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BREAKING : साय कैबिनेट की बैठक 5 अगस्त को, कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिए जाने की संभावना

BREAKING : साय कैबिनेट की बैठक 5 अगस्त को, कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिए जाने की संभावना

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार, 5 अगस्त 2026 को आयोजित होगी। यह बैठक पूर्वाह्न 11:30 बजे मंत्रालय महानदी भवन स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष में होगी।

बैठक में राज्य के विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिए जाने की संभावना है। साथ ही प्रदेश के विकास, प्रशासनिक कार्यों और जनहित से जुड़े अहम विषयों पर भी मंत्रिपरिषद विचार-विमर्श करेगी। बैठक के बाद लिए गए फैसलों की आधिकारिक जानकारी जारी की जाएगी।

CGPSC अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर: सूबेदार, उप निरीक्षक और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2024 का संशोधित फाइनल मॉडल आंसर जारी, 341 पदों पर होगी भर्ती

CGPSC अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर: सूबेदार, उप निरीक्षक और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2024 का संशोधित फाइनल मॉडल आंसर जारी, 341 पदों पर होगी भर्ती

 रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) ने गृह (पुलिस) विभाग अंतर्गत सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग और प्लाटून कमांडर परीक्षा-2024 के संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर जारी कर दिए हैं। संशोधित मॉडल उत्तर आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.psc.cg.gov.in पर अपलोड कर दिए गए हैं।

341 पदों पर होनी है भर्ती

उल्लेखनीय है कि उक्त भर्ती परीक्षा के तहत कुल 341 पदों पर भर्ती की जानी है। इसके लिए 12 जुलाई को राज्य के 33 जिलों के 183 परीक्षा केंद्रों में लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी।

दावा-आपत्तियों के बाद जारी हुए संशोधित उत्तर

परीक्षा के मॉडल उत्तर 13 जुलाई को जारी कर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 21 जुलाई 2026 निर्धारित थी।

आयोग ने निर्धारित अवधि में प्राप्त सभी दावा-आपत्तियों का विषय विशेषज्ञ समिति से परीक्षण कराया। विशेषज्ञों की अनुशंसा एवं सक्षम परीक्षण के आधार पर संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर तैयार किए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन्हीं अंतिम मॉडल उत्तरों के आधार पर अभ्यर्थियों की ओएमआर उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाएगा।

ग्रामीण उद्यमिता का मार्ग है संभागीय सरस मेला: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

ग्रामीण उद्यमिता का मार्ग है संभागीय सरस मेला: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

 रायपुर: कबीरधाम जिले के भोरमदेव मंदिर चौरा में आयोजित पांच दिवसीय संभागीय सरस मेला का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा द्वारा किया गया। इस दौरान स्व-सहायता समूहों की लखपति दीदियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि संभागीय सरस मेला से ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार को एक नई दिशा मिलती है तथा यह आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होता है।

सरस मेला में स्वदेशी, प्राकृतिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी सह विक्रय हेतु संभागीय सरस मेला समूह की दीदियों के लिए सफलता के द्वार खोलेगा। संभागीय सरस मेला के उद्घाटन के दौरान अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग  बिसेसर पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य  राम कुमार भट्ट,  वीरेंद्र साहू, लोकचंद साहू, संतोष पटेल,  विदेशी राम धुर्वे, कलेक्टर  गोपाल वर्मा, सीईओ जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक जिले के अधिकारी गण, स्व सहायता समूह की दीदियों सहित ग्रामीण उपस्थित रहे।

मेले में लगे स्टालों का उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अवलोकन किया तथा महिला समूह से उनके उत्पादन के विषय में विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान स्टॉल से खरीदी कर महिला समूह का हौसला बढ़ाया तथा उन्हें सफल व्यवसाय की शुभकामनाएं दी। संभागीय सरस मेला के संबंध में कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बताया कि मेले का आयोजन सावन माह में किया गया है जो 06 अगस्त की शाम तक चलेगा।

विश्व प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर की पावन एवं ऐतिहासिक धरा पर आयोजित यह मेला केवल खरीदारी का अवसर नहीं बल्कि ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 50 से अधिक स्टॉलों के द्वारा एक ही छत के नीचे ताज़े एवं पौष्टिक मिलेट उत्पाद, स्वादिष्ट घरेलू खाद्य सामग्री, वनोपज आधारित अन्य स्थानीय उत्पादन मिल रहा है। हस्तशिल्प एवं हथकरघा सामग्री बाँस एवं बेंत से बने आकर्षक उत्पाद,घरेलू सजावटी वस्तुएँ, पारंपरिक परिधान तथा अनेक प्रकार के अन्य उपयोगी स्वदेशी सामग्रियों का विशाल भंडार विक्रय के लिए उपलब्ध होगा।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत  अभिषेक अग्रवाल ने बताया की समूह की दीदियों द्वारा निर्मित सामग्रियों को बाजार उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से संभागीय सरस मेला का आयोजन हो रहा है। प्रत्येक खरीदी पर ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वदेशी भारत का संकल्प होगा। जैविक खाद्य सामग्री, आकर्षक सजावट के सामान सहित अन्य उपयोगी वस्तु कम दर पर उपलब्ध है। सभी जिलेवासियों से अपील की जाती है कि वह सावन के इस पवित्र महीने में बाबा भोरमदेव के दर्शन के साथ ही संभागीय सरस मेला का लाभ उठाए।

प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तरुणा साहू और स्कूली बच्चों के शिव तांडव की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया

छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तरुणा साहू के पंडवानी गायन ने सभी का मन मोह लिया। द्रोपदी चीर हरण सहित अन्य प्रसंगो की मार्मिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को उस काल खण्ड की याद दिला दी। इसी तरह स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल बोड़ला के बच्चों द्वारा शिव तांडव का नृत्य प्रस्तुत किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने सरस मेला में उपस्थित सभी लोगों का खूब मनोरंजन किया।

उल्लेखनीय है कि संभागीय सरस मेला में दुर्ग संभाग के कबीरधाम सहित जिला दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, बेमेतरा, मोहला- मानपुर- अंबागढ़ चौकी एवं खैरागढ़- छुईखदान- गंडई के अतिरिक्त अन्य ज़िलों की महिला स्व सहायता समूह की दीदियों द्वारा उत्पादित आकर्षक सामग्रियों की प्रदर्शनी सह विक्रय के लिए 50 स्टॉल गए हैं। इन स्टॉलों में विभिन्न जैविक खाद्य सामग्री जैसे हल्दी, मिर्ची, धनिया, कोदो- कुटकी, कटहल, आम, नीबू महुआ के आचार, पापड़, ब्लैक राइस के साथ अगरबत्ती, दोना-पत्तल,बैग, सिंगार के सामान, हैंड बैग सहित अनेको आकर्षक सामग्री महिला समूह द्वारा बनाये गए है।

Weather Update: छत्तीसगढ़ में फिर एक्टिव होगा मानसून, कई जिलों में झमाझम बारिश के आसार

Weather Update: छत्तीसगढ़ में फिर एक्टिव होगा मानसून, कई जिलों में झमाझम बारिश के आसार

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदलने वाला है. पूरे प्रदेश में आज से बारिश और मेघगर्जन की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा हुई. वहीं बलरामपुर जिले के एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा हुई। सर्वाधिक अधिकतम तापमान राजनन्दगांव 34.7 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस पेण्ड्रा रोड में दर्ज किया गया। रायपुर में तापमान बढ़ने के बाद उमस भरी गर्मी परेशान कर रही है।

रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ?
राजधानी रायपुर में आज आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। मौसम विभाग ने बादल गरजने-चमकने के साथ बारिश होने की संभावना जताई है। अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने के आसार हैं।

रघुनाथनगर में आठ सेमी बारिश दर्ज
प्रदेश में सोमवार को कई इलाकों में पानी गिरा। रघुनाथनगर में 8 सेंटीमीटर, वाड्रफनगर में 7, खड़गांव में 5, रामानुजगंज, रामचन्द्रपुर में 4-4, कोटाडोल, चिरमिरी, बलरामपुर में 2-2 सेंटीमीटर वर्षा हुई।

मौसम विभाग ने बताया कि औसत समुद्र तल पर मॉनसून द्रोणिका बीकानेर, दिल्ली, लखनऊ और पटना से होकर मणिपुर की ओर पूर्व दिशा में बढ़ रही है और औसत समुद्र तल से 0.9 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैली हुई है। इनके प्रभाव से 4 अगस्त को प्रदेश में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है।

निराश्रित गौवंश संरक्षण के लिए राज्य सरकार की बड़ी पहल, गौधाम योजना का बढ़ रहा दायरा

निराश्रित गौवंश संरक्षण के लिए राज्य सरकार की बड़ी पहल, गौधाम योजना का बढ़ रहा दायरा

 रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना के माध्यम से प्रदेश में घुमन्तू एवं निराश्रित पशुधन के संरक्षण और सुव्यवस्थित व्यवस्थापन की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाते हुए राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने तथा शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल किया है, जिससे भविष्य में प्रदेशभर में गौधामों का विस्तार और अधिक गति से हो सकेगा।

घुमन्तू एवं निराश्रित पशुधन के व्यवस्थापन के लिए राज्य शासन ने 6 अगस्त 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को गौधाम योजना की स्वीकृति प्रदान की थी। योजना के तहत ऐसी शासकीय भूमि एवं गौठानों का चयन किया जाता है, जहां आवश्यक अधोसंरचना उपलब्ध हो तथा जो राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित हों। इन गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, एनजीओ, एफपीओ, ट्रस्ट तथा अब संशोधित नियमों के अनुसार ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया जा रहा है।

गौधाम की स्थापना के लिए कलेक्टर एवं जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा, पंचायत का अनापत्ति प्रमाण-पत्र तथा भौतिक सत्यापन जैसी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। इसके बाद आवेदन छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजे जाते हैं, जहां क्रियान्वयन समिति द्वारा प्रत्येक तीन माह में विस्तृत समीक्षा कर शासन को प्रशासनिक स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा जाता है। स्वीकृति, अनुबंध एवं पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से गौधामों में घुमन्तू पशुओं का व्यवस्थापन सुनिश्चित किया जाता है।

पशुधन विकास विभाग द्वारा 30 जुलाई 2026 को नियमों में संशोधन कर गौधाम संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने तथा शहरी गौठानों को योजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए व्यापक आधार तैयार हो रहा है।
योजना के अंतर्गत अब तक प्राप्त 408 आवेदनों में से 151 गौधामों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण हो गया है तथा 42 गौधामों में लगभग 5,109 निराश्रित पशुधन का संरक्षण एवं व्यवस्थापन किया जा रहा है। शेष स्वीकृत गौधामों में भी पंजीयन एवं संचालन की प्रक्रिया जारी है।

राज्य गौ सेवा आयोग ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा स्वीकृत योजना में गौधामों की कोई निर्धारित लक्ष्य संख्या तय नहीं है। हालांकि, गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष की परिकल्पना के अनुसार प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में 10 उत्कृष्ट गौठानों का चयन कर लगभग 1,460 गौधाम स्थापित करने की दिशा में चरणबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य सरकार का लक्ष्य निराश्रित एवं घुमन्तू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है। जिलों से आवश्यकता के अनुरूप लगातार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई जारी है। संशोधित प्रावधानों के बाद आने वाले समय में प्रदेश में गौधामों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 160 गांवों का होगा चयन

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 160 गांवों का होगा चयन

 00 प्रत्येक ग्रामसभा को मिलेगी 15 लाख की स्वीकृति

00 आदिम जाति विभाग द्वारा सम्बन्धित जिलों के कलेक्टरों को पत्र जारी
रायपुर।
अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 160 ग्रामों का चयन निर्धारित मापंदडों के आधार पर किया जाएगा। इन ग्रामों में सामुदायिक वन संसाधन (सीएफआर) के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन के लिए सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना (सीएफआरएमपी ) तैयार कर लागू की जाएगी। अभियान के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामसभा को सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए 15 लाख रूपए की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।

आदिम जाति विभाग द्वारा कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा गया है कि योजना के तहत प्रत्येक चयनित ग्रामसभा में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा, जो ग्रामसभा के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन और संचालन की जिम्मेदारी निभाएगी। इसके लिए ग्रामसभा के नाम पर राष्ट्रीयकृत बैंक में सिंगल करंट अकाउंट भी खोला गया है। पत्र के माध्यम से कहा गया है कि राज्य सरकार ने जिलों से ऐसे 160 गांवों का चयन क्लस्टर आधारित और परस्पर जुड़े क्षेत्र के आधार पर प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए हैं, ताकि योजनाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

पत्र में कहा गया है कि योजना के प्रभावी संचालन के लिए राज्य सरकार तकनीकी सहयोगी, सिविल सोसायटी संगठनों तथा स्थानीय संस्थाओं की सेवाएं भी ले सकेगी। इन संस्थाओं की सेवाएं ग्रामसभा के प्रस्ताव एवं विधिवत अनुमोदन के बाद लिया जा सकेगा। ये संस्थाएं ग्रामसभा को सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजना तैयार करने, उसके क्रियान्वयन तथा निगरानी में सहयोग देंगी। आदिम जाति विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में बताया कि इस पहल से वन अधिकार अधिनियम-2006 का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन होगा, ग्रामसभाओं की भूमिका मजबूत होगी तथा सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और आजीविका संवर्धन को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने धरसींवा विधानसभा को दी नि:शुल्क एम्बुलेंस की सौगात

मुख्यमंत्री साय ने धरसींवा विधानसभा को दी नि:शुल्क एम्बुलेंस की सौगात

 00 डीएमएफ से 19.65 लाख की लागत से उपलब्ध कराई गई आधुनिक एम्बुलेंस, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

 

00 हर जीवन अनमोल, समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत : साय

 
 
 

रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास से धरसींवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को नि:शुल्क एम्बुलेंस की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा विधायक  अनुज शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में एम्बुलेंस के चालक को चाबी सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी सोच के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके।

 

मुख्यमंत्री  साय ने धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी मरीज के लिए उपचार के शुरुआती क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से अनेक गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई एम्बुलेंस गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों तथा सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आकस्मिक घटनाओं में घायल लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य सुरक्षा का विश्वास भी मजबूत करेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाइयों की सुगम उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। उनका कहना था कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध समाज और विकसित राज्य की आधारशिला होते हैं, इसलिए जनस्वास्थ्य से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
इस अवसर पर धरसींवा विधानसभा के विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से एक आधुनिक एम्बुलेंस की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से लगभग 19 लाख 65 हजार रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से धरसींवा क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से मिल सकेंगी। उन्होंने बताया कि यह एम्बुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धरसींवा को सौंपी गई है, जहां से इसका संचालन किया जाएगा। यह सेवा चौबीसों घंटे क्षेत्रवासियों को उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पतालों तक सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंचाने में भी यह एम्बुलेंस अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
उल्लेखनीय है कि धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। डीएमएफ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह नि:शुल्क एम्बुलेंस क्षेत्र के हजारों नागरिकों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

दिव्यांगजनों के सम्मान और सशक्तीकरण के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री साय

दिव्यांगजनों के सम्मान और सशक्तीकरण के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री साय

 00 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांग शब्द देकर सम्मान और आत्मगौरव का नया भाव दिया : मुख्यमंत्री

 

00 प्रोजेक्ट सहारा के तहत 3.58 करोड़ रुपये के सहायक उपकरणों का वितरण, 1739 दिव्यांगजन हुए लाभान्वित

 
 
 

00 बलबीर सिंह जुनेजा स्टेडियम के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण के लिए 7 करोड़ प्रदान करने की घोषणा
रायपुर।
किसी भी संवेदनशील और विकसित समाज की पहचान इस बात से होती है कि वहां प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और आगे बढऩे का अधिकार मिले। दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी प्रतिभा, क्षमता तथा आत्मविश्वास को सही अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इसी सोच के साथ दिव्यांगजनों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक अपना योगदान दे सकें। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित प्रोजेक्ट सहारा के अंतर्गत दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगजनों के प्रति देश की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होंने केवल कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि उन्हें दिव्यांग कहकर सम्मान और आत्मगौरव का नया भाव भी दिया। यह परिवर्तन केवल शब्दों का नहीं, बल्कि समाज की सोच और दृष्टिकोण का परिवर्तन है। प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र को आत्मसात करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार भी दिव्यांगजनों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर इंडोर स्टेडियम के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण के लिए 7 करोड़ रुपये की राशि प्रदान किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना का विकास केवल खिलाडिय़ों के लिए ही नहीं, बल्कि ऐसे सामाजिक और जनहितकारी आयोजनों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल, ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, हियरिंग एड, कृत्रिम हाथ-पैर, वैशाखी, वॉकिंग स्टिक तथा अन्य आधुनिक सहायक उपकरण वितरित किए। उन्होंने हितग्राहियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि ये उपकरण केवल सहायता सामग्री नहीं हैं, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वावलंबन की नई शुरुआत हैं। इनकी सहायता से दिव्यांगजन शिक्षा, रोजगार, आवागमन और दैनिक जीवन के कार्यों में अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे तथा समाज की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जुड़ पाएंगे।
मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम की शुरुआत में प्रदेशवासियों को सावन माह के प्रथम सोमवार की शुभकामनाएं देते हुए भगवान भोलेनाथ से प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सभी नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सेवा, करुणा और मानवता का संदेश देती है तथा समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की सहायता करना हम सभी का दायित्व है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर जिले में विशेष अभियान चलाकर दिव्यांगजनों की व्यापक स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 1600 से अधिक दिव्यांगजनों की पहचान की गई। इस महत्वाकांक्षी पहल के लिए भारत सरकार से 3 करोड़ 58 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी तथा भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत पहले ही 500 से 600 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित किए जा चुके हैं, जबकि आज 1000 से अधिक हितग्राहियों को विभिन्न उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। इस प्रकार कुल 1739 दिव्यांगजन प्रोजेक्ट सहारा के माध्यम से लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों को अधिक सम्मानजनक, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सर्वांगीण कल्याण के लिए सहायक उपकरण वितरण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण, कौशल विकास, पुनर्वास और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र दिव्यांगजन शासन की सुविधाओं से वंचित न रहे। उन्होंने सभी हितग्राहियों से शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में मोदी की गारंटी के अधिकांश संकल्पों को धरातल पर उतारा है। प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना, रामलला दर्शन योजना तथा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना जैसी अनेक योजनाओं ने समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को 29 किश्तों के माध्यम से अब तक 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य नागरिकों तक शासन की सेवाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से सेवा सेतु एप के माध्यम से 36 विभागों की 500 से अधिक सेवाएं घर बैठे उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे शिकायत दर्ज कराने और समयबद्ध समाधान प्राप्त करने की सुविधा भी नागरिकों को उपलब्ध कराई गई है।

मुख्यमंत्री साय ने रायपुर जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट धड़कन, प्रोजेक्ट सुरक्षा, प्रोजेक्ट रेडक्रॉस, प्रोजेक्ट दधीचि, प्रोजेक्ट जिंदगी मुस्कुराएगी, प्रोजेक्ट नि:क्षय मित्र, प्रोजेक्ट वंदन और प्रोजेक्ट गोल्डन आवर जैसे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन की ये पहलें संवेदनशील और जनकेंद्रित सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं नवाचारों की श्रृंखला में प्रोजेक्ट 'सहाराÓ दिव्यांगजनों के जीवन में नई आशा, नई सुविधा और नया आत्मविश्वास लेकर आया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट सरल एवं प्रोजेक्ट गोल्डन आवर का शुभारंभ भी किया तथा नवाचार से प्रगति पथ पर अग्रसर रायपुर कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया।
राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रोजेक्ट सहारा के तहत वितरित किए जा रहे सहायक उपकरण दिव्यांगजनों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का वातावरण तैयार किया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन केवल शारीरिक चुनौतियों का सामना करते हैं, उनकी प्रतिभा, क्षमता और हौसले किसी भी प्रकार से कम नहीं होते।
तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि प्रोजेक्ट सहारा केवल सहायक उपकरण वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्वावलंबन और सामाजिक समावेशन का अभियान है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में राज्य सरकार आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों के माध्यम से दिव्यांगजनों को समय-समय पर कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है, जिससे वे दक्ष होकर आत्मनिर्भर बनें और सम्मानजनक रोजगार से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि आज वितरित किए जा रहे सहायक उपकरण दिव्यांगजनों के लिए स्वतंत्र जीवन और नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगे।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का किया अवलोकन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी परियोजनाओं एवं नवाचारों से संबंधित स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर योजनाओं से प्राप्त लाभ की जानकारी ली तथा अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना का लाभ पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। 
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास सुशासन को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस अवसर पर विधायक सुनील सोनी, विधायक  अनुज शर्मा, विधायक  इंद्रकुमार साहू, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन कुमार अग्रवाल, प्रमुख सचिव समाज कल्याण शहला निगार, संभागायुक्त  श्याम धावड़े, कलेक्टर  गौरव सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में दिव्यांगजन तथा उनके परिजन उपस्थित थे।

पुनर्वास नीति के तहत नक्सली हिंसा के 13 पीड़ितों को 32 लाख रुपये की सहायता

पुनर्वास नीति के तहत नक्सली हिंसा के 13 पीड़ितों को 32 लाख रुपये की सहायता

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल पर मिली आर्थिक राहत

रायपुर--मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, वन एवं बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार बीजापुर जिले में नक्सली हिंसा के 13 पीड़ितों को पुनर्वास नीति के तहत कुल 32 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।

यह सहायता उन नागरिकों के लिए स्वीकृत की गई है, जो नक्सली हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए हैं या स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे पीड़ितों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक जीवन और पुनर्वास का अवसर उपलब्ध कराना है।

इन पीड़ितों को मिलेगा लाभ

स्वीकृत सहायता राशि के अंतर्गत पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के दौरान क्रॉस फायरिंग में गंभीर रूप से घायल नंदू ओयाम और जिला कुंजाम, माओवादियों की मारपीट में घायल ईस्ता बोर्रा, बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल मितराम रावटे, आईईडी विस्फोट में घायल कोरसे संतोष, चिड़ेम कन्हैया और कविता कुड़ियम, माओवादियों की मारपीट से स्थायी रूप से दिव्यांग हुए इच्चामी सुदरू, तथा आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल या स्थायी रूप से दिव्यांग हुए राममूर्ति कारम, बबलू उर्फ मोहन कड़ती, गंगा कलमू, राजेश कुमार यादव और सोढ़ी मुकेश शामिल हैं।

डीबीटी के माध्यम से शीघ्र होगा भुगतान

कलेक्टर  विश्वदीप ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत सहायता राशि का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से शीघ्र संबंधित हितग्राहियों के बैंक खातों में किया जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।

राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सली हिंसा से प्रभावित नागरिकों को राहत, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही है। यह पहल पीड़ित परिवारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और समर्पण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव का मुख्यमंत्री निवास में भव्य स्वागत

राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव का मुख्यमंत्री निवास में भव्य स्वागत

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने की 30 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि और आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति की घोषणा

ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव, बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री

रायपुर-- ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाली राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव का आज मुख्यमंत्री निवास में आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ज्ञानेश्वरी को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए उन्हें 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान  प्रदेश की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प का सम्मान है।

राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव का मुख्यमंत्री निवास में भव्य स्वागत

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, कठोर परिश्रम और अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर ज्ञानेश्वरी ने न केवल देश के लिए पदक जीता, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की है। उनकी सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश सरकार को अपनी इस बेटी पर गर्व है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार ने उन्हें आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी उपलब्धि का सम्मान हो और प्रदेश के अन्य खिलाड़ी भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लासगो रवाना होने से पहले उन्हें ज्ञानेश्वरी से मिलने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने उनके उज्ज्वल प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी थीं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से भी उन्हें बधाई दी थी। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में उनका स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व और उत्सव का क्षण है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक खेल अधोसंरचना, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, बेहतर कोचिंग, आवश्यक संसाधन और हरसंभव प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रदेश का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक खिलाड़ी ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तिरंगा लहराएं तथा देश और प्रदेश का नाम विश्वभर में रोशन करें। ज्ञानेश्वरी यादव जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस दिशा में नई पीढ़ी का आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ज्ञानेश्वरी भविष्य में भी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें अवसर देना और उनकी उपलब्धियों का सम्मान करना सरकार की खेल नीति का महत्वपूर्ण आधार है। यही प्रयास आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगा।

ब्रेकिंग: बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा में बड़ी चूक, 8 नाबालिग चकमा देकर फरार

ब्रेकिंग: बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा में बड़ी चूक, 8 नाबालिग चकमा देकर फरार

 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित बरोंडा बाजार बाल संप्रेक्षण गृह से सोमवार तड़के 8 नाबालिगों के फरार होने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि देर रात करीब 2 से 3 बजे के बीच सभी ने खिड़की की ग्रील तोड़कर परिसर से भागने की योजना को अंजाम दिया। घटना सामने आते ही संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।  जानकारी के मुताबिक, फरार हुए सभी नाबालिग पिछले चार से पांच महीनों के दौरान अलग-अलग मामलों में यहां निरुद्ध किए गए थे। इनमें एक दुष्कर्म, दो चोरी और अन्य एनडीपीएस एक्ट समेत विभिन्न आपराधिक मामलों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनका संबंध महासमुंद, सरायपाली, धमतरी और पड़ोसी राज्य ओडिशा के विभिन्न थाना क्षेत्रों से है।  घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। पूरे परिसर की जांच की जा रही है, जबकि फरार नाबालिगों की तलाश के लिए जिलेभर में सर्च अभियान तेज कर दिया गया है। गौरतलब है कि, करीब दो वर्ष पहले भी इसी बाल संप्रेक्षण गृह से बच्चों के फरार होने की घटना सामने आई थी। लगातार दूसरी बार हुई इस चूक ने सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। पुलिस मामले की जांच के साथ जिम्मेदारों की भूमिका भी खंगाल रही है।

नशा दीमक की तरह जीवन को खोखला कर देता है : राजस्व मंत्री वर्मा

नशा दीमक की तरह जीवन को खोखला कर देता है : राजस्व मंत्री वर्मा

 o ​नशामुक्त युवा ही बनाएंगे ‘विकसित भारत’

o बलौदाबाजार में ‘नशामुक्त युवा संकल्प अभियान’ का आगाज
o राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने दिलाई शपथ

बलौदाबाजार- भाटापारा। पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा देशव्यापी ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के वर्चुअल शुभारंभ के साथ ही बलौदाबाजार- भाटापारा जिले में भी इस महाअभियान का शंखनाद हुआ। मुख्य अतिथि की आसंदी से राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि “नशा एक दीमक की तरह है जो न केवल व्यक्ति को खोखला करता है, बल्कि उसके परिवार, माता-पिता के सपनों और भविष्य को भी तबाह कर देता है।

बलौदाबाजार- भाटापारा जिला के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने उपस्थित युवाओं को स्वयं नशे से दूर रहने तथा परिवार व समाज को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि,पीएम मोदी के 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इतिहास गवाह है कि देश में जितने भी बड़े परिवर्तन हुए हैं, वे युवाओं के दम पर ही संभव हुए हैं। युवाओं को नशे के चंगुल से मुक्त रहकर राष्ट्र निर्माण में अपनी ऊर्जा लगानी होगी।

​100 सप्ताह तक चलेगा जनजागरूकता का महाअभियान
इस संकल्प अभियान के तहत आगामी 100 हफ्तों तक जिले भर में खेल, कला, संस्कृति और जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने नशामुक्ति पर केंद्रित एक बेहद संवेदनशील व आकर्षक नाटिका का मंचन किया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

​जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने युवाओं को संदेश में कहा कि नशा केवल व्यक्ति का नहीं, पूरे परिवार का विनाश करता है। हमारी युवा पीढ़ी को सही संस्कार और विचार अपनाकर अपने भविष्य को सुरक्षित करना होगा। एक समृद्ध और स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए युवाओं का व्यसनमुक्त होना अनिवार्य है। इस 100-साप्ताहिक अभियान में जिले के युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। ​इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, जनपद अध्यक्ष सुलोचना यादव, जिला पंचायत सदस्य ईशान वैष्णव, कलेक्टर कुलदीप शर्मा, खेल अधिकारी सहित अनेक स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में युवा उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री साव ने टेंट एंड डेकोर एक्सपो का किया शुभारंभ

उप मुख्यमंत्री साव ने टेंट एंड डेकोर एक्सपो का किया शुभारंभ

रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज रायपुर के लाभांडी में छत्तीसगढ़ टेंट ओनर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित सीजी टेंट एंड डेकोर एक्सपो-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने एक्सपो का अवलोकन कर टेंट एवं डेकोरेशन से जुड़े आधुनिक उत्पादों, आकर्षक डिज़ाइनों और नई तकनीकों की सराहना की। एक्सपो के शुभारंभ के मौके पर विधायक मोतीलाल साहू, टेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी तथा देशभर से आए टेंट व्यवसायी एवं इससे जुड़े लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।उप मुख्यमंत्री  साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि टेंट व्यवसाय आज तेजी से विकसित होकर एक सशक्त उद्योग के रूप में स्थापित हो रहा है। नई थीम और लगातार हो रहे नवाचार इस क्षेत्र को नई पहचान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कम समय में किसी भी स्थान का स्वरूप बदल देना टेंट व्यवसायियों की रचनात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण है।उप मुख्यमंत्री  साव ने एक्सपो की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन कई शहरों के व्यवसायियों को एक मंच पर लाकर अनुभव साझा करने और व्यापार के नए अवसर तलाशने का अवसर देते हैं। यह एक्सपो टेंट उद्योग को बढ़ाने के साथ ही राज्य की आर्थिक गतिविधियों को और गति प्रदान करेगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ टेंट ओनर वेलफेयर एसोसिएशन को एक्सपों के आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों को मिलेगी मजबूत डिजिटल पहचान, 2,305 नए मोबाइल टावरों के लिए मुख्यमंत्री साय ने केंद्र से मांगी मंजूरी

छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों को मिलेगी मजबूत डिजिटल पहचान, 2,305 नए मोबाइल टावरों के लिए मुख्यमंत्री साय ने केंद्र से मांगी मंजूरी

 00 केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया से साय ने की मुलाकात, प्रदेश में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार पर हुई विस्तृत चर्चा

00 577 अतिरिक्त मोबाइल टावरों की स्वीकृति पर मुख्यमंत्री ने जताया केंद्र सरकार का आभार

00 मोबाइल नेटवर्क का विस्तार शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और सुशासन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम - मुख्यमंत्री साय
00 489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को भूमि संबंधी एनओसी जारी, शेष 88 स्थानों पर भी शीघ्र पूरी होगी प्रक्रिया

00 दूरस्थ और जनजातीय अंचलों को डिजिटल मुख्यधारा से जोड़कर समावेशी विकास को मिलेगी नई गति - मुख्यमंत्री
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली स्थित संचार भवन में केंद्रीय संचार मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में डिजिटल एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी के विस्तार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री  साय ने विशेष रूप से प्रदेश के दूरस्थ, जनजातीय, सीमावर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों में निर्बाध मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) योजना के अंतर्गत प्रस्तावित 2,305 नए मोबाइल टावरों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के संकल्प को छत्तीसगढ़ के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। भौगोलिक दृष्टि से कठिन और दूरस्थ क्षेत्रों में मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी आज केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। मोबाइल नेटवर्क और हाई-स्पीड इंटरनेट की उपलब्धता से इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं तक सहज पहुंच मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के अनेक दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण संचार नेटवर्क का विस्तार चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में 2,305 नए मोबाइल टावरों की स्थापना डिजिटल समावेशन की दिशा में बड़ा परिवर्तन लाएगी। उन्होंने कहा कि इससे उन गांवों और बसाहटों तक भी विश्वसनीय मोबाइल एवं इंटरनेट नेटवर्क पहुंचेगा, जो अब तक पर्याप्त संचार सुविधाओं से वंचित रहे हैं।577 अतिरिक्त टावरों की स्वीकृति से दुर्गम क्षेत्रों में बढ़ेगी कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सल प्रभावित रहे एवं दुर्गम क्षेत्रों के लिए 577 अतिरिक्त मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्रदान किए जाने पर केंद्र सरकार तथा केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय विशेष रूप से बस्तर सहित कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों को डिजिटल मुख्यधारा से जोडऩे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में आज शांति और विकास का नया वातावरण बन रहा है, वहां मजबूत संचार नेटवर्क विकास की गति को और तेज करेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद मजबूत होगा, आपातकालीन परिस्थितियों में संपर्क सुगम होगा और शासन की ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लोगों को अपने गांव के निकट ही प्राप्त हो सकेगा।
489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को एनओसी जारी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्वीकृत मोबाइल टावरों की स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा कर रही है। कुल 577 स्थानों में से अब तक 489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को भूमि संबंधी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी किए जा चुके हैं। शेष 88 स्थानों के लिए भी आवश्यक प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है और शीघ्र ही स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन स्थानों पर आवश्यक अनुमति और भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां बीएसएनएल द्वारा मोबाइल टावरों की स्थापना का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। राज्य शासन संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के माध्यम से आवश्यक समन्वय सुनिश्चित कर रहा है, ताकि टावरों की स्थापना में किसी प्रकार का अनावश्यक विलंब न हो।
डिजिटल कनेक्टिविटी बनेगी शिक्षा और स्वास्थ्य की नई ताकत

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल एवं इंटरनेट नेटवर्क के विस्तार का सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। इंटरनेट कनेक्टिविटी मजबूत होने से विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और डिजिटल शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। इसी प्रकार टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिक विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं से अधिक आसानी से जुड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत नेटवर्क से बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल भुगतान और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाएं भी अधिक प्रभावी होंगी। ग्रामीण नागरिकों को विभिन्न प्रमाण-पत्रों, आवेदनों और अन्य ऑनलाइन शासकीय सेवाओं के लिएअनावश्यक रूप से दूर नहीं जाना पड़ेगा। इस प्रकार डिजिटल कनेक्टिविटी शासन को नागरिकों के और करीब लाने का माध्यम बनेगी।शांति के साथ विकास और अब डिजिटल सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहा बस्तर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ अब डिजिटल कनेक्टिविटी को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। वर्षों तक भौगोलिक कठिनाइयों और अन्य चुनौतियों के कारण संचार सुविधाओं से वंचित रहे गांवों को मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क से जोडऩा वहां के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी से स्थानीय युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसरों की जानकारी मिलेगी। ग्रामीण उद्यमियों और स्व-सहायता समूहों के लिए डिजिटल बाजारों तक पहुंच आसान होगी तथा किसानों को मौसम, कृषि तकनीक और बाजार से जुड़ी सूचनाएं समय पर मिल सकेंगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि तकनीक का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि सुदूर वनांचल और जनजातीय क्षेत्रों के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत प्रस्तावित 2,305 मोबाइल टावरों को स्वीकृति मिलने से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार को बड़ी गति मिलेगी।

बस्तर के 461 पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक बिजली पहुंचाने की पहल, केंद्र से विशेष सहायता का आग्रह

बस्तर के 461 पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक बिजली पहुंचाने की पहल, केंद्र से विशेष सहायता का आग्रह

  00 मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से की मुलाकात

रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम से मुलाकात कर धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत बस्तर संभाग के 7 जिलों के 461 दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक ग्रिड बिजली पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से 435 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव सौंपते हुए कहा कि जिन गांवों में वर्षों तक नक्सल हिंसा के कारण विकास नहीं पहुंच सका, वहां अब बिजली जैसी बुनियादी सुविधा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना की कुल लागत 973 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार से तीन वित्तीय वर्षों में सहायता मांगी गई है। वर्ष 2026-27 में 85 करोड़ रुपये, 2027-28 में 250 करोड़ रुपये और 2028-29 में 100 करोड़ रुपये, यानी कुल 435 करोड़ रुपये केंद्र से अपेक्षित हैं, जबकि शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत इस प्रस्ताव को विशेष प्रकरण मानते हुए शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि बस्तर के दूर-दराज़ गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि बिजली पहुंचने से आदिवासी परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा छोटे उद्योगों को नई गति मिलेगी।

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत प्रस्ताव प्राप्त होते ही उस पर तत्काल स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए धनराशि की कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी और केंद्र सरकार बस्तर के विकास के लिए पूरा सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब विकास, विश्वास और नई संभावनाओं की पहचान बन रहा है। इन 461 गांवों तक बिजली पहुंचना उसी परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

अरुणाचल मॉडल पर बस्तर में सड़क निर्माण की मांग, मुख्यमंत्री साय ने केंद्र से किया आग्रह

अरुणाचल मॉडल पर बस्तर में सड़क निर्माण की मांग, मुख्यमंत्री साय ने केंद्र से किया आग्रह

 00 PMGSY-IV में 10 किमी क्लस्टर की विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव, केंद्रीय मंत्री चौहान ने दिया सकारात्मक आश्वासन

रायपुर-नई दिल्ली। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर बस्तर संभाग के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक सड़क संपर्क मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) में विशेष प्रावधान करने का आग्रह किया। बैठक में प्रदेश के गृह मंत्री श्री विजय शर्मा, भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव तथा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह भी उपस्थित थे। इस दौरान गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने बस्तर सहित प्रदेश में ग्रामीण विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के अनेक गांव घने जंगलों, पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत केवल 500 मीटर की परिधि में स्थित बसाहटों को एक क्लस्टर माना जाता है। इस व्यवस्था के कारण बस्तर के अनेक छोटे और दूरस्थ गांव सड़क सुविधा से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि अरुणाचल प्रदेश की तरह बस्तर में भी 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित बसाहटों को एक क्लस्टर मानने की विशेष अनुमति दी जाए, ताकि अधिक से अधिक गांवों को सड़क संपर्क से जोड़ा जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद के दौर से निकलकर तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में बेहतर सड़क संपर्क क्षेत्र के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि विकास, सुरक्षा और समृद्धि की आधारशिला हैं। इसलिए बस्तर की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दी जानी चाहिए।

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को गंभीरता से सुना और इस पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बस्तर जैसे दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है और राज्य सरकार के प्रस्ताव पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीरामजी योजना के तहत मुक्तिधाम और शौचालय निर्माण जैसे कार्य प्रभावी ढंग से हो रहे हैं। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के बेहतर क्रियान्वयन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतिदिन लगभग 1,500 आवासों का निर्माण एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में विकास कार्य और अधिक गति से आगे बढ़ेंगे।

भरपूर खाद-बीज, मजबूत योजनाएं और आधुनिक खेती से समृद्धि की राह पर छत्तीसगढ़ का किसान

भरपूर खाद-बीज, मजबूत योजनाएं और आधुनिक खेती से समृद्धि की राह पर छत्तीसगढ़ का किसान

 00 उर्वरकों का 98 प्रतिशत भंडारण, किसानों को डीबीटी से हजारों करोड़ की सहायता, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति

00 कृषि मंत्री नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ परदेशी ने विभागीय उपलब्धियों पर दी विस्तृत जानकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी, तकनीक आधारित और किसान केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा कृषि अधोसंरचना के विकास के माध्यम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी मंत्री श्री रामविचार नेताम तथा कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज संयुक्त रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभागीय उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर कृषि विभाग के संचालक श्री राहुल देव, पशुधन विकास विभाग के श्री चंद्रकांत वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के एमडी श्री अजय अग्रवाल, उद्यानिकी विभाग संचालक श्री लोकेश चंद्राकर, मत्सय विभाग के संचालक श्री एनएस नाग, छत्तीसगढ़ राज्य मण्डी बोर्ड के एमडी श्री महेन्द्र सवन्नी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति के डॉ. विनित सक्सेना उपस्थित थे। 

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी मंत्री श्री रामविचार नेताम तथा कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज संयुक्त रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभागीय उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता किसानों की आय में वृद्धि, खेती की लागत में कमी तथा कृषि को आधुनिक और टिकाऊ बनाना है। राज्य में कृषि एवं उससे जुड़े सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं।

प्रदेश में पर्याप्त खाद और बीज की उपलब्धता
प्रेसवार्ता में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए अप्रैल से सितंबर तक 15.55 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 30 जुलाई 2026 तक 15.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 98 प्रतिशत है। किसानों द्वारा अब तक 10.23 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का उठाव किया जा चुका है तथा लगभग 4.93 लाख मीट्रिक टन उर्वरक शेष उपलब्ध है। यूरिया का लक्ष्य से अधिक 102 प्रतिशत भंडारण किया गया है, जबकि डीएपी, एनपीके, एमओपी एवं एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। विभाग द्वारा कालाबाजारी, जमाखोरी तथा अवैध भंडारण पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। 30 जुलाई तक 5,466 निरीक्षण किए गए, जिनमें अनेक मामलों में एफआईआर, लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण तथा उर्वरक जब्ती जैसी कार्रवाई की गई। प्रदेश में खरीफ 2026 के लिए लगभग 4.95 लाख क्विंटल बीज की मांग के विरुद्ध 4.85 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण किया गया है, जो लगभग 98 प्रतिशत उपलब्धता को दर्शाता है।
कृषक उन्नति योजना से किसानों को मिली बड़ी आर्थिक ताकत
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में सहायता राशि उपलब्ध कराई जा रही है। खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए धान के स्थान पर अन्य फसल लेने वाले किसानों को प्रति एकड़ मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दी गई है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से लाखों किसानों को लाभ
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई। अब तक किसानों को 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। एग्रीस्टैक और ई-केवाईसी के माध्यम से योजना को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है।
बढ़ रहा है कृषि का रकबा, 83 प्रतिशत बोनी पूर्ण
इस वर्ष खरीफ में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक लगभग 83 प्रतिशत क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है। प्रदेश में औसत वर्षा भी सामान्य से अधिक दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है।
आधुनिक खेती को मिल रहा बढ़ावा
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि राज्य में कृषि यंत्रीकरण के तहत अब तक 7,745 किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं तथा 568 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं, जिससे छोटे एवं सीमांत किसानों को भी आधुनिक उपकरणों का लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 49,983 किसानों को लाभान्वित करते हुए लगभग 41,967 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है तथा 147 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान प्रदान किया गया है। प्राकृतिक खेती को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 57 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है।
दलहन-तिलहन उत्पादन पर विशेष जोर
मंत्री श्री राम विचार नेताम प्रेसवार्ता में बताया कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन, आत्मनिर्भर दलहन मिशन तथा नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयलसीड्स जैसी योजनाओं के माध्यम से दलहन एवं तिलहन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसानों को प्रमाणित बीज, प्रशिक्षण, फसल प्रदर्शन तथा अनुदान आधारित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
एग्रीस्टैक से डिजिटल कृषि को नई पहचान
प्रदेश के 19,389 ग्रामों का जियो-रेफरेंसिंग पूरा किया जा चुका है तथा 36 लाख से अधिक किसानों का डिजिटल पंजीयन किया गया है। एग्रीस्टैक के माध्यम से पीएम-किसान, पीएम-आशा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित विभिन्न योजनाओं को एकीकृत किया जा रहा है, जिससे किसानों को पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
उद्यानिकी में लगातार बढ़ रहा क्षेत्र और उत्पादन
बीते ढाई वर्षों में उद्यानिकी फसलों का कुल रकबा 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। फल, सब्जी, मसाला, पुष्प एवं औषधीय फसलों के क्षेत्र और उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। ऑयल पाम के क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत तथा बांस रोपण में 79 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में हाईटेक नर्सरियों, टिश्यू कल्चर लैब, ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस, पैक हाउस तथा कोल्ड स्टोरेज जैसी अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। आगामी वर्षों में बलरामपुर एवं जशपुर में इंटीग्रेटेड पैक हाउस तथा नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में नई उपलब्धियां
पशुधन विकास विभाग के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में दूध, अंडा एवं मांस उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य सरकार, छत्तीसगढ़ सहकारी दुग्ध महासंघ और एनडीडीबी के बीच हुए समझौते के बाद दुग्ध उत्पादकों को अब प्रत्येक दस दिन में भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। दूध संकलन दर भी बढ़ाई गई है तथा नई दुग्ध समितियों, चिलिंग सेंटर और डेयरी अधोसंरचना का विस्तार किया गया है। मोबाइल वेटेरिनरी यूनिटों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। गौधाम योजना, गौशालाओं के अनुदान में वृद्धि तथा नए गौ-अभ्यारण्यों की स्थापना भी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।
छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल
मंत्री श्री नेताम ने बताया कि मत्स्य पालन विभाग ने ढाई वर्षों में जलक्षेत्र विकास, मत्स्य उत्पादन, केज कल्चर, बायोफ्लॉक, तालाब निर्माण और झींगा पालन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया है। राज्य का मत्स्य उत्पादन लगभग 23 प्रतिशत बढ़कर 9.59 लाख टन पहुंच गया है। प्रदेश आज देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है।
कृषि विपणन और अधोसंरचना को गति
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) से प्रदेश की 21 मंडियां जुड़ चुकी हैं। ई-ट्रेडिंग के माध्यम से अंतरराज्यीय व्यापार को बढ़ावा मिला है। कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) के अंतर्गत प्रदेश ने 1,900 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 3,026 करोड़ रुपये की उपलब्धि हासिल कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। प्रदेश की मंडियों एवं उपमंडियों में किसानों की सुविधा के लिए 885 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न अधोसंरचना विकास कार्य स्वीकृत एवं निर्मित किए गए हैं।
राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण संस्था द्वारा बीज उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन साथी पोर्टल से जोड़ा गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला कृषकों को बीज प्रमाणीकरण शुल्क पर शत-प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है, जिससे वर्ष 2025-26 में 7,510 किसानों को लाभ मिला। रायपुर स्थित बीज परीक्षण प्रयोगशाला को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हुई है, जो छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश की पहली एनएबीएल मान्यता प्राप्त शासकीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला है। वर्ष 2025-26 में यहां 15 हजार बीज नमूनों का सफल परीक्षण किया गया।
प्रेसवार्ता के अंत में मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने, कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने तथा आधुनिक तकनीक और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज, पर्याप्त उर्वरक, डिजिटल सेवाओं, आधुनिक तकनीक और प्रभावी योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ कृषि विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

श्रमिक सम्मेलन में शामिल हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, ई- रिक्शे में की सवारी

श्रमिक सम्मेलन में शामिल हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, ई- रिक्शे में की सवारी

 राजनांदगांव। शहर के पद्मश्री गोविंद राम निर्मलकर ऑडिटोरियम में श्रमिक सम्मेलन के आयोजन में विधानसभा अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक डॉ रमन सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने श्रम कल्याण एवं भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार मंडल के 1802 हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ देते हुए लगभग साढ़े तीन करोड़ की राशि डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने श्रमिक सम्मेलन में शामिल होते हुए। श्रम कल्याण एवं भवन सन्निमार्ण कर्मकार मंडल के तहत चलाए जा रही योजनाओं की जानकारी दी। वहीं विभिन्न श्रमिक विभाग के तहत विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों से चर्चा की। इस चर्चा के दौरान उन्होंने दीदी ई रिक्शा सहायता योजना प्राप्त महिला से आयोजन समाप्ति के बाद उनके ई-रिक्शा में जाने इच्छा जताई। आयोजन के दौरान डॉ रमन सिंह ने श्रम विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत 1802 हितग्राहियों को 3 करोड़ 43 लाख 74 हजार 970 रूपए की राशि से लाभान्वित किया।

सम्मेलन को छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष राम प्रताप सिंह एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा ने भी संबोधित किया। आयोजन के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह कार्यक्रम स्थल से ई-रिक्शा में सवार होकर पार्टी की बैठक के लिए निकले।

Breaking: गरियाबंद में पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ, महीनों से फैली दहशत का हुआ अंत

Breaking: गरियाबंद में पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ, महीनों से फैली दहशत का हुआ अंत

 गरियाबंद। वन परिक्षेत्र के अंतर्गत ग्राम केराबाहरा में पिछले कई महीनों से दहशत का कारण बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद हो गया।शुक्रवार शाम तेंदुआ के पिंजरे में फंसते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वहीं वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी बड़ी अनहोनी टलने पर संतोष जताया।

जानकारी के अनुसार तेंदुआ लंबे समय से गांव में घुसकर कुत्तों और मुर्गियों का शिकार कर रहा था। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीण भय के माहौल में जी रहे थे।ग्रामीणों ने कई बार वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने की मांग की,लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती गई।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से मामले में संज्ञान लिया गया,जिसके बाद वन विभाग हरकत में आया और तीन दिन पहले गांव में पिंजरा लगाया गया।

शुक्रवार शाम तेंदुआ शिकार की तलाश में पिंजरे के भीतर पहुंचा और उसमें कैद हो गया।तेंदुए के पकड़ में आते ही गांव में खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते तेंदुआ पकड़ लिया गया,जिससे किसी बड़ी जनहानि की आशंका टल गई।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू कर नियमानुसार उपयुक्त वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वन्यजीव दिखाई देने पर स्वयं कोई जोखिम न उठाएं और तत्काल वन विभाग को सूचना दें।

 
 
​डिजिटल क्रांति की ओर छत्तीसगढ़, ‘वसुंधरा’ परियोजना से राजस्व सेवाओं में पारदर्शी और सुरक्षित होगा नया सवेरा….

​डिजिटल क्रांति की ओर छत्तीसगढ़, ‘वसुंधरा’ परियोजना से राजस्व सेवाओं में पारदर्शी और सुरक्षित होगा नया सवेरा….

 रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा प्रदेश के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। ‘वसुंधरा’ (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों और तहसीलों के पुराने एवं वर्तमान राजस्व अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा प्रमाणीकरण किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में ‘वसुंधरा परियोजना’ के तहत राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे खसरा, बी-1 और ऋण पुस्तिका जैसे भूमि दस्तावेज कुछ ही सेकंड में व्हाट्सएप और ऑनलाइन माध्यमों से सुरक्षित व पारदर्शी रूप से नागरिकों को मिल रहे हैं।

​दंतेवाड़ा का सफल मॉडल बना प्रेरणा

इस महत्वाकांक्षी योजना की नींव दंतेवाड़ा जिले में सफलतापूर्वक क्रियान्वित किए गए मॉडल पर रखी गई है। दंतेवाड़ा में पिछले एक वर्ष के दौरान 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया और 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र मात्र एक से दो दिनों में जारी किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निराकरण संभव हुआ और अभिलेखों में छेड़छाड़ का एक भी मामला सामने नहीं आया।

12.89 करोड़ पृष्ठों के डिजिटलीकरण का विशाल लक्ष्य

दंतेवाड़ा के इसी सफल प्रयोग के आधार पर अब पूरे राज्य में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के विभिन्न राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज़ करने का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत 22.72 करोड़ रुपए की लागत से 5.68 करोड़ पृष्ठ खसरा पांचसाला, 11.77 करोड़ रुपए की लागत से 2.94 करोड़ पृष्ठ B-1 रिकॉर्ड, 9.98 करोड़ रुपए की लागत से 2.49 करोड़ पृष्ठ नामांतरण व संशोधन पंजी, 2.13 करोड़ रुपए की लागत से 53.16 लाख पृष्ठ मिसल पंजी और 1.89 करोड़ रुपए की लागत से 47.29 लाख पृष्ठ अधिकार अभिलेख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट एवं व्यवर्तन पंजी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा।

​मजबूत वित्तीय संरचना और चरणबद्ध समयसीमा

इस विशाल परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 65.41 करोड़ रुपए की कुल एकमुश्त पूंजीगत लागत (CAPEX) और 50 लाख रूपए प्रति वर्ष का परिचालन व्यय (OPEX) तय किया गया है, जिसकी वित्तीय व्यवस्था राज्य के अधोसंरचना मद और केंद्र सरकार की DILRMP 3.0 योजना से की जाएगी। योजना के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से अगले तीन महीनों के भीतर वसुंधरा पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा, जिसके बाद कार्यदायी एजेंसियों का चयन कर एक वर्ष के भीतर सभी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सत्यापन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

आधुनिकतम तकनीक से लैस और पूरी तरह सुरक्षित

​’वसुंधरा’ परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसमें आधुनिकतम तकनीकों का समावेश है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित OCR, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और स्मार्ट सर्च इंजन की मदद से दशकों पुराने रिकॉर्ड भी पलक झपकते ही खोजे जा सकेंगे। वहीं अभिलेखों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या हेरफेर को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर और यूनिक QR व बारकोड प्रणाली लागू की जाएगी। दस्तावेजों के ऑनलाइन होने से रिकॉर्ड में किसी भी तरह के अवैध बदलाव या छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म होना।

​नागरिकों को मिलेगी दफ्तरों के चक्करों से आजादी

इस योजना के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद वर्तमान में नकल प्राप्ति में लगने वाला 3 से 7 दिनों का समय घटकर मात्र कुछ मिनटों का रह जाएगा और यह सेवा नागरिकों को 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। घर बैठे कुछ ही पलों में जमीन के जरूरी दस्तावेज प्राप्त किया जा सकेगा । नागरिक अब वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्रों और कियोस्क के माध्यम से घर बैठे प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकेंगे। सुगम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और अधिकारियों के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं से आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार का यह नवाचार न केवल भूमि विवादों और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाएगा, बल्कि राज्य में डिजिटल गवर्नेंस और सुशासन के एक नए युग का सूत्रपात भी करेगा।

Crime: विधवा महिला के घर चोरों का धावा: अलमारी से धान बिक्री के पैसे लेकर फरार, आरोपी की तलाश में पुलिस…

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 धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में इन दिनों चोरों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। ताजा मामला मगरलोड थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां चोरों ने विधवा महिला की मेहनत की कमाई पर डाका डाला है। इस घटना के बाद महिला ने पुलिस से जल्द से जल्द कारवाई की मांग की है

पढ़िए पूरी खबर

दरअसल, पीड़िता संतोषी साहू धौराभाटा गांव में अपने दो बेटों के साथ रहती है। उसने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि अपनी रवि फसल से उपजे धान को बेचकर लगभग 58 हजार की कमाई की थी। बचत के 28 हजार अपने घर के अलमारी में रखे थे।

मामला दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस

दो दिन पहले वह काम पर गई, तो इस दौरान सूने मकान का फायदा उठाकर अज्ञात चोर ने घर के पीछे दरवाजे में सेंधमारी कर अलमारी से 28 हजार पर हाथ साफ कर दिया, महिला जब अन्य सदस्य के साथ घर पहुंची तो चोरी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने पुलिस में FIR दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात चोर की तलाश शुरु कर दी है।

Crime News- पति ही निकला पत्नी का हत्यारा: चरित्र शंका में ईंट और CFL बल्ब से की हत्या, पुलिस ने किया खुलासा…

Crime News- पति ही निकला पत्नी का हत्यारा: चरित्र शंका में ईंट और CFL बल्ब से की हत्या, पुलिस ने किया खुलासा…

 कवर्धा। छत्तीसगढ़ की कवर्धा पुलिस ने महिला के हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। हत्यारा कोई और नहीं बल्कि उसका पति निकला, जिसने चरित्र शक के चलते उसकी ईंट और CFL बल्ब से मारकर हत्या कर दी थी।

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यह पूरा मामला, लोहारा थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, पत्नी किरण वर्मा के चरित्र पर संदेह के चलते द्रोणाचार्य वर्मा ने ईंट और सीएफएल बल्ब से हमला कर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी खुद थाने पहुंचा और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की।

खेत में मिला था शव

जांच के दौरान पुलिस ने 16 जुलाई को ग्राम सिंगारपुर में किरण का शव खेत के ट्यूबवेल के पीछे से बरामद किया था। पुलिस और साइबर सेल की जांच में आरोपी द्रोणाचार्य वर्मा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

न्यायिक रिमांड पर भेजा गया जेल

उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त ईंट, सीएफएल बल्ब के टूटे टुकड़े और खून से सने कपड़े बरामद किए गए। आरोपी को गिरफ्तार कर आज न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

जनता की सेहत से कोई समझौता नहीं: मंत्री राजवाड़े

जनता की सेहत से कोई समझौता नहीं: मंत्री राजवाड़े

 रायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं भटगांव विधायक लक्ष्मी राजवाड़े ने शुक्रवार को भटगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण कर अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, उपचार व्यवस्था, स्वच्छता तथा अस्पताल संचालन की स्थिति का जायजा लिया।

मंत्री राजवाड़े ने ओपीडी, वार्ड, प्रसूति कक्ष, दवा वितरण केंद्र, पेयजल व्यवस्था एवं अस्पताल परिसर की साफ-सफाई का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों से चर्चा कर उपचार, दवाओं की उपलब्धता तथा अन्य सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि अस्पताल में पाई गई कमियों को तत्काल दूर किया जाए तथा मरीजों को समय पर उपचार, आवश्यक दवाएं एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, दवाओं का पर्याप्त भंडारण बनाए रखने तथा चिकित्सा उपकरणों के सुचारू संचालन के निर्देश दिए।

राजवाड़े ने कहा कि प्रदेश सरकार आमजन को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मेरे क्षेत्र की देवतुल्य जनता को बेहतर, सुगम और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को अस्पताल आने वाले प्रत्येक मरीज के साथ संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने तथा गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही अस्पताल परिसर में स्वच्छता एवं संक्रमण नियंत्रण संबंधी मानकों का कड़ाई से पालन करने पर विशेष जोर दिया।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण एवं अंचल क्षेत्रों के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए इन संस्थानों में सभी आवश्यक सुविधाएं प्रभावी एवं व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहना आवश्यक है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को नियमित निगरानी एवं शिकायतों के त्वरित निराकरण के निर्देश भी दिए।निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री आवास योजना से साकार हो रहा गरीब परिवारों के अपने घर का सपना

प्रधानमंत्री आवास योजना से साकार हो रहा गरीब परिवारों के अपने घर का सपना

 00 मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में जरूरतमंदों को मिल रहा सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर जीवन

00 जशपुर के सुनील पांडेय की बदली जिंदगी, कच्चे मकान से पक्के आशियाने तक का प्रेरक सफर

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) प्रदेश के हजारों जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप गरीब और आवासविहीन परिवारों का वर्षों पुराना पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। यह योजना केवल एक मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार भी प्रदान कर रही है।

जशपुर जिले के तपकरा निवासी सुनील पांडेय की कहानी इस परिवर्तन की जीवंत मिसाल है। कभी उनका परिवार कच्चे मकान में रहने को विवश था। बरसात के मौसम में टपकती छत, भीगता सामान और असुरक्षित वातावरण उनके लिए हर साल बड़ी परेशानी बन जाता था। परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का सपना आर्थिक अभाव के कारण अधूरा ही रह जाता था। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत सुनील पांडेय को पक्के आवास की स्वीकृति मिली। शासन से प्राप्त सहायता के माध्यम से उन्होंने अपना नया घर बनवाया। आज उनका परिवार सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण में जीवन व्यतीत कर रहा है। सुनील पांडेय बताते हैं कि पक्का घर मिलने के बाद उनके परिवार की सबसे बड़ी चिंता समाप्त हो गई है। अब बरसात का मौसम डर नहीं, बल्कि सुकून लेकर आता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को केवल एक घर ही नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और नए विश्वास के साथ जीवन जीने का अवसर भी दिया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना प्रदेश के हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक बनकर उभरी है। पक्के आवास के माध्यम से गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार मिल रहा है, जिससे विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिल रही है।

राजस्व मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं, समय पर निपटाएं नामांतरण और बंटवारा - मंत्री वर्मा

राजस्व मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं, समय पर निपटाएं नामांतरण और बंटवारा - मंत्री वर्मा

 00 धमतरी में विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक- बाढ़ आपदा से निपटने के दिए पुख्ता निर्देश

00 मंत्री ने हितग्राहियों को सौंपे स्वामित्व कार्ड और जाति प्रमाण पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष धमतरी में कल आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, स्वामित्व कार्ड और भूमि डायवर्सन जैसे जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम जनता को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे सरकारी योजनाओं का लाभ
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री  वर्मा ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उनका सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मंत्री  वर्मा ने 5 हितग्राहियों को स्वामित्व कार्ड तथा 5 हितग्राहियों को जाति प्रमाण पत्र का वितरण भी किया।

मानसून और संभावित बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारी तेज़
मानसून के मौसम को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने संभावित बाढ़ और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाए। राहत एवं बचाव दलों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा जाए। किसी भी आपात स्थिति में जन-धन की सुरक्षा के लिए संसाधन और त्वरित राहत व्यवस्था सुनिश्चित हो। बैठक के दौरान मंत्री टंक राम वर्मा ने विभिन्न विभागीय कार्यों की प्रगति पर भी विस्तृत दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें, गणवेश और साइकिल का वितरण समय पर हर हाल में सुनिश्चित किया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए। वहीं, कृषि विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि मानसून और बोआई के इस मौसम में किसानों को खाद एवं बीज की उपलब्धता में किसी भी तरह की कमी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए मंत्री वर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा आयुष्मान भारत योजना का अधिकतम लाभ आम जनता तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।

धमतरी में बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं का हो रहा विस्तार
समीक्षा के दौरान कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिले में चल रही विकास परियोजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जिले में 200 बिस्तरीय मातृ-शिशु अस्पताल, नेत्र एवं ट्रॉमा सेंटर के साथ-साथ कुरूद में 100 बिस्तरीय अस्पताल व नर्सिंग कॉलेज का निर्माण प्रगति पर है। इसी तरह सड़क, ऑडिटोरियम, इनडोर स्टेडियम, नालंदा परिसर, रेलवे, औद्योगिक पार्क और पर्यटन विकास के कार्यों को आगामी दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में प्रत्येक अधिकारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में पुलिस अधीक्षक, वनमंडलाधिकारी, जिला पंचायत सीईओ सहित जिले के सभी प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।