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MP में हैरान कर देने वाला मामला: ट्रेन की चपेट में आने से गाय के हुए टुकड़े, पेट में से जिंदा निकला बछ़ड़ा और 15 किलो पॉलिथीन

MP में हैरान कर देने वाला मामला: ट्रेन की चपेट में आने से गाय के हुए टुकड़े, पेट में से जिंदा निकला बछ़ड़ा और 15 किलो पॉलिथीन

 सिवनी  : सिवनी–नागपुर रोड स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर आज सुबह एक ऐसा दर्दनाक दृश्य सामने आया, जिसने हर संवेदनशील व्यक्ति को भीतर तक झकझोर दिया। ट्रेन की चपेट में आने से एक गाय की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। लेकिन इस हृदयविदारक हादसे के बीच एक मार्मिक और चौंकाने वाला दृश्य भी सामने आया। मृत गाय के पेट में मौजूद उसका बछड़ा जीवित था। मौके पर मौजूद लोगों ने साहस और मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए तुरंत उसे सुरक्षित बाहर निकाला। मौत के सन्नाटे के बीच जीवन की यह हल्की-सी सांस हर आंख को नम कर गई।

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गाय के पेट से निकला पॉलिथीन का गुच्छा

इसी दौरान एक और भयावह सच्चाई उजागर हुई कि मृत गौमाता के पेट से करीब 10 से 15 किलो पॉलिथीन का गुच्छा निकला। यह वही पॉलिथीन है, जिसे हम रोज़ाना लापरवाही से सड़कों, बाजारों और नालियों में फेंक देते हैं—यह जाने बिना कि यही कचरा निरीह पशुओं के लिए मौत का कारण बन रहा है। यह सिर्फ एक हादसा नहीं है,यह हमारे व्यवहार पर कठोर सवाल है। यह हमारी स्वच्छता व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी की परीक्षा है।

घटना की जानकारी मिलते ही गौभक्त धनराज माना ठाकुर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। साथ ही वार्ड पार्षद पं. विजय मिश्रा (गोलू पंडित) भी वहां मौजूद रहे। नगर पालिका के संसाधनों से विधिवत गड्ढा खुदवाया गया और गौमाता का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया।.

यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है—

  • क्या हम अब भी नहीं समझेंगे?
  • क्या एक और ऐसी मौत का इंतजार करेंगे?

आज यह गौमाता थी, कल कोई और निर्दोष जीव हो सकता है।

अब समय आ गया है कि हम— पॉलिथीन का बहिष्कार करें, बेसहारा पशुओं के प्रति संवेदनशील बनें और अपने शहर और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाएं। कभी-कभी एक घटना, एक तस्वीर या एक दृश्य पूरी सोच बदलने के लिए काफी होता है।

 
कांग्रेस में बगावत की लपटें! एक साथ 30 पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा...

कांग्रेस में बगावत की लपटें! एक साथ 30 पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा...

 जावद : मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर खुली बगावत देखने को मिली है। जहां जावद विधानसभा में ब्लॉक अध्यक्षों की हाल ही में हुई नियुक्तियों के विरोध में 30 से अधिक ब्लॉक, नगर और बूथ स्तर के पदाधिकारियों ने इस्तीफे दिए हैं। इतना ही नहीं व्ह्ट्स एप पर नियुक्तियों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि नियुक्तियों पर एतराज नहीं लेकिन किसी बाहरी कार्यकर्ता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुल मिलाकर स्थानीय कार्यकर्ता बनाम बाहरी नेतृत्व में सीधा टकराव देखने को मिल रहा है।

दरअसल, कांग्रेस ने रतनगढ़ में शंभू चारण और सिंगोली में सत्तूलाल धाकड़ सहित जिले में 11 ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्त किए। लेकिन रतनगढ़ और सिंगोली में विरोध देखने को मिला ऐसे में 30 पदाधिकारियों ने एक साथ इस्तीफा सौंप दिया। जिनमें नगर अध्यक्ष, किसान कांग्रेस पदाधिकारी, बीएलए-2, बूथ प्रभारी आदि नेता मौजूद हैं। उनका कहना है कि 'हमें नियुक्तियों से विरोध नहीं है, लेकिन जावद पर बाहर से नेतृत्व थोपना मंजूर नहीं।'

नाराज पदाधिकारियों का कहना है कि कांग्रेस जावद में 22 साल का सूखा झेल रही है। ऐसे में पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती की जरूरत है लेकिन इसके विपरीत बाहरी नेता को जावद के फैसले लेने की राजनीति ने पुराने और संघर्षशील कार्यकर्ताओं को हाशिये पर धकेल दिया। पूरे मामले मे सबसे ज्यादा विरोध समंदर पटेल और रतनगढ़ में शंभू चारण का हो रहा है। नेताओं का कहना है कि जिन लोगों पर विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए काम करने के आरोप लगे, उन्हें ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया। संगठन में निष्ठा और संघर्ष की जगह पैसा और सिफारिश को तरजीह दी जा रही है। नाराज पदाधिकारियों का कहना है कि भले ही हमारे दादा-परदादा ने आजादी की लड़ाई में झंडा उठाया था, लेकिन झंडे उठाने का मतलब गुलामी नहीं,कि कोई बाहर से आकर राजनीति करे और हम चुपचाप माला पहनाते रहें।'

वहीं पूरे मामले में कांग्रेस नेता समंदर पटेल ने सभी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार की कोई नाराजगी नहीं है। जिन लोगों को पद नहीं मिला, वही लोग इस्तीफा दे रहे हैं। संगठन में उत्साह है। राजनीति में पद सीमित होते हैं, लेकिन चाह सभी की होती है। इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।' वहीं जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने भी इसे 'मामूली नाराजगी' बताया है। उन्होंने बैठक के जरिए समाधान निकालने की बात कही है।

खुशखबरी! शादी का सर्टिफिकेट अब मोबाइल से बनेगा, जानें 4 आसान स्टेप

खुशखबरी! शादी का सर्टिफिकेट अब मोबाइल से बनेगा, जानें 4 आसान स्टेप

 भोपाल। शादी का सर्टिफिकेट बनवाने के लिए अब नगर निगम के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भोपाल नगर निगम ने विवाह पंजीयन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब दूल्हा-दुल्हन घर बैठे आवेदन कर सकेंगे और डिजिटल मैरिज सर्टिफिकेट ऑनलाइन ही डाउनलोड कर पाएंगे।

इस व्यवस्था को लागू करने को लेकर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन की अध्यक्षता में बैठक भी हो चुकी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऑनलाइन विवाह पंजीयन की प्रक्रिया को जल्द और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए, ताकि आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

ऑनलाइन ही होगा पूरा प्रोसेस

भोपाल नगर निगम की इस नई व्यवस्था में आवेदक को शादी से जुड़े सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे। अपलोड किए गए दस्तावेजों के आधार पर संबंधित वार्ड का नगर निगम कर्मचारी ऑनलाइन पंचनामा तैयार करेगा।

इसके बाद दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा और सत्यापन पूरा होते ही डिजिटल मैरिज सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाएगा, जिसे कहीं से भी डाउनलोड किया जा सकेगा।

ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन (4 आसान स्टेप)

 सबसे पहले निगम की वेबसाइट www.bmconline.gov.in
 पर जाएं।

 होमपेज पर Citizen Services विकल्प पर क्लिक करें।

 Marriage Registration Form भरें और जरूरी दस्तावेज स्कैन कर अपलोड करें।

 दस्तावेज अपलोड के बाद ₹1100 का ऑनलाइन भुगतान करें।

जरूरी दस्तावेज

दूल्हा-दुल्हन, माता-पिता और गवाहों के आधार कार्ड

शादी संपन्न होने के स्थान का प्रमाण पत्र

 शादी का कार्ड

मैरिज शाखा के अधिकारी केवल दूल्हा-दुल्हन को कार्यालय बुलाएंगे।

 जोनल अधिकारी और AHO द्वारा घर जाकर भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

Supreme Court ने ECI को SIR विस्तार याचिकाओं पर 31 दिसंबर तक फैसला करने का दिया आदेश

Supreme Court ने ECI को SIR विस्तार याचिकाओं पर 31 दिसंबर तक फैसला करने का दिया आदेश

 भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को ECI को निर्देश दिया कि वह केरल और उत्तर प्रदेश में चल रहे SIR की समय सीमा बढ़ाने की याचिकाओं पर 31 दिसंबर 2024 तक निर्णय ले। मुख्य CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिनमें मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई थी।

अदालती कार्यवाही के मुख्य बिंदु

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह निर्देश याचिकाकर्ताओं और चुनाव आयोग को दिया। इसमें SIR की समय सीमा बढ़ाने के लिए प्राप्त अभ्यावेदन पर फैसला करने का आदेश दिया गया है। इस पर आयोग को 31 दिसंबर तक फैसला लेना है, जबकि अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी। यह मामला मुख्य रूप से केरल और उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों से संबंधित है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि केरल में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं और प्रक्रिया में समय की कमी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सीधे आयोग के पास अपनी मांग रखने की अनुमति दी है।

केरल और यूपी को लेकर गंभीर आरोप

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि केरल में पुनरीक्षण के दौरान लगभग 25 लाख नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने विसंगतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई मामलों में पति का नाम सूची में है लेकिन पत्नी का नाम हटा दिया गया है। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने उत्तर प्रदेश के संदर्भ में सवाल उठाया कि जब वहां विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, तो इतनी जल्दबाजी में गहन पुनरीक्षण (SIR) करने की क्या आवश्यकता है?

डेटा सुरक्षा पर रुख

सुप्रीम कोर्ट ने उस अलग याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें आरोप लगाया गया था कि मतदाता गणना के दौरान नागरिकों का गोपनीय डेटा निजी स्वयंसेवकों (Volunteers) के साथ साझा किया जा रहा है। कोर्ट ने फिलहाल मुख्य ध्यान समय सीमा और प्रक्रिया की शुद्धता पर केंद्रित रखा है।

NIA का खौफनाक खुलासा! इन देशों में बेचे जा रहे भारतीयों के अंग, जानिए कौन है इस पीछे का मास्टरमाइंड?

NIA का खौफनाक खुलासा! इन देशों में बेचे जा रहे भारतीयों के अंग, जानिए कौन है इस पीछे का मास्टरमाइंड?

 केरल में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय एक संगठित अंग तस्करी गिरोह का खुलासा किया है। एजेंसी के मुताबिक, यह गिरोह अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भारत से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विदेश भेज रहा था। ईरान के अलावा वर्ष 2025 में ओडिशा के दो लोगों को ताजिकिस्तान भेजे जाने की भी पुष्टि हुई है, जहां उनकी किडनी अमीर लोगों में प्रतिरोपित की गई। एनआईए ने केरल की एक विशेष अदालत में दाखिल हलफनामे में यह जानकारी दी और मुख्य आरोपी मधु जयकुमार की हिरासत अवधि बढ़ाने की मांग की। जयकुमार केरल के पलारिवट्टोम का निवासी है और लंबे समय से फरार चल रहा था।

कोच्चि एयरपोर्ट से शुरू हुई जांच
यह मामला 18 मई 2024 को सामने आया था, जब सबिथ नामक व्यक्ति को कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आव्रजन अधिकारियों ने रोका। उस पर एक संगठित अंग तस्करी गिरोह से जुड़े होने का संदेह था। इसके बाद की जांच में साजिथ और विजयवाड़ा निवासी बेलमकोंडा राम प्रसाद की गिरफ्तारी हुई। आरोप है कि ये लोग अवैध अंग प्रतिरोपण के लिए दानदाताओं और प्राप्तकर्ताओं को ईरान के अस्पतालों तक पहुंचाने की व्यवस्था करते थे।

27 ट्रांसप्लांट और 11 डोनर्स की पुष्टि
एनआईए के अनुसार, एक साल से अधिक समय तक फरार रहे जयकुमार को 7 नवंबर को नई दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उसने उन 27 लोगों के नाम उजागर किए, जिन्होंने ईरान में किडनी ट्रांसप्लांट कराया था। इसके अलावा 11 किडनी दानदाताओं की पहचान भी सामने आई है।

ताजिकिस्तान तक फैला नेटवर्क
हलफनामे में कहा गया है कि केस दर्ज होने के बाद भी गिरोह की गतिविधियां नहीं रुकीं। वर्ष 2025 में ओडिशा के दो व्यक्तियों को ताजिकिस्तान भेजा गया, जहां आरोपियों के जरिए उनकी किडनी अमीर मरीजों में प्रतिरोपित की गई। एनआईए अब इस अवैध अंग व्यापार से जुड़े पैसों की ट्रेल की जांच कर रही है।

हिरासत बढ़ाने की मांग
एनआईए ने अदालत को बताया कि जयकुमार से अन्य आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले बैंक खातों के विवरण, तस्वीरों और वीडियो के संबंध में गहन पूछताछ की जरूरत है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसका संबंध अन्य अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी गिरोहों से तो नहीं है। अदालत ने 15 दिसंबर को जयकुमार को तीन दिन की एनआईए हिरासत में भेजा था, जो 18 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रही है। सूत्रों के अनुसार, ओडिशा के उन दो दानदाताओं की तलाश जारी है, जिन्हें ताजिकिस्तान भेजा गया था।

गरीबों को लालच, वादा पूरा नहीं
एनआईए के आरोपपत्र में कहा गया है कि दानदाता अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से थे, जिन्हें मोटी रकम का लालच दिया गया। लेकिन विदेश पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें वह पैसा भी नहीं दिया गया, जिसका वादा किया गया था। यह मामला अंतरराष्ट्रीय अंग तस्करी नेटवर्क की गंभीरता और गरीबों के शोषण की भयावह तस्वीर पेश करता है, जिस पर अब जांच एजेंसियां शिकंजा कस रही हैं।

इस फेमस बॉलीवुड अभिनेत्री के घर इनकम टैक्स ने मारा छापा, जानें क्या है पूरा मामला

इस फेमस बॉलीवुड अभिनेत्री के घर इनकम टैक्स ने मारा छापा, जानें क्या है पूरा मामला

 नेशनल डेस्क: बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। गुरुवार, 18 दिसंबर 2025 को इनकम टैक्स विभाग ने शिल्पा शेट्टी के घर पर छापेमारी की कार्रवाई की। यह कार्रवाई उनके बैस्टियन रेस्टोरेंट से जुड़े वित्तीय लेनदेन और टैक्स में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत की जा रही है। विभाग ने शिल्पा के घर के अलावा उनसे जुड़े कई अन्य ठिकानों पर भी सर्च ऑपरेशन चलाया है।

दरअसल, आयकर विभाग ने शिल्पा शेट्टी के घर पर छापा मारने से एक दिन पहले मुंबई के दादर स्थित बैस्टियन रेस्टोरेंट पर कार्रवाई की थी। बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को IT विभाग के अधिकारियों ने कई घंटों तक रेस्टोरेंट में छानबीन की। विभाग को शक है कि होटल और रेस्टोरेंट बिजनेस में निवेश, आय और टैक्स भुगतान से जुड़े मामलों में गड़बड़ियां हुई हैं, जिसकी गहन जांच की जा रही है।

शिल्पा शेट्टी की बैस्टियन हॉस्पिटैलिटी कंपनी मुंबई के अलावा पुणे, बेंगलुरु और गोवा में भी बैस्टियन नाम से क्लब और रेस्टोरेंट संचालित करती है। आयकर विभाग की जांच का दायरा अब इन सभी ठिकानों तक फैलता नजर आ रहा है। इसी बीच बेंगलुरु में बैस्टियन रेस्टोरेंट से जुड़े एक मामले में केस दर्ज होने की भी जानकारी सामने आई है।

छापेमारी की कार्रवाई के बीच शिल्पा शेट्टी ने अपने एक नए रेस्टोरेंट की घोषणा भी कर दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पोस्ट साझा करते हुए अपने नए रेस्टोरेंट ‘अम्माकाई’ के लॉन्च का ऐलान किया, जो चर्चा का विषय बन गया।

गौरतलब है कि शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा लंबे समय से विभिन्न विवादों के चलते सुर्खियों में रहे हैं। इनमें 60.40 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही है। इस केस में हाल ही में नई धाराएं जोड़ी गई हैं और इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी जुटाए गए हैं। अब यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में भी आ चुका है, जिससे आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

एक पल में उजड़ गया पूरा परिवार… हाईवे पर बजरी से भरे डंपर ने ली 4 सगे भाइयों की जान

एक पल में उजड़ गया पूरा परिवार… हाईवे पर बजरी से भरे डंपर ने ली 4 सगे भाइयों की जान

 राजस्थान - राजस्थान के बूंदी जिले में नेशनल हाईवे नंबर-52 पर दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। सिलोर पुलिया के पास बजरी से भरे एक अनियंत्रित डंपर ने सामने से आ रही कार को कुचल दिया। इस भीषण दुर्घटना में कार सवार चार सगे भाइयों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

टायर फटते हीमच गया कहर

जानकारी के मुताबिक, हादसा सदर थाना क्षेत्र में हाईवे-52 पर हुआ। सिलोर पुलिया के पास बजरी से भरे डंपर का अचानक टायर फट गया। इसके बाद चालक डंपर पर नियंत्रण नहीं रख सका। अनियंत्रित वाहन पहले एक क्रेन से टकराया और फिर डिवाइडर पार करते हुए रॉन्ग साइड में जा पहुंचा। उसी दौरान सामने से आ रही कार डंपर की चपेट में आ गई। डंपर कार के ऊपर पलट गया, जिससे कार पूरी तरह बजरी के नीचे दब गई।

रेस्क्यू में लगीं क्रेन और जेसीबी

हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। कार में फंसे लोगों को निकालने के लिए दो क्रेन और एक जेसीबी की मदद ली गई। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबी कार से चारों घायलों को बाहर निकाला गया और जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

जन्मदिन से लौटते वक्त टूटा परिवार

पुलिस जांच में सामने आया कि हादसे में जान गंवाने वाले चारों युवक आपस में सगे भाई थे। वे टोंक में अपनी मौसी के पोते के जन्मदिन समारोह में शामिल होकर कोटा लौट रहे थे। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।

दुर्घटना के बाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया, जिसे पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद खुलवाया। पुलिस ने बजरी से भरे डंपर को जब्त कर लिया है। चारों शवों को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। परिजनों को सूचना दे दी गई है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

 
MP पुलिस को हाईटेक बनाने की तैयारी, AI और टेक्नोलॉजी पर CM मोहन यादव का जोर

MP पुलिस को हाईटेक बनाने की तैयारी, AI और टेक्नोलॉजी पर CM मोहन यादव का जोर

 भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पुलिस बल में नवाचार और सामाजिक सरोकार से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे के लिए पुलिस फोर्स को बधाई दी और इस अभियान में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री पुलिस मुख्यालय में आयोजित पुलिस महानिदेशक–महानिरीक्षक सम्मेलन-2025 को संबोधित कर रहे थे।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में विकास और जनकल्याण की गतिविधियाँ इस तरह संचालित हों कि भविष्य में नक्सलवाद दोबारा पनप न सके। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण शुरू करने के निर्देश दिए। पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया को वर्तमान समय की बड़ी शक्ति और चुनौती दोनों बताया। उन्होंने कहा कि अफवाहों और भ्रामक सामग्री पर समय रहते त्वरित व प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। साथ ही, पुलिस को तकनीकी रूप से और अधिक दक्ष बनाकर पीड़ितों को तुरंत सहायता उपलब्ध करानी होगी। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि पुलिस की छवि भय नहीं, भरोसे की होनी चाहिए। अपराधियों में डर और आमजन में सुरक्षा की भावना विकसित करना पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने सामुदायिक पुलिसिंग, महिला एवं बाल सुरक्षा और मीडिया के माध्यम से बेहतर संवाद पर विशेष ध्यान देने की बात कही। सड़क सुरक्षा पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने ब्लैक स्पॉट की पहचान, सख्त यातायात निगरानी, शराब पीकर वाहन चलाने पर कड़ी कार्रवाई और राहवीर योजना के व्यापक प्रचार के निर्देश दिए। उन्होंने 108 एंबुलेंस चालकों के निजी अस्पतालों से गठजोड़ पर सख्त नजर रखने और चालकों की आंखों की जांच के लिए विशेष शिविर लगाने की आवश्यकता बताई।

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महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नशे के खिलाफ अभियान को और सख्त बनाने पर भी उन्होंने जोर दिया। सम्मेलन में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने बताया कि यह बैठक रायपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए अखिल भारतीय पुलिस महानिदेशक–महानिरीक्षक सम्मेलन के निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए आयोजित की गई है। बैठक में कानून व्यवस्था, आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, पुलिस आधुनिकीकरण, महिला सुरक्षा, सिंहस्थ-2028, फॉरेंसिक साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर प्रस्तुतिकरण दिए गए। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव गृह शिवशेखर शुक्ला सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

प्रेमी के प्यार में पागल युवती घर छोड़कर 8 दिन उसके घर रही, 9वें दिन पत्नी, बच्चा मायके से लौटे तो पता चला प्रेमी शादीशुदा है

प्रेमी के प्यार में पागल युवती घर छोड़कर 8 दिन उसके घर रही, 9वें दिन पत्नी, बच्चा मायके से लौटे तो पता चला प्रेमी शादीशुदा है

 (खंडवा): मध्यप्रदेश के खंडवा से बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आय़ा है। यहां एक युवती के साथ ऐसा धोखा हुआ है कि कोई भी हिल जाए। दरअसल एक युवती प्रेमी की बातों में आकर अपना घर छोड़कर उसके साथ 8 दिन  लिव इन रिलेशन में रही। प्रेमी के झूठ का खुलासा 9वें दिन हुआ। जिस प्रेमी ने खुद को कुंआरा बताया था वो शादीशुदा निकला और युवती के होश फाख्ता हो गए। प्रेमी ने लड़की को धोखा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। पोल खुलने के बाद युवती वापस अपने घर लौट आई है और प्रेमी के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया है।

खुद को कुंवारा बताकर शादी कार्यक्रम में हुई थी युवती से दोस्ती

जानकारी के मुताबिक आरोपी युवक लवलेश महाजन ने खुद को कुंवारा बताकर लड़की से दोस्ती की थी। युवक बुरहानपुर के खकनार का रहने वाला है।  युवती के मुताबिक उसकी मुलाकात लवलेश से कुछ महीने पहले मामा के घर शादी के दौरान हुई थी। उन्होंने एक दूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए और फिर  फोन पर बात होने लगी।

लवलेश ने शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाए

लड़की को फांसने के लिए लवलेश ने खुद के शादीशुदा होने की बात उससे छिपाई। शादी करने का वादा करके युवती के साथ संबंध बना लिए । युवती लवलेश की बातों में इस कदर आ गई कि अपना घर बार छोड़कर  घर से भाग गई।

दिलचस्प है कि लवलेश उसे लेने गांव आया और वहां से दोनो बुरहानपुर चले गए। लवलेश ने युवती को अपने घर पर रखा। पीड़ित लड़की का कहना है कि लवलेश ने 8 दिन तक उसे अपने घर रखा,  शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाए।

मायके से पत्नी और बच्चे के लौटने के साथ ही सच आया सामने

पीड़ित लड़की का कहना है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने तब आई जब लवलेश के घर पर एक महिला और बच्चा आ पहुंचे। जब लड़की ने महिला और बच्चे के बारे में जानना चाहा तो लवलेश की पत्नी ने ही युवती को बताया कि लवलेश ने उससे 3 साल पहले लव मैरिज की थी। इस खुलासे के बाद युवती और उसके बीच काफी कहासुनी हुई। विवाद बढ़ने के बाद लड़की अपने घर लौटी और घरवालों को सच्चाई बताई। लिहाजा पुलिस मामले में जांच कर रही है

MP में रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया नायब तहसीलदार, तहसील कार्यालय में ही ट्रैप

MP में रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया नायब तहसीलदार, तहसील कार्यालय में ही ट्रैप

 सतना। मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी के खिलाफ लोकायुक्त की सख्ती लगातार जारी है। बावजूद इसके, कुछ अधिकारी अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे। ताजा मामला सतना जिले से सामने आया है, जहां रीवा लोकायुक्त की टीम ने रामपुर बाघेलान तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया।

तहसील कार्यालय में ली जा रही थी रिश्वत

गुरुवार को लोकायुक्त रीवा की टीम ने नायब तहसीलदार वीरेंद्र सिंह जायसूर को तहसील कार्यालय में ही 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया। आरोपी खैरा निवासी आशुतोष सिंह से जमीन से जुड़े काम के बदले यह रकम ले रहा था।

शिकायत, सत्यापन और फिर कार्रवाई

फरियादी आशुतोष सिंह ने 15 दिसंबर को लोकायुक्त कार्यालय रीवा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसके पिता चंद्रशेखर सिंह के नाम दर्ज पुस्तैनी भूमि के बंटवारे, सीमांकन और नामांतरण आदेश के एवज में नायब तहसीलदार ने 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। सत्यापन के दौरान आरोपी ने 10 हजार रुपये ले भी लिए। इसके बाद 18 दिसंबर को गठित टीम ने योजनाबद्ध तरीके से तहसील कार्यालय में कार्रवाई करते हुए आरोपी को रिश्वत लेते समय पकड़ लिया।

आगे की कार्रवाई जारी

लोकायुक्त टीम ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। इस कार्रवाई से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि रिश्वतखोरी पर लोकायुक्त की नजर है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

MP में ई-अटेंडेंस को लेकर सख्ती, 134 शिक्षकों पर कार्रवाई, नोटिस जारी

MP में ई-अटेंडेंस को लेकर सख्ती, 134 शिक्षकों पर कार्रवाई, नोटिस जारी

गुना। मध्यप्रदेश में स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए लागू किए गए ई-अटेंडेंस सिस्टम को लेकर शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। गुना जिले में ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करने वाले 134 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने उन्हें नोटिस जारी किए हैं।

यह कार्रवाई शिक्षा पोर्टल 3.0 से प्राप्त ऑनलाइन डाटा के आधार पर की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शासन की इस अनिवार्य व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

75% शिक्षक कर रहे पालन, 2300 अब भी लापरवाह

गुना जिले में शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों सहित कुल 9477 कर्मचारी पदस्थ हैं। इनमें से करीब 75 प्रतिशत शिक्षक नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज कर रहे हैं, जबकि लगभग 2300 शिक्षक अब भी इस प्रणाली का पालन नहीं कर रहे। पहले चरण में उन शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है, जिन्होंने एक बार भी ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की। ऐसे सभी 134 शिक्षकों को तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।

“लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त” – डीईओ

जिला शिक्षा अधिकारी राजेश गोयल ने कहा कि ई-अटेंडेंस शासन की अनिवार्य व्यवस्था है। यदि नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

रोजाना हो रही निगरानी, आगे भी चलेगी कार्रवाई

शिक्षा विभाग द्वारा रोजाना पोर्टल के माध्यम से रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है। आने वाले दिनों में ई-अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शेष शिक्षकों की पहचान कर चरणबद्ध कार्रवाई की जाएगी, ताकि स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था सुचारु और पारदर्शी बनी रहे।

तकनीकी दावों की होगी जांच

कई शिक्षकों ने नेटवर्क समस्या, मोबाइल या ऐप से जुड़ी तकनीकी खराबी का हवाला दिया है। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने भौतिक सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए विभागीय दल गठित किए जाएंगे, जो स्कूलों में पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच करेंगे। तकनीकी खामी पाए जाने पर मौके पर ही सुधार की कार्रवाई की जाएगी।

 

CRIME : कलयुगी बेटे का खौफनाक कांड—पिता का गला घोंटा, मां को आरी से काटा, शव बोरियों में भरकर नदियों में फेंके

CRIME : कलयुगी बेटे का खौफनाक कांड—पिता का गला घोंटा, मां को आरी से काटा, शव बोरियों में भरकर नदियों में फेंके

 उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली वारदात सामने आई है, जहां अंबेश नाम के युवक ने पैसों और शादी के विवाद में अपने ही माता-पिता की नृशंस हत्या कर दी।

अहमदपुर गांव में हुई इस दिल दहला देने वाली घटना में आरोपी ने पहले लोहे के लोढ़े से माता-पिता के सिर पर हमला किया, फिर तड़पते पिता श्याम बहादुर का रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी और मां बबिता के शव को आरी से टुकड़ों में काट डाला। साक्ष्य मिटाने के लिए उसने दोनों शवों को छह सीमेंट की बोरियों में भरकर कार की डिक्की में रखा और रात के अंधेरे में गोमती व सई नदी में फेंक दिया।

पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कोलकाता में दूसरे धर्म में शादी की थी और पत्नी द्वारा मेंटेनेंस मांगने को लेकर विवाद चल रहा था। बहन को गुमराह कर उसने माता-पिता के लापता होने की कहानी गढ़ी, लेकिन कड़ाई से पूछताछ में जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने एक बॉडी पार्ट बरामद कर लिया है, जबकि बाकी अंगों की तलाश जारी है।

नदियों को जोड़कर बाढ़ से लड़ने की तैयारी, बिहार में लिंक योजनाओं को मिलेगी रफ्तार

नदियों को जोड़कर बाढ़ से लड़ने की तैयारी, बिहार में लिंक योजनाओं को मिलेगी रफ्तार

 पटना : बिहार में बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई विस्तार और जल प्रबंधन को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। कोसी-मेची लिंक और बागमती-बेलवाधार-बूढ़ी गंडक लिंक योजना के बाद अब राज्य में करीब एक दर्जन से अधिक नदी जोड़ परियोजनाओं पर काम शुरू होने वाला है। इनमें गंडक-छाड़ी-दाहा-घाघरा लिंक, गंडक-माही-गंगा लिंक, त्रिशुला-बलान लिंक और फल्गु-पैमार लिंक जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं शामिल हैं।

इन सभी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य नदियों के जल का संतुलित उपयोग कर बाढ़ के खतरे को कम करना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना और भूजल स्तर को बेहतर बनाना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई मौकों पर नदी जोड़ योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की टीम तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर तेजी से काम कर रही है।

हाल ही में कोसी-मेची लिंक परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जबकि बागमती-बेलवाधार-बूढ़ी गंडक लिंक योजना का काम लगभग पूरा हो गया है। नदी जोड़ योजनाओं के तहत नदियों को आपस में जोड़ने से बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी का बेहतर बंटवारा होगा। इससे एक ओर जहां बाढ़ से सुरक्षा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इसका सीधा फायदा राज्य के लगभग आधे हिस्से के किसानों को मिलने की संभावना है, जिससे फसल उत्पादन में भी इजाफा होगा।

बागमती-बेलवाधार-बूढ़ी गंडक लिंक योजना से किसानों को राहत
बागमती-बेलवाधार-बूढ़ी गंडक लिंक योजना पर करीब 130.88 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस परियोजना से शिवहर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण जिले के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। योजना के तहत बागमती धार (बेलवा–मीनापुर लिंक चैनल) को पुनर्जीवित किया गया है। चैनल के दोनों ओर तटबंध का निर्माण कर बेलवा स्थित हेड रेगुलेटर के माध्यम से बागमती नदी का पानी बूढ़ी गंडक नदी में पहुंचाया जाएगा।

इस परियोजना के माध्यम से लगभग 1.43 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल खेती को संजीवनी मिलेगी, बल्कि बाढ़ और सूखे दोनों से निपटने में राज्य को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त: 35 साल का लाल आतंक खत्म, विकास को नई उड़ान

मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त: 35 साल का लाल आतंक खत्म, विकास को नई उड़ान

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने लगभग 35 साल नक्सलवाद का दंश झेला। यह एक बड़ी चुनौती थी, पर राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और नक्सल विरोधी अभियान में शामिल जवानों की प्रतिबद्धता से 11 दिसंबर 2025 को नक्सलवाद प्रदेश के नक्शे से पूरी तरह मिटा दिया गया। यह दिन प्रदेश में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश की धरती से नक्सलवाद को समूल खत्म करना हमारी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है। नक्सलवाद और लाल आतंक देश के हर हिस्से में विकास आधारित गतिविधियों में बाधक था। इससे आम नागरिकों में इसके कारण भय का माहौल होता था। ऐसे में नक्सलियों और नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही। 

पुलिस के अधिकारी-कर्मचारियों ने बालाघाट में अंतिम दो नक्सलियों का आत्मसमर्पण कराया और मध्यप्रदेश ने लाल सलाम को आखिरी सलाम कर दिया। अब इससे प्रभावित क्षेत्रों में विकास को एक नई दिशा और एक नई रफ्तार मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में विकास को गति देने के लिए मध्यप्रदेश में दशकों से चली आ रही नक्सलवाद की समस्या से खत्म करना अति आवश्यक था। मध्यप्रदेश ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह द्वारा देश से नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय डेडलाइन से करीब साढ़े तीन महीने पहले ही यह ऐतिहासिल उपलब्धि हासिल कर ली है। नक्सलवादियों के एमएमसी जोन (महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़) में 42 दिन में 42 नक्सलवादियों ने समर्पण कर विकास की धारा से जुड़ना स्वीकार किया है। वहीं, प्रदेश में वर्ष 2025 में 10 हार्डकोर माओवादियों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस सफलता का श्रेय राज्य के बहादुर पुलिस अधिकारी और केंद्रीय सुरक्षाबलों को दिया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों के पुनर्वास के लिए विशेष योजना बनाई है। साथ ही प्रदेश में अब एक ऐसा तंत्र भी विकसित किया जाएगा, जिससे दोबारा मध्यप्रदेश की धरती पर नक्सलवादी या अन्य अतिवादी मूवमेंट खड़े न हो पाएं। इसके लिए सभी पड़ोसी राज्यों के साथ भी जरूरी समन्वय किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में वर्ष 1988-90 से नक्सली गतिविधियों की शुरुआत हुई थी। 

नक्सलियों ने आम नागरिकों को डरा-धमकाकर परेशान किया और सरकार के विकास कार्यों में भी रुकावटें डालीं। नक्सली पुलिस की बसों को भी आग के हवाले कर देते थे। नक्सलियों ने विपक्षी दल की सरकार में मंत्री रहे श्री लिखीराम कावरे की बालाघाट जिले में उनके घर से निकालकर सरेआम हत्या कर दी थी। प्रदेश में 35 सालों के लंबे समय तक नक्सलियों से संघर्ष जारी रहा, जिसमें कई आम नागरिक और पुलिस व सुरक्षाबलों के जवानों को अपने प्राण गंवाने पड़े।

नक्सलवाद उन्मूलन अभियान के कुछ प्रमुख तथ्य
 
मध्यप्रदेश में वर्ष 1988 से 1990 के बीच नक्सल गतिविधियों की शुरुआत हुई थी। प्रदेश में  मंडला, डिंडौरी और बालाघाट नक्सल प्रभावित जिले रहे।

राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित जिले बालाघाट, मंडला और डिंडौरी के लिए विशेष सहयोगी  दस्ते के 850 पद स्वीकृत किए।

नक्सलियों को हथियार डालकर जीवन से जुड़ने का अवसर देने के लिए राज्य सरकार ने 'पुनर्वास  से पुनर्जीवन' अभियान प्रारंभ किया।

सरकार की इसी पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर दिसंबर 2025 में करीब 2.36 करोड़ रुपए की इनामी राशि वाले 10 नक्सलियों ने पुलिस लाईन, बालाघाट में सरेंडर कर दिया।

11 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश ने 35 वर्षों से चले आ रहे लाल आतंक को समाप्त कर नक्सल मुक्त बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

वर्ष 2025 में नक्सल विरोधी अभियानों में 16 मुठभेड़ों/एक्सचेंज ऑफ फायर में 13 हार्डकोर नक्सली मारे गए और एक की गिरफ्तारी हुई।

जून 2025 में बालाघाट में हुई मुठभेड़ में 4 नक्सली मारे गए, इनमें 3 महिलाएं शामिल थीं। इनके  कब्जे से ऑटोमैटिक हथियार और भारी मात्रा में गोला-बारूद भी बरामद किया     गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट पहुंचकर नक्सलियों का खात्मा करने वाले पुलिस के सिपाहियों और अधिकारियों को पदोन्नति देकर सम्मानित किया।

नक्सल विरोधी अभियान में राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य     साहस और वीरता का प्रदर्शन कर नक्सलवाद की दशकों से चली आ रही समस्या का सफाया कर दिया।

कौन हैं नितिन नबीन? जिन्हें BJP ने बनाया अपना नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष

कौन हैं नितिन नबीन? जिन्हें BJP ने बनाया अपना नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष

  नई दिल्ली/पटना। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार सरकार में मंत्री नितिन नबीन (Nitin Nabin) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति संगठन के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। नितिन नबीन लंबे समय से पार्टी और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और उन्हें एक अनुभवी, जमीनी नेता के रूप में जाना जाता है।

नितिन नबीन बिहार की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। युवावस्था से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहे। संगठन में लगातार सक्रिय रहने के कारण वे पार्टी नेतृत्व की नजर में आए और धीरे-धीरे बड़ी जिम्मेदारियां संभालते चले गए।

कई बार रह चुके बिहार विधानसभा के सदस्य

नितिन नबीन कई बार बिहार विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। वे पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे हैं और जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। एक जनप्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने शहरी विकास, बुनियादी ढांचे और जनसमस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाई है।

सरकार में रहते हुए नितिन नबीन को मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। वे बिहार सरकार में अलग-अलग विभागों का नेतृत्व कर चुके हैं। मंत्री रहते हुए उन्होंने सड़क, शहरी विकास, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक सुधारों पर काम किया। उनकी कार्यशैली को तेज, अनुशासित और परिणाम देने वाली माना जाता है।

संगठन के स्तर पर भी नितिन नबीन का अनुभव काफी व्यापक है। वे भाजपा के प्रदेश संगठन में कई अहम पदों पर रह चुके हैं। पार्टी के भीतर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाकर काम करना जानते हैं। यही कारण है कि उन्हें अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आगामी चुनावी रणनीतियों में अहम योगदान

राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद नितिन नबीन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। अब वे पार्टी के राष्ट्रीय संगठन को मजबूत करने, राज्यों के साथ समन्वय बनाने और आगामी चुनावी रणनीतियों में अहम योगदान देंगे। माना जा रहा है कि उनका प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होगी।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व ने यह नियुक्ति संगठन को और अधिक सक्रिय व मजबूत बनाने के उद्देश्य से की है। नितिन नबीन को मेहनती, अनुशासित और नेतृत्व क्षमता वाला नेता माना जाता है। उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो बिना विवादों में आए काम पर फोकस करते हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नितिन नबीन की नियुक्ति से बिहार के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी भाजपा को मजबूती मिलेगी। खासतौर पर संगठनात्मक ढांचे को जमीन स्तर तक मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।

कुल मिलाकर, नितिन नबीन का सफर छात्र राजनीति से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तक का रहा है। यह नियुक्ति न सिर्फ उनके राजनीतिक करियर की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि भाजपा के लिए भी एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

 
 
CG -10वीं की छात्रा ने की आत्महत्या : घर में फांसी लगाकर दी जान, परिवार में छाया मातम

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दिल्ली- भारतीय रेलवे देश की लाइफलाइन है और रोजाना करोड़ों यात्री इस पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में ट्रेन छूट जाना एक आम लेकिन बेहद परेशान करने वाली स्थिति है। अक्सर यात्रियों का पहला सवाल होता है कि क्या छूटी हुई ट्रेन के टिकट से किसी दूसरी ट्रेन में यात्रा की जा सकती है।

रेलवे नियमों के अनुसार, रिजर्व टिकट लेकर दूसरी ट्रेन में सफर करना संभव नहीं है। अगर किसी अन्य ट्रेन में यात्रा करते समय पकड़े जाते हैं, तो जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी ट्रेन में सफर करने के लिए जनरल कोच का टिकट होना जरूरी है और यह भी ट्रेन की कैटेगरी पर निर्भर करता है। वंदे भारत, राजधानी और सुपरफास्ट जैसी ट्रेनों में जनरल टिकट स्वीकार्य नहीं है। इसलिए सफर से पहले टिकट और ट्रेन की कैटेगरी जरूर जांच लें।

अगर आपकी ट्रेन छूट जाए, तो सबसे सुरक्षित तरीका है टिकट कैंसिल कराना और रिफंड लेना। इसके लिए टीडीआर (TDR) फाइल करना होता है। IRCTC ऐप या वेबसाइट पर लॉगिन करके टिकट के ऑप्शन में जाकर टीडीआर फाइल किया जा सकता है। कारण भरने और सबमिट करने के बाद प्रोसेस शुरू हो जाती है। 

रिफंड सीधे उसी बैंक अकाउंट में भेजा जाता है, जिससे टिकट बुक किया गया था, और आमतौर पर 60 दिनों के भीतर राशि प्राप्त हो जाती है। इसलिए ट्रेन छूटने के बाद बिना नियमों को देखे दूसरी ट्रेन पकड़ना जोखिम भरा साबित हो सकता है। सुरक्षित विकल्प है टिकट कैंसिल कर रिफंड लेना और फिर वैध टिकट से यात्रा करना।

CRIME : शादी के दबाव में होटल में खूनी वारदात, प्रेमी ने प्रेमिका की गला घोंटकर हत्या की

CRIME : शादी के दबाव में होटल में खूनी वारदात, प्रेमी ने प्रेमिका की गला घोंटकर हत्या की

लुधियाना।  लुधियाना: पंजाब के लुधियाना में एक होटल में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक प्रेमी युगल के बीच शादी को लेकर हुए विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। पुलिस के अनुसार, महिला ने अपने साथी अमित निषाद पर शादी का दबाव बनाया, बहस बढ़ने पर महिला ने कथित तौर पर धारदार हथियार से उसके गुप्तांगों पर हमला कर दिया, जिससे अमित गंभीर रूप से घायल हो गया और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ।

इसके बाद गुस्से में आकर अमित ने महिला का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी और फरार हो गया। मृतका दो बच्चों की मां थी और पति से तलाक की प्रक्रिया में थी, इसी दौरान उसकी मुलाकात अमित से हुई थी।

लुधियाना के डीसीपी रुपिंदर सिंह ने पुष्टि की कि महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और गंभीर चोटों के चलते उसे इलाज के लिए चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।

 
MP FSO Exam 2025: एमपी खाद्य सुरक्षा अधिकारी परीक्षा-2025 आज, 42000 अभ्यर्थी होंगे शामिल, 4 शहरों में बनाए गए एग्जाम सेंटर

MP FSO Exam 2025: एमपी खाद्य सुरक्षा अधिकारी परीक्षा-2025 आज, 42000 अभ्यर्थी होंगे शामिल, 4 शहरों में बनाए गए एग्जाम सेंटर

 MP Food Safety Officer Exam 2025: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की ओर से खाद्य सुरक्षा अधिकारी परीक्षा 2025 (MP Food Safety Officer)  रविवार, 14 दिसंबर को आयोजित की जा रही है. परीक्षा एक शिफ्ट में दोपहर 12 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक संपन्न होगी. इस परीक्षा में मध्य प्रदेश के 42 हजार अभ्यर्थी इसमें शामिल होंगे. इसके लिए प्रदेशभर में 111 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. 

राजधानी भोपाल में 29 परीक्षा केंद्र, इंदौर में 44, जबलपुर में 23 और ग्वालियर में 15 एग्जाम सेंटर बनाए गए हैं. इन केंद्रों पर 42 हजार अभ्यर्थी परीक्षा देंगे. बता दें कि इंदौर में 17 हजार 72 अभ्यर्थियों के लिए व्यवस्था की गई है.

कब मिलेगी परीक्षा केंद्र में एंट्री

खाद्य सुरक्षा अधिकारी परीक्षा 2025 एक शिफ्ट में दोपहर 12 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक संपन्न होगी. हालांकि अभ्यर्थियों को सुबह 11.15 बजे से ही परीक्षा केंद्र में एंट्री दी जाएगी. अगर कोई अभ्यर्थी सुबह 11.45 बजे के बाद परीक्षा सेंटर पर पहुंचते हैं तो उन्हें एंट्री नहीं दी जाएगी. बता दें कि दिव्यांग अभ्यर्थियों को सहलेखन लेने पर 1 घंटे का एक्स्ट्रा टाइम दिया जाएगा.

परीक्षा केंद्र पर अपने साथ ले जाए ये आवश्यक वस्तुएं

एमपीएससी की ओर से साझा की गई डिटेल के मुताबिक, परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों को अपने साथ केवल ई-प्रवेश पत्र, वैध पहचान पत्र, स्वयं का फोटोग्राफ, पेन, पानी की पारदर्शी बॉटल लाने की अनुमति रहेगी.

परीक्षा केंद्र पर भूलकर भी न ले जाएं ये चीजें

परीक्षा केंद्र पर कुछ वस्तुएं को ले जाने पर मनाही है. ऐसे में यहां पूरि लिस्ट देख सकते हैं.

  • पेंसिल
  • रबर
  • व्हाइटनर
  • स्केल
  • बैग्स
  • पठन सामग्री
  • मोबाइल फोन
  • पेनड्राइव
  •  केलकुलेटर
  • ब्लूटूथ
  • हैंड फ्री
  • डिजिटल घड़ी
  • स्मार्ट घड़ी या एनालॉग घड़ी
  • कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या अन्य कोई ऐसे उपकरण जो संचार उपकरण के रूप में उपयोग किए जाते है प्रतिबंधित रहेंगे.
  • बालों को बांधने वाले क्लचर/ बक्कल, हाथ के बैड/हाथ में पहने जाने वाले मेटेलिक बैंड / चमड़े के बैंड, कमर में पहने जाने वाले बैल्ट, कफलींक धूप का चश्मा पर्स / वॉलेट, टोपी.
  • चाबी, लाइटर्स/ माचिस बॉक्स
  • किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र, शार्पनर ब्लेड और अन्य कोई कीमती सामान प्रतिबंधित रहेंगे.
  • परीक्षार्थियों को परीक्षा कक्ष में जूते-मोजे पहनकर प्रवेश निषिद्ध रहेगा.
MP की तीन महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को मिलेंगे 25-25 लाख रुपये, CM मोहन ने कहा- कोच को भी मिलेगा इतना पैसा

MP की तीन महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को मिलेंगे 25-25 लाख रुपये, CM मोहन ने कहा- कोच को भी मिलेगा इतना पैसा

 Madhya Pradesh : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शनिवार को ब्लाइंड विमेंस टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 का फाइनल जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल मध्यप्रदेश की तीन महिला खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भेंट की. खिलाड़ियों में सुनीता सराठे, सुषमा पटेल और दुर्गा येवले शामिल हैं. 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस उपलब्धि के लिए तीनों खिलाड़ियों को प्रोत्साहन स्वरूप 25-25 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे, जिसमें से 10-10 लाख रुपये नगद और 15-15 लाख  फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में होंगे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तीनों खिलाड़ियों और तीनों कोच का ट्राफी और अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मान किया. 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश का नाम रोशन करने वाली तीनों खिलाड़ियों की आगामी पढ़ाई और कोचिंग आदि की व्यवस्था भी राज्य सरकार द्वारा की जाएगी. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला खिलाड़ियों के कोच सोनु गोलकर, ओमप्रकाश पाल और दीपक पाहड़े को एक-एक लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की.

ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी

भारतीय महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम ने महिला टी-20 वर्ल्ड कप क्रिकेट 2025 के फाइनल मैच में नेपाल को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम में मध्यप्रदेश की ये  तीन प्रतिभावान खिलाड़ी शामिल थीं. इनमें ऑलराउंडर केटेगरी में खेलने वाली सुनीता सराठे नर्मदापुरम, सुषमा पटेल दमोह और बेट्समेन और विकेटकीपर के रूप में खेलने वाली दुर्गा येवले बैतूल से हैं.

स्टेट हाईवे बना जानलेवा, अतिक्रमण और तेज रफ्तार ने ली 22 वर्षीय युवक की जान

स्टेट हाईवे बना जानलेवा, अतिक्रमण और तेज रफ्तार ने ली 22 वर्षीय युवक की जान

 मधेपुरा : जिले में स्टेट हाईवे-91 एक बार फिर मौत का कारण बन गया. अतिक्रमण, सीमित दृश्यता और तेज रफ्तार के घातक मेल ने एक युवा की जिंदगी छीन ली. कोल्हयपट्टी पंचायत के वार्ड संख्या तीन निवासी 22 वर्षीय बिट्टू राम उर्फ बीटल की शनिवार को भेलाही मोड़ के पास सड़क हादसे में मौके पर ही मौत हो गई. यह हादसा उस जगह हुआ, जिसे स्थानीय लोग पहले से ही “दुर्घटना संभावित क्षेत्र” मानते हैं.

जानकारी के अनुसार बिट्टू राम अपनी न्यू पल्सर मोटरसाइकिल से जा रहा था, तभी सामने से आ रहे छह चक्का ट्रक से आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि युवक ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और दुर्घटनाग्रस्त वाहन जब्त कर थाना ले गई.

हादसे के बाद फूटा आक्रोश
घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए. बेटे का शव देखकर पिता बदहवास हो गए. गुस्साए लोगों ने शव को हाईवे पर रखकर सड़क जाम कर दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई. स्कूल और कार्यालय जाने वाले लोग घंटों फंसे रहे. बाद में पंचायत के मुखिया और पुलिस के समझाने पर जाम हटाया गया.

अतिक्रमण और अव्यवस्था बना खतरा
स्थानीय लोगों ने हादसे के लिए सड़क किनारे फैले अतिक्रमण को जिम्मेदार ठहराया. ग्रामीणों का कहना है कि भेलाही मोड़ पर मकान की दीवार सड़क के काफी पास है, जिससे दृश्यता कम हो जाती है. इसके अलावा सड़क पर गिट्टी-बालू, पुआल, धान की बोरियां और मकई के डंठल रखे जाने से हादसे की आशंका बनी रहती है. कुहासे के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है.
पुलिस की कार्रवाई
थानाध्यक्ष अजीत कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है. अभी तक कोई लिखित आवेदन नहीं मिला है. आवेदन मिलने पर प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.