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हर बूंद की होगी सुरक्षा, ‘कैच द रेन’ अभियान से जल संरक्षण बनेगा देशव्यापी जनआंदोलन

हर बूंद की होगी सुरक्षा, ‘कैच द रेन’ अभियान से जल संरक्षण बनेगा देशव्यापी जनआंदोलन

 नई दिल्ली। देश में जल संकट से निपटने और वर्षा जल को बचाने के उद्देश्य से ‘कैच द रेन’ अभियान को एक बार फिर तेज गति दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से अपील की है कि बारिश की हर बूंद को संरक्षित करना सभी की जिम्मेदारी है और जल संरक्षण को जनभागीदारी से बड़ा अभियान बनाया जाना चाहिए। इस अभियान के तहत घरों, आवासीय क्षेत्रों और संस्थानों में वर्षा जल संचयन व्यवस्था लगाने, रिचार्ज पिट बनाने, पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और तालाबों की क्षमता बढ़ाने जैसे कार्यों पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही भूजल स्तर सुधारने के लिए पौधरोपण और स्थानीय जल संरचनाओं के संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार के अनुसार, ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तहत देशभर में लाखों भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इस पहल में पंचायतों, शहरी निकायों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि, जल संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि हर नागरिक का अभियान बनना चाहिए। वैज्ञानिक उपायों और सामूहिक प्रयासों से वर्षा जल को बचाकर भविष्य की जल जरूरतों को सुरक्षित किया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि, जल संरक्षण के जरिए कृषि, ग्रामीण विकास और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा को मजबूत बनाया जाए।

अमित शाह ने कोलकाता में ‘म्यूजियम ऑफ वर्ड’ का किया उद्घाटन, बोले- भाषा के बिना संस्कृति अधूरी

अमित शाह ने कोलकाता में ‘म्यूजियम ऑफ वर्ड’ का किया उद्घाटन, बोले- भाषा के बिना संस्कृति अधूरी

 कोलकाता। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को कोलकाता में नेशनल लाइब्रेरी और नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम द्वारा बनाए ‘म्यूजियम ऑफ वर्ड’ के पहले फेज का लोकार्पण किया। इस दौरान एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक पुनरुत्थान की इसी मूल कमी को कोलकाता का ये संग्रहालय (म्यूजियम ऑफ वर्ड) पूरा करेगा, इसका मुझे पूरा विश्वास है।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश या प्रदेश की संस्कृति की अभिव्यक्ति भाषा के बिना संभव ही नहीं हो सकती और भाव से उत्पन्न शब्दों के बिना भाषा बन ही नहीं सकती। जब तक हमारी आने वाली पीढ़ियां यह नहीं जानेंगी कि भाषा शब्दों से बनती है, शब्द भाव से उत्पन्न होते हैं और भाषा के माध्यम से संस्कृति की अभिव्यक्ति होती है, तब तक इस देश का सांस्कृतिक पुनरुत्थान संभव नहीं हो सकता। आज देशभर की भाषाओं और संस्कृति के लिए बहुत बड़ा दिन है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का जो संकल्प लिया है, उस दिशा में आज महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया गया।

उन्होंने कहा कि आज एक प्रकार से देशभर की भाषाओं और देश की संस्कृति के लिए बहुत बड़ा दिन है। क्योंकि आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का जो संकल्प लिया है, उसका महत्वपूर्ण पड़ाव आज पार कर रहे हैं। किसी भी देश की और किसी प्रदेश की संस्कृति भाषा के बिना संभव हो ही नहीं सकती और भाव से उत्पन्न शब्दों के बगैर भाषा बन ही नहीं सकती है।

अमित शाह ने कहा कि जब पाणिनि ने व्याकरण की रचना की, तब उनके एक शिष्य ने पूछा कि इतना बड़ा व्याकरण का ढांचा बनाने का उद्देश्य क्या है? तब पाणिनि ने कहा था- मनुष्य के भाव से शब्द की उत्पत्ति होती है, व्याकरण शब्दों को बांधता है, शुद्ध और भावपूर्ण उच्चारण वाक्य को अर्थ देता है, और अर्थयुक्त वाक्यों का समूह भाषा की संरचना करता है। यही भाषा सदियों तक संस्कृति की वाहक बनकर समस्त जीवों का कल्याण करती है। परंतु हमारी जो विरासत है, उसे आगे बढ़ाने में किसी को कोई शर्म नहीं आनी चाहिए, लेकिन हमारे विशाल विचारों की व्याख्या ऐसी कर दी गई कि हम दूसरों में ही गौरव करते चले गए और अपने विचारों को भूल गए।

उन्होंने कहा कि ये ‘शब्द संग्रहालय’ हमारी भाषाओं और संस्कृति से चिरकाल तक आने वाली पीढ़ियों को परिचित कराएगा, शिक्षित करेगा और उन्हें जीवन जीने का तरीका भी सिखाएगा। संकुचितता भारतीय संस्कृति का कदापि चिन्ह नहीं बन सकती। हम तो भूमि पूजन के समय जब शांति मंत्र का उच्चारण करते हैं, तब पशुओं और वनस्पतियों के साथ-साथ पूरे ब्रह्मांड के लिए शांति की कामना करते हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि हम तो इस देश के वासी हैं, जहां ऋग्वेद में कहा गया है कि सभी दिशाओं से हमारे पास कल्याणकारी व शुभ विचार आते रहें, जो किसी से दबे नहीं, जिन्हें कोई बाधित न कर सके और उन्हीं के आधार पर हम अपने सामाजिक जीवन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।

भारत का केमिस्ट्री ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन, 4 गोल्ड मेडल के साथ हासिल की संयुक्त टॉप रैंक

भारत का केमिस्ट्री ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन, 4 गोल्ड मेडल के साथ हासिल की संयुक्त टॉप रैंक

 नई दिल्ली। इंटरनेशनल केमिस्ट्री ओलंपियाड (IChO) 2026 में भारत ने इतिहास रचते हुए अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। भारतीय टीम के सभी चारों सदस्यों ने गोल्ड मेडल जीतकर देश को संयुक्त रूप से टॉप रैंक दिलाई। भारत के साथ चीन, वियतनाम और रूस के एक व्यक्तिगत प्रतिभागी ने भी संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया। 58वां इंटरनेशनल केमिस्ट्री ओलंपियाड 10 से 19 जुलाई तक उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में आयोजित किया गया था। इस प्रतियोगिता में दुनिया के 93 देशों के 363 छात्रों ने हिस्सा लिया। यह IChO में भारत की 27वीं भागीदारी थी और इस बार का प्रदर्शन देश के लिए अब तक का सबसे बेहतरीन रहा।

भारत की ओर से गोल्ड मेडल जीतने वाले छात्रों में ओडिशा के भुवनेश्वर निवासी देबदत्त प्रियदर्शी, पंजाब के मंडी गोबिंदगढ़ के हर्षित सिंघल, दिल्ली के कबीर छिल्लर और तेलंगाना के हैदराबाद निवासी संदीप कुची शामिल हैं। भारतीय टीम का नेतृत्व IISER कोलकाता के हेड मेंटर प्रो. सुभाजीत बंद्योपाध्याय और होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन (HBCSE) की मेंटर डॉ. इंद्राणी दास सेन ने किया। टीम के साथ वैज्ञानिक पर्यवेक्षक के रूप में IIT खड़गपुर के डॉ. अनुबेंदु अधिकारी और NES रत्नम कॉलेज, मुंबई की डॉ. जयश्री गोपालकृष्णन भी मौजूद रहीं।

इंटरनेशनल केमिस्ट्री ओलंपियाड दुनिया भर के सेकेंडरी स्कूल छात्रों के लिए रसायन विज्ञान की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से एक है। इसकी शुरुआत 1968 में हुई थी, जिसमें छात्रों की सैद्धांतिक और प्रायोगिक क्षमता का परीक्षण किया जाता है। भारत वर्ष 1999 से इस प्रतियोगिता में भाग ले रहा है। देश में चयन और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के अंतर्गत होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन (HBCSE) संभालता है।

2026 के आयोजन से पहले भारत IChO में 31 गोल्ड, 55 सिल्वर और 18 ब्रॉन्ज मेडल जीत चुका था। वर्ष 2025 में भारत ने दो गोल्ड और दो सिल्वर मेडल हासिल किए थे, लेकिन इस बार चारों प्रतिभागियों के गोल्ड जीतने के साथ भारत ने नया रिकॉर्ड बनाया। HBCSE ने इस उपलब्धि के लिए नेशनल स्टीयरिंग कमिटी, शिक्षक संगठनों, केमिस्ट्री ओलंपियाड सेल से जुड़े विशेषज्ञों और सभी सहयोगी संस्थानों का आभार जताया। साथ ही डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (DAE), डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) और शिक्षा मंत्रालय (MoE) के वित्तीय सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया।

प्राइवेट स्पेस सेक्टर में भारत की ऐतिहासिक छलांग, विक्रम-1 लॉन्च से दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंचा देश

प्राइवेट स्पेस सेक्टर में भारत की ऐतिहासिक छलांग, विक्रम-1 लॉन्च से दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंचा देश

 श्रीहरिकोटा। भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 18 जुलाई को स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट की सफल लॉन्चिंग के साथ भारत निजी क्षेत्र से ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे दो पूर्व ISRO वैज्ञानिकों पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका की वर्षों की मेहनत और दूरदृष्टि है। दोनों ने 2018 में मिलकर स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना की थी और निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की नई पहचान बनाने की दिशा में काम शुरू किया।

विक्रम-1 की सफल उड़ान भारत के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि यह किसी निजी भारतीय कंपनी द्वारा विकसित पहला ऑर्बिटल रॉकेट मिशन है। इससे देश के स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियों के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खुल गए हैं। पवन चंदाना और नागा भरत डाका पहले ISRO में वैज्ञानिक के रूप में काम कर चुके हैं। अंतरिक्ष मिशनों के अनुभव को आधार बनाकर उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस को खड़ा किया और भारत के निजी स्पेस उद्योग को नई दिशा दी।

हैदराबाद स्थित इस स्टार्टअप ने कुछ ही वर्षों में भारत के पहले स्पेस यूनिकॉर्न के रूप में पहचान बनाई। विक्रम-1 की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि भारत का निजी क्षेत्र भी अत्याधुनिक अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम है। इस उपलब्धि के साथ भारत अमेरिका और अन्य प्रमुख अंतरिक्ष देशों की कतार में निजी ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता रखने वाले देशों में शामिल हो गया है।

मंगल पांडे की वीरता को पीएम मोदी ने किया याद, बोले- उनका बलिदान हर भारतीय को देता रहेगा प्रेरणा

मंगल पांडे की वीरता को पीएम मोदी ने किया याद, बोले- उनका बलिदान हर भारतीय को देता रहेगा प्रेरणा

 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान क्रांतिकारी मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहस, देशभक्ति और बलिदान को नमन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि, स्वतंत्रता संग्राम के इस वीर योद्धा का योगदान भारतीय इतिहास में हमेशा अमर रहेगा और उनकी शौर्यगाथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश जारी करते हुए कहा कि, मंगल पांडे ने मातृभूमि के सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष देश में स्वतंत्रता की भावना जगाने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मंगल पांडे की भूमिका ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ लोगों में नई ऊर्जा और साहस का संचार किया। उनका अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि, मंगल पांडे का जीवन युवाओं को देश सेवा, एकता और जिम्मेदारी का संदेश देता है। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि महान क्रांतिकारियों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान दें। मंगल पांडे का नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में वीरता और बलिदान के प्रतीक के रूप में हमेशा याद किया जाता रहेगा।

यूक्रेन के ड्रोन हमले से रूस में मचा हड़कंप, वेयरहाउस और तेल डिपो को बनाया निशाना

यूक्रेन के ड्रोन हमले से रूस में मचा हड़कंप, वेयरहाउस और तेल डिपो को बनाया निशाना

 मास्को। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में ड्रोन हमलों का सिलसिला तेज होता जा रहा है। शनिवार तड़के यूक्रेन की ओर से किए गए बड़े ड्रोन हमले में रूस के तांबोव क्षेत्र के कोटोव्स्क शहर में एक लॉजिस्टिक्स सेंटर को नुकसान पहुंचा। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 25 लोग घायल हुए हैं। तांबोव के गवर्नर येवगेनी पेर्विशोव ने बताया कि, हमला ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज के वेयरहाउस पर हुआ। मृतक सभी कर्मचारी नाइट शिफ्ट में काम कर रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, हमले के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया और आग पर नियंत्रण पा लिया गया।

रूसी प्रशासन ने दावा किया कि, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 28 यूक्रेनी ड्रोन को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले नष्ट कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि यदि सभी ड्रोन सफल होते तो नुकसान और अधिक बड़ा हो सकता था। इसके अलावा मॉस्को क्षेत्र के नोगिंस्क शहर में भी ड्रोन मलबे के कारण एक तेल डिपो में आग लग गई। घटना में दो लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। सुरक्षा कारणों से पास के अस्पताल को कुछ समय के लिए खाली कराया गया। रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जारी युद्ध में अब ड्रोन हमले दोनों देशों की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हाल के समय में ऐसे हमलों की संख्या लगातार बढ़ी है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।

अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: सातवें हमले के बाद ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन अटैक का दावा

अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: सातवें हमले के बाद ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन अटैक का दावा

 तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब और गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका की ओर से लगातार सातवें दौर के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, उसने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरानी सेना ने बताया कि, यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन लाइटनिंग’ के तहत की गई, जिसमें ड्रोन के जरिए कई अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए गए। ईरान का दावा है कि कुवैत के कुछ सैन्य क्षेत्रों, जॉर्डन के एयर बेस और बहरीन में अमेरिकी ड्रोन सुविधाओं को निशाना बनाया गया।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी दावा किया कि, उसके अभियान में अमेरिकी ड्रोन स्टोरेज सेंटर को नुकसान पहुंचा और कई ड्रोन नष्ट किए गए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इससे पहले अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सातवें सैन्य अभियान की घोषणा करते हुए कहा था कि, उसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ये कार्रवाई शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर की गई। दोनों देशों के बीच बढ़ती जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व में तनाव और गहराने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि, लगातार हो रहे हमले क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक बाजारों पर भी असर डाल सकते हैं।

यहां पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका, 8 लोगों की मौत, 15 से ज्यादा घायल

यहां पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका, 8 लोगों की मौत, 15 से ज्यादा घायल

 अहमदाबाद।  गुजरात के अहमदाबाद शहर में शनिवार दोपहर एक पटाखा निर्माण इकाई में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस दुर्घटना में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 से अधिक लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

धमाके के बाद फैक्ट्री में तेजी से फैली आग

यह घटना शहर के वस्त्राल क्षेत्र के पास रामोल-गतराद रोड स्थित महमूदपुरा इलाके में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फैक्ट्री में अचानक तेज धमाका हुआ, जिसके बाद आग ने कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। पटाखों का भंडारण होने के कारण आग तेजी से फैल गई और हालात गंभीर हो गए।

राहत और बचाव अभियान

सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और लंबे प्रयास के बाद आग पर काबू पाया गया। बचाव अभियान में स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों ने भी सहयोग किया। आग बुझने के बाद मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

मौके पर पहुंचे अधिकारी

हादसे की सूचना मिलने के बाद अहमदाबाद के महापौर हितेश बारोट और नगर निगम आयुक्त बच्छा निधि पानी घटनास्थल पहुंचे और राहत कार्यों का जायजा लिया। महापौर ने बताया कि सभी घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस स्थान पर फैक्ट्री संचालित की जा रही थी, वह अस्थायी ढांचे जैसा प्रतीत होता है। हादसे के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी।

लाइसेंस रद्द होने के बावजूद संचालन का आरोप

संयुक्त पुलिस आयुक्त जयपाल सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही निरस्त किया जा चुका था। इसके बावजूद वहां कथित रूप से अवैध तरीके से काम जारी था। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

फायर विभाग का बयान

 चीफ फायर ऑफिसर अमित डोगरे ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंच गई थी और आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है। उन्होंने कहा कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है और घायलों का इलाज जारी है।फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। मृतकों की पहचान और हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बद्रीनाथ दान चोरी केस में बड़ा खुलासा, पूर्व अधिकारी के घर से विदेशी मुद्रा बरामद

बद्रीनाथ दान चोरी केस में बड़ा खुलासा, पूर्व अधिकारी के घर से विदेशी मुद्रा बरामद

चमोली। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि बद्रीनाथ धाम इलाके में बद्रीनाथ मंदिर के पूर्व अधिकारी राजेंद्र चौहान के ठिकानों पर उत्तराखंड पुलिस की रेड में महंगे केसर और दूसरे सामान के साथ विदेशी करेंसी भी मिली हैं।यह रेड चौहान की गिरफ्तारी के बाद मिली जानकारी के आधार पर की गई, जो मंदिर में कथित दान चोरी मामले में मुख्य आरोपी है। चौहान को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने करीब चार घंटे की पूछताछ के बाद दिन में पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। CCTV फुटेज में कथित तौर पर चौहान को 22 जून, 25 जून और 29 जून को कैश के बंडल इकट्ठा करके अपनी जेब में रखते हुए दिखाया गया है, जिसके बाद SIT ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया।

रेड पर अपडेट देते हुए,
SIT इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर महादेव उनियाल ने कहा, “केसर और कुछ दूसरे सामान बरामद हुए हैं। विदेशी करेंसी भी मिली हैं। जहां तक ​​कैश की बात है, आरोपी सहयोग नहीं कर रहा है।”चौहान को आगे की जांच के लिए शनिवार, 18 जुलाई को कोर्ट में पेश किया जाएगा। उत्तराखंड पुलिस ने गुरुवार को बताया कि यह कदम बद्रीनाथ मंदिर में कथित दान की चोरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी (BKTC) की तैयार की गई 18 पेज की इंटरनल जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उठाया गया है। साथ ही, नए CCTV फुटेज से SIT को मामले में और संदिग्धों की पहचान करने में मदद मिली है।छुट्टियां व मौसमी आयोजन हाई कोर्ट उत्तराखंड पुलिस के मुताबिक, BKTC ने मंदिर के दान की कथित चोरी की चल रही जांच के तहत अपनी 18 पेज की इंटरनल जांच रिपोर्ट SIT को सौंप दी है।

पुलिस ने पहले कहा था
SIT ने 29 जून और 2 जुलाई के CCTV फुटेज पूरी तरह से रिकवर कर लिए हैं, जिनकी जांच होनी थी। SIT ने 22 जून और 25 जून के CCTV फुटेज रिकवर किए थे, जिनका जांच के हिस्से के तौर पर पहले ही एनालिसिस किया जा चुका है। 14 जुलाई को, बद्रीनाथ मंदिर में कथित दान की चोरी की जांच के लिए बनाई गई एक कमेटी ने बद्रीनाथ धाम का दौरा किया और दान को कैसे हैंडल और ट्रांसपोर्ट किया जाता है, इस प्रोसेस और काउंटिंग रूम के अंदर के इंतज़ामों का रिव्यू किया। इस बीच, बद्रीनाथ दान चोरी मामले की जांच कर रही SIT ने मंदिर के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) सोहन सिंह रांगड़ और उनके पर्सनल असिस्टेंट अतुल डिमरी से पूछताछ की, ताकि निगरानी में कमियों की जांच की जा सके। साथ ही, जांच करने वाले मंदिर के CCTV कंट्रोल रूम में घुस गए, और ऑपरेशनल लॉग को सिस्टमैटिक तरीके से रिव्यू किया और यह ट्रैक किया कि रोज़ाना दान कैसे हैंडल किया जाता था।

20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र, सरकार-विपक्ष के बीच घमासान तय, सांसदों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी

20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र, सरकार-विपक्ष के बीच घमासान तय, सांसदों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी

 नई दिल्ली। देश की संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करने की तैयारी में है, जिनका असर चुनावी व्यवस्था, आरक्षण और प्रशासनिक ढांचे पर पड़ सकता है। वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, NEET पेपर लीक और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। वहीं सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा सचिवालय ने सांसदों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें संसद परिसर के भीतर सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से कई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

स्मार्ट डिवाइस को लेकर सावधानी

सचिवालय ने कहा है कि आजकल बाजार में उपलब्ध स्मार्ट ग्लास, पेन कैमरा, स्मार्ट वॉच और अन्य रिकॉर्डिंग क्षमता वाले उपकरण सुरक्षा और गोपनीयता के लिए चुनौती बन सकते हैं। ऐसे उपकरण संसदीय कार्यवाही की गोपनीयता और विशेषाधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए सांसदों से इनका जिम्मेदारी से उपयोग करने का अनुरोध किया गया है।

संसद परिसर में इन गतिविधियों से बचने की सलाह

लोकसभा सचिवालय ने सांसदों से अपील की है कि वे संसद भवन परिसर में

  • धरना, प्रदर्शन या नारेबाजी न करें।
  • पोस्टर, बैनर और तख्तियां लेकर न आएं।
  • AI से तैयार आपत्तिजनक तस्वीरों या नारों का प्रदर्शन न करें।
  • किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन या अनशन से परहेज करें।
  • हथियार, लाठी, तलवार, भाला या अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं परिसर में न लाएं।

सचिवालय का कहना है कि इन निर्देशों का उद्देश्य संसद परिसर में आवागमन सुचारु रखना और सदन की कार्यवाही बिना किसी बाधा के संचालित करना है।

पहले भी बाधित होती रही है कार्यवाही

पिछले कई संसदीय सत्रों में विरोध-प्रदर्शन, नारेबाजी और पोस्टरबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार प्रभावित हुई थी। कई मौकों पर हंगामे के चलते कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी। बजट सत्र के दौरान निलंबित सांसदों द्वारा संसद परिसर में किए गए विरोध प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया है। इस बार भी सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर आमने-सामने होने की संभावना है। ऐसे में मानसून सत्र के हंगामेदार रहने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।

Breaking  पुरी रथ यात्रा में भारी भीड़ से भगदड़ जैसी स्थिति, एक की मौत, कई श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती

Breaking पुरी रथ यात्रा में भारी भीड़ से भगदड़ जैसी स्थिति, एक की मौत, कई श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती

 पूरी। ओडिशा के पुरी में गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस घटना में कई श्रद्धालु घायल हो गए। एक श्रद्धालु की मौत की भी खबर है।

जमा हुए हैं लाखों श्रद्धालु
यह घटना बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) पर हुई, जहां भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ खींचने के कार्यक्रम को देखने के लिए लाखों श्रद्धालु जमा हुए थे।

बचाव अभियान शुरू किया गया
आपातकालीन बचाव दलों ने घायलों को तुरंत बाहर निकाला और पास के अस्पतालों में पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग और स्वास्थ्य कर्मियों ने तुरंत बचाव और भीड़ को नियंत्रित करने का अभियान शुरू किया, ताकि स्थिति सामान्य की जा सके।

चश्मदीद ने क्या बताया?

  • पुरी में घटनास्थल पर मौजूद एक श्रद्धालु ने बताया कि मरीचि कुंड चौक के पास या तो बाहरी घेरे की रस्सी की बैरिकेड गिर गई या कुछ लोग अपना संतुलन खो बैठे और सड़क पर गिर गए।
  • उन्होंने बताया कि उन्होंने लगभग 40 से 50 लोगों को एक-दूसरे के ऊपर गिरते देखा, जिससे कई श्रद्धालु घायल हो गए और चार से पांच को गंभीर चोटें आई हैं।
  • उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने लगभग 20 लोगों को बचाया और उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया, और अब उन्हें पता चला है कि एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई है।

इसके अलावा, सूत्रों ने यह भी दावा किया कि गुरुवार को श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ और लगातार बारिश के बीच घुटन और विभिन्न चोटों की शिकायत करने वाले लगभग 200 मरीजों को अब तक पुरी के अस्पतालों और अस्थायी स्वास्थ्य सुविधाओं में भर्ती कराया गया है।

मुख्यमंत्री माझी ने क्या कहा?
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना में हुई मौत पर गहरा दुख जताया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए।

देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में एक है पुरी रथ यात्रा
जगन्नाथ रथ यात्रा भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। इसमें हर साल देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। भगदड़ के सही कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारी स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

गुरुवार को पवित्र तटीय शहर पुरी में भव्य वार्षिक रथ यात्रा देखने के लिए लाखों लोग एकत्रित हुए। विश्व प्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत निर्धारित समय से पहले ही दिन में दिव्य भाई-बहनों और अन्य देवी-देवताओं के लिए ‘पहंडी बीजे’ अनुष्ठान के साथ हुई।

‘पहंडी बीजे’ अनुष्ठान के दौरान पवित्र भाई-बहनों और अन्य देवी-देवताओं को 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर से उनके सजाए गए रथों तक भव्य शोभायात्रा के साथ ले जाया गया। इस दौरान घंटा, कहली और तेलिंगी बाजा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर और दिव्य ध्वनि पूरे वातावरण में गूंजती रही।

पुजारियों ने पवित्र वैदिक मंत्रों का जाप किया और पारंपरिक ओडिसी कलाकारों ने अपने मनमोहक नृत्य प्रदर्शनों से देवताओं का उनके जन्मस्थान माने जाने वाले गुंडिचा मंदिर में नौ दिवसीय प्रवास के लिए स्वागत किया। हालांकि, ‘पहंडी बीजे’ की रस्में निर्धारित समय से पहले शुरू हो गईं। लेकिन गुरुवार को उनके समापन में दो घंटे से अधिक की देरी हुई।

Rath Yatra 2026: आज भक्तों के बीच आएंगे भगवान जगन्नाथ, दर्शन के लिए उमड़ेंगे लाखों श्रद्धालु

Rath Yatra 2026: आज भक्तों के बीच आएंगे भगवान जगन्नाथ, दर्शन के लिए उमड़ेंगे लाखों श्रद्धालु

 Rath Yatra 2026: जय जगन्नाथ! आज देशभर में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा पूरे श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के साथ निकाली जा रही है। यह पर्व केवल ओडिशा के पुरी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश-विदेश में बसे करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा आज अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर भक्तों के बीच नगर भ्रमण करेंगे। लाखों श्रद्धालु रथों के दर्शन करेंगे और रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य मानेंगे

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं। जो श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान जगन्नाथ के दर्शन करता है, रथ की परिक्रमा करता है या श्रद्धा से रथ की रस्सी खींचता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि इस पर्व को आस्था, सेवा, समानता और भक्ति का महापर्व कहा जाता है।

क्यों खास है भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा?

रथ यात्रा का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भगवान केवल मंदिरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने भक्तों के बीच स्वयं पहुंचते हैं। इस दिन जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र का कोई भेदभाव नहीं रहता। हर व्यक्ति भगवान के रथ की रस्सी खींच सकता है। यही परंपरा इस उत्सव को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल करती है।

रथ यात्रा का इतिहास

जगन्नाथ मंदिर पुरी का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने कराया था। तभी से हर वर्ष भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथ यात्रा निकाली जाती है।

रथ यात्रा का उल्लेख स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण और नारद पुराण सहित कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार भगवान जगन्नाथ का रथ दर्शन करने मात्र से भी विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

रथ यात्रा की पौराणिक कथा

मान्यता है कि एक बार माता सुभद्रा ने अपने दोनों भाइयों भगवान कृष्ण (जगन्नाथ) और बलराम (बलभद्र) से नगर भ्रमण की इच्छा जताई। बहन की इच्छा पूरी करने के लिए दोनों भाई रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। तभी से हर वर्ष यह परंपरा निभाई जाती है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। वहां कुछ दिन विश्राम करने के बाद पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं। इसी यात्रा को रथ यात्रा कहा जाता है।

तीनों रथों का क्या है महत्व?

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के लिए हर वर्ष नए रथ बनाए जाते हैं।

  • नंदीघोष – भगवान जगन्नाथ का रथ, जिसमें 16 पहिए होते हैं।
  • तालध्वज – भगवान बलभद्र का रथ, जिसमें 14 पहिए होते हैं।
  • दर्पदलन (देवदलन) – माता सुभद्रा का रथ, जिसमें 12 पहिए होते हैं।

विशेष बात यह है कि इन रथों का निर्माण हर वर्ष नई लकड़ियों से पारंपरिक विधि के अनुसार किया जाता है।

रथ की रस्सी खींचने का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि भगवान के रथ की रस्सी खींचना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। लाखों श्रद्धालु इसी विश्वास के साथ रथ यात्रा में शामिल होते हैं।

आज ऐसे करें भगवान जगन्नाथ की पूजा

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। घर के मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं और चंदन, तुलसी दल, पीले फूल, फल, नारियल और सात्विक भोग अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।

मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो नारायणाय
जय जगन्नाथ स्वामी नयन-पथगामी भवतु मे।

आज करें ये शुभ कार्य

  • भगवान जगन्नाथ के दर्शन करें।
  • रथ यात्रा में भाग लें।
  • रथ की रस्सी श्रद्धा से खींचें।
  • गरीबों को भोजन कराएं।
  • गौ सेवा करें।
  • तुलसी का पूजन करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • मंदिर में पीले फल और मिठाई का दान करें।

इन कार्यों से बचें

  • क्रोध, झूठ और अपशब्दों से बचें।
  • मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • किसी का अपमान न करें।
  • धार्मिक आयोजनों में अव्यवस्था न फैलाएं।

क्या घर बैठे भी मिलेगा पुण्य?

यदि आप किसी कारणवश रथ यात्रा में शामिल नहीं हो सकते तो घर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा करें, ऑनलाइन रथ यात्रा के दर्शन करें, दीपक जलाकर “जय जगन्नाथ” का स्मरण करें और जरूरतमंदों की सहायता करें। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा ही सबसे बड़ा पूजन है।

रथ यात्रा से जुड़े रोचक तथ्य

  • पुरी की रथ यात्रा विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है।
  • तीनों रथ हर वर्ष नए बनाए जाते हैं।
  • रथ निर्माण में पारंपरिक कारीगरों की पीढ़ियां शामिल होती हैं।
  • लाखों श्रद्धालु बिना किसी भेदभाव के रथ की रस्सी खींचते हैं।
  • रथ यात्रा को देखने देश-विदेश से श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह

यदि आप रथ यात्रा में शामिल हो रहे हैं, तो प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। पर्याप्त पानी पिएं, धूप से बचाव करें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।

आस्था, भक्ति और संस्कृति का यह महापर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा की जीवंत पहचान है। आज जब भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के बीच नगर भ्रमण पर निकलेंगे, तब पूरा वातावरण “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से गूंज उठेगा। मान्यता है कि सच्चे मन से भगवान का स्मरण करने वाला भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता। इसलिए आज श्रद्धा, सेवा और भक्ति के साथ इस पावन पर्व में सहभागी बनें और भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें।

 
 
वाराणसी को मिलेगा नया एलिवेटेड कॉरिडोर, कैबिनेट ने दी 10,998 करोड़ की मंजूरी

वाराणसी को मिलेगा नया एलिवेटेड कॉरिडोर, कैबिनेट ने दी 10,998 करोड़ की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में वरुणा नदी के किनारे 43.218 किलोमीटर लंबे संपर्क कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल लागत 10,998.32 करोड़ रुपये होगी।

यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगी और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल (एचएएम) के तहत विकसित की जाएगी। परियोजना में मुख्य मार्ग, फ्लाईओवर, रैंप, लूप और सर्विस रोड सहित 6/4 लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा।

यह कॉरिडोर वाराणसी शहर की यातायात भीड़ कम करने की व्यापक योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बनने से राष्ट्रीय राजमार्ग-31, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी रिंग रोड, लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, वाराणसी जंक्शन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, रामनगर बंदरगाह, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के घाटों तथा चंदौली क्षेत्र तक बेहतर और निर्बाध संपर्क मिलेगा।

80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुरूप तैयार किए जाने वाले इस कॉरिडोर से राष्ट्रीय राजमार्ग-31 से काशी रेलवे स्टेशन तक की यात्रा का समय लगभग 40 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा। इससे शहर में यातायात का दबाव कम होगा, सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, वाहनों की परिचालन लागत घटेगी तथा यात्री और माल परिवहन अधिक तेज और सुगम होगा।

यह परियोजना चंदौली सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र सहित एक आर्थिक केंद्र, एक सामाजिक केंद्र और छह प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्रों तक संपर्क को भी मजबूत करेगी। इससे कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान, निर्माण सामग्री और खनिजों के परिवहन में सुविधा मिलेगी तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार के अनुसार, यह परियोजना वाराणसी में आधुनिक, नियंत्रित प्रवेश वाले शहरी परिवहन कॉरिडोर का विकास करेगी, जिससे पर्यटन, आर्थिक विकास, बहु-माध्यम परिवहन व्यवस्था और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

चारधाम यात्रा में आस्था का सैलाब: केदारनाथ पहुंचे 14 लाख श्रद्धालु, बद्रीनाथ में बारिश के बावजूद निर्बाध दर्शन जारी

चारधाम यात्रा में आस्था का सैलाब: केदारनाथ पहुंचे 14 लाख श्रद्धालु, बद्रीनाथ में बारिश के बावजूद निर्बाध दर्शन जारी

 उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बावजूद चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और हजारों तीर्थयात्री रोजाना पवित्र तीर्थस्थलों के दर्शन कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है जबकि पहाड़ी राज्य के कई हिस्सों में मौसम की स्थिति खराब बनी हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, हर दिन 6,000 से ज्यादा तीर्थ यात्री श्री बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर रहे हैं। वहीं मौजूदा तीर्थयात्रा सीजन के दौरान श्री केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 14 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। हालांकि, अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों से यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है क्योंकि लगातार बारिश के कारण उत्तराखंड के कई इलाकों में सड़कें बंद हो गई हैं, ट्रेकिंग के रास्ते फिसलन भरे हो गए हैं, भूस्खलन हो रहा है और मौसम से जुड़ी अन्य चुनौतियां पैदा हो गई हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य के विभिन्न हिस्सों, खासकर चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल जैसे पहाड़ी इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और भारी बारिश व खराब मौसम की चेतावनी दी है। अधिकारियों ने कहा कि खराब मौसम के बावजूद यात्रा को सुचारू रूप से चलाने के लिए बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए व्यापक इंतजाम जारी हैं।

बद्रीनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने के बाद एक श्रद्धालु ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “हम यहां हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए आए थे। वहां पूजा-अर्चना करने के बाद हमें लगा कि हमें बद्रीनाथ धाम के भी दर्शन करने चाहिए। हम यहां भी आए हैं और यह एक शानदार अनुभव रहा। सब कुछ अच्छा है। लोगों को यहां आना चाहिए, पूजा-अर्चना करनी चाहिए और इस जगह का आनंद लेना चाहिए।”

एक अन्य तीर्थयात्री ने भी मौजूदा मौसम की स्थिति के बावजूद यात्रा के लिए किए गए इंतजामों की सराहना की। श्रद्धालु ने कहा कि इंतजाम अच्छे हैं। हमारी तीर्थयात्रा अच्छी रही क्योंकि मौसम की स्थिति के बावजूद सब कुछ सुचारू रूप से हुआ। रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने कहा कि मंगलवार शाम तक के आंकड़ों के मुताबिक, 14 लाख से ज्यादा तीर्थ यात्री चार धाम यात्रा पूरी कर चुके हैं। अभी मौसम एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। मानसून के दौरान अक्सर सड़कें बंद हो जाती हैं और भूस्खलन का खतरा रहता है। तीर्थयात्रियों को सावधानी से यात्रा करनी चाहिए। उन्हें नदियों को पार करने और झरनों या जलधाराओं के पास जाने से बचना चाहिए क्योंकि पूरे राज्य में भारी बारिश हो रही है।

इससे पहले, मौसम के हालात को देखते हुए गढ़वाल मंडल के कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की थी कि वे यात्रा के दौरान मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी रखें और उसी के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित सरकारी विभागों को निर्देश दिए जा चुके हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चार धाम यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए पर्याप्त तैयारियां और जरूरी इंतजाम मौजूद रहें।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन किया, आयुर्वेद में वैज्ञानिक शोध पर दिया जोर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन किया, आयुर्वेद में वैज्ञानिक शोध पर दिया जोर

 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली में ‘सौश्रुतम् 2026’ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। सुश्रुत जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने AIIA के नए एमआरआई सेक्शन का भी उद्घाटन किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने आयुर्वेद जगत से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आचार्य सुश्रुत, जिन्हें शल्य चिकित्सा का जनक माना जाता है, ने सदियों पहले सर्जरी के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान दिया था। उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी, मोतियाबिंद, ट्यूमर उपचार और ईएनटी सर्जरी सहित कई जटिल शल्य तकनीकों की शुरुआत की।

राष्ट्रपति ने कहा कि आचार्य सुश्रुत द्वारा रचित ‘सुश्रुत संहिता’ ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को चिकित्सा विज्ञान की नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि मानव कल्याण से जुड़ी हमारी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को समयानुकूल आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर समाज के हित में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का समग्र जीवन दृष्टिकोण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है और इसे वर्तमान समय में भी प्रासंगिक एवं प्रभावी बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत सरकार आयुर्वेद और योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा की परंपरा को वैज्ञानिक मानकों पर प्रमाणित करने के प्रयास कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मानकीकृत दस्तावेजीकरण, डिजिटल हेल्थ इंटीग्रेशन और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान तकनीकों के प्रभावी उपयोग से आयुर्वेद को विश्व स्तर पर व्यापक स्वीकृति मिलेगी।
युवा छात्रों और शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का भविष्य उनके हाथों में है। उन्होंने उन्हें जिज्ञासा, ईमानदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ व्यावहारिक अनुसंधान तथा उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक साक्ष्य विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो, वहां नई तकनीकों के उपयोग से पीछे नहीं हटना चाहिए और आचार्य सुश्रुत के मार्ग पर चलते हुए चिकित्सा नैतिकता तथा मरीजों के प्रति संवेदनशील सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सौश्रुतम 2026’ से आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में नए ज्ञान का सृजन होगा तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समग्र स्वास्थ्य प्रणाली में आयुर्वेद के योगदान को और सशक्त बनाएंगे।

इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत और विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।

पीएम मोदी की अध्यक्षता में सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी, 1.27 लाख करोड़ रुपये से बनेगा भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

पीएम मोदी की अध्यक्षता में सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी, 1.27 लाख करोड़ रुपये से बनेगा भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, विनिर्माण और अनुसंधान का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना तथा देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाना है।

सरकार ने बताया कि सेमीकॉन 2.0 छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा।

पहले स्तंभ के तहत चिप डिज़ाइन को बढ़ावा दिया जाएगा। वर्तमान में 105 स्टार्टअप चिप डिज़ाइन पर काम कर रहे हैं। नई योजना के तहत बौद्धिक संपदा (आईपी), चिप डिज़ाइन और रणनीतिक व व्यावसायिक उत्पादों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

दूसरे स्तंभ में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए आवश्यक मशीनों, रसायनों, गैसों और अन्य सामग्री के उत्पादन तथा अनुसंधान को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे देश में उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

तीसरे स्तंभ के अंतर्गत अधिक फैब्रिकेशन संयंत्र (फैब) स्थापित करने पर जोर रहेगा। पहला फैब वर्ष 2028 तक शुरू होने की संभावना है। सरकार सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब और डिस्प्ले फैब जैसी इकाइयों को आकर्षित करेगी।

चौथे स्तंभ में एटीएमपी/ओसैट (पैकेजिंग एवं परीक्षण) उद्योग को और मजबूत किया जाएगा। सरकार उन्नत पैकेजिंग तकनीकों को भारत लाने के लिए वैश्विक कंपनियों को प्रोत्साहित करेगी।

पांचवें स्तंभ के तहत अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। 28 नैनोमीटर से 110 नैनोमीटर तकनीक से आगे बढ़ते हुए अधिक उन्नत तकनीकों पर अनुसंधान किया जाएगा।

छठे स्तंभ में कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वर्तमान में 315 विश्वविद्यालयों में लगभग 68 हजार छात्र आधुनिक चिप डिज़ाइन का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रशिक्षण को और व्यापक बनाया जाएगा तथा उद्योगों की भागीदारी भी बढ़ाई जाएगी।

सरकार के अनुसार, यह योजना आर्थिक विकास को गति देने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में सहायक होगी।

सेमीकॉन 1.0 की प्रगति

सरकार ने बताया कि अब तक 12 विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। इनमें से माइक्रोन, केयन्स और सीजी सेमी ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि एक अन्य इकाई वर्ष 2026 में उत्पादन शुरू करेगी।

डिज़ाइन क्षेत्र में अब तक 24 स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी गई है, जबकि 105 स्टार्टअप और एमएसएमई को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (ईडीए) उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। ये कंपनियां उपग्रह संचार, ड्रोन, निगरानी कैमरे, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार उपकरण और स्मार्ट मीटर जैसे क्षेत्रों के लिए चिप विकसित कर रही हैं।

जून में यात्री वाहनों की थोक बिक्री में 24.1% की जोरदार बढ़त, 3.88 लाख यूनिट्स के पार पहुंची बिक्री

जून में यात्री वाहनों की थोक बिक्री में 24.1% की जोरदार बढ़त, 3.88 लाख यूनिट्स के पार पहुंची बिक्री

 भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री (कंपनियों द्वारा डीलर्स को बिक्री) जून में सालाना आधार पर 24.1 प्रतिशत बढ़कर 3,88,144 यूनिट्स रही है। इससे पिछले वर्ष समान अवधि में यह आंकड़ा 3,12,851 यूनिट्स था। यह जानकारी इंडस्ट्री बॉडी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) की ओर से बुधवार को जारी डेटा में दी गई।

सियाम के डेटा के मुताबिक, यात्री वाहनों में यूटिलिटी व्हीकल (यूवी) सेगमेंट लगातार बढ़ रहा है और जून में इसकी सालाना वृद्धि दर 19.9 प्रतिशत रही और वॉल्यूम 2,17,228 यूनिट्स रही। यात्री गाड़ियों की बिक्री सालाना आधार पर 15.7 प्रतिशत बढ़कर 98,610 यूनिट्स हो गई है। वैन की बिक्री सालाना आधार पर 9.5 प्रतिशत बढ़कर 10,230 यूनिट्स पर पहुंच गई है।

दोपहिया वाहन श्रेणी ने भी मजबूत रफ्तार बनाए रखी। जून में कंपनियों की ओर से डीलरों को भेजे गए दोपहिया वाहनों की संख्या 18.6 प्रतिशत बढ़कर 18,51,400 यूनिट्स हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह आंकड़ा 15,61,283 यूनिट्स पर था। दोपहिया वाहनों में स्कूटर सबसे तेजी से बढ़ने वाली श्रेणी रही। इसकी घरेलू बिक्री 39.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 7,44,823 यूनिट्स पर पहुंच गई।

वहीं, मोटरसाइकिल की बिक्री 6.4 प्रतिशत बढ़कर 10,56,422 यूनिट्स हो गई, जबकि मोपेड की बिक्री कम आधार के चलते 50.4 प्रतिशत बढ़कर 50,155 यूनिट्स हो गई है। तिपहिया वाहनों की डीलरों को बिक्री सालाना आधार पर 26.1 प्रतिशत बढ़कर 77,951 यूनिट्स हो गई है, जबकि पिछले वर्ष जून में यह आंकड़ा 61,828 यूनिट्स पर था।

जून में पैसेंजर कैरियर वाहनों की बिक्री 25 प्रतिशत बढ़कर 64,181 यूनिट्स रही, जबकि गुड्स कैरियर वाहनों की बिक्री 29.4 प्रतिशत बढ़कर 11,828 यूनिट्स पर पहुंच गई। इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों ने भी मजबूत वृद्धि दर्ज की। ई-रिक्शा की बिक्री 52.4 प्रतिशत बढ़कर 1,590 यूनिट्स हो गई। सियाम के आंकड़ों के अनुसार, जून में वाहन निर्यात भी मजबूत बना रहा।

कुल वाहन निर्यात सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 6,73,105 यूनिट्स पर पहुंच गया है। इसमें दोपहिया वाहनों के निर्यात में 40.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़कर 5,43,684 यूनिट्स पर पहुंच गया। वहीं, तिपहिया वाहनों का निर्यात 39.7 प्रतिशत बढ़कर 51,950 यूनिट्स हो गया, जबकि यात्री वाहनों का निर्यात लगभग स्थिर रहा और 76,601 यूनिट्स दर्ज किया गया।

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, कैबिनेट ने ₹62,500 करोड़ की MPMS योजना को दी मंजूरी

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, कैबिनेट ने ₹62,500 करोड़ की MPMS योजना को दी मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दे दी है। ₹62,500 करोड़ के बजट वाली यह योजना भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाने, घरेलू स्तर पर अधिक पुर्जों के निर्माण को बढ़ावा देने, सप्लाई चेन मजबूत करने और भारतीय मोबाइल ब्रांडों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी। इसके तहत भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को पात्र बिक्री (Eligible Sales) पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन (इंसेंटिव) दिया जाएगा। यदि कंपनियां मोबाइल फोन के प्रमुख पुर्जे और सब-असेंबली भारत से खरीदती हैं तो उन्हें 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त इंसेंटिव मिलेगा। वहीं, भारतीय ब्रांडों को डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए पात्र बिक्री पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।

सरकार के अनुसार, इस योजना के दौरान देश में मोबाइल फोन का कुल उत्पादन करीब ₹39 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। साथ ही मोबाइल फोन के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। योजना से लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

सरकार ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत वित्त वर्ष 2014-15 के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में सात गुना और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना वृद्धि हुई है। यह क्षेत्र बड़ी संख्या में युवाओं, खासकर ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरा है।

मोबाइल फोन निर्माण भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। सरकार के मुताबिक, देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब भारत में ही बनाए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गया, जिसने डीजल ईंधन और कटे-तराशे हीरों जैसे पारंपरिक निर्यात उत्पादों को भी पीछे छोड़ दिया।

सरकार का कहना है कि नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS), प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI-LSEM) योजना के बाद अगले चरण की पहल है। PLI-LSEM की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई थी। नई योजना से मोबाइल फोन निर्माण, निर्यात, घरेलू वैल्यू एडिशन और भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कैबिनेट ने यूरिया-2026 के लिए नई राष्ट्रीय निवेश नीति को दी मंजूरी, आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती

कैबिनेट ने यूरिया-2026 के लिए नई राष्ट्रीय निवेश नीति को दी मंजूरी, आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने आज बुधवार को यूरिया क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा देने के लिए आत्मनिर्भर भारत के लिए यूरिया-2026 (NIPU-2026) की राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दे दी। उर्वरक विभाग द्वारा प्रस्तुत इस नीति का मुख्य उद्देश्य देश में गैस-आधारित नई यूरिया निर्माण इकाइयों की स्थापना को आकर्षित करना है, ताकि घरेलू उत्पादन बढ़े और आयात पर निर्भरता कम हो।

नीति के प्रमुख फायदे

– पारदर्शिता बढ़ेगी: निश्चित और परिवर्तनशील लागतों को अलग-अलग किया जाएगा।
– व्यावहारिक रिटर्न: इक्विटी पर रिटर्न (RoE) के लिए 12% न्यूनतम और 16% अधिकतम सीमा तय।
– विदेशी मुद्रा जोखिम कम: चार साल बाद निश्चित लागत को रुपये में बदलने का प्रावधान।
– बड़ी बचत: NIP-2012 की तुलना में प्रत्येक नए संयंत्र पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान।

पृष्ठभूमि

2012 में शुरू की गई पुरानी निवेश नीति (NIP-2012) के तहत कुल 6 नई यूरिया इकाइयां स्थापित हुई थीं। इस नीति की समयसीमा अक्टूबर 2019 में समाप्त हो चुकी है। वर्तमान में देश में 33 यूरिया इकाइयां संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन है। फिर भी घरेलू उत्पादन और मांग के बीच अंतर बना हुआ है, जिसे आयात से पूरा किया जाता है। उर्वरक विभाग को कई नए प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद नई निवेश नीति की आवश्यकता महसूस की गई। नई नीति NIPU-2026 के तहत नई यूरिया इकाइयों की स्थापना को गति देगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह फैसला किसानों को सस्ते और पर्याप्त यूरिया उपलब्ध कराने तथा देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 

Sawan 2026: भोले के भक्तों का इंतजार खत्म! इस दिन से शुरू होगा सावन,जानें कितने पड़ेंगे श्रावणी सोमवार

Sawan 2026: भोले के भक्तों का इंतजार खत्म! इस दिन से शुरू होगा सावन,जानें कितने पड़ेंगे श्रावणी सोमवार

  Sawan Kab Se Hai: भगवान शिव को समर्पित सावन (श्रावण) माह का इंतजार हर साल करोड़ों शिव भक्तों को रहता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि साल 2026 में सावन 30 जुलाई से शुरू होगा या 31 जुलाई से?

द्रिक पंचांग के अनुसार, उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) से होगी और 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को श्रावण पूर्णिमा के साथ इसका समापन होगा। वहीं, दक्षिण भारत के कई राज्यों में अमांत पंचांग के अनुसार सावन की शुरुआत अलग तिथि से होती है।

क्यों खास होता है सावन का महीना?

हिंदू धर्म में सावन को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष (हलाहल) को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर पूरी सृष्टि की रक्षा की थी। तभी से सावन का महीना शिव आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस पूरे महीने शिव मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, कांवड़ यात्रा, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।

सावन सोमवार का महत्व

सावन के सभी सोमवार भगवान शिव को समर्पित होते हैं। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, दांपत्य जीवन सुखमय बनता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

कई श्रद्धालु सावन के पहले सोमवार से सोलह सोमवार व्रत भी शुरू करते हैं।

उत्तर भारत में सावन 2026 की प्रमुख तिथियां

  • सावन प्रारंभ: 30 जुलाई 2026 (गुरुवार)
  • पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
  • दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
  • तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
  • चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026
  • श्रावण पूर्णिमा (समापन): 28 अगस्त 2026

दक्षिण भारत में कब शुरू होगा सावन?

दक्षिण भारत के कई राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में अमांत पंचांग का पालन किया जाता है। इसलिए वहां सावन की शुरुआत 13 अगस्त 2026 से मानी जाएगी। 

दक्षिण भारत के सावन सोमवार

  • पहला सोमवार – 17 अगस्त 2026
  • दूसरा सोमवार – 24 अगस्त 2026
  • तीसरा सोमवार – 31 अगस्त 2026
  • चौथा सोमवार – 7 सितंबर 2026

सावन में पड़ने वाले प्रमुख पर्व

  • सावन सोमवार व्रत
  • मंगला गौरी व्रत
  • सावन शिवरात्रि
  • हरियाली अमावस्या
  • नाग पंचमी
  • रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा)

सावन में भगवान शिव की पूजा कैसे करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में सुबह स्नान कर शिवलिंग पर गंगाजल, शुद्ध जल और दूध से अभिषेक करें। इसके बाद साफ जल चढ़ाएं और भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, शहद, अक्षत, सफेद फूल और मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें, शिव चालीसा एवं रुद्राष्टकम का पाठ करें और अंत में भगवान शिव व माता पार्वती की आरती करें।

सावन में क्या करें?

  • प्रतिदिन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या दूध का दान करें।
  • शिव मंदिर में दीपक जलाएं।
  • सात्विक भोजन करें और संयम रखें।

क्या न करें?

  • मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से बचें।
  • किसी का अपमान या झूठ न बोलें।
  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।