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जयपुर हत्याकांड: पत्नी और 3 बेटियों की हत्या का आरोपी रींगस से गिरफ्तार

जयपुर हत्याकांड: पत्नी और 3 बेटियों की हत्या का आरोपी रींगस से गिरफ्तार

 जयपुर - जयपुर के करधनी इलाके में पत्नी और तीन बेटियों की हत्या के मामले में फरार चल रहे 45 वर्षीय राहुल झा को पुलिस ने रविवार को सीकर जिले के रींगस से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद जयपुर से निकलकर राहुल खाटूश्यामजी पहुंचा था। वहां दर्शन करने के बाद उसने एक होटल में ठहरने की कोशिश की, लेकिन पैसे खत्म होने के कारण ज्यादा देर नहीं रुक सका। इसके बाद वह रींगस पहुंचा, जहां सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने उसकी लोकेशन का पता लगाकर उसे पकड़ लिया।
होटल के कैमरे से मिला अहम सुराग

पुलिस आरोपी की तलाश में जयपुर से लेकर सीकर जिले तक अलग-अलग जगहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही थी। इसी दौरान रींगस स्थित होटल रींगस राज के लाइव कैमरे में राहुल नजर आया। रिपोर्ट के मुताबिक, उसने चेहरे पर कपड़ा बांध रखा था। फुटेज के आधार पर पुलिस ने उसकी पहचान की और मिल तिराहे के पास घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे जयपुर लाया गया, जहां मामले की आगे की जांच की जा रही है।

खाटूश्यामजी में दर्शन के बाद होटल में रुका

पुलिस की जांच में सामने आया है कि वारदात के बाद राहुल जयपुर से फरार होकर खाटूश्यामजी पहुंचा था। वहां पूजा-अर्चना करने के बाद वह एक होटल में ठहरा। रिपोर्टों के अनुसार, उसके पास खर्च के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। इसी दौरान उसने अपनी अंगूठी बेचने की कोशिश भी की, लेकिन होटल कर्मचारियों से इसे लेकर बात नहीं बन सकी। इसके बाद वह रींगस की तरफ चला गया।

घर में मिले थे पत्नी और तीन बेटियों के शव

यह मामला 11 सितंबर को सामने आया था। करधनी थाना क्षेत्र की गोविंद वाटिका स्थित घर में राहुल की पत्नी गीता झा और उनकी तीन बेटियों के शव अलग-अलग कमरों में मिले थे। शुरुआती पुलिस जांच के मुताबिक, चारों पर सिर और चेहरे पर किसी भारी वस्तु से हमला किया गया था। घटनास्थल से सीमेंट के ब्लॉक/पत्थर भी बरामद किए गए थे, जिन्हें जांच के लिए कब्जे में लिया गया।

पुलिस के अनुसार, गीता का शव पहली मंजिल के कमरे में मिला था, जबकि तीनों बेटियों के शव ग्राउंड फ्लोर के अलग-अलग कमरों में मिले। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई थी कि हमला उस समय किया गया, जब परिवार के सदस्य सो रहे थे।

हत्या के बाद पिता को चाय पिलाकर निकला था

घटना के शुरुआती जांच विवरण में सामने आया था कि राहुल ने कथित हत्या के बाद भी सामान्य तरीके से गतिविधियां कीं। पुलिस के अनुसार, उसने सुबह दूध लिया और अपने बुजुर्ग पिता लक्ष्मीनाथ झा के लिए चाय बनाई। इसके बाद वह घर से निकल गया। कुछ देर बाद पिता को घर में खून दिखाई दिया और पड़ोसियों को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची।

 

कर्ज और मकान को लेकर विवाद की जांच

पुलिस हत्या के पीछे आर्थिक परेशानी और पारिवारिक विवाद समेत कई पहलुओं की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई थी कि राहुल पर कर्ज था और वह गोविंद वाटिका स्थित मकान को बेचने की कोशिश कर रहा था। बताया गया कि मकान पत्नी के नाम था और इसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच विवाद की बात सामने आई है। राहुल ने हत्या से कुछ दिन पहले एक पड़ोसी से 50 हजार रुपये उधार मांगे थे, लेकिन उसे 25 हजार रुपये ही मिल पाए थे।

हालांकि, इन परिस्थितियों को हत्या का अंतिम कारण नहीं माना जा सकता। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम और कथित मकसद की पुष्टि करने की कोशिश करेगी।

नशीला पदार्थ दिए जाने की आशंका की भी जांच

मामले की जांच में एक और पहलू सामने आया है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या हत्या से पहले पीड़ितों को कोई जहरीला पदार्थ या नशीली दवा दी गई थी। जांचकर्ताओं ने मृतकों के मुंह के आसपास झाग पाए जाने के बाद इस संभावना पर गौर किया है। हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि गंभीर चोट के बाद भी ऐसा हो सकता है, इसलिए केवल इस आधार पर जहर दिए जाने की पुष्टि नहीं की जा सकती।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हत्या पहले से योजनाबद्ध थी या घटनाक्रम अचानक हिंसक हुआ। फोरेंसिक जांच और आरोपी से पूछताछ के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

अब राहुल से पूछताछ में खुलेंगे कई सवाल

राहुल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अब हत्या की पूरी टाइमलाइन, कथित मकसद, वारदात के तरीके और हत्या के बाद उसके जयपुर से निकलने से लेकर रींगस पहुंचने तक की गतिविधियों को जोड़ने की चुनौती है। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि खाटूश्यामजी जाने और होटल में रुकने के दौरान उसने किन लोगों से संपर्क किया था।

फिलहाल राहुल झा इस मामले में हत्या के आरोपी के तौर पर पुलिस की हिरासत में है। अंतिम रूप से अपराध और उसकी परिस्थितियों से जुड़े तथ्य जांच तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्थापित होंगे।

BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे, गलवान झड़प के बाद पहला दौरा; शाम को मोदी से अहम मुलाकात

BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे, गलवान झड़प के बाद पहला दौरा; शाम को मोदी से अहम मुलाकात

 BRICS Summit 2026 Live Updates: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंच गए हैं। उनका विमान पालम एयर फोर्स स्टेशन पर उतरा। दिल्ली पहुंचने के बाद अब सबकी नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की शाम 5:45 बजे होने वाली द्विपक्षीय बैठक पर है। भारत मंडपम में BRICS नेताओं के सत्र, भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी, फैमिली फोटो, संयुक्त वृक्षारोपण और गाला डिनर समेत कई अहम कार्यक्रम भी होंगे। इस लाइव ब्लॉग में BRICS Summit से जुड़े हर बड़े घटनाक्रम, नेताओं की बैठक, बयान और महत्वपूर्ण अपडेट लगातार मिलते रहेंगे।

आज का पूरा शेड्यूल | टाइमलाइन

सुबह 10:00 बजे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हैदराबाद हाउस में इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली के साथ बैठक।

सुबह 10:30 बजे
PM मोदी की मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय बैठक।

सुबह 11:00 बजे
प्रधानमंत्री मोदी अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे।

सुबह 11:30 बजे
PM मोदी की वियतनाम के नेता ले मिन्ह हंग के साथ बैठक। इसी समय राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात करेंगी।

दोपहर 2:00 बजे
BRICS सदस्य देशों के नेताओं का भारत मंडपम के लेवल-2 पर आगमन।

प्रवासी नेटवर्क जुड़ें

दोपहर 2:35 बजे
समिट हॉल में ‘Inclusive Global Governance and Strengthening Multilateralism’ विषय पर बंद सत्र।

शाम 4:25 बजे
BRICS नेता भारत मंडपम के हॉल-14 में ‘Bharat Innovates Exhibition’ का अवलोकन करेंगे।

शाम 5:05 बजे
भारत मंडपम के बाहर लॉन में BRICS नेताओं की फैमिली फोटो।

शाम 5:10 बजे
नेताओं का संयुक्त वृक्षारोपण कार्यक्रम।

शाम 5:45 बजे - सबसे अहम मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक।

रात 7:30 बजे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में भारत मंडपम के लेवल-3 पर गाला डिनर।

उज्‍जैन के खड़े हनुमानजी के सामने सारी तकनीकें ध्‍वस्‍त, अब IIT इंदौर बताएगा क्‍या है वजह, कैसे विस्‍थापित होगी प्रतिमा?

उज्‍जैन के खड़े हनुमानजी के सामने सारी तकनीकें ध्‍वस्‍त, अब IIT इंदौर बताएगा क्‍या है वजह, कैसे विस्‍थापित होगी प्रतिमा?

 जिस सड़क पर मंदिर है उसकी डिजाइन भी बदली जा सकती है

चमत्‍कार या तकनीकी वजह से नहीं हट पा रहे बजरंगबली

पूजा-पाठ से लेकर जेसीबी की ताकत सबकुछ लगा लिया, टस से मस नहीं हुए हनुमान

सड़क चौड़ीकरण की जद में आए करीब 170 साल पुराने 'खड़े हनुमान मंदिर' की प्रतिमा के विस्‍थापन के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन क्रेन, जेसीबी और दर्जनों मजदूरों की दिन-रात मेहनत के बाद भी हनुमानजी की प्रतिमा अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिल सकी है। करीब 10 दिनों तक चली तमाम असफल कोशिशों के बाद अब प्रशासन ने तकनीकी विशेषज्ञों का सहारा लिया है। अब जानकारी सामने आ रही है कि इसके विस्‍थापन के लिए आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।

अब तक इस घटना ने इंटरनेट पर सनसनी फैला दी है। बता दें कि क्रेन, हाइड्रोलिक जैक और कई उन्नत मशीनों का उपयोग करने के बावजूद प्रतिमा टस से मस नहीं हुई, जिसके बाद प्रशासन और इंजीनियरों को बैकलॉग पर जाना पड़ा। यह घटना अब पूरे शहर में चर्चा और आस्था का केंद्र बन चुकी है। इसके लिए पूजा-पाठ भी की गई। तय कार्यक्रम के अनुसार पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमा की शिफ्टिंग का काम शुरू किया गया था लेकिन फिर भी प्रतिमा नहीं हटी है। प्रत्यक्षदर्शियों और इंजीनियरों के अनुसार, भारी क्षमता वाली क्रेन का उपयोग करने के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से 1 इंच भी नहीं हिली।

अब क्‍या रास्‍ते हैं प्रशासन के पास : जानकारी है कि तकनीकी विफलता और उफनती जन-आस्था को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल प्रतिमा शिफ्टिंग का काम रोक दिया है।

सड़क के नक्शे (Road Design) में बदलाव : सड़क के सेंट्रल वर्ज (Divider) को इस तरह री-डिजाइन किया जाए कि हनुमान मंदिर डिवाइडर के बीच में सुरक्षित बना रहे और यातायात दोनों तरफ से सुचारू रूप से निकल सके। सिविल स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स और भू-वैज्ञानिकों की टीम को बुलाकर प्रतिमा के आधार (Foundation) की गहराई और संरचना का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और मंदिर के संत-महात्मा मिलकर ऐसे समाधान पर काम कर रहे हैं, जिससे विकास कार्य भी न रुके और धार्मिक आस्था को भी कोई ठेस न पहुंचे। इसके साथ ही खबर यह भी है कि इसके लिए इंदौर के आईआईटी विशेषज्ञों को भी उज्‍जैन बुलाया गया है, जो इसकी पूरी जांच करेंगे।

क्‍या कहते हैं स्‍थानीय पत्रकार :  चर्चा में सामने आया कि प्रतिमा के आसपास की खुदाई को लेकर सावधानी बरत रहा है। उन्‍होंने बताया कि मंदिर के आसपास तो खुदाई हो गई है, अब प्रतिमा को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए उसे आसपास से खोदा जा रहा है। ऐसे में हनुमानजी की प्रतिमा को कोई नुकसान न पहुंचे, मूर्ति को किसी तरह का डैमेज न हो इस बात का खासा ध्‍यान रखा जा रहा है।

कहीं लॉकिंग सिस्‍टम तो नहीं प्रतिमा में : बता दें कि यह दुर्लभ प्रतिमा मालवा के विशेष बेसाल्ट पत्थर से तैयार की गई है, जो परमार काल और राजा भोज के शासनकाल की शिल्पकला को दर्शाती है। प्रशासन पिछले करीब पांच दिनों से इस प्रतिमा को विस्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिमा को यहां लॉकिंग सिस्टम के मुताबिक स्थापित किया गया होगा। प्राचीन काल में लोहे या अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं होते थे। यही कारण है कि उस समय के इंजीनियर पत्थरों में छेद कर न केवल प्रतिमाओं, बल्कि भव्य मंदिरों का भी निर्माण कर देते थे।

क्यों विस्‍थापित हो रही प्रतिमा : बता दें कि उज्‍जैन के कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक की सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस मार्ग पर प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर है। पिछले कुछ दिनों से प्रतिमा को हटाने के लिए चार बार प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई। मंदिर भवन के गर्भगृह और मुख्य ढांचे को तोड़ा जा चुका है। फिलहाल प्रतिमा को कैनोपी टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। मंदिर के बाहर स्थानीय श्रद्धालुओं ने चेतावनी भरा पोस्टर भी लगाया है। इसमें लिखा है कि प्रतिमा हटाने के दौरान यदि किसी भी तरह से प्रतिमा खंडित होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ऐसे में प्रतिमा को विस्‍थापित करने में प्रशासन अतिरिक्‍त सतर्कता बरता रहा है।

शिक्षा में नवाचार और स्टार्टअप सोच को बढ़ावा देना समय की जरूरत: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

शिक्षा में नवाचार और स्टार्टअप सोच को बढ़ावा देना समय की जरूरत: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

 रायपुर: शिक्षा में नवाचार, रचनात्मकता और विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। बदलती तकनीक के दौर में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उनमें जिज्ञासा, नई सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना जरूरी है। यह बात वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी ने पीएम शासकीय विद्यालय कोड़ातराई में आयोजित शिक्षक सम्मान सह फन फेयर कार्यक्रम में कही।

वित्त मंत्री चौधरी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यालय के नवीन भवन निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और उनकी रचनात्मकता, आत्मविश्वास एवं नवाचार की सोच की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का भी है।

फन फेयर में विद्यार्थियों ने संभाली आयोजन की पूरी जिम्मेदारी

पीएम श्री स्कूल कोड़ातराई में आयोजित फन फेयर विद्यार्थियों के व्यावहारिक सीखने और नेतृत्व क्षमता का प्रभावी उदाहरण बना। शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने स्वयं मंच संचालन, अतिथि सत्कार, अनुशासन, समय प्रबंधन, कूपन वितरण और विभिन्न स्टॉलों के संचालन की जिम्मेदारी संभाली।

फन फेयर में बड़ा, डोसा, मंचुरियन, चाउमिन, फ्रेंच फ्राई, चना रोस्ट, आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक सहित विभिन्न खाद्य पदार्थों के स्टॉल लगाए गए। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ व्यवहारिक जीवन की समझ भी देती हैं। इससे टीमवर्क, नेतृत्व, प्रबंधन, संवाद और निर्णय लेने जैसी क्षमताओं का विकास होता है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अपनी प्रतिभा को पहचानने, प्रयोग करने और नए विचारों को सामने लाने के पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। यही अनुभव आगे चलकर उनमें नवाचार और स्टार्टअप की सोच को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

शिक्षकों का सम्मान कर जताया आभार

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कार्यालयीन कर्मचारियों का तिलक लगाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया। विद्यार्थियों ने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके मार्गदर्शन एवं योगदान को सराहा।

विद्यालय के प्राचार्य  अजय कुमार सिन्हा ने पीएम श्री योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों, योजनाओं एवं नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यालय के विकास में सहयोग प्रदान करने वाले जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ व्याख्याता रामसागर पटेल ने आभार प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष  शिखा रविन्द्र गबेल, जनपद अध्यक्ष  हेमलता हरिशंकर चौहान, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, शिक्षक-शिक्षिकाएं, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

पांच राज्यों की 6 सीटों पर उपचुनाव का ऐलान, 6 अक्टूबर को वोटिंग, इस दिन आएंगे नतीजे

पांच राज्यों की 6 सीटों पर उपचुनाव का ऐलान, 6 अक्टूबर को वोटिंग, इस दिन आएंगे नतीजे

 चुनाव आयोग ने देश की 6 सीटों पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. 4 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की 5 विधानसभा सीटों तथा 1 लोकसभा सीट पर 6 अक्टूबर 2026 को वोटिंग होगी, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को कराई जाएगी. ये सभी सीटें विधायकों और सांसदों के इस्तीफे की वजह से खाली हुई थीं

इन सीटों पर होंगे उपचुनाव

विधानसभा सीटें:

  • मदुरंतकम (तमिलनाडु)
  • धारापुरम (तमिलनाडु)
  • थट्टांचावडी (पुडुचेरी)
  • रेजीनगर (पश्चिम बंगाल)
  • नंदीग्राम (पश्चिम बंगाल)

लोकसभा सीट: नौगांव (असम)

उपचुनाव का पूरा शेड्यूल

  • नॉटिफिकेशन जारी होने की तिथि: 09 सितंबर 2026
  • नामांकन की अंतिम तिथि: 16 सितंबर 2026
  • नामांकन पत्रों की जांच: 17 सितंबर 2026
  • नाम वापसी की अंतिम तिथि: 19 सितंबर 2026
  • मतदान की तिथि: 06 अक्तूबर 2026
  • मतगणना की तिथि: 09 अक्तूबर 2026
  • चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की तिथि: 11 अक्टूबर 2026

क्यों हो रहे उपचुनाव?

इन सभी 6 सीटों पर संबंधित जनप्रतिनिधियों के इस्तीफे के बाद उपचुनाव कराए जा रहे हैं. असम की नगांव लोकसभा सीट से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद वहां उपचुनाव हो रहे हैं. इसके अलावा अन्य पांच विधानसभा सीटों पर भी विधायकों ने इस्तीफा दिया है. तमिलनाडु की मदुरंतकम सीट पर विधायक मरागथम कुमारवेल  और धारापुरम से पी. सत्यभामा ने इस्तीफा दिया था. वहीं पश्चिम बंगाल की रेजीनगर से विधायक हुमायूं कबीर और नंदीग्राम से CM सुवेंदु अधिकारी ने इस्तीफा दिया था. इसके अलावा पुडुचेरी की थट्टनचावडी    सीट से विधायक एन. रंगासामी ने इस्तीफा दिया.

व्यापार वाणिज्य और उद्योग के क्षेत्र में भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है : मोहन यादव

व्यापार वाणिज्य और उद्योग के क्षेत्र में भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है : मोहन यादव

 भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि व्यापार वाणिज्य और उद्योग के क्षेत्र में भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश कदम से कदम मिलाकर इस क्षेत्र में कार्य करेगा। वैश्विक स्तर पर निवेश की संभावनाओं को साकार करने के लिए मैं मध्य प्रदेश से यूएई के दौरे पर आया हूं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आर्थिक शक्ति बन रहा है। उनकी यूएई यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को यूएई पहुंचने पर मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत जिस तरह दुनिया के देशों के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ कर तेज गति से आगे बढ़ रहा है। हमारा देश एक पारदर्शी, सरलीकृत व्यवस्था के साथ शुचिता के बल पर व्यापार और वाणिज्य क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। राज्यों के बीच भी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है। यह स्वर्णिम काल है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विभिन्न देशों के साथ व्यापार, वाणिज्य की गतिविधियों में वृद्धि हुई है। निवेश के प्रयासों में मध्य प्रदेश भी कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। आज मध्य प्रदेश का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। पिछले एक वर्ष में ही 76 हजार करोड़ रुपये का निर्यात मध्य प्रदेश से हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि लॉजिस्टिक्स, माइनिंग, एग्रीकल्चर, रियल एस्टेट सहित हर क्षेत्र में निवेश आए, व्यापार बढ़े और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हों। निश्चित ही यूएई और मध्य प्रदेश के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई मिलेगी और निवेशक मध्य प्रदेश की विकास यात्रा में भागीदार बनेंगे।

मुख्यमंत्री दुबई में वैश्विक निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे मप्र की विकास और निवेश संभावनाएं

जनसम्पर्क अधिकारी संजय दुबे ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव 09 सितंबर 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर रहेंगे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दुबई में एआईएम कांग्रेस-2026 में सहभागिता करेगा। मुख्यमंत्री दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एआईएम कांग्रेस-2026 में मध्य प्रदेश की निवेश क्षमता, औद्योगिक आधार और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध निवेश अवसरों को वैश्विक उद्योग जगत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। यात्रा के दौरान ‘इन्वेस्ट मध्य प्रदेश' विषय पर विशेष सत्र भी प्रस्तावित है, जिसमें मुख्यमंत्री राज्य के निवेश-अनुकूल वातावरण और औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डालेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश भारत के तेजी से उभरते औद्योगिक और निवेश गंतव्यों में अपनी सशक्त पहचान बना रहा है। राज्य में उपलब्ध संसाधन, बेहतर आधारभूत संरचना, उद्योग-अनुकूल वातावरण और निवेशकों के लिए विकसित सुविधाएं प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक बनाती हैं। हमारा प्रयास है कि वैश्विक निवेशकों के साथ मजबूत साझेदारी स्थापित कर मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाए

उन्होंने कहा कि दुबई यात्रा मध्य प्रदेश और संयुक्त अरब अमीरात के बीच आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करेगी। वैश्विक निवेशकों और उद्योग समूहों के साथ होने वाली बैठकें प्रदेश में नए निवेश और रोजगार के अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उनकी यात्रा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य जनवरी 2027 में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क एवं सहभागिता को बढ़ावा देना भी है। यात्रा में संयुक्त अरब अमीरात सरकार को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में पार्टनर कंट्री के रूप में आमंत्रित करने के प्रयास किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री एआईएम कांग्रेस के उद्घाटन समारोह, वैश्विक नेतृत्व से जुड़े कार्यक्रमों तथा विभिन्न निवेश और व्यावसायिक बैठकों में सहभागिता करेंगे। वे मध्य प्रदेश मंडप का अवलोकन भी करेंगे और वैश्विक कॉर्पोरेट समूहों के साथ वन-टू-वन बैठकों में मध्य प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। दुबई यात्रा के दौरान सरकारी एवं व्यावसायिक स्तर की बैठकों के साथ राष्ट्र प्रमुख और संस्थागत निवेशकों के साथ राउंड टेबल बैठक भी प्रस्तावित है। इन बैठकों में मध्य प्रदेश में निवेश की नई संभावनाओं तथा दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी पर चर्चा की जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मेजबानी में बिजनेस लीडर्स लंच तथा निवेशकों के साथ संवाद कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। 8 सितंबर को 'इन्वेस्ट मध्य प्रदेश : इंटरएक्टिव सेशन' के माध्यम से चुनिंदा वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। इस दौरान मध्य प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश-अनुकूल वातावरण और विभिन्न उभरते क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं, बल्कि निवेशकों के साथ दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी स्थापित करना है। प्रदेश में निवेश के माध्यम से उद्योगों के विस्तार, रोजगार सृजन और समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

रोंगटे खड़े करने वाला हत्याकांड: पति ने की 25 साल की रिया की बेरहमी से हत्या, सिर काटकर फ्रिज में छुपाया

रोंगटे खड़े करने वाला हत्याकांड: पति ने की 25 साल की रिया की बेरहमी से हत्या, सिर काटकर फ्रिज में छुपाया

असम :- असम की गुवाहाटी पुलिस के हाथ एक ऐसा खौफनाक मामला लगा है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। शहर के संवेदनशील हाटीगांव इलाके से एक ऐसी दर्दनाक और खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ बसिष्ठपुर बाइलेन में एक किराए के मकान से 25 वर्षीय युवती का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ है। मृतका की पहचान रिया तालुकदार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से नूनमती की रहने वाली थी। इस वीभत्स हत्याकांड के केंद्र में उसका अपना ही पति रामानुजन गोस्वामी है, जिस पर बेरहमी से कत्ल करने का गंभीर आरोप लगा है।

खून से सनी प्रेम कहानी का खौफनाक अंत

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रिया तालुकदार फैंसी बाजार के प्रसिद्ध एसी मार्केट इलाके में एक बुटीक में काम करके अपनी आजीविका चला रही थी। रिया के जीवन का संघर्ष बहुत गहरा था, क्योंकि उसके माता-पिता इस दुनिया में नहीं थे और परिवार में उसके पास केवल एक भाई बचा था। जीवन की इन तमाम दुश्वारियों के बीच उसने रामानुजन गोस्वामी से रिश्ता जोड़ा था, लेकिन किसे पता था कि जिस जीवनसाथी पर उसने भरोसा किया, वही उसका सबसे बड़ा कातिल बन जाएगा।

आरंभिक पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि घटना से ठीक पहले, यानी सोमवार को पति-पत्नी के बीच किसी घरेलू बात को लेकर तीखी बहस और झगड़ा हुआ था। विवाद इतना बढ़ गया था कि आरोपी रामानुजन रात करीब 8 बजे घर से गुस्से में बाहर निकल गया था। इसके बाद क्या हुआ, यह केवल वहीशी दरिंदगी की दास्तान बयां करता है जो घर के अंदर घटी।

पड़ोसियों की नाक के नीचे चल रहा था खूनी खेल

यह खौफनाक राज तब खुला जब मंगलवार को पड़ोसियों की नाक में दम करने वाली एक तेज दुर्गंध उस घर से बाहर आने लगी। शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद कोई मृत जानवर आसपास होगा, लेकिन जब बदबू बर्दाश्त से बाहर हो गई और घर के भीतर से कोई हलचल नहीं हुई, तो स्थानीय लोगों को किसी अनहोनी का शक हुआ। तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस थाने को दी गई।

मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब बसिष्ठपुर बाइलेन स्थित उस मकान का दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का मंजर देखकर पुलिसकर्मियों के भी होश उड़ गए। घर के भीतर जो दृश्य था, वह किसी हॉरर फिल्म से भी ज्यादा भयानक था।

क्रूरता की हदें पार: सिर काटकर फ्रिज में रखा

पुलिस के आधिकारिक बयानों के अनुसार, रिया की हत्या सामान्य तरीके से नहीं की गई थी, बल्कि हत्यारे ने दानवीरी और क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं। आरोपी ने रिया का सिर उसके धड़ से अलग कर दिया था। सबसे डरावनी बात यह है कि कटे हुए सिर को एक काले रंग के पॉलीथीन बैग में लपेटकर घर के रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) के अंदर छिपा दिया गया था।

जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि मृतका की पहचान मिटाने या उसे अत्यधिक प्रताड़ित करने के उद्देश्य से उसकी उंगलियां भी काट दी गई थीं। यह इस बात का प्रमाण है कि हत्यारे के मन में कितनी गहरी नफरत और क्रूरता भरी हुई थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार, आरोपी पति की तलाश तेज

गुवाहाटी पुलिस के फोरेंसिक विशेषज्ञों और जांच अधिकारियों का अनुमान है कि यह हत्या शव बरामद होने से कम से कम 24 से 48 घंटे पहले की जा चुकी होगी। गंध फैलने से यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि वारदात सोमवार रात की ही है। हालांकि, हत्या की असली और सटीक वजह अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।

  • मुख्य संदिग्ध: मृतका का पति रामानुजन गोस्वामी (मूल निवास: गौरीपुर)।
  • बरामदगी: रिया का सिर कटा शव, जिसे फ्रिज से बरामद किया गया।
  • वर्तमान स्थिति: शव को गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

पुलिस अब रामानुजन गोस्वामी की तलाश में चप्पे-चप्पे पर छापेमारी कर रही है। आरोपी का मोबाइल फोन बंद आ रहा है और उसके संभावित ठिकानों पर पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि हत्या से पहले रिया को किस तरह की शारीरिक प्रताड़ना दी गई थी और क्या इस जघन्य कृत्य में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।

इस सनसनीखेज घटना के बाद से पूरे हाटीगांव और आसपास के इलाकों में डर और गुस्से का माहौल है। आम लोग इस बात से स्तब्ध हैं कि कोई इंसान इतनी बेरहमी से अपनों की जान कैसे ले सकता है। पुलिस का दावा है कि आरोपी को जल्द ही कानून के शिकंजे में लाया जाएगा और इस दिल दहला देने वाले मामले की हर एक कड़ी को सुलझा लिया जाएगा।

दर्दनाक हादसा: भरभराकर गिरी 5 मंजिला इमारत, कई लोगों के दबने की आशंका, रेस्क्यू जारी

दर्दनाक हादसा: भरभराकर गिरी 5 मंजिला इमारत, कई लोगों के दबने की आशंका, रेस्क्यू जारी

 Delhi : देश की राजधानी दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले स्थित सत्य निकेतन इलाके से एक बड़े हादसे की खबर सामने आ रही है. यहां 5 मंजिला इमारत अचानक ढह गई. इमारत के गिरते ही आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया और चीख-पुकार मच गई. आशंका जताई जा रही है कि इमारत के मलबे के नीचे कई लोग फंसे हो सकते हैं.

जानकारी के अनुसार, फायर विभाग को रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन में इमारत गिरने की सूचना मिली. कॉल मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां और राहत-बचाव दल तुरंत मौके के लिए रवाना हो गए. रेस्क्यू में दमकल की 12 टीम लगी हैं.

घटनास्थल पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीमें और स्थानीय पुलिस प्रशासन की मदद से तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है. राहतकर्मी मलबे को हटाने और उसके नीचे फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुटे हैं. आसपास के लोगों की मदद से भी स्थिति पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है.

विस्तृत जानकारी का इंतजार

हादसा किस वजह से हुआ और इमारत गिरने के समय उसमें कितने लोग मौजूद थे, इसको लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है. मौके पर एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को भी तैनात कर दिया गया है. मामले में विस्तृत विवरण का इंतजार किया जा रहा है.

इमारत में चलता था हॉस्टल

बताया जा रहा है कि जिस इमारत के गिरने की जानकारी सामने आई है,उसमें हॉस्टल संचालित होने की बात कही जा रही है. ऐसे में मलबे में छात्रों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि,प्रशासन की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हादसे के वक्त इमारत में कितने छात्र मौजूद थे. सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित है और इलाके में बड़ी संख्या में पीजी और हॉस्टल संचालित होते हैं. यही वजह है कि इमारत गिरने के बादछात्रों और उनके परिजनों के बीच भी चिंता बढ़ गई है.

हादसे के बाद एहतियात के तौर पर आसपास की कुछ इमारतों को भी खाली कराया गया है. पिछले दो दिनों से दिल्ली में बारिश का दौर जारी है, ऐसे में प्रशासन की ओर से आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है.

 
बच्चों को नशे और अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने में शिक्षक निभाएं अहम भूमिका : प्रधानमंत्री मोदी

बच्चों को नशे और अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने में शिक्षक निभाएं अहम भूमिका : प्रधानमंत्री मोदी

 राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए 82 शिक्षक एवं शिक्षाविद चयनित, शिक्षकों ने साझा किए शिक्षण के रचनात्मक अनुभव

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से संवाद किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनके व्यवहार और दैनिक जीवन पर भी नजर रखने का आग्रह किया। उन्होंने युवा छात्रों में बढ़ती नशीली दवाओं की लत और अत्यधिक स्क्रीन टाइम को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए शिक्षकों से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए तीन विभागों से कुल 82 शिक्षकों और शिक्षाविदों का चयन किया गया है। इनमें विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के 48 शिक्षक, उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षक एवं संकाय सदस्य तथा कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के 13 कौशल प्रशिक्षक शामिल हैं।पुरस्कार विजेताओं ने प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के दौरान अपने शिक्षण अनुभव और नवाचार साझा किए। उन्होंने कक्षा में पढ़ाई को अधिक रुचिकर, प्रभावी और विद्यार्थियों के अनुकूल बनाने के लिए अपनाए जा रहे विभिन्न रचनात्मक तरीकों की जानकारी दी।

बच्चों में बदलाव पर नजर रखें शिक्षक
प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षकों को केवल बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके व्यवहार और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक संयुक्त परिवार व्यवस्था में कमी आने के कारण बच्चों के जीवन में शिक्षकों की भूमिका पहले की तुलना में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।नशे की समस्या का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को ऐसे बदलावों के पीछे के कारणों को समझने का प्रयास करना चाहिए और जरूरत पडऩे पर बच्चों को नशीली दवाओं की लत से बाहर निकलने में मदद करनी चाहिए।

बच्चों की जिज्ञासा को दें सही दिशा
प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा उनके विकास का महत्वपूर्ण आधार है। बचपन की मासूमियत को सुरक्षित रखना शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बच्चों में स्वाभाविक रूप से सीखने और जानने की जिज्ञासा होती है। यदि शिक्षक इस जिज्ञासा को प्रोत्साहित कर उसे उचित दिशा दें, तो बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों से घटाएं स्क्रीन टाइम
प्रधानमंत्री ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को भी गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने शिक्षकों से अभिभावकों के साथ इस मुद्दे पर संवाद करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके बच्चे मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों पर कितना समय बिताते हैं तथा क्या वे देर रात तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं।उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों के प्रति आकर्षित किया जाए। इससे वे धीरे-धीरे अत्यधिक स्क्रीन उपयोग की आदत से बाहर निकल सकते हैं और उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

कक्षा से बाहर सीखने पर जोर
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए बच्चों को कक्षा की सीमाओं से बाहर ले जाने और उन्हें वास्तविक दुनिया के कौशल तथा विभिन्न प्रकार के कार्यों से परिचित कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम और पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में श्रम की गरिमा सहित जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों को विकसित करने में सहयोग देने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों को व्यावहारिक अनुभवों से जोडऩे से उनमें जिम्मेदारी, आत्मनिर्भरता और समाज के प्रति सम्मान की भावना विकसित की जा सकती है।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षकों का समर्पण और नवाचार देश की भावी पीढ़ी को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने 6 लोगों को जिंदा जलाने वाले शख्स को सुनाई उम्रकैद की सजा

कर्नाटक हाई कोर्ट ने 6 लोगों को जिंदा जलाने वाले शख्स को सुनाई उम्रकैद की सजा

 बेंगलुरु । कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 2013 में मैसूर में एक घर में आग लगाकर एक ही परिवार के छह लोगों की हत्या करने के मामले में आरोपी अब्दुल शरीफ उर्फ आमिर जान को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को बरी करने के मैसूर सत्र न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए उसे दोषी करार दिया।न्यायमूर्ति एचपी संदेश और न्यायमूर्ति बी. प्रमोद की खंडपीठ ने कर्नाटक सरकार की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। सरकार ने आरोपी को बरी करने के मैसूर के द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायालय के 28 अप्रैल 2018 के फैसले को चुनौती दी थी।

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को गलत ठहराते हुए उसे रद्द कर दिया। अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या, धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास और धारा 436 के तहत आग या विस्फोटक पदार्थ के जरिए मकान को नुकसान पहुंचाने के अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही उसे संबंधित विचारण अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।मामला मैसूर के उदयगिरि थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, अब्दुल शरीफ और मोहम्मद आमिर जान के परिवारों के बीच पैसों को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते शरीफ ने 12 अप्रैल 2013 की आधी रात को कथित तौर पर पेट्रोल डालकर घर में आग लगा दी।

आग की चपेट में आने से मोहम्मद आमिर जान, उनकी मां अफरोज बेगम, रेशमा, अंजुम, रिजवान और रिजाना गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में उपचार के दौरान सभी छह लोगों की मौत हो गई।घटना के समय आरोपी की उम्र करीब 50 वर्ष थी। अब उसकी उम्र 63 वर्ष है।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी को दोषी ठहराने के लिए आवश्यक साक्ष्य, जिसमें विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी शामिल है, रिकॉर्ड पर मौजूद हैं। इसके बावजूद विचारण अदालत इन साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन करने में विफल रही।

अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने इस बात को लेकर अनावश्यक रूप से विचार किया कि आग या धमाका तत्काल हुआ था अथवा कुछ समय बाद। उच्च न्यायालय के अनुसार, यह मुद्दा मामले के लिए महत्वपूर्ण नहीं था और इसके कारण उपलब्ध साक्ष्यों पर उचित तरीके से विचार नहीं किया गया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि विचारण अदालत द्वारा आरोपी को बरी करना गलत था। निचली अदालत के आदेश में गंभीर त्रुटियां थीं, इसलिए उसे रद्द किया जा रहा है।अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अब्दुल शरीफ को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही उसे निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।a

गांव की कक्षा से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचीं सुनीता यादव, CM साय ने दी बधाई

गांव की कक्षा से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचीं सुनीता यादव, CM साय ने दी बधाई

  छत्तीसगढ़ की शिक्षिका को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से किया सम्मानित, नवाचार और जनभागीदारी से बदली ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के एक ग्रामीण स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाली शिक्षिका सुनीता यादव के लिए आज का दिन जीवन का यादगार दिन बन गया। जिस स्कूल में कभी संसाधनों की कमी के बीच बच्चों को पढ़ाने की चुनौती थी, वहीं उन्होंने अपनी पहल, तकनीक और गांव के लोगों की भागीदारी से पढ़ाई का ऐसा माहौल तैयार किया, जिसकी गूंज आज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया।

सुनीता यादव इस वर्ष छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षिका हैं। देशभर से चुने गए 48 स्कूली शिक्षकों में उनका नाम शामिल है। इन शिक्षकों का चयन जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया से किया गया। इस वर्ष सम्मानित शिक्षकों में 22 महिलाएं और 26 पुरुष शामिल हैं।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनीता यादव को इस उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में रहकर बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए उनका समर्पण और नवाचार पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों को प्रदेश के अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी बताया।

अपनी कक्षा को बनाया स्मार्ट, गांव को बनाया भागीदार
सुनीता यादव वर्ष 2008 से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने केवल उपलब्ध सरकारी संसाधनों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं पहल की। अपने स्तर पर संसाधन जुटाए और समुदाय को साथ लेकर स्कूल में स्मार्ट क्लास विकसित की। आज उनके स्कूल में प्रोजेक्टर, लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल आधारित ICT साधनों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाता है। यानी किताब के पन्नों के साथ अब बच्चे तस्वीरों, वीडियो और डिजिटल सामग्री के जरिए भी विषयों को समझते हैं।

उनकी सोच सीधी है—बच्चे को पढ़ाई रटनी नहीं, समझनी चाहिए
इसीलिए उन्होंने डिजिटल सामग्री, कहानी, ऑडियो-वीडियो और गतिविधि आधारित पढ़ाई को कक्षा का हिस्सा बनाया। कठिन लगने वाले विषयों को बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर समझाने की कोशिश की गई।

‘न्योता भोजन’ से स्कूल और समाज का रिश्ता मजबूत
सुनीता यादव की पहल केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रही। उन्होंने बच्चों के पोषण और स्कूल से समाज के जुड़ाव को भी शिक्षा का हिस्सा बनाया। ‘न्योता भोजन’ जैसी पहल के माध्यम से गांव के लोगों को बच्चों के साथ भोजन साझा करने के लिए जोड़ा गया। स्थानीय स्तर पर शुरू हुई इस सोच ने बाद में व्यापक रूप लिया और ‘न्योता भोजन’ छत्तीसगढ़ में एक जानी-पहचानी पहल बना। इसका संदेश भी सरल है—बच्चे सिर्फ स्कूल की जिम्मेदारी नहीं हैं, पूरा समाज उनकी शिक्षा और विकास में भागीदार बन सकता है।

किताब स्कूल से निकलकर घर तक पहुंची
बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए उन्होंने ‘घर-घर पुस्तक वाचन’ जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया। इसका उद्देश्य बच्चों को पाठ्यपुस्तक से आगे ले जाकर कहानी और किताबों की दुनिया से जोड़ना था।

इसका असर बच्चों की भाषा, पढ़ने की क्षमता और आत्मविश्वास पर दिखाई दिया। कमजोर बच्चों को भी साथ लेकर चलने की कोशिश की गई, ताकि कोई बच्चा केवल इसलिए पीछे न रह जाए क्योंकि उसे शुरुआत में पढ़ाई कठिन लगती है। इन्हीं प्रयासों के कारण उनके विद्यालय में Foundational Literacy and Numeracy (FLN) पर विशेष काम हुआ और विद्यालय को ‘सुघ्घर पढ़इया’ प्लेटिनम ग्रेड की उपलब्धि मिली।

Teacher’s Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए इस दिन का खास महत्व

Teacher’s Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए इस दिन का खास महत्व

 नई दिल्ली। Teacher’s Day 2026:  हर साल 5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस दिन स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई का माहौल कुछ अलग दिखाई देता है। विद्यार्थी अपने शिक्षकों के सम्मान में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण, खेल और विशेष प्रस्तुतियां आयोजित करते हैं। कई शिक्षण संस्थानों में वरिष्ठ छात्र एक दिन के लिए शिक्षकों की भूमिका भी निभाते हैं और जूनियर कक्षाओं को पढ़ाते हैं।

कहीं विद्यार्थी अपने शिक्षकों की नकल करके मनोरंजक कार्यक्रम पेश करते हैं तो कहीं उन्हें उपहार देकर आभार जताया जाता है। हालांकि, इस पूरे आयोजन के पीछे सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि शिक्षकों के प्रति सम्मान और उनके योगदान को याद करने की भावना जुड़ी है। लेकिन सवाल यह है कि भारत में शिक्षक दिवस मनाने के लिए 5 सितंबर की तारीख ही क्यों तय की गई? इसके पीछे देश के महान शिक्षाविद और दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की महत्वपूर्ण भूमिका है।

5 सितंबर से कैसे जुड़ा शिक्षक दिवस?

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वे देश के जाने-माने दार्शनिक, विद्वान और शिक्षाविद थे। उन्होंने अपने जीवन का लंबा समय शिक्षा और अध्यापन के क्षेत्र को समर्पित किया। जब वर्ष 1962 में डॉ. राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने, तब उनके कुछ विद्यार्थियों और प्रशंसकों ने उनका जन्मदिन विशेष रूप से मनाने की इच्छा जताई।

बताया जाता है कि राधाकृष्णन ने अपने जन्मदिन को व्यक्तिगत तौर पर मनाने के बजाय इस दिन को देश के शिक्षकों के सम्मान के लिए समर्पित करने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि जन्मदिन को केवल एक व्यक्ति तक सीमित रखने के बजाय इसे उन सभी शिक्षकों के सम्मान का अवसर बनाया जाना चाहिए, जो समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी विचार के बाद भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई।

कौन थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन?

डॉ. राधाकृष्णन को भारत के प्रमुख दार्शनिकों और शिक्षाविदों में गिना जाता है। उन्होंने अध्यापन और शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया। वे आंध्र विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उन्होंने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर भी जिम्मेदारी संभाली।

वर्ष 1952 में वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और इसके बाद 1962 में देश के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला। राधाकृष्णन शिक्षा को केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं मानते थे। उनके विचार में शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों में तर्क करने की क्षमता, स्वतंत्र विचार, नैतिक समझ और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित करना था।

1962 से जारी है शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा

भारत में शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत 1962 से मानी जाती है। तब से हर साल 5 सितंबर को शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के सम्मान में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों के लिए विशेष प्रस्तुतियां तैयार करते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में भाषण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। कई जगह विद्यार्थी एक दिन के लिए शिक्षक की भूमिका निभाकर कक्षाएं भी संचालित करते हैं। इस तरह शिक्षक दिवस विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है।

 48 शिक्षकों को राष्ट्रीय सम्मान

इस वर्ष 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में 48 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन शिक्षकों को सम्मान प्रदान करेंगी। इन शिक्षकों का चयन जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन चरणों में हुई प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है। सम्मान पाने वाले शिक्षक 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और 6 केंद्रीय सरकारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

1958 में हुई थी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत

Teacher’s Day 2026: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत 1958 में की गई थी। इसका मकसद ऐसे शिक्षकों को पहचान और सम्मान देना है, जिन्होंने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया हो और अपने विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ उनके जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव डाला हो। शिक्षक दिवस हर साल यह याद दिलाता है कि एक शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के ज्ञान, व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाता है।

 
देश के 48 उत्कृष्ट शिक्षकों को मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित

देश के 48 उत्कृष्ट शिक्षकों को मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित

 नई दिल्ली: देशभर में आज 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में देश के 48 उत्कृष्ट स्कूल शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। सम्मान पाने वाले शिक्षकों में केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, आदर्श जनजातीय स्कूल और पीएम श्री स्कूल सहित विभिन्न संस्थानों के शिक्षक शामिल हैं। 

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुने गए 48 शिक्षकों में 26 पुरुष और 22 महिला शिक्षक हैं। राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश से तीन, जबकि बिहार और मध्य प्रदेश से दो-दो शिक्षकों का चयन किया गया है

लातूर के गणित शिक्षक वैभव कुलकर्णी भी सूची में

राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों में महाराष्ट्र के लातूर स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के गणित शिक्षक वैभव वसंतराव कुलकर्णी भी शामिल हैं। उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है। कुलकर्णी के पास तीन दशक से अधिक का शिक्षण अनुभव है। गणित जैसे विषय को विद्यार्थियों के लिए आसान और रोचक बनाने के उद्देश्य से उन्होंने पढ़ाने के कई नए तरीके अपनाए। इसके अलावा उन्होंने कम लागत में तैयार किए जा सकने वाले विभिन्न लर्निंग एड्स विकसित किए, ताकि विद्यार्थी गणितीय अवधारणाओं को बेहतर तरीके से समझ सकें।

तीन स्तरों की प्रक्रिया से हुआ शिक्षकों का चयन

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए 48 शिक्षकों का चयन जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर हुई तीन चरणों वाली प्रक्रिया के बाद किया गया है। इस पुरस्कार का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों के काम को सामने लाना है, जिन्होंने अपने समर्पण, मेहनत और नवाचार के जरिए स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने में योगदान दिया है। साथ ही विद्यार्थियों के सीखने, व्यक्तित्व विकास और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।

किन शिक्षकों को मिलता है राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार?

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार उन शिक्षकों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हों। इसके लिए मुख्य रूप से ऐसे योगदानों को महत्व दिया जाता है—

  • स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रभावी पहल करना।
  • विद्यार्थियों की पढ़ाई और समग्र विकास में उल्लेखनीय योगदान देना।
  • शिक्षण में नए, रचनात्मक और प्रभावी तरीकों का प्रयोग करना।
  • अपने कार्यों के जरिए अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करना।

1958 में हुई थी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत 1958 में हुई थी। इसका उद्देश्य देश के समर्पित और उत्कृष्ट शिक्षकों के योगदान को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करना और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्यों को पहचान दिलाना है। समय के साथ यह पुरस्कार उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मान बन गया है, जो अपने नवाचार और समर्पण के जरिए विद्यार्थियों की शिक्षा को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं।

पीएम मोदी भी कर चुके हैं पुरस्कार विजेता शिक्षकों से मुलाकात

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुलाकात कर चुके हैं। वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से बातचीत की थी। उस समय कुल 82 शिक्षकों को यह सम्मान दिया गया था। इस मुलाकात के दौरान तमिलनाडु से आई एक शिक्षिका ने स्थानीय भाषा में पढ़ाई की जरूरत का मुद्दा उठाया था। इस पर प्रधानमंत्री ने मातृभाषा में शिक्षा के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा था कि नई शिक्षा नीति में स्थानीय और मातृभाषाओं पर विशेष जोर दिया गया है।

 वहीं पिछले साल शिक्षक दिवस से एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले 45 शिक्षकों से मुलाकात की थी। करीब 35 मिनट के संबोधन में उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ GST सुधार, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े कानून और आत्मनिर्भर भारत जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की थी। आज एक बार फिर शिक्षक दिवस के अवसर पर देश के 48 शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उनके समर्पण, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में योगदान को पहचान देने का अवसर होगा। 

यहां देखें पूरी सूची

क्र.सं. नाम राज्य / केंद्र शासित प्रदेश / संगठन
1 जे प्रकाश राव अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
2 राजेश कौलुरी आंध्र प्रदेश
3 याकू तामे अरुणाचल प्रदेश
4 राजेश बोरदोलोई असम
5 खुशबू कुमारी बिहार
6 पुष्पा प्रसाद बिहार
7 राधा राजेश सी.आई.एस.सी.ई.
8 संगीता यादव सी.बी.एस.ई.
9 रवि जायसवाल चंडीगढ़
10 सुनिता यादव छत्तीसगढ़
11 पटेल पूर्णिमा मोहनलाल दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
12 सुमन गोयल दिल्ली
13 मो. ज़फर आलम एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (जनजातीय कार्य मंत्रालय)
14 महादेव हनमंत शिंदे गोवा
15 नितिनकुमार महेंद्रकुमार पाठक गुजरात
16 अनिल कौशिक हरियाणा
17 मंजरी वी महाजन हिमाचल प्रदेश
18 मोहम्मद अयाज रैना जम्मू और कश्मीर
19 मुनमुन भट्टाचार्जी झारखंड
20 रत्नाकुमारी एस कर्नाटक
21 अमुथा जे केंद्रीय विद्यालय संगठन
22 डॉ. मनीषा क्षेत्रपाल केंद्रीय विद्यालय संगठन
23 सुनील कुमार केपी केरल
24 मोहम्मद मुस्तफा कुमल लद्दाख
25 डॉ. अर्चना शुक्ला मध्य प्रदेश
26 शैलेंद्र प्रताप सिंह मध्य प्रदेश
27 डॉ. कविता नरसिंगराव गित्ते महाराष्ट्र
28 कुंदा जयवंत बच्छाव महाराष्ट्र
29 वांगलेम्बम गोबिन सिंह मणिपुर
30 लालनुनमावी मिजोरम
31 आर रोनाल्ड मेरु नगालैंड
32 वैभव वसंतराव कुलकर्णी नवोदय विद्यालय समिति
33 पदराज उमाकांत नायक ओडिशा
34 गणेसन एस पुडुचेरी
35 दिनेश कुमार पंजाब
36 डॉ. दिव्येंदु सेन राजस्थान
37 डॉ. वर्तिका गुलाटी राजस्थान
38 शिवप्रसाद अरविंद टिंगरे रक्षा मंत्रालय के तहत सैनिक स्कूल
39 सुषमा तमंग सिक्किम
40 थंगा राज एम तमिलनाडु
41 भवानी बोमपेल्ली तेलंगाना
42 रंजन देबनाथ त्रिपुरा
43 डॉ. रेनू त्रिपाठी उत्तर प्रदेश
44 डॉ. इफ्तिखार खान उत्तर प्रदेश
45 शालिनी कुशवाहा उत्तर प्रदेश
46 गबर सिंह उत्तराखंड
47 पलाश चौधरी पश्चिम बंगाल
48 शांतनु पात्रा पश्चिम बंगाल
बाढ़ की चपेट में यूपी के 23 जिले, 16 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू, जन-जीवन प्रभावित

बाढ़ की चपेट में यूपी के 23 जिले, 16 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू, जन-जीवन प्रभावित

 लखनऊ। UP Flood 2026: उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। प्रदेश के 35 प्रभावित जिलों में से 23 जिले फिलहाल बाढ़ से जूझ रहे हैं। प्रशासन की ओर से लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है, जिसमें अकेले बुधवार को 3,042 लोगों का रेस्क्यू किया गया। बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें प्रतापगढ़ का 18 महीने का प्रियांश, जबकि अमरोहा के गजरौला में 32 वर्षीय शेरा और 55 वर्षीय सुरेश शामिल हैं।

बड़े स्तर पर राहत-बचाव अभियान

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए प्रशासन ने 1,499 नाव और मोटरबोट मैदान में उतारी हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,067 मेडिकल टीमें भी तैनात की गई हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के लिए 1,311 राहत केंद्र बनाए हैं, हालांकि इनमें से फिलहाल 201 केंद्र ही सक्रिय हैं। इसके अलावा बारिश और बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए 442 मकानों के मामलों में भी सहायता उपलब्ध कराई गई है। बाढ़ का असर करीब 36,287 पशुओं पर भी पड़ा है।

चित्रकूट में 150 लोगों का रेस्क्यू

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के आसपास के इलाकों में पानी बढ़ने के बाद चौरा गांव में राहत अभियान चलाया गया। 42वीं बटालियन PAC की मोटरबोट की मदद से करीब 150 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। रेस्क्यू किए गए लोगों को भोजन, जरूरी राहत सामग्री और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

बलिया में 20 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

बलिया में गंगा और सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर ने कई इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। यहां करीब 20,500 लोग प्रभावित बताए गए हैं। राहत कार्य के लिए 83 नावें तैनात हैं। जिले में अब तक 6,500 राशन किट, 33,843 दवा किट और 83,092 पके भोजन के पैकेट वितरित किए गए हैं। पशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए 16,629 पशुओं का टीकाकरण किया गया है, जबकि 965 क्विंटल चारे की व्यवस्था की गई है। बाढ़ चौकियों के साथ NDRF और PAC की टीमें भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं। गोपालनगर टाडी और भोजपुरवा में राहत शिविरों के साथ कम्युनिटी किचन भी संचालित किए जा रहे हैं।

पीलीभीत में कई नदियों का जलस्तर बढ़ा

पीलीभीत में शारदा, देओहा और खाकरा नदियों का जलस्तर बढ़ने से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बनबसा से शारदा नदी में दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया, जबकि नानक सागर से देओहा नदी में 30 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने की जानकारी है। स्थिति को देखते हुए कक्षा 1 से 8 तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। खाकरा पुल के पानी में डूबने के कारण करीब 18 गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

वहीं 200 बेड वाले मेडिकल कॉलेज की बिजली व्यवस्था भी बारिश से प्रभावित हुई। अंडरग्राउंड केबल बॉक्स में पानी भर जाने के कारण मुख्य बिजली आपूर्ति 34 घंटे से अधिक समय तक बाधित रही। इस दौरान अस्पताल में जनरेटर के जरिए बिजली की व्यवस्था जारी रखी गई।

लखीमपुर खीरी में कटाव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण

लखीमपुर खीरी में जिला मजिस्ट्रेट अंजनी कुमार सिंह ने गिरजा बैराज एफ्लक्स बांध और मोहना नदी के किनारे कटाव प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। प्रशासन की टीमें लगातार मौके पर काम कर रही हैं। पानी की चपेट में आए करीब एक दर्जन घरों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक पालिया में शारदा नदी का जलस्तर 154.59 मीटर के खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया और फिलहाल जलस्तर स्थिर बताया गया है। कई खेत और गांवों को जोड़ने वाली सड़कें पानी में डूबी हुई हैं। हालांकि अभी किसी गांव के पूरी तरह बाढ़ में डूबने की सूचना नहीं है।

लाखों क्लोरीन टैबलेट और ORS पैकेट वितरित

बाढ़ के साथ बीमारियों का खतरा बढ़ने को देखते हुए प्रशासन राहत सामग्री के साथ स्वास्थ्य संबंधी सामान भी वितरित कर रहा है। अब तक 68,953 खाद्यान्न पैकेट और 3.36 लाख से अधिक भोजन पैकेट बांटे जा चुके हैं। पानी से होने वाली बीमारियों पर नियंत्रण के लिए 5.02 लाख से ज्यादा क्लोरीन की गोलियां और 1.77 लाख से अधिक ORS पैकेट वितरित किए गए हैं। इससे पहले भी बड़ी मात्रा में खाद्यान्न, भोजन, क्लोरीन और ORS सामग्री प्रभावित इलाकों में पहुंचाई गई थी।

BREAKING : श्रीनगर एयरपोर्ट पर पार्किंग के दौरान खंभे से टकराया विमान, बाल-बाल बचे यात्री

BREAKING : श्रीनगर एयरपोर्ट पर पार्किंग के दौरान खंभे से टकराया विमान, बाल-बाल बचे यात्री

 श्रीनगर। मुंबई से श्रीनगर पहुंची इंडिगो की फ्लाइट 6E 225 लैंडिंग के बाद हादसे का शिकार हो गई। जानकारी के मुताबिक, विमान लैंड करने के बाद पार्किंग बे की ओर जा रहा था। इसी दौरान विमान के ब्रेक सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण विमान समय पर रुक नहीं सका और पार्किंग बे में लगे पोल/VDGS सिस्टम से जा टकराया। टक्कर के कारण विमान के अगले हिस्से यानी नोज सेक्शन को नुकसान पहुंचा है।

सभी यात्री और क्रू सुरक्षित

हादसे के वक्त विमान में मौजूद सभी यात्री और क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। यात्रियों और क्रू को मैनुअल सीढ़ियों की मदद से सुरक्षित विमान से बाहर निकाल लिया गया।

विमान को हुए नुकसान को देखते हुए फिलहाल इसे उड़ान भरने से रोक दिया गया है। घटना की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, हादसे की परिस्थितियों और इसकी वजह की जांच तय प्रक्रियाओं के तहत संबंधित एजेंसियों द्वारा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के सही कारणों का पता चल सकेगा।

श्रीनगर एयरपोर्ट का संचालन सामान्य रूप से जारी है

वहीं, श्रीनगर एयरपोर्ट का संचालन सामान्य रूप से जारी है और विमानों की आवाजाही तय कार्यक्रम के मुताबिक हो रही है। एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के लिए सुरक्षित एवं सुचारू संचालन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है।

दोहा-बेंगलुरु फ्लाइट की भी हुई थी इमरजेंसी लैंडिंग

गौरतलब है कि गुरुवार को दोहा से बेंगलुरु जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 1302 को भी मस्कट डायवर्ट किया गया था। उड़ान के दौरान पायलट की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद विमान की एहतियातन मस्कट में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी।

 
 
नेपाल बाढ़ के 9 दिन बाद चमत्कार, त्रिशूली हाइड्रोपावर सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर

नेपाल बाढ़ के 9 दिन बाद चमत्कार, त्रिशूली हाइड्रोपावर सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर

 काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के नौ दिन बाद शुक्रवार को राहत अभियान में ऐसी सफलता मिली, जिसने सभी को हैरान कर दिया। त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो मजदूरों को जिंदा और सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। आपदा के बाद से ही इस सुरंग में फंसे मजदूरों के जीवित बचने को लेकर आशंकाएं जताई जा रही थीं।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दो मजदूरों को जमीन में किए गए छोटे छेद के जरिए एक-एक करके बाहर निकाला गया। सामने आए वीडियो में एक मजदूर को कीचड़ से सना हुआ देखा जा सकता है, जिसे बचावकर्मी अपने कंधे पर लेकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचा रहे हैं। दोनों मजदूरों के बाहर आने पर मौके पर मौजूद रेस्क्यू टीम ने तालियां बजाकर खुशी जाहिर की।

42 मजदूरों को निकालने के लिए चल रहा था ऑपरेशन

त्रिशूली-3A पावर प्लांट की करीब चार किलोमीटर लंबी सुरंग में कई मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। उन्हें बाहर निकालने के लिए बचाव दल जमीन के भीतर ड्रिलिंग कर रास्ता बनाने में जुटा था। इसी दौरान टीम को दो मजदूरों तक पहुंचने में सफलता मिली।

नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत और स्थानीय सांसद श्री राम न्यौपाने ने दोनों मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकलने की पुष्टि की है।

सुरंग से सुनाई दीं दूसरे मजदूरों की आवाजें

रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच एक और राहत की खबर सामने आई है। नुवाकोट जिले के पुलिस प्रमुख बिपिन रेग्मी के मुताबिक, बचाव दल को सुरंग के अंदर से कुछ अन्य मजदूरों की आवाजें सुनाई दी हैं। इससे सुरंग में फंसे दूसरे लोगों के भी जीवित होने की उम्मीद मजबूत हुई है।

मजदूरों तक जल्द पहुंचने के लिए रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया गया है। घटनास्थल पर मेडिकल टीमों को भी भेजा गया है, ताकि बाहर निकाले जाने वाले लोगों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता मिल सके।

12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से करीब 900 मजदूर लापता

स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक नेपाल के करीब 12 अलग-अलग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से लगभग 900 मजदूरों के लापता होने की जानकारी है। इनमें करीब 500 मजदूरों के विभिन्न सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुई थीं। इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। ऐसे में दो मजदूरों का नौ दिन बाद जिंदा मिलना बचाव अभियान के लिए बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है।a

ISRO ने रचा इतिहास, EOS-05 सेटेलाइट सफलता पूर्वक हुआ लॉन्च, समझें क्यों ये है भारत के लिए बहुत बड़ी सफलता

ISRO ने रचा इतिहास, EOS-05 सेटेलाइट सफलता पूर्वक हुआ लॉन्च, समझें क्यों ये है भारत के लिए बहुत बड़ी सफलता

 SRO EOS-05 launch: जब पूरा भारत गहरी नींद में था, तब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिक एक नए इतिहास की स्क्रिप्ट लिख रहे थे. शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 की तड़के 2:55 बजे, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से GSLV-F17 रॉकेट ने अंधेरे और बारिश को चीरते हुए उड़ान भरी. इस लॉन्चिंग के साथ ही इसरो ने अपने 8 महीने के सूखे को खत्म कर दिया और भारत के पहले जियो-इमेजिंग सैटेलाइट EOS-05 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया.

क्या है ‘आई इन द स्काई’ (EOS-05) की खासियत?

इस सैटेलाइट को आसमान में मौजूद भारत की “आंख” (Eye in the sky) कहा जा रहा है. अब तक भारत के जो 22 ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट काम कर रहे हैं, वे लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में हैं. लेकिन, EOS-05 पहला ऐसा सैटेलाइट है जो पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर ‘जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट’ में काम करेगा.
इस ऊंचाई से यह सैटेलाइट पृथ्वी की घूमने की गति के साथ-साथ चलेगा, जिसका मतलब है कि यह भारतीय उपमहाद्वीप और उसकी सीमाओं पर 24×7 रियल-टाइम नजर रख सकेगा.

सेना को मिलेंगी 5 मीटर तक की साफ तस्वीरें

इस 2367 किलोग्राम वजनी (अब तक का सबसे भारी GSLV पेलोड) सैटेलाइट में एक खास किस्म की दूरबीन और हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगे हैं. यह कैमरे सीमाओं पर होने वाली किसी भी हलचल की 5 मीटर तक की साफ तस्वीरें भारतीय सेना (Armed Forces) को रियल-टाइम में भेजेंगे. इसके अलावा, यह स्पेसक्राफ्ट बाढ़, जंगल की आग, आपदा प्रबंधन और कृषि के क्षेत्र में भी देश को बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रैटेजिक डेटा’ (Strategic Data) उपलब्ध कराएगा.

‘नॉटी बॉय’ का शानदार कमबैक

GSLV रॉकेट को अतीत में कुछ विफलताओं के कारण अक्सर ‘नॉटी बॉय’ (ISRO Naughty Boy) कहा जाता रहा है. 2021 में इसके एक मिशन में खराबी आ गई थी. लेकिन इस बार GSLV ने महज 18 मिनट के भीतर ही पेलोड को सटीक कक्षा में स्थापित कर अपना लोहा मनवा लिया. इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन (V. Narayanan ISRO Chief) ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “सैटेलाइट की स्थिति बिल्कुल ठीक है और सोलर पैनल खुल चुके हैं. यह हमारे स्पेस प्रोग्राम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.” केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इस बड़ी कामयाबी पर पूरी इसरो टीम को बधाई दी.

ग्लोबल स्पेस पावर बना भारत (isro satellite launch)

जनवरी 2026 में PSLV मिशन की आंशिक विफलता के बाद यह लॉन्चिंग इसरो के लिए साख का सवाल थी. तिरुपति बालाजी के दर्शन से लेकर 27 घंटे के लंबे काउंटडाउन तक, वैज्ञानिकों की मेहनत आखिरकार रंग लाई. EOS-05 का सफल लॉन्च यह साबित करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत तेजी से एक ‘ग्लोबल स्पेस पावर’ (Global Space Power) के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.

ISRO को लेकर पूछे जाने वाले सवाल

  • EOS-05 सैटेलाइट क्या है और इसका काम क्या होगा?
  • इसरो EOS-05 लॉन्च की पूरी जानकारी
  • GSLV-F17 रॉकेट से कौन सा सैटेलाइट लॉन्च हुआ?
  • इसरो का ‘नॉटी बॉय’ रॉकेट फिर चर्चा में क्यों?
  • श्रीहरिकोटा से इसरो का सैटेलाइट लॉन्च
  • EOS-05 मिशन भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
  • इसरो के पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का क्या काम है?
  • इसरो के GSLV रॉकेट की खासियत क्या है?
दिशा सालियान मर्डर केस: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, सीबीआई करेगी जांच

दिशा सालियान मर्डर केस: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, सीबीआई करेगी जांच

 मुंबई। करीब छह साल पुराने दिशा सालियान मौत मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम आदेश देते हुए जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने एजेंसी को एफआईआर दर्ज कर नए सिरे से जांच शुरू करने और दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज करने को कहा है। इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। दिशा के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया था कि उनकी बेटी की मौत की पहले हुई जांच में कई सवाल अनसुलझे रह गए। उन्होंने स्वतंत्र जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद CBI को मामले की जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि CBI अब पहले की जांच से जुड़े सभी रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर मामले की शुरुआत से पड़ताल करेगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही की जाएगी। दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। शुरुआती जांच में इसे दुर्घटना और बाद में आत्महत्या बताया गया था। हालांकि, उनके पिता लगातार निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे। अब CBI जांच के आदेश के बाद मामले की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

राम मंदिर को मिला पहला सीईओ, जितेंद्र मिश्रा संभालेंगे जिम्मेदारी

राम मंदिर को मिला पहला सीईओ, जितेंद्र मिश्रा संभालेंगे जिम्मेदारी

 अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ ) को लेकर निर्णय हो गया है। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ट्रस्ट के सीईओ चुने गए हैं। बुधवार को अयोध्या की मणिरामदास छावनी में महंत नृत्यगोपालदास की अध्यक्षता में हुई ट्रस्ट की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। बैठक में ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ ही आमंत्रित सदस्य भी मौजूद रहे।

वहीं, ट्रस्ट की बैठक में तीन नए सदस्यों की भी घोषणा की गई है। नए शामिल होने वाले सदस्यों में मदन मोहन पांडेय अयोध्या के, महेश भागचंदका दिल्ली के और निर्मला यादव अयोध्या से हैं। ट्रस्ट ने एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ ) नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके मिश्रा अब राम मंदिर की प्रशासनिक और संचालन व्यवस्था को नई दिशा देंगे।

एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा मूल रूप से देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया था। अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान भरी और 3,000 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव हासिल किया। कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर भी रहे हैं। इसके अलावा एकीकृत रक्षा स्टाफ में उप प्रमुख (सिद्धांत, संगठन एवं प्रशिक्षण) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। देश के साथ अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले मिश्रा के पास बड़े संगठन के संचालन और नेतृत्व का व्यापक अनुभव है।

सैन्य अनुशासन से मंदिर प्रबंधन तक
राम मंदिर के सीईओ के रूप में उनकी नियुक्ति को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मंदिर अब निर्माण के चरण से आगे बढ़कर व्यवस्थित संचालन और वैश्विक धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, कर्मचारी प्रबंधन, सुविधाओं का विस्तार और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसी जिम्मेदारियां सीईओ के सामने होंगी।

ऐसे में सैन्य सेवा से आए मिश्रा के अनुशासन, नेतृत्व, बड़े संस्थान के प्रबंधन और समन्वय के अनुभव को ट्रस्ट के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देवरिया के छोटे से गांव भोपतपुरा से भारतीय वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे मिश्रा का अब अयोध्या के राम मंदिर के पहले सीईओ के रूप में नया अध्याय शुरू हुआ है।

राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य और स्थाई सदस्य
के. परासरन : सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य।
महंत नृत्य गोपाल दास : अध्यक्ष, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट।
स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज : कोषाध्यक्ष।
कृष्ण मोहन : अंतरिम महासचिव।
जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज : सदस्य (प्रयागराज)।
जगतगुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ जी महाराज : सदस्य (पेजावर मठ, उडुपी)।
युगपुरुष परमानन्द जी महाराज : सदस्य (हरिद्वार)।
महंत दिनेंद्र दास : सदस्य (निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि)।
निर्मला यादव : नई महिला ट्रस्टी (शिकोहाबाद)।
मदन मोहन पांडे : नए ट्रस्टी (अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता)।
महेश भागचंदका : नए ट्रस्टी (दिल्ली)।

पदेन और सरकारी सदस्य
नृपेंद्र मिश्रा : अध्यक्ष, मंदिर निर्माण समिति।
प्रशांत लोखंडे : केंद्र सरकार के प्रतिनिधि।
संजय प्रसाद : उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि।
शशांक त्रिपाठी : जिलाधिकारी अयोध्या।

ग्रामीणों के लिए सरकार के संकट से पहले सुरक्षा वाला विकास मॉडल चाहिए : खरगे

ग्रामीणों के लिए सरकार के संकट से पहले सुरक्षा वाला विकास मॉडल चाहिए : खरगे

 नयी दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि किसी भी दल की सरकार को ग्रामीणों को केवल सूखा, बाढ़, फसल खराब होने या चुनाव के समय याद नहीं करना चाहिए बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चत करने वाला विकास मॉडल अपनाना चाहिए। खरगे ने बुधवार को यहां डॉ.वाईएस राजशेखर रेड्डी अवार्ड-2026 समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे ग्रामीण समुदायों को संकट आने से पहले सुरक्षा मिल सके और वे भारत के विकास में भागीदार बन सकें।

उन्होंने कहा कि यह पूछा जाना चाहिए कि किसानों को उचित बाजार, ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक आजीविका, महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और आदिवासी समुदायों को प्रौद्योगिकी एवं अवसरों तक पहुंच मिल रही है या नहीं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी और कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन की सोच में समानता थी कि विकास का वास्तविक अर्थ आम लोगों की गरिमा और जीवन में सुधार से है तथा देश की प्रगति का महत्व तभी है जब उसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि डॉ रेड्डी ने गरीबों और वंचितों के लिए स्वास्थ्य, आवास, भूमि, किसानों को मुफ्त बिजली और कृषि ऋण राहत जैसे कदम उठाए थे। खरगे ने कहा कि ग्रामीण भारत के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता उसकी शासन-दृष्टि का महत्वपूर्ण आधार रही है। उन्होंने इंदिरा गांधी के भूमि सुधारों, राजीव गांधी के प्रौद्योगिकी मिशनों, पंचायती राज को सशक्त बनाने तथा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दौरान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और ‘काम के बदले भोजन’ जैसी योजनाओं का उल्लेख किया और कहा कि 1960 के दशक के खाद्य संकट से देश को उबारने में हरित क्रांति की महत्वपूर्ण भूमिका रही और स्वामीनाथन ने ऐसी ‘सदाबहार क्रांति’ की अवधारणा दी, जिसमें उत्पादन बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समुदायों की गरिमा सुनिश्चित हो।

उन्होंने कहा कि एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन वर्ष 1988 से ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के बीच कृषि, आजीविका, महिला सशक्तीकरण और जलवायु अनुकूलन के क्षेत्र में काम कर रहा है। इस अवसर पर फाउंडेशन को डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी एवं डॉ. केवीपी फाउंडेशन की ओर से डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी अवार्ड-2026 प्रदान किया गया। फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने पुरस्कार ग्रहण किया। पुरस्कार के तहत 25 लाख रुपये की नकद राशि दी गई।