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कब से शुरू हो रही है अमरनाथ यात्रा, जानें क्या है बाबा बर्फानी का पौराणिक इतिहास, जो है लोगों की आस्था का केंद्र

कब से शुरू हो रही है अमरनाथ यात्रा, जानें क्या है बाबा बर्फानी का पौराणिक इतिहास, जो है लोगों की आस्था का केंद्र

 श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादियों में स्थित अमरनाथ धाम हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष लाखों भक्त कठिन पर्वतीय मार्ग तय कर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। करीब 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के लिए प्रशासन और श्राइन बोर्ड की ओर से व्यापक तैयारियां की जा रही है।

प्राकृतिक हिमलिंग है मुख्य आकर्षण

अमरनाथ गुफा की सबसे बड़ी विशेषता यहां बनने वाला प्राकृतिक हिम शिवलिंग है। माना जाता है कि गुफा के भीतर बर्फ से बनने वाला यह शिवलिंग किसी मानव द्वारा निर्मित नहीं होता, बल्कि प्राकृक रूप से आकार लेता है। श्रद्धालु इसे बाबा बर्फानी के रूप में पूजते हैं। यही कारण है कि यह धाम देश के सबसे महत्वपूर्ण शिव तीर्थों में गिना जाता है। वहीं सनातन धर्म में यह जगह बेहद ही खास महत्व रखती है। यहीं पर वैष्णो देवी मंदिर और अमरनाथ गुफा जैसे पवित्र धार्मिक स्थल हैं, जो हिंदुओं की गहरी आस्था के केंद्र हैं।

भगवान शिव और अमर कथा से जुड़ी है मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। कहा जाता है कि इस गुप्त ज्ञान को किसी अन्य जीव द्वारा न सुना जाए, इसलिए शिव ने यात्रा मार्ग में अपने प्रिय साथियों और प्रतीकों को नंदी, चंद्रमा, नाग, गणेश और अन्य को अलग-अलग स्थानों पर छोड़ दिया था। इसी कथा के कारण इस स्थान को “अमरनाथ” नाम मिला।

दर्शन से मिलती है आध्यात्मिक शांति

मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस पवित्र गुफा के दर्शन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके सभी पापों का नाश होता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। यही वजह है कि हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बनते हैं।

ऊंचाई और कठिन मार्ग बनाते हैं यात्रा को खास

समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। चुनौतीपूर्ण यात्रा होने के बावजूद हर साल बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं। आस्था, साहस और तपस्या का यह संगम अमरनाथ यात्रा को अन्य तीर्थ यात्राओं से अलग पहचान देता है। अमरनाथ यात्रा में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को पहले से पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी कारणों को देखते हुए प्रशासन ने बिना वैध रजिस्ट्रेशन किसी भी यात्री को यात्रा मार्ग पर जाने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।

अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कोई भी कफ सिरप, केंद्र सरकार ने बदले दवा बिक्री के नियम

अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कोई भी कफ सिरप, केंद्र सरकार ने बदले दवा बिक्री के नियम

 नई दिल्ली।  दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई अधिसूचना जारी कर देशभर में सिरप की बिक्री के नियमों में बदलाव किया है। नए निर्देशों के अनुसार अब कफ सिरप समेत किसी भी प्रकार का औषधीय सिरप बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदा जा सकेगा।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अब मेडिकल स्टोर और फार्मेसी संचालकों को सिरप बेचने से पहले पंजीकृत चिकित्सक द्वारा जारी वैध पर्ची की जांच करनी होगी। यह व्यवस्था केवल खांसी की दवाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी तरह के औषधीय सिरप पर समान रूप से लागू होगी।

दवाओं के गलत इस्तेमाल पर लगेगी लगाम

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हाल के वर्षों में कई दवाओं, विशेषकर कफ सिरप के अनुचित उपयोग और दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने की बढ़ती प्रवृत्ति स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसी को देखते हुए सरकार ने प्रिस्क्रिप्शन आधारित बिक्री प्रणाली लागू करने का फैसला लिया है।

मेडिकल स्टोरों को करना होगा नियमों का पालन

नई व्यवस्था लागू होने के बाद देशभर के दवा विक्रेताओं और फार्मेसी संचालकों को निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। बिना डॉक्टर की पर्ची के सिरप बेचने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

मरीजों की सुरक्षा पर सरकार का फोकस

सरकार का मानना है कि यह कदम दवाओं के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देगा और लोगों को स्वयं इलाज करने की आदत से बचाएगा। साथ ही इससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी।स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि दवाओं की अनियंत्रित बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।

भारत में बैन होगा टेलीग्राम, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जानें क्या है इसकी वजह

भारत में बैन होगा टेलीग्राम, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जानें क्या है इसकी वजह

 नई दिल्ली : RE-NEET परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह कदम राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिशों के बाद उठाया गया है। सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69A के तहत टेलीग्राम की सेवाओं पर सीमित अवधि के लिए रोक लगाई जाएगी। यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। सरकार का मानना है कि परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग और कथित पेपर लीक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए यह कदम जरूरी है।

RE-NEET परीक्षा 21 जून को

गौरतलब है कि RE-NEET परीक्षा का आयोजन 21 जून 2026 को प्रस्तावित है। पिछले कुछ समय से टेलीग्राम के कई समूहों और चैनलों पर परीक्षा प्रश्नपत्रों के लीक होने या उससे जुड़े दावों की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं आशंकाओं को देखते हुए सरकार ने यह एहतियाती निर्णय लिया है।

मैसेज एडिट फीचर पर भी रोक

सरकार ने टेलीग्राम को यह निर्देश भी दिया है कि भारत में पहले से मौजूद संदेशों के लिए एडिट (संपादन) सुविधा को अस्थायी रूप से बंद किया जाए। यह व्यवस्था 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच एजेंसियों को डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने में इससे मदद मिलेगी और किसी भी संदिग्ध सामग्री में बाद में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।

पहले भी उठते रहे हैं सवाल

टेलीग्राम का नाम कई बार पेपर लीक, साइबर धोखाधड़ी और अवैध ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े मामलों में सामने आता रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि प्लेटफॉर्म के कुछ फीचर्स का दुरुपयोग कर अपराधी अपनी पहचान छिपाने और सबूत मिटाने की कोशिश करते हैं। केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसियां इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।अधिकारियों का कहना है कि छात्रों के हितों की रक्षा और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि, सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध स्थायी नहीं है, बल्कि केवल परीक्षा अवधि और जांच संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सीमित समय के लिए लागू किया गया है।

PM Kisan Yojana : पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त की तारीख तय, जानें किसानों के खाते में कब आएंगे पैसे

PM Kisan Yojana : पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त की तारीख तय, जानें किसानों के खाते में कब आएंगे पैसे

 नई दिल्ली। देशभर के करोड़ों किसानों के लिए राहत और खुशी की खबर है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली अगली किस्त का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने 23वीं किस्त जारी करने की तारीख की घोषणा कर दी है, जिसके तहत पात्र किसानों के बैंक खातों में सीधे 2,000 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे।

20 जून को जारी होगी राशि

योजना से जुड़े आधिकारिक अपडेट के अनुसार, पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त 20 जून 2026 को किसानों के खातों में भेजी जाएगी। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा होगी, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

किसानों को मिलती है सालाना आर्थिक सहायता

केंद्र सरकार ने किसानों की आय को सहारा देने और खेती-किसानी से जुड़े खर्चों में मदद के उद्देश्य से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में की थी। इस योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को हर वर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि तीन समान किस्तों में दी जाती है, जिसमें प्रत्येक किस्त के रूप में 2,000 रुपये सीधे किसानों के खातों में भेजे जाते हैं।

अब तक जारी हो चुकी हैं 22 किस्तें

 योजना की शुरुआत के बाद से अब तक किसानों को 22 किस्तों का लाभ मिल चुका है। अब सरकार 23वीं किस्त जारी करने जा रही है, जिससे लाखों किसान परिवारों को आर्थिक सहयोग मिलेगा। यह राशि खेती से जुड़े कार्यों, बीज, खाद और अन्य आवश्यक खर्चों में मददगार साबित होती है।

Accident: दर्दनाक हादसे ने छिनी परिवार की खुशियां, कुएं में गिरी श्रद्धालुओं से भरी पिकअप, 8 लोगों की मौत

Accident: दर्दनाक हादसे ने छिनी परिवार की खुशियां, कुएं में गिरी श्रद्धालुओं से भरी पिकअप, 8 लोगों की मौत

 सोलापुर। महाराष्ट्र के सोलापुर से एक बेहद ही दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। जहां एक पिकअप वाहन सड़क किनारे स्थित एक कुएं में जा गिरी। जिससे की इस हादसे में 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने छह अन्य लोगों को बचा लिया। बताया गया की मृतकों में बच्चें भी शामिल थे। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है।

मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे श्रद्धालु

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और प्रशासन को सूचना दी। पुलिस, आपदा राहत दल और स्थानीय लोगों की मदद से बचाव अभियान चलाया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद सभी घायलों और मृतकों को कुएं से बाहर निकाला गया। जानकारी के मुताबिक, वाहन में सवार सभी 14 लोग सोलापुर जिले के रंजनीगांव के निवासी थे। वे म्हास्वद स्थित प्रसिद्ध सिद्धनाथ मंदिर में दर्शन करने गए थे और वापस अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान तंदुलवाड़ी गांव के समीप यह हादसा हो गया।

बताया जा रहा है कि जिस कुएं में वाहन गिरा, वह सड़क के बेहद करीब स्थित है और उसकी सुरक्षा दीवार भी पर्याप्त ऊंची नहीं थी। कुआं पूरी तरह पानी से भरा हुआ था, जिससे हादसा और भी घातक साबित हुआ। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतकों में चार महिलाएं और चार बच्चे शामिल हैं। वहीं कुछ पुरुष यात्रियों को स्थानीय लोगों की मदद से समय रहते बाहर निकाल लिया गया। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक

 घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचने लगे। सांसद धैर्यशील मोहिते-पाटिल ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं विधायक उत्तम जानकर ने भी इसे अत्यंत दुखद घटना बताते हुए प्रशासन से त्वरित राहत और सहायता सुनिश्चित करने की बात कही। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। वहीं मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए प्रशासन आवश्यक कदम उठा रहा है।

बड़ी खबर : अमेरिका-ईरान युद्ध पर ब्रेक, 4 महीने बाद शांति समझौते का ऐलान

बड़ी खबर : अमेरिका-ईरान युद्ध पर ब्रेक, 4 महीने बाद शांति समझौते का ऐलान

 BIG NEWS : करीब चार महीने से जारी संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हो गया है. इस समझौते की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की. इस खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है क्योंकि दोनों देशों के बीच तनाव लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ था.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर किया ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है.

उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोला जाएगा और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी तुरंत हटाई जाएगी. साथ ही दुनिया भर के जहाजों को फिर से सामान्य आवाजाही शुरू करने का संदेश दिया गया.

पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
समझौते तक पहुंचने में पाकिस्तान की अहम भूमिका बताई गई है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा, ‘दोनों पक्षों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करने पर सहमति जताई है. इसमें लेबनान भी शामिल है. उन्होंने यह भी बताया कि समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा.’

आखिरी वक्त पर फंस सकता था समझौता
रिपोर्ट के अनुसार रविवार को यह समझौता लगभग टूटने की स्थिति में पहुंच गया था. कारण यह था कि इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी इलाके में हमला किया, जहां ईरान समर्थित हिजबुल्लाह लड़ाकों को निशाना बनाया गया था. इसके बावजूद बातचीत जारी रही और अंततः समझौते की घोषणा कर दी गई.

समझौते में क्या-क्या शामिल है?
दोनों देशों के बीच हुई सहमति में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं.

सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकना.
लेबनान को भी समझौते के दायरे में शामिल करना.
ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना.
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करना.
इस सप्ताह तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रखना.
19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर करना.

परमाणु कार्यक्रम पर भी बनी सहमति
समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी शामिल है. जानकारी के अनुसार, समझौते में परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और अत्यधिक समृद्ध परमाणु सामग्री को नष्ट करने की बात कही गई है. इसके लिए निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था भी लागू करने का प्रस्ताव है.

हालांकि यहां एक बड़ा मतभेद भी सामने आया है. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि परमाणु सामग्री को नष्ट किया जाएगा, जबकि एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को अपने देश में ही अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को कम करने की अनुमति देने पर सहमति जताई है.

अभी अंतिम शांति समझौता नहीं
यह समझौता फिलहाल अंतिम शांति संधि नहीं है. इसे एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग बताया गया है, जिसके तहत अगले 60 दिनों तक दोनों पक्ष एक व्यापक और अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत करेंगे. इस दौरान अमेरिकी और ईरानी अधिकारी आगे की शर्तों पर चर्चा करेंगे.

ईरान ने रखी अपनी शर्त
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अंतिम समझौते पर बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब ईरान यह सुनिश्चित कर लेगा कि अमेरिका अपने वादों को पूरा कर रहा है. उन्होंने कहा कि इसमें सैन्य कार्रवाई रोकना, नाकाबंदी हटाना और संपत्तियों को जारी करना जैसी बातें शामिल हैं. साथ ही उन्होंने साफ कहा कि यह समझौता अमेरिका पर भरोसा करने का संकेत नहीं है और ईरान अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के पालन पर नजर रखेगा.

अब आगे क्या?
अब सबकी नजर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह पर है. अगर आने वाले 60 दिनों की बातचीत सफल रहती है, तो यह समझौता अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकता है.

16 महीने बाद आमने-सामने होंगे PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप, G-7 समिट में होगी अहम मुलाकात

16 महीने बाद आमने-सामने होंगे PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप, G-7 समिट में होगी अहम मुलाकात

 नई दिल्ली/पेरिस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 16 महीने बाद पहली बार आमने-सामने मुलाकात करने जा रहे हैं। दोनों नेता 17 जून को फ्रांस में आयोजित G-7 समिट के दौरान द्विपक्षीय बैठक करेंगे। फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद यह दोनों नेताओं की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात होगी, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि भारतीय समयानुसार शाम 6:15 बजे होने वाली इस बैठक में भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील प्रमुख एजेंडा रहेगी। दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी है और अब इस मुलाकात से महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी 16 और 17 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे G-7 देशों, साझेदार राष्ट्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वैश्विक आर्थिक विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, मोदी-ट्रंप बैठक में व्यापार के अलावा रक्षा सहयोग, ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर भी चर्चा हो सकती है। अमेरिका का मानना है कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक आर्थिक साझेदार हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

इस मुलाकात के दौरान खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हाल के दिनों में भारतीय नाविकों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। ओमान तट के पास तेल टैंकरों पर हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने के बाद भारत ने अपनी चिंता अमेरिका के समक्ष दर्ज कराई थी। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता का मुद्दा भी दोनों नेताओं के बीच उठ सकता है।

G-7 समिट के बाद प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को पेरिस में विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे और यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी एवं स्टार्टअप कार्यक्रम VivaTech Summit में भी शामिल होंगे। साथ ही वे फ्रांस में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे।

भारत ने रचा इतिहास, ‘मेड इन इंडिया’ C-295 सैन्य विमान ने भरी पहली सफल उड़ान

भारत ने रचा इतिहास, ‘मेड इन इंडिया’ C-295 सैन्य विमान ने भरी पहली सफल उड़ान

 नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। भारत में असेंबल किए गए पहले C-295 सैन्य परिवहन विमान ने बुधवार को अपनी पहली सफल परीक्षण उड़ान पूरी कर ली। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी भारतीय वायु सेना (IAF) ने दी और इस परियोजना से जुड़े सभी इंजीनियरों व विशेषज्ञों को बधाई दी।

करीब 21,935 करोड़ रुपये की लागत वाले इस रक्षा सौदे के तहत भारतीय वायु सेना कुल 56 C-295 विमान खरीद रही है। इनमें से 16 विमान सीधे एयरबस से प्राप्त किए जा रहे हैं, जबकि शेष 40 विमानों का निर्माण और असेंबली भारत में की जा रही है।

गुजरात के वडोदरा स्थित अत्याधुनिक उत्पादन केंद्र में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस के सहयोग से इन विमानों का निर्माण हो रहा है। यह पहली बार है जब भारत में इस स्तर का आधुनिक सैन्य परिवहन विमान तैयार किया जा रहा है।

C-295 विमान दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में जवानों, हथियारों और भारी सैन्य उपकरणों को तेजी से पहुंचाने में सक्षम है। इसकी सफल उड़ान भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल रक्षा क्षेत्र की सफलता नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए भी एक बड़ा मील का पत्थर है। इससे भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी और देश सैन्य तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में और आगे बढ़ेगा।

 
 

 

 
काशी में बनेगा दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग, 100 करोड़ की लागत से 20 एकड़ में तैयार होगा भव्य शिव थीम पार्क

काशी में बनेगा दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग, 100 करोड़ की लागत से 20 एकड़ में तैयार होगा भव्य शिव थीम पार्क

 वाराणसी। मोक्ष और भगवान शिव की नगरी काशी जल्द ही एक और ऐतिहासिक पहचान हासिल करने जा रही है। वाराणसी में दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए नगर निगम ने स्थान का चयन कर लिया है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, आगामी 9 से 10 महीनों के भीतर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जानकारी के अनुसार, भेलूपुर स्थित जलकल विभाग की लगभग 20 एकड़ भूमि पर यह भव्य शिवलिंग स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही शिव थीम पर आधारित एक आधुनिक अर्बन पार्क भी विकसित किया जाएगा, जो धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पार्क परिसर में आकर्षक लेजर शो, थीम आधारित संरचनाएं और मनोरम हरित क्षेत्र तैयार किए जाएंगे, जिससे यह स्थल धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बन सके।

गौरतलब है कि वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध भगवान काशी विश्वनाथ धाम स्थित है, जो द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। इसके अलावा काशी में अनेक प्राचीन शिव मंदिर मौजूद हैं, जिनका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर वर्ष यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

 परियोजना पूरी होने के बाद काशी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विश्व के सबसे ऊंचे शिवलिंग के दर्शन का अवसर मिलेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि यह नया धार्मिक स्थल वाराणसी की आध्यात्मिक और पर्यटन पहचान को और अधिक वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगा।

 
इंडिया गठबंधन की बैठक में 25 दलों की मौजूदगी, महंगाई-बेरोजगारी समेत पांच मुद्दों पर बनी सहमति

इंडिया गठबंधन की बैठक में 25 दलों की मौजूदगी, महंगाई-बेरोजगारी समेत पांच मुद्दों पर बनी सहमति

 नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आज सोमवार को इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कांग्रेस की अगुवाई में 25 राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और देश के विभिन्न अहम मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर सहमति जताई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई वरिष्ठ विपक्षी नेता मौजूद रहे।

बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि गठबंधन के सभी दलों ने पांच प्रमुख मुद्दों पर एकजुट होकर आगे बढ़ने का फैसला किया है। इनमें शिक्षा व्यवस्था, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और आर्थिक हालात प्रमुख रूप से शामिल हैं। विपक्षी दलों ने नीट और सीबीएसई से जुड़े हालिया विवादों को लेकर केंद्र सरकार को भी घेरा। नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।

 खड़गे ने कहा कि, खड़गे ने कहा कि SIR में करोड़ों वोटर के नाम कटे। SIR और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर CJI को लेटर लिखेंगे। देश के मौजूदा आर्थिक हालात, बेरोजगारी, महंगाई और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार को जल्द सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। साथ ही मानसून सत्र के दौरान संसद में विपक्ष की रणनीति को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन समन्वय बैठकें आयोजित करने का भी फैसला लिया गया है। बैठक में यह भी तय हुआ कि इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियां हर दो महीने में बैठक करेंगी। गठबंधन की अगली बैठक अगस्त महीने में हैदराबाद में आयोजित की जाएगी।

इन पांच मुद्दों पर बनी सहमति

1. SIR, मतदाता सूची में कथित हस्तक्षेप और चुनावों की निष्पक्षता के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने पर सहमति बनी है. यह पत्र उन्हें जल्द से जल्द सौंपा जाएगा।

2. नीट और सीबीएसई से जुड़े विवादों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उनके कार्यकाल में नीट और सीबीएसई परीक्षाओं से जुड़े मामलों में लाखों युवाओं के साथ अन्याय हुआ है। जिस वजह से बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं।

3. देश की गंभीर आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, अत्याचारों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे। जनहित से जुड़े इन विषयों पर केंद्र सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, जिसमें हम अपने सभी मुद्दे और सुझाव रखेंगे।

4. इंडिया ब्लॉक के सभी दल हर दो महीने में बैठक करेंगे। हमारी अगली बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित होगी।

5. संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच समन्वय जारी रहेगा। इसके लिए नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में प्रतिदिन सुबह एक समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।

 बता दें कि, बैठक के अंत में नेताओं ने संकेत दिए कि आने वाले समय में महंगाई, बेरोजगारी, चुनावी प्रक्रिया, संविधान और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया जा सकता है। राजनीतिक जानकार इस बैठक को विपक्षी एकता के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। हालांकि गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेद पूरी तरह खत्म हुए हैं या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल विपक्ष ने एकजुटता का संदेश देते हुए सरकार के खिलाफ साझा संघर्ष का संकेत दिया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट को मिले 6 नए स्थायी जज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नियुक्ति को दी मंजूरी

बॉम्बे हाई कोर्ट को मिले 6 नए स्थायी जज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नियुक्ति को दी मंजूरी

 नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय के 6 अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद जारी इस नियुक्ति में निवेदिता प्रकाश मेहता, प्रफुल्ल सुरेंद्रकुमार खुबलकर, अश्विन दामोदर भोबे, रोहित वासुदेव जोशी, अद्वैत महेंद्र सेठना और प्रवीण शेषराव पाटिल के नाम शामिल हैं।


BREAKING : राजधानी के मशहूर रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग, अब तक 20 लोगों की मौत, बचाव कार्य जारी

BREAKING : राजधानी के मशहूर रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग, अब तक 20 लोगों की मौत, बचाव कार्य जारी

 नई दिल्ली।  देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है. बुधवार सुबह यहां एक मशहूर रेस्टोरेंट में अचानक भीषण आग लग गई. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस भयानक अग्निकांड में झुलसने और दम घुटने के कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है. हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दुख का माहौल है. दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली फायर सर्विस (DFS) को सुबह करीब 09:45 बजे मालवीय नगर के एक रेस्टोरेंट में आग लगने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां और राहतकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे. नेहरू प्लेस (NRN) फायर स्टेशन के डिवीजनल ऑफिसर (DO) रविंदर खुद टीम के साथ मौके पर मौजूद रहकर राहत और बचाव कार्य की कमान संभाले हुए हैं.

शुरुआती कार्रवाई के दौरान दमकलकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रेस्टोरेंट की इमारत के बेसमेंट से 3 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. उन्हें कैट्स (CATS) एम्बुलेंस के जरिए तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया. दिल्ली पुलिस ने बताया कि दमकलकर्मियों ने कुल 30 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है. हालांकि, अस्पताल ले जाए जाने के बाद डॉक्टरों ने 10 लोगों को मृत घोषित कर दिया. पुलिस और प्रशासन की टीमें अभी भी मौके पर मौजूद हैं और इस बात की जांच की जा रही है कि आग लगने की असली वजह क्या थी. हादसे में घायल हुए लोगों का इलाज जारी है और पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है.

सीजेआई सूर्यकांत ने 5 नए जजों को दिलाई शपथ, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर हुई 37

सीजेआई सूर्यकांत ने 5 नए जजों को दिलाई शपथ, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर हुई 37

 भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के पांच नए न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीशों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है।

नए नियुक्त न्यायाधीशों में शामिल हैं:

– जस्टिस शील नागू
– जस्टिस श्री चंद्रशेखर
– जस्टिस संजीव सचदेवा
– जस्टिस अरुण पल्ली
– वरिष्ठ वकील वी. मोहना

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद शपथ

केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति ने मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद इन पांचों को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया है। नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर की गई हैं।

नए जजों का संक्षिप्त परिचय:

– जस्टिस शील नागू: मई 2011 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने। जुलाई 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
– जस्टिस श्री चंद्रशेखर: जनवरी 2013 में झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए। जनवरी 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला।
– जस्टिस संजीव सचदेवा: अप्रैल 2013 में दिल्ली हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने, मार्च 2015 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। जुलाई 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
– जस्टिस अरुण पल्ली: दिसंबर 2013 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए।
– वी. मोहना: सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील हैं। उन्होंने संवैधानिक, दीवानी और सेवा कानून से संबंधित कई महत्वपूर्ण मामलों में वकालत की है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 22 मई और 27 मई को हुई बैठकों में इन नामों की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र सरकार ने सोमवार को मंजूरी दे दी। यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से मौजूद न्यायाधीशों की कमी को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने में स्वस्थ भारत होना बुनियादी जरूरत: जेपी नड्डा

‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने में स्वस्थ भारत होना बुनियादी जरूरत: जेपी नड्डा

 केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को एम्स बठिंडा के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और पास होकर निकले छात्रों को उनके पेशेवर सफर की शुरुआत करने पर बधाई दी। उन्होंने तृतीयक स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को मजबूत करने की दिशा में संस्थान के बढ़ते योगदान की सराहना की।

जेपी नड्डा ने छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने पर बधाई दी और दूसरे दीक्षांत समारोह को छात्रों, उनके माता-पिता, संकाय सदस्यों और पूरे एम्स बठिंडा परिवार के लिए गर्व और उत्सव का क्षण बताया।

उन्होंने संस्थान की तेजी से हुई प्रगति और इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में उसके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि एम्स बठिंडा आज प्रतिदिन लगभग 3,000 ओपीडी मरीजों और लगभग 600 ओपीडी मरीजों का इलाज करता है और साथ ही एम्स ब्रांड से जुड़े उच्च मानकों और विश्वसनीयता को भी बनाए रखता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स बठिंडा की सामुदायिक पहुंच की पहलों की भी सराहना की, जिसमें आसपास के 59 गांवों में हर महीने दो बार ‘आयुष्मान शिविर’ आयोजित करना शामिल है, जहां नागरिकों की मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों के लिए जांच की जाती है।

उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन सेवाओं, मोबाइल मेडिकल इकाइयों, ग्रामीण जागरूकता अभियानों और स्वास्थ्य सेवा पहुंच कार्यक्रमों के माध्यम से यह संस्थान केवल अस्पताल-आधारित देखभाल से आगे बढ़कर सार्वजनिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए स्वास्थ्य सेवा सुधारों के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए नड्डा ने कहा कि भारत का स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण मुख्य रूप से ‘उपचारात्मक मॉडल’ से विकसित होकर एक ऐसे व्यापक ढांचे में बदल गया है, जिसमें निवारक, प्रोत्साहक, पुनर्वास, प्रशामक और बुजुर्गों की देखभाल शामिल है।

उन्होंने बताया कि आज 1.82 लाख से अधिक ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संपर्क के पहले बिंदु के रूप में कार्य कर रहे हैं।

नड्डा ने सरकार के निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर जोर देने की बात पर बल देते हुए बताया कि 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को पंचायतों, आशा कार्यकर्ताओं और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से नियमित जांच (स्क्रीनिंग) करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन पहलों के तहत हुई प्रगति की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 36 करोड़ से अधिक लोगों की मुंह के कैंसर के लिए, 17 करोड़ से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर के लिए और 9 करोड़ से अधिक महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर के लिए जांच की गई है। इसके अलावा 42 करोड़ से अधिक लोगों की मधुमेह और उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के लिए जांच की गई है, जबकि देशव्यापी तपेदिक (टीबी) जांच अभियान भी चल रहा है।

राष्ट्र निर्माण में स्वास्थ्य के महत्व का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का सपना केवल एक स्वस्थ और कर्मठ आबादी के माध्यम से ही साकार किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि सरकारें बुनियादी ढांचा और आधुनिक सुविधाएं प्रदान कर सकती हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवा अंततः डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों के समर्पण, दक्षता और करुणा पर ही निर्भर करती है। डॉक्टरों को स्वास्थ्य प्रणाली की सच्ची ताकत बताते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि बुनियादी ढांचा भले ही स्वास्थ्य सेवा का हार्डवेयर हो, लेकिन स्वास्थ्य पेशेवर ही इसके सॉफ्टवेयर हैं।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के विकास के मामले पंजाब सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं, और उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी प्रकाश डाला।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत के चिकित्सा शिक्षा तंत्र में हुए अभूतपूर्व विस्तार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एम्स संस्थानों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 820 से अधिक हो गई है। स्नातक (यूजी) चिकित्सा सीटों की संख्या लगभग 59,000 से बढ़कर 1.28 लाख से अधिक हो गई है और स्नातकोत्तर (पीजी) सीटों की संख्या लगभग 31,000 से बढ़कर 86,000 से अधिक हो गई है।

उन्होंने आगे बताया कि सरकार अगले पांच वर्षों में यूजी तथा पीजी चिकित्सा की 75,000 सीटें जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनमें से लगभग 23,000 सीटें पिछले दो वर्षों के दौरान पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं।

नड्डा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें 2014 में देश को पोलियो-मुक्त घोषित किया जाना और 2015 में मातृ एवं नवजात टिटनेस का उन्मूलन शामिल है। उन्होंने बताया कि अब देश में ट्रेकोमा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय नहीं रहा है, और काला-अजार, कुष्ठ रोग तथा लिम्फैटिक फाइलेरिया के उन्मूलन की दिशा में भी काफी प्रगति हुई है।

एम्स बठिंडा की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) नीरजा भाटला ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का स्वागत किया और संस्थान को उनके निरंतर मार्गदर्शन तथा सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार ने स्वास्थ्य सेवा को अधिक समावेशी, सुलभ और किफायती बनाने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए हैं और इसी क्रम में पूरे देश में एम्स नेटवर्क का विस्तार सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को बड़ी सफलता, महाराष्ट्र में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण पूरा

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को बड़ी सफलता, महाराष्ट्र में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण पूरा

 मुंबई- अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। पालघर जिले में पिछले पांच महीनों के भीतर तीन पर्वतीय सुरंगों के निर्माण पूरा होने से देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना को नई गति मिली है। यह उपलब्धि परियोजना के सबसे तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण खंडों में तेज प्रगति का संकेत मानी जा रही है।

एमटी-07 सुरंग का निर्माण हुआ पूरा

हाल ही में पूरी हुई एमटी-07 पर्वतीय सुरंग 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है। यह सुरंग बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की दोनों पटरियों के लिए बनाई गई है। इसकी खुदाई दोनों सिरों से नियंत्रित ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग तकनीक के माध्यम से की गई। निर्माण कार्य के दौरान उन्नत इंजीनियरिंग मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया गया।

अत्याधुनिक निगरानी और सुरक्षा प्रणाली का उपयोग

सुरंग निर्माण के दौरान संरचनात्मक स्थिरता, श्रमिकों की सुरक्षा और कार्य की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक निगरानी प्रणालियों तथा भू-तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया गया। सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (एसएसपी), 3डी टारगेट, स्ट्रेन गेज और सिस्मोग्राफ जैसे उपकरणों के जरिए कंपन, सुरंग की गतिविधियों और आसपास की संरचनाओं की लगातार निगरानी की गई। इसके अलावा वेंटिलेशन सिस्टम, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, नियंत्रित पहुंच और निरंतर भू-तकनीकी निरीक्षण जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी लागू रहीं।

पांच महीनों में तीन सुरंगों का निर्माण पूरा

इससे पहले 2 जनवरी 2026 को पालघर जिले के सफाले के पास 1.5 किलोमीटर लंबी पहली पर्वतीय सुरंग एमटी-05 का निर्माण पूरा हुआ था। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को 454 मीटर लंबी दूसरी सुरंग एमटी-06 का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) के जरिए पूरा किया गया। अब एमटी-07 के निर्माण के साथ पांच महीनों के भीतर तीन पर्वतीय सुरंगें पूरी हो चुकी हैं।

अन्य सुरंगों पर भी तेजी से जारी है काम

महाराष्ट्र में निर्माणाधीन सात पर्वतीय सुरंगों में से एमटी-05, एमटी-06 और एमटी-07 की खुदाई पूरी हो चुकी है। एमटी-08 की 350 मीटर लंबी सुरंग की खुदाई अक्टूबर 2023 में ही पूरी हो गई थी। वहीं एमटी-03 में 80% से अधिक, एमटी-04 में लगभग 60% कार्य पूरा हो चुका है, जबकि एमटी-01 और एमटी-02 में निर्माण कार्य जारी है।

औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ रहा है हाई-स्पीड कॉरिडोर

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर महाराष्ट्र के बोइसर और गुजरात के वापी के बीच स्थित महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। वापी और बोइसर स्टेशनों के बीच स्थित तीन पर्वतीय सुरंगों एमटी-08, एमटी-07 और एमटी-06 की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है, जिससे इस खंड में निर्माण कार्य को गति मिली है।

हाई-स्पीड रेल अवसंरचना को मिलेगी मजबूती

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत उन्नत सुरंग निर्माण, निगरानी और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। यह परियोजना देश में सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हाई-स्पीड रेल अवसंरचना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

अल नीनो की आशंका पर केंद्र अलर्ट, किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : शिवराज सिंह चौहान

अल नीनो की आशंका पर केंद्र अलर्ट, किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : शिवराज सिंह चौहान

 केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संभावित अल नीनो परिस्थितियों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन समय रहते तैयारी करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और खरीफ सीजन को प्रभावित होने से बचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

कम वर्षा वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी के निर्देश

बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कम वर्षा की आशंका वाले राज्यों और जिलों पर विशेष निगरानी रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुनर्बुवाई, जीवनरक्षक सिंचाई, कम अवधि वाली फसलें, वैकल्पिक बुवाई योजनाएं और जिला-विशिष्ट कृषि सलाह किसानों तक समय पर पहुंचाई जानी चाहिए।

बीज, नमी और जल प्रबंधन पर सरकार का फोकस

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संभावित मौसमीय चुनौतियों को देखते हुए बीजों की उपलब्धता, खेतों में नमी संरक्षण, जल प्रबंधन और वैकल्पिक फसल योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि बेहतर तैयारी के जरिए किसानों पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सकेगा।

जलाशयों का जलस्तर सामान्य से बेहतर

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश के जलाशयों में जलस्तर सामान्य से बेहतर स्थिति में है, जो खरीफ सीजन की तैयारियों के लिए एक बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

रोग और कीट प्रबंधन की अग्रिम तैयारी पर जोर

बैठक में रोग एवं कीट प्रबंधन को भी प्रमुखता से उठाया गया। शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए कि मौसम में बदलाव, नमी के असंतुलन या वर्षा में अंतराल के कारण बढ़ने वाले संभावित रोगों और कीटों की अग्रिम पहचान की जाए। साथ ही उनकी निगरानी और उपचार संबंधी सलाह पहले से तैयार कर राज्यों और किसानों तक तेजी से पहुंचाई जाए।

मोबाइल एडवाइजरी और डिजिटल संचार तंत्र होगा मजबूत

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार के पास पर्याप्त डेटा, तकनीकी प्लेटफॉर्म और संचार व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में किसानों तक सीधे मोबाइल संदेश, कृषि सलाह, चेतावनी और फसल संबंधी जानकारी पहुंचाने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य स्तरीय तंत्र, कॉल सेंटर, स्थानीय अधिकारियों और डिजिटल माध्यमों को एकीकृत कर प्रभावी सूचना प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया।

राज्यों की तैयारियों की होगी लगातार समीक्षा

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्यों की तैयारियों की निरंतर समीक्षा की जाएगी। जिन राज्यों में तैयारियां बेहतर हैं, उनके अनुभव साझा किए जाएंगे और जहां अतिरिक्त सहयोग की जरूरत होगी, वहां केंद्र सरकार सक्रिय हस्तक्षेप करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों तक समय पर सहायता पहुंचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

संयुक्त रणनीति के साथ काम करने की जरूरत

बैठक में मंत्री ने कहा कि मौसम, जल, बीज, फसल, रोग-कीट, सिंचाई और ग्रामीण विकास से जुड़े विभाग अलग-अलग काम करने के बजाय साझा डेटा और संयुक्त रणनीति के साथ आगे बढ़ें। इससे जिला और राज्य स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

किसानों का आत्मविश्वास बनाए रखना लक्ष्य

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य केवल संभावित जोखिम का आकलन करना नहीं, बल्कि समय रहते ऐसे सभी कदम उठाना है जिससे किसानों का आत्मविश्वास बना रहे और खेती की निरंतरता प्रभावित न हो। उन्होंने विश्वास जताया कि बेहतर जल प्रबंधन, उन्नत कृषि तकनीकों, समय पर बीज उपलब्धता और मजबूत समन्वय के बल पर संभावित चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

रुद्रम-II मिसाइल का सफल परीक्षण, भारत की रक्षा क्षमता को मिली नई मजबूती

रुद्रम-II मिसाइल का सफल परीक्षण, भारत की रक्षा क्षमता को मिली नई मजबूती

 रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने स्वदेशी रूप से विकसित अत्याधुनिक रुद्रम-II वायु-से-सतह मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है। चुनौतीपूर्ण परिचालन परिस्थितियों में किए गए इस परीक्षण ने मिसाइल की सटीकता, विश्वसनीयता और उसकी सभी प्रमुख प्रणालियों की क्षमता को प्रमाणित किया।

सभी लक्ष्यों पर सटीक प्रहार

परीक्षण के दौरान प्रक्षेपित की गई सभी मिसाइलों ने अपने पूर्वनिर्धारित लक्ष्यों पर अत्यंत सटीकता के साथ प्रहार किया। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) द्वारा तैनात उन्नत ट्रैकिंग और रेंज उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्य पूरी तरह सफल रहे।

स्वदेशी तकनीक से विकसित हुई रुद्रम-II

रुद्रम-II मिसाइल का विकास हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की नोडल प्रयोगशाला इमारत अनुसंधान केंद्र (आरसीआई) ने किया है। इसके विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल), शस्त्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एआरडीई) तथा एकीकृत परीक्षण रेंज सहित कई प्रयोगशालाओं ने सहयोग किया।

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान

इस परियोजना में विकास सह उत्पादन साझेदारों (डीसीपीपी) के अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), क्षेत्रीय सैन्य विमानन योग्यता केंद्र, मिसाइल प्रणाली गुणवत्ता आश्वासन एजेंसी और विभिन्न उद्योगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन संस्थानों के सहयोग से मिसाइल के विकास और परीक्षण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

राजनाथ सिंह ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रुद्रम-II के सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और उद्योग जगत के सभी सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती परिपक्वता, विश्वसनीयता और क्षमता का प्रमाण है।

आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र को मिलेगा बल

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगी तथा देश की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

वैज्ञानिकों और तकनीकी टीमों की सराहना

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष ने इस उपलब्धि से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और परिचालन टीमों को बधाई देते हुए इसे देश की रक्षा क्षमता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

जून की शुरुआत के साथ बदले कई बड़े नियम, LPG सिलेंडर से लेकर कार और UPI तक का सीधा असर आपकी जेब पर

जून की शुरुआत के साथ बदले कई बड़े नियम, LPG सिलेंडर से लेकर कार और UPI तक का सीधा असर आपकी जेब पर

 नई दिल्ली।  जून महीने की शुरुआत के साथ ही देशभर में कई बड़े वित्तीय और रोजमर्रा से जुड़े नियम बदल गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों, कारोबारियों और ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाला है। 1 जून 2026 से कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा हो गया है, मारुति सुजुकी की कारों की कीमतें बढ़ गई हैं, बैंकिंग नियमों में बदलाव लागू हो गए हैं, सोलर पैनल महंगे हो सकते हैं और UPI पेमेंट सिस्टम में भी बड़ा बदलाव किया गया है। आइए जानते हैं आज से लागू हुए 5 बड़े बदलावों के बारे में।

1. कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा

हर महीने की तरह तेल कंपनियों ने 1 जून को LPG सिलेंडर की नई कीमतें जारी कर दी हैं। घरेलू 14.2 किलो वाले सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत फिर बढ़ा दी गई है। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 42 रुपये महंगा होकर 3113.50 रुपये का हो गया है, जबकि कोलकाता में इसकी कीमत 52.50 रुपये बढ़ गई है। इसका असर होटल, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है।

इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्रालय ने LPG और PNG कनेक्शन रखने वालों के लिए भी नियम सख्त कर दिए हैं। अब जिन उपभोक्ताओं के घर PNG कनेक्शन लग चुका है, उन्हें 30 दिनों के भीतर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा।

2. Maruti Suzuki की कारें हुईं महंगी

जून की पहली तारीख से मारुति सुजुकी ने अपनी कई कारों की कीमतें बढ़ा दी हैं। कंपनी के अनुसार बढ़ी हुई कीमतें आज से लागू हो गई हैं। Alto, Brezza, WagonR और अन्य कई मॉडल अब पहले से महंगे मिलेंगे। कंपनी ने अलग-अलग मॉडलों की कीमतों में अधिकतम 30 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की है। ऐसे में नई कार खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अब ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।

3. HDFC Bank ने बदले नियम

1 जून 2026 से HDFC Bank ने अपने करंट अकाउंट और कुछ अन्य खातों से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। बैंक के मुताबिक अब छोटे नोट और सिक्के जमा करने पर नई लिमिट और चार्ज लागू होगा। 20 रुपये या उससे कम मूल्य के नोटों के लिए 10 हजार रुपये प्रतिमाह और सिक्कों के लिए 5 हजार रुपये प्रतिमाह की सीमा तय की गई है। इससे ज्यादा रकम जमा करने पर अतिरिक्त 2 प्रतिशत शुल्क देना होगा।

4. Solar Panel हो सकते हैं महंगे

आज से सोलर पैनल सेक्टर में भी नया नियम लागू हो गया है। अब सरकारी योजनाओं और सब्सिडी वाले प्रोजेक्ट्स में केवल Approved List of Models and Manufacturers (ALMM List-II) में शामिल सोलर मॉड्यूल और सेल का ही इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, लेकिन इसके कारण सोलर पैनल की कीमतों में बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है।

5. UPI पेमेंट सिस्टम में बड़ा बदलाव

डिजिटल पेमेंट को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए NPCI ने UPI सिस्टम में बड़ा बदलाव लागू किया है। अब किसी भी UPI ट्रांजैक्शन के दौरान PIN डालने से पहले पैसे पाने वाले व्यक्ति का बैंक खाते में दर्ज नाम स्क्रीन पर दिखाई देगा। इसका मकसद गलत खाते में पैसे ट्रांसफर होने और ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाओं को कम करना है।

इन सभी बदलावों का असर सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और खर्चों पर पड़ सकता है। ऐसे में नई दरों और नियमों की जानकारी रखना जरूरी हो गया है।

‘‘खेत बचाओ अभियान’ बनेगा किसानों के अधिकारों की आवाज, देशभर में चलेगा जन आंदोलन : शिवराज चौहान

‘‘खेत बचाओ अभियान’ बनेगा किसानों के अधिकारों की आवाज, देशभर में चलेगा जन आंदोलन : शिवराज चौहान

 एक जून को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से होने वाले ‘खेत बचाओ अभियान’ के राष्ट्रीय शुभारंभ से पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ कृषि अधिकारियों तथा किसान हित में कार्यरत साथियों से वर्चुअल संवाद किया।

उन्होंने अभियान को जनभागीदारी, वैज्ञानिक दृष्टि और राष्ट्रीय दायित्व के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया। शिवराज सिंह ने इस महत्वपूर्ण अभियान में शामिल होने के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर चर्चा की है, वहीं वे केंद्रीय मंत्रियों और अन्य सभी जनप्रतिनिधियों से भी सहभागिता की अपील कर रहे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती मां को बचाने, खेती का भविष्य सुरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा करने का राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने कहा कि बढ़ता तापमान, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का असंतुलित उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट और बदलते जलवायु संकट खेती के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं, इसलिए समय रहते व्यापक जागरूकता और व्यवहारिक हस्तक्षेप आवश्यक है।

उन्होंने आगे बताया कि 1 जून को रायसेन जिले के रामसिया गांव से प्रारंभ हो रहा राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, फसल चयन, जल संरक्षण, हरी खाद, कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक कृषि पद्धतियों तथा नकली खाद-बीज और पेस्टिसाइड की पहचान जैसे विषयों पर जागरूक करेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल सलाह देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि खेत स्तर पर डेमो, वैज्ञानिक प्रमाण और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से किसानों का विश्वास मजबूत करना होगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देशभर में 30 जून तक का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि कौन अधिकारी, वैज्ञानिक, संस्थान या टीम किस तिथि को किस गांव में जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि हर जिले का कार्यक्रम पूर्व नियोजित हो, डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग हो, स्थानीय स्तर पर समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों और अभियान के हर चरण में प्रभावी समन्वय दिखाई दे।

उन्होंने राज्यों के कृषि विभागों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए केंद्र, राज्य, आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी और किसान हितैषी संस्थाएं एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ने तथा प्राकृतिक खेती व टिकाऊ कृषि के व्यवहारिक नमूने प्रस्तुत करने पर बल दिया।

शिवराज सिंह ने कहा कि अभियान को बहुउद्देश्यीय स्वरूप देते हुए किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, सॉयल हेल्थ कार्ड, मिनी बीज किट, दलहन-तिलहन मिशन, तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं का लाभ भी किसानों तक पहुंचाया जाए; इससे खेत बचाने के साथ-साथ किसान की आय, जागरूकता, और कृषि प्रबंधन क्षमता को भी मजबूत किया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रचार-प्रसार पर जोर देकर इसे अभियान का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि यह देशहित का कार्यक्रम है और इसकी जानकारी जितनी तेजी से गांव-गांव पहुंचेगी, अभियान उतना ही प्रभावशाली बनेगा। उन्होंने अधिकारियों और वैज्ञानिकों से कहा कि वे बिना संकोच मीडिया से संवाद करें, क्योंकि यह अभियान धरती, खेती और अन्नदाता के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

हर साल लाखों जानें ले रहा तंबाकू, रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

हर साल लाखों जानें ले रहा तंबाकू, रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

 तंबाकू आज दुनिया के सामने मौजूद सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। हर साल लाखों लोग तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। लोगों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और इसके सेवन को कम करने के उद्देश्य से हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) मनाया जाता है। यह दिवस केवल एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और तंबाकू-मुक्त समाज के निर्माण का वैश्विक संकल्प भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा शुरू की गई यह पहल लोगों को यह समझाने का प्रयास करती है कि तंबाकू का सेवन न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बल्कि परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस का उद्देश्य

विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य तंबाकू सेवन से होने वाले स्वास्थ्य खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करना और सरकारों, संस्थाओं तथा नागरिकों को तंबाकू नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है। यह दिवस हर वर्ष एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है, जिसके माध्यम से तंबाकू उद्योग की रणनीतियों, युवाओं को लक्षित करने वाले प्रचार और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

तंबाकू: एक धीमा जहर

तंबाकू को अक्सर “धीमा जहर” कहा जाता है क्योंकि इसका प्रभाव धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, सिगार, खैनी, गुटखा, जर्दा और पान मसाला जैसे विभिन्न रूपों में तंबाकू का सेवन किया जाता है। इनमें मौजूद निकोटीन अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला तत्व है। इसके अलावा तंबाकू में हजारों हानिकारक रसायन पाए जाते हैं, जिनमें से कई कैंसर उत्पन्न करने वाले होते हैं। तंबाकू का सेवन फेफड़ों के कैंसर, मुंह के कैंसर, गले के कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, श्वसन संबंधी बीमारियों और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू से होने वाली अधिकांश बीमारियां रोकी जा सकती हैं, यदि समय रहते इसके सेवन को छोड़ दिया जाए।

भारत में तंबाकू सेवन की स्थिति

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां तंबाकू का सेवन व्यापक स्तर पर होता है। यहां धूम्रपान के साथ-साथ बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में तंबाकू सेवन एक गंभीर समस्या बना हुआ है। विशेष चिंता की बात यह है कि युवाओं और किशोरों के बीच भी तंबाकू उत्पादों का उपयोग बढ़ता देखा गया है। कई बार जिज्ञासा, साथियों का दबाव, विज्ञापनों का प्रभाव या सामाजिक वातावरण युवाओं को तंबाकू की ओर आकर्षित करता है। एक बार इसकी लत लगने के बाद इससे छुटकारा पाना काफी कठिन हो जाता है।

युवाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा

तंबाकू उद्योग अक्सर युवाओं को अपने उत्पादों की ओर आकर्षित करने के लिए विभिन्न तरीके अपनाता है। आकर्षक पैकेजिंग, फ्लेवर वाले उत्पाद और अप्रत्यक्ष प्रचार युवाओं को प्रभावित करते हैं। कम उम्र में तंबाकू सेवन शुरू करने वाले लोगों में भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा अधिक होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरावस्था में विकसित होने वाला मस्तिष्क निकोटीन के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। इससे न केवल लत तेजी से लगती है बल्कि मानसिक और शारीरिक विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए स्कूलों, कॉलेजों और परिवारों की भूमिका युवाओं को तंबाकू से दूर रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निष्क्रिय धूम्रपान भी है खतरनाक

तंबाकू सेवन का नुकसान केवल सेवन करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास मौजूद लोग भी इसके दुष्प्रभावों का शिकार बनते हैं। इसे निष्क्रिय धूम्रपान या सेकेंड हैंड स्मोक कहा जाता है। घर, कार्यालय या सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट और बीड़ी के धुएं के संपर्क में आने वाले लोगों में भी फेफड़ों की बीमारियां, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर इसका प्रभाव विशेष रूप से गंभीर हो सकता है। यही कारण है कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित करने के लिए विभिन्न देशों में कानून बनाए गए हैं।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

तंबाकू केवल स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि इसका आर्थिक और सामाजिक प्रभाव भी व्यापक होता है। तंबाकू से होने वाली बीमारियों के उपचार पर परिवारों और सरकारों को भारी खर्च करना पड़ता है। कई परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा चिकित्सा खर्चों में चला जाता है। इसके अलावा बीमारी और समय से पहले मृत्यु के कारण उत्पादकता में कमी आती है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है। गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका प्रभाव और अधिक गंभीर होता है, क्योंकि सीमित आय का एक हिस्सा तंबाकू उत्पादों पर खर्च हो जाता है।

तंबाकू नियंत्रण के लिए सरकारी प्रयास

भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने तंबाकू नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध, तंबाकू उत्पादों पर चेतावनी चित्र, विज्ञापनों पर रोक और तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाना ऐसे महत्वपूर्ण उपाय हैं जिनका उद्देश्य लोगों को तंबाकू सेवन से हतोत्साहित करना है। इसके अलावा स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने तथा जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को इसके खतरों के बारे में जानकारी दी जाती है। स्वास्थ्य संस्थान भी तंबाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों को परामर्श और सहायता प्रदान कर रहे हैं।

तंबाकू छोड़ना क्यों जरूरी है?

तंबाकू छोड़ने का निर्णय किसी व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी निर्णय हो सकता है। तंबाकू छोड़ने के कुछ ही घंटों के भीतर शरीर में सकारात्मक बदलाव शुरू हो जाते हैं। रक्तचाप और हृदय गति सामान्य होने लगती है, जबकि कुछ महीनों में फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार दिखाई देने लगता है। लंबे समय तक तंबाकू से दूरी बनाए रखने पर कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। इसके साथ ही व्यक्ति की आर्थिक बचत बढ़ती है और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।

समाज और परिवार की भूमिका

तंबाकू-मुक्त समाज के निर्माण में केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। परिवार बच्चों और युवाओं को सही दिशा देने में अहम योगदान दे सकते हैं। माता-पिता यदि स्वयं तंबाकू से दूर रहें और इसके दुष्प्रभावों के बारे में खुलकर चर्चा करें, तो बच्चों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ सकती है। शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और मीडिया को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिविर और परामर्श कार्यक्रम तंबाकू सेवन को कम करने में प्रभावी साबित हो सकते हैं।

स्वस्थ भविष्य के लिए सामूहिक संकल्प

विश्व तंबाकू निषेध दिवस हमें यह याद दिलाता है कि तंबाकू से होने वाली अधिकांश मौतों और बीमारियों को रोका जा सकता है। इसके लिए व्यक्तिगत जागरूकता, सामाजिक सहयोग और प्रभावी सरकारी नीतियों की आवश्यकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति तंबाकू से दूरी बनाने का संकल्प ले और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करे, तो एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज का निर्माण संभव है। तंबाकू छोड़ना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस हमें यही संदेश देता है कि स्वस्थ जीवन का आधार सही विकल्पों में छिपा है और तंबाकू से दूरी उन सबसे महत्वपूर्ण विकल्पों में से एक है।