तमिलनाडु। तमिलनाडु लगभग छह दशक बाद तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है। फ़िल्म स्टार विजय थलापती ने वो कर डाला जो कांग्रेस और भाजपा नहीं कर सके। 1967 के बाद TVK के रूप में पहले ऐसे राजनीतिक दल का उदय हुआ जिनसे DMK और AIADMK की बुनियाद हिला दी है।अभिनेता से राजनेता बने विजय थलापती मुख्यमंत्री की कुर्सी की तरफ़ निरंतर बढ़त बनाये हुए हैं।
West Bengal Elections Result Live : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद आज 4 मई को वोटों की गिनती शुरू हो गई है। अब तक सामने आए रूझानों में बीजेपी ने टीएमसी और बीजेपी में कांटे की टक्कर चल रही है। फिलहाल 293 सीटों के रूझानों मे बीजेपी 187 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं टीएमसी 98 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस ने भी एक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं भवानीपुर में ममता बन
पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह एक सोची-समझी चाल है, ताकि शुरुआती राउंड में BJP को आगे दिखाया जा सके। ममता बनर्जी का दावा है कि कई जगहों पर वोटों की गिनती रोक दी गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय बलों का इस्तेमाल करके तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और पार्टी दफ्तरों में तोड़फोड़ की जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि वोटों में गड़बड़ी के लिए SIR का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ममता बनर्जी का बड़ा आरोप
भाजपा की रेखा पात्रा आगे
चुनाव आयोग (EC) के आधिकारिक रुझानों के मुताबिक, 19 में से 2 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद हिंगलगंज विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार रेखा पात्रा 2808 वोटों से आगे चल रही हैं। रेखा पात्रा वही हैं, जो साल 2024 की संदेशखाली घटना की पीड़ितों में शामिल रही थीं। इस मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निलंबित नेता शेख शाहजहां पर आरोप लगाए गए थे।
आसनसोल कॉलेज में तनाव
पश्चिम बंगाल में बीजेपी, टीएमसी पर भारी पड़ती नजर आ रही है। अब तक सामने आए रूझानों में बीजेपी ने बहुमत के आंकड़े का काफी आगे चल रही है। फिलहाल 293 सीटों के रूझानों मे बीजेपी 180 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं टीएमसी 106 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं मतगणना के बीच आसनसोल कॉलेज के बाहर तनाव की खबर सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उसके कैंप कार्यालय में भाजपा समर्थकों ने तोड़फोड़ की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी :- आज शाम भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्यालय पहुंचकर विधानसभा चुनावों में पार्टी की भारी जीत का जश्न मनाएंगे। जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी शाम 6 बजे नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंचेंगे।
नई दिल्ली। दिल्ली के विवेक विहार इलाके में रविवार सुबह एक चार मंजिला बिल्डिंग में भीषण आग लग गई। इसमें अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से कई की जान दम घुटने की वजह से गई है। आग बुझाने के दौरान करीब 10 से 15 लोगों बिल्डिंग से सुरक्षित निकाला गया। इनमें दो लोग घायल भी हुए हैं। इस हादसे का कारण शॉर्ट सर्किट की वजह से एसी में ब्लास्ट को माना जा रहा है।
हादसे में 9 लोगों की मौत
बताया जा रहा है कि इमारत में इलेक्टॉनिक लॉक वाले दरवाजे लगे हैं, जो हादसे के वक्त खुले ही नहीं, इस वजह से दम घुटने और जलने से 9 लोगों की जान चली गई। हादसे वाली बिल्डिंग पीछे से पुरी ग्रील लगाकर बंद किया हुआ है। खुले स्थान को भी इस बिल्डिंग में लोहे की जाली से बंद कर दिया गया है। जिससे आपात स्थिति रेस्क्यू मुश्किल हो गया।
तेजी से फैल गया आग
प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, आग बिल्डिंग की दूसरी मंजिल से शुरू हुई और कुछ ही देर में लपटों ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। आशंका है कि ऐसी का कंप्रेसर फटने से भी आग भड़की। चश्मदीदों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का अवसर ही नहीं मिला। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां रविवार तड़के लगभग 3:35 बजे घटनास्थल पर पहुंचीं और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। इस बिल्डिंम में चार सामने और चार पीछे की ओर कुल आठ फ्लैट हैं। पीछे स्थित फ्लैटों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, क्योंकि वहां से बाहर निकलने का रास्ता सीमित था।
आग लगने के बाद कमरों में धुआं भर गया, इससे लोगों का दम घुट गया। कुछ दरवाजे इलेक्ट्रॉनिक लॉक सिस्टम के कारण बंद थे और सीढ़ियां भी संकरी होने से लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके। शाहदरा जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) राजेंद्र प्रसाद मीना ने बताया कि सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है और भवन के प्रत्येक हिस्से की गहनता से जांच की जा रही है। दमकल कर्मियों के साथ पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर तैनात हैं।
Government Survey: जनगणना 2027 के प्रथम चरण की औपचारिक शुरुआत आज से देश के छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हो गई है, जिसमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। इस चरण में मकानसूचीकरण और मकानों की गणना (HLO) का कार्य किया जा रहा है, जिसके तहत प्रशिक्षित प्रगणक 30 मई 2026 तक घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटाएंगे। इससे पहले 15 दिन की स्व-गणना (Self Enumeration) प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसमें देशभर के करीब 82 लाख परिवारों ने ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी खुद दर्ज कराई, जो इस बार की डिजिटल-प्रथम पहल की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
सरकार ने इस बार जनगणना को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए लोगों को खुद ऑनलाइन जानकारी भरने का विकल्प दिया है। se.census.gov.in पोर्टल के माध्यम से लोग सुरक्षित और आसान तरीके से अपनी जनगणना कर सकते हैं। जिन लोगों ने पहले ही स्व-गणना पूरी कर ली है, उन्हें अब केवल अपनी SE ID तैयार रखनी होगी, जिसे प्रगणक के आने पर दिखाना होगा। वहीं, जिन्होंने ऑनलाइन प्रक्रिया नहीं अपनाई है, उनके घर प्रगणक पहुंचकर पूरी जानकारी एकत्र करेंगे।
आज से ही दिल्ली (MCD क्षेत्र), राजस्थान, महाराष्ट्र, मेघालय और झारखंड में भी स्व-गणना सुविधा शुरू हो गई है, जो 15 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इसके बाद 16 मई से 14 जून तक इन राज्यों में घर-घर सर्वे किया जाएगा। वहीं बिहार में स्व-गणना की अवधि समाप्त हो चुकी है और 2 मई से 31 मई तक फील्ड सर्वे चलेगा। इसके अलावा देश के कई अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया पहले से जारी है।
इस चरण के दौरान प्रगणक 33 निर्धारित सवालों के जरिए घरों की स्थिति, परिवार के सदस्यों, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़ी अहम जानकारी जुटाएंगे। इसमें मकान का प्रकार, पानी-बिजली की सुविधा, शौचालय, इंटरनेट, वाहन, घरेलू सामान और परिवार के सदस्यों की बुनियादी जानकारी शामिल होगी। यह डेटा आगे होने वाली जनसंख्या गणना के लिए आधार तैयार करेगा और सरकार को विकास योजनाएं बनाने में मदद करेगा।
खास बात यह है कि इस बार प्रगणक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए डेटा दर्ज करेंगे, जिससे प्रक्रिया तेज, सटीक और पारदर्शी बनेगी। साथ ही जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय और विकासात्मक उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। जनगणना 2027 को देश की सबसे बड़ी डेटा संग्रह प्रक्रिया माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों की नीतियों और योजनाओं की दिशा तय करेगी।
नई दिल्ली । संसद की महत्वपूर्ण समितियों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है, जहां लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वर्ष 2026-27 के लिए प्रमुख संसदीय समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है। इस फैसले के तहत भाजपा सांसद बैजयंत जय पांडा को सार्वजनिक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल को लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संसद की ये दोनों समितियां बेहद अहम मानी जाती हैं, जो सरकारी खर्च, नीतियों और सार्वजनिक उपक्रमों की कार्यप्रणाली की गहन जांच और निगरानी करती हैं।

नई दिल्ली। Exit Poll : विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के बाद जारी एग्जिट पोल के नतीजों ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक कई राज्यों में सत्तारूढ़ दलों को चुनौती मिलती दिख रही है, जबकि कुछ जगहों पर सत्ता में वापसी के संकेत भी मिल रहे हैं।
पुडुचेरी में भाजपा की बढ़त का अनुमान
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। एग्जिट पोल के अनुसार पार्टी को 16 से 20 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है, जो उसे सत्ता के करीब ला सकता है।
असम में NDA की वापसी के संकेत
Exit Poll : पूर्वोत्तर के अहम राज्य असम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। विभिन्न एग्जिट पोल NDA को 80 से 100 सीटों के बीच आंक रहे हैं, जबकि कांग्रेस को 24 से 36 सीटों तक सीमित रहने का अनुमान है। इससे राज्य में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार की वापसी लगभग तय मानी जा रही है।
पश्चिम बंगाल में कांटे की टक्कर, भाजपा को बढ़त
सबसे ज्यादा दिलचस्प मुकाबला पश्चिम बंगाल में नजर आ रहा है। यहां कुल 6 एग्जिट पोल सामने आए हैं, जिनमें से 5 भाजपा के पक्ष में सरकार बनने का संकेत दे रहे हैं, जबकि एक पोल तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बढ़त देता है।
-प्रजा पोल: TMC 85-110, भाजपा 178-200
– पी-मार्क: TMC 118-138, भाजपा 150-175
– पोल डायरी: TMC 99-127, भाजपा 142-171
– मैट्रिज: TMC 125-140, भाजपा 146-161
– चाणक्य स्ट्रैटीज: TMC 130-140, भाजपा 150-160
– पीपुल्स पल्स: TMC 177-187, भाजपा 95-110
Supreme Court: ब्रेन डेथ घोषित करने की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है. अदालत ने एम्स को निर्देश दिया है कि मेडिकल विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर इस विषय पर वैज्ञानिक, पारदर्शी और भरोसेमंद प्रक्रिया को लेकर रिपोर्ट पेश की जाए. यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान दिया. अदालत ने कहा कि इस संवेदनशील विषय पर स्पष्ट और विश्वसनीय मानकों की जरूरत है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों के अधिकार सुरक्षित रह सकें.
डॉ. गणपति ने कहा कि वर्तमान में इस्तेमाल होने वाला एप्निया टेस्ट पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना जा सकता. उनके अनुसार ब्रेन एंजियोग्राम और ईईजी जैसे परीक्षण अधिक वैज्ञानिक और भरोसेमंद हैं, क्योंकि ये सीधे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह और उसकी गतिविधि को मापते हैं. उन्होंने अदालत से मांग की कि ब्रेन डेथ घोषित करने के लिए आधुनिक तकनीकों को अनिवार्य किया जाए.
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) पर एक और बड़ा एक्शन लिया है। बैंक धोखाधड़ी के मामले में ईडी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (RInfra) की 3,034 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति कुर्क कर ली है। इस ताजा कार्रवाई के बाद अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का आंकड़ा 19,344 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।

ईडी ने कौन-कौन सी संपत्तियां कुर्क की हैं?
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में प्रमोटर ग्रुप की कई अहम संपत्तियों का खुलासा हुआ है, जिन्हें अब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 5 के तहत अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया गया है। इनमें मुंबई का उषा किरण बिल्डिंग, मुंबई में स्थित एक लग्जरी फ्लैट, खंडाला (पुणे) में एक फार्महाउस और साणंद, अहमदाबाद में जमीन का एक बड़ा हिस्सा शामिल है।
इसके अलावा ‘रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ के 7.71 करोड़ शेयर शामिल हैं। ये शेयर ‘राइजी इनफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड’ (Risee) के पास थे, जो अनिल अंबानी के परिवार के एक प्राइवेट ट्रस्ट ‘राइजी ट्रस्ट’ (RiseE Trust) के तहत काम करने वाली कंपनी है।
मुजफ्फरपुर । बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। पानापुर करियात थाना क्षेत्र के शाहबाजपुर मठ के पास सोमवार देर रात एक 30 वर्षीय महिला और उसके दो छोटे बच्चों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। मृतकों में मां रीता देवी, दो साल की बेटी वैष्णवी और महज तीन महीने का बेटा कन्हैया शामिल है।
आधी रात को पसरा मातम: पति ने देखा मंजर
मृतका के पति मिठाई लाल शाह कैटरिंग का काम करते हैं। सोमवार रात वह एक बारात में गए हुए थे। जब वे तड़के करीब 3:30 बजे घर लौटे, तो मुख्य दरवाजा बाहर से बंद मिला। किसी तरह घर के अंदर दाखिल होने पर उन्होंने जो देखा वह भयावह था। कमरे के बेड पर पत्नी और दोनों बच्चों के शव पड़े थे। शवों के पास ही एक रस्सी पड़ी मिली, जिससे गला घोंटे जाने की आशंका जताई जा रही है। घटना के समय परिवार के अन्य दो बच्चे अपनी दादी के साथ दूसरे कमरे में सो रहे थे, जिससे उनकी जान बच गई।
परिजनों का आरोप: “जमीन विवाद में दी गई सजा”
मृतका की सास उर्मिला देवी ने गांव के ही कुछ रिश्तेदारों पर हत्या का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि काफी समय से परिवार का जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। परिजनों का मानना है कि इसी रंजिश के कारण इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया है ताकि पूरे परिवार को खत्म किया जा सके।
पुलिस की कार्रवाई: फॉरेंसिक टीम ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी पश्चिमी सुचित्रा कुमारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
फॉरेंसिक जांच: सबूत जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम (FSL) को मौके पर बुलाया गया है।
पोस्टमार्टम: तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मौत के सटीक समय और तरीके का पता चल सके।
गहन जांच: पुलिस जमीन विवाद के एंगल के साथ-साथ अन्य संभावित पहलुओं पर भी छापेमारी और पूछताछ कर रही है।
डीएसपी सुचित्रा कुमारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह सुनियोजित हत्या का मामला लग रहा है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना के बाद इलाके में तनाव और शोक का माहौल है।
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला लिए बहुत जरूरी है। एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिश्तों को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर कोई जोड़ा आपसी सहमति से सालों तक साथ रहता है और बाद में पार्टनर रिश्ता तोड़कर चला जाता है, तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता। राजधानी रायपुर के युवा वर्ग और कानूनी जानकारों के बीच इस फैसले को लेकर अब बहस छिड़ गई है।
15 साल का साथ और 7 साल का बच्चा, फिर भी अपराध नहीं?
मामला मध्य प्रदेश का है, जो अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। एक महिला ने अपने पूर्व लिव-इन पार्टनर पर शादी का झांसा देकर यौन शोषण का आरोप लगाया था। महिला का कहना था कि उसके पति की मौत के बाद आरोपी ने शादी का वादा किया और 15 साल तक उसके साथ रहा। इस दौरान उनका एक 7 साल का बच्चा भी हुआ। जब पार्टनर उसे छोड़कर चला गया, तो महिला ने FIR दर्ज कराई। हालांकि, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने महिला से तीखे सवाल पूछे।
शादी से पहले साथ रहने में जोखिम तो रहता ही है
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दो-टूक लहजे में कहा, जब रिश्ता आपसी मर्जी से बना हो, तो उसमें अपराध का सवाल ही कहां उठता है? कोर्ट ने पूछा कि जब महिला को पता था कि कोई कानूनी बंधन (शादी) नहीं है, तो वह उस पुरुष के साथ रहने क्यों गई? जजों ने स्पष्ट किया कि लिव-इन रिलेशनशिप में हमेशा यह जोखिम रहता है कि कोई भी पार्टनर किसी भी दिन रिश्ता तोड़ सकता है। कोर्ट के अनुसार, पार्टनर का रिश्ता तोड़कर चले जाना कोई जुर्म नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने महिला को दिया ये सुझाव
महिला के वकील ने दलील दी कि आरोपी ने अपनी पहली शादी छिपाई थी। इस पर बेंच ने कहा कि अगर शादी हुई होती, तो आप दूसरी शादी (Bigamy) या गुजारा-भत्ते का केस कर सकते थे। चूंकि शादी नहीं हुई थी, इसलिए अब जेल भेजने से कुछ हासिल नहीं होगा। कोर्ट ने महिला को बच्चे के भविष्य के लिए कुछ अन्य रास्ते सुझाए हैं जिसके तहत महिला बच्चे के लिए गुजारा-भत्ता (Maintenance) की मांग कर सकती है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी सुलह (Mediation) के लिए जाने की सलाह दी। 7 साल के बच्चे के लिए आर्थिक मुआवजे के इंतजाम पर विचार करने को कहा।
आम आदमी पार्टी के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के पदचिन्हों पर चलते हुए अब पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी बड़ा मोर्चा खोल दिया है। सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत का पूर्ण बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सिसोदिया ने जज को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने साफ कह दिया है कि अब न तो वे खुद और न ही उनका कोई वकील अदालत की कार्यवाही में हिस्सा लेगा। दिल्ली की राजनीति में मचे इस घमासान का असर अब देशभर के सियासी हलकों में देखा जा रहा है
क्या है पूरा मामला? क्यों भड़के सिसोदिया?
मामला कथित शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसमें सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है जिसमें केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 लोगों को क्लीन चिट मिल गई थी। अब इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में हो रही है। सिसोदिया का कहना है कि उन्हें इस अदालत से न्याय की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। उन्होंने इसे अपनी लड़ाई का अगला चरण बताते हुए सत्याग्रह का नाम दिया है।
जज पर लगाए गंभीर आरोप, हितों के टकराव का दिया हवाला
मनीष सिसोदिया ने अपने पत्र में जो बातें लिखी हैं, उसने कानूनी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। सिसोदिया ने सीधे तौर पर जज के बच्चों के करियर और केंद्र सरकार के कनेक्शन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पत्र में दावा किया कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बच्चों का भविष्य उन लोगों के हाथों में है जो केंद्र सरकार के पैनल में हैं। सिसोदिया ने कड़े शब्दों में लिखा, जब बच्चों का भविष्य तुषार मेहता जी के हाथों में हो, तो कोई निष्पक्ष फैसले की उम्मीद कैसे कर सकता है?
केजरीवाल ने पहले ही कर दिया था किनारा
आपको बता दें कि एक दिन पहले ही अरविंद केजरीवाल ने भी इसी तरह का कदम उठाया था। केजरीवाल ने एक वीडियो जारी कर स्पष्ट किया था कि जब न्यायपालिका की निष्पक्षता पर ही सवाल हों, तो महात्मा गांधी के बताए सत्याग्रह के रास्ते पर चलना ही एकमात्र विकल्प बचता है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने हालांकि केजरीवाल की उस याचिका को पहले ही खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने जज से खुद को केस से अलग करने की मांग की थी। कोर्ट ने इसे न्यायिक संस्था पर हमला बताया था।
अब आगे क्या होगा?
प्रशासन और कानूनी जानकार अब इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आरोपियों और वकीलों की गैरमौजूदगी में अदालत की कार्यवाही कैसे आगे बढ़ेगी। सत्याग्रह के इस नए पैंतरे ने जांच एजेंसियों की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिल्ली से लेकर रायपुर तक इस खबर ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, क्योंकि छत्तीसगढ़ में भी आप कार्यकर्ता इसे केंद्र की तानाशाही के खिलाफ बड़ी लड़ाई बता रहे हैं।
गरदासपुर : बटाला (जिला गुरदासपुर) के पुलिस स्टेशन घुमान के अधीन आते गांव भोमा में अंधाधुंध फखबरसामने आई है। इस दौरान 2 व्यक्तियों की मौत हो जाने की पुलिस द्वारा पुष्टि की गई है और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।
राजधानी दिल्ली में 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर पूरे शहर में शराब की दुकानें बंद रहेंगी। इस संबंध में दिल्ली सरकार ने आदेश जारी किया है। सरकार के फैसले के अनुसार, सिर्फ 1 मई ही नहीं बल्कि आने वाले महीनों में भी कई तारीखों पर शराब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। मई से सितंबर तक कुछ विशेष दिनों को ‘ड्राई डे’ घोषित किया गया है, जिन दिनों राजधानी में किसी भी प्रकार की शराब की बिक्री नहीं होगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सभी लाइसेंसधारकों को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित दिनों में अपने प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रखें और नियमों का पालन सुनिश्चित करें।
दिल्ली सरकार ने लाइसेंस धारकों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा। सरकार के आदेश के अनुसार, ड्राई डे वाले दिन न केवल शराब की दुकानें बंद रहेंगी, बल्कि बार, क्लब और रेस्टोरेंट में भी शराब की बिक्री और सर्विस पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। यानी इन दिनों किसी भी रूप में शराब की बिक्री या सप्लाई नहीं की जा सकेगी। हर वर्ष की तरह इस बार भी दिल्ली सरकार ने विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और महत्वपूर्ण अवसरों को ध्यान में रखते हुए ड्राई डे घोषित किए हैं। इन तारीखों पर एक्साइज नियमों के तहत सख्ती से निगरानी की जाएगी।
कब-कब बंद रहेंगी शराब की दुकानें?
यह निर्णय दिल्ली उत्पाद शुल्क नियम, 2010 के नियम 52 के प्रावधानों के तहत लागू किया गया है। आबकारी विभाग के अनुसार, तय तारीखों पर राजधानी में शराब की बिक्री, सप्लाई और सर्विस पूरी तरह बंद रहेगी। घोषित ‘ड्राई डे’ में प्रमुख तौर पर बुद्ध पूर्णिमा – 1 मई ,ईद-उल-जुहा – 27 मई ,मुहर्रम – 26 जून ,स्वतंत्रता दिवस – 15 अगस्त ,जन्माष्टमी – 9 सितंबर इन सभी तारीखों पर शराब की दुकानें बंद रहेंगी और बार, क्लब तथा रेस्टोरेंट में भी शराब नहीं परोसी जाएगीa
Assembly Election 2026 LIVE : पश्चिम बंगाल की 152 और तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर आज वोटिंग हो रही है। बंगाल में दो चरण में विधानसभा चुनाव होने हैं जिसमें आज यानी 23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग हो रही है। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हो रहा है। वहीं, तमिलनाडु की बात करें तो यहां सभी सीटों पर एक चरण में ही वोटिंग हो रही है। बीजेपी इन दोनों ही राज्यों में सत्ता में आने के लिए पूरा दमखम लगा रही है। वहीं, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी के लिए सत्ता बचाए रखना बड़ी चुनौती है। तमिलनाडु में एमके स्टालिन के लिए भी एक बार फिर सरकार में आना आसान नहीं होगा।
शाम 5 बजे तक पश्चिम बंगाल में 89% मतदान
विधानसभा चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बंपर वोटिंग हुई है। शाम 5 बजे तक पश्चिम बंगाल में 89.93 प्रतिशत मतदान हुआ है। वहीं, तमिलनाडु में 82.24 फीसदी मतदान शाम 5 बजे तक हुआ है। दोनों ही राज्यों में वोटिंग को लेकर खासा उत्साह दिखा है।

सुबह 7 बजते ही दोनों राज्यों में वोटिंग शुरू हो गई जो शाम 6 बजे तक जारी रहेगी। सुबह 9 बजे तक पश्चिम बंगाल में 18.76% और तमिलनाडु में 17.69% मतदान हुआ। मौसम विभाग ने पश्चिम बंगाल समेत पूरे उत्तर और मध्य भारत में लू की चेतावनी जारी की है। ऐसे में ज्यादातर मतदाता सुबह और शाम के समय ही मतदान कर सकते हैं। दोपहर में तेज गर्मी के कारण मतदान कम रह सकता है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 5.73 करोड़ से ज्यादा वोटर 4,023 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे।
चुनाव आयोग ने लगाई पाबंदी
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को निर्देश दिया है कि वे 23 अप्रैल को सुबह छह बजे से मतदान समाप्त होने तक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से बाहर नहीं जाएं। पहले चरण के चुनाव में गुरुवार को राज्य के 16 जिलों की 152 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। यहां कुल 1,478 उम्मीदवार मैदान में है। 3.60 करोड़ से अधिक मतदाता लगभग 44,376 बूथों पर वोट डालेंगे। इनमें 1.84 करोड़ पुरुष, 1.75 करोड़ महिला और 465 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक दिशानिर्देश के अनुसार, उम्मीदवारों को मतदान के समय अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ही रहना चाहिए और किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल होने से बचना चाहिए जिससे चुनावी प्रक्रिया बाधित हो सकती है। उन्होंने कहा, ”सभी उम्मीदवारों से यह सुनिश्चित करने की अपेक्षा की जाती है कि मतदान स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और मतदाता बिना किसी भय या बाधा के अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर सकें।” मतदान का दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा और मतगणना चार मई को होगी।


Petrol Diesel Price In India: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में लगातर अपडेट आ रहा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जो हालात बन रहे हैं, उन्होंने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट पर बन रहे हालात से दुनियाभर में टेंशन का माहौल है। क्योंकि यही वो समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस सप्लाई होता है। ऐसे में तेल के डैम बढ़ने की आशंका बनी हुई है। भारत में तेल पर अब तक बहुत बड़ा असर देखने को नहीं मिला है, लेकिन इस बात की आशंका जताई जा रही है कि पांच राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद तेल के दाम बढ़ सकते हैं। इसपर अब सरकार ने आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की है।
सरकार ने क्या कहा?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इन तमाम अटकलों को खारिज करते हुए साफ कहा है कि फिलहाल ईंधन की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, जो खबरें चल रही हैं, वे पूरी तरह भ्रामक हैं और लोगों में बेवजह डर पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर भी मंत्रालय ने इसी बात को दोहराया। वहां साफ लिखा गया कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने को लेकर सरकार कोई विचार नहीं कर रही है। यानी फिलहाल आम लोगों को राहत की ही खबर है।
पिछले चार सालों में ईंधन की कीमतों में स्थिरता-सरकार
मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां पिछले चार सालों में ईंधन की कीमतों में स्थिरता बनी रही है। सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने कोशिश की है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाहे जितनी भी उथल-पुथल हो, उसका सीधा असर आम जनता की जेब पर न पड़े। हालांकि, यह भी सच है कि ग्लोबल हालात पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किए जा सकते। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ता है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट जैसी अहम जगह पर, तो उसका असर दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर पड़ सकता है। और ऐसे में कीमतों पर दबाव आना स्वाभाविक है।
अभी भारत में क्या हैं पेट्रोल के दाम?
भारत में पेट्रोल-डीजल रेट की बात करें तो दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई है। वहीं मुंबई की बात करें तो वहां 87.67 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल का दाम है।
ईरान ने 48 घंटे बाद इजराइल और अमेरिका से अपना बदला ले लिया है. 2 दिन पहले अमेरिका ने ईरान के एक जहाज पर हमला कर दिया था.
ईरान ने दावा किया है कि उसने इजराइल से जुड़े 2 जहाजों को अपने कंट्रोल में ले लिया है. इन सभी जहाजों पर बोट के जरिए अटैक किया गया है. ईरानी मीडिया का कहना है कि ग्रीक के एक जहाज पर भी हमला किया गया है, लेकिन यह तय नहीं है कि इसे अभी जब्त किया गया है या नहीं.
जिन जहाजों को ईरान ने कंट्रोल में लिया है, उसका नाम MSC- FRANCESCA और EPAMINODES है. तीसरे जहाज के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है. इन जहाजों पर क्या लदा था, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है. सरकारी बयान में आईआरजीसी ने इन जहाजों का कनेक्शन यहूदी शासन से जोड़ा है.
ईरान ने बुधवार को संसद में 12 प्वॉइंट वाला एक प्लान को अमल में लाने की बात कही गई है. इसके तहत होर्मुज से किसी भी इजराइली जहाजों को नहीं गुजरने देने की बात कही गई है. इसके अलावा उसके मित्र देश के जहाजों पर भी ईरान ने एक्शन लेने की बात कही है.
मरीन ट्रैफिक के मुताबिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने नाव के जरिए ओमान के पास दो जहाजों को घेर लिया. इन जहाजों पर पहले फायरिंग की गई और फिर इसे कब्जे में ले लिया. इसके बाद होर्मुज के पास ग्रीक के एक और जहाज को ईरान ने कब्जे में लिया है.
ईरान संसद में पेश बिल के मुताबिक जो भी होर्मुज में नियमों का पालन नहीं करने वाले जहाजों को पहले जब्त किया जाएगा. इसके बाद उस पर लदे माल से 20 प्रतिशत जुर्माने के तौर पर वसूला जाएगा.
बताते चले कि इससे पहले रविवार (20 अप्रैल) को ईरान के एक जहाज पर अमेरिकी सेना ने हमला किया था. हमले के बाद अमेरिकी सेना ने इस जहाज को जब्त कर लिया था. अमेरिकी मीडिया के मुताबिक जहाज पर चीन से मिसाइल बनाने का सामान लदा था. सेंटकॉम ने इस जहाज को अभी तक अपने कंट्रोल में ले रखा है.
पीएम नरेंद्र मोदी ने देश में परिसीमन के अनुपात में कोई बदलाव नहीं होने का आश्वासन देते हुए गुरुवार को लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण अधिनियम संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो भी इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर अपने विचार रखते हुए यह भी कहा कि इस विषय को राजनीति के तराजू से नहीं तौलना चाहिए और इसका श्रेय वह विपक्षी दलों को भी देने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा, ”हमारे देश में जबसे महिला आरक्षण को लेकर चर्चा शुरू हुई है और जब-जब चुनाव आया है, जिस दल ने महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया।” पीएम मोदी ने कहा, ”2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ क्योंकि सब ने (2023 में) सहमति से इसे (महिला आरक्षण विधेयक) पारित किया था। किसी का राजनीतिक फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान नहीं हुआ।”
आइए जानते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की बड़ी बातें
- पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, ”अगर हम सब साथ में रहेंगे तो इतिहास गवाह है कि यह किसी के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा, देश के लोकतंत्र और सामूहिक निर्णय के पक्ष में जाएगा। जिन्हें इसमें राजनीति की बू आ रही है। वे खुद के 30 साल के परिणामों को देख लें। उनका इसमें ही फायदा है। नुकसान से बच जाएंगे। राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं। जो विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण और परिसीमन के लिए विधेयक एक साथ लाने पर और कुछ राज्यों के साथ भेदभाव होने संबंधी कुछ विपक्षी सदस्यों की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा, ”संविधान ने हमें यहां बैठकर देश को टुकड़ों में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है। ना टुकड़ों में सोच सकते हैं, न टुकड़ों में निर्णय ले सकते हैं। निराधार बात है, इसमें रत्ती भर सचाई नहीं है।”
- उन्होंने कहा, ”केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए बवंडर खड़ा किया जा रहा है। मैं बड़ी जिम्मेदारी से आज सदन में कहना चाहता हूं कि दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो पश्विम हो, छोटे राज्य हों, बड़े राज्य हों….. निर्णय प्रकिया किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगी। यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी।”
- पीएम मोदी ने कहा, ”अतीत में जो सरकारें रहीं, जिनके कालखंड में परिसीमन हुआ और जो अनुपात उस समय से चला आ रहा है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी।”
- जब तमिलनाडु की एक सांसद ने गारंटी देने की बात कही तो प्रधानमंत्री ने कहा, ”अगर गारंटी शब्द चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा शब्द चाहें ते इसका इस्तेमाल करता हूं। तमिल में केोई अच्छा शब्द हो तो उसका इस्तेमाल करता हूं। नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की कोई जरूरत नहीं है।”
- उन्होंने कहा कि जब 25-30 साल पहले महिला आरक्षण का विचार आया था तभी इसे लागू कर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ”हम सब भाग्यवान हैं कि हमें देश की आधी आबादी को इस राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण प्रक्रिया में हिस्सा बनाने का सौभाग्य मिला है।” पीएम मोदी ने कहा कि ”हम सभी को इस अहंकार में नहीं रहना चाहिए कि हम नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं। यह उसका अधिकार है।”
- उन्होंने कुछ विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि समय-समय पर सभी ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का समर्थन तो किया लेकिन किसी न किसी बहाने से इसे रोकने का प्रयास करते रहे। उन्होंने कहा तरह-तरह की बहानेबाजी और चीजों को उलझाना अब नहीं चलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा, ”यहां कुछ लोगों को लगता है कि इसमें मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। अगर आप इसका विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि मुझे इसका राजनीतिक लाभ होगा। लेकिन साथ चलेंगे तो किसी को इसका लाभ नहीं होगा।”
नई दिल्ली। भारत की रक्षा ताकत को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। चेन्नई की जुप्पा जिओ नेविगेशन टेक्नोलॉजी ने पिछले तीन महीनों में भारतीय सेना को 500 से ज्यादा ‘अजीत’ सीरीज के हाई-टेक ड्रोन सौंपे हैं। ये ड्रोन सेना की फ्रंटलाइन यूनिट्स के लिए तैयार किए गए हैं और दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखने, रियल टाइम जानकारी जुटाने और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
‘अजीत’ ड्रोन छोटे, हल्के और पोर्टेबल हैं, जिन्हें सैनिक आसानी से अपने साथ ले जा सकते हैं। कुछ ड्रोन इतने कॉम्पैक्ट हैं कि बैकपैक में भी रखे जा सकते हैं। इनमें दिन और रात दोनों समय काम करने वाले कैमरे लगे हैं, जिससे हर परिस्थिति में निगरानी संभव है। बड़े मॉडल करीब एक घंटे तक उड़ान भर सकते हैं और कई किलोमीटर तक की दूरी कवर कर सकते हैं।
इन ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इनकी साइबर सुरक्षा है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन हैकिंग, सिग्नल जैमिंग और गलत सिग्नल देकर सिस्टम को भ्रमित करने का खतरा बढ़ गया है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इन्हें तैयार किया गया है। इनमें ‘नवगति’ नाम का ऑटो पायलट सिस्टम लगा है, जो बिना GPS के भी काम कर सकता है। यानी जहां सिग्नल उपलब्ध नहीं होते या इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर की स्थिति होती है, वहां भी ये ड्रोन अपना मिशन पूरा करने में सक्षम हैं।
सेना के जवानों को इन ड्रोन के संचालन और रखरखाव की ट्रेनिंग भी दी गई है। साथ ही एक साथ कई ड्रोन उड़ाने यानी स्वॉर्म ऑपरेशन की भी ट्रेनिंग दी गई है, जिससे बड़े इलाके की निगरानी और ऑपरेशन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। ये ड्रोन STQC से प्रमाणित हैं और सुरक्षा व गुणवत्ता के सभी मानकों पर खरे उतरे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले भारत विदेशी और खासकर चीनी ड्रोन सिस्टम पर निर्भर था, लेकिन अब स्वदेशी तकनीक के जरिए देश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ‘अजीत’ सीरीज के ड्रोन इसी बदलाव का बड़ा उदाहरण हैं, जो भारतीय सेना को आधुनिक युद्ध के लिए और अधिक सक्षम बना रहे हैं।
नई दिल्ली। आज से संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र शुरू हो चुका है। जिसमें कई अहम विधायी प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। इसमें 2029 तक महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को लागू करना और लोकसभा की सदस्य संख्या को बढ़ाकर 850 तक करना है।
वहीं वहीं केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में परिसीमन बिल पेश कर दिया है। इसी के साथ ही आज दोपहर करीब 3 बजे पीएम मोदी सदन को संबोधित करेंगे।
























