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हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन से भारत ने रचा इतिहास, स्वदेशी तकनीक का सफल प्रदर्शन

हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन से भारत ने रचा इतिहास, स्वदेशी तकनीक का सफल प्रदर्शन

 भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को 17 जुलाई, 2026 को दिल्ली क्षेत्र के जींद–सोनीपत रेलखंड पर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। शुरुआत के बाद से यह ट्रेन 1,200 किलोमीटर से अधिक की सफल यात्रा पूरी कर चुकी है, जिससे 3,200 लीटर से अधिक डीज़ल की बचत हुई है। यह ट्रेन शून्य टेलपाइप कार्बन उत्सर्जन के साथ केवल जलवाष्प छोड़ती है और भारतीय रेल के स्वच्छ एवं सतत परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनती है बिजली

यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से फ्यूल सेल के भीतर ही बिजली उत्पन्न करती है। इसी विद्युत ऊर्जा से ट्रेन संचालित होती है। इस पूरी प्रक्रिया में उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। न धुआँ निकलता है और न ही टेलपाइप से कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे यह वर्तमान रेल प्रणोदन तकनीकों में सबसे स्वच्छ विकल्प बनकर उभरी है।

पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार परियोजना

भारतीय रेल के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना पूरी तरह स्वदेशी पहल है। 10 कोच वाली इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं, जो संयुक्त रूप से 2,400 किलोवाट शक्ति प्रदान करती हैं। इसके अलावा ट्रेन में लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियां और हाइड्रोजन सिलेंडर भी लगाए गए हैं, जो इसकी ऊर्जा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं।

जींद में बनी पहली हाइड्रोजन भंडारण सुविधा

इस परियोजना के तहत जींद में भारतीय रेल की पहली समर्पित हाइड्रोजन भंडारण सुविधा स्थापित की गई है। यहां 500 Bar तक के दाब पर ग्रीन हाइड्रोजन का भंडारण किया जा सकता है, जबकि 350 Bar के दाब पर ईंधन भरने की व्यवस्था उपलब्ध है। इस सुविधा की कुल भंडारण क्षमता लगभग 3,000 किलोग्राम है।

सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था

ट्रेन में हाइड्रोजन रिसाव, अधिक तापमान, आग और धुएँ का स्वतः पता लगाने वाली कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियां लगाई गई हैं। इसके साथ स्वचालित शट-ऑफ सिस्टम, निरंतर वेंटिलेशन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का अनुपालन तथा सभी आवश्यक परीक्षण और सत्यापन भी सुनिश्चित किए गए हैं। जींद–सोनीपत रेलखंड पर सफल परिचालन के बाद जल्द ही इसका परीक्षण दिल्ली मार्ग पर भी शुरू किया जाएगा।

स्वच्छ परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

भारत की हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि स्वदेशी हाइड्रोजन रेल इकोसिस्टम की स्थापना की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। यह परियोजना सतत और शून्य-उत्सर्जन रेल परिवहन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा भविष्य में इसके व्यापक विस्तार और स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की मजबूत आधारशिला रखती है।

प्रधानमंत्री मोदी 26 जुलाई को विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 के प्रतिभागियों से करेंगे संवाद

प्रधानमंत्री मोदी 26 जुलाई को विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 के प्रतिभागियों से करेंगे संवाद

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 जुलाई (रविवार) को शाम 4:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 के प्रतिभागियों से बातचीत करेंगे। इस कार्यक्रम में देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक युवा शामिल होंगे, जिनका चयन राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के जरिए किया गया था।

तीन लाख से अधिक युवाओं ने लिया चयन प्रक्रिया में हिस्सा

माय भारत के माध्यम से संचालित विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 का आयोजन 4 जून से 30 जून तक दो चरणों में किया गया। कार्यक्रम के लिए आयोजित ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में तीन लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया, जिनमें से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक प्रतिभागियों का चयन किया गया।

74 सीमावर्ती गांवों से युवाओं को मिला जुड़ने का अवसर

इस कार्यक्रम के तहत लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 वाइब्रेंट सीमावर्ती गांवों को शामिल किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक परिवेश से जोड़ना तथा उन्हें इन गांवों के रणनीतिक महत्व से परिचित कराना था।

स्थानीय समुदायों के साथ रहकर किया अनुभव साझा

प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के दौरान स्थानीय समुदायों के साथ रहकर स्वच्छता अभियान, सरकारी योजनाओं पर जागरूकता अभियान, युवा सम्मेलन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, वृक्षारोपण अभियान, लघु पंचायत मॉडल सिमुलेशन, स्थानीय कारीगरों के साथ संवाद और रणनीतिक महत्व के संस्थानों का दौरा जैसी विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया।

सीमावर्ती गांवों को ‘देश के पहले गांव’ बनाने की पहल

विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन पर आधारित है, जिसमें सीमावर्ती गांवों को “देश के पहले गांव” के रूप में विकसित करने और उन्हें विकसित भारत की यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया गया है। इस कार्यक्रम ने युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य, सांस्कृतिक विरासत और विकास संबंधी आकांक्षाओं का प्रत्यक्ष अनुभव देने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता, सामुदायिक भागीदारी और सीमावर्ती गांवों के महत्व की गहरी समझ विकसित करने का अवसर भी प्रदान किया। 

सरकार कर्मचारी संगठनों के साथ नियमित संवाद के लिए प्रतिबद्ध : डॉ. जितेंद्र सिंह

सरकार कर्मचारी संगठनों के साथ नियमित संवाद के लिए प्रतिबद्ध : डॉ. जितेंद्र सिंह

 केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि सरकार नियमित संवाद और रचनात्मक परामर्श के माध्यम से कर्मचारी संगठनों के साथ जुड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी, जवाबदेह और कर्मचारी-केंद्रित शासन के चलते लगभग 25 से 30 वर्षों से लंबित कई सेवा संबंधी मामलों का समाधान किया गया है। उन्होंने यह बात नई दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) से संबद्ध भारतीय डाक कर्मचारी संघ (बीपीईएफ) के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान कही।

लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान पर दिया जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने पारदर्शिता, जवाबदेही और कर्मचारी कल्याण को प्राथमिकता देते हुए वर्षों से लंबित सेवा संबंधी शिकायतों के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तरदायी शासन, समय पर निर्णय और निरंतर प्रशासनिक सुधारों के कारण शिकायत निवारण लोक प्रशासन का महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है, जिससे कर्मचारियों की समस्याओं का निष्पक्ष, नियम-आधारित और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो रहा है।

डाक कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल से हुई चर्चा

भारतीय डाक कर्मचारी संघ (बीपीईएफ) के महासचिव अनंत कुमार पाल के नेतृत्व में 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के डाक कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक में सेवा संबंधी मामलों, कर्मचारी कल्याण, मान्यता से जुड़े मुद्दों और लंबित प्रशासनिक एवं कानूनी मामलों के शीघ्र समाधान पर विस्तार से चर्चा हुई।

कर्मचारी संगठनों से सुझाव देने का किया आग्रह

केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रत्येक वास्तविक अभ्यावेदन की जांच उसकी योग्यता और लागू नियमों के आधार पर की जाती है। उन्होंने कहा कि कई मंत्रालयों और विभागों से जुड़े मामलों में व्यापक संस्थागत परामर्श की आवश्यकता होती है, ताकि कानूनी रूप से मजबूत, पारदर्शी और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कर्मचारी संगठनों से शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण को और बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव और प्रतिक्रिया लगातार साझा करने का आग्रह किया।

प्रशासनिक सुधारों की प्रतिनिधिमंडल ने की सराहना

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने प्रशासनिक सुधारों और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में दशकों से लंबित कई सेवा संबंधी मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे कर्मचारियों का व्यवस्था पर विश्वास मजबूत हुआ है। प्रतिनिधियों ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देने में निभाई जा रही भूमिका की भी प्रशंसा की।

कर्मचारी कल्याण और सुशासन को मजबूत करने का भरोसा

प्रतिनिधिमंडल ने कर्मचारी संगठनों के साथ संवाद बनाए रखने के लिए डॉ. जितेंद्र सिंह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार आगे भी कर्मचारियों के कल्याण, प्रशासनिक दक्षता और सुशासन को मजबूत करते हुए सेवा संबंधी वैध मांगों के समाधान की दिशा में कार्य करती रहेगी।

सरकार और सीजेपी में बनी सहमति, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी ने खत्म किया राष्ट्रव्यापी आंदोलन

सरकार और सीजेपी में बनी सहमति, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी ने खत्म किया राष्ट्रव्यापी आंदोलन

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बीच सहमति बन गई है। इसके बाद सीजेपी ने अपना राष्ट्रव्यापी आंदोलन तत्काल प्रभाव से वापस लेने का ऐलान किया। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा की।

सरकार ने स्वीकार कीं प्रमुख मांगें

सीजेपी ने अपनी पोस्ट में कहा कि सरकार ने उसकी सभी प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं। इनमें नीट परीक्षा पेपर लीक से जुड़ी घटनाओं के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को अधिकतम संभव मुआवजा देने का फैसला शामिल है।

एफआईआर वापस लेने पर सहमति

पार्टी के अनुसार, केंद्र सरकार और एनडीए शासित राज्यों में आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी। साथ ही भविष्य में इस आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई नई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

परीक्षा सुधारों पर होगी आगे चर्चा

सीजेपी ने बताया कि सरकार उसके 5 सूत्रीय परीक्षा सुधार चार्टर पर विचार करेगी। इन सुधारों को लेकर आगे की रणनीति तय करने के लिए पार्टी का प्रतिनिधिमंडल सरकार के साथ अलग से बैठक करेगा।

तीन दौर की वार्ता के बाद बनी सहमति

सरकार से बातचीत के बाद सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दौर की वार्ता हुई। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान पार्टी की तीन प्रमुख मांगें थीं—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी कानूनी मामलों व एफआईआर की वापसी तथा भविष्य में आंदोलन से जुड़े लोगों पर कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाना।

मुआवजे की मांग का भी उल्लेख

रांका ने कहा कि पार्टी ने यह भी मांग रखी थी कि नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ उनकी पहली मांग पूरी हो गई है। वहीं, दूसरी मांग के तहत दिल्ली समेत सभी भाजपा और सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने इस पर सहमति जताई है और जल्द ही इन मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

BIG BREAKING : धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से दिया इस्तीफा, पोस्ट में लिखा- युवाओं की भावनाओं का सम्मान

BIG BREAKING : धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से दिया इस्तीफा, पोस्ट में लिखा- युवाओं की भावनाओं का सम्मान

 नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। जिस शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर नीट छात्र धरना प्रदर्शन दे रहे थे, उन्होंने आखिरकर इस्तीफा दे दिया है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।

युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं का सम्मान

मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभार प्रकट करता हूं।

सीबीटी मोड में परीक्षा कराने का लिया निर्णय

किंतु 3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद किया एवं पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-based-test) मोड में करने का निर्णय लिया गया।

इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए whole of government approach के तहत काम किया गया। इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही, छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई।

पहले ही दिन से, इसपर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।

मेधावी छात्रों को मिली सफलता

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आगे लिखा कि 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली। परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ।

मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूं तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता आया हूं। वे केवल भारत का भविष्य ही नहीं हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं।

यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं

धर्मेंद्र प्रधान ने आगे लिखा कि पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है। देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है।

जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र (इस्तीफा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।

मैं प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। साथ ही, मंत्रिपरिषद के अपने सभी सम्मानित सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उन सभी व्यक्तियों का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिनके साथ मुझे कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैं इसके लिए सदैव समर्पित रहूंगा।

प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखूंगा।

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पेपर लीक संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई; 10 साल की सजा और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव

पेपर लीक संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई; 10 साल की सजा और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव

 नई दिल्ली। परीक्षा में पेपर लीक और संगठित नकल के मामलों पर सख्ती बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी गई। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में धांधली करने वाले संगठित गिरोहों के खिलाफ अधिक कठोर कानूनी प्रावधान लागू करना है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार इस विधेयक को संसद के मानसून सत्र में अगले सप्ताह पेश करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट को कानूनी आधार दिया जाएगा, ताकि मामलों का निपटारा निर्धारित समयसीमा में हो सके। प्रस्ताव है कि ऐसे मामलों में तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाए।

विधेयक में दोषियों के लिए अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को इस संशोधन विधेयक का नोडल मंत्रालय बनाया गया है, जो अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर दंड संबंधी प्रावधानों को लागू करेगा। वर्तमान में देश में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू है। इसके तहत व्यक्तिगत स्तर पर परीक्षा में धांधली करने वालों के लिए 3 से 5 वर्ष तक की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, संगठित गिरोहों के मामलों में 5 से 10 वर्ष तक की कैद और ₹1 करोड़ तक जुर्माने की व्यवस्था है। नए संशोधन के जरिए इन प्रावधानों को और अधिक कठोर बनाने का प्रस्ताव है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा था कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ तेज और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कानून को और मजबूत बना रही है।

NEET पेपर लीक प्रदर्शन: छात्रों पर कथित लाठीचार्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, 27 जुलाई को होगी सुनवाई

NEET पेपर लीक प्रदर्शन: छात्रों पर कथित लाठीचार्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, 27 जुलाई को होगी सुनवाई

 नई दिल्ली। नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने इस संबंध में दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। दोनों मामलों पर 27 जुलाई को सुनवाई होगी। मामला वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और गोपाल शंकरनारायणन की ओर से न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष उठाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ से अनुरोध किया कि दोनों याचिकाओं को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। उन्होंने बताया कि दोनों याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं और उन्हें रजिस्ट्री द्वारा नंबर भी आवंटित कर दिए गए हैं।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले दो दिनों से यह दावा किया जा रहा था कि मामले में याचिका पहले ही दायर हो चुकी है, जबकि शुक्रवार सुबह तक केवल एक पत्र या अभ्यावेदन प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि औपचारिक याचिका बाद में दाखिल की गई। गौरतलब है कि 20 जुलाई को दिल्ली में नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान पुलिस द्वारा कथित रूप से लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए, जिसके बाद इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी गई।

इस बीच, NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं।

NEET-CBSE विवाद: छात्रों के समर्थन में कांग्रेस का देशव्यापी कैंडल मार्च और सत्याग्रह, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई

NEET-CBSE विवाद: छात्रों के समर्थन में कांग्रेस का देशव्यापी कैंडल मार्च और सत्याग्रह, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई

 नई दिल्ली। NEET और CBSE से जुड़े विवादों को लेकर कांग्रेस अब देशभर में छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने शनिवार, 25 जुलाई को सभी जिलों में कैंडललाइट मार्च और सत्याग्रह आयोजित करने का ऐलान किया है। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस संबंध में सभी प्रदेश कांग्रेस समितियों और जिला इकाइयों को निर्देश जारी किए हैं। पार्टी की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार, जिला कांग्रेस समितियों के नेतृत्व में शनिवार शाम को कैंडल मार्च निकाला जाएगा, जिसका समापन महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास किया जाएगा।

कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं का सीधा असर छात्रों और युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है। पार्टी ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने और छात्रों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। केसी वेणुगोपाल ने 24 जुलाई को जारी पत्र में प्रदेश कांग्रेस समितियों से अपने-अपने क्षेत्रों की जिला इकाइयों को कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश देने को कहा है। कांग्रेस के मुताबिक, यह कार्यक्रम पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निर्देश पर आयोजित किया जा रहा है।

कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई है। पार्टी का आरोप है कि परीक्षा से जुड़े मामलों में सरकार को छात्रों की चिंताओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए। एआईसीसी ने प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर की कांग्रेस समितियों के साथ-साथ पार्टी के सभी प्रकोष्ठों, विभागों और कार्यकर्ताओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। कांग्रेस ने छात्रों, युवाओं, अभिभावकों और नागरिक समाज के लोगों से भी कैंडल मार्च और सत्याग्रह में शामिल होने का आग्रह किया है।

450 करोड़ बैंक फ्रॉड केस में ईडी का बड़ा एक्शन, दिल्ली-पंजाब-यूपी के 8 ठिकानों पर छापेमारी

450 करोड़ बैंक फ्रॉड केस में ईडी का बड़ा एक्शन, दिल्ली-पंजाब-यूपी के 8 ठिकानों पर छापेमारी

 नई दिल्ली/लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने करीब 450 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत संतोष ओवरसीज लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला सीबीआई की ओर से दर्ज केस के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। आरोप है कि कंपनी ने बैंकों के कंसोर्टियम से करीब 450 करोड़ रुपये का कर्ज लिया और बाद में इस रकम को फर्जी कंपनियों, संदिग्ध लेनदेन और गलत दस्तावेजों के जरिए दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया।

ईडी ने शुक्रवार को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पंजाब में कुल 8 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इन ठिकानों में कंपनी के प्रमोटर, संबंधित संस्थान और कथित सहयोगियों के परिसरों को शामिल किया गया है। एजेंसी ने बताया कि कार्रवाई के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य सबूतों की जांच की जा रही है। इससे पहले भी ईडी फर्जी डिग्री और नकली शैक्षणिक दस्तावेज मामले में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने उस केस में करोड़ों रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की थीं। फिलहाल 450 करोड़ बैंक फ्रॉड मामले में जांच जारी है और आगे की कार्रवाई सबूतों के आधार पर की जाएगी।

आस्था पर प्रहार करने वाले आज आस्थावान बनने का ठेका ले रहे हैं : मुख्यमंत्री योगी

आस्था पर प्रहार करने वाले आज आस्थावान बनने का ठेका ले रहे हैं : मुख्यमंत्री योगी

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखपुर में 995 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात देते हुए जिले के पहले सिक्सलेन फ्लाईओवर सहित चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण तथा दस नई विकास योजनाओं का शिलान्यास किया। टीपी नगर–पैडलेगंज मार्ग स्थित समारोह में मुख्यमंत्री ने विकास, कानून व्यवस्था, आस्था, रोजगार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के समग्र परिवर्तन का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग सत्ता में रहते हुए आस्था पर प्रहार करते थे, वही आज सबसे बड़े आस्थावान बनने का ठेका लेने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं के मुंह से आस्था की बातें सुनना हास्यास्पद लगता है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में बाधा पहुंचाई और रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं। कांग्रेस ने भगवान श्रीराम के अस्तित्व और मंदिर आंदोलन के विरोध में सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि ऐसे दलों को आज आस्था पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

2017 से पहले दंगे, असुरक्षा और अराजकता थी पहचान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश दंगों, अपराध और अराजकता के लिए जाना जाता था। होली, रामनवमी, विजयदशमी, दुर्गापूजा और कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों पर भी तनाव और हिंसा का वातावरण बना रहता था। व्यापारियों, बहन-बेटियों और आम नागरिकों की सुरक्षा संकट में थी। आज प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है और हर व्यक्ति बिना भय के अपना जीवन जी रहा एवं व्यवसाय कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में हजारों बच्चों की मौत हो गई लेकिन तत्कालीन सरकारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाई और पूर्वांचल को इंसेफेलाइटिस की त्रासदी से लगभग मुक्त करा दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में सरकारी नौकरियों पर सैफई सिंडिकेट का कब्जा रहता था। योग्य युवाओं को अवसर नहीं मिलते थे और भर्ती प्रक्रिया में पक्षपात होता था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले नौ वर्षों में बिना भेदभाव नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। जबकि 65 लाख युवाओं को निजी निवेश के माध्यम से रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि एक जिला–एक उत्पाद (ओडीओपी) जैसी योजनाओं से करोड़ों युवाओं और कारीगरों को स्वरोजगार का अवसर मिला है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब गोरखपुर माफिया, अपराध और मच्छरों के कारण बदनाम था। निवेशक यहां आने से डरते थे और गीडा में कोई उद्योग लगाने को तैयार नहीं होता था। आज सुरक्षा और बेहतर वातावरण के कारण गीडा में बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है, जिससे करीब 50 हजार युवाओं को रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि अब गोरखपुर में जमीन खरीदना और घर बनाना लोगों की पहली पसंद बन गया है।

मुख्यमंत्री याेगी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच प्रदेश की 29 चीनी मिलें बंद कर दी गईं और उनमें से 21 को औने-पौने दामों में बेच दिया गया। उन्होंने कहा कि पडरौना चीनी मिल महज दो करोड़ रुपये में बेच दी गई। उसकी जमीन की कीमत ही लगभग 200 करोड़ रुपये थी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकार की नीयत साफ होती है तो विकास भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने गोरखपुर में एम्स, मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, बंद उर्वरक कारखाने के पुनरुद्धार, बेहतर सड़क एवं हवाई संपर्क जैसी अनेक उपलब्धियां दी हैं। उन्होंने मुक्तेश्वरनाथ मंदिर के पुनरोद्धार का उल्लेख करते हुए झारखंडी महादेव मंदिर के विकास का भी भरोसा दिलाया।

गोरखपुर के सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गोरखपुर की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल गई हैं। जो शहर कभी टूटी सड़कों और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, आज वही आधुनिक फ्लाईओवर और विश्वस्तरीय आधारभूत सुविधाओं से सुसज्जित हो रहा है। महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में गोरखपुर लगातार विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले जिस शहर की उपेक्षा होती थी, आज उसे हर सप्ताह नई विकास परियोजनाओं की सौगात मिल रही है। 

कृषकों के कल्याण के लिए मध्यप्रदेश सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

कृषकों के कल्याण के लिए मध्यप्रदेश सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मध्य प्रदेश :- मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की निगरानी और प्रभावी संचालन के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे, जबकि कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ इसमें शामिल होंगे।

 

किसानों के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध: सीएम डॉ.मोहन यादव

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर बाजार और सरकारी योजनाओं का अधिक लाभ मिलेगा।

 

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी राज्य स्तरीय समिति

 

प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत चयनित जिलों में योजना की निगरानी और बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय 'प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना समिति' का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे।

 

समिति में कृषि उत्पादन आयुक्त को उपाध्यक्ष तथा सचिव किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग को सदस्य-सचिव बनाया गया है।

 

कौन-कौन होंगे समिति के सदस्य?

 

इस समिति में कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। इनमें सचिव उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास, पशुपालन एवं डेयरी विकास, सहकारिता, जल संसाधन, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

 

इसके अलावा जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर, नाबार्ड मध्य प्रदेश और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के प्रतिनिधि भी समिति के सदस्य रहेंगे।

 

योजना की निगरानी और बजट आवंटन पर रहेगा फोकस

 

समिति प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करेगी। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर योजनाओं का प्रभावी अभिसरण सुनिश्चित करेगी और चयनित जिलों को समय पर बजट उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगी।

 

चयनित जिलों को मिलेगा विशेष सहयोग

 

सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना के अंतर्गत चयनित जिलों में काम कर रही सभी एजेंसियों को आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे।

 

8 जिलों के उत्पादों की होगी ब्रांडिंग और मार्केटिंग

समिति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में प्रदेश के चयनित 8 जिलों के कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग और वैल्यू एडिशन (मूल्यवर्धन) भी शामिल है। इससे स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता मजबूत होगा।

सावन में ओंकारेश्वर दर्शन के लिए बदले नियम, 10 फीट दूरी से होंगे बाबा के दर्शन; जानें नया रूट और ट्रैफिक प्लान

सावन में ओंकारेश्वर दर्शन के लिए बदले नियम, 10 फीट दूरी से होंगे बाबा के दर्शन; जानें नया रूट और ट्रैफिक प्लान

 मध्यप्रदेश- सावन के पवित्र महीने में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और भक्तों को बेहतर सुविधा देने के लिए प्रशासन ने मंदिर की दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया है। कलेक्टर ऋषव गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में नई व्यवस्था को लेकर निर्णय लिया गया है। आने वाले दो-तीन दिनों में ओंकारेश्वर में नई दर्शन और ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह लागू कर दी जाएगी।

सामान्य श्रद्धालुओं को 10 फीट दूरी से होंगे बाबा के दर्शन

नई व्यवस्था के तहत सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग रूट तय किया गया है। सामान्य भक्तों का प्रवेश अब सुखदेव मुनि द्वार से होगा। श्रद्धालु यहां से सीढ़ियों के रास्ते मंदिर पहुंचेंगे और गर्भगृह से करीब 10 फीट की दूरी से भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन कर सकेंगे। दर्शन के बाद भक्तों की निकासी चांदी गेट से होगी, जहां से वे झूला पुल मार्ग की ओर निकलेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य मंदिर परिसर में भीड़ जमा होने से रोकना और सभी श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन उपलब्ध कराना है।

VIP और प्रोटोकॉल दर्शन के लिए अलग व्यवस्था

शीघ्र दर्शन, VIP और प्रोटोकॉल श्रेणी के श्रद्धालुओं के लिए अलग मार्ग बनाया गया है। इसके लिए वर्तमान एग्जिट गेट को अब प्रोटोकॉल द्वार में बदला जाएगा। प्रोटोकॉल दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को इसी द्वार से प्रवेश मिलेगा और दर्शन के बाद उनकी निकासी लकड़ी गेट से कराई जाएगी। प्रशासन ने सामान्य और विशेष दर्शनार्थियों के रास्ते अलग-अलग रखने का फैसला लिया है ताकि भीड़ प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सके।

ओंकारेश्वर शहर में लागू होगा वन-वे ट्रैफिक प्लान

सावन के दौरान बढ़ने वाली भीड़ और वाहनों के दबाव को देखते हुए पूरे ओंकारेश्वर नगर में वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू की जाएगी। प्रशासन के अनुसार, बाहरी वाहनों को सीधे शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। बाहर से आने वाले सभी वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा करना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था से मंदिर क्षेत्र में जाम की स्थिति को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाने में मदद मिलेगी।

शीघ्र दर्शन टिकट काउंटर अब ब्रह्मपुरी पार्किंग में होगा

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए शीघ्र दर्शन और प्रोटोकॉल टिकट काउंटर को मंदिर क्षेत्र से हटाकर ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में शिफ्ट किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि मंदिर परिसर के आसपास भीड़ कम करने और श्रद्धालुओं को व्यवस्थित सुविधा देने के लिए यह कदम उठाया गया है।

सावन में ओंकारेश्वर जाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

सावन में ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं को प्रशासन की नई व्यवस्था का पालन करना होगा। भक्तों से अपील की गई है कि वे निर्धारित पार्किंग में वाहन खड़े करें, तय रूट से ही मंदिर जाएं और भीड़ प्रबंधन में प्रशासन का सहयोग करें। प्रशासन का लक्ष्य है कि देश-विदेश से आने वाले शिवभक्तों को सुरक्षित, सरल और व्यवस्थित तरीके से भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन कराए जा सकें।

पीएम मोदी के फैसले का स्वागत: पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट्स गठन पर राज्यों ने की सराहना

पीएम मोदी के फैसले का स्वागत: पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट्स गठन पर राज्यों ने की सराहना

  दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट्स गठित करने के फैसले का देशभर में स्वागत हो रहा है। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने इसे युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए ऐतिहासिक और निर्णायक कदम बताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को घोषणा की कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने और केसों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा।

राज्यों की प्रतिक्रिया

– उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “यह निर्णय करोड़ों छात्रों के भविष्य की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है। इससे परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को न्याय मिलेगा।”
– दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे छात्र हितों की रक्षा का महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि अब कानून पूरी कठोरता से काम करेगा।
– छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने लिखा, “मोदी सरकार में युवाओं के भविष्य से कोई समझौता नहीं होगा। यह फैसला ईमानदार छात्रों के विश्वास को और मजबूत करेगा।”
– बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना मोदी सरकार की गारंटी है। दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलेगी।”
– राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने इसे युवाओं के सपनों की सुरक्षा की दिशा में मजबूत प्रतिबद्धता बताया।

केंद्रीय नेताओं की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सीआर पाटिल, अन्नपूर्णा देवी और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता नितिन नवीन ने भी प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल की सराहना की। अन्नपूर्णा देवी ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार पहले ही पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लाकर परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कानून बना चुकी है।

नीट मामले में नितिन नवीन की विपक्ष को खुली चुनौती, सदन में करें चर्चा, सरकार हर सवाल का देगी जवाब

नीट मामले में नितिन नवीन की विपक्ष को खुली चुनौती, सदन में करें चर्चा, सरकार हर सवाल का देगी जवाब

  दिल्ली- भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने नीट पेपर लीक विवाद को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार नीट समेत युवाओं से जुड़े सभी विषयों पर सदन में चर्चा करने और हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष इस चर्चा से बच रहा है।

उन्होंने संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमारी सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े हर मुद्दे पर हर स्तर पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन राहुल गांधी, कांग्रेस और पूरा विपक्ष चर्चा से भाग रहा है, क्योंकि उन्हें पता है कि जब वे सदन के पटल पर चर्चा के लिए आएंगे तो उनका दोहरा चरित्र जनता और युवाओं के सामने उजागर हो जाएगा।”

नितिन नबीन ने कहा, “हम खुली चुनौती देते हैं कि आइए, संसद के पटल पर छात्रों और युवाओं से जुड़े हर विषय, नीट के मुद्दे और अन्य सभी मामलों पर चर्चा करें। भाजपा के सांसद हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार हैं और एनडीए सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।” उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का 50-60 वर्षों का इतिहास युवाओं को गुमराह करने और उनके मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का रहा है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा और एनडीए सरकार ने युवाओं के भविष्य को सही दिशा देने का काम किया है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि देश में शिक्षा संस्थान, कोचिंग संस्थान और अन्य सुविधाएं बढ़ी हैं, जिससे युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज का युवा स्टार्टअप और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए जाना जाता है। कुछ लोग युवाओं को केवल नकारात्मक नजरिए से देखते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन युवाओं को उनके सुनहरे भविष्य के लिए तैयार करना है।”

उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है और परीक्षा से जुड़े मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। देश का युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन के साथ खड़ा है।

वहीं, पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान पर नितिन नबीन ने कहा कि सरकार हर मामले की जांच के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे ताकि जो लोग भी इन अपराधों में शामिल हैं और दोषी पाए जाते हैं, उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई हो। हम सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब कोई संकल्प लेते हैं तो देश और दुनिया जानती है कि उसे पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम किया जाता है।”

भाजपा के अन्य सांसदों ने भी पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने के पीएम के ऐलान पर प्रतिक्रिया दी। तरुण चुघ ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार देश के युवाओं की भलाई के लिए पूरी तरह तैयार है। ये हमारे बच्चे हैं लेकिन कुछ लोग अपने राजनीतिक फायदे के लिए बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। पेपर लीक मामले में शामिल एक भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सख्त कार्रवाई की जाएगी और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा दिया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट भी बनेगा। एक भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

सांसद मयंकभाई नायक ने कहा, “प्रधानमंत्री ने आज अपने एक्स पोस्ट के जरिए देश की जनता और युवाओं तक यह बात पहुंचाई कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इन अपराधों में पकड़े गए लोगों को विशेष अदालतों के ज़रिए सजा मिले। सजा ऐसी होगी कि भविष्य में कोई भी ऐसी हरकत करने या छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे।”

सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा, “प्रधानमंत्री ने विकसित भारत का संकल्प लिया है। मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि विपक्ष द्वारा पैदा की जा रही अफरातफरी और अव्यवस्था से सही तरीके से निपटा जाएगा और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।”

भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा, “केंद्र सरकार छात्रों के भविष्य को बहुत अहमियत देती है और बहुत संवेदनशीलता के साथ फैसले लेती है। आज प्रधानमंत्री ने फिर कहा कि नीट में गड़बड़ी करने वालों को फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के ज़रिए सबसे कड़ी सजा दी जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम भी उठाए जाएंगे।”

उन्होंने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा, “सदन नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलता है। अगर आप संसद में किसी मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं, तो आपको स्पीकर को लिखित नोटिस देना होगा, लेकिन यहां स्थिति इसके उलट है। वे मांगें कर रहे हैं, हंगामा कर रहे हैं, लेकिन चर्चा नहीं करना चाहते। भाजपा सांसदों ने नियमों का पालन करते हुए स्पीकर को इस मुद्दे पर तुरंत चर्चा के लिए लिखित अनुरोध सौंपा है। कल हमारे संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सदन में साफ कहा था कि सरकार नीट समेत हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।

अनुसूचित जाति छात्रों की छात्रवृत्ति में रिकॉर्ड वृद्धि, 74 लाख से अधिक छात्रों को मिला लाभ

अनुसूचित जाति छात्रों की छात्रवृत्ति में रिकॉर्ड वृद्धि, 74 लाख से अधिक छात्रों को मिला लाभ

 दिल्ली- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत अनुसूचित जाति के छात्रों को मिलने वाली वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मैट्रिकोत्तर और पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के जरिए लाखों छात्रों को शिक्षा जारी रखने में मदद मिली है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने लोकसभा में सांसद श्री नवासकनी के. के लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना से 48 लाख से अधिक छात्रों को लाभ

मंत्रालय अनुसूचित जाति के छात्रों को उच्च शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए ‘मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना’ (पीएमएस) लागू कर रहा है। वर्ष 2024-25 के दौरान इस योजना के तहत 5,562.23 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता के साथ 48,04,208 अनुसूचित जाति के छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई।

केंद्रीय सहायता में कई गुना बढ़ोतरी

लोकसभा में दिए गए उत्तर के अनुसार, मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत जारी केंद्रीय सहायता वर्ष 2021-22 में 1,930.38 करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर वर्ष 2025-26 में 6,186.96 करोड़ रुपए हो गई है। हाल के वर्षों में इस योजना से हर वर्ष लगभग 48 लाख अनुसूचित जाति के छात्र लाभान्वित हो रहे हैं।

पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से 26 लाख से अधिक छात्रों को सहायता

अनुसूचित जातियों और अन्य के लिए पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत भी बड़ी संख्या में छात्रों को आर्थिक मदद दी जा रही है। वर्ष 2025-26 के दौरान इस योजना के तहत 26,79,049 छात्रों को लाभ मिला, जबकि योजना के लिए 562.36 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई गई।

डीबीटी से छात्रवृत्ति वितरण में आई पारदर्शिता

सरकार ने छात्रवृत्ति योजनाओं में पारदर्शिता, दक्षता और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) व्यवस्था लागू की है। इसके तहत छात्रवृत्ति की राशि पात्र लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे जमा की जाती है। वर्ष 2022-23 से पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में डीबीटी लागू होने के बाद वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह हुई है।

शिक्षा के माध्यम से सशक्तिकरण पर सरकार का जोर

सरकार छात्रवृत्ति सहायता में वृद्धि और तकनीक आधारित वितरण प्रणाली के माध्यम से अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए शैक्षणिक अवसरों को बेहतर बनाने पर लगातार काम कर रही है। मंत्रालय का उद्देश्य आर्थिक बाधाओं को कम करना, शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करना और छात्रों के सामाजिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती: पीएम मोदी ने कहा-‘लोकमान्य तिलक ने जगाई राष्ट्रवाद की भावना’

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती: पीएम मोदी ने कहा-‘लोकमान्य तिलक ने जगाई राष्ट्रवाद की भावना’

 दिल्ली - पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई दिग्गज नेताओं ने गुरुवार को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के रूप में लोकमान्य तिलक ने राष्ट्रवाद की भावना जगाई और पीढ़ियों को समाज सेवा के लिए प्रेरित किया।

पीएम मोदी ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “लोकमान्य तिलक को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के रूप में उन्होंने राष्ट्रवाद की भावना जगाई और पीढ़ियों को समाज सेवा के लिए प्रेरित किया। हमारी संस्कृति को लोकप्रिय बनाने और भाईचारे की भावना को बढ़ाने के उनके प्रयास भी उतने ही प्रेरणादायक थे। उनकी लेखनी ने लोगों में नया आत्मविश्वास जगाया और गर्व की भावना को बढ़ावा दिया।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उनका अमर उद्घोष, ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’, करोड़ों भारतीयों में स्वतंत्रता और राष्ट्रभावना की चेतना जगाने वाला मंत्र बना। उनका अटूट राष्ट्रप्रेम, स्वराज के प्रति दृढ़ संकल्प और स्वदेशी पर बल आने वाली पीढ़ियों को भी राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।”

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी स्वाधीनता संग्राम के उन अग्रणी नायकों में थे, जिन्होंने आजादी के आंदोलन में युवाओं को संगठित और प्रेरित करने के साथ-साथ स्वभाषा, स्वदेशी और स्वसंस्कृति के लिए भी आजीवन संघर्ष किया।

उन्होंने लिखा, “‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ उनके इस उद्घोष ने पूरे राष्ट्र की चेतना को झकझोर कर स्वाधीनता की भावना को जन-जन तक पहुंचाया। गणेश उत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती जैसे आयोजनों से उन्होंने राष्ट्रीय जागरण का अभूतपूर्व कार्य किया। उनका कालजयी ग्रंथ ‘गीता रहस्य’ आज भी हमें कर्तव्यपथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। लोकसेवा व राष्ट्रनिष्ठा के प्रतीक तिलक महाराज की जयंती पर उन्हें कोटिश नमन।”

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रखर पुरोधा, पूर्ण स्वराज्य के प्रबल उद्घोषक और अदम्य राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताया।

उन्होंने लोकमान्य तिलक को नमन करते हुए कहा, “स्वदेशी आंदोलन, शिक्षा प्रसार और निरंतर सक्रियता के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को बलवती करने में लोकमान्य तिलक की महती भूमिका रही। उनके निर्भीक व्यक्तित्व, राष्ट्रवादी पत्रकारिता और जनजागरण के प्रयासों ने करोड़ों भारतीयों को स्वाधीनता आंदोलन में भागीदारी के लिए प्रेरित किया। राष्ट्र सर्वोपरि की उनकी भावना, अदम्य साहस, विचारशीलता और तपस्वी कर्मनिष्ठा आज भी प्रत्येक भारतीय को मातृभूमि की सेवा, राष्ट्रनिर्माण और कर्तव्यनिष्ठ जीवन के लिए प्रेरित करती है।

चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

 दिल्ली- स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने कहा कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद के निडर साहस और अटूट देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान है।

स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद के साहस और देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “चंद्रशेखर आजाद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उनके निडर साहस और अटूट देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान है। उन्होंने अनगिनत युवा भारतीयों को देश के प्रति खुद को समर्पित करने के लिए प्रेरित किया। उनका संकल्प पीढ़ियों को प्रेरित करता रहता है।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चंद्रशेखर आजाद को शत-शत नमन करते हुए कहा कि उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया और हर भारतीय के मन में स्वाभिमान, आत्मविश्वास तथा राष्ट्र चेतना जगाने का भी कार्य किया। उन्होंने उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की नई ऊर्जा बताया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें “मां भारती के अनन्य उपासक” और “अमर हुतात्मा” करार देते हुए कोटि-कोटि नमन किया।

विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी दी श्रद्धांजलि

– उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “‘दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे’ के उद्घोषक महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।”
– दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान को प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।
– मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चंद्रशेखर आजाद को “मध्यप्रदेश की माटी का गौरव” बताते हुए सादर नमन किया।
– राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी अमर क्रांतिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान, साहस तथा राष्ट्रभक्ति को भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, पेपर लीक मामलों में होगा फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन: पीएम मोदी

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, पेपर लीक मामलों में होगा फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन: पीएम मोदी

 दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह पेपर लीक के सभी मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा की। पीएम मोदी ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने और केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा।” उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, “इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करें।”

उन्होंने फैसले को छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार की ओर से लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”

इससे पहले, पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा सिर्फ किसी एक राज्य या केंद्र सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की चिंता का विषय है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को एनडीए के ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम के बाद बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि पेपर लीक जैसे गंभीर अपराध में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए देश के वरिष्ठ वकीलों को भी आगे आना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे अपराध करने वालों के मन में कानून का डर पैदा हो।

रिजिजू के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखना है। इसी वजह से नीट की दोबारा परीक्षा जल्द कराई गई और उसका परिणाम भी बिना किसी देरी के घोषित किया गया, ताकि छात्रों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।

12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आमों का सफल निर्यात, निरंतर कोल्ड चेन के तहत समुद्र के रास्ते से पहुंचा दुबई

12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आमों का सफल निर्यात, निरंतर कोल्ड चेन के तहत समुद्र के रास्ते से पहुंचा दुबई

 भारत के ताजे आम निर्यात क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। देश से 12.5 टन प्रीमियम दशहरी और लंगड़ा आमों को उत्तर प्रदेश के अमरोहा से संयुक्त अरब अमीरात के दुबई तक सफलतापूर्वक निर्यात किया गया है। यह निर्यात 40 फुट के रेफ्रिजरेटर कंटेनर के माध्यम से समुद्री मार्ग से किया गया, जिसके लिए आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (आईसीएआर-सीआईएसएच), लखनऊ और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित समुद्री मार्ग निर्यात प्रोटोकॉल का उपयोग किया गया। यह खेप अमरोहा स्थित शहनाज एक्सपोर्ट द्वारा अत्ताशी ग्लोबल के सहयोग से खाड़ी क्षेत्र की अग्रणी खुदरा श्रृंखलाओं में से एक, यूएई के लुलु ग्रुप को निर्यात की गई। इसमें आईसीएआर-सीआईएसएच का तकनीकी मार्गदर्शन और एपीईडीए का सहयोग प्राप्त हुआ।

आमों की तुड़ाई 22 जून को की गई और तुड़ाई के बाद वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित प्रबंधन तरीकों के अनुसार उन्हें संभाला गया। फलों को आईसीएआर-सीआईएसएच द्वारा विकसित मेटवॉश से उपचारित किया गया ताकि उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सके, वैज्ञानिक रूप से वर्गीकृत किया गया, अमरोहा पैक हाउस में पैक किया गया, 40 फुट के रेफ्रिजरेटर कंटेनर में लोड किया गया और निरंतर कोल्ड चेन के तहत समुद्र के रास्ते दुबई ले जाया गया।

पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई देरी की वजह से, खेप 17 जुलाई 2026 को गंतव्य बाजार पहुंची, जिससे तुड़ाई से लेकर बाजार तक की 25 दिन की पारगमन अवधि पूरी हुई। लंबी पारगमन अवधि के बावजूद, पहुंचने पर लगभग 90% आम अच्छी और बिकने लायक हालत में पाए गए, जो इस तकनीक की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

समुद्री मार्ग प्रोटोकॉल के सफल सत्यापन से किसानों की आय बढ़ाने के लिए किफायती निर्यात का एक स्थायी मार्ग उपलब्ध हो गया है। चूंकि समुद्री माल ढुलाई हवाई माल ढुलाई की तुलना में काफी सस्ती है, इसलिए निर्यातकों ने किसानों को अधिक खरीद मूल्य की पेशकश की। परिणामस्वरूप, आम उत्पादकों को पारंपरिक निर्यात चैनलों की तुलना में प्रति किलोग्राम लगभग ₹15-20 की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई, जिससे कृषि लाभप्रदता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आमों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बनी रही।

उत्तर प्रदेश से दुबई तक दशहरी और लंगड़ा आमों की यह पहली सफल व्यावसायिक समुद्री खेप है, जिसमें कटाई से लेकर बाजार तक की 25 दिन की लंबी पारगमन अवधि का पालन किया गया है। इससे यह साबित होता है कि अब उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय आमों को समुद्री माल ढुलाई के माध्यम से गुणवत्ता से समझौता किए बिना किफायती तरीके से निर्यात किया जा सकता है। उम्मीद है कि यह उपलब्धि निर्यातकों को समुद्री माल ढुलाई को अधिक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे खाड़ी क्षेत्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के ताजे आमों के निर्यात का विस्तार होगा।

इस तकनीक से उत्तर प्रदेश और अन्य आम उत्पादक राज्यों से समुद्री मार्ग से होने वाले आमों के निर्यात के व्यावसायीकरण में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसर खुलेंगे, साथ ही निर्यात से होने वाली आय में वृद्धि होगी, रसद लागत कम होगी और उत्तर प्रदेश के आम उत्पादकों की आजीविका में सुधार होगा।

राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला: नए CEO की नियुक्ति तक पांच संत संभालेंगे धार्मिक कार्यभार

राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला: नए CEO की नियुक्ति तक पांच संत संभालेंगे धार्मिक कार्यभार

 अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में मंदिर की धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर कई अहम फैसले लिए गए। ट्रस्ट ने निर्णय लिया है कि नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति होने तक अयोध्या के पांच प्रमुख संत राम मंदिर के धार्मिक कार्यों और संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। नए CEO के चयन में करीब एक माह का समय लगने की संभावना जताई गई है।

हाल ही में सामने आए चंदा चोरी के मामले के बाद बुलाई गई इस बैठक में मंदिर की पारदर्शिता, प्रशासनिक व्यवस्था और धार्मिक गतिविधियों को और सुदृढ़ बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। ट्रस्ट ने फैसला किया कि मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाएं संतों के मार्गदर्शन में संचालित होंगी, जिससे परंपराओं और श्रद्धालुओं की आस्था को मजबूती मिलेगी।

बैठक में धार्मिक समिति के गठन का भी निर्णय लिया गया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में स्वामी रामानंद दास, महंत राजकुमार दास, स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ, स्वामी मिथिलेशनंदनी शरण, स्वामी कमलनयन दास, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और स्वामी दिनेंद्रदास सहित कई संतों को शामिल किया गया है। यह समिति पूजा-पद्धति, धार्मिक आयोजनों और परंपराओं से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देगी।

ट्रस्ट ने समाज के साथ बेहतर संवाद के लिए प्रवक्ता नियुक्त करने का भी फैसला लिया है। साथ ही ट्रस्ट में रिक्त पदों को जल्द भरने, सचिव पद सृजित करने और वर्तमान व्यवस्था के तहत कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय भी लिया गया।

बैठक में यह भी तय हुआ कि ट्रस्ट की अगली बैठक 2 सितंबर को आयोजित की जाएगी, जिसमें मंदिर संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। ट्रस्ट का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए आधुनिक और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है।