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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में प्रदान किए संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में प्रदान किए संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार

 भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में हिस्सा लिया और संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तथा राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025 प्रदान किए। इस अवसर पर भारत की समृद्ध और विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं के सम्मान में चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए गए।

सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है हथकरघा

राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा सदियों से भारत की सभ्यता की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसमें देश की असाधारण विविधता दिखाई देती है और क्षेत्रीय विशिष्टताओं को संरक्षित करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हथकरघा क्षेत्र रोजगार, महिला सशक्तीकरण, कला-संस्कृति और प्रकृति-प्रेम को बढ़ावा देता है। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता की भावना से भी जुड़ा रहा है।

स्वदेशी आंदोलन से जुड़ा है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

राष्ट्रपति ने बताया कि स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत 7 अगस्त 1905 को हुई थी। बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुए इस आंदोलन का उद्देश्य स्वदेशी वस्तुओं और उद्योगों को बढ़ावा देना तथा देश के हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करना था। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में केंद्र सरकार 2015 से हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाती है।

हथकरघा क्षेत्र को मिल रहा आधुनिक तकनीक का सहयोग

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख मानव-केंद्रित उदाहरण बनने की क्षमता रखता है। महत्वपूर्ण हथकरघा क्लस्टरों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण विधियों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठा रही है और इन प्रयासों से भारतीय हथकरघा की अंतरराष्ट्रीय छवि भी मजबूत हो रही है।

युवा उद्यमियों और स्टार्टअप्स से नए अवसर

राष्ट्रपति ने कहा कि तकनीक और नवाचारी डिजाइनों के साथ बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली युवा उद्यमी हथकरघा क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। सरकारी योजनाओं और संस्थानों के जरिए युवाओं को सक्रिय सहयोग एवं मार्गदर्शन दिए जाने की जरूरत है। युवा उद्यमी, डिजाइनर और स्टार्टअप पारंपरिक शिल्प को आधुनिक ट्रेंड्स, ब्रांड्स और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

डिजाइन संसाधन केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों और बुनकर सेवा केंद्रों के तहत संचालित डिजाइन संसाधन केंद्र युवाओं को हथकरघा क्षेत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन प्रयासों से पारंपरिक कौशल और आधुनिक डिजाइन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

डिजिटल समाधान से बढ़ेगी वैश्विक बाजारों तक पहुंच

राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र के सतत विकास के लिए नई प्रौद्योगिकी का उचित उपयोग आवश्यक है। आधुनिक डिजिटल समाधानों से बाजार तक पहुंच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय हथकरघा उत्पादों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच को भी और मजबूत किया जा सकता है।

संत कबीर पुरस्कार हथकरघा क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान

संत कबीर हथकरघा पुरस्कार देश के हथकरघा बुनकरों को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। यह उत्कृष्ट कारीगरी, हथकरघा के प्रति समर्पित जीवन और भारत की बुनाई परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में निरंतर योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार से उत्कृष्ट योगदान का सम्मान

राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उन बुनकरों और अन्य हितधारकों को दिया जाता है जिन्होंने पारंपरिक कौशल के संरक्षण के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए रचनात्मकता, गुणवत्ता, नवीनता और उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि हथकरघा क्षेत्र देश के समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनेगा।

शहरी सहकारी बैंकों को मिलेगा आधुनिक डिजिटल सुरक्षा कवच, अमित शाह आज मुंबई में NUCFDC के नए कार्यालय का करेंगे उद्घाटन

शहरी सहकारी बैंकों को मिलेगा आधुनिक डिजिटल सुरक्षा कवच, अमित शाह आज मुंबई में NUCFDC के नए कार्यालय का करेंगे उद्घाटन

 केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज (8 अगस्त 2026) मुंबई के फोर्ट स्थित शारदा सदन में नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NUCFDC) के नवीन कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वह राज्य शहरी सहकारी बैंक महासंघों और महाराष्ट्र के जिला संघों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद भी करेंगे।

‘सहकार नव-क्रांति’ कार्यक्रम में होंगे शामिल

अमित शाह इसके बाद BSE इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘सहकार नव-क्रांति’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित रहेंगे। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के अनुरूप शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक, सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

NUCFDC और NFSU के बीच होगा समझौता

कार्यक्रम के दौरान NUCFDC और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया जाएगा। इसके जरिए शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा, तकनीकी दक्षता और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

शहरी सहकारी बैंकों के लिए खुलेगा सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर

अमित शाह शहरी सहकारी बैंकों की साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC) का उद्घाटन भी करेंगे। इसके साथ राष्ट्रव्यापी सेवा बंडल के तहत कोर बैंकिंग सेवा (CBS) और उससे जुड़ी अन्य सेवाओं की शुरुआत की जाएगी। इन पहलों का उद्देश्य शहरी सहकारी बैंकों को आधुनिक, सुरक्षित और साझा डिजिटल बैंकिंग ढांचा उपलब्ध कराना है।

‘सहकार CBS’ से जुड़े पहले छह बैंकों का सम्मान

कार्यक्रम में ‘सहकार CBS’ से सफलतापूर्वक जुड़ने वाले पहले छह शहरी सहकारी बैंकों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया जाएगा। साझा डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था से इन बैंकों को तकनीकी संसाधनों और सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।

परिचालन जोखिम प्रबंधन पर पुस्तक का होगा लोकार्पण

इस अवसर पर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व उप महाप्रबंधक जी. पी. मिस्त्री द्वारा लिखित पुस्तक ‘Operational Risk Management – A Practical Guide to Urban Co-operative Banks’ का लोकार्पण भी किया जाएगा। पुस्तक में शहरी सहकारी बैंकों के परिचालन जोखिमों की पहचान, आकलन और प्रभावी प्रबंधन के संबंध में व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

2024 में शुरू हुआ था NUCFDC

NUCFDC की शुरुआत 2 मार्च 2024 को शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य इन बैंकों को साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म, कोर बैंकिंग सेवाएं, साइबर सुरक्षा समाधान, क्षमता निर्माण और परिचालन सहयोग उपलब्ध कराना है।

छोटे और मध्यम बैंकों को मिलेगा फायदा

साझा सेवाओं के जरिए विशेष रूप से छोटे और मध्यम शहरी सहकारी बैंकों के लिए आधुनिक बैंकिंग तकनीक अपनाने की लागत कम करने का लक्ष्य है। इससे उन्हें ग्राहकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और निजी तथा वाणिज्यिक बैंकों के साथ प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।

पीएम मोदी आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को करेंगे संबोधित; 3,000 से ज्यादा छात्रों को मिलेंगी डिग्रियां

पीएम मोदी आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को करेंगे संबोधित; 3,000 से ज्यादा छात्रों को मिलेंगी डिग्रियां

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शनिवार) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस दौरान वह डिग्री हासिल करने वाले 3,000 से ज्यादा छात्रों को संबोधित करेंगे और आईआईटी दिल्ली के सोनीपत कैंपस में एआई-पावर्ड हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग केंद्र ‘परम प्रज्ञा’ का उद्घाटन करेंगे।

3,000 से ज्यादा छात्रों को मिलेंगी डिग्रियां

दीक्षांत समारोह सुबह 11 बजे शुरू होगा। समारोह में 3,000 से ज्यादा छात्रों को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी, जिनमें 587 पीएचडी स्कॉलर्स भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री मेधावी छात्रों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आईआईटी दिल्ली के प्रतिष्ठित एकेडमिक सम्मान भी प्रदान करेंगे।

मेधावी छात्रों को दिए जाएंगे प्रतिष्ठित पुरस्कार

समारोह में प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल, डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल, शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल और परफेक्ट टेन गोल्ड मेडल समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रधानमंत्री इन पुरस्कारों से सम्मानित होने वाले मेधावी छात्रों को बधाई देंगे।

‘परम प्रज्ञा’ से एआई और एडवांस्ड कंप्यूटिंग को मिलेगा बढ़ावा

प्रधानमंत्री आईआईटी दिल्ली के सोनीपत कैंपस में स्थापित एआई-पावर्ड हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग केंद्र ‘परम प्रज्ञा’ का उद्घाटन करेंगे। यह केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च के क्षेत्रों में संस्थान की क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेगा।

अत्याधुनिक रिसर्च पर भारत के संकल्प को मिलेगा बल

‘परम प्रज्ञा’ के उद्घाटन के जरिए अत्याधुनिक रिसर्च और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को आगे बढ़ाने के संकल्प पर जोर दिया जाएगा। यह केंद्र आईआईटी दिल्ली के सोनीपत कैंपस में एआई आधारित हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएगा।

18 एनआईटी के साथ आईआईटी दिल्ली का सहयोग

शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर रंगन बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री मेधावी छात्रों को संस्थान के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान करेंगे। उन्होंने बताया कि आईआईटी दिल्ली ने देशभर के 18 नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ एमओयू साइन कर एक अहम राष्ट्रीय एकेडमिक और रिसर्च सहयोग नेटवर्क शुरू किया है।

एआई और साइबरसिक्योरिटी पर सिस्को के साथ साझेदारी

इससे पहले 4 अगस्त को आईआईटी दिल्ली और सिस्को ने एआई और साइबरसिक्योरिटी पर ‘सिस्को टेक्नोलॉजी हब’ शुरू करने की घोषणा की थी। यह पहल देश में रिसर्च को आगे बढ़ाने, स्किल्स विकसित करने और एआई व साइबरसिक्योरिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

डिजिटल वर्कफोर्स तैयार करने पर जोर

इस साझेदारी के तहत सिस्को की टेक्नोलॉजी विशेषज्ञता और आईआईटी दिल्ली की एकेडमिक लीडरशिप को एक साथ लाया गया है। इसका उद्देश्य इनोवेशन को बढ़ावा देना, ज्ञान के आदान-प्रदान को सक्षम बनाना और एक अत्यधिक कुशल डिजिटल वर्कफोर्स तैयार करना है।

इंडो-पैसिफिक में प्रमुख केंद्र बनाने का लक्ष्य

‘सिस्को टेक्नोलॉजी हब’ का लक्ष्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एआई और साइबरसिक्योरिटी रिसर्च, इनोवेशन और टैलेंट डेवलपमेंट के लिए प्रमुख केंद्र के तौर पर विकसित होना है। भारत की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्राथमिकताओं के अनुरूप यह तीन साल का सहयोग सरकारी स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर डिजिटल फ्रेमवर्क और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने पर भी काम करेगा। साथ ही, डिजिटल इकोसिस्टम को अधिक मजबूत बनाने के लिए वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के समाधान विकसित किए जाएंगे।

‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान देशभर में 9 से 17 अगस्त तक चलाया जाएगा

‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान देशभर में 9 से 17 अगस्त तक चलाया जाएगा

 केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली में राष्ट्रव्यापी ‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान का शुभारंभ किया, जो 9 से 17 अगस्त 2026 तक पूरे देश में चलाया जाएगा।

यह अभियान, जो भारत के सबसे बड़े जनभागीदारी आंदोलनों में से एक बन चुका है, नागरिकों से राष्ट्रीय ध्वज को गर्व से फहराने और देशभक्ति एवं राष्ट्रीय एकता की भावना का जश्न मनाने वाली विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का आह्वान करता है।

कल गुरुवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के तहत 2022 में शुरू हुआ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान एक वार्षिक राष्ट्रीय परंपरा बन गया है, जिसमें करोड़ों नागरिक हर स्वतंत्रता दिवस पर स्वेच्छा से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अब केवल ध्वजारोहण अभियान से कहीं अधिक व्यापक हो गया है और सामुदायिक भागीदारी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, विरासत संबंधी गतिविधियों और डिजिटल सहभागिता से प्रेरित एक राष्ट्रव्यापी उत्सव में तब्दील हो गया है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि हर घर तिरंगा आज एक सच्चा जन आंदोलन बन गया है, जिसे पूरे देश में अपार उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तिरंगा सिर्फ एक राष्ट्रीय ध्वज से कहीं अधिक है; यह भारत की एकता, गौरव और सामूहिक राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि तिरंगा उन अनगिनत वीर पुरुषों और महिलाओं के साहस और बलिदान का प्रतीक है जिन्होंने देश की रक्षा की और इसकी सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी। शेखावत ने इस बात पर जोर दिया कि तिरंगा समाज के क्षेत्र या वर्ग की परवाह किए बिना हर भारतीय को प्रेरित करता है और कहा कि यह अभियान नागरिकों को 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने आगे कहा कि इस वर्ष का हर घर तिरंगा अभियान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के साथ मनाया जा रहा है, जिससे उत्सव और भी अधिक सार्थक हो जाता है और अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी को प्रेरित करता है। 

भारत ने किया अग्नि-4 का सफल परीक्षण, सामरिक मिसाइल क्षमता को मिली नई मजबूती

भारत ने किया अग्नि-4 का सफल परीक्षण, सामरिक मिसाइल क्षमता को मिली नई मजबूती

 भारत ने अपनी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का गुरुवार को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण सामरिक बल कमान (एसएफसी) की निगरानी में किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल से जुड़े सभी परिचालन और तकनीकी मानकों की सफलतापूर्वक पुष्टि हुई।

निर्धारित उड़ान मार्ग पर सफलतापूर्वक चली मिसाइल

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अग्नि-4 का परीक्षण पूरी तरह सफल रहा। मिसाइल ने निर्धारित उड़ान मार्ग का पालन करते हुए सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया। परीक्षण से अग्नि-4 की परिचालन विश्वसनीयता और भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को एक बार फिर मजबूती मिली है।

स्वदेशी विकसित मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल

अग्नि-4 भारत की स्वदेशी रूप से विकसित मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। यह देश की विश्वसनीय सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया यह परीक्षण भारत के सामरिक मिसाइल कार्यक्रम की निरंतर प्रगति को दर्शाता है।

नियमित परीक्षणों से युद्धक तैयारी मजबूत

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मिसाइल प्रणालियों के नियमित उपयोगकर्ता परीक्षण उनकी परिचालन विश्वसनीयता और युद्धक तैयारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस तरह के परीक्षणों से संबंधित प्रणालियों के प्रदर्शन और परिचालन मानकों का आकलन भी किया जाता है।

मई में अग्नि-1 का भी हुआ था सफल परीक्षण

इससे पहले भारत ने अपनी सामरिक क्षमता को मजबूत करते हुए कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-1 का सफल परीक्षण किया था। 22 मई को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से किए गए इस परीक्षण के दौरान मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया था। यह परीक्षण भी सामरिक बल कमान की निगरानी में हुआ था।

अग्नि-1 मिसाइल श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अग्नि-1 भारत की स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कम दूरी तक सटीक मार करने में सक्षम है और देश की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने निर्धारित लक्ष्य और उड़ान मानकों को सफलतापूर्वक हासिल किया था।

लंबी दूरी की कुश मिसाइल का भी परीक्षण

भारत ने जुलाई में लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली ‘कुश’ का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया था। इस प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है। इसका परीक्षण ओडिशा तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया था।

वायु रक्षा क्षमता को मिली नई मजबूती

कुश मिसाइल प्रणाली लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए विकसित की गई है। इसके सफल परीक्षण के साथ भारत की लंबी दूरी की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

प्रह्लाद जोशी की दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और ईरान के मंत्रियों से मुलाकात, शिक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर

प्रह्लाद जोशी की दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और ईरान के मंत्रियों से मुलाकात, शिक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार को दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और ईरान के शिक्षा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ मंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। बातचीत में शिक्षा, कौशल विकास, शोध, नवाचार, डिजिटल लर्निंग और अकादमिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

दक्षिण अफ्रीका के मंत्रियों से शिक्षा साझेदारी पर चर्चा

प्रह्लाद जोशी ने दक्षिण अफ्रीका की बेसिक एजुकेशन मंत्री सिविवे ग्वारुबे और उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण की उप मंत्री डॉ. नोमुसा ड्यूबे-नक्यूब के साथ द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने बताया कि बातचीत में प्राथमिक एवं उच्च शिक्षा, कौशल विकास, शोध, नवाचार और डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

निपुण भारत और स्वयं जैसी पहलों का साझा किया अनुभव

बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान बढ़ाने के अवसरों पर विचार किया गया। भारत की निपुण भारत, परख, स्वयं और समर्थ जैसी सफल पहलों के अनुभव भी साझा किए गए।

शिक्षा समझौतों को जल्द पूरा करने पर जोर

दोनों पक्षों ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रस्तावित समझौतों पर चल रही बातचीत को आगे बढ़ाने और उन्हें जल्द पूरा करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच शिक्षा सहयोग को गहरा करना और आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ पहुंचाना है।

इंडोनेशिया के मंत्री से उच्च शिक्षा और शोध पर मंथन

ब्रिक्स शिक्षा वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के दौरान प्रह्लाद जोशी ने इंडोनेशिया के उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ब्रायन युलियार्तो से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार और शैक्षणिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में भारत-इंडोनेशिया सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

आईआईटी मद्रास और इंडोनेशिया के बीच एमओयू का स्वागत

जोशी ने आईआईटी मद्रास ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन और इंडोनेशिया के उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे शोध, नवाचार और प्रतिभा विकास में सहयोग मजबूत होगा तथा दोनों देशों के छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

ईरान के मंत्री से सभ्यतागत संबंधों पर चर्चा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने ईरान के कार्यवाहक विज्ञान, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रो. मसूद शम्स-बख्श से भी मुलाकात की। भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई इस मुलाकात में दोनों देशों के सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को आधुनिक शिक्षा, शोध, प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी में बदलने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अवसर बढ़ाने पर जोर

जोशी ने कहा कि दोनों देशों के संस्थानों के बीच संबंधों को और मजबूत करने, शैक्षणिक एवं शोध सहयोग बढ़ाने और छात्रों तथा शोधकर्ताओं के लिए अधिक अवसर पैदा करने की जरूरत है। उन्होंने डिजिटल शिक्षा के माध्यम से भारत-ईरान के बीच ज्ञान आधारित साझेदारी को और गहरा करने पर भी जोर दिया।

युवाओं को सशक्त बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और ईरान के साथ शिक्षा क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खोल सकता है। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं को सशक्त बनाने और नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

उदार हृदय वाले सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते रहते हैं : पीएम मोदी

उदार हृदय वाले सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते रहते हैं : पीएम मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुभाषित साझा किया है। उन्होंने संस्कृत के श्लोक के माध्यम से बिना स्वार्थ के परोपकार करने की बात कही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, “किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्। स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “चंद्रमा किसी प्रत्युपकार की इच्छा से अपनी किरणों द्वारा कमुदुनी को प्रकाशित नहीं करता, अपितु यह उसका स्वाभाविक गुण है। उसी प्रकार महान और उदार हृदय वाले सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते रहते हैं, क्योंकि परोपकार उनके स्वभाव में होता है।”

इसके पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा था, “विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्। शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “जिसमें सभी प्रकार की श्रेष्ठ वनस्पतियां और औषधियां पैदा होती हैं, वह पृथ्वी माता विस्तृत और स्थिर हो। विद्या, शौर्य, सत्य, स्नेह आदि सद्गुणों से पालित-पोषित, कल्याणकारी और सुख-साधनों को देने वाली मातृभूमि की हम सदैव सेवा करें।”

वहीं, बुधवार को प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा था, “आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करता है। इसी से प्रेरित होकर आज हमारी युवा शक्ति देश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रही है।”

इसके साथ ही श्लोक भी लिखा था, “आत्मोदयः परज्यानिर्द्वयं नीतिरितीयती। तदूरीकृत्य कृतिभिर्वाचस्पत्यं प्रतायते।” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “स्वयं का उत्था करना और निरंतर आगे बढ़ना ही जीवन की सच्ची नीति है। इसी ध्येय को आधार बनाकर गुणी और विद्वान लोग अपने ज्ञान, कौशल और प्रभाव का विस्तार करते हैं, ताकि वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें।”

इससे पहले, मंगलवार को प्रधानमंत्री की ओर से एक्स पर लिखा गया था, “निरंतर प्रयास और साधना से हमारी प्रतिभा और निखरती है। आज हमारे युवा इन्हीं गुणों को आत्मसात कर दुनियाभर में देश का नाम रोशन कर रहे हैं।”

उन्होंने एक संस्कृत श्लोक, “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते। तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति॥” साझा किया था। इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला कुछ भी नहीं है। कर्मयोग या साधना के द्वारा जिसका अंतःकरण भली-भांति शुद्ध हो गया है, वह साधक समय आने पर उस परम ज्ञान को अपने आप ही अपने भीतर आत्मा में अनुभव कर लेता है।

असम: बाढ़ से 15 जिलों के 1.68 लाख लोग प्रभावित, 133 राहत शिविर संचालित

असम: बाढ़ से 15 जिलों के 1.68 लाख लोग प्रभावित, 133 राहत शिविर संचालित

 असम में बाढ़ की स्थिति गुरुवार को भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के 15 जिले अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। हालांकि अधिकारियों के मुताबिक सिर्फ एक नदी ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार नुमालीगढ़ में धनसिरी दक्षिण नदी खतरे के निशान से ऊपर है। वहीं कोई भी नदी सर्वाधिक बाढ़ स्तर से ऊपर नहीं बह रही है। नवीनतम बाढ़ बुलेटिन के अनुसार 39 राजस्व सर्किलों के 481 गांवों में 1,68,701 लोग प्रभावित हैं। लगभग 14,382.26 हेक्टेयर फसल क्षेत्र जलमग्न है जिससे कई जिलों में लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में गोलाघाट, शिवसागर, जोरहाट, चराईदेव, लखीमपुर, नगांव, दरंग और विश्वनाथ शामिल हैं। गोलाघाट में सबसे अधिक 54,085 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद शिवसागर में 49,515, जोरहाट में 27,842 और चराईदेव में 21,486 लोग प्रभावित हैं। शिवसागर, जोरहाट, लखीमपुर और चराईदेव में फसलों को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है।

राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में 133 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित किए हैं। राहत शिविरों में अभी 10,111 लोग शरण लिए हुए हैं जबकि 35,596 लोगों को वितरण केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा रही है। राहत सामग्री में 616 क्विंटल से अधिक चावल, लगभग 110 क्विंटल दाल, खाद्य तेल, पशु आहार और अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं जिनका वितरण किया गया है।बाढ़ में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। गोलाघाट और उदलगुरी जिले में एक-एक व्यक्ति की जान गई है। फिलहाल किसी के लापता होने की सूचना नहीं है।

आपदा से 41,475 पशु भी प्रभावित हुए हैं। साथ ही 365 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं जिनमें 40 पूरी तरह और 325 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं। बचाव कार्यों के लिए 93 टीमें और 151 नावें तैनात की गई हैं। नावों से अब तक चार लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। प्रशासन बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत और पुनर्निर्माण के काम में लगा हुआ है।

पीएम मोदी 8 अगस्त को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को करेंगे संबोधित

पीएम मोदी 8 अगस्त को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को करेंगे संबोधित

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 8 अगस्त को सुबह 11 बजे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। पीएम मोदी इस दौरान 3000 से अधिक ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को संबोधित भी करेंगे, जिनमें 587 पीएचडी स्कॉलर्स भी शामिल हैं। समारोह के दौरान इन छात्रों को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी।

मेधावी छात्रों को दिए जाएंगे संस्थान के सर्वोच्च सम्मान

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी बेहतरीन शैक्षणिक प्रदर्शन को देखते हुए मेधावी छात्रों को IIT दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान करेंगे। इनमें प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल, डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल, शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल और परफेक्ट टेन गोल्ड मेडल शामिल हैं।

सोनीपत कैंपस में होगा ‘परम प्रज्ञा’ सुपरकंप्यूटर का उद्घाटन

अत्याधुनिक रिसर्च और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के भारत के संकल्प को और मजबूत करते हुए प्रधानमंत्री IIT दिल्ली के सोनीपत कैंपस में स्थापित AI-संचालित हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग सुविधा ‘परम प्रज्ञा’ का उद्घाटन भी करेंगे। उम्मीद है कि यह आधुनिक सुविधा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और अंतर-विषयक अनुसंधान के क्षेत्रों में संस्थान की क्षमताओं को काफी बढ़ाएगी।

शिक्षा सिर्फ सरकार की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी: RSS प्रमुख मोहन भागवत

शिक्षा सिर्फ सरकार की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी: RSS प्रमुख मोहन भागवत

 मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा केवल सरकार या शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की भी भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर शिक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हें अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभानी चाहिए। यदि कहीं कमी है तो उसमें सुधार होना चाहिए, लेकिन समाज को भी यह सोचना होगा कि वह बच्चों की शिक्षा के लिए क्या योगदान दे सकता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारे बच्चों के भविष्य से जुड़ा विषय है, इसलिए समाज को इसके आर्थिक और सामाजिक पक्षों के प्रति सक्रिय रहना चाहिए। यदि शिक्षा के क्षेत्र में सामूहिक प्रयास जन-आंदोलन का रूप लें, तो सुधार की गति और तेज हो सकती है।

FSSAI ने Old Monk, McDowell, बैगपाइपर, रॉयल चैलेंज की बिक्री पर आखिर क्यों लगाई रोक ?

FSSAI ने Old Monk, McDowell, बैगपाइपर, रॉयल चैलेंज की बिक्री पर आखिर क्यों लगाई रोक ?

 नई दिल्ली: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने शराब बनाने वाली कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इनमें ओल्ड मोंक, मैकडॉवेल्स, बैगपाइपर, एंटीक्विटी ब्लू और रॉयल चैलेंज जैसे लोकप्रिय ब्रांड बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने बिना अनुमति वाले फ्लेवरिंग तरीकों का इस्तेमाल किया। साथ ही शराब की एज से जुड़े भ्रामक दावे करके फूड सेफ्टी और लेबलिंग नियमों का उल्लंघन हुआ।

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक फूड रेगुलेटर ने कहा कि जांच और लैब टेस्टिंग में पाया गया कि कुछ कंपनियां रम और व्हिस्की में बाहरी फ्लेवर मिला रहे थे। नियमों के मुताबिक उन्हें कच्चे माल, फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और मैच्योरेशन के जरिए प्राकृतिक रूप से स्वाद और खुशबू विकसित होने देनी चाहिए थी।

रम या फ्लेवर्ड स्पिरिट

FSSAI का कहना है कि ऐसे उत्पादों को स्टैंडर्ड रम या व्हिस्की के तौर पर बेचा जा रहा है, जबकि ये मुख्य रूप से न्यूट्रल अल्कोहल या एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल से बने होते हैं। इनमें ड्रिंक्स का असली स्वाद नहीं होता। अथॉरिटी ने कहा कि इन उत्पादों को रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट या व्हिस्की-फ्लेवर्ड स्पिरिट के तौर पर लेबल किया जाना चाहिए ताकि उनकी असलियत पता चल सके।

अथॉरिटी ने एक बयान में कहा, “कुछ कंपनियां बाहरी फ्लेवर मिलाते हैं जो उत्पाद की असली खुशबू और स्वाद की नकल करता है। कंपनियां फिर इसे स्टैंडर्ड उत्पाद के तौर पर बेचती हैं, जिससे ग्राहक गुमराह होते हैं। कंपनियां प्राकृतिक रूप से स्वाद विकसित करने के लिए मैच्योरेशन या शीरा, माल्ट या अंगूर जैसे बेस मटीरियल का यूज नहीं करती हैं। ये कंपनियां मुख्य रूप से स्पिरिट/न्यूट्रल अल्कोहल का इस्तेमाल करती हैं। इनमें कोई खास स्वाद नहीं होता और इसलिए फ्लेवर मिलाते हैं।”

ग्राहकों को कैसे किया गुमराह?
FSSAI ने कहा कि ऐसे उत्पाद न केवल घटिया क्वालिटी के होते हैं बल्कि स्टैंडर्ड कैटेगरी के नामों का इस्तेमाल करके उन्हें गलत तरीके से बेचा जाता है। उन्हें रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट या व्हिस्की-फ्लेवर्ड स्पिरिट आदि के तौर पर पहचाना जा सकता है। साथ ही पैक में उत्पाद की असलियत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती है।

रेगुलेटर ने ओल्ड मोंक XXX रम के एक वेरिएंट पर 7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड के दावे को भी गुमराह करने वाला पाया। जांच में पाया गया कि इस रम का मुख्य घटक न्यूट्रल स्पिरिट है जबकि मैच्योर रम स्पिरिट इसका बहुत छोटा हिस्सा है। जांच के नतीजों के अनुसार यह 5% से भी कम पाया गया। यह मौजूदा नियमों का भी साफ उल्लंघन है। नियमों के मुताबिक स्पिरिट की उम्र का दावा मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र की स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए।

किन-किन पर लगी रोक?
लैब रिपोर्ट के आधार पर अथॉरिटी ने मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर के ओल्ड मोंक वेरिएंट्स, यूनाइटेड स्पिरिट्स के मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की, इनब्रू बेवरेजेज के बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम और एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रुअरीज के सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर XXX रम की बिक्री पर रोक लगा दी है।

छत्तीसगढ़ के बाद अब गुजरात में एनालॉग पनीर, चीज़ और बटर पर पूरी तरह प्रतिबंध, नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के बाद अब गुजरात में एनालॉग पनीर, चीज़ और बटर पर पूरी तरह प्रतिबंध, नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

 अहमदाबाद। खाद्य सुरक्षा को लेकर गुजरात सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्यभर में एनालॉग पनीर, चीज़ और बटर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में कई स्थानों पर मानकों के अनुरूप न पाए गए उत्पाद मिलने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। इसके साथ ही होटल, रेस्तरां, डेयरी पार्लर, सुपरमार्केट और अन्य खाद्य कारोबारियों को केवल मानक के अनुरूप बने वास्तविक डेयरी उत्पादों का उपयोग और बिक्री करने के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बाद गुजरात का बड़ा फैसला

इससे पहले छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार भी एनालॉग डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी हैं। अब गुजरात ऐसा कदम उठाने वाला तीसरा राज्य बन गया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है।

जांच में सामने आईं अनियमितताएं

फूड सेफ्टी विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों से पनीर, चीज़ और बटर के नमूने एकत्र कर प्रयोगशालाओं में जांच कराई। जांच के दौरान कई उत्पाद ऐसे पाए गए जिन्हें डेयरी उत्पाद के रूप में बेचा जा रहा था, लेकिन वे निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने पूरे राज्य में तत्काल प्रतिबंध लागू कर दिया।

क्या होते हैं एनालॉग डेयरी उत्पाद?

एनालॉग पनीर, चीज़ और बटर देखने में पारंपरिक डेयरी उत्पादों जैसे लगते हैं, लेकिन इन्हें दूध की बजाय अन्य वसा और वैकल्पिक सामग्री से तैयार किया जाता है। ऐसे उत्पादों को यदि असली डेयरी उत्पाद बताकर बेचा जाए, तो इससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे न केवल ग्राहकों के हित प्रभावित होते हैं, बल्कि डेयरी उद्योग और पशुपालकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

कानूनी प्रावधानों के तहत जारी हुआ आदेश

राज्य सरकार ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए यह आदेश जारी किया है। इसके तहत मानकों के अनुरूप न बनने वाले एनालॉग पनीर, चीज़ और बटर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर पूर्ण रोक रहेगी।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

सरकार ने सभी खाद्य उत्पाद निर्माताओं, व्यापारियों, होटल और रेस्तरां संचालकों, कैटरिंग व्यवसायियों तथा अन्य खाद्य कारोबारियों को निर्देश दिया है कि वे केवल प्रमाणित और मानक के अनुरूप डेयरी उत्पादों का ही उपयोग करें। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

PM मोदी ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की मुलाकात

PM मोदी ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की मुलाकात

 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस उच्च-स्तरीय बैठक में देश के शीर्ष नेतृत्व ने राष्ट्रपति आवास पर एक औपचारिक बैठक के लिए मुलाकात की। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक X अकाउंट ने इस मुलाकात की जानकारी दी और साथ ही बैठक की तस्वीरें भी साझा कीं।पोस्ट में लिखा था, “प्रधानमंत्री श्री @narendramodi ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।”इससे पहले आज, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की चौथी विशेष बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक संकट का आकलन करना और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तैयारियों की समीक्षा करना था।

संघर्ष से कई क्षेत्रों में संभावित चुनौतियों को देखते हुए, प्रधानमंत्री ने सरकार के सभी विभागों के मिलकर काम करने वाले “whole-of-government” (सरकार के सभी अंगों के सम्मिलित प्रयास) दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को नागरिकों की सुरक्षा के उपायों में तेजी लाने और राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एक एकीकृत और समन्वित निगरानी तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया।कैबिनेट सचिव ने CCS को मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने LNG/LPG और उर्वरकों सहित पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि LPG की खरीद के स्रोतों में पहले ही विविधता लाई जा चुकी है और प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का कुल स्टॉक और आपूर्ति की स्थिति पर्याप्त बनी हुई है।कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSE) की रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर पा रही हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन लगातार जारी है। पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन का विस्तार करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप PNG कनेक्शन में काफी वृद्धि हुई है।

सरकार नेशनल गैस ग्रिड के विस्तार, LNG आयात और री-गैसीफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने, सिटी गैस वितरण नेटवर्क के विस्तार और ‘पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर ऑर्डर, 2026’ के तहत समयबद्ध तरीके से पाइपलाइन और ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ की मंजूरी के माध्यम से LPG के औद्योगिक विकल्प को भी बढ़ावा दे रही है।बैठक के दौरान, आगामी रबी सीजन के लिए उर्वरकों की जरूरतों का आकलन किया गया और उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी उपाय किए जाएं।

संघर्ष वाले क्षेत्रों में घरेलू और विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने समुद्री यात्रियों और उनके परिवारों को समय पर जानकारी, आपातकालीन सहायता और काउंसलिंग देने के लिए एक सिस्टम बनाने का निर्देश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों को इस संघर्ष के असर से बचाने के लिए हर संभव कोशिश की जानी चाहिए।प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए सोलर एनर्जी और दूसरे नॉन-फॉसिल-फ्यूल स्रोतों सहित रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों पर ज़ोर दिया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के सभी विभागों को मिलकर काम करने का तरीका अपनाना जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए सही उपायों को तेज़ी से लागू करने और सभी घटनाक्रमों पर लगातार नज़र रखने के लिए एक एकीकृत और समन्वित सिस्टम बनाया जाना चाहिए।

तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में बदलेगा मिड-डे मील मेन्यू: बच्चों को मिल सकती है हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी

तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में बदलेगा मिड-डे मील मेन्यू: बच्चों को मिल सकती है हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी

 

  रायपुर। आगामी गणेशोत्सव को लेकर छत्तीसगढ़ बजरंग दल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए भगवान गणेश की प्रतिमाओं को उनके मूल स्वरूप में ही स्थापित करने की मांग की है। संगठन ने फिल्मों और काल्पनिक पात्रों जैसे बाहुबली, कटप्पा, क्यूट गणेश और AI आधारित आदि के रूप में गणेश प्रतिमाएं बनाने पर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताया है।

 

बजरंग दल के प्रांत संयोजक विजेंद्र वर्मा ने मीडिया से चर्चा में कहा कि गणेश प्रतिमाओं का निर्माण और स्थापना धार्मिक परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के विवाद या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने जैसी स्थिति उत्पन्न न हो।

 

उन्होंने बताया कि गणेशोत्सव के दौरान कई पंडालों में डीजे पर अश्लील और आपत्तिजनक गीत बजाए जाते हैं, जो धार्मिक माहौल के अनुकूल नहीं हैं। इसे देखते हुए इस वर्ष पंडालों में बजाए जाने वाले उपयुक्त भक्ति गीतों की सूची भी जारी की जाएगी।

 

बजरंग दल ने पंडालों की आड़ में जुआ खेलने की शिकायतों पर भी प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि ऐसे मामलों में जरूरत पड़ने पर बिजली कनेक्शन काटने और संबंधित पंडालों को बंद कराने जैसी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

 

विजेंद्र वर्मा ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव की शुरुआत हिंदू समाज को संगठित करने, सामाजिक एकता को मजबूत करने और जनजागरण के उद्देश्य से की थी। इसलिए गणेशोत्सव को प्रतिस्पर्धा का मंच बनाने के बजाय आस्था, सामाजिक समरसता और जनसेवा का माध्यम बनाए रखना चाहिए। इन्हीं मांगों को लेकर बजरंग दल के प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की।

 

 

बता दें कि पिछले वर्ष रायपुर के लाखेनगर में गणेश प्रतिमा को लेकर काफी विवाद हुआ था। प्रतिमा को लेकर विरोध-प्रदर्शन हुए थे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा था। इसी का हवाला देते हुए बजरंग दल ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में समय रहते कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद या तनाव पैदा न हो।

 

कब मनाया जायेगा गणेशोत्सव

14 सितंबर 2026 से देशभर में 10 दिवसीय गणेशोत्सव (गणेश चतुर्थी) की शुरुआत होगी। भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापना के साथ भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। यह पर्व 23 सितंबर 2026 (अनंत चतुर्दशी) तक मनाया जाएगा, जब गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाएगा। देशभर में इस दौरान धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।

भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत, माहे श्रेणी के सातवें पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मछलीपटनम’ का शुभारंभ

भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत, माहे श्रेणी के सातवें पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मछलीपटनम’ का शुभारंभ

 भारतीय नौसेना के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) में निर्मित माहे श्रेणी के सातवें उथले जल में चलने वाले पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) ‘मछलीपटनम’ का मंगलवार को शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव वाइस एडमिरल अतुल आनंद की उपस्थिति में श्रीमती गुलरुख आनंद ने जहाज का औपचारिक शुभारंभ किया। समारोह में भारतीय नौसेना, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया।

ऐतिहासिक बंदरगाह शहर के नाम पर रखा गया जहाज

‘मछलीपटनम’ का नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मछलीपटनम के नाम पर रखा गया है। यह शहर भारत के पूर्वी तट पर अपनी समृद्ध समुद्री विरासत और ऐतिहासिक व्यापारिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह युद्धपोत उसी गौरवशाली विरासत का प्रतीक होने के साथ भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

आधुनिक युद्ध क्षमताओं से लैस है युद्धपोत

मछलीपटनम को समुद्र के भीतर निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियान (एएसडब्ल्यू), निम्न तीव्रता वाले समुद्री अभियान (एलआईएमओ) और बारूदी सुरंगों का पता लगाने तथा उन्हें निष्क्रिय करने जैसे महत्वपूर्ण अभियानों के लिए तैयार किया गया है। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा तथा समुद्री क्षेत्र में निगरानी और जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी मजबूती

मछलीपटनम का शुभारंभ एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी परियोजना के सफल क्रियान्वयन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह परियोजना रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने का भी प्रतीक है।

80% से अधिक स्वदेशी सामग्री से हुआ निर्माण

इस परियोजना में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारतीय जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। इस श्रेणी के युद्धपोत भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाने के साथ हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा को और सशक्त बनाएंगे।

समुद्री सुरक्षा में निभाएगा महत्वपूर्ण योगदान

भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने के बाद ‘मछलीपटनम’ समुद्री सुरक्षा, तटीय रक्षा और पनडुब्बी रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके शामिल होने से नौसेना की परिचालन तैयारियों को और मजबूती मिलेगी तथा देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और प्रभावी होगी।

प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि का सम्मान हमारे अस्तित्व के मूल में है : पीएम मोदी

प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि का सम्मान हमारे अस्तित्व के मूल में है : पीएम मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए देशवासियों को भारतीय संस्कृति के गूढ़ दर्शन, पर्यावरण संरक्षण और सनातन परंपराओं से जुड़ने का एक खास संदेश दिया है। संस्कृत श्लोकों (सुभाषित) और उनके मर्मस्पर्शी हिंदी अर्थों के माध्यम से प्रधानमंत्री ने एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने प्रकृति के प्रति सेवाभाव और कृतज्ञता व्यक्त करने की बात कही। उन्होंने लिखा, “प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि का सम्मान हमारे अस्तित्व के मूल में है। आइए, हम इनके प्रति पूरी कृतज्ञता और सेवाभाव के साथ एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बनें।”

इससे पहले बुधवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पीएम मोदी ने गुरु-शिष्य परंपरा को नमन करते हुए देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुसंस्कारित भी करते हैं।

इससे पूर्व बीते दिन मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी की ओर से सुभाषित शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा गया था, “प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती है।” उन्होंने संस्कृत श्लोक, “लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः ॥ दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः ॥” भी साझा किया था।

जिसका हिंदी अर्थ है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही सुख, सुरक्षा और मंगल का आधार है। अतः दिशाओं के रक्षक देवता, इंद्र आदि प्रमुख देवगण, छह ऋतुएं, सभी मास, वर्ष, रात्रियां, दिन और शुभ मुहूर्त सदैव कल्याणकारी हों। वेद, स्मृतियां और धर्म भी सभी प्रकार से सर्वत्र सबकी रक्षा करें।

सावन माह के शुभारंभ के साथ महाकाल मंदिर में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब, ‘जय महाकाल’ जयघोष से गूंजा मंदिर

सावन माह के शुभारंभ के साथ महाकाल मंदिर में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब, ‘जय महाकाल’ जयघोष से गूंजा मंदिर

 भगवान शिव को समर्पित सावन मास के शुभारंभ के साथ आज गुरुवार को उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सावन के पहले दिन तड़के आयोजित बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। देर रात से ही भक्त दर्शन के लिए कतारों में खड़े नजर आए। मंदिर परिसर ‘जय महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

बाबा महाकाल का विशेष पूजन-अर्चन किया गया

परंपरा के अनुसार बाबा महाकाल का विशेष पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद पंचामृत अभिषेक, दिव्य शृंगार और भोग की प्रक्रिया संपन्न हुई। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। आरती का अलौकिक दृश्य देखकर भक्तों ने इसे जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि सावन के पहले दिन भस्म आरती में शामिल होना उनके लिए महाकाल का विशेष आशीर्वाद है।

बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन होना उनके जीवन का सबसे अनमोल उपहार

भस्म आरती में पहली बार शामिल हुए एक श्रद्धालु ने बताया कि वह स्वयं को बेहद सौभाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने कहा कि जन्मदिन के अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन होना उनके जीवन का सबसे अनमोल उपहार है। उन्होंने इस दिव्य अनुभव को शब्दों से परे बताते हुए कहा कि महाकाल की कृपा से उन्हें आत्मिक शांति की अनुभूति हुई।

पंजाबी गायक दीप मनी भी महाकाल मंदिर पहुंचे

इस दौरान पंजाबी गायक दीप मनी भी महाकाल मंदिर पहुंचे और विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया। उन्होंने न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए बाबा महाकाल के दर्शन को बेहद शांतिपूर्ण और दिव्य अनुभव बताया। सावन के पहले दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने एक बार फिर महाकाल मंदिर की धार्मिक महत्ता और भक्तों की अटूट आस्था को उजागर किया। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं, जिससे दर्शन और पूजा-अर्चना का क्रम सुचारु रूप से चलता रहा।

मंदिर के दरवाज़े सुबह 3 बजे खुले

एक भक्त ने कहा कि यह सदियों पुरानी परंपरा है। मंदिर के दरवाज़े सुबह 3 बजे खुले और बाबा महाकाल की विशेष पूजा और पंचामृत अभिषेक (दही, दूध, शहद, चीनी और घी से) किया गया, जिसके बाद केसर से स्नान कराया गया। भस्म आरती से पहले बाबा को भांग से विशेष रूप से सजाया गया। एक भक्त ने न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए कहा कि आज से सावन की शुरुआत हो रही है, जो भगवान शिव का प्रिय महीना है। महाकाल के भक्तों के लिए ऐसा लग रहा है जैसे कोई बड़ा त्योहार शुरू हो गया हो। बाबा महाकाल ने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए और ऐसा महसूस हुआ मानो वे स्वयं हमारे बीच मौजूद हों।

यूएस- ईरान तनाव से तेल बाजार में हलचल: कच्चा तेल 88 डॉलर के करीब पहुंचा, जानें आगे क्या होगा

यूएस- ईरान तनाव से तेल बाजार में हलचल: कच्चा तेल 88 डॉलर के करीब पहुंचा, जानें आगे क्या होगा

 वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी, हूती हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता के चलते कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 4 फीसदी उछलकर 88 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। इससे पहले लगातार तीन दिनों तक गिरावट के बाद तेल कीमतों में यह बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बाजार की नजर अब पश्चिम एशिया की स्थिति और तेल आपूर्ति पर बनी हुई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बातचीत के बाद कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया गया है। हालांकि, क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, जिससे निवेशकों की चिंता बनी हुई है। तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, क्योंकि दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक कीमतों को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंध, सुरक्षा हालात और तेल सप्लाई की स्थिति तय करेगी कि कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ेंगी या राहत मिलेगी। बढ़ते तनाव से महंगाई और ईंधन कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

ब्रेकिंग: राज्यसभा में पास हुआ ‘वंदे मातरम्’ बिल, जानिए क्या बदल जाएगा नया कानून लागू होने के बाद

ब्रेकिंग: राज्यसभा में पास हुआ ‘वंदे मातरम्’ बिल, जानिए क्या बदल जाएगा नया कानून लागू होने के बाद

 नई दिल्ली। राज्यसभा ने बुधवार को ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी। इस विधेयक के पारित होने के बाद राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में महत्वपूर्ण बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को और अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करना है। इस संशोधन के तहत ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े प्रावधानों को भी कानून में शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार, नए नियम राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मामलों में स्पष्टता लाएंगे और उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की प्रक्रिया को अधिक मजबूत बनाएंगे।

सदन में विधेयक पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने अपनी-अपनी राय रखी। सरकार ने इसे राष्ट्रीय गौरव और सम्मान की भावना से जुड़ा कदम बताया, जबकि कुछ विपक्षी नेताओं ने इसके कुछ प्रावधानों पर सवाल भी उठाए। अब यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह कानून के रूप में लागू होगा। इस विधेयक के लागू होने के बाद राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मामलों में संशोधित कानूनी प्रावधान प्रभावी हो जाएंगे।

एंटी पेपर लीक बिल’: लोकसभा से पास हुआ सख्त कानून, पेपर लीक पर 10 साल की जेल और रु.10 करोड़ तक जुर्माना

एंटी पेपर लीक बिल’: लोकसभा से पास हुआ सख्त कानून, पेपर लीक पर 10 साल की जेल और रु.10 करोड़ तक जुर्माना

 नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 यानी एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा से पारित हो गया। विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक ध्वनि मत से मंजूर किया गया। इसके साथ ही पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक जैसे गंभीर अपराध में अधिकतम 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए लाया गया है। विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा भी देखने को मिला।

विपक्ष ने सरकार पर कई सवाल उठाए, जबकि सरकार ने इस कानून को छात्रों के हित में बड़ा कदम बताया। अब लोकसभा से पारित होने के बाद विधेयक की आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कानून लागू होने के बाद पेपर लीक मामलों में पहले की तुलना में कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई संभव होगी।