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इस दिन बंद रहेंगी मांस-मटन की दुकानें, होटल-रेस्टोरेंट में भी नॉनवेज पर बैन; उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

इस दिन बंद रहेंगी मांस-मटन की दुकानें, होटल-रेस्टोरेंट में भी नॉनवेज पर बैन; उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

 रायपुर। राजधानी रायपुर में दिवाली के अवसर पर मांस-मटन की बिक्री और नॉनवेज परोसने पर प्रतिबंध लगाया गया है। 8 नवंबर को रायपुर नगर निगम क्षेत्र की सभी मांस-मटन की दुकानें बंद रहेंगी। इसके साथ ही होटल और रेस्टोरेंट में भी मांसाहारी भोजन परोसने की अनुमति नहीं होगी। नगर निगम के इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

दुकानों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट तक लागू रहेगा प्रतिबंध

दिवाली के मौके पर जारी निर्देशों के अनुसार, 8 नवंबर को नगर निगम क्षेत्र में मांस और मटन की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसका दायरा केवल खुले बाजार और दुकानों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट में भी नॉनवेज भोजन तैयार करने और ग्राहकों को परोसने पर रोक रहेगी।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में मांस-मटन कारोबारियों और होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को निर्धारित आदेश का पालन करना होगा।

रायपुर नगर निगम क्षेत्र में लागू होगा आदेश

यह प्रतिबंध रायपुर नगर निगम की सीमा में आने वाले क्षेत्रों पर लागू रहेगा। 8 नवंबर को कारोबारियों को अपनी मांस-मटन की दुकानें बंद रखनी होंगी। वहीं, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को भी इस दिन नॉनवेज व्यंजन नहीं परोसने होंगे। दिवाली के अवसर पर लागू इस प्रतिबंध को लेकर संबंधित कारोबारियों और खाद्य प्रतिष्ठानों को निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता होगी।

दर्दनाक हादसा: छत्तीसगढ़ में तेज रफ्तार का कहर; धनतेरस की खुशियां मातम में बदलीं, सड़क हादसे में दो की मौत

दर्दनाक हादसा: छत्तीसगढ़ में तेज रफ्तार का कहर; धनतेरस की खुशियां मातम में बदलीं, सड़क हादसे में दो की मौत

 बेमेतरा।  छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में धनतेरस की सुबह भीषण सड़क हादसा हो गया। बेमेतरा-कवर्धा मार्ग पर सतनाम चौक के पास तेज रफ्तार कार ने दो अन्य कारों और एक ट्रैक्टर को टक्कर मार दी। हादसे में एक महिला और एक युवक की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना सुबह करीब 3:30 से 4 बजे के बीच हुई। बताया जा रहा है कि एक परिवार गिरौदपुरी धाम से दर्शन कर वापस लौट रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार कार ने उनकी गाड़ी समेत अन्य वाहनों को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित एक मकान की दीवार से जा भिड़ी।

हादसे में महिला और युवक की मौत

शुरुआती जानकारी के अनुसार, मृत युवक की पहचान बेमेतरा निवासी लक्की देशलहरे के रूप में हुई है। वहीं, मृत महिला ग्राम सोड़ की निवासी बताई जा रही है। हादसे में चार अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

नशे में वाहन चलाने की आशंका

हादसे के बाद चालक के कथित तौर पर नशे में होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दुर्घटना के वास्तविक कारणों और चालक की स्थिति की जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

धनतेरस के दिन हुए इस हादसे से दो परिवारों में मातम छा गया। फिलहाल घायलों की स्थिति और दुर्घटना से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

 
 
 
 
दिवाली पर छत्तीसगढ़ के 4,670 परिवारों को मिला पक्के मकान का तोहफा, PM आवास योजना 2.0 के तहत केंद्र ने दी मंजूरी

दिवाली पर छत्तीसगढ़ के 4,670 परिवारों को मिला पक्के मकान का तोहफा, PM आवास योजना 2.0 के तहत केंद्र ने दी मंजूरी

 रायपुर। दीपावली के त्योहार पर छत्तीसगढ़ के हजारों परिवारों के लिए खुशखबरी सामने आई है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत प्रदेश के 4,670 परिवारों के लिए नए पक्के मकानों को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस स्वीकृति के बाद प्रदेश में आवास निर्माण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। खास बात यह है कि नए आवास प्रदेश के 27 जिलों के 84 नगरीय निकायों में बनाए जाएंगे।

27 जिलों के 84 नगरीय निकायों को मिली सौगात

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत 4,670 नए आवासों का लाभ प्रदेश के अलग-अलग नगरीय क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को मिलेगा। केंद्र सरकार की मंजूरी से उन परिवारों की अपने पक्के घर का सपना पूरा होने की उम्मीद बढ़ी है, जो लंबे समय से आवास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

बीएलसी घटक में आवासों की संख्या बढ़कर 60,623

नई स्वीकृति के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के बीएलसी (लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण) घटक के तहत छत्तीसगढ़ में स्वीकृत मकानों की संख्या बढ़कर 60,623 हो गई है। इस घटक के तहत पात्र हितग्राही अपने भूखंड पर स्वयं का पक्का मकान बनाने के लिए सरकारी सहायता प्राप्त करते हैं।

बीएलसी और एएचपी मिलाकर 76,086 आवास स्वीकृत

प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत बीएलसी और एएचपी (किफायती आवास साझेदारी) दोनों घटकों को मिलाकर अब तक कुल 76,086 आवासों को मंजूरी मिल चुकी है। इस स्वीकृति से शहरी क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद और पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के प्रयासों को गति मिलेगी। दीपावली के अवसर पर मिली यह मंजूरी हजारों परिवारों के लिए अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में बड़ी सौगात मानी जा रही है।

महतारी वंदन योजना से महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल, आत्मनिर्भरता के साथ बढ़ रहा आत्मविश्वास

महतारी वंदन योजना से महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल, आत्मनिर्भरता के साथ बढ़ रहा आत्मविश्वास

 रायपुर- महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा संचालित महतारी वंदन योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही उनमें आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा की भावना भी बढ़ा रही है। सरगुजा जिले की महिलाएं इस सहायता राशि का उपयोग अपनी घरेलू आवश्यकताओं, आजीविका गतिविधियों और परिवार की खुशियों के लिए कर रही हैं। ऐसी ही एक हितग्राही हैं अम्बिकापुर जनपद पंचायत कार्यालय में छोटी सी कैंटीन संचालित करने वाली  रानी सिंह, जिनके लिए महतारी वंदन योजना आर्थिक संबल का माध्यम बनी है।

छोटी सी कैंटीन से परिवार की जिम्मेदारी, महतारी वंदन से मिला अतिरिक्त सहारा

 रानी सिंह अम्बिकापुर जनपद पंचायत कार्यालय में कैंटीन संचालित कर अपनी आजीविका अर्जित करती हैं। कैंटीन के माध्यम से होने वाली आमदनी से वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। ऐसे में महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए अतिरिक्त सहारा साबित हो रही है। इस राशि से उन्हें अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और त्योहारों से जुड़े छोटे-मोटे खर्चों को पूरा करने में मदद मिल रही है।

रानी सिंह बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिलना एक बड़ी राहत है। इससे महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। अपनी जरूरत के अनुसार राशि खर्च करने की सुविधा से महिलाओं में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।

दीपावली से पहले खाते में आई राशि, लक्ष्मी पूजा की तैयारियों को लेकर दिखी खुशी

महतारी वंदन योजना की सहायता राशि मिलने पर रानी सिंह ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि दीपावली से पहले राशि प्राप्त होने से वे इस बार लक्ष्मी पूजा अच्छी तरह मना सकेंगी। पूजा के लिए दीये, बाती और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीदी में इस राशि का उपयोग करेंगी।

उन्होंने भावुक होकर कहा, महतारी वंदन योजना से हर महीने आर्थिक सहायता मिल रही है। दीपावली से पहले ही मुख्यमंत्री विष्णु भैया ने हमारे खाते में पैसा भेज दिया, जिससे मैं बहुत खुश हूं। इस बार लक्ष्मी पूजा अच्छे से मनाऊंगी। दीया-बाती और पूजा की जरूरी सामग्री खरीदूंगी। सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि अब इन छोटी-छोटी जरूरतों के लिए मुझे किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

हर महीने मिलने वाली सहायता से महिलाओं का बढ़ रहा आत्मविश्वास

 रानी सिंह का कहना है कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने वाली पहल है। नियमित रूप से मिलने वाली राशि से महिलाएं अपनी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर पा रही हैं। इससे उन्हें परिवार की जिम्मेदारियों के निर्वहन में भी सहयोग मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा महिलाओं की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दी जा रही सहायता से महिलाओं में खुशी है। छोटी-छोटी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी अपने पास राशि उपलब्ध होना महिलाओं को आत्मनिर्भरता का एहसास कराता है।

महतारी वंदन योजना के माध्यम से राज्य शासन महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि महिलाओं को अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ ही छोटे-छोटे आर्थिक निर्णय स्वयं लेने में सक्षम बना रही है।

CG बाल संप्रेक्षण गृह के बाहर दिनदहाड़े कत्ल, युवक को चाकुओं से गोदा, इस वजह से दिया वारदात को अंजाम

CG बाल संप्रेक्षण गृह के बाहर दिनदहाड़े कत्ल, युवक को चाकुओं से गोदा, इस वजह से दिया वारदात को अंजाम

 रायपुर। राजधानी रायपुर के माना थाना क्षेत्र में बाल संप्रेक्षण गृह के ठीक बाहर दिनदहाड़े हत्या की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां 18 वर्षीय युवक की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि तीन महीने पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए तीन नाबालिगों ने इस वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद पुलिस ने तीनों अपचारी बालकों को हिरासत में ले लिया है।

मिली जानकारी केे अनुसार, मृतक की पहचान अश्विनी नगर के निवासी 18 वर्षीय सावन सेन के रूप में हुई है। बुधवार शाम करीब 4 बजे सावन अपने परिवार के 6 सदस्यों के साथ माना स्थित बाल संप्रेक्षण गृह पहुंचा था। वहां हत्या के एक पुराने मामले में निरुद्ध अपचारी से मुलाकात के बाद जैसे ही वह मुख्य द्वार से बाहर निकला, पहले से घात लगाकर बैठे तीन नाबालिगों ने उसे घेर लिया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, तीनों ने सावन पर चाकू से दनादन वार कर दिए। अचानक हुए इस खूनी हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 और माना थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने गंभीर रूप से घायल सावन को मेकाहारा अस्पताल पहुंचाया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस की प्राथमिक पूछताछ में हिरासत में लिए गए तीनों नाबालिगों ने चौंकाने वाला खुलासा किया। आरोपियों ने बताया कि, करीब तीन महीने पहले पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में सावन ने उनमें से एक पर चाकू से हमला किया था। उसी रंजिश के चलते उन्होंने सावन की हत्या की साजिश रची थी। बुधवार को जैसे ही उन्हें सूचना मिली कि, सावन माना संप्रेक्षण गृह जा रहा है, तीनों वहां पहुंचे और वारदात को अंजाम दे दिया। तीनों आरोपी सरस्वती नगर थाना क्षेत्र की देवार बस्ती के रहने वाले हैं।

माना थाना पुलिस ने तीनों अपचारी बालकों को हिरासत में लेकर हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस वारदात में इस्तेमाल चाकू की बरामद कर लिया है। फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।

CG- आपत्तिजनक हालत में पत्नी को देख पति ने खोया आपा, नाबालिग को पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट, पत्नी की हालत नाजुक…..

CG- आपत्तिजनक हालत में पत्नी को देख पति ने खोया आपा, नाबालिग को पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट, पत्नी की हालत नाजुक…..

 सरगुजा। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के ग्राम डीपाडीह में पत्नी को नाबालिग के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखकर पति ने अपना आपा खो दिया। गुस्से में युवक ने दोनों की बेरहमी से पिटाई कर दी। गंभीर हालत में दोनों को शंकरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान नाबालिग ने दम तोड़ दिया, जबकि पत्नी की हालत नाजुक बताई जा रही है। मामला शंकरगढ़ थाना क्षेत्र का है।

पढ़िए क्या है मामला?

ग्राम डीपाडीह जम्होर में गजेंद्र पैकरा के घर आयोजित दशगात्र कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नाबालिग पंकज पैकरा (15 वर्ष) अपनी मां ललिता पैकरा के साथ पहुंचा था। 04 नवंबर बुधवार को सुबह करीब 10 बजे गजेंद्र पैकरा कहीं से अपने घर पहुंचा तो उसने घर में पंकज को अपनी पत्नी के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया।

दोनों को आपत्तिजनक अवस्था में देखकर गजेंद्र पैकरा ने डंडे से पंकज पैकरा एवं अपनी पत्नी की बेदम पिटाई कर दी। दोनों मौके पर बेहोश हो गए। मामले की जानकारी मिलने पर परिवार के अन्य सदस्यों ने एंबुलेंस बुलाकर दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंकरगढ़ भेजा।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंकरगढ़ से दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। दोनों को यहां बुधवार शाम को एडमिट किया गया। इलाज के दौरान देर रात नाबालिग पंकज पैकरा की मौत हो गई। महिला की हालत गंभीर बनी हुई है।

सूचना पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल चौकी पुलिस ने मर्ग कायम किया और शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। अंबिकापुर पुलिस ने मर्ग डायरी बलरामपुर पुलिस को भेज दी है।

CG- मेडिकल की पढ़ाई करने वालों के लिए बड़ी खबर, सरकारी कॉलेजों में 11 पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू

CG- मेडिकल की पढ़ाई करने वालों के लिए बड़ी खबर, सरकारी कॉलेजों में 11 पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख क्षेत्र के 11 पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रारंभ हो गया है। इनमें तीन डिप्लोमा और आठ स्नातक पाठ्यक्रम शामिल हैं। प्रवेश संबंधी जानकारी के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट https://cgdme.in का अवलोकन कर सकते हैं।

डिप्लोमा स्तर पर एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, डायलिसिस टेक्नोलॉजी तथा मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी के पाठ्यक्रम शामिल हैं। स्नातक स्तर पर बैचलर ऑफ फिजिशियन एसोसिएट्स, बैचलर ऑफ साइंस हेल्थ इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट, बैचलर ऑफ मेडिकल रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग टेक्नोलॉजी, बैचलर ऑफ एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, बैचलर ऑफ रेडिएशन थेरेपी टेक्नोलॉजी, बैचलर्स ऑफ डायलिसिस थेरेपी टेक्नोलॉजी, बैचलर ऑफ ऑप्टोमेट्री तथा बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंस शामिल हैं।

इनके माध्यम से विद्यार्थी चिकित्सा सेवाओं से जुड़े विभिन्न तकनीकी कार्यक्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। प्रमुख कार्यक्षेत्रों में रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग, चिकित्सा प्रयोगशाला, एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर, डायलिसिस तथा ऑप्टोमेट्री शामिल हैं।

रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग का कार्यक्षेत्र एक्स-रे, सीटी और एमआरआई जाँच सेवाओं से जुडे क्षेत्र में रोजगार के द्वार खुलेंगे। चिकित्सा प्रयोगशाला का कार्यक्षेत्र पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं, रक्त बैंकों और शोध प्रयोगशालाओं तक विस्तृत है। इसी प्रकार एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर से संबंधित भूमिकाएँ शल्य कक्ष, गहन चिकित्सा इकाई और आपातकालीन विभाग में होती हैं। डायलिसिस का कार्यक्षेत्र डायलिसिस इकाइयों एवं गुर्दा रोग विभाग तथा ऑप्टोमेट्री का कार्यक्षेत्र नेत्र अस्पतालों, दृष्टि जाँच केंद्रों में रोजगार की संभावना होगी ।

आवेदन जमा करने अथवा शुल्क का भुगतान करने से पहले अभ्यर्थियों को आधिकारिक प्रवेश सूचनाओं का अवलोकन करने के लिए कहा गया है। प्रवेश की विस्तृत शर्तों और प्रक्रिया की प्रामाणिक जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी अधिसूचनाओं से प्राप्त की जा सकती है।

CG- 5 हजार शिक्षक पदों पर भर्ती परीक्षा का नया शेड्यूल जारी, अब इस तारीख को होगा एग्जाम, देखें पूरा टाइम टेबल…..

CG- 5 हजार शिक्षक पदों पर भर्ती परीक्षा का नया शेड्यूल जारी, अब इस तारीख को होगा एग्जाम, देखें पूरा टाइम टेबल…..

रायपुर। अगर आप भी छत्तीसगढ़ से हैं और आप भी सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है। शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक अच्छी खबर निकलकर सामने आई है। राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 5,000 नियमित पदों पर होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की नई तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाकर दिसंबर कर दी गई है। वहीं व्याख्याता भर्ती परीक्षा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 नवंबर को होगी।

परीक्षा शेड्यूल जारी

दरअसल, दिव्यांग अभ्यर्थियों (दृष्टिबाधित, मूक-बधिर, सेरेब्रल पाल्सी, कुष्ठ रोग मुक्त और माइल्ड एएसडी) द्वारा दायर याचिका पर बिलासपुर हाईकोर्ट के 9 अक्टूबर 2026 के निर्देशानुसार चयन मंडल ने इन्हें दोबारा ऑनलाइन आवेदन का अवसर दिया था, जिसके चलते परीक्षा शेड्यूल में संशोधन करना पड़ा है।

अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए मिला समय

परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव के चलते अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार, नियमित भर्ती के तहत व्याख्याता के 854, शिक्षक के 1,654, सहायक शिक्षक के 2,292 और सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के 200 पद शामिल हैं। गौरतलब है कि सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा पहले 11 अक्टूबर और शिक्षक भर्ती परीक्षा 25 अक्टूबर को प्रस्तावित थी। अब दोनों परीक्षाओं की तारीख दिसंबर में निर्धारित की गई है।

दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए बढ़ाया अवसर

भर्ती परीक्षा के शेड्यूल में बदलाव के पीछे एक बड़ी वजह है। दिव्यांग अभ्यर्थियों को आवेदन का समान अवसर देना। दरअसल, दिव्यांगता की कुछ श्रेणियों के उम्मीदवार पहले आवेदन नहीं कर पाए थे। इसे लेकर अभ्यर्थियों ने बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद 9 अक्टूबर 2026 को कोर्ट ने आदेश जारी किया। कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए अब दृष्टिबाधित, मूक-बधिर, सेरेब्रल पाल्सी, कुष्ठ रोग से मुक्त और माइल्ड एएसडी समेत अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों को भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इसके लिए चयन मंडल ने 15 से 30 अक्टूबर तक दोबारा ऑनलाइन आवेदन करने का मौका दिया था।

यह रहेगा नया परीक्षा कार्यक्रम

व्याख्याता भर्ती: 29 नवंबर 2026 को सुबह 10 से दोपहर 12:15 बजे तक पांच संभागीय मुख्यालयों में परीक्षा होगी।

सहायक शिक्षक भर्ती: छह दिसंबर 2026 को प्रदेश के 16 जिला मुख्यालयों में परीक्षा आयोजित की जाएगी।

शिक्षक भर्ती: 20 दिसंबर 2026 को 16 जिला मुख्यालयों में परीक्षा होगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वर्गीय गुरुजी कोर्सेवाड़ा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वर्गीय गुरुजी कोर्सेवाड़ा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

 - अहिवारा के शासकीय महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर करने की घोषणा

दुर्ग, 05 नवम्बर 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय पहुंचकर छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले मृदुभाषी, मिलनसार एवं अनुभवी व्यक्तित्व के धनी अहिवारा के विधायक स्वर्गीय  डोमन लाल कोर्सेवाड़ा को पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश एवं क्षेत्र के विकास तथा अनुसूचित जाति के उत्थान के लिए उनके द्वारा किए गए उल्लेखनीय योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा का निधन छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके द्वारा समाज और प्रदेश के विकास के लिए किए गए कार्य सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा को उनके वास्तविक नाम से अधिक लोग गुरुजी के नाम से ज्यादा जानते थे। उनका सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाता था। मुख्यमंत्री ने उनके साथ जुड़े आत्मीय प्रसंग को साझा करते हुए बताया कि जब स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा हैदराबाद में उपचार के लिए भर्ती थे, तब उन्होंने स्वयं फोन कर उनका हाल-चाल जाना था तथा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल को भी उनका हाल जानने के लिए हैदराबाद जाने के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री  साय ने आगे कहा कि अनुसूचित जाति के विकास, उत्थान और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए स्वर्गीयकोर्सेवाड़ा द्वारा किए गए कार्य ऐतिहासिक हैं। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने अहिवारा स्थित शासकीय महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय  डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के नाम पर किए जाने की घोषणा की।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री  गजेन्द्र यादव, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास  गुरु खुशवंत साहब, रायपुर सांसद  बृजमोहन अग्रवाल एवं जगदलपुर के विधायक  किरण देव ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। उन्होंने स्वर्गीय  कोर्सेवाडा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाले। साथ ही अपनी भावभीनी श्रद्धांजली अर्पित की।

श्रद्धांजली सभा में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण व अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चन्द्राकर, जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष कीर्ति नायक, कलेक्टर अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ प्रदेश के दूर-दराज से पहुंचे जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में जनसमुदाय उपस्थित थे।

लोकतंत्र को कमजोर करने और अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ भाजपा ने निकाली लोकतंत्र बचाओ - अराजकता हटाओ पदयात्रा

लोकतंत्र को कमजोर करने और अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ भाजपा ने निकाली लोकतंत्र बचाओ - अराजकता हटाओ पदयात्रा

 00 भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश, लोकतंत्र की जननी है हमारा देश : साय

रायपुर। भाजपा रायपुर जिला द्वारा आज राजधानी रायपुर के सुभाष स्टेडियम में आयोजित लोकतंत्र बचाओ - अराजकता हटाओ पदयात्रा एवं विशाल रैली 10,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। रैली विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम के विरोध में निकाली गई, जिसमें रायपुर शहर की जनता आक्रोशित नजर आई और विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया भी व्यक्त की। विपक्ष द्वारा लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम पूरी तरह झूठा और जनता को गुमराह करने वाला है। जनता अब विपक्ष के इस भ्रमजाल में आने वाली नहीं है, क्योंकि देश की जनता जानती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश का लोकतंत्र पूरी तरह सुरक्षित है और संविधान की रक्षा के लिए भाजपा पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस और आईएनडीआई गठबंधन के लोग सरकार में बैठने और प्रधानमंत्री बनने की लालसा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का विरोध करते-करते अब पूरे देश का विरोध करने पर उतारू हो गए हैं और देश में अराजकता फैलाकर जनता द्वारा चुनी हुई सरकार को गिराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लोकतंत्र की जननी है, दुनिया के सभी देश हमारे लोकतंत्र की सराहना करते हैं। उन्होंने कहा कि जब ये चुनाव हार जाते हैं तो कभी ईवीएम में दोष लगाते हैं, कभी चुनाव आयोग में दोष लगाते हैं। जब जीत जाते हैं तो वही चुनाव आयोग उन्हें अच्छा लगने लगता है। कांग्रेस का यही दोहरा चरित्र उसकी हताशा को दर्शाता है।

साय ने कहा कि कांग्रेस और आईएनडीआई गठबंधन के लोग भाजपा-एनडीए के ऊपर वोट चोरी और लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाते हैं, जबकि खुद कांग्रेस का इतिहास ही लोकतंत्र की हत्या का इतिहास है। उन्होंने कहा कि मैं आपको बताना चाहता हूँ, जब देश आजाद हुआ और प्रधानमंत्री चुनने की बात आई, उस समय कांग्रेस के 12 नेता सरदार वल्लभभाई पटेल जी के पक्ष में थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के पक्ष में एक भी नेता नहीं था। इसके बावजूद पंडित जवाहरलाल नेहरू जी को प्रधानमंत्री बना दिया गया। तो असली वोट चोर कौन हुआ? वोट चोर कांग्रेस है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा जी के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में और हर जिला-जिला में लोकतंत्र बचाओ - अराजकता हटाओ पदयात्रा का आयोजन हो रहा है, ताकि जनता के सामने कांग्रेस की अराजक मानसिकता का सच लाया जा सके।

148 करोड़ जनता लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए सजग खड़ी है - देव
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने कहा कि आज रायपुर की इस पावन भूमि पर लोकतंत्र बचाओ - अराजकता हटाओ पदयात्रा का आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा का महाअभियान है। उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक दल अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है। आजादी के बाद जिस दल का पूरे देश में शासन हुआ करता था, आज वह गिने-चुने तीन-चार राज्यों में ही सिमट कर रह गया है। जनविरोधी नीतियां और देशविरोधी सोच आज उस दल का आवश्यक अंग बन चुकी हैं। लेकिन भारत में लोकतंत्र की जड़ें अत्यंत मजबूत हैं, यहां 148 करोड़ जनता लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए सजग खड़ी है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस चुनाव हार जाती है तो कभी ईवीएम में दोष लगाती है, कभी चुनाव आयोग में दोष लगाती है, लेकिन जब जीत जाती है तो वही चुनाव आयोग उसे अच्छा लगने लगता है, यही कांग्रेस का दोहरा चरित्र है और यही उसकी हताशा को दर्शाता है, जबकि देश की जनता ने जनविरोधी और देशविरोधी राजनीति को हमेशा नकारा है और आगे भी नकारेगी।

कुछ तत्व विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को अस्थिर करने का षड्यंत्र रच रहे हैं - बृजमोहन
भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कुछ तत्व प्रजातंत्र को संकट में डालकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को अस्थिर करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों से कुछ समूहों और नेताओं के द्वारा भारत को नेपाल बना देने, बांग्लादेश बना देने की धमकियां दी जा रही हैं। देश की जनता इस अराजक मानसिकता को कभी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें अत्यंत मजबूत हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को देश की जनता पलकों पर बिठाकर रखती है, उन्हें अपना प्यार और समर्थन देती है। देश को अराजकता की ओर धकेलने वालों के मंसूबे कभी पूरे नहीं होंगे।

 

 

 

भाजपा रायपुर जिले द्वारा आज राजधानी रायपुर के सुभाष स्टेडियम में आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ - अराजकता हटाओ रैली एवं पदयात्रा ऐतिहासिक रूप से सफल रही। यह रैली रायपुर शहर जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर एवं रायपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष श्याम नारंग के नेतृत्व में निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में कार्यकर्ता, पदाधिकारी एवं आमजन शामिल हुए और रैली को सफल बनाया। रैली में कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा, गुरु खुशवंत साहेब, प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, विधायक राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी, अनुज शर्मा, इंद्र कुमार साहू, महापौर मीनल चौबे, रायपुर शहर जिला प्रभारी राजेंद्र शर्मा, रायपुर ग्रामीण जिला प्रभारी सुरेंद्र पाटनी, मंडल अध्यक्ष, मोर्चा-प्रकोष्ठ के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता व 10 हजार से अधिक संख्या में आमजन मौजूद रहे।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 की कार्यकारी समिति की प्रथम बैठक संपन्न

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 की कार्यकारी समिति की प्रथम बैठक संपन्न

 रायपुर--मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 के अंतर्गत गठित कार्यकारी समिति की प्रथम बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों द्वारा क्रियान्वित किए जा रहें सुधार प्रस्तावों, जोखिम-आधारित वर्गीकरण तथा ईओडीबी नियमों के चरणबद्ध क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति की विस्तृत एवं गहन समीक्षा की गई।   

बैठक के दौरान प्रस्तुत कार्ययोजना के अनुसार उद्योगों एवं व्यवसायों को उनके संचालन के लिए भवनों के स्वरूप, ऊंचाई और निर्मित क्षेत्र के आधार पर कम जोखिम, स्व-प्रमाणीकरण और स्व-घोषणा के आधार पर तुरंत स्वीकृति व निरीक्षण से राहत, मध्यम जोखिम, थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन एवं अधिकृत विशेषज्ञों के प्रमाणीकरण के माध्यम से समयबद्ध मंजूरी के लिए नियमों के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। 

बैठक में उच्च जोखिम, निर्धारित सुरक्षा मानकों, अग्निशमन नियमों और जन-सुरक्षा के आधार पर विभागीय भौतिक निरीक्षण के पश्चात त्वरित स्वीकृति,  विभागीय समीक्षा और सिंगल विंडो सिस्टम एकीकरण, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए गठित जिला सशक्त समिति, कार्यकारी परिषद और कार्यकारी समिति की प्रक्रियाओं को समयबद्ध सीमा के भीतर अधिसूचित कर दिया गया है।   

बैठक में नगरीय प्रशासन, आबकारी, आवास एवं पर्यावरण, उद्योग, गृह-अग्निशमन, संस्कृति, जल संसाधन तथा लोक निर्माण विभाग के व्यावसायिक सेवाओं के जोखिम वर्गीकरण, लोक सेवा गारंटी समय-सीमा और सिंगल विंडो पोर्टल एकीकरण की स्थिति की समीक्षा की गई।  मुख्य सचिव ने कहा कि सभी संबंधित विभाग ईओडीबी नियमों के प्रारूप पर अपने अंतिम सुझाव त्वरित रूप से प्रेषित करें, जिससे निवेशकों को अनावश्यक प्रक्रियाओं से मुक्ति मिले और प्रदेश में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों को पारदर्शी, डिजिटल और सुगम वातावरण प्राप्त हो सके।  

बैठक में गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष कुमार ठाकुर, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  अविनाश चम्पावत, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. सारांश मित्तर सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

डीएमएफ की कार्ययोजना में पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना को दें प्राथमिकता - राज्यपाल डेका

डीएमएफ की कार्ययोजना में पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना को दें प्राथमिकता - राज्यपाल डेका

 00 खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के दिए निर्देश, बस्तर में विकास कार्यों पर विशेष जोर

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास और वहां के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के साथ पर्यावरणविदों का भी सहयोग लिया जाए।

राज्यपाल डेका आज लोक भवन में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की गतिविधियों, खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने डीएमएफ की राशि के प्रभावी और सुनियोजित उपयोग के लिए कम से कम दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीएमएफ से आवश्यक कार्य किए जाएं। साथ ही उद्योगों से चर्चा कर पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को अभियान के रूप में संचालित करने पर उन्होंने जोर दिया।
वैज्ञानिक तरीके से हो रेत का उत्खनन
राज्यपाल ने नदियों से रेत उत्खनन के संबंध में वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि रेत रहेगी तो पानी रहेगा और पानी रहेगा तो रेत रहेगी। रेत खदानों में वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन को लेकर विशेष अभियान चलाने की बात भी कही।

जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करें डीएमएफ की कार्ययोजना
राज्यपाल ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे आम जनता से संवाद करें और उनकी आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं को समझें। इसके अनुरूप डीएमएफ की कार्ययोजना तैयार की जाए। विकास कार्यों के क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों को भी विश्वास में लेना आवश्यक है। प्रशासन को जनता के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कौन से कार्य किए जा सकते हैं तथा किन कार्यों को करना संभव नहीं है। उन्होंने डीएमएफ की नियमित बैठकें आयोजित करने को कहा, ताकि कार्यों की प्रगति की समीक्षा और आवश्यक निर्णय समय पर लिए जा सकें।
खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं
राज्यपाल ने कहा कि डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक कल्याण और विकास से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विशेष उद्देश्यों के लिए डीएमएफ के अंतर्गत कार्य निर्धारित किए जाते हैं, उन कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाना चाहिए। राज्यपाल ने बस्तर क्षेत्र में डीएमएफ के माध्यम से विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यधारा में लौट आए हैं, उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। उनके पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जीवन स्तर में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि वे विकास की प्रक्रिया से जुड़ सकें।
विशेष पिछड़ी जनजातियों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर दें ध्यान
राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन जनजातीय समुदायों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने तथा स्वास्थ्य एवं जीवनशैली में सुधार के लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन समुदायों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जाएं और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। राज्यपाल ने कहा कि मनरेगा की तर्ज पर डीएमएफ के कार्यों में भी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही निर्मित परिसंपत्तियों के भौतिक सत्यापन पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि यह पता चल सके कि स्वीकृत कार्यों का वास्तविक क्रियान्वयन हुआ है और उनसे क्षेत्र के लोगों को लाभ मिल रहा है।
विस्थापित परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश
राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापित हुए लोगों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से विस्थापित परिवारों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि प्रभावित और विस्थापित परिवारों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए उनके लिए संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में खनिज विभाग के सचिव श्री पी दयानंद ने राज्यपाल को डीएमएफ की गतिविधियों और कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीएमएफ पोर्टल 2.0 के माध्यम से प्रत्येक परियोजना और कार्य की जानकारी उपलब्ध है। पोर्टल के जरिए कार्यों की स्थिति और प्रगति की निगरानी भी की जा रही है। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, खनिज विभाग के अधिकारी तथा खनन प्रभावित विभिन्न जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।

CG TRANSFER : छत्तीसगढ़ वित्त विभाग में बड़ा फेरबदल, कई अधिकारियों के हुए तबादले, देखिए लिस्ट

CG TRANSFER : छत्तीसगढ़ वित्त विभाग में बड़ा फेरबदल, कई अधिकारियों के हुए तबादले, देखिए लिस्ट

 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव किया गया है। राज्य वित्त सेवा संवर्ग के कई अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। जारी आदेश के तहत अलग-अलग पदों पर कार्यरत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

राज्यपाल डेका ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

राज्यपाल डेका ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

 राज्यपाल डेका ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

रायपुर-  राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकभवन में असम राज्य सहित देश-विदेश में सांस्कृतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी, भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर प्रसन्ना, विधिक सलाहकार सत्यभामा अजय दुबे एवं लोकभवन के अधिकारियों. कर्मचारियों ने हजारिका के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

दिवंगत विधायक स्व. डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को उप मुख्यमंत्री शर्मा सहित जनप्रतिनिधियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

दिवंगत विधायक स्व. डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को उप मुख्यमंत्री शर्मा सहित जनप्रतिनिधियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

 00 पुष्प अर्पित कर किया नमन, शोकाकुल परिजनों से मिलकर बंधाया ढांढस

रायपुर। दिवंगत विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बुधवार को बालोद जिले में उनके गृह ग्राम भेंड्रा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा शामिल हुए। इस अवसर पर उनके साथ शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद विजय बघेल, विधायक ललित चंद्राकर, सतनामी समाज की गुरू दीदी प्रियंका, पूर्व विधायक सांवलाराम डाहरे सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने दिवंगत स्व. डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा उनके प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन समाज और जनजीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान, जनसेवा के प्रति समर्पण और लोगों से उनके आत्मीय जुड़ाव को सदैव याद किया जाएगा। उनका स्नेह, सरल व्यवहार और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता लोगों के हृदय में हमेशा बनी रहेगी।

इस दौरान सभी ने शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में उन्हें संबल प्रदान किया तथा दिवंगत आत्मा की शांति एवं परिजनों को इस दु:ख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, नगर पालिका दल्लीराजहरा के अध्यक्ष तोरन लाल साहू, नगर पंचायत गुण्डरदेही के अध्यक्ष श्री प्रमोद जैन, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

Jungle Safari Closed: दो दिन बंद रहेगा रायपुर का जंगल सफारी,जानिए वजह.....

Jungle Safari Closed: दो दिन बंद रहेगा रायपुर का जंगल सफारी,जानिए वजह.....

  Raipur Jungle Safari Closed: दीपावली के त्योहार के दौरान रायपुर के जंगल सफारी और जू घूमने का प्लान बना रहे पर्यटकों के लिए जरूरी खबर है। त्योहार को देखते हुए जंगल सफारी एवं जू को दो दिनों के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है। जारी आदेश के मुताबिक, 10 और 11 नवंबर को पर्यटकों को यहां प्रवेश नहीं मिलेगा। यानी इन दोनों दिनों में जंगल सफारी घूमने और वन्य प्राणियों को करीब से देखने की योजना बना रहे लोगों को अपना कार्यक्रम बदलना होगा।

10 और 11 नवंबर को नहीं मिलेगी एंट्री

कार्यालय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, रायपुर की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, 10 नवंबर और 11 नवंबर को जंगल सफारी एवं जू पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद रहेंगे। इन दोनों दिनों में पर्यटकों को सफारी परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे में दीपावली की छुट्टियों के दौरान परिवार और दोस्तों के साथ जंगल सफारी घूमने का प्लान बना रहे लोगों को तारीखों का विशेष ध्यान रखना होगा। पर्यटकों को सलाह है कि सफारी पहुंचने से पहले संचालन की तारीख और प्रवेश संबंधी जानकारी जरूर जांच लें, ताकि वहां पहुंचने के बाद निराश होकर वापस न लौटना पड़े।

वन्य प्राणियों को शोर और आतिशबाजी से बचाने की तैयारी

दीपावली के दौरान शहरों में पटाखे और आतिशबाजी का दौर चलता है। इसका असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि वन्य प्राणियों पर भी पड़ सकता है। तेज आवाज और अचानक होने वाले शोर से जानवरों में तनाव और घबराहट की स्थिति पैदा हो सकती है। जंगल सफारी में अलग-अलग प्रजातियों के वन्य प्राणी रहते हैं, जिनकी सुरक्षा और सामान्य दिनचर्या बनाए रखना वन विभाग की प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए त्योहार के दौरान पर्यटकों की आवाजाही रोकने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा सफारी परिसर में सरकारी संपत्ति को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए भी यह कदम उठाया गया है।

CG Rain Alert: छत्तीसगढ़ में तूफान ‘मुरासु’ का तांडव, 16 जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली का यलो अलर्ट जारी

CG Rain Alert: छत्तीसगढ़ में तूफान ‘मुरासु’ का तांडव, 16 जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली का यलो अलर्ट जारी

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के कमजोर पड़ने के बाद भी मौसम का असर बना हुआ है। तूफान के बाद बने डिप्रेशन के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल गया है। मौसम विभाग ने 5 नवंबर को राज्य के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। वहीं, गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है।

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, पूर्वी तेलंगाना और उससे लगे तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर बना यह अवदाब असल में चक्रवाती तूफान मुरासु का ही कमजोर हुआ रूप है। इसी मौसमी सिस्टम के प्रभाव से दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिलों में बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि आज के लिए किसी भी जिले में भारी बारिश का कोई रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी नहीं किया गया है, लेकिन एहतियात के तौर पर दक्षिणी हिस्सों में थोड़ा संभलकर रहने की जरूरत है, क्योंकि इन इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या छिटपुट बारिश हो सकती है।

जैसे-जैसे बारिश की गतिविधियां कम होंगी, वैसे-वैसे प्रदेश के तापमान में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 48 घंटों के दौरान छत्तीसगढ़ में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है। तापमान के नीचे जाने से अब रात और सुबह के वक्त हल्की ठंड का अहसास और ज्यादा बढ़ जाएगा, जो ठंड की आहट साफ तौर पर बयां कर रहा है।

छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों का तापमान

छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में आज का न्यूनतम और अधिकतम तापमान इस प्रकार प्रकार रहने की संभावना है:

• रायपुर: न्यूनतम तापमान 19°C और अधिकतम तापमान 30°C

• बिलासपुर: न्यूनतम तापमान 18°C और अधिकतम तापमान 30°C

पेंड्रा रोड: न्यूनतम तापमान 15°C और अधिकतम तापमान 28°C

• दुर्ग: न्यूनतम तापमान 18°C और अधिकतम तापमान 30°C

• राजनांदगांव: न्यूनतम तापमान 19°C और अधिकतम तापमान 30°C

• अम्बिकापुर: न्यूनतम तापमान 16°C और अधिकतम तापमान 27°C

• सूरजपुर: न्यूनतम तापमान 15°C और अधिकतम तापमान 28°C

6 नवंबर से साफ होने लगेगा मौसम

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, कल यानी 6 नवंबर को प्रदेश में इक्का-दुक्का जगहों पर ही बहुत हल्की बारिश हो सकती है और इस दिन के लिए कोई चेतावनी भी नहीं है। इसके बाद 7, 8, 9 और 10 नवंबर को पूरे छत्तीसगढ़ में मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की संभावना है। यानी आने वाले कुछ ही दिनों में बारिश का यह दौर थम जाएगा और आसमान साफ होने के साथ ही ठंडक धीरे-धीरे और जोर पकड़ेगी।

धनतेरस 2026 पर खरीदें ये 9 शुभ चीजें, घर में आएगी सुख-समृद्धि!

धनतेरस 2026 पर खरीदें ये 9 शुभ चीजें, घर में आएगी सुख-समृद्धि!

 धनतेरस का त्योहार दिवाली से पहले मनाया जाता है. इस साल धनतेरस  6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है. इस दिन सोना, चांदी और बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है.

आमतौर पर लोग धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना पसंद करते हैं. हालांकि, वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ ऐसी छोटी-छोटी चीजें भी हैं, जिन्हें इस दिन घर लाना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इन चीजों की खरीदारी से घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है. खास बात यह है कि धनतेरस पर शुभ खरीदारी के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना जरूरी नहीं है. आप अपने बजट के अनुसार भी इन चीजों को खरीद सकते हैं.

 धनतेरस पर खरीदें ये 9 शुभ चीजें
 1. सोने के सिक्के या आभूषण
धनतेरस पर सोना खरीदना सबसे लोकप्रिय परंपराओं में से एक है. मान्यता है कि सोना धन, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक है. इस दिन लोग सोने के सिक्के, अंगूठी, चेन या अन्य आभूषण खरीदते हैं. अगर आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार ही खरीदारी करें. सोना खरीदते समय हॉलमार्क और शुद्धता की जांच जरूर करें.

 2. चांदी के सिक्के और बर्तन
धनतेरस पर चांदी खरीदना भी शुभ माना जाता है. इस दिन कई लोग मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आकृति वाले चांदी के सिक्के खरीदते हैं. इसके अलावा चांदी के गिलास, कटोरी और अन्य छोटे बर्तन भी खरीदे जा सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी को शुद्धता और शुभता का प्रतीक माना जाता है.

 3. पीतल, तांबे या स्टील के बर्तन
धनतेरस पर नए बर्तन खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इसी वजह से इस दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. आप पीतल, तांबे या स्टील की थाली, कटोरी, गिलास और रसोई के दूसरे उपयोगी बर्तन खरीद सकते हैं. कुछ घरों में नए बर्तन में चावल, अनाज या मिठाई रखकर घर लाने की भी परंपरा है.

 4. मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति
धनतेरस पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति या तस्वीर खरीदना भी शुभ माना जाता है. दिवाली की पूजा के लिए लोग इस दिन नई प्रतिमाएं घर लाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी धन और वैभव की देवी हैं, जबकि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का देवता माना जाता है. मूर्ति खरीदते समय उसके आकार और पूजा घर में रखने की जगह का ध्यान रखें.

 5. मिट्टी के दीपक और सजावटी लैंप
धनतेरस और दिवाली पर दीपक जलाने का विशेष महत्व है. इस दिन आप मिट्टी के दीये, पीतल के दीपक और सजावटी लैंप खरीद सकते हैं. वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर के मुख्य द्वार और आसपास रोशनी रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. दीपक खरीदते समय ध्यान रखें कि उन्हें सुरक्षित जगह पर रखा जा सके.

 6. नया झाड़ू
धनतेरस पर झाड़ू खरीदना भी कई जगहों पर शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, झाड़ू को मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है. इसे घर की गंदगी और नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक माना जाता है. इस दिन नया झाड़ू खरीदने के साथ घर के कोनों और स्टोर रूम की अच्छी तरह सफाई करें.

 7. साबुत धनिया
धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदने की भी परंपरा है. कुछ परिवार इसे पूजा में शामिल करते हैं और बाद में इसे मिट्टी में बो देते हैं. मान्यता है कि धनिया के बीज विकास, खुशहाली और समृद्धि के प्रतीक होते हैं. आप थोड़ी मात्रा में साबुत धनिया खरीदकर पूजा में रख सकते हैं.

 8. घर के लिए जरूरी सामान
धनतेरस पर केवल सोना-चांदी या पूजा से जुड़ी चीजें खरीदना जरूरी नहीं है. आप घर की जरूरत के हिसाब से नई चादर, किचन के डिब्बे, पानी का फिल्टर, फर्नीचर या घर की सजावट से जुड़ी चीजें भी खरीद सकते हैं. वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना सकारात्मक माहौल बनाने में मदद करता है.

 9. व्यापार और कामकाज से जुड़ी चीजें
अगर आप अपना कारोबार करते हैं या घर से काम करते हैं, तो धनतेरस पर काम से जुड़ी नई चीजें खरीद सकते हैं. इस दिन नया लैपटॉप, ऑफिस का सामान, मशीनरी, औजार या हिसाब-किताब से जुड़ी जरूरी चीजें खरीदना शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इससे कामकाज में तरक्की और नए अवसरों का स्वागत होता है.

 धनतेरस से पहले घर में करें ये 5 वास्तु उपाय
 1. उत्तर-पूर्व दिशा की सफाई करें
वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है. इसे पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. धनतेरस से पहले इस दिशा की अच्छी तरह सफाई करें. यहां बेकार सामान, कबाड़ और टूटी-फूटी चीजें जमा न होने दें.

 2. मुख्य द्वार को सजाएं
घर का मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का स्थान माना जाता है. धनतेरस से पहले दरवाजे की सफाई करें. यहां फूलों का तोरण लगाएं और सुंदर रंगोली बनाएं. जूते-चप्पलों को भी व्यवस्थित रखें.

 3. पूजा घर को व्यवस्थित करें
धनतेरस पर पूजा घर की सफाई जरूर करें. देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को साफ करें और पूजा की जरूरी सामग्री व्यवस्थित रखें. अगर आप नई मूर्ति या चांदी का सिक्का खरीदकर ला रहे हैं, तो उसे साफ जगह पर रखें.

 4. शाम के समय जलाएं दीपक
धनतेरस की शाम घर में दीपक जलाने की परंपरा है. कई परिवार इस दिन यम दीपदान भी करते हैं. दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें,  पर्दों या ज्वलनशील चीजों के पास न जलाएं.

 5. घर में जमा कबाड़ हटाएं
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर में अनावश्यक सामान जमा नहीं करना चाहिए. धनतेरस से पहले अलमारी, बालकनी, रसोई और स्टोर रूम की सफाई करें. पुराने और बेकार सामान को हटाकर घर को व्यवस्थित बनाएं.

 धनतेरस पर किनचीजों को खरीदने से बचते हैं?
कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर कुछ चीजों की खरीदारी से परहेज किया जाता है. हालांकि, ये मान्यताएं अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग हो सकती हैं.

–  नुकीली चीजें:  कुछ लोग चाकू, कैंची और अन्य धारदार सामान खरीदने से बचते हैं.
–  लोहे का सामान:  पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन लोहे की वस्तुएं खरीदना कुछ लोग अशुभ मानते हैं.
–  काले रंग की चीजें:  कुछ परिवार धनतेरस पर काले रंग की वस्तुएं खरीदने से परहेज करते हैं.
–  बिना जरूरत की महंगी चीजें:  त्योहार के नाम पर अपनी आर्थिक क्षमता से ज्यादा खर्च करने से बचना चाहिए.

धनतेरस पर खरीदारी का महत्व केवल महंगी चीजें घर लाने में नहीं है. आप अपनी जरूरत और बजट के अनुसार छोटी-सी शुभ वस्तु खरीदकर भी इस परंपरा को निभा सकते हैं. घर की साफ-सफाई, पूजा और परिवार के साथ खुशियां बांटना भी इस त्योहार का अहम हिस्सा है.

जियो-पोर्टल से सशक्त होगा छत्तीसगढ़ का डेटा आधारित शासन, विकास योजनाओं को मिलेगी नई दिशा

जियो-पोर्टल से सशक्त होगा छत्तीसगढ़ का डेटा आधारित शासन, विकास योजनाओं को मिलेगी नई दिशा

 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट से अब एक क्लिक पर मिलेगी भौगोलिक जानकारी

190 से अधिक जीआईएस डेटा लेयर्स का एकीकरण, 35 से अधिक जीआईएस आधारित टूल्स एवं समाधान विकसित

जीआईएस तकनीक से औद्योगिक भूमि चयन, बैंकिंग सेवाओं के विस्तार और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में मिलेगी मदद

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन को तकनीक आधारित, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य में विकास योजनाओं के बेहतर निर्माण, संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन तथा सटीक निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा नवा रायपुर स्थित एक निजी होटल में ‘शासन में भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राज्यभर के विभिन्न विभागों के 200 से अधिक अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया।कार्यशाला में राज्य स्तरीय जियो-पोर्टल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के माध्यम से विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

*जीआईएस आधारित डेटा से योजनाओं के निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को मिलेगी मजबूती*

कार्यशाला का शुभारंभ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद ने किया। उन्होंने बताया कि चिप्स द्वारा राज्य के लिए 190 से अधिक जीआईएस डेटा लेयर्स का एकीकरण किया जा चुका है। इन आंकड़ों के आधार पर विभिन्न विभागों की आवश्यकताओं के अनुरूप 35 से अधिक जीआईएस आधारित टूल्स एवं उपयोग आधारित समाधान विकसित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इन तकनीकी समाधानों के माध्यम से विभागों को उपलब्ध भौगोलिक आंकड़ों का विश्लेषण करने, संसाधनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाओं का निर्माण एवं प्रभावी क्रियान्वयन करने में सहायता मिल रही है।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य चिप्स द्वारा विकसित राज्य स्तरीय जियो-पोर्टल एवं डिसीजन सपोर्ट सिस्टम से जिलों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को परिचित कराना था। इसके माध्यम से जिला स्तर पर उपलब्ध भौगोलिक आंकड़ों का उपयोग कर विकास संबंधी आवश्यकताओं की पहचान और योजनाओं की प्राथमिकता निर्धारित करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जियो-पोर्टल के उपयोग के लिए चिप्स द्वारा सभी जिलों को यूजर नेम और पासवर्ड भी जारी किए जा चुके हैं।

कार्यशाला में नई दिल्ली से आए ईसरी इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट  प्रशांत जोशी, हेड ई.आई.सी. पीयूष मिश्रा, ऑक्टेव इंडिया के  विवेक चौहान,  चंचल मुखर्जी, चिप्स सीईओ मयंक अग्रवाल, चिप्स के संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अनुपम आशीष टोप्पो, परियोजना प्रमुख  संदीप टिकरिहा तथा  हरीश सिन्हा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

*एआई चैट बॉट से आसान होगी भौगोलिक जानकारी तक पहुंच*

कार्यशाला का विशेष आकर्षण जियो-पोर्टल पर विकसित नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट फीचर रहा। इस नई सुविधा से उपयोगकर्ताओं के लिए भौगोलिक जानकारी प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक होगा। अब उपयोगकर्ता जियो-पोर्टल पर किसी भी क्षेत्र, स्थान, परिसंपत्ति अथवा स्थल का नाम चैट बॉट में लिखकर सीधे संबंधित स्थान तक पहुंच सकेंगे। इसके लिए उन्हें ड्रॉप-डाउन मेन्यू या लंबी सूची में स्थान खोजने की आवश्यकता नहीं होगी।

चैट बॉट में स्थान का नाम दर्ज करते ही जियो- पोर्टल का मानचित्र संबंधित स्थान पर नेविगेट करेगा। साथ ही उस स्थान से जुड़ी विस्तृत भौगोलिक जानकारी और आवश्यक दिशा-निर्देश स्क्रीन पर प्रदर्शित होंगे। यह सुविधा जियो-पोर्टल को अधिक सरल, सहज और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने के साथ ही विभागीय अधिकारियों को आवश्यक सूचनाएं तेजी से उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगी।

*औद्योगिक विकास से लेकर बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार तक उपयोगी होगी तकनीक*

कार्यशाला में जियो-पोर्टल और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी देते हुए चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मयंक अग्रवाल ने विभिन्न विभागों द्वारा अपनाए जा रहे जीआईएस आधारित समाधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा औद्योगिक भूमि के चयन और नियोजन के लिए ‘लैंड पैच एनालिसिस’ का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से संभावित औद्योगिक भूखंडों की पहचान, उपलब्ध भूमि का डिजिटल विश्लेषण तथा उपयुक्त स्थानों के चयन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाई जा सकेगी।

इसी प्रकार संस्थागत वित्त संचालनालय (डीआईएफ) द्वारा ‘बैंक कवरेज एनालिसिस’ के माध्यम से बैंकिंग सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। इसके आधार पर नई बैंक शाखाएं स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थानों का निर्धारण किया जा सकेगा। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि भू-स्थानिक तकनीक केवल मानचित्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन, संसाधन प्रबंधन और जनसुविधाओं के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

*विशेषज्ञों ने बताए भू-स्थानिक तकनीक के नवीनतम उपयोग*

कार्यशाला के दौरान ईसरी इंडिया (Esri India) एवं ऑक्टेव इंडिया के विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रस्तुतिकरण दी गई। विशेषज्ञों ने जीआईएस तकनीक के नवीनतम अनुप्रयोगों, आधुनिक भू-स्थानिक समाधानों तथा शासन की कार्यप्रणाली में इनके प्रभावी उपयोग की संभावनाओं पर जानकारी साझा की।

इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने जीआईएस आधारित योजनाओं, डेटा विश्लेषण और विभागीय आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित करने के विषय में विचार-विमर्श किया।

*डेटा आधारित शासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल*

छत्तीसगढ़ में जियो-पोर्टल और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम का विस्तार विकास योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण पहल है। भौगोलिक सूचनाओं के एकीकृत उपयोग से विभागों को स्थानीय जरूरतों की पहचान करने, उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने और विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने में सहायता मिलेगी।

इस पहल का उद्देश्य राज्य और जिला स्तर पर डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ करते हुए विकास योजनाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाना है। आधुनिक जीआईएस तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का समन्वित उपयोग छत्तीसगढ़ में डिजिटल एवं तकनीक आधारित शासन व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा।

महादेव सट्टा ऐप पर बड़ा एक्शन: दुबई में गिरफ्तार हुआ को-प्रमोटर रवि उप्पल, भारत लाने की कवायद तेज

महादेव सट्टा ऐप पर बड़ा एक्शन: दुबई में गिरफ्तार हुआ को-प्रमोटर रवि उप्पल, भारत लाने की कवायद तेज

 महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के मुख्य आरोपी रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। सौरभ चंद्राकर के बाद अब एजेंसियों ने शिकंजा कसते हुए प्रत्यर्पण की तैयारी शुरू कर दी है।

रायपुर: चर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप (Mahadev Online Betting App) सिंडिकेट मामले में प्रवर्तन निदेशालय और सुरक्षा एजेंसियों को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। इस बहुचर्चित अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के मास्टरमाइंड और को-प्रमोटर रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है।

इससे पहले इस अवैध साम्राज्य के मुख्य संचालक सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी हुई थी, और अब रवि उप्पल के शिकंजे में आने के बाद जांच एजेंसियों ने उसे भारत वापस लाने (प्रत्यर्पण) की कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ से जुड़े इस करोड़ों रुपए के अवैध सट्टा नेटवर्क ने देश भर में हड़कंप मचा रखा था। कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों, हवाला कारोबारियों और सेलिब्रिटीज के नाम इस सिंडिकेट से जुड़े होने के कारण यह मामला लगातार राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर था। रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर पर लंबे समय से रेड कॉर्नर नोटिस और गैर-जमानती वारंट जारी थे। अब दुबई में रवि उप्पल की गिरफ्तारी के बाद माना जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क के अन्य छिपे हुए चेहरों और वित्तीय लेन-देन की परते तेजी से बाहर आएंगी।

अग्निवीरों को दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा का अवसर देने का निर्णय अभिनंदनीय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

अग्निवीरों को दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा का अवसर देने का निर्णय अभिनंदनीय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल का दूरदर्शी निर्णय, अग्निवीरों के अनुभव और कौशल का राष्ट्रहित में होगा बेहतर उपयोग

युवाओं को राष्ट्रसेवा के साथ सैन्य क्षेत्र में आगे बढ़ने के मिलेंगे नए अवसर : मुख्यमंत्री  साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अग्निवीरों के लिए दो वर्ष के अतिरिक्त ‘सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी’ को स्वीकृति दिए जाने के निर्णय का हार्दिक स्वागत करते हुए इसे अभिनंदनीय एवं दूरदर्शी पहल बताया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि इस निर्णय से अग्निवीरों को चार वर्ष की प्रारंभिक सेवा पूरी करने के बाद दो वर्ष तक और राष्ट्र की सेवा करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, निर्धारित चयन मानदंडों को पूरा करने वाले इच्छुक अग्निवीर नियमित सैन्य सेवा में भी शामिल हो सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय अग्निवीरों के अनुभव, कौशल और सामर्थ्य का राष्ट्रहित में बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के साथ ही युवाओं को सैन्य सेवा में आगे बढ़ने के नए अवसर प्रदान करेगा। इससे देश की रक्षा व्यवस्था को भी अनुभवी एवं प्रशिक्षित युवाओं की क्षमताओं का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री  साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित युवाओं के मनोबल को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

बस्तर और सरगुजा सहित जनजातीय एवं दूरस्थ अंचलों के युवाओं तक पहुंचे विश्वस्तरीय वैज्ञानिक शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ : मुख्यमंत्री श्री साय

बस्तर और सरगुजा सहित जनजातीय एवं दूरस्थ अंचलों के युवाओं तक पहुंचे विश्वस्तरीय वैज्ञानिक शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ : मुख्यमंत्री श्री साय

 विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्यों में करेंगे स्थापित : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री साय ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ की उच्चस्तरीय बैठक

छत्तीसगढ़ को वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, तकनीकी नवाचार और चिकित्सा प्रौद्योगिकी का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श

प्रदेश में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर तथा विज्ञान एवं गणित शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी और आधुनिक अनुसंधान के क्षेत्र में प्रदेश के युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर

आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ और किफायती स्वास्थ्य तकनीकों के विकास में भी आईआईएससी की विशेषज्ञता का लाभ लेने पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रस्तावित परियोजनाओं की व्यवहार्यता का परीक्षण कर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देश

रायपुर -- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार की शक्ति से समृद्ध बनाना राज्य सरकार का संकल्प है। हमारा लक्ष्य छत्तीसगढ़ को केवल औद्योगिक और आर्थिक विकास में ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधनों, औद्योगिक संभावनाओं और प्रतिभाशाली मानव संसाधन को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़कर विकास का एक नया अध्याय लिखा जा सकता है। मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन एवं संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों तथा राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में छत्तीसगढ़ को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और चिकित्सा अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर संभावित सहयोग, आवश्यक वैज्ञानिक अधोसंरचना, संस्थागत व्यवस्थाओं और क्रियान्वयन की प्रारंभिक रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री  साय ने भारतीय विज्ञान संस्थान के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों का छत्तीसगढ़ आगमन पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान देश ही नहीं, विश्व के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों में शामिल है। इसकी विशेषज्ञता, अनुसंधान क्षमताओं और शैक्षणिक अनुभवों का लाभ छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, स्वास्थ्य सेवाओं और विशेष रूप से युवाओं को मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी उत्कृष्टता और उच्च कौशलयुक्त मानव संसाधन की निर्णायक भूमिका होगी। छत्तीसगढ़ भी इसी राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी विश्वस्तरीय वैज्ञानिक और शैक्षणिक अधोसंरचनाएं विकसित करना चाहती है, जिनका लाभ केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित न रहे, बल्कि आने वाली अनेक पीढ़ियों को प्राप्त हो। विज्ञान और अनुसंधान में निवेश प्रदेश के दीर्घकालिक विकास, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है।

मुख्यमंत्री  साय ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ केवल बड़े शहरों और प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ अंचलों में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इन प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की है।

मुख्यमंत्री  साय ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ सहयोग की सभी संभावनाओं का गंभीरता से परीक्षण किया जाए। प्रस्तावित परियोजनाओं की तकनीकी, वित्तीय एवं संस्थागत व्यवहार्यता का अध्ययन कर ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि इन पहलों को व्यावहारिक स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार से संबंधित इन महत्वपूर्ण प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से तैयार होगा वैज्ञानिक और तकनीकी विकास का नया आधार

बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन प्रमुख परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इनमें प्रदेश में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना, विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड संस्थान का विकास तथा आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ तक पहुंचाना शामिल है।

इन प्रस्तावित परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में अत्याधुनिक वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, अनुसंधान आधारित औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया गया।

विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर से उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों को मिलेगी नई शक्ति

बैठक में छत्तीसगढ़ में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना के प्रस्ताव पर विशेष रूप से चर्चा हुई। यह प्रस्तावित केंद्र प्रदेश के खनिज, इस्पात, धातु, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित उद्योगों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज और औद्योगिक राज्यों में शामिल है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपयोग बढ़ाने, नई औद्योगिक तकनीकों के विकास और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान सुविधाओं की आवश्यकता है। प्रस्तावित केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इस केंद्र में अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे आधारित विश्लेषण, उच्च तापमान पर पदार्थों का परीक्षण, नैनो टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक एवं चुंबकीय पदार्थों का अध्ययन तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

इन सुविधाओं के माध्यम से धातु एवं मिश्रधातुओं के गुणों का अध्ययन, उन्नत पदार्थों का परीक्षण, नई विनिर्माण तकनीकों का विकास और औद्योगिक उत्पादों की गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सकेगा। इससे रक्षा, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और अन्य अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में भी अनुसंधान एवं नवाचार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

प्रस्तावित केंद्र में लगभग 600 शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के आवासीय प्रशिक्षण की क्षमता विकसित करने की परिकल्पना है। इसके माध्यम से तीन वर्षों में लगभग 1,800 विद्यार्थियों को उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।

इस केंद्र के विकसित होने से छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग संस्थानों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, स्टार्टअप और औद्योगिक इकाइयों को उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे वैज्ञानिक परीक्षण के लिए विदेशी संस्थानों पर निर्भरता कम करने, अनुसंधान की लागत और समय में कमी लाने तथा उद्योगों की तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और औद्योगिक क्षमताओं को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीक से जोड़ना प्रदेश के आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाला कदम होगा। इससे राज्य में अनुसंधान आधारित उद्योगों, तकनीकी नवाचार और उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकेंगे।

विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए विशेष संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव

बैठक में प्रदेश में विज्ञान और गणित शिक्षा की गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार के उद्देश्य से भारतीय विज्ञान संस्थान के अकादमिक मार्गदर्शन में चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विशेष संस्थान की स्थापना के प्रस्ताव पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रस्तावित इस संस्थान का उद्देश्य विज्ञान एवं गणित विषयों में उच्च प्रशिक्षित, दक्ष और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित शिक्षकों की नई पीढ़ी तैयार करना है।

प्रस्तावित पाठ्यक्रम में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित जैसे प्रमुख विषयों के साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, वैज्ञानिक अनुसंधान, संचार कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

संस्थान में 14 आधुनिक शिक्षण प्रयोगशालाएं, 600 विद्यार्थियों की आवासीय क्षमता, समृद्ध पुस्तकालय, डिजिटल शिक्षण सुविधाएं, आधुनिक व्याख्यान कक्ष, खेल सुविधाएं तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए आवासीय अधोसंरचना विकसित करने की परिकल्पना है। यहां 25 पूर्णकालिक शिक्षकों की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा पाठ्यक्रम निर्माण, प्रयोगशाला विकास, शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अनुसंधान संस्कृति को प्रोत्साहित करने में अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा ही वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता की मजबूत आधारशिला है। विज्ञान और गणित के विषयों में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने तथा उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने के लिए उत्कृष्ट शिक्षकों का होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रदेश में विज्ञान एवं गणित के उच्च प्रशिक्षित शिक्षकों की नई पीढ़ी तैयार करने में सहायता मिलेगी। इसका सकारात्मक प्रभाव शासकीय विद्यालयों सहित प्रदेश की संपूर्ण स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण एवं जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण प्रयास होगा।

चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों में भी सहयोग की संभावनाएं

बैठक में तीसरी महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की शैक्षणिक, वैज्ञानिक और अनुसंधान क्षमताओं का लाभ छत्तीसगढ़ में उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

इस प्रस्ताव में किफायती चिकित्सा जांच तकनीकों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, क्लिनिकल रिसर्च और चिकित्सा क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन के विकास को प्राथमिकता दी गई है।

प्रारंभिक चरण में पूर्ण मेडिकल स्कूल की स्थापना के स्थान पर हब एंड नेटवर्क मॉडल अपनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस मॉडल के माध्यम से भारतीय विज्ञान संस्थान को छत्तीसगढ़ के अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, शासकीय संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों से जोड़कर संयुक्त अनुसंधान एवं तकनीकी विकास की दिशा में कार्य किया जा सकेगा।

इसके अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान प्रयोगशालाओं की स्थापना, चिकित्सा तकनीकों के परीक्षण एवं सत्यापन केंद्रों का विकास, फेलोशिप, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।

बैठक में बताया गया कि बेंगलुरु स्थित टाटा आईआईएससी मेडिकल स्कूल विज्ञान, इंजीनियरिंग और चिकित्सा के समन्वय पर आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है। इसमें कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण और रोबोटिक सर्जरी जैसे विशेषज्ञ चिकित्सा क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

इस संस्थान के वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुभवों का लाभ छत्तीसगढ़ में चिकित्सा अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आधुनिक उपचार तकनीकों के विकास में लिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों में चिकित्सा जांच, रोगों की शीघ्र पहचान और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए तकनीकी नवाचार उपयोगी सिद्ध होंगे।

बस्तर और सरगुजा के युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़ने, आधुनिक प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षण प्राप्त करने और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की है।

बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान की विशेषज्ञता से प्रदेश के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन, ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अनुसंधान इंटर्नशिप, आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों का प्रशिक्षण और विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के व्याख्यान उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी, बुनियादी विज्ञान और अन्य उभरती तकनीकों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने पर भी विचार किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अवसरों से शासकीय शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों तथा ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के युवाओं को प्राथमिकता के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा के प्रतिभाशाली युवा भी देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में अनुसंधान करें, नई तकनीकों का विकास करें और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएं, यह राज्य सरकार की आकांक्षा है।

बस्तर और सुकमा में जल संरक्षण तथा स्थानीय तकनीकी नवाचार की संभावनाओं पर चर्चा

बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग पर भी विचार-विमर्श किया गया।

भारतीय विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने बस्तर और सुकमा सहित विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के बिना जल प्रवाह की ऊर्जा से संचालित पंपिंग तकनीकों के उपयोग संबंधी कार्यों की जानकारी दी।

हाइड्रोलिक रैम एवं टरबाइन पंपों पर आधारित ये तकनीकें विशेष रूप से दूरस्थ वनांचलों में उपयोगी हो सकती हैं, जहां पारंपरिक विद्युत आधारित जलापूर्ति व्यवस्थाओं के संचालन में कठिनाइयां आती हैं। स्थानीय जलस्रोतों और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप इन तकनीकों का उपयोग जल उपलब्धता बढ़ाने तथा ग्रामीण समुदायों की आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक हो सकता है।

इसके अतिरिक्त शोधित जल के पुनर्चक्रण, जलाशयों के पुनर्भरण और भूजल संवर्धन के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के अनुभवों पर भी चर्चा हुई।

इस दौरान कर्नाटक के कोलार जिले में प्रतिदिन 440 मिलियन लीटर शोधित जल को 137 जलाशयों तक पहुंचाने वाली परियोजना का उदाहरण प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचारों की उपयोगिता का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, जल प्रबंधन और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विज्ञान और तकनीक का उपयोग ग्रामीण जीवन को सुगम बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए भी किया जाना चाहिए।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में विज्ञान, शिक्षा, उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय आवश्यक

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, उद्योग, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़कर आगे बढ़ाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग से प्रदेश में आधुनिक वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने, उच्चस्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा देने, उद्योगों की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार चाहती है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की पहचान केवल खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और उत्कृष्ट मानव संसाधन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी स्थापित हो।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के संकल्प को साकार करने में विज्ञान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ प्रस्तावित सहयोग प्रदेश की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल साबित हो सकता है।

बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन, प्रशासन एवं वित्त संकाय के डीन प्रोफेसर पी.एस. अनिल कुमार, मैकेनिकल साइंसेज डिवीजन के डीन प्रोफेसर सत्यम सुवास तथा बायोलॉजिकल साइंसेज डिवीजन के डीन प्रोफेसर सतीश राघवन शामिल हुए।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन की नई दिल्ली में पदस्थ निवेश आयुक्त सुश्री ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, कौशल विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजू सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सेंट विंसेंट पैलोटी महाविद्यालय में लीडरशिप फॉर एक्सीलेंस पर एक दिवसीय  कार्यशाला का आयोजन

सेंट विंसेंट पैलोटी महाविद्यालय में लीडरशिप फॉर एक्सीलेंस पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

 रायपुर :- सेंट विंसेंट पैलोटी महाविद्यालय, रायपुर द्वारा प्राइवेट कॉलेजेस प्रिंसिपल वेलफेयर एसोसिएशन (निजी महाविद्यालय प्राचार्य कल्याण संघ) के तत्वावधान में लीडरशिप फॉर एक्सीलेंस: एंपावरिंग प्रिंसिपल्स फॉर विकसित भारत 2047” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रभावी नेतृत्व, संस्थागत विकास एवं शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ावा देना तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्राचार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार-विमर्श करना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. संजीव प्रशार, निदेशक, भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), रायपुर उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कुलदीप दुबे ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व ही शैक्षणिक संस्थानों को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर कर सकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में उच्च शिक्षण संस्थानों एवं उनके प्राचार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सकारात्मक दृष्टिकोण एवं सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। 
निजी महाविद्यालय प्राचार्य कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ. मेघेष तिवारी एवं सचिव डॉ. देवाशीष मुखर्जी ने बताया कि वर्तमान बदलते शैक्षणिक परिवेश में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों के नेतृत्वकर्ताओं का सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में सहभागिता के लिए शहर के लगभग 30 महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने अपनी सहमति प्रदान की है।
मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता प्रो. संजीव प्रशार ने अपने उद्बोधन में शैक्षणिक संस्थानों के विकास में दूरदर्शी नेतृत्व, नवाचार एवं प्रभावी प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं मूल्यपरक शिक्षा की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सांस्कृतिक चेतना का विकास भी होना चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपराओं एवं अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में पारंपरिक ज्ञान एवं समकालीन शैक्षणिक दृष्टिकोण के बीच समन्वय स्थापित करना आवश्यक है, ताकि शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके।
कार्यशाला के अंतर्गत दो विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में प्रो. एस. के. पांडेय, पूर्व कुलपति, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा में नेतृत्व की बदलती भूमिका एवं संस्थागत विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। द्वितीय सत्र में प्रो. बी. जी. सिंह, पूर्व कुलपति, पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा में नेतृत्व, प्रशासनिक दक्षता एवं संस्थागत उत्कृष्टता के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। दोनों सत्रों में प्रतिभागियों को विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त करने तथा अपने विचार साझा करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजित समापन समारोह में प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलपति, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने उच्च शिक्षा में नेतृत्व की बदलती भूमिका, शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संस्थानों की प्रगति के लिए प्राचार्यों में दूरदर्शिता, नवाचार को अपनाने की क्षमता तथा बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करने का दृष्टिकोण होना आवश्यक है। उन्होंने प्राचार्यों को संस्थागत विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करने तथा एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने के लिए प्रेरित किया।
इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने सहभागिता की। विभिन्न महाविद्यालयों से आए प्राचार्यों एवं शैक्षणिक नेतृत्वकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, संस्थागत विकास एवं प्रभावी नेतृत्व से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। कार्यशाला ने सभी प्रतिभागियों को नवीन विचारों एवं अनुभवों से सीखने तथा शैक्षणिक संस्थानों के विकास के लिए प्रभावी रणनीतियों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यशाला के माध्यम से उच्च शिक्षा में नेतृत्व की भूमिका, संस्थागत विकास तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में प्राचार्यों की जिम्मेदारियों पर सार्थक विचार-विमर्श किया गया।
छत्तीसगढ़ बनेगा देश का नया फिल्म हब, छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन बनाने पर जोर

छत्तीसगढ़ बनेगा देश का नया फिल्म हब, छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन बनाने पर जोर

 00 मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक, पर्यटन और रोजगार के खुलेंगे नए द्वार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण (फिल्म शूटिंग) को प्रोत्साहित करने और पर्यटन के बहुमुखी विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख और लोकप्रिय फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना है।

प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा वैश्विक मंच
मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिनेमैटिक और प्राकृतिक दृश्यों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। राज्य के अनछुए प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध पर्यटन स्थलों को देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर में फिल्म शूटिंग के लिहाज से उपयुक्त और संभावनाशील नए स्थलों की पहचान कर उन्हें तेजी से विकसित और प्रोत्साहित किया जाए।

फिल्म नीति का नवीनीकरण और चित्रोत्पला फिल्म सिटी पर विशेष जोर
चर्चा के दौरान राज्य की मौजूदा फिल्म नीति को और अधिक व्यावहारिक व प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही, बहुप्रतीक्षित चित्रोत्पला फिल्म सिटी के प्रस्ताव और उसकी संभावनाओं को मूर्त रूप देने को लेकर भी गहन मंथन हुआ। सरकार का उद्देश्य फिल्म मेकर्स के लिए शूटिंग की प्रक्रियाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी और आकर्षक बनाना है, जिससे अधिक से अधिक प्रोडक्शन हाउस छत्तीसगढ़ का रुख करें। 

स्थानीय युवाओं और कलाकारों के लिए सृजित होंगे रोजगार के अवसर
मुख्य सचिव ने इस बात पर विशेष बल दिया कि फिल्म निर्माण गतिविधियों के बढऩे से न केवल पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, होटल उद्योग और युवाओं के लिए रोजगार के नए और सुनहरे अवसर सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त, बैठक में निफ्टेम के प्रस्तावित भ्रमण तथा खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) के क्षेत्र में तकनीकी सुविधाओं एवं प्रशिक्षण के विस्तार को लेकर भी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।

इस उच्चस्तरीय बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ की प्रबंध संचालक श्रीमती संजीता गुप्ता तथा वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की उप सचिव श्रीमती आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

नगरीय निकाय चुनाव : नगरीय निकाय चुनाव के लिए भाजपा नेताओं को सौंपी गई जिम्मेदारी

नगरीय निकाय चुनाव : नगरीय निकाय चुनाव के लिए भाजपा नेताओं को सौंपी गई जिम्मेदारी

 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए प्रदेश चुनाव टोली की घोषणा की है। गठित चुनाव टोली मे संतोष पाण्डेय - प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं सांसद, अखिलेश सोनी - भाजपा प्रदेश महामंत्री, भूपेन्द्र सवन्नी - अध्यक्ष राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा), सौरभ सिंह - अध्यक्ष खनिज विकास निगम, किशोर राय - प्रदेश संयोजक नगरीय निकाय प्रकोष्ठ, प्रफुल विश्वकर्मा - अध्यक्ष लौह शिल्पकार विकास बोर्ड और पंकज कुमार झा - मीडिया सलाहकार को शामिल किया गया है। टोली के पदेन सदस्य के रूप में सुनील पिल्लई - भाजपा आईटी सेल प्रदेश संयोजक, मितुल कोठारी - भाजपा सोशल मीडिया प्रदेश संयोजक और हेमंत पाणिग्रही - भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक शामिल किया गया है।
इसी प्रकार आगामी नगरीय निकाय चुनावों और उपचुनाव के मद्देनजर प्रभारियों एवं सह-प्रभारियों की सूची घोषित की गई है : रायगढ़ जिला की नगर पंचायत तमनार के लिए लखनलाल साहू को प्रभारी और श्रीमती संयोगिता सिंह जूदेव व जोगेश लाम्बा को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। धमतरी जिला की नगर पंचायत बड़ी करेली में शशि पवार को प्रभारी और अरूण सार्वा व श्रीमती ज्योति चंद्राकर सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला की नगर पंचायत बिलाईगढ़ में केवल अध्यक्ष पद के उपचुनाव हेतु केदार गुप्ता को प्रभारी और चन्द्रकुमार पटेल व श्रीमती अल्का चंद्राकर को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है।