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बीयर प्रेमियों के लिए खुशखबरी : अब छत्तीसगढ़ में भी मिलेगी क्राफ्ट बीयर, राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने की दी मंजूरी…

बीयर प्रेमियों के लिए खुशखबरी : अब छत्तीसगढ़ में भी मिलेगी क्राफ्ट बीयर, राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने की दी मंजूरी…

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में बीयर पीने वालों के लिए खुशखबरी है। अब प्रदेश में अलग-अलग फ्लेवर वाली फ्रेश (क्राफ्ट) बीयर मिलने वाली है। राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद आबकारी विभाग लाइसेंस जारी करेगा। लाइसेंस के लिए 10 लाख फीस होगी। 4 हजार वर्गफीट परिसर होना जरूरी होगा।

सरकार का कहना है कि इससे लोगों को नया विकल्प मिलेगा और होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सरकार की आय भी बढ़ेगी। माइक्रो ब्रुअरी में सीमित मात्रा में ताजा बीयर तैयार की जाती है और उसे उसी परिसर में मौजूद रेस्तरां या ग्राहकों को परोसा जाता है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में माइक्रो ब्रुअरी पहले से चल रही हैं। खासकर बेंगलुरु को देश की ‘क्राफ्ट बीयर कैपिटल’ माना जाता है। अब छत्तीसगढ़ भी इस सूची में शामिल होने जा रहा है।

ताजा परोसा जाता है क्राफ्ट बीयर

क्राफ्ट बीयर छोटे बैच में तैयार की जाती है, इसलिए इसके स्वाद, गुणवत्ता और ताजगी पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। इसमें बेहतर गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और अन्य प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि इसका स्वाद सामान्य फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग होता है। इसमें अलग-अलग फ्लेवर भी मिलते हैं और इसे ताजा परोसा जाता है।

4 हजार वर्गफीट जगह जरूरी, लाइसेंस फीस 10 लाख सालाना

सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। ब्रुअरी और उससे जुड़े रेस्तरां का कुल क्षेत्रफल कम से कम 4 हजार वर्गफीट होना चाहिए। इसके अलावा भवन में फायर सेफ्टी, मशीनों की सुरक्षा और अन्य सभी जरूरी मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को हर साल 10 लाख रुपए लाइसेंस फीस देनी होगी। एक माइक्रो ब्रुअरी को प्रतिदिन अधिकतम 1 हजार लीटर क्राफ्ट बीयर बनाने की अनुमति होगी। पहले जहां सालाना लाइसेंस फीस 25 लाख रुपए थी, उसे घटाकर 10 लाख रुपए कर दिया गया है। हालांकि, लाइसेंस लेने के साथ ही कारोबारियों को लाइसेंस फीस का 25% हिस्सा सुरक्षा राशि के रूप में पहले से जमा करना होगा।

एक गिलास की कीमत 250 से 300 रुपए तक

सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी में तैयार होने वाली क्राफ्ट बीयर पर 60 रुपए प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क तय किया है। वहीं एक गिलास क्राफ्ट बीयर की अनुमानित कीमत 250 से 300 रुपए के बीच हो सकती है। सरकार का मानना है कि माइक्रो ब्रुअरी शुरू होने से होटल, रेस्तरां और पर्यटन क्षेत्र को फायदा मिलेगा। नए निवेश आएंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य को लाइसेंस फीस और उत्पाद शुल्क के रूप में अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा।

छत्तीसगढ़ के 32 हजार से ज्यादा स्कूलों को 84.29 करोड़ की सौगात, विभाग ने जारी किए निर्देश

छत्तीसगढ़ के 32 हजार से ज्यादा स्कूलों को 84.29 करोड़ की सौगात, विभाग ने जारी किए निर्देश

 रायपुर।  छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा ने प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के संचालन एवं रखरखाव के लिए 84 करोड़ 29 लाख 90 हजार रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की है।

जारी आदेश के अनुसार, इस राशि का लाभ प्रदेश के 32,295 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक स्कूलों को मिलेगा। अनुदान राशि का उपयोग स्कूलों के दैनिक संचालन, रखरखाव, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा।

राज्य सरकार का उद्देश्य स्कूलों में शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ करना, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा विद्यालयों के नियमित संचालन में आने वाली व्यावहारिक जरूरतों को पूरा करना है। समग्र शिक्षा के तहत जारी यह राशि सभी पात्र स्कूलों तक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पहुंचाई जाएगी।

 

 
 
CG Weather : छत्तीसगढ़ में आज से बदलेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट

CG Weather : छत्तीसगढ़ में आज से बदलेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में शनिवार से मौसम का मिजाज बदलने जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में अगले सात दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई है। कई जिलों में भारी बारिश, तेज हवाएं और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में तीन अलग-अलग मौसमी सिस्टम सक्रिय हैं, जिनके प्रभाव से प्रदेशभर में बारिश की गतिविधियां तेज होंगी। इसके चलते अगले तीन से चार दिनों के भीतर मानसून छत्तीसगढ़ के शेष हिस्सों में भी पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।

विभाग का कहना है कि कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं गरज-चमक के दौरान वज्रपात की घटनाएं भी होने की आशंका है। ऐसे में लोगों को खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आएगी और खरीफ फसलों की बुआई में मददगार साबित होगी। हालांकि लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम से जुड़े ताजा अपडेट पर नजर बनाए रखें। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

CG – दोस्त ने ली दोस्त की जान : पहले खाना खिलाया, शराब पिलाई… फिर उतारा मौत के घाट

CG – दोस्त ने ली दोस्त की जान : पहले खाना खिलाया, शराब पिलाई… फिर उतारा मौत के घाट

 दुर्ग। जिले में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ते ही जा रहा है। इस बिच दोस्त ने मामूली सी बात पर होने ही दोस्त की हत्या कर दी। उसके सिर सब्बल से ताबड़तोड़ वार उसे मौत के घाट उतार दिया। फिर सबुत मिटाने के लिए सब्बल और पहने हुए कपड़ों को तालाब में फेंक दिया। मामला जिले के नंदिनी नगर थाना क्षेत्र के ग्राम डूमर का है। वारदात गुरुवार (25 जून) रात की है। मृतक की पहचान पथरिया गाँव के रहने वाले चेतन ठाकुर (19) के रूप में हुई है। जबकि आरोपियों का नाम रोमनाथ उर्फ लालू यादव और राहुल कुर्रे है।

जानकारी के मुताबिक़, चेतन ठाकुर, लालू यादव और राहुल कुर्रे ने एक साथ शराब पी थी। उसके बाद सभी लालू यादव के घर खाना खाने गए। खाना खाने के दौरान चेतन ठाकुर गाली-गलौज करने लगा। इससे लालू यादव को गुस्सा आ गया। फिर क्या जब चेतन गांव के चबूतरे पर सो रहा था तब उसने उसकी सब्बल से मारकर हत्या कर दी। इसके बाद सब्बल, अपनी टी-शर्ट और जींस को पास के तालाब में फेंक दिया ताकि कोई पहचान न पाए। चेतन की खून से लथपथ लाश मिली। इसकी सूचना पुलिस को दी गयी. शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। साथ ही डॉग स्क्वाड की टीम को भी मौके पर बुलाया गया।

स्थानीय लोगो से पूछताछ के आधार पर लालू यादव और राहुल कुर्रे को हिरासत में लिया गया। दोनों से सख्ती से पूछताछ की गयी जिसमे अपना गुनाह कुबूल किया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।

नक्सलमुक्त बस्तर के चहुंमुखी विकास के लिए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने समाज प्रमुखों से मांगा सहयोग

नक्सलमुक्त बस्तर के चहुंमुखी विकास के लिए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने समाज प्रमुखों से मांगा सहयोग

 रायपुर: उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा द्वारा आज जिला पंचायत कांकेर सभाकक्ष में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक लेकर बस्तर के नक्सल उन्मूलन के बाद चहुंमुखी विकास, सामाजिक एकता तथा आदिवासियों की पारंपरिक संस्कृति और विरासत को सहेजने, संरक्षित करने पर चर्चा की। जिसमें जिले में पेसा एक्ट का समुचित क्रियान्वयन और पारंपरिक देव स्थलों को संरक्षित करने जैसे विषयों पर द्विपक्षीय सकारात्मक चर्चा हुई। इस दौरान समाज प्रमुखों ने भी बारी बारी से सुझाव दिए।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में समाज प्रमुखों से कहा कि किसी समाज की परंपरा और सांस्कृतिक धरोहरों व पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने में समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। किसी बड़े लक्ष्य की सफलता समाज के सहयोग से ही संभव होती है और बस्तर में नक्सल उन्मूलन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र की मुख्यधारा से टूट कर हिंसा का मार्ग अपनाने वाले युवाओं को वापस मुख्यधारा में लेकर आने में समाज प्रमुखों ने  सराहनीय कार्य किया, जिसमें सुरक्षा बलों और जवानों का सतत् सहयोग मिला, जिसके  फलस्वरूप आज बस्तर का लाल आतंक से मुक्त होना संभव हुआ। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि आज वर्षों से बंद मेला-मड़ई, बाजार, हाट अब आबाद होने लगे हैं। पहले जहां रिश्तेदार भी घर आने में डरते थे वे भी बेखौफ आने जाने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के इतने सालों के बाद भी वे पहली बार (नक्सलवाद से) आजाद होने का अनुभव कर रहे हैं।

सुविधा केंद्र के रूप में विकसित हो रहे अब सुरक्षा कैम्प

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि कतिपय बाहरी लोग स्थानीय लोगों में भ्रम फैला रहे हैं कि बस्तर के संसाधनों का दोहन किया जा रहा है। इस पर उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि बस्तर का विकास बस्तर के युवाओं और लोगों के द्वारा ही किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय संसाधनों का प्रयोग कर ही ग्रामों का विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए शुरुआत के रूप में सुरक्षा कैम्पों को सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान द्वारा स्थानीय संसाधनों से ही विकसित किया जाएगा।

197 गांवों के देव स्थलों का राजस्व रिकॉर्ड

समाज प्रमुखों से चर्चा के दौरान शर्मा ने बताया कि इसी क्रम में अब बस्तर के देव स्थलों को संरक्षित करने के लिए 197 गांवों के देव स्थलों का राजस्व रिकॉर्ड में चिन्हांकन कर उसे स्थायी पंजीयन की व्यवस्था की जा रही है ताकि देव स्थलों को अच्छे से संरक्षित किया जा सके। उन्होंने बताया कि सरकार के द्वारा पेसा एक्ट को और भी सशक्त करने का कार्य किया गया है। इसके लिए पहली बार सरकार ने गांव गांव में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर पेसा मोबिलाइजर, कोऑर्डिनेटर रखने का कार्य किया जा रहा है।

नक्सलमुक्त बस्तर के चहुंमुखी विकास के लिए उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने समाज प्रमुखों से मांगा सहयोग

जेल से भी पुनर्वास की व्यवस्था

समाज प्रमुखों की जेल में बंद भटके हुए युवाओं के पुनर्वास पर चिंता के संबंध में उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि हमने हर युवा को मुख्यधारा में लाने के लिए जेल से भी पुनर्वास की व्यवस्था की है। इसके लिए समाज को भी प्रेरित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि अब पुनर्वासित युवा खुद भी जेल में जाकर भटके युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रेरित करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अन्य मतों में जाने वाले लोगों के साथ सामाजिक स्तर पर चर्चा कर शांति स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा शासन द्वारा भोले भाले ग्रामीणों की रक्षा के लिए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक का निर्माण भी किया गया है।

इस अवसर पर सांसद  भोजराज नाग ने कहा कि समाज में वैचारिक चिंतन की आवश्यकता है, ग्रामों की संस्कृति के संरक्षण की जरूरत है। उन्होंने विकास के साथ स्थानीय लोगों का भी विकास के लिए कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा कि विकास के लिए समाज के प्रतिनिधि और प्रशासन के समन्वय के द्वारा आगे बढ़ना है।

सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव रखे। उन्होंने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए समाज की सहभागिता से बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य करने का विश्वास दिलाया।

इस अवसर राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, अंतागढ़ विधायक  विक्रम उसेंडी, कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर सहित गोंडवाना समाज के अध्यक्ष सुमेर सिंह नाग, सर्व आदिवासी समाज के जिला सचिव राजेश भास्कर सहित विभिन्न आदिवासी समाज के प्रमुखगण मौजूद थे।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का सुकमा दौरा: बच्चों के बीच बैठकर पढ़ी एबीसीडी

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का सुकमा दौरा: बच्चों के बीच बैठकर पढ़ी एबीसीडी

 रायपुर: महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने शुक्रवार को सुकमा जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान विभिन्न विभागीय संस्थानों का निरीक्षण कर जमीनी स्तर पर संचालित योजनाओं और व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने बच्चों के पोषण,  शिक्षा, महिला स्वावलंबन और आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास को राज्य सरकार की प्राथमिकता बताते हुए संबंधित अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का सुकमा दौरा

दौरे की शुरुआत आंगनबाड़ी केंद्र रोकेल और पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) से हुई। मंत्री राजवाड़े ने बच्चों के बीच फर्श पर बैठकर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से एबीसीडी और पहाड़े सुने, उनकी पढ़ाई,  और दैनिक गतिविधियों की जानकारी ली तथा उन्हें फल और चॉकलेट वितरित कर उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर उन्होंने परिसर में पौधारोपण भी किया और निर्देश दिए कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पोषण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। एनआरसी में उन्होंने कुपोषित बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण भोजन एवं बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने तथा अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को केंद्र तक लाने पर विशेष जोर दिया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का सुकमा दौरा

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का सुकमा दौरा

इसके बाद मंत्री राजवाड़े ने कुम्हाररास स्थित इमली प्रसंस्करण केंद्र का निरीक्षण किया। कलेक्टर अमित कुमार ने उन्हें केंद्र की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां स्व-सहायता समूहों की लगभग 60 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है और इमली से विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। मंत्री ने महिलाओं के कार्यों की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण का प्रभावी मॉडल बताया तथा उत्पादन एवं विपणन को और मजबूत करने पर बल दिया।

अपने प्रवास के दौरान मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े नक्सल पुनर्वास केंद्र पहुंचीं, जहां उन्होंने आत्मसमर्पित युवाओं से संवाद कर उनके रहने, भोजन और प्रशिक्षण संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित युवाओं को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर भविष्य उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान उन्होंने 36 प्रशिक्षणार्थियों को वेलकम किट वितरित की और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नए जीवन की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का सुकमा दौरा

दौरे के दौरान कलेक्टर  अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक  किरण चव्हाण, जिला पंचायत सीईओ  मुकुंद ठाकुर सहित विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में मंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और सतत निगरानी के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बस्तर क्षेत्र का सर्वांगीण विकास सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता: वन मंत्री केदार कश्यप

बस्तर क्षेत्र का सर्वांगीण विकास सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता: वन मंत्री केदार कश्यप

 रायपुर: मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी कड़ी में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने आज मर्दापाल क्षेत्र के ग्राम मड़ागांव में लगभग 8 करोड़ 63 लाख 78 हजार रुपये की लागत से विभिन्न सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया।

कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की हुई शुरुआत

भूमिपूजन के अंतर्गत खोड़सानार से नवागांव तक 2.30 किलोमीटर डामरीकरण सड़क निर्माण, बांसगांव-जोगियालवाड़ मार्ग पर फोटकी नाला में मध्यम पुल का निर्माण, मर्दापाल-बयानार मार्ग पर नवागांव से एहरा तक पुलिया एवं एप्रोच निर्माण, आदनार क्षेत्र में तीन पुलियों का निर्माण तथा तोड़म मेन रोड से मुंडापारा तक 2.65 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य शामिल हैं।

इन कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी। विशेष रूप से बारिश के मौसम में आने-जाने की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा और गांवों की सड़क संपर्क व्यवस्था अधिक मजबूत होगी।

अंतिम छोर तक विकास पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता

इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का उद्देश्य विकास को गांव-गांव तक पहुंचाना है। दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, पुल और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है ताकि प्रत्येक नागरिक को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने कहा कि अच्छी सड़कें किसी भी क्षेत्र के विकास की आधारशिला होती हैं। बेहतर सड़क संपर्क से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलती है, विद्यार्थियों को  शिक्षा, मरीजों को समय पर  स्वास्थ्य सेवाएं और आम नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन का लाभ मिलता है।

बस्तर के समग्र विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर क्षेत्र का सर्वांगीण विकास राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई तथा जनकल्याण से जुड़े कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन निर्माण कार्यों के पूर्ण होने के बाद मर्दापाल क्षेत्र की विकास यात्रा को नई गति मिलेगी और हजारों ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष अनीता कोर्राम, उपाध्यक्ष  टोमेंद्र ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य यशोदा कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत का त्वरित समाधान, परिवहन विभाग की तत्पर कार्रवाई से आवेदक को मिली आवश्यक जानकारी

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत का त्वरित समाधान, परिवहन विभाग की तत्पर कार्रवाई से आवेदक को मिली आवश्यक जानकारी

 रायपुर: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान का भरोसेमंद माध्यम बनती जा रही है। हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को आवश्यक सेवाएं और जानकारी समय पर उपलब्ध हो रही है।

इसी क्रम में जिला परिवहन कार्यालय जशपुर ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में प्राप्त एक शिकायत का त्वरित निराकरण करते हुए आवेदक को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई, जिससे शिकायत का संतोषजनक समाधान हो गया।

जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से  एच.एल. भगत का आवेदन प्राप्त हुआ था। उन्होंने झारखंड राज्य के लिए वाहन पोर्टल पर ऑनलाइन अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी करने की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

शिकायत प्राप्त होने के बाद परिवहन विभाग ने तत्काल प्रकरण की जांच कर 25 जून 2026 को आवेदक से दूरभाष पर संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि वर्तमान में झारखंड राज्य के लिए वाहन पोर्टल पर ऑनलाइन एनओसी जारी करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

विभाग द्वारा आवेदक को यह भी बताया गया कि एनओसी प्राप्त करने के लिए प्रपत्र-28, चेसिस नंबर ट्रेस, आधार कार्ड, बीमा प्रमाण-पत्र, प्रदूषण प्रमाण-पत्र, मूल पंजीयन प्रमाण-पत्र (आरसी) तथा एनसीआरबी रिपोर्ट सहित आवश्यक दस्तावेज संबंधित जिला परिवहन कार्यालय में प्रस्तुत कर ऑफलाइन प्रक्रिया के माध्यम से एनओसी प्राप्त किया जा सकता है।

पूरी जानकारी मिलने के बाद आवेदक ने समाधान पर संतोष व्यक्त किया तथा किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई। जिला परिवहन अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शासन और नागरिकों के बीच प्रभावी संवाद का सशक्त माध्यम बन रही है। हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को समय पर आवश्यक जानकारी एवं सेवाओं का लाभ मिल रहा है। शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक शिकायत का संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ निराकरण किया जा रहा है।

नवा रायपुर में वृक्षारोपण एवं पीपल प्लांटेशन कार्यों का मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया निरीक्षण

नवा रायपुर में वृक्षारोपण एवं पीपल प्लांटेशन कार्यों का मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया निरीक्षण

 रायपुर: आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने आज नवा रायपुर में सेंध लेक क्षेत्र में चल रहे वृक्षारोपण एवं पीपल प्लांटेशन कार्यों का अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान मंत्री चौधरी ने पौधारोपण की प्रगति, पौधों के संरक्षण एवं रखरखाव की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को पौधों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने तथा नवा रायपुर को अधिक हरित एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के उद्देश्य से वृक्षारोपण कार्यों को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, एनआरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  चंदन कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

नीली क्रांति’ से समृद्धि की ओर: मछली पालन बना ग्रामीण विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया आधार…

नीली क्रांति’ से समृद्धि की ओर: मछली पालन बना ग्रामीण विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया आधार…

 रायपुर: भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ सहायक व्यवसायों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इन्हीं में मछली पालन आज केवल भोजन का स्रोत नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन गया है। कम लागत, कम समय में बेहतर उत्पादन और बाजार में बढ़ती मांग के कारण यह व्यवसाय गांवों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

मत्स्य पालन जैसे आयवर्धक व्यवसायों को अपनाएं

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने भी किसानों से आह्वान किया है कि वे खेती को केवल धान तक सीमित न रखें। दलहन, तिलहन, उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे आयवर्धक व्यवसायों को अपनाएं। इसी सोच के अनुरूप भारत  सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं चला रही हैं, जिससे किसानों और ग्रामीण युवाओं को रोजगार-स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती  

ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन सीमित भूमि और कम पूंजी में शुरू किया जा सकता है। तालाब, जलाशय, नहर और अन्य जल स्रोतों का उपयोग कर किसान अतिरिक्त आय कमा सकते हैं। बढ़ती आबादी और पौष्टिक भोजन की मांग से मछली की खपत लगातार बढ़ रही है। प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर मछली स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।

मत्स्य पालन में रोजगार के बड़े अवसर

मत्स्य पालन न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाता है, बल्कि मत्स्य बीज उत्पादन, आहार निर्माण, परिवहन, प्रसंस्करण और विपणन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के बड़े अवसर देता है।

राज्य पोषित योजनाओं से बढ़ रही संभावनाएं, शिक्षण एवं प्रशिक्षण

छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य कृषकों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता दे रही है। आधुनिक तकनीकों के लिए 10 दिवसीय प्रशिक्षण में तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज उत्पादन, रोग नियंत्रण और विपणन की जानकारी दी जाती है। तकनीकी उन्नयन के लिए विशेष प्रशिक्षण भी होते हैं।

मत्स्य पालकों को राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण 

प्रगतिशील मत्स्य पालकों को राज्य के बाहर सफल मॉडल देखने भेजा जाता है, ताकि वे नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित हों।

सहकारी समितियों को अनुदान- 

उत्पादन और विपणन व्यवस्था मजबूत करने के लिए मत्स्य सहकारी समितियों को आर्थिक मदद दी जाती है।

नाव-जाल सहायता-

अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को नाव-जाल देकर पारंपरिक मछली पकड़ने को बढ़ावा दिया जा रहा है।

फुटकर विक्रेताओं को मदद–

आइस बॉक्स, तराजू जैसे उपकरण देकर छोटे मछुआरों को बेहतर बाजार और लाभ दिलाया जा रहा है।

स्पॉन संवर्धन व झींगा पालन–

अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग को स्पॉन संवर्धन और झींगा सह मछली पालन के लिए विशेष सहायता मिल रही है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना दे रही नई उड़ान- 

केंद्र-राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से चल रही इस योजना का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, रोजगार सृजन और मछुआरों की आय बढ़ाना है।

आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहन- 

मत्स्य बीज उत्पादन बढ़ाने और नए तालाब निर्माण के लिए आकर्षक अनुदान दिया जा रहा है। बेहतर वृद्धि के लिए संतुलित आहार, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सजावटी मछली व केज कल्चर- 

मत्स्य पालन के क्षेत्र में सजावटी मछली पालन इकाइयों और जलाशयों में केज कल्चर से स्वरोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।

विपणन को मजबूती-

मत्स्य पालकों को शीत संयंत्र, प्रशीतित वाहन, आइस बॉक्स युक्त मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा और लाइव फिश सेंटर से मछलियों की गुणवत्ता बनाए रखकर बेहतर विपणन सुनिश्चित हो रहा है।

मछुआरों के लिए सामाजिक सुरक्षा का कवच
बचत सह राहत योजना-

मछली पकड़ने की बंद (15 जून से 15 अगस्त तक) अवधि में आर्थिक मदद के लिए केंद्र-राज्य के सहयोग से यह योजना चल रही है।

निःशुल्क समूह बीमा योजना-

मत्स्य पालकों के दुर्घटना, मृत्यु या अपंगता की स्थिति में मछुआरों और उनके परिवारों को वित्तीय सुरक्षा मिलती है।

आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर कदम-  

मछली पालन आज ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता का अहम माध्यम बन गया है। सरकार की योजनाएं किसानों, युवाओं, महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को स्वरोजगार के नए अवसर दे रही हैं। आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण से मत्स्य क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं बन रही हैं।

मत्स्य पालन आत्मनिर्भर और समृद्ध ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम

इच्छुक हितग्राही अपने नजदीकी मत्स्य विभाग कार्यालय से संपर्क कर योजनाओं की विस्तृत जानकारी ले सकते हैं। मछली पालन न सिर्फ आय बढ़ाने का जरिया है, बल्कि आत्मनिर्भर और समृद्ध ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बोड़ागांव में ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाकर किया संवाद

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बोड़ागांव में ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाकर किया संवाद

 रायपुर: उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज अपने उत्तर बस्तर कांकेर प्रवास के दौरान अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम बोड़ागांव स्थित सीएएफ कैंप परिसर में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से संवाद करते हुए शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी ढाई महीने के भीतर प्रत्येक ग्रामीण का बैंक खाते की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाए, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच सके।

ग्रामीणों की टीम गठित कर गुजरात में एक्पोजर विजिट कराने के निर्देश अधिकारियों को

उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने चौपाल में ग्रामीणों से चर्चा के दौरान क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने, दुग्ध उत्पादन को आजीविका के साधन के रूप में विकसित करने तथा लघु वनोपज के प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने आधुनिक ढंग से दुग्ध उत्पादन के लिए इसमें रुचि लेने वाले 10-10 ग्रामीणों की टीम गठित कर गुजरात में एक्पोजर विजिट कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से ग्रामीणों को रोजगार और आय के नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।उन्होंने महिला स्व सहायता समूहों से अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ने तथा शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक पहल करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने से आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।

आमाबेड़ा में किसान सदन निर्माण के लिए 15 लाख रुपये की स्वीकृति

इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने बोड़ागांव में स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवकों को रोजगार देने के लिए अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित करने एवं आमाबेड़ा में किसान सदन निर्माण के लिए 15 लाख रुपये की स्वीकृति देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं और किसानों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीणों को बेहतर लाभ मिलेगा।

ग्रामीणों ने उप मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी आवश्यकताओं और स्थानीय समस्याओं से भी अवगत कराया, जिस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। इस अवसर पर कांकेर सांसद  भोजराज नाग और अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए नक्सलवाद की समाप्ति के बाद ग्रामीणों को शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं से जुड़कर विकास की मुख्य धारा में शामिल होने की अपील की।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, जिले के कलेक्टर  निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपी  आकाश श्रीमाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से सेवा सेतु बना ग्रामीणों का भरोसेमंद साथी, रायगढ़ विकासखंड के ग्राम सांगीतराई के दुर्गा सिदार को घर बैठे मिला विवाह प्रमाण पत्र

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से सेवा सेतु बना ग्रामीणों का भरोसेमंद साथी, रायगढ़ विकासखंड के ग्राम सांगीतराई के दुर्गा सिदार को घर बैठे मिला विवाह प्रमाण पत्र

 सेवा सेतु के जरिए विभिन्न शासकीय सेवाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से हो रही उपलब्ध

रायगढ़, 26 जून 2026// मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन और डिजिटल सेवाओं के विस्तार की दिशा में संचालित सेवा सेतु पोर्टल आम नागरिकों के लिए सुविधाओं का नया माध्यम बनकर उभरा है। इस पोर्टल के जरिए नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रही हैं। रायगढ़ विकासखंड के ग्राम सांगीतराई के दुर्गा सिदार सिदार इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिन्हें सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से विवाह पंजीकरण एवं विवाह प्रमाण पत्र की सुविधा का लाभ मिला।

दुर्गा सिदार ने बताया कि विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने तथा आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें विवाह प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। पहले ऐसे दस्तावेज बनवाने के लिए कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते थे। इसी दौरान उन्हें सेवा सेतु पोर्टल की जानकारी मिली, जिसके माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध थी। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ पोर्टल पर आवेदन किया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत कुछ ही दिनों में उनका विवाह प्रमाण पत्र जारी हो गया। इससे उन्हें बिना किसी अनावश्यक भागदौड़ के समय पर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त हो गया।
दुर्गा सिदार बताती हैं कि सेवा सेतु पोर्टल केवल विवाह प्रमाण पत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से आय, जाति, निवास, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, भू-अभिलेख संबंधी सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ी सेवाएं, श्रम, राजस्व, नगरीय प्रशासन तथा अन्य विभागों की अनेक नागरिक सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को विशेष सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि पहले जहां छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब सेवा सेतु के माध्यम से कई सेवाओं का लाभ घर के नजदीक उपलब्ध हो रहा है। इससे समय की बचत होने के साथ-साथ प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोगों का भरोसा भी बढ़ा है। दुर्गा सिदार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा सेतु जैसी पहल ग्रामीण नागरिकों के जीवन को आसान बना रही है। यह पोर्टल डिजिटल सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो शासन की सेवाओं को आमजन तक सहज और प्रभावी रूप से पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सोच को साकार कर रहा टेक्सटाइल पार्क, स्थानीय रोजगार को मिलेगी नई उड़ान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सोच को साकार कर रहा टेक्सटाइल पार्क, स्थानीय रोजगार को मिलेगी नई उड़ान

 मुख्यमंत्री की पहल पर नवा रायपुर के टेक्सटाइल पार्क में लग रही पहली यूनिट, 235 करोड़ का निवेश, 4600 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार

81 एकड़ में विकसित हो रहा टेक्सटाइल पार्क, निवेशकों के लिए तैयार की जा रही सभी जरूरी अधोसंरचनाएं

रायपुर. 26 जून 2026. मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार नवा रायपुर को देश के प्रमुख टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा है कि नवा रायपुर का टेक्सटाइल पार्क प्रदेश के युवाओं और महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का मजबूत आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार टेक्सटाइल पार्क में निवेशकों को विश्वस्तरीय अधोसंरचना और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय की गंभीर कोशिशों से नवा रायपुर के टेक्सटाइल पार्क में पहली यूनिट लगने जा रही है। 235 करोड़ रुपए के निवेश से लगने वाली इस यूनिट से 4600 से अधिक लोगों को रोजगार का मौका मिलेगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने 25 जून को टेक्सटाइल पार्क की पहली गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का भूमिपूजन किया। तमिलनाडु की स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड यहां अपनी मेन्युफेक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रही है। कंपनी मुख्य रूप से बच्चों के कपड़े (किड्सवियर) और यूरोपीय व अमेरिकी बाजारों में निर्यात पर ध्यान केंद्रित करते हुए निट गारमेंट्स और कपड़े बनाएगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के टेक्सटाइल व गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश-विदेश में नई पहचान दिलाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के बड़े अवसर तैयार करने के विजन को साकार करने नवा रायपुर में 81 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। यहां टेक्सटाइल, गारमेंट, तकनीकी वस्त्र तथा सहायक उद्योगों के लिए सभी आवश्यक अधोसंरचनाएं विकसित की जा रही हैं। इस टेक्सटाइल पार्क में स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ ही पुनीत क्रिएशन्स और दृष्टि डिजाइन्स एलएलपी को भी भूमि आबंटित की जा चुकी है। इन तीनों इकाईयों द्वारा लगभग 445 करोड़ रुपए के निवेश से 11 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा नवा रायपुर में सर्वसुविधायुक्त टेक्सटाइल पार्क के लिए डामरीकृत पक्की सड़कों, नाली एवं जल निकासी व्यवस्था, पॉवर सब-स्टेशन, जल प्रदाय व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, प्रशासनिक भवन, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP), ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र एवं कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अच्छी कनेक्टीविटी, आधुनिक अधोसंरचना और सुदृढ़ लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ नवा रायपुर का यह टेक्सटाइल पार्क वस्त्र उद्योगों को एक आदर्श निवेश स्थल के रूप में आकर्षित कर रहा है।

राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में टेक्सटाइल एवं रेडीमेड गारमेंट्स को थ्रस्ट सेक्टर के रूप में विशेष प्राथमिकता दी है। रोजगार सृजन को बढ़ावा देने महिला कर्मचारियों हेतु 6 हजार रुपए तथा पुरुष कर्मचारियों हेतु 5 हजार रुपए प्रतिमाह की रोजगार सहायता पांच वर्षों तक देने का प्रावधान किया गया है। नई औद्योगिक नीति के प्रभाव से प्रदेश में पिछले 18 महीनों में 8 लाख करोड़ रुपु से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे 1.6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

टेक्सटाइल और कपड़ों के अलावा राज्य ने डेटा सेंटर, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़े निवेश आकर्षित किए हैं। यह छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।

"नवा रायपुर का टेक्सटाइल पार्क छत्तीसगढ़ के युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का मजबूत माध्यम बनेगा। हमारी सरकार यहां निवेशकों को विश्वस्तरीय अधोसंरचना और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। उद्योगों के विस्तार के साथ रोजगार, आर्थिक गतिविधियों और प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। हम छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्माण केंद्र बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे है। - मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय"

जनता के द्वार, डिजिटल सरकार: छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया चेहरा बना सेवा सेतु

जनता के द्वार, डिजिटल सरकार: छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया चेहरा बना सेवा सेतु

 रायपुर- आधुनिक युग में जब तकनीक आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने का माध्यम बन जाए, तो वह सुशासन की सबसे बड़ी सफलता कहलाती है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल 'सेवा सेतु पोर्टल आज कुछ ऐसा ही कमाल कर रही है। यह पोर्टल प्रदेश के आम नागरिकों के लिए एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है, जिसने सरकारी दफ्तरों की जटिल प्रक्रियाओं को घर बैठे एक क्लिक पर समेट दिया है।

इस डिजिटल क्रांति की एक जीवंत मिसाल बनी हैं धमतरी जिले के कुरूद तहसील के ग्राम करेली की रहने वाली कु. लोमेश्वरी साहू। लोमेश्वरी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कैसे 'सेवा सेतु ने आमजन के समय, श्रम और धन की बचत कर उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया है।

चक्कर काटने के दौर से 'क्लिक के सफर तक

अपने बीते अनुभवों को साझा करते हुए लोमेश्वरी साहू बताती हैं कि पहले किसी भी शासकीय प्रमाण पत्र को बनवाना एक थका देने वाली प्रक्रिया थी। उन्हें और उनके जैसे कई ग्रामीणों को तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे।पहले आवेदन करने के लिए बस का किराया लगाकर शहर जाओ, फिर दफ्तरों के चक्कर काटो। कई बार जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी न होने के कारण काम अटक जाता था। इससे समय तो बर्बाद होता ही था, साथ ही जेब पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था।

: घर बैठे मिला जाति प्रमाण पत्र, एसडीएम ने सौंपा

लोमेश्वरी के लिए 'सेवा सेतु पोर्टल एक वरदान साबित हुआ। जब उन्हें अपने जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई, तो उन्होंने किसी कार्यालय के चक्कर काटने के बजाय घर बैठे ही सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया। बेहद सरल प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और अपने मोबाइल से ही आवेदन की स्थिति (स्ह्लड्डह्लह्वह्य) को ट्रैक करती रहीं। ?नतीजा यह हुआ कि बिना किसी भाग-दौड़ के, निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया। कुरूद के एसडीएम ने उन्हें यह प्रमाण पत्र सौंपा। लोमेश्वरी कहती हैं कि इस पारदर्शी व्यवस्था ने उन्हें दफ्तरों की कतारों और आवागमन के खर्च, दोनों से हमेशा के लिए मुक्ति दिला दी।

: डिजिटल तकनीक से सुदृढ़ हुआ 'जन-विश्वास

सेवा सेतु पोर्टल ने पारंपरिक शासकीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। इसके जरिए अब नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनके समय और श्रम की भारी बचत हो रही है। घर बैठे आवेदन की सुविधा मिलने से न केवल आवागमन का खर्च बंद हुआ है, बल्कि बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होने से आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत भी मिली है। इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी शत-प्रतिशत पारदर्शिता है, जिसके तहत आवेदक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, यह पोर्टल समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करता है, जिससे सभी आवश्यक प्रमाण पत्र और शासकीय लाभ तय समय-सीमा के भीतर सीधे नागरिकों तक पहुँच रहे हैं।

लोमेश्वरी साहू का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था ने शासकीय सेवाओं को न केवल सुलभ बनाया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में गजब की पारदर्शिता ला दी है। अब नागरिकों को अपने काम के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे शासन और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

: सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर

धमतरी जिले की यह सफलता की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि डिजिटल तकनीक के सही इस्तेमाल से शासकीय सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को कितना बेहतर किया जा सकता है। आज 'सेवा सेतु पोर्टल त्वरित, पारदर्शी और विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर  'जनता के द्वार, डिजिटल सरकार की परिकल्पना को धरातल पर सच कर रहा है। छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह पहल वाकई एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

नशा मुक्त भारत अभियान को मिला जनसहभागिता का संबल

नशा मुक्त भारत अभियान को मिला जनसहभागिता का संबल

 जिला जेल में बंदियों ने ली नशामुक्त जीवन की शपथ, गीत-संगीत से दिया जागरूकता का संदेश

रायपुर, 26 जून 2026/ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशन तथा छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में नशामुक्त भारत सप्ताह और नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी विरोधी सप्ताह पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

जिला जेल में हुआ विशेष आयोजन,नशामुक्ति की दिलाई गई शपथ

अभियान के समापन पर जिला जेल रायगढ़ में नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम हुआ। यहां बंदियों को नशे से दूर रहकर स्वस्थ और सकारात्मक जीवन अपनाने का संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम में सभी बंदियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। नशीले पदार्थों के दुष्परिणाम, उनके सामाजिक- परिवारिक प्रभाव और स्वस्थ जीवनशैली के फायदे बताए गए। गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भी नशामुक्ति का प्रभावी संदेश दिया गया, जिसे सभी ने सराहा।

सामूहिक प्रयास से ही आएगी जागरूकता

उपसंचालक समाज कल्याण रायगढ ने कहा कि नशा व्यक्ति की क्षमता, परिवार की खुशहाली और समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है। युवाओं को नशे से बचाने और समाज में जागरूकता लाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।उन्होंने बताया कि नशा मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, उपचार- पुनर्वास सेवाओं से जोड़ना और जनसहभागिता से नशामुक्त भारत बनाना है। विभाग ने आमजन से अपील की कि वे खुद नशे से दूर रहें और परिवार-मित्रों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करें।

कार्यक्रम में जिला जेल अधीक्षक  जी.एस.सोनी, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, नशा मुक्ति केंद्र के प्रबंधक  सुमंत आचार्य, रंजना यादव, डे-केयर सेंटर सियान गुड़ी के संगीत प्रशिक्षक  कुबेर चरण चौहान सहित जेल प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में बंदियों ने हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन बनी त्वरित जनसमस्या समाधान का सशक्त माध्यम: मात्र दो घंटे में पुनः सक्रिय हुआ संजुक्ता पटेल का आधार कार्ड

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन बनी त्वरित जनसमस्या समाधान का सशक्त माध्यम: मात्र दो घंटे में पुनः सक्रिय हुआ संजुक्ता पटेल का आधार कार्ड

 रायपुर, 26 जून 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुसार आमजन की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी निराकरण के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शासन की जनसेवा, सुशासन और जवाबदेही के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। कलेक्टर  अमृत विकास तोपनो के निर्देशन में जिले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का गंभीरता, संवेदनशीलता एवं समयबद्ध तरीके से निराकरण किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को त्वरित राहत मिल रही है।

इसी क्रम में विकासखंड डभरा के ग्राम खोंधर निवासी संजुक्ता पटेल का आधार कार्ड तकनीकी कारणों से निष्क्रिय हो गया था। आधार कार्ड निष्क्रिय होने के कारण उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं आवश्यक सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। समस्या से परेशान होकर उनके पति श्री नरेंद्र पटेल ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन क्रमांक 1076 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही ई-जिला प्रबंधक श्री दुष्यंत सोनी एवं आधार टीम ने तत्परता और संवेदनशीलता के साथ मामले का परीक्षण कर आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण की तथा मात्र दो घंटे के भीतर उनका निष्क्रिय आधार कार्ड पुनः सक्रिय करा दिया। इससे उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ और शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने का मार्ग भी सुगम हो गया।

संजुक्ता पटेल ने त्वरित कार्रवाई पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें समस्या के समाधान की उम्मीद थी, लेकिन इतनी शीघ्र कार्रवाई होने से वे अत्यंत संतुष्ट हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की प्रभावी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि अब आमजन की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की संवेदनशील एवं जनहितैषी कार्यप्रणाली से जरूरतमंद लोगों को समय पर राहत मिल रही है, जिससे आम नागरिकों का शासन के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

​मनरेगा और जल निधि का महासंगम: छत्तीसगढ़ के धमतरी में 'आजीविका डबरी' से बदल रही ग्रामीण इकॉनमी की तस्वीर

​मनरेगा और जल निधि का महासंगम: छत्तीसगढ़ के धमतरी में 'आजीविका डबरी' से बदल रही ग्रामीण इकॉनमी की तस्वीर

 कलेक्टर ने बोथापारा और चनागांव का किया जमीनी निरीक्षण

​वैज्ञानिक मत्स्य पालन और बागवानी के इंटीग्रेटेड मॉडल से किसानों की आय होगी दोगुनी

​कॉर्पोरेट पार्टनरशिप (एबिस कंपनी) से इनपुट कॉस्ट में 25% की छूट, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष फोकस

​रायपुर,26 जून 2026/ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आर्थिक स्वावलंबन और जल संरक्षण को लेकर एक बेहद अनूठा और सफल प्रयोग सामने आ रहा है। धमतरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और 'जल निधि परियोजना' के बेहतरीन तालमेल ने पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय के नए द्वार खोल दिए हैं। मनरेगा के तहत खोदे गए तालाबों (डबरी) को महज जल संचय तक सीमित न रखकर, उन्हें वैज्ञानिक मत्स्य पालन से जोड़ा गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है।
​इसी जमीनी हकीकत और इसकी भविष्य की संभावनाओं को परखने के लिए कलेक्टर ने नगरी विकासखंड के सुदूर ग्राम बोथापारा और चनागांव का सघन दौरा किया। उन्होंने सीधे खेतों की मेढ़ पर पहुंचकर महिला मत्स्य पालकों और प्रगतिशील किसानों से संवाद किया और इस आजीविका मॉडल को ग्रामीण समृद्धि की एक नई और स्थायी दिशा बताया।

​क्या है 'आजीविका डबरी' का पूरा बिजनेस मॉडल?

​अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को बताया कि प्रत्येक आजीविका डबरी का एक मानक आकार तय किया गया है। ग्रामीण इस मॉडल को अपनाकर बेहद कम लागत में अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं। लगभग 33 हजार रुपये की लागत से वैज्ञानिक देखरेख में लगभग 6 महीने में 20*20*3 मीटर की आजीविका डबरी का निर्माण किया जा सकेगा।

लागत की तुलना में लगभग दोगुनी आय की शत-प्रतिशत संभावना

​कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) का सहारा

इस मॉडल को व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रशासन ने 'एबिस कंपनी' के साथ हाथ मिलाया है। सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत कंपनी इन ग्रामीण मत्स्य पालकों को मछली दाना (फीड) की खरीदी पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट दे रही है। इससे किसानों की उत्पादन लागत काफी घट गई है और उनका शुद्ध लाभांश बढ़ गया है।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं सावित्री दर्रो

​नगरी विकासखंड के ग्राम बोथापारा की महिला मत्स्य पालक श्रीमती सावित्री दर्रो के खेत पहुंचकर कलेक्टर ने खुद डबरी का मुआयना किया। सावित्री ने बताया कि उनके पास करीब 7 एकड़ कृषि भूमि है, जहां वे बरसों से पारंपरिक रूप से सिर्फ धान की खेती करती आ रही थीं। लेकिन अब उन्होंने अपने खेत में दो आजीविका डबरियां तैयार की हैं, जिनमें कतला, रोहू और मृगल प्रजाति की मछलियों का पालन हो रहा है।
​इस कहानी में नया मोड़ तब आया जब अधिकारियों ने बताया कि सावित्री के बेटे ओमप्रकाश को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों की एडवांस ट्रेनिंग के लिए अगले महीने पुरी (ओडिशा) भेजा जा रहा है। वहां से ट्रेनिंग लेकर लौटने के बाद वह न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे इलाके के युवाओं को उन्नत और आधुनिक मत्स्य पालन की बारीकियां सिखाएगा।

नारायण सिंह का इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल

​इसके बाद कलेक्टर चनागांव के प्रगतिशील किसान  नारायण सिंह नेताम के खेत पहुंचे। नेताम ने अपनी 5 एकड़ कृषि भूमि में से दो आजीविका डबरियां विकसित की हैं। खास बात यह है कि वे डबरी के पानी से सिर्फ मछली पालन नहीं कर रहे, बल्कि उसके चारों तरफ आम की बागवानी (हॉर्टिकल्चर) भी अपना चुके हैं। डबरी के पोषक तत्वों से भरपूर पानी की वजह से बागवानी की फसल भी बंपर हो रही है, जिससे उन्हें सालभर एक फिक्स और मोटी आमदनी मिल रही है।कलेक्टर ने खुद मौके पर जाकर डबरी के पानी की गुणवत्ता (Water Quality) की जांच भी कराई।

16 से बढ़कर 50 गांवों तक पहुंचेगा यह सफर

​कलेक्टर ने जिले के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मनरेगा के तहत बनने वाली हर एक सरकारी और निजी परिसंपत्ति का शत-प्रतिशत उत्पादक उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य सिर्फ गड्ढे खुदवाना या अस्थाई रोजगार देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के हाथ में एक ऐसा साधन सौंपना है जिससे वे जीवनभर कमाई कर सकें। मनरेगा, जल संरक्षण और वैज्ञानिक मत्स्य पालन का यह त्रिवेणी संगम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा, गांवों में कुपोषण दूर कर पोषण सुरक्षा लाएगा और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देगा।
​वर्तमान में धमतरी जिले के 16 गांवों में यह आजीविका मॉडल सफलतापूर्वक जमीन पर उतर चुका है। इसकी अपार सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब अगले चरण में 50 गांवों की 50 आजीविका डबरियों में इस मत्स्य पालन विस्तार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और सतत कृषि विकास (Sustainable Agriculture) को गति देने की दिशा में यह प्रयोग एक नजीर बन चुका है।

आवास निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी प्रदेश के विकास को देगा नई गति : मुख्यमंत्री साय

आवास निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी प्रदेश के विकास को देगा नई गति : मुख्यमंत्री साय

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नए लोगो का किया विमोचन

पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को सक्षम बनाकर प्रदेश के विकास को गति देना हमारी इकोनॉमिक फिलॉसफी : मंत्री  ओ पी चौधरी

आवास बुक करने वाले लकी ड्रा के विजेताओं को कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन सहित अन्य पुरस्कार का किया वितरण

दो वर्षों में 07 हजार से अधिक परिसंपत्तियों का विक्रय कर 1500 करोड़ रुपये का किया राजस्व अर्जित

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले अंशुल कश्यप को दी 2.50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि

रायपुर, 26 जून 2026// मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज नया रायपुर स्थित सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नवीन लोगो का विमोचन किया। इस अवसर पर वर्ष 2025 के आवास मेले में आवास बुक करने वाले हितग्राहियों को लकी ड्रा के माध्यम से कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित विभिन्न पुरस्कार वितरित किए गए। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले  अंशुल कश्यप को शुभकामनाएं दी और प्रतियोगिता की पुरस्कार राशि ढाई लाख रुपए का चेक सौंपा।

मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार का अपना पक्का घर होने का सपना होता है और राज्य सरकार इस सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पूर्व में केवल गृह निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आर्थिक चुनौतियों से उबरते हुए मंडल ने लगभग 7,388 संपत्तियों का विक्रय कर 1,532 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग, मंडल के अध्यक्ष तथा पूरी टीम को बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने सभी संकल्पों और वायदों को तेजी से पूरा किया है। सरकार के गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। आज प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद साढ़े दस लाख से अधिक परिवार के आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 नए आवास तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से 15 हजार अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कराए गए हैं तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए भी विशेष आवास योजना संचालित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन हमारे सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 'सेवा सेतु' के माध्यम से 450 से अधिक शासकीय सेवाएं अब मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 भी प्रारंभ की गई है, जहां नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कर समयबद्ध समाधान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग 65 हजार घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के माध्यम से सरकार घर में सोलर संयंत्र लगाने के लिए आकर्षक सब्सिडी भी दे रही है और इन परिवारों लिए आने वाले समय में बिजली पूरी तरह मुफ्त हो जाएगी और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच पाएंगें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के माध्यम से लंबित बिजली बिल के भुगतान का भी बड़ा अवसर दिया है और बिल पर लगने वाले सरचार्ज समेत आकर्षक छूट का प्रावधान किया है।  साय ने कहा कि सरकार न केवल जनहितैषी योजनाएं लागू कर रही है बल्कि सुशासन तिहार के माध्यम से उसका फीडबैक लेने लोगों के बीच भी गई। दो महीने लगातार जनता से फीडबैक लेकर व्यवस्थाओं में सुधार का काम किया गया है। उन्होंने इस दौरान शासन की विभिन्न नवाचारी पहल की जानकारी देते हुए सुशासन और पारदर्शी सरकार के संकल्प को दोहराया।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में विभाग में व्यापक प्रशासनिक सुधार लागू किए गए हैं। गृह निर्माण मंडल को अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में नई पहचान देकर प्रदेश के पूंजीगत व्यय और विकास कार्यों में इसकी भूमिका का विस्तार किया गया है। मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को वित्तीय और मानव संसाधन के माध्यम से सक्षम बनाने का काम किया है ताकि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि अब किसी भी नई आवासीय परियोजना का निर्माण तभी प्रारंभ होगा जब पर्याप्त बुकिंग सुनिश्चित हो जाएगी, जिससे अनावश्यक निर्माण और वित्तीय जोखिम से बचा जा सके। मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू कर वर्षों से लंबित संपत्तियों के विक्रय को गति दी तथा वित्तीय अनुशासन स्थापित किया। इसके परिणामस्वरूप मंडल की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अब यह अधोसंरचना विकास के नए आयाम स्थापित करने के लिए तैयार है।
मंडल के अध्यक्ष  अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मंडल ने नई कार्य संस्कृति अपनाई है। गृह निर्माण मंडल का विस्तार कर अधोसंरचना विकास मंडल बनाया जाना प्रदेश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने रिकॉर्ड संपत्तियों का विक्रय कर नई उपलब्धियां हासिल की हैं और भविष्य में मांग आधारित, गुणवत्तापूर्ण तथा वित्तीय रूप से व्यवहारिक परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम में लकी ड्रा के नौ विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। सारंगढ़ की पूजा बरेठ को प्रथम पुरस्कार के रूप में कार प्रदान की गई। इसके अलावा स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित अन्य आकर्षक पुरस्कार भी वितरित किए गए।
इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ,आयुक्त  अवनीश शरण, तथा विभाग एवं मंडल के वरिष्ठ अधिकारी और हितग्राही उपस्थित थे।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने सुकमा प्रवास में विभागीय संस्थाओं का किया निरीक्षण

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने सुकमा प्रवास में विभागीय संस्थाओं का किया निरीक्षण

 सुकमा। छत्तीसगढ़ शासन की महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े आज शुक्रवार को अपने एक दिवसीय प्रवास पर सुकमा पहुंची। इस दौरान उन्होंने जिले में संचालित विभिन्न विभागीय संस्थाओं का निरीक्षण कर आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

मंत्री राजवाड़े आंगनबाड़ी केंद्र राकेल और एनआरसी सुकमा पहुंचकर उन्होंने बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी दिनचर्या स्वास्थ्य, भोजन और शिक्षा जैसी गतिविधियों की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने परिसर में पौधा रोपण किया। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के साथ फर्श पर बैठकर एबीसीडी और पहाड़ा के बारे में जानकारी ली। बच्चों ने राजवाड़े को एबीसीडी सुनाया। मंत्री ने बच्चों से आत्मीयता से मुलाकात की पढ़ाई-लिखाई के बारे में बातचीत की और उन्हें फल व चॉकलेट देकर प्रोत्साहित किया। इस दौरान उन्होंने निर्देशित किया कि सभी बच्चों को पढ़ाई के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मंत्री राजवाड़े ने गुणवत्तापूर्ण भोजन कराने और बच्चों को उनकी बोली भाषा में पढ़ाने के निर्देश दिए।

इसके पश्चात मंत्री राजवाड़े ने कुम्हाररास में स्थित ईमली प्रशंसकरण केंद्र का निरीक्षण किया। भ्रमण के दौरान कलेक्टर अमित कुमार ने केंद्र के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि केंद्र में स्व सहायता समूह के लगभग 60 महिलाओं के रोजगार का प्रबंध किया गया। केंद्र में इमली से जुड़े विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। समूह की महिलाओं ने मंत्री का आत्मीय स्वागत किए। उन्होंने संस्था के विभिन्न कक्ष में उपलब्ध व्यवस्थाओं को देखा।

इसके पश्चात महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े नक्सल पुनर्वास केंद्र पहुंची। उन्होंने केंद्र में उनके रहने, खाने और व्यवस्थापन के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इस दौरान कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि पुनर्वास के लिए सभी आत्मसमर्पितों को विभिन्न प्रशिक्षण प्रकार के प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान 36 प्रशिक्षणार्थियों को मंत्री राजवाड़े ने वेलकम किट वितरित की। उन्होंने केंद्र में निवासरत लोगों से चर्चा की और उन्हें समाज की मुख्य धारा में जुड़कर परिवार के साथ प्रेमपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा दी। मंत्री राजवाड़े ने आत्मसमर्पित युवाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने केंद्र में रहने, खाने और प्रशिक्षण की व्यवस्था की बारे में बात की।

इस दाैरान एसपी किरण चव्हाण, जिला सीईओ मुकुंद ठाकुर, डिप्टी कलेक्टर शबाब खान, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि धनीराम बारसे, अरुण सिंह सिसोदिया, संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग सिसोदिया, जिला महिला बाल विकास अधिकारी शिवदास नेताम, रितीश टंडन सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने वाले ही भविष्य का नेतृत्व करेंगे : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने वाले ही भविष्य का नेतृत्व करेंगे : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

 एआई से डरने की नहीं, उसे अवसर में बदलने की है जरूरत

वित्त मंत्री ने मैक कॉलेज के राष्ट्रीय सम्मेलन में युवाओं से कहा- बदलती तकनीक के अनुरूप स्वयं को करें तैयार

रायपुर, 26 जून 2026/ वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज (एमएआईसी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "Artificial Intelligence & Digital Transformation: Opportunities, Challenges and Future Impact" में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर युवाओं का आह्वान किया कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नई तकनीकों से भयभीत होने के बजाय उन्हें अपने भविष्य के निर्माण का सबसे बड़ा अवसर मानें।

अपने संबोधन में मंत्री  चौधरी ने कहा कि आज पूरी दुनिया तेजी से ज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। भारत का स्वर्णिम इतिहास भी ज्ञान, शिक्षा और नवाचार की नींव पर खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत लगभग 1600 वर्षों तक विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इसलिए रहा क्योंकि यहां शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च स्थान दिया गया।

मंत्री  चौधरी ने युवाओं से कहा कि आज दुनिया के सबसे सफल उद्योगपति और उद्यमी वे हैं जिन्होंने नए विचारों और नवाचार के बल पर अपनी पहचान बनाई है। एलन मस्क, एनवीडिया और एप्पल जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज तकनीक की शक्ति इतनी बड़ी हो चुकी है कि कई टेक्नोलॉजी कंपनियों का मूल्यांकन अनेक देशों की अर्थव्यवस्था से भी अधिक है। इसलिए युवाओं को समय रहते तकनीकी परिवर्तन को समझकर स्वयं को उसके अनुरूप तैयार करना होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि "जो एआई को अपनाएगा वही भविष्य का नेतृत्व करेगा। जो इससे दूर भागेगा, वह प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएगा।" उन्होंने कहा कि हर तकनीकी परिवर्तन चुनौतियां लेकर आता है, लेकिन वही परिवर्तन नए अवसर भी पैदा करता है। आवश्यकता इस बात की है कि युवा इन अवसरों का लाभ उठाएं।

उन्होंने कहा कि एआई कई कार्यों को सरल बना सकता है, लेकिन मानवीय संवेदनशीलता, करुणा और मानवीय स्पर्श का विकल्प कभी नहीं बन सकता। इसलिए युवाओं को ऐसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहिए जहां मानवीय मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, नर्सिंग और अन्य सेवा क्षेत्र।

मंत्री चौधरी ने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल नौकरी तलाशने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार और उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ें तथा विश्वस्तरीय स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियां स्थापित करने का लक्ष्य रखें। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और पूरी दुनिया में भारतीय तकनीकी नेतृत्व का लोहा माना जाता है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के विजन से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ सरकार भी मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में "छत्तीसगढ़ अंजोर विजन @2047" पर कार्य कर रही है। इस दिशा में नवा रायपुर को उभरते तकनीकी और नवाचार केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां सेमीकंडक्टर यूनिट, एआई डाटा सेंटर तथा ट्रिपल आईटी में अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं सहित अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य हो रहा है।

कार्यक्रम के अंत में वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज प्रबंधन, आयोजकों एवं सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के युवा नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सुशासन में साकार हो रहे गरीबों के सपने, प्रधानमंत्री आवास योजना से अमृतलाल के परिवार को मिला सम्मानपूर्ण जीवन

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सुशासन में साकार हो रहे गरीबों के सपने, प्रधानमंत्री आवास योजना से अमृतलाल के परिवार को मिला सम्मानपूर्ण जीवन

 कच्चे घर की परेशानियों से मिली मुक्ति, पक्के आवास ने बदली पूरे परिवार की तस्वीर और तकदीर

रायपुर, 26 जून 2026। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के माध्यम से हजारों परिवारों के पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पंडरीपानी निवासी अमृतलाल का परिवार इसका प्रेरणादायी उदाहरण है। वर्षों तक कच्चे मिट्टी के मकान में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाला यह परिवार आज प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बने मजबूत एवं सुरक्षित पक्के घर में सम्मान और खुशहाली के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है।
बीते 24 जून को पंडरीपानी में आयोजित विशेष ग्राम सभा के दौरान कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे ने अमृतलाल के नए आवास का अवलोकन किया। उन्होंने परिवार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अमृतलाल ने बताया कि पहले उनका परिवार कच्चे मिट्टी के मकान में रहता था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था, दीवारों में सीलन आ जाती थी और पूरे परिवार को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और सुरक्षित जीवन जीना भी चुनौती बना रहता था। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि स्वयं पक्का मकान बनवा सकें।
प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास स्वीकृत होने के बाद उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ। योजना की सहायता से उन्हें मजबूत, सुरक्षित और सुविधायुक्त पक्का घर मिला। अब बारिश और अन्य मौसम संबंधी परेशानियों से पूरी तरह राहत मिल गई है। स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण मिलने से परिवार की जीवनशैली में उल्लेखनीय सुधार आया है। बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिला है और पूरे परिवार में नई ऊर्जा एवं आत्मविश्वास का संचार हुआ है।
अमृतलाल ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में गरीबों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को केवल पक्का घर ही नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का भरोसा भी दिया है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की सराहना की।
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री आवास योजना इसी संकल्प को साकार करते हुए प्रदेश के हजारों परिवारों के जीवन में खुशहाली और नई उम्मीद का आधार बन रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर की महिलाएं बनेंगी 'ड्रोन दीदी'

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर की महिलाएं बनेंगी 'ड्रोन दीदी'

 रायपुर में ले रहीं आधुनिक ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण, किसानों तक पहुंचाएंगी तकनीक आधारित कृषि सेवाएं

ड्रोन से उर्वरक एवं कीटनाशक का वैज्ञानिक छिड़काव, कम लागत में होगी बेहतर खेती

रायपुर, - मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में जशपुर जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाएं नई पहचान बना रही हैं। नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत जिले की चयनित महिलाएं इन दिनों रायपुर स्थित आईटीएम विश्वविद्यालय में ड्रोन संचालन एवं रिमोट पायलटिंग का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

यह प्रशिक्षण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के साथ उन्हें कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं देने के लिए दक्ष बन रही हैं।

प्रशिक्षण के दौरान ड्रोन दीदियों को ड्रोन की तकनीकी संरचना, सुरक्षित उड़ान संचालन, रिमोट पायलटिंग, फसलों में उर्वरक एवं कीटनाशकों का वैज्ञानिक छिड़काव, ड्रोन के रखरखाव तथा कृषि क्षेत्र में उसके व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद ये ड्रोन दीदियां जशपुर जिले के किसानों को ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरक, कीटनाशक एवं अन्य कृषि कार्यों की सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे कृषि कार्य कम समय में, कम लागत पर और अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। साथ ही वैज्ञानिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में जशपुर प्रवास के दौरान प्रशिक्षण के लिए रवाना हो रही ड्रोन दीदियों की बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इससे पूर्व 17 अप्रैल 2026 को रणजीता स्टेडियम में आयोजित 'लखपति दीदी' कार्यक्रम के दौरान ड्रोन दीदी एवं उन्नत सॉयल टेस्टिंग मशीन भी प्रदान की गई थी।

उप संचालक कृषि, जशपुर के अनुसार प्रशिक्षण के बाद ड्रोन दीदियां जिले के विभिन्न विकासखंडों में किसानों को तकनीक आधारित कृषि सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे खेती में समय की बचत, लागत में कमी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग का विश्वास है कि यह पहल जशपुर में तकनीक आधारित कृषि को नई गति देने के साथ महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक सशक्तता और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

CG - तालाब में डूबने से एक ही परिवार की दो मासूम बच्चियों की मौत, गांव में पसरा मातम

CG - तालाब में डूबने से एक ही परिवार की दो मासूम बच्चियों की मौत, गांव में पसरा मातम

 धमतरी। धमतरी जिले के मगरलोड थाना क्षेत्र के कपालफोड़ी गांव में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार की दो मासूम बच्चियों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार, मोहर्रम की छुट्टी होने के कारण 8 वर्षीय गीतिका और 6 वर्षीय खुशबू गांव के तालाब में नहाने के लिए गई थीं। काफी देर तक जब दोनों बच्चियां घर वापस नहीं लौटीं तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की।

तालाब किनारे मिले कपड़े और बाल्टी

खोजबीन के दौरान तालाब के किनारे दोनों बच्चियों के कपड़े और बाल्टी मिली। इसके बाद ग्रामीणों को अनहोनी की आशंका हुई और तत्काल तालाब में तलाश शुरू की गई। काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चियों के शव तालाब से बरामद किए गए। घटना की सूचना मिलते ही मगरलोड थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों बच्चियों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मगरलोड ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।

मृतक गीतिका और खुशबू एक ही परिवार की थीं। एक साथ दो मासूम बच्चियों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में मातम पसरा हुआ है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। मगरलोड पुलिस ने घटना का पंचनामा तैयार कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।प्रारंभिक जांच में मामला तालाब में डूबने का प्रतीत हो रहा है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस हृदयविदारक घटना के बाद कपालफोड़ी गांव में हर आंख नम है। ग्रामीणों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर तालाबों और जलाशयों के आसपास सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

CG : नक्सलियों के ठिकानों पर बड़ा खुलासा, 24 लाख कैश और नक्सलियो का डंप हथियार जब्त

CG : नक्सलियों के ठिकानों पर बड़ा खुलासा, 24 लाख कैश और नक्सलियो का डंप हथियार जब्त

 नारायणपुर।  नक्सलवाद के समाप्त होने के बाद अब उनके पीछे छोड़ गए सामग्रियों को ढूंढने में सुरक्षाबल जुटी हुई है। इस कड़ी में टेकला जंगल से हथियारों का बड़ा डंप और तोयामेटा से 24 लाख रुपये नगद बरामद किया गया है। खुफिया सूचना पर चलाए गए सर्च ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को दो अलग-अलग स्थानों पर बड़ी सफलता मिली है। टेकला जंगल से सुरक्षा बलों ने इंसास, एसएलआर, 303 रायफल समेत भारी मात्रा में गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद किया है, वहीं छोटेडोंगर के तोयामेटा जंगल-पहाड़ी से नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए 24 लाख रुपये नगद बरामद किया गया है।

ACB की बड़ी कार्रवाई, पटवारी और बिजली विभाग का बाबू रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

ACB की बड़ी कार्रवाई, पटवारी और बिजली विभाग का बाबू रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

 बिलासपुर। जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग मामलों में सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पहली कार्रवाई रतनपुर तहसील में हुई, जहां लालपुर पटवारी को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया। वहीं दूसरी कार्रवाई मस्तूरी क्षेत्र में की गई, जहां सीएसपीडीसीएल (विद्युत विभाग) के बाबू को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। पहले मामले में रतनपुर निवासी अशोक अग्रवाल ने ACB बिलासपुर इकाई में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उन्होंने अपनी लालपुर स्थित जमीन के नक्शा बंटांकन के लिए लगभग एक वर्ष पहले तहसीलदार रतनपुर के यहां आवेदन दिया था। इस कार्य के लिए तहसीलदार द्वारा लालपुर पटवारी भानु चंद्राकर को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

आरोप है कि पटवारी भानु चंद्राकर ने कार्य करने के एवज में 40 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, बल्कि आरोपी को रंगे हाथ पकड़वाना चाहता था। एसीबी द्वारा सत्यापन के दौरान यह बात सही पाई गई। बाद में मोलभाव के बाद 25 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। इसके बाद ACB ने ट्रैप की योजना बनाई और 25 जून को प्रार्थी को रिश्वत की राशि लेकर तहसील कार्यालय रतनपुर भेजा गया। जैसे ही पटवारी ने 25 हजार रुपये की राशि ली, एसीबी की टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। आरोपी के कब्जे से पूरी रिश्वत राशि बरामद कर ली गई। इसके बाद उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

एसीबी अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगने पर तत्काल सूचना देने की अपील की गई है। डीएसपी एसीबी ने कहा कि जनता बिना किसी डर के शिकायत दर्ज कर सकती है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह दूसरी कार्रवाई बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र में की गई, जहां बिजली विभाग के एक बाबू को रिश्वत लेते पकड़ा गया। ग्राम पारघाट निवासी त्रिलोकी साहू ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपने कृषि भूमि में शासन की योजना के तहत निःशुल्क विद्युत पोल लगाने के लिए सीएसपीडीसीएल कार्यालय मस्तूरी में आवेदन किया था। आरोप है कि कार्यालय में पदस्थ बाबू सहदेव कुमार चंद्रा ने काम आगे बढ़ाने के एवज में 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

शिकायतकर्ता ने भी इस पूरे मामले में एसीबी से संपर्क कर कार्रवाई की मांग की। शिकायत के सत्यापन के बाद मामला सही पाया गया। इसके बाद ACB ने ट्रैप की योजना बनाई और प्रार्थी को रिश्वत की राशि लेकर कार्यालय भेजा गया। जैसे ही बाबू ने 10 हजार रुपये लिए, टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। हालांकि बाद में रिश्वत राशि की बरामदगी और आरोपी की पहचान को लेकर विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इन दोनों मामलों के सामने आने के बाद जिले में सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी रिश्वत की मांग आम बात बनती जा रही है, जिससे आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ACB की इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। विभागीय अधिकारियों ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक स्तर पर समीक्षा शुरू कर दी है।