नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में भाजपा नेता की बेटी समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता    |    बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री साय    |    लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |
अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति, कुछ ही देर में CEO का भी ऐलान

अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति, कुछ ही देर में CEO का भी ऐलान

  अयोध्या :- अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आज सीईओ का ऐलान करेगा. इससे पहले ट्रस्ट में 3 नए सदस्यों को शामिल किया गया है. इनमें अयोध्या से मदन मोहन पांडेय, दिल्ली से महेश भागचन्दका और शिकोहाबाद से निर्मला यादव का नाम शामिल है.

बुधवार को राम मंदिर के सीईओ का भी ऐलान होना है. इसके लिए ट्रस्ट की मीटिंग चल रही है. इस बैठक में CEO चुनने के साथ-साथ ट्रस्ट की डीड में संशोधन करने जैसे बड़े फैसले भी होने हैं. 5 फरवरी 2020 को ट्रस्ट के गठन के बाद ये पहला मौका है, जब इसकी डीड में संशोधन किया जा रहा है.

बता दें कि राम मंदिर चंदा चोरी मामले में आरोपों के बाद पूर्व महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था. इस विवाद के बाद ट्रस्ट की छवि और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सीईओ की नियुक्ति प्रक्रिया 6 जुलाई से शुरू की गई थी.सीईओ पद के लिए कुल 5,585 आवेदन आए थे. जस्टिस (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली स्क्रीनिंग कमेटी ने 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया और 3 नामों का लिफाफा ट्रस्ट के अध्यक्ष को सौंप दिया है.

सीईओ के पास होंगी ये जिम्मेदारियां

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि पेशेवर प्रशासन और पारदर्शिता के लिए एक सीईओ बेहद जरूरी है. नए नियमों के तहत सीईओ के अधिकार और शक्तियां तय की जाएंगी. सीईओ ट्रस्ट के महामंत्री को रिपोर्ट करेंगे और उनके पास सभी प्रशासनिक, वित्तीय और वैधानिक अधिकार होंगे.

अश्लील कंटेंट के चक्कर में न करें ये गलती, एक APK फाइल खाली कर सकती है बैंक अकाउंट! सरकार ने जारी की चेतावनी

अश्लील कंटेंट के चक्कर में न करें ये गलती, एक APK फाइल खाली कर सकती है बैंक अकाउंट! सरकार ने जारी की चेतावनी

 नई दिल्ली। Instagram-Facebook Alert: सोशल मीडिया पर कुछ भी देखने के चक्कर में अगर आप अनजान लिंक पर क्लिक करते हैं या किसी वेबसाइट से APK फाइल डाउनलोड कर लेते हैं, तो यह आपकी बड़ी गलती साबित हो सकती है। भारत सरकार ने Android फोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ संदिग्ध विज्ञापनों और APK फाइलों को लेकर अलर्ट किया है।

सरकार के मुताबिक, साइबर अपराधी Facebook और Instagram पर अश्लील कंटेंट से जुड़े विज्ञापनों का इस्तेमाल करके यूजर्स को खतरनाक APK फाइल डाउनलोड करने के लिए फंसा सकते हैं। देखने में ये ऐप सामान्य एडल्ट कंटेंट या वीडियो ऐप जैसे लग सकते हैं, लेकिन फोन में इंस्टॉल होने के बाद ये संवेदनशील जानकारी और वित्तीय डेटा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।

यह चेतावनी गृह मंत्रालय और Indian Cybercrime Coordination Centre (I4C) की National Cybercrime Threat Analytics Unit (NCTAU) की ओर से जारी की गई एडवाइजरी से जुड़ी है। एडवाइजरी में Night Play, Reloop, Kyss, Vimo, Rivo, Nexo और Vixa जैसे ऐप के नाम बताए गए हैं।

Facebook-Instagram के विज्ञापन से शुरू हो सकता है पूरा खेल

साइबर अपराधियों का तरीका काफी चालाक हो सकता है। सबसे पहले यूजर को Facebook या Instagram पर अश्लील वीडियो या अन्य कंटेंट से जुड़ा कोई विज्ञापन दिखाई देता है।

जैसे ही यूजर उस विज्ञापन पर क्लिक करता है, उसे किसी दूसरी वेबसाइट पर ले जाया जा सकता है। यहां वीडियो या कंटेंट देखने के लिए यूजर से किसी ऐप को डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।

कई मामलों में यूजर को Google Play Store की जगह सीधे APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जा सकता है। यही वह जगह है जहां सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।

APK फाइल डाउनलोड करना क्यों हो सकता है खतरनाक?

APK Android ऐप की इंस्टॉलेशन फाइल होती है। Google Play Store के बाहर से डाउनलोड की गई किसी अनजान APK में क्या मौजूद है, इसका भरोसा करना मुश्किल हो सकता है।

ऐसी फाइल के जरिए फोन में संदिग्ध या नुकसान पहुंचाने वाला सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इसलिए किसी वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापन या अनजान लिंक से मिलने वाली APK फाइल को सिर्फ इसलिए इंस्टॉल न करें क्योंकि उसमें कोई आकर्षक वीडियो या कंटेंट दिखाने का दावा किया जा रहा है।

ऐप इंस्टॉल करने के बाद मांगी जाती हैं खतरनाक परमिशन

संदिग्ध ऐप फोन में इंस्टॉल होने के बाद कई तरह की परमिशन मांग सकते हैं। इनमें Accessibility Access जैसी परमिशन भी शामिल हो सकती है।

Accessibility सुविधा असल में जरूरतमंद यूजर्स की सहायता के लिए बनाई गई है, लेकिन अगर कोई संदिग्ध ऐप इसका गलत इस्तेमाल करे तो फोन के कुछ हिस्सों पर असामान्य नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की जा सकती है।

ऐसी स्थिति में यूजर की स्क्रीन पर होने वाली गतिविधियों, ऐप इस्तेमाल और अन्य संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है।

बैंकिंग और UPI भी हो सकते हैं निशाने पर

सबसे बड़ी चिंता तब पैदा होती है जब फोन में मौजूद संदिग्ध ऐप को संवेदनशील परमिशन मिल जाती है। साइबर अपराधी इसका इस्तेमाल OTP, स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी या बैंकिंग गतिविधियों तक पहुंच बनाने की कोशिश में कर सकते हैं।

इसलिए अगर आपने गलती से कोई संदिग्ध ऐप इंस्टॉल कर लिया है तो अपने बैंक अकाउंट, UPI और कार्ड से जुड़े लेनदेन पर नजर रखना बेहद जरूरी है।

कोई ऐसा ट्रांजैक्शन दिखाई दे जिसे आपने नहीं किया है तो बिना देरी किए अपने बैंक से संपर्क करें।

VPN के नाम पर भी हो सकता है खेल

कुछ संदिग्ध ऐप फोन में VPN इंस्टॉल करने या उसकी अनुमति देने के लिए भी कह सकते हैं। VPN का इस्तेमाल सामान्य तौर पर इंटरनेट कनेक्शन और प्राइवेसी के लिए किया जाता है, लेकिन किसी अनजान या संदिग्ध VPN के मामले में सावधानी जरूरी है।

ऐसे सॉफ्टवेयर से इंटरनेट ट्रैफिक की सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर जोखिम पैदा हो सकता है।

संदिग्ध ऐप को हटाना भी हो सकता है मुश्किल

कुछ खतरनाक ऐप इस तरह डिजाइन किए जा सकते हैं कि उन्हें सामान्य तरीके से हटाना आसान न हो। अगर किसी नए ऐप को इंस्टॉल करने के बाद फोन में अचानक अजीब पॉप-अप, अनजान ऐप, बैटरी तेजी से खत्म होना, फोन का असामान्य व्यवहार या बैंकिंग गतिविधियों में गड़बड़ी दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज न करें।

सबसे पहले संदिग्ध ऐप की पहचान करें और उसकी परमिशन की जांच करें।

अगर APK इंस्टॉल कर ली है तो क्या करें?

अगर आपने गलती से किसी अनजान वेबसाइट से APK डाउनलोड या इंस्टॉल कर ली है तो घबराने के बजाय तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाएं।

सबसे पहले संदिग्ध ऐप की परमिशन चेक करें। खासकर Accessibility, Notification Access, Device Admin और अन्य संवेदनशील एक्सेस की जांच करें।

इसके बाद संदिग्ध ऐप को हटाने की कोशिश करें। अगर ऐप सामान्य तरीके से डिलीट नहीं हो रहा है तो Safe Mode में फोन शुरू करके उसे हटाने का प्रयास किया जा सकता है।

समस्या बनी रहने पर जरूरी डेटा का सुरक्षित बैकअप लेने के बाद Factory Reset भी एक विकल्प हो सकता है। हालांकि, ऐसा करने से पहले जरूरी डेटा और अकाउंट की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।

Google Play Protect रखें ON

Android यूजर्स को अपने फोन में Google Play Protect चालू रखना चाहिए। यह ऐप्स को स्कैन करने और संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले ऐप्स की पहचान करने में मदद करता है।

इसके अलावा फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और सिक्योरिटी अपडेट को समय पर इंस्टॉल करते रहें।

इन गलतियों से हमेशा बचें

  • अनजान वेबसाइट से APK डाउनलोड न करें।
  • सोशल मीडिया पर आए संदिग्ध विज्ञापनों पर क्लिक न करें।
  • किसी अनजान ऐप को Accessibility Access न दें।
  • संदिग्ध ऐप को SMS, कॉल, नोटिफिकेशन या अन्य संवेदनशील परमिशन देने से बचें।
  • अनजान लिंक से बैंकिंग ऐप या दूसरे जरूरी ऐप डाउनलोड न करें।
  • फोन में Google Play Protect चालू रखें।
  • Android का सिक्योरिटी अपडेट समय पर करें।
  • बैंक और UPI ट्रांजैक्शन नियमित रूप से चेक करते रहें।

साइबर फ्रॉड हो जाए तो तुरंत करें शिकायत

अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे इंतजार नहीं करना चाहिए। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है।

इसके अलावा National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।

एक छोटी सी सावधानी बचा सकती है बड़ा नुकसान

सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर विज्ञापन सुरक्षित नहीं होता। खासकर जब कोई विज्ञापन आपको अश्लील कंटेंट, फ्री वीडियो या किसी खास सुविधा का लालच देकर Play Store के बाहर से APK डाउनलोड करने के लिए कहे, तो सावधान हो जाएं।

किसी अनजान ऐप को फोन में इंस्टॉल करने से पहले यह जरूर सोचें कि उसे आपके फोन और आपकी निजी जानकारी तक कितनी पहुंच मिल रही है। थोड़ी सी सावधानी आपके डेटा और पैसे दोनों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है।

बिना इंटरनेट भेजें पैसे! अब फीचर फोन से भी होगा UPI पेमेंट, जानिए कैसे करेगा काम

बिना इंटरनेट भेजें पैसे! अब फीचर फोन से भी होगा UPI पेमेंट, जानिए कैसे करेगा काम

  नई दिल्ली। अगर आपके पास स्मार्टफोन नहीं है और आप अभी भी फीचर फोन का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए डिजिटल पेमेंट से जुड़ी बड़ी खबर है। PhonePe ने फीचर फोन यूजर्स के लिए UPI 123Pay सेवा शुरू की है, जिसके जरिए चुनिंदा फीचर फोन से बिना सामान्य इंटरनेट कनेक्शन के UPI पेमेंट किया जा सकेगा।

इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिल सकता है, जो स्मार्टफोन इस्तेमाल नहीं करते या ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर रहती है। PhonePe के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य फीचर फोन इस्तेमाल करने वाले लोगों को भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा से जोड़ना है।

बिना इंटरनेट कैसे होगा पेमेंट?

UPI 123Pay को खास तौर पर ऐसे यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिन्हें UPI इस्तेमाल करने के लिए स्मार्टफोन और लगातार इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं है। सेवा के जरिए फीचर फोन से जरूरी UPI सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

यानी अगर आपके फोन में सामान्य इंटरनेट नहीं चलता, तब भी उपलब्ध सुविधा और नेटवर्क के आधार पर आप पैसे भेजने और पेमेंट करने जैसे काम कर सकेंगे।

फीचर फोन से कर सकेंगे ये काम

PhonePe की इस सुविधा के जरिए यूजर्स को कई जरूरी UPI सुविधाएं मिलने की बात कही गई है। इनमें—

  • दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजना
  • दुकानदार को UPI पेमेंट करना
  • बैंक अकाउंट का बैलेंस चेक करना
  • पुराने ट्रांजैक्शन की जानकारी देखना
  • आने वाले समय में बिल पेमेंट और मोबाइल रिचार्ज जैसी सुविधाएं

शामिल हो सकती हैं।

इससे फीचर फोन यूजर्स को छोटे-बड़े रोजमर्रा के भुगतान के लिए हर बार कैश पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।

किन फीचर फोन में मिलेगा सपोर्ट?

शुरुआत में यह सुविधा HMD, Nokia, Lava International और Itel Mobile के चुनिंदा फीचर फोन मॉडल्स में उपलब्ध कराई जा रही है।

बताए गए सपोर्टेड मॉडल्स में HMD 105 2G, HMD 110 2G, Nokia 105 Classic, Nokia 105 Single SIM, Nokia 105 Dual SIM, Nokia 106 और Nokia 123 Shield जैसे फोन शामिल हैं।

आने वाले समय में कुछ अन्य फीचर फोन मॉडल्स में भी इसका सपोर्ट बढ़ाया जा सकता है।

आवाज के जरिए भी मिलेगी मदद

PhonePe ने यूजर्स की सुविधा के लिए AI आधारित वॉयस हेल्पलाइन उपलब्ध कराने की बात कही है। यह सेवा अंग्रेजी के साथ कई भारतीय भाषाओं में मदद देगी।

इसके जरिए यूजर्स को UPI 123Pay शुरू करने और इस्तेमाल करने के तरीके की जानकारी स्टेप-बाय-स्टेप दी जा सकती है। UPI से जुड़े सामान्य सवालों का जवाब भी वॉयस हेल्पलाइन के माध्यम से लिया जा सकेगा।

UPI 123Pay कैसे शुरू करें?

सेवा शुरू करने के लिए सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि आपका फीचर फोन इस सुविधा को सपोर्ट करता है। इसके बाद फोन में उपलब्ध PhonePe सेवा को खोलकर जरूरी नियम और शर्तों को स्वीकार करना होगा।

इसके बाद यूजर को अपना बैंक अकाउंट चुनना होगा। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में डेबिट कार्ड से जुड़ी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण मांगे जा सकते हैं। इसके बाद UPI PIN सेट करना होगा।

रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद उपलब्ध विकल्पों के अनुसार मोबाइल नंबर, कॉन्टैक्ट या UPI ID के जरिए पेमेंट किया जा सकेगा।

अगर फीचर फोन में कैमरा उपलब्ध है और संबंधित सुविधा सपोर्ट करती है, तो QR कोड के जरिए भी पेमेंट किया जा सकता है।

पेमेंट करते समय रखें सावधानी

UPI का इस्तेमाल करते समय सबसे जरूरी है कि पेमेंट करने से पहले सामने वाले व्यक्ति की जानकारी और रकम को अच्छी तरह जांच लें। UPI PIN कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शेयर न करें।

अगर कोई व्यक्ति फोन करके UPI PIN, OTP या बैंक की गोपनीय जानकारी मांगता है तो उसे बिल्कुल न बताएं। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करके बैंकिंग जानकारी दर्ज करने से भी बचें।

कमजोर इंटरनेट वाले इलाकों में मिल सकता है फायदा

भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोग फीचर फोन का इस्तेमाल करते हैं। कई ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी भी हमेशा बेहतर नहीं रहती।

ऐसे में फीचर फोन पर UPI की सुविधा डिजिटल पेमेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है। खासकर छोटे दुकानदारों, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और उन यूजर्स के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है, जो स्मार्टफोन नहीं रखते।

स्मार्टफोन के बिना डिजिटल पेमेंट की ओर बड़ा कदम

PhonePe की UPI 123Pay सेवा से फीचर फोन यूजर्स के लिए डिजिटल पेमेंट की पहुंच बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, सभी फीचर फोन में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, इसलिए इस्तेमाल करने से पहले अपने फोन मॉडल और संबंधित सेवा की उपलब्धता जरूर जांच लें।

FD में पैसा रखने से पहले जान लें ये विकल्प! LIC की इन स्कीम्स से मिल सकता है बेहतर रिटर्न

FD में पैसा रखने से पहले जान लें ये विकल्प! LIC की इन स्कीम्स से मिल सकता है बेहतर रिटर्न

 नई दिल्ली। जब निवेश की बात आती है तो ज्यादातर लोग सबसे पहले सुरक्षित विकल्प तलाशते हैं। बैंक एफडी इसी वजह से लंबे समय से भारतीय निवेशकों की पसंद रही है। हालांकि, कम जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न की तलाश करने वाले निवेशक LIC Mutual Fund की डेट और हाइब्रिड कैटेगरी की कुछ योजनाओं पर भी नजर डाल सकते हैं।

लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड में रिटर्न की गारंटी नहीं होती। डेट फंड और आर्बिट्रेज फंड को भी पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकता। इसलिए किसी भी योजना में निवेश करने से पहले उसके जोखिम, अवधि, रिटर्न और टैक्स नियमों को समझना जरूरी है।

LIC MF Banking & PSU Debt Fund

यह एक डेट फंड है, जो मुख्य रूप से बैंकिंग और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से जुड़े डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है। इसका उद्देश्य अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न हासिल करना होता है।

यह विकल्प उन निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकता है जो इक्विटी मार्केट के सीधे उतार-चढ़ाव से बचते हुए मध्यम अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं। हालांकि, इसमें भी ब्याज दर और क्रेडिट से जुड़े जोखिम मौजूद रहते हैं।

LIC MF Savings Fund

कम अवधि के लिए निवेश करने वाले लोग सेविंग्स फंड जैसी डेट स्कीम पर विचार कर सकते हैं। ऐसी योजनाएं आमतौर पर कम अवधि वाले डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करती हैं।

बैंक सेविंग अकाउंट की तुलना में इनमें संभावित रिटर्न अधिक हो सकता है, लेकिन रिटर्न निश्चित नहीं होता और जरूरत के समय निकासी पर संबंधित नियम लागू हो सकते हैं।

LIC MF Arbitrage Fund

आर्बिट्रेज फंड कैश और फ्यूचर्स मार्केट में मौजूद कीमतों के अंतर से कमाई करने की रणनीति अपनाता है। इसे आमतौर पर कम जोखिम वाली इक्विटी श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन इसे बिना जोखिम वाला निवेश समझना सही नहीं है।

इसका एक फायदा यह है कि टैक्स नियमों के तहत यह इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड की श्रेणी में आता है, हालांकि वास्तविक टैक्स देनदारी निवेश की अवधि और लागू आयकर नियमों पर निर्भर करेगी।

LIC MF Conservative Hybrid Fund

जो निवेशक डेट के साथ थोड़ी इक्विटी एक्सपोजर चाहते हैं, उनके लिए कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड एक विकल्प हो सकता है। इस तरह की योजनाओं में आमतौर पर डेट इंस्ट्रूमेंट्स का हिस्सा अधिक और इक्विटी का हिस्सा कम रखा जाता है।

इक्विटी एक्सपोजर की वजह से लंबी अवधि में महंगाई को मात देने की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन इसके साथ बाजार जोखिम भी आता है। इसलिए इसे एफडी की तरह पूंजी-सुरक्षित निवेश नहीं माना जाना चाहिए।

FD या म्यूचुअल फंड, क्या बेहतर?

एफडी में बैंक द्वारा तय ब्याज दर के अनुसार रिटर्न मिलता है और पात्र जमा पर DICGC के नियमों के तहत प्रति बैंक प्रति जमाकर्ता ₹5 लाख तक जमा बीमा उपलब्ध होता है। दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड में रिटर्न बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

इसलिए सिर्फ ज्यादा रिटर्न के आधार पर निवेश का फैसला करने के बजाय जोखिम, निवेश अवधि, टैक्स और पैसे की जरूरत को ध्यान में रखना बेहतर है।

 
 
अमेरिका-ईरान में फिर भड़का तनाव, मिसाइल हमलों से बढ़ी टकराव की आशंका

अमेरिका-ईरान में फिर भड़का तनाव, मिसाइल हमलों से बढ़ी टकराव की आशंका

 वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। रविवार रात से सोमवार सुबह के बीच दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे पर मिसाइल हमले किए गए, जिससे क्षेत्र में हालात फिर से गंभीर हो गए हैं। पिछले एक महीने से अधिक समय में यह दोनों देशों के बीच पहला प्रत्यक्ष सैन्य टकराव माना जा रहा है। इन हमलों के बाद पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास नहीं करते, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

हाल के हफ्तों में अपेक्षाकृत शांति बनी हुई थी, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने संघर्ष के फिर से गहराने की आशंका बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी विवाद पहले भी कई बार सैन्य टकराव का रूप ले चुके हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव लगातार बना रहा है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाते हैं या हालात और बिगड़ते हैं।

Road Accident: भीषण सड़क हादसा, डंपर की टक्कर से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, 1 घायल

Road Accident: भीषण सड़क हादसा, डंपर की टक्कर से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, 1 घायल

 बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में मंगलवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। हादसा मसौली थाना क्षेत्र के बाराबंकी-बहराइच हाईवे पर बिंदौरा चौराहे के पास हुआ, जहां तेज रफ्तार डंपर ने मोड़ लेते समय एक ऑल्टो कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोग वाहन के अंदर फंस गए। हादसे में चार लोगों की जान चली गई, जबकि 7 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई।

मोड़ पर कार को डंपर ने मारी टक्कर

जानकारी के मुताबिक, कार में सवार लोग श्रावस्ती के भिनगा कस्बे के रहने वाले थे और बहराइच की ओर से आ रहे थे। बिंदौरा चौराहे के पास कार मोड़ रही थी, तभी सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने कार को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद कार में फंसे लोगों को बाहर निकालकर बड़ागांव सीएचसी पहुंचाया गया।

चार लोगों ने तोड़ा दम

अस्पताल में डॉक्टरों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान मोहम्मद शरीफ (51), तबस्सुम बानो (45), साजिया खातून (31) और उजैम (33) के रूप में हुई है। वहीं हादसे में घायल 7 वर्षीय हुदा को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों की निगरानी में बच्ची का इलाज जारी है और फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

हादसे के बाद डंपर चालक फरार

घटना के तुरंत बाद डंपर चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और दोनों वाहनों को कब्जे में ले लिया। सड़क से क्षतिग्रस्त कार हटवाकर यातायात भी बहाल कराया गया। पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं फरार डंपर चालक की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

बच्ची का इलाज जारी

  बाराबंकी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि हादसे में चार लोगों की मौत हुई है। मृतकों के शवों की पोस्टमार्टम प्रक्रिया कराई जा रही है। घायल बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है। फिलहाल पुलिस हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है और फरार चालक की तलाश जारी है।

चीनी की बढ़ती कीमतों पर केंद्र का बड़ा फैसला, कच्ची चीनी के आयात नियम बदले

चीनी की बढ़ती कीमतों पर केंद्र का बड़ा फैसला, कच्ची चीनी के आयात नियम बदले

  नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत आयात होने वाली कच्ची चीनी को अब किसी एक निश्चित अंतिम तारीख तक बाजार में उतारने की बाध्यता नहीं होगी। इसके बजाय प्रत्येक खेप के लिए अलग समयसीमा निर्धारित की गई है। आयातक को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर कच्ची चीनी को रिफाइन कर सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराना होगा।

सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब देशभर में चीनी की खुदरा कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। महज एक महीने के दौरान चीनी के दाम करीब 15.6 फीसदी तक बढ़ गए हैं।

नई व्यवस्था के तहत TRQ के माध्यम से आयात की गई कच्ची चीनी की प्रत्येक खेप के लिए बिल ऑफ एंट्री की तारीख से दो महीने की समयसीमा लागू होगी। इससे पहले आयातित कच्ची चीनी को रिफाइन कर घरेलू बाजार में बेचने के लिए 31 अक्टूबर 2026 की एक समान अंतिम तारीख निर्धारित थी।

सरकार ने कुल 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के TRQ आयात से जुड़े नियमों में यह बदलाव किया है। अब आयातक को संबंधित खेप को तय दो महीने के भीतर रिफाइन कर सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में उतारना होगा।

चीनी की कीमतों में तेजी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी। 20 अगस्त तक यह बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई।

इस तरह एक महीने में चीनी के दाम में 7.52 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। प्रतिशत के लिहाज से यह करीब 15.6 फीसदी की वृद्धि है। कीमतों में इस उछाल से घरेलू बजट पर भी दबाव बढ़ा है।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी चीनी की कीमतों और उत्पादन को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक अल नीनो परिस्थितियों का असर गन्ने की फसल पर पड़ा है। इसका प्रभाव भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों में कृषि उत्पादन और विशेष रूप से चीनी उत्पादन पर भी पड़ा है।

मंत्री के अनुसार, भारत में सालाना चीनी की जरूरत करीब 280 लाख टन है। वहीं, देश में फिलहाल 20 से 25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध है।

सरकार की नई व्यवस्था का मकसद TRQ के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को लंबे समय तक स्टॉक में रखने के बजाय तय अवधि के भीतर रिफाइन कर घरेलू बाजार में उपलब्ध कराना है। प्रत्येक खेप के लिए दो महीने की समयसीमा तय होने से आयातित कच्ची चीनी की बाजार में आपूर्ति को समयबद्ध करने की कोशिश की गई है।

हालांकि, इस बदलाव से खुदरा कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में चीनी की आपूर्ति, घरेलू उत्पादन और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार के सामने कीमतों को नियंत्रित रखने के साथ पर्याप्त घरेलू स्टॉक बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर कब लगेगा ग्रहण ? क्या होगा सूतक काल और भद्रा का समय, जानें 10 बड़ी बातें

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर कब लगेगा ग्रहण ? क्या होगा सूतक काल और भद्रा का समय, जानें 10 बड़ी बातें

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व इस साल 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक यह त्योहार सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। हालांकि, इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण का संयोग बनने से लोगों के मन में राखी बांधने के शुभ समय, ग्रहण की अवधि और सूतक काल को लेकर कई तरह के सवाल हैं। वहीं, भद्रा का साया भी रक्षाबंधन से एक दिन पहले रहेगा। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ समय क्या रहेगा, चंद्र ग्रहण कब लगेगा और क्या इसका प्रभाव भारत में भी माना जाएगा। आइए जानते हैं रक्षाबंधन 2026 से जुड़ी 10 बड़ी बातें।

1. कब मनाया जाएगा रक्षा बंधन 2026 ?

सावन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त 2026, गुरुवार को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से होगी और इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को ही रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।

2. किस समय लगेगा चंद्र ग्रहण 2026 ?
ज्योतिषियों के अनुसार, 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को चंद्र ग्रहण सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होगा। ग्रहण का समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर माना जा रहा है।

3. क्या भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण ?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल का यह आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यही वजह है कि, भारत में इस ग्रहण से जुड़े कोई भी नियम मान्य नहीं होंगे और धूमधाम से राखी का पर्व मनाया जा सकेगा।

4. क्या रहेगा सूतक काल का समय ?
चंद्र ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है। लेकिन जब ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई नहीं देता है तो वहां सूतक संबंधी नियम लागू नहीं माने जाते। इसलिए ग्रहण के न दिखने के कारण भारत में रक्षाबंधन के दिन सूतक काल मान्य नहीं होगा।

5. क्या है रक्षाबंधन 2026 का शुभ मुहूर्त ?

28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस दौरान अलग-अलग शुभ मुहूर्त भी रहेंगे।
लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 7 बजकर 33 मिनट से सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक।
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 9 बजकर 10 मिनट से सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक।

6. कब रहेगा भद्रा का साया ?

इस साल 27 अगस्त 2026 को भद्रा का प्रभाव सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। ऐसे में भद्रा की अवधि 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए 28 अगस्त को बिना भद्रा के रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।

7. कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण ?
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण अफ्रीका, यूरोप, उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका तथा पश्चिमी एशिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

8. किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ग्रहण ?
28 अगस्त 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में माना जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर एक जैसा नहीं माना जाता। ज्योतिषीय गणना के अनुसार मेष, कर्क, कन्या और तुला राशि के जातकों को इस अवधि में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

9. आखिर कब लगता है चंद्र ग्रहण ?
खगोल विज्ञान के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है। चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा तिथि को ही लगता है।

10. ग्रहण के कारण क्या सावन पूर्णिमा मनाने में कोई बाधा होगी ?
चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण यहां इसका धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा। इसलिए सावन पूर्णिमा का पर्व सामान्य रूप से मनाया जा सकेगा। इस दिन स्नान-दान और धार्मिक कार्यों के लिए कई शुभ समय भी रहेंगे।
सावन पूर्णिमा स्नान-दान मुहूर्त 2026
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:37 बजे तक।
प्रातः संध्या: सुबह 5:14 बजे से 6:23 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:14 बजे से 1:05 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:45 बजे से 3:36 बजे तक।

नैनीताल की इस झील में पूर्णिमा की रात आती हैं परियां? जानिए रहस्यमयी परीताल का राज

नैनीताल की इस झील में पूर्णिमा की रात आती हैं परियां? जानिए रहस्यमयी परीताल का राज

 नई दिल्ली। उत्तराखंड का नैनीताल अपनी खूबसूरत झीलों और पहाड़ों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन इसी इलाके में एक ऐसी झील भी है, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ रहस्यमयी लोककथाओं के लिए जानी जाती है। इसका नाम है परीताल।

नैनीताल से करीब 25 किलोमीटर दूर चाफी गांव के आसपास स्थित यह झील मुख्य सड़क से कुछ दूरी पर है। गांव से लगभग 3-4 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद यहां पहुंचा जा सकता है। पथरीला और दुर्गम रास्ता इस सफर को रोमांचक बना देता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, पूर्णिमा की रात इस झील पर देव परियां आती हैं और पानी में स्नान करती हैं। इसी लोककथा के कारण इसका नाम परीताल पड़ा। कहा जाता है कि इस विश्वास की वजह से कई स्थानीय लोग पूर्णिमा के दौरान झील के पास जाने से बचते हैं।

झील की गहराई को लेकर भी कई तरह की बातें कही जाती हैं। आसपास की काली चट्टानों और प्राकृतिक संरचनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। हालांकि, परियों के आने या झील की असाधारण गहराई से जुड़े दावों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। नैनीताल से भीमताल-पदमपुरी मार्ग होते हुए चाफी गांव पहुंचा जा सकता है। इसके बाद करीब 3 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है। रास्ता कठिन होने के कारण स्थानीय लोगों की मदद और मौसम की जानकारी लेकर यात्रा करना बेहतर रहेगा।

महिलाओं को बड़ा तोहफा: साल में 3 एलपीजी सिलेंडर फ्री, डीलक्स बसों में भी मुफ्त सफर

महिलाओं को बड़ा तोहफा: साल में 3 एलपीजी सिलेंडर फ्री, डीलक्स बसों में भी मुफ्त सफर

 चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने महिलाओं के लिए कई बड़ी कल्याणकारी योजनाओं का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में बताया कि, कम आय वाले परिवारों को हर साल तीन मुफ्त LPG सिलेंडर दिए जाएंगे। साथ ही महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा का दायरा भी बढ़ाया गया है।

सरकार के मुताबिक, ‘अन्नापूरणई सुपर सिक्स’ योजना के तहत 2.5 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों को तीन LPG सिलेंडर का लाभ मिलेगा। यह योजना अगले साल पोंगल के मौके पर शुरू होने की बात कही गई है। सिलेंडर की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। सरकार का अनुमान है कि, करीब 1.30 करोड़ परिवार इससे लाभान्वित होंगे और योजना पर सालाना लगभग 4,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, LPG की बढ़ती कीमतों और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के बीच यह कदम परिवारों का खर्च कम करने में मदद करेगा। इसके अलावा ‘वेट्री पयानम’ मुफ्त बस यात्रा योजना का विस्तार किया गया है। अब महिलाएं साधारण बसों के साथ एक्सप्रेस, LSS, डीलक्स और अंतर-जिला सरकारी बसों में भी मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। ट्रांसजेंडर लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। विस्तारित बस योजना 2 अक्टूबर से लागू होने की घोषणा की गई है।

अयोध्या में ऐतिहासिक पल! राम मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर पर फहरा नया धर्म ध्वज, देखें अलौकिक तस्वीरें

अयोध्या में ऐतिहासिक पल! राम मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर पर फहरा नया धर्म ध्वज, देखें अलौकिक तस्वीरें

 अयोध्या. रामनगरी से बड़ी और गौरवशाली खबर सामने आ रही है. श्रावण मास के पावन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के शुभ अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य शिखर पर नवीन धर्मध्वज का विधिवत पूजन के साथ ध्वजारोहण किया गया.

जैसे ही मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर केसरिया धर्मध्वज लहराया, पूरा राम मंदिर परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा. दूर से ही शिखर पर लहराता यह नया ध्वज श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है.

ट्रस्ट ने जारी की तस्वीरें

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आज नवीन धर्मध्वज की भव्य तस्वीरें और ड्रोन वीडियो जारी किए हैं. ट्रस्ट के अनुसार, यह ध्वज सनातन धर्म, विजय और मर्यादा का प्रतीक है.

मंदिर के शिखर पर स्थापित यह ध्वज विशेष तकनीक और सैन्य-ग्रेड पैराशूट कपड़े से बनाया गया है, ताकि तेज हवा और मौसम में भी इसकी चमक और मजबूती बनी रहे. ध्वज पर सूर्यवंश का प्रतीक – सूर्य, ओम और कोविदार का चिन्ह अंकित है.

श्रद्धालुओं में उत्साह

धर्मध्वज फहराए जाने की तस्वीरें सामने आते ही देशभर के रामभक्तों में जबरदस्त उत्साह है. सोशल मीडिया पर #DharmDhwaj और #RamMandir ट्रेंड करने लगा है.

बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं. ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि मुख्य शिखर के साथ-साथ परकोटे के अन्य मंदिरों पर भी इसी तरह के धर्मध्वज स्थापित किए गए हैं.

उन्होंने बताया कि यह मंदिर निर्माण के पूर्णता की ओर बढ़ते एक और ऐतिहासिक पड़ाव को दर्शाता है.

वाराणसी का चर्चित 27 किलो चांदी लूटकांड मामला, गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच दो अंतरराज्यीय बदमाश गिरफ्तार

वाराणसी का चर्चित 27 किलो चांदी लूटकांड मामला, गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच दो अंतरराज्यीय बदमाश गिरफ्तार

 वाराणसी। जिले के चर्चित 27 किलो चांदी लूटकांड में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के दो शातिर बदमाशों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। कमिश्नरेट वाराणसी की एसओजी, थाना चौक और थाना लंका की संयुक्त टीम ने लौटूबीर पुलिया के पास घेराबंदी की। खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाश घायल हो गए और मौके से गिरफ्तार कर लिए गए।

मुठभेड़ में घायल बदमाशों की पहचान

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद अली उर्फ शाबिर हसन (55) पुत्र हाजी मुस्कीन उर्फ महमूद अली, निवासी रायसेन, वर्तमान पता ईरानी बस्ती, अमन कॉलोनी करोध, थाना निशादपुरा, जिला भोपाल (मध्य प्रदेश) तथा हाल पता इदबारा, पोस्ट कोतवाली पिपारिया, जिला होशंगाबाद (नर्मदापुरम), और माशाअल्लाह (40) पुत्र अनवर अली, निवासी पिपारिया, थाना पंचमढ़ी रोड, जिला नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश) के रूप में हुई है।

नकदी, अवैध हथियार और चांदी बरामद

पुलिस ने दोनों के कब्जे से 4 किलो वजन की चांदी की चार बटिया, 15,020 रुपये नकद, दो अवैध .315 बोर तमंचे, चार जिंदा कारतूस और तीन खोखा कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद चांदी 17 जुलाई को चौक थाना क्षेत्र में हुई लूट की घटना से संबंधित है।

गोविंदपुरा मोड़ के पास हुई थी वारदात

गौरतलब है कि हेमा ज्वेलर्स से 27 किलो 327 ग्राम चांदी महालक्ष्मी ज्वेलर्स ले जाते  समय गोविंदपुरा मोड़ के पास बदमाशों ने कर्मचारियों से चांदी लूट ली थी। घटना के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई।

मुख्य आरोपी पर दर्ज हैं गंभीर मुकदमे

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी मोहम्मद अली उर्फ शाबिर हसन एक शातिर अंतरराज्यीय अपराधी है। उसके खिलाफ वाराणसी, दिल्ली, जयपुर सहित विभिन्न राज्यों में हत्या के प्रयास, लूट, चोरी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराधों के कई मुकदमे दर्ज हैं।

दोनों आरोपियों को घायल अवस्था में बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और लूटी गई बाकी चांदी की बरामदगी के लिए अभियान चला रही है।

दिल्लीवासियों को बड़ी सौगात! 9.62 करोड़ से बनेगा नया स्काईवॉक, नवंबर में होगा शुरू

दिल्लीवासियों को बड़ी सौगात! 9.62 करोड़ से बनेगा नया स्काईवॉक, नवंबर में होगा शुरू

 दिल्ली - दिल्ली के मधुबन चौक पर राहगीरों की सुविधा और सड़क पार करने में सुरक्षा बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से Skywalk-FOB का निर्माण कराया जा रहा है। करीब 9.62 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह स्काईवॉक-फुटओवर ब्रिज नवंबर 2026 से आम लोगों के लिए खोलने की योजना है। यह Skywalk-FOB आउटर रिंग रोड स्थित मधुबन चौक पर बनाया जा रहा है। इसके तैयार होने के बाद पैदल यात्रियों को व्यस्त सड़क और चौराहे पर वाहनों के बीच से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। Skywalk-FOB को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यह पितमपुरा मेट्रो स्टेशन, मधुबन चौक मेट्रो स्टेशन और रोहिणी जिला अदालत को आपस में जोड़ेगा। इससे मेट्रो यात्रियों, अदालत आने वाले लोगों और आसपास के निवासियों को आवाजाही में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य

सूत्रों के मुताबिक, मधुबन चौक पर बन रहे Skywalk-FOB को 30 नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके शुरू होने के बाद पैदल यात्रियों को आउटर रिंग रोड जैसी व्यस्त सड़क को सीधे सड़क स्तर पर पार करने की जरूरत नहीं होगी। Skywalk-FOB के जरिए यात्रियों को सड़क के ऊपर से सुरक्षित तरीके से आवाजाही की सुविधा मिलेगी। इससे व्यस्त मार्ग पर पैदल यात्रियों और वाहनों के बीच टकराव का जोखिम भी कम होने की उम्मीद है।

दुर्घटनाओं का जोखिम होगा कम

वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मधुबन चौक पर Skywalk-FOB बनने से पैदल यात्रियों और वाहनों के बीच टकराव और दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी। व्यस्त आउटर रिंग रोड को सड़क स्तर पर पार करने की जरूरत नहीं होने से पैदल यात्रियों की आवाजाही अधिक सुरक्षित हो सकेगी। अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना से मेट्रो स्टेशनों और रोहिणी जिला अदालत के बीच लास्ट-माइल कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। इससे रोजाना मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों, अदालत आने वाले लोगों और आसपास के आम नागरिकों को आवाजाही में सुविधा मिलेगी।

मेट्रो से कनेक्टिविटी होगी बेहतर

वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, PWD की इस परियोजना से मधुबन चौक क्षेत्र में पैदल यातायात को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, आउटर रिंग रोड पर वाहनों और पैदल यात्रियों के बीच बेहतर पृथक्करण सुनिश्चित किया जा सकेगा। Skywalk-FOB के जरिए मेट्रो स्टेशनों और रोहिणी जिला अदालत के बीच पैदल आवाजाही आसान होगी। इससे क्षेत्र की लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ मेट्रो यात्रियों को भी बेहतर सुविधा मिलेगी।

 

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान, अगले दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान, अगले दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

 भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 9 अरब डॉलर तक पहुंच गई है और मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम एवं नीतिगत सुधारों के चलते अगले दशक में इसके 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी सरकार की ओर से जारी ताजा डेटा में सामने आई। भारत रविवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस ऐसे अवसर पर मनाया जा रहा है, जब देश का अंतरिक्ष इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। पंजीकृत अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या इस साल अगस्त तक बढ़कर करीब 440 हो गई है, जो 2014 में सिर्फ 1 थी।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश लगभग छह गुना बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 2021-22 में 100.5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर हो गया। अकेले 2026 में अब तक 187 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को 113 ऑथराइजेशन दिए जा चुके हैं। इनमें 18 स्टार्टअप हैं, जिन्हें उपग्रह संचालन, पेलोड स्थापित करने और लॉन्च सेवाओं के लिए अनुमति मिली है।

भारत ने 2020 में अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया था। इससे उपग्रहों, लॉन्च सिस्टम और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में उद्योगों और स्टार्टअप्स की भागीदारी संभव हुई। इसे भारत के व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना गया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में निजी भागीदारी को और बढ़ाया। इस नीति में न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया।

इसरो की वाणिज्यिक शाखा एनएसआईएल लॉन्च, उपग्रह और अंतरिक्ष आधारित सेवाएं उपलब्ध कराती है और इसरो की तकनीकों को भारतीय उद्योगों तक पहुंचाती है। एनएसआईएल का राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 में 321.77 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 3,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बढ़ते व्यावसायीकरण को दर्शाता है। इन-स्पेस सिंगल-विंडो व्यवस्था के जरिए निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को सक्षम बनाता है। 31 जनवरी 2026 तक इसने उद्योगों और स्टार्टअप्स को इसरो की 71 तकनीकों के हस्तांतरण में मदद की।

भारत को रक्षा क्षेत्र में बनना होगा आत्मनिर्भर, किसी देश पर निर्भर नहीं रह सकते: राजनाथ सिंह

भारत को रक्षा क्षेत्र में बनना होगा आत्मनिर्भर, किसी देश पर निर्भर नहीं रह सकते: राजनाथ सिंह

 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि अब हमारी सोच यह नहीं होनी चाहिए कि भारत को दुनिया से क्या खरीदना है। हमारी सोच यह होनी चाहिए कि दुनिया भारत से क्या खरीदना चाहती है। स्वदेशी हथियार हमारे लिए कितने जरूरी हैं, इसका उदाहरण हमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत की स्वदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमता देखी।

राजनाथ सिंह ने यह बात रविवार को पांच रक्षा प्रोजेक्टों का शिलान्यास करने के दौरान कहीं। जिनका शिलान्यास किया गया वे पश्चिम बंगाल स्थित जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड की 5 नई फैसिलिटी हैं। जीआरएसई देश के प्रमुख युद्धपोत निर्माण प्रतिष्ठानों में शामिल है। जीआरएसई के पास 800 से अधिक जहाजों के निर्माण का अनुभव है। यहां राजनाथ सिंह ने कहा, हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि क्वालिटी ऐसी कि दुनिया भरोसा करे, कीमत ऐसी कि दुनिया चुने और डिलीवरी ऐसी कि दुनिया बार-बार ऑडर करे।

उन्होंने बताया जीआरएसई के पास तकनीकी जानकारी है, कुशल कार्यबल है और अब विस्तारित क्षमता भी होगी। आपको इसका पूरा उपयोग करना होगा। आप अभी नौसेना के ऑर्डर के साथ-साथ, एक जर्मन कंपनी के लिए 12 मालवाहक जहाज बना रहे हैं। यह बिल्कुल हमारी मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड, विजन के अनुरूप है। जैसे-जैसे आपकी क्षमता बढ़ेगी, आपको घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों में अधिक आक्रामक बोली लगानी होगी।

राजनाथ सिंह ने कहा, “आगे भी, रक्षा मंत्रालय के साथ, हमारी प्रयोगशालाएं, हमारे सार्वजनिक उपक्रम, और निजी हितधारक मिलकर, अपनी सेनाओं को स्वदेशी प्लेटफॉर्म से लैस करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हमने यह साबित किया है कि आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं है। आत्मनिर्भरता, युद्धक्षेत्र क्षमता का गुणक है। और इस पहल में जीआरएसई, तथा यंत्र इंडिया लिमिटेड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि यदि हम हिंद महासागर क्षेत्र में जहाज मरम्मत और ओवरहॉल का केंद्र बन जाएं, तो विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ, हजारों रोजगार पैदा होंगे। आज भी हमारे बनाए युद्धपोत, दुनिया के संघर्ष क्षेत्रों से होकर हमारी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम रक्षा क्षेत्र में किसी भी देश पर निर्भर नहीं रह सकते। हमारी अपनी स्वदेशी कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों को ही इस क्षेत्र में पूरी तरह प्रभुत्व हासिल करना होगा। और आज के ये पांचों परियोजनाएं उसी रणनीतिक स्वायत्तता को प्रतिबिंबित कर रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने बताया, “आज हम, लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपयों की लागत वाली पांच अत्यंत महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास कर रहे हैं। इनमें जीआरएसई की तीन नई जहाज निर्माण सुविधाएं – रायचक शिपयार्ड, टिम्बर पोंड हावड़ा जहाज निर्माण सुविधा और दामोदर कॉम्प्लेक्स जहाज निर्माण सुविधा शामिल हैं। इसके साथ ही यंत्र इंडिया लिमिटेड की दो अत्याधुनिक धातुकर्म सुविधाओं, 3,000 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक ओपन डाई फोर्जिंग प्रेस और रेडियल फोर्जिंग प्लांट, का भी शिलान्यास हो रहा है। ये पांचों परियोजनाएं आत्मनिर्भरता, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की भावना को बल देने वाली हैं।”

उन्होंने कहा कि जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड जैसे संस्थान, इस बात के प्रमाण हैं, कि बंगाल का औद्योगिक आधार फिर से मजबूत हो रहा है। यहां से शुरू होने वाले ये परियोजनाएं, रक्षा उत्पादन को तो बढ़ाएंगे ही, साथ ही साथ एमएसएमई, संबद्ध उद्योगों और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगे। एक तरह से देखें, तो ये परियोजनाएं, बंगाल की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के, नए अध्याय के रूप में सामने आने वाले हैं।

मध्य प्रदेश को जैव विविधता संरक्षण के लिए मोदी सरकार की अतिरिक्त मदद, दिए 32.73 लाख रुपये

मध्य प्रदेश को जैव विविधता संरक्षण के लिए मोदी सरकार की अतिरिक्त मदद, दिए 32.73 लाख रुपये

 भोपाल। मध्य प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय जैव संसाधनों के दस्तावेजीकरण और उनसे जुड़े समुदायों की आजीविका को मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने पहुंच एवं लाभ-साझाकरण तंत्र के तहत मध्य प्रदेश को 32.73 लाख रुपये आवंटित किए हैं।

उल्लेखनीय है कि देशभर में जारी 2.80 करोड़ रुपये की राशि में मध्य प्रदेश को मिलने वाला यह हिस्सा उसे प्रमुख प्राप्तकर्ता राज्यों में शामिल करता है। यह राशि राज्य में जैव विविधता संरक्षण और उससे जुड़े स्थानीय समुदायों के हित में विभिन्न गतिविधियों पर खर्च की जाएगी।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने भारत के जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों को साझा करने के उद्देश्य से पहुंच एवं लाभ-साझाकरण यानी एबीएस तंत्र के तहत कुल 2.82 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। इसमें से 2.80 करोड़ रुपये 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों तथा तीन केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 2.01 लाख रुपये भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, कर्नाटक को दिए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश को आवंटित 32.73 लाख रुपये इस पूरी राशि में तीसरा सबसे बड़ा राज्यवार हिस्सा है। गुजरात को 44.59 लाख रुपये और पश्चिम बंगाल को 41.24 लाख रुपये मिले हैं। मध्य प्रदेश के बाद ओडिशा को 32.57 लाख रुपये, बिहार को 30.86 लाख रुपये और छत्तीसगढ़ को 16.54 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि जैविक संसाधनों और बागवानी फसलों की विविधता के लिहाज से मध्य प्रदेश का महत्व राष्ट्रीय स्तर पर भी रेखांकित हुआ है।

इस संबंध में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) की ओर से अधिकारिक तौर पर कहा गया है कि यह राज्य की जैव विविधता को संरक्षित करने और स्थानीय स्तर पर उसके सतत उपयोग की दिशा में संसाधन उपलब्ध कराने की पहल है।

फूलगोभी, मिर्च, भिंडी और टमाटर से जुड़े संसाधनों से आया लाभ

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को मेसर्स एडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड, पूर्व में मेसर्स यूपीएल लिमिटेड, से एबीएस के तहत 2.94 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह राशि फूलगोभी की आठ संकर किस्मों, मिर्च की पांच संकर किस्मों, भिंडी की पांच संकर किस्मों और टमाटर की छह संकर किस्मों से जुड़े आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से संबंधित है।

इस मामले में जैविक संसाधनों तक पहुंच किसी अन्य कंपनी के अधिग्रहण के माध्यम से हुई थी। ऐसे में किसानों, समुदायों अथवा किसी एक पहचान योग्य भौगोलिक स्रोत को प्रत्यक्ष लाभार्थी के रूप में चिन्हित करना संभव नहीं था। इसी कारण राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने ऐसे मामलों में लाभ-साझाकरण राशि के वितरण और उपयोग के लिए विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर एक कार्यप्रणाली विकसित की। प्राधिकरण द्वारा इसे अनुमोदित किए जाने के बाद संबंधित राज्यों में बागवानी फसलों की खेती को ध्यान में रखते हुए राशि का वितरण किया गया।

मध्य प्रदेश में किन कामों पर खर्च होगी राशि

राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी राशि का उपयोग जन जैव विविधता रजिस्टरों के दस्तावेजीकरण एवं अद्यतन, जैव विविधता के इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण, खराब हो चुके पारिस्थितिक तंत्रों के पुनर्स्थापन तथा जैव विविधता विरासत स्थलों को मजबूत करने जैसे कार्यों में किया जाना है।

इसके साथ ही जैव विविधता प्रबंधन समितियों की क्षमता बढ़ाने और स्थानीय समुदायों की आजीविका के संवर्धन पर भी राशि खर्च की जाएगी। मध्य प्रदेश जैसे बड़े और जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध राज्य के लिए यह राशि स्थानीय स्तर पर जैव संसाधनों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

प्राप्त राशि का उपयोग करने के बाद संबंधित संस्थाओं को एक वर्ष के भीतर उपयोग प्रमाण पत्र और व्यय विवरण प्रस्तुत करना होगा। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से प्राप्त आर्थिक लाभ संरक्षण कार्यों तक पहुंचे और उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही हो।

अनुसंधान संस्थानों को भी लाभ

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को सुमितोमो केमिकल इंडिया लिमिटेड, मुंबई, पूर्व में एक्सेल क्रॉप केयर, से दो सूक्ष्मजीव उपभेदों के अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग के लिए 7.15 लाख रुपये एबीएस राशि के रूप में प्राप्त हुए। इनमें स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस और ट्राइकोडर्मा हारजियानम के संबंधित उपभेद शामिल हैं, जिन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, कर्नाटक से प्राप्त किया गया था।

चूंकि ये जैविक संसाधन एक सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान से प्राप्त हुए थे, इसलिए नियमों के अनुसार एबीएस राशि का 30 प्रतिशत यानी 2.01 लाख रुपये भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान को दिया जा रहा है। इस राशि का उपयोग जैविक संसाधनों के भंडारों के रखरखाव, अनुसंधान, जैव विविधता सर्वेक्षण, वर्गीकरण एवं संरक्षण संबंधी क्षमता विकास तथा जैव संसाधनों और उनसे जुड़े वन्य जीवों के इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण के लिए किया जाएगा।

संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच बनेगा संतुलन

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अनुसार अब तक कुल 185 करोड़ रुपये की एबीएस राशि जारी की जा चुकी है। इसका उद्देश्य भारत के जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से उत्पन्न आर्थिक लाभ को जैव विविधता संरक्षण, उसके सतत उपयोग तथा किसानों, स्थानीय समुदायों और संरक्षण से जुड़े अन्य लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास से जोड़ना है।मध्य प्रदेश को मिला 32.73 लाख रुपये का आवंटन इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा है।

बंगाल की खाड़ी में समंदर में समाया मालवाहक जहाज, 24 नाविक सवार; रेस्क्यू जारी

बंगाल की खाड़ी में समंदर में समाया मालवाहक जहाज, 24 नाविक सवार; रेस्क्यू जारी

 नई दिल्ली। ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 नॉटिकल मील दूर बंगाल की खाड़ी में शनिवार को पनामा के झंडे वाला एक मालवाहक जहाज डूब गया। अधिकारियों के मुताबिक, जहाज पर 24 क्रू सदस्य सवार थे। हादसे के बाद भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है।

कहां और कैसे हुआ हादसा?
अधिकारियों के अनुसार, मालवाहक जहाज ओडिशा से लौह अयस्क लेकर सिंगापुर की ओर जा रहा था। उसने शुक्रवार को ओडिशा के तट से अपनी यात्रा शुरू की थी। शनिवार को यह जहाज बंगाल की खाड़ी में डूब गया। जहाज के डूबने की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद दूसरे जहाजों को भी अलर्ट किया गया, ताकि बचाव अभियान में मदद मिल सके।

जहाज पर कितने लोग थे?
मालवाहक जहाज पर कुल 24 क्रू सदस्य मौजूद थे। एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने बताया कि इनमें से ज्यादातर सदस्य चीनी नागरिक थे। अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कितने क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचाया जा सका है। बचाव अभियान जारी है और अधिकारियों की नजर रेस्क्यू ऑपरेशन पर बनी हुई है।

भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने संभाला मोर्चा
जहाज के डूबने की जानकारी मिलने के बाद भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना ने बचाव अभियान शुरू किया। आसपास के जहाजों को भी सहायता के लिए सतर्क किया गया है। फिलहाल अधिकारियों की प्राथमिकता जहाज पर सवार सभी क्रू सदस्यों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित निकालना है।

शनिवार को पीपल के पेड़ पर छाछ चढ़ाने की मान्यता, जानिए क्या है धार्मिक महत्व

शनिवार को पीपल के पेड़ पर छाछ चढ़ाने की मान्यता, जानिए क्या है धार्मिक महत्व

 नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल का संबंध भगवान विष्णु, ब्रह्मा, महेश और शनिदेव से जोड़ा जाता है। इसी वजह से शनिवार के दिन पीपल की पूजा और उससे जुड़े उपायों का विशेष महत्व बताया गया है।धार्मिक परंपराओं में एक उपाय पीपल की जड़ में छाछ या मट्ठा अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि शनिवार को लगातार सात सप्ताह तक श्रद्धा के साथ यह उपाय करने से शनि से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है। इसे आर्थिक संकट, कर्ज और जीवन में आने वाली बाधाओं से जोड़कर भी देखा जाता है।

क्या है तरीका?
शनिवार सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद पीपल के पेड़ के पास जाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करने की परंपरा है। इसके बाद पेड़ की जड़ में छाछ अर्पित की जाती है। धार्मिक विश्वास रखने वाले लोग इसे सात शनिवार तक करने की मान्यता बताते हैं।

कहा जाता है कि, इस उपाय से नकारात्मकता दूर होती है, रुके काम बनने लगते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। हालांकि, इन दावों के वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में ही देखना उचित है। साथ ही पीपल के पेड़ और आसपास की मिट्टी को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में पान मसाला और तंबाकू के अवैध उत्पादन नेटवर्क का भंडाफोड़, 185 करोड़ की कर चोरी उजागर

उत्तर प्रदेश में पान मसाला और तंबाकू के अवैध उत्पादन नेटवर्क का भंडाफोड़, 185 करोड़ की कर चोरी उजागर

 डीजीजीआई की कार्रवाई में 27 अघोषित पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त, चित्रकूट-बांदा के छह परिसरों से 15.50 लाख से अधिक तैयार पाउच बरामद

नई दिल्ली । जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की लखनऊ क्षेत्रीय इकाई ने उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और बांदा जिलों में पान मसाला, सुगंधित जर्दा और गुटखा के अवैध उत्पादन से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। छह उत्पादन परिसरों में की गई कार्रवाई के दौरान 27 अघोषित पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त की गईं और करीब 185 करोड़ रुपये की जीएसटी, स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा (एचएसएनएस) उपकर तथा केंद्रीय उत्पाद शुल्क की चोरी का पता चला है।

डीजीजीआई अधिकारियों ने खुफिया जानकारी के आधार पर 18 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि के आसपास चित्रकूट और बांदा स्थित छह परिसरों में एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। ये परिसर दो फर्मों से जुड़े पाए गए। इनमें से एक पान मसाला एवं संबंधित उत्पादों के उत्पादन, जबकि दूसरी व्यापारिक गतिविधियों में शामिल थी।

27 अघोषित मशीनें मिलीं
तलाशी के दौरान अधिकारियों को 27 ऐसी पाउच-पैकिंग मशीनें मिलीं, जिनका घोषित उत्पादन व्यवस्था में उल्लेख नहीं था। इनमें सुगंधित जर्दा के लिए छह, पान मसाला के लिए नौ और दोहरा/देसी गुटखा के लिए 12 मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा मिश्रण, सुपारी की कुटाई और सुखाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी बरामद की गईं।

कार्रवाई के दौरान पान मसाला, चबाने वाला तंबाकू, सुगंधित जर्दा और सुगंधित सुपारी के 15,50,922 तैयार पाउच जब्त किए गए।
जांच के दौरान बड़ी मात्रा में कच्चा माल और पैकिंग सामग्री भी बरामद हुई। इसमें 32.9 मीट्रिक टन सुपारी एवं कटी सुपारी, 2.8 मीट्रिक टन तंबाकू, 8.4 मीट्रिक टन पैकिंग सामग्री, पाउच और लैमिनेट्स, 470 किलोग्राम कत्था पाउडर, 850 किलोग्राम ग्लिसरीन, 545 किलोग्राम एसेंस और 256 किलोग्राम बिना पैक किया हुआ पान मसाला शामिल है।

अपंजीकृत परिसरों से चल रहा था कारोबार
जांच में सामने आया कि अवैध कारोबार अपंजीकृत परिसरों के एक नेटवर्क के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। इन परिसरों में अघोषित मशीनरी के जरिए पान मसाला और तंबाकू उत्पादों का उत्पादन किया जाता था। तैयार माल को लागू जीएसटी, एचएसएनएस उपकर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क का भुगतान किए बिना कथित तौर पर गुप्त रूप से बाजार में भेजा जा रहा था।

जांच एजेंसी के अनुसार, निर्माण फर्म के मालिक की इस अवैध उत्पादन और माल की निकासी की गतिविधियों को संगठित करने में प्रमुख भूमिका सामने आई है।

मालिक गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया
फर्म के मालिक को 19 अगस्त 2026 को स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम, 2025 की धारा 26 और केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 की धारा 13 के तहत गिरफ्तार किया गया। उसे विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीमा शुल्क), लखनऊ के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

मामले की जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, जांच आगे बढऩे पर और बरामदगी तथा कर चोरी से जुड़े तथ्यों का खुलासा होने की संभावना है।

1 फरवरी से लागू है क्षमता आधारित कर व्यवस्था
पान मसाला और तंबाकू क्षेत्र में 1 फरवरी 2026 से क्षमता आधारित उपकर और कर व्यवस्था लागू की गई है। स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम, 2025 के तहत पान मसाला पर क्षमता आधारित मासिक उपकर लगाया जाता है। इसकी गणना स्थापित पाउच-पैकिंग मशीनों की संख्या, प्रकार और क्षमता के आधार पर की जाती है।

इसी तरह केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 के तहत चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा पर भी क्षमता आधारित केंद्रीय उत्पाद शुल्क लागू है। डीजीजीआई के अनुसार, कुछ निर्माता अघोषित मशीनों का इस्तेमाल कर उत्पादन छिपाने और कर एवं उपकर से बचने का प्रयास करते हैं।

देशभर में 27 मामले दर्ज, 668 करोड़ की चोरी का पता
अघोषित उत्पादन और कर चोरी पर अंकुश लगाने के लिए डीजीजीआई ने देशभर में खुफिया सूचना आधारित प्रवर्तन कार्रवाई तेज की है। डेटा विश्लेषण से जुड़ी विभिन्न इकाइयों के समन्वय से अवैध उत्पादन और कर चोरी के मामलों की पहचान की जा रही है।

1 फरवरी 2026 से अब तक डीजीजीआई की विभिन्न इकाइयों ने देशभर में ऐसे 27 मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में कुल 668 करोड़ रुपये के शुल्क, कर और उपकर की चोरी का पता चला है। जांच के दौरान 11.7 करोड़ रुपये की राशि स्वेच्छा से जमा की गई है।

इसके अलावा, कार्रवाई के दौरान अब तक 131 पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त की जा चुकी हैं और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। डीजीजीआई की कार्रवाई से पान मसाला और तंबाकू क्षेत्र में अघोषित उत्पादन तथा कर चोरी के खिलाफ प्रवर्तन अभियान तेज होने के संकेत मिले हैं।

छोटे बच्चों की दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसला, 4 साल से कम उम्र में एफडीसी पर रोक

छोटे बच्चों की दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसला, 4 साल से कम उम्र में एफडीसी पर रोक

 नई दिल्ली। छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सर्दी-जुकाम में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फेनिलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड वाले फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की नई अधिसूचना के मुताबिक, इन दोनों दवाओं वाले किसी भी फॉर्मूलेशन को अब चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। कंपनियों को दवाओं के लेबल, पैकेज इंसर्ट और प्रचार सामग्री पर स्पष्ट चेतावनी देना भी अनिवार्य किया गया है।

सरकार ने यह फैसला विशेषज्ञ समिति और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों में इस संयोजन से दुष्प्रभाव का खतरा हो सकता है, जबकि सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं। इससे पहले अप्रैल 2025 में सरकार ने कुछ चुनिंदा एफडीसी पर प्रतिबंध लगाया था। अब नए आदेश के जरिए इसका दायरा बढ़ाकर इन दोनों सामग्रियों वाले सभी फॉर्मूलेशन तक कर दिया गया है। अधिसूचना ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत जारी हुई है और गजट में प्रकाशन के साथ लागू होगी। नए फैसले से बाजार में मौजूद कई बच्चों की सर्दी-जुकाम वाली दवाओं पर असर पड़ सकता है।