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डीआरडीओ ने एयरोइंजन के लिए टेक्नोलॉजी विकसित की

डीआरडीओ ने एयरोइंजन के लिए टेक्नोलॉजी विकसित की

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अपने अद्वितीय 2000 मीट्रिक टन आइसोथर्मल फोर्ज प्रेस का उपयोग करके कठिन-से-विकृत टाइटेनियम मिश्र धातु से उच्च दबाव कंप्रेसर (एचपीसी) डिस्क के सभी पांच चरणों का उत्पादन करने के लिए निकट आइसोथर्मल फोर्जिंग तकनीक विकसित की है। टेक्नोलॉजी का विकास हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की प्रमुख धातुकर्म प्रयोगशाला रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला (डीएमआरएल) द्वारा विकसित की गई है। एयरोइंजन प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसके साथ ही भारत ऐसे महत्वपूर्ण एयरोइंजन घटकों की निर्माण क्षमता रखने के लिए सीमित वैश्विक इंजन विकास करने वालों की लीग में शामिल हो गया है।

थोक उत्पादन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डीएमआरएल प्रौद्योगिकी को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (एलएटीओटी) के लिए लाइसेंस समझौते के माध्यम से मैसर्स मिधानी को हस्तांतरित किया गया था। डीएमआरएल, हैदराबाद में उपलब्ध आइसोथर्मल फोर्ज प्रेस सुविधा का इस्तेमाल करके विभिन्न कंप्रेसर चरणों से संबंधित एचपीसी डिस्क फोर्जिंग की थोक मात्रा (200 नंबर) का उत्पादन संयुक्त रूप से (डीएमआरएल और मिधानी द्वारा) किया गया है और एचएएल (ई), बेंगलुरु को जगुआर/हॉक विमान को शक्ति देने वाले एडोर इंजन में फिट करने के लिए सफलतापूर्वक आपूर्ति की गई है।

भारत में एडोर इंजन को एचएएल (ई), बेंगलुरु द्वारा ओईएम के साथ लाइसेंस प्राप्त मैन्युफैक्चरिंग समझौते के तहत ओवरहाल किया गया है। किसी भी एयरोइंजन की तरह एचपीसी ड्रम एसेंबली को अनेक बार काम लिए जाने और क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में बदलना होता है। उच्च मूल्य के इन एचपीसी डिस्क की वार्षित जरूरतें काफी अधिक होती हैं। एचपीसी ड्रम एक अत्यधिक स्ट्रेस्ड सब-एसेंबली है और इसे कम चक्र थकान और ऊंचे तापमान पर धीरे-धीरे काम करना पड़ता है। एचपीसी ड्रम के लिए कच्ची सामग्री और फोर्जिंग उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए जो स्थिर और गतिशील यांत्रिक गुणों के निर्दिष्ट संयोजन को पूरा कर सके।

डीएमआरएल ने विभिन्न विज्ञान और ज्ञान-आधारित उपकरणों के एकीकरण से इस फोर्जिंग तकनीक को विकसित किया है। डीएमआरएल द्वारा अपनाई गई पद्धति साधारण प्रकृति की है और इसे अन्य समान एयरोइंजन घटकों को विकसित करने के लिए अनुकूल ट्यून किया जा सकता है। इस पद्धति के उपयोग से उत्पादित कंप्रेसर डिस्क वांछित कार्य के लिए उड़ान योग्य एजेंसियों द्वारा तय सभी आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। इसी के अनुसार इस टेक्नोलॉजी को प्रमाणित किया गया और तकनीकी स्वीति प्रदान की गई। संपूर्ण घटक स्तर और प्रदर्शन मूल्यांकन परीक्षण परिणामों के आधार पर, एचएएल (ई) और भारतीय वायु सेना ने इंजन फिटमेंट के लिए घटकों को मंजूरी दी। डीएमआरएल और एचएएल (ई) के अलावा, मिधानी, सेमिलैक और डीजीएक्यूए जैसी विभिन्न एजेंसियों ने इस महत्वपूर्ण तकनीक को स्थापित करने में एक होकर काम किया।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण एयरो इंजन से संबंधित प्रौद्योगिकी के विकास में शामिल डीआरडीओ, उद्योग और अन्य सभी एजेंसियों के वैज्ञानिकों को बधाई दी है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की प्राप्ति पर संतोष व्यक्त किया और इसमें शामिल टीमों को बधाई दी।

 

रात में अश्लीडल वीडियो दिखाकर पति करता था ये गंदा काम, पुलिस ने किया मुकदमा दर्ज

रात में अश्लीडल वीडियो दिखाकर पति करता था ये गंदा काम, पुलिस ने किया मुकदमा दर्ज

शाहपुर क्षेत्र की रहने वाली महिला ने एडीजी को दिए प्रार्थना पत्र में लिखा है कि दो साल पहले उसकी शादी मऊ के रहने वाले युवक से हुई थी। परिवार के साथ वह गाजियाबाद में रहता है और वहीं पर प्राइवेट कंपनी में काम करता है। नशे का आदी पति शादी के बाद से ही उसे प्रताड़ित करता था। रात को नशे में घर पहुंचने के बाद उसे शारीरिक यातना देने के साथ ही आपत्तिजनक वीडियो दिखाकर यौन हिंसा करता था। शिकायत करने पर पीटता था। कुछ दिन बाद पता चला कि पति का संबंध कोलकाता की रहने वाली युवती से है। इसकी जानकारी उसने सास व ससुर को दी तो बेटे के साथ मिलकर वह लोग भी प्रताड़ित करने लगे। इसके बाद वह मायके चली आयी।
जनवरी 2021 के पहले सप्ताह में जोन कार्यालय पहुंचकर पति व उसके घरवालों के कृत्य की जानकारी देते हुए कार्रवाई करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। जोन कार्यालय से मुकदमा दर्ज किए जाने का आदेश एसएसपी गोरखपुर को दिया गया। लेकिन शाहपुर पुलिस ने यह कहते हुए तहरीर बदलवा दी कि बयान लेकर अप्राकृतिक दुष्कर्म की धारा बढ़ा देंगे। लेकिन ऐसा किया नहीं। एडीजी ने पीडि़त को भरोसा दिया कि मामले की जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।

 

आयुर्वेद Vs एलोपैथ: आईएमए का बाबा रामदेव को खुला चैलेंज,कहा-अपनी क्वालिफिकेशन व चर्चा का दिन बताएं

आयुर्वेद Vs एलोपैथ: आईएमए का बाबा रामदेव को खुला चैलेंज,कहा-अपनी क्वालिफिकेशन व चर्चा का दिन बताएं

आईएमए उत्तराखंड बाबा रामदेव की ओर से पूछे गए 25 सवालों का जबाव देने के लिए एक कमेटी गठित कर रहा है। यह कमेटी बाबा के सवालों का जबाव देने के साथ ही रामदेव से भी पांच सवाल पूछेगी। आईएमए के प्रदेश महासचिव डॉ. अजय खन्ना ने कहा कि बाबा रामदेव ने एलोपैथी डॉक्टरों के नाम खुला खत लिखकर 25 सवालों के जबाव देने को कहा था। इसके जबाव में अब आईएमए बाबा के सवाल देने को राजी हो गया है। आईएमए उत्तराखंड शाखा के प्रदेश सचिव ने बताया कि बाबा से सवाल जबाव के लिए आईएमए की ओर से पांच डॉक्टरों की कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया है। यह कमेटी बाबा के सवालों के जबाव देने के साथ ही बाबा से भी पांच सवाल पूछेगी। उन्होंने कहा कि आईएमए बाबा रामदेव के हर सवाल का जबाव देने को तैयार है। बशर्ते बाबा रामदेव मीडिया के सामने चर्चा के लिए तैयार हो। उन्होंने कहा कि आईएमए की ओर से अपनी पांच सदस्यीय कमेटी का ऐलान जल्द कर दिया जाएगा।
बाबा रामदेव व बालकृष्ण से पूछी क्वालिफिकेशन
आईएमए उत्तराखंड की ओर से बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण को ईमेल कर दोनों की योग्यता पूछी गई है। आईएमए के सचिव ने बताया कि बाबा ने एलोपैथी को लेकर सवाल पूछे हैं। इसके जबाव के लिए आईएमए के पांच सदस्यीय कमेटी बना रहा है। लेकिन इससे पहले बाबा व उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की योग्यता की जानकारी मांगी गई है। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में आईएमए उत्तराखंड की ओर से उन्हें ईमेल किया गया है।

आईएमए डॉक्टरों का सम्मान करेंगे योगाचार्य
आईएमए के प्रदेश सचिव ने बताया कि शुक्रवार को देहरादून के कुछ योगाचार्य आईएमए भवन में आईएमए के डॉक्टरों का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि आईएमए भवन में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के दौरान कई पदाधिकारी व डॉक्टर मौजूद रहेंगे। 

सावधान! वैक्सीन लगवाने के बाद मिले सर्टिफिकेट की फोटो सोशल मीडिया पर डालना पड़ सकता है महंगा, जानिए क्यों?

सावधान! वैक्सीन लगवाने के बाद मिले सर्टिफिकेट की फोटो सोशल मीडिया पर डालना पड़ सकता है महंगा, जानिए क्यों?

मुंबई, आज के कोरोना काल में वैक्सीन की डोज़ संजीवनी से कम नहीं है और हर किसी को वैक्सीन की डोज़ लेना अनिवार्य है. वैक्सीन लगाने के बाद एक सर्टिफिकेट दिया जाता है, जिससे ज़रूरत पड़ने पर आप इसे दिखाकर बता सकें कि आपको वैक्सीन की डोज़ लग चुकी है. हालांकि, कई लोगों को सोशल मीडिया जैसे कि ट्विटर, फेसबुक या दूसरी साइट्स पर अपनी पर्सनल जानकारी साझा करने की आदत होती है और इसी सबका फायदा सायबर क्रिमिनल्स लेते हैं.

महाराष्ट्र सायबर सेल के एसपी संजय शिंत्रे ने बताया कि इस तरह से अपनी डिटेल्स डालना खतरनाक है. शिंत्रे ने बताया कि वैक्सीन डोज़ मिलने के बाद जो सर्टिफिकेट मिलता है, उसपर आपकी निजी जानकारी होती है. यह जानकारी सायबर क्रिमिनल डार्क नेट पर बेच सकते हैं या फिर उसमे एडिटिंग कर किसी और को बेच सकते हैं.
इस सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर आप एक जगह से दूसरी जगह यात्रा कर सकते हैं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा कर सकते हैं. कई ऐसी भी कंपनी हैं जो लोगों को तभी नौकरी पर बुलाती हैं जब आपके पास वैक्सीन लगाए होने का सर्टिफिकेट होता है. ऐसे में ये सायबर क्रिमिनल आपकी जानकारी को एडिट कर ऐसे लोगों को बेच सकते हैं.
इसके अलावा हमने कुछ दिनों पहले एक क्राइम रजिस्टर किया था, जिसमें आरोपी सिप्ला कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर दवाई बेचने के नाम और लोगों की ठगी करते थे. हमें जांच के दौरान पता चला कि ये आरोपी ठगी कर पैसे पाने के लिए 40 फर्जी बैंक अकाउंट और लोगों को संपर्क करने के लिए 40 फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे.
शिंत्रे ने बताया कि आपके सर्टिफिकेट पर जो जानकारी है उसका इस्तेमाल कर सायबर क्रिमिनल फर्जी दरस्तावेज भी बना सकते हैं, जिसका इस्तेमाल कर वे बैंक अकाउंट खोल सकते हैं और सिमकार्ड खरीद सकते हैं.
इसी विषय पर लोगों को सतर्क करने के लिए सायबर पुलिस ने एडवाइजरी भी जारी की है. अंकुर पुराणिक सायबर एक्पर्ट ने बताया कि वैक्सीन के सर्टिफिकेट का दुरुपयोग हो सकता है. पुराणिक ने बताया कि कई बार पहली डोज़ मिलने के बाद सर्टिफिकेट मिलता है, जिसपर दूसरी डोज़ कब मिलेगी इसके बारे में बताया जाता है. अगर यह सर्टिफिकेट सायबर फ्रॉड के हाथ लगी तो वो आपको फोन कर तारीख बदल दी गयी या फिर बदलना पड़ेगा जैसे बातें कर आपको ठगने की भी कोशिश कर सकता है.
अगर आपको पोस्ट करने का इतना ही मन है तो आपको उसे ब्लर करके पोस्ट करना चाहिए ताकि उसकी डिटेल कोई पढ़ न सके और अगर वो पढ़ नही पायेगा तो उसका दुरुपयोग भी नहीं हो पायेगा.

 

राहत, टीके की अलग-अलग डोज ली हैं तो घबराने की जरूरत नहीं : संयुक्त सचिव

राहत, टीके की अलग-अलग डोज ली हैं तो घबराने की जरूरत नहीं : संयुक्त सचिव

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को देश में कोरोना की स्थिति को लेकर अहम जानकारी दी है। मंत्रालय ने प्रेस वार्ता में कहा कि 24 राज्यों ने पिछले सप्ताह से सक्रिय मामलों में गिरावट दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि पिछले 24 घंटों में देश में 2,11,000 मामले दर्ज किए गए हैं। सक्रिय मामले 8.84 फीसदी हैं। 10 मई को देश में 37,45,000 सक्रिय मामले थे जो अब 24,19,000 रह गए हैं। उन्होंने कहा कि 3 हफ्ते पहले 531 जिलों में रोज 100 नए मामले प्रतिदिन दर्ज किए जाते थे, अब ऐसे जिले 359 रह गए हैं। देश में आज 2,83,000 रिकवरी दर्ज की गई हैं। 23 राज्य देश में ऐसे हैं, जहां प्रतिदिन रिकवर मामलों की संख्या नए मामलों से ज्यादा है। रिकवरी रेट अब 90 फीसदी हो गई है।
पिछले 1 सप्ताह में प्रतिदिन 21,00,000 टेस्ट किए जा रहे हैं। पॉजिटिविटी रेट देश में 10.45 फीसदी रह गई है। केंद्र सरकार द्वारा अब तक 45 साल से अधिक आयु के 14.85 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज दी गई है। 18-44 साल के बीच के लोगों को अब तक 1.39 करोड़ डोज दी जा चुकी हैं।

टीके की दूसरी डोज देने पर सतर्क रहने की जरूरत
मंत्रालय ने कहा कि देश में कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रकोप में कमी आ रही है, हमारा मानना है कि पाबंदियों में सार्थक ढील देने पर भी यह परिपाटी बनी रहेगी। वहीं एक सवाल के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि अगर कोविड-टीके की दूसरी खुराक में अलग टीका दिया जाता है तो उसके उल्लेखनीय दुष्प्रभाव होने की आशंका नहीं है, इसमें घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
 

अनोखा मामला, कोरोना निगेटिव महिला ने दिया कोविड पॉजिटिव बच्ची को जन्म

अनोखा मामला, कोरोना निगेटिव महिला ने दिया कोविड पॉजिटिव बच्ची को जन्म

वाराणसी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कोरोना संक्रमण को अनोखा मामला सामने आया है. वाराणसी के बीएचयू के एसएस अस्पताल में कोरोना नेगेटिव महिला ने कोविड पॉजिटिव बच्ची को जन्म दिया है. इसको लेकर मेडिकल साइंस के विशेषज्ञ हैरान हैं. मिली जानकारी के अनुसार, चंदौली की महिला ने 25 मई को बीएचयू में बच्ची को ऑपरेशन से जन्म दिया है. मिली जानकारी के अनुसार, कोरोना टेस्ट में महिला की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी. पैदा होने के बाद बच्ची का कोविड टेस्ट पॉजिटिव आया है, इससे सभी हैरान हैं. फिलहाल महिला और कोरोना पॉजिटिव दोनों स्वस्थ हैं. अभी तक ऐसे कई मामले आए हैं जिसमें कोरोना पॉजिटिव महिला ने कोविड नेगेटिव बच्चे को जन्म दिया है. बीएचयू में अनोखा मामला है जिसमें कोरोना नेगेटिव महिला ने कोविड पॉजिटिव बच्ची को जन्म दिया. इस बारे में व्यवसायी अनिल प्रजापति ने कहा कि उनकी गर्भवती पत्नी सुप्रियो को 24 मई को अस्पताल में भर्ती कराया था. उसी दिन आरटीपीसीआर से कोरोना टेस्ट हुआ तो रिपोर्ट नेगेटिव आई. 25 मई को सुप्रिया ने बच्ची को जन्म दिया. अस्पताल में बच्ची का कोरोना टेस्ट किया गया तो कोरोना रिपोर्ट पाॅजिटिव आई. मुझे कुछ घबराहट महसूस हुई. फिलहाल मां और बच्चे दोनों स्वस्थ हैं. 

इस राज्य के राज्यपाल ने संपत्ति के नुकसान की वसूली विधेयक को मंजूरी दी, क्या है इस विधेयक में

इस राज्य के राज्यपाल ने संपत्ति के नुकसान की वसूली विधेयक को मंजूरी दी, क्या है इस विधेयक में

हरियाणा के राज्यपाल एस.एन. आर्य ने संपत्ति के नुकसान की वसूली विधेयक (Haryana Recovery of Damages to Property Bill) को मंजूरी दी। इस बिल (अब अधिनियम) के अनुसार, लोगों की दुकानों, घरों, सरकारी कार्यालयों, बसों, वाहनों और ऐसी अन्य सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई प्रदर्शनकारियों से की जाएगी। “लोक व्यवस्था में गड़बड़ी के दौरान संपत्ति के नुकसान की वसूली विधेयक, 2021” (Haryana Recovery of Damages to Property During Disturbance to Public Order Bill, 2021) मार्च 2021 में पारित किया गया था।

अधिनियम के प्रमुख प्रावधान
संपत्ति के नुकसान की वसूली उस व्यक्ति से की जाएगी जो सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी पैदा करता है।
यह अधिनियम पीड़ितों को मुआवजा भी सुनिश्चित करता है।
विरोध का नेतृत्व करने वाले और इसकी योजना बनाने में शामिल लोगों, नेताओं, आयोजकों आदि से भी वसूली की जाएगी।
क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा पारित निर्णय से व्यथित कोई भी व्यक्ति पंजाब और हरियाणा के उच्च न्यायालय में जा सकता है। मुआवजे से संबंधित प्रश्न पर विचार करने का अधिकार किसी भी सिविल कोर्ट के पास नहीं होगा।
सरकार का मत
हरियाणा सरकार ने यह कहते हुए अधिनियम को मंजूरी दी कि राज्य में किसी भी सरकारी या निजी संपत्ति की रक्षा करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

 

भूखी-प्यासी गर्भवती महिला को घी का लालच देकर किया गैंगरेप

भूखी-प्यासी गर्भवती महिला को घी का लालच देकर किया गैंगरेप

जयपुर, राजधानी जयपुर में महिला से गैंगरेप का सनसनीखेज मामला सामने आया है. मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़ित महिला आठ माह की गर्भवती थी. बताया जा रहा है कि भूखी-प्यासी पीड़िता ने बांगड़ हॉस्पिटल के बाहर एम्बुलेंसकर्मी से रोटी मांगी. उन्होंने महिला को घी का लालच दिया और इसके बाद एम्बुलेंसकर्मी पीड़िता को झांसा देकर झलाना जंगल में ले गया. जहां अपने साथी के साथ मिलकर गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया.
वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी पीड़िता को वापस एसएमएस हॉस्पिटल के बाहर उतारकर फरार हो गए. डीसीपी अभिजीत सिंह के मुताबिक, 24 मई की देर शाम पीड़ित महिला ने एसएमएस पुलिस चौकी पहुंचकर चौकी प्रभारी राजेन्द्र शर्मा को पूरी वारदात बताई. जिसके बाद चौकी प्रभारी ने मोती डूंगरी थानाधिकारी सुरेन्द्र पंचोली को वारदात की सूचना दी.
डीसीपी अभिजीत सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों को कानोता से गिरफ्तार कर लिया गया है. बता दें कि मंगलवार को पीड़िता का मेडिकल भी करवाया गया और आरोपियों के खिलाफ डीएनए सबूत जुटाने के लिए साक्ष्य जुटाए गए. साथ ही बुधवार को मजिस्ट्रेट के समक्ष भी पीड़िता का बयान दर्ज करवाया गया.
 

20 जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट, टापू बने ओडिशा-बंगाल के तटीय इलाके

20 जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट, टापू बने ओडिशा-बंगाल के तटीय इलाके

बालासोर/कोलकाता। यास के चलते मौसम विभाग ने बंगाल के 11 व ओडिशा के नौ जिलों के लिए अगले 24 घंटे में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है।
इनमें इनमें बंगाल के पुरुलिया, नादिया, मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्धमान, हावड़ा, झारग्राम, बांकुरा, दक्षिण व उत्तर 24 परगना, दार्जिलिंग और कालिमपोंग में बारिश भारी से बहुत भारी बारिश होगी। वहीं ओडिशा के बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपारा, जगतसिंहपुर, कटक, मयूरभंज, किओंझार और धेनकनाल में बारिश का अलर्ट जारी हुआ है।
ओडिशा विशेष राहत आयुक्त पीके जेना ने बताया कि राज्य के 36 ब्लॉक में 304 एममए तक बारिश दर्ज की गई। वहीं 37 ब्लॉक में 55-110 एमएम बारिश हुई। बीते 24 घंटे में भद्रक जिले के चांदबाली में अकेले 288.3 एमएम बारिश दर्ज की गई।
वहीं केंद्रपारा के राजकनिका में 255 एमएम बारिश हुई। जिसके कारण गांवों में पानी भर गया, स्थानीय प्रशासन पानी निकालने के लिए उचित कदम उठा रहा है। बारिश के कारण बुद्धबलांग नदी में जलस्तर खतरे के निशान से महज छह बिंदु नीचे तक पहुंच गया। खंभे टूटने से जगतसिंहपुर, केंद्रपारा और जाजपुर जिले में बिजली आपूर्ति ठप हुई हालांकि प्रशासन ने तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कर दिया।

सेना, नौसेना व एनडीआरएफ की टीमों ने कसी कमर
तूफान के बाद राहत कार्य के लिए सेना, नौसेना और एनडीआरएफ की टीमों ने कमर कस ली है। गांवों से पानी निकाला जा रहा है। टूटकर गिरे पेड़ों को हटाकर रास्ता खोलने का काम भी शुरू हो गया है।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि बंगाल में प्रशासन की मदद के लिए 17 कॉलम राहत सैनिकों को मोेर्चे पर लगाया है। इन सैनिकों ने दीघा में फंसे 32 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। बिजली के टूटे खंभों की मरम्मत का काम भी तेजी से चल रहा है ताकि प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल हो सके।

बंगाल के रिहायशी इलाकों में घुसा पानी, सेना ने संभाला मोर्चा
यास के कारण भारी बारिश के बीच समुद्र का पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया। हालात बिगड़ने पर सेना ने मोर्चा संभाला। पूर्व मेदिनीपुर के रामनगर इलाके में सेना के जवानों ने लोगों को बाहर निकाला।
यहां पेड़ टूटने से रास्ता बंद हो गया था और राहत कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। वहीं शंकरपुर इलाके का एक स्कूल समुद्र की लहरों में बह गया। समुद्र का पानी घुसने से पूरा इलाका टापू बन गया और गांव के ट्रैक्टर, कारें पानी में तैरते नजर आए।

 

पुलिस से एक यूजर ने ट्वीट कर पूछा- क्या मैं बाहर निकल सकता हूं? जवाब हुआ वायरल

पुलिस से एक यूजर ने ट्वीट कर पूछा- क्या मैं बाहर निकल सकता हूं? जवाब हुआ वायरल

मुंबई, लोग इन दिनों लॉकडाउन के चलते घरों में बंद हैं. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी कोरोना का कहर जारी है. वहां भी लॉक़डाउन लगा हुआ है. ऐसे में एक बड़ा ही मजेदार वाकया हुआ है. एक शख्स ने ट्विटर पर मुंबई पुलिस से रिक्वेस्ट की और फिर जो मुंबई पुलिस ने उसे जवाब दिया वो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
दरअसल मुंबई पुलिस इन दिनों माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर जलवे बिखेर रहा है. एक बार फिर ऐसा ही हुआ है. एक यूजर ने मुंबई पुलिस से ट्विटर पर पूछा “सर, मेरा नाम सनी है. क्या मैं बाहर जा सकता हूँ?" उसके ट्वीट पर मुंबई पुलिस ने बड़े ही मजेदार अंदाज में शख्स के नाम का इस्तेमाल करते हुए उसे घर में रहने की सलाह दी.

 

मुंबई पुलिस ने लिखा, '"सर, यदि आप वास्तव में सौर मंडल के केंद्र के वो तारा हैं, जिसके चारों ओर पृथ्वी और सौर मंडल के अन्य घटक घूमते हैं, तो हम आशा करते हैं कि आप उस जिम्मेदारी को महसूस करेंगे जो आप निभा रहे हैं. कृपया अपने आप को वायरस के संपर्क में लाकर इससे समझौता न करें." मुंबई पुलिस का ये जवाब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है. लोग मुंबई पुलिस के रिप्लाई की जमकर तारीफ कर रहे हैं.
 

12 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियों ने खराब मौसम और चक्रवात का सामना करते हुए पूर्वी राज्यों से 969 मीट्रिक टन एलएमओ के साथ देश को सहायता पहुंचाई

12 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियों ने खराब मौसम और चक्रवात का सामना करते हुए पूर्वी राज्यों से 969 मीट्रिक टन एलएमओ के साथ देश को सहायता पहुंचाई

भारतीय रेलवे सभी बाधाओं को पार करते हुए तथा नए समाधान निकाल कर देश के विभिन्न राज्यों में तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाना जारी रखे हुए है। भारतीय रेलवे द्वारा अभी तक देश के विभिन्न राज्यों में 1080 से अधिक टैंकरों में 17,945 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाई गई है।

ज्ञात हो कि लगभग 272 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियों ने अब तक अपनी यात्राएं पूरी कर ली हैं और विभिन्न राज्यों को सहायता पहुंचाई है।

सहायता पहुंचाने का काम कल देर तक जारी रहा और 969 एमटी तरल मेडिकल ऑक्सीजन के साथ 12 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियां पूर्वी राज्यों से खराब मौसम और चक्रवात का सामना करती हुई चलीं।

इन 12 ऑक्सीजन एक्सप्रेस में तमिलनाडु के लिए 3 ट्रेनें, आंध्र प्रदेश के लिए 4 और दिल्ली क्षेत्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम और केरल के लिए 1-1 ट्रेन शामिल हैं।

दक्षिणी राज्यों में तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना प्रत्येक में एलएमओ की डिलीवरी 1000 एमटी को पार गई।

झारखंड ने पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस की अगवानी की और यह रेल से ऑक्सीजन प्राप्त करने वाला देश का 15वां राज्य बन गया ।

भारतीय रेलवे का यह प्रयास रहा है कि ऑक्सीजन का अनुरोध करने वाले राज्यों को कम से कम संभव समय में अधिक से अधिक संभव ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा 15 राज्यों- उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और असम को ऑक्सीजन सहायता पहुंचाई गई है।

अब तक महाराष्ट्र में 614 एमटी ऑक्सीजन, उत्तर प्रदेश में लगभग 3731, मध्य प्रदेश में 633 एमटी, दिल्ली में 4910 एमटी, हरियाणा में 1911 एमटी, राजस्थान में 98 एमटी, कर्नाटक में 1653 एमटी , उत्तराखंड में 320 एमटी, तमिलनाडु में 1158 एमटी, आंध्र प्रदेश में 929 एमटी, पंजाब में 225 एमटी, केरल में 246 एमटी, तेलंगाना में 1312 एमटी, झारखंड में 38 एमटी और असम में 160 एमटी ऑक्सीजन पहुंचाई गई है।

रेलवे ने ऑक्सीजन सप्लाई स्थानों के साथ विभिन्न मार्गों की मैपिंग की है और राज्यों की बढ़ती हुई आवश्यकता के अनुसार अपने को तैयार कर ऱखा है। भारतीय रेलवे को एलएमओ लाने के लिए टैंकर राज्य प्रदान करते हैं।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने 32 दिन पहले 24 अप्रैल को महाराष्ट्र में 126 एमटी तरल मेडिकल ऑक्सीजन डिलीवर करने के साथ अपना काम शुरू किया था।

पूरे देश से जटिल परिचालन मार्ग नियोजन परिदृश्य में भारतीय रेलवे ने पश्चिम में हापा, बड़ौदा, मुंद्रा, पूर्व में राउरकेला, दुर्गापुर, टाटा नगर, अंगुल से ऑक्सीजन लेकर उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश तथा असम को ऑक्सीजन की डिलीवरी की है।

ऑक्सीजन सहायता तेज गति से पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ऑक्सीजन एक्सप्रेस माल गाड़ी चलाने में नए और बेमिसाल मानक स्थापित कर रहा है। लंबी दूरी के अधिकतर मामलों में माल गाड़ी की औसत गति 55 किलोमीटर से अधिक रही है। उच्च प्रथमिकता के ग्रीन कॉरिडोर में आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मंडलों के परिचालन दल अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं ताकि तेज संभव समय में ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। विभिन्न सेक्शनों में कर्मियों के बदलाव के लिए तकनीकी ठहराव (स्टॉपेज) को घटाकर 1 मिनट कर दिया गया है।

रेल मार्गों को खुला रखा गया है और उच्च सतर्कता बरती जा रही है ताकि ऑक्सीजन एक्सप्रेस समय पर पहुंच सकें।

यह सभी काम इस तरह किया जा रहा है कि अन्य माल ढ़ुलाई परिचालन में कमी नहीं आए।

नई ऑक्सीजन लेकर जाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य है और आंकड़े हर समय बदलते रहते हैं। देर रात ऑक्सीजन से भरी और अधिक ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियां यात्रा प्रारंभ करेंगी।

 

सेक्स रैकेट : जिले के इस क्षेत्र से पुलिस ने 4 शादीशुदा महिलाओं को युवक के साथ रंगरलियाँ मनाते किया गिरफ्तार

सेक्स रैकेट : जिले के इस क्षेत्र से पुलिस ने 4 शादीशुदा महिलाओं को युवक के साथ रंगरलियाँ मनाते किया गिरफ्तार

गुमला | झारखण्ड के गुमला जिले से देह व्यापार की एक बड़ी खबर सामने आ रही है | खबर मिली है कि गुमला जिले में सेक्स रैकेट गिरोह में शामिल चार महिलाओं को पुलिस ने एक युवक के साथ आपत्तिजनक स्थिति में गिरफ्तार किया है |


जानकारी के अनुसार, पुलिस को मुखबिर से सुचना प्राप्त हुई कि बेहराटोली स्थित एक मेडिकल हॉल के समीप एक किराये के मकान में चार महिलाएं रहती हैं, जो सेक्स रैकेट चलाती हैं | 


सूचना के आधार पर स्वयं थानेदार मनोज कुमार के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया | सभी लोगों ने घर में धावा बोला | उस समय मकान के अंदर एक युवक मौजूद था, जो आपत्तिजनक स्थिति में था |


पुलिस सभी लोगों को पकड़ कर थाना ले आयी है | युवक ने अपना नाम प्रकाश साहू बताया है जो बसिया प्रखंड के बनई गांव का रहने वाला है |
थाने में महिलाओं से पूछताछ की जा रही है | थानेदार ने बताया कि सभी महिलाएं शादी-शुदा हैं | चंद पैसो के लिए जिस्म के धंधे में शामिल हुई हैं |
उन्होंने बताया कि महिलाएं क्रमशः घाघरा, आंजन, खोरा व सिसई की रहने वाली हैं | फिलहाल घर मालिक को बुलाकर पुछताछ की जाएगी | उसके बाद कार्रवाई की जाएगी |

बड़ी खबर : प्रदेश के इस जिले में स्वास्थ्य कर्मियों ने 20 लोगों को लगा दिए कोविड वैक्सीन का कॉकटेल, लोग आये दहशत में

बड़ी खबर : प्रदेश के इस जिले में स्वास्थ्य कर्मियों ने 20 लोगों को लगा दिए कोविड वैक्सीन का कॉकटेल, लोग आये दहशत में

सिद्धार्थनगर | उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर जिले से कोविड वैक्सीनेशन को ले कर एक बड़ी खबर सामने आइ है | खबर मिली है कि  यूपी के सिद्धार्थनगर जिले में चल रहे कोविड वैक्सीनेशन के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने बड़ी लापरवाही बरती है | जानकारी मिली है कि यहां कुछ लोगो को पहली डोज कोविशील्ड की तो दूसरी डोज कोवैक्सीन की लगा दी गई है | वैक्सीन का कॉकटेल लेने वाले लोगों में दहशत है | हालांकि अभी किसी की तबीयत खराब होने का मामला सामने नहीं आया है |

 

 

पूरा मामला जिले की बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्र का है | जहां औदही कलां गांव व एक अन्य गांव में लगभग 20 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज कोविशील्ड की लगाई गई, लेकिन 14 मई को दूसरी डोज लगाते समय स्वास्थ्यकर्मियों की बड़ी लापरवाही देखने को मिली | स्वास्थ्यकर्मियों ने दूसरी डोज कोवैक्सिन की लगा दी | इस बात की जानकारी होते ही विभाग में हड़कंप मच गया | सब एक दूसरे पर इस गलती का आरोप लगाने लगे | वहीं इस बात की जानकारी जब वैक्सीन लगवा चुके लोगों को हुई तो वह भी भयभीत हो गए |  हालांकि कॉकटेल वैक्सीन लगने के बाद भी किसी को कोई स्वास्थ्य संबंधित समस्या नहीं हुई है, लेकिन सभी लोग डरे सहमे हुए हैं |

अधिकारी ने कहा ये :-
सीएमओ संदीप चौधरी ने स्वीकार किया कि लगभग 20 लोगो को स्वास्थ्यकर्मियों ने लापरवाही बरतते हुए कॉकटेल वैक्सीन लगा दी है | उन्होंने बताया कि हमारी टीम इन सभी लोगों पर नजर बनाये हुए हैं | अभी तक किसी व्यक्ति में कोई समस्या नहीं देखने को मिली है | इस गंभीर लापरवाही के लिए हमने जांच टीम बना दी है | रिपोर्ट आते ही जो भी दोषी कर्मचारी होंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी |

उल्टा पड़ गया बाबा रामदेव का दाव, IMA करेगा 1,000 करोड़ की मानहानि का केस, पढ़े ये खबर

उल्टा पड़ गया बाबा रामदेव का दाव, IMA करेगा 1,000 करोड़ की मानहानि का केस, पढ़े ये खबर

ऐलोपैथी को लेकर दिए गए बयान से नाराज आईएमए की उत्तराखंड यूनिट ने बाबा रामदेव को मानहानि का नोटिस भेजा है। 15 दिन के भीतर क्षमा न मांगने व बयान को सोशल मीडिया प्लेटफार्म से न हटाने पर बाबा के खिलाफ एक हजार करोड़ की मानहानि का दावा ठोकने की चेतावनी दी गई है। आईएमए उत्तराखंड के प्रदेश सचिव डॉ अजय खन्ना की ओर से मंगलवार को बाबा रामदेव को छह पेज का नोटिस भेजा गया। इस नोटिस में उन्होंने कहा कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बाबा के बयान से आईएमए उत्तराखंड से जुड़े दो हजार सदस्यों की मानहानि हुई है। उन्होंने कहा कि एक सदस्य (डॉक्टर) की पचास लाख की मानहानि के अनुसार कुल एक हजार करोड़ की मानहानि का दावा किया जाएगा।


नोटिस में कहा गया है कि बाबा रामदेव ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए ऐलोपैथी डॉक्टरों की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है। ऐसे में उनके खिलाफ मानहानि के दावे के साथ साथ एफआईआर भी कराई जाएगी। इसके साथ ही नोटिस में बाबा रामदेव को नोटिस मिलने के 76 घंटे के अंदर दिव्य श्वासारि कोरोनिल किट के भ्रामक विज्ञापन को भी सभी प्लेटफार्म से हटाने को कहा गया है। डॉ खन्ना ने कहा है कि बाबा ने भ्रामक विज्ञापन के जरिए कोरोनिल को कोरोना संक्रमण के विरुद्ध प्रभावि दवाई व कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभावों से बचाने वाली दवाई बताया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी बाबा के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
आईएम की उत्तराखंड यूनिट के सचिव डॉ अजय खन्ना ने बताया कि बाबा रामदेव के वायरल ऐलोपैथी के खिलाफ वायरल वीडियो के मामले में नोटिस भेजा गया है। 15 दिन के भीतर यदि क्षमा नहीं मांगी जाती और वीडियो सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से नहीं हटाए जाते तो एक हजार करोड़ की मानहानि का दावा ठोका जाएगा। इसके अलावा कोरोनिल के भ्रामक विज्ञापन को नहीं हटाया गया तो मकदमा दर्ज कराया जाएगा। जल्द मुख्यमंत्री से मिलकर भी बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की जाएगी।
 

किसान आंदोलन के 6 महीने पूरे, आज मना रहे हैं काला दिवस

किसान आंदोलन के 6 महीने पूरे, आज मना रहे हैं काला दिवस

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में बीते साल शुरू हुए आंदोलन को आज यानि 26 मई को छह महीने पूरे हो गए हैं। इस मौके पर किसान संगठनों ने घोषणा की है कि वे आज 'काला दिवस' मनाएंगे। किसान संगठनों ने अपील की है कि कृषि कानूनों के विरोध में लोग आज अपने घरों, वाहनों, दुकानों पर काला झंडा लगाएं।
किसान मोर्चा की ओर से किए गए इस आह्वान को कांग्रेस समेत 14 प्रमुख विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दिया है। लगभग 30 किसानों के संघ, संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदर्शन भी करने का फैसला किया है, हालांकि दिल्ली पुलिस ने कहा कि विरोध या रैली के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है और प्रदर्शनकारियों से कानून और व्यवस्था बनाए रखने और कोविड नियमों का पालन करने की अपील की है।

 

चक्रवात YASS का भारत में असर जारी, क्या है 'य़ास' का अर्थ और कैसे पड़ता है तूफानों का नाम-जानें

चक्रवात YASS का भारत में असर जारी, क्या है 'य़ास' का अर्थ और कैसे पड़ता है तूफानों का नाम-जानें

ताउते के बाद अब देश में 'यास' तूफान ने दस्तक दे दी है. मौसम विभाग 'यास' तूफान की स्थिति पर नजर बनाए हुए है. मौसम विज्ञानी 'यास' को भी बेहद खतरनाक तूफान मान रहे हैं. इस चक्रवाती तूफान का असर अंडमान निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा और पश्चिम बंगाल पर होगा. इसका असर बिहार पर भी पड़ेगा. इस तूफान को देश में 2019 में आए तूफान अम्फान की तरह बताया जा रहा है. इस दौरान हवाओं की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. आइये जानते है कि आखिर 'यास' नाम का मतलब क्या है और तूफान का नाम कैसे पड़ता है.


यास का अर्थ होता है 'निराशा'

दुनिया में शुरुआत से ही तूफानों के नामकरण का चलन चल रहा है. 'यास' एक अरेबिक शब्द है जिसका अर्थ है 'निराशा'. ओमान देश ने इस तूफान को ये नाम दिया है. दरअसल ये तूफान ओमान की तरफ से आया है. इससे बंगाल और ओडिशा में भारी बारिश की आशंका है.


कैसे होता है तूफानों का नामकरण

चक्रवातों के नामकरण की शुरूआत अटलांटिक क्षेत्र में 1953 में हुई एक संधि से की गई थी. जबकि हिंद महासागर क्षेत्र में यह व्यवस्था साल 2004 से शुरू हुई. किसी भी साइक्लोन के नामकरण के लिए सदस्य देश अपनी ओर से नामों की सूची देते हैं. इसके बाद उनकी अल्फाबेटिकल लिस्टिंग की जाती है. उसी क्रम में सुझाए गए नाम पर तूफानी चक्रवातों का नामकरण किया जाता है. हर बार अलग-अलग देशों का क्रम से नंबर आता है और इसी क्रम में जिस देश ने जो नाम दिया चक्रवात का नाम उसी देश के द्वारा दिए गए नाम पर पड़ जाता है.


WMO/संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग एशिया और प्रशांत (WMO/ESCAP) पैनल ऑन ट्रॉपिकल साइक्लोन (PTC) में 13 देशों के सदस्य हैं. हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की पहल पर 8 देशों ने तूफानों का नामकरण शुरू किया. इन 8 देशों में पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान और शाईलैंड शामिल थे. बाद में साल 2018 में इसमें यूएई, ईरान, कतर और यमन आदि देश भी जुड़ गए.  

पति की दूसरी शादी के दौरान मंडप में पहुंचकर पहली पत्नी ने किया हंगामा, पढ़ें पूरा मामला

पति की दूसरी शादी के दौरान मंडप में पहुंचकर पहली पत्नी ने किया हंगामा, पढ़ें पूरा मामला

पीलीभीत, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में एक शख्स की दूसरी शादी के दौरान उसकी पहली पत्नी पुलिस को लेकर विवाह मंडप में पहुंच गई और उसने जमकर हंगामा किया. पुलिस और मारपीट देखकर पंडाल में भगदड़ मच गई. पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस दूल्हे को थाने ले आई, फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है.

ससुराल पक्ष के लोगों पर दर्ज कराया मुकदमा
पूरनपुर कोतवाली प्रभारी हरीश बर्धन के अनुसार बरेली जिले की सुमन देवी ने पुलिस को दी तहरीर देकर बताया है कि 28 नवंबर 2012 को उसकी शादी शाहजहांपुर के आशीष वर्मा के साथ हुई थी. सुमन देवी के अनुसार शादी के कुछ महीने बाद पति और अन्य ससुराली कम दहेज लाने को लेकर उसे ताना मारने लगे और रुपए की मांग करने लगे. जिसपर उसने ससुराल पक्ष के लोगों पर एक मुकदमा दर्ज कराया. ये मामला न्यायालय में विचाराधीन है.

पुलिस को दी जानकारी
हरीश बर्धन ने बताया कि इसी बीच पीड़िता को जानकारी लगी कि सोमवार को उसका पति पूरनपुर क्षेत्र के मंगलम बरात घर में, पीलीभीत जिले की किसी लड़की से शादी कर रहा है. पूरे मामले की जानकारी देते हुए वो पुलिस को लेकर शादी मंडप में पहुंच गई. पुलिस की दी तहरीर में पीड़िता का कहना था कि उसके पति से अब तक ना तो कोई तलाक हुआ है, और ना ही किसी प्रकार का कोई समझौता हुआ है. उसकी ओर से दर्ज कराया गया मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है, इस पर निर्णय आना अभी बाकी है, ऐसे में नियम विरुद्ध जाकर उसका पति दूसरी शादी कर रहा था.  

बड़ी खबर: अब पानी में मिला कोरोना वायरस, तीन जगह से लिए गए नमूने, पीजीआई में हुई जांच

बड़ी खबर: अब पानी में मिला कोरोना वायरस, तीन जगह से लिए गए नमूने, पीजीआई में हुई जांच

इंसानों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बाद लखनऊ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लखनऊ के पानी में कोरोना संक्रमण मिलने की खबर ने लोगों की नींद उड़ा दी है। गोमती नदी में गिर रहे खदरा स्थित नाले में कोरोना वायरस मिला है। मुंबई के बाद लखनऊ के सीवर में कोरोना वायरस मिलने का यह पहला मामला है। यहां के कुछ नाले सीधे गोमती नदी में मिले हैं, तो कुछ का पानी ट्रीटमेंट प्लांट में शोधन के बाद नदी में छोड़ा जाता है। इस पानी का इस्तेमाल पीने में भी किया जाता है। इससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है। पीजीआई माइक्रोबायोलॉजी विभाग में सीवर के पानी की जांच हुई है।
गोमती में गिरने वाले सीवर के पानी में कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) व वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ ) ने शोध शुरू किया है। इसमें देशभर के अलग-अलग शहरों से सीवर के पानी का नमूना जुटाकर जांच की जा रही है। पीजीआई माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. उज्ज्वला घोषाल के मुताबिक देश में कुल आठ सेंटर बनाए गए हैं। इसमें लखनऊ पीजीआई भी शामिल है।
डॉ. उज्ज्वला घोषाल के मुताबिक डब्ल्यूएचओ की टीम ने पहले चरण के तहत तीन स्थानों के नालों से सीवर के पानी का नमूना लिया है। इसमें रुपपुर खदरा, घंटाघर और मछली मोहाल के नाले के पानी का नमूना लिया गया। यहां पूरे इलाकों का सीवर एक जगह गिरता है और वह सीधे गोमती नदी में मिलता है। टीम ने नमूने माइक्रोबायोलॉजी विभाग में दिए। डॉ. घोषाल के मुताबिक 19 मई को जांच रिपोर्ट आई जिसमें खदरा से लिए गए सीवर के पानी के नमूने में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। घंटाघर और मछली मोहाल के नमूनों में वायरस नहीं मिले हैं। रिपोर्ट तैयार कर आईसीएमआर को भेज दिया गया है। संस्था इसे शासन से साझा करेगी।
संक्रमितों के मल से पानी में पहुंचा वायरस
लखनऊ के ज्यादातर इलाकों के करीब डेढ़ लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। डॉ. उज्ज्वला घोषाल के मुताबिक कोरोना संक्रमित तमाम मरीज होम आइसोलेशन में हैं। ऐसे में उनका मल सीवर में आ रहा है। 40 से 50 फीसदी मरीजों के मल में भी वायरस पहुंच जाता है। इसी कारण सीवर में वायरस मिलने का मामला सामने आया है।

 Hindustan News

खोजी कुत्ते (Sniffer dogs) SARS-CoV2 का पता लगाकर कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने में मदद कर सकते हैं, जानिए क्या कहता है अध्ययन

खोजी कुत्ते (Sniffer dogs) SARS-CoV2 का पता लगाकर कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने में मदद कर सकते हैं, जानिए क्या कहता है अध्ययन

एक अध्ययन के अनुसार, खोजी कुत्ते (Sniffer dogs) SARS-CoV2 का पता लगाकर कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने में मदद कर सकते हैं। अध्ययन में यह पाया गया कि खोजी कुत्ते वायरस का पता लगाने में 88 प्रतिशत सटीक हो सकते हैं। अध्ययन लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन (London School of Hygiene & Tropical Medicine) और डरहम विश्वविद्यालय (Durham University) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया था। उनका मानना ​​है कि कुत्ते की जांच और स्वाब परीक्षण से 91 प्रतिशत संक्रमण का पता चल सकता है।

कुत्ते कुछ एक सेकंड में ही वायरस का पता लगा सकते हैं। पारंपरिक COVID परीक्षणों के परिणाम देने के लिए 15 मिनट लगते हैं। इस तरह आधे घंटे में कुत्ते एक साथ 300 लोगों की स्क्रीनिंग कर सकते हैं।
इस प्रकार, बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग के लिए सूंघना परीक्षण (sniff test) एक उपयुक्त तरीका हो सकता है।
कुत्तों ने वायरस की पहचान कैसे की?
मनुष्यों में कोरोनावायरस का पता लगाने वाले विशेषज्ञ चिकित्सा खोजी कुत्तों पर कैनाइन स्क्रीनिंग परीक्षण 2020 में शुरू हुआ। परीक्षण के दौरान, छह कुत्तों को COVID-19 वाले लोगों द्वारा उत्पादित गंध को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया गया था जो मानव नाक के लिए अवांछनीय थी। इस गंध को पहचानने के लिए कुत्तों को पहने हुए मोजे, फेस मास्क और टी-शर्ट दिए गए।

क्या कुत्ते विश्वसनीय बायोसेंसर हैं?
नकारात्मक समूह के लोग, जिनमे सामान्य सर्दी के वायरस थे, उन्हें भी परीक्षण का हिस्सा बनाया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कुत्ते अन्य श्वसन संक्रमणों से COVID को अलग करने में सक्षम थे। कुत्तों ने आसानी से इस बीमारी का पता लगाया, भले ही यह विभिन्न वैरिएंट के कारण हुई हो।

 

पत्नी से झगड़े के बाद हैवान बने पति ने अपने ही दूध मुंहे बेटे को

पत्नी से झगड़े के बाद हैवान बने पति ने अपने ही दूध मुंहे बेटे को

जोधपुर. सूर्यनगरी जोधपुर से दिल को दहला देने वाली खबर सामने आई है. यहां पत्नी से झगड़े के बाद हैवान बने पति ने अपने ही दूध मुंहे बेटे की पटक पटककर हत्या कर दी. वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया. पत्नी ने पति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है. वारदात जोधपुर शहर के महामंदिर थाना इलाके में स्थित बीजेएस नट बस्ती में हुई.

महामंदिर थानाधिकारी लेखराज सियाग ने बताया कि नट बस्ती निवासी महेंद्र नट की पत्नी तीन महीने बाद सोमवार को अपने पीहर से लौटी थी. ससुराल आते ही उसका पति से झगड़ा हो गया. इसके बाद झगड़ा इतना बढ़ गया कि गुस्से में पति ने नरेन्द्र नट ने अपने दूध मुंहे बेटे रितिक की जमीन पर पटक पटककर उसकी हत्या कर दी और फरार हो गया.

पत्नी शिकायत करने पहुंची तो पीछे से हैवान बना पति

पुलिस ने बताया कि महेंद्र की पांच साल पहले रहीसा की शादी हुई थी. उसके एक बेटा पहले से है. पति और पत्नी के बीच 3 बरस से परिवारिक विवाद चल रहा है. महेंद्र की पत्नी रहीसा तीन महीने बाद सोमवार को पीहर से ससुराल पहुंची. यहां आते ही महेंद्र ने पत्नी रहीसा से झगड़ा शुरू कर दिया. बाद में बात मारपीट तक जा पहुंची. इस पर रहीसा पास में ही रहने वाले सास और ससुर से महेंद्र की शिकायत करने चली गई. पीछे से महेंद्र ने 5 महीने के बेटे रितिक की तीन चार बार जमीन पर देकर मारा. बाद में बेटे को लहुलुहान हालत में वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गया.


पत्नी घर पहुंची तो बेटा तड़प रहा था

पत्नी रहीसा जब वापस घर आई तो बेटा रितिक जमीन पर पड़ा तड़प रहा था. वह उसे अस्पताल लेकर गई, लेकिन तब तक रितिक की मौत हो गई. रहीसा ने अपने पति महेंद्र के खिलाफ बेटे की हत्या का मामला दर्ज कराया है. पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है.