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भारत छोड़ो आंदोलन’की 84वीं वर्षगांठ : पीएम मोदी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के नायकों को किया याद

भारत छोड़ो आंदोलन’की 84वीं वर्षगांठ : पीएम मोदी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के नायकों को किया याद

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर इसमें हिस्सा लेने वाले राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को याद किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में भाग लेने वालों का साहस हर भारतीय के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।

ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने वाले सभी लोगों को याद करते हैं

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने वाले सभी लोगों को याद करते हैं। उनका साहस हर भारतीय के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा। महात्मा गांधी के नेतृत्व से प्रेरित होकर ‘भारत छोड़ो’ के आह्वान ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा का संचार किया और औपनिवेशिक शासन से मुक्त होने के हमारे लोगों के अटूट संकल्प को दर्शाया।”

ओम बिरला ने एक्स पर कहा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने पोस्ट किया, “‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर उन सभी राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी का ‘करो या मरो’ का आह्वान उस दौर में करोड़ों भारतीयों के लिए साहस और संकल्प की आवाज बना।”

उन्होंने लिखा, “इस आंदोलन में असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल यातनाएं सहीं, संघर्ष किया और अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका संघर्ष केवल राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए नहीं था, बल्कि एक ऐसे भारत के निर्माण के लिए था, जिसकी नींव सत्य, अहिंसा, लोकतंत्र, समानता और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों पर हो। स्वतंत्रता के अमृतकाल में उन महान सेनानियों का स्मरण हमें यह प्रेरणा देता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि रखते हुए हम अपने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक आदर्शों को निरंतर मजबूत करते रहें।”

जेपी नड्डा ने लिखा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लिखा, “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में आज ही के दिन अगस्त 1942 में प्रारंभ हुआ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ देश के स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक अध्याय बना। इस ‘अगस्त क्रांति’ ने देशभर में नई चेतना का संचार किया और असंख्य भारतीयों को स्वाधीनता के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी।”

उन्होंने आगे लिखा, “‘अगस्त क्रांति’ का इतिहास असंख्य गुमनाम योद्धाओं के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान की अमर गाथाओं से समृद्ध है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करती रहेंगी। ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी और उन सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि व सादर नमन, जिनके त्याग, साहस और संघर्ष से स्वतंत्र भारत की नींव सुदृढ़ हुई।

देशभर में आज से चलेगा ‘हर घर तिरंगा’ अभियान, सीएम योगी लखनऊ में करेंगे यात्रा का शुभारंभ

देशभर में आज से चलेगा ‘हर घर तिरंगा’ अभियान, सीएम योगी लखनऊ में करेंगे यात्रा का शुभारंभ

 देश के अलग-अलग राज्यों में आज रविवार से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साल 2022 में शुरू हुआ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान आज राष्ट्रप्रेम और जनभागीदारी का एक व्यापक जनआंदोलन बन चुका है। इस साल 9 से 17 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाया जा रहा है।

राजधानी लखनऊ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अभियान की शुरुआत करेंगे। वे लखनऊ से ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत ‘तिरंगा यात्रा-युवाओं के साथ’ का शुभारंभ करेंगे। साथ ही, मुख्यमंत्री योगी ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के शताब्दी समारोह में सहभाग कर अपने गौरवशाली इतिहास और वीर क्रांतिकारियों की स्मृतियों को नमन करेंगे।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “हृदय में राष्ट्रभक्ति हो तो हर व्यक्ति के जीवन में समृद्धि लाना और विकास की नई ऊंचाइयों को छूना ही मुख्य ध्येय बन जाता है।”

मुख्यमंत्री योगी रविवार को ‘विकास भी, विरासत भी’ के भाव के साथ सिद्धार्थनगर जनपद के डुमरियागंज और बांसी विधानसभा क्षेत्रों में 311 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 107 लोक-कल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा, सीएम योगी विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित होगा। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “राष्ट्र प्रथम के मंत्र को आत्मसात करते हुए विरासत के संरक्षण, सर्वांगीण विकास और हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए डबल इंजन सरकार पूर्ण रूप से संकल्पित है।”

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी प्रदेशवासियों से खास अपील की है। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “तिरंगा हमारे राष्ट्र की अस्मिता, एकता और गौरव का सर्वोच्च प्रतीक है। यह प्रत्येक भारतीय के ह्रदय में देशभक्ति, कर्तव्य और राष्ट्र प्रथम की भावना को और प्रबल करती है। आप सभी प्रदेशवासियों से आग्रह है कि 9 अगस्त से 17 अगस्त तक आयोजित होने वाले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के अंतर्गत अपने घर, प्रतिष्ठान और संस्थान पर पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रध्वज तिरंगा अवश्य फहराएं। साथ ही, अपनी एक सेल्फी लेकर ‘हर घर तिरंगा’ वेबसाइट पर अपलोड करें और इस जनभागीदारी अभियान से जुड़कर राष्ट्र के प्रति अपने सम्मान और गौरव को अभिव्यक्त करें।”

उन्होंने कहा, “आइए, इस स्वतंत्रता पर्व पर ऐसा संकल्प लें कि राजस्थान का हर घर तिरंगे से सजे, हर हृदय भारत माता के लिए धड़के और हर नागरिक गर्व से कहे- ‘मेरा तिरंगा-मेरी पहचान, मेरा भारत-मेरा अभिमान।”

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी प्रदेशवासियों से अपील की है कि 9 से 17 अगस्त तक आयोजित ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़कर इसे राष्ट्रभक्ति का पर्व बनाएं।

हरियाणा में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत राज्य स्तरीय कार्यक्रम ‘यूथ मैराथन एवं वंदे मातरम् कॉन्सर्ट’ का आयोजन किया गया है। इसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शामिल हुए हैं।

असम में बाढ़ का कहर जारी: 13 जिलों में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, मौतों का आंकड़ा 98 पहुंचा

असम में बाढ़ का कहर जारी: 13 जिलों में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, मौतों का आंकड़ा 98 पहुंचा

 गुवाहाटी। असम में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। राज्य के 13 जिलों में करीब 1.56 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि इस साल बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, 33 राजस्व सर्किलों के 464 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। गोलाघाट और शिवसागर सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। इसके अलावा जोरहाट, चराइदेव, नागांव, दरांग और धेमाजी में भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।बाढ़ के कारण 10 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसल क्षेत्र जलमग्न है। लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए 73 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। हजारों विस्थापित लोगों को यहां भोजन, पानी और जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार कुछ नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पशुधन और मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। कई घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। एसडीआरएफ, नागरिक सुरक्षा कर्मियों और अन्य एजेंसियों की टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी किनारे के संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की है।

यूपीआई यूजर्स के लिए बड़ी राहत: पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, छोटे दुकानदार भी रहेंगे शुल्क-मुक्त

यूपीआई यूजर्स के लिए बड़ी राहत: पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, छोटे दुकानदार भी रहेंगे शुल्क-मुक्त

 नई दिल्ली। यूपीआई से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है। पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने स्पष्ट किया है कि, आम ग्राहकों से यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए कोई शुल्क लेने का प्रस्ताव नहीं है। यानी डिजिटल पेमेंट करते समय उपभोक्ताओं को अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा। पीसीआई के मुताबिक, वर्ष 2016 में शुरुआत के बाद से यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है और आगे भी इसे इसी तरह बनाए रखने पर जोर है। संगठन ने यह भी साफ किया कि, छोटे कारोबारियों से यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लिया जाता।

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल और इसके डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने को लेकर चर्चा चल रही है। पीसीआई का कहना है कि, बहस ग्राहकों से शुल्क वसूलने की नहीं, बल्कि देश के विशाल डिजिटल पेमेंट नेटवर्क के रखरखाव और विस्तार के लिए टिकाऊ व्यवस्था तैयार करने की है।

यूपीआई ने छोटे दुकानदारों, किराना व्यापारियों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना आसान बनाया है। इससे नकदी पर निर्भरता घटाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में मदद मिली है। पीसीआई के अनुसार, बढ़ते लेनदेन के साथ साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकथाम और तकनीकी क्षमता मजबूत करना भी जरूरी है। हालांकि, इन प्रयासों का वित्तीय बोझ आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों पर डालने की योजना नहीं है।

ई20 पेट्रोल पर बड़ा अपडेट: तेल कंपनियों ने दूर की चिंता, जांच में नहीं मिली कोई गड़बड़ी

ई20 पेट्रोल पर बड़ा अपडेट: तेल कंपनियों ने दूर की चिंता, जांच में नहीं मिली कोई गड़बड़ी

 नई दिल्ली। ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच देश की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। कंपनियों के मुताबिक, देशभर में किए गए व्यापक परीक्षण में पेट्रोल में नमी या क्लोराइड की मिलावट का कोई प्रमाण नहीं मिला है। सभी जांचे गए नमूने तय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। तेल कंपनियों ने बताया कि, कुछ रिपोर्टों में ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाने के बाद पूरी सप्लाई चेन में अतिरिक्त जांच कराई गई। रिफाइनरी, डिपो, टर्मिनल और पेट्रोल पंप स्तर पर ईंधन के नमूनों की जांच की गई।

कंपनियों के अनुसार, देशभर की रिफाइनरियों से यादृच्छिक तौर पर लिए गए 100 से अधिक पेट्रोल नमूनों की क्लोराइड जांच हुई। इनमें क्लोराइड का स्तर 1 पार्ट प्रति मिलियन (PPM) या उससे कम पाया गया, जो निर्धारित सीमा के भीतर है। पेट्रोल पंपों पर पानी की मिलावट और घनत्व की नियमित जांच के साथ मोबाइल फ्यूल क्वालिटी टेस्टिंग लैब और स्वतंत्र प्रयोगशालाओं की मदद भी ली जा रही है। तेल कंपनियों ने कहा कि, E20 पेट्रोल की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनियों का दावा है कि, मौजूदा जांच व्यवस्था ईंधन की गुणवत्ता पर लगातार नजर रख रही है।

होर्मुज पर ईरान का बढ़ा दबाव: जलडमरूमध्य खोलने के लिए रखीं 3 बड़ी शर्तें, बढ़ी अमेरिका की मुश्किल

होर्मुज पर ईरान का बढ़ा दबाव: जलडमरूमध्य खोलने के लिए रखीं 3 बड़ी शर्तें, बढ़ी अमेरिका की मुश्किल

 दुबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान, ओमान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक खींचतान तेज हो गई है। इस अहम समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए बातचीत जारी है, लेकिन ईरान की मांगों ने समझौते की राह मुश्किल कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की पहली मांग होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की है। कुछ रिपोर्टों में माल के मूल्य के आधार पर शुल्क की मांग का उल्लेख किया गया है। हालांकि, अमेरिका ऐसी अनिवार्य वसूली के खिलाफ है।

दूसरी बड़ी मांग जलडमरूमध्य की नौवहन और सुरक्षा व्यवस्था में ईरान की मजबूत भूमिका से जुड़ी है। तेहरान चाहता है कि समुद्री मार्ग के संचालन में उसकी निर्णायक भागीदारी रहे, जबकि ओमान क्षेत्रीय प्रबंधन और सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय नौवहन पर जोर दे रहा है। तीसरी मांग अमेरिकी और इजरायली जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध से संबंधित बताई जा रही है। हालांकि, इन मांगों को लेकर अभी कोई अंतिम सार्वजनिक समझौता सामने नहीं आया है। होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद अहम रास्ता है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने से तेल, गैस और समुद्री परिवहन की लागत बढ़ सकती है। ऐसे में ईरान-ओमान बातचीत की सफलता पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।

आग बुझाने निकला जंगल में फायरफाइटिंग हेलीकॉप्टर क्रैश, 2 लोग लापता

आग बुझाने निकला जंगल में फायरफाइटिंग हेलीकॉप्टर क्रैश, 2 लोग लापता

 वाशिंगटन। अमेरिका के यूटा राज्य में भीषण जंगल की आग पर काबू पाने की कोशिश के दौरान एक फायरफाइटिंग हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद हेलीकॉप्टर में सवार दो लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घटना शुक्रवार सुबह रिचफील्ड के पास हुई। अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, Sikorsky S-64 हेलीकॉप्टर स्थानीय समयानुसार करीब 10 बजे दुर्घटनाग्रस्त हुआ। यह हेलीकॉप्टर वाइडमाउथ 2 इलाके में फैली आग के खिलाफ अभियान में शामिल था। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय, राज्य और संघीय एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया।

यूएस फॉरेस्ट सर्विस ने कहा कि, इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता दुर्घटना पर सुरक्षित तरीके से प्रतिक्रिया देना है। लापता लोगों की स्थिति को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह जंगल की आग 27 जुलाई को बिजली गिरने के बाद शुरू हुई थी और अब तक करीब 1.05 लाख एकड़ क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुकी है। आग पर लगभग 19 प्रतिशत नियंत्रण पाया जा सका है, जबकि 600 से अधिक दमकलकर्मी इसे बुझाने में जुटे हैं। आग की चपेट में आने से कम से कम छह इमारतें नष्ट हो चुकी हैं। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और बचाव दल को सहयोग देने की अपील की है।

‘चयन प्रक्रिया निष्पक्ष हो, किसी एथलीट के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए’ : खेल मंत्री मांडविया

‘चयन प्रक्रिया निष्पक्ष हो, किसी एथलीट के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए’ : खेल मंत्री मांडविया

 केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (एनएसएफ) कॉन्क्लेव 2026 की अध्यक्षता की। कॉन्क्लेव में खेल प्रशासन को मजबूत करने, खिलाड़ियों के कल्याण को बढ़ावा देने और आगामी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए भारत की तैयारियों की समीक्षा पर विशेष जोर दिया गया।

खेल प्रशासन और बड़े आयोजनों की तैयारियों पर हुई समीक्षा

कॉन्क्लेव में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 के तहत नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन के अनुपालन की स्थिति, खेल संस्थाओं में सुशासन तथा एशियन गेम्स 2026, लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 और कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए एनएसएफ की तैयारियों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं।

एथलीटों का हित और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता : मांडविया

डॉ. मांडविया ने कहा कि खेल इकोसिस्टम में हर हितधारक के लिए एथलीटों का हित और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है कि किसी भी एथलीट के साथ अन्याय न हो।

कैमरे पर रिकॉर्ड हों ओपन सेलेक्शन ट्रायल

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ओपन सेलेक्शन ट्रायल पर्यवेक्षक की मौजूदगी में कैमरे पर रिकॉर्ड किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

पूरे साल खिलाड़ियों को अधिक प्रतिस्पर्धी अवसर देने पर जोर

मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार एथलीटों को खेल के मैदान पर बनाए रखने और देश में मजबूत लीग संस्कृति विकसित करने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन को पूरे वर्ष एथलीटों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना चाहिए।

डोपिंग के खिलाफ पूरी चेन पर कार्रवाई की जरूरत

केंद्रीय मंत्री ने भारतीय खेलों से डोपिंग खत्म करने के लिए व्यापक रणनीति की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार एंटी-डोपिंग इकोसिस्टम को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक बदलावों पर काम कर रही है।

सिर्फ एथलीटों पर कार्रवाई से नहीं रुकेगा डोपिंग

मांडविया ने कहा कि डोपिंग के खतरे से निपटने के लिए केवल एथलीटों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि डोपिंग की पूरी आपूर्ति श्रृंखला, जिसमें उत्पादक, आपूर्तिकर्ता और उपयोगकर्ता शामिल हैं, की पहचान कर एक निष्पक्ष और मजबूत व्यवस्था के जरिए उससे निपटना होगा। तभी खेलों से डोपिंग को प्रभावी तरीके से खत्म किया जा सकेगा।

भारतीय कोचिंग इकोसिस्टम मजबूत करने पर जोर

डॉ. मांडविया ने मजबूत घरेलू कोचिंग इकोसिस्टम विकसित करने और विदेशी कोचों पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को अच्छे भारतीय कोचों का मजबूत समूह तैयार करना होगा।

कोचों को अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर देने की जरूरत

उन्होंने कहा कि एथलीटों को प्रशिक्षण देने के साथ भारतीय कोचों के प्रशिक्षण में भी उतना ही निवेश किया जाना चाहिए। उन्हें बेहतर अवसर और अंतरराष्ट्रीय अनुभव उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छी तरह प्रशिक्षित कोच ही देश के लिए विश्वस्तरीय एथलीट तैयार कर सकते हैं।

आगामी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए तैयारियों पर जोर

केंद्रीय खेल मंत्री ने खेल प्रशासन के मानकों को मजबूत करने, नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 का अनुपालन सुनिश्चित करने और एशियन गेम्स 2026, लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 तथा कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए भारत की तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन के साथ मिलकर काम करने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

खेल मंत्रालय और एनएसएफ के प्रतिनिधि रहे मौजूद

कार्यक्रम में युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (एनएसएफ) के प्रतिनिधि शामिल हुए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में प्रदान किए संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में प्रदान किए संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार

 भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में हिस्सा लिया और संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तथा राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025 प्रदान किए। इस अवसर पर भारत की समृद्ध और विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं के सम्मान में चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए गए।

सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है हथकरघा

राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा सदियों से भारत की सभ्यता की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसमें देश की असाधारण विविधता दिखाई देती है और क्षेत्रीय विशिष्टताओं को संरक्षित करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हथकरघा क्षेत्र रोजगार, महिला सशक्तीकरण, कला-संस्कृति और प्रकृति-प्रेम को बढ़ावा देता है। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता की भावना से भी जुड़ा रहा है।

स्वदेशी आंदोलन से जुड़ा है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

राष्ट्रपति ने बताया कि स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत 7 अगस्त 1905 को हुई थी। बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुए इस आंदोलन का उद्देश्य स्वदेशी वस्तुओं और उद्योगों को बढ़ावा देना तथा देश के हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करना था। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में केंद्र सरकार 2015 से हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाती है।

हथकरघा क्षेत्र को मिल रहा आधुनिक तकनीक का सहयोग

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख मानव-केंद्रित उदाहरण बनने की क्षमता रखता है। महत्वपूर्ण हथकरघा क्लस्टरों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण विधियों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठा रही है और इन प्रयासों से भारतीय हथकरघा की अंतरराष्ट्रीय छवि भी मजबूत हो रही है।

युवा उद्यमियों और स्टार्टअप्स से नए अवसर

राष्ट्रपति ने कहा कि तकनीक और नवाचारी डिजाइनों के साथ बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली युवा उद्यमी हथकरघा क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। सरकारी योजनाओं और संस्थानों के जरिए युवाओं को सक्रिय सहयोग एवं मार्गदर्शन दिए जाने की जरूरत है। युवा उद्यमी, डिजाइनर और स्टार्टअप पारंपरिक शिल्प को आधुनिक ट्रेंड्स, ब्रांड्स और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

डिजाइन संसाधन केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों और बुनकर सेवा केंद्रों के तहत संचालित डिजाइन संसाधन केंद्र युवाओं को हथकरघा क्षेत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन प्रयासों से पारंपरिक कौशल और आधुनिक डिजाइन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

डिजिटल समाधान से बढ़ेगी वैश्विक बाजारों तक पहुंच

राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र के सतत विकास के लिए नई प्रौद्योगिकी का उचित उपयोग आवश्यक है। आधुनिक डिजिटल समाधानों से बाजार तक पहुंच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय हथकरघा उत्पादों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच को भी और मजबूत किया जा सकता है।

संत कबीर पुरस्कार हथकरघा क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान

संत कबीर हथकरघा पुरस्कार देश के हथकरघा बुनकरों को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। यह उत्कृष्ट कारीगरी, हथकरघा के प्रति समर्पित जीवन और भारत की बुनाई परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में निरंतर योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार से उत्कृष्ट योगदान का सम्मान

राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उन बुनकरों और अन्य हितधारकों को दिया जाता है जिन्होंने पारंपरिक कौशल के संरक्षण के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए रचनात्मकता, गुणवत्ता, नवीनता और उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि हथकरघा क्षेत्र देश के समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनेगा।

शहरी सहकारी बैंकों को मिलेगा आधुनिक डिजिटल सुरक्षा कवच, अमित शाह आज मुंबई में NUCFDC के नए कार्यालय का करेंगे उद्घाटन

शहरी सहकारी बैंकों को मिलेगा आधुनिक डिजिटल सुरक्षा कवच, अमित शाह आज मुंबई में NUCFDC के नए कार्यालय का करेंगे उद्घाटन

 केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज (8 अगस्त 2026) मुंबई के फोर्ट स्थित शारदा सदन में नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NUCFDC) के नवीन कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वह राज्य शहरी सहकारी बैंक महासंघों और महाराष्ट्र के जिला संघों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद भी करेंगे।

‘सहकार नव-क्रांति’ कार्यक्रम में होंगे शामिल

अमित शाह इसके बाद BSE इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘सहकार नव-क्रांति’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित रहेंगे। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के अनुरूप शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक, सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

NUCFDC और NFSU के बीच होगा समझौता

कार्यक्रम के दौरान NUCFDC और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया जाएगा। इसके जरिए शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा, तकनीकी दक्षता और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

शहरी सहकारी बैंकों के लिए खुलेगा सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर

अमित शाह शहरी सहकारी बैंकों की साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC) का उद्घाटन भी करेंगे। इसके साथ राष्ट्रव्यापी सेवा बंडल के तहत कोर बैंकिंग सेवा (CBS) और उससे जुड़ी अन्य सेवाओं की शुरुआत की जाएगी। इन पहलों का उद्देश्य शहरी सहकारी बैंकों को आधुनिक, सुरक्षित और साझा डिजिटल बैंकिंग ढांचा उपलब्ध कराना है।

‘सहकार CBS’ से जुड़े पहले छह बैंकों का सम्मान

कार्यक्रम में ‘सहकार CBS’ से सफलतापूर्वक जुड़ने वाले पहले छह शहरी सहकारी बैंकों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया जाएगा। साझा डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था से इन बैंकों को तकनीकी संसाधनों और सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।

परिचालन जोखिम प्रबंधन पर पुस्तक का होगा लोकार्पण

इस अवसर पर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व उप महाप्रबंधक जी. पी. मिस्त्री द्वारा लिखित पुस्तक ‘Operational Risk Management – A Practical Guide to Urban Co-operative Banks’ का लोकार्पण भी किया जाएगा। पुस्तक में शहरी सहकारी बैंकों के परिचालन जोखिमों की पहचान, आकलन और प्रभावी प्रबंधन के संबंध में व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

2024 में शुरू हुआ था NUCFDC

NUCFDC की शुरुआत 2 मार्च 2024 को शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य इन बैंकों को साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म, कोर बैंकिंग सेवाएं, साइबर सुरक्षा समाधान, क्षमता निर्माण और परिचालन सहयोग उपलब्ध कराना है।

छोटे और मध्यम बैंकों को मिलेगा फायदा

साझा सेवाओं के जरिए विशेष रूप से छोटे और मध्यम शहरी सहकारी बैंकों के लिए आधुनिक बैंकिंग तकनीक अपनाने की लागत कम करने का लक्ष्य है। इससे उन्हें ग्राहकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और निजी तथा वाणिज्यिक बैंकों के साथ प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।

पीएम मोदी आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को करेंगे संबोधित; 3,000 से ज्यादा छात्रों को मिलेंगी डिग्रियां

पीएम मोदी आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को करेंगे संबोधित; 3,000 से ज्यादा छात्रों को मिलेंगी डिग्रियां

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शनिवार) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस दौरान वह डिग्री हासिल करने वाले 3,000 से ज्यादा छात्रों को संबोधित करेंगे और आईआईटी दिल्ली के सोनीपत कैंपस में एआई-पावर्ड हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग केंद्र ‘परम प्रज्ञा’ का उद्घाटन करेंगे।

3,000 से ज्यादा छात्रों को मिलेंगी डिग्रियां

दीक्षांत समारोह सुबह 11 बजे शुरू होगा। समारोह में 3,000 से ज्यादा छात्रों को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी, जिनमें 587 पीएचडी स्कॉलर्स भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री मेधावी छात्रों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आईआईटी दिल्ली के प्रतिष्ठित एकेडमिक सम्मान भी प्रदान करेंगे।

मेधावी छात्रों को दिए जाएंगे प्रतिष्ठित पुरस्कार

समारोह में प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल, डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल, शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल और परफेक्ट टेन गोल्ड मेडल समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रधानमंत्री इन पुरस्कारों से सम्मानित होने वाले मेधावी छात्रों को बधाई देंगे।

‘परम प्रज्ञा’ से एआई और एडवांस्ड कंप्यूटिंग को मिलेगा बढ़ावा

प्रधानमंत्री आईआईटी दिल्ली के सोनीपत कैंपस में स्थापित एआई-पावर्ड हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग केंद्र ‘परम प्रज्ञा’ का उद्घाटन करेंगे। यह केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च के क्षेत्रों में संस्थान की क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेगा।

अत्याधुनिक रिसर्च पर भारत के संकल्प को मिलेगा बल

‘परम प्रज्ञा’ के उद्घाटन के जरिए अत्याधुनिक रिसर्च और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को आगे बढ़ाने के संकल्प पर जोर दिया जाएगा। यह केंद्र आईआईटी दिल्ली के सोनीपत कैंपस में एआई आधारित हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएगा।

18 एनआईटी के साथ आईआईटी दिल्ली का सहयोग

शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर रंगन बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री मेधावी छात्रों को संस्थान के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान करेंगे। उन्होंने बताया कि आईआईटी दिल्ली ने देशभर के 18 नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ एमओयू साइन कर एक अहम राष्ट्रीय एकेडमिक और रिसर्च सहयोग नेटवर्क शुरू किया है।

एआई और साइबरसिक्योरिटी पर सिस्को के साथ साझेदारी

इससे पहले 4 अगस्त को आईआईटी दिल्ली और सिस्को ने एआई और साइबरसिक्योरिटी पर ‘सिस्को टेक्नोलॉजी हब’ शुरू करने की घोषणा की थी। यह पहल देश में रिसर्च को आगे बढ़ाने, स्किल्स विकसित करने और एआई व साइबरसिक्योरिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

डिजिटल वर्कफोर्स तैयार करने पर जोर

इस साझेदारी के तहत सिस्को की टेक्नोलॉजी विशेषज्ञता और आईआईटी दिल्ली की एकेडमिक लीडरशिप को एक साथ लाया गया है। इसका उद्देश्य इनोवेशन को बढ़ावा देना, ज्ञान के आदान-प्रदान को सक्षम बनाना और एक अत्यधिक कुशल डिजिटल वर्कफोर्स तैयार करना है।

इंडो-पैसिफिक में प्रमुख केंद्र बनाने का लक्ष्य

‘सिस्को टेक्नोलॉजी हब’ का लक्ष्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एआई और साइबरसिक्योरिटी रिसर्च, इनोवेशन और टैलेंट डेवलपमेंट के लिए प्रमुख केंद्र के तौर पर विकसित होना है। भारत की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्राथमिकताओं के अनुरूप यह तीन साल का सहयोग सरकारी स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर डिजिटल फ्रेमवर्क और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने पर भी काम करेगा। साथ ही, डिजिटल इकोसिस्टम को अधिक मजबूत बनाने के लिए वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के समाधान विकसित किए जाएंगे।

‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान देशभर में 9 से 17 अगस्त तक चलाया जाएगा

‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान देशभर में 9 से 17 अगस्त तक चलाया जाएगा

 केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली में राष्ट्रव्यापी ‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान का शुभारंभ किया, जो 9 से 17 अगस्त 2026 तक पूरे देश में चलाया जाएगा।

यह अभियान, जो भारत के सबसे बड़े जनभागीदारी आंदोलनों में से एक बन चुका है, नागरिकों से राष्ट्रीय ध्वज को गर्व से फहराने और देशभक्ति एवं राष्ट्रीय एकता की भावना का जश्न मनाने वाली विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का आह्वान करता है।

कल गुरुवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के तहत 2022 में शुरू हुआ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान एक वार्षिक राष्ट्रीय परंपरा बन गया है, जिसमें करोड़ों नागरिक हर स्वतंत्रता दिवस पर स्वेच्छा से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अब केवल ध्वजारोहण अभियान से कहीं अधिक व्यापक हो गया है और सामुदायिक भागीदारी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, विरासत संबंधी गतिविधियों और डिजिटल सहभागिता से प्रेरित एक राष्ट्रव्यापी उत्सव में तब्दील हो गया है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि हर घर तिरंगा आज एक सच्चा जन आंदोलन बन गया है, जिसे पूरे देश में अपार उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तिरंगा सिर्फ एक राष्ट्रीय ध्वज से कहीं अधिक है; यह भारत की एकता, गौरव और सामूहिक राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि तिरंगा उन अनगिनत वीर पुरुषों और महिलाओं के साहस और बलिदान का प्रतीक है जिन्होंने देश की रक्षा की और इसकी सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी। शेखावत ने इस बात पर जोर दिया कि तिरंगा समाज के क्षेत्र या वर्ग की परवाह किए बिना हर भारतीय को प्रेरित करता है और कहा कि यह अभियान नागरिकों को 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने आगे कहा कि इस वर्ष का हर घर तिरंगा अभियान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के साथ मनाया जा रहा है, जिससे उत्सव और भी अधिक सार्थक हो जाता है और अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी को प्रेरित करता है। 

भारत ने किया अग्नि-4 का सफल परीक्षण, सामरिक मिसाइल क्षमता को मिली नई मजबूती

भारत ने किया अग्नि-4 का सफल परीक्षण, सामरिक मिसाइल क्षमता को मिली नई मजबूती

 भारत ने अपनी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का गुरुवार को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण सामरिक बल कमान (एसएफसी) की निगरानी में किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल से जुड़े सभी परिचालन और तकनीकी मानकों की सफलतापूर्वक पुष्टि हुई।

निर्धारित उड़ान मार्ग पर सफलतापूर्वक चली मिसाइल

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अग्नि-4 का परीक्षण पूरी तरह सफल रहा। मिसाइल ने निर्धारित उड़ान मार्ग का पालन करते हुए सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया। परीक्षण से अग्नि-4 की परिचालन विश्वसनीयता और भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को एक बार फिर मजबूती मिली है।

स्वदेशी विकसित मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल

अग्नि-4 भारत की स्वदेशी रूप से विकसित मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। यह देश की विश्वसनीय सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया यह परीक्षण भारत के सामरिक मिसाइल कार्यक्रम की निरंतर प्रगति को दर्शाता है।

नियमित परीक्षणों से युद्धक तैयारी मजबूत

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मिसाइल प्रणालियों के नियमित उपयोगकर्ता परीक्षण उनकी परिचालन विश्वसनीयता और युद्धक तैयारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस तरह के परीक्षणों से संबंधित प्रणालियों के प्रदर्शन और परिचालन मानकों का आकलन भी किया जाता है।

मई में अग्नि-1 का भी हुआ था सफल परीक्षण

इससे पहले भारत ने अपनी सामरिक क्षमता को मजबूत करते हुए कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-1 का सफल परीक्षण किया था। 22 मई को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से किए गए इस परीक्षण के दौरान मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया था। यह परीक्षण भी सामरिक बल कमान की निगरानी में हुआ था।

अग्नि-1 मिसाइल श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अग्नि-1 भारत की स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कम दूरी तक सटीक मार करने में सक्षम है और देश की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने निर्धारित लक्ष्य और उड़ान मानकों को सफलतापूर्वक हासिल किया था।

लंबी दूरी की कुश मिसाइल का भी परीक्षण

भारत ने जुलाई में लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली ‘कुश’ का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया था। इस प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है। इसका परीक्षण ओडिशा तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया था।

वायु रक्षा क्षमता को मिली नई मजबूती

कुश मिसाइल प्रणाली लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए विकसित की गई है। इसके सफल परीक्षण के साथ भारत की लंबी दूरी की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

प्रह्लाद जोशी की दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और ईरान के मंत्रियों से मुलाकात, शिक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर

प्रह्लाद जोशी की दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और ईरान के मंत्रियों से मुलाकात, शिक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार को दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और ईरान के शिक्षा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ मंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। बातचीत में शिक्षा, कौशल विकास, शोध, नवाचार, डिजिटल लर्निंग और अकादमिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

दक्षिण अफ्रीका के मंत्रियों से शिक्षा साझेदारी पर चर्चा

प्रह्लाद जोशी ने दक्षिण अफ्रीका की बेसिक एजुकेशन मंत्री सिविवे ग्वारुबे और उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण की उप मंत्री डॉ. नोमुसा ड्यूबे-नक्यूब के साथ द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने बताया कि बातचीत में प्राथमिक एवं उच्च शिक्षा, कौशल विकास, शोध, नवाचार और डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

निपुण भारत और स्वयं जैसी पहलों का साझा किया अनुभव

बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान बढ़ाने के अवसरों पर विचार किया गया। भारत की निपुण भारत, परख, स्वयं और समर्थ जैसी सफल पहलों के अनुभव भी साझा किए गए।

शिक्षा समझौतों को जल्द पूरा करने पर जोर

दोनों पक्षों ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रस्तावित समझौतों पर चल रही बातचीत को आगे बढ़ाने और उन्हें जल्द पूरा करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच शिक्षा सहयोग को गहरा करना और आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ पहुंचाना है।

इंडोनेशिया के मंत्री से उच्च शिक्षा और शोध पर मंथन

ब्रिक्स शिक्षा वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के दौरान प्रह्लाद जोशी ने इंडोनेशिया के उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ब्रायन युलियार्तो से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार और शैक्षणिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में भारत-इंडोनेशिया सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

आईआईटी मद्रास और इंडोनेशिया के बीच एमओयू का स्वागत

जोशी ने आईआईटी मद्रास ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन और इंडोनेशिया के उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे शोध, नवाचार और प्रतिभा विकास में सहयोग मजबूत होगा तथा दोनों देशों के छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

ईरान के मंत्री से सभ्यतागत संबंधों पर चर्चा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने ईरान के कार्यवाहक विज्ञान, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रो. मसूद शम्स-बख्श से भी मुलाकात की। भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई इस मुलाकात में दोनों देशों के सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को आधुनिक शिक्षा, शोध, प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी में बदलने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अवसर बढ़ाने पर जोर

जोशी ने कहा कि दोनों देशों के संस्थानों के बीच संबंधों को और मजबूत करने, शैक्षणिक एवं शोध सहयोग बढ़ाने और छात्रों तथा शोधकर्ताओं के लिए अधिक अवसर पैदा करने की जरूरत है। उन्होंने डिजिटल शिक्षा के माध्यम से भारत-ईरान के बीच ज्ञान आधारित साझेदारी को और गहरा करने पर भी जोर दिया।

युवाओं को सशक्त बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और ईरान के साथ शिक्षा क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खोल सकता है। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं को सशक्त बनाने और नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

उदार हृदय वाले सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते रहते हैं : पीएम मोदी

उदार हृदय वाले सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते रहते हैं : पीएम मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुभाषित साझा किया है। उन्होंने संस्कृत के श्लोक के माध्यम से बिना स्वार्थ के परोपकार करने की बात कही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, “किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्। स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “चंद्रमा किसी प्रत्युपकार की इच्छा से अपनी किरणों द्वारा कमुदुनी को प्रकाशित नहीं करता, अपितु यह उसका स्वाभाविक गुण है। उसी प्रकार महान और उदार हृदय वाले सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते रहते हैं, क्योंकि परोपकार उनके स्वभाव में होता है।”

इसके पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा था, “विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्। शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “जिसमें सभी प्रकार की श्रेष्ठ वनस्पतियां और औषधियां पैदा होती हैं, वह पृथ्वी माता विस्तृत और स्थिर हो। विद्या, शौर्य, सत्य, स्नेह आदि सद्गुणों से पालित-पोषित, कल्याणकारी और सुख-साधनों को देने वाली मातृभूमि की हम सदैव सेवा करें।”

वहीं, बुधवार को प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा था, “आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करता है। इसी से प्रेरित होकर आज हमारी युवा शक्ति देश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रही है।”

इसके साथ ही श्लोक भी लिखा था, “आत्मोदयः परज्यानिर्द्वयं नीतिरितीयती। तदूरीकृत्य कृतिभिर्वाचस्पत्यं प्रतायते।” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “स्वयं का उत्था करना और निरंतर आगे बढ़ना ही जीवन की सच्ची नीति है। इसी ध्येय को आधार बनाकर गुणी और विद्वान लोग अपने ज्ञान, कौशल और प्रभाव का विस्तार करते हैं, ताकि वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें।”

इससे पहले, मंगलवार को प्रधानमंत्री की ओर से एक्स पर लिखा गया था, “निरंतर प्रयास और साधना से हमारी प्रतिभा और निखरती है। आज हमारे युवा इन्हीं गुणों को आत्मसात कर दुनियाभर में देश का नाम रोशन कर रहे हैं।”

उन्होंने एक संस्कृत श्लोक, “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते। तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति॥” साझा किया था। इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला कुछ भी नहीं है। कर्मयोग या साधना के द्वारा जिसका अंतःकरण भली-भांति शुद्ध हो गया है, वह साधक समय आने पर उस परम ज्ञान को अपने आप ही अपने भीतर आत्मा में अनुभव कर लेता है।

असम: बाढ़ से 15 जिलों के 1.68 लाख लोग प्रभावित, 133 राहत शिविर संचालित

असम: बाढ़ से 15 जिलों के 1.68 लाख लोग प्रभावित, 133 राहत शिविर संचालित

 असम में बाढ़ की स्थिति गुरुवार को भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के 15 जिले अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। हालांकि अधिकारियों के मुताबिक सिर्फ एक नदी ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार नुमालीगढ़ में धनसिरी दक्षिण नदी खतरे के निशान से ऊपर है। वहीं कोई भी नदी सर्वाधिक बाढ़ स्तर से ऊपर नहीं बह रही है। नवीनतम बाढ़ बुलेटिन के अनुसार 39 राजस्व सर्किलों के 481 गांवों में 1,68,701 लोग प्रभावित हैं। लगभग 14,382.26 हेक्टेयर फसल क्षेत्र जलमग्न है जिससे कई जिलों में लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में गोलाघाट, शिवसागर, जोरहाट, चराईदेव, लखीमपुर, नगांव, दरंग और विश्वनाथ शामिल हैं। गोलाघाट में सबसे अधिक 54,085 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद शिवसागर में 49,515, जोरहाट में 27,842 और चराईदेव में 21,486 लोग प्रभावित हैं। शिवसागर, जोरहाट, लखीमपुर और चराईदेव में फसलों को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है।

राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में 133 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित किए हैं। राहत शिविरों में अभी 10,111 लोग शरण लिए हुए हैं जबकि 35,596 लोगों को वितरण केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा रही है। राहत सामग्री में 616 क्विंटल से अधिक चावल, लगभग 110 क्विंटल दाल, खाद्य तेल, पशु आहार और अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं जिनका वितरण किया गया है।बाढ़ में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। गोलाघाट और उदलगुरी जिले में एक-एक व्यक्ति की जान गई है। फिलहाल किसी के लापता होने की सूचना नहीं है।

आपदा से 41,475 पशु भी प्रभावित हुए हैं। साथ ही 365 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं जिनमें 40 पूरी तरह और 325 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं। बचाव कार्यों के लिए 93 टीमें और 151 नावें तैनात की गई हैं। नावों से अब तक चार लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। प्रशासन बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत और पुनर्निर्माण के काम में लगा हुआ है।

पीएम मोदी 8 अगस्त को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को करेंगे संबोधित

पीएम मोदी 8 अगस्त को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को करेंगे संबोधित

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 8 अगस्त को सुबह 11 बजे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। पीएम मोदी इस दौरान 3000 से अधिक ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को संबोधित भी करेंगे, जिनमें 587 पीएचडी स्कॉलर्स भी शामिल हैं। समारोह के दौरान इन छात्रों को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी।

मेधावी छात्रों को दिए जाएंगे संस्थान के सर्वोच्च सम्मान

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी बेहतरीन शैक्षणिक प्रदर्शन को देखते हुए मेधावी छात्रों को IIT दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान करेंगे। इनमें प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल, डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल, शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल और परफेक्ट टेन गोल्ड मेडल शामिल हैं।

सोनीपत कैंपस में होगा ‘परम प्रज्ञा’ सुपरकंप्यूटर का उद्घाटन

अत्याधुनिक रिसर्च और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के भारत के संकल्प को और मजबूत करते हुए प्रधानमंत्री IIT दिल्ली के सोनीपत कैंपस में स्थापित AI-संचालित हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग सुविधा ‘परम प्रज्ञा’ का उद्घाटन भी करेंगे। उम्मीद है कि यह आधुनिक सुविधा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और अंतर-विषयक अनुसंधान के क्षेत्रों में संस्थान की क्षमताओं को काफी बढ़ाएगी।

शिक्षा सिर्फ सरकार की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी: RSS प्रमुख मोहन भागवत

शिक्षा सिर्फ सरकार की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी: RSS प्रमुख मोहन भागवत

 मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा केवल सरकार या शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की भी भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर शिक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हें अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभानी चाहिए। यदि कहीं कमी है तो उसमें सुधार होना चाहिए, लेकिन समाज को भी यह सोचना होगा कि वह बच्चों की शिक्षा के लिए क्या योगदान दे सकता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारे बच्चों के भविष्य से जुड़ा विषय है, इसलिए समाज को इसके आर्थिक और सामाजिक पक्षों के प्रति सक्रिय रहना चाहिए। यदि शिक्षा के क्षेत्र में सामूहिक प्रयास जन-आंदोलन का रूप लें, तो सुधार की गति और तेज हो सकती है।

FSSAI ने Old Monk, McDowell, बैगपाइपर, रॉयल चैलेंज की बिक्री पर आखिर क्यों लगाई रोक ?

FSSAI ने Old Monk, McDowell, बैगपाइपर, रॉयल चैलेंज की बिक्री पर आखिर क्यों लगाई रोक ?

 नई दिल्ली: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने शराब बनाने वाली कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इनमें ओल्ड मोंक, मैकडॉवेल्स, बैगपाइपर, एंटीक्विटी ब्लू और रॉयल चैलेंज जैसे लोकप्रिय ब्रांड बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने बिना अनुमति वाले फ्लेवरिंग तरीकों का इस्तेमाल किया। साथ ही शराब की एज से जुड़े भ्रामक दावे करके फूड सेफ्टी और लेबलिंग नियमों का उल्लंघन हुआ।

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक फूड रेगुलेटर ने कहा कि जांच और लैब टेस्टिंग में पाया गया कि कुछ कंपनियां रम और व्हिस्की में बाहरी फ्लेवर मिला रहे थे। नियमों के मुताबिक उन्हें कच्चे माल, फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और मैच्योरेशन के जरिए प्राकृतिक रूप से स्वाद और खुशबू विकसित होने देनी चाहिए थी।

रम या फ्लेवर्ड स्पिरिट

FSSAI का कहना है कि ऐसे उत्पादों को स्टैंडर्ड रम या व्हिस्की के तौर पर बेचा जा रहा है, जबकि ये मुख्य रूप से न्यूट्रल अल्कोहल या एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल से बने होते हैं। इनमें ड्रिंक्स का असली स्वाद नहीं होता। अथॉरिटी ने कहा कि इन उत्पादों को रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट या व्हिस्की-फ्लेवर्ड स्पिरिट के तौर पर लेबल किया जाना चाहिए ताकि उनकी असलियत पता चल सके।

अथॉरिटी ने एक बयान में कहा, “कुछ कंपनियां बाहरी फ्लेवर मिलाते हैं जो उत्पाद की असली खुशबू और स्वाद की नकल करता है। कंपनियां फिर इसे स्टैंडर्ड उत्पाद के तौर पर बेचती हैं, जिससे ग्राहक गुमराह होते हैं। कंपनियां प्राकृतिक रूप से स्वाद विकसित करने के लिए मैच्योरेशन या शीरा, माल्ट या अंगूर जैसे बेस मटीरियल का यूज नहीं करती हैं। ये कंपनियां मुख्य रूप से स्पिरिट/न्यूट्रल अल्कोहल का इस्तेमाल करती हैं। इनमें कोई खास स्वाद नहीं होता और इसलिए फ्लेवर मिलाते हैं।”

ग्राहकों को कैसे किया गुमराह?
FSSAI ने कहा कि ऐसे उत्पाद न केवल घटिया क्वालिटी के होते हैं बल्कि स्टैंडर्ड कैटेगरी के नामों का इस्तेमाल करके उन्हें गलत तरीके से बेचा जाता है। उन्हें रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट या व्हिस्की-फ्लेवर्ड स्पिरिट आदि के तौर पर पहचाना जा सकता है। साथ ही पैक में उत्पाद की असलियत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती है।

रेगुलेटर ने ओल्ड मोंक XXX रम के एक वेरिएंट पर 7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड के दावे को भी गुमराह करने वाला पाया। जांच में पाया गया कि इस रम का मुख्य घटक न्यूट्रल स्पिरिट है जबकि मैच्योर रम स्पिरिट इसका बहुत छोटा हिस्सा है। जांच के नतीजों के अनुसार यह 5% से भी कम पाया गया। यह मौजूदा नियमों का भी साफ उल्लंघन है। नियमों के मुताबिक स्पिरिट की उम्र का दावा मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र की स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए।

किन-किन पर लगी रोक?
लैब रिपोर्ट के आधार पर अथॉरिटी ने मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर के ओल्ड मोंक वेरिएंट्स, यूनाइटेड स्पिरिट्स के मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की, इनब्रू बेवरेजेज के बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम और एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रुअरीज के सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर XXX रम की बिक्री पर रोक लगा दी है।

छत्तीसगढ़ के बाद अब गुजरात में एनालॉग पनीर, चीज़ और बटर पर पूरी तरह प्रतिबंध, नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के बाद अब गुजरात में एनालॉग पनीर, चीज़ और बटर पर पूरी तरह प्रतिबंध, नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

 अहमदाबाद। खाद्य सुरक्षा को लेकर गुजरात सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्यभर में एनालॉग पनीर, चीज़ और बटर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में कई स्थानों पर मानकों के अनुरूप न पाए गए उत्पाद मिलने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। इसके साथ ही होटल, रेस्तरां, डेयरी पार्लर, सुपरमार्केट और अन्य खाद्य कारोबारियों को केवल मानक के अनुरूप बने वास्तविक डेयरी उत्पादों का उपयोग और बिक्री करने के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बाद गुजरात का बड़ा फैसला

इससे पहले छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार भी एनालॉग डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी हैं। अब गुजरात ऐसा कदम उठाने वाला तीसरा राज्य बन गया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है।

जांच में सामने आईं अनियमितताएं

फूड सेफ्टी विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों से पनीर, चीज़ और बटर के नमूने एकत्र कर प्रयोगशालाओं में जांच कराई। जांच के दौरान कई उत्पाद ऐसे पाए गए जिन्हें डेयरी उत्पाद के रूप में बेचा जा रहा था, लेकिन वे निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने पूरे राज्य में तत्काल प्रतिबंध लागू कर दिया।

क्या होते हैं एनालॉग डेयरी उत्पाद?

एनालॉग पनीर, चीज़ और बटर देखने में पारंपरिक डेयरी उत्पादों जैसे लगते हैं, लेकिन इन्हें दूध की बजाय अन्य वसा और वैकल्पिक सामग्री से तैयार किया जाता है। ऐसे उत्पादों को यदि असली डेयरी उत्पाद बताकर बेचा जाए, तो इससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे न केवल ग्राहकों के हित प्रभावित होते हैं, बल्कि डेयरी उद्योग और पशुपालकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

कानूनी प्रावधानों के तहत जारी हुआ आदेश

राज्य सरकार ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए यह आदेश जारी किया है। इसके तहत मानकों के अनुरूप न बनने वाले एनालॉग पनीर, चीज़ और बटर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर पूर्ण रोक रहेगी।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

सरकार ने सभी खाद्य उत्पाद निर्माताओं, व्यापारियों, होटल और रेस्तरां संचालकों, कैटरिंग व्यवसायियों तथा अन्य खाद्य कारोबारियों को निर्देश दिया है कि वे केवल प्रमाणित और मानक के अनुरूप डेयरी उत्पादों का ही उपयोग करें। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।