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CG : नए विधानसभा भवन में गिरी फॉल्स सीलिंग,करोड़ों के निर्माण पर उठे सवाल

CG : नए विधानसभा भवन में गिरी फॉल्स सीलिंग,करोड़ों के निर्माण पर उठे सवाल

 रायपुर । छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन में फॉल्स सीलिंग गिरने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस भवन में अधिकारी के कक्ष की छत का हिस्सा गिरने के बाद अब निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी परीक्षण और उपयोगिता प्रमाण पत्र को लेकर बहस तेज हो गई है।

अधिकारी के कक्ष में गिरी फॉल्स सीलिंग

रायपुर स्थित नए विधानसभा भवन में मुख्य सदन से लगे एक अधिकारी के कक्ष की फॉल्स सीलिंग अचानक गिर गई। छत के साथ स्टील के पाइप और फ्रेम भी नीचे आ गिरे। घटना के समय कमरे में कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है।

निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

घटना के बाद करोड़ों रुपये की लागत से बने नए विधानसभा भवन के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भवन के अंदर इस तरह की घटना होती है तो इसकी तकनीकी जांच कर निर्माण सामग्री और कार्य गुणवत्ता की स्वतंत्र समीक्षा की जानी चाहिए।

RTI में उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं होने की जानकारी

सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने जवाब में बताया है कि नए विधानसभा भवन का उपयोगिता प्रमाण पत्र (Occupancy/Utility Certificate) उपलब्ध नहीं है। इसके बाद भवन के उपयोग और निर्माण प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक भवन को उपयोग में लाने से पहले निर्धारित तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना आवश्यक होता है। फॉल्स सीलिंग गिरने की घटना के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या भवन के सभी हिस्सों का सुरक्षा परीक्षण पूरी तरह किया गया था।

स्वतंत्र जांच की मांग तेज

घटना के बाद तकनीकी विशेषज्ञों और जानकारों की ओर से निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठने लगी है। उनका कहना है कि भवन की संपूर्ण संरचनात्मक सुरक्षा का परीक्षण कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

 
 
Electricity New Rates: अगस्त से बदलेगा बिजली बिल का हिसाब, देखें नई प्रति यूनिट दरें और पूरा टैरिफ

Electricity New Rates: अगस्त से बदलेगा बिजली बिल का हिसाब, देखें नई प्रति यूनिट दरें और पूरा टैरिफ

 रायपुर: जून माह में देरी से हुई बिजली मीटर रीडिंग के कारण बढ़े बिल से परेशान उपभोक्ताओं को अब एक और झटका लगने वाला है। छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग ने 1 जुलाई 2026 से लागू नई बिजली दरों का असर अगस्त में मिलने वाले बिजली बिलों में दिखाई देगा। नई दरों के तहत सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बिजली टैरिफ में प्रति यूनिट 30 से 50 पैसे तक की वृद्धि की गई है। 

बिजली दरों में बढ़ोतरी का असर घरेलू, गैर-घरेलू, व्यावसायिक और कृषि उपभोक्ताओं पर समान रूप से पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच बिजली बिल में वृद्धि से आम परिवारों का मासिक बजट और प्रभावित होगा, वहीं छोटे व्यापारियों और किसानों की लागत भी बढ़ेगी।

ऐसे समझे बढ़े टैरिफ के दाम

  • खपत – पुरानी दर – वर्तमान दर
  • 0-100 यूनिट – 4.10 रुपए – 4.40 रुपए
  • 101-200 यूनिट – 4.20 रुपए – 4.50 रुपए
  • 201-400 यूनिट – 5.60 रुपए – 6 रुपए
  • 401-600 यूनिट – 6.60 रुपए – 7 रुपए
  • 601 यूनिट से अधिक – 8.30 रुपए – 8.80 रुपए
1 अगस्त से नया नियम लागू – छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों को पहले जमा करना होगा बिजली बिल

1 अगस्त से नया नियम लागू – छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों को पहले जमा करना होगा बिजली बिल

 रायपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों के बिजली भुगतान नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने सरकारी बिजली कनेक्शनों को प्रीपेड सिस्टम से जोड़ने की तैयारी पूरी कर ली है। नई व्यवस्था के तहत विभागों को बिजली उपयोग से पहले तीन महीने का अनुमानित बिल अग्रिम जमा करना होगा। राज्य के करीब 1.5 लाख सरकारी कनेक्शन इस व्यवस्था के दायरे में आएंगे। सरकार का मानना है कि इससे बिजली बिल के बढ़ते बकाया पर नियंत्रण होगा और भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बन सकेगी। राज्यभर के करीब 1.5 लाख सरकारी बिजली कनेक्शन इस नई व्यवस्था के दायरे में आएंगे। इसके लिए विभागवार समूह बनाए गए हैं और प्रत्येक विभाग को एक अलग पहचान कोड जारी किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि 1 अगस्त से सभी सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड बिजली प्रणाली लागू हो जाए।

तीन महीने का बिल जमा करना होगा

ऊर्जा विभाग ने सभी सरकारी कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे तीन महीने के अनुमानित बिजली बिल के बराबर राशि अग्रिम रूप से जमा करें। अग्रिम भुगतान के बाद संबंधित कार्यालयों के बिजली कनेक्शन प्रीपेड मोड में सक्रिय कर दिए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, इससे बिजली भुगतान में पारदर्शिता आएगी और बकाया राशि बढ़ने की समस्या पर भी नियंत्रण किया जा सकेगा।

स्मार्ट मीटर से होगी निगरानी

नई व्यवस्था को लागू करने के लिए अधिकांश सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली खपत की जानकारी रियल टाइम में उपलब्ध होगी और भुगतान की प्रक्रिया भी डिजिटल रूप से संचालित की जाएगी। इस तकनीक के जरिए विभाग अपनी बिजली खपत पर नजर रख सकेंगे और आवश्यकतानुसार खर्च का प्रबंधन कर पाएंगे।

CG ACCIDENT : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ़्तार कार, दो युवकों की मौत

CG ACCIDENT : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ़्तार कार, दो युवकों की मौत

 दुर्ग। भिलाई के सेंट्रल एवेन्यू रोड पर गुरुवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि तेज रफ्तार कार सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। टक्कर की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और भिलाई नगर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों युवकों को कार से बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस के अनुसार हादसा सुबह करीब 4 से 5 बजे के बीच हुआ। शुरुआती जांच में पता चला है कि कार सेक्टर-9 से सेक्टर-6 की ओर जा रही थी। इसी दौरान सेंट्रल एवेन्यू रोड पर कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है।

हादसे में दीपक गुप्ता (23) और कौशिक दास (15) की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों भिलाई के सेक्टर-6 के रहने वाले थे। हादसे की सूचना मिलते ही रिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए। पुलिस ने दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को घटना की जानकारी दे दी है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।

कैसे हुआ हादसा, जांच जारी

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसे के समय कार कौन चला रहा था। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ड्राइविंग सीट पर कौन था और दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।

मौके से मिले साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार हादसे की एक संभावित वजह मानी जा रही है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

CG : ACB की बड़ी कार्रवाई, महिला प्रधान आरक्षक 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

CG : ACB की बड़ी कार्रवाई, महिला प्रधान आरक्षक 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

 रायपुर।  एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी की टीम ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कोड़ेनार थाने में पदस्थ महिला प्रधान आरक्षक पिलेश्वरी साहू को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, एक मामले की जांच महिला हेड कांस्टेबल कर रही थी। शिकायत मिली थी कि महिला कांस्टेबल भयादोहन कर पैसे की डिमांड कर रही थी। दो पक्षों के बीच समझौता कराने के नाम पर प्रधान आरक्षक ने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन किया और ट्रैप की कार्रवाई की।

योजना के तहत शिकायतकर्ता ने केमिकल लगे नोट आरोपी प्रधान आरक्षक को दिए। रुपये लेते ही एसीबी की टीम ने थाने के भीतर पहुंचकर उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। कुछ देर बाद इस मामले में एसीबी की तरफ से विस्तार से जानकारी दी जायेगी।

 
ब्रेकिंग : अतिथि शिक्षकों की हड़ताल पर सरकार सख्त, इस तारीख तक स्कूल लौटने का अल्टीमेटम, नहीं लौटे तो सेवा होगी तत्काल समाप्त…

ब्रेकिंग : अतिथि शिक्षकों की हड़ताल पर सरकार सख्त, इस तारीख तक स्कूल लौटने का अल्टीमेटम, नहीं लौटे तो सेवा होगी तत्काल समाप्त…

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में हड़ताल पर बैठे अतिथि शिक्षकों को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। सत्र के शुरूआत में ही पढ़ाई ठप होने पर छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कड़ा निर्देश जारी किया हैं।  सरकार ने साफ कहा हैं कि 27 जुलाई तक सभी अतिथि शिक्षक हड़ताल खत्म कर काम पर लौट आएं। स्कूल नहीं लौटे तो ऐसे शिक्षकों की सेवा को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया जाएगा।

स्कूल शिक्षा विभाग ने शाला प्रबंध समिति को निर्देश देते हुए कहा हैं कि 27 जुलाई तक अतिथि शिक्षकों को ड्यूटी जाॅइन कराएं। काम पर नहीं लौटने पर कंडिका 7.3 के तहत शिक्षकों पर गाज गिरेगी।

स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित होने पर बढ़ी सख्ती

विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्कूलों में शिक्षण कार्य बाधित नहीं होना चाहिए। इसी कारण संबंधित शाला प्रबंधन समितियों (SMC) को निर्देशित किया गया है कि वे हड़ताली अतिथि शिक्षकों से संपर्क कर उन्हें निर्धारित तिथि तक कार्य पर वापस आने के लिए कहें।

27 जुलाई के बाद बदल जाएगी व्यवस्था

आदेश में साफ कहा गया है कि यदि अतिथि शिक्षक 27 जुलाई 2026 तक स्कूलों में कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं, तो विभाग पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार उनके स्थान पर वैकल्पिक अध्यापन व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। यानी स्कूलों में पढ़ाई किसी भी स्थिति में नहीं रुकेगी।

सभी जिलों में तत्काल पालन के निर्देश

लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा गया है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए जिला स्तर पर लगातार निगरानी रखी जाए और आवश्यक कार्रवाई समय पर पूरी की जाए।

CG – राजधानी में मिली महिला की लाश, इलाके में मचा हड़कंप, जताई जा रही ये आशंका, जांच में जुटी पुलिस…

CG – राजधानी में मिली महिला की लाश, इलाके में मचा हड़कंप, जताई जा रही ये आशंका, जांच में जुटी पुलिस…

 रायपुर। राजधानी रायपुर के मुजगहन थाना क्षेत्र के स्वागत विहार कॉलोनी में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। महिला का शव कॉलोनी के एक खुले प्लॉट में मिला है। मृतका की पहचान सुभद्रा बाई साहू (35 वर्ष) निवासी बोरियाकला के रूप में हुई है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू की। घटना को लेकर इलाके में महिला के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है, हालांकि पुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।

पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही महिला की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल मुजगहन थाना पुलिस मामले की जांच में जुटी है और घटना स्थल से जुड़े साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।

CG – रिश्ते शर्मसार! पिता ने अपनी 12 साल की बेटी को बनाया हवस का शिकार, माँ की शिकायत पर कलयुगी पिता गिरफ्तार

CG – रिश्ते शर्मसार! पिता ने अपनी 12 साल की बेटी को बनाया हवस का शिकार, माँ की शिकायत पर कलयुगी पिता गिरफ्तार

 बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहां एक 37 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी ही 12 वर्षीय नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बनाया है। मामले में मां की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। 

जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला गुंडरदेही थाना क्षेत्र का है। पीड़िता अपनी मां के साथ गुंडरदेही थाने पहुंची और हैवान पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

मामले में मामले में बालोद एडिशनल एसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि थाना गुंडरदेही में प्रार्थिया ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी नाबालिग पुत्री के साथ उसके ही पिता द्वारा दुष्कर्म किया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव की घोषणा पर अमल, महामाया गेट के लिए 24.53 लाख स्वीकृत…

उप मुख्यमंत्री अरुण साव की घोषणा पर अमल, महामाया गेट के लिए 24.53 लाख स्वीकृत…

 रायपुर: नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बिलासपुर जिले के तखतपुर नगर पालिका में महामाया गेट के निर्माण के लिए 24 लाख 53 हजार रुपए मंजूर किए हैं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा की गई घोषणा के अनुपालन में विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट से अधोसंरचना मद से यह राशि स्वीकृत की गई है। उप मुख्यमंत्री  साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने संचालनालय से इसकी मंजूरी के आदेश जारी कर दिए हैं।

अमलीपदर की रथयात्रा आस्था और संस्कृति की अमूल्य धरोहर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

अमलीपदर की रथयात्रा आस्था और संस्कृति की अमूल्य धरोहर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 महतारी वंदन योजना से माताओं और बहनों का बढ़ा आत्मविश्वास - मुख्यमंत्री साय

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

रायपुर 23 जुलाई 2026/अमलीपदर की ऐतिहासिक रथयात्रा छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। भगवान  जगन्नाथ सबको साथ लेकर चलने और लोककल्याण का संदेश देते हैं। महाप्रभु का आशीर्वाद प्रदेशवासियों पर सदैव बना रहे, यही उनकी प्रार्थना है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज गरियाबंद जिले के अमलीपदर में आयोजित भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा महापर्व को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए और भगवान  जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा, राजिम विधायक  रोहित साहू, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष  राजीव लोचन महाराज सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विकास और जनकल्याण के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आए।

बिजली बिल समाधान योजना की अवधि सितंबर तक बढ़ी

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना की अंतिम तिथि, जो जून माह तक निर्धारित थी, उसे उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तीन माह बढ़ाकर सितंबर तक कर दिया गया है। उन्होंने लोगों से इस योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सरकार आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ कम करने और उन्हें राहत प्रदान करने के लिए संवेदनशीलता के साथ निर्णय ले रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। इस योजना के माध्यम से प्रतिमाह पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सीधे राशि अंतरित की जा रही है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्त होना विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत आधारशिला है और राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सरकार प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए चौबीसों घंटे कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा प्राप्त शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है तथा वे स्वयं प्रतिदिन शिकायतों की समीक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक 42 हजार से अधिक शिकायतों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है, जो सुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

बाल्टीजोर नाले पर बनेगा पुल

क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बाल्टीजोर नाले पर पुल निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पुल बनने से क्षेत्र के लोगों को वर्षभर सुगम और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी तथा ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में बड़ी राहत मिलेगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी अभियान चलाया जा रहा है। राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता मिल रही है तथा छत्तीसगढ़ तेजी से नक्सल मुक्त राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने बच्चों से किया आत्मीय संवाद

रथयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अपना काफिला रोककर सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थियों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने बच्चों से पढ़ाई, भविष्य की योजनाओं और विद्यालय की गतिविधियों के बारे में बातचीत की। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया तथा उनके आग्रह पर बच्चों के साथ आत्मीयता से सेल्फी भी खिंचवाई। मुख्यमंत्री का यह सहज और स्नेहपूर्ण व्यवहार उपस्थित लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की रही सहभागिता

रथयात्रा महापर्व में हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। धार्मिक अनुष्ठानों, भक्ति संगीत और जयघोषों के बीच पूरा अमलीपदर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। कार्यक्रम में कलेक्टर  बी.एस. उईके, पुलिस अधीक्षक  वेदव्रत सिरमौर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग डिजिटल नवाचारों के माध्यम से सुशासन सशक्त

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग डिजिटल नवाचारों के माध्यम से सुशासन सशक्त

 राज्य में डिजिटल सुशासन को नई दिशा प्रदान करने के लिए निरंतर कार्यरत

रायपुर- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव  अंकित आनंद एवं सीईओ चिप्स  मयंक अग्रवाल ने विभागीय गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर छत्तीसगढ संवाद के आडिटोरियम (अटल नगर, नवा रायपुर) में संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा डिजिटल नवाचारों के माध्यम से सुशासन सशक्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित विकास में छत्तीसगढ़ बन रहा है, अग्रणी राज्य सेवा सेतु, भारतनेट, एआई और डिजिटल कनेक्टिविटी से नागरिकों को अधिक सुगम सेवाएं मिल रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन का इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग राज्य में डिजिटल सुशासन को नई दिशा प्रदान करने के लिए निरंतर कार्यरत है । नागरिक-केंद्रित सेवाओं के विस्तार, डिजिटल अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, ए.आई. (AI), साइबर सुरक्षा एवं नवाचार आधारित शासन व्यवस्था के माध्यम से राज्य में तकनीक-संचालित प्रशासन को नई गति मिली है ।

सेवा सेतु पोर्टल में 35 विभागों की 564 सेवाएं उपलब्ध

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव ने प्रेस को बताया कि सेवा सेतु बना नागरिक सेवाओं का सबसे बड़ा डिजिटल मंच सेवा सेतु राज्य की सबसे बड़ी एकीकृत डिजिटल नागरिक सेवा पहल के रूप में स्थापित हुआ है। 29 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री द्वारा इसका उन्नत संस्करण प्रारम्भ किया गया। वर्तमान में नागरिकों के लिए इस पोर्टल में 35 विभागों की 564 सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा विगत ढ़ाई वर्षों में 85 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए तथा 78 लाख से अधिक आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में राशन कार्ड, विवाह पंजीयन, नल कनेक्शन आदि सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता से नागरिकों को घर के निकट ही सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं । सेवा सेतु में ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल दस्तावेज सत्यापन, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन, एसएमएस एवं व्हाट्सएप सूचना तथा ऑनलाइन भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं । इन तकनीकी नवाचारों से नागरिकों को समयबद्ध एवं पारदर्शी सेवाएं सुनिश्चित हो रही हैं ।

वनांचल एवं आदिवासी क्षेत्रों तक मोबाइल कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार

अंकित आनंद ने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही डिजिटल कनेक्टिविटी डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देते हुए राज्य के दूरस्थ, वनांचल एवं आदिवासी क्षेत्रों तक मोबाइल कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार किया जा रहा है । भारत सरकार से वित्त पोषित डिजिटल भारत निधि DBN) के अंतर्गत आकांक्षी जिला, एल डब्लू ई फेज़ II तथा 4G सैचुरेशन योजनाओं के माध्यम से दूरस्थ गांवों में मोबाइल नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है । जनवरी 2024 से अब तक 1273 मोबाइल टावर ऑन-एयर किए जा चुके हैं । इसी क्रम में भारतनेट फेज-III के माध्यम से ग्राम पंचायतों को उच्च गुणवत्ता वाले ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा । इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भारत सरकार से ₹3,928 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई है । इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और फाइबर टू द होम (FTTH)  कनेक्टिविटी का विस्तार होगा ।

50 चयनित स्थानीय युवाओं को उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण 

युवाओं के लिए नई संभावनाएं राज्य में भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य के मूल निवासियों के लिए सी.एम. आईटी फेलोशिप प्रारंभ की गई है । अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), नया रायपुर के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम के अंतर्गत आरक्षण नियमों के तहत 50 चयनित स्थानीय युवाओं को उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण के साथ विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यानुभव प्रदान किया जा रहा है, जिससे राज्य के लिए दक्ष आईटी विशेषज्ञों का एक मजबूत समूह तैयार हो सके । 

विकसित  डिजिटल प्लेटफॉर्म से सुशासन को मिल रही है नई मजबूती

 इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव ने बताया कि तकनीक आधारित शासन को मिल रही नई मजबूती विभाग द्वारा विभिन्न विभागों के लिए विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म सुशासन को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं । खनिज ऑनलाइन 2.0 के माध्यम से जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच ₹30,311.80 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ । एकीकृत अपशिष्ट मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (IWMMS) के माध्यम से औद्योगिक अपशिष्ट के परिवहन एवं निस्तारण की ऑनलाइन निगरानी सुनिश्चित की गई है । वन क्लिक-सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 में 19 विभागों की 151 सेवाओं का एकीकरण कर निवेशकों को एकीकृत एवं समयबद्ध ऑनलाइन अनुमोदन उपलब्ध कराया जा रहा है । पारस पोर्टल के माध्यम से राज्य की बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है । बस्तर मुन्ने पोर्टल के माध्यम से नक्सल मुक्त जिलों (बस्तर संभाग के 07 जिले  एवं अन्य 3 जिले) में पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का प्रभावी लाभ दिलाने हेतु मॉनिटरिंग की जा रही है । वहीं डिजिटल द्वार के माध्यम से सभी विभागों के बीच सुरक्षित एवं मानकीकृत डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था विकसित की जा रही है ।

ए.आई. आधारित कौशल विकास एवं अनुसंधान को बढ़ावा 

भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभाग ने ए.आई. को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है । छत्तीसगढ़ एआई मिशन (CG-AIM)  के माध्यम से युवाओं, विद्यार्थियों, स्टार्टअप एवं शासकीय अधिकारियों के लिए ए.आई. आधारित कौशल विकास एवं अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा । राज्य में ए.आई. सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ए.आई. डेटा लैब की स्थापना की जा रही है, जिससे नवाचार एवं रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे ।

चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन

साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं भारत सरकार की संस्था सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के मध्य राशि रूपये 105.3 करोड़ की लागत से राज्य में चार सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना के लिए एमओयू किया गया है, जिसमें केंद्र एवं राज्य शासन दोनों के द्वारा बराबर राशि रुपये व्यय किये जायेंगे । प्रस्तावित सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वन एवं औषधीय उत्पाद आधारित मेडटेक, स्मार्ट सिटी समाधान तथा स्मार्ट कृषि जैसे चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन दिया जायेगा।

क्लाउड फर्स्ट नीति से मजबूत होगा डिजिटल इकोसिस्टम

डिजिटल गवर्नेंस को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार क्लाउड फर्स्ट नीति लागू कर रही है, जिसके माध्यम से सुरक्षित क्लाउड आधारित सेवाओं, डेटा सुरक्षा तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर पर मिली उल्लेखनीय पहचान इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की इन पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सराहना मिली है। आधार सेवाएं, जीआईएस परियोजना, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, ई-प्रगति पोर्टल, एकीकृत अपशिष्ट मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली, वन क्लिक-सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 तथा कोर्ट केस मॉनिटरिंग सिस्टम को विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध

प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद ने कहा कि डिजिटल तकनीक केवल शासन की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध सेवाएं पहुंचाने का प्रभावी साधन है । हमारी सरकार ए.आई., डिजिटल कनेक्टिविटी और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य

छत्तीसगढ़ शासन का उद्देश्य तकनीक को केवल सुविधा का माध्यम बनाना नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, समावेशी विकास और नागरिक सशक्तिकरण का आधार बनाना है । इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग इसी संकल्प के साथ डिजिटल नवाचार को जनहित से जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है ।

रायपुर में प्रारंभ हुआ 2 नए शासकीय महाविद्यालय, बेन्द्री में शासकीय महाविद्यालय व नवा रायपुर में संगीत महाविद्यालय

रायपुर में प्रारंभ हुआ 2 नए शासकीय महाविद्यालय, बेन्द्री में शासकीय महाविद्यालय व नवा रायपुर में संगीत महाविद्यालय

रायपुर। उच्च शिक्षा विभाग ने अभनपुर के बेन्द्री में शासकीय महाविद्यालय और नवा रायपुर अटल नगर में शासकीय संगीत महाविद्यालय शामिल हैं। दोनों संस्थानों में सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है।
नए शासकीय महाविद्यालय बेन्द्री में इस सत्र से बीए, बीएससी (बायोलॉजी), बीएससी (मैथ्स) और बीकॉम प्रथम वर्ष की कक्षाएं शुरू होंगी। बीए और बीकॉम में 90-90 सीटें, जबकि बीएससी बायोलॉजी और बीएससी मैथ्स में 45-45 सीटें तय की गई हैं। कॉलेज में प्रवेश पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगा। इच्छुक छात्र-छात्राओं से तय समय सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील की गई है।

इसके अलावा सत्र 2026-27 से नए शासकीय संगीत महाविद्यालय नवा रायपुर अटल नगर भी शुरू किया गया है। यहां बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (बीपीए) के चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश दिए जाएंगे। कॉलेज में शास्त्रीय गायन (हिंदुस्तानी), कथक नृत्य और लोक संगीत की पढ़ाई होगी। कुल 40 सीटें निर्धारित की गई हैं। संगीत महाविद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन ऑफलाइन होंगे। आवेदन पत्र शासकीय नागार्जुन स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय रायपुर से प्राप्त किए जा सकते हैं। अधिकारियों ने इच्छुक विद्यार्थियों से समय पर आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है।

माँ चन्द्रहासिनी आरोग्य धाम बनेगा जनसेवा का नया केंद्र : वित्त मंत्री चौधरी

माँ चन्द्रहासिनी आरोग्य धाम बनेगा जनसेवा का नया केंद्र : वित्त मंत्री चौधरी

 00 माँ चन्द्रहासिनी आरोग्य धाम का हुआ भूमिपूजन, क्षेत्र को मिलेगी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ

00 अस्पताल को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने का दिलाया भरोसा, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में हरसंभव सहयोग का आश्वासन

रायपुर। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने आज सक्ती जिले के चंद्रपुर स्थित चन्द्रहासिनी विद्यापीठ परिसर में माँ चन्द्रहासिनी आरोग्य धाम का विधिवत भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि यह बहुउद्देशीय चिकित्सालय क्षेत्रवासियों को आधुनिक, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो आने वाले समय में जनसेवा का सशक्त केंद्र बनेगा।

मंत्री  चौधरी ने कहा कि  गोपाल जी महाप्रभु एवं माँ चन्द्रहासिनी देवी मंदिर सार्वजनिक न्यास द्वारा शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में लगातार सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं। ट्रस्ट के माध्यम से संचालित सीबीएसई विद्यालय ने क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई है और अब आरोग्य धाम की स्थापना समाजसेवा के इस अभियान को नई ऊँचाई देगी। उन्होंने ट्रस्ट के संरक्षक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गौरीशंकर अग्रवाल, अध्यक्ष  गोविंद अग्रवाल तथा सभी न्यासियों को इस जनहितकारी पहल के लिए बधाई दी।

वित्त मंत्री ने कहा कि चंद्रपुर माँ चन्द्रहासिनी शक्तिपीठ के कारण पूरे छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस पवित्र भूमि से उनका वर्षों पुराना आत्मीय संबंध रहा है और प्रशासनिक सेवा के दौरान भी उन्हें इस क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि अस्पताल, विद्यालय और ट्रस्ट से जुड़े किसी भी विकास कार्य में यदि शासन अथवा प्रशासनिक स्तर पर कोई औपचारिक बाधा आती है तो राज्य सरकार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनहित से जुड़े ऐसे कार्यों में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होने दी जाएगी।

मंत्री  चौधरी ने कहा कि अस्पताल प्रारंभ होते ही उसे आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने की प्रक्रिया प्राथमिकता से पूरी कराई जाएगी, ताकि आसपास के ग्रामीण आयुष्मान कार्ड के माध्यम से निःशुल्क एवं बेहतर उपचार का लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल के विकास और आवश्यक सुविधाओं के लिए शासन स्तर पर हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने चन्द्रहासिनी महोत्सव को व्यापक पहचान दिलाने के लिए भी सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। साथ ही विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्य सरकार की यूपीएससी कोचिंग सहायता योजना की जानकारी दी और युवाओं से इसका अधिकाधिक लाभ उठाकर अपने भविष्य को संवारने का आह्वान किया।

वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि समाज और शासन के साझा प्रयासों से शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि माँ चन्द्रहासिनी आरोग्य धाम आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र के लिए उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं, सेवा भाव और जनकल्याण का आदर्श केंद्र बनेगा।इस अवसर पर चन्द्रहासिनी मंदिर ट्रस्ट, चंद्रपुर के संरक्षक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गौरीशंकर अग्रवाल, विधायक  रामकुमार यादव, ट्रस्ट अध्यक्ष  गोविंद अग्रवाल, संयोगिता सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधिगण, ट्रस्ट के पदाधिकारी, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया की त्वरित पहल से आकाशीय बिजली से मृतक की पत्नी को मिली 4 लाख की मुआवजा सहायता

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया की त्वरित पहल से आकाशीय बिजली से मृतक की पत्नी को मिली 4 लाख की मुआवजा सहायता

 00 मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर लंबित प्रकरण का हुआ शीघ्र निराकरण

00 आर्थिक सहायता मिलने पर परिजनों ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया एक बार फिर जरूरतमंद परिवार के लिए राहत का माध्यम बना है। आकाशीय बिजली गिरने से मृत व्यक्ति की पत्नी द्वारा मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में प्रस्तुत आवेदन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 लाख रुपये की मुआवजा सहायता राशि स्वीकृत कर उनके बैंक खाते में अंतरित कराई गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम झरन (मसरिघाट), पोस्ट घुमरा, तहसील तपकरा, जिला जशपुर निवासी मुनिका बाई विश्वकर्मा के पति की आकाशीय बिजली गिरने से असामयिक मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद लंबे समय तक मुआवजा राशि प्राप्त नहीं होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया में आवेदन प्रस्तुत कर सहायता की मांग की थी। आवेदन प्राप्त होते ही मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन ने प्रकरण का परीक्षण कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और आवेदिका के बैंक खाते में 4 लाख रुपये की मुआवजा सहायता राशि का भुगतान सुनिश्चित कराया। आर्थिक सहायता मिलने पर मुनिका बाई विश्वकर्मा एवं उनके परिजनों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की त्वरित पहल से उनकी लंबे समय से लंबित समस्या का समाधान हुआ। संकट की इस घड़ी में मिली सहायता से परिवार को बड़ा आर्थिक संबल प्राप्त हुआ है। 

उल्लेखनीय है कि बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण का भरोसेमंद केंद्र बनकर उभरा है। यहां प्राप्त आवेदनों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, जिससे स्वास्थ्य, राजस्व, बिजली, पेयजल तथा अन्य जनहित से जुड़े मामलों में पात्र हितग्राहियों को समयबद्ध राहत मिल रही है। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की संवेदनशील एवं जनोन्मुखी कार्यप्रणाली से शासन के प्रति आमजन का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

प्रदेशवासी चुनेंगे छत्तीसगढ़ की राजकीय तितली, ऑनलाइन वोटिंग 31 अगस्त तक

प्रदेशवासी चुनेंगे छत्तीसगढ़ की राजकीय तितली, ऑनलाइन वोटिंग 31 अगस्त तक

 रायपुर। छत्तीसगढ़ अपनी पहली राजकीय तितली चुनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इसके लिए प्रदेशवासियों से ऑनलाइन मतदान के माध्यम से सुझाव मांगे हैं। नागरिक अपनी पसंद की तितली के लिए Google Form के माध्यम से 31 अगस्त तक मतदान कर सकते हैं।


वनमंत्री की पहल पर शुरू की गई इस प्रक्रिया का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता और तितलियों के संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जैव विविधता और वन्यजीवों का संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है। जनभागीदारी से राजकीय तितली का चयन होने से लोगों में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

तीन तितली प्रजातियां दौड़ में
राजकीय तितली के चयन के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने वैज्ञानिक और पारिस्थितिक मानकों के आधार पर तीन तितली प्रजातियों का चयन किया है। इनमें कॉमन बैंडेड पीकॉक (Common Banded Peacock), ऑरेंज ओकलीफ (Orange Oakleaf) और स्पॉट स्वोर्डटेल (Spot Swordtail) शामिल हैं।

इन तितली प्रजातियों का चयन राज्य में उनकी उपलब्धता, पारिस्थितिक महत्व, संरक्षण मूल्य, विशिष्टता, आसानी से पहचान में आने और आमजन के आकर्षण जैसे विभिन्न मापदंडों के आधार पर किया गया है।

जनमत और विशेषज्ञों की अनुशंसा से होगा अंतिम चयन
वन विभाग द्वारा नागरिकों की राय जानने के लिए ऑनलाइन मतदान की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रदेश का प्रत्येक नागरिक अपनी पसंद की तितली के पक्ष में मतदान कर सकता है। प्राप्त जनमत और विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं के आधार पर राजकीय तितली के चयन का अंतिम प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।

विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों से भी भागीदारी की अपील

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने प्रदेश के सभी नागरिकों, विद्यार्थियों, प्रकृति प्रेमियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। विभाग ने लोगों से अधिक से अधिक नागरिकों को मतदान के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया है, ताकि छत्तीसगढ़ की जैव विविधता के इस महत्वपूर्ण प्रतीक का चयन व्यापक जनभागीदारी से हो सके।

केयर इकोनॉमी विकसित छत्तीसगढ़ की आधारभूत आवश्यकता : मंत्री राजवाड़े

केयर इकोनॉमी विकसित छत्तीसगढ़ की आधारभूत आवश्यकता : मंत्री राजवाड़े

00 राज्य स्तरीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव, नशामुक्त समाज और वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान का लिया संकल्प
रायपुर।
समाज कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा रायपुर में सुचारु एवं सशक्त केयर इकोनॉमी के निर्माण विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग की सचिव शहला निगार, संचालक  रणवीर शर्मा, राज्य आयुक्त दिव्यांगजन  रामजीवन देवांगन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, विषय विशेषज्ञ, विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे।

अपने उद्बोधन में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि केयर इकोनॉमी केवल सामाजिक कल्याण नहीं, बल्कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारभूत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वृद्धजन, दिव्यांगजन, महिलाओं और बच्चों के लिए सम्मानजनक, सुरक्षित एवं समावेशी व्यवस्था तैयार करना समय की आवश्यकता है। केयर सेक्टर में निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, महिलाओं की कार्यभागीदारी सशक्त होती है और समाज अधिक संवेदनशील एवं समावेशी बनता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांगजन कल्याण, वृद्धजन सेवाओं, पुनर्वास, कौशल विकास तथा महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से संचालित कर रही है। उन्होंने सभी विभागों से अभिसरण (कन्वर्जेंस) की भावना के साथ कार्य करते हुए मजबूत केयर इकोनॉमी के निर्माण का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत नशामुक्त समाज के निर्माण, वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान एवं उनकी देखभाल का सामूहिक संकल्प लिया। सभी ने यह शपथ भी ली कि वे वृद्धजनों के प्रति संवेदनशील रहेंगे, उनके सम्मान, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगे तथा समाज में सकारात्मक वातावरण के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान के डॉ. ए.सी. रेड्डी ने विकसित भारत के निर्माण में केयर इकोनॉमी की केंद्रीय भूमिका पर व्याख्यान दिया। कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव श्री बसवराजु एस. ने केयर इकोनॉमी में रोजगार सृजन की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। रायपुर के सीनियर कर्डियोलॉजिस्ट डॉ स्मित श्रीवास्तव ने केयर इकोनॉमी मॉडल तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोषण के महत्व पर जानकारी दी। यूनिसेफ के विशेषज्ञ ने चाइल्ड केयर एंड प्रोटेक्शन पर प्रस्तुति दी, जबकि हेल्पएज इंडिया के प्रतिनिधियों ने राज्य में वृद्धजन देखभाल की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की।

इसके अलावा राइट्स एंड इंक्लूजन इंडिया, टाटा ट्रस्ट्स, एसओएस चिल्ड्रेन्स विलेज, राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र, श्रम विभाग तथा अन्य विशेषज्ञों ने दिव्यांगजन पुनर्वास, स्वयं सहायता समूहों की भूमिका, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, डिजिटल केयर मॉडल और सामुदायिक भागीदारी जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागियों को विभिन्न विषयगत समूहों में विभाजित कर राज्य में केयर इकोनॉमी को सुदृढ़ बनाने के लिए सुझाव तैयार किए गए। समूह प्रस्तुतियों के माध्यम से प्राप्त अनुशंसाओं पर विचार-विमर्श किया गया, जिन्हें विभाग की भावी नीतियों एवं कार्ययोजनाओं में शामिल करने की दिशा में उपयोग किया जाएगा।

कार्यक्रम में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला से प्राप्त सुझाव छत्तीसगढ़ में एक सुदृढ़, समावेशी, संवेदनशील एवं रोजगारोन्मुखी केयर इकोनॉमी के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होंगे तथा राज्य को इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने में सहायक बनेंगे।

राहुल गांधी देश और संविधान से ऊपर नहीं, कानून सबके लिए एक समान : उप मुख्यमंत्री साव

राहुल गांधी देश और संविधान से ऊपर नहीं, कानून सबके लिए एक समान : उप मुख्यमंत्री साव

 00 छत्तीसगढ़ में कानून का राज, कांग्रेस नेताओं की धमकी से कोई डरने वाला नहीं

रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज कहा कि, भाजपा द्वारा कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के घेराव के समय कांग्रेस ने जिस तरह का रवैया अपनाया वह बहुत दुर्भाग्यजनक है। पता नहीं कांग्रेस किस दिशा में जा रही है, सत्ता से बाहर होने पर हताशा में दुर्व्यवहार का रास्ता अख्तियार कर ली है।

साव ने कहा कि, जब ये सरकार में होते हैं तो ये सत्ता का दुरुप्रयोग करते हैं। कल भारतीय जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान कांग्रेसी जिस प्रकार से डंडे लहरा रहे थे, सामने में आकर नारे लगा रहे थे।ऐसा कर वे क्या बताना चाहते हैं? उन्होंने कहा कि, अपने नेता को जांबाज बताते हैं। जो नेता मान्य परंपरा, कानून व्यवस्था, संविधान से परे जाकर आचरण करता है, उसे जांबाज बताते हैं। वहीं जांबाजी ये दिखाने की कोशिश कर रहे थे और अब पुलिस प्रशासन को धमकाने का काम कर रहे हैं।

साव ने कहा कि, सूरजपुर की घटना के दौरान इनके नेताओं ने पुलिस को धमकाया और अब ये फिर धमका कर क्या साबित करना चाहते हैं। इनकी धमकियों से कोई डरने वाला नहीं है। सभी के लिए कानून समान है। सभी को कानून सम्मत आचरण करना चाहिए। लेकिन यह दुर्भाग्यजनक है कि कांग्रेस न संविधान मानती है, न कानून मानती है। देश में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में जल संरक्षण को नई गति, मोर गाँव मोर पानी महाभियान बना ग्रामीण समृद्धि का आधार

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में जल संरक्षण को नई गति, मोर गाँव मोर पानी महाभियान बना ग्रामीण समृद्धि का आधार

 00 सेमरदर्री में प्रतिदिन 67 लाख 23 हजार लीटर वर्षा जल का भू-जल में हो रहा रिचार्ज, हजारों मानव दिवस का रोजगार भी सृजित

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से संचालित वीबी जी राम जी योजना के अंतर्गत ष्मोर गाँव मोर पानी महाभियानष् उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। यह अभियान जल संकट के स्थायी समाधान के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की ग्राम पंचायत सेमरदर्री इसका प्रेरणादायी उदाहरण बन गई है, जहाँ वैज्ञानिक पद्धति से किए गए कार्यों से प्रतिदिन लाखों लीटर वर्षा जल भूमि में समाहित होकर भू-जल स्तर को समृद्ध कर रहा है।

जिले के मरवाही विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरदर्री के भाटा-टिकरा, शीतल गडहा तथा पथरा कोड़ी क्षेत्र में 8300 स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच का निर्माण कराया गया है। वर्षा ऋतु में इन संरचनाओं के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 67 लाख 23 हजार लीटर पानी का भू-जल में रिचार्ज हो रहा है। इससे वर्षा जल का अपव्यय रुक रहा है, भू-जल स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है तथा मिट्टी की नमी लंबे समय तक सुरक्षित रहने से कृषि और वन क्षेत्र को भी व्यापक लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप यह अभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है। ट्रेंच निर्माण कार्य में प्रतिदिन लगभग 100 से 120 श्रमिकों को रोजगार मिला है तथा अब तक 8078 मानव दिवस का रोजगार सृजित किया जा चुका है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं

जिला प्रशासन द्वारा जनभागीदारी को केंद्र में रखकर जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। विभिन्न ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण से जुड़े स्थायी कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में जल उपलब्धता बढ़ेगी, खेती अधिक टिकाऊ बनेगी और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिलेगी। मोर गाँव मोर पानी महाभियान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरदर्शी सोच और प्रकृति संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। यह अभियान जल सुरक्षा, भू-जल संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के साथ-साथ आत्मनिर्भर गाँवों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है। आने वाले समय में इस प्रकार के कार्य प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे और जल संरक्षण की संस्कृति को और अधिक सशक्त करेंगे।

प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना लक्ष्य - मुख्य सचिव विकासशील

प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना लक्ष्य - मुख्य सचिव विकासशील

 मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में हर घर नल-जल जीवन मिशन की प्रगति पर कलेक्टर कॉन्फ्रेंस सम्पन्न

रायपुर, 23 जुलाई 2026/ मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हर घर नल (जल जीवन मिशन) की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि जल जीवन मिशन वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा सभी क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि इस योजना से महिलाओं का समय बचेगा और जलजनित बीमारियों में कमी आएगी तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।

पूर्ण योजनाओं को 31 अगस्त तक भौतिक सत्यापन करें

मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में मिशन मोड में कार्य करते हुए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि वे प्रत्येक माह जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करें। बैठक में मुख्य सचिव ने पूर्ण हो चुकी और हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जिन योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, उनका 31 अगस्त तक भौतिक सत्यापन कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन योजनाओं का कार्य अधूरा है, उन्हें 31 दिसंबर तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

जलस्रोत संरक्षण एवं रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने कार्ययोजना तैयार करें

मुख्य सचिव ने कहा कि जिला कलेक्टर समयबद्ध तरीके से रनिंग बिलों के भुगतान की प्रक्रिया सुनिश्चित करें, जिससे निर्माण कार्य बाधित नही हो। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वीबी-जी राम जी एवं स्थानीय संसाधनों, जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), सांसद निधि, विधायक निधि, सीएसआर एवं अन्य उपलब्ध स्रोतों से आवश्यक वित्तीय व्यवस्था कर योजनाओं को पूर्ण किया जाए। उन्होंने प्रत्येक जिले को जलस्रोतों का आकलन कर नए स्रोतों की पहचान करने, जलस्रोत संरक्षण एवं रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने तथा प्रत्येक स्रोत के संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं में वर्तमान स्रोत से पेयजल उपलब्ध कराना संभव नहीं है, उनके लिए वैकल्पिक स्रोतों की पहचान कर शीघ्र कार्रवाई की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ पेयजल से वंचित नहीं रखा जा सकता। बैठक में सोलर आधारित नल जल योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि योजना-वार विश्लेषण कर स्वीकृत राशि एवं व्यय का समुचित मिलान किया जाए।

जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग करें

मुख्य सचिव विकासशील ने प्रत्येक जिले को हर घर जल के लिए नया लक्ष्य निर्धारित करने एवं गांवों को इकाई मानकर शत-प्रतिशत नल जल कवरेज सुनिश्चित करने तथा जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, सभी जिलों के कलेक्टर एवं विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

CG : शेयर ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर 2 करोड़ से ज्यादा की ठगी, आरोपी दंपति गिरफ्तार

CG : शेयर ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर 2 करोड़ से ज्यादा की ठगी, आरोपी दंपति गिरफ्तार

 जांजगीर-चांपा। शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में रकम दोगुनी करने का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर पति-पत्नी को चांपा पुलिस ने गिरफ्तार कर बड़ी कार्रवाई की है। आरोपियों ने कई लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाया और करीब 2.05 करोड़ रुपये अपने बैंक खातों में जमा करा लिए। लंबे समय तक पुलिस से बचने के लिए दोनों लगातार ठिकाने बदलते रहे, लेकिन तकनीकी जांच और मुखबिर की सूचना के आधार पर उन्हें नया रायपुर से दबोच लिया गया।

पुलिस के मुताबिक मामले की शुरुआत 24 मई को हुई, जब पीड़ित हेमदत्त केशरवानी ने थाना चांपा में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी पहचान मारुति विहार कॉलोनी निवासी हरिशंकर गुप्ता और उनकी पत्नी रेखा गुप्ता से थी। दोनों ने शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने पर कम समय में दोगुना मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया और बड़े रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए तैयार कर लिया।

आरोपियों की बातों पर भरोसा करते हुए शिकायतकर्ता सहित कई लोगों ने चेक और RTGS के माध्यम से अलग-अलग किश्तों में कुल 2 करोड़ 4 लाख 97 हजार 502 रुपये आरोपियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। शुरुआत में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए दंपति ने करीब 39 लाख 99 हजार 400 रुपये वापस भी किए, ताकि निवेशकों को किसी तरह का संदेह न हो। इसके बाद उन्होंने शेष राशि लौटाने में लगातार टालमटोल शुरू कर दी और अंततः पैसे देने से साफ इनकार कर दिया।

शिकायत दर्ज होने की जानकारी मिलते ही दोनों आरोपी फरार हो गए। पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी से बचने के लिए वे लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए चांपा पुलिस ने विशेष टीम गठित कर तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, सर्विलांस और मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को दोनों आरोपियों के नया रायपुर में छिपे होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां दबिश देकर हरिशंकर गुप्ता और रेखा गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी से जुड़े कई अहम इलेक्ट्रॉनिक और बैंकिंग दस्तावेज भी बरामद किए हैं। इनमें एक लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन और बैंक की चेकबुक शामिल हैं। इन उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है तथा ठगी की रकम का उपयोग कहां किया गया।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में अन्य पीड़ितों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

CG – शिक्षक बना जल्लाद : छोटी सी गलती पर छात्र से साथ कर दी हैवानियत, अस्पताल में करना पड़ा भर्ती

CG – शिक्षक बना जल्लाद : छोटी सी गलती पर छात्र से साथ कर दी हैवानियत, अस्पताल में करना पड़ा भर्ती

 बालोद। जिले में मिडिल स्कूल के 12 वर्षीय छात्र को सॉर्ट रिसेस के बाद 1 मिनट लेट आने पर शिक्षक ने गाली-गलौज कर उसकी पिटाई कर दी। इस घटना में छात्र के सिर में चोट आई है, जिसके चलते उसका अस्पताल में इलाज कराया गया और शिक्षक के खिलाफ डौंडीलोहारा थाना में मामला दर्ज किया गया। इतिहास

जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के एक मिडिल स्कूल का है। परिजनों की शिकायत के अनुसार, मिडिल स्कूल में पदस्थ शिक्षक लोकेश्वर निषाद ने कक्षा 7वीं के 12 वर्षीय छात्र के साथ गाली-गलौज और मारपीट की है।

बताया जा रहा है कि सॉर्ट रिसेस के दौरान छात्र क्लास रूम में 1 मिनट की देरी से पहुंचा, जिसके बाद शिक्षक ने उसके साथ गाली-गलौज की और उसको बेरहमी से पिट दिया। इस पिटाई में छात्र के सिर पर चोट आई, जिसके चलते उसे आनन फानन में डौंडीलोहारा सामुदायिक स्वास्थ केंद्र ले जाया गया और इलाज कराया गया।

घटना के बाद छात्र के परिजनों ने थाने में इसकी शिकायत की है, जिसके बाद पुलिस ने शिक्षक लोकेश्वर निषाद के खिलाफ धारा 115(2) और 296 के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरु कर दी है। इस घटना से स्कूल के छात्र-छात्राओं में दहशत का माहौल है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को खाद-बीज की निर्बाध उपलब्धता, कालाबाजारी पर कड़ा प्रहार….

मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को खाद-बीज की निर्बाध उपलब्धता, कालाबाजारी पर कड़ा प्रहार….

 रायपुर: खरीफ 2026 के दौरान डीएपी की राष्ट्रीय स्तर पर सीमित उपलब्धता के बावजूद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश के प्रत्येक किसान को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो, किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और उर्वरकों की कालाबाजारी अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी के अनुरूप कृषि विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण एवं मूल्य नियंत्रण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए डीएपी का लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। जबकि 21 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में एक लाख 84 हजार 413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया गया है। वहीं भंडारण के विरूद्ध किसानों को एक लाख 26 हजार 360 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। इसके बाद भी समितियों एवं गोदामों में अभी 58 हजार 054 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि खरीफ 2025 की इसी अवधि में 37 हजार 535 मीट्रिक टन डीएपी शेष था।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुरूप किसानों को डीएपी के साथ-साथ एनपीके एवं अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके तथा डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।

देश में डीएपी का लगभग 70 से 80 प्रतिशत तथा एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत आयात विदेशों से किया जाता है। वैश्विक परिस्थितियों एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने के कारण डीएपी और एनपीके की उपलब्धता तथा कीमतों पर प्रभाव पड़ा है। इसी कारण उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियों द्वारा भारत सरकार की प्रचलित नीति एवं बाजार परिस्थितियों के अनुरूप एनपीके के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में वृद्धि की गई है।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के मूल्य निर्धारित करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, फिर भी किसानों से निर्धारित एमआरपी से अधिक मूल्य वसूला न जाए, इसके लिए कृषि विभाग लगातार निरीक्षण कर रहा है। अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी तथा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि अब तक प्रदेश में 4,878 उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया गया है। कार्रवाई के दौरान 625 नोटिस जारी किए गए, 183 केन्द्रों पर विक्रय प्रतिबंध लगाए गए तथा 98 केन्द्रों से उर्वरक जब्त किए गए। वहीं 97 केन्द्रों का लाइसेंस निलंबित और 11 विक्रय केन्द्रों का लाइसेंस निरस्त किया गया। साथ ही 56 प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए गए तथा 7 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई हैं।

इधर, भारी वर्षा से जिन क्षेत्रों में बोनी प्रभावित हुई है अथवा किसानों को पुनः बुआई (डबल बोनी) करनी पड़ रही है, वहां जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने तथा शासन के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री  रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। विभाग द्वारा उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, मूल्य नियंत्रण एवं कालाबाजारी पर प्रभावी निगरानी रखी जा रही है, ताकि प्रत्येक पात्र किसान को समय पर आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हो सके।

राज्य शासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं एवं सहकारी समितियों से ही निर्धारित मूल्य पर उर्वरक खरीदें। यदि कहीं भी अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी अथवा किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें, ताकि दोषियों के विरुद्ध शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज गारियाबंद दौरे पर,अमलीपदर में धार्मिक कार्यक्रम में होंगे शामिल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज गारियाबंद दौरे पर,अमलीपदर में धार्मिक कार्यक्रम में होंगे शामिल

 रायपुर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज गारियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड स्थित अमलीपदर के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवान  जगन्नाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज दोपहर लगभग 1 बजे गरियाबंद के लिए रवाना होंगे। यहां से वे दोपहर 2 बजे श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचेंगे, जहां 2 बजे से 3 बजे तक भगवान  जगन्नाथ की पूजा-अर्चना और दर्शन करेंगे। पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री 3 बजकर 10 मिनट पर हेलीकॉप्टर से रायपुर के लिए रवाना होंगे।

CG Weather Today: छत्तीसगढ़ में मानसून का रौद्र रूप, अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट

CG Weather Today: छत्तीसगढ़ में मानसून का रौद्र रूप, अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के अधिकांश जिलों में बुधवार को दिनभर झमाझम बारिश हुई। कई जगहों पर सड़कों पर पानी भर गया, जबकि निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति देखने को मिली। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है।

मौसम विभाग के अनुसार जुलाई महीने में बना यह दूसरा मजबूत मानसूनी सिस्टम है, जिसका असर पूरे प्रदेश में साफ दिखाई दे रहा है। पिछले एक सप्ताह से लगातार बारिश का दौर जारी है। बस्तर और सरगुजा संभाग के कुछ हिस्सों को छोड़कर राज्य के अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिस्टम अभी कमजोर नहीं पड़ा है, इसलिए अगले दो दिनों तक तेज बारिश जारी रहने की संभावना है।

मौसम विभाग ने गुरुवार को कोरबा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कबीरधाम, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ और जशपुर जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में सबसे अधिक 190 मिमी बारिश सूरजपुर में दर्ज की गई। इसके अलावा अंबिकापुर में 100 मिमी, रायपुर में 80 मिमी, जबकि रायगढ़, डोंगरगढ़, बलौदाबाजार, राजनांदगांव और माना में 70-70 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

मानसून सीजन की बात करें तो सारंगढ़ प्रदेश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बन गया है। यहां अब तक 613 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 373 प्रतिशत अधिक है। वहीं जांजगीर-चांपा में 574 मिमी, मुंगेली में 525 मिमी, बिलासपुर में 492 मिमी और रायपुर में 150 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

हालांकि पूरे प्रदेश में बारिश का वितरण समान नहीं है। अब तक राज्य में औसतन 381 मिमी वर्षा हुई है, जो सामान्य से करीब 17 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभी भी 11 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें कांकेर (257 मिमी, 50 प्रतिशत कम), सरगुजा (249.9 मिमी, 49 प्रतिशत कम), कोंडागांव और मोहला-मानपुर प्रमुख हैं।

मौसम विभाग ने लोगों से भारी बारिश के दौरान नदी-नालों के पास जाने से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में सतर्कता बरतने और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों पर न रुकने की अपील की है। प्रशासन को भी संभावित जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को खाद-बीज की निर्बाध उपलब्धता, कालाबाजारी पर कड़ा प्रहार

मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को खाद-बीज की निर्बाध उपलब्धता, कालाबाजारी पर कड़ा प्रहार

 खरीफ सीजन 2026 में डीएपी की सीमित राष्ट्रीय उपलब्धता के बीच छत्तीसगढ़ सरकार की प्रभावी व्यवस्था

किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सतत निगरानी

रायपुर- खरीफ 2026 के दौरान डीएपी की राष्ट्रीय स्तर पर सीमित उपलब्धता के बावजूद मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश के प्रत्येक किसान को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो, किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और उर्वरकों की कालाबाजारी अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी के अनुरूप कृषि विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण एवं मूल्य नियंत्रण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए डीएपी का लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। जबकि 21 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में एक लाख 84 हजार 413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया गया है। वहीं भंडारण के विरूद्ध किसानों को एक लाख 26 हजार 360 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। इसके बाद भी समितियों एवं गोदामों में अभी 58 हजार 054 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि खरीफ 2025 की इसी अवधि में 37 हजार 535 मीट्रिक टन डीएपी शेष था।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुरूप किसानों को डीएपी के साथ-साथ एनपीके एवं अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके तथा डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।

देश में डीएपी का लगभग 70 से 80 प्रतिशत तथा एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत आयात विदेशों से किया जाता है। वैश्विक परिस्थितियों एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने के कारण डीएपी और एनपीके की उपलब्धता तथा कीमतों पर प्रभाव पड़ा है। इसी कारण उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियों द्वारा भारत सरकार की प्रचलित नीति एवं बाजार परिस्थितियों के अनुरूप एनपीके के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में वृद्धि की गई है।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के मूल्य निर्धारित करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, फिर भी किसानों से निर्धारित एमआरपी से अधिक मूल्य वसूला न जाए, इसके लिए कृषि विभाग लगातार निरीक्षण कर रहा है। अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी तथा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि अब तक प्रदेश में 4,878 उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया गया है। कार्रवाई के दौरान 625 नोटिस जारी किए गए, 183 केन्द्रों पर विक्रय प्रतिबंध लगाए गए तथा 98 केन्द्रों से उर्वरक जब्त किए गए। वहीं 97 केन्द्रों का लाइसेंस निलंबित और 11 विक्रय केन्द्रों का लाइसेंस निरस्त किया गया। साथ ही 56 प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए गए तथा 7 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई हैं।

इधर, भारी वर्षा से जिन क्षेत्रों में बोनी प्रभावित हुई है अथवा किसानों को पुनः बुआई (डबल बोनी) करनी पड़ रही है, वहां जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने तथा शासन के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। विभाग द्वारा उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, मूल्य नियंत्रण एवं कालाबाजारी पर प्रभावी निगरानी रखी जा रही है, ताकि प्रत्येक पात्र किसान को समय पर आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हो सके।

राज्य शासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं एवं सहकारी समितियों से ही निर्धारित मूल्य पर उर्वरक खरीदें। यदि कहीं भी अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी अथवा किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें, ताकि दोषियों के विरुद्ध शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।