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मुख्यमंत्री साय की बड़ी सौगात: जशपुर में श्री नदी पर बनेगा उच्च स्तरीय पुल, तीन राज्यों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

मुख्यमंत्री साय की बड़ी सौगात: जशपुर में श्री नदी पर बनेगा उच्च स्तरीय पुल, तीन राज्यों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

 00 9 करोड़ 45 लाख की लागत से बनेगा श्री नदी पर उच्च स्तरीय पुल

00 झारखंड और ओडिशा राज्य को जोडऩे वाले मार्ग पर आवागमन होगा आसान

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को एक और महत्वपूर्ण विकास परियोजना की सौगात मिली है। राज्य शासन द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट अंतर्गत कुनकुरी-तपकरा-लवाकेरा मार्ग पर श्री नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य के लिए 9 करोड़ 45 लाख 85 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

 ’मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात: जशपुर में श्री नदी पर बनेगा उच्च स्तरीय पुल, तीन राज्यों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत


यह मार्ग छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा को जोडऩे वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। उच्च स्तरीय पुल के निर्माण से तीनों राज्यों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित, सुगम और निर्बाध हो सकेगा। साथ ही व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। वर्तमान में इस मार्ग पर स्थित सकरा पुल बरसात के मौसम में बड़ी समस्या बन जाता था। जलस्तर बढऩे पर आवागमन बाधित हो जाता था और ग्रामीणों एवं राहगीरों को जोखिम उठाकर यात्रा करनी पड़ती थी। लंबे समय से क्षेत्रवासी उच्च स्तरीय पुल निर्माण की मांग कर रहे थे। अब प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
स्थानीय ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार सीमावर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार जनहितकारी कार्य कर रही है। पुल निर्माण से हजारों लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी। क्षेत्रवासियों का मानना है कि श्री नदी पर बनने वाला यह उच्च स्तरीय पुल जशपुर जिले के लिए विकास का नया द्वार साबित होगा तथा राज्य के दूरस्थ अंचलों को बेहतर संपर्क सुविधा से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ संवाद को लेकर दिए गए बयान पर सांसद पाडेय बोले - यह बघेल की हताशा का प्रतीक

पूर्व मुख्यमंत्री बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ संवाद को लेकर दिए गए बयान पर सांसद पाडेय बोले - यह बघेल की हताशा का प्रतीक

 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता व सांसद संतोष पाण्डेय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ संवाद को लेकर दिए गए निराधार बयान पर कड़ा प्रतिवाद करते हुए इसे उनकी हताशा का प्रतीक बताया है। पाण्डेय ने कहा कि लगातार हार की छटपटाहट में बघेल संवैधानिक संस्थाओं के साथ-साथ अब सरकारी विभागों पर झूठे आरोप मढ़कर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हैं। बघेल यह बात अच्छी तरह समझ लें कि कांग्रेस शासन का इमरजेंसी मॉडल जनता भूली नहीं है।

भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता व सांसद पाण्डेय ने बघेल को उनके कार्यकाल का आईना दिखाते हुए कहा कि बघेल के शासनकाल में छत्तीसगढ़ ने अघोषित आपातकाल देखा है। कांग्रेस की पिछली सरकार में पत्रकारों, एक्टिविस्टों और सोशल मीडिया पर स्वतंत्र राय रखने वाले सामान्य नागरिकों तक पर राजद्रोह के मुकदमे दर्ज किए गए थे। आज बघेल किस मुँह से संवाद और पारदर्शिता की बात कर रहे हैं? पाण्डेय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ की जनता जानती है कि पिछले 5 वर्षों में 'छत्तीसगढ़ संवादÓ को किस तरह कांग्रेस का टूलकिट बनाकर रखा गया था। करोड़ों रुपए का सरकारी पैसा केवल एक चेहरे की ब्राण्डिंग और दिल्ली के आकाओं को खुश करने में फूँका गया। आज जब सरकारी तंत्र निष्पक्ष रूप से काम कर रहा है, तो बघेल के पेट में दर्द क्यों हो रहा है? पाण्डेय ने कहा कि एआई और तकनीक का नाम लेकर बघेल दरअसल अपनी उन विफलताओं को छिपाना चाहते हैं जो जनता के बीच उजागर हो चुकी हैं। कांग्रेस की भूपेश-सरकार ने केवल लूट और झूठ का उत्पादन किया, जबकि भाजपा सरकार पारदर्शिता और विकास के संवाद में विश्वास रखती है।

भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता व सांसद पाण्डेय ने बघेल द्वारा दीवारों के भी कान होते हैं की मिसाल देने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि शायद इसीलिए बघेल सरकार के कार्यकाल के कोयला घोटाले, शराब घोटाले और महादेव ऐप के कारनामे दीवारों से निकलकर आज जेल की सलाखों तक पहुँच रहे हैं। षड्यंत्र भाजपा नहीं करती, षड्यंत्र तो कांग्रेस की पिछली सरकार ने प्रदेश के युवाओं और किसानों के खिलाफ किया था, जिसका हिसाब प्रदेश की जनता निरंतर कर रही है। पाण्डेय ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को अनर्गल प्रलाप करने के बजाय अपने कार्यकाल के दौरान अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने के लिए प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। भाजपा सरकार तकनीक और संचार का उपयोग लोक कल्याण के लिए कर रही है, न कि कांग्रेस की तरह दुष्प्रचार के लिए।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना लाखों उपभोक्ताओं को राहत देने वाली जनहितैषी पहल

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना लाखों उपभोक्ताओं को राहत देने वाली जनहितैषी पहल

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आम जनता को राहत पहुंचाने और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 लागू की गई है। यह योजना घरेलू, बीपीएल एवं कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल के भुगतान में राहत देने के साथ-साथ आसान समाधान उपलब्ध करा रही है।

योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल का भुगतान एकमुश्त अथवा आसान किस्तों में करने की सुविधा दी गई है। विशेष बात यह है कि 31 मार्च 2023 तक के बकाया बिजली बिलों पर 100 प्रतिशत सरचार्ज माफी का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिल रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी उपभोक्ता आर्थिक कारणों से बिजली सुविधा से वंचित न रहे। इसी सोच के साथ योजना को सरल और सुलभ बनाया गया है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए उपभोक्ताओं का पंजीयन अनिवार्य रखा गया है।

उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए पंजीयन की व्यवस्था विभिन्न माध्यमों से उपलब्ध कराई गई है। उपभोक्ता मोर बिजली एप, ष्टस्क्कष्ठष्टरु की आधिकारिक वेबसाइट, नजदीकी बिजली कार्यालय तथा विशेष पंजीयन शिविरों के माध्यम से आसानी से अपना पंजीयन करा सकते हैं। यह योजना 12 मार्च 2026 से लागू है तथा योजना का लाभ लेने की अंतिम तिथि 30 जून 2026 निर्धारित की गई है। अब तक लाखों उपभोक्ता योजना से जुड़ चुके हैं और बड़ी संख्या में प्रकरणों का निराकरण कर उपभोक्ताओं को करोड़ों रुपए की राहत प्रदान की जा चुकी है। आंकड़ों की बात करें तो अब तक प्रदेश के 07 लाख 24 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लेने के लिए पंजीयन कराया है। 1 लाख 63 हजार प्रकरणों का निराकरण कर कुल 06 करोड़ 22 लाख रूपये से अधिक की राहत प्रदान की जा चुकी है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और आम नागरिकों को राहत पहुंचाने वाली योजनाओं को प्राथमिकता के साथ लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 इसी जनहितकारी सोच का परिणाम है, जो लाखों उपभोक्ताओं के जीवन में राहत और विश्वास लेकर आई है।

सेवा सेतु: छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल प्रशासन का नया अध्याय

सेवा सेतु: छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल प्रशासन का नया अध्याय

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में सेवा सेतु एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को आम नागरिकों तक सरल,त्वरित और डिजिटल माध्यम से पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी सोच का परिणाम है कि अब आय,जाति, निवास प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन, राशन कार्ड, भू-न$कल सहित 441 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
डिजिटल सुशासन का प्रभावी माध्यम
पहले नागरिकों को अलग-अलग विभागों की सेवाओं के लिए विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। प्रमाण-पत्र बनवाने जैसी मूलभूत सेवाओं में समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बड़ी खपत होती थी। सेवा सेतु ने इस पारंपरिक व्यवस्था को बदलते हुए नागरिकों को वन स्टॉप सॉल्यूशन उपलब्ध कराया है। अब लोग ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर रहे हैं और निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। राज्य शासन की यह पहल केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का भी संकेत है। यह व्यवस्था नागरिकों को यह भरोसा दिला रही है कि शासन उनकी सुविधा और अधिकारों को प्राथमिकता दे रहा है।

 

86 से बढ़कर 441 सेवाएं
छत्तीसगढ़ में पहले ई-डिस्ट्रिक्ट प्लेटफॉर्म के माध्यम से केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं। समय की आवश्यकता को देखते हुए इसका उन्नत संस्करण सेवा सेतु विकसित किया गया,जिसमें अब 441 सेवाएं जोड़ी जा चुकी हैं। इनमें 54 नई सेवाएं शामिल हैं, जबकि विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का भी सफल एकीकरण किया गया है। 30 से अधिक विभाग इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल या कार्यालयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनी हैं।
समयबद्ध सेवा का भरोसा
छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत नागरिकों को निर्धारित समय-सीमा में सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। सेवा सेतु इसी अधिकार को व्यवहारिक रूप से मजबूत कर रहा है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। इस अवधि में 75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामलों का निराकरण किया गया। इनमें 95 प्रतिशत से अधिक आवेदन तय समय-सीमा में निपटाए गए। यह आंकड़ा प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
प्रमाण-पत्र सेवाओं की सबसे अधिक मांग
चिप्स कार्यालय के अनुसार सबसे अधिक आवेदन आय प्रमाण-पत्र के रहे, जिनकी संख्या 32 लाख से अधिक है। इसके अलावा मूल निवास प्रमाण-पत्र, अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण-पत्र, अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रमाण-पत्र, विवाह प्रमाण-पत्र और भू-न$कल संबंधी सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर उपयोग हुआ है। यह दर्शाता है कि नागरिकों की दैनिक जरूरतों से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल माध्यम में लाना कितना आवश्यक था। अब ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोग भी कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र और इंटरनेट आधारित सेवाओं के माध्यम से सुविधाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।
व्हाट्सएप तक पहुंची सरकारी सेवाएं तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए अब सेवा सेतु की सेवाओं को व्हाट्सएप से भी जोड़ा गया है। इससे लोगों को जानकारी प्राप्त करने और सेवाओं तक पहुंचने में और अधिक सुविधा मिल रही है। अब तक 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जा चुके हैं। यह कदम डिजिटल इंडिया की अवधारणा को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल
सेवा सेतु केवल एक पोर्टल नहीं, बल्कि नागरिक और शासन के बीच भरोसे का नया सेतु बनता जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली के कारण आवेदन प्रक्रिया की निगरानी संभव हुई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और अनावश्यक विलंब में कमी आई है। राज्य सरकार की यह पहल प्रशासनिक सुधार, तकनीकी नवाचार और नागरिक सुविधा का समन्वित उदाहरण है। यदि इसी गति से सेवाओं का विस्तार और गुणवत्ता सुधार जारी रहा, तो सेवा सेतु आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।
डिजिटल युग में सुशासन का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर और सरल तरीके से जनता तक पहुंचाना है। सेवा सेतु इसी सोच को साकार कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म छत्तीसगढ़ में प्रशासन को अधिक मानवीय, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। निश्चित रूप से सेवा सेतु आने वाले वर्षों में राज्य की डिजिटल प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

85 लाख में बनी मोला लव होगे कल 45 सिनेमाघरों में होगी रिलीज

85 लाख में बनी मोला लव होगे कल 45 सिनेमाघरों में होगी रिलीज

 00 बस्तर की वादियों में बनाएंगे अगली फिल्म - अनुमोद

रायपुर। अनुमोद फिल्मस के बैनर तले 85 लाख रुपये की लागत से बनी छत्तीसगढ़ी फिल्म मोला लव होगे राजधानी रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के 45 सिनेमाघरों में 8 मई को रिलीज होने जा रही है। फिल्म का प्रीमियर शो सुबह 9 बजे रखा गया है। निर्माता निर्देशक अनुमोद राजवैद्य के अनुसार यह फिल्म छत्तीसगढ़ की सबसे अलम रोमांटिक और पारिवारिक फिल्म होगी। फिल्म में नए-नए कलाकार डेब्यू कर रहे हैं, जैसे नायक के रूप में है छत्तीसगढ़ के नवोदित सुपरस्टार आयुष राजवैद्य जो छत्तीसगढ़ समेत राष्ट्रीय स्तर पर अपने अभिनीत नाटकों के जरिए पहले ही अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं। फिल्म की नायिका है भानुप्रतापपुर की तिरांजली गोस्वामी जिनकी नायिका के रोल में यह पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म है। अनुमोद ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि इस फिल्म के बाद वे बस्तर की खुबसूरत वादियों को लेकर बहुत जल्द ही फिल्म का निर्माण करने जा रहे जिसकी शूटिंग जल्द ही शुरु होगी। अनुमोद ने कहा कि बिदाई के बाद यह दूसरी फिल्म है जबकि अनुमोद फिल्म्स के बैनर तले मोला लव होगे पहली फिल्म है। फिल्म के तीन गीत डोंट टचमाय गगरी, मोला मुम्बई घुमा दे राजा और नैना रे नैना को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और फिल्म के रिलीज होने के बाद तीन और गानों को कल यूट्यूब पर रिलीज कर दिया जाएगा। फिल्म मोला लव होगे एक ऐसे युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है जो पढ़ा लिखा है और उसके बावजूद उसकी जड़ें पूरी तरह से अपने परिवार से जुड़ी हुई हैं। फिल्म में रोमांस, एक्शन, कॉमेडी, थ्रिल, सस्पेंस सभी कुछ है और फिल्म विशुद्ध रूप से पारिवारिक फिल्म है जिसे छत्तीसगढ़ की जनता अपने परिवार व बच्चों के साथ बैठकर आराम से देख सकती है।फिल्म में छत्तीसगढ़ के सुपरस्टार करन खान, रजनीश झांझी, संजय महानंद, पुष्पेंद्र सिंह, जागेश्वरी मेश्राम, विक्रम राज जैसे जाने-माने दिग्गज कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। छत्तीसगढ़ी फिल्मों के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर नए और पुराने कलाकारों का संगम देखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ी फिल्मों के इतिहास में विगत 26 वर्षों में यह पहला अवसर होगा जिसमें सुपरस्टार करन खान और छत्तीसगढ़ के सशक्त अभिनेता रजनीश झांझी एक दूसरे के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे।उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मों के भीष्म पितामह मोर छइंहा भूइहां, झन भूलौ मां बाप ला जैसी फिल्मों के निर्माता निर्देशक सतीश जैन पहली बार अपने होम प्रोडक्शन के अलावा अनुमोद फिल्मस की फिल्म मोला लव होगे का डिस्ट्रीब्यूशन कर रहे हैं। ये ऐसी खास बात है जो छत्तीसगढ़ की जनता को इस फिल्म को देखने के लिए fमजबूर करती है।इस फिल्म का पिक्चराइजेशन पूर्णत: छत्तीसगढ़ में ही किया गया है। फिल्म 8 मई को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की श्याम टॉकीज समेत सभी मल्टीप्लेक्स में और छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख्य शहरों में एक साथ रिलीज होने वाली है।छत्तीसगढ़ के इन सिनेमाघरों में होगी रिलीज 

1. श्याम टॉकिज - रायपुर
2. पीवीआर सिटी सेंटर- रायपुर
3. मेग्नेटो मॉल- रायपुर
4. कलर्स मॉल- रायपुर
5. अम्बुजा मॉल- रायपुर
6. मिराज - नया रायपुर
7. के सेरा सेरा- दुर्ग
8. अप्सरा - दुर्ग
9. चन्द्रा आर एल आर-भिलाई
10. श्री कृष्णा - राजनांदगांव
11. देवश्री - धमतरी
12. मां कर्मा - कसडोल
13. रामनिवास - रायगढ़
14. मां भुवनेश्वरी- कवर्धा
15. ई ओ स - कवर्धा
16. मुकुंद- चांपा
17. पद्मीनी- चांपा
18. डी एल - अकलतरा
19. मेट्रो- जांजगीर
20. सिटी - सारंगढ़
21. ए के सिनेमा - घरघोड़ा
22. रामा मेट्रो- शिवरीनारायण
23. सिटी सिनेमा - बाघबाहरा
24. सिटी सिनेमा- बसना
25. रतन टॉकिज - बेमेतरा
26. श्री विठोबा- महासमुन्द
27. कृष्णा - शक्ति
28. श्री महल- भटगांव
29. आब- बिर्रा
30. श्री सिनेमा - डोंगरगढ़
31. मुरली- कटघोरा
32. पीहू - खरसिया
33. मार्को - सरसींवा
34. जय श्री- नागपुर
35. सुनीलम- कुरूद
36. श्री सिनेमा - पाटन
37. 36 माल - बिलासपुर
38. पी वी आर- बिलासपुर
39. एम बी मॉल- खरियार रोड
40. किशोर- कोंडागांव
41. ग्रैविटी- जैजैपुर
42. निहारिका- कोरबा
43. चित्रा - कोरबा
44. पाची सिनेमा- बालोद
45. सिटी प्लेक्स - भाटापारा

अबूझमाड़ में डिजिटल सूर्योदय: ताहकाडोंड में पहली बार गूंजी मोबाइल की घंटी

अबूझमाड़ में डिजिटल सूर्योदय: ताहकाडोंड में पहली बार गूंजी मोबाइल की घंटी

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का वह हिस्सा, जिसे कभी अबूझ (अनजान) कहा जाता था, अब डिजिटल संकेतों से जुड़कर अपनी नई पहचान लिख रहा है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत सुदूर वनांचल ग्राम ताहकाडोंड में मोबाइल टावर की स्थापना ने सदियों के संचार सन्नाटे को तोड़ दिया है। अब यहाँ के ग्रामीण अपनों से बात करने के लिए पहाडिय़ों की ऊंचाइयों पर नहीं चढ़ते, बल्कि घर बैठे दुनिया से जुड़ रहे हैं।छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में संचार क्रांति का यह अध्याय वास्तव में सराहनीय है। नो सिग्नल से सीधे कनेक्टिविटी तक का यह सफर केवल तकनीक का नहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा से जुडऩे का है।

पहाडिय़ों की चढ़ाई से मिली मुक्ति
ग्राम पंचायत मेटानार के आश्रित ग्राम ताहकाडोंड और उसके आसपास के क्षेत्र लंबे समय से नो नेटवर्क जोन में थे। ग्रामीणों के लिए एक फोन कॉल करना किसी चुनौती से कम नहीं था; उन्हें सिग्नल खोजने के लिए ऊंचे पहाड़ों पर चढऩा पड़ता था या कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक आना पड़ता था। टावर की स्थापना के साथ ही अब ताहकाडोंड, कदेर और ब्रेहबेड़ा जैसे गांवों के लगभग 400 ग्रामीण सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं।
विकास की नई जीवनरेखा: आपातकालीन और प्रशासनिक सेवाएँ

कनेक्टिविटी का यह विस्तार केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन रक्षक भी सिद्ध हो रहा है। अब आपात स्थिति में ग्रामीण तुरंत 108 एंबुलेंस को कॉल कर सकते हैं। त्वरित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होने और समय पर इलाज मिलने से मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी और गंभीर बीमारियों के प्रबंधन में मदद मिलेगी। इंटरनेट के माध्यम से ग्रामीण अब ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन घर बैठे कर पा रहे हैं। यह डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम का संकेत है। पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस के साथ शासन की योजनाओं की जानकारी अब सीधे हितग्राहियों तक पहुँच रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है और कार्यों में तेजी आई है।
बदलती सामाजिक-आर्थिक तस्वीर
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल टावर की स्थापना शासन की सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल संचार सुविधा है, बल्कि विकास का एक सशक्त माध्यम है। ताहकाडोंड के ग्रामीणों ने इस पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे एक नए युग की शुरुआत बताया है। मोबाइल नेटवर्क आने से न केवल शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों के बाजार और युवाओं के लिए सूचना के नए द्वार भी खुलेंगे। शासन का यह प्रयास सिद्ध करता है कि भौगोलिक बाधाएं अब विकास के आड़े नहीं आएंगी।

कच्ची मकान, टपकाती छत से मिली मुक्ति वर्षों का सपना हुआ पक्का- चौतलाल

कच्ची मकान, टपकाती छत से मिली मुक्ति वर्षों का सपना हुआ पक्का- चौतलाल

00 प्रधानमंत्री आवास योजना से बदल रही है कई परिवारों की जिंदगी,महतारी वंदन योजना से भी महिलाओं को मिल रहा है संबल
रायपुर। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन की सरकार और संवेदनशील सरकार ने आवासहीन परिवारों को पक्की छत देने के लिए कृतसंकल्पित है। यह योजना न केवल लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में सहायक है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और स्थिर आवास भी प्रदान करती है। राज्य सरकार की इसी पहल से न केवल श्री चौतलाल मरावी एवं श्रीमती सुखयारिन बाई मेरावी का सपना साकार हुआ है,बल्कि यह पहल पूरे राज्य में एक नई उम्मीद और उज्ज्वल भविष्य की किरण साबित हो रही है। आशाएं जब जीवंत रूप लेती हैं तो उसकी खुशी पूरे घर में साझा की जाती है।

ऐसा ही एक दृश्य विगत दिनों खैरागढ़ छुईखदान गंडई जिले के ग्राम सरोधी निवासी में देखने को मिला.जहां प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लोगों का आवास का सपना साकार हुआ है। श्री चौतलाल मरावी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना उनके लिए वरदान साबित हुई है। वे पुराने दिनों की कठिनाइयों को याद करते हुए बताती हैं कि कच्चे मकान में रहना काफी तकलीफदायक था। मौसम के अनुसार विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कभी छत टपकती थी तो कभी ठंड से रात भर नींद पूरी नहीं होती थी। अब पक्का मकान मिलने से उनकी ये समस्याएं दूर हो गई हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है,जिससे वे लोग बिना परेशानियों का अपना जीवन व्यतीत कर सकें। आज इस योजना का लाभ सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी मिल रहा है।

साथ ही साथ उन्होंने बताया कि वन अधिकार पट्टा के लगभग 2 एकड़ जमीन मिला है जिसमें मै धान सहित अन्य फसलों का लाभ लेते है। इसके साथ ही उनकी पत्नी श्रीमती सुखयारिन बाई मेरावी महतारी वंदन योजना का भी लाभ ले रही है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा फरवरी 2024 में महतारी वंदन योजना का फॉर्म आंगनबाड़ी केंद्र में भरी थी। जिसके तहत प्रतिमाह एक- एक हजार रुपए की किस्त प्राप्त हो रही है. जिसका उपयोग उनके द्वारा अपने घर के सामान्य खर्च तथा अपने बच्चो की पढाई लिखाई के लिए कर रही है जो उन्हें सशक्त और मजबूत बनाने में सहयोगी सिद्ध हो रही है उन्होंने प्रसन्नचित होकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को इस योजना का लाभ दिलाने के लिए धन्यवाद दिया है।

प्रगति पत्रिका विद्यार्थियों की वैचारिक शक्ति और शिक्षकों के मार्गदर्शन का प्रतिबिंब- मंत्री वर्मा

प्रगति पत्रिका विद्यार्थियों की वैचारिक शक्ति और शिक्षकों के मार्गदर्शन का प्रतिबिंब- मंत्री वर्मा

 रायपुर। शिक्षा के क्षेत्र में रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देते हुए स्व. रामनाथ वर्मा शासकीय महाविद्यालय (मोपका), निपनिया ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। महाविद्यालय की प्रथम वार्षिक पत्रिका प्रगति के प्रथम अंक का विमोचन आज प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा के कर-कमलों से उनके निवास कार्यालय में संपन्न हुआ।
नवाचार की नई उड़ान
पत्रिका के विमोचन के अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री ने महाविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा, किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान उसकी रचनात्मकता से होती है। प्रगति पत्रिका केवल पन्नों का संग्रह नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की वैचारिक शक्ति और शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। विशेषकर ग्रामीण अंचल के महाविद्यालय में इस तरह का नवाचार अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ अभिव्यक्ति के बेहतर मंच उपलब्ध कराने के लिए निरंतर संकल्पित है।
सामूहिक प्रयासों का प्रतिफल
यह पत्रिका प्राचार्य डॉ. अभिलाषा सैनी के कुशल नेतृत्व और महाविद्यालय के शैक्षणिक व अशैक्षणिक स्टाफ के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। प्रगति पत्रिका का यह प्रथम अंक न केवल महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ करेगा, बल्कि छात्र-छात्राओं की छिपी हुई प्रतिभा को प्रदर्शित करने के लिए एक अभिनव मंच भी प्रदान करेगा। इस कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, सहायक प्राध्यापक डॉ. समीक्षा चंद्राकर (राजिम) और ओएसडी डॉ. संजय तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
महाविद्यालय परिवार की सक्रिय सहभागिता
पत्रिका के सफल प्रकाशन में सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रियंका पाटले, नेहा केरकेट्टा, डॉ. असित कुमार, दुर्योधन निषाद और अदिति सैनी सहित समस्त स्टाफ का विशेष योगदान रहा। इस उपलब्धि से छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह है। माना जा रहा है कि इस पत्रिका के माध्यम से स्थानीय स्तर पर साहित्यिक और शैक्षणिक गतिविधियों को एक नई दिशा प्राप्त होगी।

केबिनेट मंत्री वर्मा का कल सारंगढ़ और झुमका दौरा, मुख्यमंत्री कन्या विवाह और सुशासन तिहार में होंगे शामिल

केबिनेट मंत्री वर्मा का कल सारंगढ़ और झुमका दौरा, मुख्यमंत्री कन्या विवाह और सुशासन तिहार में होंगे शामिल

 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा शुक्रवार, 8 मई 2026 को सारंगढ़-बिलाईगढ़ और झुमका के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे विभिन्न सामाजिक और शासकीय कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मंत्री टंक राम वर्मा सुबह 08.30 बजे रायपुर स्थित शासकीय आवास (शंकर नगर) से सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे और मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम (मण्डी प्रांगण) में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। दोपहर 1 बजे रेस्ट हाउस, सारंगढ़ में कार्यकर्ताओं से भेंट-मुलाकात करने के बाद दोपहर 03.15 बजे झुमका पहुंचेंगे और सुशासन तिहार कार्यक्रम में शामिल होंगे। राजस्व मंत्री शाम 5.30 बजे झुमका से वापस रायपुर के लिए रवाना होंगे।

आम की छांव में बदले सपनों के मायने, मुख्यमंत्री ने कहा अब करोड़पति दीदी बनने की सोचिए

आम की छांव में बदले सपनों के मायने, मुख्यमंत्री ने कहा अब करोड़पति दीदी बनने की सोचिए

 00 सुशासन तिहार में वनांचल की महिलाओं से आत्मीय संवादरू संघर्ष की कहानियों में दिखी आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की तस्वीर

रायपुर। कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में 4 मई को सुशासन तिहार के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सरकारी योजनाओं के असर को आंकड़ों से निकालकर मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। घने जंगलों और पहाडिय़ों के बीच बसे ग्रामपंचायत लोखान के कमराखोल में जब मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो वहां मौजूद महिलाओं के लिए यह केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं थी, बल्कि अपने संघर्षों को पहचान मिलने का भावुक क्षण था।

आम के पुराने विशाल पेड़ की छांव में चौपाल सजी। मुख्यमंत्री महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सहज बातचीत कर रहे थे। गांव की महिलाएं खुलकर अपनी जिंदगी की कहानियां साझा कर रही थीं - कभी आर्थिक तंगी, सीमित अवसर और संघर्षों से भरी जिंदगी, तो आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने तक का सफर। जब मुख्यमंत्री को बताया गया कि बिहान योजना से जुड़कर यहां की कई महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व दोनों दिखाई दिए। उन्होंने कहा - आप लोगों ने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी बदली है। अब यहीं मत रुकिए। बड़ा सोचिए, आगे बढि़ए। अब आपको करोड़पति दीदी बनने का सपना देखना है।

मुख्यमंत्री के ये शब्द चौपाल में मौजूद नारीशक्ति के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थे। ग्राम कुकदूर की श्रीमती कचरा तेलगाम ने अपनी कहानी साझा की। कचरा तेलगाम ने बिहान योजना से मिले दो लाख रुपये के ऋण से शटरिंग प्लेट्स खरीदीं और नया व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनके पास लगभग 1700 वर्गफुट शटरिंग सामग्री है और वे 22 से अधिक मकानों के निर्माण कार्य में सहयोग कर चुकी हैं। इस काम से उन्हें हर साल ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो रही है।
कचरा तेलगाम बताती हैं कि पहले वे केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे परिवार की आर्थिक ताकत बन चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की बचत -सब कुछ अब वे आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जिस अपनेपन से बात की, उससे लगा कि हमारी मेहनत सच में किसी ने देखी और समझी है। अब और आगे बढऩे का हौसला मिला है। सुशासन तिहार के इस दौरे ने यह स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज गांवों में आर्थिक बदलाव की नई धुरी बन चुकी हैं।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है। कबीरधाम के इन वनांचल गांवों में आम की छांव के नीचे हुई यह चौपाल महिलाओं के भीतर जगे नए विश्वास, बड़े सपनों और बदलती जिंदगी की नई शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है। लखपति दीदी से करोड़पति दीदी तक का यह सपना अब गांव-गांव में नई उम्मीद बनकर फैल रहा है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के तहत जिले के सुदूर व पहाड़ी कोरवा बसाहटों में 113 हैंडपंप व बोरवेल की होगी खुदाई

मुख्यमंत्री के निर्देश के तहत जिले के सुदूर व पहाड़ी कोरवा बसाहटों में 113 हैंडपंप व बोरवेल की होगी खुदाई

 00 कलेक्टर ने सम्बंधित विभाग से कहा एक माह के भीतर पूर्ण करें कार्य, ग्रामीणों को पेयजल से मिलेगी राहत

रायपुर। सरगुजा जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब इन क्षेत्रों में कुल 113 हैंडपंप एवं बोरवेल की खुदाई की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को पारंपरिक स्रोतों से पानी लाने की मजबूरी से राहत मिलेगी।

विगत दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले में पेयजल समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं होना पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि शासन की योजनाओं खासकर बुनियादी जरूरतों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना यह सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में सरगुजा कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास अध्यक्ष श्री अजीत वसंत ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को एक माह के भीतर सभी 113 हैंडपंप एवं बोरवेल कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने बताया कि स्थलीय सर्वे पहले ही कर लिया गया है जिले के लुण्ड्रा में 34, बतौली में 06, लखनपुर में 22, अम्बिकापुर में 11, सीतापुर में 16, मैनपाट में 20 तथा उदयपुर में 04 इस तरह इन विकासखण्डों में डीएमएफ मद से 113 हैंडपंप एवं बोरवेल खनन की जाएगी। 24 अप्रैल को आयोजित जिला खनिज संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक में पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल, लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, सहित अन्य सदस्यों की सहमति से यह कार्य की स्वीकृति दी गई है।कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायत सीईओ को निर्देशित किया है कि हैंडपंप खनन, बोरवेल खनन कर दीर्घकालिक समाधान के लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं तथा सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से एक माह में पूर्ण किए जाएं, ताकि सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में स्थायी पेयजल सुविधा सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री साय के इस संवेदनशील पहल से जिले के दूरस्थ व वनांचल क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही पेयजल की समस्या से सैकड़ो गांवों के हजारों निवासियों को निश्चित ही राहत मिलेगी।

 

 

 

छत्तीसगढ़ सरकार ने सैनिकों और पूर्व सैनिकों को दिया तोहफा, जमीन-घर की रजिस्ट्री होगी सस्ती

छत्तीसगढ़ सरकार ने सैनिकों और पूर्व सैनिकों को दिया तोहफा, जमीन-घर की रजिस्ट्री होगी सस्ती

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ सरकार ने सेवारत सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों एवं उनकी विधवाओं के सम्मान और कल्याण को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने ₹25 लाख तक की संपत्ति की रजिस्ट्री पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया  है। माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी की पहल पर विभाग द्वारा यह प्रस्ताव तैयार किया गया । अधिसूचना जारी होने पश्चात सैनिक एवं भूतपूर्व सैनिको को मिलने वाली यह छूट प्रभावशील हो गई है।

 
अधिसूचना के अनुसार, सैनिकों एवं भूतपूर्व सैनिकों  एवं दिवंगत होने पर उनके जीवन साथी को इस छूट की पात्रता केवल एक बार के लिए होगी।  ₹25 लाख तक की सीमा तक यह छूट मिलेगी । यदि संपत्ति का मूल्य इससे अधिक होता है, तो अतिरिक्त राशि पर नियमानुसार स्टाम्प शुल्क देय होगा।
 
देश की सेवा करने वाले सैनिकों के योगदान को सम्मान देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय है।
वर्तमान में अचल संपत्ति के क्रय-विक्रय विलेखों पर  लगभग 5 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क देय होता है, अब इस नई व्यवस्था से पात्र हितग्राहियों को स्टाम्प शुल्क में राहत मिलेगी। मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जन्मभूमि से दूर रहकर सेवा करने वाले सैनिकों को आवास क्रय लागत में कमी की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि छूट का लाभ लेने के लिए छत्तीसगढ़ का मूल निवासी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। साथ ही, लाभ केवल एक बार ही लिया जा सकेगा, जिसके लिए शपथ पत्र देना होगा तथा संबंधित सैनिक/पूर्व सैनिक या विधवा होने के दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ : नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है – मुख्यमंत्री साय

ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ : नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है – मुख्यमंत्री साय

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ पर भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस को नमन करते हुए कहा कि यह अभियान केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि नए भारत की अटूट इच्छाशक्ति, निर्भीक संकल्प और निर्णायक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आज से एक वर्ष पूर्व पहलगाम में सीमा पार से आतंकियों द्वारा किए गए घिनौने हमले ने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया था, लेकिन भारत ने उस चुनौती का ऐसा जवाब दिया, जिसने इतिहास में शौर्य और संकल्प का स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अब भारत चुपचाप सहने वाला राष्ट्र नहीं रहा, बल्कि मातृभूमि की ओर उठने वाली हर बुरी नजर का निर्णायक और प्रभावशाली जवाब देने में सक्षम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान ने भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, बेजोड़ रणनीति और राष्ट्र के प्रति असीम समर्पण को अमर कर दिया। जिस सटीकता, दृढ़ता और प्रभावशाली क्षमता के साथ आतंक के सरपरस्तों और उनके आकाओं को जवाब दिया गया, उसने वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य शक्ति और मजबूत नेतृत्व की नई पहचान स्थापित की।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के प्रति “शून्य सहिष्णुता” की नीति को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे धरातल पर सिद्ध भी किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं की संयुक्त शक्ति, अत्याधुनिक युद्ध तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक और प्रभावी प्रतिकार भी करता है।

मुख्यमंत्री  साय ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ पर राष्ट्र के उन सभी वीर सपूतों को कोटिशः नमन किया, जिनके शौर्य और पराक्रम ने हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊँचा किया है। उन्होंने पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले पर्यटकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय सेना का पराक्रम, राष्ट्रभक्ति और बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

BREAKING : नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 1 करोड़ 14 लाख का गांजा जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार

BREAKING : नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 1 करोड़ 14 लाख का गांजा जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार

 महासमुंद। जिले में एन्टी नारकोटिक टास्क फोर्स और सिंघोड़ा पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 1 करोड़ 14 लाख रुपये से ज्यादा कीमत का 226 किलो 600 ग्राम गांजा जब्त किया है। पुलिस ने अंतरराज्यीय तस्करी में इस्तेमाल एक पिकअप वाहन और तीन मोबाइल भी जब्त किए हैं। इस मामले में महाराष्ट्र के दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस को सूचना मिली थी कि ओडिशा से एक पिकअप वाहन में भारी मात्रा में गांजा लेकर तस्कर छत्तीसगढ़ होते हुए महाराष्ट्र जा रहे हैं। सूचना के आधार पर एनएच-53 पर सिल्की ढाबा के पास ग्राम गनियारीपाली में नाकेबंदी की गई। इसी दौरान संदिग्ध पिकअप वाहन को रोककर तलाशी ली गई।

तलाशी के दौरान वाहन के डाले में खाली कैरेट के नीचे प्लास्टिक बोरियों में छिपाकर रखा गया 226 किलो 600 ग्राम गांजा बरामद हुआ। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी गांजे को ओडिशा के बालीगुडा इलाके से महाराष्ट्र के अहमदनगर ले जा रहे थे।

पुलिस ने मौके से पिकअप वाहन, तीन मोबाइल फोन समेत कुल 1 करोड़ 22 लाख 75 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजिनाथ आश्रु जाधव और अक्षय बारूक मोरे, निवासी अहमदनगर महाराष्ट्र के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

सुशासन तिहार : मुख्यमंत्री साय ने समाज प्रमुख को सौंपा टेंट एवं बर्तन सामग्री, ग्राम आमगांव में बढ़ेगा रोजगार

सुशासन तिहार : मुख्यमंत्री साय ने समाज प्रमुख को सौंपा टेंट एवं बर्तन सामग्री, ग्राम आमगांव में बढ़ेगा रोजगार

 रायपुर। सुशासन तिहार के अंतर्गत खैरागढ़ वनमण्डल द्वारा रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई।वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के राज्य कैम्पा (क्षतिपूर्ति वर्गीकरण) मद से आस्थामूलक कार्यों के लिए ग्राम आमगांव के समाज प्रमुख  विष्णु ठाकरे को टेंट एवं बर्तन सामग्री प्रदाय की गई।

बीते दिनों यह सामग्री मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के करकमलों से सौंपे जाने पर कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों में उत्साह का माहौल रहा। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर सामाजिक एवं पारंपरिक आयोजनों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना और साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

समाज प्रमुख  विष्णु ठाकरे ने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे गांव में सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन में सुविधा होगी और आय के नए साधन भी विकसित होंगे। इस पहल को ग्रामीणों ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सार्थक कदम बताया, जिससे स्थानीय समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

वंदे मातरम को वैधानिक संरक्षण : राष्ट्रभावना और सांस्कृतिक अस्मिता को मिला नया सम्मान - सीएम साय

वंदे मातरम को वैधानिक संरक्षण : राष्ट्रभावना और सांस्कृतिक अस्मिता को मिला नया सम्मान - सीएम साय

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान करने संबंधी केंद्रीय मंत्रिमंडल के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए इसे देश की सांस्कृतिक चेतना, स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत और राष्ट्रभक्ति की भावना को सम्मान देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान किया जाना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व और आत्मसम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम भारत की आत्मा, स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा और करोड़ों देशवासियों की राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान वंदे मातरम ने देशवासियों में नई ऊर्जा और आत्मबल का संचार किया था। यह गीत आज भी हर भारतीय के मन में मातृभूमि के प्रति समर्पण, सेवा और गौरव की भावना जागृत करता है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी।मुख्यमंत्री साय ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार निरंतर भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय गौरव और जनभावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान एवं गरिमा को बनाए रखने का आह्वान भी किया।

ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री साय ने वीर सैनिकों को किया नमन

ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री साय ने वीर सैनिकों को किया नमन

 00 नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है - मुख्यमंत्री साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस को नमन करते हुए कहा कि यह अभियान केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि नए भारत की अटूट इच्छाशक्ति, निर्भीक संकल्प और निर्णायक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आज से एक वर्ष पूर्व पहलगाम में सीमा पार से आतंकियों द्वारा किए गए घिनौने हमले ने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया था, लेकिन भारत ने उस चुनौती का ऐसा जवाब दिया, जिसने इतिहास में शौर्य और संकल्प का स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अब भारत चुपचाप सहने वाला राष्ट्र नहीं रहा, बल्कि मातृभूमि की ओर उठने वाली हर बुरी नजर का निर्णायक और प्रभावशाली जवाब देने में सक्षम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान ने भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, बेजोड़ रणनीति और राष्ट्र के प्रति असीम समर्पण को अमर कर दिया। जिस सटीकता, दृढ़ता और प्रभावशाली क्षमता के साथ आतंक के सरपरस्तों और उनके आकाओं को जवाब दिया गया, उसने वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य शक्ति और मजबूत नेतृत्व की नई पहचान स्थापित की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे धरातल पर सिद्ध भी किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं की संयुक्त शक्ति, अत्याधुनिक युद्ध तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि आवश्यकता पडऩे पर निर्णायक और प्रभावी प्रतिकार भी करता है। मुख्यमंत्री साय ने ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर राष्ट्र के उन सभी वीर सपूतों को कोटिश: नमन किया, जिनके शौर्य और पराक्रम ने हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊँचा किया है। उन्होंने पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले पर्यटकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय सेना का पराक्रम, राष्ट्रभक्ति और बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

सल्फी को नई पहचान देने की कोशिश, बस्तर के हर्षवर्धन का अनोखा प्रयोग

सल्फी को नई पहचान देने की कोशिश, बस्तर के हर्षवर्धन का अनोखा प्रयोग

 00 इनोवेशन महाकुंभ 1.0 में मिला सम्मान, सल्फी की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने पर कर रहे काम

रायपुर। बस्तर की पहचान मानी जाने वाली पारंपरिक पेय सल्फी को नई वैज्ञानिक सोच और आधुनिक प्रयोगों के माध्यम से स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में स्थापित करने की दिशा में युवा नवाचारक हर्षवर्धन बाजपेयी महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ 1.0 में उनके इस प्रयोग को विशेष सराहना मिली और उन्हें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा न्यू इनोवेशन अवार्ड में तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया है।

हर्षवर्धन बस्तर इंडिजीनियस नेक्टर एग्रीकल्चर्स के माध्यम से सल्फी पेय की सेल्फ लाइफ बढ़ाने पर कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सल्फी के प्राकृतिक स्वाद और पोषक गुणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, ताकि यह केवल पारंपरिक पेय तक सीमित न रहकर स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक ड्रिंक के रूप में भी पहचान बना सके। उन्होंने बताया कि सल्फी का रस पेड़ से निकालने के कुछ समय बाद ही प्राकृतिक रूप से किण्वित होने लगता है, जिससे यह हल्का मादक पेय बन जाता है। यही कारण है कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। हर्षवर्धन ने अपने प्रयोगों के माध्यम से इस फरमेंटेशन प्रक्रिया की अवधि को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की है, जिससे सल्फी की मूल गुणवत्ता और स्वाद को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
बस्तर की संस्कृति से जुड़ी है सल्फी
सल्फी बस्तर की आदिवासी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इसे स्थानीय लोग बस्तर बीयर के नाम से भी जानते हैं। यह कैरियोटा यूरेन्स नामक ताड़ प्रजाति के पेड़ से निकलने वाला मीठा रस है। ताजा सल्फी का स्वाद नारियल पानी की तरह मीठा और ताजगी भरा होता है, लेकिन कुछ घंटों बाद इसमें प्राकृतिक खमीर बनने लगता है, जिससे यह हल्का नशीला हो जाता है। ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में सल्फी का सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर विशेष महत्व है। विवाह, पारंपरिक उत्सव और सामाजिक आयोजनों में इसे प्रमुखता से परोसा जाता है। कई ग्रामीण परिवारों की आजीविका भी सल्फी पर निर्भर है। स्थानीय लोग इसे पेट संबंधी समस्याओं के लिए लाभकारी भी मानते हैं।
जीआई टैग दिलाने का सपना
हर्षवर्धन का सपना है कि बस्तर की इस पारंपरिक पेय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिले। वे चाहते हैं कि सल्फी को स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक पेय के रूप में प्रचारित किया जाए और भविष्य में इसे बस्तर के लिए जीआई टैग भी प्राप्त हो। उनका मानना है कि यदि सल्फी की गुणवत्ता और उपयोगिता को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाए, तो यह बस्तर के आदिवासी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।

छत्तीसगढ़ में बदला मौसम का मिजाज, रायपुर समेत कई जिलों में बारिश-आंधी; अगले 24 घंटे के लिए वज्रपात अलर्ट

छत्तीसगढ़ में बदला मौसम का मिजाज, रायपुर समेत कई जिलों में बारिश-आंधी; अगले 24 घंटे के लिए वज्रपात अलर्ट

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम ने अचानक करवट ले ली। प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी। राजधानी रायपुर समेत कई इलाकों में देर रात तक बादल छाए रहे और तेज बारिश दर्ज की गई।

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए भी अलर्ट जारी करते हुए कुछ क्षेत्रों में वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, रायपुर केंद्र के अनुसार प्रदेश में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। राजनांदगांव में सबसे अधिक 41 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रिकॉर्ड किया गया, जबकि अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 18.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

राजधानी रायपुर में अधिकतम तापमान 37.1 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से काफी कम दर्ज किया गया। रायपुर में सुबह 8:30 बजे तक 26 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कुटरू में सबसे ज्यादा 5 सेंटीमीटर बारिश हुई। लाभांडीह में 4 सेंटीमीटर और रायपुर में 3 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई।

इसके अलावा भटगांव, सरिया और बिलाईगढ़ में 2-2 सेंटीमीटर बारिश हुई। बिलासपुर, मोहला, सारंगढ़, माना-रायपुर, लोरमी, कुनकुरी और बगीचा में भी हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई।

मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी तेलंगाना के आसपास सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण सिस्टम की वजह से छत्तीसगढ़ के मौसम में बदलाव आया है। इसी सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश में बादल, बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बनी हुई है।

हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि आज से मेघगर्जन की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने लगेगी। इसके बाद अगले तीन दिनों के दौरान प्रदेश के अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है।

राजधानी रायपुर में गुरुवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक शहर का अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

रायपुर पहुंची मुंबई इंडियंस की टीम, हार्दिक-रोहित को देखने विमानतल पर उमड़े फैंस

रायपुर पहुंची मुंबई इंडियंस की टीम, हार्दिक-रोहित को देखने विमानतल पर उमड़े फैंस

 रायपुर। मुंबई इंडियंस की टीम 10 मई को होने वाले बड़े मुकाबले से पहले रायपुर पहुंच चुकी है। टीम के आते ही एयरपोर्ट पर फैंस की भारी भीड़ देखने को मिली। लोग अपने पसंदीदा खिलाडिय़ों की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए और पूरे माहौल में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। टीम के साथ कप्तान हार्दिक पांड्या और दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा समेत सभी खिलाड़ी पहुंचे। एयरपोर्ट पर फैंस ने नारे लगाकर उनका स्वागत किया, जिससे माहौल पूरी तरह क्रिकेटमय हो गया।
मैच के टिकट ऑनलाइन उपलब्ध हैं और उनकी कीमत 2,500 से शुरू होकर 8,000 या उससे अधिक तक जा रही है। 10 मई के मुकाबले के टिकट तेजी से बिक रहे हैं, जिससे मैच को लेकर फैंस की दीवानगी साफ नजर आ रही है। राज्य सरकार ने भी इस आयोजन को खास बनाने के लिए पहल की है। 10वीं और 12वीं बोर्ड में टॉप करने वाले छात्रों को 10 मई का मैच मुफ्त में देखने का मौका दिया जाएगा, जिससे युवाओं में भी उत्साह बढ़ गया है।

CG – ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट का भंडाफोड़, 14 आरोपी गिरफ्तार, ऐसे चढ़े पुलिस के हत्थे

CG – ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट का भंडाफोड़, 14 आरोपी गिरफ्तार, ऐसे चढ़े पुलिस के हत्थे

 रायपुर। राजधानी रायपुर में ऑनलाइन सट्टे के बढ़ते नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए पुलिस कमिश्नरेट ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने सट्टा सिंडिकेट से जुड़े दो मुख्य आरोपियों—नमन और आयुष—को गिरफ्तार किया है। उनकी निशानदेही पर 12 अन्य आरोपियों को भी पकड़ा गया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ऑनलाइन सट्टे की तीन वेबसाइट संचालित कर रहे थे और संगठित तरीके से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। मामले का विस्तृत खुलासा रायपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी जल्द करेंगे।

जांच में सामने आया है कि आरोपी मास्टर आईडी और अलग-अलग पैनल के माध्यम से खिलाड़ियों को जोड़ते थे। तीन पैनल 777 नाम से यह सट्टा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था, जिसमें विभिन्न आईडी के जरिए लोगों को शामिल किया जाता था।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से सट्टा-पट्टी, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इसके साथ ही करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिनकी जांच जारी है।

व्यापारियों से जुड़े हो सकते हैं तार-

पुलिस जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क के संबंध शहर के कुछ बड़े कारोबारियों और सर्राफा व्यापारियों से हो सकते हैं। इस एंगल से भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे सिंडिकेट का खुलासा किया जा सके।

अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए तेजी से फैलाया जा रहा था। पुलिस को लंबे समय से इसकी सूचना मिल रही थी, जिसके बाद निगरानी कर यह कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

CG – मोहब्बत का खौफनाक अंत : इश्क नहीं हुआ मुकम्मल तो 16 साल की प्रेमिका और 20 साल के प्रेमी ने ट्रेन के सामने कूदकर दे दी जान

CG – मोहब्बत का खौफनाक अंत : इश्क नहीं हुआ मुकम्मल तो 16 साल की प्रेमिका और 20 साल के प्रेमी ने ट्रेन के सामने कूदकर दे दी जान

 बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से बड़ी खबर सामने आई है। जहां प्रेमी जोड़े ने चोरहापड़ाव रेल्वे स्टेशन के पास ट्रेन के सामने एकसाथ कूदकर आत्महत्या कर ली। दोनों के शव बुधवार सुबह रेलवे ट्रेक पर क्षत-विक्षत हालत में बरामद हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक, चोरहापड़ाव रेलवे स्टेशन के पास ट्रेक पर आज सुबह दो शव मिले हैं। घटना से लोगों में सनसनी फैल गई है। सूचना पर जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर तहकीकात शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में दोनों प्रेमी होने की बात सामने आई है।

ट्रेन की चपेट में आने से नाबालिग का शव लहूलुहान हालत में मिला, जबकि युवक का शव बुरी तरह कटा हुआ था। जांच के दौरान शवों के पास से एक बाइक भी बरामद की गई है। आशंका जताई जा रही है कि दोनों इसी बाइक से घटनास्थल तक पहुंचे थे। मृतकों में एक युवक की पहचान कुम्हालोरी गांव निवासी 20 वर्षीय जितेश्वर तारम के रूप में हुई है। वहीं दूसरे शव की पहचान डौंडी विकासखंड के साल्हे गांव की 16 वर्षीय लिलिसा उइके के रूप में की गई है।

जीआरपी ने पंचनामा कार्रवाई के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है। फिलहाल घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। दोनों ने ट्रेन के सामने कूदकर यह कदम क्यों उठाया, इसकी गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस जुटी हुई है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव लोक निर्माण विभाग के कार्यों की करेंगे समीक्षा……

उप मुख्यमंत्री अरुण साव लोक निर्माण विभाग के कार्यों की करेंगे समीक्षा……

 ​रायपुर: उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव राजधानी रायपुर में दो दिनों तक मैराथन बैठक कर लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा करेंगे। वे 7 मई को नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में राष्ट्रीय राजमार्गों तथा सेतु निर्माण के कार्यों के साथ विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों की समीक्षा करेंगे। साव अगले दिन 8 मई को पांचों संभागों में सड़कों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

बस्तर अंचल में बैंकिंग सुविधाओं में तेजी से विस्तार शांति और विकास का प्रतीक– मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

बस्तर अंचल में बैंकिंग सुविधाओं में तेजी से विस्तार शांति और विकास का प्रतीक– मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर: साय सरकार के गठन के बाद से  बस्तर संभाग में बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिली है। इसी क्रम में बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत ग्राम तर्रेम में बैंक ऑफ बड़ौदा की नई शाखा का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ऑनलाइन जुड़कर कार्यक्रम में शामिल हुए और शाखा का शुभारंभ किया। यह पिछले ढाई वर्षों में बस्तर संभाग में खुलने वाली 31वीं नई बैंक शाखा है।

वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने कहा कि दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। तर्रेम में बैंक शाखा खुलने से स्थानीय लोगों को अब बैंकिंग कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें अपने क्षेत्र में ही सभी आवश्यक सेवाएं आसानी से उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि इससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा और शासकीय योजनाओं का लाभ सीधे एवं पारदर्शी तरीके से हितग्राहियों तक पहुंचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर अब बदलाव की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है—जहां पहले बैंकिंग सुविधाओं का अभाव था, वहीं आज गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाएं पहुंच रही हैं। यह नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में बढ़ते कदमों के साथ आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर संभाग में बैंकिंग सुविधाओं के लगातार विस्तार को सुशासन और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

मुख्यमंत्री श्री  साय ने कहा कि बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता से आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर मिलेगा, युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार एवं वित्तीय गतिविधियों से जुड़ने में आसानी होगी तथा शासकीय योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर अब भय और अभाव की पहचान से निकलकर विश्वास, विकास और आत्मनिर्भरता की नई दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

जहां नक्सलियों ने किया था हमला, वहीं अब विकास की नई कहानी

इससे पूर्व भी वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने तत्कालीन धुर नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा-सुकमा जिले  के सीमावर्ती जगरगुंडा क्षेत्र में भी बैंक की नई शाखा का उद्घाटन किया था। उस दौरान वे रायपुर से सड़क मार्ग से जगरगुंडा पहुंचे थे।

उन्होंने अपने दंतेवाड़ा में कलेक्टर कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि उस समय यह क्षेत्र अत्यधिक नक्सल प्रभावित था और अधिकारी अंदरूनी क्षेत्रों में जाने से भी कतराते थे। उन्होंने कहा कि “जिस इमारत में कभी ग्रामीण बैंक की शाखा थी और जिसे नक्सलियों ने निशाना बनाया था, उसी स्थान पर पुनः बैंक शाखा शुरू होना विकास और विश्वास का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आदिवासी भाइयों एवं बहनों के आर्थिक संबल के लिए प्रतिबद्ध है और लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं।

ढाई वर्षों में बस्तर संभाग में खुले 31 नई बैंक शाखाएं

पिछले ढाई वर्षों में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों के दूरस्थ इलाकों में बैंकिंग नेटवर्क का व्यापक विस्तार हुआ है। बस्तर जिले में आईसीआईसीआई बैंक की शाखा बादेककलूर में, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की शाखा जगदलपुर में, इंडसइंड बैंक की शाखा धरमपुरा (जगदलपुर) में तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का होम लोन सेंटर (RACPC) जगदलपुर में खोला गया है।

बीजापुर जिले में बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखाएं बीजापुर और तर्रेम में, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की शाखा पामेड़ में, आईसीआईसीआई बैंक और आईडीबीआई बैंक की शाखाएं बीजापुर में तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा मड्डेड में खोली गई हैं।

दंतेवाड़ा जिले में एचडीएफसी बैंक की शाखा चेरपाल में, आईसीआईसीआई बैंक की शाखा दंतेवाड़ा में, इंडियन ओवरसीज बैंक की शाखाएं दंतेवाड़ा और समलवार में, कोटक महिंद्रा बैंक की शाखा परचेली में तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा काटेकल्याण में खोली गई है।

कांकेर जिले में एक्सिस बैंक की शाखाएं पनडोबिर और पाखांजूर में, बैंक ऑफ इंडिया की शाखा चरामा में तथा आईसीआईसीआई बैंक की शाखा भानुप्रतापपुर में खोली गई है। कोंडागांव जिले में एक्सिस बैंक की शाखा फरसगांव में तथा बंधन बैंक की शाखा कोंडागांव में शुरू की गई हैं। नारायणपुर जिले में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की शाखा सोनपुर में तथा एचडीएफसी बैंक की शाखा कोहकामेटा में खोली गई है। इसी प्रकार सुकमा जिले में एक्सिस बैंक की शाखा चिंतलनार में, बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा सुकमा में, बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा सुकमा में, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की शाखा किस्टाराम में तथा इंडियन ओवरसीज बैंक की शाखाएं सुकमा और जगरगुंडा में नई शाखाएं शुरू की गई हैं।

स्थानीय ग्रामीणों ने तर्रेम में बैंक शाखा खुलने पर खुशी जताई और इसे अपने लिए बड़ी सुविधा बताया। इस पहल से न केवल बैंकिंग सेवाएं सुलभ होंगी, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा मिलेगी। बस्तर में हो रहे ये सकारात्मक बदलाव आने वाले समय में समग्र विकास और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव साबित होंगे।

 मामूली विवाद पर गला दबाकर हत्या, संदिग्ध हालत में मिली लाश

मामूली विवाद पर गला दबाकर हत्या, संदिग्ध हालत में मिली लाश

 जांजगीर-चांपा।  जांजगीर-चांपा जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां शराब के नशे में पत्नी और बच्चे से विवाद के बाद घर से निकले युवक की चार दिन बाद संदिग्ध हालत में लाश बरामद हुई। ससुराल पक्ष के द्वारा डंडे से मारकर व गला दबाकर हत्या की गई थी। पामगढ़ पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार जगदीश प्रजापति अपनी पत्नी दिव्या और डेढ़ वर्षीय बेटे के साथ 29 अप्रैल को रिश्तेदार के विवाह कार्यक्रम में शामिल होने खरखोद गांव आया था। रात करीब 11:30 बजे वह शराब के नशे में अपनी पत्नी और बच्चे के साथ विवाद करने लगा। बच्चे के ऊपर पैर रखने और गाली-गलौज करने पर पत्नी ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ गया। इसके बाद जगदीश घर छोड़कर गांव में ही एक अन्य स्थान पर जाकर सो गया, सुबह पता किया तो वहां पर नहीं था, आसपास पता किया तो भी पता नहीं चला। 3 मई को उसका शव गांव में एक घर के पीछे दीवार के पास संदिग्ध हालत में मिला, जिसके शरीर में सड़न शुरू हो चुकी थी।
सूचना पर मर्ग कायम कर जांच पंचनामा कार्रवाई में लिया गया। शव का पीएम कराया गया, पीएम रिपोर्ट के आधार पर, थाना पामगढ में अपराध धारा 103 (1) भारतीय न्याय संहिता पंजीबद्ध कर विवेचना कार्रवाई में लिया गया। पतासाजी में यह बात सामने आई कि आरोपी देसाई कुम्हार व रामनारायण प्रजापति जो मृतक के ससुराल पक्ष के रिश्तेदार है इनके द्वारा को पकड़ा गला दबाकर, डंडा, हाथ मुक्का से मारपीट कर हत्या की गई है। आरोपी देसाई कुम्हार पिता जयसिंह उम्र 42 साल निवासी खरखोद थाना पामगढ़, रामनारायण प्रजापति पिता जयसिंह उम्र 44 साल निवासी ठाकुरदेवा चौकी मल्हार थाना मस्तूरी जिला बिलासपुर के विरूद्ध धारा 103 (1), 238, 3(5) बीएनएस के तहत कार्रवाई कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।