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छत्तीसगढ़ में पहली बार मिला दुर्लभ श्वेत कॉमन करैत, छठा राज्य बना वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण खोज

छत्तीसगढ़ में पहली बार मिला दुर्लभ श्वेत कॉमन करैत, छठा राज्य बना वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण खोज

 दुर्ग/चरोदा। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चरोदा स्थित पंचशील नगर में एक अत्यंत दुर्लभ ल्यूसिस्टिक (Leucistic) कॉमन करैत (Bungarus caeruleus) मिलने से वन्यजीव एवं वैज्ञानिक जगत में उत्साह का माहौल है। यह दुर्लभ सांप 21 जुलाई 2026 की रात लगभग 9:10 बजे एक आवासीय मकान से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू एवं सुरक्षित रिलीज का कार्य वन विभाग , अविनाश मौर्य एवं विजय शर्मा द्वारा किया गया।

जांच के दौरान यह लगभग 2.5 से 3 फीट कॉमन करैत पाया गई। इसका पूरा शरीर लगभग सफेद था, जबकि आंखें सामान्य काले रंग की थीं। इसी कारण इसे अल्बिनो (Albino) नहीं बल्कि ल्यूसिस्टिक (Leucistic) माना गया। ल्यूसिज्म एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक अवस्था है, जिसमें शरीर के अधिकांश भाग का रंगद्रव्य (Pigmentation) कम हो जाता है, लेकिन आंखों का रंग सामान्य बना रहता है।

प्रारंभिक उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य के अनुसार, भारत में इस प्रकार के ल्यूसिस्टिक कॉमन करैत के बहुत कम प्रामाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर छत्तीसगढ़ इस दुर्लभ घटना का दस्तावेजीकरण करने वाला देश का छठा राज्य बन सकता है। हालांकि अंतिम पुष्टि वैज्ञानिक शोध-पत्र के प्रकाशन एवं विस्तृत साहित्य समीक्षा के बाद होगी।

कॉमन करैत भारत के सबसे विषैले सर्पों में से एक है तथा इसे देश के “बिग फोर” विषैले सांपों में शामिल किया जाता है। इसका विष मुख्यतः न्यूरोटॉक्सिक (Neurotoxic) होता है, जो सीधे तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव डालता है। इसकी सबसे खतरनाक विशेषता यह है कि इसका दंश अक्सर बिना अधिक दर्द के होता है, जिससे कई बार पीड़ित व्यक्ति समय पर इसकी गंभीरता को समझ नहीं पाता। समय पर उपचार न मिलने पर श्वसन तंत्र प्रभावित होने से मृत्यु भी हो सकती है। भारत में अधिकांश गंभीर सर्पदंश इन्हीं चार प्रमुख विषैले सर्पों से जुड़े होते हैं, जिनमें कॉमन करैत भी शामिल है।

छत्तीसगढ़ में विशेषकर वर्षा ऋतु के दौरान कॉमन करैत के दंश के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। हाल के दिनों में भी राज्य में करैत के काटने से कई मौतों की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे इस प्रजाति के प्रति जागरूकता और समय पर उपचार की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
वन्यजीव रेस्क्यूअर विशेषज्ञ अविनाश मौर्य ने बताया कि सफेद रंग होने के बावजूद यह सांप सामान्य कॉमन करैत जितना ही विषैला था। उन्होंने कहा कि लोग किसी भी सफेद या अलग रंग के सांप को देखकर उसे पकड़ने या मारने का प्रयास न करें। ऐसे मामलों में तुरंत प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम अथवा वन विभाग को सूचना दें।

रेस्क्यू के बाद वन विभाग ओर विशेषज्ञों के दिशा-निर्देशों के अनुसार सांप को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यह खोज केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि भारतीय सर्प विज्ञान (Herpetology) के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस दुर्लभ रिकॉर्ड पर आधारित विस्तृत वैज्ञानिक शोध-पत्र तैयार किया जा रहा है, जिसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित करने की तैयारी चल रही है। यदि यह रिकॉर्ड प्रकाशित होता है, तो यह छत्तीसगढ़ की जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि मानी जाएगी।

अंत में वन्यजीव रेस्क्यूअर अविनाश मौर्य ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल किसी पर्व या वर्षा ऋतु तक सीमित नहीं होना चाहिए। सांप सहित सभी वन्यजीव हमारी जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और वर्षभर इनके संरक्षण के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। यदि कहीं कोई सांप अथवा अन्य वन्यजीव दिखाई दे, तो उसे नुकसान पहुँचाने या मारने का प्रयास न करें। प्रशिक्षित रेस्क्यूअर अथवा वन विभाग को सूचना देकर उसे सुरक्षित बचाने में सहयोग करें। प्रत्येक जीव प्रकृति के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए उनका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

प्रदेश में अब तक औसतन 421 मि.मी. वर्षा दर्ज : अब तक 85% बारिश, मैदानी इलाकों में जमकर बरसे बदरा

प्रदेश में अब तक औसतन 421 मि.मी. वर्षा दर्ज : अब तक 85% बारिश, मैदानी इलाकों में जमकर बरसे बदरा

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस मानसून सीजन में बारिश का असमान वितरण देखने को मिल रहा है। राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 27 जुलाई की स्थिति में जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 1 जून से अब तक औसतन 421 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई है। यह बीते 10 वर्षों की औसत बारिश (494 मि.मी.) का 85.2 प्रतिशत है। औसतन आंकड़ों के लिहाज से स्थिति भले ही सामान्य के करीब नजर आ रही हो, लेकिन जिलों के धरातलीय आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य छत्तीसगढ़ यानी मैदानी इलाकों में झमाझम बारिश हुई है। जबकि बस्तर और सरगुजा संभाग के अधिकांश जिलों में अब भी पानी की दरकार है।

​ इस मानसून में अब तक सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में औसत के मुकाबले रिकॉर्ड तोड़ 181.5 फीसदी (694.3 मि.मी.) वर्षा दर्ज की जा चुकी है। इसके साथ ही महासमुंद (123.2%), बलरामपुर (125.5%), जांजगीर-चांपा (117.6%), बलौदाबाजार (114.0%), सक्ती (113.7%) और राजधानी रायपुर (111.1%) में भी सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे यहाँ के नदी-नाले उफान पर हैं और खेती-किसानी के काम में तेजी आई है। इसके अलावा बिलासपुर (102.5%), दुर्ग (105.1%) और मुंगेली (100.6%) में भी वर्षा का कोटा लगभग पूरा हो चुका है।

छत्तीसगढ़ को खेल हब बनाने नई सोच और विजन के साथ करें काम: अरुण साव

छत्तीसगढ़ को खेल हब बनाने नई सोच और विजन के साथ करें काम: अरुण साव

 रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने आज खेल विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों और प्रशिक्षकों को छत्तीसगढ़ में नई खेल संस्कृति विकसित करने तथा खेल हब बनाने नई सोच एवं विजन के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, आदिम जाति कल्याण, पुलिस और वन विभाग सहित विभिन्न विभागों के खेल आयोजनों में मौजूद रहकर कम उम्र की प्रतिभाओं को खोजने तथा उनके समुचित प्रशिक्षण व मार्गदर्शन की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने इन आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए आयोजकों को आवश्यक सुझाव, सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करने को भी कहा। खेल एवं युवा कaल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और संचालक तनुजा सलाम भी बैठक में शामिल हुईं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक में विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविरों के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ ही ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों एवं खेल संघों को इससे जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये प्रशिक्षण शिविर स्थानीय स्तर पर खेलों का वातावरण तैयार करने काबड़ा माध्यम है। उन्होंने खेल एवं खिलाड़ियों के लिए अच्छा वातावरण तैयार करने हर जिले में सभी खेलों के संघ बनाने को कहा। उन्होंने शासन द्वारा सहयोग प्रदान करने सभी खेल संघों एवं एशोसिएशन्स का पंजीयन कराने को भी कहा।

उप मुख्यमंत्री साव ने राज्य शासन द्वारा निर्मित खेल अधोसंरचनाओं के साथ ही खेलो इंडिया सेंटर्स की प्रशिक्षण सुविधाओं और प्रशिक्षकों के माध्यम से राज्य के खिलाड़ियों को तराशने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रतिभावान खिलाड़ियों की कम उम्र में ही पहचान कर उनके प्रशिक्षण एवं ग्रूमिंग के लिए अच्छी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सभी जिलों के खेल अधिकारियों को अपने-अपने जिले के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ ही अच्छी संभावनाओं वाले खिलाड़ियों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने खिलाड़ियों को बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का सहयोग लेने को भी कहा।

उप मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन खेल परिसरों, खेल मैदानों एवं स्टेडियमों के निर्माण के दौरान नियमित रूप से कार्यों का अवलोकन कर खिलाड़ियों की जरूरतों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने संबंधित जिले के लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता के नियमित संपर्क में रहकर कार्यों को तेजी से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। साव ने बैठक में मौजूद लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता वी.एस. कोरम को खेल अधोसंरचनाओं से जुड़े निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ जल्द से जल्द पूर्ण करने को कहा। उन्होंने सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से पूर्ण कर अप्रारंभ कार्यों को यथाशीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने उप मुख्यमंत्री कार्यालय को हर महीने इन कार्यों की प्रगति की रिपोर्ट देने को भी कहा।

साव ने सभी खेल अधिकारियों को अपने-अपने जिले में विकासखंड शिक्षा अधिकारियों से मिलकर स्कूलों में प्रतिदिन खेलों का एक पीरिएड सुनिश्चत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के माध्यम से हर गांव के सरपंच और सचिव की बैठक कर उन्हें गांवों में खेलों के लिए अच्छा माहौल तैयार करने के लिए प्रेरित करने को कहा। उप मुख्यमंत्री साव ने प्रशिक्षकों और खेल अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नई तकनीकों, खेल उपकरणों, नए नियमों और नियामक संस्थाओं से अपडेट रहने के निर्देश दिए। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक प्रभाकर पाण्डेय, उप संचालक रश्मि ठाकुर और रवि अग्रवाल सहित सभी जिलों के खेल अधिकारी, वरिष्ठ प्रशिक्षक एवं प्रशिक्षक समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

BREAKING NEWS : भाजपा को बड़ा झटका, शहर मंडल के 111 सदस्यों ने दिया सामूहिक इस्तीफा

BREAKING NEWS : भाजपा को बड़ा झटका, शहर मंडल के 111 सदस्यों ने दिया सामूहिक इस्तीफा

 डोंगरगढ़। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।डोंगरगढ़ शहर भाजपा मंडल के 111 सदस्यों ने सामूहिक रूप से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम के बाद जिले की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि डोंगरगढ़ शहर मंडल अध्यक्ष से नाराजगी को सामूहिक इस्तीफे की प्रमुख वजह बताया गया है। इधर, सोशल मीडिया पर जिला भाजपा अध्यक्ष के नाम संबोधित सामूहिक इस्तीफे का पत्र भी सामने आया है। पत्र में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की बात कही गई है।

डोंगरगढ़ शहर भाजपा के 111 सदस्यों के सामूहिक इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में इसे भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब पार्टी संगठन इस मामले को लेकर क्या कदम उठाता है और नाराज सदस्यों को मनाने के लिए क्या प्रयास किए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

सामूहिक इस्तीफा पत्र में लिखी है ये बातें
भाजपा जिलाध्यक्ष राजनांदगांव को लिखे गए सामूहिक इस्तीफा पत्र में लिखा गया है कि हम सभी कार्यकर्ता डोंगरगढ़ शहर मंडल के निवासी हैं। डोंगरगढ़ शहर मंडल में जब से जसमीत सिंह बन्नौआना अध्यक्ष बने हैं तब से पूर्व विधायक सह प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष रामजी भारती एवं डोंगरगढ़ शहर के चार व्यापारी नेताओं के दबाव में काम कर रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ एवं निष्ठावान कार्यकर्ताओं के प्रति उनका रवैया ठीक नहीं रहा है। इनके हर फैसले प्रदेश उपाध्यक्ष रामजी भारती एवं इन चार व्यापारी नेताओं के हिसाब से लिए जाते हैं।

 

पत्र में आगे लिखा है कि शहर मंडल अध्यक्ष द्वारा स्वयं एवं कई कार्यकर्ताओं के लिए एक से अधिक पदों की अनुशंसा की जाती रही है। इसके विपरीत निष्ठावान कार्यकर्ता जिनके द्वारा लगातार चुनावों में पार्टी के पक्ष में पूरी ईमानदारी के साथ काम किया जाता रहा है उन्हें घर बैठने मजबूर कर दिया गया है। परिवारवाद से उपजे डोंगरगढ़ शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत बन्नोआना शहर में गुटबाजी को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। अंततः हम सभी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा एवं इनके काम करने के तरीके से आहत होकर भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहे हैं।

परिवारवाद को बढ़ावा देने का लगाया आरोप
उल्लेखनीय है कि जसमीत सिंह बन्नोआना का नाम शहर मंडल अध्यक्ष के रूप में सामने आने के समय भी संगठन के भीतर परिवारवाद को लेकर सवाल उठे थे। उस दौरान कई कार्यकर्ताओं ने दबी जुबान में इसका विरोध किया था। इसके बाद भाजपा युवा मोर्चा के शहर अध्यक्ष पद पर आकाश सिंह राजपूत की नियुक्ति को लेकर भी असंतोष सामने आया। असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का आरोप है कि आकाश सिंह राजपूत भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत के रिश्तेदार हैं और संगठन में उनकी कोई उल्लेखनीय सक्रिय भूमिका नहीं रही, इसके बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। इसी को आधार बनाकर संगठन पर परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए।

सवाल उठाने पर संगठन ने कार्यकर्ताओं को भेजा था नोटिस
बताया जा रहा है कि संगठन की इसी कार्यशैली का विरोध कुछ कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी किया था। इसके बाद संबंधित कार्यकर्ताओं को संगठन की ओर से नोटिस जारी किए गए थे। अब वही कार्यकर्ता इस विरोध का नेतृत्व करते हुए 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे की घोषणा तक पहुंच गए हैं, जिससे डोंगरगढ़ भाजपा में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। हालांकि, पत्र में लगाए गए सभी आरोप संबंधित कार्यकर्ताओं के हैं। शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नोतआना, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष रामजी भारती, भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत तथा भाजपा संगठन की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राष्ट्रमंडल खेल : छत्तीसगढ़ की ज्ञानेश्वरी ने जीता रजत पदक

राष्ट्रमंडल खेल : छत्तीसगढ़ की ज्ञानेश्वरी ने जीता रजत पदक

 छत्तीसगढ़ की ज्ञानेश्वरी यादवने भारोत्तोलक में जीता रजत

रायपुर। भारत की महिला भारोत्तोलक ज्ञानेश्वरी यादव ने 53 किलो भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। ज्ञानेश्वरी ने स्नैच में 88 किलो और क्लीन एंड जर्क में 111 किलो वजन उठाया। इसके साथ ही उन्होंने कुल 199 किलो वजन उठाकर दूसर स्थान हासिल किया। नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला दिदिह ने कुल 206 किलो (93+113) वजन उठाकर स्वर्ण पदक और कनाडा की रेबेका ग्रोउलेक्स ने कुल 178 किलो (83+95) का वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया। उल्लेखनीय है कि ज्ञानेश्वरी यादव छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की रहने वाली है। ज्ञानेश्वरी शुरुआत से ही पदक की प्रबल दावेदार थीं, लेकिन महज सात किलो के अंतर से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं।

ज्ञानेश्वरी ने पहले प्रयास में 82 किलो वजन सफलतापूर्वक उठाया। ज्ञानेश्वरी ने स्नैच के दूसरे प्रयास में 85 किलो वजन उठाया। इसके बाद उन्होंने स्नैच के तीसरे प्रयास में 88 किलो वजन उठाया। ज्ञानेश्वरी के स्नैच में तीनों प्रयास सफल रहे। हर एक प्रयास में उन्होंने अपना वजन बढ़ाया और वह इसे उठाने में सफल भी रहीं। ज्ञानेश्वरी का तीसरे प्रयास में 88 किलो वजन कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी था, लेकिन नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला दिदिह ने 93 किलो उठाया नया रिकॉर्ड बनाया।

क्लीन एंड जर्क में दिदिह से किस तरह पिछड़ीं
स्नैच के बाद नाइजीरिया की दिदिह आगे चल रही थीं और ज्ञानेश्वरी दूसरे नंबर पर थीं। क्लीन एंड जर्क में ज्ञानेश्वरी ने पहले प्रयास में 103 किलो वजन रजिस्टर कराया और वह इसमें सफल भी रहीं। इसके बाद उन्होंने 107 किलो और 111 किलो का वजन उठाया। स्नैच की तरह क्लीन एंड जर्क में भी ज्ञानेश्वरी के तीनों प्रयास सफल रहे। लेकिन दिदिह स्नैच की तरह क्लीन एंड जर्क में भी ज्ञानेश्वरी से आगे रहीं। दिदिह ने क्लीन एंड जर्क के तीन प्रयास में क्रमश: 105, 110 और 113 किलो वजन उठाया और स्वर्ण हासिल करने में सफल रहीं।

ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में पांचवां पदक
ज्ञानेश्वरी शुरुआत से ही पदक की प्रबल दावेदार थीं, लेकिन महज सात किलो के अंतर से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं। भारत ने इस तरह ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में अब तक पांच पदक अपने नाम किए हैं जिसमें चार भारोत्तोलन में आए हैं। भारत अब तक एक स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक जीत चुका है। भारत की ओर से अब तक भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने स्वर्ण, पुरुष भारोत्तोलक ऋषिकांता सिंह, राजा और ज्ञानेश्वरी ने रजत और पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीते हैं।

ब्रेकिंग : सरकारी कर्मचारियों को बड़ा झटका! नहीं चलेगी मनमानी, अगर ये काम नहीं किया तो नहीं मिलेगी सैलेरी

ब्रेकिंग : सरकारी कर्मचारियों को बड़ा झटका! नहीं चलेगी मनमानी, अगर ये काम नहीं किया तो नहीं मिलेगी सैलेरी

 रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने  सरकारी स्कूलों और कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इसमें साफ लिखा है, शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की उपस्थिति ऑनलाइन अटेंडेंस के जरिए ही की जा रही है। जुलाई की सैलेरी इसी आधार पर बनेगी। जितने दिन की ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज होगा, वेतन भी उतने ही दिनों की बनाई जाएगी।

पढ़िए डीपीआई का आदेश

CG Job अलर्ट : युवाओं के लिए खुशखबरी, इतने पदों पर निकली बंपर भर्ती, 10 वीं पास अभ्यर्थी कर सकते है आवेदन, देखें डिटेल……

CG Job अलर्ट : युवाओं के लिए खुशखबरी, इतने पदों पर निकली बंपर भर्ती, 10 वीं पास अभ्यर्थी कर सकते है आवेदन, देखें डिटेल……

 महासमुंद। युवाओं के लिए खुशखबरी है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में 559 पदों पर भर्ती की जाएगी। जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र, महासमुंद द्वारा युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु 29 जुलाई को जिला स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। यह रोजगार मेला शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज, ग्राम बरोड़ा बाजार, महासमुंद में सुबह 11 बजे से अपराह्न 3 बजे तक आयोजित होगा। इसके लिए अभ्यर्थी छत्तीसगढ़ ई-रोजगार पोर्टल https://www.erojgar.cg.gov.in/ के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

उप संचालक रोजगार डॉ. शशी अतुलकर ने बताया कि रोजगार मेले में निजी क्षेत्र की कंपनियां डब्ल्यूआईओ एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, सूर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी, स्वतंत्र माइक्रोफिन प्राइवेट लिमिटेड, यूपीडीटी एजुकेशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, एनआईआईटी लिमिटेड तथा स्टे प्रोटेक्टेड सिक्योरिटी गार्ड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 10वीं, 12वीं, आईटीआई एवं स्नातक उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए कुल 559 विभिन्न पदों पर भर्ती की जाएगी।

ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य

उन्होंने बताया कि रोजगार मेले में अभ्यर्थियों को शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की मूल एवं छायाप्रति, रोजगार पंजीयन प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, बायोडाटा तथा पासपोर्ट आकार के फोटो के साथ उपस्थित होना है। साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को छत्तीसगढ़ रोजगार विभाग के ई-रोजगार पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। इसके लिए अभ्यर्थी छत्तीसगढ़ ई-रोजगार पोर्टल https://www.erojgar.cg.gov.in/ के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

अभ्यर्थी रिक्त पदों की संख्या, पदवार शैक्षणिक योग्यता, वेतनमान एवं कार्यस्थल संबंधी विस्तृत जानकारी जिला रोजगार कार्यालय, महासमुंद से या ई-रोजगार पोर्टल पर प्राप्त कर सकते है।

जल जीवन मिशन 2.0 पर छत्तीसगढ़ के सांसदों के साथ मंथन

जल जीवन मिशन 2.0 पर छत्तीसगढ़ के सांसदों के साथ मंथन

 रायपुर/ नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में सोमवार शाम जल जीवन मिशन (जे.जे.एम.) 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने की। इस दौरान छत्तीसगढ़ के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव सहित राज्य के लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद उपस्थित रहे। बैठक में सांसदों के संसदीय क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की प्रगति, योजनाओं की वर्तमान स्थिति तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में छत्तीसगढ़ के लोकसभा सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू,चिंतामणि महाराज, राधेश्याम राठिया, कमलेश जांगड़े,  ज्योत्सना महंत, संतोष पांडेय,  विजय बघेल,  बृजमोहन अग्रवाल, रूपकुमारी चौधरी, महेश कश्यप और भोजराज नाग तथा राज्यसभा सांसद राजा देवेंद्र प्रताप सिंह, लक्ष्मी वर्मा और फूलो देवी नेताम उपस्थित रहे।

बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने, परियोजनाओं में तेजी लाने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा जनप्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श किया गया। सांसदों ने अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़े सुझाव और आवश्यकताएं भी साझा की।

बैठक में मिशन के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग, समयबद्ध क्रियान्वयन तथा केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से योजनाओं को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने जल जीवन मिशन 2.0 की प्रमुख विशेषताओं और क्रियान्वयन रणनीति की भी जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में सांसदों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि वे जिला स्तरीय DIHSA की बैठकों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं के समाधान में सहयोग करें। साथ ही, ‘जल अर्पण’ कार्यक्रमों में सहभागिता कर पूर्ण हो चुकी पेयजल योजनाओं के लोकार्पण तथा ग्राम पंचायतों को उनके हस्तांतरण को प्रोत्साहित करें। जल जीवन मिशन के लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए राज्य एवं जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग देने का भी आह्वान किया गया।

बैठक में केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के अधिकारियों सहित छत्तीसगढ़ के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक़ भी उपस्थित रहे।

स्मार्ट मीटर से बिजली खपत नहीं बढ़ती, तीन शहरों के सर्वे में सामने आई सच्चाई

स्मार्ट मीटर से बिजली खपत नहीं बढ़ती, तीन शहरों के सर्वे में सामने आई सच्चाई

 रायपुर। स्मार्ट मीटर को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों और अफवाहों के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगे घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली खपत का तीन माह का तुलनात्मक अध्ययन कराया है। मई, जून और जुलाई 2026 की खपत के विश्लेषण में यह सामने आया कि अधिकांश उपभोक्ताओं की बिजली खपत जुलाई माह में कम हुई है। रायपुर शहर क्षेत्र के 3,11,374 घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के अध्ययन में 1 जून से 26 जून 2026 के दौरान कुल बिजली खपत लगभग 10.85 करोड़ यूनिट दर्ज की गई थी।

जबकि 1 जुलाई से 26 जुलाई 2026 के दौरान यह घटकर लगभग 7.77 करोड़ यूनिट रह गई। अर्थात कुल 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यदि 400 यूनिट से ज्यादा खपत करने वाले उपभोक्ताओं की बात करें, तो 1 लाख 21 हजार 135 उपभोक्ताओ के बिलों के विश्लेषण से पता चलता है, कि उनकी खपत में लगभग 44 प्रतिशत की कमी हुई है। कारण स्पष्ट है, कि खपत का आधार स्मार्ट मीटर नहीं अपितु उपभोक्ताओं द्वारा की जा रही वास्तविक खपत है। ऐसेे उपभोक्ता जिनके आवासों में स्मार्ट मीटर नहीं लगे थे उनकी खपत में भी माह अप्रैल-मई-जून में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्ज हुई है।

उदाहरणः- 1. अवंती विहार रायपुर- उपभोक्ता क्र. 100060XXXX, संयोजित भार 5 किलोवाट
i. अप्रैल- 2025 की खपत 1611 यूनिट, अप्रैल- 2026 की खपत 2071 यूनिट
ii. मई- 2025 की खपत 1503 यूनिट, मई- 2026 की खपत 2592 यूनिट
iii. जून- 2025 की खपत 895 यूनिट, जून- 2026 की खपत 2487 यूनिट

2. राजीव नगर रायपुर- उपभोक्ता क्र. 100000XXXX, संयोजित भार 10 किलोवाट
i. अप्रैल- 2025 की खपत 1019 यूनिट, अप्रैल- 2026 की खपत 1065 यूनिट
ii. मई- 2025 की खपत 885 यूनिट, मई- 2026 की खपत 1383 यूनिट
iii. जून- 2025 की खपत 896 यूनिट, जून- 2026 की खपत 1762 यूनिट

3. कचना रायपुर- उपभोक्ता क्र. 100658XXXX, संयोजित भार 8 किलोवाट
i. अप्रैल- 2025 की खपत 1332 यूनिट, अप्रैल- 2026 की खपत 1360 यूनिट
ii. मई- 2025 की खपत 1156 यूनिट, मई- 2026 की खपत 1709 यूनिट
iii. जून- 2025 की खपत 759 यूनिट, जून- 2026 की खपत 1579 यूनिट

इसी प्रकार दुर्ग शहर के चयनित 240 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं जिनकी खपत 400 यूनिट से अधिक थी, के तीन माह के तुलनात्मक अध्ययन में भी जुलाई माह में बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। अध्ययन मे़ं जुलाई 2026 में कुल बिजली खपत 76,257 यूनिट रही, जबकि जून 2026 में यह 1,65,411 यूनिट तथा मई 2026 में 1,75,451 यूनिट थी। इस प्रकार जुलाई माह में लगभग 53 प्रतिशत की कमी खपत में दर्ज हुई है। बिलासपुर के सिटी सर्किल में 400 यूनिट से अधिक मासिक खपत वाले 9,717 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं का विश्लेषण किया गया। इसमें मई माह की औसत खपत 524 यूनिट, जून में 596 यूनिट तथा जुलाई में घटकर 312 यूनिट दर्ज की गई।इस प्रकार जुलाई की खपत लगभग 43 प्रतिशत कम हुई है।

निष्कर्षः- 1. उपभोक्ता जो एसी का उपयोग करते है, जिससे इनकी खपत 400 यूनिट से अधिक होती है। इन्हे मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान योजना का लाभ नहीं मिल पाता है जिसके कारण विद्युत देयक में वृद्धि परिलक्षित होती है। परंतु जुलाई माह की सिस्टम से निकाले गए आंकडों में ऐसे उपभोक्ताओं की खपत में भी उल्लेखनीय कमी हुई है, जिससे माह जुलाई की खपत जिसका बिल अगस्त में आयेगा की देय राशि कम होगी एवं अधिक उपभोक्ताओं को मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान योजना का लाभ प्राप्त होगा।

2. ऐसे उपभोक्ता जिनके आवासों में स्मार्ट मीटर नहीं लगा है, की खपत में भी मई और जून के माह में विगत वर्ष की तुलना में वृद्धि हुई है।
परंतु जुलाई के माह में इसी मीटर में कम खपत दर्ज हुई है। अर्थात अधिक खपत दर्ज करने में स्मार्ट मीटर कारण नहीं है बल्कि उपभोक्ता द्वारा विद्युत उपकरणों का अधिक उपयोग है।

3. उपभोक्ताओं के कनेक्शनों में स्वीकृत भार से अधिक उपयोग करने पर लगातार तीन माहों में उच्चतम मांग अधिक दर्ज होने पर बिल के साथ सप्लाई अफोर्डिंग की राशि जुड़ रही थी। इसके कारण भी उपभोक्ताओं को अधिक बिजली बिल प्राप्त हो रहा था। आगामी विद्युत देयकों के लिए यह व्यवस्था की गई है कि स्वीकृत भार से उच्चतम मांग लगातार तीन माहों में अधिक दर्ज होने पर वर्ष में केवल एक बार सप्लाई अफोर्डिंग की राशि माह दिसंबर का बिल जो कि जनवरी में जारी होगा, में देय होगी। उपभोक्ता मोर बिजली ऐप के माध्यम से दैनिक खपत स्मार्ट मीटर लगे होने पर मोर बिजली ऐप में देख सकता है।

सामान्य मीटर में भी मोर बिजली ऐप के माध्यम से मासिक खपत देखी जा सकती है, परंतु इस मीटर में दैनिक खपत का कोई आंकड़ा ऐप में दर्ज नहीं होता। उपभोक्ताओं की शंकाओं के समाधान के लिए विभाग द्वारा चेक मीटर भी लगाया जा रहा है, जिससे दोनों मीटरों में दर्ज खपत की तुलना कर समुचित निदान की व्यवस्था की गई है। अभी तक लगाये गये 4500 चेक मीटरों में दर्ज खपत और स्मार्ट मीटर में दर्ज खपत में एक समान है। उपभोक्ता विद्युत बिल संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए टोल फ्री नंबर- 1912 पर संपर्क कर अपना संशय दूर कर सकता है।

उपभोक्ताओं से विनम्र अनुरोध है, कि वे स्मार्ट मीटर के संबंध में किसी भी भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें। वे मोर बिजली ऐप और स्मार्ट मीटर पोर्टल के माध्यम से उपभोक्ता अपनी प्रतिदिन तथा प्रत्येक आधे घंटे की बिजली खपत स्वयं देख सकते हैं। इससे बिजली उपयोग की निगरानी और अनावश्यक खपत पर नियंत्रण आसान हो जाता है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी पारदर्शिता के साथ उपभोक्ताओं को तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराती रहेगी, ताकि स्मार्ट मीटर के संबंध में किसी भी प्रकार का भ्रम दूर हो सके।

कारगिल के वीरों का बलिदान देश की भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणापुंज रहेगा: उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

कारगिल के वीरों का बलिदान देश की भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणापुंज रहेगा: उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

 रायपुर: पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सभागृह में आज ‘कारगिल विजय दिवस’ के अवसर पर  कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री ने कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए देश की आंतरिक व बाह्य सुरक्षा, युवाओं की भूमिका और 2047 के विकसित भारत संकल्प पत्र पर अपने विचार साझा किए।

​कारगिल विजय: स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा

मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि 26 जुलाई 1999 को ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत भारतीय सेना ने अपनी सीमाओं की रक्षा करते हुए शत्रुओं को खदेड़ा था।कारगिल की जीत केवल सैन्य अभियान की सफलता नहीं, बल्कि भारत के अखंड स्वाभिमान की विजय थी। हमारे वीर जवानों का बलिदान देश हमेशा याद रखेगा। उन्होंने वीर नारियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश की ओर से आभार जताया।

कारगिल के वीरों का बलिदान देश की भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणापुंज रहेगा: उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा

​दैनिक जीवन में कर्तव्यनिष्ठा ही सच्ची देशभक्ति

उच्च शिक्षा मंत्री ने देशभक्ति की परिभाषा को व्यापक रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्रभक्ति केवल विशेष अवसरों पर नारे लगाने तक सीमित नहीं है। समय का पाबंद होना, ईमानदारी से काम करना, जरूरतमंदों की मदद, जल व पर्यावरण संरक्षण, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ व ‘वोकल फॉर लोकल’ को जीवन में अपनाना ही वास्तविक देशभक्ति है।

सुरक्षा केवल सीमाओं पर नहीं, परिसर और डिजिटल मीडिया में भी जरूरी

डिजिटल दौर की चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिना जांचे-परखे फर्जी संदेश फैलाना सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाता है। इसके साथ ही, हाल ही में नीट (NEET) परीक्षा विवाद जैसे मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का माहौल खराब करने का प्रयास करने वाले असमाजिक और बाहरी तत्वों पर कड़ी निगरानी रखनी होगी। उन्होंने राज्य के सभी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के परिसरों में शांति, सुरक्षा और सुचारू अध्यापन के लिए सतर्कता बरतने की सख्त हिदायत दी।

कारगिल के वीरों का बलिदान देश की भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणापुंज रहेगा: उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा

​2047 का विजन: विकसित भारत, समृद्ध छत्तीसगढ़

मंत्री  वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के ‘समृद्ध छत्तीसगढ़’ के संकल्प को पूरा करने में युवाओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान न देकर उनमें राष्ट्रबोध, अनुशासन और नेतृत्व के गुण विकसित करें। साथ ही, युवाओं को सेना के शौर्य से जोड़ने के लिए महाविद्यालयों में वीर सैनिकों के सम्मान में नियमित संगोष्ठी और प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि बस्तर से सरगुजा और रायपुर तक छत्तीसगढ़ के युवाओं में असीम ऊर्जा है। इस ऊर्जा को शिक्षा, कौशल, अनुसंधान और नवाचार से जोड़कर ही समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के पूर्व कुलपति प्रो. एन. पी. दीक्षित, वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. टी. एल. वर्मा, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र पटेल सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

परित्यक्त बच्चों को नया जीवन और परिवार दे रही ‘मातृछाया‘: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

परित्यक्त बच्चों को नया जीवन और परिवार दे रही ‘मातृछाया‘: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

 रायपुर: महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े रायपुर के कोटा स्थित सेवा भारती संचालित ‘मातृछाया‘ के 20वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान द्वारा नवजात, परित्यक्त एवं बेसहारा शिशुओं के संरक्षण, पालन-पोषण, शिक्षा और संस्कार के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इसे सेवा और संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

मंत्री राजवाड़े ने बच्चों से आत्मीय मुलाकात कर कहा कि मातृछाया ऐसे बच्चों को सुरक्षित आश्रय, स्नेह और बेहतर भविष्य देने का सराहनीय कार्य कर रही है।

यहां बच्चों की देखभाल के साथ कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें निःसंतान दंपतियों को दत्तक दिए जाने की व्यवस्था भी की जाती है। सेवा भारती खोए हुए बच्चों को उनके परिजनों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि ‘नर सेवा ही नारायण सेवा‘ की भावना के साथ कार्य कर रहे संस्थान के कार्यकर्ता समाज के लिए प्रेरणा हैं। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने सेवा भारती ‘मातृछाया‘ परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए संस्था के सेवा कार्यों के निरंतर विस्तार की कामना की।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल से वनांचल के लमनी और खुडि़या में 20-20 लाख रुपए की लागत से बने आधुनिक प्रतीक्षालय शेड….

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल से वनांचल के लमनी और खुडि़या में 20-20 लाख रुपए की लागत से बने आधुनिक प्रतीक्षालय शेड….

 रायपुर: उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा की विशेष पहल पर पंचायत विभाग द्वारा सुदूर वनांचल के ग्राम लमनी और खुडि़या में 20-20 लाख रुपये की लागत से आधुनिक प्रतीक्षालय शेडों का निर्माण कराया गया है।श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए अमरकंटक से मां नर्मदा का पवित्र जल कांवड़ में भरकर पदयात्रा करने वाले हजारों श्रद्धालुओं को इस वर्ष बड़ी राहत मिली है। वर्षों से वनांचल क्षेत्रों में विश्राम, पेयजल, प्रकाश और भोजन बनाने जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में कठिनाइयों का सामना करने वाले कांवडि़यों के लिए अब सुरक्षित और सुविधायुक्त विश्राम स्थल उपलब्ध हो गए हैं।

ये नवनिर्मित प्रतीक्षालय कांवड़ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित पड़ाव के रूप में विकसित किए गए हैं। यहां रात्रि विश्राम, भोजन बनाने तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे हजारों श्रद्धालुओं की यात्रा पहले की अपेक्षा अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक हो सकेगी।

लमनी में पहला सुरक्षित पड़ाव, सोलर ऊर्जा से होगा रोशन

ग्राम लमनी कांवडि़यों का पहला प्रमुख पड़ाव माना जाता है। अब तक यहां सीमित संसाधनों के बीच श्रद्धालुओं को खुले स्थानों पर रात्रि विश्राम करना पड़ता था। बरसात, अंधेरा और घने जंगलों के कारण यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इन समस्याओं को देखते हुए लमनी बैरियर के समीप निर्मित नए प्रतीक्षालय शेड में सुरक्षित रात्रि विश्राम, भोजन बनाने तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। विशेष रूप से यहां सोलर ऊर्जा आधारित विद्युत व्यवस्था स्थापित की गई है, जिससे रात के समय पर्याप्त प्रकाश उपलब्ध रहेगा और श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण मिलेगा।  इसी प्रकार ग्राम खुडि़या में भी 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित प्रतीक्षालय शेड कांवडि़यों के लिए राहत का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। अब यात्रा के दौरान दोनों स्थान श्रद्धालुओं के प्रमुख विश्राम स्थलों के रूप में उपयोगी साबित होंगे।

वर्षों पुरानी समस्या का हुआ स्थायी समाधान

कांवड़ यात्रा का मार्ग घने जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और दूरस्थ वनांचल ग्रामों से होकर गुजरता है। हजारों श्रद्धालु कई दिनों तक पैदल यात्रा कर भगवान शंकर के मंदिरों तक पहुंचते हैं। लंबे समय से इन मार्गों पर सुरक्षित रात्रि विश्राम और मूलभूत सुविधाओं की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई थी। श्रद्धालुओं की इस लंबे समय से चली आ रही आवश्यकता को गंभीरता से लेते हुए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने पंचायत विभाग के माध्यम से लमनी और खुडि़या में आधुनिक प्रतीक्षालय शेडों का निर्माण सुनिश्चित कराया, जिससे वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सका।

यात्रा मार्ग पर  स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल सुविधाओं का भी प्रबंध

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के प्रयास केवल प्रतीक्षालय निर्माण तक सीमित नहीं हैं। कांवड़ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक स्तर पर अन्य व्यवस्थाएं भी सुदृढ़ की जा रही हैं। यात्रा के दौरान आकस्मिक स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार हेतु स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। मार्गों की मरम्मत और आवश्यक रिपेयरिंग कर यात्रा को सुरक्षित बनाया जा रहा है। साथ ही विभिन्न स्थानों पर पेयजल की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

भोलेनाथ के भक्तों की सुविधा हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता – उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा ने कहा कि श्रावण मास की कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और जनभावनाओं का महापर्व है। उन्होंने कहा कि भोलेनाथ के भक्तों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना  सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से प्रतीक्षालयों का निर्माण, स्वास्थ्य शिविर, सड़क मरम्मत, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और सुविधा के साथ अपनी यात्रा पूर्ण कर सकें।

कांवडि़यों ने मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि पहले वनांचल क्षेत्रों में रात्रि विश्राम के दौरान काफी परेशानियां होती थीं। बारिश और अंधेरे के बीच यात्रा करना तथा सुरक्षित स्थान पर रुकना बेहद कठिन होता था। लमनी और खुडि़या में बने नए प्रतीक्षालय शेडों से अब बड़ी राहत मिलेगी। रात्रि विश्राम, भोजन बनाने और प्रकाश जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित हो गई है। श्रद्धालुओं ने इन जनहितकारी कार्यों के लिए मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन सुविधाओं का लाभ आने वाले वर्षों तक हजारों कांवड़ यात्रियों को मिलता रहेगा।

राष्ट्रपति भवन तक पहुँची बस्तर की गौरवगाथा, राष्ट्रपति मुर्मु करेंगी बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं का सम्मान

राष्ट्रपति भवन तक पहुँची बस्तर की गौरवगाथा, राष्ट्रपति मुर्मु करेंगी बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं का सम्मान

 00 मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल करेगा राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार भेंट, जनजातीय संस्कृति और परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान

 

00 उप मुख्यमंत्री शर्मा एवं संस्कृति मंत्री अग्रवाल रहेंगे प्रतिनिधिमंडल में शामिल

 
 

रायपुर।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ने जा रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों तथा जनप्रतिनिधियों का 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आगामी 30 जुलाई को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट करेगा। 

 

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परगना मांझी, मांझी, चालकी तथा पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन भी किया है। प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन का भ्रमण करेगा तथा नई दिल्ली के प्रमुख राष्ट्रीय स्थलों का अवलोकन भी करेगा। यह अवसर बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को देश के सर्वाेच्च संवैधानिक मंच पर मिल रहे सम्मान का ऐतिहासिक प्रतीक होगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हमारी सरकार जनजातीय समाज की गौरवशाली विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रपति भवन में बस्तर के कलाकारों और परंपरागत जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान बस्तर की संस्कृति, परंपरा और जनजातीय समाज के प्रति पूरे देश के सम्मान का प्रतीक है।
संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर पंडुम-2026 ने यह सिद्ध कर दिया है कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और लोकपरंपराएं राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव जनजातीय ज्ञान परंपरा, लोकजीवन, पारंपरिक नेतृत्व व्यवस्था और सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण का सशक्त अभियान बन चुका है। राष्ट्रपति भवन में बस्तर पंडुम के विजेता प्रतिभागियों एवं जनजातीय प्रतिनिधियों का सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक स्वाभिमान का सम्मान है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में संस्कृति विभाग द्वारा जनजातीय विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि बस्तर पंडुम आज केवल छत्तीसगढ़ का नहीं, बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण जनजातीय सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है। लोककलाओं को मंच उपलब्ध कराने, कलाकारों को सम्मान दिलाने, जनजातीय ज्ञान परंपरा का दस्तावेजीकरण करने तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में इस महोत्सव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में पहली बार आयोजित बस्तर पंडुम ने विश्व के सबसे बड़े जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान प्राप्त कर छत्तीसगढ़ को वैश्विक पहचान दिलाई थी। इस उपलब्धि के बाद वर्ष 2026 में महोत्सव का दायरा और अधिक व्यापक किया गया। पहले जहां सात विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित होती थीं, वहीं इस वर्ष इन्हें बढ़ाकर 12 विधाओं तक विस्तारित किया गया। बस्तर संभाग के सात जिलों के 32 विकासखंडों से 54 हजार 750 प्रतिभागियों ने इसमें भाग लेकर अपनी लोककला, परंपरा और सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। 10 जनवरी से 9 फरवरी 2026 तक आयोजित महोत्सव में जनपद, जिला एवं संभाग स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। जनजातीय नृत्य, लोकगीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक पेय, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि सहित 12 विधाओं के माध्यम से बस्तर की सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रदर्शन किया गया।

जगदलपुर में आयोजित संभाग स्तरीय समारोह का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया, जबकि समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया। महोत्सव में जनजातीय शिल्प, हस्तशिल्प, वन-औषधियों, पारंपरिक आभूषणों और लोक व्यंजनों की प्रदर्शनी ने बड़ी संख्या में आगंतुकों को आकर्षित किया। इससे स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों, स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण उद्यमियों को आर्थिक अवसर भी प्राप्त हुए। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और मध्यप्रदेश के कलाकारों की सहभागिता ने बस्तर पंडुम को राष्ट्रीय सांस्कृतिक संगम का स्वरूप प्रदान किया।

 

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आमंत्रण पर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने जा रही बस्तर की यह गौरवगाथा न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक शक्ति और जनजातीय गौरव का प्रतीक है, बल्कि भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर भी है।

 

गांवों के समग्र विकास से ही विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

गांवों के समग्र विकास से ही विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 रायपुर। ग्राम पंचायतों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की इकाई नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। यदि ग्राम पंचायतें सशक्त हों, गांव आत्मनिर्भर बनें और प्रत्येक ग्रामीण विकास की प्रक्रिया का सहभागी बने, तभी विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प वास्तविक रूप ले सकेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित एसआईआरडी परिसर, निमोरा में आयोजित प्रदेश के सभी जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक एवं कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। ग्राम पंचायतें जनभागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर गांव बनाने का सबसे प्रभावी मंच हैं। अधिकारियों को संवेदनशीलता, ईमानदारी और सेवा भाव के साथ कार्य करते हुए ग्रामीणों का विश्वास जीतना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि शासकीय योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और गांव का प्रत्येक नागरिक स्वयं विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बने। उन्होंने प्रत्येक जिले में ऐसे गांवों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां जनभागीदारी, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रभावी योजना के माध्यम से आदर्श विकास मॉडल विकसित किए जा सकें।

विकसित भारत जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 1 जुलाई से लागू विकसित भारत जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का निर्माण प्राथमिकता से किया जाए।
इसके माध्यम से जल संरक्षण, कृषि, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका और सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन बने प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग ही स्थायी विकास का आधार है। उन्होंने प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने तथा वर्षा जल संचयन एवं भूजल संवर्धन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

10.40 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब लक्ष्य करोड़पति दीदी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। छत्तीसगढ़ में अब तक 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। अब सरकार उन्हें उद्यमिता, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़कर बड़ी संख्या में करोड़पति दीदी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

उन्होंने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र महिलाओं की पहचान कर उन्हें स्व-सहायता समूहों, कौशल विकास, आजीविका गतिविधियों और नई औद्योगिक नीति से उत्पन्न अवसरों से जोड़ा जाए।

बस्तर के अंतिम गांव तक पहुंचे विकास की रोशनी

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर संभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन गांवों तक कभी पहुंचना कठिन था, वहां अब सड़क, बिजली, आवास, राशन, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। सरकार का लक्ष्य विकास की रोशनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

पीएम आवास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित सभी योजनाओं के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए तथा पंचायत स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पंचायत स्तर पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाए। किसानों और ग्रामीण परिवारों को सौर पंप तथा अन्य सौर ऊर्जा योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य केवल अपने सीमित उत्तरदायित्व का निर्वहन मात्र न होकर के समाज में ऐसा सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रसेवा का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, उससे प्रेरणा लेकर प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी को समाज निर्माण का अवसर मानना चाहिए।

एक व्यक्ति का संकल्प पूरे समाज की तस्वीर बदल सकता है

मुख्यमंत्री साय ने पद्मश्री पोपटराव पवार के हिवड़े बाजार मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, ईमानदार नेतृत्व और जनसहभागिता के माध्यम से किसी भी गांव का कायाकल्प किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए हमेशा बड़ी संख्या की आवश्यकता नहीं होती। यदि एक व्यक्ति भी संकल्प लेकर आगे बढ़ता है, तो पूरा समाज उसके साथ खड़ा हो जाता है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 1999 की अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए बताया कि जब वे पहली बार सांसद बने थे, तब युवा सांसदों के मार्गदर्शन के लिए श्री पोपटराव पवार को आमंत्रित किया गया था। उस समय एक युवा सरपंच के रूप में उन्होंने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की जो कहानी सुनाई थी, वही आज पूरे देश के लिए आदर्श ग्राम विकास का मॉडल बन चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट स्थित दीनदयाल शोध संस्थान में नानाजी देशमुख द्वारा विकसित ग्राम विकास मॉडल तथा ओडिशा में डॉ. अच्युत सामंत द्वारा शिक्षा के माध्यम से किए गए सामाजिक परिवर्तन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जिले की स्थानीय परिस्थितियों, संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप विकास का अपना मॉडल तैयार किया जाए, जिससे स्थायी और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।

हिवड़े बाजार मॉडल ने दिखाया जनभागीदारी की ताकत

कार्यशाला में पद्मश्री पोपटराव पवार ने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की यात्रा साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1989 में गांव जल संकट, पलायन, बेरोजगारी और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा था। जनसहभागिता, अनुशासन, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से गांव का व्यापक विकास किया गया। आज गांव में पलायन समाप्त हो चुका है, बीपीएल परिवार नहीं हैं, प्रतिदिन लगभग पांच हजार लीटर दूध का संग्रहण होता है तथा प्रति व्यक्ति आय लगभग नौ लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।

बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, संचालक प्रियंका ऋषि महोबिया, सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अमरजीत सिन्हा, प्रदेश के सभी जिलों के जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

BREAKING NEWS : राज्यपाल रमेन डेका से उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की सौजन्य भेंट

BREAKING NEWS : राज्यपाल रमेन डेका से उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की सौजन्य भेंट

 रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका से आज लोकभवन में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल डेका और उच्च शिक्षा मंत्री वर्मा के बीच प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

भेंट के दौरान राज्यपाल रमेन डेका ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था, शैक्षणिक सुधार, विद्यार्थियों के कौशल उन्नयन और नवाचार को बढ़ावा देने के विषयों पर उच्च शिक्षा मंत्री से विचार-विमर्श किया। उन्होंने प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित करने और विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया।

इस दौरान प्रदेश के विश्वविद्यालयों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं, उनकी व्यवस्थाओं में सुधार और उनके प्रभावी निराकरण से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल और उच्च शिक्षा मंत्री ने उच्च शिक्षा क्षेत्र को और सशक्त बनाने तथा विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदमों पर विचार साझा किए।

Chhattisgarh Tourism: झरनों से लेकर प्राचीन मंदिरों तक, बेहद खूबसूरत हैं छत्तीसगढ़ के ये पर्यटन स्थल

Chhattisgarh Tourism: झरनों से लेकर प्राचीन मंदिरों तक, बेहद खूबसूरत हैं छत्तीसगढ़ के ये पर्यटन स्थल

 Chhattisgarh Famous Tourist Places: भारत के मध्य भाग में बसा छत्तीसगढ़ प्राकृतिक खूबसूरती, घने जंगलों, पहाड़ों, नदियों, जलप्रपातों, प्राचीन मंदिरों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां कई ऐसी खूबसूरत जगहें हैं, जो आज भी प्रकृति को बेहद करीब से महसूस करने का मौका देती हैं। बस्तर के विशाल जलप्रपात हों या सरगुजा की खूबसूरत वादियां, कबीरधाम का ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर हो या दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी—प्रदेश में धार्मिक, प्राकृतिक, ऐतिहासिक और रोमांचक पर्यटन के कई विकल्प मौजूद हैं।

छत्तीसगढ़ की खास बात यह है कि यहां आने वाले पर्यटकों को एक ही यात्रा में जंगल, झरने, गुफाएं, प्राचीन मंदिर, पुरातात्विक स्थल और स्थानीय जनजातीय संस्कृति देखने को मिल सकती है। मानसून के दौरान प्रदेश के जलप्रपातों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है, जबकि सर्दियों में मैनपाट जैसे पहाड़ी पर्यटन स्थलों का नजारा पर्यटकों को आकर्षित करता है।

अगर आप आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ घूमने की योजना बना रहे हैं, तो प्रदेश के इन प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल कर सकते हैं।

चित्रकोट जलप्रपात – बस्तर की शान

बस्तर क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर स्थित चित्रकोट जलप्रपात छत्तीसगढ़ के सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल है। विशाल चौड़ाई और घोड़े की नाल जैसी आकृति के कारण इसे अक्सर ‘भारत का नियाग्रा’ कहा जाता है। बारिश के मौसम में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ चित्रकोट का स्वरूप बेहद विशाल और आकर्षक हो जाता है।

ऊंचाई से गिरती पानी की विशाल धारा और आसपास फैली हरियाली पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। शाम के समय यहां का प्राकृतिक नजारा और भी खूबसूरत दिखाई देता है। फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए चित्रकोट छत्तीसगढ़ की सबसे खास जगहों में से एक है।

तीरथगढ़ जलप्रपात – सीढ़ियों की तरह गिरता पानी

बस्तर के कांगेर घाटी क्षेत्र में स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात अपनी अलग बनावट के लिए प्रसिद्ध है। यहां पानी चट्टानों की अलग-अलग सतहों से सीढ़ीनुमा अंदाज में नीचे गिरता दिखाई देता है। बारिश और उसके बाद के महीनों में आसपास की हरियाली इस स्थान की सुंदरता को और बढ़ा देती है।

प्रकृति के बीच शांति से समय बिताने और खूबसूरत तस्वीरें लेने के लिए तीरथगढ़ पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में शामिल है।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान – जंगल और गुफाओं का रोमांच

प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बेहद खास है। घने जंगल, प्राकृतिक गुफाएं, वन्यजीव और जैव विविधता इसे छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्रों में शामिल करते हैं।

यहां स्थित कुटुमसर गुफा अपनी प्राकृतिक संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा क्षेत्र में कई अन्य गुफाएं और प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं। गुफाओं में प्रवेश और जंगल भ्रमण से पहले पर्यटकों को स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के दिशा-निर्देशों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

मैनपाट – छत्तीसगढ़ का खूबसूरत हिल स्टेशन

सरगुजा जिले में स्थित मैनपाट प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थलों में से एक है। हरे-भरे पहाड़, खूबसूरत घाटियां, झरने और ठंडा वातावरण इसे खास बनाते हैं। सर्दियों में यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है।

मैनपाट में तिब्बती समुदाय की मौजूदगी के कारण यहां तिब्बती संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है। यहां के मठ और आसपास का शांत वातावरण यात्रियों को अलग अनुभव प्रदान करता है।

मैनपाट में टाइगर पॉइंट, फिश पॉइंट और उल्टा पानी जैसे स्थान भी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं। परिवार और दोस्तों के साथ कुछ दिन प्रकृति के बीच बिताने के लिए मैनपाट एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

ढोलकल गणेश – पहाड़ी पर विराजमान गणपति

दंतेवाड़ा जिले के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थित ढोलकल गणेश प्रतिमा रोमांच और आस्था दोनों का अनोखा संगम प्रस्तुत करती है। ऊंची पहाड़ी पर स्थापित प्राचीन गणेश प्रतिमा तक पहुंचने के लिए ट्रेकिंग करनी पड़ती है।

घने जंगलों और पहाड़ियों से होकर गुजरने वाला रास्ता रोमांच पसंद करने वाले यात्रियों को आकर्षित करता है। यहां यात्रा करने से पहले स्थानीय मौसम, रास्ते और सुरक्षा से संबंधित जानकारी लेना बेहद जरूरी है।

मां दंतेश्वरी मंदिर – बस्तर की आराध्य देवी

दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। मां दंतेश्वरी को बस्तर क्षेत्र की आराध्य देवी माना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

बस्तर की सांस्कृतिक परंपराओं और प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में भी मां दंतेश्वरी का विशेष महत्व है। धार्मिक पर्यटन में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह मंदिर बेहद महत्वपूर्ण है।

भोरमदेव मंदिर – छत्तीसगढ़ का खजुराहो

कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर अपनी शानदार वास्तुकला और पत्थरों पर की गई नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के आसपास पहाड़ और हरियाली इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं।

भोरमदेव मंदिर की स्थापत्य कला की तुलना अक्सर मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिरों से की जाती है, जिसके कारण इसे लोकप्रिय रूप से ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ भी कहा जाता है। इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए यह एक खास जगह है।

सिरपुर – इतिहास और पुरातत्व का खजाना

महासमुंद जिले में महानदी के किनारे स्थित सिरपुर छत्तीसगढ़ के प्रमुख ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों में शामिल है। यहां खुदाई के दौरान कई महत्वपूर्ण प्राचीन अवशेष सामने आए हैं।

सिरपुर का प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए जाना जाता है। यहां बौद्ध विरासत से जुड़े अवशेष और अन्य प्राचीन संरचनाएं भी देखने को मिलती हैं। इतिहास, पुरातत्व और प्राचीन भारतीय वास्तुकला में रुचि रखने वालों के लिए सिरपुर की यात्रा बेहद खास हो सकती है।

राजिम – छत्तीसगढ़ का प्रमुख धार्मिक केंद्र

गरियाबंद जिले में स्थित राजिम प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का संगम होता है। प्रसिद्ध राजीव लोचन मंदिर सहित कई प्राचीन मंदिर यहां मौजूद हैं।

राजिम में आयोजित होने वाला राजिम कुंभ कल्प प्रदेश के बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। इस दौरान दूर-दूर से साधु-संत और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

मां बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में पहाड़ी पर स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है। नवरात्रि के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है।

पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों के अलावा रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। ऊपर से दिखाई देने वाला आसपास का प्राकृतिक नजारा भी पर्यटकों को आकर्षित करता है।

बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य

प्रकृति और वन्यजीवों को करीब से देखने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य आकर्षक जगह है। यहां जंगलों के बीच विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीव और पक्षी देखने का अवसर मिल सकता है।

शहरों की भागदौड़ से दूर प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने के इच्छुक पर्यटकों के लिए यह क्षेत्र एक अच्छा विकल्प है।

अचानकमार टाइगर रिजर्व

छत्तीसगढ़ के प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्रों में अचानकमार टाइगर रिजर्व का नाम भी शामिल है। घने जंगलों और जैव विविधता से भरपूर यह क्षेत्र प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों को आकर्षित करता है।

यहां यात्रा या सफारी की योजना बनाने से पहले वन विभाग के मौजूदा नियमों, प्रवेश व्यवस्था और मौसम की जानकारी लेना जरूरी है।

गंगरेल बांध – परिवार के साथ घूमने का शानदार विकल्प

धमतरी जिले में स्थित गंगरेल बांध, जिसे रविशंकर सागर जलाशय के नाम से भी जाना जाता है, पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। विशाल जलाशय और आसपास का प्राकृतिक वातावरण इसे परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए पसंदीदा जगह बनाता है।

बारिश के बाद यहां का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। हालांकि जलाशय और बांध क्षेत्र में घूमते समय सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

चैतुरगढ़ – पहाड़, प्रकृति और आस्था का संगम

कोरबा जिले में स्थित चैतुरगढ़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां से आसपास के जंगलों और पहाड़ियों का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। यहां स्थित मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

प्रकृति के बीच धार्मिक यात्रा का आनंद लेने वालों के लिए चैतुरगढ़ एक आकर्षक स्थान हो सकता है।

गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व क्षेत्र

उत्तरी छत्तीसगढ़ का विशाल वन क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। वन्यजीवों, जंगलों और प्राकृतिक वातावरण में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। संरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण यात्रा से पहले संबंधित वन विभाग से प्रवेश और पर्यटन गतिविधियों की जानकारी लेना जरूरी है।

बस्तर की जनजातीय संस्कृति भी है खास

छत्तीसगढ़ की यात्रा केवल प्राकृतिक स्थलों तक सीमित नहीं है। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और स्थानीय बाजार भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। बस्तर की पारंपरिक कला और बेल मेटल शिल्प देशभर में प्रसिद्ध हैं।

यहां लगने वाले स्थानीय हाट-बाजारों में क्षेत्र की जीवनशैली, खान-पान, हस्तशिल्प और संस्कृति को करीब से समझने का मौका मिलता है। यही वजह है कि बस्तर की यात्रा पर्यटकों के लिए प्राकृतिक सुंदरता के साथ सांस्कृतिक अनुभव भी लेकर आती है।

बस्तर दशहरा की अनोखी परंपरा

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की बात हो और बस्तर दशहरा का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है। बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट धार्मिक और जनजातीय परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यह सामान्य दशहरा उत्सव से अलग परंपराओं के लिए जाना जाता है और इसमें बस्तर क्षेत्र के विभिन्न समुदायों की महत्वपूर्ण भागीदारी होती है।

इस आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जगदलपुर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचते हैं।

छत्तीसगढ़ घूमने का सबसे अच्छा समय

छत्तीसगढ़ में पर्यटन का सही समय इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की जगह देखना चाहते हैं। जलप्रपातों की खूबसूरती बारिश के दौरान और उसके बाद काफी बढ़ जाती है। हालांकि भारी बारिश के समय झरनों और नदियों के आसपास जाना जोखिम भरा हो सकता है।

वहीं अक्टूबर से फरवरी के बीच मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने के कारण प्रदेश के कई पर्यटन स्थलों की यात्रा सुविधाजनक हो सकती है। मैनपाट जैसे पहाड़ी क्षेत्रों का आनंद लेने के लिए सर्दियों का मौसम खास माना जाता है।

यात्रा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

छत्तीसगढ़ के कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जंगलों, पहाड़ियों और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं। इसलिए यात्रा से पहले सड़क, मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेना जरूरी है। जलप्रपात के बेहद करीब जाने, तेज बहाव वाले पानी में उतरने या प्रतिबंधित जंगल क्षेत्रों में बिना अनुमति प्रवेश करने से बचना चाहिए।

गुफाओं, वन्यजीव क्षेत्रों और ट्रेकिंग वाले स्थानों पर स्थानीय गाइड या अधिकृत व्यवस्था का सहारा लेना बेहतर रहता है। मानसून के दौरान यात्रा कर रहे हैं तो प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा चेतावनियों का विशेष ध्यान रखें।

क्यों खास है छत्तीसगढ़ का पर्यटन?

छत्तीसगढ़ उन राज्यों में शामिल है जहां पर्यटन के अलग-अलग रूप एक साथ देखने को मिलते हैं। यहां चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे शानदार जलप्रपात हैं, तो मैनपाट जैसी खूबसूरत पहाड़ियां भी हैं। सिरपुर और भोरमदेव प्रदेश के इतिहास और वास्तुकला की कहानी बताते हैं, जबकि दंतेश्वरी, बम्लेश्वरी और राजिम जैसे धार्मिक स्थल लाखों लोगों की आस्था से जुड़े हुए हैं।

इसके साथ ही बस्तर की जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक कला, स्थानीय व्यंजन और हाट-बाजार छत्तीसगढ़ की यात्रा को और खास बनाते हैं। घने जंगल और संरक्षित वन क्षेत्र प्रदेश को प्रकृति और वन्यजीव पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बनाते हैं।

अगर आप भीड़भाड़ वाले लोकप्रिय पर्यटन शहरों से अलग प्रकृति, इतिहास, संस्कृति और रोमांच का अनुभव करना चाहते हैं तो छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए। चित्रकोट की गर्जना, मैनपाट की खूबसूरत वादियां, सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत और बस्तर की अनोखी संस्कृति—ये सभी मिलकर छत्तीसगढ़ को देश के खास पर्यटन राज्यों में अलग पहचान देते हैं।

डिस्क्लेमर: किसी भी पर्यटन स्थल की यात्रा से पहले मौसम, प्रवेश समय, सड़क की स्थिति, वन विभाग के नियम और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की नवीनतम जानकारी जरूर जांच लें।

 
 
CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिन झमाझम बारिश के आसार, कई जिलों में ऑरेंज-यलो अलर्ट

CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिन झमाझम बारिश के आसार, कई जिलों में ऑरेंज-यलो अलर्ट

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। प्रदेश में अगले चार दिनों तक मानसूनी गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवा और मध्यम से भारी बारिश के आसार जताए गए हैं। मौसम विभाग ने अलग-अलग जिलों के लिए ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया है। राजधानी रायपुर में भी बादल छाए रहने के साथ गरज-चमक और बारिश की संभावना है।रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जबकि एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा हुई। बारिश के कारण राजधानी रायपुर समेत कई इलाकों के तापमान में गिरावट आई और उमस तथा गर्मी से लोगों को राहत मिली।

हालांकि मानसूनी गतिविधियां बढ़ने के बावजूद प्रदेश में अब तक बारिश की स्थिति सामान्य से कम बताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में अब तक सामान्य की तुलना में करीब 20 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

अगले 4 दिनों तक सक्रिय रहेगा मानसून

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार छत्तीसगढ़ में आने वाले चार दिनों तक मानसूनी गतिविधियां बनी रह सकती हैं। इस दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ स्थानों पर तेज बारिश भी देखने को मिल सकती है।

बारिश के साथ कई इलाकों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली की गतिविधियां भी हो सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई गई है।

बारिश से गिरा रायपुर का तापमान

राजधानी रायपुर में शनिवार को अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इसके बाद रविवार को हुई हल्की बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया।

बारिश के बाद राजधानी के तापमान में करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। तापमान नीचे आने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली।

रायपुर के अलावा प्रदेश के कई अन्य क्षेत्रों में भी बारिश के कारण तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की कमी देखने को मिली।

इन इलाकों में भी हुई बारिश

प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में रविवार को मानसूनी गतिविधियां देखने को मिलीं। रायपुर के अलावा बसना, सरायपाली, सोनाखान, पिथौरा, बिलाईगढ़, सारंगढ़, बगीचा और कोरबा सहित कई क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई।

बारिश के बाद कई स्थानों पर मौसम सुहावना हो गया। प्रदेश में रविवार को सर्वाधिक अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस पेंड्रा रोड में दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस पेंड्रा रोड में रिकॉर्ड किया गया।

रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम?

राजधानी रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में बादल छाए रहने के साथ गरज-चमक और बूंदाबांदी या बारिश की संभावना जताई गई है।

रायपुर में अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। बारिश होने की स्थिति में दिन के तापमान में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में तेज हवा, बारिश और आकाशीय बिजली की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

उत्तर बस्तर कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम और मुंगेली में मौसम ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना जताई गई है।

इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मध्यम से तेज बारिश और आकाशीय बिजली की घटनाएं हो सकती हैं।

रायपुर समेत कई जिलों में यलो अलर्ट

प्रदेश के बड़े हिस्से के लिए यलो अलर्ट भी जारी किया गया है। सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद और रायपुर समेत कई जिलों में मौसम खराब हो सकता है।

इसके अलावा बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर में भी गरज-चमक, आकाशीय बिजली और बारिश के आसार बताए गए हैं।

इन इलाकों में कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

आकाशीय बिजली को लेकर रहें सतर्क

बारिश के साथ बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ के नीचे और ऊंचे स्थानों पर खड़े होने से बचना चाहिए। गरज-चमक होने पर सुरक्षित इमारत के अंदर रहना बेहतर है।

किसानों और खेतों में काम करने वाले लोगों को भी मौसम बिगड़ने पर सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए। किसी क्षेत्र के लिए जारी चेतावनी की नवीनतम जानकारी मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के आधिकारिक माध्यम से देखी जा सकती है।

बारिश की कमी पूरी होने की उम्मीद

छत्तीसगढ़ में अब तक सामान्य से करीब 20 प्रतिशत कम बारिश दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां तेज रहने पर बारिश की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है।

लगातार बारिश खेती-किसानी के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, लेकिन कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव जैसी परेशानी भी पैदा हो सकती है। ऐसे में आने वाले चार दिनों तक प्रदेश के लोगों को मौसम के बदलते मिजाज पर नजर रखने की जरूरत होगी।

BREAKING : 7 IFS अफसरों के तबादले, देखें आदेश..!!

BREAKING : 7 IFS अफसरों के तबादले, देखें आदेश..!!

 रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने वन विभाग के 7 IFS अफसरों का ट्रांसफर किया है। यह सभी इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के अधिकारी हैं। रायपुर से लेकर बस्तर तक के अधिकारियों को नई जगहों पर पोस्टिंग मिली है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने आदेश जारी किया है।

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सेवा सेतु से आसान हुई सरकारी सेवाओं की राह, समय पर मिल रहे जरूरी प्रमाण पत्र

सेवा सेतु से आसान हुई सरकारी सेवाओं की राह, समय पर मिल रहे जरूरी प्रमाण पत्र

 रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन की सेवा सेतु योजना प्रदेश में नागरिक सेवाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रही है। योजना के माध्यम से आय, जाति, निवास सहित विभिन्न आवश्यक प्रमाण पत्रों और शासकीय सेवाओं की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सहज हो गई है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिल रही है।

सूरजपुर जिले के ग्राम कमलपुर निवासी  सुशील सिंह इसका एक प्रेरक उदाहरण हैं। उन्होंने अपनी पुत्री अनीता सिंह के लिए आय प्रमाण पत्र बनवाने हेतु सेवा सेतु के माध्यम से आवेदन किया। पहले ऐसे कार्यों के लिए कई बार शासकीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और श्रम दोनों की हानि होती थी। लेकिन सेवा सेतु के जरिए आवेदन की प्रक्रिया सरल होने से उनका आवेदन निर्धारित समय में निराकृत हुआ और उन्हें आय प्रमाण पत्र आसानी से प्राप्त हो गया।

सुशील सिंह ने बताया कि समय पर प्रमाण पत्र मिलने से उनकी पुत्री के शैक्षणिक एवं अन्य शासकीय कार्य बिना किसी परेशानी के पूरे हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु योजना ने ग्रामीण नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाया है और अब बार-बार कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

प्रदेश सरकार की यह पहल सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक सुविधा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। सेवा सेतु योजना के माध्यम से लोगों का समय और संसाधन दोनों बच रहे हैं, वहीं सरकारी सेवाओं के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार बढ़ रहा है।

सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का त्वरित समाधान सोलर पंप चालू होने से लौटी खेतों की रौनक

सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का त्वरित समाधान सोलर पंप चालू होने से लौटी खेतों की रौनक

 रायपुर. मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा रहा है। इसी कड़ी में सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

कोरबा के विकासखंड पोड़ी-उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम अरसियां निवासी कृषक  राम के खेत में सौर सुजला योजना के तहत स्थापित सोलर पंप अचानक तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गया था। पंप के बंद होने से सिंचाई कार्य प्रभावित होने लगा और खेती-किसानी में परेशानी उत्पन्न हो गई। अपनी समस्या के समाधान के लिए  राम ने सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत प्राप्त होते ही क्रेडा के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की। तकनीकी दल को मौके पर भेजा गया, जहां सोलर पंप का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार एवं मरम्मत कार्य कर इसे पुनः चालू कर दिया गया।

सोलर पंप के पुनः सुचारु रूप से संचालित होने के बाद  राम के खेतों में सिंचाई कार्य फिर से शुरू हो गया। समय पर सिंचाई की सुविधा मिलने से उनकी कृषि गतिविधियां सामान्य हो गईं और फसल की देखभाल में आने वाली कठिनाइयां दूर हो गईं। अपनी समस्या का त्वरित समाधान होने पर कृषक  राम ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, जिला प्रशासन तथा क्रेडा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी समस्या का शीघ्र समाधान हुआ, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली।

क्रेडा के अधिकारियों ने बताया कि सौर सुजला योजना के अंतर्गत स्थापित सभी सोलर पंपों के संचालन एवं रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। किसानों से प्राप्त तकनीकी शिकायतों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाता है, ताकि उन्हें सिंचाई कार्य में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। शासन की जनहितकारी योजनाओं के साथ-साथ संवेदनशील प्रशासन और त्वरित कार्रवाई से आम नागरिकों की समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव हो रहा है तथा किसानों का शासन के प्रति विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

जैविक खेती से एरिन भगत बनीं आत्मनिर्भर, प्राकृतिक कृषि से घटी खेती की लागत

जैविक खेती से एरिन भगत बनीं आत्मनिर्भर, प्राकृतिक कृषि से घटी खेती की लागत

 जीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम, कृषि विभाग के मार्गदर्शन से मिली नई दिशा

रायपुर- कृषि विभाग द्वारा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं। सरगुजा जिले के विकासखंड सीतापुर के ग्राम पेटला की कृषक श्रीमती एरिन भगत ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में जैविक खेती अपनाकर खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी लाई है और आत्मनिर्भर खेती की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

कृषि विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन के बाद एरिन भगत ने अपने खेतों में जीवामृत एवं वर्मी कम्पोस्ट का नियमित उपयोग शुरू किया। विभाग द्वारा उन्हें जीवामृत तैयार करने के लिए विशेष ड्रम उपलब्ध कराया गया, जिसकी सहायता से वे गाय के मूत्र से जीवामृत तैयार करती हैं। वहीं, गाय के गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाकर खेतों में उपयोग कर रही हैं।

एरिन भगत वर्तमान में पूरी तरह जैविक खेती कर रही हैं। साथ ही वे वर्मी कल्चर के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद का उत्पादन भी कर रही हैं। इससे रासायनिक उर्वरकों पर उनकी निर्भरता काफी कम हुई है, जिसके परिणामस्वरूप खेती की लागत में कमी आई है और उत्पादन प्रणाली अधिक टिकाऊ बनी है।

उन्होंने बताया कि पहले रासायनिक उर्वरकों पर अधिक खर्च करना पड़ता था, लेकिन अब प्राकृतिक संसाधनों से तैयार जैविक खाद के उपयोग से आर्थिक बचत हो रही है। इसके साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी बनी हुई है, जिससे भविष्य में बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ी है। उनका मानना है कि जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

कृषि विभाग किसानों को जैविक खेती, जीवामृत निर्माण, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन तथा प्राकृतिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। विभाग के वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से जिले के किसान कम लागत, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।

सपनों को मिला कलेक्टर का साथ, द कलेक्टर्स-15 से शुरू हुई बदलाव की नई इबारत

सपनों को मिला कलेक्टर का साथ, द कलेक्टर्स-15 से शुरू हुई बदलाव की नई इबारत

 रायपुर। कोरिया जिले में शिक्षा और युवा प्रतिभाओं को नई दिशा देने की अनूठी पहल करते हुए कोरिया कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने 25 जुलाई को जिले के मेधावी विद्यार्थियों के लिए द कलेक्टर्स-15 कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह पहल केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को पहचानने, संवारने और उन्हें साकार करने की दिशा में उठाया गया एक प्रेरणादायी कदम है। इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि इतिहास में पहली बार कोरिया कलेक्टर निवास के द्वार विद्यार्थियों के लिए खोले गए, जहां सरकारी औपचारिकताओं की जगह आत्मीयता, विश्वास और प्रेरणा का वातावरण देखने को मिला। आकांक्षी विकासखंड बैकुंठपुर के सहयोग से जिले के 15 मेधावी छात्र-छात्राओं ने कलेक्टर रोक्तिमा यादव के साथ आत्मीय संवाद करते हुए अपने करियर लक्ष्य, संघर्ष, जिज्ञासाएं और भविष्य की योजनाएं साझा कीं।

चुनौतियों को अपनी ताकत बनाएं –
कलेक्टर रोक्तिमा यादव कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा, हर सपना खास होता है और उसे सही मार्गदर्शन, मेहनत व आत्मविश्वास की जरूरत होती है। सपने वही पूरे करते हैं, जो चुनौतियों से घबराते नहीं, बल्कि उन्हें अपनी ताकत बना लेते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़ी सोच रखने, निरंतर सीखते रहने, अनुशासन को जीवन का आधार बनाने और समाज के प्रति संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक लाना नहीं, बल्कि जीवन में नेतृत्व क्षमता, सकारात्मक सोच और निर्णय लेने का साहस विकसित करना है।

प्रशासनिक सेवाओं और करियर गाइडेंस पर हुई चर्चा
संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने प्रशासनिक सेवाओं, उच्च शिक्षा, तकनीकी क्षेत्र, नवाचार, समय प्रबंधन और व्यक्तित्व विकास से जुड़े अनेक सवाल पूछे। कलेक्टर ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित करने, निरंतर प्रयास करने और असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ने का संदेश दिया।

कक्षा की चारदीवारी से बाहर शिक्षा का अभिनव प्रयास
मॉडल द कलेक्टर्स-15 पहल शिक्षा को केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित न रखकर वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ने का एक नवाचार है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रशासन से सीधे जोड़ना, उनके सपनों को नई उड़ान देना, और उनमें नेतृत्व व सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है। यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि यदि युवा प्रतिभाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे न केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करेंगे, बल्कि समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी रखेंगे।

छू लो आसमान के सफल विद्यार्थियों का वन मंत्री केदार कश्यप ने किया सम्मान

छू लो आसमान के सफल विद्यार्थियों का वन मंत्री केदार कश्यप ने किया सम्मान

  रायपुर- वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा दंतेवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप ने रविवार को छू लो आसमान आवासीय शैक्षणिक संस्थान, कारली में नीट परीक्षा में सफल विद्यार्थियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने सफल विद्यार्थियों को गुलदस्ता, पुष्पमाला और टैबलेट प्रदान कर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

वन मंत्री कश्यप ने विद्यार्थियों की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनकी मेहनत, लगन और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया कि आगे की पढ़ाई में उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। शासन की ओर से उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने संस्था में अध्ययनरत कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों से नीट में सफल विद्यार्थियों से प्रेरणा लेने और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी लगन एवं मेहनत से पढ़ाई करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।

‘छू लो आसमान’ योजना से विद्यार्थियों को मिल रहा बेहतर अवसर
दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित ‘छू लो आसमान’ पहल विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान दे रही है। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक मार्गदर्शन मिल रहा है।
कारली के विद्यार्थियों की नीट में सफलता इस बात का प्रमाण है कि उचित मार्गदर्शन, मेहनत और शासन की सुविधाओं से वनांचल क्षेत्र के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकते हैं।

कार्यक्रम में विधायक चैतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष  नंदलाल मुड़ामी,  यशवंत जैन,  टेकेश्वर जैन,  संतोष गुप्ता,  दीपेश अरोरा, मुकेश शर्मा,  सत्यजीत चौहान,  जय भंसाली, कुलदीप ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डीएफओ  कृष्ण रंगनाथा वाई, अपर कलेक्टर राजेश पात्रे, जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद ठाकुर, डीएमसी  हरीश गौतम सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित थे।

प्रकृति के साथ संतुलन और जल संरक्षण भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक - राज्यपाल डेका

प्रकृति के साथ संतुलन और जल संरक्षण भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक - राज्यपाल डेका

 00 राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधनअभियान का किया शुभारंभ

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि मनुष्य, पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों के बीच संतुलन बनाए रखना पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, जल संकट और प्रदूषण आज गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को भी जल संकट का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए हमें अभी से जल संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास करने होंगे।

राज्यपाल डेका ने आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधनÓके लिए आयोजित राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने अभियान में शामिल ब्रह्माकुमारी बहनों एवं भाइयों को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान 26 जुलाई से 9 अगस्त 2026 तक रायपुर से जबलपुर की यात्रा करते हुए छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन के प्रति जन-जागरूकता का संदेश देगा। राज्यपाल ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की यह पहल केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जन-जागृति का अभियान है। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

डेका ने कहा कि प्रकृति हमारी मां के समान है और उसका संरक्षण करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के निवासी सौभाग्यशाली हैं। यह प्राकृतिक संपदा से समृद्ध प्रदेश है। यहां के घने वन, जीवनदायिनी नदियां और समृद्ध जैव-विविधता हमारी अमूल्य धरोहर हैं। प्रदेश की जनजातीय संस्कृति भी सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य और सह-अस्तित्व का संदेश देती आई है। बदलते समय में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है। इसलिए यहां की हरियाली और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करना आवश्यक है। राज्यपाल ने जल संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पानी की उपलब्धता भविष्य की एक बड़ी चुनौती है। जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के साथ वर्षा जल संचयन और परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। पर्यावरण प्रदूषण कम करने के लिए इको फ्रेंडली व्यवस्थाओं तथा नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देना होगा।

राज्यपाल ने माइक्रोप्लास्टिक के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। माइक्रोप्लास्टिक का प्रभाव मां के दूध तक में दिखाई देना भविष्य की पीढिय़ों के स्वास्थ्य की दृष्टि से चिंताजनक है। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करने और पर्यावरण संरक्षण के अभियान से समाज एवं समुदाय के प्रत्येक वर्ग को जोडऩे पर जोर दिया। राज्यपाल डेका ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन बेहतर तैयारी, जागरूकता और प्रभावी आपदा प्रबंधन से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। धरती का बढ़ता तापमान, अनियमित मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं हमें प्रकृति के प्रति अपने व्यवहार पर पुनर्विचार करने का संकेत दे रही हैं।
डेका ने कहा कि यह अभियान विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय का भी संदेश देता है। राजयोग के माध्यम से सकारात्मक विचार और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है। भौतिक प्रगति के साथ नैतिक एवं आध्यात्मिक चेतना भी आवश्यक है। राज्यपाल ने सभी नागरिकों से पानी की एक-एक बूंद बचाने, सिंगल यूज प्लास्टिक का त्याग करने और वृक्षारोपण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी संतान की तरह देखभाल करे। आज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित और खुशहाल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के पदाधिकारी, ब्रह्माकुमारी बहनें एवं भाई तथा अभियान से जुड़े सदस्य उपस्थित थे।

मन की बात’ में बार-बार छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात: मुख्यमंत्री साय

मन की बात’ में बार-बार छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात: मुख्यमंत्री साय

 मुख्यमंत्री साय ने फाफाडीह में युवाओं और आमजनों के साथ सुनी ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत कोरबा में जल संरक्षण के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की

जल संचयन को जन-अभियान बनाने का किया आह्वान

मुख्यमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

रायपुर-- मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित दया भवन में युवा साथियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी का श्रवण किया।
कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के साथ संवाद का एक ऐसा सशक्त मंच बन गया है, जो समाज के बीच हो रहे सकारात्मक और प्रेरणादायी कार्यों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। देशभर के लोगों को प्रत्येक माह इस कार्यक्रम की उत्सुकता से प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं, नवाचारों और जन-अभियानों को सामने लाते हैं, जो बिना किसी प्रसिद्धि या व्यक्तिगत अपेक्षा के समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के नवाचारों को लगातार मिल रही राष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले कुछ महीनों में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लगातार छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, सांस्कृतिक विरासत और नवाचारों का उल्लेख किया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले मल्हार की समृद्ध पुरातात्विक विरासत, बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों का उल्लेख कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति, जनजातीय परंपराओं और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया था।

उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख किया गया। यह छत्तीसगढ़ के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रदेश की उपलब्धियों का राष्ट्रीय मंच पर उल्लेख किए जाने से न केवल छत्तीसगढ़वासियों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि राज्य के नवाचारों और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल को देशभर में नई पहचान भी मिलती है।

कोरबा के जल संरक्षण प्रयासों की प्रधानमंत्री ने की सराहना

‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के अंतर्गत देशभर में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा में जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों को उत्साहजनक बताते हुए उनकी सराहना की।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि कोरबा में वैज्ञानिक पद्धति से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए भू-स्थानिक मैपिंग, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट, रिचार्ज वेल तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में संरक्षित करना, भूजल स्तर में सुधार लाना और क्षेत्र में जल उपलब्धता को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से बारिश की प्रत्येक बूंद को सहेजने का जो संदेश दिया है, वह वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकता है। जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, पर्यावरण और भावी पीढि़यों के सुरक्षित भविष्य का आधार है।

जल संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाएगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, तालाबों और अन्य परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण तथा वृक्षारोपण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जल संरक्षण के कार्य केवल सरकारी योजनाओं और विभागीय गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से एक व्यापक जन-अभियान का स्वरूप लें।

कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ की शुरुआत कारगिल विजय दिवस पर देश के वीर जवानों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए की। कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, अप्रतिम शौर्य, दृढ़ संकल्प और सर्वाेच्च बलिदान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों की शौर्यगाथा सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। 

‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साह से सहभागिता की अपील

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आगामी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह और गौरव के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराएं तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव के इस उत्सव में सहभागी बनें।

स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी परंपराओं को बढ़ावा देने का संदेश

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, कोसा, हथकरघा वस्त्र, बेलमेटल, बांस शिल्प, माटी कला और वन उत्पादों में अपार संभावनाएं हैं। इन्हें अपनाना स्थानीय कारीगरों के श्रम और सृजनशीलता का सम्मान है।

मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं अपनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री  साय ने आगामी गणेशोत्सव के संदर्भ में प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा देश की मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने की अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण-अनुकूल उत्सव हमारी संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमाओं की स्थापना से स्थानीय कुम्हारों और शिल्पकारों को रोजगार मिलता है, स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन मिलता है और जल स्रोतों को रासायनिक प्रदूषण से बचाने में सहायता मिलती है। मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का उपयोग परंपरा, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था - तीनों के हित में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए वृक्षारोपण को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया।

युवा शक्ति की उपलब्धियां देश का गौरव

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने खेल, विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों की सराहना की। निजी क्षेत्र द्वारा विकसित रॉकेट के सफल प्रक्षेपण, अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और खेल जगत में प्राप्त उपलब्धियां नए भारत की युवा शक्ति, प्रतिभा और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का युवा आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, खेल और नवाचार के क्षेत्र में विश्व पटल पर देश का नाम रोशन कर रहा है। राज्य सरकार भी छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, खेल सुविधाएं और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ना विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। राष्ट्र की युवा शक्ति ही आने वाले समय में भारत को विश्व की अग्रणी शक्ति बनाएगी।

इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष  विश्व विजय सिंह तोमर, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्षराजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में युवा, जनप्रतिनिधि, आम नागरिक और गणमान्यजन उपस्थित थे।