नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में भाजपा नेता की बेटी समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता    |    बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री साय    |    लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |
कैंसर मरीजों को बड़ी राहत! 70% तक सस्ती हो सकती हैं दवाएं, सरकार ने लिया अहम फैसला

कैंसर मरीजों को बड़ी राहत! 70% तक सस्ती हो सकती हैं दवाएं, सरकार ने लिया अहम फैसला

 नई दिल्ली- कैंसर का इलाज सिर्फ मरीज की सेहत की परीक्षा नहीं लेता. कई बार यह पूरे परिवार की जमा-पूंजी भी खत्म कर देता है. अस्पताल के चक्कर और जांच के खर्च के बीच महंगी दवाएं खरीदना भी बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से कैंसर की दवाओं की कीमत घटाने की दिशा में उठाया गया कदम लाखों मरीजों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है. सरकार की दवा मूल्य नियामक संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानी NPPA ने कुछ कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. अनुमान है कि इससे कई दवाओं की कीमत 20 से 70 प्रतिशत तक घट सकती है. सरकार के मुताबिक मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपए की बचत हो सकती है। 

हालांकि, अभी सभी कैंसर दवाओं की कीमतें एक साथ कम नहीं होंगी. यह फैसला सिर्फ उन कैंसर दवाओं पर लागू होगा, जिन्हें सरकार तय की जाने वाली अंतिम सूची में शामिल करेगी. ये ऐसी दवाएं हैं जिनकी कीमतों पर फिलहाल सरकार की ओर से तय सीमा लागू नहीं है. विशेषज्ञों की एक समिति तय करेगी कि किन दवाओं को इस नियम के दायरे में लाया जाए. इसके बाद NPPA अधिसूचना जारी करेगा और कीमतों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होगी. इस नियम में ब्रांडेड और जेनेरिक के साथ देश में बनी और विदेश से मंगाई जाने वाली दवाएं भी शामिल हो सकती हैं. सरकार का मकसद कैंसर के इलाज का खर्च कम करना और दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ाना है। 

कैंसर की दवाओं पर कितना घट सकता है खर्च?
NPPA के अनुमान के मुताबिक इस फैसले से दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत यानी MRP में 20 से 70 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. हालांकि हर दवा की कीमत में एक जैसी कटौती नहीं होगी. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि फिलहाल उसकी कीमत में निर्माता से लेकर थोक और खुदरा विक्रेता तक कितना मार्जिन जुड़ता है. सरकार ने मरीजों के लिए सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपए की संभावित बचत का अनुमान लगाया है. कैंसर दवाओं का भारतीय बाजार करीब 12,500 करोड़ रुपए सालाना का बताया गया है. इसमें गैर-अनुसूचित दवाओं की बड़ी हिस्सेदारी है। 

क्या होता है व्यापारिक मार्जिन?
जब कोई दवा निर्माता से निकलकर वितरक और दुकानदार के जरिए मरीज तक पहुंचती है तो बीच की कड़ियों पर भी कमाई का हिस्सा जुड़ता है. इसी अंतर को व्यापारिक मार्जिन कहा जाता है. NPPA की बैठक के विवरण के मुताबिक गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं में औसत व्यापारिक मार्जिन करीब 170 प्रतिशत तक पाया गया. कुछ मामलों में यह 700 प्रतिशत तक होने का अनुमान है. नई व्यवस्था का मकसद इसी तरह के ऊंचे मार्जिन पर लगाम लगाना है. प्रस्ताव के तहत व्यापारिक मार्जिन को MRP के 30 प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा। 

विशेषज्ञ समिति तय करेगी किन दवाओं पर लागू होगा फैसला
दवा मूल्य नियामक ने प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है. अब विशेषज्ञ समिति उन कैंसर दवाओं की सूची तैयार करेगी जिन्हें नई व्यवस्था में शामिल किया जाएगा. फार्मास्युटिकल विभाग ने स्वास्थ्य मंत्रालय से महानिदेशालय स्वास्थ्य सेवाएं यानी DGHS के तहत समिति गठित करने को कहा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक समिति से 14 अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट देने को कहा गया है. सूची को जरूरत के मुताबिक समय-समय पर अपडेट भी किया जा सकता है. अंतिम सूची और अधिसूचना जारी होने के बाद ही पता चलेगा कि कौन-सी दवा कितनी सस्ती होगी। 

2019 में भी घटाई गई थीं कैंसर दवाओं की कीमतें
सरकार ने इससे पहले 2019 में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की थी. उस समय 42 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित किया गया था. NPPA के मुताबिक इस कदम से 526 ब्रांड की कीमतों में कमी आई थी. कुछ ब्रांड की MRP में 91 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई थी. उस फैसले से सालाना करीब 984 करोड़ रुपए की बचत का अनुमान लगाया गया था. अब नए प्रस्ताव को उसी तरह की पहल का अगला कदम माना जा रहा है। 

सुप्रीम कोर्ट भी उठा चुका है महंगी दवाओं का मुद्दा
कैंसर की दवाओं की ऊंची कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है. 22 सितंबर को अदालत ने आवश्यक कैंसर दवाओं की ज्यादा कीमतों पर कड़ी टिप्पणी की थी. 29 सितंबर की सुनवाई के दौरान एक दवा का उदाहरण भी सामने आया जिसकी खुदरा विक्रेताओं को आपूर्ति कीमत करीब 2,700 रुपए बताई गई जबकि उसकी MRP लगभग 27,000 रुपए थी. अदालत ने दवाओं पर खुदरा मार्जिन को लेकर सवाल उठाए थे. इस मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध की गई है। 

जेवर एयरपोर्ट अब कहलाएगा ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’: सीएम योगी

जेवर एयरपोर्ट अब कहलाएगा ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’: सीएम योगी

 जेवर एयरपोर्ट अब कहलाएगा ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’: सीएम योगी

सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री के सम्मान में योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, नामकरण प्रस्ताव पारित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस वार्ता में गिनाईं पीएम मोदी के 25 वर्षों की उपलब्धियां

कहा- सेवा, समर्पण और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से जनसेवा से जनकल्याण और जनभागीदारी से जनविश्वास तक पहुंची यात्रा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित

मुख्यमंत्री ने कहा- प्रधानमंत्री के 25 वर्षों की निरंतर और समर्पित सार्वजनिक सेवा भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय

प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत-2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा, निष्ठा और प्रतिबद्धता से काम करती रहेगी: सीएम

लखनऊ- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर अब ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में एयरपोर्ट के नामकरण का प्रस्ताव पारित किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लिए गए इस निर्णय को मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रति प्रदेश सरकार की कृतज्ञता और उत्तर प्रदेश के विकास में उनके मार्गदर्शन एवं योगदान के सम्मान का प्रतीक बताया।

कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित किया है। 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री जी ने सरकार के मुखिया के रूप में 25 वर्षों की निरंतर और समर्पित सार्वजनिक सेवा पूरी की। यह भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है। 25 वर्षों की यह यात्रा ‘सेवा, समर्पण और राष्ट्र प्रथम’ की भावना से संचालित रही है। यह यात्रा केवल सत्ता या शासन की यात्रा नहीं, बल्कि ‘जनसेवा से जनकल्याण और जनभागीदारी से जनविश्वास’ की यात्रा है।

जेवर एयरपोर्ट का नामकरण, प्रधानमंत्री के प्रति कृतज्ञता का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर प्रधानमंत्री जी की ओर से उत्तर प्रदेश को मिली एक बड़ी सौगात है। यह एयरपोर्ट आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग, पर्यटन और वैश्विक कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा। इसी भावना के साथ कैबिनेट ने एयरपोर्ट का नाम ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ किए जाने का प्रस्ताव पारित किया है। कैबिनेट प्रधानमंत्री जी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन, उनके सतत मार्गदर्शन, उत्तर प्रदेश के विकास के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता और देश को नई दिशा देने वाले नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करती है। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री जी के यशस्वी नेतृत्व के प्रति अभिनंदन भी व्यक्त किया। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत-2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा, निष्ठा और प्रतिबद्धता से काम करती रहेगी।

काशी से जेवर तक, यूपी से प्रधानमंत्री का विशेष जुड़ाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी काशी से निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और उत्तर प्रदेश की धरती से देश का नेतृत्व कर रहे हैं। 2014 में प्रधानमंत्री जी ने काशी आगमन पर कहा था- ‘मुझे मां गंगा ने बुलाया है।’ इसके बाद काशी और प्रधानमंत्री जी का संबंध केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा। काशी के विकास, आध्यात्मिक पुनर्जागरण और उत्तर प्रदेश के समग्र विकास के बीच एक नया संबंध बना। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन और केंद्र-प्रदेश की ‘डबल इंजन’ सरकार के समन्वय से उत्तर प्रदेश में विकास की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश प्रशासनिक जड़ता, असुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा था। इसके बाद पारदर्शी और तकनीक आधारित सुशासन, मजबूत कानून-व्यवस्था, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश के अनुकूल वातावरण को विकास का आधार बनाया गया।

2,483 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे और नमो भारत से बदली कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब 2,483 किलोमीटर लंबे 42 राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग ₹60 हजार करोड़ खर्च किए गए हैं। दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई गति दी है। ₹30 हजार करोड़ से अधिक लागत से दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत/आरआरटीएस परियोजना देश में हाई-स्पीड सार्वजनिक परिवहन की नई मिसाल बनी है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद तथा नोएडा-ग्रेटर नोएडा में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हुआ है। इसी बदलती कनेक्टिविटी का नया केंद्र जेवर का इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने जा रहा है। सीएम ने इसे उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट और भविष्य में देश के बड़े एविएशन हब में विकसित होने वाली परियोजना बताया।

फ्रेट कॉरिडोर से डिफेंस कॉरिडोर तक, औद्योगिक तस्वीर बदली
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के बड़े लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। दादरी ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रमुख जंक्शन बन चुका है। 1,050 किलोमीटर से अधिक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रदेश से गुजर रहा है। वाराणसी में राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर देश का पहला मल्टीमॉडल इनलैंड पोर्ट टर्मिनल और 100 एकड़ का देश का पहला फ्रेट विलेज विकसित हुआ है। लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल असेंबली यूनिट, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और 1,000 एकड़ का पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क औद्योगिक विकास की नई दिशा तय कर रहे हैं।

किसानों को सीधे लाभ, फसल ऋण से गन्ना भुगतान तक
किसान कल्याण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत उत्तर प्रदेश के तीन करोड़ से अधिक किसानों को एक लाख करोड़ रुपये से अधिक धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी जा चुकी है। करीब 86 लाख किसानों की ऋणमाफी की गई है। प्रदेश में 5.50 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ₹13,42,978 करोड़ का फसल ऋण वितरित किया गया। 79.51 लाख किसानों को फसल क्षति के मद में भुगतान मिला है, जबकि गन्ना किसानों को ₹3.30 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है।

आवास, राशन और पानी से गरीबों के जीवन में बदलाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 65 लाख से अधिक गरीब परिवारों को आवास मिले हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 3.67 करोड़ राशन कार्डधारक परिवारों के करीब 15 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत 2.46 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल का कनेक्शन दिया जा चुका है। खास तौर पर बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में इसका व्यापक प्रभाव पड़ा है। जनधन योजना, बैंकिंग विस्तार और बैंक मित्रों के नेटवर्क ने प्रदेश में वित्तीय समावेशन को भी मजबूत किया है।

आयुष्मान से एम्स तक स्वास्थ्य सुरक्षा का विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत के तहत प्रदेश में करीब 6.08 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। राज्य में 9.90 करोड़ से अधिक नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवरेज मिला है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 1.09 करोड़ से अधिक मरीजों को ₹18,798 करोड़ के मुफ्त उपचार का लाभ मिला है। आरोग्य मेलों के माध्यम से 14.67 करोड़ नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। गोरखपुर और रायबरेली में एम्स का संचालन भी स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।

शौचालय, उज्ज्वला और नमामि गंगे से बदली तस्वीर
सीएम योगी ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में 3.37 करोड़ से अधिक शौचालय और 59,183 सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1.86 करोड़ मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। प्रदेश सरकार होली और दीपावली पर महिलाओं को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध करा रही है। नमामि गंगे के तहत गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए व्यापक काम हुआ है। काशी सहित गंगा के विभिन्न तटों पर विकास और संरक्षण की परियोजनाओं ने धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से नई पहचान बनाई है।

महिला सशक्तीकरण से गांव की अर्थव्यवस्था को ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी अभियान के तहत 10 लाख स्वयं सहायता समूहों से एक करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत 15 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को आर्थिक सहायता मिली है। स्वामित्व योजना के तहत 91 हजार से अधिक गांवों में काम हुआ और 1.10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को घरौनी के रूप में संपत्ति का प्रमाण मिला। महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी बढ़ी है। ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण तथा अनुसूचित जाति-जनजाति और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के कल्याण के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।

यूपी का हुनर ‘लोकल से ग्लोबल’ तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिला-एक उत्पाद योजना ने उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री जी ने विदेश यात्राओं के दौरान काशी की गुलाबी मीनाकारी, निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी, कन्नौज का इत्र और लखनऊ की जरदोजी जैसे यूपी के उत्पादों को वैश्विक मंच दिया। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को यूपी के इन स्थानीय उत्पादों को उपहार में देना ‘लोकल से ग्लोबल’ की अवधारणा को मजबूती देने वाला कदम रहा। उत्तर प्रदेश खाद्यान्न, दुग्ध, गन्ना, आम, आंवला और मोटे अनाज के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में है।

युवाओं को नौकरी, प्रशिक्षण और डिजिटल ताकत
सीएम ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 62 लाख से अधिक युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट दिए गए। प्रदेश में 9.50 लाख से अधिक सरकारी नियुक्तियां हुई हैं और 65 लाख युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। रोजगार मेलों, आईटीआई और कौशल विकास मिशन के माध्यम से 31.11 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय, काशी में आधुनिक खेल परिसर और नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी परियोजनाओं से खेल और युवा प्रतिभाओं को नई दिशा मिली है।

राम मंदिर से महाकुंभ तक, सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के योगदान को आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास से आगे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से 500 वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हुई। काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास हुआ और गंगा घाट से बाबा विश्वनाथ धाम तक भव्य एवं दिव्य मार्ग बना। विदेश से करीब 100 वर्ष पुरानी मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा वापस लाई गई और काशी विश्वनाथ धाम में पुनर्स्थापित की गई। भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष 127 वर्ष बाद भारत वापस आए। प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। मुख्यमंत्री ने काशी तमिल संगमम, अभिधम्म दिवस, बौद्ध सर्किट, संत रविदास जन्मस्थली विकास परियोजना, संग्रहालय एवं प्रतिमा परियोजनाएं, चौरी-चौरा शताब्दी आयोजन तथा लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ जैसे कार्यों को सांस्कृतिक पुनर्जागरण की कड़ी बताया। उन्होंने वाराणसी के संगीत और लखनऊ की पाक कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने, सारनाथ से जुड़े बौद्ध स्थलों को वैश्विक पहचान मिलने तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने को भी प्रदेश की महान विभूतियों के योगदान के राष्ट्रीय सम्मान के रूप में रेखांकित किया।

किसानों से 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज खरीदेगी योगी सरकार

किसानों से 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज खरीदेगी योगी सरकार

 किसानों से 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज खरीदेगी योगी सरकार
 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की क्रय नीति को मंजूरी
 
मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद के लिए प्रदेश में 455 क्रय केंद्र खोलने का प्रस्ताव
 
बाजरे के समर्थन मूल्य में 125 और हाइब्रिड ज्वार में 324 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
 
किसानों से 31 दिसंबर तक होगी खरीद, यथासंभव 48 घंटे में बैंक खाते में पहुंचेगा भुगतान
 
लखनऊ-
 प्रदेश के किसानों को मोटे अनाज का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए योगी सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की क्रय नीति तय कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मक्का, बाजरा और ज्वार की सरकारी खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत प्रदेश में कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटे अनाज की खरीद का कार्यकारी लक्ष्य प्रस्तावित है। खरीद के लिए 455 क्रय केंद्र खोलने की तैयारी है। बाजरे और हाइब्रिड ज्वार के समर्थन मूल्य में भी वृद्धि हुई है। खरीद की अवधि एक अक्टूबर से 31 दिसंबर तक निर्धारित की गई है।
 
कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने क्रय नीति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों से भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मोटे अनाज की खरीद की जाएगी। उपज का भुगतान बैंक खातों के सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर सीधे किसानों के खातों में कराया जाएगा।
 
बाजरा 2900 और मक्का 2410 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा
नई क्रय नीति के अनुसार, बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये से बढ़ाकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसमें 125 रुपये की वृद्धि हुई है। मक्का का समर्थन मूल्य 2410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। वहीं, हाइब्रिड ज्वार का समर्थन मूल्य 3699 रुपये से बढ़कर 4023 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इसमें 324 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। ज्वार मालदांडी का समर्थन मूल्य 4073 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
 
बाजरे की 2.20 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य
प्रदेश में मोटे अनाज की सरकारी खरीद के लिए कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन का कार्यकारी लक्ष्य प्रस्तावित है। इसमें बाजरे की 2.20 लाख मीट्रिक टन, ज्वार की 50 हजार मीट्रिक टन और मक्का की 15 हजार मीट्रिक टन खरीद शामिल है। सबसे अधिक खरीद का लक्ष्य बाजरे के लिए रखा गया है।
 
बाजरे के 300, ज्वार के 80 और मक्का के 75 केंद्र खुलेंगे
मोटे अनाज की खरीद के लिए प्रदेश में कुल 455 क्रय केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। इनमें बाजरे के 300, ज्वार के 80 और मक्का के 75 केंद्र होंगे। क्रय केंद्र मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे, जहां संबंधित फसल की अच्छी आवक होती है और सरकारी खरीद की पर्याप्त संभावना रहती है।
 
इन 25 जिलों में होगी मक्का की खरीद
मक्का की खरीद बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बहराइच, गोंडा, देवरिया, बलिया, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र और ललितपुर में की जाएगी।
 
बाजरे की खरीद के लिए 33 जिले निर्धारित
बाजरे की खरीद बुलंदशहर, रामपुर, संभल, अमरोहा, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, जालौन, चित्रकूट और हमीरपुर में होगी।
 
ज्वार की खरीद के लिए चुने गए 13 जिले
ज्वार की सरकारी खरीद उन्नाव, हरदोई, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, मिर्जापुर, झांसी, जालौन, बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में की जाएगी।
 
ऑनलाइन पंजीकरण और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य
सरकारी खरीद के लिए किसानों को खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट www.fcs.up.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। क्रय केंद्रों पर कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद होगी। इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ परचेज (ई-पॉप) मशीन के माध्यम से किसानों का बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण किया जाएगा। खरीद की प्रक्रिया राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर पर ऑनलाइन संचालित होगी।
 
आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे मिलेगा भुगतान
किसानों से खरीदी गई उपज का भुगतान उनके आधार से जुड़े और एनपीसीआई से मैप किए गए बैंक खातों में किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार के सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से बैंक खातों का सत्यापन होगा। सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में धनराशि भेजने की व्यवस्था की गई है।

Shardiya Navratri 2026: घटस्थापना में कलश से जुड़ी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो सकती हैं माता रानी

Shardiya Navratri 2026: घटस्थापना में कलश से जुड़ी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो सकती हैं माता रानी

 Sharadiya Navratri: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से है। पहले दिन ही मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ घटस्थापना की परंपरा निभाई जाती है। नवरात्रि में पहले दिन ही कलश की स्थापना करते हुए अगले नौ दिन तक मां दुर्गा की पूर्जा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि कलश में देवती-देवता वास करते हैं और इसकी स्थापना में किसी भी तरह की चूक करने से बचना चाहिए। तमाम लोगों को ये कन्फ्यूजन होता है कि कलश की स्थापना कैसे करना है और कौन सा स्टेप पहले शुरू करना है।

वहीं इस बात को लेकर बहुत कन्फ्यूजन होता है कि कलश को सीधे जमीन पर रखना है या फिर इसके नीचे कोई अनाज रखना है। अगर अनाज रखना है तो फिर कौन सा अनाज रखना है? चलिए जानते हैं कि कलसश के नीचे क्या रखना चाहिए? साथ ही जानेंगे के घटस्थापना के वक्त किन गलतियों को करने से बचना है?

कलश के नीचे कौन सा अनाज रखें?
नवरात्रि की कलश स्थापना में कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। पूजा के कलश को सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता है। ना ही इसे सीधे तौर पर चौकी पर रखना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले अनाजों की वेदी बनाते हैं और इसी पर कलश को रखना शुभ मानते हैं। इस दौरान सात तरह के अनाजों का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। इसे सप्तधान्य भी कहा जाता है। इसमें आप चावल, गेंहू, तिल और बाजरा समेत कई चीजें मिला सकते हैं। सबसे पहले अनाज को साफ कर लें और फिर इसकी वेदी बना दें और इसी पर कलश को रखें।

नवरात्रि घटस्थापना में ना करें ये गलतियां
1. कलश पर रखे जाने वाले नारियल को गलत दिशा में कभी भी ना रखें। इसकी सही दिशा का ध्यान जरूर दें। धार्मिक मान्यता के हिसाब से जब आप पूजा करें तो नारियल की दिशा पूजा करने वाले की साइड होना चाहिए। इसे कहीं पर भी ऊपर या फिर अपने पीछे की ओर ना रखें।

2. नवरात्रि की घटस्थापना में अक्षत का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इस दौरान कोशिश करें कि चावल टूटे हुए ना हो। कलश स्थापना के वक्त चावल का इस्तेमाल करते वक्त इस बात का ध्यान जरूर रखें। साथ ही ध्यान रखें कि पूजा में इस्तेमाल होने वाले चावल साफ हो।

3. नियम के अनुसार घटस्थापना वाले कलश को गलत जगह ना रखें। इसके लिए घर के ईशान कोण को चुनें। ज्योतिष वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। अगर यहां जगह संभव नहीं है तो पूर्व दिशा में भी कलश रख सकते हैं। बस इतना ध्यान रखें कि जहां भी पूजा हो रही है वो जगह साफ हो। बार-बार यहां पर किसी का हाथ नहीं लगना चाहिए।

15 अक्टूबर से UPI पर लगेगा MDR या टलेगा फैसला? NPCI जल्द ले सकता है बड़ा निर्णय

15 अक्टूबर से UPI पर लगेगा MDR या टलेगा फैसला? NPCI जल्द ले सकता है बड़ा निर्णय

 नई दिल्ली- यूपीआई के जरिए 2,000 रुपये से अधिक पेमेंट पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स (MDR) लगाने की योजना 15 अक्टूबर से लागू होनी है। लेकिन बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे 1 जनवरी तक टालने पर विचार किया जा रहा है। यानी फेस्टिव सीजन में इससे रिटेलर्स को राहत मिल सकती है। माना जा रहा है कि सरकार अगले कुछ दिनों में इस पर फैसला ले सकती है।

इस रिपोर्ट से पेमेंट एग्रीगेटर्स पेटीएम के शेयर 10% गिर गए और कंपनी का मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से नीचे चला गया। इसी तरह मोबिक्विक और पाइन लैब्स में 8% तक की गिरावट आई। पेटीएम के शेयर कुछ देर के लिए 1,558.80 रुपये के लोअर सर्किट पर पहुंच गए। मार्केट खुलने के कुछ ही मिनटों में कंपनी का मार्केट कैप करीब 10,972 करोड़ रुपये कम हो गया।

पेटीएम शेयर
पेटीएम का 52 हफ्ते का टॉप 1,856.50 रुपये है। मोबिक्विक के शेयर 8% से ज्यादा गिरकर 234.52 रुपये पर आ गए, जबकि पाइन लैब्स के शेयर 4% से ज्यादा फिसलकर 170.21 रुपये पर आ गए। मोबिक्विक का 52 हफ्ते का टॉप 290.35 रुपये है। इसी तरह पाइन लैब्स का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 283.70 रुपये है।

ट्रेडर्स और इंडस्ट्री एसोसिएशन के इस बात पर चिंता जताई थी कि त्योहारों की सेल के दौरान MDR शुरू करने से बिजनेस के लिए ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) की अगुवाई वाली UPI और सर्विस स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य बुधवार को MDR टाइमिंग और दूसरी बातों पर चर्चा करने के लिए मिले।

वित्त मंत्री से भी किया गया है आग्रह 
एक बड़े व्‍यापारिक सूत्र ने बताया कि व्यापारी संगठनों ने वित्त मंत्री से  UPI लेनदेन पर MDR लगाने को टालने का आग्रह किया है. ट्रेडर्स ने वित्त मंत्री से अपील की है कि UPI के पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR के प्रस्ताव को 6 हफ्ते के लिए टाल दिया जाए।

वित्त मंत्री को दिए एक लिखित मेमोरेंडम में व्यापारी संगठनों ने कहा है कि MDR को लेकर व्यापारियों में  संशय की स्थिति है. इसलिए इसे लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 किया जाए।

UPI-MDR चार्ज पर क्‍या है प्रस्‍ताव? 
NPCI के मुताबिक, 2,000 रुपये से ऊपर के पर्सन टू मर्चेंट ट्रांजैक्‍शन पर 0.4 % का MDR चार्ज लागू किया जाना है.

इस हिसाब से 75,000 रुपये के लेनदेन पर चार्ज 300 रुपये बनते हैं.हालांकि एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है।

ऐसे में 75,000 रुपये से ऊपर के जो भी ट्रांजैक्‍शन होंगे, उनपर अधिकतम यानी 300 रुपये MDR चार्ज लिए जाने का प्रावधान है।

2,000 रुपये से ऊपर हर ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं?
2,000 रुपये से ज्यादा के सिर्फ तय Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा. सामान्य दर 0.4% होगी, जबकि 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम MDR 300 रुपये होगा।

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे जरूरी सेक्टरों में 2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट MDR होगा।

अहम बात ये है कि ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा. बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर न डालें।

96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं
सरकार के मुताबिक, करीब 96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन MDR से प्रभावित नहीं होंगे. ₹2,000 तक के सभी UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा।

इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI पेमेंट किसी भी रकम पर फ्री रहेगा. छोटे व्यापारियों को UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख तक मिलने वाली रकम पर भी MDR नहीं लगेगा. RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर भी MDR शून्य रहेगा।

नो यूपीआई डे
इस महीने की शुरुआत में, होलसेल ट्रेडर्स और रिटेलर्स ने 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR के प्रस्तावित लागू होने के विरोध में 'नो UPI डे' मनाया था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कमेटी 40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले बिजनेस को MDR फीस से छूट देने पर भी विचार कर रही है। मौजूदा फ्रेमवर्क के तहत 1 लाख रुपये तक के मंथली टर्नओवर वाले बिजनेस को रोलआउट के तहत छूट दी जानी थी।

PM मोदी का बड़ा बयान- गांव से शहर तक पहुंची 5G कनेक्टिविटी, भारत बन रहा डिजिटल पावरहाउस

PM मोदी का बड़ा बयान- गांव से शहर तक पहुंची 5G कनेक्टिविटी, भारत बन रहा डिजिटल पावरहाउस

 इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया. IMC 2026 देश का बड़ा टेक और टेलीकॉम इवेंट है. इसका आयोजन 7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि में हो रहा है. इस बार IMC का 10वां एडिशन है.

नरेंद्र मोदी ने IMC 2026 का उद्घाटन करते समय सबसे पहले लोगों का धन्यवाद किया. उन्होंने बताया कि आज भारत के लिए एक विशेष दिन है.  साथ ही उन्होंने बताया कि कल ही उन्हें देश की सेवा करते हुए 25 साल पूरे हुए हैं. उद्घाटन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिनेता नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी.

नरेंद्र मोदी ने बताया है कि बीते 10-12 सालों में मोबाइल फोन गर्वनेंस का टूल बनकर सामने आया है. यह हमारे डिजिटल इंडिया का को रहा है. आज दूर सुदूर गांव और गरीब के बच्चे भी मोबाइल की वजब से बेहतर एजुकेशन पा रहे हैं.

कोरोना माहामारी के दौरान भी मिला फायदा – मोदी
मोबाइल से कोरोना महामारी के दौरान भी काम और पढ़ाई जारी रही, जो नई टेक्नोलॉजी की वजह से संभव हुआ. दूर-दराज के गांवों के बच्चे भी डिजिटल लर्निंग का फायदा उठा पा रहे हैं. उन्होंने ऑनलाइन एजुकेशन के लिए ‘दीक्षा’ प्लेटफॉर्म के बारे में भी बात की.

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि अब सरकारी योजना और सब्सिडी का लाभ आम लोगों तक आसानी से पहुंच रहा है. साथ ही उन्होंने बताया है कि भारत में टेलिकॉम सेक्टर का विस्तार हुआ है. रिमोट एरिया में भी टेलिकॉम का विस्तार हुआ और डेटा भी अफोर्डेबल हुआ है.

आज भारत में 50 करोड़ लोग किसी ना किसी तरह से गेमिंग सेक्टर से जुड़ा है. लोग गेमिंग से जुड़ने के साथ ही ई स्पोर्ट्स में कॉन्ट्रीब्यूट भी कर रहा है. सस्ते डेटा की वजह से सभी को फायदा हुआ है. सिर्फ कंटेंट क्रिएशन की इंडस्ट्री भारत में हजारों करोड़ रुपये की हो चुकी है.

फोन की सिक्योरिटी और नेटवर्क सिक्योरिटी हम सभी की प्राथमिकता है. अब लोगों को पता रहता है कि फोन कौन कर रहा है और मैसेज कौन कर रहा है. साथ ही लोगों को पता रहता है कि कॉल और मैसेज फेक हैं या नहीं. उन्होंने बताया है कि साइबर फ्रॉड और साइबर क्राइम सीमाएं नहीं मानते हैं. इसके लिए जरूरी कि साइबर फ्रॉड से मुकालबा करने के लिए एक ग्लोबल फ्रेम वर्क तैयार करना चाहिए. पीएम ने कहा कि ऐसे मैकेनिज्म तैयार करें जिससे साइबर फ्रॉड को रोका जा सके.

इंडिया मोबाइल कांग्रेस की थीम ‘Scale Without Boundaries’ है. यहां 5G, 6G, AI, IoT, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और दूसरी नई टेक्नोलॉजी देखने को मिल रही हैं. दुनियाभर की बड़ी टेक और टेलीकॉम कंपनियां, स्टार्टअप और इंडस्ट्री के बड़े नाम इस इवेंट में हिस्सा ले रहे हैं. आइए जानते हैं क्या होगा इस इवेंट में.

फ्यूचर टेक्नोलॉजी की झलक
IMC 2026 एशिया का बड़ा टेक्नोलॉजी शोकेस होने वाला इवेंट है. इस इवेंट में देश और दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों से लेकर नए-नए स्टार्टअप अपने प्रोडक्ट्स और भविष्य में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी की झलक दिखा रहे है. इस इवेंट में टेलीकॉम को 5G से 6G तक कैसे लेकर जाया जाए, इस पर भी बात होगी.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को देश में ही कैसे बनाया जा सके और लोगों के भले के लिए इसका इस्तेमाल कैसे हो, इस पर भी चर्चा होगी. स्टार्टअप्स अपने AI प्रोडक्ट्स की झलक दिखा सकते हैं. इसके अलावा, इस साल कुछ नई चीजें भी जोड़ी गई हैं, जैसे स्मार्ट मोबिलिटी और इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स. आने वाले समय में बड़े स्तर पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है.इनका डेमोंस्ट्रेशन और एग्जिबिशन भी लगाया गया है.

कैसे हिस्सा लें इस इवेंट में
IMC 2026 के इवेंट में जाकर नई टेक्नोलॉजी को समझने और डेमोंस्ट्रेशन देखने के लिए आप रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. स्टूडेंट्स और विजिटर्स के लिए फ्री एंट्री दी गई है. रजिस्ट्रेशन करने के लिए IMC के ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन पोर्टल से रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है.

यूपी में अब गन्ने से नहीं अनाज से बनेगी देसी शराब! पंजाब-हरियाणा से होगी बड़े पैमाने पर खरीद

यूपी में अब गन्ने से नहीं अनाज से बनेगी देसी शराब! पंजाब-हरियाणा से होगी बड़े पैमाने पर खरीद

 लखनऊ- यूपी में गन्ने की कमी और शराब की बढ़ती मांग ने आबकारी विभाग को देसी शराब के उत्पादन का तरीका बदलने पर मजबूर कर दिया है। अब गन्ने के शीरे पर निर्भरता कम करते हुए अनाज से शराब का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। इसके लिए पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों से बड़े पैमाने पर अनाज खरीदने की तैयारी है। आबकारी विभाग ने इसके लिए सहमति दे दी है।

अभी तक प्रदेश में देसी शराब के साथ अंग्रेजी रम के उत्पादन में बड़े पैमाने पर गन्ने के शीरे का इस्तेमाल होता रहा है। गन्ने की उपलब्धता कम होने से शीरे की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। दूसरी ओर शराब की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए आबकारी विभाग ने वैकल्पिक कच्चे माल के रूप में अनाज के इस्तेमाल पर जोर दिया है। पिछले दिनों मुख्यालय में हुई बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई।

अधिकारियों ने माना कि गन्ने और शीरे की उपलब्धता पर पूरी तरह निर्भर रहने से शराब उत्पादन में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में अनाज से बनने वाली शराब का उत्पादन बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए पंजाब और हरियाणा समेत उन राज्यों से अनाज की खरीद बढ़ाई जाएगी । विभागीय स्तर पर अनाज आधारित शराब के उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। जिला आबकारी अधिकारी सुशील कुमार मिश्र ने बताया कि गन्ने की कमी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

जिले में खुलेगा लो अल्कोहलिक ब्रिवरेज बार
अगर आप ऐसी बीयर या शराब के शौकीन है कि पीने के बाद हल्का सुरूर तो हो, लेकिन नशे में झूमें नहीं तो अब आपको ऐसा बार मिलने जा रहा है। प्रयागराज के पहले लो अल्कोहलिक ब्रिवेजर बार को जिला बार समिति ने अनुमोदन दे दिया है। अनुमोदन मिलने के बाद होटल संचालक ने इसकी राशि भी जमा कर दी है, माना जा रहा है कि 10 दिन के भीतर यहां पर लोगों को पीने के लिए कम नशे वाली बीयर और वाइन मिलेगी।

अब तक जिले में जो भी बार खुले हैं, उनमें हर प्रकार की अंग्रेजी शराब मिलती है। महानगरों में लो अल्कोहलिक ब्रिवरेज बार का चलन है। प्रयागराज जैसे शहर में अब तक किसी ने इसे खोलने का साहस नहीं जुटाया था। अब जबकि शहरीकरण बढ़ रहा है और मॉडर्न जीवनशैली को लोग अपना रहे हैं तो शहर में इसकी मांग उठने लगी थी। इसे देखते हुए सिविल लाइंस सुभाष चौराहे करीब स्थित सम्राट होटल में इस बार को खोला जा रहा है।

अनाज से तैयार होती है व्हिस्की
अब तक अनाज से मुख्य रूप से व्हिस्की ही तैयार की जाती है। हालांकि रम और देसी के लिए मुख्य रूप से गन्ने का रस ही इस्तेमाल किया जाता है। देसी शराब ही प्रदेश में सबसे ज्यादा मांग वाली शराब है। गन्ने का इस्तेमाल होने से देसी शराब का उत्पादन प्रभावित हो सकता हे। ऐसे में इसके विकल्प के रूप में अनाज के इस्तेमाल की तैयारी शुरू कर दी गई है।

योगी सरकार ने 17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की सूरत

योगी सरकार ने 17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की सूरत

 योगी सरकार ने 17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की सूरत

 योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण और तकनीक पर दिया जोर

पिछले नौ वर्षों में जेल विभाग के बजट में 215 फीसदी का इजाफा

 वर्ष 2017-18 में 913 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में 2,877 करोड़ हुआ बजट

लखनऊ- योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की जेल व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और बेहतर सुविधाओं से लैस करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। इस दौरान जेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण और नई तकनीक पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की। इसमें सबसे अधिक धनराशि जेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की गयी। 

जेल विभाग के बजट में 215 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
डीजी, कारागार एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना ने बताया कि योगी सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही जेलों की व्यवस्थाओं को भी समय के अनुरूप बनाने पर जोर दिया है। योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश की जेल व्यवस्था में एक ओर जहां क्षमता विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक के जरिए सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में जेल विभाग के लिए बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में जेल विभाग के लिए कुल 913.07 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इसके मुकाबले वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 2,877.58 करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में जेल विभाग के बजट में करीब 215 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच जेल विभाग के लिए कुल 5,494.41 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया जबकि वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक यह राशि बढ़कर 11,913.53 करोड़ रुपये हो गई। यह बढ़ोतरी योगी सरकार की ओर से जेलों के विकास और आधुनिकीकरण को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है।

जेलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
डीजी ने बताया कि योगी सरकार की ओर से प्रदेश में नई जेलों के निर्माण के साथ ही बंदी क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। अमेठी में 176.12 करोड़, महोबा में 203.42 करोड़, हाथरस में 184.94 करोड़, कुशीनगर में 228.31 करोड़, जौनपुर में 179.79 करोड़, और हापुड़ में 190.08 करोड़ की लागत से जिला कारागार का निर्माण किया जा रहा है। नई जेलों के निर्माण के साथ ही प्रस्तावित कारागारों के लिए भूमि की खरीद की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। संभल में प्रस्तावित जेल के लिए शासन की ओर से 24.56 करोड़, शामली में 96.20 करोड़, बलिया में 24.12 करोड़, सहारनपुर में 50.87 करोड़, अमरोहा में 32.28 करोड़ और चंदौली में 34.27 करोड़ रुपये भूमि के लिए स्वीकृत किए गये हैं।

बिहार के 7136 उद्यमियों को ₹150 करोड़ का तोहफा, सम्राट चौधरी ने किया 1 करोड़ परिवारों के लिए बड़ा ऐलान

बिहार के 7136 उद्यमियों को ₹150 करोड़ का तोहफा, सम्राट चौधरी ने किया 1 करोड़ परिवारों के लिए बड़ा ऐलान

 पटना- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के युवा उद्यमियों को बड़ा तोहफा दिया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री ने बिहार के 7 हजार से ज्यादा उद्यमियों को 150 करोड़ रुपये भेजे। इसी के साथ सीएम ने राज्य के 1 करोड़ परिवारों के लिए बड़ा ऐलान भी किया है। सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के 7136 लाभुकों के बीच करीब 150 करोड़ रुपये वितरित किया। पटना के बापू सभागार में उद्यमी योजना के कई लाभुक मौजूद थे। उद्यमियों को पहली किस्त दी गई है। पहली किस्त के तौर पर लाभुकों को दो-दो लाख रुपये की किस्त दी गई है।

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ऐलान किया कि बिहार के एक करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाना है। राज्य सरकार इसके लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 25 से 40 प्रतिशत की खरीद बिहार में उत्पादित सामान का करेगी।अगले पांच वर्षों में बिहार की तकदीर को बदलना है। इसके लिए हमसभी को मिलकर काम करना है। उन्होंने कहा कि अगले एक साल में सभी कृषि फीडर को सोलरयुक्त कर देंगे।

बता दें कि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 10 लाख की सहायता राशि उपलब्ध करवाई जाएगी। इसमें 5 लाख रुपये का किस्त ही उद्यमियों को देना होगा। इस पैसे से अलग-अलग तरह के व्यवसाय शुरू किए जा सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार औऱ स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहित करना है। इसमें 5 लाख तक का ब्याज मुक्त कर्ज शामिल है।

अगले 10 साल में $8 ट्रिलियन के पार पहुंचेगी भारतीय इकोनॉमी, KKR ने जताया भरोसा

अगले 10 साल में $8 ट्रिलियन के पार पहुंचेगी भारतीय इकोनॉमी, KKR ने जताया भरोसा

 नई दिल्ली- दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं इस समय कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही हैं. कहीं महंगाई दबाव बना रही है, तो कहीं कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक रफ्तार के लिए चुनौती बने हुए हैं. इन सबके बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी रफ्तार बनाए रखने में सफल रही है. ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म 'कोहलबर्ग क्राविस रॉबर्ट्स एंड कंपनी' (Kohlberg Kravis Roberts & Co. – KKR) का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था के आगे अभी लंबी ग्रोथ की गुंजाइश है और अगले 10 साल में यह 8 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा के स्तर तक पहुंच सकती है। 

केकेआर ने अक्टूबर 2026 की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का लेवल पार कर चुका है. अब यहां से अर्थव्यवस्था के फिर दोगुना होने की राह बनती दिख रही है. फर्म के मुताबिक, पिछले एक दशक में किए गए कई ढांचागत सुधारों, डिजिटलाइजेशन और लगातार बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ने भारत की विकास क्षमता को मजबूत किया है। 

सुधारों का असर अब दिख रहा

केकेआर के मुताबिक, 2014 के बाद भारत में कई ऐसे बड़े बदलाव हुए, जिनका असर धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था की बुनियाद पर पड़ा है. इनमें वस्तु एवं सेवा कर (GST), इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड और लेबर मार्केट का ज्यादा औपचारिक होना शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता को बढ़ाया है. केकेआर का मानना है कि ऐसे ढांचागत सुधारों का असर किसी एक तिमाही में नहीं, बल्कि कई वर्षों में दिखाई देता है. फर्म के मुताबिक, ये बदलाव भारत के लिए 10-11% की नॉमिनल GDP ग्रोथ के रास्ते को सहारा दे सकते हैं। 

अभी पूरी नहीं भारत की ग्रोथ स्टोरी
केकेआर का कहना है कि भारत की आर्थिक कहानी अभी पूरी नहीं हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, आगे की ग्रोथ सिर्फ नए सुधारों से नहीं आएगी, बल्कि पहले से लागू किए गए सुधारों का पूरा असर सामने आने से भी अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है. फर्म के अनुसार, अर्थव्यवस्था के ज्यादा औपचारिक होने से कारोबार और कैश फ्लो से जुड़े जोखिमों में कमी आई है. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के लंबे समय के आउटलुक को मजबूती मिली है। 

बढ़ती आय और खपत बड़ा सहारा
भारत की बढ़ती आय और घरेलू खपत भी केकेआर की नजर में लंबी अवधि की बड़ी ताकत है. जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ती है, वैसे-वैसे सामान और सेवाओं पर खर्च भी बढ़ता है. इससे अर्थव्यवस्था में मांग बनी रहती है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी इस रफ्तार के लिए छोटी अवधि में चुनौती बन सकती है. रिपोर्ट में करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के कच्चे तेल की कीमत का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इससे कुछ समय के लिए ग्रोथ धीमी हो सकती है. हालांकि, केकेआर के मुताबिक सरकारी नीतियों ने इस बार घरेलू परिवारों पर उतना बोझ नहीं डाला है, जितना पिछले तेल संकटों के दौरान देखने को मिला था। 

सर्विसेज बनीं ग्रोथ की बड़ी ताकत
भारत के लिए सर्विसेज सेक्टर भी आर्थिक विकास का एक अहम इंजन बनकर उभरा है. केकेआर के मुताबिक, सर्विसेज एक्सपोर्ट अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं. ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी GCC भी पारंपरिक आईटी सर्विसेज के साथ-साथ ग्रोथ का बड़ा स्रोत बनते जा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सर्विसेज का योगदान भारत की रियल GDP ग्रोथ में आधे से ज्यादा है. आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस क्षेत्र के विकास का अगला बड़ा चरण बन सकता है। 

इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश भी अहम
केकेआर ने भारत के लगातार बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को भी अर्थव्यवस्था की क्षमता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण फैक्टर बताया है. सड़क, रेलवे, बंदरगाह, एयरपोर्ट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से न केवल आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं, बल्कि लंबे समय में कारोबार की लागत और समय को कम करने में भी मदद मिलती है. कुल मिलाकर, केकेआर की रिपोर्ट भारत की लंबी अवधि की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश करती है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों जैसी वैश्विक चुनौतियां बीच-बीच में रफ्तार पर असर डाल सकती हैं. इसके बावजूद केकेआर का अनुमान है कि अगले 10 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था 8 ट्रिलियन डॉलर से आगे जाने की राह पर है। 

त्रिवर्षीय आबकारी नीति से निर्यात उछला तो यूपी में किसानों और उद्योगों के लिए बढ़े अवसर

त्रिवर्षीय आबकारी नीति से निर्यात उछला तो यूपी में किसानों और उद्योगों के लिए बढ़े अवसर

लखनऊ - उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) का असर विदेशी बाजारों से आगे किसानों और उद्योगों तक दिखाई देने लगा है। निर्यात बढ़ने के साथ कच्चे माल की मांग में भी तेजी आई है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, जबकि ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने के कारण अनाज की खरीद में वृद्धि हुई है। इससे कृषि और उद्योग के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है।

नई इकाइयों से औद्योगिक गतिविधियों को बल

प्रदेश में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों के बीच नई इकाइयों की स्थापना का सिलसिला भी आगे बढ़ रहा है। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने इकाई स्थापित की है। इससे संबंधित क्षेत्रों में उत्पादन और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की दिशा में कदम बढ़े हैं।

चीनी मिलों के शीरे की बढ़ी मांग

आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में नीति का लाभ प्रदेश के किसानों तक पहुंच रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है। वहीं ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने के कारण अनाज की खरीद में भी वृद्धि हुई है। इससे किसानों के उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ कृषि और उद्योग के बीच आर्थिक गतिविधियों का संबंध मजबूत हुआ है।

बंद इकाई फिर हुई सक्रिय

मुरादाबाद में एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने बंद इकाई को फिर सक्रिय किया है। वहीं गोरखपुर में कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है। आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि निर्यात के विस्तार के साथ प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। नई इकाइयों की स्थापना और बंद इकाइयों के पुनर्जीवन से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ संबंधित क्षेत्रों में कारोबारी अवसर भी पैदा हो रहे हैं। नीति में किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा गया है। जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति की छूट नहीं दी जाएगी। इसके जरिए नीति के लाभ को निर्धारित नियामकीय शर्तों से जोड़ा गया है।

4 माह में 183 लाख डॉलर का निर्यात, 66 लाख डॉलर अतिरिक्त विदेशी मुद्रा

अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 183 लाख डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 117 लाख डॉलर था। इस तरह चार माह में 56.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि राष्ट्रीय वृद्धि 20.4 प्रतिशत रही। प्रदेश ने इस अवधि में 66 लाख डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अर्जित की। राष्ट्रीय निर्यात में हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई और प्रदेश चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच गया। निर्यात लाइनें 29 से बढ़कर 39 तथा संचालित बंदरगाहों की संख्या सात से बढ़कर 10 हो गई।

Rafale से पहले भारत को मिला ‘महाबली’, नौसेना को नया फ्लीट सपोर्ट शिप; समंदर में बढ़ेगी ताकत

Rafale से पहले भारत को मिला ‘महाबली’, नौसेना को नया फ्लीट सपोर्ट शिप; समंदर में बढ़ेगी ताकत

 मुंबई - 114 राफेल फाइटर जेट की खेप भारत आने से पहले डिफेंस सेक्‍टर से बड़ी खुशखबरी सामने आई है. इससे इंडियन नेवी की ताकत बढ़ने की संभावना है. भारतीय नौसेना के बेड़े में ‘सूर्या’ शामिल किया गया है. यह भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया फ्लीट सपोर्ट शिप-1 है.  इसका जलावतरण (यानी लॉन्‍च) किया गया. इस जहाज का नाम ‘सूर्या’ रखा गया है और इसकी मौजूदगी से नौसेना की पहुंच और क्षमता मजबूत होगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सूर्या को इंडियन नेवी में शामिल किया. इसी अवसर पर हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में नए एडवांस स्लिपवे और 300 टन क्षमता वाले गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया गया. साथ ही एक और फ्लीट सपोर्ट शिप के निर्माण के लिए कील (शुरुआत) भी रखी गई. भारत इंडियन आर्मी और एयरफोर्स के साथ ही इंडियन नेवी को भी अपग्रेड कर रहा है। 

इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एक ही स्थान पर एक ही अवसर के दौरान ये तीनों उपलब्धियां भारत की बढ़ती समुद्री ताकत और जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाती हैं. उन्होंने कहा, ‘यह जलावतरण हमारी उपलब्धि का प्रतीक है, कील रखना हमारे संकल्प का प्रतीक है और नया स्लिपवे हमारी बढ़ती हुई क्षमता का प्रतीक है. आज हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में हम जहाज बनाने के साथ-साथ भारत की समुद्री शक्ति के भविष्य की नींव को और मजबूत कर रहे हैं। 

गौरवशाली विरासत को मजबूत करने का प्रयास
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के रूप में बार-बार अपनी क्षमता साबित की है. मानवीय सहायता और आपदा राहत, समुद्री डकैती रोधी अभियान, निकासी अभियान या समुद्री सुरक्षा जैसी हर परिस्थिति में नौसेना ने अपनी तत्परता और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है. उन्होंने कहा कि भारत को बड़ी समुद्री शक्ति बनाने की दिशा में आगे बढ़ना कोई नया अध्याय शुरू करना नहीं है. बल्कि यह उस गौरवशाली विरासत को फिर से मजबूत करने का प्रयास है, जिसे भारत ने सदियों पहले स्थापित किया था. इस समुद्री यात्रा में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की महत्वपूर्ण भूमिका है। 

राष्ट्रीय समुद्री क्षमता का संरक्षक
डिफेंस मिनिस्‍टर राजनाथ सिंह ने आगे बताया कि हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड भारत की राष्ट्रीय समुद्री क्षमता का संरक्षक है. आठ दशकों से अधिक समय से यह संस्थान देश की समुद्री और रक्षा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय के अधीन आने के बाद मंत्रालय और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के प्रयासों से इसकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है. वर्ष 2025 में इसे मिनीरत्न श्रेणी-1 का दर्जा मिलना इसके बदलाव और पिछले वर्षों में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों का प्रमाण है. राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की समुद्री ताकत का निर्माण अकेले नौसेना या अकेले जहाज निर्माण कारखाने नहीं कर सकते. इसके लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय समुद्री तंत्र जरूरी है। 

समंदर में इंडियन नेवी की पहुंच होगी मजबूत
उन्होंने विश्वास जताया कि नौसेना, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, शिक्षण संस्थान, उद्योग, एमएसएमई तथा नव उद्यम एक एकीकृत टीम के रूप में काम करें. उन्होंने कहा कि फ्लीट सपोर्ट शिप का जलावतरण भारतीय नौसेना की पहुंच, लंबे समय तक समुद्र में सक्रिय रहने की क्षमता और अभियान प्रभावशीलता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. पिछले एक दशक में भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र में बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि देश आयातित प्लेटफार्म पर निर्भरता से आगे बढ़कर स्वयं उन्नत प्रणालियों और प्लेटफार्म को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. आज भारतीय जहाज निर्माण कारखाने उन्नत युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल आत्मनिर्भर बनना नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना है। 

‘आत्मनिर्भरता हमारी मंजिल’
रक्षा मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता हमारी मंजिल का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जबकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा हमारी अगली बड़ी छलांग है. उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी स्थिति हासिल करनी होगी, जहां उसके जहाज निर्माण कारखाने भारतीय नौसेना के साथ-साथ मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भी जहाज और समुद्री सेवाएं उपलब्ध करा सकें. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लक्ष्य स्पष्ट है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण किया जाए. ऐसा भारत जो आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समृद्ध हो तथा विश्व पटल पर सम्मान के साथ खड़ा हो। 

8वें वेतन आयोग के बीच फिर बढ़ेगा DA? केंद्रीय कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत

8वें वेतन आयोग के बीच फिर बढ़ेगा DA? केंद्रीय कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत

 नई दिल्ली-  केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता यानी डीए में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार है। साल की दूसरी छमाही के लिए डीए बढ़ोतरी का ऐलान इसी महीने यानी अक्टूबर में ही होने की उम्मीद है। आठवें वेतन आयोग के दौर में यह दूसरी बार होगा जब सरकार महंगाई भत्ते का ऐलान करेगी। इससे पहले अप्रैल महीने में भी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डीए को 2 पर्सेंट बढ़ाया गया था।

कब हुआ था 8वें वेतन आयोग का गठन
वैसे तो सरकार ने पिछले साल जनवरी महीने में ही आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया था लेकिन 2025 के नवंबर महीने में टर्म्स ऑफ रेफरेंस और समिति का गठन हुआ। इससे एक महीने पहले यानी अक्टूबर 2025 में सातवें वेतन आयोग के आखिरी दौर में सरकार ने डीए बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया था। बता दें कि सातवें वेतन आयोग की अवधि दिसंबर 2025 में खत्म हो गई। अब ऐसा माना जा रहा है कि सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें जब लागू करेगी तो जनवरी 2026 से ही प्रभावी होगा।

अप्रैल में पहली बार डीए का ऐलान
आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद सरकार ने अप्रैल महीने में पहली बार डीए का ऐलान किया था। यह ऐलान जनवरी से जून छमाही के लिए किया गया था। डीए में 2 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई और इसका कैल्कुलेशन सातवें वेतन आयोग के तहत ही किया गया। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का भत्ता 60 पर्सेंट है।

कितनी हो सकती है बढ़ोतरी?
केंद्र सरकार के कर्मचारियों को फिलहाल 60 पर्सेंट की दर से डीए मिल रहा है। AICPI-IW के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर DA में 4 से 5 पर्सेंट बढ़ोतरीका अनुमान लगाया जा रहा है। अगर यह बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 64 पर्सेंट से 65 पर्सेंट का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। हालांकि, अंतिम डीए दर का फैसला सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। बता दें कि 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों के पूरे वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन की समीक्षा कर रहा है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। इसके आधार पर नए वेतन ढांचे में बेसिक पे में बड़ा बदलाव हो सकता है।

वहीं, डीए पर क्या फैसला होगा, इसके बारे में वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद ही फैसला होगा। ऐसा अनुमान है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशें मई या जून 2027 तक सरकार को सौंप देगा। इसके बाद सरकार इसे लागू करेगी।

CM Youth Conclave: MP में साल में दो बार होगी PSC परीक्षा, 2027 को ‘युवा वर्ष’ बनाएगी सरकार

CM Youth Conclave: MP में साल में दो बार होगी PSC परीक्षा, 2027 को ‘युवा वर्ष’ बनाएगी सरकार

 सलमान खान ने 'काला हिरण' फिल्म पर रोक की मांग करते हुए एक मुकदमा दायर किया था. वहीं फिल्म के प्रोड्यसूर अमित जानी ने एक्टर की याचिका के खिलाफ एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि इस तरह का विवाद पहले से ही एक्टर द्वारा दायर एक पुराने मुकदमे में चल रहा है. ऐसे में अब मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे लेकर सलमान खान से जवाब मांगा है.

सलमान खान से दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
अमित जानी ने ये अर्जी जस्टिस अनूप जयराम भंभानी के सामने पेश की थी. अमित जानी के वकील ने कहा कि हाई कोर्ट में पहले से लंबित एक केस में भी इसी तरह की राहत की मांग की गई थी. ऐसे में काला हिरण के मेकर्स की तरफ से सलमान की नई याचिका पर रोक लगाने की मांग की गई. जानी के वकील ने सलमान को लेकर कहा, 'उन्होंने पिछले मुक़दमे में भी ऐसी ही मांगें की थीं.'

सलमान के वकील ने क्या कहा?
इस मामले में सलमान खान की तरफ से पेश हुए वकील रवि प्रकाश ने कहा कि अर्जी का जवाब दिया जाएगा. कोर्ट में सुनवाई के वक्त कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगते हुए पूछा कि क्या यह मुक़दमा पर्सनैलिटी राइट्स के लिए था?' इस पर प्रकाश ने कहा कि सलमान का असल मुकदमा उनके व्यक्तित्व अधिकारों से संबंधित था और कोर्ट ने तब उनके पक्ष में आदेश दिया था. इसके बाद एक फिल्म (काला हिरण) का ऐलान किया गया जो एक्टर की लाइफ से जुड़ी घटना पर बेस्ड थी.

बता दें कि साल 2025 में प्रोड्यूसर अमित जानी ने 'काला हिरण: द बैटल फॉर लीगल' नाम से फिल्म बनाने का ऐलान किया था. हालांकि इस पर सलमान ने आपत्ति जताई थी. उनका मानना था कि ये फिल्म में उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकती है, क्योंकि साल 1998 के काला हिरण विवाद में एक्टर का नाम जुड़ा था. सलमान के वकील ने आगे कहा कि फिल्म से जुड़े प्रमोशनल मटीरियल, इंटरव्यू और प्रोड्यूसर के बयानों का उस वक्त हवाला दिया गया था.

16 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले में अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2026 को होगी. बता दें कि इससे पहले हुई सुनवाई में फिल्म काला हिरण की रिलीज को लेकर कोर्ट ने स्पष्ट जानकारी मांगी थी. तब बताया गया था कि फिल्म अभी रिलीज की स्थिति में नहीं है. न ही इसका ट्रेलर रिलीज हुआ.

वहीं इसके बाद की सुनवाई में सलमान की याचिका पर गौर करते हुए कोर्ट ने फिल्म से जुड़े टीजर और अन्य कंटेंट को सोशल मीडिया से हटाने के लिए कहा था. हालांकि काला हिरण के मेकर्स इनकार करते रहे हैं कि फिल्म का सलमान खान से कोई लेना-देना नहीं है. ये फिल्म उनकी काला हिरण घटना से ताल्लुक नहीं रखती है.

CM Youth Conclave: MP में साल में दो बार होगी PSC परीक्षा, 2027 को ‘युवा वर्ष’ बनाएगी सरकार

CM Youth Conclave: MP में साल में दो बार होगी PSC परीक्षा, 2027 को ‘युवा वर्ष’ बनाएगी सरकार

 भोपाल - मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने भोपाल के लाल परेड मैदान में युवाओं से संवाद किया है। 20000 युवाओं से संवाद के लिए सीएम यूथ कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था। इस दौरान युवाओं के बीच मशहूर सिंगर जुबिन नौटियाल ने अपनी प्रस्तुति दी है। जुबिन ने कहा कि हमें युवाओं से मिलने का मौका मिला है। वहीं, सीएम मोहन यादव ने कहा कि अब मध्य प्रदेश में दो बार पीएससी की परीक्षाएं होंगी।

चलते-चलते युवाओं को संबोधित किया
सीएम मोहन यादव का यूथ कॉन्क्लेव में बिल्कुल अलग अंदाज देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि मंच पर चलते-चलते युवाओं को संबोधित किया। संबोधन के दौरान क्रिकेट मैच का जिक्र किया है। साथ ही कहा कि हमने युवाओं के जरिए क्रिकेट मैच में पाकिस्तान को पटखनी दी है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सबसे युवा प्रदेश है। साथ ही यहां बेरोजगारी दर भी सबसे कम है।

हमारे राज्य में सारे असंभव काम पूरे हो रहे
मोहन यादव ने कहा कि हमारे यहां सारे असंभव काम हो रहे हैं। अब मध्य प्रदेश इंडस्ट्री लगाने वाले प्रदेश बन गया है। नए मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं। हमारे राज्य में अलग-अलग सरकारी पदों पर 85000 लोगों को नौकरियां मिली हैं। हम युवाओं को अपने बीच में पाकर यह पाते हैं कि अब सही समय है।

अगले साल से दो बार होगी पीएससी
युवाओं के लिए सीएम मोहन यादव ने एक बड़ी घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा है कि अभी तक प्रदेश में एमपीपीएससी की परीक्षा एक बार होती थी लेकिन अब साल में दो बार होगी। उन्होंने कहा कि युवा मित्रों के लिए हम दो पीएससी की परीक्षा करवाने वाले हैं।

12 यूनिवर्सिटी खोलेंगे
सीएम मोहन यादव ने कहा कि हम प्रदेश में नए 12 यूनिवर्सिटी खोलेंगे। हम लोग लगातार प्रदेश के आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे। मोहन यादव ने कहा कि हम अगले साल युवा वर्ष के रूप में मनाएंगे। मोहन यादव ने बच्चों के बीच गमछा भी लहराया है। वर्ष 2027 युवा वर्ष में शासकीय कॉलेज में अनुसंधान करने वालों का 25000 की स्कॉलरशिप प्रतिमाह मिलेगी ।

हमारी सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए फ्री में कोचिंग की व्यवस्था कर रही है। सभी शासकीय महाविद्यालयों में भी यह व्यवस्था होगी।
मोहन यादव, सीएम

एआई रोडमैप को लेकर सवाल
एक छात्रा ने सीएम मोहन यादव से एआई रोडमैप को लेकर सवाल किया है। मोहन यादव ने कहा कि एआई सिटी और नॉलेज एमपी में बन रही है। सरकार अपनी तरफ से स्टार्टअप के लिए पांच-पांच लाख रुपए का अनुदान दे रही है। इंदौर, रीवा और उज्जैन में हम आईटी पार्क बना रहे हैं। देश का सबसे बड़ा टेलीकॉम हब हम ग्वालियर में बनाने जा रहे हैं।

वहीं, सीएम खेल को बढ़ावे की बात भी कही है। उन्होंने कहा कि भोपाल में सबसे बड़ा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बन रहा है। हम हर विधानसभा क्षेत्र में स्टेडियम बना रहे हैं। हम स्पोर्ट्स को और आगे बढ़ाएंगे।

घर पर भी सुरक्षित नहीं बेटियां… घर घुसकर बंदूक की नोक पर नाबालिग से दुष्कर्म, दी जान से मारने की धमकी

घर पर भी सुरक्षित नहीं बेटियां… घर घुसकर बंदूक की नोक पर नाबालिग से दुष्कर्म, दी जान से मारने की धमकी

 अमेठी।  उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, गांव के ही करीब साढ़े 17 साल ने  रात के समय लड़की के घर में घुसा और हथियार के बल पर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के दौरान पीड़िता और उसकी मां को जान से मारने की धमकी दी है। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद से आरोपी फरार बताया जा रहा है और उसकी तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगाई गई हैं।

रात में घर में घुसने का आरोप

पुलिस के अनुसार घटना 3 अक्टूबर की रात करीब डेढ़ बजे की बताई जा रही है। आरोप है कि इसी गांव का रहने वाला किशोर पीड़िता के घर में दाखिल हुआ और कथित तौर पर बंदूक दिखाकर वारदात को अंजाम दिया। घटना के दौरान लड़की के चिल्लाने की आवाज सुनकर उसकी मां मौके पर पहुंचीं। आरोप है कि आरोपी ने उन्हें भी धमकाया और घटना के बारे में किसी को जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी दी।

दो दिन बाद दर्ज हुई शिकायत

घटना के संबंध में 5 अक्टूबर को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पीड़िता की मां की शिकायत के आधार पर रामगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।

पीड़िता की मेडिकल जांच जारी

रामगंज थाना प्रभारी राम राज कुशवाहा के मुताबिक, शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। नाबालिग पीड़िता की मेडिकल जांच कराई जा रही है, ताकि जांच में आवश्यक चिकित्सकीय साक्ष्य जुटाए जा सकें। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं। संभावित ठिकानों पर तलाश के साथ मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

पुलिस की कार्रवाई जारी

पुलिस के मुताबिक आरोपी घटना के बाद से फरार है। उसकी तलाश में अलग-अलग टीमों को लगाया गया है और जल्द गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है। घटना से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। पुलिस ने नाबालिग पीड़िता की सुरक्षा और मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।

मां दुर्गा की भक्ति में डूबेगा देश, जानें नवरात्रि की सभी खास तिथियां और पूजा से जुड़ी जरूरी बातें

मां दुर्गा की भक्ति में डूबेगा देश, जानें नवरात्रि की सभी खास तिथियां और पूजा से जुड़ी जरूरी बातें

 Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। नवरात्रि के दौरान देशभर में मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना, व्रत, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इस दौरान भक्त मां दुर्गा की आराधना कर सुख-समृद्धि, शांति, शक्ति और खुशहाली की कामना करते हैं।

इस बार भी नवरात्रि को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिलेगा। पितृ पक्ष के बाद मां दुर्गा की आराधना का सिलसिला शुरू होगा और नौ दिनों तक अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के अंतिम चरण में अष्टमी और नवमी के विशेष अनुष्ठान होंगे, जिसके बाद विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।

घटस्थापना का क्या है महत्व?

नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना या कलश स्थापना से होती है। इसे नवरात्रि के सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश को देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के बाद विधि-विधान से कलश की स्थापना की जाती है।

कलश स्थापना के दौरान कलश में जल भरकर उसमें आवश्यक पूजन सामग्री रखी जाती है। इसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखने की परंपरा है। कई घरों में कलश के साथ जौ भी बोए जाते हैं। नवरात्रि के दौरान इन जौ की बढ़ती हरियाली को शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है।

घटस्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त देखकर करने की परंपरा है। इसके लिए स्थानीय पंचांग को देखना जरूरी होता है, क्योंकि अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय समय के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर हो सकता है।

नवरात्रि के नौ दिनों में किस देवी की पूजा होती है?

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक स्वरूप का अपना धार्मिक महत्व माना गया है।

पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को शक्ति और स्थिरता का स्वरूप माना जाता है। नवरात्रि की शुरुआत भक्त मां शैलपुत्री की आराधना और घटस्थापना के साथ करते हैं।

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। धार्मिक मान्यता में मां ब्रह्मचारिणी को तप, त्याग और संयम का स्वरूप माना गया है।

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। मां चंद्रघंटा को साहस और शांति से जुड़ा स्वरूप माना जाता है।

चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की आराधना से भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति प्राप्त होती है।

पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां स्कंदमाता को ममता और वात्सल्य का स्वरूप माना जाता है।

छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना होती है। भक्त मां कात्यायनी की पूजा कर सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि को शक्ति का उग्र स्वरूप माना गया है और उनकी आराधना भय से मुक्ति की कामना के लिए की जाती है।

आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है। मां महागौरी को शांति, पवित्रता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना के साथ नवरात्रि के धार्मिक अनुष्ठानों का समापन माना जाता है।

अष्टमी और नवमी पर विशेष पूजा

नवरात्रि में अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व माना जाता है। इन दिनों देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। कई स्थानों पर कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।

कन्या पूजन के दौरान छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें भोजन कराया जाता है और अपनी श्रद्धा के अनुसार उपहार या दक्षिणा दी जाती है। कई परिवारों में अष्टमी या नवमी के दिन व्रत का पारण भी किया जाता है।

इस बार पंचांग के अनुसार अष्टमी और नवमी से जुड़े प्रमुख अनुष्ठानों को लेकर तिथियों का विशेष संयोग बन रहा है। इसलिए पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना चाहिए।

नवरात्रि में व्रत रखने की परंपरा

नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिन उपवास करते हैं, जबकि कई लोग पहले और अंतिम दिन व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान फलाहार और सात्विक भोजन करने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि में व्रत और मां दुर्गा की पूजा करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। हालांकि व्रत रखने वाले लोगों को अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए।

नवरात्रि के दौरान क्या करें?

नवरात्रि में सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और विधि-विधान से पूजा करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी मंत्रों का पाठ कर सकते हैं।

नवरात्रि के दौरान घर में सात्विक वातावरण बनाए रखने और जरूरतमंद लोगों की मदद करने की भी परंपरा है। मंदिर जाकर मां दुर्गा के दर्शन करना और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है।

नवरात्रि के बाद दशहरा क्यों मनाया जाता है?

नवरात्रि के नौ दिनों के बाद विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसलिए दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरे का पर्व अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। कई शहरों में बड़े मैदानों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। वहीं कई स्थानों पर धार्मिक शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

घटस्थापना करते समय इन बातों का रखें ध्यान

घटस्थापना के लिए पूजा स्थल को सबसे पहले अच्छी तरह साफ करें। कलश स्थापना के लिए साफ और पवित्र स्थान का चयन करें। पूजा के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

कलश में स्वच्छ जल भरकर उसके ऊपर पत्ते और नारियल रखने की परंपरा है। इसके साथ जौ बोने की परंपरा भी कई घरों में निभाई जाती है। घटस्थापना शुभ मुहूर्त में करने की सलाह दी जाती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घटस्थापना का समय शहर के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए इंटरनेट पर किसी दूसरे शहर का मुहूर्त देखने के बजाय अपने शहर के स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय ज्योतिषीय स्रोत से समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना का महत्व

नवरात्रि केवल पूजा और व्रत का पर्व नहीं है, बल्कि इसे शक्ति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव भी माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं और अपने परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा शक्ति का स्वरूप हैं। नवरात्रि के दौरान उनकी आराधना करने से भक्तों में आत्मविश्वास, साहस और सकारात्मक सोच बढ़ने की कामना की जाती है।

नवरात्रि के दौरान मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है और कई स्थानों पर गरबा, डांडिया तथा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। शहरों और गांवों में नवरात्रि की रौनक अलग ही देखने को मिलती है।

 
 
 
बिहार में बाढ़ का रौद्र रूप, 6 जिलों में हालात भयावह; डूबने से 20 लोगों की मौत

बिहार में बाढ़ का रौद्र रूप, 6 जिलों में हालात भयावह; डूबने से 20 लोगों की मौत

 पटना :- बिहार में बाढ़ की स्थिति और भयानक होती जा रही है। गंडक, गंगा, बागमती और घाघरा समेत अन्य नदियों के रौद्र रूप से छह जिलों पूर्वी-पश्चिम चंपारण के अलावा सारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में बाढ़ की स्थिति भयावह बनी हुई है। विशेषकर गंडक अब भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इस कारण तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि नदियों के जलस्तर में कमी हो रही है, लेकिन इसकी रफ्तार इतनी धीमी है कि बाढ़ पीड़ितों को जल्द राहत मिलने की गुंजाइश कम है। उधर, राज्य में बाढ़ के पानी में डूबने से 20 लोगों की मौत हो गई। जल संसाधन विभाग के मुताबिक, सारण के पानापुर और मकेर प्रखंड में क्षतिग्रस्‍त तटबंधों से फैला हुआ पानी पानापुर, करचौलिया, अमनौर, जगदीशपुर, मकेर, परसा से होते हुए आगे बढ़ रहा है, जो दरियापुर प्रखंड के हरदिया चौर में जमा होगा।

⁠हरदिया चौर से अतिरिक्त जल मुगल कैनाल के रास्‍ते गंगा नदी तथा नेऊरा और काकरा नाले से गंडक नदी में प्रवाहित होगा। ⁠वर्तमान में संभावित अतिरिक्त जलप्‍लावन क्षेत्र 22617 हेक्‍टेयर है। प्रभावित तटबंधों की सुरक्षा के लिए विभाग की ओर से रात में विशेष पेट्रोलिंग शुरू की गई है। गोपालगंज को पूर्वी चंपारण, गोपालगंज एवं सारण जिलों को जोड़ने वाली राम-जानकी पथ पर शुक्रवार को तीन फीट से अधिक बाढ़ का पानी बह रहा है। फैजुल्लाहपुर से शीतलपुर जमींदारी बांध तक करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क डूबी हुई है।

इसी तरह, पश्चिम चंपारण के गोलाघाट में टूटे चंपारण तटबंध से गंडक का पानी हरपुरवा होकर चंद्रावत में गिरने से बेतिया, बैरिया और नौतन में पानी फैल रहा है। शुक्रवार को पइन काटने के बाद तेज बहाव में बघमम्बरपुर के नीमुईया कुंड के पास पुलिया ध्वस्त हो गई, जिससे पुजहा-बेतिया मार्ग और करीब 50 गांवों का संपर्क कट गया। बैरिया-नौतन में सैकड़ों एकड़ फसल डूबी है और फुलियाखांड़ के सामने करीब 20 हजार लोग प्रभावित हैं। पूर्वी चंपारण के नवादा में दो फीट तथा केसरिया के मझरिया, कढान समेत तीन गांवों में पांच फीट पानी है। मुजफ्फरपुर में गंडक रेवा घाट पर 56 सेमी ऊपर, जबकि बूढ़ी गंडक कांटी में खतरे के निशान से 1.05 मीटर ऊपर है। समस्तीपुर में गंगा सरारी में 45.50 मीटर के खतरे के निशान से 1.40 मीटर ऊपर है और मोहिउद्दीननगर के कई गांवों व विद्यालयों में पानी पहुंच गया है

सारण में एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की 19 टीमें तैनात
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित सारण जिले में अतिरिक्त एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीमें भेजी जा रही हैं। सारण में पहले से एनडीआरएफ की पांच तथा एसडीआरएफ की तीन टीम तैनात हैं। स्थिति की भयावहता को देखते हुए बेतिया से एनडीआरएफ की तीन, गोपालगंज से दो, भागलपुर से दो और सुपौल से एक अतिरिक्त टीम सारण भेजी जा रही है। मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर और पूर्वी चंपारण से एसडीआरएफ की चार टीमें सारण भेजी गई हैं। इस प्रकार सारण में एनडीआरएफ की कुल 12 तथा एसडीआरएफ की सात टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी है।

वायुसेना जवान पहुंचा रहे सूखा राशन
सारण के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वायुसेना के हेलिकॉप्टर से अब तक 3000 से अधिक राशन पैकेट गिराए जा चुके हैं। शाम तक 5000 और राशन पैकेट गिराए गए। पटना से 10 हजार, सीवान से 15 हजार, भोजपुर-बक्सर और वैशाली से पांच-पांच हजार पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस प्रकार विभिन्न जिलों से कुल 40000 राशन पैकेट सारण भेजे जा रहे हैं। विभिन्न जिलों से कुल 75000 पॉलिथीन शीट सारण भेजी जा रही हैं। विभाग ने आपातकालीन स्थिति मे राज्य के आपातकालीन संचालन केंद्र के टोल फ्री नंबर 1070 पर सम्पर्क करने को कहा है।

बिहार में डूबने से दो सगी बहनों समेत 20 की मौत
बिहार के आठ जिलों में बाढ़ के पानी में डूबने से शुक्रवार को दो सगी बहनों समेत 20 लोगों की मौत हो गई। सबसे अधिक पूर्वी चंपारण जिले में आठ की जान चली गई। सारण में बाढ़ के पानी में डूबकर चार की मौत हो गई, जबकि सात लोग लापता हैं। सीतामढ़ी भी दो बच्चों ने जान गंवा दी। बक्सर के सिमरी प्रखंड में एक किशोर और एक किशोरी की गंगा में डूबने से मौत हो गई। वहीं, गोपालगंज के रामनगर में बाढ़ के पानी में डूबने से बच्चे की मौत हो गई। वहीं, इसी तरह नालंदा के मानपुर गांव में सकरी नदी में डूबने से बच्चे की मौत हो गई। इसके अलावा मधुबनी-समस्तीपुर में भी एक-एक की मौत हो गई।

गोपालगंज में शीतलपुर में बांध टूटने पर तीन अभियंता हटाए गए
गोपालगंज जिले में शीतलपुर तटबंध टूटने के बाद जल संसाधन विभाग ने कार्यपालक अभियंता समेत तीन अभियंताओं को हटा दिया है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल गोपालगंज के कार्यपालक अभियंता मो. साजिद इकबाल और सहायक अभियंता जावेद अंसारी को पटना मुख्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया है। उनकी जगह नए अभियंताओं की तैनाती की गई है। विभाग के अनुसार प्रमोद कुमार को नया कार्यपालक अभियंता और रमण रणधीर वर्मा को सहायक अभियंता बनाया गया है।

PM Kisan 24वीं किस्त से पहले बड़ा अपडेट, किसानों के लिए बदले 4 अहम नियम

PM Kisan 24वीं किस्त से पहले बड़ा अपडेट, किसानों के लिए बदले 4 अहम नियम

  नई दिल्ली - प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) की 24वीं किस्त की डेट अभी तय नहीं है। यह 30 नवंबर से पहले कभी मिल सकती है। पीएम किसान सम्मान निधि को लेकर आज की सबसे बड़ी खबर करोड़ों किसानों के लिए है। पीएम किसान पोर्टल पर 4 नए बदलाव हुए हैं।

क्या-क्या बदलाव हुए हैं, यह जानने से पहले बता दें कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत मोदी सरकार किसानों को हर साल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता 2000-2000 रुपये के 3 किस्तों में देती है। अब तक 23 किस्तों में 4.47 लाख करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफार (DBT) के माध्यम से पात्र किसान परिवारों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है।

ये हैं पीएम किसान पोर्टल पर 4 जरूरी बदलाव

    कुछ छूट गया हो तो यहां ठीक करें
पीएम किसान पोर्टल पर दाएं तरफ ढेर सारे चौकोर खाने बने हुए हैं। इनमें पहली लाइन में चौथे नंबर पर लिखा होगा Update Missing Information, यह सुविधा उन किसानों के लिए है, जिन्होंने पोर्टल पर अपनी जानकारी अधूरी छोड़ी है। इसके लिए इस चौकोर खाने को टैप करें।

एक नया पेज खुलेगा। इसमें दो खाने दिए होंगे। पहले में आधार नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर डालें। दूसरे में कैप्चा कोड भरें और सर्च पर टैप करें। आपको मिसिंग इन्फार्मेशन पता चल जाएगा और इसे आप यहीं से अपडेट करके सबमिट कर दें।

2. पीएम किसान पोर्टल पर अपडेट करें मोबाइल नंबर
अगर आपने हाल फिलहाल अपना मोबाइल नंबर बदला है या फिर आधार में नया नंबर जुड़वाया है तो इस बदलाव के बारे में आपको जानना बेहद जरूरी है। आप दूसरी लाइन में दूसरे चौकोर खाने पर टैप करें। यहां भी आप रजिस्ट्रेशन या आधार नंबर भरें। कैप्चा डालें और सर्च पर टैप करें। इसके बाद अपना आधार से लिंक्ड नंबर को डालकर अपडेट करें।

3. अगर अपात्र हैं तो ऑन लाइन रिफंड करें
अगर आप अपात्र होते हुए भी पीएम किसान की किस्त उठा रहे हैं तो आप ऑनलाइन रिफंड वाले खाने पर क्लिक करें । यहां भी रजिस्ट्रेशन नंबर या आधार नंबर डालें। कैप्चा कोड डालकर Get OTP पर क्लिक करें। इसके बाद दिए गए निर्देशों को पूरा करें और अब तक गलत तरीके से मिले पीएम किसान के पैसे को रिफंड कर दें।

4. अपनी समस्यों के समाधान के लिए अधिकारियों का नंबर यहां पाएं
आप पीएम किसान पोर्टल के होम पेज पर जाएं और दाएं साइड बने बॉक्स में से Search your Point of Contact (POC) पर क्लिक करें। यहां एक पेज खुलेगा, जिसमें लिखा होगा State Nodal Contact Detail, अगर स्टेट नोडल का का नाम पता और नंबर चाहिए तो सर्च स्टेट नोडल पर क्लिक करें और जिले के अधिकारियों से संपर्क करना हो तो Search district Nodal पर।

इस टैब में आप अपना स्टेट सलेक्ट करें और इसके बाद डिस्ट्रिक्ट। सबमिट करें और आपके सामने नोडल अधिकारियों का नंबर और मेल आईडी होगी। उनसे संपर्क कर आप हेल्प ले सकते हैं।

रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी, दलहन-तिलहन पर सरकार का खास जोर

रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी, दलहन-तिलहन पर सरकार का खास जोर

 बांदा :- केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। सरकार ने इस बार गेहूं की तुलना में दलहन-तिलहन पर ज्यादा मेहरबानी दिखाई है।

गेहूं का एमएसपी 2585 से बढ़ाकर 2610 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, यानी सिर्फ 25 रुपये की वृद्धि। जबकि चने में 83 रुपये, मसूर में 390 रुपये, रेपसीड-सरसों में 413 रुपये, जौ में 136 रुपये, कुसुम (तिलहन) में सबसे ज्यादा 675 रुपये बढ़ाया है। हालांकि जिले में कुसुम का उत्पादन किया ही नहीं जाता है।

दलहन और खाद्य तेलों के आयात को कम करने पर फोकस
सरकार की मंशा स्पष्ट है कि देश में गेहूं का बफर स्टाक पहले से ही पर्याप्त है। 2014-15 से 2025-26 के बीच 3715 लाख टन गेहूं की खरीद एमएसपी पर हुई है, जो 2004-05 से 2013-14 के 2254 लाख टन से काफी अधिक है। इसलिए अब फोकस दलहन और खाद्य तेलों के आयात को कम करने पर है। जिले के किसानों के लिए यह फैसला सीधे जेब से जुड़ा है। लेकिन गेहूं के दाम में कम बढ़ोतरी पर किसान मायूस हैं।

जिले में 3.39 लाख किसान हैं, जो करीब 3.77 लाख हेक्टेयर खेती में रबी फसलों की पैदावार करते हैंं। इसमें से 1.94 लाख खेती में किसान गेहूं की उपज पैदा करते हैं। जिले में रबी की मुख्य फसलें गेहूं, चना, मसूर और सरसों हैं।

अतिरिक्त लाभ का हिसाब
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष 2026-27 में जिले की मंडियों और सरकारी क्रय केंद्रों पर कुल 6,00,120 क्विंटल गेहूं, 1,52,051 क्विंटल चना, 41,444 क्विंटल मसूर और 23,526 क्विंटल सरसों की खरीद/उत्पादन दर्ज किया गया था।

यदि इसी उत्पादन को आधार मानें तो नए बढ़े हुए एमएसपी से किसानों को होने वाले अतिरिक्त फायदे में गेहूं बीते वर्ष 6,00,120 क्विंटल हुआ, इसमें बढ़ोतरी धनराशि यदि 25 रुपये बढ़ा दिया जाए तो करीब 1.50 करोड़ रुपये की होगी। वहीं यदि चने की बात करें तो बीते वर्ष 1,52,051 क्विंटल का उत्पादन हुआ तो बढ़ोतरी 83 रुपये होने पर अतिरिक्त लाभ में करीब 1.26 करोड़ रुपये का सीधे लाभ होगा।

मसूर में भी बीते वर्ष 41,444 क्विंटल का उत्पादन हुआ, यदि बढ़ोतरी 390 रुपये होने पर किसानों को होने वाले फायदे की बात करें तो करीब 1.61 करोड़ रुपये का लाभ होगा। सरसों बीते वर्ष 23,526 क्विंटल हुई, बढ़ोतरी 413 रुपये की सरकार ने की तो इस हिसाब से करीब 97 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा।

यानी यदि आने वाले रबी सीजन में इतना ही उत्पादन हुआ तो बांदा के किसानों की जेब में पिछले साल के मुकाबले कुल पांच करोड़ 35 लाख दो हजार 631 रुपये अतिरिक्त आएंगे। इसमें सबसे ज्यादा फायदा मसूर और सरसों के किसानों को होगा। गेहूं सबसे ज्यादा पैदा होने के बावजूद सबसे कम लाभ देगा।

    पानी की कमी के कारण दलहन-तिलहन की खेती ज्यादा फायदेमंद है। एमएसपी बढ़ने से किसान को चना-मसूर-सरसों में ज्यादा फायदा होगा, किसानों को चाहिए चना, मसूर, सरसों जैसी खेती की ओर लौटें, जिससे भूजल बचेगा और फायदा भी अधिक होगा।

    -संजय कुमार, जिला कृषि अधिकारी, बांदा

बढ़ोतरी एक नजर में

फसल 2026-27 2027-28 बढ़ोतरी
गेहूं 2,585 2,610 25
जौ 2,150 2,286 136
चना 5,875 5,958 83
मसूर 7,000 7,390 390
रेपसीड-सरसों 6,200 6,613 413
कुसुम (तिलहन) 6,540 7,215 675