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जशपुर जिले में सड़क सुदृढ़ीकरण को मिली बड़ी गति, 12.63 करोड़ स्वीकृत

जशपुर जिले में सड़क सुदृढ़ीकरण को मिली बड़ी गति, 12.63 करोड़ स्वीकृत

00 दो महत्वपूर्ण मार्गों के मजबूतीकरण एवं उन्नयन से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन होगा सुगम
00 किसानों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और आम नागरिकों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी, क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री साय का जताया आभार
रायपुर।
छत्तीसगढ राज्य में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत जिले के दो प्रमुख मार्गों के मजबूतीकरण एवं उन्नयन कार्यों के लिए 12 करोड़ 63 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन मार्गों के सुदृढ़ीकरण से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा।
स्वीकृत कार्यों के तहत शिवपुर से पत्थलगांव मार्ग के 9 किलोमीटर हिस्से के मजबूतीकरण के लिए 5 करोड़ 1 लाख रुपये तथा दुलदुला से चटकपुर- लोटापानी मार्ग, कुनकुरी के 18.6 किलोमीटर हिस्से के मजबूतीकरण के लिए 7 करोड़ 62 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन दोनों महत्वपूर्ण मार्गों के सुदृढ़ीकरण से बड़ी संख्या में ग्रामीणों को बेहतर सड़क सुविधा का लाभ मिलेगा। किसानों को कृषि उपज बाजार तक पहुंचाने, विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने तथा मरीजों और आम नागरिकों को स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा होगी। बेहतर सड़क संपर्क से यात्रा का समय कम होने के साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों की मुख्य मार्गों और बाजारों से कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।

जशपुर जिले में लगातार मजबूत हो रहा सड़क नेटवर्क
जशपुर जिले में ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क से जोडऩे के लिए सड़क निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। मजबूत सड़क नेटवर्क केवल आवागमन को सुगम बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, व्यापार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच को भी बेहतर बनाता है। सड़क अधोसंरचना के सुदृढ़ होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ ही शासन की विभिन्न योजनाओं और जनकल्याणकारी सेवाओं का लाभ भी दूरस्थ क्षेत्रों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से गांवों और प्रमुख बाजारों के बीच संपर्क मजबूत होगा तथा स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री साय का जताया आभार
इन दो महत्वपूर्ण मार्गों के मजबूतीकरण के लिए मिली स्वीकृति पर क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। ग्रामीणों ने कहा कि इन मार्गों के बेहतर होने से लंबे समय से आवागमन में आ रही परेशानियां दूर होंगी और लोगों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक यातायात की सुविधा मिलेगी। दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क से जोडऩे से क्षेत्रवासियों ने कहा कि सड़क किसी भी क्षेत्र के विकास की आधारभूत आवश्यकता है। इन मार्गों के सुदृढ़ीकरण से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं मजबूत होंगी तथा लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और बाजारों से बेहतर जुड़ाव मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सड़क अधोसंरचना के निरंतर विस्तार से जशपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को और अधिक गति मिलेगी।

CG – महिला को मृत समझकर कमरे में ताला लगाकर लौट गई पुलिस, 2 घंटे बाद खोला दरवाजा तो नजारा देख रह गई हैरान

CG – महिला को मृत समझकर कमरे में ताला लगाकर लौट गई पुलिस, 2 घंटे बाद खोला दरवाजा तो नजारा देख रह गई हैरान

 बेमेतरा। छत्तीसगढ़ बेमेतरा में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। इस घटना ने पुलिस को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। दरअसल एक महिला फांसी के फंदे पर झूल गई। पुलिस पहुंची। महिला को मृत समझ कर घर में ताला जड़ दिया और बाकी की कार्रवाई के लिए बाद में आने की बात कहते हुए वहां से निकल गया।

ज्योग्राफिक मैप्स और जीपीएस गाइड एक्सप्लोर करना

पुलिस जैसा सोच रही थी, हकीकत में वैसा कुछ भी नहीं हुआ। मर्ग कार्रवाई के लिए पुलिस जब तकरीबन दो घंटे बाद मौके पर पहुंची और कमरे का ताला खोलकर देखा तो पुलिस कर्मी भी दंग रहे गए। फांसी के फंदे पर लटकी महिला की सांसे चल रही थी। परिवार वाले उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां महिला को ICU में भर्ती कराया गया है। घटना से नाराज परिजनों और स्थानीय लोगों ने चक्काजाम कर दिया।

मकान मालिक के मुताबिक, महिला कुछ समय से तबीयत खराब होने के कारण परेशान थी। पड़ोसियों से घर में अनबन की बात भी सामने आई है। फिलहाल महिला ने आत्महत्या की कोशिश क्यों की, इसका कारण स्पष्ट नहीं है।

महिला बीते 10 सालों से किराए के मकान में अपने 3 बच्चों के साथ रह रही है। उसका पति किसान है। घटना के समय तीनों बच्चे स्कूल गए हुए थे। दोपहर तकरीबन 1:30 बजे महिला ने घर के अंदर रस्सी से फांसी लगाने की कोशिश की।

स्कूल से लौटे बच्चों ने दरवाजा बंद देखा तो उन्होंने मकान मालिक को सूचना दी। इसके बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई और पुलिस मौके पर पहुंची।

महिला को मृत समझकर कमरे में लगा दिया ताला

परिजनों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंची। महिला बेहोशी की हालत में पड़ी हुई थी। पुलिसकर्मियों ने महिला को मृत समझ लिया। इसके बाद कमरे में ताला लगा दिया गया और पंचनामा की कार्रवाई के लिए बाद में लौटने की बात कहकर थाने चले गए। दो घंटे बाद पुलिसकर्मी पंचनामा की कार्रवाई के लिए दोबारा मौके पर पहुंचे। जब कमरे का ताला खोला गया तो महिला की सांसें चल रही थीं। महिला को तत्काल निजी वाहन से अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे ICU में भर्ती कराया गया है। फिलहाल, उसका इलाज जारी है।

CG – महतारी वंदन योजना में फर्जीवाड़ा का खुलासा, सरकारी शिक्षिका और क्लर्क को मिल रहा था लाभ

CG – महतारी वंदन योजना में फर्जीवाड़ा का खुलासा, सरकारी शिक्षिका और क्लर्क को मिल रहा था लाभ

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना में बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक से बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जांच के दौरान 11 शिक्षक और बाबुओं के परिवारों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने पात्रता नहीं होने के बावजूद योजना का लाभ लिया। बताया जा रहा है कि शासकीय सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के परिवारों ने नियमों के विपरीत महतारी वंदन योजना की राशि हासिल की। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी है।

बीईओ के माध्यम से संबंधित कर्मचारियों को कार्रवाई के दायरे में लाया गया है। अब तक योजना के तहत ली गई राशि की रिकवरी की जाएगी, जिससे सरकारी योजना में अपात्र लाभ लेने वालों पर शिकंजा कस गया है।

महतारी वंदन योजना में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश की सभी महिलाओं को माह में एक हजार रुपए देने का निर्णय लिया गया है। इसका लाभ शासकीय सेवक वाले नहीं उठा सकते। इसके बाद भी जिले के बिल्हा ब्लॉक के शिक्षा विभाग में शिक्षक और बाबू के पद पर कार्यरत शासकीय सेवक नियमों को ताक पर रखकर महतारी वंदन योजना का लाभ उठा रहे थे। इसमें कुछ शिक्षिकाएं और महिला बाबू भी उसका लाभ ले रही थीं। एकीकृत बाल विकास परियोजना, बिल्हा की जांच में 11 ऐसे अपात्र हितग्राहियों के नाम सामने आए हैं। इसलिए विभाग ने ऐसे शासकीय सेवकों की जानकारी बीईओ, बिल्हा को भेज़ी है। अपात्र महिलाओं को चिह्नित किया गया है, जिनके पति या वे स्वयं शासकीय सेवा शिक्षक, वर्ग 2 और सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। इन अपात्र हितग्राहियों के खातों में गलत तरीके से भेजी गई कुल 1,24,000 रुपए की राशि वसूली करने कहा गया है।

अपात्र हितग्राही ले रहे थे योजना का लाभ

रत्ना क्षत्री पति विनोद कुमार क्षत्री शासकीय सेवक ग्रेड 2, गंगा बाई पति केसर सिंह शासकीय सेवक ग्रेड 2, रमा वर्मा पति रवींद्र वर्मा शिक्षक वर्ग 2, दिनेश्वरी कुर्रे पति शैलेश कुमार कुर्रे शिक्षक वर्ग 2, कुसुम यादव पति राजकुमार यादव शिक्षा कर्मी, गोदावरी कौशिक पति सुरेश कौशिक शासकीय शिक्षक, रामेश्वरी साहू पति राजेश साहू शासकीय सेवक ग्रेड 2, कीर्ति पाटले पति संतोष पाटले शासकीय सेवक ग्रेड 1, सविता कुर्रे पति गोरेलाल कुर्रे सहायक शिक्षक, अमर ज्योति शांडिल्य पति विनोद कुमार सहायक शिक्षक और लक्ष्मी पति परविंदर कुमार शासकीय शिक्षक शामिल हैं।

बीईओ ने जारी किया वसूली आदेश

बिल्हा बीईओ भूपेंद्र कौशिक ने कहा कि शासकीय शिक्षक और बाबू होने के बाद भी शासन की महतारी योजना के नाम पर प्रतिमाह रुपए लेने वालों की पहचान महिला एवं बाल विकास विभाग ने की है। उनसे वसूली का आदेश जारी किया गया है। इसके बाद भी राशि जमा नहीं करने पर वेतन से रिकवरी की जाएगी।

वनांचल में रेशम की चमक, नारायणपुर में टसर योजना से संवर रही ग्रामीणों की तकदीर…..

वनांचल में रेशम की चमक, नारायणपुर में टसर योजना से संवर रही ग्रामीणों की तकदीर…..

 रायपुर: वनांचल क्षेत्रों में रेशम उत्पादन ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार का एक प्रमुख साधन है। यह पारंपरिक व्यवसाय कम लागत में अधिक आय देता है। इससे पलायन रुकता है और महिलाओं को घर के पास काम मिलता है। वन आधारित यह उद्योग आदिवासियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाता है।

छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में रेशम उत्पादन ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक स्वावलंबन और स्थानीय स्तर पर रोजगार का एक मजबूत आधार बनकर उभर रहा है। नारायणपुर जिले में रेशम विभाग की टसर योजना के माध्यम से वनांचल के ग्रामीण अब पारंपरिक आजीविका के साथ-साथ रेशम उत्पादन को अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे हैं।

​41 हेक्टेयर में हरियाली और रोजगार का संगम

नारायणपुर क्षेत्र में 41 हेक्टेयर में फैले टसर अर्जुना पौधारोपण के जरिए ग्रामीण हितग्राहियों को वर्षभर आजीविका के साधन मिल रहे हैं। रेशम विभाग ग्रामीणों को न केवल टसर पौधारोपण और संसाधनों की सुविधा दे रहा है, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक एवं तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहा है। योजना के तहत हितग्राहियों को मात्र 2 रुपये प्रति DFLS (कृमि अंडे) की रियायती दर पर सामग्री दी जाती है, जिससे कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव हो पा रहा है।

​वित्तीय वर्ष 2025-26 में  4.71 लाख से अधिक कोसाफल उत्पादन

तीन फसलों के दौरान कुल 10,400 DFLS का सफलतापूर्वक कृमिपालन किया गया। जिसमें क्षेत्र के 24 हितग्राहियों ने सामूहिक प्रयास से कुल 4,71,593 नग कोसाफल का रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया। उत्पादित कोसाफल के विक्रय से हितग्राहियों को कुल 17 लाख 56 हजार 516 रुपये की आय हुई। विभाग द्वारा पूरी राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों (DBT) में भेजी गई, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा

टसर रेशम योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ग्रामीणों को उनके ही घर और जंगल के आसपास रोजगार उपलब्ध कराती है। अर्जुना पौधों की देखरेख से लेकर कृमिपालन और कोसाफल संग्रहण तक, पूरा परिवार इस प्रक्रिया से जुड़कर अपनी आय में बढ़ोतरी कर रहा है। नारायणपुर जैसे दुर्गम वनांचल में यह पहल पलायन रोकने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही है।

BREAKING: छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 9 अधिकारियों के हुए तबादले, देखें पूरी लिस्ट

BREAKING: छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 9 अधिकारियों के हुए तबादले, देखें पूरी लिस्ट

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने वन विभाग के अधिकारियों की नवीन पदस्थापना का आदेश जारी किया है। जारी आदेश के में भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारियों को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। आदेश में कुल 9 अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया गया है।

देखें आदेश

फिर सक्रिय हुआ मानसून, 7 दिन तक बारिश का दौर; 25 से ज्यादा जिलों में यलो अलर्ट

फिर सक्रिय हुआ मानसून, 7 दिन तक बारिश का दौर; 25 से ज्यादा जिलों में यलो अलर्ट

 Weather Update : छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता नजर आ रहा है। मौसम विभाग ने प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में अगले सात दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। इस दौरान कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। रायपुर समेत कई इलाकों में बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

विकास कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाएःचौधरी

विकास कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाएःचौधरी

 रायपुर। वित्त मंत्री एवं जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने आज जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर जिले में संचालित विभिन्न योजनाओं, विकास कार्यों एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विकास एवं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए। सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किए जाएं, ताकि जिलेवासियों को उनका समय पर लाभ मिल सके।

वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि आम नागरिकों के कार्यों का त्वरित निराकरण प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार एवं लापरवाही की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। यदि ऐसी शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुख्यालय में उपस्थित रहकर आमजन की समस्याओं का संवेदनशीलता एवं तत्परता से निराकरण करने के निर्देश दि

वित्त मंत्री ने जिले में संचालित बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, नालंदा परिसर सहित अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं की जानकारी ली और कहा कि सभी कार्य निर्धारित मापदंडों एवं गुणवत्ता के अनुरूप समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने निर्माण कार्यों की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने तथा जिले की प्राथमिकता वाले आवश्यक विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश भी दिए।बारिश के दौरान बार-बार विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति पर प्रभारी मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को विद्युत व्यवस्था सुचारू बनाए रखने तथा किसी भी व्यवधान की स्थिति में उसका शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। मंत्री  चौधरी ने बारिश के कारण सड़कों पर हुए गड्ढों एवं क्षतिग्रस्त हिस्सों की प्राथमिकता से मरम्मत कराने के निर्देश दिए, ताकि आवागमन सुगम बना रहे और आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।राजस्व विभाग की समीक्षा करते हुए मंत्री चौधरी ने कहा कि राजस्व विभाग के कार्य सीधे आम नागरिकों एवं ग्रामीणों से जुड़े होते हैं। इसलिए राजस्व प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। विकास एवं निर्माण कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आवश्यक रूप से आमंत्रित करने के निर्देश भी उन्होंने दिए।

।बैठक में जांजगीर-चांपा लोकसभा सांसद कमलेश जांगड़े, कलेक्टर  जन्मेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक  विजय कुमार पांडेय, जिला पंचायत सीईओ विनय कुमार पोयाम सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

स्वास्थ्य लाभ ले रहे जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव से मिले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

स्वास्थ्य लाभ ले रहे जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव से मिले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली के द्वारका स्थित छत्तीसगढ़ निवास में जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव से मुलाकात की। उपचार के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे  किरण सिंह देव से मुख्यमंत्री  साय ने आत्मीयता से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके शीघ्र स्वस्थ होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चमोली सुरंग हादसे में कोंडागांव जिले के मृतक श्रमिकों के परिजनों को ₹5-5 लाख और घायलों को ₹50-50 हजार की सहायता देने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चमोली सुरंग हादसे में कोंडागांव जिले के मृतक श्रमिकों के परिजनों को ₹5-5 लाख और घायलों को ₹50-50 हजार की सहायता देने के दिए निर्देश

 दुःख की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री साय

रायपुर :- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन सुरंग में पानी भरने की दुःखद घटना में कोंडागांव जिले के 4 श्रमिकों के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मृतक श्रमिकों के परिजनों को ₹5-5 लाख तथा हादसे में घायल दोनों श्रमिकों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

इस हादसे में कोंडागांव जिले के ग्राम धनसुली के 2, मदनार के 1 और दहीकोंगा के 1 श्रमिक की मृत्यु हुई है, जबकि जिले के 2 श्रमिक घायल हुए हैं। दिवंगत श्रमिकों के पार्थिव शरीर कोंडागांव लाए गए, जहां परिजनों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार दुःख की इस घड़ी में शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति एवं शोकाकुल परिजनों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। उन्होंने हादसे में घायल दोनों श्रमिकों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी कामना की है।

खस से बनी अनोखी राखियां, पानी की बूंद पड़ते ही बिखेरेंगी खुशबू, बहनों के प्यार से महकेगी भाइयों की कलाई : वन मंत्री केदार कश्यप

खस से बनी अनोखी राखियां, पानी की बूंद पड़ते ही बिखेरेंगी खुशबू, बहनों के प्यार से महकेगी भाइयों की कलाई : वन मंत्री केदार कश्यप

 रायपुर: खस की जड़ों से बनी अनोखी और पर्यावरण-कल अनुकूल राखियां पानी की एक बूंद पड़ते ही अपनी प्राकृतिक और सोंधी खुशबू बिखेरने लगती हैं। ये राखियां पूरी तरह प्राकृतिक, हाथ से बनी और बायोडिग्रेडेबल होती हैं, जो त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं।

इस रक्षाबंधन भाइयों की कलाई पर बंधने वाली राखियां सिर्फ बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक नहीं होंगी, बल्कि अपनी खुशबू से एक अनोखा एहसास भी कराएंगी। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक औषधीय एवं सुगंधित पौधों से जुड़ी स्थानीय प्रतिभा और हुनर को बढ़ावा देते हुए खस से विशेष राखियों का निर्माण किया जा रहा है। इन राखियों की खासियत यह है कि पानी की बूंद पड़ने, नमी आने या गीली होने पर इनमें से मनमोहक खुशबू निकलती है। यानी अब भाइयों की कलाई महकेगी बहन के प्यार से।

वन मंत्री  केदार कश्यप की संवेदनशील पहल से परंपरा और नवाचार का संगम

वन मंत्री  केदार कश्यप की मंशानुरूप वन संपदा और पारंपरिक औषधीय पौधों से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इसी संवेदनशील पहल को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय  स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा खस जैसी सुगंधित वनस्पति के उपयोग से राखियों को नया स्वरूप दिया जा रहा है।

बोर्ड अध्यक्ष  विकास मरकाम और उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला के मार्गदर्शन में अन्नपूर्णा महिला स्व सहायता समूह, नारी जिला धमतरी की 10 महिलाओं द्वारा 1000 तैयार की गई है। ये राखियां परंपरागत भावनाओं को आधुनिक सोच से जोड़ने का सुंदर उदाहरण हैं। इनमें छत्तीसगढ़ की वन संपदा, स्थानीय हुनर और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की खुशबू एक साथ महसूस की जा सकती है।

पानी की बूंद पड़ते ही महकेगी राखी

खस से बनी इन राखियों की सबसे खास विशेषता उनकी प्राकृतिक खुशबू है। सामान्य राखियां जहां केवल कलाई की शोभा बढ़ाती हैं, वहीं ये विशेष राखियां नमी के संपर्क में आने पर अपनी सुगंध बिखेरती हैं। बारिश के मौसम में या हाथ धोते समय पानी की बूंद पड़ने पर राखी से उठती खुशबू भाई को बहन के स्नेह का अनोखा एहसास कराएगी।

वन संपदा से रोजगार और नवाचार की नई राह

इन राखियों का निर्माण केवल रक्षाबंधन के त्योहार को खास बनाने की पहल नहीं है, बल्कि यह वन आधारित उत्पादों को बाजार से जोड़ने और स्थानीय हुनर को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खस जैसी उपयोगी वनस्पतियों से तैयार उत्पादों के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं।

राखी में रिश्तों की मिठास और छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू

इस नवाचार के संदर्भ में वन मंत्री श्री केदार कश्यप कहते हैं कि सचमुच ! इस रक्षाबंधन में बहनों का प्यार बांधेगा राखी, और महकेगी भाइयों की कलाई। इस बार जब बहन अपने भाई की कलाई पर खस से बनी यह राखी बांधेगी, तो उसके साथ सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ा स्नेह भी बंधेगा। पानी की बूंद के साथ जब राखी महकेगी, तो भाई को बहन के प्यार और छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा की खुशबू एक साथ महसूस होगी।

नगरीय निकायों को विभिन्न मदों में 74.88 करोड़ आबंटित

नगरीय निकायों को विभिन्न मदों में 74.88 करोड़ आबंटित

 उप मुख्यमंत्री  अरुण साव के अनुमोदन के बाद सभी निकायों को राशि आबंटन के आदेश जारी

वेतन व सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के साथ ही मरम्मत, संधारण कार्यों तथा अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों से निपटने में मिलेगी सहायता

रायपुर- नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के 158 नगरीय निकायों में विभिन्न मदों में कुल 74 करोड़ 88 लाख 17 हजार रुपए आबंटित किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने सभी निकायों को राशि आबंटन के आदेश जारी कर दिए हैं।

नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 10 नगर निगमों को कुल 45 करोड़ 7 लाख 90 हजार रुपए आबंटित किए हैं। वहीं 48 नगर पालिकाओं को कुल 18 करोड़ 60 लाख 34 हजार रुपए तथा 100 नगर पंचायतों को कुल 11 करोड़ 19 लाख 92 हजार रुपए आबंटित किए गए हैं। विभाग द्वारा निकायों को अनिवार्य निधि, राजस्व वसूली, चुंगी क्षतिपूर्ति, उत्पाद कर, बार लाइसेंस तथा मुद्रांक मद के अंतर्गत यह राशि आबंटित की गई है। 

विभाग द्वारा जारी इस राशि से नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर वेतन भुगतान तथा सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के साथ ही मरम्मत, संधारण कार्यों तथा अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों से निपटने में भी सहायता मिलेगी।

रक्षाबंधन पर छत्तीसगढ़ के बाजारों में बढ़ी रौनक, 500 से 600 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान - पारवानी

रक्षाबंधन पर छत्तीसगढ़ के बाजारों में बढ़ी रौनक, 500 से 600 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान - पारवानी

 00 देशभर में राखी पर्व में स्वदेशी एवं स्थानीय राखियों की बढ़ी मांग - CAIT
रायपुर।
देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT ) के नेशनल वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य  अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन जितेन्द्र दोशी,  विक्रम सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष  परमानंद जैन, वाइस चेयरमेन  सुरिन्दर सिंह,  जीवत बजाज, प्रदेश महामंत्री  अवनीत सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष  विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष  राजेन्द्र जग्गी वासु माखीजा,  राम मंधान,  भरत जैन,  राकेश ओचवानी एवं  शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि रक्षाबंधन को लेकर छत्तीसगढ़ के बाजारों में अच्छी खासी हलचल देखने को मिल रही है। राखी के साथ मिठाई, कपड़े, उपहार, कॉस्मेटिक्स, पूजा सामग्री एवं अन्य त्योहारी वस्तुओं की बिक्री में भी तेजी आने की उम्मीद है।
अमर पारवानी ने कहा कि देशभर में इस वर्ष राखी का कारोबार लगभग ₹25 हजार करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं छत्तीसगढ़ में राखी एवं इससे जुड़े त्योहारी कारोबार का बाजार लगभग ₹500 से ₹600 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। रक्षाबंधन के आसपास होने वाली मिठाई, उपहार, वस्त्र, पैकेजिंग एवं अन्य खरीदारी को मिलाकर प्रदेश के त्योहारी बाजार में इससे कहीं अधिक कारोबार होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के पहले से ही रायपुर सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों और कस्बों के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है। राखी बाजार के साथ कपड़ा, मिठाई, गिफ्ट, कॉस्मेटिक्स, ज्वेलरी और पूजा सामग्री की दुकानों पर भी त्योहारी मांग बढ़ रही है।
स्वदेशी और स्थानीय राखियों की बढ़ती मांग
पारवानी ने कहा कि इस वर्ष बाजार में भारतीय निर्मित एवं स्थानीय स्तर पर तैयार राखियों की मांग में विशेष वृद्धि दिखाई दे रही है। पारंपरिक राखियों के साथ खादी, जूट, बांस, बीज, सिल्क, मोती और हस्तनिर्मित राखियां ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में भी महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार बीज राखी, हस्तनिर्मित राखी तथा स्थानीय सामग्री से बनी राखियों को अच्छा बाजार मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में महिला समूहों द्वारा तैयार बीज राखियों की मांग इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि बाजार में राखियों की कीमत और डिजाइन के अनुसार बड़ी विविधता उपलब्ध है। सामान्य राखियों से लेकर प्रीमियम एवं हस्तनिर्मित राखियों तक हर वर्ग के ग्राहकों के लिए विकल्प मौजूद हैं। इससे छोटे दुकानदारों, कारीगरों और स्थानीय उत्पाद निर्माताओं को भी कारोबार का अवसर मिल रहा है।
राखी के साथ जुड़े बाजारों में भी बढ़ेगा कारोबार
पारवानी ने कहा कि रक्षाबंधन का बाजार केवल राखी तक सीमित नहीं है। बहनों के लिए कपड़े एवं श्रृंगार सामग्री, भाइयों के लिए गिफ्ट आइटम, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट, घड़ियां, मोबाइल एक्सेसरीज, कॉस्मेटिक्स, ज्वेलरी और पैकेजिंग जैसे अनेक व्यापारिक क्षेत्रों में त्योहारी मांग बढ़ती है। इसलिए रक्षाबंधन छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े रिटेल कारोबारियों तक के लिए महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर लेकर आता है। आने वाले दिनों में बाजार में ग्राहकों की आवाजाही और बिक्री दोनों में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
स्थानीय व्यापार और कारीगरों को मिलेगा लाभ
पारवानी ने कहा कि स्वदेशी और स्थानीय राखियों की बढ़ती मांग का सीधा लाभ छोटे निर्माताओं, महिला उद्यमियों, स्व-सहायता समूहों, हस्तशिल्प कारीगरों और स्थानीय व्यापारियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान ग्राहक यदि स्थानीय बाजारों से खरीदारी करते हैं तो इसका लाभ सीधे स्थानीय व्यापार और रोजगार से जुड़े लोगों तक पहुंचता है। रक्षाबंधन के बाद आने वाले त्योहारी सीजन को देखते हुए व्यापारियों को आने वाले महीनों में भी बाजार में अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
“रक्षाबंधन इस वर्ष छत्तीसगढ़ के व्यापारिक बाजार के लिए एक मजबूत कारोबारी अवसर लेकर आया है। राखी से लेकर मिठाई, कपड़े, उपहार और अन्य त्योहारी वस्तुओं तक बाजार में मांग बढ़ रही है। प्रदेश में राखी एवं इससे जुड़े कारोबार के ₹500 से ₹600 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे छोटे व्यापारियों और स्थानीय कारीगरों को भी अच्छा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।” - अमर पारवानी

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की

 नगरीय निकायों के प्रगतिरत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश, धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी

नालंदा परिसरों के कार्य समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश

बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की तत्काल मरम्मत तथा टेंडर हो चुके कार्यों को मिशन मोड में पूरा करने कहा

लोगों की समस्याओं के  संवेदनशीलता से निराकरण और समन्वय से कार्य करने के लिए अधिकारियों को दिए निर्देश

रायपुर-- उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने आज जांजगीर जिला मुख्यालय में अपने चारों विभागों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले के अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर दोनों जिलों में लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा खेलकूद एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की समीक्षा की। 

उप मुख्यमंत्री  साव ने दोनों जिलों में संचालित विभागीय योजनाओं, विकास एवं निर्माण कार्यों की विस्तार से समीक्षा करते हुए शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्यों में तेजी लाने तथा योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वीकृत विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए और लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के साथ निराकरण सुनिश्चित होना चाहिए। बैठक में अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों की प्रगति, योजनाओं के क्रियान्वयन तथा निर्माण कार्यों की स्थिति की जानकारी दी। 

उप मुख्यमंत्री  साव ने नगरीय निकायों में विकास एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि जिन कार्यों की स्वीकृति एवं आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण हो चुकी हैं, उन्हें तत्काल प्रारंभ कर निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करें। उन्होंने कार्य प्रारंभ करने में देरी तथा कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्राथमिकता वाले कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने जांजगीर एवं सक्ती में निर्माणाधीन नालंदा परिसरों के कार्यों की समीक्षा करते हुए इन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नालंदा परिसर युवाओं एवं विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है, इसलिए इसके निर्माण में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। 

 साव ने 15वें वित्त आयोग एवं स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों में तेजी लाने तथा जल आवर्धन योजना के कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत स्रोत पर कचरा पृथक्करण एवं संग्रहण को प्रभावी बनाने, एनर्जी बिल ऑडिट कराने तथा रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्रोत्साहित करने को कहा।

उप मुख्यमंत्री  साव ने नगरीय क्षेत्रों में पीएम स्वनिधि एवं पीएम आवास योजना सहित शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ समय पर दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हितग्राही मूलक योजनाओं में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए तथा पात्र हितग्राहियों के लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के साथ निराकरण किया जाए।

लोक निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री साव ने टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो चुके कार्यों को शीघ्र प्रारंभ कराने एवं प्रगतिरत कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने के निर्देश दिए। बारिश के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों एवं सड़कों पर बने गड्ढों की प्राथमिकता के आधार पर तत्काल मरम्मत करने के निर्देश देते हुए कहा कि सड़कों की स्थिति बेहतर होने से नागरिकों को सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा करते हुए  साव ने जल जीवन मिशन के तहत पूर्ण एवं हैंडओवर की जा चुकी योजनाओं के सुचारू संचालन एवं नियमित रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। उन्होंने पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव से जुड़ी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

खेलकूद एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री साव ने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में खेल गतिविधियों को व्यापक रूप से बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांवों में खेल गतिविधियों के आयोजन से बच्चों एवं युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर मिलेंगे। खेलों से बच्चों एवं युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक सोच विकसित होती है। उन्होंने खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष योजना के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने तथा खिलाड़ियों को आवश्यक प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान करने के निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री  साव ने अधिकारियों को आपसी समन्वय एवं सहयोग की भावना के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कार्यालय में आने वाले प्रत्येक नागरिक के साथ विनम्रता, संवेदनशीलता एवं सम्मानपूर्वक व्यवहार करने के निर्देश देते हुए कहा कि आम नागरिक अपनी समस्याओं एवं कार्यों के निराकरण की उम्मीद लेकर कार्यालय आते हैं। उनके प्रति सकारात्मक एवं सहयोगात्मक रवैया रखें, ताकि उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें और कार्यालयीन कार्यों के लिए बेहतर वातावरण निर्मित हो।

जांजगीर-चांपा के कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे, सक्ती के कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और जिला पंचायत के सीईओ श्री विनय कुमार पोयाम सहित लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास, खेलकूद एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा जिला स्तरीय अधिकारी बैठक में शामिल हुए।

ब्रेकिंग : पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 35 इंस्पेक्टर के हुए तबादले, पीएचक्यू ने जारी किया आदेश…देखें लिस्ट….!!

ब्रेकिंग : पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 35 इंस्पेक्टर के हुए तबादले, पीएचक्यू ने जारी किया आदेश…देखें लिस्ट….!!

 रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर निरीक्षकों का तबादला किया गया है। इसका आदेश पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने जारी किया है। जारी आदेश में 34 निरीक्षकों को इधर से उधर किया गया है। वहीं एक उपनिरीक्षक भी शामिल है।

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उत्कृष्ट शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से संवर रहा छत्तीसगढ़ के बच्चों का भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

उत्कृष्ट शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से संवर रहा छत्तीसगढ़ के बच्चों का भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर: शिक्षा किसी भी समाज और राज्य के विकास का मूल आधार है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देती है और रोजगार उनके सपनों को साकार करने का मजबूत आधार बनता है। छत्तीसगढ़ सरकार उत्कृष्ट शिक्षा, आधुनिक तकनीक और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से प्रदेश के बच्चों और युवाओं का भविष्य संवारने के लिए प्रतिबद्ध है। गांवों से लेकर सुदूर वनांचलों तक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जा रहा है।मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने  राजधानी रायपुर के जोरा स्थित एक निजी होटल में आयोजित आईबीसी24 ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय  ने टॉपर बेटियों को सम्मानित कर उन्हें स्कॉलरशिप प्रदान की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इन बेटियों की उपलब्धि उनके परिवार और विद्यालय के साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर हमारी बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।

कार्यक्रम में कक्षा बारहवीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बेमेतरा की ओमनी वर्मा को मुख्यमंत्री श्री साय ने एक लाख रुपए का चेक और सम्मान पत्र प्रदान किया। उनके विद्यालय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम कन्या विद्यालय, बेमेतरा को भी एक लाख रुपए की राशि का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों का सम्मान किया तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित पुस्तक ‘मेधा’ का विमोचन भी किया।

*गांव के मिट्टी के स्कूल से आधुनिक शिक्षण संस्थानों तक छत्तीसगढ़ ने तय की लंबी यात्रा*

मुख्यमंत्री साय ने प्रतिभावान विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि होनहार बेटियों के बीच आकर उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृहग्राम बगिया की प्राथमिक शाला में हुई। पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने के लिए उन्हें अपने गांव से कुछ दूर दूसरे गांव जाना पड़ा था। उस समय गांव के स्कूल का भवन मिट्टी का था और उसकी मरम्मत में गांव के लोग मिलकर सहयोग करते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने राज्य निर्माण के 25 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज प्रदेश में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक संस्थानों का व्यापक नेटवर्क विकसित हुआ है। प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय उपलब्ध हैं। आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान आज छत्तीसगढ़ में संचालित हैं। इससे प्रदेश के बच्चों को अपने राज्य में ही उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना के साथ शिक्षा का नया अध्याय भी शुरू हो रहा है। जगरगुंडा और ओरछा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी की शुरुआत की जा रही है। जिन इलाकों में कभी परिस्थितियों के कारण शिक्षा तक पहुंच चुनौतीपूर्ण थी, वहां अब बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक अधोसंरचना और अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

*34 नालंदा परिसर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को मिलेगा बेहतर वातावरण*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास केवल शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सुविधाएं और वातावरण उपलब्ध कराना भी है। प्रदेश में 34 स्थानों पर नालंदा परिसर विकसित किए जा रहे हैं, जहां युवाओं को शांत और सुविधायुक्त वातावरण में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि देश की राजधानी नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के जनजातीय युवाओं के लिए 200 बिस्तरों वाला ट्राइबल यूथ हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष यहां रहकर तैयारी करने वाले 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। यह उपलब्धि बताती है कि सही अवसर और सुविधाएं मिलने पर छत्तीसगढ़ के युवा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा सिद्ध कर सकते हैं।

एआई मिशन से भविष्य की तकनीक के लिए तैयार होगी नई पीढ़ी*

मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य के विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित नई तकनीकों से परिचित हों और भविष्य की संभावनाओं का लाभ उठा सकें, इसके लिए छत्तीसगढ़ एआई मिशन शुरू किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसके लिए 500 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें भविष्य के रोजगार और नवाचार के अवसरों के लिए तैयार करना है।

*बस्तर में शांति के साथ शिक्षा,  स्वास्थ्य और विकास का नया दौर*

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में शांति और विश्वास का वातावरण मजबूत हुआ है तथा विकास की गति तेज हुई है।

उन्होंने कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के 92 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया। यह बदलते बस्तर की नई तस्वीर है। नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, राशन और अन्य बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री  स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। बस्तर मुन्ने और नियद नेल्लानार जैसी पहलों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। एक लाख से अधिक लोगों के राशन कार्ड भी बनाए गए हैं।

*बस्तर में पर्यटन बनेगा रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का नया आधार*

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफा सहित अनेक प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। बस्तर के धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की सूची में शामिल किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

उन्होंने कहा कि धुड़मारास में विदेशी पर्यटक होमस्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन, संस्कृति, खान-पान और परंपराओं को करीब से जान रहे हैं। राज्य सरकार बस्तर सहित प्रदेश के पर्यटन क्षेत्रों में होमस्टे को प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए ऋण एवं सब्सिडी की सुविधा दी जा रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत माध्यम बनाने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में भी पर्यटन को शामिल किया गया है।

*निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर*

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा के साथ युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर तैयार करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति 2024-30 को देश-विदेश में सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। नई नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश के एमओयू हुए हैं और इन निवेश प्रस्तावों का प्रभाव धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी औद्योगिक इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है, जो स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराएंगी। एक हजार स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्यमियों के लिए बीस्पोक नीति के अंतर्गत विशेष इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है। बारिश के मौसम के बाद प्रदेश में रोजगार मेलों का आयोजन भी किया जाएगा, जिनके माध्यम से युवाओं को विभिन्न उद्योगों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप से सम्मानित सभी छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि वे बड़े सपने देखें, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और निरंतर मेहनत करें। राज्य सरकार उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, तकनीक और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, सांसद रूपकुमारी चौधरी, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष  राजीव लोचन जी महाराज, गोयल ग्रुप एंड कंपनीज के चेयरमैन  सुरेश गोयल, राजीव गोयल, दिनेश गोयल, रविकांत मित्तल सहित जनप्रतिनिधिगण, शिक्षाविद्, विद्यार्थी, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

IGKV पेपर लीक पर बड़ा एक्शन: परीक्षा रद्द, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

IGKV पेपर लीक पर बड़ा एक्शन: परीक्षा रद्द, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

 रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में B.Sc. द्वितीय वर्ष के Pest Management in Crops and Stored Grains-I (AENT 221) विषय के प्रश्नपत्र के कथित लीक मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय ने संबंधित परीक्षा रद्द कर दी है और पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई है, जिसमें परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र के बाहर आने की बात सामने आई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा की निष्पक्षता और विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए तत्काल परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया।

कवर्धा से मिली थी शिकायत
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग होने की शिकायत कवर्धा से प्राप्त हुई थी। शिकायत सामने आने के बाद अधिकारियों ने मामले की प्रारंभिक जानकारी जुटाई और संबंधित परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया।

अब इस विषय की परीक्षा नए सिरे से आयोजित की जाएगी। इसके लिए नई तारीख विश्वविद्यालय की ओर से बाद में जारी की जाएगी।

पांच सदस्यीय कमेटी खंगालेगी पूरा मामला
मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति यह पता लगाएगी कि प्रश्नपत्र की गोपनीयता किस स्तर पर भंग हुई और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाहर कैसे पहुंचा। समिति प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर उसके सुरक्षित रखे जाने और संबंधित परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच करेगी।

जांच में यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही अथवा संलिप्तता सामने आती है तो समिति की रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

28 कॉलेजों तक पहुंचता है प्रश्नपत्र
IGKV के कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक के अनुसार, संबंधित प्रश्नपत्र रायपुर में तैयार किया जाता है और इसके बाद विश्वविद्यालय से संबद्ध 28 कॉलेजों में भेजा जाता है। ऐसे में जांच समिति प्रश्नपत्र की पूरी सप्लाई और सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल करेगी।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
परीक्षा रद्द होने के बाद विद्यार्थियों के बीच नई परीक्षा तिथि को लेकर इंतजार है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाहर कैसे पहुंचा और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय ने संकेत दिया है कि जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी मत्स्य हब: केंद्रीय सचिव लेखी

छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी मत्स्य हब: केंद्रीय सचिव लेखी

 भारत सरकार के 900 और राज्य सरकार के 300 करोड़ से मत्स्य क्रांति को मिली रही गति

तिलापिया उत्पादन को बढ़ाने प्रदेश में रायपुर, धमतरी और कांकेर कलस्टर होगा विकसित 

पीएम मत्स्य संपदा योजना से 956.86 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत 

आधुनिक तकनीक, निर्यात और किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्र एवं राज्य का विशेष फोकस

रायपुर, 20 अगस्त 2026 -केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के सचिव  अविलक्ष्य लेखी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना देश के मत्स्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल है। योजना के विभिन्न घटकों के माध्यम से राज्यों के मत्स्य किसानों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता एवं अधोसंरचना उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे मत्स्य क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि छोटे एवं मध्यम श्रेणी के ऐसे मत्स्य किसान, जिनकी बैंकिंग सेवाओं तक सहज पहुंच नहीं हो पाती, उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों को बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी पात्र किसान योजनाओं से वंचित न रहे।

केंद्रीय सचिव  लेखी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मत्स्य उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और इन्हें साकार करने के लिए केंद्र सरकार देश के विभिन्न राज्यों में 34 मत्स्य क्लस्टरों का विकास करने जा रही है। इनमें छत्तीसगढ़ में तिलापिया कलस्टर शामिल है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार राज्य के मत्स्य क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं पर लगभग 900 करोड़ रुपये व्यय और स्वीकृत कर चुकी है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और तिलापिया उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इसे मत्स्य क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में उत्पादित मछलियों का निर्यात आयरलैंड, शिकागो सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हो रहा है। प्रदेश में 2 हजार से अधिक किसान तिलापिया पालन कर रहे हैं। इन किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए एक्सपोजर विजिट की कार्ययोजना तैयार करने, उन्नत गुणवत्ता के मत्स्य बीज उत्पादन हेतु नई हैचरियों की स्थापना तथा आधुनिक तकनीकों के विस्तार पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मत्स्य किसानों से संवाद कर उनके सुझाव भी प्राप्त किए।

इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव, मछलीपालन विभाग ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य पालन को किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य आज मत्स्य बीज उत्पादन में देश में चौथे तथा मछली उत्पादन में छठे स्थान पर पहुंच चुका है। प्रदेश में लगभग 2.08 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र में 9.59 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया जा रहा है। राज्य में 2021 पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियां, 1662 स्व-सहायता समूह, 123 मत्स्य हैचरियां, 102 मत्स्य बीज उत्पादन फार्म तथा 4 थोक मत्स्य बाजार संचालित हैं।

 परदेशी ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत पिछले छह वर्षों में राज्य के लिए 956.86 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 272.37 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। योजना के तहत बायोफ्लॉक, आरएएस, केज कल्चर, तालाब निर्माण, लाइव फिश वेंडिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज, फीड मिल और अन्य आधुनिक अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। कोरबा जिले के बांगो जलाशय में 37.10 करोड़ रुपये की लागत से एक्वा पार्क की स्थापना भी की जा रही है।

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें आधुनिक तकनीकों का विस्तार, मत्स्य अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, विपणन एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से हजारों परिवारों को रोजगार एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। ‘नवा अंजोर /2047‘ के अंतर्गत रायपुर, धमतरी एवं कांकेर जिलों में तिलापिया क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 37,857 लाख रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई है।

    कार्यक्रम में केंद्रीय सचिव ने अधिकारियों को मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि, वित्तीय समावेशन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तथा निर्यात क्षमता को और मजबूत करने के लिए समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में नाबार्ड, एमपीईडीए (डच्म्क्।), सीफा (ब्प्थ्।) सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे। अंत में मत्स्य पालन विभाग के संचालक  एन.एस. नाग ने आभार व्यक्त किया। बढ़ी संख्या में मत्स्य किसान एवं छत्तीसगढ़ राज्य मछुआरा बोर्ड के चेयरमेन उपस्थित थे।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता एवं समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के दिए निर्देश

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता एवं समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के दिए निर्देश

 विभागीय कार्यों की समीक्षा की, अधिकारियों को सप्ताह में दो दिन फील्ड में रहने के दिए निर्देश

ठेकेदारों के कार्यों की कड़ाई से मॉनिटरिंग कर निर्धारित मापदंडों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित कराने कहा

रायपुर, 20 अगस्त 2026- लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने बिलासपुर परिक्षेत्र के विभागीय एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को काम में तेजी लाने और सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने नवा रायपुर स्थित निर्माण भवन में आयोजित बैठक में विभागीय अभियंताओं से कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा में पूर्णता विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सड़कों और पुलों के नए प्रस्ताव तैयार करते समय भविष्य की जरूरतों और बढ़ते यातायात को ध्यान में रखने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी और अपर सचिव  एस.एन. श्रीवास्तव भी बैठक में मौजूद थे।

 बंसल ने अधिकारियों को प्रो-एक्टिव होकर काम करने तथा प्राक्कलन से लेकर निविदा की प्रक्रिया तक सभी कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कार्यपालन अभियंताओं को अपने जिले के कलेक्टरों से बेहतर समन्वय रखने को कहा, ताकि निर्माण कार्यों से जुड़े मामलों तथा कार्यस्थलों की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो और काम की गति बनी रहे। उन्होंने मैदानी अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन फील्ड में रहकर निर्माण कार्यों की कड़ी मॉनिटरिंग और निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों के कार्यों पर लगातार नजर रखने तथा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सड़कों और भवनों के निर्माण के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता की जांच करने को कहा, ताकि मजबूत और टिकाऊ निर्माण हो सके। 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने ऐसे नए कार्यों जिनकी निविदा हो चुकी है, उन्हें अक्टूबर तक शुरू करने को कहा। उन्होंने काम शुरू होने के बाद उसकी गति और गुणवत्ता दोनों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों और पुलों के रखरखाव पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़कें साफ-सुथरी, सुंदर और व्यवस्थित दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने बरसात में क्षतिग्रस्त हुई सड़कों और पुलों की तत्काल मरम्मत करने को कहा, ताकि लोगों की आवाजाही बाधित न हो। 

 बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों को एसडीएम से मिलकर विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए अधिग्रहित भूमि के नामांतरण की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने भू-अर्जन के नए और पुराने प्रकरणों के नामांतरण की कार्यवाही एक माह में पूर्ण करने को कहा। उन्होंने जमा पद के पूर्ण कार्यों को तत्काल संबंधित विभागों को हैंडओवर करने को कहा। 

विभागीय सचिव ने बैठक में विश्रामगृहों और सर्किट-हाउसों के संचालन एवं रखरखाव की भी जानकारी ली। उन्होंने विभाग के भवनों में बेहतर साफ-सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करने के साथ ही पूरे परिसर को व्यवस्थित रखने को कहा। लोक निर्माण विभाग की उप सचिव सुश्री अंशिका पाण्डेय, छत्तीसगढ़ सड़क एवं अधोसंरचना विकास निगम के अतिरिक्त प्रबंध संचालक  शशांक पाण्डेय, बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता  आर.के. रात्रे और  जी.एस. मंडावी तथा अधीक्षण अभियंता  के.पी. संत सहित बिलासपुर परिक्षेत्र के सभी 9 संभागों के कार्यपालन अभियंता एवं अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

शिशु संरक्षण माह: स्वस्थ बचपन और सुरक्षित भविष्य का आधार

शिशु संरक्षण माह: स्वस्थ बचपन और सुरक्षित भविष्य का आधार

 विशेष लेख : धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर। शिशु जीवन का वह नाजुक चरण है, जहाँ सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल उनके भविष्य की दिशा तय करती है। भारत जैसे विकासशील देश में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न संक्रामक बीमारियों की दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा शिशु संरक्षण माह का आयोजन किया जाता है। यह एक विशेष स्वास्थ्य अभियान है, जो नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है, जिसके तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की विशेष देखभाल की जा रही है। 
अभियान का मुख्य उद्देश्य
इस विशेष माह को मनाने का प्राथमिक लक्ष्य बाल मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके साथ ही, बच्चों में समय पर बीमारियों की पहचान करना, उन्हें आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करना, तथा माताओं को सही पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।

प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और गतिविधियाँ
शिशु संरक्षण माह के दौरान गांव-गांव और शहरों में स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जाती हैं:
विटामिन ए का अनुपूरण: 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी जैसी आंखों की बीमारियों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन ए की खुराक दी जाती है। एनीमिया से बचाव 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को खून की कमी (एनीमिया) से सुरक्षित रखने हेतु आयरन एवं फॉलिक एसिड सिरप का वितरण किया जाता है। पूर्ण टीकाकरण: जिन बच्चों के नियमित टीके छूट गए हैं, उन्हें खसरा, रुबेला, पोलिया, काली खांसी और टिटनेस जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकृत किया जाता है।

कुपोषण की पहचान व उपचार: आंगनवाड़ी स्तर पर सभी बच्चों का वजन और लंबाई नापकर गंभीर रूप से कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। आवश्यकता पडऩे पर गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है। दस्त नियंत्रण और ओआरएस वितरण: बच्चों में डिहाइड्रेशन रोकने के लिए माताओं को ओआरएस पैकेट और जिंक की गोलियां दी जाती हैं।
जागरूकता एवं परामर्श सत्र
केवल दवाएं देना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि माताओं और परिवारों का व्यवहार परिवर्तन भी इसका महत्वपूर्ण अंग है: स्तनपान का महत्व: जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के अंदर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) और शुरुआती 6 माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रेरित किया जाता है।

ऊपरी आहार की शुरुआत: 6 माह की आयु पूरी होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ सही मात्रा और गुणवत्ता वाला पूरक आहार (ऊपरी आहार) देने की सलाह दी जाती है। 6 से 12 महीने की उम्र के बीच, आपका शिशु पौष्टिक ठोस आहार खाना शुरू कर देगा, लेकिन माँ का दूध फिर भी पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा। जब आपका शिशु माँ का दूध या फार्मूला दूध पीना छोड़ दे, तो उसे धीरे-धीरे और धैर्य से खिलाएँ। उसे नए स्वाद चखने दें, लेकिन ज़बरदस्ती न करें। जब आपका बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करे, तो उसे भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खाने से रोकें ताकि वह गले में न अटके।
अपने शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करने के लिए उसे पढ़ें, उससे बातें करें और उसके लिए गाएं। अपने शिशु को सोने के पर्याप्त अवसर प्रदान करें - 4 से 12 महीने के शिशुओं के लिए अनुशंसित नींद की मात्रा प्रतिदिन 12 से 16 घंटे (24 घंटे की अवधि में, झपकी सहित) है। शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
स्वच्छता व सैनिटेशन: हाथ धोने की सही आदत और बच्चे की देखभाल में साफ-सफाई के महत्व पर चर्चा की जाती है, जिससे संक्रमण से बचाव संभव हो सके। शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है। शिशु को बांधकर रखने वाले उपकरण उसके विकास में बाधा डाल सकते हैं। शिशु को झूले, स्ट्रोलर, बाउंसिंग सीट, एक्सरसाइज़ सॉसर या अन्य किसी भी बांधकर रखने वाले उपकरण में लंबे समय तक न रखें। उन्हें बाहर निकालें और घूमने-फिरने दें।
शिशु संरक्षण माह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हर परिवार और समाज के लिए अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराने वाला समय है। जब समाज का हर वर्ग—स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अभिभावक—एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे, तभी हम एक स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और सशक्त पीढ़ी का निर्माण कर सकेंगे।

आजीविका से जोडऩा आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: कश्यप

आजीविका से जोडऩा आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: कश्यप

 00 वनौषधियों से महिलाओं को रोजगार की मिलेगी नई राह

00 मानव-हाथी द्वंद्व रोकने सामुदायिक भागीदारी पर जोर
रायपुर।
आजीविका से जोडऩा आर्थिक सशक्तिकरण की मुख्य धुरी है। इससे व्यक्तियों और परिवारों को नियमित आय मिलती है, गरीबी कम होती है और समाज में उनका आत्मसम्मान बढ़ता है। यह कदम देश के समग्र विकास और आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अपने कोरबा प्रवास के दौरान यह बात कहा है कि वन केवल पर्यावरण संरक्षण का आधार नहीं, बल्कि वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण साधन हैं।

मंत्री  कश्यप ने कहा कि वन संसाधनों का संरक्षण करते हुए उनका स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन किया जाए, तो महिलाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार तथा आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मानव-हाथी द्वंद्व की रोकथाम में वन विभाग के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी और समय पर सूचना व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। वन मंत्री कश्यप अपने कोरबा प्रवास के दौरान पाली विकासखंड के ग्राम डोंगानाला स्थित वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र पहुंचे। उन्होंने यहां हरि बोल स्व-सहायता समूह की महिलाओं से आत्मीय संवाद किया और वनौषधियों के संग्रहण, प्रसंस्करण तथा उनसे तैयार किए जा रहे उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने समूह द्वारा तैयार उत्पादों का अवलोकन कर महिलाओं के प्रयासों की सराहना की।

 कश्यप ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वनौषधियों और अन्य वन उत्पादों का उचित प्रसंस्करण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है। इससे वन आधारित उत्पादों को बेहतर मूल्य मिलेगा और स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को वन आधारित आजीविका से जोडऩा आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं की मेहनत, स्थानीय संसाधनों का ज्ञान और समूह के रूप में काम करने की क्षमता को उचित सहयोग मिले, तो ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की नई मिसालें तैयार की जा सकती हैं।
चोटिया में हाथी नियंत्रण केंद्र का निरीक्षण
वन मंत्री  कश्यप ने पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के चोटिया स्थित हाथी नियंत्रण केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने हाथी मित्र दल के सदस्यों से क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों, ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी आवाजाही और मानव-हाथी द्वंद्व की स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने हाथी मित्र दल को मोटरसाइकिल और सुरक्षा किट प्रदान की। इससे वन क्षेत्रों में निगरानी, गश्त और हाथियों की गतिविधियों की समय पर सूचना देने की व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

समय पर सूचना और सतर्कता से कम होगा मानव-हाथी द्वंद्व
वन मंत्री श्री कश्यप ने आमजनों का अवगत कराया कि मानव-हाथी द्वंद्व की रोकथाम केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए वन विभाग, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, वन प्रबंधन समितियों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। हाथियों की गतिविधियों की समय पर जानकारी मिलने से ग्रामीणों को सतर्क किया जा सकता है और संभावित घटनाओं को रोकने में मदद मिलती है। उन्होंने हाथी मित्र दल और वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों को ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ हाथियों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देने तथा लगातार निगरानी और समन्वय के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

वन संरक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी महत्वपूर्ण
वन मंत्री  केदार कश्यप ने स्थानीय वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों से भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण वन और वन्यजीवों के संरक्षण के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। उनके स्थानीय अनुभव और सहयोग से वन विभाग की संरक्षण गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण, वन आधारित आजीविका और वन्यजीव सुरक्षा सहित इन तीनों क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय को साथ लेकर आगे बढऩा ही स्थायी विकास का मजबूत आधार है। इस अवसर पर विधायक  प्रेमचंद पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन प्रबंधन समितियों के सदस्य, हाथी मित्र दल के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

उत्कृष्ट शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से संवर रहा छत्तीसगढ़ के बच्चों का भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

उत्कृष्ट शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से संवर रहा छत्तीसगढ़ के बच्चों का भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री साय आईबीसी 24 ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026’ कार्यक्रम में हुए शामिल

प्रदेश के सभी संभागों की टॉपर बेटियों को किया सम्मानित, प्रदान की स्कॉलरशिप

शिक्षा विकास का मूलमंत्र, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही राज्य सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय

बेमेतरा की प्रदेश टॉपर ओमनी वर्मा को एक लाख रुपए की स्कॉलरशिप, विद्यालय को भी मिला एक लाख रुपए का पुरस्कार

प्रदेश में बन रहे 34 नालंदा परिसर, नई दिल्ली के ट्राइबल यूथ हॉस्टल से 13 विद्यार्थियों ने उत्तीर्ण की यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा

एआई मिशन के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान, विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीक के लिए किया जाएगा तैयार

नई उद्योग नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही गति, बारिश के बाद आयोजित किए जाएंगे रोजगार मेले

रायपुर-- शिक्षा किसी भी समाज और राज्य के विकास का मूल आधार है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देती है और रोजगार उनके सपनों को साकार करने का मजबूत आधार बनता है। छत्तीसगढ़ सरकार उत्कृष्ट शिक्षा, आधुनिक तकनीक और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से प्रदेश के बच्चों और युवाओं का भविष्य संवारने के लिए प्रतिबद्ध है। गांवों से लेकर सुदूर वनांचलों तक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने  राजधानी रायपुर के जोरा स्थित एक निजी होटल में आयोजित आईबीसी24 ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय  ने टॉपर बेटियों को सम्मानित कर उन्हें स्कॉलरशिप प्रदान की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इन बेटियों की उपलब्धि उनके परिवार और विद्यालय के साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर हमारी बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।

कार्यक्रम में कक्षा बारहवीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बेमेतरा की ओमनी वर्मा को मुख्यमंत्री श्री साय ने एक लाख रुपए का चेक और सम्मान पत्र प्रदान किया। उनके विद्यालय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम कन्या विद्यालय, बेमेतरा को भी एक लाख रुपए की राशि का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों का सम्मान किया तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित पुस्तक ‘मेधा’ का विमोचन भी किया।

*गांव के मिट्टी के स्कूल से आधुनिक शिक्षण संस्थानों तक छत्तीसगढ़ ने तय की लंबी यात्रा*

मुख्यमंत्री  साय ने प्रतिभावान विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि होनहार बेटियों के बीच आकर उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृहग्राम बगिया की प्राथमिक शाला में हुई। पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने के लिए उन्हें अपने गांव से कुछ दूर दूसरे गांव जाना पड़ा था। उस समय गांव के स्कूल का भवन मिट्टी का था और उसकी मरम्मत में गांव के लोग मिलकर सहयोग करते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने राज्य निर्माण के 25 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज प्रदेश में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक संस्थानों का व्यापक नेटवर्क विकसित हुआ है। प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय उपलब्ध हैं। आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान आज छत्तीसगढ़ में संचालित हैं। इससे प्रदेश के बच्चों को अपने राज्य में ही उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना के साथ शिक्षा का नया अध्याय भी शुरू हो रहा है। जगरगुंडा और ओरछा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी की शुरुआत की जा रही है। जिन इलाकों में कभी परिस्थितियों के कारण शिक्षा तक पहुंच चुनौतीपूर्ण थी, वहां अब बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक अधोसंरचना और अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

*34 नालंदा परिसर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को मिलेगा बेहतर वातावरण*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास केवल शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सुविधाएं और वातावरण उपलब्ध कराना भी है। प्रदेश में 34 स्थानों पर नालंदा परिसर विकसित किए जा रहे हैं, जहां युवाओं को शांत और सुविधायुक्त वातावरण में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि देश की राजधानी नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के जनजातीय युवाओं के लिए 200 बिस्तरों वाला ट्राइबल यूथ हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष यहां रहकर तैयारी करने वाले 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। यह उपलब्धि बताती है कि सही अवसर और सुविधाएं मिलने पर छत्तीसगढ़ के युवा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा सिद्ध कर सकते हैं।

*एआई मिशन से भविष्य की तकनीक के लिए तैयार होगी नई पीढ़ी*

मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य के विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित नई तकनीकों से परिचित हों और भविष्य की संभावनाओं का लाभ उठा सकें, इसके लिए छत्तीसगढ़ एआई मिशन शुरू किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसके लिए 500 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें भविष्य के रोजगार और नवाचार के अवसरों के लिए तैयार करना है।

*बस्तर में शांति के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास का नया दौर*

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में शांति और विश्वास का वातावरण मजबूत हुआ है तथा विकास की गति तेज हुई है।

उन्होंने कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के 92 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया। यह बदलते बस्तर की नई तस्वीर है। नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, राशन और अन्य बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। बस्तर मुन्ने और नियद नेल्लानार जैसी पहलों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। एक लाख से अधिक लोगों के राशन कार्ड भी बनाए गए हैं।

*बस्तर में पर्यटन बनेगा रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का नया आधार*

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफा सहित अनेक प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। बस्तर के धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की सूची में शामिल किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

उन्होंने कहा कि धुड़मारास में विदेशी पर्यटक होमस्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन, संस्कृति, खान-पान और परंपराओं को करीब से जान रहे हैं। राज्य सरकार बस्तर सहित प्रदेश के पर्यटन क्षेत्रों में होमस्टे को प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए ऋण एवं सब्सिडी की सुविधा दी जा रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत माध्यम बनाने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में भी पर्यटन को शामिल किया गया है।

*निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा के साथ युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर तैयार करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति 2024-30 को देश-विदेश में सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। नई नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश के एमओयू हुए हैं और इन निवेश प्रस्तावों का प्रभाव धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी औद्योगिक इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है, जो स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराएंगी। एक हजार स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्यमियों के लिए बीस्पोक नीति के अंतर्गत विशेष इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है। बारिश के मौसम के बाद प्रदेश में रोजगार मेलों का आयोजन भी किया जाएगा, जिनके माध्यम से युवाओं को विभिन्न उद्योगों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप से सम्मानित सभी छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि वे बड़े सपने देखें, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और निरंतर मेहनत करें। राज्य सरकार उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, तकनीक और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, सांसद रूपकुमारी चौधरी, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष  राजीव लोचन जी महाराज, गोयल ग्रुप एंड कंपनीज के चेयरमैन  सुरेश गोयल,  राजीव गोयल,  दिनेश गोयल,  रविकांत मित्तल सहित जनप्रतिनिधिगण, शिक्षाविद्, विद्यार्थी, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बलौदाबाजार को बड़ी सौगात दिलाने राजस्व मंत्री की पहल, औद्योगिक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का जल्द होगा विस्तार

बलौदाबाजार को बड़ी सौगात दिलाने राजस्व मंत्री की पहल, औद्योगिक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का जल्द होगा विस्तार

 00 200 बिस्तर वाले ईएसआईसी अस्पताल के लिए नई दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से हुई सकारात्मक चर्चा
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक क्रांति के साथ-साथ श्रमिकों की सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं। इसी कड़ी में बलौदाबाजार के विशाल सीमेंट, पावर एंड स्टील प्लांटस, सहित अनेक लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र तथा अन्य संस्थानों में दिन-रात पसीना बहाने वाले हजारों मजदूरों की वर्षों पुरानी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा द्वारा एक बड़ी पहल हुई है।
सीमेंट, पावर एवं स्टील फैक्ट्रियों की बहुलता वाले बलौदाबाजार जिले में अब तक गंभीर बीमारियों और हादसों के वक्त श्रमिकों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे बड़े जिलों की ओर रुख करना पड़ता था और आपातकालीन स्थितियों में यह दूरी जानलेवा साबित होती थी। इस बड़ी व्यावहारिक समस्या को दूर करने के लिए राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा की पहल पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से नई दिल्ली में आज चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान बलौदाबाजार में 200 बिस्तर वाले सर्व सुविधायुक्त ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा गया। केंद्रीय मंत्री ने इस संवेदनशील जनहित मुद्दे पर बेहद गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है, जिससे जल्द ही क्षेत्र की जनता को एक आधुनिक अस्पताल की सौगात मिलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
आंकड़ों में दिख रहा सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा
बलौदाबाजार जिले में वर्तमान में 17,942 पंजीकृत कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि सामाजिक सुरक्षा के तहत 18,308 बीमित व्यक्तियों को सीधा लाभ मिल रहा है। बीमितों की यह अधिक संख्या स्पष्ट करती है कि इस सुरक्षा चक्र का लाभ न केवल श्रमिकों, बल्कि उनके पूरे परिवार तक पहुंच रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में 31 मार्च 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में 15,66,430 कर्मचारी ईएसआईसी में दर्ज हैं, जिनमें 6,27,260 बीमित पुरुष और 79,237 बीमित महिलाएं शामिल हैं। राज्य में ईएसआईसी के तहत कुल 37,283 नियोजक पंजीकृत हैं, जिनमें से 13,426 सक्रिय रूप से अपना योगदान दे रहे हैं। 
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की यह व्यवस्था श्रमिकों को सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि बीमारी, मातृत्व और कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं के दौरान आर्थिक संबल भी प्रदान करती है। राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा के सार्थक पहल पर बलौदाबाजार में 200 बिस्तर वाले अस्पताल के निर्माण से न केवल समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलेगा, बल्कि पूरे प्रदेश के संगठित श्रमिक वर्ग में सुरक्षा और विश्वास की भावना और अधिक मजबूत होगी।

अब ऑनलाइन देखी जा सकेगी आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी

अब ऑनलाइन देखी जा सकेगी आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा संचालित आश्रम-छात्रावासों में निवासरत छात्र-छात्राओं की जानकारी अब ऑनलाइन उपलब्ध होगी। पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यालय आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, नवा रायपुर द्वारा यह व्यवस्था की गई है।
आश्रम-छात्रावास प्रबंधन प्रणाली पोर्टल
https://hmstribal.cg.nic.in/ पर प्रवेशित सभी छात्र-छात्राओं की जानकारी पोर्टल के होम पेज पर प्रदर्शित की जाएगी। आम नागरिक पोर्टल के विद्यार्थी उपस्थिति रिपोर्ट मेनू पर क्लिक कर विद्यार्थियों से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इस व्यवस्था के तहत शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त, विशिष्ट संस्थाओं सहित सभी आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित छात्र-छात्राओं की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध होगी। साथ ही प्रत्येक माह की विद्यार्थियों की उपस्थिति भी अगले माह की 10 तारीख तक पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी। इसके अलावा शासन की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति तथा जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना (पूर्व में जवाहर उत्कर्ष योजना) के अंतर्गत लाभान्वित छात्र-छात्राओं की जानकारी भी पोर्टल के नया क्या है टैब पर क्लिक कर प्राप्त की जा सकती है। इस ऑनलाइन व्यवस्था से आश्रम-छात्रावासों में प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी और उनकी उपस्थिति को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने के साथ-साथ व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर निगरानी सुनिश्चित होगी।

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग में 22 अधिकारी-कर्मचारियों का तबादला

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग में 22 अधिकारी-कर्मचारियों का तबादला

 रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग में 22 अधिकारी-कर्मचारियों का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया गया है जिसमें सहायक संचालक से सहायक ग्रेड-3 तक के कर्मचारी प्रभावित हुए हैं. इनमें एक संयुक्त संचालक, 4 उप संचालक, 5 सहायक संचालक, 7 सहायक सूचना अधिकारी के अलावा एक सहायक ग्रेड-1, 2 सहायक ग्रेड-2 और 2 सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी शामिल हैं।.

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग में 22 अधिकारी-कर्मचारियों का तबादला

 

कांग्रेस संविधान से ऊपर नहीं, तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम् किया अपमान : साव

कांग्रेस संविधान से ऊपर नहीं, तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम् किया अपमान : साव

 00 कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से लेकर निचले स्तर के नेताओं में नैतिक पतन, धमकी की सजा इनके सहयोगी ही भुगत रहे
रायपुर।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में वंदे मातरम् के केवल दो पद गाने का फैसला बेहद निराशाजनक है। कांग्रेस की यह हठधर्मिता देश की भावनाओं के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् देश की स्वतंत्रता के संघर्ष का अभिन्न हिस्सा रहा है। अनेक वीर शहीदों ने इसे गाते हुए अपना जीवन बलिदान किया। कांग्रेस का यह फैसला उन महान शहीदों का अपमान है। यह संविधान और देश की 140 करोड़ जनता की भावनाओं का भी अपमान है। साव ने कहा कि कांग्रेस आज भी तुष्टिकरण की राजनीति से बाहर नहीं निकल पाई है। कांग्रेस की राजनीति एक बार फिर मुस्लिम लीग के रास्ते पर जाती दिखाई दे रही है। सीडब्ल्यूसी का यह प्रस्ताव कांग्रेस की इसी सोच को स्पष्ट करता है।
उप मुख्यमंत्री  साव ने अधिकारियों को धमकाने की घटनाओं पर कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े लोगों द्वारा पहले शिवनंदनपुर में अधिकारियों को धमकाने और फिर रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद ईडी अधिकारियों को धमकाने की घटनाएं सामने आई। अब ऐसी घटनाएं लगातार सामने आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। ये विष्णु देव साय सरकार का सुशासन सरकार है। अधिकारियों को धमकाना और यह कहना कि सत्ता में आने के बाद देख लेंगे, लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
साव ने कहा कि अधिकारी के साथ गाली-गलौज करना और डंडे से मारने की धमकी देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। ऐसी भाषा और व्यवहार लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं हो सकता। भूपेश बघेल सत्ता में रहते हुए अधिकारियों पर किस तरह का दबाव बनाया गया होगा, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से आज कांग्रेस के कई सहयोगी कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। लोकतंत्र में कानून से ऊपर कोई नहीं है।