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BREAKING : राजधानी में पेटी के बाद अब बोरी के अंदर मिली युवक की लाश, इलाके में फैली सनसनी

BREAKING : राजधानी में पेटी के बाद अब बोरी के अंदर मिली युवक की लाश, इलाके में फैली सनसनी

 रायपुर / अभनपुर।  राजधानी रायपुर से लगे अभनपुर से बड़ी खबर सामने आ रही है, यहां ग्राम बेंद्री में पत्थर खदान के गड्ढे में एक युवक की लाश बोरी के अंदर मिली है। सुचना पर पहुंची पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। मृतक की शिनाख्त नहीं हो पाई है। मामला राखी थाना क्षेत्र का है।

जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने पत्थर खदान के गड्ढे में भरे पानी में तैरते हुए बोरी में लाश देखा, तत्काल इसकी सुचना पुलिस को दी, सुचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टेम के लिए भेज दिया है। वहीं पुलिस हत्या कर बोरी में लाश भरकर फेंकने की आशंका जताई जा रही है।

 
छत्तीसगढ़ के 28 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, मौसम में आएगा बड़ा बदलाव

छत्तीसगढ़ के 28 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, मौसम में आएगा बड़ा बदलाव

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम करवट लेने जा रहा है। भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को अब राहत मिलने की संभावना है क्योंकि छत्तीसगढ़ बारिश अलर्ट के तहत आज प्रदेश के 28 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में मानसून की रफ्तार थमी हुई थी, लेकिन अब मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि आज से कई जिलों में अच्छी बारिश होगी। इसके चलते तापमान में गिरावट और गर्मी से राहत मिलेगी।

मौसम विभाग ने दक्षिण बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जहां भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव सहित अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग का कहना है कि शनिवार को भी कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है। ऐसे में नागरिकों और किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम अपडेट पर ध्यान दें और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाएं।

छत्तीसगढ़ बारिश अलर्ट के तहत प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। जलभराव, बिजली गिरने या अन्य प्राकृतिक खतरे की आशंका को देखते हुए सभी जिलों में निगरानी तेज कर दी गई है।

संस्कृति में सजीव और निर्जीव सभी के प्रति सम्मान और आभार की भावना: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

संस्कृति में सजीव और निर्जीव सभी के प्रति सम्मान और आभार की भावना: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर: रायपुर सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में आज हरेली पर्व का गरिमामय आयोजन हुआ। त्यौहार मनाने के लिए पूरे परिसर को ग्रामीण परिवेश में सजाया गया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारी सरकार का मुख्य ध्येय है। हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की परंपरा, प्रकृति और खेती-किसानी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमें अपने मूल से जोड़ता है। आज पूरा छत्तीसगढ़ हरेली की खुशी में डूबा है। मुख्यमंत्री निवास में भी यह पर्व पूरे उल्लास और पारंपरिक तरीके से मनाया जा रहा है।

 संस्कृति में सजीव और निर्जीव सभी के प्रति सम्मान और आभार की भावना: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक हरेली को मनाने का अपना-अपना अंदाज है। लेकिन सभी जगह इसका रंग एक ही है, आस्था और उत्साह एक ही है। जिस तरह प्रकृति हमारा ख्याल रखती है, उसी तरह हमें भी प्रकृति का ख्याल रखना चाहिए। हरेली केवल खेती-किसानी का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह अपनी धरती की हरियाली और प्रकृति पूजा का भी त्यौहार है। छत्तीसगढ़ महतारी की कृपा हम सब पर बरसाती रहे और सभी किसान भाई खुशहाल रहें।

यही मंगल कामना है उन्होंने कहा कि श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने और 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तय कर ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। हम सभी ने 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का सपना देखा है और इसके लिए हमने अपना विजन डॉक्यूमेंट भी बनाया है। हमारी सरकार राज्य से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रयास कर रही है।

 संस्कृति में सजीव और निर्जीव सभी के प्रति सम्मान और आभार की भावना: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

हरेली त्योहार पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और किसान जीवन का उत्सव है। इस पावन अवसर पर मैं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। यह त्योहार प्रकृति, कृषि और पशुधन से जुड़े हमारे जीवन मूल्यों की गूंज है। उन्होंने कहा कि ऐसा विश्वास है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती स्वयं धरती पर आकर किसानों के बीच उपस्थित होते हैं और उनके खेतों का निरीक्षण करते हैं।

यही कारण है कि इस दिन किसान अपने कृषि यंत्रों, हल-बैल और खेत-खलिहानों की पूजा करते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आज छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति कर रहा है। किसानों को समर्थन मूल्य पर धान खरीद और विभिन्न योजनाओं में 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

 संस्कृति में सजीव और निर्जीव सभी के प्रति सम्मान और आभार की भावना: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

यह हिंदुस्तान में किसी भी राज्य द्वारा किसानों के लिए किया गया सबसे बड़ा कार्य है। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मुख्यमंत्री है, जो केवल घोषणाएं नहीं करता, बल्कि धरातल पर किसानों के पसीने की कीमत चुका रहा है।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, श्री विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा, महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायकगण, निगम मंडल आयोग के अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।

 संस्कृति में सजीव और निर्जीव सभी के प्रति सम्मान और आभार की भावना: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

Transfer : वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 60 कर्मचारियों का हुआ तबादला, देखें लिस्ट…!!

Transfer : वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 60 कर्मचारियों का हुआ तबादला, देखें लिस्ट…!!

रायपुर। छत्तीसगढ़ वन विभाग में एक बार फिर व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक कुल 205 अधिकारियों-कर्मचारियों का तबादला किया गया है। इसमें 86 वनरक्षक, 60 वनपाल, 27 उपवनक्षेत्रपाल और 32 लिपिक शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह तबादला प्रक्रिया विभागीय आवश्यकता, क्षेत्रीय संतुलन और कार्य कुशलता को ध्यान में रखते हुए की गई है। वन विभाग की इस बड़ी कार्रवाई को प्रशासनिक सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

तबादला सूची विभागीय वेबसाइट और संबंधित कार्यालयों में प्रदर्शित की गई है। स्थानांतरित कर्मचारियों को शीघ्र पदस्थ स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे फील्ड स्तर पर कामकाज की गति और निगरानी व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।

हरेली तिहार पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हुआ मुख्यमंत्री निवास

हरेली तिहार पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हुआ मुख्यमंत्री निवास

 रायपुर। छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया।

BREAKING : खारून नदी में नहाने गए 2 नाबालिग डूबे, 1 का शव बरामद, एक की तलाश जारी…

BREAKING : खारून नदी में नहाने गए 2 नाबालिग डूबे, 1 का शव बरामद, एक की तलाश जारी…

 दुर्ग| अमलेश्वर थाना क्षेत्र में खारून नदी में 2 नाबालिग डूब गए. घटना बुधवार की है जब 6 दोस्त नदी में नहाने उतरे थे. इस दौरान अचानक तेज बहाव और भंवर में फंसने के बाद 2 युवक डूब गए. SDRF के टीम ने गुरुवार को एक 16 वर्षीय नाबालिग के शव को गुरुवार सुबह बरामद किया. जबकि दूसरे 15 वर्षीय युवक की तलाश अब भी जारी है.

जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान आशीष सरोज (16 वर्ष), पिता पंकज सरोज, बजरंग नगर वार्ड 37 निवासी के रूप में हुई है. वह बीते दिन ग्राम जमराव के 5 नाबालिग दोस्तों के साथ अमलेश्वर थाना क्षेत्र में खारून नदी में नहाने गया था. नहाते समय पानी के तेज बहाव और भंवर में फंस जाने से आशीष और उसका दोस्त यशवंत हरपाल (15 वर्ष) बह गए. उन्हें डूबता देखकर बाकी 4 दोस्तों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया. लोगों ने तत्काल पुलिस को घटना की सूचना दी और डूबते नाबालिगों को ढूंढने और बचाने का प्रयास किया लेकिन वे असफल रहे.

डीप डाइविंग से निकाला गया शव

SDRF की टीम ने पूरी रात आठ घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. लेकिन दोनों को नहीं ढूंढा जा सका था. वहीं आज गुरुवार सुबह डीप डाइविंग के अनुभवी जवान इंद्रपाल यादव और राजकुमार यादव ने दो घंटे की मेहनत के बाद आशीष का शव नदी से बाहर निकाला और पुलिस के सुपुर्द किया. लेकिन यशवंत अब तक नहीं मिल सका है. यशवंत की तलाश अब भी जारी है.

पुलिस ने आशीष के शव को पोस्टमार्टम के लिए सुपेला स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल भिजवाया है. घटना से गांव और परिजनों में शोक की लहर है.

पांच नक्सलियों ने किया सरेंडर, सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर छोड़ा हिंसा का रास्ता

पांच नक्सलियों ने किया सरेंडर, सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर छोड़ा हिंसा का रास्ता

 सुकमा. भाजपा सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर सुकमा जिले में सक्रिय पांच नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया है. सभी नक्सली जगरगुंडा और चिंतलनार इलाके में सक्रिय रहे हैं. सभी सरेंडर नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि दी गई और पुनर्वास नीति का लाभ भी दिया जाएगा.

Breaking : CG में युवती सहित तीन की मौत, ट्रक ने बाइक को मारी टक्कर

Breaking : CG में युवती सहित तीन की मौत, ट्रक ने बाइक को मारी टक्कर

 कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बैकुंठपुर के खरवत चौक पर भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार पल्सर बाइक की ट्रक से टक्कर हो गई, दुर्घटना में दो लड़के और एक लड़की की मौत हो गई।

सीएम हाउस में मनाया जा रहा ‘हरेली तिहार’...देखें LIVE विडियो...!!

सीएम हाउस में मनाया जा रहा ‘हरेली तिहार’...देखें LIVE विडियो...!!

 रायपुर। मुख्यमंत्री निवास में हरेली तिहार के अवसर पर पारंपरिक लोक यंत्रों की गूंज और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा के साथ सुंदर नाचा का आयोजन किया जा रहा है। पूरा परिसर उत्सवमय वातावरण से सराबोर है। ग्रामीण परिवेश की जीवंत छवि इस सुंदर माहौल में साकार हो गई है। कहीं सुंदर वस्त्रों में सजे राउत नाचा कर रहे कलाकारों की रंगत बिखरी है, तो कहीं आदिवासी कलाकार पारंपरिक लोक नृत्य की मोहक प्रस्तुतियाँ दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ का अद्भुत ग्रामीण लैंडस्केप अपनी संपूर्ण सांस्कृतिक सुंदरता के साथ यहां सजीव रूप में अवतरित हो गया है। विभिन्न प्रकार की लोक धुनों में छत्तीसगढ़ी संगीत का माधुर्य अपने चरम पर है।

राउत नाचा, छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति का एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य है, जो विशेष रूप से दीपावली के अवसर पर गोधन पूजा के दौरान किया जाता है। यह नृत्य विशेषकर यादव समुदाय (ग्वाला/गोपालक वर्ग) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण तथा गोधन की आराधना का प्रतीक माना जाता है।

राउत नाचा की परंपरा छत्तीसगढ़ में सदियों पुरानी है। इसे गोवर्धन पूजा से जोड़ा जाता है, जब ग्वाल-बाल भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति में यह नृत्य करते हैं। नर्तक रंग-बिरंगे परिधानों में सजते हैं, सिर पर पगड़ी धारण करते हैं और हाथों में लाठी थामे रहते हैं। उनके वस्त्रों को कौड़ियों, घुंघरुओं और अन्य सजावटी वस्तुओं से अलंकृत किया जाता है।

 

 

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा

 रायपुर। छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू लिए हरेली तिहार का पारंपरिक उत्सव गुरुवार 24 जुलाई को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निवास में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक अवसर और कार्य के लिए विशेष प्रकार के पारंपरिक उपकरणों एवं वस्तुओं का उपयोग होता आया है। हरेली पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ऐसे ही पारंपरिक कृषि यंत्रों एवं परिधानों की झलक देखने को मिली, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।

काठा
सबसे बाईं ओर दो गोलनुमा लकड़ी की संरचनाएँ रखी गई थीं, जिन्हें ‘काठा’ कहा जाता है। पुराने समय में जब गाँवों में धान तौलने के लिए काँटा-बाँट प्रचलन में नहीं था, तब काठा से ही धान मापा जाता था। सामान्यतः एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है। काठा से ही धान नाप कर मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता था।

खुमरी
सिर को धूप और वर्षा से बचाने हेतु बांस की पतली खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी एक घेरेदार संरचना ‘खुमरी’ कहलाती है। यह प्रायः गाय चराने वाले चरवाहों द्वारा सिर पर धारण की जाती है। पूर्वकाल में चरवाहे अपने साथ ‘कमरा’ (रेनकोट) और खुमरी लेकर पशु चराने निकलते थे। ‘कमरा’ जूट के रेशे से बना एक मोटा ब्लैंकेट जैसा वस्त्र होता था, जो वर्षा से बचाव के लिए प्रयुक्त होता था।

कासी की डोरी
यह डोरी ‘कासी’ नामक पौधे के तने से बनाई जाती है। पहले इसे चारपाई या खटिया बुनने के लिए ‘निवार’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। डोरी बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु के प्रारंभ में खेतों की मेड़ों पर कांसी पौधे उग आते हैं, जिनके तनों को काटकर डोरी बनाई जाती है। यह डोरी वर्षों तक चलने वाली मजबूत बुनाई के लिए उपयोगी होती है।

झांपी
ढक्कन युक्त, लकड़ी की गोलनुमा बड़ी संरचना ‘झांपी’ कहलाती है। यह प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में बैग या पेटी के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती थी। विशेष रूप से विवाह समारोहों में बारात के दौरान दूल्हे के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पकवान आदि रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। यह बांस की लकड़ी से निर्मित एक मजबूत संरचना होती है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित बनी रहती है।

कलारी
बांस के डंडे के छोर पर लोहे का नुकीला हुक लगाकर ‘कलारी’ तैयार की जाती है। इसका उपयोग धान मिंजाई के समय धान को उलटने-पलटने के लिए किया जाता है।

 Accident : रेत से भरी दो हाइवा में जोरदार भिड़ंत, हेल्पर की दर्दनाक मौत

Accident : रेत से भरी दो हाइवा में जोरदार भिड़ंत, हेल्पर की दर्दनाक मौत

 धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत सिहावा रोड पर तेज रफ्तार रेत से भरी दो हाइवा आपस में टकरा गई.  भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि हाइवा के परखच्चे उड़ गए. दुर्घटना में एक हेल्पर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. सुचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने ट्रक में फंसे हेल्पर को पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला और पीएम के लिए अस्पताल भेज दिया.मिली जानकारी के अनुसार, ये घटना शांति कॉलोनी के समीप पूजा राइस मिल के सामने रात 2 से 3 बजे की है. दुर्घटना में हाइवा के हेल्पर 16 वर्षीय ग्राम सुखरी, डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव निवासी की मौके पर ही मौत हो गई. सूचना मिलने पर मौके पर कोतवाली पुलिस पहुंची. फिलहाल, कोतवाली पुलिस मामले की जांच कर रही है.

किसान पति- पत्नी की मौत : हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आए किसान दंपती, दोनों की मौके पर हुई मौत

किसान पति- पत्नी की मौत : हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आए किसान दंपती, दोनों की मौके पर हुई मौत

 सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से बड़ी खबर सामने आई है। गांधीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मुडेसा अवराडुगू में खेत में काम करने गए किसान दंपती की हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। सूचना मिलते ही बिजली विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर दोनों के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।

खेत में पंप का तार जोड़ते समय हादसा

मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम मुडेसा अवराडुगू निवासी करीमन साय गोंड (56) और उनकी पत्नी दिलकुवंर गोंड (52) घर के बगल में स्थित खेत में धान का बीड़ा उखाड़ने गए थे। खेत में पानी कम होने से पंप चालू करने के लिए करीमन साय ने घरेलू कनेक्शन से पंप का तार जोड़ना चाहा। जैसे ही उन्होंने तार जोड़ा, करंट लगते ही वह तार से चिपक गए और मौके पर गिर पड़े। गीले खेत में करंट फैलने से वहां मौजूद उनकी पत्नी दिलकुवंर गोंड भी उसकी चपेट में आ गई और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद किसान दंपती के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक की लहर है।

CG – हरेली की खुशियां बदली मातम में जहरीले सांप नें दो बच्चियों क़ो काटा एक की मौत दूसरी लड़ रही जिंदगी की जंग

CG – हरेली की खुशियां बदली मातम में जहरीले सांप नें दो बच्चियों क़ो काटा एक की मौत दूसरी लड़ रही जिंदगी की जंग

 मस्तूरी - छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी मुख्यालय के समीप बसे भदौरा गांव में बीते बुधवार की रात सूर्यवंशी समाज के लिए आपदा बन कर टूटी और उनके दो बच्चे रितु सूर्यवंशी जो 9 महीने की है वही महक जो 8 साल की है जिनके पिता का नाम लक्ष्मी नारायण है दोनों को जहरीले करात सांप ने काट लिया यह घटना रात के तकरीबन 1:00 बजे की बताई जा रही है परिवार वालों को जैसे ही इस घटना की जानकारी हुई उन्होंने दोनों बच्चों को आनंद-पणन में मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जहाँ डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों बच्चों को बिलासपुर रेफर कर दिया इस दौरान छोटी बच्ची ऋतू सूर्यवंशी की मौत हो गई वही दूसरी बच्ची महक जो 8 साल की है वो जिंदगी और मौत से सिम्स में लड़ रही है।

परिवार वालों का आरोप है की मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र में बच्चों को सही समय पर सांप के जहर से बचाने वाली दवा”एंटीवेनम”सीरम अगर मिल गई होती तो आज शायद बच्चों की स्थिति कुछ और होती आपको बताते चलें की इस दवा क़ो विषैले सांप के काटने के बाद सर्प द्वारा काटे गए ब्यक्ति के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है ताकि जहर के प्रभाव को कम किया जा सके या उसे बेअसर किया जा सके।

मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र के अंदर अनगिनत गांव आते हैं मस्तूरी ग्रामीण क्षेत्र में बारिश के समय में सर्पडंस की समस्या लगातार देखने मिलता है बावजूद इसके यहां सांप काटने से बचाने वाली दवा एंटीवेनम का ना होना एक गंभीर लापरवाही या विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाती है मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र में दूर-दूर से लोग उपचार करने आते हैं और ऐसे मामलों में मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र हीं लोगों के लिए एक उपचार का जगह है ठिकाना है पर यहां भी उपचार नहीं मिलने पर लोगों को ऐसे मामलों में अपनी जान गवानी पड़ रही है बहर हाल इस पूरे घटना के बाद भदौरा गांव में हरियाली त्यौहार की खुशियां माता में बदल गई है और चारों तरफ बच्चों की गुजर जाने की तकलीफ दर्द सभी गांव वालों को महसूस हो रहा है माँ की रो रो कर बुरा हाल है सभी गांव वाले परिवार वालों को इस विपत्ति के समय में सहारा दें रहें हैं।

WEATHER UPDATE: छत्तीसगढ़ के कई जिलों में आज जमकर बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

WEATHER UPDATE: छत्तीसगढ़ के कई जिलों में आज जमकर बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों भारी बारिश का दौर जारी है. राजधानी रायपुर समेत कई स्थानों पर बुधवार देर रात से झमाझम बारिश हो रही है. इसी बीच मौसम विभाग ने मध्य और उत्तरी छत्तीसगढ़ के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. प्रदेश के 17जिले में ऑरेंज अलर्ट और 11 में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है.

इन जिलों में जारी हुआ अलर्ट:

17 जिलों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम और मुंगेली जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. इन इलाकों में गरज-चमक के साथ 30–40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और मध्यम से भारी बारिश की संभावना है.

11 जिलों में यलो अलर्ट

सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, रायगढ़, जशपुर, सुरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर में यलो अलर्ट जारी हुआ है. यहां गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है.

बिलासपुर में तेज बारिश से जलभराव (CG WEATHER UPDATE)

बिलासपुर में बुधवार रात हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई. परिजात कॉलोनी और नेहरू नगर के कई घरों में बारिश का पानी घुस गया, जिससे घर में रखा सामान डूब गया. लोग पूरी रात जागते रहे. बिजली गुल होने से आधे शहर में ब्लैकआउट रहा और पीने के पानी की समस्या खड़ी हो गई.

बारिश के आंकड़े

बता दें छत्तीसगढ़ में इस महीने 23 दिनों में लगभग 300 मिमी बारिश दर्ज की गई है. इसमें से 198.2 मिमी बारिश 1 जुलाई से 11 जुलाई के बीच हुई. पिछले 24 घंटों में औसतन 12.1 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है. तापमान की बात करें तो बिलासपुर 34.2 डिग्री के साथ सबसे गर्म रहा, जबकि दुर्ग में न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री दर्ज हुआ.

बारिश के कहर से गई कई जानें (CG WEATHER UPDATE)

सरगुजा में बिजली गिरने से 3 लोगों की मौत हो गई. वहीं दुर्ग जिले के जमराव एनीकट में 2 नाबालिग पानी में बह गए. इनमें से एक का शव बरामद कर लिया गया है और दूसरे की तलाश जारी है.
रायपुर के DEO ऑफिस कैंपस में भी पानी भरने से लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा. रायगढ़ में भी दोपहर बाद गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई.

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि अलर्ट का पालन करें और बारिश के दौरान सतर्क रहें.

ब्रेकिंग : राजिम क्षेत्र में दो दंतेल हाथियों की आमद, वन विभाग अलर्ट मोड पर

ब्रेकिंग : राजिम क्षेत्र में दो दंतेल हाथियों की आमद, वन विभाग अलर्ट मोड पर

 राजिम: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में हाथियों की हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। शुक्रवार सुबह दो दंतेल हाथी राजिम क्षेत्र में देखे गए, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है।

सूत्रों के अनुसार, एक हाथी खुडसा के जंगल में और दूसरा हाथी तर्जुन्गा के जंगल में मौजूद है। ये क्षेत्र नगर पंचायत फिंगेश्वर से महज 5 किमी की दूरी पर स्थित हैं। बताया जा रहा है कि एक हाथी महासमुंद जिले से तो दूसरा धमतरी जिले की सीमा से प्रवेश कर राजिम क्षेत्र में आया है।वन विभाग ने स्थिति को गंभीर मानते हुए लगभग 25 गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने की सख्त हिदायत दी गई है, और मुनादी के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

वन विभाग की टीम और हाथी मित्र दल के सदस्य सतत निगरानी में जुटे हुए हैं, ताकि किसी भी तरह की जनहानि या फसल क्षति को रोका जा सके। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और वन अमले का सहयोग करें।

स्थिति पर वन विभाग की लगातार नजर बनी हुई है।

ग्रामीणों से सतर्कता और संयम बरतने की अपील।

 

छत्तीसगढ़ का पहला त्योहार ‘हरेली तिहार’ क्यों है खास? जानें परंपराएं, पूजा विधि और पारंपरिक व्यंजन

छत्तीसगढ़ का पहला त्योहार ‘हरेली तिहार’ क्यों है खास? जानें परंपराएं, पूजा विधि और पारंपरिक व्यंजन

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ अंचल का पहला पर्व के रूप में मनाया जाने वाला प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का पर्व है जिसे बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है । हरेली शब्द से ही समझ आ रहा है कि यह हरियाली का उत्सव है ।

आषाढ़ , सावन माह में बारिश होने के कारण सभी ओर हरियाली छा जाती है और किसान द्वारा बोयी गई धान भी लहलहा उठती है । इसलिए प्रकृति को अपना कृतज्ञता व्यक्त करते हुए यह  Hareli Tihar मनाया जाता है । हरेली विशेष रूप से किसानों के द्वारा मनाया जाता है , लेकिन इसमें अन्य सभी लोग भी शामिल होते हैं । इस प्रकार यह पर्व प्रकृति प्रेम को प्रदर्शित करता है । बस्तर क्षेत्र की जनजातियां हरेली पर्व को अमुस तिहार के रूप में मनाते हैं ।

किसान द्वारा आषाढ़ माह में धान की बुवाई करने के बाद वह उम्मीद करता है कि उसकी फसल अच्छी होगी । जब धान थोड़े बड़े हो जाते हैं तो उसमे बियासी की जाती है । बियासी धान की खेती का अंतिम चरण है जिसमें जब धान छोटे छोटे पौधे के रूप में बड़ा हो जाता है तो खेत में हल चला दिया जाता है ताकि धान का पौधा सभी ओर बराबर वितरित हो जाए कहीं कम ज्यादा ना रहे , और खेत भी बराबर हो जाए कहीं गड्ढा या ऊंच ना रहे ।

बियासी के बाद खेती का सभी कार्य पूर्ण हो जाता है । फिर किसान खेती में उपयोग की गई समस्त औजारों जैसे – नांगर (हल) , गैंती , कुदाडी़ , रापा (फावड़ा) को खेती में योगदान देने के लिए धन्यवाद अर्पित करते हुए यह हरियाली का उत्सव सावन माह के अमावस्या को मनाया जाता है । सावन माह मतलब जुलाई – अगस्त का महीना ।

हरेली तिहार क्यों मनाया जाता है ?

एक किसान अपने आप को तभी सफल मानता है जब उसके द्वारा उगाया गया अनाज उसे अच्छी पैदावार दे और अच्छी पैदावार तब होगी जब फसल सुरक्षित रहेगा , स्वस्थ रहेगा , अच्छे से विकसित होगा । और इस अच्छी फसल को उगाने के लिए भी साधन लगते हैं जिसके बिना खेती नही की जा सकती ।

इसलिए किसान बियासी के बाद खेती के दौरान उपयोग में लायी गई साधनों / औजारों को खेती में सहयोग हेतू कृतज्ञता व्यक्त करना चाहता है । इसलिए खेती के औजारों को धन्यवाद अर्पित करने के लिए सावन अमावस्या के दिन हरेली का त्यौहार मनाता है और अपने कुल देवता , ग्राम देवी की पूजा करते हुए अच्छी फसल की उम्मीद करता है , फसल की सुरक्षा की कामना करता है । कई जगह देवी कुटकी दाई की भी पूजा अर्चना की जाती है ।

Hareli Tihar में क्या किया जाता है

हरेली तिहार के दिन विभिन्न गतिविधियाँ की जाती है जिसमे बच्चे, महिलाएं , पुरुष सभी भाग लेते हैं । हरेली तिहार में निम्न चीजें की जाती है –

  • पूजा स्थान जहां पर औजारों की पूजा होनी है वहां पर तथा घर के आंगन में लाल मुरूमी मिट्टी डाला जाता है जिसमें थोड़े बड़े बड़े कंकड़ होते हैं
  • पशुधन को वर्षा जनित बिमारी / रोग से सुरक्षित रखने के लिए बैगा द्वारा तैयार की गई औषधि को चावल आटे में मिलाकर उसमे थोड़ा नमक डालकर खम्हार के पत्ते में लपेटकर दइहान जाकर खिलाया जाता है । यह औषधि जंगल से लायी गई जड़ी बुटी से बनाया जाता है ।
  • चावल का चीला (गुड़ का) बनाया जाता है जो कि विशेष रूप से पूजा के लिए ही बनाया जाता है । इस चीले को पूजा के दौरान कुल देवता , ग्राम देवता को अर्पित किया जाता है साथ ही खेत में जाकर उसकी और प्रकृति की पूजा की जाती है और अच्छी फसल की कामना की जाती है ।
  • छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में गेंहू खेत की मिट्टी से कुल देवता को छाब (छत्तीसगढ़ी शब्द) दिया जाता है । या कहें कुल देवता को मिट्टी का लेप लगाया जाता है ।
  • कृषि औजारों जैसे – नांगर (हल) , गैंती , कुदाडी़ , रापा (फावड़ा) , टंगिया आदि को धन्यवाद देते हुए पूजा की जाती है ।
  • ग्रामीण अंचल के बच्चे बांस के बने गेंड़ी पर चढ़कर चलते हैं और आपस में प्रतियोगिता भी करते हैं । गेंड़ी से चलने का परंपरा लोगों को बहुत रोमांचित करता है । लड़कियां भी खो – खो जैसे खेल को खेलते हुए आनंद लेती है ।
  • इस दिन ग्रामीण क्षेत्रों में नारियल फेंक प्रतियोगिता , गेंडी दौड़ प्रतियोगिता , कबड्डी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है ।
  • चूंकि इस समय वर्षा के कारण जीवाणु विषाणु कीटाणु का प्रभाव अधिक होता है इसलिए राउत जाति के लोगों द्वारा नीम की टहनी घर के आंगन में खोंचा (लगाया) जाता है । क्योंकि नीम अपनी कड़वाहट के कारण कीटनाशक के तौर पर काम करता है और बरसात में पनप रहे कीटाणु , कीड़े – मकोड़े को नष्ट करने में सहायक होता है ।
  • खेतों में भेलवा की टहनी की लगाया जाता है
  • छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार तंत्र मंत्र , जादू टोने से भी जुड़ा है । लोगों का विश्वास है कि सावन अमावस्या की रात को अनिष्ट शक्ति का प्रकोप होता है इस दिन यह अनिष्ट शक्ति बहुत ताकतवर हो जाती है, जिसे टोनही के रूप में भी लोग जानते हैं , जिसके प्रभाव से बचने के लिए लोहार जाति के लोग घर घर जाकर घर के चौखट पर लोहे की नुकीला कील जिसे पाती कहते हैं उसे ठोका जाता है । और यह भी कहा जाता है कि बैगा गांव की सुरक्षा के लिए गांव को तंत्र मंत्र से बांधता है ताकि अनिष्ट शक्ति किसी को हानि ना पहुंचा सके ।
  • इस दिन बुरी शक्ति / अनिष्ट शक्ति से बचने के लिए महिलाएं घर के दीवार पर गोबर से प्रेत का चित्र बनाते हैं । जिसे सवनाही कहा जाता है । लोगों का मानना है कि ऐसा करने से अनिष्ट शक्ति उनको नुकसान नही पहुचायेगी ।
हरेली तिहार पर आज मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक उल्लास के साथ होगा विशेष आयोजन….

हरेली तिहार पर आज मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक उल्लास के साथ होगा विशेष आयोजन….

 रायपुर: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा और कृषि परंपरा से जुड़ा प्रमुख लोकपर्व हरेली तिहार इस वर्ष 24 जुलाई को मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक और उल्लासपूर्ण रूप से मनाया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष आयोजन में लोकजीवन की विविध रंगतें, सांस्कृतिक विरासत और किसानों के प्रति सम्मान का भाव सजीव रूप में प्रकट होगा। हरेली त्यौहार के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री निवास परिसर को छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के रंगों से सजाया गया है। पारंपरिक तोरण, हरियाली से सजे द्वार और ग्रामीण शिल्प कला से समृद्ध इस वातावरण में हरेली की वास्तविक आत्मा को अनुभव किया जा सकेगा।

कृषि यंत्रों का पूजन, गेड़ी नृत्य, सावन झूला और रामायण पाठ जैसे विविध आयोजन होंगे आकर्षण का केंद्र

आयोजन में छत्तीसगढ़ के विविध अंचलों से आए लोक कलाकारों द्वारा गेड़ी नृत्य, राउत नाचा आदि लोकनृत्यों की प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी। सावन की फुहारों के बीच सावन झूला और सवनाही रामायण पाठ दर्शकों के आकर्षण का केंद्र होंगे। यह कार्यक्रम ना केवल एक सांस्कृतिक आयोजन होगा, बल्कि यह प्रदेश की लोकभावना और पारंपरिक धरोहर का जीवंत उत्सव भी होगा।

कृषि यंत्रों का पूजन, गेड़ी नृत्य, सावन झूला और रामायण पाठ जैसे विविध आयोजन होंगे आकर्षण का केंद्र

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इस आयोजन में शामिल होकर कृषि यंत्रों एवं औजारों की पूजा करेंगे, जो हरेली पर्व की मुख्य परंपरा रही है। पारंपरिक से लेकर आधुनिक यंत्रों की एक विस्तृत प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिससे नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की कृषि परंपराओं और यांत्रिकी प्रगति से परिचय मिलेगा।कार्यक्रम में बच्चों के लिए परंपरागत खेल और लोककला प्रदर्शनी भी आयोजित की जा रही हैं। हरेली तिहार को इस बार केवल एक त्योहार नहीं बल्कि पर्यावरण, परंपरा और प्रगति के मिलन के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

कृषि यंत्रों का पूजन, गेड़ी नृत्य, सावन झूला और रामायण पाठ जैसे विविध आयोजन होंगे आकर्षण का केंद्र

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों को हरेली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि हरेली पर्व केवल खेती और हरियाली का नहीं, बल्कि हमारे लोकजीवन, परंपरा और प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का उत्सव है। हमारी सरकार इस सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में होने वाला यह आयोजन छत्तीसगढ़ के ग्रामीण लोकसंस्कृति को न केवल संरक्षित करने की दिशा में एक प्रयास है, बल्कि उसे सार्वजनिक जीवन के केंद्र में लाने की प्रेरक पहल भी है।

शत-प्रतिशत दिव्यांगजनों को कौशलयुक्त बनाने का लक्ष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

शत-प्रतिशत दिव्यांगजनों को कौशलयुक्त बनाने का लक्ष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य तभी साकार हो सकते हैं, जब समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री  साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में समाज कल्याण विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि समय की माँग है कि शतप्रतिशत दिव्यांगजनों को कौशलयुक्त बनाया जाए, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस दिशा में कार्ययोजना बनाकर त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की दी शुभकामनाएँ….

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की दी शुभकामनाएँ….

 रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के परंपरागत लोकपर्व हरेली के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमारी कृषि संस्कृति, लोक परंपरा और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली पर्व खेती-किसानी से जुड़ा पहला त्योहार है, जिसमें किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा कर धरती माता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। यह पर्व न केवल अच्छी फसल की कामना का अवसर है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य की भावना को भी प्रकट करता है।

श्री साय ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि इस वर्ष हरेली पर्व को हम और भी सार्थक बनाएं — धरती माता की पूजा के साथ वृक्षारोपण करें, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित हो सके। यह पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक बने।

मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि हरेली पर्व प्रदेशवासियों के जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और हरियाली लेकर आए। उन्होंने सभी नागरिकों से इस लोकपर्व को आपसी सौहार्द, प्रकृति प्रेम और परंपरा के सम्मान के साथ मनाने का आह्वान किया।

बीजेपी ने जारी किया नये जिला अध्यक्ष,उपाध्यक्ष,महामंत्री और जिला मंत्री का नियुक्ति,देखे लिस्ट…

बीजेपी ने जारी किया नये जिला अध्यक्ष,उपाध्यक्ष,महामंत्री और जिला मंत्री का नियुक्ति,देखे लिस्ट…

 रायपुर – भारतीय जनता पार्टी ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के लिए अपनी नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है,जिसमें कुल 16 कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है। यह घोषणा प्रदेश महामंत्री जगदीश रामू रोहरा द्वारा की गई है,जिसे प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव,प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, और जिला अध्यक्ष लालजी यादव की सहमति प्राप्त है। नई कार्यकारिणी में शामिल प्रमुख पदाधिकारी जिला अध्यक्ष लालजी यादव,2 महामंत्री,6 जिला उपाध्यक्ष,6 जिला मंत्री इसके अलावा संगठन में अन्य कई नेताओं को भी अवसर प्रदान किया गया है, जिससे पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की दिशा में कदम माना जा रहा है। यह गठन आगामी चुनावों और संगठनात्मक मजबूती के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ब्रेकिंग : बड़े पैमाने पर व्याख्याताओं का हुआ प्रमोशन, विषयवार व्याख्याताओं की पदोन्नति सूची जारी, देखें डीपीआई का आदेश…

ब्रेकिंग : बड़े पैमाने पर व्याख्याताओं का हुआ प्रमोशन, विषयवार व्याख्याताओं की पदोन्नति सूची जारी, देखें डीपीआई का आदेश…

 रायपुर। डीपीआई ने व्याख्याताओं की पदोन्नति सूची जारी की है। सूची में बड़ी संख्या में व्याख्याता के नाम शामिल है।

 

देखें सूची…

CG – इन जमीनों की अब नहीं होगी रजिस्ट्री, सभी जिला पंजीयकों को आदेश जारी..!!

CG – इन जमीनों की अब नहीं होगी रजिस्ट्री, सभी जिला पंजीयकों को आदेश जारी..!!

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब 5 डिसमिल से कम आकार की कृषि भूमि की खरीदी-बिक्री करने पर अब रजिस्ट्री नहीं होगी। राज्य सरकार ने इस तरह की भूमि के रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है। इस संबंध में महानिरीक्षक (पंजीयन) ने सभी जिला पंजीयकों को पत्र लिखा हैं। बीतें दिनों छत्तीसगढ़ विधानसभा में ‘छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक-2025’ लाया गया था, जिसमें जमीनों की खरीदी और बिक्री को लेकर कई तरह के प्रावधान किए गए थे। इसमें 5 डिसमिल से कम आकार की कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं करने की बात भी शामिल थी। अब इस नियम के राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही सभी जिला पंजीयकों को आदेश जारी किया गया है।

बता दें कि पूर्व में 5 डिसमिल से कम जमीन की रजिस्ट्री होने से प्रदेश भर में अवैध प्लॉटिंग बढ़ गई थी और इससे कई समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। हालांकि यह नया नियम शहरों में लागू नहीं होगा, क्योंकि शहरों में भूमि आमतौर पर कृषि श्रेणी से बाहर होती है। शहरी क्षेत्रों में डायवर्टेड भूमि जो व्यवसायिक और आवासीय उपयोग के लिए होती है, उसकी रजिस्ट्री पहले की तरह होती रहेगी।

छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक-2025’ में किए गए ये प्रावधान

विधेयक के तहत जियो रिफेरेन्सिंग तकनीक को कानूनी मान्यता दी गई है। इसके अंतर्गत पूरे प्रदेश में डिजिटल नक्शे तैयार किए जा रहे हैं, जिससे सीमांकन, बंटवारा और नामांतरण जैसे विवाद खत्म होंगे। डिजिटल नक्शे अब कानूनी दस्तावेज माने जाएंगे, जो कोर्ट और प्रशासनिक कामों में मान्य होंगे।

नौनिहालों के पोषण के साथ ही सुरक्षित और सुनहरा भविष्य देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

नौनिहालों के पोषण के साथ ही सुरक्षित और सुनहरा भविष्य देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि नौनिहालों के पोषण और उनको सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने के लिए राज्य सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है। बच्चों के समुचित विकास हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को आपसी समन्वय के साथ मिलकर कार्य करना होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की उच्च स्तरीय समीक्षा की और अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों पर केंद्रित योजनाओं की जिलेवार नियमित मॉनिटरिंग सचिव स्तर से की जाए तथा आगामी कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में इसकी गहन समीक्षा की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की आधारभूत संरचना, बजट और संचालित योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि विभाग बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के पोषण एवं सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे बच्चों की देखभाल और पोषण जितनी संवेदनशीलता और कुशलता से की जाएगी, उनका शारीरिक और मानसिक विकास उतना ही प्रभावी और सुदृढ़ होगा।

बच्चों के समुचित विकास के लिए महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग समन्वय के साथ करें कार्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बच्चे हमारे देश के भविष्य की नींव हैं और इस नींव को मजबूत करने के लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने विभागीय अमले को जमीनी स्तर पर सक्रियता और स्वप्रेरणा के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि राज्य के प्रत्येक बच्चे को पूरक पोषण आहार और विभागीय योजनाओं का समुचित लाभ प्राप्त हो।

उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाने वाले पोषण आहार, गर्म भोजन, उसकी मात्रा, गुणवत्ता और कैलोरी मानकों सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की और वितरण की प्रक्रिया की निरंतर निगरानी की आवश्यकता बताई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पीएम जनमन योजना अंतर्गत संचालित 197 आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की जानकारी ली तथा विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) समुदाय के बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों के पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचकांकों की समीक्षा करते हुए अपेक्षित सुधार लाने हेतु ठोस प्रयास करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सूचकांकों के माध्यम से वास्तविक स्थिति का आंकलन संभव होता है, और जहां भी कमी दिखाई दे, वहां त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में बेहतर प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि यह प्रगति इसी प्रकार सतत बनी रहे। उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक विकास पर छोटी-छोटी बातों और व्यवहार का गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संवेदनशीलता के साथ बच्चों से भावनात्मक जुड़ाव बनाएं।

बच्चों के समुचित विकास के लिए महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग समन्वय के साथ करें कार्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने विभागीय अमले के नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, ताकि वे तकनीकी रूप से दक्ष और अनुसंधानपरक दृष्टिकोण के साथ परिणामोन्मुखी कार्य कर सकें।

बैठक में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, सखी वन स्टॉप सेंटर, शक्ति सदन, महिला एवं चाइल्ड हेल्पलाइन, महिला कोष, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मिशन वात्सल्य तथा अन्य योजनाओं की भी समीक्षा की गई।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, श्री राहुल भगत, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, संचालक श्री पी. एस. एल्मा सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी इस जिले को 11 करोड़ 52 लाख रुपए की सौगात…

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी इस जिले को 11 करोड़ 52 लाख रुपए की सौगात…

 रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के समग्र विकास को दृष्टिगत रखते हुए एक और बड़ी सौगात दी है। जिले के तीन प्रमुख नदी-नालों में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य के लिए कुल 11 करोड़ 52 लाख 43 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन निर्माण कार्यों से ग्रामीण अंचल की कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी और वर्षा ऋतु में भी अब नागरिकों को सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी।

तीन प्रमुख स्थलों पर होगा पुल निर्माण
लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा जशपुर जिले के बोडोकछार से चटकपुर मार्ग पर स्थित चंपाझरिया नाला में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 4 करोड़ 46 लाख 58 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। यह मार्ग क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ता है और पुल निर्माण से वर्षा के दिनों में बहाव से कटने वाली सड़क की समस्या स्थायी रूप से दूर होगी। जिले के भालूमुंडा-खजूरघाट मार्ग पर स्थित कोकिया नदी पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण हेतु 3 करोड़ 32 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है।

इस पुल के निर्माण से ग्रामीणों को पूरे साल निर्बाध रूप से आवाजाही की सुविधा मिल सकेगी। डूमरबहार से तमता मार्ग पर शेखरपुर के पास गुढ़ा नाला पर 3 करोड़ 73 लाख 85 हजार रुपए की लागत से उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण को मंजूरी दी गई है। इससे न केवल यातायात सुगम होगा बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी सुगमता से पहुंच सकेंगी।

इन पुलों के निर्माण से संबंधित क्षेत्रों के हजारों ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा। इन परियोजनाओं से क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेंगी। जिससे कृषि, व्यापार, स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्रों में सुधार होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा जिले के विकास के लिए निरंतर की जा रही घोषणाएं और स्वीकृतियाँ यह दर्शाती हैं कि राज्य सरकार जशपुर जैसे दूरस्थ अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।वहीं क्षेत्र वासियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार जताया है।

श्रावण में पं. Pradeep Mishra सुनाएंगे शिव महापुराण कथा, SSP विजय अग्रवाल ने तैयारियों का किया निरीक्षण

श्रावण में पं. Pradeep Mishra सुनाएंगे शिव महापुराण कथा, SSP विजय अग्रवाल ने तैयारियों का किया निरीक्षण

 दुर्ग-भिलाई।  श्रावण मास के पावन अवसर पर इस वर्ष भी भिलाई में भव्य शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा महाराज एक बार फिर भिलाई की पुण्य भूमि पर जयंती स्टेडियम में शिव कथा का अमृत बरसाएंगे। इस शुभ आयोजन का भूमि पूजन कुछ दिन पूर्व विधिवत रूप से संपन्न हो चुका है। श्रावण मास में 30 जुलाई 5 अगस्त तक भिलाई में होने वाले शिवमहापुराण की तैयारी जोरो पार है, जिसमें सीएम विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह और दोनों डिप्टी सीएम भी शामिल होंगे।

शिव महापुराण कथा के आयोजक, बोल बम समिति के संस्थापक संरक्षक व भिलाई निगम के उपनेता प्रतिपक्ष दया सिंह ने बताया की आज दुर्ग जिले के एस.एस.पी. विजय अग्रवाल, ए. एस. पी. सुखनंदन राठौर, नगर पुलिस अधीक्षक सत्यप्रकाश तिवारी, प्रशांत मिश्रा ने कथा स्थल के पंडाल एवं पार्किंग व्यवस्था,की तैयारियों का जायजा लिया पुलिस के साथ साथ महापौर नीरज पाल, नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारी जावेद खान एवं निगम प्रभारी आयुक्त भी उपस्थित थे पी.एच.डी., पी. डब्लू. डी. के अधिकारी, कर्मचारी भी उपस्थित थे।  द्वितीय वर्ष में प्रवेश पर दया सिंह को महापौर ने बधाई दी, शिव महापुराण कथा में जरूर अमृत पान करने उपस्थित होंगे।