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मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया की त्वरित पहल से आकाशीय बिजली से मृतक की पत्नी को मिली 4 लाख की मुआवजा सहायता

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया की त्वरित पहल से आकाशीय बिजली से मृतक की पत्नी को मिली 4 लाख की मुआवजा सहायता

 00 मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर लंबित प्रकरण का हुआ शीघ्र निराकरण

00 आर्थिक सहायता मिलने पर परिजनों ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया एक बार फिर जरूरतमंद परिवार के लिए राहत का माध्यम बना है। आकाशीय बिजली गिरने से मृत व्यक्ति की पत्नी द्वारा मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में प्रस्तुत आवेदन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 लाख रुपये की मुआवजा सहायता राशि स्वीकृत कर उनके बैंक खाते में अंतरित कराई गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम झरन (मसरिघाट), पोस्ट घुमरा, तहसील तपकरा, जिला जशपुर निवासी मुनिका बाई विश्वकर्मा के पति की आकाशीय बिजली गिरने से असामयिक मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद लंबे समय तक मुआवजा राशि प्राप्त नहीं होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया में आवेदन प्रस्तुत कर सहायता की मांग की थी। आवेदन प्राप्त होते ही मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन ने प्रकरण का परीक्षण कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और आवेदिका के बैंक खाते में 4 लाख रुपये की मुआवजा सहायता राशि का भुगतान सुनिश्चित कराया। आर्थिक सहायता मिलने पर मुनिका बाई विश्वकर्मा एवं उनके परिजनों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की त्वरित पहल से उनकी लंबे समय से लंबित समस्या का समाधान हुआ। संकट की इस घड़ी में मिली सहायता से परिवार को बड़ा आर्थिक संबल प्राप्त हुआ है। 

उल्लेखनीय है कि बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण का भरोसेमंद केंद्र बनकर उभरा है। यहां प्राप्त आवेदनों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, जिससे स्वास्थ्य, राजस्व, बिजली, पेयजल तथा अन्य जनहित से जुड़े मामलों में पात्र हितग्राहियों को समयबद्ध राहत मिल रही है। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की संवेदनशील एवं जनोन्मुखी कार्यप्रणाली से शासन के प्रति आमजन का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

प्रदेशवासी चुनेंगे छत्तीसगढ़ की राजकीय तितली, ऑनलाइन वोटिंग 31 अगस्त तक

प्रदेशवासी चुनेंगे छत्तीसगढ़ की राजकीय तितली, ऑनलाइन वोटिंग 31 अगस्त तक

 रायपुर। छत्तीसगढ़ अपनी पहली राजकीय तितली चुनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इसके लिए प्रदेशवासियों से ऑनलाइन मतदान के माध्यम से सुझाव मांगे हैं। नागरिक अपनी पसंद की तितली के लिए Google Form के माध्यम से 31 अगस्त तक मतदान कर सकते हैं।


वनमंत्री की पहल पर शुरू की गई इस प्रक्रिया का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता और तितलियों के संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जैव विविधता और वन्यजीवों का संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है। जनभागीदारी से राजकीय तितली का चयन होने से लोगों में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

तीन तितली प्रजातियां दौड़ में
राजकीय तितली के चयन के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने वैज्ञानिक और पारिस्थितिक मानकों के आधार पर तीन तितली प्रजातियों का चयन किया है। इनमें कॉमन बैंडेड पीकॉक (Common Banded Peacock), ऑरेंज ओकलीफ (Orange Oakleaf) और स्पॉट स्वोर्डटेल (Spot Swordtail) शामिल हैं।

इन तितली प्रजातियों का चयन राज्य में उनकी उपलब्धता, पारिस्थितिक महत्व, संरक्षण मूल्य, विशिष्टता, आसानी से पहचान में आने और आमजन के आकर्षण जैसे विभिन्न मापदंडों के आधार पर किया गया है।

जनमत और विशेषज्ञों की अनुशंसा से होगा अंतिम चयन
वन विभाग द्वारा नागरिकों की राय जानने के लिए ऑनलाइन मतदान की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रदेश का प्रत्येक नागरिक अपनी पसंद की तितली के पक्ष में मतदान कर सकता है। प्राप्त जनमत और विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं के आधार पर राजकीय तितली के चयन का अंतिम प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।

विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों से भी भागीदारी की अपील

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने प्रदेश के सभी नागरिकों, विद्यार्थियों, प्रकृति प्रेमियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। विभाग ने लोगों से अधिक से अधिक नागरिकों को मतदान के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया है, ताकि छत्तीसगढ़ की जैव विविधता के इस महत्वपूर्ण प्रतीक का चयन व्यापक जनभागीदारी से हो सके।

केयर इकोनॉमी विकसित छत्तीसगढ़ की आधारभूत आवश्यकता : मंत्री राजवाड़े

केयर इकोनॉमी विकसित छत्तीसगढ़ की आधारभूत आवश्यकता : मंत्री राजवाड़े

00 राज्य स्तरीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव, नशामुक्त समाज और वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान का लिया संकल्प
रायपुर।
समाज कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा रायपुर में सुचारु एवं सशक्त केयर इकोनॉमी के निर्माण विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग की सचिव शहला निगार, संचालक  रणवीर शर्मा, राज्य आयुक्त दिव्यांगजन  रामजीवन देवांगन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, विषय विशेषज्ञ, विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे।

अपने उद्बोधन में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि केयर इकोनॉमी केवल सामाजिक कल्याण नहीं, बल्कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारभूत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वृद्धजन, दिव्यांगजन, महिलाओं और बच्चों के लिए सम्मानजनक, सुरक्षित एवं समावेशी व्यवस्था तैयार करना समय की आवश्यकता है। केयर सेक्टर में निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, महिलाओं की कार्यभागीदारी सशक्त होती है और समाज अधिक संवेदनशील एवं समावेशी बनता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांगजन कल्याण, वृद्धजन सेवाओं, पुनर्वास, कौशल विकास तथा महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से संचालित कर रही है। उन्होंने सभी विभागों से अभिसरण (कन्वर्जेंस) की भावना के साथ कार्य करते हुए मजबूत केयर इकोनॉमी के निर्माण का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत नशामुक्त समाज के निर्माण, वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान एवं उनकी देखभाल का सामूहिक संकल्प लिया। सभी ने यह शपथ भी ली कि वे वृद्धजनों के प्रति संवेदनशील रहेंगे, उनके सम्मान, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगे तथा समाज में सकारात्मक वातावरण के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान के डॉ. ए.सी. रेड्डी ने विकसित भारत के निर्माण में केयर इकोनॉमी की केंद्रीय भूमिका पर व्याख्यान दिया। कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव श्री बसवराजु एस. ने केयर इकोनॉमी में रोजगार सृजन की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। रायपुर के सीनियर कर्डियोलॉजिस्ट डॉ स्मित श्रीवास्तव ने केयर इकोनॉमी मॉडल तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोषण के महत्व पर जानकारी दी। यूनिसेफ के विशेषज्ञ ने चाइल्ड केयर एंड प्रोटेक्शन पर प्रस्तुति दी, जबकि हेल्पएज इंडिया के प्रतिनिधियों ने राज्य में वृद्धजन देखभाल की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की।

इसके अलावा राइट्स एंड इंक्लूजन इंडिया, टाटा ट्रस्ट्स, एसओएस चिल्ड्रेन्स विलेज, राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र, श्रम विभाग तथा अन्य विशेषज्ञों ने दिव्यांगजन पुनर्वास, स्वयं सहायता समूहों की भूमिका, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, डिजिटल केयर मॉडल और सामुदायिक भागीदारी जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागियों को विभिन्न विषयगत समूहों में विभाजित कर राज्य में केयर इकोनॉमी को सुदृढ़ बनाने के लिए सुझाव तैयार किए गए। समूह प्रस्तुतियों के माध्यम से प्राप्त अनुशंसाओं पर विचार-विमर्श किया गया, जिन्हें विभाग की भावी नीतियों एवं कार्ययोजनाओं में शामिल करने की दिशा में उपयोग किया जाएगा।

कार्यक्रम में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला से प्राप्त सुझाव छत्तीसगढ़ में एक सुदृढ़, समावेशी, संवेदनशील एवं रोजगारोन्मुखी केयर इकोनॉमी के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होंगे तथा राज्य को इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने में सहायक बनेंगे।

राहुल गांधी देश और संविधान से ऊपर नहीं, कानून सबके लिए एक समान : उप मुख्यमंत्री साव

राहुल गांधी देश और संविधान से ऊपर नहीं, कानून सबके लिए एक समान : उप मुख्यमंत्री साव

 00 छत्तीसगढ़ में कानून का राज, कांग्रेस नेताओं की धमकी से कोई डरने वाला नहीं

रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज कहा कि, भाजपा द्वारा कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के घेराव के समय कांग्रेस ने जिस तरह का रवैया अपनाया वह बहुत दुर्भाग्यजनक है। पता नहीं कांग्रेस किस दिशा में जा रही है, सत्ता से बाहर होने पर हताशा में दुर्व्यवहार का रास्ता अख्तियार कर ली है।

साव ने कहा कि, जब ये सरकार में होते हैं तो ये सत्ता का दुरुप्रयोग करते हैं। कल भारतीय जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान कांग्रेसी जिस प्रकार से डंडे लहरा रहे थे, सामने में आकर नारे लगा रहे थे।ऐसा कर वे क्या बताना चाहते हैं? उन्होंने कहा कि, अपने नेता को जांबाज बताते हैं। जो नेता मान्य परंपरा, कानून व्यवस्था, संविधान से परे जाकर आचरण करता है, उसे जांबाज बताते हैं। वहीं जांबाजी ये दिखाने की कोशिश कर रहे थे और अब पुलिस प्रशासन को धमकाने का काम कर रहे हैं।

साव ने कहा कि, सूरजपुर की घटना के दौरान इनके नेताओं ने पुलिस को धमकाया और अब ये फिर धमका कर क्या साबित करना चाहते हैं। इनकी धमकियों से कोई डरने वाला नहीं है। सभी के लिए कानून समान है। सभी को कानून सम्मत आचरण करना चाहिए। लेकिन यह दुर्भाग्यजनक है कि कांग्रेस न संविधान मानती है, न कानून मानती है। देश में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में जल संरक्षण को नई गति, मोर गाँव मोर पानी महाभियान बना ग्रामीण समृद्धि का आधार

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में जल संरक्षण को नई गति, मोर गाँव मोर पानी महाभियान बना ग्रामीण समृद्धि का आधार

 00 सेमरदर्री में प्रतिदिन 67 लाख 23 हजार लीटर वर्षा जल का भू-जल में हो रहा रिचार्ज, हजारों मानव दिवस का रोजगार भी सृजित

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से संचालित वीबी जी राम जी योजना के अंतर्गत ष्मोर गाँव मोर पानी महाभियानष् उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। यह अभियान जल संकट के स्थायी समाधान के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की ग्राम पंचायत सेमरदर्री इसका प्रेरणादायी उदाहरण बन गई है, जहाँ वैज्ञानिक पद्धति से किए गए कार्यों से प्रतिदिन लाखों लीटर वर्षा जल भूमि में समाहित होकर भू-जल स्तर को समृद्ध कर रहा है।

जिले के मरवाही विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरदर्री के भाटा-टिकरा, शीतल गडहा तथा पथरा कोड़ी क्षेत्र में 8300 स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच का निर्माण कराया गया है। वर्षा ऋतु में इन संरचनाओं के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 67 लाख 23 हजार लीटर पानी का भू-जल में रिचार्ज हो रहा है। इससे वर्षा जल का अपव्यय रुक रहा है, भू-जल स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है तथा मिट्टी की नमी लंबे समय तक सुरक्षित रहने से कृषि और वन क्षेत्र को भी व्यापक लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप यह अभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है। ट्रेंच निर्माण कार्य में प्रतिदिन लगभग 100 से 120 श्रमिकों को रोजगार मिला है तथा अब तक 8078 मानव दिवस का रोजगार सृजित किया जा चुका है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं

जिला प्रशासन द्वारा जनभागीदारी को केंद्र में रखकर जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। विभिन्न ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण से जुड़े स्थायी कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में जल उपलब्धता बढ़ेगी, खेती अधिक टिकाऊ बनेगी और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिलेगी। मोर गाँव मोर पानी महाभियान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरदर्शी सोच और प्रकृति संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। यह अभियान जल सुरक्षा, भू-जल संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के साथ-साथ आत्मनिर्भर गाँवों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है। आने वाले समय में इस प्रकार के कार्य प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे और जल संरक्षण की संस्कृति को और अधिक सशक्त करेंगे।

प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना लक्ष्य - मुख्य सचिव विकासशील

प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना लक्ष्य - मुख्य सचिव विकासशील

 मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में हर घर नल-जल जीवन मिशन की प्रगति पर कलेक्टर कॉन्फ्रेंस सम्पन्न

रायपुर, 23 जुलाई 2026/ मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हर घर नल (जल जीवन मिशन) की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि जल जीवन मिशन वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा सभी क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि इस योजना से महिलाओं का समय बचेगा और जलजनित बीमारियों में कमी आएगी तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।

पूर्ण योजनाओं को 31 अगस्त तक भौतिक सत्यापन करें

मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में मिशन मोड में कार्य करते हुए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि वे प्रत्येक माह जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करें। बैठक में मुख्य सचिव ने पूर्ण हो चुकी और हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जिन योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, उनका 31 अगस्त तक भौतिक सत्यापन कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन योजनाओं का कार्य अधूरा है, उन्हें 31 दिसंबर तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

जलस्रोत संरक्षण एवं रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने कार्ययोजना तैयार करें

मुख्य सचिव ने कहा कि जिला कलेक्टर समयबद्ध तरीके से रनिंग बिलों के भुगतान की प्रक्रिया सुनिश्चित करें, जिससे निर्माण कार्य बाधित नही हो। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वीबी-जी राम जी एवं स्थानीय संसाधनों, जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), सांसद निधि, विधायक निधि, सीएसआर एवं अन्य उपलब्ध स्रोतों से आवश्यक वित्तीय व्यवस्था कर योजनाओं को पूर्ण किया जाए। उन्होंने प्रत्येक जिले को जलस्रोतों का आकलन कर नए स्रोतों की पहचान करने, जलस्रोत संरक्षण एवं रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने तथा प्रत्येक स्रोत के संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं में वर्तमान स्रोत से पेयजल उपलब्ध कराना संभव नहीं है, उनके लिए वैकल्पिक स्रोतों की पहचान कर शीघ्र कार्रवाई की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ पेयजल से वंचित नहीं रखा जा सकता। बैठक में सोलर आधारित नल जल योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि योजना-वार विश्लेषण कर स्वीकृत राशि एवं व्यय का समुचित मिलान किया जाए।

जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग करें

मुख्य सचिव विकासशील ने प्रत्येक जिले को हर घर जल के लिए नया लक्ष्य निर्धारित करने एवं गांवों को इकाई मानकर शत-प्रतिशत नल जल कवरेज सुनिश्चित करने तथा जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, सभी जिलों के कलेक्टर एवं विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

CG : शेयर ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर 2 करोड़ से ज्यादा की ठगी, आरोपी दंपति गिरफ्तार

CG : शेयर ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर 2 करोड़ से ज्यादा की ठगी, आरोपी दंपति गिरफ्तार

 जांजगीर-चांपा। शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में रकम दोगुनी करने का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर पति-पत्नी को चांपा पुलिस ने गिरफ्तार कर बड़ी कार्रवाई की है। आरोपियों ने कई लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाया और करीब 2.05 करोड़ रुपये अपने बैंक खातों में जमा करा लिए। लंबे समय तक पुलिस से बचने के लिए दोनों लगातार ठिकाने बदलते रहे, लेकिन तकनीकी जांच और मुखबिर की सूचना के आधार पर उन्हें नया रायपुर से दबोच लिया गया।

पुलिस के मुताबिक मामले की शुरुआत 24 मई को हुई, जब पीड़ित हेमदत्त केशरवानी ने थाना चांपा में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी पहचान मारुति विहार कॉलोनी निवासी हरिशंकर गुप्ता और उनकी पत्नी रेखा गुप्ता से थी। दोनों ने शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने पर कम समय में दोगुना मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया और बड़े रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए तैयार कर लिया।

आरोपियों की बातों पर भरोसा करते हुए शिकायतकर्ता सहित कई लोगों ने चेक और RTGS के माध्यम से अलग-अलग किश्तों में कुल 2 करोड़ 4 लाख 97 हजार 502 रुपये आरोपियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। शुरुआत में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए दंपति ने करीब 39 लाख 99 हजार 400 रुपये वापस भी किए, ताकि निवेशकों को किसी तरह का संदेह न हो। इसके बाद उन्होंने शेष राशि लौटाने में लगातार टालमटोल शुरू कर दी और अंततः पैसे देने से साफ इनकार कर दिया।

शिकायत दर्ज होने की जानकारी मिलते ही दोनों आरोपी फरार हो गए। पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी से बचने के लिए वे लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए चांपा पुलिस ने विशेष टीम गठित कर तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, सर्विलांस और मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को दोनों आरोपियों के नया रायपुर में छिपे होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां दबिश देकर हरिशंकर गुप्ता और रेखा गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी से जुड़े कई अहम इलेक्ट्रॉनिक और बैंकिंग दस्तावेज भी बरामद किए हैं। इनमें एक लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन और बैंक की चेकबुक शामिल हैं। इन उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है तथा ठगी की रकम का उपयोग कहां किया गया।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में अन्य पीड़ितों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

CG – शिक्षक बना जल्लाद : छोटी सी गलती पर छात्र से साथ कर दी हैवानियत, अस्पताल में करना पड़ा भर्ती

CG – शिक्षक बना जल्लाद : छोटी सी गलती पर छात्र से साथ कर दी हैवानियत, अस्पताल में करना पड़ा भर्ती

 बालोद। जिले में मिडिल स्कूल के 12 वर्षीय छात्र को सॉर्ट रिसेस के बाद 1 मिनट लेट आने पर शिक्षक ने गाली-गलौज कर उसकी पिटाई कर दी। इस घटना में छात्र के सिर में चोट आई है, जिसके चलते उसका अस्पताल में इलाज कराया गया और शिक्षक के खिलाफ डौंडीलोहारा थाना में मामला दर्ज किया गया। इतिहास

जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के एक मिडिल स्कूल का है। परिजनों की शिकायत के अनुसार, मिडिल स्कूल में पदस्थ शिक्षक लोकेश्वर निषाद ने कक्षा 7वीं के 12 वर्षीय छात्र के साथ गाली-गलौज और मारपीट की है।

बताया जा रहा है कि सॉर्ट रिसेस के दौरान छात्र क्लास रूम में 1 मिनट की देरी से पहुंचा, जिसके बाद शिक्षक ने उसके साथ गाली-गलौज की और उसको बेरहमी से पिट दिया। इस पिटाई में छात्र के सिर पर चोट आई, जिसके चलते उसे आनन फानन में डौंडीलोहारा सामुदायिक स्वास्थ केंद्र ले जाया गया और इलाज कराया गया।

घटना के बाद छात्र के परिजनों ने थाने में इसकी शिकायत की है, जिसके बाद पुलिस ने शिक्षक लोकेश्वर निषाद के खिलाफ धारा 115(2) और 296 के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरु कर दी है। इस घटना से स्कूल के छात्र-छात्राओं में दहशत का माहौल है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को खाद-बीज की निर्बाध उपलब्धता, कालाबाजारी पर कड़ा प्रहार….

मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को खाद-बीज की निर्बाध उपलब्धता, कालाबाजारी पर कड़ा प्रहार….

 रायपुर: खरीफ 2026 के दौरान डीएपी की राष्ट्रीय स्तर पर सीमित उपलब्धता के बावजूद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश के प्रत्येक किसान को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो, किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और उर्वरकों की कालाबाजारी अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी के अनुरूप कृषि विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण एवं मूल्य नियंत्रण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए डीएपी का लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। जबकि 21 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में एक लाख 84 हजार 413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया गया है। वहीं भंडारण के विरूद्ध किसानों को एक लाख 26 हजार 360 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। इसके बाद भी समितियों एवं गोदामों में अभी 58 हजार 054 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि खरीफ 2025 की इसी अवधि में 37 हजार 535 मीट्रिक टन डीएपी शेष था।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुरूप किसानों को डीएपी के साथ-साथ एनपीके एवं अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके तथा डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।

देश में डीएपी का लगभग 70 से 80 प्रतिशत तथा एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत आयात विदेशों से किया जाता है। वैश्विक परिस्थितियों एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने के कारण डीएपी और एनपीके की उपलब्धता तथा कीमतों पर प्रभाव पड़ा है। इसी कारण उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियों द्वारा भारत सरकार की प्रचलित नीति एवं बाजार परिस्थितियों के अनुरूप एनपीके के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में वृद्धि की गई है।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के मूल्य निर्धारित करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, फिर भी किसानों से निर्धारित एमआरपी से अधिक मूल्य वसूला न जाए, इसके लिए कृषि विभाग लगातार निरीक्षण कर रहा है। अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी तथा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि अब तक प्रदेश में 4,878 उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया गया है। कार्रवाई के दौरान 625 नोटिस जारी किए गए, 183 केन्द्रों पर विक्रय प्रतिबंध लगाए गए तथा 98 केन्द्रों से उर्वरक जब्त किए गए। वहीं 97 केन्द्रों का लाइसेंस निलंबित और 11 विक्रय केन्द्रों का लाइसेंस निरस्त किया गया। साथ ही 56 प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए गए तथा 7 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई हैं।

इधर, भारी वर्षा से जिन क्षेत्रों में बोनी प्रभावित हुई है अथवा किसानों को पुनः बुआई (डबल बोनी) करनी पड़ रही है, वहां जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने तथा शासन के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री  रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। विभाग द्वारा उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, मूल्य नियंत्रण एवं कालाबाजारी पर प्रभावी निगरानी रखी जा रही है, ताकि प्रत्येक पात्र किसान को समय पर आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हो सके।

राज्य शासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं एवं सहकारी समितियों से ही निर्धारित मूल्य पर उर्वरक खरीदें। यदि कहीं भी अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी अथवा किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें, ताकि दोषियों के विरुद्ध शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज गारियाबंद दौरे पर,अमलीपदर में धार्मिक कार्यक्रम में होंगे शामिल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज गारियाबंद दौरे पर,अमलीपदर में धार्मिक कार्यक्रम में होंगे शामिल

 रायपुर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज गारियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड स्थित अमलीपदर के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवान  जगन्नाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज दोपहर लगभग 1 बजे गरियाबंद के लिए रवाना होंगे। यहां से वे दोपहर 2 बजे श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचेंगे, जहां 2 बजे से 3 बजे तक भगवान  जगन्नाथ की पूजा-अर्चना और दर्शन करेंगे। पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री 3 बजकर 10 मिनट पर हेलीकॉप्टर से रायपुर के लिए रवाना होंगे।

CG Weather Today: छत्तीसगढ़ में मानसून का रौद्र रूप, अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट

CG Weather Today: छत्तीसगढ़ में मानसून का रौद्र रूप, अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के अधिकांश जिलों में बुधवार को दिनभर झमाझम बारिश हुई। कई जगहों पर सड़कों पर पानी भर गया, जबकि निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति देखने को मिली। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है।

मौसम विभाग के अनुसार जुलाई महीने में बना यह दूसरा मजबूत मानसूनी सिस्टम है, जिसका असर पूरे प्रदेश में साफ दिखाई दे रहा है। पिछले एक सप्ताह से लगातार बारिश का दौर जारी है। बस्तर और सरगुजा संभाग के कुछ हिस्सों को छोड़कर राज्य के अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिस्टम अभी कमजोर नहीं पड़ा है, इसलिए अगले दो दिनों तक तेज बारिश जारी रहने की संभावना है।

मौसम विभाग ने गुरुवार को कोरबा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कबीरधाम, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ और जशपुर जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में सबसे अधिक 190 मिमी बारिश सूरजपुर में दर्ज की गई। इसके अलावा अंबिकापुर में 100 मिमी, रायपुर में 80 मिमी, जबकि रायगढ़, डोंगरगढ़, बलौदाबाजार, राजनांदगांव और माना में 70-70 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

मानसून सीजन की बात करें तो सारंगढ़ प्रदेश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बन गया है। यहां अब तक 613 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 373 प्रतिशत अधिक है। वहीं जांजगीर-चांपा में 574 मिमी, मुंगेली में 525 मिमी, बिलासपुर में 492 मिमी और रायपुर में 150 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

हालांकि पूरे प्रदेश में बारिश का वितरण समान नहीं है। अब तक राज्य में औसतन 381 मिमी वर्षा हुई है, जो सामान्य से करीब 17 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभी भी 11 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें कांकेर (257 मिमी, 50 प्रतिशत कम), सरगुजा (249.9 मिमी, 49 प्रतिशत कम), कोंडागांव और मोहला-मानपुर प्रमुख हैं।

मौसम विभाग ने लोगों से भारी बारिश के दौरान नदी-नालों के पास जाने से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में सतर्कता बरतने और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों पर न रुकने की अपील की है। प्रशासन को भी संभावित जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को खाद-बीज की निर्बाध उपलब्धता, कालाबाजारी पर कड़ा प्रहार

मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को खाद-बीज की निर्बाध उपलब्धता, कालाबाजारी पर कड़ा प्रहार

 खरीफ सीजन 2026 में डीएपी की सीमित राष्ट्रीय उपलब्धता के बीच छत्तीसगढ़ सरकार की प्रभावी व्यवस्था

किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सतत निगरानी

रायपुर- खरीफ 2026 के दौरान डीएपी की राष्ट्रीय स्तर पर सीमित उपलब्धता के बावजूद मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश के प्रत्येक किसान को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो, किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और उर्वरकों की कालाबाजारी अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी के अनुरूप कृषि विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण एवं मूल्य नियंत्रण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए डीएपी का लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। जबकि 21 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में एक लाख 84 हजार 413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया गया है। वहीं भंडारण के विरूद्ध किसानों को एक लाख 26 हजार 360 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। इसके बाद भी समितियों एवं गोदामों में अभी 58 हजार 054 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि खरीफ 2025 की इसी अवधि में 37 हजार 535 मीट्रिक टन डीएपी शेष था।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुरूप किसानों को डीएपी के साथ-साथ एनपीके एवं अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके तथा डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।

देश में डीएपी का लगभग 70 से 80 प्रतिशत तथा एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत आयात विदेशों से किया जाता है। वैश्विक परिस्थितियों एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने के कारण डीएपी और एनपीके की उपलब्धता तथा कीमतों पर प्रभाव पड़ा है। इसी कारण उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियों द्वारा भारत सरकार की प्रचलित नीति एवं बाजार परिस्थितियों के अनुरूप एनपीके के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में वृद्धि की गई है।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के मूल्य निर्धारित करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, फिर भी किसानों से निर्धारित एमआरपी से अधिक मूल्य वसूला न जाए, इसके लिए कृषि विभाग लगातार निरीक्षण कर रहा है। अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी तथा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि अब तक प्रदेश में 4,878 उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया गया है। कार्रवाई के दौरान 625 नोटिस जारी किए गए, 183 केन्द्रों पर विक्रय प्रतिबंध लगाए गए तथा 98 केन्द्रों से उर्वरक जब्त किए गए। वहीं 97 केन्द्रों का लाइसेंस निलंबित और 11 विक्रय केन्द्रों का लाइसेंस निरस्त किया गया। साथ ही 56 प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए गए तथा 7 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई हैं।

इधर, भारी वर्षा से जिन क्षेत्रों में बोनी प्रभावित हुई है अथवा किसानों को पुनः बुआई (डबल बोनी) करनी पड़ रही है, वहां जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने तथा शासन के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। विभाग द्वारा उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, मूल्य नियंत्रण एवं कालाबाजारी पर प्रभावी निगरानी रखी जा रही है, ताकि प्रत्येक पात्र किसान को समय पर आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हो सके।

राज्य शासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं एवं सहकारी समितियों से ही निर्धारित मूल्य पर उर्वरक खरीदें। यदि कहीं भी अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी अथवा किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें, ताकि दोषियों के विरुद्ध शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

 

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने से किया इनकार, हाईकोर्ट की टिप्पणियां हटाईं

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने से किया इनकार, हाईकोर्ट की टिप्पणियां हटाईं

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित 2,161 करोड़ रुपए के शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उनकी जमानत रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने जांच एजेंसी के खिलाफ हाईकोर्ट की ओर से की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को अनावश्यक बताते हुए हटा दिया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि इस मामले से जुड़े कानूनी सवाल अभी भी खुले रहेंगे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल जमानत आदेश में पर्याप्त कारण नहीं होने के आधार पर किसी आरोपी की जमानत रद्द की जा सकती है।

चैतन्य बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने जमानत रद्द करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर सवाल उठाए। वहीं, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने भी माना कि कानूनी रूप से गलत जमानत आदेश हमेशा आरोपी की स्वतंत्रता खत्म करने का आधार नहीं बन सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने अंत में जमानत रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने हाईकोर्ट की ओर से जांच एजेंसी पर की गई सख्त टिप्पणियों को हटाते हुए कहा कि वे आवश्यक नहीं थीं।

बता दें कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामले में जनवरी में चैतन्य बघेल को जमानत दी थी। इस आदेश के खिलाफ ईडी और राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। ईडी का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच कथित शराब घोटाले में सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया। मामले की जांच ईडी और सीबीआई दोनों कर रही हैं।

पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल : सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बिहान दीदियों की बीज राखी बिखेरेगी हरियाली

पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल : सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बिहान दीदियों की बीज राखी बिखेरेगी हरियाली

 o सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बिहान दीदियों की बीज राखी बिखेरेगी हरियाली

सारंगढ़-बिलाईगढ़। भाई-बहन के अटूट प्रेम को जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित विभिन्न जिलों में ‘बीज राखी ‘ बनाने का अनूठा अभियान चलाया जा रहा है। त्योहार के बाद मिट्टी में मिलने पर इन राखियों में जड़े देसी बीज अंकुरित होकर पौधे बन जाते हैं। इन इको-फ्रेंडली राखियों में धान, सब्जियों और फूलों जैसे देसी बीज होते हैं। इन्हें फेंकने के बजाय अगर मिट्टी में डाल दिया जाए, तो ये हरियाली बिखेरते हैं। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व केवल रिश्तों की मिठास ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का एक नया अध्याय भी लिखेगा।

कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ के निर्देशन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) की स्व-सहायता समूह की महिलाएं बड़े पैमाने पर पर्यावरण-अनुकूल राखियों के निर्माण में जुटी हैं। इस वर्ष बीज राखी थीम पर कुल 12 हजार 300 राखियां तैयार की जा रही हैं, जो भाई-बहन के पवित्र प्रेम के साथ-साथ समाज को हरियाली और पर्यावरण संवर्धन का सुंदर संदेश देंगी।

’माटी में रोपने पर पौधे बन मुस्कुराएगी राखी’
इन राखियों का मुख्य आकर्षण इनके केंद्र (मध्य) में रखे गए बीज हैं। रक्षाबंधन पर्व के उपरांत इन राखियों को मिट्टी या गमलों में रोपित किया जा सकेगा, जिससे नए पौधे अंकुरित होंगे। महिलाओं का यह अभिनव प्रयास समाज में पर्यावरण-जागरूकता फैलाने के साथ-साथ प्रकृति को संवारने का कार्य भी करेगा।

’जिले के विभिन्न ग्रामों में बिहान की बहनें पूरे उत्साह के साथ राखी निर्माण में जुटी’
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के विभिन्न गांवों में बिहान दीदियों द्वारा राखियों का निर्माण पूरे उत्साह के साथ किया जा रहा है। इसमें सालर और गोड़म की दीदियाँ सबसे आगे रहते हुए 2-2 हजार राखियाँ बना रही हैं, वहीं छिंद, पेंड्रावन और सलोनीकला में 1,500-1,500 राखियों का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा ग्राम कोसीर, पवनी और बुंदेली में 1-1 हजार राखियाँ तैयार की जा रही हैं, जबकि बोन्दा में 500 और लेंद्रा में 300 राखियों के निर्माण के साथ इस हरित अभियान को आकार दिया जा रहा है।

’स्वावलंबन और प्रकृति प्रेम का अनूठा संगम’
बिहान समूह की यह रचनात्मक पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रही है। रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व को सीधे प्रकृति से जोड़ने और बहनों के इस हरित नवाचार की पूरे जिले और राज्य में भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है।

गैर-कृषि आजीविका का सफल मॉडलः सीमेंट ईंट उद्योग से बस्तर में आत्मनिर्भरता की गूँज

गैर-कृषि आजीविका का सफल मॉडलः सीमेंट ईंट उद्योग से बस्तर में आत्मनिर्भरता की गूँज

 o सीमेंट ईंट व्यवसाय से सशक्त होतीं बस्तर की महिलाएं : सुमनी कश्यप बनीं रोल मॉडल

o स्व-सहायता समूह की ताकत और सरकारी सहयोग से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर

बस्तर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सीमेंट ईंट निर्माण महिलाओं और स्थानीय युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) जैसी योजनाओं की मदद से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने छोटे ऋण और प्रशिक्षण से इस व्यवसाय को सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (जैसे- लक्ष्मी स्व सहायता समूह) के माध्यम से लखपति दीदी बन रही हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के सुखद परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोहकापाल के आश्रित ग्राम छिंदगांव की रहने वाली सुमनी कश्यप इसकी एक प्रेरणादायी मिसाल हैं। कभी केवल खेती-किसानी तक सीमित रहने वाली सुमनी आज सीमेंट ईंट निर्माण का सफल उद्यम संचालित कर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता का नया मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।

गैर-कृषि आजीविका का सफल मॉडल: सीमेंट ईंट उद्योग
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सुमनी कश्यप ने प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न निर्माण कार्यों के कारण क्षेत्र में सीमेंट ईंटों की बढ़ती मांग को अवसर के रूप में पहचाना। उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ गैर-कृषि आधारित आजीविका अपनाने का निर्णय लिया और सीमेंट ईंट निर्माण इकाई की स्थापना कर ग्रामीण उद्यमिता की नई मिसाल कायम की।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिला संबल
इस उद्यम की स्थापना के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के नॉन-फॉर्म (गैर-कृषि आधारित आजीविका) घटक के अंतर्गत संकुल संगठन से 5 लाख रुपये की सीड कैपिटल उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त सुमनी ने स्वयं एवं अपने स्व-सहायता समूह के माध्यम से लगभग 1.50 लाख रुपये का निवेश किया। कुल 6.50 लाख रुपये से अधिक की लागत से मशीनरी, शेड और फर्श सहित आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित कर अप्रैल 2026 से उत्पादन शुरू किया गया।

तीन माह में 20 ट्रॉली ईंटों की बिक्री
जगदलपुर एवं बालेंगा क्षेत्र से डस्ट और गिट्टी जैसे कच्चे माल की सहज उपलब्धता तथा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अन्य निर्माण कार्यों की अधिकता के कारण सुमनी द्वारा निर्मित सीमेंट ईंटों की मांग लगातार बढ़ रही है। तैयार माल निर्माण स्थल से ही खरीदा जा रहा है। व्यवसाय शुरू होने के मात्र तीन महीनों में ही 20 ट्रॉली सीमेंट ईंटों की बिक्री कर उन्होंने अपने उद्यम की सफलता साबित कर दी है।

आर्थिक सशक्तिकरण से बदल रहा परिवार का भविष्य
इस व्यवसाय से प्राप्त आय ने सुमनी कश्यप के परिवार को आर्थिक मजबूती प्रदान की है। उनकी बड़ी बेटी 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद जगदलपुर में कंप्यूटर कोर्स के साथ कृषि प्रवेश परीक्षा (पीएटी) की तैयारी कर रही है, जबकि उनके दो छोटे बेटे सातवीं और पांचवीं कक्षा में अध्ययनरत हैं। परिवार की शिक्षा और भविष्य को लेकर सुमनी अब पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।

दिल्ली तक मिली पहचान, महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
सुमनी कश्यप स्व-सहायता समूह में जेंडर मास्टर के रूप में कार्य करते हुए प्रतिमाह 5 हजार रुपये का मानदेय भी प्राप्त करती हैं। अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली और सक्रिय योगदान के कारण उन्हें दिल्ली तक अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला। खेती, किराना दुकान, मत्स्य पालन और अब सीमेंट ईंट निर्माण जैसे विविध आजीविका माध्यमों के जरिए उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और अवसर मिले तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती हैं।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: एक जिला-एक उत्पाद: विष्णुभोग चावल की महक जीपीएम जिले की बनी पहचान

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: एक जिला-एक उत्पाद: विष्णुभोग चावल की महक जीपीएम जिले की बनी पहचान

 गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ का 25वां नवगठित गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अब विशिष्ट कृषि उत्पाद सुगंधित विष्णुभोग चावल के कारण भी नई पहचान बना रहा है। भारत सरकार की एक जिला-एक उत्पाद योजना के अंतर्गत विष्णुभोग चावल को जिले का प्रमुख उत्पाद चुना गया है। मनमोहक सुगंध, उत्कृष्ट स्वाद और जैविक खेती की परंपरा के कारण यह चावल आज जिले की पहचान बन चुकी है। विष्णुभोग चावल की खुशबू अब केवल खेतों तक सीमित नहीं होकर जिला, प्रदेश और देश के अन्य राज्यों तक फेल रहा है। पारंपरिक तरीके से उगाई जाने वाली यह धान की किस्म गुणवत्ता और पौष्टिकता के लिए विशेष रूप से जानी जाती है।

जिले के पेंड्रा क्षेत्र में लगभग 1,500 किसान मिलकर करीब 600 एकड़ भूमि पर विष्णुभोग धान की खेती कर रहे हैं। किसानों के सामूहिक प्रयास और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदमों ने इस उत्पाद को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ जिले की कृषि अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। केवल खेती तक ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से स्व सहायता समूह की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। मलनिया महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी पेंड्रा द्वारा किसानों से विष्णुभोग धान खरीदी जाती है। इसके बाद धान को मिनी राइस मिल में प्रसंस्करण कर आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस कार्य से समूह की 15 महिला सदस्यों को स्थायी रोजगार मिला है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर लखपति दीदी की ओर अग्रसर है। समूह की महिलाओं ने अब तक लगभग 2 टन विष्णुभोग चावल की सफलता पूर्वक बिक्री कर चुकी हैं, इससे उन्हें करीब 1 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हुआ है। इसकी गुणवत्ता और सुगंध के कारण अब इसकी मांग जिले से बाहर अन्य जिलों और विभिन्न राज्यों से भी लगातार बढ़ रही है। यह स्थानीय उत्पाद अब व्यापक बाजार में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है।

एक जिला-एक उत्पाद योजना ने यह सिद्ध कर दिया है कि, यदि स्थानीय संसाधनों, किसानों की मेहनत और महिला शक्ति को सही दिशा मिले, तो कोई भी पारंपरिक उत्पाद राष्ट्रीय पहचान बना सकता है। विष्णुभोग चावल आज जीपीएम जिले के किसानों की समृद्धि, महिलाओं के स्वावलंबन और स्थानीय उद्यमिता का सशक्त प्रतीक बन चुका है। आने वाले समय में यदि विष्णुभोग चावल के उत्पादन, ब्रांडिंग और विपणन को और अधिक प्रोत्साहन मिलता है, तो यह न केवल जीपीएम जिले की आर्थिक प्रगति का आधार बनेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि विरासत को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।

पीएम जनमन आवास योजना ने बदली दिव्यांग परस कमार की जिंदगी, कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का भावुक सफर

पीएम जनमन आवास योजना ने बदली दिव्यांग परस कमार की जिंदगी, कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का भावुक सफर

 o प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने बदली दिव्यांग परस कमार की जिंदगी, कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का भावुक सफर

बलैदाबाजार। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत् परस कमार का पक्का घर बन जाने से उसके जीवन में कई बदलाव आया। अब बार -बार मरम्मत नहीं करना पड़ रहा है। बलैदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड अंतर्गत ग्राम बल्दाकछार के निवासी परस कमार विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय से संबंध रखते हैं। उनका जीवन संघर्ष, अभाव और कठिनाइयों से भरा रहा है। परस कमार पैर से दिव्यांग हैं, जिसके कारण रोजमर्रा के छोटे-छोटे कार्य भी उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं थे। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया और उनकी माताजी भी अति वृद्ध हैं, जो उम्र और कमजोरी के कारण स्वयं सहारे की मोहताज हैं।

आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वर्षों तक वे एक कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर थे। बरसात के दिनों में छत से टपकता पानी, ठंडी रातों में टूटती दीवारों से आती हवा, और गर्मी के मौसम में तपता हुआ घर यही उनकी जिंदगी की सच्चाई थी। हर मौसम उनके लिए एक नई परीक्षा लेकर आता था। रातों को कई बार यह डर सताता था कि कहीं कमजोर दीवारें ढह न जाएं। अपनी इस हालत को देखकर परस कमार का मन बार-बार टूट जाता था, लेकिन गरीबी के आगे वे बेबस थे।

एक पक्के और सुरक्षित घर का सपना उनके लिए किसी दूर के सपने जैसा था, जिसे पूरा करना लगभग असंभव लग रहा था। लेकिन प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने उनके जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई। जिला पंचायत के सतत मार्गदर्शन, जनपद पंचायत कसडोल के सहयोग एवं ग्राम पंचायत के प्रयासों से विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग से होने के कारण उन्हें योजना के अंतर्गत आवास स्वीकृत हुआ। आवास निर्माण कार्य समय पर प्रारंभ हुआ और धीरे-धीरे उनका सपना आकार लेने लगा।साथ ही, मनरेगा अंतर्गत 90 मानव दिवस की मजदूरी राशि भी अभिसरण के माध्यम से उन्हें प्राप्त हुई, जिससे आवास निर्माण में आर्थिक सहयोग मिला। इस राशि ने उनके लिए निर्माण कार्य को और आसान बनाया तथा आत्मनिर्भरता का संबल प्रदान किया।

परस कमार का पक्का मकान बनकर तैयार है। अब सुरक्षित छत के नीचे सुकून की सांस ले रहे हैं। बरसात की चिंता नहीं, ठंड की रातों का डर नहीं और गर्मी की तपिश का भय नहीं अब उनके जीवन में सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास है। यह घर केवल ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं, बल्कि उनके संघर्षों पर मिली सबसे बड़ी जीत है। अपनी आंखों में खुशी के आंसू लिए परस कमार कहते हैं-“मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे जैसे गरीब और दिव्यांग व्यक्ति को भी पक्का घर मिलेगा।इस सुरक्षित पक्का घर में देखकर लगता है जैसे भगवान ने मेरी सबसे बड़ी इच्छा पूरी कर दी। अब हमें डर नहीं लगता, अब हमें लगता है कि हमारा भी इस दुनिया में एक सम्मानजनक ठिकाना मिल गया है।

आधुनिक खेती से बदली किसान ग्रीक चंद पटेल की तस्वीर, धान के साथ सब्जी उत्पादन से बढ़ी आय

आधुनिक खेती से बदली किसान ग्रीक चंद पटेल की तस्वीर, धान के साथ सब्जी उत्पादन से बढ़ी आय

 कोण्डागांव। आदिवासी बहुल जिले के कुम्हारपारा निवासी प्रगतिशील किसान ग्रीक चंद पटेल ने आधुनिक कृषि तकनीकों और शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर खेती को अधिक लाभकारी बना दिया है। धान की पारंपरिक खेती के साथ सब्जी उत्पादन और नैनो उर्वरकों के उपयोग से उनकी पैदावार और आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

ग्रीक चंद पटेल खरीफ और रबी दोनों मौसम में खेती करते हैं। कृषि कार्यों के लिए वे किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं। वहीं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली राशि भी खेती के लिए जरूरी संसाधनों की व्यवस्था में मददगार साबित हो रही है।

उन्होंने खेती में नैनो उर्वरकों का उपयोग शुरू किया है, जिससे पोषक तत्व पौधों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचते हैं। उनका कहना है कि नैनो उर्वरकों के इस्तेमाल से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हुआ है।

धान की खेती के साथ-साथ वे मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी कर रहे हैं। फसल विविधीकरण के जरिए उन्हें पूरे वर्ष अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं। बाजार की मांग के अनुसार विभिन्न फसलों की खेती कर वे अपनी आमदनी लगातार बढ़ा रहे हैं। साथ ही, रासायनिक उर्वरकों की तुलना में जैविक खादों के उपयोग को प्राथमिकता देकर टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।

ग्रीक चंद पटेल की सफलता इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं और फसल विविधीकरण को अपनाकर किसान अपनी उत्पादकता और आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

फांसी के फंदे से लटकी मिली विवाहित बेटी,पिता खेत से आये तो यह दृस्य देख उड़े होस

फांसी के फंदे से लटकी मिली विवाहित बेटी,पिता खेत से आये तो यह दृस्य देख उड़े होस

 मुंगेली। जिले के लोरमी थाना क्षेत्र के बुधवारा गांव में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। घर के अंदर विवाहिता का शव फांसी के फंदे पर लटका मिलने से पूरे गांव में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही लोरमी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस फिलहाल मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है। पुलिस के अनुसार, यह घटना 22 जुलाई की सुबह करीब 9 बजे की है।

बुधवारा गांव निवासी नारद मरकाम ने अपने घर के भीतर अपनी 25 वर्षीय विवाहित पुत्री सुमन टेकाम का शव फंदे पर लटका हुआ देखा। बताया जा रहा है कि मृतका अपने मायके में रह रही थी। सुबह जब उसके पिता खेत से वापस घर लौटे तो उन्होंने यह दृश्य देखा, जिसके बाद उनके होश उड़ गए। घटना के बाद परिजनों ने तत्काल इसकी जानकारी आसपास के लोगों को दी और पुलिस को सूचना दी गई। कुछ ही समय में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। विवाहिता की मौत की खबर फैलते ही गांव में शोक और चिंता का माहौल बन गया। परिजन घटना को लेकर सदमे में हैं और पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। सूचना मिलने के बाद लोरमी थाना पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। इसके बाद शव को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई पूरी की गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया है, ताकि मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विवाहिता ने किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया या फिर घटना के पीछे कोई अन्य कारण तो नहीं है। जानकारी के अनुसार, मृतका सुमन टेकाम के दो छोटे बच्चे हैं। उसकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बच्चों के भविष्य को लेकर भी परिजन चिंतित हैं। पुलिस ने बताया कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।

ऐसे मामलों में पुलिस आमतौर पर मृतका के पारिवारिक संबंधों, सामाजिक परिस्थितियों और घटना से पहले की गतिविधियों की जानकारी जुटाती है। इसी क्रम में पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि घटना की वास्तविक वजह सामने आ सके। लोरमी पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान मिलने वाले प्रत्येक तथ्य को गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच प्रक्रियाओं के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। गांव में हुई इस घटना के बाद ग्रामीणों में भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी। फिलहाल लोरमी थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है। पुलिस की जांच अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और परिजनों के बयानों पर केंद्रित है।

पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से रोशन हो रहे लोगों के घर, त्रिलोक मिश्रा बने सौर ऊर्जा के प्रेरक मिसाल

पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से रोशन हो रहे लोगों के घर, त्रिलोक मिश्रा बने सौर ऊर्जा के प्रेरक मिसाल

 o गौरेला पेंड्रा मरवाही : पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से रोशन हो रहे लोगों के घर

गौरेला पेंड्रा मरवाही। पीएम नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी मंशा और सीएम विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ तेजी से असर दिखा रही है। इस योजना के तहत जिले में सैकड़ों घर रोशन हो रहे हैं और लोग मुफ्त, स्वच्छ एवं पर्यावरण-हितैषी बिजली का लाभ लेकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहे हैं। शासन द्वारा दी जा रही सब्सिडी और सरल प्रक्रिया ने इस योजना को और अधिक लोकप्रिय बना दिया है।

इसी सकारात्मक बदलाव की एक प्रेरक मिसाल हैंकृ गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के गुरुकुल परिसर पेंड्रारोड निवासी त्रिलोक मिश्रा, जिन्होंने 3 किलोवाट का सोलर प्लांट स्थापित कर साबित कर दिया कि सौर ऊर्जा न केवल खर्च घटाती है, बल्कि स्थायी ऊर्जा का मजबूत विकल्प भी है। केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये सब्सिडी सीधे उनके खाते में जमा हो गई। इस पूरी प्रक्रिया को मिश्रा ने पूरी तरह पारदर्शी, उपभोक्ता हितैषी और सहज बताया।

सोलर प्लांट लगने के बाद मिश्रा के घर में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की एक नई शुरुआत हुई। वे बताते हैं, ष्अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। हमारी जरूरत की बिजली हमारी अपनी छत से बन रही है।ष् सोलर प्लांट स्थापित करने से पहले मिश्रा को प्रतिमाह 3000 से 3500 रुपये तक का बिजली बिल भरना पड़ता था। लेकिन सोलर ऊर्जा शुरू होने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। अब माइनस बिल प्राप्त हुए, साथ ही अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी गई, उसकी राशि बिजली बिल में समायोजित होती रही। त्रिलोक मिश्रा की सफलता यह संदेश देती है कि, यदि योजनाओं का लाभ सही समय पर और सही तरीके से लिया जाए, तो सौर ऊर्जा न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि घरेलू बजट में भी बड़ी राहत देती है। उनकी कहानी शहरवासियों के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन चुकी है।

राज्यपाल से प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकात

राज्यपाल से प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकात

 00 सेवा भाव, संवेदनशीलता और तार्किक निर्णय से निभाएं दायित्व - डेका

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि आम जनता की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और ईमानदारी से निर्वहन करना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं नए अवसर भी मौजूद होते हैं। इसलिए प्रत्येक परिस्थिति का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना करते हुए जनता के हित में निर्णय लिए जाने चाहिए।
राज्यपाल आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के वर्ष 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से चर्चा कर रहे थे। ये अधिकारी वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी, निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय में मानवीय संवेदनाओं का भी समावेश होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक कार्य में ह्यूमन टच होना आवश्यक है, ताकि शासन की योजनाओं और निर्णयों का लाभ वास्तविक रूप से आम नागरिकों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता से नियमित संवाद करना चाहिए, क्षेत्र का सतत भ्रमण करना चाहिए और लोगों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कार्य संभव हो, उसे प्राथमिकता के साथ पूरा करें और यदि किसी कारणवश कोई कार्य संभव नहीं है तो उसकी स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी संबंधित व्यक्ति को अवश्य दें। इससे प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए तार्किक सोच और विवेकपूर्ण निष्कर्ष अत्यंत आवश्यक हैं। तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेना ही एक सक्षम अधिकारी की पहचान है। उन्होंने कहा कि जनता को न्याय दिलाना लोक सेवक का प्रथम कर्तव्य है और प्रत्येक अधिकारी को इस भावना के साथ कार्य करना चाहिए।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे युवा हैं और उनके कंधों पर भविष्य के प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको छत्तीसगढ़ जैसे शांत, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में सेवा करने का अवसर मिला है। यहां के लोगों में सेवा, सहयोग और आत्मीयता की भावना अत्यंत प्रबल है। इस विश्वास और अपनत्व को बनाए रखते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होगी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी की प्रशिक्षण निदेशक मेनका प्रधान एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

'कांकेयर' ब्रांड बना ग्रामीण महिलाओं की पहचान शुद्ध जैविक उत्पादों की लगातार बढ़ रही मांग

'कांकेयर' ब्रांड बना ग्रामीण महिलाओं की पहचान शुद्ध जैविक उत्पादों की लगातार बढ़ रही मांग

 रायपुर :-  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिला स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार ‘कांकेयर’ ब्रांड तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। यह ब्रांड कांकेर की हजारों महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक उत्पादों का प्रतीक बन चुका है।

‘कांकेयर’ ब्रांड के तहत सरसों तेल, अरहर दाल, छिंद गुड़, शहद, रागी, कोदो, मक्का, आम का अचार सहित विभिन्न जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। दण्डकारण्य क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों में उगाए गए ये उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। ये उत्पाद स्वसहायता समूहों द्वारा पारंपरिक एवं जैविक पद्धति से तैयार किए जाते हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं होता है। एफएसएसएआई (FSSAI) से पंजीकृत होने के कारण उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है।

वर्तमान में ‘कांकेयर’ उत्पादों का सी-मार्ट और कांकेश्वरी एफपीसी के माध्यम से स्थानीय बाजारों में वितरण और बिक्री सुनिश्चित की जा रही है। जिला पंचायत परिसर में स्थापित पैकेजिंग इकाई से इनकी थोक खरीदी की जा सकती है। वेबसाइट Kancare.Shop के माध्यम से इन्हें ऑनलाइन ऑर्डर कर घर बैठे शुद्ध एवं प्राकृतिक उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं।

कांकेर जिला पंचायत के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 'कांकेयर’ ब्रांड के 92 किलोग्राम अरहर दाल , 5.5 किलोग्राम शहद, 5 किलोग्राम छिंद गुड़, 9 किलोग्राम रागी आटा तथा 6 किलोग्राम मक्का आटा की बिक्री हो चुकी है। ‘कांकेयर’ ब्रांड आज केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि कांकेर जिले की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन की नई पहचान बनकर उभर रहा है।

महतारी वंदन योजना से माताओं और बहनों के जीवन में आया आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

महतारी वंदन योजना से माताओं और बहनों के जीवन में आया आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

  महिलाओं को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ

 महिला सशक्तिकरण, रोजगार, पर्यटन, उद्योग और सुशासन के विजन को मुख्यमंत्री ने किया साझा

 बस्तर में शांति, विकास और रोजगार का नया अध्याय शुरू

 इमर्जिंग छत्तीसगढ़-सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हुए शामिल

रायपुर / मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित 'इमर्जिंग छत्तीसगढ़-सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महिला सशक्तिकरण, बस्तर के विकास, रोजगार, उद्योग, पर्यटन, सुशासन और सामाजिक सुधारों पर राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि हम सभी के लिए छत्तीसगढ़ महतारी है। यह माता कौशल्या की पावन जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च सम्मान देने की परंपरा रही है। उन्होंने वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि  'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताÓ अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है।

 महतारी वंदन योजना से महिलाओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश की लगभग 68 लाख 50 हजार विवाहित महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में दिए जा रहे हैं। अब तक 29 किश्तों के माध्यम से लगभग 18 हजार 800 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जब वे गांवों का दौरा करते हैं तो माताओं और बहनों के चेहरों पर इस योजना से आया आत्मविश्वास और संतोष स्पष्ट दिखाई देता है। बातचीत के दौरान माताएं और बहनें बताती हैं कि किसी ने अपनी बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश किया है, किसी ने सिलाई मशीन खरीदकर रोजगार शुरू किया है तो किसी ने किराना या सब्जी की दुकान खोलकर आय बढ़ाई है। इससे माताएं और बहनें  आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है।

 दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन की राशि से शुरू किया राम मंदिर निर्माण

मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि यह इस योजना का सबसे प्रेरक उदाहरण है कि महिलाएं इस राशि का उपयोग समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी कर रही हैं।

30 लाख से अधिक महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 86 हजार महिला स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन्हें रेडी-टू-ईट कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है तथा ऋण एवं अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बस्तर में नक्सलवाद से विकास की ओर ऐतिहासिक परिवर्तन

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि चार-पांच दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर अब तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से बस्तर में शांति स्थापित हुई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कैंप स्थापित करने के साथ-साथ विकास की योजनाओं को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाया गया। पहले सुरक्षा शिविरों के पांच किलोमीटर दायरे तक योजनाओं का लाभ पहुंचता था, जिसे अब बढ़ाकर दस किलोमीटर तक किया गया है।

 नियद नेल्ला नार से 500 से अधिक गांवों तक पहुंची सरकार

मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत अब 500 से अधिक गांवों को जोड़ा जा चुका है। लगभग 17 विभागों की 40 से अधिक योजनाओं का लाभ इन गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। यहां लोगों को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत लगभग 36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया तथा गंभीर रोगियों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। वहीं बस्तर मुन्ने योजना के माध्यम से अधिकारी स्वयं दूरस्थ गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं।

सिंचाई, कृषि और पर्यटन से आत्मनिर्भर बनेगा बस्तर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में इंद्रावती नदी पर देउरगांव एवं मटनार सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनसे लगभग 80 हजार एकड़ भूमि सिंचित होगी।

उन्होंने कहा कि चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, अबूझमाड़ के विशाल वन तथा धुड़मारास जैसे गांव बस्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। नई औद्योगिक नीति में होम-स्टे को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत पांच कमरों तक के होम-स्टे निर्माण के लिए ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इमली, महुआ, हर्रा, बहेड़ा, सीताफल और औषधीय वनोपजों का मूल्य संवर्धन कर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाई जा रही है। नेतानार जैसे गांवों में सेवा डेरा के माध्यम से महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, पैकेजिंग तथा अन्य आजीविका आधारित प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। आईआईटी की टीम भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास का कार्य कर रही है।

धर्मांतरण के विरुद्ध कड़ा कानून लागू

मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मांतरण समाज के लिए गंभीर चुनौती है। विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 लागू किया गया है। इसके तहत धर्म परिवर्तन करने और करवाने वाले दोनों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। प्रलोभन, दबाव अथवा छलपूर्वक धर्मांतरण करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 समान नागरिक संहिता की दिशा में भी तेजी से कार्य

उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है तथा राज्य सरकार का प्रयास है कि आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र तक इस दिशा में ठोस प्रगति हो।

पीएससी घोटाले की जांच और रोजगार पर सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए पीएससी घोटाले की सीबीआई जांच जारी है तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने विभिन्न विभागों में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है तथा शीघ्र ही 5 हजार शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सभी युवाओं को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है, इसलिए नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निजी निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया जा रहा है। पिछले डेढ़ वर्षों में राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लाखों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।

महिलाओं ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम में बलौदाबाजार जिले की मीना देवांगन ने महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि योजना से प्राप्त राशि से उन्होंने चूड़ी का व्यवसाय शुरू किया है। वहीं सरोज ने कहा कि वे इस राशि से अपने बच्चे की स्कूल फीस का भुगतान कर रही हैं। दोनों महिलाओं ने कहा कि इस योजना ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री साय की पहल:स्वस्थ माताएं, स्वस्थ बच्चे और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए बनेगी समन्वित रणनीति

मुख्यमंत्री साय की पहल:स्वस्थ माताएं, स्वस्थ बच्चे और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए बनेगी समन्वित रणनीति

 00 यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी कार्ययोजना

00 स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव - साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन तथा बच्चों के समग्र विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इन क्षेत्रों में स्थायी सुधार के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा आदिम जाति विकास विभाग सहित सभी संबंधित विभाग यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से एक समन्वित और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करें, जिससे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण में कमी लाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का प्रभाव तभी बढ़ेगा, जब विभिन्न विभाग साझा लक्ष्य और समन्वित कार्यप्रणाली के साथ काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी मल्टी-सेक्टोरल रणनीति तैयार करने को कहा, जिससे स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और बच्चों के पोषण स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे का शॉल एवं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक नंदी भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। वहीं सुश्री मैककैफ्रे ने भारत में यूनिसेफ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष स्मारक डाक टिकट मुख्यमंत्री को भेंट किया। यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे ने मुख्यमंत्री का जय जोहार कहकर अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और सरल-सहज लोगों का प्रदेश है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ लंबे समय से राज्य सरकार के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के बच्चों का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध बनेगा। बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ की प्रमुख सुश्री सीमा कुमार, अनिल गुलाटी तथा डॉ. बाल पारितोष दास उपस्थित थे

कांग्रेस नकारात्मक राजनीति में कभी सफल नहीं होगी, जनता सच्चाई जानती है : उपमुख्यमंत्री अरुण साव

कांग्रेस नकारात्मक राजनीति में कभी सफल नहीं होगी, जनता सच्चाई जानती है : उपमुख्यमंत्री अरुण साव

 00 नीट परीक्षा की खामी को सरकार ने किया दूर, समय पर कार्रवाई कर दोबारा आयोजित की परीक्षा

00 स्मार्ट मीटर नई तकनीक का हिस्सा, बिजली व्यवस्था में आएगी पारदर्शिता

रायपुर। उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार पारदर्शिता, सुशासन और विकास के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तथ्यहीन आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। नीट परीक्षा, यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी), स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर जनता कांग्रेस के बहकावे में नहीं आएगी। प्रदेश की जनता सच्चाई को भली-भांति समझती है। विपक्ष की नकारात्मक राजनीति कभी सफल नहीं होगी।

उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि नीट परीक्षा मामले में सरकार ने समय पर कार्रवाई कर दोबारा परीक्षा आयोजित कराई। इसके बावजूद कांग्रेस इस विषय को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यूसीसी पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि यूसीसी को लेकर भी सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि आदिवासी समाज के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित समिति सभी वर्गों से सुझाव लेकर सरकार को अपना प्रारूप सौंपेगी।

साव ने स्मार्ट मीटर को लेकर कहा कि स्मार्ट मीटर नई तकनीक का हिस्सा हैं, जिससे बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिना तथ्यों के लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार पूरे छत्तीसगढ़ के संतुलित और समान विकास के लिए प्रतिबद्ध है। किसी भी क्षेत्र के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है।