लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |
निर्माण श्रमिकों के कल्याण हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों को मंडल की बैठक में मिली स्वीकृति

निर्माण श्रमिकों के कल्याण हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों को मंडल की बैठक में मिली स्वीकृति

 00 निर्माण श्रमिकों के हित में मंडल की बैठक में लिए गए अहम फैसले

रायपुर। प्रदेश के श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने कहा है कि मुख्यममंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिको की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति के सुधार हो रहा है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि विभाग के अधिकारी यह सुनिश्चित करें की शासन की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक श्रमिकों को मिले। मंत्री देवांगन ने आज छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की बैठक को सम्बोधित करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किये।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की पंचम कार्यकाल की नवम बैठक आज गुरूवार को नवा रायपुर स्थित मण्डल कार्यालय में श्रम मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन  लखन लाल देवांगन, मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, उप सचिव श्रम विभाग  विपुल गुप्ता, अपर श्रमायुक्त  एस.एल. जांगड़े, कल्याण प्रशासक  सुनील मिश्रा, मण्डल के सचिव श्री गिरीश रामटेके सहित श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। नवीन सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अनुरूप श्रमिक कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का निर्णय लिया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत राज्य के 20 चयनित विद्यालयों में 200 निर्माण श्रमिकों के बच्चों को कक्षा 6वीं में नि:शुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रबंधन तथा अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययन हेतु प्रदान की जाने वाली शैक्षणिक सहायता राशि का एकरूपीकरण करने का निर्णय भी लिया गया, जिससे अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहन मिल सके। इसी प्रकार अटल करियर निर्माण योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1,000 निर्माण श्रमिकों के बच्चों को नीट (हृश्वश्वञ्ज) एवं जेईई (छ्वश्वश्व) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु नि:शुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने का अनुमोदन किया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन एवं डॉ. रामप्रताप सिंह अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने कहा कि राज्य सरकार निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों के समग्र विकास और सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के हित में नई योजनाएँ प्रारंभ करने तथा वर्तमान योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक सरल, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए सरकार सतत प्रयासरत है, ताकि प्रत्येक पात्र निर्माण श्रमिक तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुँच सके।

शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का करें समयबद्ध क्रियान्वयन , प्रत्येक पात्र व्यक्ति को मिले शासन की योजनाओं का लाभ : मुख्यमंत्री साय

शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का करें समयबद्ध क्रियान्वयन , प्रत्येक पात्र व्यक्ति को मिले शासन की योजनाओं का लाभ : मुख्यमंत्री साय

 00 सुशासन की नई व्यवस्था: पारस पोर्टल से हर माह होगी योजनाओं की राज्यस्तरीय समीक्षा

00 पारस पोर्टल से योजनाओं की होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग

00 जनहित की योजनाओं में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, मुख्यमंत्री श्री साय ने दिए स्पष्ट निर्देश
00 सीएम हेल्पलाइन, सेवा सेतु, एग्रीस्टैक, विकसित भारत जी-रामजी, मोबाइल टॉवर और स्कूल शिक्षा से जुड़े छह प्रमुख एजेंडों पर हुई विस्तृत समीक्षा

00 सीमांकन मामलों में लापरवाही पर मुख्यमंत्री सख्त, समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश
00 अब प्रत्येक माह के अंतिम मंगलवार को पारस पोर्टल के माध्यम से होगी राज्यस्तरीय समीक्षा

रायपुर। शासन की योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित कर आमजन को अधिकतम लाभ पहुंचाना राज्य सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। डबल इंजन सरकार का उद्देश्य शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना है। इसी दृष्टि से शासन की प्रमुख योजनाओं और जनसेवाओं की नियमित निगरानी के लिए विकसित पारस (Project Assessment, Review and Analysis System) पोर्टल सुशासन का एक प्रभावी माध्यम बनेगा। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित पारस पोर्टल की पहली राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने सीएम हेल्पलाइन 1076, सेवा सेतु, एग्रीस्टैक, विकसित भारत जी-रामजी, डीबीएन वित्तपोषित मोबाइल टॉवर परियोजना तथा स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े प्रमुख कार्यक्रमों की विभागवार विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा प्रत्येक विभाग निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप परिणाम सुनिश्चित करे।

सीमांकन मामलों में लापरवाही पर मुख्यमंत्री की नाराजगी
बैठक में मुख्यमंत्री साय ने राजस्व विभाग में सीमांकन से संबंधित लंबित मामलों पर विशेष नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हो रही हैं और सक्षम अधिकारी के आदेश के बाद भी कई मामलों में समय पर सीमांकन नहीं हो रहा है। यह स्थिति आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी में डालती है तथा प्रशासनिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीमांकन संबंधी प्रत्येक प्रकरण का निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि यह जमीनी स्तर पर लापरवाही तथा जिला स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव का परिणाम है। सभी कलेक्टर नियमित समीक्षा कर ऐसे मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करें तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई करें।

एग्रीस्टैक में शत-प्रतिशत किसान पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने एग्रीस्टैक में प्रत्येक पात्र किसान का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि यह केवल धान खरीदी की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की आधारभूत व्यवस्था है। उन्होंने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जिलेवार विशेष अभियान संचालित कर प्रत्येक पात्र किसान का समय पर पंजीयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष व्यवस्था के प्रारंभिक चरण में कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आई थीं, लेकिन इस वर्ष किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही के कारण कोई पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित होता है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी।
सीएम हेल्पलाइन को बनाया जाए प्रभावी जनसमस्या समाधान का माध्यम
मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन 1076 का उद्देश्य नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से बचाना है। उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन को जनता का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है, इसलिए प्राप्त शिकायतों और फीडबैक का गंभीर विश्लेषण कर व्यवस्थागत सुधार किए जाएं। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा राजस्व विभाग से संबंधित शिकायतों की विशेष समीक्षा करते हुए विभागवार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों का प्रदर्शन अपेक्षित नहीं है, वहां विशेष अभियान चलाकर शिकायतों का समयबद्ध एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में बताया गया कि सीएम हेल्पलाइन में अब तक एक लाख 10 हजार से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें 65 हजार से अधिक शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। प्राप्त फीडबैक में 55.29 प्रतिशत शिकायतकर्ताओं ने सकारात्मक संतुष्टि व्यक्त की है।
सेवा सेतु के माध्यम से सभी सेवाएं हों ऑनलाइन
मुख्यमंत्री ने सेवा सेतु पोर्टल की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्तमान में 27 विभागों की 721 अधिसूचित सेवाएं इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन सेवाओं को अभी तक ऑनलाइन नहीं लाया गया है, उन्हें भी शीघ्र सेवा सेतु से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों, कॉमन सर्विस सेंटर तथा अटल सेवा केंद्रों के माध्यम से सेवा सेतु का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिकाधिक नागरिक घर के निकट ही ऑनलाइन सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
विकसित भारत जी-रामजी योजना में ग्राम पंचायतों को मिले प्राथमिकता
बैठक में विकसित भारत जी-रामजी योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में आधारभूत विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दी जाए। जिन पंचायतों में अभी तक कार्य स्वीकृत नहीं हुए हैं, वहां तत्काल प्रस्ताव स्वीकृत कर विकास कार्य प्रारंभ किए जाएं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत अधोसंरचना को तेजी से सुदृढ़ किया जा सके।
मोबाइल कनेक्टिविटी और स्कूल शिक्षा की भी हुई समीक्षा
बैठक में डीबीएन वित्तपोषित 476 मोबाइल टॉवरों की स्थापना की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन पर बल देते हुए कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण, गणवेश वितरण, सरस्वती साइकिल योजना तथा प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना की प्रगति की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए।
स्कूलों में पोषण और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री  साय ने स्कूल परिसरों में किचन गार्डन विकसित करने के अभियान को गति देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों को ताजा एवं पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। उन्होंने स्कूल परिसरों में सहजन, कटहल सहित अन्य उपयोगी पौधों के रोपण पर भी विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को पोषणयुक्त भोजन के महत्व से अवगत कराया जाए, ताकि वे स्वप्रेरणा से इस अभियान से जुड़ें और विद्यालयों में विकसित हो रही इस सकारात्मक पहल को जनआंदोलन का स्वरूप मिल सके।
प्रत्येक माह होगी पारस पोर्टल के माध्यम से समीक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारस पोर्टल शासन की योजनाओं की प्रभावी निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा की कि अब प्रत्येक माह के अंतिम मंगलवार को पारस पोर्टल के माध्यम से राज्य स्तर पर सभी प्रमुख योजनाओं एवं जनसेवाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी, समस्याओं का समय पर समाधान होगा और जनता तक शासकीय सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा। बैठक में मुख्य सचिव  विकास शील, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद एवं  राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव  कमलप्रीत सिंह, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव  अंकित आनंद, राजस्व विभाग की सचिव शम्मी आबिदी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

हसदेव बराज के कार्यों के लिए 3.83 करोड़ स्वीकृत

हसदेव बराज के कार्यों के लिए 3.83 करोड़ स्वीकृत

 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा कोरबा जिले के हसदेव बांगो परियोजना के अंतर्गत हसदेव बरॉज गेट दर्री के सभी गेट स्टाप लॉग एवं संबंधित रेग्यूलेटर गेटों तथा उनके हाइस्टींग एरेंजमेंट के मरम्मत एवं पेटिंग कार्य के लिए 3 करोड़ 83 लाख 21 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के अंतर्गत कार्यों को कराने के लिए मुख्य अभियंता मिनीमाता (हसदेव) बांगो परियोजना जल संसाधन विभाग बिलासपुर को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

शराब दुकानों में गड़बड़ी पर आबकारी विभाग का बड़ा एक्शन, दो आबकारी उपनिरीक्षक निलंबित

शराब दुकानों में गड़बड़ी पर आबकारी विभाग का बड़ा एक्शन, दो आबकारी उपनिरीक्षक निलंबित

 00 सहायक जिला आबकारी अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों में अधिक कीमत पर बिक्री और अन्य गंभीर अनियमितताओं के मामलों में आबकारी विभाग ने एक ही दिन तीन बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने बलौदाबाजार-भाटापारा और बालोद के दो आबकारी उपनिरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि 53 पेटी अवैध शराब प्रकरण में बालोद की सहायक जिला आबकारी अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा शासन को भेजी गई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। आबकारी आयुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की रोहासी देशी कम्पोजिट शराब दुकान में अधिक कीमत पर शराब बिक्री की शिकायत पर मूल शिकायत के अनुरूप कार्रवाई नहीं करने तथा दुकान के सीसीटीवी सिस्टम को अद्यतन नहीं रखने के कारण आबकारी उपनिरीक्षक पी. माधव राव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, धमतरी जिले के अर्जुनी थाना क्षेत्र में 25 जुलाई को जब्त 53 पेटी अवैध देशी एवं विदेशी शराब की जांच में होलोग्राम के आधार पर शराब का स्रोत बालोद जिले की अरकार देशी कम्पोजिट शराब दुकान पाया गया। जांच में निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में थोक बिक्री सामने आने पर संबंधित वृत्त प्रभारी आबकारी उपनिरीक्षक आशा राम शाक्य को भी निलंबित कर दिया गया है।

इसी प्रकरण में अरकार शराब दुकान की प्रभारी एवं सहायक जिला आबकारी अधिकारी निलोफर जैन के शिथिल नियंत्रण और कर्तव्य के प्रति लापरवाही को गंभीर मानते हुए आबकारी आयुक्त ने उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग को भेज दी है। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि शराब दुकानों के संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता, अधिक मूल्य पर बिक्री अथवा नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

महुआ ने बदली महिलाओं की जिंदगी, वन धन योजना से मिली आत्मनिर्भरता की नई पहचान

महुआ ने बदली महिलाओं की जिंदगी, वन धन योजना से मिली आत्मनिर्भरता की नई पहचान

 रायपुर। जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड की एक पहल है, जिसे 2018 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य वनों से लघु वनोपज एकत्र करने वाले आदिवासी समुदायों को प्रशिक्षित करना, उनके उत्पादों का मूल्यवर्धन करना और उन्हें उद्यमी बनाकर स्थायी आजीविका प्रदान करना है। छत्तीसगढ़ के जंगलों में मिलने वाला महुआ अब ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के लिए आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत साधन बन गया है। राज्य शासन की वन धन विकास केंद्र योजना के माध्यम से महिलाओं को महुआ से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे उनकी आमदनी बढ़ रही है और वे सफल उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

महुआ ने बदली महिलाओं की जिंदगीa


राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की सफलता
राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की महिलाओं ने इस योजना का पूरा लाभ उठाया है। पहले वे महुआ केवल संग्रह करती थीं, लेकिन अब प्रशिक्षण के बाद महुआ से लड्डू, कुकीज़, एनर्जी बार, स्क्वैश और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं। आधुनिक प्रसंस्करण और आकर्षक पैकेजिंग के कारण इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग बन रही है।
प्रशिक्षण और कौशल विकास
वन धन विकास केंद्र में महिलाओं को केवल उत्पाद बनाना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि गुणवत्ता, स्वच्छ उत्पादन, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण और विपणन की भी जानकारी दी जाती है। इससे वे बाजार की जरूरत के अनुसार बेहतर उत्पाद तैयार कर पा रही हैं और उन्हें उचित मूल्य भी मिल रहा है।

महुआ ने बदली महिलाओं की जिंदगी


महुआ के मूल्यवर्धन से बढ़ा रोजगार
महुआ के मूल्यवर्धन से उसकी उपयोगिता और बाजार मूल्य दोनों बढ़े हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। महुआ के फूलों और बीजों के मूल्यवर्धन से ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं की आय कई गुना बढ़ गई है। अब केवल कच्चे महुआ को बेचने के बजाय उससे लड्डू, कुकीज, जैम, और एनर्जी बार जैसे उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर नए रोजगार और स्थायी आजीविका के साधन विकसित हुए हैं।
छत्तीसगढ़ हर्बल्स के माध्यम से बाजार उपलब्धता
इन उत्पादों को छत्तीसगढ़ हर्बल्स के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे वन आधारित उत्पादों को नई पहचान मिल रही है और ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद संघ की एक अनूठी पहल है। इसके तहत वनों से मिलने वाले प्राकृतिक और शुद्ध उत्पादों जैसे वन शहद, एलोवेरा जेल, हर्बल जूस, महुआ उत्पाद, आयुर्वेदिक चूर्ण और तेलों को महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार कर बेचा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों और स्थानीय लोगों को आजीविका देना है।

महुआ ने बदली महिलाओं की जिंदगी


आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम
कोरिनभाठा की महिलाओं की यह सफलता दिखाती है कि सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और विपणन सहयोग मिलने पर वन संपदा को रोजगार और समृद्धि का मजबूत आधार बनाया जा सकता है। वन धन विकास केंद्र योजना आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।

CG Weather : छत्तीसगढ़ में फिर मेहरबान हुआ मानसून, अगले 3 दिन झमाझम बारिश के आसार; इन जिलों के लिए अलर्ट

CG Weather : छत्तीसगढ़ में फिर मेहरबान हुआ मानसून, अगले 3 दिन झमाझम बारिश के आसार; इन जिलों के लिए अलर्ट

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है, जिससे प्रदेशभर में बारिश का दौर तेज होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों तक राज्य के अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कई स्थानों पर तेज बौछारें पड़ सकती हैं। खासकर उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम में आए इस बदलाव से तापमान में राहत बनी रहेगी, जबकि किसानों और आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। वहीं उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। वर्तमान में मानसूनी गतिविधियां सामान्य से सक्रिय बनी हुई हैं, जिसके चलते आने वाले दिनों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

विभाग का अनुमान है कि 5, 6 और 7 अगस्त के दौरान पूरे छत्तीसगढ़ में आसमान आंशिक से लेकर पूरी तरह बादलों से ढका रहेगा। इस दौरान कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर तेज बारिश भी देखने को मिल सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 8 अगस्त के बाद बारिश की तीव्रता और इसका दायरा धीरे-धीरे कम होने लगेगा। हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का क्रम बना रह सकता है।

फिलहाल 10 और 11 अगस्त के लिए मौसम विभाग ने किसी बड़े मौसमीय खतरे या भारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की है। इसके साथ ही अगले पांच दिनों तक अधिकतम और न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना भी नहीं जताई गई है।

राजधानी रायपुर की बात करें तो यहां भी मौसम सुहावना बने रहने के आसार हैं। दिनभर आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और गरज-चमक के साथ एक-दो दौर की बारिश होने की संभावना है। रायपुर का अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

मौसम विभाग ने खराब मौसम और वज्रपात की आशंका को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। किसानों को खेतों में काम करते समय मौसम की जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी गई है। वहीं आम नागरिकों से भी अनावश्यक रूप से खुले स्थानों में जाने से बचने और गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहने की अपील की गई है।

प्रदेश में मानसून के दोबारा सक्रिय होने से जहां एक ओर लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं कृषि कार्यों के लिए भी यह बारिश लाभदायक मानी जा रही है। हालांकि भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और बिजली गिरने जैसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए सतर्कता बरतना जरूरी होगा।

CGPSC पेपर लीक मामले में पूर्व सचिव को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज

CGPSC पेपर लीक मामले में पूर्व सचिव को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा-2021 के प्रश्नपत्र लीक और भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने आयोग के पूर्व सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करना ऐसा अपराध है, जो लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित करता है और इसका असर पूरे समाज पर पड़ता है।

CBI जांच में सामने आए गंभीर आरोप

सीबीआई जांच के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के बीच राज्य सेवा परीक्षा के दौरान जीवन किशोर ध्रुव आयोग के सचिव पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने गोपनीय प्रश्नपत्र अपने बेटे सुमित ध्रुव तक पहुंचाए। जांच के दौरान भिलाई स्थित उनके आवास से मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि जब्त दस्तावेजों में दर्ज अधिकांश प्रश्न वास्तविक परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। आरोप है कि इसी कथित पेपर लीक के आधार पर उनके बेटे का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी ने अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी पहले ही आयोग को दे दी थी और वह गोपनीय कार्यों से अलग रहे थे। साथ ही लंबे समय से जेल में होने और अन्य सह-आरोपियों के आधार पर जमानत की मांग की गई।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने वाले लोग मेहनत करने वाले लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं। कोर्ट ने इसे व्यवस्था के साथ गंभीर विश्वासघात बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों को सामान्य अपराध नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर पूर्व सचिव की जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

खिलाड़ियों का लंबा इंतजार खत्म, राज्य शासन ने जारी की उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची

खिलाड़ियों का लंबा इंतजार खत्म, राज्य शासन ने जारी की उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची

 20 खेलों के 156 खिलाड़ी शामिल

रायपुर---राज्य के खिलाड़ियों का लंबा इंतजार आखिर आज खत्म हो गया। राज्य शासन ने बहुप्रतीक्षित उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची आज जारी कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा राजपत्र में इसका प्रकाशन कर दिया गया है। राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में नियुक्त करने की नीति, 2007 के प्रावधानों के तहत राजपत्र में इस सूची को अधिसूचित किया गया है।

विभाग द्वारा जारी सूची में 156 खिलाड़ियों को शामिल किया गया है, जिनमें 20 खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं। विगत 30 जून को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति की बैठक में उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची को अनुमोदित कर राजपत्र में प्रकाशन के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया था। 

उच्च स्तरीय समिति की बैठक में उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव सहित समिति के सदस्यों ने वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए प्राप्त आवेदनों पर विस्तृत विचार-विमर्श तथा सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन को अंतिम स्वरूप प्रदान किया था। विभाग ने आवश्यक कार्यवाही पूर्ण कर आज राजपत्र में इसका प्रकाशन कर दिया है। 

Crime - WRS कॉलोनी तालाब में मिली युवती की लाश का खुला राज: बेवफाई के शक में प्रेमी बना कातिल, गला दबाकर की हत्या

Crime - WRS कॉलोनी तालाब में मिली युवती की लाश का खुला राज: बेवफाई के शक में प्रेमी बना कातिल, गला दबाकर की हत्या

 रायपुर। राजधानी रायपुर के WRS कॉलोनी तालाब में मिली अज्ञात युवती की लाश की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। मृतका की पहचान टिकरापारा निवासी नंदनी जैन के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रेम संबंधों में विवाद और बेवफाई के शक के चलते उसके प्रेमी ने गला दबाकर हत्या कर दी और शव तालाब में फेंककर फरार हो गया। मामले में पुलिस ने आरोपी प्रेमी को भी गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला खमतराई थाना क्षेत्र का है।

इंस्टाग्राम से शुरू हुई थी दोस्ती, फिर हत्या कर शव को तालाब में फेंका

मिली जानकारी के अनुसार, नंदनी जैन और आरोपी करण तांडी की पहचान करीब तीन साल पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी और यह रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया। दोनों के बीच पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि आरोपी को नंदनी पर बेवफाई का शक था, जिसके कारण दोनों के बीच लगातार तनाव बना हुआ था। इसी विवाद के दौरान आरोपी ने नंदनी की गला दबाकर हत्या कर दी।

तालाब में मिली थी युवती की लाश

हत्या के बाद आरोपी शव को WRS कॉलोनी स्थित तालाब तक ले गया और वहां फेंककर फरार हो गया। मंगलवार को तालाब में युवती का शव दिखाई देने पर स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। घटना की सूचना मिलते ही DCP नॉर्थ, ACP उरला, FSL टीम और क्राइम ब्रांच के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया। वहीं मौके से युवती का मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसकी मदद से उसकी पहचान संभव हो सकी।

मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी करण तांडी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पूछताछ में मिले तथ्यों के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अब हत्या मामले का पूरा खुलासा देर शाम तक पुलिस कर सकती है।

CG- साय सरकार का बड़ा फैसला, CSPGCL की होगी शेयर बाजार में लिस्टिंग; 200 करोड़ रुपए के बॉन्ड होंगे जारी

CG- साय सरकार का बड़ा फैसला, CSPGCL की होगी शेयर बाजार में लिस्टिंग; 200 करोड़ रुपए के बॉन्ड होंगे जारी

 रायपुर। साय सरकार ने राज्य की ऊर्जा अधोसंरचना को मजबूती प्रदान करने और आमजन व संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) की शेयर बाजार में लिस्टिंग का फैसला लिया है।

सरकार कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने के लिए 200 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD)/बॉन्ड जारी करेगी। इसके लिए राज्य सरकार मूलधन व ब्याज भुगतान पर अपनी गारंटी (Government Guarantee) प्रदान करने के साथ प्रत्याभूति शुल् में छूट देगी। इससे राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलने के साथ और बिजली उत्पादन व वितरण प्रणाली को नई रफ्तार हासिल होगी।

बता दें कि छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) चार तापीय और एक जल विद्युत संयंत्र की बदौलत कुल 2,960 MW बिजली उत्पादन करती है. इसमें तापीय विद्युत संयंत्रों की भागीदारी 2,840 MW और जलविद्युत संयंत्र की भागीदारी 120 MW है.

राज्य की कुल स्थापित क्षमता में CSPGCL की हिस्सेदारी लगभग 11% है। शेष लगभग 89% क्षमता NTPC, निजी बिजली उत्पादक कंपनियों (जैसे जिंदल, अडानी, BALCO आदि) तथा अन्य उत्पादकों के पास है।यह छत्तीसगढ़ की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 26,400 मेगावाट का लगभग 11 प्रतिशत है।

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL)

विद्युत संयंत्र प्रकार क्षमता
हसदेव ताप विद्युत गृह, कोरबा (HTPS) तापीय 840 MW (4 × 210 MW)
कोरबा वेस्ट ताप विद्युत गृह तापीय 500 MW
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह, कोरबा तापीय 500 MW (2 × 250 MW)
अटल बिहारी वाजपेयी ताप विद्युत गृह, मड़वा (जांजगीर-चांपा) तापीय 1,000 MW (2 × 500 MW)
मिनीमाता हसदेव बांगो जलविद्युत परियोजना जलविद्युत 120 MW (3 × 40 MW)

CSPGCL की नई परियोजनाएं और विस्तार योजनाएं

वित्त वर्ष 2026-27 से 2029-30 के लिए CSPGCL ने अपने पूंजी निवेश (Capital Investment Plan) में मौजूदा संयंत्रों के आधुनिकीकरण, प्रदूषण नियंत्रण और नई उत्पादन क्षमता पर विशेष जोर दिया है। इसमें मुख्य तौर पर हसदेव ताप विद्युत गृह (HTPS), कोरबा में 2 × 660 मेगावाट (कुल 1,320 मेगावाट) की सुपरक्रिटिकल इकाइयों के विस्तार की योजना है। यह परियोजना पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया में है।

इसके अलावा कंपनी के सभी प्रमुख ताप विद्युत संयंत्रों में FGD (Flue Gas Desulphurization) प्रणाली लगाई जा रही है, ताकि सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) उत्सर्जन नए पर्यावरण मानकों के अनुरूप हो सके। पुराने संयंत्रों के Renovation & Modernization (R&M), दक्षता बढ़ाने और जीवनकाल बढ़ाने के लिए भी निवेश किया जा रहा है। इसके साथ राज्य सरकार की नीति के अनुसार CSPGCL सौर ऊर्जा परियोजनाओं को भी बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी माँ के नाम पर लगाया पीपल का पौधा, वन महोत्सव-2026 का हुआ शुभारंभ

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी माँ के नाम पर लगाया पीपल का पौधा, वन महोत्सव-2026 का हुआ शुभारंभ

 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान के तहत 15 एकड़ में लगाए गए 2500 से अधिक पीपल के पौधे

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

प्रदेश में इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य, पिछले दो वर्षों में 7 करोड़ से अधिक पौधों का हुआ रोपण

रायपुर

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज वन महोत्सव-2026 का शुभारंभ करते हुए नया रायपुर में आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में अपनी माँ के नाम पर पीपल का पौधा लगाकर प्रदेशव्यापी 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के अंतर्गत लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में 2500 से अधिक पीपल के पौधे रोपे गए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को जीवनदाता माना गया है और पीपल का वृक्ष विशेष रूप से आस्था, आध्यात्मिक चेतना तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है। यह वृक्ष सर्वाधिक ऑक्सीजन देने वाले वृक्षों में माना जाता है और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2024 से प्रारंभ हुआ 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान आज जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को मातृ सम्मान की भावना से जोड़ा गया है, जिससे समाज में प्रकृति के प्रति आत्मीयता और जिम्मेदारी का भाव विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं तथा इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने घर, खेत-खलिहानों की मेड़, विद्यालय, कार्यस्थल अथवा आसपास उपलब्ध खाली भूमि पर अपनी माँ के नाम एक पौधा अवश्य लगाएँ और उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी निभाएँ। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पौधा आने वाले समय में स्वच्छ वायु, शुद्ध वातावरण और सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि बढ़ता तापमान, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव पूरी दुनिया के सामने गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे समय में वृक्षारोपण सबसे प्रभावी और सरल उपायों में से एक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने प्रतिदिन एक पौधा लगाने का आजीवन प्रण लिया है। यदि किसी दिन किसी कारणवश बाहर पौधा लगाना संभव नहीं होता, तो वे गमले में पौधा लगाकर भी अपने संकल्प का निर्वहन करते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे प्रकृति के प्रति समर्पण और अनुशासन का प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे संकल्प समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान केवल वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भविष्य के निर्माण का संकल्प है।

कश्यप ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पीपल का वृक्ष आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम है। धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत पवित्र माना गया है, वहीं वैज्ञानिक रूप से यह अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर वायु गुणवत्ता सुधारने और शहरी प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में लगभग 7 करोड़ 50 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने नागरिकों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में तिरंगा फहराने के साथ-साथ एक पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का भी आह्वान किया।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी, खाद्य मंत्री  दयाल दास बघेल, संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, विधायक  इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन  मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ)  अरुण कुमार पाण्डेय सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने पीपल के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने वृक्षारोपण के साथ पौधों के संरक्षण का भी संकल्प दोहराया।

शराब घोटाला मामला- SC से अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त

शराब घोटाला मामला- SC से अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त

 रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड में हुए घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारी अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने जमानत के साथ सख्त शर्त भी लगाई है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की दलील को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि ट्रायल के दौरान अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे। इसकी सूचना विधिवत जिला अदालत को देनी होगी।

इसके साथ ही उन्हें अपने रहने का पता और मोबाइल नंबर संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराना होगा। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल के दौरान जब भी अदालत बुलाएगी, अनवर ढेबर को पेश होना होगा। सुनवाई के दौरान अनवर ढेबर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा, जबकि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने पैरवी की।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से कहा कि यदि अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ में रहते हैं तो गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए जमानत की शर्त के रूप में उन्हें राज्य से बाहर रहने का निर्देश दिया। साथ ही अधिकारियों को अपना वर्तमान पता और संपर्क नंबर देने के लिए भी कहा गया है। बता दें इससेपहले 13 मई को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

जहाँ कभी पानी की थी चिंता, आज हर मौसम में जीवन का आधार बना जल स्रोत

जहाँ कभी पानी की थी चिंता, आज हर मौसम में जीवन का आधार बना जल स्रोत

 00 विकसित भारत जी-राम-जी योजना से बदली वनांचल गाँवों की तस्वीर

00 जल संरक्षण के साथ रोजगार और आजीविका का मजबूत संबल
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनभागीदारी और ग्रामीण विकास से जोड़कर लागू की जा रही विकसित भारत जी-राम-जी योजना दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रही है। सूरजपुर जिले के ओडग़ी विकासखंड के ग्राम पंचायत कालामांजल की सफलता इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि योजनाबद्ध जल संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता से किसी गाँव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती हैं। कालामांजल कभी ऐसा गाँव था जहाँ बारिश का अधिकांश पानी बह जाता था और गर्मी आते-आते जल स्रोत सूखने लगते थे। पेयजल, मवेशियों के लिए पानी और खेती-किसानी जैसी आवश्यकताओं के लिए ग्रामीणों को लंबे समय तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पानी की कमी यहाँ के लोगों की सबसे बड़ी चिंता बन गई थी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जल संरक्षण को ग्रामीण समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इसी सोच के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम का निर्माण कराया गया। इन संरचनाओं ने वर्षा जल को रोककर जमीन में समाहित करने का प्रभावी कार्य किया। साथ ही मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण हुआ और जंगल से आने वाला कचरा डैम तक पहुँचने से पहले ही रुकने लगा। इससे जल स्रोत न केवल संरक्षित हुए, बल्कि अधिक स्वच्छ और सुरक्षित भी बने। ग्राम के निवासी  मनोहर सिंह बताते हैं कि पहले गर्मी के दिनों में पानी की तलाश ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या होती थी। मवेशियों को पानी पिलाना और खेती करना दोनों ही कठिन हो जाता था। अब वही जल स्रोत पूरे वर्ष उपयोग में आ रहा है। ग्रामीण इस जल का उपयोग पेयजल, स्नान, कपड़े धोने, मवेशियों को पानी पिलाने और मत्स्य पालन जैसे कार्यों में कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत के सरपंच अर्जुन सिंह के अनुसार, इस योजना ने केवल जल संरक्षण ही नहीं किया, बल्कि 250 से अधिक श्रमिकों को रोजगार भी उपलब्ध कराया। निर्माण कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। आज कालामांजल के जल स्रोत पहले की तुलना में अधिक समृद्ध हैं और ग्रामीण भविष्य को लेकर आश्वस्त दिखाई देते हैं। खेती की संभावनाएँ बढ़ी हैं, मवेशियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है और मत्स्य पालन जैसी अतिरिक्त आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। ग्रामीणों ने इस सकारात्मक परिवर्तन के लिए राज्य शासन और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनका गाँव हर मौसम में पानी के भरोसे के साथ विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।

 हर बेटी को मिले सुरक्षित और स्वच्छ माहौल- राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा

 हर बेटी को मिले सुरक्षित और स्वच्छ माहौल- राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा

 डीएमएफ मद से तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में 3.50 करोड़ से बनेंगे आधुनिक बालिका शौचालय

​रायपुर, 05 अगस्त 2026/छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण अंचल की बेटियों को स्वच्छता, सम्मान और सुविधायुक्त शैक्षणिक माहौल प्रदान करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है। राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा के विशेष प्रयासों के फलस्वरूप तिल्दा विकासखंड के 50 ग्राम पंचायतों के शासकीय विद्यालयों में बालिका शौचालयों के निर्माण के लिए 3 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि की वित्तीय एवं प्रशासकीय मंजूरी प्रदान की गई है। जिला खनिज संस्थान न्यास मद से स्वीकृत यह सौगात क्षेत्र में बालिका शिक्षा को नए आयाम देने के साथ ही स्वच्छता अभियान को धरातल पर और अधिक सशक्त बनाएगी।

डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनेगी आधुनिक बालिका शौचालय

​इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार बेटियों के स्वाभिमान, बेहतर स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव अक्सर बेटियों की पढ़ाई में रुकावट बनता था। तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनने वाले ये आधुनिक बालिका शौचालय केवल एक निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि यह हमारी बेटियों के सम्मान और उनकी उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। विकास का यह प्रवाह अनवरत जारी रहेगा।

तिल्दा ब्लॉक की इन 50 गांवों को बनेगा शौचालय

​प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार सभी 50 ग्राम पंचायतों के विद्यालयों में 01-01 बालिका शौचालय का निर्माण किया जाएगा। ​इस योजना के तहत तिल्दा जनपद क्षेत्र के जिन 50 गांवों के विद्यालयों का चयन किया गया है, उनमें छपोरा, कोहका, मोहरेंगा, खौना, आलेसुर, कोटा, बोईरझीटी, अल्दा, मानपुर, इल्दा, सतभावा, सरोरा, भिंभौरी के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। इसी प्रकार मोतिमपुर कला, सगुनी, खपरीडीह खुर्द (चिंगरिया), ओटगन, सरफोंगा, छतौद, जंजगीरा, रजिया, भड़हा, बुडेरा, खमरिया (कोनारी), चांपा, सिनोधा,भरुवाडीह कला, खैरखूट(बलोदीखुर्द), जलसो के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। सरारीडीह, छच्छानपैरी, किरना, तुलसी(अ), मुड़पार, नहरडीह, कुम्हारी, लखना खपरीकला, मूरा, ताराशिव, असौंदा, केशला, बुड़गहन(सुंदरा), भिलौनी, कठिया, बिठिया, घिवरा, धनसुली, तुलसी मानपुर और कुंदरू के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

​क्षेत्र में उत्साह की लहर

​एक साथ 50 गांवों के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में 3.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की मंजूरी से पूरे तिल्दा क्षेत्र के ग्रामीणों, स्कूली छात्राओं और अभिभावकों में भारी उत्साह है। जनप्रतिनिधियों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा का आभार जताया है।मंत्री श्री वर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना इन्हें निर्धारित समयावधि के भीतर पूर्ण किया जाए।

विशेष लेख : नवजात का पहला सुरक्षा कवच- स्तनपान और इसका सामाजिक महत्व

विशेष लेख : नवजात का पहला सुरक्षा कवच- स्तनपान और इसका सामाजिक महत्व

 माँ का दूध नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक है

अमृत तुल्य है माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध

 रायपुर, 5 अगस्त 2026/ विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिशु के स्वास्थ्य के लिए माँ के दूध के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना है। जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और शुरुआती छह महीने तक केवल माँ का दूध ही देना बच्चे के लिए सबसे जरूरी है। स्तनपान के दौरान त्वचा से त्वचा का संपर्क मां और बच्चे के बीच भावनात्मक बंधन को मजबूत करता है, जिससे आराम, गर्माहट और सुरक्षा की भावना मिलती है जो स्वस्थ भावनात्मक विकास में सहायक होती है।

स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाती है

हर साल 1 अगस्त से 7 अगस्त तक दुनिया भर में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य माताओं और समाज को शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के अनुसार, शिशु के जन्म के बाद पहला घंटा और शुरुआती छह महीने उसका पूरा जीवन संवारने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। स्तनपान करने वाले शिशुओं में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुछ श्वसन संबंधी संक्रमण जैसी आम बचपन की बीमारियों का खतरा कम होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इष्टतम स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाकर विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष लाखों शिशु मृत्यु को रोकने की क्षमता रखता है।

अमृत तुल्य है पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम)

जन्म के पहले कुछ घंटों में, माँ का दूध सिर्फ़ भोजन नहीं होता, बल्कि यह नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक होती है, जो सीधे माँ के शरीर से बच्चे तक पहुँचती है। जन्म के बाद का पहला घंटा, जिसे अक्सर गोल्डन आवर कहा जाता है, स्तनपान शुरू करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान बच्चे स्वाभाविक रूप से सतर्क रहते हैं और सहज रूप से स्तन की तलाश करते हैं। त्वचा से त्वचा का शुरुआती संपर्क न केवल सफल स्तनपान की दर को बढ़ाता है, बल्कि बच्चे के तापमान, हृदय गति और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।

शिशु के जन्म के तुरंत बाद (एक घंटे के भीतर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलस्ट्रम कहा जाता है, बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका होता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीबॉडीज, प्रोटीन और विटामिन होते हैं, जो नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करते हैं और उसे विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से बचाते हैं।

शुरुआती 6 महीने केवल और केवल मां का दूध

चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि जन्म से लेकर 6 महीने की उम्र तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिए। इस अवधि के दौरान बच्चे को पानी, ऊपर का दूध या शहद जैसी चीजें देने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां के दूध में बच्चे की प्यास और भूख बुझाने के लिए सही अनुपात में पानी और सभी आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। 6 महीने पूरे होने के बाद, स्तनपान जारी रखते हुए बच्चे को धीरे-धीरे ऊपरी पौष्टिक आहार देना शुरू किया जा सकता है, जिसे 2 साल या उससे अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है।

स्तनपान के बहुआयामी लाभ

शिशु के लिए स्वास्थ्य वरदान है, स्तनपान कराने से बच्चों में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुपोषण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि स्तनपान करने वाले बच्चों का बौद्धिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य अन्य बच्चों की तुलना में बेहतर होता है। यह आगे चलकर बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और अस्थामा जैसी क्रोनिक बीमारियों की संभावना को घटाता है।

मां के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

स्तनपान कराने से माताओं में स्तन कैंसर और अंडाशय के कैंसर का जोखिम कम होता है। यह प्रसव के बाद वजन घटाने और गर्भाशय को पुनः सामान्य आकार में लाने में मदद करता है। मां और बच्चे के बीच एक भावनात्मक और अटूट संबंध स्थापित होता है।

समाज और परिवार की जिम्मेदारी

स्तनपान केवल एक मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज की साझी जिम्मेदारी है। अक्सर देखा जाता है कि जानकारी के अभाव, सामाजिक रूढ़ियों, या कामकाजी माहौल में सुविधाओं की कमी के कारण महिलाएं समय पर स्तनपान नहीं करा पातीं। प्रसव के बाद मां को सही पोषण, मानसिक शांति और आराम मिलना आवश्यक है ताकि वह बिना किसी तनाव के बच्चे को स्तनपान करा सके। कामकाजी माताओं के लिए कार्यस्थलों में क्रैच सुविधा, मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) और ब्रेस्टफीडिंग ब्रेक जैसी सुविधाएं होना बेहद जरूरी है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर माताओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ फीडिंग रूम की व्यवस्था होनी चाहिए।

स्तनपान एक स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी की नींव

विश्व स्तनपान सप्ताह हमें यह याद दिलाता है कि बच्चों को उनका मौलिक अधिकार मां का दूध दिलाने के लिए हम सभी को मिलकर एक अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। जब एक मां बिना किसी संकोच और बाधा के अपने बच्चे को स्तनपान करा सकेगी, तभी हम एक कुपोषण-मुक्त और स्वस्थ समाज की कल्पना साकार कर सकते हैं।

सशक्त बचपन, समृद्ध छत्तीसगढ़ : पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर

सशक्त बचपन, समृद्ध छत्तीसगढ़ : पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर

 00 बच्चों के पोषण, संरक्षण और सर्वांगीण विकास का नया अध्याय

रायपुर। किसी भी राज्य की वास्तविक प्रगति उसके बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा से मापी जाती है। छत्तीसगढ़ ने इसी सोच को आधार बनाकर बच्चों के सर्वांगीण विकास को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की दूरदर्शी नीतियों और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के सक्रिय नेतृत्व में प्रदेश में बच्चों के पोषण, संरक्षण और भविष्य निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं। आईसीडीएस, मिशन वात्सल्य, पोषण अभियान और बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन ने राज्य को बाल विकास के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।
आंगनबाड़ी केंद्र बन रहे बाल विकास के आधुनिक केंद्र
प्रदेश में 11 हजार 490 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम और आकर्षक बनाने का कार्य तेजी से जारी है। इन केंद्रों में बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड पेंटिंग, पोषण वाटिका, खेल एवं शिक्षण आधारित गतिविधियों जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे बच्चे सीखने के साथ आनंदमय वातावरण में विकसित हो सकें। मनरेगा अभिसरण के माध्यम से 2 हजार 337 नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को स्वीकृति मिली है। वहीं पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 191 नए आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा चुके हैं। नियद नेल्ला नार 2.0 के तहत 10 जिलों में 12 हजार 964 आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों तक सेवाएं पहुंचा रहे हैं। मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या 51 हजार 45 से बढ़कर 52 हजार 258 तथा सहायिकाओं की संख्या 44 हजार 826 से बढ़कर 51 हजार 548 हो गई है, जिससे सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार आया है।

पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर


कुपोषण पर प्रभावी प्रहार
छत्तीसगढ़ राज्य में बच्चों में कुपोषण कम करने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। पोषण ट्रैकर ऐप के आंकड़ों के अनुसार 0-5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में स्टंटिंग में 7.82 प्रतिशत की कमी, वेट में 4.36 प्रतिशत की कमी, अंडरवेट में 2.76 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। दिसंबर 2023 में जहां बौनापन की दर 30.27 प्रतिशत थी, वह जून 2026 तक घटकर 22.45 प्रतिशत रह गई। यह उपलब्धि पोषण प्रबंधन, नियमित मॉनिटरिंग, सामुदायिक सहभागिता और आंगनबाड़ी आधारित सेवाओं के प्रभावी संचालन का परिणाम है।
पोषण अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन
राष्ट्रीय पोषण माह और पोषण पखवाड़ा के दौरान छत्तीसगढ़ ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में छत्तीसगढ़ राज्य प्रति आंगनबाड़ी गतिविधियों में प्रथम स्थान पर रहा। अप्रैल 2025 के पोषण पखवाड़ा में भी छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया। प्रदेश में सितंबर-अक्टूबर 2025 के पोषण माह के दौरान 71 हजार 887 गतिविधियां और अप्रैल 2026 के पोषण पखवाड़ा में 34 लाख 93 हजार 474 गतिविधियां आयोजित की गईं। साथ ही स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए रेडी टू ईट इकाइयों की स्थापना की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल शुरू हो चुकी है।

पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर


मिशन वात्सल्य से बच्चों को सुरक्षा और संबल
अनाथ, परित्यक्त और विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए मिशन वात्सल्य प्रभावी सुरक्षा कवच बनकर उभरा है। राज्य में बाल देखरेख संस्थाओं की संख्या बढ़कर 109 हो गई है। मुख्यमंत्री बाल उदय योजना के माध्यम से सैकड़ों बच्चों को शिक्षा, देखभाल और पुनर्वास का लाभ मिला है। चाइल्ड हेल्पलाइन में प्राप्त 1 लाख 65 हजार 979 कॉलों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए हजारों मामलों का निराकरण किया गया। बाल संरक्षण सेवाओं के विस्तार का प्रभाव दत्तक ग्रहण और स्पॉन्सरशिप योजनाओं में भी स्पष्ट दिखाई देता है। दत्तक ग्रहण से लाभान्वित बच्चे 42 से बढ़कर 234 और स्पॉन्सरशिप से लाभान्वित बच्चे 767 से बढ़कर 2 हजार 37 हो गए हैं। यह वृद्धि बच्चों को पारिवारिक वातावरण और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार की संवेदनशील प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम
राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान ने सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक सक्रियता दोनों को नई दिशा दी है। बाल विवाह प्रतिरोध अधिकारियों की संख्या बढ़कर 1 हजार 382 हो गई है। इसके परिणामस्वरूप रोके गए बाल विवाहों की संख्या 109 से बढ़कर 888 तक पहुंच गई है। यह परिवर्तन केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बेटियों के शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव का संकेत है।

पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर


भविष्य की मजबूत नींव
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में संचालित ये प्रयास छत्तीसगढ़ के लाखों बच्चों को स्वस्थ, सुरक्षा, शिक्षित और सशक्त भविष्य की ओर अग्रसर कर रहे हैं। आधुनिक आंगनबाड़ी व्यवस्था, पोषण सुधार, बाल संरक्षण सेवाओं का विस्तार और बाल विवाह उन्मूलन जैसे बहुआयामी प्रयासों ने छत्तीसगढ़ को बाल विकास के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी और आदर्श राज्य के रूप में स्थापित किया है। सशक्त बचपन ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव है और राज्य सरकार उसी नींव को और अधिक मजबूत बनाने के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।

कर्तव्यनिष्ठ होकर जनसेवा एवं सुशासन के लिए जमीनी स्तर पर करें बेहतर कार्य : मुख्यमंत्री साय

कर्तव्यनिष्ठ होकर जनसेवा एवं सुशासन के लिए जमीनी स्तर पर करें बेहतर कार्य : मुख्यमंत्री साय

 00 प्रशासनिक सेवा जनविश्वास अर्जित करने का माध्यम, संवेदनशीलता और पारदर्शिता को बनाएं कार्यशैली का आधार

00 मुख्यमंत्री से 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकात
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने नवचयनित अधिकारियों को उनके भावी प्रशासनिक दायित्वों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा में चयन होना उपलब्धि अवश्य है, लेकिन वास्तविक सफलता तब है जब अधिकारी अपने पद का उपयोग जनसेवा, सुशासन और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए करें।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी शासन और जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उनके निर्णय, व्यवहार और कार्यशैली से आम नागरिक का शासन के प्रति विश्वास मजबूत होता है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी को संवेदनशीलता, पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करते समय जनता की अपेक्षाओं और स्थानीय परिस्थितियों को समझना अत्यंत आवश्यक है। अधिकारी यदि लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समयबद्ध समाधान की दिशा में कार्य करें, तो प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास स्वत: बढ़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा, वन संपदा, उर्वर भूमि और मजबूत ऊर्जा क्षमता उपलब्ध है। इन संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए राज्य को विकसित बनाने में प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में लंबे समय तक नक्सलवाद बड़ी बाधा रहा, लेकिन सुरक्षा बलों के साहस, केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति तथा जनविश्वास के कारण अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। जिन क्षेत्रों में कभी विकास पहुंचना कठिन था, वहां अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि उन्हें विशेष रूप से दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा। ऐसे क्षेत्रों में केवल प्रशासनिक दायित्व निभाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भाव भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिकारियों को चाहिए कि वे शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें

मुख्यमंत्री ने सुशासन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की गई है। साथ ही ई-ऑफिस प्रणाली लागू कर शासन की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, दक्ष और समयबद्ध बनाया गया है। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों का उपयोग प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजस्व से जुड़े विषय आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़े होते हैं। भूमि, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य राजस्व मामलों में लोगों को समय पर राहत मिलना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासनिक अधिकारी की छोटी-सी पहल भी किसी परिवार की बड़ी समस्या का समाधान कर सकती है। इसलिए अधिकारी संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएं और प्रत्येक प्रकरण को मानवीय दृष्टि से देखें।

उन्होंने अधिकारियों को व्यवहार में विनम्रता और संयम बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि लोगों की शिकायतों को सुनना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। कई बार केवल धैर्यपूर्वक शिकायत सुन लेने से ही आधी समस्या समाप्त हो जाती है। यदि अधिकारी जनता से संवाद नहीं करेंगे, तो छोटी समस्याएं भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। इसलिए प्रत्येक अधिकारी को जनता के प्रति सहज, सुलभ और उत्तरदायी रहना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके प्रशिक्षण अनुभवों की जानकारी भी ली तथा उन्हें भविष्य में अपने पदेन दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करते हुए प्रदेश के विकास और सुशासन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक टी.सी. महावर ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 2025 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों का इंडक्शन प्रशिक्षण अब पूर्ण हो चुका है। इसके पश्चात सभी प्रशिक्षु अधिकारी प्रदेश के विभिन्न जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में पदस्थ होकर शासन के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 बैच में कुल सात अधिकारी शामिल हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक  टी.सी. महावर, संयुक्त संचालक मेनका प्रधान तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति में आयोजित आरुग सम्मान समारोह का पोस्टर रायपुर प्रेस क्लब में विमोचित

स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति में आयोजित आरुग सम्मान समारोह का पोस्टर रायपुर प्रेस क्लब में विमोचित

 रायपुर। लोककला और पंडवानी परंपरा को समर्पित प्रसिद्ध पंडवानी गायिका स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति में आयोजित होने वाले आरुग सम्मान समारोह के पोस्टर का विमोचन बुधवार को रायपुर प्रेस क्लब में किया गया।
यह सम्मान समारोह 7 अगस्त को शहीद स्मारक, रायपुर में आयोजित होगा। कार्यक्रम का आयोजन अलीम बंसी, तीजन बाई के परिवारजनों के द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। समारोह में लोककला, संस्कृति और पंडवानी की विरासत को आगे बढ़ाने वाले कलाकारों का सम्मान किया जाएगा तथा स्वर्गीय तीजन बाई के कला-साधना से जुड़े अविस्मरणीय योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाएगा।पोस्टर विमोचन के अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी , कोषाध्यक्ष दिनेश यदु सहित आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने प्रदेशवासियों एवं कला प्रेमियों से बड़ी संख्या में समारोह में शामिल होकर स्वर्गीय तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करने और कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने की अपील की।

BIG ब्रेकिंग: साय कैबिनेट ने लिये कई अहम फैसले, पढ़िए मंत्रिपरिषद की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय…

BIG ब्रेकिंग: साय कैबिनेट ने लिये कई अहम फैसले, पढ़िए मंत्रिपरिषद की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय…

 दिनांक : 05 अगस्त 2026 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –

1. मंत्रिपरिषद ने ’छत्तीसगढ़ राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन’ को मंजूरी दी है। इस मिशन का उद्देश्य राज्य में सुशासन, नई तकनीक, कौशल विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। यह मिशन 5 वर्षों के लिए होगा, जिस पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इस मिशन के तहत – 100 AI डेटा लैब बनाई जाएंगी, 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, 300 से अधिक AI स्टार्टअप्स को सहायता दी जाएगी, 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को AI का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन के कार्यों को आसान और तेज़ बनाने के लिए 50 से अधिक AI आधारित सेवाएं विकसित की जाएंगी।

यह मिशन भारत सरकार के IndiaAI Mission के अनुरूप छत्तीसगढ़ को उत्तरदायी, नवाचार-आधारित और भविष्य उन्मुख डिजिटल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

2. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ में हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट (Heavy Earth Moving Equipment) मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र की स्थापना के लिए भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को रियायती दर पर भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बीईएमएल भारत सरकार का एक प्रतिष्ठित मिनीरत्न सार्वजनिक उपक्रम है। हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र हेतु यह राज्य का पहला उद्योग होगा, जिसकी स्थापना से छत्तीसगढ़ को देश के औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी और राज्य में आधुनिक भारी मशीन निर्माण उद्योग की शुरुआत होगी।

मंत्रिपरिषद के इस महत्वपूर्ण निर्णय से राज्य में बड़े निवेश को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। राज्य में संयंत्र की स्थापना से औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और छत्तीसगढ़ विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा।

3. मंत्रिपरिषद् ने लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए वर्क्स एण्ड अकाउंट मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (WAMIS) लागू करने के प्रथम चरण को मंजूरी दी है। इस प्रणाली के माध्यम से कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB), बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन तथा गुणवत्ता की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगी। सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित इस प्रणाली को पहले लोक निर्माण विभाग में लागू किया जाएगा, जिसके बाद अन्य निर्माण एवं अधोसंरचना विभागों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। इससे निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, भुगतान की प्रक्रिया तेज होगी, कार्यों की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और परियोजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनेगा।

4. मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना अंतर्गत बारहमासी सड़कों के निर्माण हेतु जारी दिशा-निर्देशों में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। संशोधनों के तहत ग्रामीण आंतरिक गलियों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण तथा सड़क निर्माण से पूर्व मनरेगा से मिट्टी कार्य की अनिवार्यता समाप्त की गई है। योजना की पात्रता का दायरा बढ़ाकर ऐसे सभी ग्रामीण मार्गों को शामिल किया गया है, जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अथवा अन्य योजनाओं में सम्मिलित नहीं हैं। आवश्यकता अनुसार नाबार्ड ऋण, पर्यावरण एवं अधोसंरचना विकास मद, खनिज न्यास मद सहित अन्य स्रोतों से भी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा सकेंगे। कार्यों का अनुमोदन प्रशासनिक विभाग करेगा तथा क्रियान्वयन की समीक्षा एवं अंतर्विभागीय समन्वय के लिए राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की जाएगी।

5. मंत्रिपरिषद् ने वित्त विभाग के उस प्रस्ताव का अनुमोदन किया है, जिसके तहत Asian Development Bank (ADB) से छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के क्रियान्वयन हेतु “Anjor LIGHT (Anjor Linked Implementation & Guidance for Holistic Tracking)’’ तकनीकी सहायता परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये का पूर्णतः अनुदान (Grant) प्राप्त किया जाएगा। यह तीन वर्ष (1 दिसंबर 2026 से 30 नवंबर 2029) की बहु-क्षेत्रीय परियोजना है, जिसमें राज्य शासन अथवा भारत सरकार का कोई वित्तीय अंशदान नहीं होगा।

परियोजना के अंतर्गत सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को सुदृढ़ करना, PPP इकोसिस्टम का विकास, ग्रीन एवं ब्लेंडेड फाइनेंस को बढ़ावा देना, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों (SOEs) की कार्यक्षमता में सुधार, क्लाइमेट-रेजिलिएंट परियोजनाओं का विकास तथा छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुरूप प्राथमिकता आधारित परियोजनाओं की पाइपलाइन तैयार की जाएगी। इसके लिए परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) की स्थापना की जाएगी।

यह परियोजना पूर्णतः अनुदान आधारित होने से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा तथा इससे संस्थागत क्षमता निर्माण, निवेश संवर्धन और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति को गति मिलेगी।

6. मंत्रिपरिषद् ने राज्य योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की राशि का अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। अब योजनाओं की राशि विभिन्न बैंक खातों में लंबे समय तक निष्क्रिय नहीं रहेगी, बल्कि एक केंद्रीकृत मदर अकाउंट के माध्यम से आवश्यकता होने पर ही सीधे हितग्राहियों या वेंडरों को भुगतान किया जाएगा। यह मॉडल भारत सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजनाओं में लागू SNA प्रणाली की तर्ज पर राज्य की योजनाओं में भी लागू किया जाएगा, जिससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को और मजबूती मिलेगी।

इस व्यवस्था से योजनाओं के क्रियान्वयन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी, वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा और निष्क्रिय राशि, गबन तथा बैंकिंग धोखाधड़ी जैसी संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। साथ ही, राज्य की नकदी प्रबंधन क्षमता बेहतर होगी, ब्याज का अनावश्यक बोझ कम होगा और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

7. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को आमजन एवं संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 200 करोड़ रूपए तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD)/बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध (लिस्टिंग) किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय से कंपनी के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के नए विकल्प उपलब्ध होंगे, ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा राज्य के विद्युत अवसंरचना विकास को और गति मिलेगी।

इसके लिए राज्य शासन द्वारा मूलधन एवं ब्याज के भुगतान पर प्रत्याभूति शुल्क में छूट सहित गारंटी प्रदान की जाएगी। साथ ही, लिस्टिंग प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक निर्णय लेने हेतु कंपनी के संचालक मंडल तथा आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए ऊर्जा विभाग को अधिकृत किया गया है।

मंत्री राजवाड़े के प्रयासों से 97 गांवों में होगा विद्युत विस्तार

मंत्री राजवाड़े के प्रयासों से 97 गांवों में होगा विद्युत विस्तार

 00 11.62 करोड़ की लागत से दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचेगी बिजली

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री एवं भटगांव विधानसभा की विधायक लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों से धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत भटगांव विधानसभा क्षेत्र के 97 गांवों में विद्युत विस्तार कार्य स्वीकृत किया गया है। लगभग 11.62 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत इस परियोजना के माध्यम से सूरजपुर जिला के दूरस्थ गांवों और मोहल्लों तक विद्युत सुविधा पहुंचाई जाएगी, जिससे हजारों ग्रामीण परिवार लाभान्वित होंगे।

राज्य शासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वीकृत कार्यों में विकासखंड भैयाथान के 36 गांवों के लगभग 109 मोहल्लों/पारों, विकासखंड ओडग़ी के 32 गांवों के लगभग 68 मोहल्लों/पारों तथा विकासखंड सूरजपुर के 29 गांवों के लगभग 53 मोहल्लों/पारों में विद्युत विस्तार किया जाएगा। यह परियोजना विशेष रूप से उन ग्रामीण और जनजातीय बस्तियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां अब तक पर्याप्त विद्युत सुविधा उपलब्ध नहीं थी। बिजली पहुंचने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कार्य, पेयजल व्यवस्था, कृषि आधारित गतिविधियों तथा ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य विकास की रोशनी को अंतिम छोर तक पहुंचाना है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्वीकृति भटगांव विधानसभा के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति देगी। उन्होंने कहा कि हर घर और हर आंगन तक बिजली पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे ग्रामीण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और जनजातीय क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं साकार होंगी।

प्रदेश में 1460 गौधामों की होगी स्थापना, 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण

प्रदेश में 1460 गौधामों की होगी स्थापना, 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण

 00 42 गौधामों में लगभग 5109 पशुधन संरक्षित

रायुपर। गौधाम योजना का उद्देश्य प्रदेश में बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना, उनके संरक्षण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। गोधन हमारी ग्रामीण संस्कृति, कृषि व्यवस्था और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य सरकार गोधन संरक्षण और बेसहारा मवेशियों की देखभाल के लिए गौधाम योजना को राज्यभर में चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है, जिससे गौसेवा की परंपरा को मजबूती मिलने के साथ ही पशुधन संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। 
प्रदेश में 1460 गौधामों की होगी स्थापना
संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं से प्राप्त जानकारी के अनुसार घुमन्तू एवं निराश्रित पशुधन के व्यवस्थापन हेतु शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग रायपुर को 1460 गौधाम योजना के तहत स्वीकृति प्रदान की गई। प्रथम चरण में ऐसे गौठानों का चयन किया गया है जो राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप है एवं जहां समस्त आवश्यक अधोसंरचना पूर्ण हैं। गौधाम योजना के प्राप्त 408 आवेदनों में से 151 को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जिसमें पंजीयन पूर्ण कर पशुओं के व्यवस्थापन की कार्यवाही की जा रही है। 
42 गौधामों में लगभग 5109 पशुधन संरक्षित
गौधाम योजना अंतर्गत ऐसी शासकीय भूमि जहां अधोसंचना पूर्ण हो एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप हो, जैसे गौठान को चिन्हांकित कर स्वयं सेवी संस्था, पंजीकृत गौशाला, एन.जी.ओ. एफ.पी.ओ. ट्रस्ट के माध्यम से संचालित किया जाना है। वर्तमान में 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण कर लिया गया है और 42 गौधामों में लगभग 5109 पशुधन संरक्षित है। कलेक्टर/जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा, पंचायत द्वारा प्रदायित अनापत्ति प्रमाण पत्र एवं जिला स्तर पर गठित समिति के भौतिक सत्यापन पश्चात, गौधाम के आवेदन छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को प्रेषित किये जाते हैं। प्राप्त आवेदन आयोग के क्रियान्वयन समिति की अनुशंसा हेतु प्रत्येक 03 माह में एक बार आयोजित बैठक में विस्तृत समीक्षा की जाती है, तत्पश्चात प्रशासकीय स्वीकृति हेतु शासन को प्रेषित की जाती है। 
प्रत्येक विकास खण्ड में उत्कृष्ठ 10 गौठानों का किया जाएगा चयन

प्रशासकीय स्वीकृति पश्चात आयोग के साथ अनुबंध एवं पंजीयन पश्चात जिला प्रशासन के माध्यम से गौधाम में घुमन्तू पशुओं का व्यवस्थापन किया जाता है। पशुधन विकास विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग नियम संशोधित कर गौधाम संचालन हेतु ग्राम पंचायत को प्राथमिकता दी गई। साथ-साथ शहरी गौठान को भी योजना में शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग द्वारा प्रेषित प्रस्ताव एवं शासन द्वारा स्वीकृत योजना में गौधाम निर्माण के लक्ष्य निर्धारित नहीं हैं, परन्तु अध्यक्ष गौ सेवा आयोग द्वारा परिकल्पना की गई है कि प्रत्येक विकास खण्ड में उत्कृष्ठ 10 गौठानों का चयन कर पूरे प्रदेश के 1460 गौधामों की स्थापना की जाएगीं।ग्राम पंचायत के माध्यम से गौधाम संचालन के नियम संशोधन एवं शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल करने के पश्चात निश्चित रूप से भविष्य में गौधाम के संख्या में बढोतरी होगी। आवश्यकता अनुसार जिलों से गौधाम स्थापना हेतु आवेदन प्राप्त हो रहे है, जिस पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

लोक कलाओं के संरक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में संस्कृति विभाग की महत्वपूर्ण पहल

लोक कलाओं के संरक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में संस्कृति विभाग की महत्वपूर्ण पहल

 मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के लिए आवेदन आमंत्रित

चयनित कलाकारों को मिलेंगे प्रतिवर्ष 12 से 24 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि

रायपुर, 5 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के अंतर्गत प्रदेश के लोक कलाकारों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। योजना का उद्देश्य पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना, कलाकारों का सम्मान बढ़ाना तथा कला दलों के सतत विकास को नई गति प्रदान करना है।

योजना के अंतर्गत नृत्य-संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कलाकार, छत्तीसगढ़ी पाक कला (पारंपरिक व्यंजन) तथा छत्तीसगढ़ी सौंदर्यकला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजे जाएंगे। आवेदन प्रपत्र विभाग की वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध हैं तथा संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर स्थित कार्यालय से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

योजना के तहत पात्र कलाकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य होगा। चयनित कलाकारों को प्रतिवर्ष न्यूनतम 12 हजार रुपये से अधिकतम 24 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि ई-पेमेंट के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह राशि एक वित्तीय वर्ष में एक बार प्रदान की जाएगी।

योजना का लाभ केवल ऐसे कलाकारों को मिलेगा जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 96 हजार रुपये से अधिक नहीं है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ बैंक खाते का विवरण, आईएफएससी कोड तथा पैन कार्ड की छायाप्रति भी प्रस्तुत करनी होगी।

प्रविष्टियां भेजने का पता –
संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय,
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, व्यावसायिक परिसर,
द्वितीय तल, सेक्टर-27, नया रायपुर, अटल नगर (छत्तीसगढ़) – 492018

प्रविष्टियां प्राप्त होने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन भेजते समय लिफाफे पर "मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026" स्पष्ट रूप से अंकित करना आवश्यक होगा। प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण समिति द्वारा किया जाएगा तथा समिति का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।

मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना प्रदेश की समृद्ध लोक कला परंपराओं के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से लोक कलाकारों को न केवल आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी प्राप्त होगा।

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री साय

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री साय

 रायपुर: खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन का आधार है। छत्तीसगढ़ सरकार कृषि और किसानों की समृद्धि को प्राथमिकता देते हुए खेती को अधिक लाभकारी, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।  किसानों की आय बढ़ाने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल विविधिकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग, कृषि यंत्रीकरण तथा कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर  में आयोजित ‘किसान और किसानी-प्रोत्साहन तथा परिणाम’ विषयक संवाद कार्यक्रम में यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों को उत्कृष्ट खेती, नवाचार और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया। कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों, उद्योग जगत तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

किसान परिवार से जुड़ाव ने खेती की चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर दिया – मुख्यमंत्री  साय

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनका जीवन स्वयं खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। किसान परिवार में जन्म लेने के कारण उन्होंने बचपन से खेतों में काम किया और खेती की कठिनाइयों तथा किसानों की आवश्यकताओं को निकट से देखा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में दिल्ली में रहने के दौरान भी वे नियमित रूप से अपने गांव और खेत की जानकारी लेते थे तथा गांव पहुंचने पर खेत अवश्य जाते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। पहले किसान पूंजी के अभाव में साहूकारों या कर्ज पर निर्भर रहते थे, जबकि आज किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्हें समय पर ऋण उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड योजना प्रारंभ किए जाने को किसानों के लिए ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि आज किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर केसीसी ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे खेती करना पहले की तुलना में अधिक सहज हुआ है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार बनने के बाद सबसे पहले किसानों से किए गए वादों को पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां किसानों को धान का सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान की खरीदी कर रही है। इसके साथ ही पूर्व में लंबित दो वर्ष के बोनस का भी भुगतान किसानों को किया गया।

उन्होंने बताया कि पिछले खरीफ विपणन सीजन में राज्य के लगभग 25 लाख किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी की गई, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना है और राज्य सरकार उसी दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना, उत्पादन लागत कम करना तथा खेती के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराना है ताकि खेती लाभ का व्यवसाय बन सके।

उन्होंने कहा कि केवल धान आधारित खेती पर निर्भर रहने के बजाय किसानों को विविध फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं।

फसल विविधिकरण को मिलेगा प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी जैसी फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ आदान सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए बागवानी, सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी तथा लघु वनोपज आधारित गतिविधियों को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय के अनेक स्रोत विकसित हो सकें।

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने में सिंचाई सुविधाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार अधिक से अधिक खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नई सिंचाई परियोजनाओं, बैराज, एनीकट तथा नहर विस्तार पर तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि किसानों को सोलर सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान पर आधुनिक कृषि यंत्र भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी पर मटनार और देऊरगांव में लगभग 2 हजार करोड़ रुपये की लागत से बैराज निर्माण किया जाएगा, जिससे हजारों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही सिकासार-कोडार नहर लिंकिंग परियोजना के लिए लगभग 3 हजार करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसका लाभ मैदानी छत्तीसगढ़ के किसानों को मिलेगा। विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के पुनर्निर्माण एवं सुधार कार्यों के लिए भी लगभग 2800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

बस्तर में विकास का नया दौर

मुख्यमंत्री नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की योजनाओं की पहुंच बढ़ी है। उन्होंने बताया कि जिन सुरक्षा शिविरों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है, उन्हें सेवाडेरा के रूप में विकसित किया जा रहा है और लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को सेवाडेरा में परिवर्तित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नेतानार स्थित सेवाडेरा में इमली की पैकेजिंग जैसी गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल रहे हैं।

आधुनिक तकनीक से बदल रही खेती की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं ड्रोन दीदी बनकर नैनो डीएपी का छिड़काव कर रही हैं और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से बेहतर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आज अनेक शिक्षित युवा अच्छी नौकरियां छोड़कर आधुनिक खेती और कृषि आधारित उद्यमों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो कृषि क्षेत्र में बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।

नई उद्योग नीति से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य की नई उद्योग नीति को देशभर में सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश संबंधी समझौते (एमओयू) किए जा चुके हैं, जिनमें से अनेक परियोजनाओं पर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, डाटा सेंटर सहित अनेक नए क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

शिक्षा,  स्वास्थ्य और अधोसंरचना में भी तेजी से हो रहा विकास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कृषि विकास के साथ-साथ राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के क्षेत्र में भी व्यापक परिवर्तन ला रही है। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान संचालित हैं। बस्तर में नक्सलवाद कम होने के बाद शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है और अब वहां ब्रेन ट्यूमर जैसी जटिल सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में रेल अधोसंरचना का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। राज्य के 32 रेलवे स्टेशनों का विश्वस्तरीय उन्नयन किया जा रहा है। हाल ही में खरसिया-परमलकसा रेल लाइन को स्वीकृति मिली है तथा लंबे समय से लंबित कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना भी अब साकार होने जा रही है।

कार्यक्रम में उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन जी महाराज, नई दुनिया  समाचार पत्र के संपादक सतीश चंद्र श्रीवास्तव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में फिर एक्टिव हुआ मानसून: अगले 3 दिन झमाझम बारिश के आसार, कई जिलों में भारी वर्षा और वज्रपात का अलर्ट…

छत्तीसगढ़ में फिर एक्टिव हुआ मानसून: अगले 3 दिन झमाझम बारिश के आसार, कई जिलों में भारी वर्षा और वज्रपात का अलर्ट…

 रायपुर. सावन माह में मजबूत मौसम तंत्र के प्रभाव से छत्तीसगढ़ फिर भीगने के लिए तैयार है. आगामी तीन दिनों तक मौसम बिगड़ा हुआ रहने वाला है. पिछले 24 घंटों में प्रदेश के अधिकतर इलाकों में बारिश हुई. उत्तरी इलाकों में सबसे ज्यादा पानी गिरा है. प्रदेश में मौसमी बारिश सामान्य से 7 प्रतिशत कम दर्ज की गई है.

4 अगस्त से अगले चार दिनों तक रायपुर समेत प्रदेश के अधिकतर जिलों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना जताई है. कुछ स्थानों पर भारी बारिश और गरज-चमक के साथ वज्रपात की संभावना बनी रहेगी. वहीं प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं.

रायपुर में उमस से राहत के आसार नहीं

राजधानी रायपुर के लिए मौसम विभाग ने स्थानीय पूर्वानुमान जारी किया है. इसके मुताबिक बुधवार को आकाश में बादल छाए रह सकते हैं. वहीं बादल गरजने-चमकने के साथ बारिश होने की संभावना है. इस दौरान अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने के आसार हैं.

तीन सिस्टम हैं एक्टिव

मौसम विभाग ने बताया कि समुद्र तल पर मॉनसून द्रोणिका अनूपगढ़, दिल्ली, शाहजहांपुर, बस्ती, छपरा और नागालैंड तक बनी हुई है. उत्तर-पश्चिम बिहार के क्षेत्र में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. वहीं बंगाल की खाड़ी आंध्र प्रदेश के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है.

इन इलाकों में जमकर हुई बारिश

मौसम विभाग के जारी आंकड़ों के अनुसार, शंकरगड़ में 11 सेमी, कुसमी, रतनपुर, सक्ती और भोपालपट्टनम में 7 सेमी, सुकमा और सकोला में 6 सेमी और सरागांव और बीजापुर में 5 सेमी बारिश हुई है. वीं पेंड्रा, भैरमगढ़, करपावंड, छाल, बरमकेला, सरिया और बम्हनीडीह में 4 सेमी पानी गिरा. इसके अलावा अनेक स्थानों पर इससे काम वर्षा हुई.

राज्यपाल रमेन डेका से स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सौजन्य भेंट की

राज्यपाल रमेन डेका से स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सौजन्य भेंट की

 रायपुर: राज्यपाल  रमेन डेका से लोकभवन में स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव ने सौजन्य भेंट की।