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डिप्टी सीएम शर्मा कवर्धा में आयोजित दही हांडी उत्सव में हुए शामिल

डिप्टी सीएम शर्मा कवर्धा में आयोजित दही हांडी उत्सव में हुए शामिल

 o शर्मा ने हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैयालाल की का जयघोष कर उत्सव का उल्लास और भी बढ़ा दिया

कवर्धा। डिप्टी सीएम एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा शनिवार को कवर्धा शहर के गांधी मैदान तथा भारत माता चौक में आयोजित दही हांडी उत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा रानी की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम शर्मा ने परंपरा अनुसार सभी ग्वाला भाइयों का तिलक लगाकर स्वागत किया और उन्हें दही हांडी उत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। यादव समाज के प्रतिनिधियों ने उन्हें पारंपरिक सम्मान स्वरूप खुमरी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सभापति रामकुमार भट्ट, नितेश अग्रवाल सहित समस्त पार्षदगण, जनप्रतिनिधि, शहरवासी और यादव समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे। डिप्टी सीएम एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने समस्त शहरवासियों एवं प्रदेशवासियों को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने मंच से ही सभी उपस्थित जनों के साथ “हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैयालाल की” का जयघोष कर उत्सव का उल्लास और भी बढ़ा दिया।

डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि गोविंदा उत्सव कवर्धा की गौरवशाली परंपरा है, जो समाज में एकता, भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने आगे कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हम सभी को धर्म, कर्म और कर्तव्य के प्रति प्रेरित करता है। कृष्ण लीला हमें यह संदेश देती है कि अन्याय और अधर्म पर सदैव धर्म की विजय होती है। शर्मा ने सभी युवाओं से आह्वान किया कि वे भगवान कृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें और समाज की सेवा में सक्रिय भूमिका निभाएं। दही हांडी उत्सव के दौरान हजारों की संख्या में शहरवासी, समाजजन और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। पूरा शहर कृष्ण भक्ति और जयघोष से गुंजायमान रहा।

झीरम के सबूत थे तो जांच एजेंसी को क्यों नहीं दिए, राजनीतिक बयानबाजी से सच नहीं बदलता : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

झीरम के सबूत थे तो जांच एजेंसी को क्यों नहीं दिए, राजनीतिक बयानबाजी से सच नहीं बदलता : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 कांग्रेस की राजनीति का पुराना चरित्र ‘फूट डालो और राज करो’, जहां जाते हैं वहां गुटबाजी करते हैं : मुख्यमंत्री साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एनआईए न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद कांग्रेस की ओर से की जा रही बयानबाजी पर पलटवार करते हुए कहा कि संबंधित प्रकरण की जांच एनआईए को उस समय सौंपी गई थी, जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी। लगभग 13 वर्षों तक इस मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया चली, 100 से अधिक गवाहों की गवाही हुई और तमाम तथ्यों एवं साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय का निर्णय सामने आया है। न्यायालय ने 10 लोगों को दोषी ठहराया है और 16 सितंबर को उनकी सजा का निर्धारण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस को यह भी याद रखना चाहिए कि एनआईए किसी राज्य सरकार की नहीं, बल्कि देश की प्रमुख जांच एजेंसी है। जब यह प्रकरण एनआईए के पास गया, तब केंद्र में उनकी ही सरकार थी। इतने वर्षों तक जांच चली। यदि कांग्रेस के नेताओं के पास इस मामले से जुड़ा कोई तथ्य, प्रमाण या सबूत था तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने रखना चाहिए था। अब न्यायालय का फैसला आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी करना केवल सवालों से बचने का प्रयास है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जब वे विपक्ष में थे, तब कहा करते थे कि सबूत जेब में लेकर घूम रहे हैं। सवाल यह है कि यदि उनके पास सबूत थे तो उन्होंने उन्हें एनआईए को क्यों नहीं सौंपा? जांच एजेंसी के सामने तथ्य रखने के लिए उनके पास पर्याप्त समय था। आरोप लगाना आसान है, लेकिन आरोपों को प्रमाणित करने के लिए तथ्य और साक्ष्य देने पड़ते हैं। न्यायिक प्रक्रिया राजनीतिक बयानों से नहीं, साक्ष्यों और तथ्यों से चलती है।

कांग्रेस में प्रभारियो के फेरबदल पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति आज भी अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चल रही है। जहां कांग्रेस जाती है, वहां गुटबाजी और आपसी खींचतान शुरू हो जाती है। जनता के मुद्दों पर एकजुट होकर काम करने के बजाय कांग्रेस के नेता अपने ही दल के भीतर एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ने में व्यस्त रहते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रभार में बदलाव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तब वहां भी उनका विरोध सामने आया था। शायद उसी का नतीजा है कि अब उनका प्रभार प्रदेश बदल दिया गया है। यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है, लेकिन जिस प्रकार उसके अपने नेताओं के बीच लगातार विरोध और खींचतान सामने आती है, उससे कांग्रेस की राजनीतिक कार्यसंस्कृति स्पष्ट दिखाई देती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने भीतर देखना चाहिए। एक तरफ उसके नेता न्यायिक निर्णयों पर सवाल खड़े करते हैं और दूसरी तरफ अपने ही संगठन में एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलते रहते हैं। छत्तीसगढ़ की जनता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और भ्रम की राजनीति को भली-भांति समझती है। जनता को बयानबाजी नहीं, तथ्य और प्रमाण चाहिए।

राज्यपाल रमेन डेका ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में हुए शामिल, कहा-समय का सदुपयोग और परिश्रम ही सफलता की कुंजी…..

राज्यपाल रमेन डेका ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में हुए शामिल, कहा-समय का सदुपयोग और परिश्रम ही सफलता की कुंजी…..

 रायपुर: राज्यपाल  रमेन डेका शिक्षक दिवस के अवसर पर एसईसीएल-डीएवी पब्लिक स्कूल, वसंत विहार, बिलासपुर में आयोजित ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शामिल हुए। इस अवसर पर शिक्षकों के उत्कृष्ट योगदान का सम्मान किया गया तथा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

इंटरनेट और तकनीक का सदुपयोग करते हुए युवा सही दिशा में आगे बढ़े

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि समय का सही उपयोग जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज का दौर इंटरनेट और तकनीक का दौर है तथा बच्चे तेजी से एक ऐसी दुनिया में बड़े हो रहे हैं, जहां ज्ञान और सूचनाएं आसानी से उपलब्ध हैं। ऐसे में बच्चों और युवाओं को समय का सदुपयोग करते हुए सही दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार एवं मूल्यों का समावेश भी आवश्यक

राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश के शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने समय में गुरुकुल परंपरा के माध्यम से गुरु विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कार प्रदान करते थे। समय के साथ शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुए हैं और आज आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार एवं मूल्यों का समावेश भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि परिश्रम करने वालों को निश्चित रूप से सफलता मिलती है। जीवन में निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए और चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिए।

देशभक्ति और संस्कारों के महत्व पर जोर

राज्यपाल ने वरिष्ठ नागरिकों से भी जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीवन में जो कुछ मिला है, उसके प्रति संतोष और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए तथा वर्तमान में रहकर जीवन का आनंद लेना चाहिए। उन्होंने देशभक्ति और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। बच्चों में देशभक्ति की भावना विकसित होने से देश को जागरूक और राष्ट्रभक्त नागरिक मिलेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के निर्माण में परिवार और शिक्षकों दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य नहीं करते, बल्कि समाज को शिक्षित और जागरूक बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

’शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित’

इस अवसर पर आयोजित ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित शिक्षकों के समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में एसईसीएल और डीएवी के बीच शिक्षा के क्षेत्र में स्थापित सहयोग और साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया। ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ शिक्षकों के सम्मान, उनके अनुभवों के आदान-प्रदान और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यक्रम में संभागायुक्त  सुनील जैन, कलेक्टर  संजय अग्रवाल,  एसईसीएल के डायरेक्टर  बिरंची दास,  हिमांशु जैन, एसईसीएल के अन्य अधिकारी-कर्मचारी, डीएवी प्रबंधन, विभिन्न प्रोजेक्ट स्कूलों के प्रतिनिधि, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

जो खेलेगा, वही खिलेगा... खेल प्रतिभाओं को तराशने और आगे बढ़ाने प्रतिबद्ध है सरकार : अरुण साव

जो खेलेगा, वही खिलेगा... खेल प्रतिभाओं को तराशने और आगे बढ़ाने प्रतिबद्ध है सरकार : अरुण साव

 राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के समापन समारोह में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री

प्रदेशभर 845 खिलाड़ियों और 150 से अधिक ऑफिशियल्स ने की भागीदारी

बिलासपुर संभाग बना ओवरऑल चैंपियन

रायपुर. 6 सितम्बर 2026. उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत इन प्रतिभाओं को पहचानने, तराशने और उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्रदान करने की है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री  साव ने आज बिलासपुर में 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

उप मुख्यमंत्री  साव ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल के मैदान में संघर्ष करने और पसीना बहाने वाले खिलाड़ी ही सफलता की नई ऊंचाइयों को छूते हैं। जो खेलेगा, वही खिलेगा। आज देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी खेल और खिलाड़ियों के विकास को विशेष प्राथमिकता दे रहे हैं। खेलो इंडिया के माध्यम से खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी खेल और खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए लगातार कार्य कर रही है। राज्य में बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक का आयोजन किया गया है। छत्तीसगढ़ को खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का अवसर भी मिला है। राज्य सरकार ने बंद हो चुके खेल अलंकरण को पुनः प्रारंभ करने के साथ ही उत्कृष्ट खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की है।

साव ने बताया कि हाल ही में 29 अगस्त को राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों को प्रोत्साहन स्वरूप एक करोड़ 74 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष योजना के अंतर्गत इस वर्ष के बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से खेलों के विकास के साथ ही स्पोर्ट्स साइंस और खेल अधोसंरचना को भी मजबूत किया जाएगा।

3800 अंकों के साथ बिलासपुर बना ओवरऑल चैंपियन

26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के पांचों संभागों के 845 खिलाड़ियों एवं 150 से अधिक ऑफिशियल्स ने भाग लिया। चार दिवसीय प्रतियोगिता में बेसबॉल, तैराकी और वाटर पोलो की स्पर्धाएं आयोजित की गईं। बिलासपुर संभाग ने सभी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3800 अंकों के साथ ओवरऑल चौंपियन का खिताब अपने नाम किया।

प्रतियोगिता का आयोजन बिलासपुर के संजय तरण पुष्कर एवं छत्तीसगढ़ स्कूल खेल मैदान में किया गया। समापन समारोह में उप मुख्यमंत्री  अरुण साव और अन्य अतिथियों ने विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरित कर सम्मानित किया।

शिक्षा के साथ खेल भी जरूरी : विधायक अमर अग्रवाल

बिलासपुर विधायक  अमर अग्रवाल ने कहा कि जीवन बहुआयामी है। शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहना भी आवश्यक है, जिसमें खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के विकास के लिए बनाई गई नीतियों का परिणाम है कि आज भारतीय खिलाड़ी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने खेलों के लिए आधारभूत अधोसंरचना विकसित करने का कार्य किया है।

खेल की प्रतिस्पर्धा भविष्य को बनाती है उज्ज्वल : विधायक  धरमलाल कौशिक

बिल्हा विधायक  धरमलाल कौशिक ने कहा कि खेल के माध्यम से छत्तीसगढ़ को नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा है और खेल के मैदान में होने वाली प्रतिस्पर्धा खिलाड़ियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाती है। उन्होंने खिलाड़ियों से खेल के क्षेत्र में अपने परिवार, प्रदेश और देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

समापन समारोह में मस्तुरी विधायक  दिलीप लहरिया, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष  राजा पाण्डेय, अपर कलेक्टर  शिव कुमार बनर्जी, संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर  अश्वनी कुमार भारद्वाज, जिला शिक्षा अधिकारी  वर्षा शर्मा, सहायक संचालक क्रीड़ा  जी.डी. गर्ग, बीईओ बिल्हा भूपेंद्र कौशिक,  मोहित जायसवाल और  दीपक सिंह सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं खेलप्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद थे।

‘नमस्ते’ योजना में छत्तीसगढ़ संयुक्त रूप से देश में प्रथम

‘नमस्ते’ योजना में छत्तीसगढ़ संयुक्त रूप से देश में प्रथम

 राज्य के 1428 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों को पीपीई किट वितरित, 1374 के आयुष्मान भारत कार्ड बनाए गए, 139 कर्मियों को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण

 
स्वच्छता कर्मियों हेतु आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए 47 ईआरएसयू और 14420 हेल्पलाइन का संचालन
 
उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने नगरीय निकायों और विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों को दी बधाई, कहा स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर कार्य परिस्थितियां सर्वोच्च प्राथमिकता
 
रायपुर. 6 सितम्बर 2026. सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा स्वच्छता कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देने में छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार की ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम’ (NAMASTE) योजना के अंतर्गत राज्यों के प्रदर्शन की रैंकिंग में छत्तीसगढ़ ने संयुक्त रूप से देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। छत्तीसगढ़ के साथ आंध्रप्रदेश, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तरप्रदेश और केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी 'नमस्ते' योजना के क्रियान्वयन में संयुक्त रूप से देश में पहले स्थान पर हैं। 
 
उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने इस उपलब्धि पर नगरीय निकायों, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों व 'नमस्ते' योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी मैदानी अमले को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर कार्य परिस्थितियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। स्वच्छता कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देकर जोखिमपूर्ण कार्यों को समाप्त करना और स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण कार्य का वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है।
 
 साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ का 'नमस्ते' योजना के क्रियान्वयन में संयुक्त रूप से राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करना स्वच्छता कर्मियों के सत्यापन, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और स्वच्छता कार्यों के मशीनीकरण के लिए यहां किए जा रहे कार्यों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह उपलब्धि स्वच्छता कर्मियों के सम्मान, सुरक्षित स्वच्छता व्यवस्था और स्वच्छता कार्यों के दौरान होने वाली मृत्यु को शून्य करने की ओर छत्तीसगढ़ की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।
 
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अब तक 1487 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों का सर्वेक्षण कर 1465 कर्मियों का सत्यापन किया गया है। 169 नगरीय निकायों में 1428 कर्मियों को पीपीई (PPE) किट वितरित किए गए हैं और 1374 कर्मियों को आयुष्मान भारत कार्ड उपलब्ध कराया गया है। वहीं 139 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण तथा 923 स्वच्छता कर्मियों को कार्यशाला आयोजित कर सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस साल 14 जुलाई को राज्य के सभी नगरीय निकायों में 'नमस्ते' दिवस का आयोजन किया गया था, जिनमें 15 हजार से अधिक स्वच्छता कर्मियों, जनप्रतिनिधियों, शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों एवं आम नागरिकों ने सहभागिता की थी। इन कार्यक्रमों में स्वच्छता कर्मियों का स्वास्थ्य परीक्षण, व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण (OST), कर्मचारियों का सम्मान तथा पीपीई किट एवं आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए थे। 
 
'नमस्ते' योजना के अंतर्गत वेस्ट पिकर्स के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। राज्य में 8527 वेस्ट पिकर्स की प्रोफाइलिंग की गई है, जिनमें से 6799 का सत्यापन किया जा चुका है। इनमें से 991 वेस्ट पिकर्स को पीपीई किट भी दिए जा चुके हैं। वहीं 512 वेस्ट पिकर्स को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। अभी 6287 और वेस्ट पिकर्स को प्रशिक्षण देने की तैयारी चल रही है। 
 
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छता कर्मियों के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में 47 ईआरएसयू (Emergency Response Sanitation Units) स्थापित किए गए हैं। 14 नगर निगमों, 24 जिला मुख्यालयों तथा 9 द्वितीय सर्वाधिक जनसंख्या वाले निकायों में ये ईआरएसयू स्थापित किए गए हैं। इनमें से 39 ईआरएसयू को सुरक्षा किट भी उपलब्ध कराए जा चुके हैं। ईआरएसयू एवं 14420 हेल्पलाइन के माध्यम से आपातकालीन स्वच्छता सेवाओं के लिए त्वरित और सुरक्षित प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित की जा रही है।
 
इस तरह हुआ राज्यों का मूल्यांकन
 
राज्यों में 'नमस्ते' योजना के क्रियान्वयन का मूल्यांकन 100 अंकों के निर्धारित पैमाने पर किया गया है। इसमें प्रोफाइल किए गए स्वच्छता कर्मियों के सत्यापन के लिए 20 अंक, एसयूवाय (SUY) के माध्यम से मशीनीकरण के लिए 10 अंक, ईआरएसयू एवं 14420 हेल्पलाइन के संचालन के लिए 20 अंक, सामाजिक सुरक्षा कवरेज के लिए 20 अंक तथा स्वच्छता मृत्यु से संबंधित मामलों में प्रवर्तन, मुआवजा एवं जवाबदेही के लिए 30 अंक निर्धारित हैं। इसके अतिरिक्त स्वच्छता मृत्यु के मामलों में नकारात्मक अंक का भी प्रावधान है। निर्धारित मूल्यांकन मानकों के आधार पर छत्तीसगढ़ ने संयुक्त रूप से प्रथम रैंक हासिल की है।
 
सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों को सुरक्षित व गरिमापूर्ण आजीविका, सामाजिक सुरक्षा तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रदान करने 2023 से संचालित है 'नमस्ते' योजना
 
सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों को सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण आजीविका, सामाजिक सुरक्षा तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 से 'नमस्ते' योजना शुरू की गई है। इसमें स्वच्छता कार्यों का मशीनीकरण बढ़ाने, असुरक्षित एवं खतरनाक तरीके से हाथ से सफाई की प्रथा को समाप्त करने तथा स्वच्छता कार्यों के दौरान होने वाली मृत्यु को शून्य (Zero Fatality) करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मी (SSW), कचरा बीनने वाले (Waste Pickers), नाली साफ करने वाले तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) एवं फ़ीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) में कार्यरत कर्मियों को शामिल किया गया है।
 
योजना का क्रियान्वयन आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) योजना की राष्ट्रीय कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है। छत्तीसगढ़ में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सभी शहरी स्थानीय निकायों के माध्यम से योजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।
बस्तर की जनता जैसा विकास चाहेगी, वैसा ही होगा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

बस्तर की जनता जैसा विकास चाहेगी, वैसा ही होगा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

बस्तर में विकास को लेकर भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहने की अपील, मुख्यमंत्री ने कहा -स्थानीय जनता की इच्छा और हित सर्वोपरि

प्रदेश की बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरा सौभाग्य, एक भाई के नाते उनकी सेवा और सुरक्षा के लिए सदैव संकल्पित - मुख्यमंत्री  साय

रायपुर 6 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर के विकास की दिशा वहां की जनता की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप ही तय होगी। बस्तर की जनता को किसी प्रकार के भ्रम में रहने की आवश्यकता नहीं है। सरकार क्षेत्र में कृषि, पर्यटन, पशुपालन सहित स्थानीय संभावनाओं के अनुरूप आजीविका और विकास के अवसरों को आगे बढ़ा रही है। बस्तर के लोग जैसा विकास चाहेंगे, सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने निजी समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में विभिन्न सवालों के जवाब देते हुए बस्तर के विकास, नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता और महिला सशक्तीकरण सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी।

बस्तर से जुड़े एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा। आज जब नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई निर्णायक मुकाम पर पहुंची है और क्षेत्र में शांति एवं विकास का नया वातावरण बना है, तब कुछ लोग बस्तर की जनता के बीच यह भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि नक्सलवाद को समाप्त करने के पीछे सरकार का उद्देश्य बड़े उद्योगों के लिए रास्ता तैयार करना है। मुख्यमंत्री ने इसे स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। बस्तर का भविष्य वहां की जनता की आकांक्षाओं और इच्छाओं के अनुरूप ही तय होगा।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जो लोग नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई में कभी साथ नहीं खड़े हुए अथवा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से उसका समर्थन करते रहे, वे अब नए नैरेटिव के माध्यम से लोगों में भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। बस्तर की जनता जागरूक है और ऐसे भ्रामक प्रयासों को भली-भांति समझती है। हमारी सरकार का उद्देश्य बस्तर की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संभावनाओं को आगे बढ़ाते हुए वहां के लोगों के जीवन में समृद्धि लाना है।

उन्होंने कहा कि बस्तर में कृषि को सशक्त करने, पशुपालन को बढ़ावा देने और पर्यटन की अपार संभावनाओं को अवसरों में बदलने की दिशा में सरकार निरंतर काम कर रही है। शांति स्थापित होने के साथ अब दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंच रहा है और स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। हमारा प्रयास है कि बस्तर अपनी विशिष्ट पहचान और समृद्ध संस्कृति को सहेजते हुए विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे।

बहनों का ‘भैया’ कहना मेरे लिए सबसे बड़ा सौभाग्य

साक्षात्कार के दौरान प्रदेश की बहनों द्वारा विष्णु भैया नाम से पुकारे जाने और बहनों के मुख्यमंत्री से आत्मीय जुड़ाव को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश की बहनें उन्हें ‘भैया’ कहकर पुकारती हैं और अपने परिवार का सदस्य मानती हैं। इससे बड़ा सौभाग्य उनके लिए और क्या हो सकता है ? बहनों से मिलने वाला स्नेह और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक भाई के नाते प्रदेश की बहनों की सेवा, सुरक्षा और उनके जीवन में खुशहाली लाना उनका संकल्प है। सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके सम्मान, स्वाभिमान और सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि प्रदेश की हर बहन को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें और वह आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार तथा छत्तीसगढ़ की प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास और स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। सरकार की प्रत्येक नीति और प्रत्येक निर्णय के केंद्र में छत्तीसगढ़ की जनता का हित है।

बस्तर के विकास से लेकर माताओं-बहनों के सशक्तीकरण तक सरकार का संकल्प स्पष्ट है - विकास ऐसा हो, जिसमें जनता की भागीदारी हो, स्थानीय आकांक्षाओं का सम्मान हो और उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

बहतराई स्टेडियम में गूंजा तीजा तिहार का उल्लास, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने बहनों संग साझा की पर्व की खुशियां

बहतराई स्टेडियम में गूंजा तीजा तिहार का उल्लास, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने बहनों संग साझा की पर्व की खुशियां

 तीजा हमारी समृद्ध लोकसंस्कृति का पावन पर्व, इसमें मातृशक्ति के प्रेम, आस्था और परिवार की खुशहाली की कामना समाहित : मुख्यमंत्री  साय

प्रदेश की बहनें आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहीं, 13.85 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी - मुख्यमंत्री  साय

छत्तीसगढ़ी संस्कृति और नारी शक्ति का दिखा भव्य संगम, पारंपरिक वेशभूषा में बड़ी संख्या में शामिल हुईं माताएं-बहनें

चोरहादेवरी गांव अब ‘रामदेवरी’ के नाम से जाना जाएगा, मुख्यमंत्री ने की घोषणा

बेलतरा महोत्सव के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री ने की 30 लाख रुपए देने की घोषणा

रायपुर 6 सितम्बर 2026/ तीजा तिहार के उल्लास के बीच आज बिलासपुर का बहतराई स्टेडियम छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं के रंग में सराबोर नजर आया। पारंपरिक वेशभूषा में बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं-बहनों के बीच मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने तीजा तिहार की खुशियां साझा कीं और उन्हें पर्व की अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की सभी बहनों के सुखी, समृद्ध और खुशहाल जीवन की कामना की।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि तीजा हमारी समृद्ध लोकसंस्कृति का पावन पर्व है, जिसमें हमारी माताओं-बहनों का प्रेम, आस्था और परिवार की खुशहाली की कामना समाहित है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में तीजा का विशेष स्थान है। इस पर्व पर विवाहित बेटियों के मायके आने और परिवार के साथ पर्व मनाने की हमारी परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। हमारी माताएं और बहनें भगवान शिव एवं माता पार्वती की आराधना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं। ऐसे पर्व हमारी परंपराओं को जीवंत रखने के साथ परिवार और समाज के आत्मीय रिश्तों को भी मजबूत बनाते हैं।

मुख्यमंत्री साय आज बहतराई स्टेडियम में आयोजित भव्य तीजा मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक  अमर अग्रवाल,  धरमलाल कौशिक,  सुशांत शुक्ला, भावना बोहरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में माताएं-बहनें उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में नारी शक्ति को सदैव सम्मान का सर्वोच्च स्थान मिला है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। घर-घर शौचालय निर्माण से महिलाओं की गरिमा और सुविधा सुनिश्चित हुई है। राशन कार्ड महिलाओं के नाम पर बनाए गए हैं। छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक योजना की 31 किश्तों का भुगतान किया जा चुका है। यह आर्थिक सहायता बहनों को अपनी छोटी-बड़ी आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवार में उनकी भूमिका को और मजबूत कर रही है।

प्रदेश की 13.85 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल शासकीय योजनाओं की लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की विकास यात्रा की सक्रिय भागीदार बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। राज्य में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर हमारी बहनें विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं।

उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ हमारी बहनें आधुनिक तकनीक को अपनाकर भी आगे बढ़ रही हैं। ड्रोन दीदियां आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए स्वरोजगार से जुड़कर प्रतिदिन 6 से 7 हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं। कहीं महिलाएं सेंटरिंग प्लेट के व्यवसाय से जुड़ी हैं तो कहीं ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। बस्तर से लेकर बिलासपुर तक हमारी माताएं-बहनें अपनी मेहनत, कौशल और आत्मविश्वास से सफलता की नई कहानियां लिख रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को उद्यमिता और उद्योगों से जोड़ने के लिए भी विशेष प्रोत्साहन दे रही है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश की हर बहन को अपनी क्षमता और हुनर के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिले और वह आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार तथा प्रदेश की समृद्धि में सहभागी बने।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा, वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रदेश है तथा यहां विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार का प्रयास है कि इन संभावनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और विकास की सुविधाएं गांव तथा लोगों के घर के नजदीक उपलब्ध हों।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का हमारा संकल्प है। इस संकल्प को पूरा करने में प्रदेश की मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जब हमारी बहनें शिक्षित, सुरक्षित, स्वस्थ, आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर होंगी, तभी परिवार मजबूत होंगे और प्रदेश भी तेजी से आगे बढ़ेगा।

चोरहादेवरी गांव का नाम होगा ‘रामदेवरी’, बेलतरा महोत्सव के लिए मिलेंगे 30 लाख रुपए

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर क्षेत्रवासियों को महत्वपूर्ण सौगातें भी दीं। उन्होंने बिल्हा विकासखंड के चोरहादेवरी गांव का नाम बदलकर ‘रामदेवरी’ किए जाने की घोषणा की। साथ ही माघी पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले बेलतरा महोत्सव के लिए 30 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं का उपस्थित जनसमुदाय ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

हमारी संस्कृति और सामाजिक आत्मीयता को सहेजता है तीजा : उप मुख्यमंत्री श्री साव

उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह माताओं और बहनों की आस्था, प्रेम और पारिवारिक समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कमल सखी परिवार द्वारा आयोजित तीजा मिलन समारोह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के साथ समाज में आत्मीयता और आपसी जुड़ाव को मजबूत करते हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि तीजा तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। यह पर्व महिलाओं के जीवन में विशेष महत्व रखता है। राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सशक्तीकरण और सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि तीजा जैसे पारंपरिक पर्व हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का संदेश देते हैं।

बेलतरा विधायक  सुशांत शुक्ला ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की माटी और संस्कृति से जुड़ा पर्व है। इसमें माताओं-बहनों की आस्था, त्याग और पारिवारिक प्रेम की सुंदर झलक दिखाई देती है। ऐसे आयोजन हमारी लोकपरंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं।

झूले, मेहंदी और पारंपरिक रंगों से सराबोर हुआ बहतराई स्टेडियम

तीजा मिलन समारोह में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और नारी शक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा में बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं-बहनों के लिए आकर्षक झूलों, मेहंदी और विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों की व्यवस्था की गई थी। भोजन और उपहार की विशेष व्यवस्था ने पर्व की खुशियों को और बढ़ाया। बच्चों ने भी उत्साह के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर आयोजन का आनंद लिया। गीत-संगीत, पारंपरिक वेशभूषा और उत्सवी माहौल से पूरा बहतराई स्टेडियम तीजा की खुशियों से सराबोर रहा।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष राजा पांडे, महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष  राजेश सूर्यवंशी, संभागायुक्त  सुनील जैन, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, एसएसपी  रजनेश सिंह, नगर निगम कमिश्नर  प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत सीईओ  संदीप अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल दही हांडी उत्सव में हुए सम्मिलित

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल दही हांडी उत्सव में हुए सम्मिलित

 जशपुर के रंजीता स्टेडियम में उमड़ा आस्था और उत्साह का सैलाब, गोविंदाओं ने दिखाया साहस और सामूहिक शक्ति

श्रीकृष्ण के आदर्शों से प्रेरणा लेकर प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता को मजबूत करें-श्री राजेश अग्रवाल

रायपुर, 6 सितंबर 2026। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, आस्था और उल्लास से सराबोर जशपुर के रंजीता स्टेडियम में आयोजित भव्य दही हांडी उत्सव में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सम्मिलित हुए। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं और गोविंदा टोलियों की मौजूदगी में उत्सव का उल्लास देखते ही बना। पूरे स्टेडियम परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने उत्सव में शामिल होकर श्रद्धालुओं और गोविंदाओं का उत्साहवर्धन किया तथा सभी को दही हांडी उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रेम, करुणा, धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। दही हांडी जैसे पारंपरिक उत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के साथ समाज में एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं।

गोविंदाओं ने दिखाया साहस और सामूहिक शक्ति

उत्सव का मुख्य आकर्षण गोविंदा टोलियों द्वारा दही हांडी फोड़ने का रोमांचक प्रदर्शन रहा। एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर ऊंचाई तक पहुंचते गोविंदाओं ने साहस, विश्वास, अनुशासन और सामूहिक प्रयास का शानदार परिचय दिया। दही हांडी फूटते ही पूरा स्टेडियम ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि दही हांडी केवल उत्सव और मनोरंजन का अवसर नहीं, बल्कि सामूहिक शक्ति, सहयोग और विश्वास का प्रतीक है। जब समाज एकजुट होकर लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता है, तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। गोविंदाओं की टोली का प्रत्येक सदस्य एक-दूसरे पर विश्वास करते हुए सामूहिक प्रयास करता है और यही एकजुटता समाज की सबसे बड़ी ताकत है।

संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और विविधतापूर्ण धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों से है। दही हांडी जैसे उत्सव हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति हमारी पहचान है। ऐसे पर्व हमारी परंपराओं को जीवंत रखने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि इन परंपराओं को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।”

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश में समाज को सही दिशा देने की अद्भुत शक्ति है। प्रेम, सद्भाव, कर्तव्य और लोककल्याण के उनके आदर्श आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं।

भक्ति के साथ सामाजिक समरसता का संदेश

रंजीता स्टेडियम में महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्सव में शामिल हुए। गोविंदाओं की टोलियों के प्रदर्शन के दौरान दर्शकों का उत्साह देखते ही बना।

मंत्री  अग्रवाल ने कहा, “धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। ऐसे अवसरों पर लोग अपने मतभेद भुलाकर एक साथ उत्सव मनाते हैं। इससे आपसी सद्भाव, सहयोग और सामाजिक समरसता की भावना मजबूत होती है। हमें भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर प्रेम, शांति और भाईचारे को आगे बढ़ाना चाहिए।”

आयोजकों, श्रद्धालुओं और गोविंदा टोलियों को दी शुभकामनाएं

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने दही हांडी उत्सव के सफल आयोजन के लिए आयोजकों, गोविंदा टोलियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।

उन्होंने कहा कि जशपुर की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराएं जिले की विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे आयोजन जशपुर की सांस्कृतिक जीवंतता को प्रदेश और देश के सामने प्रस्तुत करने के साथ सामाजिक एकता को भी मजबूती प्रदान करते हैं।

दही हांडी उत्सव के दौरान कृष्ण भक्ति से जुड़े गीतों और भजनों ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया। “तेरे नैना हेरत हेरत, माखन चुराए नंदलाल…” जैसे भक्ति भाव से वातावरण गूंजता रहा। उमंग, उल्लास और कृष्ण भक्ति से सजे इस भव्य उत्सव ने जशपुर की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।

CG - गजपल्ला वॉटरफॉल में डूबा रायपुर का युवक, पर्यटकों में मचा हड़कंप, रेस्क्यू जारी

CG - गजपल्ला वॉटरफॉल में डूबा रायपुर का युवक, पर्यटकों में मचा हड़कंप, रेस्क्यू जारी

 गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के प्रसिद्ध गजपल्ला वॉटरफॉल में आज एक बड़ा हादसा हुआ है, जहां रायपुर से पिकनिक मनाने पहुंचे युवक की डूबने से मौत हो गई। इस घटना से सनसनी फैल गई है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और युवक की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरु कर दिया है।

रायपुर से दोस्तों के साथ आया था पिकनिक मनाने

बताया जा रहा है कि युवक रायपुर से अपने पांच दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने आया था। गजपल्ला वॉटरफॉल में नहाने के दौरान वह अचानक गहरे पानी में चला गया और डूब गया। हादसे के बाद मौके पर हड़कंप मच गया। युवक के साथियों ने तत्काल इसकी सूचना प्रशासन को दी, जिसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। युवक के शव को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। जिला प्रशासन की टीम भी मौके पर मौजूद है और पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

खतरनाक स्टंट करते नजर आ रहे युवक

इधर, हादसे के बीच गजपल्ला वॉटरफॉल में पर्यटकों की लापरवाही भी सामने आई है। वॉटरफॉल क्षेत्र में कुछ युवक जोखिम भरे स्टंट करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्राकृतिक पर्यटन स्थल पर बेरोकटोक इस तरह के जानलेवा स्टंट किए जा रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

युवक की डूबने से मौत की घटना ने एक बार फिर प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम, चेतावनी बोर्ड और निगरानी व्यवस्था को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और हादसे से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।

Suicide : सीआरपीएफ कैंप में आरक्षक की पेड़ पर फांसी से लटकी मिली लाश, 15 साल से थे तैनात

Suicide : सीआरपीएफ कैंप में आरक्षक की पेड़ पर फांसी से लटकी मिली लाश, 15 साल से थे तैनात

 बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में भरनी स्थित सीआरपीएफ कैंप में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पेड़ पर आरक्षक का शव फांसी से लटका मिला. वह शुक्रवार को ड्यूटी के बाद से लापता थे. मृतक की पहचान जयप्रकाश गहिर (33 साल) के रूप में हुई है. वह ओडिसा के बलांगीर जिले के ग्राम करबहाली के निवासी थे. पिछले 15 सालों से वह भरनी स्थित सीआरपीएफ कैंप में पोस्टेड थे.   

सकरी टीआई उमेश साहू ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि जयप्रकाश शुक्रवार सुबह ड्यूटी खत्म करने के बाद कैंप से लापता हो गया था. वह अपने घर भी नहीं पहुंचा. बताया जा रहा है कि घर में किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद वह घर से बाहर निकल गया और फिर वापस नहीं लौटा.

पेड़ पर लटका मिला आरक्षक का शव 

जानकारी के मुताबिक, पुलिस को कुछ लोगों ने भरनी स्थित केंद्रीय विद्यालय के पास एक पेड़ पर आरक्षक का शव फांसी पर लटके होने की सूचना दी. मौके पर तत्काल पुलिस को रवाना किया गया. साथ ही सीआरपीएफ के अधिकारी और जवान भी मौके पर पहुंचे.

पंचनामा करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है. फिलहाल हर संभावित एंगल से पुलिस मामले की जांच कर रही है.

CG Police Transfer : पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल, कई थानों के बदले टीआई, देखें आदेश…..

CG Police Transfer : पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल, कई थानों के बदले टीआई, देखें आदेश…..

 धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के पुलिस महकमे में एक बार फिर बड़ा फेरबदल हुआ है। जिले के एसपी भावना पांडेय ने शनिवार को चार थाना प्रभारियों का तबादला किया है। 

देखें पूरी लिस्ट….

CG Weather : छत्तीसगढ़ में थमी बारिश की रफ्तार, आज रायपुर समेत इन इलाकों में बूंदाबांदी के आसार

CG Weather : छत्तीसगढ़ में थमी बारिश की रफ्तार, आज रायपुर समेत इन इलाकों में बूंदाबांदी के आसार

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की चाल अब धीमी होती नजर आ रही है। बीते दिनों की तुलना में बारिश की गतिविधियों में कमी आई है और प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम फिलहाल सामान्य बना हुआ है। हालांकि रविवार को कुछ इलाकों में मौसम करवट ले सकता है। रायपुर समेत प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में बारिश का दायरा काफी हद तक सक्रिय मौसम प्रणालियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल प्रदेश में कोई मजबूत सिस्टम सक्रिय नहीं है, जिसके कारण लगातार और व्यापक बारिश की संभावना कम बनी हुई है।

राजधानी रायपुर में रविवार को दिनभर बादलों की आवाजाही देखने को मिल सकती है। स्थानीय प्रभाव के चलते कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि अभी तेज बारिश को लेकर कोई बड़ा अलर्ट नहीं है।

रायपुर में आज अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास और न्यूनतम तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

पिछले 24 घंटे के दौरान छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई। इस दौरान जगदलपुर में अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबकि पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस रहा।

बारिश के आंकड़ों के मुताबिक मुंगेली के लोरमी, सरगुजा के दरिमा और राजनांदगांव के कुमारदा में 1-1 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई।

प्रदेश में मौसमी सब-डिविजनल वर्षा सामान्य से 3 प्रतिशत कम रही है।

प्रदेश में बारिश को प्रभावित करने वाला मौसम सिस्टम अब कमजोर हो चुका है। इसके कारण बारिश की गतिविधियों में कमी आई है। हालांकि स्थानीय स्तर पर बनने वाले मौसम प्रभाव से कुछ जगहों पर बादल और बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल छत्तीसगढ़ में व्यापक बारिश के लिए किसी मजबूत सिस्टम का इंतजार है।

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे लगे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है।

यह मौसम प्रणाली अगले दो दिनों के दौरान पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा में आगे बढ़ सकती है। इसके आगे बढ़ने के साथ मौसम में होने वाले बदलाव पर नजर रखी जा रही है।

फिलहाल छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां सीमित रहने की संभावना है। रविवार को रायपुर समेत कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं, प्रदेश में दोबारा अच्छी बारिश के लिए बंगाल की खाड़ी में बनने वाली नई मौसम प्रणाली अहम भूमिका निभा सकती है।

विकास की नई राह पर बलौदाबाजार- बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और अधोसंरचना के विस्तार से संवर रहा ग्रामीण अंचल

विकास की नई राह पर बलौदाबाजार- बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और अधोसंरचना के विस्तार से संवर रहा ग्रामीण अंचल

 रायपुर :- राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने आज रायपुर जिला के तिल्दा विकासखण्ड के ग्राम सगुनी में विकास और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रम में नव निर्मित रंगमंच और अमृत सरोवर का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने उत्कृष्ट सेवाओं के लिए शिक्षकों का सम्मान और महिलाओं को पूरक आहार का वितरण किया। मंत्री  वर्मा ने कहा कि ​बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को नया आयाम देते हुए क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की गति को तेज कर दिया गया है।

मूलभूत सुविधाओं की पहुंच प्राथमिकता में

​मंत्री  वर्मा ने स्पष्ट किया कि बलौदाबाजार विधानसभा के लगभग 260 गांवों और 2 नगरपालिकाओं में विकास कार्यों के लिए बजट की कोई कमी नहीं है। विकास कार्यों का आवंटन बिना किसी भेदभाव के किया जा रहा है, ताकि हर पंचायत और गांव को इसका समान लाभ मिल सके। प्रत्येक गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और मूलभूत सुविधाओं की पहुंच प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जा रही है।

​शिक्षा व्यवस्था एवं आंगनबाड़ियों का सुदृढ़ीकरण

​ग्रामीण बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल प्रदान करने के लिए व्यापक स्तर पर अधोसंरचना सुधार जारी है। तिल्दा ब्लॉक के 40 स्कूलों में अतिरिक्त कमरों तथा आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। स्कूलों में पेयजल, बाउंड्री वॉल और शौचालयों का निर्माण कार्य तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। इसी तरह हर गांव में आंगनबाड़ी केंद्रों, खेल मैदानों और सामुदायिक शेड के निर्माण को प्राथमिक सूची में शामिल किया गया है।

​गांवों का कायाकल्प और अधोसंरचनात्मक विकास पर विशेष ध्यान

​ग्रामीण जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए अधोसंरचनात्मक विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विधानसभा के 50 गांवों में नई लाइटें लगाने के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत कर जारी कर दी गई है। गांवों में मुक्तिधाम निर्माण, तालाबों का सौंदर्यकरण और पिंडा-बूतरा निर्माण के कार्य प्रगति पर हैं।राजस्व विभाग के माध्यम से लगभग 15 करोड़ रुपए के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिससे ग्रामीण अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी।

​17 सितंबर को विकसित भारत के संकल्प के साथ विशेष आयोजन

​मंत्री  टंक राम वर्मा ने 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा जयंती एवं प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर सभी नागरिकों से दीप प्रज्वलित कर इसे धूमधाम से मनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

कोड़ातराई में 1.21 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा पीएम स्कूल भवन, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया भूमिपूजन

कोड़ातराई में 1.21 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा पीएम स्कूल भवन, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया भूमिपूजन

 शिक्षा में आधुनिक सुविधाओं के साथ नवाचार और स्टार्टअप की सोच विकसित करने पर दिया जोर

रायपुर सितंबर 2026/ शिक्षक दिवस के अवसर पर वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी ने रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड अंतर्गत कोड़ातराई में पीएम स्कूल भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। करीब 1.21 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस स्कूल भवन में विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। भवन निर्माण पूर्ण होने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा के लिए बेहतर अधोसंरचना प्राप्त होगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र के विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीकी दौर में विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करना जरूरी है। शिक्षक बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखें, बल्कि उनमें नई सोच, जिज्ञासा, सवाल पूछने और नवाचार की भावना विकसित करें।

उन्होंने कहा कि बच्चों में इनोवेशन और स्टार्टअप की सोच विकसित करना समय की आवश्यकता है। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक समाज में ज्ञान और जागरूकता के विस्तार की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे बच्चों में सीखने और कुछ नया करने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।

सकरबोगा में ग्रामीणों से सीधा संवाद, सुनीं समस्याएं

वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने शनिवार सुबह रायगढ़ जिले के सकरबोगा गांव पहुंचकर ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं और स्थानीय जरूरतें सुनीं। उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए क्षेत्र की प्राथमिक आवश्यकताओं की जानकारी ली और विकास कार्यों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने की बात कही।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, पेयजल, सिंचाई, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। गांवों के विकास की योजनाएं स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं और सुझावों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं, ताकि विकास का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचे।

इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष पुसौर हेमलता हरिशंकर चौहान, जिला पंचायत सदस्य भाग्यवती डोलनारायण नायक, जनपद पंचायत सदस्य श्री गोपी चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

देश के अग्रणी राज्यों में होगी छत्तीसगढ़ की पहचान : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

देश के अग्रणी राज्यों में होगी छत्तीसगढ़ की पहचान : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब बस्तर में विकास और समृद्धि का नया अध्याय : मुख्यमंत्री

बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी अंचल बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही सरकार

सुरक्षा कैंप अब बन रहे ‘सेवा डेरा’, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं पहुंच रहीं अंतिम छोर तक

सवा आठ लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों से छत्तीसगढ़ में खुल रहे औद्योगिक विकास और रोजगार के नए द्वार

सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस और AI के उपयोग से भविष्य के छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव हो रही तैयार

मुख्यमंत्री  साय ‘नक्सलमुक्त विकासयुक्त छत्तीसगढ़@2047’ कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर सितंबर 2026/ नक्सलवाद की चुनौती से आगे बढ़कर छत्तीसगढ़ अब विकास, सुशासन, निवेश और नवाचार के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। विकसित भारत@2047 की यात्रा में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बनाएगा। राज्य की प्राकृतिक संपदा, युवा शक्ति और विकास की अपार संभावनाओं को जनकल्याण और आर्थिक समृद्धि में बदलने के लिए सरकार योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित एक निजी होटल में समाचार चैनल लाइव टाइम्स द्वारा आयोजित ‘नक्सलमुक्त विकासयुक्त छत्तीसगढ़@2047’ कार्यक्रम ‘एलटी एक्सचेंज’ में अपने विचार व्यक्त करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान से लेकर बस्तर के विकास, किसान कल्याण, महिला सशक्तीकरण, आवास, निवेश, सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कभी देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की चर्चा नक्सलवाद की समस्या को लेकर अधिक होती थी, लेकिन आज यह तस्वीर तेजी से बदली है। नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता के साथ विकास की नई संभावनाओं ने छत्तीसगढ़ के प्रति धारणा में सकारात्मक बदलाव लाया है। जल संचय के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का पूरे देश में शीर्ष स्थान हासिल करना इसी बदलते छत्तीसगढ़ की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व में नक्सलवाद के विरुद्ध मिली निर्णायक सफलता

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत से नक्सलवाद की समस्या को देखते-सुनते आए हैं। उनका गृह संभाग सरगुजा भी कभी नक्सलवाद से प्रभावित था और वहां नक्सल हिंसा की अनेक घटनाएं हुईं। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में सरगुजा को नक्सलवाद से मुक्त कराने में सफलता मिली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में प्रदेश में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने नक्सलवाद को लेकर महत्वपूर्ण बैठक ली थी। उस समय देश में शेष नक्सलवाद का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा छत्तीसगढ़ में केंद्रित था, जबकि शेष लगभग एक चौथाई हिस्सा पांच-छह अन्य राज्यों में था।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में नई रणनीति और बेहतर समन्वय के साथ नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान शुरू किया गया। संयुक्त सुरक्षा प्रयासों को मजबूत किया गया और हमारे सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस तथा वीरता का परिचय दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जो सफलता मिली है, उसके पीछे हमारे जवानों का साहस, समर्पण और बलिदान है, जिसे छत्तीसगढ़ हमेशा याद रखेगा।

नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के साथ विकास को भी बनाया रणनीति का अभिन्न हिस्सा

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की रणनीति शुरू से स्पष्ट थी कि नक्सलवाद का समाधान केवल सुरक्षा अभियानों से नहीं, बल्कि विकास और जनविश्वास से भी होगा। बस्तर की जनता लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण विकास से वंचित रही। नक्सली नहीं चाहते थे कि अंदरूनी क्षेत्रों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी और शासन की योजनाएं पहुंचें।

इसी सोच के साथ सरकार ने ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की। सुरक्षा कैंप स्थापित होने के साथ ही उनके आसपास के गांवों में सड़क, राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं और सुविधाओं को तेजी से पहुंचाया गया। दूरस्थ अंचलों में पहली बार अनेक लोगों के राशन कार्ड बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कई ग्रामीणों को राशन लेने के लिए आने-जाने में पांच दिन तक लग जाते थे। अब शासन स्वयं उनके द्वार तक पहुंच रहा है।

दही हांडी हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश देती है : मुख्यमंत्री साय

दही हांडी हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश देती है : मुख्यमंत्री साय

 मुख्यमंत्री विशाल दही हांडी उत्सव में हुए शामिल, गोविंदाओं की टोलियों का बढ़ाया उत्साह

रायपुर, सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में आयोजित विशाल दही हांडी उत्सव में शामिल हुए। उत्सव में उमड़े जनसमूह के बीच मुख्यमंत्री ने गोविंदाओं की टोलियों का उत्साहवर्धन किया और प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दही हांडी का उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की स्मृतियों को जीवंत करने के साथ हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश भी देता है। माखन चुराने वाले नटखट कान्हा की बाल लीलाएं आज भी हर मन में आनंद, प्रेम और भक्ति का भाव जगाती हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दही हांडी केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामूहिकता की शक्ति का सुंदर प्रतीक है। हांडी तक पहुंचने वाला गोविंदा अकेले उस ऊंचाई तक नहीं पहुंचता। उसके नीचे खड़े प्रत्येक साथी का विश्वास, सहयोग और सामर्थ्य उसे ऊपर तक पहुंचाता है। जब सभी एक लक्ष्य के लिए मिलकर प्रयास करते हैं, तभी कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। यही संदेश हमें समाज और प्रदेश के विकास के लिए भी प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन हमें जीवन जीने की कला और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण की सीख देता है। ग्वालबालों के प्रिय सखा के रूप में उन्होंने प्रेम और मित्रता का संदेश दिया, द्वारका के नेतृत्वकर्ता के रूप में कुशल नेतृत्व का आदर्श प्रस्तुत किया और कुरुक्षेत्र में सारथी बनकर पूरी मानवता को कर्मयोग का मार्ग दिखाया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन की प्रत्येक भूमिका को पूर्ण जिम्मेदारी के साथ निभाया। उनका जीवन हमें परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा प्रदेश प्रभु श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या की जन्मभूमि है। भगवान श्रीराम ने वनवास का लंबा समय छत्तीसगढ़ की पुण्य धरा पर बिताया। आज जिस अबूझमाड़ क्षेत्र को हम जानते हैं, वह रामायण काल के विशाल दंडकारण्य का हिस्सा रहा है। प्रभु श्रीराम से जुड़ी स्मृतियां और स्थल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विशेष गौरव प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और श्रद्धालुओं को प्रमुख तीर्थ स्थलों से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम में प्रभु श्रीरामलला के दर्शन का अवसर मिल रहा है। अब तक छत्तीसगढ़ के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से अयोध्याधाम जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से राज्य के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है। योजना के अंतर्गत अब तक 10 हजार से अधिक श्रद्धालु विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में गौमाता का विशेष स्थान है। राज्य सरकार सुरभि गोधाम योजना के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देवी-देवताओं की कृपा से समृद्ध पुण्यभूमि है। प्रदेश पर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा रही है। कबीरधाम में भोरमदेव और राजिम में कुलेश्वर महादेव जैसे प्राचीन एवं प्रसिद्ध शिव मंदिर हमारी आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। जशपुर का मधेश्वर पहाड़ अपनी अद्भुत प्राकृतिक संरचना के कारण विशेष पहचान रखता है और इसे विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में मान्यता मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर मातृशक्ति के अनेक प्रसिद्ध शक्तिपीठ और आस्था केंद्र भी विद्यमान हैं। डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी, रतनपुर में मां महामाया, दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी और चंद्रपुर में मां चंद्रहासिनी के धाम प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा के प्रतीक हैं। हमारी सरकार इस गौरवशाली धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

 
 

5वें सेमेस्टर में अटके छात्रों को मिली बड़ी राहत, अंतरिम प्रवेश देने की घोषणा, अध्यादेश में होगा संशोधन

5वें सेमेस्टर में अटके छात्रों को मिली बड़ी राहत, अंतरिम प्रवेश देने की घोषणा, अध्यादेश में होगा संशोधन

 सरकार प्रदेश के युवा छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति संवेदनशील- उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू करने को प्रतिबद्ध सरकार

​रायपुर। ​प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत पढ़ रहे हजारों छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहद संवेदनशील और बड़ा निर्णय लिया है। प्रथम या द्वितीय सेमेस्टर के एक-दो प्रश्नपत्रों (पेपर्स) में असफल होने के कारण 5वें सेमेस्टर में प्रवेश से वंचित हो रहे छात्रों को अब सरकार ने बड़ी राहत देते हुए अंतरिम (Provisional) प्रवेश देने की घोषणा की है।

इस फैसले से हजारों छात्रों का शैक्षणिक वर्ष (Academic Year) खराब होने से बच जाएगा। ​मामले की गंभीरता और युवाओं के हित को सर्वाेपरि रखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि NEP के क्रियान्वयन में आ रही किसी भी व्यावहारिक अड़चन को दूर करने के लिए सरकार पूरी तरह संकल्पबद्ध है।

​मंत्री वर्मा ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग और हमारी सरकार प्रदेश के युवा छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। राज्य में नई शिक्षा नीति (NEP)को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए हम पूरी तरह कटिबद्ध हैं। इसे लागू करने की प्रक्रिया में यदि कोई भी व्यावहारिक समस्या या व्यवधान उत्पन्न होता है, तो युवाओं के स्वर्णिम भविष्य और उनके सर्वांगीण उत्थान को ध्यान में रखकर उसका त्वरित समाधान निकाला जाएगा।

इसी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सरकार ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है कि जो छात्र प्रथम या द्वितीय सेमेस्टर के एक या दो पेपर्स में अनुत्तीर्ण होने की वजह से 5 वें सेमेस्टर में दाखिला नहीं ले पा रहे थे, उन्हें अब 5 वें सेमेस्टर में अनंतिम रूप से प्रवेश दिया जाएगा। छात्रों के व्यापक हित को देखते हुए संबंधित अध्यादेश में समय रहते आवश्यक संशोधन भी किए जाएंगे। सरकार प्रदेश के सभी युवाओं के स्वर्णिम भविष्य की मंगलकामना करती है।

झीरम फैसले पर कांग्रेस का बड़ा हमला, दीपक बैज बोले- ‘आधा-अधूरा न्याय’

झीरम फैसले पर कांग्रेस का बड़ा हमला, दीपक बैज बोले- ‘आधा-अधूरा न्याय’

 रायपुर। झीरम घाटी हत्याकांड में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने जांच प्रक्रिया और फैसले को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रेस वार्ता में फैसले को आधा-अधूरा न्याय बताते हुए कहा कि कांग्रेस अदालत के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन झीरम हत्याकांड के पीछे कथित राजनीतिक साजिश का सच अब भी सामने नहीं आया है।

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरू से दिशाहीन रही और राजनीतिक षड्यंत्र के पहलू की पर्याप्त जांच नहीं की गई। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब जांच में बड़ी संख्या में नक्सलियों की संलिप्तता का उल्लेख था, तो दोषसिद्धि केवल 10 आरोपियों तक ही क्यों सीमित रही। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई थी, यात्रा का मार्ग किसने और क्यों बदला और हमले की योजना किसने बनाई थी?

कांग्रेस ने एनआईए की शुरुआती एफआईआर में शामिल कथित बड़े नक्सली नेताओं के नाम बाद की चार्जशीट से हटाए जाने पर भी सवाल खड़े किए। पार्टी ने पूछा कि झीरम मामले में नामजद और बाद में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली नेताओं से एनआईए ने पूछताछ क्यों नहीं की। कांग्रेस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीसी नक्सल और संदिग्ध आत्मसमर्पित नक्सलियों के नार्को टेस्ट की मांग भी उठाई।

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा नहीं चाहती कि झीरम हत्याकांड का पूरा सच सामने आए। हालांकि, ये कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, सुशील आनंद शुक्ला समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

CG : गुरु-शिष्य के रिश्ते को किया शर्मसार, छात्राओं को पास कराने के बदले रखी गंदी शर्त, आरोपी गिरफ्तार…

CG : गुरु-शिष्य के रिश्ते को किया शर्मसार, छात्राओं को पास कराने के बदले रखी गंदी शर्त, आरोपी गिरफ्तार…

 राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में छात्राओं को अश्लील मैसेज भेजकर संबंध बनाने का दबाव बनाने के आरोप में पुलिस ने एक शिक्षक को गिरफ्तार किया है। आरोपी शिक्षक की पहचान तिलक यदु के रूप में हुई है।

पुलिस के मुताबिक, मामले में एक अन्य आरोपी भी शामिल है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। वहीं, गिरफ्तार शिक्षक से मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है। घटना के सामने आने के बाद इलाके में भी चर्चा का माहौल है।

बताया जा रहा हैं कि आरोपी शिक्षक ने कक्षा की कुछ छात्राओं को मैसेज भेजकर परीक्षा में पास करने का झांसा दिया और संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। मामले में एक आदिवासी छात्रा ने घटना की शिकायत अपने परिजनों से की, जिसके बाद परिजनों ने अपनी बेटी के साथ थाने पहुंचे और शिक्षक को भी थाने बुलाया था। इस दौरान शिक्षक ने सार्वाजनिक रूप से माफी मांगकर मामले में शिकायत नहीं करने की बात छात्रा से कही थी। छात्रा ने आरोपी शिक्षक की नहीं सुनी और घटना की शिकायत दर्ज करवाने को लेकर थाने में अड़ी रही। आरोपी शिक्षक के खिलाफ अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया।

जानिए छात्रा द्वारा थाने में दी शिकायत

पीड़ित छात्रा ने पुलिस को बताया कि आरोपी शिक्षक तिलक यदु स्कूल में हिंदी व सामाजिक विज्ञान की क्लास लेता है। पिछले कुछ समय से शिक्षक द्वारा कक्षा 9 वीं में पास कराने का झांसा देकर अश्लील मैसेज छात्राओं को भेजता था। इतना ही नहीं शिक्षक ने मैसेज में संबंध बनाने का दबाव भी बनाया। आरोपी शिक्षक की हरकतों से परेशान होकर पीड़ित छात्रा ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी। परिजन तत्काल थाने पहुंचे और शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज कर शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही घटना के संबंध में पूछताछ कर आगे की जांच कार्रवाई की जा रही है।

बताया जा रहा हैं कि घटना में शामिल एक और आरोपी रमीज कुरैशी फरार है, जिसकी तलाश पुलिस द्वारा की जा रही है।

ओरछा, फरसगांव, खडग़वां, सोनहत, डौंडी, डोंगरगांव और धमधा में भी खुलेंगे लोक निर्माण विभाग के उप संभागीय कार्यालय

ओरछा, फरसगांव, खडग़वां, सोनहत, डौंडी, डोंगरगांव और धमधा में भी खुलेंगे लोक निर्माण विभाग के उप संभागीय कार्यालय

 00 कार्यों में गति लाने, विभागीय कसावट और कड़ी निगरानी के लिए दूरस्थ क्षेत्रों में भी कार्यालय शुरू कर रहा पीडब्ल्यूडी

00 पुल-पुलियों के निर्माण में भी आएगी तेजी, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, बालोद, सारंगढ़ और बैकुंठपुर जैसे दूरवर्ती जिलों में प्रारंभ होंगे सेतु उप संभागीय कार्यालय

रायपुर। सड़कों, भवनों और पुल-पुलियों के कार्यों में गति लाने तथा इनके निर्माण कार्यों में कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने लोक निर्माण विभाग दूरस्थ क्षेत्रों में भी कार्यालय शुरू कर रहा है। राज्य शासन ने लोक निर्माण विभाग के 16 उप संभागीय, दो संभागीय और एक सेतु मंडल कार्यालय के साथ ही इन कार्यालयों के लिए सेट-अप की मंजूरी दे दी है। इनमें से ज्यादातर कार्यालय दूरस्थ क्षेत्रों में खोले जा रहे हैं। इनकी स्थापना से निर्माण कार्यों में तेजी के साथ ही विभागीय कामकाज में कसावट आएगी।

राज्य शासन ने लोक निर्माण विभाग के सेतु परिक्षेत्र के अंतर्गत 9 नए कार्यालयों की स्वीकृति प्रदान की है। इनमें जगदलपुर में अधीक्षण अभियंता कार्यालय, रायपुर में कार्यपालन अभियंता कार्यालय सेतु संभाग क्रमांक-2, तथा बीजापुर, सुकमा, कोण्डागांव, बालोद, मुंगेली, सारंगढ़ और बैकुंठपुर में अनुविभागीय अधिकारी (सेतु उप संभाग) कार्यालय शामिल हैं। राज्य शासन ने भवन एवं सड़क निर्माण के लिए 10 नवीन कार्यालय भी मंजूर किए हैं। इनमें बैकुंठपुर में कार्यपालन अभियंता (कोरिया संभाग) कार्यालय तथा फरसगांव, ओरछा, डोंगरगांव, डौंडी, धमधा, आरंग, खडग़वां, सोनहत और बलौदाबाजार में अनुविभागीय अधिकारी (उप संभाग) कार्यालय शामिल हैं।

लोकधुनों और लोकगाथाओं से सजेगा रायपुर का लोकरंग पर्व, कल से 8 तक मुक्ताकाशी मंच पर दिखेगी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक

लोकधुनों और लोकगाथाओं से सजेगा रायपुर का लोकरंग पर्व, कल से 8 तक मुक्ताकाशी मंच पर दिखेगी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक

 00 संस्कृति, भरथरी-पंडवानी से लेकर पंथी, करमा, सुआ और ददरिया तक की होंगी मनमोहक प्रस्तुतियां

रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, लोकगाथाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को मंच देने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विभागीय आयोजन 2026 के अंतर्गत तीन दिवसीय लोकरंग पर्व का आयोजन किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक आयोजन 6, 7 एवं 8 सितंबर को रायपुर स्थित मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा। कार्यक्रम प्रत्येक दिन शाम 7 बजे से प्रारंभ होगा। लोकरंग पर्व के माध्यम से छत्तीसगढ़ की विविध लोक विधाओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में प्रदेश की पारंपरिक लोकगाथाओं, लोकनाट्य, लोकगीत और लोकनृत्य की ऐसी रंगारंग प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी, जो छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू और उसकी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत करेंगी।
भरथरी और पंडवानी से लेकर पंथी-करमा तक
तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक विधाओं भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा और गम्मत की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनके साथ सुआ, करमा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां भी दर्शकों को छत्तीसगढ़ की लोकजीवन से जोड़ेंगी। वहीं बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन जैसी लोक एवं पारंपरिक गायन शैलियों की प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं की गहराई को सामने लाया जाएगा।
लोक कलाकारों को मिलेगा मंच, नई पीढ़ी तक पहुंचेगी विरासत

लोकरंग पर्व केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी लोक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। लोकगीतों, लोकगाथाओं और पारंपरिक नृत्य-नाट्य शैलियों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं जनजातीय जीवन, सामाजिक परंपराओं और लोक आस्थाओं की झलक दर्शकों को देखने मिलेगी। आयोजन में पारंपरिक लोक विधाओं के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर साकार करेंगे। लोक वाद्यों की धुन, पारंपरिक गीतों की मिठास और लोकनृत्यों की लय से मुक्ताकाशी मंच तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आएगा।
मुक्ताकाशी मंच पर तीन शाम संस्कृति के नाम
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश की लोककलाओं और लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आम नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोडऩा है। 6 से 8 सितंबर तक शाम 7 बजे से होने वाली प्रस्तुतियों में दर्शकों को छत्तीसगढ़ की अलग-अलग लोक विधाओं का विविधतापूर्ण संगम देखने को मिलेगा। लोकरंग पर्व के जरिए छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर रायपुर के मुक्ताकाशी मंच पर उभरेगी, जहां लोकगाथाओं की कथात्मकता, लोकगीतों की मिठास, नृत्यों की थिरकन और पारंपरिक वाद्यों की गूंज मिलकर प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करेगी।

मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण समारोह - वन मंत्री कश्यप ने सेवानिवृत्त शिक्षकों और शिक्षा दूतों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण समारोह - वन मंत्री कश्यप ने सेवानिवृत्त शिक्षकों और शिक्षा दूतों को किया सम्मानित

रायपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर नारायणपुर के ए.जी. ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण सम्मान समारोह का आयोजन भव्य रूप से किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता तथा संसदीय कार्य मंत्री  केदार कश्यप और राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष  विश्व विजय सिंह तोमर उपस्थित रहे।

अनुशासन और संस्कारों से ही मिलती है सफलता: केदार कश्यप
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि अनुशासन, संस्कार, धैर्य और संकल्प के साथ शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढऩे से ही सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने परिवार को पहली पाठशाला बताते हुए कहा कि माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करना हमारी संस्कृति का मूल आधार है। विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने मोबाइल फोन का उपयोग केवल पढ़ाई और ज्ञानवर्धक गतिविधियों के लिए करने तथा इसके दुरुपयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके साथ सेल्फी भी ली।

पुस्तक विमोचन और शिक्षकों का सम्मान
समारोह के दौरान लेखक  शिव कुमार पाण्डेय द्वारा अबूझमाड़ की संस्कृति पर आधारित लिखित पुस्तक बस्तर के लोक जीवन में वनस्पतियां का विमोचन किया गया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 15 सेवानिवृत्त शिक्षकों ( सुमेर सिंह मंडावी, उषा किरण बैस,  धनसिंह बघेल आदि) को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। विकासखंड स्तर पर 6 शिक्षकों को शिक्षा दूत पुरस्कार और जिला स्तर पर 3 शिक्षकों को ज्ञानदीप पुरस्कार से नवाजा गया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष  इंद्रप्रस्थ बघेल, जनपद अध्यक्ष पिंकी उसेंडी, कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल, डीएफओ डॉ. वेंकटेशा एमजी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रही।

BJP प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की सेहत में सुधार :13 को लौट सकते है छत्तीसगढ़!

BJP प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की सेहत में सुधार :13 को लौट सकते है छत्तीसगढ़!

 रायपुर. सड़क हादसे में घायल छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव का स्वास्थ्य बेहतर अब बेहतर बताया जा रहा है. डॉक्टरों की निगरानी में उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है. इस महीने 12 या 13 सितंबर को वह छत्तीसगढ़ लौट सकते हैं.

दिल्ली से प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव बस्तर जिला भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में मोबाइल के जरिए जुड़े. इस दौरान उन्होंने करीब 7 मीनट तक बैठक को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि सेवा और समर्पण से संगठन मजबूत होता है. व्यक्तिगत परिस्थितियां कैसी भी हों, संगठन और समाजसेवा का संकल्प सर्वोपरि है. देव ने कार्यकर्ताओं को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कर्मपथ पर निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया.

सड़क हादसे में घायल हुए थे किरण सिंह देव

बता दें कि 29 जुलाई को परिवार के साथ बागेश्वर धाम (छतरपुर मध्य प्रदेश) से लौटते समय उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के तालबेहट क्षेत्र में झांसी-ललितपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर उनकी इनोवा आगे चल रही ट्रक से टकरा गई थी. इस सड़क दुर्घटना में किरण सिंह देव गंभीर रूप से घायल हो गए थे. दिल्ली मे मेदांता अस्पताल में उनका आपरेशन किया गया. तब से वह उनका उपचार वहीं चल रहा है. 

BREAKING : झीरम घाटी नक्सली हमले में आया बड़ा फैसला, सभी 10 आरोपी पाए गए दोषी

BREAKING : झीरम घाटी नक्सली हमले में आया बड़ा फैसला, सभी 10 आरोपी पाए गए दोषी

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले में आज बड़ा फैसला सामने आया है। NIA की विशेष अदालत ने मामले में सुनवाई के बाद 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। करीब 13 साल पुराने इस मामले के फैसले पर पूरे छत्तीसगढ़ की नजर टिकी हुई थी। न्यायधीश अजय सिंह राजपूत ने फैसला सुनाया है। अब दोषियों को किस अपराध में कितनी सजा मिलेगी, इस पर अदालत 16 सितंबर को सुनवाई करेगी।

25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। NIA ने मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।

मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चला था, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और अंतिम बहस के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था।

अब अदालत के फैसले के बाद इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा भी तय होगी। झीरम हमले में जान गंवाने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिजनों की निगाहें भी इस फैसले पर टिकी हुई थीं।

सभी 10 आरोपियों के नाम

  • प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति (Pramila Kodiyam @ Jyoti)
  • बंजामी उर्फ सन्ना (Banjami @ Sanna)
  • अयाता मरकाम / अयाता माड़कम (Ayata Markam)
  • मुक्का मंडावी (Mukka Mandavi)
  • मड़कामी देवा (Madkami Deva)
  • कवासी कोसा (Kawasi Kosa)
  • चौतू उर्फ मुन्ना (Chautu @ Munna)
  • कोसा कवासी (Kosa Kawasi)
  • महादेव नाग (Mahadev Nag)
  • सुमित्रा (जिसे बाद में गिरफ्तार किया गया था) / या अन्य सह-आरोपी जो इस ट्रायल का हिस्सा रहे.

कई बड़े नेताओं समेत 31 लोगों की मौत हुई थी

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफिला सुकमा में बड़ी सभा के बाद लौट रहा था. इसी दौरान झीरम घाटी के घने जंगलों में हथियारबंद माओवादियों ने काफिले पर हमला कर दिया. इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 31 लोगों की मौत हुई थी.

मरने वालों में तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडूम के प्रमुख चेहरों में शामिल महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे. हमले में कई सुरक्षाकर्मी और कांग्रेस कार्यकर्ता भी मारे गए थे. गंभीर गोली लगने के बाद इलाज के दौरान विद्याचरण शुक्ल की भी मौत हो गई थी.

अदालत ने कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए

एनआईए ने इस मामले में 25 सितंबर 2014 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों के नाम शामिल थे. इसके बाद दो और संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद एनआईए ने 28 सितंबर 2015 को 35 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की. मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई हुई, लेकिन इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई. वहीं, 33 नामजद आरोपी अब भी फरार बताए गए हैं. अंतिम दलीलें पूरी होने से पहले अदालत ने कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए थे.

एआई के युग में शिक्षक बनें विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की दें सीख : राज्यपाल डेका

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 00 शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : साय

00 लोकभवन में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन

00 प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षक राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित, चार शिक्षकों को मिला राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार
रायपुर। राज्यपाल  रमेन डेका और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समारोह में वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। चार उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा भी की।

समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल  रमेन डेका ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका भी व्यापक हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का नई तकनीकों से परिचित होना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी तकनीक का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग है। उन्होंने कहा कि एआई हमारा सहायक बने, हमारा नियंत्रक नहीं। शिक्षक विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग ज्ञान अर्जित करने, नवाचार करने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रेरित करें। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि आज गूगल और डिजिटल तकनीक के माध्यम से हमारे पास सूचनाओं का विशाल संसार उपलब्ध है। इसके बावजूद हमें यह ध्यान रखना होगा कि तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित न करे। दुनिया के अनेक देशों में विद्यार्थियों द्वारा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हो रहा है। तकनीक हमें जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा गुरु से ही मिलती है। इसलिए बदलते समय में शिक्षक की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित, बहुभाषी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। आने वाले समय में शिक्षा के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में शिक्षकों को निरंतर अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देना होगा। विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका का हिस्सा है। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षण केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक महान और गरिमामय दायित्व है। शिक्षक अपने ज्ञान के साथ-साथ अपने आचरण से भी विद्यार्थियों को शिक्षित करते हैं। बच्चे अपने शिक्षकों को आदर्श के रूप में देखते हैं, इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी कैसे आगे बढ़े, उसकी प्रतिभा कैसे निखरे और उसका भविष्य कैसे बेहतर बने, यह शिक्षक की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए राज्यपाल  डेका ने कहा कि शिक्षक दिवस उन्हें प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की अपनी यात्रा की याद दिलाता है। पहले शिक्षक और विद्यार्थी के बीच आदर, आत्मीयता और विश्वास का अत्यंत गहरा संबंध होता था। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक पूरी सेवा भावना और समर्पण के साथ विद्यार्थियों का भविष्य संवारते थे। यही समर्पण और आत्मीयता शिक्षक-विद्यार्थी संबंध की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। शिक्षक विद्यार्थी के व्यक्तित्व, सोच और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और विशेष प्रतिभा को पहचानें तथा उन्हें जीवन में सही दिशा चुनने के लिए प्रेरित करें। राज्यपाल श्री डेका ने शासकीय सेवा में स्थानांतरण को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि जहां भी दायित्व मिले, उसे सहजता से स्वीकार कर पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने सम्मानित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
शिक्षा का उद्देश्य सक्षम नागरिक और श्रेष्ठ समाज का निर्माण : मुख्यमंत्री साय

समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को शुभकामनाएं दीं और राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान शिक्षकों के समर्पण, कठिन परिश्रम, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है। शिक्षक वास्तव में राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। हमारे यहां शिक्षा का उद्देश्य कभी केवल डिग्री या नौकरी प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा है। ऐसी शिक्षा ही व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करते हुए शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोडऩे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, सामाजिक और भाषायी विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय आवश्यकताओं को भी महत्व दिया जा रहा है। बस्तर अंचल में बच्चों को उनकी स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल की गई है। इससे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बन रही है। शासकीय विद्यालयों में पैरेंट्स-टीचर मीट को बढ़ावा देकर अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा और विद्यालय की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।

 AI के युग में शिक्षक बनें विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की दें सीख : राज्यपाल श्री डेका

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के अंतर्गत किया गया है। इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को भी सरकार ने प्राथमिकता के साथ पूरा किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। इन प्रयासों से दूरस्थ अंचलों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढऩे के नए अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का हमारा लक्ष्य है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा विभाग तथा हमारे शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। आज जिन बच्चों को शिक्षक ज्ञान, संस्कार और कौशल दे रहे हैं, वही आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ और देश के विकास का नेतृत्व करेंगे। इसलिए एक शिक्षक का योगदान केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव आने वाली पीढिय़ों और पूरे समाज पर पड़ता है।

एआई आधारित स्मार्ट स्कूलों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा : स्कूल शिक्षा मंत्री
समारोह के विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में आधुनिक तकनीक और नवाचार के उपयोग को निरंतर बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में एआई आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए विविध गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में नवाचार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री  यादव ने इस अवसर पर आगामी वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों की घोषणा की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार
राज्य स्तरीय समारोह में चार उत्कृष्ट शिक्षकों को विशिष्ट राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के राजेश कुमार प्रजापति को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार, कोरबा जिले के  कामता प्रसाद जायसवाल को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार, दुर्ग जिले की प्रज्ञा सिंह को डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की श्रीमती प्रियंका गोस्वामी को  गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक तथा सहायक शिक्षक एल.बी. संवर्ग के कुल 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मानित शिक्षकों के योगदान और नवाचारी प्रयासों की सराहना करते हुए अतिथियों ने उनसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने में निरंतर योगदान देने का आह्वान किया।
समारोह में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। संचालक लोक शिक्षण  ऋतुराज रघुवंशी ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव संतोष देवांगन सहित विभागीय अधिकारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।