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शिक्षा में निवेश, आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

शिक्षा में निवेश, आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

 रायपुर- छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में जिला खनिज न्यास निधि से विभिन्न विकास कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत बलौदाबाजार, पलारी और सिमगा विकासखंड के कई स्कूलों में नए किचन शेड, अतिरिक्त कक्षाएं और प्रार्थना शेड बनाए जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही मूलभूत सुविधाओं की कमी दूर होगी। 

जिले के कई सरकारी स्कूल लंबे समय से बैठक व्यवस्था (स्थान की कमी), मध्याह्न भोजन पकाने के लिए सुरक्षित जगह और खराब मौसम जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे। डीएमएफ से स्वीकृत ये नए कार्य न केवल इन कमियों को दूर करेंगे, बल्कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।

​विकास कार्यों का लेखा-जोखार- कहां, क्या और कितना हुआ स्वीकृत
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बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्रामीण अंचलों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जिला खनिज न्यास निधि से विकास कार्यों की सिलसिलेवार स्वीकृतियां दी गई हैं। इसकी शुरुआत 12 जून 2026 को सिमगा विकासखंड के अंतर्गत परसवानी और भालेसुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में प्रार्थना शेड निर्माण के लिए क्रमशः 10-10 लाख रुपये जारी किए गए, जबकि इसी विकासखंड की फूलवारी और तिल्दाबांधा प्राथमिक शालाओं में दो-दो अतिरिक्त कमरों के लिए भी 20 लाख रुपये (10-10 लाख रुपये प्रति स्कूल) की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई।

इसके बाद 18 जून 2026 को बलौदाबाजार विकासखंड के प्राथमिक शाला चिचोली, मगरवाय, केशडबरी, और पूर्व माध्यमिक शाला खम्हरिया-चापा व धवई में 5-5 लाख रुपये की लागत से कुल पांच किचन शेड मंजूर किए गए। इसी तारीख को करमनडीह और खम्हरिया यदु की प्राथमिक शालाओं में दो-दो अतिरिक्त कमरों के निर्माण के लिए 10-10 लाख रुपये स्वीकृत किए गए।

अधोसंरचना विकास की इस कड़ी में 07 जुलाई 2026 को मिली, जिसमें सिमगा और बलौदाबाजार विकासखंड के 10 गांवों चंडी, फरहदा, केसली, मटिया,रवेली,भाटागांव, खैरघटा, कोलियारी, कुकुरदी और मगरवाय के स्कूलों को शामिल किया गया। इन सभी 10 शिक्षण संस्थानों में दो-दो अतिरिक्त कमरों के निर्माण के लिए प्रति स्कूल 10 लाख रुपये के मान से कुल 1करोड़ रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की गई है, जिससे बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर और पर्याप्त स्थान मिल सकेगा।

शिक्षा को आसान, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना हमारा संकल्प- मंत्री टंक राम वर्मा

​इस महत्वपूर्ण सौगात पर प्रदेश के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का विजन सिर्फ भवनों का निर्माण करना नहीं, बल्कि सुदूर गांवों तक ऐसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना ह,ै जो बच्चों के लिए शिक्षा के मार्ग को सुगम, सुरक्षित और सम्मानजनक बना सकें। ​उन्होंने कहा कि डीएमएफ की राशि का असली हकदार स्थानीय समाज है। हमारी सरकार खनिज प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए इस पैसे का सीधा लाभ वहां के बच्चों तक पहुंचा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में किया जा रहा यह निवेश आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के निर्माण में निवेश है। जब बच्चों को बैठने के लिए अच्छे कमरे, मध्याह्न भोजन के लिए स्वच्छ किचन और प्रार्थना के लिए व्यवस्थित शेड मिलेगा, तो स्कूलों की उपस्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों में सकारात्मक बदलाव दिखाई देगा।

निर्माण कार्यों में मॉनीटरिंग और गुणवत्ता सुनिश्चित कराने में लापरवाही पर सहायक अभियंता और उप अभियंता को तत्काल निलंबित करने के निर्देश

निर्माण कार्यों में मॉनीटरिंग और गुणवत्ता सुनिश्चित कराने में लापरवाही पर सहायक अभियंता और उप अभियंता को तत्काल निलंबित करने के निर्देश

 रायपुर- उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के निर्देश पर बोड़ला विकासखंड के दलदली मेन रोड खारिया से अगरी तक प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत निर्मित सड़क के धंसने की शिकायत के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  भीम सिंह ने गुरुवार को मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सड़क की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण कराने के लिए कोर कटिंग कराई गई तथा विभिन्न तकनीकी मानकों पर सड़क की जांच की गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि नवनिर्मित सड़क हैवी लोड वाहनों के आवागमन के कारण क्षतिग्रस्त हुई। जिस सड़क पर केवल 10-12 टन क्षमता वाले वाहनों के संचालन की अनुमति है, वहां 60-70 टन क्षमता तक रेत परिवहन करने वाले भारी वाहनों के संचालन और शोल्डर निर्माण में तकनीकी खामी से सड़क क्षतिग्रस्त हो गई।

सहायक अभियंता और उप अभियंता को तत्काल निलंबित किए जाने के दिए निर्देश 

सचिव  सिंह ने दलदली मेन रोड खारिया से अगरी तक निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरतने के कारण ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए। निर्माण कार्यों में मॉनीटरिंग और गुणवत्ता सुनिश्चित कराने में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित सहायक अभियंता सौरभ देशमुख और उप अभियंता जे रितेश नायडू को तत्काल निलंबित किया गया। वहीं कार्यपालन अभियंता संतोष कुमार ठाकुर को निलंबित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सड़क का जो हिस्सा क्षतिग्रस्त है उसे उखाड़कर पुनः बनवाने के निर्देश अधिकारियों को दिये गये हैं। वहीं पूरी सड़क के शोल्डर को गुणवत्तापूर्ण निर्माण के साथ सुधार करवाने के निर्देश दिये गये हैं।

ओवरलोड वाहन और शोल्डर निर्माण में खामी बना सड़क धंसने का मुख्य कारण     

जांच के दौरान अन्य तकनीकी मानकों का परीक्षण भी किया गया, जिसमें कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाया गया। जीएसबी एवं डब्ल्यूबीएम परतों के परीक्षण में ग्रेडेशन तथा कम्पैक्शन संतोषजनक रहा। वहीं बीटी कार्य के तहत पीएमसी एवं सील कोट के लिए किए गए बाइंडर कंटेंट  परीक्षण में 6 प्रतिशत परिणाम प्राप्त हुआ, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप है। तकनीकी जांच के दौरान यह पाया गया कि सड़क के शोल्डर का कॉम्पैक्शन निर्धारित मापदंड (100 प्रतिशत) से कम था। आर.डी. 1400 मीटर पर यह 95 प्रतिशत और आर.डी. 2100 मी. पर केवल 94.68 प्रतिशत पाया गया, जो कि मानकों से कम है। जांच में आर.डी. 1400 मी. पर निर्मित पुलिया के एप्रोच में बैकफिलिंग (मिट्टी भराई) का कार्य भी मापदंड के अनुसार नहीं किया गया था। इस वजह से वर्षाऋतु में बारिश का पानी शोल्डर से होते हुए सड़क के सब-बेस (निचली सतह) में घुस गया, जिससे सड़क के अंदरूनी हिस्से कमजोर हो गए।

पीएम जनमन की सड़क पर भारी वाहनों का संचालन प्रतिबंधित किया जाएगा

सचिव  भीम सिंह ने कहा कि पीएम जनमन की सड़क पर भारी वाहनों का संचालन प्रतिबंधित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सड़क की क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों के चलने से सड़क को नुकसान पहुंचा है। ऐसे वाहनों के आवागमन को रोकने के लिए परिवहन, पुलिस और राजस्व विभाग संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगे। इस अवसर पर अधिक्षण अभियंता  अखिलेश तिवारी,  बलवंत पटेल,  अमित गुलहरे कार्यपालन अभियंता  संतोष ठाकुर, सहायक अभियंता  सौरभ देशमुख  मुरारी साहू, उप अभियंता जे रितेश नायडू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बस्तर की मातृशक्ति आज समाज में बदलाव की सशक्त वाहक- वन मंत्री केदार कश्यप

बस्तर की मातृशक्ति आज समाज में बदलाव की सशक्त वाहक- वन मंत्री केदार कश्यप

 रायपुर - बस्तर संभाग मुख्यालय स्थित पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार में गुरुवार को आयोजित ‘दीदी के गोठ’ के 12वें संस्करण में महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और आजीविका संवर्धन की प्रेरक तस्वीर देखने को मिली। बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से आई हजारों महिलाओं ने कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान लखपति दीदियों की सफलता की कहानियों ने महिलाओं में आत्मविश्वास और स्वरोजगार के प्रति नया उत्साह जगाया।

महिलाएं बन रही हैं बदलाव की ताकत : केदार कश्यप
       
वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की मातृशक्ति ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए आज समाज में परिवर्तन की सशक्त भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ तभी सार्थक होता है, जब महिलाएं उन्हें अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ती हैं। उन्होंने बताया कि बिहान योजना, मध्याह्न भोजन योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से बस्तर की महिलाएं आज आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत हो रही हैं।

सरकारी योजनाओं से बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी          

बस्तर सांसद  महेश कश्यप ने कहा कि किसी भी समाज का विकास महिलाओं के सशक्तिकरण पर निर्भर करता है। उन्होंने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), लखपति दीदी योजना, महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्रीआवास योजना जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत हुई है।

स्वरोजगार से बदल रही महिलाओं की जिंदगी
       
चित्रकोट विधायक  विनायक गोयल ने कहा कि बस्तर की महिलाएं अब केवल परिवार की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं हैं। वे मुर्गीपालन, बकरीपालन, मत्स्यपालन, सब्जी उत्पादन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़कर परिवार की आय बढ़ा रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  वेदवती कश्यप ने भी महिलाओं की मेहनत और लगन की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

लखपति दीदियों का हुआ सम्मान
          
कार्यक्रम में चपका की  नीतू झा, सुलेंगा की  सुगनी कश्यप और इरपा की  हेमबती नाग सहित कई सफल लखपति दीदियों को सम्मानित किया गया। उन्हें प्रमाण-पत्र और सहायता राशि के चेक भी प्रदान किए गए।

बिहान योजना से मिली नई पहचान
           
कार्यक्रम में कोंडागांव जिले की  नम्रता पटेल ने अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि बिहान योजना के तहत बैंक लिंकेज और 5 लाख रुपये के ऋण की सहायता से उन्होंने अपने ‘अमृत तुल्य’ चाय एवं नाश्ता कैफे का विस्तार किया। आज उनके कैफे से प्रतिदिन लगभग 5 हजार रुपये की आय हो रही है।

आत्मनिर्भर बस्तर की दिशा में मजबूत कदम       

कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने सरकारी योजनाओं से मिले लाभ और अपने अनुभव साझा किए। संवाद, सम्मान और प्रेरणा से भरपूर यह आयोजन महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर बस्तर के संकल्प को नई मजबूती देने वाला साबित हुआ। इस अवसर पर कलेक्टर  आकाश छिकारा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  प्रतीक जैन सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने “जोहार जगन्नाथ रथ” को झंडा दिखाकर किया रवाना

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने “जोहार जगन्नाथ रथ” को झंडा दिखाकर किया रवाना

 श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं और प्रार्थनाओं को जगन्नाथ धाम तक पहुंचाएगी रथ

रायपुर :- उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने आज अपने नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय से “जोहार  जगन्नाथ रथ” को झंडा दिखाकर रवाना किया। विधायक  दीपेश साहू भी इस दौरान मौजूद थे।

श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं और प्रार्थनाओं को जगन्नाथ धाम तक पहुंचाएगी रथ

माय एफएम 94.3 और एटी ज्वेलर्स द्वारा तैयार यह रथ प्रदेश के श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं और प्रार्थनाओं को जगन्नाथ धाम तक पहुंचाएगी। श्रद्धालु अपनी मनोकामना व प्रार्थना लिखकर इस रथ के कलश में समर्पित कर सकेंगे, जिसे 94.3 माय एफएम की टीम  जगन्नाथ धाम तक लेकर जाएगी। यह अभिनव पहल भगवान  जगन्नाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और मनोकामनाओं को उनके पावन धाम तक पहुँचाने का सुंदर माध्यम बनेगी। 

छत्तीसगढ़ बने देश का प्रमुख पर्यटन गंतव्य, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर दें विशेष ध्यान: मंत्री राजेश अग्रवाल

छत्तीसगढ़ बने देश का प्रमुख पर्यटन गंतव्य, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर दें विशेष ध्यान: मंत्री राजेश अग्रवाल

 रायपुर: छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने तथा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को नई गति देने के उद्देश्य से आज मंत्रालय में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में दोनों विभागों द्वारा संचालित योजनाओं, विकास परियोजनाओं, अधोसंरचना निर्माण, प्रमुख पर्यटन स्थलों एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन को पर्यटन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, पर्यटन अधोसंरचना विकास, प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार, विभाग की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही संस्कृति विभाग द्वारा संचालित सांस्कृतिक संरक्षण, लोककला एवं लोक कलाकारों के संवर्धन, सांस्कृतिक आयोजनों, पुरातात्विक एवं धरोहर संरक्षण तथा आगामी कार्यक्रमों की जानकारी संस्कृति विभाग के संचालक डॉक्टर संजय कन्नौजे द्वारा दी गई। संस्कृति विभाग की भी विस्तार से समीक्षा की गई

प्रस्तुतीकरण के उपरांत पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने दोनों विभागों के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं एवं विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गति, गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, जिससे प्रदेश के पर्यटन और सांस्कृतिक विकास को नई दिशा मिल सके।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक आस्था केंद्रों और जनजातीय परंपराओं से समृद्ध राज्य है। इन सभी विशेषताओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों के साथ-साथ प्रदेश की लोककलाओं, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक धरोहरों को भी व्यापक पहचान दिलाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाएं।

उन्होंने पर्यटकों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने, पर्यटन अधोसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा नए पर्यटन स्थलों के योजनाबद्ध विकास पर विशेष जोर दिया। साथ ही संस्कृति विभाग को निर्देशित किया कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पारंपरिक कला रूपों के संवर्धन, संग्रहालयों, सांस्कृतिक संस्थानों तथा सांस्कृतिक आयोजनों को और अधिक प्रभावी एवं जनभागीदारी आधारित बनाया जाए, जिससे नई पीढ़ी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने अधिकारियों से कहा कि सभी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा एवं सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने कहा कि समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुखी कार्यों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को पर्यटन एवं संस्कृति के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित किया जा सकता है।

बैठक में पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की अवर सचिव रुचि शर्मा, पर्यटन मंडल की उपमहाप्रबंधक  पूनम शर्मा सहित पर्यटन एवं संस्कृति विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बी. टेक - पाठ्यक्रमों हेतु ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रारंभ

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बी. टेक - पाठ्यक्रमों हेतु ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रारंभ

 रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 हेतु बी. टेक- (कृषि अभियांत्रिकी) एवं बी. टेक - (खाद्य प्रौद्योगिकी) पाठ्यक्रमों में प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। प्रवेश प्रक्रिया पी.ई.टी.-2026, जेईई और मेन्स - 2026 तथा 12वीं (गणित समूह) की प्रावीण्य सूची के आधार पर विश्वविद्यालय के प्रवेश नियम-2026 के अनुसार संपन्न की जाएगी। ऑनलाइन काउंसिलिंग में भाग लेने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन पंजीयन दिनांक 10 जुलाई 2026 से 20 जुलाई 2026 (रात्रि 11ः00 बजे तक) उपलब्ध रहेगा। अभ्यर्थियों को निर्धारित अवधि में ऑनलाइन पंजीयन कर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य होगा। ऑनलाइन पंजीकृत अभ्यर्थियों की प्रावीण्य सूची 23 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी। इसके उपरांत निर्धारित कार्यक्रमानुसार 24 जुलाई 2026 से 30 जुलाई 2026 तक विभिन्न चरणों में पी.ई.टी. 2026, जेईई और मेन्स - 2026 तथा 12वीं (गणित समूह) के आधार पर सीट आवंटन, दस्तावेज सत्यापन एवं प्रवेश की कार्यवाही संपन्न की जाएगी। प्रवेश विज्ञापन, ऑनलाइन काउंसिलिंग समय-सारणी, ऑनलाइन पंजीयन दिशा-निर्देश, ऑनलाइन काउंसिलिंग दिशा-निर्देश, सीटों का विवरण एवं अन्य आवश्यक जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट https://igkv.ac.in पर उपलब्ध है। अभ्यर्थियों से अनुरोध है कि आवेदन करने से पूर्व सभी दिशा-निर्देशों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें तथा नवीनतम जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट का नियमित अवलोकन करते रहें। 

छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान को मिला उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण-पत्र

छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान को मिला उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण-पत्र

  राष्ट्रीय कार्यशाला में मिली बड़ी सराहना

रायपुर। जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण तथा जनजातीय अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (CG TRTI) को उसके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रशंसा प्रमाण-पत्र (Certificate of EÛcellence) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान ओडिशा के भुवनेश्वर में 07 और 08 जुलाई 2026 को देश के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRTs) के सुदृढ़ीकरण के लिए आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन सत्र में प्रदान किया गया। कार्यशाला में देश के 29 राज्यों के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
’केंद्रीय मंत्रियों और विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति’

इस दो दिवसीय कार्यशाला में भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री  जुएल उराव, राज्य मंत्री  दुर्गादास उइके, नीति आयोग के सदस्य  बाला सुब्रमणियम, ओडिशा सरकार के आदिमजाति विकास विभाग के मंत्री  नित्यानंद गोंड तथा भारत सरकार की जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। सभी अतिथियों ने प्रतिभागी संस्थानों को संबोधित करते हुए कार्यशाला के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
भविष्य की रणनीति और आधुनिक तकनीकों पर हुई चर्चा
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों के साथ जनजातीय अनुसंधान संस्थानों की कार्यप्रणाली, जनजातीय विकास के लिए अनुसंधान, आधुनिकीकरण, जी.आई.एस. (GIS), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Innovation Ecosystem) जैसे विषयों पर गहन मंथन किया गया। इसके साथ ही नीति एवं योजना उन्मुख अनुसंधान की आवश्यकता, चुनौतियों और आगामी समय की रणनीतियों पर विस्तृत परिचर्चा की गई तथा विभिन्न राज्यों के TRTs द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा भी हुई।
छत्तीसगढ़ दल ने दर्ज कराई सक्रिय सहभागिता
छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के मार्गदर्शन और निर्देशन में छत्तीसगढ़ के दल ने इस राष्ट्रीय कार्यशाला में सक्रिय भूमिका निभाई। छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व संस्थान की संचालक हिना अनिमेष नेताम, संयुक्त संचालक गायत्री नेताम, सहायक अनुसंधान अधिकारी डॉ. अनिल विरूलकर एवं  योगेन्द्र निषाद ने किया।
निरंतर जारी है जनजातीय संस्कृति का संरक्षण
कार्यशाला के समापन अवसर पर मंच से भारत सरकार की जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान को जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण तथा जनजातीय अनुसंधान एवं विकास के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली संस्था के रूप में यह प्रशंसा प्रमाण-पत्र सौंपा।
गौरतलब है कि प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा के नेतृत्व और निर्देशन में छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा राज्य की जनजातियों पर आधारित सामाजिक, सांस्कृतिक, कला कौशल तथा आर्थिक विकास से संबंधित अनुसंधान व प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के कार्य निरंतर और प्रभावी रूप से किए जा रहे हैं।

लोक निर्माण विभाग राज्य का ग्रोथ इंजन, विभाग पर अधोसंरचना विकसित करने की अहम जिम्मेदारी - साव

लोक निर्माण विभाग राज्य का ग्रोथ इंजन, विभाग पर अधोसंरचना विकसित करने की अहम जिम्मेदारी - साव

 उप मुख्यमंत्री ने की लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा

 निर्माण कार्यों की गहन मॉनिटरिंग और निरीक्षण के दिए निर्देश, ठेकेदारों से बेहतर समन्वय कर कार्यों में तेजी लाने कहा

 सितम्बर-अक्टूबर तक नए कार्यों के कार्यादेश जारी करने के निर्देश, अनुबंध अनुसार प्रगति सुनिश्चित कर समय-सीमा में काम पूरा कराने कहा
रायपुर।
उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव ने आज लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विभागीय मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में प्रदेशभर में निर्माणाधीन और प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को प्रत्येक कार्यों की प्रगति पर बारीक नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने फील्ड पर जाकर निर्माण कार्यों का गहन निरीक्षण और मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों से बेहतर समन्वय और संवाद रख कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल और प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए। 

उप मुख्यमंत्री  साव ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि विभाग के अभियंताओं की दक्षता और क्षमता फील्ड पर दिखनी चाहिए। उन्होंने प्रभावी एवं परिणाममूलक कार्यों के लिए समयानुकूल नई कार्यप्रणाली और कार्य संस्कृति अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं तत्परता से पूर्ण कर आगामी सितम्बर-अक्टूबर तक नए कार्यों के कार्यादेश जारी करने के निर्देश दिए, जिससे कि बरसात के तत्काल बाद पूरी गति से काम शुरू हो सके। उन्होंने कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति के बाद सभी प्रक्रियाओं को तेजी से पूर्ण कर समय पर काम प्रारंभ कराने को कहा।
 साव ने बैठक में कहा कि लोक निर्माण विभाग राज्य का 'ग्रोथ इंजन' है। राज्य में सड़क, पुल-पुलिया और भवन निर्माण के साथ ही सभी तरह की अधोसंरचना विकसित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी विभाग पर है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए विभाग को भी अहम भूमिका निभाना है। उन्होंने इसके लिए पूरी सक्रियता और गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को काम का पुराना ढर्रा बदलने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों के समय पर बिल तैयार करने और उनका हर महीने भुगतान करने के निर्देश दिए। 

उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि फील्ड पर विभाग के काम और उनके परिणाम दिखने चाहिए। उन्होंने सड़कों और पुल-पुलियों सहित स्कूलों, कॉलेजों, ऑडिटोरियम, कार्यालयों, आवासगृहों एवं अन्य भवनों के निर्माण निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों के साथ अनुबंध में निर्धारित माइलस्टोन्स के अनुसार प्रगति सुनिश्चित कर समय-सीमा में काम पूरा कराने को कहा। उन्होंने सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं को भू-अर्जन के कार्यों में तेजी लाने इससे संबंधित कानूनों व नियमों की व्यापक एवं समग्र जानकारी के लिए राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कार्यपालन अभियंताओं, अनुविभागीय अधिकारियों तथा उप अभियंताओं की कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिए।

 साव ने पहुंचविहीन गांवों तक साल भर कनेक्टीविटी बनाए रखने के लिए सड़कों और पुलों के प्रस्ताव व प्राक्कलन प्राथमिकता से तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को पुराने लंबित कार्यों से जुड़ी समस्याओं का तत्परता से निराकरण कर काम आगे बढ़ाने को कहा। उन्होंने अनुबंध के अनुसार कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले ठेकेदारों को ब्लैक-लिस्ट करने और उनके अनुबंध टर्मिनेट करने की कार्यवाही के निर्देश दिए।

लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने बैठक में अधिकारियों को मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा अनुशंसित कार्यों के साथ ही द्रुतगामी सड़कों व पुलों, पहुंचविहीन गांवों के लिए पक्की सड़कों, जिले की जरूरतों और विधायकों द्वारा अनुशंसित कार्यों की प्राथमिकता तय कर आगामी 31 अगस्त तक नए कार्यों के प्राक्कलन भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न शहरों में निर्माणाधीन ऑडिटोरियम के काम पूरा होने के बाद तत्काल इन्हें संबंधित विभागों या नगरीय निकायों को हैंडओवर करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के अपर सचिव  एस.एन. श्रीवास्तव, सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंता, सभी मंडलों के अधीक्षण अभियंता और सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता भी बैठक में मौजूद थे। 

श्रम मंत्री की बैठक में बड़ा फैसला- असंगठित श्रमिकों के लिए बनेंगी नई योजनाएं

श्रम मंत्री की बैठक में बड़ा फैसला- असंगठित श्रमिकों के लिए बनेंगी नई योजनाएं

 ई-रिक्शा सहायता का अनुदान बढ़ाकर हुआ एक लाख किया

रायपुर। छत्तीसगढ़ के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा दायरे का विस्तार करने और उनके कल्याण के लिए राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल की प्रथम बैठक संपन्न हुई, जिसमें श्रमिकों को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
ई-रिक्शा सहायता योजना का अनुदान दोगुना किया गया
बैठक में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया गया। इसके तहत ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत वर्तमान में दी जा रही 50 हजार रुपये की अनुदान राशि को बढ़ाकर सीधे एक लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इससे श्रमिक आसानी से अपना खुद का रोजगार शुरू कर सकेंगे। 

डिलीवरी कार्य करने वाले कर्मकारों (गिग वर्कर्स), चरवाहों और मेधावी बच्चों के लिए बनेंगी नई योजनाएं असंगठित क्षेत्र के अलग-अलग वर्गों को सुरक्षा देने के लिए मंडल ने अपने दायरे का विस्तार किया है। डिलीवरी कार्य करने वाले कर्मकारों को अब मंडल के दायरे में शामिल करते हुए उनके लिए विशेष कल्याणकारी योजना तैयार की जाएगी। चरवाहों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए एक पृथक (अलग) योजना बनाई जाएगी। असंगठित कर्मकारों के प्रतिभावान व मेधावी बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए नई प्रोत्साहन योजना लाई जाएगी। श्रमिकों को मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवर देने के लिए एक व्यापक बीमा योजना तैयार करने पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

शत-प्रतिशत ई-केवाईसी और आधार आधारित पंजीयन के निर्देश
श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि असंगठित बोर्ड में पंजीकृत सभी श्रमिकों का अनिवार्य रूप से ई-केवाईसी और आधार आधारित पंजीयन किया जाए, ताकि योजनाओं का सीधा और वास्तविक लाभ केवल पात्र श्रमिकों को ही मिल सके। उन्होंने पाम्पलेट और चित्रमय बुकलेट के माध्यम से योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा हितग्राहियों के आवेदनों का त्वरित निराकरण करने के भी निर्देश दिए।
इस महत्वपूर्ण प्रथम बैठक में मंडल के सदस्य एवं विधायक  चैतराम अटामी, विधायक  सुशांत शुक्ला, श्रम विभाग के सचिव  हिमशिखर गुप्ता, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव  रजत कुमार, अपर श्रमायुक्त एवं नोडल अधिकारी  एस.एल. जांगड़े, श्रम विभाग के उप सचिव  विपुल गुप्ता सहित वित्त विभाग एवं भारतीय जीवन बीमा निगम के महाप्रबंधक तथा उप श्रमायुक्त व प्रभारी अधिकारी  एस.एस. पैकरा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

सुशासन, विकास और जनकल्याण ही हमारी सरकार की पहचान है - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

सुशासन, विकास और जनकल्याण ही हमारी सरकार की पहचान है - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 आरंग विधानसभा के विकास को मिली नई गति, 128 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय समोदा में लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम में हुए शामिल 

ग्राम रीवा में 4 करोड़ रुपये के स्टॉप डैम निर्माण की घोषणा

रायपुर-- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज आरंग विधानसभा क्षेत्र के नगर पंचायत समोदा में आयोजित कार्यक्रम में 128 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के विकास को नई गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं।  

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय समोदा में लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम में हुए शामिल

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय समोदा में लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम में हुए शामिल

मुख्यमंत्री साय ने ग्राम पंचायत रीवा में लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉप डैम निर्माण, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय समोदा में अहाता निर्माण, नगर पंचायत समोदा के पंचायत भवन में प्रथम तल निर्माण तथा ग्राम तुलसी के हाई स्कूल को हायर सेकेंडरी विद्यालय में उन्नयन की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय समोदा में लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम में हुए शामिल

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुशासन, विकास और जनकल्याण ही हमारी सरकार की पहचान है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि "मोदी की गारंटी, यानी गारंटी पूरा होने की गारंटी" केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारी सरकार की कार्यशैली और जनविश्वास का प्रतीक है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने 18 लाख गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए हैं, जिनमें से 10 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जा रहा है तथा महतारी वंदन योजना के अंतर्गत अब तक 28 किश्तों में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसी सोच के साथ बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही आधारित प्रशासन स्थापित करने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। भ्रष्टाचार और अपराध के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के साथ नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और सुलभ बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद, बीज एवं कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए सेवा सेतु के माध्यम से 520 से अधिक शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के जरिए शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सहकारिता, महिला सशक्तिकरण और जनकल्याण सरकार की प्राथमिकताओं में हैं। उन्होंने नागरिकों से शासन की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का आग्रह करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना की अवधि तीन माह के लिए बढ़ा दी गई है। पात्र उपभोक्ता "मोर बिजली" मोबाइल एप अथवा वेबसाइट के माध्यम से सितंबर तक पंजीयन कर योजना का लाभ ले सकते हैं। 

कार्यक्रम में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में आरंग विधानसभा क्षेत्र को अब तक 858 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में विकास और सुशासन की नई दिशा स्थापित हुई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 'एक पेड़ मां के नाम 2.0' अभियान के अंतर्गत आंवला का पौधारोपण किया। उन्होंने सरस्वती साइकिल योजना के तहत कक्षा 9 की छात्राओं को साइकिल वितरित की तथा जिला प्रशासन के मिशन उत्कर्ष के अंतर्गत उत्कृष्ट विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष  ध्रुव कुमार मिर्धा, छत्तीसगढ़ औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला,  कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बस्तर में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, माओवादी कैंप ध्वस्त, हथियार और विस्फोटक बरामद

बस्तर में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, माओवादी कैंप ध्वस्त, हथियार और विस्फोटक बरामद

 रायपुर. ओडिशा के नुआपड़ा जिले के पाटदर्हा संरक्षित वन में जवानों ने एक माओवादी कैंप ध्वस्त कर हथियार, विस्फोटक और अन्य सामान बरामद किया है। एसपी अमृतपाल सिंह व सीआरपीएफ-19वीं बटालियन के कमाडेंट दिलीपमणि त्रिपाठी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों बलों के संयुक्त अभियान में यह सफलता मिली है।

संयुक्त टीम की बम डिस्पोजल टीम बोडेन थानाक्षेत्र के पाटदर्हा संरक्षित वन के बारपट डोंगर के घने जंगलों और पहाड़ी इलाके में तलाशी पर निकली थी। इस दौरान जवानों ने माओवादियों द्वारा छिपाकर रखा हुआ सामान बरामद किया। अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह एक पुराना कैंप रहा होगा।

एके-47 के कारतूस, दो देसी बंदूकें जब्त
जवानों ने कैंप से दो देसी बंदूक, एक देसी कार्बाइन और मैगजीन, एके-47 की 29 नग गोलियां, एसएलआर की 54 नग गोलियां, दो टिफिन बम, एक खाली टिफिन करियर, आठ नग जिलेटिन स्टिक, एक मल्टीमीटर, एक 12 वोल्ट की बैटरी, डेढ़ किलो बारूद, यूरिया, वायर, सोलर प्लेट, चार्जर, डेटोनेटर, माओवादी साहित्य, वर्दी, बर्तन, मेडिकल किट आदि सामान बरामद किए।

माओवादियों से मुक्त हुआ जिला
केंद्रीय गृह मंत्री ने 31 मार्च 2026 तक जिले को माओवाद से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया था, जिसे पूरा किया जा चुका है। छिटपुट नेटवर्क को खत्म करने और डंप बरामद करने लगातार सर्च और एरिए डामिनेशन अभियान चलाए जा रहे हैं।

एरिया डोमिनेशन के जरिए डंप खोज रहे सुरक्षा बल
हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने आक्रामक रणनीति अपनाई है। इससे सफलता भी मिली है। ‘एरिया डोमिनेशन’ के जरिए दुर्गम इलाकों में प्रवेश कर माओवादियों के पुराने डंप खोजे जा रहे हैं। खुफिया सूचनाओं पर आधारित ये सटीक ऑपरेशन माओवादी विचारधारा के प्रभाव को तेजी से कम कर रहे हैं। विशेषकर गृह मंत्रालय के निर्धारित लक्ष्यों के तहत, सुरक्षा बलों का बेहतर समन्वय और अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग नक्सलियों के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने में निर्णायक साबित हो रहा है।

डुमरतराई थोक बाजार से व्यापार एवं राेजगार दोनों को मिलेगा बढ़ावा – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

डुमरतराई थोक बाजार से व्यापार एवं राेजगार दोनों को मिलेगा बढ़ावा – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 डुमरतराई थोक बाजार से व्यापार एवं राेजगार दोनों को मिलेगा बढ़ावा – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

डुमरतराई थोक बाजार फेस -2 का नामकरण लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर : परिसर में स्थापित होगी 15 फिट ऊंची प्रतिमा

रायपुर - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के डुमरतराई में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा विकसित नवीन थोक बाजार फेस-2 का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि परिसर का नामकरण लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर किया जाएगा तथा यहां स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की तर्ज पर उनकी 15 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत की मजबूत नींव रखी। उनके नाम पर इस आधुनिक व्यापारिक परिसर का नामकरण राष्ट्र निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान के प्रति हमारी विनम्र श्रद्धांजलि है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापार और रोजगार एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां आधुनिक व्यापारिक अधोसंरचना विकसित होती है, वहां आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होता है, नए निवेश आकर्षित होते हैं और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। डुमरतराई का यह आधुनिक थोक बाजार रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापार को नई गति देगा तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर लगभग 36 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस अत्याधुनिक परिसर में चौड़ी सड़कें, पर्याप्त पार्किंग, सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था तथा आधुनिक व्यापारिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यह व्यापारियों की वर्षों पुरानी आवश्यकता को पूरा करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ-साथ ‘ईज ऑफ लिविंग’ को भी समान महत्व दे रही है। व्यापार, उद्योग और निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए अनेक सुधार लागू किए गए हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की अधोसंरचना विकास परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मंडल द्वारा अपनाई गई नई कार्यसंस्कृति और कुशल प्रबंधन विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति देंगे।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में व्यापारिक अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में डुमरतराई में आधुनिक थोक बाजार की जो परिकल्पना की गई थी, वह आज साकार हुई है। इससे व्यापारियों को आधुनिक सुविधाएं मिलने के साथ रायपुर की यातायात व्यवस्था भी अधिक सुगम होगी।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि नवीन थोक बाजार मंडल की गुणवत्ता, नवाचार और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह परियोजना प्रदेश में व्यापार, निवेश, रोजगार सृजन तथा समग्र आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी, व्यापारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि डुमरतराई थोक बाजार का विकास दो चरणों में किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 76 करोड़ रुपये की लागत से 536 व्यावसायिक दुकानें एवं हॉल निर्मित किए गए। द्वितीय चरण में लगभग 145 करोड़ रुपये की लागत से 154 स्वतंत्र व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया गया है। दोनों चरणों के पूर्ण होने के साथ प्रदेश को आधुनिक, सुव्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त थोक व्यापारिक परिसर की सौगात मिली है।

छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए नया नियम, एक हेक्टेयर भूमि पर लगाने होंगे 2,500 पौधे

छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए नया नियम, एक हेक्टेयर भूमि पर लगाने होंगे 2,500 पौधे

 रायपुर. प्रदेश में उद्योगों को अपने प्रत्येक हेक्टेयर क्षेत्र में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाने होंगे। साथ ही त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधारोपण को बढ़ावा देकर सघन ग्रीन बेल्ट विकसित करने और परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत हिस्से को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करना अनिवार्य होगा।

राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल ने मानसून 2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों में पौधारोपण अभियान को लेकर निर्देश दिए हैं। मंडल के सदस्य सचिव राजू अगसिमनी ने उद्योगों के पौधारोपण कार्यक्रमों की प्रगति, संरक्षण, रखरखाव और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनकी जीवित रहने की दर सुनिश्चित करना भी उद्योगों की जिम्मेदारी है।

बरगद, पीपल, नीम, आम जैसी प्रजातियों का करें उपयोग
बैठक में उद्योगों को बरगद, पीपल, नीम, आम सहित स्थानीय एवं पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों के अधिकाधिक पौधे लगाने के निर्देश दिए गए। साथ ही परिसर के भीतर और बाहर दोनों स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधारोपण करने पर जोर दिया गया। पर्यावरणीय निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए सभी औद्योगिक इकाइयों को आनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) 24 घंटे चालू रखने और प्रत्येक तीन माह में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराने के निर्देश भी दिए गए।

छत्तीसगढ़ में 41 प्रतिशत वन आवरण
भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) की ‘स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट’ के अनुसार, छत्तीसगढ़ के वन आवरण में उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। राज्य में सघन वनों (Very Dense Forests) का क्षेत्र तुलनात्मक रूप से स्थिर है, किंतु मध्यम और खुले वनों के घनत्व में मानवीय हस्तक्षेप, खनन और औद्योगिक विस्तार के कारण प्रभाव पड़ा है। राज्य का कुल वनावरण भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 41 प्रतिशत है। वर्तमान में सरकार द्वारा ‘सघन वृक्षारोपण’ और ‘नगर वन’ जैसी योजनाओं से घटते वन घनत्व को संतुलित करने और पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

BREAKING: छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा फेरबदल, 15 इंस्पेक्टर और एक SI का तबादला, DGP ने जारी किया आदेश

BREAKING: छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा फेरबदल, 15 इंस्पेक्टर और एक SI का तबादला, DGP ने जारी किया आदेश

 रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में एक बार फिर बदलाव किया गया है। प्रदेश के 15 इंस्पेक्टर और एक सब इंस्पेक्टर का तबादला किया गया है। इस संबंध में आदेश डीजीपी अरुण देव गौतम ने जारी किया है।

समोदा में विकास महापर्व, मुख्यमंत्री ने दी 128 करोड़ से अधिक की सौगात

समोदा में विकास महापर्व, मुख्यमंत्री ने दी 128 करोड़ से अधिक की सौगात

 रायपुर। रायपुर जिले के समोदा में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और विष्णुदेव साय ने आरंग विधानसभा क्षेत्र को 128 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी। कार्यक्रम में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया। मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भी तीखा हमला बोला।

नगर पंचायत समोदा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आरंग विधानसभा का विकास सरकार की प्राथमिकता है और स्थानीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के लगातार प्रयासों से क्षेत्र में ढाई वर्षों में 858 करोड़ 55 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत हुए हैं। मुख्यमंत्री ने 128 करोड़ रुपये से अधिक की नई विकास सौगात देते हुए कहा कि भाजपा सरकार “मोदी की गारंटी” को धरातल पर उतार रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब तक महतारी वंदन योजना की 27 किस्तें जारी कर चुकी है और इस योजना के तहत 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख गरीब परिवारों को स्वीकृति दी गई, जिनमें 10 लाख से अधिक मकानों का निर्माण जारी है।

धान खरीदी, किसानों को बोनस, रामलला दर्शन योजना, वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा और बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित होने के बाद पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आबकारी और कोयला घोटाले का उल्लेख किया और कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में कई लोग जेल में हैं तथा कुछ जमानत पर बाहर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने पांच वर्षों तक केवल लूट और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, जबकि वर्तमान सरकार पारदर्शिता और विकास के एजेंडे पर काम कर रही है।

 
Transfer: छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 5 IAS अधिकारियों का तबादला, देखें पूरी लिस्ट

Transfer: छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 5 IAS अधिकारियों का तबादला, देखें पूरी लिस्ट

  रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने गुरुवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा महानदी भवन से जारी आदेश में 5 आईएएस अधिकारियों के तबादले और प्रभार में बदलाव किए गए हैं। इस फेरबदल में सबसे बड़ा बदलाव गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के कलेक्टर पद पर हुआ है।

 
छत्तीसगढ़ में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 6 वर्ष आयु अनिवार्य, नए सत्र से सभी स्कूलों में लागू होंगे नए नियम

छत्तीसगढ़ में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 6 वर्ष आयु अनिवार्य, नए सत्र से सभी स्कूलों में लागू होंगे नए नियम

 रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने आगामी शैक्षणिक सत्र से स्कूल प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए कक्षा पहली में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित कर दी है। यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (RTE) तथा भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने सभी संबंधित विभागों और जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।

1 अप्रैल के आधार पर तय होगी पात्रता

नई व्यवस्था के अनुसार किसी भी शैक्षणिक सत्र में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं की आयु का निर्धारण 1 अप्रैल की स्थिति के अनुसार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य फाउंडेशनल स्टेज को मजबूत करना और प्रदेशभर में प्रवेश प्रक्रिया में एक समान व्यवस्था लागू करना है।

अलग-अलग कक्षाओं के लिए निर्धारित आयु सीमा

राज्य सरकार ने पूर्व-प्राथमिक से लेकर पहली कक्षा तक के प्रवेश के लिए आयु सीमा भी स्पष्ट कर दी है।

  • नर्सरी (बालवाटिका-1): 3 वर्ष से अधिक एवं 4 वर्ष से कम
  • केजी-1 (बालवाटिका-2): 4 वर्ष से अधिक एवं 5 वर्ष से कम
  • केजी-2 (बालवाटिका-3): 5 वर्ष से अधिक एवं 6 वर्ष से कम
  • कक्षा पहली: 6 वर्ष से अधिक एवं 7 वर्ष से कम
  • तीन महीने तक की मिलेगी विशेष छूट

सरकार ने अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयु सीमा में सीमित राहत भी दी है। यदि कोई बच्चा 1 अप्रैल तक निर्धारित आयु पूरी नहीं कर पाता है, लेकिन 1 जुलाई तक आवश्यक आयु पूरी कर लेता है, तो उसे अधिकतम तीन माह की विशेष छूट देकर संबंधित कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा।

सरकारी और निजी सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होंगे नियम

नई आयु सीमा राज्य के सभी शासकीय, अशासकीय (निजी) एवं अनुदान प्राप्त विद्यालयों में अनिवार्य रूप से लागू होगी। इसके अलावा RTE के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले प्रवेश भी इसी व्यवस्था के अनुसार किए जाएंगे।

किन विद्यार्थियों पर लागू नहीं होगी नई व्यवस्था

शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो विद्यार्थी किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय की पूर्व-प्राथमिक कक्षा से प्रोन्नत होकर सीधे पहली कक्षा में प्रवेश ले रहे हैं, उन पर नई आयु सीमा लागू नहीं होगी। ऐसे मामलों में छात्र के स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (TC), अंकसूची अथवा स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा।

अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, संकुल समन्वयकों और शाला प्रमुखों के माध्यम से नए नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराएं। साथ ही अभिभावकों तक इन प्रावधानों की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने को भी कहा गया है।

एक नजर में नए नियम

  • पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष।
  • आयु की गणना हर वर्ष 1 अप्रैल के आधार पर होगी।
  • 1 जुलाई तक आयु पूरी होने पर तीन माह की विशेष छूट मिलेगी।
  • नियम सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर लागू होंगे।
  • RTE के तहत होने वाले प्रवेश भी इसी आयु सीमा के अनुसार होंगे।
  • पूर्व-प्राथमिक से प्रोन्नत विद्यार्थियों को नई आयु सीमा से छूट मिलेगी।
CG Weather : छत्तीसगढ़ में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, अगले 4 दिन बारिश का अलर्ट

CG Weather : छत्तीसगढ़ में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, अगले 4 दिन बारिश का अलर्ट

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश के कई जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है, जबकि कई इलाकों में पूरे दिन बादल छाए रहने से मौसम सुहावना बना हुआ है। मौसम विभाग ने आज से अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। वहीं उत्तर छत्तीसगढ़ के एक-दो जिलों में गरज-चमक के साथ वज्रपात होने की चेतावनी भी जारी की गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, राजधानी रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कोरिया, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, जशपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, कबीरधाम, बेमेतरा, राजनांदगांव और कांकेर समेत कई जिलों में आज बारिश होने के आसार हैं। कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ बिजली गिरने की भी संभावना है।

राजधानी रायपुर की बात करें तो आज पूरे दिन बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। दोपहर या शाम के समय गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। शहर का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। 

बीते 24 घंटे के दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। इस दौरान रायपुर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मौसम विभाग के अनुसार, इस सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय निम्न दबाव का क्षेत्र, समुद्र तल पर बनी मानसूनी द्रोणिका और अरब सागर से लेकर पूर्वी भारत तक फैली मौसमी प्रणाली के संयुक्त प्रभाव से छत्तीसगढ़ में अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। 

मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों, खेतों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। यदि जरूरी काम न हो तो खराब मौसम में यात्रा करने से बचें और मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर बनाए रखें।

ब्रेकिंग : पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर पदोन्नति, 61 सब इंस्पेक्टर बने इंस्पेक्टर, देखें लिस्ट..!!

ब्रेकिंग : पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर पदोन्नति, 61 सब इंस्पेक्टर बने इंस्पेक्टर, देखें लिस्ट..!!

 रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में बड़ पैमाने पर पदोन्नति आदेश जारी किया गया है। छत्तीसगढ़ पुलिस के 61 सब इंस्पेक्टर को इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया है। सभी 2013 बैच के सब इंस्पेक्टर हैं। यह आदेश DGP अरुण देव गौतम ने जारी किया है। पदस्थापना आदेश बाद में जारी किया जाएगा।

देखें लिस्ट….

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने की घोषणा, पंडवानी गायिका तीजन बाई के नाम पर दिया जाएगा राज्यस्तरीय पुरस्कार….

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने की घोषणा, पंडवानी गायिका तीजन बाई के नाम पर दिया जाएगा राज्यस्तरीय पुरस्कार….

 रायपुर। पंडवानी की महान गायिका स्वर्गीय तीजन बाई को श्रद्धांजलि देने के लिए रायपुर में आयोजित सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रदेश के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने स्वर्गीय तीजन बाई को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके कला जगत में दिए गए अतुलनीय योगदान को याद किया।

कार्यक्रम के दौरान संस्कृति मंत्री ने तीजन बाई के परिजनों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक भी प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने तीजन बाई की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। मंत्री राजेश अग्रवाल ने घोषणा की कि अब पंडवानी कला के क्षेत्र में स्वर्गीय तीजन बाई के नाम पर राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही तीजन बाई के पैतृक गांव गनियारी का समग्र विकास किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी विरासत से जुड़ सकें।

संस्कृति मंत्री अग्रवाल ने कहा कि तीजन बाई द्वारा उपयोग किया गया ऐतिहासिक तंबूरा अब घासीदास संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा। संस्कृति विभाग उनकी स्मृतियों, कला और योगदान को सहेजने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास करेगा। कार्यक्रम में मौजूद कलाकारों, साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों ने भी पंडवानी गायिका स्व. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया की त्वरित पहल से आकाशीय बिजली से मृत व्यक्ति के परिजनों को मिली 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया की त्वरित पहल से आकाशीय बिजली से मृत व्यक्ति के परिजनों को मिली 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता

 रायपुर :- मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के गृह निवास बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में प्रस्तुत आवेदन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आकाशीय बिजली गिरने से मृत व्यक्ति के आश्रित को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। इस पहल से पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है और शासन की संवेदनशील कार्यप्रणाली का एक और उदाहरण सामने आया है।

जानकारी के अनुसार, आकाशीय बिजली गिरने से हुई मृत्यु के बाद मुआवजा राशि लंबित होने पर मृतक के परिजनों ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया में आवेदन प्रस्तुत कर आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के पालन में राजस्व विभाग द्वारा प्रकरण का परीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने मृतक के आश्रित  संजय कुजूर, ग्राम झिक्की, तहसील बगिया, जिला जशपुर के पक्ष में 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत करने की अनुशंसा कलेक्टर जशपुर को भेजी। आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर प्रदान की गई।आर्थिक सहायता मिलने से मृतक के परिजनों को कठिन समय में संबल मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन देने के बाद उनके मामले पर तत्काल संज्ञान लिया गया और शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित होने से उन्हें समय पर आर्थिक सहायता प्राप्त हो सकी।

उल्लेखनीय है कि बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी केंद्र बनकर उभरा है। यहां प्राप्त आवेदनों पर प्राथमिकता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, जिससे जरूरतमंदों को समय पर राहत मिल रही है और शासन के प्रति आमजन का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

तेन्दूपत्ता संग्राहकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध – वन मंत्री केदार कश्यप

तेन्दूपत्ता संग्राहकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध – वन मंत्री केदार कश्यप

 रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने 7.14 लाख से अधिक तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 162.32 करोड़ की प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) राशि का वितरण किया है। राज्य में वर्तमान में तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर को 4,000 रुपए से बढ़ाकर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है, जिससे संग्राहक परिवारों को सीधा आर्थिक संबल मिल रहा है।  तेन्दूपत्ता का संग्रहण दर 5,500  रुपए प्रति मानक बोरा होने से संग्राहक परिवारों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा है कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार तेन्दूपत्ता संग्राहकों, वनवासियों और आदिवासी परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जंगल से जुड़े प्रत्येक श्रमिक को उसके श्रम का उचित सम्मान मिले और पारिश्रमिक समय पर सीधे उसके बैंक खाते में पहुंचे।

वर्ष 2023 के प्रोत्साहन पारिश्रमिक का वितरण शुरू
            
वन मंत्री  केदार कश्यप ने बताया कि विगत 3 जुलाई को सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय द्वारा वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के प्रोत्साहन पारिश्रमिक वितरण का शुभारंभ किया गया। इसके तहत प्रदेश की 621 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों से जुड़े 7,14,446 तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 162.32 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। भुगतान की प्रक्रिया तेजी से जारी है और शीघ्र पूरी कर ली जाएगी।

संग्रहण पारिश्रमिक का समय पर ऑनलाइन भुगतान
               
वन मंत्री ने बताया कि सरकार ने संग्रहण सत्र 2026 में भी तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है। प्रदेश के लगभग 11.15 लाख संग्राहकों को 734.25 करोड़ रुपए की संग्रहण पारिश्रमिक राशि ऑनलाइन माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे लाखों वनवासी और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है।

पारदर्शी और तकनीक आधारित भुगतान व्यवस्था
        
 केदार कश्यप ने कहा कि तेन्दूपत्ता प्रदेश के लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। इसलिए राज्य सरकार संग्रहण से लेकर भुगतान तक पूरी व्यवस्था को पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बना रही है, ताकि संग्राहकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

वनवासियों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
              
वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सर्वाेच्च प्राथमिकता है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समय पर पारिश्रमिक और प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराना इसी सोच का परिणाम है। आने वाले समय में भी सरकार वनवासियों के हितों की रक्षा, उनकी आय में वृद्धि तथा वन आधारित आजीविका को और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

कर्मचारियों की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल

कर्मचारियों की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल

 रायपुर :- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन के सभागार में राज्य के शासकीय सेवकों के लिए वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना के ब्रोशर का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने इसे कर्मचारी कल्याण, सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य शासकीय सेवकों को आकस्मिक परिस्थितियों में सम्मानजनक, त्वरित और सहज वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शासकीय सेवक राज्य के विकास की रीढ़ हैं। जब कर्मचारी आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर कार्य करेंगे, तभी शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों को आकस्मिक आवश्यकताओं के लिए निजी साहूकारों अथवा ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेने की विवशता का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की है, जिसके माध्यम से वे बिना अनावश्यक कागजी प्रक्रिया के अपनी पात्रता के अनुसार अल्पावधि ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग करते हुए इस सुविधा को ई-कोष प्रणाली से एकीकृत किया है। यह व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल, पेपरलेस, सुरक्षित और पारदर्शी है तथा इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं आएगा। उन्होंने इस अभिनव पहल के लिए वित्त विभाग की टीम को बधाई देते हुए सभी शासकीय सेवकों से विकसित छत्तीसगढ़ और सुशासन के संकल्प को आगे बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों और कर्मचारी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू करने के बाद अब वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना प्रारंभ की गई है, जिससे तात्कालिक आवश्यकताओं के लिए बिना ब्याज वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि पायलट चरण के मात्र दो माह में 73 हजार से अधिक कर्मचारियों ने पंजीयन कराया है तथा 27 हजार कर्मचारी इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। भविष्य में बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर अधिक राशि के ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने की भी योजना है।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संघ के प्रांतीय संयोजक  कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना कर्मचारियों की लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता को पूरा करेगी तथा आकस्मिक परिस्थितियों में उन्हें सम्मानजनक और त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी।

उल्लेखनीय है कि यह सुविधा ई-कोष प्रणाली से एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होगी। कर्मचारी ई-कोष के एम्प्लॉयी कॉर्नर से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण एवं सहमति की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ऋण स्वीकृति एवं वितरण त्वरित रूप से किया जाएगा। वित्त विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार पूरी व्यवस्था में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता तथा डिजिटल प्रमाणीकरण के उच्च मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है।

कार्यक्रम में मुख्य सचिव  विकासशील, वित्त विभाग के विशेष सचिव  चंदन कुमार, लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश बंसल, संचालक (बजट एवं वित्त)  ऋषभ पराशर, छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष  चंद्रकांत पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में ईवी चार्जिंग नेटवर्क को मिलेगा बूस्ट, सरकार लाएगी एकीकृत एप

छत्तीसगढ़ में ईवी चार्जिंग नेटवर्क को मिलेगा बूस्ट, सरकार लाएगी एकीकृत एप

 रायपुर :- छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेज़ी से बढ़ाने का फैसला लिया है। मंत्रालय में सचिव सह-परिवहन आयुक्त एस प्रकाश की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में परिवहन विभाग, सभी आरटीओ/डीटीओ, ऊर्जा विभाग, एचपीसीएल, बीपीसीएल,  एलओसीएल, जिओ -बीपी, ईवी निर्माता और विशेषज्ञ मौजूद रहे।  
          
अभी अलग-अलग कंपनियों के अलग-अलग एप हैं, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी होती है। सरकार अब राज्य स्तर पर एकीकृत प्लेटफॉर्म/एप बनाएगी। भारत सरकार भी यूनिवर्सल ईवी चार्जिंग एप ला रही है। चिप्स के जरिए ऊर्जा विभाग पहले ही पायलट एप पर काम कर रहा है। केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत चार्जिंग स्टेशन लगाने पर वित्तीय सहायता और छत्तीसगढ़ ईवी नीति-2022 के प्रोत्साहनों पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी जिलों के आरटीओ/डीटीओ को अपने क्षेत्र में चार्जिंग स्टेशनों के लिए जगह चिन्हित करने और एनओसी  की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए।
          
एचपीसीएल, बीपीसीएल,  एलओसीएल, जिओ -बीपी के निर्माताओं ने राज्य में लगे और प्रस्तावित चार्जिंग स्टेशनों की जानकारी दी और आगे विस्तार की योजना बताया। सचिव सह-परिवहन आयुक्त ने कहा कि ईवी चार्जिंग का मजबूत नेटवर्क बनाना और लोगों को समय पर जानकारी देना जरूरी है। इससे हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और प्रदूषण कम होगा। छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य राज्यभर में आसान और सुलभ चार्जिंग सुविधा देकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को ईवी अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर पंडवानी कला के क्षेत्र में प्रतिवर्ष राज्य सम्मान की घोषणा

पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर पंडवानी कला के क्षेत्र में प्रतिवर्ष राज्य सम्मान की घोषणा

 रायपुर- छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने वाली पंडवानी की महान साधिका, पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई को बुधवार को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर के मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित भव्य सांगीतिक श्रद्धांजलि समारोह में भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। लोककला, साहित्य और संस्कृति जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में स्व. तीजन बाई के जीवन, साधना और उनके अद्वितीय योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की प्रेरणा एवं मंशा के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने घोषणा की कि पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर पंडवानी कला के क्षेत्र में प्रतिवर्ष राज्य सम्मान प्रदान किया जाएगा। उनके जन्मस्थल गनियारी ग्राम को कलाग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा तथा उनके प्रिय तंबूरे को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में संरक्षित एवं प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा ले सकें।

कार्यक्रम में मंत्री  राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय तीजन बाई की पुत्रवधु मती वेणु देशमुख को एक लाख रुपये की सहायता राशि का चेक भी प्रदान किया। इस अवसर पर मती वेणु देशमुख ने श्रद्धांजलि समारोह के आयोजन के लिए संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल तथा संस्कृति विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरी लोककला परंपरा का सम्मान है।

इस अवसर पर मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि स्वर कभी मौन नहीं होते। वे समय की सीमाओं को लांघकर युगों तक जनमानस की चेतना में गूंजते रहते हैं। पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का स्वर छत्तीसगढ़ की लोकआत्मा का अमर नाद है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, परंपरा और लोकगौरव से सदैव जोड़ता रहेगा। वे केवल एक महान लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की सजीव पहचान थीं। राज्य को उन पर सदैव गर्व रहेगा और उनकी अमर लोकधुने हमारी    सांस्कृतिक चेतना में अनवरत गूंजती रहेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है तथा तीजन बाई की स्मृति में की गई घोषणाएं इसी संकल्प का विस्तार हैं।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री  राजेश अग्रवाल, संस्कृति विभाग के सचिव  एस. भारतीदासन तथा संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने स्वर्गीय तीजन बाई के जीवन और कला यात्रा पर आधारित विशेष ब्रोशर का विमोचन किया। सभी अतिथियों ने स्वर्गीय तीजन बाई के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। संस्कृति विभाग द्वारा उनके जीवन पर आधारित वृत्तचित्र का भी प्रदर्शन किया गया, जिसे उपस्थित जनों ने भावुक होकर देखा।

सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत लोक कलाकार पुष्पा निषाद के पंडवानी गायन से हुई। इसके बाद स्वर्गीय तीजन बाई की शिष्याएं तरूणा साहू और आराध्या साहू तथा दुर्गा साहू ने कापालिक शैली में प्रभावशाली पंडवानी प्रस्तुति देकर अपनी गुरु को श्रद्धासुमन अर्पित किए।  दुष्यंत द्विवेदी ने वेदमती शैली में पंडवानी गायन प्रस्तुत कर कार्यक्रम को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने स्वर्गीय तीजन बाई से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व और कला साधना को याद किया। अनेक वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। इस अवसर पर कलाकारों ने स्वर्गीय तीजन बाई को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किए जाने तथा उनके नाम पर पंडवानी एवं सांस्कृतिक विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग भी राज्य सरकार के समक्ष रखी।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष  प्रभात मिश्रा, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष  शशांक शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सु मोना सेन, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष  अमरजीत छाबड़ा, बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्रकार, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष  सलीम राज, यूसीसी सदस्य  मोहन पवार सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

साहित्य जगत से डॉ. पी.सी. लाल यादव,  परदेशीराम वर्मा, डॉ. सुशील त्रिवेदी तथा कला जगत से पद्म ममता चंद्राकर, पद्म भारती बंधु, पद्म उषा बारले, पद्म राधेश्याम बारले, मीर अली मीर, निर्मला ठाकुर, मोक्षदा चंद्राकर,  सुनील सोनी, किरण शर्मा, कविता वासनिक, राकेश तिवारी, सरस्वती बारले, वंदना बारले, दुर्गा साहू, इतिहासकार आचार्य रमेन्द्रनाथ मिश्र, अशोक तिवारी, छत्तीसगढ़ी वाद्ययंत्रों के संग्रहकर्ता रिखी क्षत्रीय, चेतन देवांगन, रत्ना पांडे तथा सुधीर शर्मा सहित बड़ी संख्या में कलाकार और साहित्यकार उपस्थित रहे। मंच का संचालन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष  प्रभात मिश्रा तथा  अरुण निर्मलकर ने किया।
समारोह के अंत में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सु मोना सेन ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई ने अपने स्वर से केवल पंडवानी को नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व मंच तक पहुंचाया। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनकी लोककला, उनकी परंपरा और उनके मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। आज यहां उपस्थित प्रत्येक कलाकार, साहित्यकार और संस्कृति प्रेमी की सहभागिता उनके प्रति सामूहिक सम्मान का प्रतीक है। संस्कृति विभाग और राज्य सरकार इस अमूल्य विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी। महान कलाकार भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न रहें, लेकिन उनकी कला, उनकी साधना और उनकी सांस्कृतिक विरासत सदैव समाज की चेतना में जीवित रहती है। स्वर्गीय पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का अमर स्वर भी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और छत्तीसगढ़ की लोकधारा में अनवरत गूंजता रहेगा।