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विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं से तैयार होंगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी : मुख्यमंत्री साय

विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं से तैयार होंगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी : मुख्यमंत्री साय

 00 सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री

00 नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू करेंगे पद्म भूषण पुलेला गोपीचंद, प्रदेश की प्रतिभाओं को मिलेगा विश्वस्तरीय प्रशिक्षण

00 खेल प्रतिभाओं को अवसर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता, खेल विकास के लिए बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान
00 बस्तर ओलंपिक से सामने आ रही दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाएं, दूसरे वर्ष लगभग 3.91 लाख खिलाडिय़ों ने लिया हिस्सा

00 खेल उत्कृष्टता, आधुनिक सुविधाओं और निवेश को प्रोत्साहित करने के राज्य सरकार के प्रयासों की गोपीचंद ने की सराहना
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इन प्रतिभाओं को पहचानने, तराशने और उन्हें विश्वस्तरीय प्रशिक्षण एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। राज्य सरकार इसी दिशा में योजनाबद्ध रूप से आगे बढ़ रही है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के जोरा में आयोजित सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर में प्रस्तावित विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स क्लब की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदेश में खेल संस्कृति को नई मजबूती मिलेगी और युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण एवं खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर क्लब के संस्थापकों और पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक श्री पुलेला गोपीचंद का छत्तीसगढ़ में स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय बैडमिंटन को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनके मार्गदर्शन में अनेक खिलाडिय़ों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया है। नवा रायपुर में उनकी बैडमिंटन अकादमी की शुरुआत प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी। साय ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता का निर्माण भी करते हैं। खेलों में निवेश वास्तव में हमारी युवा पीढ़ी और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार खेल अधोसंरचना के विस्तार, प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास और प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन देने पर विशेष ध्यान दे रही है।

बस्तर ओलंपिक ने बदली तस्वीर, गांवों से निकलकर मैदान तक पहुंच रहे युवा
साय ने बस्तर ओलंपिक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढऩे का अवसर देने का सशक्त मंच बना है। बस्तर ओलंपिक के पहले वर्ष में लगभग एक लाख 65 हजार खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया था। दूसरे वर्ष यह संख्या बढ़कर लगभग तीन लाख 91 हजार हो गई। खिलाडिय़ों की बढ़ती भागीदारी बताती है कि बस्तर के युवाओं में खेलों को लेकर अभूतपूर्व उत्साह है और क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन की नई धारा प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में आज युवा बंदूक और हिंसा से दूर होकर खेल, शिक्षा, कौशल और रोजगार के माध्यम से अपने भविष्य को संवारने के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि सुदूर गांव की प्रतिभा को भी वही अवसर और मंच मिले, जो बड़े शहरों के खिलाडिय़ों को उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया के अंतर्गत राष्ट्रीय जनजातीय खेलों का सफल आयोजन किया गया है। प्रदेश के खिलाड़ी भी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में रजत पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी यादव तथा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य संजू देवी की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां अपने परिश्रम और प्रतिभा से प्रदेश का मान बढ़ा रही हैं।
खेल अधोसंरचना के विस्तार के लिए 100 करोड़ का प्रावधान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने खेलों के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए इस वर्ष के बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार की खेलो इंडिया सहित विभिन्न योजनाओं के समन्वय से प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित की जा रही है। खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण, आवश्यक सुविधाएं और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी, चाहे वह किसी शहर से हो या सुदूर वनांचल से, संसाधनों के अभाव में पीछे न रहे। प्रतिभा को अवसर से जोडऩा और खिलाडिय़ों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।
नक्सलवाद से मुक्ति के साथ बस्तर में खुल रहे विकास के नए द्वार
साय ने कहा कि प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता उनकी सरकार के लगभग पौने तीन वर्ष के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। चार दशकों से अधिक समय तक नक्सलवाद ने बस्तर सहित प्रदेश के अनेक क्षेत्रों के विकास को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक दिशा मिली है। उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों के साहस, समर्पण और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि इस परिवर्तन में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की जनता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्थानीय लोगों के विश्वास और सहयोग से आज उन क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, खेल और रोजगार की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मोदी की गारंटी के अंतर्गत प्रदेशवासियों से किए गए वादों को पूरा करने के साथ सुशासन और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित राज्य बनने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 75 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए राज्य की प्राकृतिक संपदा और पारंपरिक सामर्थ्य के साथ नई तकनीक, आधुनिक उद्योग, सेवा क्षेत्र और मानव संसाधन के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा, वनोपज, जल संसाधन और ऊर्जा के क्षेत्र में समृद्ध है। प्रदेश के मेहनतकश लोग हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इन सभी संभावनाओं का बेहतर उपयोग करते हुए रोजगार, उद्यमिता और निवेश के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति को देश और विदेश के निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। हाल ही में सिंगापुर प्रवास के दौरान डेटा सेंटर, कृषि प्रसंस्करण सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। लगभग 15 बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ आयोजित राउंड टेबल बैठक में निवेशकों ने छत्तीसगढ़ में उद्योग और व्यवसाय स्थापित करने में रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि निवेश बढऩे से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
सुशासन और तकनीक से बदल रही प्रशासनिक कार्यसंस्कृति
साय ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित प्रशासन के लिए लगातार सुधार कर रही है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने के साथ शासकीय सेवाओं के डिजिटलीकरण को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि तकनीक के माध्यम से सेवाएं अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी बनें तथा उनका लाभ समय पर आम नागरिकों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक, सशक्त युवा, आधुनिक अधोसंरचना और सुशासन विकसित छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से स्वस्थ, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओम प्रकाश चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान अब केवल खनिज और भारी उद्योगों तक सीमित नहीं है। राज्य में सेवा क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और आधुनिक शहरी अधोसंरचना का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। नवा रायपुर इस बदलते छत्तीसगढ़ की नई संभावनाओं का प्रमुख केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास के लिए लगातार प्रतिष्ठित संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी और नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान स्थापित हो रहे हैं, जबकि आईआईटी, आईआईएम, एम्स और सीपेट जैसे राष्ट्रीय संस्थान पहले से प्रदेश में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
चौधरी ने कहा कि अमरावती और हैदराबाद के बाद श्री पुलेला गोपीचंद द्वारा छत्तीसगढ़ में बैडमिंटन अकादमी प्रारंभ किया जाना प्रदेश के खेल जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को अपने ही प्रदेश में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नवा रायपुर में डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर इकाई की स्थापना की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार अंजोर विजन दस्तावेज को आधार बनाकर दीर्घकालिक योजना के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।

विकसित भारत के निर्माण के लिए स्वस्थ और सशक्त युवा पीढ़ी जरूरी : गोपीचंद
पद्म भूषण श्री पुलेला गोपीचंद ने छत्तीसगढ़ में मिले आत्मीय स्वागत के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर के सुव्यवस्थित और सुंदर विकास को देखकर छत्तीसगढ़ के प्रति उनकी धारणा को नई दिशा मिली है। उन्होंने इलेशियम क्लब्स की पहल को खेल, स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। गोपीचंद ने कहा कि पिछले दस-बारह वर्षों में देश में खेलों के प्रति दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने वर्ष 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी राष्ट्र की प्रगति में गौरव और आत्मविश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब कोई भारतीय खिलाड़ी विजय प्राप्त करता है और तिरंगा ऊंचा होता है, तो इससे पूरे देश का आत्मविश्वास बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और साक्षरता के साथ उनके शारीरिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। बच्चों को दौडऩे, कूदने, चढऩे और विभिन्न खेल गतिविधियों में भाग लेने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। खेलों में किया गया निवेश केवल खिलाडिय़ों के निर्माण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी समाज के निर्माण में योगदान देता है। गोपीचंद ने खेल उत्कृष्टता से जुड़ी योजनाओं, सुविधाओं और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करने के लिए ऐसी युवा पीढ़ी की आवश्यकता है, जो शिक्षित होने के साथ स्वस्थ, सक्रिय, अनुशासित और शारीरिक रूप से सक्षम भी हो। इसलिए खेल और स्वास्थ्य को विकास की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया जाना आवश्यक है। इस अवसर पर प्रह्लाद राय अग्रवाल, दीपचंद राजलीवाल, पवित्र कुमार, डॉ. हिमांशु द्विवेदी सहित अन्य अतिथिगण एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

त्योहारी सीजन में छत्तीसगढ़ को मिल सकती हैं दो स्पेशल ट्रेनें, सांसद संतोष पांडेय ने GM को लिखा पत्र

त्योहारी सीजन में छत्तीसगढ़ को मिल सकती हैं दो स्पेशल ट्रेनें, सांसद संतोष पांडेय ने GM को लिखा पत्र

 रायपुर- आगामी त्योहारी मौसम में ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़, लंबी प्रतीक्षा सूची और यात्रियों की दिक्कतों को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने रेलवे प्रशासन से विशेष प्रबंध करने का आग्रह शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद संतोष पांडेय ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के महाप्रबंधक को पत्र प्रेषित किया है। सांसद ने पत्र में नवरात्र, दीपावली, छठ पूजा और क्रिसमस पर्व के दौरान छत्तीसगढ़ के यात्रियों की सुविधा के लिए दो महत्वपूर्ण मार्गों पर नई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग की है।

सांसद संतोष पांडेय ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि त्योहारी सीजन में छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान और दर्शन के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार तथा ऋषिकेश की यात्रा करते हैं। वर्तमान में इस मार्ग पर नियमित ट्रेनों में भारी वेटिंग चल रही है। अत: दुर्ग से हरिद्वार के बीच एक सीधी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन का परिचालन तत्काल शुरू किया जाना चाहिए। इससे नियमित ट्रेनों पर यात्रियों का अत्यधिक दबाव कम होगा और श्रद्धालुओं को कंफर्म टिकट के साथ सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा।

गोंदिया-माता वैष्णो देवी कटरा मार्ग के लिए मांग
सांसद ने दूसरी महत्वपूर्ण मांग जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी धाम जाने वाले यात्रियों के लिए रखी है। उन्होंने गोंदिया से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन चलाने की जरूरत जताई है। इस ट्रेन का मार्ग गोंदिया से प्रारंभ होकर राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, उसलापुर और कटनी मुड़वारा होते हुए निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया गया है। इस मार्ग से उत्तर भारत जाने वाले हजारों यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।

रेल विकास संगठन का भी मिला समर्थन
सांसद ने अपने पत्र के साथ छत्तीसगढ़ रेल विकास संगठन द्वारा प्राप्त मांग पत्र को भी संलग्न किया है। उन्होंने महाप्रबंधक से कहा कि जनभावनाओं और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन दोनों ट्रेनों के संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इन ट्रेनों के चलने से न केवल आम यात्रियों को दलालों और भीड़भाड़ से मुक्ति मिलेगी, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होगी।

शिक्षक भर्ती परीक्षा पर हाईकोर्ट की रोक, 11 से 25 अक्टूबर तक होने वाला एग्जाम स्थगित

शिक्षक भर्ती परीक्षा पर हाईकोर्ट की रोक, 11 से 25 अक्टूबर तक होने वाला एग्जाम स्थगित

 बिलासपुर-  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शिक्षक और सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस कृष्णराम महापात्र की डिवीजन बेंच ने भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया।इसके बाद छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल ने शुक्रवार को हाई कोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा स्थगित कर दी। बता दें कि भर्ती परीक्षा में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि सहायक शिक्षक भर्ती के कुल 2,292 पदों के लिए लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर को प्रस्तावित थी। वहीं शिक्षक भर्ती के 1,654 पदों में के लिए लिखित परीक्षा 25 अक्टूबर को होनी थी।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भर्ती में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण नहीं मिला। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा है।

हालांकि, समाज कल्याण विभाग ने 11 सितंबर 2026 को संशोधित अधिसूचना जारी कर सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित (बी) श्रेणी को शामिल किया।हालांकि, अधिसूचना जारी होने से पहले आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। इसलिए इस श्रेणी को वर्तमान भर्ती में शामिल करना कानूनी रूप से संभव नहीं था।

संशोधित विज्ञापन जारी कर सकती है सरकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि संशोधन केवल सहायक शिक्षक भर्ती के लिए जारी किया गया है, शिक्षक भर्ती के लिए नहीं। परीक्षा की तारीखें नजदीक होने के कारण डिवीजन बेंच ने अंतरिम आदेश जारी किया है।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2026 को होने वाली सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा और 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित शिक्षक भर्ती परीक्षा तब तक नहीं होगी, जब तक विज्ञापन में सभी आरक्षित श्रेणियों को शामिल कर संबंधित अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर नहीं दिया जाता।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य शासन नियमानुसार संशोधित विज्ञापन जारी कर सकता है या सभी आरक्षित श्रेणियों को शामिल करते हुए नया विज्ञापन निकाल सकता है।

दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण में गड़बड़ी के आरोप
कोरबा की रहने वाली मीनाक्षी मंगलेकर और बाकी ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद पूर्ण दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया गया है।

इससे वे भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के अवसर से वंचित हो रहे हैं। याचिका में इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए भर्ती विज्ञापन की शर्तों और आरक्षण व्यवस्था को चुनौती दी गई है।

संशोधित विज्ञापन में भी दृष्टिबाधितों को शामिल नहीं किया
सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने बताया कि 16 अप्रैल 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन में संशोधन की सूचना 9 अक्टूबर को रायपुर और बिलासपुर के अखबारों में प्रकाशित की गई है। इसे विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। संशोधन में आरक्षित पदों का श्रेणीवार बंटवारा किया गया है।

शासन ने कहा कि आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2026 निकल चुकी है। ऐसे में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर देना संभव नहीं है।

इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब संशोधन के जरिए आरक्षित पदों का श्रेणीवार बंटवारा किया गया है, तो दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों की श्रेणी को शामिल नहीं करने का प्रथम दृष्टया कोई उचित कारण नजर नहीं आता।

जानिए… क्या है दिव्यांगों के लिए आरक्षण का नियम
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 34 के तहत सरकारी संस्थानों में सीधी भर्ती के लिए दिव्यांग व्यक्तियों को कम से कम 4% आरक्षण देने का प्रावधान है। इसमें दृष्टिहीन और कम दृष्टि वाले व्यक्ति भी शामिल हैं।

आरक्षण का लाभ लेने के लिए सामान्यतः 40% या उससे अधिक दिव्यांगता का प्रमाणपत्र जरूरी है। याचिका में इसी 4% आरक्षण के तहत दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए पद आरक्षित नहीं करने को चुनौती दी गई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया संकल्प नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव के पोस्टर का विमोचन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया संकल्प नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव के पोस्टर का विमोचन

 रायपुर- संकल्प नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव समिति, शंकर नगर, रायपुर द्वारा बीटीआई ग्राउंड, शंकर नगर में आयोजित होने वाले गरबा उत्सव के पोस्टर का विमोचन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री माननीय श्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री माननीय श्री विजय शर्मा के करकमलों से किया गया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आयोजन के 15वें वर्ष में प्रवेश करने पर समिति को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गरबा उत्सव के सफल आयोजन की कामना की।

समिति के संयोजक संजय श्रीवास्तव ने बताया कि बीटीआई ग्राउंड, शंकर नगर, रायपुर में आयोजित होने वाला यह गरबा उत्सव अपने 15वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस वर्ष उत्सव का आयोजन 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक किया जाएगा। आयोजन के दौरान प्रत्येक दिन उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले गरबा प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा।

श्रीवास्तव ने बताया कि नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित यह उत्सव मां दुर्गा की आराधना, भक्ति एवं पारंपरिक गरबा संस्कृति का अनूठा संगम है। समिति द्वारा प्रतिवर्ष इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है।

समिति द्वारा गरबा उत्सव को भव्य रूप देने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। समिति ने समस्त श्रद्धालुओं, नागरिकों एवं गरबा प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर उत्सव की शोभा बढ़ाने की अपील की है।

इस अवसर पर समिति से अनिता खंडेलवाल, संगीता मिश्रा, दीपक श्रीवास्तव, अमरजीत सिंह,  सुमन मुथा,  नेहा खंडेलवाल, ललित साहू, हर्ष वर्मा, अंकुर अग्रवाल, श्रुति जैन, ललित साहू उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ में 240 ई-बसों की राह खुलेगी, 11 अक्टूबर को होगा कंसेशन एग्रीमेंट

छत्तीसगढ़ में 240 ई-बसों की राह खुलेगी, 11 अक्टूबर को होगा कंसेशन एग्रीमेंट

 रायपुर- छत्तीसगढ़ के चार बड़े शहरों में 240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए 11 अक्टूबर को कंसेशन एग्रीमेंट किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव की मौजूदगी में रायपुर, बिलासपुर, भिलाई और कोरबा नगर निगम का चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के साथ कंसेशन एग्रीमेंट होगा। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत होने वाले इस समझौते से चारों शहरों में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने का रास्ता साफ होगा। 

उप मुख्यमंत्री  अरुण साव के नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में आयोजित कंसेशन एग्रीमेंट कार्यक्रम में प्रदेश के आठ नगरीय निकायों के महापौर और आयुक्त शामिल होंगे। इनमें रायपुर की महापौर मती मीनल चौबे, बिलासपुर की महापौर मती पूजा विधानी, कोरबा की महापौर मती संजू देवी राजपूत, दुर्ग की महापौर मती अलका बाघमार, रिसाली की महापौर मती शशि सिन्हा, भिलाई के महापौर  नीरज पाल, बीरगांव के महापौर  नंदलाल देवांगन तथा भिलाई-चरोदा के महापौर  निर्मल कोसरे शामिल हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, संचालक  नीलेश क्षीरसागर और सूडा के सीईओ  सुमीत अग्रवाल भी इस दौरान मौजूद रहेंगे।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के पहले चरण में प्रदेश के चार नगर निगमों में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने की योजना है। इनमें सबसे अधिक 100 बसें रायपुर में चलेंगी। दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर को 50-50 तथा कोरबा को 40 बसें मिलेंगी। बसों के संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बिलासपुर और भिलाई में 1 नवम्बर 2026 तक प्रतीकात्मक रूप से 20-20 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रमुख सचिव  बोरा ने बताया कि ई-बसों में यात्रियों की सुविधा के साथ सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। बसें आधुनिक और हाईटेक सुविधाओं से लैस होंगी। यात्रियों को मोबाइल स्कैनर के माध्यम से किराए का भुगतान करने और ऑनलाइन टिकट लेने की सुविधा मिलेगी। सुरक्षा के लिए प्रत्येक बस में छह कैमरे लगाए जाएंगे। यात्री मोबाइल एप से बसों के रूट की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।

 बोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य शहरी सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बनाना है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी। इससे नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ शहरों की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के प्रयासों को भी गति मिलेगी।

वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा: अंबिकापुर के संजय पार्क में खुलेगा अत्याधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर

वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा: अंबिकापुर के संजय पार्क में खुलेगा अत्याधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर

 रायपुर- छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण और वनांचल के ग्रामीणों की सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। वन मंत्री  केदार कश्यप की अध्यक्षता में शनिवार को नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की पहली बैठक हुई। इसमें अंबिकापुर के संजय पार्क में आधुनिक वन्यजीव ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित करने को मंजूरी दी गई। साथ ही संरक्षित वन क्षेत्रों की 18 ग्रामीण सड़कों के उन्नयन संबंधी प्रस्ताव भारत सरकार को भेजने की अनुशंसा की गई।

वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण के साथ वनांचल के ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम, घायल वन्यप्राणियों के त्वरित उपचार और वन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। 

अंबिकापुर में प्रस्तावित उपचार केंद्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष और दुर्घटनाओं में घायल वन्यप्राणियों के त्वरित बचाव, प्राथमिक उपचार और अल्पकालिक देखरेख की सुविधा उपलब्ध होगी। वहीं, पीएम जनमन योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत भोरमदेव अभयारण्य की 3, इंद्रावती टाइगर रिजर्व की 14 और जशपुर के बादलखोल अभयारण्य की एक सड़क के उन्नयन की अनुशंसा की गई। इन सड़कों के उन्नयन से बैगा सहित अन्य विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों की बस्तियों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की पहुंच बेहतर हो सकेगी।

बैठक में जनभागीदारी के आधार पर चयनित ‘ऑरेंज ओकलीफ’ को छत्तीसगढ़ की पहली राजकीय तितली घोषित करने के प्रस्ताव का परीक्षण पूर्ण कर आगे की कार्यवाही करने की मंजूरी दी गई। बारनवापारा अभयारण्य में काले हिरणों के सफल संरक्षण के बाद गोमर्डा अभयारण्य में 50 काले हिरणों के स्थानांतरण को भी स्वीकृति दी गई। 

समिति ने हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों से फसल क्षति के मुआवजे की दरों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जिलावार एवं फसलवार बीमित राशि के आधार पर अद्यतन करने के प्रस्ताव पर आगे विचार करने का निर्णय लिया। हाथी प्रभावित क्षेत्रों में कच्चे मकानों को पक्का करने के लिए विशेष मुख्यमंत्री आवास योजना के प्रस्ताव को उच्चस्तरीय बैठक में विचारार्थ रखने के निर्देश दिए गए।

बैठक में विधायक  धर्मजीत सिंह,  गोमती साय और  चैतराम अटामी, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव  अमरनाथ प्रसाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक  ओ.पी. यादव सहित समिति के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सरकार प्रदेश के प्रत्येक नगर और गांव के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध – मंत्री टंक राम वर्मा

सरकार प्रदेश के प्रत्येक नगर और गांव के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध – मंत्री टंक राम वर्मा

 रायपुर - सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक नगर और गाँव के सर्वांगीण विकास तथा बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और ऐतिहासिक पहल की गई है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री  टंक राम वर्मा के विशेष प्रयासों से बलौदाबाजार विधानसभा को बुनियादी सुविधाओं, सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर तथा शैक्षणिक ढाँचे को नई मजबूती प्रदान करने के लिए लगभग पौने पांच करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी गई है। इस निर्णय से क्षेत्र के ग्रामीणों, व्यापारियों और विद्यार्थियों के बीच भारी उत्साह की लहर दौड़ गई है।

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2 करोड़ 15.24 लाख रूपए के 42 नए कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति

ग्रामीण क्षेत्रों के चहुंमुखी विकास, शिक्षा के स्तर को सुधारने और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए पूरी सरकार तरह संकल्पित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन विकास कार्यों के धरातल पर उतरने से ग्रामीण अंचलों में नागरिकों को आधुनिक एवं बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जिससे बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में सुगमता होगी और विभिन्न सार्वजनिक आयोजनों व आवश्यकताओं के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार हो सकेगा।

वर्ष 2026-27 के लिए बलौदाबाजार और सिमगा विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु 2 करोड़ 15 लाख 24 हजार रुपये की अनुमानित लागत से 42 नए विकास कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार और धार्मिक आयोजनों को सुगम बनाने के उद्देश्य से मुडियाडीह, झोंका, बिटकुली, खैरवारी, बुड़गहन, कसहीडीह, खैरवारडीह, करमनडीह, खैराटा, गोडखपरी, पौंसरी, भांठागांव, रसेड़ा, सोनपुर, चरौटी, अचानकपुर, ढाबाडीह और भालेसुर जैसे अनेक गांवों के मुक्तिधामों में शेड, अहाता तथा प्रतीक्षालय निर्माण के कार्य संपन्न कराए जाएंगे। इसके साथ ही, शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में बालिकाओं की स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए केशडबरी, हलवाई खपरी, चापा, पुरान, छुईहा, सेमराडीह, पारागांव, बिलाईडबरी, मोहभट्ठा, भैंसा, भोथाडीह, जागडा, सिकारी केशली और मगरवाय में बालिका शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। शिक्षा के ढांचे को और अधिक मजबूत करने की दिशा में सिमगा विकासखंड के ग्राम मानिपुर (आमाकोनी), नेवधा और टेकारी की शासकीय प्राथमिक शालाओं में दो-दो अतिरिक्त कक्षों का निर्माण भी इस स्वीकृति का प्रमुख हिस्सा है। इस अवसर पर राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ग्रामीण अंचलों में नागरिकों को आधुनिक सुविधाएं देने और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
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2.72 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की प्राविधिक स्वीकृति

इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए तिल्दा-नेवरा विकासखंड के नगरीय व ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति देने के लिए 2.72 करोड़ रुपए से अधिक के प्रमुख विकास कार्यों की प्राविधिक स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत क्षेत्र के यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय चौक से साहू भवन तक रोड एवं डिवाइडर निर्माण के लिए 101.68 लाख रुपए तथा मंगलम पेट्रोल पंप से पं. दीनदयाल उपाध्याय चौक होते हुए ओवर ब्रिज तक रोड एवं डिवाइडर निर्माण के लिए 95.79 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न ग्रामों के चौतरफा विकास के लिए ग्राम तरपोंगी के बाजार चौक में नाली निर्माण के लिए 10 लाख रुपए, ग्राम टंडवा, ग्राम नकटी-तुलसी के महामाया मंदिर तथा ग्राम तुलसी-नेवरा के बालाजी मंदिर तक सीसी रोड निर्माण के लिए विभिन्न स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं। शैक्षणिक और सामाजिक परिसरों के रखरखाव हेतु ग्राम मोहदी और ग्राम जोता की प्राथमिक शालाओं, ग्राम सरारीडीह के गौधाम तथा ग्राम तुलसी-मानपुर एवं खपरीकला व ग्राम सिरवे के पीएम  स्कूल में प्रार्थना शेड और अहाता निर्माण के कार्य भी शामिल हैं।

​गुणवत्ता और पारदर्शिता पर रहेगा विशेष ज़ोर

राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बात कहते हुए बताया कि ये सभी कार्य 'छत्तीसगढ़ वर्क्स डिपार्टमेंट मैनुअल' के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएंगे। आधुनिक सड़कों और डिवाइडरों के निर्माण से जहां यातायात सुगम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं विद्यालयों में प्रार्थना शेड और बाउंड्री वॉल निर्माण से बच्चों को धूप और बारिश से सुरक्षा मिलेगी, जिससे उन्हें एक सुरक्षित व व्यवस्थित शैक्षणिक वातावरण प्राप्त हो सकेगा। शासन की इस सौगात के लिए बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के वासियों ने राज्य सरकार और मंत्री  टंक राम वर्मा का सहृदय आभार व्यक्त किया है।

स्वास्थ्य सेवाओं का नया आयाम: सारंगढ़ की ‘अटल आरोग्य लैब’ बनी मरीजों का सहारा

स्वास्थ्य सेवाओं का नया आयाम: सारंगढ़ की ‘अटल आरोग्य लैब’ बनी मरीजों का सहारा

 ​रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी स्वास्थ्य नीतियों और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य के शासकीय अस्पतालों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल की पहल से आम नागरिकों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के जिला चिकित्सालय में संचालित 'अटल आरोग्य लैब' आम जनता और विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस लैब ने महज चार महीनों के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए 23 हजार से अधिक मरीजों की विभिन्न प्रकार की 86 हजार 975 पैथोलॉजी जांचें पूरी तरह निःशुल्क की हैं।

 जिला प्रशासन के सतत प्रयासों से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। जिला चिकित्सालय में यह लैब बेहतरीन सेवाएं दे रही है। अत्याधुनिक जांच मशीनों से सुसज्जित इस प्रयोगशाला में वर्तमान में 134 प्रकार की उच्चस्तरीय पैथोलॉजी जांच सुविधाएं एक ही छत के नीचे पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं। पैथोलॉजिस्ट और प्रयोगशाला में कार्यरत चिकित्सा प्रयोगशाला तकनीशियनों व कर्मचारियों की समर्पित टीम की बदौलत ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को अब छोटी-छोटी जांचों के लिए अन्यत्र भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।
 ​इस व्यवस्था से मरीजों को निजी प्रयोगशालाओं में अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करने से भारी राहत मिली है। चार माह की इस अल्पावधि में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों की जांच होना इस बात का प्रमाण है कि जिला चिकित्सालय में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ बड़े पैमाने पर लोग उठा रहे हैं। राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन का यह प्रयास ग्रामीण अंचल के जरूरतमंदों के लिए बेहद राहतकारी साबित हो रहा है।

 ​सिविल सर्जन ने नागरिकों से अपील की है कि आवश्यक जांच के लिए निजी प्रयोगशालाओं में अधिक राशि खर्च करने के बजाय जिला चिकित्सालय की इस निःशुल्क अटल आरोग्य लैब का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। साथ ही, मरीजों को और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस लैब में शीघ्र ही माइक्रोबायोलॉजी (सूक्ष्मजीव विज्ञान) जांच की सुविधा भी निःशुल्क प्रारंभ करने की तैयारी है, जिससे विभिन्न प्रकार के संक्रमण और जटिल बीमारियों की पहचान में और अधिक सहायता मिल सकेगी।

सौ रुपए की बचत से लिखी सफलता की इबारत

सौ रुपए की बचत से लिखी सफलता की इबारत

 कभी परिवार की सीमित आमदनी और तंगहाली के बीच घर का खर्च चलाना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मती अहिल्या निषाद के लिए एक बड़ी चुनौती थी। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम बिलाईगढ़ (अ) की रहने वाली अहिल्या का जीवन सामान्य गृहिणियों की तरह ही आर्थिक संघर्षों से घिरा हुआ था। लेकिन कहते हैं कि मजबूत इरादे और सही दिशा में उठाया गया एक छोटा कदम भी तकदीर बदल सकता है।     

अहिल्या की यह प्रेरक कहानी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान योजना) और उनकी खुद की कड़ी मेहनत का एक बेहतरीन उदाहरण है।

​बिहान योजना और लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली तकदीर

अहिल्या निषाद के जीवन में वास्तविक बदलाव 15 मार्च 2018 को आया, जब वे बिहान योजना के अंतर्गत लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। इस जुड़ाव के साथ ही उन्होंने अपनी आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए हर महीने मात्र 100 रुपए की बचत करने की शुरुआत की।
       ​समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल वित्तीय अनुशासन का पाठ मिला, बल्कि आगे बढ़ने का एक नया मंच भी प्राप्त हुआ। समूह की मदद से उन्होंने बैंक से 1 लाख रुपए का ऋण प्राप्त किया और अपने गांव की मुख्य सड़क पर 'निषाद होटल' के नाम से नाश्ते की दुकान की शुरुआत की।

​आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: 'लखपति दीदी' तक का सफर

पति  किर्तीलाल निषाद के सहयोग और अपनी अटूट मेहनत के बल पर अहिल्या का यह व्यवसाय धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगा। आज स्थिति यह है कि उनके होटल से प्रतिदिन लगभग 500 से 800 रुपए की आमदनी हो रही है, जिससे उनकी मासिक आय 15,000 से 24,000 रुपए तक पहुंच चुकी है।
 ​इस नियमित आय ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य और बेहतर शिक्षा की राह को भी आसान बना दिया है। आज वे क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं और गर्व से 'लखपति दीदी' के रूप में पहचानी जाती हैं।मती अहिल्या निषाद कहती है कि ​मैं बिहान योजना को दिल से धन्यवाद देती हूं, जिसकी बदौलत आज मैं आत्मनिर्भर बन पाई हूं और अपने परिवार को एक बेहतर जीवन दे रही हूं।

यह कहानी राज्य स्तर पर ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, महिला स्व-सहायता समूहों की ताकत और 'बिहान' योजना के जरिए आजीविका संवर्धन की सफलता का एक जीवंत प्रमाण है।

सरगुजा ओलंपिक से निखर रही ग्रामीण खेल प्रतिभाएं, युवा खिलाड़ियों के सपनों को मिल रही नई उड़ान : पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल

सरगुजा ओलंपिक से निखर रही ग्रामीण खेल प्रतिभाएं, युवा खिलाड़ियों के सपनों को मिल रही नई उड़ान : पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल

 रायपुर- सरगुजा की धरती खेल प्रतिभाओं से समृद्ध है। यहां के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है उन्हें उचित अवसर, प्रोत्साहन और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने की। सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को नई पहचान देने के साथ युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उक्त बातें पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने शनिवार को पीएम  विद्यालय, लखनपुर में आयोजित ब्लॉक स्तरीय सरगुजा ओलंपिक 2026 के समापन समारोह में कही। इस अवसर पर लुण्ड्रा विधायक  प्रमोद मिंज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

समापन समारोह में शामिल होकर पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया तथा उनके खेल कौशल, जोश और जीत के जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को पहचान दिलाने, युवाओं को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने और खेलों के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे आयोजनों से युवाओं में खेलों के प्रति रुचि बढ़ने के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आपसी सद्भाव की भावना भी मजबूत होती है।

सरगुजा की प्रतिभाएं प्रदेश और देश का नाम करेंगी रोशन

पर्यटन मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि सरगुजा अंचल के युवाओं में प्रतिभा, परिश्रम और संघर्ष की अद्भुत क्षमता है। यहां के खिलाड़ी यदि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और नियमित अभ्यास के साथ आगे बढ़ें, तो निश्चित रूप से राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते। सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजन ऐसे खिलाड़ियों को आगे आने, अपनी प्रतिभा निखारने और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास और संकल्प है कि सरगुजा की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिले, युवा खेलों के प्रति प्रोत्साहित हों और अपनी उपलब्धियों से सरगुजा सहित पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करें। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में परिवार, समाज, शिक्षकों और खेल प्रशिक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सभी के सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण अंचलों में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकता है।

खेलों से विकसित होता है अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व का गुण

मंत्री  अग्रवाल ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि खेल जीवन में सफलता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। खेल हमें अनुशासन, धैर्य, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की सीख देते हैं। खेल के मैदान में मिली जीत आत्मविश्वास बढ़ाती है, वहीं हार हमें अपनी कमियों को पहचानकर और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में केवल विजेता बनना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पूरे समर्पण, मेहनत और खेल भावना के साथ भाग लेना भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। प्रत्येक खिलाड़ी को अपनी प्रतिभा पर विश्वास रखते हुए निरंतर अभ्यास करना चाहिए। आज ब्लॉक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी भविष्य में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सरगुजा का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति को मिल रहा बढ़ावा

पर्यटन मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को बढ़ावा देने और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों ने देश के युवाओं में खेलकूद, स्वास्थ्य और शारीरिक दक्षता के प्रति नई जागरूकता पैदा की है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी युवाओं को खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने तथा खेल सुविधाओं के विकास की दिशा में कार्य कर रही है। ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उचित अवसर उपलब्ध कराना खेलों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, ऊर्जावान और अनुशासित युवा ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

लखनपुर में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, खेल भावना और उत्साह का शानदार प्रदर्शन

पीएम  विद्यालय, लखनपुर में आयोजित ब्लॉक स्तरीय सरगुजा ओलंपिक के दौरान खिलाड़ियों में उत्साह और प्रतिस्पर्धा का वातावरण रहा। विभिन्न खेल विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी शारीरिक दक्षता, खेल कौशल और जीत के जज्बे का प्रदर्शन किया। ग्रामीण अंचलों से आए खिलाड़ियों की सहभागिता ने आयोजन को उत्साहपूर्ण बनाया।

खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी क्षमताओं को परखने, प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त करने और खेलों के प्रति अपनी रुचि को नई दिशा देने का अवसर मिला। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, उन्हें केवल उचित मंच और प्रोत्साहन की आवश्यकता है।

खिलाड़ियों की सफलता में अभिभावकों और प्रशिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण

मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ खेलकूद भी अत्यंत आवश्यक है। खेल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों, खेल प्रशिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों के प्रति बढ़ता उत्साह आने वाले समय में सरगुजा को खेल प्रतिभाओं के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।

सभी प्रतिभागी खिलाड़ी बधाई के पात्र, निरंतर मेहनत से हासिल करें नई ऊंचाइयां

समापन समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने सरगुजा ओलंपिक में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में उतरने वाला प्रत्येक खिलाड़ी सम्मान और प्रोत्साहन का पात्र है। प्रतियोगिता में जीत हासिल करने वाले खिलाड़ी अपनी सफलता को आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं और जो खिलाड़ी इस बार विजयी नहीं हो सके, वे निराश होने के बजाय और अधिक मेहनत तथा आत्मविश्वास के साथ अगली प्रतियोगिता की तैयारी करें।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजनों से निकलने वाली खेल प्रतिभाएं आने वाले समय में प्रदेश और देश के विभिन्न खेल मंचों पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराएंगी। उन्होंने आयोजन से जुड़े अधिकारियों, शिक्षकों, खेल प्रशिक्षकों और सहयोगियों के प्रयासों की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

समापन समारोह में लुण्ड्रा विधायक  प्रमोद मिंज सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, आयोजन से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक, खेल प्रशिक्षक, खिलाड़ी एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित रहे।

डिजिटल क्रॉप सर्वे का बाकी काम 10 नवंबर तक पूरा करने के निर्देश, मुख्य सचिव ने की समीक्षा

डिजिटल क्रॉप सर्वे का बाकी काम 10 नवंबर तक पूरा करने के निर्देश, मुख्य सचिव ने की समीक्षा

 मुख्य सचिव की अध्यक्षता में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति की समीक्षा बैठक सम्पन्न

डिजिटल क्रॉप सर्वे का शेष कार्य 10 नवम्बर तक पूरा करें

कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में डिजिटल क्रॉप सर्वे के संबंध में कलेक्टरों को दिए निर्देश

डिजिटल क्रॉप सर्वे की मॉनिटरिंग, त्रुटियों के सुधार और डेटा के क्रॉस वेरिफिकेशन पर जोर

रायपुर,मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति, खसरों की जियो-रेफरेंसिंग, पॉलीगॉन निर्माण, फसल की वास्तविक स्थिति के सत्यापन तथा सर्वे के डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।
राजस्व सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने बताया कि राज्य में अब तक 93.84 प्रतिशत डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। मुख्य सचिव ने शेष कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का उद्देश्य प्रत्येक खसरे में बोई गई फसल के क्षेत्रफल को वास्तविक स्थिति के आधार पर दर्ज करना है। इसके लिए फसल का भौतिक सत्यापन, जियो-टैगिंग, पॉलीगॉन निर्माण तथा संबंधित जानकारी को डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज कर अपलोड करना सुनिश्चित किया जाए।

10 नवंबर तक पूरा करें सर्वे का शेष कार्य
मुख्य सचिव ने अधिकारियों और कलेक्टरों को निर्देश दिए कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का शेष कार्य हर हाल में 10 नवंबर तक पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन खसरों का नक्शा उपलब्ध नहीं है या जिनकी जियो-रेफरेंसिंग नहीं हुई है, उनकी पहचान कर पॉलीगॉन तैयार किए जाएं और फसल संबंधी जानकारी डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज कर अपलोड की जाए। इसके लिए जिलों में उपलब्ध ग्रामवार डेटा का उपयोग करते हुए शेष खसरों में धान अथवा अन्य फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज की जाए। पिछले वर्ष के फसल संबंधी रिकॉर्ड का भी आवश्यकतानुसार संदर्भ लिया जाए।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सर्वे का कार्य 90 प्रतिशत या उससे अधिक पूरा हो चुका है, वहां शेष कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। सर्वेयर, पटवारी और राजस्व विभाग के अन्य मैदानी अमले को सक्रिय कर ग्रामवार प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे का कार्य केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक फसल स्थिति के आधार पर पूरा होना चाहिए।

ग्राम सभाओं में किसानों की समस्याओं का होगा निराकरण
मुख्य सचिव ने बताया कि 1 नवंबर से ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं में डिजिटल क्रॉप सर्वे से संबंधित प्रकरणों का सत्यापन कर उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाए। किसानों को ग्राम सभाओं के आयोजन की जानकारी देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि वे अपनी फसल संबंधी जानकारी में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विसंगति होने पर अपनी आपत्ति और समस्या प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने कहा कि ग्रामवार ऐसे किसानों की सूची तैयार की जाए, जिनकी फसल संबंधी जानकारी का सत्यापन या सुधार किया जाना है। ग्राम सभाओं में किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान किया जाए और आवश्यक सुधारों को रिकॉर्ड में अद्यतन किया जाए। कलेक्टर ग्रामसभा सहित सर्वे की आगे की कार्ययोजना तैयार करें तथा सुधार के लिए प्राप्त आवेदनों और प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें।

डेटा की गुणवत्ता और क्रॉस वेरिफिकेशन पर विशेष जोर
मुख्य सचिव ने डिजिटल क्रॉप सर्वे के डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला और राज्य स्तर पर क्रॉस वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्वे में किसी भी प्रकार की त्रुटि या डेटा संबंधी गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल सुधार किया जाए। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड अंतिम रूप से फ्रीज होने के बाद त्रुटियों को गंभीरता से लिया जाएगा। इसलिए सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। प्रत्येक जिले में सर्वे की प्रगति के साथ उसकी गुणवत्ता की भी नियमित जांच की जाए। उन्होंने विशेष रूप से धान सहित सभी फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि कोई भी पात्र फसल क्षेत्र सर्वे से छूटने न पाए।

विशेष श्रेणी के किसानों का भी होगा पंजीयन
मुख्य सचिव ने विशेष श्रेणी के किसानों का अलग से पंजीयन कर उनकी जानकारी डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक में अपलोड करने के निर्देश दिए। इसमें वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के अंतर्गत आने वाले किसान, वन क्षेत्रों के ग्रामों से संबंधित किसान, ग्राम कोटवार तथा शासकीय पट्टाधारी किसानों की जानकारी शामिल करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि इन श्रेणियों के किसानों का सर्वे और पंजीयन भी निर्धारित समय-सीमा में पूरा कर 10 नवंबर तक संबंधित रिपोर्ट अपलोड की जाए। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय जिलों और एफआरए क्षेत्रों में कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि पात्र किसानों का पंजीयन और फसल संबंधी विवरण सही तरीके से दर्ज हो। मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे की सफलता के लिए सही डेटा, पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सर्वे का कार्य वास्तविक स्थिति के आधार पर पूरा हो तथा किसानों को अपनी समस्याएं रखने और उनमें सुधार कराने का अवसर मिले।बैठक में मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को जल जीवन मिशन के कार्यों की भी समीक्षा करने और संबंधित प्रगति पर आवश्यक ध्यान देने के निर्देश दिए। 

बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार, संचालक खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग  श्रीमती फरिया आलम सिद्दीकी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

हाथी प्रभावित गांवों में पहुंचे पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, ग्रामीणों से मिलकर जाना हाल, अधिकारियों को दिए त्वरित राहत के निर्देश

हाथी प्रभावित गांवों में पहुंचे पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, ग्रामीणों से मिलकर जाना हाल, अधिकारियों को दिए त्वरित राहत के निर्देश

 रायपुर- पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के हाथी प्रभावित ग्राम मरडीह, फुंगी और कुरमंतपारा का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने हाथियों की गतिविधियों से प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र में हुए नुकसान की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान मंत्री  अग्रवाल ने वन विभाग के अधिकारियों, एसडीएम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मंत्री  अग्रवाल ने प्रभावित गांवों के भ्रमण के दौरान ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और हाथियों के कारण उत्पन्न परिस्थितियों तथा उन्हें हो रही परेशानियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान और राहत संबंधी कार्रवाई की जानकारी प्राप्त की। मंत्री  अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हाथियों से प्रभावित परिवारों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो तथा उनके नुकसान का नियमानुसार आकलन कर मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया प्राथमिकता के साथ पूरी की जाए।

प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने में न हो अनावश्यक विलंब

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि हाथियों के कारण हुए नुकसान का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ आकलन किया जाए। प्रभावित परिवारों के प्रकरणों में आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को समय पर राहत उपलब्ध कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में विभागीय समन्वय बनाए रखते हुए त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए।

मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि हाथियों की गतिविधियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर शासन पूरी तरह संवेदनशील है। ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को आवश्यक राहत दिलाने के लिए सभी संबंधित विभागों को जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करना होगा।

जनता की सुरक्षा और हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहना हमारी प्राथमिकता: मंत्री  अग्रवाल

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्र में हुए नुकसान की जानकारी मिलते ही आज मैं स्वयं ग्रामीणों के बीच पहुंचा हूं। प्रभावित परिवारों की समस्याओं को समझना और उन्हें समय पर राहत दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। मैंने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नुकसान का शीघ्र आकलन कर प्रभावित परिवारों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। जनता की सुरक्षा, प्रभावित परिवारों को राहत और हर परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़े रहना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के साथ वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को आपसी समन्वय से कार्य करना चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

ग्रामीणों से सतर्क रहने और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील

मंत्री  अग्रवाल ने ग्रामीणों से अपील की कि हाथियों की मौजूदगी के दौरान पूरी सावधानी बरतें और किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाएं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें तथा वन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें। हाथियों की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सूचित करें। उन्होंने कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की जागरूकता, सतर्कता और प्रशासन के साथ समन्वय से संभावित खतरों को कम किया जा सकता है।

मंत्री  अग्रवाल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि शासन और प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान तथा प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित गांवों की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा और राहत संबंधी कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इस दौरान वन विभाग के अधिकारी, एसडीएम, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

​अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में ‘स्कूल केईन्ता’ से जगी उम्मीद

​अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में ‘स्कूल केईन्ता’ से जगी उम्मीद

 रायपुर- जब हौसले मजबूत हों, तो दुर्गम से दुर्गम रास्ते भी सुगम हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के सुदूर अंचलों में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ और ‘स्कूल केईन्ता अभियान’ ने इस बात को सच कर दिखाया है। भौगोलिक विषमताओं और दूरी के कारण जो बच्चे कभी शिक्षा से दूर थे, आज वे अपने ही गाँव में अक्षर ज्ञान प्राप्त कर अपने स्वर्णिम भविष्य की नींव रख रहे हैं।

 ​इस संवेदनशील पहल के तहत अब तक 2,000 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है, वहीं अत्यंत पहुँचविहीन क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक प्राथमिक शालाएँ सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं।

​अब 10 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर बना बीती बात

संकुल केंद्र गारपा के अंतर्गत आने वाले गाँव घमंडी की कहानी इस बदलाव का जीवंत उदाहरण है। कभी यहाँ के मासूम बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए कोड़ेनार तक लगभग 10 किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता था। घने जंगलों, पथरीले रास्तों और लंबी दूरी के कारण बच्चे नियमित स्कूल नहीं जा पाते थे।
बच्चों और अभिभावकों की इस पीढ़ियों पुरानी समस्या को समझते हुए ज़िला प्रशासन ने गाँव में ही वैकल्पिक प्राथमिक शाला घमंडी की शुरुआत की। वर्तमान में इस विद्यालय में 30 बच्चे पंजीकृत हैं।

स्थानीय शिक्षा दूत कोसा राम वड्डे गाँव के ही बच्चों को नियमित अध्ययन से जोड़कर इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में एक नायक की भूमिका निभा रहे हैं। अब बच्चों को शिक्षा पाने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता। बच्चों को ​शिक्षा के साथ अधिकारों का उपहार मिला। ​गाँव में स्कूल खोलने के साथ-साथ प्रशासन बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए प्रशासनिक सुविधाओं को भी उनके द्वार तक पहुँचा रहा है। हाल ही में वैकल्पिक शाला घमंडी के गत वर्ष नामांकित 22 बच्चों को उनके जाति प्रमाण पत्र तैयार कर वितरित किए गए। ​इन आवश्यक दस्तावेजों के मिल जाने से न केवल बच्चों और अभिभावकों में अपार हर्ष है, बल्कि भविष्य में मिलने वाली विभिन्न शासकीय छात्रवृत्तियों, शैक्षणिक योजनाओं और नागरिक सुविधाओं का लाभ उठाने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है।

इस अभियान के माध्यम से 2,000 से अधिक बच्चे शिक्षा से जुड़ चुके है। दूरस्थ क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक शालाओं का संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। अपने गाँव में पढ़ाई की सुविधा मिलने से अब बच्चों को 10 किमी की थकाऊ यात्रा से मुक्ति मिल गई है।
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​एक मिसाल बनता 'स्कूल केईन्ता अभियान'

ज़िला प्रशासन का यह सतत प्रयास साबित करता है कि यदि प्रतिबद्धता हो, तो अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक भी विकास की किरण पहुँचाई जा सकती है। 'स्कूल केईन्ता अभियान' न केवल बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर शिक्षण व्यवस्था और आवश्यक दस्तावेज तैयार करवाकर राज्य के अन्य आकांक्षी जिलों के लिए भी एक नई मिसाल पेश कर रहा है।

छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाले में बड़ा दावा, ₹104 करोड़ की रकम कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन तक पहुंचने का आरोप

छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाले में बड़ा दावा, ₹104 करोड़ की रकम कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन तक पहुंचने का आरोप

 रायपुर-  ईओडब्ल्यू ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कोल लेवी घोटाले में सोमवार को विशेष अदालत में छठा पूरक आरोप पत्र दाखिल कर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से वसूले गए अवैध लेवी के 104.20 करोड़ रुपये रायपुर स्थित राजीव भवन (प्रदेश कांग्रेस कार्यालय) पहुंचाए गए। यह रकम तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक भेजी गई थी।

जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की आनलाइन ई-परमिट प्रणाली में बदलाव कर जिला खनिज अधिकारी (डीएमओ) का मैन्युअल अनुमोदन अनिवार्य किया गया। इसके बिना डीओ जारी होना बंद कर दिया गया और परिवहन पर रोक लगा दी गई। इसी प्रशासनिक शिकंजे की आड़ में 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध कोयला लेवी की वसूली शुरू हुई। वसूली का मुख्य सूत्रधार सूर्यकांत तिवारी था, जो मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) और वरिष्ठ अफसरों के नाम का दुरुपयोग कर पूरा सिंडिकेट चला रहा था।

किसे कितनी मिली अवैध रकम

रामगोपाल अग्रवाल (तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष): डायरियों में दर्ज 'भवन' और 'सी पार्टी' कोडवर्ड की 32 प्रविष्टियों के जरिए कुल 104.20 करोड़ रुपये स्वीकार करने का आरोप।

देवेंद्र सिंह यादव (पूर्व विधायक, भिलाई नगर): खैरागढ़ उपचुनाव और व्यक्तिगत उपयोग के लिए सहयोगी नवाज के माध्यम से 3 करोड़ रुपये लेने का विवरण।

चंद्रदेव प्रसाद राय (पूर्व विधायक, बिलाईगढ़): नकद रकम और चुनावी खर्च के अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा दिए गए लाखों रुपये के सोने के आभूषण प्राप्त किए।

जयप्रकाश मौर्य (तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म):सिंडिकेट को मदद पहुंचाने और पैलेट उद्योगों पर 100 रुपये प्रति टन वसूली के लिए दबाव बनाने के एवज में आर्थिक लाभ प्राप्त किया।

विनोद तिवारी व रामप्रताप सिंह (कांग्रेस नेता): राजनीतिक प्रभाव और समन्वय के लिए क्रमशः 2.12 करोड़ रुपये और अन्य लेन-देन में सहभागिता के साक्ष्य।

राजीव भवन में रकम आने और राम गोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की जानकारी
चार्जशीट के मुताबिक, रकम पहुंचाने वाले लोगों के बयानों में कैश से भरा बैग राजीव भवन ले जाकर देवेंद्र डडसेना के पास जमा कराने की बात है। देवेंद्र डडसेना, राम गोपाल अग्रवाल के निजी सहायक के रूप में काम करता था और राजीव भवन में उनके कक्ष के पास बैठता था। राजीव भवन में देवेंद्र डउसेना के साथ कार्यरत कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए।

रूपेंद्र यादव और सोहन साहू ने बताया कि उन्होंने कई बार भवन के बाईं ओर स्थित शटर के पास गाड़ियों से काले बैग उतरते और देवेंद्र डडसेना के कमरे में रखे जाते देखे। रूपेंद्र यादव ने एक बार में लगभग 8-10 बैग आने और कई बार उन्हें कमरे तक पहुंचाने में मदद करने की बात कही। सोहन साहू ने एक गाड़ी के नंबर में “0009” अंक होने और सफेद स्विफ्ट डिजायर का जिक्र किया।

बैग लाने-ले जाने के दौरान कार्यालय के उस हिस्से को बंद करने और कर्मचारियों को वहां से हटाने की बात भी सामने आई है। शिशुपाल साहू और गजेंद्र यादव ने बताया कि राम गोपाल अग्रवाल और देवेंद्र डडसेना उस समय कार्यालय में मौजूद थे। उन्होंने उस हिस्से को बंद किए जाने और बैगों के बारे में बाद में मिली जानकारी भी दी।

शेल कंपनियों और अचल संपत्तियों में निवेश

जांच में सामने आया कि अवैध वसूली की रकम को छिपाने के लिए रानू साहू के भाई पियूष साहू, सौम्या चौरसिया के रिश्तेदार अनुराग चौरसिया और कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल (इंद्रमणि समूह) व जोगेंदर सिंह का सहारा लिया गया। फर्जी लोन,राइस मिलों के खातों और शेल कंपनियों के जरिए 10.77 करोड़ से अधिक की बैंक एंट्री कराई गई तथा बेनामी जमीनें, वाशरी और फ्लैट खरीदे गए।
व्हाट्सएप चैट व डायरियों से खुले राज

ईओडब्ल्यू ने जब्त हस्तलिखित डायरियों, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट्स और आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को पुख्ता साक्ष्य बनाया है। डायरियों में दर्ज 'डी','आरपी', 'जेपी', 'चंद्रा', 'भगत' और 'एमयू' जैसे कोडवर्ड की पहचान जांच के दौरान उजागर हो चुकी है।
चालान में शामिल आरोपियों की भूमिका

1. राम गोपाल अग्रवाल

राम गोपाल अग्रवाल संबंधित अवधि में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्क्ष एवं छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जब्त डायरियों में ‘‘भवन’ एवं "C PARTY" के नाम से 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ (एक सौ चार करोड़ बीस लाख रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में यह रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने तथा देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं। उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के नाम भूमि खरीदी और रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान का विवरण भी चालान में शामिल है।

2. देवेन्द्र सिंह यादव

भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव एवं उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹3 करोड़ ;तीन करोड़ रुपयेद्ध दर्ज हैं। इनमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने तथा उसका उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और स्वयं के लिए करने में देवेंद्र सिंह यादव की भूमिका पाई गई है।

3. विनोद तिवारी

विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बारह लाख ग्यारह हजार रुपये (लगभग ₹2.12 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग राजनीतिक कार्यों में करने के तथ्य मिले हैं। खैरागढ़ उपचुनाव की होर्डिंग के भुगतान तथा जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी सामने आया है।

4. रामप्रताप सिंह

जब्त डायरियों में "R P Singh" एवं "RP" नाम से रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बानवे लाख नब्बे हजार रुपये (लगभग ₹2.93 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने तथा उसे व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक कार्यों, मीडिया प्रबंधन और वाहन व्यवस्था में उपयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है।

5. चंद्रदेव प्रसाद राय

तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹49.50 लाख (लगभग उनचास लाख पचास हजार रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों में करने के तथ्य मिले हैं। इसके अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा उन्हें आभूषण उपलब्ध कराए जाने का विवरण भी चालान में शामिल है।

6. जयप्रकाश मौर्य

तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹1 करोड़ (लगभग एक करोड़ रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग के मामलों में उसके साथ संपर्क रखने तथा अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। पैलेट उद्योगपतियों को ₹100 प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने का विवरण भी उनके विरुद्ध चालान में शामिल है।

7. पियूष कुमार साहू

पियूष कुमार साहू की भूमिका अपनी बहन रानू साहू को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम संपत्तियों में निवेश कराने में पाई गई है। परिवार से संबंधित 13 संपत्तियों की खरीदी में बैंक खातों से भुगतान के अलावा रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान भी किया गया। रकम के लेन-देन और संपत्ति खरीदी में उनके तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया।

8. जोगेन्दर सिंह

जोगेन्दर सिंह, सूर्यकांत तिवारी के व्यावसायिक भागीदार थे। विवेचना में जय अम्बे रोड लाइन्स के माध्यम से नकद रकम की व्यवस्था करने तथा अपनी फर्मों के खातों से बैंक प्रविष्टियां उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका पाई गई है। सात फर्मों को भेजी गई लगभग ₹40 करोड़ (लगभग चालीस करोड़ रुपये) की राशि और उससे संबंधित लेन-देन का विवरण भी चालान में दिया गया है।

9. अनुराग चौरसिया

अनुराग चौरसिया की भूमिका सौम्या चौरसिया को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम फ्लैट और भूमि खरीदी में लगाने में पाई गई है। इसके लिए मोटल मधुबन तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया। इन खातों में प्राप्त रकम, आगे किए गए भुगतान और संपत्तियों में निवेश का विवरण चालान में शामिल है।

10. दीपेश टांक

दीपेश टांक की भूमिका भूमि सौदे में रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद रकम प्राप्त करने तथा नकद रकम को कृषि आय के रूप में दर्शाने में पाई गई है। भूमि विक्रय के बाद भी वे ओम एग्रो फार्म के कार्यों एवं भुगतान से जुड़े रहे। अवैध रकम को भूमि और फार्म के कार्यों में लगाने तथा उसे वैध आय दर्शाने से संबंधित तथ्य चालान में दिए गए हैं।

11. सुनील कुमार अग्रवाल

इंद्रमणि समूह के सुनील कुमार अग्रवाल की भूमिका सूर्यकांत तिवारी की ओर से भेजी गई नकद रकम अपने यहां रखने, उससे आगे भुगतान करने तथा वाशरी खरीदी में निवेश कराने में पाई गई है। इंद्रमणि समूह से संबंधित लेन-देन, वाशरी एवं भूमि खरीदी और नकद रकम के उपयोग का विवरण चालान में शामिल है।

12. राहुल मिश्रा

राहुल मिश्रा, सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी निर्माण परियोजनाओं में कार्य करते थे। विवेचना में उनके पास बड़ी नकद रकम रखे जाने तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे निखिल चंद्राकर के माध्यम से सूर्यकांत तिवारी को वापस उपलब्ध कराए जाने के तथ्य मिले हैं। निर्माण कार्यों के भुगतान और नकद रकम सुरक्षित रखने में उनकी भूमिका का विवरण चालान में दिया गया है।

छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का पल, माता साहिब हासी देवी के नाम पर जारी होगा ₹200 का स्मारक सिक्का

छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का पल, माता साहिब हासी देवी के नाम पर जारी होगा ₹200 का स्मारक सिक्का

 रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 22 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है। शदाणी दरबार की पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर भारत सरकार 200 का स्मारक सिक्का जारी करेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रायपुर लोकभवन में सिक्के का विमोचन करेंगी। इस मौके पर माता साहिब के सम्मान में विशेष डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। 35 ग्राम वजन वाले इस सिक्के में 50 प्रतिशत चांदी सहित चार धातुओं का मिश्रण होगा। इस पहल को सिंधी समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है।

दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि किसी सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना समाज के लिए ऐतिहासिक मौका है। इससे देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सिंधी लोगों को गर्व महसूस होगा।

उन्होंने इस पहल को सफल बनाने में सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी के वर्षों के प्रयासों को अहम बताया। सिक्के का वजन 35 ग्राम होगा, कोलकाता टकसाल में बना है। स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे।

राष्ट्रपति के हाथों होगा सिक्के का विमोचन

22 अक्टूबर को रायपुर लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्मारक सिक्के का अनावरण करेंगी। आयोजन में 200 से अधिक विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। सिक्के के साथ विशेष डाक टिकट जारी किए जाने की भी जानकारी दी गई है। माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती से जुड़ा यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

35 ग्राम का सिक्का, 50 प्रतिशत चांदी का इस्तेमाल

प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री सुधीर लूणावत के मुताबिक, स्मारक सिक्के का निर्माण भारत सरकार की कोलकाता टकसाल में किया जा रहा है। सिक्के का कुल वजन 35 ग्राम होगा।

सिक्के में इस्तेमाल होने वाली धातुएं:

चांदी: 50 प्रतिशत

तांबा: 40 प्रतिशत

निकल: 5 प्रतिशत

जस्ता: 5 प्रतिशत

धातुओं के इस मिश्रण से तैयार होने वाला सिक्का माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती की स्मृति में जारी किया जाएगा।

कहां और कैसे होगी सिक्के की बुकिंग?

शदाणी दरबार के सचिव उदय सांई के अनुसार, सिक्के के विमोचन के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से इसकी बुकिंग कर सकेंगे। कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, बुकिंग की तारीख, कीमत, उपलब्ध सिक्कों की संख्या और आधिकारिक बिक्री संबंधी विस्तृत जानकारी की पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणा से की जानी चाहिए।

सिंधी समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

दरबार के सचिव उदय सांई ने कहा कि किसी सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना समाज के लिए गर्व का विषय है। इससे देश और विदेश में रहने वाले सिंधी समुदाय के लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने में सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी के वर्षों के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया।

शदाणी दरबार की परंपरा 18वीं सदी से जुड़ी हुई है। दरबार के संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे और बाद में हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां प्रज्वलित की गई पवित्र धूनी साहिब आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है।

बुकिंग की भी मिलेगी सुविधा
संत डॉ. युधिष्ठिर लाल के बेटे और दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की कई इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे।

इसके अलावा कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। उदय सांई ने कहा कि सिंधी समाज के लिए यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है।

स्मारक सिक्के के जरिए माता साहिब हासी देवी के योगदान और शदाणी दरबार की पहचान को भी व्यापक स्तर पर प्रतिष्ठा मिलने की उम्मीद है।

शदाणी दरबार पीठ 300 साल पुराना मठ
शदाणी दरबार का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा है। इसके संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे।

इसके बाद उन्होंने हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां पवित्र धूनी साहिब प्रज्वलित की गई, जो आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी।

वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल इसके नौवें पीठाधीश्वर हैं। दरबार में धार्मिक आयोजनों के साथ मानव सेवा और समाज कल्याण के कार्य भी किए जाते हैं।

विभाजन के बाद रायपुर बना शदाणी परंपरा का प्रमुख केंद्र

भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी थी। वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल दरबार के नौवें पीठाधीश्वर हैं। यहां धार्मिक आयोजनों के साथ मानव सेवा और समाज कल्याण से जुड़े कार्य भी किए जाते हैं।

सिक्के से राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी विरासत को पहचान

माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती पर जारी होने वाला स्मारक सिक्का सिंधी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करेगा। रायपुर में होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं, इतिहास में रुचि रखने वालों और सिक्का संग्राहकों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

CG MISSING GIRLS : हॉस्टल से 3 छात्राएं गायब, इस डर से भागी छात्राएं

CG MISSING GIRLS : हॉस्टल से 3 छात्राएं गायब, इस डर से भागी छात्राएं

 कोंडागांव। कोंडागांव से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है, यहां एकलव्य विद्यालय के छात्रावास से 3 छात्राएं अचानक गायब हो गई, छात्रों की गायब होने की खबर से छात्रावास में हड़कंप मच गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, गोलावंड छात्रावास के तीन छात्राएं बीती रात से लापता है, छात्रावास वार्डन की सूचना पर सरपंच, परिजन समेत सहायक आयुक्त छात्रावास पहुंचे। इसके साथ ही पुलिस थाने में भी सूचना दे दी गई है।

सहायक आयुक्त का दावा- भूत के भय से भागी छात्राएं

सहायक आयुक्त का ने दावा करते हुए कहा कि, तीनों छात्राएं भूत के डर से हॉस्टल से भाग निकले है, वहीं छात्राओं के परिजनों ने छात्रावास के अव्यवस्थाओं पर सवाल उठाया है, उनका कहना है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है।

बता दें कि रायपुर में पिछले शनिवार से रविवार के बीच 24 घंटे में गुमशुदगी की 159 FIR दर्ज की गई हैं। दर्ज मामलों में सबसे अधिक संख्या महिलाओं की है। कुल 78 महिलाएं लापता हैं, जिनमें गृहणियां, नवविवाहिता और कामकाजी महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा 54 वयस्क पुरुष, 17 बच्चे व नाबालिग और 10 बुजुर्ग लापता हैं।

ब्रेकिंग : आकाशवाणी रायपुर के RNU प्रमुख विकल्प रंजन शुक्ला का निधन

ब्रेकिंग : आकाशवाणी रायपुर के RNU प्रमुख विकल्प रंजन शुक्ला का निधन

 रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से इस वक्त की बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है, भारतीय सूचना सेवा के 1993 बैच के अधिकारी विकल्प शुक्ला का आज दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे वर्तमान में आकाशवाणी रायपुर में उपनिदेशक के पद पर कार्यरत थे। उनके निधन से मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ पड़ी है।

विकल्प रंजन शुक्ला आकाशवाणी रायपुर में क्षेत्रीय  समाचार एकांश के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। उनके दायित्वों में आकाशवाणी छत्तीसगढ़ से प्रसारित होने वाले प्रादेशिक समाचारों का संपादन, प्रसारण और समसामयिक कार्यक्रमों का संचालन शामिल था। इस भूमिका के तहत वे प्रदेश से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को रेडियो के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाने के कार्य से जुड़े थे।

भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी विकल्प रंजन शुक्ला ने अपने सेवाकाल में आकाशवाणी के अलावा प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) में भी जिम्मेदारियां निभाईं। सूचना एवं जनसंचार के क्षेत्र में उनका कार्य अनुभव रहा। उनके पेशेवर सफर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समाचारों के संपादन और  सरकारी सूचना तंत्र से जुड़ी जिम्मेदारियों के निर्वहन से संबंधित था।

मीडिया जगत में शोक का माहौल

उनके निधन की खबर से पत्रकारिता और सूचना प्रसारण से जुड़े लोगों में शोक व्याप्त है। आकाशवाणी रायपुर के क्षेत्रीय समाचार एकांश में उनकी भूमिका और भारतीय सूचना सेवा में उनकी सेवाएं उनके कार्यक्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलू रहे।

CG- भीषण सड़क हादसा: ट्रैक्टर से टकराई कार, आरक्षक समेत 2 की मौत, गाड़ी के उड़े परखच्चे….

CG- भीषण सड़क हादसा: ट्रैक्टर से टकराई कार, आरक्षक समेत 2 की मौत, गाड़ी के उड़े परखच्चे….

 रायपुर। राजधानी रायपुर से सड़क हादसे को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। कार और ट्रैक्टर के बीच भीषण भिड़ंत हो गई। हादसे में आरक्षक कमलेश वर्मा और रुपेश निषाद की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि गोपी साहू गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए।

जानकारी के मुताबिक, ग्राम तर्रा निवासी आरक्षक कमलेश वर्मा अपने गांव के ही रुपेश निषाद और गोपी साहू के साथ रायपुर घूमने गए थे। रात में तीनों कार से वापस खरोरा की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान बरौंडा के पास खरोरा की ओर से आ रहे भूसे से भारी ट्रैक्टर ने कार को जोरदार टक्कर मार दी।

हादसा इतना जबरदस्त था कि कार के बुरी परखच्चे उड़ गए। हादसे में कमलेश और रुपेश की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं गोपी गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इधर, हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। फिलहाल दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कार और ट्रैक्टर के बीच टक्कर किन परिस्थितियों में हुई।बता दें कि कुछ दिन पहले ही तिल्दा से सिलतरा हुआ था स्थानांतरण आरक्षक कमलेश वर्मा पहले तिल्दा थाने में पदस्थ थे। कुछ समय पहले ही स्थानांतरण हो कर सिलतरा थाने आये थे।

CRIME : डबल मर्डर से सनसनी, घर में घुसकर की मां-बेटे की हत्या, बेटी गंभीर रूप से घायल

CRIME : डबल मर्डर से सनसनी, घर में घुसकर की मां-बेटे की हत्या, बेटी गंभीर रूप से घायल

 डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में डबल मर्डर की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र के चौथना गांव में घर के अंदर मां और बेटे की हत्या कर दी गई, जबकि बेटी पर भी जानलेवा हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल युवती को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।

मिली जानकारी के अनुसार, चौथना गांव निवासी कमला सोनकर और उनके बेटे पर घर में घुसे आरोपी ने कथित तौर पर हमला कर दिया। हमले में दोनों की मौत हो गई। वहीं, परिवार की बेटी ममता सोनकर गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगढ़ में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।

बताया जा रहा है कि घटना के समय कमला सोनकर का पति घर से बाहर था। इसी दौरान घर में यह वारदात हुई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद गांव और आसपास के इलाके में सनसनी फैल गई।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना के पीछे पारिवारिक रंजिश की आशंका जताई जा रही है। वारदात में परिवार के ही एक रिश्तेदार की भूमिका होने का संदेह है। हालांकि, आरोपी की संलिप्तता और हत्या के वास्तविक कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

घटना की सूचना मिलने के बाद डोंगरगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस वारदात से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। मां-बेटे की हत्या के पीछे की वजह क्या है और हमले की परिस्थितियां कैसी थीं, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा।

CG- प्रेमी से मिलने होटल गई युवती फिर जिंदा नहीं लौटी, इस हाल में मिली लाश

CG- प्रेमी से मिलने होटल गई युवती फिर जिंदा नहीं लौटी, इस हाल में मिली लाश

 धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में होटल के कमरे में युवती द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में पुलिस ने उसके प्रेमी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर युवती से शादी करने से मुकरने, उसके साथ मारपीट करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पर युवती को आत्महत्या के लिए उकसाने का भी आरोप लगाया गया है। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

दोनों के बीच लंबे समय से चल रहा था प्रेम प्रसंग

यह पूरा मामला सिटी कोतवाली थाना इलाके का है। मृतका की पहचान पिंकी मानिकपुरी (22) के रूप में हुई है, जो कवर्धा जिले की रहने वाली थी। बताया जा रहा है कि पिंकी और धमतरी के गोकुलपुर वार्ड 36 में रहने वाले टिकेश्वर उर्फ टिंकू साहू के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। आरोप है कि टिकेश्वर ने उसे शादी का झांसा दिया था, लेकिन उसके अन्य लड़कियों के साथ भी संबंध थे।

पिंकी को जब इसकी भनक लगी तो वह 24 सितंबर को कवर्धा से धमतरी आई और होटल CG-05 के कमरा नंबर 106 में ठहरी। पुलिस के मुताबिक, 25 सितंबर की शाम टिकेश्वर उससे मिलने होटल पहुंचा। दोनों के बीच शादी को लेकर बातचीत हुई, लेकिन आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। सिर्फ इनकार ही नहीं बल्कि गाली गलौज और हाथापाई तक की नौबत आई।

जांच में ये बात भी सामने आई कि आरोपी पहले भी पिंकी को मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करता था। इसी के चलते पिंकी ने 25 सितंबर को होटल के कमरे में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। मौत के बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर तफ्तीश शुरू की। सबूतों की बुनियाद पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 खुदकुशी के लिए उकसाने के तहत केस दर्ज किया।

अदालती रिमांड पर भेजा गया जेल
वहीं पुलिस ने आरोपी टिकेश्वर उर्फ टिंकू साहू को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालती रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।पुलिस का कहना है कि मामले में अभी तफ्तीश जारी है।

साइबर अपराधों से सुरक्षा के लिए जनभागीदारी जरूरी, साइबर जागरूकता को जनआंदोलन बनाना होगा : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

साइबर अपराधों से सुरक्षा के लिए जनभागीदारी जरूरी, साइबर जागरूकता को जनआंदोलन बनाना होगा : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के अभिनंदन समारोह में हुए शामिल

सात सप्ताह के साइबर जागृति अभियान में 5 लाख से अधिक कार्यक्रम, 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा जागरूकता का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा - साइबर जागृति अभियान का समापन नहीं, यह एक शुरुआत है; निरंतर जारी रहेगा अभियान

साइबर अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई से एफआईआर में कमी और ठगी की राशि की रिकवरी दर में वृद्धि : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

साइबर जागरूकता के लिए अभिनव पहल करने वाले जिलों और ट्रैफिक हैकाथॉन के विजेताओं का हुआ सम्मान

रायपुर / डिजिटल युग में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आए हैं और इनसे सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी माध्यम जागरूकता, सतर्कता और जनभागीदारी है। साइबर सुरक्षा केवल शासन और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। हमें साइबर जागरूकता को जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा, तभी हम साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों से सुरक्षित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार कर सकेंगे। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित ‘साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026’ के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

डिजिटल क्रांति ने जीवन आसान बनाया, अब साइबर सुरक्षा के प्रति सजगता जरूरी

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया ने देश में अभूतपूर्व परिवर्तन किया है। वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल इंडिया की परिकल्पना प्रस्तुत की थी, उस समय इतने विशाल देश और बड़ी ग्रामीण आबादी के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था की सफलता को लेकर अनेक आशंकाएं व्यक्त की जाती थीं। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। गांव का सामान्य नागरिक भी मोबाइल फोन के माध्यम से डिजिटल भुगतान कर रहा है और तकनीक के जरिए देश-दुनिया से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं के विस्तार ने जहां नागरिकों के जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। अपराधी नई-नई तकनीकों और तरीकों का उपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। कई बार तकनीकी रूप से जानकार व्यक्ति भी इनके जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को साइबर अपराध के तौर-तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

सात सप्ताह के अभियान से 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश

मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाए गए सात सप्ताह के विशेष साइबर जागृति अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस अभियान ने साइबर सुरक्षा के संदेश को शहरों से लेकर गांवों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग विषयों को केंद्र में रखकर अभिनव गतिविधियां आयोजित की गईं। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर नागरिकों को जागरूक किया गया। अभियान के दौरान 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, 5 लाख से अधिक सेल्फी के माध्यम से नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की गई और लगभग 1 करोड़ 70 लाख लोगों तक साइबर अपराधों से बचाव का संदेश पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार और नागरिक से जुड़ा विषय बन चुका है।

अभियान का समापन नहीं, यह एक नई शुरुआत है : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि साइबर जागृति अभियान को किसी निश्चित अवधि तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सात सप्ताह का यह अभियान समाप्त जरूर हुआ है, लेकिन साइबर जागरूकता की यह यात्रा आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन के साथ सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, युवाओं और आम नागरिकों को भी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। विशेष रूप से युवाओं को साइबर जागरूकता के संवाहक के रूप में आगे आकर अपने परिवार और समाज को सुरक्षित बनाने में योगदान देना चाहिए।

रायपुर की यातायात व्यवस्था सुधारने युवाओं के अभिनव सुझावों पर होगा गंभीरता से विचार

मुख्यमंत्री श्री साय ने ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 की सराहना करते हुए कहा कि राजधानी रायपुर का तेजी से विस्तार हो रहा है। बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के साथ यातायात प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी का बेहतर समन्वय आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रैफिक हैकाथॉन के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं ने राजधानी की यातायात समस्याओं का अध्ययन कर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं। सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी तथा जो समाधान उपयोगी और व्यवहारिक होंगे, उन्हें लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

दूरस्थ क्षेत्रों को परिवहन से जोड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। सार्वजनिक परिवहन के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण पहले ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा प्रारंभ की गई है। विशेष रूप से वर्षों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों में बस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे मार्गों पर 100 से अधिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जहां आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं होने के कारण पहले बस सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने लाभ-हानि से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता दी है और इन मार्गों पर बस संचालन से होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के साथ बस में यात्रा के दौरान उन्होंने स्वयं देखा है कि यह सेवा किस तरह लोगों के जीवन में सुविधा और खुशियां लेकर आई है।

डिजिटल लेनदेन में भारत की अग्रणी भूमिका, सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण : उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि आज दुनिया में होने वाले डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत भारत में हो रहा है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि है। डिजिटल लेनदेन ने लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों से सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर जागृति अभियान के माध्यम से अभिनव पहल की है। अभियान के दौरान पुलिस ने धार्मिक आयोजनों, चौक-चौराहों, ग्राम सभाओं, ग्राम पंचायतों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यालयों तक पहुंचकर लोगों को ऑनलाइन ठगी तथा साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताए।

श्री शर्मा ने कहा कि पुलिस केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई भी कर रही है। साइबर ठगी में उपयोग होने वाले म्यूल खाते खोलने में संलिप्त बैंककर्मियों से लेकर फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों तक कार्रवाई की गई है। इन प्रयासों से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी गई राशि की रिकवरी की दर में भी वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल पुलिस और प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समस्याओं का स्थायी समाधान जनभागीदारी और नवाचार से ही संभव है। इसी सोच के साथ ट्रैफिक हैकाथॉन आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं ने अनेक उपयोगी और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं।

सात विषयों के माध्यम से गांव-शहर तक पहुंची साइबर जागरूकता

छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक संचालित साइबर जागृति अभियान में प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों के समन्वय से सात विषय आधारित सप्ताहों में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।

अभियान में डिजिटल सुरक्षा, वित्तीय धोखाधड़ी एवं यूपीआई सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, रोजगार संबंधी ठगी, डेटा गोपनीयता और सामूहिक संकल्प जैसे विषयों पर विशेष रूप से नागरिकों को जागरूक किया गया।

विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों को ओटीपी और पासवर्ड किसी से साझा नहीं करने, संदिग्ध लिंक से बचने, फर्जी निवेश योजनाओं से सावधान रहने तथा डिजिटल अरेस्ट जैसे नए साइबर अपराधों को पहचानने के तरीके बताए गए।

अभियान में युवाओं को ‘साइबर प्रहरी’ के रूप में जोड़कर उनके माध्यम से परिवार और समाज तक जागरूकता पहुंचाने की पहल की गई। नागरिकों को साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए भी प्रेरित किया गया।

सोशल मीडिया पर 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज

साइबर जागृति अभियान में सोशल मीडिया का भी व्यापक उपयोग किया गया। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और व्हाट्सऐप के माध्यम से साइबर सुरक्षा से संबंधित संदेश और जागरूकता सामग्री प्रसारित की गई।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के सहयोग से अभियान के दौरान 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज प्राप्त हुए। आई4सी ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभियान से जुड़ी कई पोस्ट साझा कर इसकी पहुंच को और व्यापक बनाया।

जिलों के नवाचारों ने साइबर जागरूकता को जनभागीदारी से जोड़ा

अभियान के दौरान विभिन्न जिलों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अनेक अभिनव प्रयोग किए। मुंगेली जिले में विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से लगभग 15 हजार ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। गरियाबंद जिले में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को साइबर सुरक्षा की जानकारी देकर उनके माध्यम से परिवारों तक जागरूकता पहुंचाई गई।

दुर्ग जिले में ‘सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग’ अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया। रायपुर जिले में आयोजित साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इन फिल्मों के माध्यम से लगभग दो लाख लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचने का अनुमान है।

जांजगीर-चांपा जिले में ‘एक राखी साइबर जागृति के नाम’ अभियान के माध्यम से लगभग 1 लाख 61 हजार नागरिकों तक जागरूकता पहुंचाई गई। वहीं बिलासपुर जिले में आकाशवाणी के माध्यम से संचालित विशेष फोन-इन कार्यक्रम से लगभग आठ लाख श्रोताओं तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा। समारोह में इन अभिनव प्रयासों के लिए संबंधित जिलों को सम्मानित किया गया।

ट्रैफिक हैकाथॉन में युवाओं ने दिए भविष्य की यातायात व्यवस्था के समाधान

ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के ओवरऑल विजेता श्री कार्तिकेय पंत ने रायपुर के शंकर नगर टर्निंग पॉइंट की यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए ‘टैक्टिकल अर्बनिज्म’ की अवधारणा पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किया।

उन्होंने उपलब्ध सड़क क्षेत्र के बेहतर उपयोग, स्पष्ट लेन मार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान, स्ट्रीट वेंडरों और ऑटोरिक्शा चालकों के लिए व्यवस्थित स्थान निर्धारण तथा यातायात प्रवाह को बेहतर बनाने से जुड़े सुझाव प्रस्तुत किए।

हैकाथॉन के प्रतिभागियों ने टाटीबंध चौक, तेलीबांधा मरीन ड्राइव, आमापारा चौक, लोधीपारा चौक और शंकर नगर सहित राजधानी के प्रमुख यातायात दबाव वाले क्षेत्रों का अध्ययन कर पार्किंग प्रबंधन, सुरक्षित पैदल मार्ग, सार्वजनिक परिवहन के एकीकरण, लेन मार्किंग तथा यातायात जाम कम करने से संबंधित समाधान प्रस्तुत किए।

एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स से स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के सुझाव

युवाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी अभिनव सुझाव प्रस्तुत किए। ‘रायपुर नेत्र’ और ‘दृष्टि’ जैसी प्रस्तावित परियोजनाओं में सीसीटीवी कैमरों और एआई तकनीक के माध्यम से यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान, ट्रैफिक जाम की पूर्व सूचना तथा एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने जैसी परिकल्पनाएं शामिल रहीं।

ट्रैफिक हैकाथॉन के सफल आयोजन में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के छत्तीसगढ़ स्टेट सेंटर ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रस्तावों का दो चरणों में परीक्षण कर उनकी तकनीकी व्यवहार्यता, उपयोगिता और क्रियान्वयन की संभावनाओं का मूल्यांकन किया। आयोजन में शिवाशा फाउंडेशन का भी सहयोग रहा।

विधायक श्री राजेश मूणत ने कहा कि राजधानी रायपुर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करना होगा। यातायात से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना के साथ व्यावहारिक कदम उठाना आवश्यक है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रजककार बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रह्लाद रजक, विधायक श्री राजेश मूणत, रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अमित कुमार सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री सेवा संकल्प कॉन्क्लेव में हुए शामिल, विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं और विशिष्टजनों को किया सम्मानित

रायपुर, 9 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज रायपुर में समाचार चैनल एशियन न्यूज द्वारा आयोजित ‘सेवा संकल्प कॉन्क्लेव–जनसेवा का संकल्प, छत्तीसगढ़ का भविष्य’ कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के 25 वर्षों की जनसेवा, देश में आए व्यापक बदलाव तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और संकल्पों पर विस्तार से अपने विचार रखे।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का सपना तेजी से साकार हो रहा है। दुनिया में भारत की पहचान एक मजबूत और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित हुई है। आर्थिक क्षेत्र में भी भारत ने अभूतपूर्व प्रगति की है और आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रधानमंत्री  मोदी ने देशवासियों में आत्मविश्वास जगाया है और भारत को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा करते हुए 25 वर्ष पूरे किए हैं। वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने भूकंप की भीषण त्रासदी से जूझ रहे गुजरात को न केवल पुनर्निर्माण की राह पर आगे बढ़ाया, बल्कि विकास का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया जिसकी चर्चा पूरे देश में हुई। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इसी सेवाभाव, संकल्प और दूरदृष्टि के साथ देश को आगे बढ़ाया।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री  मोदी के साथ अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का छत्तीसगढ़ से पुराना और आत्मीय जुड़ाव रहा है। उन्होंने प्रदेश के दूरस्थ अंचलों और बस्तर के क्षेत्रों में भी लंबा समय बिताया है और यहां की परिस्थितियों तथा जनजीवन को निकट से समझा है। वर्ष 2014 में उन्हें प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में राज्य मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री देश के 140 करोड़ नागरिकों को अपना परिवार मानकर कार्य करते हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का उनका मूलमंत्र देश की विकास यात्रा का आधार बना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी अपनी दृढ़ता का परिचय दिया है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को नए भारत के सामर्थ्य और संकल्प से परिचित कराया है। यह नया भारत किसी को छेड़ता नहीं है, लेकिन देश की सुरक्षा और स्वाभिमान से खिलवाड़ करने वालों को जवाब देना भी जानता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से हमें सेवा की निरंतर प्रेरणा मिलती है। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के कठिन दौर में भारत ने अपनी वैज्ञानिक क्षमता और सेवा भावना का परिचय दिया। देश में विकसित वैक्सीन ने करोड़ों भारतीयों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ दुनिया के अनेक देशों तक मानवता और सहयोग का संदेश पहुंचाया। प्रधानमंत्री के इसी सेवाभाव से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के सुख, समृद्धि और बेहतर भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

बस्तर में पहुंच रही विकास की रोशनी

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में नक्सलवाद सबसे बड़ी बाधा रहा। मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने नक्सल प्रभावित राज्यों की बैठक ली। उस समय देश में शेष नक्सल समस्या का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ में केंद्रित था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय तथा हमारे सुरक्षाबलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी विकास कार्य पहुंचाना कठिन था, वहां अब सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। बस्तर के लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है और विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। सरकार का संकल्प है कि बस्तर शांति, विश्वास और विकास के नए युग का नेतृत्व करे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश के हृदय स्थल में स्थित छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और खनिज संसाधनों से समृद्ध है। राज्य में कोयला, लौह अयस्क, टिन सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिजों के विशाल भंडार हैं। प्रदेश में हीरा और सोना जैसे बहुमूल्य खनिजों की संभावनाएं भी मौजूद हैं। इन संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए राज्य में उद्योग, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते ढाई वर्षों में राज्य के खनिज राजस्व में वृद्धि हुई है। शासन की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने और राजस्व बढ़ाने के लिए डिजिटलीकरण को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। भ्रष्टाचार की संभावनाओं को समाप्त करते हुए प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती उर्वरा है और यहां के लोग परिश्रमी हैं। ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ केवल एक कहावत नहीं, बल्कि प्रदेशवासियों के सरल स्वभाव, परिश्रम और सामर्थ्य की पहचान है। इन्हीं विशेषताओं और उपलब्ध संसाधनों के बल पर छत्तीसगढ़ वर्ष 2047 तक अपने आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करेगा और विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी योगदान देगा।

महतारी वंदन योजना ने माताओं-बहनों को दिया आर्थिक संबल

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिला सशक्तीकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की माताओं-बहनों के खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि सीधे अंतरित की जा रही है। एक दिन पहले दुर्ग से योजना की 32वीं किस्त जारी की गई है।

मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रवास के दौरान उन्हें माताओं-बहनों से संवाद का अवसर मिलता है। महिलाएं महतारी वंदन योजना की राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा, परिवार की आवश्यकताओं, बचत और स्वरोजगार के लिए कर रही हैं। अनेक महिलाओं ने इस राशि को जोड़कर सिलाई मशीन सहित आजीविका के साधन खरीदे हैं और अब वे हर महीने अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। कुछ माताओं ने अपनी बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में खाते खुलवाए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह माताओं-बहनों के आत्मविश्वास, स्वाभिमान और आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का माध्यम बनी है। माताओं-बहनों के चेहरे पर दिखाई देने वाली खुशी सरकार के लिए सबसे बड़ा संतोष है।

किसानों की समृद्धि सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और किसान हमारे अन्नदाता हैं। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने और उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद किसानों को दो वर्षों का लंबित बोनस दिया गया। प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक की नई सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को सहकारी बैंकों के माध्यम से शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। खेती के लिए उन्नत बीज, खाद और अन्य आवश्यक कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश का किसान समृद्ध हो और कृषि छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति का और मजबूत आधार बने।

गरीब के पक्के आवास का सपना हो रहा पूरा

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्र में सरकार की जिम्मेदारी संभालते ही स्पष्ट किया था कि उनकी सरकार गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित है। गरीब परिवारों के पक्के आवास, शौचालय, रसोई गैस सहित बुनियादी सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इन योजनाओं ने विशेष रूप से महिलाओं के जीवन में सम्मान, सुविधा और सुरक्षा बढ़ाई है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने गठन के बाद अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति देने का निर्णय लिया। आज प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में कोई भी पात्र गरीब परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों के केंद्र में गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सुशासन, पारदर्शिता, जनकल्याण और विकास को साथ लेकर छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को विकास के अवसरों से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जाए।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं और विशिष्टजनों को सम्मानित किया तथा उनकी उपलब्धियों की सराहना की।

इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन जी महाराज सहित जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक, विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्टजन तथा एशियन न्यूज के पदाधिकारी उपस्थित थे।

करमा तिहार हमारी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

करमा तिहार हमारी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

 कंवर समाज ने सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया अनुकरणीय उदाहरण

जनजातीय समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री  साय

करमा परब महोत्सव में मुख्यमंत्री ने समाजजनों को दी शुभकामनाएं : युवाओं से शिक्षा, नशामुक्ति और सामाजिक एकजुटता का किया आह्वान

कंवर समाज के सामाजिक भवनों एवं सांस्कृतिक मंच के लिए 90 लाख रुपए तथा राजधानी में प्रतिवर्ष करमा महोत्सव के आयोजन के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा

रायपुर / करमा तिहार हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपरा, आस्था और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का अनुपम प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने के साथ प्रकृति के संरक्षण, सामाजिक एकता और सामूहिकता का संदेश देता है। बदलते समय के बीच कंवर समाज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और रीति-रिवाजों को सहेजकर नई पीढ़ी के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना ही किसी समाज की वास्तविक शक्ति है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज युवा प्रभाग महानगर इकाई द्वारा आयोजित भव्य करमा परब महोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री साय ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और करमा तिहार की खुशियां समाजजनों के साथ साझा कीं। उन्होंने भादो एकादशी व्रत एवं करमा तिहार की सभी समाजजनों और प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कंवर समाज के लिए कोरबा जिले के मड़वारानी में सामाजिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपए, राजधानी रायपुर के टाटीबंध में सामाजिक भवन के लिए 25 लाख रुपए तथा कांकेर के ग्राम जेफरा में सांस्कृतिक मंच के लिए 15 लाख रुपए देने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने राजधानी रायपुर में प्रतिवर्ष करमा महोत्सव के आयोजन के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इस भव्य आयोजन के लिए कंवर समाज युवा प्रभाग और सभी सामाजिक पदाधिकारियों की सराहना की।

प्रकृति और मानव जीवन के अटूट संबंध का उत्सव है करमा तिहार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि करमा तिहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच अटूट संबंध का उत्सव है। इस पर्व में करम डार की पूजा की जाती है। समाज के बेटे-बेटियां श्रद्धा और आस्था के साथ उपवास रखकर विधि-विधान से करम डार की पूजा-अर्चना करते हैं। रात्रि जागरण में पारंपरिक करमा गीत और नृत्य उत्सव में उल्लास भरते हैं। अगले दिन करम डार के विसर्जन के पश्चात व्रत का पारण किया जाता है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा प्रकृति के प्रति हमारी श्रद्धा, विश्वास और संरक्षण की भावना को अभिव्यक्त करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति को कभी केवल संसाधन नहीं माना, बल्कि उसे जीवन का आधार और हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग माना है। जल, जंगल और जमीन के साथ हमारा रिश्ता केवल आवश्यकता का नहीं, बल्कि आस्था और आत्मीयता का भी है। करमा तिहार जैसी परंपराएं इसी संबंध को पीढ़ी-दर-पीढ़ी मजबूत करती आई हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने प्रकृति संरक्षण की इसी भावना को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के माध्यम से व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया है। देशभर में बड़ी संख्या में नागरिक इससे जुड़कर पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पौधरोपण को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

संस्कृति के संरक्षण के साथ शिक्षा और सामाजिक सुधार भी जरूरी

मुख्यमंत्री साय ने कंवर समाज में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ शिक्षा और सामाजिक सुधार की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेष रूप से नशामुक्ति को लेकर समाज के भीतर हो रही सार्थक पहल सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।

उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति के लिए शिक्षा, संस्कार, संगठन और जागरूकता आवश्यक हैं। हमारी युवा पीढ़ी आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़े, नए अवसरों का लाभ उठाए, लेकिन अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों को भी हमेशा साथ लेकर चले। मुख्यमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने, दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा सामाजिक एकजुटता को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि करमा परब महोत्सव का आयोजन युवा प्रभाग द्वारा किया जाना विशेष प्रसन्नता की बात है। यह इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर सजग है और उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभा रही है।

जनजातीय समाज का उत्थान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए जा रहे हैं। आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विराजमान हैं। यह पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।

मुख्यमंत्री साय ने आत्मीयता के साथ कहा कि आज छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी आपके बीच का आपका अपना ‘विष्णु भैया’ है। हमारी सरकार जनजातीय समाज के प्रत्येक परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और नई पीढ़ी को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को पक्के आवास, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। इसी प्रकार धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से जनजातीय बहुल गांवों के समग्र विकास को गति दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी प्राथमिकता केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ जनजातीय समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उसके जीवन में वास्तविक बदलाव आए।

युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा, रोजगार और खेल पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय युवाओं सहित प्रदेश के सभी युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और खेल सुविधाओं का निरंतर विस्तार कर रही है। बस्तर अंचल में लंबे समय से बंद पड़े स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जनजातीय युवाओं की सुविधा के लिए दिल्ली में संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल की सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 की गई है। इससे प्रदेश के अधिक युवाओं को देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण और सुविधाएं मिलेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय रोजगार मेले के माध्यम से हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। राज्य की नई औद्योगिक नीति में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि हमारे युवा केवल रोजगार प्राप्त करने वाले ही नहीं, बल्कि उद्यमी बनकर दूसरों को भी रोजगार देने वाले बनें।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए खेल अधोसंरचना और प्रशिक्षण सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। जनजातीय अंचलों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सरकार का प्रयास है कि उन्हें उचित अवसर, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध हों।

किसानों के हित में सरकार ने पूरे किए महत्वपूर्ण वादे

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गारंटियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार बनने के बाद किसानों से किया गया दो वर्षों के लंबित धान बोनस का वादा पूरा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती, सुशासन दिवस पर प्रदेश के किसानों के खातों में 3,716 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीद रही है। किसानों की आर्थिक समृद्धि और कृषि क्षेत्र को मजबूत करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। सरकार का प्रयास है कि खेती लाभकारी बने और अन्नदाता किसान के जीवन में खुशहाली आए।

वनांचल के परिवारों की आजीविका और सम्मान की चिंता

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वनांचल में रहने वाले परिवारों की आजीविका को मजबूत करने के लिए तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक को 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है। इससे प्रदेश के लाखों तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहक भाई-बहनों के सम्मान और सुविधा को ध्यान में रखते हुए चरण पादुका योजना को भी पुनः प्रारंभ किया गया है। वनांचल के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना और उन्हें विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है।

महतारी वंदन से बढ़ा माताओं-बहनों का आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महतारी वंदन योजना संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत लाखों महिलाओं के खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि सीधे अंतरित की जा रही है। यह राशि महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति, बचत और छोटे स्तर पर आर्थिक गतिविधियां प्रारंभ करने में सहायक बन रही है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण पूरे परिवार और समाज को मजबूत करता है। महतारी वंदन योजना ने माताओं-बहनों के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी नई मजबूती दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब परिवारों के पक्के घर के सपने को पूरा करना भी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। सरकार गठन के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया। आज प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 1,600 आवासों का निर्माण किया जा रहा है। इसी प्रकार दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के माध्यम से पात्र भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

अपनी जड़ों से जुड़कर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि करमा तिहार जैसे पर्व हमारी सामाजिक एकता, सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना से परिचित होने का अवसर मिलता है।

उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए शिक्षा, सामाजिक सुधार, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ें। अपनी जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक अवसरों का लाभ उठाएं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें।

अखिल भारतीय कंवर समाज की राष्ट्रीय अध्यक्ष कौशल्या साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपनी संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का सदैव पालन करना चाहिए। पर्यावरण के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ प्राकृतिक असंतुलन का कारण बनती है, इसलिए प्रकृति का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष डॉ. नंद कुमार साय, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रूप सिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, विधायक  अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्षअनुराग सिंह देव, पूर्व कैबिनेट मंत्री  ननकी राम कंवर, प्रदेश कंवर समाज के अध्यक्ष हरवंश सिंह मिरी, कंवर समाज रायपुर महानगर के अध्यक्ष  मनोहर सिंह पैकरा सहित जनप्रतिनिधिगण, समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

गन्ना किसानों के हित में बड़ा निर्णय: अब 425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से होगी गन्ने की खरीदी

गन्ना किसानों के हित में बड़ा निर्णय: अब 425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से होगी गन्ने की खरीदी

 भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय

अन्नदाता की खुशहाली और खेती को लाभकारी बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

किसानों से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुई सार्थक चर्चा, मुख्यमंत्री ने त्वरित पहल कर लिया किसान हितैषी निर्णय

रायपुर, 10 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रदेश के गन्ना किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए शक्कर कारखानों में गन्ने की खरीदी अब 425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किए जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्नदाता की खुशहाली ही समृद्ध छत्तीसगढ़ का आधार है। किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी बने और किसान परिवार आर्थिक रूप से निरंतर सशक्त हों, इसके लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री  साय से आज भारतीय किसान संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में संगठन मंत्री मनीष शर्मा, महामंत्री  नवीन शेष सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल थे। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  अरुण साव और  विजय शर्मा भी उपस्थित थे।

भेंट के दौरान मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रदेश के किसानों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। चर्चा के दौरान गन्ना उत्पादक किसानों के हितों से संबंधित विषय भी प्रमुखता से सामने आया। मुख्यमंत्री ने किसानों की भावनाओं और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर त्वरित पहल की और शक्कर कारखानों के लिए गन्ने की खरीदी 425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने का निर्णय लिया।पेराई सत्र 2025- 26 में की गई खरीदी का भुगतान भी बढ़े हुए दर पर किया जाएगा।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत को कम करने तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी किसानों के हितों को अपनी नीतियों और निर्णयों के केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है। किसानों की आवश्यकताओं और समस्याओं के प्रति सरकार संवेदनशील है तथा किसान हित से जुड़े विषयों पर प्राथमिकता से निर्णय लिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समृद्धि में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेती-किसानी मजबूत होगी तो गांव मजबूत होंगे और गांवों की समृद्धि से ही छत्तीसगढ़ की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। राज्य सरकार का प्रयास है कि किसानों को उनकी उपज का उचित और बेहतर मूल्य मिले तथा कृषि उनके लिए सम्मानजनक और लाभकारी आजीविका का सशक्त माध्यम बने।

भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने गन्ना किसानों के हित में लिए गए इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा और उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर प्रतिफल प्राप्त होगा।

29 एकड़ में मखाना तैयार, समूह की महिलाएं जल्द करेंगी हार्वेस्टिंग

29 एकड़ में मखाना तैयार, समूह की महिलाएं जल्द करेंगी हार्वेस्टिंग

 धमतरी। किसानों की आय में वृद्धि और महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने खेती में नवाचार को बढ़ावा देने जिले में मखाना खेती की एक नई संभावना के रूप में उभर रही है। धान सहित पारंपरिक फसलों के साथ मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित किया गया है। इस कड़ी में समूह की महिलाओं द्वारा 29 एकड़ में मखाना की खेती तैयाार है। 13 अक्टूबर को इसकी हार्वेस्टिंग का शुभारंभ किया जाएगा। उत्पादित मखाना को बेचने के बाद समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

केंद्र  सरकार की सेंट्रल सेक्टर स्कीम फार डेवलपमेंट आफ मखाना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में धमतरी जिले को तालाबों में मखाना की खेती (पान्ड कल्टीवेशन) के लिए 66 हेक्टेयर का भौतिक लक्ष्य मिला था। इसके विरुद्ध जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में 42 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती प्रारंभ की गई है। यह पहल जिले में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों को परंपरागत खेती के अतिरिक्त लाभकारी विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जिले के ग्राम छाती और डांडेसरा में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा मखाना उत्पादन की पहल की गई है। शैलपुत्री स्व-सहायता समूह और नई किरण स्व-सहायता समूह के माध्यम से कुल 29 एकड़ क्षेत्र में उत्पादित मखाना की हार्वेस्टिंग की जा रही है। इससे महिला समूहों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित होने के साथ सामूहिक उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। मखाना उत्पादन का हार्वेस्टिंग शुभारंभ कार्यक्रम 13 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा।

जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा, कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में होने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य मखाना की खेती के अनुभवों को अन्य किसानों तक पहुंचाना और जिले में इसका विस्तार करना है।मखाना उत्पादन को जिले में व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए ग्राम सेनचुवा व विकासखंड धमतरी के किसानों को भी कार्यक्रम में शामिल होने कहा गया है। ये किसान आगामी वर्ष लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में मखाना की खेती करने की दिशा में पहल करेंगे। इससे जिले में कृषि विविधीकरण को नई गति मिलने तथा किसानों के लिए वैकल्पिक आय के अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

उप संचालक उद्यानिकी पूजा कश्यप साहू ने जिले के सभी विकासखंडों के किसानों से मखाना उत्पादन की संभावनाओं को समझने और 13 अक्टूबर को आयोजित हार्वेस्टिंग शुभारंभ कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। कार्यक्रम के माध्यम से किसान मखाना उत्पादन की प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं और इसकी संभावनाओं से परिचित हो सकेंगे।