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अब मरीजों को नहीं खरीदनी पड़ेंगी महंगी दवाएं, यहां पर मिलेंगी 70 फीसदी तक सस्ती दवाएं

अब मरीजों को नहीं खरीदनी पड़ेंगी महंगी दवाएं, यहां पर मिलेंगी 70 फीसदी तक सस्ती दवाएं

 लखनऊ। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर इलाज के लिए आने वाले मरीजों को महंगी दवाएं नहीं खरीदनी पड़ेंगी। उन्हें अस्पताल से ही जेनेरिक दवाएं बाजार से 50 से 70 फीसदी कम दाम पर उपलब्ध हो सकेंगी। इसके लिए केंद्रों पर प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोले जाएंगे। शासन से अनुमति मिलने के बाद अफसरों ने नए केंद्र खुलवाने की कवायद तेज कर दी है।

राजधानी में सीएमओ के अधीन 20 सीएचसी का संचालन हो रहा है। यहां प्रसव से लेकर अन्य बीमारियों का भी इलाज मुहैया कराया जाता है। मरीजों की जरूरत कोदेखते हुए चिकित्सक अस्पताल से मिलने वाली मुफ्त दवाओं के साथ ही अन्य जरूरी दवाएं भी लिखते हैं। 

बाजार में इन दवाओं की कीमत अधिक होने के कारण कई बार डॉक्टर मरीज की आर्थिक स्थित को देखते हुए दवाएं लिखने से परहेज करते हैं। ऐसे में मरीज को जल्द स्वास्थ्य लाभ मिलने में दिक्कत होती है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया की 18 सीएचसी पर प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोलने की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। यह केंद्र खुलने के बाद मरीजों को काफी सहूलियत मिलेगी।

प्रदेश में 1000 नए केंद्र खुलेंगे

फार्मासियुक्टिकल एंड मेडिकल डिवाइस ब्यूरो ऑफ इंडिया के नोडल अफसर नितिन सिंह का कहना है कि मरीजों को सस्ती दवाएं मुहैया कराने के लिए सरकार प्रयासरत है। प्रदेश में जल्द ही 1000 नए जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे। ताकि मरीजों को घर के नजदीक दवा और सर्जिकल सामान उपलब्ध कराया जा सकेगा।

बताया मौजूदा समय में प्रदेश में 2662 जन औषधि केंद्र का संचालन हो रहा है। अकेले लखनऊ में जन औषधि केंद्र की संख्या 220 है। मरीजों को और आसानी से जेनेरिक दवाएं मिल सके इसके लिए 1000 जन औषधि केंद्र और खोले जाएंगे। इसमें लखनऊ में करीब 25 नए जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे। इनमें से 18 स्वास्थ्य केंद्रों पर खुलेंगे।

ट्रैफिक नियम तोड़ने पर 10 गुना बढ़ा जुर्माना, जानें e-Challan चेक करने का तरीका

ट्रैफिक नियम तोड़ने पर 10 गुना बढ़ा जुर्माना, जानें e-Challan चेक करने का तरीका

 e-Challan  : सरकार ने ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाते हुए चालान और सजा में बदलाव किया है। अब ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर लगने वाला जुर्माना 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है। ट्रैफिक व्यवस्था को सख्त बनाने के लिए चौराहों पर कैमरे लगाए गए हैं, जो नियम तोड़ने पर स्वचालित रूप से ई-चालान जारी करते हैं।

क्या है e-Challan सिस्टम?

ई-चालान एक इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक चालान प्रणाली है, जिसमें ट्रैफिक पुलिस कैमरों के जरिए नियम तोड़ने वालों की पहचान कर चालान जारी करती है। वाहन मालिक को चालान की सूचना SMS के जरिए मिल जाती है।

ऐसे करें ऑनलाइन ट्रैफिक चालान चेक

अगर आपको लगता है कि आपकी गाड़ी का चालान काटा गया है, तो आप इसे ऑनलाइन चेक कर सकते हैं:

आधिकारिक ट्रैफिक वेबसाइट पर जाएं
“e-Challan” सेक्शन पर क्लिक करें
अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें
CAPTCHA भरकर “Submit” करें
अगर चालान जारी हुआ है, तो स्क्रीन पर पूरी जानकारी दिखेगी
“Pay Now” विकल्प पर क्लिक कर ऑनलाइन भुगतान करें

सरकार के इस फैसले का मकसद यातायात नियमों का सख्ती से पालन करवाना और सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है।

 
सुनीता विलियम्स 9 महीने बाद अंतरिक्ष से धरती पर लौटीं, मुस्कान के साथ किया स्वागत

सुनीता विलियम्स 9 महीने बाद अंतरिक्ष से धरती पर लौटीं, मुस्कान के साथ किया स्वागत

 Sunita Williams Return : अंतरिक्ष में नौ महीने बिताने के बाद प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री **सुनीता विलियम्स** सफलतापूर्वक धरती पर लौट आई हैं। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर लंबे समय तक रहकर अनुसंधान करने के बाद, उन्होंने सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापसी की। उनकी वापसी पर वैज्ञानिक समुदाय और उनके प्रशंसकों ने उत्साहपूर्वक उनका स्वागत किया।

सुरक्षित लैंडिंग और मुस्कुराहट भरा स्वागत

सुनीता विलियम्स और उनके दल ने निर्धारित समय के अनुसार सुरक्षित लैंडिंग की। जैसे ही उन्होंने धरती की सतह को छुआ, उनके चेहरे पर मुस्कान थी, जो उनकी दृढ़ता और आत्मविश्वास को दर्शाती थी।

9 महीने का ऐतिहासिक सफर

इस दौरान, उन्होंने अंतरिक्ष में कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों और अनुसंधानों में भाग लिया। उनकी इस यात्रा को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। उनकी वापसी पर नासा और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों ने उनके योगदान की सराहना की। भारत में भी उनके प्रशंसक और परिजन इस गौरवपूर्ण क्षण का जश्न मना रहे हैं।

दिल दहला देने वाली वारदात! 65 दिन बाद बोरे में बंद मिला महिला का कंकाल, पिता बोले- पति ने मां और बहन संग मिलकर…

दिल दहला देने वाली वारदात! 65 दिन बाद बोरे में बंद मिला महिला का कंकाल, पिता बोले- पति ने मां और बहन संग मिलकर…

 बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां 65 दिन बाद एक महिला का कंकाल मिला है। महिला के पिता ने कपड़े और चूड़ी से बेटी की पहचान की है। बताया जा रहा है कि महिला के पति ने अपनी मां और बहन के साथ मिलकर पत्नी की हत्या की है।

बाइक और 2 लाख रुपए देने का दबाव बना रहा था पति
जानकारी के अनुसार, 16 मार्च यानि को बलिया थाना क्षेत्र के लाल दियारा स्थित गंगा किनारे एक बोरा में महिला का कंकाल मिला। इसके अगले दिन सोमवार को लाखो थाना क्षेत्र के पनसल्ला के रहने वाले भिखो यादव ने बोरे के पास से मिले चूड़ी, कपड़े और बालों से पहचान कर दावा किया कि यह मेरी बेटी है, जो 11 जनवरी से लापता थी। दरअसल, भिखो यादव ने 13 जनवरी 2025 को बलिया थाना में मामला दर्ज कराया था। इस एफआईआर में कहा गया था कि 2020 में बेटी रीता कुमारी की शादी सुशील कुमार हुई। वहीं पिछले 6 महीने से उसके पति की ओर से बुलेट बाइक और दो लाख रुपए देने का दबाव बनाया जा रहा था। ऐसा नहीं करने पर बेटी की हत्या की धमकी भी दी जा रही थी।

परिवार संग घर छोड़कर फरार हुआ पति
भिखो यादव ने बताया कि 12 जनवरी को हम लोग जब रीता के ससुराल पहुंचे तो वह वहां नहीं थी। वहीं ससुराल वालों पर दबाव डालने के बाद पता चला कि उसकी हत्या कर दी गई है। इसके बाद थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। वहीं पुलिस द्वारा काफी खोजबीन करने के बाद भी बेटी का कुछ पता नहीं चल रहा था। उधर, रीता का पति और ससुराल वाले घर छोड़कर फरार हो गए। पिता ने कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि पति ने मां और बहन के साथ मिलकर उनकी बेटी की हत्या की है।

जांच के लिए भेजा गया कंकाल
इसी बीच शनिवार देर शाम पुलिस ने परिजनों को सूचना दी कि लाल दियारा के गंगा किनारे एक कंकाल पड़ा हुआ है, जिसके बाद उन लोगों ने मौके पर पहुंचकर कपड़ा और चूढ़ी के आधार पर बेटी की पहचान की। हालांकि, पुलिस का कहना है कि जांच और डीएनए टेस्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि कंकाल रीता का है या नहीं। ट्रेनी आईपीएस-सह-बलिया थानाध्यक्ष साक्षी कुमारी ने बताया कंकाल जांच के लिए भेजा गया है। साथ ही आरोपियों को पकड़ने के लिए कार्रवाई चल रही है। उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पीएम मोदी से मिले सीएम साय, बस्तर के विकास का रोडमैप सौंपा

पीएम मोदी से मिले सीएम साय, बस्तर के विकास का रोडमैप सौंपा

 नई दिल्ली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात कर राज्य के विकास संबंधी विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने बस्तर विकास के मास्टर प्लान का खाका प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने बस्तर विकास का मास्टर प्लान प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को बुनियादी सुविधाओं, उद्योगों और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की रूपरेखा शामिल थी। प्रधानमंत्री ने इस योजना पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सुरक्षा बलों की संगठित रणनीति एवं जनभागीदारी के चलते नक्सल प्रभावित इलाकों में तेजी से बदलाव आ रहा है। उन्होंने बताया कि पुलिस और केंद्रीय बलों के संयुक्त प्रयासों से कई नक्सल गढ़ों में विकास की किरण पहुंची है, जिससे जनता का विश्वास सरकार की योजनाओं में और मजबूत हुआ है। सरकार का अब पूरा ध्यान बस्तर को नए औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर है, जिससे युवाओं को रोजगार और आदिवासी समुदायों को बेहतर जीवन स्तर मिल सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय ने राज्य की नई औद्योगिक नीति और निवेशकों की बढ़ती रुचि पर भी विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने बताया कि निवेश को आसान बनाने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो क्लीयरेंस, टैक्स छूट और अनुकूल नीतियों को लागू किया है, जिससे बड़ी कंपनियां छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आकर्षित हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत किया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

मुख्यमंत्री ने मुलाकात में बस्तर की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने बताया कि बस्तर के महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हजारों महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे है। लघु वनोपज, जैविक कृषि, हथकरघा, बांस उद्योग और हस्तशिल्प को प्रोत्साहित कर महिलाओं को न केवल आजीविका के साधन मिल रहे हैं, बल्कि वे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही हैं। इसके अलावा, स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों के माध्यम से बस्तर की महिलाओं को उत्पादन और विपणन से जोडने की पहल की जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर राज्य की आर्थिक प्रगति में योगदान दे सकें।

प्रधानमंत्री का छत्तीसगढ़ दौरा, बड़े विकास कार्यों का होगा शुभारंभ

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 30 मार्च को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौर की रूपरेखा साझा की। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री राज्य में विभिन्न महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री ने इस दौरे को लेकर की जा रही तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की और प्रधानमंत्री को छत्तीसगढ़ में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति से अवगत कराया।

Property : जमीन और जायदाद में क्या अंतर होता है ? आइए जाने दोनों का फर्क ?

Property : जमीन और जायदाद में क्या अंतर होता है ? आइए जाने दोनों का फर्क ?

 Property : जमीन-जायदाद के बीच क्या अंतर होता है इसको लेकर आज हम आपको अहम जानकारी देने जा रहें है। अक्सर आपने सुन होगा की जमीन-जायदाद का झगड़ा चल रहा है। लेकिन क्या आपने जानते है कि जमीन और जायदाद दो अलग-अलग चीजें है, न कि एक?

Zameen-and-Jaydaad जमीन, जैसा कि नाम से ही साफ है यह भूमि का एक या अधिक टुकड़े हो सकते हैं। यह एक अचल संपत्ति है, जिसका भूगोल, आकार और सीमा स्पष्ट तौर से निर्धारित होती है। जमीन में खेत, बाग, रिहायशी भूमि, व्यापारिक भूमि आदि शामिल हो सकती है। इसे खरीदा बेचा जा सकता है और लीज पर भी दिया जा सकता है।

जायदाद, इसे अंग्रेजी में प्रॉपर्टी या एसेट (Property/Assets) कहते हैं। जमीन के मुकाबले जायदाद व्यापक है। जायदाद में भूमि (जमीन) शामिल हो सकती है। इसमें चल संपत्तियां (जैसे वाहन, आभूषण, बैंक बैलेंस, शेयर, आदि) तो होती ही हैं, साथ ही में अचल संपत्तियां (जैसे भूमि, भवन, मकान, अपार्टमेंट, आदि) भी शामिल किए जाते हैं। Zameen-and-Jaydaad 

कानून के हिसाब से?

Zameen-and-Jaydaad भारतीय कानून में जायदाद (Property) के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की संपत्तियां आती हैं।

अचल संपत्ति : भूमि और उस पर बनी इमारतें (जैसे मकान, अपार्टमेंट, दुकानें, कमर्शियल परिसर आदि)। जमीन का स्वामित्व होता है, उसे खरीदा-बेचा जा सकता है और किराए पर भी दिया जा सकता है। Immovable Property में अन्य संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं जैसे कि जलाशय, पार्क, और वन भूमि आदि। Zameen-and-Jaydaad

चल संपत्ति : इसमें वाहन, बैंक बैलेंस, आभूषण, नगदी, शेयर, बॉन्ड्स, सामान आदि शामिल हैं। Movable Property वह संपत्ति होती है, जो स्थान बदल सकती है, जैसे कि वाहन, मशीनरी, या अन्य व्यक्तिगत चीजें। Zameen-and-Jaydaad

मैनेजमेंट और ऑनरशिप

भारत में जायदाद के मैनेजमेंट और ऑनरशिप को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न कानूनी व्यवस्थाएं हैं। भारतीय संपत्ति कानून इनमें से एक है। दूसरा हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, तीसरा मुस्लिम पर्सनल लॉ है। इसके अलावा राजस्व कानून और भूमि अधिग्रहण कानून, और संपत्ति अधिनियम 1993 भी हैं। 

Zameen-and-Jaydaad भारतीय संपत्ति कानून : Indian Property Law, भारतीय संपत्ति अधिनियम 1882 के तहत आता है, जो अचल संपत्ति के हस्तांतरण और संपत्ति संबंधित अन्य मामलों को नियंत्रित करता है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता (IPC) और भारतीय अनुबंध अधिनियम (Indian Contract Act, 1872) भी संपत्ति के लेन-देन और अन्य कानूनी पहलुओं को नियंत्रित करते हैं।

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act, 1956): यह कानून हिंदू परिवारों में संपत्ति के वितरण के लिए लागू होता है। इसमें संपत्ति के स्वामित्व और उत्तराधिकार से संबंधित नियम निर्धारित किए गए हैं। Zameen-and-Jaydaad

भूमि के स्वामित्व और उसे सरकारी उद्देश्यों के लिए अधिग्रहण करने के लिए भूमि अधिग्रहण कानून (Land Acquisition Act) और अन्य संबंधित कानून लागू होते हैं। Zameen-and-Jaydaad

संपत्ति का हस्तांतरण अधिनियम, 1993 (The Transfer of Property Act, 1882): यह कानून संपत्ति के हस्तांतरण, बिक्री, किराए पर देने, लीज पर देने, और अन्य संबंधित मामलों को नियंत्रित करता है।

BREAKING : कैबिनेट मंत्री ने दिया इस्तीफा, हुए भावुक...विस बजट सत्र में की थी विवादित टिप्पणी…

BREAKING : कैबिनेट मंत्री ने दिया इस्तीफा, हुए भावुक...विस बजट सत्र में की थी विवादित टिप्पणी…

 उत्तराखण्ड  : उत्तराखण्ड के वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया। उन्होंने रविवार शाम को शासकीय आवास पर आनन-फानन बुलाई गई पत्रकार वार्ता में रुंधे गले से इसकी घोषणा की और फिर मुख्यमंत्री आवास जाकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपना इस्तीफा सौंपा।

पिछले माह 21 फरवरी को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में विपक्ष की कार्यस्थगन की सूचना का जवाब देते समय संसदीय कार्यमंत्री का दायित्व निभा रहे अग्रवाल के बयान में उपयोग किए गए शब्द को विपक्ष ने मुद्दा बनाया था। यद्यपि, तब अग्रवाल ने इसके लिए माफी मांग ली थी, लेकिन राज्य में विरोध प्रदर्शन का क्रम थमने का नाम नहीं ले रहा था। नतीजतन, सरकार व संगठन दोनों को असहज होना पड़ा। ऐसे में अग्रवाल की मंत्री पद से विदाई तय मानी जा रही थी। रविवार को कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने इस्तीफा दिया है। उन्‍होंने कहा कि जिस प्रकार से वातावरण बनाया गया। आज साबित करना पड़ रहा है कि उत्तराखंड के लिए योगदान दिया। राज्य आंदोलन में लाठियां खाईं। ऐसे व्यक्ति को टारगेट बनाया जा रहा है। आहत हूं, ऐसे में मुझे इस्तीफा देना पड़ रहा है।

बजट सत्र के पहले दिन विपक्ष की ओर से राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध किया जा रहा था, तब द्वाराहाट के विधायक बिष्ट और मंत्री अग्रवाल के बीच हुई तीखी नोकझोंक चर्चा के केंद्र में रही थी।

सदन में शून्यकाल के दौरान संसदीय कार्यमंत्री अग्रवाल, कांग्रेस विधायक मनोज तिवारी की कार्यस्थगन की सूचना का जवाब दे रहे थे। इसी दौरान विधायक बिष्ट ने साथी विधायकों से बातचीत में कथित तौर पर क्षेत्रवाद से संबंधित टिप्पणी की। मंत्री अग्रवाल ने इसे लेकर कड़ा ऐतराज जताया। फिर तो सदन में काफी देर तक हंगामे जैसी स्थिति रही।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने इस घटनाक्रम पर सख्त लहजे में कहा कि सदन की कार्यवाही को पूरा देश देख रहा है। देश से पहले विदेश से टिप्पणी आने लगती है कि आपके सदन में क्या चल रहा है। उन्होंने कहा कि हम उत्तराखंड के लोग हैं। ऐसा व्यवहार न करें। राज्य के लिए सबने लड़ाई लड़ी। ऐसी टिप्पणी लोकतंत्र के मंदिर में होगी तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

इसके बाद उत्‍तराखंड में प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक पुतला दहन और विरोध किया गया। नारेबाजी करते हुए प्रेमचंद अग्रवाल को मंत्री पद से हटाने की मांग की गई

BREAKING : मारा गया भारत का सबसे बड़ा दुश्मन ‘अबु’, मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का था करीबी

BREAKING : मारा गया भारत का सबसे बड़ा दुश्मन ‘अबु’, मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का था करीबी

  Pakistan News: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) की सर्द रात में, झेलम की गलियों में एक अनजानी हलचल थी। शनिवार की रात, करीब आठ बजे, जब आम लोग अपने घरों में गर्माहट की तलाश में थे, तभी अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट ने सन्नाटे को चीर दिया। यह कोई मामूली घटना नहीं थी। इस गोलीबारी का शिकार था भारत का नंबर-1 दुश्मन, लश्कर-ए-तैयबा का कुख्यात आतंकी अबु कताल सिंधी। अज्ञात हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, और देखते ही देखते उसकी सांसें थम गईं। एक ऐसा आतंकी, जिसके नाम से भारत की सुरक्षा एजेंसियां सालों से परेशान थीं, जिसके हाथ अनगिनत बेगुनाहों के खून से रंगे थे, आखिरकार मौत की नींद सो गया।

 

 

आतंक का दूसरा नाम: अबु कताल

अबु कताल कोई साधारण आतंकी नहीं था। वह मुंबई के 26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का दाहिना हाथ था। हाफिज ने उसे लश्कर-ए-तैयबा का चीफ ऑपरेशनल कमांडर बनाया था, और उसकी हर साजिश को हकीकत में बदलने की जिम्मेदारी अबु के कंधों पर थी। पीओके के झेलम में बैठकर वह जम्मू-कश्मीर में आतंक की आग भड़काता था। उसकी एक आवाज पर आतंकी संगठन के गुर्गे भारत की शांत वादियों को खून से लाल करने निकल पड़ते थे। रियासी हो या राजौरी, हर बड़े हमले के पीछे उसका दिमाग काम करता था।
 
9 जून की वह काली रात अभी भी लोगों के जेहन में ताजा है, जब रियासी के शिव-खोड़ी मंदिर से लौट रही तीर्थयात्रियों की बस पर आतंकियों ने हमला बोला था। गोलियों की बौछार और चीख-पुकार के बीच कई मासूम जिंदगियां छिन गई थीं। इस हमले का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, अबु कताल ही था। वह सिर्फ हमले की साजिश नहीं रचता था, बल्कि आतंकियों को हथियार, भोजन और आश्रय जैसी हर मदद मुहैया करवाता था। उसकी शातिराना चालों ने उसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शीर्ष पर ला खड़ा किया था।

 

 

राजौरी की दर्दनाक यादें

साल 2023 की शुरुआत भी अबु कताल के आतंक की गवाह बनी थी। 1 जनवरी को राजौरी के ढांगरी गांव में आतंकियों ने मासूम नागरिकों को निशाना बनाया। घरों में सोते हुए लोगों पर गोलियां बरसाई गईं, और अगले दिन एक आईईडी विस्फोट ने और तबाही मचाई। सात लोग मारे गए, कई घायल हुए। इस हमले की साजिश के तार भी अबु कताल से जुड़े थे। एनआईए की चार्जशीट में उसका नाम साफ तौर पर दर्ज था। जांच में पता चला कि अबु ने आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया था। तीन महीने तक उसने अपने गुर्गों को हर तरह की मदद पहुंचाई, ताकि वे सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों पर हमले कर सकें। चार्जशीट में लश्कर के तीन बड़े हैंडलर्स का जिक्र था—सैफुल्ला, मोहम्मद कासिम और अबु कताल—जिन्होंने मिलकर जम्मू-कश्मीर में आतंक का जाल बिछाया था।

 

 

हाफिज का भरोसेमंद सिपहसालार

अबु कताल और हाफिज सईद का रिश्ता सिर्फ आतंकी संगठन तक सीमित नहीं था। वह हाफिज का बेहद करीबी था, जिसे हर बड़ी साजिश का जिम्मा सौंपा जाता था। 26/11 के मुंबई हमले ने भारत को हिलाकर रख दिया था, और उस हमले की सफलता के बाद हाफिज ने अबु को अपने सबसे भरोसेमंद सिपहसालार के रूप में चुना। कश्मीर में आतंक फैलाने की हर योजना में अबु की अहम भूमिका होती थी। वह न सिर्फ हमलों की साजिश रचता था, बल्कि नए आतंकियों की भर्ती और उनकी ट्रेनिंग का भी इंतजाम करता था। उसकी शातिर चालों ने उसे सेना और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बना दिया था।

 

 

आखिरी सांस और अनसुलझा रहस्य

शनिवार की उस रात जब अबु कताल अपनी गाड़ी में सवार था, शायद उसे अंदाजा भी नहीं था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर होगा। अज्ञात हमलावरों ने उस पर गोलियां बरसाईं, और कुछ ही पलों में आतंक का यह सरगना धराशायी हो गया। लेकिन सवाल यह है कि उसे मारने वाले ये हमलावर कौन थे? क्या यह किसी पुरानी दुश्मनी का नतीजा था, या फिर कोई बड़ा खेल खेला जा रहा था? उसकी मौत की खबर ने जहां भारत में राहत की सांस पैदा की, वहीं कई सवाल भी छोड़ दिए।
अबु कताल की मौत के साथ ही एक खतरनाक आतंकी का अंत हो गया, लेकिन क्या यह आतंक के खिलाफ जंग की जीत है, या फिर सिर्फ एक अध्याय का अंत? हाफिज सईद अभी भी जिंदा है, और उसका आतंकी नेटवर्क फैला हुआ है। अबु की मौत से लश्कर को झटका जरूर लगा होगा, लेकिन क्या यह आतंक की जड़ को खत्म करने के लिए काफी है? यह सवाल अभी अनसुलझा है, और वक्त ही इसका जवाब देगा।
फिलहाल, भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस खबर को एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देख रही हैं। अबु कताल जैसा दुश्मन, जिसने न जाने कितने परिवारों को तबाह किया, आखिरकार मारा गया। लेकिन इस कहानी का अंत अभी बाकी है, क्योंकि आतंक का साया अभी पूरी तरह मिटा नहीं है।
होली की ड्यूटी कर रहे टीआई की मौत, दबंग अफसरों में होती थी संजय की गिनती

होली की ड्यूटी कर रहे टीआई की मौत, दबंग अफसरों में होती थी संजय की गिनती

 मध्य प्रदेश  : के इंदौर में टीआई की मौत हो गई. होली की ड्याटी के दौरान अचानक उनकी मौत होने से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया. मामला इंदौर के बेटमा का है. इस घटना के बाद पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई. मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव और डीजीपी ने इनकी मौत पर गहरा दुख जताया है.

 ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबियत
दरअसल 14 मार्च शक्रवार को होली का त्योहार मनाया गया. इस बीच इंदौर पुलिस ने सुरक्षा के चाक-चौबंध प्रबंध किए थे. कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी आईजी कार्यालय में पदस्थ टीआई संजय पाठक संभाल रहे थे. इस बीच अचानक उनकी तबियत बिगड़ गई. पुलिस कर्मियों की मदद से उन्हें फौरन इंदौर के बॉम्बे अस्पताल लाया गया. जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई. संजय पाठक की गिनती एक दबंग पुलिस अधिकारी में होती थी.
BIG BREAKING: बागेश्वर धाम जा रहे परिवार की कार पलटी, 3 लोगों की दर्दनाक मौत!

BIG BREAKING: बागेश्वर धाम जा रहे परिवार की कार पलटी, 3 लोगों की दर्दनाक मौत!

 छतरपुर : जिले के झांसी-खजुराहो नेशनल हाईवे पर शुक्रवार सुबह सड़क हादसे में ग्वालियर के तीन लोगों की मौत हो गई है। घायलों को ग्वालियर के लिए रेफर किया गया। ग्वालियर से परिवार के लोग बागेश्वर धाम दर्शन करने जा रहे थे।

जानकारी के अनुसार हादसा छतरपुर के बमीठा थाना क्षेत्र के बसारी के समीप सुबह करीब पांच बजे ग्वालियर का सोलंकी परिवार एमपी 07 सीडी 6161 चार पहिया वाहन से बागेश्वर धाम में होली मिलन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा था। हादसे में अमरीश पुत्र डोंगर सोलंकी उम्र 46 साल गीता सोलंकी पत्नी अमरीश उम्र 38 साल और उनकी बेटी देवांशी सोलंकी उम्र 16 साल की मौत हो गईं है।

हादसे में विकास पुत्र डोंगर सोलंकी उम्र 30 साल, नेहा पुत्री अमरीश सोलंकी उम्र 10 साल और पारी पिता अमरीश सोलंकी उम्र 12 साल घायल हुए हैं। सभी लोग निवासी थाना माधवगंज जिला ग्वालियर के रहने वाले हैं। कार चालक को नींद की झपकी आने के कारण कार डिवाइडर से टकरा गई और पलट गई।

Holi 2025 Skincare Tips : होली के पक्के रंगों से पाएं छुटकारा, आजमाएं ये घरेलू तरीके

Holi 2025 Skincare Tips : होली के पक्के रंगों से पाएं छुटकारा, आजमाएं ये घरेलू तरीके

 Holi 2025 Skincare Tips : होली का त्योहार रंगों की मस्ती और उमंग लेकर आता है, लेकिन इसके बाद चेहरे और दाढ़ी से रंग हटाना एक चुनौती बन जाता है। खासतौर पर सफेद दाढ़ी और बालों से पक्के रंगों को निकालना मुश्किल होता है, जिससे चेहरे की शक्ल अजीब लग सकती है। लेकिन कुछ आसान और घरेलू उपायों की मदद से इन जिद्दी रंगों को आसानी से हटाया जा सकता है।

रंग हटाने के आसान घरेलू उपाय

1. तेल का इस्तेमाल करें:

नारियल तेल, जैतून का तेल या बादाम तेल को दाढ़ी और चेहरे पर अच्छी तरह लगाएं। हल्के हाथों से मसाज करें और कुछ समय बाद गुनगुने पानी से धो लें। इससे रंग धीरे-धीरे हटने लगेगा और त्वचा को नमी भी मिलेगी।

2. नारियल तेल और शक्कर का मिश्रण:

नारियल तेल में शक्कर मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे दाढ़ी पर हल्के हाथों से स्क्रब करें। शक्कर डेड स्किन हटाने और रंग निकालने में मदद करता है, साथ ही त्वचा को मुलायम भी बनाए रखता है।

3. दूध और गुलाब जल का मिश्रण:

गुलाब जल और दूध को मिलाकर चेहरे और दाढ़ी पर 10-15 मिनट तक लगाएं। फिर गुनगुने पानी से धो लें। यह मिश्रण त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ रंग हटाने में भी मदद करता है।

4. बेसन और हल्दी का पैक:

बेसन, हल्दी और दूध मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे चेहरे और दाढ़ी पर लगाएं। जब यह सूख जाए, तो हल्के हाथों से रगड़कर हटा लें। इससे रंग निकल जाएगा और त्वचा में निखार भी आएगा।

5. फेस वॉश का इस्तेमाल करें:

अगर तेल या घरेलू उपायों से रंग पूरी तरह नहीं हटता, तो माइल्ड फेस वॉश का इस्तेमाल करें। नेचुरल इंग्रीडिएंट्स वाले फेस वॉश का चुनाव करें ताकि त्वचा और बालों को नुकसान न पहुंचे।

6. पेट्रोलियम जैली का इस्तेमाल करें:

पेट्रोलियम जैली (वेसलीन) को दाढ़ी और चेहरे पर लगाकर 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर गीले कपड़े से पोंछ लें। यह त्वचा पर रंग चिपकने से बचाने में भी मदद करता है।

चेन छीनी..मुंह पर पेशाब किया, वकील ने पुलिसवालों पर लगाया आरोप, जमकर हुआ हंगामा

चेन छीनी..मुंह पर पेशाब किया, वकील ने पुलिसवालों पर लगाया आरोप, जमकर हुआ हंगामा

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पुलिस के द्वारा वकील के साथ अभद्रता का आरोप लगा है. वकील किसी साथी वकील की पैरवी के लिए पहुंचा था, जहां उसके साथ गाली-गलौज की गई और उसकी सोने की चैन छीन ली गई. पीड़ित वकील ने आरोप लगाया कि पुलिसवालों ने उसे जबरन पेशाब पिलाई. मामला विभूति खंड थाने का हैं, जिसके बाद वकीलों ने बड़ी संख्या में वहां इकट्ठा हो गए और जमकर हंगामा किया. उन्होंने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान चौराहे पर ट्रैफिक जाम कर दिया.

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. पीड़ित वकील सौरभ वर्मा का आरोप हैं कि शुक्रवार को वो होली मनाने के बाद घर पर बैठा था तभी उनके दोस्त वकील अमित गुप्ता का फोन आया, उन्होंने बताया कि वो एक मामले की पैरवी के लिए विभूति खंड पुलिस थाने आए हैं, जहां पुलिसवालों के द्वारा उनके साथ अभद्रता की जा रही है. जिसके बाद सौरभ एक और साथी वकील राहुल पांडे के साथ थाने पहुंच गए.

पुलिसवालों ने की वकील से अभद्रता
सौरभ ने बताया कि जब वो थाने पहुंचे तो वहां कई पुलिस वाले बैठे थे, जिनमें से कुछ ने वर्दी पहनी थी और कुछ बिना वर्दी के थे. इन पुलिसकर्मियों ने उन दोनों के साथ भी बदसलूकी और अभद्रता करनी शुरू कर दी. जब उन्होंने बताया कि वो वकील है तो उनके साथ और गाली गलौज की गई. पुलिस वालों ने होली के नाम पर उनके गले में पहनी सोने की चैन भी छीन ली. और मुंह पर पेशाब की.
इस घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में वकील पुलिस थाने पहुंच गए, जिसके बाद उन्होंने जमकर हंगामा किया और नारेबाजी की. वकीलों ने आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए चौराहे को जाम कर दिया, जिसकी वजह से वहां लंबा जाम लग गया. हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुँच गए, जिसके बाद किसी तरह मामले को शांत किया गया.

वकील सौरभ वर्मा की शिकायत पर 9 पुलिसकर्मियों पर नामज़द और कुछ अज्ञात पुलिसवालों पर विभूतिखंड थाने में ही मुकदमा दर्ज किया गया है.  

पेपर लीक व्यवस्थागत विफलता है, इससे 85 लाख बच्चों का भविष्य खतरे में : राहुल गांधी

पेपर लीक व्यवस्थागत विफलता है, इससे 85 लाख बच्चों का भविष्य खतरे में : राहुल गांधी

 नयी दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक एक ‘व्यवस्थागत विफलता’ है और इसका खात्मा तब ही होगा जब सभी राजनीतिक दल एवं सरकारें मतभेद भुलाकर तथा मिलकर कदम उठाएंगे। उन्होंने यह दावा भी किया कि पेपर लीक होने से छह राज्यों में 85 लाख बच्चों का भविष्य खतरे में है।

राहुल गांधी ने एक खबर का हवाला देते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘छह राज्यों में 85 लाख बच्चों का भविष्य ख़तरे में – पेपर लीक होना हमारे युवाओं के लिए सबसे खतरनाक “चक्रव्यूह” बन गया है। पेपर लीक मेहनती छात्रों और उनके परिवारों को अनिश्चितता और तनाव में धकेल देता है, उनके परिश्रम का फल उनसे छीन लेता है। साथ ही यह अगली पीढ़ी को गलत संदेश देता है कि बेईमानी, मेहनत से बेहतर हो सकती है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।’’

उन्होंने कहा कि अभी एक साल भी नहीं हुआ, जब ‘नीट’ के पेपर लीक ने देश को झकझोर दिया था। उन्होंने कहा कि हमारे विरोध के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार ने नए कानून के पीछे छुप कर उसे समाधान बताया, लेकिन इतने सारे हालिया लीक ने उसे भी विफल साबित कर दिया।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘यह गंभीर समस्या एक व्यवस्थागत विफलता है। इसका खात्मा सभी राजनीतिक दलों और सरकारों द्वारा मतभेद भुलाकर, मिलकर कड़े कदम उठाने से होगा। इन परीक्षाओं की गरिमा बनी रहे, यह हमारे बच्चों का अधिकार है और इसे हर हाल में सुरक्षित रखना होगा।’’

Holika Dahan 2025 : होलिका दहन पर भद्रा काल ने बढ़ाई कन्फूजन, जानें सही मुहूर्त और पूजा विधि

Holika Dahan 2025 : होलिका दहन पर भद्रा काल ने बढ़ाई कन्फूजन, जानें सही मुहूर्त और पूजा विधि

 फाल्गुन पूर्णिमा की रात हर साल होलिका दहन की परंपरा निभाई जाती है। इस बार 13 मार्च की रात को होलिका दहन किया जाएगा, लेकिन इस दिन भद्रा का साया भी रहेगा, जिससे शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

होलिका दहन का सही मुहूर्त

होलिका दहन हमेशा फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर किया जाता है, लेकिन भद्रा काल में इसे वर्जित माना जाता है। इस बार पूर्णिमा तिथि 13 मार्च की सुबह 10:36 से 14 मार्च की दोपहर 12:23 तक रहेगी। वहीं, भद्रा काल 13 मार्च की रात 11:26 तक रहेगा। ऐसे में भद्रा के समाप्त होने के बाद ही, यानी 13 मार्च की रात 11:27 बजे के बाद होलिका दहन किया जाना उचित रहेगा।

होलिका दहन से पहले की तैयारी

पूजा की थाली में जल, रोली, हल्दी, काले तिल, नारियल, उपले और कलावा रखें।
होलिका दहन स्थल पर जाकर भूमि को प्रणाम करें और जल अर्पित करें।
वहां दीपक जलाकर, गोबर के उपले, हल्दी और तिल अर्पित करें।
होलिका की तीन परिक्रमा कर कलावा बांधें और सूखा नारियल चढ़ाएं।
घर के सभी सदस्यों को हल्दी या रोली का तिलक लगाएं।

कैसे करें होलिका दहन?

होलिका दहन के लिए किसी वृक्ष की शाखा को जमीन में गाड़कर उसके चारों ओर लकड़ियां और उपले रखे जाते हैं। शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित कर उसमें गेहूं की बालियां, उपले और उबटन डालने की परंपरा है। यह प्रक्रिया रोग, नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों के नाश का प्रतीक मानी जाती है।

होलिका दहन के लाभ

हिंदू मान्यता के अनुसार, होलिका दहन से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन की गई पूजा से—

  • आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
  • रोग और शारीरिक कष्टों में राहत मिलती है।
  • शत्रु बाधा से मुक्ति पाई जा सकती है।
  • घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

होलिका दहन की राख को घर लाकर तिलक लगाने की भी परंपरा है, जिसे शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। इस बार भद्रा का ध्यान रखते हुए सही समय पर होलिका दहन करें और इसका संपूर्ण लाभ प्राप्त करें।

भयंकर चक्रवाती तूफान की दस्तक! दिल्ली-NCR में आज बारिश का अलर्ट, पढ़ें 24 राज्यों के लिए IMD का अपडेट

भयंकर चक्रवाती तूफान की दस्तक! दिल्ली-NCR में आज बारिश का अलर्ट, पढ़ें 24 राज्यों के लिए IMD का अपडेट

 दिल्ली: आज होली का त्योहार है और होलिका दहन है। आज मौसम विभाग ने देश के करीब 24 राज्यों में बारिश होने का अलर्ट दिया है। दिल्ली-NCR में घने काले बादल छाए हैं। वहीं देश में गर्मी भी अपना असर दिखाने लगी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली में बीता दिन साल 2025 का दूसरा सबसे गर्म दिन रहा। कल अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.6 डिग्री अधिक रहा। आज दिल्ली में बादल छाए रहने और रात में बारिश होने की संभावना है।

राजस्थान में लगातार दूसरे दिन बाड़मेर का अधिकतम तापमान सामान्य से 7 डिग्री ज्यादा 41.2 डिग्री रहा। दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु में 2 दिन से लगातार बारिश हो रही है। केरल, लक्षद्वीप और तमिलनाडु के समुद्री तटों पर चक्रवाती हवाएं 35 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी 16 मार्च तक बारिश होने का अनुमान है। आइए जानते हैं कि दिल्ली-NCR समेत पूरे भारत में आज अगले 4 दिन मौसम कैसा रहने वाला है?

इन राज्यों में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, आज और कल 14 मार्च को उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में बादल छाए रहेंगे। कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी हो सकती है। पूर्वोत्तर भारत के सभी 8 राज्यों मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम, असम, मेघालय, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, अंडमान निकोबाद में आज और कल 14 मार्च को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। आंधी तूफान आ सकता है। 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। आज से 16 मार्च तक 4 दिन मौसम ऐसा ही रहेगा।

देश में ताजा मौसमी परिस्थितियां

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी अफ़गानिस्तान और आस-पास के इलाकों में समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव है। दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और आस-पास के इलाकों में समुद्र तल से 0.9 किलोमीटर ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र पूर्वी बांग्लादेश और निचले क्षोभमंडलीय स्तरों पर बना हुआ है। दूसरा चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र पूर्वी असम और उसके आसपास के क्षेत्रों में बना हुआ है। पश्चिमी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर और उससे सटे मालदीव क्षेत्र पर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। पूर्वी दिशा में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन तमिलनाडु तट से दूर बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम तक बना हुआ है।

इन राज्यों में लू चलने का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, आज गुजरात और कोंकण में अलग-अलग स्थानों पर लू चलने की संभावना है। दक्षिण-पश्चिम राजस्थान, विदर्भ, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल के गंगीय मैदानी इलाकों में भी 16 मार्च तक लू चल सकती है। सौराष्ट्र और कच्छ में अलग-अलग स्थानों पर रात में गर्म मौसम रहने की संभावना है। 15 और 16 मार्च को ओडिशा, तटीय कर्नाटक में गर्म और आर्द्र मौसम रहने की संभावना है।

होली मनाने से क्यों बचते हैं मुसलमान, क्या इस्लाम में रंग खेलना है हराम?

होली मनाने से क्यों बचते हैं मुसलमान, क्या इस्लाम में रंग खेलना है हराम?

 देश पर होली का खुमार चढ़ चुका है और सियासत भी जमकर हो रही है. इस बार होली का त्योहार मुस्लिमों के पवित्र रमजान के महीने में पढ़ रहा है, तो उस दिन शुक्रवार भी है. ऐसे में होली के त्योहार पर सियासी रंग भी खूब पक्का किया जा रहा है. होली के रंग का उत्सव और जुमे की नमाज के बीच संतुलन बैठाने की कोशिश में प्रशासन लगा हुआ है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मुसलमान होली मनाने से क्यों बचते हैं और क्या रंग खेलना उनके लिए इस्लाम में हराम करार दिया गया है?

ल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने एक बयान जारी कर कहा कि इस्लाम में होली खेलना जायज नहीं है. मुबारकबाद देना एक अलग चीज है. मुसलमानों को होली में नहीं जाना चाहिए और न ही रंग खेलना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस्लाम में होली खेलना हराम है. इस्लाम में क्या वाकई होली का रंग खेलने के लिए मना किया गया.

इस्लाम में होली खेलना क्या हराम है?

होली में रंग खेलने को लेकर इस्लामी नजरिए पर हमने मौलाना जिशान मिस्बाही से विस्तार से बातचीत किया. मौलाना मिस्बाही बताते हैं कि हर धर्म के अपने-अपने नियम और त्योहार व पर्व होते हैं. होली हिंदुओं का त्योहार हैं, जिसमें हिंदू समाज के लोग रंग खेलते हैं. होली पर हिंदू समाज के लोग एक दूसरे को रंग लगाकर होली त्योहार की मुबारकबाद देते हैं. होली की मुबारकबाद देना मुसलमानों के लिए मना नहीं है, लेकिन रंग खेलने की मना किया गया है.

मौलाना जिशान मिस्बाही कहते हैं कि इस्लाम सादगी और संजीदा धर्म है. इस्लाम रंग खेलने और पटाखे फोड़ने जैसे चीजों से रोकता है. होली के मौके पर रंग खेला जाता है, कुछ लोग हुड़दंग करते हैं. नाच-गाना होता है. इसीलिए होली पर रंग खेलने से मुस्लिम समाज के लोग परहेज करते हैं. हिंदुस्तान में अलग-अलग धर्म के लोग रहते हैं. सामाजिक सद्भावना के लिए मुस्लिम हिंदू भाई से होली पर गले मिलकर त्योहार की मुबारकबाद दे सकते हैं, लेकिन रंग खेलने और नाच-गाना करने से मना है.

डा. मिस्बाही कहते हैं कि होली पर लोग खुद को और दूसरों को अलग-अलग रंगों से रंगते हैं जब तक कि उनका रूप बहुत ही घृणित नहीं हो जाता और उसके बाद रंगीन कपड़े फेंक दिए जाते हैं क्योंकि उन्हें साफ करना और उन्हें उनकी मूल स्थिति में बहाल करना बहुत मुश्किल होता है. इस्लाम में कपड़े को खराब कर और रंग में रंगकर फेंक देने को गलत माना है.

इस्लाम में हुड़दंग और रंग की गुंज्जाइश नहीं

मौलाना ओसामा नदवी कहते हैं कि होली हिंदू धर्म का त्योहारा है और हिंदुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है. हिंदू धर्म के लोग होली खेलते हैं. होली हिंदू धर्म के त्योहार होने के चलते मुसमलानों को मनाने से मना किया गया है. आखिर नबी मोहम्मद साहब ने किसी दूसरे धर्म के क्रिया कलापों को मनाने से मना किया है. यही वजह है कि इस्लाम के मानने वाले लोग होली नहीं मनाते हैं. इस्लाम सादगी और संजीदा धर्म है इसीलिए इस्लाम मजहब में रंग खेलने की कोई गुंजाइश नहीं है. मुसलमान इसलिए रंग खेलने से बचते हैं.

नदवी कहते हैं कि इस्लाम किसी भी तरह के हुड़दंग और शोर-शराबे से रोकता है इसलिए इस्लाम में कोई भी त्योहार ऐसा नहीं है, जिसमें रंग खेला जाए या फिर हुड़दंग की गुंजाइश हो. इस्लाम धर्म में पहचान को काफी अहमियत की दी है, जिसके चलते ही नबी ने मना किया है कि दूसरे धर्म के त्योहार को न मनाए क्योंकि उनके मनाने से आपकी शिनाख्त नहीं रह जाएगी और उनमें और आपमें कोई फर्क नहीं रह जाएगा. कुरान में एक आयत है कि लकुम दीनुकुम वालिया दीन, इसका मतलब साफ है कि तुम्हें तुम्हारा दीन मुबारक और मुझे अपना दीन. तुम अपने रास्ते चलो, मैं अपने रास्ते. इस तरह से हम होली के त्योहार का सम्मान तो कर सकते हैं, लेकिन मना नहीं सकते हैं

सूफी और मुगल क्यों खेलते थे होली?

इस्लाम में अगर होली हराम है तो फिर इतिहास के पन्ने पलटने पर पाते हैं कि पुराने वक्त में खासकर मुगलों के दौर में होली हिंदुओं के साथ मुसलमान भी जोर-शोर से खेलते थे. इतिहासकारों ने मुगलकालीन होली के बारे में खूब जिक्र किया है. मुगल बादशाह अकबर से लेकर शाहजहां के दौर में मुस्लिमों के होली का रंग खेलने के सबूत मिलते हैं. इतना ही नहीं, होली के मौके पर दिल्ली स्थित निजामुद्दीन औलिया की दरगाह हो या फिर यूपी के बाराबंकी के देवा शरीफ में हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर हिन्दू-मुस्लिम मिलकर गुलाल उड़ाते नजर आते हैं.

होली खेलने की परंपरा हाजी वारिस अली शाह के जमाने से ही शुरू हुई थी, जो आज भी कायम है. होली के दिन यहां देश के कोने-कोने से सभी धर्म के लोग यहां आते हैं और एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर मुबारकबाद देते हैं. निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर हर साल बसंत के मौके पर होली खेली जाती है.

अजमेर की ख्वाजा गरीब नवाज के दरगाह पर बसंत के मौके पर गुलाल उड़ते नजर आते हैं. इतना ही नहीं होली के पावन मौके पर ख्वाजा गरीब नवाज की दुआएं लेने पहुंचे थे. मुसलमानों का होली से नाता आज का नहीं बल्कि सदियों का है. दिल्ली सल्तनत और मुगलिया दौर के मुस्लिम सूफी संत और कवियों ने होली पर कई बेहतरीन रचनाएं गढ़ी हैं. सूफी अमीर खुसरो हजरत निजामुद्दीन औलिया से मुरीद होली के दिन ही हुए थे. होली पर अमीर खुसरो ने कई कलाम लिखे हैं. आज रंग है ऐ मां, रंग है री, मोरे ख्वाजा के घर के रंग है री, आज सजन मिलावरा मोरे आंगन में, आज रंग है ऐ मां, रंग है री, मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया…

सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह की होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. यह मजार एक मिसाल है, इस बात की कि रंगों का कोई मजहब नहीं होता, बल्कि रंगों की खूबसूरती हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है. यही वजह है कि हर साल की तरह इस बार भी यहां गुलाल व गुलाब से सभी धर्मों के लोगों ने एक साथ होली खेली. लोगों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर फूलों से होली खेली और आपसी भाईचारे की अनोखी मिसाल पेश करते हैं.

देवा शरीफ के सूफी संत हाजी वारिस अली शाह ने यह संदेश भी दिया कि जो रब है वही राम है. शायद इसीलिए केवल होली ही नहीं, बल्कि मजार के निर्माण काल से ही यह स्थान हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश देता आ रहा है. इस मजार पर मुस्लिम समुदाय से कहीं ज्यादा संख्या में हिन्दू समुदाय के लोग आते हैं. होली पर हिंदू ही नहीं बल्कि मुसलमान, सिख के साथ और भी दूसरे धर्मों के लोग पहुंचे थे. यहां हर कोई रंगों में सराबोर रहता है.

दरगाहों पर क्यों खेली जाती होली?

सूफी और मुगलों के होली खेलने को लेकर मौलाना जिशान मिस्बाही कहते हैं कि जिन मुगल बादशाहों ने होली खेली है, वो सत्ता पर विराजमान थे और अपनी जनता की भावनाओं को देखते हुए होली खेली है. अकबर हों या फिर शाहजहां, उन्होंने अपनी आवाम के साथ मोहब्बत का पैगाम देने के लिए खेली है. इसके अलावा सूफियों के दरगाहों पर जो होली खेलने की बात है, तो वो कब शुरू और कैसे शुरू हुई, इसका कोई पुख्ता तारीख नहीं मिलती है. सूफीवाद का पूरा सिद्धांत ही मोहब्बत पर कायम है.

हजरत निजामुद्दीन से लेकर हाजी वारिस पिया तक हिंदू-मुस्लिम सामाजिक सद्भावना के लिए काम करते थे. मुगल काल में सूफियों ने ही हिंदू-मुस्लिम के बीच एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया है, क्योंकि उनका पैगाम ही मोहब्बत के लिए था. मोहब्बत के रिवायत में ही होली खेली है. इसीलिए इसे इस्लाम धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

मौलाना नदवी कहते हैं कि सूफियों और मुगलों के होली मनाने की बात सिर्फ भारत में ही दिखती है और दुनिया के किसी भी हिस्से में नहीं. जिन सूफी और मुगलों की आप बात कर रहे हैं उन्होंने भारत में आकर ही रंग खेला है और होली मनाई है. भारत में आने से पहले उनके ऐसे कोई भी सबूत नहीं मिलते हैं. रंग का भले ही कोई धर्म न हो, लेकिन रंग खेलने वालों का धर्म तो है और वो अपने धार्मिक लिहाज से रंग खेलते है इसलिए इस्लाम से जोड़ना सही नहीं है.

रंग खेलना कैसे हराम तो दिखाएं सबूत

इतिहासकार राना सफवी कहती हैं कि जो लोग इस्लाम में रंग को हराम मानते हैं, मैं उनसे इस बात का सबूत मांगना चाहती हूं. इस तरह की गलत धारणाएं अज्ञान और पूर्वाग्रहों से ही पनपती हैं. वो कहती हैं कि इस्लाम में रंग हराम नहीं है बल्कि हमें बस इतना ध्यान रखना चाहिए कि नमाज पढ़ने के लिए जब हम वुज़ू करते हैं, तब हमारी त्वचा पर ऐसा कुछ भी नहीं लगा हो जो पानी को त्वचा के सीधे संपर्क में आने से रोके. ऐसे में हमें बस ये करना करना है कि जब हम वुज़ू करने जा रहे हों उससे पहले त्वचा पर लगे गुलाल को धो लिया जाए.

इतिहासकार मुंशी जकाउल्लाह ने अपनी 19वीं सदी के मध्य में लिखी किताब तारीख-ए-हिंदुस्तानी में रंगों के त्योहार का जिक्र करते हुए लिखा है,’कौन कहता है, होली हिंदुओं का त्योहार है. मैंने देश के तमाम दरगाहों पर होली खेलते हुए मुसलमानों को देखा है. इतिहास में अकबर का अपनी रानियों के साथ और जहांगीर का नूरजहां के साथ होली खेलने की बात भी कही गई है. अलवर संग्रहालय में एक ऐसी चित्र भी मौजूद है जहां जहांगीर को होली खेलते हुए दिखाया गया है. वो लिखते हैं कि कैसे बाबर हिंदुओं को होली खेलते देखकर हैरान रह गया था. बाबर को होली का ये त्योहार इतना पसंद आया कि उसने अपने नहाने के कुंड को पूरा का पूरा शराब से भरवा दिया.

इतिहासकारों की मानें तो शाहजहां के ज़माने में होली के नाम को अलग तरह से बोला जाता था. इस त्योहार को ईद-ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी (रंगों की बौछार) कहा जाता था. अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर द्वितीय के बारे में ये किस्सा काफी मशहूर है कि होली पर वह अपने मंत्री को रंग लगाने जाया करते थे. ऐसे में लाल किले में यमुना नदी के तट पर मेले का आयोजन किया जाता था. इस दिन सभी लोग एक दूसरे पर रंग लगाते, गीतकार मुगल दरबारों में गाना गाकर सभी का मनोरंजन करते थे.

Big Accident : दर्दनाक हादसे में 12 की मौत, हाइवे पर पलटी बस, 45 लोग घायल

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 Big Accident: दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग शहर में दर्दनाक हादसा हो गया है। यहां एक बस के पलट जाने से 12 लोगों की मौत की खबर है। वही 45 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मौके पर पहुंचे पुलिस की टीम राहत बचाव कार्य में जुट गई है।

बस जोहान्सबर्ग के पूर्व में स्थित टाउनशिप कैटलहोंग से लोगों को ले जा रही थी। दुर्घटना स्थल से 9 पुरुषों और 3 महिलाओं के शव बरामद किए गए हैं। दुर्घटना में कोई अन्य वाहन शामिल नहीं था और अधिकारी अभी तक कारण का पता नहीं लगा पाए हैं। पुलिस जांच कर रही है।

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 देवरिया : क्रिकेट का जुनून भारतीयों के दिलों में गहराई तक समाया हुआ है, और जब बात विराट कोहली की हो, तो फैन्स की दीवानगी अपने चरम पर होती है। हाल ही में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में कोहली के जल्दी आउट होने के बाद एक दिल दहला देने वाली घटना घटी।

कक्षा आठवीं की छात्रा प्रियांशी पांडे, जो मैच का आनंद अपने परिवार के साथ ले रही थी, को कोहली के आउट होने के बाद गहरा सदमा लगा। कोहली ने 2 गेंदों पर सिर्फ एक रन बना कर रन आउट हो गए थे, जो कि उनके प्रशंसकों के लिए निराशाजनक पल था। जैसे ही कोहली आउट हुए, प्रियांशी को दिल का दौरा पड़ा और उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

प्रियांशी के परिजनों के अनुसार, वह मैच के दौरान काफी खुश थी, खासकर जब रोहित शर्मा और शुभमन गिल शानदार बैटिंग कर रहे थे। लेकिन जैसे ही कोहली आउट हुए, उनका मनोबल टूट गया और उन्होंने महसूस किया कि कोहली का जल्दी आउट होना उनके लिए बहुत बड़ा आघात था। इस सदमे के कारण उन्हें हार्ट अटैक आया और उन्होंने अपनी जान गवा दी।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को सीने में दर्द, एम्स में कराया गया भर्ती

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को सीने में दर्द, एम्स में कराया गया भर्ती

 नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को सीने में दर्द और बेचैनी की शिकायत के बाद दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें शनिवार देर रात करीब 2 बजे एम्स के कार्डियक केयर यूनिट (CCU) में भर्ती किया गया।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी सेहत पर करीबी नजर रख रही है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, और चिकित्सकों द्वारा आवश्यक जांच एवं उपचार जारी है।

सूत्रों के अनुसार, उपराष्ट्रपति को शुरुआती चिकित्सा परीक्षण के बाद एम्स में भर्ती करने का निर्णय लिया गया ताकि उनकी सेहत पर गहन निगरानी रखी जा सके। हालांकि, अब तक उनके स्वास्थ्य को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

सबसे अधिक बालों वाले चेहरे के साथ मध्य प्रदेश के लड़के ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, जानें कैसे फेस पर आए इतने हेयर?

सबसे अधिक बालों वाले चेहरे के साथ मध्य प्रदेश के लड़के ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, जानें कैसे फेस पर आए इतने हेयर?

 Werewolf Syndrome: सिर के अलावा इंसान के शरीर पर थोड़े बहुत ही बाल होते है, जो एक नॉर्मल बात है. लेकिन आज हम आपको मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले 18 साल के लड़के ललित पाटीदार बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने चेहरे पर सबसे अधिक बाल होने के कारण गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guiness World Record) बना लिया है. अगर आप ये सोच रहे हैं, कि चेहरे पर इतने सार बाल कैसे हो सकते हैं, तो बता दें, लंबे समय से ललित हाइपरट्रिकोसिस (Hypertrichosis) नामक एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है, जिसे वेयरवोल्फ सिंड्रोम (Werewolf Syndrome)  के नाम से भी जाना जाता है.


आपको जानकर हैरानी होगी कि इस दुर्लभ बीमारी से देश और दुनिया में केवल 50 मामले ही दर्ज हैं, जिसके कारण चेहरे पर आम लोगों की तुलना में असामान्य रूप से अधिक बाल उग आते हैं. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, पाटीदार के चेहरे पर प्रति वर्ग सेंटीमीटर 201.72 बाल हैं, जो उनके चेहरे के 95% हिस्से को पूरी तरह से ढक देते हैं.  

कैसा है ललित का चेहरा

ललित की कद - काठी बिल्कुल वैसे ही जैसे एक आम युवक की होती है, लेकिन उनका चेहरा अन्य लोगों से अलग दिखता है, जिसका मुख्य कारण उनके चेहरे पर अधिक बालों का होना है. ललित के पूरे चेहरे पर बाल है और ये इतने घने हैं कि आंखों के अलावा उसके चेहरे पर कुछ और दिखाई नहीं देता है. गाल, नाक, माथे, ठुड्डी हर जगह सिर्फ बाल ही बाल है.

बता दें, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल करना आसान नहीं था, क्योंकि उनकी शक्ल-सूरत को लेकर ज्यादातर अजनबी और स्कूल में क्लासमेट अलग- अलग टिप्पणी करते हैं, जो कई बार असहनीय भी हो जाती है.

उन्होंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (GWR) से कहा, " जो लोग मुझसे पहली बार मिलते है, वह मेरे चेहरे के बालों को देखकर डर जाता थे, लेकिन जब लोगों ने मुझे जानना चाहा और मुझसे बातचीत करनी शुरू की, तो उन्हें समझ में आ गया कि मैं एक साधारण व्यक्ति हूं और उनसे बिल्कुल भी अलग नहीं हूं. मैं सिर्फ बाहर से चेहरे के कारण अलग दिखाई देता हूं, लेकिन मैं अंदर से बिल्कुल भी अलग नहीं हूं. मेरा स्वभाव आम लोगों की तरह ही है.

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लोगों की टिप्पणी से प्रभावित नहीं होते ललित, चलाते हैं यूट्यूब चैनल

ललित लोगों की टिप्पणियों से खुद को प्रभावित नहीं होने देते. वे जानते हैं, भले ही चेहरे से वह आम लोगों की तरह नजर नहीं आते, लेकिन उनकी एक यूनिक आइडेंटिटी है, जिसे उन्हें स्वीकार करना चाहिए. बता दें, ललित एक यूट्यूब चैनल चलाते हैं, जिस पर वे अपने दिन-प्रतिदिन के डेली व्लॉग्स अपलोड करते हैं. लोगों को उनके व्लॉग्स काफी पसंद आते हैं.

इटली के मिलान पहुंचे थे ललित

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज होने से पहले ललित इटली के मिलान शहर में एक टीवी शो में दिखाई दिए थे. जहां आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड बनाने से पहले उनके चेहरे के बालों का मेजरमेंट लिया गया था, एक स्थानीय ट्राइकोलॉजिस्ट ने उनके चेहरे के बालों को मापने के लिए उनके चेहरे के छोटे-छोटे हिस्सों की शेविंग कर दी थी.

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने पर ललित ने कहा, 'मैं स्पीचलेस हूं, मुझे नहीं पता कि अब क्या कहना चाहिए, क्योंकि मैं यह पहचान पाकर बहुत खुश हूं. जो लोग चाहते हैं कि मैं अपने चेहरे के बालों शेविंग कर पूरा हटा दूं, तो उनके लिए कहने को मेरे पास ज्यादा कुछ नहीं है. मैं उनसे कहता हूं कि मुझे अपना ये रूप काफी पसंद है और मैं किसी दूसरे व्यक्ति के लिए अपना रूप नहीं बदलना चाहता'

वेयरवोल्फ सिंड्रोम के लक्षण

- आमतौर पर यह बीमारी लोगों को जन्मजात होती है. जब बच्चा जन्म लेता है और उसके शरीर पर महीन बाल होते हैं, तो इस बीमारी के कारण ये बाल कुछ हफ्तों में गायब होने के बजाय धीरे - धीरे बढ़ने लगते हैं.

- अगर आपको लगता है वेयरवोल्फ सिंड्रोम होने से सिर्फ चेहरे के बाल में बढ़ोतरी होगी तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. बता दें यह ऐसी बीमारी है जो पूरे शरीर या फिर शरीर के किसी भी एक हिस्से को प्रभावित कर सकती है. इस बीमारी से महिला या पुरुष कोई भी पीड़ित हो सकता है.

- इस बीमारी के कारण असामान्य बाल की ग्रोथ जन्म से ही शुरू हो जाती है, जो व्यक्ति के पूरे जीवन में जारी रहती रहती है. बाल, आमतौर पर लंबे और घने होते हैं, जो व्यक्ति के चेहरे और शरीर को ढक देते हैं. वहीं  कुछ मामलों में, बालों के एक से अधिक पैच मौजूद होते हैं.

- हाइपरट्रिकोसिस से महिलाएं भी पीड़ित हो सकती है, जिससे कारण महिलाओं के चेहरे, छाती और पीठ जैसे स्थानों पर काले, घने बाल उग सकते हैं.