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एक करोड़ की ज्वेलरी उठाईगिरी का पुलिस ने किया खुलासा, 46 लाख के सोने-चांदी के आभूषण बरामद

एक करोड़ की ज्वेलरी उठाईगिरी का पुलिस ने किया खुलासा, 46 लाख के सोने-चांदी के आभूषण बरामद

 सरगुजा। सीतापुर थाना क्षेत्र में ज्लर्स कारोबारी से करीब एक करोड़ रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषणों से भरा बैग चोरी करने के मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस की संयुक्त टीम ने करीब 500 सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और दूसरे राज्यों की पुलिस से समन्वय के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी के घर से करीब 46 लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, 26 जुलाई 2026 को अरुणदेव सोनी ने सीतापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि हाईस्कूल सीतापुर के पास स्थित काशी विश्वनाथ ज्वेलर्स के लिए वे स्कूटी से ज्वेलरी का बैग लेकर पहुंचे थे। दुकान के सामने स्कूटी में बैग रखकर शटर खोलने के दौरान अज्ञात व्यक्ति बैग उठाकर फरार हो गया। बैग में करीब एक करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण बताए गए थे।

घटना की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल के निर्देशन में साइबर सेल अंबिकापुर और थाना सीतापुर की संयुक्त टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थल सहित आरोपियों के संभावित रूट के करीब 500 सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार संदिग्ध बैग लेकर भागते नजर आए। जांच के दौरान पुलिस टीम ने सरगुजा, जशपुर, झारखंड और ओडिशा के कई इलाकों में सीसीटीवी फुटेज की जांच की। तकनीकी विश्लेषण और संदिग्धों के हुलिए के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान चांटी दास निवासी गंजाम, ओडिशा और नागेश्वर राव निवासी गंजाम, ओडिशा के रूप में की

इसके बाद साइबर सेल और थाना सीतापुर की टीम ओडिशा पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से करीब 10 दिनों तक तलाश अभियान चलाया। मुखबिर की सूचना पर पुलिस को आरोपी चांटी दास के घर पहुंचने की जानकारी मिली। तलाशी के दौरान उसके घर से करीब 300.92 ग्राम सोने के आभूषण, जिनकी कीमत लगभग 43 लाख रुपये, और 1 किलो 168 ग्राम चांदी के आभूषण, जिनकी कीमत करीब 3 लाख रुपये बताई गई है, बरामद किए गए। कुल मिलाकर करीब 46 लाख रुपये के आभूषण जब्त किए गए।

पुलिस के अनुसार, चांटी दास और नागेश्वर राव सहित मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। चोरी की शेष संपत्ति बरामद करने और अन्य आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल के निर्देशन में साइबर सेल अंबिकापुर और थाना सीतापुर की संयुक्त टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थल सहित आरोपियों के संभावित रूट के करीब 500 सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार संदिग्ध बैग लेकर भागते नजर आए। जांच के दौरान पुलिस टीम ने सरगुजा, जशपुर, झारखंड और ओडिशा के कई इलाकों में सीसीटीवी फुटेज की जांच की। तकनीकी विश्लेषण और संदिग्धों के हुलिए के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान चांटी दास निवासी गंजाम, ओडिशा और नागेश्वर राव निवासी गंजाम, ओडिशा के रूप में की।

इसके बाद साइबर सेल और थाना सीतापुर की टीम ओडिशा पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से करीब 10 दिनों तक तलाश अभियान चलाया। मुखबिर की सूचना पर पुलिस को आरोपी चांटी दास के घर पहुंचने की जानकारी मिली। तलाशी के दौरान उसके घर से करीब 300.92 ग्राम सोने के आभूषण, जिनकी कीमत लगभग 43 लाख रुपये, और 1 किलो 168 ग्राम चांदी के आभूषण, जिनकी कीमत करीब 3 लाख रुपये बताई गई है, बरामद किए गए। कुल मिलाकर करीब 46 लाख रुपये के आभूषण जब्त किए गए।

पुलिस के अनुसार, चांटी दास और नागेश्वर राव सहित मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। चोरी की शेष संपत्ति बरामद करने और अन्य आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है।

‘रेशम से रोशन जशपुर’ की शुरुआत, टसर उत्पादन में प्रदेश में जिला अव्वल

‘रेशम से रोशन जशपुर’ की शुरुआत, टसर उत्पादन में प्रदेश में जिला अव्वल

 जशपुरनगर। मुख्यमंत्री ने ‘रेशम से रोशन जशपुर’ योजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि जिले में टसर एवं मलबरी रेशम कीटपालन को नई पहचान मिल रही है। वर्ष 2025-26 में जशपुर जिला टसर कोसा उत्पादन में पूरे छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान पर रहा है। रेशम उत्पादन से जिले के किसानों को स्वरोजगार के साथ अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल रहा है। जिला रेशम विभाग के अनुसार जिले में 1527.5 हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन एवं विकसित पौधरोपण किया गया है। वर्तमान में 66 रेशम उत्पादन केंद्र और 84 कृमिपालन समूह सक्रिय हैं। योजना से कुल 1939 किसान जुड़कर स्वरोजगार कर रहे हैं।

टसर कीटपालन से किसानों को अच्छी आमदनी
टसर कीटों के लिए साजा और अर्जुना प्रमुख खाद्य पौधे हैं। करीब 45 से 55 दिन के कीटपालन के बाद एक किसान को औसतन 15 हजार टसर ककून प्राप्त होते हैं। शासन द्वारा ककून को ग्रेड के अनुसार निर्धारित दर पर ककून बैंक के माध्यम से खरीदा जाता है। इससे किसानों को प्रति फसल लगभग 80 हजार से 1.20 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। विभाग की ओर से तकनीकी मार्गदर्शन के साथ रियायती दर पर स्वस्थ डिम्ब समूह भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

बीज उत्पादन और मलबरी से रोजगार के अवसर
टसर बीज उत्पादन योजना के तहत बीजागार निर्माण और बीज कोसा क्रय के लिए अनुदान दिया जा रहा है। एक बीज उत्पादक एक फसल में 3000 से 4000 स्वस्थ डिम्ब समूह तैयार कर उनकी बिक्री कर सकता है। वहीं मलबरी कीटपालन योजना के तहत निजी भूमि पर शहतूत बगान विकसित करने के लिए 5 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। इसमें भवन, पौधरोपण, सिंचाई और उपकरण शामिल हैं। पूर्ण विकसित बगान से प्रति एकड़ 300 से 400 किलो तक उत्पादन होने पर किसान को वार्षिक आय के साथ अंतरफसल का भी लाभ मिलता है।

महिलाओं को धागाकरण और कताई से आत्मनिर्भरता
महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए टसर धागाकरण एवं कताई योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत रीलिंग और स्पीनिंग मशीन पर शत-प्रतिशत अनुदान के साथ एक माह का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। जिले में वर्तमान में 14 धागाकरण समूह कार्यरत हैं, जिन्होंने अब तक 15,925.811 किलोग्राम धागे का उत्पादन किया है।

1.21 करोड़ से अधिक कोसा का उत्पादन
वर्ष 2025-26 में जिले में 1,21,65,649 नग कोसा फल का उत्पादन हुआ, जिसका बाजार मूल्य 72,84,820 रुपये बताया गया है। इसके अलावा 4,69,562 स्वस्थ डिम्ब समूह भी पालित किए गए। रेशम विभाग के अधिकारियों ने इच्छुक किसानों से नजदीकी रेशम उत्पादन केंद्र से संपर्क कर शासन की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की है।

गजरथ यात्रा को मिली नई पहचान, मुख्यमंत्री साय ने ‘गजरथ यात्रा–भाग 02’ पुस्तक का किया विमोचन

गजरथ यात्रा को मिली नई पहचान, मुख्यमंत्री साय ने ‘गजरथ यात्रा–भाग 02’ पुस्तक का किया विमोचन

 जशपुरनगर। मानव–हाथी द्वंद्व को कम करने, हाथियों के संरक्षण और ग्रामीण समुदायों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जशपुर वनमंडल द्वारा संचालित ‘गजरथ यात्रा’ अभियान के द्वितीय चरण पर आधारित पुस्तक ‘गजरथ यात्रा–भाग 02’ का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कैंप कार्यालय बगिया में विमोचन किया। इस अवसर पर जशपुर वनमंडल के हाथी संरक्षण और मानव–हाथी सह-अस्तित्व के प्रयासों को राज्य स्तर पर नई पहचान मिली। गजरथ यात्रा के माध्यम से हाथी प्रभावित गांवों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर लोगों को हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार, उनके आवास, भोजन और विचरण क्षेत्र के बारे में जानकारी दी जा रही है। ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और हाथियों की मौजूदगी की स्थिति में वन विभाग को तत्काल सूचना देने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।

अभियान का मुख्य उद्देश्य हाथियों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद भय और भ्रांतियों को दूर करना तथा मानव और हाथियों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व की भावना विकसित करना है। विद्यालयों में भी जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के महत्व से अवगत कराया जा रहा है। ‘गजरथ यात्रा–भाग 02’ पुस्तक में जशपुर वनमंडल द्वारा हाथी संरक्षण, जनजागरूकता, ग्रामीण सहभागिता और मानव–हाथी द्वंद्व प्रबंधन के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों को संकलित किया गया है। इसमें स्थानीय समुदायों और विद्यार्थियों की भागीदारी को भी प्रमुखता दी गई है।

हाथियों की गतिविधियों की निगरानी और प्रभावित क्षेत्रों तक समय पर सूचना पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘राज संकेत ऐप’ के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर प्रभावित गांवों के लोगों को मोबाइल संदेश के जरिए समय रहते सतर्क किया जाता है। इस अवसर पर हाथी–मानव द्वंद्व को कम करने और हाथियों की सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को मुख्यमंत्री के हाथों प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर रोहित व्यास, डीएफओ शशि कुमार, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

CG Job News : 10वीं पास के लिए छत्तीसगढ़ में नौकरी, एक साथ इतने पदों पर होगी भर्ती, देखें डिटेल……

CG Job News : 10वीं पास के लिए छत्तीसगढ़ में नौकरी, एक साथ इतने पदों पर होगी भर्ती, देखें डिटेल……

 महासमुंद। जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र महासमुंद द्वारा 20 अगस्त को जिला स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। रोजगार मेला शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मचेवा महासमुंद में प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक आयोजित होगा।

जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि रोजगार मेले में निजी क्षेत्र की स्वतंत्र माइक्रोफाइन प्राइवेट लिमिटेड, स्वाभिमान फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, एनआईआईटी लिमिटेड, पुस्कल एग्रोटेक लिमिटेड एवं वेक्टर फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड सहित विभिन्न नियोजकों द्वारा 10वीं, 12वीं, बीएससी एग्रीकल्चर एवं स्नातक उत्तीर्ण आवेदकों के लिए कुल 117 विभिन्न पदों पर भर्ती की जाएगी। इसके अलावा अन्य नियोजक भी उपस्थित होने पर रोजगार मेले में सम्मिलित किए जा सकेंगे।

उन्होंने बताया कि रोजगार मेले में शामिल होने के इच्छुक एवं योग्य आवेदकों को निर्धारित स्थल एवं समय पर अपनी शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज, रोजगार पंजीयन, आधार कार्ड, बायोडाटा की छायाप्रति तथा पासपोर्ट साइज की स्वयं की फोटो के साथ उपस्थित होना होगा। साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आवेदकों को छत्तीसगढ़ रोजगार एप/वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना आवश्यक है। रिक्तियों की संख्या, पदवार आवश्यक योग्यता, वेतनमान एवं कार्यस्थल से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए आवेदक जिला रोजगार कार्यालय महासमुंद में संपर्क कर सकते हैं अथवा रोजगार विभाग की वेबसाइट erojgar.cg.gov.in पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ब्रेकिंग : पुलिस विभाग में फेरबदल, थाना प्रभारियों के हुए तबादले, SP ने जारी किया आदेश, देखें लिस्ट……

ब्रेकिंग : पुलिस विभाग में फेरबदल, थाना प्रभारियों के हुए तबादले, SP ने जारी किया आदेश, देखें लिस्ट……

 एमसीबी। छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद जिले में पुलिसिंग को मजबूत करने और अपराध नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए तबादलों का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है।

जिला पुलिस अधीक्षक ने तीन थाना प्रभारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार झगराखाड़, चिरमिरी और जनकपुर थाना प्रभारियों को बदला गया है। अधिकारियों के तबादले के जरिए जिले में पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने के साथ ही अपराध नियंत्रण और पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।

देखें लिस्ट….

Train Cancelled : रेल यात्रियों की फिर बढ़ेगी मुश्किलें, छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ये ट्रेनें हुई रद्द, यात्रा से पहले देखें लिस्ट…!!

Train Cancelled : रेल यात्रियों की फिर बढ़ेगी मुश्किलें, छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ये ट्रेनें हुई रद्द, यात्रा से पहले देखें लिस्ट…!!

 बिलासपुर। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में बंडामुंडा केबिन-ए से राउरकेला सेक्शन के बीच पांचवीं लाइन की कमीशनिंग का काम किया जाएगा। इसके चलते अलग-अलग चरणों में नॉन-इंटरलॉकिंग (NI) कार्य और ट्रैफिक ब्लॉक लिया जाएगा। इसका सीधा असर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से होकर गुजरने वाली कई ट्रेनों के परिचालन पर पड़ेगा।

रेलवे के मुताबिक, 25 सितंबर से 14 अक्टूबर के बीच अलग-अलग तारीखों में करीब 18 ट्रेनों को रद्द किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने प्रभावित ट्रेनों की सूची जारी कर दी है। ऐसे में इस अवधि में यात्रा करने वाले यात्रियों को ट्रेन की स्थिति और शेड्यूल की जानकारी पहले ही जांच लेने की सलाह दी गई है।

ये ट्रेनें होंगी रद्द

18109/18110 इतवारी-टाटानगर-इतवारी एक्सप्रेस 25 से 30 सितंबर तथा 1, 2, 4, 5, 6, 7, 11, 12 और 13 अक्टूबर को दोनों दिशाओं में रद्द रहेगी।

18113 टाटानगर-बिलासपुर एक्सप्रेस 25 से 30 सितंबर तथा 1, 2, 4, 5, 6, 7, 11, 12 और 13 अक्टूबर को रद्द रहेगी।

18114 बिलासपुर-टाटानगर एक्सप्रेस 26 से 30 सितंबर तथा 1, 2, 3, 5, 6, 7, 8, 12, 13 और 14 अक्टूबर को रद्द रहेगी।

12767 नांदेड़-सांतरागाछी एक्सप्रेस 28 सितंबर और 12 अक्टूबर को कैंसिल रहेगी।

12768 सांतरागाछी-नांदेड़ एक्सप्रेस 30 सितंबर और 14 अक्टूबर को रद्द रहेगी।

01001 एलटीटी-सांतरागाछी स्पेशल 29 सितंबर को कैंसिल रहेगी।

01002 सांतरागाछी-एलटीटी स्पेशल 1 अक्टूबर को रद्द रहेगी।

18641 हटिया-दुर्ग एक्सप्रेस 1 और 13 अक्टूबर को रद्द रहेगी।

18642 दुर्ग-हटिया एक्सप्रेस 2 और 14 अक्टूबर को रद्द रहेगी।

22843 बिलासपुर-बक्सर एक्सप्रेस 9 अक्टूबर को कैंसिल रहेगी।

22844 बक्सर-बिलासपुर एक्सप्रेस 10 अक्टूबर को रद्द रहेगी।

12812 हटिया-एलटीटी एक्सप्रेस 10 अक्टूबर को रद्द रहेगी।

12811 एलटीटी-हटिया एक्सप्रेस 12 अक्टूबर को कैंसिल रहेगी।

12262 हावड़ा-सीएसएमटी दुरंतो एक्सप्रेस 13 अक्टूबर को रद्द रहेगी।

12261 सीएसएमटी-हावड़ा दुरंतो एक्सप्रेस 14 अक्टूबर को रद्द रहेगी।

13288/13287 आरा-दुर्ग-आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस 1 अक्टूबर को दोनों दिशाओं में कैंसिल रहेगी।

उत्कल एक्सप्रेस चेंज रूट से चलेगी

18477 पुरी-योग नगरी ऋषिकेश उत्कल एक्सप्रेस 30 सितंबर, 1 अक्टूबर और 12 अक्टूबर को परिवर्तित मार्ग से चलेगी। ट्रेन कटक, संबलपुर सिटी, झारसुगुड़ा रोड और ईब के रास्ते योग नगरी ऋषिकेश जाएगी।

गीतांजलि एक्सप्रेस 2 घंटे देरी से रवाना होगी

12860 हावड़ा-सीएसएमटी गीतांजलि एक्सप्रेस 13 अक्टूबर को अपने निर्धारित समय से 2 घंटे देरी से हावड़ा से रवाना होगी।

रेलवे की अपील

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले अपनी ट्रेन के परिचालन की स्थिति की जानकारी जरूर जांच लें, ताकि अचानक होने वाली असुविधा से बचा जा सके।

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की संवेदनशील पहल से अविनाश को मिला नया जीवन

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की संवेदनशील पहल से अविनाश को मिला नया जीवन

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल पर डीकेएस अस्पताल रायपुर में हुआ सफल उपचार

आर्थिक तंगी बनी थी इलाज में बाधा, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय ने बढ़ाया मदद का हाथ

स्वस्थ होकर मुख्यमंत्री से मिले अविनाश, कहा - मुश्किल समय में मिली मदद ने बदल दी जिंदगी

रायपुर 17 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल जरूरतमंद परिवारों के जीवन में आशा और विश्वास का संचार कर रही है। बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के साथ ही गंभीर बीमारी से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए भी लगातार सहायता दी जा रही है। इसी संवेदनशील पहल से फरसाबहार विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी निवासी 21 वर्षीय अविनाश नायक का रायपुर के डीकेएस अस्पताल में सफल उपचार संभव हो सका है।

स्वस्थ होने के बाद अविनाश आज मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया पहुंचे और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया। अविनाश ने मुख्यमंत्री को बताया कि उपचार के बाद उनकी स्थिति में काफी सुधार आया है और अब वे पहले की तुलना में कहीं अधिक सहजता से चलने-फिरने के साथ अपने दैनिक कार्य कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उनके स्वस्थ होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की कामना की।

जन्म से थी परेशानी, आर्थिक तंगी के कारण नहीं हो पा रहा था उपचार

अविनाश नायक को जन्म से ही बाएं पैर के अंगूठे और एक अन्य अंगुली में मांसपेशियों एवं हड्डी के असामान्य रूप से बढ़ने की समस्या थी। उम्र बढ़ने के साथ यह परेशानी भी बढ़ती गई। इससे उन्हें चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई होने लगी। उपचार की आवश्यकता होने के बावजूद परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति उनके सामने सबसे बड़ी बाधा बनी हुई थी।

कुछ वर्ष पूर्व अविनाश ने उपचार के लिए जिला अस्पताल में चिकित्सकों से संपर्क किया। जांच के बाद चिकित्सकों ने बेहतर उपचार एवं ऑपरेशन के लिए किसी बड़े चिकित्सा संस्थान में जाने की सलाह दी। परिवार के लिए इलाज और ऑपरेशन का खर्च वहन करना संभव नहीं था। ऐसे में बेहतर उपचार की उम्मीद लिए अविनाश ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया में अपनी समस्या बताते हुए सहायता के लिए आवेदन किया।

कैंप कार्यालय ने दिखाई तत्परता, रायपुर में कराया उपचार

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय ने अविनाश की समस्या को गंभीरता और संवेदनशीलता से लेते हुए उनके उपचार के लिए तत्काल आवश्यक पहल की। उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रायपुर भेजा गया, जहां डीकेएस अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार और ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।

सफल उपचार ने अविनाश के जीवन की एक बड़ी परेशानी दूर कर दी है। लंबे समय से जिस शारीरिक समस्या के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, उससे अब काफी राहत मिली है। वे सामान्य दिनचर्या की ओर लौट रहे हैं।

आर्थिक स्थिति कमजोर थी, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बना सहारा

मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान अविनाश ने भावुक होकर बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे किसी बड़े अस्पताल में जाकर अपना उपचार करा सकें। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन देने के बाद उनकी समस्या पर गंभीरता से पहल हुई और रायपुर के डीकेएस अस्पताल में सफल उपचार कराया गया।

अविनाश ने मुख्यमंत्री  साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में मिली इस सहायता ने उन्हें बड़ी परेशानी से मुक्ति दिलाई है। उन्होंने उपचार में सहयोग करने वाले चिकित्सकों और प्रशासन के प्रति भी धन्यवाद व्यक्त किया।

जरूरतमंदों के लिए उम्मीद और विश्वास का केंद्र बना कैंप कार्यालय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रहा है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बीमारी और अन्य कठिन परिस्थितियों में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में संवेदनशीलता के साथ पहल की जा रही है।

अविनाश की कहानी इसी संवेदनशील व्यवस्था का उदाहरण है। आर्थिक अभाव के कारण जिस युवक का उपचार लंबे समय से नहीं हो पा रहा था, उसे समय पर सहायता और बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलने से आज उसके जीवन में नई उम्मीद आई है। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय जरूरतमंदों के लिए सहायता के माध्यम के साथ भरोसे और संवेदनशील शासन के केंद्र के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।

सरगुजा और बस्तर संभाग में डेयरी विकास को मिलेगी नई गति, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक संपन्न

सरगुजा और बस्तर संभाग में डेयरी विकास को मिलेगी नई गति, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक संपन्न

 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (सीजीसीडीएफ) की राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में डेयरी क्षेत्र का समग्र विकास, दुग्ध उत्पादकों की आय में वृद्धि, महिला दुग्ध उत्पादकों की भागीदारी बढ़ाना और दुग्ध संग्रहण व विपणन अधोसंरचना को मजबूती प्रदान करना रहा।
बस्तर और सरगुजा संभाग पर विशेष फोकस
बस्तर संभाग के सात जिलों में बड़ी संख्या में ग्रामीण व अनुसूचित जनजाति परिवार पशुपालन से जुड़े हैं। क्षेत्र में लगभग 88ः गायें स्थानीय नस्ल की हैं। दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने के लिए पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। एनडीडीबी के सहयोग से जून 2025 से सरगुजा संभाग के जशपुर (2 हजार लीटर क्षमता) और बलरामपुर (5 हजार लीटर क्षमता) में चिलिंग सेंटर शुरू किए गए हैं। वर्तमान में 45 मिल्क कलेक्शन सेंटर्स के माध्यम से रोजाना लगभग 3,500 लीटर दूध एकत्र किया जा रहा है, जिससे 1500 से अधिक महिला उत्पादक जुड़ी हैं।
सीधा भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था
परियोजना के तहत दुग्ध उत्पादकों के बिल का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जा रहा है, जिससे महिलाओं को नियमित आय मिल रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। बैठक में पिछली बैठकों की कार्रवाई रिपोर्ट, मानव संसाधन चुनौतियों, भौतिक-वित्तीय प्रगति और डेयरी समग्र विकास योजना की समीक्षा की गई। इस अवसर पर अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित आयुक्त सहकारिता  रमेश कुमार शर्मा सहित राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के अधिकारी एवं सहकारी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और फेडरेशन के अन्य सदस्य शामिल हुए।

मानव-हाथी सह-अस्तित्व की दिशा में जशपुर की अभिनव पहल गजरथ यात्रा को मिली नई पहचान

मानव-हाथी सह-अस्तित्व की दिशा में जशपुर की अभिनव पहल गजरथ यात्रा को मिली नई पहचान

 00 मुख्यमंत्री ने गजरथ यात्रा पुस्तक का किया विमोचन

00 मुख्यमंत्री ने कहा - जनसुरक्षा के साथ हाथियों और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण हमारी प्राथमिकता

00 मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन एवं हाथियों की सुरक्षा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वनकर्मियों को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित
00 गांवों और विद्यालयों तक पहुंचकर हाथियों के व्यवहार एवं सुरक्षित सह-अस्तित्व के प्रति जागरूक कर रही ‘गजरथ यात्रा’
रायपुर।
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के गृहग्राम बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में जशपुर वनमंडल के जनजागरूकता अभियान पर आधारित पुस्तक ‘गजरथ यात्रा-भाग 02’ का विमोचन किया। यह पुस्तक मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने, हाथियों के संरक्षण और प्रभावित क्षेत्रों में जनजागरूकता बढ़ाने के लिए जशपुर वनमंडल द्वारा किए जा रहे प्रयासों एवं अभिनव गतिविधियों का दस्तावेज है।

मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर कहा कि जशपुर वन-संपदा और जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र है। यहां मानव और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके विचरण क्षेत्रों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाकर मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा के साथ वन और वन्यजीवों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने ‘गजरथ यात्रा’ की सराहना करते हुए कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों को जागरूक और सतर्क बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे प्रयासों में वन विभाग के साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भूमिका मानव-हाथी सह-अस्तित्व को मजबूत बनाने में सहायक होती है।इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वनमंडलाधिकारी  शशि कुमार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  अभिषेक कुमार सहित वन विभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

*गांव-गांव और विद्यालयों तक पहुंच रही ‘गजरथ यात्रा’*
जशपुर वनमंडल द्वारा विगत वर्षों से हाथी प्रभावित क्षेत्रों में मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने और ग्रामीणों को सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ‘गजरथ यात्रा’ इसी दिशा में शुरू किया गया एक व्यापक जनजागरूकता अभियान है।
इस अभियान के माध्यम से हाथी प्रभावित गांवों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर ग्रामीणों, विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों को हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार, उनके आवास, भोजन और विचरण क्षेत्रों के संबंध में जानकारी दी जा रही है। लोगों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, उनकी उपस्थिति के दौरान अनावश्यक रूप से निकट नहीं जाने और आपात स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना देने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से हाथियों को लेकर प्रचलित भ्रांतियों और भय को दूर कर उनके प्रति वैज्ञानिक, संवेदनशील एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण समुदायों की सुरक्षा के साथ हाथियों के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए द्वंद्व की संभावनाओं को न्यूनतम करना है।
*‘गजरथ यात्रा-भाग 02’ में दर्ज हुई संरक्षण और जनजागरूकता की यात्रा*
‘गजरथ यात्रा-भाग 02’ में जशपुर वनमंडल द्वारा मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन और हाथी संरक्षण के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों को विस्तार से संकलित किया गया है। पुस्तक में जनजागरूकता कार्यक्रमों, ग्रामीण समुदायों की भूमिका, विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने तथा हाथियों के साथ सुरक्षित व्यवहार को प्रोत्साहित करने वाली गतिविधियों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। पुस्तक इस संदेश को भी रेखांकित करती है कि वन्यजीव संरक्षण को प्रभावी बनाने में वन विभाग के साथ स्थानीय समुदायों और आम नागरिकों की जागरूकता एवं सहयोग महत्वपूर्ण है। विशेषकर हाथी प्रभावित क्षेत्रों में समय पर सूचना, सावधानी और सामुदायिक समन्वय मानव तथा हाथियों दोनों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं।
*तकनीक बनी जनसुरक्षा की सहयोगी, समय पर मिल रही हाथियों की सूचना*
जशपुर वनमंडल हाथियों की गतिविधियों की निगरानी और प्रभावित क्षेत्रों तक समय पर सूचना पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी उपयोग कर रहा है। ‘राज संकेत’ ऐप के माध्यम से हाथियों के विचरण और गतिविधियों की जानकारी मिलने पर संबंधित क्षेत्रों के ग्रामीणों तक मोबाइल संदेश के जरिए सूचना पहुंचाई जा रही है। समय पर मिलने वाली सूचना से ग्रामीणों को सतर्क रहने, आवश्यक सावधानी बरतने और हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचने में मदद मिल रही है। वन विभाग के मैदानी अमले, त्वरित प्रतिक्रिया दल और स्थानीय समुदाय के बीच समन्वय स्थापित कर जनसुरक्षा तथा हाथी प्रबंधन के प्रयासों को प्रभावी बनाया जा रहा है।
*नई पीढ़ी को भी वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने की पहल*
‘गजरथ यात्रा’ में विद्यालयों और विद्यार्थियों को विशेष रूप से जोड़ा जा रहा है। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को हाथियों के व्यवहार, जैव विविधता, वन एवं वन्यजीवों के महत्व और उनके संरक्षण के बारे में जानकारी दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और वैज्ञानिक सोच विकसित करना है, ताकि बच्चे न केवल स्वयं जागरूक हों, बल्कि अपने परिवार और समुदाय तक भी सुरक्षित व्यवहार एवं संरक्षण का संदेश पहुंचाएं।
*उत्कृष्ट कार्य करने वाले वनकर्मियों का मुख्यमंत्री ने किया सम्मान*
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन, जनसुरक्षा और हाथियों के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वन क्षेत्रों में कार्यरत मैदानी अमले की तत्परता और स्थानीय समुदायों के साथ उनका समन्वय मानव-वन्यजीव द्वंद्व को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
‘गजरथ यात्रा’ के माध्यम से जशपुर में जनसुरक्षा, जनजागरूकता और वन्यजीव संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय समुदाय, तकनीक और वन विभाग के मैदानी अमले के समन्वय से संचालित यह पहल मानव और हाथियों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

दृष्टिबाधा नहीं बनी बाधा, जयमंती के सपनों को मिली डिजिटल उड़ान, मुख्यमंत्री ने भेंट किया लैपटॉप

दृष्टिबाधा नहीं बनी बाधा, जयमंती के सपनों को मिली डिजिटल उड़ान, मुख्यमंत्री ने भेंट किया लैपटॉप

 00 मुख्यमंत्री ने पूछा—“आगे क्या बनना चाहती हो?”, जयमंती बोलीं—“शिक्षक बनना चाहती हूं”

00 मुख्यमंत्री ने बढ़ाया हौसला- “शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं, मेहनत से अपने सपने को जरूर साकार करें”

00 विशेष सॉफ्टवेयर से पढ़ाई होगी आसान, अध्ययन सामग्री को सुनकर कर सकेंगी अध्ययन
रायपुर।
मजबूत इरादों के आगे कठिनाइयां भी रास्ता छोड़ देती हैं। जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के ग्राम गोरिया की शत-प्रतिशत दृष्टिबाधित छात्रा जयमंती खेस ने अपनी दृष्टिबाधा को कभी शिक्षा की राह में बाधा नहीं बनने दिया। उच्च शिक्षा प्राप्त कर शिक्षक बनने का सपना संजोए जयमंती की पढ़ाई को अब तकनीक का मजबूत सहारा मिला है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज ग्राम बगिया स्थित अपने निवास पर जयमंती को विशेष सॉफ्टवेयर युक्त लैपटॉप प्रदान कर उनका हौसला बढ़ाया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

जयमंती वर्तमान में डिग्री गर्ल्स कॉलेज, रायपुर में बी.ए. अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। दृष्टिबाधा के बावजूद शिक्षा के प्रति उनकी लगन और आगे बढ़ने का जज्बा मजबूत है। लैपटॉप मिलने से अब डिजिटल अध्ययन सामग्री तक उनकी पहुंच आसान होगी और वे आधुनिक तकनीक की सहायता से अपनी पढ़ाई को अधिक सुगमता से आगे बढ़ा सकेंगी।

लैपटॉप प्राप्त करते समय जयमंती के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। उन्होंने मुख्यमंत्री  साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह लैपटॉप उनकी पढ़ाई में बेहद उपयोगी साबित होगा। इससे अध्ययन सामग्री तक पहुंच आसान होने के साथ उच्च शिक्षा के अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने में भी मदद मिलेगी।

“शिक्षक बनना चाहती हूं”—जयमंती के जवाब ने मुख्यमंत्री को किया प्रसन्न
मुख्यमंत्री  साय ने लैपटॉप प्रदान करने के दौरान जयमंती से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने छात्रा की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली और पूछा, “आगे क्या बनना चाहती हो?” जयमंती ने आत्मविश्वास से जवाब दिया, “शिक्षक बनना चाहती हूं।”जयमंती का लक्ष्य जानकर मुख्यमंत्री ने उनका उत्साहवर्धन करते हुए कहा, “शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं। पूरी लगन से पढ़ाई करें और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर आगे बढ़ती रहें।” मुख्यमंत्री ने उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प और परिश्रम से जीवन की कठिन से कठिन चुनौती को पार कर अपने सपनों को साकार किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराकर उन्हें शिक्षा एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।

जनदर्शन में रखी थी आवश्यकता, संवेदनशीलता से मिला समाधान
जयमंती ने अपनी पढ़ाई को सुगम बनाने के लिए कलेक्टर जनदर्शन में लैपटॉप उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। छात्रा की आवश्यकता और शिक्षा के प्रति उनकी लगन को देखते हुए कलेक्टर ने समाज कल्याण विभाग को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद समाज कल्याण विभाग ने छात्रा की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सहायक सॉफ्टवेयर से युक्त लैपटॉप तैयार कराया। आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वयं यह लैपटॉप जयमंती को प्रदान किया। इस प्रकार जनदर्शन में छात्रा द्वारा रखी गई आवश्यकता का समाधान उसके शिक्षा के सपने को आगे बढ़ाने का माध्यम बन गया।
तकनीक बनेगी जयमंती की आंखें, पढ़ाई होगी अधिक सुगम
समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जयमंती की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लैपटॉप में विशेष सहायक सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया गया है। इसकी सहायता से स्क्रीन पर उपलब्ध सामग्री को आवाज के माध्यम से सुना और समझा जा सकेगा।
इस तकनीकी सुविधा से जयमंती डिजिटल पुस्तकें, नोट्स एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री का उपयोग अधिक आसानी से कर पाएंगी। इससे उनकी उच्च शिक्षा की राह सुगम होने के साथ डिजिटल माध्यमों से स्वतंत्र रूप से अध्ययन करने की क्षमता भी बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री से मिले प्रोत्साहन और तकनीक के इस सहयोग ने जयमंती के शिक्षक बनने के सपने को नई ऊर्जा दी है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन मिले तो शारीरिक चुनौतियां प्रतिभा और सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकतीं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा के निधन पर जताया शोक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा के निधन पर जताया शोक

 रायपुर 17 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि रमेश शर्मा ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका योगदान और समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता सदैव स्मरणीय रहेगी। मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा शोकाकुल परिजनों एवं शुभचिंतकों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति और संबल प्रदान करने की प्रार्थना की है।

20 अगस्त की ग्राम सभाओं में वीबी - जीरामजी के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के कार्यों का होगा अनुमोदन

20 अगस्त की ग्राम सभाओं में वीबी - जीरामजी के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के कार्यों का होगा अनुमोदन

 रायपुर। विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी - जीरामजी) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 20 अगस्त, 2026 को आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं में योजना से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को योजना के प्रावधानों, अधिकारों, लाभों एवं अनुमेय कार्यों की जानकारी देने के साथ-साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के अंतर्गत लिए जाने वाले कार्यों का ग्राम सभा से अनुमोदन कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त को पत्रकार वार्ता में कहा था कि वीबी - जीरामजी के अंतर्गत सभी विकास कार्यों का चयन ग्राम सभा की स्वीकृति से किया जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा एवं वीबी - जीरामजी के माध्यम से राज्य को लगभग 6 हजार 855 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे, जो ग्रामीण रोजगार एवं विकास कार्यों के लिए राज्य में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय निवेश है। योजना के लिए वर्ष 2026-27 में 5,591.42 करोड़ रुपए का प्रस्तावित बजट रखा गया है तथा प्रथम किस्त के रूप में भारत सरकार से 1,538 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
मेरी बेटी, मेरा अभिमान 26 जनवरी, 2027 तक चलेगा 
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास को नई गति देने के उद्देश्य से मेरी बेटी, मेरा अभिमान अभियान का भी शुभारंभ किया है। 15 अगस्त, 2026 से 26 जनवरी, 2027 तक चलने वाले इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक गांव में मुक्तिधाम एवं प्रतीक्षालय तथा ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालय निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे। इन कार्यों सहित योजना के अंतर्गत अन्य विकास कार्यों का चयन एवं अनुमोदन ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की सहभागिता एवं स्वीकृति के आधार पर किया जाएगा।
ग्राम सभा की मांग के आधार पर होंगे कार्य
20 अगस्त की ग्राम सभाओं में ग्राम की स्थानीय आवश्यकता, उपलब्ध संसाधनों तथा ग्रामीणों की मांग के आधार पर वित्तीय वर्ष 2026-27 में वीबी - जीरामजी के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्यों पर चर्चा की जाएगी। प्रस्तावित कार्यों को ग्राम सभा के समक्ष रखा जाएगा और अनुमोदन के पश्चात उन्हें नियमानुसार स्वीकृति एवं क्रियान्वयन के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।
वीबी - जीरामजी में 318 प्रकार के अनुमेय कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में शामिल
योजना के अंतर्गत 318 प्रकार के अनुमेय कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में शामिल किया गया है। इनमें 107 जल संरक्षण एवं जल संवर्धन, 90 ग्रामीण अधोसंरचना, 86 आजीविका संवर्धन तथा 35 जलवायु अनुकूलन एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्य शामिल हैं। ग्राम सभा में स्थानीय आवश्यकता के अनुसार इन कार्यों में से प्राथमिकता वाले कार्यों का चयन किया जा सकेगा।
ग्रामीण अधोसंरचना के अंतर्गत कार्य किए जाएंगे
जल संरक्षण के अंतर्गत तालाब, चेकडैम, रिचार्ज संरचनाएं, सिंचाई विस्तार, भू-जल एवं मृदा संरक्षण तथा वृक्षारोपण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। ग्रामीण अधोसंरचना के अंतर्गत सड़क, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, स्कूल कक्ष, ग्रामीण पुस्तकालय, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, मुक्तिधाम आदि कार्य किए जा सकेंगे। इसी प्रकार आजीविका संवर्धन तथा जलवायु अनुकूलन से जुड़े कार्य भी स्थानीय आवश्यकता के अनुसार लिए जाएंगे।
2 अक्टूबर से तैयार होगी विकसित ग्राम पंचायत योजना
20 अगस्त की ग्राम सभा में विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाएगी। 2 अक्टूबर, 2026 से ग्राम सभा एवं स्थानीय समुदाय की अनुशंसाओं और सहभागिता के आधार पर वीजीपीपी तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। यह योजना ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के अनुरूप तैयार की जाएगी। 20 अगस्त की ग्राम सभा में ग्रामीणों से गांव की आवश्यकताओं, प्राथमिकताओं एवं संभावित विकास कार्यों के संबंध में सुझाव प्राप्त किए जाएंगे, ताकि 2 अक्टूबर से प्रारंभ होने वाली वीजीपीपी निर्माण प्रक्रिया में इन सुझावों एवं ग्राम सभा की अनुशंसाओं का प्रभावी उपयोग किया जा सके।
कार्यों की शीघ्र स्वीकृति एवं क्रियान्वयन पर जोर
वीबी - जीरामजी के अंतर्गत राज्य को उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का प्रभावी एवं समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभाओं में अनुमोदित कार्यों को शीघ्रता से स्वीकृति प्रदान कर क्रियान्वयन की प्रक्रिया में लाने पर जोर दिया जाएगा। रोजगार की मांग के अनुसार श्रमिकों को समय पर कार्य उपलब्ध कराने, मजदूरी का समय पर भुगतान तथा कार्यों की गुणवत्ता एवं निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
स्थानीय आवश्यकता के आधार पर कार्यों का प्रस्ताव को ग्राम सभा से अनुमोदन 
मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा है कि योजना के अंतर्गत कृषि कार्यों के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में 60 दिनों तक योजना के कार्य बंद रखने का प्रावधान है। अत: उपलब्ध कार्य अवधि का प्रभावी उपयोग करते हुए ग्राम सभा से अनुमोदित कार्यों को समय पर प्रारंभ करना आवश्यक है। ग्राम पंचायतों से अपेक्षा की गई है कि 20 अगस्त की ग्राम सभाओं में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मांग एवं स्थानीय आवश्यकता के आधार पर अधिक से अधिक पात्र कार्यों का प्रस्ताव तैयार कर ग्राम सभा से अनुमोदन कराया जाए। अनुमोदित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र स्वीकृति एवं क्रियान्वयन के लिए आगे बढ़ाया जाए, ताकि योजना के अंतर्गत उपलब्ध बजट का अधिकतम एवं समयबद्ध उपयोग हो सके तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा सके।
विकसित एवं आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण करना
वीबी - जीरामजी का उद्देश्य केवल ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, स्वच्छता, शिक्षा, आजीविका तथा सामाजिक सुविधाओं को मजबूत करते हुए विकसित एवं आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण करना है। ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी से योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, स्थानीय आवश्यकताओं की प्राथमिकता और बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकेंगे।

सावन माह के तीसरे सोमवार और नागपंचमी पर सीएम साय ने पत्नी संग किया फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना

सावन माह के तीसरे सोमवार और नागपंचमी पर सीएम साय ने पत्नी संग किया फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना

 00 पार्थिव शिवलिंग निर्माण में बने सहभागी, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना

रायपुर। पवित्र सावन माह के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने बगिया स्थित  फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान अपनी पत्नी के साथ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण भी किया और लोगों से एक लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन के धार्मिक अनुष्ठान में सहभागी बने की अपील भी किया।

एक या अधिक लोग, हेन्ना, विवाह, dais और टेक्स्ट की फ़ोटो हो सकती है


बताया जाता है कि मैनी नदी के तट पर स्थित  फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में 17 से 19 अगस्त तक एक लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन का तीन न दिवसीय दिवसीय विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में मुख्यमंत्री  साय एवं कौशल्या साय श्रद्धापूर्वक पार्थिव शिवलिंग निर्माण में सहभागी बने और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को सावन मास एवं नागपंचमी की बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा सदैव प्रदेशवासियों पर बनी रहे और छत्तीसगढ़ निरंतर विकास, शांति एवं समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता रहे। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के विकास और जनकल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है।

 

औद्योगिक निवेश से रोजगार का नया आधार बन रहा नवा रायपुर अटल नगर

औद्योगिक निवेश से रोजगार का नया आधार बन रहा नवा रायपुर अटल नगर

 00 राजधानी से रोजगारधानी की ओर बढ़ता नवा रायपुर

रायपुर। नवा रायपुर अटल नगर अब केवल आधुनिक प्रशासनिक राजधानी के रूप में नहीं, बल्कि निवेश, उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। सुनियोजित शहरी विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक अधोसंरचना के साथ शहर में ऐसे उद्योगों को आकर्षित किया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसरों का आधार बन सकें। नवा रायपुर में टेक्सटाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और आईटी जैसे भविष्य के उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। औद्योगिक निवेश के इन प्रयासों का उद्देश्य केवल नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करना नहीं, बल्कि विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था को गति देना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना भी है।
टेक्सटाइल पार्क : हजारों रोजगार का नया केंद्र
नवा रायपुर के लेयर-2 स्थित ग्राम कुर्रू में टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इस परियोजना के लिए सीएसआईडीसी को 100 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश की शुरुआत अब जमीन पर भी दिखाई देने लगी है। स्विफ्ट टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड ने जून 2026 में 235 करोड़ रुपए के निवेश से गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का भूमिपूजन किया है। इस इकाई से करीब 4,650 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। वहीं पुनीत क्रिएशन के साथ 175 करोड़ रुपए के निवेश का समझौता किया गया है। इन परियोजनाओं को मिलाकर टेक्सटाइल पार्क में लगभग 10,000 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इस तरह टेक्सटाइल पार्क नवा रायपुर में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार के साथ रोजगार के नए अवसरों का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
132 एकड़ में फार्मा पार्क, स्वास्थ्य उद्योग को मिलेगी नई गति
स्वास्थ्य और औषधि निर्माण के क्षेत्र में भी नवा रायपुर एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सेक्टर-22 में 132 एकड़ भूमि सीएसआईडीसी को आवंटित की गई है, जहां फार्मा पार्क विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना में लगभग 2,000 करोड़ रुपए के निवेश और करीब 1,400 रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। फार्मा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों टोरेंट फार्मा, एविला फार्मास्युटिकल्स और विटालिस हेल्थ के साथ कुल 735 करोड़ रुपए के एमओयू किए जा चुके हैं। फार्मा पार्क के विकसित होने से दवा निर्माण के साथ इससे जुड़ी विभिन्न औद्योगिक और सहायक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

रायपुर : विशेष लेख : औद्योगिक निवेश से रोजगार का नया आधार बन रहा नवा रायपुर अटल नगर


इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भी बढ़ते कदम
भविष्य की अर्थव्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की भूमिका लगातार बढ़ रही है। नवा रायपुर ने इस क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। यश फैंस ने 110 करोड़ रुपए के निवेश से होम अप्लायंसेज निर्माण इकाई शुरू की है। यह निवेश नवा रायपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण निर्माण के क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए इलेक्ट्रॉनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर को भारत सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। यहां पीसीबी प्रोटोटाइपिंग, 3डी प्रिंटिंग और ईएमसी टेस्टिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
एमएसएमई बनेंगे औद्योगिक विकास की रीढ़
नवा रायपुर के औद्योगिक विकास की कहानी केवल बड़े निवेशों तक सीमित नहीं है। बड़े उद्योगों के साथ-साथ एमएसएमई क्षेत्र को भी मजबूत आधार दिया जा रहा है। सेक्टर-05 में विनिर्माण उद्योगों के लिए भूमि आवंटित की गई है। यहां वर्तमान में 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है, जबकि भविष्य में 12,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। एमएसएमई क्षेत्र के विस्तार से स्थानीय उद्यमिता और विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ बड़े उद्योगों के लिए सहायक औद्योगिक नेटवर्क विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
निवेश से रोजगार और रोजगार से आर्थिक गतिविधियों का विस्तार
नवा रायपुर में विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों की तस्वीर बताती है कि शहर के विकास का अगला चरण प्रशासनिक राजधानी से आगे बढ़कर निवेश और रोजगार के केंद्र के रूप में आकार ले रहा है। टेक्सटाइल पार्क में लगभग 10,000 रोजगार, फार्मा पार्क में करीब 1,400 रोजगार और रूस्रूश्व क्षेत्र में भविष्य में 12,000 से अधिक रोजगार की संभावनाएं - ये सभी मिलकर नवा रायपुर की अर्थव्यवस्था को अधिक विविध और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और आईटी क्षेत्र में विकसित हो रहा इकोसिस्टम नवा रायपुर की औद्योगिक संभावनाओं को और व्यापक बना रहा है। शहर में 2,000 सीटों वाला प्लग एंड प्ले आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है, जहां स्क्वायर बिज़नेस सर्विसेज़, वराइज़ इंडिया और विज़न प्लस जैसी आईटी कंपनियां कार्य कर रही हैं।

राजधानी से रोजगारधानी की ओर बढ़ता नवा रायपुर


निवेश की नई तस्वीर, रोजगार का नया भविष्य
नवा रायपुर में औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण पहलू सेक्टर आधारित औद्योगिक क्लस्टरों का विकास है। टेक्सटाइल के लिए अलग क्षेत्र, फार्मा के लिए समर्पित पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की शुरुआत और एमएसएमई के लिए औद्योगिक भूमि—ये प्रयास शहर की अर्थव्यवस्था को विविधता प्रदान कर रहे हैं। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक सेवाओं के विकास की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। नवा रायपुर में सीबीडी रेलवे स्टेशन संचालित है और सेक्टर-1 तथा सेक्टर-40 में आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब प्रस्तावित हैं।
आईटी, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर से बनेगा भविष्य का डिजिटल इकोसिस्टम
नवा रायपुर में औद्योगिक विकास का दायरा पारंपरिक विनिर्माण तक सीमित नहीं है। सेक्टर-22 में सीबीडी रेलवे स्टेशन के पास करीब 1,000 करोड़ रुपए की लागत से एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जा रहा है। इसे रैकबैंक करीब 13.5 एकड़ क्षेत्र में विकसित कर रही है, जिसमें एक हिस्सा सेज के रूप में विकसित होगा। इसके अलावा सीटीआरएलएस भी नवा रायपुर में अपना डेटा सेंटर स्थापित करने जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंजीनियरिंग आधारित दूसरे सेज को भी मंजूरी मिल चुकी है। इसमें पॉलीमेटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 5जी और 6जी तकनीक के लिए जीएएन आधारित सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन करेगी।
युवाओं के लिए बदल रहा अवसरों का परिदृश्य
नवा रायपुर का औद्योगिक विस्तार युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसरों का आधार तैयार कर रहा है। टेक्सटाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और सेमीकंडक्टर जैसे विविध क्षेत्रों के विकास से उत्पादन, तकनीकी सेवाओं, प्रबंधन और अन्य कौशल आधारित क्षेत्रों में अवसर बढऩे की संभावनाएं हैं। इस लिहाज से नवा रायपुर की नई औद्योगिक तस्वीर केवल निवेश और कारखानों की कहानी नहीं है, बल्कि रोजगार आधारित आर्थिक विकास की दिशा में बढ़ते कदमों की भी कहानी है।
नवा रायपुर की बदलती पहचान
एक ओर नवा रायपुर में आधुनिक राजधानी की अधोसंरचना विकसित हो रही है, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक निवेश की नई परियोजनाएं शहर की आर्थिक तस्वीर को नया आकार दे रही हैं। भूमि, निवेश, उद्योग और रोजगार को एक-दूसरे से जोड़कर नवा रायपुर को ऐसी अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें औद्योगिक विकास के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ें। यही औद्योगिक विस्तार नवा रायपुर अटल नगर को आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के निवेश और रोजगार के प्रमुख केंद्रों में शामिल करने की मजबूत संभावनाएं तैयार कर रहा है।
एक शहर, कई औद्योगिक संभावनाएं
नवा रायपुर अटल नगर की विकास यात्रा अब केवल प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रह गई है। औद्योगिक निवेश को शहर की विकास रणनीति से जोड़कर रोजगार आधारित अर्थव्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। टेक्सटाइल पार्क में हजारों रोजगार की संभावना से लेकर फार्मा पार्क में बड़े निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की शुरुआत, एमएसएमई क्षेत्र के विस्तार और एआई डेटा सेंटर व सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के क्षेत्रों में निवेश तक—नवा रायपुर में उद्योगों की ऐसी श्रृंखला तैयार हो रही है, जो आने वाले वर्षों में शहर की आर्थिक पहचान को नई दिशा दे सकती है। आधुनिक राजधानी के रूप में पहचान बना चुका नवा रायपुर अब निवेश, उद्योग और रोजगार के नए गंतव्य के रूप में अपनी अगली पहचान गढ़ रहा है।

अपनी माटी और खेती-किसानी से मुख्यमंत्री साय का आत्मीय जुड़ाव, गृहग्राम बगिया में सुबह-सुबह खेत पहुंचे, बैलों के साथ हल चलाकर की बियासी

अपनी माटी और खेती-किसानी से मुख्यमंत्री साय का आत्मीय जुड़ाव, गृहग्राम बगिया में सुबह-सुबह खेत पहुंचे, बैलों के साथ हल चलाकर की बियासी

 00 हल की मूठ थामते ही जीवंत हुईं खेती-किसानी से जुड़ी पुरानी स्मृतियां

00 मुख्यमंत्री ने कहा - किसान परिवार से होने के नाते खेती मेरे लिए केवल आजीविका नहीं, जीवन का संस्कार
00 छत्तीसगढ़ की माटी, कृषि परंपरा और मेहनतकश अन्नदाता किसान सदैव हृदय के सबसे करीब: साय
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपनी माटी और खेती-किसानी से गहरा जुड़ाव आज एक बार फिर देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सुबह जशपुर जिले के अपने गृहग्राम बगिया में खेत पहुंचे और पारंपरिक रूप से बैलों की जोड़ी के साथ हल चलाकर बियासी की। खेत में उतरकर हल की मूठ थामे मुख्यमंत्री  साय सहज ही एक किसान की भूमिका में नजर आए। इस दौरान उन्होंने खेती-किसानी से जुड़ी अपनी पुरानी स्मृतियों को भी साझा किया। मुख्यमंत्री साय ने हरे-भरे खेत में मिट्टी की सौंधी सुगंध और बैलों के साथ खेती करते हुए कहा कि अपने गांव, अपनी माटी और अपने खेत से जुड़ाव का सुख ही अलग है। हल की मूठ थामते ही खेती-किसानी से जुड़ी पुरानी स्मृतियां एक बार फिर जीवंत हो उठती हैं। खेतों के बीच बिताया समय मन को असीम सुकून देने के साथ नई ऊर्जा से भर देता है।

गृहग्राम बगिया में सुबह-सुबह खेत पहुंचे मुख्यमंत्री, बैलों के साथ हल चलाकर की बियासी


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और बचपन से खेती-किसानी को बहुत करीब से देखा और अनुभव किया है। खेती उनके लिए केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है। गांव और खेतों ने ही उन्हें श्रम का सम्मान करना, प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना सिखाया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की माटी, मेहनतकश किसानों और समृद्ध कृषि परंपराओं से जुड़ी हुई है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में खेती का महत्वपूर्ण स्थान है। पीढिय़ों से हमारे किसान अपने परिश्रम से धरती को सींचते हुए प्रदेश की समृद्धि की नींव मजबूत करते आए हैं। छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहार, परंपराएं और ग्रामीण जीवन भी कृषि से गहराई से जुड़े हुए हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना महत्वपूर्ण है। खेती हमें परिश्रम, धैर्य और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है। किसान खेत में केवल फसल नहीं उगाता, बल्कि अपने श्रम से पूरे समाज के जीवन और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी संबल देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी, हमारी समृद्ध कृषि परंपरा और हमारे मेहनतकश अन्नदाता किसान सदैव उनके हृदय के सबसे करीब हैं। किसानों की खुशहाली और कृषि की समृद्धि ही प्रदेश की समृद्धि का मजबूत आधार है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अन्नदाता किसानों के परिश्रम को नमन करते हुए उनके जीवन में खुशहाली तथा खेतों में भरपूर फसल की कामना की।
खेती से मुख्यमंत्री का रहा है पुराना नाता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जीवन ग्रामीण परिवेश और खेती-किसानी से गहराई से जुड़ा रहा है। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वे अपने गांव, खेत और ग्रामीण परिवेश से जुड़कर आत्मीयता का अनुभव करते हैं। आज सुबह गृहग्राम बगिया के खेत में बैलों के साथ हल चलाते मुख्यमंत्री की सहजता में अपनी माटी और कृषि परंपरा के प्रति उनका यही गहरा लगाव दिखाई दिया।

CG – प्रेमी जोड़े ने की आत्महत्या : इश्क नहीं हुआ मुकम्मल तो प्रेमी जोड़े ने दी जान, इस हाल में मिले दोनों के शव

CG – प्रेमी जोड़े ने की आत्महत्या : इश्क नहीं हुआ मुकम्मल तो प्रेमी जोड़े ने दी जान, इस हाल में मिले दोनों के शव

 रायपुर। राजधानी रायपुर से प्रेमी जोड़े की आत्महत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि दोनों के शव फांसी के फंदे से लटके हुए मिले। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया।

सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, दोनों ने यह कदम क्यों उठाया, इसकी वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। घटना की खबर फैलते ही गांव में मातम और दहशत का माहौल है।

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला राजधानी रायपुर के छेरीखेड़ी इलाके का है। यहां प्रेमी जोड़े ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतकों की पहचान मेघराज साहू और नंदिनी धुर्व के रूप में हुई है। दोनों छेरीखेड़ी गांव के रहने वाले थे और उनके बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों के शव पेड़ से लटके मिले, जिसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही मंदिर हसौद थाना पुलिस मौके पर पहुंची।

पुलिस ने शुरू की जांच

पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया है। FSL की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोनों की मौत के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए परिजनों और आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है। घटना मंदिर हसौद थाना क्षेत्र की है।

CG Weather : रायपुर में सुबह से झमाझम बारिश, कई जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट; अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम

CG Weather : रायपुर में सुबह से झमाझम बारिश, कई जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट; अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम

 रायपुर।  राजधानी रायपुर में आज सुबह से बारिश का दौर जारी है। कई इलाकों में लगातार पानी गिरने से सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ गई हैं। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के दौरान छत्तीसगढ़ के अधिकांश इलाकों में बारिश होने का अनुमान जताया है। उत्तर छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति बन सकती है।

पिछले 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हुई। इस दौरान पेण्ड्रा रोड में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम के मौसमी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक बारिश सामान्य के आसपास रही है, हालांकि कुल वर्षा में करीब 9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

रायपुर में सुबह से बारिश, कई जगह पानी भरा

रायपुर में सुबह से रुक-रुककर और कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। घने बादलों के कारण दिन में भी अंधेरा छाया हुआ है। बारिश के चलते शहर की कुछ सड़कों और निचले इलाकों में पानी जमा होने की स्थिति बनी है।

आज राजधानी में अधिकतम तापमान करीब 28 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने दिनभर बादल छाए रहने के साथ बारिश की संभावना जताई है।

बंगाल की खाड़ी का सिस्टम हुआ सक्रिय

उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे उत्तरी ओडिशा तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र अब ज्यादा स्पष्ट हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक यह सिस्टम अगले 24 घंटे में और ताकतवर होकर डिप्रेशन में बदल सकता है।

इसका असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी पड़ रहा है। इसी वजह से अगले तीन दिनों तक प्रदेश में बारिश का दौर बने रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ भारी बारिश भी हो सकती है।

इन जिलों में भारी बारिश और तेज हवा का अलर्ट

मौसम विभाग ने रायपुर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है।

इन क्षेत्रों में बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद और बलरामपुर में मध्यम बारिश होने का अनुमान है।

रविवार को इन इलाकों में सबसे ज्यादा बरसा पानी

रविवार को प्रदेश के कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई। भैसमा और लवन में 9-9 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके बाद ओडगी में 8 सेंटीमीटर और कोटाडोल में 7 सेंटीमीटर पानी बरसा।

बेरला, सिमगा और थानखमरिया में 6-6 सेंटीमीटर, जबकि छाल और मनेंद्रगढ़ में 5-5 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा तिल्दा, दरी, सुहेला, नांदघाट, कटघोरा, लैलूंगा, पेण्ड्रा रोड, भाटापारा, सहसपुर लोहारा, कसडोल, हरदीबाजार और कोंटा में करीब 3 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।

अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अगले तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ में बारिश का प्रभाव बना रह सकता है। उत्तर और मध्य हिस्सों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है, जबकि अन्य इलाकों में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है।

लगातार बारिश को देखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। तेज बारिश के दौरान जलभराव वाले रास्तों से गुजरने और नदी-नालों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है।

 
पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा से पहले चेन स्नैचिंग, कलश यात्रा में आरोपियों ने महिलाओं को बनाया निशाना,

पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा से पहले चेन स्नैचिंग, कलश यात्रा में आरोपियों ने महिलाओं को बनाया निशाना,

 दुर्ग/भिलाई। अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा शुरू होने से पहले ही भिलाई में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को चोरों ने चुनौती दे दी। रविवार को निकाली गई भव्य कलश यात्रा के दौरान महिलाओं के गले से चेन झपटने के करीब चार से पांच मामले सामने आने की जानकारी मिली है। घटनाओं के बाद कलश यात्रा में शामिल महिलाओं में नाराजगी देखने को मिली और भीड़ में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे।

दरअसल, भिलाई के सेक्टर-6 स्थित जयंती स्टेडियम में 17 से 23 अगस्त तक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा से पहले रविवार को सेक्टर-5 मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। रिमझिम बारिश के बीच निकली इस यात्रा में 11 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हुईं। यात्रा सेक्टर-5 मंदिर से शुरू होकर जयंती स्टेडियम स्थित कथा पंडाल में पहुंचकर समाप्त हुई।

बताया जा रहा है कि इसी दौरान भारी भीड़ का फायदा उठाकर चोरों ने महिलाओं को निशाना बनाया। कलश यात्रा के दौरान करीब चार से पांच महिलाओं के साथ चेन स्नैचिंग के प्रयास या घटनाओं की शिकायत पुलिस तक पहुंची है। घटना के बाद महिलाओं में काफी आक्रोश देखने को मिला।

700 से ज्यादा जवानों की तैनाती

शिव महापुराण कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी के मुताबिक, कथा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए 20 राजपत्रित अधिकारियों समेत 700 से अधिक पुलिस जवानों की ड्यूटी लगाई गई है।

पुलिस के अनुसार, कलश यात्रा के दौरान चेन स्नैचिंग के प्रयास की शिकायतें मिली हैं। मामले की जांच सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। पुलिस ने दो से तीन संदिग्ध महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। पुलिस का कहना है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कथा से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में कथा से पहले ही कलश यात्रा में चेन स्नैचिंग की घटनाओं ने पुलिस के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी कथा के दौरान भारी भीड़ के बीच श्रद्धालुओं, खासकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होगी।

नागपंचमी आज : 23 साल बाद बना ऐसा दुर्लभ संयोग, अब करना होगा 14 वर्ष का लंबा इंतजार

नागपंचमी आज : 23 साल बाद बना ऐसा दुर्लभ संयोग, अब करना होगा 14 वर्ष का लंबा इंतजार

 रायपुर। 23 वर्ष पश्चात इस वर्ष नाग पंचमी सोमवार को मनाई जाएगी। सोमवार का दिन होने के कारण इसे सोमवती नागपंचमी कहा जाएगा। इस अद्भुत संयोग के लिए अब 14 वर्षों का इंतजार करना होगा। सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। नाग पंचमी के दिन सावन के तीसरे सोमवार का व्रत भी किया जाएगा।

ऐसा संयोग इससे पहले साल 2003 में बना था। भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का प्रत्येक सोमवार विशेष माना जाता है, वहीं नाग पंचमी का पर्व नाग देवता की पूजा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। एक ही दिन इन दोनों शुभ अवसरों का संयोग बनने से यह विशेष फलदायी होगा। पंचमी तिथि की शुरुआत 16 अगस्त को दोपहर 4 बजकर 52 मिनट से हो चुकी है।

शिव-नाग पूजा से दूर होंगे कालसर्प व पितृ दोष
पंचमी तिथि का समापन सोमवार शाम 5 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी आज मनाई जाएगी। इस दिन शुभ योग, शुक्ल योग, रवि नामक योग भी बन रहा है। इन शुभ योग में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा अर्चना करने से कालसर्प दोष, पितृ समेत कई दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति भी आती है। इन शुभ योग के साथ गुरु के उच्च राशि में होने से हंसराज योग भी बन रहा है।

इसलिए पंचमी तिथि पर पूजन
ज्योतिष शास्त्र में हर तिथि की अधिष्ठात्री शक्ति और देवता होते हैं, इसी क्रम में पंचमी तिथि का संबंध नाग देवता से माना गया है। इसलिए सावन मास की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। सावन भगवान शिव का प्रिय मास है और शिवजी का नागों से संबंध भी है। महादेव ने अपने गले में नागराज वासुकी को धारण किया है, वहीं भगवान विष्णु के पास शेषनाग है। पंचमी तिथि नाग देवता को समर्पित है, इसलिए सालभर की सभी पंचमी तिथि में सावन मास की पंचमी तिथि नाग पूजन के लिए सबसे उपयुक्त मानी गई है।

2 घंटे 37 मिनट का समय सर्वोत्तम
नाग पंचमी पर पूजन के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 5 बजकर 50 मिनट से 8 बजकर 28 मिनट तक है। नाग देवता की पूजा के लिए 2 घंटे 37 मिनट का समय मिलेगा। इस अवधि में भक्त विधि विधान के साथ नाग देवता के साथ महादेव की आराधना भी कर सकते हैं और कालसर्प दोष, पितृ दोष समेत नाग संबंधी सभी दोषों के लिए पूजा व उपाय कर सकते हैं। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा करना शुभ रहेगा।

  • ब्रह्म मुहूर्तः तड़के 4:25 बजे से 5:09 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्तः दोपहर 12 बजे से 12:52 बजे तक
  • विजय मुहूर्तः दोपहर 2:37 बजे से 3:29 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्तः संध्या 6:59 बजे से 7:21 बजे
CG - फेसबुक पर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा, रिटायर्ड BSP कर्मी से 45 लाख की ठगी,आरोपी MP से गिरफ्तार

CG - फेसबुक पर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा, रिटायर्ड BSP कर्मी से 45 लाख की ठगी,आरोपी MP से गिरफ्तार

 दुर्ग/भिलाई। भिलाई में बीएसपी के सेवानिवृत्त कर्मी से करीब 45 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने फेसबुक के जरिए ऑनलाइन ट्रेडिंग में कम समय में भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया। इसके बाद पंजीयन, मार्जिन और टैक्स समेत अलग-अलग शुल्क के नाम पर विभिन्न बैंक खातों में रकम जमा कराई गई।

मामले में दुर्ग पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश के बैतूल से 24 वर्षीय आरोपी विशाल नागले को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके कब्जे से मोबाइल फोन, चेकबुक और पहचान संबंधी दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस अब ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।

फेसबुक के जरिए बनाया संपर्क

जानकारी के मुताबिक, आरोपियों ने फेसबुक के माध्यम से बीएसपी के सेवानिवृत्त कर्मी से संपर्क किया। ऑनलाइन ट्रेडिंग में कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने का झांसा देकर उसे निवेश के लिए तैयार किया गया। शुरुआत में ट्रेडिंग के नाम पर भरोसा कायम किया गया और बाद में अलग-अलग शुल्क बताकर लगातार रकम जमा कराई जाने लगी।

आरोपियों ने पंजीयन, मार्जिन और टैक्स के नाम पर पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए। धीरे-धीरे ठगी की रकम करीब 45 लाख रुपये तक पहुंच गई।

शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच

ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने भिलाई नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर दुर्ग पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने बैंक खातों में हुए लेनदेन, मोबाइल नंबर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की।

जांच के दौरान पुलिस को आरोपी विशाल नागले के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने बैतूल पहुंचकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस के मुताबिक, मामले में आरोपी के साथ अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। बरामद मोबाइल, चेकबुक, दस्तावेज और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच के जरिए पुलिस साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

दुर्ग पुलिस ने लोगों से ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर मिलने वाले अनजान ऑफर और सोशल मीडिया के झांसे से सावधान रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि कम समय में भारी मुनाफे का लालच देने वाले लोगों के कहने पर किसी भी बैंक खाते में रकम ट्रांसफर न करें और निवेश से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की जांच जरूर करें।

 
भौतिक प्रगति के साथ अपनी समृद्ध परंपरा और मानवीय मूल्यों को सहेजकर रखना ही सच्चा विकास- मंत्री टंक राम वर्मा

भौतिक प्रगति के साथ अपनी समृद्ध परंपरा और मानवीय मूल्यों को सहेजकर रखना ही सच्चा विकास- मंत्री टंक राम वर्मा

 रायपुर: ​बिलासपुर जिला स्थित बिल्हा विकासखंड के ग्राम कड़ार में आयोजित  भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने डॉ. खूबचंद बघेल और स्वामी आत्मानंद महाराज जैसी महान विभूतियों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में लाखों लोग जन्म लेते हैं, लेकिन अमर वही होते हैं जो अपने सत्कर्मों से समाज का निर्माण करते हैं और इतिहास रचते हैं।

इस अवसर पर ​मंत्री ने 20 लाख रूपए से बनने वाले सामुदायिक भवन का भूमि पूजन किया। छत्तीसगढ़ निर्माण की पृष्ठभूमि का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि ​पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का सपना देखा गया था, और मार्ग में निरंतर आगे बढ़ने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने उस सपने को साकार किया। यदि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ का निर्माण न हुआ होता, तो प्रदेश की स्थिति आज भी वैसी ही बनी रहती। आज सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरी और अधोसंरचना के हर क्षेत्र में तेज़ी से काम हो रहा है। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और राजस्व का पूरा पैसा अब यहीं के सर्वांगीण विकास में उपयोग हो रहा है।

सामाजिक बदलाव पर प्रकाश डालते हुए  मंत्री वर्मा ने कहा कि कभी पूर्णतः कृषि पर आधारित हमारा समाज अब व्यवसाय, व्यापार और नौकरियों के क्षेत्र में भी तेज़ी से आगे बढ़ा है। लोगों के रहन-सहन का स्तर बदला है; जिनके पास कभी साइकिल नहीं थी, वे आज दोपहिया, चारपहिया और हवाई यात्रा तक का आनंद ले रहे हैं। गांव-गांव में महज 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में स्कूल, हायर सेकेंडरी विद्यालय और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है। इस भौतिक प्रगति के साथ हम सभी को ​सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है।आधुनिकता के इस दौर में गांव-घर का पारस्परिक प्रेम और पारिवारिक मर्यादाएं प्रभावित हो रही हैं। प्रगति के साथ-साथ अपनी प्राचीन संस्कृति, परंपरा और संस्कारों को बनाए रखना बेहद अनिवार्य है, क्योंकि संस्कारों के बिना जीवन अधूरा है। हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना होगा जहां आपसी प्रेम, भाईचारा, संवेदनशीलता और एक-दूसरे के दुख-सुख में खड़े रहने की भावना सदैव जीवंत रहे।

​वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और मार्गदर्शन से मिल रही काम करने की प्रेरणा: धरमलाल कौशिक

​कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक  धरमलाल कौशिक ने अपने उद्बोधन में वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन और जीवन अनुभवों की महत्ता पर बल दिया। ​उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं का जीवन अनुभवों से भरा होता है, जिससे सीखकर, समझकर और पढ़कर संगठन व समाज सेवा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। पृथक छत्तीसगढ़ के निर्माण के बाद से लेकर आज तक प्रदेश ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। दूर-दराज़ के क्षेत्रों तक भौतिक साधनों और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच ने आम नागरिक के जीवन को सुगम बनाया है। बिल्हा विकासखंड के ग्राम कड़ार में आयोजित इस भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के क्रेडा के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी,सरपंच ब्रजेश दुबे,जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ नागरिक और ग्रामीण जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

धमतरी को मिली सौगात, खुली प्रदेश की पहली कयाकिंग अकादमी, इको-टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

धमतरी को मिली सौगात, खुली प्रदेश की पहली कयाकिंग अकादमी, इको-टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

 धमतरी। जिले में जल पर्यटन और साहसिक खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रुद्री बांध परिसर में कयाकिंग अकादमी का शुभारंभ किया गया। इस पहल से जहां युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलेंगे, वहीं रुद्री और गंगरेल क्षेत्र में इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रुद्री बांध परिसर में कयाकिंग अकादमी का शुभारंभ नगर निगम धमतरी के महापौर रामू रोहरा ने किया। गंगरेल ब्लू एडवेंचर स्पोर्ट्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ और कर्मा महिला स्व-सहायता समूह रुद्री के सहयोग से शुरू हुई यह अकादमी जिले में जल आधारित साहसिक गतिविधियों को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

जल क्रीड़ा गतिविधियों का किया जाएगा विस्तार- कलेक्टर

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि आने वाले समय में यहां कयाकिंग के अलावा अन्य जल क्रीड़ा गतिविधियों का भी विस्तार किया जाएगा। जलाशय की जल गुणवत्ता में सुधार, प्रदूषण और दुर्गंध को जैविक तरीके से कम करने तथा जल क्रीड़ा स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से बायो-क्यूब भी लगाए जाएंगे। इससे पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। कयाकिंग अकादमी का उद्देश्य सिर्फ साहसिक खेलों को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाना भी है। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन आधारित आजीविका को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कयाकिंग पर्यटकों के लिए बनेगा नया आकर्षण- महापौर

महापौर रामू रोहरा ने कहा कि रुद्री बांध की प्राकृतिक सुंदरता और मनोरम परिवेश को देखते हुए कयाकिंग पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगा। इससे धमतरी के पर्यटन मानचित्र पर रुद्री और गंगरेल क्षेत्र को नई पहचान मिल सकती है।

महापौर रामू रोहरा और कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने स्वयं कयाक में बैठकर चप्पू चलाया और कयाकिंग का रोमांचक अनुभव लिया। अकादमी का संदेश है—“Paddle Your Way to Adventure – Live Life One Stroke at a Time”, जो युवाओं में साहस, आत्मविश्वास और प्रकृति से जुड़ाव की भावना को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

रुद्री बांध में शुरू हुई यह कयाकिंग अकादमी धमतरी में साहसिक पर्यटन, जल क्रीड़ा और स्थानीय रोजगार के नए अवसरों का रास्ता खोल सकती है। आने वाले समय में यहां अन्य जल गतिविधियों के विस्तार से रुद्री और गंगरेल क्षेत्र पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बनने की उम्मीद है।

CG  : जादू-टोने के शक में 24 वर्षीय युवती की हत्या, रिश्तेदार पर आरोप

CG : जादू-टोने के शक में 24 वर्षीय युवती की हत्या, रिश्तेदार पर आरोप

 बलौदाबाजार। जिले के लवन थाना क्षेत्र के ग्राम चितावर में 24 वर्षीय शतरूपा ध्रुव की हत्या ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या के पीछे जादू-टोने को लेकर पैदा हुआ शक वजह बना। इस मामले में शतरूपा के रिश्तेदार और पड़ोसी रामदयाल ध्रुव पर हत्या का आरोप है।

पत्नी की मौत का ठीकरा शतरूपा के परिवार पर
पुलिस के अनुसार, आरोपी की पत्नी की मौत के बाद उसके मन में यह शक घर कर गया था कि शतरूपा की मां ने जादू-टोना किया है। यही शक धीरे-धीरे बदले की भावना में बदल गया। आरोप है कि इसी अंधविश्वास के चलते शतरूपा को निशाना बनाया गया और उसकी जान चली गई। सबसे भयावह बात यह है कि शतरूपा का आरोपी से कोई प्रत्यक्ष व्यक्तिगत विवाद नहीं बताया जा रहा था। बावजूद इसके, किसी दूसरे व्यक्ति के प्रति पैदा हुए शक और अंधविश्वास की कीमत एक 24 वर्षीय युवती को अपनी जिंदगी देकर चुकानी पड़ी।

जब अंधविश्वास बना हत्या की वजह
यह मामला सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच का खतरनाक चेहरा है, जिसमें बीमारी, मौत या परिवार में आने वाली किसी परेशानी का कारण वैज्ञानिक तरीके से तलाशने के बजाय जादू-टोना और टोना-टोटका मान लिया जाता है। अंधविश्वास की यही सोच कई बार किसी महिला को डायन बताने, किसी परिवार को सामाजिक रूप से बहिष्कृत करने और यहां तक कि हिंसा और हत्या तक पहुंच जाती है। डर, अफवाह और बिना प्रमाण के लगाए गए आरोप जब दिमाग पर हावी हो जाते हैं, तो रिश्ते भी दुश्मनी में बदल जाते हैं।

आंकड़े भी डराने वाले
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 में जादू-टोने के आरोप से जुड़े मामलों में 85 लोगों की हत्या हुई थी। वर्ष 2021 में यह संख्या 68 थी। वर्ष 2013 से 2022 के बीच ऐसे मामलों में 1,064 लोगों की जान गई। इन घटनाओं में महिलाओं को भी बड़ी संख्या में निशाना बनाया गया।

शतरूपा की मौत छोड़ गई बड़ा सवाल

शतरूपा की हत्या यह सवाल छोड़ गई है कि आखिर कब तक बीमारी, मौत और परेशानियों का जिम्मेदार किसी इंसान को ठहराकर उसके खिलाफ हिंसा की जाएगी? आधुनिक समाज में भी अगर बिना किसी प्रमाण के जादू-टोने का शक किसी की जान ले ले, तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना पर भी गंभीर सवाल है।

अंधविश्वास के खिलाफ लोगों को जागरूक करने की जरुरत
अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, स्कूल, समाज, सामाजिक संगठन और प्रशासन सभी को मिलकर वैज्ञानिक सोच और जागरूकता को बढ़ावा देना होगा। शतरूपा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी मौत समाज को एक जरूरी संदेश दे रही है- शक को सच मान लेना खतरनाक है और अंधविश्वास को हिंसा का आधार बनने देना उससे भी ज्यादा खतरनाक।

महिला एवं बाल विकास विभाग में 50 पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर) की सीधी भर्ती को मिली मंजूरी

महिला एवं बाल विकास विभाग में 50 पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर) की सीधी भर्ती को मिली मंजूरी

 00 लंबे समय से रिक्त पदों पर भर्ती से विभाग को मिलेगी नई ऊर्जा, जमीनी स्तर पर पोषण अभियानों का होगा बेहतर क्रियान्वयन
रायपुर।
महिला सशक्तिकरण और नौनिहालों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध छत्तीसगढ़ सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सुशासन सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों से, विभाग के अंतर्गत पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर) के 50 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती को आधिकारिक सहमति प्रदान कर दी गई है।
मैदानी स्तर पर विभाग की योजनाओं—विशेषकर आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारू संचालन, पोषण अभियानों की निगरानी, महत्वपूर्ण सामाजिक पहलों के क्रियान्वयन—में पर्यवेक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। लंबे समय से इन पदों के रिक्त होने के कारण मैदानी स्तर पर कार्य का दबाव था। इन 50 नए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से विभागीय ढांचे को ऐतिहासिक मजबूती मिलेगी और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे हितग्राहियों तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगा।
सुशासन के संकल्प को मिल रही सिद्धि
इस महत्वपूर्ण स्वीकृति पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और दूरदर्शी नेतृत्व के चलते आज विभाग को यह अहम स्वीकृति मिली है। पर्यवेक्षकों की कमी से जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग में जो चुनौतियां आ रही थीं, वे अब दूर होंगी। हमारी सरकार माताओं और बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। इन नई नियुक्तियों से विभाग की कार्यक्षमता में व्यापक सुधार आएगा और हमारी आंगनबाड़ी व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी।
प्रस्ताव को मिली वित्तीय एवं प्रशासकीय स्वीकृति
ज्ञात हो कि संचालनालय, महिला एवं बाल विकास द्वारा इन पदों की पूर्ति के लिए शासन से अनुमति मांगी गई थी। विभागीय मंत्री के निर्देश पर इस प्रक्रिया में तेजी लाई गई और 13 अगस्त 2026 को वित्त विभाग द्वारा 50 पर्यवेक्षकों की भर्ती के लिए विधिवत सहमति जारी कर दी गई है। इसके पश्चात महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा भी आदेश जारी कर भर्ती प्रक्रिया का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया गया है। इस बहुप्रतीक्षित फैसले से न केवल विभाग के कार्यों में गति आएगी, बल्कि प्रदेश की योग्य युवतियों और महिलाओं को शासकीय सेवा में आकर समाज के लिए कार्य करने का एक बड़ा अवसर भी प्राप्त होगा।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सैनिक भाइयों के लिए भेजे रक्षा सूत्र

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सैनिक भाइयों के लिए भेजे रक्षा सूत्र

 रायपुर: रक्षाबंधन के पावन अवसर पर देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात सैनिक भाइयों के प्रति सम्मान, स्नेह और कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से संचालित ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4’ अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सरगुजा की महिलाओं एवं स्काउट-गाइड द्वारा एकत्रित रक्षा सूत्र सैनिकों के लिए रवाना किए।  अंबिकापुर के सर्किट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने स्वयं रक्षा सूत्र भेजकर सैनिकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया।

मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि यह लगातार चौथा वर्ष है, जब छत्तीसगढ़ की बहनों की ओर से देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिaए रक्षा सूत्र भेजे जा रहे हैं। यह अभियान प्रदेश की महिलाओं के सैनिक भाइयों के प्रति स्नेह, सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के अवसर पर जब पूरा देश अपने परिवार के साथ खुशियां मनाता है, तब हमारे सैनिक भाई अपने परिवार से दूर रहकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में डटे रहते हैं। उनके त्याग और समर्पण को नमन करते हुए बहनों की ओर से भेजा गया यह रक्षा सूत्र प्रेम, सम्मान और आशीर्वाद का संदेश लेकर जवानों तक पहुंचेगा।

ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4 के तहत सरगुजा से सैनिकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ की बहनों का स्नेह, सम्मान और आशीर्वाद

रक्षा सूत्र सैनिकों के लिए बहनों के स्नेह का संदेश

श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि रक्षा सूत्र केवल एक धागा नहीं, बल्कि सैनिकों और देशवासियों के बीच भावनात्मक संबंध का प्रतीक है। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की माताएं और बहनें देश के वीर जवानों को यह संदेश दे रही हैं कि पूरा प्रदेश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपने परिवार और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से दूर रहने वाले सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि इस प्रकार के अभियान समाज में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करते हैं। छत्तीसगढ़ की महिलाओं द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए रक्षा सूत्र जब सैनिक भाइयों की कलाइयों पर बंधेंगे, तो उनमें प्रदेश की बहनों के स्नेह और आशीर्वाद की अनुभूति होगी।

ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4 के तहत सरगुजा से सैनिकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ की बहनों का स्नेह, सम्मान और आशीर्वाद

चौथे वर्ष में पहुंचा ‘सिपाही रक्षा सूत्र’ अभियान

अभियान के संयोजक एवं पूर्व सैनिक महासभा के अध्यक्ष श्री महेंद्र प्रताप सिंह राणा ने बताया कि ‘सिपाही रक्षा सूत्र’ अभियान की शुरुआत बिलासपुर से हुई थी। वर्ष 2023 में लगभग 6 लाख 71 हजार, वर्ष 2024 में लगभग 9 लाख और वर्ष 2025 में 12 लाख 21 हजार रक्षा सूत्र सैनिकों तक भेजे गए। इस तरह पिछले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ से लगभग 27 लाख 92 हजार रक्षा सूत्र सैनिकों के सम्मान में भेजे जा चुके हैं।

वर्ष 2026 में अभियान का चौथा चरण ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4’ के रूप में संचालित किया जा रहा है। इस वर्ष लगभग 21 लाख रक्षा सूत्र एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के माध्यम से थल सेना, जल सेना और वायु सेना के जवानों तक भी छत्तीसगढ़ की बहनों का रक्षा सूत्र पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4 के तहत सरगुजा से सैनिकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ की बहनों का स्नेह, सम्मान और आशीर्वाद

अंबिकापुर से जशपुर होते हुए रांची रवाना होंगे रक्षा सूत्र

अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम के बाद रक्षा सूत्रों से भरी वाहन रैली जशपुर होते हुए रांची की ओर रवाना होगी। इसके बाद विभिन्न माध्यमों से देश के अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात सैनिकों तक रक्षा सूत्र पहुंचाए जाएंगे।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह, पूर्व सांसद श्री कमल भान सिंह, श्री किसन सिंह, श्री भारत सिंह सिसौदिया, श्री विनोद हर्ष, श्रीमती अरुणा सिंह सहित जनप्रतिनिधि, पूर्व सैनिक महासभा के पदाधिकारी, स्काउट-गाइड की सदस्याएं एवं अधिकारी उपस्थित रहे।