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रोजगार मेले में 51,000 युवाओं को मिले नियुक्ति पत्र; पीएम मोदी बोले- ‘विकसित भारत’ के अहम सारथी हैं हमारे युवा

रोजगार मेले में 51,000 युवाओं को मिले नियुक्ति पत्र; पीएम मोदी बोले- ‘विकसित भारत’ के अहम सारथी हैं हमारे युवा

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी :- ने शनिवार को 19वें रोजगार मेले में अलग-अलग सरकारी विभागों और संगठनों में 51 हजार से अधिक नवनियुक्त युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि भारत के युवा ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ रही यात्रा को गति देने में एक अहम भूमिका निभा रहे हैं। ‘रोजगार मेला’ युवाओं को नए अवसर प्रदान कर सशक्त बनाने के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज देशभर के हजारों युवाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिवस है। आज 51,000 से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र मिला है। इस उपलब्धि के लिए मैं सभी को बहुत बहुत बधाई देता हूं।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नवनियुक्त युवाओं से संवाद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज आप सभी देश की विकास यात्रा में अहम जिम्मेवार भागीदार बन रहे हैं। रेलवे, बैंकिंग, डिफेंस, हेल्थ, एजुकेशन और दूसरे कई क्षेत्रों में आप सभी नई जिम्मेदारियां संभालने जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने में आप सभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।”

उन्होंने कहा, “अभी दो दिन पहले मैं पांच देशों की यात्रा करके लौटा हूं। कहने को तो ये सिर्फ पांच देशों की यात्रा थी, लेकिन इस दौरान मेरी दर्जनों देशों की बड़ी बड़ी कंपनियों के लीडर्स से बातें हुईं, विस्तार से चर्चा हुईं। इस दौरान हर जगह मैंने एक बात समान रूप से महसूस की है। दुनिया भारत के युवाओं और भारत की टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस को लेकर बहुत उत्साहित है। आज दुनिया भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनना चाहती है।”

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत भी दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ पार्टनरशिप कर रहा है। इसका उद्देश्य यही है कि भारत के युवाओं को अवसर मिले, रोजगार मिले और उनका सामर्थ्य खिल उठे। साथ ही साथ, मैं चाहता हूं कि देश के नौजवानों को ग्लोबल एक्सपोजर भी मिले।

उन्होंने कहा, “आज स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, हरित हाइड्रोजन और टिकाऊ विनिर्माण से जुड़े क्षेत्र भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इनसे जुड़ी साझेदारी एक नई अर्थव्यवस्था के नए अवसर के दरवाजे खोल रही हैं। स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसे देशों के साथ ‘ग्रीन ट्रांजिशन एंड सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी’ में भी सहयोग बढ़ रहा है। ये भारत को क्लीन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी फ्यूचर इंडस्ट्री में मजबूत करेगा।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज हर भारतीय एक बड़े संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। ये संकल्प, 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आज देश अलग-अलग क्षेत्र में निवेश कर रहा है और इस निवेश से देश के युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर बन रहे हैं।

डॉक्टर बना हैवान.. इलाज करवाने आई छात्रा को देख बिगड़ी नीयत, नशीला इंजेक्शन देकर किया दुष्कर्म

डॉक्टर बना हैवान.. इलाज करवाने आई छात्रा को देख बिगड़ी नीयत, नशीला इंजेक्शन देकर किया दुष्कर्म

 लखनऊ।  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बेहद शर्मनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां स्थित तेजस हॉस्पिटल में 12वीं की एक छात्रा के साथ रेप का आरोप लगा है। पीड़िता मिर्गी की बीमारी से पीड़ित बताई जा रही है और इलाज के लिए 18 मई को अस्पताल में भर्ती हुई थी। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टर ने छात्रा को नशीला इंजेक्शन दिया और उसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया।

छात्रा का आरोप है कि बुधवार सुबह डॉ. विजय कुमार गिरी उसे ट्यूब डालने की बात कहकर ऑपरेशन थिएटर में ले गए। मेरी दीदी भी साथ में थी, लेकिन डॉक्टर ने उन्हें बाहर कर दिया। पीड़िता के मुताबिक उसे कोई इंजेक्शन दिया गया, जिससे वो आधी बेहोशी की हालत में चली गई, जिसके बाद डॉक्टर ने उसके साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया। होश में आने के बाद पीड़िता ने सारी बातें अपने परिजनों को बताई।

घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार में आक्रोश फैल गया और अस्पताल परिसर में हंगामा मच गया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। आरोपी डॉक्टर विजय गिरी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पीड़िता की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली गई है और मेडिकल जांच सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

 इस घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पाकिस्तान-बांग्लादेश बॉर्डर पर बनेगी ‘स्मार्ट दीवार’, अमित शाह का बड़ा ऐलान

पाकिस्तान-बांग्लादेश बॉर्डर पर बनेगी ‘स्मार्ट दीवार’, अमित शाह का बड़ा ऐलान

 नई दिल्ली।  भारत अब अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए हाईटेक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह “स्मार्ट बॉर्डर” में बदला जाएगा। इसके तहत सीमाओं पर सिर्फ कंटीले तार नहीं, बल्कि अत्याधुनिक कैमरे, सेंसर, रडार और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे ताकि घुसपैठ, ड्रोन गतिविधियों, पशु तस्करी और ड्रग्स तस्करी पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके। सरकार का लक्ष्य इसी साल स्मार्ट फेंसिंग सिस्टम को बड़े स्तर पर शुरू करना है।

अमित शाह ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने वाली गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। इस योजना के तहत BSF को और अधिक मजबूत जिम्मेदारी दी जाएगी और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की जाएगी। पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा सरकारें भी इस परियोजना में सहयोग कर रही हैं और कई जगहों पर जमीन बीएसएफ को सौंपी जा चुकी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीमा सुरक्षा में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। आने वाले समय में भारत की सीमाएं सिर्फ जवानों के भरोसे नहीं, बल्कि तकनीक के मजबूत सुरक्षा कवच से भी सुरक्षित नजर आएंगी।

आज 19वें रोजगार मेले में 51 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र देंगे PM मोदी, देशभर में 47 जगहों पर आयोजन

आज 19वें रोजगार मेले में 51 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र देंगे PM मोदी, देशभर में 47 जगहों पर आयोजन

 नई दिल्ली। Rozgar Mela: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 19वें रोजगार मेले के तहत देशभर के 51 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री युवाओं को संबोधित भी करेंगे। रोजगार मेला देशभर के 47 स्थानों पर आयोजित हो रहा है और इसे केंद्र सरकार की मिशन मोड भर्ती प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा माना जा रहा है।

सरकार की इस पहल के जरिए अब तक करीब 12 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। आज जिन युवाओं को नियुक्ति मिलेगी, उनका चयन SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), IBPS और अन्य केंद्रीय भर्ती परीक्षाओं के माध्यम से किया गया है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति रेल मंत्रालय, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग समेत कई मंत्रालयों और सरकारी संगठनों में की जाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी पहले भी रोजगार मेलों को युवाओं के लिए बड़े अवसर का माध्यम बता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि सरकार युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है। पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया और तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम के कारण रोजगार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।

सरकार के अनुसार भारत का स्टार्टअप सेक्टर अब लाखों युवाओं को रोजगार दे रहा है, वहीं डिजिटल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी बड़े स्तर पर नौकरियों के अवसर बढ़े हैं। रोजगार मेला इसी दिशा में युवाओं को सरकारी सेवाओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण अभियान माना जा रहा है।

राज्यसभा चुनाव की तारीखों का एलान, 10 राज्यों की 24 सीटों पर होगी वोटिंग

राज्यसभा चुनाव की तारीखों का एलान, 10 राज्यों की 24 सीटों पर होगी वोटिंग

 RAJYA SABHA ELECTION: चुनाव आयोग ने शुक्रवार को 10 राज्यों की 24 सीटों पर राज्यसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया। इन सीटों पर 18 जून को मतदान होगा। चुनाव आयोग की घोषणा के बाद संबंधित राज्यों में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, एक जून को नोटिफिकेशन जारी होगा। इसके बाद 9 जून को नामांकन की जांच की जाएगी, 11 जून को नामांकन वापस लिया जाएगा। 18 जून को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। वोटों की गिनती के बाद इसी दिन चुनाव परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

किन राज्यों में होना है मतदान
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात में 4-4 सीटों पर मतदान होना है। मध्य प्रदेश में और राजस्थान में 3-3, झारखंड में 2, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश एक-एक सीट पर राज्यसभा चुनाव होना है।

 

खत्म हो रहा है इन दिग्गजों का कार्यकाल
बता दें कि राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन, और रवनीत सिंह बिट्टू समेत 24 नेताओं के कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

राज्यसभा में कैसे होते हैं चुनाव
राज्यसभा के सदस्यों को विधायक चुनते हैं। यह अप्रत्यक्ष चुनाव होता है। विधायक बैलेट पेपर पर वोट डालते हैं। यह खुला मतदान होता है, यानी पार्टी को अपना वोट दिखाना पड़ता है। हर विधायक अपनी पसंद के उम्मीदवारों को नंबर देता है जैसे 1, 2, 3… (वरीयता के आधार पर)। अगर कोई उम्मीदवार पहले ही जरूरी वोट (कोटा) पा ले, तो उसके अतिरिक्त वोट दूसरी पसंद पर चले जाते हैं। राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं, जिनमें से 233 सदस्य राज्यों और कुछ केंद्रशासित प्रदेशों से चुने जाते हैं और 12 को राष्ट्रपति नामित करते हैं। हर सदस्य का कार्यकाल 6 साल का होता है और हर 2 साल में करीब एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं, इसलिए चुनाव नियमित रूप से होते रहते हैं।

एआई मिशन को गति देगा यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर : सीएम योगी

एआई मिशन को गति देगा यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर : सीएम योगी

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेश की भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विषयों – उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी), प्रोजेक्ट गंगा और गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मंडी शुल्क एवं मंडी सेस में संभावित छूट – की उच्च स्तरीय समीक्षा की।

यूपी बनेगा एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा केंद्र

सीएम योगी ने यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी) की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के एआई मिशन की बुनियादी संरचना तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि डाटा सेंटर क्लस्टर केवल एनसीआर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों को भी इससे जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि इसकी शुरुआत बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से की जा सकती है, जहां बड़े पैमाने पर भूमि उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि टाटा समूह सहित बड़ी टेक कंपनियों से संवाद स्थापित कर लखनऊ को ‘एआई सिटी’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाए।

2040 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर प्रदेश को भारत और ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा एआई कंप्यूट पावर सेंटर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति है। इसका उद्देश्य राज्य को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाना है। प्रस्तुतीकरण में कहा गया कि यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि अगले 50 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक संरचना का खाका है। इसके तहत वर्ष 2040 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था, 1.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और 5 गीगावॉट एआई कंप्यूट कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

भविष्य की अर्थव्यवस्था के केंद्र में होंगे एआई और साइबर सिक्योरिटी

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2040 तक दुनिया की नई अर्थव्यवस्था एआई, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों के इर्द-गिर्द विकसित होगी। इन क्षेत्रों का संयुक्त वैश्विक बाजार 29 से 48 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। उत्तर प्रदेश की पांच प्रमुख ताकतों – भौगोलिक स्थिति, विशाल भूमि उपलब्धता, बड़ी युवा आबादी, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत नेतृत्व – को इस परियोजना की सफलता का आधार बताया गया।

यूपी को बताया गया ‘मोस्ट सिक्योर एआई टेरिटरी’

बैठक में उत्तर प्रदेश को ‘एशिया का मोस्ट सिक्योर, स्केलेबल एवं कनेक्टेड इनलैंड एआई टेरिटरी’ बताया गया। कहा गया कि देश के लगभग सभी प्रमुख फाइबर नेटवर्क यूपी से होकर गुजरते हैं और राज्य भारत के सभी समुद्री केबल लैंडिंग पॉइंट्स से जुड़ा हुआ है। साथ ही राज्य के भीतर 5 मिलीसेकंड से कम लेटेंसी और मुंबई-चेन्नई जैसे डिजिटल हब तक 5 से 12 मिलीसेकंड कनेक्टिविटी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई।

प्रोजेक्ट गंगा से गांवों तक पहुंचेगा हाई-स्पीड इंटरनेट

मुख्यमंत्री ने ‘प्रोजेक्ट गंगा’ यानी गवर्नेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि डिजिटल उद्यमी के रूप में चुने जाने वाले युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। बैठक में बताया गया कि केवल मोबाइल इंटरनेट के जरिए सीमित सेवाएं संभव हैं, जबकि वास्तविक डिजिटल परिवर्तन के लिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड जरूरी है। एआई आधारित कृषि, ड्रोन मॉनिटरिंग, स्मार्ट विलेज, वर्चुअल लैब, टेलीमेडिसिन और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी सेवाओं के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता बताई गई। योजना के तहत प्रत्येक डीएसपी को 5 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।

मंडियों को आधुनिक और आकर्षक बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी समीक्षा की। उन्होंने मंडी टैक्स और मंडी शुल्क व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रदेश की मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि मंडियों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, पर्वों के दौरान लाइटिंग, अतिक्रमण हटाने और बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। समिति ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश में पंजीकृत मिलों द्वारा राज्य के भीतर प्रसंस्करण हेतु खरीदे गए गेहूं पर मंडी शुल्क और विकास उपकर में छूट दी जाए।

भारत-इटली मिलकर बनाएंगे वैश्विक सहयोग का नया मॉडल : पीएम मोदी

भारत-इटली मिलकर बनाएंगे वैश्विक सहयोग का नया मॉडल : पीएम मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत और इटली संयुक्त नवाचार और उत्पादन के आधार पर वैश्विक सहयोग का नया मॉडल विकसित करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ रोम में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत-इटली संबंध अब संरचित और समयबद्ध सहयोग के नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ‘इंडिया-इटली जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029’ दोनों देशों की साझेदारी के लिए व्यावहारिक और भविष्य उन्मुख ढांचा प्रदान करता है।

रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों ने भविष्य की साझेदारी को और मजबूत करने के लिए विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने कहा कि यह एक्शन प्लान केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि सहयोग को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने का रोडमैप है और इसे तय समयसीमा में लागू किया जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय व्यापार तेजी से 20 अरब यूरो के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत में काम कर रही 800 से अधिक इटालियन कंपनियां देश की विकास यात्रा में योगदान दे रही हैं और भारत के विशाल बाजार तथा इनोवेशन इकोसिस्टम का लाभ उठा रही हैं।

बिजनेस फोरम में दिखा नया उत्साह

प्रधानमंत्री ने कहा कि इंडिया-इटली बिजनेस फोरम में दोनों देशों के उद्योग जगत के नेताओं के बीच नया उत्साह, विश्वास और महत्वाकांक्षा देखने को मिली। उन्होंने कहा कि उभरते क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इटली दुनिया में डिजाइन और प्रिसिजन के लिए जाना जाता है, जबकि भारत अपनी विशाल क्षमता, प्रतिभा और किफायती नवाचार के लिए पहचान रखता है।

‘डिजाइन एंड डेवलप’ मॉडल पर जोर

पीएम मोदी ने कहा, “हम ‘डिजाइन एंड डेवलप इन इंडिया एंड इटली एंड डिलीवर फॉर द वर्ल्ड’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ेंगे।” उन्होंने बताया कि दोनों देश फैशन, फिनटेक, लेदर, लॉजिस्टिक्स, मोबिलिटी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे, ताकि वैश्विक बाजारों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

भारत-ईयू एफटीए पर भी हुई चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर इटली के समर्थन के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने और लागू करने की दिशा में मिलकर काम करेंगे, जिससे व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलेगी।

पांच देशों के दौरे का अंतिम चरण

इससे पहले पीएम मोदी को रोम में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी की। प्रधानमंत्री की यह यात्रा उनके पांच देशों के दौरे का अंतिम चरण है। इस दौरे के दौरान उन्होंने नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात का भी दौरा किया।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर पीएम मोदी सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर पीएम मोदी सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की

 पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजीव गांधी को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि।”

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि पर ‘वीर भूमि’ पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सोनिया गांधी भी ‘वीर भूमि’ पहुंचीं और राजीव गांधी को श्रद्धांजलि दी।

कांग्रेस ने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट से पोस्ट किया, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन। राजीव गांधी का दूरदर्शी नेतृत्व, देश के प्रति समर्पण और उनके विचार कांग्रेस परिवार को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।”

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “कुछ नेता अपने पीछे सिर्फ यादें छोड़ जाते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी होते हैं जो एक ऐसा विन छोड़ जाते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को लगातार राह दिखाता रहता है। पूर्व प्रधानमंत्री और ‘भारत रत्न’ राजीव गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर याद कर रहा हूं। उन्होंने एक ऐसे आधुनिक भारत की कल्पना की थी, जो टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और युवाओं की आकांक्षाओं से संचालित हो और उनके नेतृत्व ने ही इस बदलाव की नींव रखी। सार्वजनिक जीवन के मेरे शुरुआती वर्षों में, उनके मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए मैं उनका हृदय से आभारी हूं। युवा नेताओं पर उनका भरोसा और कर्नाटक के साथ उनका गहरा जुड़ाव, हमेशा मेरे दिल के करीब रहेगा।”

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लिखा, “भारत की एकता, आधुनिक सोच और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बलिदान दिवस पर उन्हें सादर नमन और वंदन। सूचना प्रौद्योगिकी, पंचायती राज व्यवस्था तथा युवा भारत की सशक्त भागीदारी को लेकर उनके योगदान ने देश के विकास की दिशा को नई गति प्रदान की। राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और दूरदर्शी सोच सदैव स्मरणीय रहेगी।”

कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने पोस्ट किया, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, देश में सूचना व संचार क्रांति की आधारशिला रखने वाले, भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। राजीव गांधी को पंचायती राज को मजबूती देने, मतदान करने की आयु 18 वर्ष करके युवाओं को लोकतंत्र में अधिक अवसर देने जैसे अनेक ऐतिहासिक फैसलों के लिए सदैव याद किया जाएगा। पंचायती राज और स्थानीय निकाय में महिला आरक्षण भी उन्हीं का विजन था। आज देश उनके जैसे स्वप्नदृष्टा की कमी महसूस करता है।

विदेश दौरे से लौटते ही एक्शन में PM मोदी, आज होगी हाई-लेवल बैठक, सभी मंत्रियों को दिल्ली में रहने का आदेश

विदेश दौरे से लौटते ही एक्शन में PM मोदी, आज होगी हाई-लेवल बैठक, सभी मंत्रियों को दिल्ली में रहने का आदेश

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश दौरे से लौटते ही गुरुवार को बड़े एक्शन मोड में नजर आने वाले हैं। शाम 4 बजे दिल्ली के सेवा तीर्थ में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक से पहले सभी केंद्रीय मंत्रियों को दिल्ली में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

पीएम मोदी खुद इस हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें कैबिनेट मंत्रियों के साथ-साथ जूनियर मंत्री भी शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक बैठक में देश की सुरक्षा, आर्थिक हालात, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और संभावित राजनीतिक बदलावों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। खासतौर पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और उसके कच्चे तेल, एलपीजी सप्लाई और महंगाई पर पड़ने वाले असर को लेकर सरकार गंभीर मंथन कर सकती है।

प्रधानमंत्री के विदेश दौरे के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में गठित हाई-पावर ग्रुप लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है, जिसमें अमित शाह, निर्मला सीतारमण और हरदीप सिंह पुरी भी शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में मोदी सरकार 3.0 के एक साल पूरे होने से पहले बड़े कैबिनेट फेरबदल और मंत्रालयों में बदलाव की अटकलें भी तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि जून के दूसरे सप्ताह में मंत्रियों के विभागों में बदलाव हो सकता है, ऐसे में आज की यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।

देशभर में आज केमिस्ट संगठनों की हड़ताल, बंद रहेंगे 12 लाख मेडिकल स्टोर; ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध

देशभर में आज केमिस्ट संगठनों की हड़ताल, बंद रहेंगे 12 लाख मेडिकल स्टोर; ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध

 नई दिल्ली। ई-फार्मेसी की ओर से ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री और भारी डिस्काउंट के विरोध में आज बुधवार (20 मई, 2026) को ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है।

एसोसिएशन का कहना है कि इस विरोध प्रदर्शन का मकसद उन रेगुलेटरी कमियों को उजागर करना है, जिनकी वजह से ई-फार्मेसी और तुरंत दवा पहुंचाने वाले प्लेटफॉर्म बिना किसी उचित निगरानी के काम कर पा रहे हैं।

बंद रहेंगी 12.5 लाख से ज्यादा केमिस्टों की दुकानें

संगठन ने दावा किया है कि इस प्रोटेस्ट के तहत देशभर में 12,50,000 और बिहार में 40,000 केमिस्ट हैं। भारत और बिहार की सभी दुकानें एक साथ बंद रहेंगी।

खुली रहेंगी ये दुकानें

राष्ट्रव्यापी बंद के आह्वान के बावजूद 20 मई को देशभर में सभी बड़ी फार्मेसी चेन, अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी खुली रहेंगी। साथ ही कई राज्य-स्तरीय फार्मेसी एसोसिएशनों ने भी प्रस्तावित बंद में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।

उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख के रीटेल फार्मेसी एसोसिएशंस ने लिखित आश्वासन दिया है कि उनके राज्यों में दवा दुकानें खुली रहेंगी और दवाओं की कोई किल्लत नहीं होने दी जाएगी। हालांकि, कर्नाटक के कुछ हिस्सों और मध्य प्रदेश में बंद का व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

एआईओसीडी की क्या है मांग?

एआईओसीडी ने यह कदम तब उठाया गया है जब हाल ही में उसके प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय दवा नियामक से मुलाकात की और ई-फार्मेसी के कामकाज व नियमन से जुड़ी अपनी चिंताएं उनके सामने रखीं।

इस मुद्दे पर बात करते हुए प्रभाकर कुमार ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के प्रति केमिस्टों के विरोध को स्पष्ट किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खुदरा फार्मेसियां कड़े 'प्रिस्क्रिप्शन-बेस्ड' (prescription-based) सिस्टम के तहत काम करती हैं और एंटीबायोटिक्स, नशीले पदार्थ तथा गर्भपात किट जैसी प्रतिबंधित दवाओं का विस्तृत रिकॉर्ड रखती हैं।

उन्होंने ई-फार्मेसी सिस्टम पर आरोप लगाया कि यह उन दवाओं तक ऑनलाइन पहुंच की अनुमति देता है जिन्हें अन्यथा रेगुलेट किया जाना चाहिए और डिजिटल लेन-देन में नकली पर्चों के संभावित इस्तेमाल के प्रति आगाह किया।

सूत्रों के अनुसार, नियामक ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों की सक्रिय रूप से समीक्षा की जा रही है और इस क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे की जांच की जा रही है, ताकि खुदरा फार्मेसी से जुड़े लोगों की उचित चिंताओं का समाधान किया जा सके।

Technology: एक साथ हवा और जमीन पर हमला करेगी भारत की नई ULPGM-V3 मिसाइल

Technology: एक साथ हवा और जमीन पर हमला करेगी भारत की नई ULPGM-V3 मिसाइल

 नई दिल्ली। भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाते हुए दुनिया को अपनी बढ़ती सैन्य ताकत का अहसास करा दिया है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से विकसित नई हल्की मिसाइल ‘ULPGM-V3’ का सफल परीक्षण कर लिया है। यह मिसाइल दुश्मन के टैंक, बंकर, ड्रोन और हेलीकॉप्टर जैसे लक्ष्यों को हवा और जमीन दोनों में सटीकता से तबाह करने की क्षमता रखती है। खास बात यह है कि यह मिसाइल छोटे ड्रोन से लेकर बड़े यूएवी और अटैक हेलीकॉप्टर तक से लॉन्च की जा सकती है। DRDO के मुताबिक इस आधुनिक मिसाइल का परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुर्नूल स्थित टेस्ट रेंज में किया गया, जहां इसने हर परीक्षण में शानदार प्रदर्शन कर अपनी ताकत साबित की।

ULPGM-V3 यानी “अनमैन्ड एरियल व्हीकल लॉन्च्ड प्रिसीजन गाइडेड मिसाइल” को आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका वजन करीब 12.5 किलोग्राम है, लेकिन इसकी मारक क्षमता बेहद घातक मानी जा रही है। यह मिसाइल ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक पर काम करती है। यानी एक बार लॉन्च होने के बाद इसे लगातार नियंत्रित करने की जरूरत नहीं पड़ती। मिसाइल खुद दुश्मन के लक्ष्य को पहचानकर उस पर हमला करती है। आधुनिक युद्ध में यह तकनीक बेहद अहम मानी जाती है क्योंकि इससे सैनिकों का जोखिम कम होता है और हमला ज्यादा सटीक बनता है।

इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी एयर-टू-एयर क्षमता है। अब तक हल्की मिसाइलों का उपयोग ज्यादातर जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए किया जाता था, लेकिन ULPGM-V3 हवा में उड़ रहे दुश्मन ड्रोन और हेलीकॉप्टरों को भी निशाना बना सकती है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में ड्रोन युद्ध दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य रणनीति बनने जा रहा है। ऐसे में भारत की यह नई मिसाइल सेना को नई ताकत और बढ़त देने वाली साबित हो सकती है।

DRDO ने इस मिसाइल में हाई-डेफिनिशन डुअल चैनल सीकर लगाया है, जिसमें इमेजिंग इंफ्रारेड और RF तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यही वजह है कि यह मिसाइल दिन हो या रात, घना अंधेरा हो या खराब मौसम—हर परिस्थिति में दुश्मन की पहचान कर हमला कर सकती है। इसकी रेंज दिन में लगभग 4 से 10 किलोमीटर तक बताई जा रही है, जबकि रात में भी यह कई किलोमीटर दूर मौजूद लक्ष्य को सटीकता से तबाह कर सकती है।

मिसाइल में टू-वे डेटा लिंक तकनीक भी दी गई है। इसका मतलब है कि लॉन्च होने के बाद भी ऑपरेटर इसमें नई जानकारी भेज सकता है। जरूरत पड़ने पर लक्ष्य बदला भी जा सकता है। तेजी से बदलते युद्ध क्षेत्र में यह फीचर बेहद अहम माना जा रहा है। इसके अलावा ULPGM-V3 को इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के माहौल में भी काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। यदि दुश्मन GPS या कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम करने की कोशिश करता है, तब भी यह मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम रहेगी।

इस मिसाइल में अलग-अलग तरह के वारहेड लगाए जा सकते हैं, जिससे यह टैंक, बंकर और सैनिकों के ठिकानों को अलग-अलग तरीके से निशाना बना सकती है। इसका ‘टॉप-अटैक मोड’ दुश्मन के टैंक के कमजोर ऊपरी हिस्से पर हमला करता है, जिससे भारी बख्तरबंद टैंक भी कुछ ही सेकंड में तबाह हो सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के मैदान में यह फीचर भारतीय सेना को बड़ी रणनीतिक बढ़त देगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता को ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। वहीं DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने कहा कि यह भारतीय रक्षा तकनीक की बड़ी उपलब्धि है और इससे देश की सैन्य ताकत कई गुना बढ़ेगी। इस परियोजना में भारत डायनामिक्स लिमिटेड, अदाणी डिफेंस सिस्टम एंड टेक्नोलॉजी लिमिटेड और न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी जैसी सरकारी और निजी कंपनियों ने मिलकर काम किया है।

रक्षा जानकारों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ड्रोन आधारित युद्ध तेजी से बढ़ने वाला है। ऐसे में ULPGM-V3 जैसी हल्की, सस्ती, स्मार्ट और सटीक मिसाइल भारतीय सेना के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। भारत की यह उपलब्धि न केवल देश की सैन्य शक्ति को मजबूत करेगी बल्कि दुनिया को यह संदेश भी देगी कि अब भारत रक्षा तकनीक के क्षेत्र में किसी से पीछे नहीं है।

"रिश्ते का खूनी अंत: सगाई के 4 दिन बाद बॉयफ्रेंड ने की मंगेतर की बेरहमी से हत्या, सिर कुचलकर झाड़ियों में फेंका शव"

"रिश्ते का खूनी अंत: सगाई के 4 दिन बाद बॉयफ्रेंड ने की मंगेतर की बेरहमी से हत्या, सिर कुचलकर झाड़ियों में फेंका शव"

 लखनऊ।  राजधानी लखनऊ से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है। यहां सगाई के महज चार दिन बाद 22 वर्षीय युवती शिवानी सिंह की उसके ही बॉयफ्रेंड ने बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपी ने पहले रबर पाइप से युवती का गला घोंटा, फिर सीमेंट की ईंट से सिर कुचलकर शव को जंगल की झाड़ियों में फेंक दिया। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए आरोपी प्रेम कुमार मांझी को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक प्रेम कुमार मांझी लखनऊ में डिलीवरी बॉय का काम करता है और पिछले 7 से 8 वर्षों से शिवानी के साथ रिश्ते में था। आरोपी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से शिवानी अपने ऑफिस के सहकर्मी मनीष के करीब आ गई थी। मोबाइल में दोनों की तस्वीरें देखने के बाद वह लगातार गुस्से में रहने लगा था। इसी शक और जलन में उसने हत्या की खौफनाक साजिश रची।

बताया जा रहा है कि रविवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे आरोपी शिवानी को बाइक पर बैठाकर उतरेटिया रेलवे लाइन के पास जंगल की ओर ले गया। वहां सुनसान जगह पर उसने वाटर लेवलिंग में इस्तेमाल होने वाले रबर पाइप से युवती का गला घोंट दिया। जब इससे भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ तो पास में पड़ी सीमेंट की ईंट उठाकर शिवानी का सिर कुचल दिया। हत्या के बाद शव को झाड़ियों में फेंक दिया और मोबाइल फोन तेलीबाग नहर में फेंककर सबूत मिटाने की कोशिश की।

शिवानी एल्डिको उद्यान के रक्षा खंड इलाके में अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहती थी। उसकी मां घरों में काम करती हैं जबकि पिता शटरिंग मजदूर हैं। शिवानी एक रियल एस्टेट कंपनी में चैनल पार्टनर के तौर पर काम कर रही थी। परिवार के मुताबिक 14 मई को उसकी सगाई प्रकाश नाम के युवक से हुई थी और घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि खुशियों के बीच ऐसा दर्दनाक हादसा हो जाएगा।

रविवार को ऑफिस जाने की बात कहकर निकली शिवानी रात तक घर नहीं लौटी तो परिवार परेशान हो गया। काफी तलाश के बाद भी कोई जानकारी नहीं मिली। सोमवार सुबह सुशांत गोल्फ सिटी इलाके के जंगल में एक युवती का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली। तस्वीर देखकर मां ने शव की पहचान शिवानी के रूप में की, जिसके बाद परिवार में मातम छा गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की चार टीमें जांच में लगाई गईं। सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंची। पूछताछ और सबूतों के आधार पर प्रेम कुमार मांझी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई ईंट भी बरामद कर ली है। फिलहाल आरोपी को जेल भेज दिया गया है और मामले की आगे जांच जारी है।

सफेद-पीले रंग और मॉडर्न लुक में दिखी भारत की पहली बुलेट ट्रेन, रेलवे ने जारी की पहली झलक

सफेद-पीले रंग और मॉडर्न लुक में दिखी भारत की पहली बुलेट ट्रेन, रेलवे ने जारी की पहली झलक

 नई दिल्ली।  भारत की पहली बुलेट ट्रेन की पहली तस्वीर सामने आते ही लोगों में उत्साह बढ़ गया है। रेल मंत्रालय ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर चलने वाली बुलेट ट्रेन का प्रस्तावित डिजाइन जारी किया है, जिसमें ट्रेन सफेद और पीले रंग के आकर्षक मॉडर्न लुक में नजर आ रही है। रेलवे के मुताबिक यह डिजाइन अभी फाइनल नहीं है, लेकिन इसे यात्रियों के आराम, हाई स्पीड और अत्याधुनिक तकनीक को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। 8 कोच वाली यह ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी और मुंबई से अहमदाबाद तक का लगभग 508 किलोमीटर लंबा सफर सिर्फ 2 घंटे में पूरा करेगी। इस हाई-स्पीड कॉरिडोर में साबरमती, अहमदाबाद, आनंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई समेत 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, शुरुआत में बुलेट ट्रेन सूरत से बिलिमोरा के बीच 100 किलोमीटर के रूट पर शुरू की जा सकती है। केंद्र सरकार का लक्ष्य 15 अगस्त 2027 तक देश की पहली बुलेट ट्रेन को शुरू करने का है।

BREAKING NEWS : वीडी सतीशन ने ली केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ, ये नेता रहे मौजूद

BREAKING NEWS : वीडी सतीशन ने ली केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ, ये नेता रहे मौजूद

 कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. अब 20 विधायक मंत्री पद की शपथ ले रहे हैं.

शपथ ग्रहण समारोह तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में हो रहा है, जहां पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी मौजूद हैं. इनके अलावा, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी उपस्थित हैं.

वीडी सतीशन 6 बार के विधायक हैं और केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं.

वो पहली बार 2001 में विधानसभा के लिए चुने गए और तब से लेकर अब तक पारावुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार हर चुनाव जीतते आए हैं.

140 सीटों वाले केरल में यूडीएएफ़ गठबंधन ने 102 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

155 करोड़ के बैंक घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, 7 ठिकानों पर छापेमारी; AAP नेताओं से जुड़े तार

155 करोड़ के बैंक घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, 7 ठिकानों पर छापेमारी; AAP नेताओं से जुड़े तार

 नई दिल्ली।  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 155 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली और गोवा में 7 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई ‘महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़े कथित बैंक फ्रॉड मामले में की जा रही है। जांच एजेंसी ने AAP नेता दीपक सिंगला समेत कई संदिग्धों के घर और कारोबारी परिसरों को निशाने पर लिया है।

ईडी सूत्रों के मुताबिक छापेमारी दीपक सिंगला, महेश सिंगला, अमरीक गिल और अन्य संदिग्धों से जुड़े ठिकानों पर की जा रही है। जांच टीमों ने सुबह-सुबह सभी लोकेशनों पर पहुंचकर दस्तावेज, डिजिटल डेटा और वित्तीय रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किस तरह बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन लेकर कथित हेराफेरी की गई।

जांच में पंजाब सरकार के गिरफ्तार मंत्री संजीव अरोड़ा के नाम की भी चर्चा सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि इस बैंक फ्रॉड केस के तार संजीव अरोड़ा और उनके करीबियों से जुड़े हो सकते हैं। इससे आम आदमी पार्टी की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

बताया जा रहा है कि महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड पर कई बैंकों से करीब 155 करोड़ रुपये का लोन लेने के बाद वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी करने का आरोप है। बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाने के आरोप में पहले ही केस दर्ज किया जा चुका है। अब ईडी मनी लॉन्ड्रिंग और फंड ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है।

फिलहाल एजेंसी की कार्रवाई जारी है और आने वाले समय में इस मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में भी इस रेड को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

PM मोदी को मिला 31वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान, स्वीडन ने दिया सर्वोच्च ‘पोलर स्टार’ अवॉर्ड

PM मोदी को मिला 31वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान, स्वीडन ने दिया सर्वोच्च ‘पोलर स्टार’ अवॉर्ड

 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन की ओर से प्रतिष्ठित ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ सम्मान प्रदान किया गया है। यह सम्मान उन्हें गोथेनबर्ग यात्रा के दौरान दिया गया। इसके साथ ही पीएम मोदी को मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।

स्वीडन सरकार ने यह सम्मान भारत और स्वीडन के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्थिरता जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग को मान्यता देते हुए प्रदान किया। दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने में पीएम मोदी की भूमिका को भी इस सम्मान के जरिए सराहा गया।

रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार’ स्वीडन का बेहद प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है, जो आमतौर पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी अमेरिका, फ्रांस, रूस, यूएई, मिस्र, ग्रीस और कई अन्य देशों के सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत और प्रधानमंत्री मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को दर्शाता है। हाल के वर्षों में भारत-स्वीडन संबंधों में तेजी आई है, खासकर हरित ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, रक्षा और सतत विकास के क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी मजबूत हुई है।

भारत अवसरों की भूमि है, जो तकनीक और मानवता दोनों से प्रेरित है: प्रधानमंत्री मोदी

भारत अवसरों की भूमि है, जो तकनीक और मानवता दोनों से प्रेरित है: प्रधानमंत्री मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत को अवसरों की धरती बताते हुए कहा कि देश तकनीक और मानवता, दोनों की ताकत से आगे बढ़ रहा है। द हेग में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे दौर में भारत नवाचार, आर्थिक विकास और वैश्विक सहयोग की एक अहम ताकत बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा, “भारत अवसरों की धरती है, जो तकनीक और मानवता दोनों से प्रेरित है।”

प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी और दुनिया में जारी संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा, “यह दशक दुनिया के लिए चुनौतियों का दशक बनता जा रहा है।” उन्होंने उभरती भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय समन्वय और साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत और नीदरलैंड ऊर्जा सुरक्षा और जल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि दोनों देश वैश्विक स्तर पर और अधिक करीब से काम कर सकते हैं और बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए मिलकर सहयोग कर सकते हैं। यूरोप के साथ भारत की बढ़ती आर्थिक भागीदारी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों पक्षों के संबंधों को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा, “नीदरलैंड उन भारतीय व्यवसायों के लिए एक स्वाभाविक प्रवेश द्वार बन सकता है जो यूरोप में विस्तार करना चाहते हैं।”

प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि यह समुदाय दोनों देशों के बीच एक भरोसेमंद सेतु का काम करता है और लोगों के बीच संबंधों और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उत्साहित भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वहां मिले प्यार और उत्साह ने उन्हें ऐसा महसूस कराया जैसे वह भारत के किसी उत्सव में शामिल हों। उन्होंने कहा, “इतना प्यार और उत्साह देखकर मैं कुछ पल के लिए भूल गया कि मैं नीदरलैंड में हूं।” प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि द हेग अब भारत-नीदरलैंड दोस्ती का जीवंत प्रतीक बन चुका ।

अमित शाह करेंगे मधुर डेयरी यूनिट-2 का उद्घाटन, डेयरी किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

अमित शाह करेंगे मधुर डेयरी यूनिट-2 का उद्घाटन, डेयरी किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

 केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 17 मई, 2026 को गुजरात के गांधीनगर स्थित दशेला में मधुर डेयरी यूनिट-2 स्वचालित दुग्ध प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग संयंत्र का उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना सहकारी डेयरी अवसंरचना को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

“सहकार से समृद्धि” विज़न को मिलेगा बल

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” मंत्र के तहत सहकारिता मंत्रालय आधुनिक अवसंरचना, तकनीक आधारित प्रणालियों और किसान-केंद्रित पहलों के जरिए देशभर में सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में जुटा है। इसी कड़ी में मधुर डेयरी यूनिट-2 की स्थापना को अहम पहल माना जा रहा है। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहेंगे।

दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता में होगी बढ़ोतरी

नई डेयरी यूनिट के शुरू होने से क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण और पैकेजिंग क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे सहकारी डेयरी नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और दुग्ध उत्पादकों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा। सरकार के अनुसार, यह परियोजना उन्नत प्रौद्योगिकी, गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों और आधुनिक प्रसंस्करण अवसंरचना के जरिए डेयरी सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम है।

संयंत्र का करेंगे औपचारिक उद्घाटन

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह मधुर डेयरी यूनिट-2 की शिलापट्टिका का अनावरण करेंगे और दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र तथा व्यूइंग गैलरी का अवलोकन करेंगे। इसके अलावा वे नियंत्रण कक्ष से परिचालन प्रणालियों का शुभारंभ कर संयंत्र का औपचारिक उद्घाटन भी करेंगे।

महिला दुग्ध उत्पादकों का होगा सम्मान

उद्घाटन समारोह में डेयरी सहकारी संस्थाओं से जुड़ी महिला दुग्ध उत्पादक अमित शाह को मधुर डेयरी उत्पाद किट भेंट कर सम्मानित करेंगी। इसे भारत के सहकारी डेयरी आंदोलन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और भूमिका का प्रतीक माना जा रहा है।

दुग्ध उत्पादक मंडलियों को वितरित होंगे प्रमाणपत्र

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री द्वारा दुग्ध उत्पादक मंडलियों के प्रतिनिधियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे जमीनी स्तर की डेयरी सहकारी संस्थाओं को मजबूती मिलेगी और आधुनिक अवसंरचना के जरिए दुग्ध उत्पादकों को अधिक अवसर प्राप्त होंगे।

ग्रामीण विकास और किसानों की आय पर रहेगा फोकस

मधुर डेयरी यूनिट-2 का उद्घाटन सहकारिता आधारित ग्रामीण विकास को गति देने, डेयरी किसानों के लिए बेहतर आजीविका अवसर सृजित करने और आधुनिक एवं सतत सहकारी मॉडल के जरिए भारत की डेयरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। 

विश्व दूरसंचार दिवस : डिजिटल क्रांति, वैश्विक संवाद और मानव सभ्यता का नया युग

विश्व दूरसंचार दिवस : डिजिटल क्रांति, वैश्विक संवाद और मानव सभ्यता का नया युग

 मानव सभ्यता का इतिहास वस्तुतः संचार के विकास का इतिहास है। आदिम मानव ने जब पहली बार गुफाओं की दीवारों पर चित्र उकेरे, धुएं के संकेतों का प्रयोग किया अथवा ध्वनियों के माध्यम से संदेश देने का प्रयास किया, तभी से संवाद की यात्रा आरम्भ हो चुकी थी। समय के साथ यह यात्रा कबूतरों, दूतों, टेलीग्राफ, टेलीफोन, रेडियो और टेलीविजन से आगे बढ़ते हुए इंटरनेट, स्मार्टफोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम संचार के युग तक पहुंच गई। आज मनुष्य केवल संवाद नहीं करता, बल्कि एक विशाल डिजिटल नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बन चुका है। इसी ऐतिहासिक और तकनीकी परिवर्तन की स्मृति तथा उसके वैश्विक महत्व को रेखांकित करने के लिए प्रतिवर्ष 17 मई को “विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस” मनाया जाता है। यह दिवस केवल तकनीकी उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि उस वैश्विक परिवर्तन का प्रतीक है जिसने पृथ्वी को “वैश्विक ग्राम” से आगे बढ़ाकर “डिजिटल सभ्यता” में रूपांतरित कर दिया है।

आज सूचना शक्ति का सबसे प्रभावशाली स्रोत बन चुकी है। आधुनिक विश्व में राजनीतिक प्रभाव, आर्थिक वर्चस्व, सांस्कृतिक विस्तार और सामरिक क्षमता का निर्धारण बड़ी सीमा तक सूचना और संचार तकनीकों के नियंत्रण से हो रहा है। इसलिए कहा जाने लगा है कि “डेटा ही नया तेल है।” जिस प्रकार औद्योगिक युग में तेल आर्थिक शक्ति का आधार था, उसी प्रकार डिजिटल युग में डेटा और संचार अवसंरचना वैश्विक शक्ति-संतुलन को निर्धारित कर रहे हैं। डिजिटल क्रांति ने मानव जीवन को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। इंटरनेट और मोबाइल तकनीक ने समय और दूरी की पारंपरिक सीमाओं को लगभग समाप्त कर दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, प्रशासन, राजनीति, संस्कृति और मनोरंजन जीवन का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं बचा है जो दूरसंचार तकनीक से प्रभावित न हुआ हो। कोविड-19 महामारी के दौरान यह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया कि डिजिटल संचार आधुनिक समाज की जीवन रेखा बन चुका है।

हालांकि, यह विकास केवल संभावनाएं ही नहीं लाया है; इसके साथ अनेक गंभीर चुनौतियां भी उभरी हैं। साइबर अपराध, डेटा गोपनीयता संकट, फेक न्यूज, डिजिटल लत, एल्गोरिद्मिक नियंत्रण और डिजिटल असमानता आधुनिक समाज के समक्ष नए प्रश्न खड़े कर रहे हैं।तकनीक जितनी अधिक शक्तिशाली होती जा रही है, उतनी ही अधिक नैतिक और मानवीय जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं।विश्व दूरसंचार दिवस हमें यह विचार करने का अवसर देता है कि तकनीकी प्रगति का अंतिम उद्देश्य क्या होना चाहिए। क्या तकनीक केवल सुविधा और लाभ का माध्यम है, या वह मानवता के समग्र विकास, समानता और वैश्विक सहयोग का आधार भी बन सकती है? यही प्रश्न इस दिवस को केवल तकनीकी आयोजन न बनाकर एक गहन सभ्यतागत विमर्श में परिवर्तित कर देता है।

विश्व दूरसंचार दिवस का इतिहास : वैश्विक संवाद की संस्थागत यात्रा

विश्व दूरसंचार दिवस का इतिहास 17 मई 1865 से प्रारंभ होता है, जब पेरिस में “अंतरराष्ट्रीय टेलीग्राफ संघ” (International Telegraph Union) की स्थापना हुई। उस समय टेलीग्राफ आधुनिक संचार का सबसे तेज माध्यम था और विभिन्न देशों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान हेतु एक अंतरराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से इस संगठन की स्थापना की गई। बाद में यही संस्था “अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ” (International Telecommunication Union – ITU) के रूप में विकसित हुई। 1947 में ITU संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी बन गई। यह विश्व की सबसे पुरानी अंतरराष्ट्रीय तकनीकी संस्थाओं में से एक है, जिसने वैश्विक संचार व्यवस्था को व्यवस्थित और समन्वित बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

21वीं सदी में जब इंटरनेट और डिजिटल तकनीकों का प्रभाव तीव्र गति से बढ़ने लगा, तब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2005 में “सूचना समाज” (Information Society) की अवधारणा को वैश्विक महत्व प्रदान किया। इसके बाद इस दिवस को “World Telecommunication and Information Society Day (WTISD)” के रूप में व्यापक पहचान मिली। इसका उद्देश्य केवल दूरसंचार तकनीक का प्रचार नहीं, बल्कि सूचना और डिजिटल तकनीकों के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभावों पर वैश्विक विमर्श को प्रोत्साहित करना है।

हर वर्ष इस दिवस के लिए एक विशेष थीम निर्धारित की जाती है। इन थीमों के माध्यम से डिजिटल समावेशन, सतत विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, लैंगिक समानता, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे समकालीन विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दूरसंचार अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया, बल्कि मानव विकास और वैश्विक शासन का केंद्रीय तत्व बन चुका है।

दूरसंचार का विकास : संकेतों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक

मानव इतिहास में संचार के साधनों का विकास निरंतर होता रहा है। प्रारंभिक काल में संदेशों के लिए धुआं संकेत, ढोल, कबूतर और दूतों का प्रयोग किया जाता था। इन साधनों की सीमाएं स्पष्ट थीं , वे धीमे, असुरक्षित और सीमित दूरी तक प्रभावी थे। 19वीं शताब्दी में सैमुअल मोर्स द्वारा टेलीग्राफ के आविष्कार ने संचार इतिहास में क्रांति ला दी। पहली बार संदेशों को विद्युत संकेतों के माध्यम से लंबी दूरी तक तेजी से भेजा जाने लगा। इसके बाद अलेक्जेंडर ग्राहम बेल द्वारा टेलीफोन का आविष्कार मानव संवाद के इतिहास की ऐतिहासिक घटना सिद्ध हुआ। अब केवल लिखित संदेश ही नहीं, बल्कि मानव आवाज भी हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंचने लगी।

20वीं शताब्दी में रेडियो और टेलीविजन ने जनसंचार को नई दिशा दी। रेडियो ने सूचना और मनोरंजन को व्यापक जनसमूह तक पहुंचाया, जबकि टेलीविजन ने दृश्य और श्रव्य माध्यमों को जोड़कर संचार को अधिक प्रभावशाली बनाया। राजनीति, संस्कृति, युद्ध और जनमत निर्माण पर इन माध्यमों का गहरा प्रभाव पड़ा। इसके बाद उपग्रह संचार का विकास हुआ, जिसने वैश्विक प्रसारण और अंतरराष्ट्रीय संपर्क को अभूतपूर्व गति प्रदान की। अंतरिक्ष में स्थापित उपग्रहों ने पृथ्वी को वास्तविक अर्थों में जोड़ना प्रारंभ किया। इंटरनेट का आगमन आधुनिक सूचना क्रांति का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। इंटरनेट ने ज्ञान, व्यापार, प्रशासन और सामाजिक संबंधों की पूरी संरचना बदल दी। ईमेल, वेबसाइट, सर्च इंजन और सोशल मीडिया ने सूचना के आदान-प्रदान को लोकतांत्रिक बना दिया।

21वीं सदी में स्मार्टफोन ने संचार को व्यक्ति-केंद्रित बना दिया। अब एक मोबाइल फोन केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि बैंक, बाजार, विद्यालय, कार्यालय और मनोरंजन केंद्र का रूप ले चुका है। आज विश्व 5G और 6G तकनीक की ओर अग्रसर है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और क्वांटम संचार जैसी तकनीकें भविष्य की डिजिटल सभ्यता की आधारशिला बन रही हैं। आने वाले समय में मशीनें स्वयं संवाद करेंगी, निर्णय लेंगी और मानव जीवन के अनेक क्षेत्रों को संचालित करेंगी।

भारत में दूरसंचार का विकास : सीमित सेवाओं से डिजिटल महाशक्ति तक

भारत में दूरसंचार का प्रारंभ औपनिवेशिक काल में टेलीग्राफ प्रणाली से हुआ। ब्रिटिश शासन ने प्रशासनिक नियंत्रण और सैन्य उद्देश्यों के लिए संचार नेटवर्क का विस्तार किया। स्वतंत्रता के बाद दूरभाष सेवाओं का विस्तार आरंभ हुआ, पर लंबे समय तक यह सुविधा केवल सीमित वर्ग तक ही उपलब्ध रही। एक समय ऐसा था जब टेलीफोन कनेक्शन प्राप्त करने के लिए लोगों को वर्षों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। दूरसंचार सेवाएं महंगी और सीमित थीं। लेकिन 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन आया।निजी कंपनियों के प्रवेश, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नवाचार ने भारत में मोबाइल क्रांति को जन्म दिया। मोबाइल फोन धीरे-धीरे आम नागरिक की पहुंच में आने लगे। कॉल दरों में कमी और इंटरनेट सेवाओं के विस्तार ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार बाजारों में परिवर्तित कर दिया।

आज भारत विश्व के सबसे बड़े मोबाइल और इंटरनेट उपभोक्ता देशों में शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों तक भी डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। सरकार की “डिजिटल इंडिया”, “भारतनेट” और “5G मिशन” जैसी योजनाओं ने डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतनेट परियोजना का उद्देश्य देश के गांवों तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाना है। यह केवल तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का माध्यम भी है। इसके माध्यम से ग्रामीण भारत को शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।UPI आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। आज मोबाइल फोन केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि वित्तीय लेन-देन, पहचान और व्यापार का प्रमुख उपकरण बन चुका है। भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था विश्व के लिए मॉडल बन रही है।

डिजिटल इंडिया : प्रशासन और समाज का डिजिटल रूपांतरण

“डिजिटल इंडिया” कार्यक्रम ने भारत के प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे को नई दिशा प्रदान की है। इसका उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना है। ई-गवर्नेंस के माध्यम से सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है। अब नागरिक प्रमाणपत्र, बैंकिंग सेवाएं, कर भुगतान और अनेक सरकारी सुविधाएं डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। इससे पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि हुई है।

शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों ने ज्ञान के लोकतंत्रीकरण को संभव बनाया है। कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल शिक्षा ने शिक्षा व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्चुअल क्लासरूम, डिजिटल पुस्तकालय और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों ने भौगोलिक सीमाओं को कम किया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई है। वीडियो परामर्श, ई-प्रिस्क्रिप्शन और स्वास्थ्य ऐप्स ने स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाया है।डिजिटल तकनीक ने स्टार्टअप संस्कृति को भी प्रोत्साहित किया है। भारत आज विश्व के प्रमुख स्टार्टअप केंद्रों में से एक बन चुका है। फिनटेक, एडटेक, हेल्थटेक और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में डिजिटल नवाचार तेजी से बढ़ रहे हैं।

दूरसंचार और सामाजिक परिवर्तन

दूरसंचार तकनीक ने सामाजिक संबंधों की संरचना को गहराई से प्रभावित किया है। परिवार, मित्रता और सामुदायिक जीवन अब डिजिटल माध्यमों से संचालित होने लगे हैं। कनाडाई चिंतक मार्शल मैक्लुहान ने कहा था “The medium is the message.” अर्थात माध्यम स्वयं समाज को बदलने की क्षमता रखता है। आधुनिक डिजिटल माध्यमों ने वास्तव में मानव व्यवहार और सामाजिक संरचना को पुनर्परिभाषित किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आज जनमत निर्माण के अत्यंत प्रभावशाली माध्यम बन चुके हैं। ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे मंच सामाजिक आंदोलनों, राजनीतिक अभियानों और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के प्रमुख साधन बन गए हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने महिलाओं, ग्रामीण समुदायों और वंचित वर्गों को नई आवाज प्रदान की है। एक ग्रामीण महिला ऑनलाइन माध्यम से अपना व्यवसाय चला सकती है; किसान मोबाइल पर मौसम और बाजार भाव की जानकारी प्राप्त कर सकता है; विद्यार्थी विश्व स्तरीय शिक्षा सामग्री तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, सोशल मीडिया ने सामाजिक ध्रुवीकरण, ट्रोल संस्कृति, सूचना अराजकता और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं को भी जन्म दिया है। डिजिटल दुनिया ने मनुष्य को जोड़ा भी है और कई बार अकेला भी कर दिया है।

आर्थिक विकास में दूरसंचार की भूमिका

आधुनिक अर्थव्यवस्था का आधार अब डिजिटल नेटवर्क बन चुका है। ई-कॉमर्स, फिनटेक, क्लाउड कंप्यूटिंग और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार दूरसंचार के बिना संभव नहीं था। दूरसंचार उद्योग स्वयं रोजगार सृजन का प्रमुख स्रोत बन चुका है। मोबाइल निर्माण, ऐप विकास, साइबर सुरक्षा, डेटा विश्लेषण और डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में लाखों रोजगार उत्पन्न हुए हैं। विदेशी निवेश ने भारतीय दूरसंचार क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जोड़ा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत की GDP वृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बनती जा रही है।“डेटा अर्थव्यवस्था” आधुनिक पूंजीवाद का नया चरण मानी जा रही है। बड़ी तकनीकी कंपनियां उपयोगकर्ताओं के डेटा के आधार पर वैश्विक आर्थिक शक्ति प्राप्त कर रही हैं। डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से उपभोक्ता व्यवहार को प्रभावित किया जा रहा है।

शिक्षा और स्वास्थ्य में दूरसंचार की भूमिका

दूरसंचार तकनीक ने शिक्षा के लोकतंत्रीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म, वर्चुअल क्लासरूम और डिजिटल पुस्तकालयों ने ज्ञान को व्यापक और सुलभ बनाया है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी अब विश्व स्तरीय शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच प्राप्त कर रहे हैं। डिजिटल शिक्षा ने सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को आंशिक रूप से कम किया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में टेलीमेडिसिन और ई-हेल्थ सेवाओं ने चिकित्सा व्यवस्था को नई दिशा दी है। महामारी के दौरान वीडियो परामर्श, ऑनलाइन दवा वितरण और स्वास्थ्य निगरानी ऐप्स अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुए। दूरसंचार ने आपदा और महामारी प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोविड-19 के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रशासनिक समन्वय, जन-जागरूकता और स्वास्थ्य प्रबंधन का प्रमुख माध्यम बने।

राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर युग

आधुनिक युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाते; वे साइबर स्पेस में भी संचालित होते हैं। संचार नेटवर्क राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। साइबर हमले बैंकिंग, ऊर्जा, परिवहन और रक्षा संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए डेटा संरक्षण और नेटवर्क सुरक्षा आज सामरिक आवश्यकता बन चुकी है। उपग्रह संचार, ड्रोन तकनीक और रियल-टाइम निगरानी आधुनिक रक्षा प्रणाली के महत्वपूर्ण अंग हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य तकनीकें युद्ध की प्रकृति को बदल रही हैं। आपदा प्रबंधन में भी दूरसंचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भूकंप, बाढ़, महामारी और युद्ध जैसी परिस्थितियों में संचार व्यवस्था राहत और बचाव कार्यों का आधार बनती है।

लोकतंत्र, सूचना और डिजिटल सार्वजनिक क्षेत्र

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान ने कहा था “Information is the oxygen of democracy.”वास्तव में लोकतंत्र में सूचना की स्वतंत्र पहुंच अत्यंत आवश्यक है। डिजिटल माध्यमों ने नागरिक भागीदारी को बढ़ाया है। आज राजनीतिक दल सोशल मीडिया और डिजिटल अभियानों के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचते हैं। नागरिक भी ऑनलाइन माध्यमों से अपनी राय और असहमति व्यक्त कर रहे हैं। लेकिन डिजिटल लोकतंत्र के सामने गंभीर चुनौतियां भी हैं। फेक न्यूज, डीपफेक तकनीक और एल्गोरिद्मिक दुष्प्रचार लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित कर रहे हैं। कई बार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म समाज में वैचारिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं। इसलिए डिजिटल स्वतंत्रता और डिजिटल उत्तरदायित्व के बीच संतुलन अत्यंत आवश्यक है।

डिजिटल विभाजन : नई असमानताओं का संकट

डिजिटल क्रांति के बावजूद विश्व की बड़ी आबादी अब भी इंटरनेट और तकनीकी सुविधाओं से वंचित है। इसे “डिजिटल डिवाइड” कहा जाता है। ग्रामीण-शहरी अंतर, आर्थिक विषमता और लैंगिक असमानता डिजिटल पहुंच को प्रभावित करती हैं। विकासशील देशों में तकनीकी अवसंरचना की कमी एक बड़ी चुनौती है। भारत में भी अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की गुणवत्ता और डिजिटल साक्षरता सीमित है। महिलाओं और वंचित वर्गों की डिजिटल पहुंच अपेक्षाकृत कम है। यदि डिजिटल समावेशन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो तकनीकी प्रगति नई असमानताओं को जन्म दे सकती है। इसलिए डिजिटल अधिकारों को सामाजिक न्याय के व्यापक प्रश्न से जोड़कर देखने की आवश्यकता है।

दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियां

साइबर अपराध: हैकिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, रैनसमवेयर और डेटा चोरी वैश्विक समस्या बन चुके हैं। डिजिटल निर्भरता जितनी बढ़ रही है, साइबर खतरे भी उतने ही गंभीर होते जा रहे हैं। डेटा गोपनीयता संकट: बड़ी तकनीकी कंपनियां उपयोगकर्ताओं के डेटा का विशाल संग्रह कर रही हैं। इससे निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर खतरा उत्पन्न हो रहा है। इंटरनेट लत और मानसिक स्वास्थ्य: अत्यधिक डिजिटल निर्भरता मानसिक तनाव, अकेलेपन, चिंता और अवसाद को बढ़ा रही है। विशेष रूप से किशोरों पर सोशल मीडिया का प्रभाव चिंता का विषय है। फेक न्यूज और दुष्प्रचार: भ्रामक सूचनाएं सामाजिक तनाव और राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दे सकती हैं। सूचना की सत्यता आज लोकतांत्रिक स्थिरता का महत्वपूर्ण प्रश्न बन गई है। पर्यावरणीय संकट: ई-वेस्ट और डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत पर्यावरणीय चुनौतियों को बढ़ा रही है। डिजिटल विकास को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ संतुलित करना आवश्यक है।

भविष्य की तकनीकें : 6G, AI और क्वांटम संचार

भविष्य का विश्व “हाइपर-कनेक्टेड” समाज होगा, जहां मशीनें और मनुष्य एक जटिल डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा होंगे। 5G और 6G: अत्यधिक तेज इंटरनेट और कम विलंबता नई औद्योगिक क्रांति का आधार बनेंगे। स्मार्ट सिटी, स्वचालित वाहन और रोबोटिक उद्योगों का विस्तार होगा। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT): घरेलू उपकरण, वाहन और मशीनें इंटरनेट से जुड़कर स्मार्ट सिस्टम का निर्माण करेंगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): AI आधारित संचार प्रणाली स्वतः निर्णय लेने, भाषा अनुवाद और डेटा विश्लेषण में सक्षम होगी। क्वांटम संचार: यह तकनीक लगभग अभेद्य साइबर सुरक्षा प्रदान कर सकती है और संचार सुरक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला सकती है। सैटेलाइट इंटरनेट: दूरस्थ क्षेत्रों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने में सैटेलाइट इंटरनेट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा और डिजिटल संप्रभुता

आज दूरसंचार वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है। अमेरिका, चीन और भारत तकनीकी प्रतिस्पर्धा के प्रमुख खिलाड़ी हैं। चीन 5G अवसंरचना और दूरसंचार उपकरण निर्माण में अग्रणी है। अमेरिका कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्मों में मजबूत स्थिति रखता है। भारत विशाल डिजिटल बाजार, युवा जनसंख्या और सॉफ्टवेयर क्षमता के कारण उभरती हुई शक्ति के रूप में सामने आया है। “तकनीकी उपनिवेशवाद” की अवधारणा आज विशेष चर्चा में है। बड़ी तकनीकी कंपनियां डेटा और डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से वैश्विक प्रभाव स्थापित कर रही हैं। इसी संदर्भ में “डिजिटल संप्रभुता” का प्रश्न महत्वपूर्ण हो गया है। राष्ट्र अब अपने डेटा, नेटवर्क और साइबर अवसंरचना पर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं।

भारतीय नीतियां और आत्मनिर्भर डिजिटल भविष्य

भारत सरकार ने डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने के लिए अनेक नीतियां लागू की हैं। राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति: इसका उद्देश्य किफायती और सार्वभौमिक डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करना है। भारतनेट परियोजना: गांवों तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना। मेक इन इंडिया: दूरसंचार उपकरण निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना। सेमीकंडक्टर मिशन: चिप निर्माण क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल। साइबर सुरक्षा नीति: डिजिटल नेटवर्क की सुरक्षा और डेटा संरक्षण को सुदृढ़ करना। इन पहलों का उद्देश्य केवल तकनीकी विकास नहीं, बल्कि डिजिटल आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।

सांस्कृतिक और नैतिक विमर्श

डिजिटल तकनीक ने संस्कृति की प्रकृति को भी बदल दिया है। अब भाषा, साहित्य, संगीत और कला डिजिटल माध्यमों से वैश्विक स्तर पर प्रसारित हो रहे हैं। भारतीय भाषाओं का डिजिटलीकरण सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हिंदी, मैथिली, तमिल, बांग्ला और अन्य भारतीय भाषाएं इंटरनेट पर तेजी से विस्तार कर रही हैं। सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति को लोकतांत्रिक बनाया है, लेकिन साथ ही सूचना की जिम्मेदारी और नैतिक पत्रकारिता का प्रश्न भी गंभीर हो गया है। डिजिटल संस्कृति कई बार तात्कालिकता, सतहीपन और उपभोक्तावाद को बढ़ावा देती है। इसलिए तकनीक और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन आवश्यक है।

प्रधानमंत्री मोदी पांच-देशों के दौरे के तीसरे चरण में आज स्वीडन जाएंगे

प्रधानमंत्री मोदी पांच-देशों के दौरे के तीसरे चरण में आज स्वीडन जाएंगे

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के दौरे के तीसरे चरण में रविवार को स्वीडन पहुंचेंगे। वे स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं। 17-18 मई के इस दौरे से भारत और स्वीडन के बीच व्यापार, इनोवेशन, ग्रीन टेक्नोलॉजी और उभरते क्षेत्रों में संबंधों के और मजबूत होने की उम्मीद है।

द्विपक्षीय संबंधों की होगी समीक्षा

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस बातचीत का उद्देश्य भारत-स्वीडन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करना और प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर तलाशना है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेता द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए सहयोग के नए रास्तों पर भी चर्चा करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार 2025 में 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, भारत में स्वीडन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वर्ष 2000 से 2025 के बीच 2.825 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

एआई और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस

उम्मीद है कि चर्चा का मुख्य केंद्र हरित परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उभरती टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, मजबूत सप्लाई चेन, रक्षा निर्माण, अंतरिक्ष सहयोग, जलवायु कार्रवाई और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना होगा। स्वीडन को यूरोप की अग्रणी इनोवेशन आधारित अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है। ऐसे में दोनों देश भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग को और विस्तार देना चाहते हैं।

यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री में लेंगे हिस्सा

इस दौरे का एक मुख्य आकर्षण यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री में प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन की भागीदारी होगी। यह व्यापार जगत के नेताओं का एक प्रमुख अखिल-यूरोपीय मंच है। दोनों नेता उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मिलकर इस सभा को संबोधित करेंगे।

नीदरलैंड दौरे के बाद स्वीडन पहुंचेंगे पीएम मोदी

स्वीडन का यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी के नीदरलैंड के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे के तुरंत बाद हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले वर्ष 2018 में पहली बार आयोजित भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को अपने डच समकक्ष रॉब जेटन के निमंत्रण पर नीदरलैंड का दौरा पूरा किया। यह उनका नीदरलैंड का दूसरा दौरा था।

डच शाही परिवार से भी हुई मुलाकात

16 मई को ह्यूस टेन बॉश स्थित रॉयल पैलेस में राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा ने प्रधानमंत्री मोदी की मेजबानी की। यहां दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसके बाद प्रधानमंत्री के सम्मान में दोपहर भोज का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री रॉब जेटन और पीएम मोदी ने बाद में सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की, जिसके बाद 16 मई की शाम को डिनर बैठक हुई।

भारत-नीदरलैंड संबंधों को और मजबूत करने पर जोर

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत और नीदरलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों, लोगों के बीच गहरे जुड़ाव और मजबूत द्विपक्षीय रिश्तों को याद किया। उन्होंने कई क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की।