नई दिल्ली, कोरोना वायरस महामारी रोकने के लिए देश में 23 मार्च से लॉक डाउन जारी है। इस वजह से अर्थव्यवस्था का हाल बेहाल है। कंपनियां, कल-कारखाने सभी बंद हैं। ऐसे में लाखों कामगारों के समक्ष नौकरी का संकट खड़ा हो गया है। इस स्थिति में ESIC की अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना आपका बड़ा सहारा बन सकती है।
यह सरकार की एक ऐसी स्कीम है, जिससे आपको 2 साल तक सैलरी मिलती रहेगी। भले ही यह सैलरी कम हो, लेकिन इससे संकट की घड़ी में आप अपना परिवार तो चला ही सकते हैं। यह योजना मोदी सरकार द्वारा 1 जुलाई 2018 में 2 साल के लिए लागू की गई थी।
ईएसआईसी (ESIC) ने इस बारे में एक ट्वीट किया है। ट्वीट में कहा गया है, ‘अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना' के तहत आपकी नौकरी जाने पर सरकार आपको आर्थिक मदद देती है। किसी वजह से आपका रोजगार छूट जाने का मतलब आपकी आमदनी का नुकसान होना नहीं है।‘
किसे मिल सकता है योजना का फायदा: बीमाकृत व्यक्ति के बेरोजगार होने की स्थिति में और नए रोजगार की तलाश के दौरान नकद राहत राशि का सीधे बैंक खाते में भुगतान। इसके लिए बेरोजगारी के पूर्व 2 वर्षों में प्रत्येक अंशदान अवधि में कम से कम 78 दिन अंशदान किया गया है। राहत राशि प्रतिदिन औसत आय के 25 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगी।
अगर किसी भी व्यक्ति को गलत आचरण की वजह से बाहर निकाला जाता है तो उसको फायदा नहीं मिलेगा। अगर आप स्वेच्छा से रिटायरमेंट लेते हैं तो आपको इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इस योजना का फायदा आप सिर्फ एक बार ही उठा सकते हैं।
कैसे भरें ऑनलाइन फॉर्म :
अगर आप भी इस योजना का फायदा लेना चाहते हैं तो आपको ESIC की अटल बीमित व्य।क्ति कल्याभण योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा। आप ESIC की वेबसाइट पर जाकर अटल बीमित व्ययक्ति कल्यािण योजना का फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। फॉर्म 5 ए के साथ ही आपकी बैंक डिटेल भी दी गई है। अगर यह जानकारी सही है तो एग्री पर क्लिक कर सबमिट का बटन दबाएं।
अगर इस फॉर्म में बैंक डिटेल के साथ आवश्य्क जानकारी नही है तो आप दूसरा 5 ए फॉर्म डाउनलोड कर भर सकते हैं। इसके बाद फिर होम पेज पर जाएं और PMGKY रेमबर्समेंट रजिस्ट्रेशन पर क्लिक करें। इस्टेब्लिशमेंट का कॉलम भरें और एग्री पर क्लिक कर फॉर्म सब्मिट कर दें।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने नियक्ताओं से उन कर्मचारियों का वेतन नहीं काटने की अपील की है जो कोरोना महामारी और सोशल डिस्टेंसिंग के चलते काम पर नहीं जा पा रहे हैं। साथ ही ESIC लाभार्थियों को आयुष्मातन भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज भी मिलेगा।
नई दिल्ली | बैंकों के कर्ज सस्ता करने की सूची में एक और सरकारी बैंक शामिल हो गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स आधारित लेंडिंग रेट में सभी अवधि या टेनर्स के लिए 5-15 (0.05 प्रतिशत-0.15 प्रतिशत) बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। यह परिवर्तन 11 मई 2020 से प्रभावी होगा। बैंक से मिली जानकारी के अनुसार इसने ओवरनाइट एमसीएलआर को 15 बेसिस पॉइंट्स से घटाकर 7.15 प्रतिशत, 1 महीने की एमसीएलआर को 10 बेसिस पॉइंट्स से घटाकर 7.25 प्रतिशत, 3 महीने और 6 महीने के एमसीएलआर को 5 बेसिस पॉइंट्स से घटाकर 7.40 प्रतिशत और 7.55 प्रतिशत कर दिया है। बैंक ने एक साल की एमसीएलआर 7.75 प्रतिशत से घटाकर 7.70 प्रतिशत कर दिया है।
मुंबई | कोरोना वायरस महामारी के कारण तमाम एयरलाइंस कंपनियों के उड़ानों पर रोक के बीच देश की सबसे बड़ी विमानन सेवा प्रदाता कंपनी इंडिगो एयरलाइन ने मई में सैलरी में कटौती के अलावा, जुलाई तक लीव विदआउट पे का ऐलान किया है। एयरलाइन के इस फैसले से कर्मचारियों को करारा झटका लगा है।
नई दिल्ली | सार्वजनिक क्षेत्र के देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने एमसीएलआर आधारित लोन की ब्याज दरों में 15 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। ब्याज दरों में कटौती हर अवधि के लोन पर की गई है। इस कटौती के बाद एक साल की लोन अवधि पर ब्याज दर 7.40 फीसदी से घटकर 7.25 फीसदी हो गई। नई ब्याज दर 10 मई से लागू होगी। बैंक ने कहा कि यह लगातार 12वीं बार है जब ब्याज दरों में कटौती की गई है।
नई दिल्ली | कोरोना वायरस की मार देश के हर सेक्टर को झेलनी पड़ रही है। बैंकिंग सेक्टर भी इस महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके चलते प्राइवेट सेक्टर के बैंक कोटक महिंद्रा बैंक ने कर्मचारियों के सैलरी पैकेज में 10 फीसद कटौती की घोषणा की है। इसके तहत सालाना 25 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाले कर्मचारियों की सीटीसी में 10 फीसदी की कटौती की जाएगी।
बताया जाता है कि इसके लिए बैंक की तरफ से सभी कर्मचारियों को भेजी एक आंतरिक ईमेल में कहा गया है कि हमने मई 2020 से 25 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक वेतन वाले सभी कर्मचारियों के लिए सीटीसी में 10 प्रतिशत की कटौती का फैसला किया है। सालाना 25 लाख रुपये से कम आय वाले कर्मचारी प्रभावित नहीं होंगे।
सुत्रों के मुताबिक, बैंक ने ये फैसला कोरोना से बिजनेस प्रभावित होने के चलते लिया है। ई-मेल में कहा गया है कि कोविड-19 हमारी अर्थव्यवस्था पर भी कहर ढा रहा है, जो हमारे जैसे वित्तीय सर्विसेज कंपनियों को प्रभावित करेगा। इसलिए, हमें अपने बिजनेस को बचाने के लिए हमारी लागतों और परिचालनों को फिर से रिकैलिब्रेट करना होगा। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हमारे सहकर्मी सुरक्षित हों और उनकी नौकरियों की सुरक्षा के लिए पूरी कोशिश करें।
संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र की ताजा व्यापार रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था इस साल मंदी में चली जाएगी, जबकि भारत और चीन इसके अपवाद हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान खरबों डॉलर का नुकसान होगा और विकासशील देशों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
रिपोर्ट में हालांकि इस बात की विस्तार से व्याख्या नहीं की गई है कि भारत और चीन अपवाद क्यों और कैसे होंगे?
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि कोविड-19 संकट के चलते विकासशील देशों में रह रहे दुनिया के करीब दो-तिहाई लोग अभूतपूर्व आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और साथ ही इन देशों की मदद के लिए 2,500 अरब डॉलर के राहत पैकेज की सिफारिश भी की गई है।
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (अंकटाड) के एक ताजा विश्लेषण में कहा गया है कि दुनिया की दो-तिहाई आबादी प्रभावित होगी और अगले 2 वर्षों के दौरान विकासशील देशों में करीब 2,000 से 3,000 अरब डॉलर के बीच विदेशों से आने वाला निवेश प्रभावित हो सकता है।
अंकटाड ने कहा कि हाल में विकसित अर्थव्यवस्थाओं और चीन ने भारी-भरकम सरकारी पैकेज की घोषणा की है। जी-20 के मुताबिक उनकी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए यह पैकेज कुल 5,000 अरब डॉलर का होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक अभूतपूर्व संकट है जिसके लिए अभूतपूर्व फैसले करने हैं।
अंकटाड ने कहा है कि इन राहत उपायों के बावजूद विश्व अर्थव्यवस्था इस साल मंदी के दौर में चली जाएगी और इससे अरबों-खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश का नुकसान होगा, जो विकासशील देशों के लिए गंभीर मुसीबत बन जाएगा।
नईदिल्ली, देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) के बढ़ते हुए प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के कारण चूजों के उत्पादन के लगभग बंद होने से पोल्ट्री उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है। इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए यातायात के साधनों पर लगाई गई रोक के कारण अधिकांश स्थानों पर हैचिंग का काम रोक दिया गया है और अंडों के भंडारण पर जोर दिया जा रहा है। इतना ही नहीं सरकारी संस्थानों में किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी रोक दिया गया है।
कोरोना के मद्देनजर यातायात के साधनों पर रोक लगाए जाने से न केवल लोगों का आना-जाना बाधित हुआ है बल्कि मुर्गी दाना, दवा ,विटामिन्स , खनिज और बिक्री के लिए तैयार मुर्गियों का परिवहन भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रामेश्वर सिंह ने पोल्ट्री उद्योग के संकट के बारे में पूछे जाने पर बताया कि विकट परिस्थिति के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है जिसका लंबे दौर में किसानों की आर्थिक स्थिति पर व्यापक असर होगा।
डॉक्टर सिंह ने बताया कि चूजा उत्पादन बंद होने से व्यावसायिक पैमाने पर पोल्ट्री उद्योग बुरी तरह से प्रभावित होगा और अंतत: इसका असर किसानों की अर्थव्यवस्था पर होगा। देश में करीब 10 लाख किसान पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े हुए हैं जिनमें से 60 प्रतिशत किसान 10 हजार से कम पक्षियों को पालते हैं। देश के सकल घरेलू उत्पाद में पोल्ट्री उद्योग का योगदान 1.2 लाख करोड़ रुपए सालाना है। देश भर में पूरे पोल्ट्री व्यवसाय चेन से करीब दस करोड़ लोग जुड़े हुए हैं।
पिछले दिनों कोरोना वायरस को लेकर फैलाई गयी अफ़वाह के कारण चिकन की थोक कीमत धराशाई हो गयी थीं और लोग 15 रुपए किलो भी लेने को तैयार नहीं हो रहे थे। देश में सरकारी क्षेत्र में बेगलुरु , हैदराबाद , चंडीगढ़ ,बरेली , इज्जतनगर और कृषि विश्वविद्यालयों में बड़े पैमाने पर चूजों को तैयार किया जाता है और यहां किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। दक्षिण भारत में निजी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चूजे तैयार किए जाते हैं और इसे किसानों को उपलब्ध कराया जाता है।
डॉक्टर सिंह ने बताया कि देश में पोल्ट्री प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन सुविधाओं का अभाव है। यह सुविधा होने पर बड़े पैमाने पर चिकन और अंडों का प्रसंस्करण किया जा सकता था। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अनुसार केवल छह प्रतिशत पोल्ट्री का ही प्रसंस्करण किया जा रहा है। इस बीच पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रमेश चंदर खत्री ने बताया कि पोल्ट्री उद्योग की कमर टूट चुकी है और चूजों की आपूर्ति लाइन पूरी तरह से तबाह हो गई है। किसानों ने अंडों को जमीन के अंदर दबा दिया है और वे आर्थिक रूप से पूरी तरह से टूट चुके हैं। बिक्री के लिए तैयार पक्षी किसानों पर बोझ हैं क्योंकि दाना का भारी अभाव है।
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लगभग पूरे भारत में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है, ऐसे वक्त में अगर आपको किसी इमरजेंसी में पैसों की आवश्यकता पड़ती है तो आप बैंक से घर बैठे धन मंगा सकते हैं। SBI, ICICI, HDFC जैसे कई बैंक अपने ग्राहकों को इस तरह की सुविधा प्रदान करते हैं।
SBI भी डोरस्टेप डिलिवरी के तहत घर पर नकद मंगाने, पैसा जमा करने की सुविधा ग्राहकों को देता है। हालांकि यह सुविधा सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों या विशेष पंजीकरण वाले ग्राहकों के लिए है। इसका शुल्क 100 रुपए है।
ICICI बैंक से घर पर कैश डिलिवरी के लिए बैंक की वेबसाइट पर Bank@homeservice पर लॉगइन करना होता है। कस्टमरकेयर पर फोन करके भी आप यह सुविधा ले सकते हैं। नकद मंगाने के लिए सुबह 9 से दोपहर 2 बजे के बीच अनुरोध कर सकते हैं। 2 घंटे के भीतर आपको जरूरत का पैसा मिल जाता है। इससे 2 हजार से लेकर 2 लाख रुपए तक घर बैठे ले सकते हैं। इस सर्विस के लिए बैंक मात्र 60 रुपए चार्ज करती है।
HDFC बैंक भी कैश एट होम की सुविधा मुहैया कराता है। आप 5 से 25 हजार रुपए तक का कैश घर पर मंगा सकते हैं। इसके लिए 100 से 200 रुपए तक शुल्क बैंक लेता है।
इन बैंकों के अलावा भी कई बैंक इस तरह की सुविधा देते हैं। बैंकों के एप्स पर भी आप कैश एट होम के लिए आवेदन कर सकते हैं।
नई दिल्ली। शेयर बाजार में सोमवार शुरुआती एक घंटे के कारोबार के दौरान निवेशकों की 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति डूब गई। इस दौरान बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक 10 प्रतिशत से अधिक टूट गए।
कोरोना वायरस (कोविड-19) के बढ़ते मामलों ने बाजार की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। इसके चलते इक्विटी बाजारों में सप्ताह की शुरुआत बड़े पैमाने पर बिकवाली के साथ हुई।
बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण कारोबार को 45 मिनट के लिए रोके जाने से ठीक पहले 10,29,847.17 करोड़ रुपए घटकर 1,05,79,296.12 करोड़ रुपऐ रह गया। बीएसई के प्रमुख सेंसेक्स सूचकांक में 2,991.85 अंक या 10 प्रतिशत की गिरावट हुई, जिसके बाद कारोबार को 45 मिनट के लिए रोक दिया गया।
बीएसई सेंसेक्स के सभी शेयर घाटे में थे। एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक और बजाज फाइनेंस में जोरदार गिरावट हुई। बैंक, रियल्टी और वित्त क्षेत्र के शेयरों में भारी नुकसान देखने को मिला। सूचकांक में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले आरआईएल में 11.57 फीसदी और टीसीएस में 5.84 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
नई दिल्ली। कमजोर जेवराती मांग और डॉलर की तुलना में रुपए में जारी गिरावट से दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना शुक्रवार को 43,170 रुए प्रति 10 ग्राम रह गया। चांदी भी 2983 रुपए की बड़ी गिरावट के साथ 43,855 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गई।
विदेशों में गुरुवार को दोनों पीली धातु में रही एक फीसदी से अधिक की नरमी ने भी घरेलू बाजार में इस पर दबाव डाला। हालांकि आज इसमें कुछ सुधार देखा गया।
लंदन एवं न्यूयॉर्क से मिली जानकारी के अनुसार, सोना हाजिर आज 7.8 डॉलर चढ़कर 1,584.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, अप्रैल का अमेरिकी सोना वायदा 4.60 डॉलर टूटकर 1,585.70 डॉलर प्रति औंस बोला गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी हाजिर 15.73 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रही।
स्थानीय बाजार में सोना स्टैंडर्ड 1,430 रुए की गिरावट के साथ 43,170 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया। सोना बिटुर भी इतनी ही नरमी के साथ 43,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के भाव बिका। आठ ग्राम वाली गिन्नी 1,500 रुपए की बड़ी गिरावट के साथ 32,500 रुपए प्रति इकाई पर आ गई।
चांदी हाजिर 2,983 रुपए लुढ़ककर 43,855 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई। चांदी वायदा 2460 रुपए टूटकर 42,883 रुपए प्रति किलोग्राम बोली गई। सिक्का लिवाली और बिकवाली 10-10 रुपए टूटकर क्रमश: 960 रुपए और 970 रुपए प्रति इकाई के भाव पर स्थिर रहे।
नई दिल्ली, यस बैंक के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यस बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम को केंद्र की मोदी सरकार ने मंजूरी दे दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम की मंजूरी दी गई। रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम को मंजूरी मिलने के ऐलान के बाद बैंक के शेयर में जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। यस बैंक का शेयर 6 फीसदी से ज्यादा के उछाल के साथ 27.50 रुपये के स्तर पर कारोबार करते हुए देखा गया।
आरबीआई यस बैंक के प्रस्तावित रिस्ट्रक्चरिंग प्लान को कैबिनेट की बैठक में पेश किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्राफ्ट स्कीम के अंतर्गत स्टेट बैंक यस बैंक में 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीद सकता है। ड्राफ्ट स्कीम को लेकर आरबीआई द्वारा लोगों से सुझाव मांगा गया था। एसबीआई का कहना है कि यस बैंक के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स बनाया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाउसिंग डेवलमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड और कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड भी यस बैंक में हिस्सा खरीद सकते हैं।
कोरबा,सामुदायिक विकास कार्यक्रमों के उत्कृष्ट प्रबंधन और क्रियान्वयन के लिए भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड बालको प्रबंधन ने वर्ष 2019 का गोल्डन पीकॉक पुरस्कार जीता। यह पुरस्कार 4 मार्च 2020 को बालको के सामुदायिक विकास प्रबंधक श्री विवेक सिंह ने मुंबई में सामुदायिक उत्तरदायित्व पर गोल्डन पीकॉक की ओर से आयोजित 14वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ग्रहण किया।
इस अवसर पर बिडला सेंटर फॉर कम्यूनिटी इनिशिएटिव एंड रूरल डेवलपमेंट की अध्यक्ष श्रीमती राजश्री बिडला और केरल के लोक आयुक्त तथा कर्नाटक एवं उत्तराखंड उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सिरियाक जोसेफ मौजूद थे। इस उपलब्धि के लिए बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री अभिजीत पति ने बालको परिवार को शुभकामनाएं दी हैं। बालको प्रबंधन अपने प्रचालन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वावलंबन और आधारभूत संरचना विकास संबंधी योजनाएं संचालित करता है। बालको की योजनाओं से बड़ी संख्या में नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं।
नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) ने अपने सभी बचत खाताधारकों के लिए एक औसत मासिक न्यूनतम राशि रखने की अनिवार्यता बुधवार को समाप्त करने की घोषणा की। इससे अब बैंक के सभी बचत खाताधारकों को ‘जीरो बैलेंस’ खाते की सुविधा मिलने लगेगी।
इसके अलावा बैंक ने सभी बचत खातों पर ब्याज दर समान रूप से तीन प्रतिशत वार्षिक कर दिया है।
एसबीआई ने बुधवार को एक बयान में कहा कि देश में वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने के लिए उसने अपने सभी 44.51 करोड़ बचत खाताधारकों के लिए औसत मासिक न्यूनतम राशि (एएमबी) रखने की अनिवार्यता खत्म कर दी है।
अभी मेट्रो शहरों के बचत खाताधारकों को औसत मासिक न्यूनतम राशि के तौर पर 3,000 रुपये, कस्बों में 2,000 रुपए और ग्रामीण इलाकों में 1,000 रुपए खाते में रखने होते हैं। औसत मासिक न्यूनतम राशि को बनाए नहीं रखने की स्थिति में खाताधारकों को 5 से 15 रुपये जुर्माने और करों का भुगतान करना होता है।
एएमबी समाप्त किए जाने से बैंक के इन खाताधारकों को ‘जीरो बैलेंस’ (यानी कोई न्यूनतम राशि नहीं रखने) की सुविधा उपलब्ध होगी।
इसके अलावा बैंक ने त्रैमासिक आधार पर एसएमएस सेवा के लिए वसूले जाने वाले शुल्क को भी खत्म कर दिया है।
इस बारे में बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि यह फैसला और अधिक लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला होगा।
बैंक का कहना है कि ‘सबसे पहले ग्राहक हित’ की अवधारणा पर चलते हुए उसने यह कदम उठाया है।
इसके अलावा बैंक ने बचत खातों पर वार्षिक ब्याज दरों को तर्कसंगत बनाते हुए सभी श्रेणियों के लिए घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया है।
























