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बुद्धि, सदाचार, संयम, ज्ञान, वीरता, वाणी, सामर्थ्य और उपकार मनुष्य के जीवन को प्रकाशमान करते हैं: पीएम मोदी

बुद्धि, सदाचार, संयम, ज्ञान, वीरता, वाणी, सामर्थ्य और उपकार मनुष्य के जीवन को प्रकाशमान करते हैं: पीएम मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर सुभाषित शेयर किया है। पीएम मोदी ने एक संस्कृत श्लोक, “अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च। पराक्रमश्च बहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च।।” साझा किया।

इसका अर्थ है, “आठ गुण मनुष्य के जीवन को प्रकाशमान करते हैं। बुद्धि उसके मार्ग को स्पष्ट करती है, सदाचार उसके आचरण को पवित्र बनाता है और संयम उसे अनुशासित रखता है। ज्ञान उसे विवेक देता है, वीरता कठिन परिस्थितियों में अडिग रखती है और वाणी की कुशलता उसे समाज में सम्मान दिलाती है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना और उपकारों के प्रति कृतज्ञ रहना उसके व्यक्तित्व को पूर्णता प्रदान करते हैं।”

वहीं, बीते दिन सोमवार को प्रधानमंत्री की ओर से संस्कृत श्लोक, “भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः॥” साझा किया गया था, जिसका हिंदी अर्थ है, “हम सत्य, शुभ और ज्ञानवर्धक वचन सुनें, कल्याणकारी विचारों को अपनाएं। स्वस्थ शरीर, उत्तम आचरण और श्रेष्ठ गुणों के साथ जीवन को लोकहित में समर्पित करें तथा सत्य, प्रामाणिक और जनहितकारी सूचनाओं का प्रसार कर राष्ट्र और समाज को जागरूक, सशक्त तथा समरस बनाएं।”

इससे पहले प्रधानमंत्री की ओर से 7 अगस्त को सुभाषित शेयर किया गया था। तब पीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा था, “किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्। स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥”

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “चंद्रमा किसी प्रत्युपकार की इच्छा से अपनी किरणों द्वारा कमुदुनी को प्रकाशित नहीं करता, अपितु यह उसका स्वाभाविक गुण है। उसी प्रकार महान और उदार हृदय वाले सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते रहते हैं, क्योंकि परोपकार उनके स्वभाव में होता है।

हिमाचल, उत्तरखंड, जम्मू और लद्दाख में भारी बारिश का अलर्ट जारी, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा

हिमाचल, उत्तरखंड, जम्मू और लद्दाख में भारी बारिश का अलर्ट जारी, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा

 हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में सोमवार रात से तेज बारिश का दौर जारी है। खासकर जिला कांगड़ा में देर रात हुई भारी बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। मौसम विभाग ने मंगलवार को कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिले में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

वहीं, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, शिमला और सोलन जिलों के लिए भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को कांगड़ा और सिरमौर में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। मंडी जिले में भी भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, शिमला और सोलन में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने का अनुमान है।

भारी बारिश के चलते पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन तथा मलबा खिसकने का खतरा बढ़ गया है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जबकि नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका है। कुछ स्थानों पर अचानक बाढ़ की स्थिति भी पैदा हो सकती है। बारिश के कारण पहाड़ी सड़कों पर फिसलन बढ़ने और कई जगह दृश्यता कम होने से यातायात प्रभावित होने की संभावना है।

मौसम विभाग ने लोगों को भूस्खलन, मलबा खिसकने और अचानक बाढ़ की आशंका वाले संवेदनशील क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी है। लोगों से नदी, नालों और अन्य जल निकायों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने तथा प्रशासन और यातायात विभाग की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।

आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक 12 और 13 अगस्त को भी प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद 14, 15 और 16 अगस्त को भी हिमाचल के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने, मौसम की ताजा जानकारी लेते रहने और नदी-नालों के आसपास जाने से परहेज करने की सलाह दी गई है।

वहीं उत्तराखंड में भी पहाड़ से मैदान तक बारिश का दौर जारी है। देहरादून और हरिद्वार में भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है जबकि देहरादून में नदी से सटे दो भवन धराशायी हो गए।

पर्वतीय क्षेत्रों में जगह-जगह भूस्खलन से यातायात प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग ने मंगलवार भी प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, सोमवार को भारी बारिश के कारण तमक नाले में अचानक उफान आने से मॉड्यूलर पुल बह गया।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 13 अगस्त के दौरान भारी बारिश का अलर्ट जारी है। मौसम विभाग ने लोगों को मौसमी जानकारी होने के बाद ही घर से बाहर निकलने और वापस आने की योजना बनाने की सलाह दी है।

पीएम मोदी संग एनडीए सांसदों की मंगल मिलन बैठक, तिरंगा लहराकर दिया एकजुटता का संदेश

पीएम मोदी संग एनडीए सांसदों की मंगल मिलन बैठक, तिरंगा लहराकर दिया एकजुटता का संदेश

 मंगलवार को संसद पुस्तकालय में आयोजित ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एनडीए सांसदों की बैठक वंदे मातरम के नारों के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए के अन्य नेता तिरंगा लहराते नजर आए। बैठक में सांसदों ने एकजुटता का संदेश देते हुए तिरंगे के साथ तस्वीरें खिंचवाईं।

विपक्ष के गतिरोध के खिलाफ संसद तक मार्च 

‘मंगल मिलन’ के बाद एनडीए सांसद संसद भवन की ओर मार्च निकालेंगे। यह मार्च मानसून सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा पैदा किए गए लगातार गतिरोध के विरोध में है। विपक्ष जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर सदन का कामकाज बाधित कर रहा है। एनडीए सांसद ऐसे प्लेकार्ड लेकर चलने वाले हैं, जिनमें लिखा होगा कि गृह मंत्री अमित शाह छात्र विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा के लिए तैयार हैं, जबकि विपक्ष संसद में बहस से कतरा रहा है। इसके अलावा सांसदों के हाथों में झारखंड सरकार को लेकर भी पोस्टर होंगे, जिनमें झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अत्याचार का मुद्दा उठाया जाएगा।

रिजिजू का राहुल गांधी पर निशाना

इस बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अब उन्हें संसद से ‘भागना’ नहीं चाहिए। रिजिजू का आरोप है कि राहुल गांधी कई दिनों से अमित शाह से जवाब की मांग कर रहे थे। अब जब गृह मंत्री हर बिंदु पर विस्तार से जवाब देने को तैयार हैं, तो कांग्रेस नेता को सदन में उपस्थित रहकर चर्चा में भाग लेना चाहिए।

रिजिजू ने सोशल मीडिया पर लिखा, “राहुल गांधी कई दिनों से गृह मंत्री अमित शाह जी से जवाब की मांग कर रहे थे। अब जब गृह मंत्री हर बिंदु पर विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार हैं, तो उन्हें भागना नहीं चाहिए।” उन्होंने लोकसभा में भी कई बार राहुल गांधी से आग्रह किया था कि वे सीधे अमित शाह का सामना करें और अपने सवाल सदन में रखें।

सरकार का प्रस्ताव: पूरी चर्चा और शाह का जवाब

छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर संसद में बार-बार बाधा आ रही है। विपक्ष जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार ने अब इस मुद्दे पर पूरी चर्चा का प्रस्ताव रखा है। चर्चा के बाद गृह मंत्री अमित शाह सरकार का पक्ष रखने वाले हैं। केंद्र इस रुकावट को दूर कर सदन का कामकाज सुचारू रूप से चलाने की कोशिश कर रहा है।

पिछली बैठक में विकास और उपलब्धियों पर चर्चा

पिछले सप्ताह हुई ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद भाजपा सांसदों ने पत्रकारों से बातचीत की थी। उन्होंने सरकार की उपलब्धियों, रोजगार, खेल, आर्थिक विकास और संसद की कार्यवाही को लेकर अपनी बात रखी थी। साथ ही विपक्ष पर संसद की कार्यवाही को बाधित करने का आरोप भी लगाया था।

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा था कि भारत तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। रोजगार के क्षेत्र में देश की स्थिति लगातार मजबूत हुई है। रोजगार का अनुपात अन्य देशों की तुलना में बेहतर हुआ है और बेरोजगारी में भी कमी आई है। 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जो सरकार की नीतियों का परिणाम है।

खेलों में भारत की चमक और आर्थिक तरक्की

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने बताया था कि बैठक में देश में हो रहे विभिन्न विकास कार्यों और सरकार की उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि विपक्ष संसद में लगातार हंगामा कर रहा है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दे रहा है। बैठक में सभी सांसदों ने यह तय किया था कि संसद की कार्यवाही के दौरान उनकी उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित रहेगी, ताकि सरकार आवश्यक विधेयकों को पारित करा सके।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल ने कहा था कि बैठक में खेलों के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा था कि यूपीए सरकार के दस वर्षों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले पिछले दस वर्षों की तुलना करें तो सकारात्मक बदलाव साफ दिखता है। खेलों में भारत की वैश्विक पहचान लगातार मजबूत हुई है।

विपक्ष पर संसद बाधित करने का आरोप

भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा था कि देश आर्थिक और सामाजिक विकास के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। बैठक में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि, रोजगार और युवाओं के लिए बढ़ते अवसरों पर चर्चा हुई। उन्होंने भी विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि आखिर विपक्ष संसद को सुचारू रूप से क्यों नहीं चलने दे रहा है।

झंडों को जमीन पर नहीं फेंकना चाहिए : गृह मंत्रालय

झंडों को जमीन पर नहीं फेंकना चाहिए : गृह मंत्रालय

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ध्वज संहिता का पालन करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने कहा कि हालांकि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेल आयोजनों के दौरान आम लोग कागज से बने झंडे लहरा सकते हैं, लेकिन कार्यक्रमों के बाद उन्हें फेंका या जमीन पर नहीं डाला जाना चाहिए।

सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजा गया संदेश

कल सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे गए एक संदेश में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने से जुड़े कानूनों, तौर-तरीकों और नियमों के बारे में लोगों के साथ-साथ सरकारी संगठनों और एजेंसियों में भी अक्सर जानकारी की कमी देखी जाती है।

भारत का राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक

इसमें कहा गया, “मुझे यह कहने का निर्देश दिया गया है कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक है, इसलिए इसे सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए।” मंत्रालय ने राज्यों से कहा कि वे इस संबंध में बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम चलाएं और इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों के जरिए इनका व्यापक प्रचार-प्रसार करें।

अमित शाह ने की अपील

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकों से तिरंगा यात्राओं, तिरंगा रैलियों और ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन के माध्यम से इस अभियान में भाग लेने और इसे मनाने तथा हर घर तिरंगा की आधिकारिक वेबसाइट पर तिरंगा फहराते हुए अपनी सेल्फी साझा करने की अपील की। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संदेश में उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शुरू किया गया ‘हर घर तिरंगा’ अभियान हमारे राष्ट्र की सामूहिक ताकत का प्रतिबिंब है, जो हमें एक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के हमारे प्रयास में एकजुट करता है।” उन्होंने कहा, “इस वर्ष ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का अवसर इस अभियान के साथ मिलकर हर देशभक्त के लिए इस पल को और भी भावुक और खास बना देता है।”

ध्वज संहिता में कहा गया है

गृह मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और बुना हुआ या मशीन से बना होना चाहिए, और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री सूती, पॉलिएस्टर, ऊन, रेशम या खादी की होनी चाहिए। आदेश के साथ संलग्न ध्वज संहिता में कहा गया, “कोई भी आम नागरिक, निजी संस्था या शिक्षण संस्थान राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए, किसी भी दिन या अवसर पर-चाहे वह औपचारिक हो या कोई अन्य-राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है या प्रदर्शित कर सकता है। 19 जुलाई, 2022 के आदेश के जरिए ‘भारतीय झंडा संहिता, 2002’ में संशोधन किया गया था… यदि तिरंगा खुले स्थान पर या किसी आम नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है तो उसे दिन-रात फहराया जा सकता है।”

जब कभी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए तो उसकी स्थिति सम्मानजनक होनी चाहिए

इसमें स्पष्ट किया गया कि जब कभी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए तो उसकी स्थिति सम्मानजनक होनी चाहिए, और फटा हुआ एवं मैला-कुचैला झंडा प्रदर्शित न किया जाए। संदेश में कहा गया कि झंडे को किसी अन्य झंडे अथवा झंडों के साथ एक ही ध्वजदंड से नहीं फहराया जाए।

इसमें कहा गया, “संहिता के भाग-3 की धारा-9 में उल्लखित गणमान्य व्यक्तियों जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि, के सिवाय झंडे को किसी वाहन पर नहीं लगाया जाएगा। किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचाई पर या उससे ऊपर या उसके बराबर में नहीं लगाना चाहिए।

राजगढ़ में बड़ा हादसा: पुल से फिसलकर नाले में गिरी कार, सात की मौत

राजगढ़ में बड़ा हादसा: पुल से फिसलकर नाले में गिरी कार, सात की मौत

 *मृतकों में दो बच्चे शामिल, तीन लोगों ने तैरकर बचाई जान; एक लापता की तलाश जारी*

भोपाल। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सोमवार को तेज बारिश के बीच बड़ा हादसा हो गया। पड़ाना के पास झिरी नाले के तेज बहाव में एक ईको कार बहकर नाले में गिर गई। कार में देवास जिले के सतवास क्षेत्र के 11 लोग सवार थे। हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता बताया जा रहा है। तीन लोग तैरकर सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे। लापता व्यक्ति की तलाश में राहत एवं बचाव दल लगातार अभियान चला रहा है।

जानकारी के अनुसार, कार में सवार सभी लोग देवास जिले के सतवास क्षेत्र के रहने वाले थे और सतवास से कड़लावद गांव जा रहे थे। इसी दौरान पड़ाना के पास झिरी नाले पर बने पुल को पार करते समय हादसा हुआ। बताया गया कि झिरी नाले पर करीब 30 फुट लंबे पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। लगातार बारिश के कारण नाले में पानी का बहाव काफी तेज था। इसके बावजूद चालक ने वाहन को तेज बहाव के बीच से निकालने का प्रयास किया। इसी दौरान पानी का दबाव बढऩे से कार अनियंत्रित होकर नाले में जा गिरी और बहाव में बह गई।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और बचाव दल ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया। तीन लोग किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए, लेकिन अन्य लोग पानी के तेज बहाव में बह गए। बताया गया है कि ईको कार में कुल तीन पुरुष, चार महिलाएं और चार बच्चे सवार थे। हादसे में सात लोगों की मौत हुई है। मृतकों में तीन पुरुष, दो महिलाएं और दो बच्चे शामिल बताए गए हैं। इनमें एक बच्चा करीब तीन वर्ष का बताया जा रहा है। एक व्यक्ति अभी भी लापता है।

हादसे में बच्चों की मौत से इलाके में शोक का माहौल है। दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचा तथा लापता लोगों की तलाश शुरू की गई। प्रशासन की टीम ने बचाव अभियान के दौरान क्रेन की मदद से कार को नाले से बाहर निकाला। पानी का बहाव तेज होने के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

वाहन का पंजीकरण क्रमांक एमपी 09 बीजे 4684 बताया गया है और वाहन इंदौर का बताया जा रहा है। फिलहाल मृतकों की आधिकारिक पहचान की प्रक्रिया जारी है। राजगढ़ के अनुविभागीय दंडाधिकारी रोहित बम्होरे ने बताया कि पुल पर पानी होने के कारण ईको कार नाले में गिर गई। हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। तीन लोग तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए थे।

उन्होंने बताया कि लापता व्यक्ति की तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान जारी है। कार को क्रेन की सहायता से नाले से बाहर निकाल लिया गया है। प्रशासन की टीम घटनास्थल पर मौजूद है और पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। झिरी नाले में तेज बहाव के बावजूद वाहन को पुल से निकालने की कोशिश इस दर्दनाक हादसे की वजह बनी। घटना ने बारिश के मौसम में उफनते नालों और निर्माणाधीन पुलों से गुजरने के दौरान बरती जाने वाली सावधानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है और लापता व्यक्ति की तलाश जारी है।

प्रधानमंत्री ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेडल जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मिले और उनकी सराहना की

प्रधानमंत्री ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेडल जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मिले और उनकी सराहना की

 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेडल जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों की तारीफ़ की और कहा कि उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगी। 7, लोक कल्याण मार्ग पर खिलाड़ियों के दल के साथ बातचीत के दौरान पैरा-एथलीटों की विशेष रूप से सराहना की गई। ग्लासगो गेम्स के पदक विजेताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सफलता भारत की पदक तालिका में पदक जोड़ने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर दिया कि उनके प्रदर्शन से खेल संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है और देश भर के युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिल रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों से कहा, “मैं इस उपलब्धि को केवल आपकी उपलब्धि नहीं मानता। आपकी जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बनती है।” उन्होंने आगे कहा, “आपने न केवल पदकों की संख्या बढ़ाई है, बल्कि आपने एक पूरी पीढ़ी को तैयार किया है।”

मोदी ने बच्चों को प्रेरित करने में खेल की सफलता की ताकत पर भी जोर दिया और कहा, “शायद हम स्कूलों में जाकर बच्चों से बात करके जो काम कर सकते थे, उससे कहीं अधिक आपके पदक उन्हें प्रेरित करते हैं।” खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “दोस्तों, आपने बहुत अच्छा काम किया है। आपने देश का मान बढ़ाया है। मैं आपको पूरे दिल से बधाई देता हूं।” उन्होंने पदक विजेताओं को उत्कृष्टता की अपनी खोज जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा: “मेरा विश्वास करें, आप भविष्य में भी जीत हासिल करते रहेंगे और हम एक बार फिर यहां मिलेंगे।”

गोल्ड मेडल जीतने वाली वेटलिफ्टर मीराबाई चानू के साथ बातचीत के दौरान मोदी विशेष रूप से भावुक हो गए। चानू अपने संघर्षों और भारतीय ध्वज फहराए जाने के समय पोडियम पर खड़े होने के पल को याद करते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “बहुत सारे आंसू बह रहे थे। मुझे ऐसा लगता है जैसे उन आंसुओं की हर बूंद सोने के पदक के गिरने जैसी है।” प्रधानमंत्री ने भारत के खेल क्षेत्र में आगे बढ़ने में योगदान के लिए खिलाड़ियों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में उनके प्रयासों ने देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की परंपरा स्थापित करने में मदद की है।

प्रक्रिया मोदी ने कहा, “मैं कई खिलाड़ियों से मिला हूं, लेकिन मैं आपसे इसलिए मिला हूं क्योंकि पिछले 10-12 वर्षों में आपने जो प्रयास किए हैं, भारत के लिए लगातार जीत हासिल करने के आपके प्रयासों और खेल में देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जो परंपरा आपने बनाई है, उसके कारण मैं आपसे मिला हूं।” ग्लासगो में भारत मेडल टेबल में चौथे स्थान पर रहा और उसने कुल 39 मेडल जीते—13 गोल्ड, 17 ​​सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज़—हालांकि उसने एक बहुत छोटे प्रोग्राम में हिस्सा लिया था जिसमें कई ऐसे खेल शामिल नहीं थे जिनसे आमतौर पर मेडल मिलते हैं, जैसे कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और शूटिंग।

बॉक्सिंग में भारत की टीम ने गेम्स में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और सात गोल्ड और तीन सिल्वर मेडल जीते। गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ी थे: प्रीति पवार (54kg कैटेगरी में), जैस्मिन लैंबोरिया (57kg कैटेगरी में), साक्षी चौधरी (51kg कैटेगरी में), प्रिया घांघस (60kg कैटेगरी में), अरुंधति चौधरी (70kg कैटेगरी में), सचिन सिवाच (60kg कैटेगरी में) और अंकुश पांघल (80kg कैटेगरी में)। जादुमनी सिंह (55kg कैटेगरी में), लवलीना बोरगोहेन (75kg कैटेगरी में) और नरेंद्र बेरवाल (90kg से ज़्यादा वाली कैटेगरी में) ने सिल्वर मेडल जीते; भारत के सात बॉक्सिंग गोल्ड मेडल कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला बॉक्सर्स का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन भी था।

मोदी ने भारतीय बॉक्सर्स के प्रदर्शन और उससे देश को मिले आत्मविश्वास के लिए उनकी तारीफ़ भी की। उन्होंने कहा, “सच कहूँ तो, आपका वीडियो कोई आम वीडियो नहीं है और लोग इसे लंबे समय तक याद रखेंगे; असल में, अब दुनिया भर के बॉक्सर्स हमसे डरने लगे हैं।” भारत ने जूडो में कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और बारह इवेंट्स में चार मेडल जीते—दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़। ये दो गोल्ड मेडल ऐतिहासिक थे क्योंकि अस्मिता डे और हर्ष सिंह, जो खेलो इंडिया प्रोग्राम के एथलीट हैं, जूडो में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले क्रमशः पहली भारतीय महिला और पहले भारतीय पुरुष बने।

एथलेटिक्स में दस मेडल जीते गए, जिनमें पाँच सिल्वर और पाँच ब्रॉन्ज़ शामिल थे, और गुलवीर सिंह ने एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में दो व्यक्तिगत मेडल जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बनकर इतिहास रचा; उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल और 5,000 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों की सफलता के व्यापक महत्व पर भी ज़ोर दिया, खासकर देश के भविष्य के खेल प्रतिभाओं को निखारने में ‘खेलो इंडिया’ जैसी पहलों के योगदान का ज़िक्र किया।

मोदी ने कहा, “जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर और बच्चों से बात करके करते, वह आपके पदकों ने उनमें कहीं ज़्यादा असरदार ढंग से प्रेरित किया है।” भारतीय टीम का कुल प्रदर्शन इसलिए भी खास तौर पर उल्लेखनीय है क्योंकि ग्लासगो में कार्यक्रम सीमित था। चूँकि कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और शूटिंग इन खेलों का हिस्सा नहीं थे, इसलिए भारत के पास अपने सामान्य पदकों की संख्या बढ़ाने के मौके कम थे। फिर भी, बॉक्सिंग, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन की बदौलत देश ने 39 पदक जीते और चौथा स्थान हासिल किया।

‘मिथिला मखाना’ की बढ़ी विदेशों में मांग, बिहार के किसानों के लिए खुल रहे नए अवसर : पीयूष गोयल

‘मिथिला मखाना’ की बढ़ी विदेशों में मांग, बिहार के किसानों के लिए खुल रहे नए अवसर : पीयूष गोयल

बिहार के प्रसिद्ध जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग प्राप्त ‘मिथिला मखाना’ ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को बताया कि पहली बार बिहार से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना का समुद्री मार्ग के जरिए ऑस्ट्रेलिया को निर्यात किया गया है। उन्होंने कहा कि मिथिला मखाना की बढ़ती वैश्विक मांग बिहार के किसानों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।

जीआई टैग वाले मखाने का ऑस्ट्रेलिया निर्यात

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत के जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना ने वैश्विक बाजार में नया मुकाम हासिल किया है। उन्होंने बताया कि कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) के सहयोग से जीआई टैग वाले 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना को बिहार से ऑस्ट्रेलिया निर्यात किया गया।

दरभंगा के किसानों को मिला सीधा लाभ

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह मखाना सीधे दरभंगा के किसानों से खरीदा गया था। इस पहल से जुड़े किसानों को बाजार भाव की तुलना में लगभग 18% अधिक लाभ मिला है। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उन्हें अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिला है।

वैश्विक मांग से बढ़ेंगे किसानों के अवसर

गोयल ने कहा कि मिथिला मखाना की बढ़ती वैश्विक मांग बिहार के किसानों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। उन्होंने इसे राज्य के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

पिछले महीने कनाडा भी भेजा गया था मखाना

गौरतलब है कि पिछले महीने भी बिहार के मखाना उत्पादकों को बड़ी सफलता मिली थी। पहली बार बिहार के मखाने का समुद्री मार्ग से कनाडा निर्यात किया गया था। उस समय दरभंगा से सात मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा भेजा गया था।

किसानों को मिली थी 50% से अधिक बेहतर कीमत

कनाडा निर्यात को भी एपीडा ने सुगम बनाया था। इसे बिहार के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था। उस समय केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि इस पहल से जुड़े किसानों को पहले की तुलना में 50% से अधिक बेहतर कीमत मिल रही है।

प्रोसेसिंग और पैकेजिंग उद्योग को भी मिलेगा बढ़ावा

ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों में मिथिला मखाना की बढ़ती मांग बिहार के किसानों के लिए बड़े अवसर लेकर आ सकती है। इससे न केवल निर्यात बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि मखाना प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन से जुड़े उद्योगों में निवेश को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

हेल्दी स्नैक के तौर पर बढ़ रही लोकप्रियता

मिथिला क्षेत्र में उत्पादित मखाना अपनी गुणवत्ता और पौष्टिकता के लिए देश-विदेश में पहचान रखता है। इसे हेल्दी स्नैक के रूप में तेजी से लोकप्रियता मिल रही है। ऐसे में समुद्री मार्ग से सफल निर्यात भारत की वैल्यू-एडेड कृषि उत्पाद निर्यात रणनीति को मजबूती दे सकता है और वैश्विक रेडी-टू-ईट एवं स्वास्थ्यवर्धक खाद्य बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद कर सकता है।

बिहार के कृषि निर्यात को मिलेगी नई गति

इस उपलब्धि से बिहार के मखाना किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ राज्य के कृषि निर्यात को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। वैश्विक बाजार में मिथिला मखाना की बढ़ती स्वीकार्यता से किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य मिलने के साथ राज्य में कृषि आधारित प्रसंस्करण उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

बदलती दुनिया में नई चुनौतियों को अवसर में बदलें युवा: प्रधानमंत्री मोदी

बदलती दुनिया में नई चुनौतियों को अवसर में बदलें युवा: प्रधानमंत्री मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए और विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज देश के प्रतिभाशाली युवाओं के जीवन की नई यात्रा शुरू हो रही है। उन्होंने कहा कि यह उत्साह, उमंग, सपनों और भावनाओं से भरा जीवन का यादगार पल है। इस पल का हिस्सा बनना और आईआईटी दिल्ली परिसर में विद्यार्थियों के साथ अनुभव साझा करना उनके लिए भी खास है।

उपलब्धियों पर विद्यार्थियों को दी बधाई

प्रधानमंत्री मोदी ने दीक्षांत समारोह में विभिन्न उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों को मेडल मिलने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज आईआईटी दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी कुछ नई पहल भी शुरू हुई हैं, जिसके लिए उन्होंने संस्थान और विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मेडल पाने वालों में एक-दो बेटियां भी होतीं तो और अच्छा लगता।

ओरिएंटेशन से दीक्षांत तक का सफर

पीएम मोदी ने विद्यार्थियों से आईआईटी दिल्ली में अपने पहले दिन को याद करने को कहा। उन्होंने कहा कि उन्हें लग रहा होगा कि अभी कल ही ओरिएंटेशन हुआ था और अब दीक्षांत समारोह का समय आ गया। ओरिएंटेशन से दीक्षांत तक की यात्रा विद्यार्थियों को संतुष्टि के साथ-साथ जीवन के नए अध्याय की शुरुआत का उत्साह भी दे रही होगी।

हर विद्यार्थी के सपने और रास्ते अलग

प्रधानमंत्री ने कहा कि दीक्षांत समारोह में मौजूद हर विद्यार्थी के मन में आने वाले कल की अपनी तस्वीर होगी। कोई अपनी पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, तो कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी कर रहा होगा। कुछ विद्यार्थी नए स्टार्टअप का सपना देख रहे होंगे, जबकि कुछ ने अगली प्रतियोगी परीक्षा को अपना लक्ष्य बनाया होगा। उन्होंने कहा कि हर किसी का रास्ता और सपना अलग है, लेकिन नए अध्याय की शुरुआत को लेकर उत्साह सभी के मन में समान है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस पल को पूरी तरह जीने की अपील की और कहा कि भविष्य में जब जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, तो यही यादें उन्हें अतीत की ओर ले जाएंगी।

बदलती दुनिया में सीखने वाला ही आगे बढ़ेगा

पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और कोई नहीं बता सकता कि आज से 20-30 साल बाद परिस्थितियां कैसी होंगी। हालांकि, बदलती दुनिया और तकनीक नए अवसर भी लेकर आएगी। उन्होंने कहा, “जो सीखेगा, वही जीतेगा।” जो लोग नई परिस्थितियों और चुनौतियों के लिए तैयार रहते हैं, वे चुनौतियों को अवसर में बदल देते हैं। उन्होंने कहा कि आईआईटी दिल्ली में विद्यार्थियों ने यही सीख हासिल की है।

शिक्षकों और संस्थान के प्रति आभार रखें

प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में जब भी पीछे मुड़कर देखने का अवसर मिले, तो वे अपने दोस्तों, शिक्षकों, मेंटर्स और सपोर्ट स्टाफ को याद करें, जो उनके लिए परिवार बन गए। उन्होंने कहा कि प्रोफेसरों ने विद्यार्थियों जैसी प्रतिभाओं को गढ़ने की जिम्मेदारी निभाई है और आईआईटी दिल्ली धीरे-धीरे उनका घर बन गया है। सफलता मिलने पर विद्यार्थियों को इन सभी के योगदान और सहयोग के प्रति आभारी रहना चाहिए।

जिज्ञासा और सवाल पूछने की आदत बनाए रखें

पीएम मोदी ने विद्यार्थियों से जीवन में जिज्ञासा बनाए रखने और सीखने की प्रवृत्ति को लगातार सक्रिय रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो बातें बिना सोचे-समझे स्वीकार कर ली जाती हैं, उन्हें परखना चाहिए और उन पर सवाल उठाने चाहिए। हालांकि, केवल सवाल पूछकर रुकना नहीं चाहिए, बल्कि उनके समाधान खोजने का साहस भी रखना चाहिए।

आत्मनिर्भरता के लिए आगे बढ़ रहा भारत

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और औद्योगिक आत्मनिर्भरता समेत विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भारत ने इस दिशा में कदम बढ़ाया तो कुछ लोगों ने सवाल उठाए कि देश ऐसा नहीं कर सकता, लेकिन अब पहली सेमीकंडक्टर यूनिट में उत्पादन शुरू हो चुका है।

चिप से शिप तक देश में निर्माण का लक्ष्य

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं के सामर्थ्य पर उन्हें पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, “चिप से लेकर शिप तक सब कुछ यहीं पर आप ही के हाथों से बनेगा।” उन्होंने कहा कि इसी मजबूत आधार के साथ युवाओं को विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना है। विकसित भारत की यात्रा में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और युवा जितने मजबूत होंगे, देश उतना ही मजबूत होगा।

युवाओं के लिए नए क्षेत्रों में अवसर

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसे कई सेक्टर खोले हैं, जहां पहले प्रवेश पर रोक थी। आधुनिक सोच के साथ गवर्नेंस में बदलाव लाकर युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा और ऊर्जा को देश के विकास से जोड़ने के लिए लगातार नए रास्ते बनाए जा रहे हैं।

ड्रोन सेक्टर में युवा तलाश रहे नई संभावनाएं

पीएम मोदी ने कहा कि आज देश के ड्रोन सेक्टर में युवा नई-नई संभावनाएं तैयार कर रहे हैं। ड्रोन का इस्तेमाल खेतों में किया जा रहा है, वहीं इनके जरिए दवाइयां पहुंचाने का काम भी हो रहा है। देश की रक्षा और सुरक्षा में भी ड्रोन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज युवा नई तकनीक के क्षेत्र में ऐसे काम कर रहे हैं, जिनके बारे में पहले कल्पना करना भी मुश्किल था।

स्टार्टअप क्रांति को युवाओं ने दी ताकत

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की स्टार्टअप क्रांति को आईआईटी जैसे संस्थानों से निकले युवाओं ने तराशा और ताकत दी है। उन्होंने कहा कि आईआईटी दिल्ली से भी कई संस्थापक निकले हैं। उन्होंने कहा कि अगर एक संस्था से इतनी बड़ी ताकत तैयार हो सकती है, तो पूरे देश में युवाओं के माध्यम से कितनी बड़ी क्षमता विकसित हो रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

आत्मनिर्भर चिकित्सा-तकनीक से वैश्विक भागीदार बन रहा भारत : पीएम मोदी

आत्मनिर्भर चिकित्सा-तकनीक से वैश्विक भागीदार बन रहा भारत : पीएम मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा भारत के बढ़ते आत्मनिर्भर चिकित्सा-तकनीक पारिस्थितिकी तंत्र पर लिखे गए एक लेख को साझा किया। पीएम मोदी ने कहा कि घरेलू विनिर्माण, आयात पर निर्भरता में कमी और पीएलआई तथा मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी योजनाओं के जरिए भारत किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा पर केंद्रित एक विश्वसनीय वैश्विक चिकित्सा-तकनीक भागीदार के रूप में उभर रहा है।

घरेलू विनिर्माण को मिल रहा बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने एक्स पर साझा पोस्ट में कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भारत के बढ़ते आत्मनिर्भर चिकित्सा-तकनीक पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रकाश डाला है। इसमें घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में देश की क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम

लेख में चिकित्सा-तकनीक क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयासों को रेखांकित किया गया है। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने से चिकित्सा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने और देश में मजबूत विनिर्माण आधार तैयार करने में मदद मिल रही है।

PLI और मेडिकल डिवाइस पार्क योजनाओं की अहम भूमिका

पीएम मोदी के अनुसार, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी सरकारी पहल भारत के चिकित्सा-तकनीक क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन योजनाओं के जरिए घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ इस क्षेत्र में निवेश और नवाचार को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा पर फोकस

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का बढ़ता चिकित्सा-तकनीक पारिस्थितिकी तंत्र किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लक्ष्य के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। आत्मनिर्भरता से देश में चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

वैश्विक चिकित्सा-तकनीक भागीदार के रूप में उभर रहा भारत

पीएम मोदी ने कहा कि इन प्रयासों के चलते भारत एक विश्वसनीय वैश्विक चिकित्सा-तकनीक भागीदार के रूप में लगातार उभर रहा है। घरेलू विनिर्माण, कम आयात निर्भरता और नीतिगत समर्थन के जरिए भारत वैश्विक चिकित्सा-तकनीक क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। 

‘जिंदगी की परीक्षा में सबकुछ आउट ऑफ सिलेबस’, IIT दिल्ली के छात्रों से बोले पीएम मोदी

‘जिंदगी की परीक्षा में सबकुछ आउट ऑफ सिलेबस’, IIT दिल्ली के छात्रों से बोले पीएम मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में वही व्यक्ति सफल होगा, जो लगातार सीखता रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले 30-35 वर्षों में युवा जो कुछ करेंगे, वह विकसित भारत की यात्रा को प्रभावित करेगा। इसलिए युवाओं के हर निर्णय का आधार यह भी होना चाहिए कि उससे देश को क्या लाभ होगा और देश की कौन सी जरूरत पूरी होगी।

दीक्षांत का पल जीवन में हमेशा याद रहेगा

प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश के प्रतिभाशाली युवाओं के जीवन की नई यात्रा शुरू हो रही है। यह जीवन का एक यादगार पल है और IIT दिल्ली परिसर में उनके साथ इस अनुभव को साझा करना उनके लिए भी खास है। उन्होंने कहा कि पिछली बार वह दीक्षांत समारोह में कोविड के दौर में वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे, लेकिन इस बार छात्रों के बीच उपस्थित होकर उन्हें अच्छा लग रहा है।

छात्रों की उपलब्धियों पर जताया गर्व

पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह छात्रों के परिवार के लोग उन पर गर्व महसूस कर रहे हैं, उसी तरह उन्हें भी सभी छात्रों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि छात्र केवल डिग्री लेकर नहीं जा रहे, बल्कि देश के लिए बहुत कुछ करने के सपने के साथ यहां से निकल रहे हैं। उन्होंने मेडल हासिल करने वाले छात्रों को भी बधाई दी और कहा कि IIT दिल्ली में AI से जुड़े नए प्रयासों की शुरुआत भी हुई है।

कैंपस की यादों को साथ ले जाने की सलाह

प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि IIT दिल्ली में बिताए दिनों की यादें भविष्य में उन्हें ऊर्जा देंगी। उन्होंने हॉस्टल, इंटर-हॉस्टल प्रतियोगिताओं, दोस्तों के साथ बिताए पलों और कैंपस की पुरानी नोक-झोंक का उल्लेख करते हुए कहा कि विदा होने से पहले इन यादों को एक बार फिर जरूर याद करें।

जिया सराय के पोहे और सतपुरा मेस के पराठों का किया जिक्र

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में छात्रों के कैंपस जीवन से जुड़े अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि भावुक पलों के बीच कुछ छात्रों को जिया सराय का पोहा और सतपुरा मेस के पराठे भी याद आ रहे होंगे। उन्होंने कहा कि कई छात्र विंड टी पर कुछ और समय बिताना चाहते होंगे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि विंड टी पर जाएं तो उन्हें भी याद करें।

दोस्त, शिक्षक और सपोर्ट स्टाफ को नहीं भूलने की अपील

प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि कैंपस के दोस्त, शिक्षक, मेंटर्स और सपोर्ट स्टाफ उनके परिवार का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि सफलता हासिल करने के बाद छात्र इन सभी को याद करेंगे और इनके प्रति आभारी रहेंगे। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि IIT से निकलते समय इन रिश्तों को एक संपत्ति के तौर पर अपने साथ लेकर जाएं और इन्हें कभी टूटने न दें।

तेजी से बदल रही दुनिया, टेक्नोलॉजी बनी सबसे बड़ी ताकत

पीएम मोदी ने कहा कि छात्र ऐसे समय में संस्थान से निकल रहे हैं, जब दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। रणनीतिक समीकरण और वैश्विक शक्ति संतुलन भी तेजी से बदल रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत टेक्नोलॉजी की गति है। उन्होंने कहा कि कोई भी निश्चित रूप से नहीं बता सकता कि अगले 20-30 वर्षों की दुनिया कैसी होगी।

जो सीखेगा, वही जीतेगा

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलाव के दौर में चुनौतियों के साथ नए अवसर भी पैदा होते हैं। दुनिया, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और प्रोफेशन बदलेंगे, लेकिन एक बात याद रखनी चाहिए- जो सीखेगा, वही जीतेगा। उन्होंने कहा कि जो नए चैलेंज के नए समाधान खोजने का साहस रखता है, उसके लिए चुनौतियां अवसर में बदल जाती हैं।

डिग्री कठिन समस्याओं का समाधान करने की क्षमता का प्रमाण

पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि उनकी डिग्री केवल परीक्षा पास करने, अच्छा CGPA हासिल करने या अच्छा प्लेसमेंट पाने का प्रमाण नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि वे कठिन समस्याओं का समाधान करना जानते हैं। उन्होंने कहा कि IIT दिल्ली तक पहुंचना आसान नहीं था और छात्रों ने एक-एक विषय, प्रोजेक्ट, मिड-सेम और एंड-सेम जैसी छोटी-छोटी चुनौतियों को पार करके यह मुकाम हासिल किया है।

बड़ी चुनौती को छोटे हिस्सों में बांटकर समाधान खोजें

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब जीवन में कोई चुनौती बहुत बड़ी लगे तो उससे घबराने के बजाय उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांट देना चाहिए। उन्होंने IIT की लैब और सिमुलेशन के अनुभवों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार समाधान खोजने में घंटे या दिन लगते हैं, लेकिन अंत में समस्या का समाधान निकलता है और कुछ नया भी सामने आता है। उन्होंने कहा कि मुश्किलें अकेली नहीं आतीं, वे अपने साथ अवसर भी लेकर आती हैं।

जिंदगी की परीक्षा में सबकुछ आउट ऑफ सिलेबस

पीएम मोदी ने कहा कि कैंपस में परीक्षा का सिलेबस तय होता है, लेकिन जिंदगी की परीक्षा में सबकुछ ‘आउट ऑफ सिलेबस’ होता है। जीवन में न कोई तय कोर्स होता है और न कोई प्रश्नपत्र। कई बार यह भी कोई नहीं बताता कि असली सवाल क्या है और उसे खुद पहचानना पड़ता है।

सवाल पहचानने और समाधान खोजने की आदत डालें

प्रधानमंत्री ने कहा कि IIT के कई पूर्व छात्रों की सफलता का कारण केवल सही जवाब देना नहीं था, बल्कि उन सवालों को पहचानना था जिन्हें दुनिया ने सवाल मानना ही छोड़ दिया था। उन्होंने युवाओं से अपनी जिज्ञासा और सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखने तथा बिना सोचे-समझे स्वीकार की जाने वाली बातों को परखने और उन पर सवाल उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल सवाल पूछना पर्याप्त नहीं है, समाधान खोजने का साहस भी होना चाहिए।

हर पीढ़ी का अपना राष्ट्रीय दायित्व

पीएम मोदी ने कहा कि हर पीढ़ी के सामने अपने समय की चुनौतियां होती हैं और उसका अपना राष्ट्रीय दायित्व भी होता है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि गुलामी के दौर में उस पीढ़ी के सामने भारत की आजादी का लक्ष्य था। आज देश स्वतंत्र है और वर्तमान पीढ़ी के सामने विकसित भारत के निर्माण की जिम्मेदारी है।

अगले 30-35 साल विकसित भारत के लिए अहम

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं के जीवन के अगले 30-35 वर्षों में वे जो कुछ करेंगे, वह विकसित भारत की यात्रा को प्रभावित करेगा। इसलिए उनके हर निर्णय का आधार यह भी होना चाहिए कि उससे देश को क्या फायदा होगा और देश की कौन सी जरूरत पूरी होगी। उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और औद्योगिक आत्मनिर्भरता समेत कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।

युवाओं के लिए नए सेक्टर खोले गए

पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा में युवाओं की भूमिका बहुत बड़ी है। देश का युवा जितना सशक्त होगा, देश उतना ही सशक्त होगा। इसी सोच के साथ कई ऐसे सेक्टर युवाओं के लिए खोले गए हैं, जिनमें पहले प्रवेश लगभग बंद था। सरकार की आधुनिक नीतियों के कारण युवाओं के लिए नए-नए क्षेत्रों में अवसर पैदा हो रहे हैं।

स्पेस सेक्टर में युवाओं के लिए खुला अवसरों का आकाश

प्रधानमंत्री ने स्पेस सेक्टर में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले इस क्षेत्र में लगभग पूरा काम सरकार करती थी, लेकिन अब यही सेक्टर हजारों युवाओं के लिए नए अवसरों का आकाश बन गया है। युवा अपने लॉन्च व्हीकल बना रहे हैं, रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं और ऐसी उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं, जो दुनिया के गिने-चुने देश ही हासिल कर पाए हैं।

सेमीकंडक्टर से चिप निर्माण तक आत्मनिर्भरता

पीएम मोदी ने कहा कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी भारत ने तेजी से आगे बढ़ना शुरू किया है। उन्होंने कहा कि जब भारत ने इस दिशा में कदम बढ़ाया था, तब कुछ लोगों ने सवाल उठाए थे कि भारत ऐसा नहीं कर पाएगा। लेकिन अब पहली सेमीकंडक्टर यूनिट्स में उत्पादन शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि चिप से लेकर शिप तक सब कुछ भारत में युवाओं के हाथों से बनेगा।

ड्रोन सेक्टर में युवाओं के लिए नए अवसर

प्रधानमंत्री ने ड्रोन सेक्टर का उल्लेख करते हुए कहा कि आज युवा इस क्षेत्र में नई संभावनाएं तैयार कर रहे हैं। ड्रोन का इस्तेमाल खेती, दवाइयां पहुंचाने और देश की रक्षा एवं सुरक्षा में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में युवाओं के लिए और बड़े अवसर पैदा होंगे।

स्टार्टअप क्रांति को युवाओं ने दी ताकत

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की स्टार्टअप क्रांति को IIT जैसे संस्थानों से निकले युवाओं ने ताकत दी है। उन्होंने कहा कि IIT दिल्ली से भी कई फाउंडर्स निकले हैं। एक संस्थान से इतनी बड़ी ताकत सामने आ सकती है तो पूरे देश में तैयार हो रही प्रतिभा की क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने यूनिकॉर्न, डिजिटल पेमेंट और फिनटेक क्रांति का भी उल्लेख किया।

AI से क्वांटम कंप्यूटिंग तक युवाओं का इंतजार

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कई नए क्षेत्रों में अपनी नई यात्रा शुरू कर रहा है और देश को युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और नेतृत्व की जरूरत है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, क्रिटिकल मिनरल्स, डीप सी एक्सप्लोरेशन, बैटरी, पावर स्टोरेज, एनर्जी सिक्योरिटी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया।

रिसर्च में युवाओं के लिए बड़ा अवसर

पीएम मोदी ने कहा कि देश को नई रिसर्च की बहुत जरूरत है और सरकार का रिसर्च पर विशेष फोकस है। प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप के माध्यम से प्रतिभाशाली युवाओं को शोध का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आइडियाज को आगे बढ़ाने के लिए रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन स्कीम शुरू की गई है और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना भी हुई है।

रिसर्च के लिए एक लाख करोड़ रुपए तक की फंडिंग

प्रधानमंत्री ने कहा कि रिसर्च सेक्टर में एक लाख करोड़ रुपए तक की फंडिंग की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने छात्रों से कहा कि देश को उनसे रिसर्च के क्षेत्र में बड़ी अपेक्षाएं हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि देश को उन पर भरोसा भी है।

दुनिया की रिसर्च जर्नल्स तक आसान पहुंच

पीएम मोदी ने कहा कि अकादमिक संसाधनों तक पहुंच को भी आसान बनाया गया है। ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ के माध्यम से दुनिया की प्रतिष्ठित रिसर्च जर्नल्स देश के छोटे से छोटे शहर तक बिना किसी अतिरिक्त लागत के पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि रिसर्च के क्षेत्र में अभी लंबी दूरी तय करनी है और यह काम युवाओं की प्रतिबद्धता से ही पूरा हो सकता है।

दूसरे से तुलना को बताया बड़ा डिस्ट्रैक्शन

प्रधानमंत्री ने छात्रों को करियर में एक-दूसरे से तुलना करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसे कितना पैकेज मिला, कौन किस कंपनी में गया, किस शहर या देश में गया और किसने स्टार्टअप शुरू किया, सोशल मीडिया के दौर में ऐसी तुलना कभी खत्म नहीं होती। उन्होंने कहा कि जिंदगी कोई लीडरबोर्ड नहीं है और व्यक्ति की असली दौड़ किसी दूसरे से नहीं, बल्कि खुद से है।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का रखें ध्यान

पीएम मोदी ने छात्रों से हर दिन खुद को कल से बेहतर बनाने की कोशिश करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने छात्रों, उनके माता-पिता, परिवारजनों, शिक्षकों और पूरी यात्रा में साथ खड़े रहे सभी लोगों को बधाई दी।

छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह सभी छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और उनके लगातार नई ऊंचाइयों को छूने की कामना करते हैं। उन्होंने छात्रों को उनके नए जीवन की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं और धन्यवाद के साथ अपना संबोधन समाप्त किया। 

राघव चड्ढा ने पीएम मोदी को भेंट की भगवान गणेश की मूर्ति, मुलाकात को बताया यादगार

राघव चड्ढा ने पीएम मोदी को भेंट की भगवान गणेश की मूर्ति, मुलाकात को बताया यादगार

 भाजपा के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को यादगार बताते हुए इसकी तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की। तस्वीर में चड्ढा प्रधानमंत्री मोदी को भगवान गणेश की मूर्ति भेंट करते नजर आए। उन्होंने मुलाकात को सीख और मार्गदर्शन से भरपूर बताया।

पीएम मोदी से मुलाकात को बताया खास

राघव चड्ढा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह एक ऐसी सुबह है, जिसे वह हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का सौभाग्य मिला और इस दौरान विस्तृत एवं समृद्ध बातचीत हुई। चड्ढा ने प्रधानमंत्री के बहुमूल्य समय और मार्गदर्शन के लिए आभार जताया।

पीएम मोदी को भेंट की भगवान गणेश की मूर्ति

सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीर में राघव चड्ढा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान गणेश की मूर्ति भेंट करते दिखाई दिए। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच बातचीत भी हुई। चड्ढा ने इसे अपने लिए महत्वपूर्ण और यादगार अनुभव बताया।

एक दिन पहले 45 सांसदों के साथ हुई थी बैठक

राघव चड्ढा की प्रधानमंत्री से मुलाकात से एक दिन पहले शुक्रवार को पीएम मोदी ने 45 सांसदों के साथ नाश्ते पर बैठक की थी। इनमें से अधिकांश सांसद हाल में अपने राजनीतिक दल बदलकर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हुए हैं।

मानसून सत्र के बीच हुई मुलाकात

राघव चड्ढा और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात संसद के मानसून सत्र के दौरान लगातार हो रहे हंगामे की पृष्ठभूमि में हुई है। विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों के कारण संसद की कार्यवाही कई बार बाधित हुई है। बताया जा रहा है कि नाश्ते पर हुई बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इन व्यवधानों पर चिंता जताई और कहा कि इससे कई सांसदों को सदन में बोलने तथा संसदीय कार्यवाही में हिस्सा लेने के अवसर सीमित हो रहे हैं।

NDA सांसदों को दिया भरोसा

रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना-यूबीटी से अलग होकर एनडीए में शामिल हुए सांसदों समेत अन्य सांसदों को भी भरोसा दिलाया कि उन्हें किसी बात को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि एनडीए उनके साथ खड़ा है और उन्हें पूरा समर्थन दिया जाएगा।

बैठक में कई दलों के सांसद हुए शामिल

रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद शामिल हुए, जिन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में विलय किया है। इसके अलावा उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सात पूर्व सांसद भी बैठक में मौजूद थे। इनमें से छह आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए हैं।

NPP और NCP के सांसद भी रहे मौजूद

रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के 20 सांसद और अजित पवार के नेतृत्व वाले NCP गुट के दो सांसद भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री के साथ हुई यह बैठक संसद के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के बीच NDA के भीतर उभरते नए राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री ने आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह की झलकियां साझा कीं, युवाओं से ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान का आह्वान

प्रधानमंत्री ने आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह की झलकियां साझा कीं, युवाओं से ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान का आह्वान

 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह की झलकियां साझा करते हुए नए स्नातकों को जीवन के नए अध्याय की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि युवा बड़े सपने देखें, चुनौतियों को स्वीकार करें और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अपना योगदान दें। प्रधानमंत्री ने कोविड महामारी के दौरान वर्चुअल माध्यम से आईआईटी दिल्ली से जुड़ने की अपनी स्मृति का उल्लेख करते हुए परिसर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को विशेष अनुभव बताया।

कैंपस की यादों को बताया जीवनभर का हिस्सा

प्रधानमंत्री ने आईआईटी दिल्ली में छात्रों की ओरिएंटेशन से लेकर दीक्षांत समारोह तक की यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हॉस्टल की यादें, दोस्ती, शिक्षक, मेंटर्स और कैंपस के पसंदीदा स्थान जीवन के ऐसे अनुभव हैं, जिन्हें लंबे समय तक याद रखा जाता है। उन्होंने स्नातकों से इस यात्रा में सहयोग देने वाले सभी लोगों को याद रखने और भविष्य में भी अपने संस्थान से जुड़े रहने का आग्रह किया।

बदलती तकनीक के साथ ढलना जरूरी

पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में खुद को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढालना बेहद जरूरी है। तकनीक उद्योगों, पेशों और जीवन के लगभग हर क्षेत्र को बदल रही है। उन्होंने युवाओं से चुनौतियों से घबराने के बजाय नए समाधान खोजने की क्षमता विकसित करने का आह्वान किया, ताकि कठिन परिस्थितियों को अवसरों में बदला जा सके।

जिंदगी का कोई तय सिलेबस नहीं

प्रधानमंत्री ने युवाओं को जीवन की अनिश्चितताओं के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं का एक सिलेबस होता है, लेकिन जिंदगी का कोई सिलेबस नहीं होता। जीवन अक्सर तय सिलेबस से बाहर निकलकर ऐसी परिस्थितियां सामने लाता है, जिनका सामना अपनी समझ, अनुभव और निर्णय क्षमता से करना पड़ता है।

आत्मनिर्भर भारत में युवाओं की निर्णायक भूमिका

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली पीढ़ी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया था। आज की युवा पीढ़ी के सामने जिम्मेदारी अलग है, लेकिन उसका महत्व कम नहीं है। आर्थिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता, औद्योगिक सामर्थ्य तथा नवाचार के क्षेत्र में युवाओं की भूमिका विकसित भारत के निर्माण में निर्णायक होगी।

रॉकेट, चिप और ड्रोन बनाने वाली पीढ़ी

पीएम मोदी ने कहा कि आज कई युवा ऐसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जहां वे आने वाली पीढ़ियों के इतिहास में भारत के शुरुआती रॉकेट, चिप और ड्रोन बनाने वालों के रूप में याद किए जा सकते हैं। उन्होंने युवाओं से इसी आत्मविश्वास और नवाचार की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

नए अध्याय की शुरुआत पर दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री ने आईआईटी दिल्ली के सभी स्नातकों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शिक्षा पूरी होने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन की नई जिम्मेदारियों और अवसरों की शुरुआत भी है। उन्होंने युवाओं से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग देश की प्रगति और समाज के कल्याण के लिए करने की अपील की।

भारत छोड़ो आंदोलन’की 84वीं वर्षगांठ : पीएम मोदी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के नायकों को किया याद

भारत छोड़ो आंदोलन’की 84वीं वर्षगांठ : पीएम मोदी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के नायकों को किया याद

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर इसमें हिस्सा लेने वाले राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को याद किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में भाग लेने वालों का साहस हर भारतीय के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।

ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने वाले सभी लोगों को याद करते हैं

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने वाले सभी लोगों को याद करते हैं। उनका साहस हर भारतीय के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा। महात्मा गांधी के नेतृत्व से प्रेरित होकर ‘भारत छोड़ो’ के आह्वान ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा का संचार किया और औपनिवेशिक शासन से मुक्त होने के हमारे लोगों के अटूट संकल्प को दर्शाया।”

ओम बिरला ने एक्स पर कहा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने पोस्ट किया, “‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर उन सभी राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी का ‘करो या मरो’ का आह्वान उस दौर में करोड़ों भारतीयों के लिए साहस और संकल्प की आवाज बना।”

उन्होंने लिखा, “इस आंदोलन में असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल यातनाएं सहीं, संघर्ष किया और अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका संघर्ष केवल राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए नहीं था, बल्कि एक ऐसे भारत के निर्माण के लिए था, जिसकी नींव सत्य, अहिंसा, लोकतंत्र, समानता और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों पर हो। स्वतंत्रता के अमृतकाल में उन महान सेनानियों का स्मरण हमें यह प्रेरणा देता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि रखते हुए हम अपने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक आदर्शों को निरंतर मजबूत करते रहें।”

जेपी नड्डा ने लिखा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लिखा, “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में आज ही के दिन अगस्त 1942 में प्रारंभ हुआ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ देश के स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक अध्याय बना। इस ‘अगस्त क्रांति’ ने देशभर में नई चेतना का संचार किया और असंख्य भारतीयों को स्वाधीनता के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी।”

उन्होंने आगे लिखा, “‘अगस्त क्रांति’ का इतिहास असंख्य गुमनाम योद्धाओं के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान की अमर गाथाओं से समृद्ध है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करती रहेंगी। ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी और उन सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि व सादर नमन, जिनके त्याग, साहस और संघर्ष से स्वतंत्र भारत की नींव सुदृढ़ हुई।

देशभर में आज से चलेगा ‘हर घर तिरंगा’ अभियान, सीएम योगी लखनऊ में करेंगे यात्रा का शुभारंभ

देशभर में आज से चलेगा ‘हर घर तिरंगा’ अभियान, सीएम योगी लखनऊ में करेंगे यात्रा का शुभारंभ

 देश के अलग-अलग राज्यों में आज रविवार से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साल 2022 में शुरू हुआ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान आज राष्ट्रप्रेम और जनभागीदारी का एक व्यापक जनआंदोलन बन चुका है। इस साल 9 से 17 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाया जा रहा है।

राजधानी लखनऊ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अभियान की शुरुआत करेंगे। वे लखनऊ से ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत ‘तिरंगा यात्रा-युवाओं के साथ’ का शुभारंभ करेंगे। साथ ही, मुख्यमंत्री योगी ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के शताब्दी समारोह में सहभाग कर अपने गौरवशाली इतिहास और वीर क्रांतिकारियों की स्मृतियों को नमन करेंगे।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “हृदय में राष्ट्रभक्ति हो तो हर व्यक्ति के जीवन में समृद्धि लाना और विकास की नई ऊंचाइयों को छूना ही मुख्य ध्येय बन जाता है।”

मुख्यमंत्री योगी रविवार को ‘विकास भी, विरासत भी’ के भाव के साथ सिद्धार्थनगर जनपद के डुमरियागंज और बांसी विधानसभा क्षेत्रों में 311 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 107 लोक-कल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा, सीएम योगी विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित होगा। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “राष्ट्र प्रथम के मंत्र को आत्मसात करते हुए विरासत के संरक्षण, सर्वांगीण विकास और हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए डबल इंजन सरकार पूर्ण रूप से संकल्पित है।”

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी प्रदेशवासियों से खास अपील की है। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “तिरंगा हमारे राष्ट्र की अस्मिता, एकता और गौरव का सर्वोच्च प्रतीक है। यह प्रत्येक भारतीय के ह्रदय में देशभक्ति, कर्तव्य और राष्ट्र प्रथम की भावना को और प्रबल करती है। आप सभी प्रदेशवासियों से आग्रह है कि 9 अगस्त से 17 अगस्त तक आयोजित होने वाले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के अंतर्गत अपने घर, प्रतिष्ठान और संस्थान पर पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रध्वज तिरंगा अवश्य फहराएं। साथ ही, अपनी एक सेल्फी लेकर ‘हर घर तिरंगा’ वेबसाइट पर अपलोड करें और इस जनभागीदारी अभियान से जुड़कर राष्ट्र के प्रति अपने सम्मान और गौरव को अभिव्यक्त करें।”

उन्होंने कहा, “आइए, इस स्वतंत्रता पर्व पर ऐसा संकल्प लें कि राजस्थान का हर घर तिरंगे से सजे, हर हृदय भारत माता के लिए धड़के और हर नागरिक गर्व से कहे- ‘मेरा तिरंगा-मेरी पहचान, मेरा भारत-मेरा अभिमान।”

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी प्रदेशवासियों से अपील की है कि 9 से 17 अगस्त तक आयोजित ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़कर इसे राष्ट्रभक्ति का पर्व बनाएं।

हरियाणा में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत राज्य स्तरीय कार्यक्रम ‘यूथ मैराथन एवं वंदे मातरम् कॉन्सर्ट’ का आयोजन किया गया है। इसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शामिल हुए हैं।

असम में बाढ़ का कहर जारी: 13 जिलों में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, मौतों का आंकड़ा 98 पहुंचा

असम में बाढ़ का कहर जारी: 13 जिलों में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, मौतों का आंकड़ा 98 पहुंचा

 गुवाहाटी। असम में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। राज्य के 13 जिलों में करीब 1.56 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि इस साल बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, 33 राजस्व सर्किलों के 464 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। गोलाघाट और शिवसागर सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। इसके अलावा जोरहाट, चराइदेव, नागांव, दरांग और धेमाजी में भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।बाढ़ के कारण 10 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसल क्षेत्र जलमग्न है। लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए 73 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। हजारों विस्थापित लोगों को यहां भोजन, पानी और जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार कुछ नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पशुधन और मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। कई घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। एसडीआरएफ, नागरिक सुरक्षा कर्मियों और अन्य एजेंसियों की टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी किनारे के संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की है।

यूपीआई यूजर्स के लिए बड़ी राहत: पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, छोटे दुकानदार भी रहेंगे शुल्क-मुक्त

यूपीआई यूजर्स के लिए बड़ी राहत: पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, छोटे दुकानदार भी रहेंगे शुल्क-मुक्त

 नई दिल्ली। यूपीआई से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है। पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने स्पष्ट किया है कि, आम ग्राहकों से यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए कोई शुल्क लेने का प्रस्ताव नहीं है। यानी डिजिटल पेमेंट करते समय उपभोक्ताओं को अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा। पीसीआई के मुताबिक, वर्ष 2016 में शुरुआत के बाद से यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है और आगे भी इसे इसी तरह बनाए रखने पर जोर है। संगठन ने यह भी साफ किया कि, छोटे कारोबारियों से यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लिया जाता।

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल और इसके डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने को लेकर चर्चा चल रही है। पीसीआई का कहना है कि, बहस ग्राहकों से शुल्क वसूलने की नहीं, बल्कि देश के विशाल डिजिटल पेमेंट नेटवर्क के रखरखाव और विस्तार के लिए टिकाऊ व्यवस्था तैयार करने की है।

यूपीआई ने छोटे दुकानदारों, किराना व्यापारियों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना आसान बनाया है। इससे नकदी पर निर्भरता घटाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में मदद मिली है। पीसीआई के अनुसार, बढ़ते लेनदेन के साथ साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकथाम और तकनीकी क्षमता मजबूत करना भी जरूरी है। हालांकि, इन प्रयासों का वित्तीय बोझ आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों पर डालने की योजना नहीं है।

ई20 पेट्रोल पर बड़ा अपडेट: तेल कंपनियों ने दूर की चिंता, जांच में नहीं मिली कोई गड़बड़ी

ई20 पेट्रोल पर बड़ा अपडेट: तेल कंपनियों ने दूर की चिंता, जांच में नहीं मिली कोई गड़बड़ी

 नई दिल्ली। ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच देश की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। कंपनियों के मुताबिक, देशभर में किए गए व्यापक परीक्षण में पेट्रोल में नमी या क्लोराइड की मिलावट का कोई प्रमाण नहीं मिला है। सभी जांचे गए नमूने तय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। तेल कंपनियों ने बताया कि, कुछ रिपोर्टों में ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाने के बाद पूरी सप्लाई चेन में अतिरिक्त जांच कराई गई। रिफाइनरी, डिपो, टर्मिनल और पेट्रोल पंप स्तर पर ईंधन के नमूनों की जांच की गई।

कंपनियों के अनुसार, देशभर की रिफाइनरियों से यादृच्छिक तौर पर लिए गए 100 से अधिक पेट्रोल नमूनों की क्लोराइड जांच हुई। इनमें क्लोराइड का स्तर 1 पार्ट प्रति मिलियन (PPM) या उससे कम पाया गया, जो निर्धारित सीमा के भीतर है। पेट्रोल पंपों पर पानी की मिलावट और घनत्व की नियमित जांच के साथ मोबाइल फ्यूल क्वालिटी टेस्टिंग लैब और स्वतंत्र प्रयोगशालाओं की मदद भी ली जा रही है। तेल कंपनियों ने कहा कि, E20 पेट्रोल की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनियों का दावा है कि, मौजूदा जांच व्यवस्था ईंधन की गुणवत्ता पर लगातार नजर रख रही है।

होर्मुज पर ईरान का बढ़ा दबाव: जलडमरूमध्य खोलने के लिए रखीं 3 बड़ी शर्तें, बढ़ी अमेरिका की मुश्किल

होर्मुज पर ईरान का बढ़ा दबाव: जलडमरूमध्य खोलने के लिए रखीं 3 बड़ी शर्तें, बढ़ी अमेरिका की मुश्किल

 दुबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान, ओमान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक खींचतान तेज हो गई है। इस अहम समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए बातचीत जारी है, लेकिन ईरान की मांगों ने समझौते की राह मुश्किल कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की पहली मांग होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की है। कुछ रिपोर्टों में माल के मूल्य के आधार पर शुल्क की मांग का उल्लेख किया गया है। हालांकि, अमेरिका ऐसी अनिवार्य वसूली के खिलाफ है।

दूसरी बड़ी मांग जलडमरूमध्य की नौवहन और सुरक्षा व्यवस्था में ईरान की मजबूत भूमिका से जुड़ी है। तेहरान चाहता है कि समुद्री मार्ग के संचालन में उसकी निर्णायक भागीदारी रहे, जबकि ओमान क्षेत्रीय प्रबंधन और सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय नौवहन पर जोर दे रहा है। तीसरी मांग अमेरिकी और इजरायली जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध से संबंधित बताई जा रही है। हालांकि, इन मांगों को लेकर अभी कोई अंतिम सार्वजनिक समझौता सामने नहीं आया है। होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद अहम रास्ता है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने से तेल, गैस और समुद्री परिवहन की लागत बढ़ सकती है। ऐसे में ईरान-ओमान बातचीत की सफलता पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।

आग बुझाने निकला जंगल में फायरफाइटिंग हेलीकॉप्टर क्रैश, 2 लोग लापता

आग बुझाने निकला जंगल में फायरफाइटिंग हेलीकॉप्टर क्रैश, 2 लोग लापता

 वाशिंगटन। अमेरिका के यूटा राज्य में भीषण जंगल की आग पर काबू पाने की कोशिश के दौरान एक फायरफाइटिंग हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद हेलीकॉप्टर में सवार दो लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घटना शुक्रवार सुबह रिचफील्ड के पास हुई। अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, Sikorsky S-64 हेलीकॉप्टर स्थानीय समयानुसार करीब 10 बजे दुर्घटनाग्रस्त हुआ। यह हेलीकॉप्टर वाइडमाउथ 2 इलाके में फैली आग के खिलाफ अभियान में शामिल था। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय, राज्य और संघीय एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया।

यूएस फॉरेस्ट सर्विस ने कहा कि, इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता दुर्घटना पर सुरक्षित तरीके से प्रतिक्रिया देना है। लापता लोगों की स्थिति को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह जंगल की आग 27 जुलाई को बिजली गिरने के बाद शुरू हुई थी और अब तक करीब 1.05 लाख एकड़ क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुकी है। आग पर लगभग 19 प्रतिशत नियंत्रण पाया जा सका है, जबकि 600 से अधिक दमकलकर्मी इसे बुझाने में जुटे हैं। आग की चपेट में आने से कम से कम छह इमारतें नष्ट हो चुकी हैं। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और बचाव दल को सहयोग देने की अपील की है।

‘चयन प्रक्रिया निष्पक्ष हो, किसी एथलीट के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए’ : खेल मंत्री मांडविया

‘चयन प्रक्रिया निष्पक्ष हो, किसी एथलीट के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए’ : खेल मंत्री मांडविया

 केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (एनएसएफ) कॉन्क्लेव 2026 की अध्यक्षता की। कॉन्क्लेव में खेल प्रशासन को मजबूत करने, खिलाड़ियों के कल्याण को बढ़ावा देने और आगामी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए भारत की तैयारियों की समीक्षा पर विशेष जोर दिया गया।

खेल प्रशासन और बड़े आयोजनों की तैयारियों पर हुई समीक्षा

कॉन्क्लेव में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 के तहत नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन के अनुपालन की स्थिति, खेल संस्थाओं में सुशासन तथा एशियन गेम्स 2026, लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 और कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए एनएसएफ की तैयारियों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं।

एथलीटों का हित और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता : मांडविया

डॉ. मांडविया ने कहा कि खेल इकोसिस्टम में हर हितधारक के लिए एथलीटों का हित और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है कि किसी भी एथलीट के साथ अन्याय न हो।

कैमरे पर रिकॉर्ड हों ओपन सेलेक्शन ट्रायल

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ओपन सेलेक्शन ट्रायल पर्यवेक्षक की मौजूदगी में कैमरे पर रिकॉर्ड किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

पूरे साल खिलाड़ियों को अधिक प्रतिस्पर्धी अवसर देने पर जोर

मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार एथलीटों को खेल के मैदान पर बनाए रखने और देश में मजबूत लीग संस्कृति विकसित करने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन को पूरे वर्ष एथलीटों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना चाहिए।

डोपिंग के खिलाफ पूरी चेन पर कार्रवाई की जरूरत

केंद्रीय मंत्री ने भारतीय खेलों से डोपिंग खत्म करने के लिए व्यापक रणनीति की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार एंटी-डोपिंग इकोसिस्टम को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक बदलावों पर काम कर रही है।

सिर्फ एथलीटों पर कार्रवाई से नहीं रुकेगा डोपिंग

मांडविया ने कहा कि डोपिंग के खतरे से निपटने के लिए केवल एथलीटों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि डोपिंग की पूरी आपूर्ति श्रृंखला, जिसमें उत्पादक, आपूर्तिकर्ता और उपयोगकर्ता शामिल हैं, की पहचान कर एक निष्पक्ष और मजबूत व्यवस्था के जरिए उससे निपटना होगा। तभी खेलों से डोपिंग को प्रभावी तरीके से खत्म किया जा सकेगा।

भारतीय कोचिंग इकोसिस्टम मजबूत करने पर जोर

डॉ. मांडविया ने मजबूत घरेलू कोचिंग इकोसिस्टम विकसित करने और विदेशी कोचों पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को अच्छे भारतीय कोचों का मजबूत समूह तैयार करना होगा।

कोचों को अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर देने की जरूरत

उन्होंने कहा कि एथलीटों को प्रशिक्षण देने के साथ भारतीय कोचों के प्रशिक्षण में भी उतना ही निवेश किया जाना चाहिए। उन्हें बेहतर अवसर और अंतरराष्ट्रीय अनुभव उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छी तरह प्रशिक्षित कोच ही देश के लिए विश्वस्तरीय एथलीट तैयार कर सकते हैं।

आगामी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए तैयारियों पर जोर

केंद्रीय खेल मंत्री ने खेल प्रशासन के मानकों को मजबूत करने, नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 का अनुपालन सुनिश्चित करने और एशियन गेम्स 2026, लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 तथा कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए भारत की तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन के साथ मिलकर काम करने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

खेल मंत्रालय और एनएसएफ के प्रतिनिधि रहे मौजूद

कार्यक्रम में युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (एनएसएफ) के प्रतिनिधि शामिल हुए।