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छत्तीसगढ़ में 6 दिवसीय फेम ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न, छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिली नई दिशा

छत्तीसगढ़ में 6 दिवसीय फेम ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न, छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिली नई दिशा

 रायपुर, 20 मार्च 2026- छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से राज्य के पर्यटन स्थलों के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से 13 से 18 मार्च तक आयोजित 6 दिवसीय विशेष फेम (FAM) ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। यह आयोजन राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच और पर्यटन को आर्थिक विकास के प्रमुख साधन के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ में 6 दिवसीय फेम ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न, छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिली नई दिशा

इस ट्रिप में देश के विभिन्न राज्यों—दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, ओडिशा, चेन्नई, बेंगलुरु एवं अंडमान-निकोबार से आए लगभग 30 टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट्स ने भाग लिया। इन प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित कर उत्तर एवं दक्षिण छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया गया, जिससे उन्हें राज्य की विविध पर्यटन संभावनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।

उत्तर छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर, मैनपाट, रामगढ़ और जशपुर जैसे स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता एवं इको-टूरिज्म संभावनाओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। वहीं दक्षिण छत्तीसगढ़ में कांगेर घाटी, कोंडागांव, जगदलपुर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा, बारसूर एवं धुडमारास जैसे स्थलों के माध्यम से बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक वैभव का अनुभव कराया गया।

छत्तीसगढ़ में 6 दिवसीय फेम ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न, छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिली नई दिशा

फेम ट्रिप के दौरान बस्तर स्थित विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात ने प्रतिभागियों को विशेष रूप से आकर्षित किया, जहां उन्होंने बोटिंग के साथ प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया। चित्रकोट के प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन कर उन्होंने आध्यात्मिक अनुभव भी प्राप्त किया। इसके अलावा स्थानीय हाट-बाजारों का भ्रमण कर प्रतिभागियों ने जनजातीय जीवनशैली, पारंपरिक आयोजनों और सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझा, जो छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान है।

ऐतिहासिक नगरी बारसूर के बत्तीसा मंदिर एवं प्राचीन गणेश प्रतिमाओं का अवलोकन कर राज्य की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर संभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर पर्यटन विकास, सुरक्षा व्यवस्था एवं बुनियादी सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की, जिससे राज्य में पर्यटन के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण का विश्वास मजबूत हुआ।
मैनपाट एवं जशपुर क्षेत्र में इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे मॉडल की संभावनाओं को प्रस्तुत करते हुए राज्य सरकार की योजनाओं और पहल की सराहना की गई। कुनकुरी का गिरजाघर, राजपुरी जलप्रपात तथा केरे विलेज के महुआ होमस्टे जैसे स्थलों ने यह सिद्ध किया कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन के विविध आयाम विकसित किए जा सकते हैं।

फेम ट्रिप का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव यह है कि इसमें शामिल टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट्स अपने-अपने राज्यों में छत्तीसगढ़ को एक उभरते हुए और आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में प्रचारित करेंगे। इससे राज्य में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की प्रबल संभावना है।
पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, खासकर होटल, ट्रांसपोर्ट, गाइड सेवा, हस्तशिल्प एवं स्थानीय बाजारों को सीधा लाभ मिलेगा। जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन के बढ़ने से स्थानीय संस्कृति को संरक्षण एवं पहचान मिलेगी, साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

इसके अतिरिक्त, इस प्रकार के आयोजनों से राज्य की सकारात्मक छवि राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होती है, जिससे निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलता है और पर्यटन अधोसंरचना के विकास को गति मिलती है।

समापन समारोह में पर्यटन मंडल के अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने ट्रैवल पार्टनर्स से छत्तीसगढ़ को देशभर में बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जा रही बेहतर सुविधाओं, सुरक्षित वातावरण और आतिथ्य की परंपरा पर विश्वास जताया। प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने भी प्रतिभागियों से अपने अनुभवों को व्यापक स्तर पर साझा करने और अधिक पर्यटकों को छत्तीसगढ़ लाने में सहयोग करने की अपील की।
प्रतिभागियों ने छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए इसे “हिडन जेम” बताया और भविष्य में यहां अधिक पर्यटकों को लाने का भरोसा जताया।
यह 6 दिवसीय फेम ट्रिप छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड एवं राज्य सरकार की प्रभावी रणनीति का प्रमाण है, जो राज्य को देश के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।


 

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर

 शांति, विश्वास और विकास-बस्तर हेरिटेज मैराथन एक मज़बूत संदेश

बस्तर की वादियों में गूँजेगी बदलाव की नई आहट, बस्तर हेरिटेज मैराथन को लेकर पुनर्वासित जनों में अभूतपूर्व उत्साह

खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने 25 लाख रुपये की पुरस्कार की घोषणा

रायपुर, 20 मार्च 2026- बस्तर में आपका स्वागत है, जहाँ विरासत जीवंत है और प्रकृति साँस लेती है। बस्तर हेरिटेज मैराथन में प्राचीन वन, जीवंत आदिवासी संस्कृति और मनमोहक परिदृश्य समाहित हैं। धावक साल के पेड़ों से घिरे सुरम्य मार्गों और प्राचीन गाँवों से गुजरेंगे, और हर कदम पर बस्तर की सुंदरता का अनुभव करेंगे। छत्तीसगढ़ के बस्तर में रोमांच और प्रकृति के बीच एक खास आयोजन होने जा रहा है। 22 मार्च 2026 को बस्तर हेरिटेज मैराथन  2026 का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के धावक हिस्सा ले सकेंगे। इस मैराथन की शुरुआत हगदलपुर के लाल बाग मैदान से होगी और फिनिश लाइन एशिया के नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात पर होगी। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि की घोषणा की गई है।

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर

बस्तर की शांत वादियों में इस बार केवल प्रकृति का संगीत नहीं, बल्कि बदलाव और विकास के संकल्प की एक अभूतपूर्व गूँज सुनाई देने वाली है।  इस मैराथन की सबसे गौरवशाली और मानवीय तस्वीर उन आत्म-समर्पित माओवादियों के रूप में उभर कर सामने आ रही है, जो कभी दुर्गम जंगलों के अंधेरों में भटकते थे, लेकिन अब समाज की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा बनकर इस खेल महाकुंभ में अपनी शारीरिक शक्ति और जीवटता का परिचय देने को बेताब हैं। हिंसा का मार्ग त्याग कर शांति की राह चुनने वाले इन युवाओं का यह उत्साह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि बस्तर अब पुराने संघर्षों के साये से बाहर निकलकर खेल, साहस और शौर्य के वैश्विक मंच पर अपनी एक नई और सकारात्मक पहचान गढ़ रहा है।

इस मैराथन में 42 कि.मी., 21 कि.मी., 10 कि.मी. और 5 कि.मी. जैसी अलग-अलग कैटेगरी रखी गई हैं, ताकि हर स्तर के रनर्स इसमें भाग ले सकें। प्रतियोगिता में 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी रखी गई है और बस्तर संभाग के धावकों के लिए अलग से पुरस्कार की व्यवस्था की गई है। यह आयोजन बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती, संस्कृति और खेल भावना को एक साथ जोड़ने का खास मौका बनने जा रहा है।

बस्तर की फिजाओं में अब हिंसा के बारूद की नहीं, बल्कि उम्मीदों और सपनों की उड़ान की खुशबू तैर रही है। कभी जिन हाथों में बंदूकें हुआ करती थीं और जो पैर घने जंगलों की खाक छानते थे, वे अब बस्तर मैराथन के ट्रैक पर अपनी किस्मत आजमाने और एक नई पहचान बनाने को पूरी तरह तैयार हैं। दंतेवाड़ा के लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान और पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) जैसे प्रभावी पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से दर्जनों पूर्व नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने का ऐतिहासिक फैसला किया है। शासन की कल्याणकारी पुनर्वास नीति के तहत ये युवा अब अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग कर रहे हैं और जंगल की संकरी पगडंडियों पर छिपने के बजाय मैराथन की फिनिशिंग लाइन को छूने का लक्ष्य लेकर कड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं।

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर

स्थानीय खेल मैदानों में आयोजित अभ्यास सत्रों के दौरान इन युवाओं का जोश देखते ही बनता है, जहाँ पसीने से तर-बतर चेहरे और दृढ़ संकल्प वाली आँखें बस्तर के बदलते स्वरूप की गवाही दे रही हैं। प्रशिक्षकों का मानना है कि इन युवाओं में अदम्य साहस और बेमिसाल स्टेमिना है, जिसे अब आधुनिक रनिंग तकनीकों के माध्यम से तराशा जा रहा है ताकि वे न केवल दौड़ें, बल्कि जीत का परचम भी लहरा सकें। इस बदलाव का मानवीय पक्ष तब और उभर कर आता है जब शिविर की महिला प्रतिभागी भावुक होकर बताती हैं कि डर के साये से निकलकर अब उन्हें समाज में सम्मान और सुरक्षा मिल रही है। यह अनूठी पहल केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जंगल की हिंसा और भटकाव को पीछे छोड़कर एथलेटिक्स में करियर बनाने का एक सुनहरा अवसर है। अनुभवी कोचों द्वारा दी जा रही प्रोफेशनल ट्रेनिंग इन युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बना रही है, जिससे वे स्थानीय समुदाय के साथ जुड़कर एक नई पहचान तलाश रहे हैं।

अंततः यह प्रयास बस्तर में शांति, विश्वास और प्रगति का एक सशक्त संदेश दे रहा है, जहाँ पूरा दंतेवाड़ा इन युवाओं के हौसले को सलाम करते हुए मैराथन के ट्रैक पर उनकी ऐतिहासिक जीत की राह देख रहा है। इस मैराथन के माध्यम से ये पूर्व माओवादी न केवल अपनी दमखम का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश भी देंगे कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो बस्तर का हर हाथ राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सहभागी बन सकता है। ऐतिहासिक लालबाग मैदान की मिट्टी से शुरू होकर विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के कल-कल करते तटों पर समाप्त होने वाली यह 42 किलोमीटर की श्फुल मैराथनश् इन समर्पित युवाओं की भागीदारी को विशेष रूप से रेखांकित करेगी।

आयोजन को पूरी तरह समावेशी बनाने के उद्देश्य से इसमें 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर की दौड़ और 5 किलोमीटर की श्फन रनश् जैसी श्रेणियां भी रखी गई हैं, जहाँ बस्तर के स्थानीय धावकों और मुख्यधारा में लौटे इन युवाओं का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन ने 25 लाख रुपये की विशाल इनामी राशि की घोषणा की है, जिसमें बस्तर कैटेगरी के विशेष प्रावधानों ने स्थानीय समुदायों के साथ-साथ इन युवाओं के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया है। विशेषकर 10 किलोमीटर की श्रेणी में जूनियर और ओपन वर्ग के अलग-अलग प्रावधानों ने पहली बार दौड़ने वाले युवाओं और फिटनेस प्रेमियों के बीच जबरदस्त आकर्षण पैदा किया है। स्थानीय सहभागिता को अधिकतम करने के लिए बस्तर जिले के सभी धावकों हेतु पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है, ताकि कोई भी प्रतिभा आर्थिक तंगी के कारण इस ऐतिहासिक अवसर से वंचित न रह जाए।

इच्छुक खिलाड़ी आधिकारिक वेबसाइटwww.bastarheritage.runया जारी विज्ञापनों में उपलब्ध क्यूआर कोड के माध्यम से अपना स्थान सुरक्षित कर सकते हैं, जबकि किसी भी प्रकार की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर +91-92440-79533 भी सक्रिय कर दिया गया है। निश्चित रूप से, 22 मार्च को जब ये धावक चित्रकोट की लहरों के साथ कदमताल करेंगे, तो वे केवल फिनिश लाइन की ओर नहीं भाग रहे होंगे, बल्कि बस्तर के एक नए, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील भविष्य की पटकथा लिख रहे होंगे।

22 मार्च 2026 (रविवार) को जगदलपुर से चित्रकोट तक आयोजित होने वाली बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 में बस्तर संभाग के सभी सात जिलोंकृसुकमा, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कांकेर एवं कोंडागांव से 200 से अधिक पुनर्वासित माओवादी कैडर उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। इस आयोजन में उनके साथ-साथ विभिन्न वर्गों के प्रतिभागी, पेशेवर एवं स्थानीय एथलीट, युवा, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में नागरिक भी सम्मिलित हो रहे हैं। यह मैराथन खेल भावना के साथ-साथ बस्तर में शांति, एकता एवं सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बनकर उभर रही है।

आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों की यह सक्रिय सहभागिता “पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) की अवधारणा को साकार रूप देती है, जो शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का मूल उद्देश्य है। “पूना मारगेम” के माध्यम से इन कैडरों को हिंसा के मार्ग से हटाकर समाज की मुख्यधारा में जोड़ने, उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने तथा नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। मैराथन जैसे आयोजनों में उनकी भागीदारी इस सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण है। बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 का उद्देश्य बस्तर क्षेत्र को एक नई पहचान देना, पर्यटन एवं सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना तथा बस्तर की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है।

आत्मसमर्पित कैडरों, स्थानीय नागरिकों एवं एथलीट्स की संयुक्त सहभागिता इस आयोजन को और अधिक प्रेरणादायक बना रही है। यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बस्तर अब विकास, विश्वास एवं नई संभावनाओं की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां “पूना मारगेम” के माध्यम से हिंसा का राह छोड़, उम्मीदों की दौड़ का अवसर मिल रहा है।


 

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : बस्तरवासियों को देखने मिलेंगे एथलेटिक्स के रोमांचक मुकाबले

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : बस्तरवासियों को देखने मिलेंगे एथलेटिक्स के रोमांचक मुकाबले

 30 मार्च से 2 अप्रैल तक होंगी प्रतियोगिताएं, तैयारियां अंतिम चरण में

रायपुर, 20 मार्च 2026 खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के तहत बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर में एथलेटिक्स की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। देश में पहली बार हो रहे राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं। प्रतियोगिता स्थल धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में ट्रैक, मैदान, दर्शक दीर्घा तथा खिलाड़ियों के लिए आवश्यक सुविधाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। साथ ही लाइटिंग, सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल एवं आवास जैसी व्यवस्थाओं को भी प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि खिलाड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : बस्तरवासियों को देखने मिलेंगे एथलेटिक्स के रोमांचक मुकाबले

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : बस्तरवासियों को देखने मिलेंगे एथलेटिक्स के रोमांचक मुकाबले

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : बस्तरवासियों को देखने मिलेंगे एथलेटिक्स के रोमांचक मुकाबले

खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए देशभर के जनजातीय खिलाड़ी बड़ी संख्या में बस्तर पहुंचेंगे। इस आयोजन में न केवल अंचल के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक विविधता को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। बस्तर जिला प्रशासन और खेल विभाग इस आयोजन को सफल बनाने के लिए समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। पूरी प्रतियोगिता के दौरान स्थानीय खेलप्रेमियों को रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे।


 

राज्यपाल रमेन डेका से रक्षा महाविद्यालय नई दिल्ली के अध्ययन दल ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल रमेन डेका से रक्षा महाविद्यालय नई दिल्ली के अध्ययन दल ने की सौजन्य भेंट

 राज्यपाल डेका ने रक्षा विशेषज्ञों को छत्तीसगढ़ की विशेषताओं से कराया अवगत, कहा- छत्तीसगढ़ सुंदर संस्कृति, कला और परंपराओं वाला मनोरम प्रदेश है

रायपुर, 20 मार्च 2026 राज्यपाल रमेन डेका से आज रक्षा महाविद्यालय (NDC) नई दिल्ली के अध्ययन दल ने सौजन्य भेंट की। रक्षा महाविद्यालय द्वारा "National Security and Strategic Studies" विषय पर Understanding India Study Tour (UIST)  के अंतर्गत 16 सदस्यों का दल 15 से 20 मार्च तक छत्तीसगढ़ भ्रमण पर था। अपनी यात्रा के अंतिम दिन आज इस दल ने राज्यपाल डेका से मुलाकात की। अध्ययन दल में भारतीय सशस्त्र सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारीगण, मित्र देशों के सेनाधिकारी तथा कुछ सिविल सेवाओं के अधिकारीगण शामिल थे। इस दल ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न पर्यटक स्थलों, जैसे-बारनवापारा अभ्यारण्य, ट्राइबल म्यूजियम, पुरखैती मुक्तांगन, बस्तर के विभिन्न जलप्रताप, कोन्डागांव के शिल्पग्राम इत्यादि का भ्रमण किया।
राज्यपाल  डेका ने अध्ययन दल के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ एक सुंदर प्रदेश है। आप सभी दोस्तों और परिवार के सदस्यों को अपने भ्रमण और छत्तीसगढ़ की खूबसूरती के बारे में बताएं, ताकि वे भी पर्यटक के रूप में यहां आ सकें। उन्होंने छत्तीसगढ़ की विशेषताओं के बारे में अध्ययन दल से चर्चा की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां पर धान की प्रजातियों को संरक्षित करके रखा गया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की शिल्प कला जैसे ढोकरा आर्ट, वुडन आर्ट, बैम्बु आर्ट के बारे मंे भी चर्चा की। इस प्रदेश में प्रतिभाशाली लोगों की भी कमी नही है, अमेरिका के ह्यूस्टन में छत्तीसगढ़ के हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सेवाएं दे रहे है। इसके अलावा अमेरिका में बसे छत्तीसगढ़ के प्रवासी लोगों की संस्था नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन (NACHA) अमेरिका में स्वदेशी मेले का आयोजन करते है, जहां पर छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन किया जाता है। उन्होंने इस दौरान ऊर्जा के नवीनीकृत स्रोतों को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की बात कही।  डेका ने छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के बारे में भी अध्ययन दल को अवगत कराया।
अध्ययन दल के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए छत्तीसगढ़ की सुंदर, संस्कृति, कला और परंपराओं की सराहना की। अध्ययन दल ने छत्तीसगढ़ के आतिथ्य की तारीफ करते हुए कहा कि यहां के लोग सीधे सरल और आत्मीय है। हम सभी को यहां आकर बहुत अच्छा लगा। अध्ययन  दल के सदस्यों ने प्रदेश में संचालित लोककल्याणकारी योजनाओं जैसे महतारी वंदन, कृषक उन्नति योजना, नक्सल पुनर्वास नीति आदि की सराहना की।


 

प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को डबल इंजन की सरकार ने किया दूर : मुख्यमंत्री साय

प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को डबल इंजन की सरकार ने किया दूर : मुख्यमंत्री साय

 नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात

विदेशी मेहमानों ने कहा - अद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा

राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की हुई सराहना

नेशनल डिफेंस कॉलेज का 15 सदस्यीय अध्ययन दल 05 दिवसीय यात्रा पर पहुंचा है छत्तीसगढ़

नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात

नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात

रायपुर ,20 मार्च 2026 / छत्तीसगढ़ की हमारी धरती   सघन वन, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा के विपुल भंडार, लोक संस्कृति की अमूल्य विरासत और नैसर्गिक सौन्दर्य का अद्भुत संगम है। इस सुंदर धरती के विकास की सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को हमारे डबल इंजन की सरकार ने अब दूर कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में नेशनल डिफेंस कॉलेज के सैन्य एवं सिविल सेवा अधिकारियों के अध्ययन दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश से आए अधिकारियों का स्वागत करते हुए शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। अध्ययन दल का नेतृत्व कर रहे एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव साझा करते हुए राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री को सैन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।

नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात

मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ सघन वनों, खनिज संपदा, समृद्ध लोक संस्कृति और नैसर्गिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम है। उन्होंने बताया कि राज्य का लगभग 46 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जिसमें “एक पेड़ मां के नाम” अभियान और कैम्पा योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। साय ने कहा कि राज्य खनिज संसाधनों से परिपूर्ण है—कोयले से लेकर हीरे तक यहां उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ वर्तमान में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सरप्लस राज्य है, जहां लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए है, जिससे आने वाले समय में इतनी ही अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से अब नक्सल समस्या समाप्ति की ओर है। इससे प्रदेश में शांति और विकास की गति और तेज होगी। कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है और यहां किसानों के लिए प्रभावी धान खरीदी नीति लागू है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘महतारी वंदन योजना’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके तहत 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा 05 लाख 30 हजार से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति, खान पान, रीति रिवाज परंपरा पर खुलकर बातें की और अपने राजनीतिक और सामाजिक अनुभव भी उनके साथ साझा किए।

विदेशी मेहमानों ने कहा - अद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा

अध्ययन दल में शामिल विदेश के सैन्य अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ प्रवास को “अद्भुत और यादगार” बताते हुए कहा कि राज्य भौगोलिक विविधताओं और उर्वर भूमि से समृद्ध है। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा की।
एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने कहा कि स्पष्ट नेतृत्व और सशक्त नीति के कारण प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ा है जिससे नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्य हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं—जैसे महिला सशक्तिकरण और आवास योजनाओं—का जमीनी स्तर पर सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को कुशल नेतृत्व का परिणाम बताया।

इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, आईजी  ओ पी पाल, अध्ययन दल में आईपीएस  अमनदीप सिंह कपूर, म्यांमार कर्नल लू जॉ आंग, ब्रिगेडियर मोहम्मद शाहिद अहमद, जापान के कर्नल उचीनो तोमोफुमी, ब्रिगेडियर कुंवर मान विजय सिंह राणा, सुश्री सुप्रिया घाघ, ब्रिगेडियर शिशिर थमैय्या, बांग्लादेश के ब्रिगेडियर जनरल फिरदौस आरिफ अहमद, ब्रिगेडियर केतन अरुण मोहिते, ब्रिगेडियर अनिरुद्ध चौहान, एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी, एयर कमोडोर  मूलनाथ गिरीश, डॉ. राजेश कुमार अस्थाना, भूटान के कर्नल समतेन चेनोर, ग्रीस के कर्नल कॉन्सटेंटिनॉस नीरस शामिल है।

उल्लेखनीय है कि नेशनल डिफेंस कॉलेज द्वारा प्रतिवर्ष एक साल का कोर्स आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 66वाँ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें 120 सैन्य तथा गैर सैन्य अधिकारियों का दल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 15 अधिकारियों का दल आर्थिक सुरक्षा और रणनीति विषय पर अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ पहुँचा, जिसमें 05 विदेशी सैन्य अधिकारी भी शामिल है। प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने नया रायपुर में शहर की व्यवस्था और प्लान, कृषि और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा, कांकेर के जंगल वारफेयर कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र का अवलोकन किया। इसके साथ ही बस्तर में सुरक्षा संबंधी विषयों से जुड़ी विशेष चर्चा, सुरक्षाबलों के साहसिक कार्य, पर्यटन स्थल, विभिन्न शासकीय आयोजनों में बस्तर की कला-संस्कृति, चित्रकोट जलप्रपात, कोंडागांव में शिल्पग्राम का भ्रमण किया। अगले दिन उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट और भिलाई के पुलिस थाना का भ्रमण कर कानून व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की।

CG - महानदी पुल के नीचे मिला युवक का शव, हत्या या आत्महत्या? जांच में जुटी पुलिस

CG - महानदी पुल के नीचे मिला युवक का शव, हत्या या आत्महत्या? जांच में जुटी पुलिस

 आरंग। आरंग थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पारागांव से सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां नेशनल हाईवे 53 पर महानदी पुल के नीचे 18 वर्षीय युवक की लाश मिली है। मृतक की पहचान ग्राम पारागांव निवासी प्रेमलाल पाल पिता राजाराम पाल (उम्र 18 वर्ष) के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर आरंग पुलिस पहुंच गई है। मृतक के शरीर में किसी प्रकार के चोट के निशान नहीं है।

आरंग थाना प्रभारी हरीश साहू ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मृतक अपनी शारीरिक समस्याओं से परेशान था, मौत से पहले उसने अपने भाई को व्हाट्सएप में अपनी परेशानी को बताया है।

बताया जा रहा है कि मृतक कल शाम को अपने दोस्त के साथ निकला था, निसदा मोड़ के पास मृतक प्रेमलाल पाल आइस्क्रीम खाने रुका था, और उसका दोस्त वहां से निकल गया था।

प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है। लेकिन पुलिस हत्या के साथ-साथ आत्महत्या के भी एंगल से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही मौत के असली कारणों का पता चल पाएगा।

 

Breaking : छत्तीसगढ़ में दुर्ग, बलरामपुर के बाद अब यहां अफीम की खेती का भंडाफोड़, तरबूज-ककड़ी की आड़ में चल रहा था नशे का खेल

Breaking : छत्तीसगढ़ में दुर्ग, बलरामपुर के बाद अब यहां अफीम की खेती का भंडाफोड़, तरबूज-ककड़ी की आड़ में चल रहा था नशे का खेल

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से नशे के अवैध कारोबार को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। तमनार क्षेत्र के आमाघाट में पुलिस ने दबिश देकर लगभग डेढ़ एकड़ में फैली अफीम की अवैध खेती को नष्ट किया है। इस मामले में पुलिस ने झारखंड के एक आरोपी को हिरासत में लिया है।

तरबूज की आड़ में अफीम का खेल

जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने पुलिस और स्थानीय लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए जमीन को तरबूज और ककड़ी की खेती के नाम पर किराए पर लिया था। खेत के बीचों-बीच अफीम की नशीली फसल उगाई जा रही थी, ताकि बाहर से देखने पर किसी को शक न हो।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारी

मुखबिर की सूचना पर रायगढ़ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आमाघाट में छापेमारी की। पुलिस ने झारखंड निवासी मार्शल सांगां को हिरासत में लिया है। लगभग 1.5 एकड़ में अफीम की फसल लहलहा रही थी।

15 दिनों में चौथा मामला

छत्तीसगढ़ में पिछले 15 दिनों के भीतर अफीम की खेती का यह चौथा मामला सामने आया है। जिसने पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

 

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पास, मुख्यमंत्री साय बोले—आस्था और संस्कृति की रक्षा का मजबूत कदम

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पास, मुख्यमंत्री साय बोले—आस्था और संस्कृति की रक्षा का मजबूत कदम

 रायपुर ।  रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के दौरान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के पारित होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए एक अहम और ऐतिहासिक फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि यह कानून राज्य की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा कदम है। साथ ही उन्होंने हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सुख-समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से राज्य के कुछ इलाकों में प्रलोभन, दबाव या डर के जरिए धर्मांतरण की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे सामाजिक संतुलन प्रभावित होता है। नए कानून का उद्देश्य ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाना है और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वेच्छा से और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ही हो।

उन्होंने बताया कि अब धर्मांतरण से पहले संबंधित व्यक्ति और प्रक्रिया से जुड़े लोगों को अधिकृत अधिकारी को पहले से सूचना देनी होगी। इसके बाद आवेदन की जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि इसमें किसी प्रकार का दबाव या लालच शामिल तो नहीं है। निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी होने के बाद ही धर्मांतरण को वैध माना जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि पहले लागू कानून पर्याप्त प्रभावी नहीं था, जिसके कारण कई बार नियमों का दुरुपयोग हुआ। लेकिन नए प्रावधानों में सख्ती बढ़ाई गई है और उल्लंघन करने पर कड़ी सजा और जेल का प्रावधान रखा गया है, जिससे अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।

उन्होंने विधानसभा में इस मुद्दे पर विपक्ष के रुख पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर चर्चा में भाग लेना जरूरी होता है, ताकि समाजहित में बेहतर सुझाव सामने आ सकें।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने दिलीप सिंह जूदेव को याद करते हुए उनके धर्मांतरण विरोधी अभियान को प्रेरणादायक बताया और कहा कि समाज की जागरूकता और सहयोग से ही ऐसे बदलाव संभव हो पाते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि यह नया कानून प्रदेश में सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और शांति को और मजबूत करेगा।


 

राजधानी में चलती कार में लगी भीषण आग,चालक ने कूदकर बचाई जान

राजधानी में चलती कार में लगी भीषण आग,चालक ने कूदकर बचाई जान

रायपुर – राजधानी रायपुर में एक बार फिर चलती कार में आग लगने की घटना सामने आई है। आमानाका ओवरब्रिज पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई,जब एक कार में अचानक भीषण आग लग गई। मिली जानकारी के मुताबिक, कार चलाते समय चालक को अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। स्थिति को भांपते हुए चालक ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए वाहन से कूदकर अपनी जान बचाई। देखते ही देखते आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया और वाहन धू-धू कर जलता रहा। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। यह मामला सरस्वती नगर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

CG : यहां अब नहीं चलेंगे भारी वाहन: देखें किन-किन जगहों पर लगा प्रतिबंध

CG : यहां अब नहीं चलेंगे भारी वाहन: देखें किन-किन जगहों पर लगा प्रतिबंध

 रायपुर ।  ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुलिस प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए भारी और मध्यम मालवाहक वाहनों की एंट्री पर समयबद्ध प्रतिबंध लागू कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक रिंग रोड-01 और रिंग रोड-02 से शहर में आने वाले 18 प्रमुख मार्गों पर सुबह 5:00 बजे से रात 12:00 बजे तक इन वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह व्यवस्था आदेश जारी होने की तारीख से अगले एक महीने तक प्रभावी रहेगी।

पुलिस का कहना है कि यह कदम शहर में बढ़ते जाम और सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और ट्रैफिक सुचारू रूप से चल सके। रोजाना भारी वाहनों के कारण शहर के कई हिस्सों में लंबा जाम लग जाता था, जिससे लोगों को काफी परेशानी होती थी।

प्रतिबंध जिन प्रमुख जगहों पर लागू रहेगा, उनमें तेलीबांधा चौक, केनाल रोड, महावीर नगर, राजेंद्र नगर, पचपेड़ीनाका, संतोषीनगर, भाठागांव, कुशालपुर, रायपुरा, डीडी नगर, अरिहंत नगर, टाटीबंध, हीरापुर टर्निंग, गोगांव तिराहा, गोंदवारा तिराहा, भनपुरी क्षेत्र, विधानसभा रोड और एक्सप्रेस-वे ब्रिज के नीचे रिंग रोड-01 जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं।

प्रशासन ने वाहन चालकों से नियमों का पालन करने की अपील की है और चेतावनी दी है कि उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले से उम्मीद की जा रही है कि शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पहले से बेहतर होगी और लोगों को जाम से राहत मिलेगी।



 

CG : बीजेपी व्यापार प्रकोष्ठ के संभाग प्रभारी-सहप्रभारी घोषित

CG : बीजेपी व्यापार प्रकोष्ठ के संभाग प्रभारी-सहप्रभारी घोषित

  रायपुर: छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी ने व्यापार प्रकोष्ठ के संभाग प्रभारी और सहप्रभारियों की घोषणा कर दी है, जिससे संगठनात्मक गतिविधियों को और तेज करने की तैयारी साफ नजर आ रही है। यह नियुक्तियां प्रदेश नेतृत्व की सहमति से की गई हैं और इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

पार्टी का उद्देश्य व्यापार वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना और जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय बनाना है। नई जिम्मेदारियों के साथ पदाधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को विस्तार देने और पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

इस घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है और आने वाले समय में व्यापार प्रकोष्ठ की सक्रियता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।


 

CG : विधानसभा बजट सत्र का 15वां दिन आज, कई अहम मुद्दों पर गरमाएगा सदन

CG : विधानसभा बजट सत्र का 15वां दिन आज, कई अहम मुद्दों पर गरमाएगा सदन

 रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का 15वां दिन आज काफी अहम रहने वाला है, जहां सदन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और फैसले होने की संभावना है। प्रश्नकाल के दौरान मंत्री ओपी चौधरी, राजेश अग्रवाल और रामविचार नेताम विधायकों के सवालों का जवाब देंगे, वहीं वित्तमंत्री ओपी चौधरी विभिन्न दस्तावेज सदन के पटल पर रखेंगे।

आज की कार्यवाही में कुल 71 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लगाए गए हैं, जिनमें जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा। इसके अलावा विधायक पुन्नूलाल मोहले प्रतिवेदन पेश करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सदन में दो महत्वपूर्ण विधेयक भी प्रस्तुत करेंगे, जबकि वित्तमंत्री ओपी चौधरी छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक पेश करेंगे।

वहीं विधायक अजय चंद्राकर और सुशांत शुक्ला दो अशासकीय संकल्प भी सदन में रखेंगे। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिलेगी और सदन का माहौल गरम रह सकता है।


 

शर्मनाक : नहर में तैरता मिला नवजात का शव, इलाके में फैली सनसनी, जांच में जुटी पुलिस…

शर्मनाक : नहर में तैरता मिला नवजात का शव, इलाके में फैली सनसनी, जांच में जुटी पुलिस…

 जांजगीर-चांपा। जिले के पामगढ ब्लॉक के ग्राम बार से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां नहर में नवजात शिशु का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया।

मामला पामगढ़ ब्लॉक के ग्राम बार का है, जहां नहर में पानी के साथ बहते हुए एक नवजात का शव देखा गया। स्थानीय लोगों की नजर पड़ते ही मौके पर भीड़ जुट गई और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पामगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू पर जांच कर रही है। फिलहाल शिशु की पहचान नहीं हो पाई है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकतंत्र सेनानी स्वर्गीय महावीर प्रसाद जैन को दी श्रद्धांजलि….

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकतंत्र सेनानी स्वर्गीय महावीर प्रसाद जैन को दी श्रद्धांजलि….

 रायपुर: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जशपुरनगर के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं लोकतंत्र सेनानी स्वर्गीय  महावीर प्रसाद जैन के निवास पहुंचकर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने शोक संतप्त परिजनों से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय  महावीर प्रसाद जैन का जीवन समाज सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण रहा है। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और समाज को प्रेरणा देता रहेगा।

इस अवसर पर विधायक गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

जशपुर को विकास की नई सौगात : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 19.51 करोड़ के 6 विकास कार्यों का किया भूमिपूजन…

जशपुर को विकास की नई सौगात : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 19.51 करोड़ के 6 विकास कार्यों का किया भूमिपूजन…

 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुरनगर में पुलिस लाइन हेलीपैड के समीप कुल 19 करोड़ 51 लाख 78 हजार रुपए की लागत से 6 महत्वपूर्ण विकास कार्यों का भूमिपूजन कर क्षेत्र को विकास की नई सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

मुख्यमंत्री  साय ने नगर पालिका जशपुर के वार्ड क्रमांक 18 भागलपुर में 35.46 लाख रुपए की लागत से मुक्तिधाम निर्माण कार्य तथा वार्ड क्रमांक 16 में 6.76 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक ऑडिटोरियम निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इन परियोजनाओं से शहरवासियों को बेहतर सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री  साय ने जशपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सुगम एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से चार प्रमुख सड़कों के निर्माण कार्यों का भी भूमिपूजन किया। इनमें 2.89 करोड़ रुपए लागत से चटकपुर-रेंगारबहार मार्ग, 3.01 करोड़ रुपए लागत से कुनकुरी-औंरीजोर-मतलूटोली-पटेल पारा मार्ग, 3.29 करोड़ रुपए लागत से रानीबंध-चिड़ाटांगर-उपरकछार मार्ग तथा 3.18 करोड़ रुपए लागत से धुरीअम्बा-कटुखोसा मार्ग का निर्माण शामिल है। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीण अंचलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई दिशा और गति मिलेगी।

इस अवसर पर विधायक गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सरहुल उत्सव जनजातीय संस्कृति की विशिष्ट धरोहर, इसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

सरहुल उत्सव जनजातीय संस्कृति की विशिष्ट धरोहर, इसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर के दीपू बगीचा में आयोजित पारंपरिक सरहुल महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धरती माता, सूर्य देव एवं साल वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा और समृद्ध फसल की कामना की। सरहुल की पारंपरिक रस्म के तहत पूजा कराने वाले बैगा द्वारा मुख्यमंत्री के कान में सरई (साल) फूल खोंचकर शुभ आशीष प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री  साय ने जिलेवासियों को सरहुल उत्सव एवं हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरहुल महोत्सव सदियों से प्रकृति, धरती और जीवन के संतुलन का प्रतीक रहा है। बैगा, पाहन एवं पुजारी द्वारा की जाने वाली पूजा-अर्चना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन मूल्यों की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि यह पर्व जनजातीय समाज की समृद्ध सभ्यता और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जिसे सहेजकर रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है

सरहुल उत्सव जनजातीय संस्कृति की विशिष्ट धरोहर, इसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की जनता से किए गए वादों को तेजी से पूरा कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 25 किश्तों में 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी किए जा चुके हैं, जिससे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। वहीं 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में प्रस्तुत धर्म स्वातंत्र्य विधेयक भी सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा।

उल्लेखनीय है कि सरहुल परब चैत्र माह में मनाया जाने वाला उरांव समुदाय का प्रमुख पर्व है, जो प्रकृति के नवजीवन और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है। इस पर्व में धरती माता और सूर्य देव के प्रतीकात्मक विवाह के साथ सामूहिक पूजा की जाती है। सरना स्थल पर पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना, प्रसाद वितरण और लोकनृत्य-गीतों के माध्यम से सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ किया जाता है। घर-घर सरई फूल और पवित्र जल का वितरण कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

सरहुल उत्सव जनजातीय संस्कृति की विशिष्ट धरोहर, इसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजी 100 से अधिक महिलाओं एवं युवतियों की टोली ने मनमोहक सरहुल नृत्य प्रस्तुत किया। मांदर की गूंजती थाप और उत्साह से भरे वातावरण ने पूरे परिसर को जनजातीय संस्कृति के रंग में रंग दिया, जहां जनसैलाब उमड़ पड़ा और उत्सव का उल्लास चरम पर रहा।

इस अवसर पर अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री  योगेश बापट, विधायक गोमती साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

 

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026: धर्मांतरण पर सख्त कानून, अवैध परिवर्तनों पर कड़ी सजा और जुर्माना

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026: धर्मांतरण पर सख्त कानून, अवैध परिवर्तनों पर कड़ी सजा और जुर्माना

 रायपुर। प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर लंबे समय से जारी विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के बीच गुरुवार को साय सरकार ने विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 पेश कर दिया। संभावना है कि बजट सत्र के अंतिम दिन इसे सदन द्वारा पारित भी कर दिया जाएगा।

विधेयक वर्तमान में लागू छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 1968 का स्थान लेगा। पुराने कानून में धर्मांतरण के बाद केवल जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देने का प्रावधान था, और जबरन धर्मांतरण को संज्ञेय अपराध माना गया था। समय और तकनीकी बदलाव के साथ वर्तमान परिदृश्य में 1968 का कानून पर्याप्त नहीं रहा, इसलिए नए विधेयक के माध्यम से व्यापक प्रावधान लागू किए जा रहे हैं।

विधेयक में कुल छह अध्याय और 31 बिंदु हैं, जो वैध और अवैध धर्मांतरण को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं। इसके मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:

अवैध धर्मांतरण पर सजा: 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना।

संवेदनशील समूह (नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग): 10 से 20 साल की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना।

सामूहिक धर्मांतरण: 10 साल से आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना।

अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे, सुनवाई विशेष न्यायालय में होगी।

विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि झूठ, बल, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण अवैध होगा। स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले सूचना देनी होगी, जिसे सार्वजनिक रूप से 30 दिनों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा ताकि आपत्ति दर्ज की जा सके।

इसके अलावा, विवाह के माध्यम से धर्मांतरण की स्थिति में, समारोह आयोजित करने वाले पादरी, फादर, मौलवी या अन्य धार्मिक अधिकारी विवाह की तारीख से आठ दिन पहले सक्षम प्राधिकारी के सामने घोषणा पत्र प्रस्तुत करेंगे। प्राधिकारी तय करेगा कि विवाह कहीं धर्मांतरण के उद्देश्य से तो नहीं किया जा रहा है।

विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही, पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।

CG :  शिक्षक की हत्या, टंगिया से वार कर उतारा मौत के घाट, फिर शव को जलाया... जानिए खौफनाक वारदात के पीछे की सच्चाई

CG : शिक्षक की हत्या, टंगिया से वार कर उतारा मौत के घाट, फिर शव को जलाया... जानिए खौफनाक वारदात के पीछे की सच्चाई

 सक्ती। जिले से हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां एक दिव्यांग शिक्षक की टांगी मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। फिर उसके शव को आग लगा दिया गया। घटना के बाद से आरोपी फरार है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। मृतक शिक्षक का नाम देवानंद भारद्वाज था और पिहरीद में पदस्थ थे।

जानिए पूरा मामला

दरअसल, यह पूरा मामला जैजैपुर थाना क्षेत्र का है। जर्वे गांव में शिक्षक की हत्या की गई। बताया जा रहा है कि दिव्यांग शिक्षक देवानंद भारद्वाज अपनी ट्राइसाइकिल से घूमने के लिए निकले थे। इसी बीच घात लगाए आरोपी ने टंगिया से वार कर शिक्षक की बेरहमी से हत्या कर दी और उसके लाश को उसके घर के पीछे ले जाकर जला दिया था। ह्त्या की वारदात से पूरे गाओं में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी शिकायत पुलिस से की।

घटना की सूचना मिलते ही जैजैपुर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। घटना के बाद से ही आरोपी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। वहीं, इस घटना के बाद से पूरे गांव में सनसनी फैली हुई है। ग्रामीणों ने पुलिस से मांग की है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार किया जाए और उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

जमीन विवाद में हत्या

सक्ती पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि मृतक शिक्षक का जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस को आशंका है कि जमीन विवाद के चलते ही दिव्यांग शिक्षक की हत्या कर दी गई।

फिलहाल, पुलिस को जिस व्यक्ति पर संदेह है, वो व्यक्ति फरार है। पुलिस संदेही को पकड़ने के लिए गांव में घेराबंदी कर आरोपी की तलाश में जुट गई है।

छत्तीसगढ़ में सुनियोजित शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा -वित्त मंत्री चौधरी

छत्तीसगढ़ में सुनियोजित शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा -वित्त मंत्री चौधरी

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सुव्यवस्थित विकास की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री  ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में अनियंत्रित विस्तार और अवैध प्लॉटिंग पर नियंत्रण स्थापित करते हुए योजनाबद्ध विकास को गति देना है।
सदन में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने बताया कि वर्तमान में नगर विकास योजनाएं तैयार करने और उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मुख्यत: रायपुर विकास प्राधिकरण और नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण जैसे प्राधिकरणों पर निर्भर है। हालांकि, राज्य गठन के बाद विभिन्न कारणों से ऐसी योजनाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, जिससे कई शहरों में अव्यवस्थित विकास और अवैध प्लॉटिंग की समस्या बढ़ी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी से नगर विकास योजनाओं के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। विशेष रूप से अहमदाबाद में रिंग रोड जैसी प्रमुख परियोजनाएं योजनाबद्ध तरीके से विकसित की गई हैं।
वित्त मंत्री  चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भी रायपुर मास्टर प्लान के अंतर्गत एम.आर.-43 मार्ग का निर्माण नगर विकास योजना के माध्यम से किया जा रहा है, जो इस प्रणाली की उपयोगिता को दर्शाता है। संशोधन के तहत छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा-38 में बदलाव किया गया है। इसके अनुसार अब नगर विकास योजनाएं तैयार करने के लिए अधिकृत एजेंसियों के दायरे का विस्तार किया जाएगा। नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकरणों के अलावा राज्य शासन के अभिकरणों और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों को भी इस कार्य के लिए अधिकृत किया जा सकेगा।
इस बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल और छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम जैसे संस्थान भी नगर विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में भागीदारी निभा सकेंगे। इससे योजनाओं की संख्या में वृद्धि होने के साथ-साथ औद्योगिक और आवासीय विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि इस विधेयक का मूल उद्देश्य राज्य में सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना, अवैध प्लॉटिंग पर अंकुश लगाना और उद्योग व आवास के लिए व्यवस्थित भूखंडों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संशोधन छत्तीसगढ़ के शहरी परिदृश्य को अधिक सुव्यवस्थित और विकासोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

आयुष्मान की प्रोत्साहन राशि में गड़बड़ी की गूंज सदन में, विपक्ष ने लगाया 60 लाख की अनियमितता का आरोप

आयुष्मान की प्रोत्साहन राशि में गड़बड़ी की गूंज सदन में, विपक्ष ने लगाया 60 लाख की अनियमितता का आरोप

 रायपुर। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के कुंवर सिंह निषाद ने बालोद जिले के अर्जुंदा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में अनियमितता का मामला उठाया। उन्होंने इसमें लगभग 60 लाख रुपए वहां पदस्थ डॉक्टर द्वारा कम्प्यूटर ऑपरेटरों की मदद से फर्जी तरीके से अपने खाते में डलवाने का आरोप लगाते हुए पूछा कि दोषी डॉक्टर पर क्या कार्रवाई की है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इसमें किसी प्रकार की आर्थिक अनियमितता से इंकार करते हुए कहा कि डॉक्टर के खाते में कोई राशि जमा नहीं हुई है ऐसे में कार्रवाई की कोई जरूरत ही नहीं है।

छत्तीसगढ़ कैडर के IAS डॉ. रवि मित्तल को मिली बड़ी जिम्मेदारी, प्रधानमंत्री कार्यालय में उप सचिव नियुक्त

छत्तीसगढ़ कैडर के IAS डॉ. रवि मित्तल को मिली बड़ी जिम्मेदारी, प्रधानमंत्री कार्यालय में उप सचिव नियुक्त

 रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के 2016 बैच के IAS अधिकारी डॉ. रवि मित्तल को केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में उप सचिव (Deputy Secretary) नियुक्त किया गया है।

बता दें कि डॉ. रवि मित्तल की छवि एक बेहद सुलझे हुए और जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारी की रही है। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई की है। डॉक्टरी छोड़कर उन्होंने देश सेवा के लिए सिविल सेवा का रास्ता चुना।

वे जशपुर कलेक्टर के पद पर पदस्थ थे। डॉ मित्तल ने महासमुंद, रायगढ़ व रायपुर में जिला पंचायत सीईओ के रूप में कार्य किया है । वे 2018 में बगीचा एसडीएम भी रह चुके हैं।

छत्तीसगढ़ में अब ATM से निकलेगा राशन, यहां लगेगा प्रदेश का पहला ग्रेन एटीएम, राशन की कालाबाजारी पर लगेगी लगाम…

छत्तीसगढ़ में अब ATM से निकलेगा राशन, यहां लगेगा प्रदेश का पहला ग्रेन एटीएम, राशन की कालाबाजारी पर लगेगी लगाम…

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में राशन वितरण व्यवस्था जल्द ही एक बड़े बदलाव देखने को मिल सकता है। पारंपरिक राशन दुकानों के बजाय आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर ‘ग्रेन एटीएम’ शुरू करने की तैयारी में है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत राजधानी रायपुर के शास्त्री मार्केट क्षेत्र में प्रदेश का पहला ग्रेन एटीएम लगाने की योजना बनाई गई है, जिससे उपभोक्ताओं को लंबी कतारों से राहत मिलने की उम्मीद है।

खाद्य विभाग इस नई पहल के जरिए राशन वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। ग्रेन एटीएम मशीन के माध्यम से लाभार्थी सीधे मशीन से निर्धारित मात्रा में अनाज प्राप्त कर सकेंगे। इससे पारंपरिक उचित मूल्य दुकानों पर निर्भरता कम होगी।

इस प्रणाली में हितग्राही को राशन कार्ड नंबर दर्ज करना होगा या आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। सत्यापन के बाद मशीन से तय मात्रा में चावल या गेहूं बाहर निकल आएगा। अधिकारियों के मुताबिक इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और तौल में गड़बड़ी या हेराफेरी की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।

पायलट प्रोजेक्ट के बाद पूरे प्रदेश में विस्तार
सूत्रों के अनुसार, रायपुर में सफल क्रियान्वयन के बाद इस योजना को चरणबद्ध तरीके से अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में इस तरह की मशीन आधारित व्यवस्था को लागू करना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है।

ब्रेकिंग: हाई कोर्ट ने किया जजों का तबादला, रजिस्ट्रार जनरल ने जारी किया आदेश, देखें ट्रांसफर सूची..!!

ब्रेकिंग: हाई कोर्ट ने किया जजों का तबादला, रजिस्ट्रार जनरल ने जारी किया आदेश, देखें ट्रांसफर सूची..!!

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने आदेश जारी कर हायर ज्यूडिशियल सर्विस से जुड़े न्यायिक अफसरों का तबादला सूची जारी किया है।

देखें जारी ट्रांसफर ऑर्डर में ज्यूडिशियल अफसरों के नाम….

यात्रीगण कृपया ध्यान दें! छत्तीसगढ़ और गोंडवाना एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें रद्द… घर से निकलने से पहले देख ले लिस्ट

यात्रीगण कृपया ध्यान दें! छत्तीसगढ़ और गोंडवाना एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें रद्द… घर से निकलने से पहले देख ले लिस्ट

 बिलासपुर।  दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन अंतर्गत गोंदिया रेलवे स्टेशन पर रेल सुविधाओं के विस्तार और सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से आगामी 5 से 24 अप्रैल तक 20 दिनों का मेगा ब्लॉक लिया जा रहा है। इस अवधि के दौरान प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर पुराने वॉशेबल एप्रन को हटाकर नए बैलेस्टिक ट्रैक के निर्माण का कार्य किया जाएगा, जिससे भविष्य में न केवल ट्रेनों की गति बढ़ेगी बल्कि रेल संचालन भी अधिक सुरक्षित हो सकेगा।

हालांकि, इस निर्माण कार्य के चलते रेल यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि रेलवे ने छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, गोंडवाना एक्सप्रेस और शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस जैसी करीब 10 प्रमुख ट्रेनों को अलग-अलग तारीखों में पूरी तरह रद्द करने का निर्णय लिया है।

इसके अतिरिक्त, कुछ ट्रेनों को आंशिक रूप से भी संचालित किया जाएगा, जिसमें बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस 4 से 25 अप्रैल तक केवल दुर्ग तक ही चलेगी और यहीं से वापस लौटेगी, यानी गोंदिया और दुर्ग के बीच इसका परिचालन बंद रहेगा। प्रभावित होने वाली मुख्य ट्रेनों में शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस (4-24 अप्रैल), एलटीटी-शालीमार (6-26 अप्रैल), कोरबा-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (5-25 अप्रैल) और अमृतसर-बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (7-27 अप्रैल) शामिल हैं, जबकि गोंडवाना और विशाखापत्तनम-निजामुद्दीन एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें भी चयनित तिथियों पर बाधित रहेंगी।

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए सलाह दी है कि वे घर से निकलने से पहले 139 हेल्पलाइन नंबर या ‘नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम’ (NTES) के माध्यम से अपनी ट्रेन की वास्तविक स्थिति की जांच अवश्य कर लें, ताकि स्टेशन पहुंचने पर किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

नल का जल बना सहारा, राधिका की बदली जिंदगी: आड़ाझर में जल जीवन मिशन से घर-घर पहुंचा पानी

नल का जल बना सहारा, राधिका की बदली जिंदगी: आड़ाझर में जल जीवन मिशन से घर-घर पहुंचा पानी

 रायपुर: खरसिया विकासखंड के ग्राम पंचायत सोनबरसा के आश्रित ग्राम आड़ाझर में जल जीवन मिशन के तहत हुए कार्यों ने ग्रामीणों के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है। इस बदलाव की एक सशक्त मिसाल हैं राधिका साहू, जिनके घर नल कनेक्शन मिलने से उनकी दिनचर्या पूरी तरह आसान हो गई है।

पहले राधिका साहू को प्रतिदिन लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ता था। दिन में तीन से चार बार भारी बर्तनों में पानी भरकर लाना उनके लिए बेहद कठिन काम था। गर्मी के मौसम में पानी की कमी के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती थी, जिससे उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता था। जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांव में पाइपलाइन बिछाकर घर-घर नल कनेक्शन दिए गए। राधिका साहू के घर में भी नल से पानी की सुविधा मिलने लगी।

अब उन्हें पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, जिससे उनका समय और श्रम दोनों बच रहे हैं। वे अब अपने घर के काम अधिक व्यवस्थित तरीके से कर पा रही हैं और बच्चों की पढ़ाई व देखभाल पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। राधिका साहू बताती हैं कि अब पानी की चिंता खत्म हो गई है और जीवन पहले की तुलना में अधिक सरल और सुगम हो गया है। यह योजना न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे गांव के लिए एक बड़ी राहत साबित हुई है।