रायपुर: राज्यपाल रमेन डेका से लोकभवन में स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव ने सौजन्य भेंट की।
रायपुर: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में स्वास्थ्य अधोसंरचना को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य सचिव एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव के साथ विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान रायपुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इनमें ट्रॉमा सेंटर, क्रिटिकल केयर यूनिट, नवीन सिकल सेल इंस्टीट्यूट, बॉयज एवं गर्ल्स हॉस्टल तथा स्टाफ रेजिडेंशियल बिल्डिंग जैसे महत्वपूर्ण निर्माण शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएं प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
बैठक में आगामी कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई, ताकि परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए, जिससे आमजन को स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर लाभ शीघ्र मिल सके।
संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष पर आयोजित कलश वंदन महाअभियान में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय
संत रविदास जयंती पर अगले वर्ष माघी पूर्णिमा को रहेगा सार्वजनिक अवकाश, मांस एवं मदिरा बिक्री होगी प्रतिबंधित
संत रविदास के नाम पर राज्य अलंकरण पुरस्कार और नवा रायपुर में प्रमुख चौक का होगा नामकरण
जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर से आए पवित्र कलश का किया वंदन, जिलों के प्रतिनिधियों को सौंपे कलश, गांव-गांव तक अभियान के लिए वाहनों को दिखाई हरी झंडी
रायपुर 4 अगस्त 2026/ संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज का जीवन समरसता, समानता, भक्ति, श्रम और सामाजिक न्याय का अमर संदेश है। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। संत रविदास ने समाज को ऊंच-नीच, भेदभाव और छुआछूत से ऊपर उठकर मानवता, समान अधिकार और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग दिखाया। यही मार्ग विकसित, समरस और सशक्त भारत की आधारशिला है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कलश वंदन महाअभियान के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से लाए गए पवित्र मिट्टी एवं जल से भरे कलश को श्रद्धापूर्वक अपने मस्तक पर धारण कर संत रविदास के छायाचित्र के समक्ष स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजन-अर्चन कर संत रविदास को नमन किया तथा इसे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।
संत रविदास के सम्मान में मुख्यमंत्री ने की महत्वपूर्ण घोषणाएं
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संत रविदास के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के क्रम में अगले वर्ष 2027 में उनकी जयंती (माघी पूर्णिमा) को प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन प्रदेशभर में मांस एवं मदिरा का विक्रय पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर प्रदान किए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से एक राज्य अलंकरण पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। साथ ही नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण भी संत गुरु रविदास के नाम पर किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में संत रविदास के प्रसिद्ध संदेश -
"ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न।
छोट-बड़ो सब सम बसैं, रविदास रहैं प्रसन्न।।" - का अंकन कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा कर प्रयास किया जाएगा।
जब-जब समाज में अन्याय बढ़ा, तब-तब संतों और महापुरुषों ने नई दिशा दी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भारत संतों, ऋषियों और महापुरुषों की पावन भूमि है। जब-जब समाज में अन्याय, अत्याचार, ऊंच-नीच, छुआछूत और भेदभाव जैसी विकृतियां बढ़ीं, तब-तब संतों और महापुरुषों ने समाज को नई दिशा प्रदान की। संत रविदास ने अपने जीवन और उपदेशों के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता और भक्ति का ऐसा संदेश दिया, जिसने समाज को नई चेतना प्रदान की।
उन्होंने कहा कि संत रविदास ने तत्कालीन शासक सिकंदर लोदी के धर्मांतरण के दबाव का भी साहसपूर्वक विरोध किया और यह संदेश दिया कि सभी मनुष्य समान हैं तथा ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल सच्ची भक्ति और सदाचार है। उनका प्रसिद्ध संदेश "मन चंगा तो कठौती में गंगा" आज भी समाज को आंतरिक शुद्धता और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाता है।
मुख्यमंत्री ने संत रविदास से जुड़ा प्रसंग भी साझा किया और कहा कि उनकी अटूट भक्ति और तपस्या के प्रभाव से कठौती में गंगा प्रकट होने की घटना केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सच्ची श्रद्धा और निर्मल मन से ईश्वर की प्राप्ति संभव है।
'विकास भी, विरासत भी' हमारा मार्गदर्शक मंत्र
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री का "विकास भी, विरासत भी" का संदेश देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण का मार्गदर्शक मंत्र है।
उन्होंने कहा कि संत रविदास की जन्मभूमि से लाई गई पवित्र मिट्टी और जल का कलश देशभर के मठों, मंदिरों और आस्था केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है। यह समाज के प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार को जोड़ने वाला राष्ट्रीय समरसता अभियान है।
कलश वंदन अभियान सामाजिक समरसता का जनआंदोलन बनेगा
मुख्यमंत्री साय ने डॉ. सनम जांगड़े के नेतृत्व में सीर गोवर्धनपुर से पवित्र कलश लेकर आए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह प्रयास संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने सभी जिलों से आए प्रतिनिधियों को पवित्र कलश सौंपे तथा गांव-गांव तक इन्हें पहुंचाने वाले वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अभियान संत रविदास के समरसता, समानता और सामाजिक एकता के संदेश को प्रत्येक गांव, प्रत्येक समाज और प्रत्येक घर तक पहुंचाएगा।
संत रविदास का जीवन सर्वसमाज को जोड़ने की प्रेरणा : गुरु खुशवंत साहेब
कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास ने छोटे-बड़े के भेद को समाप्त कर समानता और सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार संत रविदास के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। कलश वंदन अभियान गांव-गांव तक जाकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करेगा।
समरसता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति : अजय जामवाल
इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अजय जमवाल ने कहा कि संत रविदास का समरसता का संदेश आज पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि समाज को जाति, धर्म और भेदभाव के आधार पर विभाजित करने वाली शक्तियों से सावधान रहने की आवश्यकता है। संतों की शिक्षाओं को व्यवहार में उतारकर ही सामाजिक एकता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे पवित्र कलश को प्रत्येक जिले के सभी आस्था केंद्रों तक पहुंचाकर संत रविदास के विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें।
संत रविदास के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक : सरोज पाण्डेय
इस अवसर पर सुश्री सरोज पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने धर्मांतरण के दबाव का दृढ़ता से विरोध करते हुए सनातन परंपरा, समानता, श्रम और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने वाले हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास का संदेश जन-जन तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, संत समाज एवं श्रद्धालु रहे उपस्थित
कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक अनुज शर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक इंद्र कुमार साहू, विधायक संपत अग्रवाल, विधायक रोहित साहू, छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष ध्रुव कुमार मिर्धा, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज, महंत खेलुराम पैगवार, संत युधिष्ठिर लाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।a
o मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पोषण और बाल विकास सेवाओं का हो रहा निरंतर विस्तार
सूरजपुर। सीएम विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिला एवं बाल विकास सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की विशेष पहल और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप सूरजपुर जिले में 5 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के युक्तियुक्तकरण एवं संचालन की स्वीकृति प्रदान की गई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालनालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह निर्णय भारत सरकार के दिशा-निर्देशों एवं राज्य शासन की स्वीकृति के आधार पर लिया गया है। इससे दूरस्थ एवं जरूरतमंद क्षेत्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं तथा किशोरियों को पोषण, स्वास्थ्य एवं पूर्व-प्राथमिक शिक्षा सेवाएं और अधिक सुलभ हो सकेंगी। स्वीकृत केंद्र ओड़गी और भैयाथान परियोजना के अंतर्गत डगमलापारा (चेंद्रा सेक्टर),भूंडा (मोहरसोप सेक्टर), झाडूडीह (चेंद्रा सेक्टर),पण्डोपारा (चेंद्रा सेक्टर),बगईहापारा (दर्रीपारा सेक्टर) पर संचालित होंगे। इन क्षेत्रों की जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति एवं स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्रों की स्वीकृति दी गई है।
विभागीय आदेश के अनुसार कुछ पूर्व संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों का युक्तियुक्तकरण कर उन्हें अधिक आवश्यकता वाले क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अधिक से अधिक हितग्राहियों तक सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है संचालनालय ने जिला प्रशासन एवं संबंधित परियोजना अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी नवस्वीकृत आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन 60 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से प्रारंभ किया जाए। साथ ही पोषण ट्रैकर एवं आईसीडीएस पोर्टल पर आवश्यक अद्यतन, कार्यकर्ता एवं सहायिका पदों की व्यवस्था तथा भवन एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री राजवाड़े ने कहा कि, राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुपोषण, स्वास्थ्य सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि, सूरजपुर जिले में नए आंगनबाड़ी केंद्रों की स्वीकृति से दूरस्थ बस्तियों में रहने वाले बच्चों और माताओं को सीधा लाभ मिलेगा तथा कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक मजबूती मिलेगी। विभागीय जानकारी के अनुसार इन नए केंद्रों की स्वीकृति के बाद सूरजपुर जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की कुल संख्या 2086 हो जाएगी। यह निर्णय राज्य सरकार की समावेशी विकास, मातृ-शिशु कल्याण तथा ग्रामीण क्षेत्रों तक मूलभूत सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रायपुर, 04 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातिय क्षेत्र में पंचायत अनुसूचित क्षेत्र विस्तार अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम के तहत समन्वय से वनवासियों के हित में साझा जल-जंगल के बेहतर प्रबंधन से कार्य किया जाएगा। इस संबंध में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में पेसा और एफआरए टास्क फोर्स समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में जल, जंगल, जमीन के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन छत्तीसगढ़ राज्य हो तथा वनवासियों के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन हो इस संबंध में मुख्य सचिव ने विभागाीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि सभी पात्र व्यक्तियों को वन अधिकार अधिनियमों के अनुसार वन संसाधन अधिकार पत्र दिए जायें। बैठक में वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के क्रियान्वयन के संबंध में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए।
टास्क फोर्स की बैठक में छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, प्रावधान एवं क्रियान्वन की स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की गई। इसी तरह से वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत राज्य में प्राप्त निराकृत एवं लंबित दावों, आवेदनों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन के अधिकारों की मान्यता में हुई प्रगति तथा वन ग्रामों के राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तन की प्रगति की जानकारी विभागीय अधिकारियों ने दी।
बैठक में अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियमों के क्रियान्वयन की जानकारी का प्रस्तुतीकरण किया गया। इसी तरह से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ पेसा नियम के क्रियान्वयन के संबंध में भी प्रस्तुतिकरण दिया गया।
बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, पीसीसीएफ अरूण पाण्डेय, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अन्य अधिकारी शामिल हुए।
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां ग्राहक बनकर पहुंचे शातिर चोर ने दिनदहाड़े ज्वेलर्स दुकान में हाथ साफ कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच पड़ताल शुरु कर दी है।
पढ़िए पूरी खबर
पूरा मामला नगरी थाना क्षेत्र के नगरी बाजार स्थित नवकार ज्वेलर्स का है। बताया जा रहा है कि आरोपी बड़ी ही चालाकी से दुकान में दाखिल हुआ और सोने की ईयर रिंग दिखाने की बात कहने लगा। दुकानदार को क्या पता था कि ये ग्राहक नहीं बल्कि एक शातिर चोर है।
सोने के ईयर रिंग लेकर हुआ फरार
इसी बीच जैसे ही दुकानदार का ध्यान थोड़ा भटका आरोपी ने मौके का फायदा उठाकर काउंटर पर रखे 9 नग सोने के ईयर रिंग पर हाथ साफ कर दिया और पलक झपकते ही दुकान से फरार हो गया, जब दुकान के मालिक ने काउंटर पर रखे जेवरात को गिना तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन फानन में आसपास तलाश की गई, लेकिन तब तक आरोपी भीड़ का फायदा उठाकर फरार हो चुका था।
CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस
बताया जा रहा है कि चोरी हुए जेवरात की कुल कीमत 4 लाख 45 हजार रुपये आंकी गई है। घटना के बाद पीड़ित दुकान मालिक ने तत्काल नगरी थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर नगरी पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है और दुकान में लगे CCTV फुटेज को खंगाल रही है।
व्यापारी वर्ग में दहशत का माहौल
पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा। फिलहाल इस घटना के बाद नगरी के व्यापारी वर्ग में दहशत का माहौल है। अब देखना होगा कि नगरी पुलिस इस शातिर चोर को कब तक सलाखों के पीछे पहुंचा पाती है।
छत्तीसगढ़ में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी, छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए 57 करोड़ का बजट
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की दी जानकारी
रायपुर-- उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने आज प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों, गतिविधियों, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने, खेल अधोसंरचना की मजबूती, महिला खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करने तथा खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के तहत 57 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान रखा गया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और उप संचालक रश्मि ठाकुर भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में मौजूद थीं।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी चल रही है। राज्य के खेल अकादमियों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मुहैया कराने 14 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए पटियाला भेजा गया है। उन्होंने बताया कि खेल गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए राज्य शासन ने 6 नए जिलों गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में खेल अधिकारी के पदों का सृजन किया गया है। विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 44 प्रशिक्षकों, 4 जिला खेल अधिकारियों, 23 सहायक ग्रेड-3 और 8 वार्डन्स की भर्ती प्रक्रियाधीन है।
साव ने बताया कि राज्य में ज्यादा से ज्यादा बच्चे एवं युवा खेल के मैदानों में पहुंचे, इसके लिए सरकार सक्रियता और गंभीरता से काम कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के समय केवल 4 करोड़ रुपए के बजट वाले खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 304 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। दूरस्थ आदिवासी वनांचलों को खेल की मुख्य धारा से जोडऩे की अभिनव पहल करते हुए पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक के आयोजन के साथ ही इस साल से सरगुजा ओलंपिक भी राज्य में शुरु किया गया है। देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शानदार मेजबानी ने छत्तीसगढ़ को देश के खेल मानचित्र में प्रतिष्ठित किया है।
रायपुर। राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ की बढ़ती धाक के मद्देनजर रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में खेलों और खिलाडिय़ों के विकास के लिये कमर कसते हुए आज उपमुख्यमंत्री व खेल मंत्री अरुण साव नेबड़ा फैसला लेते हुए सूबे के छह नए जिलों में जिला खेल अधिकारी के पदों पर नियुक्ति की स्वीकृति दे दी गई है। इन नियुक्तियों से स्थानीय स्तर पर खेल गतिविधियों के संचालन और खिलाडिय़ों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।जिन जिलों में जिला खेल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी उनमें मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सक्ती, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही शामिल हैं। मंगलवार को पत्रकार वार्ता में यह जानकारी उपमुख्यमंत्री व खेल मंत्री अरुण साव ने दी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और सरकार खेल अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि नवा रायपुर और जशपुर में करीब 67 करोड़ रुपये की लागत से तीरंदाजी अकादमी का निर्माण कार्य जारी है, जिससे प्रदेश के खिलाडिय़ों को आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी। खेल मंत्री साव ने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन की शुरुआत की है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें प्रशिक्षण देना और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना है।14 प्रशिक्षकों को आधुनिक खेल प्रशिक्षण के लिए पटियाला भेजा गया है, जहां वे नवीनतम तकनीकों और खेल विज्ञान का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
प्रदेश के खिलाडिय़ों को उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ में जल्द ही हॉकी लीग का आयोजन किया जाएगा, जिससे प्रदेश के हॉकी खिलाडिय़ों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच मिलेगा और खेल संस्कृति को और मजबूती मिलेगी।
00 जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर विशेष जोर, स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता गतिविधियां जारी
रायपुर। हर नवजात को जीवन की स्वस्थ और सुरक्षित शुरुआत मिले, इसी उद्देश्य के साथ प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्ताहभर अस्पतालों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा समुदाय स्तर पर विविध जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से माताओं, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व तथा उसके वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना उसके स्वस्थ विकास की सबसे मजबूत नींव है। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह संक्रमण से बचाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा कुपोषण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छह माह तक केवल स्तनपान कराने के बाद शिशु को उम्र के अनुरूप ऊपरी आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।
स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद मां के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होता है, कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है तथा मां और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध भी अधिक मजबूत बनता है। विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती एवं धात्री माताओं की काउंसलिंग, समूह चर्चा, स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, प्रश्नोत्तर कार्यक्रम तथा स्तनपान संबंधी व्यवहारिक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्यकर्मी माताओं को सही स्तनपान तकनीक, नवजात की देखभाल तथा स्तनपान से जुड़े सामान्य भ्रमों के वैज्ञानिक समाधान भी बता रहे हैं।
स्तनपान को केवल मां की जिम्मेदारी न मानकर पूरे परिवार की साझा जिम्मेदारी समझें। परिवार का सहयोग, सकारात्मक वातावरण और सही जानकारी ही प्रत्येक नवजात को स्वस्थ जीवन की बेहतर शुरुआत दे सकती है। जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक सुधार लाया जा सकता है तथा कुपोषण मुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया जा सकता है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से एक ही जगह पर जमे अधिकारी-कर्मचारी बदले जाएंगे। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग, छग शासन के सचिव अविनाश चंपावत ने आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक, मंत्रालय से लेकर कलेक्टर ऑफिस तक तीन साल से एक ही जगह पर काम कर रहे अधिकारी-कर्मचारी बदले जाएंगे। अगर किसी को रोकना बहुत जरूरी है तो कारण बताना होगा।
आदेश में लिखा है कि राज्य के विभिन्न विभागों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों, संभागीय आयुक्त कार्यालयों, कलेक्टर कार्यालयों तथा अधीनस्थ कार्यालयों में पदस्थ कतिपय अधिकारी एवं कर्मचारी लंबे समय से एक ही स्थान अथवा एक ही कार्य-पटल पर कार्यरत हैं। कर्मचारियों की कार्य क्षमता में वृद्धि एवं उनके समग्र विकास के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें कार्यालय में संपादित होने वाले सभी प्रकार के कार्यों का कार्यरत रहते हुए व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। इससे वे विभिन्न कार्य प्रक्रियाओं, नियमों एवं कार्यालयीन व्यवस्थाओं से भली-भांति परिचित होते हैं, जिससे उनकी दक्षता, कार्यकुशलता में निरंतर वृद्धि होती है। अतः कर्मचारियों को समय-समय पर विभिन्न कार्यों में सहभागिता एवं प्रशिक्षण का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए, ताकि उक्त उद्देश्य की प्रभावी रूप से पूर्ति सुनिश्चित की जा सके। अतएव प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही, कार्यकुशलता एवं सुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा निम्नानुसार निर्णय लिया जाता है।
- राज्य के सभी विभागों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों, संभाग आयुक्त कार्यालयों, कलेक्टर कार्यालयों एवं अधीनस्थ कार्यालयों में पदस्थ अधिकारी एवं कर्मचारियों के कार्य-पटल का प्रत्येक तीन वर्ष में अनिवार्य रूप से परिवर्तन किया जाए।
- कार्य-पटल परिवर्तन करते समय संबंधित अधिकारी/कर्मचारियों की प्रशासनिक आवश्यकता, कार्य की प्रकृति एवं कार्यालयीन हित का समुचित ध्यान रखा जाए।
- विशेष परिस्थितियों में यदि किसी अधिकारी/कर्मचारी को उसी कार्य-पटल पर बनाए रखना आवश्यक हो तो सक्षम प्राधिकारी के लिखित एवं कारणयुक्त अनुमोदन के उपरांत ही ऐसा किया जाए।
- समस्त विभागाध्यक्ष एवं कार्यालय प्रमुख यह सुनिश्चित करेंगे कि इस परिपत्र के प्रावधानों का समयबद्ध एवं प्रभावी अनुपालन किया जाए।
- इस संबंध में आवश्यक अभिलेख एवं कार्य-पटल परिवर्तन का विवरण कार्यालय स्तर पर संधारित किया जाए।
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00 खाद्य मंत्री ने गरियाबंद में जिला स्तरीय जिला स्तरीय काम-काज की समीक्षा की
रायपुर। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण तथा गरियाबंद जिले के प्रभारी मंत्री दयालदास बघेल की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्टर सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। मंत्री बघेल ने बैठक में खनिज विभाग की समीक्षा के दौरान कहा कि जिले में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने रेत, मुरुम, पत्थर सहित अन्य गौण खनिजों के अवैध कारोबार पर सख्ती से नियंत्रण रखने तथा नियमित जांच एवं कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में प्रभारी मंत्री बघेल ने राजस्व प्रकरणों के त्वरित एवं समय-सीमा में निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व विभाग का समीक्षा करते हुए कहा कि खाता विभाजन, नामांतरण, सीमांकन, बंदोबस्त त्रुटि सुधार, न्यायालयीन प्रकरण एवं डायवर्सन संबंधी मामलों का गुणवत्तापूर्ण और शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने लंबित एनओसी प्रकरणों का भी समयबद्ध निराकरण करने तथा अनावश्यक विलंब नहीं होने देने के सख्त निर्देश दिए। बैठक में राजिम विधायक रोहित साहू, कलेक्टर बीएस उइके, पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर, वनमण्डलाधिकारी शशिगानंदन के, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित थे।
मंत्री बघेल ने ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवासों को शीघ्र पूर्ण कराने, भूमिहीन परिवारों को स्वीकृत आवासों की प्रगति पर नियमित निगरानी रखने तथा व्यक्तिगत शौचालयों का शत-प्रतिशत निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष बल देते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अधिक से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर बड़े कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। जहॉ विभागीय अधिकारी बैंक एवं उनके मंशा अनुरूप आजीविका कार्यों को फार्म भराकर उन्हें आजीविका उपलब्ध कराने के लिए ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकरियों को निर्देशित किया कि जिला, ब्लॉक एवं पंचायत स्तर पर किसी भी प्रकार के शासकिय कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, तो जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से बताएं। साथ ही विभागीय सामग्रियों का वितरण भी जनप्रतिनिधियों को कराएं। उन्होंने आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने, हस्तशिल्प, मसाला प्रसंस्करण, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मशरूम उत्पादन तथा अन्य स्वरोजगार गतिविधियों का विस्तार एवं उनके लिए बाजार उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के निर्माणाधीन सड़क, भवन तथा अन्य अधोसंरचना कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी कार्य गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।
00 राज्य सरकार की पहल से छात्राओं को मिला सुरक्षित और सुगम आवागमन,
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को विद्यालय से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में संचालित सरस्वती साइकिल योजना छात्राओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना के तहत बलरामपुर जिले में कक्षा 9वीं की 120 छात्राओं को निशुल्क साइकिल वितरित की गई, जिससे अब उनकी पढ़ाई का सफर अधिक सुरक्षित, आसान और समयबद्ध हो सकेगा।
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बलरामपुर में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं को साइकिल प्रदान की गई। साइकिल प्राप्त करते ही छात्राओं के चेहरों पर आत्मविश्वास और खुशी साफ दिखाई दी।
कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष लोधीराम एक्का ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूरी, आर्थिक कठिनाई या संसाधनों की कमी कभी भी बेटियों की शिक्षा में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि सरस्वती साइकिल योजना विशेष रूप से दूरस्थ अंचलों की छात्राओं के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। इससे वे समय पर विद्यालय पहुंच सकेंगी, सुरक्षित आवागमन कर सकेंगी और पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे पाएंगी।
विद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि आठवीं के बाद विद्यालय की दूरी कई छात्राओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती थी। कई बेटियों को प्रतिदिन 4 से 5 किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय पहुंचना पड़ता था, जिससे उनकी नियमित उपस्थिति और पढ़ाई प्रभावित होती थी। साइकिल मिलने से अब उनकी उपस्थिति में सुधार होगा और पढ़ाई के लिए अधिक समय मिल सकेगा।
ग्राम पिण्डारा की छात्रा कोमल शर्मा ने बताया कि पहले विद्यालय पहुंचने में काफी समय और ऊर्जा खर्च हो जाती थी। अब साइकिल मिलने से वह समय पर विद्यालय पहुंच सकेगी और पढ़ाई पर पहले से अधिक ध्यान दे पाएगी।
वहीं ग्राम ओबरी की छात्रा राधिका ने कहा कि विशेषकर बारिश के दिनों में विद्यालय पहुंचना बहुत कठिन होता था। साइकिल मिलने से अब उसका विद्यालय आना-जाना सुरक्षित और सुविधाजनक हो गया है। उसने मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने माता-पिता, विद्यालय तथा जिले का नाम रोशन करने का संकल्प भी व्यक्त किया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
00 कार्टून और कैरिकेचर के माध्यम से बस्तर की सकारात्मक पहचान को मिलेगी नई दिशा
रायपुर। बस्तर की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से नई पहचान देने के उद्देश्य से जगदलपुर में आयोजित ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कैनवास कार्यशाला में स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतारकर रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
विशेषज्ञों ने सिखाईं कार्टून और कैरिकेचर की तकनीकें
कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ कार्टूनिस्टों और कला विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर बनाने की बुनियादी तकनीकें सिखाईं। उन्होंने बताया कि किसी भी चित्र की अच्छी शुरुआत सही सर्किल बनाने से होती है। इसके साथ ही रफ स्केच, आउटलाइन, रंगों के चयन और चेहरे के भावों को प्रभावी ढंग से चित्रित करने के तरीके भी बच्चों को सरल भाषा में समझाए गए।
प्रशिक्षण से बढ़ा बच्चों का आत्मविश्वास
स्वामी आत्मानंद स्कूल के छात्र वंश साहू ने बताया कि इस प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और कला के प्रति उनकी रुचि और मजबूत हुई है।
चरणबद्ध मार्गदर्शन से आसान हुई चित्रकला
सेजेस शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 की छात्राएं भारती पांडे और पूनम ध्रुव ने कहा कि पहले उन्हें चित्र बनाने की सही शुरुआत की जानकारी नहीं थी, लेकिन विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से अब वे आसानी से कार्टून और कैरिकेचर बना पा रही हैं।
कल्पनाशीलता को मिली नई दिशा
सेजेस नानगुर की छात्राएं अंजलि नाग और नैना मरकाम तथा सेजेस जगदलपुर की छात्रा अक्षिता बाजपेई ने बताया कि वरिष्ठ कलाकारों का मार्गदर्शन उनकी कल्पनाशीलता को नई दिशा देगा और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।
बस्तर की सकारात्मक छवि को मिलेगा नया मंच
यह कार्यशाला बच्चों की प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ कला के माध्यम से बस्तर की शांतिपूर्ण, रचनात्मक और मुस्कुराती हुई पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। इससे बस्तर की सकारात्मक छवि को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है।
रायपुर,04 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों के बजाय सभी नागरिकों को संविधान के एक ही दायरे में लाने के उद्देश्य से गठित विशेष समिति ने अब आम जनता और विभिन्न संगठनों से उनके सुझाव और अभिमत आमंत्रित किए हैं। राज्य के नागरिक यह बता सकते हैं कि राज्य में आने वाला नया कानून कैसा होना चाहिए।
राज्य सरकार द्वारा गठित यह 5-सदस्यीय समिति छत्तीसगढ़ में UCC की आवश्यकता और उसकी रूपरेखा का अध्ययन कर रही है। इसके साथ ही समिति व्यक्तिगत सिविल मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों व व्यवस्थाओं की भी व्यापक समीक्षा करेगी।
समिति ने शासकीय, गैर-शासकीय संगठनों, सामाजिक समूहों, धार्मिक संस्थाओं, समुदायों और राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे 15 अक्टूबर 2026 तक अपने विचार, राय और अभ्यावेदन अनिवार्य रूप से जमा करा दें।
*UCC लागू करने वाला देश का 5वां राज्य बनेगा छत्तीसगढ़*
यूसीसी लागू करने में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था। उत्तराखंड के अलावा गोवा, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी यूसीसी लागू किया जा चुका है।
राज्य में यूसीसी के क्रियान्वयन व सुझावों के लिए उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 5-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
राज्य के नागरिक और संगठन 15 अक्टूबर तक निम्नलिखित माध्यमों से अपने सुझाव भेज सकते हैं:
*ई-मेल (E-mail):* *ucc-chhattisgarh@cg.gov.in*
*वेब पोर्टल (Web Portal):*
*[https://ucc.cgstate.gov.in/](https://ucc.cgstate.gov.in/)*
*डाक द्वारा (Postal Address):*
*कार्यालय समान नागरिक संहिता समिति,न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, कमरा नंबर-201,रायपुर, छत्तीसगढ़ – 492001
रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 2024 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों की फील्ड ट्रेनिंग के लिए पहली पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग द्वारा 3 अगस्त 2026 को जारी आदेश के अनुसार, प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पांच प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रदेश के विभिन्न वनमंडलों में उप वनमंडलाधिकारी (SDO Forest) के रूप में पदस्थ किया गया है।

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार, 5 अगस्त 2026 को आयोजित होगी। यह बैठक पूर्वाह्न 11:30 बजे मंत्रालय महानदी भवन स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष में होगी।
बैठक में राज्य के विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिए जाने की संभावना है। साथ ही प्रदेश के विकास, प्रशासनिक कार्यों और जनहित से जुड़े अहम विषयों पर भी मंत्रिपरिषद विचार-विमर्श करेगी। बैठक के बाद लिए गए फैसलों की आधिकारिक जानकारी जारी की जाएगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) ने गृह (पुलिस) विभाग अंतर्गत सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग और प्लाटून कमांडर परीक्षा-2024 के संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर जारी कर दिए हैं। संशोधित मॉडल उत्तर आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.psc.cg.gov.in पर अपलोड कर दिए गए हैं।
341 पदों पर होनी है भर्ती
उल्लेखनीय है कि उक्त भर्ती परीक्षा के तहत कुल 341 पदों पर भर्ती की जानी है। इसके लिए 12 जुलाई को राज्य के 33 जिलों के 183 परीक्षा केंद्रों में लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी।
दावा-आपत्तियों के बाद जारी हुए संशोधित उत्तर
परीक्षा के मॉडल उत्तर 13 जुलाई को जारी कर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 21 जुलाई 2026 निर्धारित थी।
आयोग ने निर्धारित अवधि में प्राप्त सभी दावा-आपत्तियों का विषय विशेषज्ञ समिति से परीक्षण कराया। विशेषज्ञों की अनुशंसा एवं सक्षम परीक्षण के आधार पर संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर तैयार किए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन्हीं अंतिम मॉडल उत्तरों के आधार पर अभ्यर्थियों की ओएमआर उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाएगा।
रायपुर: कबीरधाम जिले के भोरमदेव मंदिर चौरा में आयोजित पांच दिवसीय संभागीय सरस मेला का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा किया गया। इस दौरान स्व-सहायता समूहों की लखपति दीदियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि संभागीय सरस मेला से ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार को एक नई दिशा मिलती है तथा यह आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होता है।
सरस मेला में स्वदेशी, प्राकृतिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी सह विक्रय हेतु संभागीय सरस मेला समूह की दीदियों के लिए सफलता के द्वार खोलेगा। संभागीय सरस मेला के उद्घाटन के दौरान अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग बिसेसर पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य राम कुमार भट्ट, वीरेंद्र साहू, लोकचंद साहू, संतोष पटेल, विदेशी राम धुर्वे, कलेक्टर गोपाल वर्मा, सीईओ जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक जिले के अधिकारी गण, स्व सहायता समूह की दीदियों सहित ग्रामीण उपस्थित रहे।
मेले में लगे स्टालों का उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अवलोकन किया तथा महिला समूह से उनके उत्पादन के विषय में विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान स्टॉल से खरीदी कर महिला समूह का हौसला बढ़ाया तथा उन्हें सफल व्यवसाय की शुभकामनाएं दी। संभागीय सरस मेला के संबंध में कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बताया कि मेले का आयोजन सावन माह में किया गया है जो 06 अगस्त की शाम तक चलेगा।
विश्व प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर की पावन एवं ऐतिहासिक धरा पर आयोजित यह मेला केवल खरीदारी का अवसर नहीं बल्कि ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 50 से अधिक स्टॉलों के द्वारा एक ही छत के नीचे ताज़े एवं पौष्टिक मिलेट उत्पाद, स्वादिष्ट घरेलू खाद्य सामग्री, वनोपज आधारित अन्य स्थानीय उत्पादन मिल रहा है। हस्तशिल्प एवं हथकरघा सामग्री बाँस एवं बेंत से बने आकर्षक उत्पाद,घरेलू सजावटी वस्तुएँ, पारंपरिक परिधान तथा अनेक प्रकार के अन्य उपयोगी स्वदेशी सामग्रियों का विशाल भंडार विक्रय के लिए उपलब्ध होगा।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल ने बताया की समूह की दीदियों द्वारा निर्मित सामग्रियों को बाजार उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से संभागीय सरस मेला का आयोजन हो रहा है। प्रत्येक खरीदी पर ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वदेशी भारत का संकल्प होगा। जैविक खाद्य सामग्री, आकर्षक सजावट के सामान सहित अन्य उपयोगी वस्तु कम दर पर उपलब्ध है। सभी जिलेवासियों से अपील की जाती है कि वह सावन के इस पवित्र महीने में बाबा भोरमदेव के दर्शन के साथ ही संभागीय सरस मेला का लाभ उठाए।
प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तरुणा साहू और स्कूली बच्चों के शिव तांडव की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तरुणा साहू के पंडवानी गायन ने सभी का मन मोह लिया। द्रोपदी चीर हरण सहित अन्य प्रसंगो की मार्मिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को उस काल खण्ड की याद दिला दी। इसी तरह स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल बोड़ला के बच्चों द्वारा शिव तांडव का नृत्य प्रस्तुत किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने सरस मेला में उपस्थित सभी लोगों का खूब मनोरंजन किया।
उल्लेखनीय है कि संभागीय सरस मेला में दुर्ग संभाग के कबीरधाम सहित जिला दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, बेमेतरा, मोहला- मानपुर- अंबागढ़ चौकी एवं खैरागढ़- छुईखदान- गंडई के अतिरिक्त अन्य ज़िलों की महिला स्व सहायता समूह की दीदियों द्वारा उत्पादित आकर्षक सामग्रियों की प्रदर्शनी सह विक्रय के लिए 50 स्टॉल गए हैं। इन स्टॉलों में विभिन्न जैविक खाद्य सामग्री जैसे हल्दी, मिर्ची, धनिया, कोदो- कुटकी, कटहल, आम, नीबू महुआ के आचार, पापड़, ब्लैक राइस के साथ अगरबत्ती, दोना-पत्तल,बैग, सिंगार के सामान, हैंड बैग सहित अनेको आकर्षक सामग्री महिला समूह द्वारा बनाये गए है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदलने वाला है. पूरे प्रदेश में आज से बारिश और मेघगर्जन की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा हुई. वहीं बलरामपुर जिले के एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा हुई। सर्वाधिक अधिकतम तापमान राजनन्दगांव 34.7 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस पेण्ड्रा रोड में दर्ज किया गया। रायपुर में तापमान बढ़ने के बाद उमस भरी गर्मी परेशान कर रही है।
रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ?
राजधानी रायपुर में आज आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। मौसम विभाग ने बादल गरजने-चमकने के साथ बारिश होने की संभावना जताई है। अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने के आसार हैं।
रघुनाथनगर में आठ सेमी बारिश दर्ज
प्रदेश में सोमवार को कई इलाकों में पानी गिरा। रघुनाथनगर में 8 सेंटीमीटर, वाड्रफनगर में 7, खड़गांव में 5, रामानुजगंज, रामचन्द्रपुर में 4-4, कोटाडोल, चिरमिरी, बलरामपुर में 2-2 सेंटीमीटर वर्षा हुई।
मौसम विभाग ने बताया कि औसत समुद्र तल पर मॉनसून द्रोणिका बीकानेर, दिल्ली, लखनऊ और पटना से होकर मणिपुर की ओर पूर्व दिशा में बढ़ रही है और औसत समुद्र तल से 0.9 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैली हुई है। इनके प्रभाव से 4 अगस्त को प्रदेश में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना के माध्यम से प्रदेश में घुमन्तू एवं निराश्रित पशुधन के संरक्षण और सुव्यवस्थित व्यवस्थापन की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाते हुए राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने तथा शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल किया है, जिससे भविष्य में प्रदेशभर में गौधामों का विस्तार और अधिक गति से हो सकेगा।
घुमन्तू एवं निराश्रित पशुधन के व्यवस्थापन के लिए राज्य शासन ने 6 अगस्त 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को गौधाम योजना की स्वीकृति प्रदान की थी। योजना के तहत ऐसी शासकीय भूमि एवं गौठानों का चयन किया जाता है, जहां आवश्यक अधोसंरचना उपलब्ध हो तथा जो राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित हों। इन गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, एनजीओ, एफपीओ, ट्रस्ट तथा अब संशोधित नियमों के अनुसार ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया जा रहा है।
गौधाम की स्थापना के लिए कलेक्टर एवं जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा, पंचायत का अनापत्ति प्रमाण-पत्र तथा भौतिक सत्यापन जैसी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। इसके बाद आवेदन छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजे जाते हैं, जहां क्रियान्वयन समिति द्वारा प्रत्येक तीन माह में विस्तृत समीक्षा कर शासन को प्रशासनिक स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा जाता है। स्वीकृति, अनुबंध एवं पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से गौधामों में घुमन्तू पशुओं का व्यवस्थापन सुनिश्चित किया जाता है।
पशुधन विकास विभाग द्वारा 30 जुलाई 2026 को नियमों में संशोधन कर गौधाम संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने तथा शहरी गौठानों को योजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए व्यापक आधार तैयार हो रहा है।
योजना के अंतर्गत अब तक प्राप्त 408 आवेदनों में से 151 गौधामों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण हो गया है तथा 42 गौधामों में लगभग 5,109 निराश्रित पशुधन का संरक्षण एवं व्यवस्थापन किया जा रहा है। शेष स्वीकृत गौधामों में भी पंजीयन एवं संचालन की प्रक्रिया जारी है।
राज्य गौ सेवा आयोग ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा स्वीकृत योजना में गौधामों की कोई निर्धारित लक्ष्य संख्या तय नहीं है। हालांकि, गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष की परिकल्पना के अनुसार प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में 10 उत्कृष्ट गौठानों का चयन कर लगभग 1,460 गौधाम स्थापित करने की दिशा में चरणबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य निराश्रित एवं घुमन्तू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है। जिलों से आवश्यकता के अनुरूप लगातार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई जारी है। संशोधित प्रावधानों के बाद आने वाले समय में प्रदेश में गौधामों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
00 प्रत्येक ग्रामसभा को मिलेगी 15 लाख की स्वीकृति
00 आदिम जाति विभाग द्वारा सम्बन्धित जिलों के कलेक्टरों को पत्र जारी
रायपुर। अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 160 ग्रामों का चयन निर्धारित मापंदडों के आधार पर किया जाएगा। इन ग्रामों में सामुदायिक वन संसाधन (सीएफआर) के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन के लिए सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना (सीएफआरएमपी ) तैयार कर लागू की जाएगी। अभियान के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामसभा को सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए 15 लाख रूपए की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
आदिम जाति विभाग द्वारा कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा गया है कि योजना के तहत प्रत्येक चयनित ग्रामसभा में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा, जो ग्रामसभा के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन और संचालन की जिम्मेदारी निभाएगी। इसके लिए ग्रामसभा के नाम पर राष्ट्रीयकृत बैंक में सिंगल करंट अकाउंट भी खोला गया है। पत्र के माध्यम से कहा गया है कि राज्य सरकार ने जिलों से ऐसे 160 गांवों का चयन क्लस्टर आधारित और परस्पर जुड़े क्षेत्र के आधार पर प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए हैं, ताकि योजनाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
पत्र में कहा गया है कि योजना के प्रभावी संचालन के लिए राज्य सरकार तकनीकी सहयोगी, सिविल सोसायटी संगठनों तथा स्थानीय संस्थाओं की सेवाएं भी ले सकेगी। इन संस्थाओं की सेवाएं ग्रामसभा के प्रस्ताव एवं विधिवत अनुमोदन के बाद लिया जा सकेगा। ये संस्थाएं ग्रामसभा को सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजना तैयार करने, उसके क्रियान्वयन तथा निगरानी में सहयोग देंगी। आदिम जाति विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में बताया कि इस पहल से वन अधिकार अधिनियम-2006 का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन होगा, ग्रामसभाओं की भूमिका मजबूत होगी तथा सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और आजीविका संवर्धन को नई गति मिलेगी।
00 डीएमएफ से 19.65 लाख की लागत से उपलब्ध कराई गई आधुनिक एम्बुलेंस, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती
00 हर जीवन अनमोल, समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत : साय रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास से धरसींवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को नि:शुल्क एम्बुलेंस की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा विधायक अनुज शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में एम्बुलेंस के चालक को चाबी सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी सोच के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री साय ने धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी मरीज के लिए उपचार के शुरुआती क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से अनेक गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई एम्बुलेंस गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों तथा सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आकस्मिक घटनाओं में घायल लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य सुरक्षा का विश्वास भी मजबूत करेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाइयों की सुगम उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। उनका कहना था कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध समाज और विकसित राज्य की आधारशिला होते हैं, इसलिए जनस्वास्थ्य से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
इस अवसर पर धरसींवा विधानसभा के विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से एक आधुनिक एम्बुलेंस की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से लगभग 19 लाख 65 हजार रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से धरसींवा क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से मिल सकेंगी। उन्होंने बताया कि यह एम्बुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धरसींवा को सौंपी गई है, जहां से इसका संचालन किया जाएगा। यह सेवा चौबीसों घंटे क्षेत्रवासियों को उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पतालों तक सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंचाने में भी यह एम्बुलेंस अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
उल्लेखनीय है कि धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। डीएमएफ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह नि:शुल्क एम्बुलेंस क्षेत्र के हजारों नागरिकों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
00 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांग शब्द देकर सम्मान और आत्मगौरव का नया भाव दिया : मुख्यमंत्री
00 प्रोजेक्ट सहारा के तहत 3.58 करोड़ रुपये के सहायक उपकरणों का वितरण, 1739 दिव्यांगजन हुए लाभान्वित 00 बलबीर सिंह जुनेजा स्टेडियम के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण के लिए 7 करोड़ प्रदान करने की घोषणा
रायपुर। किसी भी संवेदनशील और विकसित समाज की पहचान इस बात से होती है कि वहां प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और आगे बढऩे का अधिकार मिले। दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी प्रतिभा, क्षमता तथा आत्मविश्वास को सही अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इसी सोच के साथ दिव्यांगजनों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक अपना योगदान दे सकें। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित प्रोजेक्ट सहारा के अंतर्गत दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगजनों के प्रति देश की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होंने केवल कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि उन्हें दिव्यांग कहकर सम्मान और आत्मगौरव का नया भाव भी दिया। यह परिवर्तन केवल शब्दों का नहीं, बल्कि समाज की सोच और दृष्टिकोण का परिवर्तन है। प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र को आत्मसात करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार भी दिव्यांगजनों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर इंडोर स्टेडियम के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण के लिए 7 करोड़ रुपये की राशि प्रदान किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना का विकास केवल खिलाडिय़ों के लिए ही नहीं, बल्कि ऐसे सामाजिक और जनहितकारी आयोजनों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल, ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, हियरिंग एड, कृत्रिम हाथ-पैर, वैशाखी, वॉकिंग स्टिक तथा अन्य आधुनिक सहायक उपकरण वितरित किए। उन्होंने हितग्राहियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि ये उपकरण केवल सहायता सामग्री नहीं हैं, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वावलंबन की नई शुरुआत हैं। इनकी सहायता से दिव्यांगजन शिक्षा, रोजगार, आवागमन और दैनिक जीवन के कार्यों में अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे तथा समाज की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जुड़ पाएंगे।
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम की शुरुआत में प्रदेशवासियों को सावन माह के प्रथम सोमवार की शुभकामनाएं देते हुए भगवान भोलेनाथ से प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सभी नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सेवा, करुणा और मानवता का संदेश देती है तथा समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की सहायता करना हम सभी का दायित्व है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर जिले में विशेष अभियान चलाकर दिव्यांगजनों की व्यापक स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 1600 से अधिक दिव्यांगजनों की पहचान की गई। इस महत्वाकांक्षी पहल के लिए भारत सरकार से 3 करोड़ 58 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत पहले ही 500 से 600 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित किए जा चुके हैं, जबकि आज 1000 से अधिक हितग्राहियों को विभिन्न उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। इस प्रकार कुल 1739 दिव्यांगजन प्रोजेक्ट सहारा के माध्यम से लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों को अधिक सम्मानजनक, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सर्वांगीण कल्याण के लिए सहायक उपकरण वितरण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण, कौशल विकास, पुनर्वास और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र दिव्यांगजन शासन की सुविधाओं से वंचित न रहे। उन्होंने सभी हितग्राहियों से शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में मोदी की गारंटी के अधिकांश संकल्पों को धरातल पर उतारा है। प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना, रामलला दर्शन योजना तथा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना जैसी अनेक योजनाओं ने समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को 29 किश्तों के माध्यम से अब तक 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य नागरिकों तक शासन की सेवाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से सेवा सेतु एप के माध्यम से 36 विभागों की 500 से अधिक सेवाएं घर बैठे उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे शिकायत दर्ज कराने और समयबद्ध समाधान प्राप्त करने की सुविधा भी नागरिकों को उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री साय ने रायपुर जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट धड़कन, प्रोजेक्ट सुरक्षा, प्रोजेक्ट रेडक्रॉस, प्रोजेक्ट दधीचि, प्रोजेक्ट जिंदगी मुस्कुराएगी, प्रोजेक्ट नि:क्षय मित्र, प्रोजेक्ट वंदन और प्रोजेक्ट गोल्डन आवर जैसे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन की ये पहलें संवेदनशील और जनकेंद्रित सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं नवाचारों की श्रृंखला में प्रोजेक्ट 'सहाराÓ दिव्यांगजनों के जीवन में नई आशा, नई सुविधा और नया आत्मविश्वास लेकर आया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट सरल एवं प्रोजेक्ट गोल्डन आवर का शुभारंभ भी किया तथा नवाचार से प्रगति पथ पर अग्रसर रायपुर कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया।
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रोजेक्ट सहारा के तहत वितरित किए जा रहे सहायक उपकरण दिव्यांगजनों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का वातावरण तैयार किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन केवल शारीरिक चुनौतियों का सामना करते हैं, उनकी प्रतिभा, क्षमता और हौसले किसी भी प्रकार से कम नहीं होते।
तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि प्रोजेक्ट सहारा केवल सहायक उपकरण वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्वावलंबन और सामाजिक समावेशन का अभियान है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में राज्य सरकार आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों के माध्यम से दिव्यांगजनों को समय-समय पर कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है, जिससे वे दक्ष होकर आत्मनिर्भर बनें और सम्मानजनक रोजगार से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि आज वितरित किए जा रहे सहायक उपकरण दिव्यांगजनों के लिए स्वतंत्र जीवन और नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगे।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का किया अवलोकन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी परियोजनाओं एवं नवाचारों से संबंधित स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर योजनाओं से प्राप्त लाभ की जानकारी ली तथा अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना का लाभ पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास सुशासन को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस अवसर पर विधायक सुनील सोनी, विधायक अनुज शर्मा, विधायक इंद्रकुमार साहू, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन कुमार अग्रवाल, प्रमुख सचिव समाज कल्याण शहला निगार, संभागायुक्त श्याम धावड़े, कलेक्टर गौरव सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में दिव्यांगजन तथा उनके परिजन उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल पर मिली आर्थिक राहत
रायपुर--मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, वन एवं बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार बीजापुर जिले में नक्सली हिंसा के 13 पीड़ितों को पुनर्वास नीति के तहत कुल 32 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।
यह सहायता उन नागरिकों के लिए स्वीकृत की गई है, जो नक्सली हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए हैं या स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे पीड़ितों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक जीवन और पुनर्वास का अवसर उपलब्ध कराना है।
इन पीड़ितों को मिलेगा लाभ
स्वीकृत सहायता राशि के अंतर्गत पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के दौरान क्रॉस फायरिंग में गंभीर रूप से घायल नंदू ओयाम और जिला कुंजाम, माओवादियों की मारपीट में घायल ईस्ता बोर्रा, बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल मितराम रावटे, आईईडी विस्फोट में घायल कोरसे संतोष, चिड़ेम कन्हैया और कविता कुड़ियम, माओवादियों की मारपीट से स्थायी रूप से दिव्यांग हुए इच्चामी सुदरू, तथा आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल या स्थायी रूप से दिव्यांग हुए राममूर्ति कारम, बबलू उर्फ मोहन कड़ती, गंगा कलमू, राजेश कुमार यादव और सोढ़ी मुकेश शामिल हैं।
डीबीटी के माध्यम से शीघ्र होगा भुगतान
कलेक्टर विश्वदीप ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत सहायता राशि का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से शीघ्र संबंधित हितग्राहियों के बैंक खातों में किया जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।
राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सली हिंसा से प्रभावित नागरिकों को राहत, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही है। यह पहल पीड़ित परिवारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और समर्पण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की 30 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि और आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति की घोषणा
ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव, बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री
रायपुर-- ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाली राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव का आज मुख्यमंत्री निवास में आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ज्ञानेश्वरी को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए उन्हें 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान प्रदेश की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प का सम्मान है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, कठोर परिश्रम और अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर ज्ञानेश्वरी ने न केवल देश के लिए पदक जीता, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की है। उनकी सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार को अपनी इस बेटी पर गर्व है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार ने उन्हें आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी उपलब्धि का सम्मान हो और प्रदेश के अन्य खिलाड़ी भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लासगो रवाना होने से पहले उन्हें ज्ञानेश्वरी से मिलने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने उनके उज्ज्वल प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी थीं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से भी उन्हें बधाई दी थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में उनका स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व और उत्सव का क्षण है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक खेल अधोसंरचना, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, बेहतर कोचिंग, आवश्यक संसाधन और हरसंभव प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रदेश का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक खिलाड़ी ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तिरंगा लहराएं तथा देश और प्रदेश का नाम विश्वभर में रोशन करें। ज्ञानेश्वरी यादव जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस दिशा में नई पीढ़ी का आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ज्ञानेश्वरी भविष्य में भी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें अवसर देना और उनकी उपलब्धियों का सम्मान करना सरकार की खेल नीति का महत्वपूर्ण आधार है। यही प्रयास आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगा।





























