्राप्त कर सरगुजा संभाग का गौरव बढ़ाया है।
संस्थागत श्रेणी में सरगुजा जिले के सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय, अम्बिकापुर को राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। वहीं महाविद्यालयीन स्वयंसेवक श्रेणी में राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अम्बिकापुर के शिवम शर्मा और शासकीय राम भजन राय एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय जशपुर नगर की कु. नेहा यादव ने बाजी मारी है। इसके अलावा विद्यालय स्तर की स्वयंसेवक श्रेणी में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अधिना (सूरजपुर) की कु. मीना राजवाड़े का चयन हुआ है।
राष्ट्रीय सेवा योजना के स्थापना दिवस के अवसर पर 24 सितम्बर को रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार में राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया जाएगा, जहाँ इन सभी उत्कृष्ट संस्थाओं और स्वयंसेवकों को सम्मानित किया जाएगा। वर्तमान में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के अंतर्गत सरगुजा संभाग के छह जिलों में 158 इकाइयां संचालित हैं, जो जमीनी स्तर पर समाजसेवा और सामुदायिक विकास के कार्यों में जुटी हुई हैं।
विश्वविद्यालय की इस ऐतिहासिक सफलता पर कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले ने सभी विजेताओं, प्राचार्यों और कार्यक्रम अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का समर्पण ही राष्ट्र निर्माण की असली नींव है और यह उपलब्धि उनके कठिन परिश्रम, अनुशासन व निष्ठा का ही परिणाम है।
00 375 अनुमेय कार्यों में से स्थानीय आवश्यकता के अनुसार कार्यों का करें चयन
रायपुर। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जिला पंचायत प्रतिनिधियों से वीसी द्वारा की वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन पर की चर्चाविकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के जिला पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यों से संवाद किया। बैठक में योजनांतर्गत जिलों में स्वीकृत कार्यों, प्रगति तथा योजना के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने जिला पंचायत प्रतिनिधियों से बारी-बारी संवाद करते हुए योजना के क्रियान्वयन की जानकारी ली तथा उनके सुझाव और जमीनी स्तर पर आ रही कठिनाइयों को जाना। उन्होंने सभी को वीबी-जीरामजी के अंतर्गत अब 375 प्रकार के अनुमय कार्यों में से स्थानीय आवश्यकता के अनुसार कार्यों का चयन एवं स्वीकृति के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों में पर्याप्त संख्या में कार्य स्वीकृत किए गए है, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ग्राम सभा के माध्यम से नए कार्य भी लिए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि योजना में मजदूरी एवं सामग्री का 60रू40 अनुपात बनाए रखते हुए तथा जल संरक्षण से संबंधित कम से कम 30 प्रतिशत कार्यों को प्राथमिकता देते हुए ग्राम सभाएं आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कार्य स्वीकृत कर सकती हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से योजना का लाभ ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कार्यों का चयन करने पर जोर दिया।
बैठक में अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ऋचा शर्मा ने पंचायतों में स्वीकृत कार्यों के गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किए जाएंगे, जिससे निर्माण कार्यों की प्रभावी निगरानी की जा सकेगी।
आयुक्त, विकसित भारतदृजीरामजी तारन प्रकाश सिन्हा ने जिला पंचायत सदस्यों के योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा तकनीकी समस्याओं से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों तथा किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खेत सड़क और धरसा को भी अनुमय कार्यों में शामिल किया गया है। प्रदेश में बालिका शौचालय, मुक्तिधाम शेड तथा डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज जैसे कार्यों को प्राथमिकता से लिया जा रहा है। ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकता के अनुसार इन कार्यों का चयन कर सकती हैं। सिन्हा ने बताया कि विभिन्न योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेंस) से संबंधित भारत सरकार का नोटिफिकेशन जल्द जारी होने की प्रक्रिया में है। वहीं मनरेगा के शेष लंबित भुगतान के संबंध में भारत सरकार को पत्र प्रेषित किया गया है।
वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 175 पदों पर भर्ती की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें कार्यक्रम अधिकारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर एवं लेखापाल के पद शामिल हैं तथा भर्ती प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। इसके अतिरिक्त बस्तर, बीजापुर एवं नारायणपुर जिलों में 63 रोजगार सहायक पदों पर भर्ती की अनुमति भी प्रदान की गई है।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने सुझाव साझा किए तथा मैदानी स्तर पर आ रही विभिन्न कठिनाइयों से अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों से प्राप्त सुझावों एवं समस्याओं को आवश्यक कार्रवाई हेतु संकलित किया गया है।
00 69.58 लाख रुपए से पक्के फड़ एवं समतलीकरण कार्य को मिली स्वीकृति, किसानों को मिलेगी बेहतर उपार्जन सुविधा
रायपुर। किसानों को धान उपार्जन के दौरान बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भटगांव विधानसभा क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की गई है। भटगांव विधायक एवं कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से विधानसभा क्षेत्र के 7 धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण कार्य के लिए 69.58 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। इससे इन केंद्रों में आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी और किसानों को धान बेचने के दौरान अधिक व्यवस्थित एवं सुविधाजनक वातावरण मिलेगा।
स्वीकृत कार्यों में सूरजपुर विकासखंड के टमकी, सिरसी, करोटी बी, खोपो, बतरा, सांवारांवां एवं कुर्रीडीह स्थित धान उपार्जन केंद्र शामिल हैं। प्रत्येक केंद्र में 9.94 लाख रुपए की लागत से पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण का कार्य किया जाएगा।
धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ और समतलीकरण होने से उपार्जन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी। इससे धान की आवक, खरीदी और रख-रखाव के दौरान होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को उपार्जन केंद्रों पर बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में यह कार्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में अधोसंरचना विकास को गति देने के क्रम में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा भटगांव विधानसभा क्षेत्र में किसानों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने के प्रयासों का यह एक और परिणाम है। इससे धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था मजबूत होने के साथ किसानों को सुविधाजनक उपार्जन व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
00 राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा चंपारण्य, करीब 15 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का होगा विस्तार
00 चंपारण्य को राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम - अग्रवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में लगभग 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ष्टस्रूष्ट ने स्वीकृति प्रदान की है। सीएसएमसी स्वदेश दर्शन 2.0 की केंद्रीय समिति है, जो मिशन निदेशालय की अनुशंसाओं के आधार पर परियोजनाओं की स्वीकृति पर विचार करती है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा तथा इसके लिए 18 माह की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को नई गति मिल रही है। चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। हमारा प्रयास होगा कि श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली की गरिमा और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्ता की सुविधाएं विकसित हों। यह परियोजना चंपारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के बीच और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करने में सहायक होगी।

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।
महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर में वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के माध्यम से पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य से संबंधित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना में यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है। यह श्रद्धालुओं के साथ-साथ परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी आकर्षक अनुभव होगा।
परियोजना की परिकल्पना इस प्रकार की गई है कि चंपारण्य आने वाले श्रद्धालुओं को महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के जीवन, दर्शन और विरासत से परिचित होने का अवसर मिले। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास तथा धार्मिक आयोजनों एवं वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक अवधि तक ठहरने की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है। परियोजना की डीपीआर एवं कार्य-सीमा तैयार है और स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारी है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को भी विस्तार मिलेगा। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले के राजस्व विभाग में बड़े पैमाने पर पटवारियों का ट्रासंफर किया गया है। यह सभी लंबे वक्त से एक ही हल्के में जमे हुए थे। प्रशासनिक कसावट के लिए पेंड्रारोड, मरवाही, सकोला और पेण्ड्रा तहसीलों में पटवारियों का ताबदला किया गया है। कलेक्टर कार्यालय से जारी सूची में 60 पटवारियों का नाम शामिल है।
देखें आदेश….




Pitra Paksha 2026। हिंदू पंचांग में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह अवधि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित होती है। इस दौरान परिवार अपने दिवंगत पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक कर्म करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए इन कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक ग्रंथ निर्णय सिंधु के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से मानी जाती है और इसका समापन अमावस्या तिथि पर होता है। तिथियों की स्थिति के आधार पर इसकी अवधि 15 या 16 दिन हो सकती है।
27 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर की रात 10:18 बजे शुरू होगी और 27 सितंबर की रात 8:58 बजे तक रहेगी। 26 सितंबर को दिनभर भाद्रपद पूर्णिमा रहेगी। उदयातिथि के नियम के अनुसार आश्विन कृष्ण प्रतिपदा का श्राद्ध 27 सितंबर 2026 को किया जाएगा। इसी के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत मानी जाएगी और अलग-अलग तिथियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाएगा।
प्रतिपदा तिथि पर किन पितरों का श्राद्ध?
पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि उन दिवंगत पितरों के लिए मानी जाती है, जिनका निधन किसी भी महीने की प्रतिपदा तिथि को हुआ हो। इस दिन उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और पंचबलि जैसे कर्म किए जाते हैं। श्राद्ध कर्म के लिए तिथि का सही निर्धारण करना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए परिवार अपने स्थानीय पंचांग और विद्वान आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि कर सकते हैं।
श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त
पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के लिए दिन के विशेष समय को महत्वपूर्ण माना गया है। दिए गए पंचांग के अनुसार श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:36 बजे से 1:24 बजे तक
दोनों मुहूर्तों की कुल अवधि 1 घंटा 36 मिनट है।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
पितृ पक्ष का अंतिम दिन आश्विन कृष्ण अमावस्या को होता है, जिसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात न हो या जिनका किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका हो। इस वर्ष अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे शुरू होगी और 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन होगा।
पितृ पक्ष में क्या किया जाता है?
पितृ पक्ष के दौरान परिवार अपने पूर्वजों को याद करते हुए विभिन्न धार्मिक कर्म करता है। इनमें तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, पंचबलि और दान आदि प्रमुख माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों की तृप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार को प्राप्त होता है। पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी माना जाता है। इसी कारण हिंदू धर्म में इस पक्ष का विशेष महत्व बताया गया है।
रायपुर। धार्मिक पर्वों को देखते हुए रायपुर नगर निगम क्षेत्र में तीन निर्धारित तिथियों पर मांस-मटन की बिक्री और पशुवध पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। नगर निगम ने डोल ग्यारस, अनंत चतुर्दशी और दिगंबर जैन समाज के पर्युषण पर्व के संवत्सरी एवं उत्तम क्षमा दिवस पर मांस-मटन की दुकानें और पशुवध गृह बंद रखने का आदेश जारी किया है।
नगर निगम के अनुसार 22 सितंबर को डोल ग्यारस, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी और 26 सितंबर को संवत्सरी एवं उत्तम क्षमा पर्व मनाया जाएगा। इन अवसरों को देखते हुए निगम क्षेत्र में मांस-मटन के विक्रय और पशुवध पर रोक रहेगी।
होटलों में भी मांस-मटन बेचने पर कार्रवाई
निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध सिर्फ खुले बाजार की मांस-मटन दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा। होटलों और अन्य प्रतिष्ठानों में भी इन तिथियों पर मांस-मटन की बिक्री नहीं की जा सकेगी।
महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर निगम प्रशासन ने कहा है कि प्रतिबंधित दिनों में यदि किसी होटल या अन्य प्रतिष्ठान में मांस-मटन की बिक्री होती पाई गई तो संबंधित सामग्री की तत्काल जब्ती की जाएगी और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
पशुवध गृह भी रहेंगे बंद
इन तीनों निर्धारित तिथियों पर नगर निगम क्षेत्र में स्थित पशुवध गृहों को भी बंद रखने का आदेश दिया गया है। निगम प्रशासन ने सभी संबंधित दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को पहले से आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन का कहना है कि धार्मिक पर्वों के दौरान जारी प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जोन कमिश्नर और स्वास्थ्य विभाग करेंगे निगरानी
आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम के सभी जोन कमिश्नरों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में मांस-मटन की दुकानों, होटलों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
निगम प्रशासन इन तिथियों पर पशुवध गृहों और मांस-मटन विक्रय केंद्रों के संचालन पर नजर रखेगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी।
किन तारीखों पर रहेगा प्रतिबंध?
22 सितंबर: डोल ग्यारस
25 सितंबर: अनंत चतुर्दशी
26 सितंबर: दिगंबर जैन समाज का पर्युषण पर्व — संवत्सरी एवं उत्तम क्षमा
दुर्ग : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां पुलिस ने चैन स्नैचिंग के जिस गैंग का पर्दाफाश किया है, उसके तार किसी पेशेवर अपराधियों से नहीं, बल्कि तकनीकी शिक्षा ले रहे दो युवा छात्रों से जुड़े हैं. पैसे की तंगी और शौक पूरा करने की चाहत ने इन होनहारों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है.
एक ही बुजुर्ग महिला को दो बार बनाया शिकार
मामले की शुरुआत 31 जुलाई से होती है. दुर्ग के सुपेला थाना क्षेत्र के प्रियदर्शनी परिसर में 62 वर्षीय गीता देवी सुबह करीब 6:32 बजे अपने घर के सामने टहल रही थीं. तभी स्कूटी सवार एक युवक-युवती वहां पहुंचे और पीछे बैठे शख्स ने उनके गले से सोने की चैन झपट ली.
इसके बाद, दुस्साहस देखिए कि 20 सितंबर को नेहरू नगर ईस्ट की विद्या विहार कॉलोनी में एक बार फिर उसी बुजुर्ग महिला (गीता देवी) को दोबारा निशाना बनाया गया. लगातार हो रही इन वारदातों से इलाके में सनसनी फैल गई थी.
सीसीटीवी फुटेज ने खोली पोल
लगातार शिकायतों के बाद हरकत में आई पुलिस ने सुपेला थाना क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपियों तक पहुंच गई. एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने खुलासा किया कि आरोपी पहचान छिपाने के लिए हेलमेट और कपड़ों का इस्तेमाल करते थे. स्कूटी पर सवार होकर ये सुबह के वक्त उन इलाकों में निकलते थे जहां बुजुर्ग महिलाएं टहलने आती थीं.
पुलिसिया पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
पुलिस ने जब दबिश देकर विक्की नायक (23) और तरूणा सिन्हा (20) को हिरासत में लिया, तो उनके कारनामों की फेहरिस्त देख पुलिस भी हैरान रह गई. विक्की नायक: मूल रूप से बालाघाट (मध्य प्रदेश) का रहने वाला है और वर्तमान में दुर्ग के तितुरडीह में रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है. तरूणा सिन्हा: राजनांदगांव की रहने वाली है और वह भी तितुरडीह, दुर्ग में रहकर इंजीनियरिंग की शिक्षा ले रही है.
दोनों आपस में दोस्त हैं और भिलाई में रहकर पढ़ाई कर रहे थे. शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि पैसों की तंगी और अय्याशी या शौक पूरे करने के चक्कर में इन्होंने आसान रास्ता चुना और चैन स्नैचिंग की वारदातों को अंजाम देने लगे. पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर लूटी गई सोने की चैन का हिस्सा और वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी को जब्त कर लिया है. दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है.
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में विरोध जताया। परिजनों का यह भी आरोप है कि महिला की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव उन्हें सौंप दिया। मामले को लेकर अब कलेक्टर से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
प्रसव पीड़ा के बाद जिला अस्पताल लाए थे परिजन
परिजनों के मुताबिक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर राजनांदगांव के जिला अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में उपचार के दौरान महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। दोनों की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने डॉक्टरों तथा स्वास्थ्यकर्मियों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।
मौत के बाद अस्पताल में हुआ हंगामा
जच्चा और बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध जताया। उनका आरोप है कि समय पर उचित इलाज नहीं मिलने के कारण दोनों की जान गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पूरे मामले की जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
बिना पोस्टमार्टम शव सौंपने का भी आरोप
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि महिला की मौत के बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई और बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव उन्हें सौंप दिया गया। परिजनों का दावा है कि इस तरह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पोस्टमार्टम कराया जाना जरूरी था।
कलेक्टर से शिकायत, जांच की मांग
घटना से नाराज महिला के रिश्तेदारों ने जिला प्रशासन के सामने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और इलाज के दौरान हुई घटनाओं की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। अब प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महिला और नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई और पोस्टमार्टम नहीं कराने के पीछे क्या कारण था।
रायपुर। जमीन, मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए राहत की खबर है। अब रजिस्ट्री से जुड़े काम के लिए लोगों को मुख्य कार्यालय तक लंबी दूरी तय करने और घंटों इंतजार करने की परेशानी से जल्द राहत मिल सकती है। प्रशासन ने रायपुर में रजिस्ट्री कार्यालयों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत शहर के अलग-अलग बाहरी क्षेत्रों में 7 नए रजिस्ट्री कार्यालय शुरू करने की तैयारी की जा रही है। नए केंद्र शुरू होने के बाद शहर में कुल 14 स्थानों पर रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध होगी।
जानकारी के अनुसार, रायपुर में प्रतिदिन करीब 400 जमीनों की रजिस्ट्री होती है। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण मुख्य रजिस्ट्री कार्यालय में लगातार भीड़ बनी रहती है। रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों को कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता है। दूर-दराज के इलाकों से आने वाले लोगों के साथ-साथ बुजुर्गों और महिलाओं को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। भीड़ के कारण कई बार कार्यालय में बैठने के लिए पर्याप्त जगह तक उपलब्ध नहीं हो पाती। गर्मी और बारिश के दौरान लोगों की दिक्कतें और बढ़ जाती हैं।
प्रशासन ने आउटर क्षेत्रों में नए रजिस्ट्री कार्यालय खोलने के लिए भवनों की तलाश शुरू कर दी है। टाटीबंध-हीरापुर, अमलीडीह-अवंति विहार और बीरगांव-सिलतरा सहित अन्य बाहरी क्षेत्रों में नए केंद्र खोलने की तैयारी है। इन कार्यालयों के शुरू होने के बाद संबंधित क्षेत्रों के लोगों को रजिस्ट्री के लिए मुख्य कार्यालय तक जाने की जरूरत कम होगी। वे अपने नजदीकी केंद्र पर ही जमीन, मकान और प्लॉट का पंजीयन करा सकेंगे।
नए रजिस्ट्री कार्यालयों में आधुनिक डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी तैयारी है। ऑनलाइन व्यवस्था को बढ़ावा मिलने से दस्तावेजों और पंजीयन से जुड़े काम अधिक सुविधाजनक तरीके से किए जा सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा लोगों को लंबी कतारों में खड़े होकर इंतजार करने से भी राहत मिल सकती है।
सात नए केंद्र शुरू होने के बाद रायपुर में कुल 14 स्थानों पर जमीन रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रशासन के अनुसार, शहर में बढ़ते पंजीयन कार्य और लोगों की संख्या को देखते हुए रजिस्ट्री कार्यालयों का विस्तार जरूरी हो गया है। नए केंद्र शुरू होने से मुख्य कार्यालय का दबाव कम होने के साथ ही लोगों को अपने क्षेत्र के नजदीक रजिस्ट्री की सुविधा मिल सकेगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम एक बार फिर करवट लेता नजर आ रहा है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 21 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है
इन जिलों में जारी हुआ अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, जिन जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, उनमें बिलासपुर, रायगढ़, मुंगेली, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा, बेमेतरा, बलौदाबाजार, महासमुंद, राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, बालोद, धमतरी, गरियाबंद, कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा शामिल हैं
हल्की बारिश और बिजली गिरने की संभावन
अलर्ट वाले जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही गरज-चमक के दौरान आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी जताया गया है। ऐसे में मौसम खराब होने के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम में बदलाव के बीच प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों से अपील की गई है कि बारिश और गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करें।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के दिनभर के कार्यक्रम को लेकर समय-सारिणी जारी की गई है। इसके तहत वह मंत्री टंक राम वर्मा के निवास पर पहुंचने के साथ ही तीज मिलन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद मंत्रालय और मुख्यमंत्री निवास में भी उनके कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दोपहर 2 बजे मंत्री टंक राम वर्मा के निवास पहुंचेंगे। यहां से उनका अगला कार्यक्रम तीज मिलन समारोह का है। मुख्यमंत्री दोपहर 2:30 बजे से 3:30 बजे तक आयोजित ‘तीज मिलन’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे कार्यक्रम में मौजूद लोगों से मुलाकात करेंगे।इसके बाद मुख्यमंत्री का काफिला शाम 3:40 बजे मंत्रालय स्थित महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर पहुंचेगा। यहां 3:40 बजे से शाम 5 बजे तक मुख्यमंत्री का समय आरक्षित रखा गया है। मंत्रालय से निकलने के बाद मुख्यमंत्री साय शाम 5:30 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर पहुंचेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री निवास में शाम 6 बजे से 7 बजे तक एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
00 विद्याभारती मध्यक्षेत्र क्षेत्रीय कबड्डी प्रतियोगिता के समापन समारोह में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री
रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव आज चांपा के सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित विद्याभारती मध्यक्षेत्र क्षेत्रीय कबड्डी खेलकूद प्रतियोगिता-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल खिलाडिय़ों का उत्साहवर्धन करते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समापन कार्यक्रम में विजेता टीम को मोमेन्टो, प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया। सांसद कमलेश जांगड़े भी समापन कार्यक्रम में शामिल हुईं।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम में कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए खेलना बेहद जरूरी है, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। विद्यार्थियों और युवाओं को प्रतिदिन खेल के लिए समय देना चाहिए। मैदान में बहाया गया पसीना शरीर में ऊर्जा और जीवन में उत्साह बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती विद्यार्थियों और युवाओं के जीवन को अनुशासन तथा संस्कारों से जोड़ते हुए उन्हें अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढऩे के लिए प्रेरित करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि खेल में कोई जीतता है तो कोई हारता है, लेकिन सीखते सभी हैं। खेल हमें अच्छा स्वास्थ्य, अनुशासन, आत्मविश्वास और ऊर्जा प्रदान करता है तथा लक्ष्य की दिशा में आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। एक अच्छा खिलाड़ी अनुशासित जीवन जीता है और ऊर्जा से भरपूर रहता है।
साव ने कहा कि जब कोई बच्चा छोटा होता है और चलने का प्रयास करता है, तो वह कई बार गिरता है, लेकिन हर बार उठकर दोबारा चलने का प्रयास करता है। अंतत: वही बच्चा चलना और दौडऩा सीख जाता है। इसी प्रकार जीवन में बार-बार असफलता मिलने पर निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर पुन: प्रयास करना चाहिए। मन, समर्पण और संकल्प के साथ किए गए प्रयास से सफलता प्राप्त की जा सकती है। आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरा व्यक्ति ही जीवन में आगे बढ़ता है। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर और अधिक मजबूती के साथ आगे बढऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल और खिलाडिय़ों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
सांसद कमलेश जांगड़े ने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यालयों में विद्यार्थियों को अनुशासन और शिष्टाचार की शिक्षा दी जाती है, जो उनके जीवन में एक अच्छा इंसान बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों एवं खिलाडिय़ों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
पूर्व संसदीय सचिव अंबेश जांगड़े, पूर्व सांसद कमला देवी पाटले, जिला पंचायत की अध्यक्ष इंजी. सत्यलता आनंद मिरी, नगर पालिका चांपा के अध्यक्ष प्रदीप नामदेव, नगर पालिका जांजगीर-नैला की अध्यक्ष रेखा देवा गढ़ेवाल, जिला पंचायत के सदस्य राजकुमार साहू, हनुमान प्रसाद, शान्ति कुमार सोनी, प्रशांत सिंह ठाकुर, रजनी सत्तु साहू, अमर सुल्तानिया, इंजी रवि पांडेय, कार्तिकेश्वर स्वर्णकार, सलीम मेमन, कमल देवांगन, जुड़ावन सिंह ठाकुर और सुधीर देव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी एवं खिलाड़ी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।
बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में निरीक्षक, उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल के तबादले हुए हैं। एसपी गौरव राय ने यह सूची जारी की हैं।
देखें आदेश….


रायपुर :- महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय, रायपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के संयुक्त तत्वावधान में 18 सितंबर 2026 को विशाल स्वास्थ्य परीक्षण एवं स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। महाविद्यालय के सभागार में आयोजित इस शिविर का संचालन प्राचार्य डॉ. देवाशीष मुखर्जी और राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी डॉ. लक्ष्मीकांत साहू के मार्गदर्शन में हुआ।
00 कबीरधाम के दंपती ने विशेष ट्रेन से पहुंचकर किए रामलला और बाबा विश्वनाथ के दर्शन
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था के केंद्रों तक पहुंचने का सहज और सुविधाजनक माध्यम बन रही है। कबीरधाम जिले के ग्राम बबई निवासी डोमन साहू और उनकी पत्नी पार्वती साहू के लिए यह यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि वर्षों से मन में संजोए एक सपने के साकार होने का अवसर बनी।
डोमन साहू बताते हैं कि प्रभु श्री राम के दर्शन की इच्छा उनके मन में लंबे समय से थी। परिवार की आर्थिक एवं अन्य परिस्थितियों के कारण वे अयोध्या धाम जाकर रामलला के दर्शन नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में छत्तीसगढ़ शासन की श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना उनके लिए आशा और अवसर लेकर आई। योजना के माध्यम से उन्हें अपनी पत्नी श्रीमती पार्वती साहू के साथ अयोध्या धाम जाने और प्रभु श्री रामलला के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। साथ ही उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन भी किए।
डोमन साहू ने कहा कि वर्षों से मन में रामलला के दर्शन की इच्छा थी। जब पत्नी के साथ अयोध्या धाम पहुंचकर प्रभु श्री रामलला के दर्शन किए तो मन भावुक हो गया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना ने उनके जैसे सामान्य परिवारों के लिए तीर्थयात्रा को आसान बनाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर में रामलला के दर्शन का अवसर मिलना उनके लिए अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय अनुभव है।
22 जनवरी 2024 को अयोध्या में नवनिर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक आयोजन हुआ था। इस ऐतिहासिक अवसर के बाद अयोध्या धाम में रामलला के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन हो रहा है। इसी आस्था को छत्तीसगढ़ शासन की श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना श्रद्धालुओं के लिए यात्रा की सुविधाओं से जोड़ रही है।
श्रद्धालुओं को कवर्धा से दुर्ग रेलवे स्टेशन तक निःशुल्क बस सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके बाद विशेष ट्रेन से उन्हें काशी एवं अयोध्या धाम ले जाया गया। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भोजन, नाश्ता और चाय की व्यवस्था के साथ स्वास्थ्य सुविधा के लिए चिकित्सकीय दल की व्यवस्था भी की गई।
श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के साथ अयोध्या धाम पहुंचकर श्री रामलला के दर्शन किए। लंबे समय से तीर्थयात्रा की इच्छा रखने वाले अनेक श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा आस्था, श्रद्धा और आत्मिक संतोष का अनुभव लेकर आई।
श्री डोमन साहू और श्रीमती पार्वती साहू की कहानी इस बात की एक झलक है कि जब धार्मिक आस्था से जुड़ी यात्रा में परिवहन, भोजन और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों, तो सामान्य परिवार भी अपने वर्षों पुराने तीर्थदर्शन के सपने को पूरा कर सकते हैं। श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना इसी उद्देश्य से श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से अयोध्या धाम और काशी की यात्रा का अवसर प्रदान कर रही है।
डोमन साहू दंपती के लिए अयोध्या की यह यात्रा अब उनके जीवन की ऐसी स्मृति बन गई है, जिसे वे लंबे समय तक संजोकर रखेंगे। वर्षों से मन में बसे रामलला के दर्शन का सपना जब अपनी पत्नी के साथ पूरा हुआ, तो उनके लिए यह यात्रा आस्था के साथ-साथ जीवन के एक अधूरे संकल्प के पूर्ण होने का भावुक अवसर भी बन गई।





























