हरिद्वारः उत्तराखंड में हरिद्वार के थाना कनखल क्षेत्र में झाड़ियों में मिले युवक के शव के मामले में पुलिस ने बुधवार को सनसनीखेज खुलासा करते हुए मृतक के दोस्त को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) हरिद्वार के नेतृत्व में गठित विशेष टीमों ने सघन जांच और सीसीटीवी विश्लेषण के आधार पर वारदात की गुत्थी सुलझाई।
उल्लेखनीय है कि सात फरवरी को श्रीयंत्र पुलिया के समीप झाड़ियों में एक युवक का लहूलुहान शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव की शिनाख्त कुनाल पुत्र रोहिताश, निवासी रामपुर रायघाटी थाना लक्सर (हाल निवासी लाटोवाली, कनखल) के रूप में की। मृतक के सिर पर गंभीर चोट के निशान पाए गए, जिससे हत्या की आशंका प्रबल हुई। मृतक के पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच प्रारंभ की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पांच टीमों का गठन किया गया। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
जांच के दौरान मृतक को एक शराब के ठेके से शराब खरीदते हुए एक स्कूटी सवार युवक के साथ जाते देखा गया। संदिग्ध की पहचान अरविंद उर्फ शिवम पुत्र संदीप शर्मा, निवासी गोवर्धन, मथुरा (उ.प्र.), हाल निवासी लाटोवाली, कनखल के रूप में हुई। घटना के बाद से फरार चल रहे आरोपी को पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मथुरा से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि छह फरवरी की रात वह और कुनाल साथ बैठकर शराब पी रहे थे। नशे की हालत में कुनाल द्वारा आरोपी की बहनों पर अभद्र टिप्पणी करने और विवाद के दौरान थप्पड़ मारने से झगड़ा बढ़ गया। गुस्से में आकर आरोपी ने पास पड़े भारी पत्थर से कुनाल के सिर पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर मृतक का मोबाइल फोन बरामद किया है। मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई जारी है। इस पूरे घटनाक्रम के अनावरण में थाना कनखल पुलिस, सर्विलांस (सीआईयू) टीम तथा नगर/रानीपुर पुलिस की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी साक्ष्यों और त्वरित समन्वय के चलते ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी अल्प समय में सुलझाई जा सकी।
नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एफसीआई डिपो चंदौसी के प्रबंधक सुनील त्यागी और सहायक ग्रेड-2 सह डिपो प्रभारी अशोक कुमार को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
सीबीआई ने बताया कि इन आरोपितों ने चावल के स्टैक पास करने के बदले पैसे की मांग की थी। यह राशि पहली किस्त के तौर पर ली जा रही थी।
शिकायतकर्ता एक निजी फर्म चलाता है। वह एफसीआई बबराला डिपो में 16 स्टैक चावल जमा करने गया था।
वह आगे 8 और स्टैक जमा करने की योजना बना रहा था। आरोप है कि सहायक ग्रेड-2 सह डिपो प्रभारी ने 16 स्टैक पास करने के बदले 50000 रुपये मांगे।
शेष 8 स्टैक के लिए प्रति स्टैक 15000 रुपये की अतिरिक्त मांग की गई। सीबीआई ने 11 फरवरी को शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया।
इसके बाद एजेंसी ने जाल बिछाया। जांच में सामने आया कि रिश्वत की मांग प्रबंधक के साथ साजिश में की गई थी। सीबीआई ने बताया कि मामले की आगे जांच जारी है।
-मुख्यमंत्री ने की प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समीक्षा, पुलिस बल को अलर्ट रहने के निर्देश
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होली, महाशिवरात्रि और रमजान सहित विभिन्न पर्व-त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वालों के विरुद्ध सख्ती से निपटने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार को शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश की कानून-व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 02 से 04 मार्च तक होली का पर्व मनाया जाएगा। ब्रज क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में होलिकोत्सव के दौरान हर्ष और उल्लास का माहौल होना चाहिए। यह सुनिश्चित करायें कि शोभायात्राओं में उपद्रवी तत्वों की घुसपैठ किसी भी स्थिति में न होने पाए। रंग में भंग डालने वालों, उन्माद फैलाने वालों एवं अराजक तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में सभी मंडलों, पुलिस ज़ोन, रेंज एवं जनपदों के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहभागिता की। मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत वर्षों में पर्व-त्योहारों के दौरान घटित घटनाओं से सीख लेते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सतर्कता, निगरानी एवं प्रबंधन को और अधिक मजबूत किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि होलिका दहन केवल परम्परागत स्थलों पर ही कराया जाए। सड़क के मध्य किसी भी स्थिति में दहन न किया जाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी सतत निगरानी रखी जाए। आगामी महाशिवरात्रि, होली, रमजान, माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाओं, जनगणना तथा अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए सभी आवश्यक प्रबंध समय से सुनिश्चित किए जाएं।
महाशिवरात्रि के अवसर पर जलार्पण हेतु निकलने वाले कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार की दुर्घटना न हो, इसके लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहें। पुलिस महानिदेशक ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इस संबंध में पुलिस बल को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने वाराणसी, मेरठ, लखीमपुर खीरी एवं बाराबंकी के जिलाधिकारियों से महाशिवरात्रि पर प्रमुख शिव मंदिरों में दर्शन-पूजन की तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि 14 एवं 15 फरवरी को प्रमुख शिवधामों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुगम दर्शन, यातायात, पार्किंग, महिला सुरक्षा तथा आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीमें 24×7 सक्रिय रहें। मंदिर परिसरों में तैनात पुलिस कार्मिक श्रद्धालुओं से मर्यादित व्यवहार करें तथा पर्याप्त संख्या में महिला कार्मिकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि यातायात जाम के प्रमुख कारकों को चिन्हित कर उनके स्थायी समाधान सुनिश्चित किए जाएं। अस्थायी व्यवस्थाओं के स्थान पर दीर्घकालिक एवं व्यवहारिक उपाय लागू किए जाएं, ताकि आमजन को अनावश्यक असुविधा न हो।
धर्मस्थलों पर ध्वनि-विस्तारक यंत्रों के उपयोग को लेकर निर्देश दिए गए कि उनकी आवाज़ किसी भी स्थिति में परिसर से बाहर न जाए। पूर्व में ऐसी गतिविधियों के कारण कानून-व्यवस्था सम्बंधी चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं। अतः नियमों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए। विवाह एवं अन्य सामाजिक समारोहों में रात्रि 10 बजे के उपरांत डीजे, साउंड सिस्टम अथवा तेज़ ध्वनि उपकरणों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन की स्थिति में कठोर कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मस्थलों के आसपास भिक्षावृत्ति की गतिविधियों में वृद्धि संज्ञान में आई है। इस पर प्रभावी रोक लगाई जाए तथा संबंधित व्यक्तियों के यथोचित पुनर्वास की योजना बनाई जाए।
मुख्यमंत्री ने 108 एवं 102 एम्बुलेंस सेवाओं के रिस्पॉन्स टाइम एवं कार्यक्षमता में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। आपातकालीन सेवाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। अवैध, जहरीली एवं नकली मदिरा के निर्माण, भंडारण एवं बिक्री पर पूर्ण नियंत्रण के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में सभी संबंधित विभाग निरंतर अलर्ट रहें। ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना मिलते ही त्वरित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों पर स्टंटबाजी करने वाले अराजक तत्वों के विरुद्ध विशेष सतर्कता बरती जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 18 फरवरी से माध्यमिक शिक्षा परिषद की कक्षा 10 एवं 12 की परीक्षाएं प्रारम्भ हो रही हैं। परीक्षाएं नकलविहीन कराई जाएं तथा परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी अवधि में रमजान माह भी प्रारंभ होगा तथा संभावित रूप से 21 मार्च को ईद का पर्व मनाया जाएगा। धर्मगुरुओं से संवाद स्थापित कर शांति एवं सौहार्द बनाए रखा जाए। किसी भी स्थिति में कोई नई परम्परा प्रारम्भ न की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 19 मार्च से वासंतिक नवरात्र प्रारंभ होंगे। इसके उपरांत राम नवमी का पर्व आएगा। इन सभी आयोजनों की तैयारियां समय से पूर्ण कर ली जाएं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने अवगत कराया कि आगामी दिनों में जनगणना का प्रथम चरण प्रारम्भ हो रहा है। उसके लिए सभी जिलाधिकारी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के प्रति अत्यंत सतर्क रहना होगा। प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी ईमानदारी एवं जवाबदेही के साथ करे।
Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से आज सुबह एक बड़ी सनसनीखेज खबर सामने आई है। जहां बुढाना कोतवाली क्षेत्र में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में 50 हजार रुपये का इनामी और कुख्यात बदमाश अमजद मारा गया है। इस मुठभेड़ में पुलिस ने साहस का परिचय दिया, हालांकि बदमाशों की ओर से की गई फायरिंग में एक सब-इंस्पेक्टर और एक सिपाही भी घायल हुए हैं।
मुठभेड़ की पूरी कहानी
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस को बुढाना इलाके में किसी बड़ी वारदात की फिराक में घूम रहे बदमाशों की सूचना मिली थी। जब पुलिस टीम ने घेराबंदी शुरू की, तो खुद को घिरा देख बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं, जिसमें कुख्यात अमजद गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ के दौरान घायल हुए जांबाज सब-इंस्पेक्टर और सिपाही को उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
अपराध का लंबा इतिहास
मारा गया बदमाश अमजद कोई मामूली अपराधी नहीं था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अमजद पर हत्या, लूट, और डकैती जैसे 40 से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे। उसका आतंक केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था; दिल्ली और उत्तराखंड समेत कई अन्य राज्यों की पुलिस भी उसकी तलाश कर रही थी। उसकी बढ़ती आपराधिक गतिविधियों के कारण पुलिस ने उस पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
हथियारों का जखीरा बरामद
पुलिस को अमजद के पास से जो सामान मिला है, वह चौंकाने वाला है। मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने एक स्वचालित कार्बाइन (Carbine), एक पिस्टल, चोरी की बाइक और लूट का भारी माल बरामद किया है। कार्बाइन जैसे घातक हथियार का मिलना यह संकेत देता है कि यह गैंग किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी में था
इलाके में पुलिस का सख्त पहरा
इस एनकाउंटर के बाद पूरे इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अब अमजद के अन्य साथियों और उसके नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, अमजद के खात्मे से इलाके में दहशत का माहौल कम होगा और पुलिस प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास बढ़ेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विषय वस्तु का पुस्तकों में समावेश विषय पर हुई एक दिवसीय कार्यशाला
भोपाल। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि ऐसी पाठ्य पुस्तकें तैयार हों जो विद्यार्थी में जिज्ञासा, तर्कशक्ति, सृजनशीलता और भारतीयता तथा पर्यावरण के प्रति संरक्षण की दृष्टि के बोध को विकसित करें। पुस्तक शिक्षक के लिए मार्गदर्शक बने, बोझ नहीं।
उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य ऐसी पाठ्यपुस्तकें निर्मित करना है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुसार भारत की आत्मा, विज्ञान की दृष्टि, और भविष्य के विश्वास को समेकित करें। निजी विद्यालयों में प्रयुक्त होने वाली पाठ्यपुस्तकों में भी यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि, उनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के निर्देशों के अनुरूप एनसीईआरटी और एससीईआरटी द्वारा तैयार की गयी विषय वस्तु का समावेश हो।
मंत्री सिंह बुधवार को राज्य शिक्षा केंद्र, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भोपाल के होटल अशोका लेकव्यू में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विषय वस्तु का पुस्तकों में समावेश विषयक आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए। उन्होंने कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 न केवल पाठ्यक्रम परिवर्तन का दस्तावेज है, बल्कि यह भारत केन्द्रित, बाल-केन्द्रित और भविष्य केन्द्रित शिक्षा दृष्टि है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 अनेक शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के अथक परिश्रम का परिणाम है।
स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा प्रकाशित पुस्तकों के उदाहरण को ध्यान में रखते हुए निजी विद्यालयों में प्रयुक्त की जाने वाली पुस्तकों को भी बच्चों के लिए आकर्षक, गुणवत्तापरक बनाया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने अनुभवी शिक्षकों, विभागीय अधिकारियों और निजी प्रकाशकों की समिति गठित करने का सुझाव भी दिया, जो पुस्तकों की गुणवत्ता, उपयोगिता और लागत पर समुचित मार्गदर्शन प्रदान करे।
कार्यशाला में पाठ्य पुस्तक स्थायी समिति के सदस्य डॉ. भागीरथ कुमरावत ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या और एससीईआरटी, मध्यप्रदेश द्वारा निर्मित राज्य पाठ्यचर्या की विस्तृत जानकारी प्रदान की।
सभी के सहयोग, अनुभव, प्रतिबद्धता से होंगे सफल : शिल्पा गुप्तालोक शिक्षण आयुक्त शिल्पा गुप्ता ने कहा कि सभी के सहयोग, अनुभव और प्रतिबद्धता से हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ्य पुस्तकों के निर्माण में सफल होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा स्थापित करेंगे। कार्यशाला में मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के प्रबंध संचालक विनय निगम, माध्यमिक शिक्षा मंडल की अतिरिक्त सचिव प्रियंका गोयल, लोक शिक्षण संचालक केके द्विवेदी, राज्य शिक्षा केन्द्र संचालक हरजिंदर सिंह, कार्यशाला प्रभारी एवं अपर संचालक शीतांशु शुक्ला, नियंत्रक पाठ्य पुस्तक प्रकोष्ठ साक्षी जैन सहित निजी प्रकाशक एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने उज्जैन में पहली बार आयोजित ‘श्री महाकाल वन मेले, महाकाल स्मृति उपहार किट और महाकाल वन प्रसादम् का किया शुभारंभ
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वन हमारी वसुंधरा का वैभव, धरती की धरोहर और धरा का अलंकरण हैं। वन हमारी राष्ट्रीय पूंजी हैं। इनका संरक्षण एवं संवर्धन करना हम सबकी जिम्मेदारी है। वन मेले प्रदेश की समृद्ध जैविक और वानस्पतिक विविधताओं को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम हैं। इनके जरिए हमारे जनजातीय भाई-बहनों को अपने वनोत्पाद और काष्ठ शिल्प विक्रय करने का सुनहरा मौका मिलता है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार शाम को धार्मिक नगरी उज्जैन में पहली बार आयोजित ‘श्री महाकाल वन मेला-2026’ के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘श्री महाकाल वन मेला शीघ्र अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। मेले में प्रदर्शित जड़ी-बूटियां तथा विभिन्न प्रकार के शुद्ध एवं सुरक्षित अकाष्ठीय लघु वनोत्पाद आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों से रोगोपचार में बेहद उपयोगी होते हैं। वनौषधियां हर रोग के इलाज में कारगर साबित हो रही हैं। इनसे असंभव रोग का इलाज भी संभव हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय बजट-2026 में एम्स की तर्ज पर देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोलने की घोषणा की गई है। इनमें से एक अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान भगवान धनवंतरी की कर्मभूमि और सिंहस्थ भूमि उज्जैन में स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस वन मेले में नागरिकों को प्राकृतिक रंग-गुलाल मिलेंगे। इसमें नाड़ी वैद्य और आयुर्वेदिक चिकित्सक भी अपनी सेवाएं देंगे। वन मेले में प्रदर्शित काष्ठ और बांस से निर्मित एथनिक क्रॉफ्ट आइटम्स न केवल पारम्परिक शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, बल्कि सबके घरों की शोभा भी बढ़ाते हैं। उन्होंने उज्जैन के नागरिकों से अपील की कि वे इस वन मेले का भरपूर लाभ उठाएं और प्रदेश की वन संपदा तथा जनजातीय उत्पादों का उपयोग कर सबको प्रोत्साहित भी करें।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ‘महाकाल वन मेले’ के जरिए स्थानीय वन उत्पादों और शिल्पकारों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। पर्यावरण जागरूकता, आयुर्वेदिक उत्पादों के प्रचार-प्रसार और आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक सार्थक कदम है।
उज्जैन के दशहरा मैदान में यह वन मेला 16 फरवरी तक चलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तेजी से प्रदेश में मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों की संख्या में वृद्धि कर रही है। पिछले साल हमने विभिन्न जिलों में 8 नए आयुर्वेदिक कॉलेज शुरू किए हैं। इस साल हम और भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विंध्य हर्बल के प्राकृतिक रंग-गुलाल, महाकाल स्मृति उपहार किट एवं 'महाकाल वन प्रसादम्' का शुभारंभ किया। उन्होंने पन्ना जिले के वन औषधियों से उपचार पद्धति के विशेष जानकार वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने 25 जनवरी को 'मन की बात' में वनरक्षक अहिरवार द्वारा वनौषधियों के देशज ज्ञान के संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के जनजातीय और वनांचल को समृद्धि देने के लिए भोपाल और उज्जैन जैसे वन मेले प्रदेश भर में लगाए जाने की आवश्यकता है। उज्जैन में महाशिवरात्रि और विक्रमोत्सव के अवसर पर आयोजित वन मेला प्रदेशवासियों के लिए अद्भुत है। वन विभाग ने प्राकृतिक रूप से महाकाल वन प्रसादम् तैयार किया है। इसमें काष्ठ से बने गमले में एक पौधा लगाया गया है। यह गमला महाकाल को भेंट स्वरूप दिया जाएगा। वापस मिलने पर इसे किसी भी जगह पर सीधे रोपित कर दिया जाएगा। काष्ठ गलकर खाद बन जाएगा और पौधा बिना गमला निकालते ही निर्बाध रूप से पल्लवित होता रहेगा।
उन्होंने कहा कि उज्जैन के श्री महाकाल वन मेले में महुआ के लड्डू, श्रीअन्नों से बनी मिष्ठान्न सहित अनेक वनोपज उत्पाद भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन के वन मेले में आए वैद्य और चिकित्सक अनेक असाध्य रोगों के उपचार के लिए नागरिकों को नि:शुल्क सेवाएं देंगे।
वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में जनजातीय समुदायों की आय बढ़ाने के लिए वन विभाग लगातार काम कर रहा है। उज्जैन की धरती पर आयोजित यह वन मेला निश्चित रूप से भोपाल वन मेले की तरह सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। यहां विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक औषधियां एवं बांस से बने उत्पाद उपलब्ध हैं। नागरिक इसका भरपूर लाभ उठाएं।
अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के शहर-शहर में वन मेला लगाने की शुरुआत की है। भोपाल के बाहर यह पहला वन मेला उज्जैन में लगाया गया है। वन मेलों के दो उद्देश्य होते हैं। इनसे जनजातीय समुदायों को तो आमदनी होती ही है, शहरी लोगों को प्राकृतिक उत्पाद खरीदने और नेचर के साथ चलने-संवरने का अवसर भी मिल जाता है। उन्होंने बताया कि मप्र लघु वनोपज संघ के जरिए प्रदेश के 30 लाख जनजातीय संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। भोपाल में डेढ़ माह पहले हुए वन मेले में 3 करोड़ रुपए से अधिक की बिक्री हुई थी। श्री महाकाल वन मेला में प्रदेशभर के विभिन्न उत्पादों के 250 स्टॉल लगाए गए हैं। इसके अलावा यहां 150 से अधिक वैद्य एवं आयुर्वेदिक चिकित्सक लोगों को परामर्श प्रदान करेंगे।
भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपने रणनीतिक साझेदार देश सेशेल्स के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के बीच सोमवार को नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता में विकास से जुड़ी साझेदारी को केंद्र में रखा गया। इस दौरान दोनों नेताओं ने ‘सेशेल’ विजन को अपनाया, जिसका मकसद स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षा को बढ़ावा देना है। भारत ने सेशेल्स की विकास से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की भी घोषणा की है, जो वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक हाउसिंग सेक्टर को मजबूती देगा। सेशेल विजन और विशेष आर्थिक पैकेज इस उच्च स्तरीय बैठक का सबसे अहम दस्तावेज रहा। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस विजन के तहत भारत ने सेशेल्स के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज का एलान किया है। यह फंड मुख्य रूप से पब्लिक हाउसिंग, मोबिलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी ने इस बात पर जोर दिया कि यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
Mahashivratri Vrat 2026: महाशिवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। ये प्रमुख त्योहारों में से एक है जो हर साल फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार ये वही दिन है जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद 8 योग का शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व बढ़ गया है, तो चलिए जानते हैं इसकी पूजा विधि और पूजा व रुद्राभिषेक का शुभ मुहूर्त क्या है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी।
रुद्राभिषेक का शुभ मुहूर्त
इस दिन रुद्राभिषेक कराने का शुभ मुहूर्त शाम 05:04 से अगले दिन की सुबह 06:59 बजे तक रहेगा।
रुद्राभिषेक करने की विधि
सबसे पहले पूजन सामग्री को पवित्र करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लें कि आप किस मनोकामना के लिए रुद्राभिषेक कर रहे हैं। रुद्राभिषेक की शुरुआत में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। फिर शिवजी, कार्तिकेय जी और नंदी की पूजा करें और ‘श्रृंगी’ से शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें। यदि श्रृंगी न हो तो लोटे से धार बनाकर अभिषेक करें। रुद्राभिषेक दूध, दही, घी, गन्ने के रस, जल, सरसों के तेल किसी भी चीज से कर सकते हैं। अभिषेक करते समय ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।
वहीं अभिषेक के बाद शिवलिंग को पोंछकर उनका श्रृंगार करें। शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं। फिर बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र, भांग और फूल चढ़ाएं साथ ही इत्र लगाएं और जनेऊ पहनाएं। कपूर जलाकर महादेव की आरती करें और कर्पूरगौरं मंत्र का पाठ करें। अंत में क्षमा प्रार्थना करें कि यदि पूजा में कोई त्रुटि हो गई हो तो भगवान उसके लिए क्षमा करें। फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में सभी में प्रसाद बांट दें।
रायबरेली। उत्तरप्रदेश के रायबरेली से हादसे की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां गंगा एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार कार ने पैदल जा रहीं 9 लड़कियों को कुचल दिया। इस दर्दनाक हादसे में 4 लड़कियों की मौत हो गई, जबकि 5 की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। वहीं सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया और मामले की जांच शुरू की।
जानकारी के अनुसार, घटना कल रविवार जगतपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत सुल्तानपुर जनोली के पास हुई। बताया गया कि, गांव में बने एक नए मंदिर में कल भंडारे का आयोजन था। जिसमें शामिल होने के लिए 10 से 12 लड़कियां प्रसाद लेकर पैदल अपने घर जा रही थी। इस दौरान शाम करीब 7 बजे अंडर कंस्ट्रक्शन गंगा एक्सप्रेस-वे पर लालगंज की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार ने उन्हें रौंद दिया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।
बताया गया कि, कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि लड़कियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। वहीं मौके पर ही दो लड़कियों की मौत हो गई। जबकि दो की जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। वहीं हादसे के बाद स्थानीय लोग मदद के लिए पहुंचे और एम्बुलेंस और पुलिस को इस दुर्घटना की सूचना दी। जिसके बाद पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंची। घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया।
मृतक युवतियों की पहचान शालिनी (22) पुत्री जंग बहादुर, हिमांशी (23) पुत्री दल बहादुर, रश्मि (14) पुत्री रामरतन और आसमा (18) के रूप में हुई है। बताया गया कि, सभी मृतक ग्राम पंचायत कोडर की रहने वाली थी। वहीं हादसे में घायल 5 लड़कियों को पहले जगतपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया. डॉक्टरों के मुताबिक सभी की हालत गंभीर बनी हुई है।घटना के बाद रायबरेली की डीएम हर्षिता माथुर और एसपी रवि कुमार ने ज़िला अस्पताल का दौरा किया और घायल लोगों से मुलाकात की और फरारा कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज तक जांच शुरू की।
International Desk: पाकिस्तान के कराची में पिछले महीने गुल प्लाजा शॉपिंग मॉल में लगी भीषण आग के बाद देश के इस सबसे बड़े शहर में आग लगने की घटनाएं प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई हैं और इन घटनाओं में किसी साजिश या जानबूझकर किए गए कृत्य की आशंका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। शुक्रवार को शहर के विभिन्न हिस्सों से कम से कम पांच जगह आग लगने की घटनाएं सामने आईं। वहीं, धाबेजी स्थित मुख्य जल पंपिंग स्टेशन की एक पाइपलाइन विस्फोट में क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे लाखों निवासियों की जलापूर्ति बाधित हो गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) जुबैर नजीर शेख ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां और अग्निशमन विभाग के अधिकारी स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं तथा आग लगने के कारणों की जांच कर रहे हैं, जिसमें किसी साजिश की आशंका भी शामिल है। आग की घटनाओं को लेकर चिंता 17 जनवरी को सदर वाणिज्यिक क्षेत्र में स्थित गुल प्लाजा शॉपिंग मॉल में लगी भीषण आग के बाद उत्पन्न हुई है। इस हादसे में पूरी इमारत जलकर खाक हो गई थी और कम से कम 79 लोगों की जान चली गई थी। आग पर काबू पाने में दो दिन लगे थे, जबकि एक सप्ताह तक चले बचाव अभियान में मलबे से दर्जनों शव बरामद किए गए थे। शुक्रवार को लांधी निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र में एक प्लास्टिक फैक्टरी में आग लग गई।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी हुमायूं खान ने बताया कि आग बुझाने के लिए 12 दमकल गाड़ियां तैनात की गईं। आग तेजी से फैलकर पास के गोदामों और कारखानों तक पहुंच गई। उन्होंने कहा, ''गुल प्लाजा हादसे के बाद लोग अधिक सतर्क हो गए हैं और व्यावसायिक इमारतों तथा कारखानों में अग्नि सुरक्षा कवायदों के प्रति जागरूकता बढ़ी है, इसलिए किसी की जान नहीं गई।'' अधिकारियों के अनुसार, गुल प्लाजा त्रासदी के बाद कराची में लगभग रोजाना आग लगने की खबरें आ रही हैं, जिससे निवासियों की चिंता बढ़ गई है और प्रशासन को सतर्कता तथा सुरक्षा उपायों को मजबूत करना पड़ा है।
कुआलालंपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत आज केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि निवेश और व्यापार का भरोसेमंद वैश्विक साझेदार बन चुका है। यूके, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ओमान, यूरोपीय संघ और अमेरिका सहित कई देशों के साथ भारत के व्यापार समझौते इस बढ़ते विश्वास का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि “ट्रस्ट अब भारत की सबसे मजबूत करंसी है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए ओसीआई कार्ड की पात्रता छठी पीढ़ी तक बढ़ाने, तिरुवल्लुवर स्कॉलरशिप शुरू करने और मलेशिया में नए भारतीय वाणिज्य दूतावास के शीघ्र उद्घाटन की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई जल्द ही मलेशिया में शुरू होगी, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और जनसंपर्क और मजबूत होंगे। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र बना चुका है, जहां दुनिया के करीब आधे रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन होते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और मलेशिया की दोस्ती अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में आगे बढ़ रही है। दोनों देशों का संबंध इंडिया-मलेशिया पार्टनरशिप फॉर एडवांसिंग कलेक्टिव ट्रांसफॉर्मेशन (आईएमपीएसीटी) मंत्र पर आधारित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने बीते एक दशक में अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है। भारत 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से शीर्ष-3 की ओर बढ़ रहा है, मोबाइल निर्माण, स्टार्ट-अप, रक्षा निर्यात और स्वच्छ ऊर्जा में बड़ी उपलब्धियां हासिल हुई हैं।
प्रधानमंत्री ने मलेशिया में बसे भारतीय मूल के लोगों को “भारत-मलेशिया संबंधों की जीवंत कड़ी” बताया। उन्होंने तमिल, सिख, गुजराती, तेलुगु, मलयाली सहित विभिन्न भारतीय समुदायों के योगदान की सराहना की। सिख समुदाय द्वारा गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं- नाम जपो, किरत करो और वंड छको—को जीवित रखने का विशेष उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि तमिल भाषा और संस्कृति भारत की अमूल्य धरोहर है और मलेशिया में तमिल समुदाय सदियों से सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन को समृद्ध करता आ रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय मलाया में तिरुवल्लुवर चेयर के बाद अब तिरुवल्लुवर सेंटर स्थापित करने की भी घोषणा की।
प्रधानमंत्री ने मलेशिया में बसे तमिल, सिख और अन्य भारतीय समुदायों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सदियों से अपनी संस्कृति और परंपराओं को संजोकर रखा है। उन्होंने बटू केव्स के ताइपूसम उत्सव, गरबा की लोकप्रियता और भारतीय भाषाओं में शिक्षा देने वाले स्कूलों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस यात्रा में प्रवासी भारतीय अहम भागीदार हैं। चाहे आप कुआलालंपुर में जन्मे हों या कोलकाता में, भारत आपके दिल में बसता है और प्रवासी भारतीय विकसित भारत और समृद्ध मलेशिया के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।
नेशनल डेस्कः दिल्ली में बीजेपी सरकार का एक साल पूरा होने जा रहा है और इसे बड़े उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी की गई है। 8 फरवरी से 20 फरवरी तक पूरी दिल्ली में लगातार कार्यक्रम होंगे, ताकि सरकार के कामकाज और उपलब्धियां आम जनता तक पहुंचाई जा सकें। इस दौरान नए प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन और शिलान्यास भी किए जाएंगे। इस जश्न का मुख्य केंद्र दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान होगा।
500 इलेक्ट्रिक बसें होंगी लॉन्च
रविवार को रामलीला मैदान में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें 500 नई इलेक्ट्रिक बसों (ई-बसों) को दिल्ली की जनता को समर्पित किया जाएगा। बीजेपी इसे अपनी विकास की तेज रफ्तार दिखाने का बड़ा प्रतीक मान रही है। यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा, अगले 12 दिनों (20 फरवरी तक) हर दिन कोई न कोई नई योजना, परियोजना या सुविधा जनता के लिए शुरू की जाएगी। इसके बाद 22 फरवरी से बीजेपी फिर से सीधे जनता के बीच जाएगी और अपनी उपलब्धियों के बारे में बताएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में बीजेपी सरकार जनता के समर्थन और वोट की ताकत से बनी है, और इसी वजह से विकास कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने यह भी बताया कि मटियाला विधानसभा क्षेत्र में 400 करोड़ रुपये के विकास कार्य शुरू हो रहे हैं, जो जनता के भरोसे से ही संभव हुए हैं।
बीजेपी की अहम बैठक में बना पूरा प्लान
शनिवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में बीजेपी विधायक दल की अहम बैठक हुई, जिसमें सरकार के एक साल को उत्सव और जन-अभियान के रूप में मनाने का रोडमैप तैयार किया गया। इसी बैठक में तय हुआ कि रविवार को रामलीला मैदान में बड़ा कार्यक्रम होगा। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 500 ई-बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। पूरी दिल्ली में विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे
सीहोर में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन में किसानों के उन्मुखीकरण के लिएहुआ राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन
सीहोर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ किसान के साथ खड़ी सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन में मध्य प्रदेश सरकार केन्द्र सरकार के साथ मिलकर काम करेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इकार्डा जैसे अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान का सशक्त होना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। भारत में अन्न केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और संस्कार का आधार है “अन्न देवो भव:” हमारी कृषि परंपरा का मूल मंत्र है।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ‘कृषक कल्याण वर्ष’ मना रहा है। केन्द्र के दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना, आयात निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इससे किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक भंडारण और सुनिश्चित विपणन की सुविधाएं मिलेंगी। दलहन उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जिससे इस मिशन का सर्वाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा।
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे। केन्द्रीय मंत्री चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. यादव दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (आईसीएआरडीए) सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक प्लांट टिशु कल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इकार्डा का यह नवीन भवन प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए नई आशाओं और संभावनाओं का द्वार खोलेगा। यह केंद्र वैज्ञानिक खेती, उन्नत तकनीक और वैश्विक कृषि अनुभव को किसानों से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने सिंचाई विस्तार और जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इकार्डा द्वारा विकसित वैज्ञानिक मॉडल प्रदेश की योजनाओं को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय और इकार्डा का यह संयुक्त प्रयास मध्यप्रदेश को टिकाऊ और समृद्ध कृषि का राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक मॉडल बना सकता है। उन्होंने कहा कि सीहोर का यह राष्ट्रीय सम्मेलन दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, मूल संवेदनाओं और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विमर्श का सशक्त मंच बनेगा और नीति निर्धारण व अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय कृषि मंत्रालय एवं इकार्डा की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह अनुसंधान केंद्र प्रदेश की कृषि को नई दिशा देगा और किसानों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश भारत का फूड बॉस्केट है। भारतीय संस्कृति में अन्न देवता के माध्यम से समाज पल्लवित होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के विकास और कल्याण के लिए 4 श्रेणियां गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण बताई हैं। हमारी भारतीय सभ्यता में कृषि आधारित जीवन शैली विकसित हुई। आधुनिक समय में खेती में कई प्रकार के विकार आ गए। खेती में रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से हमारी जीवन शैली में बदलाव आया। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा। अमेरिका जैसे देश ने भारत की बात मानी।
उन्होंने कहा कि दाल हर भारतीय परिवार की प्रतिदिन की थाली का अभिन्न हिस्सा और हर मौसम में भारतीय परिवारों की जरूरत है। इसका उत्पादन और खपत बताता है कि दलहन क्षेत्र में हमें और अधिक काम करने की जरूरत है। इसलिए अब मध्य प्रदेश में दलहन फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ायेंगे। इसके लिए हम केन्द्र सरकार के साथ हम-कदम होकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार दालों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार के हर मिशन, हर संकल्प की पूर्ति में हर जरूरी सहयोग देगी। हम देश में दाल समृद्धि का संकल्प मिल-जुलकर पूरा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना से सोयाबीन की उपज की 1500 करोड़ रुपये से अधिक राशि किसानों के खातों में पहुंची है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन उपयुक्त प्रबंधन के अभाव में प्रदेश का बड़ा भू-भाग सिंचाई से वंचित था। हमारी सरकार आने के बाद प्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। देश की पहली केन-बेतवा राष्ट्रीय लिंक नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी जोड़ो परियोजना से प्रदेश में सिंचाई का रकबा और तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हमने आने वाले सालों में प्रदेश का सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर तक करने का लक्ष्य रखा है।
कार्यक्रम को केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजीव कुमार अग्रवाल, अंतरराष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (इकार्डा) के महानिदेशक अली अबुर साबा और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री कंषाना ने 'एक उत्पाद-श्रेष्ठ उत्पाद' के तहत मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के अनुपम उत्पाद सम्मेलन में आए सभी अतिथियों को भेंट किए। कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा दलहन मिशन पोर्टल का शुभारंभ किया और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रकाशित बुलेटिन इकॉर्डा की पुस्तक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम स्थल पर कृषि विकास संबंधी प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही इकॉर्डा परिसर में पौध-रोपण भी किया गया।
राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री द्वय रामनाथ ठाकुर एवं भागीरथ चौधरी, प्रदेश के मंत्रीगण करण सिंह वर्मा व कृष्णा गौर, राज्यों के कृषि मंत्रियों में ओडिशा के उप-मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री केवी सिंहदेव, उत्तरप्रदेश से सूर्य प्रताप शाही, हरियाणा से श्याम सिंह राणा, गुजरात से रमेशभाई भूराभाई कटारा, छत्तीसगढ़ से रामविचार नेताम, महाराष्ट्र से आशीष जायसवाल, राजस्थान से डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, बिहार से रामकृपाल यादव, इकार्डा के निदेशक शिवकुमार अग्रवाल, केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के निदेशक अविनाश लवानिया, कृषि क्षेत्र में कार्य करने वाली विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ सहित बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे।________________
Kanpur News: उत्तर प्रदेश में कानपुर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां पर एक हैवान पिता ने अपनी मासूम बेटी की जान ले ली। दरअसल, रावतपुर क्षेत्र में घरेलू कलह के बीच एक नशेड़ी ने अपनी मासूम पुत्री की पानी भरे टब में डाल दिया, जिसके उसकी मौत हो गई। मां का रो-रोकर बुरा हाल है।
घरेलू कलह के चलते दिया इस वारदात को अंजाम
जानकारी के मुताबिक, मसवानपुर निवासी महिला रुचि ने थाने में सूचना दी कि वर्ष 2024 में उसका प्रेम विवाह गोपाल गुप्ता नामक व्यक्ति से हुआ था जो नशे का आदी है। उसकी इस आदत की वजह से आए दिन पति पत्नी में झगड़ा हुआ करता था। इसी के चलते पिछली एक फरवरी को भी पति पत्नी के बीच झगड़ा हुआ और गोपाल ने अपनी एक वर्षीय पुत्री को नशे की हालत में पानी भरे टब में डाल दिया।
इलाज के दौरान हुई बच्ची की मौत
टब में डालने से मासूम की हालत बिगड़ गई। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां शुक्रवार देर शाम उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने बताया कि पोस्टमाटर्म रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं होने के कारण विसरा सुरक्षित किया गया है। परिजनों से तहरीर प्राप्त होने पर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ। भारत-अमेरिका में प्रस्तावित द्विपक्षीय समझौते के अंतर्गत जारी टैरिफ ज्वाइंट स्टेटमेंट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत अमेरिका के साथ एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क तक पहुंच गया है, जो भारतीय निर्यातकों व एमएसएमई के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार करता है और साथ ही भारत के कृषि क्षेत्र, खाद्य सुरक्षा, हमारे किसानों के हितों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती से रक्षा करता है। यह मेक इन इंडिया को मजबूती देने के साथ ही महिलाओं व युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित करता है। मुख्यमंत्री ने इस समझौते को आगे बढ़ाने में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका भी धन्यवाद ज्ञापित किया है।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के अंतर्गत जारी टैरिफ ज्वाइंट स्टेटमेंट ने उत्तर प्रदेश की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत संकेत दिया है। ज्वाइंट स्टेटमेंट में भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को औसतन 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत और चुनिंदा श्रेणियों में शून्य किए जाने का प्रावधान ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य सरकार श्रम-प्रधान उद्योगों, एमएसएमई और क्लस्टर आधारित विनिर्माण को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री योगी जारी बयान में कहा कि स्टेटमेंट में 30 अरब डॉलर से अधिक के भारतीय निर्यात को 18 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ के दायरे में लाने और लगभग 14 श्रेणियों में चुनिंदा उत्पादों को संभावित टैरिफ समायोजन सूची के तहत शून्य शुल्क का लाभ देने की बात कही गई है। इसका प्रभाव केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टेक्सटाइल, लेदर, कृषि-आधारित उद्योग, एमएसएमई और औद्योगिक विनिर्माण जैसे उन क्षेत्रों पर पड़ेगा जिनमें उत्तर प्रदेश की भागीदारी राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख है। ऐसे में यह टैरिफ व्यवस्था राज्य के निर्यात ढांचे, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन की दिशा में दीर्घकालिक अवसर के रूप में देखी जा रही है।
भारत-अमेरिका टैरिफ ज्वाइंट स्टेटमेंट में टेक्सटाइल और अपैरल उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को औसतन 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत तक सीमित करने तथा रेशम आधारित उत्पादों को शून्य शुल्क के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश के उन क्षेत्रों के लिए विशेष महत्व रखती है, जहां उत्पादन बड़े पैमाने पर श्रम-प्रधान और क्लस्टर आधारित है।
उन्होंने कहा कि भदोही-मिर्जापुर कार्पेट सेक्टर, जो वैश्विक स्तर पर हस्तनिर्मित कालीनों के लिए जाना जाता है, लंबे समय से ऊंचे आयात शुल्क के कारण अमेरिकी बाजार में मूल्य प्रतिस्पर्धा की चुनौती झेल रहा था। टैरिफ में कटौती के बाद इन उत्पादों की लागत संरचना में सुधार आने की संभावना है, जिससे निर्यात ऑर्डर और दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंधों को बढ़ावा मिल सकता है। इसी तरह, वाराणसी का रेशम और हैंडलूम सेक्टर, जिसे ज्वाइंट स्टेटमेंट के तहत शून्य शुल्क का लाभ मिलने की बात कही गई है, अमेरिकी बाजार में सीमित लेकिन स्थिर मांग के बीच बेहतर पहुंच हासिल कर सकता है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के पावरलूम और रेडीमेड गारमेंट आधारित उत्पादन इकाइयों के लिए भी यह टैरिफ व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रेडीमेड गारमेंट्स, मैन-मेड और कॉटन टेक्सटाइल जैसे उत्पादों पर शुल्क घटने से इन इकाइयों को चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले लागत और मूल्य निर्धारण के स्तर पर तुलनात्मक बढ़त मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि लॉजिस्टिक्स और गुणवत्ता मानकों में अपेक्षित सुधार किया गया, तो यह टैरिफ राहत उत्तर प्रदेश के टेक्सटाइल और कार्पेट सेक्टर के निर्यात को अधिक स्थिर और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक हो सकती है।
भारत-अमेरिका टैरिफ ज्वाइंट स्टेटमेंट में लेदर और फुटवियर उत्पादों पर अमेरिकी आयात शुल्क को औसतन 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के पारंपरिक लेदर क्लस्टर्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानपुर और आगरा जैसे क्षेत्र, जहां उत्पादन का बड़ा हिस्सा एमएसएमई और कारीगर-आधारित इकाइयों पर केंद्रित है, लंबे समय से ऊंचे टैरिफ और लागत दबाव के कारण अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा की चुनौती का सामना कर रहे थे।
कानपुर का लेदर उद्योग फिनिश्ड लेदर, फुटवियर और उससे जुड़े कंपोनेंट्स के लिए जाना जाता है, जबकि आगरा का फुटवियर क्लस्टर मुख्य रूप से निर्यात-उन्मुख उत्पादन पर आधारित है। टैरिफ में प्रस्तावित कटौती से इन उत्पादों की कुल निर्यात लागत में कमी आने की संभावना है, जिससे मूल्य निर्धारण अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकता है। जानकारों का मानना है कि इससे अमेरिकी खरीदारों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंधों की संभावनाएं बढ़ेंगी और निर्यात ऑर्डर में स्थिरता आ सकती है।
इसके साथ ही, टैरिफ राहत से छोटे और मध्यम उद्यमों की सीधे निर्यात करने की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब तक ऊंचे शुल्क के कारण कई इकाइयां बिचौलियों के माध्यम से काम करने को मजबूर थीं। शुल्क घटने से निर्यात श्रृंखला में उनकी सीधी भागीदारी बढ़ सकती है, जिससे मूल्यवर्धन का बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर ही बना रहेगा।
भारत-अमेरिका टैरिफ ज्वाइंट स्टेटमेंट में होम डेकोर उत्पादों पर अमेरिकी आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत तक सीमित करने तथा कुछ श्रेणियों को शून्य शुल्क के दायरे में लाने का प्रावधान पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लकड़ी के फर्नीचर, कुशन, क्विल्ट, कंफर्टर, गैर-इलेक्ट्रिकल लाइटिंग और अन्य सजावटी वस्तुएं ऐसे उत्पाद हैं जिनका उत्पादन बड़े पैमाने पर एमएसएमई और कारीगर-आधारित इकाइयों के माध्यम से होता है।
मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर जैसे क्षेत्रों में होम डेकोर और हस्तशिल्प से जुड़ी इकाइयां लंबे समय से निर्यात में सक्रिय हैं, लेकिन ऊंचे टैरिफ और लागत दबाव के कारण अमेरिकी बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति सीमित रही है। टैरिफ में कटौती से इन उत्पादों की कुल निर्यात लागत में कमी आने की संभावना है, जिससे अमेरिकी बाजार में मूल्य निर्धारण अधिक व्यवहार्य हो सकता है।
इस सेक्टर में टैरिफ राहत का लाभ केवल बड़े निर्यातकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे उत्पादकों और कारीगरों को भी सीधे निर्यात से जुड़ने का अवसर मिल सकता है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होने और मूल्यवर्धन का बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर रहने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही, होम डेकोर उद्योग का श्रम-प्रधान स्वरूप रोजगार सृजन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यदि निर्यात ऑर्डर में निरंतरता आती है, तो इससे कारीगरों, फर्नीचर, सिलाई और फिनिशिंग से जुड़े कामगारों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
चुनिंदा कृषि उत्पादों और प्रोसेस्ड फूड निर्यात को नया आधार
भारत-अमेरिका टैरिफ ज्वाइंट स्टेटमेंट में चुनिंदा कृषि उत्पादों और प्रोसेस्ड फूड निर्यात पर शून्य शुल्क का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए संरचनात्मक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इस श्रेणी में ताजे फल और सब्जियां, मसाले, चाय-कॉफी एक्सट्रैक्ट, रेडी-टू-ईट एवं अन्य प्रोसेस्ड फूड उत्पाद शामिल किए गए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश की उत्पादन हिस्सेदारी राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय है।
उत्तर प्रदेश देश का प्रमुख आम उत्पादक राज्य है और इसके साथ ही आलू, टमाटर, मटर, हरी सब्जियों तथा मसालों के उत्पादन में भी अग्रणी भूमिका निभाता है। अब तक अमेरिकी बाजार में इन उत्पादों की पहुंच सीमित रूप से प्रसंस्करण लागत, टैरिफ और सख्त मूल्य प्रतिस्पर्धा के कारण बनी रही। शून्य शुल्क की व्यवस्था से इन उत्पादों की कुल निर्यात लागत में उल्लेखनीय कमी आने और भारतीय उत्पादों की कीमत अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होने की संभावना बनती है।
प्रोसेस्ड फूड के संदर्भ में यह प्रावधान उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर्स, कोल्ड चेन और एग्री-इन्फ्रास्ट्रक्चर को सीधे निर्यात से जोड़ने का अवसर देता है। राज्य में स्थापित मेगा फूड पार्क, निजी प्रसंस्करण इकाइयां और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) इस व्यवस्था के माध्यम से निर्यात श्रृंखला का हिस्सा बन सकते हैं। इससे कच्चे कृषि उत्पादों के बजाय मूल्यवर्धित निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
ज्वाइंट स्टेटमेंट में सेमीकंडक्टर इनपुट्स, डेटा सेंटर हार्डवेयर, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर और उन्नत डिजिटल तकनीकों के आयात और तकनीकी सहयोग को लेकर प्रतिबद्धता जताई गई है। इसका सीधा प्रभाव उत्तर प्रदेश के उभरते आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेंटर इकोसिस्टम पर पड़ सकता है, विशेष रूप से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में। टैरिफ और तकनीकी सहयोग में स्पष्टता से राज्य में डेटा सेंटर परियोजनाओं की लागत संरचना बेहतर होने और निवेश निर्णयों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश पहले से ही बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर निवेश आकर्षित कर रहा है और यह व्यवस्था इन परियोजनाओं को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने में सहायक हो सकती है।
उत्तर प्रदेश जैसे कृषि-प्रधान राज्य के लिए यह प्रावधान विशेष महत्व रखता है, जहां बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से खेती, दुग्ध उत्पादन और पशुपालन पर निर्भर है। स्टेटमेंट में इन क्षेत्रों को पूर्ण टैरिफ छूट या व्यापक आयात उदारीकरण से अलग रखते हुए नियामक नियंत्रण, गुणवत्ता मानकों और घरेलू उत्पादन क्षमता के संरक्षण पर जोर दिया गया है। इससे पता चलता है कि व्यापार संतुलन को बढ़ाते हुए खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
भोपाल/रतलाम : भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक मजबूती के उद्देश्य से जिलों में प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी नेतृत्व ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए विभिन्न जिलों के लिए नए प्रभारियों के नाम घोषित किए हैं। सूची के मुताबिक, विवेक जोशी रतलाम मंदसौर नीमच प्रभारी बने हैं।
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बताया जा रहा है कि आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों को देखते हुए यह नियुक्तियां की गई हैं। जिला प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में संगठनात्मक समन्वय, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और पार्टी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नई नियुक्तियों से जमीनी स्तर पर संगठन को और अधिक सशक्त किया जाएगा और बूथ स्तर तक कार्यप्रणाली को मजबूत करने पर विशेष फोकस रहेगा।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि कोई भी होमबायर सिर्फ इस वजह से उपभोक्ता नहीं माना जाना बंद नहीं करता कि उसने अपनी खरीदी गई संपत्ति को किराए पर दे दिया है।
जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने 4 फरवरी को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें गुरुग्राम में फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति की शिकायत यह कहकर खारिज कर दी गई थी कि फ्लैट किराए पर होने से वह कॉमर्शियल उपयोग में है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल किराए पर देना यह साबित नहीं करता कि संपत्ति व्यावसायिक उद्देश्य से खरीदी गई थी और ऐसे मामलों में यह साबित करने की जिम्मेदारी बिल्डर की होती है, न कि होमबायर की।
कोर्ट ने साफ किया कि हर मामला उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर तय होगा और जब तक कॉमर्शियल उद्देश्य साबित न हो, तब तक खरीदार को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत उपभोक्ता ही माना जाएगा। अब यह मामला दोबारा विचार के लिए NCDRC को भेज दिया गया है।
नई दिल्ली/वॉशिंगटन। भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है, क्योंकि आज 7 फरवरी 2026 से अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी कार्यकारी आदेश के अनुसार संशोधित 18 प्रतिशत टैरिफ व्यवस्था आज से प्रभावी हो गई है, जिसके तहत अब भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत एड-वेलोरम ड्यूटी नहीं लगेगी।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका की आधिकारिक टैरिफ सूची से भारत से जुड़े वे विशेष कोड और प्रावधान हटा दिए गए हैं, जिनके तहत यह अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा था, और यह नियम आज या इसके बाद अमेरिका में खपत के लिए पहुंचने वाले सभी भारतीय उत्पादों पर लागू होगा।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए बड़ा कदम बताया और कहा कि यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देगा, साथ ही किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार व नए अवसर पैदा करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार आज से लागू हुए इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार को नई गति मिलेगी और भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी।
iPhone in Space : क्या आपने कभी सोचा है कि चांद की सतह से कोई एस्ट्रोनॉट अपनी फैमिली को सीधे व्हाट्सएप मैसेज करे या इंस्टाग्राम रील शेयर करे? अब यह हकीकत बनने जा रहा है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने दशकों पुराने नियम को बदलते हुए अंतरिक्ष यात्रियों को अपने साथ iPhone और अन्य आधुनिक स्मार्टफोन ले जाने की आधिकारिक अनुमति दे दी है।
मिशन आर्टिमिस-2 में दिखेगा आईफोन का जलवा
नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेर इसाकमैन ने घोषणा की है कि आने वाले क्रू-12 (Crew-12) और आर्टिमिस-2 (Artemis II) मिशन पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्री अपने पर्सनल स्मार्टफोन साथ रख सकेंगे।
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क्यों लिया गया यह फैसला? नासा का मानना है कि स्मार्टफोन के जरिए एस्ट्रोनॉट्स अपने अनुभवों को अधिक 'पर्सनल टच' के साथ रिकॉर्ड कर सकेंगे।
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कनेक्टिविटी: इसके जरिए वे अंतरिक्ष से ही अपने परिवार के साथ जुड़े रह सकेंगे और दुनिया के साथ स्पेस की हाई-क्वालिटी फोटो और वीडियो साझा कर पाएंगे।
अब तक क्यों लगा था बैन?
हैरानी की बात यह है कि अब तक अंतरिक्ष में पर्सनल फोन ले जाना मना था। इसके पीछे तीन मुख्य कारण थे:
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सुरक्षा (Security): फोन के सिग्नल कहीं स्पेसक्राफ्ट के नेविगेशन सिस्टम में बाधा न डालें।
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ड्यूरैबिलिटी (Durability): क्या स्मार्टफोन स्पेस के रेडिएशन और दबाव को झेल पाएंगे?
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सिस्टम इंटरफेरेंस: स्पेस स्टेशन के उपकरणों के साथ फोन की वेवलेंथ का टकराना।

अभी तक एस्ट्रोनॉट्स ईमेल या वीडियो कॉल के लिए केवल नासा द्वारा दिए गए खास लैपटॉप का ही इस्तेमाल करते थे।
क्या अब आईफोन स्पेस-सेफ है?
नासा ने स्पष्ट किया है कि यह अनुमति लंबी टेस्टिंग के बाद दी गई है। जांच में पाया गया कि आधुनिक स्मार्टफोन अब इतने एडवांस हैं कि वे स्पेसफ्लाइट के सभी सुरक्षा मानकों (Safety Standards) को पूरा करते हैं। जेर इसाकमैन ने इसे नासा के कल्चरल शिफ्ट के रूप में पेश किया है जहां पुराने और अप्रासंगिक हो चुके नियमों को बदला जा रहा है।
दुनिया देखेगी चांद का पर्सनल व्यू
इस फैसले से स्पेस साइंस के प्रति लोगों की रुचि बढ़ेगी। जब एस्ट्रोनॉट्स अपने फोन से चांद की उबड़-खाबड़ सतह या पृथ्वी का नजारा लाइव दिखाएंगे, तो वह किसी प्रोफेशनल कैमरे के मुकाबले ज्यादा रीयल और कनेक्टेड लगेगा।
नेशनल डेस्क: लोकसभा में बजट सत्र 2026 के दौरान एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारंपरिक भाषण के बिना ही सदन में पारित कर दिया गया। संसदीय इतिहास में ऐसा बहुत कम देखने को मिला है जब चर्चा का समापन प्रधानमंत्री के जवाब के बिना हुआ हो।
लोकसभा में सुरक्षा का हाई-ड्रामा
सूत्रों और सदन के भीतर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री के निर्धारित संबोधन से कुछ मिनट पहले लोकसभा का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था। भाजपा सांसदों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि कांग्रेस और विपक्षी दल के कुछ सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री के पास पहुँचने या उनके खिलाफ आक्रामक व्यवहार करने की योजना थी।






















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