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CG- इस तारीख से शुरू होगी छत्तीसगढ़ में धान खरीदी, 273 चेक पोस्ट पर बढ़ेगा पहरा, तस्करों पर होगी सख्त कार्रवाई…

CG- इस तारीख से शुरू होगी छत्तीसगढ़ में धान खरीदी, 273 चेक पोस्ट पर बढ़ेगा पहरा, तस्करों पर होगी सख्त कार्रवाई…

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की शुरुआत 15 नवंबर 2026 से होने जा रही है। खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और दूसरे राज्यों से अवैध रूप से धान लाकर प्रदेश में बेचने की कोशिशों पर रोक लगाने के लिए खाद्य विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। खाद्य सचिव रीना कंगाले ने सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों और मार्कफेड के प्रबंध संचालक को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

निर्देशों के अनुसार, इस बार धान खरीदी के दौरान बाहरी राज्यों से आने वाले धान की निगरानी के साथ-साथ कोचियों, बिचौलियों और धान के अवैध कारोबार पर भी विशेष नजर रखी जाएगी।

आशंका जताई गई है कि दूसरे राज्यों से धान लाकर छत्तीसगढ़ के पंजीकृत किसानों के रकबे में बेचने का प्रयास किया जा सकता है। इससे  सरकारी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा गांवों और शहरी क्षेत्रों में सक्रिय कोचिये-बिचौलिये भी छोटे स्तर पर धान खरीदकर किसानों के पंजीयन के माध्यम से उसे खपाने की कोशिश कर सकते हैं।

कुछ मिलरों और धान परिवहनकर्ताओं द्वारा धान के पुनर्चक्रण यानी एक ही धान को अलग-अलग माध्यमों से दोबारा खरीदी व्यवस्था में खपाने की आशंका को देखते हुए भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

हर जिले में बनेगा विशेष चेकिंग दल

धान खरीदी में अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रत्येक जिले में कलेक्टर की ओर से विशेष चेकिंग दल का गठन किया जाएगा। इस दल में राजस्व, खाद्य, मंडी, सहकारिता, वन, परिवहन सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।

विशेष चेकिंग दल नियमित निरीक्षण करेगा और दूसरे राज्यों से आने वाले धान की आवक पर नजर रखेगा। जांच के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

273 चेक पोस्ट पर कड़ी निगरानी

प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर स्थापित 273 चेक पोस्ट पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर चेक पोस्ट की संख्या बढ़ाई जा सकती है। विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों में अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दूसरे राज्यों से अवैध रूप से धान लाकर बेचने की कोशिशों को रोका जा सके।

बिना अनुमति नहीं ला सकेंगे दूसरे राज्यों से धान

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर 2026 से 30 अप्रैल 2027 तक दूसरे राज्यों से धान का आयात करने के लिए संचालक, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

हालांकि, 3300 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक लागत वाले सुपर फाइन धान के आयात के मामले में संचालक की अनुमति से छूट दी गई है। लेकिन ऐसे धान के आयात की सूचना संबंधित जिला खाद्य अधिकारी या खाद्य नियंत्रक को देना अनिवार्य होगा।

कोचियों और बिचौलियों की पहले ही होगी पहचान

मंडी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि धान खरीदी शुरू होने से पहले ही गांवों और शहरी क्षेत्रों में छोटे स्तर पर धान खरीदने वाले कोचियों और बिचौलियों की पहचान कर ली जाए। इनकी जानकारी नजदीकी धान खरीदी समिति और खाद्य विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।

यदि कोई कोचिया या बिचौलिया समिति में धान लाकर दूसरे किसानों के पंजीयन में उसे बेचने या खपाने की कोशिश करता पाया जाता है, तो उसका वाहन और धान जब्त किया जा सकता है। साथ ही संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रपति ने पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में जारी किया 200 रूपए का स्मारक सिक्का, राज्यपाल व मुख्यमंत्री रहे उपस्थित….

राष्ट्रपति ने पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में जारी किया 200 रूपए का स्मारक सिक्का, राज्यपाल व मुख्यमंत्री रहे उपस्थित….

 रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम में पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उपस्थित थे।

पूज्य शदाणी दरबार रायपुर की 5 वीं पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की 200 वीं जयंती पर भारत सरकार वित्त मंत्रालय द्वारा 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी किया गया है। सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का जारी होना समाज के लिए ऐतिहासिक मौका था। यह देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सिंधी लोगों के लिए गर्व का विषय है। स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा जारी इस विशेष सिक्के पर पूज्य माता हासी देवी जी की छवि अंकित है। सिक्के के एक ओर अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष और 200 रुपये का मूल्यवर्ग दर्शाया गया है। इस स्मारक सिक्के के माध्यम से उनके जीवन, विचारों और आध्यात्मिक योगदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन पूज्य शदाणी दरबार रायपुर के पीठाधीश संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी ने दिया।

इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी, मोतीलाल साहू, मुख्य सचिव विकासशील, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना सहित वरिष्ठ अधिकारी, पूज्य शदाणी दरबार के सदस्य सहित देशभर से आए हुए जनप्रतिनिधि और सिंधी समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री साय से राजस्थान विस अध्यक्ष देवनानी ने की सौजन्य भेंट

मुख्यमंत्री साय से राजस्थान विस अध्यक्ष देवनानी ने की सौजन्य भेंट

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने देवनानी का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर इंदौर लोकसभा क्षेत्र के सांसद शंकर लालवानी और अमित चिमनानी उपस्थित थे।

सिरपुर हमारी समृद्ध सभ्यता, कला और ज्ञान परंपरा की अनमोल धरोहर : साय

सिरपुर हमारी समृद्ध सभ्यता, कला और ज्ञान परंपरा की अनमोल धरोहर : साय

 00 यूनेस्को की संभावित सूची में सिरपुर का शामिल होना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिरपुर को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। साय ने कहा कि सिरपुर हमारी समृद्ध सभ्यता, कला, आध्यात्मिकता और ज्ञान परंपरा की अनमोल धरोहर है। प्राचीन काल से ही सिरपुर शिक्षा, संस्कृति, धर्म और स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत पहचान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में विरासत भी, विकास भी के संकल्प के साथ देश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यटन की नई संभावनाओं से जोडऩे के लिए प्रतिबद्ध है। साय ने कहा कि यूनेस्को की संभावित सूची में सिरपुर का शामिल होना हमारी गौरवशाली विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सिरपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सिरपुर सहित छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि आने वाली पीढिय़ां अपनी गौरवशाली विरासत से परिचित हों और छत्तीसगढ़ की संस्कृति की कीर्ति विश्वभर में और अधिक विस्तारित हो।

बिना रेरा पंजीयन भूखंडों की बिक्री पर सीजी-रेरा की बड़ी कार्रवाई, सालासार विहार के प्रमोटर पर 25 लाख का जुर्माना

बिना रेरा पंजीयन भूखंडों की बिक्री पर सीजी-रेरा की बड़ी कार्रवाई, सालासार विहार के प्रमोटर पर 25 लाख का जुर्माना

 00 रायपुर जिले के आरंग स्थित सालासार विहार परियोजना में नियमों के उल्लंघन पर प्राधिकरण की सख्ती

00 संपत्ति खरीदने से पहले रेरा पंजीयन की जांच अवश्य करें नागरिक : सीजी-रेरा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भूखंड एवं आवास खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (सीजी-रेरा) द्वारा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रमोटरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में प्राधिकरण ने रायपुर जिले के आरंग स्थित सालासार विहार परियोजना में बिना रेरा पंजीयन के भूखंडों की बिक्री करने के मामले में प्रमोटर राजीव सोनी, पिता के.एल. सोनी, पर 25 लाख रुपये की शास्ति अधिरोपित की है।

प्राधिकरण द्वारा प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं उपलब्ध तथ्यों के परीक्षण में पाया गया कि सालासार विहार परियोजना के अंतर्गत भूमि का भूखंडों में विभाजन कर रेरा पंजीयन प्राप्त किए बिना भूखंडों का विक्रय किया गया। यह कृत्य भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 3 के प्रावधानों का उल्लंघन है। प्राधिकरण ने इस उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत परियोजना की अनुमानित लागत के आधार पर प्रमोटर पर 25 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया है।

रेरा पंजीयन के बिना भूखंडों की बिक्री अधिनियम का उल्लंघन
भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के अंतर्गत निर्धारित श्रेणी की रियल एस्टेट परियोजनाओं का रेरा में पंजीयन कराना अनिवार्य है। ऐसी परियोजनाओं में पंजीयन प्राप्त किए बिना भूखंडों अथवा अन्य संपत्तियों का विज्ञापन, विपणन या विक्रय करना अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध है। इन प्रावधानों का उद्देश्य संपत्ति खरीदारों को परियोजना की वैधानिक स्थिति, विकास संबंधी जानकारी और अन्य आवश्यक विवरण उपलब्ध कराना तथा उनके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्राधिकरण की यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि रियल एस्टेट परियोजनाओं के विकास और विक्रय में निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है। बिना पंजीयन परियोजनाओं का संचालन करने वाले प्रमोटरों के विरुद्ध अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

भूखंड खरीदने से पहले रेरा पंजीयन की जांच करने की अपील
छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने आम नागरिकों एवं संपत्ति खरीदारों से अपील की है कि किसी भी आवासीय अथवा भूखंड परियोजना में निवेश करने से पहले संबंधित परियोजना की रेरा पंजीयन स्थिति की जांच अवश्य करें। खरीदार परियोजना का पंजीयन क्रमांक, प्रमोटर का विवरण तथा अन्य आवश्यक जानकारियों का सत्यापन करें, ताकि भविष्य में संभावित विवादों एवं आर्थिक नुकसान से बचा जा सके। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। साथ ही भूखंड एवं आवास खरीदारों के अधिकारों की रक्षा तथा सुरक्षित एवं विश्वसनीय संपत्ति लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए प्राधिकरण प्रतिबद्ध है। आमजन छत्तीसगढ़ रेरा की आधिकारिक वेबसाइट
https://rera.cgstate.gov.in पर जाकर परियोजनाओं के पंजीयन संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अब अलग-अलग सेंटरों के चक्कर होंगे खत्म! एक छत के नीचे होगी प्रतियोगी परीक्षाएं, इतने करोड़ की लागत से राजधानी में बनेगा हाईटेक मेगा एग्जाम सेंटर…

अब अलग-अलग सेंटरों के चक्कर होंगे खत्म! एक छत के नीचे होगी प्रतियोगी परीक्षाएं, इतने करोड़ की लागत से राजधानी में बनेगा हाईटेक मेगा एग्जाम सेंटर…

 रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ऐसा हाईटेक मेगा एग्जाम सेंटर बनाने की  सरकार की याेजना है, जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा एंट्रेस एग्जाम लिए जाएंगे। मेगा एग्जाम सेंटर में स्टेट और सेंट्रल लेवल के एग्जाम लिए जाएंगे।

भवन की ड्राइंग डिजाइन कैसे रहेगी, हाईटेक सेंटर में नकल रोकने क्या व्यवस्था रहेगी, कैम्पस से लेकर एग्जाम हॉल तक सीसीटीवी कैमरे में निगरानी में रखने फूलप्रूफ डिजाइन तैयार करने विभाग ने आर्किटेक्ट की खोजबीन शुरू कर दी है। अपनी तरह की पहली और मेगा प्लान के लिए 25 करोड़ का बजट बनाया गया है।

अपनी तरह के इस पहली परियोजना का निर्माण लोक निर्माण विभाग PWD के जरिए कराया जाएगा। लिहाजा, पीडब्ल्यूडी ने मेगा परीक्षा केंद्र भवन के लिए आर्किटेक्ट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है।

हाईटेग मेगा एग्जाम सेंटर में एक साथ 5 हजार परीक्षार्थी बैठकर परीक्षा दिला सकेंगे। पूरे सेंटर को ऑफलाइन के अलावा ऑनलाइन कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) मोड की परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाएगा। परीक्षा केंद्र भवन निर्माण के लिए जमीन चिंहित की प्रक्रिया चल रही है। इसके चयन में अभ्यर्थियों की पहुंच को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई है, ताकि परीक्षा देने आने वाले छात्रों को केंद्र तक पहुंचने में परेशानी न हो।

2027 में कर्मचारी चयन मंडल से 22 परीक्षाएं होंगी

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2027 में कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से 22 परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा।कर्मचारी चयन मंडल के जरिए शासकीय विभागों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर, बीएड और डीएलएड जैसी प्रवेश परीक्षाएं भी चयन मंडल के दायरे में रहेगी।

NTA, UPSC एग्जाम भी मेगा सेंटर में

प्रस्तावित मेगा परीक्षा केंद्र में कर्मचारी चयन मंडल और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग CGPSC की परीक्षाओं के अलावा राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करने की भी सुविधा होगी। इसके लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी संस्थाओं की परीक्षाएं भी कराई जा सकेंगी।

छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए बड़ा फैसला, साल में 2 बार होगी विशेष TET परीक्षा, राज्य सरकार ने दी सहमति

छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए बड़ा फैसला, साल में 2 बार होगी विशेष TET परीक्षा, राज्य सरकार ने दी सहमति

 रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के सेवारत शासकीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के विशेष आयोजन के प्रस्ताव को सहमति प्रदान की है। यह परीक्षा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) के माध्यम से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) पद्धति से आयोजित की जाएगी। शासन ने वर्ष में न्यूनतम दो बार परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सेवारत शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें।

टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील क्रमांक 1385/2025 में 1 सितंबर 2025 तथा पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को पारित निर्णय के अनुपालन में यह निर्णय लिया गया है। न्यायालय के निर्देशानुसार कक्षा पहली से आठवीं तक के ऐसे समस्त सेवारत शिक्षक, जिनकी सेवा अवधि पांच वर्ष या उससे अधिक शेष है, उन्हें सेवा में बने रहने अथवा पदोन्नति के लिए निर्धारित स्तर की टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राज्यों को निर्देशित किया गया है कि गैर-टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों के लिए प्रतिवर्ष न्यूनतम दो बार शिक्षक पात्रता परीक्षा का विशेष आयोजन किया जाए। इसी परिप्रेक्ष्य में लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 24 सितंबर 2026 को शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, जिस पर राज्य सरकार ने सहमति प्रदान की है।

ब्रेकिंग : बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर सहित इन अधिकारियों के कार्यस्थल बदले, देखें आदेश…..

ब्रेकिंग : बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर सहित इन अधिकारियों के कार्यस्थल बदले, देखें आदेश…..

 गरियाबंद। जिले में प्रशासनिक कार्यों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रणबीर शर्मा ने राज्य प्रशासनिक सेवा के पांच अधिकारियों के कार्यस्थल में आंशिक संशोधन किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकारियों को जिले के विभिन्न अनुविभागों एवं कलेक्टर कार्यालय में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इनमें संयुक्त कलेक्टर टी.आर. महेश्वरी को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), देवभोग पदस्थ किया गया है। वहीं, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) विशाल महाराणा को संयुक्त कलेक्टर, कार्यालय कलेक्टर गरियाबंद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी प्रकार संयुक्त कलेक्टर अवंति गुप्ता को छुरा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नियुक्त किया गया है। डिप्टी कलेक्टर नेहा भेड़िया को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), राजिम तथा डिप्टी कलेक्टर लोकांश एल्मा को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मैनपुर के पद पर पदस्थ किया गया है।

देखें आदेश….

CG : विश्व धरोहर बनेगा छत्तीसगढ़ का सिरपुर! यूनेस्को की अस्थायी सूची में मिली जगह…..

CG : विश्व धरोहर बनेगा छत्तीसगढ़ का सिरपुर! यूनेस्को की अस्थायी सूची में मिली जगह…..

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। महासमुंद जिले में महानदी के किनारे बसे ऐतिहासिक शहर सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। इससे सिरपुर के इतिहास, कला और संस्कृति को दुनिया भर में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। साथ ही यहां पर्यटन बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य  सरकार प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को पहचान दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में भी इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पहले केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 1 जनवरी 2026 को सिरपुर का दौरा किया था। उन्होंने यहां के ऐतिहासिक स्थलों की तारीफ करते हुए सिरपुर को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयासों पर जोर दिया था।

कभी दक्षिण कोसल की राजधानी था सिरपुर

सिरपुर का इतिहास काफी पुराना है। प्राचीन समय में इसे श्रीपुर कहा जाता था। पाण्डुवंशी राजाओं के शासनकाल में यह दक्षिण कोसल की राजधानी हुआ करता था। उस समय सिरपुर व्यापार, शिक्षा, धर्म और संस्कृति का बड़ा केंद्र था। सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग भी इस क्षेत्र में आए थे। उनके यात्रा विवरण में यहां लगभग 100 बौद्ध मठ और 10 हजार बौद्ध भिक्षु होने का जिक्र मिलता है। सिरपुर की खासियत यह थी कि यहां शिव, विष्णु, बौद्ध और जैन धर्म को मानने वाले लोग साथ रहते थे।

लक्ष्मण मंदिर सहित कई ऐतिहासिक स्थल हैं मौजूद

सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर देश के प्रसिद्ध प्राचीन मंदिरों में शामिल है। ईंटों से बने इस मंदिर का निर्माण लगभग 650 ईस्वी में रानी वासटा ने अपने पति हर्षगुप्त की याद में कराया था। मंदिर की सुंदर नक्काशी और अनोखी बनावट आज भी लोगों को आकर्षित करती है। इसके अलावा महानदी किनारे स्थित गंधेश्वर महादेव मंदिर, सुरंग टीला, राम मंदिर, आनंदप्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार और तीवरदेव महाविहार भी सिरपुर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल हैं।

खुदाई में मिलीं दो हजार से ज्यादा पुरानी चीजें

सिरपुर में अलग-अलग समय पर हुई खुदाई में दो हजार से ज्यादा पुरानी वस्तुएं मिली हैं। इनमें मूर्तियां, सिक्के, गहने बनाने के औजार, बर्तन, ताले, खिलौने और मिट्टी की मुहरें शामिल हैं। यहां एक पुराना चीनी सिक्का भी मिला है, जो दूसरे देशों के साथ व्यापारिक संबंधों की ओर इशारा करता है। सिरपुर से मिली कई दुर्लभ मूर्तियां देश के अलग-अलग संग्रहालयों में सुरक्षित रखी गई हैं। यहां की कलाकृतियों को विदेशों में भी प्रदर्शित किया जा चुका है।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
यूनेस्को की अस्थायी सूची में जगह मिलने से सिरपुर में देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। इससे होटल, होमस्टे, परिवहन, स्थानीय दुकानों और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। हालांकि, सिरपुर को अभी विश्व धरोहर का दर्जा नहीं मिला है। अस्थायी सूची में शामिल होना इसकी शुरुआती प्रक्रिया है। इसके बाद जरूरी दस्तावेज, संरक्षण की योजना और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

नगर सैनिकों के लिए खुशखबरी : मानदेय बढ़कर 30,870 प्रतिमाह मिलेगा

नगर सैनिकों के लिए खुशखबरी : मानदेय बढ़कर 30,870 प्रतिमाह मिलेगा

 रायपुर-- छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था, अग्निशमन और आपदा प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं में अपनी सेवाएं दे रहे स्वयंसेवी नगर सैनिकों (Home Guards) के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर गृह मंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में राज्य शासन द्वारा नगर सैनिकों के मानदेय में एक बार फिर से भारी बढ़ोतरी की गई है। नए प्रस्ताव के अनुसार, अब सैनिकों का कुल मानदेय बढ़ाकर 30,870 रूपए प्रतिमाह (यानी 1,029 रूपए प्रतिदिन) किया जा रहा है। इस फैसले से प्रदेश के लगभग 7,900 नगर सैनिकों और उनके परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

नया मानदेय

      गृह विभाग द्वारा तैयार किए गए नए प्रस्ताव के मुताबिक मूल मानदेय 19,500 रूपए प्रतिमाह, महंगाई भत्ता (58 प्रतिशत) 11,310 रूपए, वर्दी धुलाई भत्ता 60 रूपए इस प्रकार कुल प्रस्तावित मानदेय 30,870 रूपए प्रतिमाह मिलगा। 

पहले कितनी थी बढ़ोतरी

      नगर सैनिकों के मानदेय में समय-समय पर संशोधन किया जाता रहा है। वर्ष 2017 गृह विभाग के आदेश से मानदेय में 3,200 रूपए की वृद्धि कर इसे 10,000 रूपए से बढ़ाकर 13,200 रूपए प्रतिमाह किया गया था। 30 मई 2023 इसके बाद 1 अप्रैल 2023 से मानदेय में 6,300 रूपए की और वृद्धि की गई, जिससे यह बढ़कर 19,500 रूपए प्रतिमाह हो गया था।

      वर्तमान में माननीय न्यायालय के निर्देशों, लगातार बढ़ती महंगाई तथा नगर सैनिकों द्वारा ड्यूटियों के दौरान कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और अन्य आवश्यक सेवाओं में दिए जा रहे उत्कृष्ट योगदान को ध्यान में रखते हुए गृह विभाग ने यह अनुशंसा की है। शासन के इस कदम से न केवल नगर सैनिकों को आर्थिक संबल (मजबूती) प्राप्त होगी, बल्कि उनका मनोबल और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता भी और अधिक मजबूत होगी। स्वयंसेवी नगर सैनिकों ने मानदेय में हुई इस बढ़ोत्तरी के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर गृह मंत्री श्री विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में मजबूत हो रही सड़क एवं पुल अधोसंरचना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में मजबूत हो रही सड़क एवं पुल अधोसंरचना

 मरगा नाला पर 4.52 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा उच्च स्तरीय पुल, निर्माण कार्य में तेजी

जशपुर से सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों तक आवागमन होगा सुगम, संकरी पुलिया की समस्या से मिलेगी राहत

जशपुर जिले में 22 उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण के लिए 109 करोड़ रुपये की स्वीकृति, दूरस्थ अंचलों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी

रायपुर-- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार जशपुर जिले में सड़क संपर्क को मजबूत बनाने और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधाओं का विस्तार करने के लिए पुल-पुलियों के निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर-सन्ना मार्ग पर मरगा नाला में 4 करोड़ 52 लाख रुपये की लागत से उच्च स्तरीय पुल का निर्माण कराया जा रहा है। इस पुल के निर्माण से जशपुर जिले का सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों की ओर सड़क संपर्क और अधिक सुगम होगा। साथ ही स्थानीय नागरिकों, किसानों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवागमन का लाभ मिलेगा।

मरगा नाला पर वर्तमान में स्थित संकरी पुलिया के कारण लंबे समय से लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। पुलिया की चौड़ाई कम होने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती थी और कई बार यातायात बाधित होने की स्थिति बन जाती थी। विशेष रूप से बड़े वाहनों के आवागमन के दौरान परेशानी होती थी। इन समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर उच्च स्तरीय पुल का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। इसके पूर्ण होने से वाहनों के आवागमन में सहूलियत होगी और सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

जशपुर से सरगुजा संभाग के अन्य जिलों तक बेहतर होगा सड़क संपर्क

जशपुर-सन्ना मार्ग क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क संपर्क व्यवस्था का हिस्सा है। यह मार्ग जशपुर जिला मुख्यालय को सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों की ओर जाने वाले मार्गों से जोड़ता है। मरगा नाला पर उच्च स्तरीय पुल बनने से इन जिलों के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक होगा और क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी।

पुल निर्माण से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन में सुविधा मिलेगी। किसानों को कृषि उपज बाजार तक पहुंचाने तथा व्यापारियों को माल परिवहन में भी सहूलियत होगी। इससे स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

जिले में 22 उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण के लिए 109 करोड़ रुपये स्वीकृत

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में सड़क एवं पुल अधोसंरचना के विकास को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आवागमन की सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 22 उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण के लिए लगभग 109 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन पुलों के निर्माण से ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध होगा तथा लोगों को आवागमन में होने वाली कठिनाइयों से राहत मिलेगी।

जशपुर जिले के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में नदी-नालों के कारण विशेष रूप से वर्षा ऋतु के दौरान आवागमन प्रभावित होता है। जलस्तर बढ़ने पर छोटी पुलिया और निचले मार्गों से गुजरना कठिन हो जाता है। ऐसे स्थानों पर उच्च स्तरीय पुलों का निर्माण होने से वर्षभर सुरक्षित और सुचारु आवागमन की व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे दूरस्थ गांवों की जिला मुख्यालय और अन्य प्रमुख स्थानों तक पहुंच अधिक सुविधाजनक होगी।

ग्रामीण विकास और आर्थिक गतिविधियों को मिलेगी गति

जिले में उच्च स्तरीय पुलों का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने, विद्यार्थियों को शैक्षणिक संस्थानों तक आने-जाने और मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में आसानी होगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार सड़क एवं पुल निर्माण कार्यों को गति देकर दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधाओं से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। मरगा नाला पर निर्माणाधीन उच्च स्तरीय पुल इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति जताया आभार

मरगा नाला पर उच्च स्तरीय पुल के निर्माण कार्य में तेजी आने से क्षेत्रवासियों में उत्साह है। लंबे समय से संकरी पुलिया के कारण आवागमन की परेशानियों का सामना कर रहे ग्रामीणों को उम्मीद है कि नए पुल के निर्माण से उनकी समस्याओं का समाधान होगा और यात्रा अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनेगी।

क्षेत्रवासियों ने मरगा नाला पर 4.52 करोड़ रुपये की लागत से उच्च स्तरीय पुल निर्माण तथा जिले में सड़क संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

60वाँ वर्ष डायमंड जुबिली दुर्गा पूजा महोत्सव 2026 सम्पन्न

60वाँ वर्ष डायमंड जुबिली दुर्गा पूजा महोत्सव 2026 सम्पन्न

 
रसमती” — परंपरा, प्रकृति और बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम*

रायपुर :- रायपुर की डब्ल्यू.आर.एस. कॉलोनी में श्री श्री दुर्गा एवं लक्ष्मी पूजा समिति द्वारा आयोजित **60वाँ वर्ष डायमंड जुबिली दुर्गा पूजा महोत्सव* समिति के अध्यक्ष डॉ देवाशीष मुखर्जी व सचिव प्रश्क़न्त नाग ने कहा कि इस वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र है। छह दशकों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित यह महोत्सव केवल माँ दुर्गा की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि बंगाल की समृद्ध लोक-संस्कृति, पारंपरिक कला और सामूहिक समर्पण को जीवंत करने का एक अनूठा प्रयास है।

इस वर्ष महोत्सव की मुख्य थीम *“रसमती”* रखी गई है, जिसके माध्यम से समिति ने पारंपरिक बंगाली दुर्गा पूजा की मूल भावना, प्राकृतिक तत्वों और लोक-सौंदर्य को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है।

_तीन महीनों की मेहनत और समर्पण से साकार हुई ‘रसमती’_

इस वर्ष की पूजा की तैयारियाँ पिछले तीन महीनों से निरंतर चल रही हैं। माँ दुर्गा के आगमन को भव्य, कलात्मक और पारंपरिक स्वरूप देने के लिए समिति के सदस्यों ने योजनाबद्ध तरीके से डिजाइन, संरचना निर्माण, सजावट और दृश्य-सज्जा पर कार्य किया।

पंडाल की परिकल्पना से लेकर माँ दुर्गा की प्रतिमा के अनुरूप सजावटी संरचनाओं, पृष्ठभूमि (बैकड्रॉप), पारंपरिक आकृतियों और विभिन्न कलात्मक तत्वों के निर्माण तक, प्रत्येक चरण में बारीकी और रचनात्मकता का विशेष ध्यान रखा गया। इन सभी चीजों की डिजाइनिंग और योजना बनाने में ही एक महीने से अधिक का समय लगा।

इस वर्ष की थीम की सबसे खास बात है **बाँस से निर्मित विभिन्न उत्पादों और प्राकृतिक सामग्रियों का व्यापक उपयोग।* आधुनिक सजावट के बढ़ते चलन के बीच समिति ने बंगाल की पारंपरिक पूजा-पद्धति की सादगी, आत्मीयता और सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का प्रयास किया है।

_बाँस की सजावट में छिपी है परंपरा की जड़ें_

‘रसमती’ की अवधारणा केवल सजावट तक सीमित नहीं है। इसके पीछे नवरात्रि की मूल भावना, प्रकृति के प्रति सम्मान और पूजा में उपयोग होने वाली पारंपरिक सामग्रियों से प्रेरित एक सांस्कृतिक दृष्टिकोण है।

नवरात्रि के दौरान ज्वारा तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त प्राकृतिक तत्व, पारंपरिक रंग, पाटा-माटा जैसी स्थानीय सामग्रियों और मिट्टी से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं ने इस थीम की कल्पना को दिशा दी है। इन तत्वों से प्रेरणा लेते हुए पंडाल को ऐसा स्वरूप देने का प्रयास किया गया है, जो माँ दुर्गा की आराधना के मूल आधार को दर्शाए।

चाहे पूजा घर में हो, मंदिर में या विशाल पंडाल में—उसकी आत्मा श्रद्धा, प्रकृति, परंपरा और सामूहिक विश्वास में ही बसती है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की सजावट में भव्यता के साथ-साथ पारंपरिक बंगाली पूजा का स्पर्श और एहसास बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

इस विशाल आयोजन को कोलकाता से आये हुए कारीगरों और विभिन्न सहयोगी टीमों ने अपना योगदानपूर्ण किया। 

इसके साथ ही दृश्य-सज्जा, कलात्मक पृष्ठभूमि, सजावट और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग देने वाले सभी लोगों का योगदान भी सराहनीय रहा है। हर टीम ने अपने कौशल और अनुभव के माध्यम से ‘रसमती’ की कल्पना को वास्तविक रूप देने में सहायता की है।

विशेष रूप से पिछले 15 दिन इस आयोजन की तैयारी के सबसे व्यस्त और चुनौतीपूर्ण दिन रहे। इस दौरान समिति के सदस्यों ने अपने हाथों से बैकड्रॉप, सजावटी आकृतियाँ और कई अन्य कलात्मक संरचनाएँ तैयार कीं। यह मेहनत केवल एक भव्य पंडाल बनाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी परंपरा के प्रति प्रेम और समर्पण व्यक्त करने के लिए की गई है।

इस वर्ष की थीम की डिजाइनिंग, मार्गदर्शन, क्रियान्वयन और संपूर्ण रचनात्मक प्रक्रिया में समिति के *__अनिश नाग (Anish Nag)_* ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी  कल्पनाशीलता और निरंतर मार्गदर्शन ने इस परियोजना को दिशा देने में अहम योगदान दिया है।
डायमंड जुबिली महोत्सव के अंतर्गत 20 अक्टूबर 2026 को डब्ल्यू.आर.एस. कॉलोनी में एक भव्य संगीतमय संध्या का आयोजन किया गया।
इस आयोजन में मुख्यमंत्री, विधायकगण और सांसदगण सहित विशिष्ट जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बड़ी ।
संघ प्रमुख डा.मोहन भागवत कल से दो दिन के छग प्रवास पर

संघ प्रमुख डा.मोहन भागवत कल से दो दिन के छग प्रवास पर

 रायपुर। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ(आरएसएस)के सरसंघचालक डा.मोहन भागवत दो दिवसीय प्रवास पर कल 22 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। वे 22 अक्टूबर को शाम चार बजे गोंडवाना एक्सप्रेस से बिलासपुर पहुंचेंगे। बिलासपुर में वे पहले दिन कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में एक बौद्धिक वर्ग को संबोधित करेंगे। इस बौद्धिक वर्ग में केवल बिलासपुर जिले के संघ पदाधिकारी शामिल होंगे। डा.भागवत रात्रि विश्राम बिलासपुर में ही करेंगे। दूसरे दिन 23 अक्टूबर को प्रांतीय टोली की बैठक होगी जिसमें छत्तीसगढ़ प्रांत के सभी प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक में देश के विभिन्न समस्याओं पर चिंतन किया जाएगा। इस बैठक के बाद संघ प्रमुख देर शाम जबलपुर के लिए रवाना होंगे और वहां विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। 

महिला क्रिकेट की ऐतिहासिक श्रृंखला से प्रदेश की बेटियों को मिलेगी नई प्रेरणा : मुख्यमंत्री साय

महिला क्रिकेट की ऐतिहासिक श्रृंखला से प्रदेश की बेटियों को मिलेगी नई प्रेरणा : मुख्यमंत्री साय

 खेल प्रतिभाओं को अवसर और विश्वस्तरीय खेल अधोसंरचना का विकास हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों से छत्तीसगढ़ की वैश्विक पहचान के साथ पर्यटन, व्यापार और रोजगार को भी मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री ने भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के तीसरे मुकाबले का लिया आनंद, दोनों टीमों के खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन

रायपुर--- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव और हर्ष का अवसर है कि नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच तीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की श्रृंखला का आयोजन किया गया है। छत्तीसगढ़ की धरती पर पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट श्रृंखला का आयोजन प्रदेश के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच पहली द्विपक्षीय श्रृंखला की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना इस अवसर को और भी ऐतिहासिक बनाता है।

मुख्यमंत्री  साय  नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम पहुंचे और भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के तीसरे मुकाबले का आनंद लिया। उन्होंने दोनों देशों की महिला क्रिकेट टीमों के खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ की धरती पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा और परिश्रम से पहचान बनाने वाली महिला खिलाड़ी देश की करोड़ों बेटियों के लिए प्रेरणा हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवा रायपुर में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैचों का आयोजन खेलों के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की बढ़ती भूमिका का प्रमाण है। यह केवल एक क्रिकेट श्रृंखला नहीं, बल्कि प्रदेश की बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करने वाला अवसर भी है। हमारी बेटियां जब विश्वस्तरीय खिलाड़ियों को अपने सामने खेलते हुए देखेंगी, तो उनमें भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने और छत्तीसगढ़ तथा देश का नाम रोशन करने का आत्मविश्वास बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक श्रृंखला के अवसर पर माताओं, बहनों और बेटियों के लिए स्टेडियम में निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था की गई है। इसके पीछे उद्देश्य अधिक से अधिक महिलाओं और बालिकाओं को खेलों से जोड़ना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन को प्रत्यक्ष देखने का अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी केवल खेल मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि आज हमारी बेटियां प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य से देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, संसाधन और प्रतिस्पर्धा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं को अपने ही प्रदेश में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिले।

उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण खेल अधोसंरचना है। राज्य सरकार द्वारा स्टेडियम को छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ को लीज पर दिए जाने से यहां नियमित रूप से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्रिकेट प्रतियोगिताओं के आयोजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे न केवल प्रदेश के क्रिकेट प्रेमियों को विश्वस्तरीय मुकाबले देखने का अवसर मिल रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ के युवा खिलाड़ियों को भी बड़े खिलाड़ियों से सीखने और प्रेरणा लेने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते समय में नवा रायपुर में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों का सफल आयोजन किया गया। राज्य सरकार की विशेष पहल पर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के दो आईपीएल मुकाबलों का भी सफल आयोजन हुआ। अब भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के आयोजन ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े खेल आयोजन किसी प्रदेश की खेल संस्कृति को मजबूत करने के साथ उसकी अर्थव्यवस्था और पहचान को भी नई ऊर्जा देते हैं। देश-दुनिया से खिलाड़ी, खेल अधिकारी और दर्शक जब छत्तीसगढ़ आते हैं, तो इससे पर्यटन, होटल व्यवसाय, परिवहन, स्थानीय व्यापार और सेवा क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होते हैं।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर तेजी से आधुनिक अधोसंरचना और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से युक्त शहर के रूप में विकसित हो रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य नवा रायपुर को केवल एक आधुनिक और सुव्यवस्थित राजधानी के रूप में विकसित करना नहीं, बल्कि इसे देश के प्रमुख स्पोर्ट्स एवं इवेंट डेस्टिनेशन के रूप में भी नई पहचान दिलाना है। इसके लिए आधुनिक खेल सुविधाओं का विस्तार, मौजूदा अधोसंरचना का बेहतर उपयोग और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक सकारात्मक वातावरण बना है। खेलों में भारत की बेटियां लगातार शानदार उपलब्धियां हासिल कर रही हैं और विश्व मंच पर तिरंगे का मान बढ़ा रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के अनुरूप प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को पहचानने, तराशने और आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह श्रृंखला उत्कृष्ट खेल भावना, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और दोनों देशों के बीच मैत्री का यादगार उदाहरण बनेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवा रायपुर में आयोजित यह ऐतिहासिक श्रृंखला प्रदेश की नई पीढ़ी, विशेषकर बेटियों को खेलों से जुड़ने की प्रेरणा देगी और छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में एक गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगी।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ एवं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पदाधिकारी, खेल जगत से जुड़े प्रतिनिधि, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने रावणभाठा दशहरा उत्सव के आयोजन के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की

मुख्यमंत्री साय ने रावणभाठा दशहरा उत्सव के आयोजन के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की

 मुख्यमंत्री श्री साय ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में हुए शामिल, प्रदेशवासियों को दी दशहरा पर्व की शुभकामनाएं

प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ का गहरा आत्मीय नाता, माता कौशल्या का मायका और भगवान श्रीराम का ननिहाल है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री

भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, धैर्य, साहस और न्याय के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण : मुख्यमंत्री साय

सत्य, सेवा, सुशासन और जनकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का लें संकल्प : मुख्यमंत्री

रायपुर : असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत संदेश देता है विजयादशमी का पर्व : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
रायपुर : असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत संदेश देता है विजयादशमी का पर्व : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
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रायपुर-- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय और बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत संदेश देता है। विजयादशमी हमें अपने जीवन में सत्य, धर्म, न्याय और मानवता के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हम प्रतिवर्ष रावण का पुतला दहन करते हैं, लेकिन इस पर्व की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब हम अपने भीतर विद्यमान काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी रावण का भी वध करें। विजयादशमी आत्ममंथन का अवसर है। यह पर्व हमें अपनी कमजोरियों और बुराइयों पर विजय प्राप्त कर सद्गुणों को अपनाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर का ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान दशहरा उत्सव की लगभग 170 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा का साक्षी है। पीढ़ियों से यहां विजयादशमी का पर्व पूरे उल्लास, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है। यह मैदान केवल रावण दहन का स्थल नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और सामूहिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। उन्होंने इस ऐतिहासिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए आयोजन समिति और इससे जुड़े सभी लोगों की सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर रावणभाठा दशहरा उत्सव के आयोजन के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं और विरासत का संरक्षण तथा संवर्धन हमारी जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

*प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ का आत्मीय और अटूट संबंध*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए विजयादशमी का विशेष महत्व है, क्योंकि प्रभु श्रीराम का इस पावन धरती से अत्यंत गहरा और आत्मीय संबंध रहा है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वनवास काल में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने छत्तीसगढ़ की धरती पर लंबा समय व्यतीत किया। यही कारण है कि प्रभु श्रीराम की स्मृतियां और उनके आदर्श प्रदेश की लोकसंस्कृति, लोकजीवन और जनमानस में गहराई से रचे-बसे हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन सत्य, मर्यादा, धैर्य, साहस, त्याग और न्याय के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। वनवास के दौरान उन्हें अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। रावण के पास विशाल सेना, अपार सामर्थ्य और अस्त्र-शस्त्र थे, फिर भी भगवान श्रीराम ने अपने दृढ़ संकल्प और धर्मबल से उसे परास्त किया। यह हमें सिखाता है कि उद्देश्य न्यायपूर्ण हो, संकल्प दृढ़ हो और मार्ग सत्य का हो, तो बड़ी से बड़ी चुनौती पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विजयादशमी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सत्य का मार्ग कठिन अवश्य हो सकता है, लेकिन अंततः विजय सत्य की ही होती है। प्रभु श्रीराम का रावण के विरुद्ध संघर्ष केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध धर्म एवं मानवीय मूल्यों की स्थापना का महान अभियान था।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति के चरित्र की वास्तविक पहचान कठिन परिस्थितियों में होती है। यह महत्वपूर्ण है कि संकट और संघर्ष के समय हम सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े होते हैं या नहीं। रावण के साथ मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी हमें यही संदेश देता है कि असत्य और अन्याय का साथ देने वाला व्यक्ति चाहे कितना ही सामर्थ्यवान क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है।

*आतंकवाद और अन्याय के विरुद्ध भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विजयादशमी का संदेश केवल पौराणिक संदर्भों तक सीमित नहीं है, बल्कि आज भी उतना ही प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सामर्थ्य का परिचय दिया है। भारतीय सेना द्वारा चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर देश के साहस, पराक्रम और आतंकवाद के विरुद्ध अडिग संकल्प का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि चाहे पौराणिक काल का रावण हो अथवा आधुनिक युग में आतंकवाद और अन्याय जैसी बुराइयां, समाज और राष्ट्र को इनके विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। सत्य और न्याय की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प तथा सामूहिक शक्ति आवश्यक है।

*श्रीरामलला का भव्य मंदिर भारत के सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक*

मुख्यमंत्री श्री साय ने अयोध्या में भगवान श्रीरामलला के भव्य मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि 22 जनवरी 2024 का दिन भारत के इतिहास में आस्था, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक चेतना के अविस्मरणीय अवसर के रूप में अंकित हो चुका है। सदियों की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्रीरामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए। यह क्षण करोड़ों देशवासियों की आस्था, विश्वास और संकल्प की पूर्णता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़वासियों की प्रभु श्रीराम के प्रति गहरी आस्था और आत्मीय संबंध को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने श्रीरामलला दर्शन योजना प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम पहुंचकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को इस आध्यात्मिक अनुभूति से जुड़ने का अवसर मिले।

*अपने भीतर की बुराइयों पर विजय का संकल्प लें*

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान करते हुए कहा कि विजयादशमी केवल रावण के पुतले के दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों पर विजय प्राप्त करने और सद्गुणों को अपनाने का अवसर है। हमें भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज में प्रेम, सद्भाव, भाईचारा, न्याय और सेवा की भावना को और मजबूत करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ विकास के नए दौर में आगे बढ़ रहा है। हमारी जिम्मेदारी है कि विकास के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को भी सहेजकर आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप हम सभी को मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आइए, इस पावन विजयादशमी पर हम सभी सत्य, सेवा, सुशासन और जनकल्याण के मार्ग पर चलते हुए एक समृद्ध, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लें। उन्होंने प्रभु श्रीराम से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को विजयादशमी की पुनः हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि रावणभाठा का दशहरा उत्सव लगभग 170 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा है, जिसका आयोजन दूधाधारी मठ द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि देश अपनी प्राचीन विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजते हुए विकास के पथ पर आगे बढ़े। उन्होंने माता दुर्गा और प्रभु श्रीराम से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

इस अवसर पर विधायक श्री सुनील सोनी सहित श्री अंजय शुक्ला, श्री सुभाष तिवारी, श्री मनोज वर्मा, श्री सुशील ओझा, श्री उमेश गुप्ता, श्री संजू नारायण, सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

शहरों के सुनियोजित विकास और आधुनिक अधोसंरचना को मिलेगी नई रफ्तार

शहरों के सुनियोजित विकास और आधुनिक अधोसंरचना को मिलेगी नई रफ्तार

 मुख्यमंत्री  साय  अर्बन चैलेंज फंड एवं अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग पर क्षेत्रीय कार्यशाला का करेंगे शुभारंभ

शहरी विकास में निवेश के नए द्वार खोलने मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होंगे दो महत्वपूर्ण एमओयू

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का हुडको और सेप्ट यूनिवर्सिटी के साथ होगा एमओयू

नवा रायपुर में जुटेंगे शहरी विकास और वित्तीय प्रबंधन के विशेषज्ञ, म्युनिसिपल बॉन्ड, पीपीपी मॉडल और निवेश आधारित परियोजनाओं पर होगा मंथन

नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

रायपुर--छत्तीसगढ़ के शहरों के सुनियोजित एवं टिकाऊ विकास, आधुनिक शहरी अधोसंरचना के विस्तार और नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में राज्य सरकार एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 21 अक्टूबर को प्रातः 10 बजे नवा रायपुर में अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) एवं अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग पर आयोजित एक दिवसीय क्षेत्रीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे।

कार्यशाला में देशभर के शहरी विकास, वित्तीय प्रबंधन और अधोसंरचना क्षेत्र के नीति-निर्माता एवं विशेषज्ञ भाग लेंगे। इस दौरान शहरों के विकास के लिए नए वित्तीय संसाधन जुटाने, निजी निवेश आकर्षित करने, म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करने, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से अधोसंरचना विकसित करने तथा किफायती आवास परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय की उपस्थिति में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा हुडको तथा सेप्ट यूनिवर्सिटी के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए जाएंगे। इन समझौतों के माध्यम से नगरीय निकायों की संस्थागत एवं वित्तीय क्षमता को मजबूत करने, आधुनिक शहरी नियोजन को बढ़ावा देने और निवेश आधारित अधोसंरचना परियोजनाओं को गति देने की दिशा में सहयोग बढ़ाया जाएगा।

राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और हुडको द्वारा संयुक्त रूप से नवा रायपुर स्थित होटल मेफेयर लेक रिसॉर्ट में आयोजित कार्यशाला में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू तथा उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

कार्यशाला में अर्बन चैलेंज फंड तथा अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) के माध्यम से शहरी विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने और नगरीय निकायों को निवेश योग्य परियोजनाएं तैयार करने में सक्षम बनाने पर विशेष फोकस रहेगा। इसके साथ ही शहरी परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने, उनकी वित्तीय योजना तैयार करने और दीर्घकालिक वित्तीय प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्थाओं पर भी विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे।

कार्यशाला में हुडको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री संजय कुलश्रेष्ठ मुख्य वक्तव्य देंगे। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा प्रदेश में शहरी विकास की प्राथमिकताओं, नगरीय अधोसंरचना की आवश्यकताओं तथा कार्यशाला के उद्देश्यों पर अपने विचार रखेंगे।

*तीन तकनीकी सत्रों में होगा शहरी विकास के वित्तीय मॉडल पर मंथन*

कार्यशाला के अंतर्गत दोपहर 12 बजे से तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में देश के विभिन्न राज्यों एवं संस्थाओं के विशेषज्ञ शहरी विकास के सफल मॉडल, वित्तीय नवाचार और परियोजनाओं को निवेश योग्य बनाने के व्यावहारिक पहलुओं पर अपने अनुभव साझा करेंगे।

पहले तकनीकी सत्र में हुडको के महाप्रबंधक डॉ. विवेक अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो की अवधारणा, कार्यप्रणाली और शहरी विकास परियोजनाओं में इनके उपयोग की संभावनाओं पर प्रस्तुति देंगे। तेलंगाना शासन की सचिव डॉ. टी.के. श्रीदेवी तेलंगाना में अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन के अनुभव साझा करेंगी। इससे नगरीय निकायों को शहरी विकास के विभिन्न मॉडलों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन को समझने का अवसर मिलेगा।

बैंकेबल प्रोजेक्ट और पीपीपी मॉडल पर रहेगा विशेष फोकस

दोपहर दो बजे से आयोजित दूसरे तकनीकी सत्र में अर्बन स्पेशलिस्ट सुश्री आस्था जैन परियोजनाओं की अवधारणा तैयार करने से लेकर उनके निर्माण तथा विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया पर प्रस्तुति देंगी।

सिटीज (CITIES) फोरम के श्री प्रकाश गौर बैंकेबल शहरी अधोसंरचना परियोजनाओं, किफायती आवास परियोजनाओं और पीपीपी स्ट्रक्चरिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। विश्व बैंक के श्री रघु केसवन म्युनिसिपल फाइनेंस तथा रेवेन्यू रिंग फेंसिंग के माध्यम से शहरी परियोजनाओं के बेहतर वित्तीय प्रबंधन के तरीकों की जानकारी देंगे।

यह सत्र नगरीय निकायों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा, क्योंकि इससे उन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ऐसी परियोजनाएं तैयार करने में मार्गदर्शन मिलेगा, जिनमें संस्थागत वित्त और निजी निवेश आकर्षित करने की क्षमता हो।

म्युनिसिपल बॉन्ड से शहरों के विकास के लिए संसाधन जुटाने पर चर्चा

शाम सवा चार बजे आयोजित तीसरे तकनीकी सत्र में टिपसन्स के श्री उमेश खंडेलवाल म्युनिसिपल बॉन्ड के माध्यम से शहरी विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। म्युनिसिपल बॉन्ड जैसे आधुनिक वित्तीय साधनों के प्रभावी उपयोग से नगरीय निकाय बड़े अधोसंरचना प्रोजेक्ट्स के लिए वैकल्पिक वित्तीय संसाधन जुटाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

इसके बाद हुडको के क्षेत्रीय प्रमुख श्री हितेश बोरड अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत बैंकेबल शहरी अधोसंरचना और किफायती आवास परियोजनाओं के लिए हुडको द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली वित्तीय सुविधाओं की जानकारी देंगे।

शाम 5:20 बजे हुडको के महाप्रबंधक डॉ. विवेक के साथ पैनल डिस्कशन एवं प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रतिभागी शहरी विकास, परियोजनाओं की वित्तीय संरचना, निवेश जुटाने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े व्यावहारिक विषयों पर विशेषज्ञों से सीधा संवाद कर सकेंगे।

नगरीय निकायों की वित्तीय क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

कार्यशाला के माध्यम से राज्य के नगरीय निकायों को परंपरागत वित्तीय संसाधनों के साथ-साथ निवेश आधारित विकास, म्युनिसिपल बॉन्ड, पीपीपी और संस्थागत वित्त जैसे आधुनिक विकल्पों के प्रभावी उपयोग की जानकारी मिलेगी। इससे नगरीय निकायों को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करने तथा उनके लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।

कार्यशाला में होने वाला विचार-मंथन छत्तीसगढ़ के शहरों में आधुनिक अधोसंरचना के निर्माण, किफायती आवास, बेहतर नागरिक सुविधाओं और निवेश आधारित विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके साथ ही नगरीय निकायों को दीर्घकालिक रूप से वित्तीय रूप से सक्षम बनाते हुए प्रदेश के शहरों को अधिक सुव्यवस्थित, सुविधाजनक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में भी यह पहल उपयोगी होगी।

आज से छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का आगाज ,ओलंपियन खिलाड़ियों के साथ हुनर दिखाएंगे प्रदेश के सितारे

आज से छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का आगाज ,ओलंपियन खिलाड़ियों के साथ हुनर दिखाएंगे प्रदेश के सितारे

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ में हॉकी को नई पहचान दिलाने और स्थानीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की शुरुआत आज से होने जा रही है। राजधानी रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शाम 5 बजे इस लीग का शुभारंभ करेंगे। राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों के साथ छत्तीसगढ़ की उभरती प्रतिभाएं भी अपना दमखम दिखाएंगी।

‘चलव रे संगी हॉकी खेलबो’ के संदेश के साथ आयोजित इस लीग में कुल छह फ्रेंचाइजी टीमें हिस्सा लेंगी। खास बात यह है कि टीमों में ओलंपिक खेल चुके खिलाड़ियों को मार्की प्लेयर के रूप में शामिल किया गया है। अनुभवी खिलाड़ियों के साथ खेलने से स्थानीय खिलाड़ियों को अपनी तकनीक, रणनीति और खेल कौशल को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।

युवा खिलाड़ियों को मिलेगा दिग्गजों से सीखने का मौका

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का उद्देश्य केवल रोमांचक मुकाबले कराना ही नहीं, बल्कि प्रदेश में हॉकी के लिए मजबूत और पेशेवर खेल वातावरण तैयार करना भी है। इस प्रतियोगिता के जरिए युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर के अनुभवी खिलाड़ियों के साथ खेलने, अभ्यास करने और उनसे खेल की बारीकियां सीखने का मौका मिलेगा।

मैदान पर बड़े खिलाड़ियों के साथ समय बिताने से युवाओं को बेहतर टीमवर्क, फिटनेस, त्वरित निर्णय लेने और दबाव में प्रदर्शन करने जैसी क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिलेगी। प्रशिक्षकों और अनुभवी खिलाड़ियों के मार्गदर्शन से प्रदेश की प्रतिभाओं को अपनी कमियों को पहचानने और खेल में सुधार करने का अवसर भी प्राप्त होगा।

 
 
मुख्यमंत्री ने जशपुर विधायक रायमुनि से अस्पताल में की मुलाकात, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की

मुख्यमंत्री ने जशपुर विधायक रायमुनि से अस्पताल में की मुलाकात, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के नारायणा एमएमआई अस्पताल पहुंचकर जशपुर विधायक रायमुनि भगत से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री साय ने चिकित्सकों से भगत के स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

रेल नेटवर्क के विस्तार से बदल रही छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी

रेल नेटवर्क के विस्तार से बदल रही छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी

 औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति

प्रदेश में 51 हजार 80 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम जारी

नए रेल कॉरिडोर से माल ढुलाई, औद्योगिक कनेक्टिविटी और आदिवासी अंचलों के विकास को मिलेगी गति

धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायुपर

रायपुर,--

प्रदेश में 51 हजार 80 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम जारी

छत्तीसगढ़ में आधारभूत रेल अधोसंरचना का तेजी से विकास हो रहा है, जिसका लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक तक पहुंच रहा है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित रेलवे स्टेशनों के विकसित होने से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। बेहतर प्रतीक्षालय, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, स्वच्छ परिसर, आधुनिक यात्री सुविधाएं तथा उन्नत अधोसंरचना से आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण रेल सेवाएं उपलब्ध होंगी।

प्रदेश में 51 हजार 80 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम जारी

                देश के प्रमुख औद्योगिक और खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल छत्तीसगढ़ में रेलवे नेटवर्क का विस्तार अब राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की जरूरतों से जुड़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। छत्तीसगढ़ मध्य भारत का महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स केंद्र है। ऐसे में मजबूत रेल नेटवर्क प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। रेलवे के विकास से उद्योगों की परिवहन लागत कम होगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे तथा युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे। 

                मुख्यमंत्री श्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। प्रदेश में नई रेल परियोजनाओं, दोहरीकरण, विद्युतीकरण तथा आधुनिक रेलवे सुविधाओं के विस्तार से विकास को नई दिशा मिल रही है। यह परिवर्तन विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास से छत्तीसगढ़ में रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के रेलवे बजट का आवंटन बढ़ाकर 7,470 करोड़ रुपये कर दिया है जो वर्ष 2009-14 के दौरान औसतन 311 करोड़ रुपये सालाना था। इस तरह वार्षिक औसत आवंटन में करीब 24 गुना वृद्धि हुई है। इस निवेश का प्रमुख उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर दबाव कम करना, खनिज और औद्योगिक माल की आवाजाही बढ़ाना तथा उन क्षेत्रों तक रेल संपर्क पहुंचाना है, जहां अब तक कनेक्टिविटी सीमित रही है।

राष्ट्रीय माल ढुलाई को मिलेगा वैकल्पिक रेल मार्ग

                 छत्तीसगढ़ की रेल रणनीति में खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल कॉरिडोर महत्वपूर्ण है। करीब 278 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2025 में मंजूर दी थी। तब इस परियोजना की लागत 8,741 करोड़ रुपये अनुमानित थी। बाद में इसमें संशोधन किया गया और इसकी अनुमानित लागत 7,854 करोड़ रुपये कर दी गई। इस परियोजना का उद्देश्य बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग के व्यस्त रेल खंडों को बाईपास कर माल और यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेल लाईन बिछाना है। इस कॉरिडोर से कोलकाता-मुंबई रेल मार्ग पर परिचालन का दबाव कम करने और बलौदाबाजार सहित नए औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क देने की योजना है। इससे कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योगों के लिए माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी और सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।साथ ही, मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होने से औद्योगिक इकाइयों को बाजारों तथा बंदरगाहों तक आसानी से पहुंचने में मदद मिलेगी। 

बस्तर की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

                  रेल नेटवर्क के विस्तार का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू बस्तर की कनेक्टिविटी है। रावघाट-जगदलपुर (140 किमी)की महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है। जबकि किरंदुल-कोत्तागुडेम (180 किमी) तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) की 490 किलोमीटर नई रेल लाइन परियोजना का सर्वे कार्य प्रगति पर। दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के तहत दल्लीराजहरा से अंतागढ़ (77 किमी) तक रेल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। इस रेलखंड पर यात्री रेल सेवा प्रारंभ होने से हजारों ग्रामीण पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़े हैं। इस परियोजना के अगले चरण में रावघाट तक संपर्क विकसित करने का काम चल रहा है। परियोजना पूरी होने पर रावघाट की लौह अयस्क खदानें सीधे भिलाई इस्पात संयंत्र से जुड़ जाएंगी, जिससे उद्योगों और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को नई मजबूती मिलेगी। वहीं कोत्तावलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण से बस्तर क्षेत्र में माल एवं यात्री परिवहन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कटघोरा से डोंगरगढ़ तक नए संपर्क की योजना

               प्रस्तावित कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन की लंबाई करीब 295 किलोमीटर है। यह मार्ग कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित है। परियोजना को रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित करने की योजना है। इसके लिए स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) गठित करने का प्रस्ताव है। इस रेल लाइन का महत्व उन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने में है, जहां अभी रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है या सीमित है। इससे यात्रियों की आवाजाही, कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। 

उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए भी नई परियोजनाएं

              सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा (301 किलोमीटर) और अंबिकापुर-बरवाडीह (200 किलोमीटर) रेल कॉरिडोर को भी रेल मंत्रालय द्वारा जल्दी ही मंजूर किए जाने की संभावना है। अगस्त 2026 में इन प्रस्तावों पर जल्दी निर्णय और सर्वेक्षण की प्रक्रिया तेज करने का मुद्दा उठाया गया था। इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल संपर्क व्यवस्था मजबूती होगी तथा व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 

स्टेशनों का आधुनिकीकरण

                 छत्तीसगढ़ में नई रेल लाइनों के साथ मौजूदा नेटवर्क और स्टेशनों को आधुनिक बनाने पर भी काम किया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को करीब 1,680 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रियों के लिए सुविधाएं बेहतर करना और स्टेशन परिसरों को अधिक व्यवस्थित बनाना है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रेल अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण हो रहा है और इसका प्रत्यक्ष लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चांपा, बालोद एवं सरोना रेलवे स्टेशनों का प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल लोकार्पण प्रदेश के रेल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस जनहितकारी पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने  कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का सशक्त आधार है। चांपा, बालोद और सरोना जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों के उन्नयन से व्यापार, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। इससे लोगों के लिए आवागमन अधिक सुगम होगा और रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

गरबा महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और मातृशक्ति के सम्मान का प्रतीक: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

गरबा महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और मातृशक्ति के सम्मान का प्रतीक: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न गरबा महोत्सवों और दुर्गा पूजा आयोजनों में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए मां आदिशक्ति से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि नवरात्रि शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना का महापर्व होने के साथ हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक एकता और मातृशक्ति के सम्मान का उत्सव भी है। गरबा और दुर्गा पूजा जैसे आयोजन हमारी आस्था और परंपराओं को जीवंत रखते हुए समाज को प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के सूत्र में जोड़ते हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने माना बाजार सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति तथा सार्वजनिक श्री श्री दुर्गा पूजा समिति द्वारा स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना की। उन्होंने मां के चरणों में शीश नवाकर प्रदेशवासियों के कल्याण और छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति का आशीर्वाद मांगा।

इसके पश्चात मुख्यमंत्री साय हुकुम ललित महल में पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत युवा विंग द्वारा आयोजित ‘रास गरबा विथ भजन डांडिया’, रामबाग में आयोजित रास गरबा, पचपेड़ी नाका स्थित राम मंगलम लॉन में दशा सोरठिया वाणिक समाज द्वारा आयोजित ‘सोरठी रंग रंगीलो’ नवरात्रि उत्सव तथा शंकर नगर स्थित बीटीआई मैदान में नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव समिति द्वारा आयोजित ‘संकल्प गरबा’ में शामिल हुए। विभिन्न आयोजनों में समाजजनों और श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री साय का आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर आज पूरे देश और छत्तीसगढ़ में भक्ति, आस्था और उल्लास का वातावरण है। गरबा मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति को अभिव्यक्त करने का सुंदर माध्यम है। गुजरात की सांस्कृतिक परंपरा से निकला गरबा आज पूरे देश में लोकप्रिय होकर हमारी सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत की विशेषता उसकी विविधता में निहित एकता है। हमारे पर्व और उत्सव अलग-अलग समाजों, समुदायों और पीढि़यों को एक साथ जोड़ते हैं तथा अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं।

नवरात्रि मातृशक्ति के सम्मान और सामर्थ्य का पर्व

मुख्यमंत्री साय ने गरबा आयोजनों में बड़ी संख्या में उपस्थित माताओं, बहनों और बेटियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव शक्ति का स्वरूप माना गया है। नवरात्रि हमें मातृशक्ति के सम्मान, उनकी गरिमा और समाज निर्माण में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण कराती है।

उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, निर्णयों में भागीदारी निभाती हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं, तब परिवार के साथ पूरा समाज सशक्त होता है। इसलिए माताओं-बहनों की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक स्वावलंबन राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

महतारी वंदन से महिलाओं को आर्थिक संबल

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की सहायता राशि सीधे अंतरित की जा रही है। इस आर्थिक संबल से महिलाएं अपनी छोटी-बड़ी आवश्यकताओं के संबंध में स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हो रही हैं। यह सहायता बच्चों की शिक्षा, परिवार की आवश्यकताओं और घरेलू जरूरतों की पूर्ति में भी उपयोगी सिद्ध हो रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाते हुए उन्हें स्वावलंबन और समृद्धि की दिशा में आगे ले जाना है। आज छत्तीसगढ़ की 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह उपलब्धि प्रदेश की मातृशक्ति की मेहनत, उद्यमशीलता और सामर्थ्य का प्रमाण है। राज्य सरकार स्व-सहायता समूहों, आजीविका गतिविधियों और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के लिए आर्थिक प्रगति के नए अवसर तैयार कर रही है।

देवी आराधना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है। यह मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी की पुण्यभूमि है। प्रदेश में आदिशक्ति की उपासना और देवी आराधना की गौरवशाली परंपरा सदियों से चली आ रही है।

उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान दंतेवाड़ा से डोंगरगढ़ और रतनपुर से चंद्रपुर तक प्रदेश के देवी मंदिरों और शक्तिपीठों में श्रद्धा का अद्भुत वातावरण दिखाई देता है। लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं। छत्तीसगढ़ की यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी इस विरासत को सहेजें और नई पीढ़ी को इससे जोड़ें। गरबा, दुर्गा पूजा और अन्य पारंपरिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराने और संस्कारों को आगे बढ़ाने के सशक्त माध्यम हैं।

विकास और विरासत साथ-साथ आगे बढ़ें: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों में अपनी संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली विरासत के प्रति स्वाभिमान का नया भाव जागृत किया है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के साथ प्रदेश के सर्वांगीण विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के प्रमुख देवी शक्तिपीठों और धार्मिक स्थलों के विकास की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और इन स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक विकास की यात्रा में हमारी संस्कृति और परंपराएं पीछे न छूटें, बल्कि वे विकसित छत्तीसगढ़ की पहचान और शक्ति बनें। विकास और विरासत का यही समन्वय आने वाली पीढि़यों को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाएगा।

बस्तर में अब सुनाई दे रही खुशहाली के मांदर की थाप: मंत्री श्री केदार कश्यप

कैबिनेट मंत्री  केदार कश्यप ने प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में डबल इंजन की सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ी है। इसका परिणाम है कि बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि बस्तर में जहां कभी बारूद और बम के धमाकों की आवाज सुनाई देती थी, वहां आज खुशहाली के मांदर की थाप गूंज रही है। बस्तर की बदलती तस्वीर पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि शांति स्थापित होने के साथ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन को भी नई पहचान मिल रही है।

विभिन्न गरबा आयोजनों में पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने गरबा और डांडिया की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। भक्ति गीतों और पारंपरिक संगीत के बीच बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों ने उत्साहपूर्वक पर्व की खुशियां साझा कीं। मुख्यमंत्री  साय ने आयोजन समितियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता को मजबूत करने के साथ हमारी सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने अंत में मां दुर्गा से प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करते हुए कहा कि मां आदिशक्ति की कृपा छत्तीसगढ़ पर सदैव बनी रहे और हमारा प्रदेश शांति, समृद्धि तथा विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री  खुशवंत साहेब, विधायक मोतीलाल साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय श्रीवास्तव, सिंधी समाज के  अमित चिमनानी, महेश दरयानी,  दशा सोरठिया वाणिक समाज के  नितिन ढोलकिया सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण, आयोजन समितियों के सदस्य, श्रद्धालु एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

CG- साइबर ठगी का बड़ा खेल : कंपनी को 2 करोड़ का लगा झटका! फर्जी WhatsApp प्रोफाइल से ठगी, एक करोड़ रुपये होल्ड…..

CG- साइबर ठगी का बड़ा खेल : कंपनी को 2 करोड़ का लगा झटका! फर्जी WhatsApp प्रोफाइल से ठगी, एक करोड़ रुपये होल्ड…..

 रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। ठगों ने एक कंपनी के अधिकृत अधिकारी के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी WhatsApp प्रोफाइल बनाई और उसके जरिए दो करोड़ रुपये दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए। हालांकि, कंपनी को धोखाधड़ी का पता चलते ही बैंक और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करा दी गई। समय रहते कार्रवाई होने से ठगी की रकम में से करीब एक करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में होल्ड करा दिए गए हैं। वहीं, शेष रकम के एक हिस्से को निकाले जाने की आशंका जताई जा रही है।मामले में तेलीबांधा पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत वंकाल केबल्स एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड के मुख्य वित्त अधिकारी ओमकार वरु ने दर्ज कराई है। कंपनी का कार्यालय रायपुर के तेलीबांधा इलाके में स्थित मैग्नेटो मॉल में है।

फर्जी WhatsApp प्रोफाइल से भेजे गए रुपये ट्रांसफर करने के निर्देश

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपियों ने कंपनी के एक अधिकृत अधिकारी के मोबाइल नंबर और पहचान का इस्तेमाल करके WhatsApp पर फर्जी प्रोफाइल तैयार की। इसके बाद इसी प्रोफाइल के माध्यम से रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। निर्देशों पर भरोसा करते हुए कंपनी की ओर से बताए गए बैंक खाते में दो करोड़ रुपये भेज दिए गए।पुलिस की जांच में पता चला है कि जिस बैंक खाते में सबसे पहले रकम जमा कराई गई, वह कोलकाता का है। आरोपियों ने खाते में पैसे पहुंचने के बाद उन्हें दूसरे बैंक खातों में भी ट्रांसफर किया। जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि शिकायत दर्ज होने से पहले ही करीब एक करोड़ रुपये विभिन्न खातों से निकाले जा चुके थे।

समय पर बैंक और साइबर हेल्पलाइन को दी सूचना, एक करोड़ रुपये रुके

कंपनी को जैसे ही ठगी का पता चला, उसने संबंधित बैंक को ईमेल के जरिए इसकी सूचना दी। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई।शिकायत पर तेजी से कार्रवाई होने के कारण करीब एक करोड़ रुपये को अलग-अलग बैंक खातों में होल्ड कराने में सफलता मिली। इस कार्रवाई से ठगी की पूरी रकम के हाथ से निकल जाने की आशंका के बीच कुछ धनराशि सुरक्षित रखने में मदद मिली।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी WhatsApp प्रोफाइल किसने बनाई, रकम ट्रांसफर कराने में किन लोगों की भूमिका रही और पैसे किन-किन बैंक खातों के जरिए आगे भेजे गए।

17 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR, तकनीकी साक्ष्यों की जांच जारी

एसीपी सिविल लाइंस रमाकांत साहू के मुताबिक, इस मामले में 17 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कंपनी के अधिकृत व्यक्ति की पहचान और मोबाइल नंबर का दुरुपयोग करके धोखाधड़ी की गई। मामले से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है।पुलिस बैंक खातों के लेनदेन, डिजिटल गतिविधियों और आरोपियों के संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही है, ताकि ठगी के पूरे घटनाक्रम का पता लगाया जा सके।

कई बैंक खाते सीज, आरोपियों की पहचान में जुटी पुलिस

रायपुर पुलिस के अनुसार, मामले में कई बैंक खातों को सीज कराने की कार्रवाई की गई है। अब जांच का प्रमुख उद्देश्य ठगी में शामिल लोगों की पहचान करना, रकम के लेनदेन की कड़ियां जोड़ना और शेष धनराशि का पता लगाना है।कंपनी की ओर से शुरुआती समय में शिकायत किए जाने के कारण करीब एक करोड़ रुपये होल्ड कराए जा सके। हालांकि, पूरी रकम की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर जांच के अंतिम नतीजों का इंतजार है।

CG- 8 साल तक छिपा रहा हीरों का राज, बेचने निकला तो खुल गई पोल… लाखों का माल जब्त……

CG- 8 साल तक छिपा रहा हीरों का राज, बेचने निकला तो खुल गई पोल… लाखों का माल जब्त……

 धमतरी। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के पायलीखंड खदान क्षेत्र से बहुमूल्य पत्थरों की चोरी के मामले में धमतरी पुलिस ने 64 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, भाटापारा निवासी विनोद अग्रवाल इन पत्थरों को बेचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहा था। इसी दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उसके कब्जे से 146 नग पत्थर बरामद किए गए हैं, जिनका कुल शुद्ध वजन 13.49 ग्राम है। जब्त पत्थरों की अनुमानित कीमत 10 लाख 15 हजार 200 रुपये बताई गई है।

धमतरी पुलिस के मुताबिक, 18 अक्टूबर को पुलिस की टीम इलाके में गश्त और अपराधों की पतासाजी कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि नेशनल हाईवे-30 पर कोड़ापार नहर पुलिया के पास एक व्यक्ति बहुमूल्य पत्थर लेकर खड़ा है और उन्हें बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहा है। सूचना मिलने के बाद बिरेझर पुलिस और साइबर थाने की टीम मौके पर पहुंची। घेराबंदी कर संदिग्ध को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने अपना नाम विनोद अग्रवाल, उम्र 64 वर्ष, निवासी केके वार्ड, भाटापारा, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा बताया।

पुलिस की तलाशी में आरोपी के पास पॉलीथीन में रखे 146 सफेद, चमकदार और पारदर्शी पत्थर मिले। ये नीले और फिरोजी रंग की झिल्ली में लिपटे हुए थे। पुलिस ने इन पत्थरों को हीरा बताया है।

जब्त पत्थरों का कुल वजन 16.17 ग्राम और शुद्ध वजन 13.49 ग्राम दर्ज किया गया है। इनकी अनुमानित कीमत 10 लाख 5 हजार रुपये बताई गई है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी के मेमोरेंडम कथन में उसने बताया कि इन पत्थरों को वर्ष 2018 में गरियाबंद जिले के पायलीखंड खदान क्षेत्र से चोरी किया था। अब वह इन्हें बेचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहा था। इस कथन और बरामदगी के आधार पर पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की।

हीरे जैसे पत्थरों के अलावा पुलिस ने आरोपी के पास से सैमसंग Galaxy S21 FE 5G मोबाइल फोन और दो सक्रिय सिम कार्ड भी जब्त किए हैं। मोबाइल की अनुमानित कीमत 8 हजार रुपये बताई गई है। इसके साथ ही 2,200 रुपये नकद भी मिले हैं।

पुलिस ने विनोद अग्रवाल के खिलाफ खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 21(4) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) के तहत मामला दर्ज किया है। उसे 19 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, आरोपी को कुरूद स्थित न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। मामले में बरामद पत्थरों की प्रकृति, उनकी उत्पत्ति और चोरी से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के महत्वपूर्ण पहलू होंगे।

धमतरी पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि अवैध खनिज उत्खनन, चोरी, तस्करी या संदिग्ध खरीद-बिक्री की जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचित करें।

ब्रेकिंग: राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, इस विभाग में अधीक्षण अभियंताओं के हुए तबादले, देखे आदेश…..

ब्रेकिंग: राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, इस विभाग में अधीक्षण अभियंताओं के हुए तबादले, देखे आदेश…..

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में त्योहारी सीजन के बीच प्रशासनिक विभाग में तबादलों का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 12 अधीक्षण अभियंताओं के ट्रांसफर कर दिए हैं। विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, जिन जिलों और क्षेत्रों के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से रायपुर, दुर्ग, रायगढ़, गरियाबंद, बेमेतरा, जगदलपुर, कोरबा और खरसिया शामिल हैं।

देखें लिस्ट…..

CG- जमीन के सौदे में लाखों की धोखाधड़ी, लंबे खेल के बाद ऐसे पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी…..

CG- जमीन के सौदे में लाखों की धोखाधड़ी, लंबे खेल के बाद ऐसे पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी…..

 बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में जमीन की खरीद-बिक्री के नाम पर 10 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। दयालबंद में रहने वाले विशालचंद्र केसरी ने भारतीय नगर निवासी प्रफुल्ल झा पर दूसरे की जमीन को खुद से अनुबंधित बताकर सौदा करने और एडवांस के रूप में 10 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336, 338 और 340 के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी है।

पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, विशालचंद्र केसरी ने आरोप लगाया है कि प्रफुल्ल झा ने बिलासपुर के अमेरी क्षेत्र में स्थित कई जमीनों को अपने से अनुबंधित बताते हुए 70 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से बेचने का सौदा किया था। इस संबंध में 10 दिसंबर 2025 को अनुबंध किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से 10 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए थे। आरोप है कि अनुबंध में शामिल जमीनों में कुछ भूखंड राजस्व रिकॉर्ड में अन्य व्यक्तियों के नाम पर दर्ज थे।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, इनमें खसरा नंबर 232 की 0.2430 हेक्टेयर जमीन चंद्रकली बाई के नाम पर दर्ज थी, जो गोंड आदिवासी समुदाय से थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस जमीन को सामान्य वर्ग की भूमि बताते हुए सौदे में शामिल किया गया, जबकि संबंधित जमीन के स्वामित्व और अनुबंध को लेकर वास्तविक तथ्यों की जानकारी छिपाई गई।

विशालचंद्र केसरी ने शिकायत में बताया कि रकम लेने के बाद जब उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए प्रफुल्ल झा से संपर्क किया तो वह लगातार टालमटोल करता रहा। कई बार प्रयास करने के बावजूद रजिस्ट्री नहीं होने और संपर्क का जवाब नहीं मिलने पर उन्हें धोखाधड़ी की आशंका हुई।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रफुल्ल झा ने कृष्णा दुआ के नाम से जारी मुख्तियारनामा के आधार पर जमीनों को बेचने का अधिकार होने की बात कही थी। बाद में उन्हें कथित तौर पर जानकारी मिली कि संबंधित मुख्तियारनामा जमीन बिक्री के लिए अधिकृत नहीं था और उसकी प्रामाणिकता पर भी सवाल उठे थे।

शिकायत के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 को मसानगंज और तोरवा क्षेत्र की अन्य जमीनों के संबंध में भी प्रफुल्ल झा के साथ अनुबंध किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन जमीनों के विक्रय के लिए भी मुख्तियारनामा के जरिए अधिकार होने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक किसी भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। आवेदन में विशालचंद्र केसरी ने प्रफुल्ल झा के खिलाफ पहले की शिकायत और सिविल लाइन थाने में दर्ज एफआईआर क्रमांक 631, दिनांक 10 मई 2026 का भी उल्लेख किया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीनों के फर्जी अनुबंध के जरिए अन्य लोगों को भी प्रभावित करने की आशंका है। शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336, 338 और 340 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी प्रफुल्ल झा को गिरफ्तार कर कार्रवाई में जुटी है।

VIP Visit : अगले 15 दिन रहेंगे खास, छत्तीसगढ़ आएंगे राष्ट्रपति मुर्मू और मोहन भागवत, राज्योत्सव में अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि

VIP Visit : अगले 15 दिन रहेंगे खास, छत्तीसगढ़ आएंगे राष्ट्रपति मुर्मू और मोहन भागवत, राज्योत्सव में अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में आने वाले 15 दिन वीआईपी दौरों के लिहाज से खास रहने वाले हैं। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी राज्य के दौरे पर आएंगे। इन चारों के आगमन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। दौरों की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के छत्तीसगढ़ प्रवास से होगी। वहीं, राज्योत्सव में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इन कार्यक्रमों के चलते प्रदेश में राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगी। 22 अक्टूबर को वह रायपुर स्थित लोक भवन में पूज्य माता हासी देवी के सम्मान में दो सौ रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी करेंगी। शाम को इंडोर स्टेडियम में आयोजित नवाखाई पर्व, सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी।

23 अक्टूबर को राष्ट्रपति जगदलपुर पहुंचेंगी और मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी। पदस्थ राष्ट्रपति का मां दंतेश्वरी के दरबार में पहुंचना पहला अवसर होगा। इसके बाद वह बस्तर दशहरा के पारंपरिक मुरिया दरबार में शामिल होकर जनजातीय समाज से संवाद करेंगी।

22 और 23 अक्टूबर को ही डॉक्टर मोहन भागवत बिलासपुर के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। वह कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में विजयादशमी महोत्सव में शामिल होंगे और विभाग टोली तथा प्रांत कार्यकारिणी की बैठक लेंगे। सूत्रों के अनुसार, दौरे में छत्तीसगढ़ प्रांत को दो हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव पर निर्णय हो सकता है। इसके तहत एक हिस्से में बिलासपुर-सरगुजा और दूसरे में रायपुर-दुर्ग-बस्तर संभाग शामिल होंगे। संघ बस्तर जैसे क्षेत्रों में शाखाओं का विस्तार करने और 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की रणनीति पर भी ध्यान दे रहा है।

एक नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रायपुर पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आमंत्रण पर वह एक से तीन नवंबर तक आयोजित राज्योत्सव में मुख्य अतिथि होंगे। इस बार उत्सव की थीम ‘सुंदर, सुघ्घर और माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़’ रखी गई है। यह थीम न सिर्फ प्रदेश के विकास को बयां करेगी, बल्कि बस्तर से लेकर पूरे राज्य में बदलते और सुरक्षित अमन-चैन के नए दौर की गवाही भी देगी।

छत्तीसगढ़ भाजपा की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी 25 और 26 अक्टूबर को रायपुर में रहेंगी। वह अगले विधानसभा चुनाव यानी ‘मिशन 2028’ की तैयारियों के तहत वह पूर्व सांसदों और विधायकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगी और संगठन के कामकाज की समीक्षा करेंगी। चर्चा है कि उनके दौरे के बाद प्रदेश के 60 से ज्यादा पूर्व सांसदों और विधायकों को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।