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भरपूर खाद-बीज, मजबूत योजनाएं और आधुनिक खेती से समृद्धि की राह पर छत्तीसगढ़ का किसान

भरपूर खाद-बीज, मजबूत योजनाएं और आधुनिक खेती से समृद्धि की राह पर छत्तीसगढ़ का किसान

 00 उर्वरकों का 98 प्रतिशत भंडारण, किसानों को डीबीटी से हजारों करोड़ की सहायता, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति

00 कृषि मंत्री नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ परदेशी ने विभागीय उपलब्धियों पर दी विस्तृत जानकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी, तकनीक आधारित और किसान केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा कृषि अधोसंरचना के विकास के माध्यम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी मंत्री श्री रामविचार नेताम तथा कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज संयुक्त रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभागीय उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर कृषि विभाग के संचालक श्री राहुल देव, पशुधन विकास विभाग के श्री चंद्रकांत वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के एमडी श्री अजय अग्रवाल, उद्यानिकी विभाग संचालक श्री लोकेश चंद्राकर, मत्सय विभाग के संचालक श्री एनएस नाग, छत्तीसगढ़ राज्य मण्डी बोर्ड के एमडी श्री महेन्द्र सवन्नी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति के डॉ. विनित सक्सेना उपस्थित थे। 

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी मंत्री श्री रामविचार नेताम तथा कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज संयुक्त रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभागीय उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता किसानों की आय में वृद्धि, खेती की लागत में कमी तथा कृषि को आधुनिक और टिकाऊ बनाना है। राज्य में कृषि एवं उससे जुड़े सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं।

प्रदेश में पर्याप्त खाद और बीज की उपलब्धता
प्रेसवार्ता में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए अप्रैल से सितंबर तक 15.55 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 30 जुलाई 2026 तक 15.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 98 प्रतिशत है। किसानों द्वारा अब तक 10.23 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का उठाव किया जा चुका है तथा लगभग 4.93 लाख मीट्रिक टन उर्वरक शेष उपलब्ध है। यूरिया का लक्ष्य से अधिक 102 प्रतिशत भंडारण किया गया है, जबकि डीएपी, एनपीके, एमओपी एवं एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। विभाग द्वारा कालाबाजारी, जमाखोरी तथा अवैध भंडारण पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। 30 जुलाई तक 5,466 निरीक्षण किए गए, जिनमें अनेक मामलों में एफआईआर, लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण तथा उर्वरक जब्ती जैसी कार्रवाई की गई। प्रदेश में खरीफ 2026 के लिए लगभग 4.95 लाख क्विंटल बीज की मांग के विरुद्ध 4.85 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण किया गया है, जो लगभग 98 प्रतिशत उपलब्धता को दर्शाता है।
कृषक उन्नति योजना से किसानों को मिली बड़ी आर्थिक ताकत
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में सहायता राशि उपलब्ध कराई जा रही है। खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए धान के स्थान पर अन्य फसल लेने वाले किसानों को प्रति एकड़ मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दी गई है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से लाखों किसानों को लाभ
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई। अब तक किसानों को 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। एग्रीस्टैक और ई-केवाईसी के माध्यम से योजना को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है।
बढ़ रहा है कृषि का रकबा, 83 प्रतिशत बोनी पूर्ण
इस वर्ष खरीफ में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक लगभग 83 प्रतिशत क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है। प्रदेश में औसत वर्षा भी सामान्य से अधिक दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है।
आधुनिक खेती को मिल रहा बढ़ावा
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि राज्य में कृषि यंत्रीकरण के तहत अब तक 7,745 किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं तथा 568 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं, जिससे छोटे एवं सीमांत किसानों को भी आधुनिक उपकरणों का लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 49,983 किसानों को लाभान्वित करते हुए लगभग 41,967 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है तथा 147 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान प्रदान किया गया है। प्राकृतिक खेती को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 57 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है।
दलहन-तिलहन उत्पादन पर विशेष जोर
मंत्री श्री राम विचार नेताम प्रेसवार्ता में बताया कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन, आत्मनिर्भर दलहन मिशन तथा नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयलसीड्स जैसी योजनाओं के माध्यम से दलहन एवं तिलहन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसानों को प्रमाणित बीज, प्रशिक्षण, फसल प्रदर्शन तथा अनुदान आधारित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
एग्रीस्टैक से डिजिटल कृषि को नई पहचान
प्रदेश के 19,389 ग्रामों का जियो-रेफरेंसिंग पूरा किया जा चुका है तथा 36 लाख से अधिक किसानों का डिजिटल पंजीयन किया गया है। एग्रीस्टैक के माध्यम से पीएम-किसान, पीएम-आशा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित विभिन्न योजनाओं को एकीकृत किया जा रहा है, जिससे किसानों को पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
उद्यानिकी में लगातार बढ़ रहा क्षेत्र और उत्पादन
बीते ढाई वर्षों में उद्यानिकी फसलों का कुल रकबा 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। फल, सब्जी, मसाला, पुष्प एवं औषधीय फसलों के क्षेत्र और उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। ऑयल पाम के क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत तथा बांस रोपण में 79 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में हाईटेक नर्सरियों, टिश्यू कल्चर लैब, ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस, पैक हाउस तथा कोल्ड स्टोरेज जैसी अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। आगामी वर्षों में बलरामपुर एवं जशपुर में इंटीग्रेटेड पैक हाउस तथा नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में नई उपलब्धियां
पशुधन विकास विभाग के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में दूध, अंडा एवं मांस उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य सरकार, छत्तीसगढ़ सहकारी दुग्ध महासंघ और एनडीडीबी के बीच हुए समझौते के बाद दुग्ध उत्पादकों को अब प्रत्येक दस दिन में भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। दूध संकलन दर भी बढ़ाई गई है तथा नई दुग्ध समितियों, चिलिंग सेंटर और डेयरी अधोसंरचना का विस्तार किया गया है। मोबाइल वेटेरिनरी यूनिटों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। गौधाम योजना, गौशालाओं के अनुदान में वृद्धि तथा नए गौ-अभ्यारण्यों की स्थापना भी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।
छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल
मंत्री श्री नेताम ने बताया कि मत्स्य पालन विभाग ने ढाई वर्षों में जलक्षेत्र विकास, मत्स्य उत्पादन, केज कल्चर, बायोफ्लॉक, तालाब निर्माण और झींगा पालन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया है। राज्य का मत्स्य उत्पादन लगभग 23 प्रतिशत बढ़कर 9.59 लाख टन पहुंच गया है। प्रदेश आज देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है।
कृषि विपणन और अधोसंरचना को गति
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) से प्रदेश की 21 मंडियां जुड़ चुकी हैं। ई-ट्रेडिंग के माध्यम से अंतरराज्यीय व्यापार को बढ़ावा मिला है। कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) के अंतर्गत प्रदेश ने 1,900 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 3,026 करोड़ रुपये की उपलब्धि हासिल कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। प्रदेश की मंडियों एवं उपमंडियों में किसानों की सुविधा के लिए 885 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न अधोसंरचना विकास कार्य स्वीकृत एवं निर्मित किए गए हैं।
राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण संस्था द्वारा बीज उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन साथी पोर्टल से जोड़ा गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला कृषकों को बीज प्रमाणीकरण शुल्क पर शत-प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है, जिससे वर्ष 2025-26 में 7,510 किसानों को लाभ मिला। रायपुर स्थित बीज परीक्षण प्रयोगशाला को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हुई है, जो छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश की पहली एनएबीएल मान्यता प्राप्त शासकीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला है। वर्ष 2025-26 में यहां 15 हजार बीज नमूनों का सफल परीक्षण किया गया।
प्रेसवार्ता के अंत में मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने, कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने तथा आधुनिक तकनीक और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज, पर्याप्त उर्वरक, डिजिटल सेवाओं, आधुनिक तकनीक और प्रभावी योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ कृषि विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

श्रमिक सम्मेलन में शामिल हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, ई- रिक्शे में की सवारी

श्रमिक सम्मेलन में शामिल हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, ई- रिक्शे में की सवारी

 राजनांदगांव। शहर के पद्मश्री गोविंद राम निर्मलकर ऑडिटोरियम में श्रमिक सम्मेलन के आयोजन में विधानसभा अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक डॉ रमन सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने श्रम कल्याण एवं भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार मंडल के 1802 हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ देते हुए लगभग साढ़े तीन करोड़ की राशि डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने श्रमिक सम्मेलन में शामिल होते हुए। श्रम कल्याण एवं भवन सन्निमार्ण कर्मकार मंडल के तहत चलाए जा रही योजनाओं की जानकारी दी। वहीं विभिन्न श्रमिक विभाग के तहत विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों से चर्चा की। इस चर्चा के दौरान उन्होंने दीदी ई रिक्शा सहायता योजना प्राप्त महिला से आयोजन समाप्ति के बाद उनके ई-रिक्शा में जाने इच्छा जताई। आयोजन के दौरान डॉ रमन सिंह ने श्रम विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत 1802 हितग्राहियों को 3 करोड़ 43 लाख 74 हजार 970 रूपए की राशि से लाभान्वित किया।

सम्मेलन को छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष राम प्रताप सिंह एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा ने भी संबोधित किया। आयोजन के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह कार्यक्रम स्थल से ई-रिक्शा में सवार होकर पार्टी की बैठक के लिए निकले।

Breaking: गरियाबंद में पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ, महीनों से फैली दहशत का हुआ अंत

Breaking: गरियाबंद में पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ, महीनों से फैली दहशत का हुआ अंत

 गरियाबंद। वन परिक्षेत्र के अंतर्गत ग्राम केराबाहरा में पिछले कई महीनों से दहशत का कारण बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद हो गया।शुक्रवार शाम तेंदुआ के पिंजरे में फंसते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वहीं वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी बड़ी अनहोनी टलने पर संतोष जताया।

जानकारी के अनुसार तेंदुआ लंबे समय से गांव में घुसकर कुत्तों और मुर्गियों का शिकार कर रहा था। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीण भय के माहौल में जी रहे थे।ग्रामीणों ने कई बार वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने की मांग की,लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती गई।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से मामले में संज्ञान लिया गया,जिसके बाद वन विभाग हरकत में आया और तीन दिन पहले गांव में पिंजरा लगाया गया।

शुक्रवार शाम तेंदुआ शिकार की तलाश में पिंजरे के भीतर पहुंचा और उसमें कैद हो गया।तेंदुए के पकड़ में आते ही गांव में खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते तेंदुआ पकड़ लिया गया,जिससे किसी बड़ी जनहानि की आशंका टल गई।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू कर नियमानुसार उपयुक्त वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वन्यजीव दिखाई देने पर स्वयं कोई जोखिम न उठाएं और तत्काल वन विभाग को सूचना दें।

 
 
​डिजिटल क्रांति की ओर छत्तीसगढ़, ‘वसुंधरा’ परियोजना से राजस्व सेवाओं में पारदर्शी और सुरक्षित होगा नया सवेरा….

​डिजिटल क्रांति की ओर छत्तीसगढ़, ‘वसुंधरा’ परियोजना से राजस्व सेवाओं में पारदर्शी और सुरक्षित होगा नया सवेरा….

 रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा प्रदेश के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। ‘वसुंधरा’ (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों और तहसीलों के पुराने एवं वर्तमान राजस्व अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा प्रमाणीकरण किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में ‘वसुंधरा परियोजना’ के तहत राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे खसरा, बी-1 और ऋण पुस्तिका जैसे भूमि दस्तावेज कुछ ही सेकंड में व्हाट्सएप और ऑनलाइन माध्यमों से सुरक्षित व पारदर्शी रूप से नागरिकों को मिल रहे हैं।

​दंतेवाड़ा का सफल मॉडल बना प्रेरणा

इस महत्वाकांक्षी योजना की नींव दंतेवाड़ा जिले में सफलतापूर्वक क्रियान्वित किए गए मॉडल पर रखी गई है। दंतेवाड़ा में पिछले एक वर्ष के दौरान 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया और 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र मात्र एक से दो दिनों में जारी किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निराकरण संभव हुआ और अभिलेखों में छेड़छाड़ का एक भी मामला सामने नहीं आया।

12.89 करोड़ पृष्ठों के डिजिटलीकरण का विशाल लक्ष्य

दंतेवाड़ा के इसी सफल प्रयोग के आधार पर अब पूरे राज्य में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के विभिन्न राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज़ करने का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत 22.72 करोड़ रुपए की लागत से 5.68 करोड़ पृष्ठ खसरा पांचसाला, 11.77 करोड़ रुपए की लागत से 2.94 करोड़ पृष्ठ B-1 रिकॉर्ड, 9.98 करोड़ रुपए की लागत से 2.49 करोड़ पृष्ठ नामांतरण व संशोधन पंजी, 2.13 करोड़ रुपए की लागत से 53.16 लाख पृष्ठ मिसल पंजी और 1.89 करोड़ रुपए की लागत से 47.29 लाख पृष्ठ अधिकार अभिलेख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट एवं व्यवर्तन पंजी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा।

​मजबूत वित्तीय संरचना और चरणबद्ध समयसीमा

इस विशाल परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 65.41 करोड़ रुपए की कुल एकमुश्त पूंजीगत लागत (CAPEX) और 50 लाख रूपए प्रति वर्ष का परिचालन व्यय (OPEX) तय किया गया है, जिसकी वित्तीय व्यवस्था राज्य के अधोसंरचना मद और केंद्र सरकार की DILRMP 3.0 योजना से की जाएगी। योजना के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से अगले तीन महीनों के भीतर वसुंधरा पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा, जिसके बाद कार्यदायी एजेंसियों का चयन कर एक वर्ष के भीतर सभी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सत्यापन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

आधुनिकतम तकनीक से लैस और पूरी तरह सुरक्षित

​’वसुंधरा’ परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसमें आधुनिकतम तकनीकों का समावेश है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित OCR, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और स्मार्ट सर्च इंजन की मदद से दशकों पुराने रिकॉर्ड भी पलक झपकते ही खोजे जा सकेंगे। वहीं अभिलेखों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या हेरफेर को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर और यूनिक QR व बारकोड प्रणाली लागू की जाएगी। दस्तावेजों के ऑनलाइन होने से रिकॉर्ड में किसी भी तरह के अवैध बदलाव या छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म होना।

​नागरिकों को मिलेगी दफ्तरों के चक्करों से आजादी

इस योजना के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद वर्तमान में नकल प्राप्ति में लगने वाला 3 से 7 दिनों का समय घटकर मात्र कुछ मिनटों का रह जाएगा और यह सेवा नागरिकों को 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। घर बैठे कुछ ही पलों में जमीन के जरूरी दस्तावेज प्राप्त किया जा सकेगा । नागरिक अब वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्रों और कियोस्क के माध्यम से घर बैठे प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकेंगे। सुगम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और अधिकारियों के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं से आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार का यह नवाचार न केवल भूमि विवादों और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाएगा, बल्कि राज्य में डिजिटल गवर्नेंस और सुशासन के एक नए युग का सूत्रपात भी करेगा।

Crime: विधवा महिला के घर चोरों का धावा: अलमारी से धान बिक्री के पैसे लेकर फरार, आरोपी की तलाश में पुलिस…

Crime: विधवा महिला के घर चोरों का धावा: अलमारी से धान बिक्री के पैसे लेकर फरार, आरोपी की तलाश में पुलिस…

 धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में इन दिनों चोरों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। ताजा मामला मगरलोड थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां चोरों ने विधवा महिला की मेहनत की कमाई पर डाका डाला है। इस घटना के बाद महिला ने पुलिस से जल्द से जल्द कारवाई की मांग की है

पढ़िए पूरी खबर

दरअसल, पीड़िता संतोषी साहू धौराभाटा गांव में अपने दो बेटों के साथ रहती है। उसने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि अपनी रवि फसल से उपजे धान को बेचकर लगभग 58 हजार की कमाई की थी। बचत के 28 हजार अपने घर के अलमारी में रखे थे।

मामला दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस

दो दिन पहले वह काम पर गई, तो इस दौरान सूने मकान का फायदा उठाकर अज्ञात चोर ने घर के पीछे दरवाजे में सेंधमारी कर अलमारी से 28 हजार पर हाथ साफ कर दिया, महिला जब अन्य सदस्य के साथ घर पहुंची तो चोरी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने पुलिस में FIR दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात चोर की तलाश शुरु कर दी है।

Crime News- पति ही निकला पत्नी का हत्यारा: चरित्र शंका में ईंट और CFL बल्ब से की हत्या, पुलिस ने किया खुलासा…

Crime News- पति ही निकला पत्नी का हत्यारा: चरित्र शंका में ईंट और CFL बल्ब से की हत्या, पुलिस ने किया खुलासा…

 कवर्धा। छत्तीसगढ़ की कवर्धा पुलिस ने महिला के हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। हत्यारा कोई और नहीं बल्कि उसका पति निकला, जिसने चरित्र शक के चलते उसकी ईंट और CFL बल्ब से मारकर हत्या कर दी थी।

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यह पूरा मामला, लोहारा थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, पत्नी किरण वर्मा के चरित्र पर संदेह के चलते द्रोणाचार्य वर्मा ने ईंट और सीएफएल बल्ब से हमला कर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी खुद थाने पहुंचा और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की।

खेत में मिला था शव

जांच के दौरान पुलिस ने 16 जुलाई को ग्राम सिंगारपुर में किरण का शव खेत के ट्यूबवेल के पीछे से बरामद किया था। पुलिस और साइबर सेल की जांच में आरोपी द्रोणाचार्य वर्मा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

न्यायिक रिमांड पर भेजा गया जेल

उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त ईंट, सीएफएल बल्ब के टूटे टुकड़े और खून से सने कपड़े बरामद किए गए। आरोपी को गिरफ्तार कर आज न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

जनता की सेहत से कोई समझौता नहीं: मंत्री राजवाड़े

जनता की सेहत से कोई समझौता नहीं: मंत्री राजवाड़े

 रायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं भटगांव विधायक लक्ष्मी राजवाड़े ने शुक्रवार को भटगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण कर अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, उपचार व्यवस्था, स्वच्छता तथा अस्पताल संचालन की स्थिति का जायजा लिया।

मंत्री राजवाड़े ने ओपीडी, वार्ड, प्रसूति कक्ष, दवा वितरण केंद्र, पेयजल व्यवस्था एवं अस्पताल परिसर की साफ-सफाई का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों से चर्चा कर उपचार, दवाओं की उपलब्धता तथा अन्य सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि अस्पताल में पाई गई कमियों को तत्काल दूर किया जाए तथा मरीजों को समय पर उपचार, आवश्यक दवाएं एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, दवाओं का पर्याप्त भंडारण बनाए रखने तथा चिकित्सा उपकरणों के सुचारू संचालन के निर्देश दिए।

राजवाड़े ने कहा कि प्रदेश सरकार आमजन को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मेरे क्षेत्र की देवतुल्य जनता को बेहतर, सुगम और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को अस्पताल आने वाले प्रत्येक मरीज के साथ संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने तथा गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही अस्पताल परिसर में स्वच्छता एवं संक्रमण नियंत्रण संबंधी मानकों का कड़ाई से पालन करने पर विशेष जोर दिया।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण एवं अंचल क्षेत्रों के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए इन संस्थानों में सभी आवश्यक सुविधाएं प्रभावी एवं व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहना आवश्यक है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को नियमित निगरानी एवं शिकायतों के त्वरित निराकरण के निर्देश भी दिए।निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री आवास योजना से साकार हो रहा गरीब परिवारों के अपने घर का सपना

प्रधानमंत्री आवास योजना से साकार हो रहा गरीब परिवारों के अपने घर का सपना

 00 मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में जरूरतमंदों को मिल रहा सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर जीवन

00 जशपुर के सुनील पांडेय की बदली जिंदगी, कच्चे मकान से पक्के आशियाने तक का प्रेरक सफर

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) प्रदेश के हजारों जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप गरीब और आवासविहीन परिवारों का वर्षों पुराना पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। यह योजना केवल एक मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार भी प्रदान कर रही है।

जशपुर जिले के तपकरा निवासी सुनील पांडेय की कहानी इस परिवर्तन की जीवंत मिसाल है। कभी उनका परिवार कच्चे मकान में रहने को विवश था। बरसात के मौसम में टपकती छत, भीगता सामान और असुरक्षित वातावरण उनके लिए हर साल बड़ी परेशानी बन जाता था। परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का सपना आर्थिक अभाव के कारण अधूरा ही रह जाता था। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत सुनील पांडेय को पक्के आवास की स्वीकृति मिली। शासन से प्राप्त सहायता के माध्यम से उन्होंने अपना नया घर बनवाया। आज उनका परिवार सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण में जीवन व्यतीत कर रहा है। सुनील पांडेय बताते हैं कि पक्का घर मिलने के बाद उनके परिवार की सबसे बड़ी चिंता समाप्त हो गई है। अब बरसात का मौसम डर नहीं, बल्कि सुकून लेकर आता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को केवल एक घर ही नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और नए विश्वास के साथ जीवन जीने का अवसर भी दिया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना प्रदेश के हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक बनकर उभरी है। पक्के आवास के माध्यम से गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार मिल रहा है, जिससे विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिल रही है।

राजस्व मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं, समय पर निपटाएं नामांतरण और बंटवारा - मंत्री वर्मा

राजस्व मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं, समय पर निपटाएं नामांतरण और बंटवारा - मंत्री वर्मा

 00 धमतरी में विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक- बाढ़ आपदा से निपटने के दिए पुख्ता निर्देश

00 मंत्री ने हितग्राहियों को सौंपे स्वामित्व कार्ड और जाति प्रमाण पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष धमतरी में कल आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, स्वामित्व कार्ड और भूमि डायवर्सन जैसे जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम जनता को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे सरकारी योजनाओं का लाभ
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री  वर्मा ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उनका सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मंत्री  वर्मा ने 5 हितग्राहियों को स्वामित्व कार्ड तथा 5 हितग्राहियों को जाति प्रमाण पत्र का वितरण भी किया।

मानसून और संभावित बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारी तेज़
मानसून के मौसम को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने संभावित बाढ़ और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाए। राहत एवं बचाव दलों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा जाए। किसी भी आपात स्थिति में जन-धन की सुरक्षा के लिए संसाधन और त्वरित राहत व्यवस्था सुनिश्चित हो। बैठक के दौरान मंत्री टंक राम वर्मा ने विभिन्न विभागीय कार्यों की प्रगति पर भी विस्तृत दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें, गणवेश और साइकिल का वितरण समय पर हर हाल में सुनिश्चित किया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए। वहीं, कृषि विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि मानसून और बोआई के इस मौसम में किसानों को खाद एवं बीज की उपलब्धता में किसी भी तरह की कमी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए मंत्री वर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा आयुष्मान भारत योजना का अधिकतम लाभ आम जनता तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।

धमतरी में बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं का हो रहा विस्तार
समीक्षा के दौरान कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिले में चल रही विकास परियोजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जिले में 200 बिस्तरीय मातृ-शिशु अस्पताल, नेत्र एवं ट्रॉमा सेंटर के साथ-साथ कुरूद में 100 बिस्तरीय अस्पताल व नर्सिंग कॉलेज का निर्माण प्रगति पर है। इसी तरह सड़क, ऑडिटोरियम, इनडोर स्टेडियम, नालंदा परिसर, रेलवे, औद्योगिक पार्क और पर्यटन विकास के कार्यों को आगामी दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में प्रत्येक अधिकारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में पुलिस अधीक्षक, वनमंडलाधिकारी, जिला पंचायत सीईओ सहित जिले के सभी प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय की पहल से जशपुर को सड़क विकास की बड़ी सौगात

मुख्यमंत्री साय की पहल से जशपुर को सड़क विकास की बड़ी सौगात

 00 चार ग्रामीण संपर्क मार्गों के निर्माण के लिए 8.44 करोड़ रुपये से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति

00 बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार को मिलेगा नया संबल

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में जशपुर जिले को एक और महत्वपूर्ण सौगात मिली है। राज्य शासन ने वर्ष 2025-26 के बजट प्रावधान के अंतर्गत जिले के चार प्रमुख ग्रामीण संपर्क मार्गों के निर्माण के लिए कुल 8 करोड़ 44 लाख 68 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इन सड़कों के निर्माण से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा आवागमन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। शासन के इस निर्णय से क्षेत्रवासियों में उत्साह और खुशी का माहौल है

राज्य शासन द्वारा जारी स्वीकृति के अनुसार बुलडेगा से रेचवाघाट पहुंच मार्ग (1.20 किलोमीटर) के निर्माण के लिए 1 करोड़ 23 लाख 77 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस सड़क के निर्माण से ग्रामीणों को वर्षभर सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी तथा दैनिक आवागमन में आने वाली परेशानियां दूर होंगी। इसी प्रकार खुंटापानी से सलियामुड़ा पहुंच मार्ग (3 किलोमीटर) के निर्माण के लिए 3 करोड़ 46 लाख 67 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह मार्ग कई गांवों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। सड़क बनने से विद्यार्थियों को विद्यालय, मरीजों को स्वास्थ्य संस्थानों तथा किसानों को कृषि उपज के परिवहन में बेहतर सुविधा मिलेगी।

कोसमभावना से बनगांव पहुंच मार्ग (1.20 किलोमीटर) के निर्माण, जिसमें पुल-पुलिया का निर्माण भी शामिल है, के लिए 1 करोड़ 43 लाख 84 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना से विशेषकर बरसात के दौरान आवागमन बाधित होने की समस्या का स्थायी समाधान होगा और ग्रामीणों को पूरे वर्ष सुरक्षित आवागमन का लाभ मिलेगा। 
इसके अतिरिक्त बुलडेगा मेन रोड से सुकबासुपारा होते हुए भिंजपुर पहुंच मार्ग (2.50 किलोमीटर) के निर्माण के लिए 2 करोड़ 30 लाख 40 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस सड़क के निर्माण से क्षेत्र के अनेक गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और ग्रामीणों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में सड़क संपर्क व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी, विद्यार्थियों और मरीजों का आवागमन सुगम होगा तथा स्थानीय व्यापार और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार जनहितकारी निर्णय ले रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सड़क निर्माण कार्यों से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने की भेंट, छत्तीसगढ़ के विकास और ‘बस्तर विजन’ पर हुई विस्तृत चर्चा

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने की भेंट, छत्तीसगढ़ के विकास और ‘बस्तर विजन’ पर हुई विस्तृत चर्चा

 राजनांदगांव में ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना, 461 गांवों में स्थायी ग्रिड कनेक्टिविटी और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना के लिए मांगा सहयोग

मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के समक्ष रखा बदलते बस्तर का रोडमैप

शांति और विश्वास के साथ अब विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है बस्तर - मुख्यमंत्री साय

‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुन्ने’ से 5,542 गांवों के लगभग 39 लाख लोगों तक पहुंच रही शासन की योजनाएं

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ में शामिल होने का दिया आमंत्रण

रायपुर 31 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, बस्तर के कायाकल्प तथा राज्य की महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं औद्योगिक परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के समक्ष बदलते छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए राज्य की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुरक्षा, विश्वास और विकास की समन्वित रणनीति के परिणामस्वरूप बस्तर आज व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा और विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करने वाला यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, बिजली, हवाई संपर्क, आजीविका, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस परिवर्तन को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ना है।

मुख्यमंत्री साय ने राजनांदगांव में ₹10,500 करोड़ की यूरिया परियोजना के लिए शीघ्र मंजूरी का किया अनुरोध

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव में प्रस्तावित लगभग ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है तथा राज्य सरकार के स्तर की आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के स्थापित होने से छत्तीसगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता और बेहतर होगी। इसके साथ ही प्रदेश में औद्योगिक निवेश, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार तथा सहायक आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

461 गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए मांगी विशेष सहायता

मुख्यमंत्री साय ने बस्तर सहित संवेदनशील क्षेत्रों के ऐसे 461 गांवों का विषय भी प्रधानमंत्री के समक्ष रखा, जहां पूर्व में सुरक्षा एवं भौगोलिक कारणों से विद्युत ग्रिड पहुंचाना संभव नहीं हो पाया था और वर्तमान में ऑफ-ग्रिड माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने इन गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थायी विद्युत आपूर्ति से इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, आजीविका और लघु उद्यमों के विस्तार को गति मिलेगी तथा दूरस्थ अंचलों में विकास की प्रक्रिया और मजबूत होगी।

रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना का किया अनुरोध

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी से रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना के प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर और अन्य जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय वनस्पतियों एवं पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की समृद्ध विरासत है। राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं विकसित होंगी।

5,542 गांवों तक पहुंच रहा विकास, लगभग 39 लाख लोगों को लाभ

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री के समक्ष ‘बस्तर विजन’ की विस्तृत जानकारी रखते हुए बताया कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्त मुन्ने’ के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों में शासन की योजनाओं और सेवाओं का व्यापक क्रियान्वयन किया जा रहा है जिससे लगभग 39 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राशन, आयुष्मान भारत, जनधन खाते, वनाधिकार, प्रधानमंत्री आवास सहित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दूरस्थ और पूर्व में अत्यधिक संवेदनशील रहे गांवों में प्रशासन की पहुंच बढ़ने से शासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

421 बंद स्कूल फिर खुले, ओरछा और जगरगुंडा में बनेंगी एजुकेशन सिटी

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को बस्तर में शिक्षा के क्षेत्र में आए परिवर्तन की जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से बंद पड़े 421 स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है। जिन गांवों में कभी बच्चों के लिए नियमित शिक्षा तक पहुंच बड़ी चुनौती थी, वहां अब स्कूलों में फिर से पढ़ाई शुरू हुई है।

उन्होंने बताया कि दंतेवाड़ा की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में भी राज्य सरकार कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आवासीय सुविधाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ में 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच

मुख्यमंत्री  साय ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के अंतर्गत अब तक 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और आवश्यकता के अनुरूप उन्हें चिकित्सा सेवाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि बस्तर में चिकित्सा अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ गीदम में मेडिकल कॉलेज के माध्यम से क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार नए मेडिकल कॉलेजों और आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क से बदल रही बस्तर की तस्वीर

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर के स्थायी विकास के लिए कनेक्टिविटी सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसी दृष्टि से सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि लगभग ₹3,513 करोड़ की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेललाइन परियोजना पर कार्य आगे बढ़ रहा है। इस रेल संपर्क से बस्तर के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। जगदलपुर से नियमित हवाई सेवाओं के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे के अंतिम चरण की प्रगति तथा इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बैराज परियोजना की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने कहा कि बैराज परियोजना से लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे क्षेत्र के किसानों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।

बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड बनाने की दिशा में प्रयास

मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर की अनूठी जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन संभावनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे विश्वस्तरीय प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और प्रमुखता से स्थापित करने के लिए अधोसंरचना एवं सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बस्तर का विकास उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के संरक्षण के साथ किया जा रहा है, ताकि विकास का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे और रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित हों।

बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने दिया बदलाव का संदेश

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने पूरे क्षेत्र में नई ऊर्जा और सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। खेलों के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिला है और शांति, विश्वास तथा सामाजिक सहभागिता को भी मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर की नई पहचान खेल, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन, उद्यमिता और विकास से निर्मित हो रही है।

छत्तीसगढ़ को मिले लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को राज्य में तेजी से बदल रहे औद्योगिक परिदृश्य की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ को लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें अनेक परियोजनाओं पर क्रियान्वयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को परंपरागत क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों की ओर ले जाया जा रहा है। राज्य में पहली बार एआई डेटा सेंटर पार्क, सेमीकंडक्टर, हाइपरस्केल डेटा सेंटर, ग्लोबल बीपीओ, गारमेंट, चॉकलेट मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा इंट्राऑक्यूलर लेंस निर्माण जैसे नए क्षेत्रों में निवेश आ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निवेशों से राज्य की अर्थव्यवस्था में विविधता आने के साथ युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी निर्मित होंगे।

निवेश अनुकूल वातावरण में छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि निवेशकों के लिए पारदर्शी, सरल और भरोसेमंद व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। नीति आयोग के इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में नियामकीय सुगमता और संस्थागत वातावरण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
उन्होंने ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026’ की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य ने उद्योगों और उद्यमियों के लिए जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था, सेल्फ सर्टिफिकेशन और समयबद्ध अनुमतियों को कानूनी आधार प्रदान किया है। इससे निवेशकों को निश्चितता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित व्यवस्था मिल रही है।

10.42 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब 14 लाख और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री साय ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर 10.42 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया है। अब अगले चरण में 14 लाख और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य पर राज्य सरकार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को इसमें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

₹500 करोड़ के राज्य एआई मिशन से तकनीक आधारित सुशासन की ओर छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ₹500 करोड़ के राज्य एआई मिशन के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शासन की सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में एआई के उपयोग की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

वित्तीय अनुशासन के साथ जनकल्याण, राजस्व वृद्धि में छत्तीसगढ़ का मजबूत प्रदर्शन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राज्य की सुदृढ़ होती वित्तीय स्थिति और राजस्व वृद्धि से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय अनुशासन और जनकल्याण के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित करते हुए राजकोषीय एवं राजस्व घाटे में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। राज्य में जीएसटी राजस्व में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं खनिज राजस्व में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खनिज क्षेत्र में नई संभावनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि देश के पहले टिन ब्लॉक और लिथियम ब्लॉक की नीलामी कर छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

तकनीक और पारदर्शिता से नागरिक-केंद्रित सुशासन को नई गति

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि राज्य सरकार तकनीक आधारित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में निरंतर सुधार कर रही है। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है, जिससे नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है और लाखों आवेदनों का समयबद्ध निराकरण संभव हुआ है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान और प्रभावी निगरानी की व्यवस्था भी विकसित की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व प्रशासन में व्यापक डिजिटल सुधार करते हुए रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की व्यवस्था लागू की गई है। आधार और वीडियो केवाईसी के माध्यम से घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा ने पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का मूल उद्देश्य शासन को नागरिकों के और निकट लाना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक सहज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से छत्तीसगढ़ में विकास की गति तेज हुई है। प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के संकल्प के अनुरूप राज्य सरकार ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के समग्र कायाकल्प से लेकर कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और औद्योगिक विकास से जुड़े राज्य के इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को केंद्र सरकार का सकारात्मक सहयोग मिलेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास की यह यात्रा छत्तीसगढ़ के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा कभी चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ को शांति, समृद्धि और संभावनाओं के नए मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए।

BREAKING : गंगरेल से छोड़ा जाएगा 20 हजार क्यूसेक पानी, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट..!

BREAKING : गंगरेल से छोड़ा जाएगा 20 हजार क्यूसेक पानी, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट..!

 Chhattisgarh dhamtari गंगरेल जलाशय में लगातार बढ़ रही जल आवक के बीच गुरुवार रात 8 बजे की स्थिति के अनुसार जल स्तर 345.39 मीटर और जलभराव 63.26% दर्ज किया गया। वर्तमान में जलाशय में 94,500 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जबकि पिछले एक घंटे में जल स्तर 11 सेंटीमीटर बढ़ा है।

मुख्य अभियंता के निर्देश पर बांध की सुरक्षा और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गंगरेल जलाशय से नरराज बैराज की ओर 20,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पानी छोड़े जाने से पहले निचले इलाकों के संबंधित अधिकारियों और प्रभावित क्षेत्रों को सूचना देकर आवश्यक सुरक्षा एवं एहतियाती व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

CG Weather Today: छत्तीसगढ़ में आज भी भारी बारिश का अलर्ट, दक्षिणी जिलों में बरसेंगे बादल

CG Weather Today: छत्तीसगढ़ में आज भी भारी बारिश का अलर्ट, दक्षिणी जिलों में बरसेंगे बादल

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले तीन दिनों से जारी झमाझम बारिश का दौर शुक्रवार (31 जुलाई) को भी जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, सक्रिय मानसून द्रोणिका और डीप डिप्रेशन सिस्टम के प्रभाव से दक्षिण छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में बारिश होगी, जबकि कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने के आसार हैं। हालांकि, आज के बाद प्रदेशभर में बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में अब तक मौसमी वर्षा सामान्य बनी हुई है, जो सामान्य से करीब 6 प्रतिशत कम है। बीते 24 घंटों में बड़े बचेली में सबसे अधिक 19 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं रायपुर शहर में 15 सेंटीमीटर, गरियाबंद और कोमाखान में 14-14 सेंटीमीटर, बीजापुर और ओड़गी में 13-13 सेंटीमीटर तथा सुकमा, बागबाहरा और गोबरा नवापारा समेत कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई।

राजधानी रायपुर का मौसम
मौसम विभाग के अनुसार, रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में आज दिनभर बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

कमजोर पड़ रहा है सिस्टम
मौसम विभाग ने बताया कि पश्चिम-मध्य छत्तीसगढ़, विदर्भ और दक्षिण-पूर्व मध्यप्रदेश के ऊपर बना गहरा अवदाब अब पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए कमजोर हो रहा है। इसके अगले 24 घंटों में अवदाब के रूप में परिवर्तित होने की संभावना है। इसी कारण आज के बाद प्रदेश में बारिश की तीव्रता में कमी आ सकती है, हालांकि कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने के आसार हैं।

रायपुर में बाहुबली, कटप्पा और AI से क्यूट गणेश प्रतिमाएं बनाने पर बजरंग दल ने जताई आपत्ति, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

रायपुर में बाहुबली, कटप्पा और AI से क्यूट गणेश प्रतिमाएं बनाने पर बजरंग दल ने जताई आपत्ति, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

 रायपुर। आगामी गणेशोत्सव को लेकर छत्तीसगढ़ बजरंग दल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए भगवान गणेश की प्रतिमाओं को उनके मूल स्वरूप में ही स्थापित करने की मांग की है। संगठन ने फिल्मों और काल्पनिक पात्रों जैसे बाहुबली, कटप्पा, क्यूट गणेश और AI आधारित आदि के रूप में गणेश प्रतिमाएं बनाने पर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताया है।

बजरंग दल के प्रांत संयोजक विजेंद्र वर्मा ने मीडिया सेचर्चा में कहा कि गणेश प्रतिमाओं का निर्माण और स्थापना धार्मिक परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के विवाद या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने जैसी स्थिति उत्पन्न न हो।

उन्होंने बताया कि गणेशोत्सव के दौरान कई पंडालों में डीजे पर अश्लील और आपत्तिजनक गीत बजाए जाते हैं, जो धार्मिक माहौल के अनुकूल नहीं हैं। इसे देखते हुए इस वर्ष पंडालों में बजाए जाने वाले उपयुक्त भक्ति गीतों की सूची भी जारी की जाएगी।

बजरंग दल ने पंडालों की आड़ में जुआ खेलने की शिकायतों पर भी प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि ऐसे मामलों में जरूरत पड़ने पर बिजली कनेक्शन काटने और संबंधित पंडालों को बंद कराने जैसी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

विजेंद्र वर्मा ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव की शुरुआत हिंदू समाज को संगठित करने, सामाजिक एकता को मजबूत करने और जनजागरण के उद्देश्य से की थी। इसलिए गणेशोत्सव को प्रतिस्पर्धा का मंच बनाने के बजाय आस्था, सामाजिक समरसता और जनसेवा का माध्यम बनाए रखना चाहिए। इन्हीं मांगों को लेकर बजरंग दल के प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की।

बता दें कि पिछले वर्ष रायपुर के लाखेनगर में गणेश प्रतिमा को लेकर काफी विवाद हुआ था। प्रतिमा को लेकर विरोध-प्रदर्शन हुए थे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा था। इसी का हवाला देते हुए बजरंग दल ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में समय रहते कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद या तनाव पैदा न हो।

कब मनाया जायेगा गणेशोत्सव

14 सितंबर 2026 से देशभर में 10 दिवसीय गणेशोत्सव (गणेश चतुर्थी) की शुरुआत होगी। भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापना के साथ भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। यह पर्व 23 सितंबर 2026 (अनंत चतुर्दशी) तक मनाया जाएगा, जब गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाएगा। देशभर में इस दौरान धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।

धरसींवा ब्लॉक के स्कूलों में शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर, सरस्वती साइकिल योजना में अनियमितता के आरोप

धरसींवा ब्लॉक के स्कूलों में शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर, सरस्वती साइकिल योजना में अनियमितता के आरोप

 रायपुर। धरसींवा विकासखंड के ग्राम परसतराई स्थित दाऊ पोषण लाल शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला में शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही एवं संवेदनशील मामला सामने आया है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि शासन की सरस्वती साइकिल योजना के तहत वितरित की जा रही साइकिलों की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की है।

स्कूल परिसर में विद्यार्थियों की प्रार्थना के लिए बनाए गए प्रार्थना शेड को शिक्षा विभाग एवं संबंधित ठेकेदार की कथित मिलीभगत से साइकिलों के कल-पुर्जों का कबाड़घर बना दिया गया है। वहीं बाहरी ठेकेदार के कर्मचारियों द्वारा उसी स्थान पर साइकिलों की असेंबलिंग एवं रिपेयरिंग का कार्य किया जा रहा है।

मौके पर मौजूद कर्मचारियों से जानकारी लेने पर बताया गया कि कई साइकिलों में आवश्यक पुर्जे उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी उन्हें बिना पूर्ण रूप से तैयार किए ही विद्यार्थियों को वितरित कर दिया जाता है। यह शासन की योजना की गुणवत्ता एवं पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

वर्तमान भीषण वर्षा के मौसम में प्रार्थना शेड कबाड़ से भरा होने के कारण विद्यालय के मासूम छात्र-छात्राएं खुले में भीगते हुए प्रार्थना करने को मजबूर हैं। यह स्थिति शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

केवल परसतराई ही नहीं, बल्कि आसपास के विद्यालयों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। ग्राम मांढर के विद्यालय में बरसात के दौरान परिसर में पानी भर जाता है, जिससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

साइकिल वितरण की प्रभारी सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी वंदना शुक्ला पर भी क्षेत्र में अनुपस्थित रहने के आरोप लगाए जा रहे हैं। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी से इस संबंध में जानकारी लेने पर कबाड़ रखने की जिम्मेदारी से बचते हुए उच्च अधिकारियों का हवाला दिया गया। लगातार ऐसी शिकायतें भी प्राप्त हो रही हैं कि जिला शिक्षा अधिकारी आमजन एवं जनप्रतिनिधियों के फोन रिसीव नहीं करते तथा ब्लॉक मुख्यालय में भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते, जिससे विद्यालयों के प्राचार्यों एवं शिकायतकर्ताओं को निराश होकर लौटना पड़ता है।

यह पूरा मामला धरसींवा विकासखंड के छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।

मांग हम शासन एवं प्रशासन से मांग करते हैं कि सरस्वती साइकिल योजना में हुई कथित अनियमितताओं, विद्यालय परिसर में प्रार्थना शेड के दुरुपयोग तथा शिक्षा विभाग की लापरवाही की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।

CM साय ने मेदांता अस्पताल में किरण सिंह देव से की मुलाकात, सड़क हादसे के बाद जाना स्वास्थ्य हाल

CM साय ने मेदांता अस्पताल में किरण सिंह देव से की मुलाकात, सड़क हादसे के बाद जाना स्वास्थ्य हाल

 रायपुर/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में सड़क हादसे में घायल हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव का बेहतर इलाज दिल्ली-एनसीआर के गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में जारी है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अस्पताल पहुंचे और उनसे मुलाकात कर स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से भी उपचार की जानकारी लेते हुए किरण सिंह देव के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकों से किरण सिंह देव के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। इस दौरान उन्होंने परिजनों और अस्पताल प्रबंधन से भी चर्चा कर इलाज की प्रगति के बारे में जानकारी प्राप्त की।

बता दें कि छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और जगदलपुर विधायक किरण देव बुधवार को उत्तरप्रदेश में सड़क हादसे के शिकार हुए थे। हादसा झांसी-ललितपुर हाईवे पर उस समय हुआ था, जब वह परिवार के साथ बागेश्वर धाम से दर्शन कर लौट रहे थे। वापसी के दौरान झांसी-ललितपुर मार्ग पर सामने से आ रहे एक वाहन को बचाने की कोशिश में उनके चालक ने अचानक ब्रेक लगाया। इससे कार का संतुलन बिगड़ गया और कार ट्रक में घुस गई।

हादसे के वक्त किरण देव के साथ उनकी सुरक्षा में तैनात पीएसओ भी वाहन में मौजूद थे, जबकि परिवार के अन्य सदस्य दूसरी कार में सफर कर रहे थे। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से किरण सिंह देव को तुरंत झांसी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। इस हादसे में किरण सिंह देव का चालक भी घायल हुआ था।

जलापूर्ति योजनाओं के दीर्घकालीन सुचारू संचालन के लिए जल संचय और जल संरक्षण जरूरी – उप मुख्यमंत्री अरुण साव

जलापूर्ति योजनाओं के दीर्घकालीन सुचारू संचालन के लिए जल संचय और जल संरक्षण जरूरी – उप मुख्यमंत्री अरुण साव

 रायपुर: उप मुख्यमंत्री तथा लोक  स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  अरुण साव आज जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए ग्रामीण पाइपलाइन जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने नवा रायपुर स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (RGNGWTRI) में आयोजित कार्यशाला में महिला सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा कि जल आपूर्ति की योजनाओं के लंबे समय तक सुचारू संचालन के लिए बारिश के पानी का संचय और जल संरक्षण आवश्यक है। यह भूजल को रिचार्ज करने के साथ ही दीर्घ काल तक जल स्रोतों में जल की उपलब्धता बनाए रखेगा।

उप मुख्यमंत्री  साव ने कार्यशाला में सरपंचों से गांवों में हर घर नल से जल पहुंचने के बाद ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली। उन्होंने नल जल योजनाओं के संचालन-संधारण के लिए पंचायतों द्वारा की गई व्यवस्था के बारे में पूछा। उन्होंने गांवों में जलस्रोतों, जल की गुणवत्ता के नियमित परीक्षण तथा रखरखाव शुल्क की भी जानकारी ली। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा यूनिसेफ और एसीई (Action for Community Development) संस्था के सहयोग से इस एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 100 महिला सरपंच शामिल हुईं।

कार्यशाला में हर घर जल प्रमाणित गांवों में नल जल योजनाओं के संचालन, संधारण और मरम्मत पर व्यापक विचार-विमर्श और बेस्ट प्रेक्टिसेस पर गहन चर्चा की गई। महिला सरपंचों ने इस दौरान जल जीवन मिशन के तहत अपनी-अपनी पंचायतों में जल आपूर्ति की व्यवस्था तथा नल जल योजना के संचालन-संधारण के अनुभव साझा किए। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने महिला सरपंचों को नल जल योजनाओं के सफल, निर्बाध और दीर्घकालीन संचालन के गुर बताए।

उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने कार्यशाला में कहा कि जल आपूर्ति के लिए उपयोग हो रहे जल स्रोतों की देखभाल और सावधानीपूर्वक उपयोग जरूरी है। इसके टिकाऊपन (Sustainability) पर ही योजना की दीर्घकालीन सफलता निर्भर है। उन्होंने कहा कि नल जल योजनाओं के काम पूर्ण होने तथा पंचायतों को इसके हस्तांतरण के बाद इसका संचालन व संधारण ग्राम पंचायतों को करना है। जल जीवन मिशन हमारे घर और हमारे गांव के लिए योजना है। ग्राम पंचायतों को गांववालों के साथ मिलकर जल आपूर्ति की व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है।  साव ने जल स्तर बनाए रखने तथा भू-जल स्रोतों को रिचार्ज करने स्टॉपडैम बनाने और बारिश के पानी को संग्रहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी के प्राकृतिक बहाव के अवरोधों व अतिक्रमणों को हटाकर तालाबों को अच्छे से भरने की व्यवस्था सभी गांवों को करना चाहिए।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की निदेशक सुश्री रूबी मुखर्जी और यूनिसेफ की जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ सुश्री श्वेता पटनायक ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता  के.के. मरकाम और अधीक्षण अभियंता  समीर गौड़ भी कार्यशाला में मौजूद थे।

महिला स्व-सहायता समूहों, FPO और युवाओं के लिए खुलेंगे स्वरोजगार के नए द्वार- मंत्री टंक राम वर्मा

महिला स्व-सहायता समूहों, FPO और युवाओं के लिए खुलेंगे स्वरोजगार के नए द्वार- मंत्री टंक राम वर्मा

 रायपुर: कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों में स्थापित माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इन्क्यूबेशन सेंटर (कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर) किसानों, युवाओं और नए उद्यमियों को कम लागत पर आधुनिक मशीनरी, उत्पाद परीक्षण, पैकेजिंग और कौशल प्रशिक्षण की साझा सुविधा प्रदान करते हैं।  बिना बड़ी मशीनें खरीदे, उद्यमी यहाँ अपने कच्चे माल (जैसे फल, सब्जी, मसाले या मिलेट्स) से जूस, अचार, सॉस व अन्य उत्पाद बनाकर उनकी गुणवत्ता और बाजार का परीक्षण कर सकते हैं।

धमतरी जिले में कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों के मूल्य संवर्धन और ग्रामीण उद्यमिता को नई पहचान देने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), धमतरी में नवनिर्मित ‘माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इन्क्यूबेशन सेंटर’ का भव्य लोकार्पण राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, उच्च शिक्षा  मंत्री श्री टंक राम वर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण विषय पर आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी सफलतापूर्वक समापन हुआ।

​वैज्ञानिक प्रसंस्करण से किसानों की आय दोगुनी करना मुख्य उद्देश्य: मंत्री टंक राम वर्मा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि कृषि और उद्यानिकी उपजों का वैज्ञानिक विधि से प्रसंस्करण (Processing) करना किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम है। कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका अब सिर्फ तकनीक पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इन्हें ग्रामीण उद्यमिता के पावरहाउस के रूप में विकसित किया जा रहा है। ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना’ से ग्रामीण युवाओं, स्व-सहायता समूहों और एफपीओ (FPO) को स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं।

​महिला स्व-सहायता समूहों, FPO और युवाओं के लिए खुलेंगे स्वरोजगार के नए द्वार-मंत्री श्री टंक राम वर्मा

मंत्री श्री वर्मा ने इन्क्यूबेशन सेंटर में स्थापित आधुनिक मशीनों का निरीक्षण किया और प्रशिक्षणार्थियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि यह सेंटर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीक सिखाकर स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

​स्थानीय उपजों को मिलेगा नया बाजार: कलेक्टर

कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने इसे जिले के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इस सेंटर से स्थानीय कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे धमतरी के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की नई राहें खुलेंगी।

​तीन दिवसीय प्रशिक्षण में सीखे गुणवत्ता और मार्केटिंग के गुर

​तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान किसानों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं और युवाओं को खाद्य प्रसंस्करण के साथ-साथ ​गुणवत्ता नियंत्रण एवं स्वच्छता ​आधुनिक पैकेजिंग व लेबलिंग ​FSSAI के मानक एवं नियम,​विपणन और ब्रांडिंग के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई।

इस कार्यक्रम में धमतरी महापौर  रामू रोहरा, पूर्व विधायक रंजना दीपेंद्र साहू, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार सेवाए, कृषि महाविद्यालय की अधिष्ठाता, खाद्य प्रसंस्करण विभागाध्यक्ष, जिला व्यापार उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सहित बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी, किसान और महिला समूहों की सदस्याएं उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारी वर्षा को देखते हुए सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रहने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारी वर्षा को देखते हुए सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रहने के दिए निर्देश

 रेड एवं येलो अलर्ट वाले जिलों में विशेष सतर्कता बरतने, संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी और समय पर राहत-बचाव सुनिश्चित करने के निर्देश

जन सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, तैयारियों में किसी प्रकार की लापरवाही न हो : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

रायपुर-- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार हो रही वर्षा तथा मौसम विभाग द्वारा कई जिलों के लिए जारी रेड एवं येलो अलर्ट को देखते हुए सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को उच्च सतर्कता (हाई अलर्ट) पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री  साय ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे संभावित बाढ़ एवं जलभराव प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी रखें तथा संवेदनशील स्थानों की पहचान कर आवश्यक एहतियाती कदम तत्काल उठाएं। जिन क्षेत्रों में आवश्यकता हो, वहां लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि की संभावना न रहे।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले में राहत एवं बचाव की समुचित तैयारियां पहले से सुनिश्चित की जाएं। राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों, प्राथमिक उपचार, बिजली, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध रहे। साथ ही वृद्धजनों, महिलाओं, बच्चों तथा दिव्यांगजनों जैसे संवेदनशील वर्गों की विशेष देखभाल सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), पुलिस, होमगार्ड, नगर सेना, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, विद्युत वितरण कंपनी तथा अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ पूरी तत्परता बनाए रखें। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों, उपकरणों, नावों तथा राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिला एवं राज्य स्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए तथा मौसम की स्थिति, जलाशयों के जलस्तर, नदी-नालों की स्थिति और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की नियमित समीक्षा की जाए। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित निर्णय लेते हुए राहत एवं बचाव कार्य तत्काल प्रारंभ किए जाएं।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से भी अपील की है कि वे मौसम विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अनावश्यक रूप से नदी-नालों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन को दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन की सतर्कता, समयबद्ध कार्रवाई और जनसहयोग से किसी भी संभावित आपदा का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा।

बस्तर में सड़क विकास को मिलेगी नई गति : सांसद महेश कश्यप ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से की मुलाकात

बस्तर में सड़क विकास को मिलेगी नई गति : सांसद महेश कश्यप ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से की मुलाकात

 भारतमाला परियोजना से जगदलपुर को जोड़ने और प्रमुख मार्गों के फोरलेन निर्माण की मांग

बस्तर के सभी जिला मुख्यालयों को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने के लिए विशेष पैकेज का प्रस्ताव

रायपुर-- दिल्ली प्रवास के दौरान बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद  महेश कश्यप ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी से मुलाकात कर बस्तर क्षेत्र में सड़क और राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव सौंपे। सांसद कश्यप ने बस्तर में सड़क संपर्क को मजबूत करने, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने तथा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार और उन्नयन की आवश्यकता पर जोर दिया।

         सांसद  कश्यप ने बताया कि सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों और प्रभावी रणनीति के कारण बस्तर में नक्सलवाद पर काफी हद तक नियंत्रण हुआ है। इसके परिणामस्वरूप उद्योग, व्यापार, पर्यटन और निवेश के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। इन संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक और बेहतर सड़क नेटवर्क आवश्यक है।

प्रमुख मार्गों को फोरलेन बनाने का प्रस्ताव

        बस्तर सांसद ने एनएमडीसी स्टील प्लांट की गतिविधियों और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जगदलपुर-नगरनार-ओडिशा सीमा मार्ग को फोरलेन बनाने की मांग की। इसके साथ ही जगदलपुर-दंतेवाड़ा-बीजापुर-भोपालपटनम-तेलंगाना सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग को भी फोरलेन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जिससे छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र के बीच आवागमन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात तक पर्यटकों की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जगदलपुर-चित्रकोट मार्ग को भी चार लेन में विकसित करने की मांग की।

भारतमाला परियोजना से जोड़ने पर जोर

        बस्तर सांसद  कश्यप ने जगदलपुर को भारतमाला परियोजना के आर्थिक गलियारों से जोड़ने, शहर में यातायात का दबाव कम करने के लिए रिंग रोड और बायपास के निर्माण तथा बस्तर संभाग के सभी जिला मुख्यालयों को उच्च गुणवत्ता वाले राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने के लिए विशेष विकास पैकेज स्वीकृत करने का आग्रह किया। उन्होंने सड़क सुरक्षा के लिए ब्लैक स्पॉट्स के सुधार, आवश्यक स्थानों पर पुल, फ्लाईओवर और रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का विषय भी प्रमुखता से उठाया।

        बस्तर सांसद  महेश कश्यप ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से बस्तर में व्यापार, रोजगार, पर्यटन और निवेश को नई गति मिलेगी तथा क्षेत्र के समग्र विकास को मजबूती मिलेगी। इससे बस्तर राष्ट्रीय विकास के मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से उभरेगा।

छत्तीसगढ़ में बस्तर से सरगुजा तक रेल संपर्क मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

छत्तीसगढ़ में बस्तर से सरगुजा तक रेल संपर्क मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ में  प्रमुख रेल परियोजनाओं को गति देने रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव से की विस्तृत चर्चा

रेल नेटवर्क का विस्तार छत्तीसगढ़ के संतुलित और समावेशी विकास का मजबूत आधार बनेगा : मुख्यमंत्री  साय

रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली प्रवास के दौरान रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विस्तार, नई रेल परियोजनाओं तथा लंबित रेल लाइनों की प्रगति के संबंध में विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू तथा राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद  संतोष पांडे उपस्थित थे।

बैठक में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के औद्योगिक, खनिज एवं कृषि दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। प्रदेश में रेलवे नेटवर्क का विस्तार केवल यातायात सुविधा का विषय नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, व्यापार, पर्यटन, कृषि विपणन, जनजातीय अंचलों के विकास तथा क्षेत्रीय संतुलित प्रगति से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में रेल अधोसंरचना के अभूतपूर्व विस्तार का लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है और राज्य सरकार इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ पूर्ण समन्वय के साथ कार्य कर रही है।

बैठक में कटघोरा-डोंगरगढ़ नई रेलवे लाइन परियोजना पर विशेष रूप से चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि लगभग 295 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का विकास रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए दोनों संस्थाओं की साझेदारी में एक स्पेशल परपज़ व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा। यह रेल लाइन कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचेगी तथा ऐसे अनेक क्षेत्रों को पहली बार रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी, जहां अब तक रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा लाखों नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी।

बैठक में रावघाट-जगदलपुर रेलवे लाइन परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 140 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की आवश्यक कार्यवाही पूरी की जा चुकी है तथा रेलवे द्वारा निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होने से बस्तर अंचल की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश की तीन अन्य महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं - सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा (301 किलोमीटर) तथा अंबिकापुर-बरवाडीह (200 किलोमीटर) - को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल संपर्क व्यवस्था सुदृढ़ होगी तथा व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इस पर रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

बैठक के दौरान किरंदुल-कोत्तागुडेम (180 किलोमीटर) तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) (490 किलोमीटर) नई रेल लाइन परियोजनाओं के सर्वे कार्य की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सर्वे कार्य शीघ्र पूर्ण कर आगामी कार्यवाही प्रारंभ करने का अनुरोध किया, जिससे बस्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हो सके तथा विकास एवं सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को गति मिले।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई रेल परियोजनाएं प्रदेश के औद्योगिक विकास, खनिज परिवहन, कृषि उत्पादों की सुगम आवाजाही, पर्यटन संवर्धन और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ का रेल नेटवर्क आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिलेगी।

 

वीएसके ऐप में तकनीकी त्रुटियों का होगा शीघ्र समाधान, तकनीकी समस्या के कारण किसी शिक्षक का वेतन नहीं कटेगा: शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव

वीएसके ऐप में तकनीकी त्रुटियों का होगा शीघ्र समाधान, तकनीकी समस्या के कारण किसी शिक्षक का वेतन नहीं कटेगा: शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव

 लगभग डेढ़ लाख शिक्षक नियमित रूप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर निभा रहे हैं अपनी जिम्मेदारी, शिक्षा मंत्री ने जताया आभार

85 प्रतिशत शिक्षक रोज लगाते है ऑनलाइन अटेंडेंस

रायपुर-- स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव ने कहा है कि शिक्षक संगठनों एवं शिक्षकों द्वारा VSK ऐप में आ रही तकनीकी त्रुटियों एवं एरर संबंधी शिकायतों को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि VSK ऐप में आने वाली तकनीकी समस्याओं के कारण किसी भी शिक्षक का वेतन नहीं काटा जाएगा। शिक्षकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।  यादव ने बताया कि संबंधित अधिकारियों एवं तकनीकी टीम को VSK ऐप में आ रही सभी समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं। लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि 15 अगस्त तक ऐप में आ रही तकनीकी खामियों का समाधान कर इसे पूरी तरह सुचारु बनाया जाए, ताकि शिक्षकों को बिना किसी परेशानी के अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की सुविधा मिल सके। 

शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के लगभग 1 लाख 75 हजार शिक्षकों में से लगभग डेढ़ लाख शिक्षक लगभग 85 प्रतिशत शिक्षक प्रतिदिन VSK ऐप के माध्यम से अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि प्रदेश के शिक्षक नई तकनीक को अपनाते हुए शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं आधुनिक बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के शिक्षक केवल शिक्षण कार्य ही नहीं, बल्कि डिजिटल व्यवस्था को सफल बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। सरकार उनके इस सहयोग, अनुशासन और समर्पण का सम्मान करती है। शिक्षकों के सुझावों और अनुभवों के आधार पर VSK ऐप को और अधिक सरल, उपयोगी एवं प्रभावी बनाया जाएगा।

 गजेंद्र यादव ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों के सम्मान, सुविधा और हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यदि किसी शिक्षक को तकनीकी कारणों से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में कठिनाई आती है, तो उसके हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी। किसी भी शिक्षक को तकनीकी खामी का खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा। उन्होंने सभी शिक्षकों से अपील की कि वे पूर्व की भांति VSK ऐप का उपयोग करते रहें तथा यदि किसी प्रकार की तकनीकी समस्या या सुझाव हो तो उसे संबंधित अधिकारियों तक अवश्य पहुँचाएं। सरकार प्रत्येक सुझाव का सकारात्मक परीक्षण कर आवश्यक सुधार करेगी, ताकि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी एवं तकनीक-सक्षम बन सके।

मुख्यमंत्री साय के विजन को रेखांकित करेगी मुस्कुराता बस्तर कार्टून कार्यशाला

मुख्यमंत्री साय के विजन को रेखांकित करेगी मुस्कुराता बस्तर कार्टून कार्यशाला

 00 मुस्कुराता बस्तर थीम पर जगदलपुर में होगी कार्टून कार्यशाला

00 स्कूली विद्यार्थियों को मिलेगा वरिष्ठ कार्टूनिस्टों से प्रशिक्षण

रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहयोग से देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका कार्टून वॉच द्वारा जगदलपुर में स्कूली विद्यार्थियों के लिए मुस्कुराता बस्तर थीम पर विशेष कार्टून कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला में विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर कला का प्रशिक्षण देने के साथ बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और लोकजीवन को रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर आज विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के नए आयाम स्थापित कर रहा है। बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों के कारण देश-दुनिया में नई पहचान बना रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर दशहरा तथा अन्य लोकपर्व बस्तर की समृद्ध विरासत के प्रतीक हैं। कार्टून वॉच के संपादक त्र्यंबक शर्मा ने बताया कि कार्यशाला की थीम मुस्कुराता बस्तर इन्हीं सकारात्मक पहलुओं को कार्टून कला के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति देना है।
इस कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट  माधव जोशी तथा पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार शुभम जिंदे लाइव डेमो के माध्यम से ऑन-द-स्पॉट कार्टून और कैरिकेचर बनाने का प्रशिक्षण देंगे। साथ ही विद्यार्थियों को कार्टून कला के सामाजिक, रचनात्मक और रोजगारपरक पक्षों से भी परिचित कराया जाएगा।
कार्यशाला के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और बस्तर की सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से देशभर तक पहुंचाया जा सके। मुस्कुराता बस्तर अभियान नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोक परंपराओं और प्राकृतिक धरोहर से जोडऩे का रचनात्मक प्रयास है।

महानदी विवाद नहीं, छत्तीसगढ़-ओडिशा की साझा समृद्धि का आधार बने : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

महानदी विवाद नहीं, छत्तीसगढ़-ओडिशा की साझा समृद्धि का आधार बने : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 श्रमशक्ति भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़, ओडिशा की उच्चस्तरीय बैठक

नई दिल्ली, 30 जुलाई- नई दिल्ली स्थित श्रमशक्ति भवन में आज केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सीआर पाटिल की अध्यक्षता में महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्यों की साझा जीवनरेखा है। यह किसानों, उद्योगों, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस बैठक को विवाद की निरंतरता नहीं, बल्कि समाधान की नई शुरुआत के रूप में देखता है।
मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की सिंचाई, पेयजल और हीराकुंड परियोजना से जुड़ी चिंताओं का सम्मान करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासी क्षेत्रों, सूखा प्रभावित अंचलों और भविष्य की विकास आवश्यकताओं को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए सम्मानजनक, व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि दोनों राज्यों के विशेषज्ञ उपलब्ध जल के वैज्ञानिक आकलन, कम वर्षा वाले वर्षों के लिए साझा व्यवस्था तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्थायी संस्थागत तंत्र विकसित करें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक एवं तकनीकी स्तर पर अधिकतम मुद्दों का समाधान किया जाए और केवल नीतिगत विषय ही मंत्रिस्तरीय स्तर पर लाए जाएं।

साय ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सीआर पाटिल और केंद्रीय जल आयोग से निष्पक्ष तकनीकी सहयोग, समयबद्ध कार्ययोजना तथा दोनों राज्यों के बीच दीर्घकालिक समझौते का प्रारूप तैयार कराने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि महानदी विवाद की रेखा नहीं, बल्कि सहयोग, विकास और भाईचारे का सेतु बने।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारी संघवाद और संवाद आधारित दृष्टिकोण ने वर्षों पुराने जटिल विषयों के समाधान का सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रक्रिया से दोनों राज्यों के किसानों, नागरिकों और भावी पीढ़ियों का जल भविष्य सुरक्षित होगा।

बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री साय की बड़ी सौगात : बनगाँव आश्रम चौक से मुड़ाटोली तक बनेगी 4.89 करोड़ की सड़क

मुख्यमंत्री साय की बड़ी सौगात : बनगाँव आश्रम चौक से मुड़ाटोली तक बनेगी 4.89 करोड़ की सड़क

 00 बहुप्रतीक्षित सड़क निर्माण को मिली प्रशासनिक स्वीकृति, ग्रामीणों में खुशी की लहर

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में ग्रामीण अधोसंरचना विकास को लगातार गति मिल रही है। इसी क्रम में जिले के बनगाँव आश्रम चौक से मुड़ाटोली पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 4 करोड़ 89 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस सड़क का निर्माण शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। यह सड़क लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख मांगों में शामिल थी। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क निर्माण से वर्षों से चली आ रही आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान होगा।

नई सड़क बनने से क्षेत्र के विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी। विशेष रूप से बारिश के मौसम में ग्रामीणों को होने वाली कठिनाइयों से राहत मिलेगी और गांवों की जिला मुख्यालय सहित अन्य क्षेत्रों तक पहुंच अधिक सुगम हो सकेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में सड़क संपर्क का लगातार विस्तार हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकृत सड़क परियोजनाएं न केवल आवागमन को सुगम बना रही हैं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई मजबूती प्रदान कर रही हैं। बनगाँव आश्रम चौक से मुड़ाटोली सड़क निर्माण की यह स्वीकृति क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।