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BREAKING: छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी,मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया ऐलान

BREAKING: छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी,मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया ऐलान

 रायपुर – छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए धान खरीदी को लेकर बड़ी खबर है। प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष के तहत धान खरीदी की शुरुआत 15 नवंबर से होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धान खरीदी की तारीख का ऐलान किया है। धान खरीदी की तारीख सामने आने के बाद अब किसानों की निगाहें खरीदी प्रक्रिया पर टिकी हैं। प्रदेश में धान खरीदी को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी जारी हैं। वहीं,खेतों में धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है और कई इलाकों में किसानों ने फसल की कटाई भी शुरू कर दी है।

धान खरीदी छत्तीसगढ़ की कृषि व्यवस्था का अहम हिस्सा है। ऐसे में खरीदी केंद्रों की व्यवस्था, किसानों के पंजीयन, धान के भंडारण और खरीदी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए प्रशासन तैयारियों में जुटा है। अब 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी के साथ ही प्रदेश में खरीफ सीजन की महत्वपूर्ण प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। किसानों को उम्मीद है कि खरीदी केंद्रों पर जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी होंगी, ताकि उन्हें अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

BREAKING : प्रदेश प्रभारी बनने के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ पहुंची स्मृति ईरानी

BREAKING : प्रदेश प्रभारी बनने के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ पहुंची स्मृति ईरानी

 रायपुर। भाजपा छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी बनने के बाद स्मृति ईरानी आज पहली बार छत्तीसगढ़ पहुंची. रायपुर एयरपोर्ट पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक राजेश मूणत और रायपुर महापौर मीनल चौबे ने स्वागत किया. एयरपोर्ट से स्मृति ईरानी बाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंची, जहां स्वागत और मुलाकात करने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी पहुंचे.

स्मृति ईरानी के दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में उत्साह है. होर्डिंग और बैनर लगाए जाने से मना करने के बाद राजधानी में जगह-जगह भाजपा के झंडे नजर आ रहे हैं. ऐसा पहली बार हो रहा है, जब किसी बड़े नेता के आगमन पर स्वागत के लिए बैनर-पोस्टर नहीं लगे हैं. यही नहीं भाजयुमो ने इस अवसर पर बाइक रैली का भी आयोजन रखा था, जिसे देर रात को रद्द कर दिया गया.

स्मृति ईरानी के छत्तीसगढ़ आगमन पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि स्मृति ईरानी का हम बहुत-बहुत स्वागत करते हैं, अभिनंदन करते हैं. उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी और मजबूत होगी. सरकार संगठित होगी और अच्छा काम करेगी.

स्वागत में पोस्टर-बैनर नहीं लगाए जाने पर सांसद अग्रवाल ने कहा कि जो अनुभवी उलझे वरिष्ठ नेता होते हैं, उनको ऐसा लगता है उनको यहां से चुनाव लड़ना नहीं है. चुनाव जिनको लड़ना है, उनके पोस्टर लगे. उनके पोस्टर लगने से कोई फायदा नहीं है, इसलिए इस कंपटीशन में कार्यकर्ता उलझ जाते हैं. कार्यकर्ता संगठन का काम करें. कार्यकर्ता संगठन को आगे बढ़ाने के लिए काम करें.

वहीं राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने कहा कि स्मृति ईरानी रायपुर पहुंची हैं. आज कई बैठक भी होंगी. छत्तीसगढ़ में और मजबूती से कार्यकर्ता काम करेंगे.

रायपुर प्रेस क्लब में चली गोली, सदस्यता नहीं मिलने से नाराज युवक ने की फायरिंग, मचा हड़कंप

रायपुर प्रेस क्लब में चली गोली, सदस्यता नहीं मिलने से नाराज युवक ने की फायरिंग, मचा हड़कंप

 रायपुर:  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मोतीबाग स्थित रायपुर प्रेस क्लब में शनिवार की शाम हड़कंप मच गया, जब सदस्यता नहीं मिलने से नाराज एक युवक ने पिस्टल से गोली चला दी। मामले में पुलिस ने आरोपी पलाश तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। ये पूरा मामला राजधानी रायपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र की है, जहां आरोपी पलाश तिवारी ने फायरिंग की है। प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी की लिखित शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी पलाश तिवारी के खिलाफ आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया है। इस घटना से दहशत का माहौल बना, जिसकी जांच शुरू हुई।

आरोपी पलाश तिवारी

मिली जानकारी के अनुसार, घटना शनिवार 24 अक्टूबर की शाम करीब 5:30 बजे की बताई जा रही है। प्रेस क्लब में फायरिंग की इस वारदात को आरोपी पलाश तिवारी ने सदस्यता नहीं मिलने से अंजाम दिया है। बताया जा रहा है कि फायरिंग से पहले आरोपी ने क्लब के कोषाध्यक्ष दिनेश यदु और कार्यालय सचिव शिव दत्ता पर पिस्टल तानी थी। प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कोतवाली थाने में लिखित आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई। आवेदन के मुताबिक, शाम के वक्त प्रेस क्लब परिसर में मीडियाकर्मियों और अन्य नागरिकों की नियमित आवाजाही थी। इसी दौरान पलाश तिवारी नामक युवक ने अवांछनीय तत्वों के साथ मिलकर पिस्टल से हवाई फायर किया और उपस्थित लोगों को डराने-धमकाने का प्रयास किया। अचानक हुई इस गोलीबारी से परिसर में मौजूद पत्रकारों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। शिकायत पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

 
 
 
 
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की OTS-2 योजना को बड़ी सफलता, अब तक 62.5 प्रतिशत संपत्तियों का विक्रय

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की OTS-2 योजना को बड़ी सफलता, अब तक 62.5 प्रतिशत संपत्तियों का विक्रय

 रायपुर- छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों को किफायती दरों पर आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां उपलब्ध कराने तथा वर्षों से रिक्त पड़ी संपत्तियों के बेहतर उपयोग की दिशा में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की वन टाइम सेटलमेंट योजना-2 (OTS-2) महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर रही है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना के अंतर्गत अब तक 62.5 प्रतिशत संपत्तियों का विक्रय किया जा चुका है। योजना के माध्यम से कुल 251.71 करोड़ रुपये मूल्य की 1,659 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों का विक्रय हुआ है।

OTS-2 योजना के अंतर्गत कुल 2,656 संपत्तियों को विक्रय के लिए शामिल किया गया था। इनमें से अब केवल 997 संपत्तियां विक्रय के लिए शेष हैं, जिनका कुल मूल्य 134.40 करोड़ रुपये है। योजना की सफलता से जहां वर्षों से रिक्त पड़ी संपत्तियों का उपयोग सुनिश्चित हो रहा है, वहीं आम नागरिकों को रियायती दरों पर अपना घर एवं व्यावसायिक परिसर प्राप्त करने का अवसर भी मिल रहा है।

पूर्ववर्ती योजना की तुलना में OTS-2 का प्रदर्शन बेहतर

वन टाइम सेटलमेंट योजना-2 की उपलब्धि पूर्व में संचालित OTS योजना की तुलना में उल्लेखनीय रही है। सितंबर 2021 से मार्च 2024 तक संचालित पूर्ववर्ती वन टाइम सेटलमेंट योजना के अंतर्गत लगभग 511 करोड़ रुपये मूल्य की 2,591 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों को शामिल किया गया था। इस अवधि में कुल 88.28 करोड़ रुपये मूल्य की 506 संपत्तियों का विक्रय हुआ था, जिसमें विक्रय का प्रतिशत 17.27 रहा था। वहीं वर्तमान OTS-2 योजना में अब तक 62.5 प्रतिशत संपत्तियों का विक्रय हो चुका है।

इस प्रकार पूर्ववर्ती योजना की तुलना में वर्तमान योजना के विक्रय प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की संपत्ति विक्रय व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलाव तथा रियायती दरों पर संपत्तियां उपलब्ध कराने की नीति के प्रभावी परिणामों को दर्शाती है।

मंत्रिपरिषद के निर्णय से मिली योजना को गति

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 19 जनवरी 2025 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की पांच वर्ष से अधिक समय से अविक्रित आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों के एकमुश्त निपटान के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था। इसके अंतर्गत ऐसी संपत्तियों को लागत मूल्य (बेस रेट) पर निर्धारित छूट प्रदान कर विक्रय करने की स्वीकृति दी गई थी।

मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुरूप 1 मार्च 2025 से वन टाइम सेटलमेंट योजना-2 प्रारंभ की गई। योजना में संपत्तियों के रिक्त रहने की अवधि तथा संबंधित परियोजना में रिक्त संपत्तियों के अनुपात के आधार पर 10, 20 एवं 30 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है। इस पहल से लंबे समय से अविक्रित संपत्तियों के विक्रय को गति मिली है तथा नागरिकों के लिए आवास एवं व्यावसायिक संपत्ति खरीदने के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं।

मंडल आयुक्त ने की समीक्षा, शेष संपत्तियों के विक्रय में तेजी लाने के निर्देश

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के मुख्यालय में 23 अक्टूबर को मंडल आयुक्त  अवनीश कुमार शरण ने OTS-2 योजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने योजना के अंतर्गत अब तक विक्रय की गई संपत्तियों, शेष उपलब्ध आवासीय एवं व्यावसायिक इकाइयों तथा उनके विक्रय की संभावनाओं की जानकारी ली।

मंडल आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शेष संपत्तियों के विक्रय में तेजी लाने के साथ-साथ वहां उपलब्ध सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाए। विशेष रूप से आवासीय परिसरों में लिफ्ट की व्यवस्था, भवनों की आवश्यक मरम्मत, नियमित रखरखाव तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।

उन्होंने कहा कि आवासीय परियोजनाओं में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता और बेहतर रखरखाव सुनिश्चित करने से संभावित खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा तथा संपत्तियों के विक्रय में भी तेजी आएगी।

रायपुर, नवा रायपुर और दुर्ग में चलेंगे आवास रथ

मंडल आयुक्त  शरण ने OTS-2 योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार और नागरिकों को उपलब्ध संपत्तियों की जानकारी देने के लिए रायपुर, नवा रायपुर एवं दुर्ग में आवास रथ प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।

आवास रथ के माध्यम से इच्छुक नागरिकों को छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की विभिन्न परियोजनाओं में उपलब्ध आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों की जानकारी देने के साथ-साथ उनका प्रत्यक्ष अवलोकन कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे संभावित खरीदार संपत्तियों की स्थिति, लोकेशन, उपलब्ध सुविधाओं एवं अन्य आवश्यक जानकारियों के आधार पर खरीद का निर्णय ले सकेंगे।

आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना की जानकारी अधिक से अधिक नागरिकों तक पहुंचाई जाए। इसके लिए प्रभावी प्रचार-प्रसार के साथ इच्छुक खरीदारों को आवश्यक मार्गदर्शन और जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि निर्धारित अवधि में अधिकतम संपत्तियों का विक्रय सुनिश्चित किया जा सके।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में उपलब्ध हैं आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां

OTS-2 योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की विभिन्न परियोजनाओं और क्षेत्रीय कार्यालयों में आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां उपलब्ध हैं। इनमें नवा रायपुर के कैपिटल प्रोजेक्ट, रायपुर जोन-02 एवं जोन-03 के साथ दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर, धमतरी, राजनांदगांव, रायगढ़, जशपुर, कोंडागांव, कोरिया, कोरबा एवं दंतेवाड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों की संपत्तियां शामिल हैं।

इच्छुक नागरिक संबंधित कार्यालयों से संपर्क कर उपलब्ध संपत्तियों की लोकेशन, कीमत, सुविधाओं तथा योजना के अंतर्गत लागू छूट की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मार्च 2027 तक ही मिलेगा विशेष छूट का लाभ

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की वन टाइम सेटलमेंट योजना-2 की अवधि मार्च 2027 तक निर्धारित की गई है। इस अवधि के दौरान पात्र संपत्तियों के क्रय पर निर्धारित शर्तों के अनुसार 10 से 30 प्रतिशत तक छूट का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद संपत्तियों पर OTS-2 योजना के अंतर्गत विशेष छूट का लाभ उपलब्ध नहीं होगा। ऐसे में रियायती दरों पर आवासीय अथवा व्यावसायिक संपत्ति खरीदने के इच्छुक नागरिकों के लिए यह महत्वपूर्ण अवसर है।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की इस पहल से एक ओर वर्षों से रिक्त पड़ी संपत्तियों का बेहतर उपयोग और आवासीय परिसरों में बसाहट को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर संपत्तियों के विक्रय से प्राप्त राजस्व का उपयोग भविष्य की आवासीय एवं अधोसंरचना विकास गतिविधियों को गति देने में किया जा सकेगा।

BSP पार्षद समेत 4 दोस्तों की शराब पीने से बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान 2 की मौत

BSP पार्षद समेत 4 दोस्तों की शराब पीने से बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान 2 की मौत

 जांजगीर चाम्पा. छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां शराब पीने से पार्षद समेत दो लोगों की मौत हो गई। तबियत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना से हड़कंप मच गया है।

चार दोस्तों ने मिलकर पी थी शराब
यह पूरा मामला पामगढ़ नगर पंचायत का है। मृतकों की पहचान BSP पार्षद राम खिलावन जांगड़े और जोहित खरे के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों ने शुक्रवार रात 10 बजे पुराना अस्पताल पामगढ़ परिसर में अपने दो अन्य साथियों के साथ शराब पी थी, जिसके कुछ देर बाद उनकी तबियत बिगड़ गई।

दो की मौत, दो का इलाज जारी
आनन-फानन में खिलावन जांगड़े और जोहित खरे को पामगढ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उन्हें बिलासपुर रेफर कर दिया गया। खिलावन जांगड़े ने सिम्स में, तो जोहित खरे ने अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं दो युवकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ में भर्ती कराया है, जहां उनका इलाज जारी है।

शराब में जहर होने की आशंका
शराब में जहर होने की आशंका जताई जा रही है। पूरे मामले का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही होगा। फिलहाल पुलिस की ओर से मामले की जांच की जा रही है।

दवाएं सस्ती हों, ग्रामीणों तक पहुंचे इलाज, नकली दवाओं पर लगे रोक -राज्यपाल डेका

दवाएं सस्ती हों, ग्रामीणों तक पहुंचे इलाज, नकली दवाओं पर लगे रोक -राज्यपाल डेका

 दवाएं सस्ती हों, ग्रामीणों तक पहुंचे इलाज, नकली दवाओं पर लगे रोक -राज्यपाल डेका

एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल टीचर्स ऑफ इंडिया के 28वें राष्ट्रीय अधिवेशन एपिकॉन-2026 में शामिल हुए राज्यपाल

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि सस्ता इलाज, किफायती दवाएं और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना देश की प्रमुख चुनौतियां हैं। इनके समाधान के लिए चिकित्सकों, फार्मासिस्टों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा। स्वास्थ्य और शिक्षा को केवल कारोबार नहीं, बल्कि समाजसेवा का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने नकली दवाओं पर रोक लगाने, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर वैज्ञानिक शोध करने और छत्तीसगढ़ की वनौषधियों के पारंपरिक ज्ञान को सामने लाने पर जोर दिया।

राज्यपाल  डेका आज पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल टीचर्स ऑफ इंडिया (एपीटीआई) के 28वें राष्ट्रीय अधिवेशन एपिकॉन-2026 को संबोधित कर रहे थे। अधिवेशन का विषय ‘फार्मा शिक्षक आत्मनिर्भर भारत के लिए फार्मासिस्ट तैयार करने का संकल्प’ था।

राज्यपाल ने कहा कि देश ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में प्रगति की है, लेकिन ग्रामीण आबादी तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना अब भी चुनौती है। दवाओं की कीमत आम आदमी की पहुंच में होनी चाहिए। चिकित्सकों को दवाएं लिखते समय मरीज की आर्थिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए और जहां संभव हो, कम कीमत वाली प्रभावी दवाओं के विकल्प अपनाने चाहिए।

उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि चिकित्सकों और फार्मासिस्टों को गांवों तक पहुंचकर लोगों को जागरूक करना होगा। गर्भवती महिलाओं, माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों, विशेषकर बैगा समुदाय के पास औषधीय पौधों और पारंपरिक उपचार पद्धतियों से जुड़ा महत्वपूर्ण ज्ञान है। इसका वैज्ञानिक अध्ययन और दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। भारतीय चिकित्सा परंपराओं में उपलब्ध जानकारी की आधुनिक शोध के माध्यम से जांच कर उनकी उपयोगिता का आकलन करना जरूरी है।
नकली दवाओं को गंभीर खतरा बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन पर संकट पैदा होता है तथा चिकित्सा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है। फार्मेसी के विद्यार्थियों, शिक्षकों और दवा उद्योग को दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट का उपयोग ज्ञान बढ़ाने के लिए करने तथा मौलिक चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नैतिक मूल्यों को महत्व देने की अपील की।

फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मोंटू एम. पटेल ने बताया कि बदलती तकनीक और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप फार्मेसी पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मेडिकल डिवाइस जैसे विषय शामिल किए गए हैं। उन्होंने अनावश्यक एंटीबायोटिक के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए देश के 42 स्थानों पर चलाए जा रहे अभियान की जानकारी दी।
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने विश्वविद्यालय में चल रहे शोध कार्यों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ के वन आधारित औषधीय संसाधनों से नए उत्पाद विकसित करने और फार्मेसी शोध को अन्य विज्ञान विषयों से जोड़ने की जरूरत बताई।

एपीटीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मिलिंद जनराव उमेकऱ ने संगठन की गतिविधियों और फार्मेसी शिक्षकों के प्रशिक्षण, शोध तथा उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी।

भारतीय शिक्षा मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी.आर. शंकरानंद ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा को सामाजिक बदलाव और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

अधिवेशन में देशभर से लगभग 700 शिक्षक, 900 विद्यार्थी और फार्मेसी, विपणन तथा उद्योग जगत से जुड़े करीब 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अधिवेशन में सस्ती दवाओं, सुरक्षित उपचार, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शोध के माध्यम से स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।

बिलासपुर-मुंगेली में बनेंगे नए पुल, डिप्टी CM अरुण साव ने मंजूर किए ₹14.25 करोड़

बिलासपुर-मुंगेली में बनेंगे नए पुल, डिप्टी CM अरुण साव ने मंजूर किए ₹14.25 करोड़

 रायपुर. सड़क संपर्क और आवागमन की सुविधाओं को मजबूत करने लोक निर्माण विभाग ने मुंगेली और बिलासपुर जिलों में दो नए पुलों के लिए राशि मंजूर की है। दोनों पुलों और उनके पहुंच मार्गों के निर्माण के लिए कुल 14 करोड़ 25 लाख 97 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।

उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने दोनों कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति के आदेश जारी कर दिए हैं। मुंगेली जिले के तखतपुर-बरेला मार्ग पर मनियारी नदी में मौजूदा जलमग्नीय पुल के स्थान पर उच्च स्तरीय पुल तथा बिलासपुर जिले के बेलगहना-कोंचरा-खोंगसरा मार्ग पर डोंगानाला में उच्च स्तरीय पुल के निर्माण शामिल हैं। दोनों पुलों के साथ पहुंच मार्ग भी बनाए जाएंगे। लोक निर्माण विभाग ने तखतपुर-बरेला राज्य मार्ग में मनियारी नदी पर जलमग्नीय पुल के स्थान पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 7 करोड़ 67 लाख 11 हजार रुपए मंजूर किए हैं। वर्तमान में वहां जलमग्नीय पुल होने के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। नए उच्च स्तरीय पुल के निर्माण से इस मार्ग पर आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम हो सकेगा। विशेष रूप से बारिश के मौसम में लोगों को राहत मिलेगी और सड़क संपर्क की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

विभाग ने बेलगहना-कोंचरा-खोंगसरा मार्ग पर डोंगानाला में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 6 करोड़ 58 लाख 86 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। राज्य शासन ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता को दोनों कार्यों में गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्माण के दौरान गुणवत्तापूर्ण सामग्री के उपयोग, कार्यों की नियमित निगरानी और तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। मनियारी नदी और डोंगानाला पर इन पुलों के निर्माण से मुंगेली और बिलासपुर जिलों में सड़क अधोसंरचना मजबूत होगी तथा स्थानीय लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।

CG राज्योत्सव में दिखेगा सारंग हेलीकॉप्टर एयर शो का रोमांच, तैयारियों में जुटा प्रशासन

CG राज्योत्सव में दिखेगा सारंग हेलीकॉप्टर एयर शो का रोमांच, तैयारियों में जुटा प्रशासन

 रायपुर.छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर स्थित सेंध लेक क्षेत्र में आयोजित होने वाले सारंग हेलीकॉप्टर एयर शो की तैयारियों को लेकर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक में भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों सहित जिला प्रशासन, नगर निगम तथा विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान एयर शो के सफल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए की जा रही तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, चिकित्सा सुविधाओं, आपातकालीन सेवाओं और दर्शकों की सुविधा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
बैठक में आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने, यातायात का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने तथा दर्शकों एवं अतिथियों की सुविधा के लिए आवश्यक प्रबंध करने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान पुलिस सहायता, चिकित्सा सुविधाओं, आपातकालीन सेवाओं, परिवहन व्यवस्था और पार्किंग प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की गई। साथ ही ड्रॉप जोन की लेबलिंग, आयोजन स्थल पर प्रवेश एवं आवागमन की व्यवस्था तथा किसी भी आपात परिस्थिति से निपटने के लिए आवश्यक इंतजाम समय पर सुनिश्चित करने के संबंध में चर्चा की गई।

एयर शो के सफल संचालन के लिए आयोजन स्थल पर आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसमें विद्युत आपूर्ति, सॉफ्ट ग्राउंड, मेंटेनेंस, मोबाइल टॉयलेट, कार्यालयीन कार्यों के लिए आवश्यक स्थान तथा अन्य सुविधाओं की व्यवस्था शामिल रही। अधिकारियों ने आयोजन स्थल की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने और कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने पर चर्चा की।

बैठक में अतिथियों के आगमन एवं स्वागत, परिवहन और पार्किंग की समुचित व्यवस्था तथा एयर शो के व्यापक प्रचार-प्रसार से जुड़े विषयों की भी समीक्षा की गई। आयोजन में शामिल होने वाले अतिथियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक प्रबंध करने पर बल दिया गया। साथ ही आयोजन स्थल पर चिकित्सा सहायता एवं अन्य आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा संबंधित टीमों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के महत्व पर भी चर्चा हुई।

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा की जा रही तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि सारंग हेलीकॉप्टर एयर शो जैसे महत्वपूर्ण आयोजन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूर्ण की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन, विद्युत आपूर्ति और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित तैयारियों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने पर जोर दिया। आयोजन के दौरान आम नागरिकों एवं दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के अवसर पर आयोजित होने वाला सारंग हेलीकॉप्टर एयर शो राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण होगा। इसे देखते हुए आयोजन से संबंधित सभी तैयारियों की नियमित समीक्षा, विभागीय जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन और समय पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बैठक में नगर निगम रायपुर के आयुक्त संबित मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिस्वरंजन, भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी तथा स्वास्थ्य विभाग, नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए), परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सुशासन और पारदर्शिता के साथ हर वर्ग तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

सुशासन और पारदर्शिता के साथ हर वर्ग तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

 सुशासन और पारदर्शिता के साथ हर वर्ग तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

गढ़फुलझर में बाबा बिशासहे कुल कोलता समाज के वार्षिक स्नेह सम्मेलन एवं बंधु मिलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गढ़फुलझर में 50 लाख रुपये की लागत से निर्मित सर्वमंगल भवन का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री साय ने मंदिर परिसर में 50 लाख रुपये की लागत से भव्य डोम निर्माण की घोषणा की

मानसरोवर तालाब के सौंदर्यीकरण और सड़क निर्माण सहित क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास कार्य

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत गढ़फुलझर में बाबा बिशासहे कुल कोलता समाज द्वारा आयोजित वार्षिक स्नेह सम्मेलन एवं बंधु मिलन कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 50 लाख रुपये की लागत से निर्मित सर्वमंगल भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने समाज की मांग पर मंदिर परिसर में 50 लाख रुपये की लागत से भव्य डोम निर्माण की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2024 में गढ़फुलझर के विकास के लिए किए गए वादे अब धरातल पर साकार हो रहे हैं। सर्वमंगल भवन का निर्माण पूरा होने से सामाजिक एवं सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही 48 लाख रुपये की लागत से मानसरोवर तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। क्षेत्र में लगभग पौने दो किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण भी प्रगति पर है, जिस पर लगभग 3.50 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विकास कार्यों से गढ़फुलझर और आसपास के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने के साथ सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि गढ़फुलझर में विकास का बदलाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है और आने वाले समय में क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को और गति दी जाएगी।

कोलता समाज ने शिक्षा, कृषि और सामाजिक क्षेत्र में बनाई विशिष्ट पहचान

मुख्यमंत्री साय ने कोलता समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समाज का राज्य सरकार को सदैव स्नेह, सहयोग और आशीर्वाद मिलता रहा है। कोलता समाज मेहनतकश, शिक्षित, समृद्ध और सामाजिक मूल्यों के प्रति समर्पित समाज है। कृषि, शिक्षा, सेवा और सामाजिक क्षेत्र में समाज के लोगों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता और आपसी सहयोग को मजबूत करने में कोलता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अपनी प्रगतिशील सोच और सामाजिक चेतना के कारण यह समाज दूसरे समाजों के लिए भी प्रेरणा और मार्गदर्शन का कार्य कर रहा है।

मोदी की गारंटी के संकल्पों को तेजी से पूरा कर रही राज्य सरकार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप राज्य सरकार जनकल्याण से जुड़े संकल्पों को प्राथमिकता के साथ पूरा कर रही है। सरकार का लक्ष्य विकास और जनकल्याण की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का उल्लेख करते हुए कहा कि आवास से वंचित गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए सरकार तेजी से कार्य कर रही है। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1,600 आवासों का निर्माण हो रहा है। विशेष पिछड़ी जनजातियों के परिवारों को भी प्राथमिकता के आधार पर आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। इसी प्रकार किसानों से किए गए वादों को पूरा करने के साथ तेंदूपत्ता संग्राहकों, श्रमिकों, युवाओं और समाज के अन्य वर्गों के कल्याण के लिए भी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है – प्रदेश के प्रत्येक परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए और विकास का लाभ बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद तक पहुंचे।

सुशासन और पारदर्शिता के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग कर रही है। नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की गई है। इसके माध्यम से प्राप्त शिकायतों के निराकरण के लिए समय-सीमा और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है।

उन्होंने बताया कि सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की लगभग 700 शासकीय सेवाएं नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे लोगों को विभिन्न शासकीय सेवाओं के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों के माध्यम से भी विभिन्न सेवाओं और वित्तीय लेन-देन को सरल एवं सुलभ बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के माध्यम से शासन को नागरिकों के और करीब लाना तथा शासकीय सेवाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना सुशासन सरकार का संकल्प है।

पर्यटन और सिंचाई परियोजनाओं से खुलेंगे विकास एवं रोजगार के नए अवसर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था, पुरातात्विक विरासत और समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण है। प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। पर्यटन स्थलों पर आवश्यक सुविधाओं के विस्तार के साथ होमस्टे जैसी व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने सिरपुर बैराज तथा सिकासेर-कोडार लिंक परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किसानों की समृद्धि और कृषि उत्पादन में वृद्धि का आधार बनेगा। सरकार सिंचाई क्षमता बढ़ाने और किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं संबलपुर सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि गढ़फुलझर आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने माँ रामचंडी मंदिर की धार्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र आस्था, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां गुरुद्वारे के निर्माण और लक्ष्मी-नारायण मंदिर के विकास से धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी।

प्रधान ने कहा कि बसना अंचल में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का निरंतर विस्तार हो रहा है। सर्वमंगल भवन का लोकार्पण सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और भाईचारे को और मजबूत करेगा। उन्होंने कोलता समाज को मेहनतकश, कृषि से गहराई से जुड़ा तथा राष्ट्र और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला समाज बताया।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। छत्तीसगढ़ के किसान धान उत्पादन और देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। किसानों की मेहनत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के साथ देश की खाद्य सुरक्षा को भी सुदृढ़ कर रही है।

महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि गढ़फुलझर श्रद्धा और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है और इसके समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कोलता समाज को उदार, मिलनसार और सभी समाजों एवं वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने वाला समाज बताया।

श्रीमती चौधरी ने सिरपुर के यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल होने पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने माँ रामचंडी मंदिर में सीढ़ियों के लिए शेड निर्माण हेतु सांसद निधि से राशि उपलब्ध कराने की घोषणा भी की।

अंचल के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध : विधायक डॉ. संपत अग्रवाल

बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कहा कि वार्षिक स्नेह सम्मेलन एवं बंधु मिलन सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है। उन्होंने कहा कि कोलता समाज ने शिक्षा, कृषि, सेवा और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री तथा महासमुंद जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल, रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित कोलता समाज के अध्यक्ष भुवनेश्वर सदावर्ती सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं समाजजन उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के नियम बदले, अब फिंगरप्रिंट से होगा सत्यापन, जान लीजिए ये नए नियम…..

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के नियम बदले, अब फिंगरप्रिंट से होगा सत्यापन, जान लीजिए ये नए नियम…..

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का नया सीजन शुरू होने से पहले किसानों के लिए जरूरी अपडेट सामने आया है। इस बार खरीदी प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए गए हैं, जिनका ध्यान रखना किसानों के लिए जरूरी होगा। नई व्यवस्था के तहत धान बेचने के लिए किसान की पहचान के साथ टोकन में दर्ज धान की मात्रा का भी सत्यापन किया जाएगा। खरीदी केंद्र पर किसान या उसके अधिकृत नॉमिनी को बायोमेट्रिक यानी फिंगरप्रिंट सत्यापन कराना होगा। ऐसे में किसानों को धान बेचने के लिए केंद्र पहुंचने से पहले टोकन में दर्ज जानकारी और अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर लेनी चाहिए।

धान बेचने के लिए अब फिंगरप्रिंट जरूरी

नई व्यवस्था के तहत धान खरीदी केंद्र पर किसान की पहचान बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए की जाएगी। अगर किसान खुद धान बेचने के लिए खरीदी केंद्र नहीं पहुंच सकता है, तो उसके अधिकृत नॉमिनी के जरिए धान बेचने की सुविधा रहेगी। हालांकि नॉमिनी को भी फिंगरप्रिंट के जरिए अपनी पहचान सत्यापित करानी होगी।

यानी अब केवल ओटीपी के जरिए सत्यापन कराकर धान बिक्री की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। किसान या उसके अधिकृत नॉमिनी को खरीदी केंद्र पर बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। नॉमिनी के मामले में किसानों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उसका नाम संबंधित रिकॉर्ड में दर्ज हो।

टोकन में दर्ज धान की मात्रा पर रखें नजर

धान खरीदी के नए नियमों के तहत टोकन में दर्ज धान की मात्रा को लेकर भी किसानों को सावधानी बरतनी होगी। टोकन जारी होने के बाद किसान उसमें दर्ज मात्रा की अच्छी तरह जांच कर लें।

उदाहरण के लिए अगर किसी किसान को 120 क्विंटल धान बेचना है और उसके लिए दो टोकन जारी किए जाते हैं, तो दोनों टोकन में 60-60 क्विंटल धान दर्ज हो सकता है। इसी तरह 300 क्विंटल धान के लिए तीन टोकन जारी होने पर प्रत्येक टोकन में 100-100 क्विंटल की मात्रा दर्ज हो सकती है।

इसलिए टोकन मिलने के बाद किसान उसमें दर्ज मात्रा जरूर जांच लें। टोकन में दर्ज मात्रा और खरीदी केंद्र पर लाई गई धान की मात्रा में अंतर होने पर परेशानी हो सकती है।

100 क्विंटल का टोकन, 80 क्विंटल धान लाए तो?

किसानों के मन में यह सवाल भी है कि अगर टोकन में 100 क्विंटल धान दर्ज है, लेकिन किसान खरीदी केंद्र पर सिर्फ 80 क्विंटल धान लेकर पहुंचता है तो क्या होगा?

ऐसी स्थिति में किसान के पास मौजूद धान के हिसाब से ही खरीदी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यानी टोकन में 100 क्विंटल दर्ज होने के बावजूद किसान अगर 80 क्विंटल धान लेकर पहुंचता है, तो शेष 20 क्विंटल की मात्रा के संबंध में लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी।

ऐसे में किसानों को सलाह है कि टोकन बनवाने से पहले अपनी वास्तविक उपज का हिसाब जरूर लगा लें और टोकन जारी होने के बाद उसमें दर्ज मात्रा की जांच कर लें।

एक से ज्यादा टोकन मिले तो भी सावधानी जरूरी

जिन किसानों को एक से ज्यादा टोकन जारी किए गए हैं, उन्हें सभी टोकन की जांच करनी होगी। किसान यह देखें कि प्रत्येक टोकन में कितनी मात्रा दर्ज है और सभी टोकन में दर्ज कुल मात्रा कितनी है।

खासकर ज्यादा उत्पादन वाले किसानों को इस मामले में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होगी। टोकन में दर्ज मात्रा उनकी वास्तविक उपज और बिक्री की योजना के मुताबिक होनी चाहिए।

किसान की जगह नॉमिनी बेच सकेगा धान

नई व्यवस्था में उन किसानों को राहत दी गई है, जो किसी कारण से खुद खरीदी केंद्र नहीं पहुंच सकते। ऐसे किसान अपने अधिकृत नॉमिनी के जरिए धान बेच सकेंगे।

हालांकि नॉमिनी के लिए भी बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी होगा। नॉमिनी का फिंगरप्रिंट लिया जाएगा और उसके विवरण का संबंधित रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। इसलिए किसान पहले से यह सुनिश्चित कर लें कि उनके अधिकृत नॉमिनी की जानकारी संबंधित समिति के रिकॉर्ड में दर्ज है।

खरीदी केंद्र जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

किसानों को धान खरीदी केंद्र जाने से पहले टोकन में दर्ज मात्रा और खरीदी की तारीख की जांच कर लेनी चाहिए। इसके साथ ही उपलब्ध धान का सही हिसाब भी पहले से लगा लेना जरूरी है।

अगर किसान के पास टोकन में दर्ज मात्रा से कम धान है तो खरीदी केंद्र पहुंचने से पहले संबंधित सहकारी समिति से प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। इससे खरीदी के दौरान होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

पंडवानी को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने वाली पद्म विभूषण तीजन बाई की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाएगी राज्य सरकार

पंडवानी को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने वाली पद्म विभूषण तीजन बाई की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाएगी राज्य सरकार

 अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस पर बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

  तीजन बाई के नाम पर इसी वर्ष से दिया जाएगा लोककला अलंकरण, गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित करने की पहल

महासम्मेलन में शामिल 70 दलों को 25-25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा

मिडिल स्कूल बानबरद का हाईस्कूल में होगा उन्नयन, अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बनेगी बीटी रोड

रायपुर -- छत्तीसगढ़ लोककला और संस्कृति की समृद्ध धरती है। हमारी लोककलाएं हमारे इतिहास, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इन्हें सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार लोककलाओं के संरक्षण-संवर्धन के साथ कलाकारों को प्रोत्साहन और व्यापक मंच उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर दुर्ग जिले के अहिवारा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने प्रदेशभर से आए लोक कलाकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी ने अनेक महान कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और साधना से प्रदेश की लोकसंस्कृति को देश-दुनिया में प्रतिष्ठित किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पंडवानी की महान लोक कलाकार पद्म विभूषण तीजन बाई का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्वितीय कला-साधना से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। पंडवानी एक अनूठी लोकविधा है, जिसमें कलाकार महाभारत की कथा और उसके विभिन्न पात्रों को अपने गायन, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से जीवंत कर देता है। तीजन बाई ने इस अद्भुत लोकविधा को दुनिया के अनेक मंचों तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई की स्मृतियों और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार महत्वपूर्ण पहल कर रही है। उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा तथा वहां के हाईस्कूल का नामकरण तीजन बाई के नाम पर करने की पहल की जाएगी। उन्होंने बताया कि तीजन बाई के नाम पर लोककला अलंकरण इसी वर्ष से राज्योत्सव के अवसर पर प्रदान किया जाएगा। यह अलंकरण उनकी अनुपम कला-साधना के प्रति सम्मान के साथ प्रदेश के लोक कलाकारों को अपनी परंपरागत कलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने ज्ञानश्रोत कला मंच के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसी संस्था का लगातार 46 वर्षों तक लोककला और संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इस मंच ने छत्तीसगढ़ की लोककलाओं को जीवंत रखने, कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने पद्मश्री डॉ. उषा बारले एवं ज्ञानश्रोत लोककला मंच से जुड़े सभी लोगों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के कलाकारों और फिल्म जगत को भी नई संभावनाओं से जोड़ रही है। छत्तीसगढ़ी सिनेमा और स्थानीय कलाकारों को व्यापक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का गठन किया गया है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ी सिनेमा के साथ अन्य फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश के कलाकारों तथा युवाओं के लिए रोजगार एवं रचनात्मक अवसरों के नए द्वार खुलेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आयोजकों की मांग पर पंडवानी महासम्मेलन में शामिल 70 दलों को 25-25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की। इनमें पंडवानी कलाकारों के साथ चार पंथी एवं तीन आदिवासी नृत्य दल भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की शिक्षा और अधोसंरचना से जुड़ी मांगों को पूरा करते हुए मिडिल स्कूल बानबरद को हाईस्कूल में उन्नयन करने तथा अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड निर्माण की भी घोषणा की।

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को आगे बढ़ाने में यहां के कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा जैसी लोकविधाएं हमारे जीवन और सामाजिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। ये केवल गीत और नृत्य नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा हैं। उन्होंने कलाकारों से इस महासम्मेलन की परंपरा को आगे भी इसी उत्साह के साथ जीवंत बनाए रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम को विधायक श्री रिकेश सेन ने भी संबोधित किया। पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कलाकारों से जुड़ी विभिन्न मांगों की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट किया।

इस अवसर पर विधायक दुर्ग ग्रामीण श्री ललित चंद्राकर, विधायक साजा श्री ईश्वर साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोक कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

CG- हसदेव नदी में आरक्षक ने लगाई छलांग! पुल पर बाइक, मोबाइल और ID कार्ड मिलने से मचा हड़कंप

CG- हसदेव नदी में आरक्षक ने लगाई छलांग! पुल पर बाइक, मोबाइल और ID कार्ड मिलने से मचा हड़कंप

 कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हसदेव नदी के पुल से एक आरक्षक के छलांग लगाने की आशंका जताई जा रही है। केंदई के पास पुल पर उसकी बाइक खड़ी मिली, जिसके पास मोबाइल, पर्स, पुलिस आईडी कार्ड और आधार कार्ड बरामद हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरक्षक की तलाश के लिए SDRF की टीम को बुलाया गया। मामला मोरगा चौकी क्षेत्र का है। फिलहाल नदी में आरक्षक की तलाश जारी है।

जानकारी के अनुसार, हसदेव नदी के पुल पर आरक्षक की बाइक क्रमांक CG 14 MX 1898 खड़ी मिली। बाइक के पास ही उसका मोबाइल, पर्स, पुलिस आईडी कार्ड और आधार कार्ड भी मिला है। घटनास्थल पर मिले सामान के आधार पर आरक्षक के नदी में छलांग लगाने की आशंका जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि आरक्षक की पहचान 31 वर्षीय सुनील बेक के रूप में हुई है। वह सरगुजा जिले के प्रेमनगर थाना क्षेत्र की तारापुर चौकी में आरक्षक के पद पर पदस्थ है। पुल पर बाइक और व्यक्तिगत दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित थाना और चौकी को सूचना दी है।

घटना की जानकारी मिलते ही मोरगा चौकी प्रभारी मंगतू राम पुलिस स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी। पुलिस ने बाइक के पास मिले दस्तावेजों को जब्त कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

मोरगा चौकी प्रभारी मंगतू राम के अनुसार, पुलिस आईडी कार्ड के आधार पर संबंधित थाना और चौकी को सूचना दे दी गई है। आरक्षक की तलाश के लिए एसडीआरएफ के गोताखोरों की टीम को बुलाया गया है।

बताया जा रहा है कि हसदेव नदी में पानी का बहाव तेज है। ऐसे में नदी में तलाशी और रेस्क्यू अभियान चलाने में कठिनाई हो रही है। पुलिस और रेस्क्यू टीम आरक्षक की तलाश के लिए आवश्यक कार्रवाई कर रही है। वहीं देर रात होने के कारण खोजबीन सुबह किए जाने की बात सामने आई है।

फिलहाल, आरक्षक ने नदी में छलांग कब और किन परिस्थितियों में लगाई, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरक्षक की तलाश जारी है।

CG : खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 2500 किलो मिठाई और 1000 लीटर दूध नष्ट , 3 दुकानें सीज

CG : खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 2500 किलो मिठाई और 1000 लीटर दूध नष्ट , 3 दुकानें सीज

 भिलाई : छत्तीसगढ़ के भिलाई में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाई और डेयरी कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 2500 किलो मिठाई और 1000 लीटर दूध नष्ट कराया है। जांच के दौरान कहीं एक्सपायरी दूध से पनीर बनाया जा रहा था, तो कहीं गंदगी के बीच मिठाइयां तैयार की जा रही थीं। विभाग ने गंभीर गड़बड़ियां मिलने पर तीन प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थ बनाने का काम बंद करा दिया।

वैशाली नगर की एक दुकान में बिस्किट के पैकेट पर भविष्य की तारीख डालकर पैकिंग करने का मामला भी सामने आया है। विभाग ने दुकान संचालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक, जांच का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लोगों की सेहत से जुड़े सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।

एक्सपायरी दूध से बना रहे थे पनीर

नंदनी रोड स्थित मां दुर्गा डेयरी की जांच में पनीर और दही बनाने की जगह पर गंदगी मिली। यहां पनीर बनाने में एक्सपायरी तारीख वाला पैक्ड दूध इस्तेमाल किया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पनीर, दूध और दही के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे। इसके बाद नगर निगम की मदद से करीब 1000 लीटर दूध और 80 किलो दही नष्ट कराया गया।

लड्डुओं में रंग का इस्तेमाल!

कैंप-2 स्थित गुप्ताजी लड्डू हाउस में जांच के दौरान करीब 250 किलो मैदे के लड्डू मिले। विभाग को इनमें तय मानकों के अनुरूप नहीं होने वाले खाद्य रंग और मिठास बढ़ाने वाले पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका हुई। इसके बाद लड्डुओं को नष्ट करने की कार्रवाई की गई। खाद्य सुरक्षा विभाग ने प्रतिष्ठान में मिली अनियमितताओं के आधार पर आगे की कार्रवाई भी शुरू की।

गंदगी में बन रही थीं पेड़ा, सोनपापड़ी और बर्फी

बैकुंठधाम, कैंप-2 स्थित मुस्कान फूड प्रोडक्ट्स में भी साफ-सफाई की कमी के बीच मिठाइयां बनाते और पैक करते पाया गया। यहां लड्डू, सोनपापड़ी, पेड़ा और बर्फी जैसी मिठाइयां बिना लेबल वाले प्लास्टिक के जार में पैक की जा रही थीं। कार्रवाई के दौरान करीब 200 किलो पेड़ा, 1020 किलो सोनपापड़ी और 70 किलो मसूर पाक सहित अन्य मिठाइयों को नष्ट करने की प्रक्रिया की गई।

बिस्किट के पैकेट पर 9 दिन आगे की तारीख

वैशाली नगर स्थित जलाराम नमकीन एंड डेयरी में जांच के दौरान बिस्किट के पैकेट पर 1 नवंबर 2026 की तारीख डालकर पैकिंग की जा रही थी, जबकि जांच 23 अक्टूबर को हुई थी। यानी पैकेट पर जांच की तारीख से करीब नौ दिन आगे की तारीख दर्ज थी। विभाग ने इसे ग्राहकों को गुमराह करने से जुड़ा मामला मानते हुए दुकान संचालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। मामले को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

छत्तीसगढ़ की 11,689 ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों में वित्तीय समावेशन अभियान

छत्तीसगढ़ की 11,689 ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों में वित्तीय समावेशन अभियान

 00 31 दिसंबर तक पात्र लोगों को बैंकिंग सेवाओं और वित्तीय योजनाओं से जोडऩे का लक्ष्य

रायपुर। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ में वित्तीय समावेशन संतृप्ति अभियान के तहत बैंकिंग सुविधाओं और जनकल्याणकारी वित्तीय योजनाओं से वंचित पात्र लोगों को जोडऩे के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 21 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक संचालित इस अभियान के अंतर्गत राज्य की सभी ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और वित्तीय जागरूकता का लाभ पहुंचाना है।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, छत्तीसगढ़ के संयोजक एवं भारतीय स्टेट बैंक के उप महाप्रबंधक श्री दीपक कुमार अभिषेक ने बताया कि अभियान के अंतर्गत सभी बैंकों की शाखाएं अपनी निकटवर्ती ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में विशेष शिविर आयोजित कर रही हैं। इन शिविरों में वित्तीय साक्षरता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव के संबंध में जानकारी दी जा रही है। बैंक अधिकारियों की उपस्थिति में पात्र हितग्राहियों का पंजीकरण करने के साथ आवश्यक दस्तावेज भी प्राप्त किए जा रहे हैं।

अभियान के दौरान प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना में पात्र व्यक्तियों का पंजीकरण, जन सुरक्षा बीमा योजनाओं के लिए आधार सीडिंग, प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत नए खाते खोलने तथा निष्क्रिय खातों को पुन: सक्रिय करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के परिवारों के बैंक खाते खोलने, जन धन एवं अन्य बचत खातों के निर्बाध संचालन के लिए पुन: केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) प्रक्रिया पूरी करने तथा बचत खातों और बैंक लॉकरों में नामांकन दर्ज कराने अथवा उसे अद्यतन करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

शिविरों में नागरिकों को वित्तीय समावेशन, सुरक्षित डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही आपकी पूंजी, आपका अधिकार अभियान के माध्यम से दावा रहित वित्तीय परिसंपत्तियों के संबंध में जानकारी दी जा रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी किसानों से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण के आवेदन प्राप्त करने तथा आगामी रबी फसल के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

दीपक कुमार अभिषेक ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत 18 से 70 वर्ष की आयु के पात्र व्यक्तियों को 20 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर दुर्घटना से मृत्यु अथवा पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में दो लाख रुपये तक का बीमा संरक्षण मिलता है। वहीं, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत 18 से 50 वर्ष की आयु के पात्र व्यक्तियों को 436 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर किसी भी कारण से मृत्यु की स्थिति में दो लाख रुपये का बीमा संरक्षण उपलब्ध है। अटल पेंशन योजना के अंतर्गत निर्धारित अंशदान और पात्रता शर्तों के अनुसार 60 वर्ष की आयु के बाद मासिक पेंशन प्राप्त करने का प्रावधान है।

राज्य में यह अभियान सभी 33 जिलों के 146 विकासखंडों के अंतर्गत 11,689 ग्राम पंचायतों तथा शहरी स्थानीय निकायों में संचालित किया जा रहा है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने निकटतम बैंक शिविर में पहुंचकर पात्रता के अनुसार योजनाओं का लाभ लें, बैंक खातों से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराएं और वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के लिए जागरूक बनें। अभियान की प्रभावी सफलता के लिए राज्य सरकार, ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों से भी सक्रिय सहयोग की अपेक्षा की गई है।

मंत्री राजवाड़े के प्रयासों से छह परियोजना-सह-संसाधन केंद्रों के भवनों को मंजूरी

मंत्री राजवाड़े के प्रयासों से छह परियोजना-सह-संसाधन केंद्रों के भवनों को मंजूरी

 00 तीन जिलों में 2.70 करोड़ से बनेंगे भवन, विभागीय सेवाओं और योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन को मिलेगी मजबूती

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को मजबूत आधारभूत सुविधाओं के साथ जमीनी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से प्रदेश के छह परियोजना-सह-संसाधन केंद्रों के भवन निर्माण को स्वीकृति मिली है। राज्य शासन ने इन भवनों के लिए कुल 2 करोड़ 70 लाख 90 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रथम किस्त के रूप में 67 लाख 72 हजार 500 रुपये जारी करने की सहमति भी दी गई है। नए भवन सूरजपुर जिले के भैयाथान और ओडग़ी, रायगढ़ जिले के तमनार तथा बीजापुर जिले के बीजापुर, उसूर और भोपालपटनम में बनाए जाएंगे। प्रत्येक भवन के निर्माण के लिए 45 लाख 15 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बच्चों के विकास, स्वास्थ्य, पोषण तथा उनके अधिकारों और हितों के संरक्षण से जुड़ी अनेक योजनाओं और सेवाओं का संचालन करता है। परियोजना-सह-संसाधन केंद्र इन योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन, विभागीय अमले के समन्वय और सेवाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप भवनों का निर्माण विभागीय कार्यों के संचालन के लिए बेहतर और व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध कराएगा। यह स्वीकृति केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला एवं बाल विकास सेवाओं को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर आधारभूत सुविधा से विभागीय अमले को योजनाओं के क्रियान्वयन और हितग्राहियों से जुड़े कार्यों में सहूलियत मिलेगी। साथ ही, महिलाओं और बच्चों तक शासन की कल्याणकारी योजनाओं तथा सेवाओं की पहुंच आसान बनाने में मदद मिलेगी। दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में विभागीय गतिविधियों को मजबूत करने से शासन की जनकल्याणकारी पहलें अधिक व्यवस्थित रूप से लोगों तक पहुंच सकेंगी।

शासन के आदेश के अनुसार, अगली किस्त के प्रस्ताव के साथ प्रथम किस्त के उपयोग का प्रमाण-पत्र तथा निर्माण कार्य की भौतिक और वित्तीय प्रगति का विवरण प्रस्तुत करना होगा। स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित व्यय सीमा और शासन के नियमों के अनुरूप किया जाएगा।

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की विशेष पहल पर ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति, 6.60 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य स्वीकृत

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की विशेष पहल पर ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति, 6.60 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य स्वीकृत

 रायपुर- छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा की विशेष पहल पर 6 करोड़ 60 लाख 38 हजार रुपये की अनुमानित लागत के 67 निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी गई है। बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत इन कार्यों में विद्यालयों के अतिरिक्त कक्ष, नवीन आंगनबाड़ी भवन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के भवन, मुक्तिधामों में शेड एवं प्रतीक्षालय तथा नवीन पंचायत भवनों का निर्माण शामिल है। प्रस्तावित कार्यों के क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, पोषण, खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।

ग्रामीण अधोसंरचना के विस्तार से विकास को मिलेगी गति

 राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा के विशेष प्रयासों से बलौदाबाजार विधानसभा अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा रहा है। इसके तहत शिक्षा, पोषण, खाद्यान्न वितरण, पंचायत प्रशासन और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों के माध्यम से गांवों में बुनियादी अधोसंरचना की स्वीकृति दी गई है।

मंत्री  वर्मा ने कहा कि स्वीकृत किए गए निर्माण पूर्ण होने के बाद ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय सेवाओं का लाभ लेने में अधिक सुविधा होगी। इसके साथ ही निर्माण गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो सकेंगे। बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार करने की यह पहल शिक्षा, पोषण, खाद्य सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी ।

ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूती, 18 विद्यालयों में बनेंगे 36 अतिरिक्त कक्ष

ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 1 करोड़ 26 लाख रुपये की अनुमानित लागत से 18 शासकीय विद्यालयों में 36 अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। प्रत्येक विद्यालय में सात लाख रुपये की लागत से दो अतिरिक्त कक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव है। इनमें कोनारी, ताराशिव, टोहड़ा, भूमिया, तुलसी (मानपुर), सिलपट्टी, कोटा, देवरी, निनवा, बिलाड़ी, बुंदेली, सिरवे, छतौद, ओटगन, खम्हरिया, सतभांवा, सांकरा और चांपा के शासकीय विद्यालय शामिल हैं। अतिरिक्त कक्षों के निर्माण से विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध होगा तथा शैक्षणिक गतिविधियों के सुचारू संचालन में सहायता मिलेगी।

17 नवीन आंगनबाड़ी भवनों के लिए 2.04 करोड़ रुपये स्वीकृत

ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग की सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 2 करोड़ 4 लाख रुपये की अनुमानित लागत से 17 नवीन आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण के प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। प्रत्येक भवन की  लागत 12 लाख रुपये निर्धारित है। मोहगांव, चांपा, टोहड़ा, नकटी, सतभांवा, चंगोरी, खुड़मुड़ी, लखना, सड्डू, मोहदा, तरपोंगी, सुंगेरा, सगुनी, सिलपट्टी, केवतरा, देवरी और सरारडीह में नवीन आंगनबाड़ी भवन प्रस्तावित हैं। इन भवनों के निर्माण से छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध होगा। साथ ही पोषण आहार वितरण, प्रारंभिक बाल शिक्षा और मातृ-शिशु कल्याण से संबंधित गतिविधियों के संचालन में सुविधा मिलेगी।

17 गांवों में 2.12 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनेंगे पीडीएस भवन

ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 2 करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपये की अनुमानित लागत से 17 पीडीएस भवनों के निर्माण के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। प्रत्येक भवन की लागत 12 लाख 50 हजार रुपये निर्धारित है। इनमें खपरीकला, टंडवा, सरारीडीह, छपोरा, सरोरा, बोईरझिटी, भिलौनी, बरतोरी, मानपुर, तरपोंगी, जलसो, खम्हरिया, सड्डू, निनवा, अल्दा, कोटा और तुलसी (मानपुर) शामिल हैं। इन भवनों के निर्माण से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न भंडारण और वितरण की व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी। ग्रामीण उपभोक्ताओं को राशन प्राप्त करने के लिए अधिक सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी।

13 मुक्तिधामों में लगभग 78 लाख रुपये से विकसित होंगी सुविधाएं

ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार स्थलों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 13 मुक्तिधामों में शेड सहित प्रतीक्षालय निर्माण के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इन कार्यों की कुल अनुमानित लागत 77 लाख 98 हजार रुपये है। परसदा (जोता), जलसो, मानपुर, बलौद खुर्द, सगुनी, सड्डू, परसदा, सरोरा, बिलाड़ी, सिरवे, खपर खुर्द, छपोरा और बोईरझिट में ये निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं। इनके पूर्ण होने से अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले ग्रामीणों को विशेष रूप से गर्मी और बरसात के मौसम में सुविधाएं मिल सकेंगी।

छतौद और ताराशिव में 39.90 लाख रुपये से नवीन पंचायत भवन स्वीकृत

ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए छतौद और ताराशिव में नवीन पंचायत भवनों के निर्माण की स्वीकृत दी गई हैं। दोनों भवनों की कुल अनुमानित लागत 39 लाख 90 हजार रुपये है। प्रत्येक पंचायत भवन के निर्माण पर 19 लाख 95 हजार रुपये व्यय होने का अनुमान है। नवीन पंचायत भवनों से ग्राम सभा, पंचायत बैठकों, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्रामीणों से संबंधित प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध होगी।

Train Cancelled : रेल यात्रियों की फिर बढ़ेगी मुश्किलें, 50 से ज्यादा ट्रेन इस दिन रहेंगी रद्द, सफर करने से पहले जरूर देख लें ये लिस्ट…

Train Cancelled : रेल यात्रियों की फिर बढ़ेगी मुश्किलें, 50 से ज्यादा ट्रेन इस दिन रहेंगी रद्द, सफर करने से पहले जरूर देख लें ये लिस्ट…

 रायपुर। रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर है। झारसुगुड़ा पैसेंजर यार्ड में 27 नवंबर से 17 दिसंबर तक नॉन इंटरलॉकिंग का कार्य किया जाएगा। इसके चलते दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से जुड़ी कई यात्री ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहेगा। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले ट्रेनों की स्थिति जरूर जांच लें।

रद्द होने वाली गाडियां-

29 नवम्बर और 01 से 16 दिसम्बर तक गाड़ी संख्या 18109/18110 टाटानगर–नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी- टाटानगर एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
26 नवम्बर, 03 दिसम्बर और 12 दिसम्बर को हावड़ा से चलने वाली 12222 हावड़ा–पुणे दुरंतो एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
28 नवम्बर, 05 दिसम्बर और 14 दिसम्बर को पुणे से चलने वाली 12221 पुणे-हावड़ा दुरंतो एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
28 नवम्बर तथा 05, 08 और 12 दिसम्बर को चर्लपल्ली से चलने वाली 17007 चर्लपल्ली – दरभंगा एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
01, 08, 11 और 15 दिसम्बर को दरभंगा से चलने वाली 17008 दरभंगा-चर्लपल्ली एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
04, 05 और 07 से 15 दिसम्बर तक टाटा से चलने वाली 18113 टाटानगर-बिलासपुर एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
05, 06 और 08 से 16 दिसम्बर तक बिलासपुर से चलने वाली 18114 बिलासपुर-टाटानगर एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
05 और 12 दिसम्बर को सांतरागाछी से चलने वाली 20822 सांतरागाछी-पुणे एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
07 और 14 दिसम्बर को पुणे से चलने वाली 20821 पुणे-सांतरागाछी एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
07 और 14 दिसम्बर को तिरुपति से चलने वाली 17433 तिरुपति-रक्सौल एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
10 और 17 दिसम्बर को रक्सौल से चलने वाली 17434 रक्सौल-तिरुपति एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
05 और 12 दिसम्बर को मालदा टाउन से चलने वाली 13425 मालदा टाउन-सूरत एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
07 और 14 दिसम्बर को सूरत से चलने वाली 13426 सूरत-मालदा टाउन एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
05 और 12 दिसम्बर को कामाख्या से चलने वाली 22512 कामाख्या-एलटीटी एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
08 और 15 दिसम्बर को एलटीटी से चलने वाली 22511 एलटीटी-कामाख्या एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
09 दिसम्बर को रानी कमलापति से चलने वाली 22169 रानी कमलापति-सांतरागाछी हमसफर एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
10 दिसम्बर को सांतरागाछी से चलने वाली 22170 सांतरागाछी-रानी कमलापति हमसफर एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
07 और 11 दिसम्बर को हटिया से चलने वाली 22846 हटिया-पुणे एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
09 और 13 दिसम्बर को पुणे से चलने वाली 22845 पुणे-हटिया एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
05 और 12 दिसम्बर को शालीमार से चलने वाली 22830 शालीमार-भुज एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
08 और 15 दिसम्बर को भुज से चलने वाली 22829 भुज-शालीमार एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
09 दिसम्बर को सांतरागाछी से चलने वाली 20828 सांतरागाछी-जबलपुर हमसफर एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
10 दिसम्बर को जबलपुर से चलने वाली 20827 जबलपुर-सांतरागाछी हमसफर एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
09 दिसम्बर को गया से चलने वाली 22358 गया-एलटीटी एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
11 दिसम्बर को एलटीटी से चलने वाली 22357 एलटीटी-गया एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
08 और 10 दिसम्बर को हटिया से चलने वाली 18641 हटिया-दुर्ग एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
09 और 11 दिसम्बर को दुर्ग से चलने वाली 18642 दुर्ग-हटिया एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
09 और 10 दिसम्बर को एलटीटी से चलने वाली 12151 एलटीटी-शालीमार एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
11 और 12 दिसम्बर को शालीमार से चलने वाली 12152 शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
11 दिसम्बर को बिलासपुर से चलने वाली 22843 बिलासपुर-बक्सर एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
12 दिसम्बर को बक्सर से चलने वाली 22844 बक्सर-बिलासपुर एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
11 और 12 दिसम्बर को हटिया से चलने वाली 12812 हटिया-एलटीटी एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
13 और 14 दिसम्बर को एलटीटी से चलने वाली 12811 एलटीटी-हटिया एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
10 दिसम्बर को हैदराबाद से चलने वाली 17005 हैदराबाद-रक्सौल एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
13 दिसम्बर को रक्सौल से चलने वाली 17006 रक्सौल-हैदराबाद एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
11 दिसम्बर को पोरबंदर से चलने वाली 12949 पोरबंदर-सांतरागाछी एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
13 दिसम्बर को सांतरागाछी से चलने वाली 12950 सांतरागाछी-पोरबंदर एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
11 दिसम्बर को वास्को द गामा से चलने वाली 17321 वास्को द गामा–जसीडीह एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
14 दिसम्बर को जसीडीह से चलने वाली 17322 जसीडीह-वास्को द गामा एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
13 दिसम्बर को ओखा से चलने वाली 22905 ओखा-शालीमार एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
15 दिसम्बर को शालीमार से चलने वाली 22906 शालीमार-ओखा एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
14 दिसम्बर को एलटीटी से चलने वाली 12101 एलटीटी-शालीमार एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
16 दिसम्बर को शालीमार से चलने वाली 12102 शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
12 दिसम्बर को उदयपुर से चलने वाली 20971 उदयपुर-शालीमार एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
13 दिसम्बर को शालीमार से चलने वाली 20972 शालीमार-उदयपुर एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
07, 14, 15 और 16 दिसम्बर को हावड़ा से चलने वाली 12262 हावड़ा-पुणे दुरंतो एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
08, 15, 16 और 17 दिसम्बर को पुणे से चलने वाली 12261 पुणे-हावड़ा दुरंतो एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
14 दिसम्बर को हावड़ा से चलने वाली 12834 हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
17 दिसम्बर को अहमदाबाद से चलने वाली 12833 अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
14 दिसम्बर को नांदेड़ से चलने वाली 12767 नांदेड़-सांतरागाछी एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
16 दिसम्बर को सांतरागाछी से चलने वाली 12768 सांतरागाछी-नांदेड़ एक्सप्रेस रद्द रहेगी।
परिवर्तित मार्ग से चलने वाली गाड़ी–
28 नवम्बर, 05 दिसम्बर एवं 07 से 14 दिसम्बर तक योगनगरी ऋषिकेश से चलने वाली 18478 योगनगरी ऋषिकेश-पुरी उत्कल एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग व्हाया ईब-झारसुगुड़ा रोड-सम्बलपुर सिटी-अंगुल-कटक के रास्ते पुरी जाएगी।

06 दिसम्बर से 15 दिसम्बर तक पुरी से चलने वाली 18477 पुरी-योगनगरी ऋषिकेश उत्कल एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग व्हाया कटक-अंगुल-सम्बलपुर सिटी-झारसुगुड़ा रोड- ईब के रास्ते योगनगरी ऋषिकेश जाएगी।

गंतव्य से पहले समाप्त और प्रारम्भ होने वाली गाडियां-
28 नवम्बर तथा 04 से 15 दिसम्बर तक आरा से चलने वाली 13288 आरा-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस, राउरकेला स्टेशन में समाप्त होगी तथा राउरकेला-दुर्ग के मध्य रद्द रहेगी।

29 नवम्बर तथा 05 से 16 दिसम्बर तक दुर्ग से चलने वाली 13287 दुर्ग-आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस राउरकेला स्टेशन से प्रारम्भ होगी तथा दुर्ग-राउरकेला के मध्य रद्द रहेगी।

विलंब से रवाना होने वाली गाड़ी-

14 दिसम्बर को पुणे से रवाना होने वाली 12129 पुणे-हावड़ा आजाद हिंद एक्सप्रेस, 02 घंटे विलंब से रवाना होगी।

यात्री असुविधा से बचने के लिए रेलवे द्वारा अधिकृत रेलवे पूछताछ सेवा NTES/139 से गाड़ी की सही स्थिति की जानकारी हासिल कर यात्रा करें।

Police Transfer: थानेदारों का हुआ तबादला, एसएसपी ने जारी किया आदेश, जानिए किसे कहां की मिली जिम्मेदारी, देखें लिस्ट…

Police Transfer: थानेदारों का हुआ तबादला, एसएसपी ने जारी किया आदेश, जानिए किसे कहां की मिली जिम्मेदारी, देखें लिस्ट…

 बिलासपुर। एसएसपी रजनेश सिंह ने बिलासपुर जिले में पुलिसिंग में प्रशासनिक कसावट हेतु 10 निरीक्षकों के तबादला आदेश जारी किए हैं। सिविल लाइन, सिरगिट्टी के साथ ही नगर कोतवाल भी बदले गए हैं। दूसरे जिलों से तबादले में आए रक्षित केंद्र में आमद देने वाले निरीक्षकों को भी थानों में पोस्टिंग दी गई है।

देखें लिस्ट…

ब्रेकिंग : उप संचालक पर गिरी निलंबन की गाज, गंभीर शिकायतों पर हुआ एक्शन, आदेश जारी…

ब्रेकिंग : उप संचालक पर गिरी निलंबन की गाज, गंभीर शिकायतों पर हुआ एक्शन, आदेश जारी…

 बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में समीक्षा बैठक के दौरान कथित तौर पर आक्रोशित भाषा का प्रयोग करने और वरिष्ठ अधिकारी के साथ अनुचित व्यवहार करने के मामले में बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। राज्य शासन ने नगर और ग्राम निवेश विभाग के उप संचालक बी.एल. बांधे को निलंबित कर दिया है, जिसका आदेश भी जारी कर दिया गया है।

जानिए पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, समय सीमा की बैठक के दौरान कार्यों को लेकर समीक्षा की जा रही थी। इसी दौरान जब उप संचालक बी.एल. बांधे से उनके विभाग से संबंधित प्रश्न पूछा गया, तो उनके जवाब देने का तरीका सही नहीं था। इसके बाद कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से किया था।

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 का उल्लंघन

आवास एवं पर्यावरण विभाग, मंत्रालय नवा रायपुर की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि समीक्षा बैठक के दौरान आक्रोशित भाषा का प्रयोग करना और वरिष्ठ अधिकारी के साथ उचित व्यवहार नहीं करना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 का उल्लंघन है। इसे देखते हुए राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

निलंबन अवधि के दौरान बी.एल. बांधे का मुख्यालय संचालनालय, नगर और ग्राम निवेश, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर अटल नगर निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्हें मूलभूत नियम 53 के तहत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर छत्तीसगढ़ में उच्च स्तरीय बैठक संपन्न

मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर छत्तीसगढ़ में उच्च स्तरीय बैठक संपन्न

 रायपुर। मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ राज्य के प्रमुख विषयों और उत्कृष्ट पहलों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए आज मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पिछले राष्ट्रीय सम्मेलन से जुड़े विषयों पर चर्चा के साथ-साथ एक्शन ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से कार्यों की प्रगति और गुणात्मक सुधार की समीक्षा की गई।
शिक्षा, स्वास्थ्य और नवाचारों पर विशेष जोर
बैठक में मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों के सचिवों को निर्देश दिए कि आगामी राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्य के नवाचारों और गुणात्मक सुधारों को प्रमुखता से रखा जाए। उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य और पोषण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किए गए उत्कृष्ट कार्यों की जानकारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर तैयार करने के निर्देश दिए ताकि राज्य के प्रयासों और सकारात्मक परिणामों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
आंगनबाड़ी केंद्रों में खिलौना बैंक की अनूठी पहल
बैठक के दौरान राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित खिलौना बैंक की पहल की विशेष रूप से सराहना की गई। इस अभिनव योजना के तहत लोग अपने बच्चों के पुराने खिलौने जमा करते हैं, जिनका उपयोग आंगनबाड़ी के बच्चों के मानसिक विकास और उनके सुपोषण के प्रति जनजागुरूकेंट बढ़ाने के लिए किया जाता है। अब तक इस पहल के अंतर्गत एक लाख से अधिक खिलौने जमा किए जा चुके हैं।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों पर केंद्रित सत्र
बैठक में यह जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय सम्मेलन में विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए मुख्य रूप से चार सत्र आयोजित किए जाएंगे। विकसित भारत के लिए विशिष्ट प्राथमिकताएं और उद्देश्य, आर्थिक विकास एवं राज्य के वित्त को मजबूत बनाने में खनन क्षेत्र की भूमिका, सुशासन में तकनीक का प्रभावी उपयोग, सड़क व अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए नए विचार और बेहतर कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य एवं पोषण, गैर- कृषि कार्यों में उर्वरकों के दुरुपयोग पर नियंत्रण, प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देने और अंतरराज्यीय प्रतिस्पर्धा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, खाद्य विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, कौशल विकास विभाग के सचिव बसवराजू एस., राजस्व विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, आदिम जाति विभाग के सचिव भूवनेश यादव, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा, तथा मुख्यमंत्री के विशेष सचिव एवं आयुक्त जनसंपर्क रजत बंसल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

दशकों तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस बताये की उसने जनजातीय समाज के लिए क्या किया? - सीएम साय

दशकों तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस बताये की उसने जनजातीय समाज के लिए क्या किया? - सीएम साय

 0 जनजातीय समाज को केवल वोट बैंक मानती रही कांग्रेस, हमारी सरकार ने सम्मान, अधिकार और विकास को प्राथमिकता दी

रायपुर। कांग्रेस ने हमेशा जनजातीय समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखा। यही कारण है कि जनजातीय समाज ने कांग्रेस को छोड़ दिया। 55-60 वर्षों तक देश में शासन करने वाली कांग्रेस अब बताए कि उसने जनजातीय समाज के जीवन में वास्तविक बदलाव के लिए क्या किया? कांग्रेस द्वारा बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में शामिल होने आई महामहिम राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान प्रशासनिक तैयारियों को प्रशासनिक दखलंदाजी बताए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उक्त बातें कही। वे मीडिया के प्रश्नों का जवाब दे रहे थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार जनजातीय समाज के सम्मान, अधिकार और सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जनजातीय समाज के कल्याण और विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता में रखा है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के विकास, शिक्षा, आजीविका और सशक्तीकरण के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य हो रहा है। छत्तीसगढ़ में भी विभिन्न विकास प्राधिकरणों और योजनाओं के जरिए जनजातीय अंचलों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को तेज गति दी जा रही है।

साय ने कहा कि बस्तर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों तथा हमारे सुरक्षा बलों के साहस और पराक्रम से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी भय और हिंसा का माहौल था, आज वहाँ सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के नए अवसर पहुँच रहे हैं। दूरस्थ गाँव विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और बस्तर शांति एवं विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को आरोप लगाने से पहले अपने लंबे शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। आज जनजातीय समाज जागरूक है। वह साफ देख रहा है कि किसने केवल उसके नाम पर राजनीति की और किसने उसके सम्मान, सुरक्षा तथा विकास के लिए जमीन पर काम किया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं और जनजातीय संस्कृति की सराहना की

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं और जनजातीय संस्कृति की सराहना की

 00 बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता, सामूहिक आस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक - राष्ट्रपति मुर्मु

 

00 माओवाद से मुक्त बस्तर में अब नवनिर्माण और विकास की बारी - मुख्यमंत्री साय

 
 
 

00 अब मांझियों को 5000 रूपए और चालकियों को 3500 मिलेगा मासिक मानदेय
रायपुर।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने बस्तर दशहरा की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और जनजातीय विरासत का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह अनूठा उत्सव विभिन्न समुदायों को एक सूत्र में बांधने और पीढिय़ों से चली आ रही परंपराओं को संरक्षित रखने का उत्कृष्ट उदाहरण है।

 

राष्ट्रपति ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि बस्तर दशहरा जैसे विश्वप्रसिद्ध उत्सव में शामिल होना उनके लिए विशेष प्रसन्नता का विषय है। इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता रहती है। रथ निर्माण से लेकर रथ खींचने, पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों तक प्रत्येक समुदाय अपनी परंपरागत जिम्मेदारी का निर्वहन करता है। यह सामूहिक सहभागिता सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक निरंतरता का असाधारण उदाहरण है।

 
 

मुरिया दरबार लोकतांत्रिक परंपराओं का उत्कृष्ट उदाहरण-राष्ट्रपति
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बस्तर दशहरा के अंतर्गत आयोजित होने वाले मुरिया दरबार की परंपरा को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं, आवश्यकताओं और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। सामूहिक संवाद के माध्यम से निकाले गए समाधान समाज की खुशहाली और आपसी सहयोग का मार्ग प्रशस्त करते हैं। ऐसी परंपराएं भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को नई प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि लगभग दो माह पूर्व राष्ट्रपति भवन में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से उनकी मुलाकात हुई थी। इसमें बस्तर पंडुम के विजेताओं के साथ बस्तर के परगना मांझी और चालकी भी शामिल थे। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को अवसर देना आवश्यक
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज में अपार प्रतिभा और संभावनाएं हैं। उचित अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन उपलब्ध होने पर जनजातीय समाज के बेटे-बेटियां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक में जनजातीय युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि खेल प्रतिभाओं को उचित मंच मिलने से बस्तर के युवा भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं और ओलंपिक जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ा सकते हैं। राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या से मुक्ति और सुरक्षा एवं विकास के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की पीड़ा से मुक्त होकर यह क्षेत्र प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के युवा और जनजातीय समुदाय के लोग अपनी प्रतिभा, परिश्रम और सहभागिता से देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
दंडकारण्य की सांस्कृतिक स्मृतियों में रची-बसी है बस्तर की विरासत
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बस्तर क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण में इस अंचल का संबंध दंडकारण्य से जोड़ा जाता है। भगवान श्रीराम के वनवास से संबंधित अनेक प्रसंग इस क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों में विद्यमान हैं। माता शबरी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की पवित्रता और माता शबरी की भक्ति से प्रेरणा लेकर समाज को नैतिकता, मर्यादा और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
प्रकृति संरक्षण जनजातीय जीवन दर्शन का अभिन्न हिस्सा
राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रकृति पूजा की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि पेड़-पौधों, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान इस समाज की विशिष्ट पहचान है। जनजातीय परंपराओं में पेड़-पौधों को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवनदाता के रूप में देखा जाता है। प्रकृति हमें ऑक्सीजन, जल, फल, फूल, भोजन और औषधियां प्रदान करती है। इसलिए प्रकृति की पूजा के साथ-साथ उसका संरक्षण और संवर्धन भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक संसाधन अमूल्य धरोहर हैं। इनका उपयोग आवश्यकता के अनुरूप करते हुए इनके संरक्षण और क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। एक वृक्ष को विकसित होने में कई दशक लगते हैं, इसलिए वनों की रक्षा और अधिकाधिक पौधरोपण भविष्य की पीढिय़ों के लिए जरूरी है। उन्होंने सभी नागरिकों, विशेषकर जनजातीय समाज के लोगों से अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने और जंगलों को हरा-भरा बनाए रखने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं। जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जोडऩे के प्रयास समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर उपलब्ध कराकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनजातीय समाज की भागीदारी और अधिक मजबूत होगी। बस्तर दशहरा के पारंपरिक अनुष्ठानों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कुटुम्ब जात्रा के माध्यम से ग्राम देवी-देवताओं की विदाई तथा 27 अक्टूबर को माँ दंतेश्वरी और देवी मावली की डोली विदाई जैसे आयोजनों को इस उत्सव की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का परिचायक बताया। उन्होंने माँ दंतेश्वरी से बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य, छत्तीसगढ़ की प्रगति और समग्र विकास की कामना की।

 

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बस्तर दशहरा और विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतांत्रिक मूल्य हमारी सभ्यता एवं संस्कारों में गहराई से रचे-बसे हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिकता जनजातीय समाज की जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। गांवों में सामाजिक निर्णय मिल-बैठकर लिए जाते हैं। बड़ों की बात सुनना और प्रत्येक व्यक्ति की आवाज को सम्मान देना जनजातीय समाज की सहज परंपरा रही है। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी भव्यता के साथ समाज को साथ लेकर चलने की सीख भी देता है। रथ के लिए लकड़ी लाने से लेकर उसके निर्माण और संचालन तक विभिन्न गांवों एवं समुदायों के लोग अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। राजशाही की समाप्ति के बाद भी यह परंपरा निरंतर जारी रही और जनतांत्रिक संवाद के सशक्त मंच के रूप में विकसित हुई।
उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार यह संदेश देते हैं कि संवाद ही समाधान का मार्ग है। जब शासन और समाज आमने-सामने बैठकर चर्चा करते हैं, तब कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने मांझी, मुखिया, पुजारी, कारीगरों, रथ निर्माताओं, कलाकारों और स्थानीय प्रशासन सहित उन सभी लोगों के योगदान की सराहना की, जिनके सामूहिक परिश्रम और श्रद्धा से यह विश्वप्रसिद्ध परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित बस्तर दशहरा उत्सव में स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का बस्तर की धरती से गहरा जुड़ाव रहा है। इसी वर्ष फरवरी में उन्होंने बस्तर पंडुम का शुभारंभ किया था। इसके बाद बस्तर पंडुम के विजेताओं को सम्मानित करने के साथ राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। आज बस्तर दशहरा में उनकी उपस्थिति से समस्त बस्तरवासियों का उत्साह बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुरिया दरबार जनजातीय संस्कृति और लोकतांत्रिक परंपराओं की सुंदर अभिव्यक्ति है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा बस्तर की लोक संस्कृति का आईना है। इसकी रस्में जनजातीय समाज में निहित समतामूलक विचारों, सामूहिक सहभागिता और आपसी विश्वास को प्रदर्शित करती हैं।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष बस्तर दशहरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक ओर राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति से उत्सव की प्रतिष्ठा बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बस्तर पंडुम के माध्यम से यहां की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को देश-विदेश तक पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बस्तर की समृद्धि और विकास के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन योजना के तहत अंदरूनी बसाहटों को सड़क मार्ग से जोडऩे का कार्य किया जा रहा है। जहां सड़कें बन चुकी हैं, वहां मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के माध्यम से परिवहन सुविधाओं के विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि रायपुर से रावघाट तक नई रेल सेवा प्रारंभ की गई है तथा रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर कार्य जारी है। रायपुर से विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा बस्तर क्षेत्र से गुजरता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे की व्यवस्था हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं। वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रारंभ किया गया है तथा गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू हो गया है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से बस्तर को देश का अग्रणी संभाग बनाने तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने माँ दंतेश्वरी, माँ मावली और बस्तर अंचल के समस्त ग्राम देवी-देवताओं को नमन करते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी अवधि, विशिष्ट परंपराओं, आस्था और व्यापक जनभागीदारी के कारण देश के अन्य उत्सवों से अलग पहचान रखता है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की जीवंत सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने परंपरागत प्रतिनिधियों के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मांझियों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये तथा चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया गया है। यह निर्णय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले परंपरागत प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, विधायक कोण्डागांव सुश्री लता उसेंडी, महापौर संजय पाण्डे सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी श्री शलभ सिन्हा सहित पारंपरिक मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन, नाइक-पाइक और बस्तर दशहरा समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय के प्रयासों से जशपुर में आकार ले रही 3147 करोड़ रुपये की भारतमाला परियोजना

मुख्यमंत्री साय के प्रयासों से जशपुर में आकार ले रही 3147 करोड़ रुपये की भारतमाला परियोजना

 00 रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर से बदलेगी जशपुर की तस्वीर, राजधानी रायपुर तक का सफर होगा आसान

 

00 रायपुर तक यात्रा का समय घटकर 5 से 6 घंटे होने की उम्मीद, बिलासपुर, कोरबा और झारखंड से भी बेहतर होगा सड़क संपर्क

 
 

रायपुर।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों से जशपुर जिले में सड़क अधोसंरचना के विकास को नई गति मिल रही है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण जशपुर जिले में आकार लेने लगा है। जिले में लगभग 3147 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रही इस सड़क परियोजना के पूर्ण होने से जशपुर का राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों और पड़ोसी राज्यों से सड़क संपर्क अधिक सुगम होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से जिले में व्यापार, पर्यटन, कृषि आधारित गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

 

निर्माणाधीन इकोनॉमिक कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 707 किलोमीटर बताई गई है, जिसमें लगभग 104 किलोमीटर सड़क जशपुर जिले से होकर गुजरेगी। यह फोरलेन सड़क रायपुर और धनबाद के बीच आवागमन को अधिक सुविधाजनक बनाने के साथ जशपुर, पत्थलगांव और आसपास के क्षेत्रों को व्यापक सड़क नेटवर्क से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश की राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर, ऊर्जाधानी कोरबा और पड़ोसी राज्य झारखंड की ओर आवागमन की सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है।

राजधानी रायपुर तक का सफर होगा आसान, यात्रा समय में आएगी उल्लेखनीय कमी
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत विकसित हो रहे इकोनॉमिक कॉरिडोर से जशपुर जिले के लोगों को सबसे बड़ा लाभ यात्रा समय में कमी के रूप में मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में जशपुर से राजधानी रायपुर तक सड़क मार्ग से यात्रा करने में लंबा समय लगता है। परियोजना के पूर्ण होने पर बेहतर फोरलेन सड़क और सुगम यातायात व्यवस्था से यात्रा अवधि में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। उपलब्ध परियोजना संबंधी जानकारी के अनुसार, संबंधित मार्गों पर यात्रा अवधि लगभग 14 घंटे से घटकर 8 से 9 घंटे होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। वहीं जशपुर से रायपुर तक का सफर भविष्य में लगभग 5 से 6 घंटे में पूरा होने की उम्मीद भी जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक यात्रा अवधि मार्ग की उपलब्धता, यातायात की स्थिति और परियोजना के पूर्ण संचालन पर निर्भर करेगी। सड़क संपर्क बेहतर होने से जिले के नागरिकों को राजधानी रायपुर और अन्य बड़े शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च शिक्षा, व्यापार और प्रशासनिक कार्यों के लिए आने-जाने में सहूलियत होगी।
व्यापार, कृषि और रोजगार के नए अवसरों को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर जशपुर जिले की आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क विकसित होने से किसानों को अपनी कृषि उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। विशेष रूप से उद्यानिकी फसलों, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों के परिवहन में लगने वाला समय कम होने से किसानों और व्यापारियों को लाभ मिलने की संभावना है। जशपुर जिला कृषि, वनोपज, हस्तशिल्प और ग्रामीण आजीविका गतिविधियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण संभावनाएं रखता है। आधुनिक सड़क संपर्क से स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने, व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार और नए उद्यमों के विकास के अवसर बढ़ सकते हैं। सड़क निर्माण और परिवहन सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाओं को भी बल मिलेगा।
जशपुर के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान, पर्यटकों की पहुंच होगी आसान
प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों, पर्वतीय क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए प्रसिद्ध जशपुर जिले में पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। बेहतर सड़क संपर्क के अभाव में कई पर्यटकों को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने में अधिक समय लगता है। भारतमाला परियोजना के पूर्ण होने से देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के लिए जशपुर पहुंचना अधिक सुविधाजनक होगा।
जिले के प्रसिद्ध मयाली नेचर कैंप, मधेश्वर पर्वत, रानीदाह जलप्रपात, कैलाश गुफा और अन्य प्राकृतिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच को बेहतर सड़क नेटवर्क से अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। पर्यटकों की आवाजाही बढऩे से होटल, होमस्टे, स्थानीय परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों को प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित हो सकेंगे।
आधुनिक सड़क संरचनाओं से सुरक्षित और व्यवस्थित होगा आवागमन
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत विकसित किए जा रहे इकोनॉमिक कॉरिडोर में यातायात को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए आधुनिक सड़क संरचनाओं का प्रावधान किया जा रहा है। विभिन्न स्थानों पर अंडरपास, वाहन अंडरपास और वन्यजीवों की आवाजाही के अनुकूल संरचनाओं जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य मुख्य मार्ग पर यातायात को व्यवस्थित रखने के साथ स्थानीय नागरिकों और वाहनों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाना है। वन्यजीवों के आवागमन से संबंधित संरचनाएं पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होंगी। आधुनिक सड़क अधोसंरचना विकसित होने से लंबी दूरी के यात्री वाहनों और मालवाहक वाहनों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सड़क के साथ रेल कनेक्टिविटी की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में सड़क और रेल संपर्क के विस्तार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। भारतमाला परियोजना के साथ कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य को गति मिली है। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राज्य राजमार्गों के अंतर्गत विभिन्न सड़कों का निर्माण एवं उन्नयन कराया जा रहा है। जिले के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित रेल संपर्क की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। लोहरदगा से धरमजयगढ़ तक प्रस्तावित रेल लाइन से संबंधित स्वीकृति की जानकारी केंद्रीय राजपत्र में प्रकाशित की गई है। यह रेल परियोजना आगे बढऩे पर जशपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के लिए रेल संपर्क के नए अवसर उपलब्ध करा सकती है। रेल और सड़क नेटवर्क का विस्तार भविष्य में जिले के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को गति देने में सहायक होगा।
दूरस्थ जनजातीय अंचल को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पिछले लगभग तीन वर्षों में सड़क, पुल-पुलिया और अन्य परिवहन अधोसंरचना के विकास के लिए अनेक परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे जशपुर जिले की प्रदेश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों और पड़ोसी राज्यों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजना के पूर्ण होने पर आवागमन की सुविधा बढऩे के साथ व्यापार, पर्यटन, कृषि और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार को भी प्रोत्साहन मिलेगा। आधुनिक सड़क नेटवर्क के विकास से जशपुर जिले में आर्थिक अवसरों का विस्तार होगा और दूरस्थ अंचलों को बेहतर परिवहन सुविधाओं से जोडऩे की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल होगी।

बस्तर दशहरा: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की मुरिया दरबार की सराहना, बोलीं- आदिवासी परंपरा और विरासत को सहेजना जरूरी

बस्तर दशहरा: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की मुरिया दरबार की सराहना, बोलीं- आदिवासी परंपरा और विरासत को सहेजना जरूरी

 जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुरिया दरबार की परंपरा की प्रशंसा की। उन्होंने आदिवासी समाज से अपने पारंपरिक रीति-रिवाज, आपसी एकता और सांस्कृतिक विरासत को कायम रखने की अपील की। राष्ट्रपति ने कहा कि वह खुद इसी संस्कृति से जुड़ी रही है। उनके दादा और पिता मांझी की भूमिका निभाते थे, इसलिए वह इस व्यवस्था और इसकी परंपराओं को समझती है।

मुरिया दरबार को मजबूत बनाए रखने की अपील

मुरिया दरबार में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शासन की व्यवस्थाएं समय के साथ बदलती रही है। पहले राजाओं का शासन था, फिर अंग्रेज आए और बाद में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई। इन बदलावों के बीच आदिवासी समाज ने अपने पारंपरिक नियमों और सामुदायिक जीवन को बनाए रखा है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की खूबसूरती आपसी मेलजोल, शांति और मिलकर त्योहार मनाने की परंपरा में है। गांवों में मांझी और परगना जैसे पारंपरिक नेतृत्वकर्ता बैठकों के जरिए लोगों की समस्याओं का समाधान करते है। इस व्यवस्था को सामाजिक एकता का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए राष्ट्रपति ने इसे सम्मान देने की बात कही।

गांव में ही सुलझाएं विवाद, पारंपरिक व्यवस्था का करें सम्मान

राष्ट्रपति ने कहा कि आज छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए लोग थाने और अदालतों तक पहुंचते है, जहां मामलों के निपटारे में समय और धन खर्च हो सकता है। उन्होंने गांवों में सामुदायिक स्तर पर समस्याओं के समाधान की परंपरा को बनाए रखने पर जोर दिया।

उन्होंने मुरिया दरबार को प्रभावशाली पारंपरिक व्यवस्था बताते हुए कहा कि गांव की भलाई के लिए लोग एक साथ पूजा-पाठ और दूसरे सामुदायिक कार्य करते है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि इस तरह की परंपराएं भाईचारे और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि मुरिया दरबार की व्यवस्था लगातार जारी रहनी चाहिए, ताकि समाज अपनी पहचान और विरासत को सुरक्षित रख सके।

बस्तर दशहरा में सभी समाजों की भागीदारी विशेष

लालबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने सभी को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा में विभिन्न समाजों की भागीदारी इस उत्सव को खास बनाती है। यह आयोजन लोगों को आपस में जोड़ने और सामाजिक आत्मीयता बढ़ाने का काम करता है।

राष्ट्रपति ने बताया कि मांझियों ने उन्हें मुरिया दरबार की परंपरा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस व्यवस्था को जमीन से जुड़ा हुआ बताया और कहा कि ऐसी पारंपरिक संस्थाएं लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करने में योगदान दे सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान उन्हें बस्तर पंडुम में शामिल होने का निमंत्रण मिला था।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलाव और बस्तर ओलंपिक का जिक्र

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से प्रभावित लोगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों से नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को राहत मिली है और वे आगे बढ़ रहे है। उनके मुताबिक, देश के दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों को भी इन बदलावों से नई ऊर्जा मिली है।

उन्होंने बस्तर में आयोजित बस्तर ओलंपिक का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें आदिवासी युवाओं ने भाग लिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र के खिलाड़ी आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकते है और ओलंपिक में पदक जीतने की दिशा में आगे बढ़ सकते है।

दंडकारण्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख

राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर भी बात की। उन्होंने दंडकारण्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका जिक्र वाल्मीकि रामायण में मिलता है। राम, सीता और लक्ष्मण के वनवास से जुड़ी मान्यताएं इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। उन्होंने माता शबरी से भगवान राम की भेंट और रावण वध से जुड़ी कथाओं का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इस विरासत की पवित्रता को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि जनजातीय समाज में आज भी राम, लक्ष्मण और सीता से जुड़ी परंपराओं और कथाओं का विशेष स्थान है।

प्रकृति और जंगलों का संरक्षण समाज की जिम्मेदारी

राष्ट्रपति मुर्मू ने छत्तीसगढ़ में विकास की संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जुड़ने के अवसर बढ़ने से क्षेत्र के विकास को गति मिल सकती है। उन्होंने आदिवासी समाज की प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली की प्रशंसा की, जिसमें पेड़-पौधों, पत्थरों और मिट्टी को विशेष महत्व दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे भोजन, जलवायु और जीवन के लिए जरूरी प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े है। जंगल और पहाड़ पर्यावरण के संतुलन में अहम भूमिका निभाते है। इसलिए इनका संरक्षण करना सभी का साझा दायित्व है।

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में आदिवासी समाज की परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान, आपसी भाईचारे और प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया।