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नगर पंचायत बम्हनीडीह के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण समारोह कल,मुख्यमंत्री होंगे मुख्य अतिथि

नगर पंचायत बम्हनीडीह के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण समारोह कल,मुख्यमंत्री होंगे मुख्य अतिथि

 रायपुर। जांजगीर-चांपा जिले के नगर पंचायत बम्हनीडीह में नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं पार्षदों का शपथ ग्रहण समारोह 2 जुलाई 2026, गुरुवार को प्रात: 10:30 बजे आई.टी.आई. ग्राउंड, बम्हनीडीह में आयोजित किया जाएगा। समारोह में नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष  रमेश कुमार डडसेना तथा सभी नवनिर्वाचित पार्षद पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे।

समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री  अरुण साव करेंगे। जिले के प्रभारी मंत्री एवं वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब तथा जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष  अनुराग सिंहदेव, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू, पूर्व नेता प्रतिपक्ष  नारायण चंदेल, पूर्व संसदीय सचिव  अम्बेश जांगड़े तथा जिला पंचायत जांजगीर-चांपा की अध्यक्ष इंजी. सत्यलता आनंद मिरी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों एवं क्षेत्रवासियों की उपस्थित रहेंगे।

लक्ष्मीनारायण कन्या विद्यालय में शाला प्रवेश उत्सव: गुरुकुल प्रेक्षागृह में हुआ भव्य आयोजन

लक्ष्मीनारायण कन्या विद्यालय में शाला प्रवेश उत्सव: गुरुकुल प्रेक्षागृह में हुआ भव्य आयोजन

 रायपुर :- लक्ष्मीनारायण कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुरुकुल परिसर कालीबाड़ी रोड रायपुर में शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन गुरुकुल प्रेक्षागृह में आयोजित हुआ । मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य बाल सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉक्टर वर्णिका शर्मा जी उपस्थित हुई । कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि  तरल मोदी अध्यक्ष भातखण्डे ललितकला शिक्षा समिति एवं अध्यक्षता अजय तिवारी जी उपाध्यक्ष ने किया ।  समिति की सचिव शोभा खण्डेलवाल, गुरुकुल महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉक्टर संध्या गुप्ता के साथ कमलादेवी संगीत महाविद्यालय की प्राचार्या आरती सिंह विशेष रूप से उपस्थित हुईं । प्रवेश उत्सव में सर्वप्रथम मुख्य अथिति का स्वागत वंदन अभिनंदन किया गया । प्राचार्या मनीषा गहोई ने स्वागत भाषण के साथ प्रतिवेदन प्रतुत करते हुए अथितियों का स्वागत किया । अथितियों द्वारा नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर मुँह मीठा करवाया गया उन्हें कॉपी पुस्तक पेन वितरित किया गया । बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए मुख्य अथिति एवम अन्य अतिथियों द्वारा आशीर्वचन उदबोधन किया गया । कार्यक्रम का संचालन सादिका सुल्ताना सिद्दिकी शिक्षिका ने किया । इस अवसर पर शाल श्रीफल से अतिथियों का स्वागत किया गया । विद्यालय की समस्त शिक्षिका, कर्मचारियों के साथ अध्ययनरत छात्राएं उपस्थिति होकर कार्यक्रम को सफल बनाया । पालक समिति के अध्यक्ष  हेमकरन देवांगन, उपाध्यक्ष श्रीमती गौरी सोनकर श्री ईंधन कलिहारी उपस्थित हुए ।

CG ब्रेकिंग : छत्तीसगढ़ में फिर चली ट्रांसफर एक्सप्रेस, इस जिले में तहसीलदारों का हुआ तबादला

CG ब्रेकिंग : छत्तीसगढ़ में फिर चली ट्रांसफर एक्सप्रेस, इस जिले में तहसीलदारों का हुआ तबादला

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में तहसीलदारों का फेरबदल किया गया है। इसका आदेश कलेक्टर ने जारी किया है। तबादला आदेश के मुताबिक आरंग, धरसीवां, मंदिर हसौद, खरोरा, गोबरा नवापरा के तहसीलदारों को इधर से उधर किया गया है।

देखें लिस्ट –

नगरीय निकायों को महापौर, अध्यक्ष और पार्षद निधि के 104.54 करोड़ जारी

नगरीय निकायों को महापौर, अध्यक्ष और पार्षद निधि के 104.54 करोड़ जारी

 उपमुख्यमंत्री साव ने निधि का सदुपयोग कर शहरी आबादी को समुचित लाभ पहुंचाने के दिए निर्देश
रायपुर।
राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगर निगमों में महापौर निधि, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अध्यक्ष निधि तथा तीनों तरह के निकायों में पार्षद निधि के रूप में 104 करोड़ 54 लाख 25 हजार रुपए जारी किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने नगरीय निकायों को ये राशि जारी कर दी है। साव ने नगरीय निकायों को इन निधियों का सदुपयोग करते हुए राज्य की शहरी आबादी तक योजनाओं का समुचित लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। इस राशि से निकायों में मूलभूत विकास के कार्य किए जाएंगे।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव के निर्देश पर चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नगर निगमों में महापौर निधि तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों में अध्यक्ष निधि की 50-50 प्रतिशत राशि की प्रथम किस्त के रूप में कुल 31 करोड़ 16 लाख 25 हजार रुपए जारी किए गए हैं। तीनों तरह की नगरीय निकायों में पार्षद निधि के रूप में कुल 73 करोड़ 38 लाख रुपए भी जारी किए गए हैं।
विभाग द्वारा 14 नगर निगमों में महापौर निधि के 10 करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपए, 57 नगर पालिकाओं में अध्यक्ष निधि के 11 करोड़ 6 लाख 25 हजार रुपए तथा 121 नगर पंचायतों में अध्यक्ष निधि के 9 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपए जारी किए गए हैं। वहीं पार्षद निधि के प्रथम किस्त (50 प्रतिशत) के रूप में नगर निगमों को 21 करोड़ 84 लाख रुपए, नगर पालिकाओं को 24 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपए एवं नगर पंचायतों को 27 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपए जारी किए गए हैं।

आदिवासी हितों से जुड़े विभिन्न विषयों के निराकरण हेतु उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश : मुख्य सचिव

आदिवासी हितों से जुड़े विभिन्न विषयों के निराकरण हेतु उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश : मुख्य सचिव

 फर्जी जाति प्रमाण-पत्रों की जांच प्रक्रिया को और सुदृढ़ बनाने के निर्देश

रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज, रायपुर द्वारा प्रस्तुत आवेदन-पत्र में बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा उनके निराकरण के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए।

बैठक में अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा एक्ट, 1996 एवं राज्य के पेसा नियम, 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मैदानी स्तर पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था, फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में नियुक्ति अथवा पदोन्नति प्राप्त करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई, आदिवासी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति संबंधित अनुसूचित जनजाति सलाहकार परिषद सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि आदिवासियों के हित संबंधित विषयों के समन्वित अध्ययन एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास विभाग तथा खनिज विभाग के सचिवों को सदस्य बनाकर एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण-पत्रों की जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं सुदृढ़ हो तथा सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। मुख्य सचिव ने आदिवासी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति योजना को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप संशोधित करने तथा इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। 
बैठक में आदिम जाति विकास विभाग तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, सामान्य प्रशासन तथा वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिवभीम सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

CG Rain Alert : छत्तीसगढ़ में अगले 7 दिन झमाझम बारिश के आसार, 14 जिलों में यलो अलर्ट जारी

CG Rain Alert : छत्तीसगढ़ में अगले 7 दिन झमाझम बारिश के आसार, 14 जिलों में यलो अलर्ट जारी

 रायपुर। दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूरे छत्तीसगढ़ में सक्रिय हो चुका है। मौसम विभाग के अनुसार आज से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। अगले सात दिनों तक कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। वहीं 14 जिलों के लिए बारिश, तेज हवा, आकाशीय बिजली और गरज-चमक को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। 

राजधानी रायपुर में बुधवार सुबह से आसमान में बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार दिनभर हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। शहर का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

3 जुलाई से और सक्रिय होगा सिस्टम

मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण उत्तर बंगाल की खाड़ी और उससे लगे दक्षिण बांग्लादेश के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रीय परिसंचरण बना हुआ है। इसके प्रभाव से 3 जुलाई के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके असर से रायपुर समेत मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने के आसार हैं। 

इन इलाकों में हुई अच्छी बारिश

पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार कुसमी में 9 सेमी, पखांजूर में 7 सेमी, चंद्रपुर, मर्दापाल, गिधौरी और टुंड्रा में 5-5 सेमी, शिवरीनारायण, कोटा और दंतेवाड़ा में 4-4 सेमी तथा पौड़ी उपरोड़ा, गीदम, सामरी और दोरनापाल में 3-3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा कई अन्य क्षेत्रों में 1 से 2 सेमी तक वर्षा दर्ज हुई।

4 जिलों में यलो अलर्ट

मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों के लिए बलरामपुर, बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कबीरधाम, कांकेर, कोंडागांव, कोरबा, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, मुंगेली, नारायणपुर, रायगढ़, सूरजपुर और सरगुजा जिलों में गरज-चमक, तेज हवा, आकाशीय बिजली और बारिश की संभावना जताते हुए यलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचने तथा आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है।

ब्रेकिंग : राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, 11 अधिकारियों को किया गया इधर से उधर, देखें लिस्ट…!!

ब्रेकिंग : राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, 11 अधिकारियों को किया गया इधर से उधर, देखें लिस्ट…!!

 रायपुर। राज्य शासन के श्रम विभाग में तबादला हुआ है। श्रम विभाग मंत्रालय ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार, 11 अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। सभी अधिकारियों को प्रशासनिक दृष्टिकोण से आगामी आदेश तक नई पदस्थापना दी गई है।

देखें आदेश….

ब्रेकिंग : इस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,33 अधिकारियों के तबादले,देखे आदेश…!!

ब्रेकिंग : इस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,33 अधिकारियों के तबादले,देखे आदेश…!!

 रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। विभाग ने मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) सहित कुल 33 अधिकारियों के स्थानांतरण के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। 

जारी आदेश के अनुसार प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विभिन्न जनपद पंचायतों में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, क्षेत्र संयोजकों, सहायक संचालकों तथा अन्य अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

स्थानांतरण सूची में गरियाबंद, नारायणपुर, कोरबा, जशपुर, बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा, सूरजपुर, सरगुजा, सुकमा, धमतरी, बीजापुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही सहित कई जिलों के अधिकारी शामिल हैं

 
खेल प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराएगी हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय

खेल प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराएगी हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय

 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में नियुक्त करने की होगी व्यवस्था, प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को निखारने में निभाएंगे अहम भूमिका

रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज उनके निवास कार्यालय में उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री  अरुण साव सहित समिति के सदस्यों ने वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए प्राप्त आवेदनों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया तथा सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन को अंतिम स्वरूप प्रदान किया। इनमें 20 अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं। 

बैठक में अनुमोदित 156 खिलाड़ियों की सूची को सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इसे अधिसूचित करने के बाद खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में लेने के लिए आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ होगी। राज्य के खिलाड़ी लंबे समय से इस सूची की प्रतीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री  साय की अध्यक्षता में आज हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद खिलाड़ियों का यह इंतजार जल्द समाप्त हो जाएगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए पारदर्शी, समयबद्ध और प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि चयनित उत्कृष्ट खिलाड़ियों को पात्रता के अनुरूप उन्हें शासकीय सेवा में नियुक्ति दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया और व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन खिलाड़ियों का अनुभव और उपलब्धियां प्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, इसलिए उनकी सेवाओं का उपयोग खेल प्रशिक्षण, प्रतिभा संवर्धन और खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में भी किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत खेल व्यवस्था विकसित करना है, जहां गांव से लेकर राज्य स्तर तक प्रतिभाओं की समय रहते पहचान हो, उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने अधिकारियों से खेल गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा खेल प्रतिभाओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। खेल अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक सुविधाओं के विकास तथा नई खेल अकादमियों की स्थापना की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसे उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करना है जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आज चयनित खिलाड़ी भविष्य में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर प्रदेश में खेल संस्कृति को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक 182 उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए जा चुके हैं। इसी क्रम में वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए पूर्व में विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों के परीक्षण और निर्धारित मानकों के आधार पर 156 खिलाड़ियों को पात्र पाया गया।

बैठक में वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  अविनाश चंपावत, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक तनुजा सलाम उपस्थित थीं।

रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व पटल पर दिलाएंगे नई पहचान - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व पटल पर दिलाएंगे नई पहचान - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य समापन

रामगढ़ के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की घोषणा, उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नगर पंचायत बनाने की घोषणा

मुख्यमंत्री ने 6 पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश, टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स का किया सम्मान

रायपुर,- रामगढ़ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन का केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा, प्रकृति पूजा, आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। सरगुजा की यह पवित्र भूमि प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है। अनेक प्राचीन ग्रंथों में रामगढ़ का उल्लेख मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को प्रमाणित करता है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के ऐतिहासिक दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के  समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनश्रुतियों के अनुसार त्रेतायुग में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने इस क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। सीताबेंगरा गुफा आज भी श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है तथा रामगढ़ की हवाओं और शिलाओं में रामायण की स्मृतियां आज भी जीवंत हैं।

उन्होंने कहा कि सीताबेंगरा गुफा भारत की सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में से एक मानी जाती है, जहां हजारों वर्ष पूर्व सांस्कृतिक आयोजन और नाट्य प्रस्तुतियां होती थीं। वहीं जोगीमारा गुफा अपनी प्राचीन भित्तिचित्र कला के लिए विश्वविख्यात है। हाथीपोल जैसी प्राकृतिक शैल संरचना तथा यहां के प्राचीन शिल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साक्षी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकवि कालिदास द्वारा मेघदूतम् की रचना इसी क्षेत्र में किए जाने का उल्लेख मिलता है, जिससे रामगढ़ का साहित्यिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार रामगढ़, सीताबेंगरा और जोगीमारा जैसी ऐतिहासिक धरोहरों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य से परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि जिस भव्यता के साथ इस वर्ष रामगढ़ महोत्सव का आयोजन हुआ है, उसी भव्यता के साथ यह महोत्सव प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में सरगुजा जिले में 2,387 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश में लोगों के पक्के आवास का सपना तेजी से साकार हो रहा है। 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति प्रदान की गई है तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 आवास बनकर तैयार हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के कारण बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। पुनर्वासित नक्सलियों तथा विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) परिवारों को भी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों से 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। 13 लाख किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस प्रदान किया गया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1,000 रुपये अंतरित किए जा रहे हैं। रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या दर्शन कराया गया है। तीर्थयात्रा दर्शन योजना के अंतर्गत देश के 19 प्रमुख तीर्थस्थलों को शामिल किया गया है, जहां वरिष्ठ नागरिक अपनी इच्छा के अनुसार दर्शन कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए विभिन्न विभागों में लगातार भर्ती प्रक्रिया संचालित की जा रही है। आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रारंभ की गई है, जिसके माध्यम से लोगों की शिकायतों का प्रभावी समाधान किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रामगढ़ के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही क्षेत्रवासियों की मांग पर उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नगर पंचायत के गठन की घोषणा भी की।

इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामगढ़ महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककला और गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का सशक्त माध्यम है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य कर रहा है।

कृषि मंत्री  रामविचार नेताम ने सभी को रामगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लगभग 50 वर्षों से आयोजित हो रहा यह महोत्सव ऐतिहासिक, पौराणिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश, टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंच से विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के छह बच्चों का शाला प्रवेश कराया। उन्होंने बच्चों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाई तथा स्कूल बैग, वॉटर बॉटल सहित अध्ययन सामग्री प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने 26 से 30 जून तक सरगुजा जिले के विभिन्न पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर विशेष डॉक्यूमेंट्री तैयार करने वाले टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया।

समापन समारोह में विधायक प्रबोध मिंज, विधायक  रामकुमार टोप्पो, विधायक शकुंतला पोर्ते, विधायक उद्देश्वरी पैंकरा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष  विश्व विजय सिंह तोमर सहित अन्य विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ जंगली कुत्तों (ढोल) का झुंड

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ जंगली कुत्तों (ढोल) का झुंड

 वन मंत्री कश्यप के मार्गदर्शन में संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के मजबूत होने का मिला संकेत’
00 अखिल भारतीय बाघ आकलन 2026 के कैमरा ट्रैप में पहली बार रिकॉर्ड हुआ चार ढोलों का संगठित झुंड
रायपुर।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। अखिल भारतीय बाघ आकलन (एआईटीई) 2026 के दौरान उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार दुर्लभ भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का संगठित झुंड रिकॉर्ड हुआ है। वन विभाग ने इसे जंगल के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और बेहतर वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण संकेत बताया है।
’दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी से मजबूत हुआ संरक्षण का भरोसा’
ढोल (भारतीय जंगली कुत्ता) देश के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त मांसाहारी वन्यजीवों में शामिल है। इनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि टाइगर रिजर्व में शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ी है और प्राकृतिक आवास पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हुआ है। इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलित और स्वस्थ होने का संकेत मिलता है।
’संरक्षण के लिए उठाए गए प्रभावी कदम’
वन मंत्री  केदार कश्यप के निर्देश पर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। इनमें वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर प्राकृतिक स्वरूप में विकसित करना, वन्यजीव अपराधियों और शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, एंटी-पोचिंग अभियान को मजबूत करना तथा कैमरा ट्रैप और आधुनिक तकनीक से लगातार निगरानी करना शामिल है। इन प्रयासों में स्थानीय ग्रामीणों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई।
’956 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से हुई मुक्त’
वन विभाग ने रिजर्व क्षेत्र की लगभग 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इससे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास और आवागमन के मार्ग फिर से उपलब्ध हुए। साथ ही 550 से अधिक वन्यजीव अपराधियों और अवैध शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत किया गया।
’ढोल क्यों हैं जंगल के लिए महत्वपूर्ण’
ढोल झुंड में रहने वाले सामाजिक और अनुशासित वन्यजीव हैं। ये चीतल, सांभर और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी जीवों की संख्या को संतुलित रखते हैं, जिससे जंगल का प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। यही कारण है कि इनकी मौजूदगी किसी भी वन क्षेत्र के स्वस्थ और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।
’जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि’
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक ने बताया कि ढोल के संगठित झुंड का रिकॉर्ड होना यह प्रमाणित करता है कि रिजर्व की खाद्य-श्रृंखला मजबूत हुई है और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण विकसित हुआ है। यह उपलब्धि वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में किए गए वैज्ञानिक प्रबंधन, कड़ी सुरक्षा और प्रभावी संरक्षण प्रयासों का परिणाम है।
’वन्यजीव संरक्षण का उभरता मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़’
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। राज्य सरकार के संरक्षण प्रयासों से यह रिजर्व मध्य भारत में वन्यजीवों के सुरक्षित और समृद्ध आवास के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।

मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अनुपम संगम : साय

मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अनुपम संगम : साय

 फॉरेस्ट रेस्ट हाउस "राम वाटिका" में स्थापित भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन कर प्राप्त किया आशीर्वाद
रायपुर।
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज अपने सरगुजा प्रवास के दौरान विकासखंड उदयपुर स्थित रामगढ़ के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस "राम वाटिका" में स्थापित भगवान राम की प्रतिमा को नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की, इसके साथ ही उन्होंने "एक पेड़ माँ के नाम 3.0" अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधारोपण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान को मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा तथा आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि माँ के नाम पर लगाया गया एक पौधा न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित भविष्य की सुदृढ़ आधारशिला भी है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाएँ तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लें, ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करते हुए प्रकृति के संतुलन को बनाए रखा जा सके।
भगवान राम की प्रतिमा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्री राम का जीवन मर्यादा, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता का अनुपम आदर्श है, जो युगों-युगों से समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता आ रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से प्रभु श्री राम द्वारा प्रशस्त आदर्श पथ पर चलते हुए सेवा, सद्भाव एवं समर्पण के भाव से समाज एवं राष्ट्र के उत्थान में सहभागी बनने का आह्वान किया।
इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, सीतापुर विधायक  रामकुमार टोप्पो सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

रायपुर में अष्टविनायक रियल्टीज़ ला रहा है अपने प्रोजेक्ट अभिनव सिटी में भव्य आवास मेला

रायपुर में अष्टविनायक रियल्टीज़ ला रहा है अपने प्रोजेक्ट अभिनव सिटी में भव्य आवास मेला

 00 प्रकृति और आधुनिकता का अद्भुत संगम
रायपुर।
रायपुर के प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी और डेवलपर 'अष्टविनायक रियल्टीज़' और , 'अभिनव बिल्डर्स' शहरवासियों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आए हैं। 3, 4 और 5 जुलाई 2026 को, रायपुर के मोवा, दलदल सिवनी में स्थित उनके बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट 'अभिनव सिटी' में एक भव्य 'आवास मेला' आयोजित किया जा रहा है। प्रकृति के बीच एक नए युग की कम्युनिटी की परिकल्पना पर आधारित यह प्रोजेक्ट लग्ज़री, सुविधा और शांति का बेहतरीन मेल है। 
विस्तृत आवासीय विकल्प
इस तीन -दिवसीय आवास मेले में ग्राहकों को उनकी आवश्यकता और बजट के अनुसार विविध विकल्प मिलेंगे:
प्रीमियम प्लॉट्स: ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार गार्डन प्लॉट्स, गार्डन फेसिंग प्लॉट्स, कॉर्नर प्लॉट्स या गार्डन फेसिंग और कॉर्नर प्लॉट्स का चयन कर सकते हैं। 2 और 3 बीएचके लग्ज़री अपार्टमेंट्स: आधुनिक जीवनशैली को ध्यान में रखकर बनाए गए इन अपार्टमेंट्स में 2 बीएचके (1066 वर्ग फुट और 1125 वर्ग फुट सुपर बिल्ट-अप एरिया) रेरा कारपेट एरिया 672 वर्ग फुट और 714 वर्ग फुट और 3 बीएचके (1317 वर्ग फुट सुपर बिल्ट-अप एरिया) रेरा कारपेट एरिया 959 वर्ग फुट के शानदार विकल्प मौजूद हैं। 
अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधाएं 
'अभिनव सिटी' अपने निवासियों को एक कम्पलीट वर्ल्डक्लास लाइफस्टाइल देने के लिए प्रतिबद्ध है। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं इस प्रकार हैं: 
आध्यात्मिक और प्राकृतिक : मन की शांति के लिए परिसर में एक सुंदर मंदिर और हरियाली के लिए 10 विशाल गार्डन मौजूद हैं। 
स्वास्थ्य और खेलकूद : फिटनेस के लिए अत्याधुनिक जिम, स्विमिंग पूल, स्टीम बाथ, मल्टीपर्पस कोर्ट, और नेट क्रिकेट की सुविधा उपलब्ध है। 
मनोरंजन और सामजिक आयोजन : निवासियों के मनोरंजन के लिए मिनी थिएटर, इंडोर प्ले एरिया, म्यूजिक रूम, और पारिवारिक या सामाजिक आयोजनों के लिए कम्युनिटी हॉल की व्यवस्था है। बच्चों के लिए सुरक्षित किड्स प्ले एरिया भी बनाया गया है। 
अतिरिक्त सुविधाएं : मेहमानों के रुकने के लिए विशेष गेस्ट रूम्स हैं। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे सिक्योरिटी के साथ पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। 
प्राइम लोकेशन
यह प्रोजेक्ट रायपुर के सबसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में से एक में स्थित है, जहाँ से 30 और 40 फीट चौड़ी आंतरिक सड़कों के साथ 60 फीट चौड़ी मुख्य सड़क की कनेक्टिविटी है। 
प्रकृति : इंदिरा स्मृति वन (0.5 किमी) 
शिक्षा और विज्ञान : छत्तीसगढ़ साइंस सेंटर (2.2 किमी), भवन्स स्कूल, नारायण टेक्नो स्कूल, और चैतन्य टेक्नो स्कूल (4 किमी)
स्वास्थ्य : बालाजी हॉस्पिटल (2.5 किमी), इट्सा हॉस्पिटल (2.5 किमी) 
शॉपिंग और एंटरटेनमेंट : अंबुजा मॉल (2.9 किमी), रिलायंस स्मार्ट बाज़ार (3 किमी), डीकैथलॉन (3.8 किमी) 
मुख्य केंद्र : अवंती बाई चौक (5 किमी), पंडरी मार्केट (5.5 किमी), और रेलवे स्टेशन (8.5 किमी) 
डेवलपर्स का विज़न और सन्देश
इस भव्य आयोजन और प्रोजेक्ट के विजन को लेकर अष्टविनायक रियल्टीज़ के सीएमडी , श्री संतोष लोहाना ने कहा: "हमारा उद्देश्य हमेशा से ही ग्राहकों को सिर्फ ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि एक संपूर्ण और सुरक्षित जीवनशैली प्रदान करना रहा है। 'अभिनव सिटी' को प्रकृति और आधुनिकता के अनूठे संगम के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जहाँ हर उम्र के लोगों की सुविधाओं का बारीकी से ध्यान रखा गया है।"
वहीं, अष्टविनायक रियल्टीज़ के एमडी , श्री प्रकाश लोहाना ने आवास मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा: "आगामी 3, 4 और 5 जुलाई को आयोजित होने वाला 'आवास मेला' बायर्स और इन्वेस्टर्स के लिए एक बेहतरीन अवसर है। हमारे प्रोजेक्ट की पारदर्शिता, इसकी प्राइम लोकेशन और विश्वस्तरीय सुविधाएं इसे रायपुर का सबसे बेहतरीन इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनाती हैं। हम सभी शहरवासियों को इस मेले में आकर अपने सपनों का घर चुनने के लिए सादर आमंत्रित करते हैं।"
आयोजन का विवरण
दिनांक: 3, 4 और 5 जुलाई 2026 
स्थान: अभिनव सिटी, अंबुजा मॉल के पीछे, साइंस सेंटर के पास, दलदल सिवनी, मोवा, रायपुर (छ.ग.) 
संपर्क: 8516003000 
'अभिनव सिटी' का यह आवास मेला निवेश करने और अपने सपनों का घर खरीदने का एक बेहतरीन अवसर है। अधिक जानकारी के लिए आप दिए गए नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान

भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान

 00 पर्यटन, प्रकृति और रोजगार का नया आयाम

00 एक माह में ही पहुंचे 480 से ज्यादा पर्यटक, युवाओं, महिला समूह, वन प्रबंधन समिति को पौने 3 लाख रुपए से अधिक की हुई आय
रायपुर।
ईको-टूरिज्म के तहत स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुंचाए बिना लोगों को प्रकृति से जोडऩे की नई पहल शुरू की गई है, जिसमें पर्यटकों को आकर्षित करने वाले शानदार मॉडल शामिल हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की इको-टूरिज्म पहल के तहत विकसित भोरमदेव जंगल सफारी संचालन के पहले ही महीने में छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान बनकर उभरी है। जंगल सफारी प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है, सिर्फ एक माह में ही 489 से अधिक पर्यटक यहां पहुंचे हैं, वहीं स्थानीय युवाओं, वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों को रोजगार एवं आमदनी के नए अवसर मिले हैं। भोरमदेव जंगल सफारी प्रकृति, रोमांच और स्थानीय विकास का सफल संगम बनी यह पहल भोरमदेव को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थापित करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है।
एक माह में पहुंचे सैंकड़ों पर्यटक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा तथा वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह जंगल सफारी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है। वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि भोरमदेव जंगल सफारी का उद्घाटन 3 मई को कर पर्यटकों के लिए इसका संचालन शुरू किया गया था। मानसून को देखते हुए 4 जून से सफारी को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। मात्र एक माह के संचालन के दौरान 480 से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया, जिससे पौने 3 लाख रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई है। बारिश के बाद नवंबर माह से इसका संचालन फिर से शुरू होगा।

भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान


पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों को मिला रोजगार
भोरमदेव जंगल सफारी की शुरुआत से स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिले हैं। केवल एक महीने के संचालन में वाहन चालक, गाइड और गेट कीपर के रूप में कार्यरत 17 स्थानीय युवाओं ने 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की। वहीं वन प्रबंधन समिति को 92 हजार और वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। सफारी परिसर में स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन भी पर्यटकों की पसंद बनी रही। एक माह में कैंटीन से 20 हजार रुपये से अधिक का मुनाफा हुआ, जिससे समूह की महिलाओं की आय बढ़ी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती मिली।
सिर्फ सफारी ही नहीं, उद्यान भी बना आकर्षण का केंद्र
जंगल सफारी के साथ-साथ भोरमदेव का प्राकृतिक उद्यान भी पर्यटकों की पसंद बन रहा है। सफारी का आनंद लेने वाले पर्यटकों के अलावा 1500 से अधिक लोगों ने उद्यान का भी भ्रमण किया। इससे साफ है कि भोरमदेव क्षेत्र धीरे-धीरे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना रहा है।
वन्यजीवों की रोमांचक साइटिंग ने बढ़ाया आकर्षण
करीब 36 किलोमीटर लंबी जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को कई वन्यजीवों और पक्षियों को करीब से देखने का अवसर मिला। सफारी में भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, कोटरी (बार्किंग डियर), बाघ के पदचिह्न (टाइगर पगमार्क), जंगली मुर्गा, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और रंग-बिरंगी तितलियां पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहीं। घने जंगल, ऊंची पहाडिय़ां और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर वातावरण ने सफारी को रोमांचक और यादगार अनुभव बना दिया।
इको-टूरिज्म की नई पहचान
वन मंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल ने बताया कि लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभयारण्य में 36 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी मार्ग तैयार किया गया है। सफारी का मुख्य प्रवेश द्वार भोरमदेव मंदिर के पास करियाआमा क्षेत्र में स्थित है, जहां से पर्यटक अपनी जंगल यात्रा शुरू करते हैं। इस सफारी के माध्यम से पर्यटकों को छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन, वन्यजीव, जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर भी मिल रहे हैं।

रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : साय

रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : साय

 00 मुख्यमंत्री ने रामगढ़ पहुँचकर निहारी सीताबेंगरा की प्राचीन विरासत

00 जोगीमारा गुफा शिलालेख एवं हाथीपोल का किया अवलोकन
00 हमारी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढिय़ों के लिए अमूल्य विरासत
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया तथा इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर प्राप्त हों।

उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख एवं चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाडिय़ों में अपनी कालजयी कृति मेघदूतम् की रचना की थी, जिसका आरंभ आषाढस्य प्रथमदिवसे से होता है। इसी ऐतिहासिक एवं साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा तथा यहाँ प्राप्त प्राचीन अभिलेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।
रामगढ़ की एक अन्य महत्वपूर्ण पहचान हाथीपोल नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊँची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ इस सम्पूर्ण क्षेत्र को और अधिक रहस्यमयी, आकर्षक एवं ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित इन कलात्मक गुफाओं का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

पशुपालन विभाग की ऋण योजना से बदली किसान की किस्मत, मुर्गी पालन से हुआ आर्थिक बदलाव

पशुपालन विभाग की ऋण योजना से बदली किसान की किस्मत, मुर्गी पालन से हुआ आर्थिक बदलाव

 रायपुर। सरकार द्वारा पशुपालकों और किसानों की आय बढ़ाने के लिए चलाई जा रही है। इसके तहत गाय, भैंस, भेड़, बकरी, और मुर्गी पालन के लिए लोन और सब्सिडी प्रदान की जाती है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम उल्लूर के किसान सदाशिव कुरगुड़ इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्होंने पशुधन विकास विभाग की किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेकर मुर्गी पालन शुरू किया और आज हर वर्ष लगभग 80 हजार रुपये का शुद्ध लाभ कमा रहे हैं।
योजना से मिली नई शुरुआत
सदाशिव खेती के साथ आय बढ़ाने के लिए अतिरिक्त रोजगार करना चाहते थे, लेकिन पर्याप्त पूंजी नहीं थी। इसी दौरान उन्हें पशुधन विकास विभाग की किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी मिली। विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें बैंक के माध्यम से 30 हजार रुपये का ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने चूजे खरीदे और उनके लिए आवश्यक आहार एवं अन्य व्यवस्थाएं कीं।
मेहनत और मार्गदर्शन से मिली सफलता
नियमित देखभाल, बेहतर प्रबंधन और विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से उनका मुर्गी पालन व्यवसाय लगातार बढ़ता गया। आज वे इस व्यवसाय से हर साल लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं, जिसमें करीब 80 हजार रुपये का शुद्ध लाभ होता है। इस अतिरिक्त आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।
अब बड़ा पोल्ट्री फार्म लगाने का सपना
सदाशिव कुरगुड़ का कहना है कि पशुधन विकास विभाग की योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया। अब उनका लक्ष्य एक व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म स्थापित कर रोजगार का विस्तार करना है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों और ग्रामीण युवाओं तक पहुंचना चाहिए, ताकि वे भी स्वरोजगार अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें।
ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रही हैं शासकीय योजनाएं
जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-रोजगार को बढ़ावा देना, किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। विभाग की विभिन्न योजनाएं आजीविका संवर्धन और ग्रामीण विकास की दिशा में प्रभावी साबित हो रही हैं। सदाशिव कुरगुड़ की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और मेहनत मिलकर किसी भी किसान की तकदीर बदल सकते हैं।

उद्यानिकी विभाग की योजना से बदली कमार कृषक की तकदीर, खीरे की वैज्ञानिक खेती बनी वरदान

उद्यानिकी विभाग की योजना से बदली कमार कृषक की तकदीर, खीरे की वैज्ञानिक खेती बनी वरदान

 रायपुर। उद्यानिकी विभाग की योजना से बदली कमार कृषक की तकदीरखीरे की व्यावसायिक खेती एक बेहद लाभदायक व्यवसाय है, जो 45 से 50 दिनों में पैदावार देना शुरू कर देता है। व्यावसायिक खेती में खीरे को जमीन पर फैलाने के बजाय मचान और तारों का सहारा देकर ऊपर चढ़ाना चाहिए। इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, गलते नहीं हैं और उनका आकार, रंग और चमक शानदार रहती है, जिससे बाजार में बेहतरीन भाव मिलता है। बुवाई के 45-50 दिनों बाद फल तोडऩे योग्य हो जाते हैं। मचान विधि से एक एकड़ में लगभग 30 से 45 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो जाती है।

सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के दौर में यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो खेती कैसे फायदे का सौदा बन सकती है, इसे धमतरी जिले के एक प्रगतिशील किसान ने सच कर दिखाया है। जिला धमतरी के विकासखंड नगरी के अंतर्गत ग्राम सेलबहरा के विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार समुदाय) के कृषक श्री खीमांशु गजेसिंग आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

उद्यानिकी विभाग की योजना से बदली कमार कृषक की तकदीर


4 एकड़ में खीरे की व्यावसायिक खेती
गजेसिंग के पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से उन्होंने इस वर्ष 4 एकड़ क्षेत्र में खीरे की व्यावसायिक खेती की। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के नियमित संपर्क और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने उन्नत खेती की तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीजों का चयन, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई और पौध संरक्षण जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया।
पारंपरिक से वैज्ञानिक खेती का सफर
पहले पारंपरिक ढर्रे पर खेती करने के कारण  गजेसिंग के लिए कृषि की लागत निकालना भी एक बड़ी चुनौती थी और आय बेहद सीमित थी। लेकिन आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के बाद पासा पलट गया। वैज्ञानिक तरीके से की गई इस खेती के कारण खीरे की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में जबरदस्त सुधार हुआ है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी उनके खीरे की भारी मांग है। उपज का सही और उचित मूल्य मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

उद्यानिकी विभाग की योजना से बदली कमार कृषक की तकदीर

भविष्य की योजनाएं और संदेश
अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए श्री खीमांशु गजेसिंग ने बताया कि विभागीय अधिकारियों के तकनीकी सुझावों और शासकीय योजनाओं के सहयोग से मुझे खेती को एक नए नजरिए से देखने का मौका मिला। इस सफलता से प्रेरित होकर अब मैं भविष्य में अन्य उद्यानिकी फसलों का विस्तार करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए उत्पादन को और बढ़ाने की योजना बना रहा हूँ। उद्यानिकी विभाग भी लगातार किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। श्री गजेसिंग की यह उपलब्धि साबित करती है कि वैज्ञानिक नवाचार और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर कृषि को टिकाऊ और अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

नैनो उर्वरक- छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी में आई नई क्रांति

नैनो उर्वरक- छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी में आई नई क्रांति

 किसान भाईयों को कम लागत में होगी अधिक पैदावारी

 तेजबहादुर सिंह भुवाल,  सहा. जनसंपर्क अधिकारी

रायपुर - छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है और किसानों की समृद्धि राज्य के विकास से सीधे जुड़ी हुई है। बदलते समय के साथ खेती में नई तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है, जिनमें नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में उभरा है। कम लागत, अधिक प्रभाव और पर्यावरण संरक्षण जैसे गुणों के कारण नैनो उर्वरक आज किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा हैं।

नैनो उर्वरक अत्यंत सूक्ष्म कणों से निर्मित होते हैं, जिन्हें पौधे तेजी से और अधिक मात्रा में अवशोषित कर लेते हैं। इसके कारण पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं और फसलों का विकास बेहतर तरीके से होता है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनकी मात्रा कम लगती है, जिससे किसानों का खर्च घटता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

छत्तीसगढ़ में धान, मक्का, चना, अरहर तथा सब्जी फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। प्रदेश में कई किसानों ने अनुभव किया है कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसल की पैदावार बेहतर होती है, पौधे अधिक हरे-भरे रहते हैं और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

नैनो उर्वरकों का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ता है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जहां भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं नैनो उर्वरक संतुलित पोषण प्रदान कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। साथ ही जल स्रोतों में रासायनिक तत्वों के बहाव को भी कम करते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।

परिवहन और भंडारण की दृष्टि से भी नैनो उर्वरक काफी सुविधाजनक हैं। पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की जगह छोटी बोतलों में उपलब्ध नैनो उर्वरक किसानों के लिए आसानी से ले जाने और उपयोग करने योग्य होते हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोडऩे के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे उन्नत उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर खेती को अधिक उत्पादक, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और नवाचार आधारित खेती ही भविष्य की कृषि का आधार है। नैनो उर्वरकों का उपयोग न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।

छत्तीसगढ़ सरकार तथा कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। इसी क्रम में माननीय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय जी ने भी राज्य के किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और नवीन तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं। उन्होंने किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक होने तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इनका प्रयोग करने का आग्रह किया है, ताकि उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों की आय में वृद्धि हो सके।  

वर्तमान में कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आए हैं। यह तकनीक कम खर्च में बेहतर उत्पादन, स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि छत्तीसगढ़ के किसान वैज्ञानिक सलाह और संतुलित उपयोग के साथ नैनो उर्वरकों को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में यह राज्य की कृषि उन्नति और किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है। निस्संदेह, नैनो उर्वरक छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों के लिए आधुनिक खेती का नया वरदान साबित हो सकता है।

ब्रेकिंग : इस संभाग के जेडी हुए सेवानिवृत्त, इस अधिकारी को मिला प्रभार, देखें आदेश

ब्रेकिंग : इस संभाग के जेडी हुए सेवानिवृत्त, इस अधिकारी को मिला प्रभार, देखें आदेश

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर संभाग के प्रभारी प्रभारी संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग, रामायण प्रसाद आदित्य आज सेवानिवृत्त हो गए। उनकी जगह पर अश्वनी कुमार भारद्वाज, प्रभारी उप संचालक, लोक शिक्षण संभाग, सरगुजा, अंबिकापुर को अस्थायी रूप से संभागीय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग, बिलासपुर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। बता दें , अश्वनी कुमार भारद्वाज जांजगीर डीईओ रह चुके हैं। लिहाजा उन्हें बिलासपुर शिक्षा संभाग में काम करने का अच्छा खासा अनुभव है। संभाग उनके लिए नया नहीं है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से किसानों को बड़ी राहत, खरीफ 2026 में पूर्व वर्ष की तरह मिलेगा एकमुश्त यूरिया, 80 प्रतिशत वितरण सीमा समाप्त

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से किसानों को बड़ी राहत, खरीफ 2026 में पूर्व वर्ष की तरह मिलेगा एकमुश्त यूरिया, 80 प्रतिशत वितरण सीमा समाप्त

 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य  सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने और खेती को अधिक सुगम बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। इसी क्रम में खरीफ सीजन 2026 के लिए जांजगीर-चांपा जिले के किसानों को बड़ी राहत देते हुए सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया वितरण पर लागू 80 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर दी गई है। अब किसानों को खरीफ 2025 की भांति उनकी पात्रता के अनुसार एकमुश्त यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा।

उप संचालक कृषि  राकेश शर्मा ने बताया कि खरीफ 2026 में किसानों को खरीफ 2025 में प्राप्त यूरिया की मात्रा के अनुरूप यूरिया वितरित किया जाएगा। यदि संबंधित सहकारी समिति में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा तो किसानों को एकमुश्त यूरिया प्रदान किया जाएगा। किसी समिति में स्टॉक की कमी होने पर शेष मात्रा यूरिया उपलब्ध होते ही किसानों को वितरित कर दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि शासन के इस निर्णय से किसानों को बार-बार समिति के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और खरीफ सीजन में आवश्यक उर्वरक समय पर उपलब्ध होने से कृषि कार्य निर्बाध रूप से संचालित हो सकेंगे। इससे किसानों को खेती की तैयारी में सुविधा मिलेगी तथा समय पर उर्वरक उपलब्ध होने से फसल उत्पादन को भी गति मिलेगी। राज्य सरकार का यह निर्णय किसान हितों के प्रति उसकी संवेदनशीलता और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शासन का उद्देश्य किसानों को आवश्यक कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना और कृषि को अधिक समृद्ध एवं टिकाऊ बनाना है।

मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अनुपम संगमः मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ’’राम वाटिका’’ में किया रुद्राक्ष का पौधारोपण

मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अनुपम संगमः मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ’’राम वाटिका’’ में किया रुद्राक्ष का पौधारोपण

 रायपुर: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज अपने सरगुजा प्रवास के दौरान विकासखंड उदयपुर स्थित रामगढ़ के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस ष्राम वाटिकाष् में स्थापित भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की, इसके साथ ही उन्होंने ’’एक पेड़ माँ के नाम 3.0’’ अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधारोपण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने ष्एक पेड़ माँ के नामष् अभियान को मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा तथा आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि माँ के नाम पर लगाया गया एक पौधा न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित भविष्य की सुदृढ़ आधारशिला भी है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाएँ तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लें, ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करते हुए प्रकृति के संतुलन को बनाए रखा जा सके।

भगवान राम की प्रतिमा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु  राम का जीवन मर्यादा, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता का अनुपम आदर्श है, जो युगों-युगों से समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता आ रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से प्रभु राम द्वारा प्रशस्त आदर्श पथ पर चलते हुए सेवा, सद्भाव एवं समर्पण के भाव से समाज एवं राष्ट्र के उत्थान में सहभागी बनने का आह्वान किया।

इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, लुण्ड्रा विधायक  प्रबोध मिंज, सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

नैनो उर्वरकों के उपयोग से लागत में कमी और उत्पादन में होती है वृद्धि

नैनो उर्वरकों के उपयोग से लागत में कमी और उत्पादन में होती है वृद्धि

 किसानों को नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग के लिए किया जा रहा जागरूक

राज्य में नैनो डीएपी का लगभग 2.47 लाख बोतलों का भंडारण और किसानों को 87 हजार से अधिक बोतलों का वितरण

नैनो यूरिया का लगभग 2.86 लाख बोतलों का भंडारण और किसानों को 1.14 लाख बोतलों का वितरण

रायपुर, 30 जून 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए राज्य में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।

कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के दौरान सहकारी समितियों के माध्यम से नैनो उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। 26 जून 2026 की स्थिति में राज्य में नैनो डीएपी का लगभग 2.47 लाख बोतलों का भंडारण किया गया है, जिसमें से 87 हजार से अधिक बोतलों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। इसी प्रकार नैनो यूरिया का लगभग 2.86 लाख बोतलों का भंडारण किया गया है तथा 1.14 लाख बोतलों से अधिक का वितरण किसानों को किया जा चुका है। शेष मात्रा समितियों में उपलब्ध है, जिससे आगामी कृषि कार्यों के लिए किसानों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

राज्य सरकार किसानों को नैनो उर्वरकों के लाभों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चला रही है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया पारंपरिक ठोस रासायनिक उर्वरकों की तुलना में अधिक प्रभावी हैं। इनका उपयोग करने से उर्वरकों की मात्रा कम लगती है, पौधों द्वारा पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है, उत्पादन लागत घटती है तथा फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से नैनो उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के किसान वैज्ञानिक खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकें।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपने निकटतम सहकारी समिति एवं कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी प्राप्त करें तथा इन आधुनिक उर्वरकों का अधिक से अधिक उपयोग कर कृषि को लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने में सहभागी बनें।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से किसानों को बड़ी राहत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से किसानों को बड़ी राहत

 खरीफ 2026 में पूर्व वर्ष की तरह मिलेगा एकमुश्त यूरिया, 80 प्रतिशत वितरण सीमा समाप्त

रायपुर, 30 जून 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने और खेती को अधिक सुगम बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। इसी क्रम में खरीफ सीजन 2026 के लिए जांजगीर-चांपा जिले के किसानों को बड़ी राहत देते हुए सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया वितरण पर लागू 80 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर दी गई है। अब किसानों को खरीफ 2025 की भांति उनकी पात्रता के अनुसार एकमुश्त यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा।

उप संचालक कृषि  राकेश शर्मा ने बताया कि खरीफ 2026 में किसानों को खरीफ 2025 में प्राप्त यूरिया की मात्रा के अनुरूप यूरिया वितरित किया जाएगा। यदि संबंधित सहकारी समिति में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा तो किसानों को एकमुश्त यूरिया प्रदान किया जाएगा। किसी समिति में स्टॉक की कमी होने पर शेष मात्रा यूरिया उपलब्ध होते ही किसानों को वितरित कर दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि शासन के इस निर्णय से किसानों को बार-बार समिति के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और खरीफ सीजन में आवश्यक उर्वरक समय पर उपलब्ध होने से कृषि कार्य निर्बाध रूप से संचालित हो सकेंगे। इससे किसानों को खेती की तैयारी में सुविधा मिलेगी तथा समय पर उर्वरक उपलब्ध होने से फसल उत्पादन को भी गति मिलेगी।

राज्य सरकार का यह निर्णय किसान हितों के प्रति उसकी संवेदनशीलता और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शासन का उद्देश्य किसानों को आवश्यक कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना और कृषि को अधिक समृद्ध एवं टिकाऊ बनाना है।

सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण सनिश्चित करें-मुख्य सचिव

सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण सनिश्चित करें-मुख्य सचिव

 मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई की सामान्य सभा की बैठक सम्पन्न

रायपुर, 30 जून 2026/मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई की सामान्य सभा की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने सामाजिक अंकेक्षण में पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण किया जाना चाहिए। मुख्य सचिव ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण ग्राम सभा को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से हुई चर्चा

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को ग्राम सभाओं में अनिवार्य रूप से अंकेक्षण रिपोर्ट दिया जाना आवश्यक है। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। इस वर्ष प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी नरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण एवं राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रमों के सामाजिक अंकेक्षण कराये जाने पर बल दिया गया।

सामाजिक अंकेक्षण नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम

बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2025-26 में अब तक किए गए सामाजिक अंकेक्षण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना एवं बजट का भी अनुमोदन किया गया। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई के निर्माण हेतु विस्तार से चर्चा हुई। सामाजिक अंकेक्षण कार्य में नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम क्रियान्वयन हेतु डेवलपमेंट एजेंसी के सहयोग के लिए भी चर्चा हुई। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई के विस्तार हेतु अन्य योजनाओं से निश्चित विकास निधि के निर्धारण के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई।

सामाजिक अंकेक्षण कार्यों के संपादन पदों को भरने के प्रस्ताव पर चर्चा

बैठक में मनरेगा योजना को संशोधित नवीन योजना वीबीजीरामजी में सामाजिक अंकेक्षण के प्रावधान का अवलोकन, आत्मसात करने के प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत महात्मा गांधी नरेगा सहित अन्य योजनाओं के सामाजिक अंकेक्षण के कार्यों के संपादन हेतु विभिन्न पदों को नियमानुसार भरने के लिए आवश्यक नियमों के प्रस्ताव पर चर्चा के बाद अनुमोदन किया गया।

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, आदिम जाति विकास विभाग एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव  सिद्धार्थ कोमल परदेशी, जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई के सामान्य सभा के सदस्यों ने भाग लिया।

रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री ने रामगढ़ पहुँचकर निहारी सीताबेंगरा की प्राचीन विरासत

जोगीमारा गुफा शिलालेख एवं हाथीपोल का किया अवलोकन

हमारी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत - मुख्यमंत्री  साय

रायपुर 30 जून 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय "रामगढ़ महोत्सव-2026" के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया तथा इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर प्राप्त हों।

उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख एवं चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी कालजयी कृति "मेघदूतम्" की रचना की थी, जिसका आरंभ "आषाढस्य प्रथमदिवसे" से होता है। इसी ऐतिहासिक एवं साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा तथा यहाँ प्राप्त प्राचीन अभिलेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

रामगढ़ की एक अन्य महत्वपूर्ण पहचान "हाथीपोल" नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊँची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ इस सम्पूर्ण क्षेत्र को और अधिक रहस्यमयी, आकर्षक एवं ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित इन कलात्मक गुफाओं का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।